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मेरा नाम करण है, मैं शिमला से हूँ और दिल्ली में काम करता हूँ, आपको अपनी असली Antarvasna कहानी सुनना चाहता हूँ।
मैंने दो महीने पहले अन्तर्वासना-कथाएँ पढ़नी शुरू की और सोचा कि मुझे भी अपनी असली कहानी सुनानी चाहिए कि मैंने कैसे पहली बार अपनी होने वाली बीवी के साथ सेक्स किया। उसका नाम कोमल है और अब हमारी शादी हो गई है।
दो साल पहले की बात है, एमबीए पूरा करने के बाद मैंने एक कंपनी में नौकरी कर ली। मेरी एक मौसी की लड़की पूजा चंडीगढ़ में नौकरी करती थी। वो एक पेइंग-गेस्ट रहती थी अपनी दोस्त के घर पर। हम दोनों भाई-बहन बहुत करीब हैं। कोमल उसकी पुरानी दोस्त थी। मैंने उसे कभी नहीं देखा था।
पूजा मुझे मजाक में कहती थी- भईया आपकी शादी अपनी सहेली कोमल से करवाउंगी।
मैं भी बोल देता- ठीक है, करवा देना !
मैं एक बार दिल्ली से शिमला जा रहा था। त्यौहारों के मौसम के कारण चंडीगढ़ से दो घंटे बाद बस थी। तो मैंने बस स्टैंड से पूजा को फोन किया।
उसने बोला- मैं मार्केट में हूँ, आप बाजार में आ जाइए।
मैं बाजार चला गया। उसके साथ एक खूबसूरत लड़की थी।
पूजा ने बताया- यह कोमल है !
क्या बताऊँ उसके बारे में ! प्राकृतिक सौंदर्य था वो। हमारी सिर्फ हाय हैलो हुई।
पूजा कोमल को भी कहती थी कि आप दोनों की शादी मैं करवाउंगी। एक सप्ताह बाद में वापिस दिल्ली चला गया। पूजा रोज फोन पर कोमल के बारे में पूछती थी- कोमल कैसी लगी आपको?
बाद में मैंने हाँ कर दी और कोमल ने भी हाँ कर दी। कोमल के परिवार वाले भी मान गए क्योंकि उसके पापा मुझसे मिल चुके थे। मेरे परिवार को भी पूजा ने बताया, वो भी मान गए। फिर हमारी फ़ोन पर बात होने लगी और हम संदेशों का आदान-प्रदान भी करने लगे।
धीरे-2 हम काफ़ी घुलमिल गए। इस बीच हम दोनों के परिवार मिले और हमारा रिश्ता तय हो गया और दो महीने के बाद मार्च में सगाई भी तय हो गई। अब जब भी मैं कभी घर जाता तो कोमल से 1-2 घंटे के लिए मिल लेता था। हम बाजार में ही मिलते। अब तक हम काफ़ी पास आ गए थे।
हमारी सगाई से दो सप्ताह पहले मेरे एक दोस्त के पिता की मृत्यु हो गई। मैं वहाँ गया। वापिसी में मैं कोमल से मिलने चंडीगढ़ चला गया।
उस दिन बरसात हो रही थी। बैठने के लिए हम एक पार्क चले गए। पार्क के बीच एक छत सी बनी हुई थी, हम वहाँ बैठ गए। वो भीग गई थी, उसने कहा- मुझे ठण्ड लगा रही है।
मैंने हिम्मत करके उसे बाँहों में ले लिया। बहुत नाजुक सी थी वो ! उसने आंखें बंद कर ली और अपना सर मेरे कंधे पर रख दिया।
मेरी हिम्मत बढ़ गई, मैंने उसे और कस लिया। वो मदहोश हो गई। मुझे अपनी छाती पर उसके मम्मों का एहसास होने लगा। मुलायम और गर्म गर्म मम्मों के एहसास से मेरा लंड खड़ा होने लगा। किसी लड़की से मेरा पहला एहसास था। वो बिलकुल मदहोश हो गई।
मैंने हिम्मत करके कहा- कोमल, मैं तुम्हें चूम सकता सकता हूँ?
उसने कुछ नहीं कहा, बस अपनी आंखें बंद ली। मैंने उसके माथे पर एक चुंबन किया। फिर दोनों गालों पर किया। फिर मैंने अपने होंठ उसके होठों पर रख दिए। धीरे धीरे उसके होठों को चूसने लगा।
क्या एहसास था ! गरम और नरम होंठ थे उसके !
वो भी साथ देने लगी थी मेरा। एक लड़की को बरसात में चूमने का क्या एहसास क्या होता है, मैं ही जानता हूँ।
काफी देर बाद हम अलग हुए, सिर्फ चुंबन ही किया। हम शादी से पहले आगे नहीं जाना चाहते थे। फिर कुछ दिन बाद हमारी सगाई हो गई। अब जब भी मिलते तो हम एक दूसरे को चूमते थे। एक बार चूमते हुए हम कुछ ज्यादा ही गर्म हो गए। हम पार्क में थे तो कुछ कर भी नहीं सकते थे।
दिल्ली जाकर मैंने संदेश भेजा कि आज मेरा दिल नही मान रहा, मुझे फ़ोन पर ही चूमो।
वो मुझे चूमने लगी। वो भी तब कुछ ज्यादा ही गर्म थी।
मैंने कहा- आज मेरा दिल कर रहा है कि तुम्हें सारी पा लूँ !
उसने कहा- कैसे ?
मैंने कहा- मैं तुम्हें चोदना चाहता हूँ।
उसने कहा- वो क्या होता है?
मैंने कहा- सेक्स !
तो कोमल बोली- किया तो है हमने !
मुझे तो झटका लग गया, मैंने पूछा- कब किया?
वो बोली- क्यूं? चूमते तो हो हर बार !
मुझे हंसी आ गई और पूछा- सेक्स के बारे में क्या जानती हो?
उसने कहा- जब होंठ चूमते हैं तो उसको सेक्स कहते हैं।
मेरी तो हंस-2 कर बुरी हालत थी! मैंने पूछा- तुम्हें किसी सहेली ने सेक्स के बारे में नहीं बताया क्या?
वो बोली- नहीं।
मुझे लगा कि वो मेरा बेवकूफ बना रही है पर सच में उसे पता नहीं था कि सेक्स में क्या करते हैं!
तो मैंने उसे बताया कि सेक्स क्या होता है और सेक्स क्यूँ करते हैं। वो शरमा गई। फिर मैंने उसे फोन सेक्स के बारे में भी बताया। अब हम रोज रात को फोन सेक्स करते थे, उसे भी मजा आता !
अगली बार जब हम मिले तो एक फिल्म देखने गए। थियेटर में बहुत कम लोग थे। मैं उसके कंधे पर हाथ फेरने लगा, वो भी गर्म होने लगी थी। .उसने अपना सर मेरे कंधे पर रख दिया! फिर मैं उसके होंठ चूमने लगा, वो भी पूरा साथ दे रही थी। मैंने अपनी जीभ उसके मुँह में डाल दी और उसके मुँह में फिराने लगा और उसकी जीभ को चूस रहा था!
मैंने एक हाथ उसकी कमीज में डाल दिया और पेट पर फिरने लगा। उसके शरीर को मैंने पहली बार छुआ था। उसकी सांसें तेज हो गई, उसने आंखें बंद कर ली और उसके मुँह से आवाजे निकलने लगी- म्मम्मम्मम्म मम्म म्मम्मम आहऽऽ
मैंने अपना हाथ ऊपर किया और उसके मम्मों पर फिराने लगा। मैं ब्रा के ऊपर से उसके चूचे दबा रहा था। इतनी नरम चीज़ मैंने पहली बार स्पर्श की थी। मेरा लंड एकदम खड़ा हो गया। वो भी मम्म अम मम कर रही थी। फिर मैंने हाथ उसकी ब्रा के अंदर डाल दिया। उसके नर्म नर्म मम्मों से मेरी हालत खराब हो रही थी, मैं तो पागल हो रहा था। उसकी भी हालत खराब हो रही थी।
मैंने धीरे से पूछा- कोमल, मुझे तुम्हारी सलवार में हाथ डालना है !
