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वो मेरे पड़ोस में रहने Sex Stories वाली 18 साल की लड़की है जो कक्षा 11 या 12 में पढ़ती है और शाम में कॉलोनी के बाकी बच्चों के साथ छुपा छुपी खेलते समय अक्सर मेरे घर में या आस-पास आकर छुप जाती है.
एक शाम मैं अपने बेडरूम में लेटा था और मेरे परिवार वाले शहर से बाहर गए हुए थे. मैं घर पर अकेला ही था..
अचानक देखा कि कोई मेरे बेडरूम की खिड़की में चढ़ गया है, थोड़ी देर तक तो मैंने ध्यान नहीं दिया फिर कुछ हलचल हुई तो परदा हटा के देखा तो चाँदनी थी..
उसने मुझे देखते ही अपने होंठों पर उंगली रख कर चुप रहने का इशारा किया.
मैंने शरारत में परदा इतना हटाया कि वो मुझे अंदर अच्छी तरह देख सके..
और मैं अपने डबल बेड में फिर लेट गया…
वहाँ से चाँदनी खिड़की में खड़ी साफ दिख रही थी, उसकी फ्रॉक घुटने के ऊपर तक की होने की वजह से उसकी सुडौल जांघें और थोड़ी सी चड्डी भी दिख जा रही थी तो मेरा लंड खड़ा होने लगा. मैंने पहले तो सोचा कि मेरे से 15 साल छोटी लड़की है, कुँवारी है, मुझे गंदा नहीं सोचना चाहिए…
पर दिल और लंड मेरे दिमाग़ पर हावी हो गये, और उसको देख कर मैंने अपना लंड मसलना शुरू कर दिया…
मैंने देखा कि जल्दी ही चाँदनी उसके छुपा-छुपी के खेल में नहीं मुझमें ज़्यादा ध्यान दे रही थी..
इससे मेरी हिम्मत बढ़ी तो मैं धीरे से अपना पजामा नीचे करके सिर्फ़ लौड़े के बालों तक करके लंड ऊपर से ही दबाने लगा..
मेरे खेल में उसकी रुचि देख कर फिर मैं पजामा पूरा उतार कर लंड हाथ में छुपा कर लेट गया..
वो शायद मेरे लौड़े को देखने को बेताब हो रही थी और जब मैंने लौड़ा छुपाए रखा तो उसने इशारे से हाथ हटाने का आग्रह किया. तो मैं समझ गया कि लड़की गर्म हो गई है.
उसकी बेताबी से मैं समझ गया कि मेरी शरारत से मेरी किस्मत खुल गई है.
उसका इशारा पाते ही मैंने अपना लौड़ा पूरा उसके सामने कर दिया. उसने शायद पूरा खड़ा और चोदने को तैयार लंड पहली बार देखा तो उसका मुँह खुला और आँख फटी रह गई…
मैं मौका देख कर खिड़की के पास जा कर मुठ मारने लगा और लौड़े को उसको हर तरफ से दिखाने लगा और जल्दी ही मैं झड़ गया और मेरा वीर्य सीधे पिचकारी मारता हुआ उसके घुटने में जा लगा…
वो मेरे चेहरे और लंड को मिले सुकून से मुस्कुरा दी तो मैंने उसको बोला- अंदर आ जाओ..
वो खिड़की से उतर के थोड़ी देर बाद चोरी से मेरे घर अंदर आ गई जिसके लिए मैंने पहले से ही दरवाज़ा खुला रखा था..
उसके आते ही मैंने दरवाज़ा बंद किया तो वो बोली- आपका ‘वो’ कितना सुंदर है..!
तो मैंने पूछा, तो उसने बताया कि उसने ‘यह’ पहली बार देखा है, पर उसकी दूसरी सहेलियाँ उनके बॉय-फ्रेंड्स के साथ इससे खेलती हैं और बताती है कि खूब मजा आता है..
तो मैंने भी उसको सीधे बेड रूम में ले जाकर बेड पर बिठाया. मैं लेट गया और बोला- तुम भी इससे खेलो, तुम्हारी सहेलियाँ ठीक कहती हैं..
उसने डरते डरते मेरे लंड को पजामे के ऊपर हाथ में लिया तो मैं समझ गया कि वो पहली बार कर रही है और डर भी रही है…
तो मैंने पजामा उतार के उसके हाथ को अपने से पकड़ के लौड़े को कस कस के मसलने लगा तो वो डर के बोली- इतनी ज़ोर से?
तो मैंने कहा- मजा तो आ रहा है ना…?
मैंने उसको बोला- चाँदनी, देख मैं तेरे सामने बिना कपड़ों के नंगा पड़ा हूँ तो तू भी तो कपड़े उतार के दिखा..
तो बोली- डर लगता है..
मैं बोला- किससे?..मुझसे..?
मैं बोला- तुम तो अपनी मर्ज़ी से अंदर आई हो तो मुझसे डर कैसा..
वो बोली- कोई देख लेगा!
तो मैं बोला- घर पूरा बंद है, अगर हम-तुम किसी को नहीं बोलेंगे तो किसी को पता नहीं चलेगा!
तो बोली- शीला कहती है कि बच्चा हो जाता है!
तो मैं समझ गया कि इसको पूरा पता नहीं है…
मैं बोला- अगर तुम मुझ पर भरोसा रखो और मैं जैसा बोलूँ तुम वैसा करो तो ना किसी को पता चलेगा, न ही बच्चा होगा, उल्टे तुमको बहुत मजा आएगा.
तो बोली- कैसे?
मैंने कहा- पहले कपड़े उतारो…
उसने शरम से मुँह ढक लिया तो मैंने पहले फ्रॉक के नीचे ही उसकी पेंटी उतार दी और उसकी गान्ड मसालते हुए फ्रॉक की ज़िप खोल कर फ्रॉक उतार दी.
वो पहली बार किसी मर्द के सामने नंगी होने की वजह से शरमा गई थी तो मैंने कहा- देख मैं भी तो नंगा हूँ और हम दोनों के अलावा कोई और नहीं यहाँ!
और मैंने उसको आईने में दिखाया- देख हम दोनों नंगे कितने सुंदर दिख रहे हैं!
और मैंने उसको अपना लौड़ा पकड़ा दिया, उसके होंठ चूसने लगा. उसकी 32 क्स आकार के चूचे टेनिस बॉल के जैसे कस गये थे..
उसकी जवानी से मेरा लंड फिर से खड़ा हो कर कूद रहा था..
वो मेरे लंड को आगे पीछे करने के बजाए दबा रही थी, मैं गरम हो कर बोला- चाँदनी, चूस ना मेरा!
तो वो बोली- ‘क्या’
तो मुझे लगा कि पहले इसको समझा देना ज़रूरी होगा कि सेक्स कैसे करते हैं ताकि मजा आए.
मैंने उसको बताया कि सेक्स में लड़का और लड़की नंगे हो कर जो चाहे और जैसे चाहे करते हैं और कोई मना नहीं करता.
तो बोली- फिर बच्चा हो जाता होगा?
तो मैंने समझाया- हम लोग जो कर रहे हैं जैसे तुम मेरे लंड को दबा रही हो, या अगर इसको चूसोगी और मैं तुम्हारी चूची चूसूंगा या होंठ को चूमूंगा और चुसूंगा तो बच्चा नहीं होगा. यह चुदाई के पहले का खेल है जिसको ‘फोर-प्ले’ कहते हैं. जब लन्ड को चूत में घुसा कर असली चुदाई होती है, चुदाई करते करते जब लंड अपना पानी छोड़ता है और साथ में चूत भी पानी छोड़ती है तब बच्चा होने की संभावना होती है और अक्सर समझदार लोग चोदने के बाद झड़ने के समय लंड चूत से निकल के झाड़ते है, जैसे मैंने मुठ मार के किया. ऐसा करने से बच्चा नहीं होता और सेक्स का पूरा मजा आता है.
तो वो बोली- वो तो ठीक है! पर मेरी चूची आप क्यूँ चुसोगे? वो तो छोटे बच्चे चूसते हैं और मैं आपका ये ‘लंड’ क्यूँ चूसूंगी?
तो मैं बोला- करके तो देखो कितना मजा आता है.
तो शायद वो पूरी तरह राज़ी नहीं हुई, तो मैंने एक ब्लू फिल्म की सीडी लगाई और उसको लेकर बिस्तर में लेट गया…
फिल्म में लड़की ने लड़के के झूलते हुए लौड़े को पहले निकाला फिर हाथ से खेल खेल के बड़ा किया तो वो बोली- आपका तो पहले से ही बड़ा है…
फिर फ़िल्म की लड़की उसके लंड के सुपारे को चूसने लगी लॉली-पोप जैसे और उसके लंड से खेलने लगी तो उसने भी मेरा लौड़ा पकड़ा और चूसने के लिए मुँह नीचे किया तो मैंने उसको बोला- तुम पहली बार करोगी तो रूको!
