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अंतर्वासना के प्रिय Antarvasna Sex Stories पाठकों को मेरा नमस्कार ! मेरा नाम राज है (बदला हुआ नाम ) और मैं दिल्ली के पास के शहर मेरठ से हूँ। आज सोचा कि क्यूँ ना अपनी भी कहानी यहाँ लिखी जाये !
तो दोस्तो आप मेरी कहानी पढ़ो और मजे लो !
वैसे तो मै इक्कीस साल का एक साधारण सा युवक हूँ पर थोड़े दिन पहले तक काम के सुख से वंचित था ! दूसरे लोगों की तरह मेरे दिल में भी कामवासना के लिये बहुत तड़प थी और चाह कर भी मैं इस तड़प को कम नहीं कर पा रहा था क्यूँकि ना तो मेरे पास कोई पार्टनर थी और मुझे डर भी लगा रहता था कि कहीं किसी जानने वाले को पता चल गया तो !
यही बात मेरे कॉलेज के दो दोस्तों को भी पता थी कि मुझे काम-क्रिया करनी तो है पर कोई मौका नही मिल रहा ! उन्होंने मुझे सुझाव दिया कि किसी काल-गर्ल को बुला ले। पर बदनामी और पकड़े जाने के डर से मेरी हिम्मत ना हुई और मैने मन ही मन फैसला किया कि मुझे किसी पचड़े में नहीं फंसना और जब भी मौका लगेगा तब हाथ आजमा लेंगे !
फिर अचानक एक दिन मेरी किस्मत ने जोर मारा। छुट्टी का समय था और मैं कॉलेज के गेट पर खड़ा था कि तभी मेरी ही क्लास की एक लड़की अदिति (बदला हुअ नाम) मेरे पास आई और बोली- मुझे तुमसे बात करनी है !
मुझे लगा कि इसे कोई काम ही होगा और मैं लेट भी हो रहा था सो मैंने उसकी बात पर ज्यादा गौर नहीं किया। पहले आप लोगो को अदिति के बारे में थोड़ा बता दूँ… क्या कहूँ बिल्कुल साधारण लड़की थी, औरों के लिए तो ठीक-ठाक एक सामान्य लड़की पर मेरे लिए तीखे नयन नक्शों वाली एक हूर की परी…..
उसने बात शुरू की- मैं और तुम एक ही नाव में हैं !
मुझे कुछ समझ नहीं आया, मैंने जोर से बोल दिया- अबे क्या कह रही है?
वो थोड़ा डर सी गई..
मैंने समझाया कि मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा है कि तू क्या कहना चाहती है…
वो सहमी सी खड़ी रही।
मैंने तब उससे कहा- डर मत ! बोल जो बोलना है !
उसने कहा- मुझे पता चला है कि तुम्हें एक पार्टनर की जरुरत है !
अब मैं समझ गया कि वो कहाँ बोल रही थी !
मैंने कहा- हाँ है तो पर तुझे कैसे पता चला?
फिर वो बोली- मेरी दोस्त से !
जो कि मेरे उन दोनों दोस्तों में से ही एक की गर्लफ्रेंड थी!
वो आगे बोली- मैं तुम्हारी पार्टनर बन सकती हूँ पर मुझे डर है कहीं किसी को पता न चल जाये !
मैंने उसका डर दूर किया और कहा- यह डर मुझे भी है तभी तो आज तक कुछ नहीं किया !
बस फिर क्या था, बात आगे बढ़ी और अगले दिन का कार्यक्रम तय हुआ…
मैं अपना जोर जोर से धड़कता हुआ दिल हाथ में लेकर किसी तरह घर पंहुचा पर दिमाग में तो उसकी बातें ही घूम रही थी। घर जाते ही अपने कमरे में गया और खाना भी नहीं खाया…
वही बातें दिमाग में घूमने लगी और तब अहसास हुआ कि उसने अभी तक सेक्स तो किया ही नहीं है। मतलब साफ़ था कि चूत एक दम टाइट होगी और उसे दर्द भी होगा…
बस फिर तो सारा दिन उसको चोदने के तरीके सोचने लगा … पहले ये करूँगा.. फिर वो … लेकिन एक बात दिमाग में थी कि उसे पूरी तरह गत्म करने के बाद ही कुछ शुरू करूँगा और उसके दर्द का भी ध्यान रखूँगा.. क्योंकि मुझे पता था कि अगर लड़की को दर्द ज्यादा हो तो ना वो खुद मजा ले पाती है और न तुम्हें दे पाती है…
बस देर रात तक यही सोचता रहा कि किसी भी तरह उसे अपने से पहले चरम-सुख दे सकूँ .. और उसे आनंद की चरम सीमा से भी परे ले जा सकूँ … ताकि उसका पहला सेक्स अनुभव यादगार बन जाये और वो मेरी दीवानी हो जाये !
खैर अगला दिन आया… सुबह दस बजे हम मिले और ऑटो पकड़ कर चल दिए होटल की ओर ….
वहाँ पहले अन्दर वो गई, कमरा बुक कराया दूसरे नाम से…. और कमरे में चली गई …
फिर कमरे में से मुझे कॉल किया कि रूम नंबर इतना है…
मैं होटल के बाहर ही खड़ा था तब तक ! ताकि किसी को शक न हो….
मैं सीधे होटल में गया.. किसी की तरफ नहीं देखा और सीधे कमरे की तरफ बढ़ गया ताकि अगर कोई देख भी रहा हो तो उसे लगे कि इसका कमरा पहले से बुक्ड है…
खैर कमरे तक पहुंच कर दरवाज़ा खटखटाया…
उसने दरवाज़ा खोला और मुस्कुरा दी। मैं कमरे के अन्दर आया और सबसे पहले उसे मेरा पार्टनर बनने के लिए धन्यवाद दिया ! इससे पहले कि वो कुछ समझ पाती, मैंने उसे अपनी बाहों में जोर से जकड़ लिया और बोला- इस दिन के लिए कब से तड़प रहा था..
और अपने होंठ उसके होंठों से सटा दिए! अब मैं जोश से भर चुका था और जोर जोर से उसके होंठों को चूसे जा रहा था..
