Important Notice: Post Free Ads Unlimited...🔥🔥🔥

Male Escorts in Neemuch Premium Companionship and Escort Services

Read Our Top Call Girl Story's

टीनएजर गर्ल फर्स्ट सेक्स का मजा मुझे दिया मेरी पड़ोस के लड़के ने! मैंने अपनी चूत फड़वाने के लिए उसे पसंद किया पर उसकी नजर मेरी छोटी बहन पर थी. उसको मैंने कैसे सेट किया?

दोस्तो, मेरा नाम रीता शर्मा है. मैं 19 साल की हूँ.
मैं हर रोज अन्तर्वासना की सेक्स कहानी पढ़ती हूँ और इस पटल की एक नियमित पाठिका हूँ.

आज मैं आप सबको अपनी पहली चुदाई की कहानी बताने जा रही हूँ.
ये मेरे ब्वॉयफ्रेंड के साथ हुई चुदाई की कहानी है जिसमें टीनएजर गर्ल फर्स्ट सेक्स का मजा मैंने लिया.

वह मेरे घर के बगल में रहता था.

उन दिनों मैं हॉस्टल में रहती थी तो मैं विंटर वेकेशन में अपने घर गई थी.

उधर मेरी मुलाकात मेरे पड़ोसी लड़के से हुई.
वह काफी हैंडसम था और जिम भी जाता था.

उस दिन मैं नहा कर छत पर धूप सेंकने गई थी.

उधर वह सिर्फ एक गमछा लपेटे हुए छत पर खड़ा धूप ले रहा था.

मैंने उसे देखा तो वह काफी हॉट लग रहा था.
उसके सिक्स पैक साफ दिख रहे थे और सच में क्या मस्त लग रहा था.

पहली नजर में वह एकदम सलमान खान जैसा लगा था.
मैं उसे देखती रही, वह अपने मोबाइल में कुछ देख रहा था इसी लिए शायद उसने मुझे नहीं देखा था.

फिर जब उसकी नजरें मोबाईल से हटीं तो वह मेरी छोटी बहन को देख रहा था.
शायद उसे मेरी छोटी बहन पसंद थी.
यही सब देख कर मैं छत की दूसरी तरफ चली गई.

फिर दूसरे दिन कुछ ऐसा हुआ कि मेरे घर में लाइट नहीं आ रही थी.

मैं उस वक्त छत पर थी.
वह उधर ही था.

मैंने उससे हाय कहा और उसको अपना फ़ोन चार्ज करने के लिए दे दिया.
उसे मैंने उसे बताया कि किसी वजह से मेरे घर की बिजली नहीं आ रही है और मोबाईल पूरा डिस्चार्ज पड़ा है.

उसने मेरा फ़ोन ले लिया और चार्ज पर लगाने के लिए नीचे ले लगा.
उसी दौरान उसने मेरा नंबर चुरा लिया.

शायद उसी शाम को वह अपनी नानी के घर चला गया क्योंकि वह अपनी पढ़ाई नानी के घर रह कर ही करता था.

उधर से उसने मेरे फोन पर मैसेज किया.
मैं उसके मैसेज से मन ही मन खुश हुई और धीरे धीरे उससे मेरी बात होना शुरू हो गई.

मैंने पहले तो उससे कहा- तुम्हारे पास मेरा नंबर कहां से आया है?
उसने कहा- वो सब छोड़ो, तुम बस ये बताओ कि तुम्हें मुझसे बात करना कैसा लगा?

मैंने कहा- मुझे बात करने में भला कैसे बुरा लग सकता है. बस यह बात मुझे बुरी लग रही है कि तुमने मेरा नंबर कुछ गलत तरीके से हासिल किया है.

वह बोला- क्या मैंने कोई पाप किया है?
उसके इस सवाल पर मैं चुप थी.

मेरे मन में अब बस वह सवाल चल रहा था कि क्या वो मुझमें दिलचस्पी रखता है या मेरी छोटी बहन में.
फिर मैंने उससे ये बात साफ साफ पूछने की बात ठान ली और उससे कहा.

मैं- मैं तुमसे एक बात साफ साफ पूछना चाहती हूँ. बिना कोई छिपाव के तुम मुझे बताओगे, तो मुझे अच्छा लगेगा और तभी मैं तुमसे बात करना या ना करना तय करूंगी.
वह बोला- क्या जानना चाहती हो?

मैंने कहा- मैंने तुम्हें अपनी छोटी बहन को देखते हुए देखा है. क्या तुम मेरी छोटी बहन में दिलचस्पी रखते हो?

उसने एक पल के लिए मौन साधा और उसके बाद कहा- वो मुझे पसंद नहीं करती है. मगर मैं तुम दोनों को पसंद करता हूँ.

उसके इस साफ जवाब से मैं मन ही मन खुश हो गई थी कि मैं अपनी छोटी बहन का हक नहीं चुरा रही हूँ.

उसके बाद हम दोनों में बातें होने लगीं और कुछ ही समय बाद हम दोनों में प्यार का इजहार हुआ.

प्यार मुहब्बत की बातें चलती रहीं और बातों में सेक्स भी हिस्सा बनने लगा.
फिर एक रोज वह अपने घर आया और उसने मुझे रात में बाहर बुलाया.

मैं उस रात बेहद घबराई हुई थी कि आज पहली बार एक लड़का मुझे अकेले में बुला रहा है.
अपनी सांसों को नियंत्रित करती हुई मैं उससे मिलने चली गई.

हमारे घर के पास में ही एक टूटा मकान था. उसमें रात में कोई नहीं जाता था.
उसी खंडहर में हम दोनों गए.

उसने मुझे कसके पकड़ा और किस करने लगा.
मैं भी उसका साथ देने लगी.

वह मेरी चूचियों को दबाने लगा.
मैं मदभरी सिसकारियां भरने लगी ‘अंह अंह धीरे करो आह.’

वह मान ही नहीं रहा था.

मैंने कहा- धीरे धीरे दबाओ … मुझे दर्द हो रहा है.
उसने मेरी एक न सुनी और मेरी दोनों चूचियों को बस दबाए जा रहा था.

उसी दौरान वह अपना एक हाथ मेरी चूत पर ले गया और उसे जोर जोर से रगड़ने लगा.
कुछ ही देर में मेरी चूत ने पानी छोड़ दिया.
चूत के पानी से मेरी जींस गीली हो गई.

वह अभी भी मेरी चूत को रगड़ता ही जा रहा था.
फिर उसने अपना हाथ मेरी जींस में डालना चाहा लेकिन मैंने उसे डालने नहीं दिया.

मैंने उससे कहा- आज नहीं, कभी फिर कर लेना.
फिर हम दोनों वहां से चले गए.

दूसरे दिन वह अपनी नानी के घर चला गया.
उसकी हरकतें मुझे बार बार उसकी याद दिलाने लगी थीं.

उस दिन के बाद से वह रोज मुझे वीडियो कॉल करने लगा और मुझे अपनी चूत और चूची दिखाने को बोलने लगा.

जब मैं उसे अपने दूध दिखाती तो वह मेरे सामने अपना लंड निकाल कर मुठ मारने लगता.

उसका लंड बड़ा ही मस्त था और काफी लंबा व मोटा था.

इसी तरह से वीडियो कॉल से हम दोनों के मन में चुदाई की इच्छा ने जोर पकड़ लिया और मैं भी मन ही मन उससे चुदने के लिए बेचैन होने लगी.

काफी समय बीतने के बाद हमें चुदाई करने का मौका मिला.
मुझे अच्छी तरह से याद है कि उस दिन बीस फरवरी की तारीख थी.

वह अपनी नानी के घर से मुझसे मिलने आया था.

उन दिनों कोई छुट्टी भी नहीं थी.
वैलेंटाइन डे भी निकल चुका था.

उसी ने वैलेंटाइन डे पर मिलने के लिए मना किया था क्योंकि उस दिन हमारे आस-पास के इलाके में कुछ लोग प्यार के दुश्मन बन जाते हैं और उनके कारण हमारी निजता पर फर्क पड़ सकता था.

बीस तारीख के दिन हम दोनों ने मिलने के लिए बात की.
मैंने उससे कहा कि मैं खंडहर में मिलना नहीं चाहती हूँ.

वह समझ गया कि आज चुदाई का मुहूर्त आ गया है.
उसने एक ओयो रूम बुक किया और मुझे बताया कि तुम मुझे गली के बाहर मिलो.

फिर हम दोनों उधर उस होटल में गए.

कमरे के अन्दर जाते ही उसने गेट लॉक कर दिया और मुझे कसके पकड़ लिया.
वह मुझे किस करने लगा.
मैं भी उसका साथ देने लगी.

वह मेरी चूचियों को कपड़ों के ऊपर से ही दबाने लगा.
मुझे दर्द होने लगा और मैं सिसकारियां भरने लगी- आह सीई … आह आराम से करो … मैं कहीं भागी थोड़ी न जा रही हूँ.

उसने कुछ देर बाद मेरा टॉप ऊपर उठाते हुए उतार दिया, फिर मेरी ब्रा को भी खोला और मेरी चूचियों को बारी बारी से चूसने लगा.
उसके दूध चूसने से मुझे काफी मज़ा आने लगा.

मैंने भी उसका सर अपने मम्मों में दबाते हुए सिसकारना शुरू कर दिया- आह चूसो मेरी जान … मेरी चूचियों को पूरा चूस लो आह बड़ा मज़ा आ रहा है.

कुछ देर बाद उसने अपनी टी-शर्ट को उतार कर अलग कर दी और मैं उसके सीने को सहलाने लगी.

थोड़ी देर बाद उसने मेरी जींस को उतार फेंका और मेरी पैंटी को भी निकाल दिया.
मैं पूरी नंगी हो गई थी.

उसने मुझे बेड पर चित लिटाया और मेरी चूत को चाटने लगा.
मुझे भी अपनी चूत चटवाने में मज़ा आने लगा.

मैं मजे से अपनी गांड उठाती हुई चूत चटवा रही थी और साथ में कामुक सिसकारियां भी भर रही थी- आह आह उन्ह चाटो मेरी चूत … आह आह!

कुछ ही देर में मेरी चूत ने उसके मुँह पर सारा पानी छोड़ दिया और वह मज़े से मेरी चूत का पानी पी गया.

