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मेरा नाम मोहित है ! मैं नागपुर Hindi Porn Stories में रहता हूँ ! आप लोगो को मेरी कहानी बताता हूँ ! एक दिन मैं अपने दोस्त वरुण के यहाँ गया ! उसके घर में कोई भी नहीं था ! मैंने आवाज़ लगाई पर किसी ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी ! मैं अन्दर चला गया तो उसके कमरे की तरफ जाते हुए मुझे बाथरूम से आवाज़ आई ! मुझे लगा शायद वो नहा रहा होगा ! मुझे मजाक सूझा ! मैंने दरवाज़े को खोला तो अन्दर से चिल्लाने की आवाज़ आई ! मैंने देखा तो एकदम से आश्चर्य में पड़ गया ! अन्दर उसकी बहन नहा रही थी ! उसका नाम लवी था ! उसका पूरा बदन पानी से गीला था ! उसको नंगा देख के मेरा लौड़ा खड़ा हो गया ! उसने एकदम से दरवाज़ा बंद कर लिया ! फिर मैं वहां से चला गया ! पर वहां से जाने के बाद भी मुझे उसका नंगा बदन याद आ रहा था !
उस दिन मैं उसके बारे में ही सोचता रहा ! फिर दूसरे दिन जब मैं उसके घर गया तो वरुण की तबियत बहुत ख़राब थी ! वो सोया हुआ था ! उसकी बहन दूसरे कमरे में लेट कर टी-वी देख रही थी ! उसने मुझे आवाज़ दी,”मिथ्स इधर आ ! तूने नया मोबाइल लिया ?”
मैं बोला,”हाँ !”
वो बोली,”दिखा, कैसा है?”
मैं एकदम से डर गया क्यूंकि मेरे मोबाइल में ब्लू फिल्म थी ! मैंने उसको फोल्डर के बहुत अन्दर छुपा के रखा था ! फिर मैंने उसे मोबाइल दिया ! मुझे क्या पता था कि उसे मेरे मोबाइल की पूरी समझ आ जायेगी, वो बोली,”तेरे पास तो बहुत गाने हैं! मुझे भी दे !”
मैंने उसे पूरे गाने एक साथ भेज दिए और वहां से चला गया! थोड़ी देर बाद जब वापस आया तो उससे मोबाइल माँगा ! वो बोली,” दो मिनट रुक जा! बस हो ही गया है और वो मुझसे बाते करने लगी! उसने मुझे पूछा ,”क्या तेरी कोई गर्लफ्रेंड है?”
मैंने कहा,”नहीं !”
फिर वो एकदम से बोली,”तू इतना बड़ा हो गया है (उस समय मेरे उम्र १८ साल की थी) और तेरी एक भी गर्लफ्रेंड नहीं है?”
मैंने भी उसे पूछा,”क्या तेरा कोई बॉयफ्रेंड नहीं है?”
उसका भी जवाब न में ही आया ! फिर उसने कहा,”छोड़, जाने दे !”
फिर वो मोबाइल में और गाने ढूँढने लगी तो एकदम से उसे ब्लू फिल्म वाला फोल्डर दिखा ! वो एकदम से चौंक गई ! उसके मुंह से हुउऊ…….. करके आवाज़ निकली! मैं एकदम से डर गया ! उसे पूछा,” क्या हुआ ?”
तो वो बोली,”बच्चू ! १८ साल का भी नहीं हुआ और अभी से ऐसी चीज़ें देखता है? “
मैं बहुत डर गया ! उसे पूछा,”क्यूँ, क्या हुआ ?”
उसने कहा,” यह क्या हैं ?”
मैं चुप हो गया ! फिर थोड़ी देर बाद मैं बोला,” तुझे उससे क्या? तुझे जो लेना है वो ले और मोबाइल वापस दे !”
फिर मैंने एकदम से उसे पूछा,” इतनी भोली मत बन ?? जैसे मुझे कुछ पता ही नहीं कि तू भी चुपके से ब्लू फिल्म देखती है!”
वो मुझे बोली,” तुझे कैसे पता?”
मैं बोला,”उस दिन जब मैंने तुझे बाथरूम में देखा था तो तू मोबाइल पर ब्लू फिल्म देख रही थी और अपनी चूत में ऊँगली डाल रही थी!”
वो एकदम से डर गई और मुझे बोली,”चुप बैठ !”
फिर वो मुझे बोली,” सॉरी! मैं तेरी बात किसी को नहीं बताउंगी तो तू भी मेरी बात मत बताना !!!”
मैंने कहा,”ठीक है !”
फिर हम नोर्मल हो के बातें करने लगे ! फिर उसने मुझे पूछा,” क्या तूने कभी किसी के साथ सेक्स किया है?”
मैंने कहा,”नहीं ! अभी तक मेरी कोई गर्लफ्रेंड ही नहीं है तो किसको चोदूंगा?”
उसने कोई जवाब नहीं दिया ! फिर मैंने उसे एकदम से एक क्लिप दिखाया ! वो बोली,” क्या है और दखने लगी !” वो शरमा गई !
मैं बोला,”शरमा मत ! हमारे अलावा कोई नहीं है! देख ले ! न जाने फिर कब देखने को मिले ?”
वो देख रही थी ! अचानक मुझे पता नहीं क्या सूझा, मैं उसके बाजू में जा कर बैठ गया और हम साथ-साथ उस क्लिप को देखने लगे ! वो बहुत गरम हो गई थी और मेरा लौड़ा भी तन गया था ! मैंने जान-बूझ कर उसकी टांगों पर हाथ लगाया ! उसने मेरा हाथ हटाया पर मैं मानने वाला नहीं था! मैंने उसका हाथ मेरे लौड़े पे रख दिया! उसने मुझे डांट दिया और बोली,”अच्छे से रहो !”
मैंने उसको पूछा ,” क्यूँ न हम भी पहली बार सेक्स करके देखें ?”
वो बोली,”पागल है क्या?”
मैंने कहा,” ठीक है ! तो मुझे सिर्फ एक बार तेरे स्तन ही दिखा दे !”
वो बोली,” नहीं!”
मैंने जबरदस्ती उसके टॉप पर अपना हाथ लगाया ! वो जोर से चिल्लाई ! मैंने एक हाथ से उसका मुंह दबा दिया और उसके स्तन दबाने लगा ! वो छटपटाने लगी ! मैंने उसका टॉप उतार दिया और उसके वक्ष जोर से दबाने लगा! वो भी शांत हो गई! मैं उसके बूब्स चूसने लगा !
वो बोली,” यह गलत है! अगर कोई आ गया तो हम फंस जायेंगे !”
मैंने कहा,”तू उसकी चिंता मत कर ! मै सारे दरवाजे बंद करके आया हूँ !”
वो बोली,”अगर वरुण आ गया तो ?”
मैंने कहा,”उसका भी दरवाज़ा बंद कर दिया है!”
फिर मैंने अपने कपड़े उतार दिए और अपना लौड़ा उसके हाथ में दे दिया और कहा,” अब इसे मुंह में ले और लॉलीपोप जैसा चूस !”
वो बोली,” तू भी तो मेरी चूत चाट !”
फिर मैं उसकी चूत की तरफ लेट गया और अपना लौड़ा उसके मुंह में दे दिया ! हम दोनों ५-७ मिनट तक चूसते ही रहे ! फिर मैंने उसको सीधा किया और अपने लौड़े पर क्रीम लगाई ! मैंने उसकी चूत पर भी बहुत सारी क्रीम लगा दी !
वो बोली,”कंडोम नहीं है?”
मैंने कहा,”झड़ने से पहले ही निकाल लूँगा !”
वो बोली,”पक्का निकाल लेना !”
फिर मैंने उसकी चूत के बीच में अपना लौड़ा रखा और धीरे-धीरे अन्दर डालने लगा ! वो चिल्ला रही थी,” बहुत दर्द हो रहा है………..बाहर निकाल !!!!!!!!!!”
पर मैं कहाँ मानने वाला था !!! मैंने जोर से झटका मारा और मेरा ७ इंच का लौड़ा उसकी चूत में पूरा घुस गया ! वो जोर से चिल्लाई………………! मैंने उसका मुँह दबा दिया ! वो रो रही थी ! उसकी चूत में से खून आ रहा था ! फिर मैं धीरे-धीरे डालने लगा ! करीब १५ मिनट तक उसे चोदता रहा ! पहले वो चिल्लाती रही लेकिन फिर उसे भी मज़ा आने लगा ! वो भी नीचे से झटके देने लगी ! थोड़ी देर बाद उसकी चूत में से पानी आने लगा !
मैं उसे और जोर से चोदने लगा ! कुछ देर बाद मैं भी झड़ गया ! चुदाई करते-करते मेरे ध्यान में कुछ भी नहीं रहा और मैंने पूरा वीर्य उसकी चूत में ही डाल दिया ! उसके भी ध्यान में यह बात नहीं आई ! थोड़ी देर बाद जब हम अलग हुए तो वो बोली,”यह हमने क्या किया ? बिना प्रोटेक्शन के ही सेक्स किया ? और तुमने पूरा वीर्य मेरी चूत में ही डाल दिया ??”
