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करीब एक महीने बाद की Hindi Sex Stories बात है। मैं सुबह ऑफिस पहुँचा तो देखा कि ऑडिट डिपार्टमेंट में एक नयी लड़की काम कर रही है। वाओ! कितनी सुंदर थी वो। वो करीब ५ फ़ुट ४ इंच की थी पर इस समय हाइ-हील की सैंडल पहने होने की वजह से ५ फ़ुट आठ इंच के करीब लग रही थी। गाल भरे-भरे और आँखें भी तीखी थी। उसने टाइट स्लीवलेस टॉप और टाइट जींस पहन रखी थी। कपड़े टाइट होने की वजह से उसके बदन का एक-एक अंग जैसे छलक रहा था। उसे देखते ही मेरे लंड में गर्मी आ गयी।
मुझे उससे मिलना पड़ेगा मैंने सोचा और उस पर नज़र रखने लगा।
एक दिन लंच से पहले मैंने उसे अपनी सीट से उठ कर जाते हुए देखा तो मैं उसके पीछे-पीछे पैसेज में आ गया। मैंने हिम्मत कर के पूछा, “लगता है… आप यहाँ नयी आयी हैं, इसके पहले कभी नहीं देखा?”
“हाँ! मैं यहाँ पर नयी हूँ, अभी एक हफ्ता ही हुआ है।”
“हाय! मुझे सुनील कहते है।” मैंने अपना हाथ आगे बढ़ा दिया।
मुझसे हाथ मिलाते हुए उसने कहा, “मुझे रजनी कहते हैं। आपसे मिलकर अच्छा लगा।” कुछ देर बात करने के बाद हम अपने काम में लग गये।
उस दिन के बाद मैं अक्सर उससे टकराने के बहाने ढूँढता रहता था। कभी सीढ़ियों पर, कभी स्टोर रूम में। हम लोग अक्सर बात करने लगे थे। काफी खुल भी गये थे। हम इंटरनेट पर भी चैटिंग करने लगे थे। रजनी में बढ़ती मेरी दिलचस्पी तीनों लेडिज़ से छुपी ना रह सकी।
“क्या तुम लोगों ने देखा…. कैसे हमारा सुनील उस नयी लड़की के पीछे पड़ा हुआ है?” समीना ने एक दिन लंच लेते हुए कहा।
“सुनील! संभल कर रहना, सुनने में आया है कि एम-डी की भतीजी है”, शबनम ने कहा।
“छोड़ो यार! मुझे उसमें कोई दिलचस्पी नहीं है। तुम लोग सिर्फ़ राई का पहाड़ बना रही हो। मैं तो सिर्फ़ उससे हँसी मजाक कर लेता हूँ और कुछ नहीं।” मैंने उनसे झूठ कहा।
एक दिन इंटरनेट पर बात करते हुए मैंने हिम्मत कर के पूछा, “रजनी! शाम को कॉफी पीने मेरे साथ चलोगी?”
“जरूर चलूँगी, क्यों नहीं?” उसने जवाब दिया।
उस दिन शाम को हम लोग पास के रेस्तोरां में कॉफी पीने गये। फिर बाद में एक दूसरे का हाथ थामे पार्क में घूमते रहे। वो शाम काफी सुहानी गुजरी थी।
दूसरे दिन लंच पर गौरी ने शिकायत की, “कल शाम को कहाँ थे? मैं और शबनम कितनी देर तक तुम्हारा इंतज़ार करते रहे।”
मैं रजनी के चक्कर में ये भूल गया था कि गौरी और शबनम आने वाली थी। “सॉरी! लेडिज़, कल शाम को मैं रजनी को कॉफी पिलाने ले गया था”, मैंने कहा।
“क्या हम दोनों की कीमत पर उसे बाहर ले जाना तुम्हें अच्छा लगा सुनील?” गौरी शिकायत करते हुए बोली।
“सब्र से काम ले गौरी, हमें पहले कनफर्म करना चाहिये था सुनील से। सुनील को हक है वो अपनी उम्र वालों के साथ घूमे फ़िरे”, शबनम उसे समझाते हुए बोली।
“हाँ! हम नहीं चाहते कि रजनी की कुँवारी चूत चोदने का मौका सुनील के हाथ से जाये, वैसे सुनील! आजकल की लड़कियों की कोयी गारंटी नहीं कि वो कुँवारी हो।” समीना शरारत करते हुए बोली।
“दोबारा कब उसके साथ बाहर जा रहो हो?” गौरी ने पूछा।
“कल शाम को”, मैंने जवाब दिया।
“ओह वापस हम लोगों की कुरबानी पर नहीं”, गौरी नाराज़गी से बोली।
“तुम लोग चाहे तो आज की रात आ सकती हो”, मैंने सुझाव दिया। फैसला होने के बाद हम लोग काम पर वापस आ गये।
मैं और रजनी अब बराबर मिलने लगे। पिक्चर देखते, साथ खाना खाते, पार्क में घूमते। एक महीना इसी तरह गुजर गया। तीनों लेडिज़ चिढ़ाने से बाज़ नहीं आती थी, “रजनी को तुम अब तक चोद चुके होगे, सच बताओ उसकी चूत कैसी है, बहुत टाइट थी क्या?”
“ऐसा कुछ नहीं हुआ है और मुझे इंटरस्ट भी नहीं है… कितनी बार तुम लोगों से बोलूँ?” मैंने गुस्सा करते हुए कहा।
“ठीक है कभी हमारी जरूरत पड़े तो बताना”, कहकर तीनों लेडिज़ अपनी अपनी सीट पर चली गयी।
एक दिन शाम को मैं और रजनी पिक्चर देखने जाने वाले थे। जब सिनेमा हॉल में दाखिल होने जा रहे थे तो मुझे याद आया कि मैं टिकट तो घर पर ही भूल आया हूँ। “तुम यहीं रुको, टिकट मिल रही है… मैं दूसरी दो टिकट ले आता हूँ”, मैंने रजनी से कहा।
“और वो दो टिकट वेस्ट जाने दें? नहीं! अभी वक्त है… चलो घर से ले आते हैं”, इतना कहकर वो मेरे साथ मोटर-साइकल पर बैठ गयी।
हम लोग मोटर-साइकल पर घर जा रहे थे कि जोरदार बारिश शुरू हो गयी। मेरे फ्लैट तक पहुँचते हुए हम लोग काफी भीग चुके थे। रजनी सिर से नीचे तक भीग चुकी थी। उसका टॉप भीगा होने से उसके शरीर से एक दम चिपट गया था और उसके निप्पल साफ दिखायी दे रहे थे। उसने ब्रा नहीं पहन रखी थी। उसकी जींस भी चिपकी हुई थी और उसके कुल्हों की गोलियाँ मुझे मादक बना रही थी। मैं अपने लंड को खड़ा होने से नहीं रोक पा रहा था।
“सुनील मुझे बहुत ठंड लग रही है”, रजनी ने ठिठुरते हुए कहा, “जल्दी से मुझे कुछ पहनने को दो, और तुम भी कपड़े बदल लो नहीं तो तुम्हें भी ठंड लग जायेगी।”
हालात को बदलते देख मैं चौंक उठा और कपबोर्ड में उसके लिये कपड़े ढूँढने लगा, “सॉरी रजनी तुम्हारे पहनने के लायक मेरे पास कुछ नहीं है।”
“क्या बात करते हो? तुम्हारे पास पायजामा सूट नहीं है क्या?” रजनी ने पूछा।
“हाँ है! पर वो बहुत बड़ा पड़ेगा तुम पर।”
“सुनील! जल्दी करो, शर्ट मुझे दो और पायजामा तुम पहन लो, मुझे बहुत ठंड लग रही है।” रजनी ने काँपते हुए कहा।
मैंने उसे शर्ट दी और वो उसे लेकर बाथरूम में बदलने चली गयी। थोड़ी देर में वो दरवाजे से झाँकती हुई बोली, “सुनील ये तो बहुत छोटा इससे मेरी चू… मेरा मतलब ही कि पूरा शरीर नहीं ढक पायेगा।”
मैंने उसकी तरफ देखा तो मेरे बदन में आग लग गयी। उसके मम्मे साफ झलक रहे थे। मेरा लंड तन कर खड़ा हो रहा था। मैंने उसे बीच में ही टोक कर पूछा, “क्या तुमने पैंटी नहीं पहनी है क्या?”
“अरे पहनी थी बाबा! पर वो भी तो भीग गयी थी, मैं ये जानना चाहती हूँ कि क्या मैं तुम्हारा बाथरोब पहन लूँ?” उसने कहा।
उसके रूप में मैं इतना खो गया था कि ये भी भूल गया कि मेरे पास बाथरोब भी है। “हाँ ले लो”, मैंने कहा।
थोड़ी देर बाद रजनी मेरे सफ़ेद बाथरोब में लिपटी हुई बाथरूम से बाहर आयी। सफ़ेद बाथरोब उसके शरीर से एकदम चिपका हुआ था। उसके शरीर की एक-एक गोलायी साफ नज़र आ रही थी। मैं अपने लंड को खड़ा होने से नहीं रोक पा रहा था। अपनी हालत छुपाने के लिये मैंने मुड़ कर रजनी से पूछा, “रजनी कॉफी पीना पसंद करोगी या कोल्ड ड्रिंक?”
