Important Notice: Post Free Ads Unlimited...🔥🔥🔥

Male Escorts in Burhanpur Premium Companionship and Escort Services

Read Our Top Call Girl Story's

Hindi Sex stories

दोस्तो, मैं अमन कोलकाता Hindi Sex stories से… चोदन स्टोरीज का लेखक…
आपने मेरा पहला अनुभव ’एक सच्ची कहानी’ के रूप में पढ़ी होगी. इसके जवाब में मुझे कई ई मेल मिले. बहुतों को ये कहानी झूठी लगी.

लेकिन सच तो हमेशा सच ही रहता है. इस कहानी से मुझे एक दोस्त मिली. जो की मुझे रोज 4-5 मेल करती है और मुझे भी उसके ई मेल का इंतेजार रहता है.

खैर, मैं सेक्स के बारे में शुरू से ही बहुत सक्रिय रहा हू. मेरी शादी के दस साल हो गये हैं. इस वेबसाइट पर कहनियाँ भेजने वाले और पढ़ने वाले ज़्यादातर शादीशुदा लोग ही होंगे ऐसा मैं सोचता हूँ.

रवि और चिंता के साथ सेक्स करने के बाद से मेरी इच्छा और ऐसा करने को करने लगी. उस समय के बाद जब मैं रितु (मेरी बीवी) के साथ सेक्स करता तो मुझे ऐसा ख्याल आता कि अगर एक और कोई मर्द होता और हम दोनों मिलकर रितु को फक करते तो कैसा लगता. इसके बाद मुझे ख्याल आया वाइफ स्वापिंग के बारे में. इसके बारे में बहुत चर्चा हो रही थी. मैं ये सोचता था कि क्या ऐसा होता है. मैंने अपनी बीवी से कहा तो पहले तो उसने झिड़क दिया. महीनों कोशिश करने के बाद वो तैयार हुई लेकिन इस शर्त पर कि मर्द उसकी पसंद का होगा और ये केवल एक ही बार ऐसा करेगी. मेरा ख्याल था कि अगर वो किसी के साथ राज़ी होती है तो शायद मेरी 2:1 ( दो मर्द और एक औरत) की इच्छा पूरी होगी.

इसके बाद मैंने ऐसे जोड़ों की नेट पर तलाश शुरू की. संपर्क हुआ लेकिन बात आगे नहीं बढ़ी. किसी को मैं नहीं पसंद आया तो कोई मिलने की बात उठते ही जवाब देना बंद कर दिया तो किसी को मेरी बीवी ने पसंद नही किया. एक-दो जोड़ों ने अपनी फोटो भी भेजी थी लेकिन बात नहीं बनी. कहने को तो सब तैयार थे लेकिन वक्त पर सबने अपने पैर पीछे खींच लिए.

पिछले साल यानी 2004 में मेरा संपर्क एक लड़के से हुआ जिसका नाम सन्नी था. कुछ ई मेल के संपर्कों के बाद हम मिलने पर राज़ी हुए. और एक दिन मिले लेकिन केवल वो और मैं. वो मुझसे दिखने ज़्यादा स्मार्ट और हॅंडसम था. मुझे लगा कि वो मेरी बीवी को पसंद आ जाएगा. लेकिन उस दिन के मिलने के बाद उसने संपर्क करना छोड़ दिया. उसके फोन पर ट्राइ करने पर हमेशा आउट ऑफ रीच होता. मुझे लगा कि उसे मैं पसन्द नहीं आया और मेरी बीवी ने मुझे जी भरकर कोसा कि तुम्हारा दिमाग़ बिना मतलब के कामों में लगा रहता है.

इस घटना के 6 मास के बाद मैंने उसके मोबाइल पर एक “हैप्पी न्यू ईयर” का मैसेज भेजा. कुछ दिन के बाद उसका जवाब मिला कि उसका फोन खो गया था इसलिए वो मुझसे संपर्क नहीं कर पाया था और वो अब हम लोगों से मिलना चाहता है. फिर मिलने का दिन तय हुआ. मैंने अपनी बीवी को बहुत मुश्किल से उससे मिलने के लिए मनाया. सन्नी की बीवी का नाम सीमा था.

जिस दिन मिलना था उसके पहले दिन उसका फोन आया कि मैं उनसे पहले मिल सकता हूँ.
मैंने पूछा- क्यों?
तो उसने जो कहा वो सुनकर मैं तो पहले उछल पड़ा. उसने मुझे 2:1 का प्रस्ताव दिया. मैं, सन्नी और उसकी बीवी सीमा जिसको मैंने अभी तक देखा भी नहीं था और ना कभी बात किया था. मैंने बिना सोचे हाँ बोल दिया.

उसने अगले दिन मुझे एक होटल में बुलाया. मैंने अपनी बीवी नहीं बताकर एक ज़रूरी काम का बहाना बनकर मिलने चल दिया. लेकिन सारे रास्ते मैं यही सोचता था की कैसे होगा कहीं कोई प्राब्लम न हो जाए. खैर लाइफ में कभी- कभी रिस्क तो लेना ही पड़ता है.

मैं सन्नी के बताए हुए होटल के बाहर पहुँचा वो बाहर ही मेरा इंतजार कर रहा था. फिर हम दोनों होटल में घुसे. एक रूम के सामने उसने दस्तक दिया और दरवाजा खुला और हम अंदर गये. रूम में एक 23-24 साल की लड़की थी. वही सीमा थी सन्नी की बीवी. वो एक पतली, लंबी और बहुत सुंदर तो नहीं लेकिन सुंदर थी. देखने में बहुत सादगी पसन्द लगी. मुझे तो पहले लगा कि क्या वो ऐसी हो सकती है?

फिर कुछ देर तक हमने इधर उधर की बातें की. इसके बाद सन्नी ने टी वी पर एक हिन्दी मूवी चला दी. इसके बाद वो सीमा के पास बेड पर बैठ गया और मुझे दूसरी ओर से आने को बोला. मैं सीमा के दूसरी ओर बेड पर अधलेटा होकर टी वी देखने लगा. सीमा ने उस समय ऑरेंज कलर का सूट पहन रख था और उसमे वो बहुत पवित्र लग रही थी.

फिर सन्नी ने उसका एक हाथ मेरे हाथ में पकड़ा दिया और एक हाथ अपने हाथ में लेकर चूमने लगा. उस समय सीमा बेड पर अधलेटी थी. मैंने भी उसका हाथ धीरे धीरे चूमना शुरू किया तो उसने अपनी आँखें बंद कर ली. सन्नी धीरे धीरे उसके गर्दन और कानो को चूमने लगा और सीमा का मुख मेरी ओर घुमा दिया मैं सीमा के होठों को अपने होठों में लेकर चूसने लगा और अपनी जीभ उसके मुंह में घुसा दी जिसे वो चूसने लगी. मैंने पहली बार उसकी चुचियों पर हाथ रखा. चुचियाँ छोटी पर कठोर थी. सन्नी भी उसकी एक चुची दबाने लगा.

