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मैं अपनी फ़र्स्ट इयर की पढ़ाई कर Antarvasna रहा था। मुझे याद है उस समय बरसात का मौसम था…. पापा ने मुझे बताया कि दीदी के साथ उदयपुर जाना है। दीदी की उम्र करीब 27 वर्ष की थी। जयपुर में भी एक दिन रुकना है। मुझे घूमने का वैसे ही बहुत शौक था। मैंने तो तुरन्त हां कह दी। फिर दीदी मुझे कई चीजें भी देती थी। पापा ने हमारा बस में रिजर्वशन करवा दिया था।
दिन की बस थी सो हमने खाना वगैरह खा कर बस में बैठ गये…. दीदी खिड़की वाली सीट पर थी। बस के चलने के बाद थोड़ी ही देर में बरसात शुरु हो गई थी। रास्ते भर दीदी पर खिड़की से छींटे आते रहे और बार बार वो रुमाल से अपने हाथों को और बोबे को पोंछती जाती थी। मैंने भी उनकी मदद की और एक दो बार मैंने भी दीदी बोबे को अपने रूमाल से साफ़ कर दिया। उन्होने मुझे घूर कर देखा भी…. हाथ लगाते ही दीदी के उभार लिये हुए चिकने और नरम बोबे मेरे दिल में बस गये।
बस के हिचकोले से वो बार बार मुझ पर गिर सी जाती थी। एक बार तो उनका हाथ मेरे लण्ड पर भी पड़ गया। मुझे लगा कि दीदी जान कर के मुझे उकसा रही है। मैं भी जवान था, मेरे दिल में भी हलचल मच गई। शाम होते होते हम जयपुर पहुंच चुके थे। टूसीटर ले कर हम सामने ही होटल में रुक गये और वहीं से दूसरे दिन का उदयपुर स्लीपर का रिजर्वशन करवा लिया। दीदी काऊंटर पर गई और कमरा बुक करवा लिया। मैंने सारा सामान एक साईड में रख दिया।
हमने खाना जल्दी ही खा लिया और होटल के बाहर टहलने लगे। दीदी मुझे कभी आईसक्रीम तो कभी कोल्ड ड्रिंक पिला कर मुझे खुश कर रही थी। मुझे लगा मुझे भी दीदी के बदन को हाथ लगा कर खुश कर देना चाहिये। सो मैंने टहलते हुए मजाक में दीदी के चूतड़ पर हाथ मार दिया। उस हाथ मारने में मुझे उनके गाण्ड का नक्शा भी महसूस हो गया। दीदी की गाण्ड पर मेरा हाथ लगते ही वो चिहुंक गई….मुझे फिर से उसने मुस्करा कर देखा, मुझे इस से ओर बढ़ावा मिला। मुझे भी बहुत आनन्द आ रहा था इस सेक्सी खेल में।
“शैतान….मारने को यही जगह मिली थी क्या….?” मतलब भरी निगाहों से मुझे देखते हुए उसने कहा।
“दीदी….मजा आया ना….! नरम गद्देदार है….!” मैंने उसे छेड़ा।
“चल हट…. ” कह कर दीदी ने भी मेरी चूतड़ पर एक चपत लगा दी।
“दीदी एक और चपत लगाओ ना….” मैंने शरारत से कहा।
“क्यो तुझे भी मजा आया क्या ?” दीदी मुस्कराने लगी।
“हां….लगता है खूब मारो और बल्कि दबा ही दो !” मैं भी थोड़ा खुल गया।
“जानता है मुन्ना….मेरी भी हनीमून मनाने की इच्छा होती है !”
ये सुनते एकाएक मुझे विश्वास नहीं हुआ। मैंने अन्जान बनते हुए कहा,”ये कहां मनाते हैं? कैसे करते हैं?”
“होटल में और कहां….!” दीदी ने मेरी ओर देखते हुए कहा।
“होटल में….चलो ज्यादा से ज्यादा कुछ खर्चा हो जायेगा….पर तुम्हारी इच्छा तो पूरी हो जायेगी ना….”
“बुद्धू …. नहीं मालूम है क्या….?”
“दीदी….कोई बताये तो मालूम हो ना…. हाँ एक फ़िल्म आई थी….मैंने नहीं देखी थी !”
“पागल है तू तो …. तुझे सब सिखाना पड़ेगा…. बोल सीखेगा?” मुझे मालूम हो गया कि दीदी मुझसे चुदना चाहती है।
“हनीमून सीखने वाली बात है क्या?”
दीदी मेरी पीठ पर घूंसे मारने लगी।
रात के 9 बजने को थे। हम फिर से होटल के कमरे में आ गये और सोने की तैयारी करने लगे। अचानक मेरी नजर बिस्तर पर गई। एक ही सिंगल बिस्तर था। मुझे लगा दीदी ने जान बूझ कर के सिंगल बेड लिया है, मैंने अपना पजामा पहन लिया और अंडरवियर मैंने नहीं पहनी। मैं दीदी को अपना फ़ड़फ़ड़ाता लण्ड दिखाना चाहता था। मैंने झुक कर देखा तो पजामे में से मेरा झूलता हुआ लण्ड बाहर से ही नजर आ रहा था।
दीदी मेरी सब बातों को नोट कर रही थी और मुस्करा रही थी। मेरे झूलते हुए लण्ड को तिरछी नजरों से देख भी रही थी। मुझे भी अब शरीर में सनसनी होने लगी थी। लण्ड भी अब खड़ा होने लगा था। दीदी ने भी अपना नाईट गाऊन पहन लिया पर मेरी तेज निगाहों ने भांप लिया था कि अन्दर वो कुछ नहीं पहने थी। मुझे लगा कि दीदी आज सेक्सी मूड में हैं, और शायद हीट में भी हैं….दीदी ने अपने हाथों को उठा कर और अपनी चूंचियों को उभार कर एक भरपूर अंगड़ाई ली ….मुझे लगा कि मेरे दिल के सारे टांके टूट जायेंगे। मुझे महसूस हुआ कि मैं इसका फ़ायदा ले सकता हूँ। शायद मेरी किस्मत खुल जाये। दीदी बिस्तर पर लेट गई और बोली…”अरे मुन्ना….यहीं आजा तू भी….”
सुनते ही मेरा लण्ड कड़क गया। मैं भी लाईट बन्द करके दीदी की बगल में लेट गया। बिस्तर बहुत ही संकरा था। हम दोनों का बदन छू रहा था। मेरा हाथ उनके बदन पर यहाँ वहाँ लग जाता था पर वो कुछ नहीं कह रही थी। कुछ ही देर में वो सो गई। पर मेरे दिल में हलचल थी। लण्ड भी कड़ा हो रहा था।
अचानक दीदी ने नींद में अपना हाथ मेरे लण्ड पर रख दिया….मेरे जिस्म में झुरझुरी आ गई पर उसने किया कुछ नहीं। मैंने लण्ड को थोड़ा सा और कड़ा कर दिया और हिला दिया। पर दीदी ने कुछ नहीं किया। वो नींद में मेरे से और चिपक गई। उनका हाथ मेरे पेट पर से होता हुआ लण्ड पर था। मुझे दीदी के जवान जिस्म की अब महक आने लगी थी। मैंने भी अपनी हथेली उनकी चूचियों के ऊपर जमा दी और उनके सांस लेते समय उनकी उठती और गिरती छातियों को हल्के से दबा कर मजे ले रहा था।
शायद दीदी की नींद खुल गई थी या वो नाटक कर रही थी। उन्होने चुपके से मेरी तरफ़ देखा, और मेरी नजरें उनसे मिल ही गई। हम दोनों आपस में एक दूसरे को निहारने लगे। उसकी आंखों में निमंत्रण था, भरपूर वासना थी। मेरे हाथ उसने नहीं हटाये और ना ही मेरे लण्ड पर से उसका हाथ हटा। हम दोनों ने एक दूसरे की मौन स्वीकृति पा कर मैंने उसकी चूंची पर दबाव बढ़ा दिया और नीचे मेरे लण्ड पर उसके हाथ का कसाव बढ़ गया। दोनों के मुख से एक साथ सिसकारियाँ फ़ूट पड़ी।
मेरा लण्ड मसलते हुए बोल पड़ी,”मुन्ना क्या कर रहा है….छोड़ दे ना….”
“दीदी…. हाय….आप कितनी अच्छी है…!.” मैंने गाऊन के अन्दर हाथ डाल दिया और चूंचियों का जायका लेने लगा, और मसलने लगा।
“मुन्ना….हाय कितना शैतान है रे तू….मेरे तो बोबे ही मसल डाले रे….!” दीदी ने मेरा पजामा का नाड़ा खींच दिया और अन्दर हाथ डाल कर मेरा लण्ड पकड़ लिया।
“दीदी….जरा जोर से मसलो ना…. दबाओ और दबाओ….बहुत मजा आ रहा है….!”
“तू भी मेरे बोबे खींच खींच कर दबा डाल….हाय रे….तू अब तक कहां था रे….!” मैंने दीदी की चूंची निकाल कर मुख में भर ली और मैं दूध पीने लगा। मेरा दूसरा हाथ उनकी चूत पर पहुंच गया। मैंने उनकी चूत दबा दी।
वो तड़प उठी….”अरे छोड़ दे जालिम मेरी चूत….”
“दीदी….तू भी मेरा लण्ड छोड़ दे….हाय रे….!”
“मुन्ना….चल अपन दोनों हनीमून मना लें….!”
“कैसे….?”