वो गर्म होने लगी- वो भी अपनी जीभ मेरे मुँह के अन्दर डाल कर मुझे आनंद दे रही थी। इसके साथ ही उसने अपने हाथों से मेरे हाथ अपने वक्ष पर रख लिए .. मैंने भी झट से उसके स्तन दबाने शरू कर दिए…
अब मुझसे रहा नहीं जा रहा था सो मैं उसे जोर से चूसने लगा और उसके स्तन इस तरह दबाने लगा कि वो तड़पने लगी…
फिर मैं कुछ देर बाद उससे अलग हुआ और एक ही झटके में उसके सारे कपड़े उतार दिए… अभी भी मैं उसके स्तन सहला रहा था… और वो आवाजें निकाल रही थी कि तभी मैंने पाया की उसकी चूत पूरी गीली हो चुकी है..
मैंने उसके रुमाल से उसकी चिकनाई साफ़ की और थोड़ी सी वेसलीन अपनी बीच वाली ऊँगली पर लगा कर अन्दर दे दी !
अब मैं पूरे हरामी मूड में आ चुका था सो मैंने अपनी ऊँगली गोल गोल घुमानी शरू कर दी और अब तो वो मचलने लगी और जोर जोर से आवाजे निकाल कर कह रही थी- और जोर से करो और जोर से !
मैं तो अपने होश खो बैठा और लगा उसकी चूत मसलने…
वो मजे से उछलने लगी..
मुझे बस इतना पता था कि उसे चरम-सुख पहले देना है बस चाहे जो हो जाये..
उसकी चूत एक दम गीली हो गई। मैंने दोबारा से चूत साफ़ की और अपना मुँह उस पर लगा दिया। जीभ अन्दर डाली और उसकी चूत को कुरेदने लगा, उसकी मदहोश करने वाली आवाजें आने लगी…
उसने अपने दोनों हाथ मेरे सर के पीछे किये और मेरा मुँह अपनी चूत में दबा लिया! मैं जंगली भूत की तरह उसकी चूत कुरेदने लगा और तभी उसकी अपनी टांगें बंद करनी शरू कर दी और उसका शरीर ऐंठने लगा… और फिर उसकी चूत से पानी का फव्वारा छूटा और इसके साथ ही उसका शरीर ढीला पड़ने लगा पर मैं नहीं रुका, मैं लगातार उसके स्तन मसलता रहा और थोड़ी देर बाद उसने कहा- अब नहीं रहा जा रहा ! अब डाल दो !
मैंने भी देर न करते हुए अपना लण्ड निकाल लिया, मुझे पता था कि पहली पहली बार तो आदमी ज्यादा देर टिकता ही नहीं पर मैं तो उसे ओर्गास्म दे ही चुका, अब जल्दी झड़ भी गया तोशर्मिंदा नहीं होना पड़ेगा। पर फिर भी अभी तो चरम-सीमा आनी बाकी थी।
मेरा लण्ड देखकर उसने कहा- इतना बड़ा मैं कैसे लूंगी ?
पर मैंने उसे समझाया तो मान गई। बस फिर क्या था, मैंने रखा उसकी चूत पर और थोड़ा सा डाल कर ही अन्दर बाहर करने लगा और फिर धीरे धीरे शरू हुई रफ़्तार !
जिसके साथ ही बढ़ता गया आनंद !
टूटी उसकी सील, निकला उसका खून पर दोनों ही थे नशे में चूर !
अब वो लगी चिल्लाने ! मैंने भी पूरा अन्दर देकर कराया मिलन बच्चेदानी से ! रफ़्तार पे रफ़्तार, रफ़्तार पे रफ़्तार, रफ़्तार पे रफ़्तार और आखिर फिर फूट पड़ा उसका ज्वार ! मैं तो अब भी नहीं छूटा था….
तो चला एक दौर और ! इस बार थी मेरी साँसों और शरीर में गज़ब की गर्मी, चेहरा था लाल, साँस रही थी फूल ! पर फिर भी दम लगा कर था मैं मशगूल !
बस अब मेरा समय था.. मैंने उसे कहा तो बोली कि मैं भी आ रही हूँ ! दोनों साथ में होंगे…. और थोड़ी ही देर में हो गया ऐसा धमाका कि बस मत पूछो कि क्या साला हिरोशिमा पे बम गिरा होगा !!
खैर थोड़ी देर तो यूँ ही पड़े रहे, फिर पहने अपने अपने कपड़े …
अब हुए हम चलने को तो मैडम ने पास बुलाया सर पर चूमा और कहा- तुम्हारा दिया प्यार हमेशा याद रहेगा !
कमरे से एक एक करके निकले, फिर साथ खाना खाया …..
एक बार फिर जरुरत पड़ी उन्हें आश्वस्त करने की कि किसी को कभी नहीं बताऊंगा….
और चल दिए अपनी अपनी मंजिल की ओर….
मेरी सभी प्रिय पाठकों को स्नेह, धन्यवाद !! Antarvasna Sex Stories
मेरा नाम अनी है। मैं फरीदाबाद का Antarvasna रहने वाला हूँ। मैं आपको अपनी कहानी बताता हूँ।
ये मेरे जीवन की सच्ची कहानी है। मैं प्रोफेशन से एक कॉलबाय हूँ।
मैं एक दिन घर पर था, मुझे उस दिन फ़ोन-काल आया, किसी कुसुम नाम की लड़की का। उसने मुझे अपने घर मालिश करने के लिए बुलाया। उसने मुझे अपना पता दिया, वो भी फरीदाबाद की ही रहने वाली थी। वह बड़े परिवार से थी। उसकी शादी हो चुकी थी, उसके पति एक महीने के लिये कनाडा गये हुए थे।
जब मैं उसके घर पहुंचा तो मैंने एक २२ साल की लड़की को देखा। बहुत ही सुंदर और बहुत ही स्टाइलिश टाइप की लड़की थी। जब उसने मुझे देखा तो वो मेरे बारे में पूछने लगी। मैंने उसे बताया कि किसी कुसुम का फोन आया था ! मैंने जैसे ही उसे अपना नाम बताया तो उसके चेहरे पर अजीब सी मुस्कान आ गई। तभी मैं समझ गया ये ही कुसुम है।
उसने मुझे घर में आने के लिए कहा, पानी दिया और मैं बैठ गया।
उसने मुझसे कहा- मुझे मसाज करानी है ! अच्छे से कर दोगे तो जितना बोलोगे उतना पैसा दे दूंगी।
मैंने कहा- ठीक है।
वो अपने कमरे में चली गई, तभी वो अपने कपड़े बदल कर आई। जब वो आई, मैं उसे देखता रहा। उसने मुझे अपने कमरे में बुलाया और बोली- आराम से मालिश करना जो मजा आ जाये !