और मैंने झट से लंड की टोपी में खूब सा शहद लगाया और उसको चूसने को दिया. उसको टोपी चूसने में मजा आने लगा तो मैंने धीरे धीरे पूरा 6 इंच का लंड उसके मुँह में घुसाया और अब फिल्म वाले के जैसे चाँदनी का मुँह चोदने लगा..
फिल्म में वो लोग 69 करने लगे. फिर लड़का लड़की को बिस्तर में किनारे लिटा कर उसकी चूची दबाते हुवे उसकी चूत चाटने लगा तो वो मुझको बोली- आप भी ऐसे करो ना…
मैं मन ही मन सोच रहा था कि मैं पक्का खिलाड़ी इस नई चिड़िया को तो चोद चोद के रंडी बना दूँगा…
मैंने उसकी ब्रेड के बन जैसी कुँवारी चूत के होंठ खोल कर उसमें भी शहद डाला, फिर 69 करने लगा…
मैं ऊपर चढ़ कर उसके मुँह को चोद रहा था और उसकी चूत भी चाट रहा था और वो मज़े से सिसकियाँ भर रही थी…
और फिर झर भी गई…
अब उसका ध्यान टीवी पर गया जहाँ अब चुदाई शुरू हो गई थी, लड़की लड़के के ऊपर चढ़ कर उसको चोद रही थी और उसको बार बार अपनी चूची चुसवा रही थी! बीच बीच में लड़के का लण्ड चूत से फिसल के निकल भी जाता था, तो वो दोबारा घुसा कर चोदने लगती.
तो वो बोली- चलो. हम भी ऐसा ही करते हैं!
मैं समझ गया कि चाँदनी अब चुदने के लिए पूरी तरह तैयार है पर उसको यह नहीं अंदाज़ है कि वो फिल्म की लड़की कितना चुद चुकी है, और इसकी पहली बार चुदने वाली कसी चूत! काफ़ी अंतर है दोनों में!
तो मैंने उसको बिस्तर के किनारे पर लिटाया, उसको उसके दोनों पैर कंधे तक मोड़ कर पकड़ने को कहा. लण्ड में एक कॉण्डम लगाया और उसको बताया कि हम जब चुदाई करंगे और अगर ग़लती से भी मैं झड़ने के समय चूत से लण्ड ना भी निकालूं तो मेरा पानी जो कि तुम्हारे ऊपर मूठ मारते समय गया था, वो इसी के अंदर रह जायगा और किसी भी हालत में बच्चा नहीं होगा.
तो वो खुशी से मुझे चूमने लगी और बोली- आप कितने समझदार हो… प्लीज़ अब जल्दी करो ना…
मैं सोच रहा था कि मेरी समझ तो इसको अभी पता चलेगी जब इसकी चूत फटेगी और किस्मत साथ देगी तो दस मिनट बाद इसकी गाण्ड भी मारूँगा…
मैं लण्ड के सुपारे को उसकी चूत के दाने में रगड़ने लगा, साथ साथ उंगली चूत में उंगली घुसा कर रास्ता बनाने लगा और इन सब में मैं जोकि अब तक दस के करीब चूत चोद चुका था और पिछले 14 साल से किसी ना किसी की चूत चोद रहा हूँ, भी कंट्रोल में मुश्किल से था, मैंने अब एक हाथ से लण्ड पकड़ कर उसकी चूत में सुपारे को सही जगह में बिठाया और उसको अपनी पूरी पकड़ में लेकर चूची चूसते हुए बोला- चाँदनी, अब मेरा लौड़ा तेरी चूत में घुसेगा और तुझे खूब मजा भी आएगा और अगर तुझे दर्द हो तो अपनी टाँगे ऊपर की तरफ उठा लेना.
तो वो बोली- ठीक है!
और मैं एक पक्के खिलाड़ी की तरह उसको जकड़ कर उसके होंठ चूसने लगा ताकि उसकी चीख मेरे मुँह में दब के रह जाए और उसकी गाण्ड के छेद में उंगली करते हुए उसको और ज़्यादा गरम किया. फिर एक करारे झटके से अपने लण्ड को उसकी चूत में आधा से ज़्यादा पेल दिया.
वो चीखी पर आवाज़ दब गई, दर्द हुआ तो टाँगें उठा ली और मैंने उसकी आँखो से अचानक हुए दर्द से निकले आँसुओं को चाटते हुए उसको पूछा- कैसी हो…
तो वो बोली- आपने तो कसाई की तरह चाकू चला दिया, मैं तो बस मरते मरते बच गई…
मैंने बोला- तो चलो निकल लेता हूँ!
तो वो बोली- नहीं, थोड़ा रूको!
तो मैंने जितना घुसा था, उतने में ही लौड़े को आगे पीछे करना चालू कर दिया. जिससे उसको आराम लगा तो मौका देख कर दूसरे और तीसरे तेज़ झटके में में पूरा 6 इंच से भी बड़ा लौड़ा उसकी चूत के अंदर कर दिया और उसकी गान्ड की गोलाइयों को मसलते हुवे उसकी जाँघ सहलाने लगा.
तो वो बोली- निकालो-निकालो! मैं मर जाऊँगी…
तो मैंने कहा- चाँदनी, जब सब हो गया तो अब निकालने का क्या मतलब, अब तो तुम वो फिल्म वाली जैसे मज़े लो!
और मैंने उठ कर उसको उसकी चूत में घुसा मेरा लौड़ा दिखाया तो उसको विश्वास नहीं हुआ कि मेरा पूरा का पूरा लौड़ा घुस चुका है.
मैंने अब तक बहुत सब्र से काम लेते हुए अपने लौड़े को कुँवारी चूत में घुसाया था, पर अब मेरा सब्र साथ नहीं दे रहा था और मैंने उसकी चूत में धक्का-पेल चूदाई शुरू कर ही और उसको बाँहों में कस के जकड़ कर उसकी चूचियों को करीब करीब चबाते हुए खूब चोद डाला.
और वो दर्द और मज़े में चीखे ज़ा रही थी और मैं सिर्फ़ और सिर्फ़ चोद रहा था… कह सकता हूँ कि खूब बेरहमी से चोद रहा था.उसकी कुँवारी चूत चोदने में मुझे स्वर्ग का मजा मिल रहा था क्यूंकि चोदा तो 10-11 चूतों को था पर इतनी जवान, इतनी कमसिन, इतनी कम उम्र और इतनी फ्रेश कोई नहीं थी. उसकी चूत फट गई थी, मुझे मालूम था कि अब रुकुंगा तो वो साथ नहीं देगी.
और बेरहम चुदाई में हालांकि उसको दर्द हुआ पर जैसे ही वो पहली बार झड़ी, उसको मजा आने लगा और अब तो जब मैं झरने को था तो वो 3 बार झर चुकी थी.
मैं जैसे झरने को आया, उसकी चूत में दना-दन 5-6 ज़ोर के धक्के दिए और उसके ऊपर ही लुढ़क गया, जिससे वो भी एक और बार झड़ गई.
मैंने अपना लड़ पूरा उसकी चूत में घुसाए रखा जब तक कि वो अपने आप ढीला होकर न निकल गया…
उसने मुझसे कहा- तुमने यह क्या किया?
मैंने बोला- मेरी जान चाँदनी, आज मैंने तुमको कली से फूल बना दिया! अब इस फूल की खुशबू से तुम किसी भी भंवरे (लौड़े) को अपने काबू में कर सकती हो!
वो शरमा कर बोली- आपके ने तो मेरी जान निकाल दी और दूसरो का कैसे काबू में होगा?
तो मैंने कहा- यही तो राज़ की बात है, अब मेरा भी तुम्हारे काबू में है…
मैंने फिर उठ कर कॉंण्डम उतारा और उसको बताया- बाहर की तरफ खून और चिकनाई है, वो उसकी चूत का पानी है, और अंदर का पानी मेरे लौड़े का है, और चिंता की बात नहीं, अब बच्चा नहीं ठहरेगा.
मैंने चाँदनी को कहा- रानी, मैंने कितनी चूत और लड़की चोदी हैं पर जो मजा तुमसे मिला है वो किसी में नहीं था.
