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Sex Stories

भरी जवानी में मैं Sex Stories अपनी क्लास के एक सुन्दर से लड़के से प्यार कर बैठी। झिझक तो खुलते खुलते ही खुलती है। पहले तो हम क्लास में ही चुपके से प्रेम-पत्र का आदान प्रदान करते रहे। एक दिन प्रतीक ने मुझे वहाँ के एक गार्डन में शाम को बुलाया। मैं असमंजस में थी कि जाऊं अथवा ना जाऊं। फिर सोचा कि इसमें डरने की क्या बात है … वहाँ तो और लोग भी होंगे। पर किसी ने पहचान लिया तो फिर … ? चलो मुँह पर कपड़ा बांध लेंगे।

मैंने हिम्मत की और शाम को बगीचे में पहुंच गई। वो मोटर साईकल स्टेण्ड पर ही मेरा इन्तज़ार कर रहा था। हम दोनों उस शाम को बहुत देर तक घूमे। खूब बातें की, पर प्यार की नहीं, बस यूँ ही इधर उधर की। मेरा डर मन से निकलता गया और अब मुझे उसके साथ घूमना-फ़िरना अच्छा लगने लगा। धीरे धीरे हम प्यार की बातें भी करने लगे।

पहले तो मुझे बहुत शरम आती थी, पर मैं अपना चेहरा हाथों से छिपा कर बहुत कुछ कह जाती थी। वो एक बहुत ही शरीफ़ लडका था, उसने मुझे अकेला पा कर भी कोई भी अश्लील हरकत नहीं की। पर मुझे यह अजीब लगता था। मेरी मन की इच्छा तो यह थी कि हम दोनों अकेले में एक दूसरे के यौन-अंगों से छेड़छाड़ करें, कुछ रूमानी माहौल में जाये। कुछ ऐसा करें कि मन की आग और भड़क जाये …

यानि … यानि …

एक दिन मैंने ही पहल कर दी। एकान्त पा कर मैंने अपना चेहरा हाथों में छिपा कर कह ही दिया,”प्रतीक … एक बात कहूँ … ?”

“हां अंजली … कहो …!”

“बस एक बार … एक बार … यानि कि … ” मैं नहीं कह पाई। पर दिल ने सब कुछ समझ लिया। उसने चेहरे पर से हाथ हटाया और मेरे होंठों को चूम लिया।

“हाय … और करो ना … !”

उसने ज्योंही मेरे होंठों पर अपने होंठ रखे, मैंने जोर से उसे भींच लिया और बेतहाशा चूमने लगी। प्रतीक ने मेरे बालों में हाथ डाल कर सहला दिया। मेरी गुलाबी आंखें उस एकटक निहारने लगी। मेरी नजरें स्वतः ही झुक गई।

इसी तरह एक दिन मैंने उसके हाथों को मेरे सीने पर रख कर स्तनों को दबाने को कह दिया।

उसने बड़े ही प्यार से मेरे स्तन सहलाये और दाबे … । अब मुझे प्यार में सेक्स का भी मजा आने लगा था। फिर वो घड़ी भी आई जब मैंने उसका हाथ मेरा कुर्ता ऊपर करके अपनी चूत पर रख दिया। वो उसे सहला कर मेरे नक्शे का जायजा लेने लगा। मेरी गीली चूत का भी उसे अहसास हो गया।

मैंने भी हिम्मत करके उसका लण्ड पकड़ लिया और सहलाने लगी।

अब अधिकतर यही होने लगा था कि हम किसी कोने या अंधेरी जगह को तलाशते और एक दूसरे के अंगों के साथ खेलते और वासना में लिप्त हो जाते।

एक दिन प्रतीक ने मुझसे चुदवाने को कहा। मैं डर गई, मुझे तो इसी खेल में मजा आने लगा था। पर चुदना, मतलब उसके लण्ड को मेरी चूत में घुसवाना पड़ेगा। जाने क्या होगा … ? मैं उसे टालती रही। यूँ हम सालभर तक ऐसे ही वासना भरा, अंगों की छेड़छाड़ का खेल खेलते रहे। हां अब हम कभी कभी अपना यौवन रस भी निकालने लगे थे। उसका तो वीर्य भी ढेर सारा निकलता था। उसका लण्ड वास्तव में मोटा था। उसका सुपाड़ा भी मैंने देख लिया था, बड़ा सा फ़ूला हुआ लाल टमाटर जैसा था, पर उस समय वो उत्तेजित था।

यूँ ही करते करते मेरी शादी भी पक्की हो गई। शादी का समय भी आ गया और फिर देखते ही देखते शादी भी हो गई। हम दोनों इस बार बहुत ही फ़ूट फ़ूट कर रोये थे। हम में भाग कर शादी करने की भी हिम्मत नहीं थी। हमारी कसमें, वादे सभी कुछ किताबी बातें बन कर रह गये थे। तारे तोड़ कर लाना बस मुहावरा बन कर ही रह गया था।

मेरे पति बंसी लाल की एक बड़ी दुकान थी, जो बहुत अच्छी चलती थी। वो अधिकतर दिल्ली या कलकत्ता आता जाता रहता था। मेरे लिये बहुत सी चीज़ें लाया करता था। मुझे वो बहुत प्यार करता था। चुदाई भी बहुत बढ़िया करता था। हां, गालियां वगैरह नहीं देता था। जब भी बंसी लाल शहर से बाहर जाता तो मैं प्रतीक के कमरे पर चली जाती थी।

उन दिनों मेरी जिन्दगी रंगो से भरी हुई थी। मुझे सब कुछ सुहाना और सुन्दर सा लगता था। मेरा मन खिला खिला सा रहता था। मेरा पति मुझे बहुत प्यार करता था और मेरा प्रेमी मुझ पर अब भी जान छिड़कता था। दोनों ही मुझे बहुत खुश रखते थे। आज भी मैं अपनी स्कूटी से प्रतीक के घर आ गई थी। प्रतीक हमेशा की तरह अपनी पढ़ाई में लगा था। मुझे देखते ही वो खुश हो गया और मुझे अपने आलिंगन में जकड़ लिया। सदा की तरह उसका लण्ड खड़ा हो गया और मेरी गाण्ड की दरार में घुसने लगा। मुझे बस रंगीनियाँ ही रंगीनियाँ नजर आने लगी।

कुछ देर तक तो हम चूमा-चाटी करते रहे … फिर मैंने उसका लण्ड पकड़ लिया और सहलाने लगी। आज उसने अपना पजामा उतार दिया और अपना नंगा लण्ड मेरे हाथों में थमा दिया। उसका मोटा लण्ड मेरे दिल में पहले ही बसा हुआ था, सो उसे मैंने हौले हौले रगड़ना चालू कर दिया। उसने भी आज पहली बार मेरी साड़ी उतार दी और हाथ ब्लाऊज में घुसा दिया। मुझे इस से थोड़ी तकलीफ़ हुई फिर मैंने उसका हाथ हटा दिया।

“ऐसे मत करो, लगती है … बस अब मैं चलती हूँ !”

पर प्रतीक ने मेरी एक ना सुनी। उसने मुझे बिस्तर पर लेटा दिया और मेरे ऊपर चढ़ गया।

“ये मत करो, पति के अलावा दूसरा कोई नहीं … !!” मैं कुछ आगे कहती, प्रतीक ने चुप करा दिया,”मैं दूसरा नहीं हूँ, मैं तुम्हें प्यार करता हूँ, आज मुझे सब करने दो … “

“नहीं प्रतीक, बस ऊपर ही ऊपर से कर लो … “

“प्लीज बस एक बार चुदा लो … देखो मैं तो तुमसे कब से प्यार करता हूँ, मेरी कसम है तुम्हें … देखो तुमने मेरा क्या हाल कर दिया है … प्लीज अंजली … “

उसका यह हाल देख कर मुझे भी ठीक नहीं लगा। सोचा किसको पता मालूम चलेगा, सच है ये कब से तड़प रहा है … मैं पिघलने लगी। मैंने अपनी साड़ी ऊंची कर ली।

“तुम्हारी कसम अंजली … तुमने तो आज मेरा दिल जीत लिया … ” और वो मुझ पर झुक गया, मुझे प्यार से चूमने लगा, उसका लण्ड मेरी चूत में घुसने लगा। मुझे लगा उसका लण्ड मेरे पति से बहुत मोटा है … कसता हुआ सा भीतर जाने लगा।

आनन्द से मेरी आंखें बंद होने लगी। उसने धीरे धीरे अपना लण्ड मेरी चूत में पूरा उतार ही दिया। दूसरा लण्ड, नया लण्ड … अलग ही आनन्द दे रहा था। मैंने प्यार से प्रतीक को देखा और अपनी ओर खींच लिया।

“प्रतीक … बहुत मजा आ रहा है … अब तक क्यों नहीं चोदा तुमने !”

“तुम ही दूर रही मुझसे … तुम तो मेरी जान हो … आह्ह्ह … !”

वो मेरे से प्यार से लिपट गया और उसके चूतड़ मेरी चूत के ऊपर भचाभच चलने लगे। मैं भी उसे प्यार से चूमने चाटने लगी। मैं अब पलट कर उसके ऊपर आ गई और उसके लण्ड पर बैठ कर चुदने लगी। उत्तेजना के मारे मेरा बुरा हाल था।

उसका लण्ड मेरी चूत को मस्ती से चोद रहा था। कितनी खुशी लग रही थी मुझे।

उसका मोटा लण्ड मेरी योनि में अब भी कसता हुआ आ जा रहा था। मीठी सी गुदगुदी तेज हो गई। मुझे लगा कि मैं चरम बिन्दु तक पहुंच गई हूँ और अब मुझे नहीं सहा जायेगा। तभी मेरा रज छूट गया। प्रतीक ने झट से पोज बदला और मुझे घोड़ी बना दिया और देखते ही देखते उसका लण्ड मेरी गाण्ड में फ़ंस चुका था। मेरी गाण्ड खासी चिकनी थी और खुली हुई थी। उसने लण्ड को भीतर घुसा दिया और आगे पीछे करने लगा। मुझे फिर से आनन्द आने लगा। उसका ये सब इतने प्यार से करना मुझे बहुत पसन्द आया। उसका तरीका इतना अच्छा था कि कोई एक बार चुद जाये तो बार बार लण्ड खाने की इच्छा हो !