मैंने कहा- ठीक है !
मैंने जैसे ही उसका गाउन उतारा, वो मेरे सामने बिल्कुल नंगी खड़ी थी, उसका बदन कोमल, नाज़ुक और गोरा था। उसका कद ५’९” होगा, उसका बदन ३६-२८-३६ का होगा। मैंने जैसे ही उसके चुचियों का हाथ लगाया और दबाया, वो सिस्कियाँ भरने लगी। तभी मैं समझ गया कि ये प्यासी है।
मैंने उसे बैड पर लेटा लिया, मैं भी सिर्फ अंडरवियर में ही था। मैं उसकी मालिश कर रहा था, उसे मजा आ रहा था।
अचानक उसने मेरा हाथ पकड़ा, मुझे अपने उपर ले लिया और बोली- मसाज को छोड़ो ! अब आप मेरी प्यास को बुझा दो ! जितने पैसे बोलोगे उतने दूंगी।
वो बहुत प्यासी थी। मैंने कहा- ठीक है, जैसे आप चाहें !
मैंने अपने होठों को उसके होंठों पर रख दिया। अब वो मेरे होंठो का रस चूसने लगी, मैं भी उसके होंठों का रस लेने लगा। तभी वो वोली- मजा आ रहा है तुम्हारे होंठ तो बहुत प्यारे हैं !
कुसुम मेरे लण्ड को पकड़ कर चूसने लगी, तभी वो सीधे लेट गई और बोली- मुझे चोदो !
मैंने अपना लण्ड उसकी चूत पर लगाया और जोर से धक्का दिया तो वो चिल्ला उठी। उसकी आँखों से आंसू तो निकल रहे थे मगर उसे मजा भी आ रहा था। वो मुझे छोड़ने को तैयार ही नहीं थी। मैं उसे परेशान करने लगा। कभी मैं उसकी चूत में अपने लण्ड को घुसाता और निकाल कर शान्त हो जाता, मैं उसे तड़पा रहा था, वो बार बार मुझे अपनी तरफ खींचती और कहती- क्या कर रहे हो? प्लीजजजजजज करो ना !
मैं फिर शुरु हो जाता। मैं ३ घण्टे उसे मजा देता रहा और मजा लेता रहा। ३ घण्टे बाद मैं डिस्चार्ज हो गया। वो जोर जोर से साँस ले रही थी। मैंने उसके होंठो को चूसना शुरु कर दिया। वो बोली- मुझे ऐसा मजा कभी भी नहीं आया ! तुमसे पहले बहुत आये मगर तुम्हारे आगे सब बेकार हैं। मुझे तुमसे मिलकर अच्छा लगा।
फिर हम दोनों नहाने चले गये, एक साथ नहाये। जब हम नहाकर बाहर आये, वो मेरे बदन को पोंछ रही थी, मैं उसके बदन के पानी को अपनी जीभ से चाट रहा था। उसकी आँखें बंद हो गई और सीत्कार करने लगी- अअऽ॥अअअअअआहऽऽऽहहहहह। यह भी थोड़ी देर तक चलता रहा। फिर वो मुझे फरीदाबाद मैं शिव रेस्टॉरेन्ट, १७ सेक्टर में ले गई। हम दोनों ने खाना खाया।
उसने मुझे अपने साथ सोने को कहा मगर मुझे घर जाना था इसलिए मैंने मना कर दिया।
तो बोली- अब कब आओगे?
मैंने कहा- जब आप बुलाओगी, आ जाऊंगा !
उसने मुझसे पूछा- कितना दूँ?
मैंने कहा- जितना आप चाहो !
उसने मुझे दस हजार दिये और मैं अपने घर आ गया।
रात को उसका फिर फोन आया और हम दोनो ने रातभर सैक्सी बाते की।
जब भी कुसुम का दिल करता है वो मुझे ही बुलाती है। मैं भी उस मज़े को भूल नहीं सकता।
मैंने सैक्स कई बार किया है मगर ऐसा मजा मुझे पहली बार आया !
कुसुम आग है। Antarvasna
मैंने मामी को नीचे Antarvasna खींचा और फिर से उनके मम्मे दबाने लगा. मेरा जोश अब पहले से भी ज्यादा था. क्या पता फिर मौका मिले ना मिले? मैं उनके मम्मे चूसे ही जा रहा था और एक हाथ से चूत सहला रहा था. मैंने अब उनको चाटना चालू किया. उन्होंने अपने हाथों से सर के नीचे जो तकिया था, उसे कस के पकड़ा था. तो मैंने उनकी बगलों में चूमना चालू किया जिससे मामी पूरी सिहर उठी. धीरे धीरे चूमते हुए मैं नीचे आ गया और चूत चाटने लगा. अब मामी ने धीरे से अपने पैर उठाये और अपनी छाती के पास ले गई जिससे अब उनकी गांड का छेद मेरे सामने आ गया था.
“नयन, अगर तुमको तकलीफ ना हो तो थोड़ा इसे भी चाटो ना!”
मैंने अपनी जीभ गांड के छेद पर रखी और धीरे धीरे अपनी जीभ का जोर बढ़ाया. मामी कसमसा रही थी और नीचे से अपनी गांड उठा उठा कर मुझसे चुसवा रही थी.
“मामी क्या इस छेद को कभी किसी ने छेड़ा है?”
“नहीं नयन, ये तो मेरी चूत को हो नहीं चाटते! तो इसको क्या चाटेंगे!”
“मामी, मैं इसको चूसूंगा भी और बजाऊँगा भी!”
मामी अब जरा मेरा लंड गीला तो करो!”
