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मेरे नथुनों में बानो Antarvasna की चूत की रसभरी महक बस गई। ऐसी खुशबू मैंने जिन्दगी में पहली बार पाई थी। उसने अपनी चूत को मेरे मुख पर रगड़ दिया और मेरा चेहरा लसलसे, चिकने द्रव से भिगा दिया। बाकी का काम मेरी लपलपाती हुई जीभ ने कर दिया। उसकी चूत का रस मैंने बड़ी ही सफ़ाई से चाट कर साफ़ कर दिया। उसकी चूत की धार पर मेरी जीभ गुदगुदी करने लगी।
“भोसड़ी के, मेरा दाना कितना फ़ुदक रहा है, जरा उसे अपने होंठों में दबा ले !”
“वो क्या होता है आपा …?”
“रुक जा … अभी सेट कर देती हू … तू तो निरा चूतिया है रे !”
उसने अपनी चूत के पट और खोल दिये और एक जगह को उभार दिया। अरे ! इतना सा दाना… मटर जैसा … इसमें क्या मजा आयेगा।
“देख लिया क्या ? बता तो…”
“हाँ यह छोटा सा चमड़ी का उभरा हुआ मटर जैसा…?”
“बस, इसे होंठों से पकड़ना और चूस ले… उईई … साला मरदूद … धीरे से कर भेनचोद !”
मैंने उसे हौले हौले से चूसना और सहलाना आरम्भ कर दिया । बानो आहें भर भर कर उसका मजा ले रही थी। उसके पोन्द मेरे चेहरे पर ऊपर नीचे यूँ हो रहे थे जैसे कि … आह क्या बताऊँ मैं … उसके रज की भीनी खुशबू … मेरा मुरझाये हुए लण्ड में जैसे एक बार फिर से उफ़ान आने लगा… वो कड़क हो गया। सीधा हवा में तन्नाते हुए झूलने लगा। पर बानो पर तो चुदाई का नशा और फिर जवानी का नशा … जी हां … तिस पर दारू का नशा … उसे तो बस अपनी स्वयं की चूत को चुदाने की लग रही थी। मैंने मौका पा कर अपना हाथ उसकी पोन्द पर जमा दिया और धीरे से अपनी एक एक अंगुली उसके गाण्ड की छेद में घुसा दी।
“आह रे … तू तो नवा नवाड़ी है रे … तुझे ये सब कैसे मालूम है रे ?”
“भैया को देखा है ना मैंने ऐसे करते हुये !”
“अरे वाह रे मेरे भोले पंछी, तू भोसड़ी का बड़ा मादरचोद निकला, सब छुप छुप कर देखता है ?”
“हां आपा … पर आपको कैसे ये समझ में नहीं आता था कि मेरे पास भी लौड़ा है और मुझे भी चोदने की तमन्ना होती है !”
“साले हरामी … लण्ड तो है ना तेरे पास, मेरा भोसड़ा तो तेरे कब्जे है ना, साले को चोद डाल !”
“तो फिर आपा… आ जाओ ना धार पर … आने दो ना अपने ट्यूब वेल में इस लण्ड को …”
“हाय रे … मेरे राजा … पानी निकालेगा क्या…”
“हां आपा… मेरा लण्ड देखो ना बेहाल हो रहा है।”
मेरी बस एक अंगुली ने बानो को इतना उत्तेजित कर दिया कि उसने अपनी चूत मेरे मुख से हटा से हटा कर नीचे सरका ली और मेरे खड़े लण्ड के ठीक ऊपर उसे चिपका दिया। मुझे भला क्या पता था कि चुदाई किसे कहते हैं। बस मेरे दोस्त बताया करते थे। इतना मधुर मजा आयेगा यह तो मुझे पता ही नहीं था।
अपने होंठों को मेरे होंठ पर रगड़ते हुये वो मुझे प्यार करने लगी। उसकी चूत मेरे लण्ड पर जोर लगाने लगी और फिर चूत और लण्ड आपस में गले मिल गये। मेरे लण्ड पर उसकी चूत की कोमल नरम त्वचा रगड़ खाने लगी। मुझे एक बहुत ही खूबसूरत सी अनुभूति हुई, दिल आनन्द से भर उठा। मीठी सी गुदगुदी करता हुआ मेरे लण्ड ने किसी चूत के अन्दर पहली बार प्रवेश किया। मैंने भी अपने लण्ड को उभार कर चूत में घुसने की सहायता की।
जब लौड़ा भली भांति अन्दर बैठ गया तब बानो ने अपने शरीर का भार मेरे ऊपर डाल दिया और पसर सी गई। फिर धीरे धीरे लण्ड और चूत आपस में घर्षण करने लगे। एक स्वर्गिक आनन्द से मैं मदहोश होने लगा। उसके बोबे मेरे हाथों में भिंच गये। मैं उसके शरीर को जोश में नोचने खसोटने लगा। बानो बीच बीच में कराह सी उठती थी।
“अरे नोच मत भोसड़ी के, देख मेरे बोबे से कहीं खून ना निकल जाये !”
मैं अब सिर्फ़ उसके मम्मों को दबाने और मसलने लगा। बानो अपनी आंखें बन्द किये हुये चुदाई का मजा ले रही थी। वो रह रह कर अपनी चूत लण्ड पर पटक रही थी और सिसकारियाँ भरती जा रही थी। मेरे मोटे कुंवांरे लण्ड का आनन्द जी भर कर ले रही थी। वो बार बार मेरे चेहरे को चाट लेती थी।
“मेरे राजा, अब ऊपर आ कर मेरी भोसड़ी को भचाभच चोद मार !”
