Important Notice: 📧 Mail for rent: info@tottaa.com

Massage Girl in Ernakulam: Premium Relaxation Services

Our site can help you find a professional massage girl in Ernakulam who will help you relax in the best manner possible. We connect you with professional therapists who can offer you a massage that will make you feel better and more relaxed. The pros on our list are ready to provide you with a fantastic experience at your house or in one of their particular spots, whether you want to relax or get away from it all.

Introduction

Massage is currently one of the finest methods to relax your mind, body, and overall health. Our website makes it easy to locate the top massage services in Ernakulam that meet your demands. This will be a one-of-a-kind and calming experience for you.

Tottaa wants to make it simple for clients to find the top masseuse. The Ernakulam massage service providers on our list offer the greatest quality, comfort, and competence, whether you want a full-body massage or a massage for a particular location.

How Tottaa Helps Advertisers Reach More Customers

Tottaa is not only a list of masseuses, it’s also a secure location for them to show off what they can do. People in Ernakulam who are seeking massage services may find them on our website. This makes them easier to find and gets them more appointments.

Advertisers may simply put up profiles, offer their services, and talk about pricing and discounts on our sites. This makes sure that the relevant people notice your Ernakulam massage service, which makes it easier to obtain more customers.

Different Types of Massages We Offer

There are a lot of different types of massage services on our site, so you may choose one that works for you. You may choose the kind of treatment that works best for you, whether it’s profound rest or a particular type of therapy.

1. Swedish Massage

A calm and gentle way to ease muscular tension and improve blood flow. This Ernakulam massage is perfect for you if you want to relax and forget about your concerns.

2. Deep Tissue Massage

This approach employs a lot of pressure to get to deeper muscle layers. It’s helpful for folks who have muscular discomfort or stiffness that won’t go away. There are specialists on our profiles of massage girls in Ernakulam who are good at deep tissue treatments that function effectively.

3. Aromatherapy Massage

Calming massage strokes and essential oils are beneficial in making people feel improved both emotionally and physically. Most massage companies in Ernakulam employ the use of custom oil preparations to make you feel good.

4. Thai Massage

A therapy that wakes you up by using a mix of regular massage, stretching, and compression. This traditional massage in Ernakulam helps you relax, become more flexible, and get your mind and body back in harmony.

5. Hot Stone Massage

Heated stones are placed on various parts of the body to help with deep muscular tightness. People who want to feel good, relax, and help their muscles recover quickly can use this massage service in Ernakulam

How to Book Our Massage Services

Tottaa makes it simple and fast to book. With our listings, you can see what kind of massage you want, read about the providers, see that they are free and then contact them directly. After you choose, you can book a massage in Ernakulam at your convenient time and location. In order to get your desired massage services, apply the following simple steps:

Step 1: Browse Our Listings

Take a peek around our site to view a few massage professionals. Each listing gives you information about the many sorts of massages, how long they last, how much they cost, and where they are situated. This makes it easier to choose the finest ones.

Step 2: Compare and Shortlist

Examine the profiles carefully to compare how the services, talents, and reviews posted by customers differ. This phase makes sure you choose a business that has the style, pricing, and supply you desire.

Step 3: Connect with the Provider

When you have decided, use the information that you are offered so that you can contact them directly. One can communicate it to the massage giver thus making it understood what massage you want at what time and when.

Step 4: Confirm the Appointment

The date, time and place of the service, which could be your home, a hotel or the spa where the therapist may be found. You also need to agree on the payment method and any other accords prior to commencement of the course.

Step 5: Relax and Enjoy Your Massage

All you have to do on the day of the appointment is have your area ready for the house visit. The remainder will be handled by the expert. Take it easy and enjoy a massage that is made just for you.

Frequently Asked Questions

To locate a professional who can meet your needs, read our biography, reviews and advertising.

Yes, many of the therapists on our site will come to your house so you may feel safe and at ease.

You may pick based on talents since most adverts provide their qualifications in their profiles.

It would be advisable to make a reservation earlier to guarantee that you would be able to get a massage, particularly against the prevalent services of massage.

Not at all. Tottaa exclusively connects users with service providers. The doctor gets to choose how to handle payment.

Read Our Top Call Girl Story's

Antarvasna

दोस्तो, मेरा नाम लक्ष्य है Antarvasna और मैं दिल्ली का रहने वाला हूँ। मेरी आयु 29 साल की है, कद 5’8″, देखने में अच्छा, एक शरीफ़ आदमी की तरह, वैसे मैं शरीफ़ आदमी ही हूँ।

बात कुछ महीने पहले की है।
एक दिन मैं नेट पर चैटिंग कर रहा था। तब मैंने देखा कि एक मैसेज कॉमन रूम में फ्लेश हुआ कि हम मैन और वूमन के लिए सर्विस देते हैं। और एक मोबाइल नंबर भी फ्लेश हुआ। मैंने नंबर नोट कर लिया फिर अगले दिन कॉल किया तो उस लड़के ने मिलने को कहा।

हमने कनॉट-प्लेस में मीटिंग की। उसने कुछ फीस ली और कहा कि सप्ताह में एक लेडी मिलेगी और आपकी फीस भी वही कस्टमर देगी।
मैं राजी हो गया।

एक हफ्ते बाद उसने मुझे कॉल करके बताया कि आपको ग्रेटर कैलाश में जाना है।
दोस्तो! यह मेरा पहला कॉल-बॉय का काम था।

मैं बताये हुए पते पर पहुँच गया। मैंने वहाँ पहुँच कर घर की बैल बजाई तो 33-34 साल की सुन्दरी ने दरवाजा खोला। मैं देख कर हैरान हो गया कि क्या सुन्दर थी वो!

मैंने उसे रेफेरेंस दिया तो उसने बुलाया और मीठी मीठी मुस्कान देने लगी। मेरा 8.5″ लम्बा और 3″ मोटा लण्ड कूदने लगा। मैं भी खुश था कि मैं एक परी की चूत मारूंगा। मैं अन्दर गया और सोफे पर बैठ गया। वो पानी लेकर आई, मैंने पानी पिया, कुछ बातें करने लगे। कुछ मिनटों के बाद वो मुझे अपने बेड-रूम में ले गई और मुझ से ऐसे लिपट गई मानों सालों की प्यासी हो।

मैंने उसके लिप्स पर जोर की किस ली और उसने भी मेरा साथ दिया। 10-12 मिनट के बाद मैंने उसके सलवार का नाड़ा खोल कर उसमें हाथ डाल दिया और उसकी मुलायम चूत पर हाथ फेरा। वो गरम होती जा रही थी और इन्तजार मुझ से भी नहीं हो रहा था। हम दोनों ने एक दूसरे के कपड़े उतार दिए और बेड पर लेट गए।

उसके मम्मे बहुत शानदार थे। मैंने उन्हें पीना शुरू कर दिया। कुछ मिनट के बाद मैं धीरे धीरे उसकी चूत तक आ गया और उसकी प्यारी सी चूत को चाटने लगा। मुझे चूत चाटना बहुत ही अच्छा लगता है। मैं 10 मिनट तक चाटता रहा। इसी बीच उसका पाना निकल गया और थोड़ा शांत हो गई। फिर मैंने उसके मुंह में अपना लम्बा मोटा लण्ड दिया तो वो एक भूखी शेरनी की तरह चाटने लगी और जोर जोर से आवाज निकालने लगी।

मेरा हथियार तो तैयार ही था, मैंने एक बार फिर उसकी चूत चाटनी शुरू की, वो फिर से गरम हो गई और कहने लगी- अब नहीं रुका जाता है, अब मुझे चोद दो!

मैं फिर उसकी टांगों के बीच में आ कर बैठ गया और अपना मोटा और लम्बा लंड उसक चूत के छेद पर रख दिया, फिर एक जोरदार झटका दिया तो आधा लण्ड उसकी चूत में था।
वो चिल्लाई और बोली- धीरे से करो!
मैंने कहा ‘तुम्हरी चूत तो पहले से ही खुली है, तो दर्द क्यों?
वो बोली- मैं अपने पति से 1 साल से दूर रह रही हूँ, किसी और से करवाया नहीं है, इसलिए दर्द हो रहा है!’

मैंने 1 मिनट के बाद एक झटका और दिया तो पूरा का पूरा लंड उसकी चूत में समां गया। फिर मैंने आगे पीछे करना शुरू किया। अब उसको भी मजा आने लगा था। अब तो वो अपनी गांड को उठा उठा कर हिलाने लगी। 10-15 मिनट तक करने तक वो दुबारा झड़ चुकी थी और मेरा भी आने वाला था लेकिन मैं लालची हो गया था कि थोड़ी देर और रुक कर झाड़ूँगा क्योंकि वो चूत ही इतनी प्यारी थी कि निकालने का मन ही नहीं कर रहा था।

4-5 मिनट करने के बाद मैं आने वाला था तो मैंने अपना लण्ड निकल कर उसके मुँह में दे दिया, साली पूरा रस गट गट पी गई और कहने लगी- आज बहुत दिनों के बाद मुझे स्वर्ग का मजा आया है!

फिर हम दोनों बाथ रूम में गए और वहाँ जाकर नहाने लगे। हम दोनों फिर से चिपट गए। मेरा हथियार तो फिर से खड़ा हो गया।

मैंने कहा- एक बार और हो जाए?

उसने हाँ कर दी। फिर मैंने उसे कुतिया के स्टाइल में चोदा। दो बार तो मैंने उसकी गांड में डाला लेकिन उसे दर्द हो रहा था तो फिर मैंने उसकी चूत में झाड़ दिया।

फिर हम नहा कर बाथरूम से बाहर आ गए, कपड़े पहन कर मैंने चलने को कहा तो उसने मुझे 5000 रुपये दिए और एक प्यारी सी किस दी और कहा- दोबारा बुलाने के लिए अपना नम्बर दे जाओ!

मैंने उसे अपना मोबाइल नम्बर दे दिया और अपने घर वापिस आ गया।

दोस्तो! यह मेरी कहानी थी!

आप सभी को कैसे लगी, बताना!
लड़कियों, भाभियों और आन्टियों को मेरे लम्बे लंड का नमस्कार!
आप सभी को चोदना और चुदवाना मुबारक हो! चोदते रहो और चुदवाते रहो और खुश रहो!
मुझे मेल कर सकते हो- Antarvasna

Antarvasna Sex Stories

दोस्तों ! सबसे पहले मैं Antarvasna Sex Stories आप सभी का धन्यवाद करना चाहूँगा कि आपने मेरी पिछली कहानी “इब तो बाड़ दे” का पहला भाग बहुत पसंद किया । मैंने उस कहानी में आपको बताया था कि कैसे मैंने अपने साथ ट्यूशन पढ़ने वाली मोना को चोदा था। उसकी चुदाई करने के बाद जब हम घर से बाहर निकले थे तो हमें ट्यूशन पढ़ाने वाली मास्टरनी अनीता सांगवान सामने से आती मिली थी। जिस तरह से वो हमें घूर रही थी मुझे लगा उसे पूरा शक हो गया है कि हमने उस मौके का भरपूर फायदा उठाया है।

मैंने मोना को मज़ाक में कह तो दिया था कि साली मास्टरनी को भी पटक कर रगड़ दूंगा पर वास्तव में मैं अन्दर से बहुत डरा हुआ था। सच पूछो तो मेरी गांड तो इस डर से फटी जा रही थी कि अगर मास्टरनी ने वो गीली चद्दर देख ली तो मैं तो मारा ही जाऊँगा। अब तो बस गोपी किशन का ही सहारा बचा था। अगले 2 दिन मैं ट्यूशन पर ही नहीं गया।

तीसरे दिन जब मैं शाम को उसके घर गया तो मास्टरनी ड्राइंग रूम में ही बैठी जैसे हमारा इंतज़ार कर रही थी। काँता आंटी भी पास बैठी थी। जिस तरीके से वो दोनों खुसर फुसर करती मुझे घूर रही थी मुझे लगा जैसे उनकी नज़रें नहीं कोई एक्स-रे मशीन से मेरी स्क्रीनिंग कर रही हैं। काँता आंटी उठ खड़ी हुई और मेरी और रहस्यमयी ढंग से मुस्कुराते हुए अपने घर चली गई। अब मास्टरनी मेरी ओर मुखातिब हुई।

“हम्म … तुम कल नहीं आये जीत ?”

“वो … वो …” मेरे गले से तो कोई आवाज ही नहीं निकल रही थी।

“हम्म …?”

“वो … दरअसल मेरी तबियत खराब थी “

“क्यों तुम्हें क्या हुआ था ?”

“ब…. ब … बुखार था ?”

“वाइरल तो नहीं था ?”

“हाँ हाँ वही था !”

“तो एक दिन में ठीक कैसे हो गया ?”

“वो…. वो …” मैं क्या बोलता। मैंने अपनी मुंडी नीचे कर ली।

“उस छोरी न के हुआ ?”

“कौन … ?”

“हाय मैं मर जावां ? मैं उस छमक छल्लो मोना की बात कर रही हूँ ?”

“ओह … वो… वो … ओह … मुझे क्या पता ?” मैंने सर झुकाए ही कहा। मैं सोच रहा था अगर मैंने नज़रें मिलाई तो मास्टरनी पहचान लेगी।

“तन्नै ते नी कुछ कर दीया था उसतै ?”

“न … नहीं … नहीं मैंने कुछ नहीं किया !”

मुझे लगा मेरा गला सूख गया है। मेरे चेहरे से तो हवाइयां ही उड़ रही थी। लगता है हमारी चुदाई की पोल खुल गई है।

“तन्नै किस बात का डर मार रया फ़ेर ? (तो तुम इतना डर क्यों रहे हो ?)” मास्टरनी ने फिर पूछा।

“न… नहीं तो … मैं भला क… क्यों … डरूंगा… ?” मैंने थोड़ी हिम्मत करके जवाब दिया। मैंने देखा मास्टरनी मेरी पतली हालत देख कर मंद मंद मुस्कुरा रही है।

“एक बात बता तू मन्नै !”

“क्या ?”

“यो चद्दर गील्ली कीकर होई ?”

“वो… वो …?”

अब शक की गुन्जाइश नहीं रह गई थी। मास्टरनी को पता चल गया है। मैं मुंडी नीचे किये खड़ा रहा।

“कहीं पानी का गिलास तो नहीं गिरा दिया था ?”

मैं चुप रहा। थोड़ी देर बाद मास्टरनी ने फिर पूछा “पानी ढंग से पिया या केवल चद्दर पर ही गिराया ?”

“वो … वो … ?

“केवल तुमने ही पिया था या उस कमेड़ी ने भी पिया था ?”

“हाँ उसने भी पिया था “

“हम्म… उसको भी पानी अच्छा लगा ?”

पता नहीं मास्टरनी क्या पूछे जा रही थी। मुझे लगाने लगा कि मैं थोड़ा बच सकता हूँ। मेरी जान छूट सकती है। एक बार अगर बच गया तो हे गोपी किशन फिर कभी उस कमेड़ी की ओर देखूंगा ही नहीं पक्की बात है। मैं अपने खयालों में खोया हुआ था।

मास्टरनी ने फिर बोली “या छोरी तो घनी चुदक्कड़ निकली रै? ….. इसके तो बड़े पर निकल आये साली अभी से लण्ड खाने लगी है आगे जाकर पता नहीं क्या गुल खिलाएगी ?”