अब उसने मुझसे कहा- बेबी, मेरा लंड चूसोगी?
मैंने उसे साफ़ मना कर दिया.

वह मेरी आंखों में वासना से देखता हुआ चूसने के लिए इशारा करने लगा.
मैंने साफ बोल दिया कि मैं लंड नहीं चूसूंगी.

उसने कहा- तो चलो हो गया. अब हम दोनों वापस चलते हैं.
मैंने कहा- क्यों मेरी लेना नहीं है?

वह कुछ नहीं बोला.
उसका मन था कि मैं उसके लौड़े को चूस कर उसे भी मजा दूँ.

उसकी इस बात को मैंने समझ लिया और उसके गले लग कर उसे मनाया, तब जाकर वह चुदाई के लिए राजी हुआ.

अब मैं उसका लंड चूसने के लिए मान गई थी.
मैंने अपना मुँह खोला और उसका सुपारा चाटने लगी.

मेरे मन की अजीब सी स्थिति को बदलने में देर न लगी और मुझे लंड चूसने में अच्छा लगने लगा.

मैंने उसके एक इंच लंड को अपने मुँह में ले लिया और जीभ से लिक लिक करके लौड़े को चूसने लगी.
उसने उसी समय मौका देखा और एक ही झटके में अपना पूरा का पूरा लंड मेरे मुँह में पेल दिया.

उसका लंड मेरे गले में जाकर फंसने लगा था.
फिर मैंने उसका लंड करीब 20 मिनट तक चूसा और उसने अपने लंड का सारा पानी मेरे गले में छोड़ दिया.

पानी छोड़ने के बाद भी वह अपने लंड को मेरे मुँह में दिए रहा, जिस वजह से मुझे उसका सारा पानी पी जाना पड़ा.

कुछ देर बाद उसने लंड बाहर निकाला और मुझसे पूछा- कैसा लगा स्वाद?
सच में मुझे अच्छा लगा था.
मैंने कहा- हां मुझे अच्छा लगा.

उसने कुछ देर बाद फिर से लंड चूस कर खड़ा करवाया और अब उसने मुझे लेटा दिया.

उसने मेरी जांघों को पूरा खोल दिया और मेरी चूत के मुख पर अपना लंड रगड़ने लगा.

वह मेरी चूत में लंड पेलने की कोशिश करने लगा.
लेकिन मेरी सीलपैक चूत काफी टाइट थी तो उसका लंड मेरी चूत नहीं जा रहा था.

फिर उसने बाथरूम से बॉडीलोशन लाकर अपने लंड पर लगाया और मेरी चूत की फांकों में भी थोड़ा बॉडीलोशन लगा दिया.
फिर उसने चूत के छेद पर लौड़े को रखा और एक ही झटके में लंड पेल दिया.

उसने अपना आधा लंड मेरी चूत में डाल दिया, जिससे मुझे काफी दर्द होने लगा, मेरी आंखों से आंसू आने लगे.

मैं दर्द से कराह उठी और बोली- लंड बाहर निकालो, मुझे दर्द हो रहा है.
लेकिन उसने मेरी चूत में अपना लंड पेले रखा.
वह मेरे ऊपर लेटा रहा और मुझे सहलाता रहा.

करीब 5 मिनट बाद मुझे थोड़ा ठीक लगा तो उसने एक और झटके में अपना पूरा लंड अन्दर पेल दिया.
उसका लंड मेरी चूत को चीरता हुआ अन्दर तक चला गया था.

कुछ दर्द के बाद अब मुझे टीनएजर गर्ल फर्स्ट सेक्स का मज़ा आने लगा.
मैं अपनी गांड उठा उठा कर उसके झटकों में उसका साथ देने लगी.

वह भी बेदर्दी से मेरी चूत को चोदता रहा.
मैं मज़े से अपनी चूत चुदवाती रही.

कुछ बीस मिनट की चुदाई के बाद उसने अपना सारा पानी मेरी चूत में छोड़ दिया और मेरे ऊपर ही लेटा रहा.
बाद में हम लोग साथ में नहाने बाथरूम में चले गए. नहाने के बाद उसने एक बार फिर से मेरी चूत को चोदा.

फिर हम लोग उधर से निकल आए.

मेरी टीनएजर गर्ल फर्स्ट सेक्स की कहानी आपको कैसी लगी?
आप अपनी राय मुझे मेल कर सकते हैं.
sauravjaikar2@gmail.com

लेखक की पिछली कहानी थी: गृह प्रवेश में भाभी की चूत में लंड प्रवेश

What did you think of this story??

प्रेषिका : नीना Sex Stories

हाय दोस्तो ! सभी Sex Stories अन्तर्वासना पढ़ने वालों को मेरी तरफ से यानि कि गौरी की तरफ से गीली चूत के साथ प्रणाम !

मैंने अन्तर्वासना पर लगभग सभी कहानियाँ पढ़ी हैं और आज मैं आपके सामने अपनी एक मस्त चुदाई लेकर आई हूँ।

नाम गौरी है, उम्र उन्नीस साल, गोरा रंग, कसा हुआ बदन, गोल गोल वक्ष, पतली कमर !

वैसे तो मैं छोटी ही थी जब मैंने अपनी चूत का चीरहरण करवा डाला था।

उसके बाद कई लड़कों ने मुझे चोदा- स्कूल में, स्कूल जाते रास्ते में पड़ने वाले बाग़ में, जहाँ मेरे आशिक मेरी इन्तज़ार करते और छुट्टी के बाद उन बागों में रासलीला रचाई।

उसके बाद मुझे वो स्कूल छोड़ना पड़ा क्यूंकि वो दसवीं तक था। माँ ने मुझे शहर मामा जी के घर भेज दिया। एक तो मामी के बच्चा होने वाला था दूसरा स्कूल घर की बग़ल में था बस यही बात ठीक नहीं थी। ऊपर से रात को जब मामा मामी मजे लेते तो मैं छुप कर देखती।

मामी मुँह में लेकर, मुठ मारकर मामा का पानी निकालती। यह देख मेरी चूत गीली हो जाती, सोचती कि मामा को ही पटा लूँ !

लोहा गर्म तो था ही, चोट मारनी रह गई थी।

तभी मेरा स्कूल शुरू हो गया। कुछ ही दिनों में मेरा श्याम नाम के लड़के के साथ अफेयर चल पड़ा। आधी छुट्टी में खाली क्लास में उसकी मुठ मारती, कभी चूस भी लेती।

वो तो मुझे अपने दोस्त के घर में ले जाना चाहता था। उसके दोस्त के मम्मी पापा ऑफिस में जॉब करते थे, बहन हॉस्टल में रहती, घर खाली होता। दोनों मेरी चूत मारने के लिए उतावले थे। मैं चाहते हुए भी नहीं जा पा रही थी। मेरे न जाने से वो मुझसे खफा रहने लगा।

आखिर एक दिन मैंने मन बना ही लिया। सुबह स्कूल जाने के लिए निकली लेकिन आगे निकल गई। शहर था, मुँह पर चुन्नी डाल उसके साथ चिपक गई और हम सीधा उसके दोस्त के घर चले गए।

जाते ही उसने मुझे दबोच लिया, पागलों की तरह मुझे चूमने लगे। दोनों ने मुझे बिस्तर पर लिटा कर नंगी कर दिया।

मैंने श्याम का तो कई बार चूसा था, विपन का लौड़ा उस से भी ज्यादा मस्त निकला।

भूखे भेड़िये को मांस मिला हो उसी तरह एक ने मेरा एक मम्मा मुँह में डाला दूसरे ने दूसरा ! हाय !

मैंने दोनों के लौड़े पकड़ रखे थे। हाय क्या मजा था एक साथ श्याम और विपन के नीचे लेटकर !

इतने में डोर-बेल बजी। विपन की फटने लगी, उसने रसोई में से देखा- उसकी मामी, मासी, उसका लड़का खड़े थे।

सारा स्वाद ख़राब हो गया। अब क्या करते वो कपड़े पहन कर बोला- तुम दोनों पीछे वाले हिस्से में चले जाओ, चाबी ले लो !

वहीं दरवाज़ा खोल कर चले जाना, उधर कोई नहीं आयेगा। हम दोनों ने कपड़े उठाये, पीछे चले गए। ऊपर से खुला हुआ था, कोई भी अपनी छत से देख सकता था। एक बाथरूम था, मैं उसमें घुस गई, श्याम भी वहीं आ गया। उसने विपन को मोबाइल पर कहा कि पीछे कोई न आये, वरना तुझे इसकी चूत कभी नहीं मारने दूंगा। हम बाथरूम में हैं।

कह कर हम फिर चिपक गए। जगह काफी थी, मैंने उसको सीट पर बिठा खुद नीचे बैठ कर उसके लौड़े को चूसने लगी। वो आहें भरने लगा- हाय रानी और चूस चूसती जा ! साली रंडी !

मैं उठी, उसको वहीं बैठे रहने को कहा। उसका लौड़ा छत की तरफ तना हुआ खड़ा था। मैंने टांगे खोली और उसके ऊपर गई, चूत पे रखते हुए उसपर बैठती गई और उसका पूरा लौड़ा अन्दर डलवा लिया। पहली बार उसने अन्दर डाला था, उसको बहुत मजा आने लगा। मैं उठ उठ कर चुदने लगी- हाय ! चोरी का गुड़ कहते हैं कि ज्यादा मीठा लागे ! वोही बात थी ! वहां बहुत मजा आने लगा।

फिर मैंने इंग्लिश सीट पर बैठ गई।श्याम मेरी टांगें उठा मेरे ऊपर आते हुए बीच में आ गया और मैंने पकड़ कर निशाने पर लगा दिया। उसने अन्दर डाल दिया- बहन की लौड़ी ! साली ! पक्की रंडी है ! सब जाने तू !

उसने तेज़ धक्के देने शुरू किये।

हाय मैं झड़ने वाली हूँ ! उह अह उह !