मामी ने वापस मेरा लंड मुँह में लिया और चूसना चालू किया.
“अब मामी पेट के बल हो जाओ, मैं आपके पीछे के छेद को छेड़ता हूँ!”
“नयन, संभल के! मैंने कभी पीछे लिया नहीं है!”
“अरे मामी जी! तुमने कभी आगे भी नहीं लिया था! लेकिन अब लेती हो ना!”
मैंने अपनी पकड़ बना ली और उनकी गांड पर लंड का दबाव बनाने लगा.
“नयन, धीरे से करो! मुझे दुःख रहा है!”
“हाँ मामी! मैं धीरे से करता हूँ!”
“मामी, एक काम करो! आप नीचे से गांड उठाओ और धीरे से अन्दर लेने की कोशिश करो!”
लंड तो अब मेरा भी दुखने लगा था क्योंकि गांड का छेद बहुत ही छोटा था. मामी ने अपनी गांड नीचे से उठानी शुरू कर दी थी. वो गांड तो नीचे से उठा रही थी, साथ में चिल्ला भी रही थी.
“नयन, आऽऽऽऽ आआआऽऽऽ बहुत दर्द हो रहा है नयन…!”
अब लंड आधा अन्दर जा चुका था और मामी अब गांड आगे खींचने लगी थी. मुझे लगा कि मामी अब बाहर निकलेगी तो मैंने मामी को पेट के नीचे हाथ डाल कर पकड़ लिया और ऊपर से ऐसा जोर लगाया कि लंड अन्दर धंसने लगा. मामी की तो चीख ही निकलने वाली थी पर उसने जैसे तैसे रोक ली.
“मामी, अब पूरा अन्दर गया है! अब कैसा लग रहा है?”
“नयन, बहुत ही दर्द हो रहा है!”
“मामी, थोड़ा सहन करो! और आपको दर्द ना हो, इस तरह से अपनी गांड नीचे से हिलाओ!”
“हाँ मामी! बस इसी तरह से धीरे धीरे हिलाओ!”
मामी ने अपना काम चालू कर दिया था.
“मामी, कैसा लग रहा है?”
“नयन, यह तो अलग ही अनुभव है! मुझे बहुत ही मजा आ रहा है! तुम भी कमर हिलाओ ना! मजा आ रहा है बहुत!”
अब मैंने अपने शॉट धीरे से चालू किये जिससे उनको तकलीफ़ ना हो.
लेकिन मामी पूरे जोश में आ गई थी, वो तो नीचे से गांड हिला हिला कर लंड ले रही थी.
मैं भी जोरों पर था और और एक हाथ से उनकी चूची भी दबा रहा था.
बहुत देर ये खेल चला!
“मामी, क्या बस करूँ गांड की ठुकाई?”
“हाँ नयन, अब जरा मेरी चूत पर जोर लगाओ!”
मैंने गांड से लंड बाहर निकाला और उनको घोड़ी बना कर उनकी चूत में डाल दिया और पूरी गति से कमर हिलाने लगा.
मामी की सिसकारियाँ रुक रुक कर निकल रही थी जो के मेरे धक्के के कारण हो रहा था.
“मामी, कैसा लग रहा है?”
“नयन, मत पूछो! तुम अपना काम चालू रखो!”
“नयन! आआऽऽऽ आआआआअ… क्या मजा आ रहा है! मैं तो पागल थी जो तुम्हें चोदने को मना कर रही थी!”
“नयन, मैं निकलने वाली हूँ मुझे कस लो नयन! आआऽऽऽ आआआआअ…! ”
मैंने मामी की हालत जान ली और पीछे से उनको कस कर पकड़ लिया.
मामी ने अपनी चूत को मेरे लंड पर कस लिया जिस कारण मैं भी मचलने लगा.
“मामी, ऐसे ही चूत से दबाओ मेरे लंड को! मैं भी निकलने वाला हूँ…मामी ऽऽऽ! ”
और मैं और मामी एक साथ झड़ने लगे. मेरे लंड का फव्वारा मामी की चूत में खाली हो रहा था और मामी भी अपनी चूत के होंट दबा दबा कर मेरा पूरा लंड खाली करवा रही थी.
“क्यों नयन, मजा आया?”
“बहुत मामी…बहुत मजा आया!”
“अरे अभी कहाँ? मजा तो अब तुझे दूंगी जो तुम जिन्दगी भर नहीं भूलोगे!”
और मामी ने मेरा मुरझाया हुआ लंड अपने मुँह में लिया और अपनी जबान से और दातों से उसे चूसने लगी. मेरी हालत तो ख़राब हो रही थी, एक तो पहले ही मैं दो बार झड़ चुका था.
“मामी बस करो ना! अब मेरे लंड में दर्द हो रहा है!”
“नयन, यह दर्द बस थोड़ी देर सहन करो! फिर देखो!”
थोड़ी देर बाद मेरी लंड में जान आने लगी और वो वापिस पहले की तरह तैयार हो गया. मामी मेरे लंड को निहार निहार कर चाट रही थी. शायद उनको लंड चूसना बहुत ही पसंद था.
“नयन, तुम्हरे लंड में तो बड़ा जोर हैं! यह तो तीसरी बार भी तैयार हो गया है?”
“यह तो आप के मुँह में लेने की कला के वजह से हो रहा है!”
“अब मेरी समझ में आया कि मेरी गांड में इतना दर्द क्यों हुआ! यह तो कितना बड़ा है!”
“अब आपको पता चला? जब चूत और गांड दोनों चोद कर हो गया?”
“अरे तुमने देखने ही कहाँ दिया? जब देखो मशीन चालू थी तुम्हारी!”
“हाँ मामी! अब क्या करना है मुझे?”
“नयन, चूत और गांड तो तुमने चोद दी! अब मैं तुम्हें मुँह चोदना सिखाती हूँ.
मामी ने मुझे घोड़ा बना दिया और मेरे नीचे आ कर नीचे से मेरे लंड को पकड़ा.
“नयन, जैसे तुमने मेरी चूत चोदी और मेरी गांड चोदी, उसी तरह अब मेरे मुँह को चूत समझ कर जोर से चोदो!”