मेरा गाऊन ऊपर करके मेरे से चिपक जा….हनीमून अपने आप हो जायेगा। “
“सच दीदी….” मुझे तो अब चोदने की लग रही थी। लण्ड बेकाबू होता जा रहा था। मैंने गाऊन ऊंचा करके लण्ड उसकी चूत पर गड़ा दिया। दीदी ने अपनी चूत का मुँह खोल कर मेरे लण्ड का चिकना सुपाड़ा अपनी गीली चूत में फ़ंसा लिया और जोर लगा कर लण्ड अपनी चूत में अन्दर सरकाने लगी।
“ये लो मुन्ना….बन गया हनीमून…. अ….अ….आह्….स्सीऽऽऽऽऽऽऽ ….अह्ह्ह्ह्ह्….” लण्ड गहराई में धंसता चला गया। मेरे लण्ड के सुपाड़े में मिठास आने लगी। मैंने भी अपने चूतड़ का जोर लगा कर पूरा अन्दर तक घुसा डाला। दीदी तो चुद्दकड़ निकली….इतनी गहराई तक लण्ड लेने के बाद तो उसे और मस्ती चढ़ गई…. वो मेरे से चिपकती गई। मैंने उसे अपने नीचे दबा लिया और उसके ऊपर चढ़ गया। और उसकी नरम नरम चूत को चोदने लगा…. वो नीचे दबी सिसकती रही…. मैं आनन्द के सागर में डूब चला था। दीदी के कड़कती चूचियों को मसलता जा रहा था।
दीदी जैसे चुदाते समय भी तड़प रही थी, जैसे उसकी सारी इच्छायें पूरी हो रही हों…. कुछ ही देर में उसकी शरीर में जैसे ताकत भर गई हो….मुझे उसने बुरी तरह से भींच लिया….और सिसकी लेती हुई झड़ने लगी। मुझे भी लगा कि जैसे सारा संसार मेरे में सिमट रहा हो…. मेरे जिस्म ने ऐठन के साथ ही लण्ड से सारा वीर्य निकाल दिया। सारा वीर्य उसकी चूत में भरने लगा….मेरा लण्ड बार बार रुक रुक कर वीर्य छोड़ रहा था….जैसे सारा जिस्म निचोड़ लिया हो। मैं निढाल हो कर एक तरफ़ चित लेट गया। हम दोनों ही जाने कब सो गये।
सवेरे उठते ही नहा धो कर हमने नाश्ता किया। और घूमने निकल पड़े…. दिन भर में सारा काम निपटाया और रात की बस में बैठ गये। बस लगभग खाली थी। ठीक साढ़े नौ बजे बस रवाना हो गई। बस के चलने के बाद बस की लाईटें बन्द हो गई। अभी हम नीचे सीट पर ही बैठे थे जिसे हमें अजमेर में खाली करके स्लीपर में जाना था। सीट के साथ लगे पर्दे मैंने खींच दिये।
अंधेरे का फ़ायदा मैंने उठाते हुए दीदी के बोबे मसलने चालू कर दिये, दीदी ने भी मेरा लण्ड बाहर निकाल कर झुक कर चूसना शुरू कर दिया। वो मेरे सुपाड़े के रिंग को खास तरह से चूस रही थी। मेरा लण्ड बेहद कड़ा हो गया था। साथ में मैं सावधानी से इधर उधर भी देख लेता था कि कोई हमें देख तो नहीं रहा है….पर सब अलसाये हुए से आंखे बन्द किये पड़े थे। मैंने अब दीदी का सर अपने लण्ड पर जोर से दबा दिया और लण्ड से उसका मुँह चोदने लगा। मुझे लगा कि मैं झड़ने वाला हू, तो मैंने लण्ड दीदी के मुँह से लण्ड निकालने की कोशिश की पर दीदी लण्ड छोड़ने को तैयार नहीं थी…. मेरा वीर्य उसके मुँह में ही छूट पड़ा…. मै उसके सर को पकड़ कर उस पर दोहरा हो गया। मेरा सारा रस वो पी चुकी थी। मेरा एक दम साफ़ सुथरा लण्ड उसके मुह से बाहर निकला। मैंने जल्दी से अपनी पेन्ट की ज़िप चढ़ा दी। दीदी भी ठीक से बैठ गई। उसकी आंखे अभी भी शराबी लग रही थी।
अजमेर के बस स्टेण्ड पर बस आ गई थी….समय किस तेजी से निकला पता ही नहीं चला। यात्री बस में चढ़ रहे थे कुछ उतर रहे थे। हम भी कोल्ड ड्रिंक लेने के लिये उतर गये। हम दोनढ़ एक दूसरे से नजर मिला कर देखे जा रहे थे। आंखो ही आंखो में बातें हो रही थी।
तभी कंडक्टर ने कर तन्द्रा भंग की,”साहब जी….चलो या यहीं रहना है….?”
हम दोनों मुस्करा पड़े और बस की तरफ़ चल दिये। बस पूरी भर चुकी थी। हम दोनों आगे की डबल स्लीपर पर चढ़ गये…. हमने अपना सारा हिसाब जमाया और लेट गये…. पर्दा अच्छी तरह से खींच दिया। बस चल पड़ी। कुछ ही देर में बस की लाईट बंद हो गई और हमारे दिल में शैतान एक बार फिर से जाग उठा। बाहर अब हल्की सी बरसात होने लगी थी। ठण्डक बढ़ गई थी। हमने एक चादर ओढ़ ली।
कुछ ही देर में चादर के अन्दर कयामत टूट पड़ी। दीदी ने अपना कुर्ता ऊपर कर लिया और सलवार नीचे खींच ली। मैंने भी अपनी पैन्ट नीचे खींच ली। हम दोनों के लण्ड और चूत नीचे से खुले हुए थे। मैंने दीदी के चूतड़ों की दरार में अपना लण्ड दबा दिया। उसके गोल गोल मांसल चूतड़ की फ़ांके लण्ड के दबाव से खुलने लगी। मेरा लण्ड उसकी गाण्ड के छेद से टकरा गया।
“भैया आज तो गाण्ड भी हनीमून मनायेगी….!”
“चुप रह दीदी…. तेरी गाण्ड फ़ाड़ने को मन कर रहा है….!”
“फ़ाड़ दे मेरे मुन्ना….”
उसकी गाण्ड के छेद पर लण्ड ने अपना पूरा दबाव डाल दिया। मेरे लण्ड का रिंग उस छेद में अन्दर जा कर फ़ंस गया। अब मैंने और दीदी ने आराम की पोजीशन बना ली दोनो एक दूसरे से सट गये। दीदी ने भी अपनी गाण्ड पीछे उभार कर ढीली छोड़ दी। मैंने दीदी के बोबे पकड़ लिये और लण्ड अन्दर सरकाने लगा। मेरा लण्ड फिर मिठास से भरने लगा। मैंने अब धीरे धीरे लण्ड को अन्दर बाहर करना शुरु कर दिया। मुझे मजा आने लग गया। बस के झटके और सहायता कर रहे थे।
काफ़ी देर तक तक मैं उसकी गाण्ड मारने का मजा लेता रहा ….फिर मुझे लगा कि दीदी तो बेचारी अब तक प्यासी ही है। ये सोचते हुये मैंने अपना लण्ड गाण्ड से निकाल कर पीछे से ही उसकी चूत में घुसेड़ दिया। आनन्द की तेज सिसकारी दीदी के मुँह से निकल पडी…. मैंने तुरन्त उसके मुँह को दबा दिया….दीदी की नरम नरम चूत एक बार फिर मेरे लण्ड में उत्तेजना भरने लगी। चूत में अन्दर बाहर करने से दीदी और मुझे असीम आनन्द आने लगा। मैंने अब धक्के जमा कर जोर से मारने शुरू कर दिये। दीदी का जिस्म मसकने लगा…. बल खाने लगा….उसे जबरदस्त मस्ती चढ़ने लगी….जिस्म थरथराने लगा….
‘मुन्ना….मुझे जकड़ ले बोबे मसल दे…. राम रे….!” और दोहरी होते हुए झड़ने लगी…. अचानक मेरे लण्ड ने भी जोर से पिचकारी छोड़ दी। हम दोनों लगभग साथ ही झड़ने लगे थे…. एक दूसरे को हमने भींच रखा था……..। हम शान्त होने लगे थे। दीदी की चूत के पास वीर्य फ़ैल रहा था। मैंने तुरन्त चादर खींच ली और साफ़ करने लगा। पर उसकी चूत से रह रह कर वीर्य आता ही जा रहा था। मैंने अपना साफ़ रूमाल निकाला और उसे दीदी की चूत के अन्दर थोड़ा सा डाल कर रख दिया। दीदी ने अपना सलवार कुर्ता ठीक कर लिया। मैं भी पैन्ट पहन कर लेट गया। सवेरे बस उदयपुर पहुंच चुकी थी…. हमने टूसीटर वाले से किसी होटल में ले जाने को कहा….अब हम होटल में चाय नाश्ता कर रहे थे….
“मुन्ना ….अपना तो ये हनीमून का सफ़र हो गया….”
“दीदी बहुत मजा आता है ना…. होटल में….बस में…. कितना चोदा….मजा आ गया….” हम दोनों आगे प्लान बनाने लगे….काम का कम और हनीमून का अधिक …. उदयपुर बहुत सुन्दर जगह थी इसलिये हमने अपना प्रोग्राम दो दिन और बढ़ा लिया था….साथ में हनीमून के दिन भी बढ़ गये….
