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एक दिन मैं अपने घर की तरफ़ जा Sex Stories रहा था कि मैंने देखा कि कोई मुझे बुला रहा है। मैं उनके पास गया तो देखा कि वो मेरे पड़ोसी हैं और बहुत ज्यादा पीने की वजह से वो चल नहीं पा रहे हैं। मैंने अंकल की मदद की और उन्हें उनके घर तक छोड़ने गया। डोरबेल बजाई तो एक औरत ने दरवाजा खोला जिन्हें मैं भाभी बुलाता था और जब उन्होंने मुझे अपने पति के साथ देखा तो चिड़चिड़ाना शुरू कर दिया।
मैंने कहा- पहले अन्दर तो आने दो फ़िर जो मर्जी कह लेना!
पर वो गुस्से से लाल हो रही थी। मैंने उनके पति को बेडरूम में ले जा कर लिटा दिया और वापिस जाने लगा तो मुझे अन्तर्वासना की एक कहानी याद आ गई और मैंने जानबूझ कर एक गिलास पानी मांगा तो भाभी पानी लेने चली गई। जब वो वापिस आई तो पानी पीने के बाद मैं उनसे बोला कि मुझे नींद आ रही है और मैं जा रहा हूं।
इस पर भाभी ने कहा- आप बहुत थक गए होंगे।
मैंने कहा- भाभी, कोई बात नहीं। मैं तो घर ही जा रहा था कि देखा भैया बुला रहे हैं.
तो वो बोली कि इनका तो रोज़ का काम है और आज तो हद कर दी इन्होंने!
मैं उनको समझा कर जाने लगा तो भाभी ने पूछा कि आप चाय लेंगे?
मैंने कहा- इतनी रात को क्यों तकलीफ़ करती हो भाभी!
तो वो बोली- क्या तकलीफ़! बस दो मिनट लगेंगे।
मैंने कहा- ठीक है।
वो चाय बनाने चली गई और मैं टीवी देखने लगा। तभी टीवी पर एक ब्लू फ़िल्म आने लगी। करीब रात के 1 बजे और आप तो जानते हैं कि दिल्ली की कालोनी में देर से ब्लू फ़िल्म आती ही है। फ़िल्म देख कर मैं एक्साईटिड हो गया और मेरा लण्ड खड़ा हो कर पैन्ट की ज़िप तोड़ने लगा। इतने में भाभी चाय लेकर आ गई और मैंने चैनल बदल दिया। फ़िर हम चाय पीने लगे तो उनकी नज़र मेरी जीन्स पर गई तो मैं थोड़ा टेढा होकर बैठ गया। फ़िर वो मेरे जोब के बारे में पूछने लगी। मैं उनकी बातों का जवाब देता रहा।
अचानक उनके मुंह से छूटा कि तुम शादी कब कर रहे हो, तो मैंने कहा कि जैसे ही कोई लड़की मिल जाएगी। तो वो हंसने लगी और कहने लगी कि तुम्हारे लिए लड़कियों की क्या कमी है।
मैंने कहा- मुझे लड़की नहीं मैच्योर औरत चाहिए।
वो बोली- तुम पागल हो।
मैं चाय पीकर जाने को उठा तो वो बोली- क्या हुआ? नींद आ रही है?
मैंने कहा- नहीं भाभी, सुबह ड्यूटी पर जाना है।
तो वो बोली- बैठो, थोड़ी देर और गप्पें मारते हैं।
मैं बैठ गया। मुझे औरतों से बात करने में शरम आती है इसलिए कुछ बोल नहीं रहा था। जितना वो पूछती, केवल उसका ही जवाब देता और चुप हो जाता।
तब वो बोली कि तुम इतना चुप क्यों रहते हो।
तो मैंने कहा- पता नहीं।
अब मैं नोर्मल हो गया था पर पता नहीं भाभी का क्या इन्टेंशन था जो मेरी समझ में नहीं आ रहा था। शायद मैं गलत हूं पर आखिरकार मुझे लगा कि मुझे ही शुरूआत करनी पड़ेगी।
मैंने उनकी दुखती रग पर हाथ रख दिया और बोला कि भाभी आप लोग फ़ैमिली प्लानिंग कर रहे हैं क्या?
वो बोली- नहीं! ऐसी कोई बात नहीं है।
“फ़िर आपकी शादी को कई साल हो गए हैं और आपके घर में नया मेहमान नहीं आया?”
तब भाभी ने बताया कि तुम्हारे भैया ने डाक्टर से चेक अप कराया था और डाक्टर ने उनमें कमी बताई है, उस दिन से ये शराब पीने लगे हैं और रोज रात को ऐसे ही लेट आते हैं।
मैं उन्हें दिलासा देने लगा और वो रोने लगी।
मैं उनके पास गया और उनके कंधे पर हाथ रख कर कहा- आप चिन्ता ना करें, सब ठीक हो जाएगा। फ़िर मैं थोड़ा पीछे हट गया क्योंकि मेरे दिमाग में गंदे ख्याल आने लगे थे।
तब भाभी बोली- कहाना बहुत आसान है पर जिस पर बीतती है उसे ही मालूम पड़ता है।
फ़िर मैंने उनका हाथ पकड़ा और कहा- आप चुप हो जाएं, नहीं तो मैं चलता हूं।
वो बोली- नहीं… बैठो… कोई और बात करते हैं, और उन्होंने मेरा हाथ पकड़ कर बैठा लिया।
मैंने कहा कि आप कुछ दिनों के लिए अपनी मम्मी के पास चली जाएं तो आपका दिल बहल जाएगा।
वो मेरे करीब आ कर बोली कि वहां जाने की सोच तो रही हूं पर कोई साथ नहीं मिल रहा है और इनसे कहा तो कहते हैं कि छुट्टी नहीं मिल रही है।
” ठीक है… मेरी शनिवार की छुट्टी रहती है, मैं आपको छोड़ कर रविवार को वापिस आ जाऊंगा।” मैंने कहा।
फ़िर मैंने घड़ी की तरफ़ देखा तो मुझे लगा कि काफ़ी देर हो गई है और मैं चलने को उठा तो वो बोली- शनिवार तो कल ही है।
मैंने कहा- हां मैं तो भूल ही गया था।
तो भाभी बोली- तभी तो कहती हूं, शादी कर लो, कब तक अकेले रहोगे तो मैं हंस दिया।
फ़िर भाभी मेरी होबीज़ के बारे में पूछने लगी। मैंने एकदम से उनके और हस्बैंड के सम्बंधों के बारे में पूछा तो वो बोली क्यों मूड खराब करते हो।मैंने कहा कि बस पूछ ही रहा हूं। फ़िर वो उठने लगी तो मैं भी उठ गया और कहा कि भाभी आपको भी नींद आ रही है और मैं भी सोने जाता हूं।
फ़िर मैं अपने घर आ गया और सारी रात मुझे नींद नहीं आई। अगले दिन दरवाजा खटखटाने की आवाज से मैं उठा और दरवाजा खोला तो देखा कि भाभी खड़ी थी।
वो बोली- कैसे घोड़े बेच कर सो रहे हो और वो अन्दर आ गई।
मैंने पूछा कि भैया कहां हैं तो उन्होंने कहा कि ओफ़िस गए हैं, तुम घर आ जाओ, मैंने आलू के परांठे बनाए हैं।
मैं फ़्रेश होकर गया तो भाभी टेबल पर नाश्ता लगा रही थी। उन्होंने काली टी और कैप्री पहनी थी जिसमें उनके हिप्स साफ़ दिख रहे थे।मैंने अपना ध्यान वहां से हटाया और पूछा कि भाभी आज मुझ पर आप इतनी मेहरबान कैसे?
तो वो बोली- बस! ऐसे ही।
मैं नाश्ता करने लगा। खाते खाते मुझे धस्का सा लगा तो वो भाग कर मेरे पास आई और मेरी पीठ मसलने लगी और मुझे पानी पिलाया। उनका हाथ मेरी कमर पर नाच रहा था।
मैंने कहा- अब ठीक है।
वो बोली- तुम खाओ, मैं तुम्हारे पास ही बैठ जाती हूं।
उनका हाथ अभी भी मेरी पीठ पर था। खाते खाते मैंने जान बूझ कर अपना हाथ उनके बूब्स पर लगा दिया तो उन्होंने मेरी इस हरकत को नज़र अंदाज़ कर दिया। मैं हाथ धोने को उठते हुए अपने हाथ को उनकी जांघ पर रख दिया। हाथ धोने के बाद मेरे पीछे से भाभी तौलिया लेकर बोली – लो इससे पौंछ लो, और जैसे ही मैं मुड़ा तो वो मेरे बिल्कुल पीछे ही खड़ी थी और मेरे लिप्स उनके लिप्स से टकरा गए और वो शरमा गई। मैंने सोरी बोला तो वो बोली कोई बात नहीं।
नाश्ते के बाद हम लोग इधर उधर की बातें करने लगे और भाभी धीरे धीरे मेरे पास आ गई। हम दोनो टीवी भी देख रहे थे। तभी अचानक टीवी पर एक किसिंग सीन आ गया। भाभी मुझ से पूछने लगी कि क्या तुमने किसी को किस किया है?
