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दोस्तो, आपने पहली कहानी Hindi Porn Stories तो पढ़ ली और आपके काफी मेल मिले अब मैं आपको आगे की कहानी सुनाता हूँ।
पूनम और मैं अब एक दूसरे के साथ काफी घुल मिल गये थे। और राहुल को भी मेरे और पूनम के ऊपर कोई भी शक नहीं था क्योँकि वह पूनम का दीवाना था। लेकिन राहुल के ओफिस के कारण राहुल को ज्यादा बाहर ही रहना पड़ता था। इस बात का फायदा मुझे और पूनम को मिलता था। एक बार पूनम के भाई की शादी थी और राहुल शहर से बाहर था तो राहुल ने फोन पर कहा कि अमित अपनी भाभी को उनके घर तुम लेकर चले जाना और मैं सीधे ही वहाँ पर आ जाऊँगा। तो मैंने पूछा कि कब जाना है तो राहुल ने कहा कि तुम चार दिन पहले जाओगे। फिर तो मैं भी आ जाऊँगा। यह सुनकर मैंने हाँ कह दी।
दो दिनों के बाद मैं और पूनम दोनों पूनम के मायके के लिए निकले और फिर उनके घर पर सभी ने हमारा स्वागत किया और पूनम ने मुझे अपने कमरे के बराबर वाला ही कमरा दिया। मेरे कमरे में टायलेट अटैच था। और पूनम के कमरे में टायलेट अटैच नहीं था। तो पूनम की भाभी ने कहा कि अमित जी और पूनम तुम दोनों नहाकर आ जाओ। फिर मार्किट चलेंगे। फिर पूनम ने कहा कि मैं नहा लेती हूँ और अमित जी फिर आप नहा लेना। मैंने कहा कि ठीक है आप नहाओ और मैं अपना सामान कमरे में रखता हूँ घर में शादी की वजह से पूनम मेरे कमरे में नहाने चली गयी और मैंने अपना सामान कमरे में रखना शुरू कर दिया।
पूनम नहा कर बाहर निकली तो पूनम ने अपने शरीर पर केवल तौलिया ही लपेट रखा था और उसके बाल गीले थे। उस समय पूनम को देखकर मेरे मन में पूनम की चूत मारने की इच्छा होने लगी।
मैंने पूनम को देखकर कहा- पूनम! मेरी इच्छा हो रही है!
पूनम ने कहा- अमित रात तो होने दो!
मैंने कहा- रात में कैसे करेंगे?
तो पूनम ने कहा- मैं सब देख लूंगी।
पूनम के चूतड़ों से नीचे तक के लम्बे बालों को देखकर मैं और भी उत्तेज़ित होता जा रहा था। इस बीच मैंने पूनम को पकड़कर उसके होंठों को चूम लिया तो पूनम ने कहा कि बस कोई आ जायेगा।
मैंने अपने कमरे का दरवाज़ा बन्द कर दिया। पूनम ने मना किया तो मैंने कहा कि कुछ नहीं करूँगा, बस एक बार तुम्हें नंगी देखना चाहता हूँ। मैंने उसके शरीर से तौलिया हटा दिया। पूनम की चुच्ची एक दम पहा्ड़ की तरह खड़ी थी। फिर मैं पूनम की चुच्ची को चूमने लगा और पूनम के मुँह को भी चूमा। पूनम भी गर्म होने लगी और उसने मेरे मुँह में अपनी जीभ घुमानी चालू कर दी। फिर मैंने पूनम को वहीं बैड पर लिटा दिया और उसके पूरे शरीर को चूमने लगा।
अब पूनम भी सब कुछ भुलती जा रही थी। मैंने उसकी चूत पर अपने लण्ड की गर्मी को महसूस करवाया तो पूनम ने कहा- अमित जल्दी जल्दी कर लो और जो कमी रह जायेगी रात को पूरी कर लेना!
फिर मैं पूनम की चूत में अपने लण्ड को आगे पीछे करने लगा और मेरी रफ़्तार बढ़ती ही जा रही थी। 20-25 झटको में ही मेरा वीर्य पूनम की चूत में चला गया और बाहर भी नहीं आया तो मैंने पूनम से कहा- आज वीर्य बाहर नहीं निकला।
उसने कहा- मेरा मासिक धर्म से दो दिन पहले ही बन्द हुआ है!
मैंने कहा- फिर?
तो पूनम बोली- कोई बात नहीं मैं तुम्हारे ही बच्चे की माँ तो बनूँगी, और क्या होगा।
फिर मैंने पूनम को चूमा और बाहर आ गया। पूनम और मैं तो पहले से ही पति-पत्नी के ही तरह रहते थे। मैंने उसकी मांग भी भरी थी और मंगलसूत्र भी पहनाया था। इस कार्य करने के पश्चात सेक्स करने का मजा ही कुछ और आता है। पूनम और मैं अकेले होने पर चूमा-चाटी और मैं उसकी चुच्ची दबा लिया करता था। अब मैं पूनम को प्यार करने लगा था। और पूनम भी मुझे राहुल से ज्यादा प्यार करती थी। राहुल उसकी मजबूरी बन गयी थी। लेकिन हमें अभी कोई भी परेशानी नहीं थी।
हम अपना काम करके बाहर आए और मार्किट के लिए गए तथा मार्किट का काम करके वापिस घर आ गये। उस रात को मैंने और पूनम की दो बार चूत मारी।
अगले दिन पूनम के घर वालों को मार्किट जाना था तो पूनम के भाभी जिनका नाम श्वेता था, उन्होंने कहा कि अमित जी, पूनम! मार्किट चलना है? तो मैंने कहा कि मेरा मन नहीं है।
श्वेता ने कहा- ठीक है पूनम तुम चलो।
पूनम ने कहा- भाभी! कल ही काफी थक चुकी है आज मेरी तबियत भी ठीक नहीं है तो आप और घर वाले ही चले जाओ।
इसके बाद सभी मार्किट के लिए बाहर निकले। उनके बाहर जाते ही मैंने पूनम को अपनी बाहों में भरकर चूमा, उसकी चुच्ची को दबाने लगा और मैंने उसके कमीज के सारे बटन खोल दिये और वह ऊपर से सिर्फ़ काले रंग की ब्रा में ही थी और मैं उसको किस किये जा रहा था।
पूनम ने कहा- दरवाजा तो बन्द कर लो कोई आ जायेगा!
तो मैंने कहा कि सभी तो मार्किट गये है कोई नहीं आयेगा।
मैंने इतना कहा ही था कि पूनम की भाभी श्वेता हमारे सामने खड़ी थी। श्वेता को देखकर हम दोनों पागल हो गये।
श्वेता थोड़ी देर देखकर बोली- पूनम यह क्या है?
पूनम ने कहा- भाभी प्लीज़! आप यह किसी को भी नहीं बताना नहीं तो कहा बात बिगड़ जायेगी!
श्वेता ने कहा- राहुल तुमारे साथ सेक्स नहीं करते क्या?
पूनम ने कहा कि वह तो ज्यादातर घर के बाहर ही होते हैं और मेरा मन भी करता है और मुझे अमित काफी अच्छा लगता है, मैं अमित को प्यार करती हूँ । अमित मुझे पूरा सेक्स का मजा दिलाता है राहुल के मुकाबले अमित बहुत अच्छा सेक्स करता है।
तो श्वेता ने कहा- अमित! तुम मेरी ननद के साथ कैसे सेक्स करते हो जो पूनम ने राहुल को भी नहीं देखा।
मैंने कहा- भाभी गलती हो गयी अब माफ भी कर दो।
तो श्वेता ने कहा कि आज मुझे भी दिखाओ कि तुम सेक्स कैसे करते हो?
मैंने कहा कि मैं यह नहीं कर पाऊँगा।
पूनम ने कहा- भाभी आप यह क्या कह रही हो?
मैं अमित से प्यार करती हूँ!
श्वेता ने कहा- पूनम तुम तो मजा लेती हो, आज मुझे भी मजा लेने दो, तुम्हारे भाईया भी सेक्स का मजा नहीं दे पाते हैं।
पूनम को कुछ बुरा लगा। लेकिन श्वेता की बात सुनकर मेरा मन श्वेता की चूत मारने का होने लगा। तो मैं पूनम को एक कमरे में ले गया और कहा कि पूनम देख! तुम्हारी भाभी ने हमें देख लिया है और वह किसी को कुछ बता न दे इसलिए हमे श्वेता के साथ भी काम करना होगा और शादी के बाद हमें यहाँ से चले ही जायेंगे। पूनम ने थोड़े गुस्से से ही हाँ की। पूनम मुझे अपने पति के तरह मानती थी इसलिए पूनम मुझे अपनी भाभी के साथ सेक्स करते नहीं देखना चाहती थी। लेकिन पूनम की मजबूरी थी और मेरी इच्छा पूर्ति।
हमने कहा- ठीक है आज रात को।
तो श्वेता ने कहा कि अभी।
और श्वेता बाहर गयी और घर के सदस्यों से बोली कि मुझे घर पर ही कुछ काम है आप लोग चले जाओ।
तो उन्होंने कहा कि हम रात तक ही आयेंगे, खाना बना लेना।
इसके बाद सभी चले गये। मैं और श्वेता उसके बैडरूम में गये और श्वेता ने कहा कि अभी रूको मैं आती हूँ। तब पूनम थोड़ी गुमसुम थी, मैंने पूनम को किस किया और कहा कि दो तीन दिन की बात है फिर हम और तुम ही है।
थोड़ी देर में श्वेता आई और पूनम बाहर चली गई।
मैंने श्वेता से कहा- भाभी जी! तो श्वेता ने कहा कि मुझे श्वेता कहकर बुलाओ।
तो मैंने कहा- ठीक है। फिर श्वेता को मैंने उठाकर बैड पर लिटा दिया और मैं उसके शरीर के ऊपर आ गया। उसने लालं रंग की लिपस्टिक लगाई हुई थी। मैं उसके लाल लाल होंठों पर जोर से किस करने लगा उसकी होंठों की लपस्टिक मेरे होंठों पर भी लग गई। और मैंने उसके मुँह में अपनी जीभ चारों तरफ घुमानी शुरू कर दी। श्वेता का शरीर ऊपर नीचे हो रहा था। मैं उसके बलाऊज के ऊपर से ही उसकी चुच्ची को दबाने लगा और अपने मुंह में लेने लगा, तो श्वेता बोली कि पूनम सच्ची कह रही थी कि तुम सेक्स अच्छा करते हो। तुमने तो बिना चूत मारे ही मुझे गीला कर दिया।
उसके बाद मैंने धीरे-धीरे श्वेता की साड़ी को खोल दिया और श्वेता ने मेरे सारे कपड़े उतार दिये। अब श्वेता बलाऊज और पेटीकोट में ही थी। फिर मैंने उसके बलाऊज भी उतार दिया और ब्रा के ऊपर से ही उसकी चुच्ची को चूमने लगा। उसकी ब्रा में से भी उसकी चुच्ची का ऊपर का हिस्सा बाहर आ रहा था मैंने उसको भी चूमा और उसकी ब्रा को भी खोल दिया तो श्वेता बोली कि अमित अब रहा नहीं जा रहा जल्दी करो।
तो मैंने कहा- श्वेता अभी तो काफी समय है। उसके बाद उसके पेटकोट का नाड़ा भी खोल दिया। फिर मैं उसके शरीर को चूमने लगा मैंने श्वेता से कहा कि तुम मेरे लण्ड को अपने मुँह में लेना चाहोगी?
