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दोस्तों मैं अजनबी दहिया Antarvasna आपके सामने अपनी पहली कहानी रिया की चुदाई पेश करने जा रहा हूँ। सबसे पहले मैं गुरूजी का धन्यवाद करता हूँ जिन्होंने मेरी कहानी को समझा और आप लोगो तक पहुँचाया, और उन फड़कती हुई चूतों को भी मेरा सलाम, जो हमेशा किसी लण्ड की तलाश में रहती हैं। चूतें हमेशा चुदने के लिए ही होती हैं !
रिया मेरी एक रिश्तेदार है। वह मेरे बड़े भाई की साली है। रिया और मेरा चक्कर बहुत पहले से चल रहा था।
एक दिन मैं उसके शहर में गया, मैंने वहां होटल में कमरा लिया और दो दिन तक रुका। मैंने रिया को फ़ोन कर शाम को कमरे पे बुला लिया। वो मेरी पसंद की काली साड़ी में शाम को पाँच बजे वहां आ गई। उसके आते ही मैंने कमरे का दरवाजा अंदर से बंद कर लिया। वो बला की खूबसूरत लग रही थी।
मैंने उसे अपनी बाहों में भर लिया और चूमने लगा। वो भी मेरा पूरा साथ दे रही थी। मैंने उसे उठाया और बिस्तर पे लिटा दिया।
मैंने उसके होठों को जी भर के चूसा। फिर मैंने उसकी काली साड़ी को निकाल फेंका. फिर मैं उसके स्तनों को ब्लाऊज़ के ऊपर से ही मसलने लगा। वो भी मुझे कस के बाहों में लिए हुए थी और बहुत ही खुश थी। उसका पति उसे समय नहीं दे पाता था। वो मेरे द्वारा माँ बनना चाहती थी। मैंने उसके ब्लाऊज़ और पेटीकोट को उतार दिया। अब वो ब्रा और पेंटी में थी और बड़ी ही सेक्सी लग रही थी।
मैंने भी अपने कपड़े उतार दिए और उसे चूमने लगा और एक हाथ से उसके छोटे-२ स्तनों को सहला रहा था। फिर मैंने उसकी पेंटी में हाथ डाला तो वो गीली हो चुकी थी, उसकी चूत ने पानी छोड़ दिया था। मैं उसकी चूत में ऊँगली घुमाने लगा।
अब मैंने उसकी ब्रा को भी निकाल फेंका। अब हम दोनों पूरे नंगे हो चुके थे। मैं उसके दोनों स्तन बारी-२ से सहला रहा था और उसके रस-भरे होठों को चूम रहा था। अब रिया ने मेरे लंड को अपने हाथ में पकड़ लिया और सहलाने लगी। अब हम दोनों ६९ पोजीशन में आ गए। वो मेरे लण्ड को लॉलीपोप की तरह बड़े ही मजे से चूस रही थी और में उसकी चूत को चाट रहा था। करीब पन्द्रह मिनट बाद हम अलग हुए, वो दो बार झड़ चुकी थी। अब उसे बिल्कुल बर्दाश्त नहीं हो रहा था। उसने मुझसे कहा- अब जल्दी से ऊपर आ जाओ !
मैंने अपने लण्ड को निशाने पे लगाया और उसकी बूर पे रखकर एक जोरदार झटका मारा, वो दर्द के मारे कराहने लगी। मैं उसके स्तन मसलने लगा।
जब उसका दर्द कुछ कम हुआ तो मैंने एक और जोरदार शोट मारा और पूरा का पूरा लण्ड उसकी चूत की गहराई में समां गया। वो एक बार फिर दर्द से चिल्ला उठी और आ आआ आ आह्ह्ह्ह्ह् ईईइह्ह्ह्ह्ह ऊऊ ऊ ऊ ऊह्ह्ह्ह्ह् की आवाजें करने लगी। मैंने उसके होठों पे अपने होंठ रख दिए। जब उसका दर्द कम हो गया तो वो कहने लगी- जोर से चोदो मेरे राजा ! आज इस चूत का भोंसड़ा बना दो ! और जोर से … और जोर से ! आज मुझे छोड़ना नहीं मेरे रज्जा !……. मुझे आज पेल दो आज …… !
मैं जोर-२ से ध्क्के लगाने लगा, रिया भी मेरा पूरा साथ दे रही थी और नीचे से गांड उठा-२ कर झटके मार रही थी। करीब पन्द्रह मिनट बाद मैंने कहा- अब मैं झड़ने वाला हूँ !
इससे पहले वो दो बार झड़ चुकी थी, तो उसने कहा- स्पीड बढ़ा दो !
