Find Related Category Ads
गरम चूत में ओल्ड लंड ने खूब मजा दिया. मेरे पहचान के एक अंकल मुझे मुंबई बीच पर मिल गए. मैंने उन्हें अपने घर ले आई. अंकल की नजर मेरे जिस्म पर थी. तो बात बन गयी.
मैं मिसेज रागिनी हूँ दोस्तो.
मैं 30 साल की एक मद मस्त, जवान और पढ़ी लिखी औरत हूँ।
मेरी शादी दो साल पहले आनंद नाम के एक लड़के से हो गई थी।
आनद भी बड़ा स्मार्ट और हैंडसम लड़का है.
वैसे मैं कानपुर की रहने वाली हूँ।
मेरी ससुराल भी कानपुर में ही है मगर मैं आजकल अपने पति के साथ मुंबई के कोलाबा एरिया में रह रही हूँ।
मैं 5′ 5″ के कद वाली हूँ, गोरी चिट्टी हूँ और चंचल स्वभाव की हूँ।
देखने में सेक्सी, खूबसूरत और हॉट हूँ।
ऐसा मैं नहीं कह रही हूँ लोग कहते हैं।
मेरे मम्मे थोड़ा बड़े बड़े साइज के हैं.
मेरी कमर पतली है, मेरी बाहों की गोलाई बड़ी मनमोहक है इसलिए मैं अक्सर स्लीवलेस कपड़े ही पहनती हूँ।
मेरे कूल्हे थोड़ा बड़े बड़े है जिससे मुझे ठुमके लगाने में बड़ी आसानी होती है।
मेरी जांघें केले के तने जैसी हैं और मेरे चूतड़ भी बड़े आकर्षक हैं।
साथ ही मेरी गांड़ भी ससुरी बड़ी मस्त है.
और फिर गरम चूत के तो कहने ही क्या!
उसके बारे में मैं आपको आगे बताऊंगी।
शादी के पहले कॉलेज के दिनों में मैं दो बातों के लिए बहुत मशहूर थी।
एक तो पढ़ाई के लिए और दूसरे चुदाई के लिए!
मतलब यह कि मैं जितनी बातें पढ़ाई के बारे में करती थी उतनी ही बातें चुदाई के बारे में भी करती थी।
चुदाई में सबसे ज्यादा लण्ड की बातें होतीं थीं।
मैं ही नहीं, सभी लड़कियां खुल कर लण्ड की बातें करती थीं।
‘लण्ड का साइज और लण्ड की बनावट’ कभी ख़त्म न होने वाला टॉपिक था।
कोई ऐसा दिन न था जब लण्ड पर कोई बात न होती हो.
लड़कियां वैसे भी लड़कों से ज्यादा गन्दी गन्दी बातें करतीं हैं।
वैसे भी हर लड़की के मुंह से लण्ड, बुर, चूत, भोसड़ा जैसे शब्द निकलते ही रहते थे।
उसके साथ साथ गालियां भी जैसे बहन चोद, मादर चोद, माँ का लौड़ा, बहन का लौड़ा, भोसड़ी वाली, बुर चोदी, गांडू और भी बहुत कुछ सबके मुंह से सुनाई पड़ता था।
वो सच में बड़े अच्छे दिन थे यार!
मैं याद करती हूँ तो सिहर जाती हूँ।
बस कॉलेज के दिनों में ही मैंने लण्ड पकड़ना शुरू किया, लण्ड मुंह में लेना शुरू किया और फिर लण्ड का सड़का मारना भी शुरू किया।
तभी मुझे एक सहेली ने लण्ड का वीर्य पीने की सलाह दी और उसके फायदे बताये।
उसने मुझे लण्ड का वीर्य पीते हुए दिखाया।
बस मैं भी वही करने लगी.
तो एक साल में ही मेरी चूचियाँ दूनी हो गईं।
मुझे लण्ड पीने में मज़ा आने लगा.
फिर एक दिन लण्ड चूत में पेलवाना भी शुरू कर दिया।
जी हां दोस्तो, मैं शादी के पहले खूब चुदी हुई थी।
यह बात किसी को नहीं मालूम सिर्फ आपको बता रही हूँ।
किसी से मत कहना प्लीज!
मैं कॉलेज में पढ़ती थी तो हमारे पड़ोस में एक प्रशांत नाम के अंकल रहते थे।
वे बड़े मस्त, गोरे चिट्टे, स्मार्ट और हैंडसम थे।
हमारे घर आते जाते थे।
मैं कभी कभी उनके घर जाकर इंग्लिश पढ़ती थी।
अंकल बड़े प्यार से पढ़ाते भी थे।
मैं मन ही मन अंकल का बड़ा आदर और सम्मान करती थी।
मेरी जब शादी हो गयी तो हमारा संपर्क टूट गया।
वे कानपुर में ही थे और मैं यहाँ मुंबई आ गई।
मेरी शादी को दो साल हो गये हैं. इन दो सालों में मुझे अपने पति के लण्ड के अलावा कोई और लण्ड नहीं मिला।
मैं धीरे धीरे किसी पराये मरद के लण्ड के लिए तरसने लगी।
मेरी चूत मुझे बहुत परेशान करने लगी।
मेरा मन किसी काम में नहीं लग रहा था।
मुझे कॉलेज के लण्ड बहुत याद आ रहे थे।
एक दिन शाम को मैं अपनी दोस्त अंजलि के साथ चौपाटी पर घूम रही थी।
अचानक किसी के मुंह से निकला- अरे रागिनी तुम यहाँ?
मैंने पीछे मुड़ कर देखा तो बोली- आप प्रशांत अंकल है न?
वे बोले – हां रागिनी, मैं प्रशांत ही हूँ।
मैंने कहा- अरे अंकल, कहाँ खो गए थे आप? मैं आपको बहुत याद करती हूँ … आपसे मिलना चाहती थी। आपसे बातें करना चाहती थी। पर यह बताओ यहाँ मुंबई में कैसे?
वे बोले- यहाँ कोलाबा में मेरी बेटी है। मैं उसी के यहाँ ठहरा हुआ हूँ।
मैंने कहा- अरे वाह, मैं तो कोलाबा में ही रहती हूँ।
वे बोले- फिर तो हमारा मिलना होता रहेगा।
मैंने कहा- होता रहेगा ये तो आगे की बात है, मेरे साथ अभी चलो मेरे घर!
फिर मैंने उन्हें अंजलि से मिलवाया और कहा- यह मेरी दोस्त अंजलि है। यह भी साथ चलेगी।
फिर हम तीनों लोग गाड़ी में बैठ कर घर आ गए।
मेरा पति एक हफ्ते के लिए विदेश गया था।
मैंने दोनों को बड़े प्यार से बैठाया और झुक कर पानी दिया।
झुकने से मेरी साड़ी का पल्लू गिर पड़ा।
मेरी छोटी सी ब्रा के अंदर से मेरी बड़ी बड़ी चूचियाँ अंकल को दिख गईं।
वे अपने होंठ चाटने लगे।
मुझे बहुत अच्छा लगा, मैंने राहत की सांस ली। मुझे पराये मरद के लण्ड का रास्ता दिख गया।
मैंने ठान लिया कि आज नहीं तो कल मैं अंकल का ओल्ड लंड अपनी गरम चूत में ले ही लूंगी।
सुना है कि बड़े बड़े लोगों के लण्ड भी बड़े बड़े होते हैं।
इतने में नकल बोले- रागिनी, तुम पहले से ज्यादा खूबसूरत हो गई हो। ज्यादा सेक्सी दिखने लगी हो. शादी के बाद तुम्हारा चेहरा ज्यादा खिल गया है।
मैंने कहा- वो तो मैं नहीं जानती अंकल … लेकिन शादी के बाद मैं बहनचोद ज्यादा बोल्ड हो गई हूँ। अब मैं किसी भोसड़ी वाले से शर्माती नहीं हूँ और डरती भी नहीं हूँ। बेशरम हो गई हूँ मैं! मेरे पति के न रहने पर मुझे कोई भी मादरचोद हाथ नहीं लगा सकता!
