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प्रेषक : सचिन कुमार Hindi Porn Stories

दुनिया की लगभग सभी जातियों में, सभी Hindi Porn Stories समाज में जब लड़के, लड़की सेक्स करने लायक हो जाते हैं तो उनकी शादी कर दी जाती है और ये शादी बहुत ही खुशी, गाजे बाजे और उत्साह से एवं धूमधाम से की जाती है।

यह तो निर्विवाद रूप से मान लेना चाहिए कि सेक्स का मनुष्य जीवन में बहुत महत्व है। इस कारण इस सेक्स की शुरुआत इतनी भव्यता से की जाती है।

मनुष्य जीवन क्या, अपितु इस संसार के सभी जीवों के लिए यह जीवन का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है।

भगवान् ने इसको बनाया भी बहुत ही आनंद दायक है।

इसलिए सेक्स को हमेशा बहुत ही आरामदायक स्थिति में, प्रसन्न रहते हुए और मन व शरीर को सम्पूर्ण रूप से समर्पित करते हुए एवं पूर्ण समय देते हुए करना चाहिए।

यह सामर्थ्यवान है इसलिए सर पर चढ़ कर बोलता है, दिल और दिमाग को अति शीघ्र काबू में कर लेता है और सारे शरीर को तरंगित कर देता है।

यह शक्तिवान है इसलिए यदि यह अपूर्ण रह जाए तो मन को विक्षोभ से भर देता है और मन सारी वर्जनाएं तोड़ने को उतारू हो जाता है।

यह हर बार नयेपन का अहसास देता है, इसलिए इसको करने का बार बार मन करता है।

क्योंकि यह अति आनंद दायक है इसलिए सारी वर्जनायें टूट गई हैं, अब शादी के बाद ही सेक्स करना है – यह वर्जना टूटती जा रही है।

जिस किसी को सेक्स का अनुभव मिल सकता है वो कोई मौका नहीं छोड़ना चाहता है।

यह इतना विस्तृत है कि सेक्स को करने के इतने तरीके है कि कोई पूरा नहीं कर सकता।

और इतना गूढ़ कि कोई यह नहीं कह सकता कि मैं इसका पूर्ण रूप से एक्सपर्ट हूँ।

इस कारण से ही सेक्स ने दुनिया में तहलका मचा रखा है।

इस दो इंच के खड्डे में पूरी दुनिया है।

इसको नमन, आख़िर ये ही हमारी जन्मस्थली भी तो है।

इस सेक्स पर कितने ही ग्रन्थ लिखे जा चुके हैं। जो इस के बारे में जानते हैं वो भी और जो नहीं जानते है वो भी, जो कुछ इस के बारे में लिखा जाए सब कुछ पढ़ने को तैयार रहते हैं।

तो लीजिये प्रकृति की इस महान कृति पर एक और रचना। आशा है आपको यह पसंद आएगी।

बात आज से लगभग २५ साल पुरानी है जब मेरी उम्र अट्ठारह साल रही होगी और मैं उस समय १२ वीं में पढ़ता था। मेरे पास साइंस थी इसलिए शरीर विज्ञान में रूचि भी बहुत थी, ख़ास तौर से लड़कियों के बारे मैं जानने की उत्सुकता बहुत ही ज्यादा थी।

पता नहीं क्यों लेकिन मुझको बचपन से लड़कियों से बात तक करने में बहुत डर लगता था। आज भी किसी लड़की से सीधे सीधे सेक्स के बारे में बात करनी हो तो मेरी गांड लुप लुप करने लगती है। जबरदस्ती करना तो बहुत दूर की बात है।

हमारे मकान की पहली मंजिल को किराये पर दिया हुआ था। और आंटी जी की उम्र लगभग ३३ साल की होगी। वो मेरे कंधे तक आती थी लेकिन शारीरिक गठन के कारण से मुझको बहुत आकर्षण महसूस होता था और इच्छा होती थी कि उनके साथ मैं सेक्स करू। लेकिन हिम्मत नहीं होती थी। हमारे मकान में सड़क वाली साइड में चारदीवारी के अन्दर बगीचा था।

एक दिन उन दोनों पति पत्नी को कहीं जाना था, सुबह लगभग १० बजे तैयार होकर वो अंकल से पहले नीचे आ गई। उन्होंने नहाने के बाद तैयार होते समय गर्दन से बोबों तक पाउडर लगा रखा था। जो दिख भी बहुत गहरा रहा था। तो मैंने आंटी जी को कह दिया कि आंटी जी इतना पाउडर लगा रखा है। तो उन्होंने मुझसे कहा कि तू ठीक कर दे। अब मेरे होश गुम होने की बारी थी और डर ये लग रहा था कि मेरे घर से किसी ने देख लिया तो मेरी खैर नहीं। सो मैं चुप हो गया।

हमारे मकान के दाईं साइड वाला मकान बना नहीं था। खाली जमीन ही पड़ी थी और मालिक कभी आकर देखता ही नहीं था। हम ही लगभग १० साल से तो उसको खाली ही देख रहे थे। उसमें हम हमारे घर का कचरा भी डाल देते थे। और बरसात में झाड़ झंखाड़ भी बहुत उग आए थे। एक दिन देखा कि उस जमीन में एक मियां बीवी झाडों की सफाई कर रहे हैं और एक घोड़ा-ठेली उनके गेट के पास खड़ी है। पता चला कि वो दूध वाले हैं और उन्होंने किराए पर लिया है। किराए पर लेने से पहले इन लोगों ने मालिक से कह कर बिजली पानी के कनेक्शन चालू करवा लिए थे। उस जमीन के बाद में जो अगला मकान था, उसकी बगल में २ छोटे छोटे झोपड़ी नुमा कमरे इस जमीन पर बने हुए थे और एक हौज जमीन पर बाहर की चारदीवारी के पास उन कमरों के बाद बना हुआ था। उसमे उन लोगों ने पानी भरा और दो दिन लगा कर सारी जमीन साफ़ कर दी। एक कमरे में रसोई बना ली और दूसरे को सोने के काम लेने लगे। फ़िर दो चार दिन बाद २ भैंसे और एक भैंसा ले आए। दूध वाले की औरत का नाम राधा था और वो सुंदर भी खूब थी। कमर लगभग २५ इंच। छरहरी और मेहनती। अब उसके पास आकर रहने से मन उस पर भी डोलने लगा।

जब भी जोर से सेक्स करने की इच्छा होती तो टॉयलेट में जाकर आंटी जी या राधा के सपने देखकर मुठ मारता।

अब एक और मुश्किल हो गई कि राधा के यहाँ जो भैंसा रखा गया था, अकसर आसपास से डेरी वाले अपनी भैंसे ला ला कर उनके भैंसे से चुदवा कर ले जाते थे। अनेकों बार जब स्कूल की। छुट्टी के बाद मैं घर पर होता तो जब भी ऐसा होता तो मैं कोमन बाउंड्री के पास, गैरेज के बाहर खड़े होकर देखा करता और भैंसे की किस्मत से इर्ष्या करता के मुझसे तो यही अच्छा, रोज रोज नई भैंस चोदने को मिल जाती है। भैंसे का लंड दूधवाला अपने हाथों से पकड़ कर भैंस की चूत में डालता था। और कभी जब दूधवाला नहीं होता तो राधा ये काम करती थी और फ़िर मुझको टॉयलेट में लंड को शांत करना पड़ता।

दूधवाला अक्सर चारे और कुछ और काम से अपने गाँव भी जाता रहता था तब राधा घर में अकेली होती थी।

ये गैरेज ही उन दिनों मैंने खुद के रहने और पढने के लिए चुन रखा था।

एक दिन आंटी जी ने मुझको आवाज देकर ऊपर आने को कहा, मैं उनके पास गया तो मुझसे बोली कि तू पड़ोस में क्या देखता रहता है। मुझसे कोई जवाब नहीं बन पडा। मैं बोला कुछ नहीं यूँ ही खड़ा रहता हूँ।

कुछ दिन निकल गए। मार्च की बात है। मैं अकेला सुबह १० बजे मेरे बगीचे में खड़ा था। अचानक ही नजर राधा के टैंक की तरफ़ गई तो धड़कन मेरे गले में बजने लगी, राधा ऊपर से बिना ब्लाउज बिना ब्रा के सिर्फ़ घाघरे में टैंक से लोटे से पानी ले कर नहा रही थी। मेरी नजरों ने आज तक ऐसा नजारा नहीं देखा था। मैंने चोर नजरों से फ़टाफ़ट मेरे घर और आसपास देखा कि कोई देख तो नहीं रहा है ओर मेरी नजरें राधा के चिपक गई, राधा ने बिना मेरी ओर देखे नहाना जारी रखा। उसके जैसे बोबे तो मैंने आज तक कभी नहीं देखे। क्रिकेट की बॉल से जरा ही बड़े बिल्कुल गुम्बद की तरह गोल और तने हुए खड़े। दोनों पहाडों के बीच में तीन इंच के लगभग घाटी। मुझको मेरी आंखों पर विश्वास नहीं हो रहा था। राधा ने बिल्कुल आराम से अपना काम निबटाया और ऊपर चोली पहनी और सूखा घाघरा गले से डालते हुए नीचे का गीला घाघरा खोल के गले से डाला हुआ घाघरा नीचे कर के बाँध लिया और अपने कमरे में चली गई।

मेरी हालत – लंड अकड़ कर सात इंच के डंडे में बदल चुका था। मुझको इस घटना के तुंरत बाद टॉयलेट जाना पड़ा और बहुत मुश्किल से उसकी अकड़न शांत हो पाई।

फ़िर दो चार दिन बाद ही मेरी दीदी की चिट्ठी आई थी उस को पढ़ रहा था कि आंटी जी भी आ गई और मेरी दांई बाजू की ओर खड़े होकर चिट्ठी देखने लगी फ़िर उन्होंने अपना हाथ मेरी बांह में दे कर मेरी कोहनी अपने बोबे से सटा ली। बोबों की नरमी और गर्मी से मेरे शरीर में झुरझुरी छूट गई और जो करेंट लगा तो लंड ने एक ही उछाल में ओलिम्पिक के सारे रिकोर्ड तोड़ दिए। मुझको लगा कि मैं भट्टी पर बैठ गया हूँ।

चिट्ठी के ख़त्म होने पर माँ ने आवाज लगाई तो आंटी जी मुझसे दूर हुई। आँटीजी के अलग होने पर मुझे तुंरत टॉयलेट जाना पड़ा, मेरे छोटे मुन्ने को शांत करने के लिए। माँ का बताया काम करके मैं ऊपर आंटी जी के पास गया भी और उनके पास खड़े होकर कुछ देर बात भी की। लेकिन उनको हाथ लगाने कि हिम्मत फ़िर भी नहीं हुई।

मैं बहुत चाहता था कि इन दोनों से या किसी एक से मेरे शारीरिक सम्बन्ध बन जाएँ तो मजे ही मजे हो जाएँ। लेकिन बहुत हिम्मत करने पर भी उनको ऊँगली तक लगाने की हिम्मत नहीं होती थी। ये जानते हुए भी कि वो राजी हो जाएँगी मेरी हिम्मत फिर भी नहीं होती थी।

फिर एक बार आँटीजी के पास खड़ा था कि उन्होंने मुझको कहा- आ ! तेरे को एक चीज दिखाऊं !