दोस्तो यह मेरी पहली कहानी है….कृपया अपने विचार भेजें….धन्यवाद। Antarvasna
यह एकदम १००% सच्चा अनुभव Hindi Porn Stories है जो कि मैंने अपनी पत्नी के साथ महसूस किया। मेरा मान राम है और मेरी उम्र ३२ साल है। मेरी पत्नी का नाम मुस्कान है, उसकी उम्र ३० साल है।
पिछले साल हम लोग केरल गए थे घूमने के लिए। वहाँ केरल में मालिश बहुत मशहूर है। दुनिया भर के लोग केरल की मालिश पसन्द करते हैं। मैंने अपनी बीवी को बताया कि यहाँ मालिश का बहुत मज़ा आएगा तुम्हें। पहले तो वो थोड़ा शरमाई फिर बाद में राजी हो गई।
हम लोग एक छोटे से मालिश-पार्लर में गए। वहाँ केवल एक ही आदमी था और वही वहाँ पर मालिश करता था। उसका नाम जोशीन था और उसकी उम्र २८ साल थी और वह केरल का ही रहने वाला था, वह यह छोटा सा मसाज पार्लर चलाता था।
जोशीन ने मुजे बताया कि वहाँ पर कोई लड़की नहीं है जो कि किसी और लड़की की मालिश कर सके। वहाँ सब की मालिश वह ख़ुद करता है, चाहे कोई लड़का हो अथवा लड़की। मैंने अपनी पत्नी को बताया तो वह पहले तो गुस्सा करने लगी, फिर बाद में मान गई, वह भी इस शर्त पर कि वह ब्रा और पैन्टी पहने हुए ही मालिश करवा लेगी। यह सुनकर मैं भी राजी हो गया।
हमने जोशीन से बात करके अगली सुबह ७ बजे का समय तय कर लिया, क्योंकि हमारी ट्रेन दिन में ११:४५ को थी। हम दोनों सुबह जोशीन के मसाज पार्लर में चले गए। वहाँ जोशीन अकेला टी-शर्ट और शॉर्ट में था, मेरी पत्नी ने ब्रा और पैन्टी के ऊपर गाऊन पहना हुआ था।
जब हम वहाँ गए तो उसने कहा कि पहले मैं मैडम की मालिश कर देता हूँ, बाद में आप करवा लेना। हम दोनों सहमत हो गए। मेरी पत्नी ने गाऊन उतार कर बगल में रख दिया और लाल रंग की ब्रा और पैन्टी में मालिश करने की मेज पर लेट गई। मैंने उसे छेड़ने की नीयत से कहा, “ये ब्रा और पैन्टी भी उतार दो, और पूरी नंगी होकर मालिश करवा लो यार!”
यह सुनकर पत्नी गुस्से भरी नज़रों से मुझे देखने लगी और कहा, “एक कसकर थप्पड़ लगा दूँगी अभी।”
जोशीन को कुछ समझ में नहीं आया क्योंकि उसे हिन्दी नहीं आती थी, वह सिर्फ मलयालम जानता था। जोशीन ने मालिश करना शुरु किया, लेकिन १५ मिनट में ही उसने कहा, “मैडम आपको ये ब्रा और पैन्टी उतारनी पड़ेगी क्योंकि मालिश करने में मेरा हाथ फ्री होकर नहीं चल रहा है।” यह सुनकर मेरी पत्नी कुछ सोचने लग गई कि तभी जोशीन बोला, “मैडम मैं भी शादीशुदा हूँ और चिन्ता करने की कोई बात नहीं है।”
तभी मैंने पीछे से हाथ डालकर पत्नी की ब्रा की कप को ऊपर कर दिया और पत्नी की दोनों चूचियों को पूरा नंगा करकके जोशीन को दिखा दिया। पत्नी ने कहा, “ये क्या कर रहे हो राम?” तब मैंने कहा, “जोशीन भी विवाहित हूँ और ये चूचियाँ उसके लिए कोई नई चीज़ नहीं है, उसकी बीवी के भी ऐसी ही होंगी यार। और वैसे भी जब उसने सब कुछ देख ही लिया है तो पूरी ब्रा निकाल देने में कोई हर्ज़ नहीं है।” तभी मैंने एक ही झटके से अपनी पत्नी की पूरी ब्रा खोलकर निकाल दी।
जोशीन मेरी पत्नी की दोनों चूचियों को देखने लगा, ये देख मुझे बहुत मज़ा आया। फिर जोशीन ने कहा, “पैन्टी भी उतारनी पड़ेगी।”
यह सुनकर मैंने पत्नी को टेबल से उतार ज़मीन पर खड़ा किया और एक ही झटके में उसकी पैन्टी भी खींच दी। जोशीन मेरी पत्नी के पीछे खड़ा था और उसके बड़े-बड़े चूतड़ों को बड़े ध्यान से देख रहा था। तभी मेरी पत्नी ने कहा कि मेरी चूत पर आगे थोड़ा तो कपड़ा लगा दो। तब जोशीन ने एक पतला सा लम्बा सा कपड़ा दे दिया, जिसे मेरी पत्नी ने अपनी कमर पर बाँध कर अपनी चूत के आगे से लटका दिया। लेकिन वह कपड़ा ऐसे ही चूत के ऊपर लटक सा रहा था कहीं पर चूत के नीचे से बँधा हुआ नहीं था। और मेरी पत्नी फिर से मालिश करवाने के लिए ऊपर से नंगी मेज पर लेट गई और जोशी उसकी मालिश करने लगा।
तभी मैंने जोशीन को इशारा किया कि वह उसकी चूचियों की मालिश कर दे। यह सुनकर वह मुस्कुराया और थोड़ा सा तेल उसकी चूचियों पर डालकर मालिश करने लगा। यह सब देखकर मुझे बहुत मस्ती आई और मेरा लंड खड़ा हो गया। जब मैंने देखा तो मुझे लगा कि जोशीन का लंड भी खड़ा हुआ है।
काफी देर मालिश करने के बाद जोशीन ने मेरी पत्नी को पलटने के लिए कहा। जब वह पलट कर पेट के बल लेट गई तो उसके चूतड़ पूरे नंगे जोशीन के सामने थे जिन्हें देखकर वह मचल उठा और तबीयत से उसके चूतड़ों की मालिश करने लगा और बीच-बीच में वह उसकी गाँड और चूत पर भी हाथ लगा देता था, और मेरी ओर देखकर मुझे आँख मार देता।
मुझे बहुत मज़ा आ रहा था। मेरी पत्नी एकदम मस्त होकर पूरी नंगी होकर अपनी मालिश एक अजनबी आदमी से मेरे सामने ही करवा रही थी और काफ़ी मज़े भी लूट रही थी। जोशीन ने फिर मेरी बीवी को पलटने को कहा, अबकी बार जब मेरी पत्नी पलटी तो उसकी चूत से कपड़ा सरक गया और चूत पूरी नंगी दिखने लगी। यहाँ पर बात कहनी ज़रूरी होगी कि एक रात पहले ही मैंने अपने शेविंग रेज़र से उसकी चूत को पूरा शेव किया था और आज उसकी चूत बहुत चिकनी दिख रही थी।
मैंने देखा कि जोशीन वह कपड़ा हटा कर उसकी चूत देख रहा था। मैंने वह छोटा सा कपड़ा हटा दिया और जब मेरी पत्नी ने पूछा कि वह कपड़ा क्यों हटा रहे हो तो मैंने कहा कि जोशीन ने सब कुछ देख लिया है और अब जोशीन से शरमाने का कोई फ़ायदा नहीं। मेरी पत्नी ने कुछ नहीं कहा और अब वह पूरी नंगी होकर जोशीन से मालिश करवाने लगी थी। जोशन भी मालिश करने के बहाने से उसकी चूत और चूचियों पर मज़े से हाथ फेर रहा था। यह सब देखकर मुझे तो बड़ा ही मज़ा आ रहा था, और मेरी पत्नी भी मज़े ले रही थी।
तभी जोशीन ने मुझसे कहा – “मैडम की मालिश पूरी हो गई, अब तुम्हारी बारी है। पर इससे पहले मैडम को आयुर्वेदिक-गरम पानी से नहाना पड़ेगा, क्योंकि शरीर पर काफी मात्रा में तेल है।”
टेबल और उसके शरीर पर बहुत सारा तेल होने की वज़ह से वह टेबल पर से उतर नहीं सक रही थी, तो वह उठकर बैठ गई। बैठने से उसकी नंगी चूत खुल कर अन्दर के नज़ारे भी दिखाने लगी, जिसे देख मुझे और जोशीन दोनों को बहुत मज़ा आया। मैंने जोशीन से कहा – “काफी तेल लगा हुआ है, इसलिए मेरी पत्नी को तुम ही टेबल से नीचे उतार दो।” यह सुनकर उसने मेरी पत्नी की गाँड के नीचे हाथ डालकर उसे अपनी गोद में उठाकर नीचे उतार दिया और मैंने देखा कि जोशीन का हाथ उसकी चूत व चूचियों को भी छू रहा था। यह देखकर मुझे काफ़ी मज़ा आया।
मेरी बीवी साथ में लगे बाथरूम में चली गई, और मैं और जोशीन बाहर खड़े होकर उसे नंगे देख रहे थे, और तभी मैंने पत्नी को पलटने को कहा। जैसे ही वह पलटी, उसे सामने से नंगी देख मेरा लंड फिर से खड़ा हो गया। मैंने ग़ौर किया कि जोशीन का लंड पहले से ही खड़ा है। उसने सिर्फ एक अन्डरवियर पहना रखा था, तो उसमें से एक तम्बू जैसा उठाव देखा जा सकता था। मेरी पत्नी पूरी तरह से नंगी होकर बाथरूम में टेबल पर बैठ गई और फिर गरम पानी भरने लगी। तभी जोशीन ने मेरी पत्नी की पीठ पर आयुर्वेदिक साबुन घिसना शुरु किया, मेरी नंगी बीवी उसका मज़ा ले रही थी। बाद में जोशीन अलग हटकर खड़ा हो गया, और उसे नंगी नहाते मेरे साथ ही देखने लगा। हमें काफ़ी मज़ा आया।