मैंने जैसे ही अपनी कमर हिलाना चालू किया, मामी ने अपने मुँह से कमाल दिखाना चालू किया, नए-नए तरीके से मेरे लंड को मुँह में चूस रही थी, कभी अपने होंटों का दबाव बना कर, कभी अपनी जबान से सहला कर मुझे पागल कर रही थी.
मैं भी अब पूरी गति से उनके मुँह में लंड को हिला रहा था. मैं अब घुटनों के बल बैठ गया और मामी वैसे ही नीचे से सर हिला के अपने मुँह को खुद चुदवा रही थी.
मैंने एक हाथ पीछे किया और उनकी चूत में उंगली डाल दी. मामी अब आगे से सर हिला के मुँह को चुदवा रही थी और कमर हिला एक चूत में उंगली ले रही थी. अब मेरा बदन अकड़ने लगा था. मामी अपने मुँह का कमाल दिखा रही थी. मैं अब अपने हाथों पर आ गया और कमर हिला हिला के मामी का मुँह चोदने लगा.
मामी पूरा लो! खा जाओ! मैं तो झड़ने वाला हूँ ऽऽ!!
और एक जोरदार धक्का लगाकर मैं उनके मुँह में झड़ गया. पहले की तरह मामी ने मेरा वीर्य पूरा चाट लिया और मेरे लंड को साफ कर दिया.
फिर हमने उठ कर कपड़े पहन लिए.
“मामी, मैं निकलता हूँ! आपने आज मेरा सपना पूरा कर दिया! अब मैं आप से दोबारा कुछ नहीं मांगूंगा!”
“नयन भले ही तुम मुझे दोबारा कुछ नहीं मांगो, लेकिन तुमने आज जो ख़ुशी मुझे दी है, अब मैं तुमसे रोज तुम्हारा लंड मांगूंगी! तो फिर नयन कल दोपहर को आओगे ना? मैं तुम्हारा इंतजार करुँगी.”
तो दोस्तो! कैसी लगी मेरी आगे की कहानी?
अब तो मैं इतना चोदने का आदि हो गया हूँ कि जब तक दो बार झड़ता नहीं, मैं नीचे उतरता ही नहीं.
तो अब मैं 29 साल का हूँ और मुंबई में रहता हूँ.
मुझे जरूर मेल करें कि मेरी कहानी आपको कैसी लगी! Antarvasna
मेरे मामा Indian Sex Stories जी की पत्नी यानि मेरी मामी का अकस्मात निधन हो गया था। मामाजी अट्ठाईस साल के खूबसूरत वयक्तित्व वाले हैं। उनकी पत्नी भी पढ़ी-लिखी सुंदर औरत थी। निधन के समाचार से मेरी मम्मी और परिवार के सभी सदस्यों को बहुत दुःख हुआ था। मामाजी की एक दो साल की लड़की थी।
थोड़ा अपने बारे में बता दूँ!
मेरी उम्र 18 से कुछ ज्यादा है, बला की खूबसूरत हूँ मैं! मुझे देखते ही आदमी की आह निकल जाती है। बी.कॉम की परीक्षा के बाद गर्मियों की छुट्टियों में मम्मी ने मामाजी की लड़की जॉली को सम्हालने के लिए मुझे इस वर्ष अकेले ही भेज दिया।
मामाजी के यहाँ पूरा परिवार छोटे मामाजी, नानी जी, नानाजी सभी जॉली को बहुत अच्छे से रखते हैं। मामाजी बिलकुल उदास और गमगीन रहते थे। वो अकसर कामकाज के सिलसिले में बाहर जाते थे, रात को देर सवेर घर पर आते थे।
एक रोज रात को मामाजी करीब साढ़े गयारह बजे घर पर आये। मैं जॉली को सुला रही थी, सोते वक्त जोली रोने लगी, मुझे बहुत दया आई और अपनी शर्ट को खोलकर जॉली को अपना चुचूक चुसाने लगी। चुसाते-पिलाते कब जाने नींद लग गई।
जब मेरी नींद उड़ी तो देखा मामाजी के हाथ मेरे स्तनों को धीमे धीमे सहला रहे थे, नींद उड़ते ही एकदम से मैं सन्नाटे में आ गई। पर सोचा कि आज चार माह हो गए मामीजी को मरे हुए, रोजाना सेक्स करने वालों की क्या हालत होती होगी। फिर सबसे बड़ी बात मेर गुलाबी चुचूकों पर मामाजी का हल्का स्पर्श पाकर मैं खुद रोमांचित हो गई। मैं नींद का बहाना करके सोई रही।
मामाजी ने धीरे धीरे शर्ट के चार बटन खोल दिए ब्रा को थोड़ा और ऊपर खिसका कर एक स्तन पर अपने होंठ रगड़ने लगे, दूसरे पर हल्का हल्का हाथ चला रहे थे। मेरे पूरे बदन में चिंगारियाँ फूटने लगी। वक्ष पर मामाजी की चलती हुई जबान से मेरी चूत कुलबुलाने लगी।
इधर मामाजी के पजामे के सामने ऐसा लगा जैसे टेंट खड़ा हो गया हो। धीरे से मामाजी का हाथ मेरी कमर से रेंगते हुए जींस तक पहुँच गया परन्तु तंग जींस होने से हाथ चूत तक नहीं पहुँच सका। फिर मामाजी जो भी हरकत कर रहे थे, बहुत डरते डरते से कर रहे थे। मैं आँख बंद कर आनंद ले रही थी पर डर मुझे भी लग रहा था। थोड़ी देर बाद मामाजी ने चुचूक चूसते चूसते पजामे में से अपना आठ-नौ इंच लम्बा लंड निकाल कर हाथ में ले लिया। वासना के वशीभूत हो के हाथ से लंड को जोर जोर से हिलाने लगे, दूसरे से मेरे स्तन दबाते रहे और मुँह में निप्पल लेकर लॉलीपॉप सरीखे चूसते रहे।
इच्छा तो मेरी भी बहुत हुई पर आंखे मींचे शर्म के मारे लेटी रही। थोड़ी देर बाद मामाजी के लंड ने पिचकारी मारी, जैसे होली पर रंग निकला हो, ढेर सारा वीर्य निकल कर बेडशीट पर जा गिरा। मामाजी जोर जोर से हांफ़ने लगे। सांसों को ठीक कर धीरे धीरे मेरी शर्ट के बटन लगाने लगे। सब कुछ सामान्य हो गया सिवा मेरे बदन के, आग लग गई उसमें!