फिर उन्होंने मुझे अपने पापा की बनाई हुई दही मथने की मथनी दिखाई, और उसको चला कर दिखाते हुए उनका पल्लू नीचे सरक गया जिसको उन्होंने ठीक नहीं किया, अब उनके ब्लाउज में से उनके भरे हुए बोबे अपना जलवा दिखा रहे थे लेकिन फिर बात वो ही हुई कि मैंने अपने आपको जाने कैसे कंट्रोल किया, मेरी हिम्मत एक ऊँगली तक लगाने की नहीं हुई। अब वो खुद तो अपने कपड़े खोल कर मुझसे बोलने से रही कि आ मुझे चोद दे। इस दुनिया की साधारण रीत तो ये ही है कि लड़का पहल करे सेक्स के लिए। और अक्सर देखने में ये आता है, कि एक बार हिम्मत कर लो तो कामयाबी मिल ही जाती है। लेकिन हिम्मत ही तो नहीं होती है।

इस बात को लगभग दो हफ्ते बीत गए, आंटीजी और राधा अक्सर आपस में बातें किया करते थे, जैसा कि आमतौर पर औरतों में होता है।

एक दिन राधा ने अचानक से मां को बोला कि आज लालाजी (राजस्थान में देवर को लालाजी से संबोधित किया जाता है) को शाम को खाना मैं खिलाउंगी क्योंकि ये (उसके पति) तो बाहर गया, और मैंने आज मनौती मानी है (मुझे बाद में पता चला कि उसके बच्चे नहीं हुए तो मनौती मानी थी) । मां ने साधारण तौर से हाँ कर दी। तो राधा ने शाम को मुझे खेलते देख बोला कि लालाजी आज खाना मेरे यहाँ खा लेना, मैं मां को बोल चुकी हूं, बोलो, क्या सब्जी बनाऊं। मुझे आलू की सूखी सब्जी और दाल अच्छी लगती है सो मैंने बता दिया तो राधा ने बोला कि ठीक है, तुम आठ बजे खाना खाने आ जाना। वो समय था जब हमारी कालोनी निर्माण के दौर से गुजर रही थी। इसलिए ज्यादा आबादी नहीं थी। कई मकान बिना बने ही जमीन के रूप में पड़े थे।

रात को आठ बजे मैंने राधा को आवाज लगाईं – भाभी………

तो राधा ने मुझको कहा- लालाजी, रसोई में आ जाओ।

मैं रसोई में चला गया, वो चुनरी पहने हुई थी। जैसा कि राजस्थान में रिवाज है कि पूजा के टाइम चुनरी ओढ़ते हैं। मुझको आसन पर बिठाया, और बहुत ही मनोयोग से थाली सजा कर मेरे सामने रखी।

थाली में मेरी पसंद की दोनों सब्जी-दाल, अच्छे से छौंक कर बनाई हुई, एकदम गरम करारी फूली हुई चपाती – खूब घी से तर, और बर्फी थी। खाना खाया तो मजा आ गया, बहुत ही मन लगा कर बनाया हुआ खाना था। खाना खिला कर मेरी थाली उठा कर उसने खुद उसमें खाना खाया। मैं बहुत आश्चर्य से उसे देखने लगा, लेकिन वो इत्मीनान से खाना खा रही थी। खैर, खाना खा चुकी तो उठी, मुझे नमस्ते की और बोली – लालाजी अब तुम साढ़े नौ बजे दूध पीने आ जाना तो मेरी मनौती पूरी हो जायेगी।

मैंने सोचा कि मानी होगी कोई मनौती। तो मैंने हाँ कर दी। मैं रात को गैरेज में सोता था। इसलिए मुझको कोई ज्यादा परवाह भी नहीं थी कि रात को आने में कोई परेशानी होनी है। आबादी कम थी और टीवी उन दिनों होते नहीं थे, इसलिए अक्सर ही नौ-साढ़े नौ सोने का समय होता था।

रात को जब मुझे पढ़ते में ध्यान आया तो साढे नौ बज भी चुके थे, तो मैंने गैरेज से निकल कर कुण्डी लगाईं, और दीवार फांद कर उसके कमरे के बाहर हौले से आवाज लगाईं – भाभी… तो राधा ने कमरे का दरवाजा खोला और मुझे बोली आओ लालाजी, मैं अन्दर गया तो देखा उस आठ गुना दस के छोटे कमरे में एक और खाट लगा रखी थी। फिर बीच में दरवाजा और दूसरी और एक छोटी सी मेज थी। जिस पर कुछ सामान रखा था। खाट के पास तिपाई पर एक गिलास कटोरी से ढका हुआ रखा था। और दूसरी तिपाई पर टेबल फैन। ये ही थी उसकी छोटी सी लेकिन बहुत बड़ी दुनिया।

मेरे अन्दर आते ही राधा ने दरवाजा ढुका दिया मैंने कोई विशेष ध्यान नहीं दिया और खाट की ओर इशारा करके बोली- बैठो लालाजी।

मैं खाट पर बैठ गया। राधा तिपाई की ओर गई तो मैंने सोचा दूध का गिलास उठाती होगी। फिर वो मेरी और घूमी और बोली- लो लालाजी आज तक ऐसा दूध कभी नहीं पिया होगा।

वो देखते ही मैं तो हक्का बक्का रह गया। राधा की चोली खुली हुई थी और उसमें से उसके शानदार बोबे निकले हुए थे जिसमें से एक के नीचे उसने एक हाथ लगा रखा था, सीधे मेरे मुँह के सामने वो बोबा कर के मेरा मुँह दूसरे हाथ से सीधा करके मेरे मुँह में दे दिया। मैं इतना हकबका गया था, कि कुछ देर तक तो कुछ समझ में ही नहीं आ रहा था कि ये सब क्या हो रहा है और मुझको अब क्या करना चाहिए। राधा ने अपना बैलेंस बनाने के लिए अपना एक पैर मेरे पैर से सटा हुआ जमीन पर और दूसरा पैर मेरे शरीर के बाजू में रख दिया। मैं उसके दोनों पैरों के बीच में आ गया।

राधा का दूसरा हाथ मेरे सर के पीछे आ गया और जो हाथ उसने अपने बोबे के नीचे लगा रखा था उस से मेरे गालों को बहुत प्यार से हौले हौले सहलाने लगी, और बोली, मेरे प्यारे लालाजी दूध पीना शुरू करो, देखो तो कितने प्यार से गरम किया है। खूब मलाई मारी है इसमें।

जिस के लिए मैं तरस रहा था वो सब मेरे साथ हो रहा था और मैं होश में नहीं था। मुझे गुमान भी नहीं था कि ये सब इस तरह से होगा और मेरी झोली में आ गिरेगा।

धीरे धीरे मैं संभला। राधा का जो पैर जमीन पर था। उस का घाघरा घुटनों तक चढ़ गया था, क्योंकि दूसरा पैर खाट पर था। मैंने अपना मुँह खोला और उसके बोबे की निप्पल मुँह में लेकर दूध पीने लगा। राधा के मुँह से सिसकारी निकलने लगी, वो बड़बड़ाने लगी- पीओ लालाजी पीओ ! जी भर के पीओ ! ये दूध बहुत दिनों से तुम्हारे लिए ही गरम कर के रखा है। ……………. आआआआआह….

आज मेरी आँखों के सामने उसके नहाने का सीन घूम रहा था, मैंने धीरे धीरे अपने हाथ उठाये और राधा का दूसरा बोबा अपने एक हाथ में पकड़ा जिसे छूने की हसरत बहुत दिनों से थी। और अपना दूसरा हाथ उसकी कमर में डाल दिया। मेरा पूरा शरीर उत्तेजना के मारे थरथरा रहा था। फिर मैं अपने को संभाल नहीं सका और मेरा धड़ धीरे धीरे खाट पर पसरने लगा और राधा को अपने ऊपर लिए दिए मैं खाट पर पसर गया।

मेरा मुँह राधा के बोबों में दब गया और मेरी सांस घुटने लगी तो मैंने अपना मुँह खोल के सांस ली, राधा अच्छी तरह से जान चुकी थी कि मैं सेक्स के मामले में निरा भोन्दू हूँ। इसलिए शर्म को उसने पूरी तरह से त्याग दिया वो अपने हाथो पर जोर डाल कर घुटने मोड़े मेरे लंड पर बैठ गई और खुद का घाघरा ऊँचा कर लिया फिर थोड़ा ऊँचा होकर, थोड़ा इधर उधर होकर मेरे पायजामे का नाडा खींच कर खोल दिया, फिर अंडरविअर में हाथ डाल कर लंड को पकड़ कर बाहर निकाल लिया, और मेरे कपडे थोड़ा सा नीचे सरका दिए। फिर अपने मुँह से थोड़ी सी लार निकाली और हाथ में लेकर मेरे लंड के सुपारे पर पोत दी। फिर लंड को खुद की चूत के मुँह पर रखकर मुझ पर पसरती चली गई।

मेरे लंड में मीठी मीठी टीस उठने लगी, जो इतने मजे में मैंने आराम से बर्दाश्त की। उसकी चूत बुरी तरह से गीली हो चुकी थी। और उसकी जांघो तक से पानी टपक कर मेरे लंड के आसपास गिर रहा था, मैंने कहा- भाभी ! सु सु निकल रहा है शायद !

तो राधा बोली- मेरे भोले बालम, मेरे प्यारे देवर, यह चूत का रस है, इससे ही तुम्हारा छोटा मेरे अन्दर घुसा जा रहा है !