उसने कहा- क्यों?
मैंने कहा कि सेक्स में अच्छा लगता है और शरीर में गर्मी आती है।
तो उसने कहा ठीक है। मैं उसके मुँह में अपने लण्ड को आगे पीछे करने लगा तो उसे भी आनन्द आया तो श्वेता बोली कि क्या पूनम भी इस तरह सेक्स करती है?
मैंने कहा कि पूनम मेरी पत्नी की तरह है और सभी प्रकार से सेक्स करती है। उसके बाद मैंने श्वेता से कहा कि मैं तुम्हारी गांड मार सकता हूँ?
तो उसने कहा- दर्द होगा।
मैंने पूछा- तुमने पहले गाण्ड मरवायी है क्या?
उसने कहा- नहीं।
तो मैंने कहा कि आज मैं तुम्हें ग़ाण्ड मरवाने का मजा देता हूँ।
फिर मैंने पूनम को अवाज लगाई और कहा- पूनम! जरा तेल लेकर आ जाओ।
पूनम तेल लेकर आयी तो पूनम नाराज नहीं थी। मैंने पूनम से कहा कि तुम भी यहीं पर रहो।
उसने कहा- मैं खाना बना लेती हूँ, इतने तुम भाभी के साथ काम करो। फिर हम दोनों आराम से करेंगे।
मैंने पूनम के होंठों पर किस किया और उसकी चुच्ची को हल्के से दबाया। उसके बाद पूनम किचन में चली गयी।
श्वेता के चूतड़ काफी बड़े और गोरे थे। मैंने उसके चूतड़ों पर हल्के हल्के हाथ घुमाना शुरू कर दिया और श्वेता को आनन्द आने लगा। श्वेता ने मेरे लण्ड पर काफी तेल लगाया, मैंने श्वेता के गाडं के छेद पर तेल लगाया, उसको कुतिया की तरह बैठाया। उसकी गाण्ड के छेद पर अपना लण्ड लगाया और लण्ड उसकी गाण्ड में जगह बनाता हुआ अन्दर जाने लगा लेकिन श्वेता को काफी दर्द हो रहा था।
उसने कहा- काफी दर्द हो रहा है लेकिन तुम करते रहो।
अब मेरा पूरा लण्ड उसकी गाण्ड में था। फिर मैं धीरे-धीरे अपने लण्ड को बाहर निकालता और फिर अन्दर करने लगा। और रफ़्तार बढ़ने लगी। 20-25 झटको के बाद श्वेता बोली कि अमित अब सहन नहीं होता, अब मेरी चूत में डालो।
फिर मैंने उसे सीधे लिटाया और मैंने श्वेता से कोंडम के लिए कहा तो उसने कहा कि मैंने पहले से ही रखा है। उसने मेरे लण्ड को मुँह में लिया और जब लण्ड पूरा टाईट हो गया तो उसने डोट वाला कोडम मेरे लण्ड पर लगा दिया। फिर मैंने उसकी चूत में लण्ड डाल दिया। मेरा लण्ड आसानी से उसकी चूत में चला गया क्योंकि उसकी चूत पहले से ही गीली हो गई थी। मैं उसकी चुदाई करता रहा। और उसके बाद 25 मिनटो तक पूरा कमरा छप छप की आवाज से गूंजने लगा और फिर मैं झड़ गया तब तक श्वेता भी लगभग तीन बार झड़ चुकी थी।
श्वेता ने तुरन्त ही कोंडम को उतार दिया और मेरे लण्ड को अपने मुँह में लेकर साफ किया उसका लण्ड साफ करना था और मेरा लण्ड फिर से चूत मारने के लिए तैयार हो गया।दूसरी औरतों के साथ काम करने में मजा भी कुछ ज्यादा ही आता है ना दोस्तो।
फिर मैंने उसे कहा कि श्वेता तुम कुतिया की तरह बैठ जाओ। तो श्वेता ने कहा कि अभी तो रूक जाओ। मैंने कहा कि नहीं तो वह बैठ गयी। मैंने एक ही झटके में श्वेता की चूत लंड डाल दिया। और 20-25 मिनटों तक चोदता रहा श्वेता को। उसके बाद फिर पूनम आ गई।
दोस्तो मेरी यह घटना कैसी लगी मुझे मेल करके बताओ फिर मैं आपको अगली बार आगे की घटना के बारे में बताऊँगा। Hindi Porn Stories
मेरे दोस्तो अब मैं आपको अपनी स्टोरी बता oral sex रहा हूं। मैं गुजरात(सौराष्ट्र) के एक मशहूर शहर में रहता हूं। मेरा ओफ़िस है और मैं एकदम फ्रेंडली लड़का हूं। बोडी अच्छी है, मेरा लंड ७ का है और थोड़ा मोटा है, वैसे तो मैं कई बार सेक्स का अनुभव कर चुका हूं, पर यहां की भाभी और लड़कियों में जो बात है वो भारत में और कहीं नहीं। बड़े बूब्स, चिकनी गांड, मस्त बोडी, जैसे चोदते हि रहो। मैं डेली ओफ़िस जाने के लिये बस मे आता जाता हूं। सुबह जाता हूं और शाम को वापस, रोज यही चलता है।
मेरे साथ एक लड़की भी रोज़ सफ़र करती है, वो आगे से ही उसी गाड़ी में होती थी शायद अगले शहर से आती होगी, एक बार गाड़ी में भीड़ ज्यादा ही थी, उसके बाजु में एक सीट खाली थी सो मैं उसके पास बैठ गया, वो मुझे देख कर हल्के से मुस्करायी मैने भी मुस्करा कर जवाब दिया, फ़िर थोड़ी देर बैठे रहे, अचानक ही उसने मुझसे पूछा कि तुम पढ़ाई करते हो या कोई जोब, मैने कहा कि मेरा बिजनेस है, और उसने बताया कि वो सरकारी नौकरी करती है, कुछ बातें हुई और फ़िर हम काम पर चले गये, रोज ऐसे ही मुलाकात होती रही, हम अपनी बातें बताते रहे, वो शादी शुदा थी पर तलाक हो चुका था अकेली रहती थी,उसका नाम सोनु था, उसकी आंखो में कुछ अजब सी कशिश थी, गोरा बदन, ३६ बूब्स, काफ़ी सुडौल बदन और एकदम सेक्सी। एक बार उसने कहा कि कल मेरी छुट्टी है हो सके तो मेरे घर चाय-पानी के लिये आओ। मैने कहा ठीक है।
और उससे पता और मोबाइल नम्बर लेकर मैं उसके घर पहुंचा। उसका घर काफ़ी सुंदर था। मैने डोरबेल बजाई और उसने दरवाजा खोला और मुझे वेलकम कहा। अंदर आके मैं ड्राइंग रूम में बैठा। थोड़ी देर में वो चाय ले कर आयी और हमने आपस में बातें करना शुरु किया। अचानक ही उसने कहा कि आई लव यु। मैं तुम्हे प्यार करती हूं और तुम्हे पाना चाहती हूं और मुझसे लिपट गयी, जैसे ही उसके बदन का सपर्श हुआ मेरे शरीर में करेंट दौड़ गया मैं भी उससे लिपट गया और उसे चूमने लगा, वो मुझे अपने बेडरूम में ले गयी
हम दोनो बेड में लेटे हुए एक दूसरे के कपड़ों पर टूट पड़े थोड़ी देर में हम एकदम नंगे थे, क्या बताऊं दोस्तों, उसका बदन था या कयामत, नर्म और बड़े बूब्स, उस पर गुलाबी निप्पल एकदम फ़ूल गये थे, चिकनी जांघें और बीच में गुलाब की तरह लाल चूत, जैसे मुझे न्यौता दे रही थी, उसने मेरे लंड को पकड़ा और कहा मेरे जानु तुम्हारा लंड तो एकदम कड़क है, अब मेरी प्यास बुझेगी, मैने अपना एक हाथ उसकी चूत पर रखा और रब करने लगा, मैने धीरे से उसकी चूत खोली, एकदम फ़ूली हुई और छोटी सी उसकी चूत थी। एकदम सफ़ाचट थी मैने चूत की क्लिट को छुआ तो वो तड़प उठी और आहें भरने लगी मेरा सर पकड़कर उसने चूत पर रख दिया और मैं धीरे धीरे उसकी चूत पर अपनी जीभ फ़ेरने लगा वो बुरी तरह से तड़प रही थी, उसकी चूत में से चिकना पानी निकल रहा था, मैने अपनी एक उंगली को चिकना किया और धीरे से उसकी चूत में डाल दिया और अंदर बाहर करने लगा।
वो मस्त हो रही थी, फ़िर उसने मेरे लंड को पकड़ लिया और अपनी जीभ उस पर फ़िराने लगी मैं उसके दोनो निप्पल को चुटकियों में रगड़ रहा था फ़िर उसने कहा कि अब मुझमे समा जाओ और फ़िर मैने उसकी दोनो टांगो को अलग किया और बीच में बैठ गया। उसकी गुलाबी चूत एकदम फ़ूल गयी थी और पानी से एकदम चिकनी हो गयी थी। चिकना पानी लगातार निकल रहा था मैने अपना लंड चूत के पानी से चिकना किया और चूत पर रब करने लगा वो बहुत तड़प रही थी, उसने अपनी चूत दोनो हाथों से खोल दी, उसकी चूत का छोटा सा छेद एकदम साफ़ दिख रहा था, फ़िर मैने अपना चिकना लंड धीरे से उसकी चूत में डालना शुरु किया और वो कराहने लगी, धीरे धीरे मैने पूरा लंड उसकी चूत में डाला और अपनी कमर हिलाने लगा। अब वो भी मस्त होकर एकदम मुझसे लिपट पड़ी थी और मैं शोट पर शोट लगाता रहा, उसे बहुत मज़ा आ रहा था, चूत चिकना पानी निकाल रही थी और उसकी बजह से चप चपक चप जैसी आवाज़ आ रही थी, फ़िर मैने उसे घोड़ी बनाकर पीछे से अपना लंड उसकी चूत में डाल दिया, मैं कभी लंड पूरा निकाल लेता और फ़िर पूरा डाल देता, रगड़ से छपाक छपाक की आवाज़ गूंज रही थी और फ़िर स्पीड से मैने उसे चोदना शुरु किया और अपना पूरा वीर्य उसकी चूत में डाल दिया। अब वो पूरी तरह सैटिस्फाई हो गयी थी। हम दोनो बेड पर लेटे एक दूसरे को चूमने लगे और दोस्तो फ़िर शुरु हुआ न खत्म होने वाला एक चोदने का सिलसिला। oral sex
एक बहुत पुराने गाने कि तलाश थी मुझे। इसे मुकेश Hindi Porn Storiesऔर लता ने गाया था। फ़िल्म का नाम मुझे याद नहीं था। सिर्फ़ गाने के बोल ही याद थे। कुछ इस तरह था वो गाना—छोड़ गये बालम, मिझे हय अकेला छोड़ गये। सीडी, कैसेटों की दुकानों मे काफ़ी ढूंढा, पर नहीं मिला। किसी ने कहा कि शायद लैमिन्ग्टन रोड पर मिल जाये।
मैं लैमिन्ग्टन रोड गया। इत्त्फ़ाक से पहली ही दुकान से यह गाना मिल गया, पर वहाँ क्या हुआ, ये बताता हूं।
मैंने दुकान मे देखा कि कैश काउन्टर पर एक आदमी को छोड़ कर बाकी सब लड़कियां हैं। मैं सीडी के काउन्टर पर गया तो लड़की ने मुस्कुरा कर मेरा स्वागत किया और बोली-यस सर ! वट कैन आई डू फ़ोर यू?