मैंने उसे कहा,”प्रतीक, एक बार और मेरी चूत चोद डालो, प्लीज !”

उसने जल्दी से लण्ड बाहर निकाल कर चूत में घुसेड़ दिया। मुझे फिर से असीम आनन्द की दुनिया में पहुँचा दिया। सच में कुतिया के पोज में ज्यादा मस्त चुद रही थी। धक्के अन्दर तक ठोक रहे थे। मधुर चुदाई ने फिर रंग दिखाया और मैं फिर से झड़ने के कगार पर थी। मस्त चूत की उसने जम कर ठुकाई की उसने और मेरा रस फिर से चू पड़ा। तभी उसका वीर्य भी निकल पड़ा। मेरी चूत उसके वीर्य से लबालब भर गई और फिर उसका लण्ड सिकुड़ कर बाहर आता प्रतीत हुआ।

उसने जल्दी से अपनी कमीज को मेरी चूत पर लगा दिया और उसे साफ़ करने लगा।

मैने पीछे मुड़ कर उसे प्यार से देखा। वो बड़े अच्छे तरीके से मेरी चूत को साफ़ करने में लगा था।

“प्रतीक, तुमने मुझे ये सुख पहले क्यों नहीं दिया … ?”

“यह तो सब समय की बात है, तुमने मुझे हाथ लगाने दिया तो मेरी किस्मत खुल गई।”

“हाय राम, अपन इतने दिनों तक बेकार ही यूँ ही मसला-मसली करते रहे, चुदाई कर लेते तो कितना आनन्द आता … ! है ना ?… अपन तो अपने आप को वासना की आग में जलाते रहे … मुठ मारते रहे … प्रतीक, साले तुमने मुझे जबरदस्ती क्यों नहीं चोद दिया?”

“मैं तुम्हें प्यार करता हूँ … कोई जानवर तो नहीं हूँ … “

“कसम खाओ, अब रोज ही ये सब करेंगे … तुम्हारा लण्ड मुझे बहुत ही अच्छा लगा !”

“बस जान लो … आज से ये लण्ड तुम्हारा ही है।”

हम दोनों एक बार फिर से लिपट गये और अब मुझे चोदने वाला पति के अलावा प्रतीक भी था। एक बार फिर से हमने मरने जीने की कसमे खाने लगे, चांद तारे तोड़ कर लाने की बातें करने लगे … मरने जीने की कसमें खाने लगे … आह्ह्ह्ह्ह … … Sex Stories

Antarvasna

कमलिनी का Antarvasna महीना हुए चार दिन हो चुके थे और मैं उसको चोदने की योजना बना रहा था। शाम के समय मैं अपने कमरे में चाय पी रहा था तो मैंने देखा कि कमलिनी अपने छज्जे पर खड़ी होकर सड़क का नज़ारा देख रही है, मुझसे नज़र मिली तो हलके से मुस्कुरा दी। मुझसे चुदवाने के बाद आज पहली बार सामना हुआ था, मैंने अपनी जेब से मोबाइल निकाला और कमलिनी का नम्बर डायल कर दिया। घंटी बजने पर उसने अपना मोबाइल देखा, फ़िर मुझे देखा तो मुस्कुरा कर फ़ोन काट दिया और मेरे पास आकर खड़ी हो गई। मैंने हाल चाल पूछा तो बोली- ठीक है !

मैंने पूछा- आज रात को आओगी?

तो शरमाकर बोली- नहीं ! मैंने कहा- मैं तुम्हारा इंतज़ार करूंगा।

रात को लगभग १२ बजे मेरे मोबाइल पर मिस्ड-कॉल आई, देखा तो कमलिनी की थी। मैंने कॉलबैक किया तो बोली- क्या कर रहे हैं?

मैंने कहा- तुम्हारा इंतज़ार !

तो बोली- अभी आ रही हूँ ! ५ मिनट बाद कमलिनी मेरे कमरे में आई और आते ही मुझसे लिपट गई। मैंने उसके बदन पर हाथ फेरा तो पाया कि उसने सिर्फ़ गाउन पहना हुआ था। गाउन के अन्दर ब्रा और पैंटी नहीं पहनी थी। मैं समझ गया कि छोरी चुदवाने की पूरी तैयारी कर के आई है।

दीवान के पास आकर उसका एक पैर मैंने दीवान पर रख दिया और उसका गाउन कमर तक उठा दिया। अपना लोअर मैंने उतार दिया और लंड उसकी चूत पर रखना चाहा तो मेरी खुशी का ठिकाना नहीं रहा, आज उसकी चूत पर एक भी बाल नहीं था। अपनी झांटें साफ़ करके उसने चूत की सुन्दरता को चार चाँद लगा दिए थे। मैंने चोदने का इरादा फिलहाल छोड़ा और उसकी चूत चाटने लगा। उसने भी पोजीशन बदली और मेरा लंड अपने मुंह में लेकर चूसने लगी। १० मिनट तक मुख-मैथुन का मज़ा लेने के बाद मैंने अपने लंड पर कंडोम चढाया और उसकी चूत में डाल दिया।

जमकर चोदने के बाद जब मैंने उसकी चूत में डिस्चार्ज किया तो मैं ख़ुद को जन्नत में महसूस कर कर रहा था। अब हमारी चुदाई की गाड़ी पटरी पर हौले हौले चल रही थी, दूसरे तीसरे दिन वह मुझसे चुदवा लेती थी, इतना मेरे लिए भी काफ़ी था और उसके लिए भी।

अब हमारी कहानी में एक तीसरा पात्र आ गया। मेरी पत्नी की एक ममेरी बहन श्वेता इसी शहर में रहती थी। एक दिन लगभग ११ बजे मैं ऑफिस में था कि मेरी पत्नी का फ़ोन आया कि वह श्वेता के घर जाना चाहती है।

मैंने कहा- चली जाओ !

तो बोली- मैंने खाना बना दिया है और चाभी रागिनी भाभी को दे दी है, शाम को ४-५ बजे तक आ जाऊंगी।

मैंने कहा- ठीक है।

दोपहर को १ बजे मैं लंच करने घर आया, घंटी बजाई तो रागिनी भाभी बोलीं- चाभी लेकर आ रही हूँ।

उन्होंने मुझे चाभी दी, मैंने ताला खोला और वो भी अन्दर आ गई, उनके घर में भी कोई नहीं था, डॉक्टर साहब क्लीनिक और लड़कियां कॉलेज गई थीं। अन्दर आकर बोलीं- रेखा दाल सब्जी बनाकर गई है और मुझसे कह रही थी कि रोटी मैं सेंक दूँ।

रागिनी का गदराया हुआ बदन और एकांत मेरे लंड को खड़ा कर चुके थे और मैंने उनको चोदने की ठान ली थी।

मैंने कहा- भाभी आप कुछ देर बैठिये, मैं नहा लूँ, फ़िर खाना खाऊँगा।

भाभी वहीं कुर्सी पर बैठ गईं। मैंने उनको गरम करने के लिए जानबूझकर वहीं अपनी शर्ट उतारी और फ़िर बनियान भी उतार दी। भाभी शर्म के मारे इधर उधर ना देखें इसलिए उनसे कुछ ना कुछ बात करता रहा। मैंने कहा- दोपहर में नहा लेने से शरीर में ताजगी आ जाती है और मैंने अपनी पैंट भी उतार दी। अंडरवियर में से मेरा तन्नाया हुआ लंड साफ़ नज़र आ रहा था। मैंने अपना तौलिया कमर पर लपेटा और अंडरवियर उतारते उतारते बोला- भाभी जी अगर आप बुरा ना मानें तो एक बात कहूं?

बोलीं- कहिये !

मैंने कहा- ऐसा लगता है जैसे भगवान् जोड़ियाँ बनाते समय गलती कर गया है, मैं आप जैसी पत्नी डिजर्व करता था और रेखा को डॉक्टर साहब की पत्नी होना चाहिए था। अगर ऐसी जोड़ियाँ होतीं तो मेरी ज़िन्दगी जन्नत से कम न होती।

भाभी उठीं और बोलीं- काश ऐसा होता तो मैं हर पल तुम्हारी बाहों में ही गुजारती।

इतना सुनते ही मैंने उनका हाथ पकड़ कर चूमा और अपनी आंखों से इस तरह लगाया कि मैं धन्य हो गया। मैं एक कदम उनकी ओर बढ़ा और अपनी बाहें फैलाकर उन्हें अपने करीब आने का इशारा किया, वो मेरे सीने लग गईं, मैंने अपना एक हाथ उनकी कमर पर और दूसरा टांगों के पास ले जाकर उनको अपनी गोद में उठा लिया, मेरे कसरती बदन को निहारते हुए बोलीं- उतार दो दीपक ! मैं बहुत भारी हूँ !

मैंने कहा- भाभी मेरे प्यार के सामने आपका भार कुछ भी नहीं !

मैं उनको रेखा के बेडरूम में ले आया और पलंग पर लिटाकर उनसे लिपट गया। वो मेरे से लिपटी हुई छुई मुई हुई जा रहीं थीं। एक एक करके उनके सारे कपड़े मैंने उतार दिए और उनके होठों पर अपने होंठ रखकर एक हाथ से उनके मम्मे और दूसरे से उनकी चूत सहलाने लगा। थोडी देर में जब उनकी चूत गीली हो गई तो मैं उठा और अलमारी से कंडोम निकालकर अपने लंड पर चढ़ाने लगा तो भाभी बोलीं- दीपक जी इसकी कोई जरूरत नहीं है, मैं २० साल पहले नसबंदी करा चुकी हूँ।

मैं वापस पलंग पर आया, उनकी टाँगे फैला कर अपने लंड का सुपाड़ा उनकी चूत के मुंह पर रखा और पूरा लंड उनकी चूत के अन्दर कर दिया।

भाभी बोलीं- दीपक जी, एक बात पूछूं?