मैं तेज-२ झटके लगाने लगा और १०-१५ झटकों के बाद मेरा लावा उसकी चूत में समां गया। वो आज बहुत ही खुश हुई।
फिर मैंने उसे अगले दिन कुतिया बना के भी चोदा। इस तरह आज वो माँ बनने वाली है और आज भी मुझसे बहुत प्यार करती है।
दोस्तों आशा करता हूँ मेरी यह कहानी आपको बहुत पसंद आएगी। इसी विश्वास के साथ यहीं ख़त्म कर रहा हूँ। पर मेल भेजना न भूलिएगा।
आपके मेल का इंतजार रहेगा। आप सभी को ढेर सारा प्यार। Antarvasna
आज मैं आपको अपनी ज़िन्दगी Antarvasna की वो दास्ताँ सुनाने जा रही हूँ जिसे अगर गलती से भी मेरे पति ने पढ़ लिया तो वो अपने ऑफिस के
हर मर्द को बारी बारी से बुलाकर मेरी मुलायम बिना झांटों वाली गुलाबी बुर को चुदवा चुदवा के भोसड़ी वाला कुआँ बनवा देगा।
मेरा मर्द बहुत बड़ा वाला चुदक्कड़ है। साला चोदता कम और चिल्लाता ज्यादा है।
खैर पहले मैं आपको अपने बारे में कुछ बता दूं। मेरा जन्म एक छोटे कस्बे में हुआ।
हम पांच बहनें हैं। माताजी को पांचवी के जन्म के बाद ही पिताजी ने घर से निकाल दिया। मेरी बड़ी बहन ने बहुत कोशिश की पर
पिताजी नहीं माने।
असल में पिताजी की नजर पड़ोस वाले कस्बे के किसी बनिए की विधवा बहू पर पड़ गई थी। माँ के जाते ही पिताजी उसे घर ले आये।
क्यूंकि पिताजी का रुतबा बहुत था उन दिनों तो किसी ने कोई आवाज़ नहीं उठाई।
खैर मैं इन सब दुनियादारी वाली बातों से अनजान अपने तरीके से बड़ी हो रही थी, क्यूंकि अपनी माँ की वो पांचवी बेटी मैं ही थी, तो
सारी बहने मुझे ही जिम्मेदार समझ कर मुझसे बातचीत नहीं करती थी।
पिताजी पर तो उस छम्मक छल्लो ने ऐसा जादू किया कि पिताजी दिन भर उसके कमरे में ही घुसे रहते।
इस तरह मैं बड़ी हो गई। पिताजी ने मुझे पढ़ने के लिए हमेशा प्रेरित किया। हम सभी बहनें घर पर रह कर ही पढ़ाई करती रही।
परीक्षा देने स्कूल जाना पड़ता था।
जब दसवीं बोर्ड की परीक्षा आई तो पिताजी ने मुझे पढ़ने के लिए एक मास्टर का इंतजाम कर दिया। वो मास्टर रोज मुझे दिन में दो
बजे पढाने आता था। मास्टर जी की उम्र पैंतालीस थी और वो जोर से बोल नहीं पाते थे शायद किसी बीमारी की वजह से।
तो कहानी कुछ इस तरह है।
एक रात मुझे मेरी बड़ी बहन ने बहुत मारा। मुझे लगा शायद फिर वोही माँ की याद आ रही होगी। मेरी सभी बहनें माँ को याद करती
तो मेरी ही पिटाई करती।
पर उस दिन मुझे बहुत बुरा लगा। मैं चुपचाप अपने कमरे में आकर रोने लगी। तभी मुझे कुछ अजीब सी आवाज आई। मैंने इधर उधर
देखा तो लगा कि आवाज पिताजी के कमरे से आ रही है। मैं दबे पाँव उनके कमरे की तरफ जाकर खिड़की से झाँकने लगी।
अन्दर का नजारा देख कर मैं दंग रह गई। अन्दर मेरी सौतेली माँ हमारे नौकर श्याम के होंठ चूम रही थी। श्याम का एक हाथ मेरी माँ
की गांड पर था और दूसरे हाथ से वो माँ की चूची मीस रहा था।
नजारा देखकर मेरे दिमाग में करंट सा लगा। तभी मेरी नजर बिस्तर पर पड़ी। मेरा तो सर घूमने लगा।
मैंने देखा मेरे पिताजी पूरे नंगे बिस्तर पर लेट कर अपने लुल्ले को हिला रहे थे।
मुझे थोड़ा धक्का सा लगा। मैंने कभी किसी के लुल्ले को इतना बड़ा नहीं देखा था। मेरी दोनों टांगों के बीच गुदगुदी सी होने लगी।
फिर माँ ने श्याम के होठों से होंठ चिपकाये हुए उसकी धोती खींचनी शुरू कर दी। श्याम भी मेरी माँ के ब्लाउज को जोर से खींचने
लगा।
मेरे पिताजी ने कहा- और जोर से खींच! फाड़ डाल!
इतना सुनते ही श्याम ने मेरी माँ का ब्लाउज बीच से फाड़ दिया। ब्लाउज के फटते ही मेरी माँ की चुचियाँ खुल के बाहर आ गई। श्याम
भूखे कुत्ते की तरह मेरी माँ की चूचियाँ चूसने लगा।
मेरी माँ भी बहुत ही जोर जोर से सिसकरियाँ ले रही थी। पिताजी का लुल्ला किसी डंडे की तरह खड़ा था।
मेरी माँ ने इस बार श्याम की धोती एक झटके में खींच दी। धोती खुलते ही श्याम का लुल्ला भी किसी सांप की तरह फनफनाता हुआ
ऊपर नीचे होने लगा।
मेरे तो होश उड़ गए थे। मेरी माँ ने तभी श्याम के लुल्ले को अपने हाथो से पकड़ लिया और सहलाने लगी। श्याम भी माँ की चुचियों
को हौले हौले दबा रहा था। फिर माँ ने पिताजी की तरफ देखा।
पिताजी ने कहा- चूस ले रांड! आज इस लंड को चूस ले!