मैंने कहा- हां! किया है।
तो भाभी ने पूछा- किस के साथ?
मैंने कहा- आपको! अभी अभी।
तो वो हंस पड़ी और कहने लगी कि वो कोई किस है।
मैंने कहा- किस्मत से ज्यादा कभी किसी को नहीं मिलता।
तब उन्होंने कहा- ऐसा नहीं है, वो तो महज़ एक घटना थी।
मैंने कहा- जो समझ आए वो दुर्घटना और जो कुदरती हो वो घटना!
और वो हंस पड़ी, मुझे छूने लगी तो मैंने भी उनका हाथ पकड़ कर कस कर दबाने लगा। वो शरमाने लगी।
मैंने पूछा- क्यों क्या हुआ?
भाभी बोली- कुछ हलचल हो रही है।
मैंने पूछा- कहां?
तो वो बोली- नीचे।
मैंने देखा कि वो मेरे लण्ड को देख कर कह रही है।
मैंने तभी कहा- जब आप जैसी खूबसूरत औरत पास हो तो मेरा क्या भगवान की भी नियत डोल जाए।
वो बोली- अच्छा! क्या तुम्हें मैं इतनी खूबसूरत दिखती हूं?
मैंने कहा- हां! आप का फ़ीगर- वाउ! 32 30 36 ब्रिलिअन्ट!
तो वो बोली- नहीं! तुमने नापने में गलती कर दी- मैं 36 20 32 हूं।
तो मैंने कहा- क्यों झूठ बोलती हो।
तो उन्होंने कहा- खुद ही देख लो।
मैंने कहा- कैसे?
उन्होंने कहा- बताती हूं, उन्होंने झट से अपनी शर्ट उतार दी और हाथ में लेकर बोली- देखो! हैं ना 36!
मैंने कहा- भाभी चाहे कुछ भी हो, इनका साईज़ है जबरदस्त! मैं इन्हें छू लूं?
वो बोली- रुको! मैं अभी आती हूं.
और वो टायलेट जाकर वापिस आईं। मैं उनके पास गया और उनके होठों को चूमने लगा और ऐसी किस की कि मेरे ही रौंगटे खड़े हो गए। फ़िर मैं उनके बूब्स कस के दबाने लगा। वो सिसकारियां भरने लगी। अब मैंने उनके बूब्स को चूसना शुरू कर दिया तो वो जैसे पागल हो गई। शायद मैं इसी तरह करता हूं और उनके निप्पलों पर अपनी जीभ चलाने लगा।
उन्होंने मेरे शोर्ट्स में हाथ डाल कर मेरा लण्ड पकड़ लिया तो मैंने कहा- भाभी इसे चूसो!
तो भाभी मना करने लगी।
पर जब मैंने जोर दे कर कहा तो उन्होंने अपनी जीभ मेरे लण्ड पर छुआई। इससे उनको और भी मज़ा आ गया और कहने लगी और चूसने दो, तो मैंने कहा- पहले तो आप मना कर रही थी- अब क्या हुआ?
उन्होंने कहा- अच्छा लग रहा है। वो मेरे लण्ड को काफ़ी देर तक चूसती रही मगर मैं नहीं झड़ा। मैं उनकी चूत में उंगली डाल कर अन्दर बाहर करने लगा तो वो बहकने लगी और मुझे नीचे दबाने लगी।
तभी मैंने उनकी चूत पर मुंह रख दिया और कुछ देर तक उनकी प्यासी चूत को चाटता रहा। इसी बीच वो दो बार झड़ चुकी थी और अपना सारा पानी मेरे मुंह में भर दिया था।
उन्होंने मुझे कहा कि वो अब थक गई है। तब मैंने अपना लण्ड उनके मुंह में डाल कर गीला कर लिया और हिलाने लगा।
वो तड़पते हुए बोली- क्यों तड़पा रहे हो, डालो ना!
मैंने अपने सारे कपड़े उतार दिए और उनके भी कपड़े उतार कर पूरा नंगा कर लिया। अब उनकी चूत के मुंह पर लण्ड रख कर एक झटका दिया, जिससे वो चिल्ला पड़ी और कहने लगी- अरे! आराम से डालो। मुझे कुछ भी महसूस नहीं हुआ, मैंने फ़िर एक जोरदार झटका मारा और वो रो पड़ी। उनसे बरदाश्त नहीं हो रहा था मेरा मोटा लण्ड।
मैंने कहा- रुको! अभी दर्द कम कर देता हूं!
और मैंने उन्हें अपने उपर बुला लिया। वो मेरे ऊपर आकर मेरे लण्ड पर अपनी चूत को टिका कर धीरे धीरे डालने लगी और तेज़ तेज़ आवाज़ें निकालने लगी आह ह उ उ ऊफ़्फ़ च चो चोद चोद्…आह।
अब मैं समझ गया कि वो मूड में आ गई हैं। अभी मेरा आधा लण्ड ही अन्दर गया था। मैंने उन्हें ऊपर उठाया और उनकी कमर को पकड़ कर नीचे से ही एक झटका दिया जिससे वो चिल्ला पड़ी- उई मां!
इस बार मेरा पूरा लण्ड उनकी चूत में समा गया था। थोड़ी देर मैंने कोई हरकत नहीं की पर बीच बीच में मैं उनके बूब्स दबाता रहा। जब वो सामान्य हुई तो उन्होंने तेज़ी से कमर चलानी शुरू कर दी और जल्दी ही वो एक बार फ़िर झड़ गई।
वो मुझ से बोली कि तुम अब ऊपर आ जाओ। मैंने ऊपर उनकी टांगों के बीच में आ कर अपना लण्ड फ़िर से उनकी चूत में डाल दिया और तेज़ी से अपनी कमर को हिलाने लगा। उन्होंने अपने दोनो पैर ऊपर कर लिए जिससे उनकी चूत में ढीलापन महसूस होने लगा।
मैंने कहा- भाभी पैर नीचे कर लो.
और हमने अपने पैर आपस में जोड़ लिए और वो कमर उठा कर मुझसे चुदवा रही थी। मैं भी पूरी तन्मयता से उनको चोदे जा रहा था। मुझे लगा कि अब मैं झड़ने वाला हूं तो मैंने भाभी को बताया। उन्होंने कहा कि अन्दर मत झाड़ना, मेरे मुंह में झाड़ दो। भाभी ने मेरा लण्ड अपने मुंह में ले लिया और चूसने लगी। मैंने पूरे वेग से ढेर सारा वीर्य उनके मुंह में डाल दिया जिससे उनका पूरा मुंह भर गया। बाद में मैंने उनकी चूत को चाट चाट कर ठण्डा कर दिया।
तो यह थी मेरी भाभी की चुदाई की कहानी! Sex Stories
प्रीती अब बहुत खुश थी कि उसने Hindi Sex Stories महेश से अपना बदला ले लिया था। एक दिन उसने मुझसे कहा, “सुनील! मुझे अब एम-डी से बदला लेना है, लेकिन कोई उपाय नहीं दिख रहा।”
“तुम रजनी को सीढ़ी क्यों नहीं बनाती?” मैंने सलाह देते हुए कहा, “एम-डी उसे अपनी बेटियों से भी ज्यादा प्यार करता है।”
“हाँ!!! मैं भी यही सोच रही थी”, प्रीती ने जवाब दिया।
“लेकिन एक चीज़ ध्यान में रखना, वो पढ़ी लिखी और समझदार लड़की है, मीना और मेरी बहनों की तरह बेवकूफ़ नहीं।”
“क्या तुम उसे प्यार करते हो?” उसने पूछा।
“बिल्कुल भी नहीं! पर हाँ मुझे उससे हमदर्दी जरूर है, वो मेरी पहली कुँवारी चूत थी।” मैंने जवाब दिया।
“ठीक है… मैं चाँस लेती हूँ! लगता है मैं उसे समझाने में और मनाने में कामयाब हो जाऊँगी”, प्रीती ने कहा।
प्रीती के बुलाने पर एक दिन शाम को रजनी हमारे घर आयी। मैंने देखा कि वो बातें करने में झिझक रही थी ।
“रजनी! इसके पहले कि मैं तुम्हें बताऊँ कि मैंने तुम्हें यहाँ क्यों बुलाया है और मैं तुमसे क्या चाहती हूँ, ये जान लो कि मुझे तुम्हारे और सुनील के बारे में सब मालूम है और मुझे बिल्कुल भी बुरा नहीं लगा।”
रजनी कुछ बोली नहीं और चुप रही।
“लेकिन एक बात मुझे पहले बताओ, क्या सुनील के बाद तुमने किसी से चुदवाया है?” प्रीती ने पूछा।
रजनी ने झिझकते हुए मेरी ओर देखा और मैंने गर्दन हिला कर उसे सहमती दे दी। इस कहानी के लेखक सुनील अग्रवाल है!
