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प्यारे दोस्तो, Sex Stories कैसे हैं आप!
अब मैं अपनी स्टोरी शुरु करता हूं
अगले दिन मेरी बहन मुझ से और मैं बहन से आंख नहीं मिला पा रहे थे.
तब मेरी मम्मी आयीं और बोली- अरे सुबह से उठे हो नहाये नहीं अभी कोई भी चलो सब नहाते हैं!
मैंने और सिस्टर ने कहा- ठीक है।
हम नहाने अंदर चले गये, हमने अपने कपड़े उतार दिये मुझे, मेरी बहन और मम्मी को कोई झिझक नहीं हुई तब मम्मी ने देखा मैं अपनी बहन से बात नहीं कर रहा हूं तो बोली क्या हुआ? बात क्यों नहीं कर रहे हो?
मैंने कहा- कुछ नहीं!
तब मम्मी बोली- कल की वजह से?
मैंने कहा- हाँ!
मम्मी ने कहा- क्या हुआ? इतना समझ कर भी ऐसे हो? चलो नहाओ रोज़ की तरह तब।
मेरी बहन ने मेरे ऊपर पानी डाला और मैंने भी फ़िर साबुन लगाया उसने मेरे पैर और मेरा लंड पकड़ लिया और मस्त हो गई फ़िर मैंने लगाया और उसकी चूचियाँदबाने लगा और अपना लंड उसकी चूत पर लगा दिया.
वो भी एक्साइटेड हो गई और बोली- अब शरम छोड़ो क्या हम नहीं कर सकते चुदाई?
तो मैंने कहा- कर सकते हैं, पर मम्मी से परमीशन ले लो!
तब मम्मी कहा- कर लो… पर कंडोम जरूर लगाना!
मैंने कहा- ठीक है!
तब मैंने पूछा- रात मजा आया था?
तो बोली- बहुत… अब मैं बाहर किसी और से नहीं चुदाई करवाऊँगी! जब घर में 2-2 लंड हैं तो मैंने फ़ैसला कर लिया है शादी के बाद भी पापा से और आप से चुदाई करवाती रहुंगी.
मैंने कहा- मैंने भी फ़ैसला किया है कि मैं भी मम्मी और तुम्हारी शादी के बाद भी करता रहुंगा.
मम्मी ने कहा- तुम्हारे पापा और मैंने भी फ़ैसला किया है, जब चाहो चुदाई करेंगे मिल कर!
तब मैंने अपनी बहन की चूत में तेल लगाया और मम्मी के…
फ़िर पहले मैंने अपनी बहन की चूत में अपना लंड डाला और उसकी चुदाई की और चुदाई से पहले उसने मेरा लंड चूसा और मैंने उसकी चूत को फ़िर मैंने मम्मी की चुदाई की.
मेरी बहन की चूत अभी भी बहुत टाइट थी और एक दम गर्म।
मेरी मम्मी ने कहा कि अब कभी बाहर मत करना किसी और लड़के से और किसी और लड़की से फ़िर थोड़ी देर बाद।
मैं बाहर घूम कर आया और मैंने फ़िर अपनी बहन को बोला की मुझे आज तुम्हारी गांड मारनी है!
वो बोली- दर्द होगा!
तो मैं बोला- आराम से करुंगा दर्द होगा एक बार पर फ़िर आदत हो जायेगी और दर्द भी नहीं होगा मज़ा भी खुब आयेगा.
तब मैंने अपनी बहन की गांड पर तेल लगाया और पहले ऊँगली डाली फ़िर अपना लंड लगा दिया.
वह चिल्ला पड़ी- फ़ट गई मेरी गांड बहुत टाइट है आराम से डालो!
मैंने फ़िर धीरे 2 अंदर डाला और फ़िर खूब चुदाई की फ़िर उसे भी मज़ा आया तब उस रात हमने खूब चुदाई की.
एक दिन हम कहीं घूमने गये हमारे बेग में कपड़े थे पर बाहर बड़ी बारिश हो रही थी हमारे सारे कपड़े भीग गये बेग के भी हमने एक रूम ले लिया हमे 4-5 दिन रुकना था रात को हमने फ़ैसला किया कपड़े तो भीग गये हैं सब बिना कपड़ों के एक ही रज़ाई में सोयेंगे क्योंकि कोई और रास्ता नहीं है.
तब पापा मेरी बहन के साथ मैं मम्मी के साथ सोया और रात भर खूब चुदाई की कभी चूत मारी कभी गांड और फ़िर हमने चेंज किया मम्मी पापा के साथ और मैं मेरी बहन के साथ उसकी गर्म 2 चूत बड़ा मज़ा आया फ़िर मैंने गांड भी मारी और रात को ऐसे ही अंदर डाल कर सो गये हमने वहाँ 5 दिन रुकना था हम बाहर घूमने नहीं गये बस दिन रात चुदाई की। Sex Stories
मैं एक पंजाबन लड़की हूँ Antarvasna और इंग्लैंड में एक साल का स्टडी और साथ दो साल के वर्क परमिट वीसा पर इंग्लैंड आई थी। दो साल के बाद मैंने अपना वीसा एक्सटेंड करवा लिया था। कुल मिला कर तीन साल से इंग्लैंड में हूँ। पहले तो सपने में भी इन्टरनेट पर बैठने की नहीं सोची, यहाँ किसी के पास फालतू समय नहीं, मैं भारत में बहुत इन्टरनेट सर्फिंग करती थी, इसके ज़रिये दो यार बना लिए थे और फिर उनके साथ खूब मस्ती की। वैसे भी कॉलेज में मेरे कई लड़कों से चक्कर थे और मैं एक चालू और जुगाड़ टाइप की लड़की कहलाती थी। लड़कों के साथ पकड़े जाने पर मैं दो बार कॉलेज से सस्पेंड हुई थी- एक बार तो केमिस्ट्री लेब में और दूसरी बार क्लास रूम में आधी छुट्टी टाइम !
मुझे और उन दोनों लड़कों की भी निकाल दिया। उसके बाद मैंने प्राइवेट स्कूल जगन ज्योति पब्लिक स्कूल से मैं हीला वसीला करके पास हुई। मैं बोर्ड की क्लास में थी कामर्स ग्रुप में।
सुपरिटेंडेन्ट लग कर आये सर को अपने हुस्न के जाल में फंसाया। वैसे तो बहुत नक़ल चल रही थी लेकिन सर मुझे अलग बिठा देते और बुक्स, नोट्स दे देते ! पेपर के बाद मुझे सर ही घर छोड़ते थे। पहला पेपर ख़त्म हुआ, उन्होंने कह दिया था कि मेरे साथ चलना ! मैं ही घर छोड़ दूंगा।
मैंने घर में कहा कि पेपर के बाद अगले पेपर की तैयारी के लिए मुझे ट्यूशन पढ़नी पड़ रही है।
किसी ने कुछ नहीं कहा। उसने कार में ही छेड़छाड़ शुरू कर दी। पूरे रास्ते में उसका हाथ में पकड़ सहलाती आई और वो भी बीच बीच में मेरे मम्मे दबाते आये।
मेरे पास समय कम था, मैं उनके घर जाते ही उनसे लिपट गई और वो मुझे बेडरूम में ले गए। जाते ही मैंने अपनी शर्ट उतार दी और फिर स्कर्ट भी उतार दी। मुझे नंगी देख उसका लौड़ा कच्छे को फाड़ने को आ रहा था तो मैंने एक पल में उतार दिया। उनका लौड़ा इतना भयंकर होगा, सोचा नहीं था।
मैं वहीं पाँव के बल बैठ गई और मुहं में ले लिया।
और फिर उन्होंने मुझे एक घंटे में दो बार चोदा। इस तरह मैंने बारहवीं के पेपर दिए और मेरे ७५% नंबर आये।
मेरी एक बहन शादी के बाद अपने पति के साथ बंगलौर चली गई और वो हमें उनके घर की साफ़ सफाई के लिए चाभी दे गई। एक दिन मैंने घर से चोरी छिपे चाभी उठाई और अपने बॉयफ्रेंड को वहीं बुला लिया।
अभी हम पहला राउंड लगा कर साँसे ले रहे थे कि कोई आ गया, झट से कपड़े पहने, दरवाज़ा खोला तो देखा- माँ थीं ! ज़बरदस्त थप्पड़ लगा ! यह तेरा स्कूल है हरामजादी?
