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Antarvasna

प्रिय मित्रो आप सब को मेरा नमस्कार !

मैं राम,

मुझे उम्मीद है मेरी कहानी “बायलोजी की टीचर के साथ Antarvasna सेक्सोलोजी” आप सब को पसंद आई होगी, प्लीज़ आप मुजे अपनी राय भेजना मत भूलिएगा.

यह उन दिनों की बात है जब मैं बारहवी क्लास में पढता था, मैं मेरी मौसी के यहाँ रहता था क्योकि उनका घर शहर से नजदीक भी था और 2 मंजिला था.

मेरी मौसी की दो लड़कियां थी, दोनों ही बड़ी सेक्सी थी. सोनिया जो मुझसे 2 साल बड़ी थी वह कॉलेज में थी और दूसरी सिया वह दसवीं क्लास में थी, हम दोनों एक ही स्कूल में थे.

हर रोज साथ में आना-जाना, खेलना, पढाई में उसकी मदद करना, यह सब मिला के हम दोनों में अच्छी पटती थी, सिया को कभी भी बुरी नजरो से नहीं देखा, सिया मेरी बहुत इज्ज़त करती थी और मैं हमेसा उसको खुश रखता था, वो जो मांगती वो मैं उसे ला देता था तो खुशी से मेरे गले लग जाती या मुझे चूम लेती थी।

एक दिन उसने मुझे कहा भइया आप मुझे मेरी बर्थडे पर क्या गिफ्ट दोंगे ?

मैंने कहा तुझे जो भी चाहिए, हर साल की तरह इस साल भी ला दूंगा. तो उसने कहा इस बार आप मुझे आप की पसंद की गिफ्ट देना,

मैंने कहा- ठीक है जैसी तेरी मर्जी।

अगले दिन जब स्कूल जाने का टाइम हो गया था लेकिन सिया दिख नहीं रही थी, तो मैंने उसे आवाज़ लगाई लेकिन कोई जवाब न मिला तो मैं उसे देखने के लिए उसके कमरे मैं गया, दरवाजा अन्दर से खुला ही था और मैंने नोक भी नहीं किया, सीधा अन्दर ही चला गया, लेकिन जो दृश्य मैंने देखा…मेरी साँस रुक गई.

सिया एकदम बे ख़बर सी बेड के उपर बैठ के उसकी ब्रा का हुक ठीक करने में मशगूल थी, उसके तन का उपरी हिस्सा बिल्कुल नंगा था, हाय का नजारा था, उसके इस रूप को देखा तो मेरे अन्दर का जानवर जग उठा, क्या मस्त बूब्स थे…जैसे मोसंबी को काट के लगा दिए हो, मुंह में पानी आ गया लेकिन क्या करे…

मैंने वहां ठहरना उचित न समझा जैसे जाने के लिए मुडा तो उसका ध्यान मेरी ओर गया, मुझे देख कर वो शर्म से कांप गई…अपने आजाद कबूतरों को हाथों से छिपाने लगी, और मेरी पीठ करके खड़ी हो गई ..पूछा यहाँ क्या कर रहे हो भइया…

मैंने कहा स्कूल के लिए देर हो रही थी…आवाज़ दी लेकिन जवाब नहीं मिला तो तुझे ढूंढते हुए यहाँ आ गया…

उसने कहा ठीक है आप यहाँ से जाओ मैं तैयार हो के 2 मिनट में आती हूं। मैं बाहर तो आ गया लेकिन दिल अन्दर ही छोड़ आया.

ऐसे भी देर हो गई थी…स्कूल बस भी चली गई होगी करके मैंने मौसाजी से उनकी बाइक मांग ली.

सिया को लेकर मैं भी स्कूल की ओर चल दिया..

स्कूल आने तक वो एक शब्द भी नहीं बोली तो मुझे लगा सिया मुझसे नाराज़ हो गई है.

पूरा दिन स्कूल में दिल नहीं लगा…बार-बार सिया के बूब्स दिखाई दे रहे थे…राम को जब घर लौट रहे तो रास्ते में मैंने पूछा तुम मुझसे नाराज़ हो तो उसने कहा नहीं तो…

तब मैंने कहा बोलती क्यों नहीं हो, तो वो कहने लगी शर्मिन्दा हूँ, मैंने कहा किस बात के लिए तो कहने लगी की सुबह वाली बात से…मेरी ही गलती थी मुझे दरवाज़ा अन्दर से बंद करना चाहिए था…

मैंने कहा उसमे कौन सी बड़ी बात है मैंने ही तो देखा है किसी और ने नहीं, और मैं थोड़े ही किसी को बताऊंगा. ऐसा कहने पर उसने मुझे पीछे से जोर से जकड लिया और बोली थेंक यू भइया.

उस रात मैंने मुठ मार के ही काम चला लिया. अब मेरा सिया को देखने का नजरिया ही बदल गया. हर बार उसे बूब्स, गांड, चूत, कोमल होंठ के बारे में सोचने लगा. अब मैं हर मौके का फायदा उठा लेता था, कभी उसे चूतड़ को हाथ लगा देता कभी बस की भीड़ में बूब्स पर भी.

दो हफ़्ते बाद उसका जन्म दिन आया तो मैं उसके लिए अच्छी घड़ी लाया जो उसे बहुत पसंद थी. जब मैं उसके रूम में गिफ्ट देने के लिए गया तो वो स्कूल का बेग रेडी कर रही थी.

मैंने उसे गिफ्ट दिया तो उसने झट से मेरे सामने ही खोला और थेंक यू कहते हुए मु्झसे लिपट गई मैंने भी उसे बाँहों में भर लिया और उसके निप्पल को अपनी छाती पर महसूस करने लगा, तब उसने कहा भइया यह तो मेरी पसंद का है और आपने मुझे आप की पसंद का गिफ्ट देने का वादा किया था, मैं इस मौके को कैसे चूकता, मैंने कहा वो भी दूंगा लेकिन तु्झे पसंद न आया तो? तो वो बोली आप की हर पसंद मेरी पसंद, मैंने कहा वादा करो पसंद न आए तो नाराज नहीं होगी और मेरा गिफ्ट मुझे वापस कर दोगी…उसने कहा ठीक है…

तो मैंने कहा- अपनीआँखे बंद करो. जैसे ही उसने आँखे बंद की मैंने उसे अपने पास खींच लिया और उसके गुलाब की कलि जैसे होठों को चूम लिया. वो एकदम पीछे हट गई और बोली यह क्या कर रहे हो…मैंने कहा यही तो गिफ्ट है…मैंने पूछा पसंद आया…उसने कहा नहीं…तो मैंने कहा ठीक है मुझे वापस कर दो…उसने पूछा कैसे…

मैंने कहा जैसा मैंने दिया…इस बार उसका रिस्पोंस अलग था…झट से मेरे लग गई और बोली भइया आप बड़े वो हो…मुझे पसंद है…मैंने कहा ठीक है और देता हूं कह के अपने होंठ उसके होंठ पर रख दिए और धीरे धीरे चूसने लगा

…उसे भी अच्छा लगने लगा इसलिए वो भी मेरे होंठो को चूसने लगी…अब हम दोनों एक दूसरे को जम के किस कर रहे थे…मेरा लंड खड़ा हो गया था और बेकाबू हो रहा था, मैंने एक हाथ से उसको अपने साथ चिपका के रखा था और दूसरा हाथ उसके कड़क बूब्स को सहलाने लगा…उसकी सांसे तेज होने लगी…तभी मैं अपना हाथ उसकी गांड पर रख के हलके से दबाने लगा और उसकी चूत के साथ अपने लंड को उपर से ही रगड़ने लगा…तभी हमने बाहर से मौसी की आवज़ सुनाई दी…हम दोनों ने अपने आप को ठीक किया और स्कूल जाने की तैयारी करने लगे.

