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मेरी दीदी Sex Stories का नाम सपना है, वो मुझसे तीन साल बड़ी है, उनका रंग गोरा चिट्टा है और हाँ उनके होंटों के नीचे एक काला तिल है, जिसकी वजह से वो बहुत सेक्सी लगती है! उनकी शादी एक अनिवासी भारतीय लड़के से यानि कि मेरे जीजा जी से हो गई, जो कि दुबई में नौकरी करते हैं! दीदी उन्हीं के साथ रहती है। वैसे तो वो दोनों बहुत खुश रहते हैं मगर शादी के दो साल गुजर जाने के बाद भी उनकी कोई औलाद न होने से दीदी उदास सी रहती है!
मेरा नाम राज है मैं भी एक अनिवासी भारतीय हूँ और कनाडा में एक कम्पनी में जॉब करता हूँ। यहाँ आने से पहले मेरे माँ-बाप का स्वर्गवास हो गया था इसलिए दीदी, जीजाजी के सिवा मेरा और कोई नहीं है!
एक दिन मैं अपने जीजा जी के साथ फ़ोन पर बात कर रहा था तो बातों ही बातों में मैंने जीजा जी को दीदी के साथ अपने पास घूमने आने का निमंत्रण दे दिया। तभी जीजाजी ने यह कह कर टाल दिया कि उनको अभी छुट्टी नहीं मिल सकती, उन पर कम्पनी के काम का बहुत भार है।
थोड़ा रुकने के बाद जीजा जी ने कहा- मैं कुछ दिनों के लिए तेरी दीदी को तेरे पास भेज देता हूँ, उसकी नौकरी भी छुट गई है, सारे दिन भर घर में बोर हो जाती है, वो पहले से काफी उदास सी रहने लगी है, कुछ दिन पहले तुझे ही याद कर रही थी, शायद वो तुझको देखना-मिलना चाहती है। वैसे भी राखी का त्यौहार नजदीक आ रहा है, दोनों भाई-बहन मिल भी लेना और उसको कहीं घुमा भी देना, शायद इसी बहाने उसका मन ही बहल जाए!
मैंने कहा- ठीक है जीजा जी! जैसा आप कहें!
और कुछ दिन बाद वो दिन भी आ गया जब दीदी मेरे पास आने के लिए दुबई से रवाना हुई। मैं भी दीदी को लेने के लिए ठीक समय पर एयरपोर्ट पहुँच चुका था। कुछ समय बाद दीदी की फ्लाईट लैण्ड होने की घोषणा हुई। मैंने अपनी आँखें एग्जिट-गेट पर जमा दी।
कुछ समय बाद मैंने दीदी को लोगों के साथ बाहर आते देखा तो मैं दीदी को देखता ही रह गया। सच क्या लग रही थी दीदी! मैंने कभी भी दीदी को इस रूप में नहीं देखा था। उन्होंने ऊँची ऐड़ी की सेंडल पहनी हुई थी और काले रंग की फेंसी साड़ी और हाफ कट वाला ब्लैक ब्लाउज़ पहना हुआ था। ब्लाउज़ का गला काफी खुला और बड़ा होने से उनके आधे नंगे स्तन ऊपर से साफ दिखाई दे रहे थे। उनके वक्ष के ऊपर एक काला तिल था जो अलग ही चमक रहा था जैसे दूध में मक्खी!
तभी दीदी की नज़र मुझ पर पड़ी तो मैंने हाथ हिला कर उनको अपने होने का इशारा किया और दीदी ने एक हल्की सी मुस्कान देकर मेरी ओर बढ़ी और मेरे नजदीक आकर मेरे गले लगने लगी। मैंने भी मोके का फ़ायदा उठाया और दीदी की नंगी गोरी चिकनी कमर को अपने दोनों हाथों से सहलाते हुए जकड़ लिया। वहाँ खड़े सारे लोग शायद यही सोच रहे होंगे कि हम पति पत्नी हैं। फिर मैंने दीदी का सामान उठाया और हम दोनों घर की ओर चल दिए!
घर पहुँच कर दीदी फ्रेश होने के लिए बाथरूम में चली गई ( क्यूँकि गर्मी के दिन थे और मेरी दीदी को बहुत पसीना आता है और वो तो उस दिन पसीने से बहुत भीग चुकी थी) मैंने दीदी जी का सामान सेट कर दिया और थोड़ी देर बाद दीदी भी फ्रेश हो कर बाथरूम से बाहर आ गई!
जैसे ही मैंने उनको देखा तो मेरी आंखें फटी की फटी रह गई। दीदी सिर्फ पेटीकोट-ब्लाउज़ में ही बाथरूम से बाहर आ गई थी। काले पेटीकोट और ब्लाउज में उनका गोरा-गोरा अंग एकदम सोने की तरह चमक रहा था। दीदी को देख कर मेरे अंदर थोड़ी अजीब सी घबराहट होनी शुरु हो गई। मैं दीदी को न चाह कर भी देखना चाहता था! मैं कभी दीदी के वक्ष के ऊपर विराजमान काले तिल को देखता तो कभी उनकी नंगी कमर को, तो कभी उनके नाड़े वाले नंगे हिस्से को!
तभी दीदी ने मेरे पास आकर मेरे सर में प्यार से हाथ फेर कर पूछा- किया हुआ भईया? कहाँ खो गए?
मैं थोड़ा घबरा कर और शरमा कर बोला- कुछ नहीं दीदी! बस मैं… आप काले कपड़ों में बहुत सुंदर लगती हो!
दीदी समझ गई कि मैं क्यों ऐसे बोल रहा हूँ। दीदी शरमा कर बोली- भाई मैं क्या करूं, बहुत गर्मी है और साड़ी में बहुत घुटन हो रही थी, इसलिए मैंने साड़ी अलग निकाल दी!
मैं बोला- दीदी कोई बात नहीं, हम दोनों के सिवा और कोई भी नहीं है यहाँ पर! और मैं बिल्कुल फ्रैंक लड़का हूँ, तुम निश्चिंत रहो, मैं तालिबानी जैसा भी नहीं हूँ कि जो अपनी इतनी सुन्दर दीदी को बुरके में पसंद करे!
दीदी हंस दी और बोली- भईया, तू तो बहुत शैतान हो गया है! चल जल्दी से तू भी नहा धो ले! आज राखी है राखी नहीं बंधवानी क्या!
फिर मैं भी बाथरूम मैं नहाने चले गया। बाथरूम में बहुत ही अच्छी खुशबू आ रही थी। आज से पहले कभी ऐसी खुशबू बाथरूम में नहीं थी! मैं समझ गया कि यह खुशबू दीदी के बदन की है! आज मैं इस खुशबू में समां जाना चाहता था और मैंने पहली बार अपनी दीदी के बारे में कर उनके नाम की मुठ मार दी। इसका एक अलग ही आनंद आया और जब मैं बाथरूम से नहा धो कर बाहर आया तो दीदी बोली- क्या बात है, बड़ी देर लगा दी तूने?
मैं बोला- क्या करूँ दीदी जी! आज मेरा तो बाथरूम से बाहर आने का मन ही नहीं कर रहा था!
दीदी बोली- क्यों?
मैं चुप रहा और मैंने दीदी को एक स्माइल दी! दीदी भी शायद मेरा इशारा समझ गई थी और वो शरमाकर बोली- लगता है अब जल्द से जल्द तेरे लिए एक लड़की तलाशनी पड़ेगी! बोल मेरे राजा भइया, तुझको कैसी लड़की पसंद है, मैं अपने राजा भइया के लिए वैसी ही लड़की लाऊँगी!
मैं दीदी से बोला- सच!
दीदी हँस कर बोली- मुच!
मैंने तुंरत ही दीदी का हाथ पकड़ा और उनको शीशे के आगे ले जा कर बोला- मुझे ऐसी लड़की चाहिए!