उस मुहल्ले में भी मेरी बदनामी देख मेरी इंग्लैंड की फाइल लगा दी गई और कर-करवा कर एक यूनीवर्सिटी में दाखिल करवाया। दो साल का वर्क परमिट मिला और उड़ कर चली गई इंगलैंड।
अपने सारे आशिकों के बारे सोच-सोच मेरा मन सा भर आता ! वहाँ मेरा कोई रिश्तेदार नहीं था। यूनीवर्सिटी में क्लास ज्वाइन कर ली और हॉस्टल में रहने लगी।
एक-दो महीनों में वहां मेरा एक भारतीय लड़के से चक्कर शुरु हो गया।
उसने मुझे कहा- हॉस्टल छोड़ दे और मेरे साथ रेंट पर रह ले ! अपने हिस्से के पैसे देती रहना ! हॉस्टल से कम खर्चा है और साथ में बहुत बढ़िया काम पार्ट-टाइम मिलेगा !
वो जहाँ रहता था उसमें तीन कमरे थे रसोई, आलीशान बाथरूम, वूडन फ्लोर्स, दो कमरों में छः लड़के रहते थे और एक में तीन लड़कियाँ ! एक भारतीय, एक पाकिस्तानी और एक नाइजीरियन।
कमरे बहुत खुले थे। मैंने सोच-विचार करके हॉस्टल छोड़ दिया और मैंने रवि से कहा- आज कॉलेज बंक करके मेरा सामान मेरे साथ शिफ्ट तो करवा दे !
उसने मेरी मदद की, सभी कॉलेज गए हुए थे, हम दोनों अकेले थे, उसको अकेला देख मेरी प्यास जाग उठी। दो महीने से ज्यादा मुझे लौड़ा लिए हो चुके थे।
उसने मुझे हल्के से चूमा और बोला- आई लव यूं रूही !
मैं उठी और उसके सामने खड़ी होकर उसके होंठ चूसने लगी और बोली- आई लव यू टू रवि ! आई लव यू सो सो मच !
कहते-कहते उसके पाँव पर खड़ी हुई और उसके साथ लिपट गई। मेरी चूचियाँ बहुत शानदार हैं, कसी हुई है और मेरे चुचूक बहुत बड़े और लड़के के खींचने के लिए काफी बढ़िया हैं। जानबूझ कर मैं अपने मम्मे उसकी छाती से लगा दबाव दे रही थी, उसका कण्ट्रोल खोने लगा था। मैं उसके लौड़े में आ रहे कसाव को महसूस कर रही थी। बस वो थोड़ा सा डर रहा था कि मैं नाराज़ न हो जाऊँ !
मैंने अपना टॉप खुद उतार फेंका और नीचे से हाथ उसके लौड़े पर फेरने लगी। अब वो खुलने लगा, मैंने उसकी शर्ट उतार दी और अपने मम्मे उसकी घने बालों वाली मर्दानी छाती से घिसने लगी। मैंने अपनी स्कर्ट की साइड जिप खोल दी और बटन भी, जिससे स्कर्ट नीचे घिर गई।
मेरी गोरी जांघें देख वो आपे से बाहर होने लगा। उसके होंठ चूसते हुए साथ-साथ मैंने उसकी बेल्ट खोली, फिर उसका बटन खोला और उसकी जींस उतार फेंकी और नीचे झुकते हुए उसके अंडरवियर से उसका लौड़ा निकाल मुँह में ले लिया। उसका लौड़ा सामान्य आकार का ही था, लेकिन था बहुत दिल खींचने वाला !
उसको कुछ करने का मैंने मौका ही नहीं दिया था, पहल खुद की थी और उसको अपनी मर्ज़ी से आगे बढ़ा भी रही थी। वो हैरान भी था लेकिन खुश भी ! ओह बेबी सक ! सक इट डार्लिंग !
उसका सात इंच का लौड़ा बहुत मज़ेदार था। उसने मुझे बिस्तर पर लेजाकर टांगें खोल पैंटी उतार दी और अपने होंठ मेरी गर्म हो रही चूत पर रख दिए, लगा चाटने !
अह उह अह उह ! मेरे मुँह से अब मस्ती की आवाजें आने लगी थी। मैंने अपनी टांगें उसके कन्धों पर टिका दीं और उसने अपना लौड़ा मेरी चूत में उतार दिया, चूत कसी थी क्यूंकि दो महीनों से भी ज्यादा से उसमे ऊँगली के इलावा कुछ नहीं घुसा था। उसने स्पीड बढ़ा दी। उसका स्टेमिना देख में बहुत खुश थी। फिर दो घंटे अलग अलग मुद्राओं में हमने चुदाई का मजा लिया।
मुझे एक स्टोर में काम मिल गया और मैं पढ़ाई भी करती थी। मेरा रवि के साथ चक्कर था, यह पूरे घर में मालूम था। लेकिन रवि के पक्के दोस्त पंजाब से थे मुझे पर लाइन मारते थे। मैं भी उनको उलझा कर मजे ले रही थी।
रवि मुझसे शादी करना चाहता था, तभी उसकी बहन की शादी पक्की हो गई थी और वो भारत चला गया। उसकी गैर मौजूदगी में मैं उन दोनों के साथ सहमत हो गई। दोनों टैक्सी चलाते थे, मैंने उन्हें कहा कि मेरा लाइसेंस बनवा दो।
इसमें चोखी कमाई थी !
चुदाई के बदले दोनों ने मुझसे लाइसेंस के लिए ड्राइविंग लर्निंग टेस्ट के लिए अप्लाई करवा दिया उसकी फीस खुद भरी। जैसे ही मेरा यह काम करवाया, मैंने उनके साथ किया वादा निभा दिया।
यह वादा कैसे निभा?
यह जानने के लिए अन्तर्वासना के साथ दिल से जुड़ जाओ क्यूंकि मेरा सफ़र कुछ लम्बा है ! एक बार में नहीं समाएगा !