“प्रीती, अगर तुम इतने खुले रूप में पूछ रही हो तो मैं बताती हूँ कि मैंने अपने कॉलेज के दो लड़कों से चुदवाया है पर सुनील जैसा कोई नहीं था।”
“मैं जानती हूँ! सुनील से चुदवाने में जो मज़ा आता है वो किसी से भी नहीं आता”, प्रीती ने जवाब दिया।
“अच्छा… अब मुझे बताओ तुमने मुझे यहाँ क्यों बुलाया है?” रजनी ने पूछा।
प्रीती भी सीधे विषय पर आते हुए बोली, “रजनी! मैं चाहती हूँ कि तुम एम-डी से चुदवा लो?”
“तुम्हारा दिमाग तो नहीं खराब हो गया है? तुम चाहती हो कि मैं अपने अंकल के साथ सोऊँ???” रजनी अपनी जगह से उठते हुए बोली।
“रजनी रुको! एक बार हमारी बात तो सुन लो”, मैंने उसे रोकना चाहा।
“ठीक है सुनील! तुम कहते हो तो मैं रुक जाती हूँ। अब बताओ, तुम क्या कहना चाहते हो?” रजनी अपनी जगह पर बैठते हुए बोली। रजनी के बैठते ही प्रीती ने पूरी दास्तान रजनी को सुना दी और ये भी बता दिया कि किस तरह महेश और एम-डी ने ऑफिस की सभी लड़कियों और औरतों को चोदा है।
सारी बात सुनने के बाद रजनी बोली, “मैं इसमें कुछ गलत नहीं मानती, वो पैसे वाले हैं और उन्होंने इंसान की कमजोरियों का फ़ायदा उठाया है, किसी के साथ जबरदस्ती तो नहीं की। गल्ती उनकी है जो राज़ी हो गये।”
“तुम नहीं जानती हो रजनी! एम-डी ने कैसे कुँवारी चूत को चोदने के लिये कई लोगों को फंसाया और धमकाया है!” प्रीती बोली।
“मैं नहीं मानती कि अपनी हवस मिटाने के लिये मेरे अंकल किसी भी हद तक गिर सकते हैं।”
“ठीक है! मैं तुम्हें विस्तार में बताती हूँ। तुम असलम को तो जानती होगी, हमारे ऑफिस में पियन का काम करता था।”
“वही असलम ना जिसे चोरी के इल्ज़ाम में पकड़ा गया था और फिर छूट गया था?”
“हाँ वही! लेकिन तुम्हें हकीकत नहीं मालूम?” प्रीती ने कहा।
“मैं और माँ जानते थे कि असलम निर्दोष है, इसलिये हमने अंकल से रिक्वेस्ट भी की थी कि उसे छोड़ दें।”
प्रीती रजनी की बात सुन कर हंसने लगी। “मैं तुम्हें हकीकत बताती हूँ”, प्रीती ने कहा, “एक दिन तुम्हारे अंकल ने मुझे अपने ऑफिस में बुलाया और कहा कि प्रीती, मैं असलम पर से सारे इल्ज़ाम वापस ले लूँगा अगर उसकी बेटी आयेशा चुदवाने को तैयार हो जाये। मुझे बुरा लगा और मैंने एम-डी को मना करना चाहा, तो उन्होंने गुस्से में कहा, तुम्हें ये काम करना है तो करो नहीं तो मैं किसी और से करवा लूँगा। उसकी चूत किसी ना किसी दिन तो फटनी ही है तो मैं क्यों ना करूँ। एम-डी मुझे इन सब काम के लिये पैसे दिया करता था तो मैंने सोचा क्यों ना मैं भी पैसा कमा लूँ”, प्रीती आगे बोली।
“मैं दूसरे दिन आयेशा को समझा बुझा कर और अच्छे कपड़ों और मेक-अप में तैयार करके तुम्हारे अंकल के सूईट, होटल शेराटन में लेकर पहुँच गयी। तुम्हारे अंकल और महेश ने बुरी तरह उसकी चूत को चोदा और उसकी गाँड भी फाड़ दी और वो बेचारी अपने बाप को बचाने के लिये हर ज़ुल्म सहती गयी।”
“प्लीज़ प्रीती! मुझे और नहीं सुनना है”, रजनी ने अपने हाथ अपने कान पर रखते हुए कहा। इस कहानी के लेखक सुनील अग्रवाल है!
“नहीं! तुम्हें पूरी बात सुननी होगी। तुम्हें नहीं मालूम महेश और एम-डी ने कितनी लड़कियों को अपने जाल में फंसाया है?”
“नहीं!!! मुझे और नहीं सुनना और मैं तुम पर अब विश्वास करती हूँ, मैं तुम्हारा साथ देने को तैयार हूँ, मुझे बताओ मुझे क्या करना है?” रजनी बोली।
“ये मैंने पहले ही सोच रखा है, मैं एम-डी से कहुँगी कि तुम एक गरीब घर की गाँव की रहने वाली लड़की हो और तुम्हें अपनी विधवा माँ के इलाज के लिये पैसे चाहिये, तुम पैसों की तंगी की वजह से अपनी चूत तो दे चुकी हो लेकिन तुम्हारी गाँड अभी भी कुँवारी है।”
“वो तो अब भी है!” रजनी ने हँसते हुए कहा।
“मैं जानती हूँ, इसलिये जानती हूँ कि एम-डी तैयार हो जायेगा। मैं ये भी शर्त रखुँगी कि तुम अंधेरे में चुदवाना चाहती हो”, प्रीती ने कहा।
“ये सब तो ठीक हो जायेगा पर क्या सुनील ने आयेशा को चोदा था?”