सीमा उस समय उत्तेजना से छटपटा रही थी. उसके होठों को चूसते हुए मैंने अपना एक हाथ उसकी बुर की ओर बढ़ाया. उसने इलास्टिक वाली सलवार पहन रखी थी इसलिए मुझे वहाँ तक पहुँचने में कोई परेशानी नहीं हुई. उसके बूर पर छोटे छोटे बाल थे. मैंने एक अंगुली उसकी बूर में घुसाई तो मेरी अंगुली पूरी तरह से भीग गई.

इसके बाद सन्नी ने उसकी सलवार और पैंटी एक झट के में उतार दी और मैंने उसके ऊपर के कपड़े उतार दिए. अब वो पूरी तरह से नग्न थी. जिस लड़की को मैंने 1 घंटा पहले पहली बार देखा था वो मेरी बाहों में थी पूरी तरह से नग्न. मेरी उस समय क्या हालत थी मैं शब्दों में बयान नहीं कर सकता. मैं उसकी एक चुची को चूस रहा था और सन्नी दूसरी. और सीमा का चेहरा लाल हो रहा था.

इसके बाद मैं उसके पेट और नाभि से होते हुए उसकी बूर को चूसने लगा. उस समय सीमा उत्तेजना से जैसे पागल हो रही थी और अपना बूर चूसते हुए मुझे अपना सिर उठा कर देख रही थी.

सन्नी ने अपना लिंग उसके मुख में दे दिया और वो उसे चूस रही थी. इसके बाद सन्नी ने मुझे उसे चोदने का इशारा किया और एक कंडोम भी दिया. मैंने जल्दी से कंडोम को अपने लण्ड पर चढ़ा कर सीमा के दोनों पैरों के बीच बैठ गया. और उसकी पतली कमर को दोनों हाथों में उठकर अपना लण्ड उसके बूर में एक ही बार घुसा दिया वो उत्तेजना के मारे ज़ोर से चिल्लाई. मैंने उसकी कमर को दोनों हाथों में पकड़ कर थोड़ उपर उठाकर ज़ोर ज़ोर से उसे चोदने लगा. मैं जितना ज़ोर से धक्का लगता वो उतनी ज़ोर से अपना चूतड़ उठाती. ऐसी हॉट लड़की मैंने आज तक अपनी जिंदगी में नही देखी थी।

कंडोम लगाकर करने में मेरा जल्दी झड़ता नहीं है इसलिए मेरी बीवी बर्थ कंट्रोल पिल्स खाती है. वहाँ भी ऐसे ही हुआ मैं करते – करते थक गया लेकिन सीमा नहीं थकी. अपनी जिंदगी में मैंने 5-6 लड़कियों को चोदा है लेकिन सीमा ने मुझे थका दिया था. सन्नी ने मेरी स्पीड धीमी देखकर मुझे हटाकर वो सीमा को चोदने लगा कुछ देर के बाद वो भी हट गया. लेकिन सीमा के चेहरे को देखकर ऐसा लग रहता की उसे और चाहिए.

मैं और सन्नी बेड पर लेट गये और सीमा हमारे बीच में बैठ गई उसने मेरे लण्ड पर से कंडोम हटाया और चूसना शुरू किया। उस समय तो ऐसा लगा कि मैं स्वर्ग में हूं. वो कभी मेरा तो कभी सन्नी का लॅंड चूस रही थी. उसने बताया कि ये उसका एक सपना था कि वो एक समय में दो मर्दों से चुदवाये और उनका लण्ड चूसे. इसके बाद सन्नी फिर उसे चोदने लगा और मैं उस समय उसकी चुचियाँ दबा रहा था. सन्नी के झड़ने के बाद मैंने एक और कंडोम अपने लण्ड पर लगाया और उसे चोदने लगा. थोड़ी देर के बाद मैं भी झड़ गया लेकिन सीमा का चेहरा जैसे कुछ और माँग रहा था. खैर मैंने अपने कपड़े पहने और दूसरी बार सारी रात का प्रोग्राम बनाने के लिए बोलकर चला आया क्योंकि मुझे उस समय मुझे ऑफीस भी जाना था.

दोस्तो, ये मेरा आपसे बाँटने लायक आख़िरी अनुभव है अभी तक तो… इसके बारे में अपनी राय प्रकट करना! Hindi Sex stories

हाय दोस्तो !Oral Sex

पता नहीं लोगों को चार पांच बार Oral Sex नई नवेली चुदाई करने को मिल जाती है, पर मैंने तो एक बार में भी शायद देर कर दी।

मेरी कहानी ऐसी है कि मैं शायद कभी लोगों को समझ नहीं पाया खासकर लेडीज को, पता ही नहीं लगता कि उन्हें कब चुदना है कब नहीं? मेरी कहानी कुछ ऐसी है।

मैं बहुत ही सेक्सी किस्म का इन्सान हूँ, अक्सर सेक्स के बारे में सोचता रहता हूँ।

एक दिन मेरे भाई (सगा नहीं) की बीवी से मुलाकात हुई तो उन्होंने कहा कि आप बड़े मज़ाकिये हो। फिर उसने मेरा नम्बर ले लिया। उसके एक सप्ताह बाद उसने हमारे फर्म से काम करना शुरू कर दिया। मेरा फर्म कंप्यूटर डील करता है इसलिए जब भाई घर पर नहीं होते थे वो मुझे घर पे फ़ोन करके बुलाती और कहती कि उनके कंप्यूटर में कुछ प्रॉब्लम है इसलिए सर्विस के लिए मुझे जाना ही पड़ता था।

वो मेरे करीब बैठ जाती थी लेकिन कभी भी ग़लत हरकत नहीं की।

उसके बाद जब उसे लगा कि मैं कुछ समझ नहीं पा रहा हूँ, तो उसने खुलकर आई लव यू ! भी बोल दिया लेकिन मैं समझ नहीं पाया फिर उसने मुझे कई बार बाहर घूमने के लिए बुलाया और मैं भी चला गया। फिर वो मेरे बगल में सटकर बैठ जाती और बातें करती। कहती कि उसका मन मेरे बिना नहीं लगता। मैंने भी कह दिया कि वो मुझे अच्छी लगती है।

फिर एक दिन जब हम अकेले बैठे थे तो मैंने उसकी ब्रेस्ट को छू लिया क्योंकि हम पार्क में थे इसलिए मैं उसके कपड़े नहीं उतार सका, फिर 2 मिनट बाद वो चलने को कहने लगी और हम चल दिए।

अगले दिन उसने फिर से मिलने के लिए बुलाया और हम पार्क पहुँच गए। थोड़ी देर इधर -उधर की बात के बाद मैंने उसे छूने की इच्छा जाहिर की और वो बोली इधर बहुत भीड़ है। हम एक कोने में चले गए, वहां उसने धीरे से कहा अब छू सकते हो!
मैंने कहा- क्या?
तो बोली- कुछ नहीं !