मैंने कहा- पूछिए !

तो बोलीं- तीन साल बाद आपका लंड किसी की चूत में जा रहा है तो कैसा लग रहा है?

मैंने कहा- आपको यह कैसे पता है?

तो बोलीं- रेखा ने मुझे बताया था कि मेरी इच्छा नहीं होती।

इस बातचीत के साथ साथ मेरा लंड अपना काम कर रहा था। उस दिन १ बजे से ४ बजे तक भाभी को दो बार चोदा।

मैंने पूछा- भाभी, सच बताना ! तुम्हारा देवर चोदने में कैसा है?

तो बोलीं- टचवुड। बहुत अच्छा !

मैंने कहा- अच्छा भाभी, एक बात और बताओ कभी गांड मराई है?

बोली- नहीं कभी नहीं ! शुरू शुरू में एक दो बार डॉक्टर साहब ने मारनी चाही थी लेकिन उनका लंड गांड में घुसा ही नहीं।

मैंने कहा- भाभी मैं तुम्हारी गांड मारूंगा, मराओगी ?

बोलीं- हाँ मेरे राजा जरूर मराउंगी।

फ़िर भाभी ने रोटियां सेंकी, हम दोनों ने खाना खाया और भाभी अपने घर चली गईं।

बाकी कहानी अगली बार लिखूंगा, इंतज़ार करिए… Antarvasna

प्रेषक : रेखा शर्मा Hindi Sex Stories

हाय, मैं रेखा, फिर से आपके Hindi Sex Stories लिये अपनी जिंदगी का एक हसीन पल लेकर उपस्थित हुई हूँ, मेरी प्रथम कहानी के लिये मुझे आपका बहुत ढेर सारा प्यारा मिला, सभी को अलग अलग जवाब देने के लिये मेरे पास समय भी कम पड़ गया। आप सभी को को मेरा दिल से प्यार और धन्यवाद।

आइए, आपको अभी ही 3 अक्टूबर की सच्ची बात बताती हूँ।

2 अक्टूबर को मेरे पति के ऑफ़िस की गांधी जयन्ती की छुट्टी थी, पर काम के सिलसिले में उन्हें आज बाहर जाना था ताकि अगले दिन वो बैठक में भाग ले सकें। आप जानते ही हैं कि खाली दिमाग शैतान का घर होता है, मेरे सेक्सी दिमाग ने एक दम से ही एक योजना बना डाली। मैंने अपने बॉय-फ़्रेण्ड कुलदीप को फोन कर दिया। मैंने नीता से भी कहा, पर डर के मारे उसने कुछ नहीं कहा।

कुलदीप समय पर आ गया था। हम दोनों शाम को बाज़ार घूमने निकल पड़े। वहां कुलदीप ने मेरे लिये ब्रा और एक छोटी सी प्यारी पेण्टी ली। मैंने भी उसके लिये एक बढ़िया सा अंडरवियर लिया। इसका सीधा सा मतलब था कि हमें रात की चुदाई में ये सब ही पहनना है। यही हमारी दिवाली का तोहफ़ा भी था।

रात ढलते ढलते हम घर आ चुके थे।

रात को जब मैं खाना बना रही थी तो कुलदीप अपने घर जाकर जाने कब लौट आया। नीता को उसके आने के बारे में पता नहीं था। नीता मुझसे कुलदीप के बारे में ही पूछ रही थी कि हम दोनों ने क्या क्या मजे किये ?

मुझे लगा कि उसकी चूत भी यह सोच सोच कर गीली हो रही थी कि मैंने लण्ड कैसे लेती हूँ, वगैरह।

मैंने उसे बताया कि यदि मैं बताऊंगी तो फिर अपने आप को रोक नहीं पाऊंगी।

“अरे वाह, ऐसा क्या किया था तुम दोनों ने ? बता ना दीदी?”

“अच्छा तू अपना काम खतम कर फिर बताऊंगी तुझे !”

हम दोनों ने फ़टाफ़ट अपना अपना काम समाप्त किया … तभी मेरे मन एक प्यारा सा ख्याल आया कि क्यों ना नीता मेरे साथ मिलकर रात को चुदाई का मजा ले। मैंने नीता को कहा,”देख बात तो बहुत लम्बी है … रात को मेरे साथ ही सो जाना … मैं पूरी कहानी बता दूंगी !”

“हाय नहीं रे दीदी, तू कुछ ना कुछ गड़बड़ जरूर करेगी, मुझे तो शरम आयेगी !”

“तुझे सुनना है तो बोल वरना तेरी मर्जी …”

ये सब बातें कुलदीप सुन रहा था, उसे लगा कि आज रात की चुदाई तो गई, पर उसे क्या पता था था कि मैं उसी के लिये तो नई चूत का इन्तज़ाम कर रही हूँ ! और नीता के लिये एक सोलिड नया लण्ड तैयार कर रही हूँ। नीता ने कुछ सोच कर कहा कि मुझे पूछना पड़ेगा उन्होने हां कह दी तो मैं अभी आ जाती हूँ।

जैसे ही नीता जाने लगी तो मैंने उसे पीछे से आ कर उसकी कमर को पकड़ कर अपने से चिपका लिया और उसकी बड़ी-बड़ी चूचियाँ दबा दी … और उत्तेजना में मसल दी …

“उफ़्फ़्फ़्फ़, दीदी … हाय रे …” और वो हंस पड़ी

“सॉरी, नीता … जल्दी आना … मैं इन्तज़ार करूंगी” और हंस कर आंख मार दी।

“दीदी … अब तो बड़ी बेशरम हो गई है तू … अभी आती हूँ …” नीता चली गई।

बैचेन सा कुल्दीप बाहर आया और असमन्जस में बोला,”अक्षी, आज की चुदाई का क्या होगा …?”

“क्यों … क्या हुआ … तेरा लण्ड तो मस्त है ना … या कुछ …?”

“ओह्ह हो … तुमने नीता को बुलाया है ना …?”

“मेरे जानू, आज मैं तुम्हें वो मजा दूंगी कि हमेशा याद करोगे, बस अब देखते जाओ !”

कुलदीप के मुख पर एक प्यारी सी मुस्कुराहट तैरने लगी, शायद उसे कुछ अंदाज़ा हो गया था। खाना बनाने के बाद मैं बैठक में आ गई। कुलदीप नहाने चला गया … कुछ ही देर में बाथरूम से उसने आवाज दी,”अक्सू, जरा यहाँ आना …!”

मैं बाथरूम के पास गई और दरवाजा खोला। उसे देखकर मैं सन्न रह गई, वो पूरा नंगा था … उसका मोटा और भारी लण्ड कड़क होकर सीधा तना हुआ था। मेरे मन में हलचल होने लगी। दिल धड़क उठा। उसे मैंने यों पहली बार देखा था। उसका नंगा और चिकना बदन, उस पर पानी की बूंदें उसे बला का सेक्सी बना रहा था। मेरे मन में वासना का उबाल आने लगा। मेरे चुचूक अकड़ गये, चूत से पानी रिसने लगा। वो खड़े खड़े अपना लण्ड हिला रहा था, उसका लाल सुपारा गजब ढा रहा था। मैं शर्माती हुई अन्दर चली आई, उसने मुझे आँख मार दी, मेरी नजरें झुक गई और मैंने धीरे से उसका फ़ड़फ़ड़ाता हुआ लौड़ा अपने हाथों में भर लिया।

“मेरी पीठ पर साबुन लगा दे … जरा रगड़ कर …” मैं उसकी पीठ पर साबुन मलने लगी, साथ ही साथ अपना हाथ उसके कड़े चूतड़ो पर भी फ़िसलने लगा।

उसके चूतड़ों की गहराई में हाथ घुस कर उसे मजे दे रहा था। दूसरे हाथ से मैंने उसकी चौड़ी छाती पर उसके जरा से निपल को मसलने लगी। मैंने उसकी छाती पर अपना सर रख दिया और साबुन वाले हाथ नीचे लण्ड पर उतर आये। उसके लण्ड पर साबुन मलते हुये उसका जैसे मुठ ही मारने लगी। कुलदीप ने अपनी आंखें बन्द कर ली … और उसके गीले हाथ मेरे उन्नत वक्ष पर आ गये। कुछ ही देर में उसने मेरी चूचियाँ बाहर निकाल ली और एक दूसरे को मसला-मसली का दौर चल पड़ा। उसका पूरा शरीर साबुन के झाग से ढक गया था। जाने कब हम दोनों के होंठ आपस में जुड़ गये … सच में बहुत आनन्द आ रहा था … स्वर्ग जैसा आनन्द … ।

लण्ड की घिसाई से वो बहुत आनन्दित हो रहा था। तभी उसने मुझे खींच कर शॉवर के नीचे कर लिया और पानी बरसा दिया। मेरे कपड़े भीग उठे, मेरे चिकने स्तन पानी से भीगे हुये थे। एकदम फ़ूल कर कड़े हो गये थे। मेरे गीले बदन को भोगने की नजर से देखने लगा … मैं समझ गई थी कि अब उसका लण्ड मुझे चोदने के लिये तैयार है। मेरे हाथ उसके लण्ड पर तेजी से मुठ मार रहे थे। उसने मेरे रहे सहे कपड़े भी उतार दिये। मेरी आंखों में नशा सा छा गया। वो मुझे बेहद सेक्सी लगने लगा था। चुदने को चूत लपलपाने लगी थी। मुझे एक झुरझुरी सी आई और मैं उससे एक दम चिपक गई। हमारे अधर एक दूसरे को पी रहे थे …

चूसने की आवाज यूं आ रही थी मानो आम चूस रहे हों … क्या रस भरा महौल था …

मेरा अंग अंग मसले जाने को बेताब हो रहा था। उसका लण्ड अब भी मेरी मुठ्ठी में था। उसने मेरे निपल को दांतो से काट सा लिया … मेरी चूत पर जैसे आग में घी के जैसा असर होने लगा। चूत में आग सी लग गई,”दीपूऽऽऽऽ अह्ह्ह् … मार डाला रे तूने तो …”