एक घंटे बाद जब लगा कि मामाजी सो गए, मैं धीरे से उठकर अपने कमरे में चली गई। सीधे बाथरूम में जाकर पूरी नंगी होकर नहाई, नहाते हुए जमकर चूत में ऊँगली डाली, तब जाकर राहत मिली और सो गई।
अगले रोज मामाजी से मैं बराबर निगाह नहीं मिला पा रही थी, पर ऐसा जाहिर किया जैसे रात जो कुछ हुआ उसकी मुझे जानकारी न हो। परन्तु सारे दिन रात के वाकयात मेरी निगाहों से न निकले, रह रह कर रात वाली बात याद आती और कुदरन सेक्स करने की इच्छा होने लगी। इससे पहले हल्का फुल्का वक्ष को स्पर्श करवाना, बन-ठन कर रहना, लड़कों को कुत्ते की तरह पीछे दौड़वाने तक का खेल मैंने किया था पर सेक्स के मामले में विगत रात अब तक का मेरा उच्च स्कोर थी।
जैसे-तैसे दिन कटा, रात होते ही खुद-ब-खुद मेरे कदम मामाजी के कमरे की तरफ बढ़ने लगे, परन्तु आज बहाना न रहा! जॉली नानीजी के पास जो सो गई थी। मन मार कर मैं अपने कमरे में सो रही थी।
नौ बजे के करीब मामाजी आये, उनकी कमर में थोड़ा दर्द हो रहा था। नानीजी ने मुझे आवाज लगाई- बेटी निशा, मामाजी के कमर पर जरा तेल लगा देना!
मुझे जैसे मुँह मांगी मुराद मिल गई हो। आज मैंने नाईट-सूट पहन रखा था, वो भी बिना ब्रा और पेंटी के! मामाजी चादर ओढ़ कर लेटे थे। मैंने पूछा- मामाजी, कहाँ दर्द हो रहा है?
मामाजी ने कमर की बगल में इशारा किया वहाँ तेल लगाने के लिए मामाजी को पजामा खोलना पड़ता। उन्होंने पजामा और चड्डी खोलकर नग्न होकर चादर डाल ली। मैं चादर के अंदर हाथ डालकर आहिस्ता-आहिस्ता मालिश करती गई। दस मिनट बाद मुझे कंपकपी छूटने लगी। वासना से मेरा बदन जलने लगा।
एकाएक मामाजी जो बगल में होकर लेटे हुए थे, थोड़ा सीधा हो गए। सीधा होते से ही सांप की फुफकारता उनका लंड मेरे हाथ से टकराया। रिश्ते-नाते, उम्र सब भूलकर मैंने लंड को हाथ में पकड़ लिया। मामाजी भी सिसकारियाँ भरने लगे। मुझसे और बर्दाश्त न हुआ, लंड को मुँह में ले लॉलीपोप की तरह चूसने लगी। मामाजी मेरी ब्रा विहीन चूचियों को कस के दबाने लगे, चूसने लगे। बेतहाशा लिपट गए, चिपट गए!
इसके आगे क्या हुआ?
बाकी की कहानियों में आप लोग रोजाना पढ़ते ही हो!
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पति सेक्स कहानी में पढ़ें कि मेरा पति मुझ पर शक करने लगा था कि मैं बाहरी लंडों से चुदती हूँ। तो एक रात मैं पति से चुदने के मूड में घर गयी. वहां क्या ड्रामा हुआ?
दोस्तो, मैं सिमरन, फिर से अपनी हॉट सेक्स स्टोरी के साथ लौट आई हूं।
पिछले कुछ दिनों से मैं अपने ऑफिस के काम में इतनी व्यस्त हो गई थी कि चुदाई के बारे में सोचना जैसे बंद ही कर दिया था मैंने!
दिमाग की दही हो गई थी।
मेरे अंदर की सारी फीलिंग्स जैसे सूख गईं थी।
मेरे साथ काम करने वाले लोगों को लगने लगा था कि मैं पागल हो चुकी हूं।
लेकिन मेरे पति को लगता था कि मैं दूसरे लड़कों के साथ चुदाई करवाकर उसको धोखा दे रही हूं।
वह मुझे कभी भी कॉल कर देता था, यह देखने के लिए कि कहीं मैं किसी के पास चुदाई तो नहीं करवा रही!
इन बेवजह की कॉल्स ने मेरे दिमाग का बैलेंस खराब कर दिया था।
इन दिनों मुझसे फोन पर बात करते हुए वह बताता था कि मेरा पति सेक्स करते हुए किन डर्टी पोजीशन में वह मुझे चोदना चाहता है।
दारू के नशे में कई बार तो वह मुझे रंडी कहता था जो अपने पति को भूल चुकी है।
इसलिए अपना काम खत्म करके एक छोटी सी ऑफिस पार्टी के बाद मैं अब चुदाई का पूरा मजा लेना चाहती थी।
तो सबसे पहली चीज जो मैंने की वो ये कि मैं पार्लर गई और अपनी बॉडी (जरूरी जगहों पर) के सारे बाल साफ करवा दिए।
मैंने एक नया लुक कैरी किया।
जब मैं शीशे के सामने आई तो देखकर हैरान रह गई कि मैं थोड़ी मोटी होने के बाद कितनी सेक्सी लग रही थी!
मेरा बदन अब विद्या बालन जैसा लग रहा था।
अगर आपको विद्या बालन की ‘डर्टी पिक्चर’ याद है तो मैं बिल्कुल ‘सिल्क’ जैसी ही लग रही थी।
मैं अपने हस्बेंड को सरप्राइज देने और उसके लंड को खुश करने घर पहुंची।
लेकिन घर पहुंचने के बाद उसके बदले हुए तेवरों से मैं ही सरप्राइज हो गई।
मैं- हो क्या गया है तुम्हें! तुम तो मुझे चोदने के लिए मरे जा रहे थे तो अब क्यों नहीं चोद रहे हो?