राम को जब वापस स्कूल से आए, फ्रेश हुए…खाना खाया…सब साथ बैठ के बातें करने लगे…

करीब 8 बजे मैंने कहा मुझे एक इम्पोर्टेन्टप्रोजेक्ट पे काम करना है जो मुझे 10 दिन में स्कूल में जमा करनाहै. यह कहके उपर चला गया, मेरा कमरा दूसरे फ्लोर पर था जहाँ मेरे अलावा कोई नहीं सोता था।

दो और कमरे थे लेकिन वो गेस्ट रूम थे.

10 बजे सब सो गए, मेरा ध्यान पढ़ाई में कम और सिया के इंतजार में ज्यादा था. 11.30 को सिया कॉफी के दो कप ले के उपर आई. उसने हल्के पिंक कलर की नाइटी पहन रखी थी और कुछ ज्यादा ही सेक्सी लग रही थी. हमने कोफ़ी पी और और चेक कर लिया कोई जाग तो नहीं रहा है.

अब सुबह तक हमें कोई खतरा नहीं था… मैंने दरवाजा अन्दर से बंद कर लिया…
सिया चेयर पर बैठ के कुछ पढ़ने का नाटक कर रही थी, मैंने पीछे से जाके उसको दबोच लिया…
उसने कोई विरोध नहीं किया…मैं उसके दोनों बूब्स को दबाने लगा और उसकी गर्दन और कान को किस करने लगा.

वो गरम हो रही थी, मेरा लंड भी कड़क हो गया था. मैंने उसकी नाइटी उतार दी और उसकी ब्रा भी निकाल दी निकर उसने पहने नहीं थी, मैंने भी सारे कपड़े उतार दिए।

हम दोनो एकदम नंगे हो गये, मैंने धीरे से उसका मुंह अपनी ओर किया और उसके रसीले होंठ चूसने लगा.

वो भी मुझे बराबर का साथ दे रही थी, मैं कोई जल्दबाजी करना नहीं चाहता था.
एक हाथ से में उसके बूब्स को सहलाने लगा और दूसरे से उसकी गांड को दबा रहा था.

अब धीरे धीरे उसके बूब्स को चूसने लगा उसके मुंह से हल्की सी कराहने की आवाज़ आ रही थी, अब मैंने उसको बेड पर लेटा दिया और उसके बूब्स को चाटने और चूसने लगा साथ ही एक हाथ उसकी कुंवारी चूत पर रख दिया और हलके से सहलाने लगा, सिया एकदम उत्तेजित हो उठी…पहली बार किसी मर्द ने उसकी चूत को छुआ था.

अब मैं उसे फ्रेंच किस करने लगा और साथ ही उसकी चूत से खेल रहा था…जैसे ही मैंने उसकी चूत में ऊँगली डाली उसने मेरा हाथ पकड़ लिया लेकिन मैं नहीं रुका मैं उसकी चूत में ऊँगली अन्दर बाहर करने लगा। अब उसको भी मज़ा आने लगा…

उसकी चूत एकदम गीली हो चुकी थी, मैंने अपना मुंह उसकी चूत पर लगा दिया और चाटने लगा साथ ही उसके निपल्स के साथ खेल रहा था.

धीरे धीरे मैंने अपनी जीभ उसकी चूत में अन्दर डाली उसका वर्जिन ज्यूस पीने कान कुछ और ही मज़ा था, अब मैं जोर से उसकी चूत को चाटने लगा, उसने अपना पानी छोड़ दिया, मुझे उसका पानी चाटने में बहुत मज़ा आया, मेरा भी सब्र का बाँध टूटा जा रहा था। आधा घण्टा बीत चुका था इस चुम्मा चाटी में.

अब मैंने कहा- मेरा लंड चूसोगी?

पहले तो उसने मना किया फ़िर मान गई तो हम 69 पोसिशन में आ गए, मेरे लंड को देखते ही वो घबरा गई, मैंने कहा डरो मत धीरे धीरे जितना हो सके उतना लो और जब मेरा ज्यूस निकले तब उसे पी जाना ताकि चुदाई के वक्त तुझे ज्यादा ताकत मिलेगी…

मैं ज्यादा नहीं टिक सका क्योंकि उसको लंड चूसना नहीं आता था, 5 मिनट में मैं उसके मुंह में झङ गया, वो मेरा सारा पानी पी गई।

…अब मैंने उसकी बुर में अपनी ऊँगली डाल दी और चाटने लगा थोडी देर में मैं तैयार हो गया, मेरा ९” का मूसल सिया की चूत से मिलने को बेकरार था।

वो भी कह रही थी भइया ! डालो ना ! मुझसे रहा नहीं जाता…!

मैं उसके दो पैर के बीच आ गया और उसकी गांड के नीचे तकिया लगाया, दोनो पैरों को फैला दिया और अपना लंड उसकी चूत पर रगड़ने लगा…उसकी सिसकारी बढ़ने लगी…

मैंने अपने लंड का सुपाडा उसकी चूत के मुंह पर सेट किया और एक हलका सा धक्का मारा, मेरा सुपाडा सिया की चूत में घुस गया वो दर्द के मारे चीखने लगी…निकालो.. निकालो… .मर गई…लगी…निकालो…निकालो…मर गई…

मैंने उसके मुंह पर हाथ रख दिया…
थोडी देर बाद उसके पैर ढीले होने लगे तो मैं समझ गया कि उसका दर्द कम हो गया है, एक और धक्का मारा तो मेरा लंड उसके सील तक पहुँच गया, मैंने लंड को धीरे धीरे अन्दर बाहर करने लगा, सिया को भी मज़ा आने लगा वो भी नीचे से गांड उठा के साथ देने लगी, और मौका देखते ही उसके मुंह पे अपना मुंह रख दिया और एक जोरदार झटका मारा…

उसकी सील टूट गई…कली से फ़ूल बन गई मेरी सिया…उसके मुह से चीख निकल गई…आँखों से आंसू निकलने लगे…दर्द से छटपटाने लगी, लेकिन मैंने आव देखा ना ताव, तीन चार और झटके मार के रुक गया 6″ से ज्यादा मेरा लंड उसकी बुर में जा चुका था…

थोडी देर बाद उसका दर्द कुछ कम हुआ तो उसने गांड हिलानी चालू कर दी मैं समझ गया कि अब सब ठीक है…मैंने धीरे धीरे अपना लंड उसकी खून भरी चिकनी चूत में पेलना चालू किया

…आअह…आ.आआ.ईई.म्म्म्म्म्म्म्म्म्मर ग..गग..आआईई यस्…ओह…फ़िर मेरी स्पीड बढ़ने लगी…मेरा पिस्टन जोर से अन्दर बाहर हो रहा था…एक और झटका मारा, पूरा का पूरा लंड उसकी चूत में समा गया…

वो भी गांड उठा उठा के मेरा साथ अच्छे से दे रही थी…भइया चोदों मुझे…और जोर से…आह…आह…अआः…आह…ऊईई माँ..फक मी…ओह यस्…वो अब तक तीन बार झङ चुकी थी…उसकी गांड और जांघ वीर्य से पिचपिचा रही थी…पूरे रूम में चुदाई का संगीत बज रहा था
पच..पच..फच…फचक…फचक…ओह…ओह…ओह..आ…आ..आया.इ..इ..इ..ई..ओ..ओ..ओ…मैं अब झड़ने वाला था, रफ्तार तेज हो गई…सिया मैं झड़ने वाला हूं…मैं भी झड़ने वाली हूं…ओह माय…ओह मैं गई और मैं भी…20-25 झटके मार के मैं झड़ गया उसकी चूत में ही।