मेरा इन्तज़ार करो ! Antarvasna
आरती मेरे छोटे भाई रौनक की वाइफ़ है। आरती काफ़ी सुंदर महिला Sex stories है। उसका बदन ऊपर वाले ने काफ़ी तसल्ली से तराश कर बनाया है।
मैं सुरेश उसका जेठ हूं। मेरी शादी को दस साल हो चुके हैं।
आरती शुरु से ही मुझे काफ़ी अच्छी लगती थी। मुझसे वो काफ़ी खुली हुई थी।
रौनक एक यूके बेस्ड कम्पनी में सर्विस करता था।
हां बताना तो भूल ही गया आरती का मायका नागपुर में है और हम जालंधर में रहते हैं।
आज से कोई पांच साल पहले की बात है।
हुआ यूं कि शादी के एक साल बाद ही आरती प्रेग्नेंट हो गयी, डिलीवरी के लिये वो अपने मायके गयी हुई थी। सात महीने में प्रीमेच्योर डिलीवरी हो गयी। बच्चा शुरु से ही काफ़ी वीक था। दो हफ़्ते बाद ही बच्चे की डेथ हो गयी।
रौनक तुरंत छुट्टी लेकर नागपुर चला गया। कुछ दिन वहां रह कर वापस आया। वापस अकेला ही आया था। ये तय हुआ था कि आरती की हालत थोड़ी ठीक होने के बाद आयेगी।
एक महीने के बाद जब आरती को वापस लाने की बात आयी तो रौनक को छुट्टी नहीं मिली।
आरती को लेने जाने के लिये रौनक ने मुझे कहा।
तो मैं आरती को लेने ट्रेन से निकला। आरती को वैसे मैंने कभी गलत निगाहों से नहीं देखा था। लेकिन उस यात्रा मे हम दोनों में कुछ ऐसा हो गया कि मेरे सामने हमेशा घूंघट में घूमने वाली आरती बेपर्दा हो गयी।
हमारी टिकट प्रथम क्लास में बुक थी। चार सीटर कूपे में दो सीट पर कोई नहीं आया। हम ट्रेन में चढ़ गये।
गरमी के दिन थे, जब तक ट्रेन स्टेशन से नहीं छूटी तब तक वो मेरे सामने घूंघट में खड़ी थी।
मगर दूसरों के आंखों से ओझल होते ही उसने घूंघट उलट दिया और कहा- अब आप चाहे कुछ भी समझें मैं अकेले में आपसे घूंघट नहीं करूंगी। मुझे आप अच्छे लगते हो आपके सामने तो मैं ऐसी ही रहूंगी।
मैं उसकी बात पर हँस पड़ा- मैं भी घूंघट के समर्थन में कभी नहीं रहा।
मैंने पहली बार उसके बेपर्दा चेहरे को देखा। मैं उसके खूबसूरत चेहरे को देखता ही रह गया।
अचानक मेरे मुंह से निकला- अब घूंघट के पीछे इतना लाजवाब हुश्न छिपा है उसका पता कैसे लगता।
उसने मेरी ओर देखा फ़िर शर्म से लाल हो गयी।
आरती ने बोतल ग्रीन रंग की एक शिफ़ोन की साड़ी पहन रखी थी, ब्लाउज़ भी मैचिंग पहना था।
गर्मी के कारण बात करते हुए साड़ी का आंचल ब्लाउज़ के ऊपर से सरक गया।
तब मैंने जाना कि उसने ब्लाउज़ के अन्दर ब्रा नहीं पहनी हुई है।
उसके स्तन दूध से भरे हुए थे इसलिये काफ़ी बड़े बड़े हो गये थे।
ऊपर का एक हुक टूटा हुआ था इसलिये उसकी आधी छातियां साफ़ दिख रही थी।
पतले ब्लाउज़ में से ब्रा नहीं होने के कारण निप्पल और उसके चारों ओर का काला घेरा साफ़ नजर आ रहा था।
मेरी नजर उसकी छाती से चिपक गयी।
उसने बात करते करते मेरी ओर देखा। मेरी नजरों का अपनी नजरों से पीछा किया और मुझे अपने बाहर छलकते हुए बूब को देखता पाकर शरमा गयी और जल्दी से उसे आंचल से ढक लिया।
हम दोनों बातें करते हुए जा रहे थे।
कुछ देर बाद वो उठकर बाथरूम चली गयी। कुछ देर बाद लौट कर आयी तो उसका चेहरा थोड़ा गम्भीर था।
हम वापस बात करने लगे।
कुछ देर बाद वो वापस उठी और कुछ देर बाद लौट कर आ गयी।
मैंने देखा वो बात करते करते कसमसा रही है। अपने हाथों से अपने ब्रेस्ट को हल्के से दबा रही है।
“कोई प्रोब्लम है क्या?” मैंने पूछा।
“ना… नहीं!”
मैंने उसे असमंजस में देखा।
कुछ देर बाद वो फिर उठी तो मैंने कहा- मुझे बताओ न क्या प्रोब्लम है?
वो झिझकती हुई सी खड़ी रही, फ़िर बिना कुछ बोले बाहर चली गयी, कुछ देर बाद वापस आकर वो सामने बैठ गयी।
“मेरी छातियों में दर्द हो रहा है।” उसने चेहरा ऊपर उठाया तो मैंने देखा उसकी आंखें आंसुओं से छलक रही हैं।
“क्यों क्या हुआ?” मर्द वैसे ही औरतों के मामले में थोड़े नासमझ होते हैं।
मेरी भी समझ में नहीं आया अचानक उसे क्या हो गया।
“जी, वो क्या है म्म … वो मेरी छातियां भारी हो रही हैं।” वो समझ नहीं पा रही थी कि मुझे कैसे समझाये आखिर मैं उसका जेठ था।
“म्मम मेरी छातियों में दूध भर गया है लेकिन निकल नहीं पा रहा है।” उसने नजरें नीची करते हुए कहा।
“बाथरूम जाना है?” मैंने पूछा.
“गयी थी लेकिन वाश-वेसिन बहुत गंदा है इसलिये मैं वापस चली आयी.” उसने कहा- और बाहर के वाश-वेसिन में मुझे शर्म आती है कोई देख ले तो क्या सोचेगा?
“फ़िर क्या किया जाए?” मैं सोचने लगा.
“कुछ ऐसा करें जिससे तुम यहीं अपना दूध खाली कर सको। लेकिन किसमें खाली करोगी? नीचे फ़र्श पर गिरा नहीं सकती और यहां कोई बर्तन भी नहीं है जिसमें दूध निकाल सको!”
उसने झिझकते हुये फ़िर मेरी तरफ़ एक नजर डाल कर अपनी नजरें झुका ली। वो अपने पैर के नखूनों को कुरेदती हुई बोली- अगर आप गलत नहीं समझें तो कुछ कहूं?
“बोलो?”
“आप इन्हें खाली कर दीजिये न!”
“मैं? मैं इन्हें कैसे खाली कर सकता हूं।” मैंने उसकी छातियों को निगाह भर कर देखा।
“आप अगर इस दूध को पी लो…” उसने आगे कुछ नहीं कहा।
मैं उसकी बातों से एकदम भौचक्का रह गया- लेकिन ये कैसे हो सकता है। तुम मेरे छोटे भाई की बीवी हो। मैं तुम्हारे स्तनों में मुंह कैसे लगा सकता हूं?
“जी आप मेरे दर्द को कम कर रहे हैं इसमें गलत क्या है। क्या मेरा आप पर कोई हक नहीं है?” उसने मुझसे कहा- मेरा दर्द से बुरा हाल है और आप सही गलत के बारे में सोच रहे हो? प्लीज़!
मैं चुपचाप बैठा रहा, समझ में नहीं आ रहा था कि क्या कहूं। अपने छोटे भाई की बीवी के निप्पल मुंह में लेकर दूध पीना एक बड़ी बात थी।
आरती ने अपने ब्लाउज़ के सारे बटन खोल दिये- प्लीज़!
उसने फ़िर कहा लेकिन मैं अपनी जगह से नहीं हिला।
“जाइये आपको कुछ भी करने की जरूरत नहीं है। आप अपने रूढ़ीवादी विचारों से घिरे बैठे रहिये चाहे मैं दर्द से मर ही जाऊँ।” कह कर उसने वापस अपने स्तनों को आंचल से ढक लिया और अपने हाथ आंचल के अंदर करके ब्लाउज़ के बटन बंद करने की कोशिश करने लगी लेकिन दर्द से उसके मुंह से चीख निकल गयी- आआहह!