फिर जोशीन ने मुझे मालिश करवाने का इशारा किया और तभी मैं पूरा नंगा होकर टेबल पर लेट गया और मालिश करवाने लगा। कुछ देर के बाद मेरी पत्नी नहाकर बाहर निकली। वह पूरी नंगी थी, मैंने उसे बुलाया और अपना लंड पकड़ने को कहा, क्योंकि जोशीन ने मेरे लंड पर मालिश करने से मना कर दिया था। मैंने जोशीन को कहा कि तुम मेरी पत्नी की चूत और गाँड पर ख़ूब मालिश कर रहे थे, लेकिन मेरे लंड पर मालिश करने में क्या समस्या है, तो उसने बस मुस्कुरा दिया।
मेरी पत्नी मेज़ के किनारे नंगी ही खड़ी होकर मेरे लंड की मालिश करने लगी। जोशीन मेरी मालिश करते-करते मेरी पत्नी के नंगे बदन को देख रहा था और मज़ा ले रहा था। कभी-कभी वो उसकी चूचियों को छू लेता, तो कभी उसकी गाँड पर हाथ फेर देता। मैं भी ऐसा ही कर रहा था। हमें बहुत ही मज़ा आ रहा था।
मैंने अपनी पत्नी को अपना लंड चूसने को कहा, जोशीन के कारण पहले वह मना करती रही, पर बाद में राज़ी हो गई और फिर उसके सामने ही मेरे लंड को बिल्कुल लॉलीपॉप की तरह चूसने लगी। जोशीन मेरी मालिश में मशरूफ था।
काफ़ी देर तक चूसने के बाद मेरा लंड झड़ गया और मेरी पत्नी ने उसे एक कपड़े से साफ़ कर दिया। तभी मैंने जोशीन को कहा कि तुमने मुझे और मेरी पत्नी को पूरा नंगा देखा, मगर हमने तुम्हें कपड़ों में देखा, तुम भी पूरे नंगे होकर अपना लंड मेरी पत्नी को दिखाओ। यह सुनकर मेरी पत्नी को गुस्सा आया और वह बोली कि मैं होटल जा रही हूँ, तुम्हें जो करना हो, करो। लेकिन मेरे समझाने पर वह राज़ी हो गई और जोशीन भी नंगा होने के लिए राज़ी हो गया।
जोशीन ने अपनी अन्डरवियर और बनियान उतार दी, और पूरा नंगा होकर मेरी मालिश करने लगा। मेरी पत्नी जो कि बगल में पूरी नंगी खड़ी थी जोशीन का लम्बा लंड देखकर घबरा कर बोली, “जोशीन, तुम्हारा तो काफ़ी लम्बा है। क्या केरल में सबके लंड ऐसे ही लम्बे होते हैं?” यह सुनकर जोशीन ने बस एक मुस्कान देकर कहा, “मुझे नहीं मालूम मैडम सबका होता है, या किसका होता है।”
तभी मैंने जोशीन का लण्ड पकड़ लिया और उससे खेलने लगा। यह देख मेरी पत्नी को मस्ती सूझी और वह जोशीन का लण्ड पकड़ने के लिए किनारे पर आ गई और नीचे झुक कर बैठ गई। जोशीन मेरी मालिश में मगन था। मेरी पत्नी नीचे बैठ उसका लण्ड चूसने लगी, वह उसे बिल्कुल लॉलीपॉप की तरह चूस रही थी। यह देखकर मुझे बहुत मज़ा आ रहा था, और मेरा लण्ड फिर से खड़ा हो गया।
जोशीन ने मुझे पलटने के लिए कहा और मेरी गाँड पर मालिश करने लगा, नीचे मेरी पत्नी को लंड भी चुसवाता रहा। यह सब देखकर मेरा लण्ड बहुत कड़क हो गया और मैंने चुदाई का मन बना लिया और मैंने अपनी पत्नी को कहा कि तुम टेबल पर किनारे में घोड़ी बन जाओ, मेरा चोदने का मन कर रहा है। पहले थोड़ा ना-नुकर करने के बाद वह राज़ी हो गई।
मैंने उसकी जम कर चुदाई की जोशीन के सामने ही। फिर जोशीन से भी उसे चुदवा दिया घोड़ी बना कर ही। यह सब करने में काफी समय निकल गया, पर हमें मज़ा बहुत आया था। उसके बाद हमने एक ऑटो किया और रेलवे-स्टेशन से ट्रेन लिया और अपने घर वापिस आ गए।
उस घटना को आज भी याद करने पर मेरा लंड खड़ा हो जाता है।
आपको हमारा अनुभव कैसा लगा, ज़रूर लिखे। Hindi Porn Stories
मेरा नाम रोशन छेड़ा है. मेरे पड़ोस Antarvasna में एक जवान लड़की रूबी रहती थी। वो 12वीं में पढ़ रही थी। उसकी उमर 18 साल थी, रूबी बहुत सेक्सी थी। उसके बूब्स मुझे बहुत अच्छे लगते थे। वो एकदम हरी-भरी थी। मेरी उसके घर वालों के साथ और उसके साथ अच्छी अक्सर बातें होती रहती थी, क्योंकि उसकी और हमारी छत एक ही थी, बीच में सिर्फ़ 3 फीट ऊँची एक दीवार थी।
वो पढ़ाई में कमजोर थी। उसके एग्जाम आने वाले थे, उसकी मम्मी ने मुझसे कहा- परेश, रूबी के एग्जाम शुरू होने वाले हैं, वो पढ़ाई में कमजोर हैं, उसे थोड़ा समय निकाल कर पढ़ा दिया करो।
मैंने हाँ कर दी।
मैं रोज रात को 8 बजे उसके घर उसे पढ़ाने जाता। मेरा कमरा फ़र्स्ट फ़्लोर पर था, उसके घर में भी एक कमरा फ़र्स्ट फ़्लोर पर था, वो बन्द रहता था क्योंकि उसके मम्मी, पापा और उसका छोटा भाई जो 12 साल का था सब ग्राऊँड फ़्लोर पर ही रहते थे।
दो दिन के बाद मैंने उसकी मम्मी से कहा- भाभी नीचे हम डिस्टर्ब होते हैं, क्या हम आपके ऊपर वाले कमरे में पढ़ाई कर सकते हैं?
उन्होंने तुरन्त हाँ कर दी।
मैं रोज़ रात को 8 बजे जाता और रात के 11-12 बजे तक वहाँ पर रुकता था। वो पढ़ाई में बहुत कमजोर थी। उसे अच्छे से कुछ भी याद नहीं होता था, मैंने उसकी मम्मी से कहा तो उन्होंने बोला कि अगर नहीं पढ़ती है तो पिटाई कर दिया करो, तो मैंने एक दिन उसे उसकी मम्मी के सामने ही हलका सा एक थप्पड़ मारा, उस दिन मैंने उसे पहली बार छुआ था, उसका गाल एकदम गरम था, थप्पड़ खा कर वो मुस्कराने लगी।
अगले दिन उसने जींस और शर्ट जिसके बटन सामने खुलते थे पहने हुए थी, मैं उसके सामने बैठा कर उसे मैथ्स समझा रहा था, उसके शर्ट का एक बटन टूटा हुआ था, उसका ध्यान पढ़ाई में था और मेरा ध्यान उसके टूटे हुए बटन के पीछे उसके बूब्स पर था, उसकी काली ब्रा और गोरे बूब्स मेरे सामने दिख रहे थे।
अचानक उसका ध्यान अपने टूटे हुए बटन पर गया तो वो शरमाई और नीचे जा कर शर्ट बदल कर आई।
मैंने पूछा- क्या हुआ?
तो उसने बोला- आप मुझे अच्छे से पढ़ा नहीं पा रहे थे।
अगले दिन उसने टाइट टी शर्ट पहनी हुई थी जिसमें उसके बूब्स का उभार गजब ढा रहा था। कामुकता वश मेरा ध्यान वहीं पर था।
उसने पूछा- परेश, क्या हुआ? तुम्हारा ध्यान कहाँ है?’
मैंने कहा- मेरा ध्यान तुझमें है!’
वो शरमाई और बोली- धत!
मेरी हिम्मत बढ़ गई। मैंने हलके से उसके गाल पर चपत लगाया और प्यार से मुस्कराया।
जवाब में वो भी मुस्कराई।
मेरी हिम्मत और बढ़ी, मैंने उसके दोनों गालों को पकड़ कर उसके होठों को चूम लिया, उसने दूर हटाते हुए कहा- मम्मी आ जायेगी!
और हम वापस पढ़ाई में लग गये।
अगले दिन उसके मम्मी, पापा और उसका भाई किसी काम से बाहर गये थे, जाते समय उसकी मम्मी ने मुझसे कहा- रूबी घर पर अकेली है, तुम रात को हमारे घर पर ही सो जाना! मुझे तो जैसे मन मांगी मुराद मिल गई।
रात को 8 बजे मैं उसके घर गया। वो ग्राउन्ड फ़्लोर पर थी। आज उसने सुन्दर सी काले रंग की नाइटी पहन रखी थी। हम दो घण्टे तक पढ़ते रहे। बाद में वो अपने कमरे में जाकर सो गई, मैं बाहर हाल में सो गया। अचानक वहाँ लाइट चली गई। वो कमरे से बाहर आई और मेरे पास हाल में बेड पर बैठ गई और हम बातें करने लगे।
उसने मुझसे कहा- परेश, आई लव यू!’