दीदी थोड़ी शरमा कर बोली- पागल ऐसी लड़की लायेगा तो सुहागरात के बदले रक्षा बंधन मनाना पड़ेगा तुझे!
और जोर जोर से हँसने लगी!
मैं दीदी के पीछे की तरफ खड़ा था और दीदी मेरे आगे थी। हम दोनों भाई बहन एक दूसरे को शीशे में देख कर बातें कर रहे थे!
मैं बोला- दीदी अगर आप जैसी सुंदर लड़की मुझे मिल जाए तो मैं उससे राखी भी बंधवाने के लिए तैयार हूँ!
दीदी बोली- ऐसा क्या है मुझमें जो तू अपनी दीदी का इतना दीवाना हुआ पड़ा है! क्या देखा तूने मुझमें?
मैं बोला- दीदी आप गुस्सा तो नहीं होंगी ना!
दीदी बोली- मैं आज तक अपने राजा भइया से गुस्सा हुई हूँ जो अब होंऊगी!
मैं बोला- दीदी! मैं सच में तुम्हारा दीवाना हूँ! जब से मैंने तुम्हें एयर पोर्ट पर देखा है, मैं तुम्हारा दीवाना हो गया हूँ। पता नहीं क्यों मैं तुम्हें पाना चाहता हूँ, तुम्हें छूना चाहता हूँ, तुम्हें तुम्हारे नाज़ुक होटों के नीचे काले तिल का अहसास दिलाना चाहता हूँ!
और मैंने आव देखा न ताव! और दीदी की गर्दन के नीचे प्यार से एक किस कर दिया। दीदी मुझे शीशे में देख रही थी और वो वैसे ही खड़े रह कर मेरे गाल पर प्यार से हाथ फेरने लगी! मैंने भी दीदी को अपने दोनों हाथों से आगे से जकड़ लिया और दीदी ने अपनी दोनों आँखें बंद कर ली जिससे मेरा थोड़ा और साहस बढ़ा और दीदी के कान में मैंने हल्की सी आवाज में ‘ आई लव यू दीदी ‘ बोल दिया और बोला- अगर आप मेरी बहन न होती तो मैं आप को ज़रूर प्रपोज़ करता! आप कितनी सुंदर हो! मैंने आप सी सुंदर कोई लड़की नहीं देखी! हम भाई बहन क्यों हैं?
दीदी ने अभी तक अपनी आँखें बंद कर रखी थी क्योंकि मैं उनके पेट पर, नाभि पर हल्का-हल्का हाथ फेर रहा था। अचानक मैंने दीदी के पेटीकोट के नाड़े की तरफ हाथ बढ़ाया तो दीदी ने मेरा हाथ पकड़ लिया और गर्दन हिला कर मना करने लगी और बोली- भईया मैं तुम्हारी बहन हूँ!
मैंने बोला- मैं जानता हूँ! आज मैं सारे रिश्तों को भुला देना चाहता हूँ, तुम मेरी हो और मैं आज अपनी बहन की बाँहों मैं समा जाना चाहता हूँ!
दीदी बोली- किसी को मालूम चल गया तो समाज में हमारी थू-थू हो जायेगी!
मैंने कहा- हमें समाज देखने थोड़े ना आ रहा है!
दीदी चुप हो गई और कुछ सोचने के बाद मेरे से लिपट गई और रोने लगी।
मैंने पूछा- दीदी क्या हुआ? क्यों रो रही हो?
तो बोली- मैं बहुत प्यासी हूँ! तेरे जीजाजी से मुझे वो खुशी नहीं मिली जो हर औरत को शादी के बाद अपने पति से मिलती है!
मैं बोला- दीदी साफ साफ बताओ ना! मैं समझ नहीं पा रहा हूँ!
वो बोली- तेरे जीजा जी मर्द नहीं हैं!
यह सुनकर मुझे तो पसीना आ गया और मैं अंदर ही अंदर सोचने लगा- यानि कि दीदी अभी कुँवारी हैं और उनकी सील भी नहीं टूटी!
मैंने दीदी के आँसू को अपनी जीभ से चाट कर साफ किया और बोला- दीदी! तुम चिंता मत करो मैं हूँ ना! तुम बस मुझको यह बताओ कि तुम मुझको पसंद करती हो?
दीदी बोली- जान से भी ज्यादा!
क्या तुम मुझे भाई की जगह अपना पति मानोगी? मैं तुम्हें हर वो खुशी दूंगा जो तुम चाहती हो!
दीदी ने फ़ौरन मेरे होटों पर किस कर दिया और बोली- आज से तुम ही मेरे पति हो! मेरा तन-मन सब तुम्हारा है! जो तुम बोलोगे, वो मैं करूंगी!
मैंने दीदी को बोला- आज मैं तुमसे शादी करूंगा!
यह सुन कर दीदी जल्दी से सिंदूर और अपना मंगल सूत्र ले कर मेरे पास आ गई। मैंने उनकी मांग भर कर मंगल सूत्र उनके गले में पहना दिया।
दीदी बोली- भइया! मैं अपने कमरे में जा रही हूँ, तुम थोड़ी देर बाद कमरे के अंदर आ जाना! मैं तुम्हारा इन्तजार करूंगी!
और जब मैं थोड़ी देर बाद दीदी के कमरे में गया तो दीदी सज-संवर के अपने शादी के जोड़े में घूँघट ओढ़े पलंग पर बैठी मेरा बेसबरी से इंतजार कर रही थी। मैं दीदी के पास गया और प्यार से उनका घूँघट उठाया और उनकी ठुडी को अपने हाथ से ऊपर उठाने के साथ ही उनके होटों का चुम्बन ले कर बोला- ओह दीदी! आई लव यू! मैंने आज तक तुम जैसी सेक्सी लड़की नहीं देखी!
और उनके होटों के नीचे वाले काले तिल को अपने दाँतों में बुरी तरह दबोच लिया और चूसने लगा। दीदी को दर्द हो रहा था मगर दीदी मुझ से भी ज्यादा प्यासी थी, उसे दर्द में भी मज़ा आ रहा था।
तभी मैंने दीदी के ब्लाउज़ को अपने दोनों हाथों से फाड़ दिया और उनके गोरे गोरे आम के जैसे बूब्स बाहर आ गये। मैं उनको चूसने लगा। थोड़ी देर बाद दीदी ने मेरी पैन्ट की ज़िप खोल कर मेरे लंड को बाहर निकाला और अपने कोमल गोरे हाथों से उसे सहलाने लगी। कुछ देर बाद जब मेरा लंड लौड़ा बन गया तो उसको अपनी जीभ से चाटने, सहलाने लगी और होटों से रगड़ कर उसे खड़ा कर दिया!
हम दोनों भाई बहन नंगे थे, मैंने दीदी को बिस्तर में लिटा दिया और उनकी चूत को अपनी जीभ से चाटने लगा।
दीदी ओह माय भईया डार्लिंग! आई लव यू! बोल रही थी।
मैंने अपनी दीदी को गीध की तरह नौचना शुरु कर दिया। कुछ देर बाद जब मैंने अपनी बहन की चूत में अपना लौड़ा डाला तो दीदी ने उई माँ! बोल कर मुझको जोर से जकड़ लिया और मुझको फ्रेंच किस करने लगी और अपने दोनों हाथों को मेरे चूतड़ों पर रख कर भइया और जोर से! और जोर से! बोलने लगी।
कुछ देर बाद मैंने दीदी को डौगी स्टाइल में चोदना शुरू किया। दीदी के गद्देदार चूतड़ को देख मैं ललचा गया और उनके चूतड़ चाटने लगा। दीदी को मैंने सारी रात चोदा!
सुबह जब मैं जागा तो दीदी मेरे लंड को चूस रही थी, मुझको प्यासी आँखों से देख रही थी और मेरा लौड़ा खड़ा करके उसके ऊपर बैठ गई और फिर दुबारा से मैंने दीदी को चोदना शुरु कर दिया।
हम दोनों चार साल बीत जाने के बाद भी हमेशा एक दूसरे के साथ सेक्स में डूबे रहते हैं।
सच अपनी बहन के साथ कितना मजा आता है, मैं क्या बताऊँ!