मुझे बड़ा आश्चर्य हो रहा था कि मास्टरनी इस तरह के शब्द प्रयोग कर रही है। वो अपनी चूत को पाजामे के ऊपर से मसल और खुजला रही थी। आज उसने पतला सा कुरता और पाजामा डाल रखा था। उसकी साँसें तेज हो रही थी और आँखों में लाल डोरे से तैर रहे थे।

“उस कमेड़ी को ठीक से रगड़ा या नहीं ?” वह मेरी और देख कर हंसने लगी फिर बोली “मैं जानती थी जिस तरीके से वो अपनी गांड मटका कर चलती थी जरुर लण्डखोर बनेगी”

अब मेरी जान में जान आई। इतना तो पक्का है की मास्टरनी यह सब घर वालों को तो कम से कम नहीं बताएगी। मैं चुप उसे देखता ही रहा।

उसने फिर पूछा “उसे खून निकला या नहीं ?””वो … वो … हाँ आया था चद्दर पर भी लग गया था इसीलिए … वो… गीली …”

“हम्म … तेरे तो मज़े हो गए रे जीत … मैं तो तने बड़ा भोला समझ रई थी तू तो गज़ब का गोला निकला रे ?”

“वो दरअसल मैं आपका ही तो चेला हूँ ना ?” मैंने कह दिया।

“रै बावले चेला इस तरह थोड़े ही बना जावे सै?”

“तो कैसे बना जावे है ?”

“पहले गुरुदक्षिणा देनी पड़ी सै ?’

“आप जो मांगो दे दूंगा ?”

“हम … लागे सै इब तू बावली बूच नई रिया बड़ा सयाना हो गया ?”

मेरा दिल तो जोर जोर से धड़कने लगा था। लगता है मास्टरनी के मन में भी जरुर कुछ चल रहा है। हे गोपी किशन अगर मास्टरनी पट जाए तो बस मज़ा ही आ जाए। फिर तो बस दोनों हाथों में लड्डू क्या पूरी कन्हैया लाल हलवाई की दूकान ही हाथों में होगी।

उसने इशारे से मुझे अपनी और बुलाया। मैं उसके पास सोफे पर बैठ गया। उसने मेरी जांघ पर हाथ रख दिया और बोली “अच्छा चल सारी बात शुरू से बता कुछ छुपाने की जरुरत ना है। कैसे उस कमेड़ी के साथ खाट-कब्बडी खेली ? मैंने तो तुम्हें पूरे ढाई तीन घंटे दिए थे मज़े करने को ?” और कहते हुए उसने मेरी और आँख मार दी। मेरा राम लाल तो उछलने ही लगा था। और उसका उभार पैन्ट के अन्दर साफ़ दिखने लगा था। मास्टरनी ने अपनी जांघें आपस में कस रखी थी और एक हाथ से अपनी चूत को जोर जोर से मसल रही थी।

मैंने पूरी बात बता दी। इस दौरान मास्टरनी ने मेरा लण्ड पैन्ट के ऊपर से ही मसलने लगी। मेरा लण्ड तो खूंटे की तरह हो चला था अब। मास्टरनी की साँसें तेज होने लगी थी और मेरा शेर तो जैसे पैन्ट फाड़ने को तैयार था। अचानक मास्टरनी ने मेरी पैन्ट की जिप खोल दी और नीचे फर्श पर उकड़ू होकर बैठ गई। मुझे बड़ी शर्म भी आ रही थी और मेरी उत्तेजना भी बढती जा रही थी। मास्टरनी ने फिर पैन्ट के अन्दर हाथ डाल कर मेरे खूंटे जैसे खड़े लण्ड को बाहर निकाल लिया। उसकी तो आँखें फटी की फटी रह गई। मेरा लण्ड 7’ लम्बा मोटा ताज़ा लण्ड देख कर वो तो मस्त ही हो गई। आप तो जानते ही हैं कि मेरे लण्ड में एक ख़ास बात है उसका टोपा (क्राउन) बहुत बड़ा है। बिलकुल मशरूम की तरह है। मेरी भी उतेजना बढती जा रही थी और राम लाल तो मास्टरनी के हाथों में ऐसे उछल रहा था जैसे कोई चूहा किसी बिल्ली के पंजों में फसा अपनी जान बचाने को तड़फ रहा हो।

“वाह जीत तेरा राम लाल तो बहुत बड़ा और शानदार है ?” इतना कहकर मास्टरनी ने उसका एक चुम्मा ले लिए। राम लाल ने एक ठुमका लगाया। मास्टरनी ने उसे कस कर अपनी मुट्ठी में जकड़े रखा। “साली वो कबूतरी कैसे झेल गई इस मर्दाने लण्ड को ?”

एक बार फिर से उसने उस पर पुच्च किया और फिर उसे गप से मुँह में ले लिया। मैं तो जैसे सातवें आसमान पर ही था। जिस तरीके से मास्टरनी उसे चूस और चूम रही थी मुझे लगता है ये मास्टरनी भी एक नंबर की चुदक्कड़ है। चलो मेरी तो पौ बारह है। मैंने अपनी पैन्ट को ढीला कर दिया और अपने कूल्हे थोड़े से उठा कर पैन्ट नीचे कर दी। इससे मास्टरनी को सुविधा हो गई। और वो जोर जोर से मेरा लण्ड चूसने लगी। कभी मेरे अण्डों को मसलती कभी उन्हें भींचती कभी पूरा लण्ड मुँह में ले लेती और कभी उसे मुँह से बाहर निकल कर ऊपर से नीचे तक चाटती। उसकी गर्म साँसें मेरे पेट और पेडू पर पड़ती तो मैं रोमांचित हो जाता और मेरा शेर ठुमके पर ठुमके लगाने लगता। मास्टरनी तो बिना रुके उसे चूसे ही जा रही थी पता नहीं कितने दिनों की भूखी थी।

“य़ा … ….” मेरी सीत्कार निकलने लगी और राम लाल झटके पर झटके खाने लगा। मुझे लगा कि मेरा तो मोम पिंघल ही जाएगा। मास्टरनी मेरी इस हालत को जानती थी। उसने मेरा लण्ड पूरा का पूरा मुँह में भर कर मेरे कूल्हे पकड़ लिए। मेरा तनाव अपनी चरम सीमा पर पहुँच चुका था। मैंने कस कर उसका सर पकड़ लिया। मेरी बंद आँखों में तो सतरंगी तारे से जगमगाने लगे थे और फिर मेरी पिचकारी छूट गई। गर्म लावे से उसका मुँह भर गया। मास्टरनी गटागट उसे पीती चली गई। उसने तो जैसे मुझे पूरा का पूरा निचोड़ लेने की कसम खा रखी थी। उसने एक भी बूँद इधर उधर नहीं गिरने दी।

लण्ड अब सिकुड़ने लगा था। मास्टरनी ने एक आखिरी चुस्की लगाई और अपने होंठों पर जीभ फिराती हुई बोली,”वाह जीत, आज तो मज़ा ही आ गया एक कुंवारे लण्ड की गाढ़ी और ताज़ी मलाई तो बड़ी ही मजेदार थी। वाह … जियो मेरे सांड …?” कहकर मास्टरनी ने मुझे चूम लिया।

मुझे बड़ी हैरानी हुई कि इस नाम से तो मुझे मोना डार्लिंग पुकारा करती है इसे कैसे पता ?

“मैडम आपने तो मज़ा ले लिया पर मैं तो सूखा ही रह गया ना ?” मैंने उलाहना दिया।

“रे बावली बूच क्यूं चिंता कर रिया सै… अभी बड़ा टेम बाकी सै ? चिंता ना कर !” कहते हुए मास्टरनी बाथरूम में चली गई। मैंने अपनी पैन्ट पहन ली और उसका इंतज़ार करने लगा।

मास्टरनी कोई दस मिनट के बाद बाथरूम से बाहर आई। उफ़ … उसके बाल खुले थे। उसने अपने वक्ष पर लाल रंग का तौलिया लपेट रखा था जो उसकी चिकनी मोटी मोटी संग-ए-मरमर जैसी जाँघों और अमृत कलशों के अनमोल खजाने को छिपाने की नाकाम कोशिश कर रहा था। बस अगर तौलिया एक दो इंच छोटा होता तो उसकी रस भरी (चूत) का नज़ारा साफ़ दिख जाता। उसने तौलिये को नीचे से कस कर पकड़ रखा था। धीरे धीरे अपने नितम्बों को मटकाती और अपने दांतों में निचला होंठ दबाये मेरे पास आकर खड़ी हो गई। उसके होंठ काटने की कातिलाना अदा और चूतड़ों की थिरकन से तो मेरे राम लाल को जैसे फिर से जीवनदान मिल गया । वो तो फिर से सर उठाने लगा था। मैं तो उसके इस अंदाज़ को बस मुँह बाए देखते ही रह गया। उसका गदराया शरीर तो ऐसे लग रहा था जैसे कोई सांचे में ढली मूर्ति हो। वैसे तो मैं उसे रोज़ ही देखता था पर इस रूप में तो आज ही देखा था। उसके शरीर की गर्मी मैं अच्छी तरह महसूस कर रहा था। मुझे लगा जैसे मैं किसी आग की भट्टी के सामने खड़ा हूँ। मेरी तो जैसे साँसें ही जम गई मुझे लगा मेरा पप्पू फिर से घुड़सवारी के लिए तैयार होने लगा है।

“ओह … तन्नै फ़ेर या पैन्ट सी पऽऽन ली ? इब इसका के काम सै ? तार दे इसने !”

“आपने भी तो तौलिया लपेट रखा है ?”

“ओह …. रै मेरी बात और सै चल … सैड़ देसी अपणी पैन्ट और कमीज नै तार दे !”

मैंने थोड़ा शर्माते हुए पैन्ट कमीज उतार दी पर अपने राम लाल के ऊपर हाथ रख लिया। मैंने बनियान और कच्छा तो पहना ही नहीं था। मास्टरनी बोली “तुमने कभी सहस्त्रधारा का जल पिया है?”

सच पूछो तो मेरे कुछ समझ नहीं आया। मैंने गंगाजल और ब्रह्म सरोवर का जल तो सुना था पर यह नया जल पहली बार सुना था। जब कुछ समझ नहीं आया तो मैंने अपनी मुंडी ना में हिला दी।

मुझे लगा मास्टरनी मुझे फिर से मोटी बुद्धि का कहेगी या फिर ताऊ तो जरुर ही कहेगी पर मास्टरनी हंस पड़ी। मोती जैसे चमकते दांत और उसकी कातिलाना मुस्कान और होंठो को काटने की अदा ने तो मुझे अन्दर तक रोमांच से भिगो दिया था। मेरा मन कर रहा था कि उसे कस के अपनी बाहों में भर लूं और पटक कर अपना किल्ला गच्च से उसकी रसीली चूत में ठोक दूं पर मैं रुका रहा।

“हाय मैं मर जावां … मेरे बुद्धू बालम …” कह कर मास्टरनी ने मेरी और अपनी बाहें फैला दी। ऐसा करने से उसके चूंचियों पर अटका तौलिया खुल कर नीचे गिर गया और उसके मोटे मोटे कसे हुए गोल गोल चूचे अनावृत्त हो गए। उसकी घुन्डियाँ मूंगफली के दाने जितनी गुलाबी रंग की थी और एरोला कोई दो इंच का गहरे लाल रंग का। गोल गोल चूचे थोड़े से नीचे लटके से थे वर्ना तो वो मोना को भी पानी भरवा देती।

मैंने झट से उसे बाहों में भर लिया। उसकी साँसें तेज हो रही थी। उसने मेरा सर अपने हाथों में पकड़ लिया और मेरे होठों से अपने होंठ लगा दिए। मैं तो उन गुलाब की पंखुड़ियों को चूसने में मस्त ही हो गया। मेरा एक हाथ उसकी पीठ पर था और एक हाथ से उसके नितम्ब सहला रहा था।

वो तो बेसाख्ता मेरे होंठों को चूसे ही जा रही थी। मैंने अपनी जीभ उसके मुँह में डाल दी तो वो उसे कुल्फी की तरह चूसने लगी। यह तो अनोखा आनंद था। कभी वो अपनी जीभ मेरे मुँह में डाल देती कभी मैं अपनी जीभ उसके मुँह में डाल देता।

मैं तो इस चूसा-चुसाई में इतना खो गया था कि मेरा ध्यान उसकी चूत की ओर गया ही नहीं। यह तो भला हो मेरे राम लाल का कि वो अपनी तंद्रा से जग कर उसे सलाम बजाने लगा था। अब मैंने अपना एक हाथ उसके चूत पर फिराया। छोटे छोटे बालों से ढकी उसकी चूत पूरी गीली हो चुकी थी। मैंने जैसे ही उसकी चूत में अपनी एक अंगुली डालने की कोशिश की वो थोड़ा सा चिहुंकी।

“ऊईइ … मां …”

“क्या हुआ ?”

“ओह…. ऐसे नहीं चलो, उस पलंग पर चलो !”