“सुनील! अगर ब्रांडी मिल जाये तो ज़्यादा अच्छा रहेगा…” रजनी ने कहा।
“ब्रांडी तो नहीं है पर हाँ रम है मेरे पास”, कहकर मैं किचन में जा कर दो पैग रम बना लाया और उसके साथ सोफ़े पर बैठ गया। मेरे दिमाग में एक ही खयाल आ रहा था – रजनी को नंगे बदन देखने का – और ये सोच मेरे लंड को और तगड़ा कर रही थी।
रजनी ने मेरे कंधे पर हाथ रख कर पूछा, “सुनील तुम अपने बारे में बताओ।” मैंने रजनी को अपने परिवार के बारे में बता दिया। मेरे भाई भाभी और दोनों बहनों के बारे में। “अब तुम अपने बारे में बताओ रजनी।”
“तुम्हें तो मालूम है ये कंपनी मेरे पापा ने शुरू की थी। मम्मी काम नहीं संभाल पायी तो अपने दूर के रिश्तेदार मिस्टर रजनीश को बुला लिया। रजनीश अंकल ने अपने दिमाग और मेहनत से कंपनी को कहाँ से कहाँ पहुँचा दिया।”
“हमारा घर काफी बड़ा है, इसलिये कुछ सालों के बाद मम्मी ने रजनीश अंकल और उनके परिवार को हमारे साथ ही रहने को बुला लिया। रजनीश अंकल और उनकी बीवी और दोनों बेटियाँ अब हमारे साथ ही रहते हैं। उनकी बेटियों से मेरी दोस्ती भी अच्छी है।”
रजनी की बातों से लगा कि उसे अपने अंकल की चुदाई की कहानियाँ नहीं मालूम हैं। इसलिये मैंने भी बताना उचित नहीं समझा।
हम दोनों काफी देर तक बात कर रहे थे। अचानक वो मेरी आँखों में देखने लगी और मैं भी उसकी आँखों को देख रहा था जैसे वो मुझसे कुछ कहना चाहती हो।
उसने अपने होंठों पर जीभ फिराते हुए अपना चेहरा मेरी तरफ बढ़ाया। मैं भी उसकी और बढ़ा और अपने होंठ उसके होंठों पर रख दिये। उसने मेरे चेहरे को कस कर पकड़ते हुए अपने होंठों का दबाव मेरे होंठों पर कर दिया और चूसने लगी। हम दोनों के मुँह खुले और दोनों की जीभ आपस में खेलने लगी। हम दोनों की साँसें उखड़ रही थी।
“ओह सुनील!” वो सिसकी। “ओह रजनी!” मैं भी सिसका।
मेरा लंड मुझसे कह रहा था कि मैं इस कुँवारी चूत को अभी चोद दूँ और दिमाग कह रहा था कि नहीं! कंपनी के एम-डी की भतीजी है, कहीं कुछ गलत हो गया तो सब सत्यानाश हो जायेगा। मैं इसी दुविधा में उल्झा हुआ सोच रहा था।
“सुनील मुझे एक बार और किस करो ना”, वो बोली।
मैंने अपने होंठ उसके होंठों पर रख दिये और उसके होंठों को चूसने लगा। अब हम लोग धीरे से खिसकते हुए सोफ़े पर से ज़मीन पे लेट गये थे। मैं उसके ऊपर अध-लेटा हुआ था और अपने हाथ बाथरोब में डाल कर उसके मम्मे सहला रहा था और जोर से भींच रहा था।
“ओह सुनील! कितना अच्छा लग रहा है!” वो मादकता में बोली।
मेरा लंड भी अब तंबू की तरह मेरे पायजामे में खड़ा था। अब मुझे परवाह नहीं थी कि वो देख लेगी। मैंने उसका बाथरोब खोल दिया और उसका नंगा बदन मेरी आँखों के सामने थे।
“ओह रजनी!! तुम कितनी सुंदर हो। तुम्हारा बदन कितना प्यारा है”, यह कहकर मैं उसके मम्मे चूसने लगा और बीच-बीच में उसके निप्पल को दाँतों से काट रहा था।
उसके मुँह से सिसकरी निकल रही थी, “ओहहहह आआहहह सुनील ये क्या कर डाला तुमने। बहुत अच्छा लग रहा है… हाँ किये जाओओओओ।”
मैं उसे चूमते हुए नीचे की ओर बढ़ रहा था। उसकी प्यारी चूत बहुत ही अच्छी लग रही थी। उसकी चूत बिल्कुल साफ़ थी। मैं उसकी चूत को चाटने लगा। मैंने जोर लगाया तो वो और जोर से सिसकने लगी, “ओहहहह हहहह आआआहहह सुनीलजजज!!”
मैंने उसकी टाँगों को थोड़ा फैला कर उसकी कुँवारी चूत के छेद को पहली बार देखा। काफी छोटा है, मैंने सोचा।
जैसे ही मैं अपनी जीभ उसकी चूत के छेद पर रगड़ने लगा, उसने मेरे सर को जोर से अपनी चूत पर दबा दिया। मैं अपनी जीभ से उसकी चूत की चुदाई करने लगा। रजनी ने जोर से सिसकरी भरी और उसकी चूत ने पानी छोड़ दिया।
रजनी ने मेरे बाल पकड़ कर मुझे उसके ऊपर कर लिया और बोली, “सुनील मुझे चोदो, आज मेरी कुँवारी चूत को चोद दो, मुझे अपना बना लो।”
मैंने अपना लंड उसकी चूत के मुँह पर रख कर पूछा, “रजनी तुम वाकय चुदवाना चाहती हो?”
“हाँ!! अब देर मत करो और अपना लंड मेरी चूत में डाल दो, फाड़ दो मेरी चूत को”, वो उत्तेजना में चिल्लायी।
मैं अपने लंड को धीरे-धीरे उसकी चूत में डालने लगा। उसकी चूत बहुत ही टाइट थी। फिर थोड़ा सा खींच कर एक जोर का धक्का मारा और मेरा लंड उसकी कुँवारी झिल्ली को फाड़ता हुआ उसकी चूत में जड़ तक समा गया।
“ओह!!! बहुत दर्द हो रहा है सुनील!” वो दर्द से चिल्ला उठी और उसकी आँखों में आँसू आ गये। उसकी आँखों के आँसू पौंछते हुए मैंने कहा, “डार्लिंग! अब चिंता मत करो, जो दर्द होना था वो हो गया… अब सिर्फ़ मज़ा आयेगा”, इतना कहकर मैं उसे चोदने लगा। मेरा लंड उसकी चूत के अंदर बाहर हो रहा था।
करीब दस मिनट की चुदाई के बाद उसे भी मज़ा आने लगा। वो भी अपनी कमर उछाल कर मेरे धक्के का साथ देने लगी। उसकी सिसकरियाँ बढ़ रही थी।
“हाँ सुनील! जोर जोर से करो, ऐसे ही करते जाओ, बहुत अच्छा लग रहा है, प्लीज़ रुकना नहीं… आआआहहह और जोर से, लगता है मेरा छूटने वाला है।”
मुझे अभी अपने लंड में तनाव लग रहा था। वो किसी परेशानी में ना पड़ जाये, इसलिये मैं अपने लंड को उसकी चूत से निकालने जा रहा था कि वो बोली, “क्या कर रहे हो? निकालो मत, बस मुझे चोदते जाओ।”
“रजनी तुम प्रेगनेंट हो सकती हो, मुझे निकाल लेने दो”, मैंने जवाब दिया।
“हिम्मत ना करना निकालने की, बस चोदते जाओ, और अपना सारा पानी मेरी चूत में डाल दो। आज इस प्यासी चूत की साऱी प्यास बुझा दो।” ये कहकर वो उछल-उछल कर चुदवाने लगी। मैंने भी अपनी स्पीड बढ़ा दी।
उसका शरीर कंपकंपाया, “ओह सुनील!!!! हाँआँआँआ आआ… चोदो लगता है मेरा छूटने वाला है”, वो जोर से चिल्लायी और वैसे ही मैंने अपना वीर्य उसकी चूत में छोड़ दिया।
हम दोनों काफी थक चुके थे। जब मेरा मुरझाया लंड उसकी चूत से बाहर निकल आया तो मैंने उसकी बगल में लेट कर सिगरेट जला ली।
“सुनील बहुत मज़ा आया, आज मैं लड़की से औरत बन गयी”, रजनी ने कहा।
“हाँ रजनी! काफी आनंद आया”, मैंने जवाब दिया।
मैं उसके मम्मे सहला रहा था, और देखना चाहता था कि अब उसकी चूत कैसी दिखायी दे रही है। मैंने उसकी जाँघें ऊपर उठायीं तो देखा कि उसकी चूत थोड़ी चौड़ी हो गयी थी। उसमें से वीर्य और खून दोनों टपक रहे थे। मेरा बाथरोब भी खून और पानी से सराबोर था।
मैं उसके मम्मे और चूत दोनों सहला रहा था जिससे मेरे लंड में फिर गरमी आ गयी थी।
जैसे ही उसका हाथ मेरे खड़े लंड पर पड़ा वो चिहुँक उठी, “सुनील ये तो फिर तन कर खड़ा हो गया है, इसे फिर से मेरी चूत में डाल दो।“
“हाँ रानी! मैं भी मरा जरा जा रहा हूँ, तुम्हारी चूत है ही इतनी प्यारी”, ये कह कर मैंने अपना लंड उसकी चूत में डाल दिया और उसे कस कर चोदने लगा। थोड़ी देर में ही हम दोनों खलास हो गये।
उस दिन रात तक हम लोगों ने चार बार चुदाई कि और काफी थक गये थे। करीब नौ बजे वो बोली, “सुनील अब मुझे जाना चाहिये, मम्मी घर पर इंतज़ार कर रही होगी।”
“अभी तो सिर्फ़ नौ बजे हैं, थोड़ी देर रुक जाओ…. फिर मैं तुम्हें घर छोड़ दूँगा”, मैंने उसे रोकना चाहा।
“नहीं सुनील! मैंने मम्मी से कहा था कि मैं सहेली के साथ सिनेमा देखने जा रही हूँ और साढ़े नौ तक वापस आ जाऊँगी। अगर टाईम से घर नहीं पहुँची तो मम्मी को मुझपर विश्वास नहीं रहेगा”, ये कहकर वो कपड़े पहन के अपने घर चली गयी।
अगले दिन मैं ऑफिस पहुँचा तो देखा रजनी का ई-मेल आया था, “सुनील डार्लिंग! कल कि शाम बहुत अच्छी थी, मुझे बहुत मज़ा आया, क्यों ना हम फिर से करें। आज शाम छः बजे कैसा रहेगा? ऑय लव यू, रजनी।”
मैंने उसे जवाब दिया, “हाँ मुझे भी अच्छा लगा। मैं भी आज शाम छः बजे तुम्हारा इंतज़ार करूँगा।”
लंच के समय शबनम बोली, “आखिर हमारे सुनील ने रजनी की कुँवारी चूत फाड़ ही दी।”
“ये तुम कैसे कह सकती हो?” गौरी ने पूछा।