“मेरी रानी … तेरे अंग बहुत मद भरे हैं … आह्ह्ह्ह”

मुझसे रहा नहीं जा रहा था। इसका सुन्दर, मोहक लण्ड मेरे दिल को पिघला रहा था। अनजाने में मैं नीचे बैठती गई और अब उसका मनमोहना सुन्दर लण्ड मेरे होंठो के पास था। मैंने उसका लाल तड़पता हुआ सुपारा अपने मुख में भर लिया और चूसने और काटने लगी।

“हाय रे … मेरा लण्ड काट कर खा मत जाना … श्स्स्स्स्स्स्स् … निकल जायेगा रानी” उसकी सिसकी फ़ूट पड़ी। मैं अब जल्दी जल्दी उसके लण्ड को अपने मुख में अन्दर बाहर करने लगी, उसका लण्ड बुरी तरह से फ़ड़फ़ड़ा रहा था। वो भी झुक कर मेरे स्तनों को मरोड़ने और खींचने लगा। उसने मुझे अब प्यार से उठाया और खड़ा कर दिया। उसने मेरे मस्तक पर चूमा, फिर मेरे होंठो को, मेरे कंधे पर, फिर मेरे उरोज पर, नाभी पर … हाय राम …

वो तो मेरी चूत तक पहुंच गया। उसके होंठ मेरी गीली और चिकनी चूत के लबों में पहुंच कर उस रस का स्वाद लेने लगे … मेरी चूत की चिकनाई में वासना से भरे बुलबुले भी उभर आये थे, जैसे चूत में रस का मन्थन हो रहा हो। मेरा वो पहला प्यार था, उसके लिये मैं सब कुछ कर सकती थी … मेरे मन भी चूत चुसवाने को मचल रहा था। दिल को दिल से रहत होती है … वो मेरी अदायें समझता था। मेरी टांग अपने आप एक तरफ़ उठ गई और मेरी चूत का मुख खुल गया उसकी जीभ मेरी चूत के अन्दर तक चाट रही थी। दाना फूल कर लाल हो गया था। बार बार होंठो से चुसने के कारण मेरे तन की आग भड़कने लगी थी।

मैंने उससे कहा,”कुलदीप मुझे तेरा लण्ड चूसना है … बड़ा ही मस्त है रे …”

वो मुस्करा उठा और वहीं बाथरूम में सीधा लेट गया। वो जब मेरी चूत चूसता है तो मेरा मन करता है कि मैं अलादीन का चिराग बन जाऊँ और जो वो मांगे दे दूं।

मैं कुलदीप पर उल्टा लेट गई। हम अब 69 पोजीशन में थे। वो मेरी चूत के रस का स्वाद ले रहा था और मैं उसके मोटे और सुन्दर लण्ड को बड़े प्यार से चूस रही थी, कभी कभी काट भी लेती थी और फिर उसके सुपारे के छल्ले को कस कर और खींच कर चूस लेती थी। मेरे अंगों में तरावट सी आने लगी … जिस्म कंपकंपाने सा लगा … एक मीठी सी लहर उठने लगी …

“दीपू … मेरा पानी निकल जायेगा … हे मेरी मां … कैसा कैसा हो रहा है …”

“मेरी प्यारी अक्सू … निकाल दे पानी … तू मेरा रस पी सकती है तो क्या मैं तेरा रसपान नहीं कर सकता …?”

मैं अपनी उच्चतम सीमा को पार करने ही वाली थी … कि उसने चूसने की स्पीड बढ़ा दी और अपनी जीभ और दो अंगुलियाँ मेरी चूत में समा दी। मैं लहरा उठी और मेरी चूत उसके मुँह से भिंच गई और आग उगलने लगी … पानी छूट गया … मैं झड़ने लगी …।

अब मेरी बारी थी, मैंने उससे कहा कि अब अपना वीर्य भी मुझ पिलाओ …

उसने प्यार से मुझे सहला कर मुझे बैठा दिया और स्वयं अपना लण्ड मेरे सामने ले कर खड़ा हो गया।

“जानू आज अपने चेहरे को मेरे वीर्य से भिगा दो … मैं अपना ही माल चाट कर देखूंगा !”

मैंने उसका लण्ड मुख में भर लिया और अपने हाथों की ताकत का इस्तमाल किया, कस-कस के मुठ मारने लगी। वो तड़प सा गया। उसका जिस्म लहराने लगा, उसके अंगों में बिजलियाँ दौड़ने लगी। उसने छटपटा कर मेरे मुख से लण्ड निकाल लिया और एक भरपूर मुठ मार कर निशाना बांध लिया। एक तेज वीर्य की धार निकल पड़ी और निकलती ही गई … मेरा पूरा चेहरा जैसे नहा लिया हो … कुछ तो मैंने अपने मुँह में भर लिया पर दूसरे ही पल में कुलदीप मेरे चेहरे पर लपक कर आ गया और अपना ही वीर्य चाटने लगा। उसकी जीभ मेरे चेहरे को गुदगुदाने लगी, मुझे बहुत ही आनन्द आया। मैं खड़ी हो गई, कुलदीप को मेरे चेहरे को भरपूर चाटने को मिल गया था। अभी भी वो मुझे चाट कम रहा था चुम्मा अधिक ले रहा था।

मैंने प्यार में भर कर उसे चिपका लिया और उसकी गर्दन में बाहें डाल कर झूल गई।

कुछ ही देर हम दोनों बाथरूम से बाहर आ गये और मैं अपने कपड़े उठाने लगी।

कुलदीप ने मुझे रोक लिया और कहा,”जानू हमरे बीच में कोई परदा तो नहीं है फिर कपड़ों की क्या जरूरत है, आज ऐसे ही , नंगे ही हम केन्डल लाईट डिनर करेंगे !”

मैं शरमा गई, हाय ऐसे कैसे नंगे होकर हम खाना खायेंगे। अपना गीला बदन लिये हुये मैं अपने बेड रूम में आ गई और आईने के सामने अपने आपको निहारने लगी। मैंने ऊपर एक झीना सा गाऊन डाल लिया। मैं आईने में अपना ही अक्स देख कर शर्माने लगी। सच में बहुत सेक्सी बदन थ मेरा … मेरी उभरी हुई चूचियाँ फिर उस पर पानी बूंदें … कोई भी मुझे चोदने को लालायित हो सकता था।

मैंने अपना गाऊन अपने शरीर पर कस कर लपेट लिया। बदन गीला होने से मेरी गीली चूचियाँ बाहर से ही अपना नजारा दिखाने लग गई थी। मैंने अपना सर झटका …

हाय मैं ये क्या सोचने लग गई। मेरे गीले बदन से गाऊन चिपक गया था। मैंने गाऊन उतारा और नंगी ही बैठक में आ गई। कुलदीप सोफ़े पर लेटा सुस्ता रहा था … उसका लण्ड मुरझाया हुआ था। मुझे देखते ही उसने मुझे अपनी तरफ़ बुलाया।

मैं जैसे ही उसके पास गई उसने मुझे अपने ऊपर गिरा लिया। उसका लण्ड फिर से खड़ा होने के लिये फ़ुफ़कार उठा। मैंने नजाकत देखते हुये उसके लण्ड को थाम लिया और उसके होंठो से होंठ मिला दिये। मुझे इस तरह नंगी घूमते देख कर वो एक बार फिर से भड़क गया।

“चलो हटो ना … अब खाना खा लें …”

कुलदीप ने मुझे छोड़ दिया।

तभी दरवाजे की घण्टी बजी। हम दोनों घबरा से गए।

“कौन है …?”

“मैं नीता …”

रात बहुत हो चुकी थी।

“रुको जरा मैं आई …”

मैंने तुरंत ही कुछ सोच लिया और कुलदीप को बाथरूम में भेज दिया। मुझे नीता को हीट में जो लाना था।

“नीता साथ में और कौन है? रात में रुकेगी ना?”

“अरे बाबा, दरवाजा तो खोल, मेरे साथ कोई नहीं है … तेरे पास ही तो आई हूँ !”

मैंने धीरे से दरवाजा खोला और यहाँ-वहाँ झांक कर देखा। कोई भी नहीं था, तब मैंने उसे अन्दर खींच लिया। मुझे पूरी नंगी देख कर वो चौंक गई। उसने पहली बार मुझे नंगी देखा था।

“ये क्या अक्सू …”

“अभी नहा कर निकली थी कि तू आ गई … इसलिये ऐसे ही आ गई !”

“आह्ह रे अक्सू … तू भी ना ऽऽ”

“देख मैं अच्छी लगती हूँ ना, मेरे ये सब देख … और बता …”

वो झेंप गई और शरमा गई …

“दीदी …बस है ना … ओह दीदी … आप तो बला की सुन्दर हैं !”

“चल, आज मौका है … तुझे एक सेक्सी बात जाननी थी ना … आज तुझे लाईव दिखा दूँ !”

“मैं समझी नहीं दीदी … क्या दिखाओगी …?”

“सब कुछ समझ जाओगी … देखो शर्माओ मत … बता भी दो अब …”

वो शर्मा उठी और मुस्कराते हुये धीरे से हां में सर हिला दिया। वो सब कुछ समझ चुकी थी कि मैं उसके साथ कुछ करने वाली हूँ। वो कुछ ऐसे ही विचार में डूबने सी लगी उसके मन में वासना का गुबार उठने लगा।

मैंने उसे कहा कि वो मेरे बेडरुम में चली जाये और चुपके से बिना आवाज के दरवाजे से झांक कर देखते रहना। वो कुछ असमन्जस में उठी और बेडरूम में चली गई।

मैंने कुलदीप को बाथ से बुला लिया … वो कुछ आश्चर्य से बोला,”तुम ऐसे ही उसके सामने चली गई … नंगी … वो गई क्या?”