थोड़ी देर ऐसे ही पड़े रहे हम दोनो, पसीने से तर थे…लंड उसकी चूत से निकला तो पूरा खून से रंगा था पूरी चादर खून और वीर्य से भरी थी…सिया ठीक से चल नहीं पा रही थी.बाथरूम ले जा कर हम दोनो ने साफ किया, सिया को पेनकिलर दिया, ताकि दर्द थोड़ा कम हो सके।

फ़िर मैंने उसे पूछा कैसा लगा मेरा गिफ्ट…हमेशा की तरह वो मुझ्से चिपक गई और मेरे होठों को चूमते हुए बोली बेस्ट ऑफ़ द बेस्ट… आई लव यू भइया…और अपने अपने रूम में जा के सो गए… Antarvasna

Hindi Porn Stories

मेरा नाम सुरेश है मैं कटनी का Hindi Porn Stories रहने वाला हूँ. आज मैं आप सबको मेरी माँ की चुदाई के बारे में बताता हूँ.

बात उन दिनों की है जब मैं भोपाल पढ़ाई करने गया था इन्जिनीयरिंग में दाखिले के बाद. मेरे घर में मेरे पापा, मेरी माँ और मैं ही रहते हैं क्योंकि मेरे पापा सरकारी अध्यापक हैं और गाँव में रहते हैं, उनका कटनी आना कम ही होता है, महीने में 3 बार. इसलिए मेरी माँ की चूत प्यासी ही रह जाती है, उनकी उम्र 37 साल की होगी क्योंकि कम उम्र में ही उनकी शादी हो गई थी, पर उनका किसी 28 साल की लड़की जैसा ही शरीर था. उनके दूध बड़े बड़े और गाण्ड तो आफत ही है. मोहल्ले के कई मर्द मेरे माँ को चोदना चाहते थे. यह बात, जब मैं छोटा था, तब से ही मुझे मालूम थी.

दोस्तो, एक बार जब मैं कॉलेज़ की छुट्टी में घर गया, तो हम खाना खा कर सो गए. रात का 1 बज रहा था, मुझे नींद नहीं आ रही थी, क्योंकि मुझे नींद नहीं आती जल्दी से तो अचानक मैंने दरवाजे पर किसी की दस्तक सुनी और चूंकि मेरा कमरा माँ के कमरे के साथ ही है तो मैंने देखा- मेरी माँ चुपके से बिस्तर से उठ कर दरवाजे के तरफ जा रही थी. मैं चुपचाप उनको देखता रहा.

दरवाजा खुलते ही मेरे मोहल्ले का एक लड़का महेश जिसकी उम्र 32 साल होगी, अंदर आया. माँ ने चुपके से दरवाजा बंद कर दिया, दरवाजा बंद करते ही महेश ने मेरे माँ के स्तनों को दबाना चालू कर दिया. लग रहा था दोनों प्रेमी एक दूसरे को पहले से जानते थे. माँ ने उससे जल्द से अपने कमरे के अंदर बुला लिया, नाईट-लैंप की रौशनी में उसकी मैक्सी चमक रही थी. महेश जो कि थोड़ा नशे में लग रहा था, अब अपना हाथ मेरे माँ की गाण्ड पर फिराने लगा और मेरी माँ अपना हाथ उसके लण्ड पर फिरा रही थी.

फिर अचानक मेरी माँ मेरे कमरे की तरफ आई. वो तसल्ली करना चाह रही थी कि मैं सो गया हूं. मैं झट से बिस्तर में लेट गया. वो भरपूर तसल्ली करके चली गई और मैं फिर से उनकी रास-लीला देखने लगा.

अब महेश ने अपना जिप खोल दिया और माँ जमीन पर घुटने के बल बैठ कर उसका 8 इंच का लण्ड चूसने लगी और महेश उसके दूधों को दबा रहा था. अब महेश ने मेरी माँ की मैक्सी उतार दी. वो उसके लण्ड को लॉलीपॉप की तरह चूसे जा रही थी. उसकी गोरी गाण्ड मुझे साफ़ दिखाई दे रही थी और मेरी माँ अपनी चूत भी सहला रही थी.

अब महेश ने अपना लण्ड मेरी माँ के मुँह से निकाला और उसे खड़ा करके चूमने लगा. मेरी माँ उसका पूरा साथ दे रही थी. अब मेरी माँ की गाण्ड मुझे मस्त लग रही थी. मेरा लण्ड भी अब खड़ा हो गया था और मेरी माँ को चोदना चाह रहा था. लेकिन मैंने चुप रहना बेहतर समझा.

अब महेश उसके दूध को अपने मुँह से पी रहा था. दोनों ही मंझे हुए खिलाड़ी लग रहे थे. अब महेश ने मेरी माँ को बिस्तर में लेटा दिया और मेरी माँ अपनी दोनों टाँग ऊपर करके बोलने लगी- आओ महेश, आज फाड़ दे मेरे चूत और गाण्ड! आज बरसा दे अपनी जवानी मुझ पर!

महेश अपना लण्ड मेरी माँ की चूत पर रगड़ रहा था और एक हाथ से उसके बड़े-2 दूध सहला रहा था. कभी कभी वो उसकी चूची को पकड़ कर चूस लेता था और मेरी माँ आह्ह्ह्ह ह ह्ह कर रही थी.

तभी महेश का लण्ड जो के 6 इंच का होगा, 8 इंच का कड़ा लौड़ा बन गया था. उसने मेरी माँ की चूत के अंदर डाल दिया और थाप मारने लगा. मेरी माँ भी खूब साथ दे रही थी उसका अपनी गाण्ड उछाल उछाल कर! उसने अपने पाँव से महेश की कमर को जकड़ लिया था. महेश भी जोर जोर से उसे चोद रहा था. कुछ देर बाद मेरे माँ का पानी छूट गया पर महेश अब भी उसे चोद रहा था.

कुछ देर बाद महेश ने अपना लण्ड निकाला, शायद वो झड़ने वाला था, वो अपना लण्ड मेरे माँ के मुँह में डाल कर खड़ा हो गया, वो उसका लण्ड का पानी ऐसे पी रही थी जैसे शरबत!

अब दोनों निढाल होकर एक दूसरे पर सो रहे थे, मेरी भी अब हालत काबू से बाहर थी, मैंने जल्दी से दरवाजा खोला और उनके सामने पहुँच गया. यह देखते ही मेरी माँ घबरा गई, उसके मुँह से आवाज भी नहीं निकली, महेश चुपचाप कपड़े पहन कर चला गया और कमरे में मैं और मेरे नंगी माँ जो बिस्तर पर बैठी थी, रह गए.

मैंने पूछा- कब से चल रह है यह सब?
तो वो घबरा गई और कहने लगी- अपने पापा को मत बताना, चाहे जो मांग लो!
मैंने कहा- जो भी?
उसने हामी भर दी.

मैंने उसके दूध पर हाथ रख दिए.
वो मुस्करा कर रह गई, बोलने लगी- आजकल बेटा बड़ा हो गया है!
और बोली- आज तू भी चोद ले पर किसी को बताना मत!
यह कह कर उसने अपना हाथ मेरे लण्ड पर रख दिया और बोलने लगी- अरे तेरा लण्ड तो बहुत बड़ा है!

अब मैंने भी अपना लण्ड उसके मुँह में दे दिया. वो उसे भी मज़े से चूसे जा रही थी. कुछ देर बाद वो बोली- चल आ जा! चोद ले मुझे!