ये मेरी बुरी आदत है कि जब भी मैं किसी लड़की को देखता हूं तो न चाहते हुए भी मेरी नज़र सबसे पहले उसकी छाती पर पड़ती है। यहाँ भी ऐसा ही हुआ, मेरी नज़र उसके बूब्स पर पड़ी पर मैं सम्भल गया। उसने भी मेरी इस हरकत को भाम्प लिया और अपने दुपटटे से दिलकश कबूतरों को ढकते हुए फ़िर बोली-कैन आई हेल्प यू?
जी तो चाहा कि कह दूं- इन कबूतरों को पालना चाहता हूं, लेकिन कहा- जी, मैं एक बहुत पुराना गाना तलाश रहा हूं, अगर यहाँ मिल जाये?
वो झट से बोली- गाने के बोल बताइये।
छोड़ गये बालम, मुझे हय अकेला छोड़ गये,
कुछ सोचते हुए वो बोली- मुझे तो ऐसा कोइ गाना याद नहीं आ रहा है- ठहरिये, मैं सर से पूछती हूं।
यह कह कर वो उस अधेर आदमी के पास गई जो कैश काउंटर पर बैठा था। थोड़ी देर बाद वो वापस आकर बोली- है हमारे पास- ये फ़िल्म बरसात का गाना है- आप रुकिये, मैं यह सीडी लाती हूं। वो उपर गई और एक सीडी लाई, बोली- पर आपको इस गाने के लिये पूरी सीडी खरीदनी पड़ेगी-इसमें कुछ और पुरा्नी फ़िल्मों के गाने भी हैं।
कोइ बात नहीं लेकिन देखिये इसमें वो गाना है य नहीं
जरूर होगा– इस सीडी में बरसात फ़िल्म के गाने भी हैं
हाँ, लेकिन देखो वो पर्टिकुलर गाना है भी या नहीं
वो सीडी के कवर पर लिखे गानो कि लिस्ट देखने लगी और बोली- क्या बोल बताये थे आपने?
छोड़ गये बालम, मुझे हय अकेला छोड़ गये–
वो एक एक गाना पढने लगी–दुम– नही–दम भर जो इधर मुंह फ़ेरे–बरसात में हमसे मिले… हवा मे उड़ता जाये– चोद गये–ओह सारी– छोड़–
छोड़ गये बालम, मुझे हय अकेला छोड़ गये– ये लीजिये। वो जल्दी से सीडी मेरे हाथ मे देते हुए बोली और फ़िर दूसरी और देखने लगी।
मैं अपनी हंसी रोक ना सका–वो शर्म से लाल हो गई और बोली- सारी।
मैंने कहा- कोइ बात नही- मुझे दोबारा हंसी आ गई।
वो नर्वस होते हुए बोली- देखो ना छोड़ की स्पेलिन्ग ऐसी होती है क्या-? सी डबल एच लिखना चाहिये ना- यहाँ सिन्गल एच ही है
हाँ सच कहा आपने– आपने तो चोद पढा– कई लोग तो इसे चोद– मैं कहते कहते रुक गया।
वो कैश काउंटर की तरफ़ और फ़िर अपनी साथी लड़कियों की ओर देखते हुए बोली- और कुछ?
जी बस — इतना काफ़ी है– अच्छा लगा।
व्हाट?
अच्छा लगा कि इतना ढूंढने के बाद आखिर यह गाना मिल ही गया।
और कुछ?
नहीं बस-कितने पैसे हुए?
मैं बिल बना देती हूं आप काउंटर पे पेमेंट कर दें।
जब मैं घर आया तो सोचने लगा-उसके बूब्स तो ईरानी होटल की डबल रोटियों जैसे थे- होंठ भी कम सेक्सी ना थे॥ अगर ये होंठ मेरे लन्ड को कोमलता से दबा लें तो क्या हो? मेरे शरीर में झुरझुरी सी आ गई।
रात को सपने में मैं उसे लेकर किसी हिल स्टेशन चला गया। मैंने देखा-हम दोनों नंगे ही पहाड़ियों की सैर कर रहे है। मैं कभी उसके कन्धे पर हाथ रख कर चलता तो कभी उसकी कमर मे बाहें डाल कर्। मेरा हाथ फ़िसल कर उसकी गान्ड पर रुक जाता। उसकी छातियां तजमहल के गुम्बद लग रहे थी पीछे से उसके गोल गोल कोमल चूतड़ यूं उपर नीचे हो रहे थे जैसे कोइ सी-सा ऊपर नीचे झूल रहा हो। मैं अपना लन्ड उसकी गांड की दरार में घुसाना चाहता था लेकिन घुस नहीं पा रहा था मैंने खूब जोर लगाया तो वो चिल्लाई- पागल हो गये हो क्या? मैंने उसकी बात अनसुनी कर दी और एक बार फ़िर जोर से झटका दिया, ताकि लन्ड अपनी मन्जिल तक पहुंच जाये। झटके से वो गिर पड़ी और मैं भी उसी के साथ चारों खाने चित्त हो गया। लन्ड पथरीली जमीन से टकराया और मैं चीख पड़ा– बहनचोद !!!
आंख खुली तो मैं पलंग से गिर कर जमीन पर पड़ा था। घरी मे टाइम देखा तो सुबह के साढे छह बजे थे। लन्ड जबरदस्त अंदाज में खड़ा था और किसी चूत की फ़िराक मे धीरे धीरे हाँफ़ रहा था। मुझे हाथ से ही लन्ड को शांत करना पड़ा। नहा धो कर कमरे से निकला तो घर वालों को काफ़ी हैरानी हुई कि नौ बजे उठने वाला लड़का आज इतनी जल्दी कैसे उठ गया।
” क्या आज कालेज जल्दी जाना है?” बड़े भाई ने पुछा।
” हाँ आज एक्स्टरा क्लास है-” और मैं क्या कहता। जब कह दिया तो घर से बाहर निकलना भी था। मेरे कदम फ़िर लैमिन्ग्टन रोड की तरफ़ उठ गये।
दुकान बंद थी। बाजू के पान वाले से पूछा तो वो बोला-‘दस बजे खुलती है दुकान” मैंने घड़ी देखी। अभी साढे नौ ही बजे थे। मैं दूर जाकर खड़ा हो गया। जैसे तैसे दस बजे। दुकान खुली, वो लगभग सवा दस आई। जब वो दुकान मे घुस रही थी तो मैंने देखा कि उसकी गान्ड के उभार बिलकुल सपने मे देखी हुई गान्ड कि तरह ही थे। मैं सोचने लगा कि सुबह का सपना वाकैई सच होता है !
थोड़ी देर में मैं दुकान के अन्दर गया। उसकी नज़र मुझ पर पड़ी औए उसके भाव देख कर मुझे यह अंदाजा हुआ कि उसने मुझे पहचान लिया है।
मैं सीधे उसके पास गया। वो जबरन मुस्करा के बोली- यस सर?
”मुझे एक और सीडी चाहिये”
कौन सी?
एक पुरानी फ़िल्म की॰॰॰अगर आपके पास हो तो॰॰॰
फ़िल्म का नाम?
राजा हरिशचंद्र
उसने सिर हिलाया और बोली- सर को पूछती हूं।
आज वो मुझे कुछ खूबसूरत भी नज़र आयी। बड़े बूब्स तो मेरी कमजोरी हैं ही।
जल्दी ही वो वापिस आयी और बोली-ईतनी पुरानी फ़िल्म के गाने नहीं हैं
ओह ! बैड लक, मैं निराश हो कर बोला।
और कुछ?
नहीं॰॰॰यही चाहिये था॰॰॰खैर थोड़ी देर बाद आउंगा।
क्यों? उसने पूछा।
क्यों मतलब? आपकी दुकान में कोइ क्यों आता है?
अच्छा, सोरी सर ! यू आर मोस्ट वेलकम!
कालेज के बाद फ़िर उसी दुकान में पहुंचा। अबकी बार वो दूर से ही मुस्काई। जब मैं उसके पास पहुंचा तो वो खुद बोली- कोइ और पुरानी फ़िल्म?
हाँ॰॰॰फ़िल्म चुदाई की सीडी चहिये।
व्हाट???॰॰॰ वो ऐसे बोली जैसे बिजली का करंट लग गया हो।
क्या हुआ? मैंने भी हैरानी जताई।
क्या कह रहे हैं?
कोइ अजीब बात कह दी मैंने?
किस फ़िल्म की सीडी चाहिये आपको?
जुदाई फ़िल्म की !
जुदाई ?
हाँ ! ॰॰॰आपने क्या सुना?
नहीं नहीं ठीक है॰॰॰जुदाई की सीडी होगी ही॰॰॰
लेकिन मुझे पुरानी चुदाई की सीडी चाहिये॰॰॰
वो फ़िर चौंक गई और मुझे शक भरी नज़रों से देखने लगी॰॰॰
मैंने पूछा- अब क्या हुआ?