“अरे वो मेरी पड़ोसन है … गई वो तो … चलो खाना खा लें …”

हम नंगे ही खाना खाने बैठ गये। खाना खाते समय वो मेरे स्तन दबा देता था, चुचूकों को ऐंठ देता था। मैं भी उसका लण्ड सहला देती थी। उसका भी खड़े लण्ड के साथ खाना मुश्किल हो रहा था। हमारी ये सब मस्ती नीता देख रही थी। मैं नीता को बार बार आँख मार रही थी। नीता भी ये सब देख कर उत्तेजित हो रही थी। कुलदीप ने एक ब्ल्यू फ़िल्म की सीडी निकाली और उसे लगा दी। पहले ही सीन में दो लड़कियां एक लड़के से चुदवा रही थी।

“कुलदीप, तुम्हारा मन एक साथ दो चूतों को चोदने का नहीं करता ?”

वो शरमा गया “अरे नहीं, तू ये क्या कह रही है …”

“अरे बता ना … बेचारा लण्ड तो कुछ कहेगा नहीं …”

“देख बुरा मत मान लेना … दो चूत चोदने का किसका मन नहीं करेगा … फिर एक साथ दो लड़कियाँ क्युँ चुदवायेगी, खैर ! मेरे ऐसे नसीब कहाँ …”

“अच्छा … मेरे साथ तुम्हें चोदने को दो चूत मिल जायें तो …?”

नीता सब सुन रही थी और उसे शायद ये मालूम हो गया था कि दूसरी चूत उसी की होगी।

पहले तो वो मना करता रहा पर मैंने उसे मना ही लिया। नीता अपने होंठों पर जीभ फ़िरा रही थी और अब अपने होंठ काटने लगी थी। उसकी चूत में रस चूने लग गया था।

मैं नीता को उत्तेजित करने के लिये कुलदीप का लण्ड पकड़ कर उसे हिलाने लगी। उसका लण्ड मस्ती से झूमने लगा। कड़क हो उठा … नीता अपनी बड़ी बड़ी आंखों से उसे बड़े मोहक तरीके से निहार रही थी। मैं नीता को आंख मार कर मुस्करा रही थी। मैंने उसकी आंखों में उत्तेजना देखी और उसे इशारा किया लण्ड पकड़ने के लिये। उसने जल्दी से सर हिला कर मना किया। फिर मैंने उसे लण्ड मुँह में लेने का इशारा किया। वो शरमा कर हंस दी … यानी कि हंसी और फ़ंसी। मैं समझ गई उसे ये सब पसन्द है। मैंने कुलदीप का लण्ड मुँह में लिया और चूसने लगी और उसे देखने लगी। फिर मैं अपनी अंगुली अपनी चूत में डाल कर हिलाने लगी।

वो उत्तेजना से बेहाल थी। मैंने उसे फिर इशारा किया कि वो बाहर आ जाये।

उसने शर्म के मारे फिर ना कर दिया। मुझे लगा कि उसे समझाना पड़ेगा। मैं अन्दर गई और उससे कहा तो बोली कि शर्म आती है। मैंने उसके बोबे दबाये और कहा,”क्यूँ ! मन चुदने का नहीं हो रहा है क्या ?”

उसका शर्माना उसकी हां कह रहा था। वो शरमा कर नीचे देखने लगी। उसने धीरे से सर हिला कर हां कहा। पर फिर कहा कि वो मुझे देख लेगा तो। मैंने उसे स्कीम बताई, मैं लाईट बन्द करके अंधेरा कर दूंगी फिर जब मैं घोड़ी बनूं तो मैं उसे तेरे पास ले आऊंगी वो तुझे चोद देगा।

कुछ भी ना बोलना और हां वो लण्ड मेरा है, उसे हाथ भी मत लगाना। यह कह कर दोनों ही हंस पड़ी।

मैं वापस आकर उसके लण्ड से खेलने लगी और वो मेरे चुचूकों से खेलने लगा। फिर एक हाथ मेरी चूत पर रख कर उसे रगड़ने लगा। फिर चूत में अंगुली डाल कर अन्दर-बाहर करने लगा। उसका लण्ड मेरी चूत को मिसकॉल मारने लगा। मैं सोफ़े पर झुक गई और वो मेरी चूत खोलकर उसे चाटने लगा। मैं सिसकियाँ भरने लगी।

नीता सिसक उठी, मेरी नजरें उसी पर थी। कुलदीप ने अपना पूरा लण्ड चूत में घुसा दिया। मेरे मुख से उफ़्फ़्फ़्फ़ निकल गई। उसके लण्ड को चूत में से निकाल कर मैंने उसे अपने मुख में भर लिया और चूसने लगी। वो तड़प उठा और बोला,”अक्सू … आज तो अपनी गाण्ड प्यारी के दर्शन करा दे …”

मुझे भी बहुत समय हो गया था गाण्ड मरवाये सो मैंने भी लण्ड को गाण्ड का रास्ता दिखा दिया।

गाण्ड गीली होने से उसका लण्ड सट से छेद में घुस पड़ा। कुलदीप बोला,”अरे चूत इतनी टाईट कैसे हो गई?”

मैं हंस पड़ी। उसे मालूम था या वो अन्जान बन रहा था।

“सुनो जनाब, आपका लौड़ा मेरी गाण्ड में है, तुम्हें पता ही नहीं चला कि लौड़ा तुमने किस छेद में डाला?”

यह सुन कर वो खुश हो गया। मैं गाण्ड चुदाने के नशे में डूब गई। तभी मुझे नीता का ध्यान आया। मैंने घूम कर उसे देखा तो वो अपनी चूत दबा कर सिसकियाँ भर रही थी।

मैंने कुलदीप को देखा वो मस्ती में मेरी गाण्ड चोदे जा रहा था।

“सुनो बेड रूम में चलो, तुम्हें एक सरप्राईज देना है !”

” हाय, वो सब बाद में ! पहले पानी तो निकाल दूं !”

“नहीं, पहले आओ तो … चलो …!” मैं उसे धकेलते हुये बेडरूम में ले आई। तभी उसे नीता की एक झलक मिली, नीता तुरन्त ही परदे के पीछे छिप गई। उसे लगा कि शायद उसे भ्रम हुआ है। वो बिस्तर पर लेट गया। मैं उसके ऊपर लेट गई और उसकी आंखों पर अपनी चुन्नी बांध दी।

“अब रुको, मैं अभी आई …” मैंने लाईट बन्द कर दी। मैंने नीता को बुलाया और उसे सब समझा दिया। नीता ने उसके खड़े लण्ड को धीरे से अपने मुँह में ले लिया। पर उसकी स्टाईल अलग थी … उसका तरीका अलग था।

“जल्दी कस कर चूसो ना …” मैंने नीता को इशारा किया। उसने लण्ड मसलते हुए जोर से चूसने लगी। फिर भी उसमे मेरी वाली बात नहीं आ रही थी। पर नीता को तो मस्ती चढ़ने लगी थी। उसकी आंखें बंद हो चली थी। यह देख कर मैंने लाईट जला दी। लाईट जलते ही नीता ने मेरी तरफ़ देखा। मैंने इशारा किया … चूसे जाओ …

मैंने नीता के पूरे कपड़े उतार दिये और उसे पूरी नंगी कर दिया। मैंने जोश में उसकी चिकनी चूत में अंगुली डाल दी, वाह क्या चूत थी उसकी …बहुत ही प्यारी सी, चिकनी … गुलाबी उसमें काम-रस भरा हुआ। मैंने उसकी उसकी चूत में अपने होंठ चिपका दिए और उसकी रस भरी चूत का पान करने लगी।

“बस, अक्सू … अब चूत में लण्ड डाल दो …” मैंने नीता को इशारा किया तो वो उठ कर उसके लण्ड पर बैठ गई। उसका लण्ड नीता की चूत में घूत में घुसने लगा।

“आज क्या हो गया है … तुम्हारी चूत तो अलग सी लग रही है ?”

नीता के चेहरे पर शर्म की लालिमा तैर गई। मैंने जवाब दिया,”अच्छा मजाक कर लेते हो … जरा लौड़े का कमाल तो दिखाओ !”

नीता शरमाते हुये अपनी चूत ऊपर नीचे करने लगी और बड़े प्यार से चुदने लगी।

मैं भी कुलदीप के दोनों और टांगें करके खड़ी हो गई और अपनी चूत नीता के मुख से सटा दी। नीता चुदते हुये मेरी चूत चूसने लगी। बड़ी खूबसूरत चुदाई चल रही थी। नीता अब सम्पूर्णता की ओर बढ़ने लगी थी। उसने धीरे से कहा,”दीदी, मैं तो आह्ह्ह गई …”

“रुक जा तू धीरे से उठ जा ” मैं अब कुलदीप के लण्ड पर चढ़ गई और लण्ड पूरा घुसा लिया। नीता को सामने खड़ी कर लिया और उसकी चूत में दो अंगुलियाँ डाल कर उसकी चूत चोदने लगी। वो झड़ने लगी … उसका पानी निकल गया। वो शांत हो गई। अब नीता धीरे से वहां से हट गई। मैं घोड़ी बन गई और कुल्दीप मेरी चूत चोदने लगा। मेरी चूत अब रिसने लगी थी। मैं आनन्द से सराबोर हो चुकी थी।

मैं भी अब झड़ने के कगार पर थी। मजे लेते लेते मन कर रहा था कि कभी ना झड़ूँ …

पर आखिर में मेरा पानी छूट ही गया। मैंने जल्दी से उठ कर अपनी चूत कुलदीप के मुख से सटा दी … उसने मेरे रस का स्वाद लिया और जोर से चूत को चूसने लगा। मैं चूत चुसाने के बाद उल्टी हो कर उसके खड़े लण्ड का वीर्य निकालने के लिए उसे चूसने लगी। नीता की जीभ भी लपालपा उठी, मैंने नीता को पूरा मौका दिया चूसने का। कुलदीप कुछ ही देर में नीता के मुख में ही झड़ गया। नीता को थोड़ा अजीब लगा पर मैंने उसे पूरा पी जाने कहा। उसने पूरा लण्ड साफ़ किया और उठ कर बाहर चली गई। मैंने कुलदीप से कहा कि मैं अभी मुँह साफ़ करके आती हूँ …