उसने मना कर दिया- कोई देख लेगा।
वो भी चाहती थी पर डर रही थी। मैंने धीरे से हाथ उसकी सलवार में डाल दिया और उसकी पैन्टी के ऊपर से हाथ फिराने लगा। उसकी चूत की गर्मी को महसूस करने लगा, मेरी हालत ख़राब हो गई थी! अब मैंने उसकी पेंटी के अंदर हाथ दाल दिया। उसने अपनी चूत के बाल एक दम साफ़ किये हुए थे। एकदम गर्म और चिकनी चूत थी। मैं उसकी चूत की मालिश करने लगा। कोमल ने अब मेरी गर्दन पर अपने होंठ रख दिए और मेरी गर्दन को चूसने लगी! मैं भी तेज-2 उसकी चूत को मलने लगा। उसके मुँह से आवाजें आने लगी- मम्म म्मम्म मम मम मम म्मम्म .
उसने मेरी गर्दन पर अपने दांत लगा दिए और काटने लगी। शायद वो भी गर्म हो गई थी, उसकी चूत भी गीली हो गई थी। मैंने एक ऊँगली अंदर दाल दी और फिराने लगा। उसने और तेज काटना शुरू कर दिया। मेरी हालत भी खराब हो गई थी!
फिर उसने कहा- बस करो ! मुझे कुछ हो रहा है !
शायद उसे लंड चाहिए था। तभी फिल्म ख़त्म होने लगी, हम ठीक होकर बैठ गए। Antarvasna
हेल्लो दोस्तो, मैं राज फ़िर कोलकाता से।
आप लोगों ने मेरी कई कहानियाँ, जो कि सच्चे अनुभवों पर आधारित थी, आप लोगों ने पढ़ा। मेरी आखिरी कहानी ग्रुप सेक्स-2 थी। अब मरे पास कोई मुझसे सम्बंधित सच्ची कहानी नहीं है। और मैं काल्पनिक कहानियाँ लिखता नहीं। मैं बहुत चैट करता हूँ। जिसमे अनेक लड़कियां/ औरतें भी होती है। पिछले दिनों एक अमेरिकन लड़की से दोस्ती हुई थी।
उसका नाम शैली है। उसी ने अपनी एक कहानी मुझे बताई। उसी कहानी को मैं प्रस्तुत करूंगा उसी के शब्दों में। यह मुझे पता नहीं कि यह कहानी सच है या झूठ लेकिन रोचक जरूर है। अब आप उसी के शब्दों में उसका एक अनुभव सुनिए :~
मेरा नाम शैली है। मेरी उम्र 29 साल है। मैं अमेरिका के एक बड़े शहर में अपने पति के साथ रहती हूँ। अभी हम लोगों को कोई बच्चा नहीं है। मैं दिखने में खूबसूरत हूँ। वैसे तो मेरा फिगर स्लिम है लेकिन मेरे बूब्स बड़े हैं। मेरा पति रोजर, और मैं दोनों ही काम करते हैं, लेकिन अलग-अलग जगहों पर।
मेरी एक सहेली है लेस्ली, मेरी ही उम्र की, जो मेरे साथ ही काम करती है। उसका पति टॉम मेरी पति के साथ काम करता है। लेस्ली भी दिखने में बहुत खूबसूरत है। उसके हिप्स मुझसे बड़े हैं। हम चरों अक्सर सप्ताहांत पर कैम्पिंग करते हैं। महानगर की भीड़-भाड़ से दूर, शांत माहौल में किसी जंगल के किनारे या किसी बड़े पार्क में अपना कैंप डालकर हम अपना सप्ताहांत मनाते हैं।
हमने इस वीकएंड में भी कैम्पिंग का प्रोग्राम बनाया था। मर्द यानि रोजर और टॉम आमने ऑफिस से सीधे वहीं चले गए थे। मैं और लेस्ली 3-4 घंटे के बाद वहां के लिए निकलीं। हम दोनों एक ही कार में थे। बियर पीते हुए हम तेजी से कैम्पिंग वाली जगह की ओर जा रहे थे। हम आपस में अपने पतियों के बारे में बातें कर रहे थे कि वे कितने मेहनती हैं। फ़िर हम लोगों की चर्चा सेक्स की होने लगी।
लेस्ली ने अकस्मात् कहा कि मेरे पति को तुम्हारी बड़ी-बड़ी चूचियां बहुत पसंद हैं। और मैं और टॉम कभी-कभी तुम लोगों की कल्पना कर सेक्स करते हैं। मैं सन्न रह गई क्योंकि रोजर भी लेस्ली की गांड की तारीफ रोज करता है। मैंने बोला कि यार ! ऐसा तो हम लोग भी करते हैं, रोजर को तुम्हारी गांड बहुत पसंद है। और मुझे टॉम की बालों भरी छाती आकर्षित करती है।
लेस्ली ने ये सुनकर कहा कि आज क्यों न हम दोनों मर्दों की इच्छा को पूरी कर दें। मैं ये सुनकर रोमांचित हो गई। क्योंकि मैं कितने दिनों से टॉम की बालों भरी छाती पर हाथ फिराते हुए उसके साथ सेक्स के सपने देख रही थी। और रोजर लेस्ली की भारी गांड में लण्ड डालना चाहता था।
फ़िर मैंने कहा कि मैं अगर किसी के साथ अपने पति को बाँटने के बारे में सोच सकती हूँ वो तुम हो।
लेस्ली ने यह सुनकर कहा कि मेरा भी यही ख्याल है। हम रास्ते भर इसी के बारे में बात करते कैंप ग्राउंड पर पहुँच गए। हमने रास्ते में ही ठीक कर लिया था कि टॉम और रोजर को इसके बारे कुछ नहीं बताएँगे। तब तक रात हो गई थी। वहां पहुँच कर हमने देखा कि दोनों ने खाना बना लिया था। और कैंप फायर जला लिया था। हम दोनों ने मिलकर काफ़ी बनाई और हम चारों मिलकर काफ़ी पीने लगे। एक बड़े पार्क में, खुले में, आग के चारों ओर बैठ कर, रात के समय काफ़ी पीने का एक अलग ही रोमांच था।
फ़िर जो रात को होने वाला था उसे सोचकर ही मेरी चूत में खुजली हो रही थी। फ़िर हमने खाना खाया। दोनों मर्दों ने कहा कि अब सोने चलो। दो अलग-अलग कैंप दोनों के लिए लगे थे। उसके बगल में बाथरूम था।
इस पर हमने कहा कि तुम लोग चलो हम थोड़ा नहा कर आते हैं। दोनों अपने-अपने कैंप में चले गए। थोड़ी देर तक बात करने के बाद हम नहाने के लिए बाथरूम में घुसे। एक साथ हम नहा रहे थे। नहाकर कपड़े पहन कर हम बाहर निकले। मैंने नहाने के बाद एक पायजामा और टी-शर्ट पहना था, उसके नीचे मैं पूरी तरह से नंगी थी। फ़िर हम दोनों गले मिली। मैं टॉम यानि लेस्ली के पति के टेंट की ओर बढ़ी और लेस्ली मेरे पति की ओर।
मैंने टॉम के टेंट के पास पहुँच कर लेस्ली की ओर देखा। लेस्ली रोजर के टेंट की जिप खोल रही थी। जिप खोल कर वो भीतर घुस गई और जिप को भीतर से बंद कर लिया। मेरा दिल जोर-जोर से धड़क रहा था। मैं अपने कांपते हाथों से टेंट का जिप खोलकर भीतर घुसी। टॉम की पीठ मेरी और थी। मैंने भीतर घुसकर जिप को लगा दिया। टेंट में एक फ्लैश लाइट जल रही थी। मैंने लाइट को बुझा दिया। अब एकदम घुप्प अंधकार था।
टॉम ने मुझे लेस्ली समझकर कहा,’ कितनी देर लगा दी। मैं तुम्हारा कब से इंतजार कर रहा हूँ।’
मैं कुछ नहीं बोली और उसके पास जाकर उसके कम्बल में घुस गई और अपना एक हाथ उसके लण्ड की और बढा दिया।
हठात टॉम ने पूछा ‘ लेस्ली तुमने शैली का परफ्यूम यूज किया है क्या?”