कुछ नहीं॰॰॰पुरानी मतलब्॰॰॰? उसमे एक्टर कौन थे?
जितेन्द्र और शयद रेखा॰॰॰ मैंने युं ही कह दिया।
वो उपर की मन्जिल पर गई, थोड़ी देर बाद नीचे आयी, कैश काउंटर पर गई, दो तीन मिनट बाद आयी और बोली-सोरी सर्॰॰॰नई जुदाई कि सीडी है॰॰॰ पुरानी नहीं।
मैं फ़िर अपने को निराश जताने लगा॰॰॰वो मुझे धयान से देखने लगी।
फ़िर मैंने अपने दोस्त करण का नम्बर मिलाया और बोला॰॰॰
हाँ भैया॰॰॰जुदाई कि सीडी तो नहीं मिली॰॰॰क्या करूं?
उधर से करण बोला- अबे क्या बोल रहा है तू?
अच्छा दूसरी दुकान में देखूं ओके ओके जी जी॰॰॰
करण फ़िर हैरानी से बोला- कहाँ है तू॰॰॰क्या बोल रहा है?
कौन सी? ॰॰॰लन्ड्॰॰॰लन्डन्॰॰॰ कौन सा लन्दन?
मैंने चोर नज़रो से देखा, उसका चेहरा लाल हो गया था
जी ॰॰॰ नाईट इन लन्डन्॰॰॰ अच्छा॰॰॰पुछता हूं भैया॰॰॰
मैंने फ़ोन काटा और लड़की से पूछा- नाईट इन लन्डन् की सीडी या कैसेट होगी आपके पास?
उसने सीडी तलाश कर मुझे दे दी और आदत के अनुसार बोली- और कुछ?
नहीं बस्॰॰ बिल बना दीजिये।
वो सर झुका कर बिल बनाने लगी।
अगले दिन मैं फ़िर उसकी दुकान में पहुंच गया। आज उसने गुलाबी साड़ी पहनी थी। होठों पर हल्के रंग की लिप्स्टिक भी थी। वो उम्र में मुझ से कुछ बड़ी शायद तीस बत्तीस की लग रही थी। ब्लाउज का गला सामान्य से कुछ बड़ा ही था, जिसमे से उसकी बड़ी बड़ी छातियां गजब ढा रही थी।
यस सर ! उसने मुस्कुराते हुए पुछा- सीडी?
हाँ पुरानि फ़िल्म की सीडी या कैस्सेट जो भी हो!
फ़िल्म का नाम ?
गांड है तो जहान है॰॰॰ मैंने जानबूझ कर गांड शब्द का इस्तेमाल किया।
वो घूर कर मुझे देखने लगी।
है तो दे दीजिये।
क्या नाम बताया आपने?
जान है तो जहान है॰॰॰
इस नाम की तो कोई फ़िल्म नहीं आई।
आप सर से पूछिये।
ठीक है॰॰ वो कैश काउंटर तक गई। थोरी देर बाद आ कर बोली- सर आपसे बात करना चाह्ते हैं
मैं थोड़ा घबरा गया कि कहीं साले को शक तो नहीं हो गया। मैं उस तक गया तो उसने पूछा- इतना पुराना पुराना गाना कयको मांगता तुमको?
मेरेको नाइ मेरा भाई को मांगता॰॰॰ वो कोइ रिसर्च कर रहा है।
आप एच एम वी में जाके पूछो ना॰॰॰
फ़िर मैंने पूछा- अच्छा आपके पास वो गाना है॰॰॰चूतक चूतक चूतिया॰॰॰?
वो हंसने लगा॰॰॰अरे! ये क्या बोलता॰॰चूतक चूतक नही तूतक तूतक्॰॰॰
लेकिन ये तो नया गाना है तुम्हारा भाई क्या करेगा इसका?
भाई को नही॰॰ ये तो मुझे चाहिये।
अच्छा उधर सोना से पूछ लो।
सोना कौन?
अरे वही सेल गर्ल्॰॰॰
अच्छा तो उसका नाम सोना है॰॰
मैं उसके पास पहुंचा- सोना॰॰वो पोप भन्ग्ड़ा है आपके पास्॰॰॰तूतक तूतक तूतिया॰॰॰
वो मेरी तरफ़ देख कर बोली- मेरा नाम किसने बताया आपको?
चन्दू साब ने॰॰॰
कौन चंदू साब?
वो जो काउंटर पे बैठे हैं
अरे वो तो मेहता साब हैं
अच्छा मुझे मालूम नही था।
चूतक चूतक चूतिया है आपके पास?
वो सपाट नज़रों से मुझे देखते हुए बोली॰॰ अब मैं समझ गई॰॰तुम जानबूझ कर गलत बोल रहे थे अब तक
नही है ये गाना॰॰॰ वो नाक फ़ुला कर बोली और दूसरी तरफ़ मुंह कर लिया।
उस दिन मैंने सोच लिया कि आज इसे रास्ते मे पकड़ूंगा।
शाम को सात बजे दुकान बंद हो गई और वो बाहर निकली।
मैं उसके पीछे हो लिया।
थोड़ी देर पीछा करने के बाद ग्रांट रोड स्टेशन आने से पहले ही उसके पास पहुंच कर धीरे से कहा॰॰॰हाय !
वो चौंक कर मुझे देखने लगी। थोड़ी घबरा भी गई।
मैंने फ़िर हाय कहा।
वो बोली-क्या बात है, क्या काम है?
सोरी, मैं जरा लेट हो गया, आपकी दुकान तो बंद हो गई।
हाँ, अब उसके कदम तेज़ हो गये थे।
अरे ! आप दौड़ क्यों लगा रही हैं?
मुझे जल्दी है। सात बीस की टरेन पकड़नी हैकहाँ रहती हैं आप ?
कहाँ रहती हैं आप ?
उसने जवाब नही दिया
दरअसल मुझे एक और पुरानी फ़िल्म की सीडी चाहिए थी अर्जेंट
अब कल आइये
हाँ वो तो अब कल ही
यहाँ दूसरी दुकाने भी हैं वहाँ ट्राई कीजिये
हाँ, मगर वहाँ आप तो नही मिलेंगी ना
व्हाट? क्या मतलब ?
मैंने हिम्मत करके कहा…देखिये सच कहता हूँ… अब तक जितनी भी शोपिंग मैंने आपकी दुकान से की है सिर्फ़ आपसे मिलने के लिए…
वो रुक गई और मेरी आँखों में देख कर बोली…तुम्हारे इरादे अच्छे नही लगते.
हाँ वो तो है…
क्या मतलब ?
अब मतलब तो आप समझ ही गई होंगी .. मैं आपको डिनर मतलब लंच पर ले जाना चाहता हूँ
…
…काफी पापड़ बेलने पड़े उसे पटाने के लिए। आख़िर वो रास्ते पर आ ही गई. .. पता चला कि उसका तलाक हो चुका है.
ससुराल वालों ने निकल दिया है घर से. मायका दिल्ली में है और वो अपने माँ बाप के पास रहना नही चाहती। यहाँ बोरिविली में एक चल में किराये पर रहती है.
काफी कोशिशों के बाद मैंने उसे अपने साथ सोने के लिए राजी कर लिया. अब वो काफी खुल चुकी थी. बोली-कहाँ ले जाओगे?..अपने घर ?
नही वहाँ तो मेरी फॅमिली रहती है.
फ़िर?
किसी होटल में.
मैंने एक अच्छे होटल में कमरा बुक कर लिया. उस दिन उसने काम से छुटी ले ली थी। मुझे ये सोच कर मजा आ रहा था की मैं सारा दिन उसे चोदूंगा। उसकी चूत चाटुन्गा, वो मेरा लंड अपने कोमल होठों से मसलेगी.
तयशुदा दिन हम होटल में पहुंचे। कमरा पहले से ही बुक था. दोपहर के दो बज रहे थे. हमने बियर पी और खाना खाया .फ़िर मेरे सब्र का पैमाना भर गया.मैंने उसे कहा…सोना, हर रात को मैं तुम्हे सपने में चोदता हूँ आज वो दिन आ ही गया जब सचमुच…
वो बोली..मैं भी बिना मर्द के कई दिनों से प्यासी हूँ अभी तक बैंगन ,लोकी से काम चला रही थी, आज मर्द का लंड मिलेगा.. पर
पर क्या?
अभी तो तुम इतने मर्द नही लगते। कितना बड़ा है तुम्हारा?
देखोगी?
हाँ दिखाओ…
मैंने झट से कपडे उतारे लंड तमतमा कर फडफडा रहा था वो बड़े गोर से मेरे लंड को देखने लगी और फ़िर कहा…चलेगा !
अरे 6 इन्च के लोडे को देख कर कह रही हो… चलेगा… दोडेगा बोलो ना…
6 इंच का लोडा क्या खाक दोडेगा ? दोड़ने के लिए तो कम से कम 8 इंच का घोड़ा चाहिए!
मुझे गुस्सा आ गया और मैं बोला-पहले आजमा तो लो,इस 6 इंच के टट्टू को क्या सरपट दोड़ता है.
अच्छा?
ये कह कर वो आगे झुक गई और अपने हाथों से मेरे लंड को पकड़ किया, उसका पकड़ना था की मेरा फ़ड़फ़ड़ाता हुआ लंड आधा इंच और लम्बा हो गया. वो धीरे धीरे लंड के सुपाड़े को सहलाने लगी। मुझे हल्का हल्का नशा आने लगा था।
उसने मुझे बेड पे लिटा लिया और मेरि दोनों टांगो के बीच बैठ कर मेरा लन्ड चूसने लगी। मैं उसके मुलायम होठों को अच्छी तरह महसूस कर रहा था। ऐसा लग रहा था कि जैसे मैं किसी और दुनिया मे हूं। मेरे जिस्म मे चींटियां रेंगने लगी। उसने अपनी गति बढा दी और जल्दी जल्दी लन्ड को चूसने लगी। थोड़ी देर मे लन्ड से धड़ाधड़ पानी निकलने लगा जिसे उसने गड़प से पी लिया। लन्ड कुछ देर शान्त बना रहा। मैं भी बेड पर निढाल सा पड़ा था। वो उठ कर बोली- क्यो मर्द?… बस क्या?… और कुछ करना है?
जानेमन्… अभी तो पूरा दिन बाकी है… बस एक मिनट्… अभी तैयार हो जाता हूं… ये कह कर मैंने उसके सारे कपड़े उतार दिये। वो मेरे सामने बिल्कुल नंगी खड़ी थी। मैं उसे घूम घूम के चारों ओर से देखने लगा। वो हन्स कर बोली… ऐसे क्या देख रहे हो ?