वो और तेजी से ठोकने लगा।

हाय हाय ! जोर दे कर ! हाय फाड़ दे कमीने ! इतने दिन से नाराज़ बैठा था ! लगा दम ! हाय साईँ ! मार, मेरी मार ! करते हुए दोनों लगभग एक साथ ढीले पड़ गए उसने मेरा मम्मा मुँह में लेकर निपल काट दिया।

और जैसे उसने अपना लौड़ा मेरी फ़ुद्दी से बाहर निकाला, मैंने झट से मुँह में डाल सारा रस चाट लिया।

तभी विपन ने दरवाज़ा खटकाया- मैं हूँ !

अबे साले रुक !

दरवाज़ा खोला, मैं सलवार पहन चुकी थी, ब्रा बंद करने वाली थी कि उसने रोक दिया- छोड़ो !

मुझसे वो बोला- सब गए ! अब आओ, आराम से अन्दर बैठते हैं ! कोल्ड ड्रिंक पियो !

अभी छुट्टी में काफी वक्त था, मैंने सोचा दोहरा मजा ले ही लिया जाये !

मौका तो था ही !

ठीक है विपन ! छुट्टी के टाइम तक मैं यहीं हूँ !

उसके बाद क्या क्या हुआ ? मैंने खूब मजे लूटे !

यह मैं आप सब के सामने जल्दी ही लाने वाली हूँ !

इतंजार का फल मीठा होवे, समझे ना !

आपके जवाबों का इंतज़ार रहेगा Sex Stories

हैलो Sex Stories

मेरा नाम सुनील है और मैं Sex Storiesआगरा से हूँ। हमारे पड़ोस में एक आँटी रहती हैं जिनकी एक लड़की है जो कि बहुत ही ख़ूबसूरत होने के साथ-साथ बहुत ही सेक्सी भी है। उसकी फिगर ३६-२४-३४ है। जिसका नाम सोनिया था। उसकी नशीली आँखें हमेशा मुझसे कुछ कहतीं थीं। लेकिन मैं समझ नहीं पाया कि आख़िर वो क्या चाहतीं हैं। वाऊ, क्या फिगर है उसकी, जो देखे मुट्ठ मारे बिना नहीं रह सकता। उसकी चूचियाँ ऐसी हैं जैसे किसी दूध की नदी में उसने छलाँग लगाई हो। उसकी गाँड ऐसी है जैसे किसी झील में घुसे जा रहे हैं।

बात उन दिनों २००१ की है जब मैं हाई स्कूल के पेपर की तैयारी कर रहा था। हमारा इंग्लिश का पेपर था और मैं घर पर ख़ूब पढ़ रहा था। रात के ११ बजे बेल बजी तो मैं चौंक गया कि कहीं मेरा दोस्त तो नहीं आ गया, पेपर आउट करने के लिए।

जैसे ही मैंने दरवाज़ा खोला तो सामने आँटी और उनकी बेटी शब़नम खड़ी थीं। उन्होंने मुझसे कहा कि इसे भी पेपर के बारे में थोड़ा-बहुत समझा दो। उसके बाद आँटी चलीं गईं, तो मम्मी ने पूछा कि कौन है, तो मैंने तुरन्त उत्तर दिया कि सोनिया आई है पढ़ने के लिए। तो वो अपने कमरे में वापस चली गईं।

मेरे मन में कोई भी ग़लत विचार नहीं थे। आधे घण्टे के बाद शबनम कहने लगी कि उसे नींद आ रही है, और वह थोड़ी देर सोना चाहती है। मैंने कहा, ठीक है थोड़ी देर सो लो। उसने मिनी-स्कर्ट और टी-शर्ट पहन रखी थी, वह सो गई। उसके सोने के बाद मैंने देखा कि उसकी स्कर्ट ऊपर उठ गई थी, और उसकी चिकनी-चिकनी जाँघें और गाँड दिख रहीं थीं। मेरा ७ इंच का लण्ड एकदम खड़ा हो गया और मेरे मन में गन्दे विचार आने लगे।

मैंने धीरे-धीरे उसकी टाँगों को सहलाना शुरु कर दिया, फिर हाथ हाथ ऊपर की ओर ले जाकर उसकी पैन्ट में उँगली करने लगा। तभी वह जाग गई और पूछने लगी कि क्या कर रहे हो। मैंने पलट कर पूछा “तुम्हें मज़ा नहीं आ रहा था?”

“मज़ा तो आ रहा था, लेकिन अगर कुछ हो गया तो?”

“कुछ नहीं होगा।”

फिर मैंने उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए, उसके बाद वह गरम होने लगी। धीरे-दीरे मैंने अपना हाथ उसकी टी-शर्ट के अन्दर डाल दिया और टी-शर्ट उतार दी। उसकी चूचियाँ ऐसे बाहर आईं जैसे दो पहाड़ो को आज़ादी मिल गई हो।

क्या दूध थे उसके, गज़ब के, एकदम टाईट और तरो-ताज़ा माल। फिर हम दोनों किस करते हुए बिस्तर पर आ गए। मैंने उसकी स्कर्ट उतार दी। अब वह केवल पैन्टी में थी। मैंने अपनी पैन्ट उतारी और जैसे ही अपना लंड निकाला तो वह एकदम डर गई। इतना बड़ा लंड….

उसने मेरे लण्ड को सहलाना शुरु कर दिया। जैसे-जैसे वह सहलाती जा रही थी, मेरा लंड भी वैसे-वैसे ही बड़ा और कड़क भी होता जा रहा था। फिर हम दोनों 69 की स्थिति में आ गए। वह मेरा लण्ड चूसने लगी और मैं उसकी गाँड में ज़ुबान डालकर खूब मज़े ले रहा था।

१५ मिनट बाद वो मेरे मुँह में ही झड़ गई। मैंने उसे ऊपर उठाया और उसकी दोनों टाँगें फैला कर मैंने अपना लंड उसकी बुर में डालने की कोशिश की, लंड अन्दर जा ही नहीं पा रहा था। मैंने फिर से ज़ोर लगाकर किसी तरह अपना लंड उसकी बुर में घुसेड़ा तो वह दर्द के मारे चीख उठी और कराहने लगी। मैंने उसे समझाया कि शुरु में दर्द होता है लेकिन बाद में मज़ा आएगा। मैंने दुबारा झटकों के साथ जैसे ही ताक़त लगाई तो मेरा लंड पूरा-का-पूरा अन्दर चला गया।

मैंने उसे जी भरकर चोदा। लगभग आधे घण्टे के बाद मैंने अपना वीर्य उसकी बुर में छोड़ दिया और इस दौरान वह दो बार झड़ चुकी थी। उसकी बुर से खून बह रहा था। वह डर गई, तो मैंने समझाया कि यह पहली बार होता है। उसके बाद मैंने उसे कुतिया बनाया और उसकी गाँड में लंड डालने लगा तो मना करने लगी। पर मैं भी कहाँ मानने वाला था। मैंने क्रीम ली और उसकी गाँड और अपने लंड पर लगाई और पेल दिया लंड को… पर ये क्या लंड तो जा ही नहीं रहा था, बहुत टाईट गाँड की छेद थी साली की।

मैंने ज़ोर लगा कर जैसे ही दुबारा झटका मारा तो मेरा आधा लंड उससकी गाँड में घुस गया। वह चिल्लाने लगी। मैंने कहा “मम्मी आ जाएगी,” और उसका मुँह अपने हाथ से बन्द कर दिया। और फिर एक ज़ोर का झटका लगाते ही मेरा लंड पक्क से पूरा का पूरा उसकी गाँड की छेद में पेवस्त हो गया। कम से कम आधे घण्टे तक हमने गाँड-चुदाई का आनन्द लिया फिर निढाल होकर बिस्तर पर ढेर हो गए।

फिर वह अपने घर चली गई। उस दिन के बाद जब भी मुझे मौक़ा मिलता, मैं उसकी जमकर चुदाई करता।

मुझे मेल करें। Sex Stories

लेखिका : लक्ष्मी Antarvasna

मेरा तलाक हुए करीब 3 साल Antarvasna हो चुके थे। मेरी शादी जब मैं 19 साल की थी तब कर दी गई थी। मेरा पति मुझसे दस साल बड़ा था। उस समय तक मैं चुदाई और सेक्स के खेल से अनभिज्ञ थी। सुहागरात को उसने मेरी चुदाई नहीं की थी पर मुझसे मुख-मैथुन किया था। अपना लण्ड मुझसे चुसवाया था, जो मेरे लिये एक नया नया दर्दनाक अनुभव था। मुँह में लण्ड डाल कर मेरा मुख चोदता था, फिर ढेर सारा वीर्य मेरे मुँह में ही निकाल देता था। मुझे बहुत ही घिन आती थी और फिर मुझे उल्टियां होने लगती थी। फिर उसने मेरी गाण्ड मारी थी। यूँ तो चिकनाई भी लगाई थी, पर जाने क्यूँ मेरी गाण्ड एकदम टाईट हो जाती थी, वो मुझे तमाचे मार मार गाण्ड में लण्ड घुसेड़ देता था। मेरी गाण्ड लहूलुहान हो जाती थी। मुझे बहुत ही पीड़ा होती थी। पर पिटाई के बीच गाण्ड मारना मेरे लिये दर्द भरा हादसा था। मैं बहुत उससे बहुत डर गई थी।

डर के मारे अगले दिन मैं बीमारी का बहाना कर अपनी सास के पास सो गई थी। पर आखिर कब तक बहाना करती। फिर मैंने हिम्मत करके अपनी सास को कह ही दिया। मेरी बात सुनते ही वो चिन्तित हो उठी। सास ने मुझे वादा किया कि वो उन्हें समझा देगी। पर रात को उसने मुझे फिर से अपना लण्ड मेरे मुख में डाल कर मुख मैथुन किया और फिर बाद में मेरी गाण्ड भी मारी। मैंने बहुत सहा, लगभग एक महीना होने को आया, मेरी सास ने उसे कुछ नहीं कहा। फिर उसने मेरी चूत चोदी। चूंकि पहली बार चुदी थी तो फिर वही तकलीफ़ हुई थी। मेरे पति का लण्ड भी मोटा और लम्बा था, इस कारण रोज़ गाण्ड मरवाने में और चुदवाने में मुझे बहुत तकलीफ़ होती थी।