मैंने कहा,’ तुमको शैली पसंद है?’
टॉम,’ शैली !!!! तुम यहाँ? लेस्ली कहाँ है?’
मैंने कहा,’ अगर मैं यहाँ हूँ तो लेस्ली कहाँ होगी? सोचो।’
टॉम चिल्ला उठा,’ ओ माय गाड ! किसका प्लान था ये?’
मैंने कहा,’ हम दोनों का ! हमने सुना है कि कुछ युगल आपस में बदल कर सेक्स करते हैं। और तुम मेरी बड़ी चुचियों को हसरत से देखते थे और रोजर लेस्ली की बड़ी गांड को निहारता था। तुम दोनों हम दोनों को खुश रखने के लिए कितनी मेहनत करते हो तो हमारा भी तुम्हारी इच्छा पूरी करने का फर्ज बनता है टॉम ! मैं आज पूरी रात तुम्हारे साथ हूँ !’
फ़िर मैंने एक हाथ से टॉम का लण्ड पकड़ लिया। टॉम ने अपने दोनों हाथ से मेरा चेहरा पकड़ कर गहरा चुम्मा लिया। उसने एक हाथ से मेरा टी-शर्ट एक ही झटके में उतार दिया। उसने एक हाथ से मेरी एक चूची पकड़ी और दबाने लगा और मुंह से दूसरे का निप्पल पकड़ कर चूसने लगा। मेरी आँखें उत्तेजना से बंद होने लगी। फ़िर उसने मेरे पायजामे को घुटने तक उतार दिया और अंगुली से मेरे चूत को सहलाने लगा। मैंने अपने पायजामे को पूरी तरह उतार कर कम्बल से बाहर फेंक दिया अब मैं पूरी तरह से नंगी थी।
टॉम ने भी अपने कपड़े उतार दिए। मैंने टॉम से कहा कि मैं तुम्हारा लण्ड चुसना चाहती हूँ। फ़िर मैं नीचे सरक कर लण्ड को मुंह में भर लिया। उसका लंड रोजर से थोड़ा बड़ा ही था। टॉम का एक हाथ मेरी चुचियों पर था और एक हाथ मेरी बुर पर। एक अंगुली से वो मेरी शिश्निका सहला रहा था।
मैंने टॉम का लण्ड पूरी तरह से मुंह में घुसा लिया था। और चूस रही थी। टेंट में घुप्प अंधकार था। फ़िर टॉम मेरे कान में कहा कि मैं अब तुम्हारे बुर का स्वाद लेना चाहूँगा और वह नीचे सरक गया। पहले उसने अपने मुंह को मेरी चिकनी बुर पर फिराया। फ़िर जीभ से सहलाया। हम उस समय 69 पोजीसन में थे। उसने जीभ को बुर के मुहाने पर रगड़ना शुरू किया।
मैंने उसकी सुविधा के लिए अपनी टांगो को फैला दिया और उसके लण्ड को पूर्ववत चूसती रही। बहुत मजा आ रहा था। उसने अपनी जीभ को अब पूरी तरह से मेरी बुर के भीतर घुसा दिया था। और जीभ से ही चोद रहा था। अंगुली से बुर की चोंच को रगड़ रहा था। मेरी बुर में जैसे आग लग गई थी। मैं उसी समय झड़ गई। ठीक उसी समय वो भी मेरे मुंह में झड़ गया। मैंने उसे कुछ बोला नहीं और वीर्य को बाहर फेंक दिया।
फ़िर टॉम ने कहा,’ अच्छा ! इस समय लेस्ली और रोजर क्या कर रहे होंगे?’
मैंने कहा,’ एक ही काम ! चुदाई ! चुदाई और सिर्फ़ चुदाई ! अब मेरी बुर लण्ड से चुदाई मांग रही है, चोद डालो अब मुझे।’
टॉम ने कुछ कहा नहीं और कम्बल में ही मुझको पलट दिया और जीभ को मेरी पीठ पर, हिप्स पर और जांघों पर फिराने लगा।मेरी उत्तेजना भड़कने लगी। वैसे रोजर तो मेरे साथ एनल सेक्स भी करता था कभी-कभी। रोजर को एनल सेक्स बहुत पसंद था।
तभी बगल वाले टेंट से लेस्ली की चीख सुनाई दी।
टॉम ने कहा कि क्या हुआ रोजर ने लेस्ली की बुर फाड़ दी क्या?
मैंने कहा कि नहीं ! रोजर को गांड मारना बहुत पसंद है। उसने लेस्ली की गांड में लण्ड डाला होगा इसीलिए चिल्लाई होगी। फ़िर टॉम ने मुझे पलट दिया और मेरी गांड के नीचे एक तकिया लगा कर मेरी बुर को ऊँचा कर लिया। फ़िर एक झटके में ही अपना लण्ड को घुसा दिया।
मेरी चीख निकल गई। टॉम ने कहा,’ तुम तो ऐसा कर रही जैसे पहली बार तुम्हारी चुदाई हो रही है? उधर लेस्ली की गांड को तुम्हारा रोजर फाड़ रहा है।’
मैंने कहा कि दर्द हुआ इसीलिए चिल्लाई। अब तुम जोर से चोद सकते हो।
वो मुझे जोर-जोर से चोदने लगा। मेरी पतली कमर को दोनों हाथों से थोड़ा ऊपर उठाकर जोर से धक्का मर रहा था। मुझे बहुत मजा आ रहा था। फ़िर मैंने कहा कि मेरी चुचियों को भी दबाओ।
वो चूचियां भी दबाने लगा।
थोडी देर इस स्टाइल में चुदवाने के बाद मैंने कहा कि मुझे अब कुतिया बनाकर चोदो।
फ़िर मैं नीचे उतर कर कुतिया स्टाइल में हो गई और वो मुझे पीछे से चोदने लगा। मेरी मुंह से उत्तेजना में आवाज़ें निकल रही थीं आहऽऽऽऽ आऽऽऽ ऊऽऽऽऽ उओऽऽऽ औरऽऽऽऽ जोरऽऽऽ सेऽऽऽ मैंऽऽऽऽ स्वर्गऽऽ मेंऽऽ पहुँचऽऽऽ रहीऽऽऽ हूँऽऽऽऽऽ।
अंधेरे में केवल एक ही आवाज आ रही थी- फच्च ऽऽऽऽ फच्चऽऽऽ मेरी सिस्कारियां ऽऽऽ और टॉम की हांफने की आवाजें।
माहौल में पूरी तरह से चुदास भरी थी। बगल के टेंट से भी सिसकारियों की आवाजें आ रही थी। टॉम की स्पीड बढती जा रही थी। अब वो झड़ने वाला था। मैं भी झड़ने वाली थी। टॉम ने अपना लण्ड बाहर निकाल लिया और मेरे हिप्स पर झड़ गया। बहुत मजा आया था।
यह कहानी मुझे शैली ने बताई थी और कहा था कि ये उसका सच्चा अनुभव है।
अरे सुरेश, बड़े दिनों बाद दिखे, आज कल कहां Sex Stories रहते हो?’
‘मंथली एक्ज़ाम चल रहे थे न आंटी। अब इस साल मैं 12वीं में आ गया हूं।’
‘तुम्हारी क्लास में लड़कियाँ कितनी हैं?’
’12
‘और लड़के?’