और मेरी बेरहमी के लिए माफी भी माँगी तो वो बोली- आपने मुझे कली से फूल बनाया, आप तो मुझे अब मार भी डालो तो मुझे कोई शिकवा नहीं होगा. आप तो मेरे स्वामी हो! मुझे जैसा और जितना चाहो, चोदो, जब चाहे चोदो!
इस बीच टीवी में जो सीन था वो देखकर चाँदनी फिर टीवी से चिपक गई. वहाँ एक नीग्रो एक गोरी लड़की के चूचे बेरहमी से खा रहा था और उसकी गाण्ड में लण्ड घुसाने की कोशिश कर रहा था. लड़की कुतिया की अवस्था में खड़ी थी और वो उसके गाण्ड के छेद को पहले चाटने लगा.
तो चाँदनी बोली- यह क्या करेगा अब?
मैंने कहा- मेरी जान, सेक्स में इतनी ज़्यादा वेराइटी है कि अगर हम लोग अलग अलग स्टाइल से करें तो दिन भर चुदाई की जा सकती है.
तो वो बोली- तो चोदिये ना मुझको सब तरीके से!
मैं बोला- रानी अभी तुम 30 मिनट से यहाँ चुद रही हो, और मुझे तो खुशी होगी कि रात भर तुमको चोदूँ पर अभी घर जाओ, कल जल्दी आ जाना तो 4-5 तरीके से चोदूंगा.
तो बोली- इसको तो देखो!
वो नीग्रो उस गोरी लड़की की गान्ड बड़ी बेरहमी से चोद रहा था और चाँदनी अब यह भी करवाना चाह रही थी, मैंने उसको कहा- कल जब शाम को खेलने निकलो तो याद रखना कि अब तुम बच्चों वाला नहीं वयस्कों वाला खेल खेलोगी, जिसके लिए आने के पहले चूत और गाण्ड अच्छे से धो लेना.
उसने खुश होकर कपड़े पहने और चली गई.
मैं खुश था कि मैंने ऐसी लड़की चोद दी जिसकी चूत में अभी तो अच्छी तरह बाल भी नहीं आए हैं और कल यह खुद से गाण्ड भी मरवाएगी.
उसके बाद तो मैंने 3 महीने तक चाँदनी को अलग अलग तरीके से चोदा, उसकी गान्ड मारी और सेक्स में संभव हर काम किया.
उसको भी फिर किसी और भी लौड़े का शौक लगा और फिर एक बार किसी अमीर ज़ादे को फंसाया और उसने उसको चोदा.
और एक बार होटल ले जा कर अपने 4 दोस्तों के साथ उसको चोदा!
मेल करो… Sex Stories
मैं सुरेश एक ऐसी कहानी बता Sex Stories रहा हूँ। मैंने अपनी बहु, छोटे भाई की बीवी को चोदा!
छोटे भाई की बीबी थी देखने में गोरी और नाटे शरीर की! गोरी इतनी कि देखने से ही लंड खड़ा हो जाए!
मैंने उसकी आँखों में एक वासना देखी जो मेरे लिए अच्छी थी।
भाई घर पर कम रुकता था। मैं रोज रात में घर जाता हूँ।
एक रात मैं किसी काम से बाहर गया था। रात को १-१.३० बजे आया। मैं मूतने के लिए गया, उसके कमरे को देख कर मेरा लंड खड़ा हो गया। मैंने उसकी कुण्डी धीरे से हिलाई ताकि मेरी बीवी न जगे। मेरा व उसका कमरा पास-पास में था।
उसने कुण्डी की आवाज सुन कर दरवाजा खोल दिया। उसको मालूम था मैं ही रात को आउँगा। वो मुझसे बोली- जल्दी अन्दर आ जाओ!
मैं तुंरत अन्दर गया।
और दरवाजा बंद कर दिया उसने!
मेरे लंड मैं खुजली होने लगी।
वो तुंरत लेट गई कहने लगी- जल्दी कर लो नहीं तो कोई जान जाएगा।
मैंने कहा- कोई यह नहीं जानता कि मैं घर आ गया हूँ।
वो इत्मिनान से लेट गई। उसकी धोती जांघों के ऊपर थी। उसकी गोरी जांघों को देख कर मेरा लंड पानी छोड़ने लगा।
मैंने उसकी धोती उतार दी। उसके बड़े बड़े दूध, जो ब्लाउज के अन्दर थे, देख कर मैं और उत्तेजित हो गया।
उसने मेरे लंड को पैंट के ऊपर से पकड़ लिया। करीब पौन फ़ुट लंबा लंड पकड़ कर वो खुश हो गई। उसने मेरी पैंट की बेल्ट को खोल डाला और मेरे अन्डरवीयर में हाथ डाल कर लंड को बाहर निकाला, उसमें से पानी चू रहा था। उसने उस पानी को अपनी जीभ से चाट लिया। अब मैंने उसका ब्लाउज उतार दिया। वो ब्रा पहने थी। कोई भी ब्रा उसकी चूचियों को अपने अन्दर समेट कर नहीं रख सकती, इतनी बड़ी थी।
मैंने ब्रा उतार दी। अब वो पेटीकोट पहने थी। मैंने पेटीकोट का नाड़ा पकड़ कर खींचा तो बुद की आवाज कर के खुल गया।
उसकी झांटें बड़ी बड़ी थी। अब मैंने अपने कपड़े उतार दिए, दोनों लोग नंगे हो गए थे उसने मेरे लंड को मुँह में रख कर चूसना शुरु कर दिया।
मैं थोड़ी देर बाद उसके मुँह में मूतने लगा, मुझे मुतास तो लगी थी ही! आधा लीटर मूत पीने के बाद उसकी प्यास कम हुई।
तब वो अपनी ताल जैसी चूत फैला कर लेट गई। उसकी गोरी बुर में लाल लाल देख कर बुर का पानी चाटने का मन होने लगा। मैंने उसकी बुर खूब चाटी। उसने हाथ रख कर मेरे सर को दाब लिया उसकी चूत नहीं, भोसड़ी नहीं, भोसड़ा था। मेरा आधा मुँह घुस गया।
तब मैं उठा और उसकी बुर को फैला कर उसके ऊपर लेट गया।
उसने मेरे लंड को पकड़ कर बुर पर रखा।
मैंने कहा- रखने की कोई जरुरत नहीं! अपने आप घुस जाएगा!
तो उसने कहा- छोटी उम्र से ही चोदी जा रही हूँ! मेरे फूफा मुझे खूब चोदते थे लेकिन उनका लंड तुमसे छोटा था। अब जल्दी लंड पेलो!
मैंने तुरंत उसकी ताल जैसी भोसड़ी में लंड डाल दिया। उसने टागें फैला दी थी जिससे उसकी चूत और भी चोड़ी हो गई थी व उसके बच्चेदानी पर हच-हच मेरे लंड का सुपाड़ा लगने लगा। वो जोर जोर से नीचे से ठोकर मार मार कर १००-१०० ग्राम पानी छोड़ने लगी।
मेरा लंड उसकी चूत में फच फच होने लगा। वो कह रही थी- बच्चेदानी तक भी मेरी फाड़ डालो!
मैंने उसे बहुत चोदा। वो तीन बार झड़ी। बाद में मैं 6-7 पिचकारी छोड़ कर ढेर हो गया।
उसने मेरे लंड को अपने मुँह से चाट चाट कर साफ कर के मुझे रवाना किया।
मुझे और उसको बहुत मजा आया।
अब जब भी मौका मिलता है मैं उसे चोद डालता हूँ।
कहानी लिखने के एक दिन पहले भी चोदा Sex Stories
नमस्ते दोस्तो! मेरा Hindi Porn Stories नाम राज है, मैं आपसे अपना पहला सेक्स अनुभव बाँटने जा रहा हूँ।
अभी तो मैं नोयडा में रहता हूँ, लेकिन ये बात है तब की जब मैं इन्दौर से ग्रेजुएशन कर रहा था।
मेरी गर्लफ्रेण्ड का नाम किरण है। वो ५ फीट ५ इंच की गोरी, लम्बी, सुडौल बदन, फिगर ३४-२४-३६ है, और मुझे जो सबसे अच्छा लगता है, वो है उसके होंठ, बिल्कुल एन्जेलेना जॉली जैसे हैं, जिनसे मैं खेलता रहता और चूसता रहता। मैं भी कम स्मार्ट नहीं हूँ दोस्तों। मैं ६ फीट लम्बा, गोरा और हैंडसम हूँ। मैं अपने कॉलेज का प्लेब्वॉय हुआ करता था। किसी भी लड़की को कोई भी काम पड़ता, मुझे ही याद करती, “कहाँ है मेरा राज?”