एक दिन मैंने अपनी मां से कह कर अपने शहर वापिस आ गई। मेरी हालत देख कर मुझसे मेरी मां ने पूछ ही लिया। मैंने रो रो कर सारी बातें बता दी। मेरे पापा ने दूसरे ही दिन मेरे पति से बात की। पर उसने बहुत ही बद्तमीज़ी से बात की। अन्त में हार कर पापा ने कोर्ट में तलाक की अर्जी दे डाली। मेरा पति भी मुझसे परेशान था अतः तलाक में अधिक परेशानी नहीं आई। मुझे अब उन नारकीय दुःखों से छुटकारा मिल ग़या।

लगभग तीन साल बाद मुझे अचानक एक फोन आया। कोई अशोक नाम का लड़का था। उसने कहा कि उसने बहुत मुश्किल मेरा मोबाईल नम्बर प्राप्त किया है और मुझसे शादी करने की इच्छा रखता है। उसने बताया कि वो एक पढ़ा-लिखा सरकारी अफ़सर है… उसे मेरे तलाक के बारे में पता है। मैं दिखने में बहुत सुन्दर हूँ, शरीर से दुबली पतली हूँ, लगभग 5 फ़ुट 4 इन्च की हूँ। मैंने पास में स्कूल में नौकरी कर ली थी। बस मुझमें सुन्दरता ही एक खूबी थी, जिसके कारण लड़के मुझसे दोस्ती करना पसन्द करते हैं। पर उनकी मन्शा मात्र मुझे चोदने तक की होती है। सभी को पता है कि मैं तलाकशुदा हूँ।

एक दिन वो मुझे स्कूल में मिलने आ गया।

“मेरा नाम अशोक है, मैंने ही आपको फोन किया था।”

विजिटिंग रूम में हम लोग बातें करते रहे, उसका व्यवहार अच्छा था, वो सुन्दर था और शरीर से भी लम्बा और बलिष्ठ नजर आ रहा था। उसके बाद से वो मुझसे मिलने अक्सर स्कूल आ जाता था। मेरी छुट्टी होने पर हम दोनों एक पेड़ के नीचे खड़े हो कर बाते करते थे। धीरे धीरे हमारी दोस्ती बढ़ गई। अब वो मेरे लिये गिफ़्ट भी लाता था। हम दोनों मोबाईल पर भी खूब बतियाने लग गये थे। एक दिन मेरे घर पर अशोक अपने पापा के साथ आया और उन्होने मेरा हाथ मांग लिया। मेरे पापा खुश हो गये कि मुझे मेरी ही जात वाला एक प्रतिष्ठित युवक मिल गया। उन्होने तुरन्त ही इस रिश्ते की मंजूरी दे दी। सादे तरीके से हमारी सगाई हो गई।

अब रोज ही शाम को अशोक मुझसे मिलने आता था और हम दोनों कार में घूमने निकल पड़ते थे। मै उसके प्यार में खो चुकी थी। हम दोनों बाग में अक्सर एक दुकान के आगे रुक कर पेप्सी या थम्स अप पिया करते थे।

ऐसे ही एक दिन उसने भावावेश में मुझे अपने से लिपटा लिया और मेरे होंठ चूम लिये। मैं आनन्द से भर गई। मुझे भी पुरुष का शारीरिक स्पर्श का आनन्द बहुत दिनो बाद हुआ था। सो मैं उससे लिपटी रही। इसी दौरान उसने मेरे चूचियों को हल्के से छुआ भी और सहलाया भी। मुझे एक अलग ही आनन्द आने लगा था। यूं तो मैं शारीरिक स्पर्श से डरती थी… पर यह पहले जैसी अनुभूति नहीं थी। मुझे इसमे आन्तरिक सुख मिलता था। मैंने इसका कोई विरोध नहीं किया। हम दोनों इस असीम सुख का आनन्द उठाते रहे। अब हमारा जब भी घूमने जाना होता तो हम एकान्त में कार रोक कर आपस में खूब चिपका चिपकी करते थे। फिर जाने कैसे एक दिन मैंने होश खोते हुये उसका लण्ड थाम लिया… और उसे बहुत देर तक सहलाती रही। एक अनजानी सी सुखद वासना भरी अनुभूति हुई। मेरे मन में उसके लण्ड के लिये प्रीति जाग उठी, मैं कभी कभी उसका सुपारा चूम लेती थी।

एक दिन उसका सहलाते सहलाते उसके लण्ड में से वीर्य निकल गया, उसकी पैन्ट गीली हो गई। उस दिन अशोक ने भी मेरी चूत के आस पास सहलाया था। मेरी जीन्स की जिप खोल कर मेरी चूत में अंगुली भी दबाई थी। चूत का गीलापन उसे बहुत अच्छा लगा था।

एक दिन सवेरे जब मैं स्कूल जा रही थी तो अशोक का फोन आया कि आज की छुट्टी ले लो, घर पर कोई नहीं है, दोनों घर पर बातें करेंगे। मैंने स्कूल में फोन करके छुट्टी ले ली और उसके साथ उसके घर आ गई। घर बिलकुल खाली था।

उसने अपना घर मुझे दिखाया… फिर अपना कमरा भी दिखाया… ये हमारा कमरा होगा … ये बिस्तर आपका होगा… ” उसने एक बेहद मुलायम सा बिस्तर दिखाया।

“हाय रे अशोक … कब होगी शादी…।” मैंने उतावले स्वर में कहा।

“दिल से दिल मिल जाने को ही शादी कहते हैं !” और उसने मुझे अपनी बाहों में भर लिया और मुझे चूमने लगा।

“चलो इस नरम गद्दे पर लेट कर प्यार करते हैं…” अशोक मुस्करा उठा।

उसका फ़ोम का गद्दा बहुत ही नरम था। मैं तो उस पर लोट लगाने लगी। तभी अशोक ने अपनी बाहें खोल दी। मैं लोट लगाते हुये उसकी बाहों में चली आई। हम एक दूसरे से लिपट पड़े। प्यार से एक दूसरे को चूमने लगे।

उसके हाथ जाने कब मेरे टॉप के अन्दर पहुंच गये, मेरी चूचियाँ सहलाने लगा, मेरे भीतर अनन्त उमंगें जाग पड़ी, मेरे चुचूक फूल कर कड़े हो गये। वासना का ऐसा भावनात्मक प्यार भरा उन्माद पहली बार मह्सूस हुआ। मैंने उसकी कमीज के बटन खोल दिये और उसकी नंगी छातियों को चूमने लगी। अचानक मुझे अपने कपड़े तंग मह्सूस होने लगे। जीन्स मेरे शरीर पर कसने लगी। मेरी जांघें जैसे जीन्स को फ़ाड़ देना चाह रही थी, टॉप जैसे चूंचियों पर फ़ंसने लगा। मुझे कपड़े बहुत ही खराब लगने लगे। पहल अशोक ने ही की। उसने अपनी पैन्ट उतार दी। फिर उसने मेरी तरफ़ वासनायुक्त नजरों से देखा। मुझे भी कपड़े कहाँ सुहा रहे थे। अशोक ने मेरी टॉप ऊपर ही खींच दी। मेरे वक्ष छलक पड़े। मैंने अपनी जीन्स उतार डाली और बस एक तंग सी छोटी सी चड्डी रह गई। जैसे ही मेरे बदन को हवा लगी, एक सिरहन सी उठ गई।

जैसे ही मेरी नजरें अशोक के लण्ड पर गई, वही मोटा सा, लम्बा लण्ड… मैं डर गई, पर शायद वो मेरी बात जानता था। वो दूर हट गया… और अपना लण्ड देख कर बोला,”आपको देख कर इसे आप पर प्यार आ रहा है… जैसे कार में आप इसे प्यार करती थी… बस एक बार फिर से वही प्यार करके इसे मजा दो…”

मैंने डरते हुये उसके लण्ड को निहारा और उसे पकड़ लिया। जैसे ही मैंने उसे दबाया… अशोक के मुख से एक सिसकारी निकल पड़ी।

” आपको मजा आया ना, पर मुझे इससे डर लगता है … प्लीज मुझे कुछ मत करना…” मैंने उसे समझाते हुये कहा।

“आओ प्यार करें … जो आप कहेंगी वही करेंगे !” मैं कुछ सावधान सी, सकुचाती हुई उसके नंगे शरीर से लिपट गई। फिर हम दोनों धीरे धीरे बिस्तर पर लेट गये। हमारे अधर एक दूसरे से मिल गये। उसका लण्ड हाथ में लिये मुझे लगा कि वो और फूल गया है। बेहद कड़क हो गया है। मेरी चूंचियाँ वो मसलने लगा। मेरे शरीर में एक सुखद मीठा सा नशा चढ़ने लगा। मेरी चूत पानी छोड़ने लगी थी। मुझे जाने क्यूँ इच्छा होने लगी थी कि लण्ड अपनी चूत में घुसेड़ लूँ। मैंने लण्ड को पकड़े हुये अपनी चूत के द्वार पर रख दिया और आंखे बंद करके मदहोशी में उस पर जोर लगा दिया। उसका लण्ड मेरी गीली चूत में अन्दर फ़िसल पड़ा। मुझे एक विचित्र सी सुखद वासना युक्त कसक भरी मिठास का अहसास हुआ और मैंने अपनी चूत उसके लण्ड पर पूरी ताकत से दबा दी। उसका लण्ड मेरी चूत के लबों को चूमता हुआ अनन्त खाई में जैसे कूद पड़ा।

मैंने अशोक को खींच कर अपने ऊपर सवार कर लिया और अपनी दोनों टांगें चीर कर उसकी कमर से लपेट ली। अशोक मेरे ऊपर आ चुका था और लण्ड मेरी चूत में पूरी गहराई तक घुसा हुआ था। हम दोनों की कमर अब धीरे धीरे चलने लगी। वो चोदने लगा और मैं चुदती चली गई। ऐसा स्वर्गीय आनन्द मुझे पहली बार मिला था। इतना प्यारा वो तो नहीं चोदता था। मुझे अचानक इच्छा हुई कि मेरा पूर्व पति मेरी गाण्ड मारता था, उसमें क्या मजा आता होगा। सो मैंने अशोक को इशारो में अपनी इच्छा बता दी। उसने मेरे सर पर बालों में प्यार से हाथ फ़ेरा और लण्ड धीरे से बाहर निकाल लिया। उसने एक मोटा तकिया नीचे लगा दिया और पास में पड़ी क्रीम मेरी गाण्ड में लगा दी। फिर मुझे चूमता हुआ मुझसे प्यार से लिपट गया। मैं अनजाने डर से सहम सी गई। मेरे गाण्ड की छेद पर उसका नरम सा गोल सुपारा चिपक गया। मुझे ताज्जुब हुआ कि उसका लण्ड एक ही बार में छेद के अन्दर बिना किसी तकलीफ़ के घुस गया था। इस बार मुझे दर्द नहीं हुआ बल्कि मजा आया।