अब हम दोनों भाई बहन एक पति पत्नी की तरह जिन्दगी जी रहे हैं। मेरी दीदी से मेरी एक लड़की हुई है…! Sex Stories
मेरे घर कुछ दिन Sex Stories पहले मेरी छोटी दादी (पिताजी की चाची) आई। उनके साथ कोई उनके मायके की भतीजी थी। उन्हें मेरे ही कमरे में ठहराया गया।
मेरी पारखी नज़रों ने मुझे बताया कि चांस मारा जा सकता है। फ़िर मुझे पता चला कि उनके पति स्वर्गवासी हैं, तो मैंने कुछ भी ऐसा-वैसा करने का इरादा छोड़ दिया।
पर उन्होंने मेरा हौसला खाने के वक्त बढ़ाया। मेज़ के नीचे बार-बार मेरा पैर अपने पैर से रगड़ती रहीं।
फ़िर मैंने ख्याल किया उनके नीचे गले वाले ब्लाउज से बाहर झांकते स्तनों का। कुछ नहीं तो 36 सी आकार रहा होगा।
मेरा तो कलुआ खुशी से उठ खड़ा हुआ जब पता चला कि उन्हें मेरे कमरे में ठहराया गया है।
वे मेरे बिस्तर पर चैन से सो रहे थे। दादी साइड में थी। सीमा – उनका नाम था- किनारे पर इस तरफ थी। और मैं अपने सिस्टम पर प्रोग्रामिंग का अभ्यास कर रहा था। पर दिमाग अलग ही प्रोग्रामिंग में लगा था।
जब मैंने देख लिया कि अब सब गहरी नींद में हैं तो उठा। अभी मुझे चेक करना था कि क्या सही में सीमाजी और कितनी हद तक एक्सेसिबल हैं।
मैंने कम्बल ओढ़ाने के बहाने उनके एक बेल को मसला। उनकी आंख झट से खुली। मैं डरा, पर उनकी मुस्कान ने मुझे ग्रीन सिग्नल दे दिया।
फिर दादी को कम्बल ओढ़ाने के बाद मैंने उनके कम्बल को पैर से सर तक सही किया, एक बार। वो भी एकदम अच्छे तरीके से। पर देखा दादी अभी करवट ले रही है, इसलिये फ़िर से मशीन पर बैठ गया।
बैठा था मैं जो करने, वहाँ ध्यान ही नहीं था। मैं उन लड़कियों और औरतों के बारे में सोच रहा था, जिनके साथ खेला हुआ था, या मैंने करना चाहा था।
मुझसे रहा नहीं गया। मैं उठ कर बाथरूम चला गया। वहीं हस्तमैथुन करने लगा, एकदम से भीतर जाकर।
तभी मुझे लगा कोई आया बाथरूम में। रात के एक बज रहे थे, सो मैंने बन्द नहीं किया था। पता नहीं कौन होगा, सोचकर मैंने खांसी की। पर देखा कि वो मेरे सामने आकर मुस्कुरा रहीं हैं, सीमाजी!!
मैं सकपका गया। एकदम सावधान खड़ा हो गया। वो मुस्कुराते हुए चली गईं।
मैं अब आकर सोफ़े पर एक चादर लेकर सो गया। देखा वो करवटें ले रही थी। और उनकी चूचियाँ छलक-छलक के बाहर आ रही थी।
एकबार जब वो शान्त हुई, तो मैंने हिम्मत की। डर मुझे इतना ही था कि ये मेरे पापा की सम्बंधी लगती एक रिश्ते में, बस।
मैं उनके छाती पर धीरे-धीरे ऊँगलियों से हरकत कर रहा था। थोड़ी देर बाद पूरे हाथ से दबाना शुरू किया उनके बेल के आकार के स्तनों को।
उन्होंने अपने दोनों हाथ जांघों के भीतर दबा कर डाल लिये। जगी तो वो थी ही, अब आंखें भी खोल ली उन्होंने और मुझे इशारा किया ब्लाउज खोलने को।
पैकिंग और अनपैकिंग के काम मेरा हाथ तेज है। मैंने झट-पट ब्लाउज के साथ ब्रा भी खोल दिया।
अब उनको मस्ती आने लगी थी। पर मैंने होठों पर हाथ रख कर आवाज ना करने को कहा।
वो हाथ पैर फेंक कर दादी को डिस्टर्ब करे उससे पहले मैंने उनसे सोफे पर चलने को कहा।
सोफे पर जाते ही उन्होंने मेरा सर अपनी तनी हुई चूचियों वाली छाती पे लगा दिया। मैं भी लगा चूसने कस के।
सिसकारी निकलने लगी तो मैंने उनके मुँह पर हाथ रख दिया। वो बड़े-बड़े बोबे, दोनों हाथों से पकड़ो तो हाथ मे आयेंगे। मैं सब कुछ भूल कर दूध पी रहा था उसका।
वो भी जन्नत की हूर थी, कैसे आ गई मेरा रात रंगीन करने!!! जो गठीला बदन था, आजकल पैसा खर्चने पर भी वैसी आइटम नहीं मिलेगी।
जब मेरा मन भर गया ऊपर से तो मैंने नीचे की ओर देखा। उन्होंने सहमति में सर हिलाया।
मैंने धीरे से साड़ी के भीतर हाथ डाला। पूरे पैर को सहलाते हुए जांघों तक पहुँचा। इस बीच उनके हाथ मेरे लुंगी के भीतर मेरे लोहे जैसे गर्म और सख्त टूल को टटोलने लगे थे।
वो मेरे साइज से बेहद खुश थी। एक ही बार में भूखी शेरनी जैसे भेड़िये को खाती है, मेरे तीसरे पैर को डाल लिया अपने मुँह में।
मैं सिहर उठा। आज मैं सातवें आसमान में उड़ रहा था। मेरे हाथ अब उस चूत की ओर बढ रहे थे जिसे उन्होंने बताया कि 3-4 साल से जल रही थी।
सच में किसी ऑवन से कम गर्मी न थी। पर सारा लव-होल एरिया जंगल से भरा था। वो चाहती थी, मैं चाटूं। पर बालों ने मेरा उत्साह कम कर दिया।
पर उन्होंने मेरा मन खुश किया था, तो मैंने कहा कि आज मैं टेस्टर से चेक कर लूँ कि कितना कर्रेंट है, फिर कल मुँह डालूंगा, इतना गरम है कि क्या पता मुंह जल जाए।
वो मेरे बात से सहमत थी।
मैंने अपना रॉड गाड़ दिया उनके आग के कुंए में। कसम से आज मैं समझा कि जिसको हम चरित्रहीनता कहते हैं, वो उसके अन्तःमन की दबी हुई आग की चिन्गारी भर होती है, अन्तर्वासना होती है।
एक सम्पूर्ण संतुष्टि का भाव था उनके चेहरे पर उस वक्त।
सालों से ना चुदने की वजह से उनके लव-स्पॉट की दीवारें तंग हो गई थी। बड़ी दिक्कत हो रही थी मुझे। मैं उठ कर अपने रसोई से मक्खन ले आया। गर्मी तो इधर इतनी थी कि मक्खन पिघलते देर नहीं लगी।
खैर मैं उत्तेजना की वजह से दस मिनट से ज्यादा सम्हाल न सका। पर वो खुश थी।
उसके बाद 2-3 दिन और रुके वो लोग… Sex Stories