फिर मैंने उसे पकड़ लिया और उसके होंठ चूमने लगा। वो भी मजे ले रही थी तभी उधर से कोई आदमी के आने की आहट हुई और हम दूर दूर हो गए। वो डर गई और घर चलने को कहा। हम घर आ गए वहां कोई नहीं था पर जब मैंने उसे छूना चाहा तो उसने मुझे मना कर दिया और डांटने लगी, कहने लगी- आप बड़े बदतमीज़ हैं। और मैं घर चला गया।

फिर 8-10 दिन बाद उसने फिर से मिलने के लिए बुलाया। क्योंकि उसके घर में नॉन-वेज़ नही बनता था इसलिए उसने मुझे लंच के लिए मुझे एक होटल में बुलाया और मैं गया। फिर उसने कहा- चलो एक कमरा लेते हैं और कुछ देर बैठते है।

पर मैंने मना कर दिया क्योंकि मेरे पास 1000 रुपये नहीं थे, कमरे का किराया 800 रुपये था। इसलिए मैंने कहा कि मेरे पास समय नहीं है और जल्दी ऑफिस जाना है। फिर वो मुझे एक कपड़े की दुकान में ले गई, मेरे लिए शर्ट खरीदी, मुझे गिफ्ट किया और मुझे ट्राई रूम के अन्दर बुलाने लगी। पर दुकान में भीड़ होने के कारण मैंने मना कर दिया। फिर उसको घर छोड़ आया।

फिर उसके घर पर बहुत बार मिले लेकिन उसने मुझे छूने भी नहीं देती दिया। एक दिन वो कहीं बाहर जा रही थी तो मुझे स्टेशन पर छोड़ने के लिए बुलाया और जब गाड़ी आई तो बिछड़ते हुए उसकी आंखों में आंसू आ गए। मैं सोच में पड़ गया कि वो मुझसे कितना प्यार करती है !

पर उसके बाद वो आई और मुझसे दूर रहने लगी। एक टूर पर पूरे परिवार के साथ गई और मुझे घर पर रहने को कहा। वो चली गई मुझे लगा कि वो मुझे फ़ोन करेगी पर उसने नहीं किया। फिर वो वापिस आ गई और मुझसे दूर रहने लगी। मेरे समझ में नहीं आ रहा था कुछ भी।

फिर एक दिन पता लगा कि वो मेरे ऑफिस के एक स्मार्ट लड़के जो कि मुझसे लंबा और स्वस्थ था उससे बात करने लगी थी। इसी बीच मेरा तबादला 7 किलोमीटर दूर वाली दुकान में हो गया था और वो दोनों खूब मिलने लगे। मुझे बहुत बुरा लगा क्योंकि मैं शायद उससे प्यार करने लगा था और उसके साथ सेक्स भी करना चाहता था, पर शायद देर हो चुकी थी।

उसने मुझसे मिलने से मना कर दिया जिसकी वजह से हम दोनों में खूब झगड़े हुए और वो मुझसे और दूर हो गई। अब न मैं उससे फ़ोन करता न वो मुझे। इसी बीच मेरी जिंदगी में एक लड़की आ गई जिस कारण मैं उससे आसानी से दूर हो सका।

आज फिर से उसने मुझे फ़ोन किया और मैं फिर से उलझन में हूँ। Oral Sex

hindi Sex Stories

अन्तर्वासना के सभी hindi Sex Stories पाठकों को मेरा नमस्कार ! मैं अन्तर्वासना का नियमित पाठक हूँ और मैं भी सभी को अपनी जिन्दगी की वो बातें बताना चाहता हूँ जिनको पढ़ कर सभी को मज़ा आए !

दोस्तों यह वो घटना है जिसने पहली बार मेरा परिचय एक लड़की के जिस्म से करवाया ! सच बताऊँ तो इससे पहले मैंने सिर्फ इसके बारे में सुना था पर देखा नहीं था! मन करता था कि कब मुझे असली चूत के दर्शन होगे! यही सोच सोच कर मैं सिर्फ मुठ मार कर अपनी प्यास बुझा लेता था! यह सिलसिला बहुत समय तक चला!

बात उस समय की है जब मैं पढ़ता था! एक दिन मैंने अपनी क्लास की एक लड़की की एक कॉपी में एक चित्र देखा जो किसी ने पेन्सिल से बनाया था! उस में एक लड़का मूत रहा था और एक लड़की नीचे बैठ कर उसको पी रही थी! मैं घबरा गया और मैंने जल्दी से वो कॉपी बंद कर दी, पर मेरा मन बार बार उसी चित्र पर जा रहा था और सोच रहा था कि काश मुझको भी ऐसा मौका मिलता! यही सोचते सोचते मैं घर आ गया! फिर खाना खा कर शाम को अपना होमवर्क करने लगा पर मेरा मन नहीं लग रहा था।

उस समय घर पर कोई नहीं था! तभी हमारे पड़ोस में रहने वाली एक लड़की जिसका नाम मोना था, वो हमारे घर आई। हम लोग हम-उम्र थे और साथ साथ खेलते थे! वो जब मेरे पास आई और मुझसे खालेने के लिए कहने लगी पर मैंने मना कर दिया!

उसने पूछा- क्या बात है?

मेरा मन कर रहा था कि यह बात मैं किसी को बताऊँ पर उससे मुझको शर्म भी आ रही थी और डर भी लग रहा था कि कहीं उसने किसी से मेरी शिकायत कर दी तो?

पर उसने बार बार मुझसे पूछा तो मैंने उसको अपनी कसम दे कर कहा- तुम यह बात किसी को नहीं बताओगी !

उसने कहा- ठीक है !

फिर मैंने उससे वो बताया कि मैंने आज क्या देखा तो वो शरमा गई! शर्म तो मुझको भी आ रही थी पर अब तो बात खुल चुकी थी, तो मैंने उसको कहा- यह बात किसी को मत बताना !

उसने कहा- ठीक है, पर मैं भी तुमको एक बात बताऊँ?

मैंने कहा- बताओ !

वो बोली- मैं और मेरा चचेरा भाई कई बार मम्मी पापा का खेल खेलते हैं!

मैंने पूछा- कैसे?

तो उसने बोला- हम लोग स्टोर में अकेले में अपने कपड़े उतार कर सेक्स करते हैं।

मैं एक दम चौंक गया और उसकी तरफ देखने लगा। वो बोलती रही और मैं सुनता रहा। फिर उसने मुझको देखा पर मुझे उसका देखना कुछ अलग लगा। वो आज मुझको कुछ अलग लगने लगी थी। कहीं आज मेरी इच्छा तो पूरी नहीं होने वाली थी !

मैंने सोचा कि जब हम लोगों में इतनी खुल कर बातें हो गयी हैं तो एक बार कोशिश करने में क्या है ! हो सकता है आज मुझको कुछ मिल जाए !