उसने अब धीरे धीरे मेरी गाण्ड चोदना आरम्भ किया। मुझे मस्ती आने लगी और मैं उसे एन्जोय करने लगी। पर हां मुझे ये जरूर लगा कि मेरे पति जब ये सब करते थे तो मैं घबरा जाती थी, गाण्ड में से खून निकलने लगता था, यहाँ तक कि मैं बेहोश भी हो जाती थी, मजा आने की बात तो दूर रही। काफ़ी देर तक मैंने गाण्ड मराने का आनन्द लिया। थोड़ी देर के बाद मेरी चूत कुलबुलाने लगी तो मैंने अशोक को चूत मारने को कहा। उसने मेरी चूत में लण्ड घुसा कर धक्के लगाना शुरू कर दिया। मेरी उत्तेजना मेरी सहनशीलता के बाहर चुकी थी। चूत उछाल उछाल कर चुदाने लगी… और फिर मेरे अंग प्रत्यंग जैसे आग उगलने लगे और मैंने अपना यौवन रस छोड़ दिया, मैं झड़ने लगी।

उसका चोदना जारी रहा पर गीलापन बढ़ने से छप-छप की आवाजें आने लगी। चूत ढीली पड़ गई। उसने इशारे से कहा कि मेरा लण्ड चूस कर वीर्य निकाल दो…

उसके लण्ड को मुख में लेने के विचार से ही मेरे मन में फिर वही डर समा गया। पर मैंने हिम्मत करके उसका लण्ड मुँह में भर लिया और धीरे धीरे उसे चूसने लगी। मुझे लगा उसे बहुत ही मजा आ रहा है। मैं जोश में उसके लण्ड के रिन्ग जोर से चूसने लगी। उसके मुँह से सिसकारियाँ निकल पड़ी। उसका हाल देख कर मैं भी और जोश में आ गई और उसका लण्ड हाथ से भी दबा कर मुठ मारते हुये जोर जोर से चूसने लगी।

इतने में उसने मेरे बाल पकड़ लिये और लण्ड का मुख में जोर लगा कर झुक पड़ा और लण्ड से वीर्य निकल पड़ा। वो अपने लण्ड पर जोर लगा कर पिचकारी पर पिचकारी मुह में छोड़ने लगा। मैं भी जोश में आ कर उसका वीर्य गटागट पी गई। अब उसका लण्ड मैं दूध निकालने की तरह खींच-खींच वीर्य निकालने लगी। पूरा लण्ड साफ़ करके उसे छोड़ दिया।

आज मेरी खुशी का कोई ठिकाना ना था। मैं खूब जोर जोर से हंसी… और उसे भी अपनी खुशी में शामिल होने कहा। फिर मैंने अशोक को अपनी पूरी कहानी बताई और रो पड़ी। अशोक ने सब कुछ भूल जाने कहा और हम फिर से एक दूसरे में प्यार में खो गये। चुदाई के मनमोहक दौर की तैयारी करने लगे। मेरा मन आज जी भर कर चुदने का कर रहा था… मैं अपने पिछले गुजरे हुये तूफ़ान को भूल जाना चाहती थी… Antarvasna

(Vidhva Bhabhi Ki Chudai- Part 1) Antarvasna

Antarvasna - मेरा नाम दीपक है। मेरी उमर इस समय 24 साल की है। शादी के 3 साल बाद ही एक रोड दुर्घटना में भैया का स्वर्गवास हो गया था। मैं भाभी के साथ अकेला ही रहता था। मेरी भाभी का नाम संध्या है। हमारा अपना खुद का बिजनेस था। भैया के स्वर्गवास होने के बाद मैं ही बिजनेस की देखभाल करता था।

भाभी बहुत ही खूबसूरत थी। वो मुझे दीपक कह कर ही बुलाती थी। पापा और मम्मी का स्वर्गवास बहुत पहले ही हो चुका था। मैं एक दम हट्टा कट्टा नौजवान था और बहुत ही ताकतवर भी था। भाभी उमर में मुझसे 1 साल की छोटी थी। वो मुझे बहुत प्यार करती थी।

भैया के गुजर जने के बाद मैं भाभी की पूरी देखभाल करता था और वो भी मेरा बहुत ख्याल रखती थी। मैं सुबह 10 बजे ही घर से चला जाता था और फिर रात के 8 बजे ही घर वापस आता था।

ये उस समय की बात है जब भैया को गुजरे हुये 6 महीने ही हुये थे। एक दिन मेरी तबियत खराब हो गयी तो मैने मेनेजर से दुकान सम्भालने को कहा और दोपहर के 1 बजे ही घर वापस आ गया।

भाभी ने पूछा- क्या हुआ दीपक?

मैने कहा- मेरा सारा बदन दुख रहा है और लग रहा है की कुछ फ़ीवर भी है।
मेरी बात सुनकर वो परेशान हो गयी। उन्होने मुझसे कहा, तुम मेरे साथ डॉक्टर के पास चलो।

मैने कहा, मैने मेडीकल स्टोर से कुछ मेडीसीन ले ली है। मुझे थोड़ा आराम कर लेने दो।

वो बोली, ठीक है, तुम आराम करो। मैं तुम्हारे बदन पर तेल लगा कर मालिश कर देती हूं।

मैने कहा, नहीं, रहने दो, मैं ऐसे ही ठीक हूं।

वो बोली, चुप चाप अपने क्मरे में जा कर लेट जाओ। मैं अभी तेल ले कर आती हूं।

मैं कभी भी भाभी की बात से इन्कार नहीं करता था।

मैं अपने कमरे में आ गया। मैने अपनी शर्ट और पेन्ट उतार दी और केवल बनियान और नेकर पहने हुये ही लेट गया। मेरा नेकर एक दम ढीला था और थोड़ा छोटा नेकर ही पहनता था।

भाभी तेल ले कर आयी। उन्होने मेरे सिर पर तेल लगाया और मेरा सिर दबाने लगी। उसके बाद उन्होने मेरे हाथ, सीने और पीठ पर भी तेल लगा कर मालिश किया। आखिर में वो मेरे पैर पर तेल लगा कर मालिश करने लगी।

आखिर मैं भी आदमी ही था। उनके हाथ लगने से मुझे जोश आने लगा। जोश के मारे मेरा लण्ड खड़ा होने लगा और मेरा नेकर तम्बू की तरह से उपर उठने लगा। धीरे धीरे मेरा लण्ड पूरी तरह से खड़ा हो गया और मेरा नेकर एक दम तम्बू की तरह हो गया। मैं जानता था की नेकर के छोटा होने की वजह से भाभी को मेरा लण्ड थोड़ा सा दिखायी दे रहा होगा।

वो मेरे पैरों की मालिश करते हुये मेरे लण्ड को भी देख रही थी और उनकी आंखे थोड़ा गुलाबी सी होने लगी थी। उनके चेहरे पर हलकी सी मुस्कान भी थी। मालिश करने के बाद वो चली गयी। उसके बाद मैं सो गया।

शाम के 6 बजे मेरी नींद खुली और मैं उठ गया। भाभी चाय लेकर आयी। मैने चाय पी। उसके बाद मैं बाथरूम चला गया। बाथरूम से जब मैं वापस आया तो भाभी ने कहा, अब लेट जाओ, मैं तुम्हारे बदन की फिर से मालिश कर देती हूं।

मैने कहा, अब रहने दो ना, भाभी।

वो बोली, क्या मालिश करने से कुछ आराम नहीं मिला।

मैने कहा, बहुत आराम मिला है। वो बोली, फिर क्यों मना कर रहे हो।

मैने कहा, ठीक है, तुम केवल मेरे पैर की ही मालिश कर दो।

वो खुश हो गयी। उन्होने मेरे पैर की मालिश शुरु कर दी। मेरा लण्ड फिर से खड़ा हो गया। इस बार मेरा नेकर थोड़ा पीछे की तरफ़ खिसक गया था जिस से भाभी को मेरा लण्ड इस बार कुछ ज्यादा ही दिखायी दे रहा था। भाभी मेरे लण्ड को देखते हुये मेरे पैरों की मालिश करती रही। मुझे साफ़ पता चल रहा था कि मेरे लण्ड को देख कर वो भी जोश मे अने लगी थी।

थोड़ी देर बाद वो बोली, मैं जब तेरे पैर की मालिश करती हूं तो तुझे क्या हो जाता है। मैं कहा, कुछ भी तो नहीं हुआ है मुझे। उन्होने मेरे लण्ड पर हलकी सी चपत लगते हुये कहा, फिर ये क्या है।

मैने कहा, जब तुम मालिश करती हो तो मुझे गुदगुदी सी होने लगती है, इसी लिये तो मैं मना कर रहा था।

उन्होने जोश मे भर कर मेरे लण्ड पर फिर से चपत लगते हुये कहा, इसे काबू में रखा कर।

मैने कहा, जब तुम मालिश करती हो तो ये मेरे काबू में नहीं रहता।

वो बोली, तुम भी अपने भैया की तरह ही हो। मैं जब उनके पैर की मालिश करती थी तो वो भी इसे काबू में नहीं रख पाते थे।

मैने मजाक करते हुये कहा, फिर वो क्या करते थे।

वो बोली, बदमाश कहीं का।

मैने कहा, बताओ ना भाभी, फिर वो क्या करते थे। भाभी शरमाते हुये बोली, वही जो सभी मर्द अपनी बीवी के साथ करते हैं।

मैने कहा, तब तो तुम्हें भैया के पैरों की मालिश नहीं करनी चाहिये थी। उन्होने पूछा, क्यों। मैने कहा, आखिर बाद में परेशानी भी तुम्हें ही उठानी पड़ती थी। वो बोली, परेशानी किस बात की, आखिर मेरा मन भी तो करता था।