वो रोने लगी और बोली ,”अगर मैं गर्भवती हो गई तो ?”
मैंने कहा,” तू डर मत ! मैं तुझे आई-पिल (गर्भ निरोधक दवा) ला दूंगा ! वो ले लेना और मैं उठ गया !”
उसने बिस्तर पर देखा तो वो डर गई ! उसका खून पड़ा हुआ था ! मैंने कहा,”डर मत ! पहली बार में सबका खून निकलता है !”
फिर मैं वहां से चला गया ! दूसरे दिन मैं फिर से उसे मिलने आया और उसे आई-पिल दी और बोला,” कल मजा आया न ? आज फिर से सेक्स करेंगे ! आज तो मंहगा वाला कंडोम भी लाया हूँ !”
उस दिन हम फिर से सेक्स करने लगे ! Hindi Porn Stories
आपको हमने बहुत से किस्से Hindi Porn Stories पहले भी सुनाये हैंआप शायद हमें भूल गए, लेकिन हम भूल नहीं पाये हैं
आपने इतना प्यार हमको दिया कि हम आप के लिए एक बार फ़िर से आए है
तो एक बार फ़िर से आता हूँ असली बात पे
अपनी औकात पे
बात है उस कमसिन की, गर्मी के एक दिन की
मैं बैठा था उदास, क्यूंकि लंड को लगी थी बड़ी ज़ोर की प्यास
मेरा लंड भी तो दशहरा मनाना चाहता था
और किसी की चूत में ठिकाना चाहता था
एक चुलबुली लड़की को देख कर मेरा मन बहक गया
लंड का चेहरा खिल गया और चहक गया
आख़िर उस लड़की ने मेरी तरफ़ देख लिया
मैंने भी उस लड़की की तरफ़ देखते हुए एक स्माइल को फेंक दिया
वो हँसने लगी, मुझे लगा कि फंसने लगी
मैंने हिम्मत की उसके पास जाने की
उसे चुदाई के लिए मनाने की
मैंने कहा की आप बहुत सुंदर हो
सुन्दरता का समुन्दर हो
वो बोली कि सब यही कहते हैं
और बस मुझे ही देखते रहते हैं
मैंने कहा चलो कहीं चलते हैं
आपको ले जाने के लिए दिल में अरमान मचलते हैं
वो मान गई,
मेरी तो जैसे कि जान गई
मैं उसे ले के अपने रूम पे आ गया
उसे चोदने का मेरे दिल पे जैसे जूनून छ गया
मैंने उसे अपने बिस्तर पे लिटा दिया
और घर का दरवाज़ा बंद कर दिया
उसने कुरता और ब्रा उतार के अपने मोम्मो को मेरे सामने धर दिया
उसके मोम्मे देख के मुंह में पानी आ गया
और मैंने उसके मोम्मों को अपने हाथ में जल्दी से धर लिया
वो बोली इन्हे पकड़ोगे ही या मुंह में भी लोगे
बस बिठाने के लिए ही लाये हो या चुदाई का सुख भी दोगे
उसकी ये बात सुन के मेरा हौसला बढ़ गया
और अपने कपड़े उतार के मैं उस के ऊपर चढ़ गया
मैंने उसकी चूत को पहले ऊँगली से और फ़िर अपने लंड से चोद डाला
एक या दो बार नहीं चार बार उसका पानी निकाला
फ़िर मैंने उसे उल्टा किया और उसकी गांड मारने की सोच रहा था
वो बोर न हो इस लिए उसके मोम्मे भी नोच रहा था
मैंने उसे कहा कि मेरा लंड चूस लो
गला सूख रहा होगा इसलिए थोड़ा लंड का जूस लो
वो बोली इसके पैसे अलग लूंगी
और पहले पिछले पैसे का हिसाब कर लो तभी और चुदाई करने दूँगी
मैंने कहा कि पैसे कि क्या बात करती हो
तुम जल्दी बता दो मुझे तुम्हारी गांड भी लेनी है
पैसे की बात मत करो मुझे बहुत बेचैनी है
वो बोली कि तुमने मुझे चार बार चोदा है तो ५०००० दे दो
मैंने कहा ये तो बहुत ज़्यादा हैं
सब तो ५०० लेती हैं, तुम भी ले लो
वो बोली मेरा रेट यही है
और मैंने अपनी भाई से भी कही है
अगर तुमने पैसे नहीं दिए तो वो आता ही होगा
और अपने साथ ४ -५ गुंडे लाता ही होगा
ये सुन के मेरी तो फट ही गई
मैंने कहा इस वक्त मेरे पास १०००० हैं सो ले जाओ
लेकिन कृपया अपने भाई को मत बुलाओ
वो बोली कि ठीक है लेकिन तुमने अभी मेरी गांड भी तो लेनी है
और उसकी पेमेंट एक्स्ट्रा देनी है
मैंने कहा कि बस बहुत हो गया है
अब मुझे कुछ भी नहीं चाहिए, आप जा सकती हो
वो चली गई तो मैं सोचता रहा
कि ५०००० में तो मैं उमर भर चुदाई का मज़ा ले सकता था
और ये बहन की लौड़ी १०००० तो ले गई
और ४०००० और मांगती है
जाने दो ये पैसा तो हाथ की मैल है
और इसी के लिए ही तो हर एक खेल है
तो दोस्तों चोदो-चुदाओ और लाइफ को खुशहाल बनाओ
लेकिन किसी अनजान को चोदते हुए कंडोम ज़रूर लगाओ
मुझे आपकी चूत और मेल का इंतज़ार रहेगा Hindi Porn Stories
यह मेरे पड़ोस में Antarvasna रहनी वाली विश्रांती-रेशमा की कहानी जिनको मैंने गणित सिखाने के बहाने कैसे चोदा।
एक दिन मेरे घर पर कोई नहीं था। उस दिन विश्रांती और रेशमा दोनों मेरे घर चली आई। मैं उनके लिए चाय बनाने के लिए रसोई में गया। वे दोनों गप्पे हाँक रही थीं… मैं पीछे छुप कर उनकी बात सुन रहा था।
विश्रांती- रेशमा, मैं कुछ पूछूँ तुझे?
रेशमा- हाँ विश्रांती, पूछ ना!
विश्रांती- आजकल सुहास और तू दोनों हमेशा इतने खुश रहते हैं, इसके पीछे कोई खास बात तो नहीं है?
रेशमा- अरे नहीं विश्रांती! वो मुझे गणित का प्रोब्लम है इसलिए मैं अकसर उसके घर जाती हूँ, इसमें बुरा क्या है?
विश्रांती- रेशमा, तुम रोज दरवाजा क्यूँ बंद करके पढ़ते हो?
रेशमा- अरे विश्रांती वो तो ऐसे ही कि कोई तंग न करे!
विश्रांती- रेशमा, तू तो ऐसे जवाब दे रही हो जैसे कि मैं बच्ची हूँ, मुझे कुछ पता ही नहीं है।
रेशमा- तू ऐसा क्यूँ बोले रही है?
विश्रांती- मैंने एक दिन दरवाज़े पर कान लगा कर आपकी पढ़ाई की कहानी सुनी थी! मुझे सब पता है वहाँ कैसी गणित की पढ़ाई होती है!
रेशमा मुस्कुराते हुए- अच्छा तो तुझे सब पता है! तो ऐसा बोलो ना! देखो किसी से बोलना मत! तो तू चाहती है कि सुहास तुझे भी ऐसे ही गणित सिखाए?
विश्रांती- चाहने से क्या होगा रेशमा!
रेशमा- अच्छा यह बता! तेरे स्तन से दूध अभी भी आता होगा ना?
विश्रांती- हाँ रेशमा, दूध तो निकलता है और अब बच्ची भी नहीं पीती… सो भरा हुआ है…
रेशमा- तब तो सुहास जरूर तुम्हें गणित सिखाएगा, रुक जा मैं उसे कल हिंट दे दूँगी!
तभी मैं नाश्ता लेकर वहाँ आ गया। तुरंत दोनों ने विषय बदल दिया।
उसी दिन शाम को फ़िर विश्रांती मेरे घर चली आई।
विश्रांती- सुहास, रेशमा जैसे मुझे भी गणित सिखाओ ना!
मैं- विश्रांती तुझे भी गणित सीखना है…
विश्रांती- सुहास, तुझसे कुछ सवाल पूछने हैं…
मै- हाँ विश्रांती, रेशमा ने बोला था… मैं तेरा ही इन्तज़ार कर रहा था, हा पूछ ना!
मैं- विश्रांती तुम सलवार-कमीज में बहुत खूबसूरत लग रही हो…
विश्रांती- तुझे अच्छा लगा यह ड्रेस?
मैं- हाँ विश्रांती, तू ऐसे ही ड्रेस पहना कर… बहुत अच्छी लगती है… पूछ क्या पूछना है?
