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Massage Girl in Wayanad: Premium Relaxation Services

Our site can help you find a professional massage girl in Wayanad who will help you relax in the best manner possible. We connect you with professional therapists who can offer you a massage that will make you feel better and more relaxed. The pros on our list are ready to provide you with a fantastic experience at your house or in one of their particular spots, whether you want to relax or get away from it all.

Introduction

Massage is currently one of the finest methods to relax your mind, body, and overall health. Our website makes it easy to locate the top massage services in Wayanad that meet your demands. This will be a one-of-a-kind and calming experience for you.

Tottaa wants to make it simple for clients to find the top masseuse. The Wayanad massage service providers on our list offer the greatest quality, comfort, and competence, whether you want a full-body massage or a massage for a particular location.

How Tottaa Helps Advertisers Reach More Customers

Tottaa is not only a list of masseuses, it’s also a secure location for them to show off what they can do. People in Wayanad who are seeking massage services may find them on our website. This makes them easier to find and gets them more appointments.

Advertisers may simply put up profiles, offer their services, and talk about pricing and discounts on our sites. This makes sure that the relevant people notice your Wayanad massage service, which makes it easier to obtain more customers.

Different Types of Massages We Offer

There are a lot of different types of massage services on our site, so you may choose one that works for you. You may choose the kind of treatment that works best for you, whether it’s profound rest or a particular type of therapy.

1. Swedish Massage

A calm and gentle way to ease muscular tension and improve blood flow. This Wayanad massage is perfect for you if you want to relax and forget about your concerns.

2. Deep Tissue Massage

This approach employs a lot of pressure to get to deeper muscle layers. It’s helpful for folks who have muscular discomfort or stiffness that won’t go away. There are specialists on our profiles of massage girls in Wayanad who are good at deep tissue treatments that function effectively.

3. Aromatherapy Massage

Calming massage strokes and essential oils are beneficial in making people feel improved both emotionally and physically. Most massage companies in Wayanad employ the use of custom oil preparations to make you feel good.

4. Thai Massage

A therapy that wakes you up by using a mix of regular massage, stretching, and compression. This traditional massage in Wayanad helps you relax, become more flexible, and get your mind and body back in harmony.

5. Hot Stone Massage

Heated stones are placed on various parts of the body to help with deep muscular tightness. People who want to feel good, relax, and help their muscles recover quickly can use this massage service in Wayanad

How to Book Our Massage Services

Tottaa makes it simple and fast to book. With our listings, you can see what kind of massage you want, read about the providers, see that they are free and then contact them directly. After you choose, you can book a massage in Wayanad at your convenient time and location. In order to get your desired massage services, apply the following simple steps:

Step 1: Browse Our Listings

Take a peek around our site to view a few massage professionals. Each listing gives you information about the many sorts of massages, how long they last, how much they cost, and where they are situated. This makes it easier to choose the finest ones.

Step 2: Compare and Shortlist

Examine the profiles carefully to compare how the services, talents, and reviews posted by customers differ. This phase makes sure you choose a business that has the style, pricing, and supply you desire.

Step 3: Connect with the Provider

When you have decided, use the information that you are offered so that you can contact them directly. One can communicate it to the massage giver thus making it understood what massage you want at what time and when.

Step 4: Confirm the Appointment

The date, time and place of the service, which could be your home, a hotel or the spa where the therapist may be found. You also need to agree on the payment method and any other accords prior to commencement of the course.

Step 5: Relax and Enjoy Your Massage

All you have to do on the day of the appointment is have your area ready for the house visit. The remainder will be handled by the expert. Take it easy and enjoy a massage that is made just for you.

Frequently Asked Questions

To locate a professional who can meet your needs, read our biography, reviews and advertising.

Yes, many of the therapists on our site will come to your house so you may feel safe and at ease.

You may pick based on talents since most adverts provide their qualifications in their profiles.

It would be advisable to make a reservation earlier to guarantee that you would be able to get a massage, particularly against the prevalent services of massage.

Not at all. Tottaa exclusively connects users with service providers. The doctor gets to choose how to handle payment.

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अन्तर्वासना के सभी पाठकों को मेरा प्यार भरा नमस्कार! Antarvasna

मैं राजेश लुधियाना से Antarvasna आपको अपनी कहानी नहीं बल्कि हकीक़त बताने जा रहा हूँ जो मेरे साथ हुआ।

भैया की नई नई शादी हुई थी, हम सब बहुत खुश थे क्योंकि भाभी बहुत ही खुश मिजाज हैं। शादी के कुछ महीनों बाद हमारे माता पिता को किसी काम से आठ दस दिन के लिए कहीं जाना पड़ा, सो घर में हम तीनों ही रह गए। उस पर भैया को एक दिन ऑफिस के काम से जाना पड़ा।

उस दिन घर में हम दोनों अकेले थे, सो भाभी से कहा- भाभी, कहाँ अकेले मेरे लिए खाना बनाओगी! चलो कहीं बाहर घूम आते हैं, आपका दिल भी बहल जायेगा और बाहर से खाना भी खा आयेंगे।

तो भाभी झट से मान गई। हाँ! मेरी भाभी की उम्र 26 साल कद 5’3′ रंग गोरा और फिगर 36/28/34 है। उसने जींस और टॉप पहना और हम मूवी देखने गए। हमने मूवी देखी। मूवी थोड़ी रोमांटिक थी सो मुझे कुछ अलग महसूस हो रहा था।

हम ने खाना पैक करवाया और सोचा घर जाकर खायेंगे। खाना पैक करवा के घर आ गए और मैं भाभी से बोला- आप कपड़े बदल लो, फिर खाना खाते हैं।

भाभी ने अपनी नाईट ड्रेस पहन ली। ड्रेस पारदर्शक थी, उसमें से उसके शरीर का एक एक कट नज़र आ रहा था कि कहाँ से उसकी चूचियाँ शुरू होती हैं, कहाँ पर ब्रा है और कहाँ से कमर और कहाँ पर उसकी पेंटी है।

उसको ऐसे देख कर मेरे शोर्ट्स में मेरा लंड स्टील रॉड की तरह हो गया। मेरा बैठना मुश्किल हो गया, बड़ी मुश्किल से अपने लंड को नज़र छुपाकर कुछ ठीक किया।

उसके बाद हमने खाना खाना शुरू किया तो मैंने भाभी से कहा- तुम रोज सर्व करती हो, लाओ, आज मैं करता हूँ!

और मैं जैसे ही दाल भाभी की प्लेट में डालने लगा तो मेरा ध्यान हट गया और दाल भाभी की ड्रेस के ऊपर गिर गई। मेरी तो जान ही निकल गई कि अब भाभी मुझे डांटेगी। मैंने झट से पास पड़े कपड़े से उनकी ड्रेस साफ़ करनी शुरू कर दी। पहले तो मैं ड्रेस ही साफ़ कर रहा था पर अचानक मेरा ध्यान गया कि दाल उनकी चुचियों पर गिरी है और उनकी आँखें बंद हैं। शायद मेरे दाल साफ़ करने पर वो गरम हो रही थी तो मैंने दाल साफ़ करने के बहाने उनकी चुचियों को सहलाना चालू रखा।

उनकी चुचियाँ कड़ी हो रही थी और इधर शोर्ट्स मेरा लंड भी फड़क रहा था। भाभी की आँखें अभी भी बंद थी तो मैंने दूसरे हाथ से उनकी दूसरी चूची को सहलाना शुरू कर दिया और साथ में दबा भी रहा था। जब भाभी ने कुछ नहीं कहा तो मैं समझ गया कि वो भी गरम है। तो मैंने उसकी चुचियों को जोर से दबाना शुरू कर दिया तो उनके मुँह से आह्ह् अह्ह् उफ्फ्फ निकलने लगा। मैंने लोहा गरम जान कर उनकी नाइटी का फ़ीता खोल दिया। अब वो मेरे सामने सिर्फ ब्रा और पेंटी में थी। उनकी आँखें अभी भी बंद थी।

अब मैं उनकी चुचियाँ ब्रा के ऊपर से सहला रहा था। वाह, क्या सफ़ेद चुचियाँ थी! पहली बार इतनी पास से देख रहा था! दिल कर रहा था खा जाऊँ! उनको सहलाते सहलाते हाथ कभी पेट तक ले जाता और कभी नाभि तक! तो वोह सिसक पड़ती- आ आआ आह्ह्ह ह हम्म म्म्म्म!