वो धीरे धीरे हिल कर पूरा लंड अन्दर ले गई, मेरा लंड अन्दर जाकर कहीं अड़ गया, तो उसके मुँह से जोर की सिसकारी निकली। मैं डर गया कि शायद दर्द हुआ होगा। तो राधा ने मेरा चेहरा देख कर बोला कि देवर जी डरो मत ना, तुम्हारा छोटा मेरे बच्चेदानी के मुँह पर लगा है, और मुझको बहुत आनंद मिला है। फिर उसने मेरे मुँह से खुद का मुँह जोड़ लिया और मेरे होंट और जीभ चूसने लगी।

अब मैं भी ताव में आने लगा था, मैंने अपनी बाहें उसके पीठ पर बाँध ली और उसको कस लिया उसके होंट ढीले पड़े और मुँह से आह निकली। मैंने आव देखा न ताव उसके मुँह पर जगह जगह से पप्पी ली, चूसा फिर उसके होंट अपने होंट में लेकर जोर जोर से चूसने लगा। वो मुझे देख कर मुस्कुराई और आँख मार कर अपने कूल्हे चलाने लगी, कोई २०-२५ बार में वो अकड़ी और फिर ढीली पड़ गई और मुझसे बोली- देवर जी अब ज़रा सा रुक जाओ।

मुझे पहली बार पता चला कि औरत को भी चुदने में आनंद मिलता है, वो भी झड़ती है।

फिर मुझसे रहा नहीं गया तो उसके तने हुए बोबे दबाता रहा। ज़रा सी देर में वो फिर गर्मी में आने लगी, और एक और को खिसक कर खाट पर मेरी करवट में आ गई और बोली- लाला अब तुम ऊपर आओ मेरा गीला छेद ढूंढो और अपना छोटा घुसा कर खुद का काम करो, और मेरा भी।

मुझे समझ नहीं आया कि उसका काम कैसे करना है, लेकिन मैं कुछ नहीं बोला, सोचा कि जरूरत पड़ी तो बाद में बोलूंगा और राधा पर चढ़ गया, उसका छेद ढूंढ कर लंड को लगाया और सोच ही रहा था कि इसको अन्दर डालने के लिए क्या करूँ तो राधा ने नीचे से खुद के कूल्हे ऊपर उठा लिए और लंड अपने रास्ते चला गया। गहरे अन्दर तक, वो फिर सी सी करने लगी, और मैं चालू हो गया, धक्के पर धक्के, जोर से फिर और भी जोर जोर से………… अचानक फिर राधा अकड़ी और ढीली पड़ गई, मैं चालू ही रहा फिर मेरे मुँह से आ आ, निकलने लगा तो राधा चौकन्नी हो गई, उसने अपनी टाँगे मेरी कमर पर लपेट ली और बोली- पूरा दम लगा कर धक्के मारो और जब माल निकले तो पूरी ताकत से दबा कर उसे मेरे अन्दर डाल दो।

मैंने ऐसा ही किया। हम दोनों पसीना पसीना हो चुके थे। फिर अचानक ही मुझे याद आया कि मैं कहाँ हूँ, पता नहीं तो किसी ने देखा होगा, या गैरेज में झांक ले, मुझे ना पाकर, मुझको ही कोई इधर उधर देखता हो…………..

मुझे घबराहट होने लगी, राधा बोली- देवर जी घबराओ मत ना, मैं हूँ ना, मैं कुछ भी बोल दूँगी, सब संभाल लूंगी।

फिर आले में रखी प्लेट लेकर मेरे सामने की, ढेर सी मलाई थी, उस में मिश्री डाली हुई थी, मैं ने एक बार खाई, फिर राधा के न न करते हुए भी उसको भी खिलाई, और मैंने भी खाई, फिर उसने गिलास उठा कर मेरे मुँह से लगा दिया, फिर खड़ी होकर मुझे ठीक से बिठाया और पैर छूकर बोली, देवर जी मुझे वरदान दो कि मेरी मनौती पूरी हो, मुझे बहुत शर्म आई लेकिन मेरे मुँह से निकल पड़ा- ऐसा ही हो।

राधा ने मेरे होंटो का चुम्बन लिया और दरवाजा खोल कर बाहर झाँका फिर मुझसे बोली – अच्छा होता कि तुम आज यहाँ ही सोते, लेकिन ज्यादा अच्छा है कि तुम खुद के कमरे में ही सोवो। किसी को शक नहीं होगा।

मैं चोर कदमों से गैरेज में आकर दरवाजा बंद कर के पलंग पर लेट गया, नींद का दूर दूर तक नाम भी न था। राधा के शरीर की खुशबू, उसकी गर्मी, उसकी नरमी के अहसास, उसके बोबे और अंग प्रत्यंग मेरी आँखों के सामने घूमते रहे, मेरा लंड अकड़ा ही रहा, जाने उस रात मैंने कितनी बार मुठ मारी लेकिन लंड ने नहीं बैठना था और वो नहीं बैठा। मेरा मन भरा ही नहीं था, औरत के शरीर को नापने देखने की हसरत मन की मन में थी, बस चुदाई पूरी हो गई थी।

मेरी मां सुबह साढ़े चार बजे उठ जाती है, और पास की जमीन से भी पॉँच बजे खटर पटर होने लगी, भैंसों की सार संभाल शुरू हो चुकी थी, मेरी बाहर निकलने की हिम्मत नहीं पड़ रही थी, फिर भी जैसे तैसे करके छः बजे मैं उठा, भारी हाथों से दरवाजा खोला कि सामने राधा नजर आई। मेरी तो हिम्मत नहीं थी उससे नजरें मिलाने की, राधा हौले से मुस्कुराई, फिर अपने काम में लग गई।

मुझमे थोड़ी हिम्मत आई, फिर मैं लैट्रीन, ब्रश आदि से फारिग होकर बाहर दालान में आया तो ऊपर आंटीजी नजर आई जो राधा की और देख रही थी, जैसे ही राधा और आंटीजी की नजरें मिली, आंटीजी ने “क्या हुआ?” के रूप में गर्दन और आँखों की भोएं उठाई, राधा ने गर्दन को “हाँ” के रूप में हिला दी। ये सब रोज का सा काम था। मैंने कोई ध्यान नहीं दिया। अब मुझमे आम रोज की तरह का अहसास होने लगा था। बस रात का अहसास मन को गुदगुदा रहा था।

१० से थोड़ा पहले पिताजी और ऊपर वाले अंकल जी ऑफिस चले गए, मैं मां से कह ही रहा था, कि टंकी का पानी गर्म आने लगा है, अब पानी बाल्टी में भरकर थोड़ी देर रखना पड़ेगा। कि ऊपर से आंटीजी की आवाज आई – मुन्ना, ऊपर आकर नहा ले, यहाँ बाल्टी गुसलखाने में रखी है। मैं कपड़े लेकर ऊपर नहाने चला गया, तो आंटीजी बोली- जल्दी से नहा, फिर अपन नाश्ता करें !

मैंने सोचा कि नेकी और पूछ पूछ। जल्दी से नहाया – ठंडे पानी से मजा आ गया।

सारी रात नहीं सोने के कारण भूख बहुत जोरों से लगी थी, इसलिए मुझे नाश्ते की जोरो से याद आ रही थी, फ़टाफ़ट कपड़े डाले और बाहर निकल कर आंटीजी से बोला तो उन्होंने नाश्ता प्लेट में लगाया और गोल छोटी मेज को पलंग के पास सरकाकर मुझको बैठने को कहा और खुद भी मेरे पास बैठ गई, हम दोनों नाश्ता करने लगे गर्म पोहे और जलेबी।

अचानक ही आंटीजी ने पूछा- दूध पिएगा?

मैं चौंक गया, तो आंटी जी बोली- राधा के जैसा तो नहीं है लेकिन फिर भी अच्छा है………….

मेरी आँखों के सामने इनके और राधा की गर्दन के इशारे घूम गए,

फिर तो एक और बार कमरे का दरवाजा बंद हुआ, और एक मिनट में ही हम दोनों नंगधडंग होकर एक दूसरे से लिपट गए। दूसरा ही नाश्ता शुरू हो गया, आंटीजी के भरे हुए नरम बोबों का स्वाद भी कोई कम तो नहीं था। लेकिन हाँ राधा के जवान शरीर की गर्मी और कसावट मुझे याद आने लगी। हम दोनों ही बेताब होकर एक दूसरे को चूमने लगे, चूसने लगे, होंटो से होंट मिले फिर जीभे चूसी, फिर मैं उनके बोबे पीने लगा, वो ऊपर आ गई, जो कुछ रात को मैं नहीं देख पाया था अब सब कुछ स्पष्ट दिख रहा था, एक स्त्री का पूरा शरीर कैसा होता है, पूरा अहसास मेरे मन को तरंगित किये हुए था। मैंने उनके पूरे शरीर को सहलाया, कौन सा हिस्सा क्या अहसास देता है ये जाना, उसकी गर्मी नरमी जानी, रात का भौचाक्कापन कहीं पीछे छूट गया, और मैं बेशर्म होकर आंटीजी के पूरे शरीर को निहार रहा था, परख रहा था।

मैंने उनकी टाँगे चौड़ी करके उनकी चूत भी ठीक से देखी, लंड की अकड़न तो बस…………….

आंटीजी मेरे लंड से खेलती रही, मुझे जगह जगह से चूमती रही, फिर उन्होंने मुझे पलंग पर सीधा कर दिया और मुझ पर चढ़ कर मेरा लंड अपने चूत पर अड़ा कर धीरे धीरे कूल्हे पर दबाव डाल कर अन्दर लेती चली गई, मैंने भी नीचे से धीरे धीरे धक्के लगाए, लंड में मीठा मीठा दर्द था, बेचारा सारी रात परेशान रहा था और अब भी उसकी परेशानी का अंत नहीं हो रहा था।

मुझे एक लोकोक्ति याद आ गई कि ज्यादा अकड़ेगा तो मार खायेगा।

आंटी जी ने मेरे हाथ अपने बोबों पर रखने को बोला, और खुद का मुँह मेरी गर्दन पर लगा कर मेरी गर्दन चूसने लगी, बहुत ऊंचे वोल्ट के झटके मुझे लगने लगे, मुझसे सब कुछ बर्दाश्त बाहर होता लगा। मेरे मुँह से आहें और सिसकारी निकलने लगी, मैंने आंटीजी के बोबे भींच लिए, आंटी जी भी मजे और बोबों में हो रहे थोड़े दर्द से आहें और सिसकारी भरने लगी। फिर वो अकड़ने लगी और निढाल मेरे ऊपर पसर गई।

थोड़ी देर तो मैं आंटीजी के बोबे दबाता रहा और फिर अपने हाथ उनके बदन पर फिराने लगा।

उनमे चेतना आने लगी, फिर वो सक्रिय हो गई एक बार फिर चूमा चाटी का दौर शुरू हो गया, मेरा लंड अब भी आंटीजी की चूत में घुसा हुआ फुफकार मार रहा था। अब मैंने नीचे से धक्के पे धक्के लगाने शुरू किये और ऊपर से आंटीजी ने, दोनों के बदन टकराने पर फच फच की आवाज होती थी। जब मेरे झड़ने की बारी आई तो मेरे हाथो की कसावट थोड़ा ढीले होने लगी तो आंटीजी बोली कि बस थोड़ा सा और सब्र कर ले १०-५ धक्कों में मैं भी आई……………….. और बस…………………

अगले ४-५ दिन तो न रात और न दिन, न मैं सो पा रहा था और ना ही लंड को बैठने की फुर्सत मिल रही थी। मेरी भूख बढ़ रही थी और मेरे खाने की परवाह दोनों करती थी, मेरा बदन गदराने लगा। एक महीने में ६ किलो वजन बढ़ गया, और मेरा चेहरा चमकने लग गया। लेकिन फिर दोपहर में एक घंटा दोनों हमारे ऊपर मकान में एक साथ होती और हम लोग १-२-३ बार जितना हो सकता मजे करते। अब बाकी समय हम लोग चुदाई नहीं करते थे…………. मैं भी अब बाकी समय में अपनी पढ़ाई में जबरदस्ती मन लगाने लगा।

अचानक एक शाम को फिर राधा ने मुझको कहा- देवर जी, आज रात को दूध पीने आना !

