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दोस्तो, मेरा नाम लक्ष्य है Antarvasna और मैं दिल्ली का रहने वाला हूँ। मेरी आयु 29 साल की है, कद 5’8″, देखने में अच्छा, एक शरीफ़ आदमी की तरह, वैसे मैं शरीफ़ आदमी ही हूँ।
बात कुछ महीने पहले की है।
एक दिन मैं नेट पर चैटिंग कर रहा था। तब मैंने देखा कि एक मैसेज कॉमन रूम में फ्लेश हुआ कि हम मैन और वूमन के लिए सर्विस देते हैं। और एक मोबाइल नंबर भी फ्लेश हुआ। मैंने नंबर नोट कर लिया फिर अगले दिन कॉल किया तो उस लड़के ने मिलने को कहा।
हमने कनॉट-प्लेस में मीटिंग की। उसने कुछ फीस ली और कहा कि सप्ताह में एक लेडी मिलेगी और आपकी फीस भी वही कस्टमर देगी।
मैं राजी हो गया।
एक हफ्ते बाद उसने मुझे कॉल करके बताया कि आपको ग्रेटर कैलाश में जाना है।
दोस्तो! यह मेरा पहला कॉल-बॉय का काम था।
मैं बताये हुए पते पर पहुँच गया। मैंने वहाँ पहुँच कर घर की बैल बजाई तो 33-34 साल की सुन्दरी ने दरवाजा खोला। मैं देख कर हैरान हो गया कि क्या सुन्दर थी वो!
मैंने उसे रेफेरेंस दिया तो उसने बुलाया और मीठी मीठी मुस्कान देने लगी। मेरा 8.5″ लम्बा और 3″ मोटा लण्ड कूदने लगा। मैं भी खुश था कि मैं एक परी की चूत मारूंगा। मैं अन्दर गया और सोफे पर बैठ गया। वो पानी लेकर आई, मैंने पानी पिया, कुछ बातें करने लगे। कुछ मिनटों के बाद वो मुझे अपने बेड-रूम में ले गई और मुझ से ऐसे लिपट गई मानों सालों की प्यासी हो।
मैंने उसके लिप्स पर जोर की किस ली और उसने भी मेरा साथ दिया। 10-12 मिनट के बाद मैंने उसके सलवार का नाड़ा खोल कर उसमें हाथ डाल दिया और उसकी मुलायम चूत पर हाथ फेरा। वो गरम होती जा रही थी और इन्तजार मुझ से भी नहीं हो रहा था। हम दोनों ने एक दूसरे के कपड़े उतार दिए और बेड पर लेट गए।
उसके मम्मे बहुत शानदार थे। मैंने उन्हें पीना शुरू कर दिया। कुछ मिनट के बाद मैं धीरे धीरे उसकी चूत तक आ गया और उसकी प्यारी सी चूत को चाटने लगा। मुझे चूत चाटना बहुत ही अच्छा लगता है। मैं 10 मिनट तक चाटता रहा। इसी बीच उसका पाना निकल गया और थोड़ा शांत हो गई। फिर मैंने उसके मुंह में अपना लम्बा मोटा लण्ड दिया तो वो एक भूखी शेरनी की तरह चाटने लगी और जोर जोर से आवाज निकालने लगी।
मेरा हथियार तो तैयार ही था, मैंने एक बार फिर उसकी चूत चाटनी शुरू की, वो फिर से गरम हो गई और कहने लगी- अब नहीं रुका जाता है, अब मुझे चोद दो!
मैं फिर उसकी टांगों के बीच में आ कर बैठ गया और अपना मोटा और लम्बा लंड उसक चूत के छेद पर रख दिया, फिर एक जोरदार झटका दिया तो आधा लण्ड उसकी चूत में था।
वो चिल्लाई और बोली- धीरे से करो!
मैंने कहा ‘तुम्हरी चूत तो पहले से ही खुली है, तो दर्द क्यों?
वो बोली- मैं अपने पति से 1 साल से दूर रह रही हूँ, किसी और से करवाया नहीं है, इसलिए दर्द हो रहा है!’
मैंने 1 मिनट के बाद एक झटका और दिया तो पूरा का पूरा लंड उसकी चूत में समां गया। फिर मैंने आगे पीछे करना शुरू किया। अब उसको भी मजा आने लगा था। अब तो वो अपनी गांड को उठा उठा कर हिलाने लगी। 10-15 मिनट तक करने तक वो दुबारा झड़ चुकी थी और मेरा भी आने वाला था लेकिन मैं लालची हो गया था कि थोड़ी देर और रुक कर झाड़ूँगा क्योंकि वो चूत ही इतनी प्यारी थी कि निकालने का मन ही नहीं कर रहा था।
4-5 मिनट करने के बाद मैं आने वाला था तो मैंने अपना लण्ड निकल कर उसके मुँह में दे दिया, साली पूरा रस गट गट पी गई और कहने लगी- आज बहुत दिनों के बाद मुझे स्वर्ग का मजा आया है!
फिर हम दोनों बाथ रूम में गए और वहाँ जाकर नहाने लगे। हम दोनों फिर से चिपट गए। मेरा हथियार तो फिर से खड़ा हो गया।
मैंने कहा- एक बार और हो जाए?
उसने हाँ कर दी। फिर मैंने उसे कुतिया के स्टाइल में चोदा। दो बार तो मैंने उसकी गांड में डाला लेकिन उसे दर्द हो रहा था तो फिर मैंने उसकी चूत में झाड़ दिया।
फिर हम नहा कर बाथरूम से बाहर आ गए, कपड़े पहन कर मैंने चलने को कहा तो उसने मुझे 5000 रुपये दिए और एक प्यारी सी किस दी और कहा- दोबारा बुलाने के लिए अपना नम्बर दे जाओ!
मैंने उसे अपना मोबाइल नम्बर दे दिया और अपने घर वापिस आ गया।
दोस्तो! यह मेरी कहानी थी!
आप सभी को कैसे लगी, बताना!
लड़कियों, भाभियों और आन्टियों को मेरे लम्बे लंड का नमस्कार!
आप सभी को चोदना और चुदवाना मुबारक हो! चोदते रहो और चुदवाते रहो और खुश रहो!
मुझे मेल कर सकते हो- Antarvasna
मेरा नाम रोशन छेड़ा है. मेरे पड़ोस Antarvasna में एक जवान लड़की रूबी रहती थी। वो 12वीं में पढ़ रही थी। उसकी उमर 18 साल थी, रूबी बहुत सेक्सी थी। उसके बूब्स मुझे बहुत अच्छे लगते थे। वो एकदम हरी-भरी थी। मेरी उसके घर वालों के साथ और उसके साथ अच्छी अक्सर बातें होती रहती थी, क्योंकि उसकी और हमारी छत एक ही थी, बीच में सिर्फ़ 3 फीट ऊँची एक दीवार थी।
वो पढ़ाई में कमजोर थी। उसके एग्जाम आने वाले थे, उसकी मम्मी ने मुझसे कहा- परेश, रूबी के एग्जाम शुरू होने वाले हैं, वो पढ़ाई में कमजोर हैं, उसे थोड़ा समय निकाल कर पढ़ा दिया करो।
मैंने हाँ कर दी।
मैं रोज रात को 8 बजे उसके घर उसे पढ़ाने जाता। मेरा कमरा फ़र्स्ट फ़्लोर पर था, उसके घर में भी एक कमरा फ़र्स्ट फ़्लोर पर था, वो बन्द रहता था क्योंकि उसके मम्मी, पापा और उसका छोटा भाई जो 12 साल का था सब ग्राऊँड फ़्लोर पर ही रहते थे।
दो दिन के बाद मैंने उसकी मम्मी से कहा- भाभी नीचे हम डिस्टर्ब होते हैं, क्या हम आपके ऊपर वाले कमरे में पढ़ाई कर सकते हैं?
