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Antarvasna

ये कहानी आज से 6 महीने पहले की Antarvasna है जब हम अपनी दूसरी साली की शादी में गये थे बड़ौदा, मेरी पहली साली की शादी को 6 महीने हुए थे।

वो भी अपनी बहन की शादी की तैयारी के लिये आई थी।

मेरी साली का नाम है सोनू, हम सब शादी से 1 हफ़्ते पहले गये थे।
उसका पति नहीं आया था।
वो करीबन होगी 24 की।

वो भी मेरी बीवी की तरह ही बहुत सेक्सी थी, वैसे साली का फ़ीगर होगा 36-29-38 उसके बूब तो बहुत ही सेक्सी थे जब वो चलती थी तो उसके बूब्स हिलते थे ये देख कर कोई भी आदमी मचल जाये।

उसके पति की अक्सर नाइट ड्युटी रहती थी।

मैं जब भी उसके घर पर जाता तो उसको देखता ही रहता और उसको चोदने के बारे में सोचा करता के काश इस को चोद सकूँ।

एक दिन जब रात को सोने गये तो एक रूम में पूरा सामान पड़ा था इस लिये हम सब एक साथ ही सो गये। पहले मेरे बगल मे मेरी वाइफ़ तब साली।

रात को जब मैं पानी पीने उठा तो वापस आकर देखा तो मरी जगह पर मेरी वाइफ़ थी।

इसलिये में साली और मेरी वाइफ़ के बीच में सो गया।
मुझे नींद नहीं आ रही थी।

थोड़ी देर के बाद मेरी साली ने अपने पैर मेरे पैरों पर रख दिया।
उसने नाइटी पहनी थी और वो उसके घुटने तक ऊपर हो गयी थी।
मेरा लंड खड़ा हो गया और पूरा टेंट बन गया।
फिर मैंने भी अपना हाथ उसके ऊपर रख दिया।

थोड़ी देर के बाद जब वो कुछ न बोली तब मैंने अपने हाथ को थोड़ा ऊपर लेके उसके एक बूब पर रख दिया और धीरे से दबाने लगा।

वो धीरे से मेरे पास आ गई तो मुझे लगा रेस्पोंस मिल रहा है।
ओर मैंने फिर दूसरे बूब को दबाने लगा।

फिर वो मेरी तरफ़ घूम गई तो मैंने अपने हाथ उसके नाइटी में ऊपर से डाल कर उसके टिट्स को दबाने लगा।

वो मचलने लगी और मुझे कान में कहा स्टोर रूम में चलते हैं।

फिर वो उठके दूसरे रूम मे चली गई और मैं भी उसके पीछे चला गया और स्टोर रूम का दरवाजा बंद कर दिया।

उसको मैंने पीछे से पकड़ कर उसके बूब्स दबाने लगा।

उसने कहा- आहिस्ता, आहिस्ता।

फिर मैंने उसकी नाइटी को ऊपर उठा कर पूरा निकाल दिया और उसको किस करने लगा।

मैंने उसकी ब्रा भी निकाल दी और उसके टिट्स को हाथ से दबाने लगा।

उसकी सांसे तेज हो रही थी।

उसने मुझे बूब्स चूसने को कहा और मैंने उसका दायाँ बूब्स चूसने लगा और पूरा चाटने लगा।

थोड़ी देर के बाद दूसरा बूब्स भी चूसा।

अब मैंने धीरे से उसका पेटीकोट को ऊपर कर के अपना हाथ उसकी पैंटी में डाल दिया और बूब्स भी चूसता रहा।

उसकी चूत पर बाल नहीं थे और पूरी गीली हो गई थी।

थोड़ी देर के बाद मैंने एक उंगली उसकी चूत में घुसा दी और वो मचल गई।
अब वो सिसकियाँ ले रही थी और मैंने उसका पेटीकोट और पैंटी निकाल दिया और उसकी चूत को चाटने लगा।

उसके पानी का स्वाद बहुत अच्छा था। उसने मेरे पैजामे का नाड़ा खोल दिया और पैजामा और अंडरवियर उतार दिये।

वो मेरा लंड को देखती ही रह गयी और बोली ये तो उसके पति से बहुत बड़ा है और उस पर हाथ फ़ेरने लगी।

मैंने फिर से उसकी चूत को चाटने लगा और हम 69 कि पोजिशन में आ गये।

वहां पे कोई बिस्तर नहीं था इसलिये टाइल्स पर ही लेट गये।

मैंने उसके स्लिट को दांतो से थोड़ा सा दबाया और वो जोर से मचल पड़ी और फिर मैंने अपनी जीभ को उसके अंदर डाल कर अंदर बाहर हिलाने लगा।

वो सिसकिया भरने लगी और बहुत गर्म हो गई।

फिर वो मेरी बाहों में आ कर लिपट गई और धीरे से कहा कि अब मत तड़पाओ, अब मेरे अंदर जल्दी से डालो, मैं मर रही हूं।

तो मैं एक कुरसी पर बैठ गया और उसको आगे की तरफ़ झुका कर अपने लंड पर बिठा दिया और जोर से एक ही झटके में पूरा लंड उसकी चूत में घुसा दिया।

वो दर्द के मारे अपने होंठों को दबाये मुझे पीछे पकड़ लिया।

थोड़ी देर उसको ऐसे ही बिठाये मैं भी बैठा रहा।

फिर उसे मजा आने लगा और वो आगे पीछे होने लगी।

मैंने भी पीछे से धक्के देने शुरु कर दिये।

10 मिनट बाद उसकी रफ़्तार तेज हो गई और मेरा भी निकलने वाला था इसलिये मैंने भी जोर से धक्का लगाना शुरु कर दिया।

थोड़ी देर के बाद वो मुझे पर बैठ गई और मैंने भी उसके दोनो बूब्स को जोर सो दबाने लगा और हम दोनो ने एक साथ अपना पानी छोड़ दिया। थोड़ी देर ऐसे ही बैठे रहे।

फिर हम दोनो ने अपने कपड़े पहन कर एक लम्बी किस कर के वापस अपनी जगह पर आके सो गये।

हम दोनो पूरी रात नहीं सोये।

मैं भी उसके बगल में लेटे उसकी पैंटी में हाथ डाल कर चूत पर अपना हाथ फेरता रहा।

वो भी चादर में हाथ डाल कर मेरे लंड को पूरी रात पकड़ कर सोयी रही।

जब तक हम वहां पर साथ रहे रोज कुछ बहाना निकाल कर बाहर चले जाते और कोई फ़र्म और खाली जगह पर जाके अपनी मोटर साइकल पर बैठ कर ही मजे लूटते रहे।अब वो प्रेग्नेंट हो गई है और मेरे ही बच्चे की मां बनेगी। Antarvasna