अब यह सब मेरे लिए साधारण बात थी, सो जब रात को मैं दूध पीने गया तो कमरे में जाते ही राधा मेरे पैर छूकर मुझसे लिपट गई, आज फिर से मैं अकबकाया सा देख रहा था कि यह क्या हो रहा है, तो राधा बोली- मेरे प्यारे देवर, मेरी मन्नत पूरी हो गई, मेरे दिन चढ़ गए हैं और ये सब तुम्हारे वरदान के कारण हुआ है…………

मैंने सोचा- काहे का मेरा वरदान, भाभी यदि तूने ही आगे बढ़ने की हिम्मत नहीं की होती तो मेरी मर्दानगी तो टॉयलेट में ही धरी रह जाती।

कुछ महीने बाद एक सुन्दर सा बेटा राधा के पास था। Hindi Porn Stories

बिग लंड पड़ोसी का देख कर एक मॉडर्न भाभी के दिल में उस लंड का मजा लेने की तमन्ना जाग गयी. वैसे भी वह रेगुलर सेक्स से बोर हो चुकी थी और कुछ नया करना चाहती थी.

कैसे हैं दोस्तो,

मेरी पिछली कहानी
दोस्त से बीवी को गर्भवती कराया
आपने पढ़ी और पसंद की.
धन्यवाद.

आज की कहानी सारिका और गौरव की है.
दोनों की लव मैरिज हुई है.
शादी को दो साल हो गये, अभी बच्चे की कोई प्लानिंग नहीं है.

गौरव और सारिका शादी से पहले ही सारिका की पहल पर हमबिस्तर होने लगे थे.

सारिका की मां को खबर लग गयी थी, उसने बखेड़ा खड़ा कर दिया.
तो गौरव के पेरेंट्स ने हथियार डाल दिए और दोनों की शादी करवा दी.

गौरव गुरुग्राम में किसी कंपनी में जॉब करता था.
कम्पनी के प्रोजेक्ट्स बाहर चलते थे तो गौरव की पोस्टिंग कहीं भी हो जाती एक दो साल के लिए.

अकेले रहने से वह सारिका के साथ में हर समय सेक्स की ही सोचता.
सारिका उसका भरपूर साथ देती.

सेक्सी सारिका ने कॉपर टी लगवा रखी है.
सारिका गजब की सुंदर, स्मार्ट और कामदेवी है.

उसने गौरव को सेक्स का और अपना इतना दीवाना बना दिया है कि शादी के दो साल बाद भी गौरव रोज चुदाई न करे तो सारिका उसे ऑफिस न जाने दे.

सारिका कभी सेक्स से थकती नहीं और हरदम कुछ नया ट्राई करना चाहती है.
उसे यह बर्दाश्त नहीं कि कोई उसके आगे किसी और औरत की तारीफ करे.

सारिका हर पार्टी की जान होती क्योंकि वह इतने खुले और आधुनिक कपड़े पहनती कि मर्द हर समय उसके आगे पीछे घूमते.

औरतों को भी उससे ऐतराज़ नहीं था क्योंकि वह फुलझड़ी की तरह सबके बीच हंसी मजाक के फूल बिखेरती और मुंहंफट होने से कोई मर्द उसकी मर्जी के बिना उसके ज्यादा नजदीक नहीं जा पता था.

सारिका फ़्लर्ट करने में पक्की थी.
पता नहीं कितने मर्द उसका ख्याल करके अपनी बीबियों को चोदते थे और कितने मुठ मारते थे.

गौरव और सारिका कहीं भी सरेआम बेशर्मी से लिपटा-लिपटी और चूमाचाटी करते थे.
उनका बस चलता तो वो सरेआम सेक्स भी कर लेते.

सारिका की अदाओं के मारे कितने ही मर्द उसे व्हाट्सएप्प मेसेज भेजते और वो उन सभी का बेबाकी से जवाब देती.

पर सभी मर्द आपस में और अपनी बीवियों से ये बात छिपा कर रखते.
सारिका को मजा आता जब पार्टी में वो उन मर्दों के पैन्ट के उभार को देखती.

उनकी फॅमिली किटी के सदस्य लगभग एक ही उम्र के थे और सभी बाहर से आये नौकरीपेशा थे.

गौरव हॉस्टल में 5-6 साल रहा था तो पक्का खुराफाती बन चुका था.
उसका हॉस्टल का साथी रवि भी उसी की कॉलोनी में रहता था और उनकी फॅमिली किटी का मेम्बर भी था.

रवि किसी एमएनसी में सीनियर पोस्ट पर था और गौरव से ज्यादा अच्छा पैकेज ले रहा था.
पर दोनों की बीवियों को उनकी हॉस्टल लाइफ और वेतन की जानकारी नहीं थी.

यही हाल सारिका का भी रहा.
दिल्ली के नामी कॉलेज में वह हॉस्टल में रही.

सिगरेट, बियर और ब्लू फिल्म सबका लुत्फ़ उठाते उठाते वह लेस्बियन हो चली थी.
उसने बहुत सारी लड़कियों के साथ नंगी होकर समलिंगी सेक्स का मजा लिया; न जाने कितनी चूतें चाटी, कितनी चूचियां चूसी, ना जाने कितनी लड़कियों से उसने अपनी चूत और चूचियां चुसवाई.

हाँ सील उसने पैक रखी हुई थी अपने सपनों के राजकुमार के लिए!
और वह सपनों का राजकुमार एसा मिला कि बिना डोली उठे उसकी सील तोड़ बैठा.

गौरव के ऑफिस जाने के बाद सारिका घर के काम निबटा कर आराम ही करती और टीवी पर या मोबाइल में उलझी रहती.

उनका एक आलीशान दो बेडरूम का फ्लैट था तो सफाई का ज्यादा झंझट नहीं था.
सुबह दो-तीन घंटे को एक लड़की सुरभि आती, वह साफ़ सफाई से लेकर खाना बनाने का काम भी कर जाती.

हर दूसरे दिन सारिका उससे अपनी मालिश भी करवा लेती.
इस सबके बदले वो उस लड़की को बंधे वेतन के अलावा खाना और कपड़े और बचा हुआ मेकअप का सामान भरपूर देती.

सुरभि उससे खूब खुश रहती और उसके अलावा कहीं और काम पर नहीं जाती.
नयी उम्र की लड़की थी वो!

जब वो सारिका की मालिश करती तो सारिका बहुत कम कपड़ों में होती और सिगरेट के कश लगते हुए टी वी पर कोई हॉट फिल्म देख रही होती.
सुरभि भी सारिका के मखमली जिस्म और अंदरूनी अंगों की मालिश करते करते और हॉट फिल्म देखते देखते सारिका के रंग में रंग गयी थी और उसकी गुलाम सी हो गयी थी.

सारिका घर पर बहुत हल्के कपड़ों या सिर्फ फ्रॉक में ही रहती.
ये भी गौरव के आते ही उतर जाते.
दोनों काफी देर बाथटब में पड़े रहते.

गौरव उसे बाथटब में घोड़ी बनाकर चोदता.
ऊपर से पानी की फुहार पड़ती.

सारिका चुदते समय हल्ला बहुत मचाती.
उसे जोर जोर से आहें और सीत्कारें निकालने में बड़ा मजा आता.

और अब तो दोनों को आदत पड़ गयी थी इन आवाजों की!
वह जितना शोर करती, गौरव की चुदाई की स्पीड उतनी ही बढ़ जाती.

अब रुटीन सेक्स से दोनों बोर होने लगे थे और कुछ थ्रिल चाहते थे.

अभी दीपावली पर उनकी फॅमिली किटी पार्टी हुई तो उसमें कपल डांस भी था.

रोशनी बहुत धीमी करके सारे जोड़े चिपक कर डांस कर रहे थे.

गौरव और सारिका तो होंठ से होंठ भिड़ाये अपने में मस्त डांस करने में मशगूल थे.
बाकी जोड़े भी नजर बचा कर उन्हें ही देख रहे थे.

सारिका सबकी स्थिति को महसूस कर रही थी और मजे ले रही थी.

डांस के बाद वह पहले वाशरूम गयी और अपनी लिपस्टिक ठीक करके आई.

रात को घर पहुँचते ही गौरव उसे बेड पर खींचने लगा.
सारिका बोली- अरे कपड़े उतार कर मेकअप तो उतारने दो.

सारिका ने वाशरूम में अपना व्हाटसप्प चेक किया तो पार्टी में आये उसके दीवाने रवि का मेसेज था, उसकी सुन्दरता के कसीदे काढ़ रहा था.
तब सारिका ने जवाब दिया- अपनी बीवी को सुला कर आधा घंटे बाद फोन करना!

बाहर गौरव हल्ला मचा रहा था तो सारिका ने हबड़धबड़ में कपड़े उतारे और फेसवाश लेकर नंगी ही बेड में घुस गयी.
वहां चादर के नीचे गौरव नंगा अपना लंड सहला रहा था.

उसे देख के सारिका बोली- अगर ये भी तुम ही करोगे तो मैं क्या करुँगी? छोड़ो इसे!

सारिका ने गौरव का लंड मुंह में ले लिया और लगी लपर लपर चूसने!
पर चुदासी वह भी हो रही थी.
तो उसने अपनी टांगें गौरव की तरफ कर दीं.

अब गौरव ने भी उसकी चूत में अपनी जीभ घुसा दी.
सारिका की चूत तो पहले से ही गीली थी.

गौरव ने जीभ के साथ एक उंगली भी सारिका की चूत में घुसा दी.
सारिका लगी मचलने!

गौरव ने ढेर सारा थूक उसकी चूत में डाला जो बह कर बाहर नीचे आ रहा था.
तब गौरव ने थूक से एक उंगली चिकनी की और सारिका की गांड में घुसा दी.

सारिका चिहुंकी और बोली- वहां नहीं, बाहर निकालो! तुम तो मेरी गुलाबो को चाटो बस!
गौरव ने उसकी टांगें और फैलायीं और पूरे दम खम के साथ उसकी चूत में जीभ और उंगली से चुभलाने लगा.

सारिका अब आवाजें निकाल रही थी.
उसे बहुत मजा आ रहा था.