वे बोले- क्या मैं भी नहीं लगा सकता रागिनी?
मैंने हंस कर कहा- तुम्हारी बात और है अंकल! तुम तो मेरे साथ जबरदस्ती भी कर सकते हो.
वे हंसने लगे।
इतने में अंकल का अचानक फोन आ गया तो वे चाय पीकर चले गये।
उनके जाने के बाद अंजलि बोली- यार रागिनी, मुझे लगता है कि तेरे अंकल लण्ड बड़ा सॉलिड होगा। उनकी नज़रें बता रहीं थीं कि वे तुम्हें अपना लण्ड पकड़ाना चाहते हैं. उन्हें तुमसे प्यार हो गया है।
मैंने कहा- अरे यार अंजलि, मैं खुद उनका लण्ड पकड़ना चाहती हूँ। मैं तो आज ही पकड़ लेती उनका लण्ड … लेकिन एक फोन ने सब काम बिगाड़ दिया बहनचोद!
अंजलि बोली- अच्छा पकड़ना तो फिर मुझे भी दिलवा देना उनका लण्ड! मैं भी लण्ड की प्यासी हूँ।
दूसरे दिन शाम को फिर घंटी बज उठी।
मैंने दरवाजा खोला तो बोली- अरे आप अंकल … अंदर आओ न प्लीज!
मैंने उन्हें बैठाया और फिर एक गिलास पानी का रखा।
आज मेरी चूचियाँ कुछ ज्यादा ही खुली हुईं थीं।
अंकल ने पानी पिया और बोले- थैंक यू रागिनी!
मैं उसके सामने बैठ गई।
इस समय मैं केवल ब्रालेट पहने थी नीचे एक छोटी सी टाइट नेकर।
मैं एकदम एक मॉडर्न गर्ल बनी हुई थी।
फिर मैंने पूछा- अंकल बोलो क्या पियोगे, ठण्डा या गर्म?
वे बोले- आज तो मैं व्हिस्की पियूँगा। तुम मेरा साथ दोगी तो!
मैंने कहा- हां जरूर दूँगी।
उन्होंने अपनी जेब से हाफ निकाला और मुझे दिया.
फिर क्या … हम दोनों व्हिस्की पीने लगे, सिगरेट भी पीने लगे.
हमारा मूड बन गया।
मैंने कहा- आज मुझे अपने कॉलेज के दिन याद आ रहें हैं अंकल!
फिर क्या … थोड़ा नशा हुआ तो दिल की बातें बाहर निकलने लगीं।
मैंने कहा- अंकल कल आपका फोन आया था. कोई खास बात थी क्या?
उन्होंने कहा- नहीं, कोई खास बात नहीं थी। पर हां, कल मुझे तुम्हारी गालियां बड़ी अच्छी लग रहीं थी रागिनी। मन करता था कि बस सुनता जाऊं? तेरी दोस्त न होती तो मैं तुमसे खुल कर बातें करता.
मैंने कहा- तो फिर आज कर लो न खुल कर बातें बहनचोद? आज तो वह बुरचोदी अंजलि नहीं है।
उन्होंने सिगरेट का एक कश लिया और मेरे मम्मों पर धुंआ छोड़ दिया।
मैं कहाँ चूकने वाली थी, मैंने भी कश लिया और उनके लण्ड पर धुआं छोड़ दिया।
वे बोले- तुम बहुत समझदार लड़की हो रागिनी!
मैंने कहा- हां, तभी तो मैंने तुम्हारे सवाल का जबाब देकर अपनी इच्छा ज़ाहिर कर दी।
वे बोले- रागिनी, एक बात है कि हमारे तुम्हारे बीच में उम्र का बड़ा अंतर है।
मैंने कहा- उम्र की माँ का भोसड़ा अंकल! औरत उम्र नहीं देखती, औरत मर्द का हथियार देखती है अंकल। हथियार टना टन हो तो उम्र की माँ चूत!
वे बोले- रागिनी, तुम इतनी हॉट हो कि मैं कल रात भर सो नहीं पाया।
मैंने कहा- अरे यार, मुझे भी तुम्हारी बड़ी याद आती रही रात भर!
उन्होंने मेरे कंधे पर हाथ रख दिया तो मैं भी उसकी जांघ पर हाथ रगड़ने लगी।
तब उन्होंने मेरी चुम्मी ले ली और मेरी नंगी टांगों पर अपना हाथ फिराने लगे।
फिर मेरा भी हाथ अपने आप उसके लण्ड तक पहुँच गया।
मैं उनकी पैंट के ऊपर से ही लण्ड टटोलने लगी।
मेरे मुंह से निकला- तेरा हथियार तो मादर चोद बड़ा जबरदस्त लग रहा है अंकल?
मैं मन ही मन अंकल से पूरी तरह फंस चुकी थी।
मुझे बिना उनका लण्ड देखे एक मिनट का भी चैन न था।
मैं जल्दी से जल्दी उन्हें नंगा करना चाहती थी और इसी आवेश में मैंने उनकी शर्ट उतार दी।
उनके चौड़े कंधे बलिष्ठ भुजाएं, चौड़ी छाती और पूरा कसरती बदन देख कर मैं उन पर मोहित हो गयी।
तब तक उन्होंने मेरी ब्रा का हुक खोल डाला तो मेरी दोनों मम्मे उसके सामने छलक पड़े।
वे मम्मे देख कर मस्त हो गये, उन्हें पकड़ कर सहलाने लगे, मसलने और चूमने लगे।
अंकल मेरे निप्पल मुंह में भर कर चूसने लगे।
मैं भी उत्तेजित होने लगी, मज़ा लेने लगी।
फिर बड़ी बेशर्मी से मैंने उनकी पैंट उतार दी उनकी नेकर भी खोल डाला।
नेकर खुलते ही लौड़े मियां ताल ठोकते हुए बाहर आ गए।
मैंने उसे देखा तो सन्न रह गयी।
सांप की तरह फनफनाकर खड़ा हो गया था उनका मोटा तगड़ा लण्ड।
लण्ड का अंडाकार 3″ का चिकना टोपा एकदम झकास लग रहा था।
मैंने उसे पकड़ा चूमा और बोली- वाह क्या मरदाना लण्ड है अंकल? ऐसा लौड़ा बहुत कम लोगों का होता है। तुम बड़े लकी हो. तुम्हारा लण्ड लाखों में एक है. मैं तो तुम्हारे लण्ड पर मर मिटी। मेरा तो दिल आ गया इस मादरचोद लण्ड पर! क्या मस्ताना लण्ड है भोसड़ी का! मज़ा आ गया यार ऐसा लौड़ा देख कर!
तब तक उन्होंने मेरी छोटी सी नेकर उतार कर फेंक दी।
मैं माँ की लौड़ी उसके आगे एकदम नंगी हो गयी।
मेरा यह पहला मौका था जब मैं शादी के बाद किसी पराये मर्द के आगे नंगी खड़ी थी वह भी उसका नंगा लण्ड पकड़े हुए!
मैं किसी पराये मर्द को पहली बार नंगा देख भी रही थी।
मुझे किंचित मात्र भी न शर्म थी और न झिझक … मैं बिंदास अपनी जवानी का मज़ा लूटने लगी.