’36 ‘
‘बड़ी किस्मत वाली हैं एक एक के तीन तीन लौंडे।’
‘पर मुझे तो कोई घास नहीं डालती।’
‘अरे कोई नहीं, मैं सिखा दुंगी तुम्हे लड़की कैसे पटाते हैं।’
‘प्लीज़ आंटी जल्दी सिखाओ।’
‘तुम्हारी कोई गर्ल फ़्रेण्ड है या नहीं?
‘है न, रीता।’
‘क्या करते हो उसके साथ?’
‘बातें, और क्या?’
‘क्या गर्ल फ़्रेण्ड के साथ केवल बातें करते हैं?’
‘नहीं, आंटी, वो न थोड़ी कंज़रवेटिव है।’
‘कंज़रवेटिव न होती तो क्या करते?’
‘तो सब कुछ कर देता।’
‘मतलब क्या-साफ़ साफ़ बताओ मुझे?’
‘मुझे शरम लगती है।’
‘मैं तुमको कैसी लगती हूं?’
‘बहुत अच्छी।’
‘मतलब क्या क्या अच्छा लगता है?’
‘आपका चेहरा बहुत अच्छा लगता है।’
‘मतलब मैं बुड्ढी हो गयी हूं चेहरे के सिवा कुछ अच्छा ही नहीं है।’
‘है न।’
‘तो बताओ न।’
‘आप गुस्साओगे तो नहीं?’
‘मैं क्यों गुस्साऊं, अपनी बढ़ाई किस को अच्छी नहीं लगती।’
‘आप का न फ़्रंटसाइड बहुत अच्छा है।’
‘फ़्रंटसाइड मतलब?’
‘वो ब्लाउज़ के भीतर।’
‘उसमे अच्छा क्या है तुमने अंदर देखा है कभी?’
‘नहीं पर बहुत बड़ा है न।’
‘मतलब तुम्हें बड़ी चूची पसंद हैं।’
‘हां।’
‘तो सीधे बोलो न मुझे आपके बड़े ब्रेस्ट पसंद हैं।’
‘बोलो बोलो।’
‘मुझे आपकी बड़ी चूची पसंद हैं।’
‘गुड, शाबाश, और क्या क्या पसंद है तुम्हें?’
‘आपका बैकसाइड।’
‘पर उसमें क्या?’
‘आपका बैकसाइड छोटा और स्लिम है न।’
‘मतलब तुम्हें छोटे बटक्स चाहिये।’
‘हां।’
‘बड़े परखी हो।’
‘तुम्हारी रीता की बैक साइड कैसी है?’
‘छोटी और स्लिम, पर पता नहीं आगे जाकर फ़ैल न जाये।’
‘क्यों? क्या पीछे से डाल कर फ़ैलाने का इरादा है?’
‘धत्।’
‘और तुम्हारी गर्ल फ़्रेण्ड की चूची कैसी हैं?।’
‘मीडियम है, आप जैसे बड़े नहीं हैं।’
‘बार बार दबाने से न बढ़ जाते हैं। चूत और चूची को जितना मसलो उतना बढ़ते जाते हैं।’
‘अब अब दबायेगा रोज रोज?
‘दबवायेगी तब न।
‘कभी मसला है उसकी चूची को?’
वो तो छूने ही नहीं देती।
क्या? छूने ही नहीं देती?
अपने ब्रेस्ट ।
हिन्दी में बोलो पूरा एक बार में
वो अपनी चूची छूने ही नहीं देती।
चिन्ता मत करो मैं तुम्हें ऐसे ट्रिक्स बताऊंगी और सिखाऊंगी कि वो खुद तुम्हें चूची मसलवाने की रिक्वेस्ट करेगी।
सचमुच। आप बड़ी अच्छी हो।
अच्छा अगर मैं तुम्हें फ़्री छोड़ दूं तो क्या करोगे?
धत्। आप तो आंटी हो?
फ़िर ये तुम्हारे पैंट के भीतर कड़ा कड़ा क्यों हो गया ये सवाल सुनकर?
आई एम सोरी, आप गुस्सा न करो।
एक शर्त पर अगर तुम सच सच बोलोगे, ये कड़ा कैसे हो गया?
आप भी सेक्सी हो न इसलिये।
तो बताओ न फ़्री मिल गये तो क्या क्या करोगे?
फ़्री थोड़े ही न छोड़ेंगे आप।
लेसन 1- हाथ की सफ़ाई
तो तुम्हारा पहला लेसन है हाथ की सफ़ाई। आदमी और औरत हाथ से क्या कुछ कर और करा सकते हैं और कितना मजा दे और ले सकते हैं?
तुम बताओ हाथ से क्या कर सकते हो?
हाथ से चूची को पकड़ सकते हैं?
और?
और क्या अपना हाथ जगन्नाथ।
तुम सच मुच घामड़ हो।
क्यों और कुछ भी करते हैं? प्लीज़ बताइये न आंटी।
अच्छा बताती हूं। आदमी औरत के हर अंग को दबा के सहला के उसे मजे दे सकता है।
कैसे?
अभी दिखाती हूं।
आज मेरे बदन में बड़ा दर्द है, थोड़ा बोडी लोशन लगा दोगे?
हां।
पर कुछ और तो नहीं करोगे, फ़्री समझ के?
नहीं।
तो लो ये लोशन मेरे कंधे, पीठ और कुल्हों पे लगा दो।
मैं पेट के बल लेट जाती हूं।
अपना टी शर्ट तो उतार दो आंटी।
लो उतार दिया अब ब्रा उतारने को मत कहना। और ये लेट गयी मैं पेट के बल। कंधे को धीरे धीरे दबाओ और बोडी लोशन लगाओ। हां, ऐसे ही, अब थोड़ा प्रेस करो, वेरी गुड। अब यही मेरे पीठ पर करो। वाह! शाबाश। अब मेरी जीन्स को थोड़ा नीचे सरकाओ और पैंटी को भी। थोड़ा लोशन मेरे चूतड़ों पर लगाओ और धीरे धीरे उस पर मालिश।
अरे नहीं, गांड में मत डालो लोशन, शैतानी नहीं। बस, हो गया।
आंटी थोड़ा और दबाऊं न। आपने जीन्स क्यों बंद कर ली? बड़ा मजा आ रहा था।
अच्छा अब आगे दबाने की ट्रैनिंग देती हूं।
आगे मतलब ऊपर या नीचे
क्या मतलब? साफ़ बोलो।
वो ब्रा के भीतर या पैंटी के भीतर।
तू तो बड़ा सयाना हो गया है। साफ़ साफ़ क्यों नहीं पूछता चूत या चूची?
हां वही।
वही क्या?
चूत या चूची दबाने की ट्रैनिंग?
तुझको कौन सी पसंद है।
दोनो।
बड़ा लोभी है तू।
अगली ट्रैनिंग चूत दबाने की। वहां अपना हाथ डाल के धीरे धीरे सहलाना चाहिये।
कहां?
चूत पे और कहां?
फिर न, उंगली को चूत के छेद में डाल कर धीरे धीरे फ़िंगर करते हैं।
इससे न, लड़की/औरत गर्म हो जाती है, तुम न अपनी गर्ल फ़्रेण्ड पर ट्राइ करना और बताना कैसा लगा उसे।
आंटी थोड़ा प्रेक्टिस तो करा दो प्लीज़।
तुम तो बड़े लोभी निकले।
अच्छा चलो पर केवल दो मिनट।
थैंक यू ।
कहां से शुरु करें?
मेरे जीन्स के बटन खोलो।
खोल दिया।
क्या मस्त जांघ है आपकी।
तुम्हें पसंद आयी?
हां।
तो चूम ले जी भर के?
चाट चाट चाट ! अब अपना हाथ मेरी पैंटी के अंदर डालो।
आंटी एक बार चूत तो दिखा दो अपनी।
आज नहीं, अगली बार।
और धीरे धीरे इसे सहलाओ।
छेद पर नहीं थोड़ा ऊपर। चूत के छेद से ऊपर जो थोड़ा उठा हुआ भाग है उसे क्लाइटोरिस बोलते हैं। औरतों को न सबसे ज्यादा मजा वहीं मिलता है।
चूत से भी ज्यादा?