मैंने और बानो ने चिपक कर पलटी मार दी। अब नीचे आ गई थी। लण्ड वैसा का वैसा चूत में ही था। बानो की दोनों टांगें हवा में लहरा गई। मैं दोनों टांगो के बीच सेट हो गया और लण्ड को बाहर निकाल कर फिर से अन्दर घुसेड़ दिया। मैंने अपने शरीर का भार अपने दोनों हाथों पर ले लिया और उसकी चूत पर लण्ड मारने लगा… मारने क्या लगा जैसे उसकी पिटाई करने लगा।
बानो आनन्द के मारे चीख उठी। मेरा बलिष्ठ लण्ड उसकी चूत मारने में लगा था। मुझे भी बहुत आनन्द आ रहा था। ये साली बानो मुझे अब तक क्यो नहीं मिली थी ? हाय रे इतना मजा आता है चुदाई में… लग तो रहा था ना शमीम आपा आनन्द में मगन थी… मेरे तन मन में मीठी सी आग भरी हुई थी। मन कर रहा था कि ये चुदाई कभी खत्म ना हो… पर अल्ला ताला बहुत बेरहम है … सब कुछ उतना होता है जितना यह तन झेल सकता है।
बानो एक सीत्कार के साथ झड़ने लगी। उसका काम रस फ़ूट पड़ा।
“बस कर हरामी के पिल्ले … निकाल अपना लौड़ा…”
“चुप बे साली रण्डी, तू गई तो क्या मैं भी गया… पूरा चुद ले मेरी आपा…”
वो धीरे धीरे झड़ कर शान्त हो गई। कुछ ही देर में मेरे लण्ड ने भी झुक कर सलामी दी और और अपना मद भरा रस का छिड़काव बानो के सीने पर, उसके मस्त बोबे पर करने लगा। खूब माल निकला … मेरा लण्ड अब ढीला हो गया।
बानो तो निश्चल पड़ी थी। अब तो उसके मुख से खर्राटे भी निकलने लगे थे। नशे के कारण वो गहरी नींद में चली गई थी। उसे कुछ भी होश नहीं था।
मैंने कपड़े से बानो के शरीर को साफ़ किया और खुद पजामा और बनियान पहन कर अपने कमरे में आ गया।
आह्ह्ह … मेरे अल्लाह … इतना प्यारा आनन्द … इतना मजा… काश मुझे यह सब रोज नसीब हुआ करे। मैं जमीन पर पड़े गद्दे पर फ़ैल कर सो गया। मेरी नींद खुली तो सवेरा हो चुका था। बानो झुक कर मेरा पजामा उतार कर मेरा सोया हुआ लण्ड निहार रही थी। चाय उसके हाथ में थी। मैंने उसके हाथ से कप ले लिया और चाय पीने लगा।
“कितना प्यारा सा है ना…!”
“आपा, आपकी भी तो बहुत प्यारी सी है, रसीली भी है।”
“उंह… अभी तो तूने देखा ही क्या है … भड़वे मर जायेगा जब मेरी पोंद देखेगा तो !”
“सच, बानो मुझे मार डाल ना !”
“अरे सवेरे सवेरे …”
“अभी तो छः ही तो बजे हैं … मार डाल ना … अपना ये पेटीकोट उतार दे ना !”
“अच्छा तो ले , देख ले…”
मेरा लण्ड फिर से जाग गया … अकड़ कर खड़ा हो गया। बानो ने अपना पेटीकोट उतार दिया और अपनी पोंद उघाड़ कर मेरी तरफ़ कर दी।
“बानो, हाय मैं मर गया, मरवा ले अपनी पोंद…!”
“पोंद मारेगा …? अच्छा मेरे कमरे से मेरी क्रीम उठा ला, वही लगा देना, चिकना होगा तो इतने मोटे लण्ड से अधिक दर्द नहीं होगा।”
मेरी सारी नींद काफ़ूर हो चुकी थी। मैं बिजली की तेजी से भाग कर क्रीम ले आया। इतनी देर में बानो ने अपने आपको नीचे बिस्तर पर घोड़ी बन कर सेट कर लिया था। उसकी पोंद फ़ूल की तरह उभर कर खिल गई थी। उसकी गोलाइयाँ बला की खूबसूरत और चिकनी थी। भीतर दोनों गोलो के बीच सुन्दर सा काला-भूरा सा कोमल फ़ूल मुस्करा रहा था। मैंने अपना पजामा उतार दिया और खड़े लण्ड पर चिकनी क्रीम लगा ली।
“तू भी एक नम्बर का चूतिया है … अरे क्रीम मेरी गाण्ड में लगा … तो घुसेगा ना !”
मुझे अपनी ना समझी पर थोड़ी शरम सी आई। फिर उसकी गाण्ड के छेद पर क्रीम लगा दी। फिर अंगुली को अन्दर घुसेड़ कर अन्दर तक लगा दी।
“बानो, लगता है तेरी गाण्ड तो खूब चुदी है … घिस घिस कर काली हो गई है।”
“चुप साले भड़वे, तेरे बाप ने तो नहीं चोदी है ना … मेरे दोस्तों ने चोदी है… जैसे कि तू… खूब मजा आता है इसमें दोस्तों को !”
“अरे वाह … क्या बात है आपा …”
मेरे जरा से जोर लगाने से ही लण्ड भीतर घुसता चला गया। बानो ने एक आनन्द भरी चीख भरी … पता नहीं यह चीख आनन्द से भरी थी या दर्द से !
“साला, मस्त है रे … मजा आ गया … चोद दे रे !”
मैं पहले तो धीरे धीरे लण्ड अन्दर बाहर करने लगा पर जल्दी ही डांट पड़ गई।
“भोसड़ी के, कोई बच्चे की गाण्ड मार रहा है क्या … बड़ा अखाड़ची बना फिरता है, इतना भी दम नहीं है … चल जोर लगा के चोद … साला मरियल !”