तो मैंने हिम्मत करके उसको कहा- मेरा भी बहुत मन करता है यह सब करने का ! और अगर तुम बुरा न मानो तो हम लोग यह मज़ा ले सकते है !

उसने तुंरत बोला- किसी को पता चल गया तो क्या होगा?

मैं समझ गया कि यह तैयार तो है पर डर रही है, मैंने तुंरत उसको अपनी बाहों में लिया और उसके होठों पर चूम कर कहा- मेरी जान, पता तो तब चले न जब कोई बताएगा ! और वैसे भी हम लोग अकेले में करेगे !

तो उसने कुछ नहीं कहा!

मैंने उसको पकड़ कर भी दो चार चुम्बन जड़ दिए तो उसने भी मुझको जवाब दिया! मैं मन ही मन खुश हो रहा था कि जिस चीज़ को मैं बाहर देख रहा था वो तो मेरे पास ही थी! हम लोग बहुत देर तक एक दूसरे को चूमते रहे! उसको देख कर पता चल रहा था कि उसको इस बात अच्छा अनुभव है!

धीरे धीरे उसने मेरे सारे जिस्म को चूमना शुरु कर दिया तो मैं समझ गया कि वो गरम हो गई है! मेरा हाथ भी उसके टॉप में जा चुका था और मैं उसके छोटे छोटे स्तनों को सहला रहा था! मैं बता नहीं सकता कि उस वक़्त मुझको कैसा लग रहा था! पहली बार किसी लड़की के स्तन दबाने का मज़ा तो आप लोगों को पता ही होगा! फिर मैंने जल्दी से उसको टॉप उतार कर फेंक दिया! मेरे सामने रोज़ मेरे साथ खेलने वाली लड़की सिर्फ स्कर्ट और ब्रा में खड़ी थी और उसकी सफेद ब्रा में उसके छोटे वक्ष साफ़ दिख रहे थे! अब मुझसे कंट्रोल नहीं हो रहा था और मैंने उसकी ब्रा अलग कर दी और उसके स्तन को अपने मुँह में ले कर चूसने लगा! वो भी जोर जोर से आहें भरने लगी!

मैंने उससे पूछा- मज़ा आ रहा है?

तो वो बोली- जरा जल्दी जल्दी करो!

उसका हाथ मेरे लण्ड तक पहुँच गया! वो उसको सहलाने लगी और जल्दी से मुझको अलग करके नीचे बैठ गई और मेरा लण्ड मुँह में लेकर चूसने लगी! मेरी सालों की इच्छा पूरी हो रही थी! वो बहुत देर तक यही करती रही और मैं मज़े लेता रहा!

फिर मैंने उसका स्कर्ट और पैंटी उतार दी और उसकी चूत को अपने मुँह में ले के चूसने लगा! उसकी चूत पर थोड़े भूरे-भूरे बाल थे पर मुझको बहुत मज़ा रहा था! वो जोर जोर से सिसकारियाँ ले रही थी! नीचे मेरा लण्ड भी टाइट हो गया था, उसने कहा- अब इंतजार नहीं होता ! आज मुझको चौद डालो!

यह सुनकर मैंने उसको बिस्तर पर लिटाया और उसके ऊपर चढ़ गया!

यह मेरा पहला अनुभव था तो मुझको पता नहीं था कि लण्ड कहाँ डालते हैं! फिर भी कोशिश करके मैंने उसकी चूत के छेद पे अपना लण्ड लगा ही दिया और जोर लगाने लगा!

पर मेरा लण्ड अन्दर नहीं जा रहा था। तो उसने अपनी टाँगे फ़ैला ली और बोली- अब करो!

मुझको थोड़ा जोर लगाना पड़ा और दर्द भी हो रहा था पर थोड़ी सी कोशिश से मेरा लण्ड उसकी चूत में अंदर गया!

उसको भी दर्द हो रहा था तो मैंने कहा- मैं अपना लण्ड निकालूँ?

तो वो बोली- नहीं साले ! और अंदर डाल !

मैंने पूरा जोर लगाया और मेरा पूरा लण्ड अंदर चला गया ! फिर मैं धीरे धीरे धक्के लगाने लगा और अब हम दोनों को बहुत मज़ा आने लगा था!

दस पन्दरह मिनट में ही हम दोनों झड़ गए! फिर हम एक दूसरे से चिपके रहे! थोड़ी देर बाद हम लोगों को फिर जोश आया और हम लोगो ने एक और ट्रिप ली! फिर हम लोगों ने कपड़े पहने और एक दूसरे को चूमने लगे!

उस दिन के बाद हम लोगों को जब भी मौका मिलता, हम सेक्स के मज़े लेते! अब हम लोग साथ तो नहीं हैं।

तो यह थी मेरी कहानी !