हेलो फ्रेंड्स मेरा नाम विकाश है। मैं देहरादून से Hindi Sex Stories हूँ लेकिन अभी बॅंगलुर में एक सॉफ्टवेर कंपनी में काम कर रहा हूँ। ये घटना दो महीने पुरानी है। मैने एक साइट पर पॉर्न स्टोरी लिखी थी ओर साथ मैं अपनी ई-मेल आई भी लिखी थी, जिसे पढ़ कर एक लड़की ने मुझे मेल किया और पूछा कि क्या मैं उससे मिल सकता हूँ। वो मुझसे शायद सेक्स करना चाहती थी। मैंने उसे अपना फोन नंबर मेल कर दिया। अगले दिन मैं ऑफीस से घर आ रहा था तो रास्ते मैं उसका फोन आया। उसने अपना नाम शिवानी बताया। वो हरिद्वार, जो कि देहरादून के पास जगह है, की रहने वाली थी। उसने बताया कि वो एक सॉफ्टवेर कंपनी में एच आर है। उसके बाद रोज रात को उसका फ़ोन आने लगा। धीरे धीरे वो मुझसे खुल गयी। उसने बताया कि वो अपनी कंपनी के एक लड़के से बहुत प्यार करती है, लेकिन कुछ दिन पहले उसे पता चला कि वो लड़का उसे धोखा दे रहा है। उसके ऑफीस की ही किसी दूसरी लड़की से संबंध है। मैंने उससे पूछा कि क्या तुमने उसके साथ सेक्स किया है तो वो बोली की नहीं उसने बस एक बार मेरे बूबस दबाए थे लेकिन मैं बुरा मान गयी तो उसने मुझे छोड़ दिया। लेकिन जब से मुझे उसके बारे में पता चला है। मैं चाहती हूँ कि मैं भी किसी और लड़के से सम्बन्ध बनाऊँ।
मैं तो बस यही चाहता था। मैंने उसे बोल दिया कि ठीक है मैं तुम्हें बहुत अच्छे से चोदूँगा। चूँकि अगले दिन दोनो का ऑफीस था तो हमने ये डिसाइड किया कि दोनो छुट्टी ले लेंगे। अगले दिन जब मेरे दोनो रूम मेट्स ऑफीस चले गये तो मैं शिवानी को अपने फ्लेट में ले आया। यकीन मानो दोस्तो मैंने उसकी आवाज़ सुन कर उसके बारे में जो सोचा था वो उससे कहीं ज़्यादा सेक्सी थी। उसकी हाईट ५’५”थी और फ़ीगर ३४-२८-३५ वो बहुत शर्मा रही थी। मैं उसकी झिझक दूर करने के लिए उसे किचन में ले गया और उसके साथ मिल कर ओम्लेट और चाय बनाई। ब्रेकफ़ास्ट करने के बाद वो मुझसे काफ़ी घुल मिल गयी थी और मेरे काफ़ी करीब भी बैठ गयी। उसके शरीर से प्यारी सी खुशबू आ रही थी। मैंने उसके बालों पे धीरे से हाथ फेरा तो उसने शर्म से मुँह छुपा लिया।
मैंने उसके कान पे किस करनी शुरू किया तो उसकी आँखों में पहली बार सेक्स अपील देखी। फिर मैने उसे फ्रेंच किस की तो वो भी मेरा साथ देने लगी। मैंने उसे बोला कि उसे जो कुछ भी कहना हो कह सकती है। उसने कहा कि वो मेरा लॅंड देखना चाहती है। मैंने बिना देर किए अपनी शॉर्ट उतारी और उसे अपने ८ इंच लंबे लॅंड के दर्शन कराए। उसकी आँखें खुली की खुली रह गयी। वो बोली कि इतना बड़ा लॅंड उसकी चूत में कैसे फिट होगा। मैंने उसे बोला अभी घबराओ नहीं ये बहुत आराम से तुम्हारी चूत में जाएगा और ये कह कर मैंने उसे के वाय -जेल्ली की ट्यूब दिखाई। उसने पूछा कि ये क्या है तो मैंने बताया कि इसे लूब्रिकॅंट कहते हैं और इसे लॅंड पे लगाने से लॅंड आराम से तुम्हारी चूत में घुसेगा। तुम्हें पता भी नहीं चलेगा। वो ये सुन कर बहुत ही एक्साइटेड हो गयी। मैंने उसकी चूत पर बाहर से हाथ रखा तो वो काफ़ी गरम हो गयी थी। उसने मेरे लॅंड पे अपना हाथ रखा और उसे प्यार से सहलाने लगी।
मैने उसकी टोप उतारी। उसने सफेद रंग की ब्रा पहन रखी थी। मैंने जल्दी से ब्रा उतारी और उसके दोनों बूब्स के साथ खेलने लगा। वो मेरे लॅंड को सहलाने में मस्त थी। वो मस्ती में आ..ह सी…सी.. … की आवाज़ निकल रही थी। अब मुझसे बरदाश्त नहीं हो रहा था। मैंने झट से उसकी जीन्स और सफेद रंग की पेंटी भी उतार दी। उसकी चूत काफ़ी गीली हो गयी थी। उसकी चूत के रस से उसकी पेंटी गीली हो रखी थी। मैंने जल्दी से एक उंगली उसकी चूत में डाली तो वो सर्र से अंदर घुस गयी। मैं उसकी चूत में अपनी उंगली अंदर बाहर करने लगा। मैंने अपनी उंगली उसकी चूत में डाल कर ‘ कम हेयर’ स्टाइल में उंगली हिलाने लगा ताकि उसका जी – स्पॉट प्रेस कर सकूँ। वो मारे खुशी की पागल हो उठी और कहने लगी कि प्लीज़ उंगली बाहर निकालो और जल्दी से अपना मोटा सा लॅंड मेरी चूत में डाल दो। मैंने के वाय -जेल्ली की ट्यूब लॅंड के ऊपर रखी और ५-६ बूंदे उसपे टपका दी। मैंने उसे पीठ के सहारे लेटने को बोला और उसकी टांगे फैला दी। फिर अपने लॅंड उसकी चूत पे रख कर उसे क्लाइटॉरिस पे रगड़ने लगा। वो तो मानो पागल हो उठी। उसने मेरे बॉल खींच लिए और ज़ोर से बोली प्लीज़ मुझे और मत तड़पाओ, और जल्दी से अपना लॅंड अंदर कर दो। मैंने थोड़ा सा धक्का लगाया तो लॅंड का सुपाड़ा उसकी चूत पे जा कर अटक गया। और वो दर्द से चिल्लाने लगी. आ…ह… उ…ई… बाहर निकालो प्लीज़। उसकी आँखों में आंशु आ टपके। लेकिन मैं तो पूरे जोश में था। मैंने उसे अपने बाजुओं में कस कर पकड़ा और धीरे से प्रेशर देने लगा। फिर मैं रुक गया क्योंकि उसकी चूत काफ़ी टाइट थी और मुझे भी फील हो रहा था। मैं बस उतना सा ही घुसा कर उसकी बूब्स को चाटने लगा। थोड़ी देर बाद वो खुद ही अपनी गांड धीरे से उचकाने लगी। मैं समझ गया कि अब उसका दर्द ख़त्म हो गया है और वो अब पूरा लॅंड अपनी चूत के अंदर चाहती है। मैंने कुछ सोचा और थोड़ा सा लॅंड बाहर निकाल कर ज़ोर से धक्का मारा। फ़च्छ … की आवाज़ के साथ पूरा का पूरा लॅंड उसकी चूत में चला गया था। और शिवानी ने ज़ोर से चीखना शुरू कर दिया। मैंने उसके मुँह को अपने एक हाथ से ज़ोर से बंद किया और कहा कि अगर वो ज़ोर से चिल्लाएगी तो पड़ोसी आ जाएँगे और सारा मज़ा किरकिरा हो जाएगा। उसकी आँखो से आंशु छलक पड़े, लेकिन उसने आवाज़ निकालनी कम कर दी।