“आज सुबह मैं जब ऑफिस में आयी तो, जैसे सब कहते हैं, मैंने भी रजनी से कहा, गुड मोर्निंग रजनी, कैसी हो, मैंने देखा उसके चेहरे पर रोज़ से ज्यादा चमक थी। उसने कहा, गुड मोर्निंग शबनम। और मुझे बाँहों में भर कर बोली ओह शबनम आज मैं बहुत खुश हूँ। उसकी मादकता और चंचलता देख कर मुझे लगा कि वो चुदाई कर चुकी है।”
“क्या सिर्फ़ उसके इस व्यवहार से तुम कैसे अंदाज़ा लगा सकती हो कि वो कुँवारी नहीं रही?” समीना ने कहा।
“एक और बात भी है जो मुझे सोचने पर मजबूर कर गयी, आज सुनील सुबह जब ऑफिस में आया तो उसके चेहरे पर खुशी की झलक थी और होंठों से गीत गुनगुना रहा था”, शबनम ने कहा।
“क्या ये ठीक कह रही है सुनील?” गौरी और समीना ने पूछा।
“हाँ मेरी जानू! ये ठीक कह रही है, उसकी चूत इतनी टाइट थी कि मुझे अब भी मेरे लंड पर दर्द हो रहा है”, मैंने खुशी के मारे जवाब दिया।
“देखा! मेरा शक ठीक निकला ना! फ्रैंड्स अब हमको सुनील के आनंद में बाधा नहीं बनना चाहिये, इसलिये आज से हम उसके घर नहीं जायेंगे”, शबनम ने कहा।
“तो क्या हम सुनील के लंड का मज़ा नहीं ले सकेंगे?” गौरी ने कहा।
“क्यों नहीं ले सकेंगे? स्टोर रूम जिंदाबाद!” समीना ने हँसते हुए स्टोर रूम की चाबी दिखायी।
अगले दिन मैंने कुछ कंडोम खरीद लिये जिससे कोई खतरा ना हो। मुझे हमेशा डर लगा रहता था कि कहीं रजनी प्रेगनेंट ना हो जाये। हम लोग बराबर मिलते थे और जम कर चुदाई करते थे।
एक दिन रजनी बोली, “सुनील ये कंडोम पहनना जरूरी है क्या? इस रबड़ के साथ मज़ा नहीं आता।”
“तो तुम बर्थ कंट्रोल पिल्स लेना शुरू कर दो”, मैंने कहा।
“मैं कहाँ से लाऊँगी, और मुझे कौन लिख कर देगा, कहीं मम्मी को पता चल गया तो मुझे जान से ही मार डालेगी”, उसने जवाब दिया।
दूसरे दिन ऑफिस में मैंने समीना से कहा, “समीना! तुम्हें मेरा एक काम करना होगा, मुझे बर्थ कंट्रोल की गोलियाँ चाहिये रजनी के लिये।”
“तुम कंडोम क्यों नहीं इस्तमाल करते?” समीना ने पूछा।
“कंडोम इस्तमाल करता हूँ लेकिन रजनी को उसमे मज़ा नहीं आता”, मैंने कहा।
“ठीक है मैं ला दूँगी”, कहकर समीना अपने कम में लग गयी।
अगले दिन समीना ने मुझे पैकेट दिया और कहा, “जाओ ऐश करो।”
अब हम लोगों के दिन आराम से कट रहे थे। दिन में ऑफिस में तीनों को चोदता था और घर पर रजनी को। मन में आता था कि मैं रजनी से शादी कर लूँ, इसलिये नहीं कि मैं उससे प्यार करता था मगर इसलिये कि मैं कंपनी के एम-डी का दामाद बन जाता, और क्या पता भविष्य में कंपनी का एम-डी।
एक दिन रजनी अपनी आगे की पढ़ाई पूरी करने के लिये काम छोड़ कर चली गयी। मैं भी बोर हो रहा था तो सोचा अपने घर हो आऊँ। काफी दिन हो गये थे सब से मिले।
ऑफिस में छुट्टी की एपलीकेशन देकर मैं अपने घर पहुँचा। सब से मिलकर बहुत मज़ा आया, खास तौर पर अपनी दोनों बहनें, अंजू और मंजू से।
एक दिन पिताजी ने कहा, “सुनील मैंने तुम्हारी शादी फिक्स कर दी है, आज से ठीक पाँच दिन बाद तुम्हारी शादी मेरे दोस्त की बेटी प्रीती से हो जायेगी।”
मैं चिल्ला कर कहना चाहता था कि “नहीं पिताजी! मैं प्रीती से शादी नहीं करना चाहता, मुझे रजनी से शादी करनी है और कंपनी का एम-डी बनना है।” पर हिम्मत नहीं हुई, सिर्फ इतना कह पाया, “आप जैसा बोलें पिताजी।”
आज मेरी सुहागरात थी। मैं अपने दोस्तों के बीच बैठा था और सब मुझे समझा रहे थे कि सुहागरात को क्या करना चाहिये, सैक्स कैसे किया जाता है। उन्हें क्या मालूम कि मैं इस खेल में बहुत पुराना हो चुका हूँ। रात काफी हो चुकी थी। अपने दोस्तों से विदा ले मैं अपने कमरे की और बढ़ गया।
कमरे में घुसते ही देखा कि कमरा काफी सज़ा हुआ था। चारों तरफ फूल ही फूल थे। बेड भी सुहाग सेज़ की तरह सज़ा हुआ था। बेड पे मेरी दुल्हन यानी प्रीती, लाल रंग का जोड़ा पहने, घूँघट निकाले हुए बैठी थी। कमरे में पर्फयूम की सुगंध फैली हुई थी। मेरे कदमों की आवाज़ सुन कर उसने अपना सिर उठाया।
मैंने उसके पास बेड पर बैठते हुए कहा, “प्रीती ये तुमने घूँघट क्यों निकाल रखा है? मम्मी कहती थी कि तुम बहुत सुंदर हो, अपना घूँघट हटा कर मुझे भी तुम्हारे रूप के दर्शन करने दो।” उसने ना में गर्दन हिलाते हुए जवाब दिया।
अगर तुम नहीं हटाओगी तो ये कम मुझे अपने हाथों से करना पड़ेगा। ये कहकर मैंने अपने हाथों से उसका चेहरा ऊपर उठाया और उसका घूँघट हटा दिया। घूँघट हटाते ही ऐसे लगा कि कमरे में चाँद निकल आया हो। प्रीती सिर्फ काफी नहीं बल्कि बहुत सुंदर थी। गोरा रंग, लंबे बाल। उसकी काली काली आँखें इतनी तीखी और प्यारी थी कि मैं उसकी सुंदरता में खो गया। रजनी, प्रीती के आगे कुछ भी नहीं थी। उसने अपनी आँखें बंद कर रखी थीं, चेहरे पे शर्म थी। मैंने उसका चेहरा अपने हाथों में लेते हुए कहा, “प्रीती! तुम दुनिया की सबसे सुंदर लड़की हो, अपनी आँखें खोलो और मुझे इसकी गहराइयों में डूब जाने दो।”
उसने अपनी मादकता से भरी आँखें धीरे से खोली, और मैंने अपने तपते हुए होंठ उसके लाली से भरे होंठों पर रख दिये। उसके शरीर में कोई हरकत नहीं थी इसके सिवा कि उसकी साँसें तेज हो रही थी। प्रीती ने काफी ज्वेलरी पहन रखी थी। मैं एक-एक कर के उसके जेवर उतारने लगा।
“आओ प्रीती! मेरे पास लेट जाओ”, कहकर मैंने उसे अपने बगल में लिटा दिया। उसे अपनी बाँहों में भरते हुए हम लोग ऐसे ही कितनी देर तक लेटे रहे। थोड़ी देर बाद मैं अपना एक हाथ उसकी छाती पर रख कर उसके मम्मे दबाने लगा।
“ये क्या कर रहे हो?” उसने धीरे से कहा।
“कुछ नहीं! तुम्हारे बदन को परख रहा हूँ”, मैंने जवाब दिया।
जब मैंने उसके ब्लाऊज़ के बटन खोलने शुरू किये तो उसने मेरा हाथ पकड़ते हुए कहा, “प्लीज़ मत करो ना।“
“मुझे करने दो ना, आज हमारी सुहागरात है और सुहागरात का मतलब होता है दो शरीर और अत्मा का मिलन, और मैं नहीं चाहता कि हमारे मिलन के बीच ये कपड़े आयें”, और मैं उसके कपड़े उतारने लगा।
“अच्छा लाइट बंद कर दो… नहीं तो मैं शरम से मर जाऊँगी।” उसने अपना चेहरा दोनों हाथों में छुपाते हुए कहा।
“अगर लाइट बंद कर दूँगा तो तुम्हारे गोरे और प्यारे बदन को कैसे देख सकुँगा”, मैंने मुस्कुराते हुए कहा।
अब मैं धीरे-धीरे उसके कपड़े उतारने लगा। उसका नंगा बदन देख कर मुझसे रहा नहीं गया। मैंने उसे बाँहों में भरते हुए कहा, “प्रीती! तुम्हारा बदन तो मेरी कल्पना से भी ज्यादा सुंदर है।” ये सुनकर उसने अपने आँखें और कस कर बंद कर ली।
मैं उसकी दोनों छातियों को सहला रहा था और उसके निप्पल चूस रहा था। जब कभी मैं उसके निप्पल को दाँतों में भींच लेता तो उसके मुँह से सिसकरी छूट पड़ती थी।
मैं उसकी चूत का छेद देखना चाहता था कि क्या वो रजनी के छेद जैसा ही था या उससे छोटा था। मैं धीरे-धीरे नीचे की ओर बढ़ने लगा और उसकी नाभी को चूमते हुए उसकी चूत के पास आ गया। उसकी चूत बारिकी से कटे हुए बालों से ढकी पड़ी थी।
मैंने उसकी चूत को धीरे से फैला कर अपनी जीब उस पर रख दी और चाटने लगा।
“प्लीज़! ये मत करो”, उसने सिसकते हुए कहा।
उसकी चूत को चूसते और चाटते हुए मैंने उसकी जाँघों को थोड़ा ऊपर उठाया और उसकी चूत के छेद को देखा। प्रीती की चूत का छेद रजनी की चूत के छेद जैसा ही था।
“वहाँ मत देखो मुझे बहुत शरम आ रही है”, उसने कहा।
“इसमे शरमाने की क्या बात है? हमारी शादी हो चुकी है, और हम दोनों को एक दूसरे के शरीर को देखने और खेलने का हक है। तुम भी मेरा लंड देख सकती हो।” उसने शर्मते हुए मेरे लंड की तरफ देखा जो तंबू की तरह मेरे पायजामे में तन कर खड़ा था।
मैं खड़ा हुआ और अपने कपड़े उतार कर उस पर लेट गया। प्रीती ने अपनी दोनों टाँगें आपस में जोड़ रखी थीं।
“डार्लिंग! अपनी टाँगें फैलाओ और मेरे लंड के लिये जगह बनाओ!”
