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Antarvasna Sex Stories

हम दोनों आमने सामने Antarvasna Sex Stories ही खड़ी थी, जिमी ने बीच में वह डंडा फंसा कर उसका एक भाग अपनी चूत पर लगा कर और दूसरा मेरी चूत से सटा दिया।

यह नज़ारा बहुत ही रोमांटिक था, हम दोनों ने अपनी अपनी पोजीशन संभाल ली और एक दूसरे की चूचियाँ मसलते हुए अपनी कमर आगे झटकी, डंडे के दोनों सिरे हमारी आँखों से ओझल हो गए, मेरी उत्तेजना का कोई ठिकाना नहीं था, बस इसी तरह हम धीरे धीरे आगे बढ़ते गए और डंडा लुप्त होता गया, कुछ देर में हम दोनों के शरीर आपस में भिड़ गए।

जिमी का अंदाजा सही था, ठीक 6-6 इंच ही हम दोनों के हिस्से आया था, एक अजीब सी मस्ती हम दोनों पर छा गई, हम एक दूसरे की चूची मसलते हुए होंठ चूमने लगी, तभी दरवाजे पर आहट हुई।

‘लगता है बाबूलाल आ गया!’ मैंने खुश होकर कहा।

‘हाँ आहट तो उसी कमीने की है!’ कहते हुए जिमी ने एक झटके के साथ मुझे अपने शरीर से जुदा कर दिया, डंडा फिसलता हुआ मेरी चूत से बाहर हो गया मगर जिमी की चूत मे आधा वैसे ही फंसा था, मेरी आंखे फटी रह गई क्योंकि वह डंडा जिमी के शरीर का ही अंग लग रहा था, जिमी उसी हालत में अपनी चुचियाँ हिलाती हुई दरवाजे की तरफ बढ़ी।

जैसे ही दरवाजा खुला बाबूलाल लड़खडाता हुआ अंदर आ गया, उसकी आँखें सीधी उस डंडे पर जा टिकी- ऐसा लग रहा है यह तुम्हारा ही सामान है मैडम!
उसकी बात सुन कर मुझे हंसी आ गई।

‘अब जमाना आ गया है जब औरतों को डंडे लगवाने पड़ेंगे और तुम मर्दों को झुक कर खाने पड़ेंगे।’ जिमी ने दरवाजा बंद करते हुए कहा।

‘छोड़ो मैडम, यह जमाना अभी बहुत दूर है, आओ पहले तो हमी तुमको अपना डंडा खिलाते हैं।’ उसने अपना पजामा उतार कर एक तरफ रखते हुए कहा।

‘मैं तो बहुत बार खा चुकी हूँ, आज इसे खिलाना है, बेचारी बहुत दिनों से परेशान है।’ जिमी ने मेरी तरफ इशारा करते हुए कहा।

वो जैसे ही मेरी तरफ घूमा मेरा दिल जोर से धड़क उठा, उस समय उसके लंड में हल्की-हल्की उत्तेजना थी लेकिन आकार वही था जो जिमी ने बताया था। यह आदमी है या गधा, मैं यह सोचने को मजबूर हो गई।

‘यह हर परेशानी की दवा है मैडम!’ उसने अपना लंड मुझे दिखाते हुए हिलाया- अब यह आ गया है, सारी चिंता खत्म!

‘हूँ… पहले ही काफी देर हो चुकी है, चलो काम पर लगो!’ जिमी ने उसे मेरी तरफ धकेलते हुए कहा।

बाबूलाल एक ही झटके में मेरे पैरों पे आ गिरा, जिमी भी हंसती हुई मेरे पास आ खड़ी हुई, बाबूलाल औंधे मुंह गिरा था, जैसे ही उसने नजर उपर उठाई उसकी नजर सीधी मेरे चूत पर पड़ी- अरे… बाप… रे… इसमें से तो भाप निकल रही है मैडम!’
बाबूलाल चिल्लाया।

‘क्या मतलब है तेरा?’ जिमी ने अपने पैर से उसका सिर ऊपर उठाते हुए कहा।

‘मतलब साफ है मैडम, इसकी गर्मी से तो मेरा लंड पिघल जाएगा।’ वह हाथ झाड़ता हुआ खड़ा हुआ।

उसकी बात सुन कर मैं दंग रह गई, मैंने झुक कर अपनी चूत देखी मुझे तो कहीं भाप नहीं दिखी।

‘क्या बक रहा है तू?’ जिमी को गुस्सा आ गया, उसने बाबूलाल का लंड पकड़ कर इतनी जोर से झटका मारा कि बेचारा बाबूलाल दर्द से तड़प उठा- मईया… रे मैं तो जा रहा हूँ!
कह कर वो अपने कपड़े उठाने लगा।

उसे जाता देख मैं तो तड़प उठी- हाय… क्यों झगड़ा कर रही हो जिमी? वो जा रहा है!