आप लोगो को कैसी लगी, कृपया मुझे मेल करके बतायें। hindi Sex Stories

मेरा नाम विजेंद्र कुमार है, मैं 68 साल का हूँ और अपनी 64 साल की पत्नी नीना के साथ लखनऊ में रहता हूँ । हमारे एक बेटा और एक बेटी हैं और दोनों शादी के बाद विदेश में रहते हैं । इस उम्र में मेरा लिंग खड़ा नहीं होता इसीलिए मैं इंटरनेट पर सेक्स कहानियां पढ़कर अपनी पत्नी को सुनाता हूँ, जिन्हें सुनकर उसकी योनि गीली हो जाती है । 2020 - 21 में जब लॉकडाउन लगा था, तो मैं सप्ताह में दो से तीन बार नीना को सेक्स कहानियां सुनाता था । इस दौरान मैंने कईं बार सोचा की कोई जवान लड़का मिल जाए तो मेरी पत्नी के शरीर की गर्मी को शांत कर सके, और फिर वो मौका कैसे आया ये मैं आज बताने जा रहा हूँ । ये घटना मेरे साथ अक्टूबर 2022 में घटी थी । उस दिन हम दोनों किसी शादी से होकर आ रहे थे, घर पहुँचने तक हमें रात के एक बज गए । घर आने पर मैं बैडरूम की चाबी लेने रसोई में गया । जब मैंने फ्रिज के ऊपर से चाबी उठाई और बाहर आने लगा तो मुझे पीछे से किसी ने पकड़ लिया, मैंने खुद को छुड़ाने की कोशिश की लेकिन उसकी पकड़ मजबूत थी तो मैं चिल्लाया - नीना मुझे बचाओ ! बचाओ ! मेरी आवाज़ सुनकर नीना रसोई में आयी । उसने जैसे ही लाइट जलाई तो मैंने देखा की रसोई के दरवाज़े के पीछे दूसरा आदमी खड़ा है, उसने मेरी पत्नी नीना को पीछे से पकड़ लिया । तब नीना चिल्लाई - चोर ! चोर ! तो उस आदमी ने नीना के मुंह पर हाथ रख दिया और बोला - तुम्हारे पास जितने भी गहने और रुपये हैं, वो हमें दे दो । हम चुप-चाप यहाँ से चले जायेंगे । मैंने कहा - हमारे पास देने के लिए कुछ है ही नहीं, मुझे रिटायर हुए छह साल हो चुके हैं । पेंशन पर जी रहे हैं हम दोनों । तभी वो चोर जिसने मुझे पकड़ रखा था बोला - सब पहले ऐसे ही कहते हैं, लेकिन कुछ पैसे और गहने तो सबके पास होते ही हैं । तभी नीना ने चोर के हाथ पर काट लिया, जिससे उसकी पकड़ ढीली हो गयी और उसने नीना को छोड़ दिया । यह देख नीना भागने लगी तो चोर ने रसोई का दरवाज़ा अंदर से बंद कर दिया । तब मैंने कहा - हम दोनों शादी से आ रहे हैं, कोई माल नहीं है हमारे पास । वो चोर जिसने मुझे पकड़ रखा था बोला - ठीक तो अपने पहने हुए गहने उतार कर हमें दे दो । नीना ने डरते हुए अपने गहने उतारे और उस चोर को दे दिए, फिर वो बोली - इसके अलावा मेरे पास तुम्हें देने के लिए कुछ भी नहीं है । तब वो फिर से चोर बोला - ये लोग ऐसे नहीं मानेंगे ! इस बुढ़िया का ब्लाउज चेक कर, उसमें ज़रूर कुछ माल होगा । ये सुनकर नीना घबरा गई और स्तन छुपाने लगी, लेकिन उस चोर ने जबरदस्ती ब्लाउज पकड़ के अंदर देखा, फिर वो मेरे पीछे खड़े चोर से बोला - माल तो है ! उस दिन मेरी पत्नी ने लाल साड़ी पहनी थी, क्यूंकि नीना छोटे कद की है और गोरी भी है । उसके बालों में कुछ लटें ही सफ़ेद हैं, चेहरे पर थोड़ी झुर्रियां है लेकिन तब भी वो उम्र में कुछ कम और सुन्दर दिखती है । उन दोनों चोरों की उम्र 20 - 22 साल होगी, लेकिन दोनों पतले लेकिन मजबुत शरीर के थे । तब वो चोर जिसने नीना को पकड़ रखा था उसने मेरी पत्नी का ब्लाउज खोलने की कोशिश की तो नीना ने उसके हाथ पकड़ लिए । तब उसने नीना के स्तन पकड़ लिए और उन्हें दबाने लगा, जिससे नीना उसकी पकड़ से छूटने की कोशिश करने लगी और बोली - नहीं ये गलत है । लेकिन वो चोर नहीं माना और बहुत बेरहमी से उसके स्तन दबाने लगा जिससे नीना के ब्लाउज के हुक खुलने गए और उसकी लाल ब्रा में से हलके से स्तन दिखाई देने लगे । मैंने कहा - ये मत करो, तुमसे उम्र में कितनी बड़ी है । लेकिन मेरे पीछे खड़ा चोर बोला - साले बुड्ढे ! तेरी बीवी तो इस उम्र में भी माल है ! तब नीना के स्तन दबाने वाला चोर बोला - साली बुढ़िया सेक्सी तो है, इस उम्र में भी लाल रंग की ब्रा पहनती है । फिर उसने ब्लाउज उतार दिया और नीना की ब्रा में हाथ डाल के उसके स्तन दबाने लगा । इससे नीना ने अपनी आँखें बंद कर ली और मैंने देखा की उसके निप्पल खड़े हो रहे हैं, यानी वो गरम होने लगी है । ये देख मुझे गुस्सा आ रहा था लेकिन मैं कुछ बोल नहीं पाया तो उस चोर की हिम्मत बढ़ गयी और उसने नीना की ब्रा भी उतार दी । तब मेरे पीछे खड़ा चोर बोला – लगता है इसने माल नीचे छुपा रखा है । मैंने कहा - बेवकूफी की हद्द होती है, चड्डी में कोई माल छुपता है । पर उस चोर ने एक हाथ से नीना की साड़ी उतारनी चाही, लेकिन जब साड़ी नहीं उतरी तो । मेरे पीछे खड़ा चोर भी नीना के पास चला गया और उसने एक झटके में नीना की साड़ी खींच कर उतार दी । अब नीना के शरीर पर लाल रंग की पैंटी ही बची थी । तब दूसरे चोर ने पैंटी के ऊपर से ही उसकी चूत पकड़ ली और दबाते हुए बोला - लगता है अंदर कुछ है ! फिर वो दोनों हंसने लगे । ये देख मुझे समझ आ गया की उन दोनों के इरादे क्या हैं । तब दूसरे चोर ने नीना की पैंटी उतारनी चाही, लेकिन नीना ने उसका हल्का सा विरोध किया, पर जब उसने अपना हाथ पैंटी में डाला तो नीना उसे रोक ना सकी । ये देख मैं भी गरम होने लगा और कुछ नहीं बोल पाया । इसके बाद दूसरे चोर ने नीना की पैंटी उसकी जाँघों से नीचे की और अपनी जीभ मेरी पत्नी की योनि में डालकर चाटने लगा । इससे नीना अपने होंठ पर जीभ फिराने लगी और हिलने लगी तो पीछे खड़ा चोर अपनी ऊँगली से उसके निप्पल दबाने लगा । कुछ मिनट के बाद नीना की योनि से पानी निकल गया तो दूसरे चोर ने अपनी जीभ बाहर निकाली और बोला - जीभ आगे तक जा नहीं पा रही, लगता है लंड ही डालना पड़ेगा । तब उसने अपना पजामा नीचे किया और अपना खड़ा लंड बाहर निकाला और मेरी पत्नी नीना की योनि में डालने लगा । उसका लंड काफी लम्बा था और योनि गीली होने की वजह से आसानी से अंदर चला गया । फिर वो चोर अपना लंड अंदर-बाहर करते हुए मेरी पत्नी को चोद रहा था, साथ में वो नीना के स्तन भी चूस रहा था । तीन मिनट के बाद उसने अपना माल नीना की योनि में ही गिरा दिया और अपना लंड बाहर निकाला जिससे उसका वीर्य भी नीना की योनि से टपकने लगा, और वो बोला - माल तो है ! तू भी अंदर डालेगा तो पता चलेगा । इसके बाद नीना के पीछे खड़े चोर ने भी अपना पजामा नीचे करके खड़ा लंड बाहर निकाला और पीछे से ही अपना लंड नीना की योनि में डाल दिया । फिर वो पीछे से स्तन दबाते हुए मेरी पत्नी को चोदने लगा, इससे नीना कामुक आवाज़ें कर रही थी । इस चोर ने लगभग पांच मिनट तक नीना की योनि में अपना लंड अंदर-बाहर किया । दो बार की चुदाई से नीना थक चुकी थी, तब पहला चोर फिर से उसके पास आया और उसने नीना के मुंह पर अपना लंड फिराया और उसके मुंह में डाल दिया फिर वो धीरे-धीरे आगे पीछे होने लगा तो नीना खुद ही उसका लंड चूसने लगी । तो पांच मिनट में उसका लंड फिर से खड़ा हो गया, अब पहले चोर ने नीना को रसोई की स्लैब पर बैठाया और उसकी दोनों टांगें खोलकर फिर से अपना खड़ा लंड मेरी पत्नी की योनि में डाल दिया । ये देख मेरा लंड पूरी तरह खड़ा हो चूका था, तब मैं अपने लंड की मुट्ठ मारने लगा । मुझे जोश में आया देख दूसरा चोर भी नीना के पास चला गया और स्लैब पर खड़ा होकर उसने नीना के मुंह में अपना लंड डाल दिया । पहला चोर लंड से योनि में धक्के मार रहा था और दूसरा मुंह में, वो दोनों बड़ी बेरहमी से मेरी पत्नी की चुदाई कर रहे थे । पांच मिनट बाद उन दोनों ने अपने धक्कों की गति बढ़ा दी और फिर से अपना माल मेरी पत्नी की योनि और मुंह में गिरा दिया । नीना को देख ऐसा लग रहा था की वो ब्लू फिल्मों में काम करने वाली अभिनेत्री है, ये देख मेरा भी माल निकल गया । इसके बाद उन चोरों ने अपने लंड पर लगे माल को मेरी पत्नी की ब्रा और पैंटी से पोंछा और अपने कपडे पहन लिए । जब उन्होंने देखा की मेरे लंड से भी माल गिरा है तो वो मुझे देख हंसने लगे और बोले - तेरी बीवी बड़ी सेक्सी है बुड्ढे, जवानी में खूब मज़े किये होंगे तूने । इसके बाद जब नीना कपडे उठाकर कमरे में जाने लगी, तो एक चोर ने उसके कंधे पर हाथ रख कर अपनी तरफ खींचा और बोला - क्यों मेरी जान ! मज़ा आया या नहीं ? नीना उसकी तरफ देख कर मुस्कुराई तो दूसरा चोर उसका एक स्तन दबा कर बोला - अब तो आना-जाना लगा ही रहेगा ! इसके बाद वो दोनों चोर चले गए । उनके जाने के बाद हम भी कपडे बदल कर सो गए । उस घटना के बाद वो चोर महीने में दो-तीन बार आधी रात को शुक्रवार या शनिवार हमारे घर आ जाते हैं और मेरे सामने ही नीना के साथ सेक्स करते हैं, फिर रात हमारे घर में रुक कर सुबह चले जाते हैं । चोरों के साथ सेक्स करने के कारण नीना का शरीर काफी भर गया है और वो पहले से भी अधिक सुन्दर हो गयी है । तो ये थी मेरे साथ हुई एक सच्ची घटना, पसंद आयी तो अपनी प्रतिक्रिया मुझे यहाँ krvijendra26@gmail.com लिख भेजिए ।
Antarvasna