मैंने मन में कहा कि मैं झांट किसी की परवाह नहीं करूंगी। अब तो मैं एक नहीं, कई लण्ड का मज़ा लूंगी।
बस मैं अंकल का लण्ड बड़े प्यार से चाटने लगी और अंकल भी उसी प्यार से मेरी फुद्दी चाटने लगे।
मेरी चूत बहुत गर्मा चुकी थी।
अंकल उसमें बार बार अपनी उं गली घुसेड़ रहे थे।
मैंने धीरे से अपनी टाँगें फैलाई तो मेरी चूत पूरी तरह खुल गयी.
अंकल को यही चाहिए था।
उन्होंने फ़ौरन लण्ड पेल दिया अंदर और बिना रुके चोदने लगे मुझे!
मैं भी अपने कॉलेज के दिनों को याद कर कर के चुदवाने लगी … मैं एन्जॉय करने लगी।
मुझे लगा कि आज मैं सच में अपनी सुहागरात मना रही हूँ।
अपनी सुहागरात में भी मुझे इतना मज़ा नहीं आया था।
मैं बोली- अंकल, मुझे अपनी बीवी समझ कर चोदो। मैं ही तुम्हारी असली बीवी हूँ, मुझे चोदो। मेरी बुर चोदो, मेरी चूत चोदो, मेरी गांड चोदो। मैं तुम्हारी ही हूँ, जैसे चाहो वैसे चोदो। तुम्हारा लण्ड बड़ा मज़ा दे रहा है यार!
वे बोले- ले भोसड़ी की रागिनी, आज मैं फाड़ डालूँगा तेरी चूत … भोसड़ा बना दूंगा मैं तेरी चूत का! मैंने जब मुंबई में तुझे पहली बार देखा था तो मेरा लण्ड खड़ा हो गया था. और आज देख वही लण्ड तेरी चूत में घुसा है। तेरी माँ की चूत … तू भोसड़ी वाली एकदम रंडी है और मैं रंडियां खूब चोदता हूँ। मैं मुंबई में रंडियां चोदने ही आता हूँ। मैं हर रोज़ 2/3 लड़कियों की चूत में लण्ड पेलता हूँ।
अंकल को जोश आ गया था, वे बोलते रहे- मैं खुद बहुत बड़ा हरामजादा हूँ। मैं रंडीबाज हूँ, लौडियाबाज़ हूँ। मैं अपने दोस्तों की बीवियां फंसा फंसा कर चोदता हूँ। बीवियां भी बुरचोदी मेरे लण्ड की दीवानी है और बार बार मुझसे चुदवाने आतीं हैं।
सच में अंकल बड़े मूड में थे और मस्ती से अपनी ही पोल खोल रहे थे।
चुदाई का नशा शराब के नशे से ज्यादा ताकतवर होता है।
दूसरे की बीवी चोदने के नशे में वह सब सच उगल देता है।
मुझे अंकल की बातें, उनका जोश, उनकी गालियां सब कुछ बड़ा अच्छा लग रहा था।
मैं अपनी गरम चूत में ओल्ड लंड एन्जॉय कर रही थी।
मेरा मन सातवें आसमान पर था।
इस तरह उन्होंने मुझे हर तरफ से चोदा और मैं भी खूब मन से चुदी।
मैंने उसे रात में रोक लिया और तब उन्होंने मुझे रात में 3 बार चोदा।
सुबह उठ कर वे चले गये।
उस दिन मुझे अहसास हुआ कि बड़े लोगों से चुदवाने में ज्यादा मज़ा आता है।
मेरे पतिदेव का एक Hindi Sex Stories तथाकथित भाई जो उन दिनों मेरे परिवार का हिस्सा बना हुआ था… मेरा भी दोस्त बन गया था, बल्कि काफ़ी अन्तरंग हो गया था। उसने मुझसे एक बार सेक्स करने का वादा ले लिया था, मैंने शर्त रखी थी कि अपने शहर से बाहर ही उसके साथ सेक्स करूँगी। मैं करूँ या न करूँ का फ़ैसला नहीं कर पा रही थी। वह हमेशा मौके की तलाश में रहता, एक बार दूसरे शहर में मौका मिला भी तो मैंने खुद को बचा लिया था।
अब वह जब भी अकेले मिलता या फ़ोन पर बातें करता तो शिकायत जरूर करता कि आपने वादा करके उसे निभाया नहीं !
मैं उसे यह कह कर टालती कि मैं कोई मरी या भागी जा रही हूँ आगे और भी मौके आयेंगे। यूँ वह घर में मुझे अकेले पाकर भी कभी छेड़ता नहीं था बस मीठी-2 बातें करके मुझे पटाने की कोशिश करता और इस तरह वह मेरा विश्वास ही जीत रहा था।
उस घटना के करीब दो माह बाद मेरे पति 3-4 दिनों के लिये बाहर गये हुए थे, उस दौरान वह रोज ही मुझे अपना वादा पूरा करने की याद दिलाता। मेरे यह कहने पर कि शहर से बाहर का वादा है मेरा, तो वह कहता कि तब तो मिल चुका मुझे आपका संसर्ग……… जब भैया शहर से बाहर हैं यानि कि आपका पोल तो खुलने से रहा, और कोई समस्या तो है नहीं। चूँकि वह तकरीबन रोज ही आता था अतः पड़ोसियों को भी कोइ शक नहीं होता। अन्ततः उनके लौटने से एक दिन पहले उसके लगातार मनुहार करने पर मैं पिघल गई, और रात में देने का वादा इस शर्त पर किया कि आज के बाद वह फ़िर कभी मुझसे सम्बन्ध बनाने की कोशिश नहीं करेगा अन्यथा मैं पति को सब कुछ बता दूँगी।
उसने मुझसे वादा किया कि ऐसा ही होगा। उस शाम वह सात बजे ही आ गया और बच्चों के साथ टी वी देखता और बातें करता रहा। डिनर के बाद तीनों बच्चे मेरे बेडरूम में सो गये क्योंकि उसी में ए सी था, पति के बाहर जाने पर हम चारों उसी में सोते थे। दस बजे तक नौकर भी बालकनी में चला गया, हम दोनों बैठक में टी वी देखते बैठे रहे, मेरा तो घबराहट के कारण दिल धक-धक कर रहा था, जब नौकर भी सो गया तो उसने धीरे से दरवाजा बन्द कर दिया और बैठक के कमरे की लाइट बुझा कर मुझे पकड़ कर दीवान पर ले गया।
मैं उस दिन एक टू-पीस-नाइटी पहने थी। अंधेरे में वह मुझे बेतहाशा चूमने लगा और अपनी बाहों में लेकर दीवान पर लोट-पोट होने लगा……… वह अत्यन्त ही उत्तेजित था और मेरी भी हालत बुरी थी……… डर, घबराहट और शायद कुछ हद तक उत्तेजित भी हो चुकी थी मैं !……… शायद मानसिक रूप से मैं उसके साथ सम्भोग के लिये तैयार हो चुकी थी………
उसने ज्यादा देर न करके मेरी नाइटी और साया ऊपर करके अपने पैण्ट की जिप खोल कर अपना लिंग निकाल कर मेरी योनि में डाल ही दिया ………
मुझे तो कुछ होश ही नहीं रहा कि आगे क्या-क्या हुआ और कैसे-कैसे उसने किया………
बस इतना याद था कि उसका लिंग मेरे पति की तुलना में बहुत बड़ा और मोटा था। शायद पूरा गया भी नहीं था और मैं चिल्लाई भी थी आहिस्ता से ……… शायद मैं भी सहयोग करने लगी थी, उसका जल्दी ही पतन हो गया जिसका मुझे अन्दाज नहीं हुआ ……… फ़िर पता नहीं मैं या वह मुझे खींचकर बच्चों के खाली बेडरूम में ले गया और दरवाजा अन्दर से बन्द करके हम दोनों फ़िर गुत्थम-गुत्था हो गये………
शायद उसने अपनी पैण्ट उतार दी थी पर मैं नाइटी में ही थी, चूँकि मासिक के दिनो के अलावा मैं पैण्टी नहीं पहनती इसलिये मेरी योनि तक पहुँचने में उसे कोई रुकावट नहीं हुई। मुझे इतना ही याद है कि वह बहुत ही जोर-जोर से मुझे मुझे चोद रहा था और मस्ती में मैं उसके ऊपर चढ़ कर अपनी बुर उसके पोल जैसे लण्ड पर ऊपर नीचे करने लगी थी। सचमुच मुझे भी काफ़ी अनन्द आ रहा था और उस समय कोई अपराध-बोध नहीं हो रहा था, बस एक आदिम-तृप्ति की चाह बच रही थी ………… मुझे और कुछ याद नहीं कितनी देर तक उसने मुझे किया ……… मैं स्खलित हुई या नहीं ……… वह कब स्खलित हुआ !