“ओह…. हाँ …”

मुझे फिर अपनी बुद्धि पर तरस आने लगा। हम दोनों अब पलंग पर आ गए। पलंग पर नई चद्दर बिछी थी। मास्टरनी पलंग पर लेट गई। पर पता नहीं क्यों उसने अपनी चूत पर दोनों हाथ रख लिए और अपनी जांघें कस कर बंद कर ली। मुझे बड़ा अटपटा लगा कि अब शर्माने की कहाँ गुन्जाइश रह गई है। पर सयाने ठीक कहते हैं औरत कितनी भी काम के वशीभूत हो अपनी स्त्री सुलभ लज्जा नहीं छोड़ती।

खैर अब उसे चुदना तो हर हाल में ही था, थोड़ी देर या नखरे और सही। मेरा राम लाल तो हिलोरें ही मारने लगा था। मैं उसकी बगल में लेट गया और उसके चूचों पर हाथ फिराने लगा। मैंने एक चूची के अग्र-भाग पर अपनी जीभ फिराई तो उसकी हल्की सीत्कार ही निकालने लगी। अब मैंने उसे चूसना चालू कर दिया। एक हाथ से उसकी एक चूची को दबाता और दूसरे को जोर जोर से चूसता।

वो तो मस्त ही हो गई। आंखें बंद किये सीत्कार पर सीत्कार करने लगी। मैंने एक एक करके दोनों आमों को चूसना चालू रखा। फिर मैंने धीरे से अपना एक हाथ उसकी चूत की तरफ बढ़ाया। मोटी मोटी फांकें सूजी हुई सी लग रही थी। मैंने थोड़ा नीचे खिसकते हुए अब अपनी जीभ उसके उरोजों की घाटियों से लेकर नीचे पेट और नाभि तक चाटना चालू कर दिया।

जैसे ही मेरी जीभ ने उसकी चूत को छुआ तो उसकी एक किलकारी ही निकल गई। उसकी बंद जांघें स्वतः ही खुलने लगी और रस भरी दो पंखुड़ियां मेरी आँखों के सामने फ़ैल गई। उसके अन्दर वाली पत्तियाँ जरुर काली सी थी पर बाहरी फांकें गोरी गोरी थी जिन्हें छोटे छोटे काले घने झांटों ने ढक रखा था। मैंने एक चुम्मा उस पर ले ही लिया। मेरे नथुनों में एक मादक गंध भर उठी। और मास्टरनी की एक मादक सीत्कार निकल गई।

मास्टरनी आँखें बंद किये लेटी आह उन्ह… करने लगी। अब मैंने दोनों हाथों से उसकी चूत की फांकों को चौड़ा किया। अन्दर से चूत एक दम गुलाबी रंग की थी और उसके अन्दर का गीलापन तो ऐसे लग रहा था जैसे इसमें से पानी की सैंकड़ों धाराएं निकल रही हों। ओह … अब मेरी मोटी बुद्धि में सहस्त्रधारा का अर्थ समझ आया था।

मैंने अपने जलते होंठ उसकी फांकों के बीच लगा दिए। आह … नमकीन और कसैला सा स्वाद तो ठीक वैसा ही था जैसा मोना की चूत का था बस थोड़ी सी गंध अलग थी। मैंने अपनी जीभ को नुकीला बनाया और उसकी चूत की दरार पर ऊपर से नीचे तक फिराया। उसका दाना तो चेरी की तरह बिलकुल लाल था। मैंने अपनी जीभ उस पर फिराई और फिर उसे हल्का सा दांतों से दबाया तो मास्टरनी की उत्तेजना में एक चींख सी निकलते निकलते बची।

“रे ताऊ … ओह … जीत … चूस….. और जोर से चूस….. आह … य़ाआअ ईईईईईईईईई………………”

मैंने झट से उसकी चूत को मुँह में भर लिया और जोर जोर से चूसने लगा। मास्टरनी रोमांच में कांपने लगी थी। कभी वो अपने पैर उठाती और कभी नीचे पटकती। उसने मेरा सर कस कर अपने हाथों में पकड़ा था। और जोर जोर से अपनी चूत की ओर दबाने लगी। वह तो सीत्कार पर सीत्कार किये जा रही थी।

उसका शरीर एक बार थोड़ा सा अकड़ा और उसने मेरा सर इतने जोर से अपनी चूत पर दबाया कि मेरी तो साँसें ही कुछ क्षणों के लिए रुक सी गई। इसके साथ ही उसकी चूत ने 3-4 चम्मच गाढ़ा सा तरल द्रव्य छोड़ दिया। मैं तो उस सहस्त्रधारा के जल को पीकर निहाल ही हो गया।

मास्टरनी पता नहीं नशे जैसी हालत मन क्या क्या बड़बड़ा रही थी। पता नहीं उसे अचानक क्या सूझा वो मुझे परे धकेल कर उठ खड़ी हुई और इस से पहले कि मैं कुछ समझूं उसने मुझे धकेलते हुए चित लेटा कर अपने दोनों पैरों को मेरे कूल्हों के दोनों तरफ कर के एक हाथ में मेरा तना हुआ लण्ड पकड़ लिया और अपनी चूत पर घिसने लगी।

जैसे ही मेरे लण्ड का सुपड़ा उसकी चूत के छेद से टकराया मास्टरनी ने बिना देरी किये एक झटका सा लगाया और गच्च से मेरे लण्ड के ऊपर बैठ गई। पूरा का पूरा लण्ड जड़ तक एक ही झटके में उसकी चूत में समां गया। मास्टरनी की एक चीत्कार सी निकल गई।

“आईईईईईईईईईईईईईईई…………………………………………”

मास्टरनी ने लण्ड पूरा का पूरा अन्दर तो ले लिया पर मुझे लगा वो ज्यादा जोश में गलती कर बैठी है। उसे थोड़ा सा दर्द भी जरुर हुआ होगा पर वो मेरे सामने कमजोर नहीं पड़ना चाहती थी। उसने अपनी आँखें बंद कर ली और चुपचाप ऊपर ही बैठी रही। कुछ समय बाद जब वो थोड़ी सामान्य हुई तब उसने नीचे झुक कर मेरे होंठों को चूमा और बोली,”रे जीत … तू तो पूरा सांड सै मेरी तो जान ही काड़ दी तन्नै !”

“क्यों … मास्टरजी का इतना बड़ा नहीं है क्या ?”

“अरै छोड़ …. वो तो पूरा नन्दलाल ही है। किसी काम का नहीं है। मैं तो इस चूत में अंगुली कर कर के कमली ही हो गई हूँ और वो देहरादून के जंगलों में फोरेस्ट अफसर बना अपनी गांड मरवा रहा है साला चूतिया कहीं का !”

मास्टरनी को ज्यादा जोश आ गया और फिर उसने जोर जोर से ठुमके लगाने शुरू कर दिए। उसके गोल गोल कसे हुए चूतड़ तो उसके झटकों के साथ थिरकने ही लगे थे। मैंने उसकी चूचियों को पकड़ कर मसलना चालू कर दिया तो वो थोड़ा सा नीचे हो गई और अपने उरोज मेरे मुँह पर लगाने लगी। मैं इतना भी मोटी बुद्धि का नहीं था मैंने झट से उसे मुँह में ले लिया और चूसने लगा। मास्टरनी की फिर से सीत्कार निकालने लगी।

“आह … आज कितने दिनों बाद एक मस्त लण्ड मिला है … या … जीवो मेरे सांड तूने तो मुझे निहाल ही कर दिया उम्म्म्म …” और एक बार फिर मास्टरनी ने मेरा सर पकड़ कर होंठों को चूम लिया।

ऐसा नहीं था कि सिर्फ वो ही धक्के लगा रही थी। मैं भी नीचे से अपने चूतड़ उठा उठा कर उसके धक्कों के साथ ताल मिलाने की कोशिश कर रहा था। मैंने अपने हाथ उसके नितम्बों पर फिराने चालू कर दिए। मास्टरनी कभी ऊपर उठती कभी झटके के साथ नीचे आ जाती। कभी थोड़ी देर के लिए मेरे ऊपर लेट सी जाती। तब मुझे उसके नितम्ब सहलाने का मौका मिल जाता।

मेरी बड़ी इच्छा हो रही थी कि एक बार अगर मुझे ऊपर आ जाने दे तो मैं इसके इन नितम्बों और कमर को पकड़ कर ऐसे झटके मारूं कि इसकी तो बस टैं ही बोल जाए। अचानक मेरी एक अंगुली उसकी गांड के छेद से टकरा गई। मैंने मस्तराम और अन्तर्वासना की कई कहानियों में गांड मारने के बारे में भी पढ़ा था। मैंने मन में सोचा मास्टरनी अगर एक बार मुझे भी गांड मार लेने दे तो हे गोपी किशन मैं तो बस सीधा बैकुंठ ही पहुँच जाऊं।

पर मास्टरनी तो अपनी ही धुन में अपनी चूत को मेरे लण्ड पर घिसे जा रही थी। पता नहीं उसे मेरे हलके हलके नुकीले झांटों से अपनी फांकों को रगड़ने में क्या मज़ा आ रहा था। मैंने उसकी गांड में अपनी तर्जनी अंगुली डाल दी। शायद उसकी चूत का रस फ़ैल कर उसकी गांड को भी गीला कर चुका था। अंगुली गच्च से अन्दर चली गई और मास्टरनी की हलकी चीत्कार निकल गई,”रे… ओह….. रे ताऊ यो के कर रिया सै …?

“क्यों क्या हुआ ?” मैंने पूछा।

“न … ना इस छेद को इबी ना छेड़ … इसका नंबर बाद मैं ? तू चिंता ना कर मैं दोनों छेदों में एक साथ भी डलवाऊँगी?”

चलो ठीक है। मुझे तसल्ली हुई कि बाद में ही सही मौका तो जरुर मिलेगा। मास्टरनी ने अब जोर जोर से धक्के लगाने चालू कर दिए। वो अपनी चूत को इस तरह से सिकोड़ रही थी जैसे अन्दर से चूस रही हो। मैंने सेक्स स्टोरीज में पढ़ा था कि बहुत ही अनुभवी और चुद्दकड़ औरतें ऐसा करती है। इससे उनको और अपने साथी को दुगना आनंद आता है और ढीला लण्ड भी अन्दर ठुमके लगाने लगता है। और मास्टरनी तो पूरी उस्ताद थी इस मामले में।

हमें कोई 20-25 मिनट तो जरुर हो ही गए थे। मुझे लग रहा था अब मैं खलास होने वाला हूँ। मैं ऊपर आने की सोच रहा था पर मास्टरनी ने मुझे नीचे दबोच रखा था। अब मास्टरनी ने जोर जोर से सीत्कार करना चालू कर दिया था और मुझे लगा मेरा लण्ड उसकी चूत ने इतनी जोर से अन्दर भींच लिया है जैसे गन्ना पेरने वाली मशीन गन्ने का रस निचोड़ लेती है। उसने एक किलकारी मारी और मेरे ऊपर ढेर हो गई।

मैंने उसकी कमर पकड़ ली और एक पलटी मारी तो मास्टरनी नीचे और मैं ऊपर हो गया। अब मुझे थोड़ा सांस आया। मैंने दोनों हाथों से उसकी कमर पकड़ कर दनादन धक्के लगाने चालू कर दिए। मास्टरनी आँखें बंद किये लेटी रही। मैं भी अंतिम पड़ाव पर था कितनी देर रुकता। मेरा भी ज्वालामुखी फट पड़ा और वीर्य की फुहारें अन्दर निकलती चली गई। मास्टरनी की ठंडी आहें निकलने लगी और उसकी अकड़न मंद पड़ने लगी। पर उसने अपनी बाहों की जकड़न ढीली नहीं होने दी।

कोई 10 मिनट हम इसी अवस्था में पड़े रहे। अब मेरा लण्ड सिकुड़ गया था और बाहर फिसल आया। उसकी चूत से वीर्य और कामरज बाहर निकल कर चद्दर को भिगोने लगा था। मास्टरनी ने मुझे उठ जाने का इशारा किया तो मैं उठ बैठा। मेरे लण्ड के चारों और भी वीर्य और उसकी चूत से निकला कामरज लगा था। मैं उसे धोने बाथरूम में चला गया।

जब मैं अपने लण्ड को साफ़ करके और उस पर थोडा सा सरसों का तेल लगा कर वापस आया तब भी मास्टरनी उसी मुद्रा में लेटी थी। वो अपनी चूत धोने बाथरूम में नहीं गई। मैंने उसे बाथरूम जाने को पूछा तो उसने मना कर दिया और बोली,”एक बार और मज़ा लेना है अभी !”

मेरा राम लाल तो दो बार निचुड़ चुका था। पर मेरा भी मन अभी नहीं भरा था। सच पूछो तो मास्टरनी ने मुझे चोदा था। मज़े तो उसने लिए थे। मैं एक बार उसे घोड़ी या डॉगी स्टाइल में चोदना चाहता था। मैं उसके नजदीक जाकर पलंग पर बैठ गया तो वो सरक कर मेरी जाँघों पर सर रख कर लेट गई और मेरे राम लाल को हाथ में पकड़ कर एक चुम्मा ले लिया। राम लाल तो अलसाया सा था। मुझे डर लगाने लगा था कि यह दो बार निचुड़ चुका है कहीं धोखा ही ना दे जाए।

पर कहते हैं औरत के हाथ में जादू होता है। जो लण्ड तीन इंच का होता है खूबसूरत औरत के हाथों में आते उम्मीद से दुगना हो जाता है भला मेरा क्यों ना होता। मास्टरनी ने उसे मसलना चालू कर दिया और फिर से अपने मुँह में लेकर चूसने लगी। राम लाल धीरे धीरे अपने रंग में आने लगा।

मेरे सारे शरीर में सनसनी सी होने लगी और लण्ड तनकर अपनी औकात में आ गया। मास्टरनी ने उसे मुँह से निकाल कर आज़ाद करते हुए कहा,”रे जीत, ले तेरा घोड़ा तो फेर तैयार हो गया सवारी करने को ?”

मुझे डर लगाने लगा कहीं मास्टरनी फिर से मुझे ना दबोच कर अपने नीचे ले ले। मैंने कहा,”तो आप घोड़ी बन जाओ ना मैं सवारी करता हूँ ?”

उसने मेरी और टेढ़ी आँखों से इस तरह देखा जैसे मैं मोटी बुद्धि का ना रह कर कालिदास बन गया हूँ। मास्टरनी झट से अपने घुटनों के बल हो गई और अपने गांड हवा में ऊपर उठा दी। उसने अपना सर तकिये पर रख लिया। अब मैं उसके पीछे आ गया। गोरी गोरी मुलायम जाँघों के बीच उसकी चूत की फांकें सूज कर मोटी मोटी हो गई थी। गांड का सुनहरा सा छेद कभी खुल और कभी बंद हो रहा था। उसकी दर दराई सिलवटें तो मुझे उसी में अपना लण्ड डाल देने का आमंत्रण दे रही थी।

मैंने अपने लण्ड को उसकी फांकों के बीच लगाया और उसकी कमर पकड़ कर जोर से एक धक्का लगा दिया। चूत पहले से ही गीली थी पूरा का पूरा लण्ड बिना किसी रुकावट के अन्दर चला गया।

मास्टरनी की चींख सी निकल गई। वो बोली “रे ताऊ थोड़ा सबर कर धीरे … के जल्दी सै ?”

मैं अब कहाँ रुकने वाला था। मैंने धक्के लगाने शुरू कर दिए। धक्कों के साथ उसके भारी चूतड़ हिलते तो मेरा उत्साह दुगना हो जाता। मैंने उन पर जोर जोर से थप्पड़ लगाने चालू कर दिए। मास्टरनी तो सीत्कार पर सीत्कार करने लगी। मैं कहीं पढ़ा था कि जब कोई औरत उम्र में थोड़ी बड़ी हो तो उसे चोदते समय अगर उसके चूतड़ों पर हलकी चपत लगाई जाए या उसके होंठ या चूत की फांकों को दांतों से काटा जाए तो उसे दर्द के स्थान पर मीठी कसक के साथ और भी मज़ा आता है।

मैंने अपनी घुड़सवारी और एड लगानी चालू रखी। हर धक्के के साथ मेरा लण्ड उसकी बच्चे दानी तक चला जाता और मास्टरनी की आह … उन्ह … निकलने लगती।

“या … आह … उइईई ……मा … और जोर से … आज सारे कस बल निकाल दे इस चूत के … आह … बहोत तंग किया है इसने मुझे … आह …”

मेरा शेर तो इस समय खूंखार बना था। मैंने धक्कों की गति बढ़ा दी। 10-15 मिनट की इस दूसरी चुदाई में ही मास्टरनी के पसीने निकलने लगे। मेरा भी यही हाल था। पर राम लाल तो उसी तरह खड़ा था। सच कहूं तो चुदाई का असली मज़ा तो मुझे आज ही मिला था। उस कमेड़ी की चुदाई के समय तो हम दोनों ही डरे हुए थे और वो भी बस सारी चुदाई में आह…. उईइ…. हाई…. करती कसमसाती रही थी।

मास्टरनी की आँखें बंद थी। मास्टरनी जब निढाल हो गई तो उसने अपना जानामाना फ़ॉर्मूला आजमाया और अपनी चूत का संकोचन करने लगी। आप तो अनुभवी हैं जानते ही हैं कि जब चुदाई के दौरान औरत ऐसा करती है तो आदमी बहुत जल्दी अपनी चरम सीमा पर पहुँच जाता है। हमें 15-20 मिनट तो इस बार भी हो ही गए थे। मैं मास्टरनी की हालत जानता था इसलिए अब मैंने भी जोर जोर से धक्के लगा कर अपना तनाव ख़तम करने का सोच लिया।

उसके चूतड़ों की खाई और गांड के छेद को देख कर मुझ से रुका नहीं गया और मैंने अपनी एक अंगुली उसकी गांड में डालने की फिर से कोशिश की तो मास्टरनी बोली,”रे ताऊ, इब खिलवाड़ बंद कर … बस निकाल दे अपना माल मैं तो गई … उईईईइ…… म़ा …?”