देख रहा हूं, सपने मे जो हसीना देखी थी, वही अब सामने है… वही रंग रूप, वही उतार चढाव, वही चूत्… वही गांड वही चूची वही जांघ…
तुम सचमुच माल हो यार !
कमाल है यार माल देख के भी धमाल नही कर रहे हो… वो हंसने लगी। मैं उससे लिपट गया। कमरे मे म्युजिक बज रहा था हम अपने आप धीरे धीरे नाचने लगे। मैं उससे यूं लिपटा हुआ था जैसे उसके अन्दर ही समा जाउंगा। वो बहुत भावुक हो रही थी।
मैंने उसे बेद पे लिटा दिया। उसने खुद अपनी टांगे ऊपर कर ली, जिससे उसकी चूत खुल गई। उसकी चूत देख कर लग रहा था कि उसके पति ने उसे ज्यादा नहीं चोदा था। गुलाबी रस भरी चूत बड़ी प्यारी लग रही थी। मेरे मुंह मे पानी आ गया। मैं उसकी चूत पर झुक गया। मादक सी गंध आ रही थी। मैंने अपनी जीभ उसकी चूत के होठों पर रख दी। वो सिसक पड़ी। होले होले मैं उसकी चूत कि पूरी दरार चाटने लगा। वो तिलमिलाने लगी। तड़फ़ने लगी। मैंने अपनी जीभ की नोक उसकी चूत के छेद मे डाली और अन्दर तक ले गया। वो तड़फ़ती रही। मैं जोर जोर से चूत रगड़ने लगा। उसकी सिसकियां चीखों मे बदल गई।
मैंने उसे उल्टा किया। पीछे का नज़ारा और भी मज़ेदार था। पतली कमर के नीचे सुंदर सी गोल गान्ड्। मैंने उसकी चूत से बहुत सारा रस निकाला और उसकी गान्ड मे मल दिया। गान्ड चिकनी हो गई और चमकने लगी। मैं धीरे धीरे उसकी गान्ड की मसाज करने लगा। कभी मेरी उन्गलियां उसकी गान्ड मे तो कभी उसकी चूत में।
चूत का रस था कि निकला ही जा रहा था और मैं उसी के रस से उसके सारे शरीर की मालिश कर रहा था। उसे बड़ा ही आनन्द आ रहा था। मैं उसकी गांड मे अपनी बीच की उंगली घुसाने लगा। दो तीन मिनट में पूरी उन्गली अन्दर घुस गई और मैं बड़े आराम से अपनी उंगली से उसकी गांड की चुदाई करने लगा।
उसकी सिसकारी बद नही हो रही थी। गांड मे उंगली का मज़ा शायद वो पहली बार ले रही थी। आखिर उससे रहा नही गया और वो बोली… अपना लन्ड डाल दो मेरी गांड मे… पेल दो… खूब जोर जोर से… रुको नही एक भी पल्…
मैं तुरन्त पीछे से उसके उपर चढ गया। उसकी कमर के नीचे हाथ डाल कर थोड़ा उपर उठाया। उसकी गांड ऊँट की पीठ की तरह ऊपर हो गई। गांड का छेद साफ़ दिखाई दे रहा था। धीरे सेमैंने अपना लन्ड उसकी गांड के छेद पर रखा तो अपने आप ही अन्दर जाने लगा। मैंने बस थोड़ी ही मेहनत की और हल्का सा धक्का दिया, लन्ड गांड के अन्दर यूं गया जैसे सांप बिल मे फ़ुर्र से घुस जाता है। मुझे अपना सपना याद आ गया जिसमे मैंने लाख कोशिश की थी गांड मे लन्ड घुसाने की, मगर सफ़ल ना हो सका था। वो हल्के से चीखी भी… मगर फ़िर चुप हो गई। मैं अपना लन्ड उसकी गांड मे अन्दर बाहर करने लगा। वो सी सी की आवाज़ निकालने लगी। फ़िर ये आवाज कुछ ऊँची हो गई। मेरी नस नस को मज़ा मिल रहा था और शायद उसे भी, क्योंकि वि भी हाय्… उफ़्… मर गई कहती जा रही थी।
मक्खन की तरह कोमल गांड मे मेरा लोहे का सा लन्ड अन्दर बाहर हो रहा था। जब वो अपनी गांड के दोनों पाटों से दबाती तो मैं अन्दर बाहर नही कर पाता। जब वो अपनी पकड़ ढीली कर देती तो मैं तुरन्त अपने लन्ड को उसकी गांड से बाहर निकालता और फ़िर फ़चाक से अन्दर डाल देता। ये खेल उसे बहुत अच्छा लग रहा था। वो अपनी गांड उचका उचका कर मेरी हिम्मत बढा रही थी
यह खेल 10 -15 मिनट ही चला। तब मेरे लन्द ने अपना सारा रस उसकी गांड मे उतार दिया। पूरा रस निकलने तक मैं उसकी गांड मे धक्के मारता रहा। जब अन्तिम बूंद भी निकल गई तो मैंने अपना लन्ड उसकी गांड से बाहर निकाला, जो उस वक्त भी लाल लाल और तमतमाया हुआ था।
वो सीधे लेट कर जोर जोर से सांस लेने लगी। यही मेरी हालत थी। कुछ देर हम यूं ही पड़े रहे। अचानक दरवाजे की घंटी बजी। सोना नंगी ही बाथरूम भागी। मैंने जल्दी से कपड़े पहने, बलों को सीधा किया और दरवाजा खोला। दरवाजे पर रूम बोय कम वेटर खड़ा था।
क्या बात है? मैंने पूछा।
साहब, कुछ नाश्ता वाश्ता…॥
यार कुछ चाहिये होगा तो इन्टरकोम से बोल देन्गे।
सोरी सर ! मगर आपकी तरफ़ से कोइ मैसेज नही आया तो मैंनेजर ने भेजा कि… शायद आपको कुछ चाहिये हो ?
मैंने घड़ी देखी… शाम के 5 बज रहे थे. मुझे हैरानी हुई कि इतनी जल्दी 5 कैसे बज गये। खैर मैंने उसे बीयर और चिकन पकौड़ा लाने को कहा। वो आधे घंटे बाद नाश्ता लाया। तब तक हमने इन्तजार करना ही मुनासिब समझा।
भरपेट नाश्ता करने के बाद मैंने वेटर से खाली डिशेज ले जाने को कहा और उसके जाते ही मैंने फ़िर दरवाजा बंद कर लिया।सोना भी उसी इन्तजार मे थी। उसने फ़टाफ़ट कपड़े उतारे और मैंने भी।
एक बार फ़िर उसने मेरे लन्ड को अपने भीगे मुंह मे ले लिया। बीयर और पकौड़े से तरबतर जीभ ने मेरे लन्ड मे आग सी लगा दी।
वो अपनी जीभ से मेरे लन्ड को सराबोर करने लगी। छह इन्च के लन्ड का यही फ़ायदा है कि वो किसी से भी मुंह मे पूरी तरह समा जाता है। अपने मुंह के अन्तिम सिरे तक वो मेरे लन्ड को लीलती रही और बाहर निकालती रही। मेरे लन्ड को यह वरदान पहले नही मिला था। वैसे तो तीन चार लड़कियों ने सकिन्ग की थी मेरी… पर आज जो अनुभव मिल रहा था वो किसी अनुभवी नारी का ही काम था। लड़कियों ने तो मेरे लन्द को ऐसे चूसा था जैसे लोलीपोप चूस कर फ़ेंक देती हैं। उन्हें तो पानी निकालना भी नही आता था। कई बार उन्होने अपने हाथों से ही मेरे लन्ड को तृप्ति दी थी।
सोना अपने हलक तक मेरा लन्ड ले रही थी।
मैंने उसे दोबारा उल्टा लिटाया और कमर के नीचे से हाथ डाल कर घोड़ी बनने पर मजबूर किया। मैंने उसे ऐसे ऐडजस्ट किया कि चूत बिल्कुल सीध मे आ जाये। उसकी टांगो को और फ़ैलाया। गुलाबी चूत दिखाई देने लगी हल्की हल्की झांटे चूत के आस पास ऐसे खड़ी थी जैसे किसी खजाने की रखवाली के लिये सुरक्षा कर्मी खड़े हों। घुटनों के बल खड़े हो कर उसकी गोरी जांघों पर हाथ फ़ेर कर मैंने उसकी चूत मे अपने लन्द को लगाया और धक्का दिया। आशा के विपरीत मेरा लन्ड उसकी चूत मे फ़ंसने लगा। चूत काफ़ी टाईट थी। ये सोच कर मुझे बहुत मज़ा आया। मैं धीरे धीरे धक्के मार कर अपने लन्ड को उसकी चूत मे पूरी तरह घुसाने की कोशिश करने लगा। इसके लिये मुझे उसकी कमर को पकड़ कर आगे पीछे भी करना पड़ा। थोड़ी कोशिश मे ही मेर लोड़ा टाईट चूत मे अन्दर बाहर होने लगा। दोगी स्टाईल मेरा फ़ेवरेट आसन है। इसमे जो मज़ा आता है वो करने वाले को ही मालूम है। तना हुआ लन्ड चिकनी चूत मे जा रहा था, आ रहा था। चूत के अन्दर की नर्म हडडी मेरे लन्ड के निचले भाग की मालिश कर रही थी। मेरे मुंह से लगातार आह आह की आवाजें आ रही थी। सोना का भी यही हाल था। मैं उसकी गांड को पकड़ कर आगे पीछे कर रहा था। लन्ड को ऐसी सेवा कभी कभी ही मिलती है… और शायद चूत को भी।
अब मैंने वैसे ही उसे डोगी स्टाईल में थामा। उसकी गान्ड को मजबूती से पकड़ कर मैं धीरे से पीठ के बल लेट गया। लन्ड उसकी चूत में ही था। वो मेरा लन्ड लिये उसी तरह धीरे से मेरी जांघों पर बैठ गई। उसने अपनी दोनों टांगें मेरी जांघों के आसपास रख दीं और सम्भल कर बैठ गई। अपने आप को एडजस्ट किया और फ़िर उपर नीचे होने लगी। मेरा लन्ड उसकी चूत में जाकर बाहर निकल रहा था। वो बराबर उपर नीचे हो रही थी। उसका स्टेमिना अच्छा था। यह आसन उसके लिये शायद काफ़ी मज़ेदार साबित हुआ। उसकी चूत से धड़ाधड़ पानी निकलने लगा और मेरी जांघों और लन्ड को तर करने लगा। उसने अपनी रफ़्तार बढा दी। अब वो चीखने लगी थी।