मुझे हंसी भी आई और गुस्सा भी। मैंने अपनी रफ़्तार बढ़ा दी। अब उसे मजा आने लगा था। उसकी टाईट गाण्ड में लण्ड की रगड़ गजब चिन्गारियाँ पैदा कर रही थी। मेरे लण्ड में जैसे आग सी लग गई थी। बहुत तेज मजा आ रहा था। उसकी चिकनी गाण्ड पर मैंने हाथ से थप्पड़ मारने आरम्भ कर दिये थे। लण्ड को मैं अन्दर तक घुसा कर चोद रहा था। बानो आनन्द से तड़पने लगने लगी थी। उसकी चूत में से भी प्रेम रस की बून्दें निकल आई थी।
मैं झड़ता, उसके पहले बानो ने चूत की आग भी बुझाने का आदेश दे दिया। मैंने लण्ड गाण्ड से निकाल कर पीछे से ही उसकी आंसू भरी चूत में डाल दिया। चूत में लण्ड घुसते ही बानो का मन खिल उठा। उसकी रंगत बदल गई। उसका शरीर चुदाई के लिये मचल उठा। चूत को घुमा घुमा कर चुदा रही थी वो … सवेरे सवेरे ही हम दोनों ने चुदाई से दिन की शुरुआत की थी। खूब जम कर बानो की गाण्ड चोदी मैंने ।
अब मुझे काफ़ी आईडिया हो गया था चोदने का। सटासट लण्ड चला कर खूब मस्ती ली मैंने। तभी बानो ने अपना रस छोड़ दिया। मैंने भी कोशिश करके अपना वीर्य निकाल दिया और उसकी चूत में भरने लगा। हम दोनों झड़ चुके थे। लण्ड अपने आप चूत को छोड़ चुका था।
बानो उठी और बड़े प्यार से मुझे देखते हुये कमरे से बाहर जाने लगी। दरवाजे से मुड़ कर बानो ने एक मीठी सी नजर से मुझे देखा और आँख मार दी।
“मेरे राजा … रात तो अभी बाकी है …जवानी मजा उठा ले ” और खिलखिला कर, अपने चूतड़ मटका कर चल दी Antarvasna
मेरा नाम अविनाश है। मैं वैसे तो Antarvasna जयपुर में नौकरी करता हूँ, पर आजकल एक कॉल-ब्वॉय का काम भी करता हूँ। ये काम मेरे शौक की वज़ह से मुझे मिला।
हुआ यूँ कि पहले-पहल जब मैं जयपुर आया तो यहाँ की हसीन लड़कियों को देख कर मैं पहले बहुत तड़पता था। मेरी बहुत इच्छा होती चूत की, पर कुछ कर नहीं पाता था। फ़िर मेरी दोस्ती एक लड़की से हुई और मैंने उसको बहुत अच्छे से संतुष्ट किया। फिर उसने मुझे अपनी दोस्तों से मिलवाया और फिर दोस्तों के दोस्तों से मिलते चले जाने का सिलसिला चलता ही रहा। कई बार तो कोई बदसूरत मिलती है, कभी बहुत ही मस्त ग्राहक मिल जाती है तो मज़ा आ जाता है।
मैं आपको अपना सच्चा अनुभव सुनाता हूँ जो मुझे हमेशा याद रहेगा। एक बार मेरी दोस्त ने कहा, “कुछ काम है।”
.मैंने पूछा – “बोल, क्या काम है?”
“मुझे कुछ पैसों की ज़रूरत है।” उसने बताया।
पर मेरे पास उस समय पैसे तो थे नहीं, और वह मेरी अच्छी दोस्त थी। तो मैंने कहा, “ठीक है, मैं कहीं से लाकर देता हूँ।”
तो उसने कहा, “किसी से लेने की ज़रूरत नहीं है, मैंने उसका भी इन्तज़ाम भी कर लिया है, बस तू मेरा एक काम कर दे।”
“तुम्हारे लिए तो जान भी हाज़िर है, तू बोल तो सही।”
“मेरी एक दोस्त है जो तुम्हें पैसे दे देगी, पर तुझे उसकी प्यास बुझानी पड़ेगी।
“ये भी कोई बात है, पैसे भी, मज़े भी। इसके लिए कौन मना करता है।”
“तो शाम को मेरे कमरे पर आ जाना।” उसने कहा।
मैं शाम को उसके कमरे पर गया। कुछ देर बाद ही उसके दरवाज़े पर किसी ने खटखटाया। मैं समझ गया कि मेरी ग्राहक आ गई है। मेरी दोस्त ने दरवाज़ा खोला तो सामने एक बला की ख़ूबसूरत लड़की खड़ी थी। उसे तो देखते ही मेरी लंड एकदम खड़ा हो गया। मैं मन-ही-मन सोचने लगा, क्या क़िस्मत है, ऐसे माल को तो कोई भी उल्टे पैसे देकर भी नहीं छोड़ेगा। फिर वो अन्दर आ गई। मेरी दोस्त ने कहा कि मुझे कुछ काम है, मैं एक-दो घंटे में आ जाऊँगी। तब तक तुम लोग अपना काम कर लो। कह कर वह कमरे से चली गई।
उसके जाते ही मैं उसके पास आ गया। उसने अपना नाम बताया, मैंने उससे पूछा कि उसे पैसे देकर सेक्स करने की क्या ज़रूरत है। उसे चोदने के लिए तो कोई भी तैयार हो जाएगा। तो उसने कहा कि आजकल की लड़की किसी पर भी भरोसा नहीं कर सकती। पता नहीं कौन कब अपनी ज़बान खोल दे। इसलिए तुम्हारी ज़रूरत पड़ी। प्रोफेशनल लोग ऐसा नहीं करते। मैंने नीमा (मेरी दोस्त) से इस बारे में पहले पक्की बात की है। मैंन कहा, ये तो सच है, इस बारे में तुम बेफ्रिक रहो।
फिर वह मेरा हाथ पकड़कर मुझे बेडरूम में ले गई। हम दोनों बेडरूम में थे, रंग एकदम सफेद, और फ़िगर तो गज़ब का था। उसने मेरे होठों पर किस किया। फिर मैंने उसकी कमीज़ उतार दी। उसकी चूचियाँ बड़े और मस्त थे, और ऊपर से झाँक कर शायद कह रहे थे, कि हमें भी आज़ाद कर दो। मैंने उसकी जीन्स भी खोल दी. अब वो ब्रा-पैन्टी में मेरे सामने खड़ी थी। उसने मेरे कपड़े भी उतारे और मेरे लंड से खेलने लगी। कभी वो मेरी गोलियाँ दबाती, कभी मेरे लंड को मुँह में लेती, फिर उसने मेरे लंड को चूसना चालू कर दिया। मैं तो आसमान में था। उसने १५ मिनट ऐसी ही मेरे लंड की चुसाई की। अब मैंने उसकी ब्रा खोल दी और उसके दूध जैसे रंग की चूचियाँ मेरे सामने थीं। उसकी गुलाबी-गुलाबी घुंडियाँ जैसे मुझे अपनी ओर खींच रहीं थीं, मैंने उसकी एक घुंडी को मुँह में लिया और दूसरी घुंडी को एक हाथ से मसलने लगा। उसे बहुत मज़ा आ रहा था. मैंने उसी बीच उसकी पैंटी भी उतार दी।
अब हम दोनों बिल्कुल नंगे थे। मैंने उसे बिस्तर पर लिटा दिया और उसके ऊपर लेट गया, पर उसकी निप्पल की चुसाई मैंने जारी रखी। उसे बड़ा मज़ा आ रहा था। उसने कहा, जान बहुत अच्छा लग रहा है। बहुत समय के बाद आज चुदाई का मौक़ा मिला है। ख़ूब जम कर चोदना। मैंने उसकी चूत में एक ऊँगली डाल कर आगे-पीछे करना शुरू किया तो वो तड़प उठी। मुझे लगा जैसे अब उँगली नहीं लंड डाल कर फाड़ दो।
फिर उसने कहा कि बस अब डाल दो, और सहन नहीं होता। मैंने उसकी दोनों टाँगें अपने कंधे पर रखीं और लंड को उसकी चूत से लगा गिया। बहुत गरम थी उसकी चूत… उसकी चूत में से चिकनाई निकल रही थी। मैंने एक धक्का मारा तो आधा लंड उसकी चूत में समा गया। उसके मुँह से स्स्स्स्सीईईई की आवाज़ निकल गई। बोली – थोड़ा धीरे !