मुझे लगा मास्टरनी झड़ गई है। अब तो उसकी चूत बिलकुल ढीली पड़ गई थी। मैंने 4-5 धक्के बिना रुके लगा दिए और उसके साथ ही मेरे लण्ड ने भी मुक्ति की राह पकड़ ली। मास्टरनी धीरे धीरे नीचे होती गई और मैं उसके ऊपर ही पसर गया। हम दोनों ने ही ध्यान रखा कि लण्ड बाहर ना निकले। मैंने अपने हाथ नीचे करके उसके चुचों को पकड़ लिया और अपनी टांगें उसके चूतड़ों के गिर्द कस ली।

पता नहीं कितनी देर हम इसी तरह लेटे रहे। मेरा लण्ड धीरे धीरे बाहर निकल आया। उसकी चूत से वीर्य और कामरज का मिलाजुला मिश्रण बाहर निकल कर चद्दर पर फ़ैल गया। हम दोनों ही अब उठ खड़े हुए। हमने देखा 8-10 इंच के गोल घेरे में चद्दर पर वो मिश्रण फैला है।

मास्टरनी ने मेरी ओर मुस्कुराते हुए देखा और बोली,”रे हरियाने के सांड ! देख तूने चद्दर को फिर से खराब कर दिया। जा इब इसे बाथरूम में गेर दे !” “वो क्यों ?””रे ताऊ ! वो हरामजादी कान्ता कभी भी आ सकती है पूरे दो घंटे हो गए हैं ?””ओह … ?” मेरी भी हंसी निकल गई।

“वो कल का क्या प्रोग्राम है ?” मैंने पूछा।

“कल की कल देखेंगे !”

मास्टरनी चद्दर उठा कर बाथरूम में चली गई और मैं अपने कपड़े पहन कर घर की ओर भागा। मैं सोच रहा था कि मास्टरनी की दोनों छेदों में एक साथ लण्ड डलवाने वाली बात का क्या मतलब था ?

मै एक गाना एक गाना गुनगुनाता हुआ अपनी मस्ती और ख़ुशी में जा रहा था कि

आज मैं ऊपर आसमान नीचे

जल्दी से घर पहुंचा और नहाया और खाना खा कर पलंग पर लेट कर सोचने लगा आज जो हुआ और कल क्या होगा उसका इन्तजार करने लगा।

अगले दिन जब मैं मास्टरनी के घर पहुंचा तो किसी के बात करने की आवाज आ रही थी मास्टरनी किसी से बात कर रही थी मैं जब अन्दर पहुंचा तो वहां का नजारा देख कर तो मेरे पाँव के नीचे से जमीन ही निकल गई….

कहानी अभी बाकी है दोस्तो ! मैंने मास्टरनी के घर ऐसा क्या देखा यह आपको अगली कहानी मैं लिखूंगा. लेकिन तब जब आप लोग मुझे मेल करेंगे. लेकिन इतना बता देता हूँ कि जो भी देखा वो कम से कम मेरे लिए किसी 1000 वाट के कर्रेंट से कम नहीं था।

मेरी यह चुदाई आपको कैसी लगी ? मुझे यह तो जरुर बताना। Antarvasna Sex Stories

Hindi Porn Stories

मैं देविका हूँ, उम्र 24 वर्ष और Hindi Porn Stories लम्बाई 5 फ़ुट 3 इन्च। मैंने अपने बॉब हेयर कट करवा रखे थे। मैं दुबली पतली पर आकर्षक लगने वाली युवती हूँ। मैं मुम्बई की एक निजी कम्पनी में पीए हूं। आईये आपको मैं बताती हूँ कि मुझे कम्पनी में कैसे प्रोमोशन मिला।

मेरी नौकरी के लिये जब इन्टरव्यू हुआ था तब कम्पनी का मालिक एक बुजुर्ग इन्सान था और उसने मेरी काबलियत पर मुझको रखा था। पर वो अब कम्पनी नहीं चलाते थे। उनका बेटा अंकित जो 28 वर्ष का था और उसका एक खास दोस्त रोहित, तो कम्पनी का पार्टनर भी था, कम्पनी का काम काज देखते थे।

मुझे इस कम्पनी में काम करते हुए सात माह हो चुके थे… मुझे अंकित और रोहित दोनों ही बहुत पसन्द थे। दोनों स्टाफ़ के साथ घुल मिल कर काम करते थे। समय समय पर रीसोर्ट में सभी को पार्टी देते थे और पिकनिक भी ले जाते थे।

अंकित की नजरें शुरु से ही मुझ पर थी। मुझ पर, शायद खूबसूरत और मोडर्न टाईप की दिखने पर, लाईन मारता था। मैं उसकी लाईन को इज्जत से स्वीकार करती थी, और एक मतलबी मुस्कान बिखेर देती थी। मेरी अदाओं पर मर कर आखिर एक बार उसने मुझे अपने केबिन में बुला ही लिया…

“देविका… तुम्हारा काम हमें बहुत पसन्द आया है… रोहित चाहता है कि तुम्हारा प्रोमोशन हो और वेतन सात से बढ़ा कर बारह हज़ार कर दिया जाये।”

“आपका बहुत बहुत धन्यवाद सर… मैं हमेशा आपकी आभारी रहूंगी सर…!” मैंने खुश हो कर अंकित से हाथ मिलाते हुए कहा।

“आप तो खुश हो गई ना … अब हमें भी खुश कर दो…” अंकित मुस्करा कर बोला…और मेरा हाथ दबा दिया।

“जी…अभी पार्टी की तैयारी करती हूँ…” मैंने भी उनका हाथ दबाते हुए कहा।

‘तो पहले बाबा को कॉफ़ी के लिये कहो…और मेरे निजी कमरे में आ जाओ…” अंकित ने आज्ञा देते हुए कहा। और उठ कर अपनी आराम करने के कमरे में चले गये… कुछ ही देर में बाबा कॉफ़ी ले आया… हम तीनो कॉफ़ी पीने लगे… रोहित कॉफ़ी पी कर चला गया।

“देविका… देखो प्रोमोशन को सेलेब्रेट करना चाहिये… मेरे पास आ जाओ…!”
“जी… पास क्या…कहां…” मैं थोड़ा सा हिचक गई।
“यहा…मेरे पास… सोफ़े पर…”
“जी…”

मैं जैसे ही सोफ़े पर बैठने को हुई… अंकित ने मुझे खींच कर अपनी गोदी में बैठा लिया।

“यहाँ पर…आओ…” उसके अचानक इस हमले को मैं समझ नहीं पाई… मैंने देखा कि वहां कोई नहीं था… तो मैंने गोदी में बैठे रहना ही उचित समझा।
“सर…कोई देख लेगा…”मैं शर्माते हुए और उठते हुए बोली।
“देविका डरो मत… यहां कोई नहीं आयेगा… फिर मैं तुम्हें सच बताऊँ तो तुम मुझे बहुत ही अच्छी लगने लगी हो…”

“जी…आप ये क्या कह रहे हैं? मैं एक साधारण परिवार से हूँ और आप …” मैंने अपनी मजबूरी दिखाई पर मन ही मन में मेरे लड्डू फ़ूट रहे थे… कि अंकित ने लिफ़्ट तो दी… मैं उसकी गोदी से उठने की नाकाम कोशिश करती रही।

“देविका…कुछ मत कहो… बस प्यार की बातें करो… तुम्हारी अदाएँ मुझे तुम्हारी तरफ़ खींचती हैं…” उसने अपनी गोदी में मुझे जकड़ते हुए कहा।

मेरे चूतड़ो के स्पर्श से उसका लण्ड खड़ा होने लगा था। लण्ड का कड़ापन का मुझे नीचे अहसास होने लगा था।

“सर… सच आप मुझसे प्यार करते हैं…” मुझे पता था कि ये तो मुझे चोदने का एक बहाना है… फिर भी मैंने भी अंकित की तरह ही बोलना शुरु कर दिया।

“हां …सच देविका…तुम्हारा ये सेक्सी जिस्म … तुम्हारे ये उभार लिये हुए सीना … तुम्हारी कमर और ये मांसल जांघें… मुझे दीवाना बना देता है…देखो मेरा नीचे क्या हाल है…”
“हाय अंकित … आप कितने अच्छे हैं…”मैं भी अपना चेहरा उनके चेहरे के पास ले आई।

उसने धीरे से अपने होंठ मेरे होंठो से लगा दिये… उसके हाथ मेरे सीने की ओर बढ़ चले… कुछ ही क्षणों में उसके हाथ मेरी गोल गोल से उन्नत उरोज़ों को सहला रहे थे। उसका लण्ड मेरी गाण्ड में घुसने को तड़प रहा था, दरारों में अपनी जगह ढूंढ रहा था। मैं वासना में मदहोश होती जा रही थी। उसके होंठ मेरे होंठो को चूस रहे थे…बीच बीच में उसकी जीभ मेरे मुख के अन्दर भी जायजा लेती जा रही थी।

तभी रोहित भी आ गया…”अरे भई…ये क्या हो रहा है… मैं जाऊ क्या?”
मैं एकदम से घबरा उठी। अंकित ने मुझे कस कर पकड़ रखा था।

“आओ…रोहित… आज प्यार का मौसम है…इसलिये प्यार हो रहा है…” अंकित ने शरारत से कहा। और उसके सामने ने मेरे बोबे सहलाते हुए मसलने लगा।
मैं शरमा गई,”सर प्लीज…छोड़िये ना…!” मैं अपने आपको छुड़ाने लगी।
रोहित भी मुझे रंगीन नजरो से निहारने लगा,” तो क्या हमारा नम्बर भी आयेगा… प्यार करने में …देविका जी…?”
“जी क्या कह रहे आप…मैं तो अंकित को प्यार करती हूं…”

“देविका जी…जरा रोहित को भी एक किस तो दे ही दो…प्लीज… प्रोमोशन तो रोहित ने ही दिया है…” मुझे छोड़ते हुए अंकित ने कहा। मेरे उठते ही रोहित ने प्यार से मुझे अपनी तरफ़ खींच लिया। और मेरे होंठो को चूमने लगा। मुझे तरावट आने लगी…यहां तो एक छोड़ दो दो मिल रहे थे…
रोहित ने अपना हाथ मेरे चूतड़ो पर रख कर दबा दिये… उसके हाथ मेरे शरीर को सहलाते हुए बोबे को कभी चूत को मसल रहे थे।

तभी बाहर से एक कॉल आया… अंकित उठ कर चला गया। रोहित ने मुझे छोड़ते हुए कहा,”जाओ अपने ऑर्डर ले आओ और शाम को हमारे साथ आपका होटल में डिनर है…घर पर बोल देना कि आपको रात में देर हो सकती है…!”

शाम को ठीक 8 बजे मेरे घर के आगे उनकी कार खड़ी थी… मैं सजधज के कार में बैठ गई। वहां जो होने वाला था उसकी शुरुआत तो ऑफ़िस में हो ही चुकी थी। मैंने अपने आप को इसके लिये पहले ही तैयार कर लिया था। घर पर मैंने अच्छी तरह से चूत की शेव कर ली थी… चूत में और गाण्ड की छेद में बढ़िया सी चिकनी क्रीम अन्दर तक मल ली थी। ब्यूटी पार्लर पर बाल ठीक करा कर और फ़ेशियल करा कर चेहरा और मुलायम कर लिया था।

गाड़ी एक शानदार होटल में रुकी… शायद 5 स्टार होटल था। दरबान ने मुझे झुक कर सलाम किया और मेरे आगे आगे चला…और एक खाली चेम्बर में सोफ़े पर बैठा दिया। ये अंकित और रोहित का स्थाई बुक किया हुआ चेम्बर था। कुछ ही देर बाद एक अटेन्डेन्ट आया और मुझे लिफ़्ट से एक कमरे में लेगया। वहां अंकित और रोहित दोनों ही थे… खाने टेबल लगी थी… मेरे आते ही उन्होने मेरा स्वागत किया… शायद रोहित को जल्दी थी… उसने आते ही मुझे लिपटा कर प्यार कर लिया।

“प्रोमोशन की बधाई स्वीकार करो … !!” रोहित ने मुझे एक लिफ़ाफ़ा दिया। मैंने रोहित की तरफ़ प्रश्न भरी निगाहों से देखा।

“हां हां देख लो देविका…” रोहित मुस्कुराया।

“और ये मेरी तरफ़ से है…” अंकित ने एक ओर लिफ़ाफ़ा दिया। ये कम्पनी की ओर से रहने के लिये एक बड़ा फ़र्निश्ड क्वार्टर था… मैं तो जैसे स्वर्ग में पहुँच गई। मैं झूम उठी … दोनों ने मुझे हवा में उठा लिया और मैं अंकित बाहों में झूल गई। मेरे कपड़े हवा में उछल गये… कुछ ही देर में हम तीनों नंगे थे। उन दोनों ने शराब की बोतल उठा ली और तीन गिलास बना लिये। अंकित ने अपनी दूसरी पीए को फोन कर दिया कि घर पर सूचना दे दो कि घर दूर होने की वजह से देविका अपनी सहेली के यहा रात को रुक जायेगी इसलिये इंतज़ार नहीं करें।

जाम छलक उठे… कमरे में वासना का नंगा नाच शुरू हो गया। मैं भी उनके साथ वासना में बह निकली…मस्त हो उठी। चूत गीली होने लगी… मैं कभी एक की गोदी में तो कभी दूसरे की गोदी में उनके लण्ड पर बैठ कर मजे लेती रही। वो भी मेरे जिस्म से खेलने लगे। मेरे बोबे, मेरे चूतड़ों को, चूत को सहलाते और दबाते रहे। सरूर चढ़ता गया… रोहित बिस्तर पर लेटा हुआ था…। उसका तन्नाया हुआ लण्ड देख कर मुझसे रहा नहीं गया और उछल कर उसके लन्ड पर बैठ गई।

मेरे चूत लपलापाने लगी… फ़ड़क उठी। लण्ड चूत में घुसेगा ये सोच के मैं तड़प उठी। मैंने अपनी चूत उठाई और निशाने पर रखी और दबा दिया लण्ड पर… लण्ड मेरी चूत में सरसराता हुआ घुस गया। मैंने अपने चूतड़ उठा कर ज्योंही धक्का मारा…कि पीछे से अंकित ने दोनों हाथों से मेरे चूतड़ थाम लिये… और बिस्तर पर चढ़ गया। मेरी गाण्ड उसके लण्ड का निशाना थी। मैं तो आनन्द से भर उठी कि मेरे दोनों छेदों में एक साथ लण्ड पिरोये जायेंगे।