मैने कहा, मेरा भी मन भी काबू में नहीं है, अब तुम ही बताओ कि मैं क्या करूं।

वो बोली, शादी कर लो।

मैने कहा, मैं अभी शादी नहीं करना चाहता।

उन्होने मुस्कराते हुये कहा, फिर बाथरूम में जा कर मुठ मार लो।

मैने अनजान बनते हुये पूछा, वो क्या होता है।

वो बोली, क्या सच में तुझे नहीं मालूम है कि मुठ मारना किसे कहते हैं।

मैने कहा, नहीं।

उन्होने मेरे लण्ड की तरफ़ इशारा करते हुये कहा, इसे अपने हाथ में पकड़ कर अपना हाथ तेजी से आगे पीछे करना। थोड़ी ही देर में इस में से ज्यूस निकल जायेगा और ये शान्त हो जायेगा।

मैने कहा, तुम मुझे थोड़ा सा कर के बता दो।
भाभी जोश में तो आ ही चुकी थी। वो बोली, तू बहुत ही बदमाश है। अपने लण्ड को बाहर निकाल, मैं बता देती हूं की कैसे करना है। मैने कहा, तुम खुद ही लण्ड को बाहर निकाल कर बताओ की कैसे करना है। उन्होने शरमाते हुये मेरे लण्ड को पकड़ कर नेकर से बाहर निकाल लिया। जैसे ही मेरा 9″ लम्बा लण्ड बाहर आया तो वो बोली, बाप रे, तेरा तो बहुत ही लम्बा है और मोटा भी।

मैने पूछा, अच्छा नहीं है क्या।

वो शरमाते हुये बोली, बहुत ही अच्छा है। मैने पूछा, भैया का कैसा था। वो बोली, उनका भी अच्छा था लेकिन तेरे जैसा लम्बा और मोटा नहीं था। मैने कहा, अब बताओ की कैसे करना है। उन्होने मेरे लण्ड को पकड़ कर अपना हाथ आगे पीछे करना शुरु कर दिया। मुझे बहुत मज़ा आने लगा। वो भी जोश में आने लगी।

2 मिनट मुठ मारने के बाद वो बोली, ऐसे ही कर लेना। अब जा बाथरूम में।

मैने कहा, बाथरूम में क्यों, अगर मैं यहीं कर लेता हूं तो इसमें क्या बुरायी है।

वो बोली, तेरा ज्यूस यहां गिरेगा और मुझे ही साफ़ करना पड़ेगा।

मैने कहा, मैं ही साफ़ कर दूंगा। वो बोली, ठीक है, यहीं कर ले। मैं जाती हूं। मैने उनका हाथ पकड़ कर कहा, तुम यहीं बैठो ना। वो बोली, तेरे लण्ड पर हाथ लगने से मुझे पहले ही थोड़ा सा जोश आ चुका है। अगर मैं तुझे मुठ मारते हुये देखूंगी तो मुझे और ज्यादा जोश आ जायेगा। फिर मेरे लिये बरदाश्त करना मुश्किल हो जायेगा। आखिर मैं भी तो औरत हूं और अभी जवान भी हूं। मैने कहा, मुझ पर भरोसा रखो, मैं तुम्हारे साथ कुछ भी नहीं करुंगा। वो बोली, मुझे पूरा भरोसा है तभी तो मैने तेरे लण्ड को पकड़ कर तुझे मुठ मारना बताया है। मैने पूछा, नेकर उतार दू या ऐसे ही मुठ मार लू। वो बोली, क्या नेकर भी खराब करेगा। उतार दे इसे।

मैने अपना नेकर उतार दिया और मुठ मारने लगा। भाभी मुझे मुठ मारते हुये देखती रही। मैं भाभी को देखता हुआ मुठ मार रहा था। धीरे धीरे वो और ज्यादा जोश में आ गयी। जोश के मारे मेरे मुह से आह… ऊह… की आवाज़ निकाल रही थी। वो मुझे और कभी मेरे लण्ड को देख रही थी। उन्होने अपना एक हाथ अपनी चूत पर रख लिया और सहलाने लगी। मैने पूछा, क्या हुआ। वो बोली, तू मुझे एक दम पागल कर देगा। मैं जा रही हूं।

मैने उनका हाथ पकड़ लिया और कहा, बैठो ना मेरे पास। वो चुप चाप बैठ गयी। मैं मुठ मारता रहा। भाभी जोश के मारे पागल सी हो चुकी थी। थोड़ी ही देर में उन्होने मेरा लण्ड पकड़ लिया और बोली, अब रहने दे, अब मुझसे बरदाश्त नहीं हो रहा है।

मैने पूछा, क्या हुआ। उन्होने अपना पेटीकोट उपर कर दिया और बोली, देख मेरी चूत भी एक दम गीली हो गयी। तूने तो मुझे पागल सा कर दिया है। अब मुझे बर्दाश्त नहीं हो रहा है, तू मेरी चूत को सहला दे, मैं तेरा लण्ड सहला देती हूं। मैने कहा, केवल सहलना ही है या कुछ और करना है। वो बोली, अगर तेरा मन करे तो मेरी चूत को थोड़ा सा चाट ले जिस से मुझे भी थोड़ा आराम मिल जायेगा। मैने कहा, कपड़े तो उतार दो। वो बोली, तू खुद ही उतार दे।

मैने भाभी के कपड़े उतार दीये। अब वो एक दम नंगी हो गयी। उनकी चूत एक दम साफ़ थी।
मैने कहा, तुम्हारी चूत तो एक दम साफ़ है।
वो बोली, मुझे चूत पर बाल बिलकुल भी पसन्द नहीं हैं इसी लिये मैं इसे हमेशा ही साफ़ रखती हूं। तेरा भी तो एक दम साफ़ है।
मैने कहा, मुझे भी बाल पसन्द नहीं हैं।

वो लेट गयी तो मैने उनकी चूत पर अपनी जीभ फिरानी शुरु कर दी।
वो बोली, ऐसे नहीं।
मैने कहा, फिर कैसे?
वो बोली, मुझे भी तो तेरा चूसना है। तू मेरे उपर उल्टा लेट जा और अपना लण्ड मेरे मुह के पास कर दे फिर चाट मेरी चूत को।

मैं भाभी के उपर 69 की पोजीशन में लेट गया। मैने उनकी चूत पर जीभ फिरना शुरु किया तो उन्होने मेरे लण्ड का सुपाड़ा अपने मुह में ले लिया और चूसने लगी। मुझे खूब मज़ा आने लगा। भाभी भी जोश के मारे सिसकारियां भरने लगी।

मैने उनकी चूत की दरार को अपने होंठो से दबाना शुरु कर दिया तो उन्होने जोर की सिसकारी ली।
मैने पूछा, क्या हुआ।
वो बोली- बहुत मज़ा आ रहा है, और जोर जोर से दबा।

मैने उनकी चूत की दरार को और ज्यादा जोर से दबाना शुरु कर दिया तो उन्होने मेरा लण्ड अपने मुह में और ज्यादा अन्दर ले लिया और तेजी के साथ चूसने लगी। मैने एक अंगुली उनकी चूत में डाल दी और अन्दर बाहर करने लगा। थोड़ी ही देर में भाभी की चूत से ज्यूस निकाल आया।

वो बोली, चाट ले इसे। मैने उनकी चूत का सारा ज्यूस चाट लिया। थोड़ी ही देर में मेरे लण्ड का ज्यूस भी निकालने लगा तो भाभी सारा का सारा ज्यूस निगल गयी। उसके बाद मैं हट गया और उनके बगल में लेट गया।

भाभी मेरा लण्ड सहलने लगी। थोड़ी देर बाद वो बोली, आज तो वो हो गया जो कि नहीं होना चाहिये था।

मैने कहा, मैने ऐसा क्या कर दिया।

वो बोली, तूने मुझे अपना लण्ड दिखा कर आज मुझे पागल सा कर दिया।

मैने कहा, मैने तो नहीं दिखाया था।

वो बोली, तेरा नेकर ही इतना छोटा और ढीला था की मुझे तेरा लण्ड दिखायी दे गया। मैं अपने आप को काबू में नहीं रख पायी इसी लिये मैने तुझसे पैर की दोबारा मालिश करने के लिया कहा था। मैं तेरा लण्ड देखना चाह्ती थी क्यों की मुझे तेरा लण्ड बहुत ही लम्बा और मोटा दिख रहा था।
मैने कहा, अब तो देख लिया ना।
वो बोली, हा, देख भी लिया और पसन्द भी कर लिया।
मैने कहा, अब क्या इरादा है।

वो बोली, तू भी वही कर जो तेरे भैया मेरे साथ करते थे।

मैने कहा, ये ठीक नहीं है।
वो बोली, क्या ठीक है क्या नहीं, मैं कुछ नहीं जानती। अगर तू मेरे साथ नहीं करेगा तो मैं मर जाऊगी।
मैने पूछा, मैं तुम्हारे साथ क्या करूं। वो बोली, जो तेरे भैया मेरे साथ करते थे।

मैने कहा, मैने तो कभी देखा ही नहीं की भैया तुम्हारे साथ क्या करते थे। भाभी ने मेरे गालो को जोर से काट लिया और बोली, अब चोद दे मुझे।

मैने कहा, दर्द होगा।

वो बोली, तो मैं क्या करूं, होने दे। जो होगा देखा जायेगा।
मैने कहा, तुम मेरी भाभी हो, मैं तुम्हें कैसे चोद सकता हूं?
भाभी का तो जोश के मारे बुरा हाल था। वो बोली, तू मुझे नहीं चोदेगा लेकीन मैं तो तुझे चोद सकती हूं।
मैने कहा, फिर तुम ही चोदो।

मेरा लण्ड फिर से खड़ा हो चुका था। भाभी मेरे उपर आ गयी। उन्होने मेरे लण्ड के सुपाड़े को अपनी चूत के बीच रखा और दबाने लगी। उनके चेहरे पर दर्द की झलक साफ़ दीख रही थी फिर भी वो रुकी नहीं। मेरा लण्ड धीरे धीरे उनकी चूत में घुसता ही जा रहा था। उनकी चूत बहुत ही टाईट थी। उन्होने दबाना जारी रखा तो थोड़ी ही देर में उनकी आंखो में आंसू भी आ गये।