विश्रांती- तू तो बस रेशमा से ही बातें करता है…
मैं- नहीं विश्रांती ऐसी कोई बात नहीं है… तू भी बहुत अच्छी है…
बात करते करते विश्रांती ने अपना दुपट्टा सरका दिया… विश्रांती के उभार अब छुपाये नहीं छुप रहे थे… मैं भी अपने आप को रोक न सका… विश्रांती की चूचियों को देखने लगा…
विश्रांती- सुहास, मुझसे नज़रें भी नहीं मिला रहे हो… क्या देख रहे हो नीचे?
मैं- विश्रांती कुछ नहीं, सच्ची में तू भी बहुत अच्छी है…
विश्रांती- तू मुझसे नजरें क्यूँ नहीं मिलाता… क्या देख रहा है नीचे?
मैं- कुछ नहीं विश्रांती…
विश्रांती- कहीं तू मेरे सीने को तो नहीं देख रहा?… बदमाश!
मैं- विश्रांती मैं साफ बोलूँ तो गुस्सा नहीं होगी ना?
विश्रांती- नहीं सुहास, तू मेरा दोस्त है उसमें क्या गुस्सा करना!
मैं- विश्रांती तेरे वक्ष इतने अच्छे और बड़े हैं कि मेरी नज़र ही नहीं हट रही है वहाँ से…
विश्रांती- ये तो मेरी बच्ची को दूध पिलाने के लिए हैं….
मैं- विश्रांती, तेरी बच्ची तो अब बड़ी हो गई है! उसे अभी भी दूध पिलाती हो?
विश्रांती- नहीं! अब ओ नहीं पीती दूध!
मैं- विश्रांती, तेरी चूची में दूध है क्या?
विश्रांती- हाँ अभी भी दूध है… इसलिए तो इतने बड़े हैं!
मैं- विश्रांती मुझे प्यास लगी है…
विश्रांती- ठहर, मैं पानी लेकर आती हूँ…
मैं- विश्रांती, पानी नहीं दूध पीना है… चूची का दूध…
विश्रांती- बदमाश! कोई ऐसे दूध पीता है भला?
मैं- क्यूँ नहीं? पीने दो न… तेरे दूध का क़र्ज़ जरूर चुकाऊँगा…
विश्रांती- अच्छा ठीक है पी ले… काफी दिन से भरी हुई हैं… खाली करने वाला कोई है नहीं…
फिर विश्रांती ने अपना कमीज़ उतार दिया… अब विश्रांती ब्रा में आ गई…
विश्रांती- आ जा सुहास! मेरी गोद में आ… तुझे अपने बच्चे की तरह पिलाऊँगी…
मैंने विश्रांती की गोद में सिर रख लिया… विश्रांती ने अपनी ब्रा उतारी… और अपनी चूची को ख़ुद मेरे मुँह में डाल दिया… लो सुहास पी लो… अच्छे से पीना…
उसके बाद मैं दूध का प्यासा विश्रांती का दूध मेमने की तरह पीने लगा… कभी बाईं चूची से तो कभी दाईं से…
साथ में चूची सहला भी रहा था।
विश्रांती- तू तो ऐसे पी रहा है जैसे जन्मों से प्यासा हो!
मैं- विश्रांती, तूने मुझे वो खुशी दी है कि मैं सदा तेरा आभारी रहूँगा… तू जो बोलोगी वो सब करूँगा…
विश्रांती- जो बोलूंगी वो करेगा?
मैं- हाँ विश्रांती, तू एक बार बोल के तो देख…
विश्रांती- अच्छा ठीक है… सुन, मेरे नीचे में ना काफी खुजली हो रही है… ज़रा मेरी खुजली मिटा दे ना?
मैं- नीचे कहाँ विश्रांती?
विश्रांती- तू सब जानता है फिर क्यूँ पूछ रहा है?
मैं- बोलो ना विश्रांती! तेरी मुँह से सुनना चाहता हूँ।
विश्रांती- अच्छा, चल मेरी चूत में खुजली हो रही है… मिटा दे ना…
मैं- कैसे मिटा दूं? उंगली से या चाट के? या फिर लंड ही डाल दूँ?
विश्रांती- मुझे तो तीनों की खुजली हो रही है…
मैं- विश्रांती, मैं तेरी चूत का ख्याल रखूंगा…
विश्रांती- अपनी रेशमा से भी ज्यादा ख्याल रखेगा ना… . रेशमा तो तेरे लंड की बहुत तारीफ करती है…
मैं- तुम लोग ये सब बातें भी करती हो?
विश्रांती- तुझे कौन ज्यादा अच्छी लगती हैं?
मैं- विश्रांती, अभी तूने अपना पूरा जलवा दिखाया कहाँ है?
विश्रांती- अच्छा तो यह बात है? तो जितना जलवा देख चुके हो उसमें कौन ज्यादा अच्छा लगा?
मैं- विश्रांती, इसमें तो पूछने की कोई बात ही नहीं है… रेशमा की चूची में अमृत तो है ही नहीं! दूध तो तू ही पिला सकती है… तब इसमें तू ही न हुई रानी… विश्रांती, अब तू अपने कुछ और जलवे भी दिखा ना!
विश्रांती- हाँ सुहास तेरी विश्रांती, आज ऐसे जलवे दिखायेगी कि तू पागल हो जायेगा…
और फिर विश्रांती ने अपने कपड़े खोलने शुरु किये… विश्रांती जब पेंटी और ब्रा में आ गई तो मैं उसकी मदद करने लगा…
मैं- विश्रांती, लाओ अब मैं खोल दूं!
विश्रांती- हाँ सुहास! आ अपनी विश्रांती को नंगी कर दे…
विश्रांती मेरे पास आ गई… मैं विश्रांती की ब्रा को खोल के प्यार से सूंघने लगा… . विश्रांती की मादक मुस्कराहट ने और भी मजा भर दिया… फिर विश्रांती की पेंटी को एक ही झटके में खोल दिया… .पेंटी की मादक सुगंध मुझे दीवाना कर रही थी।
फिर विश्रांती अपने हाथ मेरी पैंट के ऊपर से लंड को सहलाने लगी… . मेरी हालत भी ख़राब हो रही थी… . मुझे डर भी लग रहा था कि कहीं मैं झड़ ना जाऊँ. विश्रांती ने देखते ही देखते मुझे पूरा नंगा कर दिया… .अब कमरे में दो नंगे एक दूसरे से खेलने लगे… विश्रांती मेरे लंड से ऐसे खेल रही थी कि कोई बच्चा अपने सबसे मनपसंद खिलौने के साथ खेलता है…
विश्रांती- सुहास, तेरा लंड तो काफी बड़ा है रे…
मैं- विश्रांती मेरे लंड से ऐसे खेलोगी तो ये जल्दी ही ढीला हो जायेगा… .
विश्रांती- क्या करूँ सुहास, ऐसे लंड मेरे हाथ में पहली बार आया है… .
मैं- विश्रांती तुझे पता है रेशमा तो इसे आइसक्रीम से भी अच्छा प्यार करती है…
विश्रांती- वाह रे बदमाश! अपनी विश्रांती को लंड मुँह में लेने बोल रहा है… .ये गरम आइसक्रीम सच में है तो मुँह में लेने के लिए ही…
मैं- विश्रांती तो ले लो ना इसे…
फिर विश्रांती प्यार से मेरे लंड को चूसने लगी… . इतना तो पता चल ही गया था कि विश्रांती को लंड चूसने में बहुत मजा आता है… रेशमा ने इतने प्यार से कभी नहीं चूसा था… फिर जब विश्रांती मेरे लंड से खेल रही थी… मैं विश्रांती की चूची को मज़े देने लगा… . इतनी मुलायम चूचियाँ को सहलाना, नीचे लंड का विश्रांती से चुसवाना… सच्ची काफ़ी बढ़िया कॉम्बिनेशन है…
मैं- विश्रांती, लंड चुसवाने में इतना मजा आज तक नहीं आया… विश्रांती मेरा मुँह भी रसपान के लिए तड़प रहा है, विश्रांती उल्टा-पुल्टा करें… .
विश्रांती- उल्टा पुल्टा ये क्या होता है रे?
मैं- क्या विश्रांती! तू मुझसे पूछेगी तो कैसे चलेगा… .अच्छा चल, मैं बताता हूँ- उल्टा पुल्टा मतलब तू मेरे ऊपर रह कर मेरा लण्ड चूसना और मैं नीचे से तेरी चूत का रसपान करूँगा!