उसने कुछ जवाब नहीं दिया और अपनी टाँगें और जकड़ ली। जब मेरे दोबारा कहने पर भी वो नहीं मानी तो मैं अपने लंड को उसकी चूत पर रगड़ने लगा।
अपनी चूत पर मेरे लंड की गर्मी से उसका बदन हिलने लगा और मैंने अपने घुटनों से उसकी जाँघें फैला दी।
उसकी कुँवारी चूत को चोदने के खयाल से ही मैं उत्तेजना में भरा हुआ था, मगर मैं रजनी की चूत की तरह एक ही झटके में अपना लंड उसकी चूत में नहीं डालना चाहता था। बल्कि उसकी चूत के मुँह पर अपना लंड मैंने धीरे से डाला जिससे पूरा मज़ा आ सके।
प्रीती का बदन घबड़ाहट में कंपकंपा गया जब उसे लगा कि मेरा लंड उसकी चूत में घुसने वाला है। उसे अपनी बाँहों में भरते हुए एक धीरे से धक्का लगाया जिससे मेरे लंड का सुपाड़ा उसकी चूत में जा घुसा। उसकी चूत की कुँवारी झिल्ली मेरे लंड का रास्ता रोके हुए थी।
“डार्लिंग थोड़ा दर्द होगा, सहन कर लेना”, कहकर मैंने अपने लंड को थोड़ा सा दबाया। उसने अपनी आँखें बंद कर रखी थी और अपने होंठ दाँतों में भींच रखे थे जैसे दर्द सहने की कोशिश कर रही हो।
मेरा लंड उसकी झिल्ली पर ठोकर मार रहा था, उसके मुँह से “ऊऊऊऊऊ आआआ आआआआआ” की आवाजें निकल रही थी। अब मैंने थोड़ा जोर से अंदर घुसेड़ा और मेरा लंड उसकी झिल्ली को फाड़ता हुआ उसकी चूत में जड़ तक समा गया, उसके मुँह से जोर की चींख निकली, “ऊऊऊ ईईईई माँ!!! मैं मर गयी!”
मैं रुक गया और देखा कि दर्द के मारे उसकी आँखों से आँसू निकल पड़े थे। मैंने उसके आँसू पौंछते हुए कहा, “डार्लिंग जो दर्द होना था वो हो गया अब तुम्हें कभी दर्द नहीं होगा”, और मैं अपने लंड को धीरे- धीरे अंदर बाहर करने लगा।
उसकी चूत काफी कसी हुई थी, और जब मेरा लंड उसकी चूत की दीवारों से रगड़ते हुए अंदर तक जाता तो उसके मुँह से हल्की हल्की दर्द भरी चींख निकल जाती। थोड़ी देर में उसकी चूत भी गीली होने लगी जिससे मुझे चोदने में आसानी हो रही थी। अब मैं थोड़ा तेजी से उसे चोद रहा था।
थोड़ी देर में उसकी चींखें सिसकरियों में बदल गयी। अब उसे भी मज़ा आ रहा था। उसकी भी जाँघें मेरी जाँघों के साथ थाप से थाप मिला रही थी।
एक तो मैंने तीन हफ्तों से किसी को चोदा नहीं था, ऊपर से उसकी कसी चूत मेरे लंड के पानी में उबाल ला रही थी। मुझे अपने आपको रोकना मुश्किल हो रहा था।
इस उत्तेजना में मैंने उसे जोर से अपनी बाँहों में भींच लिया और उसके होंठों को चूसने लगा। वो भी जवाब देते हुए मेरे होंठों को चूसने लगी और अपनी जीभ मेरे मुँह में डाल दी। मैंने अपनी चोदने की रफ़्तार बढ़ा दी।
“ओहहह डार्लिंग!!! मेरा छूट रहा है, अब मैं नहीं रोक सकता”, ये कहकर मैंने अपना सारा वीर्य उसकी फटी हुई चूत में उगल दिया। जैसे ही मेरा पानी उसकी चूत में गिरा, वो भी जोर से “आआहहह हहह” करती हुई बिस्तर पर निढाल पड़ गयी। उसकी चूत भी पानी छोड़ चुकी थी।
हम दोनों का शरीर पसीने से लथपथ था। दोनों एक दूसरे को बाँहों में भरे एक दूसरे की आँखों में इस मिलन का आनंद ले रहे थे। इतने में ही मेरा मुरझाया लंड उसकी चूत से बाहर निकल पड़ा।
उस रात मैंने उसे चार बार चोदा। हर चुदाई के बाद उसे भी मज़ा आने लगा। अब वो भी मेरे धक्कों का जवाब अपनी टाँगें उछाल कर देने लगी। उन्माद में मेरे होंठों को दाँतों से भींच लेती। मेरे दोनों कुल्हों पर हाथ रख कर मेरे लंड को अपनी चूत के और अंदर लेने की कोशिश करती। उसके मुँह से आनंद की सिसकरियाँ निकलती थी। काफी थक कर हम दोनों सो गये।
अगले दिन मैं सो कर उठा तो देखा प्रीती वहाँ पर नहीं थी और ना ही उसके कपड़े। अब भी मुझे लग रहा था कि रात मैंने कोई सपना देखा था, जिसमें मैंने प्रीती की चुदाई की थी, परंतु बिस्तर पर खून और वीर्य के धब्बे इस बात को कह रहे थे कि वो सपना नहीं था।
“गुड मोर्निंग!” कहते हुए प्रीती हाथ में चाय का कप लिये कमरे में दाखिल हुई।
“इतनी सुबह कहाँ गयी थी?” मैंने पूछा।
“सुबह? सुनील दस बज रहे हैं और मैं तुम्हारे लिये चाय बनाने गयी थी”, उसने चाय के कप की तरफ इशारा करते हुए कहा।
“इतना गुलाब की तरह क्यों खिली हुई हो, सब ठीक है ना, या तुम्हें किसी ने कुछ कहा जिससे तुम्हें शरम आ रही है?” मैंने पूछा।
“हाँ! सब ठीक है, किसी ने मुझे कुछ नहीं कहा, बस तुम्हारी दोनों बहनें मुझे तंग कर रही थी जब मैं चाय बना रही थी।”
“ओह अंजू और मंजू!! दोनों ही बहुत शैतान हैं”, मैंने कहा।
“हाँ कुछ ज्यादा ही शैतान हैं”, उसने हँसते हुए कहा।
प्रीती को चोदने की इच्छा फिर से हो रही थी, मैंने उसका हाथ पकड़ कर कहा, “आओ प्रीती यहाँ बैठो।”
वो मेरा मक्सद समझ कर बोली, “अभी नहीं!! पहले तुम चाय पियो, ठंडी हो जायेगी। फिर नहा कर तैयार हो जाओ, सब नाश्ते पर हमारा इंतज़ार कर रहे हैं।”
“तुम्हें सिर्फ़ चाय की पड़ी है कि ठंडी हो जायेगी”, मैंने बिस्तर पर से खड़े होकर अपने तने लंड की तरफ इशारा किया, “और इसका क्या? तुम चाहती हो कि ये ठंडा हो जाये।”
मेरे तने लंड को देख कर वो बोली, “ओह! तो ये वाला लंबा डंडा था जो मेरी चूत में घुसा था?”
“हाँ मेरी जान पूरा का पूरा।” उसके चेहरे पर आश्चर्य देख कर मैंने उसे बिस्तर पर लिटाया और लंड उसकी चूत में घुसा दिया। “आआआ आआहहह हह ऊऊहहह” वो छटपटायी।
“देखा कैसे पूरा का पूरा तुम्हारी चूत में आसानी से चला गया”, मैंने धक्के लगाते हुए उसे पूछा, “प्रीती जब मैं तुम्हें चोदता हूँ तो तुम्हें मज़ा आता है ना?” वो कुछ बोली नहीं और चुप रही।
“शरमाओ मत, चलो बताओ मुझे?”