मैने पूछा, क्या हुआ।
वो बोली, दर्द बहुत हो रहा है।

मैने कहा, फिर रुक जाओ ना, क्यों इतना दर्द बर्दाश्त कर रही हो।
वो बोली, मैं पागल हो गयी हूं।

अब तक मेरा लण्ड भाभी की चूत में 7″ तक घुस चुका था। दर्द के मारे भाभी का बुरा हाल हो रहा था। तभी वो अपने बदन का सारा जोर देते हुये अचनक मेरे लण्ड पर बैठ गयी। मेरा पूरा का पूरा लण्ड उनकी चूत में समा गया। उनके मुह से जोर की चीख निकाली। उनका सारा बदन थर थर कांपने लगा। उनके चेहरे पर पसीना आ गया। उनकी सांसे बहुत तेज चल रही थी।

वो मेरे उपर लेट गयी और मेरे होंठो को चूमने लगी। मैं उनकी कमर और चूतड़ को सहलने लगा।

तभी मुझे बदमाशी सूझी। मैने उनकी गाण्ड के छेद पर अपनी अंगुली फिरानी शुरु कर दी तो उन्हें मज़ा आने लगा।

अचनक मैने अपनी अंगुली उनकी गाण्ड में डाल दी तो उन्होने जोर की सिसकारी ली और बोली, बदमाश कहीं का। पहले तो कह रहा था की तुम मेरी भाभी हो, मैं तुम्हें कैसे चोद सकता हूं। अब मेरी गाण्ड में अंगुली डाल रहा है। क्या मैं अब तेरी भाभी नहीं रह गयी।

मैने कहा, बिलकुल नहीं, अब तो तुमने मेरा लण्ड तुमने अपनी चूत में डाल लिया है। अब तुम मेरी भाभी नहीं रह गयी हो।
वो बोली, फिर मैं अब तेरी क्या लगती हूं।

मैने कहा, बीवी।
वो बोली, फिर चोद दे ना अपनी बीवी को। क्यों तरसा रहा है मुझे।

अब तो मैने तेरा पूरा का पूरा लण्ड अपनी चूत के अन्दर ले लिया है। मेरी अंगुली अभी भी भाभी की गाण्ड में थी। मैने फिर शरारत की और कहा, मैं तुम्हें एक ही शर्त पर चोद सकाटा हूं।

वो बोली, कैसी शर्त।

मैने कहा, मैं तुम्हारी गाण्ड भी मारुंगा। वो बोली, अपनी बीवी से भी पूछना पड़ता है क्या। मैने कहा, मुझे नहीं मालूम।

वो बोली, तेरे भैया ने तो मुझसे कभी नहीं पूछा, जब भी उनका मन किया उन्होने मेरी चुदायी की और जब उनका मन हुआ तो उन्होने मेरी गाण्ड भी मारी। मैने कहा, इसका मतलब तुम भैया से गाण्ड भी मरवा चुकी हो।
वो बोली, तो क्या हुआ, मज़ा तो दोनो में ही आता है। अब मुझे ज्यादा मत परेशान कर, चोद दे ना।
मैने कहा, थोड़ा सा तुम चोदो फिर थोड़ा सा मैं चोदुंगा। वो बोली, ठीक है, बाबा।

भाभी ने धीरे धीरे धक्के लगाने शुरु कर दिये तो उनके मुह से चीख निकालने लगी।

मैने पूछा, अब क्या हुआ। वो बोली, दर्द हो रहा है। मैने पूछा, क्यों, अब तो पूरा अन्दर ले चुकी हो।

वो बोली, अन्दर लेने से क्या होता है। मेरी चूत अभी तेरे लण्ड के साईज की थोड़े ही हुयी है।
मैने पूछा, मेरे लण्ड की साईज की कैसे होगी।
वो बोली, जब तू मुझे कई बार चोद देगा तब। वो धीरे धीरे धक्के लगाती रही।
मैने पूछा, तुम्हारी चूत को चौड़ा करने के लिये मुझे कितनी बार चोदना पड़ेगा।
वो बोली, ये तो तेरे उपर है की तू किस तरह से मेरी चुदायी करता है। मैने पूछा, क्या एक बार में भी हो सकता है।
वो बोली, बिलकुल हो सकता है, अगर तू मुझे पहली बार में ही कम से कम 1 घन्टे चोद सके तो। लेकीन मैं जनति हूं की तू ऐसा नहीं कर पयेगा।
मैने पूछा, क्यों।
वो बोली, तूने कभी किसी को पहले चोदा है।
मैने कहा, नहीं। वो बोली, तो फिर तू 10 मिनट से ज्यादा रुकेगा ही नहीं।
मैने कहा, रुकुनगा क्यों नहीं। वो बोली, तुझे मेरी चुदायी केरने में जोश ज्यादा आ जायेगा इस लिये।

भाभी को धक्के लगते हुये लगभग 10 मिनट हो चुके थे और वो इस दौरन 1 बार झड़ भी चुकी थी। तभी मेरे लण्ड का ज्यूस निकाल पदा और साथ ही साथ वो भी फिर से झड़ गयी।

वो मुस्कराते हुये बोली, क्या हुआ पहलवान। मैने कहा, वही हुआ जो तुम कह रही थी। वो बोली, मेरी चूत धीली करने के लिये तुझे कम से कम 1 घन्टे तक मेरी चुदायी करनी पदेगि। मैं ये भी जानती हूं की अगली बार तू ज्यादा से ज्यादा 15 मिनट ही मुझे चोद पयेगा। इस तरह जब तू 3-4 बार मेरी चुदायी कर देगा तब कुल मिलकर 1 घन्टे हो जयेनगे और मेरी चूत ढीली हो जायेगी और तेरे लण्ड के साईज की हो जायेगी, समझ गये बच्चु। मैने कहा, बिलकुल समझ गया, मेडम।

भाभी ने मेरे लण्ड को अपनी चूत के अन्दर ही रखा और मेरे उपर लेट गयी। वो मेरे होंठो को चूमती रही और मैं उनकी चूंचियो को मसलता रहा। 10 मिनट के बाद मेरा लण्ड उनकी चूत में ही फिर से खड़ा होने लगा तो वो बोली, अब तुम मुझे चोदो। मैने कहा, जैसी आप की मरजी। वो मुस्कराते हुये मेरे उपर से हट गयी और लेट गयी। मैं उनके उपर आ गया। मैने उनकी चुदायी शुरु कर दी। मैं पूरे जोश में था और जोर जोर के धक्के लगाते हुये उनको चोद रहा था।

वो बोली, शाबाश बहादुर, बहुत ही अच्छी तरह से चोद रहे हो, चोदते रहो, रुकना मत, थोड़ा और जोर के धक्के लगाओ। मैने और ज्यादा तेजी के साथ धक्के लगने शुरु कर दिये। लगभग 15 मिनट की चुदायी के बाद मैं झड़ गया। भाभी भी इस चुदायी के दौरान 2 बार झड़ चुकी थी।

मैने उन्हें सारी रात खूब जम कर चोदा। वो भी पूरी तरह से मस्त हो गयी थी और मैं भी। सुबह तक मैं उ्न्हे 6 बार चोद चुका था। सुबह को मैने पूछा, तुम्हारी चूत मेरे लण्ड की साईज की हो गयी या नहीं।

वो बोली, जब तुमने मेरी 4 बार चुदायी कर दी फिर उसके बाद मैं चिल्लायी क्या। मैने कहा, बिलकुल नहीं। वो बोली, फिर समझ लो की मेरी चूत तुम्हारे लण्ड की साईज की हो गयी।

थोड़ी देर बाद वो बोली, मैं एक बात तुमसे कहना चाहती हूं।

मैने पूछा, अब क्या है। वो बोली, मुझे तो तुम्हारा लण्ड बहुत पसन्द आ गया है। अगर तुम्हें मेरी चूत भी पसन्द आ गयी हो तो तुम मुझसे शादी कर लो। मैं तुमसे 1 साल छोटी भी हूं और जवन भी। मैं तुम्हें पूरा मज़ा दूंगी और एक दम खुश रखूगी। अगर तुम मुझसे शादी नहीं करोगे तो मैं तो तुम्हारी रखैल बन कर रह जाऊगी। जब तुम्हारी शादी हो जायेगी तो मुझे कौन चोदेगा। भाभी खूबसुरत थी ही। मैं उन्हें बहुत प्यार भी करता था और वो भी मुझसे बहुत प्यार करती थी। उनकी बात सही भी थी क्यों की मुहल्ले के लोग बाद में उन्हें मेरी रखैल ही कहते।

मैने मजाक किया, अगर तुम मुझसे शादी करना चाहती हो तुम्हें एक काम करना पड़ेगा। वो बोली, मैं सब कुछ करने के लिये तैयार हूं। मैने कहा, तुमने उस पागल को देखा है ना जो हमारे मुहल्ले में घूमता रहता है। वो बोली, हां देखा है। मैने कहा, तुमने उसका लण्ड भी देखा होगा। वो बोली, देखा है। मैने पूछा, उसका लण्ड कैसा है। वो बोली, उसका तो तुमसे भी ज्यादा लम्बा और मोटा लगता है।

मैने कहा, मैं उसे एक दिन घर ले आता हूं, तुम उस से चुदवा लो।

वो बोली, ठीक है, ले आना। मैं तुमसे शादी करने के लिये कुछ भी कर सकती हूं। मैं उस पागल से भी चुदवा लूंगी।

मैने कहा, मैं तो मजाक कर रहा था।

वो बोली, तो क्या तुम समझी की मैं सच में ही उस पागल से चुदवा लूंगी।

मैने कहा, मैं तुमसे एक ही शर्त पर शादी करुंगा।

वो बोली, मैने कहा ना की मुझे तुम्हारी हर शर्त मनज़ूर है।

मैने कहा, सुन तो लो। वो बोली, फिर सुना ही दो। मैने कहा, मैं तुम्हारी गाण्ड मारुंगा तब ही तुमसे शादी करुंगा।

वो बोली, जब मैने तुम्हारा लण्ड अपनी चूत के अन्दर लिया तब ही मैं तुम्हारी बीवी बन गयी थी, भले ही हमारी शादी नहीं हुयी थी। अपनी बीवी से ये बात पूछी नहीं जाती। अभी मार लो मेरी गाण्ड।