विश्रांती- अच्छा तो तू 69 पोज़िशन की बात कर रहा है… अच्छा नाम है उल्टा पुल्टा… चल इसमें तो और भी मजा आएगा…
फिर हम एक दूसरे से मज़े लेने लगे… विश्रांती की चूत का स्वाद आते ही मन चंगा तो आया था… विश्रांती की चूत काफी गीली हो गई थी… . इसलिए चाटने में बहुत मजा आ रहा था… मैं विश्रांती को बहुत मन से चाट रहा था… . विश्रांती भी काफी उत्तेजित हो गई थी… विश्रांती ने अचानक इतना पानी निकाला कि मेरा मुँह उनके रस से भर गया था।… ऐसा मजा विश्रांती ने दिया कि बस मैं तो उनका दीवाना हो गया था…
मैं- विश्रांती तेरा रस कितना स्वादिष्ट है… अब मेरा रस भी निकाल दे… अब मेरी लंड तेरी चूत के लिए और नहीं तड़प सकता…
विश्रांती- आ न सुहास… अब ऐसा चोद कि बस मैं पानी पानी हो जाऊँ…
फिर विश्रांती बिस्तर पे लेट गई… अपनी चूत एकदम फाड़ के मुझे अपने तरफ बुलाने लगी… चूत तो जैसे कि लंड के लिए बनी हो… मैंने भी अपना लंड हाथ में लेकर उसकी चूत पर लगा दिया…
विश्रांती- दे धक्का!… चोद अपनी विश्रांती को… चोद…
मैं- ले विश्रांती… ये गया मेरा लंड तेरी चूत में… चुद अपने सुहास से मेरी प्यारी विश्रांती…
फिर विश्रांती गाण्ड उठा उठा कर मेरा लंड लेने लगी… मैं भी विश्रांती को जी जान लगा के चोदने लगा… फिर विश्रांती ने कुतिया बन के मुझे कुत्ता बना दिया… उस पोजिशन में बहुत मजा आया… फिर विश्रांती मेरे ऊपर सवार हो गई… इसमें तो मेरा लंड सबसे ज्यादा अंदर तक जा रहा था… करीब मिनट के बाद मैं उसकी चूत में ही झड़ गया… विश्रांती ने बड़े प्यार से फिर मेरे लंड को साफ़ किया… वो मुझे बेतहाशा किस कर रही थी… विश्रांती बहुत खुश थी…
विश्रांती- अपनी विश्रांती को चोदने में कैसा लगा… रेशमा को चोदने में ज्यादा मजा आया था क्या?
मैं- नहीं विश्रांती तू कुछ माल है… तुझे चोदने में बहुत मजा आया… मैं अब तुझे ही चोदूंगा…
विश्रांती- अरे नहीं सुहास! दोनों को चोदना… रेशमा भी बहुत अच्छी है उसने ही तो मुझे तेरा लंड दिलाया… तू उसे कभी नाराज़ न करना…
फिर मैं रेशमा और विश्रांती के साथ मस्ती करने लगा… दोनों प्यार से मुझसे चुदती हैं…
आपको यह हिंदी सेक्सी स्टोरी अच्छी लगी? मेल करना… Antarvasna
मैं एक बार फिर आप लोगों को मेरी Antarvasna ज़िन्दगी में हुई असली और सच्ची सेक्स कथा लिखने जा रहा हूँ।
बात उन दिनों की है जब मैं कोलकाता में एक आर्ट कॉलेज में पढ़ता था। मेरे साथ संपा दीदी पढ़ती थी जो मुझसे एक साल सीनियर थी।
अंडमान आइलैंड से हम दोनों ही थे हमारे कॉलेज में, इस लिए संपा दीदी मुझे अपनी भाई की तरह मानती थी। गर्मियों की छुट्टी शुरू होने वाली थी तो दीदी ने कहा- संजय चलो इस बार हम दोनों शिप (जहाज) से अंडमान जायेंगे!
मैंने कहा- ठीक है दीदी, मैं टिकेट ले लूँगा।
और फिर हम लोग निर्धारित दिन में जहाज में चढ़ गए।
कोलकाता से अंडमान आने के लिए 4 दिन लगते है। मैंने एक ही केबिन के टिकेट लिए थे। जहाज में चढ़ कर हमने खिड़की में से देखा कि शाम को 5.00 बजे जहाज बन्दर से छूटा और फिर धीरे धीरे कोलकाता का खिदिरपुर डॉक हमसे दूर होता जा रहा था। शाम के वक्त लाइट बहुत सुंदर दिख रही थी।
तभी दीदी ने कहा- भाई देखो कितनी सुंदर दृश्य नज़र आ रहा है, इस सीन का लैंड स्केप बना सकते है।
मैंने भी हाँ में हामी भरी। वक्त कटता गया, शाम के 7.00 बजे डिनर होता है जहाज में, इसलिए हम 7.30 तक डिनर खाकर अपने केबिन में आ गए। दीदी ने कहा- संजय! इस केबिन में तो चार सीट हैं फिर हम दोनों के अलावा और किसी को इस केबिन का टिकेट नहीं मिला क्या?
मैंने कहा- दीदी शायद जहाज खाली जा रहा है, इसलिए जहाज में लोग भी कम नज़र आ रहे हैं।
थोड़ी देर की खामोशी के बाद दीदी बोली- भाई इतनी जल्दी तो नींद नहीं आने वाली! चलो कपड़े बदल लेते हैं और फिर हम एक दूसरे के स्केच बनाते हैं। मैंने भी हाँ कहा और बाथरूम जाकर फ्रेश होकर एक नेक्कर और बनियान पहनकर बेड में बैठ गया।
दीदी ने कहा- दरवाजा बंद कर दो।
और बाथरूम जाकर फ्रेश होकर एक स्कर्ट और हल्का सा टाप पहन कर बाहर आई। मैं देखता रह गया कि दीदी कितनी सुंदर लग रही हैं, इससे पहले दीदी को कभी इन कपड़ो में नहीं देखा था।
दीदी को पता चला तो बोली- संजय! क्या देख रहे हो? तुमको ठीक से मेरी फिगर दिखाई दे इसलिए ही इन कपड़ो को पहना है ताकि तुमको मेरी स्केच बनने कोई परेशानी न हो!
फिर हम दोनों एक दूसरे के स्केच बनाने लगे। मेरी नज़र तो बार बार संपा दीदी की छाती पर जाकर रुक जाती थी और मेरे लिए अपने लण्ड को हाफ पैन्ट में छुपाना मेरे लिए मुश्किल हो रहा था क्योंकि दीदी की उभरी हुयी चुंचियाँ टॉप के भीतर से झाँकने लगी थी। दीदी को शायद पता चला या नहीं अचानक दीदी ने कहा- भाई क्या हुआ तुमको? क्या देख रहे हो? क्या कुछ दिक्कत हो रही है स्केच बनाने में या ठीक से दिख नहीं रही है मेरी फिगर? चलो तुम्हारे लिए और थोड़ी एडजस्ट कर लेती हूँ, लकिन तुम भी अपना बनियान उतार कर बैठो, और फिर दीदी ने अपने स्कर्ट और टाप उतार दी।मेरी तो हालत ख़राब हो रही थी। पर मैं चुपचाप से दीदी की ब्रा में बंद उनके बड़े बड़े बूब्स को ही देख रहा था।
तभी दीदी ने कहा- क्या हुआ संजय? जल्दी से अपनी बनियान उतार दो, मुझे भी तो तुम्हारा स्केच बनाने है। और इस तरह क्या देख रहे हो? ठीक से स्केच बनाओ!
मैंने धीरे से अपने बनियान उतार दिया और फिर स्केच बनने लगा, पर मेरा लण्ड को हाफ-पैन्ट में छुप नहीं पा रहा था और मैं इधर उधर देखने लगा। शायद दीदी को मेरा लण्ड हाफ-पैन्ट में खड़ा होता दिख गया।
दीदी ने कहा- संजय! क्या हुआ? कभी इस तरह किसी लड़की को नहीं देखा क्या? तुम्हारी नियत तो ठीक है न?
मेरा झूठ पकड़ में आ रहा था मेरा लण्ड पैंट के ऊपर से उफनता हुआ दिख रहा था।
‘क्या बात है… तुम्हारा मुंह लाल क्यूँ हो रहा है…?’
मेरी नजरों के सामने दीदी की ब्रा में उभरी हुयी चुंचियाँ के भीतर से झाँकने लगी। मेरी नजरें उनके स्तनों पर गड़ गयी। दीदी ने नीचे से ही तिरछी नजरों से उसे देखा… और मुझे गर्माते देख कर सीधे चोट की…’संजय… मेरी छाती में क्या देख रहे हो…झांक कर?’
‘हाँ… नही… क्या…?’ मैं बुरी तरह झेंप गया।
‘अच्छा.. अब मैं बताऊँ…कि क्या देख रहे हो तुम…’ मैं एकदम से शरमा गया।
‘दीदी… वो… नही… सो…सॉरी…’
‘क्या सॉरी… एक तो चोरी…फिर सॉरी…’
‘दीदी… अच्छी लग रही है देखने में…सॉरी कहा न ‘
मैं ‘हाँ… नही… क्या…?’ मैं बुरी तरह झेंप गया।
‘अच्छा.. अब मैं बताऊँ…कि क्या देख रहे हो तुम…’ मैं एकदम से शरमा गया।
‘दीदी… वो…नही…सो… सॉरी…’
‘क्या सॉरी… एक तो चोरी…फिर सॉरी…’
‘दीदी… अच्छी लग रही थी… सॉरी कहा न ‘
दीदी मेरे पाइंट पर से लण्ड के उभार को देख रही थी। मैंने ऊपर हाथ रख लिया।
‘नहीं देखो… इधर.. ‘ मैं शरमा गया। दीदी मुस्कुरा उठी।
‘तो कान पकड़ो…’
मैंने अपने कान पकड़ लिए… ‘बस…ना…’
हाथ हटाने पर लण्ड का उभार फिर से दिखने लगा। वो हंस पड़ी।
‘नहीं देखो… इधर.. ‘ मैं शरमा गया। वो मुस्कुरा उठी।
अब मुझे समझ में आ गया था कि खुला निमंत्रण है। मेरा लण्ड का पूरा आकार तक दिखने लगा था। मैं उठ कर दीदी के पास आ गया। मैंने उनके कंधे पर हाथ रखा और कहा-‘दीदी…तुम्हारे भी तो उभार हैं… एक बार दिखा दो…न…प्लीज़!’