उसने बाद में बताया कि मेरा अत्यन्त उत्तेजित और रौद्र रूप देखकर (महसूस कर क्योंकि अंधेरा था न) वह अन्दर ही अन्दर डर गया कि मुझे कुछ हो न जाये।
अच्छा, एक बात और …… हमेशा चटर-पटर करने वाली उसकी जुबान उस सारे क्रिया-कलाप के दौरान एक बार भी नहीं खुली। बस चुपचाप वह मुझे लिये जा रहा था …… और ज्वार शान्त होने पर रात ही में बारह-एक बजे के बीच चला गया। हमारे काम्प्लेक्स में उस वक्त तक लोगों का आना जाना लगा रहता था अतः कोई बदनामी का डर नहीं था। मैं उसी कमरे में सो गई।
सुबह मेरा तेरह वर्षीय बड़ा बेटा पूछने लगा- मम्मी चाचा और आप रात में हम लोगों के कमरे में सोये थे क्या? मैं रात में पेशाब करने उठा तो आप दोनों के चप्पल दरवाजे के बाहर देखे थे?
मुझे काटो तो खून नहीं, पर मैं अपने धड़कते दिल को सामान्य रखने का यत्न करते हुए बोली- तुम्हें नींद में गलतफ़हमी हुई होगी क्योंकि चाचा तो साढ़े दस तक चले गये थे। मुझे तुम तीनों के साथ सोने में दिक्कत हो रही थी तो मैं उस कमरे में चली गई। खैर उस दिन के बाद मुझे कुछ अपराध-बोध भी हुआ और मन को तसल्ली भी देती कि अब ऐसा नहीं करूँगी, एक अनुभव ही काफ़ी है। वरना पाँव फ़िसला तो इज्जत जाते देर नहीं लगनी। Hindi Sex Stories
मैं रीना Sex stories, मैं ३९ साल की हूं। शादी शुदा हूं। किस्मत अच्छी है कि मैं आज भी बहुत सुन्दर, सेक्सी हूं, मुझे पता है कि कई लंड वाले मेरी स्टोरी पढ़कर मुझे चोदना चाहेंगे
लेकिन मैं लिस्बो हूं मुझे लड़कियों से सेक्स की बाते करना और फ़ोरप्ले करना अच्छा लगता है इसलिये लड़कों, मेरी कहानी पढ़कर अपना लंड हिलाकर शांत हो जाना लेकिन गर्ल्स मुझे रेप्लय करना। १० साल पुरानी घटना है मैं आपसे अपना एक एक्सपेरिएंस बताती हूँ बात ११ साल पहले की है मेरी ननद का लड़का (विज्जु) जिसकी उमर १७-१८ साल थी एक्साम देने के लिये हमारे घर आया मेरे पति न दिनो टूर पर ज्यादा रहते थे इसलिये मैं सेक्स के लिये परेशान रहती थी। घर में सिर्फ़ दो रूम थे जिस कारण विज्जु से मुझे चिड़ हो रही थी कि इसकी बजह से मेरे जीवन का आनंद जा रहा है, उस दिन पति रात की ट्रेन से ७ दिन के लिये बाहर जाने वाले थे पति ने बोला वह दोपहर को आ जायेंगे जब विज्जु कोलेज में रहेगा और बच्चों को सुला देंगे फिर प्यार से सेक्स करेंगे क्योंकि ७ दिन नहीं मिलेगा।
मैं बहुत खुश थी मैं ने नहाने से पहले शेव की बहुत सुन्दर सेक्सी अंडर गारमेंट्स और साड़ी पहनी लेकिन मेरी किस्मत खराब, पहले तो पति लेट हो गये और जैसे ही वह आये पीछे से विज्जु भी आ गया मेरा दिमाग खराब हो गया मैं फालतू में विज्जु को डाटने लगी, पति भी मुझ पर नाराज़ हो गये कहने लगे जीवन पड़ा है, क्यों परेशान हूं फिर मैं मन मार कर उनके जाने की तैयारी करने लगी बारिश के दिन थे पानी गिरने लगा पति की ट्रेन १० बजे रात की थी मैने जल्दी खाना सब को खिला दिया ९ बजे करीब पति अंदर किचन में आये मुझे पीछे से पकड़कर चूमा-चाटी करने लगे, उनका हथियार अपने नितम्बों पर महसूस करके बहुत उत्तेजित हो गयी मैं ने पति को बताया आज की तैयारी में मैं ने क्या-क्या किया पति ने साड़ी के अंदर मेरी पैंटी में हाथ डालकर मेरी चिकनी चूत सहलायी।
मैं ने उनके हथियार को हाथों से सहलाया मेरी चूत चुदाई के लिये तैयार हो गयी थी गीली होने लगी, इतने में विज्जु ने आवाज़ दी “मामा, ट्रेन का समय हो गया चलो” फिर विज्जु उन्हे स्कूटर से छोड़ने स्टेशन चला गया, मैं हाल में लेटकर टीवी देखने लगी मैं बहुत गरम महसूस कर रही थी और मुझे अपनी किस्मत पर भी रोना आ रहा था मे उत्तेजना से भरकर अपनी साड़ी में हाथ डालकर अपनी बुर को सहलाने लगी, इतने में स्कूटर की आवाज आयी मैं ने अपने कपड़े सही किये दरवाज़ा खोला विज्जु भीग कर आया था मैने उसे गुस्से से “बोला जल्दी पोंछ कर कपड़े बदल ले वरना तबियत खराब हो गयी तो हमारी ही मुसीबत होगी”
वो सहम गया मैं अंदर रूम में चली गयी रूम का दरवाज़ा बंद करने आयी तो देखा विज्जु अपनी गीली बनियान उतार रहा था उसकी नंगी पीठ देखकर मुझे कुछ अजीब सा महसूस हुआ और मैं हाल में आ गयी और कुछ ढूंढने का नाटक करते हुए तिरछी नज़र से उसे देखने लगी फिर उसने अपनी पैंट उतारी उसकी अंडरवेअर सफेद थी जो गीली होने से विज्जु के शरीर से चिपक गयी थी मैने देखा विज्जु का काला लंड मुड़ा हुआ साफ़ दिख रहा था वह भरपूर मोटा था जबकि खड़ा नहीं था, काले-काले बाल भी नज़र आ रहे थे और उसके लंड का गुलाबी सुपाड़ा तो एकदम चमक रहा था, वह मुझे भरपूर मर्द का जवान लंड दिख रहा था जिसे हर कोई औरत अपनी चूत में डलवाना चाहेगी चाहे वह सती सावित्री क्यो न हो, मेरी हालत जवान लड़के को अपने इतने करीब नंगा देखकर बहुत खराब हो गयी और मैं सपने में भी नहीं सोच सकी कि विज्जु इतना जवान है उसके शरीर को देखकर मैं रिश्ते को भूल गयी मैं ने सोचा रात को इसका मज़ा लेना है जो होगा देखा जायेगा फिर विज्जु ने कपड़े पहन लिये, फिर विज्जु बिस्तर पर लेट गया मैं अपने रूम में आ गयी और मैने अपनी साड़ी, ब्लाउज़ ब्रा और पेटीकोट उतार कर नाइटी पहन ली।