फिर मैंने धीरे-धीरे धक्के मारना चालू किया। मैं तो बस ज़न्नत में था, उसकी कसी हुई चूत में अलग ही मज़ा था। मैं उसे चोदता जा रहा था और उसकी चूचियाँ भी चूस रहा था। फिर मैंने उसे कुतिया बनाकर के भी चोदा। वह लगभग १५ मिनटों में झड़ गई। उसके चूत की पानी के कारण अब फच्च-फच्च की आवाज़ें आ रहीं थीं।
मैंने उसे आधे घंटे चोदा और मैं भी झड़ गया, इस बीच वो दो बार झड़ गई थी। उसे आज बड़ा मज़ा आया था। मैंने कहा कि तो फिर मज़े ले लो। उसने कहा पर अभी तुम्हारी दुगुनी फ़ीस मेरे पास नहीं है। मैंने कहा, तुमसे फ़ीस की बात किसने की है, तुम जब चाहो, दे देना। बस तुम्हारा जब मन करे, मुझे बता देना। तुम्हारे जैसी लड़की से तो फ़ीस लेने का मन भी नहीं करता। मैंने उसे दोबारा चोदा।
थोड़ी देर बाद मेरी दोस्त आ गई। उसके जाने का समय हो गया। उसने मेरा मोबाईल नम्बर लिया, और बाद में मिलने का वादा करके चली गई। Antarvasna
कहानी का पिछला भाग : दोस्त की माँ, बुआ और बहन की चुदाई-2 Hindi sex stories कुछ देर बाद होश आया तो मैंने उनके रसीले होंठों के चुम्बन लेकर उन्हें जगाया.
माँ ने करवट लेकर मुझे अपने ऊपर से हटाया और मुझे अपनी बाहों मे कस कर कान मे फुस-फुसा कर बोली- बेटा तुमने और तुम्हारे मोटे, लम्बे लण्ड ने तो कमाल कर दिया!
क्या गजब की ताकत है तुम्हारे मोटे लण्ड मे!
मैंने उत्तर दिया- कमाल तो आपने कर दिया है! आज तक तो मुझे मालूम ही नहीं था कि अपने लण्ड को कैसे काम में लिया जाता है?
यह तो आपकी मेहरबानी है! जो कि आज मेरे लण्ड को आपकी चूत की सेवा करने का मौका मिला.
अब तक मेरा लण्ड उनकी चूत के बाहर झांटो के जंगल मे रगड़ मार रहा था. माँ ने अपनी मुलायम हथेलियों मे मेरा लण्ड को पकड़ कर सहलाना शुरु किया.
माँ खड़े लण्ड देख दुबारा चुदवाईउनकी उंगली मेरे आण्ड से खेल रही थीं. उनकी नाजुक उंगलियाँ के स्पर्श की पकड़ से मेरा लण्ड भी जाग गया और एक अंगड़ाई लेकर माँ की चूत पर ठोकर मारने लगा.
माँ ने कस कर मेरे लण्ड को कैद कर लिया और बोली- बहुत जान है! तुम्हारे लण्ड में, देखो फिर से साला कैसा फ़ड़क रहा है अब मैं इसको नहीं छोड़ने वाली.
हम दोनों अगल बगल लेटे हुए थें. माँ ने मुझको चित लेटा दिया और मेरी टांग पर अपनी टांग चढ़ा चढ़ा कर लण्ड को हाथ से उमेठने लगीं.
साथ ही साथ अपनी गाण्ड हिलाते हुए अपनी झांट और चूत मेरी जाँघ पर रगड़ने लगी.
उनकी चूत पिछली चुदाई से अभी तक गीली थीं और उसका स्पर्श मुझे पागल बनाये हुए था. अब मुझसे रहा नहीं गया और करवट लेकर माँ की तरफ़ मुँह करके लेट गया.
उनकी चूची को मुंह मे दबा कर चूसते हुए अपनी उंगली चूत मे घुसा कर सहलाने लगा.
उन्होंने एक सिसकारी लेकर मुझसे कस कर लिपट गईं, और जोर जोर से कमर हिलाते हुए मेरी उंगली से चुदवाने लगीं. अपने हाथ से मेरे लण्ड को कस कर जोर जोर से मुठ मार रही थीं.
मेरा लण्ड पूरे जोश मे आकर लोहे की तरह सख्त हो गया था. अब माँ की बेताबी हद से ज्यादा बढ गई थीं और, खुद ही चित हो कर मुझे अपने ऊपर खींच लिया.
मेरे लण्ड को पकड़ कर अपनी चूत पर रखती हुई बोलीं- आओ मेरे राजा! दूसरा राउंड हो जाए.
मैंने झट कमर उठा कर धक्का दिया और, मेरा लण्ड उनकी चूत को चीरता हुआ जड़ तक धंस गया.
माँ चिल्ला उठी और बोलीं- जियो मेरे राजा! क्या शॉट मारा? अब मेरे सिखाए हुए तरीके से शॉट पर शॉट मारो और फ़ाड़ दो मेरी चूत को.
माँ का आदेश पाकर मैं दोगुने जोश मे आ गया और, उनकी चूची को पकड़ कर हुमच हुमच कर माँ की चूत में लण्ड पेलने लगा.