अब मेरी चिकनी गाण्ड में पीछे से अंकित का लण्ड उतरने लग गया। मैंने अपनी गाण्ड में क्रीम लगा कर पहले ही तैयारी कर ली थी। बस अब तो मजा लेने की बारी थी। चूत में रोहित का लण्ड पहले से ही घुसा हुआ था। दोनों के बीच में मैं भिंच गई… मेरी चुदने की इच्छा भी पूरी होने लगी।
कहते है कि जिन्दगी में ऐसे मौके बहुत कम आते है जबकि दोनों छेद में दो व्यक्तियों के दो लण्ड एक साथ जायें और गांड और चूत दोनों चुद जाये। मेरी अच्छी तकदीर थी कि मुझे ऐसा मौका आज मिल गया।

दोनों ओर से लण्ड धक्के मार रहे थे मेरी चूत और गाण्ड दोनों चुद रही थी। डबल मजा… रोहित नीचे से उछल उछल कर चोद रहा था और अंकित का मोटा लण्ड मेरी गाण्ड को मस्त किये दे रहा था। खास कर मुझे मजा यूं भी आ रहा था कि मेरी भी किस्मत खुल गई थी और मुझे मुम्बई जैसी जगह में एक बढ़िया मकान मिल गया था और एक गोआ के ट्रिप… । जिससे चुदने को मेरी साथ की सहेलिया तड़पती रहती थी… उसी से आज मैं जी भर के एक तरफ़ नहीं बल्कि दोनों तरफ़ से चुदवा रही थी।

मेरा तन और मन आज खिल उठा था। जोरदार धक्के पर धक्के दोनों मार रहे थे… मेरे मुख से सिसकारियाँ निकली जा रही थी… मेरे बोबे अंकित बुरी तरह भींच रहा था… मैं भी आखिर मजा कितना उठाती… जिस्म ने साथ नहीं दिया और मेरा बदन जैसे बिजलियों से भर उठा और चूत कसकने लगी…
फिर

“रोहित… प्लीज बस… अब नहीं …मैं गई… हाय…” मेरा जिस्म कांप उठा और मैंने रोहित को जकड़ लिया और मेरा पानी छूट पड़ा। मैं झड़ने लगी… इतने में रोहित ने भी वीर्य छोड़ दिया… अंकित जरा दमदार था…टाईट गांड ने अभी तक लण्ड पेल रहा था…पर कुछ ही समय में उसकी पिचकारी भी निकल पड़ी… मेरी चूत और गाण्ड दोनों ही वीर्य से भर चुकी थी।

अब हम तीनों ही बिस्तर पर निढाल पड़े थे… दोनों के लण्ड मुरझा चुका थे… मैं भी चुद कर शान्त हो चुकी थी। उठ कर हमने अपने आप को ठीक किया। मैंने भी मेकअप ठीक किया फिर कुछ ही देर बाद हमने डिनर मंग़ा लिया। रोहित डिनर करके चला गया था… खाना खा कर मैं फिर ताजा दम हो गई थी।
“अंकित… मेरे साथ गोआ कौन जायेगा…” मैंने अपने साथी के बारे में पूछा।

“ये तुम्हारी मर्ज़ी पर है कि अपने बॉय फ़्रेन्ड को ले जाओ या रोहित को या चाहो तो मुझे… हम तुम्हारी पसन्द की इज्जत करेंगे…”
“जी मेरा तो बॉय फ़्रेन्ड नहीं है … आप जैसा चाहे… !” ये सुन कर अंकित खुश हो गया।

“फिर ठीक है…कोई तुम्हारी सहेली बताओ… जो रोहित के लायक हो…उसे भी एक प्रोमोशन मिल जायेगा…” उसे मैं पसन्द आ गई थी अब वो शायद रोहित के लिये सोच रहा था।
“जी…” मैं खुशी से उछल पड़ी…”सर सुमन को प्रोमोशन दे दीजिए… वो रोहित के सपने में खोई रहती है।” मेरे मुख से अचानक निकल पड़ा।

अंकित मेरे पर झुका जा रहा था। उसके कपड़े उतर चुके थे… मैं भी अपने कपड़े उतार चुकी थी… उसने मुझे चूमना चालू कर दिया था…मेरी चूत गीली होने लगी थी। अंकित मेरे ऊपर छा चुका था। उसका लण्ड मेरी चूत पर गड़ा जा रहा था।
मेरी चूत के दोनों पट लन्ड ने खोल दिये और वह गहरी गुफ़ा में उतरने लगा… मैं एक बार फिर से मस्ती में खोने लगी… आनन्द में बहकने लगी…शरीर कसमसाने लगा… और लण्ड चूत की तह में जा पहुंचा…अब अंकित ने मुझे अपनी बाहों में जकड़ लिया और धीरे धीरे उसकी कमर चलने लगी… मैं सुख के सागर में गोते खाने लगी…

यह थी मेरी प्रोमोशन की दास्तान। मेरे बॉस ने मेरी दिल की इच्छा भी पूरी की और साथ में गिफ़्ट, प्रोमोशन और रहने एक बड़ा मकान भी दिया… अब मुझे अपने बॉस को खुश करने का तरीका भी आ गया है… आज मैं अपनी काबलियत के बल पर सीईओ के पद पर हूँ…ये काबलियत नहीं तो और क्या है? हां, पर मैं अपने साथ की सहेलियों का ध्यान भी रखती हूँ… अगर वो बॉस के लिये कुछ मन में फ़न्तासी रखती है तो उसका रास्ता मैं निकाल देती हूँ… इससे मेरा वेतन भी बढ़ जाता है…और स्टाफ़ में मेरी इज्ज्त भी बढ़ जाती है…

बस नुक्सान एक ही है…

जब कोई बिजनेस डील होती है तब हमें और मेरी प्रोमोटेड सहेलियो को उन सेठों के बीच में मीटिन्ग में आकर सेक्सी स्टाईल मारनी पड़ती है, फिर उनकी डिमांड पर उन्हें स्टाईल और नखरे दिखा कर घरेलू शरीफ़ औरत बन कर चुदना पड़ता है… पर बदले में वो भी खासा पैसा भी इनाम में दे जाते हैं… Hindi Porn Stories

Hindi Sex Stories

कमरे में घुसते ही राम Hindi Sex Stories ने कहा, “सिमरन ये मैं क्या देख रहा हूँ?”

“ओह गॉड! मेरे पति कि आवाज़ है! मुझे जाने दो”, सिमरन अपने आपको जय से छुड़ाने की कोशिश करने लगी।

“चुप हो जाओ रानी, मैं तुम्हें तभी जाने दूँगा जब मेरा काम हो जायेगा”, जय ने हँसते हुए अपने लंड की रफ़्तार और तेज कर दी।

“राम मुझे जाने दो! नहीं…. मैं तुम्हें नहीं करने दूँगी!” अंजू ने विरोध करते हुए कहा, लेकिन ज़मीन पर कार्पेट पे लेट कर अपनी टाँगें फैला दी।

“अंजू तुम्हें क्या हुआ?” जय ने पूछा।

“आहहहह!!! राम ने अपना लौड़ा मेरी चूत में घुसा दिया है और मुझे चोद रहा है”, अंजू ने जवाब दिया।

“चोदने दो! मैं भी तो उसकी बीवी की गाँड मार रहा हूँ”, जय ने हँसते हुए कहा।

“ओहहहहहहह नहीं!!! मुझे नंगा मत करो प्लीज़, नहीं…. तुमने तो अपना लंड मेरी चूत में घुसा दिया है”, मंजू सिसकी।

“अब तुम क्यों चिल्ला रही हो?” विजय ने पूछा।

“श्याम मेरे ऊपर चढ़ कर मुझे चोद रहा है”, मंजू ने जवाब दिया।

“चढ़ा रहने दे, मैं भी तो उसकी बीवी पर चढ़ा हुआ हूँ, मजे लो!” विजय ने साक्षी की गाँड में धक्का मारते हुए कहा।

चारों जोड़े चुदाई में मस्त थे। दो बिस्तर पर और दो ज़मीन पर। ऐसा सामुहिक चुदाई का नज़ारा देखने लायक था। थोड़ी देर बाद सब थक कर चूर हो चुके थे। जय और विजय खड़े होने लगे।

“तुम कहाँ जा रहे हो? अभी मुझे और चुदाना है!” साक्षी ने विजय का हाथ पकड़ते हुए कहा।

“नहीं, मैं थक चुका हूँ! अब मुझसे नहीं होगा”, विजय ने कहा। इस कहानी के लेखक सुनील अग्रवाल है!

“तुम्हें अब मैं चोदूँगा”, राम ने कहा।

“हाँ राम! तुम मुझे चोदो”, साक्षी बोली।

“चोदूँगा जरूर! लेकिन तुम्हें नहीं सिमरन को, तुम्हें श्याम चोदेगा”, राम ने कहा।

“हाँ राम! मुझे चोदो प्लीज़….!” फिर दोनों ने अपने-अपने पति के लंड को मुँह में ले कर चूसना शुरू कर दिया।

“अब चलो यहाँ से….. मुझसे सहा नहीं जा रहा है, देखो मेरी चूत कितनी गीली हो गयी है”, प्रीती मेरा हाथ पकड़ कर मुझे बेडरूम में ले आयी।

वहाँ वो चुदाई में मस्त थे और मैं अपनी प्रीती की जम कर चुदाई कर रहा था। उसके मुँह से सिसकरियाँ फूट रही थीं, “ओहहहहहह हाँ!!!! जोर से!!! ओहहहह तुम्हारे लंड की तो मैं दीवानी हो गयी हूँ!!!! कितने लौड़ों से चुदवा चुकी हूँ पर तुम्हारे लंड का जवाब नहीं।”

थोड़ी देर में हम झड़ कर अलग हुए ही थे कि चुदाई पार्टी हमारे कमरे में आ गयी।

“कैसे रहा तुम लोगों के साथ?” प्रीती ने पूछा।

“बहुत अच्छा रहा! सिमरन और साक्षी की चूत और गाँड सही में लाजवाब हैं”, जय बोला।

“और तुम दोनों की चूत की खुजलाहट कैसी है?”

“पहले से ठीक है पर अब भी खुजला रही है”, सिमरन ने जवाब दिया।

“जाओ जा कर स्नान कर लो….. ठीक हो जायेगी”, प्रीती ने कहा, “सब लोग तैयार हो जाओ… फिर पिक्चर देखने चलते हैं।”

हम सब लोग तैयार होकर पिक्चर देखने गये और एक अच्छे रेस्तोरां में खाना खाया। घर पहुँचते हुए काफी देर हो चुकी थी। घर पहुँच कर हम सब ड्रिंक्स पीने बैठ गये। बाद में जब सब सोने की तैयारी करने लगे तो प्रीती बोली, “सिमरन और साक्षी तुम आज रात सुनील के साथ सोओगी, और राम और श्याम, अंजू और मंजू के साथ!” प्रीती ने कहा।

“तो हम लोग किसके साथ सोयेंगे?” जय ने पूछा। इस कहानी के लेखक सुनील अग्रवाल है!

“तुम दोनों आज मेरे साथ सोओगे”, प्रीती बोली। प्रीती की आँखों में वासना भरी थी और उसकी आवाज़ नशे में बहक रही थी।

बेडरूम में मैंने जब अपने कपड़े उतारे तो सिमरन सिसकी, “साक्षी! देख तो जीजाजी का लंड कितना लंबा और मोटा है!”

“हाँ यार! ये तो काफी मोटा और लंबा है, सुना है… मोटा लंड चुदाई में ज्यादा मज़ा देता है”, साक्षी मेरे लंड को पकड़ कर सहलाने लगी, “पहले मैं चुदवाऊँगी।”

“नहीं पहले मैं चुदवाऊँगी, पहले मैंने देखा है”, सिमरन बोली। वो दोनों भी नशे में थीं। उन्होंने पहले कभी शराब पी नहीं थी और आज प्रीती के जोर देने पर दोनों ने एक-एक पैग पिया था और उसमें ही दोनों को अच्छा खासा नशा हो गया था।

“झगड़ा मत करो, पूरी रात पड़ी है”, मैंने दोनों को शाँत करते हुए कहा, “सिमरन बड़ी है इसलिये मैं पहले सिमरन को चोदूँगा।”

पूरी रात मैं दोनों को बारी-बारी से चोदता रहा।

सुबह जब मैं उठा तो दोनों लड़कियाँ गहरी नींद में सोयी पड़ी थी। बिना आवाज़ किये मैं कमरे से बाहर आ गया और देखा कि किचन में प्रीती नंगी ही चाय बना रही थी।

“रात कैसी गयी?” प्रीती ने पूछा।

“बहुत शानदार, दोनों की चूत वाकय में बहुत टाइट है।”

“हाँ मैं जानती हूँ! उनकी शादी हुए ज्यादा अरसा नहीं हुआ है, और तुम्हारे मोटे लंड के लिये तो चुदी हुई चूत भी टाइट है”, प्रीती बोली।

“गुड मोर्निंग भाभी!” अंजू किचन में आते हुए बोली।

“आप दोनों नंगे क्यों हैं? क्या सुबह-सुबह चुदाई कर रहे थे?” मंजू ने हमें नंगा देख कर कहा।

“नहीं ऐसी कोई बात नहीं है, हमने वैसे आज से फैसला किया है कि घर में सब नंगे ही घूमेंगे, कोई भी कपड़े नहीं पहनेगा”, मैंने कहा।

“अगर ऐसी बात है तो ठीक है”, दोनों ने अपने-अपने गाऊन उतार दिये और नंगी हो गयी।

“हाँ… उम्मीद है कि बाकी भी सब मान जायें”, अंजू ने हँसते हुए कहा, “कितना अच्छा लगेगा जब सब मर्द अपना लंड हवा में उठाये घूमेंगे”, अंजू बोली।

“और हम चूज़ भी कर सकते हैं कि किससे चुदवाना है!” मंजू ने कहा। इस कहानी के लेखक सुनील अग्रवाल है!