“हकीकत में हाँ! लेकिन ये अलग कहानी है”, प्रीती ने जवाब दिया।
“बताओ मुझे, मैं जानना चाहती हूँ”, रजनी बोली।
“करीब पंद्रह दिन के बाद आयेशा मेरे घर आयी और बोली कि वो प्रेगनेंट है। मैंने उससे कहा कि अगर वो इस मुश्किल से बचना चाहती है तो उसे सुनील से चुदवाने पड़ेगा। वो मान गयी क्योंकि उसके पास दूसरा चारा नहीं था”, प्रीती ने कहा, “सुनील ने उस दिन उसे बड़े ही प्यार से चार बार चोदा। पहले तो वो उसका लौड़ा देख कर डर ही गयी थी, दीदी! इनका लंड तो कितना मोटा और लंबा है….. मैं तो मर ही जाऊँगी? मैं भी तो इनसे रोज़ चुदवाती हूँ और अभी तक जिंदा हूँ मैंने जवाब दिया। सुनील ने उसे बहुत ही नाजुक्ता और प्यार से चोदा, ऐसा चोदा कि वो इसके लंड कि दिवानी हो गयी। दूसरे दिन मैंने उसे डॉक्टर के पास ले जा कर उसका अबार्शन करा दिया। वो सुनील के लंड कि इतनी दिवानी हो गयी कि बराबर हमारे घर सुनील से चुदवाने के लिये आने लगी। इसी बीच सुनील ने उसकी गाँड का भी उदघाटन कर दिया।”
“क्या तुम्हें बुरा नहीं लगता कि सुनील दूसरी लड़कियों को चोदता है?” रजनी ने पूछा।
“नहीं, जब तक वो मुझे बताकर करता है, मैं जानती हूँ वो मुझे भी चुदाई का मज़ा दे सकता है और दूसरों को भी और फिर मैं भी तो दूसरे मर्दों से चुदवाती हूँ”, प्रीती बोली।
“फिर तो मैं भी अपनी गाँड का उदघाटन सुनील से ही करवाना चाहुँगी!” रजनी उत्सुक्ता से बोली।
“नहीं रजनी! तुम्हारी गाँड तुम्हारे अंकल के लिये ही रहने दो… हाँ तुम सुनील से अपनी चूत चुदवा सकती हो! एक शर्त पर कि, मेरे सामने चुदवाओ!” प्रीती ने जवाब दिया।
“ये तो बहुत ही अच्छी बात है, हाँ अगर तुम हमारा साथ दो तो और मज़ा आयेगा”, रजनी ने कहा।
थोड़ी ही देर में मैं दो सुंदर औरतों के साथ नंगा बिस्तर पर था जिनकी चूत का उदघाटन मैंने ही किया था।
जैसे ही मेरा लंड रजनी की चूत में दाखिल हुआ, वो कामुक्ता भरी आवाज़ में बोल उठी, “ओहहहहहह सुनील तुम्हारा लंड कितना अच्छा है।” प्रीती हमें देख रही थी और उसने अपने हाथों को रजनी की चूत के पास रखा हुआ था, जिससे मेरा लंड उसके हाथों से होकर रजनी की चूत में जा रहा था।
थोड़ी ही देर में रजनी मस्ती में आ गयी थी। वो अपने कुल्हे उछाल कर मेरी थाप से थाप मिला रही थी। उसके मुँह से उन्माद भरी आवाज़ें निकल रही थी, “हाँआँआआआ सुनील!!! ऐसे ही चोदते जाओ, और तेजी से राआआआजा हाँआँ मज़ाआआआआ आ रहा है…… और जोर से।”
उसकी कामुक्ता भरी बातें सुन कर मेरे लंड में भी उबाल आने लगा। मैंने अपने धक्कों की रफ़्तार धीमी कर दी। तभी उसने कहा, “ओहहहहह सुनील रुको मत….. मेरा थोड़ी देर में ही छूटने वाला है, हाँआँआँ सुनीला और जोर से, प्लीज़ और जोर से…… कितना मज़ा आ रहा है।” यह कहते हुए उसकी चूत ने पानी छोड़ दिया। मैंने भी दो चार धक्के लगा कर अपना वीर्य उसकी चूत में डाल दिया और हम अपनी अपनी साँसें संभालने लगे।
“तुम दोनों की चुदाई देख कर अब मुझसे रहा नहीं जाता, प्लीज़ सुनील! मेरी चूत की भी प्यास बुझा दो।” प्रीती ने मेरे लंड को पकड़ते हुए कहा।
“जान मेरी! थोड़ा वक्त तो दो…. फिर मैं तुम्हारी अभी की प्यास तो क्या….. जनमों की प्यास बुझा दूँगा”, मैंने जवाब दिया।
प्रीती मेरा लंड अपने मुँह में लेकर जोर से चूसने लगी। जब मेरा लंड तन कर खड़ा हो गया तो मैंने इतनी जोर से उसे चोदा कि वो तीन बार झड़ गयी।
हम लोग अपनी उखड़ी हुई साँसों पर काबू पाने की कोशिश कर रहे थे कि रजनी ने अपने होंठ प्रीती की चूचियों पर रख कर चूसना शुरू कर दिया।
“ऊऊऊऊहहहहह ये क्या कर रही हो?” प्रीती बोली, लेकिन उसकी बातों को अनसुना कर के रजनी नीचे की ओर बढ़ती हुई अपनी जीभ को उसकी चूत पर रख कर चाटने लगी।
प्रीती कि सिसकरियाँ तेज हो रही थी, “हाँआआआआआ ऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊ माँआँआआआआआआआ ये तुम क्या कर रही हो रजनी…… हाँ और जोर से चाटो”, कहते हुए प्रीती ने अपना पानी रजनी के मुँह में छोड़ दिया। इस कहानी के लेखक सुनील अग्रवाल है!
इन दोनों की हरकत देख कर मेरा लंड फिर से तन कर खड़ा हो गया। “तुम में से पहले कौन इसका मज़ा लेना चाहेगा?” मैंने अपना लंड हिलाते हुए कहा।
“पहले प्रीती को चोदो”, कहकर रजनी ने मेरे लंड को प्रीती की चूत के छेद पर लगा दिया।
उस दिन मैंने कई बार बदल-बदल कर दोनों को चोदा।
“तो फिर कब मिलना है?” रजनी ने कपड़े पहनते हुए कहा।
“शनिवार की रात को, क्यों ठीक रहेगा ना?”
“ठीक है! शनिवार को मिलेंगे”, कहकर रजनी अपने घर चली गयी। इस कहानी के लेखक सुनील अग्रवाल है!
शनिवार की शाम को मैंने सूईट के सब बल्ब निकाल दिये और खिड़की पर काले पर्दे चढ़ा दिये जिससे कमरे में अंधेरा हो और एम-डी रजनी को पहचान नहीं पाये।
“सर! आप अपने कपड़े उतार कर रूम में जा सकते हैं, नयी चूत आपका इंतज़ार कर रही है!” प्रीती ने एम-डी से कहा।
अपने कपड़े उतार कर एम-डी बेडरूम में दाखिल हो गया। “सुनील! मैं सब सुनना चाहती हूँ और रिकॉर्ड भी करना चाहती हूँ”, प्रीती ने अपने लिये एक बड़ा पैग ले कर सोफ़े पर बैठते हुए कहा।
मैंने टीवी का स्विच ऑन किया और देखने लगा। एम-डी अपना लंड रजनी की चूत में घुसा चुका था। “मैं तुम्हारी चूत के भी पैसे दे देता अगर तुम मेरे पास पहले आ जाती”, कहते हुए एम-डी रजनी की चूत को चोद रहा था।
रजनी के मुँह से कामुक सिसकरियाँ निकल रही थी। एम-डी अपना पूरा जोर लगा कर रजनी की चूत को चोद रहा था।
“तुझे चुदाई अच्छी लग रही है ना?” एम-डी ने पूछा।
“हाँआँआआ”, रजनी बोली।
“लगता है रजनी को मज़ा आ रहा है!” मैंने प्रीती से कहा।
“हाँ! एम-डी चुदाई बहुत अच्छे तरीके से करता है”, प्रीती ने सिगरेट का कश लेकर मेरे लंड को पैंट के ऊपर से ही दबाते हुए कहा।
टीवी पर रजनी की सिसकरियाँ गूँज रही थी, “ओहहहहहहह हाँआँआआआआआ जोर से… हाँआँआँ ऐसे ही।”
थोड़ी देर बाद कमरे में एक दम खामोशी सी छा गयी थी। सिर्फ़ उन दोनों की साँसों की आवाज़ आ रही थी।
“लगता है दोनों का काम हो गया है!” प्रीती बोली। प्रीती का तीसरा पैग चल रहा था और वो चेन स्मोकर की तरह लगातार सिगरेट पे सिगरेट फूँक रही थी।
इतने में एम-डी ने कहा, “काश तुम मेरे पास पहले आ जाती तो मैं तुम्हारी कुँवारी चूत चोद पाता, फिर भी तुम्हारी चूत अभी भी कसी हुई है। कोई बात नहीं….. चलो अब घोड़ी बन जाओ, अब मैं तुम्हारी गाँड मारूँगा।”
“म….म…म..म…म नहीं!!” रजनी ने थोड़ा विरोध किया।
“तुम डरो मत! मैं धीरे-धीरे करूँगा…… तुम्हें तकलीफ नहीं होगी”, एम-डी ने रजनी की चूचियों को सहलाते हुए कहा।
रजनी घोड़ी बन गयी और एम-डी ने अपना लंड उसकी कुँवारी गाँड में डाल दिया।
“ओहहहहहहह मर गयीईईईईई, निकालो बहुत दर्द हो रहा है, ऊऊऊऊऊऊऊऊ माँआँआआ”, रजनी की चींख सुनाई दी।
“सुनील! एम-डी ने रजनी की कुँवारी गाँड फाड़ दी लगता है!” अपनी सिगरेट एश-ट्रे में टिका कर और ग्लास टेबल पर रख कर प्रीती मेरे लंड को पैंट में से निकालते हुए बोली। “तुम्हारा लंड कितना तन गया है और मेरी भी चुदाई की इच्छा हो रही है…. मुझे चोदो ना…. देखो मेरी चूत कैसे बह रही है।”
मैं प्रीती को सोफ़े पर लिटा कर, कसके उसकी चुदाई करता रहा।
दो घंटे के बाद एम-डी बेडरूम से बाहर आया और अपने कपड़े पहन लिये। “प्रीती! तुम भी कमाल की औरत हो, कहाँ कहाँ से ढूँढ के लाती हो इतनी कुँवारी चूतों को? मज़ा आ गया!” एम-डी ने कहा, “उससे पूछो कि क्या वो और दस हज़ार कमाना चाहेगी?”