मैने कहा, फिर सुहागरात के दिन मैं क्या करुंगा।

वो बोली, फिर रहने दो, सुहागरात के दिन तुम मेरी गाण्ड चोद लेना।

मैने कहा, एक दिक्कत और है।

वो बोली- अब क्या है।

मैने कहा, तुमसे शादी करने के बाद मैं सारी जिन्दगी किसी कुवांरी चूत को नहीं चोद पाऊगा।

वो बोली, मैं तुम्हारे लिये कुंवारी चूत का इनतजाम भी कर दूंगी। मैने पूछा, वो कैसे। वो बोली, ये मुझ पर छोड़ दो। मैने कहा, फिर मैं पण्डित से पूछ लेता हूं की हमें शादी कब करनी चाहिये। वो बोली, पूछ लेना। मैने पण्डित से बात की तो उसने 3 दिन बाद का मुहुरत बताया। 3 दिनो तक मैने संध्या की खूब जम कर चुदायी की। अब उसे और ज्यादा मज़ा आने लगा था।

संध्या चुदवाते समय मेरा पूरा साथ देती थी इस लिये मुझे भी खूब मज़ा आता था।

तीसरे दिन हम दोनो ने मन्दिर में शादी कर ली। रात में मैने संध्या की गाण्ड मारी। वो बहुत चीखी और चिल्लायी लेकिन उसने एक बार भी मुझे रोका नहीं। उसकी गाण्ड कई जगह से कट फ़ट गयी थी और उसकी गाण्ड की हालत एक दम खराब हो गयी थी। वो 2 दिनो तक ठीक से चल भी नहीं पा रही थी।

मैने पूछा, मैं जब तुम्हारी गाण्ड मार रहा था और तुम्हें इतनी ज्यादा तकलीफ़ हो रही थी तो तुमने मुझे रोका क्यों नहीं। वो बोली, मैं अपने पति को कैसे मना करती। आखिर बाद में मुझे भी तो गाण्ड मारवने में मज़ा आया। मैने कहा, वो तो आना ही था। अब मेरे लिये कुंवारी चूत का इनतेजाम कब करोगी। वो बोली, बस जल्दी ही हो जायेगा।

शादी के 4 दिन के बाद जब मैं दुकान से घर आया तो घर पर एक लडकी बरतन साफ़ कर रही थी। उसके कपड़े थोड़ा गन्दे थे लेकीन वो थी बहुत ही खूबसुरत। उसकी उमर लगभग 18 साल की रही होगी। मैं सीधा अपने कमारे में चला गया। संध्या भी मेरे पीछे पीछे आ गयी।

मैने संध्या से पूछा, ये कौन है। वो मुस्कराते हुये बोली, मैने इसे घर का काम करने के लिये रखा है। इसका नाम रीना है। पसन्द है ना तुम्हें। मैं इसे तुम्हारे काम के लिये भी जल्दी ही तैयार कर लू्ंगी। मैने कहा, तुम्हारी पसन्द का तो जवाब नहीं है। कहां रहती है ये।

संध्या ने कहा, ये गावँ में रहती थी लेकिन अब यहीं रहेगी। मेरे भैया जब शादी में आये थे तो मैने उन से कहा था की मुझे घर का काम करने के लिये एक लड़की चाहिये। उन्होने ने ही इसे यहां पर भेजा है। ये हमारे साथ ही रहेगी। मैने कहा, जल्दी तैयार करो इसे। मैं इसे जल्दी से जल्दी चोदना चाहता हूं। वो बोली, थोड़ा सबर करो।

रीना बरतन साफ़ कर के कमारे में आ गयी। उसने संध्या से पूछा, मालकिन, मैने घर का सारा काम कर दिया है, और कुछ करना हो तो बता दो। संध्या ने कहा, तू तो मेरे गावँ की है, मुझे मालकिन मत कहा कर।

वो बोली, फिर मैं आप को क्या कह कर बुलाऊ। संध्या ने कहा, तू मुझे दीदी कहा कर और इन्हें जीजू। वो खुश हो गयी और बोली, ठीक है, दीदी। संध्या ने कहा, मेरी तबियत कुछ खराब रहती है इस लिये तू मेरे साथ ही सो जना। वो बोली, फिर जीजू कहन सोयेनगे। संध्या ने कहा, वो भी मेरे पास ही सोयेनगे। वो बोली, फिर मैं आप के पास कैसे सो पौनगि। संध्या ने कहा, मेरे एक तरफ़ तुम सो जाना दूसरी तरफ़ ये सो जायेगे। वो बोली, ये तो ठीक नहीं होगा।

संध्या ने कहा, शहर में सब चलता है। यहां ज्यादा शरम नहीं की जाती।

वो बोली, ठीक है, मैं आप के पास ही सो जाऊगी।

हम सब ने खाना खाया उसके बाद मैं अपने कमरे में सोने के लिये आ गया। मैने केवल लुंगी ही पहन रखी थी। थोड़ी देर बाद संध्या और रीना भी आ गये। संध्या ने बरा और पेन्टी को छोड़ कर अपने बाकी के कपड़े उतार दिये। उसके बाद उसने मैक्सी पहन ली। संध्या ने रीना से कहा, अब तू भी अपने कपड़े उतार दे। मैं तुझे भी एक मैक्सी देती हूं, उसे पहन लेना।

वो बोली, नहीं, मैं ऐसे ही ठीक हूं। संध्या ने कहा, मैं जो कहती हूं, उसे मान लिया कर। सोते समय सारा बदन खुला छोड़ देना चाहिये। वो बोली, जीजू यहां हैं।

संध्या ने कहा, जीजू से कैसी शरम, ये तुझे पकड़ थोड़े ही लेंगे। उतार दे अपने कपड़े। रीना ने शरमाते हुये अपनी शलवर और कमीज़ उतार दी। उसका बदन देखकर मैं दंग रह गया। उसकी चूंचिया अभी बहुत ही छोटी छोटी थी। संध्या ने उसे भी एक मैक्सी दे दी तो उसने वो मैक्सी पहन ली।

संध्या मेरे बगल में लेट गयी। रीना संध्या के बगल में लेट गयी। हम सब कुछ देर तक बातें करते रहे। उसके बाद सोने लगे। थोड़ी ही देर में रीना सो गयी तो संध्या ने मुझसे कहा, अब तुम मेरी चुदायी करो।

मैने कहा, इसके सामने। वो बोली, मैं चाह्ती हूं की ये हम दोनो को देख ले, तभी तो मैं इसे तैयार करुंगी। तुम मुझे खूब जोर जोर से चोदना जिस से ये जाग जाये। मैने कहा, ठीक है।

मैने संध्या को जोर जोर से चोदना शुरु कर दिया। सारा बेड जोर जोर से हिलने लगा। थोड़ी ही देर में रीना की नींद खुल गयी और वो उठ कर बैठ गयी। जैसे ही वो उठी तो मैने अपना लण्ड संध्या की चूत से बाहर निकाल लिया।

रीना ने जब हुम दोनो को देखा तो शरमा गयी। वो बोली, दीदी, मैं बाहर जा रही हूं।

संध्या ने कहा, क्यों, क्या हुआ।
वो बोली, मुझे शरम आती है।
संध्या ने कहा, पागली, इसमें शरमाने की कौन सी बात है। तू अपना मुह दूसरी तरफ़ कर ले और सो जा। रीना उठ कर जाना चाहती थी लेकीन संध्या ने उसका हाथ पकड़ लिया। रीना कुछ नहीं बोली।

वो संध्या के बगल में ही लेट गयी लेकिन उसने अपना मुह दूसरी तरफ़ नहीं किया। संध्या ने मुझसे कहा, अब तुम अपना काम जल्दी से पूरा करो, मुझे नींद आ रही है।

मैने संध्या को चोदना शुरु कर दिया। रीना तिरछी निगाहों से हम दोनो के देख रही थी।
15 मिनट की चुदायी के बाद जब मैं झड़ गया तो मैने अपना लण्ड संध्या की चूत से बाहर निकाला। संध्या उठ कर बैठ गयी और उसने मेरा लण्ड चाट चाट कर साफ़ कर दिया। रीना ने शरम के मारे अपनी आखे बन्द कर ली।

संध्या ने अपना मुह रीना की तरफ़ कर लिया और अपना हाथ उसकी चूचियों पर रख दिया। उसने कहा, दीदी, अपना हाथ हटा लो।
संध्या ने कहा, मुझे तो ऐसे ही सोने की आदत है। अब सो जा।
रीना कुछ नहीं बोली। उसके बाद हम सब सो गये।

सुबह हम सब उठ गये। रीना फ़्रेश होने चली गयी। संध्या ने मुझसे कहा, अब तुम इसे बार बार अपना लण्ड दिखने की कोशिश करना लेकीन इसे हाथ मत लगाने देना। इसे ऐसा लगना चाहिये की जैसे तुम अपना लण्ड इसे दिखाने की कोशिश नहीं कर रहे थे। मैने कहा, ठीक है। रीना फ़्रेश हो कर आ गयी।

संध्या ने कहा- अब तू घर में झाड़ु लगा ले।
वो झाड़ु लगाने चली गयी।

संध्या ने मुझसे कहा- अब तुम जा कर फ़्रेश हो जाओ। आज से अपना टावेल साथ मत ले जना और एकदम नंगे ही नहाना, मैं रीना से तुम्हारा टावेल भेज दूंगी।
मैने कहा, ठीक है।

Antarvasna कहानी जारी रहेगी।
विधवा भाभी की चुदाई-2

TOTTAA’s Disclaimer & User Responsibility Statement

The user agrees to follow our Terms and Conditions and gives us feedback about our website and our services. These ads in TOTTAA were put there by the advertiser on his own and are solely their responsibility. Publishing these kinds of ads doesn’t have to be checked out by ourselves first. 

We are not responsible for the ethics, morality, protection of intellectual property rights, or possible violations of public or moral values in the profiles created by the advertisers. TOTTAA lets you publish free online ads and find your way around the websites. It’s not up to us to act as a dealer between the customer and the advertiser.

 

👆 सेक्सी कहानियां 👆