उन्होंने तुरन्त हाँ कर दी।
मैं रोज़ रात को 8 बजे जाता और रात के 11-12 बजे तक वहाँ पर रुकता था। वो पढ़ाई में बहुत कमजोर थी। उसे अच्छे से कुछ भी याद नहीं होता था, मैंने उसकी मम्मी से कहा तो उन्होंने बोला कि अगर नहीं पढ़ती है तो पिटाई कर दिया करो, तो मैंने एक दिन उसे उसकी मम्मी के सामने ही हलका सा एक थप्पड़ मारा, उस दिन मैंने उसे पहली बार छुआ था, उसका गाल एकदम गरम था, थप्पड़ खा कर वो मुस्कराने लगी।
अगले दिन उसने जींस और शर्ट जिसके बटन सामने खुलते थे पहने हुए थी, मैं उसके सामने बैठा कर उसे मैथ्स समझा रहा था, उसके शर्ट का एक बटन टूटा हुआ था, उसका ध्यान पढ़ाई में था और मेरा ध्यान उसके टूटे हुए बटन के पीछे उसके बूब्स पर था, उसकी काली ब्रा और गोरे बूब्स मेरे सामने दिख रहे थे।
अचानक उसका ध्यान अपने टूटे हुए बटन पर गया तो वो शरमाई और नीचे जा कर शर्ट बदल कर आई।
मैंने पूछा- क्या हुआ?
तो उसने बोला- आप मुझे अच्छे से पढ़ा नहीं पा रहे थे।
अगले दिन उसने टाइट टी शर्ट पहनी हुई थी जिसमें उसके बूब्स का उभार गजब ढा रहा था। कामुकता वश मेरा ध्यान वहीं पर था।
उसने पूछा- परेश, क्या हुआ? तुम्हारा ध्यान कहाँ है?’
मैंने कहा- मेरा ध्यान तुझमें है!’
वो शरमाई और बोली- धत!
मेरी हिम्मत बढ़ गई। मैंने हलके से उसके गाल पर चपत लगाया और प्यार से मुस्कराया।
जवाब में वो भी मुस्कराई।
मेरी हिम्मत और बढ़ी, मैंने उसके दोनों गालों को पकड़ कर उसके होठों को चूम लिया, उसने दूर हटाते हुए कहा- मम्मी आ जायेगी!
और हम वापस पढ़ाई में लग गये।
अगले दिन उसके मम्मी, पापा और उसका भाई किसी काम से बाहर गये थे, जाते समय उसकी मम्मी ने मुझसे कहा- रूबी घर पर अकेली है, तुम रात को हमारे घर पर ही सो जाना! मुझे तो जैसे मन मांगी मुराद मिल गई।
रात को 8 बजे मैं उसके घर गया। वो ग्राउन्ड फ़्लोर पर थी। आज उसने सुन्दर सी काले रंग की नाइटी पहन रखी थी। हम दो घण्टे तक पढ़ते रहे। बाद में वो अपने कमरे में जाकर सो गई, मैं बाहर हाल में सो गया। अचानक वहाँ लाइट चली गई। वो कमरे से बाहर आई और मेरे पास हाल में बेड पर बैठ गई और हम बातें करने लगे।
उसने मुझसे कहा- परेश, आई लव यू!’
मैंने कुछ नहीं बोला और उसे अपनी बाहों में ले लिया। वो चुप रही, उसने कुछ भी नहीं बोला। मैंने उसे चूमना शुरू कर दिया, वो हल्का सा विरोध करती रही, इतने में लाइट आ गई तो मैंने देख उसका चेहरा एकदम लाल हो रहा है और आँखे अपने आप बन्द हो रही हैं।
मैंने धीरे से उसके बूब्स पर हाथ फिराया तो वो एक दम से मुझसे चिपक गई। मैं उसके रसीले होठों को चूमता रहा और हाथों से धीरे धीरे उसके बूब्स को दबाता रहा, वो मदहोश हो गई।
मैं थोड़ा आगे बढ़ा और मैंने उसकी नाइटी धीरे से उतार दी। अब वो मेरे सामने लेमन रंग की ब्रा और पेंटी में थी, उसकी फ़िगर देख कर मैं अपने होश खो बैठा। मैंने उसके पूरे बदन को चूमना शुरू कर दिया। वो भी मुझे चूमने लगी और मेरे कपड़े उतारने लगी। अब मैं भी सिर्फ़ अन्डरविअर में था। मैं उसे चूमता रहा और उसके पूरे शरीर पर हाथ घुमाता रहा। उसके स्तन क्या पत्थर की तरह कड़क थे। मैंने अपने हाथ उसके पीछे ले जाकर उसकी ब्रा का हुक खोल दिया, एक झटके से ब्रा उसके हाथ में आ गई और उसके बूब्स आज़ाद हो गये, इससे पहले भी मैंने 3-4 बार सेक्स किया था लेकिन उसका हुस्न देख कर मैं अपने होश खो गया और धीरे से मैंने उसकी चड्डी भी उतार दी। बदले में उसने भी मेरी चड्डी उतार दी।
अब हम दोनों नंगे थे। हम दोनों एक दूसरे को चाटते रहे। मैंने अपना मुँह उसके निप्पल पर लगाया और उसको चूसने लगा उसने मेरे लण्ड को हाथ में ले लिया और उसको सहलाने लगी। मेरा लण्ड लोहे की तरह एक दम कड़क हो गया। मैंने धीरे से अपने लण्ड को उसके मुँह के पास किया तो वो उसे चूमने लगी। मैंने उसे मुँह में लेने को कहा तो वो उसे मुँह में लेकर चूसने लगी।
मेरा बड़ा बुरा हाल हो रहा था, मैंने अपनी उंगली धीरे से उसकी चूत में डाल दी। उसकी चूत गरम तवे की तरह तप रही थी। मेरी उँगलियाँ उसकी चूत की गरमी महसूस कर रही थी।
वो मेरे लण्ड को चूसती रही और मेरी उँगलियाँ उसकी चूत के साथ खेलती रही। अब वो चुदवाने के लिये एकदम तैयार थी। उसकी चूत मेरी उँगलियों की हरकत से पानी से भर गई और गीली हो गई। मैं अपना मुँह उसकी चूत पर ले गया और उसकी जाँघों और उसकी चूत को चूमने लगा। वो जोर जोर से पाँव हिलाने लगी। मैंने अपनी जीभ उसकी चूत में डाल दी और उसके पानी को पीने लगा। वो एक दम मदहोश हो गई और मेरे लण्ड को दाँत चुभाते हुये और जोर से चूसने लगी।
थोड़ी देर में उसकी चूत ने और पानी छोड़ दिया। मैं उसे पीता रहा। कुँवारी चूत का पानी पीने का मेरा यह पहला मौका था और उसके मुँह में मेरे लण्ड ने भी ढेर सारा पानी छोड़ दिया जो सीधे उसके गले में गया। उसने बड़े प्यार से मेरा पूरा पानी पी लिया और एक भी बून्द बाहर नहीं गिरने दी, और मेरे लण्ड को चूसना जारी रखा।
3-4 मिनट में मेरा लण्ड वापस तन गया। उसकी हरकतों से मुझे लगने लगा कि वो चुदाई के लिये बहुत आतुर है।
मैंने उसे बेड पर सीधा लिटाया और उसकी गांड के नीचे एक तकिया लगाया जिससे उसकी चूत ऊपर आ गई। मैं अपने लण्ड को उसकी चूत पर फिराने लगा। उसकी चूत तन्दूर की तरह गरम थी
उसने कहा कि उसने कभी चुदवाया नहीं है। मेरा इतना मोटा लण्ड उसकी चूत में कैसे जायेगा।
मैंने कहा- थोड़ा सा दर्द होगा, लेकिन बाद में मजा आयेगा।
मैंने अपने लण्ड और उसकी चूत पर क्रीम लगाई और अपना लण्ड धीरे से उसकी चूत में घुसाने लगा। उसकी चूत बहुत टाइट थी।
मेरे लण्ड का सुपाड़ा उसके अन्दर जाते ही वो जोर से बोली- बहुत दर्द हो रहा है!