‘अरे… मैं नहीं वो साला खुद झगड़ा कर रहा है, अगर भाप निकल रही है तो इसमे डरने की क्या बात है?’

‘ज़रा ऊँगली डाल कर देखो, खुद पता चल जाएगा कि मैं क्यों डर रहा हूँ!’

‘ठीक है इसका फैसला अभी हो जाता है!’ जिमी ने बाबूलाल की तरफ देख कर दांत भींचे- अगर तू यहाँ से भागा तो तेरी मूंछे उखाड़ कर तेरे पीछे घुसेड़ दूंगी!’ कहते हुए वो उसी कमरे में गई जहाँ से वो डंडा उठा कर लाई थी जो अब तक उसकी चूत में आधा फंसा हुआ था।

जब वह लौटी तो उसके हाथ में थर्मामीटर था जिससे डॉक्टर बुखार देखते हैं, जिमी ने मुझे बैठा कर मेरी जांघें फैलाई और थर्मामीटर मेरी चूत में आधा फंसा दिया, बाबूलाल भी आँखे फाड़े हुए सामने खड़ा हो गया, तभी एक अजीब बात हो गई, थर्मामीटर मेरी चूत से बाहर उछला और उसके टुकड़े टुकड़े हो गए, हम तीनों की आंखें फटी रह गई।

‘देख… क्या हाल हुआ है थर्मामीटर का! यही हाल इसका होने वाला था!’ बाबूलाल ने अपनी मोटे लंड की तरफ इशारा किया।

‘ओह्ह्ह… अब मेरा क्या होगा जिमी, मैं तो आज बड़ी आशा लेकर यहाँ आई थी यार!’ मैंने तड़प कर कहा।

‘मैंने तुझसे पहले ही कहा था पायल, यह पागल कुतिया की तरह लार टपका रही है।’

‘अब मैं क्या करूँ? कुछ सोच यार, नहीं तो मैं रो पडूँगी!’

‘नहीं…’ वो मेरा कन्धा पकड़ते हुए बोली- आज तुझे नहीं इस पगली को रोना पड़ेगा, इसके आंसू निकलवाना बहुत जरुरी हो गया है।’

उसने बाबूलाल की तरफ देख कर कहा- क्या बोलता है तू?

‘एक गाँधी का नोट और लगेगा मैडम!’ बाबूलाल बोला।

जिमी को गुस्सा आ गया। वो कुछ करती उससे पहले मैंने जिमी से कहा- तुम पैसे दे दो।

‘ठीक है बेटा ले ले तू पैसे, आज मैं भी तुझसे एक एक पैसे का हिसाब लेकर ही रहूंगी।’ जिमी अपने पर्स से रूपए निकाल कर उसे देती हुई बोली।

‘ठीक है.. ठीक है!’ कहता हुआ वह मेरी जांघों के नीचे फर्श पर बैठता हुआ बोला। उसने एक बार कुत्ते की तरह मेरी चूत को सुंघा फ़िर लम्बी जीभ निकाल कर चाटने लगा, उसका स्पर्श बेहद उत्तेजक था। मैं बिन पानी की मछली की तरह छटपटाने लगी।

जिमी मेरे पास बैठ गई, मेरी चूची दबाने लगी और होंठ और गाल चूमने लगी। फिर तो मैं आकाश में उड़ने लगी, मेरा अंग अंग झनझना उठा, मेरी चूत तड़पने लगी, वह मेरी चूत को हाथों से फैला कर चाट रहा था, जिमी ने मेरी चूचियाँ रगड़ डाली, वह उन पर उभरे निप्पल एक बच्चे की तरह चूसने लगी।

मैं मस्ती की वादियों में ऐसा खोई कि मैं अपना नाम पता तक भूल गई। पूरे बदन में मीठी मीठी गुदगुदी उठ रही थी जिसका अहसास मुझे पागल बना रहा था।