तब मुझे पहली बार पता चला कि बड़े वाले लुल्ले को लंड कहते हैं।
फिर माँ श्याम के लंड को अपने मुँह में ले कर आइसक्रीम की तरह उसे चुम्लाते हुए चूसने लगी।
श्याम माँ के मुँह में धक्का लगा रहा था। तभी मैंने देखा कि माँ पिताजी के लंड को अपने हाथों में भींचकर तेजी से आगे पीछे करने
लगी। पिताजी हाय हाय करने लगे।
कुछ ही देर में पिताजी के लंड से एक पिचकारी निकली और पिताजी हाँफते हुए पीछे लुढ़क गए। फिर माँ ने श्याम को अपने ऊपर लेटने
कहा। श्याम माँ के ऊपर लेट गया और जोर जोर से उछलते हुए गाली बकने लगा। माँ उफ़ हाय! चोदो जोर से… कहते हुए नीचे से
धक्के लगा रही थी।
मेरी चड्डी पूरी गीली हो चुकी थी। मैंने देखना जारी रखा। कुछ देर बाद श्याम आया आया… कहते हुए माँ के ऊपर कस के लेट गया।
माँ भी आजा मेरे राजा कहती हुई कस के श्याम से लिपट गई।
तभी मेरी बड़ी बहन की आवाज सुनकर मैं वापस अपने कमरे की ओर भागी और कमरे में आकर रजाई में घुस गई।
मेरी चड्डी पूरी भीग चुकी थी और साँसे गर्म हो गई थी। पूरे बदन में चीटियाँ चल रही थी। मैंने किसी तरह चड्डी बदली और वापस लेट
गई।
पर नींद तो आँखों से बहुत दूर थी। मेरा हाथ अपने आप मेरी बुर में चला गया।
मैं श्याम के लंड के बारे में सोचते हुए अपनी बुर को सहलाने लगी। मेरी साँसे तेज चलने लगी। मेरे बदन में एक अजीब सी गर्मी चढ़
गई थी।
मैं हाय श्याम! हाय श्याम! कहती हुई अपनी बुर में हाथ फिराती रही।
तभी मुझे लगा कि मैं हवा में उड़ रही हूँ।
मैंने अपना हाथ तेजी से अपनी बुर में चलाना चालू किया।
कुछ पलों बाद मेरी बुर से एक पतली धार बहने लगी और मुझे इतना मजा आने लगा कि मैं बता नहीं सकती।
कुछ देर तक मैं वैसे ही पड़ी रही फिर मुझे नींद आ गई। उस रात मैंने पहली बार जाना कि जवानी किसे कहते हैं और फिर मैंने जवानी
के मदमस्त जीवन में कदम रखा।
अब मेरी शादी हो चुकी है पर शादी तक पहुँचने से पहले मैंने कितने प्यासे लोगों को पानी पिलाया यह मैं आपको गुरूजी के माध्यम से
बताती रहूंगी।
क्यों गुरूजी! आप मेरी कहानियाँ सब तक पहुँचाओगे न?
आपकी अंतरा
दोस्तो कैसी लगी मेरी कहानी! Antarvasna
भावना और रीता दो बहनों की कहानी Sex Stories है… भावना 21 साल की है और रीता 24 साल की। दोनों में आपस में बहुत प्यार था। एक दूसरे के ऊपर वो जान छिड़कती थी। उनमें अधिकतर चोरी छुपे लडकों की बातें होती रहती थी। एक दिन वो आपस में खुल गयी … और अब वो सेक्स के मजे भी लेने लगी। कैसे हुआ ये सब…
रात का खाना खा कर रीता कम्प्यूटर काम कर रही थी… भावना उसके पास बैठी थी- दीदी … शादी के बाद सुहागरात में लड़के लड़की क्या करते हैं…’ भावना ने हिचकते हुये पूछा।
‘क्या करते हैं? अरे मस्ती करते है और क्या…’ रीता मुस्कराई।
‘मैंने सुना है वो … दोनों नंगे हो कर … कुछ करते हैं…’
‘पता है तो क्यो पूछती है…’
‘दीदी… मजा आता है ना…’ भावना थोडी सी चन्चल हो उठी।
‘हां … तुझे देखना है …वो क्या करते हैं …’ रीता ने शरारत से पूछा।
‘हां दीदी…… पर कैसे……?’
‘देख मैं बताती हूं …’ रीता ने तिरछी निगाहों से देखा… फिर नेट पर पोर्न साईट लगा दी…
और एक मूवी लगा दी … ब्ल्यू फ़िल्म थी … रीता वहां से उठ कर बाथरूम चली गयी। भावना बड़े ध्यान से ब्ल्यू फ़िल्म देखने लगी। उसका हाथ अपने आप स्तनों पर आ गया और उन्हे दबाने लगी… इतने में रीता आ गयी…
‘देख लिया… ये करते है शादी की रात …’ भावना बेचैन हो उठी।
‘दीदी… लडकों का इतना बड़ा होता है…’ रीता हंस पडी
‘क्यों… कभी देखा नहीं क्या…?’ भावना ने सर हिला कर ना कह दिया।
कम्प्यूटर बन्द करके दोनों बिस्तर में घुस गई… पर भावना को नींद कहां थी… उसने धीरे से अपना कुर्ता ऊपर उठाया और अपनी चूंचियां धीरे धीरे मलने लगी… रीता ये सब देख रही थी…
अब रीता का मन भी मचल उठा … उसने भावना की तरफ़ करवट ली और उसके बालों में प्यार से हाथ फ़ेरा…’कम्मो … क्या हुआ… मन भटक रहा है…’
‘दीदी… हाय… मुझे कुछ हो रहा है…’
रीता ने उसकी चूंचियां उसके हाथों से छुडा दी…’मत कर ऐसे … वर्ना बेचैनी बढ जायेगी…’
‘दीदी … क्या करूं… मेरा तो जिस्म टूट रहा है…’ अब रीता से भी नहीं रहा गया… उसने भावना के दोनो बोबे पकड लिये और धीरे से सहला दिये…