मैं वहीं पर रूक गया और उसकी चूचियों को सहलाने लगा और उसके होठों को चूमने लगा।
थोड़ी देर में रूबी जोश में आ गई और अपने चूतड़ उठाने लगी। मैंने ऊपर से थोड़ा जोर लगाया, मेरा लण्ड उसकी चूत में 3 इन्च घुस गया। वो जोर से चिल्लाने लगी और पसीने में नहा गई, मुझसे कहने लगी- प्लीज! बाहर निकालो!
मैंने उससे बोला- पहली बार में थोड़ा दर्द होता है! और उसे चूमने लगा।
कुछ देर बाद वो शान्त हो गई।
मैंने उससे बोला- अपना मुँह बन्द रखना। मैं अभी अपना पूरा लण्ड तेरी चूत में डालूंगा।
उसने जोश में आकर कहा- अगर मैं चीखूं भी तो भी तुम नहीं रुकना।
मैं धीरे धीरे अपने लण्ड को उसकी चूत में 3 इन्च में अन्दर बाहर करने लगा। उसे भी मजा आने लगा और वो मुझसे ज्यादा चिपकने लगी। अचानक मैंने एक जोर का झटका दिया और अपना पूरा 7 इन्च का लण्ड उसकी चूत में घुसेड़ दिया। वो बहुत जोर से चीखी और जोर से तड़पने लगी।
मैं वहीं पर रूक गया। उसकी चूत में से खून निकलने लगा था। वो जोर जोर से रोने लगी, मैंने उसे प्यार से समझाया कि मेरा पूरा लण्ड उसकी चूत में चल गया है। अभी थोड़ा सा दर्द होगा लेकिन बाद में जो मजा आयेगा वो पूरा दर्द भुला देगा।
मैंने उसके लाख कहने पर भी अपना लण्ड उसकी चूत से नहीं निकाला।
पाँच मिनट तक मैं सिर्फ़ उसके बूब्स को चूसता रहा और उसके पूरे शरीर पर हाथ फ़िराता रहा। धीरे धीरे उसका दर्द कम हुआ और उसे जोश आने लगा। वो मुझसे चिपक गई और अपने चूतड़ उठाने लगी। उसकी चूत मेरे लण्ड को कभी जकड़ती और कभी ढीला छोड़ती। मैं इशारा समझ गया और मैंने धीरे धीरे अपने लण्ड को उसकी चूत में अन्दर बाहर करना शुरू कर दिया। थोड़ी देर मैं उसे भी मजा आने लगा और वो भी हिल हिल कर चुदाई का मजा लेने लगी।
10 मिनट तक मैं उसे चोदता रहा। इतनी देर में उसकी चूत गीली हो गई और उसका दर्द कम हो गया, और वो बहुत मज़े लेकर चुदवाने लगी।
करीब 15 मिनट के बाद मैंने उसे कहा- मैं झड़ने वाला हूँ।
मैंने उसे कस के पकड़ा, जिससे उसके मुंह से आवाज न निकले उसके होंठ अपने होठों में मजबूती से दबा लिये और सरपट घोड़ा दौड़ा दिया। मैं पूरे जोश में आ चुका था और मैं अपना लण्ड पूरा बाहर निकाल कर एक धक्के से पूरा घुसा देता, पूरी फूर्ती से।
अब वो बुरी तरह छूटने के लिये दम लगा रही थी और मैं उसे उतना ही मजबूती से पकड़ रहा था। झटके पर झटके! धक्के पर धक्के।
एक दो मिनट में उसकी चूत बुरी तरह से मेरे लण्ड को रोकने की कोशिश कर रही थी। और मुझे साफ़ पता चला जैसे कि उसकी चूत ने एक जोर से पिचकारी मेरे लण्ड पर छोड़ दी। अब मैंने रफ़्तार और धक्के की ताकत बढ़ा दी और बड़े दम लगाने पर मैं भी चरम आनन्द पर पहुँच गया। ऐसा लगा जैसे मेरे लण्ड से कोई टँकी खुल गई हो और मैंने बहुत सारा पानी उसकी चूत में भर दिया। करीब 10 मिनट तक उसके ऊपर लेटा रहा। हम दोनों की सांस की आवाज से पूरा कमरा गूँज रहा था।
उसके बाद हम दोनों उठे और बाथरूम में जाकर उसकी चूत और अपने लण्ड को धो कर साफ़ किया और वापस आकर बेड पर बैठ गये।
मेरा लण्ड इतनी देर में वापस तन कर खड़ा हो गया। उसे तना देखकर वो बोली- अब नहीं परेश, अभी दो घण्टे सो लेते हैं, उसके बाद करेंगे।
मैंने कहा- ठीक है।
हमने अपने कपड़े पहन लिये और सोने लगे। लेकिन आंखों में नींद कहाँ!
करीब एक घण्टे बाद मैंने उसके और अपने कपड़े फिर उतार दिये। उसने कहा कि प्यार से करना क्योंकि अभी थोड़ा थोड़ा दर्द हो रहा है। मैंने उसके बदन को दबाना शुरू कर दिया, बच्चों की तरह उसका दूध पीने लगा तो वह कसमसा उठी। और उसने भी मुझे चूमना शूरू कर दिया और खुद-ब-खुद 69 की पोजीशन में आ गये। वो मेरे लण्ड को चूस रही थी और मैं उसकी चूत को। फिर मैं काम शास्त्र में बताये एक एक आसन से उसे चोदने लगा और एक ही रात में कली को खिला कर फ़ूल बना दिया।
फिर तो हम दोनों को जब भी मौका मिलता वो मुझसे चुदवाती थी। करीब एक साल तक मैं उसे चोदता रहा, उसके बाद उसके पापा की बदली हो गई। उसके बाद से आज तक उससे मेरी मुलाकात नहीं हुई है।
वो मेरे जीवन सबसे हसीन कली थी जिसे फूल बनाने का जिम्मा खुदा ने मुझे इनाम में दिया था। Antarvasna
मैं आप लोगों को अपने साथ घटी Hindi Porn Stories एक सच्ची घटना बताने जा रहा हूँ।
मैं लुधियाना से अनीश हूँ, ६ फीट का ख़ूबसूरत, आकर्षक… और ८.३” लम्बे और काफी मोटे लण्ड का मालिक !”