जब मेरा प्रथम वर्ष पूरा हुआ तो मेरी नज़र में एक जूनियर आई, उसका नाम किरण था, जैसा नाम वैसी शक्ल और खूबसूरती भगवान ने दी थी उसे! मैंने सोच लिया, मैं उसकी अपनी गर्लफ्रेण्ड बनाऊँगा, और मैंने बनाया भी।
जो भी हमारे अन्तर्वासना के पाठक इन्दौर से हैं, वो सभी रालामंडल का नाम ज़रूर जानते होंगे, ये एक जंगली इलाका है जो पर्यटक-स्थल भी है, वहाँ जंगली जानवर आदि भी हैं। रालामंडल प्रेम-परिन्दों के लिए यानि कि युगलों के लिए स्वर्ग है। लड़के-लड़कियाँ दिनभर वहाँ जोड़े बनाकर प्रेमालाप में तल्लीन रहते हैं – बिना रोक-टोक। कोई पूछने वाला नहीं होता, कौन क्या कर रहा है और क्यों कर रहा है।
मैं भी अपनी जानेमन को लेकर रालामंडल गया। बाईक पार्क करने के बाद हम प्रेम-परिन्दे अपने लिए एक घोंसला तलाश करने लगे। काफ़ी ऊपर जाने के बाद मुझे एक जगह मिली, जहाँ मैं आराम से अपनी किरण के साथ अपने प्यार के ग़ुल को ग़ुलिस्ता बना सकता था, और वहाँ किसी को पता भी नहीं चलता, कि कोई बैठा भी है। मैं उसे अपनी बाँहों में लेकर बैठ गया। हम दोनों इधर-उधर की बातें करने लगे, और धीरे-धीरे मैं अपने हाथों से उसकी चूचियाँ दबाने लगा। वो भी मेरे हाथों को पकड़ कर अपनी चूचियाँ और ज़ोरों से दबवाने लगी। फिर मैंने पीछे से उसके गले और कंधों पर चूमने लगा और उसके मुँह से सिसकारियाँ निकलने लगीं। फिर मैंने उसका टॉप उतार दिया, वो गुलाबी रंग की ब्रा में थी, सच में क्या क़यामत लग रही थी वो उस समय, जैसे स्वर्ग की कोई अप्सरा धरती पर आ गई हो। मैंने उसकी दोनों चूचियों को अपने दोनों हाथों में भर लिया और मसलने लगा।
वो मेरी बाँहों में कसमसाने लगी, इसके बाद मैंने ऊपर से ही उसकी चूचियों को चूम लिया और घुण्डियों को चूसा और काटा। फिर उसने मुझसे मुँह से ब्रा खोलने बोला, और मैंने अपने दाँतों से उसकी ब्रा की स्ट्रिप खोली और एक तरफ फेंक दी। अब मेरे सामने उसकी उभरती जवानी थी जिसे मैंने अपने हाथों और मँह में भर लिया। एक हाथ से मैं उसकी बाईं ओर की चूची को दबाने लगा, और दाईं तरफ की चूची को अपने मुँह में भर कर चूसने लगा। उसके मुँह से और ज़ोरों की आवाज़ें निकलने लगीं, फिर मैं अपनी जीभ से उसकी घुण्डियों को सहलाने लगा, उसे ज़ोर का झटका लगा और मैंने उसकी घुण्डियों को दाँतों से पकड़ लिया और हल्के से काट लिया, और दूसरी घुण्डी को ज़ोर से मसल दिया, वो मेरी बाँहों में तड़प उठी।
अब उसने मेरी शर्ट के बटन खोलने चालू किए। मैंने अन्दर बनियान नहीं पहनी थी। फिर वो पागलों की तरह बेतहाशा मेरे छाती पर चूमने लगी, बालों से खेलने लगी, और फिर अपने होंठों से मेरे निप्पलों को चूसने लगी। मैं अब उत्तेजित हुआ जा रहा था और वो अपने गीले होंठों से मुझे चूमे जा रही थी। मैंने उसे ज़ोर से अपनी बाँहों में भर लिया।
इसके बाद मैंने उसे अपने नीचे लिटा दिया और उसके होंठों को चूसने लगा। हम दोनों के मुँह से सिसकारियाँ निकलने लगीं। उसने अपनी आँखें बन्द कर लीं और हम ऐसे ही आनन्द लेते रहे। फिर मैं अपनी जीभ उसके मुँह में ले गया और वो उसे चूसने लगी – ज़ोरों से। मैं अपनी जीभ उसके मुँह में चारों ओर फिरा रहा था और फिर उसकी जीभ पर घुमाने लगा। इससे अजीब नशा छा रहा था हम दोनों पर। दोनों डूबे जा रहे थे एक-दूसरे में, साथ-साथ में मैं उसकी चूचियों को भी दबाए जा रहा था, जिससे वो और भी ज़्यादा उत्तेजित हो गई थी। इस तरह हमने क़रीब १५ मिनट तक खूब प्यार किया।
फिर मैंने उसके कान के लटकन से खेलना शुरु किया, उसे अपने दाँतों में लिया, अपनी जीभ से चाटा, और फिर धीरे-धीरे नीचे आने लगा। अब मैं उसकी चूचियों के ऊपरी हिस्सों पर किस करते हुए इसकी चूचियों के बीच की घाटी पर चूम रहा था। फिर नीचे उसकी नाभि पर चूमने लगा। इतनी देर में ही वो काफ़ी गरम हो गई थी, और सेक्सी आवाज़ें निकालने लगी थी।
फिर मैंने उसकी जीन्स की ज़िप खोल कर जीन्स उतार दी। अब उसके पूरे बदन पर कपड़े के नाम पर बस एक पैन्टी रह गई थी, वो भी ब्रा की तरह ही गुलाबी रंग की थी। मैंने पैन्टी के ऊपर से ही उसकी चूत को सहलाने लगा। पैन्टी पूरी गीली हो चुकी थी, मैंने पैन्टी को निकाला और उसकी चूत के आस-पास सहलाने लगा। क्या चूत थी, बिल्कुल गुलाबी, एक भी बाल नहीं। मन कर रहा था, खा जाऊँ उसकी चूत को। उसे देखकर मुँह में पानी आ गया। वो बोलने लगी, प्लीज़ अब मत तड़पाओ।
मैंने कहा, “अभी तो बहुत समय है स्वीटहार्ट ! थोड़ा सब्र करो, और पहले इन्हीं बातों से आनन्द उठाओ, तभी सेक्स का पूरा मज़ा आएगा।”
फिर मैं उसकी चूत को चूमने लगा, और अपनी जीभ से सहलाने लगा, और उसके दाने को जीभ से उठाने लगा। वो काफ़ी उत्तेजित हो गई। फिर मैंने उसकी चूत पर अपने होंठ लगा दिए और ज़ोर से चूसना शुरु किया, वह ज़ोर से तड़पी और बोली, क्या कर रहे हो? अब मैंने अपनी जीभ को उसकी चूत में अन्दर-बाहर करने लगा और जीभ से ही उसे चोदने लगा।
अब तक वो चिल्लाने लगी थी, “यस… कम ऑन, फक्क मी…!”