मैंने कुछ नहीं बोला और उसे अपनी बाहों में ले लिया। वो चुप रही, उसने कुछ भी नहीं बोला। मैंने उसे चूमना शुरू कर दिया, वो हल्का सा विरोध करती रही, इतने में लाइट आ गई तो मैंने देख उसका चेहरा एकदम लाल हो रहा है और आँखे अपने आप बन्द हो रही हैं।
मैंने धीरे से उसके बूब्स पर हाथ फिराया तो वो एक दम से मुझसे चिपक गई। मैं उसके रसीले होठों को चूमता रहा और हाथों से धीरे धीरे उसके बूब्स को दबाता रहा, वो मदहोश हो गई।
मैं थोड़ा आगे बढ़ा और मैंने उसकी नाइटी धीरे से उतार दी। अब वो मेरे सामने लेमन रंग की ब्रा और पेंटी में थी, उसकी फ़िगर देख कर मैं अपने होश खो बैठा। मैंने उसके पूरे बदन को चूमना शुरू कर दिया। वो भी मुझे चूमने लगी और मेरे कपड़े उतारने लगी। अब मैं भी सिर्फ़ अन्डरविअर में था। मैं उसे चूमता रहा और उसके पूरे शरीर पर हाथ घुमाता रहा। उसके स्तन क्या पत्थर की तरह कड़क थे। मैंने अपने हाथ उसके पीछे ले जाकर उसकी ब्रा का हुक खोल दिया, एक झटके से ब्रा उसके हाथ में आ गई और उसके बूब्स आज़ाद हो गये, इससे पहले भी मैंने 3-4 बार सेक्स किया था लेकिन उसका हुस्न देख कर मैं अपने होश खो गया और धीरे से मैंने उसकी चड्डी भी उतार दी। बदले में उसने भी मेरी चड्डी उतार दी।
अब हम दोनों नंगे थे। हम दोनों एक दूसरे को चाटते रहे। मैंने अपना मुँह उसके निप्पल पर लगाया और उसको चूसने लगा उसने मेरे लण्ड को हाथ में ले लिया और उसको सहलाने लगी। मेरा लण्ड लोहे की तरह एक दम कड़क हो गया। मैंने धीरे से अपने लण्ड को उसके मुँह के पास किया तो वो उसे चूमने लगी। मैंने उसे मुँह में लेने को कहा तो वो उसे मुँह में लेकर चूसने लगी।
मेरा बड़ा बुरा हाल हो रहा था, मैंने अपनी उंगली धीरे से उसकी चूत में डाल दी। उसकी चूत गरम तवे की तरह तप रही थी। मेरी उँगलियाँ उसकी चूत की गरमी महसूस कर रही थी।
वो मेरे लण्ड को चूसती रही और मेरी उँगलियाँ उसकी चूत के साथ खेलती रही। अब वो चुदवाने के लिये एकदम तैयार थी। उसकी चूत मेरी उँगलियों की हरकत से पानी से भर गई और गीली हो गई। मैं अपना मुँह उसकी चूत पर ले गया और उसकी जाँघों और उसकी चूत को चूमने लगा। वो जोर जोर से पाँव हिलाने लगी। मैंने अपनी जीभ उसकी चूत में डाल दी और उसके पानी को पीने लगा। वो एक दम मदहोश हो गई और मेरे लण्ड को दाँत चुभाते हुये और जोर से चूसने लगी।
थोड़ी देर में उसकी चूत ने और पानी छोड़ दिया। मैं उसे पीता रहा। कुँवारी चूत का पानी पीने का मेरा यह पहला मौका था और उसके मुँह में मेरे लण्ड ने भी ढेर सारा पानी छोड़ दिया जो सीधे उसके गले में गया। उसने बड़े प्यार से मेरा पूरा पानी पी लिया और एक भी बून्द बाहर नहीं गिरने दी, और मेरे लण्ड को चूसना जारी रखा।
3-4 मिनट में मेरा लण्ड वापस तन गया। उसकी हरकतों से मुझे लगने लगा कि वो चुदाई के लिये बहुत आतुर है।
मैंने उसे बेड पर सीधा लिटाया और उसकी गांड के नीचे एक तकिया लगाया जिससे उसकी चूत ऊपर आ गई। मैं अपने लण्ड को उसकी चूत पर फिराने लगा। उसकी चूत तन्दूर की तरह गरम थी
उसने कहा कि उसने कभी चुदवाया नहीं है। मेरा इतना मोटा लण्ड उसकी चूत में कैसे जायेगा।
मैंने कहा- थोड़ा सा दर्द होगा, लेकिन बाद में मजा आयेगा।
मैंने अपने लण्ड और उसकी चूत पर क्रीम लगाई और अपना लण्ड धीरे से उसकी चूत में घुसाने लगा। उसकी चूत बहुत टाइट थी।
मेरे लण्ड का सुपाड़ा उसके अन्दर जाते ही वो जोर से बोली- बहुत दर्द हो रहा है!
मैं वहीं पर रूक गया और उसकी चूचियों को सहलाने लगा और उसके होठों को चूमने लगा।
थोड़ी देर में रूबी जोश में आ गई और अपने चूतड़ उठाने लगी। मैंने ऊपर से थोड़ा जोर लगाया, मेरा लण्ड उसकी चूत में 3 इन्च घुस गया। वो जोर से चिल्लाने लगी और पसीने में नहा गई, मुझसे कहने लगी- प्लीज! बाहर निकालो!
मैंने उससे बोला- पहली बार में थोड़ा दर्द होता है! और उसे चूमने लगा।
कुछ देर बाद वो शान्त हो गई।
मैंने उससे बोला- अपना मुँह बन्द रखना। मैं अभी अपना पूरा लण्ड तेरी चूत में डालूंगा।
उसने जोश में आकर कहा- अगर मैं चीखूं भी तो भी तुम नहीं रुकना।
मैं धीरे धीरे अपने लण्ड को उसकी चूत में 3 इन्च में अन्दर बाहर करने लगा। उसे भी मजा आने लगा और वो मुझसे ज्यादा चिपकने लगी। अचानक मैंने एक जोर का झटका दिया और अपना पूरा 7 इन्च का लण्ड उसकी चूत में घुसेड़ दिया। वो बहुत जोर से चीखी और जोर से तड़पने लगी।
मैं वहीं पर रूक गया। उसकी चूत में से खून निकलने लगा था। वो जोर जोर से रोने लगी, मैंने उसे प्यार से समझाया कि मेरा पूरा लण्ड उसकी चूत में चल गया है। अभी थोड़ा सा दर्द होगा लेकिन बाद में जो मजा आयेगा वो पूरा दर्द भुला देगा।
मैंने उसके लाख कहने पर भी अपना लण्ड उसकी चूत से नहीं निकाला।
पाँच मिनट तक मैं सिर्फ़ उसके बूब्स को चूसता रहा और उसके पूरे शरीर पर हाथ फ़िराता रहा। धीरे धीरे उसका दर्द कम हुआ और उसे जोश आने लगा। वो मुझसे चिपक गई और अपने चूतड़ उठाने लगी। उसकी चूत मेरे लण्ड को कभी जकड़ती और कभी ढीला छोड़ती। मैं इशारा समझ गया और मैंने धीरे धीरे अपने लण्ड को उसकी चूत में अन्दर बाहर करना शुरू कर दिया। थोड़ी देर मैं उसे भी मजा आने लगा और वो भी हिल हिल कर चुदाई का मजा लेने लगी।
10 मिनट तक मैं उसे चोदता रहा। इतनी देर में उसकी चूत गीली हो गई और उसका दर्द कम हो गया, और वो बहुत मज़े लेकर चुदवाने लगी।
करीब 15 मिनट के बाद मैंने उसे कहा- मैं झड़ने वाला हूँ।
मैंने उसे कस के पकड़ा, जिससे उसके मुंह से आवाज न निकले उसके होंठ अपने होठों में मजबूती से दबा लिये और सरपट घोड़ा दौड़ा दिया। मैं पूरे जोश में आ चुका था और मैं अपना लण्ड पूरा बाहर निकाल कर एक धक्के से पूरा घुसा देता, पूरी फूर्ती से।
अब वो बुरी तरह छूटने के लिये दम लगा रही थी और मैं उसे उतना ही मजबूती से पकड़ रहा था। झटके पर झटके! धक्के पर धक्के।
एक दो मिनट में उसकी चूत बुरी तरह से मेरे लण्ड को रोकने की कोशिश कर रही थी। और मुझे साफ़ पता चला जैसे कि उसकी चूत ने एक जोर से पिचकारी मेरे लण्ड पर छोड़ दी। अब मैंने रफ़्तार और धक्के की ताकत बढ़ा दी और बड़े दम लगाने पर मैं भी चरम आनन्द पर पहुँच गया। ऐसा लगा जैसे मेरे लण्ड से कोई टँकी खुल गई हो और मैंने बहुत सारा पानी उसकी चूत में भर दिया। करीब 10 मिनट तक उसके ऊपर लेटा रहा। हम दोनों की सांस की आवाज से पूरा कमरा गूँज रहा था।
उसके बाद हम दोनों उठे और बाथरूम में जाकर उसकी चूत और अपने लण्ड को धो कर साफ़ किया और वापस आकर बेड पर बैठ गये।
मेरा लण्ड इतनी देर में वापस तन कर खड़ा हो गया। उसे तना देखकर वो बोली- अब नहीं परेश, अभी दो घण्टे सो लेते हैं, उसके बाद करेंगे।
मैंने कहा- ठीक है।
हमने अपने कपड़े पहन लिये और सोने लगे। लेकिन आंखों में नींद कहाँ!