चकाचक धकाधक छकाछक्… लन्ड चूत के अन्दर बाहर हो रहा था और वो उसी गति से चीख रही थी। अचानक वो धम्म से मेरी लांघों पे बैठ गई और उसके मुंह से बड़ी जोर से आ…ह निकला। वो पूरी तरह झड़ चुकी थी मगर मैं बाकी था।
उसने अपनी चूत से मेरे लन्ड को निकालने की कोशिश की, मगर मैंने ऐसा नही होने दिया। मैंने मजबूती से उसकी गान्ड को पकड़ा और आगे पीछे करके उसे हिलाने लगा। मेरा लन्ड उसकी चूत में ही था। मुझे उसका सहयोग नहीं मिल रहा था। इसलिये मेरा लन्ड उसकी चूत से बाहर आ गया और वो झट से बेड पे उलटी लेट गई। मेरा पानी निकलना अभी बाकी था। मैं भला उसे ऐसे कैसे छोड़ देता।
मैं फ़ौरन पीछे से उसके उपर चढ गया। पहले तो वो कसमसाई, मगर फ़िर ढीली पड़ गई। मैंने अपने तने हुए चिकने लन्ड को उसकी गान्ड में उतारना चाहा। इसके लिये मुझे उसकी गान्ड को ऊपर उठाना था, मगर वो उठने के लिये राज़ी नहीं हो रही थी। मैं उसकी मजबूरी समझ रहा था। आखिर मैंने दोनों तकिये उठाये और उसके पेट के नीचेए रख दिये। इससे उसकी गान्ड कुछ ऊपर हो गई।
मैंने उसकी गान्ड के दोनों पाटों को अपने अंगूठों से हटाया तो भूरे रंग का छेद नज़र आने लगा।
बस यही थी मेरी- मेरी लन्ड की मन्जिल्…॥
अपने तमतमाए लन्ड को मैंने उसकी गान्ड के संकरे छेद पर रखा। अंगूठे से दोनों फ़ांकों को फ़ैलाए रखा, ताकि छेद छुप ना जाये।
लन्ड बिल्कुल गान्द के छेद पर था। गीला और चिकना तो वो था ही। धीरे से थोड़ा सा लन्ड अन्दर को किया। हल्के हल्के धक्के मार के मैंने अपना पूरा का पूरा लन्ड उसकी गान्ड में उतार ही दिया। पूरा लन्ड कभी कभी ही गान्ड में समाता है, वरना आधे लन्ड की चुदाई से ही काम चलाना पड़ता है। उसे तकलीफ़ जरूर हुई पर उसने प्रोटेस्ट नहीं किया। बीस पच्चीस धक्कों से ही मेरा काम बन गया। उसकी पूरी गान्ड मार कर मैं निहाल हो गया। सारा बचा खुचा पानी निकल गया। मैं उसके ऊपर ही लेट गया।
रात को लगभग दस बजे घर आकर मैंने हिसाब लगाया तो पता चला कि पांच हज़ार खर्च हो गये हैं। ये पैसे मैंनें अपने जेब खर्च से बचा कर रखे थे।
सोना से दोबारा मिलने का वादा तो कर लिया था, पर दोबारा पांच हज़ार जमा करने के लिये मुझे क्य क्य पापड़ बेलने पड़ेंगे, वो मुझे ही मालूम है… सोना को नहीं Hindi Porn Stories
मेरा नाम राम है। मैं आपको जो कहानी Hindi Porn Stories सुनाने जा रहा हूँ, यह तब की बात है जब मैं कालेज में पहले सेमस्टर में पढ़ता था। मेरे कोलोनी में ही मेरा एक दोस्त अमित(बदला हुआ नाम) रहता था जो मेरे साथ ही कालेज में था, वो कमरा किराए पर लेकर रहता था। सो मैं उसके यहाँ स्टडी या ऐसे ही कभी कभी मिलने चला जाता था। उसके साथ उसकी एक दीदी रीना और उनकी एक सहेली नेहा भी रहती थी। वो दोनों आई आई टी कर रही थी। वे लोग एक ही कमरे में रहते थे।
एक बार जब मैं उससे मिलने उसके कमरे पर गया तो मैंने देखा कि नेहा वहाँ अकेली थी। मेरे पूछने पर उसने बताया कि रीना ओर अमित बाज़ार गये हैं। फ़िर मैं जाने को हुआ तो नेहा ने मुझे ये कह कर रोक लिया कि वो लोग बस आते ही होंगे। सो मैं वहीं रुक गया।
मैंने कभी नेहा से ज्यादा बाते नहीं की थी, ना ही उसके बारे में जानता था, वो मुझसे उमर में शायद तीन साल बड़ी होगी। मैं एक कुर्सी लेकर बैठ गया और अमित के आने का इन्तज़ार करने लगा।
मैने सोचा क्यूँ ना नेहा से ही बातें कर ली जाये। मैं उठ कर उसके पास गया और उससे इधर उधर की बाते करने लगा। बातों ही बातों में मैने उससे पूछ लिया कि क्या उसका कोई बाय फ़्रेन्ड है?
तो उसने शरमाते हुये कहा- नहीं !
मुझे यह बात पूछ्ने में डर इसलिए नहीं लगा क्योंकि वो मुझसे तब तक खुल के बातें करने लगी थी। फ़िर उसने मुझसे पूछा तो मैने भी बता दिया कि मेरी भी कोइ गर्ल फ़्रेन्ड नहीं है।
फ़िर उसने कहा- तुम बैठो ! मैं चाय बना के लाती हूँ।
तो मैं अमित का लेपटोप ओन करके गाने सुनने लगा। तभी मुझे एक शरारत सूझी। मुझे याद आया कि अमित के लेपटाप में बहुत सी ब्लू-फ़िल्में हैं। मैने सोचा क्यूं ना इसे नेहा को दिखाऊँ और अगर काम बन जाता है तो उसकी चुदाई भी कर दूँ!
इस ख्याल से ही मेरे पैन्ट के अन्दर सो रहा मेरा हथियार जाग गया। जैसे तैसे मैंने अपने आप को सम्भाला और गाने सुनने लगा। मैंने 4 गाने एक साथ सिलेक्ट किये और उसके बाद एक ब्ल्यू-फ़िल्म का वीडियो लगा दिया। मेरी उम्मीद के मुताबिक दो गाने खत्म होते ही नेहा चाय लेकर आ गई और मेरे पास बैठ के बातें करने लगी। मैने भी लेपटोप की आवाज को इतना कम कर दिया कि वो कमरे से बाहर ना जाये।
मैंने नेहा से बाथरुम जाने का बहाना किया और बाथरुम चला गया।
बाथरुम दूसरी तरफ़ था। मैं बाथरुम में रुककर चौथे गाने के खत्म होने का इन्तजार करने लगा। फ़िर जैसे ही वो पल आया मैं धीरे से कमरे में आ गया। नेहा तो लेपटोप में ब्ल्यू-फ़िल्म ऐसे देख रही थी जैसे छोटे बच्चे टी वी देखते हैं। उसका मुँह खुला हुआ था, शायद किसी का लन्ड मांग रही थी।
मैं चुपके से जाकर उसके पीछे खड़ा हो गया और उससे कहा- क्या देख रही हो?
तभी वो हड़बड़ा गई और लेपटोप की स्क्रीन बन्द कर दी। वो मूवी देखने में इतनी खो गई थी कि उसे होश ही नहीं था कि मैं भी वहीं हूँ।
शायद उसका यह पहला अनुभव था नग्न फ़िल्म देखने का !
लेपटोप से आहह्ह्ह्ह उउहहहहह की आवाजें आ रही थी जिन्हें सुन कर मेरा लन्ड खड़ा हो गया। उसने शायद यह देख लिया था।
मेरे पूछ्ने पर कि क्या कर रही थी, वो कुछ नहीं बोली, शायद शरमा गई थी।
मेरे बार बार पूछ्ने पर भी उसने कुछ नहीं कहा तो मैने लेपटोप की स्क्रीन ऊपर कर दी। चूंकि मूवी बहुत लम्बी थी इसलिये वो अभी भी चल ही रही थी। फ़िर मैने नेहा की तरफ़ देखा तो उसने अपनी आँखें अपने हाथों से बन्द कर ली।
उसे देख कर मन तो एसा कर रहा था कि पकड़ कर अभी चोद डालूँ लेकिन मैं थोड़े मजे लेना चाहता था। फ़िर मैने उसके दोनों हाथों को पकड़ा और उससे कहा- इसमें शरमाने की क्या बात है? ये तो सब लोग देखते हैं !
और उसको आँखें खोलने को कहा। उसने अपनी आँखें खोली और मुझसे पूछ्ने लगी- क्या तुमने कभी ऐसी मूवी देखी है?
तो मैने कहा- हाँ ! एक दो बार देखी है !
उसने बताया- मैंने कभी ऐसी मूवी नहीं देखी थी !
मुझे तो यह पहले ही पता चल गया था जब उसे मुँह खोल के मूवी देखते देखा था। खैर फिर मैने उससे कहा- चलो साथ में देखते हैं !
पहले तो वो मना करने लगी पर थोड़ा सा मनाने पर मान गई। फ़िर हम दोनों साथ में मूवी देखने लगे। मैं और वो एक ही बिस्तर पर बैठे थे। मूवी देखते हुए मैंने महसूस किया कि उसकी सांसें बहुत तेज चलने लग गई थी।
तो मैंने भी सोचा- अब मौका है !
मैं धीरे से अपना हाथ उसकी जांघों पर लाया और उसे सहलाने लगा।
तो उसने कुछ भी नहीं कहा। फ़िर मैं हाथ थोड़ा ऊपर करके उसकी गाण्ड पर लाया और उसको दबाने लगा। कसम से क्या गान्ड थी उसकी ! एक दम मुलायम !
तो उसने कहा- क्या कर रहे हो?
मैंने कहा- वही जो तुम मूवी में देख रही हो ! और पूछा- क्यूँ? अच्छा नहीं लगा क्या?
तो उसने कहा- अगर करना ही है तो अच्छे से करो !
मैं भी यह सुन कर जोश में आ गया और उसे पकड़ कर उसके होंठों पे किस करने लगा। वो भी मेरा साथ देने लगी।
क्या रसीले होंठ थे उसके ! मजा आ गया उसे चूमने में !