“भाभी! आपने हमारे पतियों के साथ क्या किया है जो अभी तक सो रहे हैं?” अंजू ने पूछा।

“कुछ ज्यादा नहीं किया….. सिर्फ़ उनके लंड से उनके पानी की एक-एक बूँद निचोड़ ली!” प्रीती खिलखिलाती हुई बोली, “अब वो आराम से सो रहे हैं।”

“आओ मंजू देखते हैं, उनका लंड कितना सूखा हुआ है”, अंजू उसे बेडरूम की ओर घसीटती हुई बोली।

आधे घंटे बाद वो दोनों लौटीं, “भाभी! उनके लंड में अभी थोड़ा पानी बचा था जो हमने चूस के निकाल दिया”, मंजू जोर से बोली और बाकी सब को उठाने चली गयी।

हम सब लोग नंगे ही नाश्ता कर रहे थे। “जय और विजय कहाँ हैं?” मैंने पूछा।

“हम यहाँ हैं भैया।” दोनों किचन में नंगे आते हुए बोले। फिर जय और विजय ने राम और श्याम की ओर घूरते हुए कहा, “तो वो तुम दोनों ही हो जिन्होंने हमारी बीवियों का कुँवारापन लूटा था।”

“हाँ लूटा था! तो क्या कर लोगे?” राम भी अकड़ कर बोला। मैं घबरा रहा था कि कहीं कुछ गड़बड़ ना हो जाये। मैंने अंजू और मंजू की ओर देखा।

“सॉरी भैया, भाभी! इन्होंने चालाकी से हमारे मुँह से उगलवा लिया”, मंजू बोली।

इतने में जय बोला, “करेंगे क्या!!! हमने भी तो तुम्हारी बीवियों की चूत और गाँड मारी है”, और हंसने लगा।

माहोल शाँत होते देख मेरी जान में जान आयी। अब तो घर में सब नंगे ही रहते और जो मन में आता उसे पकड़ कर चुदाई करने लगते। सारा दिन शराब और चुदाई चलती…. कौन किसे और कहाँ चोद रहा है कोई परहेज नहीं था। ऑफिस से लौटने के बाद मैं भी शामिल हो जाता था।

एक दिन ऑफिस से लौटा तो देखा कि अंजू के बेडरूम से आवाज़ें आ रही है। सभी लोग वहाँ थे सिवाय राम के।

“प्रीती! राम के साथ बेडरूम में कौन है?” मैंने पूछा। इस कहानी के लेखक सुनील अग्रवाल है!

“तुम्हारी पहली कुँवारी चूत….. रजनी, आयी थी, टीना की बर्थडे पार्टी के बारे में बात करने, लेकिन इतने सारे खड़े लंड देख कर अपने आप को रोक नहीं सकी और पिछले चार घंटे से सबसे बारी-बारी से चुदवा रही है।” प्रीती ने जवाब दिया। थोड़ी देर बाद राम और रजनी बेडरूम से बाहर आये। “प्रीती! अब मैं चलती हूँ, कल मम्मी के साथ आऊँगी, फिर हम सब फायनल कर लेंगे”, रजनी ने कहा।

“मेरी जान! तुम ऐसे कैसे जा सकती हो? सुनील अभी तो आया है और तुमने उससे चुदवाया भी नहीं है”, प्रीती हँसते हुए बोली।

“सॉरी सुनील… आज नहीं! आज मेरी चूत और गाँड इतनी सुजी हुई है कि अब मैं बर्दाश्त नहीं कर पाऊँगी, फिर कभी!” ये कहकर वो चली गयी।

सभी लोग रजनी और टीना के बारे में जानना चाहते थे। प्रीती ने पूरी डीटेल में सब कुछ उन्हें बता दिया। दो दिन के बाद योगिता और रजनी आयीं। चार नौजवान और खड़े लंडों को देख कर योगिता के मन में चुदवाने की इच्छा जाग उठी।

“मम्मी! जो काम की बात हम करने आये हैं….. पहले वो पूरा कर लेते हैं, बाद में हम दोनों मिलकर इन सबके लंड का पानी निचोड़ लेंगे”, रजनी ने कहा।

मैंने उन दोनों के लिये ड्रिंक्स बनाये और फिर हमने तय किया कि टीना का जन्मदिन कैसे मनाया जाये। तय ये हुआ कि हम लोग एक पार्टी रखेंगे और योगिता की जवाबदारी होगी कि वो टीना और उसके माता-पिता को पार्टी में लेकर आये।

“अगर एम-डी रीना को भी साथ ले आया तो?” मैंने पूछा।

“तुम उसकी चिंता मत करो, रीना नहीं आयेगी! कारण ये कि आज शाम को वो अपनी मौसी से मिलने जा रही है और टीना के जन्मदिन के बाद ही लौटेगी”, प्रीती ने कहा।

“प्रीती! मुझे लगता है कि तुम्हें खुद सुनीलू और मिली को पार्टी में इनवाइट करना चाहिये”, योगिता बोली।

“ठीक है! मैं ही फोन किये देती हूँ!” प्रीती ने फोन उठा कर एम-डी का नंबर मिलाया।

“एम-डी बोल रहा हूँ”, दूसरी तरफ से आवाज़ सुनाई दी। इस कहानी के लेखक सुनील अग्रवाल है!

“सर, मैं प्रीती बोल रही हूँ, मैं आपको और मिली को शनिवार की शाम पाँच बजे मेरे घर पर कॉकटेल पार्टी की दावत देने के लिये फोन किया है।”

“शनिवार को हम नहीं आ सकते, उस दिन टीना का जन्मदिन है और मैंने उसे प्रॉमिस किया है कि उसे किसी स्पेशल जगह लेकर जाऊँगा”, एम-डी ने कहा।

“सर! ये तो ठीक नहीं होगा! मेरी दोनों ननदें यहाँ आयी हुई हैं और आपसे मिलना चाहती हैं”, प्रीती ने अपने शब्दों पर जोर देते हुए कहा।

“ये तो बहुत अच्छी बात है, मैं भी एक बार फिर उन्हें चोदना चाहता हूँ, लेकिन तुम ये कैसे कर पाआगी?” एम-डी ने कहा।

“सर! उस दिन की पार्टी को आप टीना की बर्थडे पार्टी समझ लिजिये। इससे एक पंथ दो काज़ पूरे हो जायेंगे”, प्रीती ने सिगरेट का धुँआ छोड़ते हुए कहा।

“हाँ! ये ठीक रहेगा। हम लोग शनिवार की शाम ठीक पाँच बजे पहुँच जायेंगे”, एम-डी दूसरी तरफ से बोला।

“तो ठीक है सर! मैं शनिवार को आपका इंतज़ार करूँगी, और हाँ सर टीना और रीना को लाना मत भूलना”, कहकर प्रीती ने फोन रख दिया।

“प्रीती! तुम तो कमाल की चीज़ हो, अब अंकल जरूर आयेंगे”, रजनी ने कहा।

“अब काम खत्म हो गया है, चलो अब मस्ती की जाये”, योगिता अपना ब्लाऊज़ उतारते हुए बोली।

“हाँ मम्मी, चलो चुदाई की जाये!” रजनी बोली। दोनों माँ बेटियाँ शराब के नशे में चूर थीं और उनकी आँखों में वासना लहरा रही थी।

“चलो लड़कों इनकी कपड़े उतारने में मदद करो, और इन्हें कमरे में ले जाकर इनकी सामुहिक चुदाई करो”, प्रीती ने हँसते हुए कहा, “ऐसा कम बार होता है कि माँ बेटी साथ में चुदाई करवा रही हों।”

चारों ने मिलकर उनके कपड़े उतारे और दोनों नंगी माँ-बेटी सिर्फ हा‌ई-हील के सैंडल पहने नशे में झूमति हु‌ईं उन चारों के सहारे बेडरूम में चली गयीं। ।

“क्या सोच रहे हो भैया?” अंजू ने पूछा। इस कहानी के लेखक सुनील अग्रवाल है!

“शनिवर का दिन और टीना की कुँवारी चूत के बारे में ही सोच रहा होगा और क्या सोचेगा”, प्रीती ने अपना ग्लास हवा में झुलाते हुए कहा। वो भी नशे में धुत्त थी।

“तुम हमेशा की तरह सही कह रही हो प्रीती”, मैंने कहा और सिमरन और साक्षी को बाँहों में भर लिया। “आओ तुम दोनों मुझे शनिवार की थोड़ी सी प्रैक्टिस करा दो।”

सिमरन और साक्षी को चोदने के बाद मैं शनिवार का बेसब्री से इंतज़ार करने लगा। ऐसा लग रहा था कि समय जैसे थम सा गया हो। जैसे तैसे शनिवार का इंतज़ार खत्म हुआ।

शनिवार की सुबह मैं सोकर उठा तो देखता हूँ कि हॉल का सारा फर्निचर फिर से सजाया हुआ था और बीच में एक बेड बिछा दिया गया था। चारों लड़के नंगे उस पर ताश खेल रहे थे।

“प्रीती कहाँ है?” मैंने उनसे पूछा।

“वो किचन में शाम के लिये नश्त बाना रही है”, राम ने जवाब दिया।

मैं किचन में पहुँचा तो देखा कि वो पाँचों भी सिर्फ सैंडल पहने नंगी ही काम कर रही हैं। “क्या हो रहा है?” मैंने पूछा।

“तुम्हारी स्पेशल दवाई से नाश्ता बना रही हूँ, याद है ना आज तुम्हें टीना की कुँवारी चूत फाड़नी है”, प्रीती ने जवाब दिया।

“वो तो मुझे याद है, पर हॉल के बीच में ये बेड क्यों बिछाया हुआ है, क्या शाम को कोई शो होने वाला है?” मैंने पूछा।

“हाँ! शो ही तो होने वाला है, हम सब तुम्हें टीना की चूत फाड़ते हुए देखना चाहते हैं, तुम्हें अकेले ही मज़ा नहीं लेने देंगे”, प्रीती ने कहा।

“हाँ! हम सब भी देखना चाहते हैं”, सभी ने मिलकर कहा।

“तो तुम सब मुझे टीना की चूत फाड़ते देखना चाहते हो?” मैंने कहा।

“तुम्हें कोई प्रॉब्लम तो नहीं है ना?” प्रीती ने पूछा।

“मुझे तो कोई प्रॉब्लम नहीं है, पर टीना को शरम आयी और वो ना मानी तो?” मैंने कहा।

“टीना अगर नहीं मानी तो उस समय सोचेंगे, अब तुम जा कर तैयार हो जाओ। रजनी टीना को लेकर आती ही होगी”, प्रीती बोली। मैं नहा धोकर तैयार हो बाहर आया कि दरवाजे पर घंटी बजी। प्रीती ने अपना हाऊज़ कोट पहन कर दरवाजा खोल दिया।

दरवाजे पर रजनी और टीना थी। “थैंक गॉड! तुम लोग आ गये, आओ अंदर आओ…… मैं तो समझी कि कहीं एम-डी को भनक तो नहीं लग गयी”, प्रीती ने रजनी से कहा।

प्रीती उन्हें लेकर हॉल में आयी। टीना बहुत ही सुंदर लग रही थी, उसका चेहरा गुलाब की तरह खिला हुआ था और उसके गुलाबी होंठ…… जी कर रहा था कि अभी आगे बढ़ कर उन्हें चूम लूँ।

टीना ने जब सबको नंगा देखा तो शरमा गयी और अपनी गर्दन झुका कर बोली, “रजनी दीदी! ये सब नंगे क्यों हैं? “

“ये नंगे नहीं हैं, आज ये सब जनब अवस्था में तुम्हारा जन्मदिन स्पेशल तरीके से मनायेंगे”, प्रीती बोली, “आओ आज मैं तुम्हें अपने हाथों से तैयार करती हूँ”, कहकर प्रीती टीना को बेडरूम में ले गयी।

“प्रीती इसकी चूत के बाल साफ करना मत भूलना”, रजनी ने कहा।

“मुझे याद है! नहीं भूलूँगी!” प्रीती बेडरूम में जाते हुए बोली।

“इतनी देर कहाँ लगा दी?” मैंने रजनी से पूछा। इस कहानी के लेखक सुनील अग्रवाल है!

“शुक्र करो कि हम लोग पहुँच गये, वर्ना अंकल ने तो सब प्लैन चौपट कर दिया था”, रजनी अपने कपड़े उतारते हुए बोली।

“अच्छा!!! ऐसा क्या हुआ?” मैंने पूछा।

“क्या तुम अपने कपड़े नहीं उतारोगे?” रजनी बोली।

“मैं बाद में उतार दूँगा, मुझे ज्यादा वक्त नहीं लगेगा। पहले तुम बताओ क्या हुआ?” मैंने फिर पूछा।

हाई पेन्सिल हील के सैंडलों के अलावा अपने सब कपड़े उतार कर रजनी नंगी हो गयी और उसने बताया:

मैं और टीना तैयार हो कर अंकल के कमरे में पहुँचे और उनसे जाने की इजाज़त मांगी तो वो बोले कि “ऐसी भी क्या जल्दी है, तुम लोग रुको और हमारे साथ ही चलना।”

मुझे काटो तो खून नहीं फिर भी मैं हिम्मत कर के बोली कि “लेकिन अंकल क्यों, हम दोनों जाने के लिये तैयार हैं और आपको अभी कम से कम आधा घंटा लगेगा। हमें जाने दीजिये ना।”

इतने में मिली आँटी हमारे बचाव में आ गयी और बोली कि “जब बच्चे तैयार हैं तो तुम क्यों उन्हें रोक रहे हो, रजनी सही कह रही है हमें अभी आधा घंटा लगेगा, इनके जल्दी जाने में बुराई क्या है?”

अंकल ने कहा कि “तुम सुनील को नहीं जानती, वो मौका मिलते ही टीना की कुँवारी चूत चोद देगा।”

टीना बोली कि “पापा…. ऐसे कैसे चोद देगा, मैं क्या बच्ची हूँ कि जिसका मन जब चाहा मुझे चोद देगा।”

अंकल ने कहा कि “मुझे यही तो डर है कि तुम अब बड़ी हो गयी हो।”

मेरी मम्मी बोली कि “तुम बेकार ही सुनील पर शक कर रहे हो….. जब उसका घर उसके मेहमानों से भरा पड़ा है तो वो टीना की चूत कैसे फाड़ेगा? फिर तुम भी तो वहाँ जा ही रहे हो।”

अंकल बोले कि “ठीक है! जाओ बच्चों इंजॉय करो और सुनील से कहना कि हम ठीक पाँच बजे पहुँच जायेंगे।”

मैंने रास्ते में टीना से पूछा कि “क्या तुम अपनी चूत चुदवाने के लिये तैयार हो”, तो उसने हाँ में जवाब दिया।

रजनी की बात सही थी। प्रीती और टीना ने हॉल में कदम रखा। दोनों ने सिर्फ हाई-हील के सैंडल पहन रखे थे, बाकी बिल्कुल ही नंगी थीं। टीना ने अपने हाथों से अपनी सफ़ाचट चूत छुपा रखी थी।

“अपनी गोरी और प्यारी चूत को मत छुपाओ टीना, इन सबको तुम्हारी चूत देखने दो”, रजनी बोली।

उसकी गोरी चूत को देखते ही मेरे लंड में तनाव आ गया। जैसे ही मैं अपने कपड़े उतार कर नंगा हुआ, मेरा लंड तन कर आसमान की तरफ खड़ा हो गया। मेरे लंड का सुपाड़ा एक नयी चूत की तमन्ना में और ज्यादा फूल कर लाल हो गया।

“वाओ!!!! क्या लंड है”, अंजू बोली।

“ये क्या बुरा है?” जय ने अपने लंड की ओर इशारा करते हुए कहा।

“बुरा तो नहीं है पर छोटा है”, कहकर अंजू ने जय के लौड़े को चूम लिया।

प्रीती टीना को ले कर मेरे पास आयी और उसे मेरी और ढकेल कर बोली, “लो अब…. आज की बर्थडे गर्ल को संभालो और इसका अच्छी तरह से जन्मदिन मनाओ।”

मैं टीना को अपनी बाँहों में भर कर चूमने लगा। मेरे हाथ उसकी चूचियों को भींच रहे थे। मैंने उसे धीरे से गोद में उठा कर बेड पर लिटा दिया और खुद उसके बगल में लेट गया। अब मैं उसके होंठों को चूस रहा था और हाथों से उसके मम्मे सहला रहा था।

कुछ देर तक तो टीना ने साथ नहीं दिया। फिर वो भी साथ देने लगी और वो भी मेरे होंठों का रसपान कर रही थी। वो अपनी जीभ मेरे मुँह में डाल कर मेरी जीभ से खेलने लगी।

पाँच मिनट बाद मैं उसके ऊपर आ गया और अपना लंड उसकी चूत पर रगड़ने लगा। उसने अपनी टाँगें इकट्ठी की हुई थी। मैं जोर-जोर से उसके होंठों को चूसते हुए अपना लंड और जोर से रगड़ने लगा। “आआआआआहहहहहहह” कहकर उसने अपनी टाँगें थोड़ी खोल दी। इस कहानी के लेखक सुनील अग्रवाल है!