करीब एक घण्टे बाद मैंने उसके और अपने कपड़े फिर उतार दिये। उसने कहा कि प्यार से करना क्योंकि अभी थोड़ा थोड़ा दर्द हो रहा है। मैंने उसके बदन को दबाना शुरू कर दिया, बच्चों की तरह उसका दूध पीने लगा तो वह कसमसा उठी। और उसने भी मुझे चूमना शूरू कर दिया और खुद-ब-खुद 69 की पोजीशन में आ गये। वो मेरे लण्ड को चूस रही थी और मैं उसकी चूत को। फिर मैं काम शास्त्र में बताये एक एक आसन से उसे चोदने लगा और एक ही रात में कली को खिला कर फ़ूल बना दिया।
फिर तो हम दोनों को जब भी मौका मिलता वो मुझसे चुदवाती थी। करीब एक साल तक मैं उसे चोदता रहा, उसके बाद उसके पापा की बदली हो गई। उसके बाद से आज तक उससे मेरी मुलाकात नहीं हुई है।
वो मेरे जीवन सबसे हसीन कली थी जिसे फूल बनाने का जिम्मा खुदा ने मुझे इनाम में दिया था। Antarvasna
हेल्लो दोस्तों, मैं रिचा । मैं एक शादी शुदा औरत हूँ। मैं खाली समय में सेक्स विडियो देखन और नई नई चुदाई कहानियां पढना पसंद करती हूँ। हूँ। आज मैं आपको अपनी स्टोरी सूना रही हूँ। मैं उम्मीद करती हूँ कि यह कहानी सभी लोगों को जरुर पसंद आएगी। ये मेरी जिन्दगी में घटी एक घटना है।
मैं कोटा की रहने वाली हूँ और यहाँ की कोटा यनिवर्सिटी में मैं प्रोफेसर हूँ। मैं मेकैनिकल इंजीनियरिंग पढाती हूँ। मैं बहुत सुंदर और जवान औरत हूँ। सेक्स के मामले में मैं बहुत गर्म औरत हूँ और हमेशा नये नये लंड की तलाश में मैं रहती हूँ। मेरी इसी छिनरपन वाली आदत के कारण मेरे पति ने मुझे तलाक दे दिया और अब अकेले ही रहती हूँ। मैं हर साल अपने क्लास के लड़को को डरा धमका कर उन्हें अपने घर पर बुला लेती हूँ और उसने कसकर चुदवाती हूँ। मैं इसी तरह लंड का इंतजाम करती हूँ। मेरी किस्मत तेज है की हर साल मेरी युनिवर्सिटी में नये नये गबरू जवान लड़के पढने के लिए आते रहते है और मुझे लंड की कोई कमी नही होती है। आज मैं आपको अपनी कहानी सूना रही हूँ। सन 2016 के बीटेक बैच में मेरी क्लास में एक बहुत ही हैंडसम लड़का पढ़ने आया। उसका नाम राहुल था।
उसके पापा अमेरिका के रहने वाले थे। उसकी माँ से उसके पापा से लव मैरिज की थी जब वो अमेरिका पढने गयी थी। इसलिए राहुल भी बिलकुल गोरा गोरा लगता था और हिन्दुस्तानी भी लगता था, क्यूंकि उसकी माँ तो एक हिन्दुस्तानी ही थी। राहुल मेरी क्लास में आकर पढने लगा। धीरे धीरे मुझे वो बहुत अच्छा लगने लगा। वो बिलकुल अंग्रेज लगता था और कोई राजकुमार जैसा लगता था। 6 फुट का इकदम गोरा गोरा। धीरे धीरे वो मुझे अच्छा लगने लगा और मैं उससे प्यार करने लगी। एक दिन मैंने उसे अपने चैम्बर में बुलाया। मैं बाकी स्टूडेंट से बहुत सख्ती से पेश आती थी, पर राहुल से मुझे प्यार हो गया था।
“कहे मैडम…..मुझे क्यों बुलाया??” राहुल मेरे चैम्बर में आया और पूछने लगा। मेरे समझ नही आ रहा था की उससे कैसे कहूँ की मैं उससे प्यार करने लगी हूँ और उससे कसकर चुदवाना चाहती हूँ।
“आओ आओ देव…प्लीस सिट!!” मैंने उसे बैठने को कहा
“देखो अगर कोई चैप्टर समझ ना आए तो तुम मेरे घर पर चले आना। मैं चाहती हूँ की तुम्हारे एक्साम में अच्छे मार्क्स आये। ये लो मेरा फोन नॉ..!” मैंने उस हैंडसम लड़के को अपना कार्ड दे दिया। उसमे मेरे घर का पता और फोन नॉ लिखा हुआ था। मैं रात भर सोचती रही की काश वो राहुल मुझसे पट जाए और मैं उससे कस के चुदवाऊ। वो कितना हॉट और हैंडसम लड़का था। बार बार मुझे उसी का ख्याल आ रहा था। रात में मैंने 3 बार अपने स्टूडेंट राहुल को सोच सोचकर अपनी चूत में उंगली डाल कर मुठ मारी। हर बार मुझे खूब मजा आया। मैं अपने स्टूडेंट से प्यार करने लगी थी। पर 1 महिना तो वो मेरे पास नही आया। फिर कुछ दिन बाद वो रविवार को मेरे घर पर आ गया। उसने मेरे दरवाजे की बेल बजाई। मैंने दरवाजा खोला। सापने राहुल खड़ा हुआ था। बाप रे….वो कितना हैंडसम लग रहा था बिलकुल जॉन अब्राहम लग रहा था। मेरा तो दिल कर रहा था की उसे गले लगा हूँ और ऊसके होठो से अपने होठ जोड़कर किस करने लगूं। मैंने किसी तरह खुद को समहाला।
“गुड मोर्निंग…..रिचा मैम। मुझे मेकैनिकल में कुछ क्वेश्चन पूछने है क्या आप बता देंगी??” राहुल ने पूछा
“हा हा …क्यों नही। मैं तो कबसे तुम्हारा इंतजार कर रहा थी!!” मैंने कहा और उसे मैंने लॉबी में ले गयी। वो मेरा आशिक था, वो मेरे लिए बहुत मायने रखता था, इसलिए उसे देखकर मैं बहुत खुश थी। मैंने उसे 4 घंटे बैठकर अच्छे से सारे सवाल बता दिए। वो बहुत खुश हो गया। धीरे धीरे ये सिलसिला चल निकला और राहुल अक्सर मेरे घर पर आने लगा। एक दिन मैंने उसे एक गुलाब का फूल दे दिया।
“ये फूल किसलिए मैडम??” राहुल बोला
!” मैं कहा
राहुल ब्लश करने लगा। मैंने उससे पूछा की उसकी कोई गर्लफ्रेंड तो नही है। तो उसने कहा की ये प्यार व्यार फ़ालतू की चीज है और वो इन सब चीजो में अभी वक़्त नही खराब करना चाहता। एक दिन जब राहुल मेरे घर में स्टडी टेबल पर पढ़ रहा हा तो मैंने झूठ मूठ फिसल के गिरने का नाटक किया। राहुल मुझे बचाने आ गया और मैं उससे लिपट गयी। मैंने गुलाबी रंग की साडी पहन रखी थी और आगे से डीप नेक और पीछे से बैकलेस ब्लाउस पहन रखा था। जैसे ही राहुल ने मुझे उठाने की कोशिश की मैं उससे लिपट गयी और झूठ मुठ दर्द का बहाना करने लगी।

“राहुल ……प्लीस मुझे गोदी में उठाकर बेडरूम तक ले चलो..मैं चल नही पाउंगी!!” मैंने बहाना बनाया
उसने एक आज्ञाकारी चेले की तरह मुझे अपनी गोद में उठा लिया और बेडरूम में लेकर जाने लगा। उफफ्फ्फ्फ़ कितना हसीन पल था वो की मेरा आशिक मेरा जानम ही आज मुझे गोद में उठाये हुए था। जब बेडरूम आ गया और वो मुझे बेड पर उतारने लगा तो मैं अचानक उससे चिपक गयी और उसके गाल और होठो पर किस करने लगी। मेरा स्टूडेंट हैरान था।
“मैडम……??? ये सब…??”
“देव…ये सच है की मैं तुमसे प्यार करती हूँ। प्लीस मना मत करना। वरना मेरा दिल टूट जाएगा!!” मैंने कहा। उसके बाद वो भी मान गया और मेरे साथ ही बेड पर लेट गया और हम दोनों किस करने लगे। हर नए लड़के को मैं इसी तरह इमोशनल डाईलोग मारके पटा लेती थी और उनका मोटा और रसीला लंड खाती थी। कुछ देर में राहुल की नजर मेरे डीप नेक वाले ब्लाउस पर पड़ गयी। मेरे हसीन, बड़े बड़े और चिकने चिकने दूध तो पूरे पूरे दिख ही रहे थे और बस नाम मात्र को छिपे हुए थे। मैं गदराई 30 साल की जवान औरत थी और आज मैं अपने चेले का मोटा लंड खाने वाली थी। मैंने राहुल को अपने उपर लिटा लिया और उसके लबो से मैंने अपने लब जोड़ दिए और हम दोनों एक दूसरे के ओंठ पीने लगे। मैं बहुत खुश थी की राहुल ने मेरा ऑफर ले लिया था वरना मुझे बहुत दुःख होता।
हम दोनों होठ से होठ जोडकर किस करने लगे।
दोस्तों, मेरे होठ बहुत सुंदर थे। बिलकुल किसी ताजे गुलाब की पंखुड़ियों की तरह मेरे होठ थे। कुछ देर में राहुल भी मुझसे प्यार करने लगा और उसे भी चुदाई का जूनून चढ़ गया था। उसकी उँगलियाँ मेरे होठ पर थी और उसे छू रही थी। बड़ी देर तक आज वो मेरी जैसी सुंदर चुदासी औरत को पास से देखकर मजा लेता रहा।
“मैडम….कभी आपको चोदने को मिलेगा मैं कभी नही सोचा था!!” राहुल बोला
“जान….अब तुम मेरे स्टूडेंट नही मेरे यार और मेरे जानम हो। मेरे सारी सुन्दरता सिर्फ और सिर्फ तुम्हारे लिए है। आज तुम मुझे जी भरकर पेल खा लो!!” मैंने अपने स्टूडेंट से कहा। उसके बाद वो और जादा चुदासा हो गया और मेरे रसीले होठो को अपनी उँगलियों से दबाने लगा। फिर वो मेरे लबो पर अपने लब रखकर मेरे होठ मजे से पीने लगा। आज मैं अपने स्टूडेंट से अपने ही घर में कसकर चुदने वाली थी। हम दोनों धीरे धीरे जोश में आ रहे थे। बड़ी देर तक हमारा गरमा गर्म चुम्बन चला। मैंने अपनी जीभ निकालकर राहुल के मुंह में डाल दी। वो मेरी जीभ चूसने लगा। मुझे एक विशेष प्रकार का सुख मिलने लगा, चुदाई का नशा धीरे धीरे चढ़ता जा रहा था। फिर राहुल ने ही अपनी लम्बी जीभ मेरे मुंह में डाल दी। इस तरह हम दोनों एक दूसरे की जीभ चूसने लगे।
मैं चुदासी और मदमस्त हो गयी। उफ्फ्फफ्फ्फ़….ये मुझे क्या हो रहा है। इससे पहले मैंने कई स्टूडेंट से चुदवाया था और होठो पर किस किया था पर कभी इतना मजा नही आया था। पर आज तो मुझे अजीब सा नशा चढ़ रहा था। आज मैं अपने आशिक से कसके चुदवाना चाहती थी। आधे घंटे तक हम दोनों एक दूसरे के होठ और जीभ चूसते रहे। इसी बीच मैंने अपना ब्लाउस खुद ही खोल दिया और निकाल दिया। फिर गुलाबी ब्रा भी मैंने खोल कर निकाल दी। मेरा स्टूडेंट राहुल मेरे हुस्न को देखकर पागल था। राहुल मेरे दूध पीने लगा।