मैंने दीदी की पूरे बदन को देखा और फिर अचानक ही… दीदी को बिस्तर पर चित लिटा दिया और उनकी पीठ पर सवार हो गया. वो कुछ कर पाती, उनके पहले मैंने उसको जकड़ लिया. मेरे लण्ड का जोर उनके चूतड़ों पर महसूस होने लगा था।
दीदी हलके से चीखी ‘संजू… ये क्या कर रहे हो…?’
‘दीदी… मुझसे अब नहीं रहा जाता है…!’
मैंने तुंरत ही उनके होंट पर अपने होंट रख दिए। मुझे लगा कि शायद दीदी को मजा आने लगा था।
मैंने उनके भारी स्तनों को पकड़ लिया और स्तनों को मसलना चालू कर दिया। वो सिमटी जा रही थी। पर मैंने हाथों से उनके उभारों को मसलना जारी रखा। वो अपने को बचाती भी रही…पर मुझे रोका भी नहीं। जब मैंने उनके उभारों को अच्छी तरह से दबा लिया तब उसने मुझे पीछे की ओर धक्का दे दिया और कहा -‘बहुत बेशरम हो गए हो…’
उनके हाथ से पेंसिल नीचे गिर गयी। वो जैसे ही उठ कर पेंसिल उठाने को झुकी, मैंने फिर से उनके स्तनों पर कब्जा कर लिया।
‘क्या हुआ… अब बस करो…छोड़ दो न… ये मत करो… संजू…हटो न ..?’
‘ अरे… हट जा न… हटो संजय…’
मना मत करो दीदी!’
‘देखो मैं चिल्ला पडूँगी ..’
‘नहीं नहीं…ऐसा मत करना… दीदी… प्लीज़ एक बार देखने दो न…!’
मैंने दीदी के नरम नरम गोल चूतड़ों को हाथ से सहला दिया। गोलाइयाँ सहलाते हुए अपना हाथ दोनों फाकों की दरार में घुसा दिया और फिर अपनी ऊँगली घुसा कर उनकी गांड के छेद को सहलाने लगा। मुझे बहुत आनंद आ रहा था। दीदी वैसे ही झुकी रही। अब मेरे हाथ उनकी चूत की तरफ़ बढ गए।
वो सिहर उठी। जैसे ही उनकी चूत पैन्टी के ऊपर से दबी… चूत का गीलापन मेरे हाथ में लग गया। अब मैंने उनकी चूत को भींच दिया पर जल्दी से हाथ हटा दिया। और दीदी सीधी खड़ी हो गयी।
मैं मुस्कुराया ‘दीदी .. मज़ा आ गया… तुम्हें कैसा लगा…?’
‘अब तुम बेशरमी ज्यादा ही दिखा रहे हो… स्केच नहीं बनाने क्या…?’ दीदी भी मुस्कुरा कर कहा।
मैंने कहा- नहीं दीदी प्लीज़ मुझे अभी कुछ और करना है… और मैंने दीदी को धक्का देकर बेड पर लिटा दिया और उनकी पीठ के ऊपर फिर से बैठ गया और मैंने अपना नेक्कर उतार दिया और दीदी की पैन्टी भी उतार दी।
अब मैं और दीदी नीचे से नंगे हो गए थे। मैंने फिर अपने लण्ड को उनके चूतड़ों पर दबाया, दीदी ने भी चूतड़ों को ढीला छोड़ दिया…और मेरा लण्ड उनकी गांड के छेद से टकरा गया।
दीदी ने फिर कहा-‘ अब बस करो…छोड़ दो न… ये मत करो… संजू…हटो न…’
‘आह संजू… मत करो…न… देखो तुमने…क्या किया?’
‘दीदी ..कुछ मत बोलो…आज मैं तुम्हे छोड़ने वाला नहीं… मेरी अपनी इच्छा जरूर पूरी करूँगा!’
मुझे तो आनंद आ रहा था… मैंने अपने लण्ड को दीदी की गांड के छेद से रगड़ना शुरू किया, दीदी चुप रही।
फिर अचानक मैंने दीदी को सीधा कर दिया… और अपना लण्ड उनको दिखाया…’देखो न दीदी… अपनी गांड से इसका क्या हाल किया है तुमने…’
उसने कहा ..’देख संजय…मैं हाथ जोड़ती हूँ… मुझे छोड़ दे अब… प्लीज़ ..’
‘ दीदी…सॉरी… ये मेरे बस में नहीं है अब… मैं अब पूरा ही मजा लूँगा… तुमने मुझे बहुत तड़पाया है ..’
मैंने उनकी ब्रा के हुक खोल दिए, उनके बूब्स को देख कर मेरा लण्ड ज़ोर ज़ोर से झटके खाने लगा तब सबसे पहले मैंने उनके निप्पल को चूपा। उनके निप्पल भी बड़े सख्त हो रखे थे और मुझे भी उन्हें चूपने का बड़ा मज़ा आ रहा था।
फिर मैं उनके बूब्स को दोनों हाथों से ज़ोर ज़ोर से दबाने लगा मेरे इस तरह करने से वो और ज़्यादा तड़पने लगी। तब मैंने उनकी चूत को देखा, उसकी चूत पर बाल नहीं थे और उनकी चूत बहुत मस्त लग रही थी। उनकी चूत को देख कर मेरे मुंह में पानी आ गया और मैं उनकी चूत को चाटने लगा। दीदी ज़ोर ज़ोर से चीखने लगी- आ आ आ आ ओ ऊ ऊ ओ ओ करने लगी
थोड़ी देर तक उनकी चूत चाटने के बाद मैंने देखा कि वो बहुत गरम हो चुकी थी लेकिन मैं उसको और गरम करना चाहता था इसलिए अब मैं अपने लण्ड को उनके पूरे बदन पर घुमाने लगा, पहले उनके चेहरे पर अपने लण्ड को लगाया फिर उनकी गर्दन पर, फिर उनके बूब्स पर, उनके निप्पल पर, उनके बूब्स के बीच में अच्छी तरह मैं अपने लण्ड को लगा रहा था। मेरे लण्ड से जो पानी निकल रहा था वो भी उनके पूरे बदन पर लग रहा था जिससे वो और ज़्यादा गरम हो रही थी। मैंने अपने लण्ड को उनके बूब्स के बीच में अच्छी तरह दबा दिया वो भी मेरे लण्ड को अपने बूब्स में रख कर ज़ोर ज़ोर से दबाने लगी।
8 इंच लंबा और 3 इंच मोटा लण्ड देखते ही उनके होश उड़ गए और वो कहने लगी कि नहीं संजू प्लीज़ मेरे साथ वो मत करना मुझे बहुत दर्द होगा। मैंने कहा- डरो मत दीदी मैं बिल्कुल दर्द नहीं करूँगा।
मगर वो मान ही नहीं रही थी।
तो मैंने उसको कहा कि क्या तुम मेरे इस हथियार को अपने मुंह में ले सकती हो?
उसने पहले तो मना किया पर फ़िर मेरे बार बार प्लीज़ कहने पर वो मान गई। अब वो मेरे लण्ड को चूस रही थी और मैं मानो जन्नत में था। उससे खूबसूरत लड़की को मैंने अपनी ज़िंदगी में नहीं देखा था और वो मेरा लण्ड चूस रही थी।
थोड़ी देर के बाद वो पूरे मज़े के साथ चुसाई का काम करने लगी और उसे भी खूब मज़ा आ रहा था। फिर क्या था मैंने अपना सारा माल दीदी की मुँह में ही डाल दिया। दीदी को शायद ख़राब लगा और उन्हें उलटी आने लगी।
मैं जल्दी से उनकी चूत पर झुक गया। मादक सी गंध आ रही थी। मैंने धीरे से अपने होंठ उनकी चूत पर रख दिये। वो तिलमिला उठी मैंने अपनी जीभ उनकी चूत के होठों पर रख दी। वो सिसक पड़ी। होले होले मैं उनकी चूत की पूरी दरार चाटने लगा। वो तिलमिलाने लगी, तड़फ़ने लगी। मैंने अपनी जीभ की नोक उनकी चूत के छेद मे डाली और अन्दर तक ले गया। वो तड़फ़ती रही। मैं जोर जोर से चूत रगड़ने लगा। उनकी सिसकियाँ बढ़ने लगी। अब वो सारे बहाने छोड़ कर दोनों हाथो से मेरे सर को अपनी चूत पर दबाने लगी। तभी वो काँपने लगी और उनकी चूत ने पानी छोड़ दिया और मैं उसका सारा पानी पी गया।
मैंने देखा कि वो हाँफ रही है ओर मेरी तरफ़ देख रही है, मैंने उनके कान के पास जाकर फुसफुसा के कहा- दीदी अब बोलो तुम्हे कैसा लगा?