एक हाथ से सहलाते हुए हाथ पीछे ले जाकर उसकी ब्रा खोल दी और उनकी ब्रा में टाइट हो रही चुचियों को आज़ाद कर दिया। भाभी की आँखें अभी भी बंद थी। मुझे लगा शायद वो आँखें खोलकर मेरे साथ नज़र मिलाना नहीं चाहती थी।

उनके चुचूक बिल्कुल छोटे थे पर एक दम सख्त थे और हल्के रंग के थे। उसके चुचूक देख कर लंड अब बाहर आने को बेताब था, लगता था कि अगर एक दो मिनट में नहीं निकला तो अंडरवियर को फाड़ देगा।

भाभी की आँखें बंद थी तो मुझसे रहा नहीं गया, मैंने झट से भाभी के चुचूक को मुँह में ले लिया और चूसना शुरू कर दिया। भाभी ने एकदम से मुझे पकड़ लिया और मेरे सिर को जोर से दबाना शुरू कर दिया और कहने लगी- आह्ह्ह्ह हाँ! ऐसे ही करो और जोर से आआआआह्ह्ह ह्ह्ह आज इनको नहीं छोड़ना! बहुत प्यासी है यह! इनको खूब अच्छे से चूसो! आ आह!

अब तो मैं दोनों चुचियों पर टूट पड़ा, मैं पागल हो रहा था भाभी की मस्त चुचियाँ देख कर! उनको मसल रहा था, चूस रहा था जैसे बच्चे चूसते हैं। कभी कभी काट भी लेता था तो वो चिल्ला उठती। पर मेरे सिर को दबाये जा रही थी। मैंने 8-10 मिनट तक भाभी की चुचियों को खूब चूसा, चूस चूस के लाल कर दी, कहीं कहीं तो दांतों के निशान पड़ गए थे।

अब मैंने भाभी को ऐसे ही अपनी गोद में उठाया और बेडरूम में ले गया, जाकर भाभी को बिस्तर पर गिरा दिया, मैं उन पर गिर पड़ा और भाभी को चूमना शुरू कर दिया। भाभी सिर्फ पेंटी में थी पर पेंटी पर निशान से पता लग रहा था कि भाभी स्खलित हो चुकी है।

मैंने भाभी को हर जगह चूमा, हर चुम्बन पर वह सिसक पड़ती। उसमें से आ रही मदमस्त खुशबू मुझे और पागल कर रही थी। अब वह भी मुझे पागलों की चूम रही थी। जब मैंने भैया का पूछा तो कहती- उनके पास समय नहीं है ऐसे प्यार करने का! उनको तो बस दो मिनट का सेक्स पसंद है, चूत में डाला और हो गया! उनको यह सब पूर्व-क्रीड़ा पसंद नहीं है। इसलिए आज सच में मजा आ रहा है! पहली बार किसी ने मुझे सेक्स से पहले वो मजा दिया जिसके लिए मैं तड़पती रही हूँ।

इतनी देर में मैंने भाभी की पेंटी भी उतार दी थी, वाह क्या मस्त चूत थी! आज तक ऐसी चूत तो मैंने ब्लू फिल्म में भी नहीं देखी थी, एक दम सफ़ाचट थी, चूत के होंठ गुलाबी थे और बिल्कुल छोटा सा चीरा था ऐसे लग रहा था जैसे अभी कुँवारी है। मुझसे रहा नहीं गया और मैंने झट से उसको चूसना शुरू कर दिया तो वह एक दम से उछल पड़ी। मैंने झट से उसकी चूत में जीभ डाल दी और उसका रस चूसना शुरू कर दिया। बहुत ही स्वादिष्ट थी उसकी चूत! उसकी चूत को चाट चाट कर साफ़ कर दिया मैंने!

वो बड़ी जोर से मेरा सिर दबा रही थी और कह रही थी- आऽऽ आह्ह उफ्फ्फ आअह्ह्ह ह्ह्हू ऊऊउल् मैं मर गई!

अब तक उसका हाथ मेरे लंड तक पहुँच गया था, वो उसको सहला रही थी निकर के ऊपर से! मैंने झट से अपनी निकर उतार दी। अब हम बिल्कुल नंगे थे। वह मेरा लंड देख कर हैरान रह गई, कहती- इतना बड़ा?

अब मैंने फिर से भाभी के चुचूक चूसना शुरू कर दिया और उनको जोर से मसल रहा था, तो कहती- हाँ राजेश! और जोर से कर! आआह्ह बहुत मजा आ रहा है!

फिर कोई 5 मिनट की चुसाई के बाद हम 69 पोज़ में आ गए। भाभी ने कहा- ला राजेश, अब मुझे भी मजा लेने दे! तेरे भैया तो चूसने ही नहीं देते! ना चूसते हैं, ना ही चुसवाते हैं!

भाभी ने झट से मेरा लंड मुँह में लिया और चूसने लगी। पर लौड़ा इतना बड़ा हो गया था कि उनके मुँह में नहीं आ रहा था। पर जितना आ रहा था, वो उतना बड़ी मस्ती से चूस रही थी। मेरी भी जान निकल रही थी, लगता था जैसे कहीं स्वर्ग में आ गया हूँ और मैं भाभी की चूत को बड़ी मस्ती से चूस रहा था। कभी उसके दाने को चूसता तो कभी होंठों से खींचता तो उछल पड़ती। कभी उसकी चूत में उंगली करता, कभी उसकी चूत में जीभ डालता। पूरी चूत की मस्ती से चुदाई कर रहा था जीभ से!

इस दौरान वो कम से कम तीन बार झड़ चुकी थी। अब मैं भी झड़ने के करीब था तो मैंने भाभी का सिर पकड़ लिया और जोर से उनके मुँह की चुदाई शुरू कर दी। वो ग्गू गुउउऊ कर रही थी उसकी आवाज़ नहीं आ रही थी। मैंने बालों से पकड़ कर पूरा लंड मुँह में डाल दिया तो लगता जैसे उसकी सांस रुक गई। वो मिचका रही थी पर मैंने पूरे जोश से उसके मुँह की चुदाई चालू रखी और 5-7 मिनट बाद उसके मुँह में ही झड़ गया। उसने भी सारा रस पी लिया, एक भी बूँद बाहर नहीं गिरने दी।

मैं झटके लेकर झड़ता रहा, लग रहा था कि जैसे आज वीर्य निकलना बंद नहीं होगा।

हम दोनों थक गए थे और ऐसे ही नंगे एक दूसरे के साथ चिपक कर सो गए।

उसके बाद अगले दिन क्या हुआ, वो आपके जवाब देने पर बताऊँगा। Antarvasna

लेखिका : आरती वर्मा Hindi Sex Stories

मेरी सगाई की तारीख पक्की हो Hindi Sex Stories गई थी। मैं जब राजू से पहली बार मिली तो मैं उसे देखती रह गई। वो बड़ा ही हंसमुख है। मज़ाक भी अच्छी कर लेता है। मैं ३ दिनों से इन्दौर में ही थी। वो मुझे मिलने रोज़ ही आता था। हम दोनो एक दिन सिनेमा देखने गए। अंधेरे का फ़ायदा उठाते हुए उन्होंने मेरे स्तनों का भी जायज़ा ले लिया। मुझे बहुत अच्छा लगा था।

पापा ने बताया कि उज्जैन में मन्दिर की बहुत मान्यता है, अगर तुम दोनों जाना चाहो तो जा सकते हो। इस पर हमने उज्जैन जाने का कार्यक्रम बना लिया और सुबह आठ बजे हम कार से उज्जैन के लिए निकल पड़े। लगभग दो घण्टे में ७०-७५ किलोमीटर का सफर तय करके हम होटल पहुँच गये.