उंगली की चुदाई से उनकी चूत गीली हो गई थीं और, मेरा लण्ड सटासट अन्दर-बाहर हो रहा था. वो भी नीचे से कमर उठा उठा कर हर शॉट का जवाब मेरा पूरा लौड़ा लेकर जोश के साथ दे रही थीं.
माँ ने दोनों हाथों से मेरी कमर को पकड़ रखा था और जोर जोर से अपनी चूत मे लण्ड घुसवा रही थीं.
वो मुझे बस इतना उठाती थीं कि बस लण्ड का सुपाड़ा अन्दर रहता और, फिर नीचे से जोर लगा कर घप से लण्ड चूत मे घुसवा लेती थीं.
पूरे कमरे में हमारी साँस और घपा-घप!फचा-फच! की आवाज गूंज रही थीं.
माँ ने चुदाई का नया तरीका बतायाजब हम दोनों की ताल से ताल मिल गईं, तब माँ ने अपने हाथ नीचे लकर मेरे चूतड़ को पकड़ लिया और कस कस कर दबोच कर चुदाई का मज़ा लेने लगीं.
कुछ देर बाद माँ ने कहा- आओ एक नया आसन सिखाती हूँ! और मुझे अपने ऊपर से हटा कर किनारे कर दिया. मेरा लण्ड पक्क! की आवाज साथ बाहर निकल आया.
मैं चित लेटा हुआ था और मेरा लण्ड पूरे जोश के साथ सीधा खड़ा था. माँ उठ कर घुटनों और हथेलियों पर मेरे बगल मे बैठ गईं.
मैं लण्ड को हाथ मे पकड़ कर उनकी हरकत देखता रहा.
माँ ने मेरे लण्ड पर से हाथ हटा कर मुझे खींचते हुए कहा- ऐसे पड़े पड़े क्या देख रहे हो?
चलो अब उठ कर पीछे से मेरी चूत मे अपना लण्ड को घुसाओ!
मैं भी उठ कर उनके पीछे आकर घुटने के बल बैठ गया और लण्ड को हाथ से पकड़ कर उनकी चूत पर रगड़ने लगा.
क्या मस्त गोल गोल गद्देदार गाण्ड थीं?
माँ ने नए तरीके में दमदार चुदाईमाँ ने जाँघ को फैला कर अपने चूतड़ ऊपर को उठा दिए, जिससे कि उनकी रसीली चूत साफ़ नज़र आने लगी.
उनका इशारा समझ कर, मैंने लण्ड का सुपाड़ा उनकी चूत पर रख कर धक्का दिया और मेरा लण्ड उनकी चूत को चीरता हुआ जड़ तक धंस गया.
माँ ने एक सिसकारी भर कर अपनी गाण्ड पीछे कर के मेरी जाँघ से चिपका दीं. मैं भी माँ की पीठ से लिपट कर लेट गया, और बगल से हाथ डाल कर उनकी दोनों चुची को पकड़ कर मसलने लगा.
वो भी मस्ती मे धीरे धीरे चूतड़ को आगे-पीछे करके मज़े लेने लगीं.
उनके मुलायम चूतड़ मेरी मस्ती को दोगुना कर रही थी. मेरा लण्ड उनकी रसीली चूत मे आराम से आगे-पीछे हो रहा था.
कुछ देर तक चुदाई का मज़ा लेने के बाद माँ बोलीं- चलो रज्जा! अब लण्ड आगे उठा कर शॉट लगाओ, अब रहा नहीं जाता.
मैं उठ कर सीधा हो गया, और माँ के चूतड़ को दोनों हाथों से कस कर पकड़ कर, चूत मे हमला शुरु कर दिया.
जैसा कि माँ ने सिखाया था, मैं पूरा लण्ड धीरे से बाहर निकाल कर जोर से अन्दर कर देता.
शुरु में तो मैंने धीरे धीरे किया लेकिन जोश बढ़ गया और धक्को की रफ़्तार भी बढती गई.
धक्का लगाते समय मैं माँ के चूतड़ को कस के अपनी ओर खींच लेता, ताकि शॉट करारा पड़े. माँ भी उसी रफ़्तार से अपने चूतड़ को आगे-पीछे कर रही थीं.
हम दोनों की साँसें तेज हो गई थीं. माँ की मस्ती पूरे परवान पर थी. नंगे जिस्म जब आपस में टकराते तो घप-घप की आवाज आती.
काफ़ी देर तक मैं उन्हीं की कमर पकड़ कर धक्का लगाता रहा. जब हालात बेकाबू होने लगा, तब माँ को फिर से चित लेटा कर उन पर सवार हो गया और चुदाई का दौर चालू रखा.
हम दोनों ही पसीने से लथपथ हो गए थे पर, कोई भी रुकने का नाम नहीं ले रहा था.
तभी माँ ने मुझे कस कर जकड़ लिया और अपनी टांगे मेरे चूतड़ पर रख दिया और कस कर जोर जोर से कमर हिलाते हुए चिपक कर झड़ गईं.
उनके झड़ने के बाद मैं भी माँ की चूची को मसलते हुए झड़ गया और हाँफ़ते हुए उनके ऊपर लेट गया.
हम दोनों की साँसें जोर जोर से चल रही थीं और हम दोनों काफ़ी देर तक एक-दूसरे से चिपक कर पड़े रहे.
कुछ देर बाद माँ बोलीं- क्यों बेटा, कैसी लगी हमारी चूत की चुदाई?
मैं बोला- हाय मेरा मन करता है कि, जिंदगी भर इसी तरह से तुम्हारी चूत में लण्ड डाले पड़ा रहूँ.
माँ को दूसरी बार चुदने को बोलामाँ बोलीं- जब तक तुम यहाँ हो, यह चूत तुम्हारी है! जैसे मर्जी हो, मज़े लो! अब थोड़ी देर आराम करते हैं.
नहीं माँ, कम से कम एक बार और हो जाए!
देखो! मेरा लण्ड अभी भी बेकरार है.
माँ ने मेरे लण्ड को पकड़ कर कहा- यह तो ऐसे रहेगा ही, चूत की खुशबू जो मिल गई है.
पर देखो, रात के तीन बज गए है! अगर सुबह समय से नहीं उठे तो तुम्हारी बुआ जी को शक जाएगा.
अभी तो सारा दीनू सामने है, और आगे के इतने दीनू हमारे पास है. जी भर कर मस्ती लेना!