मैंने उसके हाथ थाम कर ब्लाउज़ से बाहर निकाल दिये।
फ़िर एक झटके में उसके आंचल को सीने से हटा दिया।
उसने मेरी तरफ़ देखा।
मैं अपनी सीट से उठ कर केबिन के दरवाजे को लोक किया और उसके बगल में आ गया।
उसने अपने ब्लाउज़ को उतार दिया, उसके नग्न ब्रेस्ट जो कि मेरे भाई की अपनी मिल्कियत थी मेरे सामने मेरे होंठों को छूने के लिये बेताब थे।
मैंने अपनी एक उंगली को उसके एक ब्रेस्ट पर ऊपर से फ़ेरते हुए निप्पल के ऊपर लाया।
मेरी उंगली की छुअन पा कर उसके निप्पल अंगूर की साइज़ के हो गये।
मैं उसकी गोद में सिर रख कर लेट गया। उसके बड़े बड़े दूध से भरे हुए स्तन मेरे चेहरे के ऊपर लटक रहे थे।
उसने मेरे बालों को सहलाते हुए अपने स्तन को नीचे झुकाया।
उसका निप्पल अब मेरे होंठों को छू रहा था।
मैंने जीभ निकाल कर उसके निप्पल को छूआ।
“ऊओफ़्फ़ फ़्फ़ जेठजी अब मत सताओ… प्लीज़ इनका रस चूस लो!” कहकर उसने अपनी छाती को मेरे चेहरे पर टिका दिया।
मैंने अपने होंठ खोल कर सिर्फ़ उसके निप्पल को अपने होंठों में लेकर चूसा।
मीठे दूध की एक तेज़ धार से मेरा मुंह भर गया।
मैंने उसकी आंखों में देखा।
उसकी आंखों में शर्म की परछाई तैर रही थी।
मैंने मुंह में भरे दूध को एक घूंठ में अपने गले के नीचे उतार दिया।
“आआ अहह!” उसने अपने सिर को एक झटका दिया।
मैंने फ़िर उसके निप्पल को जोर से चूसा और एक घूंठ दूध पिया।
मैं उसके दूसरे निप्पल को अपनी उंगलियों से कुरेदने लगा।
“ऊओह हहाआन्न हाआन्नन… जोर से चूसो और जोर से… प्लीज़ मेरे निप्पल को दांतों से दबाओ, काफ़ी खुजली हो रही है।” उसने कहा। वो मेरे बालों में अपनी उंगलियां फ़ेर रही थी।
मैंने दांतों से उसके निप्पल को जोर से दबाया।
वो ‘ऊउईईइ…’ कर उठी, वो अपने ब्रेस्ट को मेरे चेहरे पर दबा रही थी।
उसके हाथ मेरे बालों से होते हुए मेरी गर्दन से आगे बढ़ कर मेरे शर्ट के अन्दर घुस गये।
वो मेरी बालों भरी छाती पर हाथ फ़ेरने लगी।
फ़िर उसने मेरे निप्पल को अपनी उंगलियों से कुरेदा।
“क्या कर रही हो?” मैंने उससे पूछा।
“वही जो तुम कर रहे हो मेरे साथ!” उसने कहा
“क्या कर रहा हूं मैं तुम्हारे साथ?” मैंने उसे छेड़ा.
“दूध पी रहे हो अपने छोटे भाई की बीवी के स्तनों से!”
“काफ़ी मीठा है!”
“धत्त…” कहकर उसने अपने हाथ मेरे शर्ट से निकाल लिये और मेरे चेहरे पर झुक गयी।
इससे उसका निप्पल मेरे मुंह से निकल गया। उसने झुक कर मेरे लिप्स पर अपने लिप्स रख दिये और मेरे होंठों के कोने पर लगे दूध को अपनी जीभ से साफ़ किया।
फ़िर वो अपने हाथों से वापस अपने निप्पल को मेरे लिप्स पर रख दी।
मैंने मुंह को काफ़ी खोल कर निप्पल के साथ उसके बूब का एक पोर्शन भी मुंह में भर लिया।
वापस उसके दूध को चूसने लगा।
कुछ देर बाद उस स्तन से दूध आना कम हो गया तो उसने अपने स्तन को दबा दबा कर जितना हो सकता था दूध निचोड़ कर मेरे मुंह में डाल दिया।
“अब दूसरा!” वो बोली.
मैंने उसके स्तन को मुंह से निकाल दिया फ़िर अपने सिर को दूसरे स्तन के नीचे एडजस्ट किया और उस स्तन को पीने लगा।
उसके हाथ मेरे पूरे बदन पर फ़िर रहे थे।
हम दोनों ही उत्तेजित हो गये थे।
उसने अपना हाथ आगे बढ़ा कर मेरे पैंट की ज़िप पर रख दिया। मेरे लिंग पर कुछ देर हाथ यूं ही रखे रही। फ़िर उसे अपने हाथों से दबा कर उसके साइज़ का जायजा लिया।
“काफ़ी तन रहा है!” उसने शर्माते हुए कहा।
“तुम्हारी जैसी हूर पास इस अन्दाज में बैठी हो तो एक बार तो विश्वामित्र की भी नीयत डोल जाये।”
“म्मम्म अच्छा। और आप? आपके क्या हाल हैं?” उसने मेरे ज़िप की चैन को खोलते हुए पूछा.
“तुम इतने कातिल मूड में हो तो मेरी हालत ठीक कैसे रह सकती है?”
उसने अपना हाथ मेरे ज़िप से अन्दर कर ब्रीफ़ को हटाया और मेरे तने हुए लिंग को निकालते हुए कहा- देखूं तो सही कैसा लगता है दिखने में?
मेरे मोटे लिंग को देख कर खूब खुश हुई- अरे बाप रे कितना बड़ा लिंग है आपका। दीदी कैसे लेती हैं इसे?
“आ जाओ तुम्हें भी दिखा देता हूं कि इसे कैसे लिया जाता है।”
“धत्त मुझे नहीं देखना कुछ… आप बड़े वो हो!” उसने शरमा कर कहा लेकिन उससे हाथ हटाने की कोई जल्दी नहीं की।
“इसे एक बार किस तो करो!” मैंने उसके सिर को पकड़ कर अपने लिंग पर झुकाते हुए कहा।
उसने झिझकते हुए मेरे लिंग पर अपने होंठ टिका दिये।
अब तक उसका दूसरा स्तन भी खाली हो गया था।
उसके झुकने के कारण मेरे मुंह से निप्पल छूट गया।
मैंने उसके सिर को हल्के से दबाया तो उसने अपने होंठों को खोल कर मेरे लिंग को जगह दे दी।
मेरा लिंग उसके मुंह में चला गया।
उसने दो तीन बार मेरे लिंग को अन्दर बाहर किया फ़िर उसे अपने मुंह से निकाल लिया।
“ऐसे नहीं… ऐसे मजा नहीं आ रहा है!”
“हां अब हमें अपने बीच की इन दीवारों को हटा देना चाहिये!” मैंने अपने कपड़ों की तरफ़ इशारा किया।
मैंने उठकर अपने कपड़े उतार दिये फ़िर उसे बाहों से पकड़ कर उठाया। उसकी साड़ी और पेटीकोट को उसके बदन से अलग कर दिया।
अब हम दोनों बिल्कुल नग्न थे।
तभी किसी ने दरवाजे पर नोक किया।
“कौन हो सकता है?” हम दोनों हड़बड़ी में अपने अपने कपड़े एक थैली में भर लिये और आरती बर्थ पर सो गयी।
मैंने उसके नग्न शरीर पर एक चादर डाल दी।
इस बीच दो बार नोक और हुआ।
मैंने दरवाजा खोला बाहर टीटी खड़ा था, उसने अन्दर आकर टिकट चेक किया और कहा- ये दोनों सीट खाली रहेंगी इसलिये आप चाहें तो अन्दर से लोक करके सो सकते हैं.