उसने अपनी गर्दन धीरे से हिलाते हुए कहा, “हाँ! आता है।”
मैं उसे जोर-जोर से चोद रहा था। वो भी अपने कुल्हे उठ कर मेरी थाप से थाप मिला रही थी। उसे भी खूब मज़ा आ रहा था। उसके मुँह से प्यार भरी सिसकरियाँ निकल रही थी। जब भी मेरा लंड उसकी चूत की जड़ से टकराता तो “ओओओहहह आआहहह” भरी सिसकरी निकल जाती। थोड़ी देर में उसका शरीर अकड़ा और एक “आआहहह” के साथ निढाल पड़ गया। मैंने भी दो चार धक्के मारते हुए अपना पानी उसकी चूत में छोड़ दिया।
“ओह रानी! बहुत अच्छा था”, ये कहकर मैं उस पर से उठ गया।
“हाँ सुनील! बहुत अच्छा लगा”, कहकर वो भी बिस्तर पर से उठ गयी।
हम रोज़ हर रात को कई-कई बार चुदाई करते। मैं उसे अलग-अलग आसनों से चोदता था। वो भी मज़े लेकर चुदवाती थी। एक रात मैंने उसकी चूत चाटते हुए कहा, “प्रीती! तुम अपनी चूत के बाल साफ़ क्यों नहीं कर लेती?” उसने कुछ नहीं कहा।
अगली रात मैंने देखा कि उसकी चूत एक दम साफ़ थी। एक भी बाल का नामो निशान नहीं था। उस रात उसकी चिकनी और सपाट चूत को चाटने और चोदने में काफी मज़ा आया।
एक बात थी जो मुझे सता रही थी। जब भी मैं अपनी तीनों असिसटेंट को चोदता था तो वो इतनी जोर से चिल्लाती थी, और आहें भरती थी कि शायद पड़ोसियों को भी सुनाई पड़ जाती होंगी, पर प्रीती के मुँह से सिर्फ, ऊहह आआहह के सिवा कुछ नहीं निकलता था। मैं सोच में रहता था पर मैंने प्रीती से कुछ कहा नहीं। साथ ही तीनों असिसटेंट चुदाई के समय भी अपने हाई हील के सैंडल पहने रखती थीं जिससे मुझे और अधिक जोश और लुत्फ आता था। हालांकि मैंने नोटिस किया था कि बाहर घुमने जाते वक्त प्रीती भी हाई हील के सैंडल पहनना पसंद करती थी पर मैं चाहता था कि बिस्तर पर चुदाई के समय भी वो अपने सैंडल पहने रहे।
मेरी छुट्टियाँ खत्म होने को आयी थी। पिताजी ने हमारे लिये फर्स्ट क्लास एयर कंडीशन का रिज़रवेशन कराया था। दो दिन के लंबे सफ़र में मैंने उसे कई बार चोदा, और उसकी चूत चाटी थी। मैंने उसे लंड को चूसना भी सिखा दिया। शुरू में तो उसे वीर्य का स्वाद अच्छा नहीं लगा था पर अब वो एक बूँद भी मेरे लंड में छोड़ती नहीं थी। जब तक हम लोग मुंबई पहुँचे, मेरे लंड का पानी एक दम खत्म हो चुका था और उसकी चूत पानी से भरी हुई थी। Hindi Sex Stories
पता नहीं लोगों को चार पांच बार Oral Sex नई नवेली चुदाई करने को मिल जाती है, पर मैंने तो एक बार में भी शायद देर कर दी।
मेरी कहानी ऐसी है कि मैं शायद कभी लोगों को समझ नहीं पाया खासकर लेडीज को, पता ही नहीं लगता कि उन्हें कब चुदना है कब नहीं? मेरी कहानी कुछ ऐसी है।
मैं बहुत ही सेक्सी किस्म का इन्सान हूँ, अक्सर सेक्स के बारे में सोचता रहता हूँ।
एक दिन मेरे भाई (सगा नहीं) की बीवी से मुलाकात हुई तो उन्होंने कहा कि आप बड़े मज़ाकिये हो। फिर उसने मेरा नम्बर ले लिया। उसके एक सप्ताह बाद उसने हमारे फर्म से काम करना शुरू कर दिया। मेरा फर्म कंप्यूटर डील करता है इसलिए जब भाई घर पर नहीं होते थे वो मुझे घर पे फ़ोन करके बुलाती और कहती कि उनके कंप्यूटर में कुछ प्रॉब्लम है इसलिए सर्विस के लिए मुझे जाना ही पड़ता था।
वो मेरे करीब बैठ जाती थी लेकिन कभी भी ग़लत हरकत नहीं की।
उसके बाद जब उसे लगा कि मैं कुछ समझ नहीं पा रहा हूँ, तो उसने खुलकर आई लव यू ! भी बोल दिया लेकिन मैं समझ नहीं पाया फिर उसने मुझे कई बार बाहर घूमने के लिए बुलाया और मैं भी चला गया। फिर वो मेरे बगल में सटकर बैठ जाती और बातें करती। कहती कि उसका मन मेरे बिना नहीं लगता। मैंने भी कह दिया कि वो मुझे अच्छी लगती है।
फिर एक दिन जब हम अकेले बैठे थे तो मैंने उसकी ब्रेस्ट को छू लिया क्योंकि हम पार्क में थे इसलिए मैं उसके कपड़े नहीं उतार सका, फिर 2 मिनट बाद वो चलने को कहने लगी और हम चल दिए।
अगले दिन उसने फिर से मिलने के लिए बुलाया और हम पार्क पहुँच गए। थोड़ी देर इधर -उधर की बात के बाद मैंने उसे छूने की इच्छा जाहिर की और वो बोली इधर बहुत भीड़ है। हम एक कोने में चले गए, वहां उसने धीरे से कहा अब छू सकते हो!
मैंने कहा- क्या?
तो बोली- कुछ नहीं !
फिर मैंने उसे पकड़ लिया और उसके होंठ चूमने लगा। वो भी मजे ले रही थी तभी उधर से कोई आदमी के आने की आहट हुई और हम दूर दूर हो गए। वो डर गई और घर चलने को कहा। हम घर आ गए वहां कोई नहीं था पर जब मैंने उसे छूना चाहा तो उसने मुझे मना कर दिया और डांटने लगी, कहने लगी- आप बड़े बदतमीज़ हैं। और मैं घर चला गया।
फिर 8-10 दिन बाद उसने फिर से मिलने के लिए बुलाया। क्योंकि उसके घर में नॉन-वेज़ नही बनता था इसलिए उसने मुझे लंच के लिए मुझे एक होटल में बुलाया और मैं गया। फिर उसने कहा- चलो एक कमरा लेते हैं और कुछ देर बैठते है।
पर मैंने मना कर दिया क्योंकि मेरे पास 1000 रुपये नहीं थे, कमरे का किराया 800 रुपये था। इसलिए मैंने कहा कि मेरे पास समय नहीं है और जल्दी ऑफिस जाना है। फिर वो मुझे एक कपड़े की दुकान में ले गई, मेरे लिए शर्ट खरीदी, मुझे गिफ्ट किया और मुझे ट्राई रूम के अन्दर बुलाने लगी। पर दुकान में भीड़ होने के कारण मैंने मना कर दिया। फिर उसको घर छोड़ आया।
फिर उसके घर पर बहुत बार मिले लेकिन उसने मुझे छूने भी नहीं देती दिया। एक दिन वो कहीं बाहर जा रही थी तो मुझे स्टेशन पर छोड़ने के लिए बुलाया और जब गाड़ी आई तो बिछड़ते हुए उसकी आंखों में आंसू आ गए। मैं सोच में पड़ गया कि वो मुझसे कितना प्यार करती है !
पर उसके बाद वो आई और मुझसे दूर रहने लगी। एक टूर पर पूरे परिवार के साथ गई और मुझे घर पर रहने को कहा। वो चली गई मुझे लगा कि वो मुझे फ़ोन करेगी पर उसने नहीं किया। फिर वो वापिस आ गई और मुझसे दूर रहने लगी। मेरे समझ में नहीं आ रहा था कुछ भी।
फिर एक दिन पता लगा कि वो मेरे ऑफिस के एक स्मार्ट लड़के जो कि मुझसे लंबा और स्वस्थ था उससे बात करने लगी थी। इसी बीच मेरा तबादला 7 किलोमीटर दूर वाली दुकान में हो गया था और वो दोनों खूब मिलने लगे। मुझे बहुत बुरा लगा क्योंकि मैं शायद उससे प्यार करने लगा था और उसके साथ सेक्स भी करना चाहता था, पर शायद देर हो चुकी थी।
उसने मुझसे मिलने से मना कर दिया जिसकी वजह से हम दोनों में खूब झगड़े हुए और वो मुझसे और दूर हो गई। अब न मैं उससे फ़ोन करता न वो मुझे। इसी बीच मेरी जिंदगी में एक लड़की आ गई जिस कारण मैं उससे आसानी से दूर हो सका।
आज फिर से उसने मुझे फ़ोन किया और मैं फिर से उलझन में हूँ। Oral Sex
शाम को मैं और मेरी बहन महजबीं और अम्मी काम से घर जाने लगे.
रास्ते में हाफिज मामा की दुकान पर सामान लेने के लिए मैं और अम्मी रुक गए.
महजबीं घर चली गयी.
हाफिज मामा- आओ आपा बैठो!
अम्मी- आज तो थक गई भाई जान काम पे!
हाफिज मामा इशारों में बात करते हुए- क्यों आज डबल मजदूरी कर ली क्या?
मैं छोटा था तो कुछ समझ नहीं पा रहा था.
अम्मी- हां भाई जान, आज दो दो मिल के मार रहे थे.
हाफिज मामा- फिर तो आज मुझे नहीं मिलेगी क्या?
अम्मी- नहीं भाई जान! आज के लिए तो माफ कर दो, सूज के पाव रोटी हो गयी है!
हाफिज मामा- वो सब मुझे नहीं पता, मुझे तो आज ही चाहिए!
अम्मी- अच्छा बाबा आप जीते में हारी!
फिर हाफिज मामा ने अम्मी को चुम्मा और सामान दे दिया.
मुझे भी आइसक्रीम दे दी.
हम घर आ गए.
घर पर आज अमीरा ने खाना पहले से तैयार रखा था.
अम्मी ने मुझे हाफिज मामा को बुलाने को कहा.
मैं- अम्मी, मैं अकेला नहीं जाऊंगा, अमीरा आपा को भेजो मेरे साथ!
अम्मी- ठीक है, जाओ जल्दी आ जाना!