गौरव उसके मम्मे भी मसल रहा था.

अब सारिका से बर्दाश्त नहीं हुआ तो उसने गौरव को नीचे लिटाया और चढ़ गयी उसके ऊपर और गौरव का लंड अपनी चूत में सेट करके लगी जोर जोर से उछलने!
वह जितना जोर से उछलती, उतनी ही जोर से आवाजें करतीं.
उसके मुख से लार बाहर निकल रही थी.

वह गौरव को निचोड़ देना चाहती दी.
पर गौरव दमदार था.
उसने सारिका को नीचे पलटा और चढ़ गया उसके ऊपर और पेल दिया अपना मूसल उसकी चूत में!

तभी गौरव ने स्पीड बढ़ा दी थी.
वह भी बोलने में कम नहीं था, कह रहा था- बड़ा नैन-मटक्का कर रही थी मीटिंग में रवि के साथ? बुला लूं उसे भी … दोनों मिलकर तेरी चूत का भोसड़ा बना देते हैं अभी!
सारिका बोली- तुम भी तो कामिनी की गांड पर हाथ फेर रहे थे. ज्यादा मन कर रहा था तो चोद देते उसे वहीं! अब बकवास कम करो और मेरी चुदाई पर ध्यान दो. तुमसे नहीं चुदाई हो रही तो मैं ही रवि को बुला लेती हूँ.

सुन कर गौरव का जोश और बढ़ गया और वह और जोर लगा कर चोदने लगा सारिका को!
वह बोला- अब जब भी कामिनी मायके जायेगी, मैं रवि को बुला लूंगा. रवि से चुदवाऊंगा तुझे! सब मालूम पड़ जाएगा जब दो दो मोटे लंड तेरी चूत फाड़ेंगे.

सारिका यह सुन कर और गर्म हो गयी और उछल-उछल कर गौरव का साथ देने लगी.
दोनों गुत्थम गुत्था हो रहे थे.

गौरव ने झटके बढाते हुए कहा- मेरा तो होने वाला है, मैं आने वाला हूँ.

सारिका ने अपने लम्बे नाख़ून गौरव की पीठ में गड़ा दिए और कस के भींच लिया उसे!
उसकी चूत की आग अभी भड़की हुई थी.

गौरव ने एक झटके में सारा माल सारिका की चूत में निकाल दिया और वहीं निढाल होकर पड़ गया.
सारिका ने उसे एक भद्दी गाली देते हुए कहा- इतना जल्दी कर दिया, अब मैं इसमें किसका लंड घुसाऊं?

गौरव थक कर मुंह ढक के सो गया हँसते हँसते ये कहते- किसी का भी घुसा ले, मैं क्या रोकता हूँ?

सारिका वाशरूम में फ्रेश होने गयी और एक फ्रॉक डाल कर फ्रिज से अपने लिए एक कोल्ड कॉफ़ी का केन निकाल लायी और सिगरेट जला कर दूसरे रूम में सोफे पर बैठ गयी.

तभी रवि का मेसेज आया- हाय!

सारिका ने बेबाकी से पूछ लिया- निबटा लिया कामिनी को?
रवि ने भी जवाब दिया- वह तो पार्टी से आते ही सो गयी और मैं तुम्हारे ख्वाबों में सोने की तैयारी में हूँ.
सारिका ने जवाब दिया- ज्यादा उड़ो नहीं, फोन बंद करो और सो जाओ. ख्वाबों में जो आये उससे अपना काम करवा लेना, मैं तो नहीं आने वाली!

रवि ने तुरंत सॉरी बोला- अब तो तुमसे बात हो रही हैं तो नींद का सवाल ही नहीं!

तब रवि ने उसे पार्टी की सारिका की कुछ फ़ोटोज़ भेजीं जो उसने खींची थी.
सारिका बोली- मेरी फ़ोटोज़ डिलीट कर देना. वरना कामिनी ने देख लीं तो तुम्हारा टूल काट देगी!

रवि पीछे पड़ गया- वीडियो काल कर लो!
सारिका बोली- मैं तो रात को बिना कपड़ों के हूँ और तुम कपड़े पहने हो.
रवि बोला- मैं भी ऐसे ही हूँ, एक बार प्लीज़ काल करता हूँ, उठा लेना.
सारिका बोली- दिखाऊंगी कुछ नहीं.

रवि ने उसे वीडियो काल किया.
सारिका ने फोन का कैमरा अपनी चिकनी टांगों को दिखाते हुए उसे सीधे अपने चेहरे पर ले लिया.

रवि को एसा ही अहसास हुआ कि वह बिना कपड़ों के है.
तो रवि ने अपना मोबाइल अपने चेहरे पर करते हुए सीधे अपने औज़ार पर कर दिया.

“क्या मोटा लंड था उसका!”

बिग लंड देख सारिका के मुंह में पानी आ गया.
पर उसने झटके से फोन काट दिया और फोन स्विच ऑफ कर दिया.
उसे मालूम था कि अब रवि बार बार उसका फोन ट्राई करेगा और बाद में उसके नंगे जिस्म की कल्पना में मुठ मार कर सो जाएगा.

सारिका बेड में घुस गयी और गौरव से चिपट कर सो गयी.

परन्तु रवि का मोटा लंड उसके दिमाग से उतर नहीं रहा था.

मेरे प्यारे पाठको, पांच भागों में समाप्य यह कहानी आगे आगे आपको और मजा देगी.
अभी तक की बिग लंड कहानी कैसी लगी?

Xxx मेड फक कहानी में मैं मुठ मार के गुजरा करता था. हमारी काम वाली आंटी को पता चल गया, उन्होंने मेरी गर्लफ्रेंड के बारे में पूछा. तो मैंने आंटी को ही मदद करने को कहा.

दोस्तो, मेरा नाम जीत है. मैं यूपी का रहने वाला हूं.
मेरी उम्र अभी 25 साल है, हाइट 5 फुट 7 इंच है और मेरा लौड़े का साइज 6 इंच है.

यह Xxx मेड फक कहानी एकदम सच्ची है.

यह बात एक साल पहले की है.

हमारे घर पर एक काम वाली आंटी काम करने आती थीं.
उन आंटी का नाम कोमल था.
उनका रंग सांवला था.
आंटी थोड़ी मोटी भी थीं, लेकिन बहुत ही सेक्सी फिगर की थीं.

एक दिन मैं अपने दोस्तों के साथ घूम रहा था तो हम दोनों हस्तमैथुन की बात करने लगे.

बातचीत के दौरान उसने कहा- मैं तो लंड पर कंडोम पहन कर मुठ मारता हूँ और वैसे ही अपने लौड़े को कंडोम पहनाए हुए ही सो जाता हूँ.
मैंने कहा- इसमें क्या खास बात है?

वह बोला- खास-वास कुछ नहीं है, बस उस वक्त जो नशा चढ़ता है ना तो लगता है कि कौन लंड धोने जाए … बस ऐसे ही पड़े रहो. बिस्तर के कपड़े भी खराब नहीं होते और मजा भी पूरा आआ है. तू कैसे मुठ मारता है?

मैंने कहा- मैं तो मुठ मार कर टिश्यू पेपर से लंड पौंछ लेता हूँ.
वह कुछ नहीं बोला.

फिर उसने कहा- अरे यार, मुझे तो डॉटिड कंडोम में हाथ चलाने में मजा आता है.
उसकी यह बात सुनकर मुझे भी लगा कि एक बार तो कंडोम लगा कर देखना चाहिए कि कैसा लगता है.

कुछ देर बात करने के बाद उस दोस्त ने मुझे अपने पास से एक कंडोम का पैकेट दे दिया और कहा- ट्राई करके देख.
मैंने भी वह कंडोम का पैकेट अपनी जेब में रख लिया.

मैं शाम को अपने घर आया तो मैंने सोचा कि मैं इस कंडोम को यूज कर लेता हूँ.
मेरा कमरा अलग था तो अपने कमरे में गया और दरवाजा बंद कर दिया.

मैंने अपने कपड़े उतार दिए और अपने लौड़े पर कंडोम चढ़ाने लगा.
पर लंड तो ढीला था तो मैंने सोचा कि पहले इसको कड़क करता हूँ.

मैंने अपने लौड़े पर थूक लगा कर हिलाना शुरू कर दिया.

कुछ देर बाद मेरा लंड सख्त हो गया.
अब मैंने कंडोम का रैपर फाड़ा और उसे अपने लौड़े पर चढ़ा दिया.

उसके बाद मैंने कुछ देर तक मुठ मारी और झड़ गया.
सच में बड़ा मजा आया.
न साला हाथ धोना पड़ा और ना लंड.

फिर मैं बिना कंडोम निकाले यूं ही ही सो गया.
बड़ी गहरी नींद आई.

सुबह सुबह कोमल आंटी की आवाज आई- जीत बेटा दरवाजा खोलो.
मैं एकदम से हड़बड़ा कर उठा और अपने लंड को देख कर मैंने कहा- हां आंटी, बस अभी आया … आप एक मिनट रुको.

मैंने झट से लंड से कंडोम निकाला और बेड के गद्दे के नीचे घुसा दिया.
फिर मैंने जल्दी से अपने कपड़े पहने और दरवाजा खोल दिया.

कोमल आंटी ने कहा- 8 बज रहे हैं … उठना नहीं था क्या?
कोमल आंटी मुझसे थोड़ा फ्रेंडली थीं तो मैंने कहा- आपके ही उठाने का इंतजार कर रहा था.
वे हंसने लगीं.

फिर मैं फ्रेश होने चला गया.

जब मैं अपने कमरे में आया तो देखा कि साला कंडोम तो आधा ही गद्दे के नीचे घुसा हुआ है और कोमल आंटी भी उसी के सामने पौंछा लगा रही हैं.

मैंने जैसे ही कंडोम को अन्दर घुसाने की कोशिश की, आंटी ने मुझे देख लिया.

आंटी मुझसे बोली- यह कंडोम यहां क्या कर रहा है?
जैसा कि मैंने आपको बताया कि कोमल आंटी मुझसे थोड़ा फ्रेंडली थीं.

तो मैंने मुस्कुराते हुए कहा- कुछ नहीं आंटी, यह गलती से रह गया था.
आंटी ने कहा- इसे तो तुरंत ही फेंक देना चाहिए था ना!

मेरी जगह कोई और होता तो शायद तुरंत उनकी बात को पकड़ लेता कि वे क्या कहना चाहती हैं.
लेकिन मैंने कहा- आंटी यह तो अभी निकाला है, इसलिए मैंने यहीं रख दिया था.

आंटी आश्चर्य से बोलीं- क्या तूने यह अभी यूज़ किया है?
मैंने कहा- नहीं, यूज़ तो रात को किया था … पर इसे लगा कर ही सो गया था. अब निकाल कर रखा था.