दूसरी साली को भी कैसे चोदा वो अगली कहानी में

नमस्कार मेरा नाम रीना माली है। मैं राजस्थान के उदयपुर शहर में रहती हूं। मेरे पति नगर निगम में कार्यरत हैं और मेरे दो बच्चे हैं। मेरी उमर 32 साल है, लंबाई 5.6 ft. ये मेरी होली के दिन की सच्ची घटना है जिसे में पेश कर रही हु। मेरे पति पिछले दो सालों से मुझे टाइम नही देते थे जिसके कारण मेरे पड़ोस में एक बीकॉम थर्ड ईयर के स्टूडेंट अमित जो कि भरतपुर से है उससे मेरी गहरी दोस्ती हो गई थी। अमित के साथ मेरा अफेयर दो सालों से चल रहा है। अमित का एक दोस्त है निलेश जिसे हमारे बारे में पता है. और वह अमित से काफी बार मुझसे रिलेशन बनाने की बात कर चुका है परन्तु मेरी और से साफ मना है। होली के दिन मेरे पति बाहर गए हुए थे। घर में होली 11 बजे तक खत्म हो गई थी, तभी अमित का कॉल आया। बोला ” रीना भाभी मुझे भी आपके साथ होली खेलनी है।” मेने उसे एक बार मना कर दिया की घर पे सब हैं और यहां होली खेलना संभव नहीं है। परंतु बार बार बोलने पे मेने बोला की में कोशिश करती हूं। मेने सासूजी से कहा की मेरी सहेलियां मुझे होली खेलने उनके फार्म हाउस पे बुला रही हैं। पहले तो सासु जी ने आनाकानी की फिर बोली ” ठीक ही जाओ और 3 बजे तक आजाना”। बच्चे की जिम्मेदारी भी लेली। मेने अमित को फोन करके बताया तो उसने मुझे ऐश्वर्या रिसोर्ट में आने को बोला। मैं स्कूटी लेके व्हाइट कलर की फाग साड़ी और रेड कलर के ब्लाउज पेटीकोट में निकल गई। वहा पहुंची तो अमित और निलेश दोनो थे। निलेश को देख के मेने अमित से पूछा ” इसे क्यों लेके आए, तुमको पता है ना ये मेरे बारे में क्या सोचता है”। अमित ने मुझे समझाया कि वो उसके साथ सुबह से था होली खेलने। और उसकी और से कोई परेशानी नहीं होगी। रिसोर्ट में अमित ने पूल में होली खेलने की व्यवस्था रखी थी। अमित ने पहले गुलाल से मुझे गालों पे रंगा फिर मेने भी उसे रंग लगाया। निलेश भी पास आया और मुझे गालों पे रंग लगाया और मेने भी उसे गालों पे रंग लगा कर होली की शुभकामनाएं दी। फिर अमित ने निलेश को कही भेज दिया और अमित ने मेरे पास आकर मुझे कस के गले लगा लिया। जवाब में मेने भी उसे कस के गले लगाया। फिर वो मेरे गले , हाथ, और पेट पर रंग लगाने लगा। मैं भी आंखे बंद करके उससे रंग लगवा रही थी। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है. फिर उसने मुझे बाहों में उठा लिया और पूल में गिरा दिया। और खुद भी कूद गया। होली की पूरी मस्ती में मुझे होली खेल रहा था और मेरे हर अंग को छू रहा था और कलर से रगड़ रहा था। पूल में ही उसके होठ मेरे होठों का चुम्बन ले रहे थे। होली का कार्यक्रम करीब 30 मिनट तक चला। फिर हम दोनो पूल से बाहर आए। मेरी साड़ी शरीर से पूरी चिपकी हुई थी। अमित बोला ” भाभी आग लगा रहे हो आप”। मैं शर्मा गई ये सुनकर। फिर अमित बोला की उसने चेंज करने के लिए एक रूम बुक किया है। हम दोनों रूम में चले गए। वहा जाते ही अमित ने मुझे फिर बाहों में भर लिया और मुझे चूमने लगा। गालों पे, होठों पे, गले में, पर पे सब जगह पागलों की तरह चूमने लगा। में बोली ” अमित आज नहीं प्लीज”। पर वो रुका नहीं। उसने मेरी साड़ी मुझे गोल गोल गुमाकर निकल ली। मैं अब लाल रंग के गीले चिपके हुए गहरे गले के ब्लाउज और पेटीकोट में थी और गले में लंबा मंगलसूत्र था। मुझे शर्म आ रही थी। फिर वो मुझे बाहों में उठाकर बाथरूम में ले गया और वहा हम दोनो ने एक दूसरे से चिपक कर स्नान किया। जितने में डोर बेल बाजी। अमित मुझे बाथरूम में छोड़ कर डोर खोलने गया फिर डोर बंद भी कर दिया। मेने अंदर से आवाज लगाई “अमित कोन है”। अमित बोला ” रूम सर्विस वाला था”। में पेटीकोट ब्लाउज में ही बाहर आ गई और अमित के साथ निलेश को खड़े देखकर चौंक गई। “तुम यहां क्या कर रहे हो”। ऐसा बोलकर में बाथरूम की और भागी. परंतु निलेश ने मेरा हाथ पकड़ लिया और बोला ” भाभी आज तो आपके साथ होली खेलने आया हु ऐसे केसे माना कर सकती हो।” ऐसा कहकर उसने मुझे बाहों में जकड़ लिया और मुझे चूमने लगा। मैं उसे हटाने लगी लेकिन उसकी झकड के आगे खुद को छुड़ा न पाई। मेने अमित से कहा “अमित बोलो इसे यहां से जाने को.” अमित बोला “अरे भाभी मेरा अच्छा दोस्त है, इसकी भी इच्छा है खेलने की पूरी करने दो।” मैं समझ गई आज मेरे साथ कुछ अनर्थ होने जा रहा है। मेने निलेश को धक्का दिया और अपनी साड़ी उठाकर भागने लगी। दरवाजे पर अमित ने मुझे पकड़ लिया और बोला ” भाभी आज तो आपको हम देवर बिना खेले जाने नही देंगे” और ऐसा कहकर अमित ने मुझे गोद में उठा लिया और बेड पर गिरा दिया। मैं उनसे हाथ जोड़कर विनती करने लगी लेकिन उन दोनो पे भांग और हवस का नशा चढ़ चुका था। निलेश बोला “उफ्फ भाभी, लाल गीले पेटीकोट ब्लाउज में आपने मेरे अंदर तक आग लगा दी हे। आप साक्षात काम देवी रति लग रही हो।” ऐसा बोलकर उसने मेरे पैर पकड़ लिए। और अमित ने मेरे दोनो हाथ पकड़कर उपर कर दिए। निलेश मेरे ऊपर आगया और मेरे गले में चूमने और काटने लगा। मेने अमित से कहा ” अमित निलेश को बोलो मेरे गले में बाइट्स के निशान हो जाएंगे और घर में पता चल जाएगा.” अमित का इशारा पाके निलेश ने काटना बंद किया और गले में चूमने और चाटने लगा। मैं परेशान थी। निलेश मेरे कानो में जीभ से चाटने लगा। मुझे करंट सा आने लगा। उधर अमित मेरा पेटीकोट घुटनों तक ले आया और पैरों पे चूमने और चाटने लगा। धीरे धीरे में उनके काबू में आ रही थी। मुझे लग गया था विरोध से ये दोनो मेरा बलात्कार कर सकते है। सही यही होगा अपने आप को इन्हे सौंप दिया जाए। मेने अपना शरीर ढीला कर दिया। निलेश अब मेरे पेट को चाटने लगा और नाभि में जीभ से हरकत कर रहा था। मुझे भी मजा आने लगा। अमित मेरी पैरो की उंगलियां चूस रहा था। मैं मदहोश हुए जा रही थी। निलेश मेरे ब्लाउज के हुक खोलने लगा और खीच कर ब्लाउज उतार दिया। अंदर मेने काली ब्रा पहनी थी। निलेश बोला ” उफ्फ भाभी आप कमाल हो” ऐसा कहकर उसने मेरी ब्रा का हुक पीछे हाथ डालकर खोल दिया और एक झटके में मेरे उरोज आजाद कर दिया। 34 के स्तन देखकर वो काबू न कर सका और मेरे निपल्स चूसने लगा। ऐसा लग रहा था उसने पहले बार किसी का स्तनपान किया हो। इधर अमित ने पेटीकोट का नाड़ा खोल दिया और और खीच कर पेटीकोट निकला दिया। अब मैं केवल ब्लैक कच्छी में थी। अमित मेरी जांघो को चूम रहा था और अंदर जांघो को चूस रहा था। मैं मादक सिसकारियां ले रही थी। निलेश ने मुझे उल्टा लिटाया और मेरी पीठ को जीभ से चाटने लगा। मै पागल हो रही थी। मुझे पीठ पर निलेश काटे जा रहा था और मैं एक मछली की तरह मचल रही थी। अब दोनो अपने कपड़े निकाल कर नग्न हो चुके थे। निलेश का 7 इंच का मोटा लिंग देखकर मैं डर गई थी। अमित उपर आया मुझे सीधा करके उपर से लिंग मेरे मुंह में डाल दिया जिसे बड़े मजे से मैं चूसने लगी। उसका लिंग गले तक जा रहा था। नीचे निलेश अपनी जीभ से मेरी योनि का भेदन कर रहा था। मेने जांघो से निलेश का सिर दबा रखा था और योनि को चटवा रही थी। फिर हमने पोजिशन बदली और निलेश ने अपना लिंग मुझे चूसने दे दिया और अमित अपनी जीभ से जोर जोर से मेरी योनि का दाना चाट रहा था। इसी बीच में एक बार अमित के मुंह में झर गई। मैं एक वैश्या जैसे निलेश का लिंग चूस रही थी और खो खो की आवाजे निकाल रही थी। अमित ने मुझे गोड़ी बनाने के लिए कहा। मेने कहा “अमित कंडोम लगा लो”। अमित बोला ” भाभी आज तो आपको हम बिना कंडोम के सुख देंगे।” मेने माल बाहर गिराने का आश्वासन लेकर अनुमति दे दी। अमित ने एक जोरदार झटके से अपना लिंग मेरी योनि में डाल दिया और फुल स्पीड से मुझे चोदने लगा। कमरे में पच पच की आवाज आ रही़ थी और मुंह से मै निलेश का लिंग चोद रही थीं। इस बीच में 1 बार और झड़ गई। 15 मिनट बाद अमित बोला “भाभी में आने वाला हु”| मेने बोला ” अमित प्लीज बाहर निकालो”। लेकिन उसने नही माना और एकजोरदार झटके से मेरी योनि को अपने वीर्य से भर दिया। उसके गरम पिचकारी मुझे अपनी कोख तक महसूस हुई और मुझे आनंदित कर गई। अब निलेश आया और मुझे लिटाकर मेरे उपर आगया और अपने लिंग का सुपाड़ा मेरी योनि पर रघड़ने लगा। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है. यह क्रिया उसने 3 मिनट करी। मैं फिर से गरम हो गई और मेरे होठ को होठों से बंद करके एक जोरदार झटके में उसने अपना पूरा लिंग मेरी योनि में उतार दिया। मेरी आंखों में दर्द से आंसू आ गये। अंदर डाल कर वो थोड़ी देर लेटा रहा। मेरा दर्द कम होने पर उसने अंदर बाहर धक्के चालू किए। अब मुझे मजा आने लगा और उछल उछल कर निलेश का साथ देने लगी। “ओह निलेश चोदो अपनी भाभी को, और जोर से आह आह… आओह्ह्ह्ह… मार डाला आआआह” निलेश और स्पीड में मेरा चोदन करने लगा। मैं उसके लिंग से हवा में उड़ने लगी और उछल उछल कर मजा लेने लगी। 20 में की चूदाई के बाद वो बोला “भाभी में अपना माल कहा निकालू.” मैं बोली “अंदर ही निलेश.” और फिर हम दोनो एक साथ अकड़ के साथ प्रेम जूस की पिचकारी छोड़ कर शांत हुए। निलेश के वीर्य की गर्मी मेरे अंदर तक समा गई। फिर हम तीनो ने सामूहिक स्नान किया और में गीले कपड़े पहनकर घर आ गई।
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हाय, मेरा नाम दीपक है। मैं Antarvasna Sex Stories गाजियाबाद का रहने वाला हूँ। मैंने अतंर्वासना की बहुत सी कहानियाँ पढ़ी हैं और मैं भी अपनी एक हसीन कहानी आपके सामने प्रस्तुत करने जा रहा हूँ। उम्मीद है आपको पसंद आयेगी।