हां।
आंटी आपको तो कितना पता है। आइ एम लकी कि आप मुझे सब बता रहीं हैं।
सहलाते रहो धीरे धीरे।
अब जरा स्पीड बढ़ाओ – जोर से और जोर से। बस। मैं आ गयी।
विकाश आज तुमने बड़े मजे दिये मुझे। ऐसे भी मैं किसी का उधार नहीं रखती।
मैं तुम्हें इनाम देना चाहती हूं।
क्या आइस क्रीम?
नहीं, उससे भी बढ़िया।
अरे, ये तुम्हारा पैंट के भीतर क्यों इतना कड़ा हो गया है?
कोई स्टील रोड छुपा रखा है क्या।v
नहीं तो?
क्या मैं खुद हाथ लगा कर देखती हूं।
जरा अपनी पैंट के जिप तो खोलो।
अरे तुम्हारा तो कितना मोटा लंड है।
आंटी आप इसको पकड़ते हो न तो बड़ा अच्छा लगता है।
कभी तुम्हारी गर्ल फ़्रेण्ड ने पकड़ा है इसे।
नहीं वो न शरमाती है शायद।
तो भूखों मरेगी साली। कोई नहीं मैं तुम्हें ऐसे तरीके सिखाउंगी कि इसके बिना जी नहीं पाएगी तेरी छोकरी। बस एक बार उसे आदत लगने दे। अच्छा ये जो मैं तुम्हारे लंड को दबा रही हूं ये कैसा लग रहा है?
बहुत अच्छा।
तो ले आज मैं तुझे हाथ से ही लाती हूं।
आंटी थोड़ा और जोर से दबाओ।
थोड़ा तेजी से प्लीज़।
और तेजी से।
फच फच फच।
ये मैंने आपका ब्लाउज़ खराब कर दिया और थोड़ा सा तो चेहरे पर भी पड़ गया, अरे आप इसे चाट क्यों रही हो?
तू चिंता मत कर आगली बार एक बूंद भी बाहर नहीं जयेअगा सारा मैं अंदर ले लुंगी।
आंटी आपके हाथों में तो जादु है।
तू देखता जा और कहां कहां जादु है साले। आंटी के तो अंग अंग में जादु है।
विकाश, ये जो मैंने तुम्हारी ट्रैनिंग करायी किसी को बताना नहीं।
जी ।
अपनी गर्ल फ़्रेण्ड को भी नहीं?
जी अच्छा।
और अपनी गर्लफ़्रेण्ड के ऊपर ट्राइ करके बताना उसे कैसा लगा?
जी।
पर करुंगा कहां?
सिनेमा हाल में, पार्क में, खाली क्लास रूम में, जहां मौका मिले।
वो कैसे?
और कभी ट्रैनिंग की जरुरत हो तो आ जाना।
तो आज शाम को आ जाऊं?
अरे बदमाश पहले ये ट्रैनिंग तो प्रेक्टिस करले रीता पर?
जब तुम्हारे अंकल नहीं हों तब आना ट्रैनिंग के लिये।
क्यों?
तुम्हारे अंकल न नहीं चाहते कि मैं किसी को ट्रैनिंग दूं। वो सारी ट्रैनिंग खुद ही लेना चाहते हैं
बड़े स्वार्थी हैं अंकल। Sex Stories
मेरा नाम Hindi Sex Stories रवि है, मैं आपको अपनी एक कहानी बताता हूँ।
जब मैं स्कूल में पढ़ता था तब मेरे साथ मेरी एक दोस्त थी जिसका नाम ऋतु था वो मेरे घर क पास ही रहती और हम एक साथ स्कूल जाया करते थे। एक बार किसी कारण से मुझे स्कूल जाने में देर हो गई तो ऋतु मेरा इन्तज़ार करते करते मेरे घर आ गई। उस दिन बारिश हो रही थी, वो भीगती हुई आई। उसकी स्कूल ड्रेस भीग चुकी थी उसे देख कर मेरी मम्मी ने कहा- थोड़ी देर रुको, रवि नहा कर आ रहा है, फिर तुम दोनों उसके पापा की कार लेकर स्कूल चले जाना। लेकिन उससे पहले अपने घर जाकर अपने कपड़े बदल लेना।
तो वह मान गई। जब मैं नहा कर आया तो देखा कि वो दरवाजे पर खड़ी मम्मी से बात कर रही थी। उसकी शर्ट एक दम गीली थी उसके स्तन और चुचूक एकदम मस्त लग रहे थे।
मैं पास गया तो देख कर हैरान हो गया। चूचियाँ देख कर मेरा लंड खड़ा हो गया था। वो भांप गई कि मेरी नज़रें उसके वक्ष पर हैं लेकिन वह कुछ नहीं बोली। फिर मैं जल्दी से तैयार होकर आया तो पापा से कार की चाबी लेकर कार स्टार्ट करने लगा और होर्न बजा कर ऋतु को बुलाने लगा। ॠतु होर्न सुन कर जल्दी से मेरे पास आई और बोली- रवि, तू आज मरवा देगा बक्शी मैडम से !
मैंने कहा- तू जल्दी से गाड़ी में बैठ ! पहले तेरे घर चलें, तू ड्रेस बदल, फिर स्कूल जायेंगे।
वो बोली- नहीं, हम लेट हो रहे हैं, मैं घर नहीं जाउंगी, सीधे स्कूल चलते हैं।
और वो कार में बैठ गई। उसका स्कूल बैग उसकी पीठ पर था तो वह ठीक से बैठ नहीं पा रही थी।
मैंने कहा- ऋतु, अपना बैग उतार कर पीछे सीट पर रख दे !
तो वह बैग उतारने लगी। जब वह बैग उतार रही थी तो उसके कंधे पीछे की ओर हो गए और स्तन बाहर की ओर आ गए। उसके चुचूक एकदम कड़क थे पानी में भीगने की वजह से !
मेरा मन कर रहा था कि बस स्कूल न जाकर उसे घर ले जाकर चोद दूँ।
तभी उसकी नज़र मुझ पर पड़ी और बोली- क्या देख रहे हो ?
मैंने कहा- कुछ नहीं, बस ऐसे ही !
उसने कहा- तुम मेरी चूचियाँ देख रहे हो ना ?
गलती से मेरे मुँह से हाँ निकल गया और वो बोली- कितने गंदे हो तुम रवि ! मुझे इतनी गन्दी नज़रों से देखते हो !
मैंने कहा- इसमें गुस्सा होने की क्या बात है? यह चीज़ ही ऐसी है कि किसी की नज़र ना पड़े तो वह अँधा है !
यह बात सुन कर वह मुँह दूसरी तरफ करके बैठ गई। मैं तो बस उसके वक्ष के बारे में ही सोच रहा था। थोड़ी देर में हम स्कूल पहुँच गए। मैं अपना बैग लेने के लिए पीछे मुड़ा, इतने में वो भी मुड़ी, उसके होंठ मेरे गालों से छू गए। फिर मेरे अन्दर एक करंट सा लग गया और उसे बोला- एक और प्लीज़ ! एक और !
वो बोली- तो बहाना चाहिए बस?
मैंने कहा- तू चीज़ ही इतनी मस्त है ! मैं क्या करूँ !
तो वह हँस पड़ी और हम दोनों बैग उठा कर स्कूल जाने लगे। स्कूल की सीढ़ी चढ़ते वक़्त मैंने देखा कि उसके स्तन ऊपर-नीचे उछल रहे हैं। मेरा तो लंड खड़ा हो रहा था देख-देख कर !
ना जाने कैसे उसकी शर्ट का बटन खुल गया था, अंदर से उसकी सफ़ेद रंग की ब्रा चमक रही थी लेकिन किसी तरह मैंने अपने आप को संभाल लिया और क्लास में चले गए।
फिर स्कूल ख़त्म होने के बाद हम फिर मिले और कार की तरफ बढ़ चले। कार में बैठ कर मैं कार स्टार्ट करने लगा तभी उसने कहा- आज कितनी बारिश हो रही है ! देखना, तुम्हारी कार स्टार्ट नहीं होगी !
उसका तो कहा ही हुआ और मेरी कार ने जवाब दे दिया, वो स्टार्ट नहीं हो रही थी। ऊपर से ऋतु खिलखिला कर हँस रही थी।
पास के टेलीफोन बूथ से मैंने पापा को फोन किया और बताया कि कार स्टार्ट नहीं हो रही है।
पापा ने कहा- कोई बात नहीं, मैं मकेनिक भेज कर कार ठीक करा दूंगा।
मैंने कार की चाबी स्कूल के चौकीदार को दे दी और हम पैदल घर की तरफ़ चल पड़े। रास्ते में काफी बारिश थी सो हम काफी भीग चुके थे। ऋतु के घर पहुँच कर देखा कि उसके घर पर ताला लगा है। पड़ोसी से पता लगा कि उसकी मम्मी मेरी मम्मी के साथ कीर्तन में गई है।
मैंने कहा- कोई बात नहीं ऋतु ! मेरे पास मेरे घर की दूसरी चाबी है, वहीं चलो !
उसने कहा- ठीक है !
और मेरे मन की मुराद पूरी हो गई कि आज तो रितू की चूचियाँ दबा कर ही रहूँगा। घर पहुँच कर मैंने ऋतु को तौलिया दिया और बोला- तुम अपना सर पौंछ लो, नहीं सर्दी लग जाएगी !
मैं उसे मम्मी के कमरे में ले गया- तुम यहाँ करो, मैं चाय बना कर लाता हूँ।
और मैं दरवाज़ा बंद कर के चला गया। लेकिन मैं गया कहीं नहीं था, दरवाज़े के पास खड़े होकर देख रहा था कि ऋतु क्या कर रही है।
पहले उसने शीशे के पास जाकर अपने आप को देखा और अपना सर पौंछने लगी। तभी उसकी नज़र अपने वक्ष पर पड़ी तो देखा कि उसकी शर्ट का बटन खुला है। (जिसे मैं सुबह देख रहा था) फिर उसने अपनी शर्ट क ऊपर से ही अपने स्तन दबाने चालू कर दिए। उसे देख कर मेरा लंड खड़ा हो गया और मैं पैंट से बाहर निकाल कर सहलाने लगा। पता नहीं हल्की सी आहट से उसे पता चल गया कि मैं उसे देख रहा हूँ।
तभी उसने आवाज़ लगाई- रवि, बाहर क्यों खड़े हो ? अंदर आओ !
मेरे मन में तो लड्डू फूट गए। लंड को अंदर किये बिना मैं दरवाज़ा खोल कर अंदर चला गया। मेरा लंड देख कर वो चौंक गई और बोली- यह क्या है?
मैंने कहा- यह नागराज है ! गर्म लड़कियों को देख कर खड़ा हो जाता है विष छोड़ने के लिए !
उसने पास आकर मेरे लंड को पकड़ कर कहा- रवि सच बताओ, सुबह तुम मेरे स्तन को क्यों देख रहे थे?
मैंने कहा- तेरी चूचियाँ हैं ही इतनी मस्त चीज़ कि दबाने को, चूसने को मन करता है।
यह सुन कर उसने मेरे हाथ अपने वक्ष पर रख दिए और कहा- लो ! जो करना है करो !
बस फिर क्या था, मैंने उसकी शर्ट के सारे बटन खोल दिए और उसकी चूचियों की लाइन पर अपना मुँह रख कर महसूस कर रहा था कि यह कोई सपना तो नहीं है !
तभी उसने मेरे लंड को जोर से दबा दिया और कहा- सिर्फ महसूस करोगे या चूसोगे भी ?
फिर क्या था, मैंने झट से उसकी शर्ट उतारी, ब्रा उतारी और जोर से दबा दिया। उसके मुँह से आह निकल गई- रवि, और जोर से !
मैंने और जोर से दबा कर उसके स्तनों को अपनी मुट्ठी में लेकर उसके चुचूक चूसने लगा। वो मेरे लंड पर जोर से हाथ आगे पीछे कर रही थी। फिर धीरे धीरे मैं अपने हाथ उसकी स्कर्ट के अन्दर डाल उसके चूतड़ों को भी दबाने लगा, उसकी पैंटी नीचे करने के बाद उसकी चूत पर हाथ फेरने लगा। वो एक दम गीली थी। मैं नीचे झुक कर उसकी स्कर्ट के अन्दर अपना मुँह डाल कर चूत को चाटने लगा।वो पूरी मस्ती में आ गई और मुझे पलंग पर धक्का दे कर मेरी पैंट खोल कर मेरे लंड को चूसने लगी। मैं उसके वक्ष दबाये जा रहा था।
इतने में मेरे लंड ने पिचकारी छोड़ दी।
वो बोली- देखो नागराज ने विष छोड़ दिया !
और वो पूरा चूस गई।
फिर मैं उसे पलंग पर लिटा कर उसकी चूत को चाटने लगा। वो पूरी तरह गर्म थी और मेरे बाल नोच रही थी, कह रही थी- रवि मत तड़पाओ ! डाल दो अपना नागराज मेरी सुरंग में !
मैंने अपना लंड उसकी चूत पर रख कर एक जोर से झटका मारा और लंड अन्दर चला गया। मैं थोड़ी देर उसके ऊपर लेट कर उसके स्तन चूसने लगा और नीचे नागराज अपना काम करने लगा। दस मिनट बाद मेरे लंड ने पिचकारी छोड़ दी। मैंने कहा- नागराज ने तेरी सुरंग में विष छोड़ दिया !
तो वह घबरा गई- अब क्या होगा ! मैं गर्भवती हो जाउंगी !
मैंने कहा- कोई बात नहीं ! मैं आई-पिल ला दूंगा, वो खा लेना, सब ठीक हो जायेगा !
और हम फिर पूरी मस्ती से फिर चुदाई में लग गए……….. Hindi Sex Stories
फर्स्ट ओरल सक का मजा मैंने तब लिया था जब मैं कॉलेज टूर में गयी थी. वहां मैंने लड़के लड़कियों के ग्रुप को सेक्स का मजा लेते देखा. उन्होंने मुझे भी खींच लिया और मैंने पहली बार लंड चूसा.
कहानी के दूसरे भाग
बेटी को यौन शिक्षा की शुरुआत
में आपने पढ़ा कि मेरी बेटी सेक्स के बारे में जानती तो थी पर उतना नहीं जितना उसे उस उम्र में जानना चाहिए तो मैंने उसे बताना शुरू किया, उसे कंडोम, लंड और चूत के बारे में बताया. उसके साथ लेस्बियन सेक्स करके उसे मजा दिया.
अब आगे फर्स्ट ओरल सक का मजा:
चारू झड़ने के बाद मुझ पर गुस्सा करने लगी- मौसी, आपने जो उंगली डाली थी अभी भी बहुत जलन हो रही है मुझे!
मैंने कंडोम चढ़ा खीरा उठाया और चारू को दिया- लो, तुम अब मेरी चूत मार लो।
चारू की आंखों में चमक आ गई।
उसने झट से खीरा मेरी चूत पर लगाया और एक ही झटके में पेल दिया।
मैं तो बस चिल्ला कर रह गई।
खीरा मेरी बच्चेदानी से जा टकराया था और उसमे ऐसा दर्द उठा कि मेरा बदन ऐंठ गया।
6 इंच तक खीरा मेरी चूत में घुसा मेरी चूत को गहरा करने में लगा था।
चारू बेहद शैतानी अंदाज में मेरी चूत को खीरे से चोद रही थी।
डॉट वाला कंडोम होने की वजह से खुरदरापन इतना ज्यादा था कि मेरी चूत का हर कोना रगड़ खाकर झनझना रहा था।
चारू इतने जोर से मेरी चूत मार रही थी कि मुझे झड़ने में 5 मिनट भी न लगे।
मेरी चूत से झरना निकला तो चारू ने खीरा निकाल लिया.