मेरा कहा मानोगे तो रोज नया स्वाद चखाऊँगी! माँ का कहना मान कर, मैंने भी जिद्द छोड़ दी और माँ भी करवट ले कर लेट गईं और मुझे अपने से सटा लिया.
मैंने भी उनकी गाण्ड की दरार में लण्ड फंसा कर चूचियों को दोनों हाथों में पकड़ लिया और माँ के कंधे को चूमता हुआ लेट गया.
नींद कब आई? इसका पता ही नहीं चला.
सुबह जब अलार्म बजा तो, मैंने समय देखा, सुबह के सात बज रही थी!
माँ ने मुझे मुस्कुरा कर देखा, और एक गर्मा-गर्म चुम्बन मेरे होंठों पर जड़ दिया.
मैंने भी माँ को जकड़ कर उनके चुम्बन का जोरदार का जवाब दिया. फिर, माँ उठ कर अपने रोज के काम काज में लग गईं. वो बहुत खुश थीं!
मैं उठ कर नहा, धोकर फ़्रेश होकर आँगन में बैठ कर नाशता करने लगा.
तभी बुआ जी आ गईं और बोलीं, बेटा खेत चलोगे?
मैंने कहा- क्यों नहीं! और रात वाला उनका ककड़ी से चोदने का सीन मेरे आँखों के सामने नाचने लगा.
इतने में सुमन (दोस्त की बहन) बोलीं, मैं भी तुम्हारे साथ खेत मैं चलूँगी और हम तीनों खेत की ओर चल पड़े.
रास्ते में जब हम एक खेत के पास से गुजर रहे थें, तो देखा की उस खेत में ककड़ियाँ उगी हुई थी.
मैंने ककड़ियों को दिखाते हुए बुआ जी से कहा, बुआ जी देखो! इस खेत वाले ने तो ककड़ियाँ उगाई है. ककड़ियों में काफ़ी गुण होते हैं.
बुआ जी लम्बी साँस भरती हुई बोलीं, हाँ बेटा ककड़ियों से काफ़ी फ़ायदा होता है और कई कामों में इसका उपयोग किया जाता है. जैसे सलाद में, सब्जियों में, कच्ची ककड़ी खाने के लिए भी इसका उपयोग किया जाता है!
मैं बोला- हाँ! बुआ जी इसे कई तरह से उपयोग में लाया जाता है. इस तरह की बातें करते करते हम लोग अपने खेत में पहुँच गए.
ख्यालों में सुमन की मदमस्त चुदाईवहाँ जाकर, मैं मकान में गया और लुंगी और बनियान पहन कर वापस बुआ जी के पास आ गया. बुआ जी खेत में काम कर रही थीं और सुमन (दोस्त की बहन) उनके काम में मदद कर रही थीं.
मैंने देखा! बुआ जी ने साड़ी घुटनों के ऊपर कर रखी थीं और सुमन स्कर्ट और ब्लाऊज़ पहने हुए थीं. मैं भी लुंगी ऊँची करके (मद्रासी स्टाईल में) उनके साथ काम में मदद करने लगा.
जब सुमन झुककर काम करती तो मुझे उसकी चड्डी दिखाई देती थी!
हम लोग करीब 1 या 1:30 घण्टे काम करते रहे.
फिर मैं बुआ जी से कहा, बुआ जी मैं थोड़ा आराम करना चाहता हूँ!
तो बुआ बोलीं, ठीक है! और मैं खेत के मकान में आकर आराम करने लगा.
कुछ देर बाद कमरे में सुमन आई और कहने लगी, दीनू भैया आप वहाँ बैठ जाए क्योंकि, कमरे में झाड़ू मारनी है और मैं कमरे के एक कोने में बैठ गया. वो कमरे में झाड़ू मारने लगी.
झाड़ू मारते समय जब सुमन झुकी तो, मुझे उसकी चड्डी दिखाई देने लगी और मैं उसकी चुदाई के ख्यालों में खो गया.
थोड़ी देर बाद फिर वो बोली- भैया, जरा पैर हटा लो झाड़ू देनी है.
मैं चौंक कर हकीकत की दुनिया में वापस आ गया! देखा सुमन कमर पर हाथ रखी मेरे पास खड़ी है.
मैं खड़ा हो गया और वो फिर झुक कर झाड़ू लगाने लगी. मुझे फिर उसकी चड्डी दिखाई देने लगी. आज से पहले मैंने उस पर ध्यान नहीं दिया था.. पर आज की बात ही कुछ और थी.
रात माँ से चुदाई की ट्रैनिंग लेकर, एक ही रात में मेरा नज़रिया बदल गया था. अब मैं हर औरत को चुदाई की नज़रिए से देखना चाहता था.
सुमन की चूचियों के दर्शनजब वो झाड़ू लगा रही थी तो मैं उसके सामने आकर खड़ा हो गया. अब मुझे उसके ब्लाऊज़ से उसकी चूची साफ़ दिखाई दे रही थी. मेरा लण्ड फन-फना गया.
रात वाली! माँ जैसी चूची मेरे दिमाग के सामने घूमने लगी कि, तभी सुमन की नज़र मुझ पर पड़ी. मुझे एकटक घूरता देख पकड़ लिया.
उसने एक दबी सी मुस्कान दी और अपना ब्लाऊज़ ठीक कर, अपनी चूचियों को ब्लाऊज़ के अन्दर छुपा लिया. अब वो मेरी तरफ़ पीठ कर के झाड़ू लगा रही थी.
उसके चूतड़ तो और भी मस्त थे. मैं मन ही मन सोचने लगा कि, इसकी गाण्ड में लण्ड घुसा कर चूची को मसलते हुए चोदने में कितना मज़ा आएगा!
बेख्याली में मेरा हाथ मेरे तन्नाए हुए लण्ड पर पहुँच गया और, मैं लुंगी के ऊपर से ही सुपाड़े को मसलने लगा.
तभी सुमन अपना काम पूरा कर के पलटी और, मेरी हरकत देख कर मुँह पर हाथ रख कर हँसती हुई बाहर चली गई.
थोड़ी देर बाद बुआ जी और सुमन हाथ पैर धोकर आए और मुझे कहा कि, चलो दीनू बेटे खाना खालो. अब हम तीनों खाना खाने बैठ गए.
बुआ जी मेरे सामने बैठी थीं और सुमन मेरे बाईं साईड की ओर बैठी थी. सुमन पालथी मारके बैठी थी और बुआ जी पैर पसारे बैठी थीं.