वह बोलीं- छी: तेरे कच्छे में तो बास भी भर गई होगी!
मैंने कहा- अरे ऐसे कैसे कच्छे में बास भर गई होगी? चाहे तो आप सूंघ लो.

आंटी हंसने लगीं और बोलीं- किसी को लेकर भी आया था … या अपने हाथ से ही काम चलाया था?
मैंने कहा- ऐसी किस्मत कहां है मेरी, जो कोई मेरे साथ सेक्स करे!

कोमल आंटी ने कहा- दिखने में तो इतने हैंडसम हो, फिर भी तुझे हाथ से काम चलाना पड़ रहा है!
मैंने कहा- क्या करूँ आंटी … आप भी तो मेरे लिए कुछ नहीं सोचतीं.

यह सुनकर आंटी ने मेरे हाथ से एकदम कंडोम छीन लिया और बोलीं- जीत, ज्यादा मत बोला करो … मैं तुम्हारी आंटी हूँ … तुम्हारे पास मेरे लायक लंड भी नहीं होगा.
मैंने उनके मुँह से लंड शब्द सुना तो समझ गया कि आंटी लंड के नीचे आने को राजी हैं.

मैंने कहा- बड़े छोटे से कुछ नहीं होता आंटी … लंबी रेस का घोड़ा होना चाहिए.

तभी आंटी ने कंडोम को सीधा किया और हैरानी से बोलीं- क्या तुम्हारा इतना बड़ा है या तुमने इसे खींच कर लंबा कर दिया?
यह कह कर वे हंसने लगीं.

इतनी सेक्सी बात सुनते सुनते मेरा लंड खड़ा हो गया था.

मैंने आंटी का हाथ अपने लौड़े पर रखा और कहा- खुद ही देख लो आंटी … मेरा हथियार आपकी फटी हुई चुत को मजा दे सकता है!
आंटी ने एकदम से लौड़े से हाथ हटाया और बोलीं- हट बदतमीज, कोई देख लेगा.

अब मुझ पर अपना काबू नहीं रहा.
मैंने आंटी की एक चूची पकड़ कर भींच दी.
आंटी ‘आउच.’ कह कर उचक गईं.

मैंने आंटी से कहा- आंटी, मुझे अब आपके साथ सब कुछ करना है.
वे बोलीं- कोई आ जाएगा, अभी मुझे जाने दो … मैं जा रही हूं.
आंटी मुझसे छूट कर चली गईं.

मैंने आंटी के जाने के बाद उनकी चूचियों का अहसास करते हुए मुठ मार ली.

मैं समझ गया था कि आंटी को लंड के नीचे लाना कोई बड़ी बात नहीं है. साली चुत चुदवाने के कुछ पैसे ही तो लेगी.

उस दिन आंटी चली गईं.
उसके बाद से जब भी आंटी मेरे कमरे में आतीं, मैं उनके ब्लाउज में सौ का नोट फंसा देता कि आंटी एक बार चूसने दो ना.

आंटी हँसती हुई मुझसे अपने दूध दबवा लेतीं और कभी कभी मैं उनके ब्लाउज को उठा कर निप्पल चूस भी लेता.
हर बार आंटी को सौ का नोट मिलता तो वे और ज्यादा प्यार से चूचे दबवा लेतीं.

कभी कभी मैं उनकी टांगों के बीच में भी हाथ डाल कर उनसे चुत चुदवाने की बात कर लेता तो वे कुछ नहीं कहतीं.
कुछ दिनों तक ऐसे ही चलता रहा.

एक दिन घर के सभी लोग एक फंक्शन में दो दिन के लिए गए हुए थे.
मैं नहीं गया था.
मैंने सोच लिया था कि आज आंटी की लेना ही है.

शाम को आंटी आईं और बोलीं- सभी लोग कहां पर हैं?
मैंने कहा- वे सभी एक-दो दिन के लिए एक रिश्तेदार के यहां गए हैं.

आंटी मुस्कुराने लगीं.
मैंने कहा- यहां पर सिर्फ आप और मैं ही रह गए हैं.

वे बोलीं- तो क्या करूँ?
मैंने लंड सहला कर कहा- आंटी, आज आप कुछ नहीं करोगी. आज मैं आपकी चुत चुदाई करूंगा.

आंटी ने हँसते हुए झाड़ू लगाना शुरू कर दिया.
मैंने उनकी गांड को देखा तो मेरा लंड मचलने लगा था.
पीछे से उनकी गांड मुझे मदहोश कर रही थी.

मैंने एकदम से आंटी को पीछे से पकड़ लिया और उनके मोटे मोटे चूचे दबाने लगा.
कोमल आंटी ने कहा- जीत, यह तुम क्या कर रहे हो … ऐसा मत करो.

मैंने आंटी को बेड पर गिरा लिया और कोमल आंटी की चूची दबाते हुए उनके होंठों चूसने लगा.
आंटी ने भी मेरे लौड़े को अपने मुलायम हाथों से भींच लिया.

कुछ 5 मिनट तक हम ऐसे ही करते रहे.
आंटी ने मेरे कपड़े निकाल दिए.
तो मैंने भी आंटी की साड़ी और ब्लाउज निकाल दिए.

आंटी जितनी मोटी थीं, उतनी ही बिल्कुल टाइट चूचियां थीं.
उनकी ब्रा सफेद रंग की ओर कच्छी नीले रंग की थी.

आंटी मेरे लौड़े को पकड़ कर हिलाती हुई बोलीं- आगे को आ जाओ.
उन्होंने मेरे लौड़े को अपने मुँह में भर लिया.
अब आंटी मेरे लौड़े को चूस रही थीं.

तभी मैंने आंटी की ब्रा उतार दी.
आंटी के निप्पल काले थे.
मैं उनके निप्पल दबाने लगा.

आंटी को मेरा लंड को चूसते चूसते 15 मिनट हो गए थे.
तब आंटी ने कहा- अब तुम मेरी चाटो.

मैं आंटी की किस करते-करते नीचे आ गया.
मैंने आंटी की पैंटी निकाल दी.

आंटी की चूत पर काली झांटें थीं.
मैंने अपनी उंगली से आंटी की चूत खोली और चूत में उंगली डाल दी. फिर जीभ से चाटने लगा.

आंटी ने मेरे सर को पकड़ कर अपनी चूत पर दबा लिया.
मैं अपनी उंगली जोर-जोर से अन्दर बाहर कर रहा था.

आंटी की चूत पूरी तरह से गीली थी.
वे सिसकारियां भरने लगीं- उई आ अम्म चाट जीत चाट मेरे भोसड़े को.
उनकी झांटें मेरे चेहरे पर लग रही थीं.

अब मुझसे रहा नहीं जा रहा था.
मैंने आंटी से कहा- आंटी, अपने पैर चौड़े कर लो.
आंटी ने अपने पैर चौड़े कर लिए.

फिर मैंने अपना सख्त लौड़ा उनकी चूत पर रखा और हल्का सा धक्का लगाया तो मेरा लंड अन्दर घुस गया.
आंटी अपनी दोनों आंखें बंद करके अपनी चूची दबाने लगीं.

मैं तेज तेज धक्के मारता हुआ आंटी की चूत चोदने लगा.
मैंने आंटी से कहा- आंटी, आप मेरे लौड़े के ऊपर आ जाओ.

मैं बेड पर लेट गया.
अब आंटी ने मेरे लौड़े को अपनी चूत में डाल लिया और ऊपर नीचे होने लगीं.

आंटी थोड़ी मोटी थीं तो वे कुछ ही देर में थक गईं.
वे बोलीं- मुझसे नहीं हो पा रहा, अब तुम करो.

मैंने आंटी को घोड़ी बना लिया.
आंटी की झांटें बहुत बड़ी थीं इसलिए चूत खोल कर अपना लंड पूरा एक ही बार में डाल दिया.

आंटी- उई आह थोड़ा आराम से करो.
मैंने जैसे ही धक्के देने चालू किए, आंटी के चूतड़ मेरी जांघों पर लगने लगे थे.

Xxx मेड फक करने में मुझे बहुत मजा आ रहा था.
मैं झड़ने वाला था तो मैंने लौड़े को गर्म चूत से बाहर निकाला और आंटी की गांड से कमर तक अपने माल की बूंदें गिरा दीं.

फिर हम दोनों शान्त हो गए.
मैं आंटी के ऊपर ऐसे ही लेट गया.

आंटी बोलीं- मैं इतने दिनों से काम कर रही हूं, ये काम तो तुझे पहले ही कर देना चाहिए था!
मैंने कहा- आंटी कोई बात नहीं, अब से तो शुरू हो गया!

उसके बाद मैंने कहा- आज आप यहीं रुक जाओ. रात भर चुदाई का मजा लेंगे.
वे कुछ देर सोचने के बाद राजी हो गईं।

उन्होंने अपने घर फोन कर दिया कि आज रात वे मेरे घर रुकेंगी.

बस फिर क्या था … मैं और आंटी ने सारी रात चुदाई का मजा लिया.
मैंने आंटी की चुत की झांटें साफ कीं और जबरदस्त चुदाई की.

दोस्तो, यह मेरी सच्ची सेक्स कहानी है. आपको कैसी लगी प्लीज बताएं.

मेरी अभी कुछ सेक्स कहानी और भी हैं जो एकदम सच्ची हैं. उनको मैं Xxx मेड फक कहानी पर आपके कमेंट्स पढ़ने के बाद लिखूँगा.