‘हाय दीदी … दबा दो जोर से…’ भावना सिसक पडी। रीता के दोनों हाथों को अपने हाथों से अपनी चूंचियों पर दबाने लगी। रीता ने उसकी बेचैनी महसूस कर ली थी, उसका इलाज़ ऊपर नहीं नीचे था। भावना वासना में डूब चुकी थी… रीता ने अपना हाथ बढाया और उसकी चूतडों पर रख कर उसे सहलाने लगी।
पहले तो वो हाथ हटाने की कोशिश करती रही फिर बोली-‘दीदी… पीछे…गुदगुदी होती है… मत करो ना…’ अब मुझ पर भी वासना सवार होने लगी थी… मैने और जोर से उसके चूतड मसलने चालू कर दिये।
‘भावना…सुन एक खेल खेलते हैं … कपड़े उतार देते है…’
‘हां दीदी…… देखो ना कैसे तंग हो रहे है… पर हम तो नंगे हो जायेंगे ना…’
‘हां ये खेल नंगे हो कर ही खेला जाता है…’ दोनों बिस्तर पर से उतर गयी और कपड़े उतार दिये… रीता अलमारी से कुछ छुपा कर ले आयी और बिस्तर के सिरहाने रख दिया।
‘देख अपन बातें खुली भाषा में करेंगे… मजा आयेगा…’
‘यानी…… लन्ड…चूत वाली… भाषा में…’
‘हां… ठीक है ना…’
‘दीदी… हाय… मैं तो अभी से … जाने कैसी कैसी हो रही हू’
‘हां…… पहली बार ऐसा ही होता है…’
भावना रीता से लिपट गयी… उसकी सांसे रीता के चेहरे से टकराने लगी… उसकी दिल की धड़कने बढने लगी थी… रीता भावना से लिपट गयी…
दोनों के नरम होंठ आपस में टकरा गये। दोनो जोरों से एक दूसरे को चूम रही थी… रीता की जीभ भावना की जीभ से खेल रही थी…
रीता ने भावना की चूंचियां दबानी शुरु कर दी… उत्तर में भावना ने भी उसके स्तनों को मसलना चालू कर दिया।
‘मसल दे मेरी चूंचीं को… कम्मो… हाय रे… देख चूत का पानी रिस रहा है’
‘हाय रीता… और बोलो…ना…चूत का पानी……हाय रे…’ भावना चूत शब्द सुन कर ही उत्तेजना में बहने लगी। रीता बोल उठी -‘कम्मो… तू भी बोल दे ना…देख फिर कैसा चूत का पानी छूटता है…’
‘ हाय…दीदी… मेरी चूत का कुछ कर ना… काश कोई लन्ड होता…।’
‘मेरी कम्मो…ले मेरी उंगली चूत में ले ले…।’ रीता ने अपनी उंगली भावना की चूत में डाल दी…
‘हाय रे दीदी… मैं चुद गयी रे …’ भावना चीख उठी…
‘अभी कहां रे…… अभी ऊपर से ही मजे ले… जब चुदेगी तो लन्ड का मजा आयेगा।’
‘दीदी……हाय रे… चोद दे ना…देख तो…चूत कैसी हो रही है…’
‘तो चुदेगी… सच में… चोद दूऽ तेरी चूत को…’
भावना तो जैसे होश में ही नहीं थी… उछल उछल कर रीता की उंगली को लौड़ा समझ कर चुदा रही थी… रीता ने मौका देखा और बिस्तर के नीचे से डिल्डो निकाल लिया…
‘कम्मो… लन्ड घुसा दूं क्या…’
‘हाय दीदी… घुसा दो ना…’ रीता ने डिल्डो को अपने थूक से गीला कर लिया। अपना हाथ हटा लिया और डिल्डो उसकी चूत पर लगा दिया… भावना को तो जैसे कुछ पता नहीं था… उसने अपनी आंखे बन्द कर रखी थी…सांसे जोरों से चल रही थी… उसकी चूत पहले जैसे ही उछल रही थी…
डिल्डो लन्ड उसकी पानी छोड़ती हुयी चिकनी चूत पर था… उसके उछलते ही लन्ड चूत में उतर गया… रीता को पता था कि उसकी चूत अब तक कुंवारी है…
उसके घुसते ही रीता ने जोर लगाते हुये डिल्डो को अन्दर घुसाने लगी… भावना चीख उठी … रीता ने जल्दी जल्दी डिल्डो को अन्दर बाहर करना चालू कर दिया। उसके चूत से खून बाहर आने लगा…… वो दर्द से कराहती रही…
‘बस बस…कम्मो तुम्हारा कौमार्य अब जाता रहा … अब मस्त हो जाओ…’
‘दीदी… दर्द हो रहा है…’
‘बस अब सिर्फ़ दो मिनट का है… फिर से अब पहले से ज्यादा मजा आयेगा…’
‘मेरी झिल्ली फ़ट गयी ना… अब क्या होगा…’
‘कम्मो… झिल्ली टूटने की तुम्हारी अब उमर हो गयी है … जब चुदने को मन करे समझ लो कि तुम्हारा कुँवारापन भी गया… अब चुदा लो ठीक से…’
‘दीदी…फिर तो चोद दो मुझे पूरा… हाय रे दीदी…ये डिल्डो है ना…’
रीता ने अब प्यार से लन्ड से चोदना चालू कर दिया…… अब भावना मस्त होने लगी…वो चुदाने की बात समझ गयी थी …
उसे आनन्द आने लगा था…अब फिर से उसके चूतड उछल उछल कर चुदवा रहे थे… उसने रीता की चूंचियां दबा रखी थी…रीता भी एक हाथ से उसके चूंचक एक हाथ से खींच रही थी … दबा रही थी…
कुछ ही देर में भावना झड़ने लगी…’हाय रीता…डिल्डो खींच के चोद… चोद दे रे… दीदी… मेरी फ़ाड डाल…’
‘कम्मो…… चुद गयी रे तू … और ले… ले… हाय …मेरी चूची खींच दे…’
‘दीदी…मैं… झड़ने वाली हूं…मुझे दबा ले…हाय… लन्ड खींच के मार… मेरा रस निकाल दे…’
‘कम्मो… चल निकाल दे रस… निकाल… हाय निकाल रे…’ रीता के हाथ तेजी से चल पडे…
भावना अब बिस्तर पर चित लेट गयी थी। रह रह कर कांप उठती थी…वो झड़ रही थी… रीता ने डिल्डो निकाल कर उसे जकड़ लिया…
भावना ने धीरे से आंखे खोली…’दीदी… खेल खतम हो गया…?’