“आप अपने आप क्यों नहीं पूछ लेते?” रजनी ने कमरे में नंगे ही आते हुए पूछा।
“ओह गॉड! ये तुम थीं!” एम-डी ने रजनी को देखते हुए कहा। इस कहानी के लेखक सुनील अग्रवाल है!
“हाँ मेरे प्यारे अंकल! ये सुन कर अच्छा लगा कि आपको मुझे चोदने में मज़ा आया…. मैं फिर से चुदवाना चाहती हूँ”, रजनी ने हँसते हुए कहा।
एम-डी धम से सोफ़े पर बैठ गया और अपने आपको कोसने लगा, “ये मैंने क्या किया? अपनी बेटी समान भतीजी को ही चोद दिया, हे भगवान मुझे माफ़ कर देना।” फिर वो प्रीती पर गुस्से से चिल्लाया, “ये सब तुम्हारा किया धरा है…. तुम क्या ये सब मज़ाक समझती हो?”
“हाँ! ये सब मैंने ही किया है। मैंने ही रजनी को तुमसे चुदवाने के लिये तैयार किया। जिस तरह तुमने मुझे चोदने के लिये मेरे पति को ब्लैकमेल किया था…. ये उसका बदला है”, प्रीती जोर जोर से हँस रही थी।
एम-डी प्रीती को गालियाँ दे रहा था, “कुतिया….. रंडी….. साली….. तूने ऐसा क्यों किया?” फिर रजनी की तरफ पलटते हुए बोला, “मैंने तुम्हारे साथ ऐसा क्या किया जो तुम इसके लिये तैयार हो गयी?”
“मेरे साथ नहीं किया, पर दूसरों के साथ तो करते आये हो! असलम को भूल गये? कैसे उसे चोरी के इल्ज़ाम में फँसा कर उसकी बेटी आयेशा को आपने और महेश ने चोदा था”, रजनी खीझती हुई बोली।
“ये सब झूठ है, इन्होंने तुम्हें बहकाया है”, एम-डी ने कहा।
“आप रहने दें, झूठ बोलने से कोई फ़ायदा नहीं है, मुझे सचाई का पता है, आप यहाँ से प्लीज़ जायें, मुझे आपको अपना अंकल कहते हुए भी शरम आ रही है।”
एम-डी चुपचाप उठा और धीमे कदमों से सूईट से बाहर चला गया।
“हम लोगों ने कर दिखाया”, रजनी खुशी से चिल्लाते हुए बोली। इस कहानी के लेखक सुनील अग्रवाल है!
“हाँ कर तो लिया…. पर तुमने देखा एम-डी का चेहरा कैसे उतर गया था, मुझे दुख है लेकिन उसे सबक भी सिखाना जरूरी था”, प्रीती अपना ग्लास हवा में लहराते हुए बोली, “रजनी ये पैसे तुम रख लो… तुम्हारे हैं जो एम-डी ने तुम्हें चोदने के लिये दिये थे।”
“नहीं मुझे इनकी जरूरत नहीं है….. इसे तुम ही रखो”, रजनी ने पैसे लौटाते हुए कहा।
“तो फिर इनका क्या करें, ऐसा करते हैं ये पैसे असलम को दे देते हैं, कहेंगे आयेशा की शादी में काम आयेंगे”, प्रीती ने कहा।
“हाँ! ये ठीक रहेगा! लेकिन अब क्या करें?” रजनी बोली।
“तुम लोगों को जो करना है करो….. मुझे तो एम-डी पर दया आती है, मैं घर जाकर सोना चाहता हूँ।”
“ठीक है”, कहकर प्रीती ने रजनी को भी घर भेज दिया और हम लोग घर आकर सो गये।
दूसरे दिन एम-डी ऑफिस में नहीं आया। घर फोन करने पर पता लगा कि उनकी तबियत खराब है। एम-डी की तबियत दिन पर दिन खराब रहने लगी और उन्हें हॉसपिटल में भरती करना पड़ा।
ऑफिस का काम मैंने संभल लिया था। इसी तरह महीना गुजर गया। सब कुछ वैसे ही चल रहा था। मैं ऑफिस की औरतों को चोदता और प्रीती भी क्लबों और पार्टियों में दूसरे मर्दों से चुदवा कर ऐश कर रही थी।
एक दिन मैंने एम-डी को फोन किया, “सर! मैं सुनील बोल रहा हूँ, अब आपकी तबियत कैसी है?”
“मैं ठीक हूँ सुनील! एक काम करो… आज रात आठ बजे तुम मुझे मेरे सूईट में मिलो? ठीक टाईम पर पहुँच जाना, तुम आओगे ना?” एम-डी ने कहा।
“बिल्कुल पहुँच जाऊँगा सर”, मैंने जवाब दिया।
ठीक टाईम पर मैं सूईट में दाखिल हुआ तो क्या देखता हूँ कि एम-डी एकदम नंगा सोफ़े पर बैठा था, और दो औरतें, जो कि बिल्कुल नंगी थीं, उसके लंड को चूस और चूम रही थी।
“आओ सुनील!” एम-डी ने मेरी तरफ हाथ हिलाते हुए कहा।
एम-डी को बोलते सुन दोनों औरतें अपना नंगा बदन छुपाने के लिये सोफ़े के पीछे जा छुपीं। उनका सिर्फ़ चेहरा दिखायी दे रहा था। मैंने उन दोनों को पहचान लिया। एक एम-डी की पत्नी मिली थी और दूसरी रजनी कि मम्मी, मिसेज योगिता थी। इस कहानी के लेखक सुनील अग्रवाल है!
“रजनीश! ये कौन है और यहाँ क्यों आया है? इसे फ़ौरन यहाँ से जाने को बोलो!” मिसेज मिली चिल्लाते हुए बोली और मिसेज योगिता ने शरमा कर अपनी गर्दन झुका रखी थी।
उसकी बातों को अनसुना कर के एम-डी ने कहा “सुनील! तुम इन दोनों से पहले भी मिल चुके हो….. लेकिन फिर भी मैं इनसे तुम्हारा परिचय कराता हूँ। ये मेरी बीवी मिली है और बिस्तर में भी उतना ही मिल जाती है, और ये मेरी दूर की कज़िन योगिता है…… ये थोड़ी शर्मिली है, लेकिन इसकी चूत एक दम आग का गोला है….. योगिता ये मिस्टर सुनील हैं…… हमारे अकाऊँट्स के जनरल मैनेजर।”
“आप दोनों से मिलकर खुशी हुई”, मैंने कहा।
दोनों औरतों ने कुछ नहीं कहा और चुपचाप रही।
एम-डी ने मेरी तरफ देखते हुए कहा, “सुनील! मैंने तुम्हारी पत्नी और बहनों को चोदा है, आज मैं हिसाब बराबर कर देना चाहता हूँ। मैं जानता हूँ कि मेरी पत्नी और बहन तुम्हारी बीवी और बहनों जितनी यंग तो नहीं है, लेकिन जैसी हैं तुम्हारी हैं। तुम चाहो जैसे इन्हें चोद सकते हो।”
“तुम्हारा दिमाग तो खराब नहीं हो गया है? तुम अपने नौकर से अपनी बीवी और बहन को चुदवाना चाहते हो?” मिली चिल्लाते हुए बोली। उसकी आवाज से साफ ज़ाहिर था कि उसने शराब पी रखी थी।
“इसके नौकर होने की तुम्हें तकलीफ हो रही है तो ठीक है….. इसे मैं आज से डिप्टी मैनेजिंग डायरेक्टर नियुक्त करता हूँ, अब तो तुम्हें तकलीफ नहीं?” एम-डी ने हँसते हुए कहा।
“नहीं! मैं तैयार नहीं हूँ!” मिली वापस चिल्लायी। इतनी देर योगिता चुपचाप सब सुन देख रही थी।
“तुम तैयार हो कि नहीं…… बाद में देखेंगे।” एम-डी हँसा, “सुनील जरा इन्हें अपना लंड तो दिखाना!”