लेकिन धार इतनी तेज थी कि चारू का बदन भीग गया।
मेरी चूत से कामरस के फव्वारे छूट रहे थे और वह झरने जैसे बह रही थी।
तब मैंने अपनी जीभ से उसका जिस्म चाट कर साफ किया।
इसके बाद हम दोनों ही ठण्डी हो गई थी।
चारू अब मुझसे लिपट गई और हमने चारू की बनियान से ही अपना बदन साफ किया।
फिर नंगे बदन ही एक दूसरे से लिपट कर लेट गई।
मां बेटी के बीच आज सारी दीवारें खत्म हो गई थी।
चारू- मौसी, आज के पहले आपने कभी किसी लड़की के साथ सेक्स किया है?
मैं- लड़की नहीं, लड़कियों के साथ किया है, ग्रुप में, मेरी चारों सहेलियों ने मिलकर मेरी ली थी।
चारू- इसीलिए आप सेक्स में इतनी एक्सपर्ट हो. अगर कोई मर्द आपको आज मिले तो क्या आप उसके साथ मजा करोगी?
मैं- ऐसा क्यों पूछ रही है तू?
चारू- मुझे आपको सेक्स करते हुए देखना है।
मैं- कोई तेरे सामने मेरी लेगा तो तुझे बुरा नहीं लगेगा?
चारू- नहीं, मुझे मजा आयेगा क्यूंकि आप उस मर्द को भी मेरी तरह निचोड़ कर रख दोगी।
मैं- अगर तेरे पापा को पता चला तो वे मुझे घर से निकाल देंगे।
चारू- आप परेशान मत हो मौसी, मैं उनसे कुछ नहीं कहूंगी बल्कि मैं तो चाहती हूं कि आपके साथ साथ मैं भी किसी लड़के को निचोड़ कर अपनी प्यास बुझाऊं!
उसकी बात सुनकर मुझे हंसी आ गई।
मैं- चारू अभी तुम छोटी हो, अगर इस उम्र में सेक्स करोगी तो बहुत सी परेशानियां सामने आ जायेंगी, जैसे वजन बढ़ना, इन्फेक्शन, योनि का ढीलापन, मुंहासे वगैरह। तुम थोड़ा और सब्र कर लो फिर जी भर के जिंदगी के मजे लेना।
चारू ने कहा- ठीक है मौसी … लेकिन याद रखियेगा, आपने आज मुझे निचोड़ दिया है, अब मैं आपकी बेटी के साथ साथ लौड़ी भी हूं, इसलिए मैं आपके दूध निचोड़ूंगी भी और चूसूंगी भी!
यह कहकर उसने मेरे निप्पल पर काट लिया।
मैं आह भरी सिसकी लेकर उसका मुलायम बदन सहलाने लगी।
उसके नितम्बों के बीच के छेद पर उंगली फेर कर मैंने उसे आराम दिया.
और फिर चारू मेरे ऊपर चिपक कर लेट गई।
उसका नंगा बदन इतना मुलायम और रसभरा था कि कोई भी उसे छूकर उत्तेजित हो जाता, उसके गोलाकार नितंब मेरी हथेलियों से मालिश का मजा ले रहे थे।
चारू- वासू मौसी, आपने पहली बार सेक्स किसके साथ किया था?
मैं- एक लड़का था मेरे कॉलेज के पास का, उसके साथ प्रेम शुरू किया था, उसने ही मेरी सील तोड़ी थी। लेकिन तुम्हारे पापा से मुझे शादी करनी पड़ी और हम दोनों अलग हो गए।
चारू- सच! लेकिन सब कैसे हुआ, प्लीज बताइए।
मैंने उसे अपनी आप बीती सुनानी शुरू की।
चारू, बात तब की है जब मैं 12वीं में स्कूल में थी।
तब मैं तेरे जैसी थी, इतनी की उम्र की जितनी कि तुम अब हो.
मैं पढ़ाई में ज्यादा अच्छी नहीं थी लेकिन मार्क्स ठीक आ जाते थे।
देखने में तो मैं बला की खूबसूरत हूँ ही।
मेरे हल्के नींबू जैसे स्तन अभी विकसित होना शुरू ही हुए थे, मेरे शरीर पर मांस पर्याप्त मात्रा में था और मेरे नितम्ब गोलाई लिए हुए मेरे रूप को आकर्षक बनाते थे।
बोर्ड एग्जाम हो चुके थे और सभी लोग छुट्टियां काट रहे थे।
एक दिन स्कूल की तरफ से टूर पर जाने की योजना बनाई गई।
टूर में हमें सिर्फ राजनगर के किले और जंगल में जाना था और टूर एक ही दिन का था।
मुझे भी जाने का अवसर मिला।
अगले दिन मैं अपने कपड़े और बाकी समान लेकर स्कूल के लिए निकल गई।
धीरज सर और मोनिका मैम को छात्रों को संभालने की जिम्मेदारी दी गई।
हमारे साथ हमारे सीनियर क्लास के लड़के लड़की भी आए थे।
कुल 30 बच्चों का ग्रुप था।
धीरज सर और मोनिका मैम का चक्कर पूरे कॉलेज को पता था।
हमारे ग्रुप में कुछ तेज तर्रार लड़कियां थीं।
उनमें से एक लड़की थी रचना जो सबसे हॉट और सेक्सी थी।
उसकी दो सहेलियां थी रुचि और नेहा।
वे भी उसी के जैसी थी और उन तीनों के पीछे लड़कों की लाइन लगी रहती थी।
हम सभी बस में सवार हो गए।
फिर बस राजनगर के किले की तरफ़ चल दी।
बस में मेरी ही क्लास का एक लड़का भी था, रोहित जो चोरी छुपे मुझे देखता था लेकिन कुछ कहता नहीं था।
टूर एक दिन और एक रात का था।
बस राजनगर के किले के पास पहुंच गई तो हम सब लोग अपनी अपनी टीम में बंट गए।
लड़के धीरज सर के साथ थे और मेरी टीम मोनिका मैडम के साथ थी।
हम सखियां रचना को ही देख रहे थे।
उसका लम्बा गोरा मांसल जिस्म बहुत आकर्षक लग रहा था।
इंटर के लड़के उसी को ताड़ रहे थे, रचना भी उनको खूब लाइन दे रही थी।
घूमते घूमते शाम हो गई और हम लोग राजनगर के जंगल में आ गए।
धीरज सर और मोनिका मैम के बीच कुछ इशारा हुआ तो धीरज सर बोले- बच्चो, मोनिका मैम की तबीयत ठीक नहीं है, मैं इनको दवा दिलाकर लाता हूं, तब तक आप लोग यहीं रहिएगा और मेरे आने तक इधर उधर मत जाइएगा।
यह कहकर वह मोनिका मैम के साथ चले गए।
अब टीचर थे नहीं इसलिए सबको खुलकर नैन मटक्का करने का मौका मिल गया।
रचना ने कुछ लड़कों को इशारा किया और फिर पहले 5 लड़के और फिर कुछ देर बाद रचना और उसकी सहेलियां नेहा और रुचि भी जंगल में अंदर की तरफ चली गई।
मैंने अपनी सखियों से कहा- चलो हम लोग भी चलते हैं जंगल में, देखो रचना गई है। बहुत मजा आयेगा।
लेकिन मेरी सहेलियों ने मना कर दिया।
लेकिन मैं नहीं मानी और 10 मिनट बाद मैं भी जंगल में चली गई।
जंगल में बड़ी चट्टाने थी और मुझे कुछ आहट मिली तो मैं उन्ही की ओट में छिपकर सब देखने लगी।
देखा तो आंखें फटी रह गई।
रचना 3 लड़कों के साथ चुम्मा चाटी कर रही थी और उसकी सहेलियां नेहा और रुचि भी यही कर रही थी।
नेहा अपनी टांगें खोल कर चट्टान पर बैठी हुई थी और एक लड़का उसकी योनि को चाट रहा था।
रुचि भी एक लड़के को किस कर रही थी और वह लड़का रुचि के नितम्ब सहला रहा था।
सबसे ज्यादा तो रचना लगी थी इन सब कामों में!