और मैंने इशारा पा कर उसकी बुर में अपना लण्ड फंसा दिया.
वो बोल रही थी- धीरे! आह्ह्ह्ह्ह्! अव्वो! आराम से!
कुछ देर बाद वो छूटने वाली थी और मैं भी.

मैंने अपना पानी उसके बुर में डाल दिया और उसके ऊपर ही निढाल हो कर गिर गया- आआ आआ आ आ आअ!
सुबह हुई तो मेरे सामने मेरी माँ मुस्कराते हुए कहने लगी- कैसी कटी रात?
अब जब भी हमें मौका मिलता है तो मैं उसे चोदता हूँ.

कहानी कैसे लगी? Hindi Porn Stories

रात को खाना‌ खाने के बाद मैं घूमने के बहाने छत चला गया और पिंकी का इंतजार करने लगा, मगर काफी देर तक इन्तजार करने के बाद भी पिंकी छत पर नहीं आई। आखिरकार थक कर मैं वापस नीचे आकर सो गया।

अगले दिन दोपहर को भी पिंकी पढ़ने के लिये नहीं आई, इससे अब तो मेरे दिल‌ में कुछ शंका‌ व भय सा हो‌ गया… मैं सोच रहा था कि कहीं कल जल्दबाजी में ज्यादा आगे बढ़कर मैंने कुछ गलती तो नहीं ‌कर दी!?!

रात को भी खाना खाने के बाद मैं फिर से छत पर चला गया और ऐसे ही घूमने लगा…
कुछ देर तक‌ ऐसे ही छत पर घूमने के बाद मैं वापस जाने ही‌ लगा था कि‌ तभी‌ मुझे पिंकी के घर की तरफ‌ से सीढ़ियों पर किसी‌ के चढ़ने की आवाज‌ सुनाई दी… आवाज सुनकर मैं वहीं पर रूक गया।
फिर कुछ ही देर बाद एक‌ साया छत पर आया और तार पर से सूख रहे कपड़े उतारने लगा, वो साया बार बार मेरी ‌तरफ‌ ही‌ देख‌ रहा था।
छत पर अन्धेरा तो था मगर कद काठी और कपड़ों के पहनावे से मैं पहचान गया‌‌ कि वो पिंकी ही है।

मैं हमारे घर व पिंकी के घर के बीच बनी दीवार पर से कूद कर तुरन्त पिंकी के घर की छत पर चला गया जिससे पिंकी घबरा सी ‌गई‌ और जल्दी जल्दी कपड़े उतारने‌ लगी।
मैंने उससे पूछा कि वो आज पढ़ने के लिये क्यों नहीं आई तो उसने बता‌या‌ कि उसे घर में ही कुछ काम थे।

तब तक पिंकी ने तार पर से कपड़े उतार लिये थे और वो वापस जाने के लिये मुड़ने ही वाली‌ थी,‌ तभी मैंने उसे पीछे से पकड़कर अपनी बाहों में भर लिया और उसकी गर्दन व गालों को चूमने लगा जिससे पिंकी कसमसाते हुए कहने लगी- इईई…श्शशश… क्या कर रहा है…? छोड़ मुझे…! कोई आ जायेगा…!
मगर मैं कहाँ मानने वाला था, मैंने कपड़ों के ऊपर से ही उसकी छोटी छोटी चुची को‌ मुट्ठी में भर लिया और उसकी गर्दन व गालों को चूमते हुए धीरे धीरे उसके रसीले होंठों की‌ तरफ बढ़ने लगा।‌
मेरे इस हमले से पिंकी एक तो बुरी तरह से घबरा गई थी और दूसरा उसने दोनों हाथों में कपड़े पकड़ रखे थे इसलिये वो मुझसे छुड़ाने का इतना अधिक प्रयास नहीं कर पा रही थी, बस कसमसाते हुए घबराई सी आवाज में धीरे धीर कह रही थी- कोई… देख लेगा…! क्या क…कर…रहा है…? छोड़ मुझे…! प्ली..ईज…!’

मगर तब तक मेरे होंठ उसके होंठों तक पहुँच गये और मैंने उसके रसीले होंठों को धीरे धीरे चूसना शुरु कर दिया.
अब तो पिंकी और भी जोर से कसमसाने लगी, उसने जो कपड़े हाथों में पकड़ रखे थे उन्हें नीचे गिरा दिया‌ और मुझे हटाने के लिये हाथ पैर चलाने लगी। पिंकी के होंठों को अपने मुँह में भर कर मैंने उसका मुँह तो बन्द कर दिया था लेकिन अब भी वो मुझसे छुड़ाने का प्रयास कर रही थी, इसलिये मैंने पिंकी को घुमा कर दीवार के साथ लगा‌ लिया, साथ ही अपना एक हाथ भी उसकी टीशर्ट में भी घुसा दिया और उसकी छोटी छोटी नंगी चुची को सहलाने लगा।

पिंकी अब मुझे हटाने के लिये बस मेरे हाथों को ही पकड़ने का प्रयास कर पा रही थी क्योंकि मैंने उसे दीवार से लगा कर अपने शरीर के पूरे भार से दबा लिया था।
मैंने भी अब मेरा हाथ जो पिंकी की चुची सहला रहा था, उसे धीरे से उसकी‌ योनि की तरफ बढ़ा दिया जिससे पिंकी जोर से कसमसाते हुए ‘अअओ.. ओइईई… वहाँ नहीं… वहाँ नहीं… इईई… श्श्श्शशश… क..य..आ… कर‌… रहा.. है… अ..आआआ… ह्ह्हहह…’ कह कर चिल्लाई मगर पिंकी ने नीचे लोवर पहन रखा जिसमें इलास्टिक लगा हुआ था‌, जब तक‌ वो मेरा हाथ पकड़ती, तब तक ‌बहुत देर हो गई ‌थी… और बिना तकलीफ के ही मेरा हाथ सीधा उसके लोवर व पेंटी में उतर गया.

पिंकी ने अपनी जाँघों को भी सिकोड़ने की कोशिश की मगर मेरा एक पैर उसकी दोनों जाँघों के बीच फंसा हुआ था इसलिये वो असफल हो गई. और अब मेरा हाथ पिंकी की छोटी सी नंगी योनि पर था जो‌ हल्की सी गीली हो रही थी।
पिंकी की योनि बिल्कुल छोटी सी ही तो थी जो मुश्किल से मेरी दो उंगलियों के ही बराबर की होगी इसलिये मैंने उसे‌ अपनी उंगलियों से ही दबा लिया। पिंकी ने दोनों हाथों से मेरे हाथ को पकड़ लिया था और अपने लोवर से बाहर निकालने की‌ कोशिश करते हुए वो अब भी‌ यही दोहरा रही थी- अअओ.. ओइईई… क्या क…कर… रहा है…? मरवायेगा…? छोड़ मुझे…! प्ली..ईज…! कोई… देख लेगा…!
मगर मैं कहाँ मानने वाला था, मैंने अब उसकी नंगी योनि को धीरे धीरे उंगलियों से ही रगड़ना शुरू कर दिया जिससे पिंकी कसमसाने लगी और मेरे हाथ को अपने लोवर से बाहर निकालने के लिये छटपटाने सी लगी। अभी तक मेरी उंगलियाँ पिंकी की योनि को ऊपर से ही रगड़ रही थी मगर पिंकी के छटपटाने से मेरी उंगलियाँ योनि की दोनों फांकों के बीच चली गई.