मैंने लॅंड को थोड़ा सा बाहर खींचा और धीरे धीरे अंदर बाहर करने लगा। वो अब मस्ती से कराहने लगी. आ…ह , उम्म…ह…, हाँ… ऐसे ही ठीक है…
मैं लॅंड की अंदर बाहर करने की स्पीड धीरे धीरे बढ़ाने लगा। उसे अब मज़ा आने लगा था। वो भी अब पूरा सपोर्ट कर रही थी अपनी गांड हिला हिला कर। मैंने स्पीड और बढ़ा दी। १० मिनट के बाद उसका ऑर्गेज़्म हो गया था। मैं उसकी चूत में वाइब्रेशन्स फील कर सकता था। उसकी चूत का पानी निकल कर पूरी बेड शीट पर फैल गया था। मैंने उसकी टाँगे और फैला ली और लंबे लंबे धक्के लगाने लगा। वो आँखें बंद करके कराह रही थी। थोड़ी देर बाद मैंने भी उसकी चूत के अंदर ही ढेर सारा वीर्य छोड़ दिया। हम दोनो इसी तरह आधे घंटे तक लेटे रहे। फिर मैंने धीरे से अपना लॅंड उसकी चूत से निकाला। वो काफ़ी टाइट से अटका था। फक्क की आवाज़ के साथ पूरा लॅंड बाहर आया तो उस पर मेरा वीर्य और थोड़ा खून भी लगा था। मैं उसे गोद में उठा कर बाथरूम ले गया। वहां गरम शावर के नीचे थोड़ी देर दोनो बैठे रहे। मैंने उसकी चूत को ठीक से साफ किया। इस दौरान मेरा लॅंड फिर से खड़ा हो गया था। उसकी चूत भी फिर से गीली होने लगी थी। मैने बाथरूम में ही फिर से उसकी चुदाई की। इस बार उसने पूरा सपोर्ट किया और हम दोनो एक साथ आधे घंटे बाद झड़े।
फिर हमने तौलिए से एक दूसरे को अच्छे से पोंछा। फिर हम वापस बेड रूम में आ गये और थोड़ी देर बातें की। उस दिन मैंने उसे शाम ५ बजे तक ६ बार चोदा। शाम को इससे पहले कि मेरे रूम मेट्स वापस आते, मैं उसे उसके हॉस्टिल तक छोड़ आया। उसके बाद से अब तक मैं उसे ५ बार चोद चुका हूँ। Hindi Sex Stories
। Hindi Sex Stories
दोस्तो, आज जो कहानी मैं आप लोगो को सुनाने जा Sex Stories रहा हूं उससे उम्मीद है की चुदक्कर लड़कियों के चूत की प्यास और ज्यादा बढ़ जाएगी।
मैं आज से तीन साल पहले कोलकाता में पढ़ाई कर रहा था. मेरे घर के सामने ही एक लड़की रहती थी जिसका नाम था जानवी। उसकी बड़ी बड़ी चुचियों को देखकर अक्सर मेरा लण्ड पैन्ट में अकड़ने लगते था और मैं सोचता था कि कब चोदूंगा इसकी चूत?
भगवान ने मौका दे ही दिया उसकी चुदाई का !
मैं कॉलेज से आ रहा था। अँधेरा हो गया था। अचानक पीछे से किसी के बुलाने की आवाज़ आई तो मैंने मुड़ के देखा, मेरे पीछे जानवी डार्लिंग खड़ी थी।
वो मेरे पास आई और बोली कि राहुल मैं तुमसे कुछ कहना चाहती हूँ।
मैंने कहा- हाँ बोलो !
तो उसने कहा- आइ लव यू !
मैं तो पागल हो गया। मैंने उसका हाथ पकड़ा और उसे जोर से अपने सीने से लगा कर उसके होठों को चूस लिया, उसकी चुचियाँ मेरे सीने में घुसी जा रही थी। मगर मुझे डर लग रहा था कि कोई हमें इस तरह देख न ले। तो मैंने उसका हाथ पकड़ कर झाड़ी की तरफ़ ख़ींचा और झाड़ी में जाते ही मैंने उसके होठों को फ़िर से अपने होठो में दबा कर चूसना शुरू कर दिया।
अब वो भी गरम हो रही थी, जानवी मेरे बदन से जोर से लिपट गई और मेरे लंड उसकी चूत को ऊपर से ही चोदने के लिए फड़फ़ड़ाने लगा।
मैंने अपना एक हाथ जानवी की कुर्ती में डाला और उसके चुचियों को पकड़ना चाहा, मगर मैं पकड़ नही सका, क्योंकि उनका आकार बहुत बड़ा था। फ़िर भी मैंने उसे थोड़ा पीछे किया और दोनों हाथों से चुचियों को पकड़ लिया और जोर जोर से मसलने लगा।
जानवी आह… ऊऊह करने लगी तो मैं समझ गया कि अब यह बुर की चुदाई के लिए तैयार हो चुकी हैं। मैंने उसे वहीं झाड़ियों पर लिटा दिया और उसकी सलवार का नाड़ा खोल कर नीचे उतार दी।
हे भगवान ! उसने पैंटी नही पहनी थी और उसकी चूत से माल निकल रहा था। फ़िर मैंने उसे पूरी तरह से नंगा कर दिया, अपने भी कपड़े खोल दिए। मेरा 8” का लंबा लंड जब बाहर आया तो काफी फूल गया था और वो पहले से ज्यादा लंबा लग और मोटा लग रहा था। जानवी अब डर के कारण कहने लगी- मुझे लेट हो रहा है, प्लीज़, मुझे जाने दो।
मगर मैं कहाँ छोड़ने वाला था। मैंने उसके हाथ में लंड पकड़ा दिया और वो उसे ऊपर नीचे करने लगी। उसके सहलाने से मेरे सुपाडा और लाल हो गया। फ़िर मैंने उसे थोड़ा उठाया और अपना लंड उसके मुहँ में डाल दिया, वो बड़े प्यार से उसे चूसने लगी। ऐसा लग रहा था कि वो कोई लोलीपोप चूस रही थी।
लगभग १५ मिनट तक वो मेरे लंड को चूसती रही। फ़िर मुझे लगा कि मैं झड़ने वाला हूँ तो मैंने उसे धक्का दे कर नीचे पटक दिया और फ़िर मैं उसकी चुचियां मसलने लगा।
उसके बाद मैंने एक ऊँगली उसकी चूत में डाल दी। साली बहुत सेक्सी लड़की थी, अपनी जांघो को ख़ुद ही सहला रही थी। मैंने उसकी चूत को फैला दिया और थोड़ा सा थूक निकाल कर अपने लंड और उसकी चूत पर मसल दिया जिससे उसकी चूत गीली हो गई। मैंने अपना लंड जानवी के हाथ में पकड़ा दिया और उसने लंड को चूत के मुंह पर टिका दिया।
मैंने पूछा- तैयार हो क्या जन्नत की सैर करने के लिए?
तो वो बोली- हाँ मेरे राजा आज इस चूत की खुजली मिटा दो, साली रात भर सोने नही देती हैं।
इतना सुनते ही मैंने उसकी कमर जोर से पकड़ ली और अपनी कमर पीछे ख़ींच के एक जोरदार धक्का मार दिया जानवी के चूत पर, मेरा लंड सुपाडा सहित ३’ अन्दर घुस गया।
जानवी चिल्ला पड़ी- ऊह मा …मर गई… आह्ह्ह्ह्छ… वोह…!