हमारा बाथरूम पीछे आंगन में था रात के करीब ११ बज रहे थे, मैने विज्जु को आवाज़ दी वह बोला जी मामी मैने कहा मुझे पीछे पेशाब जाना है डर लग रहा है, तू साथ चल मैने पीछे की लाइट जलायी और बाथरूम के बाहर नाली के पास जाकर अपनी नाइटी उठाई कमर के ऊपर और धीरे से अपनी पैंटी सरकाई ताकि विज्जु मेरी चिकनी टांग और गांड आराम से देख सके और बैठ गयी, विज्जु मेरे पीछे ही खड़ा था मैने पीछे देखते हुआ बोला जाना मत, वह बोला जी मामी फिर मैं विज्जु की मुंह की तरफ़ होकर खड़ी हुई फिर मैं ने अपनी नाइटी कमर से ऊपर उठा कर पैंटी पहनी ताकि विज्जु को मेरी साफ़ चूत दिख जाये और वह भी बहक जाये विज्जु की आंखों में शरम थी लेकिन वह मेरी चूत और नंगी जांघों को देख रहा था लेकिन वह वापस जाकर सो गया मैं अपने रूम में आयी और सोचा विज्जु को आवाज देकर अपने पास बुलाऊं लेकिन डर लग रहा था कही कुछ गलत तो नहीं हो रहा है लेकिन मेरी सांस तेज़-तेज़ चल रही थी और मेरी चूत चिल्ला कर कह रही थी कि उसे लंड चाहिये मेरी हालत पागलों जैसी हो गयी मैं उठ कर बैठ गयी, विज्जु के कमरे की लाइट जल रही थी मैने धीरे से उठ कर विज्जु के रूम में झांका वह उल्टा होकर सो रहा था फ़िर मेरा हाथ अपने आप अपनी चूत पर जा रहा था, समझ नहीं आ रहा था कि कैसे शुरुआत करूं।
तभी मैने महसूस किया कि विज्जु कुछ हिल रहा है (जैसे आदमी औरत के ऊपर होकर हिलता है वैसे) मुझे समझते देर नहीं लगी कि वह मेरी नंगी जांघों को और चिकनी चूत को देखकर उत्तेजित हो गया है और अपना पनी निकालने की तैयारी में है मैने समय गंवाये बिना विज्जु के रूम में चली गयी मैं ने देखा विज्जु ने धीरे से अपनी आंख खोल कर मुझे देखा और सोने का नाटक करने लगा मैं कुरसी पर बैठ गयी मैने सोचा देखूं अब विज्जु हिलता है या नहीं यदि हिलेगा तो उससे खुल कर चुदवाने का बोल दूंगी लेकिन १०-१२ मिनट में साला बिल्कुल नहीं हिला और मेरी हालत खराब हुये जा रही थी। मुझे समझ नहीं आ रहा था कि क्या करूं रात के करीब १ बज गये थे फ़िर मैं ने टीवी ओन कर दिया और देखने लगी तभी विज्जु आंख घिसते हुए उठ कर बैठ गया कहने लगा, क्या हुआ मामी, सो क्यों नहीं रही हो? मैने बोला नींद नहीं आ रही। दुख रहा है विज्जु ने कहा क्या सर दुख रहा है? मैने कहा नहीं पूरा शरीर दुख रहा है, विज्जु ने कहा तबियत तो ठीक है, मैने कहा हां विज्जु बोला मैं कुछ मदद करूं, मैं ने कहा, प्लीज मेरे पैर दबा दे, विज्जु ने कहा ठीक है, फ़िर विज्जु के बिस्तर पर मैं लेट गयी विज्जु मेरे पैर दबाने लगा मैने कहा प्लीज थोड़ा ऊपर और ऊपर विज्जु बिस्तर पर बैठकर मेरी जांघें दबा रहा था मेरी चूत से रस निकल रहा था मुझे अपनी पैंटी गीली-गीली महसूस हो रही थी।
तभी मुझे महसूस हुआ विज्जु मेरी चूत को नाइटी के ऊपर से विज्जु टच कर रहा था और चूत के ऊपर अपनी उंगलियां चला रहा था मेरी सांस बहुत तेज़-तेज़ चलने लगी। मैने अपना एक हाथ विज्जु के लंड पर रख दिया उसका लंड ८” का पूरी तरह खड़ा था बहुत मोटा महसूस हो रहा था। तभी विज्जु बोला “मेरा लंड कैसा लगा” फ़िर मैं ने कहा मुझे आज यह चाहिये है तभी विज्जु मेरे बाजु में आ गया और मेरे सीने को सहला रहा था। मुझे बहुत मज़ा आ रहा था, मेने अपने एक हाथ से उसका लंड सहलाना चलू रखा और उसकी गांड भी सहला रही थी। उसकी हिम्मत और बढ़हई और वो मेरे ब्रेअस्ट को जोर-जोर से दबाने लगा। मुझे सिंहरन होने लगी और मैं ने करवट बदल कर सीधी सो गई तो उसने हाथ हटा लिया और थोड़ी देर बाद वो फ़िर से मेरा बूब्स सहलाने लगा। फ़िर वो मेरी नाइटी उतारने लगा और वो मेरे नेकेड बूब्स को चूसने लगा। मैं बहुत ही गरम हो रही थी मैं उठ गयी और मैने उसे कपड़े निकालने को कहा, उसने तुरंत अपने सारे कपड़े निकाल दिये और पूरा नंगा हो गया। मैने उसके लंड को देखा वो बहुत ही बड़ा था।
फ़िर उसने मेरी पैंटी को निकाल दी। फ़िर वो मुझे किस करने लगा और मैं भी उसे बहुत किस करने लगी फ़िर उसने मुझे बेली पर किस किया। आआआअह्ह ह्हह्ह ऊओह्हह् मुझे बहुत मज़ा आ रहा था और मैं बहुत ही गरम हो चुकी थी। फ़िर वो मेरे चूत को चाटने लगा। और मैं अंगड़ाई लेने लगी ऊफ़्फ़फ़ मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि मैं क्या करूं। फ़िर मैने उसे कहा प्लीज और मत तड़पाओ प्लीज मुझे चोदो। फ़िर वो मेरे ऊपर आ गया और उसने उसके लंड को मेरे चूत पे रखा और फ़िर धक्का मरा तो उसका पुरा लंड एक ही झटके में अंदर चला गया। और मैं जोर से चीख उठी आआआअह्ह आआआह फ़िर वो जोर जोर से मुझे चोदते गया और मैं भी अपने हिप्स उठा उठा के उसे साथ देने लगी। और आआआअह आआआह्ह् ह्ह उह्हह्हू ऊऊउह्हह्ह वो जोर जोर से चोदने लगा।
फ़िर थोड़ि देर बाद उसने मेरी चूत में गरमा गरम लावा छोड़ दिया फ़िर सारी रात हम दोनो एक दूसरे साथ नंगे चिपके सो गये
इसके बाद उसका जब भी मन होता तो वो मेरे ब्लाउज़ को हटा के मेरे निप्पल चूसता रहता लेकिन मुझे पूछे बिना मेरी चूत को नहीं छूता था। एक दिन मैं नहा रही थी तो वो भी बाथरूम में आ गया और मुझसे बाथरूम में ही प्यार की भीख मांगने लगा तो मैं उसे मना नहीं कर पायी। फ़िर उसने सारे कपड़े निकाल दिये और हम शोवर साथ लेने लगे। फ़िर मैं दीवर का सहारा लेके खड़ी रही और उसने मुझे बहुत टाइट पकड़ा और मेरे होंठों का जूस पीने लगा और उसने मेरी एक टांग को उठा के फ़िर मुझे चोदने लगा। उसने मुझे एक नये अनुभव का सुख दिया। मे बहुत भी खुश हो गयी, मैं विज्जु को बहुत चाहती हूं। और वो भी मुझे बहुत चाहता है। फ़िर हमने कई बार सेक्स किया। मैं मेरे पति को भी चाहती हू. Sex stories
दोस्तों आज जो किस्सा Antarvasna आपको सुनाने जा रहा हूँ वो उस रात का है जब मैं समझ नहीं पाया कि वो सब हो कैसे गया। आज जब मैं उस रात के बारे में सोचता हूँ तो उलझन में पड़ जाता हूँ। दरअसल बात तब की है जब मैंने कॉलेज में दाखिला लिया था। तभी मेरी ममेरी बहन की शादी पड़ गई।
हम सब शादी में गए हुए थे और सगाई वाले दिन जब हम लड़के वालों के आने का इंतज़ार कर रहे थे। तभी उनकी गाड़ियाँ दरवाज़े पर आ कर रुकी और हम जीजाजी के साथ अन्दर जाने लगे। तभी पीछे मेरी मामी ने आवाज़ लगाई- राजन, पूजा अकेले सामान ला रही है, उसके साथ सामान उठा लाओ !