हाफिज मामा दुकान बंद कर रहे थे.
अमीरा- हाफिज मामा, अम्मी ने खाने के लिए बुलाया है.
हाफिज मामा- तेरी अम्मी तो आज लेने नहीं देगी तो आज तुझे देनी पड़ेगी फिर से!
मैं बीच में बोला- अमीरा आपा को क्या देनी पड़ेगी? और अम्मी क्या नहीं लेने दे रही?
हाफिज मामा- बेटा, रजाई की बात कर रहा हूँ.
मैं- तो क्या हुआ, आज आप मेरी ले लेना!
इस पर अमीरा आपा और हाफिज मामा जोर जोर से हँसने लगे.
हाफिज मामा- नहीं बेटा, तेरी छोटी है, फट जाएगी.
अमीरा- अम्मी की कब से ले रहे हो?
हाफिज मामा- बहुत वक़्त से … यह आलम मेरा बेटा है.
मैं- हां मामू, मैं आपका ही बेटा हूँ.
अमीरा- ठीक है मामा, कोशिश करूँगी! पर अम्मी जाग गई तो क्या होगा?
हाफिज मामा- क्या होगा … दोनों की ले लूंगा साथ में! आज सोने नहीं दूंगा दोनों को!
अमीरा- ठीक है. अब चलें, खाना ठंडा हो रहा है।
हम घर आ गए तो अम्मी ने खाना लगा दिया.
सब लोग खाना खाकर सोने के लिए चले गए.
महजबीं और अमीरा दूसरे कमरे में सोने चली गई।
मैं अम्मी साथ में सोने चला गया।
हाफिज मामा बाहर सोने चले गए।
मैं- अम्मी, मुझे मामा के पास जाना है उनके पास सोना है.
अम्मी- नहीं बेटा, मुझे अकेले में डर लगेगा.
मैं- तो अम्मी मामा को यहां बुला लूं क्या?
अम्मी- ठीक है बाबा, बुला ले!
मैं मामा को बुलाकर लाया.
अम्मी- भाईजान, आप यहीं सो जाओ. आलम ने जिद पकड़ ली है.
हाफिज मामा- ठीक है आपा.
फिर सब सो गए.
रात को 12 बजे अमीरा मामा के पास आई और वहीं उनको पकड़ कर लेट गई।
हाफिज मामा ने उसको कस के पकड़ लिया और अमीरा के होठों को चूसने लगे।
अमीरा भी उनका पूरा साथ दे रही थी।
मैं ये सब रजाई के अंदर से देख रहा था.
अब मामा ने मेरी बहन की कुर्ती को निकाल अलग कर दिया और उसकी चूचियों से खेलने लगे।
अमीरा भी मामा के लंड को पजामे के अंदर से मसलने लगी।
अब मामा सलवार के अंदर से अमीरा की चूत पे हाथ फेरने लगे।
अमीरा सिसकारियां लेने लगी।
अमीरा फुसफुसाती हुई- अब जल्दी से कर ले! वरना तेरी रंडी उठ जाएगी.
मामा- तू भी तो मेरी रंडी है।
अमीरा- हां मेरे आका, मैं भी आपकी रंडी हूँ। अब जल्दी करो मेरी जान, आग लगी हुई है मेरी चूत में!
मामा- साली हरामखोर, दिन में तो अच्छे से बजा के गया हूँ।
अमीरा- क्या करूँ मेरे राजा, तेरा लंड ही इतना मस्त है कि बार बार लेने का मन करता है।
अब मेरी बहन मामा का पजामा खोलकर उसके लंड को चूसने लगी.
मामा मजे से लंड चुसवाने लगे- आह मेरी रांड, तू तो रंडी की तरह चूस रही है. आह मेरी जान, मजा आ गया।
अब मामा जोर जोर से मेरी बहन का मुंह चोदने लगे.
इतने में अम्मी जाग गई और बहन को मामा के साथ नंगी देखा तो बोली- भाई जान, ये क्या कर रहे हो? ये तो आपकी बेटी जैसी है. आपको शर्म नहीं आती? ये सब कब से चल रहा है?
अम्मी ने अमीरा को एक थप्पड़ मार दिया।
अमीरा रोते हुए अम्मी से- मुझे पता है आप और मामा रोज चुदाई करते हो. मैंने आप दोनों को कई बार चुदाई करते हुए देखा है। आप तो कई लंड खा चुकी हो मुझे सब पता है।
अम्मी रोते हुए- हां मैं तो रंडी हूँ, 100 लंड से ज्यादा खा लिए हैं। पर तू भी कोई पाकसार लड़की नहीं है। मैंने भी तुझे मोहल्ले के कई लड़कों से चुदाई करते हुए देखा है। कल ही तो बबला कारीगर का लंड खा के आई है ना? कम से कम हाफिज को तो छोड़ देती मेरे लिए! तेरे अब्बू के जाने के बाद से यही मेरा खसम है।
अमीरा गुस्से से- तो क्या हुआ? मेरी सील भी मामा ने तोड़ी है। ये मेरे भी खसम हैं।
इस पर अम्मी ने अमीरा को 2 थप्पड़ और लगा दिए।
अमीरा ने भी अम्मी को 1 थप्पड़ लगा दिया।
मामा दोनों को शांत करवाने लगे- आज से तुम दोनों मेरी बीवियां हो, अब मैं तुम दोनों के बिना नहीं रह सकता। अगर मेरी बात दोनों को मंजूर हो तो बोलो. वरना मैं दुकान मकान बेच के कहीं दूर चला जाऊंगा.
इस बात से दोनों घबरा गई और दोनों एक साथ मंजूर बोल पड़ी।
अम्मी- ठीक है, आज से आप हम दोनों के खसम हो. एक रात इसके साथ, एक रात मेरे साथ गुजार लेना।
अमीरा- अम्मी जब हम दोनों का एक ही खसम है तो बारी बारी से क्यों आज से हम दोनों मिल के अपने खसम को मजा देंगी।
अम्मी बहन को गले लगा के रोने लगी- मुझे माफ़ कर दे बेटी, मैंने तुझे मारा!
अमीरा ने भी रोते हुए कहा- अम्मी, मुझे भी माफ कर दे, मैंने भी आप पे हाथ उठाया.
फिर दोनों गले लगकर एक दूसरे को चूमने लगी।
अब दोनों गर्म होने लगी।
बहन तो पहले से नंगी थी, अब वह अम्मी को नंगी करने लगी।
अम्मी- बेटी, मुझे शर्म आ रही है।
अमीरा- ओहोओ आई बड़ी शर्माने वाली … आज से मैं तेरी बेटी नहीं सौतन हूँ।
अम्मी- रांड पहला हक़ तो मेरा है भाई जान पे!
अमीरा ने अब अम्मी का कुर्ता उतार दिया।
तो अम्मी के बड़े बड़े बूब्स आजाद होकर लहराने लगे।
अमीरा अम्मी के बूब्स चूसने लगी.
अम्मी- आह आह हाय बेटी आराम से … दिन को हरामी बबला ने पकड़ पकड़ के सुजा दिए हैं।
अब मामा नीचे से मेरी बहन की चूत चाटने लगा।
अमीरा- हाय्य आह मेरे राजा … और जोर से चाट … मजा आ रहा है। आज तो चूत में आग लगी हुई है।
उधर अम्मी ने भी नीचे आकर मामा का लंड पकड़ा और मुँह में लेकर लॉलीपॉप की तरह मजे से चूसने लगी।
अब मामा अमीरा की चूत और अम्मी मामा का लंड चूस रही थी।
अमीरा से अब बर्दाश्त नहीं हो रहा था- साले कुत्ते के बच्चे भड़वे, अब तड़फा मत और फाड़ मेरी चूत को साले … अब नहीं सह सकती … जल्दी से लंड को डाल!
मामा ने अब लंड अम्मी के मुंह से निकाला और अमीरा की चूत में एक झटके से डाल दिया।
अमीरा की चीख निकल गयी- हाय मेरी मआआ आआ … मार दिया कुत्ते ने! फाड़ दी मेरी चूत … आआई ईईया मेरी माँ!
अम्मी मामा को डांटती हुई बोली- भाई जान आराम से करो. फाड़ोगे क्या मेरी सौतन की चूत?
मामा- इसकी चूत तो कब की फाड़ दी थी। ये तो रंडी ऐसे ही नखरे कर रही है। अब तो इस घर में एक और चूत सील पैक है।
अम्मी- वो तो अपने भाई से सील खुलवायेगी।
मैं अपना नाम सुनकर खुश हो गया।
अब मामा धीरे धीरे अमीरा को चोद रहे थे।
अम्मी अब अपनी चूत अमीरा के मुँह पे रख के चटवाने लगी।
अमीरा चूत चाटती हुई- अब जोर जोर से चोद हरामी … दिखा अपना दम! आह और जोर से … एआईई ईई आईई ओआह आह आहह हहह … मैं तो गयी मेरी जाआन!
अम्मी सिईईई ईई आहहहह हहा करती हुई अमीरा के मुंह मे झड़ गई.
हाफिज मामा भी अमीरा की चूत में झड़ गए।
अब सब हाँफ रहे थे।
थोड़ी देर में अम्मी तैयार हो गयी चुदाई के लिए- साली कुतिया तेरे को तो औजार का मजा आ गया. अब इसे दुबारा तैयार कर … मुझे भी औजार चाहिए … वरना शांति नहीं मिलेगी!
अमीरा ने मामा का लंड चूस कर फिर से तैयार कर दिया.
मामा अम्मी की चूत पे हाथ फेर रहे थे।
अम्मी की चूत का रस मामा के हाथ पे लगा तो मामा ने चाट लिया।
मामा- रहमत मेरी जान, घोड़ी बन जा. पहले तेरी गांड मरूँगा. वरना जल्दी से झाड़ेगा नहीं.