हेलो मेरा नाम राहुल है और मैं पंजाब का राने वाला हूं। ये मेरी पहली कहानी हैं इस लिए लिखावट में कोई गलती हो तो पहले से ही माफी मांगता हु। मेरी उम्र 26 साल की है और दिखने में ठीक थक हु। कहानी मेरी बुआ की लड़की की है जो उम्र में मुझसे 10 साल बड़ी है। उसका नाम ममता है दिखने में काफी सुंदर लम्बी चौढी शरीर की मालकिन है। जब वह 20 ... 22 की उम्र में थी तब उसके चाल चलन कुछ ठीक नहीं थे वह किसी लड़के के साथ दो तीन बार चूत की चिराई करवाती पकड़ी जा चुकी थी। तब से मेरे मन में उसकी चूदाई करने के ख्याल आया करते थे। लेकिन अब उसके 2 बच्चे है वह दिल्ली में रहती है। हमारी बाते फोन पर होती रहती थी और इसी के साथ वे बहुत खुले स्वभाव की है ,हम बहुत अच्छे दोस्त भी है बात कुछ महीनों पहले की है मैं अपनी शॉप के काम से दिल्ली आया जाया करता था। और कभी कभी ममता दीदी के घर मिलने जाता था । एक बार जब मैं उनके घर रुका हुआ था तो में अपनी गर्ल फ्रेंड से चैटिंग कर रहा था । कमरे में सिर्फ मैं दीदी और बच्चे ही थे। और मैं बिस्तर पर लेटा चैटिंग के दौरान मैं अभी गर्ल फ्रेंड के बूब्स और उसकी नंगी फोटोज और वीडियो देख रहा था। इसी के चलते मेरा लंड़ हवा में उछाल मार रहा था। शायद यह बात ममता दीदी को पत्ता लग गई और वो अचानक से बोली राहुल .... तू मेरी होने वाली भाभी से बात कर रहा है क्या। मैं थोड़ा डर सा गया और फोन साइड पे रख कर सहज बनाते हुए बोला नहीं यार बस ऐसे ही कुछ खास नहीं । दीदी.. मुझे पागल मत बना, जल्दी बता फोन में इतने ध्यान से क्या देख रहा था और हंसने लगी। मैं.. कुछ नहीं दीदी गेम खेल रहा था , मेरा टाइम पास नहीं हो पा रहा । दीदी.. तो कोई गर्ल फ्रेंड बना, घूम फिर और लाइफ के मज़े ले। मैं... दीदी मुझे नहीं आता गर्ल फ्रेंड बनाना , मुझे आप सिखाओ ये सब। दीदी... ओहो बस रहने दे। गर्ल फ्रेंड तो तेरी पहले से ही है, मुझसे झूठ मत बोल। मैने कहा दीदी सच में नहीं है कोई गर्ल फ्रेंड, कसम से। दीदी.. हे भगवान कितना झूठा है ये लड़का... राहुल मैने अभी अभी तेरे फोन में देखा तो किसी लड़की से वीडियो कॉल पर था और तू उससे चैटिंग भी कर रहा था । मैं... घबराते हुए.. दीदी आपको कैसे पता। दीदी.. हस्ती हुई बोली , जहां तू लेटा है उसके पीछे वाला शीशा तुझे नजर नहीं आ रहा क्या। इतना बोल कर दीदी होठों को दांतों तले दबा कर शैतानी मुस्कान देती हुई रसोई में चली गई । और मैं हैरान परेशान वहीं पर लेटा हुआ सोचता रह गया। ये सब क्या हुआ । थोड़ी देर बाद दीदी मुझे खाना खाने के लिए बुलाने आई। मैं उठ कर ऊके पीछे चला गया। दीदी.. क्या हुआ बहुत परेशान लग रहा है? मैं... दीदी वो सॉरी मैने आपको गर्ल फ्रेंड के बारे में नहीं बताया। मुझे माफ कर दो, और किसी को मत बताना प्लीज। दीदी... अरे .. तू इतना परेशान क्यों हो रहा है, गर्ल फ्रेंड ही तो है! इसमें क्या हुआ सब की होती है। मैं.. थैंक्यू दीदी। दीदी.. नहीं चाहिए तेरा थैक्यू! एक तो झूठी कसमें खाता है , और पकड़ा गया तो थैक्यू । दीदी हंसते हुए ...अच्छा मुझे फोटोज तो दिखा शीशे में ठीक से दिखाई नहीं दी । मैं... बिल्कुल दीदी देखिए, कहते हुए मेरे अपना फोन दीदी को देदिया। तभी दरवाजे पर गैस सिलेंडर वाला आया तो दीदी बोली तू जा कर सिलेंडर उपर उठा ल तब तक मैं फोटोज देखती हु । में नीचे चला गया और भूल गया था कि मेरे फोन में गर्ल फ्रेंड के साथ मेरी और उसकी सेक्स करते हुए न्यूड फोटोज और वीडियो भी है। मैं हड़बड़ी में सिलेंडर उपर उठा लाया । लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी । दीदी सब फोटोज और वीडियो देख चुकी थी, फोन मेरा एक तरफ पड़ा था और दीदी चुप चाप खाना बना रही थी । मेरी पूछने की हिम्मत नहीं थी दीदी ने क्या क्या देख । कुछ देर बाद.. दीदी.. लड़की काफी सुंदर है। मैं.. हां दीदी इतना कह कर में खाना खाने लगा और दीदी से आंखे नहीं मिल पा रहा था, और मन में काफी सवाल घूम रहे थे। और दूसरी तरफ पूरी दोपहर दीदी की चूत फंडवाते टाइम पकड़े जाने के किस्से मेरे दिमाग और लंड़ में हल्ला कर रहे थे। अब तक शाम हो गई और जीजा जी के आने का समय हो गया था। और दीदी नहा कर बाहर आई और बोली, राहुल.. तू भी नहा ले तेरे जीजा जी आने वाले है फिर रात का खाना बाहर ही खाने चले जाएंगे। इतना सुन कर में नहाने गया तब बाथरूम में ममता दीदी के बदन की खुशबू बाथरूम में घूम रही थी। मेरे दिमाग में ममता दीदी की चूदाई के ख्याल हावी होने लगे। तब मुझे ममता दीदी की कच्छी खूंटी पर लटकी हुई मिली। दोस्तो लाइट क्रीम कलर की कॉटन की पैंटी जो गांड़ की तरफ से पसीने से भीगी हुई थी। और चूत की तरफ पैंटी पर पीले धब्बे शायद पेशाब के होंगे, और सफ़ेद चिपचिपा पानी साथ ही 3..4 घुंघराले बाल वह लगे मिले। मैने सोचा शायद यह पानी दीदी का मेरी और गर्ल फ्रेंड की चूदाई वाली वीडियो देख कर निकला होगा। मेरी तो जैसे किस्मत ही खुल लगाई । उस पैंटी की खुशबू या बदबू बोलो इतनी तीखी और मदहोश करने वाली थी कि अच्छे भले मर्द का पानी निकल दे। मेरे पैंटी को खूब सूंघा और चड्डी पर लगे चूत के पानी को चाटा। जिससे दिमाग और लड़ की सारी नसे खुल गई । और मैने दबा कर मूठ मारी तब मैं कुछ हल्का हुआ। जीजा जी घर आ चुके फिर हम सब रेडी हो कर बाहर खाना खाने गए। शाम को बाहर जीजा जी के साथ घूमते हुए दीदी ने अपने मम्मी पापा के साथ मिलने की बात कही । दीदी बोली राहुल जाए गा कल तो में इसी के साथ चली जाती हु। बच्चे देवरानी के यह रह ले। सिर्फ 4..5 दिन में वापिस आ जाऊंगी। जीजा जी ने हां बोल दी, हमारी बस सुबह 4 बजे की थी और घर पहुंच कर दीदी ने सुबह के लिए पैकिंग कर रही थी । जीजा जी दूसरे रूम में टीवी देख रहे थे। तभी दीदी बाथरूम से अपने टूथ ब्रश लेने गई तब दीदी मेरी और अपनी अंडरगार्मेट्स उठा लाई। दीदी...ये तू अपने कपड़े बाथरूम में ही भूल आया। ये ले तेरी चड्डी और ये मेरी पैंटी बोल कर बैग में डालने लगीं।तब दीदी सोचते हुए बड़बड़ाई..... ये मेरी पैंटी ही है न!? इतनी क्लीन कैसे ! बोल कर मेरी तरफ देखने लगी और शैतानी मुस्कुराहट दे डाली। मेरी हवा फिर से टाइट। मैने फोन चलने लगा । और रात को हम सभी लोग सो गए, सुबह जल्दी निकलना था । अगले दिन हमें पहली बस पकड़ ली और स्लीपर सीट ले ली। सारा सामान रख लिया था । और हम अपने स्लीपर केबिन में बैठ गए थे । रात की नींद बाकी थी तो हमें सोने का फैसला किया । हम दोनों का सीधे तरफ सीना मुमकिन नहीं था तो दीदी बोली राहुल तू अपने पैर दूसरी तरफ कर के लेट जा। मैने बोला ठीक है। और मन में ख्याल आया इसी बहाने ममता दीदी की गांड़ या चूत सुंघने को मिले कि ओर मुस्कुराता हुआ लेट गया। गर्मी ज्यादा होने की वजह से मैने निक्कर और टीशर्ट पहनी थी । और दीदी ने पजामा और टीशर्ट । हम दोनों 69 पोजिशन में लेटे थे , ओर फोन चला रहे थे। मैने सोचा क्यों ना गर्ल फ्रेंड के साथ वाली फोटोज और वीडियो देखी जाए तब तक नींद भी आ जाएगी। में अपने फोन में वो सब देखने में व्यस्त था । लंड फिर से तूफान उठाने लगा और कबू से बाहर हो रहा था । में भूल गया था दीदी मेरे बिल्कुल दूसरी तरफ थी 69 पोजिशन में । दीदी फोन में व्यस्त थी और मुझे नहीं पता कब मेरा लंड दीदी के फोन के पीछे उंगलियों पर टकराया। दीदी.. थोड़ी झंझोड़ते हुए राहुल तू फिर से वाही सब देख रहा है क्या फोन में! मैं फिर से डर गया । दीदी... अपना मुंह दूसरी तरफ कर के देख जो भी देखना है । मैने बोला सॉरी दीदी और पलट कर मुंह दूसरी तरफ करने लगा तो जगह थोड़ी होने की वजह से मेरा लंड दीदी की मुंह को टकराते हुए निकल गया। दीदी ने इस बार कुछ नहीं बोल, बस चल रही थी तब दीदी ने थोड़ी देर बाद बोला राहुल तू निक्कर के नीचे अंडरवियर नहीं पहन कर आया । मैने बोला नहीं दीदी वो मेरे पास सिर्फ एक ही था । मैं... दीदी आपको कैसे पता मैने चड्डी नहीं पहनी? दीदी... वो जो अभी अभी टकराया था मुझे पता चल गया , और हाँ तेरी दीदी सब जानती हैं। मैने पूछा और क्या जानते हो बताओ ? दीदी... तू अपने लंड की चमड़ी पीछे खिसका कर सफाई नहीं करता ! बहुत गन्दी बदबू मार रहा है । मैं सुन कर हक्का बक्का रह गया! दीदी.. हस्ते हुए मेरी भाभी क्या सोचती होगी कितना गन्दा रहता है तू । मैं ये सब बाते मुंह दूसरी तरफ कर के चुप चाप सुन रहा था और लंड जैसे शब्द दीदी के मुंह से सुन कर मेरा कलेजा मुंह को आ गया था । ऐसे शब्द दीदी के मुंह से सुन कर मेरी वासना दीदी के ऊपर हावी होने लगी थी। मेरी हिम्मत बढ़ी और कुछ ही देर में मैने करवट ली, और दीदी के शरीर को ऊपर से निहारने लगा। दीदी का पजामा उनके पिंडलियों तक उपर उठा हुआ था जिस वजह से दीदी के पैरों के बाल मुझे काफी नज़दीक से देखने हो मिले । दोस्तो लड़की या औरत के पैरों के बाल मुझे काफी कामुख लगते है। इस अब के चलते दीदी ने अपनी करवट बदल ली जिस वजह से दीदी की चौड़ी गांड़ मेरे मुंह के सामने आ गई थी। मेरा दिल तेजी से धड़क रहा था । और दीदी भी नींद में थी। में दीदी की गांड़ के मज़े लेने का प्लान बना रहा था । और हिम्मत करके अपना मुंह दीदी की गांड़ के पास ले जाने लगा । और इतनी नज़दीक से इतनी बड़ी और खूबसूरत गांड़ देख कर मुझसे बर्दाश्त नहीं हो रहा था । तभी मैने अपनी नाक धीरे से गांड़ की लकीर में रगड़ने लगा । क्या बताऊं दोस्तो उस समय जो में महसूस कर रहा था, लेडीज़ की गांड़ की खुशबू के दीवाने मेरी हालत समझ सकते है । इतनी मीठी और गहरी बदबू आह्हा क्या ही बताऊं, मुझे तो नशा जैसा होने लगा। तभी दीदी के शरीर में मुझे कुछ हलचल सी महसूस हुई। और दीदी ने खुशबूदार पाद छोड़। उस पाद की बदबू आज भी मेरी नाक में कही न कही ठहरी हुई है। तब में सोने का नाटक करने लगा, ताकि दीदी करवट ले तो में उन्हें सोया पाऊं। दीदी उठी और उन्होंने बैग में से कंबल लिया और दोनों के ऊपर कंबल ले लिया। में शांत होने की कोशिश करने लगा पर मेरा लंड बैठने को राजी नहीं था । थोड़ी देर बाद मैने महसूस किया कि दीदी की गरम सबसे मेरे लंड पर गिर रही है और दीदी का मुंह नींद की वजह से खुला हुआ है । सांसे इतनी गरम थी दोस्तो , मैं निक्कर के अंदर से दीदी की गरम सांसों को महसूस कर रहा था । लंड को गर्मी देने के लालच में मैने निक्कर थोड़ी सी उठा कर लंड दीदी के मुंह के एकदम पास में ले गया। और लंड को दीदी की सांसों की सिकाई देने लगा। बस आगे बढ़ रही थी और मेरे दिमाग भी । दीदी की चूत चिराई अब मेरे मन में पक्की हो गई थी । आगे इस सफर में दीदी और मेरे बीच बहुत कुछ होने वाला है । बाकी की स्टोरी अगले भाग में । स्टोरी कैसी लगी जरूर बताना , कोई गलती हुई है तो माफ करना अगला भाग और भी ज्यादा मजेदार होगा। rakeshkumar39323@gmail.com धन्यवाद।
प्रेषक : राम Hindi Porn Stories