उसकी आंखों से मैंने अपनी चुन्नी खोल दी। कुलदीप मन्द-मन्द मुस्करा रहा था।

मैं बाहर आई तो नीता का चिकना सुघड़ शरीर देख कर दंग रह गई। मैंने उसकी कमर पकड़ कर उसकी चूत में अंगुली डाल दी। वो हंस पड़ी। फिर उसे हटते ही मैंने अपना मुख भी साफ़ कर लिया। नीता सोफ़े पर चादर डाल कर सो गई। मैं भी भीतर जाकर कुलदीप का लण्ड पकड़ कर सो गई।

सवेरे उठते ही मुझे झटका लगा। कुलदीप मेरे साथ नहीं था। मैंने धीरे से उठ कर परदे से झांका तो वो नंगा खड़ा था और नीता के नंगे बदन को देख कर मुठ मार रहा था। नीता की चादर नीचे गिर गई थी। मैंने धीरे से जाकर कुलदीप का हाथ लण्ड से छुड़ाया और बताया कि वो रात उससे चुद चुकी है। उसे कहा कि अब देर किस बात की है … अब खुल कर चोद डालो …

कुलदीप ने मेरी तरफ़ देखा और धीरे से उसके पास आ गया और उसकी चूत पर अपना लण्ड लगा दिया। थोड़ा सा जोर लगाते ही वो अन्दर उतर गया।

नीता जाग गई … और कुलदीप को अपने ऊपर पा कर जैसे धन्य हो गई। उसके हाथ कुलदीप की कमर पर लिपट गये, दोनों एक होने के लिये मचल पड़े। उसकी नजर ज्योंही मुझ पर पड़ी … वो सब कुछ समझ गई। मुझे आंखों ही आंखों में धन्यवाद कहा और अपनी आंखें बंद कर ली … नीता की शरम अब जा चुकी थी … उसने अपनी टांगें ऊपर कर ली और कुलदीप का एक नया सफ़र आरम्भ हो गया।

मैंने ईश्वर को अपनी इस सफ़लता पर धन्यवाद किया। और रोज़मर्रा के कार्य पर लग गई। आज तो चुदाई का आगाज था … आगे जो चुदाई होनी थी, उसे सोच सोच कर नीता बेहाल हुई जा रही थी। Hindi Sex Stories

हाय दोस्तों Antarvasna

आज पहली बार मैं अंतर्वासना पर कहानी Antarvasna नहीं, सच्ची घटना लिखने जा रहा हूँ। मेरी उम्र २७ साल है, मैं कोइम्बटोर तमिलनाडु में नौकरी करता हूँ।

मेरे सेठ के परिवार में मेरे सेठजी, सेठानी और उनका एक लड़का जो ८ साल का तीसरी कक्षा में पड़ता है, रहते हैं।

कुल मिला कर ४ लोग थे, सेठजी की दुकान पर वैसे तो और भी ३-४ लोग काम करते थे लेकिन वे सब तमिल थे जो अपने-अपने घर चले जाते थे, सिर्फ मैं सेठजी के घर पर रहता था।

हमारा काम सुबह ९.३० बजे दुकान आना और रात को ८.०० बजे दुकान बंद करके घर पर चले जाना था।

मेरे सेठजी की उम्र ४० और सेठानी की ३२ थी। सेठजी पूरा दिन दुकान में लगे रहते थे, और अपनी सेहत का ख्याल न रखने की वजह से ४५-५० के लगते थे, वहीं हमारी सेठानी ब्यूटी पार्लर और योग से अपने फिगर को पूरा ख्याल रखती है। मेरी सेठानी का फिगर ३८-२६-३६ का है।

दोपहर को मैं घर जाकर सेठानी के हाथ का बढ़िया खाना खाकर सेठजी का खाना टिफिन में लेकर दुकान चला आता हूँ। एक दिन की बात है, दोपहर को जब मैं घर गया तो सेठानी स्नान कर रही थी। स्नान करते समय उसका पाँव फिसल गया तो वो ज़ोरों से दर्द से चिल्लाई… उ इ माँ, मर गई। मैंने पूछा क्या हुआ, तो बोली पाँव में मोच आ गई है आयोडेक्स लाओ। फिर मैंने सहारा देकर उसे हॉल तक पहुँचाया। उसने मेरे कन्धों पे हाथ डाल दिया और मैंने उसकी कमर में।

वाह क्या जन्नत थी मेरे लिए, उस क्षण मेरा लंड एकदम से खड़ा होकर खम्भा हो गया था। उसे सोफे पर बिठा कर मैं उसके पाँव पर आयोडेक्स लेकर मालिश करने लगा। उसके गोरे-गोरे पाँव इतने हसीन थे कि मन क़ाबू में करना मुश्किल हो रहा था। मेरे हाथ काँप रहे थे मालिश करते हुए। सेठानी ने प्यार से कहा: “मालिश ढंग से, जोर से करो, तो ही मोच जाएगी।” और उसने अपना गाउन घुटनों तक ऊपर उठा दिया।

वाह क्या नज़ारा था, उसकी गोरी-गोरी पिंडलियाँ मेरी आँखों के सामने थीं। मालिश मैं कर रहा था, मज़ा दोनों को आ रहा था। अब मेरी हिम्मत थोड़ी बढ़ी और मेरा हाथ घुटनों तक पहुँच रहा था। सेठानी आँख बंद करके सोफे पर लेटी हुई थी। धीरे-धीरे मेरा हाथ घुटनों से ऊपर जाने लगा तो सेठानी ने पूछा क्या कर रहे हो? मैंने कहा कि सेठानी जी आज मैं आपकी खूबसूरती का दीवाना हो गया हूँ, प्लीज़ आज मुझे मत रोकिए।

सेठानी बोली: “कोई देख लेगा तो?”

उसके इतना कहते ही मैं समझ गया कि आग दोनों ओर बराबर की लगी है। फिर मैंने दरवाजा बंद किया और सेठानी को गोद में उठाकर बेडरूम में ले गया। सेठानी जान चुकी थी कि आज उसकी चुदाई होकर रहेगी।

मैंने हिम्मत करके पूछा- सेठजी चोदते हैं क्या?

“कभी-कभार करते भी हैं तो उनका लंड अन्दर जाते ही झड़ जाता है, फिर मैं ऊँगली डाल कर अपनी प्यास बुझाती हूँ, वो तो आराम से खर्राटे मारते हैं।”

“सेठानी जी अब आप चिंता मत करो, जब भी आप चाहो, आपकी चुदाई मैं करूँगा।”

“बाथरूम में मेरा कोई पाँव नहीं फिसला था, वो तो एक बहाना था तुम्हें झाँसे में लेने का। मेरा तो उसी दिन से तुमसे चुदने का मन था जिस दिन तुम हमारे यहाँ पहले दिन नौकरी पर लगे थे।” – सेठानी ने रहस्योद्घाटन किया।

अब मैंने सेठानी का गाऊन ऊपर कर उतार दिया। वाकई ब्रा और चड्डी में सेठानी हसीन लग रही थी। सेठानी भी मेरे कपड़े उतारने लगी, मेरा लंड देखते ही वो बड़ी खुश हुई और अपने मुँह में लेकर चूसने लग गई

मैंने कहा- आराम से चूसो, दाँत मत चुभोना, नहीं तो दर्द होगा।

उसके चूसने का अंदाज़ महसूस करके मैं तो जन्नत की सैर कर रहा था। मैं एक हाथ से उसकी चूचियाँ दबा रहा था, दूसरा हाथ चूत पर सहला रहा था।

अब तक सेठानी गरम हो चुकी थी। सेठानी ने कहा, अब सहा नहीं जाता, जल्दी से मेरी खुजली शांत कर दो।

मैंने सेठानी को कहा- अब आप ऊपर आ जाओ।

सेठानी तुंरत मेरे ऊपर आकर लंड को हाथ से चूत का दरवाजा दिखा रही थी। मैंने कमर से एक धक्का ऊपर की ओर दिया और सेठानी ने नीचे की ओर, और लंड चूत के अन्दर।

अब सेठानी आराम से धक्के लगा रही थी और मुझे स्वर्ग का आनंद आ रहा था। मैं दोनों हाथों से अब सेठानी की चूचियाँ पकड़ कर मसल रहा था। सेठानी आनंद विभोर हो रही थी। करीबन १० मिनट के बाद मैंने सेठानी को नीचे सुलाकर उसके ऊपर आ गया और लंड एक बार फिर चूत में घुसा दिया।

सेठानी बोली: “चोदो राजा, ज़ोर से चोदो, बहुत मज़ा आ रहा है। ऐसा मज़ा तो कभी नहीं मिला। मैंने धक्के मारने शुरू किए। हर धक्के पर सेठानी चूतड़ उठा कर साथ दे रही थी। १० मिनट बाद सेठानी हाँफने लगी ओर कहा कि अब मैं झड़ने वाली हूँ। तो मैंने कहा मुझे कस कर पकड़ लो, मैं भी गया। औरर हम दोनों शिथिल अवस्था में कुछ देर पड़े रहे।
उसके बाद जब भी मौक़ा मिलता, मैं सेठानी को बीवी की तरह ही चोदता। सेठानी भी मुझे बहुत खुश रखती थी। तरह-तरह के पकवान व्यंजन बना कर खिलाती थी। मैं दुकान की वसूली, बैंक के काम का बहाना बना कर सेठानी को चोद कर आ जता था। सेठजी को भनक तक नहीं पड़ती थी

अब सेठानी सेठ का भी ख्याल न रख के मेरा ध्यान अधिक रखती थी। मेरे दोनों हाथों में लड्डू थे। फ्री की चूत, अच्छा खाना, ओर सेठ जी से तनख्वाह। सेठ मेरे काम से खुश, सेठानी मेरे लंड से खुश, मैं दोनों खुशियों से बहुत खुश।

कैसी लगी मेरी ये घटना? कृपया मुझे मेल ज़रूर करें। Antarvasna

मेरा नाम यश है मैं आँगनवा जोधपुर का रहने वाला हूँहूँ. मेरी उम्र अभी इक्कीस साल है और मेरे लंड का साइज़ सवा छह इंच है, लंड की मोटाई तीन इंच है.