खाना खाते समय मैंने कहा, बुआ जी आज खाना तो जायकेदार बना है.
बुआ जी ने कहा, मैंने तुम्हारे लिए खास बनाया है. तुम यहाँ जितने दीनू रहोगे गाँव का खाना खा खा कर और मोटे हो जाओगे!
मैं हँस पड़ा और कहा, अगर ज्यादा मोटा हो जाऊँगा तो मुश्किल हो जाएगी. बुआ जी और सुमन हँस पड़ीं!
थोड़ी देर बाद बुआ जी ने कहा, सुमन तुम खाना खा कर खेत में खाद डाल आना. मैं थोड़ा आराम करूँगी. हम सबने खाना खाया.
सुमन बरतन धोकर खेत में खाद डालने लगी. मैं और बुआ जी चटाई बिछा कर आराम करने लगे. मुझे नींद नहीं आ रही थी.
आज मैं बुआ जी या सुमन को चोदने का विचार बना रहा था. विचार करते करते कब नींद आ गई! पता ही नहीं चला.
कहानी जारी रहेगी.
कहानी का अगला भाग : दोस्त की माँ, बुआ और बहन की चुदाई-4
Hindi sex stories
मैं रमेश हरियाणा फ़िर Sex Stories से हाज़िर हूँ आपके लिए एक रोमांच और सेक्स से भरपूर कहानी ले कर !
सभी मर्द अपने लंड को हाथ में दबा के और लड़कियाँ और औरतें अपने स्तनों को दबा के और अपनी चूत में ऊँगली दे कर बैठें …………
आज अपनी कहानी शुरू करने से पहले मैं पाठकों को बता दूँ कि मेरी कहानी कोई झूठी या मन से बनाई हुई नहीं है, यह उतनी ही सच्ची है जितनी कि सेक्स की जरुरत……
और एक बात ! प्लीज़, कोई भी पाठक ग़लत नाम से मुझे मेल ना भेजे !
मेरी पिछली कहानी को पढ़ के कुछ लड़कों ने लड़कियों के नाम से मुझे मेल भी भेजी, सिर्फ़ यही जानने के लिए कि मैं सच बोल रहा हूँ या झूठ?
तो दोस्तो, मैं आपको अपनी कहानी बता रहा हूँ तो इसका ग़लत मतलब नहीं निकालें …………
और सभी पाठकों को धन्यवाद !
तो कहानी ऐसे है :
अभी कुछ दिन पहले जब मेरी कहानी ‘पड़ोस की कुवांरी छोकरी’ अन्तर्वासना पर आई तो कुछ दिन बाद मुझे एक मेल आई……… मेल एक लड़की ने भेजी थी, लड़की का नाम था जसमीत कौर जो कि एक पंजाबी परिवार से थी। उसने अपनी मेल में कहा कि वो एक घरेलू लड़की है और कॉलेज में पढ़ती है। उसने मेरी कहानी पढ़ी और उसे सेक्स करने की इच्छा हुई !
यह उसका पहली बार था…..वो अपने घर वालों से भी डरती है लेकिन सब कुछ करना भी चाहती है… इस तरह हमने २-३ दिन मेल से ही बात की। उसने मुझसे मेरा सेल नम्बर लिया और फ़िर मुझे एक दिन काल किया.. उसकी आवाज में क्या जादू था दोस्तों…… मैं तो दीवाना हो गया उसकी आवाज का ही…… उसने मुझे अपने बारे में सब कुछ बताया और कहा कि उसके पास कोई जगह नहीं है और वो करना भी चाहती है। लेकिन उसकी एक शर्त थी कि सब कुछ गुप्त और सुरक्षित होना चाहिए।
तो फ़िर क्या था जैसे कि मेरे नियम है हि कि सब कुछ गुप्त और सुरक्षित होगा।
मैंने उसे विश्वास दिलाया और फ़िर उसने मुझे अपने शहर का नाम बताया, वो जालंधर सिटी की रहने वाली थी।
उसने मुझसे अगले ही दिन आने को कहा।
मैं भी उसके कहे अनुसार सुबह ६ बजे ही वहाँ पहुँच गया और पहुँच कर मैंने एक होटल में कमरा बुक किया, उसे फ़ोन से सम्पर्क किया।
उसने मुझे कहा कि वो कॉलेज टाइम में मेरे पास आएगी। उसने मुझे १० बजे का टाइम दिया, मैं फ्रेश हुआ और कुछ देर आराम किया।
उसने मुझे १० बजे कॉल की और एक पार्क में आने को कहा। मैं उसके बताये हुए स्थान पर गया। वो एक पार्क में एक बेंच पर अकेली बैठी थी, उसने जींस और टॉप पहना हुआ था, उसका कद ५’४” होगा और उसके बाल बहुत लंबे और काले नागिन की तरह, आँखे काली काली और बड़ी बड़ी, गाल कश्मीर के सेब की तरह लाल लाल, लिप्स गुलाब की पंखुडियों की तरह पिंक पिंक और उसके बूब्स पुरे भरे हुए टॉप फाड़ कर बहार आने को थे……..अगर ठीक से कहू तो उसका फिगर कुछ ३६-३०-३६ रहा होगा…..
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मैं तो देखते ही उसे फ्लैट हो गया और काफी देर तक उसे देखता ही रहा……. फ़िर मैं उसके पास गया, बैठ कर हमने कुछ देर बात की और उसके बाद हम दोनों होटल की तरफ़ चल दिए। होटल पहुँच कर हम दोनों कमरे में गए। वहाँ हमने कुछ देर बात की और धीरे धीरे मैं उसकी आँखों में मदहोश हो गया। फ़िर मैंने उसके गुलाबी होंठों पर अपने होंठ रख दिए और काफी देर तक उसे समूच किया।
इसी दौरान मेरे हाथ उसके बड़े बड़े और नर्म नर्म स्तनों पर चले गए। मैं उसके वक्ष बड़ी ही आराम से दबा रहा था और उसकी आँखों में मदहोशी साफ़ साफ़ दिखाई दे रही थी। मैंने उसके टॉप के अन्दर हाथ डाला और उसके कबूतरों को ब्रा की कैद से आजाद कर दिया। अब मेरे हाथ उसके आजाद कबूतरों को बड़ी ही जोरों से दबा रहे थे। फ़िर मैंने देर ना करते हुए उसके टॉप को उतार दिया……व्वाऊऊ ऽऽ ऊऊऊ उसके स्तन जितने कोमल थे उतने ही तने हुए भी थे और उसके चुचूक भी कड़े और हल्के गुलाबी थे।
फ़िर मैंने उसके एक वक्ष को मुँह में लिया और छोटे बच्चे की तरह चूसने लगा और दूसरे को हाथ से दबाने लगा। वो बहुत ही मदहोश हो चुकी थी और सेक्सी सेक्सी आवाजें निकाल रही थी …….ऊऊऊऊऊह्ह्ह्ह्ह आआआआअह्ह्ह्ह्ह्ह् म्म्म्म्म्म्म्म्म्मूऊऊउस्स्स्स् !