मैंने भी अब उसकी योनि की छोटी छोटी फांकों को उंगलियों से हल्का सा फैला दिया और बीच की एक उंगली से योनि की‌ फांकों के बीच, योनि की दरार में सहालाना शुरू कर दिया.
जिससे कुछ ही देर में उसकी‌ सांसें तेज व गहरी हो गई और मेरी उंगलियाँ भी योनिरस से गीली होने लगी.

पिंकी का विरोध अब कुछ हल्का पड़ने लगा था क्योंकि उसे भी अब मजा आ रहा था। उसने दोनों हाथों से मेरे हाथ को पकड़ तो रखा था, मगर उसे अब वो बाहर निकालने की इतना अधिक कोशिश नहीं कर रही थी।
मैं भी ऐसे ही पिंकी की योनि को रगड़ता मसलता रहा जिससे कुछ ही देर में मेरा हाथ योनिरस से भीग कर तर हो गया और पिंकी का विरोध भी अब काफूर हो गया, पिंकी के मुँह से अब हल्की हल्की सिसकारियाँ निकलनी शुरू हो गई थी वो झूठ मूठ में दिखाने के लिये ही ‘छ..ओ…ड़..अ.. म्ममुऊ… झ..ऐ… क..य..आ… कर‌… रहा..है… अ..आआआ… छ..ओ…ड़..अ…’ कहते हुए मेरा विरोध कर रही थी मगर मेरे हाथ को अपने लोवर से बाहर निकालने की कोशिश नहीं कर रही थी।

मैं भी सही मौका देखकर धीरे से नीचे बैठ गया और साथ ही पिंकी की पेंटी व लोवर को भी एक झटके में मैंने नीचे खींच लिया जिससे पिंकी जोर से ‘अअओ..ओइईई… इईई… श्श्श्शशश… क..य..आ… कर‌… रहा..है… अ.. आआआ… ह्ह्हहह…’ करके चिहुँक पड़ी और दोनों हाथों से अपने लोवर पेंटी को पकड़ने की कोशिश करने लगी, मगर तब तक वो उसके घुटनों तक उतर चुके थे.

मेरा दिल ‌तो बहुत कर रहा था कि एक बार पिंकी की इस छोटी सी कच्ची कुवाँरी योनि के दीदार हो जाये मगर अन्धेरे में कुछ साफ नहीं दिखाई दे रहा था बस उसकी गोरी नंगी जांघें ही चमक रही थी।

पिंकी ने दोबारा से अपने लोवर व पेंटी को पहने की कोशिश तो करनी चाही मगर तब तक मैंने अपना सिर उसकी‌‌ दोनों जाँघों के बीच घुसा दिया और अपने प्यासे होंठों को उसकी नंगी, केले के तने सी चिकनी, नर्म मुलायम जाँघों पर लगा दिया.
मेरे प्यासे होंठों का अपनी नंगी जाँघों पर स्पर्श पाते ही पिंकी का पूरा बदन एक बार तो जोर से सिहर सा गया और उसने दोनों हाथों से मेरे सिर को पकड़ लिया.

मैंने भी अब देर ना करते हुए धीरे धीरे उसकी नंगी जाँघों को चूमते हुए ऊपर उसकी योनि की तरफ बढ़ना शुरू कर दिया जिससे पिंकी के पूरे बदन में सिहरन व झुरझुरी की लहर सी दौड़ने लगी जिसे मैं भी साफ महसूस कर पा रहा था।

पिंकी जब कुछ नहीं कर सकी तो वो मुझे हटाने के लिये दोनों हाथों से मेरे सिर को पकड़ कर मुझे धकेलने लगी मगर मैंने पीछे से दोनों हाथों में उसके नितम्बों को बांहों में भर लिया और धीरे धीरे उसकी जाँघों को चूमते हुए ऊपर‌ उसकी योनि‌ की तरफ बढ़ता रहा.
पिंकी की जाँघों को चूमते हुए मैं घुटनों से थोड़ा ऊपर बढ़ा ही था कि पिंकी के पैर कंपकपाने शुरू हो गये और वो मेरे होंठों की छुवन से अपने को बचाने के लिये पीछे होने की कोशिश करने लगी.

मगर उसके पीछे एक तो दीवार थी और दूसरा मैं उसके नितम्बों को पकड़े हुए था इसलिये वो पीछे नहीं हट सकी.
मैं जाँघों को अन्दर की तरफ से चूमता हुआ ऊपर बढ़ रहा था इसलिये थोड़ा सा ऊपर बढ़ते ही मेरे होंठ चिपचिपे व नमकीन से होने लगे. यह पिंकी का प्रेमरस था जो उसकी गीली पेंटी के कारण उसकी जाँघों पर लग गया था।

मैं जैसे जैसे ऊपर पिंकी की योनि‌ की तरफ बढ़ रहा था वैसे वैसे मेरे होंठ ज्यादा गीले व चिपचिपे होते जा रहे थे, साथ ही पिंकी के पैरों की कंपकपाहट भी बढ़ती जा रही थी। पिंकी एक कुँवारी व अनछुई लड़की थी उसके साथ ये सब पहली‌ बार हो रहा था जो उसकी बर्दाश्त के बाहर था इसलिये मुझे आगे बढ़ने से रोकने के लिये पिंकी ने दोनों हाथों से मेरे सिर को पकड़ लिया मगर अब मैं उसकी कमसिन कुंवारी योनि का स्वाद चखे बिना कहाँ मानने वाला था, पिंकी के पकड़ने के बावजूद भी मैं ऐसे ही धीरे धीरे‌ जाँघों को चूमते हुए उसकी ‌नंगी योनि तक पहुँच गया जहाँ से उसके कौमर्य की भीनी भीनी मादक महक फूट रही थी।

पिंकी की उस कच्ची कुँवारी छोटी सी योनि की मादक महक पाकर मुझसे रहा नहीं गया और मैंने उसे एक बार जोर से चूम लिया जिससे पिंकी ‘अअओ.. ओइईई… इईई… श्शशश… अह.. आआ… ह्ह्हहहहह…’ कहकर चीख पड़ी और कंपकपा कर उसकी दोनों जांघें आपस में मिलकर बंद हो गई।
पिंकी का ये पहला और बड़ा ही अनोखा व अदभुत अनुभव था इसलिये उसका झिझकना वाजिब ही था।

मैंने भी‌ पिंकी की जाँघों के साथ अब कोई जबरदस्ती नहीं की, बल्कि ऐसे ही उसकी बन्द जाँघों को व योनि का ऊपरी भाग, यानि की नाभि के निचले हिस्से पर चूमता चाटता रहा, साथ ही मेरे हाथ जो की पिंकी के नितम्बों को पकड़े हुए थे उनसे धीरे धीरे पिंकी के नितम्बों को भी सहलाना शुरु कर दिया जिससे कुछ ही देर में पिंकी की जाँघों की पकड़ कुछ हल्की हो गई और वो अब एक दूसरे से धीरे धीरे जुदा होने लगी।
पिंकी के पैर अब भी हल्के हल्के कंपकपां रहे थे‌ और वो कंपकपांती सी आवाज में अब भी यही दोहरा रही‌ थी ‘अअओ.. ओइईई… इईई… श्श्श्शशश… क..य..आ… कर‌…रहा..है… अ..आआआ.. .ह्ह्हहहहह… छ..ओ…ड़.. अ… म्ममुऊ.. झ..ऐ… क..य..आ…कर‌…रहा..है… अ..आआआ… छ..ओ…ड़..अ…’ मगर अब मुझे हटाने की कोशिश नहीं कर रही थी

मैंने भी कोई जल्दबाजी नहीं की बल्की ऐसे ही पिंकी जाँघों को चूमता चाटता रहा…
मगर हाँ, बीच बीच में मैं अपने हाथों को पिंकी के नितम्बों पर से सहलाते हुए पीछे से ही उसकी जाँघों पर जरूर ला रहा था.