कमरे में जाकर राजू ने कहा-“आरतीफ्रेश हो जाओ…नाश्ता करके निकलेंगे..”

मैं फ्रेश होने चली गयी. फिर आकर थोड़ा मेक अप किया. इतने में नाश्ता आ गया. नाश्ते के बीच बीच में वो मेरी तरफ़ देखता भी जा रहा था. उसकी नज़ारे मैं भांप गयी थी. वो सेक्सी लग रहा था.

मैंने कहा -“क्या देख रहे हो…”

“तुम्हे… इतनी खूबसूरत कभी नहीं लगी तुम..”

“हटो…” मैं शरमा गयी.

“सच… तुम्हे बाँहों में लेने का मन कर है”

“राजू !!! ”

“आओ मेरे गले लग जाओ..”

‘वो कुर्सी से खड़ा हो गया और अपनी बाहें फैला दी. मैं धीरे धीरे आंखे बंद करके राजू की तरफ़ बढ गयी. उसने मुझे अपने आलिंगन में कस लिया. उसके पेंट में नीचे से लंड का उभार मेरी टांगों के बीच में गड़ने लगा. मैं भी राजू से और चिपक गयी. उसने मेरे चेहरे को प्यार से ऊपर कर लिया और निहारने लगा. मेरी आंखे बंद थी. हौले से उसके होंट मेरे होंटों से चिपक गए. मैंने अपने आपको उसके हवाले कर दिया. वो मुझे चूमने लगा. उसने मेरे होंट दबा लिए और मेरे नीचे के होंट को चूसने लगा. मैं आनंद से भर उठी. उसके नीचे का उभार मेरी टांगों के बीच अब ज्यादा चुभ रहा था. मैंने थोड़ा सेट करके उसे अपनी टांगों के बीच में कर लिया. अब वो सही जगह पर जोर मार रहा था. मैं भी उस पर नीचे से जोर लगा लगा कर चिपकी जा रही थी.

वो अलग होते हुए बोला -“नेहा…एक बात कहूं…”

“कहो राजू”

“मैं तुम्हे देखना चाहता हूँ…”

मैं उसका मतलब समझ गयी , पर उसको तड़पाते हुए मजा लेने लगी…”तो देखो न…सामने तो खड़ी हूँ…”

“नहीं…ऐसे नहीं…”

“मैंने इठला कर कहा -“तो फिर कैसे.. ”

“मतलब…कपडों में नहीं…”

“हटो राजू…चुप रहो…”

“न..नहीं..मैं तो यूँ ही कह रहा था… चलो…अच्छा..”

मैं उस से लिपट गयी..” मेरे राजू… क्या चाहते हो… सच बोलो..

“क कक्क कुछ नहीं… बस..”

“मुझे बिना कपडों के देखना चाहते हो न…”

उसने मुझे देखा… फिर बोला..” मेरी इच्छा हो रही थी.. तुम्हे देखने की…क्या करून अब तुम हो ही इतनी सुंदर…”

“मैं धीरे से उसे प्यार करते हुए बोली – ” सुनो मैं तो तुम्हारी हूँ… ख़ुद ही उतार लो..”

“सच…” उसने मेरे टॉप को ऊपर से धीरे से उतार दिया. मैं सिहर उठी.

“राजू… आह…”

ब्रा में कसे मेरे उरोज उभार कर सामने आ गए. राजू ने प्यार से मेरे उरोजों को हाथ से सहलाया. मुझे तेज बिजली का जैसे करंट लगा…फिर उसने मेरी ब्रा खोल दी. उसकी आँखे चुंधिया गयी. उसके मुंह से आह निकल पड़ी. मैंने अपनी आंखे बंद करली. वो नज़दीक आया उसने मेरे उभारों को सहला दिया. मुझे कंपकंपी आ गयी. उस से भी अब रहा नहीं गया…मेरे मस्त उभारों की नोकों को मुंह में भर लिया..और चूसने लगा..

“राजू मैं मर जाऊंगी…बस…करो..” मेरे ना में हाँ अधिक थी.

उसने मेरी सफ़ेद पेंट की चैन खोल दी और नीचे बैठ कर उसे उतारने लगा. मैंने उसकी मदद की और ख़ुद ही उतार दी. अब वो घुटनों पर बैठे बैठे ही मेरे गहरे अंगों को निहार रहा था. धीरे से उसके दोनो हाथ मेरे नितम्बों पर चले गए और वो मुझे अपनी और खींचने लगा.। मेरे आगे के उभार उसके मुंह से सट गए. उसकी जीभ अब मेरी फूलों जैसे दोनों फाकों के बीच घुस गयी थी. मैंने थोड़ा और जोर लगा कर उसे अन्दर कर दी. फिर पीछे हट गयी.

“बस करो ना अब…” वो खड़ा हो गया. ऐसा लग रहा था की उसका लंड पेंट को फाड़ कर बाहर आ जाएगा

“राजू..अब मैं भी तुम्हे देखना चाहती हूँ… मुझे भी देखने दो.. ”

राजू ने अपने कपड़े भी उतार दिए. मैं उसका तराशा हुआ शरीर देख कर शर्मा गयी. अब हम दोनों ही नंगे थे. उसका खड़ा हुआ लंड देख कर और उसकी कसरती बॉडी देख कर मन आया कि… हाय…ये तो मस्त चीज़ है… मजा आ जाएगा… पर मुझे कुछ नहीं कहना पड़ा. वो ख़ुद ही मन ही मन में तड़प रहा था. वो मेरे पास आ गया. उसका इतना कड़क लंड देख कर मैं उसके पास आकर उस से चिपकने लगी. मुझे गांड कि चुदाई में आरंभ से ही मजा आता था. मुझे गांड मराने में मजा भी खूब आता है. उसका कड़क, मोटा और लंबा लंड देख कर मेरी गांड चुदवाने कि इच्छा बलवती होने लगी.

मेरी चूत भी बेहद गीली हो गयी थी. उसका लंड मेरी चूत से टकरा गया था. वो बहुत उत्तेजित हो रहा था. वो मुझे बे -तहाशा चूम रहा था. “नेहा…डार्लिंग… कुछ करें…”

“राजू… मत बोलो कुछ…” मैं ऑंखें बंद करके बोली ” मैं तुमसे प्यार करती हूँ…मैं तुम्हारी हूँ.. मेरे राजू..”

उसने मुझे अपनी बलिष्ठ बाँहों में खिलोने की तरह उठा लिया. मुझे बिस्तर पर सीधा लेटा दिया. मेरे चूतडों के नीचे तकिया लगा दिया. वो मेरी जांघों के बीच में आकर बैठ गया। धीरे से कहा -“आरतीमैं अगर दूसरे छेद को काम में लाऊं तो…” मैं समझ गयी कि ये तो ख़ुद ही गांड चोदने को कह रहा है. मैं बहुत खुश हो गयी.”चाहे जो करो मेरे राजा…पर अब रहा नहीं जाता है.”

” इस से सुरक्षा भी रहेगी..किसी चीज का खतरा नहीं है…”

“राजू…अब चुप भी रहो न… चालू करो न…” मैंने विनती करते हुए कहा.

मैंने अपनी दोनों टांगे ऊँची करली. उसने अपने लंड कि चमड़ी ऊपर खीच ली और लंड को गांड के छेद पर रख दिया. मैं तो गंद चुदवाने के लिए हमेशा उसमे चिकनाई लगाती थी. उसने अपना थूक लगाया और… और अपने कड़े लंड की सुपारी पर जोर लगाया. सुपारी आराम से अन्दर सरक गयी. मैं आह भर उठी.

“दर्द हो तो बता देना..नेहा..”

“राजू… चलो न…आगे बढो… अब..” मैं बेहाल हो उठी थी. पर उसे क्या पता था की मैं तो गांड चुदवाने और चुदाई कराने मैं अभ्यस्त हूँ. उसने धीरे धीरे धक्के मारना चालू किया.