पाठको, आपके साथ-साथ Antarvasna मैं भी अन्तर्वासना की कहानियों का लुत्फ़ उठाता हूँ। एक कहानी मेरी ओर से भी आपको अर्पित है। इसकी प्रेरणा एक काल्पनिक पात्र ‘रति कन्या’ पर आधारित है। कहानी एक माला के सामान है, जिसके फूल सदियों से चले आ रही ‘नारी-पुरुष वासना’ या काम-मय सृष्टि की वास्तविकता है। बस नाम वगैरह बदल दिए जाते हैं। आशा है, अर्पित दो भाग, जो अपने आप में भी पूरी कहानी है, आपका मन बहलायेगें। यदि आपने इन्हें पसंद किया, तो आगे और शृंखला-बद्ध कहानियाँ भेजूंगा।

भोलेनाथ शांत हैं, फिर भला क्यों विश्व में युद्ध के बादल मंडराने लगे। उनका पिछला तांडव हुए अब पूरे सौ वर्ष हो गए हैं। उस बार, द्वितीय विश्व युद्ध में उन्होंने जम कर नर-संहार किया था। इस बार तो सृष्टि लुप्त होती नजर आती है, लेकिन ऐसा होगा नहीं। अन्तर्वासना के पात्र जीवित रहेंगे। सदियों से चले आ रही मानव-शृंखला की प्रारंभिक आवश्यकताओं को, या यूँ कहें कि उस शृंखला के बीज को, युद्ध उपरांत युग तक पहुँचायेंगे। फिर एक बार कोमल अंकुरों की हरियाली छायेगी, नए-नए पंख निकल आएंगे।

सन 2050 के आधुनिक युग में भी, जब सिंगल-मॉम होना आम बात हो चली है, रति अभी भी अपनी माँ के कड़े अनुशासन में रह रही है यहाँ तक की जींस-टॉप मत पहनो, हाई हील्स मत पहनो, गहरी लिपिस्टिक मत लगाओ। लड़कों से बात करना तो दूर की बात है, नजरें मिला कर भी वह किसी पुरुष से बात नहीं कर सकती।

जूनियर कालेज में आकर उसने माँ से कहा- मम्मी मेरी सारी फ्रेंड्स के पास पता नहीं कब से ब्लैक-बैरी हैं, कम से कम अब तो मुझे भी एक दिला दो।

बस इतनी सी बात पर माँ गुस्सा झाड़ने लगी- अभी से मोबाइल का तू क्या करेगी, तेरा कोई बॉय-फ्रेंड है जो तुझे अब यह खिलौना चाहिए? ख़बरदार जो कभी लड़कों को मुँह लगाया। हमारे घराने की लड़कियाँ शादी तक किसी अनजाने लड़के को हाथ नहीं लगाने देती।

इन्हीं लताड़नाओं के साथ उसकी माँ जल्दी जल्दी तैयार हो कर काम के लिए निकल गई। उसकी माँ स्वयं, स्वछन्द विचारों वाली, अविवाहित सिंगल-मॉम थी और अपेक्षा करती थी कि बेटी लड़कों से मित्रता भी न करे।

रति उदास होकर कालेज जाने के लिए तैयार होने लगी। वह व उसकी सहेलियाँ लगभग सभी साथ-साथ बालिग हो गई थी। उसकी सहेलियों के पास एक से एक बढ़ कर, पता नहीं क्या क्या सेक्स-खिलोने थे। बालिग होते ही उन सबके ‘पर’ निकल आये थे। सब लड़कियाँ टाईट ड्रेस पहनती, अपने कामुक फिगर की नुमाइश में लगी रहती। वह केवल रति ही थी, जिसकी ड्रेस ढीला-ढाला ब्लाउस और घुटनों तक की स्कर्ट होती।

आज जूनियर कालेज में फ्री-डे था। अर्थात, रति की कई सहेलियाँ रंग बिरंगी, मिनी-वस्त्रों में आने वाली थी। सबको अपनी नुमाइश में सेक्सी-किक मिलता था। इस मामले में रति इतनी भोली थी, जैसे सहेली न होकर, वह उनकी छोटी बहन हो।