तो आइये अब रूख करते हैं कहानी की ओर-

यह कोई दो महीने पहले की बात है, मैं ट्रेन से सफर करते हुए अपने गाँव जा रहा था। ट्रेन में काफी भीड़ थी इसलिए मुझे सीट नहीं मिली। मैं जाकर ट्रेन के दरवाजे पर खड़ा हो गया। मैं खड़ा हुआ बोर हो रहा था, तभी एक लड़की और उसकी दादी भी उसी डिब्बे में चढ़ गई। दादी को तो एक अकंल ने सीट दे दी पर वो लड़की मेरे पीछे आकर खड़ी हो गई। इसी दौरान गाड़ी चल पड़ी। गाड़ी तेज चल रही थी जिससे यात्री इधर उधर हिल रहे थे। मेरा हाथ बार बार उसके पेट से टकरा रहा था और वो मुझे गर्म लग रही थी। अब तो मेरे मन ने हिलोरें लेनी शुरू कर दी, मैंने जानबूझ कर अपना हाथ उसके पेट पर फेरना शुरू कर दिया। उसे भी लगने लगा कि मैं यह सब जानबूझ कर कर रहा हूँ। उसने मेरा हाथ पकड़ लिया और मुझे धीरे से मना कर दिया। भीड़ की वजह से किसी का ध्यान हम पर नहीं था।

अब मैं घूम कर उसकी ओर मुँह करके खड़ा हो गया और उससे उसका नाम पूछा तो उसने बिना किसी ना-नुकर के अपना नाम बता दिया। उसका नाम विनीता था। मैंने उससे उसके बारे में सब कुछ पूछ लिया। वो फरीदाबाद की रहने वाली थी। मैंने उससे उसका पता और फोन नंबर लिया, मैंने भी अपना नंबर उसे दे दिया। इसके बाद मेरा स्टेशन आ गया और मैं उतर के अपने गाँव चला गया।

15 दिन गुजर गये, ना तो उसने काल किया ना मैंने ! लेकिन 15 दिन बाद उसका एस एम एस आया कि वो एक जरूरी काम से गाजियाबाद आ रही है। उसने मुझे होटल का नाम बता दिया। उस दिन मैं शाम 7 बजे होटल पहुँच गया। मैंने उसके बताये कमरे का दरवाजा खोला, मैंने देखा कि विनीता बेड पर उल्टी लेटी थी। मैंने दरवाजा बंद कर दिया, विनीता ने एक हल्की नाईटी पहनी थी जिससे उसका सारा शरीर साफ दिख रहा था।

जब मैंने विनीता को उस हल्की नाईटी में देखा तो मेरा छ: इंच का लंड सलामी देने लगा। मैंने खुद को कन्ट्रोल किया और धीरे से मैंने उसे आवाज लगाई। मेरी आवाज सुनकर वो बड़ी तेजी से उठी और मुझे अपनी बाहों में भर लिया और मुझे बेहताशा चूमने लगी। मैंने भी उसका पूरा साथ दिया और उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए। मेरे हाथ उसके पेट पर घूम रहे थे। मैं उसे बिस्तर पर ले गया वो चुदने के लिए बेकरार थी।

मैंने उसकी नाईटी उतार दी। अब वो सिर्फ पैन्टी और ब्रा में थी। मैंने उसका फिगर निहारा क्या गजब का फिगर था ! उसकी चुच्ची बिल्कुल कैटरीना की तरह थी। मैंने उसकी चुच्ची को दबा दिया। अब उसने मुझे कपड़े निकालने को कहा तो मैंने कहा- तुम ही निकाल दो !

उसने मेरे कपड़े उतार दिए। अब मैं भी सिर्फ कच्छे में था। मेरा लंड बिल्कुल बर्दाश्त नहीं कर पा रहा था। मैंने अब अपना हाथ विनीता की पैंटी में डाल दिया और उसकी चूत मसलने लगा। उसकी चूत पे एक भी बाल नहीं था। उसकी चूत बिल्कुल गीली हो चुकी थी और वो जोर जोर से सिसकियाँ ले रही थी- आ आह अअअ उउउ आ अअ ! मार डाल ! फाड़ दे ! चोद दे ! सि..

मैं भी उसकी चूत को जोर जोर से रगड़ रहा था। वो मेरे हाथ पे ही झड़ गई।

मैंने उसे लेटने को कहा, उसकी टाँगें चौड़ी की और अपना लंड उसकी चूत के छेद पर रखा और दो धक्को में ही लंड अंदर चला गया। पूरा कमरा उसकी चुदाई की चीखों से भर गया। मैंने विनीता की चुच्चियों को मुँह में दबा रखा था। लगभग बीस मिनट की चुदाई के बाद हम दोनों झड़ गये। उस रात हमने चार बार चुदाई की।

सुबह वो अपने रास्ते चली गई और मैं अपने !

पर हम आज भी फोन पर चूत-चुदाई करते हैं!

आपको मेरी कहानी कैसी लगी जरुर बतायें ! Antarvasna Sex Stories

(Meri Class Teacher Ki Chudai)-Hindi sex stories

दोस्तो Hindi sex stories, आज मैं तुम को नये साल के टाइम पर मेरी पहली चुदाई की बात बताता हूं। मैं १८ साल का था और मैं उस टाइम ६’ का था शरीर से लम्बा तगड़ा था।

मुझे १ टीचर उपासना पढ़ाती थी उस की उमर २७ – २८ साल थी पर उसको बच्चा नहीं था। उसका पति सरकारी नोकरी में था और वो काफ़ी टाइम टूर पर रहता था। उपासना का पति बाहर गया हुअ था और उसको एक नये मकान की जरुरत थी वो किराये पर रहती थी। हमारे पड़ोस में एक मकान नया बना था और काफ़ी खुला और हवादार था। जब उपासना ने पूछा तो मैंने उस मकान का बता दिया।

उसी दिन उपासना मेरे साथ घर अयी और वो मकान देखने मेरी मां के साथ चली गई। उपासना को मकान काफ़ी पसंद आया और किराया भी काफ़ी जायज था, सो उपासना ने मकान मालिक को अगले महीने की १ तारीख को आने के लिये कहा और एडवांस किराया दे दिया। अगस्त महीने की १ तारीख को उपासना अपने सामान के साथ उस मकान में शिफ़्ट कर गई।