मैंने लंड संभाल के एक बार फ़िर धक्का मार दिया। अबकी लंड चूत फाड़ के गहरे में घुस गया और ऐसा लग रहा था कि मेरा लंड है ही नहीं क्योंकि वो चूत में पूरा समां गया था।
जानवी तो चिल्लाये जा रही थी- आह… आह… आह… ओह… ओउच…
थोडी देर बाद जब वो सामान्य हो गई तो मैंने धक्के लगाने शुरू किए। तक़रीबन १२० धक्के लगाने के बाद मैंने अपना लंड ख़ींच लिया और उसे पीछे कुत्ते की तरह घुमा कर झुका दिया और लंड उसकी गांड पर रख पर पेल दिया। मैंने काफी देर तक उसकी गांड मारी, वो तो बस आह… ऊह…आः… कर रही थी।
फ़िर मैंने उसे आगे पटक दिया और फिर से उसकी चूत की चुदाई करने लगा।
तक़रीबन आधे घंटे के बाद हम दोनों का माल निकल गया तो हम कपड़े पहन कर वापस घर की तरफ़ जाने लगे. Sex Stories
मेरा नाम अमन है। जब मेरी Hindi Sex Stories नौकरी लगी थी तब मैं एक कसरती लड़का था। मेरा पहला पदस्थापन धार जिले में हुआ था। मैं वहां भी कसरत करता था। खाना पकाने के लिये मैंने एक १८ वर्ष का लड़का रख लिया था। वो मेरे सामने वाले घर में भी काम करता था। वो सुबह और शाम काम पर आता था। उसका नाम सन्नी था। ज्यादातर शाम का खाना मेरे यहां ही खा लेता था। मैं रोज़ अपने बदन पर तेल की मालिश करवाता था। मेरी मालिश भी वही कर देता था। शाम को मैं ओफ़िस से आने के बाद मालिश करवाता था।
सन्नी सामने वाले घर से काम करके शाम को ७ बजे मेरे कमरे में आ जाता था। सामने वाले घर की मालकिन रीता मुझे कभी कभी शाम का खाना भी भेज देती थी। आज भी वो खाना लेकर आ गई थी।
“अमन ….. आज मैंने स्पेशल सब्जी बनाई है…. बताना कि कैसी है..”
मैंने उसे धन्यवाद कहा। थोड़ी देर बैठने के बाद वो चली गई। सन्नी ने मेरी पेन्ट और बनियान उतार दी। मैं नीचे दरी बिछा कर उल्टा लेट गया। उसने तेल की मालिश करना चालू कर दिया। वो अच्छी मालिश करता था। मालिश करवाते समय मैं मात्र एक वी आई पी की अंडरवियर पहनता था। फिर मैं सीधा लेट जाता था, तब वो मेरे सीने की इत्यादि की मालिश भी कर देता था। उसके हाथ में मालिश की कला थी।
मुझे अचानक लगा कि जैसे किसी ने दरवाजा खोला और बंद कर दिया। मैंने पूछा,” सन्नी, कौन था ?”
“कोई नहीं… ” सन्नी मुस्कराता हुआ बोला।
मालिश करवाने के बाद मैं नहाने चला जाता था।
दो तीन दिनो से मैं महसूस कर रहा था कि सन्नी मालिश करते समय मेरे गुप्त अंगो को भी हाथ लगा देता था। उससे मुझे उत्तेजना महसूस होने लगती थी। आज भी मैं मालिश करवा रहा था। सन्नी के हाथ मेरे बदन पर पर तेजी से चल रहे थे। कभी कभी उसके हाथ मेरे अंडर वियर के अन्दर भी घुस जाते थे और चूतड़ों की भी मालिश कर देते थे। मैं उत्तेजित हो जाता था उसके ऐसा करने से मुझे बड़ा आनंद आता था। वो सब समझता था।
वो बोला -“अंकल, अंडरवियर थोड़ा नीचे कर लो… मैं चूतड़ों की मालिश भी कर देता हूँ !”
“अरे नहीं….कोई देख लेगा..”
“आप तो मर्द है फिर क्यों शरमाते हो…” उसने मेरी अंडरवियर नीचे सरका दी। उसने मेरे कसे हुये दोनो चूतड़ों पर तेल लगाया और उन्हे मलने लगा। मैं बहुत ही उत्तेजित हो गया। उसने मेरी चूतड़ों के बीच दरारो में भी तेल डाल दिया था और दरारों के अंदर गाण्ड के छेद में भी तेल मल कर मालिश करने लगा।
मेरे मुख से सिसकारी निकल पड़ी। उसने कहा – “साब…. अब सीधे हो जाओ…”
मैं जैसे ही सीधा हुआ, मेरा लण्ड सीधा तना हुआ खड़ा हो गया था। मेरी अन्डर वियर तो आधी उतरी हुई थी….
सन्नी हंसने लगा – “अंडरवियर तो ऊपर कर लो….ये देखो कैसा हो गया है…….”
“चल बदमाश…” मैं भी शरमा गया। मैंने अंडरवियर ऊपर खींच लिया। उसने सामने मालिश शुरु कर दी। उसने मेरी अंडर वियर सरका कर लण्ड पर तेल मल दिया। मैं एकबारगी तो कंपकंपा गया। पर मुझे लगा कि वो मेरे लण्ड को और मसल दे और मसलता ही रहे। मैं चुपचाप मलवाता रहा….पर अन्त में एक सिसकारी तो निकल ही गई।
वो धीरे धीरे तेल मलता रहा। मैं बेसुध सा हो गया। तभी मुझे महसूस हुआ कि दरवाजा किसी ने खोला…. मैंने आंखे खोली तो दरवाजे पर कोई नजर नहीं आया। सन्नी ने मलना बन्द कर दिया और तेल एक तरफ़ रख दिया।
“साब…. नहला दूं क्या ?.”
“हां यार…. नहला दे अब……”
मैंने नहाते हुए कहा – ” सन्नी तू तो एक्स्पर्ट है मालिश करने में…”
“जी हां…. मैं मालिश भी तो करता हूँ…. रीता आंटी की मालिश भी मैं ही करता हूं”
मैं चौक गया – क्या …. आंटी की…. कैसे ..”
“पांव और पीठ की…. वो इसके लिये मुझे २० रुपिये देती है…”
मैंने भी उसे २० रुपये देने का वादा कर दिया। मैं तौलिया लपेट कर बैठ गया था और खाने की तैयारी करने लगे। खाने के बीच में मैंने रीता के बारे में पूछा। तो उसने बताया की रीता भी आपके बारे में पूछती रहती है। मुझे लगा कि वो मुझमें दिलचस्पी रखती है।
बाहर मौसम अच्छा नहीं था…. बरसात के आसार थे। लग रहा था बरसात जल्दी ही शुरु हो जायेगी। बिजली रह रह कर चमक रही थी। बादल भी गरज रहे थे। कुछ ही देर में बरसात शुरु हो गई। जैसा कि यहा आम बात थी कि बरसात शुरु होते ही बिजली चली जाती थी। वही हुआ, बिजली गुल हो गई।
काफ़ी देर हो गई…. बरसात रुकने का नाम ही नहीं ले रही थी….मैं बिस्तर पर लेट गया। सन्नी भी वहां आ गया। मैं कब सो गया मुझे पता ही नहीं चला। बन्टी भी मेरी बगल में आकर सो गया। रात को मेरी नींद खुल गई। मैंने तौलिया उतारा और अंडरवियर में सन्नी की पीठ से चिपक कर सो गया।
बरसात अपनी तेजी पर थी। मुझे लगा सन्नी से चिपकने के कारण मेरे लण्ड में कड़ापन आने लग गया था। मेरा लण्ड उसके शरीर से स्पर्श होने के कारण खड़ा हो गया था। वो सन्नी के चूतड़ों पर लग रहा था। मैंने अपने को उससे अलग किया, लेकिन सन्नी ने जानकर अपने चूतड़ पीछे सरका कर मेरे लण्ड से सटा दिया, लण्ड फिर से एक बार और उसकी चूतड़ों की दरार में घुस गया। मेरे शरीर में तेज सिरहन दौड़ गई। मैं वैसे ही पड़ा रहा पर लण्ड दरारों में घुसा हुआ फूलने लगा। और कड़ा हो गया। उसने सिर्फ़ चड्डी पहन रखी थी।
मुझे कड़क लण्ड होने से बहुत तकलीफ़ होने लगी थी। मैंने अंडरवियर से लण्ड को बाहर निकाल कर आज़ाद कर लिया। मेरा लण्ड अब नंगा था और खुला हुआ था। मुझे लगा कि सन्नी ने जानकर अपनी गान्ड और पीछे सरका कर मेरे लन्ड को गाण्ड से चिपका रहा था। अब मुझसे भी मेरा धैर्य छूट रहा था। मैंने अब अपना लण्ड उसकी गाण्ड की दरारो में घुसा दिया और बाहर से ऐसे ही रगड़ने लगा।
जब उसने कुछ नहीं कहा तो मैंने उसकी चड्डी का नाड़ा खोल दिया और चड्डी नीचे सरका दी। अब सन्नी ने अपने चूतड़ ढीले कर दिये और लण्ड को छेद तक जाने का रास्ता दे दिया। मैंने अपना लण्ड उसके चूतड़ों की दरार में घुसा डाला और छेद तक पहुंचा दिया।
वो सोया नहीं था और उसे मजा आ रहा था। मुझे लगा कि छेद बहुत टाईट है, मैंने अपना थूक उस पर लगा दिया। मैं लण्ड धीरे धीरे गाण्ड के छेद पर दबाने लगा..और मेरे लण्ड की चमड़ी ऊपर तक सरक गई और लाल सुपाड़ा निकल आया और छेद में घुस गया। सन्नी ये जताने लगा कि वो नींद में है।
सुपाड़े के अन्दर जाते ही वो बोल उठा,” आह…. धीरे धीरे डालना …. मजा आ रहा है….”