मैंने बोला इतनी भी क्या ज़ल्दी है, आराम से करेंगे। तुम मेरे लंड से नहीं खेलना चाहती क्या? फिर मैंने अपना ८ इंच लम्बा और ३ इंच मोटा लण्ड उसके हाथों में पकड़ा दिया। पहले वो उससे खेलने लगी, फिर सुपाड़े की चमड़ी को पीछे कर अपनी जीभ से सहलाने लगी, और अपने मुँह में भर कर लॉलीपॉप की तरह चूसने लगी। धीरे-धीरे मेरा लंड और मोटा और टाईट होता जा रहा था। मैंने उसको सिर से पकड़ करक उसका मुँह ही चोदने लगा, और क़रीब २५-३० झटकों के बाद में उसके मुँह में ही झड़ गया, और अपना पूरा वीर्य उसके मुँह में उगल दिया, जिसे वह आसानी से चाट-चाट कर निगल गई।
इसके बाद हम दोनों 69 की मुद्रा में आ गए और मैं उसकी चूत का रस पीने लगा, और वो मेरे लण्ड से खेलने लगी। धीरे-धीरे मेरा लण्ड फिर से खड़ा हो गया, और उसकी चूत मारने को तैयार हो गया।
अब मैंने उसे सीधा लिटाया और उसकी टाँगों को मोड़ कर फैला दिया, ताकि चूत का मुँह खुल जाए और लंड आसानी से चला जाए। वैसे भी चूत अभी तक इतनी गीली हो चुकी थी कि लण्ड उसमें आसानी से चला ही जाता। अब मैंने अपने लंड को चूत के मुँह पर रखा और धीरे-धीरे अन्दर डालने लगा, इस विधि से लंड घुसाने पर उसे दर्द भी कम हुआ और मज़ा भी आया। अब तक मेरा लंड आधा अन्दर जा चुका था।
अगले झटके में मेरा पूरा-का-पूरा लंड अन्दर चला गया, और उसने चिल्ला दिया, फिर मैंने उसके होंठों को अपने होंठों से दबा लिया, और चूसने लगा। धीरे-धीरे जब उसका दर्द कम हुआ तो वो अपनी कमर हिलाने लगी, मैं समझ गया अब वो तैयार है पूरी तरह से।
अब मैंने अपने लंड को अन्दर-बाहर करना शुरु किया और झटके लगाने लगा। वह भी कमर हिला-हिला कर झटकों का उत्तर झटकों से देने लगी।
ऐसे ही क़रीब १५ मिनटों तक चुदाई चलती रही। फिर मैंने उसे अपने गोद में उठा लिया और ऊपर उछाल-उछाल कर चोदने लगा, इससे हर बार मेरा लंड चूत की दीवार छू लेता, जिससे पूरा मज़ा आ रहा था। इतनी देर में वो ३ बार झड़ चुकी थी, और अब मैं झड़ने वाला था।
मैंने उसे नीचे रखा और उसकी चूत में अपने वीर्य की पिचकारी छोड़ दी। काफ़ी देर तक मेरा लंड धार मारता रहा। तबतक मेरी जानेमन भी एक बार झड़ गई मेरे साथ ही। ऐसे ही हम एक-दूसरे की बाँहों में पड़े रहे और फिर उठकर कपड़े पहन कर तैयार हो गए। Hindi Porn Stories
हेलो पाठको, मैं अन्तर्वासना Hindi Porn Stories का नियमित पाठक हूँ। मैं अपनी कहानी आप सभी को बताना चाहता हूँ। यह करीब पाँच साल पुरानी बात है, जब मैं स्नातिकी के प्रथम वर्ष में था। कॉलेज की छुट्टियों में मेरे घर के सभी सदस्य गाँव चले गए थे। मेरा रहने का प्रबंध मेरी चाची के यहाँ कर दिया था। मैं बहुत खुश था।
मैं सुबह जल्दी से तैयार होके चाची के यहाँ चला गया। चाची ने दरवाजा खोला, वो बहुत ही अलग लग रही थी। उन्होंने साड़ी पहनी थी। साड़ी में वो बहुत ही खूबसूरत लग रही थी। मेरा मन बदलने लगा, मैं कभी कभी चाची के बारे में सोचता था और मुठ मारता था।
उन्होंने मुझसे बैठने को कहा और अन्दर रसोई में चली गई, कुछ देर बाद चाची कुछ खाने को लाई। मैंने उनसे चाचा और बच्चों के बारे में पूछा, तो पता चला कि चाचा सुबह ही गाँव गए हैं और बच्चे अपनी नानी माँ के पास गए हैं, दो दिन बाद लौटेंगे।
मैं यह सोच कर सोचता ही रह गया कि आज के बाद के आठ दिन मुझे उनके साथ रहना है, और दो दिन हम दोनों को अकेले ही रहना है। वैसे तो मुझे चाची पसंद ही नहीं, बल्कि वो तो मेरी ड्रीम गर्ल थी। उनको जब पहली बार देखा था तो वो बहुत ही सादगीपूर्ण थी। उन्होंने कभी मुझे अपने बच्चों से अलग नहीं समझा था। कुछ साल पहले जब मैं उनके घर गया था तो उन्होंने मुझे छोटा समझ के मेरे सामने अपनी साड़ी बदली थी, तब मैं सातवीं कक्षा में था। तभी से आज तक मैं उनके बारे में सोचता और अपने मन को शांत करता था। उनके उस सादे रूप में और अ़ब दो बच्चों को जन्म देने के बाद बहुत बदलाव हुए हैं, वो और भी सुन्दर होती जा रही हैं।
उस दिन तो वो गजब लग रही थी। मैं उनको चोरी से देखता हूँ, यह बात उन्हें पता चल चुकी थी। मगर उन्होंने इस बात का जिक्र कभी किसी से नहीं किया था और आज मैं उनके साथ अकेला था। उन्होंने मेरी कॉलेज-लाइफ के बारे में पूछना शुरु किया। वैसे तो मैं उनसे ज्यादा बात तो करता ही था, मैंने भी उनसे उनकी कॉलेज-लाइफ के बारे में पूछा और हम बातों में इतने घुल मिल गये कि हमें वक्त का लिहाज भी नहीं रहा। कोई एक बजे हमने खाना खाया। उन्हें मदद करने के बहाने (देखने के लिए) रसोई में चला गया। वहाँ बरतन मांजते समय मैंने एक दो बार उन्हें छू भी लिया था। उन्होंने कुछ भी नहीं कहते हुए सब अनदेखा कर दिया। यह देख कर मैं और भी उनकी तरफ आकर्षित हुआ।
काम निपटा के हम दोनों बाहर आ गये। टीवी उनके बेडरूम में होने के कारण हम दोनों बेडरूम में चले गए। वो बेड पर बैठी और मैं ठीक उनके सामने बेड से नीचे बैठा था।
टीवी पर कोई होरर फ़िल्म चल रही थी। बेडरूम में हम दोनों के अलावा कोई नहीं था और होम- थियेटर होने के कारण आवाज कमरे में गूंज रही थी। डर के कारण उनके पैर मुझे छू रहे थे, यह देखकर मैंने उन्हें महसूस करना शुरु किया। चाची फ़िल्म के मज़े ले रही थी और मैं उनके स्पर्श का अनुभव कर रहा था। अचानक मरे कंधों को चाची ने दबोचा, मैं अपने गहरे सपने से जाग गया तो देखा कि चाची के दोनों पैर मेरे दोनों कंधों के बगल में थे। अगर मैं घूम जाता तो चाची की मांसल पिंडलियों में मैं अपने आपको खो देता। मैं उनके शरीर को महसूस करने लगा।
अचानक डर के मारे चाची ने अपना चेहरा मेरे सर और दाएं कंधे के बीच दबाया। उनके गदराये शरीर ने मानो मुझे पागल कर दिया। उनकी दोनों टांगों के बीच मेरा सर उनकी जांघों से और उनके रसीले मादक आमों से टकरा रहा था। अचानक वो फ़िल्म के माहौल से बाहर आ गई और अपने आपको मुझसे इतना चिपके देख हड़बड़ा गई। मैं उनके दोनों पैरों के बीच फंसा था, यह देख उन्हें मुझ पर हंसी आ रही थी, मगर मेरी होने वाली हलचल से उन्हें कुछ और महसूस होने लगा था। मैं उनके मम्मों के और चूत के इतने करीब था कि उनकी चूत पानी छोड़ रही थी और मेरे बाल भीगी चूत के कारण गीले हो रहे थे। मेरी हालत पतली हो गई थी और यह देख कर वो वापिस फ़िल्म देखने लगी मगर उनके मन में कुछ और ही चल रहा था।
कुछ देर बाद मुझे महसूस हुआ कि उनका बायाँ हाथ मेरे कंधे से मेरे गले तक आ गया था और उनकी चुचियाँ मेरे सर को चुभ रही थी। एकाएक उन्होंने अपने बायें हाथ से मेरे सर को अपनी ओर घुमाया और मेरी आँखों में आँखें डालकर अपने रसीले होंटों को मेरे होंटों से लगाकर चूमना शुरु किया। मेरे लिए ये सब नया था, मैं पहले डर गया मगर थोड़ी देर बाद मैंने भी साथ देना शुरु किया। अ़ब मेरे हाथ चाची को टटोल रहे थे। मैंने उनके स्तनों को ऊपर से सहलाना शुरु किया वह भी यही चाहती थी। उनके हाथ मेरी पीठ और बालों में घूम रहे थे। उन्होंने मुझे अपने ऊपर खींच लिया।
मैं अब बेड पर आ गया। मैं उनके ऊपर और वो मेरे नीचे थी। मैं अपने हाथों से उनके वक्ष सहला रहा था। एक एक करके उनके दोनों मम्मों को बारी-बारी ब्लाऊज़ के ऊपर से मुँह में ले रहा था, मेरे थूक के कारण उनकी ब्लाऊज़ गीली हो गई थी। वो भी उसका आनन्द ले रही थी। गर्मी के साथ मेरी थूक के कारण उन्हें ठंडी का एहसास हो रहा था और वो मुझसे और लिपटती सी जा रही थी।
तभी अचानक मैंने अपनी पैन्ट के ऊपर चाची के हाथ का जोर महसूस किया। वो मुझे छूना चाहती थी, मेरे साथ का पूरा आनन्द लेना चाहती थी। मेरी आँखों में उनके लिए जो वासना थी उसे वो पीना चाहती थी। मैंने उनकी तरफ देखा, वो आँखों को बंद कर के मेरे हर एक स्पर्श को महसूस कर रही थी। यह देख उनके ब्लाऊज़ के बटन मैंने अपने दांतों से एक एक करके खोल दिए। अ़ब उनके दोनों मम्मे खुले थे, बिना ब्रा के मैं उन्हें पहली बार देख रहा था। उन्हें देख कर मैं पागल हो गया और उन्हें मसलने लगा, अपने हाथों में ले के एक एक करके रगड़ने लगा अपने जीभ से उनके साथ खेलने लगा, अपने दांतों से उन्हें काटने लगा।
यह देख वो भी मचलने लगी, मेरे बालों को पकड़ के अपने हाथों से मेरा सर मम्मों पे दबाने लगी। यह देख मैं और जोरों से उनके दोनों मम्मों से खेलने लगा। अ़ब तक वो एक बार झड़ चुकी थी। उनके मम्मो को तो मैंने टमाटर की तरह लाल कर दिये थे, उन्हें देख वो बोली,”छोटेऽऽ आम ही खायेगा? और मुझे कुछ नहीं खिलायेगा? आआअ उईईईइ।”
तभी मैं बोला,”चाची मैं तो पूरा आपका तो हूँ जहाँ से चाहे खा लीजिये !”