दोस्तों यहां से असली बात शुरु होती है। उपासना ने हमारे पड़ोस में आने के बाद मेरी मां से दोस्ती कर ली और मुझे एक्स्ट्रा पढ़ाई करवाने की बात कर ली बिना कोई ट्यूशन फीस के। बस मेरी मां को क्या चहिये था। उपासना ने मुझे घर पर बुलाना शुरु कर दिया और अकेले में पढ़ाने लगी।

पहले ही दिन जब मैं उसके घर गया तो देखा कि उसने लूज़ कमीज और लंहगा पहन रखा था। उसने ब्रा नहीं पहनी थी और कमीज का गला भी खुला था।

उपासना ने मुझे पढ़ाना शुरु किया और बीच बीच मैं वो अपनी चूचियां अपने हाथ से दबा देती, उसकी बड़ी बड़ी चूचियों की गोलियां जैसे बाहर आने को हो जाती मैं उसकी इस हरकत को देख के मस्ती में भर जाता और मन कर रहा था कि मैं ही उसकी चूचियां दबा दूं पर हिम्मत नहीं हो रही थी।
मेरा कुंवारा लंड तन कर सख्त हो गया था और मेरी पैंट को फ़ाड़ के बाहर निकलने को तैयार था। पर मैं उपासना को कुछ कह नहीं पा रहा था।

कोई २ घंटे पढ़ाने के बाद उपासना ने मुझे कहा- रंजीत तुम अब घर जाओ और अपने परेंट्स से पूछ कर आना यहां सोने के लिये!
मैंने कहा- अच्छा मैडम!

जब मैं चलने लगा तो उपासना ने कहा- रंजीत तुम रहने दो, रुको यहीं पर… मैं ही पूछ आती हूं।
कह कर उपासना ने अपना कमीज मेरे सामने ही खोल दिया और बड़बड़ाने लगी- इतना करने के बाद भी कुछ नहीं किया, पता नहीं रात को क्या करेगा!
फ़िर उपासना ने अपनी ब्रा पहनी और मुझे हुक लगाने को कहा।
“आआआ आअ ह्हह् ह्हह आआआऐईई ईईइ” हुक लगते हुए मेरे मुंह से निकल ही गया।
“रंजीत अगर तुम मेरी मानोगे तो इससे भी ज्यादा मजा आयेगा तुम बस यहीं मेरा इन्तजार करो और बुक खोल के बैठ जाओ।

उपासना ने साड़ी पहनी और मेरे घर चली गई। कोई ३० मिनट के बाद वो वापस आयी और मेरा पजामा और कमीज साथ ले आयी।

“रंजीत तेरी मां तो सिर्फ़ पजामा दे रही थी, बोल रही थी कि रंजीत रात को पजामा और बनियान में सोता है पर मैं ही शर्ट भी ले आयी उनको शक नहीं होगा कि मैंने क्या किया है.”
फ़िर उपासना ने अपनी साड़ी उतार दी और सिर्फ़ पेटीकोट और ब्लाउज़ में हो गई.
मेरा लंड काफ़ी तन गया और मैंने उपासना को हिम्मत करके कह ही दिया- मैडम एक बात कहूं… आप जब मेरे सामने कपड़े बदलती हो तो मुझे ऐसा लगता है कि मैं ही आपका आदमी हूं.

उसने कहा- रंजीत तो फ़िर तुम मेरे को औरत की तरह इस्तेमाल करो!
फ़िर मैंने हिम्मत कर ही ली और टीचर की चूचियां पीछे से पकड़ ली और मेरा सात इंच का लंड उसकी कमर पर लग रहा था।

मैंने उसकी गर्दन पर किस किया, उपासना ने सिसकारी भरी- ऊऊफ़ उफ़फ़्फ़ ऊऊऊऊ आआआह्हां आआआअ रंजीत प्लीज जोर से!
मैंने टीचर की चूचियां जोर से दबाई और उसने अपनी कमर का पूरा दबाव मेरे लंड पर डाल दिया। मैंने उपासना के ब्लाउज़ को ऊपर सरका कर उसकी नंगी चूचियों को दबाया और एक हाथ उसकी सफ़ाचट चूत पर ले गया।
चूत गीली थी मेरा लंड काफ़ी जोर मार रहा था।

टीचर ने मेरे से अलग हो कर मेरा लंड पैंट से बाहर निकाल लिया, बोली- ओईईईइ माआआआअ… ये तो गधे का लौड़ा है, मेरी चूत का तो बुरा हाल कर देगा!
बस फ़िर उसने आनन फ़ानन में मेरा लौड़ा मुंह में ले लिया।

क्योंकि अब तक मैंने न ही मुठ मारी थी और न ही कभी किसी को चोदा था तो मेरा लंड उसके मुंह में ही झड़ गया, जोर की एक पिचकारी उसके मुंह में गई। मैं सिसकार रहा था, वो भी पानी पी कर खिलखिला के हंसने लगी और अपना वीर्य से भरा मुंह मेरे होंठों पर रगड़ने लगी.

मेरा लंड आधा हो गया था लेकिन वो फ़िर से खड़ा होने लगा।

अब टीचर बिल्कुल नंगी हो गई और मेरे को भी एकदम नंगा कर लिया। फ़िर उपासना मेरे को बेड पर ले गई और मैं उसके गुलाम की तरह से उसका कहना मानने लगा। बेड पर वो मेरे को बूब्स चूसने कही और मेरे लंड पर मुठ मारने लगी.

दो ही मिनट में मेरा लंड खड़ा हो गया। उपासना ने मेरे को अपनी दोनों टांगें मेरे कंधे पर रखने को कहा और मेरा लंड अपनी गरम चूत में ले लिया। मेरा लंड उस की चूत में गया मेरे को ऐसा लगा कि किसी गरम भट्टी में मेरा लंड घुस गया है।
मेरे लंड के अंदर जाते ही वो चिहुंकी- आआआअह्ह हहह्ह ह्हाआआआ… रंजीत मजा आ रहा है… जोर से चोदो प्लीज!