“तकलीफ़ तो नहीं हुई…नेहा…”

“अरे चलो न…जोर से करो ना…क्या बैलगाडी की तरह चल रहे हो…” मुझसे रहा नहीं गया. मुझे तेजी चाहिए थी.

सुनते ही एक जोरदार धक्का मारा उसने… अब मेरी चीख निकल गयी. लंबा लंड था…बहुत अंदर तक चला गया. अपना लंड अब बाहर निकल कर फिर अन्दर पेल दिया उसने… अब धक्के बढने लगे थे. खूब तेजी से अन्दर तक गांड छोड़ रहा था.. मुझे बहुत मजा आने लगा था. “हाय..मेरे..राजा… मजा आ गया… और जोर से… जोर लगा…जोर से… हाय रे…”

उसके मुंह से भी सिस्कारियां फूट पड़ी. “नेहा… ओ ओह हह ह्ह्ह… मजा..आ रहा है… तुम कितनी अच्छी हो…”

“राजा…और करो… लगा दो…अन्दर तक…घुसेड दो… राम रे…तुम कितने अच्छे हो…आ आह हह…रे..”

मेरी गांड चिकनी थी…उसे चूत को चोदने जैसा आनंद आ रहा था… मेरी दोनों जांघों को उसने कस के पकड़ रखा था. मेरी चुन्चियों तक उसके हाथ नहीं पहुँच रहे थे. मैं ही अपने आप मसल रही थी. और सिस्कारियां भर रही थी. मैंने अब उसे ज्यादा मजा देने के लिए अपने चूतडों को थोड़ा सिकोड़ कर दबा लिया. पर हुआ उल्टा…

“आरतीये क्या किया… आह…मेरा निकला…मैं गया… ”

“मैंने तुंरत अपने चूतडों को ढीला छोड़ दिया… पर तब तक मेरी गांड के अन्दर लावा उगलने लगा था.

“आ अह हह नेहा…मैं तो गया… अ आह ह्ह्ह…” उसका वीर्य पूरा निकल चुका था. उसका लंड अपने आप सिकुड़ कर बाहर आ गया था. मैंने तोलिये से उसका वीर्य साफ़ किया

मैं अभी तक नहीं झड़ी थी.. मेरी इच्छा अधूरी रह गयी थी. फिर भी उसके साथ मैं भी उठ गयी.

हम दोनों एक बार फिर से तैयार हो कर होटल में भोजनालय में आ गए. दोपहर के १२ बज रहे थे. खाना खा कर हम उज्जैन की सैर को निकल पड़े.

करीब ४ बजे हम होटल वापस लौट कर आ गये. मैंने राजू से वो बातें भी पूछी जिसमे उसकी दिलचस्पी थी. सेक्स के बारे में उसने बताया कि उसे गांड चोदना अच्छा लगता है. चूत की चुदाई तो सबको ही अच्छी लगती है. हम दोनों के बीच में से परदा हट गया था. होटल में आते ही हम एक दूसरे से लिपट गए. मेरी चूत अभी तक शांत नहीं हुयी थी. मुझे राजू को फिर से तैयार करना था. आते ही मैं बाथरूम में चली गयी. अन्दर जाकर मैंने कपड़े उतार दिए और नंगी हो कर नहाने लगी. राजू बाथरूम में चुपके से आ गया. मैंने शोवेर खोल रखा था. मुझे अपनी कमर पर सुहाना सा स्पर्श महसूस हुआ. मुझे पता चल गया कि राजू बाथरूम में आ गया है. मैं भीगी हुयी थी. मैंने तुरन्त कहा -“राजू बाहर जाओ… अन्दर क्यूँ आ गए..”

राजू तो पहले ही नंगा हो कर आया था. उसके इरादे तो मैं समझ ही गयी थी. उसका नंगा शरीर मेरी पीठ से चिपक गया वो भी भीगने लगा. “मुझे भी तो नहाना है…” उसका लंड मेरे चूतड में घुसने लगा. मैं तुंरत घूम गयी. और शोवेर के नीचे ही उस से लिपट गयी. उसका लंड अब मेरी चूत से टकरा गया. मैं फिर से उत्तेजित होने लगी. मेरी चूत में भी लंड डालने की इच्छा तेज होने लगी. हम दोनों मस्ती में एक दूसरे को सहला और दबा रहे थे. अपने गाल एक दूसरे पर घिस रहे थे. उसका लंड कड़क हो कर मेरी चूत पर ठोकरें मार रहा था. उसने मुझे सामने स्टील की रोड पकड़ कर झुकने को कहा. शोवेर ऊपर खुला था. मेरे और राजू पर पानी की बौछार पड़ रही थी. मैंने स्टील रोड पकड़ कर मेरी गांड को इस तरह निकाल लिया कि मेरी चूत की फ़ांकें उसे दिखने लगी.

उसने अपना लण्ड पीछे से चूत की फ़ांकों पर रगड़ दिया। मेरा दाना भी रगड़ खा गया। मुझे मीठी सी गुदगुदी हुई। दूसरे ही पल में उसका लण्ड मेरी चूत को चीरता हुआ अन्दर तक घुस गया। मैं आनन्द के मारे सिसक उठी,”हाय रे… मार डाला…”

“हाँ नेहा… तुम्हें सुबह तो मजा नहीं आया होगा…अब लो मजा…”

उसे कौन समझाए कि वो तो और भी मजेदार था… पर हाँ…सुबह चुदाई तो नहीं हो पाई थी.

“हाँ… अब मत छोड़ना मुझे… पानी निकाल ही देना…” मैं सिसककते हुए बोली.

“तो ये लो…येस…येस… कितनी चिकनी है तुम्हारी..”उसके धक्के तेज हो गए थे. ऊपर से शोवेर से ठंडे पानी की बरसात हो रही थी…पर आग बदती जा रही थी. मुझे बहुत आनंद आने लगा था.

“राजू… तेज और… तेज… कस के लगाओ… हाय रे मजा आ रहा है…”

“हा…ये..लो…और…लो…ऊ ओऊ एई एई…”

मैंने अपनी टांगे और खोल दी. उसका लंड सटासट अन्दर बाहर जा रहा था. हाँ…अब लग रहा था कि शताब्दी एक्सप्रेस है. मेरे तन में मीठी मीठी सी जलन बढती जा रही थी .उसके धक्के रफ़्तार से चल रहे थे. फच फच की आवाजें तेज हो गयी. “हाय रे मार दो मुझे…और तेज धक्के लगाओ…हाय…आ आह ह्ह्ह…आ आ हह हह…”

मुझसे अब रहा नहीं जा रहा था. मैं झड़ने वाली थी. मैंने राजू की ओर देखा. उसकी आँखे बंद थी. उसकी कमर तेजी से चल रही थी. उसके चूतड मेरी चूत पर पूरे जोर से धक्का मार रहे थे. मेरी चूत भी नीचे से लंड की रफ्तार से चुदा रही थी. “राजू…अ आह…हाय…आ आया ऐ ई ई ई… मैं गयी… हाय रे…सी ई सी एई ई… निकल गया मेरा पानी… अब छोड़ दे मुझे… बस कर…”मैं जोर से झड़ गयी. मेरी चूत ने पानी छोड़ दिया. पर वो तो धक्के मारता ही गया. मैंने कहा..”अब बस करो…लग रही है… हाय..छोड़ दो ना…”

राजू को होश आया… उसने अपना लंड बाहर निकल लिया. उसका बेहद उफनता लंड अब बाहर आ गया था. मैंने तुंरत उसे अपने हाथ में कस के भर लिया. ओर तेजी से मुठ मारने लगी. कस कस के मुठ मारते ही उसका रस निकल पड़ा. “नेहा…आ आह हह…आ अहह ह्ह्ह… हो गया…बस… बस…ये आया…आया…”

इतने मैं उसका वीर्य बाहर छलक पड़ा. मैं राजू से लिपट गयी. उसका लंड रुक रुक कर पिचकारियाँ उगलता रहा. और मैं उसका लंड खींच खींच कर दूध की तरह रस निकालती रही. जब पूरा रस निकल गया तो मैंने उसका लंड पानी से अच्छी तरह धो दिया. कुछ देर हम वैसे ही लिपटे खड़े रहे. फिर एक दूसरे को प्यार करते रहे और शोवर के नीचे से हट गए. हम दोनों एक दूसरे को प्यार से देख रहे थे. इसके बाद हम एक दूसरे के साथ दिल से जुड़ गए. हमारा प्यार अब बदने लगा था.