और बाहर चला गया।
मैंने दरवाजा बंद किया और आरती के बदन से चादर को हटा दिया।
आरती शर्म से अपनी जांघों के जोड़ को और अपनी छातियों को ढकने की कोशिश कर रही थी।
मैंने उसके हाथों को पकड़ कर हटा दिया तो उसने अपने शरीर को सिकोड़ लिया और कहा- प्लीज़ मुझे शर्म आ रही है।
मैं उसके ऊपर चढ़ कर उसकी योनि पर अपने मुंह को रखा।
इससे मेरा लिंग उसके मुंह के ऊपर था।
उसने अपने मुंह और पैरों को खोला। एक साथ उसके मुंह में मेरा लिंग चला गया और उसकी योनि पर मेरे होंठ सट गये।
“आह सुरेश जी क्या कर रहे हो, मेरा बदन जलने लगा है। पंकज ने कभी इस तरह मेरी योनि पर अपनी जीभ नहीं डाली!” उसके पैर छटपटा रहे थे।
उसने अपनी टांगों को हवा में उठा दिया और मेरे सिर को उत्तेजना में अपनी योनि पर दबाने लगी।
मैं उसके मुंह में अपना लिंग अंदर बाहर करने लगा।
मेरे हाथों ने उसकी योनि की फ़ांकों को अलग अलग कर रखा था और मेरी जीभ अंदर घूम रही थी।
वो पूरी तन्मयता से अपने मुंह में मेरे लिंग को जितना हो सकता था उतना अंदर ले रही थी।
काफ़ी देर तक इसी तरह 69 पोज़िशन में एक दूसरे के साथ मुख मैथुन करने के बाद लगभग दोनों एक साथ खल्लास हो गये, उसका मुंह मेरे रस से पूरा भर गया था।
उसके मुंह से चू कर मेरा रस एक पतली धार के रूप में उसके गुलाबी गालों से होता हुआ उसके बालों में जाकर खो रहा था।
मैं उसके शरीर से उठा तो वो भी उठ कर बैठ गयी।
हम दोनों एक दम नग्न थे और दोनों के शरीर पसीने से लथपथ थे। दोनों एक दूसरे से लिपट गये और हमारे होंठ एक दूसरे से ऐसे चिपक गये मानो अब कभी भी न अलग होने की कसम खा ली हो।
कुछ मिनट तक यूं ही एक दूसरे के होंठों को चूमते रहे फ़िर हमारे होंठ एक दूसरे के बदन पर घूमने लगे।
“अब आ जाओ!” मैंने आरती को कहा।
“जेठजी थोड़ा सम्भाल कर… अभी अंदर नाजुक है, आपका बहुत मोटा है, कहीं कोई जख्म न हो जाये।”
“ठीक है। चलो बर्थ पर हाथों और पैरों के बल झुक जाओ। इससे ज्यादा अंदर तक जाता है और दर्द भी कम होता है।”
आरती उठकर बर्थ पर चौपाया हो गयी।
मैं पीछे से उसकी योनि पर अपना लंड सटा कर हल्का सा धक्का मारा, मेरे भाई की बीवी की चूत गीली तो पहले ही हो रही थी, धक्के से मेरे लंड के आगे का टोपा अंदर धंस गया।
एक बच्चा होने के बाद भी उसकी योनि काफ़ी टाइट थी।
वो दर्द से “आआह्हह” कर उठी।
मैं कुछ देर के लिये उसी पोज़ में शांत खड़ा रहा।
कुछ देर बाद जब दर्द कम हुआ तो आरती ने ही अपनी गांड को पीछे धकेला जिससे मेरा लंड पूरा अंदर चला जाये।
“डालो न… रुक क्यों गये।”
“मैंने सोचा तुम्हें दर्द हो रहा है इसलिये।”
“इस दर्द का मजा तो कुछ और ही होता है। आखिर इतना बड़ा है दर्द तो करेगा ही।” उसने कहा।
फ़िर वो भी मेरे धक्कों का साथ देते हुए अपनी कमर को आगे पीछे करने लगी।
मैं पीछे से शुरु शुरु में सम्भल कर धक्का मार रहा था लेकिन कुछ देर के बाद मैं जोर जोर से धक्के मारने लगा।
हर धक्के से उसके दूध भरे स्तन उछल उछल जाते थे।
मैंने उसकी पीठ पर झुकते हुए उसके स्तनो को अपने हाथों से थाम लिया लेकिन मसला नहीं, नहीं तो सारी बर्थ उसके दूध की धार से भीग जाती।
काफ़ी देर तक उसे धक्के मारने के बाद उसने अपने सिर को को जोर जोर से झटकना चालू किया।
“आआह शीईव्व अम्मम आआअह तउम्म इतनए दिन कहा थीए। ऊऊ ओह्हह माआ ईईइ माअर्र र्रर जाऊऊं गीइ। मुझए माअर्रर डालओ मुझीए मसाअल्ल डाअल्लओ” और उसकी योनि में रस की बौछार होने लगी।
कुछ धक्के मारने के बाद मैंने उसे चित लिटा दिया और ऊपर से अब धक्के मारने लगा।
“आअह मेरा गला सूख रहा है।” उसका मुंह खुला हुआ था। और जीभ अंदर बाहर हो रही थी।
मैंने हाथ बढ़ा कर मिनरल वाटर की बोतल उठाई और उसे दो घूंठ पानी पिलाया।
उसने पानी पीकर मेरे होंठों पर एक किस किया।
“चोदो सुरेश चोदो… जी भर कर चोदो मुझे।”
मैं ऊपर से धक्के लगाने लगा।
काफ़ी देर तक धक्के लगाने के बाद मैंने रस में डूबे अपने लिंग को उसकी योनि से निकाला और सामने वाली सीट पर पीठ के बल लेट गया।
“आजा मेरे ऊपर!” मैंने आरती को कहा।
आरती उठ कर मेरे बर्थ पर आ गयी और अपने घुटने मेरी कमर के दोनों ओर रख कर अपनी योनि को मेरे लिंग पर सेट करके धीरे धीरे मेरे लिंग पर बैठ गयी।
अब वो मेरे लिंग की सवारी कर रही थी।
मैंने उसके निप्पल को पकड़ कर अपनी ओर खींचा। तो वो मेरे ऊपर झुक गयी।
मैंने उसके निप्पल को सेट कर के दबाया तो दूध की एक धार मेरे मुंह में गिरी।
अब वो मुझे चोद रही थी और मैं उसका दूध निचोड़ रहा था।
काफ़ी देर तक मुझे चोदने के बाद वो चीखी- सुरेश, मेरे निकलने वाला है। मेरा साथ दो। मुझे भी अपने रस से भिगो दो।
हम दोनों साथ साथ झड़ गये।
काफ़ी देर तक वो मेरे ऊपर लेटी हुई लम्बी लम्बी सांसें लेती रही।
फ़िर जब कुछ नोर्मल हुई तो उठ कर सामने वाली सीट पर लेट गयी।
हम दोनों लगभग पूरे रास्ते नग्न एक दूसरे को प्यार करते रहे।
लेकिन उसने दोबारा मुझे उस दिन और चोदने नहीं दिया. उसकी बच्चेदानी में हल्का हल्का दर्द हो रहा था।
पर उसने मुझे आश्वासन दिया- आज तो मैं आपको और नहीं दे सकूंगी लेकिन दोबारा जब भी मौका मिला तो मैं आपको निचोड़ लूंगी अपने अंदर। और हां अगली बार मेरे पेट में देखते हैं दोनों भाइयों में से किसका बच्चा आता है।
उस यात्रा के दौरान कई बार मैंने उसके दूध की बोतल पर जरूर हाथ साफ़ किया। Sex stories
मेरी शादी हुए दस Sex Stories साल हो गये हैं और हम दोनों का यौन-जीवन बहुत बढ़िया है। पर मेरे मन में इसके अलावा भी कुछ और करने की इच्छा थी।
मैंने रात को सेक्स करते हुए बीवी को बोला- अगर तुम्हें एक ओर लंड मिले तो कैसे लगेगा?