तो दोस्तों, असली बात पर आएँ
मुझे लड़कियों की चूचियों और मोटी गाँड देखने का बड़ा शौक है। एक साल पुरानी बात है जब मैं एयर-हॉस्टेस एकेडमी में डिप्लोमा कर रहा था। आपको तो पता ही है कि लड़कियाँ मिनी-स्कर्ट में आतीं हैं, मेरे बैच में भी बहुत सी सेक्सी लड़कियाँ थीं। उनमें से मुझे एक लड़की जिसका नाम सरब था, बहुत अच्छी लगती थी, वह पहले दिन से ही मेरे साथ बैठती थी।
जब भी वह बैठने के लिए झुकती, उसके मम्मे मेरी आँखों के सामने आ जाता थे। उसके मम्मों का आकार ३६:२८:३२ होगा। जब भी वह मेरी तरफ ऐसे झुकती तो मेरे अन्दर कुछ होने लगता और मेरा लण्ड खड़ा होने लगता। दो महीने ऐसी ही बीत गए, रोज़ उसके बारे में सोच-सोचकर मैं मुट्ठ मारने लग गया कि कब उसके मम्मों के पूरे दर्शन होंगे।
एक दिन जब वह मेरे पास बैठने लगी तो उसका हाथ मेरे लण्ड पर लग गया, उसे जैसे करंट जैसा लगा हो। उस समय क्लास में कोई और नहीं था, वह मुझे घूर कर देखने लगी।
मैंने पूछा- क्या हुआ?
तो उसने कोई उत्तर नहीं दिया। उसे भी शायद अच्छा लगा, क्योंकि उसने भी कहाँ किसी का लण्ड पकड़ा होगा। मेरे अन्दर तो खुशी की लहर दौड़ गई कि किसी लड़की का हाथ तो लगा मेरे लण्ड पर, नहीं तो बेचारे को मसल-मसल कर इसका रस निकालना पड़ता और पहली बार किसी के हल्का सा हाथ लगाने से मेरी फ्रेंची गीली हुई। उस दिन मैंने कमरे में जाकर २ बार मुट्ठ मारी।
वैसे तो सरब भी मुझसे प्यार करने लग गई थी पर हम दोनों ही एक दूसरे को कहने से डरते थे। पर उस दिन उसका फोन आया, वह कहने लगी कि यार “आई एम रियली वेरी सॉरी,”
मैंने कहा- किस बात की सॉरी यार, दोस्तों में कोई सॉरी नहीं होती ! पर वैसे किस बात की सॉरी माँग रही हो?
उसने कहा कि जब मैं तुम पर गिर गई थी तो तुम्हें बड़ा दर्द हुआ होगा क्योंकि वह तो तुम्हारे शरीर का सबसे नाज़ुक हिस्सा है, तुम चिल्लाए भी थे। मैंने सोचा अब तो लाईन साफ़ है बच्चू, बुला ले डेट पर।
मैंने कहा – “एक बात पर सॉरी मिलेगी, जब तुम मेरे साथ कल कॉफ़ी पीने चलोगी, क्लास शुरू होने से पहले !”
वह मान गई, मैंने सोचा मैं कल उसको “आई लव यू” कह ही दूँगा। उधर भी वही बात चल रही थी। फिर अगले दिन जब सुबह हुई, मैंने उठ कर पहले शेव की और नहाने के लिए गया, नहा-धो कर नाश्ता करके मैं उसके फोन का इन्तज़ार करने लगा। मेरे साथ चार लड़के रहते थे। सबसे देर से मैं ही उठता था, वे सब कहने लगे, भाई आज तू इतनी ज़ल्दी उठकर कहाँ जा रहा है, तेरी क्लास तो ११ बजे होती है। मैंने कहा कि कोई ज़रूरी काम है। फिर उसका फोन आया कि मैं तुम्हारा १० बजे कॉफी कैफ़े डे में इन्तज़ार करूँगी। मैं भी अपनी बाईक पर उसके मिलने के लिए निकल पड़ा, पहले तो मॉल रोड से उसके लिए एक ग़ुलाब लिया फिर एक आई लव यू वाली ग्रीटिंग कार्ड ली।
फिर मैं जब कैफ़े पहुँचा तो वो क्या क़यामत लग रही थी, आसमानी नीले रंग की डॉप और सफ़ेद जीन्स। मैंने उसको जाकर गुलाब दिया, वो भी समझ गई कि आज कुछ होने वाला है जब ग्रीटिंग दिया तो समझ गई कि मैं उससे प्यार करता हूँ। उसने कहा कि तुमने तो मेरे दिल की बात जान ली। मैंने कहा कि दो प्यार करने वाले ही एक दूसरे की बात समझ पाते हैं।
उसने कहा- आई लव यू डार्लिंग !
मैंने भी जवाब दिया। मैं कुछ ज्यादा ही रोमांटिक होता जा रहा था कि आज तो मेरे लण्ड को किसी गुफ़ा में जगह मिल ही जाएगी। मैंने उससे कहा कि चलो मेरे कमरे पर चलते हैं, मैं तुम्हें बहुत प्यार करना चाहता हूँ, तो उसने कहा कि ज़नाब के इरादे तो नेक हैं। खुजली तो उसे भी होने लगी थी क्योंकि उसे भी तो लण्ड मिलने वाला था, तो वह इन्कार नहीं कर पाई, उसने हाँ कर दी।
हम दोनों बाईक पर मेरे कमरे की ओर निकले, वो मेरे पीछे ऐसे बैठी, मानों मेरी पत्नी हो। मैंने २-३ बार ज़ोर की ब्रेक लगाई, उसके मम्मे मेरे साथ टकराए और मेरा लण्ड फिर से खड़ा हो गया। उसने फिर मेरे लण्ड पर हाथ रख लिया और ज़ोर से दबाने लगी। मेरा लण्ड पैन्ट को फाड़कर बाहर आने को तैयार हो गया।
जैसे ही हम पहुँचे, तो मैंने उससे पहले अन्दर जाने को कहा, फिर बाद में मैं गया और मैंने मुख्य द्वार बन्द किया और उसको मेरे कमरे में बिठाया और पूछा – तुम कुछ लोगी क्या? उसने कहा – जूस चलेगा। मैंने फ्रिज़ में से रियल जूस की बोतल निकाली और हम दोनों जूस पीने लगे, उसके जूस पीते-पीते थोड़ा सा जूस उसके होठों के नीचे आ गया। मैंने मौक़ा न गँवाते हुए जूस की एक बूँद साफ करने के बहाने उसके होठों को भी चूम लिया और उसके होंठ चूसने लगा।
मैंने १० मिनट तक उसको नहीं छोड़ा और उसके मम्मों में हाथ डाल दिया और ज़ोर-ज़ोर से दबाने लगा। उसने भी मेरी ज़िप खोल ली और लण्ड राजा को बाहर निकाल लिया। मैंने उसकी टॉप उतार दी, उसके बाद उसके जीन्स भी। अब वह सिर्फ ब्रा और पैण्टी में थी, उसने भी मेरे कपड़े उतार दिए, मैं अब अपनी फ्रेंची में था, मैंने उसकी ब्रा उतारी तो उसके बड़े-बड़े मम्मे उछल कर बाहर आए। उसने जब मेरी फ्रेंची उतारी तो देखकर डर गई कि इतना बड़ा लण्ड ! उसने देर ना करते हुए मेरा लण्ड अपने मुँह में डाल लिया और ऐसे चूसने लगी मानों लॉलीपॉप हो।