रीता ने उसे प्यार करते हुए कहा -‘कहां खत्म हुआ… मेरा क्या होगा… ‘
भावना खुशी से उछल पडी…’हाय… दीदी…मैं भी ऐसा ही तुम्हारे साथ करूं…’
‘हां… अब तुम मुझे चोदो…इस से…’
‘आय हाय दीदी… डिल्डो मुझे दो…’
कुछ ही पलों में डिल्डो रीता की चूत में था… रीता तो पहले ही बहुत उत्तेजना में थी… डिल्डो घुसते ही उसकी चूत फ़डक उठी…
एक ही झटके में लन्ड चूत में घुसा लिया… भावना ने अब रीता के चूंचक मसलने चालू कर दिये…रीता मस्ताने लगी…
उसका शरीर काम वासना से तडप उठा… ‘मेरी रान्ड… चोद दे रे… कुतिया…’ रीता के मुख से वासना भरी गालियां निकलने लगी…
‘दीदी… ऐसे मत बोलो ना…’
‘ चोद दे रे…छिनाल… दे लन्ड… मार चूत पर… हरामी चूत है…’
‘दीदी… क्या कहती हो…’ भावना के हाथ तेजी से चल रहे थे… रीता का बदन वासना से कांप रहा था।
‘हां री… कम्मो… मां चोद दे…… मेरी चूत की… दे लण्ड… हाय रे……’
‘दीदी … तेरी चूत को घोडे के लन्ड से चुदवा ले रे… बडी मस्त चिकनी है…’
इतने में रीता खुशी से सिसकारी भरती हुयी… मेरे से चिपक गयी… इस चक्कर में डिल्डो उसकी चूत में पूरा ही घुस गया…
‘मैय्या री… इसे निकाल… मैं तो गयी… कम्मो प्लीज़…’
भावना ने तुरन्त डिल्डो खींच के बाहर निकाल दिया… रीता झड़ रही थी… उसने मुझे चिपटा लिया… भावना को उसके बदन की और चूत की ऐंठन महसूस हो रही थी… दोनों के होंठ एक दूसरे से मिल गये… और प्यार में डूब गये…
सवेरे भावना रीता से नजरें नहीं मिला पा रही थी…
‘दीदी… सोरी … मुझे रात को जाने क्या हो गया था।’ रीता ने एक हाथ से उसका चेहरा उठाया और प्यार कर लिया…
‘तुम… अरे तुम्हें तो अब रोज़ रात को यही होगा…’
‘दीदी… ऐसा मत कहो…’ भावना शरम से सिमटने लगी…
‘जवानी इसे कहते हैं… कपडे भी तंग लगने लगते है… लगता है सब उतार फ़ेंको…’
‘दीदी……’ भावना शरमा कर रीता से लिपट गयी…
अब दोनो में प्यार और बढ गया था… Sex Stories
रमेश, दोस्तो Hindi sex stories , लड़की को उत्तेजित करके चोदने में बड़ा मज़ा आता है। बस उत्तेजित करने का तरीका ठीक होना चाहिये।
मैंने अपनी घर की नौकरानी को ऐसे ही उत्तेजित कर खूब चोदा।
अब सुनो उसकी दास्तान।
मेरा नाम है रमेश।
मैं लखनऊ यू पी का हूं, मेरे घर में ऊल-ज़ुलूल नौकरानियों के काफ़ी अरसे बाद एक बहुत ही सुंदर और सेक्सी नौकरानी काम पर लगी।
22-23 साल की उमर होगी।
सांवला सा रंग था।
मीडियम हाईट की और सुडौल बदन,
फ़ीगर उसका रहा होगा 33-26-34
शादी शुदा थी।
उसका पति कितना किस्मत वाला था, साला खूब चोदता होगा।
बूब्स यानि चूचियाँ ऐसी कि बस दबा ही डालो।
ब्लाउज़ में समाती ही नहीं थी।
कितनी भी साड़ी से वो ढकती, इधर उधर से ब्लाउज़ से उभरते हुई उसकी चूचियाँ दिख ही जाती थी।
झाड़ु लगाते हुए, जब वो झुकती, तब ब्लाउज़ के उपर से चूचियों के बीच की दरार को छुपा न सकती।
एक दिन जब मैंने उसकी इस दरार को तिरछी नज़र से देखा तो पता लगा कि उसने ब्रा तो पहना ही नहीं था।
कहां से पहनती, ब्रा पर बेकार पैसे क्यों खर्च किये जायें।
जब वो ठुमकती हुई चलती, तो उसके चूतड़ हिलते और जैसे कह रहे हों कि मुझे पकड़ो और दबाओ।
अपनी पतली सी सूती साड़ी जब वो सम्भालती हुई सामने अपने बुर पर हाथ रखती तो मन करता कि काश उसकी चूत को मैं छू सकता।
करारी, गर्म, फूली हुई और गीली गीली चूत में कितना मज़ा भरा हुआ था।
काश मैं इसे चूम सकता, इसके मम्मे दबा सकता, और चूचियों को चूस सकता।
और इसकी चूत को चूसते हुए जन्नत का मज़ा ले सकता।
और फिर मेरा तना हुआ लौड़ा इसकी बुर में डाल कर चोद सकता।
हाय! मेरा लंड ! मानता ही नहीं था।
बुर में लंड घुसने के लिये बेकरार था।
लेकिन कैसे।
यह तो मुझे देखती ही नहीं थी।
बस अपने काम से मतलब रखती और ठुमकती हुई चली जाती।
मैंने भी उसे कभी एहसास नहीं होने दिया कि मेरी नज़र उसे चोदने के लिये बेताब है।
अब चोदना तो था ही।
मैंने अब सोच लिया कि इसे उत्तेजित करना ही होगा।
धीरे धीरे उत्तेजित करना पड़ेगा वरना कहीं मचल जाये या नाराज़ हो जाये तो भांडा फूट जायेगा।
मैंने उससे थोड़ी थोड़ी बातें करनी शुरु की।
उसका नाम था नीरू।
एक दिन सुबह उसे चाय बनाने को कहा।
चाय उसके नर्म नर्म हाथों से जब लिया तो लंड उछला।
चाय पीते हुए कहा- नीरू, चाय तुम बहुत अच्छी बना लेती हो।
उसने जवाब दिया- बहुत अच्छा बाबूजी।
अब करीब करीब रोज़ मैं चाय बनवाता और बड़ाई करता।
फिर मैंने एक दिन कोलेज जाने के पहले अपनी शर्ट प्रेस करवाई।
‘नीरू, तुम प्रेस भी अच्छा ही कर लेती हो।’
‘ठीक है बाबूजी!’ उसने प्यारी सी आवाज़ में कहा।
जब कोई नहीं होता, तब मैं उससे इधर उधर कि बातें करता, जैसे- नीरू, तुम्हारा आदमी क्या करता है?