दोनों औरतें ४० साल के ऊपर थीं, फिर भी उनका बदन गदराया हुआ था और उन्हें चोदने को मेरा दिल मचल उठ था। मैंने अपने कपड़े उतारते हुए अपना लंड दिखाया।
“ओह गॉड! कितना मोटा और लंबा लौड़ा है तुम्हारा”, मिली ने अब आगे आकर मेरे लंड को अपने हाथों में जकड़ते हुए कहा। “तुम्हारा लंड तो महेश से भी लंबा है।”
“साली कुत्तिया! मेरे पीछे तुम महेश से चुदवाती रही हो?” एम-डी ने हँसते हुए कहा।
“हाँ… उसी तरह जैसे तुम उसकी बीवी को चोदते रहते थे”, कहकर मिली मेरे लंड को हिलाने लगी।
“योगिता क्या तुम इसके लिये तैयार हो?”
“नहीं! बिल्कुल नहीं!” योगिता बोली।
“योगिता प्लीज़ मान जाओ! नहीं तो मुझे सुनील के लिये किसी और चूत का इंतज़ाम करना होगा, रजनी की चूत कैसी रहेगी? मुझे मालूम है कि सुनील को रजनी की कुँवारी चूत चोदने में मज़ा आयेगा।” एम-डी हँसते हुए बोला।
“मेरी बेटी को इन सबसे दूर रखो! समझे?” योगिता जोर से चिल्लायी।
“तुम सोच लो, या तो तुम्हारी चूत या फिर रजनी की चूत, फैसला तुम्हारे हाथ में है।”
एम-डी की बात सुन कर योगिता भी सोफ़े के पीछे से बाहर आ गयी। सिर्फ काले रंग के हाई हील के सैंडल पहने, बिल्कुल नंगी, योगिता बहुत ही सैक्सी लग रही थी। एम-डी उसे देख कर बोला, “अच्छा अब तुम मान ही गयी हो तो सुनील का जरा अलग अंदाज़ में स्वागत करो।”
योगिता घुटने के बल मेरे पास बैठ गयी और मेरे लंड को अपने मुँह में लेकर चूसने और चाटने लगी।
“चलो अब बेडरूम में चलते हैं”, एम-डी सोफ़े पर से उठते हुए बोला। हम चारों बेडरूम में आ गये। पहले हम सबने दो-दो पैग पीये और फिर मैंने दोनों को खूब चोदा। इतनी उम्र होने के बाद भी दोनों में सैक्स की आग भरी हुई थी। एम-डी सब कुछ देखता रहा। फिर एम-डी के कहने पर मैंने उन दोनों की गाँड भी मारी।
मैंने रात को घर पहुँच कर प्रीती को सब बताया तो वो खुश हुई और बोली, “अच्छा है! आज से एम-डी तुम्हें अपने बराबर समझेगा….. नौकर नहीं।”
एम-डी जब बिमार था तो रजनी बराबर आती रहती थी और मैं प्रीती के साथ उसकी भी जम कर चुदाई करता था, लेकिन जबसे मैंने उसकी माँ योगिता को चोदा, उसने आना बंद कर दिया था। इस कहानी के लेखक सुनील अग्रवाल है!
एक दिन मैं घर पहुँचा तो देखता हूँ कि रजनी और प्रीती शराब की चुस्कियाँ लेती हुई बातें कर रही हैं।
“हाय सुनील! कैसे हो और आज कल क्या कर रहे हो…. मेरी मम्मी को चोदने के अलावा?” रजनी बोली।
“तो तुम्हें पता चल गया”, मैंने कहा।
“तुम्हें कैसे पता चला?” प्रीती ने पूछा।
“वही तो बताने आयी हूँ, सुनील का ही इंतज़ार कर रही थी”, रजनी बोली।
“अब तो सुनील आ गया है….. चलो शुरू हो जाओ।”
“कुछ दिनों से मैं देख रही थी कि मम्मी कुछ खोयी-खोयी सी रहती थी। अब ना तो वो पहले के जैसे हँसती थी और ना ही उनका काम में मन लगता था। पहले वो कभी-कभी ही, पार्टी वगैरह में ड्रिंक करती थीं पर अब कुछ दिनों से रोज़ ड्रिंक करने लगी थीं।”
“मेरे बहुत जोर देने पे वो बोलीं, रजनी मेरी बातें सुनकर हो सके तो मुझे माफ़ कर देना….. रजनी! मैं बचपन से ही बहुत सैक्सी थी, मुझे सैक्स हमेशा चाहिये होता था, तुम्हारे पिताजी के मरने के बाद मैं अकेली पड़ गयी और मेरी सैक्स की भूख शाँत नहीं होती थी। एक दिन मेरी एक सहेली ने मुझे रबड़ का नकली लंड खरीद कर लाके दिया।”
“मम्मी! आपके पास क्या नकली लंड है? मुझे दिखाओ ना! मैं बीच में बोली।”
“अभी नहीं बाद में, मम्मी बोली पर मैंने जोर दिया तो मम्मी बेडरूम से नकली लंड ले आयी…. प्रीती! पूरा दस इंच का काला और मोटा लंड है, अच्छा है पर सुनील के असली लंड जैसा नहीं।”
“आगे क्या हुआ, वो बता”, प्रीती सिगरेट का धुँआ छोड़ती हुई रजनी से बोली।
“मम्मी ने बताया कि एक दिन शाम को वो अपने नकली लंड से मज़े ले रही थी कि मेरी आँटी मिली ने उन्हें देख लिया और बोली, ‘योगिता नकली लंड से कुछ नहीं होगा, मेरे पास आओ मैं तुम्हें असली मज़ा दूँगी।’ उसकी बातें सुन कर मम्मी आगे बढ़ी तो उसने उन्हें बाँहों में भर कर चूमना शुरू कर दिया। मम्मी को भी मज़ा आने लगा और थोड़ी ही देर में दोनों एक दूसरे की चूत चाट रही थीं, जब उनका पानी छूट गया तो मम्मी ने मिली आँटी से पूछा, ‘मिली! तुम्हें भी चुदाई का बड़ा शौक है ना?’ ‘हाँ! योगिता बहुत है लेकिन रजनीश मुझे कभी-कभी ही चोदता है।’ उस दिन के बाद से वो दोनों रोज़ एक दूसरे को नकली लंड से चोद कर मज़ा लेतीं और एक दूसरे की चूत को खूब चाटतीं।”
“एक दिन मम्मी बिस्तर पर आँखें बंद किये लेटी थी। उनकी टाँगें हवा में उठी हुई थी और मिली आँटी के चोदने का इंतज़ार कर रही थी। ‘मिली! अब जल्दी भी करो मेरी चूत में आग लगी हुई है…. मुझसे बर्दाश्त नहीं होता।’ मम्मी की बात सुन कर मिली आँटी ने नकली लंड उनकी चूत में घुसा दिया, लेकिन जैसे ही लंड घुसा कि मम्मी समझ गयी कि नकली नहीं असली लंड है। मम्मी ने आँखें खोली तो देखा कि रजनीश अंकल अपना लंड घुसाये उन्हें चोद रहे थे। मम्मी ने बिस्तर से उठना चाहा तो अंकल ने उन्हें कस कर बाँहों में पकड़ कर चोदते हुए कहा, ‘योगिता! जब ये असली लंड है तो तुम्हें नकली लंड से चुदवाने की क्या जरूरत है?’ मम्मी ने भी कई दिनों से असली लंड का मज़ा नहीं लिया था। मम्मी भी उनका साथ देने लगी और मस्ती में चुदवाने लगी। बाद में मम्मी को पता लगा कि ये दोनों की मिली भगत थी। मम्मी ने बुरा नहीं माना। उस दिन से रजनीश अंकल मम्मी को अकसर चोदने लगे।”
“एक दिन अंकल मम्मी और मिली आँटी को होटल के सूईट में ले आये और बोले कि आज यहाँ मज़े करेंगे। अंकल ने मम्मी और मिली आँटी को खूब शराब पिलायी। मम्मी ने मुझे आगे बताया कि हम लोग मस्ती कर रहे थे कि हमारी कंपनी से कोई सुनील आया और तुम्हारे अंकल ने हम दोनों को उसे सौंप दिया…. चोदने के लिये क्योंकि तुम्हारे अंकल ने उसकी बीवी और बहन को चोदा था। मैं साथ नहीं देना चाहती थी लेकिन जब मिली ने सुनील के लंड को देखा तो उसके मुँह में पानी आ गया। मैंने मना करना चाहा तो तुम्हारे अंकल ने कहा कि या तो मैं मन जाऊँ नहीं तो वो तुम्हारी चूत सुनील को दे देंगे। फिर मैं भी मान गयी और सुनील ने एम-डी के सामने ही हम दोनों को चोदा, उसने हमारी गाँड भी मारी। बस उस दिन से मुझे ऐसा लग रहा है कि मैं रंडी बन गयी हूँ।”
“मम्मी! सुनील का लंड बहुत मोटा और लंबा है ना? चुदवाने में बहुत मज़ा आता है ना? मैंने मम्मी से कहा। तुमने सुनील का लंड कब देखा और चखा? मम्मी ने पूछा। तब मैंने मम्मी को पूरी कहानी सुनाई, सुनील से चुदवाने से लेकर अंकल से चुदवाने तक। मेरी कहानी सुन कर मम्मी बोल पड़ी कि काश मैं भी प्रीती कि तरह तुम्हारे अंकल से बदला ले सकूँ। ‘मम्मी! आप चिंता ना करें….. मैं आपके साथ हूँ’, ‘मगर हम किस तरह बदला लेंगे?’ मम्मी ने पूछा। अंकल की दोनों बेटियाँ है ना! ६ महीने बाद बड़ी बेटी इक्कीस साल की हो जायेगी और छोटी वाली एक साल के बाद। उनके इक्कीस्वें जन्मदिन पर उनका तोहफा होगा….. मोटा और लम्बा लंड उनकी चूत और गाँड में।”
“तुम्हारे दिमाग में कोई इंसान है? मम्मी ने पूछा। हाँ! मैं सुनील को तैयार कर लूँगी…. अब तुम लोग समझ गये होगे कि मुझे कैसे पता चला और क्या तुम दोनों मेरा साथ दोगे?”