ये मेरी और मेरी बेस्ट फ्रेंड की चुदाई की कहानी है जो पिछले महीने की बात है.

शुरूआत में वैसे तो मेरे मन में उसके लिए कोई खराब विचार नहीं थे, पर ये सिलसिला उसके ब्वॉयफ्रेंड की वजह से शुरू हुआ. वो अक्सर ये कहती थी कि उसका बीएफ रोमांटिक नहीं है. थोड़े दिन ऐसी ही बातों का दौर चला. चूंकि वो मेरी अच्छी दोस्त थी, तो एक बार वो मुझसे मेरी सेक्स लाइफ के बारे में पूछने लगी.

पहले तो मैंने भी उसे वैसे ही समझते हुए बताया, जैसे दो दोस्त आपस में बात करते हैं. मैंने उसे मेरा पहला सेक्स अनुभव बता दिया. मैंने इस सबको बड़ी ही साधारण तरीके से बताया था, पर वो मेरी बात को बड़ी तफसील से जानना चाहती थी. वो मेरी इस पहली चुदाई की एक एक बात के बारे में बड़ी गहराई से पूछ रही थी. जैसे मैंने लड़की के ब्रेस्ट कैसे चूसे थे … फिर चूत कैसे लिक की … वग़ैरह वग़ैरह!
उसके ऐसे बर्ताव की वजह से मुझे शक हुआ कि कहीं ये सेक्स की बातों के बहाने मुझसे सेक्स तो नहीं करवाना चाहती.

मैं आपको अपनी इस फ्रेंड के बार बता देता हूँ. उसका नाम ऋषिका है. उसका फिगर 34-26-36 का है. ऋषिका हर रोज जिम जाती है, तो फिगर काफी अच्छा संवारा हुआ है. वो कहीं से भी ढीली पोली नहीं लगती. उसके बदन का हर हिस्सा एकदम चुस्त और मस्त लगता था.

उसकी सेक्स की बात को लेकर मैंने उससे ज्यादा तो कुछ नहीं कहा बस उसकी जानकारी को जितना खुल कर बता सकता था, उतना मैंने उसको बता दिया.
खैर … बात आई गई हो गई. लेकिन मैं अब उसकी कामना को समझने की कोशिश करने लगा था.

दो दिन बाद हम दोनों साथ में बाइक से कॉलेज जा रहे थे, तो मैंने चैक करने के लिए जानबूझकर जोर से ब्रेक मारा. जिससे उसकी मनोदशा मालूम की जा सके कि वो मुझमें किधर तक इंटरेस्टेड है.

झटका लगा तो वो उछल कर आगे को आ गई और मेरे बम्प से सट कर बैठ गयी. उसने झटके के बाद अपनी पोजीशन को भी नहीं बदला. उस टाइम उसके कड़क मम्मे मेरी पीठ से टच कर रहे थे. मैंने पीठ पीछे करके उसके मम्मों की सख्ती का मजा लिया. लेकिन इस पर भी वो पीछे को नहीं हुई. जब वो पीछे नहीं खिसकी तो इससे मेरा शक यकीन में बदल गया. मैं पीठ उसकी चूचियों से ही सटाए. मैंने महसूस किया कि उसके निप्पल एकदम कड़क हो गए थे और मम्मे भी तन गए थे.

मैं अपनी पीठ से उसके मम्मों को रगड़ रहा था, फिर भी वो मजे से उसी स्थिति में बैठी रही.

बस उस दिन इतना ही हो पाया. अब मैं ये तो समझ गया था कि वो चुदने को बेताब है, पर मैं उसे तड़पाना चाहता था, इसलिए दूसरे दिन मैं उसकी स्कूटी से गया. फिर जब एक स्पीड ब्रेकर आया तो उसने भी ब्रेक लगे और स्कूटी उछलने से हम दोनों भी उछले. इस झटके से मैं जानबूझ कर आगे को खिसक कर उससे चिपक गया. मैं इस तरह से बैठ गया ताकि मेरा कड़क लंड उसकी गांड को टच होने लगे.

जब मेरा लंड उसकी गांड को टच हुआ तो आह … मजा ही आ गया. क्या बताउं आपको कि मुझे इस वक्त कितना मजा आ रहा था. उसकी एकदम मुलायम रुई जैसी गांड और ऊपर से गांड की गर्माहट मिली, तो मेरा लंड तो एक ही झटके में पूरा तन गया. मेरा लंड गांड का स्पर्श पाकर झटके मारने लगा था.

जब मेरा कड़क लंड उसकी गांड की दरार को छूने लगा, तो शायद उसको भी पता लगा गया. पर आश्चर्य कि वो वैसे ही गांड से लंड दबाए बैठी रही. मेरा लंड गांड में गड़ने से भी उसने कोई विरोध भी नहीं किया था, जिससे मुझे लंड को झटके देने का मजा मिलना शुरू हो गया था.

वो भी मस्ती से लंड का अहसास करते हुए आराम से अपनी स्कूटी चला रही थी. स्कूटी के झटकों से वो मेरे लंड पर अपनी मस्त गर्म गर्म और नर्म नर्म गांड भी घिस रही थी. इस सबसे मेरा लंड इतना कड़क हो गया था कि जैसे लोहे का लंड हो गया हो. उस पर ऊपर से उसकी गांड का घिसाव भी मेरा लंड चरम की अवस्था में आ गया था और लावा उगलने को तैयार हो गया था. वो तो अच्छा हुआ कि कॉलेज आ गया और मेरा पैन्ट गीला होने से बच गया.

जब वो स्कूटी रख कर आयी, तो उसने मेरी पेन्ट में बना तंबू देखा. वो मुस्कराने लगी … ये सब उसने जानबूझ कर जो किया था.

उसने उसी दिन अपने बीएफ से ब्रेकअप कर लिया. वैसे भी वो ऋषिका के साथ ओरल शुरू करते ही झड़ जाता था, ऐसा ऋषिका ने मुझे बताया था.

ब्रेकअप के बाद ऋषिका मेरे और करीब आ गयी थी. मेरे साथ में चिपक कर बैठना, फिर स्कूटी वाला खेल खेलना, ये सब आम बात हो गई थी.

मैं जब रिसपोन्स नहीं देता था, तो भी वो अपने मम्मे मेरी पीठ से टच कराने लगती थी, मेरे लंड से अपनी गांड घिसना, ये सब करने का मजा लेती रहती थी. मैं सब समझ रहा था, लेकिन उसके बोलने का इन्तजार कर रहा था. वो भी खुल कर नहीं बोल रही थी कि मुझे तुमसे चुदवाना है.

फिर एक दिन कि बात है, जब मैंने आगे बढ़ने की सोची और एक योजना बनाई. योजना के मुताबिक मैं उसको लांग ड्राइव पर ले गया. फिर एक गुप्त सी लगने वाली सुनसान जगह पर ले जाकर गाड़ी को रोक दिया. इधर अक्सर मैं अपनी जीएफ के साथ चुदाई करता रहता था. उस जगह की खास बात ये थी कि शाम को 7 बजे के बाद वहां कोई नहीं आता जाता है. ये जगह मेरे दोस्त के खेत पर बना एक फार्म हाउस का कमरा था, इसलिए कोई आ भी जाए, तब भी किसी तरह का बवाल होने जैसी सम्भावना नहीं थी.

वहां पहुंच कर जब ऋषिका ने सुनसान एरिया देखा तो वो बोली- बाप रे इतना सुनसान इलाका … यहां क्या काम है … मुझे इधर क्यों ले कर आए?
मैं- इरादा तो नेक ही है, बस तुमसे अकेले में बात करनी थी तो ले आया.
ऋषिका - अकेले में? तो फिर फोन से भी तो हो सकती थी ना?
मैं- जो मजा मिलके बात करने में आता है … वो मजा फोन में कहां?
ऋषिका - बातें बनाना तो कोई तुमसे सीखे … चलो अब आ ही गए हैं तो बताइए जनाब अकेले में क्या गुफ्तगूं करनी है आपको?

मैं उससे पीछे से जाकर चिपक गया. जैसे कि मैंने पहले बताया था कि ऐसे चिपकना हमारे बीच आम बात थी. तो उसको कुछ अजीब नहीं लगा. पर मैंने इस तरह उसके कंधे पर अपना सिर रखा कि मेरी गर्म सांसें उसकी कान की लौ और गरदन को छूने लगीं.

यह बात तो आप जानते ही होंगे कि नारी का ये हिस्सा कितना सम्वेदनशील होता है. मैंने जैसे ही ये किया और मेरी गर्म सांसों ने उसकी गरदन को छुआ, वो एकदम से सिहर उठी.

चूंकि हम खड़े थे, उसके ठीक सामने लगभग चार पांच कदम की दूरी पर गन्ने का खेत था, जो पानी से भरा हुआ था. तो उस तरफ से बह कर आने वाली हवा एकदम ठंडी थी, जो हम दोनों को छू कर जा रही थी. इस स्थिति की आप कल्पना कर सकते हो, जब मेरी गर्म सांसें उसकी गरदन को छू रही होंगी और सामने से ठंडी हवा उसको सिहरा रही होगी, तो सेक्स उसपर किस कदर हावी हुआ होगा.

वो इस माहौल से एकदम से कांप उठी और एक बार फिर से उसकी थिरकती हुई गांड मेरे लंड को छूने लगी. मेरा लंड तुरंत खड़ा हो गया और उसकी गांड को छूने लगा, जिससे उसकी चुदास और बढ़ गयी. इसी के साथ उसकी गांड मेरे लंड पर रगड़ने की वजह से मेरा लंड भी खड़ा हो गया था.