मैंने उसकी पैण्टी उतारी तो उसकी शेव की हुई चिकनी चूत मेरे सामने आ गई और फिर हम ६९ की स्थिति में आ गए। मैंने जब उसकी चूत को देखा तो वह पानी छोड़ रही थी कि जैसे वह मेरा ही इन्तज़ार कर रही हो। मैं बड़े ही प्यार से उसकी चूत चाटने लगा, मुझे इतना मज़ा आया कि मैं आपको बता नहीं सकता कि मुझे क्या हो रहा था।
मेरा रस निकलने वाला था, और इतने में सरब दो बार झड़ चुकी थी, उसका रस नमकीन सा था, मेरी तो जैसे जन्मों की प्यास मिट गई हो। मैंने ३ बार उसका रस पिया, जैसे ही मेरा रस निकलने वाला था मैंने बाहर निकालना चाहा पर उसने मुँह से निकालने ही नहीं दिया, मेरे लण्ड की पिचकारी उसके गले में जा लगी, गरमा-गरम रस पीकर उसे बहुत मज़ा आया। उसने मेरे लण्ड को चाट-चाटकर साफ कर दिया। मैंने फिर से उसकी चूत चूसनी शुरू कर दी। वह १ बार फिर झड़ गई, मैंने फिर उसका सारा रस पी लिया।
फिर मैं अपना ८ इंच का लण्ड चूत में डालने लगा तो वह चिल्ला उठी, क्योंकि उसने कहा कि कोई भी लण्ड अपनी चूत में नहीं लिया था। मैंने मुश्किल से ४ इंच ही डाला था कि उसकी चूत खून से भर गई, और वह रोने लगी।
मैंने उसे चुप करवाया और उसे हौसला दिया, और फिर एक ही झटके में सारा लण्ड डाल दिया और मेरे बिस्तर का गद्दा खून से भर गया, वह ज़ोर-ज़ोर से चिल्लाने लगी। मैं २ मिनट के लिए रूका, ,वह भी शान्त हो गई थी, अब उसे भी मज़ा आने लगा था, वह भी अपनी गाँड़ उठा-उठा कर मेरा साथ देने लगी थी। फिर मेरा रस निकलने लगा तो मैंने लण्ड बाहर निकाल लिया। सरब ने वक्त बर्बाद न करते हुए मेरा लण्ड अपने मुँह में डाल लिया और मेरे सारा रस पी गई। फिर मैंने उसकी दो बार और चुदाई की फिर हम १ घण्टे ऐसे ही लेटे रहे, उसके बाद उठे फिर वॉशरूम में गए, दोनों साथ में ही नहाए। फिर उसको १ बार और चोदा शैम्पू लगा के, नहा के हम फिर खाना खाने के लिए होटल में गए, उसके बाद मैंने उसे उसके घर पर छोड़ दिया। उसके बाद मैंने उसकी दो बार चुदाई और की। Hindi Porn Stories
मैं अब बड़ी हो Hindi Sex Stories गई हूँ। मेरी माहवारी चालू हुए भी चार साल हो चुके हैं। मेरी चूंचियाँ भी उभर कर काफ़ी बड़ी बड़ी हो गई हैं। मेरी चूत में अब पहले से अधिक खुजली हुआ करती है। उसकी गहराई अधिक हो गई है। मेरे चूतड़ अब और सुडौल हो गये हैं। मेरी गर्दन भी अब सुराहीदार और खूबसूरत हो गई है।
मेरा भाई मुझसे बस डेढ़ वर्ष ही छोटा है।
उसका लण्ड तो बहुत ही सोलिड जान पड़ता था। जब वो सोता था तो उसका लण्ड कभी कभी खड़ा हो जाता था। छोटी सी चड्डी में से वो खम्बे की भांति खड़ा नजर आता था। उसे देख कर मेरा दिल भी बेईमान हो उठता था। दिल में खलबली मच जाती थी। कई बार तो मैं अपनी चूत को हाथ से दबा लेती थी। शायद यह उम्र भी बेईमान होती है। उसे भाई बहन के रिश्तों का भी ध्यान नहीं रहता है।
मेरा भाई भी कम नहीं है, वो भी मेरे अंगों को अब घूरने लगा था। मेरे अकेलेपन का फ़ायदा वो उठाने लगा था। वो हंसी हंसी में कितनी ही बार मेरे चूतड़ों पर हाथ मार देता था। छुप-छुप कर स्नान के समय वो मुझे झांक कर देखता था। उसकी इस हरकत से मुझे रोमांच हो उठता था। अब मैं भी उसको स्नान करते समय झांक कर देखती थी। जब वो लण्ड पर साबुन मलता, तो मेरे शरीर के रोंगटे खड़े हो जाते हैं।
आज मैंने बाथरूम के अन्दर कपड़ों में छुपा हुआ मोबाईल देखा। उसके कैमरे का कोण मेरी वीडियो लेने के हिसाब से लगाया था। मेरे मन में वासना जाग उठी…
सोचा आज भैया को सब कुछ दिखा ही दूं, शायद भैया पिघल ही जाये और हमारे बीच शर्म की दीवार टूट जाये। मैंने बड़ी अदा से एक एक कपड़ा उताड़ा और चूतड़ मटकाते हुये मैं अपने आपको मोबाइल में कैद करवाने लगी। चूत को और चूतड़ों को साबुन से मल मल कर और चूंचियों को सेक्सी तरीके से मल मल कर उसे दिखाने लगी। फिर अपने चूतड़ों को उभार कर और उसके दोनों पट खोल कर अपना चूतड़ों के मध्य केन्द्र बिन्दु भी दर्शा दिया। फिर अपनी चूत सामने करके चूत को सहलाते हुये अन्दर अपनी अंगुली भी डाल कर उसे बताई। अन्त में अपना मटर जैसा दाना भी हिला कर बताया। फिर साधारण तरीके से कपड़े पहने और बाहर निकल आई।
मेरे बाहर निकलते कुछ ही देर बाद भैया ने बाथरूम में जाकर अपना मोबाइल ले लिया। मेरे किचन में जाते ही वो वीडियो देखने लगा।
मैने छुप कर उसे देखा तो वो वीडियो देख देख कर अपना लण्ड मसले जा रहा था। उसे शायद ये मालूम हो गया था कि ये तस्वीरें मैंने जान करके खिंचवाई हैं।
मुझे लगा कि बबलू बड़ा बेताब हो चुका है। उसकी बेचैनी उसके चेहरे से झलक पड़ती थी। शाम ढलते ढलते तो शायद उसने दो बार तो मुठ मार लिया था। शायद अब वो मुझसे खुलना चाहता था। पर मैं उससे बड़ी जो थी … उसकी हिम्मत कैसे हो।
शाम को मैं अपनी चड्डी उतार कर बस शमीज में आ गई थी। मुझे लगा कि आज ही उसे बस में कर लेना चाहिये … लोहा गरम था। मैं कमरे के बाहर ठण्डी हवा का आनन्द ले रही थी। भैया भी वहीं आ गया। उसके चेहरे पर तनाव स्पष्ट नजर आ रहा था। वो मुझसे बे-मानी की, यहां वहां की बातें कर रहा था। मैं सब कुछ भांप चुकी थी। उसका लण्ड खड़ा था। उसने भी चड्डी नहीं पहन रखी थी। ट्यूब लाईट की तेज रोशनी में उसके सुपाड़े तक का आकार साफ़ नजर आ रहा था। उसे देख कर मुझे झुरझुरी सी होने लगी।
“भैया, क्या बात है… तू कुछ परेशान है… ?”