शाम के ६ बजे हम उज्जैन से रवाना हो गए… मन में उज्जैन की यादें समेटे हुए इंदौर की और कूच कर गए. Hindi Sex Stories

Sex Stories

मैं रेलगाडी में मुंबई से हावडा जा रहा Sex Storiesथा. मेरे सामने वाली सीट पर एक सुंदर महिला बैठी थी. उसने नीली साडी पहनी हुई थी, वो पतली दुबली थी मगर उसके दूध बड़े बड़े थे, ऐसा लगता था मानो अभी ब्लाउज़ फाड़ कर बाहर आने को बेताब हैं। उसका रंग भी बिल्कुल दूध की तरह सफ़ेद था। उसकी उमर कोई 28 साल की होगी।

मैंने ध्यान दिया कि वो मुझे बहुत देर से देख रही है तो मैंने भी उसकी तरफ़ देख कर थोड़ा मुस्करा दिया।

फिर वो मुझसे अपनी टिकट दिखाते हुए पूछी कि ज़रा देखो मेरा रिज़र्वेशन है कि नहीं?
मैंने देखा उनका वेटिंग टिकेट था।
मैंने कहा कोई बात नहीं आप मेरे सीट में सो जाना।

फिर मैंने उसका नाम पूछा तो उसने बताया कि उसका नाम रूपा है।

रूपा की खूबसूरती देख कर मेरे मुंह और लंड दोनों ही जगह से पानी निकल रहा था।

मैं मन ही मन उसे चोदने का प्लान बनाने लगा। ये सरदी की रात थी इसलिये सभी लोग कम्बल ढक कर सो रहे थे।

रात को हम खाना खाने के बाद मैंने रूपा से कहा के आप सो जाओ मैं बैठता हूं।

उसने कहा नहीं तुम भी कम्बल ओढ कर सो जाओ। और फिर वो ट्रेन की उस छोटी सी सीट पर इस तरह से लेट गये कि उसकी गांड मेरी तरफ़ थी और चेहरा दूसरी तरफ़।

फिर मैं उसके सर की तरफ़ पैर को रख कर लेट गया और मैं उसकी गांड की तरफ़ मुंह घुमा कर सो गया। अब लंड बिल्कुल उसकी गांड की दरार में था उसकी गोल गोल गांड और मेरा लंड एक दूसरे से चिपके हुए थे।

रूपा के गोरे गोरे पैर भी बिल्कुल मेरे चेहरे के सामने थे।
मेरे लंड को समझाना अब मुश्किल हो रहा था।

मैंने अपने हाथ उसके पैरों पर रख कर थोड़ा सहलाना शुरु किया और गर्म गर्म सांसो के साथ उसके पैरों को चूमने लगा।

थोड़ी देर बाद वो मेरी तरफ़ मुड़ गयी। अब उसका चेहरा भी मेरे पैरों की ओर था।
उसने मेरे पैरों को ज़ोर से पकड़ का अपने बूब्स से रब करना शुरु कर दिया।

फिर मैंने भी उसके पैरों को सहलाते हुए जांघ तक जा पहुंचा और जब मैं उसकी चूत पर हाथ रखा तो ऐसा लगा मेरा हाथ जल गया। उसकी चूत भट्टी की तरह गर्म हो रही थी और गर्म गर्म चूत बिल्कुल गीली हो रही थी।

मैंने उसकी चूत में अपनी ऊँगलियाँडालनी शुरु कर दी, उसकी चूत पर छोटे छोटे बाल थे जिनको मैं अपनी ऊँगलियों से सहला रहा था।
फिर धीरे धीरे कम्बल के अन्दर ही मैं अपना मुंह उसके चूत तक लेकर गया और उसकी चूत को पीने की कोशिश करने लगा।

उसने अपने एक पैर को उठा कर मेरे कंधे पर रख दिया। अब उसकी बुर बिल्कुल मेरे मुंह में थी मैं अपनी जीभ को उसके बुर के चारों तरफ़ घुमाना शुरु कर दिया वो भी अपनी कमर धीरे धीरे हिलाना शुरु कर दी।

मैंने भी अपने पैर को उठा कर अपना लंड उसकी तरफ़ बढ़ा दिया।
वो बड़े प्यार से लंड को चूसने लगी।

हम अब बिल्कुल 69 की पोजिशन में थे लेकिन ऊपर नीचे नहीं थे बल्कि साइड बाइ साइड थे और हम जो भी कर रहे थे धीरे धीरे कर रहे थे क्योंकि ट्रेन में किसी को पता न चले।

वो अब कुछ ज्यादा ही ज़ोर से अपने कमर को उठा का अपने बुर को मेरे मुंह में रगड़वा रही थी।
अचानक उसने मेरे सर को अपने हाथ से अपनी बुर में ज़ोर से दबा दिया और कमर को मेरे मुंह में दबा दिया और ढीली पर गयी।

मैं उसके बुर की गर्मी धीरे धीरे अपने मुंह से चाट चाट कर साफ़ किया। वो अब भी मेरे लंड को चूस रही थी। मैं भी अब जोर जोर से अपने लंड को उसके मुंह में घुसा रहा।

मेरे लंड का पानी भी अब बाहर निकलने वाला था मैंने ज़ोर से उसके बुर में अपना मुंह घुसा दिया और मेरे लंड से पानी निकलना शुरु हुआ तो 8-10 झटके तक निकलता ही रहा।
उसने मेरे लंड के पानी को पूरा अपनी मुंह में लेकर पी गयी।

थोड़ी देर के बाद मैं उठा और टोइलेट गया।

मैंने अपनी पैंट उतार दी फिर अपनी चड्ढी भी उतार दी। अपने लंड को अच्छी तरह से साफ़ किया और पैंट पहन ली।

वापस आकर मैंने अपनी चड्ढी बैग में डाल दी। फिर वो भी टोइलेट जाकर आयी।

और मेरी तरफ़ मुंह करके सो गयी और कम्बल ढक ली। अब उसके बूब्स मेरी छाती से लग रहे थे। मैंने उसके ब्लाउज़ के बटन खोल दिये। वो ब्रा नहीं पहनी थी। ब्रा को शायद टोइलेट में ही उतार कर आयी थी।

मैं उसके गोल गोल बूब्स को अपने हाथ से दबाने लगा और उसके निप्पल को मुंह में लेकर ज़ोर ज़ोर से चूसने लगा।
उसने अपने एक हाथ से अपनी साड़ी को उठा कर कमर के ऊपर रख लिया।

अब उसकी कमर के नीचे कुछ भी नहीं था, मेरा हाथ उसके मक्खन जैसी जांघों को तो कभी उसके बुर को प्यार से सहला रहा था और रुपा अपने हाथों से मेरे लंड को सहला रही थी।
ऐसा काफ़ी देर तक चलता रहा।

मेरा लंड एक बार फिर से उसकी बुर की गहराई को नापने के लिये मचलने लगा था। मैंने धीरे से रूपा से पलट कर सोने को कहा। रुपा धीरे से पलट गयी। अब उसकी नंगी गांड की दरार मेरे लंड से चिपकी हुई थी।
मैंने धीरे से अपने लंड को हाथ से पकड़ कर पीछे से उसकी गांड के छेद में रखा और एक हल्का सा धक्का मारा। मेरा लंड उसकी गांड में आधा घुस गया लेकिन वो दर्द से कराह उठी।लेकिन वो चीखी नहीं। वो जानती थी कि ट्रेन में सब सो रहे लोगों को शक न हो जाये।

मैंने धीरे से एक और धक्का मारा और लंड पूरा का पूरा अन्दर घुस गया। फिर मैं एक हाथ से उसकी चूचियों को मसलने लगा। रूपा की चिकनी चिकनी गांड मेरे पेट से रगड़ खा रही थी। और मैं उसे चोदे जा रहा था।