उसने अपनी शर्ट के बटन खोल रखे थे और उसकी ब्रा नीचे सरकी हुई थी।
एक लड़का पीछे से उसके दोनों संतरे जैसे स्तनों को मसल रहा था और दो लड़के अगल बगल खड़े हो कर उसे किस कर रहे थे।
रचना के दोनों हाथों में दोनों लड़कों के लंड थे और वह उन्हें सहला रही थी।
वहां बिलकुल कामसूत्र का लाइव टेलीकास्ट चल रहा था।
तभी एक लड़के ने रचना और रुचि की पैंटी निकाल दी।
स्कर्ट पहने हुए वह लड़कियां अपनी ब्रा नीचे किए लड़कों से मजे ले रही थी।
तभी एक लड़के ने रचना को छोड़ा और जाकर नेहा के पास खड़ा हो गया।
नेहा इशारा समझ गई।
उसने लपक कर उस लड़के का लिंग अपने मुंह में भर लिया।
चारू, ये सीन देखकर तो मेरे तन बदन में आग लग गई।
मेरी सांसें तेज हो गई और मैं अब गीली होने लगी।
तभी एक और करतब हुआ।
एक लड़के ने रचना को उठा लिया और सर के बल कर दिया।
रचना का सर उस लड़के के लिंग के सामने आ गया।
तभी एक और लड़के ने रचना को सहारा दिया और फिर दोनों ने रचना के गुप्तांगों पर अपनी जीभ चलानी शुरू कर दी।
रचना भी एक एक कर के उस दोनो का लिंग चूस रही थी।
उधर एक लड़का रुचि के स्तन पी रहा था और उसकी योनि सहला रहा था.
वहीं दूसरी तरफ दो लड़के नेहा पर लगे थे।
उनमें से एक नेहा का मुंह चोदन कर रहा था और एक लड़का नेहा की योनि को चूस रहा था।
इन गर्मागर्म नजारों को देखकर मुझे भी गर्मी लगने लगी।
हाथ पांव कांपने लगे और दिल की धड़कन आसमान छूने लगी।
तभी मुझे छींक आ गई और लोगों की नजर मुझपे गई।
मैं वहां जड़ खड़ी थी, कुछ समझ नहीं आ रहा था कि क्या करूं।
सबने मुझे देखा तो मुस्कुरा कर एक दूसरे से धीरे धीरे कुछ कहने लगे।
फिर रचना, नेहा और रुचि मेरे पास आई।
उनके स्तन अभी भी खुले हुए थे।
जब रचना मेरे पास आई तो अहसास हुआ कि उसके स्तन कितने रस भरे हैं।
रचना- यहां क्या कर रही है वासु?
मैं हकलाती हुई बोली- मुझे माफ कर दो दीदी, मैं बस यहां से गुजर रही थी।
रचना- अच्छा, आ फिर तुझे सैर कराती हूं।
ये कहकर उसने मेरा हाथ पकड़ लिया और मुझे अपने साथ उस चट्टान के पास ले आई।
सारे लड़के मुझे देखकर आनन्दित थे।
अभी कच्ची कली थी मैं इसलिए शरीर ज्यादा विकसित नहीं हुआ था।
रचना ने मेरी शर्ट खोली तो बनियान में मेरे स्तन आधे नींबू की तरह उभार लिए सामने आ गए।
एक लड़का बोला- इसकी तो चूचियां भी नहीं निकली अभी, इसमें मजा नहीं आयेगा।
तो रचना बोली- रुक जाओ जानेमन, चूत तो है ही, चलो देखते हैं।
यह कहकर उसने मेरी पैंटी सहलाई तो मुझे करंट सा लगा।
नेहा उन लड़कियों ने मेरी पैंटी निकाल दी और मैं कुछ न कह सकी।
मेरी योनि पर हल्के हल्के बाल आ गए थे।
रचना ने मेरी चूत का मुआयना किया और कहा- अभी सील पैक माल है ये!
यह बोलकर उसने जीभ निकाली और मेरी चूत को चाटने लगी।
उफ्फ पहली बार किसी की जुबान मेरी चूत से टकराई थी।
मैं आँखें बंद कर के इस लम्हे का मजा लेने लगी।
अब नेहा ने मेरी बनियान भी उठा दी और मेरे स्तन को बाहर कर दिया।
लड़कों ने मेरे नींबू दबा दिए तो मुझे दर्द हुआ।
मैं चिल्लाई- आह दीदी, दर्द हो रहा है।
रचना ने मेरी चूत छोड़ी और अपने होंठ मेरे होंठों से टिका दिए।
पहली बार किसी ने मुझे किस किया था वह भी एक लड़की ने!
मैं भी मजे लेकर उसे चूसने लगी।
सच कहूं तो वह चुम्बन मुझे आज भी याद है चारू!
इसके बाद नेहा और रुचि नीचे बैठ गई।
एक एक लड़का उन दोनों के पास गया और दोनों ने उनके लंड अपने मुंह में भर लिए।
उधर रचना दो लड़कों का लंड चूस रही थी।
यह नजारा ही ऐसा था कि कोई भी गीला हो जाए।
इसके बाद एक लड़का मेरे पास आया और बोला- तू भी चूस मेरा!
मैं डर के बोली- नहीं, मैं नहीं कर पाऊंगी।
तो उस लड़के ने मेरा हाथ पकड़ कर अपने लिंग पर रख दिया।
उसका गर्म लिंग पकड़ कर मुझे बेहद झटका सा लगा।
मैंने धीरे धीरे उसे सहलाना शुरु किया और फिर उसने मुझे भी घुटनों के बल बिठा दिया।
मेरे बाल पकड़ कर उसने अपना लिंग मेरे मुंह में डाल दिया।
उसका नमकीन स्वाद मेरे मुंह में घुल गया।
वह अब धीरे धीरे मेरे मुंह का चोदन करने लगा।
मेरे मुंह पर धक्के लगाते हुए उसने गले तक अपना लिंग मेरे मुंह में घुसेड़ना शुरू कर दिया।
उसका 5 इंच का काला लिंग मेरे मुंह में घुसता और निकालकर दोबारा अंदर घुस जाता।
उसका लिंग मेरी लार से अच्छी तरह भीग गया।
फर्स्ट ओरल सक का ये क्रम 5 मिनट तक चला फिर उसका बदन अकड़ने लगा।
उसने मेरे सर पर अपनी पकड़ मजबूत कर ली और फिर मेरे मुंह में झड़ गया।
एक गर्म तेल सा मेरे मुंह में गिरा और मुझे उसका नमकीन स्वाद मिल गया।
उस लड़के ने मेरा सर ऊपर उठा दिया और मेरे मुंह का वीर्य मेरे गले से अंदर उतर गया।
झड़ने के बाद वह लड़का ढीला हो कर मुझसे अलग हो गया।
मैंने देखा तो दोनों लड़के रचना के मुंह पर लंड रगड़ रहे थे और कुछ ही देर बाद झटकों के साथ उनका वीर्य रचना के चेहरे पर जा गिरा।
उधर नेहा और रुचि भी लंड को चूस चूस कर खाली कर चुकी थी।
रचना मेरे पास आई और अपने चेहरे पर लगा वीर्य मेरे स्तनों पर मल दिया और कहा- इसे लगा रहने देना बेबी, तुझे बहुत मजा आयेगा।
लड़के झड़ कर ठंडे हो गए थे इसलिए अब हमने चलने का फैसला किया।
अपने कपड़े पहनकर हम सब वापस बस में आ गए।
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