पति के सामने मैं पारदर्शी नाइटी में खड़ी थी, मैंने अंदर से सफ़ेद ब्रा पैंटी पहनी थी ताकि पति सेक्स के लिए उत्तेजित हो जाए.
हस्बेंड (नशे में)- फक ऑफ बिच! (निकलो यहां से, रंडी!)
मुझसे यह बर्दाश्त नहीं हुआ।
मैंने उसके फुस्सी लंड पर खूब ताने मारे जो अब उठना बंद हो चुका था।
रात के 11.30 बज रहे थे।
वह बेड से उठा और घर से बाहर निकल गया।
मैंने अपने कॉलेज वाले यार को कॉल किया लेकिन वह फोन नहीं उठा रहा था।
तो मैंने अपना वाइब्रेटर लिया और हार्ड सेक्स के बारे में कल्पनाएं करने लगी।
मेरे पति ने फोन पर जो सेक्सी बातें की थी, मैं उन सबके बारे में सोचने लगी।
पति सेक्स की सोचते हुए ही मैं गर्म होने लगी।
मैं अपनी गांड पर तमाच मारने लगी; चूचियों को चांटें लगाने लगी और निप्पलों को खींचने लगी।
अपनी चूत को भी मैं थ्रीसम सेक्स घटनाओं के बारे में सोचते हुए जोर से रगड़ने लगी।
अब किसी मर्द को अपने इशारों पर नचाने की फीलिंग मुझे नहीं आ रही थी क्योंकि इस वक्त मुझे सेक्स चाहिए था।
चूत चुदवाने के लिए मरी जा रही थी मैं!
ऐसा पहली बार हो रहा था जब लंड न मिलने पर मैं झुंझलाने लगी थी।
यहां तक कि मैं अपनी बिल्डिंग में रहने वाले एक दो कॉलेज के लड़कों को बुलाने तक के बारे में भी सोचने लगी थी।
हालांकि वे दोनों रोज मेरी बॉडी को ताड़ते थे और मुझे रोज चोदने के ख्यालों में डूबे रहते थे।
किस्मत से मेरे बॉयफ्रेंड का फोन मेरे पास आ गया।
मैं उसकी आवाज सुनकर बहुत खुश हो गई।
उसको भी पता चल गया होगा कि मुझे उसकी कितनी जरूरत महसूस हो रही है।
वह बोला- क्या हुआ रंडी! लग रहा है लंड की जरूरत है तुझे!
मुझे नहीं पता उसे क्या हो गया था।
नशे में होने के बाद भी वह मुझसे ऐसे बात नहीं करता था।
मैंने थोड़ा घबराते हुए उसे याद दिलाया कि ये मैं थी।
वह बोला- हां जानता हूं, ये तुम ही हो, सिमी! मैंने तुझे रंडी इसलिए बुलाया क्योंकि तुम मुझे तभी कॉल करती हो, जब तुम्हें लंड चाहिए होता है, जैसे कि मैं ही तुम्हारी रंडी हूं।
मैं जानती थी कि वह ये सारी बातें सच ही बोल रहा था।
लेकिन उस वक्त वही था जो मेरी चूत को लंड दे सकता था।
और मैं इस वक्त कोई भी चांस नहीं लेना चाहती थी अपनी चूत की प्यास मिटाने के लिए।
मैं- मैं सेक्सी साटिन की नाइटी में तुम्हारा इंतजार कर रही हूं। मेरा फुद्दू पति घर पर नहीं है। इसलिए बकवास बंद करो और जल्द से जल्द मेरे घर आ जाओ।
आधे के बाद मेरे घर की डोरबेल बजी।
मैं दरवाजे की ओर बढ़ी।
दोनों तरह के विचार मेरे मन में आ रहे थे।
सोच रही थी कि अगर मेरा हस्बेंड हुआ तो चोरी छिपे चुदाई करने का मेरा सारा प्लान खराब हो जाएगा।
मैंने दरवाजा खोला तो देखकर मैं चौंक गई।
मेरा बॉयफ्रेंड मेरे पति के साथ था और पति पूरा नशे में डूबा था।
मैं तो यह भी नहीं समझ पा रही थी कि ये दोनों आखिर मिले कहां?
सड़क पर या किसी बार में!
मैंने उन दोनों को अंदर लिया और दरवाजा बंद कर दिया।
मेरा पति चलने की हालत में नहीं था तो बॉयफ्रेंड ने उसको सोफे तक घसीट कर बिठा दिया।
अब मैं और मेरा बॉयफ्रेंड दोनों ही पति के सामने खड़े थे।
वह समझ नहीं पा रहा था कि आखिर उसके साथ हो क्या रहा है।
उसके सामने ही मेरा बॉयफ्रेंड मेरे चूतड़ों को भींचते हुए उन पर चिकोटी काटने लगा।
मेरा मूड अब खराब हो चुका था लेकिन वो कोशिश कर रहा था कि मैं फिर से गर्म हो जाऊं।
पति (जैसे चिल्लाते हुए)- जान, तुम जानती हो ये कौन है?
मैंने सोचा कि ऐसा तो हो ही नहीं सकता कि मेरे बॉयफ्रेंड ने बता दिया होगा कि वो मेरा पुराना यार है। उधर मेरे बॉयफ्रेंड के चेहरे का आत्मविश्वास देखकर मैं सोच में पड़ गई थी कि आखिर कौन सा सरप्राइज मेरे सामने आने वाला है।
पति- इसका नाम प्रेम है, यह जवान लड़के-लड़कियों के लिए एक लव गुरू है। मुझे लगता है कि तुम्हें भी इसके साथ हमारी मैरिड लाइफ के बारे में बात करनी चाहिए। आह … अह … मैं चलता हूं.