तब चाची ने मुझे अपने नीचे ले लिया और खुद मेरे ऊपर आकर मेरे पूरे शरीर को चूमने लगी, मानो मेरे लिए ही तड़प रही थी। मेरा कच्छा छोड़ चाची ने मेरे सारे कपड़े उतार दिए और मेरे होंटों से अपने होंटों को गड़ा लिया और चूमने लगी। ऐसा लग रहा था मानो मैं उनके लिए नहीं, वो मेरे लिए प्यासी हैं !
फिर करीबन ५ मिनट के बाद वो मेरे ऊपरी शरीर को चूमते चूमते मेरे कच्छे तक पहुँच गई और मेरी आँखों में देखते हुए मेरे लंड को ऊपर से ही चूमती रही। उनकी यह अदा देख मानो वो मुझे याद दिलाना चाहती थी, जितनी बार उन्हें देख मेरे लंड खड़ा होता था तब तब वो मेरे लौड़े को देख कर तरसती थी। मैं सोच ही रहा था कि उन्होंने मेरे ७ इन्च के लौड़े को कच्छे से बाहर निकाला और अपने दांतों से खाने ही लगी और मेरे कच्छा निकाल फ़ेंका। अपने दांतों से मेरे लंड को चबाती और फिर अपने होंटों से ऐसे चूमती रही मानो मेरा लंड नहीं कोई लोलीपोप है। करीबन ५ मिनट मुझे खाने के बाद चाची मेरे लंड से पानी निकाल कर गटागट पी गई। इस बीच वो भी दो बार झड़ गई। अभी तक साड़ी उनकी कमर पर ही थी। उन्हें कोई भी मौका दिए बिना मैं उनके ऊपर आ गया, अपने सारे शरीर का बोजझ उनके ऊपर डालते हुए मैं उन्हें चूमता रहा। उनके होंटों को करीबन ५ मिनट तक चूमने के बाद उनके गले को और फिर उन के मम्मों को ऊपर से हाथ मारते हुए कब मैं उनकी साड़ी और पेटीकोट को उनके शरीर से अलग किया, पता भी न चला।
मगर यह साजिश गहरी थी, यह पता चल गया क्योंकि उन्होंने ब्रा के साथ साथ अपनी पैन्टी भी नहीं पहनी थी। ब्रा घर पर रहने के कारण नहीं पहनी होगी मगर साड़ी के साथ पैन्टी नहीं, वो भी अंकल सुबह ही गाँव गए हैं तो पैन्टी न पहनने का कोई सवाल नहीं था। जब वो अंकल के साथ सेक्स करती तो वो दिन में दो से तीन बार अपनी पैन्टी बदलती थी, यह बात मुझे पता थी। अ़ब अंकल गाँव गए हैं तो जाहिर है कि अंकल से अपनी भूख तो जरुर मिटाई होगी उन्होंने। फिर भी उन्होंने पैन्टी नहीं पहनी थी और रही मेरे उनके यहाँ ठहरने की बात तो यहाँ तो एक हफ़्ते पहले ही उन्हें पता था कि मेरे घर के सभी लोग गाँव जाने वाले हैं।
तो क्या बस मैं शुरु हो गया उनके पेट के ऊपर से नाभि तक चूमते हुए मैं उनकी जांघों के बीच उनकी मुनिया पर आ गया। अपनी जीभ उनकी जांघों पर फेरते हुए मैं उनके भगोष्ठों के ऊपर से फेरने लगा। वो चहक उठी और मैं भी उस गंध के कारण रोमांचित हो उठा था। मैं धीरे धीरे उनके अन्दर अपनी जीभ को डालते हुए उनके अंदरूनी होंटों को अलग करने लगा। वो भी यह प्रयास कर रही थी कि मैं पूरी तरह से उनमें समा जाऊं ! मैं उनकी यह तड़प और बढ़ाना चाहता था। मैं धीरे धीरे उनको पी रहा था कि अचानक उन्होंने अपने पैरों की पकड़ कड़ी कर दी और मेरे मुँह को अपने अमृत से भिगो दिया। मगर मैं रुकने वाला नहीं था, मैं और जोर से उनमें समाने लगा, अपने होंटों से उनके आंतरिक होंटों का सारा रस पीने लगा। वो एक बार फिर मेरे मुंह में आ गई।
अ़ब मैं अपने हाथों की उंगलियों का उपयोग करते हुए उन्हें फिर से मेरे अगले कार्यक्रम के लिए तैयार करने लगा। अब मानो वो मेरे सामने गिड़गिड़ाने लगी और बोली,”छोटे, अ़ब तो तेरे लौड़े का स्वाद मेरी मुनिया को चखा दे, नहीं तो रो रो के दम तोड़ देगी ! आआआआआआ ईईईईईईईए “
यह सुनकर अ़ब मुझे उन पर तरस आ गया, मैंने कहा,”हाँ चाची ! थोड़ा सा और, बस फिर आप मुझे ही खा लेना !”
यह सुनकर मानो वो भी मेरे उंगलियों को साथ देने लगी। अपने कूल्हे पहले से अधिक उछालने लगी। अ़ब मैं अचानक रुक गया और अपने लौड़े को उनके मुँह तक ले गया। उनके चूमने से वो और मस्त हो गया। अ़ब उसे उनके सारे शरीर पर फिरा के उनके मम्मों से होते हुए मैं उनकी नाभि पर आकर उसे घुमाने लगा तो चाची और जोर जोर से मिन्नत करने लगी। उनकी भट्टी में मानो आग लगी थी, उनसे रहा नहीं जा रहा था। फिर मैं उनकी मुनिया को तरसाने लगा तो चाची ने अपना पूरा जोर लगा के मेरे बालों को पकड़ के मुझे अपने ऊपर ले लिया फिर भी मैं मानने वाला थोड़े ही था। मैंने अपने होट उनके होंटों से लगा लिये और उनको व्यस्त रखने की कोशिश करने लगा मगर उन्होंने अपने हाथों से मेरे लंड को पकड़ के अपनी आंतरिक होंटों से खाने लगी। देखते ही देखते उन्होंने मेरे आधा लंड अन्दर ले लिया। अ़ब क्या था, मैं तो कबसे तरस रहा था इस दिन के लिए ! मैंने जोर लगा के सारा का सारा अन्दर डाल दिया। तभी चाची जोर से चिल्लाई और मुझसे लिपट गई। मैंने अपने धक्के आहिस्ता-आहिस्ता शुरु किये।
मुझे चाची की ज़कड़ से लगा कि चाची जल्दी ही झड़ जायेगी। मैंने अपने धक्के धीरे से चालू किये। फिर अचानक अन्दर मुझे ज़कड़न और दबाव महसूस होने लगा और चाची झड़ गई।
मैं अभी नहीं आने वाला था। झड़ने के कारण उनकी मुनिया और भी गीली हो गई और मैंने अपना काम जारी रखा। थोड़ी देर बाद वो भी फ़िर साथ देने लगी और अपने कूल्हे मेरे साथ साथ उछालने लगी। मैं समझ गया कि अ़ब तो मज़ा ही मज़ा है। हम दोनों भी एक दूसरे को चूमते रहे। चाची ने तो मुझे अन्दर बाहर आते समय अड़चन ना हो इसलिए अपने पैर हवा में उठा लिए। मैंने फ़िर वही ज़कड़न को महसूस किया इसलिए मैंने अपनी रफ्तार बढ़ाई। चाची भी बराबर का साथ देने लगी और हम एक साथ एक दूसरे में मिल गए। मैं फिर भी रुका नहीं जब तक चाची ने मेरे पूरे लंड का रस अपनी योनि में नहीं लिया। तब तक मैं नहीं रुका। फिर कुछ देर बातें करते हम वैसे ही पड़े रहे। मेरा लंड अभी तक उनकी मुनिया से बाहर नहीं निकला था। उनके मम्मों से खेलते खेलते और बातें करते करते हम दोनों सो गए फिर अगले दौर के लिए !