चूंकि मेरा लंड उसकी गांड में चुभ रहा था, जिससे उसकी हालत खराब हो रही थी और मुझे भी अब रहा नहीं जा रहा था. तभी मैंने उसकी गरदन पर कई किस कर दिए, जिससे वो चिहुंक उठी और मुझसे और भी सट कर चिपक गयी.

मैंने धीरे से उसके कान में कहा- मुझे इस तरह की बात करनी है. क्या आपकी इजाजत है मेरी प्यारी ऋषिका रानी?
वो शरमा गयी, फिर मीठी स्माइल करके उसने हां में सिर हिला दिया. वो एकदम से घूम कर मुझसे कसके गले लग गयी.
आह … उस वक्त वो अहसास को मैं शब्दों में बयान नहीं कर सकता.

उसक़ी गर्म सांसें मेरी गर्दन को लग रही थीं, उसके सख्त मम्मे मेरे सीने से टच हो रहे थे. फिर मैंने उसका चेहरा अपने हाथों में ले लिया और उसके माथे पर, गालों पे किस करता चला गया. आखिर में मैंने उसके कोमल रसीले होंठों पर अपने होंठों को रख दिया और उसके होंठों से बह रहे अमृत को पीने लगा.

सच में आज जब मैं ये कहानी लिख रहा हूँ, वो एहसास मुझे अभी भी हो रहा है. क्या मस्त स्वाद था उसके गुलाब की पंखुड़ियों जैसे नर्म और रसभरे होंठों का …

फिर ये किस से शुरू हुआ कब लम्बे स्मूच में बदल गया, पता ही नहीं चला. मैं उसकी जुबान चूस रहा था और वो मेरी जीभ चूसे जा रही थी.
जबरदस्त किसिंग का यह दौर लगभग 15-20 मिनटों तक चला होगा. उस दरमियान में उसके मम्मे भी दबा रहा था. उसके मम्मे इतने कड़क हो गए थे … मानो अभी ब्रा फाड़ कर बाहर आ जाएंगे.

फिर मैंने उसको उठा लिया और अपनी कार के बोनट पर बिठा दिया. किसिंग फिर से शुरू हुई और इस बार मैं उसे एक स्मूच करते करते नीचे को आने लगा. मैंने उसके गले को किस किया, जिससे वो अपनी आंखों को बंद करके मेरे गर्म होंठों को अपनी गर्दन को चूमता हुआ महसूस कर रही थी. इसके साथ ही ऋषिका और भी ज्यादा गर्म हो रही थी.

फिर मैंने उसे उठा कर कार की पिछली सीट पर सीधा लिटा दिया.

इसके बाद मैंने ‘दे दनादन’ फ़िल्म का वो गाना ‘गले लग जा …’ को स्लो वोल्यूम पे लगा दिया और फिर से उसके होंठों को चूसने लगा. उसको अपनी ओर घुमा कर अपनी गोद में बिठा लिया. उससे ये हुआ कि उसकी चुत मेरे लंड पर घिस रही थी. चूंकि मेरा लंड एकदम कड़क था, तो उसकी चुत की गर्मी महसूस कर रहा था. वैसे ही मेरे लंड की गर्मी वो भी महसूस कर रही थी.

फिर मैंने उसकी टी-शर्ट धीरे से निकाली. उसने भी बिना वक्त गंवाए तुरंत हाथ ऊपर करके मेरी मदद की.

उसने टी-शर्ट के नीचे जालीदार ब्रा पहन रखी थी जिसमें उसके मम्मे बहुत ही सुंदर लग रहे थे. चूंकि उसके जिस्म की खुशबू से मैं पहले ही पागल हो चुका था. ऊपर से मेरे सामने उसके दो तने हुए मम्मे मुझे ललचा रहे थे, जिनके ऊपर जालीदार ब्रा उसके आमों की खूबसूरती में चार चांद लगा रही थी.

बस मुझसे रहा नहीं गया और मैं ब्रा के ऊपर से ही उसके मम्मों को पीने लगा. ऋषिका भी अत्यंत चुदासी थी, वो मेरे सिर को अपने मम्मों पर दबाने लगी. मैंने मम्मों को ब्रा के ऊपर से ही चूसते हुए उसकी ब्रा निकाल दी. उसके दो तने हुए मम्मे हवा में फुदकते हुए आजाद हो गए. उसके मम्मे एकदम गोल थे, उनके ऊपर गुलाबी निप्पल जैसे मुझे चूसने के लिए बुला रहे थे कि आओ हमारा रस पी लो.

मैं तो पागलों की तरह बारी बारी से उसके दोनों मम्मों को चुसकने लगा. मैं उसके एक आम को चूसता, तो दूसरे को दबा कर मजा ले रहा था. ऋषिका खुद पागल हो गई थी. वो चुदास में कामुक सीत्कार निकाल रही थी ‘उम्म्ह… अहह… हय… याह… ये क्या कर दिया … हां बस ऐसे ही यस यस बेबी चूस लो इन्हें … आह … न जाने ये इस पल के लिए कब से तड़प रहे थे’
वो अपनी चुदास में न जाने क्या क्या बड़बड़ाती रही और मैं भी उसके मम्मों को चूसता और मसलता रहा.

मैंने दस पन्द्रह मिनट तक उसके आम खूब दबा दबा कर चूसे. फिर किस करते करते उसकी नाभि तक जा पहुंचा. चूंकि उसने एकदम टाइट जीन्स पहन रखी थी, तो मैंने उसे खींच कर उतार दिया. अब वो सिर्फ एक ब्लैक कलर की पेन्टी में रह गई थी. वो इस वक्त ऐसी लग रही थी मानो जन्नत की कोई हूर खड़ी हो.

उसके लम्बे खुले हुए काले बाल … लाली से सजे हुए होंठ … गुलाबी गाल … तीखे नयननक्श … एकदम उठे हुए एकदम गोल मम्मे … पतली कमर. पेट पे गहरी नाभि … भरी हुई चिकनी जांघों से दमकता हुआ उसका शरीर मेरी कामवासना को अधिकता की हद से भी ज्यादा भड़का रहा था. इस लाजबाव यौवन से लदी ऋषिका के तन पर सुंदर झांझर और नेल पॉलिश से सजे हुए पैर उसकी कामुकता को किसी प्लेब्वॉय की मॉडल सा झलका रहे थे. शायद रब ने भी उसे बहुत मेहनत और समय देकर बनाया होगा.

उसका हर अंग एकदम बराबर था. फिर मैंने उसे यूं ही सिर्फ पेंटी पहने हुए अपनी गोद में उठाया और फार्म हाउस के कमरे के अन्दर ले गया. कमरे के अन्दर ले आकर उसकी उफान मारती जवानी को चूसने का समय आ गया था.

उसने बिस्तर पर आने से पहले खुद ही अपनी पेंटी को उतार दिया. मैं उसकी चिकनी चमेली चूत को देख कर मदमस्त हो गया और एकदम से उसके ऊपर चढ़ने को हो गया.

वो भी मुझसे कपड़े उतारने को कहने लगी. मैंने झट से खुद को मादरजात नंगा किया और लंड हिलाते हुए उसकी चूत को निहारने लगा. उसने अपनी टांगों को फैला कर मुझे आमंत्रित किया. मैंने देर नहीं लगाई और उसके ऊपर आ गया. मैंने उसकी टांगों को फैला कर उनके बीच में खुद को सैट किया और लंड को अपने हाथ से पकड़ कर उसकी चुत की फांकों में लगा दिया.

लंड के सुपारे से टपकता प्रीकम उसकी चूत के रिसते पानी से मिला, तो हम दोनों गनगना उठे. बस मैंने फांकों में सुपारा फंसाया और उसके ऊपर झुकते हुए उसके होंठों को अपने होंठों में दबा लिया. हालांकि वो चुदी हुई थी, तब भी मुझे लगा कि इसके बताए अनुसार इसके पुराने ठोकू का लंड जल्दी झड़ने के साथ साथ शायद मुझसे छोटा भी हो, तो ये मेरे लंड से चिल्ला न दे.

मैंने होंठ जकड़ कर उसकी चूची को जोर से दबाया तो उसने एकदम से अपनी गांड उठा दी. इधर मैंने लंड का दबाव उसकी चूत में दे दिया. बस मेरा लंड उसकी चूत को चीरता हुआ अन्दर धंस गया.

उसकी चीख निकलने को हुई, वो तड़फने लगी. मैंने बाज की तरह उसको चिरैया सा दबोचा हुआ था. वो हिल भी न सकी और मेरा लंड उसकी चूत के अंतिम सिरे तक घुसता चला गया. इसके बाद मैं एक मिनट के लिए यूं ही रुक गया. उसकी सांस तेज हो गई थीं. वो बिन पानी मछली सी तड़फ रही थी.

मैंने उसके होंठों को अपने होंठों दबाए रखा और हाथ से उसके मम्मों को सहलाने लगा, उसके निप्पल मींजने लगा. कुछ ही देर में मेरे लंड ने उसकी चूत में जगह बना ली थी और उसका दर्द कम होता चला गया. उसने नीचे से अपनी कमर को हल्का सा उठाया तो मैंने उसके होंठ छोड़ दिए.

वो मेरी तरफ देख कर मुस्कुराने लगी. मैंने भी एक झटका मार दिया. बस चुदाई का खेल शुरू हो गया. पूरे बीस मिनट तक ताबड़तोड़ चुदाई का मंजर चला. इस बीच वो एक बार झड़ भी गई. बाद में मैं उसकी चूत में ही झड़ गया और उसके ऊपर ही लम्बलेट हो गया.

झड़ने के चूमाचाटी होने लगी और कुछ ही देर में मैं फिर से चार्ज हो गया और दुबारा चुदाई का खेल शुरू हो गया.

इस चुदाई से उसे खूब मजा आया था और वो मुझसे बहुत खुश हो गई थी और अब तो गाहे बगाहे उसकी चुदास को मेरा लंड शांत करने लगा था.

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