‘साहब, वो एक मिल में नौकरी करता है।’
‘कितने घंटे की ड्युटी होती है?’ मैंने पूछा।
‘साहब, 10-12 घंटे तो लग ही जाते हैं। कभी कभी रात को भी ड्युटी लग जाती है।’
‘तुम्हारे बच्चे कितने हैं?’ मैंने फिर पूछा।
शरमाते हुए उसने जवब दिया- अभी तो एक लड़की है, 2 साल की।
‘उसे क्यों घर में अकेला छोड़ कर आती हो?’ मैं पूछता रहा।
‘नहीं, मेरी बूढ़ी सास है न। वो सम्भाल लेती हैं।’
‘तुम कितने घरों में काम करती हो?’ मैंने पूछा।
‘साहब, बस आपके और एक नीचे घर में।’
मैंने फिर पूछा- तो क्या तुम दोनो का काम तो चल ही जाता होगा?
‘साहब, चलता तो है, लेकिन बड़ी मुश्किल से। मेरा आदमी शराब में बहुत पैसे बर्बाद कर देता है।’
अब मैंने एक हिंट देना उचित समझा।
मैंने सम्भलते हुए कहा- ठीक है, कोई बात नहीं, मैं तुम्हारी मदद करूंगा।
उसने मुझे अजीब सी नज़र से देखा, जैसे पूछ रही हो – क्या मतलब है आपका?
मैंने तुरंत कहा- मेरा मतलब है, तुम अपने आदमी को मेरे पास लाओ, मैं उसे समझाऊंगा।
‘ठीक है साहब!’ कहते हुए उसने ठंडी सांस भरी।
इस तरह, दोस्तो, मैंने बातों का सिलसिला काफ़ी दिनों तक जारी रखा और अपने दोनो के बीच की झिझक को मिटाया।
एक दिन मैंने शरारत से कहा- तुम्हारा आदमी पागल ही होगा। अरे उसे समझना चाहिये, इतनी सुंदर पत्नी के होते हुए, शराब की क्या ज़रूरत है।
औरत बहुत तेज़ होती है दोस्तों।
उसने कुछ कुछ समझ तो लिया था लेकिन अभी एहसास नहीं होने दिया अपनी ज़रा सी भी नाराज़गी का।
मुझे भी ज़रा सा हिंट मिला कि ये तस्वीर पर उतर जायेगी।
मौका मिले और मैं इसे दबोचूं तो चुदवा लेगी।
और आखिर एक दिन ऐसा एक मौका लगा।
कहते हैं ऊपर वाले के यहां देर है लेकिन अंधेर नहीं।
रविवार का दिन था।
पूरी फ़ैमिली एक शादी मैं गयी थी।
मैं पढ़ाई में नुकसान की वजह बताकर नहीं गया।
माँ कह कर गयी थी- नीरू आयेगी, घर का काम ठीक से करवा लेना।
मैंने कहा- ठीक है!
और मेरे दिल में लड्डू फूटने लगे और लौड़ा खड़ा होने लगा।
वो आयी, दरवाज़ा बंद किया और काम पर लग गयी।
इतने दिन की बातचीत से हम खुल गये थे और उसे मेरे ऊपर विश्वास सा हो गया था इसी लिये उसने दरवाज़ा बंद कर दिया था।
मैंने हमेशा कि तरह चाय बनवाई और पीते हुए चाय की बड़ाई की।
मन ही मन मैंने निश्चय किया कि आज तो पहल करनी ही पड़ेगी वरना गाड़ी छूट जायेगी।
कैसे पहल करें?
आखिर में ख्याल आया कि भाई सबसे बड़ा रुपैया।
मैंने उसे बुलाया और कहा- नीरू, तुम्हे पैसे की ज़रूरत हो तो मुझे ज़रूर बताना। झिझकना मत।
‘साहब, आप मेरी तनख्वाह से काट लोगे और मेरा आदमी मुझे डांटेगा।’
‘अरे पगली, मैं तनख्वाह की बात नहीं कर रहा। बस कुछ और पैसे अलग से चाहिये तो मैं दूंगा मदद के लिये। और किसी को नहीं बताऊंगा। बशर्ते तुम भी न बताओ तो।’
और मैं उसके जवाब का इन्तज़ार करने लगा।
‘मैं क्यों बताने चली। आप सच मुझे कुछ पैसे देंगे?’ उसने पूछा।
बस फिर क्या था।
कुड़ी पट गयी।
बस अब आगे बढ़ना था और मलाई खानी थी।
‘ज़रूर दूंगा नीरू… इससे तुम्हे खुशी मिलेगी न!’ मैंने कहा।
‘हां साहब, बहुत आराम हो जायेगा।’ उसने इठलाते हुए कहा।
अब मैंने हल्के से कहा- और मुझे भी खुशी मिलेगी। अगर तुम भी कुछ न कहो तो। और जैसा मैं कहूं वैसा करो तो? बोलो मंज़ूर है?