दीदी ने आँख खोली और गहरी साँस ली। मैं उनके ऊपर से नीचे आ गया, दीदी तुंरत बिस्तर पर से नीचे आ गयी। अब दीदी ने मुझे बेड पर लिटा दिया और मेरे ऊपर चढ़ कर लेट गई और मुस्कराया…उसने मुझे चूमना चालू कर दिया। एक हाथ नीचे ला कर मेरा मुरझाया हुआ लण्ड पकड़ लिया और उसे हिलाने लगी, मसलने लगी…
लण्ड ने फिर से अंगडाई ली और जाग उठा. दीदी अपने हाथों में भर लिया और धीरे धीरे मुठ मारने लगी। कुछ ही देर में मेरा लण्ड चोदने के लिए तैयार था। दीदी मेरे ऊपर लेट गयी, अपनी दोनों टांगे फैला दी, लण्ड का स्पर्श चूत के आस पास लग रहा था। मैंने उनके होंट अपने होटों में दबा लिए। हम दोनों अपने आप को हिला कर लण्ड और चूत को सही जगह पर लेने की कोशिश कर रहे थे। उसने अपने दोनों हाथों से मुझे जकड़ लिया। मैंने अपनी जीभ उनके मुंह में घुसा दी।
अचानक मेरे अन्दर आनंद की तीखी मीठी लहर दौड़ पड़ी। मेरा लण्ड फिर एक बार और मर्दानगी दिखने के लिए उतावला हो गया। मैंने बाजी पलटी और दीदी को नीचे लिटा दिया और कहा- दीदी एक बार असली खेल भी खेल लेते हैं फ़िर बहुत मज़ा आएगा।
वो फ़िर भी घबरा रही थी लेकिन अब की बार थोड़ा सा ही समझाने पर वो तुरंत मान गई और मैंने मुंह से ढेर सारा थूक निकाल कर अपने लण्ड और उनकी चूत पर लगाया और अपना काम धीरे धीरे शुरू किया।
उसे बहुत दर्द हो रहा था और मेर लण्ड उनकी चूत में रास्ता बनाता हुआ अन्दर घुस गया। उनके मुंह से एक मीठी सी सिसकारी निकल पड़ी…’संजू… अ आह हह हह हह… सी ई स स स ई एई…!’
एक धक्का मारा मेरा आधा लण्ड उनकी चूत में चला गया।
वोह चिल्लाई- आआआआअह ह्ह्ह्ह्ह्छ ह्ह्ह… संजू… धीरे!
उनके बाद मैंने धीरे धीरे पूरा लण्ड उनकी चूत में पेल दिया फिर धीरे धीरे धक्के मारने लगा, मैंने महसूस किया कि दर्द के मारे उनके आँखों से आंसू निकल आए थे। मैंने उनके गालो को चूम कर पूछा- ज्यादा दर्द हो रहा है..?’
उसने जवाब दिया ‘इस दर्द को पाने के लिए हर लड़की जवान होती है.. इस दर्द को पाए बिना हर यौवन अधूरा है!’
मैं उनके इस जवाब पे बस मुस्कुरा ही पाया क्योंकि मेरे पास बोलने को कुछ था ही नही..
अब हम दोनों को बहुत मजा आ रहा था।
वो मुझ में लिपटी हुई थी…और मैं उसे चूम रहा था…वो मेरे नीचे थी और अपने पैरों को मेरे कमर के इर्द गिर्द लपेटे हुए थी मानो कोई सर्पिनी चंदन के पेड़ को अपने कुंडली से कसी हो..अब मैंने धीरे धीरे अपनी रफ़्तार तेज कर दी… पूरे केबिन में मादक माहौल था… हमारी सिसकारियाँ ज़हाज के इस केबिन में ऐसे गूंज रही थी मानो जलजला आने से पहले बदल गरज रहे हो…
वो जलजला जल्द ही आया जब मैं अपने कमर की हरकतों की वजह से चरम सीमा पे पहुँचने वाला था .. उधर दीदी भी मुझे बोल रही थी…’.. संजू प्लीज और जोर से..और जोर से…मेरे शरीर में अजीब सी हलचल हो रही है ‘… मैं समझ गया कि वो भी चरम सीमा पे है…इस पर मैंने अपनी रफ्तार काफी तेज कर दी। देखते ही देखते हम उफान पर थे और सैलाब बस फूटने ही वाला था कि मैंने अपना लण्ड बाहर निकला और मानो मेरे लण्ड से कोई झरना फ़ूट पड़ा हो.. मैं वापस उनके बाँहों में निढाल हो गया ..
बहुत देर बाद जब मैं उठा और देखा कि संपा दीदी की जांघों पर खून गिरा है तब मैं समझ गया कि वो अभी तक अन्छुई थी .. मुझे ये देख कर अपने किस्मत पर गर्व हो रहा था और साथ ही साथ दीदी के बारे में सोचने लगा कि .. ऐसी लड़की नहीं थी कि किसी को भी अपना शरीर सौंप दे .. इतने दिनों से अकेले कोलकाता में रहने के बाद भी वो आज तक अन्छुई थी…
मैंने पास में पड़े तौलिए को उठाया और उनके बूर के ऊपर लगे खून को साफ़ करने लगा। जब खून साफ़ हुआ तो मैंने एक बात गौर की और मुस्कुराने लगा।
दीदी ने मुझ से पूछा कि’… तुम क्या सोच कर मुस्कुरा रहे हो ..?’
मैंने उनके बिल्कुल बिना बाल के गुलाब की पंखुड़ियों सी योनि-लबों को चूम कर के बोला… ‘ दीदी सच बताऊँ तो .. मैंने तुम्हारी बूर अभी तक नहीं देखी थी.. और साफ़ करते वक्त अभी ही देखा…!’
और हम दोनों हंस पड़े..
उस दिन से अगले 4 दिन तक आप समझ ही सकते है कि हमारे सैलाब में कितनी बार उफान आई होगी.. जब तक हम अंडमान नहीं पहुँचे।
दोस्तों आप लोगो को मेरी कहानी कैसी लगी अपनी राय मुझे जरूर भेजे। Antarvasna
इस वक्त मेरी उम्र पच्चीस Hindi Sex Stories साल है, मैं विवाहित और एक बच्चे की माँ हूँ। मेरे पति एक फेक्ट्री में सुपरवाइजर हैं।
जब मेरी शादी हुई तब मेरी उम्र बीस साल थी, मैं यह शादी नहीं करना चाहती थी क्योंकि उस समय अपने एक दोस्त के साथ मेरा लव अफेयर चल रहा था, वो बहुत रोमांटिक और दिलफेंक युवक था, कभी कभी तो उसकी इस आदत का मुझ पर गहरा असर पड़ता, जहां भी किसी लड़की को अपने करीब पाता उसे वो अपनी मीठी मीठी बातों से फंसाने की कोशिश करता।
बस मैं उसकी इसी बात का बुरा मान जाती, कई कई दिन तक मैं उससे बात नहीं करती थी, वो तरह तरह से मुझे मनाने की कोशिश करता तो मैं मान भी जाती थी।
उसका और मेरा प्यार अभी तक शारीरिक सम्बंधों के बन्धन से दूर था, ऐसा नहीं था कि उसने अपनी इच्छा जाहिर नहीं की थी, वो कई बार मुझे चोदने की कोशिश कर चुका था, उसने कई बार मुझे सहला सहला कर गर्म भी कर दिया था, चूचियाँ दबा दबा कर उनमें आग भी भर दी थी मगर मैं अपनी मर्यादाओं की सीमा नहीं लांघना चाहती थी, मेरा इस बात पर अटूट विश्वास था कि चूत की सील सिर्फ पति तोड़ सकता है क्योंकि उस पर उसी का हक होता है।
ऐसा भी नहीं था कि मेरा प्रेमी मुझसे शादी नहीं करना चाहता था, सब कुछ ठीक था मगर मैं शादी से पहले चुदवा कर सुहागरात का मजा फीका नहीं करना चाहती थी, मेरा प्रेमी कई बार गुस्से से कहता कि मैं उससे प्यार नहीं करती। उसने शादी का वादा किया, कसमें खाई, मगर मेरा एक ही जवाब था कि अगर कुछ होगा तो शादी के बाद ही होगा। मैंने उसे साफ साफ जवाब दे दिया कि मैं शादी से पहले वो चीज हरगिज नहीं दे सकती जिसकी वो जिद कर रहा है।
मगर वो चालू था, उसने कई बार चाहा कि मैं बहक जाऊं और बहक कर उसकी बात मान लूँ।
एक दिन वो मुझे एकांत में ले गया, वहाँ ले जाकर उसने मुझे सहलाना शुरू कर दिया, वो ऐसा कई बार कर चुका था इसलिए इस ओर मैंने कोई ज्यादा ध्यान नहीं दिया। वो जब भी ऐसा करता तो मैं काफी गर्म हो जाती थी मगर संयम का दामन मेरे हाथ से नहीं छूटता था, मगर उस दिन मैं अपने आप को नहीं रोक सकी।
वो मेरी दोनों चूचियों पर हथेली चला रहा था और मैं हमेशा की तरह आँखें मूंदे उसकी इस हरकत का मजा ले रही थी। तभी उसने मेरा हाथ पकड़ा और अपने खड़े लंड को मेरे हाथ में पकड़ा दिया।
उसका लंड काफी लंबा और मोटा था, इतना ही नहीं, वो आग की तरह जल भी रहा था। जब मैंने आँखें खोल कर अपने हाथ की तरफ देखा तो मैं चौंक पड़ी,” उफ क्या है यह?”