“सुनील अब प्लीज़!!!! मुझे इस तरह तरसाओ नहीं, मेरी चूत में अब लंड डाल दो ना….. मुझसे नहीं रहा जाता”, कहकर उसने अपनी टाँगें पूरी फैला दीं।

“थोड़ा सब्र करो मेरी जान!!! अभी घुसाता हूँ”, कहकर मैंने चारों तरफ देखा। प्रीती और रजनी हमें देख रही थी और बाकी सब एक दूसरे के शरीर को सहला रहे थे। इतने में दरवाजे की घंटी बजी।

“सब लोग ध्यान दो! अब चूत फटने की घड़ी आ गयी है”, प्रीती बोली और अपना हाऊज़-कोट पहनते हुए दरवाजा खोलने गयी।

मैं देख तो नहीं सकता था पर मुझे सुनाई दिया, “आइये सर, योगिता, मिली जी….. आप सब का हमारे घर में स्वागत है”, प्रीती ने उनका अभिवादन किया।

मैंने अपने लंड को टीना की चूत के छेद पर रख कहा, “थोड़ा सहन कर लेना डार्लिंग! शुरू में थोड़ा दर्द होगा।” उसने हिम्मत दिखते हुए सहमती में ‘हाँ’ कहा।

मैंने अपने लंड का जोर का धक्का लगाया और मेरा लंड उसकी झिल्ली को फाड़ता हुआ उसकी चूत में जड़ तक समा गया।

“आआआआआआआआआईईईईईई मर गयीईईई बहुत दर्द हो रहा है…..” टीना दर्द के मारे चींखी। मैंने अपना लंड धीरे- धीरे अंदर बाहर करना शुरू किया।

“क्या बहुत दर्द हो रहा है?” मैंने उसकी चूचियों को सहलाते हुए कहा।

“हाँ थोड़ा हो रहा है पर तुम रुको मत और मुझे चोदते जाओ”, उसने अपने कुल्हे उठाते हुए कहा।

“ये कौन चींख रहा है?” एम-डी ने पूछा।

“मुझे तो टीना की आवाज़ लग रही है”, मिली बोली।

“हाँ वो टीना की आवाज़ ही है, मुझे लगता है कि सुनील ने टीना को उसके जन्मदिन का तोहफ़ा दे दिया है”, योगिता हँसते हुए बोली।

“ओह गॉड! सुनील ने मेरी टीना की चूत फाड़ दी!!!” कहते हुए एम-डी हॉल की ओर लपका। पीछे तीनों औरतें भी आयी।

मैं टीना की चूत में धीरे-धीरे धक्के मार रहा था और वो कमर उचका कर मेरा साथ दे रही थी।

“सुनील रुक जाओ!!! ये मेरी बेटी है!!!” एम-डी जोर से चिल्लाया।

“सुनील! ये तुम क्या कर रहे हो?” मिली ने बेवजह पूछा।

“मिली! क्या तुम अंधी हो गयी हो? देख नहीं सकती कि सुनील टीना की चुदाई कर रहा है”, योगिता जोर से हँसते हुए बोली।

“योगिता, जिस तरह से तुम हँस कर बोल रही हो उससे तो यही लगता है कि तुम पहले से जानती थी कि क्या होने वाला है?” एम-डी गुस्से में बोला।

“हाँ! मैं जानती ही नहीं थी बल्कि ये सब मैंने ही प्लैन किया था।”

“तुमने ऐसा क्यों किया योगिता, मैंने तुम्हारा क्या बिगाड़ा था?” एम-डी बोला।

“अपनी बे-इज्जती का तुमसे बदला लेने लिये”, योगिता बोली।

“तुम्हारी बे-इज्जती? मैंने कब तुम्हारे साथ दुर्व्यवहार किया?”

“मुझे कब बे-इज्जत किया? भूल गये वो होटल शेराटन की शाम…. जब तुमने मेरी चूत को अपने बाप की जायदाद समझ कर सुनील को पेश की थी। मुझसे पहले पूछा भी नहीं और जब मैंने मना किया तो तुमने मुझे रजनी की चूत फाड़ देने की धमकी दी जबकि तुम उसको कुछ दिन पहले ही चोद चुके थे….” योगिता ने नफ़रत भरे शब्दों में कहा।

“क्या?? तुमने अपनी बेटी समान भतीजी को चोदा? मैंने तुमसे ज्यादा बेशर्म इंसान नहीं देखा!” मिली उसे घूरती हुई बोली।

“मिली डार्लिंग! इन लोगों ने मेरे साथ छल किया था, मुझे नहीं मालूम था कि वो रजनी है”, एम-डी ने धीरे से कहा।

“अब तुम कुछ भी कहो….. तुम इतने गिरे हुए इंसान हो कि कल अपनी बेटियों को भी चोदना चाहोगे!” मिली पलटते हुए नफ़रत से बोली।

“मेरा विश्वास करो मिली, ये सब प्रीती और सुनील की चाल थी।”

“ये सही है कि इसे पता नहीं था कि वो रजनी है पर इसे मेरे साथ ऐसा करने का क्या हक है? ” योगिता बोली।

“क्या तुम्हें सुनील के लंड से मज़ा नहीं आया?” एम-डी ऊँची आवाज़ में बोला।

“मज़ा आया तो क्या, सवाल हक का है”, योगिता भी ऊँचे स्वर में बोली।

इससे पहले कि बात झगड़े का रूप ले लेती, प्रीती बीच में बोली, “तुम लोग सब चुप हो जाओ….. प्लीज़ सब शाँत हो जायें।”

जब सब शाँत हो गये तो उसने पूछा, “क्या आप लोगों ने सुना टीना ने क्या कहा?” उन्होंने ना में गर्दन हिलायी।

“टीना! तुमने क्या कहा था…. जरा दोबारा तो कहना!” प्रीती ने टीना से कहा।

“ओह सुनील! तुम रुक क्यों गये, कितना अच्छा लग रहा था, और चोदो ना…..” टीना ने सिसकते हुए कहा।

“सॉरी मेरी जान! मैं थोड़ा भटक गया था”, कहकर मैं अपना लंड फिर अंदर बाहर करने लगा।

“जो होना था सो हो गया….. अब झगड़ने से कोई फ़ायदा नहीं है। टीना की चूत फट चुकी है और वो मज़े से चुदवा रही है। उसे मज़ा लेने दो और आप लोग भी मज़ा लो”, प्रीती ने कहा, “लड़कियों! यहाँ आओ।” जब लड़कियाँ नज़दीक आयीं तो उसने उनका एम-डी से परिचय कराया, “सर! ये सिमरन और साक्षी हैं, अंजू और मंजू से तो आप मिल ही चुके हैं।”

टीना और झगड़े को भूल कर एम-डी ने उनकी चूचियाँ दबाते हुए कहा, “काफी सुंदर और मस्त हैं।”

“ऊऊऊऊहहहह!” वे सिसकी।

“तो मेरी तितलियों….. बताओ तुम्हारी चूत कैसी है?” एम-डी ने उनकी चूत को रगड़ते हुए पूछा।

“भट्टी की तरह गरम!” सिमरन ने अपना पैग पीते हुए कहा।

“और आपके लंड की प्यासी……” साक्षी ने एम-डी के लंड को दबाते हुए कहा। बाकियों की तरह दोनों पर शराब का नशा सवार था।

“तो तुम दोनों में पहले कौन चुदवाना चाहेगा?” एम-डी ने पूछा।

“पहले मैं चुदवाऊँगी”, साक्षी एम-डी को पकड़ बोली।

“नहीं मैं बड़ी हूँ…… पहले मैं!” सिमरन बोली।

“अच्छा झगड़ा मत करो, बेडरूम में चल कर तय करेंगे कि कौन पहले चुदवायेगा”, कहते हुए एम-डी उन्हें ले कर बेडरूम में चला गया। नंगी अंजू और मंजू भी ऊँची ऐड़ी की सैंडल खटखटाती और नशे में झूमती उनके पीछे-पीछे चली गयीं।

“योगिता और मिली! ये चार तने-खड़े लंड तुम लोगों के लिये हैं, चाहे जैसे चुदवा सकती हो”, प्रीती ने चारों लड़कों की ओर इशारा करके कहा।

उनके खड़े लंड को देख कर मिली ये भूल चुकी थी कि उसकी बेटी की चूत अभी-अभी चुदी है और वो मज़े से चुदवा रही है। मैंने देखा कि योगिता और मिली ने मिल कर इतनी सी देर में व्हिस्की की एक पूरी बोतल पी ली थी और बाकी औरतों की तरह अपने हाई हील के सैंडलों के अलावा सारे कपड़े उतार कर नंगी हो चुकी थीं।।

जय और श्याम के लंड पकड़ कर मिली बोली, “काफी मोटे और लंबे हैं, योगिता तुम बाकी दो को लेकर बेडरूम में आ जाओ हम दोनों मिलकर इनका सारा रस निचोड़ लेंगे।” मिली की आवाज़ नशे में बहक रही थी।

“ये चार लंड हैं, तुम दोनों भी हमारा साथ क्यों नहीं देती?” योगिता ने प्रीती और रजनी से कहा।

“नहीं हम लोग यहीं ठीक हैं…. सुनील टीना को चोदने के बाद हमारा खयाल रखेगा”, प्रीती ने कहा।

योगिता राम और विजय को लंड से पकड़ कर नशे में लड़खड़ाती हुई मिली के पीछे बेडरूम में चली गयी।

ये सब तो चल ही रहा था और मैंने अब अपने धक्कों की रफ़्तार बढ़ा दी।

“ओहहहह सुनील हाँआंआं आऔर जोर से, चोदो मुझे…..” टीना सिसकी।

मैं और तेजी से धक्के मारने लगा। इस कहानी के लेखक सुनील अग्रवाल है!

“हाँआआआआ ऐसे ही….ईईई……. कितना अच्छा लग रहा है!!!!” टीना मेरे धक्कों का साथ देते हुए बोली।

मैं उसे चोदते हुए उसके मम्मे दबा रहा था और उसके होंठों को चूस रहा था। “ओहहहहहहह सुनील हाँ!!!!! ऐसे ही!!!!! ओहहहहह मेरा छूटने वाला है….. ओहहहह छूटा…आआआआ।” और इतने में उसकी चूत ने पानी छोड़ दिया। मुझे लगा जैसे किसी नदी पर बांध को खोल दिया हो।

मैंने अपने स्पीड और तेज कर दी। “ओहहह टीना तुम्हारी चूत कितनी प्यारी है… रानी!!!” कहते हुए मैंने भी अपना वीर्य उसकी चूत में उढ़ेल दिया और उसे कस कर बाँहों में जकड़ लिया। मेरे लंड की पिचकारी ठीक उसकी बच्चे-दानी पर गिर रही थी। मैंने उसे चोदना चालू रखा।

“टीना! जब तुम्हारी चूत से पहली बार पानी छूटा तो तुम्हें कैसा लगा?” रजनी ने पूछा।

“दीदी! बहुत अच्छा लगा, ऐसा लगा कि मैं जन्नत में पहुँच गयी हूँ….” टीना मेरे धक्कों का साथ देते हुए बोली।

“लगता है मेरा फिर छूटने वाला है”, कहते हुए टीना ने अपनी दोनों टाँगें मेरी कमर पे जकड़ दीं। उसके सैंडलों की ऐड़ियाँ मेरी कमर पे खरोंच रही थीं। मुझे भी अपने लंड में तनाव सा महसूस हुआ। वो मुझे बाँहों में जकड़ कर जोर-जोर से चिल्ला रही थी, “हाँ हाँ सुनील!!!! और तेजी से धक्के मारो…..हाँ और जोर से!!!!” और उसकी चूत ने फिर पानी छोड़ दिया। मेरा भी पानी छूट गया और हम दोनों एक दूसरे को बाँहों में जकड़े अपनी साँसें संभालने लगे।

“ओह सुनील!!!! अब मुझे चोदो”, प्रीती बिस्तर पर धड़ाम से गिरते हुए बोली, “रजनी !अंदर से किसी लड़के को बुलाओ जो टीना की चूत को चोद सके।” प्रीती और रजनी भी नशे में धुत्त थीं।

जैसे ही मैंने अपना लंड प्रीती की चूत में घुसाया तो मैंने देखा कि जय टीना पर चढ़ कर अपना लंड उसकी चूत में घुसा रहा है।

“क्या ये भी मुझे चोदेगा?” टीना ने फूछा। इस कहानी के लेखक सुनील अग्रवाल है!

“ये ही नहीं बाकी सब भी तुम्हें चोदेंगे!” प्रीती बोली।

प्रीती को चोदने के बाद मैंने रजनी को भी चोदा। इतने में मैंने प्रीती को कहते सुना, “राम! तुम ये क्या कर रहो हो।“

“टीना की गाँड मारने की तैयारी कर रहा हूँ”, राम ने जवाब दिया।

“नहीं! टीना की गाँड मारने का पहला हक सिर्फ़ सुनील का है, तुम इसकी चूत चोदो जैसे औरों ने चोदा है….” प्रीती ने नशे में लड़खड़ाते से स्वर में जवाब दिया।

मेरे कहने पर राम ने टीना की चूत की चुदाई शुरू कर दी।

मैंने कमरे में झाँक कर देखा कि एम-डी सिमरन की चुदाई कर रहा था और दूसरे कमरे में श्याम और विजय योगिता और मिली को चोद रहे थे। अंजू और मंजू भी एक दूसरे की चूत चाट रही थीं और कामुक्ता से कराह रही थीं। उन सबकी सिसकरियाँ और मादक चींखें बता रही थी कि उन्हें बहुत मज़ा आ रहा है।

“सुनील! क्या तुम टीना की गाँड मारने को तैयार हो?” प्रीती ने पूछा।

“एक दम डार्लिंग!” मैंने अपने खड़ा लंड दिखाते हुए कहा।

“तो फिर किसका इंतज़ार कर रहे हो? शुरू हो जाओ!” रजनी बोली।

मैं टीना के पास आकर उससे बोला, “चलो टीना! अब घोड़ी बन जाओ….. मैं तुम्हारी गाँड मारूँगा।”

“नहीं सुनील! गाँड में नहीं!!!” टीना ने याचना भरे स्वर में कहते हुए प्रीती और रजनी की ओर देखा।

“गाँड तो तुम्हें मरवानी पड़ेगी!!!!” प्रीती बोली। इस कहानी के लेखक सुनील अग्रवाल है!