मैं गया और उसको देखा। शकल से एक औसत लड़की जिसकी फिगर कमाल की, साथ ही मम्मे भी इतने बड़े और उसके ब्लाऊज़ से झांकती वो जवानी, उसके वो गुलाबी होंठ ! मैं तो बस उसे देखता ही रह गया। वो मेरे जीजाजी की बहन थी।
खैर मैं उसके साथ अन्दर तक गया और मैंने देखा कि वो भी मुझे नोटिस कर रही थी। हमारी कई बार आखें मिली और एक खिंचाव सा पैदा हो गया हम दोनों के बीच में। हमने साथ में खूब खुशियाँ मनाई और खूब नाचे गाये।
जाते वक़्त मैंने हिम्मत करके पूजा का नंबर मांग लिया और उससे बातें करने लगा। शादी एक महीने बाद थी। तब तक मैंने पूजा को सेट कर लिया था। अब वो शायद मुझे पसंद करने लगी थी।
फिर शादी के दिन वो उस गुलाबी साड़ी में क्या लग रही थी, शादी में शायद ही कोई ऐसा मर्द हो जिसने उसे मुड़-2 कर न देखा हो।
फिर जब डांस करने की बारी आई तो मैंने पूजा के साथ बहुत देर तक डांस किया। डांस करते वक़्त कई बार मेरे हाथ उसके मम्मों पर छुए और वो सब समझ कर मुस्कुराने लगी लेकिन उस वक़्त तक मेरे मन में कोई खास पाप नहीं जागा था अगर वो खाना खाते वक़्त मुझे आँख मार के अलग आने के लिए नहीं कहती। उसने मुझे अलग बुलाया और बोली- मेरा यहाँ मन नहीं लग रहा है, कुछ देर बाहर घूम कर आएँ?
मैंने कहा- चलो !
मगर मैं एकदम से नहीं निकल सकता था इसलिए मौका पाकर मैंने अपनी गाड़ी में पहुँच कर उसे फ़ोन मिला दिया।
वो आ गई और हम गाड़ी में बैठ कर निकल लिए। सर्दी की रात थी और बर्फीली ठण्ड पड़ रही थी और उस बंदी(लड़की) को घूमना था। मेरी समझ में उसके सारे सिग्नल आ तो रहे थे मगर मन में यह डर था कि हम लड़की वाले थे, कोई ऊँच-नीच हो गई तो बदनामी हो जाएगी।
फिर हम मुख्य सड़क पर निकल आये और पूजा मेरे से बोली- इतनी देर तुम अन्दर बोर नहीं हो रहे थे क्या?
मैंने कहा- हाँ, हो तो रहा था मगर क्या कर सकते हैं, लड़की वाले हैं, लड़के वाले होते तो भाई की सालियों को ही छेड़ लेते !
वो बोली- तो मेरे साथ अन्दर इतनी देर से क्या कर रहे थे? कभी यहाँ हाथ, कभी वहाँ ?
मैं झेंप गया और वो बोली- मैं सब समझती हूँ !
मैंने गाड़ी अँधेरे एक साइड में लगा कर उससे कहा- समझती हो तो क्या ख्याल है?
वो बोली- मैं इतनी रात को तुम्हारे साथ सिर्फ घूमने थोड़े ही आई हूँ !
मैंने उसकी तरफ ध्यान से देखा और अचानक ही हम एक दूसरे की तरफ खिंचते चले गए और हमारे होंठ एक दूसरे से मिल गए। मैं उसके होंठों का रस पीने को बेताब था जैसे कि मेरी तमन्ना पूरी होने को थी।
बहुत देर तक उसके होंठ चूसने के बाद मैंने उसके ब्लाऊज़ के ऊपर से उसके मम्मों को सहलाना चालू किया। वो भी थोड़ी ना नुकुर के बाद मेरा साथ देने लगी। फिर मैंने अपने मुँह को उसकी छाती से लगाया और उसके जिस्म की प्यारी सी खुशबू लेने लगा। साथ ही उसकी भी सिसकियाँ चालू हो गई। मैं इस बात का पूरा ख्याल भी रख रहा था कि किसी पल पूजा को ऐसा न लगे कि मैं उसके साथ ज़बरदस्ती कर रहा हूँ।
फिर मैंने उसके ब्लाऊज़ के अन्दर हाथ डाला और ऐसा लगा जैसे किसी भट्टी के अन्दर हाथ दे दिया हो। उसका पूरा जिस्म जल रहा था। मैंने बिना मौका गंवाए बिना उसका ब्लाऊज़ ऊपर कर दिया और उसके मम्मो को सहला के उसके चुम्बन लेने लगा। कुछ देर बाद जब वो पूरी तरह मदहोश हो गई तब मैंने उसकी साड़ी ऊपर करनी चालू की। गाडी में जगह कम होने के कारण हमें थोड़ी परेशानी हो रही थी।
फिर मैंने उसकी चूत में हाथ डाला और पाया कि उसकी चूत बहुत पानी छोड़ चुकी थी और एकदम मुलायम और गरम थी। फिर उसने अपने हाथों से मेरी पेंट की जिप खोली और मेरा लंड को सहलाने लगी जोकि अब तक मूसल बन गया था। उसने मेरे लिंग की चुसाई करनी चालू की और मैं उसके बाकी कपड़े उतारने लगा। साथ ही मैंने उसके उन नरम चूचों का भी भरपूर आनंद लिया। हर तरह से मरोड़ के, चूस के दांतों से चबा के मैंने उन पर अपनी छाप छोड़ दी।
अब मैं जानता था कि देर करना सही नहीं है। पहले एक बार अपनी छाप लड़की के अन्दर छोड़ दो, फिर बाकी काम तो बाद में होते रहेंगे।
मैंने उसकी सीट पीछे को लिटा दी और उसकी पैंटी को साइड कर के अपने लंड से उसका छेद सहलाने लगा।
और वो आहें भरते हुए बोली- फक्क मी नाओ !