बिना देर किये राहुल ने मेरे मम्मे को हाथ में ले लिया और उसका साइज पता करने लगा। मेरे दूध बहुत सुंदर थे, छातियाँ भरी हुई, सुडौल और गोल गोल थी, जैसे उपर वाले ने कितनी फुर्सत से बैठकर मेरी जैसी माल और मस्त चोदने लायक औरत बनाई थी। मेरी उजली छातियाँ पुरे गर्म से तनी हुई थी। छातियों के सिखर पर अनार जैसे लाल लाल बड़े बड़े घेरे मेरी निपल्स के चारो ओर बने थे, जिसमे मैं बहुत सेक्सी माल लग रही थी। राहुल की नजर मुझ पर जम गयी। तेजी से उसने मेरी रसीली बलखाती चुचियों को अपने वश में कर लिया और दोनों मम्मो को दोनों हाथ से दबोच लिया और तेज तेज दबाने और मसलने लगा।
““उ उ उ उ उ……अअअअअ आआआआ… सी सी सी सी….” मैं तेज तेज चिल्लाने लगी। मेरा स्टूडेंट मेरे दूध को किसी हॉर्न की तरह दबाने लगा। मुझे भी काफी मजा आ रहा था। फिर वो लेटकर मेरे दूध मुंह में लेकर पीने लगा। मैं तडप गयी। मुझे तो जैसे जन्नत मिल गयी थी।
‘मैडम!!.. आप इतनी कड़क माल हो की जो मर्द आपको एक बार देख ले उसका लौड़ा तुरंत खड़ा हो जाएगा और वो आपको चोदकर ही मानेगा’ राहुल बोला। मुझे उसकी बात अच्छी लगी। वो फिर से मुझ पर लेट गया और हपर हपर करके लपर लपर करके मेरी नुकीली बेहद कमसिन चूचियों को मुँह में भरके पीने लगा। वो तो बहुत शरारती निकला। वो मेरी नुकीली छातियों को दांत से काट रहा था और पी रहा था। मुझे दर्द भी हो रहा था, उतेज्जना भी हो रही थी और मजा भी आ रहा था. ‘देव…..प्लीस आराम से मेरे नारियल चूसो!! आराम से चूसो!!’ मैंने कहा। पर उस पर कोई असर नही पड़ा। वो अपनी धुन में था। जोर जोर से मेरी सफ़ेद कदली समान चुचियाँ दांत से जोर जोर से काट कर पी रहे था। वो बहुत जादा चुदासा हो गया था। उसका बस चलता तो मेरी छातियाँ खा ही लेता। मेरी रसीली छातियों को वो जोर जोर से दबा रहा था और निपल्स पर अपनी जीभ फेरते थे और पी रहा था। दोस्तों, बड़ी देर तक यही खेल चलता रहा।
अब मेरा प्रिय स्टूडेंट मुझसे कसकर चोदने वाला था। उसने मेरी साड़ी निकाल दी, फिर मेरे पेटीकोट के उपर से ही मेरे जिस्म को इधर उधर हाथ लगाने लगा। मेरी चूत मेरे पेटीकोट के पर्दे में और फिर अंदर पेंटी में छुपी हुई थी। मेरा स्टूडेंट राहुल मेरे पेटीकोट के उपर से ही मेरी चूत को छूने लगा और हाथ लगाने लगा। मैं उत्तेजित हो रही थी।
“आआआआअह्हह्हह….ईईईईईईई…ओह्ह्ह्हह्ह…अई..अई..अई….अई..मम्मी…..” मैं जोर से सिसकी। राहुल पेटीकोट के उपर से मेरी चूत में ऊँगली करने लगा। मैं डरकर अपनी आँखे बंद कर ली। मुझे डर लग रहा था। ना जाने वो मुझे किस तरह से चोदे। काश आज वो मुझ पर इतना सितम ढाये की चोद चोदकर आज वो मेरा बुरा हाल कर दे। मैं यही कामना कर रही थी। ये साफ़ था की आज मैं उस हैंडसम जॉन अब्राहम जैसे दिखने वाले लड़के का रसीला लंड खाना चाहती थी। आज मैं दिल खोलकर चुदवाना चाहती थी। राहुल के हाथ बराबर और बिना रुके पेटीकोट के उपर से ही मेरी चूत में बड़ी देर तक मेरी चूत में ऊँगली करता रहा। मुझे ये बड़ा अच्छा लग रहा था।
राहुल ने मेरे गुलाबी पेटीकोट का किनारा पकड़ लिया और उपर जांघो तक उठा दिया। मेरी नंगे टाँगे अब उसे दिखने लगी। मेरी नंगी टाँगे बहुत ही खूबसूरत थी, चिकनी और दूधिया। मुझे थोड़ी शर्म आ रही थी। राहुल की आँखों में सिर्फ और सिर्फ वासना थी। मुझे रगड़कर चोदने की अपार इक्षा उनके मन में किसी जहरीले सांप की तरह कुंडली मारकर बैठी थी। इसी बीच उसके हाथ मेरी नंगी चिकनी टांगो पर यहाँ वहां दौड़ते रहे और सहलाते रहे। गजब तो तब हो गया जब मेरे स्टूडेंट ने मेरा पेटीकोट घुटनों के उपर तक उठा दिया। मेरी सुंदर बर्फी जैसे नायाब जांघो के उसे दर्शन हो गये। मेरे घुटनों बहुत सुंदर थे। राहुल ने हाथ मेरी टांगो और घुटनों से होता हुआ उपर बढ़ गया और मेरी नंगी जांघो पर पहुच गया। मैं सिसक गयी और कसमसाने लगी।“……मम्मी…मम्मी….सी सी सी सी.. हा हा हा …..ऊऊऊ ….ऊँ..ऊँ…ऊँ…उनहूँ उनहूँ..” बस इतना ही मेरे मुंह से निकला। उसके हाथ मेरी चिकनी उजली जांघो को सहला रहे थे। मैं काम और वासना की अग्नि में जल रही थी।
राहुल ने मेरे पेटीकोट का सिरा उठाकर इकदम उपर कर दिया और अपने होठ से मेरी चिकनी जांघे चूमने लगा। मुझे बहुत अच्छा लग रहा था। मेरी सफ़ेद जांघो को वो इधर उधर सब जगह चूमने लगा और हजारो चुम्बन उसने मेरी दोनों जांघो पर जड़ दिए। मैं सिहर गयी। ये लौंडा तो आज मेरी जान ही ले लेगा, मैंने सोचा। बड़ी देर तक मेरा स्टूडेंट राहुल मेरी दोनों खूबसूरत जांघो को चूमता, चूसता और पीता रहा। मैं उससे चुदने को बेताब थी। मैं उसके मोटा रसीला लंड खाने को पागल थी। आज मैं कसकर चुदने वाली थी। राहुल ने नारा खोल दिया और पेटीकोट भी निकाल दिया। मैंने गुलाबी रंग की पेंटी पहन रखी थी। मेरी बड़ी सी चूत किसी बड़ी मोहर की तरह मेरी पेंटी के उपर से ही साफ़ साफ़ दिख रही थी। पेंटी का सूती कपड़ा मेरी चूत की बीच वाली दरार (घाटी) में दबा हुआ था जिससे मेरी रसीली चूत का आकार किसी ट्रेस पेपर की तरह उपर से ही साफ़ साफ़ झलक गया था। राहुल ने एक बार मेरी चूत को पेंटी के उपर से ही चाटा, फिर वो भी निकाल दी। हाय, अब मैं अपने स्टूडेंट के सामने पूरी तरह से नंगी हो गयी थी। शर्म से मैं अपनी चूत छुपाने लगी, पर राहुल ने मेरे हाथ पकड़ लिए और चूत से हटा दिए।
आखिर राहुल ने मेरी चूत में अपना लंड डाल दिया और मुझे चोदने लगा। मैं भी मस्ती से चुदवाने लगी। उसके जल्दी जल्दी चोदने से मेरी बुर के दोनों होठ बार बार खुलते थे और बार बार बंद हो जाते थे। वो मुझे जोर जोर से पेल रहा था। सच में मुझे बहुत अच्छा लग रहा था। बहुत मजा मिल रहा था। बड़ी नशीली रगड़ थी मेरे स्टूडेंट के लौड़े की। बहुत सुख मुझे मिल रहा था दोस्तों। 24 साल का राहुल हचर हचर करके मेरे जैसी 30 साल की औरत को चोद रहा था। उसके मोटे से लम्बे लौड़े पर मेरा पूरा शरीर थिरक रहा था और डांस कर रहा था। जैसे लग रहा था वो कोई इंजन मेरी चूत में डाल के चला रहा हो। वो मेरी बुर पर बड़ी मेहनत कर रहा था। वो हच हच करके मुझे चोद रहा था। जैसे वो अपना लौड़ा मेरी बुर में डालता था, लौड़ा हच्च से देता था मैं 2-4 इंच आगे सरक जाती थी। फिर जैसे वो लौड़ा निकलता था मैं 2-4 इंच वापिस पीछे आ जाती थी। वो जोर जोर से हच हच करके मेरी बुर में लौड़ा अंदर बाहर कर रहा था। घंटों यही सिलसिला चला। उसने मुझे 3 घंटे चोदा और माल मेरी चूत में ही गिरा दिया। उसके बाद हम लेटकर प्यार करने लगे।
मैं शहर की एक घनी आबादी में Hindi Porn Stories रहती हूँ। आस पास दुकानों के अलावा कुछ नहीं है।
मेरे पड़ोस में मेरे ऊपर वाले कमरे के सामने ही एक कॉलेज का विद्यार्थी रहता था। मैंने जब पढ़ाई के लिये ऊपर वाले कमरे में शिफ़्ट किया था तो मेरी नजर उसकी खुली हुई खिड़की पर पड़ी। मैंने अपनी खिड़की पर पर्दा लगा लिया कि जो कोई भी वहाँ रहता हो मुझे नहीं देख पाये। पर कुछ ही दिनों में मुझे पता चल गया कि उस कमरे में rahul रहता था जो मेरे ही कॉलेज में पढ़ता था। शायद उसे कमरा अभी ही किराये पर दिया था।
मैं रात को देर तक पढ़ती थी। rahul भी रात को देर तक पढ़ता था। मैं कभी कभी झांक कर खिड़की से उसे देख लेती थी।
एक बार हमारी नजरें मिल ही गई। अब हम दोनों छुप छुप कर एक दूसरे को देखा करते थे। एक बार तो rahul खिड़की पर आ कर खड़ा ही हो गया। मुझे सनसनी सी आ गई। मैंने जल्दी से पर्दा कर दिया और पर्दे के पीछे से उसे देखने लगी, मेरा पर्दे में से देखना उसे पता था। अब वो मुझ में रूचि लेने लगा था। मुझे देख कर वो मुस्कुराता भी था। एक दिन उसने मुझे हाथ भी हिला कर अभिवादन किया था। धीरे धीरे मैं भी उससे खुलने लग गई और उसे देख कर मुस्कुराती थी।
कुछ ही दिनो में हम रात को जब कभी एक दूसरे को देखते थे तो मैं भी हाथ हिला देती थी। एक बार पत्थर में लिपटा हुआ एक कागज मेरे खिड़की के अन्दर आ गिरा। मेरा दिल धक से रह गया। मैंने उसे उठाया। तो वह rahul का पत्र था। एक साधारण सा पत्र, जिसमें सिर्फ़ शुभकामनायें थी। मैंने उसे फ़ाड़ कर नीचे फ़ेंक दिया। एक दिन मैंने भी उसे पत्र लिख दिया और उसे भी शुभकामनायें दी। बस पत्रों का सिलसिला चालू हो गया। एक दिन उसकी एक फ़रमाईश आ गई।
“स्वीटी, सिर्फ़ एक हवाई किस करो!”