और इस बार जब मेरे हाथ पिंकी की जाँघों पर आये तो मैंने उनके बीच अपना हाथ घुसाने के लिये हल्का सा, बहुत ही हल्का सा दबाव डाला ही था कि पिंकी की जांघें अपने आप ही खुलकर फिर से अलग हो गई और अब मेरा मुँह फिर से पिंकी की दोनों जाँघों के बीच था।

मैंने भी एक बार पिंकी की योनि को ऊपर से हल्का सा चूमा और फिर प्रेमरस सी भीगी योनि की छोटी छोटी कोमल फांकों को ऊपरी छोर से चूमता हुआ धीरे धीरे नीचे प्रेमद्वार की तरफ बढ़ गया.
पिंकी के मुँह से अब हल्की हल्की कराहें निकलना शुरू हो गई और अपने आप ही धीरे धीरे उसकी जांघें फैलने लगी, जैसे जैसे मेरे होंठ योनि की कोमल फांकों को चूमते हुए नीचे योनिद्वार की तरफ बढ़ रहे थे वैसे वैसे पिंकी की जांघें भी फैलती जा रही थी।

थोड़ा सा नीचे बढ़ते ही मेरे होंठ पूरी तरह योनिरस से भीगकर तर हो‌ गये और मुँह का स्वाद बिल्कुल नमकीन हो गया‌ क्योंकि मेरे होंठों अब योनि के अन्तिम छोर पर थे जहाँ से योनिरस का झरना फूट रहा था। मैंने भी उस यौवन झरने के उद्धगम स्थल को अपनी पूरी जीभ निकाल कर चाट लिया जिससे पिंकी ने जोरो से थरथराती आवाज में ‘अअओ.. ओह ईई… इईई… श्श्श्शश… अ..आआआ… ह्ह्हहह… क..य..आ… कर‌.. रहा..ह्ह्हह… है’ कह कर फिर से अपनी जाँघों को भींच‌ लिया मगर इस बार वो अपनेआप खुल भी गई।

मैं पिंकी के उस यौवन झरने को अपनी जुबान से चाटकर साफ करने की कोशिश करने लगा, मगर जितना मैं अपनी जुबान से चाटकर उसे साफ कर रहा था वो उतना ही ज्यादा और ज्यादा प्रेमरस उगल रहा था।

अभी तक मैं पिंकी के उस कुवांरे खजाने की पहरेदार उन कोमल फांकों को ऊपर से ही चूम‌ रहा था अभी तो खजाने तक‌ पहुँचना बाकी था इसलिये धीरे से मैंने योनि की कोमल फांकों को कुरेद कर अपनी जीभ को योनि की दरार के बीच घुसाई और जीभ से योनि की दरार में धीरे धीरे अन्दर की तरफ से चाटना शुरू कर दिया जिससे पिंकी की मुँह से अब सिसकारियाँ निकलनी शुरु हो गई।

प्रेमरस से भीग कर पिंकी की योनि‌ बिल्कुल चिकनी हो चुकी ‌थी इसलिये अपने आप ही मेरी जीभ योनि में ऊपर से नीचे तक फिसल रही‌ थी‌, मैं भी अपनी पूरी जीभ निकाल कर योनि की फांकों के बीच अन्दर की तरफ से पूरी योनि को चूम चाट रहा था.

तभी अचानक से पिंकी का पूरा बदन जोर से ऐसे थरथरा गया जैसे की उसे कोई करंट का झटका लगा हो, और उसने जोर से ‘अ.. उ्ऊऊ..इईईई… इईई…श्श्शश… अ..आआआ… ह्हहहह…’ कह कर मेरे सिर को दूर झटकने की कोशिश की.
अन्धेरे में कुछ दिखाई तो नहीं दे रहा था मगर फिर भी मुझे समझते देर नहीं लगी कि मेरी जीभ ने योनि के अनारदाने को छू लिया था जो किसी भी औरत या लड़की का बेहद ही संवेदनशील अंग होता है इसलिये पिंकी इतनी जोर से चीख पड़ी थी।

मगर मैं रुका नहीं और बस एक दो बार ही योनि के उस छोटे से चुचक के साथ खिलवाड़ करने के बाद मैं नीचे प्रेमद्वार की तरफ बढ़ गया.
और अब मेरी जीभ प्रेमद्वार की रक्षा करने वाली उन नाजुक कलियों को कुरेद कर प्रेमद्वार पर दस्तक दे‌ रही थी.
और जैसे ही मेरी‌‌ जीभ पिंकी के योनिद्वार पर लगी, पिंकी ने ‘अअओ.. ओइईई… इईई…श्श्श्शशश… अ..आआआ… हाहहह…’ की एक मीठी सीत्कार भर कर दोनों हाथों से मेरे सिर को जोर से अपनी योनि पर दबा लिया.

मैंने भी पिंकी को ज्यादा नहीं तड़पाया और धीरे से अपनी जीभ को नुकीला करके उसकी छोटी सी योनि के संकरे योनिद्वार में पेवस्त कर दिया जिससे एक बार फिर पिंकी ‘अह अओ.. इईई…
उम्म… इईई… अह ..आआआ… ह्हह…’ कह कर उचक गई. मगर इस बार उसने मुझे हटाने की कोशिश नहीं की बल्कि खुद ही मेरे सिर को अपनी योनि पर दबा लिया।

मैंने भी धीरे धीरे अपनी जुबान को योनिद्वार की संकरी सी गुफा में घिसना शुरु कर दिया.

पिंकी का अब बुरा हाल हो गया, ये सब उसकी छोटी सी योनि के साथ पहली बार हो रहा था जो उसकी बर्दाश्त के बाहर था, उसने मेरे सिर के बालों को कस कर पकड़ लिया था और जोर से
‘अअओ.. ओइईई… इईई…श्श्स्स… अ..आआ आह्हह… अब…ब…स्सस… इईई…श्श्श्शशश… अ..आआआ…ह्ह्हहहहह… अब…बस्सस…’ कहते हुए कभी मुझ पर झुक‌ जा रही थी तो कभी सीधा दीवार के साथ तनकर खड़ी हो रही थी. मगर मुझे हटाने का प्रयास या फिर मेरा विरोध बिल्कुल भी नहीं कर रही थी।

धीरे धीरे मैंने भी अपनी जीभ की हरकत को थोड़ा तेज कर दिया… और अब मेरी जीभ पिंकी के संकरे प्रेमद्वार की दीवारों पर घिसने के साथ साथ कभी कभी थोड़ा सा नीचे उसकी गुदाद्वार तक भी जा रही थी जिससे पिंकी की सिसकारियाँ भी बढ़ गई और उसने भी मेरी जीभ के साथ साथ धीरे धीरे अपनी कमर को हिलाना शुरू कर दिया.

पिंकी की योनिद्वार से इतना अधिक प्रेमरश का स्राव हो रहा था कि अपने आप की मेरे होंठ व जीभ उसमें फिसल रहे थे। यौवन रस से भीगी पिंकी की योनि में मेरी जीभ व होंठ अब अपनी पूरी चपलता से चल रहे थे।
धीरे धीरे अब पिंकी की सिसकारियाँ बढ़ती जा रही थी और उसने खुद ही कमर हिला कर अपनी योनि को मेरे चेहरे पर घिसना शुरू कर दिया था।
मैं भी अपनी पूरी कुशलता व तेजी से पिंकी की योनि में जीभ चला रहा था.