इतने में मुझे अपने लंड पर कुछ महसूस हुआ, उसका हाथ मेरे लंड को टटोल रहा था। मैंने अपनी जींस उतार दी और अपना लंड उसके हाथ में दे दिया। फ़िर उसने मुझे बिस्तर पर लिटा दिया और नीचे झुक कर मेरे लंड को चूम लिया और उसे मुँह में ले लिया। वो मेरे लंड को ऐसे चूस रही थी जैसे कोई छोटा बच्चा लॉलीपॉप को चूसता है।
मुझे बहुत ही मजा आ रहा था।
काफी देर तक उसने मेरा लंड चूसा, जब तक मेरा वीर्य नहीं निकल गया।
उसके बाद मेरी बारी आई, मैंने उसे बेड पर लिटाया और उसकी जींस को उतारा। उसने अपने पूरे बदन की वैक्सिंग की हुई थी, शायद आज के दिन के लिए खासतौर से !
उसने अन्दर एक काले रंग की पैंटी पहनी हुई थी, मैंने उसकी पैंटी को भी उतार दिया। वाह क्या सेक्सी और मधुर चूत थी ! उसकी चूत को देखते ही मेरा लंड फिर से खड़ा हो गया। उसकी चूत पर एक भी बाल नहीं था और उसके चूत के लब भी गुलाबी थे। मैंने जैसे ही उसकी चूत को छुआ, वो एक दम से सिसक उठी। मैंने धीरे से उसकी चूत में ऊँगली डाली और उसके लबों को रगड़ा, उसकी चूत तो बहुत टाइट थी, वो सही थी कि वो अभी तक कुंवारी है।
फ़िर मैंने उसकी चूत को चूम लिया, मुझसे रहा नहीं गया और मैं उसकी चूत को चूसने लगा।
वो पागलों की तरह आवाजें निकालने लगी, पूरा कमरा सेक्सी आवाजों से गूंज रहा था कुछ इस तरह- ऊऊऊऊऊह्ह्ह्हह्ह आआआआआह्ह्ह्ह्ह्ह ऊऊऊफ़्फ़्फ़्फ़ मम्मम्म्म्म्स्स्स्स्स प्ल्ज्ज्ज्ज्जज्ज्ज्ज़ धिरेऽऽए !
फ़िर हम दोनों ६९ की पोसिशन में हो गए और एक दूसरे को चूस रहे थे। वो २ बार झड़ चुकी थी…..फ़िर उसने मुझसे कहा- रमेश प्लीज़, अब बर्दाश्त नहीं होता ! मुझे चोद दो जोर से ……… अपना लंड मेरी प्यासी चूत में घुसा दो …….. !
अब मेरा लंड उसकी चूत में घुसने के लिए तैयार था। मैंने एक तकिया उठा कर उसकी गांड के नीचे रखा और अपना लंड उसकी चूत के मुँह पर लगा कर जोर से धक्का दिया। मेरा लंड अभी थोड़ा सी ही अन्दर गया था कि वो चिल्लाने लगी।
मैंने उसके अधरों को अपने लबों में दबा लिया और फ़िर से एक धक्का दिया। मेरा आधा लंड उसकी चूत में जा चुका था। उसकी चूत में से शायद खून निकल रहा था, वो चिल्ला नहीं पा रही थी। थोड़ी देर तक मैं उसके बूब्स के साथ खेलता रहा, कुछ देर में वो शांत हुई तो मैं फ़िर एक जोर से धक्का दिया और पूरा लंड उसकी चूत में। था इस बार वो थोड़ा सा तड़पी लेकिन सब कुछ ठीक ही था। फ़िर मैंने अपना खेल शुरू किया …… मेरे लंड के धक्को से पूरे कमरे में फ़्फ़्फ़्फ़्कक्क्क्क्कह्ह फ़्फ़्फ़्फ़्क्क्क्क्क्कक्क्ह्ह्ह्ह् की आवाजें आ रहे थी और वो अपनी गांड उठा उठा के मेरा साथ दे रही थी, साथ में कह रही थी- रमेश डार्लिंग ! चोदो ! मेरी चूत की प्यास बुझा दो …….. जोर लगा कर चोदो मुझे !
कुछ देर तक चोदने क बाद वो एक झटके क साथ मेरे से चिपक गई, शायद वो झड़ चुकी थी और ४-५ झटकों के बाद मैं भी झड़ गया। फ़िर हम कुछ देर तक बेड पर एक दूसरे के साथ चिपक कर लेटे रहे। उसके बाद उसने मुझे एक जोर से किस किया और कहा- आज मैं बहुत खुश हूँ …. लेकिन अभी कुछ और करो…..!
फ़िर मैं उसे अपने गोद में उठा के बाथरूम में ले गया और वहाँ शॉवर के नीचे हमने एक बार और यौनानन्द लिया।
उस दिन हमने ३ बार चुदाई की। शाम को जब वो जाने लगी तो मेरे को कस के लिपट कर के बोली- रमेश डार्लिंग ! यू आर सो स्वीट… ! टुडे आई ऍम वैरी हैप्पी…. ! मैं तो वैसे ही डरती थी………इसमें तो बहुत मजा आया….. !
उसने मेरी फीस मुझे दी और अपने घर चली गई। मैं भी कुछ देर आराम कर के अपने घर के लिए निकल लिया।
तो दोस्तों यह थी मेरी जालंधर सिटी की दास्ताँ.. ! अब आप इसे सच समझे या झूठ ! यह तो आप पर है …… लेकिन मेरे एक एक लफ्ज में सच्चाई है …….. Sex Stories
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