“नहीं तो … ! मुझे एक बात बात पूछनी थी !”
मैंने अपनी गाण्ड उसके लण्ड के नजदीक लाते हुये जैसे बेफ़िक्री से पूछा,”मुझे पता है तेरी बात … यही ना कि आशा को कैसे पटाना है?”
वो बुरी तरह से चौंक गया।
“तुझे आशा के बारे में कैसे मालूम… ?”
“बस, मालूम है ! ऐसा कर, धीरे से उसकी कमर पकड़ लेना और उसके पीछे चिपक जाना… और कह देना… !”
“कैसे दीदी … हिम्मत ही नहीं होती… “
“देख ऐसे … अपना हाथ बढ़ा और मुझे पीछे से पकड़ कर अपने से चिपका ले !”
मैने मुस्करा कर उसे देखा। उसने ज्योंही मुझे जकड़ा, उसका उठा हुआ लण्ड मेरे चूतड़ों से टकरा गया। मेरे तन बदन में जैसे बिजली सी कौंध गई। पर देर हो चुकी थी। बबलू ने मेरी कमर में हाथ डाल कर अपने लण्ड को चूतड़ों की दरार के बीच घुसा दिया था। मैंने तुरन्त ही उसे दूर करने की कोशिश की। तब तक उसका दूसरा हाथ मेरे सीने पर आ चुका था।
“दीदी ऐसे ही ना… ?”
“अरे बस, मुझे तो छोड़ ना… “
पर भैया में बहुत ताकत थी। उसने मुझे ऐसे ही उठा लिया और कमरे में आ गया।
मुझे बिस्तर पर पटक दिया और मेरी पीठ पर सवार हो गया। मेरी शमीज कमर से ऊपर तक उठ गई थी और मेरे चूतड़ नीचे से नंगे हो गये थे।
“बस यशोदा, चुप हो जा… मेरी गर्ल-फ़्रेन्ड तू ही तो है … मैं तेरे ही कारण तो पागल हुआ जा रहा था।”
उसने पजामा जाने कब नीचे कर लिया था उसने ! उसका नंगा लण्ड का स्पर्श महसूस हो रहा था। मुझे ये सब शायद पहले से मालूम था कि वो कुछ ना कुछ तो करेगा ही। मुझे दिल ही दिल में खुशी हो रही थी कि मैंने आखिर इस मोड़ तक तो ला ही दिया था।
“बबलू… देख ! मैं तो तेरी बहन हू… छोड़ दे … चल दूर हट जा !”
“तेरे ये मस्त चूतड़, ये मस्त चूचियाँ … ! साली तेरी तो गाण्ड मार कर ही रहूंगा !”
“देख मैं मम्मी को बुलाऊंगी … आह अरे रे रे … ना कर … हाय लण्ड घुसा ही दिया ना… !”
मेरी गाण्ड में जैसे लोहा घुसता हुआ सा लगा। वो थोड़ा रुका… फिर जोर लगाया।
“यशोदा … प्लीज चुप हो जा ना … देख ना … मेरा लण्ड तेरे नाम की कितनी बार पिचकारियाँ छोड़ चुका है… तू नहीं जानती … तू तो एक दम कड़क माल है … !”
“आईईईई … बहुत मोटा है भैया, धीरे से… !” मेरे मुख से आह निकल गई।
उसका लण्ड भीतर तक घुस चुका था। मुझे भी अपनी इस सफ़लता पर गर्व हो रहा था।
उसने अपना लण्ड बाहर खींचा और फिर से अन्दर घुसा डाला। अब मुझे भी धीरे धीरे मजा आने लगा था। उसके हाथ मेरी छोटी छोटी चूंचियों पर कस गये थे।
मैं आनन्द से सराबोर हो उठी। मैंने अपने पैर पूरे पसार दिये और उसे गाण्ड मारने में सहायता करने लगी।
“देख, दीदी … मुझे बहुत मजा आ रहा है … किसी को कहना मत यह बात… “
“मैं तुझसे कभी बात नहीं करूंगी … देखना, हाय रे ! तूने तो मेरी गाण्ड कितनी जोर से मार दी !”
उसे तो असीम मजा आ रहा था। उसका लण्ड अब सटासट चल रहा था। कुछ ही देर में उसका वीर्य निकल पड़ा। उसने मेरे चूतड़ के गोलों पर अपना माल निकाल दिया और हाथ से मलने लगा।
“छीः, ये क्या कर रहा है… ?”
“फ़िल्म में तो ऐसे ही दिखाते हैं ना दीदी… ” अब वो मेरे ऊपर से उतर गया।
उसके लण्ड से पूर्ण स्खलन हो चुका था। वो बस हाथी की सूंड की तरह झूल रहा था।
“अभी मम्मी यहां आ जाती तो … ?”
“मम्मी तो नहा रही है अभी… उन्हें तो एक घण्टा लगता है।”
“साला, मरवाने के काम करता है … मुझे तो डरा ही दिया था।”
“डरने की क्या बात है दीदी, कोई चोट थोड़े ही लगती है … बस मजा ही आता है ना… ” उसने अपना पजामा पहन लिया था।
“पर तेरा मोटा कितना है … और ये भी कोई घुसाने की जगह है ?”
“पर दीदी, बुरा मत मानना, मुझे पता है तू भी तो इतने से कम कपड़े पहन कर मुझे चिढ़ा रही थी ना?”
मुझसे कुछ कहते ना बना, शायद उसने भांप लिया था कि मैं चुदासी हूं। पर क्या करती मैं ! यह जवानी तो मुझ पर कहर बन कर टूटी पड़ रही थी, और देखो ना, मेरी चूत अभी भी लण्ड मांग रही थी। घर पर मर्द नाम का तो बस बबलू ही था।
अब यूं ही हर किसी से थोड़ी ना चुदा सकती हूं, क्या पता कब, कैसा बवाल खड़ा हो जाये। पर हां, अब मेरी और भैया की दोस्ती और पक्की हो गई थी। दिन भर हम साथ ही साथ चिपके रहे। इसी बीच उसने मुझे वो वीडियो दिखाया कि कैसे उसने चालाकी से मेरा नहाते समय वीडियो बनाया। मैंने उसे देखा तो सच में बहुत उत्तेजक वीडियो था वो। मैं ही तो उसकी हीरोइन थी। यूँ तो मैंने उसे ऊपरी मन से खूब डांटा। पर वो बता रहा था कि जिसमें हीरो का लण्ड इन होता है वो हीरोइन होती है। हम खूब मस्ती और मजाक कर रहे थे। शाम को भैया मुझे अपनी मोटर साईकल पर घुमाने भी ले गया। हम दोनों ने बाजार में खूब मस्ती भी की। रास्ते भर मैंने अपने स्तन उसकी पीठ से खूब रगड़े।
रात का खाना खाकर हम दोनों कमरे में आ गये थे। पापा और मम्मी सो चुके थे।
पर यहां नींद कहां थी। मैंने लाईट जलाई और भैया के पास आ गई। भैया अपना पजामा उतार कर नंगा ही सो रहा था। मैंने भी अपनी शमीज उतारी और उसके पास लेट गई। उसका लण्ड पहले से ही खड़ा था। मैंने उसका लण्ड हाथ में ले लिया और आगे पीछे मुठ को चलाने लगी। इतने में भैया ने मुझे अपनी बाहों में कस लिया और मेरे ऊपर चढ़ गया।
“श्… श… श्… चुप रहना… ” उसका लण्ड मेरे शरीर में कूल्हों के पास यहाँ-वहाँ गड़ने लगा। मुझे लगा कि बस अब तो चुद गई मैं।
“भैया, बस ऊपर ही ऊपर से करना … बहुत मजा आयेगा देखना ! ” मैंने फ़ुसफ़ुसाते हुये कहा।
“नहीं दीदी, आज बस एक बार चुद ले … देखना मस्त हो जायेगी… ” वो जैसे गिड़गिड़ाया।
“नहीं रे … मुझे पता है चुदने से बच्चा हो जाता है… बस चोदना मत … ऊपर से ही मस्ती मारते हैं ना !”