मेरा नाम राम है। मैं आपको जो कहानी Hindi Porn Stories सुनाने जा रहा हूँ, यह तब की बात है जब मैं कालेज में पहले सेमस्टर में पढ़ता था। मेरे कोलोनी में ही मेरा एक दोस्त अमित(बदला हुआ नाम) रहता था जो मेरे साथ ही कालेज में था, वो कमरा किराए पर लेकर रहता था। सो मैं उसके यहाँ स्टडी या ऐसे ही कभी कभी मिलने चला जाता था। उसके साथ उसकी एक दीदी रीना और उनकी एक सहेली नेहा भी रहती थी। वो दोनों आई आई टी कर रही थी। वे लोग एक ही कमरे में रहते थे।

एक बार जब मैं उससे मिलने उसके कमरे पर गया तो मैंने देखा कि नेहा वहाँ अकेली थी। मेरे पूछने पर उसने बताया कि रीना ओर अमित बाज़ार गये हैं। फ़िर मैं जाने को हुआ तो नेहा ने मुझे ये कह कर रोक लिया कि वो लोग बस आते ही होंगे। सो मैं वहीं रुक गया।

मैंने कभी नेहा से ज्यादा बाते नहीं की थी, ना ही उसके बारे में जानता था, वो मुझसे उमर में शायद तीन साल बड़ी होगी। मैं एक कुर्सी लेकर बैठ गया और अमित के आने का इन्तज़ार करने लगा।

मैने सोचा क्यूँ ना नेहा से ही बातें कर ली जाये। मैं उठ कर उसके पास गया और उससे इधर उधर की बाते करने लगा। बातों ही बातों में मैने उससे पूछ लिया कि क्या उसका कोई बाय फ़्रेन्ड है?

तो उसने शरमाते हुये कहा- नहीं !

मुझे यह बात पूछ्ने में डर इसलिए नहीं लगा क्योंकि वो मुझसे तब तक खुल के बातें करने लगी थी। फ़िर उसने मुझसे पूछा तो मैने भी बता दिया कि मेरी भी कोइ गर्ल फ़्रेन्ड नहीं है।

फ़िर उसने कहा- तुम बैठो ! मैं चाय बना के लाती हूँ।

तो मैं अमित का लेपटोप ओन करके गाने सुनने लगा। तभी मुझे एक शरारत सूझी। मुझे याद आया कि अमित के लेपटाप में बहुत सी ब्लू-फ़िल्में हैं। मैने सोचा क्यूं ना इसे नेहा को दिखाऊँ और अगर काम बन जाता है तो उसकी चुदाई भी कर दूँ!

इस ख्याल से ही मेरे पैन्ट के अन्दर सो रहा मेरा हथियार जाग गया। जैसे तैसे मैंने अपने आप को सम्भाला और गाने सुनने लगा। मैंने 4 गाने एक साथ सिलेक्ट किये और उसके बाद एक ब्ल्यू-फ़िल्म का वीडियो लगा दिया। मेरी उम्मीद के मुताबिक दो गाने खत्म होते ही नेहा चाय लेकर आ गई और मेरे पास बैठ के बातें करने लगी। मैने भी लेपटोप की आवाज को इतना कम कर दिया कि वो कमरे से बाहर ना जाये।

मैंने नेहा से बाथरुम जाने का बहाना किया और बाथरुम चला गया।

बाथरुम दूसरी तरफ़ था। मैं बाथरुम में रुककर चौथे गाने के खत्म होने का इन्तजार करने लगा। फ़िर जैसे ही वो पल आया मैं धीरे से कमरे में आ गया। नेहा तो लेपटोप में ब्ल्यू-फ़िल्म ऐसे देख रही थी जैसे छोटे बच्चे टी वी देखते हैं। उसका मुँह खुला हुआ था, शायद किसी का लन्ड मांग रही थी।

मैं चुपके से जाकर उसके पीछे खड़ा हो गया और उससे कहा- क्या देख रही हो?

तभी वो हड़बड़ा गई और लेपटोप की स्क्रीन बन्द कर दी। वो मूवी देखने में इतनी खो गई थी कि उसे होश ही नहीं था कि मैं भी वहीं हूँ।

शायद उसका यह पहला अनुभव था नग्न फ़िल्म देखने का !

लेपटोप से आहह्ह्ह्ह उउहहहहह की आवाजें आ रही थी जिन्हें सुन कर मेरा लन्ड खड़ा हो गया। उसने शायद यह देख लिया था।

मेरे पूछ्ने पर कि क्या कर रही थी, वो कुछ नहीं बोली, शायद शरमा गई थी।

मेरे बार बार पूछ्ने पर भी उसने कुछ नहीं कहा तो मैने लेपटोप की स्क्रीन ऊपर कर दी। चूंकि मूवी बहुत लम्बी थी इसलिये वो अभी भी चल ही रही थी। फ़िर मैने नेहा की तरफ़ देखा तो उसने अपनी आँखें अपने हाथों से बन्द कर ली।

उसे देख कर मन तो एसा कर रहा था कि पकड़ कर अभी चोद डालूँ लेकिन मैं थोड़े मजे लेना चाहता था। फ़िर मैने उसके दोनों हाथों को पकड़ा और उससे कहा- इसमें शरमाने की क्या बात है? ये तो सब लोग देखते हैं !

और उसको आँखें खोलने को कहा। उसने अपनी आँखें खोली और मुझसे पूछ्ने लगी- क्या तुमने कभी ऐसी मूवी देखी है?

तो मैने कहा- हाँ ! एक दो बार देखी है !

उसने बताया- मैंने कभी ऐसी मूवी नहीं देखी थी !

मुझे तो यह पहले ही पता चल गया था जब उसे मुँह खोल के मूवी देखते देखा था। खैर फिर मैने उससे कहा- चलो साथ में देखते हैं !

पहले तो वो मना करने लगी पर थोड़ा सा मनाने पर मान गई। फ़िर हम दोनों साथ में मूवी देखने लगे। मैं और वो एक ही बिस्तर पर बैठे थे। मूवी देखते हुए मैंने महसूस किया कि उसकी सांसें बहुत तेज चलने लग गई थी।

तो मैंने भी सोचा- अब मौका है !

मैं धीरे से अपना हाथ उसकी जांघों पर लाया और उसे सहलाने लगा।

तो उसने कुछ भी नहीं कहा। फ़िर मैं हाथ थोड़ा ऊपर करके उसकी गाण्ड पर लाया और उसको दबाने लगा। कसम से क्या गान्ड थी उसकी ! एक दम मुलायम !

तो उसने कहा- क्या कर रहे हो?

मैंने कहा- वही जो तुम मूवी में देख रही हो ! और पूछा- क्यूँ? अच्छा नहीं लगा क्या?

तो उसने कहा- अगर करना ही है तो अच्छे से करो !

मैं भी यह सुन कर जोश में आ गया और उसे पकड़ कर उसके होंठों पे किस करने लगा। वो भी मेरा साथ देने लगी।

क्या रसीले होंठ थे उसके ! मजा आ गया उसे चूमने में !

फ़िर मैने उसके सारे कपड़े उतार दिये, उसकी चूत गीली हो चुकी थी। मैंने उसकी चूत में अपनी जीभ लगा दी और उसे चाटने लगा। वो तो जैसे पागल सी हो गई और मेरा मुँह पकड़ के अपनी चूत पर दबाने लगी। मैं भी मदहोश हो कर उसकी चूत चाट रहा था। थोड़ी देर बाद वो झड़ गई मैंने उसका सारा रस पी लिया। उसके बाद मैंने उसे अपना लन्ड चूसने को कहा। पहले तो उसने मना किया पर मैंने जबरदस्ती उसके मुँह में डाल कर उसे मुँह में चोदने लगा। उसे भी मेरा लन्ड चूसने में मजा आने लगा। करीब 5 मिनट बाद मैं उसके मुँह में झड़ गया। उसके बाद मैंने उसकी तीन बार चुदाई की और एक बार गाण्ड भी मारी। उसके बाद हम दोनों ने अपने कपड़े पहने और एक दूसरे को किस किया।

फ़िर अमित ओर उसकी बहन भी आ गये।

अगली बार आपको बताउँगा कि रीना को मैंने कैसे मनाया चुदाई के लिये !

आप मुझे मेल करके बताना आपको मेरी कहानी कैसी लगी। Hindi Porn Stories

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