और मैंने आहिस्ता से उसकी चूत में अपना लंड घुसा दिया। और वो एक प्यारी सी चीख के साथ पीछे हो गई।
मैंने अपना लंड बाहर निकल कर पूरी जान के साथ अन्दर तक डाल दिया मगर इस बार मुझे भी दर्द हुआ क्योंकि शायद उसकी झिल्ली फट गई थी इस बार और वो दर्द से छटपटा उठी।
मैंने फ़ौरन उसके होठों पर अपने होंठ रख दिए और उसे अपने से लिपटा लिया और उसके तुरंत बाद मैंने कुछ कागज़ सीट के ऊपर रख दिए ताकि अगर खून गिरे भी तो सीट गन्दी न हो।
फिर मैंने उससे पूछा- आगे बढ़ें?
उसने प्यार से मेरी तरफ देखा और बोली- थोड़ी देर और, बहुत मज़ा आ रहा है।
मेरे लिए तो अच्छी बात थी और मैंने उसकी चूत में दुबारा अपना लंड दिया और 5-6 धक्कों के बाद बोली- अब बस !
मेरा मन तो नहीं था, मुझे मानना पड़ा, रिश्तेदारी का सवाल था। और उसकी चूत में से अपना लंड निकाल कर साफ़ करने लगा।
वो बोली- अब मेरी चूत को थोड़ी देर चूसो !
मैंने उसकी चूत फिर एक कागज़ से साफ़ की और उसे चूसना चालू किया। फिर थोड़ी देर बाद मेरा ध्यान टाइम पर गया और मैंने उससे कहा- अब वापस चलना चाहिए !
वो बोली- ठीक है !
मैंने उसे गाड़ी से बाहर एक चक्कर मारने की सलाह दी ताकि उसकी चाल में कुछ सुधार आ जाये जोकि पहली बार चुदने के बाद बिगड़ जाती है।
वापस आकर हम दोनों चुपचाप जश्न में शामिल हो गए।
उसके बाद पूजा से मेरी लगभग रोज़ बातें होती थी और मेरे साथ फ़ोन पर सब तरह की बातें करती थी। वो हंस-2 कर बताती थी कि मैंने कल रात तुम्हारे नाम से मुठ्ठी मारी और बोलती कि उस दिन का काम पूरा करने कब आओगे।
फिर कुछ दिन बाद मैं अपने जीजाजी के घर किसी काम से गया और मुझे रात को वहीं रुकना था। घर पर सिर्फ जीजाजी, दीदी, पूजा और उसकी मम्मी थी।
अचानक ही रात को जीजाजी को फ़ोन आया कि उनके दोस्त की मम्मी गुज़र गई है तो उन्हें जाना पड़ा। मेरी दीदी भी साथ चली गई। दीदी की सास तो नौ बजते ही सो जाती थी। मुझे मौका मिल गया। हमने कंप्यूटर में फिल्म चलाई और देखने लगे। सर्दी थी और वो एक बड़ा सा कम्बल लाकर मेरे बगल में ही बैठ गई। पिक्चर का नाम “जूली” था, जिसमें नेहा धूपिया ने क्या दृश्य दिए थे। पूजा मेरी बगल में बैठी थी और जब पहला चुम्बन दृश्य आया तो मुझे शादी की वो रात ध्यान आ गई।
फिर अचानक मेरे घर से फ़ोन और मैं बाहर गया और वापस आकर कम्बल में घुस गया तो मैंने पाया कि पूजा ने अपनी जींस उतार रखी थी और वो सिर्फ पेंटी में रजाई के अन्दर थी। मैं अपना आपा खो रहा था और पूजा मुझे उकसाए जा रही थी। थोड़ी देर बाद एक दृश्य में डर लगने के बहाने पूजा मेरे से एकदम सट गई और मैं अपने आपको रोक नहीं पाया और उसकी टांगों को सहलाना चालू कर दिया। फिर मैंने अपना एक हाथ टॉप के अन्दर डाल दिया और दूसरे हाथ से उसकी चूत मसलता रहा। जब तक मूवी खत्म हुई, मैंने पूजा के जिस्म को मसल-मसल कर लाल कर दिया था और उसकी सारी लिपस्टिक खा चुका था।
जैसे ही पिक्चर ख़त्म हुई पूजा ने उठ कर कंप्यूटर बंद किया, दरवाज़ा बंद किया और आकर मेरी रजाई में फिर घुस गई।
मैंने कहा- यहाँ कुछ नहीं करते !
तो वो बोली- कोई फर्क नहीं पड़ता, मम्मी तो अब सो गई, वो सुबह ही उठेगी।
यह कह कर मेरा हाथ अपने मम्मों पर सहलाने लगी। असल वो मेरे सहलाने से गर्म हो चुकी थी और अब बस चुदना चाहती थी।
तो मैंने उसे बिस्तर पर लिटाया, उसकी गांड के नीचे एक तकिया रखा और सीधा उसकी चूत में अपना लंड डाल दिया और सोचा कि कुछ धक्कों के बाद यह मान जाएगी मगर मुझे क्या मालूम था कि उसने अपनी चूत में गाजर और मूली दे-दे कर अपनी चूत को चुदक्कड़ बना दिया था।
मैं उसे धक्के मारता रहा और वो मज़े लेती रही, हर दस मिनट के ब्रेक के बाद फिर चालू हो जाती।
फिर थोड़ी देर बाद मैंने सोचा- यह ऐसे नहीं मानेगी, मैंने उसे उसकी गांड मारने के लिए राज़ी कर लिया।वो नादान मान गई और बोली- ठीक है ! यह भी करके देख लेते हैं !
मैंने कहा- ठीक है, मगर ज्यादा शोर मत मचाना, तुम्हारी मम्मी जाग जाएगी।
वो बोली- ठीक है !
मैंने पहले उसकी गांड में अपनी दो उँगलियाँ डाल के देखा कि उसका छेद बहुत ढीला था। मैंने उसे उसका छेद टाईट करने के लिए कहा और अपना लंड उसकी गांड के अन्दर डालना चालू किया आहिस्ता-2 !