“अच्छा, जैसी तेरी मरजी… ” वो अपने लण्ड को मेरी चूत में घिसने लगा और आहें भरने लगा। मेरी चूंचियाँ मलने लगा। उसकी सांसे तेज हो गई। मेरा दिल भी धाड़-धाड़ करके धड़क रहा था। मैं आनन्द से अंखियां बंद किये स्वर्ग में विचरण कर रही थी। मेरी चूत पानी से गीली हो गई थी, बहुत चिकनी हो चुकी थी। मेरे चेहरे पर पसीने की बूंदे छलक आई थी। वो भी पसीने में तरबतर था।
वो मेरे से लिपट पड़ा था। जाने कब उसका लण्ड मेरी चूत में उतर गया। हम दोनों के ही मुख से एक आनन्द भरी सिसकारी निकल गई। पर ये सब कब हो गया, मस्ती में पता ही नहीं चला। हम दोनों के शरीर जाने कब एक हो गये, बस हमारी कमर तेजी से चल रही थी। मेरी चूत उसके लण्ड को गपागप ले रही थी। वो भी उछल-उछल कर लण्ड पेल रहा था। मेरी चूंचियों की शामत आई हुई थी। उसने खींच-खींच कर उन्हें लाल कर दी थी।
“दीदी… आह कितनी चिकनी है रे तू … तू तो बहुत मस्त है… “
“भैया … बस चोद दे… कुछ मत कह … मस्त लण्ड है रे !”
“दीदी … ” और मुझ पर और जोर से पिल पड़ा।
“बबलू… और जोर से मार… हाय दैय्या … मेरी मार दी भैया… ” सच में भैया का लण्ड जैसे मेरी चूत के लिये बना था। अच्छी चुदाई कर रहा था। हम दोनों इस बात से बेखबर थे कि हम के जिस्म के साथ क्या हो रहा है। शायद इसी को स्वर्ग सा आनन्द कहते हैं।
तभी मेरे शरीर में जैसे आनन्द की लहरें उठने लगी … नहीं चूत में … नहीं शायद …
“आह्… बबलू … मेरा तो निकला … उफ़्फ़्फ़्फ़्… मुझे सम्भाल रे… उईईईईई… “
और मेर रति-रस जैसे बाहर को उबल पड़ा। मैं झड़ने लगी … मैंने उसे कस कर भींच लिया। तभी उसने अपने चूतड़ उठाये और लण्ड बाहर निकाल लिया और मेरे पेट परदबा दिया। उसका गरम वीर्य मेरी नाभि के आस पास निकल पड़ा। उसने भी मुझे कसकर लिपटा लिया। दोनों ही झड़ते रहे और जब तन्द्रा टूटी तो हम एक दूसरे से नजर तक नहीं मिला पा रहे थे। मैं उठ कर अपने बिस्तर पर चली आई। मुझे आज पहली बार तृप्ति का अहसास हुआ। मेरे चूत की झिल्ली शायद पहले ही टूट चुकी थी, जाने कब। पहली चुदाई मेरी तो असीम आनन्द से भरी हुई थी। इन्हीं ख्यालों में मैं डूबी हुई थी कि तभी मेरी चादर भैया ने खींच ली। उसका लण्ड तो ऐसे तना हुआ था कि जैसे अभी कुछ हुआ नहीं था। मैंने आनन्द से वशीभूत हो कर उसका लण्ड पकड़ लिया और अपनी तरफ़ खींच लिया। वो मेरे बिस्तर में मेरे साथ गुत्थमगुत्था हो गया। कुछ ही देर के बाद मैं उसके ऊपर बैठी हुई उसका लण्ड चूत के अन्दर बाहर कर रही थी। भैया नीचे दबा हुआ चुद रहा था… Hindi Sex Stories
मेरा नाम रणवीर, मैं इंदौर का रहने Hindi Sex Stories वाला हूँ। मैंने अपनी सामने रहने वाली रिया से अपने प्यार का इज़हार किया। शायद वो भी मुझे प्यार करती थी, हम दोनों फ़ोन पर ही प्यार की बातें करते थे।
एक दिन उसके घर पर कोई नहीं था, उसका फ़ोन आया और उसने मुझे घर पर आने को कहा। उसके घरवाले तीन दिन के लिए भोपाल गए थे। मैं समझ गया कि आज तो मेरी जिन्दगी का पहला मौका आ ही गया सेक्स करने का !
मैं मस्त नहा कर, दूसरों की नज़रें बचाकर रिया के घर पहुँच गया। रिया भी नहा कर मेरा इंतज़ार कर रही थी। मैं उसके पहुँचने के बाद उसके कमरे में गया। रिया ने पीले रंग का सलवार-कमीज़ पहना था। वो अपने बाल संवार रही थी, उसने मुझे देख कर बैठने को कहा बाहर हॉल में !
मैं उसका इन्तज़ार कर रहा था, रिया मेरे लिए पानी लेकर आई, मैंने पानी पिया। फिर वो मेरे पास बैठ गई, हम दोनों एक दूसरे को देखने लगे। फिर मैंने हिम्मत करके रिया का हाथ पकड़ लिया।
रिया बोली- दूर क्यों बैठे हो ? मेरे पास आकर बैठो !