रति के वार्डरोब में कोई भड़काऊ ड्रेस थी ही नहीं। मन ममोस कर उसने पिछले साल का, स्कूल के दिनों का, एक टू-पीस सूट निकाला। इस बीच रति के स्तन तेजी से बढ़ गए थे। ब्लाउस थोड़ा तंग हो गया था और प्लेट-दार स्कर्ट लम्बाई में थोड़ी छोटी भी। चोली की जगह उसने पारदर्शी-सिल्क की हाफ-शमीज डाल ली, जो केवल नाभि के ऊपर तक पहुँच पाई।

जन्म-दिन पर शरारत करते हुए कुछ दिन पहले एक सहेली ने उसे लाल रंग की, उत्तेजक पेंटी भेंट की थी। आज पहली बार रति ने वो वाली पेंटी पहन ली। सामने दर्पण में आपने आप को निहारा तो एक शर्म भरी मुस्कराहट के साथ आँखें नीची हो गईं। सोचने लगी, पता नहीं वह किसके सामने रेशमी शमीज व सेक्सी पेंटी में यूँ खड़ी होकर अपना लुभावन अंग दिखा पायेगी।

बचपन से ही, रति को अपने अंग प्रदर्शन से मीठी-मीठी गुलगुली होती थी। शायद उसे पुरुषों की वासना भरी नजरों से कोई किक मिलता था। लेकिन घर के कड़े अंकुश की वजह से उसकी प्यास दबी की दबी रह गई थी।

कसे ब्लाउज़ में रति के बी-कप मम्मे, एक लचक लिए कैद हो गए। उसी तरह तंग-स्कर्ट में उसके अर्ध-गोलार्ध भी उभर आये। स्कर्ट, या यों कहें, मिनी-लहंगे का छोर रति की जांघों के मध्य तक ही पहुँचा। पीछे से लहंगा और ऊपर को उठ गया था। अपने आपको शीशे में देख कर रति को सेक्स और लज्जा की मिली-जुली अनुभूति हुई। वह अपनी उम्र से काफी कम की लग रही थी। फिर हल्का सा मेक-अप, श्रृंगार किया। उसके अधर, रसीले चेरी की तरह लाल थे। उन्हें किसी लिपस्टिक की जरूरत थी नहीं। फिर भी, ग्लॉस लगा कर वह कोई स्वर्ग से आई अप्सरा-कन्या लग रही थी।

पर्स लेकर वह निकलने ही वाली थी कि सामने दरवाजे की घंटी बजी। रति घबरा गई। सोचने लगी कि इस वक्त कौन आया है, और इन भड़काऊ वस्त्रों में उसे देख, क्या सोचेगा। दरवाजे तक पहुँचने में उसे सामान्य से ज्यादा वक्त लग गया।

तनिक कांपती हुई आवाज में उसने पूछा- कौन है?
‘रति, मैं हूँ!’ जानी पहचानी आवाज आई।

रति ने राहत की साँस ली। रोहित, उसकी माँ से काफी छोटा, दूर का रिश्तेदार था; जिससे रति की अच्छी पटती थी। माँ ने केवल ‘रोहित मामा’ से मिलने जुलने की छूट दे रखी थी। तनिक संकोच करके, रति ने दरवाजा खोल दिया, लेकिन स्वयं थोड़ा आड़ में छुप गई।
रोहित अंदर आ गया।
‘दीदी कहाँ है?’ पूछते हुए उसकी नजर रति पर पड़ी।

मामा की नजरों से रति जान गई कि वे उसे ताक रहे हैं। कुछ घबरा कर, कुछ शरमा कर उसने कहा- मम्मी आज जल्दी निकल गई। कुछ काम था क्या?

रोहित बोला- हाँ, काम तो था, लेकिन वो फिर हो जायेगा!
वह अब रति को ऊपर से नीचे ऐसे देख रहा था मानो स्कैनिंग कर रहा हो। रति लज्जा से सिमट रही थी।

बाहर हवा के झोंके चल रहे थे। अधखुला दरवाजा रह रह कर फ्रेम से ठोकर खा रहा था। कुछ सोच कर रोहित ने दरवाजा बंद नहीं किया, बस भिड़ा कर छोड़ दिया।

‘तू कहीं जा रही थी क्या?’ रोहित ने पूछा।
‘जी मामाजी, आज कालेज में फ्री डे है’। मामा के चेहरे में एक मुस्कराहट खिल आई।
सकपका कर रति ने सफाई देनी चाही- आज सब लड़कियाँ तनिक माडर्न ड्रेस में आयेंगी।

मामा की चुप्पी उसे खल रही थी। वह आगे बोली- मेरे पास कोई नई ड्रेस तो थी नहीं, इसलिए स्कूल की.., मेरा मतलब, इसलिए पिछले साल की ही पहन ली।

उदासी, लज्जा व ग्लानि से रति के चहरे पर ऐसे भाव छा गए, मानो किसी बच्ची को रसोई से लोली चोरी करते हुए मामा ने पकड़ लिया हो।

उधर रोहित की स्थिति खराब हो रही थी। उसने रति को सदैव अपनी छोटी सी भांजी ही समझा था, लेकिन आज वो मानो अचानक बड़ी हो गई थी। ढीले-ढाले कपड़ों में रति की कामुक तनाकृति पर कभी उसका ध्यान ही नहीं गया था। आज उसके कसे ब्लाउज़, आम के आकार वाली चूचियाँ और मिनी-स्कर्ट से उभरे चूतड़ देख कर रोहित का लंड खड़ा हो रहा था।
रोहित के होंठ सुर्ख हो उठे, उसने जीभ फिरा कर उन्हें गीला किया। उसे कुछ सूझ नहीं रहा था कि आगे क्या बोले। रोहित की आँखों में शुद्ध-अशुद्ध भाव आ जा रहे थे।

रति, मामा की आँखों के भाव समझ न सकी। आज वे खिलखिला नहीं रहे थे, तनिक गंभीर थे। कहीं नाराज तो नहीं हैं, मम्मी को शिकायत तो नहीं कर देंगे। किसी जाल में फंसी हिरणी की नजरों से मामा को ताका।
गंभीर आवाज में मामा ने पूछा- तूने अपने आप को शीशे में देखा कि कैसी लग रही है?

बस इतना सुनना था, रति रुआंसी हो गई। आँखों की कोर पर आंसू आ आये- अंदर जाकर मैं कपड़े बदल लेती हूँ।’
इसी के साथ सिसकते हुए बोली- प्लीज़! मम्मी से कुछ मत कहना!

डर भरा, अबोध चेहरा देख कर रोहित के कठोर होते लिंग पर सनसनाहट हुई। रति की परवाह न करके, उसने एक हाथ पैन्ट के अंदर डाल, मुन्ने-राम को व्यवस्थित किया और दो तीन झटके भी दे दिए।

फिर कहा- पहले जरा घूम कर दिखा, मैं भी तो देखूं कैसी लग रही है!