“रजनी! एम-डी से बदला लेने में हम तुम्हारा पूरा साथ देंगे…..” मैंने उसे बाँहों में भरते हुए कहा।
“तुम्हारा प्लैन क्या है?” प्रीती ने पूछा।
“मेरा प्लैन ये है कि….” Hindi Sex Stories
अंतर्वासना के नियमित पाठको Antarvasna फड़कती हुई चूतों और मोटे मोटे लंडो को मेरा सलाम !
मैं सुनील अलवर से फिर एक बार हाज़िर हूँ अपने दोस्तो के लिए एक मसाले से भरी कहानी लेकर !
पिछली कहानी के लिए मुझे बहुत सी मेल आई। मुझे बहुत अच्छा लगा।
शायद आपको कुछ बताने की ज़रूरत नहीं कि मैं एक स्मार्ट और क्यूट लड़का हूँ। जो कहानी मैं आप सबको बताने जा रहा हूँ यह एक विवाहित लेकिन असंतुष्ट पत्नी की जो अपने पति के लण्ड से अपनी चूत की प्यास ना बुझा पाई और उसने मुझे याद किया।
पिछले महीने मैं अपने कम्प्यूटर पर काम कर रहा था कि मुझे एक काल आई। वहाँ से एक औरत की आवाज़ आई उसने मुझसे मेरे बारे में पूछा ओर मुझे कहा कि वो मुझसे मिलना चाहती है. उस वक्त मैं व्यस्त था तो मैने उस से बाद में बात करने को कहा. उसी रात उसका फिर से फोन आया. तब उसने मुझे बताया कि उसकी शादी को ३ साल हो गये है लेकिन वो अपने पति से खुश नही है और वो मुझसे मिलना चाहती है. फिर हमने मिलने की जगह तय की और मैं २ दिन बाद उस से मिलने उसके घर पहुचा.
मैंने बेल बजाई तो एक काम वाली ने दरवाजा खोला. उसने मुझे ड्रॉयिंग रूम में बिठाया और अपनी मालकिन को बुलाने चली गयी। कुछ देर बाद मैंने देखा कि एक २५-२६ साल की औरत गुलाबी रंग की साड़ी में आ रही है. वो देखने में बला की खूबसूरत थी. उसका फिगर ३६-२६-३६ था. मैंने मन ही मन अपनी किस्मत पर गर्व किया कि इतनी खूबसूरत अप्सरा ने मुझे बुलाया है और कुछ ही देर में वो मेरी बाहों में होगी.
उसने आकर मुझसे हाथ मिलाया और अपना नाम रेखा बताया. वो मेरे पास बैठ गयी और हम दोनो बातें करने लगे. कुछ देर बाद उसकी काम वाली चली गयी. फिर वो मुझे अपने बेडरूम में ले गयी. वहाँ हम दोनो ने ड्रिंक्स ली और उसके बाद वो नहाने क लिए बाथरूम में चली गयी.
इतनी देर में तो मेरे लण्ड ने मेरे जीन्स को फ़ाड़ना शुरू कर दिया. वो तो बाहर निकलने को तैयार था. १५ मिनट के बाद जब वो बाथरूम से बाहर निकली तो मेरे होश ही उड़ गये. उसने एक हल्के गुलाबी रंग की पारदर्शी नाइटी पहनी थी और अंदर कुछ भी नहीं था. उसके मोटे मोटे बूब्स और गुलाबी निपल्स साफ दिखाई दे रहे थे. उसकी प्यारी सी चूत, जिस पर एक भी बाल नहीं था जैसे वो अभी साफ करके आई हो, दिखाई दे रही थी. वो मेरे पास आई, मुझे मेरे होठों पे हल्के से किस किया और मेरे पास बैठ गयी. मैने उसे अपनी बाहों में समेट लिया. ओर उसके गुलाबी होठों को अपने होठों में दबा लिया. उसके बाद मैंने उसके मुँह में अपनी जीभ डाल दी। वो भी पूरा सहयोग दे रही थी. वो बहुत ही गर्म लग रही थी जैसे काफ़ी समय से उसने सेक्स ना किया हो. फिर मैने उसकी नाईटी को उतार दिया और उसने मेरे कपड़ो को उतार दिया. उसके दोनो कबूतर अब मेरे हाथो में थे. जिन्हें मैं कस कस के दबा रहा था. कमरे में बड़ी ही सेक्सी आवाज़ें गूँज रही थी… वो मदहोश हो गयी थी.
मैने उसके एक चूचे को मुँह मे ले लिया और पीने लगा। वो ज़ोर ज़ोर से उउऊहह आआहह करने लगी. पूरा कमरा उसकी आवाज़ो से गूंजने लगा. अब मैंने जैसे ही उसकी चूत को छुआ, वो तड़प उठी और मुझसे ज़ोर से लिपट गयी. फिर उसने मेरा लण्ड अपने मुँह में ले लिया ओर उसे ज़ोर से चूसने लगी. थोड़ी देर बाद हम दोनों ६९ की पोज़िशन में थे ओर वो मेरे लण्ड को और मैं उसकी चूत को चूस रहा था. थोड़ी देर बार वो फ्री हो गयी ओर मैंने उसका सारा रस पी लिया और ५ मिनट बाद मैं भी फ्री हो गया, उसने भी मेरा सारा रस भी लिया।
अब मैं उसके बूब्स क साथ खेलने लगा। वो भी मेरे लण्ड के साथ खेल रही थी। कुछ देर बाद मैं फिर से तैयार हो गया। अब वो तड़प रही थी और मुझे भी नहीं बर्दाश्त हो रहा था। मैने अपने लण्ड उसकी चूत पे रखा और एक ही बार में पूरा का पूरा घुसा दिया. वो एक दम से चिल्ला पड़ी उसकी चूत बड़ी टाइट थी. फिर मैने ज़ोर ज़ोर से झटके लगाने शुरू किया. उसने अपनी दोनो टांगें मेरी कमर के चारो तरफ लपेट ली एक नागिन की तरह. अब कमरे में फुउऊउउस्स्स् फुस स्स्स्स की आवाज़ें गूँज रही थी. कुछ देर में हम दोनों फ्री हो गये. ओर एक दूसरे क साथ लेट गये. फिर मैं उसे उठा के उसके बाथरूम में ले गया और शावर क नीचे हमने फिर से एक बार सेक्स किया उस दिन मैं उसके साथ पूरा दिन रहा और हमने ५-६ बार सेक्स किया. अलग अलग स्टाइल्स में. वो बहुत ही खुश हुई. उसके बाद मैं वापिस चला गया. कुछ दिनों बाद उसने मुझे फिर से बुलाया और इस बार उसकी एक फ्रेंड भी उसके साथ थी…
इस बारे में आपको अगली बार बताउंगा…
सो अलविदा दोस्तो और प्यारी प्यारी सेक्सी सेक्सी यौनियो !