फ़िर मैने उसके सारे कपड़े उतार दिये, उसकी चूत गीली हो चुकी थी। मैंने उसकी चूत में अपनी जीभ लगा दी और उसे चाटने लगा। वो तो जैसे पागल सी हो गई और मेरा मुँह पकड़ के अपनी चूत पर दबाने लगी। मैं भी मदहोश हो कर उसकी चूत चाट रहा था। थोड़ी देर बाद वो झड़ गई मैंने उसका सारा रस पी लिया। उसके बाद मैंने उसे अपना लन्ड चूसने को कहा। पहले तो उसने मना किया पर मैंने जबरदस्ती उसके मुँह में डाल कर उसे मुँह में चोदने लगा। उसे भी मेरा लन्ड चूसने में मजा आने लगा। करीब 5 मिनट बाद मैं उसके मुँह में झड़ गया। उसके बाद मैंने उसकी तीन बार चुदाई की और एक बार गाण्ड भी मारी। उसके बाद हम दोनों ने अपने कपड़े पहने और एक दूसरे को किस किया।
फ़िर अमित ओर उसकी बहन भी आ गये।
अगली बार आपको बताउँगा कि रीना को मैंने कैसे मनाया चुदाई के लिये !
आप मुझे मेल करके बताना आपको मेरी कहानी कैसी लगी। Hindi Porn Stories
दोस्तो, हिंदी में इंडियन अन्तर्वासना कहानी में आपने अब तक पढ़ा था कि पण्डित जी रीना की जवानी को भोगने के चक्कर में उसको पूजा करवाने के लिए फंसा चुके थे. पण्डित जी रीना की तारीफ़ करते हुए उस पर डोरे डाल रहे थे कि श्रृंगार के इतनी सुन्दर लगती हो.. तो श्रृंगार के पश्चात तो तुम बिल्कुल अप्सरा लगोगी.
अब आगे..
पण्डित- परम्परा के अनुसार तुम्हारा श्रृंगार पवित्र हाथों से होना चाहिये.. अथवा तुम्हारा श्रृंगार मैं करूँगा.. इसमें तुम्हें कोई आपत्ति तो नहीं?
रीना- नहीं पण्डित जी..
पण्डित- रीना.. मुझे याद नहीं रहा था.. लेकिन जो देवलिंग मैंने तुम्हें दिया था, उस पर पण्डित का चित्र होना चाहिये.. इसलिए इस देवलिंग पे मैं अपनी एक छोटी सी फोटो चिपका रहा हूँ.
रीना- ठीक है पण्डित जी.
पण्डित- और हाँ.. रात को दो बार उठ कर इस देवलिंग को जय करना.. एक बार सोने से पहले.. और दूसरी बार मध्य रात्रि में.
रीना- जी पण्डित जी..
पण्डित ने देवलिंग पर अपनी एक छोटी सी फोटो चिपका दी.. और रीना को बांधने के लिए दे दिया.
रीना ने पहले जैसे देवलिंग को अपनी टांगों के बीच बांध लिया..
आज की पूजा खत्म हुई और रीना अपने कपड़े पहन के घर चली आई.. पण्डित से अपनी तारीफ़ सुन कर वो खुश थी.
सारे दिन देवलिंग रीना की टांगों के बीच चुभता रहा.. लेकिन अब ये चुभन रीना को अच्छी लग रही थी.
रीना रात को सोने लेटी तो उसे याद आया कि देवलिंग को जय करना है..
उसने सलवार का नाड़ा खोल कर देवलिंग निकाला और अपने माथे से लगाया. वो देवलिंग पर पण्डित की फोटो को देखने लगी.
उसे पण्डित द्वारा की गई अपनी तारीफ़ याद आ गई.. अब उसे पण्डित अच्छा लगने लगा था.
कुछ देर तक पण्डित की फोटो को देखने के बाद उसने देवलिंग को वहीं अपनी टांगों के बीच में रख दिया और नाड़ा लगा लिया.
देवलिंग रीना की चूत को टच कर रहा था.. रीना ना चाहते हुए भी एक हाथ सलवार के ऊपर से ही देवलिंग पे ले गई.. और देवलिंग को अपनी चूत पे दबाने लगी. साथ साथ उसे पण्डित की तारीफ़ याद आ रही थी.
उसका दिल कर रहा था कि वो पूरा का पूरा देवलिंग अपनी चूत में डाल ले.. लेकिन इसे गलत मानते हुए और अपना मन मारते हुए उसने देवलिंग से हाथ हटा लिया.
आधी रात को उसकी आँख खुली तो उसे याद आया कि देवलिंग को जय करना है.
देवलिंग का सोचते ही रीना को अपने हिप्स के बीच में कुछ लगा.. देवलिंग कल की तरह रीना की हिप्स में फंसा हुआ था.
रीना ने सलवार का नाड़ा खोला और देवलिंग बाहर निकाला.. उसने देवलिंग को जय किया. उस पर पण्डित की फोटो को देख कर दिल में कहने लगी..
ये क्या पण्डित जी.. पीछे क्या कर रहे थे..?
रीना देवलिंग को अपनी हिप्स के बीच में ले गई और अपने गांड पे दबाने लगी. उसे मज़ा आ रहा था लेकिन डर की वजह से वो देवलिंग को गांड से हटा कर टांगों के बीच ले आई.. उसने देवलिंग को हल्का सा चूत पर रगड़ा.. फिर देवलिंग को अपने माथे पे रखा और पण्डित की फोटो को देख कर दिल में कहने लगी, ‘पण्डित जी.. क्या चाहते हो..? एक विधवा के साथ ये सब करना अच्छी बात नहीं..’
फिर उसने वापस देवलिंग को अपनी जगह बांध दिया.. और गरम चूत ही ले के सो गई.
अगले दिन..
पण्डित- रीना.. शिव को सुन्दर स्त्रियाँ आकर्षित करती हैं अत: तुम्हें श्रृंगार करना होगा.. परन्तु नियम के अनुसार ये श्रृंगार शुद्ध हाथों से होना चाहिये.. मैंने ऐसा पहले इसलिए नहीं कहा कि शायद तुम्हें लज्जा आये..
रीना- पण्डित जी.. मैंने तो आपसे पहले ही कहा था कि मैं भगवान के काम में कोई लज्जा नहीं करूँगी.
पण्डित- तो मैं तुम्हारा श्रृंगार खुद अपने हाथों से करूँगा.
रीना- जी पण्डित जी..
पण्डित- तो जाओ.. पहले दूथ से स्नान कर आओ.
रीना दूध से नहा आई.
पण्डित ने श्रृंगार का सारा सामान तैयार कर रखा था.. लिपस्टिक, रूज़, आई-लाइनर, ग्लीमर, बॉडी आयल..
रीना ने ब्लाउज और पेटीकोट पहना था.
पण्डित- आओ रीना..
पण्डित और रीना आमने सामने ज़मीन पर बैठ गए.. पण्डित रीना के बिल्कुल पास आ गया.
पण्डित- तो पहले आँखों से शुरू करते हैं
पण्डित रीना को आई-लाइनर लगाने लगा.
पण्डित- रीना.. एक बात कहूँ..?
रीना- जी कहिये पण्डित जी..
पण्डित- तुम्हारी आँखें बहुत सुन्दर हैं तुम्हारी आँखों में बहुत गहराई है.
रीना शरमा गई..
पण्डित- इतनी चमकीली.. जीवन से भरी.. प्यार बिखेरती.. कोई भी इन आँखों से मन्त्र-मुग्ध हो जाए.
रीना शर्माती रही.. वो कुछ बोली नहीं.. बस थोड़ा मुस्कुरा रही थी.. उसे अच्छा लग रहा था.
आई-लाइनर लगाने के बाद अब गालों पे रूज़ लगाने की बारी आई.
पण्डित ने रीना के गालों पे रूज़ लगाते हुए कहा.
पण्डित- रीना.. एक बात कहूँ.. ?
रीना- जी.. कहिये पण्डित जी..
पण्डित- तुम्हारे गाल कितने कोमल हैं जैसे कि मखमल के बने हों.. इन पे कुछ लगाती हो क्या..?
रीना- नहीं पण्डित जी.. अब श्रृंगार नहीं करती.. केवल नहाते वक्त साबुन लगाती हूँ.
पण्डित रीना के गालों पे हाथ फेरने लगा. इससे रीना शरमा रही थी.
पण्डित- रीना.. तुम्हारे गाल छूने में इतने अच्छे हैं कि शिव का भी इन्हें.. इन्हें..
रीना- इन्हें क्या पण्डित जी..?
पण्डित- शिव का भी इन गालों का चुम्बन लेने को दिल करे.
रीना शरमा गई.. थोड़ा सा मुस्कुराई भी.. अन्दर से उसे बहुत अच्छा लग रहा था.
पण्डित- और एक बार चुम्बन ले तो छोड़ने का दिल ना करे.
गालों पर रूज़ लगाने के बाद अब लिप्स की बारी आई.
पण्डित- रीना.. होंठ (लिप्स) सामने करो.
रीना ने लिप्स सामने करे.
पण्डित- मेरे ख्याल से तुम्हारे होंठों पर गाढ़ा लाल रंग बहुत अच्छा लगेगा.
पण्डित ने रीना के होंठों पे लिपस्टिक लगानी शुरू की.. रीना ने शर्म से आँखें बंद कर रखी थीं.
पण्डित- रीना.. तुम लिपस्टिक होंठ बंद करके लगाती हो क्या.. थोड़े होंठ खोलो..
रीना ने होंठ खोले.. पण्डित ने एक हाथ से रीना की ठोड़ी पकड़ी और दूसरे हाथ से लिपस्टिक लगाने लगा.
पण्डित- वाह.. अति सुन्दर..
रीना- क्या पण्डित जी?
पण्डित- तुम्हारे होंठ.. कितने आकर्षक हैं तुम्हारे होंठ.. क्या बनावट है.. कितने भरे भरे.. कितने गुलाबी..
रीना- आप मज़ाक कर रहे हैं पण्डित जी..
पण्डित- नहीं.. शिव की सौगंध.. तुम्हारे होंठ किसी को भी आकर्षित कर सकते हैं तुम्हारे होंठ देख कर तो शिव पार्वती के होंठ भूल जाएं.. वह भी ललचा जाएं.. तुम्हारे होंठों का सेवन करें.. तुम्हारे होंठों की मदिरा पिएं..
रीना अन्दर से मरी जा रही थी.. उसे बहुत ही अच्छा फ़ील हो रहा था.
पण्डित- एक बात पूछू?
रीना- पूछिए पण्डित जी..
पण्डित- क्या आज तक तुम्हारे होंठों का सेवन किसी ने किया है?
रीना ये सुनते ही बहुत शर्मा गई.
रीना- एक दो बार.. मेरे पति ने..
पण्डित- केवल एक दो बार..
रीना- वो ज्यादातर बाहर ही रहते थे.
पण्डित- तुम्हारे पति के अलावा और किसी ने नहीं..!
रीना- कैसी बातें कर रहे हैं पण्डित जी.. पति के अलावा और कौन कर सकता है? क्या वो पाप नहीं होता.
पण्डित- यदि विवश हो कर किया जाए तो पाप है, वरना नहीं.. लेकिन तुम्हारे होंठों का सेवन बहुत आनन्ददायक होगा.. ऐसे होंठों का रस जिसने नहीं पिया.. उसका जीवन अधूरा है.