यह सुन कर वह नाराज हो गई और बोली- तुम बस अभी चूत मारो ! मुझे इसमें मजा आ रहा है।
मैंने पूछा- अगर मेरा लंड और बड़ा होता तो कैसा लगता?
तो वो बोली- तब तो मेरी चूत को मजा आ जाता और मैं आसमान में पहुँच जाती।
मैंने पूछा- अगर एक और लंड का इन्तजाम हो जाये जैसे कि डिल्डो?
वो बोली- मजा आ जायेगा।
मैंने बोला- अगर इस डिल्डो की जगह अगर एक आदमी बड़े लौड़े वाला हो तो? हम दोनों मिल कर तुम्हें जम कर चोदेंगे।
तो वह इसे सुन कर हल्का मुस्कराने लगी।
मैंने बोला- तुम्हारा भी मन है !
अब वह खुल कर बोली- हाँ !
वह पूछने लगी- तुम्हारा मन भी किसी और चूत के लिये करता है क्या?
मैं तो इस भी ज्यादा चाहता हूँ !
वह बोली- तो और क्या?
मैंने बोला- दो लण्ड पहले तुम्हें चोदेगे और फिर वही लण्ड मुझे चोदेगा।
यह सुन कर वह बोली- तुम अपनी गाण्ड में लण्ड लोगे?
मैं बोला- हाँ मेरी जान ! दोनों एक लण्ड को चूसेंगे ओर मजे लेंगे।
उसकी आँखों में एक चमक आ ग़ई। अब हम दोनों सेक्स करते हुए यही बात करते और सेक्स का मजा लेते। अब मुझे एक ऐसे आदमी की ख़ोज थी जो मुझे और मेरी बीवी दोनों को चोद सके। हमारी यह ख़ोज भी जल्दी पूरी हो ग़ई। वह तो हमारा पुराना पड़ोसी ही था जिसे मेरी बीवी भी पसंद करती थी। एक दिन मेरी बीवी ने उसे मूतते हुए देखा था जब वह छत पर घूम रही थी। सामान्य अवस्था में भी उसका लण्ड 5 इन्च का था। अब बस उसे पटाना था और घर तक लाना था।
एक दिन मैंने उसे बोला- कभी बैठ कर पैग लगाते हैं।
वो बोला- इस शनिवार को बैठते हैं।
मेरे मन की और मेरी बीवी की इच्छा अब बस पूरी होने वाली थी। अब हम दोनों शनिवार का इन्तज़ार करने लगे।
शनिवार को सुबह ही मेरी बीवी ने मुझे बोला- आज तबीयत से तैयार होने वाली हूँ और मुझे काफ़ी समय लगेगा।
उसने पूरी वैक्सिंग करी और चूत को हेयर रिमूवर से साफ़ किया। मैंने भी अपने सारे झान्ट साफ़ किये और अपनी गाण्ड के बालों को हेयर रिमूवर से साफ़ किया।
शीशे में अपनी गाण्ड देख कर मुझे कुछ होने लगा। फिर मैंने अपनी गाण्ड में खूब तेल लगाया। जिससे कि मेरी गाण्ड चिकनी हो जाये। शाम को वह हमारा पड़ोसी आ गयाँ और हम दोनों इसके लिये पहले से तैयार थे। मैंने एक शॉर्ट और टीशर्ट पहनी थी ओर मेरी बीवी ने एक टॉप जिसका गला बहुत खुला था और इसके साथ उसने एक टाईट कैप्री पहनी थी जिसमें उसके कूल्हे एक दम गोल-गोल नजर आ रहे थे। टॉप के नीचे उसने ब्रा नहीं पहनी थी। उस के 38-सी कप के स्तन एक दम मस्त लग रहे थे और तने हुए चुचूक गजब ढा रहे थे।
जब वह कोल्ड ड्रिंक देने आई तो हम दोनों उसे देख़ते ही रह गये। जैसे ही उसने झुक कर सामान रखा हमारा पड़ोसी मेरी पत्नी के वक्ष देख़ने लगा। यह देख़ कर हम दोनों मुस्करा दिये क्योंकि आज रात वह हम दोनों को खुश करने वाला था। फिर मैंने ड्रिन्क ग्लास में डाला और उसे दिया। मैंने जानबूझ कर उसके पैग बड़े बनाए ओर दो पैग में वह सुरुर में आ गया।
अब हम दोनों अश्लील चुटकले सुनाने लगे।
इतने में रितु (मेरी बीवी) भी वहीं आ गई और हमारे साथ बैठ कर बातें करने लगी। रितु बोली- मुझे भी चुटकले सुनने हैं।
तो मैंने एक चुटकला सुनायाँ जो इस तरह से था :
राम लाल : ठाकुर साहब, ग़ब्बर ने बहू की इज्जत लूट ली है।
ठाकुर : तो मैं क्या करुँ?
रामलाल : बहूरानी पूछ रही है कि बब्बर से बदला लेना है या पेमेन्ट?
इस दौरान जब हम सब हंस रहे थे तो चौधरी (हमारा पड़ोसी) रितु के स्तन और चुचूक देख रह था।
और इस तरह से हमारी अश्लील बातचीत आगे चलने लगी। हम धीरे धीरे पूरी तरह से व्यस्क चुटकले सुनाने लगे।
मैंने चौधरी से पूछा- क्या कभी तुमने भाभी के अलावा किसी और से सेक्स कियाँ है?
वो बोला- मन तो बहुत करता है पर कियाँ नहीं है।
मैंने पूछा- किसी पर तुम्हारा दिल आयाँ है?
तो वो बोला- आप नाराज नहीं होना ! मुझे रितु भाभी बहुत सैक्सी लगती है।
मैंने बोला- तुम्हारी नजरें ही बता रही हैं क्योंकि तुम इसके स्तनों को ही घूरते जा रहे हो।
वो बोला- इनकी गाण्ड तो और भी सेक्सी है। मै तो अपनी बीवी को चोदते हुए भी इनके बारे में सोचते हुए चोदता हूँ।
यह सुन कर रितु हंसने लगी और बोली- तो क्या मैं इतनी सेक्सी हूँ?
तो हम दोनों एक साथ बोले- हाँ।
मैंने पूछा- चौधरी सच में इसे चोदना चाहते हो क्या?
वो बोला- अगर मौका मिले तो जरुर चोदूंगा।
मैंने बोला- आज तुम मेरे सामने ही चोद लो ! बाद में कुछ और हरकत मत कर बैठना।
वो बोला- तुम अपने सामने चोदने दोगे?