मैं अपनी टीचर को चोदने लगा। क्योंकि मैं पहली बार ही चोद रहा था और मेरा लंड काफ़ी टाइट था. वो पसीने में भर गई और जोर से सिसकारी भरती रही।
मेरी एक चुदाई में वो दो बार झड़ गई और फ़िर मैं झड़ा।
मेरे झड़ते ही वो ढीली हो गई और वो लम्बी लम्बी सांसें लेने लगी।

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इस तरह मैंने उसको रात में तीन बार चोदा. फ़िर मेरी नंगी टीचर मेरे नंगे बदन से लिपट कर सो गई।

दोस्तो, आज मैं आपको वो बताने जा रहा हूँ, जो आपने पहले शायद कभी न सुना हो।
मेरा नाम अमित है और मैं नासिक में रहता हूँ। मेरा अपना बिज़नेस है। जब काम थोड़ा बढ़ा तो मैंने अपनी एक ब्रांच पुणे में भी खोल ली, वहाँ मेरा भाई रहता है जो मेरा काम संभालता है।
काम के सिलसिले में मुझे अक्सर नासिक और पुणे आना जाना लगा रहता है, कभी ट्रेन से तो कभी अपनी कार से।

एक बार की बात है मैं अपने काम से नासिक से पुणे आ रहा था। रात के करीब साढ़े गयारह बज रहे थे, अभी नासिक से कोई 50-60 किलोमीटर ही आया था कि मैंने देखा सुनसान सड़क पर एक औरत सफ़ेद साड़ी में खड़ी मुझे हाथ का इशारा कर रही है।

पहले तो मेरी फट गई कि कहीं यह कोई भूत-वूत तो नहीं। मगर मैंने देखा, उसके पास ही एक टोयोटा कार खड़ी थी और उस लड़की ने भी पूरा मेकअप किया हुआ था, पूरे गहने पहने थे, शक्ल से तो भूत नहीं लग रही थी।

मैंने हिम्मत करके कार रोक ली।
वो मेरे पास आई और खिड़की के पास आकर थोड़ा झुकी, जब झुकी तो उसके गोरे गोरे बूब्स के दर्शन हुये, उसने मुझे ताड़ते देख लिया मगर बड़ी मीठी मुस्कान के साथ बोली- एक्सयूज मी, क्या आप मुझे थोड़ा आगे तक लिफ्ट दे सकते हैं, मेरी गाड़ी खराब हो गई है और आस पास कोई गैरेज भी नहीं है।

मैंने भी पूछा- इतनी रात को आप अकेली इस सुनसान रास्ते पे क्या कर रही हैं?

वो बोली- दरअसल मैं फिल्मों में असिस्टेंट आर्ट डाइरेक्टर हूँ, हमारी फिल्म की शूटिंग चल रही है और मैं वहीं जा रही थी।

मुझे बड़ी खुशी हुई, वैसे वो खुद भी किसी हेरोईन से कम नहीं थी, मैंने पूछा- कौन सी फिल्म की शूटिंग है, कौन कौन है फिल्म में?

वो मुस्कुरा कर बोली- चलते चलते बात करें?

मुझे बड़ा फील हुआ- अरे सॉरी, प्लीज़ आइये।

मेरे कहने पे वो मुझे उंगली से एक मिनट रुकने का इशारा करके अपनी कार के पास गई और कार में से अपना, पर्स, मोबाइल और एक बड़ा सा पैक उठा लाई, सामान कार में रख कर बोली- चलिये।

मैंने गाड़ी चला ली- इस बैग में क्या है? मैंने पूछा।

‘वो हमारी शूटिंग का समान है।’ उसने कहा।
‘ओके…’ मैंने कहा- क्या मैं आपका नाम जान सकता हूँ?

वो बोली- मेरा नाम रेखा है, और आपका?

मेरी हंसी निकल गई और हंस कर बोला- अमित…

सुन कर वो भी हंस पड़ी।

‘तो रेखा जी, कौन सी फिल्म की शूटिंग कर रही हो आप?’

वो बोली- अमित जी, अब हर किसी की किस्मत रेखा जी जैसी तो नहीं होती, मैं तो छोटी मोटी फिल्मों में काम करती हूँ।

मुझे हैरानी हुई- छोटी मोटी फिल्में, मतलब?
‘मतलब, बी ग्रेड फिल्में…’ वो थोड़ा शर्मा के मुस्कुरा के बोली।

‘ओ हो, तो शीला की जवानी, कच्ची कली, गुलाबी जिस्म, ऐसी फिल्में?’ मैंने थोड़ा शरारती अंदाज़ में पूछा।

‘जी बिल्कुल!’ वो बोली।

‘तो क्या आप फिल्मों में एक्टिंग भी करती हो?’ मैंने पूछा।

‘जी नहीं, मैं सेट डिज़ाइनिंग का काम करती हूँ’ उसने कहा।

‘ओके, तो आप वो बिस्तर सजाती हैं, जिस पर हीरो और हेरोइन प्रेम लीला रचाते हैं।’ मेरे ऐसा कहने पर वो झेंप गई पर बोली कुछ नहीं।

‘बाई द वे, आप एक्टिंग क्यों नहीं करती, आप तो माशा अल्ला खुद भी बहुत खूबसूरत हो, जवान हो, और क्या कहूँ, सब कुछ हो?’ मैंने उसके गोल गोल स्तनों की तरफ घूर कर देखते हुये कहा।

साड़ी के पल्लू में से झाँकता उसका यौवन जैसे मुझे अपनी तरफ खींच रहा था, मेरा मन किया कि पकड़ के इसके दोनों स्तन दबा दूँ, मगर मैंने अपने आप को काबू करके रखा।

वो बोली- मैंने एक फिल्म में काम किया है।

‘अच्छा, कौन सी?’ मैंने चहक कर पूछा।

‘गुलाबी रातें!’ वो बोली।

‘अरे नहीं, कब आई यह फिल्म, मुझे तो पता ही नहीं चला, मैं ज़रूर देखना चाहूँगा।’ दरअसल मैं तो उसके नंगे बदन को देखने की ख़्वाहिश मन में पाले बैठा था।

‘कोई फायदा नहीं, मैं उसमें हीरो की बहन बनी थी और मेरा फिल्म में सिर्फ 2 मिनट का रोल था, वैसा कुछ नहीं जैसा आप सोच रहे हैं।’

उसकी बात सुन कर हम दोनों हंस पड़े।

कुछ देर बातें करने के बाद मैंने सिगरेट निकली और उसे ऑफर की, उसनें डिब्बी से एक निकली और अपने होंठों में दबा ली।

मैंने कहा- अपनी सुलगाइएगा तो मेरी भी सुलगा दीजिये।

उसने दो सिगरेट अपने होंठों में ली और लाईटर से दोनों जला दी, मेरी सिगरेट पे उसके लिपस्टिक के निशान बन गए।

मैंने उसे देखते हुये पहले उसके लिपस्टिक के निशान को चूमा और फिर सिगरेट का कश लगाया।

वो मुस्कुरा कर बोली- आप तो, लगता है, ज़्यादा ही लट्टू हो गए मुझ पर?