“नहीं दीदी! मैं मर जाऊँगी, सुनील का लंड कितना बड़ा और मोटा है”, टीना बोली।

“क्या मैं और प्रीती मर गये जो तू मर जायेगी, अब जैसा सुनील बोलता है वैसा कर”, रजनी बोली।

टीना घोड़ी बन गयी और मैंने थोड़ा थूक लेकर उसकी गाँड के भूरे छेद पर रगड़ दिया। अपने लंड को छेद पर रख कर थोड़ा जोर लगाया कि वो जोर से चिल्लायी, “ओहहहहह मर गयीईईई….. सुनील मेरी गाँड को बख्श दो!!!!”

“छोड़ो मुझे!!! उठो मेरे ऊपर से…… मुझे सुनील को टीना की गाँड मारने से रोकना है”, एम-डी की चिल्लाने की आवाज़ आयी।

“मारने दो उसकी गाँड!!!! इधर मेरा छूटने वाला है”, सिमरन ने एम-डी को पकड़ते हुए कहा।

एम-डी सिमरन को जबरदस्ती अलग करते हुए हॉल में दाखिल हुआ। उसके पीछे चारों लड़कियाँ भी नशे में झुमती हुई आयी। “रुक जाओ सुनील!!! टीना की गाँड मत मारना, मैं कहता हूँ रुक जाओ?” एम-डी जोर से चिल्लाया।

उसकी चिल्लाहट पर ध्यान ना देते हुए मैंने पूरे जोर से अपना लंड टीना की गाँड में घुसा दिया। जैसे ही लंड उसकी गाँड को चीरता हुआ अंदर तक गया तो टीना दर्द से छटपटाने और जोर से चिल्लाने लगी, “मर गयीईई, सुनील निकाल लो!!!! बहुत दर्द हो रहा है…. ऊऊऊऊईईईई माँआआआआ!”

एम-डी ने जब देखा कि मैं उसकी बातों पे ध्यान नहीं दे रहा तो वो दूसरे में कमरे में भागा, “मिली तू यहाँ चुदवा रही है और दूसरे कमरे में सुनील हमारी बेटी की गाँड मार रहा है।”

“किसे परवाह है….. मारने दो उसे उसकी गाँड, मुझे चुदवाने में मज़ा आ रहा है”, वो अपने कुल्हे उठा कर चुदवाते हुए बोली, “हाँ ऐसे ही…. और जोर से।” साफ ज़ाहिर था कि मिली को शराब और चुदाई के नशे में अपनी मस्ती के अलावा किसी भी बात की परवाह नहीं थी।

“सुनीलू अब कुछ नहीं हो सकता, सुनील का लंड उसकी गाँड को फाड़ चुका है। जाओ और जा कर चूत के मज़े लो… अगर तुम में ताकत बची हो तो….” योगिता जोर से हँसते हुए बोली।

“टीना की गाँड भी इसे चार चूतों को चोदने से नहीं रोक सकती….. जब तक कि इसमें ताकत ना रहे और ताकत के लिये ये अपनी दूसरी बेटी की चूत को भी चुदवा सकता है”, मिली जोर से बोली, “क्यों ठीक बोल रही हूँ ना डार्लिंग! जाओ और अब चुदाई के मज़े लो और हमें भी मज़े लेने दो…।”

एम-डी बिना एक शब्द कहे कमरे से बाहर आ गया और लड़कियाँ उसे लेकर वापस बेडरूम में घुस गयीं। जब मैं टीना की गाँड मार कर अलग हुआ तो रजनी ने उससे पूछा, “टीना! क्या गाँड मरवाने में मज़ा आया?”

“दीदी! शुरू में दर्द हुआ था लेकिन बाद में मज़ा आया”, टीना बोली।

“चलो लड़कों! अब तुम सब टीना की गाँड मार सकते हो”, प्रीती ने आवाज़ लगायी। इस कहानी के लेखक सुनील अग्रवाल है!

सभी ने फिर बारी-बारी से टीना की गाँड मारी। हम सब आराम कर रहे थे कि एम-डी की आवाज़ सुनाई दी, “बस लड़कियों! अब मेरे लंड में और ताकत नहीं है, मैं घर जाऊँगा।” एम-डी कपड़े पहन बाहर आया और मिली के पास पहुँचा।

“मिली! चलो घर चलो।”

“तुम्हें जाना है तो जाओ मेरा अभी हुआ नहीं है।” मिली अपने कुल्हे उछालती हुई बोली, “हाँआआआ राम और जोर से चोदो….. ओहहहह आआआहहह।”

“मैंने कहा ना कि चलो यहाँ से!!!! राम छोड़ो उसे, हमें घर जाना है”, एम-डी ने थोड़ा गुस्से में कहा।

राम ने उसकी बातों पे ध्यान दिये बिना दो चार धक्के लगा कर अपना पानी उसकी चूत में छोड़ दिया।

“योगिता! तुम भी हमारे साथ क्यों नहीं चलती? सुनीलू के लंड में तो जान नहीं है…. शायद हम दोनों मिलकर कुछ कर सकें”, मिली लड़खड़ाते स्वर में बोली।

“ठीक है! चलती हूँ पर पहले मुझे खलास तो होने दो…” योगिता बोली, “हाँ श्याम चोदो मुझे जोर से….. और जोर से…… मेरा छूटने वाला है।”

श्याम भी छूटने के करीब था और दो चार धक्कों के बाद वो उसके बदन पर निढाल पड़ गया। इस कहानी के लेखक सुनील अग्रवाल है!

“साथ में मिलकर कुछ करेंगे???” टीना ने पूछा।

“थोड़े दिनों में तुम सब जान जाओगी”, रजनी ने कहा।

थोड़ी देर बाद में योगिता और मिली ने नशे में झूमते हुए जैसे-तैसे अपने कपड़े पहने और एम-डी के साथ जाने के लिये तैयार हो गयीं। “टीना! कपड़े पहनो और हमारे साथ चलो”, एम-डी कड़क कर टीना से बोला। इस कहानी के लेखक सुनील अग्रवाल है!

टीना सोच में पड़ गयी और चारों तरफ देखाने लगी पर उसकी मदद में कोई कुछ नहीं बोला। वो ही हिम्मत करके बोली, “पापा! आप लोगों को जाना है तो जाओ…. मुझे यहाँ अच्छा लग रहा है।” उसकी बातों को सुन हम सब ने ताली बजा कर स्वागत किया।

“सुनीलू!!! टीना इक्कीस की हो गयी है और वो जो चाहे कर सकती है, और वैसे भी सुनील उसकी गाँड और चूत दोनों फाड़ ही चुका है। वो और चुदवाना चाहती है तो उसे रहने दो”, मिली एम-डी को घसीटती हुई बाहर ले गयी। Hindi Sex Stories

Hindi sex stories

हाय पाठको, यह मेरी पहली कहानी है। मेरा नाम मोनु है। मेरी उम्र 25 साल है। मैंने अपनी पढ़़ाई पूरी कर ली है। मेरी लम्बाई पूरी छः फ़ुट की है, और मेरा तगड़ा लण्ड आठ इंच लम्बा है।

यह कहानी बताने में मुझे बहुत मजा आ रहा है लेकिन इसे जब मैंने अन्जाम दिया तब तो मुझे बहुत मजा आया।

मेरी चचेरी बहन काजल अभी 20 साल की है जिसको मैंने चोदा था। लंबाई उसकी ज्यादा नहीं है कोई पाँच की होगी। लेकिन उसकी चूचियाँ बड़ी-बड़ी है। वो स्मार्ट भी है है। उसकी गाण्ड पीछे से उभरी हुई भी है।

एक दिन जब हम लोग सभी शादी में गए थे उस दिन वो घर में थी। हम लोग सब शादी में थे तभी उसकी मम्मी ने मुझे घर जाने को कहा। खाना लेकर जाना था।

मैंने गाड़ी निकाली फ़िर जब मैं घर में पहुंचा तो मैंने दखा कि घर में कोई नहीं था। फ़िर मुझे बाथरूम से पानी गिरने की आवाज आई। वो नहा रही थी।

फ़िर मैं बैठ गया फ़िर मैंने देखा कि उसके बाथरूम के दरवाजे में होल था। मैंने जब उस होल से अन्दर देखा तो मेरे होश उड़ गए। काजल अपने हाथ से अपनी चूत को सहला रही थी।

यह देख कर मैं पागल हो गया। मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था। फ़िर मैंने देखा कि वो अपने हाथों से अपनी चूचियों को सहला रही थी। उसके चेहरे के भाव देख कर मेरा लण्ड खड़ा हो गया। मैं अपने लण्ड को सहला रहा था। फ़िर देखने लगा।

मुझे यकीन नहीं हो रहा था यह ऐसे भी कर सकती है। फ़िर मैंने सोचा कि हर लड़की की चाहत होती है। फ़िर उसने अपने गद्दे को सहलाया। फ़िर उसमे उसने पानी डाला और फ़िर वो नहाने लगी।

मैं बाहर जाकर बैठ गया, वो कपड़े पहन कर जैसे ही बाहर आई।

मैंने अपने लण्ड को सहलाया। उसने मेरे लण्ड की तरफ़ देखा। फ़िर मैंने कहा, ‘मैं तुझे खाना देने आया हूँ।’

फ़िर वो किचन में गई। मैं भी उसके पीछे गया। फ़िर मैंने हिम्मत करके उसके कंधे पर हाथ लगाने लगा। वो वहाँ से चली गई। वो बाल झटकने लगी थी।

मैंने कहा- ‘मैं बाल झटक देता हूँ।’

काजल चुदने को हुई राजी
फ़िर मैं उसके बाल झटकने लगा। मैंने उसके बाल उसके बूबस के उपर रख दिए और हाथ लगाने लगा। वो समझ गई कि मैं क्या चाहता हूँ।

फ़िर मैं उसके बूबस को दबाने लगा। वो शरमाने लगी और नजरें झुकाए जाने लगी। फ़िर मैंने उसे पकड़ा और उसके स्तनों को दबाने लगा। वो मदहोश होने लगी। मैं उसके पेट पर हाथ घुमाने लगा।

उसने मेरा हाथ पकड़ कर अपनी चड्डी के अन्दर डाल दिया। मैं उसकी चूत को सहलाने लगा। वो गर्म हो गई थी। फ़िर मैं उसको चूमने लगा, वो मुझे इस काम में सहायता करने लगी।

उसका हाथ पकड़ कर मैंने अपने लण्ड पर रख दिया। वो जम कर पकड़ कर दबाने लगी और फ़िर वो नीचे बैठ गई।

मेरी पैंट की जिप खोली और 8 इंच लम्बा लण्ड बाहर निकाल लिया। वो तो लण्ड को देख कर पागल हो गई।

वो बोली- ‘यह लण्ड मेरी प्यारी चूत में जाएगा तो मैं तो मर जाऊँगी।’

मैंने कहा- ‘पहले इसे मुँह में तो ले।’

वो बड़े प्यार से जुबान से चाटने लगी। मेरे मुँह से आवाज़ आने लगी- ‘पूरा मुँह में घुसेड़ ले !’

मुझे बहुत मजा आ रहा था। फ़िर मैंने उसके पूरे कपड़े उतार दिए। वो शरमा गई।

मैंने कहा- ‘पहले कभी सेक्स किया है?’

वो बोली- ‘नहीं।’

मैंने बोला- ‘मैं ही तेरी सील आज तोड़ूंगा, बहुत मजा आएगा।’

फ़िर मैं उसके चूचों को जम कर दबाने लगा, वो ‘आह आह्ह’ करने लगी। उसके गुलाबी गुलाबी निप्पल बहुत प्यारे दिख रहे थे। उसको मैं अपने दांतो से काटने लगा।

वो जोर से आह्ह करने लगी, बोली- ‘जम कर दबाओ मुझे आज जवान लड़की बना दो।’

मैंने अपना मुख उसके चूत पर रख दिया और चाटने लगा। चूत की खुशबू बहुत प्यारी थी। मैंने एक घण्टे तक उसकी चूत चाटी।

काजल की कुँवारी चूत चुदाई
वो मदहोश हो गई, वो बोली- ‘मेरी चूत फाआड़ दो आह आह आह् और जमम केईई।’

मैंने अपना लण्ड उसके चूत पर रख दिया। एक गर्म लोहे की सलाख की तरह जल रहा था मेरा लण्ड।

वो बोली ‘कितना गर्म है तुम्हारा लण्ड।’ मैंने होल पे रखा और पुश किया। वो चिल्लाई।

मैंने फ़िर घुसेड़ा, लेकिन मेरा लण्ड छेद से बाहर निकल गया। वो बोली ‘जा के पहले सीख कर आओ फ़िर मेरी चूत फ़ाड़ना।’

मुझे गुस्सा आया। मैंने उसकी टांगो को फ़ैलाया और लण्ड डाल दिया।

वो चिल्लाई, बोली ‘मत करो बहुत दर्द हो रहा है।’ लेकिन मैं कहाँ रुकने वाला था वो दर्द से चिल्ला रही थी। ‘आह्ह नहीई धीरेए प्लीलीज सीई!’

थोड़ी देर बाद वो मदमस्त हो गई और बड़े प्यार से लेने लगी और बोली, ‘मेरे राजा जरा जम के चोदो, मजा आ रहा है।’

उसकी चूत से खून निकलने लगा। वो डर गई। मैंने कहा डरना नहीं, ऐसा पहली बार होता है।

वो समझ गई और मैं फ़िर चोदने लगा बहुत मजा आ रहा था। फ़िर मैंने उसके दोनों बूबस के बीच में लण्ड रगड़ने लगा। बहुत मजा आ रहा था।

फ़िर उसके चूत चाटने लगा। फ़िर चूत में उंगली डालने लगा। फ़िर 8 इंच लम्बा लण्ड डाल दिया।

वो बोली ‘फ़ाड़ दो राजा आह।’ 25 मिनट तक चोदने के बाद वो ठण्डी होने लगी थी।

मेरा माल भी गिरने वाला था। मैंने अपना लण्ड बाहर निकाला और उसके मुख में डाल दिया।

वो बड़े प्यार से चाटी और हम दोनों बाथरूम में चले गए नहाने लगे।

वो मुझे नहला रही थी, ‘बहुत मजा आ रहा था!’

वो फ़िर बैठ कर मेरे लण्ड को मुँह में भर के चूसने लगी।

मेरा लण्ड फ़िर खड़ा हो गया। फ़िर मैंने उसे बाथरूम में चोदा। वो बिल्कुल मदमस्त हो गई थी। मैंने उसको कपड़ा पहनाया।

इस घटना के बाद मैं उसको दो बार और चोद चुका हूँ। यह बात अक्टूबर 2002 की है।

बस दोस्तो यह Hindi sex stories है मेरी।

TOTTAA’s Disclaimer & User Responsibility Statement

The user agrees to follow our Terms and Conditions and gives us feedback about our website and our services. These ads in TOTTAA were put there by the advertiser on his own and are solely their responsibility. Publishing these kinds of ads doesn’t have to be checked out by ourselves first. 

We are not responsible for the ethics, morality, protection of intellectual property rights, or possible violations of public or moral values in the profiles created by the advertisers. TOTTAA lets you publish free online ads and find your way around the websites. It’s not up to us to act as a dealer between the customer and the advertiser.

 

👆 सेक्सी कहानियां 👆