मैंने बोला- मैं भी तो चोदूंगा।
यह सब सुन कर रितु भी जोश में आ गई थी। अब हम तीनों अपने बैडरूम की तरफ़ चल दिए। रितु ऐसे मटक कर चल रही थी कि हम दोनों के लण्ड ख़ड़े हो गये। जैसे ही हम बैडरूम में पहुँचे, रितु ने बैड पर लेट कर एक जोरदार अंगड़ाई ली और उसके स्तन एक दम ख़ड़े हो ग़ये। मैंने आगे बढ़कर दोनों कबूतरों को पकड़ लिया और मसलने लगा। वह जोर से आह आह करने लगी और चौधरी अपने लण्ड को पकड़ कर हिलाने लगा।
मैंने रितु का टॉप उतार दिया और दोनों कबूतर बाहर आ गये। चौधरी ने आगे बढ़कर एक चूची को पकड़ लिया और मसलने लगा। मैंने चुचूक को मुँह में ले लिया और चूसने लगा। अब हम दोनों के बीच में रितु थी और हम दोनों उसके स्तनों से ख़ेल रहे थे। उसने हमारे लण्ड पकड़ लिये और हिलाने लगी। अब हमने मिल कर उसे पूरा नंगा कर दिया और खुद भी नंगे हो गये। अब कमरे में एक चूत और दो लण्ड थे जो कि धमाल मचाने वाले थे।
चौधरी ने बोला- मैं तो रितु की चूत को चूसूंगा।
और रितु ने टांगें खोल कर उसे बुलाया। वो उसकी टांगें उठा कर चूत को चाटने लगा और रितु की सिसकारियां निकलने लगी। वह भी उसे जोर से चूसने को कह रही थी और क्यों ना कहे, उसे आज मनचाहा दिलदार मिला था जो उसे चोदने वाला था।
चौधरी भी पूरी जोर से चूत चाटे जा रहा था। उसने दोनों हाथों से चूत को फ़ैला रख़ा था और पूरी जीभ अन्दर पेल रहा था। रितु ने उस के सिर को दोनों हाथों से पकड़ कर चूत पर दबा दिया और वो बोल रही थी- चूसो मेरे जानू और जोर से चूसो !
और इसको सुनकर चौधरी भी पूरा दम लगा कर चूसे जा रहा था। अब चूत में से पानी टपकने लगा था और चपर-चपर की आवाज भी आने लगी थी। मैं बड़े गौर से रितु को चूत चटवाते हुए देख रहा था। वह बहुत सैक्सी लग रही थी।
अब मैंने आगे बढ़कर उसे अपना लण्ड पकड़ा दिया और उसे चूसने को बोला। उसने मेरे लण्ड को मुँह में ले लिया और चूसने लगी। अब कमरे में हमारी सिसकारियाँ निकल रही थी। रितु ने अचानक मेरे लण्ड को चूसना बन्द करके जोर जोर से सिसकारियाँ भरने लगी और चौधरी के सर को जोर से चूत पर दबा दिया। वोह बोलने लगी- चूस जा इस चूत को ! चूस जा ! निकाल दे मेरा पानी ! मजा आ रहा है ! आ रहा है ! और जोर से चूस ! और जोर से।
चौधरी को भी जोश आ गया और पूरी जीभ अन्दर डाल कर चूसने लगा। इतने में रितु ने चूत को उछालना शूरु कर दिया और आअह्ह्ह, औह्हह, आआअह्ह्ह् करने लगी। और फिर थोड़ी ही देर में उसकी चूत ने पानी छोड़ना शुरु कर दिया। चौधरी मजे ले ले कर चूत का पानी पीने लग़ा। रितु की भी सिसकारियाँ तेज होती जा रही थी और फिर वह प्यार से चौधरी के सर पर हाथ फेरने लगी। अब
मैंने चौधरी को बोला- बहुत हो गया चूसना ! अब जरा इस चूत को चोदना शुरु करो।
वह बोला- इसके लिए तो मैं कब से तड़प रहा हूँ।
फिर वह रितु की टांगों के बीच आ गया और अपने लण्ड को रितु की चूत पर फ़ेरने लगा। रितु ने भी दोनों टांगें फैला दी ताकि वह आराम से उसे चोद सके। अब चौधरी ने लण्ड को चूत पर रख कर एक जोरदार धक्का लगाया तो उस का आठ इन्च का लण्ड पूरा अन्दर तक घुस गया और रितु जोर से बोली- फ़ाड दी मेरी भैन चोद !
यह सुन कर चौधरी को और जोश आ गया और उसने एक बार फिर लण्ड को बाहर निकाल कर पूरे जोर से पूरा लण्ड अन्दर पेल दिया। इस बार रितु ने बोला- मजा आ गया मेरी जान ! और पेलो जोर से पेलो।
मैं रितु को इस तरह से चुदते देख कर जोश से भर गया और बोला- आज इसकी चूत को फ़ाड दो और खूब दम लगा कर चोदो।
मैंने फिर से अपने लण्ड को रितु के मुँह में डाल दिया।
अब वह मेरे लण्ड को चूस रही थी और उधर से उसकी चूत में चौधरी लण्ड पेले जा रहा था। मैं दोनों हाथों से उसकी दोनों चूचियों को मसल रहा था।।
थोड़ी देर जब चौधरी ने चोद लिया तो मैंने बोला- तुम इसे अपना लण्ड चुसाओ, मैं तब तक चूत का स्वाद लेता हूँ।
अब हम दोनों ने पोजीशन बदल ली। मैंने चूत में अपना लण्ड डाल दिया और चौधरी ने अपना लण्ड रितु के मुँह में दे दिया। बड़ा लण्ड देख कर वह भी उसे जोश से चाटने लगी। चौधरी का लण्ड किसी ने पहली बार चूसा था और वह हवा में उड़ने लगा। उसके मुँह से आवाजें आने लगी- वाह मेरी जान, आज पहली बार इस लण्ड को किसी ने चूसा है, मेरी बीवी तो चूसती ही नहीं है, आह्ह्ह्ह, आह्ह्ह्ह्ह, वाह्ह्ह्ह्ह्ह, हो हो !
और रितु ने उसे और जोर से चूसना शुरु कर दिया। यह सब देख कर मैंने भी चूत को जोर से चोदना शुरु कर दिया। इधर रितु की चूत से पानी निकलने लगा और चूत में चिकनाई और बढ़ गई, इसके साथ ही फच फच की आवाज भी आनी शुरु हो गई। अब मैंने दोनों हाथों से उसकी चूचियों को पकड़ रखा था और चोदे जा रहा था। जबकि चौधरी ने उसके सिर को पकड़ कर मुँह को चोदना शुरु कर दिया।
मैंने चौधरी को बोला- तुम इसकी चूत में आ जाओ और मैं थोड़ी देर तुम लोगों को देखता हूँ।
चौधरी ने फिर से चूत पर मोर्चा जमा लिया और उसकी दोनों टागों को कन्धे पर रख लिया। दोनों हाथों से उसकी चूचियों को पकड़ कर जोर जोर से चोदने लगा। रितु भी नीचे से गाण्ड उठा उठा कर साथ दे रही थी।
अब दोनों के मुँह से आवाजें आने लगी- आऽऽ चोदो ! और जोर से चोदो ! फाड़ दो इस चूत को ! वह भी बोल रहा था- आज इस चूत का तो मैं बैन्ड बजा दूंगा।
और फिर रितु बोलने लगी- मैं झड़ने वाली हूँ, आईईईई, आह्ह्ह्ह्ह, और और और आह्ह्ह्ह्ह आईईईईई !