अम्मी घोड़ी बन गई।
मामा ने अपना लंड अम्मी की गांड में डाला और घपाघप चोदने लगा और अम्मी की गांड पे जोर जोर से थप्पड़ मारने लगा।
अम्मी आहें भरने लगी।
पूरा कमरा धप धप की आवाज से गूंजने लगा।
अम्मी- आह आहह हह हहआ आआई ईईया … अब आगे की गर्मी शांत कर दो भाई जान!
मामा ने अब अपना लंड निकाल के बहन को चूसने को कहा।
अमीरा- साले, इस पे तो अम्मी का गूं लगा हुआ है।
पर मामा जबरदस्ती अपना लंड बहन के मुंह में डाल दिया।
मामा के लंड को बहन मजबूरी में चाट के साफ कर दिया।
अब मामा अम्मी की टांगें अपने कंधे पर रखकर जोर जोर से चोदने लगे।
अम्मी ज्यादा टिक नहीं पाई और झड़ गई.
मामा ने अम्मी का रस पी लिया और फिर से चोदने के लिए चूत में लंड डालने लगे।
पर अब अम्मी ने मना कर दिया- अब मेरे राजा, मुझे माफ़ करो. मुझे कल काम पे जाना है।
मामा- मेरी जान, मेरा पानी तो निकाल दे।
अम्मी- लाओ हाथ से मुठ मार देती हूं।
मामा- दो दो रंडियाँ हों … फिर भी खसम को मुठ मारनी पड़े … यह तो शर्म की बात है।
अमीरा- अम्मी तुम सो जाओ, मामा के लंड को मैं सुला दूंगी।
अम्मी मामा के लंड को और अमीरा को चूम के नंगी ही मेरे पास सो गई।
उधार अमीरा मामा के लंड पे बैठकर मशीन की तरह ऊपर नीचे उछलने लगी।
मामा माँ बेटी सेक्स का मजा ले रहा था.
इधर मैं भी अम्मी को नंगी देख कर अपना छोटा लंड निकालकर अम्मी की गांड में डालने की कोशिश करने लगा.
पर अम्मी तो गहरी नींद में सो गयी थी।
मेरे लंड से पिचकारी निकल जाती है, वो अम्मी की गांड पे गिर गयी।
उधर मामा भी घपाघप अमीरा को पेल रहे थे.
कुछ देर में अमीरा अकड़ने लगी- आहहह आहहह … जोर से … और जोर से चोद मामा … मेरा होने वाला है।
मामा भी स्पीड बढ़ा दी.
अमीरा- आआई ईईया एआई ईईई आहहह में ईईई!
मामा- आह आह … मैं भी आया आय्य्यया आह!
तभी मामा का लावा अमीरा की चूत में निकल गया।
मेरी बहन भी मामा के साथ झड़ गई।
फिर बहन कपड़े पहन के महजबीं के साथ सो गयी।
मामा भी बाहर सो गए।
मैं भी अपनी पेन्ट में लंड डाल कर सो गया.
कमलिनी का Antarvasna महीना हुए चार दिन हो चुके थे और मैं उसको चोदने की योजना बना रहा था। शाम के समय मैं अपने कमरे में चाय पी रहा था तो मैंने देखा कि कमलिनी अपने छज्जे पर खड़ी होकर सड़क का नज़ारा देख रही है, मुझसे नज़र मिली तो हलके से मुस्कुरा दी। मुझसे चुदवाने के बाद आज पहली बार सामना हुआ था, मैंने अपनी जेब से मोबाइल निकाला और कमलिनी का नम्बर डायल कर दिया। घंटी बजने पर उसने अपना मोबाइल देखा, फ़िर मुझे देखा तो मुस्कुरा कर फ़ोन काट दिया और मेरे पास आकर खड़ी हो गई। मैंने हाल चाल पूछा तो बोली- ठीक है !
मैंने पूछा- आज रात को आओगी?
तो शरमाकर बोली- नहीं ! मैंने कहा- मैं तुम्हारा इंतज़ार करूंगा।
रात को लगभग १२ बजे मेरे मोबाइल पर मिस्ड-कॉल आई, देखा तो कमलिनी की थी। मैंने कॉलबैक किया तो बोली- क्या कर रहे हैं?
मैंने कहा- तुम्हारा इंतज़ार !
तो बोली- अभी आ रही हूँ ! ५ मिनट बाद कमलिनी मेरे कमरे में आई और आते ही मुझसे लिपट गई। मैंने उसके बदन पर हाथ फेरा तो पाया कि उसने सिर्फ़ गाउन पहना हुआ था। गाउन के अन्दर ब्रा और पैंटी नहीं पहनी थी। मैं समझ गया कि छोरी चुदवाने की पूरी तैयारी कर के आई है।
दीवान के पास आकर उसका एक पैर मैंने दीवान पर रख दिया और उसका गाउन कमर तक उठा दिया। अपना लोअर मैंने उतार दिया और लंड उसकी चूत पर रखना चाहा तो मेरी खुशी का ठिकाना नहीं रहा, आज उसकी चूत पर एक भी बाल नहीं था। अपनी झांटें साफ़ करके उसने चूत की सुन्दरता को चार चाँद लगा दिए थे। मैंने चोदने का इरादा फिलहाल छोड़ा और उसकी चूत चाटने लगा। उसने भी पोजीशन बदली और मेरा लंड अपने मुंह में लेकर चूसने लगी। १० मिनट तक मुख-मैथुन का मज़ा लेने के बाद मैंने अपने लंड पर कंडोम चढाया और उसकी चूत में डाल दिया।
जमकर चोदने के बाद जब मैंने उसकी चूत में डिस्चार्ज किया तो मैं ख़ुद को जन्नत में महसूस कर कर रहा था। अब हमारी चुदाई की गाड़ी पटरी पर हौले हौले चल रही थी, दूसरे तीसरे दिन वह मुझसे चुदवा लेती थी, इतना मेरे लिए भी काफ़ी था और उसके लिए भी।
अब हमारी कहानी में एक तीसरा पात्र आ गया। मेरी पत्नी की एक ममेरी बहन श्वेता इसी शहर में रहती थी। एक दिन लगभग ११ बजे मैं ऑफिस में था कि मेरी पत्नी का फ़ोन आया कि वह श्वेता के घर जाना चाहती है।
मैंने कहा- चली जाओ !
तो बोली- मैंने खाना बना दिया है और चाभी रागिनी भाभी को दे दी है, शाम को ४-५ बजे तक आ जाऊंगी।
मैंने कहा- ठीक है।
दोपहर को १ बजे मैं लंच करने घर आया, घंटी बजाई तो रागिनी भाभी बोलीं- चाभी लेकर आ रही हूँ।
उन्होंने मुझे चाभी दी, मैंने ताला खोला और वो भी अन्दर आ गई, उनके घर में भी कोई नहीं था, डॉक्टर साहब क्लीनिक और लड़कियां कॉलेज गई थीं। अन्दर आकर बोलीं- रेखा दाल सब्जी बनाकर गई है और मुझसे कह रही थी कि रोटी मैं सेंक दूँ।
रागिनी का गदराया हुआ बदन और एकांत मेरे लंड को खड़ा कर चुके थे और मैंने उनको चोदने की ठान ली थी।
मैंने कहा- भाभी आप कुछ देर बैठिये, मैं नहा लूँ, फ़िर खाना खाऊँगा।
भाभी वहीं कुर्सी पर बैठ गईं। मैंने उनको गरम करने के लिए जानबूझकर वहीं अपनी शर्ट उतारी और फ़िर बनियान भी उतार दी। भाभी शर्म के मारे इधर उधर ना देखें इसलिए उनसे कुछ ना कुछ बात करता रहा। मैंने कहा- दोपहर में नहा लेने से शरीर में ताजगी आ जाती है और मैंने अपनी पैंट भी उतार दी। अंडरवियर में से मेरा तन्नाया हुआ लंड साफ़ नज़र आ रहा था। मैंने अपना तौलिया कमर पर लपेटा और अंडरवियर उतारते उतारते बोला- भाभी जी अगर आप बुरा ना मानें तो एक बात कहूं?
बोलीं- कहिये !
मैंने कहा- ऐसा लगता है जैसे भगवान् जोड़ियाँ बनाते समय गलती कर गया है, मैं आप जैसी पत्नी डिजर्व करता था और रेखा को डॉक्टर साहब की पत्नी होना चाहिए था। अगर ऐसी जोड़ियाँ होतीं तो मेरी ज़िन्दगी जन्नत से कम न होती।
भाभी उठीं और बोलीं- काश ऐसा होता तो मैं हर पल तुम्हारी बाहों में ही गुजारती।
इतना सुनते ही मैंने उनका हाथ पकड़ कर चूमा और अपनी आंखों से इस तरह लगाया कि मैं धन्य हो गया। मैं एक कदम उनकी ओर बढ़ा और अपनी बाहें फैलाकर उन्हें अपने करीब आने का इशारा किया, वो मेरे सीने लग गईं, मैंने अपना एक हाथ उनकी कमर पर और दूसरा टांगों के पास ले जाकर उनको अपनी गोद में उठा लिया, मेरे कसरती बदन को निहारते हुए बोलीं- उतार दो दीपक ! मैं बहुत भारी हूँ !
मैंने कहा- भाभी मेरे प्यार के सामने आपका भार कुछ भी नहीं !
मैं उनको रेखा के बेडरूम में ले आया और पलंग पर लिटाकर उनसे लिपट गया। वो मेरे से लिपटी हुई छुई मुई हुई जा रहीं थीं। एक एक करके उनके सारे कपड़े मैंने उतार दिए और उनके होठों पर अपने होंठ रखकर एक हाथ से उनके मम्मे और दूसरे से उनकी चूत सहलाने लगा। थोडी देर में जब उनकी चूत गीली हो गई तो मैं उठा और अलमारी से कंडोम निकालकर अपने लंड पर चढ़ाने लगा तो भाभी बोलीं- दीपक जी इसकी कोई जरूरत नहीं है, मैं २० साल पहले नसबंदी करा चुकी हूँ।
मैं वापस पलंग पर आया, उनकी टाँगे फैला कर अपने लंड का सुपाड़ा उनकी चूत के मुंह पर रखा और पूरा लंड उनकी चूत के अन्दर कर दिया।
भाभी बोलीं- दीपक जी, एक बात पूछूं?