मैं रिया से बिल्कुल चिपक कर बैठ गया। अचानक रिया से मुझे चूमना चालू कर दिया, मैं भी उसका साथ देना लगा। उसकी साँसें तेज़ी से चलने लगीं। मैं उसके स्तन ऊपर से ही सहलाने लगा। उसके मुँह से अहह्ह्ह्ह्हह की सिसकरियाँ निकलने लगीं। मैंने अपना हाथ नीचे की तरफ़ खिसकाना शुरू किया, मेरे दिल की धड़कनें बढती ही जा रहीं थीं। मैंने अपना हाथ अब उसकी सलवार के अन्दर घुसा दिया और पैंटी के ऊपर से ही उसकी चूत को सहलाने लगा।
रिया अब बिल्कुल गरम हो चुकी थी, वो अब सेक्स के लिए बेकरार थी। मैंने उसका सलवार-कुर्ता उतार दिया। अब रिया केवल ब्रा और पैंटी में ही थी। गुलाबी रंग की ब्रा-पैंटी में वह बहुत ही सेक्सी लग रही थी। उसकी बोबे ब्रा में से निकलने को बेताब हो रहे थे। मैंने उसकी ब्रा को अलग किया। रिया के दोनों दूध अलग हो गए। रिया के बोबे कठोर हो रहे थे। मैंने जैसे ही रिया के बोबे के निप्पल को मुँह में लेकर चूसा, उसकी सिसकारी निकल गई।
रिया ने भी अब अपना हाथ मेरे पैंट के अन्दर डाल दिया। मैं उसकी चुचियों को पागलों की तरह चूस रहा था। उसने अपने हाथ से मेरा लंड मसलना शुरू कर दिया।
मैंने उसकी पैंटी के ऊपर से ही उसकी योनि का एक चुम्बन लिया, रिया पागलों की तरह चिल्ला उठी। मैंने उसकी पैंटी को उतार दिया। रिया अपनी चूत को अपने हाथों से छुपा रही थी, उसे शरम आ रही थी। मैंने उसके हाथों को हटा कर उसकी चूत को जैसे ही देखा मैं हैरान रह गया। गुलाबी रंग की चूत बिना बालों के बड़ी ही सुंदर लग रही थी। मैंने उसके जिस्म को पैरों से लेकर उसके होठों तक बड़ी ही जोश से चूमा, कोई भी अंग और जगह खाली नहीं बची होगी, जहाँ मैंने उसे नहीं चूमा हो।
अब रिया बोली- प्लीज़ जल्दी करो, मेरे बदन में आग लग रही है !
मैं बोला- मेरी जान ऐसी भी क्या जल्दी है। पहले मुझे तुम्हारी चूत को चूसने तो दो।
और मैंने उसकी चूत को चूसना शुरू कर दिया। रिया के मुँह से जोर-जोर की सिसकारियाँ निकल रहीं थीं- हाय ये क्या कर रहे हो ? मेरे तो आआ उस्स्स्स्स्स ………. स्स्स्स्स्स् .. धीरे … प्लीज़… दर्द हो रहाआआआ है… उईए… म्माआआआ…. आआआहह….. रुक्ककक….. जाओ…..
मैं उसकी चूत में अपनी ऊँगली डाल कर अन्दर-बाहर करने लगा।
रिया बोली- प्लीज़ अब मुझे मत तरसाओ, प्लीज़ अपना लंड मेरी चूत में घुसा दो।
मैं बोला- अभी नहीं डार्लिंग… अभी तो मज़ा आया है। मैंने उसकी चूत में अपनी जीभ डाल कर जैसे ही अन्दर बाहर किया, उसने मेरा सिर अपने हाथों से ज़ोर से पकड़ कर अपनी जांघों से जोरों से दबा लिया और उसकी चूत से पानी निकलने लगा, रिया झड़ने वाली थी।
मैं रुक गया और बोला- अब तुम मेरा लंड अपने मुंह में लेकर चूसो।
रिया शरमाने लगी, पर वो मान गई और मुँह में मेरा लंड लेकर चूसने लगी। उसने काफी देर तक मेरा लंड चूसा और मैं अपने एक हाथ की ऊँगली उसकी चूत में करने लगा। उसके मुंह से फुच्च-फुच्च की आवाज़ आ रही थी। अब मैं अपना लंड उसके मुंह से निकाल कर उसके चूत की फाँकों पर रगड़ने लगा, रिया के मुँह से सिसकरियाँ निकल रहीं थीं। रिया पागल हो रही थी चुदने के लिए।
मैंने अपने लंड का टोपा चूत पर रख कर थोड़ा सा धक्का लगाया, उसकी चूत ने पूरा लंड अंदर ले लिया, रिया की चीख निकल गई और वह बोली- हाय मैं मर गई, प्लीज़ बाहर निकालो !
मैं बोला- अभी एक मिनट में दर्द बन्द हो जाएगा और तुम्हें मज़ा आने लगेगा।
अब मैंने थोड़ा सा लंड और अन्दर किया, रिया चिल्लाने लगी, बोली,”प्लीज़ बाहर निकाल लो, नहीं तो मर जाऊँगी ! रुक जाओ प्लीज़ ! दर्द हो रहा है, अभी इतना ही अंदर डाल कर चोदो मुझे।”
उसकी सील टूट चुकी थी और वो अब मेरा लंड अपनी चूत में आराम से अंदर ले रही थी। मैंने उसे धीरे-धीरे चोदना शुरू कर दिया। दो-तीन मिनटों में उसका दर्द जब कुछ कम हुआ तो उसे मज़ा आने लगा। वो बोली,”थोड़ा और अंदर डाल कर और तेज़ी… से चोदो… मुझे !”
मैंने थोड़ा और अंदर दबाया तो मेरा लंड उसकी चूत में ४” तक घुस गया। मैं अपनी गति को बढ़ाते हुए उसे चोदने लगा। वो अपना चूतड़ आगे-पीछे करते हुए मेरा साथ दे रही थी। पाँच मिनट तक चोदने के बाद वो बहुत ज्यादा जोश में आ गई। मैंने अपना पूरा लंड एक ही बार में उसकी चूत में धकेल दिया, रिया को बहुत दर्द हुआ और उसकी चूत से खून भी निकल आया। वो डरने लगी पर खून ज़ल्दी ही बंद हो गया।
अब मैंने धीरे-धीरे धक्के लगाने शुरू कर दिए अब रिया को मज़ा आने लगा और वो भी अपने चूतडों को हिला-हिला कर मेरा साथ देने लगी। उसके मुँह से बड़ी ही मादक-मादक आवाजें निकल रहीं थीं। रिया कहने लगी- प्लीज़ ज़ोर से धक्का लगाओ और सारा लंड अन्दर कर दो, बड़ा ही मज़ा आ रहा है।
मैंने अब अपना सारा ६ इंच का लंड उसकी चूत के अन्दर घुसा दिया। रिया के मुंह से स्स्स्स्स्स्स्स आह आह्ह्ह उस्सुसुसू जैसी मादक आवाजें निकाल रही थी। मैंने अब रिया की चूत में से अपना लंड निकाल कर उसको घोड़ी स्टाईल में खड़ा कर उसकी चूत में लंड घुसा दिया और धक्के मारने लगा। उसको और मज़ा आने लगा। उसके चूतड़ मुझे बहुत ही आनंद दे रहे थे। २ मिनट में ही वो अपनी चूतड़ उठा-उठा कर मेरे हर धक्के का जवाब देने लगी। मैंने अपनी स्पीड और बढ़ा दी।
रिया बोली- मुझे कुछ हो रहा है। लगता है मेरी चूत से पानी निकलने वाला है। खूब ज़ोर-ज़ोर से धक्का लगाओ।”
मैं समझ गया कि वो झड़ने वाली है। मैंने बहुत ही तेज़ी के साथ उसकी चुदाई शुरू कर दी।
वो बोली, “आआआ!!! मैंऽऽऽ आआआऽऽऽ रहीऽऽऽ हूँऽऽऽ और तेज़ ऽऽऽ और तेज़ ऽऽऽ” उसकी चूत से पानी निकलने लगा और मेरा सारा लंड भीग गया। मैं भी बिना रुके उसे आँधी की तरह चोदता रहा। लगभग २० मिनट तक चोदने के बाद मैं उसकी चूत में ही झड़ गया। इस दौरान वो भी ३ बार झड़ चुकी थी। लंड का पूरा पानी उसकी चूत में निकल जाने के बाद मैं हट गया।
उस दिन मैंने उसे ६ बार चोदा और जब कभी मौका मिलता उसे चोदता हूँ। Hindi Sex Stories
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