दोस्तो, कहानी अभी बाकी है।
यह कहानी कैसी लगी, मुझे जरुर बतायें ! Hindi Porn Stories
मेरी दीदी Sex Stories का नाम सपना है, वो मुझसे तीन साल बड़ी है, उनका रंग गोरा चिट्टा है और हाँ उनके होंटों के नीचे एक काला तिल है, जिसकी वजह से वो बहुत सेक्सी लगती है! उनकी शादी एक अनिवासी भारतीय लड़के से यानि कि मेरे जीजा जी से हो गई, जो कि दुबई में नौकरी करते हैं! दीदी उन्हीं के साथ रहती है। वैसे तो वो दोनों बहुत खुश रहते हैं मगर शादी के दो साल गुजर जाने के बाद भी उनकी कोई औलाद न होने से दीदी उदास सी रहती है!
मेरा नाम राज है मैं भी एक अनिवासी भारतीय हूँ और कनाडा में एक कम्पनी में जॉब करता हूँ। यहाँ आने से पहले मेरे माँ-बाप का स्वर्गवास हो गया था इसलिए दीदी, जीजाजी के सिवा मेरा और कोई नहीं है!
एक दिन मैं अपने जीजा जी के साथ फ़ोन पर बात कर रहा था तो बातों ही बातों में मैंने जीजा जी को दीदी के साथ अपने पास घूमने आने का निमंत्रण दे दिया। तभी जीजाजी ने यह कह कर टाल दिया कि उनको अभी छुट्टी नहीं मिल सकती, उन पर कम्पनी के काम का बहुत भार है।
थोड़ा रुकने के बाद जीजा जी ने कहा- मैं कुछ दिनों के लिए तेरी दीदी को तेरे पास भेज देता हूँ, उसकी नौकरी भी छुट गई है, सारे दिन भर घर में बोर हो जाती है, वो पहले से काफी उदास सी रहने लगी है, कुछ दिन पहले तुझे ही याद कर रही थी, शायद वो तुझको देखना-मिलना चाहती है। वैसे भी राखी का त्यौहार नजदीक आ रहा है, दोनों भाई-बहन मिल भी लेना और उसको कहीं घुमा भी देना, शायद इसी बहाने उसका मन ही बहल जाए!
मैंने कहा- ठीक है जीजा जी! जैसा आप कहें!
और कुछ दिन बाद वो दिन भी आ गया जब दीदी मेरे पास आने के लिए दुबई से रवाना हुई। मैं भी दीदी को लेने के लिए ठीक समय पर एयरपोर्ट पहुँच चुका था। कुछ समय बाद दीदी की फ्लाईट लैण्ड होने की घोषणा हुई। मैंने अपनी आँखें एग्जिट-गेट पर जमा दी।
कुछ समय बाद मैंने दीदी को लोगों के साथ बाहर आते देखा तो मैं दीदी को देखता ही रह गया। सच क्या लग रही थी दीदी! मैंने कभी भी दीदी को इस रूप में नहीं देखा था। उन्होंने ऊँची ऐड़ी की सेंडल पहनी हुई थी और काले रंग की फेंसी साड़ी और हाफ कट वाला ब्लैक ब्लाउज़ पहना हुआ था। ब्लाउज़ का गला काफी खुला और बड़ा होने से उनके आधे नंगे स्तन ऊपर से साफ दिखाई दे रहे थे। उनके वक्ष के ऊपर एक काला तिल था जो अलग ही चमक रहा था जैसे दूध में मक्खी!
तभी दीदी की नज़र मुझ पर पड़ी तो मैंने हाथ हिला कर उनको अपने होने का इशारा किया और दीदी ने एक हल्की सी मुस्कान देकर मेरी ओर बढ़ी और मेरे नजदीक आकर मेरे गले लगने लगी। मैंने भी मोके का फ़ायदा उठाया और दीदी की नंगी गोरी चिकनी कमर को अपने दोनों हाथों से सहलाते हुए जकड़ लिया। वहाँ खड़े सारे लोग शायद यही सोच रहे होंगे कि हम पति पत्नी हैं। फिर मैंने दीदी का सामान उठाया और हम दोनों घर की ओर चल दिए!
घर पहुँच कर दीदी फ्रेश होने के लिए बाथरूम में चली गई ( क्यूँकि गर्मी के दिन थे और मेरी दीदी को बहुत पसीना आता है और वो तो उस दिन पसीने से बहुत भीग चुकी थी) मैंने दीदी जी का सामान सेट कर दिया और थोड़ी देर बाद दीदी भी फ्रेश हो कर बाथरूम से बाहर आ गई!
जैसे ही मैंने उनको देखा तो मेरी आंखें फटी की फटी रह गई। दीदी सिर्फ पेटीकोट-ब्लाउज़ में ही बाथरूम से बाहर आ गई थी। काले पेटीकोट और ब्लाउज में उनका गोरा-गोरा अंग एकदम सोने की तरह चमक रहा था। दीदी को देख कर मेरे अंदर थोड़ी अजीब सी घबराहट होनी शुरु हो गई। मैं दीदी को न चाह कर भी देखना चाहता था! मैं कभी दीदी के वक्ष के ऊपर विराजमान काले तिल को देखता तो कभी उनकी नंगी कमर को, तो कभी उनके नाड़े वाले नंगे हिस्से को!
तभी दीदी ने मेरे पास आकर मेरे सर में प्यार से हाथ फेर कर पूछा- किया हुआ भईया? कहाँ खो गए?
मैं थोड़ा घबरा कर और शरमा कर बोला- कुछ नहीं दीदी! बस मैं… आप काले कपड़ों में बहुत सुंदर लगती हो!
दीदी समझ गई कि मैं क्यों ऐसे बोल रहा हूँ। दीदी शरमा कर बोली- भाई मैं क्या करूं, बहुत गर्मी है और साड़ी में बहुत घुटन हो रही थी, इसलिए मैंने साड़ी अलग निकाल दी!
मैं बोला- दीदी कोई बात नहीं, हम दोनों के सिवा और कोई भी नहीं है यहाँ पर! और मैं बिल्कुल फ्रैंक लड़का हूँ, तुम निश्चिंत रहो, मैं तालिबानी जैसा भी नहीं हूँ कि जो अपनी इतनी सुन्दर दीदी को बुरके में पसंद करे!
दीदी हंस दी और बोली- भईया, तू तो बहुत शैतान हो गया है! चल जल्दी से तू भी नहा धो ले! आज राखी है राखी नहीं बंधवानी क्या!
फिर मैं भी बाथरूम मैं नहाने चले गया। बाथरूम में बहुत ही अच्छी खुशबू आ रही थी। आज से पहले कभी ऐसी खुशबू बाथरूम में नहीं थी! मैं समझ गया कि यह खुशबू दीदी के बदन की है! आज मैं इस खुशबू में समां जाना चाहता था और मैंने पहली बार अपनी दीदी के बारे में कर उनके नाम की मुठ मार दी। इसका एक अलग ही आनंद आया और जब मैं बाथरूम से नहा धो कर बाहर आया तो दीदी बोली- क्या बात है, बड़ी देर लगा दी तूने?
मैं बोला- क्या करूँ दीदी जी! आज मेरा तो बाथरूम से बाहर आने का मन ही नहीं कर रहा था!
दीदी बोली- क्यों?
मैं चुप रहा और मैंने दीदी को एक स्माइल दी! दीदी भी शायद मेरा इशारा समझ गई थी और वो शरमाकर बोली- लगता है अब जल्द से जल्द तेरे लिए एक लड़की तलाशनी पड़ेगी! बोल मेरे राजा भइया, तुझको कैसी लड़की पसंद है, मैं अपने राजा भइया के लिए वैसी ही लड़की लाऊँगी!