रीना अन्दर ही अन्दर ख़ुशी से पागल हुई जा रही थी.. अपनी इतनी तारीफ़ उसने पहले बार सुनने को मिल रही थी.
फिर पण्डित ने हेयर-ड्रायर निकाला. अब पण्डित ड्रायर से रीना के बाल सुखाने लगा. रीना के बाल बहुत लम्बे थे.
पण्डित- रीना झूठ नहीं बोल रहा.. लेकिन तुम्हारे बाल इतने लम्बे और घने हैं कि शिव इनमें खो जाएंगे.
उसने रीना का हेयर-स्टाइल चेंज कर दिया. उसके बाल बहुत पफी हो गए थे. आई-लाइनर, रूज़, लिपस्टिक और ड्रायर लगाने के बाद पण्डित ने रीना को शीशा दिखाया.
रीना को यकीन ही नहीं हुआ कि वह इतनी सुन्दर भी दिख सकती है.
पण्डित ने वाकयी ही रीना का बहुत अच्छा मेकअप किया था. ऐसा मेकअप देख कर रीना खुद में सनसनी सी फ़ील करने लगी. उसे पता ना था कि वो भी इतनी एरोटिक लग सकती है.
पण्डित- मैंने तुम्हारे लिए खास जड़ीबूटियों का तेल बनाया है.. इससे तुम्हारी त्वचा में निखार आयेगा.. तुम्हारी त्वचा बहुत मुलायम हो जाएगी. तुम अपने बदन पे कौन सा तेल लगाती हो?
रीना ‘बदन’ का नाम सुन के थोड़ा शरमा गई.. सनसनी तो वो पहले ही फ़ील कर रही थी.. ‘बदन’ का नाम सुनके वो और अधिक सनसनी सी फ़ील करने लगी.
रीना- जी.. मैं बदन पे कोई तेल नहीं लगाती.
पण्डित- चलो कोई नहीं.. अब ज़रा घुटनों के बल खड़ी हो जाओ.
रीना अपने घुटनों के बल हो गई.
पण्डित- मैं तुम पर तेल लगाऊंगा.. लज्जा ना करना.
रीना- जी पण्डित जी..
रीना ब्लाउज-पेटीकोट में घुटनों पे थी..
पण्डित भी घुटनों पर हो गया. अब वो रीना के पेट पे तेल लगाने लगा. फिर वो रीना के पीछे आ गया.. और रीना की पीठ और कमर पर तेल लगाने लगा.
पण्डित- रीना तुम्हारी कमर कितनी लचीली है.. तेल के बिना भी कितनी चिकनी लगती है.
पण्डित रीना के बिल्कुल पीछे आ गया.. वे दोनों घुटनों पे थे.
रीना के हिप्स और पण्डित के लंड में मुश्किल से 1 इंच का फ़ासला था. पण्डित पीछे से ही रीना के पेट पे तेल लगाने लगा.
वो उसके पेट पे लम्बे लम्बे हाथ फेर रहा था.
पण्डित- रीना.. तुम्हारा बदन तो रेशमी है.. तुम्हारे पेट को हाथ लगाने में कितना आनन्द आता है.. ऐसा लग रहा है कि शनील की रजाई पे हाथ चला रहा हूँ.
पण्डित पीछे से रीना के और पास आ गया.. उसका लंड रीना के चूतड़ों की दरार को एकदम टच कर रहा था.
अब पण्डित रीना की नाभि में उंगली घुमाने का लगा.
पण्डित- तुम्हारी नाभि कितनी चिकनी और गहरी है.. जानती हो यदि शिव ने ऐसी नाभि देख ली तो वह क्या करेगा?
रीना- क्या पण्डित जी.?
पण्डित- सीधा तुम्हारी नाभि में अपनी जीभ डाले रखेगा.. इसे चूसता और चाटता रहेगा.
ये सुन कर रीना मुस्कुराने लगी. शायद हर लड़की या नारी को अपनी तारीफ़ सुनना अच्छा लगता है.. चाहे तारीफ़ झूठी ही क्यों ना हो.
पण्डित एक हाथ रीना के पेट पे फेर रहा था.. और दूसरे हाथ की उंगली रीना की नाभि में घुमा रहा था.
रीना के पेट पे लम्बे लम्बे हाथ मारते वक्त पण्डित दो तीन उंगलियां रीना के पेट से ऊपर उठता हुआ ब्लाउज के अन्दर भी ले जाता.
तीन चार बार उसकी उंगलियां रीना के मम्मों के निचले हिस्से पर टच हुईं.
रीना गरम होती जा रही थी.
पण्डित- रीना.. अब हमारी पूजा आखिरी चरण में है. परम्परा में कुछ आसन बताए गए हैं.
रीना- आसन.. कैसे आसन पण्डित जी?
पण्डित- अपने शरीर को शुद्ध करने के पश्चात जो स्त्री उस आसन में लेट जाती है.. शिव उससे सदा के लिए प्रसन्न हो जाता है.. लेकिन ये आसन तुम्हें एक पण्डित के साथ लेने होंगे.. परन्तु हो सकता है मेरे साथ आसन लेने में तुम्हें लज्जा आए.
रीना- आपके साथ आसन.. मुझे कोई आपत्ति नहीं है..!
पण्डित- तो तुम मेरे साथ आसन लोगी..?
रीना- जी पण्डित जी..!
पण्डित- लेकिन आसन लेने से पहले मुझे भी बदन पे तेल लगाना होगा.. और ये तुम्हें लगाना है.
रीना- जी पण्डित जी..
ये कह कर पण्डित ने तेल की बोतल रीना को दे दी.. और वो दोनों आमने सामने आ गए. दोनों घुटनों के बल खड़े थे.
रीना ने पण्डित की छाती पे तेल लगाना शुरू किया.
पण्डित ने छाती, पेट और अंडरआर्म्स शेव किये थे.. इसलिए उसकी स्किन बिल्कुल कोमल थी.
रीना पहले भी पण्डित के बदन से आकर्षित हो चुकी थी. आज पण्डित के बदन पे तेल लगाने से उसका बदन और चिकना हो गया. वो पण्डित की छाती, पेट, बाँहें और पीठ पर तेल लगाने लगी.
वह खुद के अन्दर से पण्डित के बदन से लिपटना चाह रही थी. रीना भी पण्डित के पीछे आ गई.. और उसकी पीठ पे तेल मलने लगी. फिर पीछे से ही उसके पेट और छाती पर तेल मलने लगी. रीना के चूचे हल्के हल्के पण्डित की पीठ से टच हो रहे थे. रीना ने भी पण्डित की नाभि में दो तीन बार उंगली घुमाई.
पण्डित- रीना.. तुम्हारे हाथों का स्पर्श कितना सुखदायी है.
रीना कहना चाह रही थी कि पण्डित जी.. आपके बदन का स्पर्श भी बहुत सुखदायी है.. लेकिन शर्म की वजह से ना कह पाई.
पण्डित- चलो.. अब आसन लेते हैं.. पहले आसन में हम दोनों को एक दूसरे से पीठ मिला कर बैठना है.
पण्डित और रीना चौकड़ी मार के और एक दूसरे की तरफ़ पीठ कर के बैठ गए.. फिर दोनों पास पास आए जिससे कि दोनों कि पीठ मिल जाएं.
पण्डित की पीठ तो पहले ही नंगी थी क्योंकि उसने सिर्फ लुंगी पहनी थी. रीना ब्लाउज और पेटीकोट में थी.. उसकी लोवर पीठ तो नंगी थी ही.. उसके ब्लाउज के हुक्स भी नहीं थे, इसलिए ऊपर की पीठ भी थोड़ी सी एक्सपोज्ड थी.
दोनों नंगी पीठ से पीठ मिला कर बैठ गए.
पण्डित- रीना.. अब हाथ जोड़ लो..
पण्डित हल्के हल्के रीना की पीठ को अपनी पीठ से रगड़ने लगा. दोनों की पीठ पे तेल लगा था.. इसलिए दोनों की पीठ चिकनी हो रही थी.
पण्डित- रीना.. तुम्हारी पीठ का स्पर्श कितना अच्छा है.. क्या तुमने इससे पहले कभी अपनी नंगी पीठ किसी की पीठ से मिलाई है..?
रीना- नहीं पण्डित जी.. पहली बार मिला रही हूँ.
रीना भी हल्के हल्के पण्डित की पीठ पे अपनी पीठ रगड़ने लगी.
पण्डित- चलो.. अब घुटनों पे खड़े होकर पीठ से पीठ मिलानी है.
दोनों घुटनों के बल हो गए.
एक दूसरे की पीठ से चिपक गए.. इस पोजीशन में सिर्फ पीठ ही नहीं.. दोनों के हिप्स भी चिपक रहे थे.
पण्डित- अब अपनी बाँहें मेरी बांहों में डाल के अपनी तरफ़ हल्के हल्के खींचो.
दोनों एक दूसरे की बांहों में बांहें डाल के खींचने लगे. दोनों की नंगी पीठ और हिप्स एक दूसरे की पीठ और हिप्स से चिपक गईं.
पण्डित अपने हिप्स रीना के कूल्हों पर रगड़ने लगा. रीना भी अपने चूतड़ पण्डित के कूल्हों पर रगड़ने लगी.
रीना की चूत गरम होती जा रही थी.
पण्डित- रीना.. क्या तुम्हें मेरी पीठ का स्पर्श सुखदायी लग रहा है?
रीना शरमाई.. लेकिन कुछ बोल ही पड़ी.
रीना- हाँ पण्डित जी.. आपकी पीठ का स्पर्श बहुत सुखदायी है.
पण्डित- और नीचे का..?
रीना समझ गई पण्डित का इशारा हिप्स की तरफ़ है.
रीना- अ..ह्ह..हाँ पण्डित जी..
दोनों एक दूसरे के हिप्स को रगड़ रहे थे.
पण्डित- रीना.. तुम्हारे चूतड़ भी कितने कोमल लगते हैं कितने सुडौल हैं. मेरे चूतड़ तो थोड़े कठोर हैं.
रीना- पण्डित जी.. आदमियों के थोड़े कठोर ही अच्छे लगते हैं.
पण्डित- अब मैं पेट के बल लेटूंगा.. और तुम मेरे ऊपर पेट के बल लेट जाना.
रीना- जी पण्डित जी.
पण्डित ज़मीन पर पेट के बल लेट गया और रीना पण्डित के ऊपर पेट के बल लेट गई.
रीना के चूचे पण्डित की पीठ पर चिपके हुए थे.
आगे की अन्तर्वासना कहानी भाग 4 में पढें
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