वो सिसकियाँ भरने लगी और और शायद उसे दर्द भी हो रहा था। फिर मैंने अपना लंड बाहर निकाला और एक ही झटके में अन्दर तक डाल दिया वो बड़ी तेज़ी से चीखी और मैंने उसका मुंह अपने हाथों से बंद कर दिया। मैंने कई धक्के मारे उसकी गांड में, जिससे उसे बहुत दर्द हुआ पर मैंने सोचा कि उसे सबक तो सिखाना ही पड़ेगा।
थोड़ी देर बाद मैंने अपना लंड उसकी गांड से निकला और उसे बिस्तर पर सीधा लिटा दिया और उसकी एक टांग उठा के अपने कंधे पे रखी और उसकी चूत में अपना लंड बाड़ दिया और बहुत देर तक उसको मैंने चोद। उस बंदी ने भी हार नहीं मानी और हद से ज्यादा दर्द के बाद भी वो मेरा साथ देती रही। शायद इसी को हवस कहते हैं।
मैंने फिर उसे घोड़ी बनाया और फ़िर उसकी चूत में अपना लंड बाड़ दिया। अब वो निढाल हो चुकी थी और शायद इससे ज्यादा झेल नहीं पाती, तो मैंने उसे छोड़ दिया और उसके बगल में लेट कर उसके चुम्बन लेने लगा। अब मैं भी थक रहा था और सोना चाहता था और हम दोनों सोने चले गए। Antarvasna
मेरा नाम अमित है। मैं गुजरात का हूँ। Hindi Sex Stories मेरी यह पहली कहानी है। इसलिए लिखने में अगर कोई ग़लती हो तो मुझे माफ़ करें।
तो चलिए अब कहानी पर आते हैं।
बात आज से १ साल पहले की है, जब हम सभी लोग दर्शन कर के वापस आ रहे थे। हम सभी लोग एक ट्रक में थे। नीचे गद्दे बिछाए हुए थे।
रात हो चुकी थी। बरसात का मौसम होने की वज़ह से ट्रक पूरा ढक दिया गया था। मैं सबसे पीछे लेटा हुआ था।
मेरे सामने मेरी मौसी लेटी हुईं थीं। वहाँ अँधेरा था।
मेरी मौसी बहुत मोटी है और हॉट भी।
वह विधवा है, उनके पति का देहांत १० साल पहले हो चुका था। सभी लोग सो चुके थे।
मैंने सोने के लिए जैसे ही पैर आगे किए तो मेरा पैर मौसी की झाँटों पर जा लगा।
पाँव का स्पर्श वहाँ होते ही मेरे शरीर में बिजली दौड़ गई और मेरा ७ इंच का लंड फटाक से खड़ा हो गया।
अब मैं मौसी को चोदने के बारे में सोचने लगा था।
फिर मैंने अपने पैर को और आगे बढ़ाकर अपने पाँव के अँगूठे से ही उसकी चूत को महसूस किया और दबाया।
मौसी जाग गईं।
मैं डर गया कि वो कहीं डाँटे ना, मैंने जल्दी से अपने पाँव पीछे सिकोड़ लिए।
थोड़ी देर ऐसे ही सोता रहा।
कुछ देर के बाद मैंने फिर से अपने पाँवों को उनकी चूत से लगाया तो उन्होंने कुछ नहीं कहा।
मेरी हिम्मत बढ़ी, और मैंने पाँव के अँगूठे से उनकी चूत को दबाया, उनके मुँह से सिसकारी निकल पड़ी और उन्होंने अपने पाँव और फैला दिए।
अब मैं उनके पास जाकर लेट गया और उनकी चूचियाँ ऊपर से ही दबाने लगा।
थोड़ी देर दबाने के बाद मैंने अपनी एक उँगली उनकी चूत में डाल दीं।
वह आहें भरने लगीं। तभी ट्रक में से कुछ और आवाज़ आई, तो हमने समझा कि शायद कोई और भी जाग गया है, तो मैं तो जल्दी से आँखें बन्द करके सो गया।
हम लोग जल्दी ही घर पहुँच गए।
मैंने सोच लिया था कि उन्हें अब घर में चोदना ही है। दूसरे दिन मौसी अपने घर जाने के लिए सामान बाँध रहीं थीं।
वह हमारे यहाँ से ५० किलोमीटर दूर रहतीं थीं। उन्होंने मेरी माँ को कहा कि अमित को भी साथ ले चलती हूँ। थोड़े दिन मेरे पास रहने दो, तो माँ भी राज़ी हो गईं।
मैं तो खुश हो गया था और जल्दी से अपना सामान भी बाँध लिया और मौसी के साथ चल पड़ा।
मैं आपको बता दूँ कि मौसी की दो बेटियाँ हैं। दोनों की शादी हो चुकी है, इसलिए वह अकेली ही रहतीं हैं। उनका बंगला काफी बड़ा है।
हम लोग उनके घर पहुँचे। मैं जाकर तरोताज़ा होकर बेडरूम मे आ गया और टीवी देखने लगा, मौसी किचन में खाना बनाने लगी।
थोड़ी देर के बाद मौसी की आवाज़ आई कि खाना खा लो।
हमने साथ में खाना खाया।
खाना खत्म होने के बाद मौसी ने कहा कि तुम बेडरूम में जाओ, मैं बर्तन साफ़ करने के बाद आती हूँ।
मौसी जब आईं तो वह कफ़ी सुन्दर लग रहीं थीं। उन्होंने गुलाबी रंग की नाईटी पहनी थी।
आते ही मौसी ने दरवाज़ा बन्द कर लिया और मुझे चूमने लगी।
मैं भी उन्हें चूमने लगा।
चूमते-चूमते हम दोनों ने एक दूसरे के कपड़े भी उतार फेंके।
अब हम दोनों पूरे नंगे थे।
मौसी मेरे लंड को देखकर हैरान थीं – शाही, तेरा तो काफी बड़ा है! तेरे मौसा जी के दो लण्डों के बराबर है।
यह कहकर उन्होंने मेरे लंड को मुँह में ले लिया और चूसने लगीं।
चूसते-चूसते वह कभी-कभी दाँत भी गड़ा देतीं, वह पागलों की तरह चूसे जा रहीं थीं। मैंने कहा- मौसी, मौसाजी के मरने के बाद क्या तुमने कभी सेक्स नहीं किया है?
“१० साल बाद आज पहली बार मर्द का लंड ले रही हूँ” – उन्होंने बताया।
“१० साल तुमने कैसे चलाया?” – मैंने पूछा।
तो वह उठी और बिस्तर के नीचे से एक कृत्रिम लंड निकाल और कहने लगी, “यही मेरा पति है जो हर रात मुझे शांत करता था।”
अब हम दोनों 69 की मुद्रा में आ गए और एक-दूसरे को चाटने लगे। मौसी की चूत एकदम साफ थी। उसपर एक बाल भी नहीं था।
क़रीब १० मिनट चाटने के बाद मौसी को मैंने सीधा करके मैं उनके ऊपर आ गया और उनकी चूत पर अपना लंड रख कर रगड़ने लगा।
मौसी शशश्सस्सस्सससस… सिसकारियाँ भरने लगीं और कहने लगी, शाही अब रहा नहीं जाता… जल्दी डाल दे और मेरी चूत फाड़ दे।
मैंने अपना लंड मौसी की चूत में पेल दिया, और चोदने लगा।
लगभग ५ मिनट चोदने के बाद वह झड़ गईं।
फिर मैंने उन्हें कुतिया की मुद्रा में आने को कहा और उनकी गाँड दबाने लगा। उन्होंने कहा, “चूत में ही डालो ना!”
मौसी मैं तो गाँड ही मारूँगा” – मैंने कहा।
“ऐसा तो तेरे मौसा ने भी कभी नहीं किया। बहुत दर्द होगा।”
“मौसी मैं आराम से डालूँगा।” – यह कहकर मैंने अपने लंड के सुपाड़े को उनकी गाँड की छेद पर रखकर एक झटका मारा तो मौसी चिल्लाने लगी और कहने लगी, “बाहर निकाल…”
पर मैं कहाँ निकालने वाला था। दर्द की वज़ह से मौसी की आँखों से आँसू आ रहे थे। मैं थोड़ी देर रुक गया और आहिस्ता-आहिस्ता झटके देने लगा।
जब उनका दर्द कम हुआ तो मैंने अपनी गति बढ़ा दी। थोड़ी ही देर बाद मैं झड़ गया और बगल में आकर लेट गया।
उस रात मौसी को मैंने ५ बार चोदा और १५ दिनों तक वहीं रहकर उनकी जमकर चुदाई करता रहा।
कई बार हमने ब्लू-फिल्में देखते हुए भी चुदाई का आनन्द उठाया। फिर मैं घर वापस आ गया।
मगर फिर भी जब भी मौका मिलता है, मैं उनके घर जाकर ज़बर्दस्त चुदाई कर आता हूँ।
तो दोस्तों, आपको मेरी पहली कहानी कैसी लगी, ज़रूर बताएँ Hindi Sex Stories
The user agrees to follow our Terms and Conditions and gives us feedback about our website and our services. These ads in TOTTAA were put there by the advertiser on his own and are solely their responsibility. Publishing these kinds of ads doesn’t have to be checked out by ourselves first.
We are not responsible for the ethics, morality, protection of intellectual property rights, or possible violations of public or moral values in the profiles created by the advertisers. TOTTAA lets you publish free online ads and find your way around the websites. It’s not up to us to act as a dealer between the customer and the advertiser.