मैंने उसका लंड हाथ से छोड़ दिया तो वो सांप के फन की तरह फुंफकार उठा, मेरा रोयाँ-रोयाँ खड़ा हो गया था उस समय। मैं अच्छी तरह जानती थी कि यह लंड है मगर मैंने हर लड़की की तरह मासूमियत दिखाते हुए यह सवाल पूछा था।
हाथ से छूटते ही लंड एक तोप की तरह उपर उठा और सीधा हो गया, मैं अपनी पलकें झपका झपका कर उसे देख रही थी। मेरी मासूमियत देख कर मेरे प्रेमी के होंठों की मुस्कान गहरी हो गई।
इसे नहीं जानती, क्या है यह? उसने अपना अकड़ता हुआ लंड अपने हाथ से पकड़ कर हिलाते हुए कहा।
नहीं … क्या है यह? मैंने कहा।
हाय तुम्हारी इसी मासूमियत पर तो हम फ़िदा हैं! वो फिर से मेरी चूचियाँ दबाता हुए बोला- खैर अब मैं ही बता देता हूँ कि यह क्या चीज है!
फिर वो अपने खड़े लंड को हाथ से इधर उधर घुमा कर देखता हुआ बोला- वैसे तो इसे कई नामों से पुकारा जाता है, मगर मैं इसे कुछ और ही समझता हूँ।
क्या समझते हो तुम इसे? उसके मोटे और लम्बे लंड का सम्मोहन मेरे दिलो-दिमाग पर छाता जा रहा था, उसने अपना लंड क्या दिखाया कि उस पर से मेरी नजर हट ही नहीं रही थी।
मैं यहाँ झूठ नहीं लिखूंगी, प्रेमी का कठोर विशाल, फुंफकारता लंड देख कर मेरी तबियत ऐसी फिसली कि मेरी चूत के मुँह में पानी भर आया, मेरी चूत पूरी गीली हो गई और लगा कि अन्दर चीटियाँ रेंग रही हैं। मेरी चूचियों में भी कुलबुलाहट शुरू हो गई थी, मेरा मन यही चाह रहा था कि वो मेरी चूचियों को हाथ से पकड़-पकड़ कर खूब मसले और दबाये।
उस समय मेरी मस्ती परवान चढ़ी हुई थी, मैंने आँखें मूंद ली थी और वो कपड़े के ऊपर से ही मेरी चूचियों को दबाये जा रहा था। उस समय सी … सी के सिवा मेरे मुँह से कुछ और नहीं निकल पा रहा था।
सच कहती हूँ, उस दिन मैं मर्यादाओं को भुला बैठी, मेरा सुहागरात वाला इरादा तो ताश के पतों की तरह बिखर गया। बस सब कुछ भूल कर दिल चाह रहा था कि लंड को अपने होंठों के बीच दबा कर खूब चूसूँ!
उसका लंड सचमुच मुझे बहुत अलबेला लग रहा था, जैसा वो खुद गोरा था वैसा ही गोरा उसका बमपिलाट हथियार भी था। ताज्जुब की बात तो यह थी कि ऐसा ना तो मैंने सोचा था और ना ही कभी किया था, हाँ मगर सुहागरात वाले सपने की यह एक कड़ी जरूर थी।
उस समय मैं पूरी तरह से पागल हो चुकी थी, लंड मेरी आँखों के सामने बार बार फुंफकार मार रहा था, तभी उसने मेरी बात का जवाब दिया तो मेरी चेतना लौटी।
इसे मैं अपना छोटा भाई समझता हूँ! वो अपना लंड बड़ी मस्ती और कामुकता से सहलाता हुआ बोला।
मेरी नजरें अब भी उसके उछलते लंड पर अटकी हुई थी।
तुम इसे बहुत गौर से देख रही हो? वो मुझे अपने लंड को देखता पाकर बोला।
हूँ! शायद इसलिए कि इसे मैंने पहली बार देखा है! मैंने अपने सूखे गले को थूक से तर करते हुए कहा।
इससे तो मैं तुम्हारी पहचान बहुत पहले ही करवा देता मगर तुम तैयार ही कहाँ होती थी? उसने अपनी चमकदार आँखों से मेरी तरफ देख कर कहा।
मैंने इसकी कोई खास जरूरत नहीं समझी थी- मैंने दिल की बात छुपाते हुए कहा।
तुम्हें कैसा दीखता है यह? उसने पूछा।
उसकी बात सुन कर मुझे मजाक सूझा तो मैंने कहा- हूँ … देख रही हूँ कि इसकी सूरत तुमसे बहुत मिल रही है इसमें कोई शक नहीं कि यह तुम्हारा छोटा भाई है!
मेरी बात सुन कर वो बड़ी जोर से हंसा, वो समझ गया कि मैं मजाक में लंड और उसकी सूरत में तालमेल बिठा रही हूँ।
इसका जादू निराला है। वो बोला और अपने हाथों से लंड को सहलाने लगा।
अच्छा तो क्या यह जादूगर भी है? मैंने हैरान होकर पूछा।
इसका जादू देखना चाहती हो? उसने पूछा।
हूँ! मगर उलटी सीधी बात नहीं होनी चाहिए।
नहीं तुम्हारी मरजी के बिना यह कोई भी उलटी सीधी बात नहीं करेगा।
ठीक है, तब तो मैं इसका जादू जरूर देखना चाहूंगी। अब मेरी चूत में बुरी तरह कुलबुलाहट होने लगी थी।
मेरे प्रेमी ने मचल कर मुझसे कहा- मधु, यह कमीज अपने बदन से उतार दो!
मोहन डीयर! तुम्हीं क्यों नहीं उतार देते? मैंने मचल कर कहा।
बटन खोलना है, तुम खोल दो फिर मैं ही उतार दूंगा। वो हंसते हुए बोला।
बस क्या था, मुझ पर तो अब वासना का भूत सवार हो चुका था, मैं धीरे धीरे मदहोश होती जा रही थी, चूत अन्दर से पूरी तरह रसीली हो गई थी, मैंने तुंरत अपनी कमीज के बटनों को एक एक कर खोल दिया और बोली- लो खोल दिए बटन! तुम इसे मेरे बदन से निकाल दो!
बांह में से तो तुम्हीं को निकालना है!
मैं बांह से निकाल दूंगी तो तुम क्या करोगे?
यही तो जादू है, देखना कैसा जादू करता हूँ।
और जैसे ही मैं अपनी कमीज को हाथ ऊपर कर निकालने लगी उसने तुंरत मेरी ब्रा के हुक को खोल दिया, मेरी दोनों चूचियाँ नंगी हो गई, उसने अपने दोनों हाथों से मेरी नंगी चूचियों को पकड़ कर कस कर मसला तो मैं सिसकारने लगी।
जीवन में पहली बार किसी युवक ने मेरी नंगी चूचियों को हाथ में लिया था, मेरा गनगना उठना स्वाभाविक था, सारे बदन का रोम-रोम मरमरा उठा।
मेरी दोनों चूचियां हमेशा की तरह अपनी औकात से ज्यादा फ़ूल उठी थी, उस समय मेरी चूत भी गीली हो रही थी। ऐसा तभी होता था जब मोहन मेरी भावनाओं से खेलता था, वैसे सुबह सुबह भी चूचियाँ फ़ूल जाती थी, पहले तो उसने मेरी चूचियों को दबाना शुरू किया और मेरा हाथ पकड़ कर अपने लंड पर रख दिया और मुझसे बोला- जैसा दिल चाहे इस लंड के साथ वैसा ही व्यव्हार करो!