मेरी जीभ अब पिंकी के प्रेमद्वार में तो कभी योनि की दोनों फांकों के भीच योनि के ऊपरी‌ छोर से लेकर नीचे उसकी गुदाद्वार तक का सफर कर रही थी‌ साथ ही बीच बीच में मेरी जीभ योनि के उस अनारदाने को भी‌ कुरेद दे रही थी।

पिंकी अपनी कुँवारी योनि पर इस तीन तरफा मिश्रित हमले को ज्यादा देर तक बर्दाश्त नहीं कर सकी… जल्द ही उसका बदन कमान तरह तनने लगा और उसकी पकड़ मेरे सिर पर कसती चली गई… उसने मेरे सिर को पूरी ताकत से अपनी योनि पर दबा लिया और जोर से ‘इईईई… श्श्शश अआआ…ह्हहह… इईईई… श्श्श्शश अहा आआ… ह्ह्हहह… इईईई…श्श्श्शश अआआ…ह्हहहह… इईईई…श्श्शश अआआ…ह्हहहह…’ कहते हुए अपनी योनि से रह रह कर मेरे चेहरे पर प्रेमरश की बौछार करना शुरू कर दिया।
चार पाँच किश्तों में अपना योनिरस मेरे चेहरे पर उगल कर पिंकी निढाल हो गई, वो तो शायद मुझ पर गिर ही जाती मगर मैंने हाथों से उसे सम्भाल लिया, पिंकी के सारे बदन का भार अब मेरे हाथों पर था, मैं भी अब पिंकी को अपनी बांहों में थामे हुए ही धीरे धीरे उठकर खड़ा हो गया और धीरे धीरे फिर से उसके मखमली गालों को चूमना शुरू कर दिया।

पिंकी भी अब इस मूर्छा से जागने लगी थी मगर उसका बदन अब भी कंपकपा रहा था। धीरे धीरे मैं पिंकी के गालों पर से चूमता हुआ उसके कोमल होंठों पर आ गया मगर जैसे ही मैंने उसके होंठों को मुँह में भरा पिंकी ने अपना चेहरा घुमा लिया और मुझसे छुड़वाकर जल्दी से अपने कपड़े सही करने लगी।

पिंकी ने अपने लोवर व पेंटी को पहना ही था कि मैंने फिर से उसको पीछे से पकड़ लिया और उसके गर्दन व गालों को चूमते हुए कहा- यार, तुम्हारा तो हो गया अब मेरा भी तो कुछ कर दो…!
इस पर पिंकी ने कहा- क्या?
मैंने उसके गालों पर एक जोरदार चुम्बन करते हुए बताया- यही जो मैंने किया है.
और अपना एक हाथ उसकी लोवर में डाल दिया जिससे पिंकी कसमसाने लगी और ‘अअओ.. ओइईई… इईई… श्श्श्शशश… अ..आआ…हहह… बस…छोड़…मुझे… अ..आआआ… ह्हह… क..य..आ… कर‌…रहा.. है… अ..आआआ… ह्ह्ह… अब…बस्स… बहुत.. देर… हो..गई… जाने..दे… मुझे… अ..आआआ… ह्हहह…’ कहते हुए मुझसे छुड़ाने की कोशिश करने लगी.

मगर मैं कहाँ रुकने वाला था, मेरा हाथ अब पिंकी की नंगी योनि पर था जो प्रेमरस से भीगी हुई थी और उसके योनिद्वार से अब भी हल्का सा प्रेमरस रिस ही रहा था।
पिंकी मेरा हाथ अपने लोवर से बाहर निकालने की कोशिश कर रही थी मगर मैंने पिंकी के होंठों को मुँह में भरकर उसका मुँह बन्द कर दिया और उसकी नंगी योनि को फिर से मसलना शुरु कर दिया जिससे पिंकी कसमसाने लगी और मुझसे छुटने के लिये हाथ पैर चलाने लगी।

मैंने पिंकी को फिर से दीवार से सटा लिया और धीरे धीरे उसकी योनि की फांकों को रगड़ता मसलता रहा जिससे कुछ ही देर में उसकी योनि में फिर से तरावट आ गई और पिंकी फिर से उत्तेजित होने लगी।

मैं कुछ आगे करता कि तभी हमारे घर की तरफ से मेरी भाभी की आवाज सुनाई दी, वो मुझे नीचे बुला रही थी।
भाभी की आवाज सुनते ही पिंकी तुरंत मुझसे छुड़वा कर अलग हो गई और जल्दी से नीचे छत पर गिरे हुए सूखे कपड़े उठाने लगी।

मैं भी हमारे घर की छत पर आ गया और ऊपर से ही भाभी को आवाज देकर बता दिया- थोड़ी देर में आ रहा हूँ।
इसके बाद मैं वापस पिंकी के घर की छत पर आ गया मगर तब तक पिंकी कपड़े उठाकर नीचे जा चुकी थी।

सच कह रहा हूँ, उस समय मुझे अपनी भाभी पर बहुत गुस्सा आ रहा था… पर कर भी क्या सकता था इसलिये मन मसोस कर नीचे आ गया।
नीचे भाभी ने जब मुझसे पूछा कि ‘क्या चल रहा है’ तो मैंने भी भाभी को सारी बात बता दी।
भाभी ने कहा- मुझे पता था तुम यही सब कर रहे होगे, इसलिये तो बुला लिया, ऊपर छत पर कोई देख लेगा तो क्या होगा, थोड़ा इन्तजार कर लो, जब मम्मी पापा शहर जायेंगे तब मौका मिल जायेगा।

मुझे उत्तेजना भी चढ़ी हुई थी और भाभी पर गुस्सा भी आ रहा था इसलिये उस रात मैंने सारा गुस्सा भाभी को बुरी तरह से चोद कर उतारा जिससे भाभी‌ को मजा तो आया पर सुबह उसकी हालत खराब हो गई।

प्रेषिका/प्रेषक ?: सिया सोनी/सुनील Hindi Porn Stories

मेरी पिछली कहानी “माला की चुदाई” पर बहुत से Hindi Porn Stories पत्र मिले। मेरे कई पाठकों ने अपने दिमाग का इस्तेमाल किया और मुझसे जानकारी मांगी कि मैं नर हूं या नारी?

तो दोस्तो- हकीकत यह है कि मैं नर हूं, मेरा नाम सुनील है और राजस्थान के अजमेर ज़िले का रहने वाला हूं। आज मैं आपको नई कहानी बत रहा हूं जो करीब चार माह पुरानी है।

मैं शार्टकट के चक्कर से पुलिया पार करता हुआ बाईक से कालोनी में जाने वाला था मगर उससे पहले ही मुझे एक शानदार २६-२७ साल की नई शादीशुदा युवती नज़र आई जो अपने आप में बहुत ही खूबसूरत थी। उसके बूब्स तो माशा अल्लाह बहुत ही नज़ाकत लिए हुए थे। उसने मुझे आवाज़ लगाते हुए कहा कि क्या आप मुझे आगे कालोनी तक लिफ़्ट देंगे? मुझे तो मानो बिन मांगे मुराद मिल गई। मैंने बड़े सलीके से जवाब दिया- जी बैठिए ! मैं आपको आपके घर तक छोड़ दूंगा। वो मेरी बाईक पर बैठ गई।

अब मैं बाईक चलाता और हल्के से भी ब्रेक लगने से वो मुझसे जैसे ही स्पर्श करती, कसम से बहुत गहरा झटका लगता, क्योंकि हए झटके के साथ उसके बड़े बड़े बूब मेरी कमर से टकरा जाते और मेरी हालत खराब हो जाती। खैर जैसे तैसे मैं उसके घर पहुंच कर उसे घर के बाहर छोड़ कर जाने लगा तो उसने मुझे बड़े प्यार से अन्दर बुलाया तो मैं इंकार ना कर सका, चूंकि दोपहर का समय था और गर्मी का मौसम भी, शरीर से पसीना चू रहा था।