मेरा पति एकदम से उठा और टॉयलेट की ओर लपका, उसे पेशाब लगी थी क्योंकि उसने बार में काफी दारू पी ली थी।
उधर मेरे बॉयफ्रेंड ने उसके वॉशरूम में घुसने का इंतजार भी नहीं किया।
वह सोफे पर बैठा और मुझे खींचकर अपनी गोद में बिठा लिया।
मैं उसके लंड पर अपनी गांड को रगड़ने लगी।
वह बदले में मेरी गांड को भींचने और खींचने लगा।
हम दोनों पागलों की तरह एक दूसरे के होंठों को चूस और खींच रहे थे।
उसने मुझे जल्दी से डॉगी पोजीशन में झुका लिया और मेरी चूत और गांड को चाट चाटकर खाने लगा।
हम अपने में इतने खो गए थे कि दोनों में से किसी ने ध्यान भी नहीं दिया कि मेरा पति रूम में से झांक रहा है।
उसने मुझे मेरी गांड को मेरे बॉयफ्रेंड के मुंह पर रगड़ते देख लिया।
पति- नहीं-नहीं … तुम गलत समझ गई प्रेम को … उसके चेहरे पर से अपनी गांड को हटाओ, रंडी!
वह आया और उसने बॉयफ्रेंड का मुंह मेरी गांड से हटा दिया।
उसने मुझे सोफे पर धकेल दिया।
दरअसल वह जब नशे में होता है तो उसमें काफी हिम्मत आ जाती है।
पति- प्रेम तुम मुझे बताओ कि इस मोटी रंडी औरत को कैसे कंट्रोल करना है। देखो, वह मुझे कंट्रोल करने की कोशिश कर रही है!
मेरे पति से अब खड़ा भी नहीं हुआ जा रहा था, ना ही कुछ ढंग से बोला जा रहा था।
वह समझ रहा था कि मेरा बॉयफ्रेंड कोई मैरिज काउंसलर है।
उसने मेरी चूत को पकड़ लिया और उसके सामने खड़ी कर दिया।
मैं उससे दूर जाने की कोशिश करती तो वो मेरी गांड पर थप्पड़ मार देता और चूत को कसकर भींच देता।
पति- देखो प्रेम, मुझे इस रंडी को अभी के अभी तमीज सिखानी है। बताते रहना मैं सही कर रहा हूं क्या …
अब उसने एकदम से अपना तना हुआ लंड मेरी सूखी चूत में सरका दिया।
उसने मुझे चोदना शुरू कर दिया।
मैं उसकी पकड़ से छूट भी नहीं पा रही थी।
मैंने अपने बॉयफ्रेंड को ही इशारा किया कि वो इसे मुझसे दूर लेकर जाए।
बॉयफ्रेंड- ये सही तरीका नहीं है, आप पूरी तरह से गलत कर रहे हो, छोड़ दो इसको!
बॉयफ्रेंड ने पति को अब सोफे पर धकेल दिया और मुझे अपने कंट्रोल में ले लिया।
उसने सोचा कि पति अब इसके लिए उसको डांटेगा, लेकिन बजाए डांटने के … मेरा पति अब मुझे उसके लव गुरू के चंगुल में देखकर लंड की मुठ मारने लगा था।
इस सब आपाधापी में मेरी नाइटी नीचे गिर चुकी थी।
मैं अब पारदर्शी ब्रा-पैंटी में खड़ी थी।
इससे मेरे पति की उत्तेजना और ज्यादा बढ़ चुकी थी।
दूसरी तरफ मेरे बॉयफ्रेंड का लंड भी पूरा तना हुआ था।
वह अपने लंड को मेरी गांड में धकेलने लगा था। वह सोच रहा था कि पति को वहां से कैसे हटाया जाए, या फिर ऐसा कोई तरीका निकाला जाए कि वो मुझे मेरे पति के सामने ही चोद सके।
मेरा पति काफी नशे में था। उसका ध्यान हटाना अभी बहुत मुश्किल था।
बिना किसी चेतावनी के वो मुझपर चढ़ आया।
उसने मेरे बॉयफ्रेंड को सोफे पर धकेला और मुझे अपने कंट्रोल में ले लिया।
पति- मुझे नहीं पता तुम इसको सबक कैसे सिखाओगे, लेकिन ये मेरा तरीका है!
कहकर वो मेरी गांड पर तमाच मारने लगा, मेरी चूत के होंठों को खोलने लगा।
अब मैं लंड के लिए मरी जा रही थी और विरोध करने का मेरा कोई इरादा नहीं था।
मेरा पति मेरे बूब्स पर तमाचे मार रहा था और मुझे इसमें बड़ा मजा आ रहा था।
वह मुझे बार बार रंडी-रंडी कहकर बुला रहा था।
पति- देख, मेरा लंड अब तेरी इस छोटी सी टाइट चूत के साथ क्या करता है, अड़ियल रंडी!
मेरे पति ने मेरी चूत पर थूका और मेरे चूतड़ों को थामते हुए अपना तना हुआ लंड मेरी चूत में सरका दिया।
अब कुतिया बनी हुई मैं अपने बॉयफ्रेंड के सामने चुद रही थी।
वह मेरी गांड में उंगली घुसा रहा था, मेरी सिसकारियां निकलवा रहा था, मेरे चूतड़ों पर तमाचे मार रहा था।
साथ ही वह मेरे बॉयफ्रेंड पर भी ध्यान लगाए था।
मैंने अपने और अपने पति के बीच में इस तरह के दर्दभरे सेक्स की कभी कल्पना नहीं की थी, और वो भी मेरे बॉयफ्रेंड के सामने!
कुछ देर मेरी चूत चोदने के बाद मेरा पति मेरे ऊपर ढेर हो गया और उसने मुझे मेरे बॉयफ्रेंड के ऊपर गिरा दिया।
फिर खुद नीचे फर्श पर लेट गया।
मेरा पति सेक्स के बाद सुबह तक चैन की नींद सोता रहा।
उधर मैं अपने बॉयफ्रेंड की गोद में पड़ी थी और मेरी चूत से पति का वीर्य बहकर बाहर आ रहा था।
तब मैंने देखा कि उसकी आंखों में कोई शरारती प्लान चल रहा था।
मैंने उससे पूछा भी लेकिन उसने कुछ बताया नहीं।
लेकिन बाद में उसके जवाब ने मुझे उत्सुक कर दिया.
बॉयफ्रेंड- सिमी, अब अपनी मैरिड लाइफ का एक नया फेज एंजॉय करने के लिए तैयार हो जाओ!
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