“हां सन्नी…….तुझे अच्छा लग रहा है…”
“आऽऽऽऽऽऽह …. हां…. और डालो ना…”
मैंने अब अपने आप को सेट किया और जोर लगा कर कर अन्दर घुसाने लगा। उसकी गान्ड का छेद मुलायम था…..मुझे घुसाते हुये बड़ा आनन्द आ रहा था। मैंने भी अपना हाथ बढा कर उसका लण्ड पकड़ लिया। उसका लण्ड भी मोटा और लम्बा था…. अभी खूब तन्ना रहा था। मैंने उसका लण्ड जोर से पकड़ कर कर अपने लण्ड को गाण्ड में पूरा घुसेड़ दिया।
अब मैं उसके लण्ड को मुठ मारने लगा और उसकी गाण्ड चुदाई करने लगा। सन्नी अब मस्त हो उठा था। मुझे भी भरपूर मजा आ रहा था। हम दोनों सिसकारियां भर रहे थे। सन्नी ने एक हाथ पीछे करके मेरे चूतड़ भींच लिये थे। और अपनी ओर खींचने लगा। अब मुझे भी धक्के मारने में सहुलियत हो रही थी। मेरी कमर अब मंथर गति से हिल रही थी और लण्ड आराम से सटासट आ जा रहा था।
मुझे भी असीम आनन्द आने लगा था। उसके लण्ड को मुठ भी मार रहा था…. वो आनन्द से अपने शरीर को हिला रहा था। मैं सन्नी की गाण्ड से और चिपकता जा रहा था। और अब धक्के भी जम कर लगा रहा था। मेरी सिसकारियां भी बढ गई थी।
सन्नी भी सिसकारियां भर रहा था-” हाऽऽऽऽय …. लण्ड जोर से मसल दो ना…….. और जोर से रगड़ो….जोर से मुठ मारो”
मेरे तन में आग लगी हुई थी….वो भी तड़प रहा था …. बेहाल हो रहा था …. अचानक ही उसके लण्ड ने वीर्य छोड़ दिया । उसकी तेज पिचकारी निकल पड़ी। उसका वीर्य मेरे हाथों को गीला कर रहा था। उसकी गाण्ड भी इसके साथ भिंच गई। मैंने उसे उल्टा लेटा दिया और उसकी गाण्ड पर चढ गया। अब एक बार फिर से लण्ड गाण्ड में घुसा कर पूरे जोर से उसकी गाण्ड चोदने लगा। चूंकी वो झड़ चुका था इसलिये उसकी गाण्ड भी ढीली हो गई थी लण्ड तेजी से आ जा रहा रहा था और अब मेरा भी लण्ड जवाब देने लगा था….और ….और मेरे लण्ड ने भी वीर्य छोड़ दिया।
मैं जोर लगा कर अपना वीर्य उसकी गाण्ड में भरने लगा। धीरे धीरे सारा वीर्य निकल गया….. मैं वैसे ही उसके ऊपर लेट गया। शान्त होने पर मैं एक तरफ़ लुढक गया। मुझे अब होश आया। और लम्बी लम्बी सांसे लेने लगा। बाहर बरसात अब भी अच्छी खासी हो रही थी। कुछ ही देर में मैं सो गया।
सुबह आंख खुली तो बरसात थम चुकी थी। पर ये क्या ? मैं चौंक कर खड़ा हो गया। मैं नंगा ही था…. सन्नी भी नंगा ही था। उसके चूतड़ों पर वीर्य लगा हुआ था…. टेबल पर चाय और नाश्ता लगा हुआ था। मैं घबरा गया…. यहां कोई आया था…. सन्नी सो रहा था। मैंने तुरन्त तौलिया लपेटा और देखा तो दरवाजा में अन्दर से कुण्डी नहीं लगी थी।
मैंने बाहर झांका तो रीता अपने घर के बाहर की सफ़ाई कर रही थी। मुझे देख कर वो मुस्कुराई। सफ़ाई बंद करके वो मेरी तरफ़ आने लगी…. मैंने पास पड़ी कमीज पहन ली। वो दरवाजा खोल कर अन्दर आ गई।
” अमन जी…. दरवाजा तो बन्द कर लिया करो….”
“आप कब आई थी….रीता जी”
“मैं बस जी….बिल्कुल सही समय पर आई थी…. तुम्हें जी भर कर देख लिया…. लगता है मौसम ने रात को गड़बड़ी कर दी…”
“ना….नहीं…. वो तो ऐसे ही ना….रात को तौलिया खुल गया था…”
“फिर भी…. बिना अंडरवियर के …. और बेचारा सन्नी…. अपना दम उस पर निकाल दिया….” और हंस पड़ी।
“रीता जी…. बस करो ना..”
” ओह हां सॉरी …. पर ….” रीता ने मुस्करा कर मेरे लण्ड की तरफ़ देखा।
“पर क्या……..”
“मजा आया रात को….”
” रीता जी….वो लड़की थोड़ी है…. वो तो….”
“पर मैं तो लड़की हू ना….। उसके स्वर में सेक्स भरा अनुरोध था।
रीता के मन में हलचल हो रही थी।
“रीता जी ….मुझे शरम आ रही है….मेरा मजाक मत बनाओ….रात को मेरी वजह से सब गड़बड़ हो गई थी….”
“क्या गड़बड़ हुआ मुझे क्या सन्नी से पूछना पड़ेगा” वो आगे बढती ही जा रही थी। साफ़ जाहिर था कि उसे मालूम था कि मैंने आज सन्नी की गाण्ड चुदाई की है। मैंने भी सीधे ही कहा -“रीता जी ….! एक बात पूछूं….?”
” हां….पूछो…..”
“आपके दिल में कुछ हलचल है ना….”
उसने मुझे वासना की नजर से देखा – ” अमन !!!……”
मैंने धीरे से दोनो हाथों से उसका चेहरा थाम लिया । उसने अपनी आंखें बंद कर ली। मेरे होंठ उसके होंठो की तरफ़ झुकने लगे। हमारे होंठ आपस में मिल गये। मेरे हाथ उसके उरोजों से चिपक गये। मैंने रीता उरोजों को मसलना चालू कर दिया। उसके मुख से सिसकारी निकल पड़ी।
“उफ़्फ़ बस करो….क्या कर रहे हो….”
मैंने उसके हाथ पकड़े और बाथरूम में ले आया…. और उससे लिपट गया…. उसके अंगों को बेतहाशा मसलने लगा।
” छोड़ो ना….ये क्या कर रहे हो….” उसने मुझसे और चिपकते हुये कहा। फिर एकएक दूर हटते हुए मुझ पर तिरछी नज़र डालते हुए शरमा कर भाग गई।
मैंने सन्नी को उठाया। उसने उठ कर कपड़े पहने और नाश्ता किया और चला गया। सारा काम निपटा कर मैं बाथ रूम में नहाने चला गया। सन्नी के जाने के बाद रीता वापस आ गई।
उसने मुझे धीरे से आवाज दी। मैंने कहा,” यहीं आ जाओ…. बाथ रूम में !”