फिर चार पांच मिनट के बाद मैंने अपनी चुदाई की स्पीड बढ़ा दी। और जोर जोर से रूपा को चोदने लगा।
रूपा भी अपनी गांड हिला हिला कर चुदवा रही थी।

अचानक रूपा अपनी गांड को मेरे लंड पे जोर से दबा कर रुक गयी। मेरा लंड भी पिचकारी की तरह पानी छोड़ना शुरु कर दिया। लंड और बुर दोनों का पानी गिर जाने के बाद दोनों शान्त हो गये।
लेकिन हमारी चुदाई सुबह तक चलती रही। हमने रात भर में सात बार चुदाई की। और किसी को पता भी नहीं चला।

फिर सुबह मेरा स्टेशन आ गया। और मैं उतर गया। उसे आगे जाना था तो वो चली गयी और जाते जाते अपना फोन नम्बर भी दे गयी। Sex Stories

प्यारे दोस्तो Hindi Sex Stories

मेरा नाम Hindi Sex Stories रवि है, मैं आपको अपनी एक कहानी बताता हूँ।

जब मैं स्कूल में पढ़ता था तब मेरे साथ मेरी एक दोस्त थी जिसका नाम ऋतु था वो मेरे घर क पास ही रहती और हम एक साथ स्कूल जाया करते थे। एक बार किसी कारण से मुझे स्कूल जाने में देर हो गई तो ऋतु मेरा इन्तज़ार करते करते मेरे घर आ गई। उस दिन बारिश हो रही थी, वो भीगती हुई आई। उसकी स्कूल ड्रेस भीग चुकी थी उसे देख कर मेरी मम्मी ने कहा- थोड़ी देर रुको, रवि नहा कर आ रहा है, फिर तुम दोनों उसके पापा की कार लेकर स्कूल चले जाना। लेकिन उससे पहले अपने घर जाकर अपने कपड़े बदल लेना।

तो वह मान गई। जब मैं नहा कर आया तो देखा कि वो दरवाजे पर खड़ी मम्मी से बात कर रही थी। उसकी शर्ट एक दम गीली थी उसके स्तन और चुचूक एकदम मस्त लग रहे थे।

मैं पास गया तो देख कर हैरान हो गया। चूचियाँ देख कर मेरा लंड खड़ा हो गया था। वो भांप गई कि मेरी नज़रें उसके वक्ष पर हैं लेकिन वह कुछ नहीं बोली। फिर मैं जल्दी से तैयार होकर आया तो पापा से कार की चाबी लेकर कार स्टार्ट करने लगा और होर्न बजा कर ऋतु को बुलाने लगा। ॠतु होर्न सुन कर जल्दी से मेरे पास आई और बोली- रवि, तू आज मरवा देगा बक्शी मैडम से !

मैंने कहा- तू जल्दी से गाड़ी में बैठ ! पहले तेरे घर चलें, तू ड्रेस बदल, फिर स्कूल जायेंगे।

वो बोली- नहीं, हम लेट हो रहे हैं, मैं घर नहीं जाउंगी, सीधे स्कूल चलते हैं।

और वो कार में बैठ गई। उसका स्कूल बैग उसकी पीठ पर था तो वह ठीक से बैठ नहीं पा रही थी।

मैंने कहा- ऋतु, अपना बैग उतार कर पीछे सीट पर रख दे !

तो वह बैग उतारने लगी। जब वह बैग उतार रही थी तो उसके कंधे पीछे की ओर हो गए और स्तन बाहर की ओर आ गए। उसके चुचूक एकदम कड़क थे पानी में भीगने की वजह से !

मेरा मन कर रहा था कि बस स्कूल न जाकर उसे घर ले जाकर चोद दूँ।

तभी उसकी नज़र मुझ पर पड़ी और बोली- क्या देख रहे हो ?

मैंने कहा- कुछ नहीं, बस ऐसे ही !

उसने कहा- तुम मेरी चूचियाँ देख रहे हो ना ?

गलती से मेरे मुँह से हाँ निकल गया और वो बोली- कितने गंदे हो तुम रवि ! मुझे इतनी गन्दी नज़रों से देखते हो !

मैंने कहा- इसमें गुस्सा होने की क्या बात है? यह चीज़ ही ऐसी है कि किसी की नज़र ना पड़े तो वह अँधा है !

यह बात सुन कर वह मुँह दूसरी तरफ करके बैठ गई। मैं तो बस उसके वक्ष के बारे में ही सोच रहा था। थोड़ी देर में हम स्कूल पहुँच गए। मैं अपना बैग लेने के लिए पीछे मुड़ा, इतने में वो भी मुड़ी, उसके होंठ मेरे गालों से छू गए। फिर मेरे अन्दर एक करंट सा लग गया और उसे बोला- एक और प्लीज़ ! एक और !

वो बोली- तो बहाना चाहिए बस?

मैंने कहा- तू चीज़ ही इतनी मस्त है ! मैं क्या करूँ !

तो वह हँस पड़ी और हम दोनों बैग उठा कर स्कूल जाने लगे। स्कूल की सीढ़ी चढ़ते वक़्त मैंने देखा कि उसके स्तन ऊपर-नीचे उछल रहे हैं। मेरा तो लंड खड़ा हो रहा था देख-देख कर !

ना जाने कैसे उसकी शर्ट का बटन खुल गया था, अंदर से उसकी सफ़ेद रंग की ब्रा चमक रही थी लेकिन किसी तरह मैंने अपने आप को संभाल लिया और क्लास में चले गए।

फिर स्कूल ख़त्म होने के बाद हम फिर मिले और कार की तरफ बढ़ चले। कार में बैठ कर मैं कार स्टार्ट करने लगा तभी उसने कहा- आज कितनी बारिश हो रही है ! देखना, तुम्हारी कार स्टार्ट नहीं होगी !

उसका तो कहा ही हुआ और मेरी कार ने जवाब दे दिया, वो स्टार्ट नहीं हो रही थी। ऊपर से ऋतु खिलखिला कर हँस रही थी।

पास के टेलीफोन बूथ से मैंने पापा को फोन किया और बताया कि कार स्टार्ट नहीं हो रही है।

पापा ने कहा- कोई बात नहीं, मैं मकेनिक भेज कर कार ठीक करा दूंगा।

मैंने कार की चाबी स्कूल के चौकीदार को दे दी और हम पैदल घर की तरफ़ चल पड़े। रास्ते में काफी बारिश थी सो हम काफी भीग चुके थे। ऋतु के घर पहुँच कर देखा कि उसके घर पर ताला लगा है। पड़ोसी से पता लगा कि उसकी मम्मी मेरी मम्मी के साथ कीर्तन में गई है।

मैंने कहा- कोई बात नहीं ऋतु ! मेरे पास मेरे घर की दूसरी चाबी है, वहीं चलो !

उसने कहा- ठीक है !

और मेरे मन की मुराद पूरी हो गई कि आज तो रितू की चूचियाँ दबा कर ही रहूँगा। घर पहुँच कर मैंने ऋतु को तौलिया दिया और बोला- तुम अपना सर पौंछ लो, नहीं सर्दी लग जाएगी !

मैं उसे मम्मी के कमरे में ले गया- तुम यहाँ करो, मैं चाय बना कर लाता हूँ।

और मैं दरवाज़ा बंद कर के चला गया। लेकिन मैं गया कहीं नहीं था, दरवाज़े के पास खड़े होकर देख रहा था कि ऋतु क्या कर रही है।

पहले उसने शीशे के पास जाकर अपने आप को देखा और अपना सर पौंछने लगी। तभी उसकी नज़र अपने वक्ष पर पड़ी तो देखा कि उसकी शर्ट का बटन खुला है। (जिसे मैं सुबह देख रहा था) फिर उसने अपनी शर्ट क ऊपर से ही अपने स्तन दबाने चालू कर दिए। उसे देख कर मेरा लंड खड़ा हो गया और मैं पैंट से बाहर निकाल कर सहलाने लगा। पता नहीं हल्की सी आहट से उसे पता चल गया कि मैं उसे देख रहा हूँ।

तभी उसने आवाज़ लगाई- रवि, बाहर क्यों खड़े हो ? अंदर आओ !