मैंने शरारत में उसे हवाई किस कर दिया। अब हम पत्रों में खुलने लगे। उसने एक बार लिख दिया कि वो मुझे प्यार करता है और मिलना चाहता है। मेरा दिल बस इसी चीज़ से डरता था। मैंने मना कर दिया।
एक बार उसने लिखा- मुझे अपनी चूचियाँ खिड़की से दिखा दो।
मैंने शर्माते हुए मेरा एक स्तन उसे दिखा दिया।
मैंने जवाब में लिखा- मैं भी कुछ देखना चाहूंगी, क्या दिखाओगे?
तो उसने अपना पजामा नीचे खींच कर अपना खड़ा हुआ लण्ड दिखाया।
मुझे बड़ा रोमान्च हो आया; मुझे मजा भी आया। अब जब तब हम एक दूसरे को अपने गुप्त अंग दिखा दिखा कर मनोरंजन करने लगे।
मुझे ये नहीं पता था कि मैं जो पत्र फ़ाड़ कर नीचे फ़ेंक देती थी उसे मेरा छोटा भाई उठा कर जोड़ कर पढ़ लेता था। यहाँ हमारी प्यार और सेक्स की पींगे बढ रही, वही भैया भी मुझे चोदने का प्लान बनाने लग गया था।
एक रात को मैंने पत्र rahul की खिड़की में फ़ेंका तो वो खिड़की से टकरा कर नीचे गिर गया। मैं भाग कर नीचे गई तो वो मुझे नहीं मिला, रात में कहाँ गिरा होगा मुझे पता नहीं चला। सुबह ढूँढने की सोच लेकर मैं ऊपर आ गई; देखा तो भैया मेरे कमरे में था; उसने कहा- इसे ढूँढने गई थी क्या?”
“भैया, मुझे वापस दे दो, देखो किसी को बताना नहीं!”
उधर rahul ने देखा कि कमरे में भैया है तो उसने खिड़की बन्द कर ली।
“बताऊँगा तो नहीं अगर, जो मैं कहूँ वो करेगी तो!”
हम बिस्तर के बिस्तर पर दीवार का सहारा ले कर बैठ गये।
“हाँ हाँ कर दूंगी, इसमें क्या है… फिर वो दे देगा!”
“हाँ ज़रुर दे दूंगा… तो फिर टॉप को थोड़ा ऊपर कर दे…”
“क्या कहा…मैं तेरी बहन हूँ!” मैं उछल पड़ी।
“तो क्या… पापा से बचना है तो मुझे दुद्धू दिखा दे!” उसने मुझे धमकी दी।
मैंने हिम्मत करके अपनी आंखे बन्द कर ली और टॉप ऊपर उठा लिया। मेरे दोनों स्तन बाहर छलक पड़े। भैया ने तुरन्त मेरे स्तनों को पकड़ लिया और दबा दिया।
“ना कर भैया…” पर जैसे मेरे शरीर में बिजली कड़क उठी; सारा जिस्म एक बारगी कांप गया; मीठी सी लहर दौड़ गई।
“अब अपना स्कर्ट ऊपर कर…”
“ऐसे तो मैं नंगी दिख जाऊँगी ना!”
“वही तो देखना है…rahul को तो खूब दिखाती है!”
“पर वो मेरा भाई थोड़े ही है” मैं नर्वस होती जा रही थी पर जिस्म में एक सनसनी फ़ैल रही थी; मैं भी अब वासना में बह निकली।
“दीदी, दिखा दे ना, अच्छा देख फिर मैं भी अपना तुझे दिखाऊँगा!”
“सच, तो पहले दिखा दे, कैसा है तेरा?” मेरे स्वर भी बदलने लगे।
मुझे भैया अब सेक्सी लगने लगा था। उसकी बाते मुझे रंग में लाने लगी थी। मेरा मन अब डोलने लगा था। भैया ने जल्दी से अपना पैन्ट उतार दिया दिया और उसका लण्ड बाहर निकल आया।
“मैं छू लूँ इसे?” मुझे सनसनी सी लगी।
“नहीं नहीं छूना नहीं, पकड़ ले इसे और मसल डाल!”
“हट रे!” मैंने उसके लण्ड को पकड़ लिया, गरम हो रहा था, लाल सुपाड़ा भी चमक उठा था।
“अब बता ना तू भी!”
मैंने अपनी स्कर्ट ऊपर उठा दी।
“तूने तो पेंटी ही नहीं पहनी है!”
“अभी rahul को दिखा रही थी ना…!”
“अच्छा, तो अब ये ले!” ये कह कर उसने मुझे दबोच लिया और मेरे ऊपर आ कर कुत्ते की तरह अपने चूतड़ चलाने लगा।
“क्या कर रहा है? क्या चोदेगा मुझे…? सुन ना rahul को बुला दे ना!” मैंने मौका देख कर उसे कहा।
“पहले मेरी बारी है, फिर उसे बुला लूंगा, बहन मेरी है, पहले मैं चोदूंगा!” उसने अपना हक बताया।
“तो चोद ना जल्दी, या कहता ही रहेगा!” उसने अब जोर लगाया और लण्ड चूत में घुस पड़ा।
“अरे यार, तू तो चुदी चुदाई है, किस किस से लण्ड लिया है अब तक?”
“अरे तो चोद ना, खुद भी कौन सा पहली बार चोद रहा है?”
“तुझे क्या पता? जरूर आशा ने कहा होगा!”
“नहीं तो… अरे धक्के मार ना…!”
“तो पारुल ने कहा होगा?”
“हाय रे पारुल? मेरी सहेली? नहीं यार… लगा जरा जोर से!”
“अच्छा तो दीपिका ने बताया होगा?” एक के बाद एक सारी पोल खोलता गया।
“अरे चोद ना मुझे ठीक से, तू तो मेरी सारी सहेलियों को तो चोद चुका है, पर इन्होंने नहीं कहा, वो तो तेरे लण्ड के सुपाड़े की त्वचा फ़टी हुई है इसलिये कह रही हूँ!” मैंने हंसते हुए कहा।
“धत्त तेरे की, मैंने तो सारी पोल खोल दी… साली तू तो एक नम्बर की हरामी निकली!” उसने धक्के बढ़ा दिये।
“भैया! हाय रे दम है रे तेरे लण्ड मे…मजा आ रहा है, लगाये जा रे!” मुझे मजा आने लगा था। मैं भी उसका लण्ड चूतड़ उछाल उछाल कर ले रही थी। वो मेरे बोबे मसलता जा रहा था।
“मेरी बहन कितनी प्यारी है! क्या चूत है! अब तो रोज चोदूंगा तुझे!”
“भैया, rahul को बुला देना ना, फ़िर दोनों मिल कर चोदना, आगे से भी और पीछे से भी!”
उसके धक्के तेज हो उठे थे, मेरा भी हाल अब बुरा हो चला था। मेरी चूत अब रस छोड़ने वाली थी, मैंने भैया को जकड़ लिया और अपने चूत का जोर लण्ड पर लगाने लगी। एक लम्बी सांस के साथ
मैंने आंख बन्द कर ली और अपना बदन कसने लगी, इतने में पानी छूट पड़ा और मैं झड़ने लगी। उसी समय भैया ने भी अपना लण्ड बाहर निकाला और मेरे ऊपर पिचकारी छोड़ने लगा। मेरा सारा शरीर और कपड़े सभी कुछ वीर्य से गन्दे कर दिये।
“मजा आ गया स्वीटी, अब मैं रोज चोदूंगा तुझे, तू तो यार बहुत मजा देती है!”
मैं भी झड़ कर शान्त लेटी थी और भैया को देखती रही।
भैया कुछ देर तक तो बातें करता रहा फिर जाने को हुआ।
“मैं अब जाता हूँ, रात बहुत हो गई है” पर मैं कैसे जाने देती
“चले जाना ना, अभी एक बार और मजे करे?” ये सुनते ही भैया खुश हो गया और फिर से मेरे बिस्तर पर आ गया। हम दोनों फिर आपस में गुथ गये। उसका लन्ड मेरी चूत के दरवाजे पर आ टिका… और कमरे में एक बार फिर सिसकारियाँ गूंज उठी। Hindi Porn Stories
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