मैंने कहा- अरे रेखा और अमित की आशिक़ी के किस्से तो सारी दुनिया में मशहूर हैं।

वो हंसी और बोली- न तो आप वो अमित हैं, और न मैं वो रेखा हूँ।

‘हाँ, वो वाले नहीं हैं, मगर खुद को वो समझ तो सकते हैं।’ मैंने कहा।
तो उसने बड़ी गहरी निगाह से मुझको घूरा।

खैर बातें चलती रही और गाड़ी भी हम दोनों एक दूसरे से लगातार बातें करते रहे, मैंने उसके और उसने मेरे बारे में एक दूसरे को बहुत कुछ बताया और हम दोनों बातों बातों में एक दूसरे के बहुत अच्छे दोस्त बन गए। हमने बहुत खुल कर बातचीत की, मगर मैंने एक मर्यादा से बाहर जाकर कुछ नहीं किया।

एलीफेंटा पहुँच कर मैंने गाड़ी रोकी और उस से पूछा- रेखा क्या लोगी?

वो भी मस्ती में बोली- कुछ मर्ज़ी ले आओ यार।

मैं दुकान से कोल्ड ड्रिंक, सोडा, नमकीन वगैरह ले आया, शराब मेरे पास गाड़ी में थी।

मैंने गाड़ी बढ़ाई और काफी आगे जा कर जब रास्ता सुनसान सा हो गया, गाड़ी रोक दी।

मैंने बोतल खोली और दो पेग बनाए- किसके साथ लोगी, कोल्ड ड्रिंक, सोडा, पानी?

वो बोली- सोडा और पानी मिक्स!

मैंने दोनों पेग बनाए, एक उसको दिया- अपनी दोस्ती के नाम!

‘दोस्ती के नाम…’ कह कर हम दोनों ने एक एक घूंट पिया।

उसके बाद तो बातों का जो दौर शुरू हुआ, पूछो मत।
हम दोनों आधी से ज़्यादा बोतल गटक गए, सुरूर दोनों को पूरा हो गया था, बेवजह बात बात पे हंसी, ठहाके चल रहे थे।
बात करते करते उसकी साड़ी का पल्लू गिर गया और उसके ब्लाउज़ के लो कट से उसके आधे स्तन बाहर दिखने लगे।
वो अपना पल्लू ठीक करने लगी तो मैंने रोक दिया- मत कर यार, फिर गिर जाएगा, तू फिर ठीक करेगी, यह फिर गिर जाएगा।

तो वो बोली- इसका मतलब यह कि मैं तुझे अपनी छातियाँ बाहर निकाल के दिखाऊँ, या तू खुद इन्हें देखना चाहता है?

‘जैसा तू ठीक समझे!’ मैंने कहा- अगर दिखाना चाहती है तो दिखा दे, मुझे कोई ऐतराज नहीं!’ मैं उसे आँख मार के बोला।

‘भोंसड़ी के, छातियाँ मेरी, तू कौन होता है ऐतराज करने वाला’। मुझे उसके मुँह से गाली थोड़ी अजीब लगी, मगर बुरी नहीं लगी।

‘अरे यार, अगर तू फिल्म में एक्ट्रेस होती तो भी तो दिखाती, अब दिखा दे।’ मैंने कहा।

‘तू देखेगा?’ उसने पूछा।

‘अरे लवड़े की… दिखाएगी भी या बातें ही बनाएगी?’ मैंने भी उसे गाली दे ही दी।

उसने मेरी तरफ देखा और बोली- ले देख, हारामी, ठरकी साले!

कह कर उसने अपने ब्लाउज़ के हुक खोले, और ब्लाउज़ ब्रा दोनों उतार दिये।

वाह… क्या शानदार चूचे थे उसके, एकदम मस्त, गोल, भरे हुये और तने हुए।

मैंने देखते देखते उसके दोनों बूब्स अपने हाथों में पकड़ लिए- ओह रेखा, तुम बहुत लाजवाब हो।

कह कर मैंने उसके निप्पल को मुँह लिया और चूसने लगा।

वो व्हिस्की पीती रही और मैं उसके बूब्स चूसता रहा। बूब्स चूसते चूसते मैंने उसके पेट, बगलों, गर्दन और जहाँ तक हो सका, उसे चूमा भी और अपनी जीभ से चाटा भी।

उसकी साँसों की रफ्तार से मुझे पता चल रहा था कि वो भी पूरी गर्म हो चुकी है। अब मैं सोच रहा था कि इससे पूछूं कि आगे का क्या प्रोग्राम है।

तभी वो बोली- अमित, लेगा मेरी?

अरे मुझे तो मुँह मांगी मुराद मिल गई थी, मैंने कहा- अब इतनी आगे आकर पीछे मुड़ने का तो सवाल ही पैदा नहीं होता।

कह कर मैं अपनी शर्ट के बटन खोलने लगा तो वो बोली- यहाँ नहीं, रुको ज़रा, बाहर चलते हैं।

‘बाहर कहाँ?’ मैंने पूछा।

उसने अपनी साड़ी का पल्लू अपनी कमर में ठूँसा और कार पिछली सीट पे रखा पैक उठाया और बोली- मेरे पीछे आओ।

मैंने भी कार को लॉक किया और उसके पीछे पीछे चल पड़ा। हम दोनों सड़क छोड़ कर पैदल ही सुनसान वीराने में चलते गए।
सड़क से काफी दूर एक बड़े से झाड़ के पीछे जाकर उसने पैक खोला, उसमें बिस्तर सा था, बिस्तर बिछाया और उस पर लेट कर बोली- आ जाओ।

यह तो जन्नत का नज़ारा था।

मैंने झट से अपने सारे कपड़े उतार फेंके और बिल्कुल नंगा होकर मैं उसके ऊपर लेट गया। मेरे लेटते ही उसने मेरा सर पकड़ा और अपने होंठ मेरे होंठों से लगा दिये।