मेरे मन में तो लड्डू फूट गए। लंड को अंदर किये बिना मैं दरवाज़ा खोल कर अंदर चला गया। मेरा लंड देख कर वो चौंक गई और बोली- यह क्या है?

मैंने कहा- यह नागराज है ! गर्म लड़कियों को देख कर खड़ा हो जाता है विष छोड़ने के लिए !

उसने पास आकर मेरे लंड को पकड़ कर कहा- रवि सच बताओ, सुबह तुम मेरे स्तन को क्यों देख रहे थे?

मैंने कहा- तेरी चूचियाँ हैं ही इतनी मस्त चीज़ कि दबाने को, चूसने को मन करता है।

यह सुन कर उसने मेरे हाथ अपने वक्ष पर रख दिए और कहा- लो ! जो करना है करो !

बस फिर क्या था, मैंने उसकी शर्ट के सारे बटन खोल दिए और उसकी चूचियों की लाइन पर अपना मुँह रख कर महसूस कर रहा था कि यह कोई सपना तो नहीं है !

तभी उसने मेरे लंड को जोर से दबा दिया और कहा- सिर्फ महसूस करोगे या चूसोगे भी ?

फिर क्या था, मैंने झट से उसकी शर्ट उतारी, ब्रा उतारी और जोर से दबा दिया। उसके मुँह से आह निकल गई- रवि, और जोर से !

मैंने और जोर से दबा कर उसके स्तनों को अपनी मुट्ठी में लेकर उसके चुचूक चूसने लगा। वो मेरे लंड पर जोर से हाथ आगे पीछे कर रही थी। फिर धीरे धीरे मैं अपने हाथ उसकी स्कर्ट के अन्दर डाल उसके चूतड़ों को भी दबाने लगा, उसकी पैंटी नीचे करने के बाद उसकी चूत पर हाथ फेरने लगा। वो एक दम गीली थी। मैं नीचे झुक कर उसकी स्कर्ट के अन्दर अपना मुँह डाल कर चूत को चाटने लगा।वो पूरी मस्ती में आ गई और मुझे पलंग पर धक्का दे कर मेरी पैंट खोल कर मेरे लंड को चूसने लगी। मैं उसके वक्ष दबाये जा रहा था।

इतने में मेरे लंड ने पिचकारी छोड़ दी।

वो बोली- देखो नागराज ने विष छोड़ दिया !

और वो पूरा चूस गई।

फिर मैं उसे पलंग पर लिटा कर उसकी चूत को चाटने लगा। वो पूरी तरह गर्म थी और मेरे बाल नोच रही थी, कह रही थी- रवि मत तड़पाओ ! डाल दो अपना नागराज मेरी सुरंग में !

मैंने अपना लंड उसकी चूत पर रख कर एक जोर से झटका मारा और लंड अन्दर चला गया। मैं थोड़ी देर उसके ऊपर लेट कर उसके स्तन चूसने लगा और नीचे नागराज अपना काम करने लगा। दस मिनट बाद मेरे लंड ने पिचकारी छोड़ दी। मैंने कहा- नागराज ने तेरी सुरंग में विष छोड़ दिया !

तो वह घबरा गई- अब क्या होगा ! मैं गर्भवती हो जाउंगी !

मैंने कहा- कोई बात नहीं ! मैं आई-पिल ला दूंगा, वो खा लेना, सब ठीक हो जायेगा !

और हम फिर पूरी मस्ती से फिर चुदाई में लग गए……….. Hindi Sex Stories

Antarvasna

हाय दोस्तो.. मैं सोहन.. अहमदनगर, महाराष्ट्र से Antarvasna हूँ. आज मैं आपको एक वास्तविक सेक्स बताने जा रहा हूँ.

आज से लगभग 2 वर्ष पहले जब मेरी उम्र लगभग 22 वर्ष की थी.

तब एक दिन मेरे घर मेरे मामा और मामी आए. वो पुणे में रहते थे लेकिन कुछ कारणों से उन्होनें अपना शहर छोड़ दिया और वो हमारे घर आ गए. मेरी माँ के दूर के रिश्ते में वह भाई लगते थे.

मेरी माँ ने उन्हें यहाँ रहने के लिए कह दिया. मेरी मामी गोरी-चिट्टी … बलखाती कमर और भरे हुए बदन की थीं. जब मैंने उन्हें पहली बार देखा तो देखता ही रह गया और उन्हें कैसे चोदूँ यह सोचने लगा.

मेरे मामा को काम की तलाश थी … तो मेरी माँ ने मुझसे कहा- तुम मामा के लिए कोई नौकरी की तलाश करो.
मैंने मामा के लिए एक अच्छी नौकरी की तलाश कर ली.. और मामा नौकरी पर जाने लगे.

इधर मामी घर में रहती थीं और मैं भी घर में अकेला रहता था. उसी बीच हम दोनों लोग बहुत घुल-मिल गए, मैं मामी से मजाक भी कर लेता था.

एक दिन वह घर में कपड़े धो रही थीं.. अचानक मेरी नजर उनके मम्मों पर पड़ गई. गोरे-गोरे मम्मों को देखकर मैं उत्तेजित होने लगा.

तभी मामी की नजर मुझ पर गई.. लेकिन मुझे पता नहीं चला और उन्होंने कुछ नहीं कहा.. वो बराबर अपना काम करती रहीं लेकिन शायद उन्होंने मेरा इरादा भांप लिया था.
इधर मेरी उनसे कुछ कहने की हिम्मत नहीं हो रही थी. मैं मन ही मन में उन्हें चाहने लगा था और रात को ख्वाबों में उन्हीं को चोदने लगा.

तभी एक दिन मामी ने कहा- तुम मेरी भी नौकरी कहीं लगवा दो.
तो मैंने कुछ दिनों में उनकी भी नौकरी एक स्कूल में टीचर की जगह लगवा दी.

दूसरे दिन से मामी भी स्कूल जाने लगीं लेकिन अब मैं घर में अकेला रहता था, मुझे मामी की कमी महसूस होती थी.
मैं कुछ कर नहीं पा रहा था और चुप-चुप रहने लगा, मामी शायद यह समझ रही थीं.

एक दिन बिजली नहीं आ रही थी और हम सब लोग ऊपर छत पर आ गए तभी मामी भी आ गईं.
मैं उन्हें देखकर दूसरी छत पर चला गया जहाँ पर कोई नहीं था.
मामी भी वहीं पर आ गईं.

मामी ने मेरे हाथ पर अपना हाथ रखकर कहा- मैं तुमसे एक बात कहना चाहती हूँ.
मैंने कहा- क्या?
वो बोलीं- मैं तुमसे दोस्ती करना चाहती हूँ.

यह सुनकर मैं एकदम से चौंक गया और उनकी तरफ देखने लगा. मैंने उनसे पूछा- सिर्फ दोस्ती या और कुछ?
वह शरमा गईं और बोलीं- सच तो यह है कि मैं तुमसे बहुत प्यार करती हूँ..
तो मैंने पूछा- इस प्यार की सीमा क्या होगी?
वह बोलीं- तुम्हें वो सारे अधिकार होंगे जो तुम्हारे मामा के हैं.. लेकिन सिर्फ एक अधिकार नहीं होगा.

मैंने पूछा- कौन सा?
तो वो बोलीं- तुम सब जानते हो.
इस पर मैंने कहा- वही तो मेन अधिकार है.
वह शरमा कर चली गईं.

अब हम दोनों एक-दूसरे को किस कर लेते थे.. कभी छिप कर एक-दूसरे के अंगों को छू लेते थे.

मैं भी उनके मम्मों पर हाथ से सहला लेता था.. लेकिन उन्हें चोदने की हिम्मत नहीं कर पा रहा था और कुछ चोदने का समय भी नहीं मिल रहा था.