मैं अन्दर गया तो वहां मात्र एक उसकी नौकरानी थी, मुझे पानी पिलाने के बाद उसे भी घर भेज दिया। अब घर में हम दोनों ही थे। बातों बातों में मैं उससे पूरी तरह खुल गया था क्योंकि मुझे आए करीब एक घण्टा हो गया था। उसने बताया कि उसका नाम स्वीटी है और उसके पति की मार्बल की तीन चार फ़ैक्ट्रियाँ हैं जिसमें वह इतने व्यस्त रहते हैं कि सवेरे सात बजे के निकले रात दस ग्यारह बजे आते हैं और आते ही सो जाते हैं।

देर हो जाने के कारण उसने मुझे अपना सैल नम्बर देकर फ़िर आने को कहा और जैसे ही मैं जाने लगा, वह मेरे पीछे गेट पर आई और मुझे पीछे से पकर कर किस किया और मैं कुछ समझता इससे पहले ही उसका एक हाथ मेरी पैन्ट पर रेंग गया। मगर वह ज्यादा कुछ करती और मैं ज्यादा कुछ समझता, उससे पहले कालबेल चिंघाड़ उठी, और मेरा मूड बनता उससे पहले ही बिगड़ गया। खैर स्वीटी ने मुझे फ़िर आने को कहा और मैं चला आया।

दो तीन दिन बाद सुबह अचानक स्वीटी का फ़ोन आया और मुझे घर बुलाया। मैं गया तो उसी नौकरानी ने दरवाज़ा खोला और मुझे सोफ़े पर बैठा कर पानी पिलाया और चली गई। मैं स्वीटी का इन्तज़ार करने लगा। थोड़ी देर में स्वीटी आई, मुझे अन्दर अपने बेडरूम में ले गई। दरवाज़ा बंद करने के बाद स्वीटी ने मुझे कस के पकड़ लिया और ऊपर से नीचे तक चूमती रही। मुझे लगा कि आज मेरा देह शोषण होना है। मगर नहीं, उसने मुझे १५-२० मिनट चूमने के बाद अपने बेड पर बिठाया और फ़्रिज़ से बीयर निकाल कर लाई, दो ग्लास बनाए, एक उसने मुझे दिया और मेरे पास बैठ कर दूसरा खुद पीने लगी।

धीरे धीरे मैंने अपना हाथ बढ़ाया और उसके बूब्स को सहलाने लगा। उसका मुंह अपनी ओर करके मैंने एक लम्बा किस लिया और एक हाथ से उसका ब्लाऊज़ उतारा। ब्लाऊज़ के अन्दर उसने काली ब्रा पहन रखी थी जो मेरी एक खास पसन्द है। काली ब्रा में कैद दोनों कबूतर कब आज़ाद हो गए पता ही नहीं चला। इधर स्वीटी ने मेरी पैन्ट की ज़िप खोल कर मेरा लण्ड पने हाथ में ले लिया और सहलाने लगी। फ़िए बड़े प्यार से मेरे लण्ड को चूमने, चूसने लगी। उसके चूसने से मेरा लण्ड एक दम सख्त हो गया और उसके बाल पकड़ कर उसके मुंह में ही चुदाई करने लगा। थोड़ी देर में ही मेरे लण्ड ने उसके मुंह में रुक रुक कर फ़व्वारा छोड़ दिया जिसे स्वीटी ने बड़े प्यार से गटक लिया और अपनी जीभ से दीवानों की तरह मेरे पूरे लण्ड को चाटने लगी।

इधर मैंने उसके चूतड़ों में अपनी उंगलियों से चुदाई कर कर के उसको भी झाड़ दिया। अब मैंने उसको बेड पर पीठ के बल लिटाया और उसकी टांगों को चौड़ी करके रसीली चूत को चाटने लगा। हकीकत में, दोस्तो, जितना आनन्द चूत चटाई में आता है उतना आनन्द तो ओर कहीं नहीं मिल सकता। चूत चटाई के दौर में स्वीटी दो बार झड़ चुकी थी। उसने मेरे बाल कस के पकड़ लिए और उसके मुंह से लगातार आवाज़ें आ रही थी… आह्… संजू… चाटो आज जी भर कर चाटो ! मैं भी स्वर्ग का आनन्द प्राप्त कर रहा था। उसकी चूत गोरी-चिट्टी व चिकनी थी और साथ ही मामूली बालों का भी पहरा था जिससे चूत चटाई का आनन्द दुगना हो गया।

अब मैंने उसकी दोनों टांगों को अपने कंधों पर रख लण्ड का सुपाड़ा उसकी चूत के दरवाज़े पर रखा, सुपाड़ा अपने आप फ़िसल कर आधा अन्दर चला गया क्योंकि मेरी चूत चटाई से उसकी बुर एकदम गीली और चिकनी हो गई थी। स्वीटी डार्लिंग इतनी गर्म हो चुकी थी कि उसके मुंह से अनाप शनाप आवाज़ें आ रही थी कि संजू डार्लिंग ! मैंने तुम्हें चुन कर गलत नहीं किया, वाकय में तुम्हारा लण्ड माशाअल्लाह है।

मैंने अपने लण्ड को एक धक्का दिया तो वह चिल्ला उठी- आह ! मार डालोगे क्या ! मेरी चूत का सत्यानाश कर दोगे, मुझे नहीं चुदवाना, मुझे छोड़ो, मगर अब संजू यानि आपका चोदू दोस्त कहां रुकने वाला था। मैं उसके दोनों उरोज़ों को सहलाने लगा और अपने होठों से उसके रसीले होठों को चूसने लगा जिससे वो थोड़ी शांत हुई।

मैं लण्ड को स्वीटी की चूत में धीरे धीरे पेल रहा था। अब वो भी जोश में आ गयी थी और नीचे से अपने चूतड़ हिला हिला कर मेरा साथ दे रही थी। स्वीटी बके जा रही थी- चोदू ! आज मुझे पूरी कर दो संजू, आज फ़ाड़ दो मेरी चूत को…वगैरह वगैरह्। जिस पर मेरा हौंसला और बुलन्द हुए जा रहा था और मैं अपनी चोदने की गति को बढ़ाए जा रहा था।

अब स्वीटी चिल्लाने लगी- संजू ! मैं गई ! मैं गई संजू !

और वह झड़ गई। मैं दस पन्द्रह धक्कों के बाद आह्…आह की आवाज़ करता उसकी चूत में ही झड़ गया।

हमने पहला दौर ही करीब २०-२५ मिनट में पूरा किया। फ़िर दूसरे, तीसरे, चौथे दौर में देर नहीं लगाई क्योंकि स्वीटी थी ही इतनी शानदार चीज़ ! हमारा चुदाई का दौर शाम तक चलता रहा।

स्वीटी को कभी कुतिया बना कर चोदा तो कभी सोफ़े पर तो कभी अपनी खुद की चुदाइ कराता। मैंने जाते जाते स्वीटी की गाण्ड मारने के लिए उसकी गाण्ड में उंगली की तो वह समझ गयी। उसने कहा- अभी नहीं ! अगली बार।

सच ! स्वीटी को चोदने का मज़ा किसी भी नायाब हीरे मिलने की खुशी से कम नहीं था क्योंकि जब मैं जाने लगा तो उसने मुझे ५००० रूपए दिए और मुझे लेने पड़े।

तो कैसी लगी मेरी स्वीटी संग चुदाई की कहानी Hindi Porn Stories

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