ये कहते हुए मैंने उसे 500 रुपये थमा दिये।
उसने रुपये टेबल पर रखा और मुसकुराते हुए पूछा- क्या करना होगा साहब?
‘अपनी आंखें बंद करो पहले।’ मैं कहते हुए उसकी तरफ़ थोड़ा सा बढ़ा- बस थोड़ी देर के लिये आंखें बंद करो और खड़ी रहो।
उसने अपनी आंखें बंद कर ली।
मैंने फिर कहा- जब तक मैं न कहूं, तुम आंखें बंद ही रखना, नीरू। वरना तुम शर्त हार जाओगी।
‘ठीक है, साहब!’ शरमाते हुए आंखें बंद कर वो खड़ी थी।
मैंने देखा कि उसके गाल लाल हो रहे थे और होंठ कांप रहे थे।
दोनो हाथों को उसने सामने अपनी जवान चूत के पास समेट रखा था।
मैंने हल्के से पहले उसके माथे पर एक छोटा सा चुम्बन किया।
अभी मैंने उसे छुआ नहीं था।
उसकी आंखें बंद थी।
फिर मैंने उसकी दोनो पल्कों पर बारी बारी से चुम्बन रखा।
उसकी आंखें अभी भी बंद थी।
फिर मैंने उसके गालों पर आहिस्ता से बारी बारी से चूमा।
उसकी आंखें बंद थी।
इधर मेरा लंड तन कर लोहे की तरह कड़ा और सख्त हो गया था।
फिर मैंने उसकी थुड्ठी पर चुम्बन लिया।
अब उसने आंखें खोली और सिर्फ़ पूछते हुए कहा- साहब?
मैंने कहा- नीरू, शर्त हार जायोगी। आंखें बंद।
उसने झट से आंखें बंद कर ली।
मैं समझ गया, लड़की तैयार है, बस अब मज़ा लेना है और चुदाई करनी है।
मैंने अब की बार उसके थिरकते हुए होंठों पर हल्का सा चुम्बन किया।
अभी तक मैंने छुआ नहीं था उसे।
उसने फिर आंखें खोली और मैंने हाथ के इशारे से उसकी पल्कों को फिर ढक दिया।
अब मैं आगे बढ़ा, उसके दोनो हाथों को सामने से हटा कर अपनी कमर के चारों तरफ़ घुमाया और उसे अपनी बाहों में समेटा और उसके कांपते होंठों पर अपने होंठ रख दिये और चूमता रहा।
कस कर चूमा अबकी बार।
क्या नर्म होंठ थे मानो शराब के प्याले।
होंठों को चूसना शुरु किया और उसने भी जवाब देना शुरु किया।
उसके दोनो हाथ मेरी पीठ पर घूम रहे थे और मैं उसके गुलाबी होंठों को खूब चूस चूस कर मज़ा ले रहा था।
तभी मुझे महसूस हुआ कि उसकी चूचियाँ जो कि तन गयी थी, मेरे सीने पर दब रही हैं।
बायें हाथ से मैं उसकी पीठ को अपनी तरफ़ दबा रहा था, जीभ से उसकी जीभ और होंठों को चूस रहा था, और दायें हाथ से मैंने उसकी साड़ी के पल्लू को नीचे गिरा दिया।
दायाँ हाथ फिर अपने आप उसकी दायीं चूची पर चला गया और उसे मैंने दबाया।
हाय हाय क्या चूची थी। मलाई थी बस मलाई।
अब लंड फुंकारे मार रहा था।
बायें हाथ से मैंने उसके चूतड़ को अपनी तरफ़ दबाया और उसे अपने लंड को महसूस करवाया।
शादीशुदा लड़की को चोदना आसान होता है क्योंकि उन्हे सब कुछ आता है, घबराती नहीं हैं।
ब्रा तो उसने पहनी ही नहीं थी, ब्लाउज़ के बटन पीछे थे, मैंने अपने दायें हाथ से उन्हे खोल दिया और ब्लाउज़ को उतार फेंका।
चूचियाँ जैसे कैद थी, उछल कर हाथों में आ गयी।
एकदम सख्त लेकिन मलाई की तरह प्यारी भी।
साड़ी को खोला और उतारा।
साया बस अब बचा था।
वो खड़ी नहीं हो पा रही थी।
मैं उसे हल्के हल्के खींचते हुए अपने बेडरूम में ले आया और लिटा दिया।
अब मैंने कहा- नीरू रानी, अब तुम आंखें खोल सकती हो।
‘आप बहुत पाजी हैं साहब!’ शरमाते हुए उसने आंखें खोली और फिर बंद कर ली।
मैंने झट से अपने कपड़े उतारे और नंगा हो गया।
लंड तन कर उछल रहा था।
मैंने उसका साया जल्दी से खोला और खींच कर उतारा।
उसने कोई अंडरवेअर नहीं पहना था।
मैंने बात करने के लिये कहा- ये क्या, तुम्हारी चूत तो नंगी है। चड्ढी नहीं पहनती।
‘नहीं साहब, सिर्फ़ महीना में पहनती हूं।’ और शरमाते हुए कहा- साहब, पर्दे खींच कर बंद करो न। बहुत रोशनी है।
मैंने झट से पर्दों को बंद किया जिससे थोड़ा अंधेरा हो और उसके ऊपर लेट गया।
होंठों को कस कर चूमा, हाथों से चूचियाँ दबाई और एक हाथ को उसके बुर पर फिराया।
घुंगराले बाल बहुत अच्छे लग रहे थे चूत पर।
फिर थोड़ा सा नीचे आते हुए उसकी चूची को मुंह में ले लिया।
आहा, क्या रस था। बस मज़ा बहुत आ रहा था।
अपनी एक उंगली को उसकी चूत के दरार पर फिराया और फिर उसके बुर में घुसाया।
उंगली ऐसे घुसी जैसे मक्खन में छूरी।
गर्म और गीली थी।
उसकी सिसकारियाँ मुझे और भी मस्त कर रही थी।
मैंने छेड़ते हुए कहा, नीरू रानी, अब बोलो क्या करूं?