“उसने मुझे बाथ रूम में अन्दर झांका। और मुझे देखती ही रह गई। मैं नंगा नहा रहा था। मेरा लण्ड तो वैसे ही खड़ा था। मुझे देख कर उसने अपना मुंह हाथों में छिपा लिया। मैंने उसने हाथो को हटा कर उसे चूम लिया और उसके हाथ को अपने लण्ड पर रख दिया-“रीता….प्लीज पकड़ लो इसे….”
रीता ने शरमाते हुए मेरा लण्ड पकड़ लिया और झट से मुझसे लिपट गई। मैंने उसे झरने के नीचे खींच लिया। वो भीगने लगी। वो सिर्फ़ पेटीकोट और ब्लाऊज में थी। उसने अंदर ब्रा नहीं पहनी थी। भीगते ही उसके चूंचियां ब्लाऊज में से दिखने लगी।
मैंने उसके बोबे पर अपना हाथ रख दिया और होले होले दबाने दबाने लगा। उसका पेटीकोट का नाड़ा मैंने खोल दिया। पेटीकोट नीचे पांवो के पास गिर पड़ा। दूसरे ही पल मैंने उसका ब्लाऊज उतार दिया। उसकी आंखे बन्द थी। उसने अपने आप को पूरा समर्पित कर दिया था।
झरने के नीचे मेरा लण्ड उसकी चूत से रगड़ खाने लगा था। वो भी अपनी चूत को मेरे लण्ड से चिपका रही थी। मैंने उसे घुमा दिया और उसकी पीठ से चिपक गया। मुझे उसकी गोल गोल गाण्ड बहुत प्यारी लगती थी। मैंने अपना लण्ड उसकी चूतड़ों में घुसा दिया। उसने अपनी गाण्ड ढीली छोड़ दी। पानी हमारे शरीर पर गिर रहा था। मैंने उसकी गीली गाण्ड में अपना लण्ड दबा दिया। लण्ड उसकी गाण्ड के छेद में घुसता चला गया। वो सिसक उठी। जरा सा और जोर लगा कर लण्ड को पूरा अन्दर तक बैठा दिया।
मेरा लण्ड मीठी गुदगुदी से भर गया। मैंने उसके बोबे पकड़ कर उसका शरीर अपने से चिपटा लिया। उसकी आंखे अभी भी बन्द थी। अपनी गाण्ड में वो लण्ड का पूरा आनन्द ले रही थी। मैंने पीछे से धक्के मारना जारी रखा। मैंने अब एक हाथ छोड़ कर उसकी चूत पकड़ ली और दबा दी।
“इसे छोड़ो अमन…. वरना मैं झड़ जाऊंगी……..”
मुझे लगा वो उत्तेजित तो पहले ही से थी। कहीं सच ही में ना झड़ जाये। मैंने अपना लण्ड उसकी गाण्ड से निकाला और उसे अपनी बाहों में उठा कर बिस्तर पर ले आया। उसे सीधा लेटा कर मैं उस पर चढ गया। और उसके शरीर पर अपना बोझ डाल दिया। उसने भी मुझे अपने दोनो हाथों से कस लिया। उसके होंठो पर मैंने अपने होंठ रख दिये। और कमर उठा कर लण्ड उसकी चूत में पेल दिया। उसके मुख से एक प्यारी सी सिसकारी निकल पड़ी,”मेरे राजा…. हाय…. इसी का इंतज़ार था…. हाय मेरी चूत को अब शांति मिली….”
मेरा लण्ड बुरी तरह से उतावला हो रहा था। मैंने भी अब बेरहमी से उसे चोदना चालू कर दिया। दोनों की कमर तेजी से चल रही थी। लग रहा था कि जनम जनम से प्यासी हो। दोनों के मुख से सुख भरी चीखें निकल रही थी। अब रीता की बारी थी उसने कोशिश की कि वो मेरे ऊपर आ जाये।
मैंने उसका इशारा समझ लिया और एक पलटी मार कर उसे अपने ऊपर चढा लिया। रीता ने अपनी चूत में सट से लण्ड वापस डाल लिया और और पांव सीधे करके मेरे पर लेट गई। उसकी कमर धीरे धीरे चल रही थी। उसने पांव पास करके अपनी चूत तंग कर ली थी। अच्छी तेज रगड़ लग रही थी। मेरा सुपाड़ा घर्षण से तेज उत्तेजना दे रहा था।
रीता बोली,” राजा…. मेरी चूंचियां मसल दो…. निपल खींचो…. हाय जल्दी करो….”
मैं अब निर्दयता से उसके बोबे मसकने लगा…. निपल खींच खींच कर मलने लगा। वो निहाल हो गई। मस्ती में उसकी कमर तेज चलने लगी।
“हाय…. और जोर से…. मेरे राजा…. चोद दो मुझे………… सारा निकाल दो मेरा कस बल….”
“मेरी रानी…. लगा…. जरा जोर से धक्का लगा…. देख मेरा लण्ड तेरी चूत का कैसा प्यासा हो रहा है….”
“हाय रे….अमन…. मुझे कैसा कैसा लग रहा है…. मैया री…. चुद गई रे मैं तो….”
मुझे लगने लगा कि रीता चरमसीमा पर पहुंच चुकी है। चूत काफ़ी पानी छोड़ रही थी। फ़च फ़च की आवाजें तेज हो चली थी। उसकी मेरे शरीर पर पकड़ तेज होने लगी थी।
“येएएहऽऽ…. मेरे राजा…. ईईईईह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्…. चुद गई….चुद गई…. हाय्…. ओऽऽऽऽह …. माई रेऽऽऽऽऽ…….. गई मैं तो…. अमन॥…. निकल गई…. हाय…….. ये निकला….निकला….हाआईईईई रे….”
लगभग चीखती सी रीता झड़ने लगी…. मैंने भी अपने लन्ड को उसकी चूत में गड़ा कर झड़ने की कोशिश करने लगा…. पर नहीं निकला। वो झड़ती रही और मेरे शरीर पर निढाल सी पड़ गई। मैंने पलटी मार कर उसे फिर से नीचे ले लिया और उसकी जांघों पर बैठ गया…….. और मुठ मारने लगा। तेज पिचकारी के साथ मेरा वीर्य छूट पड़ा तो उछल कर रीता के उरोजों पर जा गिरा। उसने हाथ से वीर्य अपने बोबे पर फ़ैला दिया। मेरा लण्ड झटके दे दे कर वीर्य छोड़ रहा था। अन्त में रीता ने मेरा लौड़ा पकड़ कर बचा खुचा वीर्य भी निचोड़ लिया। मैं उसके ऊपर से हट गया और बिस्तर से नीचे आ गया। रीता भी कुछ देर बाद बिस्तर पर बैठ गई
“अमन…. तुम तो कमाल के हो…. मेरी तो पूरी जान ही निकाल दी….”
“नहीं रीता…. तुमने तो मुझे आज निचोड़ डाला…. मेरी तो आज जिन्दगी सफ़ल हो गई….”
रीता हंसने लगी। मैंने कहा – “आओ अब नहा लेते हैं…..”
हम दोनो शावर के नीचे जा कर खड़े हो गये…. और नहाने लगे…. जाने कब हम फिए होश खो बैठे…. और हमारे शरीर फिर से चिपकने लगे…. लण्ड खडा हो गया…. रीता मेरी बाहों में कसने लगी…. लन्ड एक बार फिर रीता की कोमल चूत में घुस पड़ा…….. और ….और….दोनों फिर से सिसकारियां भरने लगे…….. Hindi Sex Stories
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