मैं दीदी से बोला- सच!
दीदी हँस कर बोली- मुच!
मैंने तुंरत ही दीदी का हाथ पकड़ा और उनको शीशे के आगे ले जा कर बोला- मुझे ऐसी लड़की चाहिए!
दीदी थोड़ी शरमा कर बोली- पागल ऐसी लड़की लायेगा तो सुहागरात के बदले रक्षा बंधन मनाना पड़ेगा तुझे!
और जोर जोर से हँसने लगी!
मैं दीदी के पीछे की तरफ खड़ा था और दीदी मेरे आगे थी। हम दोनों भाई बहन एक दूसरे को शीशे में देख कर बातें कर रहे थे!
मैं बोला- दीदी अगर आप जैसी सुंदर लड़की मुझे मिल जाए तो मैं उससे राखी भी बंधवाने के लिए तैयार हूँ!
दीदी बोली- ऐसा क्या है मुझमें जो तू अपनी दीदी का इतना दीवाना हुआ पड़ा है! क्या देखा तूने मुझमें?
मैं बोला- दीदी आप गुस्सा तो नहीं होंगी ना!
दीदी बोली- मैं आज तक अपने राजा भइया से गुस्सा हुई हूँ जो अब होंऊगी!
मैं बोला- दीदी! मैं सच में तुम्हारा दीवाना हूँ! जब से मैंने तुम्हें एयर पोर्ट पर देखा है, मैं तुम्हारा दीवाना हो गया हूँ। पता नहीं क्यों मैं तुम्हें पाना चाहता हूँ, तुम्हें छूना चाहता हूँ, तुम्हें तुम्हारे नाज़ुक होटों के नीचे काले तिल का अहसास दिलाना चाहता हूँ!
और मैंने आव देखा न ताव! और दीदी की गर्दन के नीचे प्यार से एक किस कर दिया। दीदी मुझे शीशे में देख रही थी और वो वैसे ही खड़े रह कर मेरे गाल पर प्यार से हाथ फेरने लगी! मैंने भी दीदी को अपने दोनों हाथों से आगे से जकड़ लिया और दीदी ने अपनी दोनों आँखें बंद कर ली जिससे मेरा थोड़ा और साहस बढ़ा और दीदी के कान में मैंने हल्की सी आवाज में ‘ आई लव यू दीदी ‘ बोल दिया और बोला- अगर आप मेरी बहन न होती तो मैं आप को ज़रूर प्रपोज़ करता! आप कितनी सुंदर हो! मैंने आप सी सुंदर कोई लड़की नहीं देखी! हम भाई बहन क्यों हैं?
दीदी ने अभी तक अपनी आँखें बंद कर रखी थी क्योंकि मैं उनके पेट पर, नाभि पर हल्का-हल्का हाथ फेर रहा था। अचानक मैंने दीदी के पेटीकोट के नाड़े की तरफ हाथ बढ़ाया तो दीदी ने मेरा हाथ पकड़ लिया और गर्दन हिला कर मना करने लगी और बोली- भईया मैं तुम्हारी बहन हूँ!
मैंने बोला- मैं जानता हूँ! आज मैं सारे रिश्तों को भुला देना चाहता हूँ, तुम मेरी हो और मैं आज अपनी बहन की बाँहों मैं समा जाना चाहता हूँ!
दीदी बोली- किसी को मालूम चल गया तो समाज में हमारी थू-थू हो जायेगी!
मैंने कहा- हमें समाज देखने थोड़े ना आ रहा है!
दीदी चुप हो गई और कुछ सोचने के बाद मेरे से लिपट गई और रोने लगी।
मैंने पूछा- दीदी क्या हुआ? क्यों रो रही हो?
तो बोली- मैं बहुत प्यासी हूँ! तेरे जीजाजी से मुझे वो खुशी नहीं मिली जो हर औरत को शादी के बाद अपने पति से मिलती है!
मैं बोला- दीदी साफ साफ बताओ ना! मैं समझ नहीं पा रहा हूँ!
वो बोली- तेरे जीजा जी मर्द नहीं हैं!
यह सुनकर मुझे तो पसीना आ गया और मैं अंदर ही अंदर सोचने लगा- यानि कि दीदी अभी कुँवारी हैं और उनकी सील भी नहीं टूटी!
मैंने दीदी के आँसू को अपनी जीभ से चाट कर साफ किया और बोला- दीदी! तुम चिंता मत करो मैं हूँ ना! तुम बस मुझको यह बताओ कि तुम मुझको पसंद करती हो?
दीदी बोली- जान से भी ज्यादा!
क्या तुम मुझे भाई की जगह अपना पति मानोगी? मैं तुम्हें हर वो खुशी दूंगा जो तुम चाहती हो!
दीदी ने फ़ौरन मेरे होटों पर किस कर दिया और बोली- आज से तुम ही मेरे पति हो! मेरा तन-मन सब तुम्हारा है! जो तुम बोलोगे, वो मैं करूंगी!
मैंने दीदी को बोला- आज मैं तुमसे शादी करूंगा!
यह सुन कर दीदी जल्दी से सिंदूर और अपना मंगल सूत्र ले कर मेरे पास आ गई। मैंने उनकी मांग भर कर मंगल सूत्र उनके गले में पहना दिया।
दीदी बोली- भइया! मैं अपने कमरे में जा रही हूँ, तुम थोड़ी देर बाद कमरे के अंदर आ जाना! मैं तुम्हारा इन्तजार करूंगी!
और जब मैं थोड़ी देर बाद दीदी के कमरे में गया तो दीदी सज-संवर के अपने शादी के जोड़े में घूँघट ओढ़े पलंग पर बैठी मेरा बेसबरी से इंतजार कर रही थी। मैं दीदी के पास गया और प्यार से उनका घूँघट उठाया और उनकी ठुडी को अपने हाथ से ऊपर उठाने के साथ ही उनके होटों का चुम्बन ले कर बोला- ओह दीदी! आई लव यू! मैंने आज तक तुम जैसी सेक्सी लड़की नहीं देखी!
और उनके होटों के नीचे वाले काले तिल को अपने दाँतों में बुरी तरह दबोच लिया और चूसने लगा। दीदी को दर्द हो रहा था मगर दीदी मुझ से भी ज्यादा प्यासी थी, उसे दर्द में भी मज़ा आ रहा था।
तभी मैंने दीदी के ब्लाउज़ को अपने दोनों हाथों से फाड़ दिया और उनके गोरे गोरे आम के जैसे बूब्स बाहर आ गये। मैं उनको चूसने लगा। थोड़ी देर बाद दीदी ने मेरी पैन्ट की ज़िप खोल कर मेरे लंड को बाहर निकाला और अपने कोमल गोरे हाथों से उसे सहलाने लगी। कुछ देर बाद जब मेरा लंड लौड़ा बन गया तो उसको अपनी जीभ से चाटने, सहलाने लगी और होटों से रगड़ कर उसे खड़ा कर दिया!
हम दोनों भाई बहन नंगे थे, मैंने दीदी को बिस्तर में लिटा दिया और उनकी चूत को अपनी जीभ से चाटने लगा।
दीदी ओह माय भईया डार्लिंग! आई लव यू! बोल रही थी।
मैंने अपनी दीदी को गीध की तरह नौचना शुरु कर दिया। कुछ देर बाद जब मैंने अपनी बहन की चूत में अपना लौड़ा डाला तो दीदी ने उई माँ! बोल कर मुझको जोर से जकड़ लिया और मुझको फ्रेंच किस करने लगी और अपने दोनों हाथों को मेरे चूतड़ों पर रख कर भइया और जोर से! और जोर से! बोलने लगी।
कुछ देर बाद मैंने दीदी को डौगी स्टाइल में चोदना शुरू किया। दीदी के गद्देदार चूतड़ को देख मैं ललचा गया और उनके चूतड़ चाटने लगा। दीदी को मैंने सारी रात चोदा!
सुबह जब मैं जागा तो दीदी मेरे लंड को चूस रही थी, मुझको प्यासी आँखों से देख रही थी और मेरा लौड़ा खड़ा करके उसके ऊपर बैठ गई और फिर दुबारा से मैंने दीदी को चोदना शुरु कर दिया।
हम दोनों चार साल बीत जाने के बाद भी हमेशा एक दूसरे के साथ सेक्स में डूबे रहते हैं।
सच अपनी बहन के साथ कितना मजा आता है, मैं क्या बताऊँ!
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