मैंने कहा- पूछिए !
तो बोलीं- तीन साल बाद आपका लंड किसी की चूत में जा रहा है तो कैसा लग रहा है?
मैंने कहा- आपको यह कैसे पता है?
तो बोलीं- रेखा ने मुझे बताया था कि मेरी इच्छा नहीं होती।
इस बातचीत के साथ साथ मेरा लंड अपना काम कर रहा था। उस दिन १ बजे से ४ बजे तक भाभी को दो बार चोदा।
मैंने पूछा- भाभी, सच बताना ! तुम्हारा देवर चोदने में कैसा है?
तो बोलीं- टचवुड। बहुत अच्छा !
मैंने कहा- अच्छा भाभी, एक बात और बताओ कभी गांड मराई है?
बोली- नहीं कभी नहीं ! शुरू शुरू में एक दो बार डॉक्टर साहब ने मारनी चाही थी लेकिन उनका लंड गांड में घुसा ही नहीं।
मैंने कहा- भाभी मैं तुम्हारी गांड मारूंगा, मराओगी ?
बोलीं- हाँ मेरे राजा जरूर मराउंगी।
फ़िर भाभी ने रोटियां सेंकी, हम दोनों ने खाना खाया और भाभी अपने घर चली गईं।
बाकी कहानी अगली बार लिखूंगा, इंतज़ार करिए… Antarvasna
पहले मैं अपना परिचय देता हूं, मैं एक 23 साल का लड़का हूं। मैं आपको मेरी एक सच्ची Sex stories कहानी लिखता हूं जिसमें मेरे पड़ोस की एक लड़की भी है।
मेरा नाम सलीम है मैं एक मुस्लिम परिवार से हूं। मेरे घर के पास एक परिवार जो कि किराये पर रहता है उस परिवार में तीन लड़कियाँ हैं जिनमें से मुझे एक लड़की बहुत पसंद है।
घटना आज से तीन साल पहले की है जब मेरे घर वाले सभी माऊँट आबु रहते थे। मैं एक कम्पनी में जोब करता हूं इसलिये मैं माऊँट आबु नहीं गया। मैं घर में अकेला रहता था।
उन दिनों मैं उस लड़की से अक्सर बात किया करता था उसकी बातों से मुझे लगा कि वो भी मुझे चाहती है मैंने एक दिन उससे अकेले में मिलना चाहा लेकिन हमारे घर आस पास होने के वजह से हम नहीं मिल पाये मैंने उससे पूछा कि अगर तुम मुझसे रात को मेरे घर पर मिलने आ जाओ तो मैं तुम्हारे लिये घर का दरवाजा खुला छोड़ दूंगा ताकि तुम्हें दरवाजा बजाना नहीं पड़ेगा जिससे किसी को पता भी नहीं लगेगा तो वो मान गयी।
अब मैं रात को उससे मिलने के लिये बेकरार हो रहा था। फिर मैंने ओफ़िस से आते समय मेरे दोस्त की मेडिकल से एक कंडोम का पैक ले लिया फिर घर आकर जल्दी से खाना खा कर टीवी देखने लगा और रात का इंतज़ार करने लगा। मैंने पहले ही बताया था कि मैं घर में अकेला रहता हूं इसलिये मेरे पास बहुत सी बीएफ़ सीडी थी जिन्हें मैं अक्सर रात को देखा करता था तो मैंने एक बीएफ़ की सीडी सीडी प्लेयर में डाल दी।
फिर रात के 11:30 बजे वो मेरे घर आयी उसने जैसे ही घर में कदम रखा मैं जल्दी से उसको लेकर दरवाजा बंद करके अन्दर लेकर आ गया और उसने पूछा- बताओ तुम मुझसे अकेले में क्यों मिलना चाह रहे थे?
तो मैंने कहा कि ऊपर तो चलो सब बताता हूं.
फिर हम दोनों टीवी वाले रूम में आ गये। मैंने टीवी और सीडी प्लेयर ओन किया तो बीएफ़ चालू हो गयी वो देख कर बोली- यह तुम क्या दिखा रहे हो मुझे?
मैंने कहा- यही तो मैं तुम्हें दिखाने के लिया बुलाया है।
तो वो शारमाके जाने के लिये मुढ़ी तो मैंने उसको पकड़ के अपने पास बिठा लिया, मैंने कहा कि मैं यही तो तुम्हें दिखाना चाहता था.
फिर उसने शरमाकर अपना चेहरा हाथों से ढक लिया।
मैंने उससे कहा कि मैं तुम्हें बहुत प्यार करता हूं मगर कभी तुमसे पूछने की हिम्मत नहीं हुई। क्या तुम भी मुझसे प्यार करती हो?
तो उसने अपना चेहरा हिला कर हाँ कर दी फिर क्या था मुझे हरी झंडी मिल गयी और मैंने उसके चेहरे से उसके हाथ हटा कर उसके गाल पर किस किया तो उसने अपनी आंखें बंद कर ली. मैं उसके गालों से उसके होंठों पर किस करने लगा और वो भी धीरे धीरे मेरा साथ देने लगी.
मैंने उससे कहा कि देखो तो सही, क्या मस्त सीन चल रहा है मूवी में!
तो वो देखने लगी और मैं उसको किस करते करते उसके बूब्स को दबाने लगा और वो मदहोश होने लगी और मेरी बाहों में लिपट कर बोली कि न जाने कब से मैं भी दिल ही दिल में तुम्हें चाहती थी मगर तुम्हें बोल न सकी.
फिर मैंने उसकी कमीज़ को उतारना चाहा तो वो बोली- नहीं ऐसा मत करो!
मैंने कहा कि मैं तो सिर्फ़ तुम से प्यार कर रहा हूं अगर तुम नहीं चाहती तो ठीक है मैं नहीं करता!
तो उसने कहा- ठीक है जैसा तुम चाहो कर लो!
फिर मैंने उसकी कमीज़ के साथ साथ सारे कपड़े उतार दिये अब वो पूरी की पूरी नंगी हो गयी फिर मैंने भी अपने कपड़े उतार दिये और मैंने उसके बूब्स को मसलना चालू कर दिया. उसे बड़ा अजीब सा नशा छाने लगा और वो मुझ से लिपट मुझे अपनी बाहों में कसने लगी मैंने धीरे से उसकी चूत में अपनी एक उंगली डाल दी तो वो उछल पड़ी फिर मैंने उसे चूत में उंगली अंदर बाहर करने लगा और उसे भी मजा आने लगा.
2 मिनट के बाद मैंने उसको सीधा लिटाया और उस पर चढ़ गया और उसको अपना लंड दिखाने लगा तो उसने मेरा लंड पकड़ कर सहलाना शुरु कर दिया फिर 2 -3 मिनट के बाद मैंने अपने लंड पर कंडोम चढ़ा कर उसकी चूत के छेद पर रख दिया और धीरे से झटका दिया मगर उसकी चूत अभी कुंवारी थी तो मेरा लंड अंदर नहीं घुस सका फिर मैंने जोर से एक झटका मारा तो मेरा लंड करीब आधा उसकी चूत में घुस गया और वो एक दम लगी- निकाल दो निकाल दो मर जाऊँगी तुम्हें मेरी कसम निकाल दो।
मैंने उसकी चूत के तरफ़ देखा तो उसमें से खून निकल रहा था उसे शांत कर के कहा कि जानेमन अभी थोड़ा सा दर्द होगा बस 2 -3 मिनट के लिये फिर तुम्हें भी मजा आने लगेगा.
मैंने झटके देना बंद किया और उसको किस करना शुरु किया फिर थोड़ी देर के बाद मैंने उससे पूछा कि अब दर्द तो नहीं हो रहा?
तो उसने कहा- नहीं अब कम है।
फिर मैंने धीरे धीरे मेरा लंड अंदर बाहर किया और थोड़ा और उसकी चूत में डाल दिया उसे अब दर्द कम हो रहा था तो वो भी मज़े लेने लग गयी और फिर मैंने अपना पूरा लंड उसकी चूत में डाल दिया और अंदर बाहर करने लगा करीब 10 -15 मिनट के बाद वो झड़ गयी और उसके 5 -10 मिनट के बाद मैं भी झड़ गया। और कंडोम उतार के फेंक दिया।
अब हम दोनों नंगी हालत में बेड पेर लेटे थे। 10 मिनट के बाद मेरे लंड ने फिर जोश मारा और मैंने फिर एक बार उसको चोदा।
अब वो बोली कि अब टाइम ज्यादा हो गया है मुझे चलना चाहिये.
मैंने कहा कि डार्लिंग थोड़ी देर और रोक जाओ अभी मेरे पास एक कंडोम और बचा है वर्ना यह बेचारा कहेगा मैंने क्या बिगाड़ा था तुम दोनों का जो मुझे छोड़ दिया।
उसने कहा कि ठीक है मगर जल्दी करो।
फिर मैंने उसको डोगी स्टायल में फिर से चोदना शुरु किया और 15 -20 मिनट के बाद हम अलग हो गये। फिर वो चली गयी और मैंने बेड शीट देखी तो वो पूरी लाल हो चुकी थी उसके खून से मैंने बेड शीट बदली और सो गया।
उसके बाद तो हमारा लगभग यह रोज का प्रोग्राम चलता रहा करीब 10 महीने उसके बाद मेरे घर वाले वापस जयपुर शिफ़्ट हो गये और हमारा प्रोग्राम बंद हो गया। मुझे बाद में पता चला के मेरे बड़े जीजा जी (जो जयपुर में ही रहते हैं) को किसी ने बता दिया कि हम दोनों रात में यह सब करते हैं। तो मेरे जीजा जी ने मेरे घर वालों को फोन करके बता दिया उनको जयपुर वापस आने को बोल दिया और मेरे घर वाले सब वापस जयपुर शिफ़्ट हो गये। Sex stories
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