रति घूम कर रोहित की ओर पीठ कर खड़ी हो गई। पीछे से उठा हुआ मिनी-लहंगा ऐसा लग रहा था कि मानो नग्न चूतड़ दिखाने का निमंत्रण दे रहा हो। रोहित की नजरें रति की पीठ पर अन्वेषण कर कुछ खोज रही थी। उसे ब्रा-स्ट्रेप नहीं दिखा।

‘तूने ब्रा भी नहीं पहनी है क्या?’ यह कहते हुए रोहित ने रति की पीठ पर हाथ फेरा, मानो स्ट्रेप ढूंढ रहा हो।

मामा का हाथ पीठ पर सरकते ही रति की रुलाई फ़ूट गई। सिसकती आवाज में उसने उत्तर दिया- जी मैं अभी तक शमीज ही पहनती आई हूँ।
फिर कहा- आप कहेंगे तो अब से ब्रा पहन लिया करुँगी।

रोहित अब रति के पीछे चिपक गया। मानो कुछ समझाना चाहता हो- जरा देखें तो सही, तेरी चूचियों को अभी सहारे की जरूरत है भी या नहीं?

इन्ही शब्दों के साथ रोहित के हाथ रति की बाँहों के नीचे से निकल कर सामने पहुँच गए।

रति घबराई हुई थी, जल्दबाजी से वह बिदक सकती थी। यह सोच रोहित ने पहले रति की संकरी कमर घेरते हुए उसके पेट पर हाथ फिराया। इस आलिंगन में वह पूरा का पूरा रति के पीछे चिपक गया। उसका चेहरा रति के घुंघराले बालों के इर्द गिर्द मचलते हुए, नव-बालिग, कमसिन, कोमल त्वचा को सूंघने लगा। उसका पैंट में तना हुआ टट्टू, मिनी-लहंगे से छुपी गाण्ड की दरार में जा लगा।

रोहित ने अपने सीने को थोड़ा आगे कर दबाव डाला। रति को कुछ सामने झुकना पड़ा। उसके अर्थ-गोलार्ध पीछे हुए तो आभास हुआ कि एक अनजाना, गुदगुदा, तंतु उसकी पृष्ठ-घाटी में रगड़ रहा है।
इसी बीच रोहित ने हाथ ऊपर सरकाते हुए रति की अम्बियों को नीचे से तौल लिया। नई-नई पनपी अम्बियों में कोई लटकन नहीं था, केवल कामुक लचक थी। रोहित आगे-पीछे होकर अम्बियों की लचक तोलता रहा।

वह बोला- सच में, तुझे अभी कोई चोली की जरूरत नहीं।

यह सुन कर रति को थोड़ी राहत मिली। कम से कम मामा इस बात से तो नाराज नहीं होंगे कि उसने ब्रा क्यों नहीं पहनी। रोहित का हाथ और ऊपर खिसक आया, मानो वह अब रति के उभरते मम्मों के आकार का अनुमान लगा रहा हो।

अचानक रति की दाईं गर्दन में एक गहरा चुम्बन देकर वह बोला- तेरे स्तन आम के समान बन रहे हैं। बहुत कम लड़कियों के होते हैं ऐसे!

फिर जैसे मजाक कर रहा हो, बोला- कालेज में लड़कों की नजरों से इन्हें छुपाये रखना, नहीं तो कोई उन्हें चूस खायेगा।

यह कहते हुए, रोहित ने रति के चुचूक टटोल लिए। चुचूकों पर रोहित की अंगुलियाँ ऐसे फिरने लगी मानो कोई निपुण सितारवादक टंकार दे रहा हो।

रति के शरीर में बिजली का करेंट सा दौड़ गया। गले में गीला चुम्बन, गांड की दरार में किसी अनजाने अंग का स्पर्श और कुंवारी चूचियों पर पहला-पहला पुरुष-मर्दन!

इतना सब इतने कम समय में सहन कर पाना मुश्किल था। नव-युवाकांशाओं को प्राप्त करने को अग्रसित हो रहे, वासना से ओत-प्रोत, कामुक-शारीर को रोहित का आलिंगन मनमोहक लग रहा था। लेकिन माँ के अंकुशों की याद ताजा थी। उसकी अंतरात्मा कचोट रही थी कि वह कहीं कुछ गलत तो नहीं कर रही।

वह जन्म से अपने अंग-प्रदर्शन की प्यासी थी। मन की गहराई में यह कामना थी कि हर पुरुष उसे भूखी नजरों से ताके। रोहित के माध्यम से उसकी यह तृष्णा संतुष्ट हो रही थी। उसकी अंतरात्मा में मिश्रित रंग बदल-बदल कर आ जा रहे थे। वह भयभीत थी और लज्जित भी कि मामा उसका उपभोग कर रहे हैं। साथ ही साथ उसके शरीर से मीठी-मीठी धाराएं बह रही थी, जिनका उसने पहले कभी अनुभव नहीं किया था। उसकी वर्षों की दबी ज्वाला प्रज्वलित हो रही थी।

हिम्मत करके कोमल हाथ रोहित के हाथों पर भींच कर रति बोली- अब मुझे छोड़िये, यह सब ठीक नहीं है।

कुछ रुक कर बोली- माँ को पता चल गया तो बहुत नाराज होगी।

यह सुन रोहित की उत्तेजना बढ़ गई। पुरूष की काम-वासना आलिंगन में फंसी नारी की विवशता देखकर भड़क जाती है। उसने रति की गरदन पर दूसरी तरफ भी गहरा चुम्मा दे दिया। साथ ही साथ उसके कठोर होते चुचूकों को अपनी अंगुली व अंगूठे में भींच कर मसल दिया।

रति के शरीर से काम-उत्तेजना का दूसरा करेंट गुजरा। उसके कंठ से वासना भरी कराह निकली, मानो आलिंगन में फंसी नारी अपनी विवशता से प्रज्वलित हो रही हो। वक्ष और गर्दन का भाग पीछे को मुड़ गया। लज्जा एवं आनन्द से आंखें मुंद गई। उसकी दशा देख रोहित का वज्र सामान लिंग, चूतड़-खाई के अंदर ही अंदर उचकने लगा।

शेष अगले भाग में! Antarvasna

TOTTAA’s Disclaimer & User Responsibility Statement

The user agrees to follow our Terms and Conditions and gives us feedback about our website and our services. These ads in TOTTAA were put there by the advertiser on his own and are solely their responsibility. Publishing these kinds of ads doesn’t have to be checked out by ourselves first. 

We are not responsible for the ethics, morality, protection of intellectual property rights, or possible violations of public or moral values in the profiles created by the advertisers. TOTTAA lets you publish free online ads and find your way around the websites. It’s not up to us to act as a dealer between the customer and the advertiser.

 

👆 सेक्सी कहानियां 👆