उनकी जांघ पर भी मैं हाथ से सहला देता था. कई बार मैंने उनको नहाते हुए भी पूरा नंगा देख लिया था और उन्हें भी पता था कि ये मुझे देख रहा है.. लेकिन फिर भी उन्होंने कोई प्रतिक्रिया नहीं दिखाई … बस मुस्करा कर शरमा जाती थीं. जैसे एक पत्नी अपने पति से शरमा कर नशीली निगाहों से मना करती है.. वैसे ही वह मुझसे करती थीं.

एक दिन मेरे घर में सभी लोग कुछ दिन के लिए बाहर गए हुए थे.. लेकिन मैं नहीं गया था. मम्मी ने भी ज्यादा फोर्स नहीं किया.. क्योंकि वह जानती थीं कि घर में मामी हैं.. खाने-पीने की कोई परेशानी नहीं होगी, वह मुझे अकेले छोड़ने के लिए तैयार हो गईं, मामा और मामी से उन्होंने कह दिया- राज का ख्याल रखना.

दो दिन गुजर गए.. कोई मौका नहीं मिला.
एक दिन मामा ने बताया- उनकी चार दिन रात को ड्यूटी लगेगी..
तो मैं मन ही मन में खुश हुआ कि अब तो मैं मामी को चोद कर ही रहूँगा.

उस दिन मामा रात को 9.00 बजे चले गए और उन्होंने मामी से कहा- तुम रात को जिम्मेदारी से सारे ताले आदि लगाकर सोना.
मामी ने रात को सारे ताले आदि लगा दिए.
मैं अपने कमरे में जाकर सोने का नाटक करने लगा.

घर के सारे काम खत्म करके मामी 11.00 बजे मेरे कमरे में आईं और बोलीं- सो गए हो क्या?
मैंने कहा- नहीं..
वो मेरे पास आकर बैठ गईं.. मैंने मामी से कहा- क्या आपको नींद नहीं आ रही है?
तो उन्होंने कहा- अभी नहीं आ रही है..

वे मेरे सिर पर प्यार से हाथ फेरने लगीं. उन्होंने प्यार से मुझे देखा.. मुझसे रहा नहीं गया और मैंने उन्हें पकड़ कर बिस्तर पर लिटा लिया और अपने होंठ उनके होंठों पर रख दिए.
करीब आधा घण्टे तक हम एक-दूसरे को प्यार करते रहे, इसी बीच मामी भी बहुत उत्तेजित हो गई थीं.

मैंने मामी से कहा- मैं तुम्हारी जांघों को चूमना चाहता हूँ..
वो राजी हो गईं.. मैंने उनकी साड़ी उनकी जाँघों से ऊपर कर उनकी जाँघें बहुत गोरी और चिकनी थीं.
जांघों को चूमते-चूमते मैं और ऊपर की ओर आने लगा.. तो बोलीं- सोहन क्या कर रहे हो?
मैंने कहा- कुछ नहीं.. अपनी इच्छा को पूरा कर रहा हूँ.

और मैंने एकदम से अपने होंठ उनकी चूत पर रख दिए और अपनी जीभ से उनकी चूत को सहलाने लगा.. उन्हें एकदम ऐसा झटका लगा जैसे किसी ने ठहरे हुए पानी में कंकड़ मार दिया हो.
मामी कराहने लगीं- ओह.. राज ये तुम क्या कर रहे हो!?

मैं दूसरे हाथ से उनके मम्मों सहलाने लगा.

मामी को इतना मजा शायद कभी भी नहीं आया होगा. उन्होंने दोनों टाँगें चौड़ी कर दीं और मैं उनकी चूत को अपनी जीभ से सहलाने लगा.
उनकी चूत गोरी और लाल थी.. यह बहुत ही नरम थी और उसमें से गरम-गरम भाप निकल रही थी.

वे अपने दोनों हाथों से मेरे सर के बालों को ऊँगलियों से सहला रही थीं और कह रही थीं- सोहन मैं पागल हो जाऊँगी.. बहुत मजा आ रहा है..
मैं भी उनके चूत के दाने को अपनी जीभ से सहला रहा था.. मुझे भी बहुत मजा आ रहा था.

कुछ देर बाद वह बोलीं- खुद ही सब कुछ करोगे.. कि मुझे भी कुछ करने दोगे..

यह कहकर वे मुझे खींचने लगीं.. मैं अभी अपना पैंट उतार ही रहा था.. कि तभी एकदम से उन्होंने मेरा कच्छा उतार दिया और मेरे लंड को मुँह में लेकर चूसने लगीं और बोलीं- तुम्हारा लण्ड तो काफी बड़ा है..

अब मुझे भी बहुत मजा आ रहा था. उन्होंने मुझे बिस्तर पर बिल्कुल नंगा लिटा दिया और वो मेरी पास बैठकर मेरे लण्ड को चूस रही थीं.. साथ ही मेरे लण्ड की गोटियों से खेल रही थीं.
मैं उनकी चूत में उंगली डालकर आगे-पीछे कर रहा था, इस प्रकार उन्हें भी मजा आ रहा था.

उनकी गोरी-गोरी जांघें जिन पर एक भी बाल नहीं था.. उन्हें देखकर ही मैं इतना उत्तेजित हो चुका था कि मुझसे रहा नहीं जा रहा था.
उधर मामी भी अब ये चाहती थीं कि मेरा लण्ड उनकी चूत में घुस जाए और मैं उन्हें चोदूँ.
कुछ देर बाद वह बोलीं- अब मुझसे रहा नहीं जा रहा सोहन.. जल्दी करो.. मैं चुदने को बेकरार हूँ.

मैंने भी मामी को लिटाया और उनकी चूत में अपना लण्ड डालने लगा.. पहले तो वह अन्दर ही नहीं जा रहा था.. फिर मैंने एक जोर से धक्का मारा.. और वह जैसे ही अन्दर घुसा.. मामी की एकदम चीख निकल गई.

वो कराह कर बोलीं- धीरे-धीरे करो न..

मैं धीरे-धीरे करने लगा और मामी के गोरे-गोरे मम्मों को अपने मुँह में लेकर जीभ से सहलाने लगा. मामी मेरी बाँहों में सिमटी जा रही थीं और मेरे शरीर पर प्यार से हाथ सहला रही थीं.

वे कह रही थीं- ओह सोहन बहुत मजा आ रहा है.. ऐसे ही करो..
धकापेल चुदाई चल रही थी और पता नहीं कब धक्के लगाने की स्पीड बढ़ गई.
अब मेरे मुँह से भी आवाज निकल रही थी- ओह मामी.. पूरा अन्दर लो न..

और उधर मामी सिसकार कर बोल रही थीं- आह.. पूरा डाल दो.. मेरी चूत को फाड़ दो.. आह जल्दी करो..

कुछ देर बाद मैं झड़ने वाला था तो मैंने कहा- मामी मैं झड़ने वाला हूँ..
तो उन्होंने कहा- लण्ड निकाल कर मेरे मुँह में डाल दो..

मैंने लण्ड निकाल कर उनके मुँह में डाल दिया. वो लण्ड को चूसने लगीं और मेरा पानी भी मुँह में ले लिया.

उस रात मैंने मामी को तीन बार चोदा और हम दोनों पूरी रात नंगे ही लेटे रहे. कभी वो मेरे लण्ड से खेलतीं.. तो कभी मैं उनकी चूत और मम्मों से मजा लेता.

उसके बाद मैं रोजाना मामी को चोदता रहा.. करीब दो वर्ष तक मामी मेरे ही पास रहीं, ऐसा लगता था कि हम दोनों पति-पत्नी हैं.

लेकिन दोस्तो, आज मामी मेरे पास नहीं रहती हैं.. वह अब ग्वालियर रहती हैं..
लेकिन उन पलों को मैं आज तक नहीं भूला.. जो खूबसूरत पल उन्होंने मेरे साथ बिताए, उन पलों को याद करके मैं आज भी उन्हें याद कर लेता हूँ. Antarvasna

आपको मेरी सच्ची कहानी कैसी लगी. मुझे ई-मेल जरूर करें.

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