‘साहब, मत तड़पाइये, बस अब कर दीजिये।’ उसने सिसकारियाँ लेते हुए कहा।
मैंने कहा- ऐसे नहीं, बोलना होगा, मेरी जान।
मुझे अपने करीब खींचते हुए कहा- साहब, डाल दीजिये न।
‘क्या डालूं और कहां?’ मैंने शरारत की।
दोस्तों चुदाई का मज़ा सुनने में भी बहुत है।
‘डाल दीजिये न अपना ये लौड़ा मेरे अंदर।’ उसने कहा और मेरे होंठों से अपने होंठ चिपका लिये।
इधर मेरे हाथ उसकी चूचियों को मसलते ही जा रहे थे। कभी खूब दबाते, कभी मसलते, कभी मैं चूचियों को चूसता कभी उसके होंठों को चूसता।
अब मैंने कह ही दिया- हां रानी, अब मेरा ये लंड तेरी बुर में घुसेगा… बोलो चोद दूं।
‘हां हां, चोदिये साहब, बस चोद दीजिये।’
और वो एकदम गर्म थी।
मैंने कहा- ऐसे नहीं, बोलना होगा, मेरी जान !
फिर क्या था, मैंने लंड उसके बुर पर रखा और घुसा दिया अंदर।
एकदम ऐसे घुसा जैसे बुर मेरे लंड के लिये ही बनी थी।
दोस्तों, फिर मैंने हाथों से उसकी चूचियों को दबाते हुए, होंठों से उसके गाल और होंठों को चूसते हुए, चोदना शुरु किया।
बस चोदता ही रहा।
ऐसा मन कर रहा था कि चोदता ही रहूं।
खूब कस कस कर चोदा।
बस चोदते चोदते मन ही नहीं भर रहा था।
क्या चीज़ थी यारों, बड़ी मस्त थी। उछल उछल चुदवा रही थी।
‘साहब, आप बहुत अच्छा चोद रहे हैं, चोदिये खुब चोदिये!’
चोदना बंद था, टांगे उसने मेरे चूतड़ पर घुमा रखी थी और चूतड़ से उछल रही थी।
खूब चुदवा रही थी और मैं चोद रहा था।
मैं भी कहने से रुक न सका- नीरू रानी, तेरी चूत तो चोदने के लिये ही बनी है। रानी, क्या चूत है। बहुत मज़ा आ रहा है। बोल न कैसी लग रही है ये चुदाई।
‘साहब, रुकिये मत, बस चोदते रहिये, चोदिये, चोदिये, चोदिये।’
इस तरह हम न जाने कितनी देर तक मज़ा लेते हुए खूब कस कस कर चोदते हुए झड़ गये।
क्या चीज़ थी, एकदम चोदने के लिये ही बनी थी शायद।
दोस्तों मन नहीं भरा था।
20 मिनट बाद मैंने फिर अपना लंड उसके मुंह में डाला और खूब चुसवाया।
हमने 69 पोसिशन ली और जब वो लंड चूस रही थी मैंने उसकी चूत को अपनी जीभ से चोदना शुरु किया।
खास कर दूसरि बार तो इतना मज़ा आया कि मैं बता नहीं सकता क्योंकि अब की बार लंड बहुत देर तक चोदता रहा।
लंड को झड़ने में काफ़ी समय लगा और मुझे और उसे भरपूर मज़ा देता रहा।
कपड़े पहनने के बाद मैंने कहा- नीरू रानी, बस अब चुदवाती ही रहना। वरना ये लंड तुम्हे तुम्हारे घर पर आकर चोदेगा।
‘साहब, आप ने इतनी अच्छी चुदाई की है, मैं भी अब हर मौके में आपसे चुदवाउंगी। चाहे आप पैसे न भी दो।’
कपड़े पहनने के बाद भी मेरे हाथ उसकी चूचियों को हल्के हल्के मसलते रहे। और मैं उसके गालों और होंठों को चूमता रहा।
एक हाथ उसके बुर पर चला जाता था और हल्के से उसकी चूत को दबा देता था।
‘साहब अब मुझे जाना होगा।’ कह कर वो उठी।
मैंने उसका हाथ अपने लंड पर रखा- रानी, एक बार और चोदने का मन कर रहा है। कपड़े नहीं उतारूंगा।
दोस्तों, सच में लंड खड़ा हो गया था और चोदने के लिये मैं फिर तैयार।
मैंने उसे झट से लिटाया, साड़ी उठाई, और अपना लौड़ा उसके बुर में पेल दिया।
अबकी बार खचखच चोदा और कस कर चोदा और खूब चोदा और चोदता ही रहा।
चोदते चोदते पता नहीं कब लंड झड़ गया और मैंने कस कर उसे अपनी बाहों में जकड़ लिया।
चूमते हुए चूचियों को दबते हुए, मैंने अपना लंड निकाला और उसे विदा किया। Hindi sex stories
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