होंठ क्या, मैंने साथ की साथ अपनी जीभ भी उसके मुख में डाल दी, जिसे वो बड़े मज़े से चूसने लगी।
जब उसने अपनी जीभ मेरे मुँह में डाली तो मैंने भी जी भर के उसकी जीभ को चूसा और दोनों हाथों से उसके स्तन भी दबा रहा था। खुले आसमान के नीचे सेक्स करने का अपना ही मज़ा है।

‘अब सब्र नहीं होता जानेमन, अब तो यह साड़ी भी उतार दो।’ मैंने कहा तो रेखा ने अपनी साड़ी और पेटीकोट दोनों उतार दिये।

चाँदनी रात में उसका गोरा बदन चमक रहा था। मैंने उसके दोनों जांघों को अपने हाथों से सहलाया, अपने होंठों से चूमा, दांतों से काटा और उसकी चूत पे चुम्बन भी लिया।

उसने अपने टाँगें फैला दी- अमित, चाटो इसे! उसने कहा और मेरा सर पकड़ कर अपनी चूत से सटाया।
मैंने बिना कोई हील हुज्जत किए अपनी जीभ से उसकी चूत को चाटना शुरू कर दिया।

थोड़ा सा चटवाने के बाद वो बोली- घूम जाओ अमित, मैं तुम्हारा लवड़ा चूसना चाहती हूँ।

मैंने वैसे ही किया, उसने मेरा लण्ड अपने होंठों में पकड़ा और चूसने लगी। कितनी देर हम एक दूसरे को ऐसे ही चूसते रहे, फिर मैंने कहा- अब असल मुद्दे पे आया जाए!

वो बोली- नहीं, मेरे फुद्दे पे आया जाए!

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और खिलखिला कर हंस पड़ी।

मैंने अपना लौड़ा उसकी चूत पर रखा और धीरे से अंदर धकेल दिया।

आह क्या एहसास था, इतना चाटने के बाद भी उसकी चूत बिल्कुल सूखी पड़ी थी, मैंने कहा- तुम तो बिल्कुल ड्राई पड़ी हो?

‘वो बोली- हाँ, पता नहीं क्यों और औरतों की तरह मेरे पानी नहीं छूटता, मेरा बॉय फ्रेंड भी यही कहता है, इसी लिए उसका 2-3 मिनट में ही हो जाता है, तुम्हें देखती हूँ, कितना टाइम लगाते हो।

उसने कहा तो मेरा तो प्रेस्टीज़ इशू बन गया, जो मैं सोच रहा था कि आराम आराम से करूंगा, अब तो मैं पूरा लण्ड उसके अंदर तक डाल कर बाहर निकाल रहा था और जब अंदर डालता था तो कोशिश करता था कि अंदर ज़ोर से चोट करूँ।
मगर वो तो मुझसे भी दमदार थी, मेरी हर चोट कर जवाब वो ऐसे सिसकारी भर के देती जैसे उसे बहुत ही आनन्द आ रहा हो।
और कोई औरत होती तो शायद मना ही कर देती। दूसरा मेरा ध्यान घड़ी पर था, दो मिनट हुये, तीन मिनट हुए, पांच मिनट भी हो गए, करते करते नौ मिनट हो चले थे, मगर न तो वो झड़ रही थी और न ही मैं झड़ रहा था।

हाँ मेरे लिए करना अब मुश्किल होता जा रहा था, मैं सोच रहा था मैं इसकी फाड़ दूँगा, मगर अब तो मेरी फट रही थी। मुझे ऐसे लगने लगा था जैसे मेरा तो लण्ड ही छिल जाएगा। मैं और ज़्यादा बेदर्दी से उसके स्तनों को दबा रहा था, अपने दाँतों से काट रहा था और वो ‘ओह अमित, कम ऑन फक मी फक मी’ कर रही थी।

एक बार तो मैंने सोचा, कि गेम बीच में छोड़ देता हूँ, मगर वो इतने जोश से मुझे हौंसला दे रही थी कि मेरा बीच में छोड़ने का मन ही नहीं कर रहा था।

हर थोड़ी थोड़ी देर बाद मैं ऊपर से थूक कर अपने लण्ड को गीला कर रहा था। मगर लण्ड तो जैसे… खैर उसकी तेज़ चीख़ों और कराहटों के बीच मैं करीब 12 मिनट उसकी चुदाई करने के बाद झड़ गया।
झड़ा क्या, मैं तो फारिग होकर कटे पेड़ की तरह एक तरफ को गिर गया।

उसके बाद मुझे कुछ होश नहीं रहा।

सुबह जब आँख खुली तो देखा के मैं सड़क से काफी दूर, वीराने में नंग धड़ंग लेटा पड़ा हूँ, मेरे सारे बदन और मुँह के अंदर तक रेत घुसी हुई थी, रेखा का या उसके सामान का कोई पता नहीं था, शायद वो चली गई थी, मगर कब और किसके साथ?

मैं उठा तो दर्द से बिलबिला उठा, मेरा लण्ड सूजा पड़ा था और लण्ड के हर तरफ खरोंचें ही खरोंचें पड़ी हुई थी।

मैंने सबसे पहले कपड़े पहने, अपना मुँह हाथ धोये और गाड़ी में बैठ कर सीधा पुणे की तरफ दौड़ा।

मेरी हालत बहुत खराब थी, पुणे पहुँच कर मैं सीधा अपने डॉक्टर दोस्त के पास पहुंचा।

जब मैंने उसको सबसे पहले अपना लण्ड निकाल के दिखाया तो वो छूटते ही बोला- तो मिल आए तुम भी रेखा से?

मुझे बड़ी हैरानी हुई, मैंने पूछा- तुम्हें कैसे पता?

वो बोला- तुम पहले आदमी नहीं हो, मेरे पास तुम से पहले भी कई आ चुके हैं।

‘मतलब?’ मैंने पूछा।

वो बोला- रेखा एक भूत है और अक्सर सड़क पे आने जाने वाले अकेले मर्दों को अपनी हवस का शिकार बनाती है, और जो तुम सोच रहे होगे कि तुमने उसको चोदा है, दरअसल उसके मायाजाल में उलझे तुम पत्थर या रेत पे ही अपना लण्ड घिसाते रह होगे, इसीलिए इसकी यह हालत हुई है।

मैं तो हैरान रह गया, मतलब मैंने एक भूत को चोदा या भूत ने मुझको चोदा?
कानों को हाथ लगा लिए तभी कि आज के बाद मैं न रात को किसी अकेली लड़की को लिफ्ट दूँ।

आप अपना देखना, अगर भूत की लेनी है तो रोक लेना गाड़ी।

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