मैंने उसके बमापिलाट लंड को दबाना और सहलाना शरू कर दिया, शरीर में उसको छूने के कारण गुदगुदी हो रही थी।
जब मैंने उसका लंड पकड़ा तो मेरी चूत पहले से ज्यादा फ़ूल कर फुदफ़ुदाने लगी, ऐसा लग रहा था जैसे वो परदे से बाहर निकल कर लंड से पहली मुलाक़ात कर लेना चाहती हो। सलवार के अन्दर वो पिंजरे में बन्द चिड़िया की तरह फुदकने लगी, मैं अपने प्रेमी मोहन का एकदम बमपिलाट कड़ा लंड उत्साह के साथ सहलाने लगी, मेरा सारा शरीर कसमसाने लगा।
फिर मेरा प्रेमी मेरी चूचियों के निप्पल को होंठों के बीच दबा कर चूसने लगा, उसकी इस नई हरकत से मेरा सारा शरीर मस्ती से काँपने लगा, मुझ पर वासना पूरी तरह सवार हो गई। उसने अपने होंठों के जादू से मेरी चूचियों के निप्पल नुकीले बना दिये।
कैसा लग रहा है? उसने पूछा।
सी … पता नहीं है … पता नहीं मुझे क्या हो रहा है … एक अजीब सा नशा मुझ पर छाता जा रहा है …
अभी मैं नया जादू शुरू करता हूँ … तुम नीचे अपने घुटनों पर खड़ी हो जाओ, इससे तुम्हें एक नया अनुभव मिलेगा! मोहन ने मुझसे कहा।
मैं नीचे घुटनों पर खड़ी हो गई, मोहन ने अपना लंड पकडा और मेरी चूचियों पर अपने लंड का सुपारा रगड़ना शुरू कर दिया, उसने सच कहा था कि उसके लंड में अजीब सा जादू भरा था, मेरा सारा शरीर झनझना उठा, पहली बार दिल में एक इच्छा जागी कि उसके लंड की छाँव तले सो जाऊं और सारी उम्र नहीं जागूँ। मैं एक अजीब सी दुनिया में खो चुकी थी जहां हर तरफ मस्ती और खुशी का बोल-बाला था।
अब कैसा लग रहा है? उसने एक बार फिर पूछा।
सी … कुछ ना कहो … कुछ ना पूछो … ! मैंने कसमसा कर कहा- बस इसे ऐसे ही मेरे दिल से रगड़ते रहो।
फिर उसने अपना लंड ठीक मेरी चूचियों के बीच में रख कर उन्हें आपस में सटा दिया, चूचियों के आपस में सट जाने से बीच में एक पतली सी गली बन गई थी, उसी गली में लंड फंसा था, बड़ा ही मजेदार नजारा था, मैंने उसे पूरा सहयोग करने का मन बना लिया था, फिर वो मेरी चूचियों पर धक्के लगाने लगा, उसके लंड के सुपारे से कोई चिकनी सी चीज रिस रही थी, जिसकी वजह से चूचियों के बीच बनी उस पतली गली का रास्ता चिकना हो गया था। मोहन अब उस पतली गली में आसानी से अपने लंड को घुमा रहा था, वो अपने लंड को ऊपर-नीचे कर धक्के लगा रहा था और उसका लंड चूचियों के बीच से अपनी मुंडी निकाल कर बार बार मुझे देख रहा था। उस समय मैं पूरी तरह बावली सी हो गई, इधर चूत के अन्दर गर्मी कुछ इस तरह बढ़ी कि मैंने हथियार डाल दिये।
सी … बस … बस … मैं हार गई! मैंने तड़प कर कहा- अब तुम इसका जादू यहाँ पर दिखाओ।
मैंने अपनी चूत की तरफ इशारा किया और उठ कर जल्दी से अपनी सलवार खोल डाली।
ठीक है! वो मेरी जाँघों के बिच देखते हुए बोला- यदि तुम्हारी यही इच्छा है तो अपना काम तो सेवा करना ही है।
मैं सलवार उतार कर लेट गई, उसने मेरी जांघें फैला दी और मुस्कुराता हुआ बड़े प्यार से मेरी चूत को सहलाने लगा, इससे मैं और भी ज्यादा खौल उठी।
सीऽऽ जल्दी आओ ना! मैंने अपने हाथ से अपनी चूत को रगड़ते हुए कहा- यहाँ … यहाँ … कोई चीज खौल रही है! सी … ई … हाय … माँ …
फिर वो थोड़ा सा झुका और एक लम्बा मस्त चुम्बन मेरी चूत पर धर दिया, चूत उसके होंठों का स्पर्श पा कर सरसरा उठी, फिर उसने ढेर सारा थूक मेरी चूत के ठीक बीच में टपका दिया और उसे अंगुली से अच्छी तरह रगड़ा और वहाँ अपना लंड सटा कर मेरी तरफ देखा और बोला- अब आ रहा है!
आऽऽ आने दो सइयां … मैंने कसमसा कर कहा- इतनी देर क्यों लगा रहे हो! बुद्धू इसे देख कर तो मैंने अपनी कसम तोड़ दी है!
इसका फायदा भी तुम्हें मिलेगा! इतना कह कर उसने मेरे दोनों संतरों को अपने हाथों में ले लिया। उसका फुंफकार मारता बमपीलाट लंड बहुत जबरदस्त और कठोर था और पूरी मुस्तैदी के साथ चूत की खास जगह से सटा हुआ था, मेरी चूत उसे इतना करीब पा कर बौखला रही थी, वो इतनी गर्म हो चुकी थी कि जल्द से जल्द लंड से तालमेल बिठा कर उसे हजम कर जाना चाहती थी।
आ रहा है! मोहन ने एक जोरदार आवाज में कहा।
आने दो! मैं भी बुलंद आवाज में बोली।
बस फिर एक जोर का झटका मैंने अपनी चूत पर महसूस किया, ऐसा लगा कि मैंने बिजली का नंगा तार छू लिया हो, जैसे किसी ने एक चूहे को दुम से पकड़ कर जमीन पर एक जोरदार पटखनी लगाई हो। एक तीखी टीस सी पीड़ा चूत से उठी और सीधा मेरे दिमाग से टकराई, मेरे मुँह से चीख निकली- ऊई … माँ … ये सी … ये क्या हुआ? मैंने जल्दी से उठ कर अपनी चूत देखी तो उसका मुँह एक फटे हुए जूते की तरह खुला हुआ था और एक भारी भरकम पैर की तरह उसका लंड मेरी चूत में फंसा दिख रहा था।
ओफ्फो … क्या हुआ? मेरी चीख पर मेरे प्रेमी ने बौखला कर पूछा।
ऊं … हूँ … तुम्हें दिख नहीं रहा है क्या? मैंने उसे आँखों के इशारे से अपनी चूत दिखाई- देखो … सी … देखो तुम्हारा … सी … ई … छोटा भाई … छोटी सी जगह पर किस तरह फंसा पडा है, ऊई … ऊई माँ … मर … गई … आह … मुझे दर्द हो रहा है!
इसमें इतना रोने पीटने की जरूरत नहीं है! वो मेरी चरमराती चूत को सहलाते हुए बोला- यह जगह बनी ही इसके लिये है, यहाँ अब तुम्हें मेरा छोटा भाई फंसा दिख रहा है, इसमें हैरानी की क्या बात है, आज नहीं तो कल यहाँ किसी ना किसी का छोटा भाई फँसना ही था!
उफ … दर्द हो रहा है! मैंने दर्द से नाक सिकोड़ कर कहा- क्या अब यह बाहर नहीं निकल सकता? हूँ … मुझसे इसकी जलन बर्दास्त नहीं हो रही … सी … सी …
अब तो ये आगे जाएगा! इतना कह कर उसने एक और वैसा ही झटका आगे की ओर मारा, चूत से एक अजीब सी आवाज निकली, जैसा कपड़ा फटते समय निकलती है, फिर उसका लंड चूत में समाधी रमा बैठा, अब मैं उछल रही थी क्योंकि उसके लंड का सुपारा मेरे गर्भाशय के मुँह से टकरा रहा था, सुपारे की रगड़ से गर्भाशय के मुँह पर मीठी मीठी गुदगुदी हो रही थी- ऊई … अब तो … हाय … अब तो मैं उछल भी रही हूँ …
ऐसा ही होता है! वो मुस्कुरा कर बोला, वो मेरी चूचियों को दबाने लगा। एक बार फिर मैंने अपनी जाँघों के बीच देखा तो वहाँ गहरे लाल रंग का खून बूंद बूंद होकर टपक रहा था।
हाय … सी … वही हुआ … जो मैं सुहागरात से पहले नहीं चाहती थी, तुमने इसका खून कर ही दिया, हटो … तुम … बड़े वो हो … मैं तुमसे नहीं बोलती!
तुम्हें बोलने को कौन कह रहा है मेरी जान! वो मुझे चूम कर बोला- अब तो तुम देखती रहो … तुम्हें मैं कैसे कैसे जलवे दिखाता हूँ!
उसने चूत पर ताबड़तोड़ धक्के लगाने शुरू कर दिये। मैं आह … ऊई … सी … के अलावा कुछ नहीं कर सकती थी, चूत की कच्ची दीवारें काँप रही थी, मुझे अच्छी तरह याद है की दसवां धक्का मेरी जवानी को ठंडा कर गया था.
फिर जब तक मेरी शादी नहीं हो गई वो इसी तरह मेरी चूत पर कहर ढाता रहा था, मुझे चुदाई से बहुत सुख मिलता था, इसलिए मैं बिना डोर उसकी ओर खिंची चली जाती थी, उसने चूत पर पूरा अधिकार जमा कर उसका नक्शा ही बदल डाला था, अब पेशाब करते समय चूत से तेज सीटी की आवाज निकलने लगी थी, किसी कारणवश उसका और मेरा जीवन भर का साथ नहीं हो सका था, यह बात बहुत लम्बी है, यहाँ लिख कर मैं आप सबका समय खराब नहीं करना चाहती। Hindi Sex Stories
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