और फिर उसने कस कर चौधरी को पकड़ लिया। चौधरी अभी भी उसे पूरा जोर लगा कर चोदे जा रहा था। इतने में चौधरी की आवाज भी आने लगी- मैं खाली हो रहा हूँ, मेरा छुटने वाला है।
और रितु ने उसे और कस कर पकड़ लिया और फिर चौधरी भी उस से चिपक गया और हांफने लगा। उसके लण्ड ने रितु की चूत में अपना माल छोड़ दिया जो चूत से रिस कर बिस्तर पर गिरने लगा। अब तक मैं अपने लण्ड को सहला रहा था और ख़डा हो गया और बोला- अब इस चूत का पानी मैं निकालता हूँ।
चौधरी बोला- मैं इन मस्त चूचियों से दूध निकालता हूँ।
अब चौधरी ने एक चूची को मुँह में लेकर चूसना शुरु कर दिया और दूसरे हाथ से दूसरी चूची को मसलने लगा। रितु ने एक हाथ से उसके लण्ड को हिलाना शुरु कर दिया।मैंने रितु की चूत में अपना लण्ड डाल कर अन्दर-बाहर करना शुरु कर दिया। फिर से कमरे में चूत से फच फच की आवाज आने लगी और माहौल और सैक्सी हो गया। कुछ ही देर में चौधरी का लण्ड फिर से खड़ा हो गया।
मैं जोर जोर से रितु को चोद रहा था पर मेरा ध्यान चौधरी के लण्ड पर था क्योंकि आज मुझे भी तो अपनी गाण्ड का उदघाटन करवाना था। चौधरी से अपने लण्ड का ताव सहा नहीं जा रहा था और मेरी चिकनी गाण्ड देख कर वो भी उत्तेजित हो रहा था जिसे मैंने सुबह ही साफ किया था और उसका परिणाम आने ही वाला था।
अब चौधरी ने उठ कर मेरी गाण्ड पर हाथ फेरना शुरु कर दिया जो कि मुझे भी उत्तेजित कर रहा था। इतने में वह मेरे पीछे आ गया और अपनी दो अन्गुलियाँ मेरी गाण्ड में पेल दी। मेरी गाण्ड में जोर से दर्द हुआ, मैं बोला- भैन्चोद ! तेल तो लगा ले।
यह सुन कर चौधरी ने ड्रैसिंग टेबल से तेल की शीशी उठाई और बहुत सा तेल लेकर मेरी गाण्ड में लगाने लगा। अब उसने दो अन्गुलियाँ मेरी गाण्ड में डालनी शुरु कर दी और मुझे अजीब सा मजा आने लगा। इधर चूत मारने का और उधर गाण्ड में अन्गुलियाँ, इससे ऊपर की थोड़ी ही देर में एक आठ इन्च लम्बा लण्ड मेरी गाण्ड में घुसने वाला है।
अब रितु फिर से उह आह करने लगी थी।
अब चौधरी ने बोला- मैं तुम्हारी ग़ान्ड मारने वाला हूँ, तैयार हो जाओ।
उसने मेरी कमर को पकड़ लिया और मेरी गाण्ड पर अपना लण्ड रगड़ने लगा। मैंने रितु को चोदना बन्द कर दिया ताकि वह अपना लण्ड मेरी गाण्ड में डाल सके। उसने फिर से बहुत सा तेल अपने लण्ड पर लगाया और मेरी कमर पकड़ कर लण्ड को गाण्ड के छेद पर लगाया। मेरी गाण्ड में झुरझुरी सी दौड़ गई। अब उसने एक जोर का धक्का लगाया और उसका दो इन्च लण्ड मेरी गाण्ड में घुस गया।
मेरी गाण्ड में लण्ड घुसते ही दर्द हुआ पर मै आगे का मजा सोच कर और उत्तेजित हो गया और इतनी ही देर में दूसरा झटका लगा और उसका पूरा लण्ड मेरी गाण्ड में घुस गया और मेरा पूरा लण्ड रितु की चूत में। और इस के साथ ही हम तीनों की आवाज आई।
अब मै सैन्डविच की तरह से था। मैं रितु की चूत मार रहा था और चौधरी मेरी गाण्ड मार रहा था। पहले चौधरी मुझे धक्का मारता और मैं रितु की चूत में लण्ड पेलता।
इधर रितु कह रही थी- चोदो !
और उधर मै कह रहा था- चोदो।
चौधरी तो मेरी गाण्ड मारते हुए मजे से दीवाना हुआ जा रहा था और कह रहा था- क्या टाइट गाण्ड है !
मेरे को भी मजा आने लगा था और फिर चौधरी ने एक दम रफ़्तार बढ़ा दी। लगता था कि टाइट गाण्ड की वजह से वह जल्दी ही खाली होने वाला था। मैंने भी अपने धक्कों की रफ़्तार बढ़ा दी। अब रितु, मैं और चौधरी एक साथ ही झड़ने वाले थे और वह क्षण शीघ्र ही आ गया जब हम तीनों ने बोलना शुरु किया- मैं झड़ने वाला हूँ ! और तीनों कि रफ़्तार तेज हो गई।
इसके साथ ही चौधरी ने मेरी गाण्ड में अपना वीर्य छोड दिया और उसके गर्म गर्म वीर्य को महसूस करते ही मैंने भी रितु की चूत में अपना वीर्य छोड़ दिया। रितु पहले ही झड़ना शुरू हो चुकी थी। मैंने कस कर रितु को पकड लिया और चौधरी ने मुझे।
तीनो ही हांफ़ रहे थे और एक जोरदार चुदाई से तीनों के चेहरे चमक रहे थे।
थोड़ी देर बाद ही हम तीनों फिर से एक और चुदाई के लिये तैयार थे। अब मै नीचे लेटा और मेरे लण्ड पर रितु मेरी तरफ मुँह करके अपनी चूत ख़ोल कर बैठ गई। फिर मैंने उसे अपनी तरफ झुका लिया जिससे उसकी गाण्ड ऊपर की तरफ निकल आई। चौधरी ने फिर से अपने लण्ड को रितु की गाण्ड में डालने की तैयारी कर ली।
उसने अपने लण्ड पर तेल लगाया और अपनी अन्गुलियों पर तेल लगा कर रितु की गाण्ड में पेल दी और वह जैसे ही आगे हुई, मेरा लण्ड उसकी चूत में पूरा घुस गया। चौधरी ने अपने लण्ड को रितु की गाण्ड पर टिकाया और जोर से धक्का मारा। उसका लण्ड आधे तक गाण्ड में घुस गया और वह चिल्लाने लगी।
चौधरी ने हाथ आगे बढ़ा कर उसके दोनों स्तन पकड़ लिये और मसलने लगा। मैं उसके होठों को चूस रहा था। अब चौधरी ने एक और जोर से धक्का मारा और इसके साथ ही पूरा लण्ड अन्दर तक पेल दिया।
अब हमने मिल कर चोदना शुरु कर दिया और एक बार फिर से रितु की सुख भरी सिसकारियाँ कमरे में गूंजने लगी। इस बार हमने पाँच मिनट तक ऐसे ही चोदा और फिर हमने अपनी पोजीशन बदल ली।
अब चौधरी चूत में लण्ड घुसा रहा था तो मै गाण्ड की मरम्मत कर रहा था।
और फिर कुछ ही देर में रितु ने बोलना शुरु किया- आज चोद डालो इस चूत को और गाण्ड को ! मजे आ गये ! जोर से चोदो ! और जोर से !
इतना सुनते ही हम दोनों की स्पीड बढ़ गई। और हम जोर जोर से चोदने लगे।
रितु की सिसकारियाँ निकलने लगी और वह और बोलने लगी- और तेज ! तेज-तेज !
इधर चूत और गाण्ड दोनों से ही आवाज आ रही थी- फ़्च, फ़च, फ़च !
और इसके साथ ही रितु ने पानी छोड़ना शुरू कर दिया और हमने अपने धक्को की रफ्तार और तेज कर दी ताकि हम भी एक साथ ही खाली हो जायें। अब मेरे चिल्लाने की बारी थी, आह निकला, आह निकला !
इतने में चौधरी की भी आवाज आई- मेरा भी निकला !
और हम दोनों ने अपना वीर्य छोड़ना शुरू कर दिया। मैंने रितु की गाण्ड में सारा वीर्य छोड़ दिया और चौधरी ने चूत में।
तीनों के चेहरे पर सन्तोष झलक रहा था और इस तरह हम सबकी इच्छा पूरी हो गई। Sex Stories
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