फिर से ये राहुल आपकी सेवा में हाज़िर होगा…
राहुल आपकी सेवा में तत्पर है…
आपका प्यार ही मुझे आपके पास लाया है. म्म्म्म मम्मूऊऊ उऊहहाआआ Antarvasna
मेरा नाम बताना ज़रूरी Antarvasna Stories तो नहीं मगर आप मुझे लवर बॉय पुकार सकते हैं। मैं भोपाल का रहने वाला हूँ और लोग कहते हैं कि मैं काफी हैन्डसम हूँ। मेरी लम्बाई 5’9″ है और आयु 19 साल है।
यह बात उस वक़्त की है जब मैं बारहवीं में था। उस वक़्त मेरी परीक्षा शुरू होने में सिर्फ एक सप्ताह रह गया था और पढ़ाई जोरों पर थी। मैं दिन भर पढ़ाई करता था इसी वजह से थोड़ा मूड ताज़ा करने के लिए शाम के समय क्रिकेट खेलने पास वाले मैदान में चला जाता था।
एक दिन की बात है, मैं मैदान में खेल रहा था तभी मेरे दोस्त ने शॉट मारा और गेंद मैदान के बाहर चली गई। मैं गेंद लेने गया। क्योंकि गेंद बाहर चली गई थी इसलिए मैं दीवार पर चढ़ कर गेंद ढूँढ रहा था। मेरी नज़र अचानक मेरे घर के सामने वाले घर पर पड़ी। वो मैदान की दीवार से बिल्कुल करीब ही था। मैंने देखा कि स्नेहा भाभी जो उस घर में रहती हैं, अपने बाथरूम में नहा रही थीं। मैं उनके बाथरूम की दीवार में लगे रोशनदान से उन्हें साफ़ देख सकता था। मैंने उन्हें देखा तो बस देखता रह गया क्योंकि मैंने अपनी जिन्दगी में पहली बार किसी लड़की को पूरी तरह नंगा देखा था। मैं उन्हें पागलों की तरह घूरे जा रहा था। मैं उन्हें देख ही रहा था कि अचानक उनकी नज़र मुझ पर पड़ गई और मैं यह चिल्लाता हुआ कूद गया कि यार गेंद नीचे कहीं नहीं दिख रही, लगता है खो गई है ! और घर वापस आ गया।
मगर मेरे दिमाग में उनका वही नंगा बदन घूम रहा था- दूध जैसा गोरा और एक दम क्या कसा हुआ शरीर था ! फिर मैंने मैदान में जाना बंद कर दिया। मेरी परीक्षा खत्म होने के बाद करीब ४० दिन में हमारा परिणाम आ गया। घर पर सभी खुश थे। मैंने ६७% अंक प्राप्त किये। पापा मिठाई ले कर आये और बोले कि सब में बाँट दो !
मैं मिठाई लेकर सब लोगों को बाँटने चला गया और अंत में स्नेहा भाभी के घर भी गया। वो अपने पति के साथ रहती थी। क्योंकि उनकी नई-नई शादी हुई थी, उनका कोई बच्चा नहीं था। जब मैं उनके घर गया तो घर से उनके पति ऑफिस के लिए जा रहे थे। मैंने राजीव भैया को हेलो किया और मिठाई ऑफर की। उन्होंने एक टुकड़ा लिया और बोले कि अन्दर तेरी भाभी को भी दे दे ! मैं तो ऑफिस जा रहा हूँ !
और वो अपनी गाड़ी स्टार्ट करके ऑफिस के लिए निकल गए। मैं अन्दर गया तो उस दिन वाली घटना की वजह से भाभी से नज़रें नहीं मिला पा रहा था। वो बोली- वाह छोटू ! तू पास हो गया ! मगर इतना शरमा क्यों रहा है? ला मिठाई खिला !
मैंने उन्हें मिठाई दी और बोला- अच्छा भाभी ! अब मैं चलता हूँ !
तो वो बोली- छोटू, एक बात बता ! उस दिन तेरी गेंद मिल गई थी या नहीं?
तो मैं कुछ नहीं बोला।
वो बोली- चल मत बता ! यह तो बता दे कि उस दिन क्या देख रहा था?
मैं बोला- कुछ नहीं भाभी ! मैं तो बस गेंद ढूँढ रहा था !
इस पर वो बोली- चल मैं इतनी बुरी भी नहीं हूँ कि कोई लड़का ऐसी हालत में भी मुझे न देखे !
उनकी यह बात सुन कर मैं हैरान रह गया।
फिर वो बोली- चल इस उम्र में नहीं देखेगा तो कब देखेगा?
यह सुनकर मैं थोड़ा मुस्कुरा दिया। फिर वो पूछने लगी- चल बता ! मैं कैसी दिखती हूँ ?
मैं बोला- भाभी, उस दिन तो बस मज़ा आ गया था !
बोली- अच्छा ? अभी तो बड़ा शरीफ बन रहा था ?
तो मैं बोला- हाँ ! वो तो बस ऐसे ही !
और बस उन्होंने मेरा हाथ पकड़ लिया। मुझे भी बस ग्रीन सिगनल का ही इन्तज़ार था।
मैंने भी उनका हाथ पकड़ कर अपनी तरफ खींचा तो उन्होंने मुझे झटके से दूर कर दिया, बोली- रुक !
और जाकर दरवाज़ा बंद करके आई और बोली- यहाँ ठीक नहीं है !
वो मुझे अपने साथ अपने बेडरूम में ले गईं। मैंने उन्हें बेड पर धक्का दे दिया और उनके ऊपर लेट कर उन्हें चूमने लगा। करीब 15 मिनट तक मैं उनके लबो और चेहरे को चूमता रहा और वो मेरी पैंट के ऊपर से ही मेरे लंड को दबाने लगी।
फिर मैं उनके ऊपर से हटा और उनकी कुर्ती उतार दी और ब्रा भी खोल दी। मैं उनके दूध दबाने लगा, मैं उनके चुचूकों को दबा और चाट रहा था। इसी बीच वो सिसकियाँ ले रही थी और फिर उन्होंने खुद अपनी सलवार और पैंटी उतार फेंकी। अब वो मेरी सामने बिल्कुल नंगी थी। मैने देखा उनकी चूत एक दम टाइट थी और उस पर एक भी बाल नहीं था- एकदम साफ़ और चिकनी !
वो मेरे कपडे भी उतारने लगी। पहले उन्होंने मेरी टी-शर्ट, फिर जींस उतार फेंकी और फिर मैंने अपनी अंडरवियर उतार दी। अब हम दोनों एक दूसरे के सामने बिल्कुल नंगे थे और मेरा लंड भी पूरी तरह से तैयार हो गया था। मैंने उनकी चूत पर अपने लण्ड का मुँह रखा तो उन्होंने हटा दिया और बोली- नहीं ! पहले पिछवाड़ा !
फिर मैंने उन्हें घूमने को कहा, उन्हें कुतिया बनाया और अपना लंड उनकी गाण्ड पर रखा और धक्का मारा तो थोड़ी तकलीफ हुई। फिर मैंने पास की अलमारी से तेल उठा कर उनकी गाण्ड और अपने लंड पर लगाया और एक जोर का धक्का दिया तो मेरा आधा लंड उनकी गाण्ड में चला गया। उनके मुँह से चीख निकल गई। मैने उनके मुँह पर हाथ रखा और एक जोर का धक्का लगाया। मेरा पूरा ७ इंच का लण्ड उनकी गांड में घुस गया। फिर बहुत देर तक मैं उनकी गाण्ड मारता रहा। इस बीच वो दो बार झड़ चुकी थी और मैं भी झड़ गया। फिर मैंने उनसे चूत मारने का कहा तो वो बोली- यह अभी सील बंद है ! इसको तो अभी तुम्हारे भैया ने भी नहीं मारा ! तुम ज़रूर मेरी चूत भी मारना, मगर अगली बार !
और फिर मैंने क्या किया, यह मैं आपको अगली बार बताऊँगा।
आपको मेरी कहानी कैसी लगी, मुझे बताएँ ! Antarvasna Stories
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