मैंने भी कसमसा कर जिमी की छातियों को रगड़ डाला।
उसने तड़प कर मेरे होंठ छोड़ दिये और मस्ती में कसमसा कर एक हाथ से डंडा हिलाने लगी जो बहुत देर से उसकी चूत में फंसा था।
देखते ही देखते आधे से ज्यादा डंडा उसकी चूत में घुस गया था, वह फिर भी उस डंडे को बहुत जोर जोर से हिला रही थी।

‘सी… ई… ई… क्या कर रही है पागल, ऐसे तो ये डंडा टूट जाएगा यार!’ मैंने उसके हाथों को पकड़ते हुए कहा।

‘हूँ… हाँ… छोड़ दे पायल, आज मैं इस डंडे को तोड़ कर ही दम लूंगी!’ उसने मेरा हाथ झटक दिया।

वासना का नंगा नाच शुरू हो चुका था, बाबूलाल ने मेरी चूत चाट चाट कर बहुत सारा रस निकाल दिया था, अब मुझे वहाँ कुछ ठंडक सी महसूस हो रही थी।
अब मैं चूत चटवाने से ऊब गई थी और बाबूलाल को वहाँ से हटा दिया, जब वह खड़ा हुआ तो उसका चेहरा देखने लायक था, उसके होंठ चिपचिपा रहे थे, उसकी मूंछें चूत के रस से भीग कर अकड़ गई थी।

‘हाँ… जी.. अब जरा इसका भी खयाल कर लो!’ वह अपने होंठ चाटता हुआ और अपना विकराल लंड हिलाता हुआ बोला।

‘अरे… इसे कौन छोड़ने वाला है!’ यह कह कर जिमी बेड से कूद गई, उसने इशारे से मुझे भी बुला लिया, मेरे होंठ तो पहले ही फड़फड़ा रहे थे क्योंकि मैंने तीन साल बाद लंड के दर्शन किये थे, हम दोनों पास पास बैठ गई और बाबूलाल का लंड बारी बारी से चाटने लगी।
मैं तो उसे अपने होंठ में दबा कर यह भी भूल जाती कि उसे छोड़ना भी है। जिमी जबरदस्ती खींच कर मेरे मुंह से निकालती।

पुच्च… पुच्च… की आवाज पूरे कमरे में गूँज रही थी, बाबूलाल भी खुल कर मैदान में आ गया।
वह लंड चुसाई का भरपूर आनन्द उठा रहा था, 10 मिनट बाद वह बोला- बस करो मैडम, अब इसे छोड़ दो, इस पर रहम करो तो अच्छा है।’

मैं भी अब यही चाहती थी कि जल्द से जल्द चुदाई-लीला शुरु हो जानी चाहिए।

मैंने फर्श पर हथेलियाँ टिकाई और घुटने मोड़ कर एक पशु की तरह झुक गई, बाबूलाल मेरी गांड के पीछे आ खड़ा हुआ, वो अपने लंड के सुपाड़े को मेरी गांड और चूत पर रगड़ने लगा, हम दोनों की चुसाई के कारण उसका लंड एकदम चिकना हो रखा था, चूत पर लंड रगड़ने से मेरी चूत से भी चिकना रस निकलने लगा, तभी उसने एक झटका मारा कि उसका लंड मेरी चूत के छोटे से द्वार में आ फंसा, ऐसा झटका लगा कि मैं उछल पड़ी।

मैंने बाबूलाल से कहा- अरे… भैया, थोड़ा धीरे पेलो! यह जिमी की चालू मशीन नहीं है जिसमें रोज तेल जाता है, यह मशीन तीन साल से बन्द है, पहले इसे ढीला कर लो फिर जैसे मर्जी हो चलाना।
मैंने कराहते हुए कहा।

‘मैडम जी, आप की सहेली मुझे भैया कह रही है?’ बाबूलाल अपना लंड आगे पेलते हुए बोला।

‘तुझे भैया बोल रही है तो तू बन जा इसका सैयाँ! इसकी चूत में ऐसा लंड पेल कि हरामजादी चुदवाना भूल जाये, साली को बहुत खुजली होती है! मिटा दे सारी खुजली।’ जिमी ने उसे और जोश में लाने के लिए बोला।

अब तो बाबूलाल बंदर की तरह उछलने लगा, उसका लंड मेरी चूत की गहराई में उतर कर ऐसी तैसी कर रहा था, ऐसी तैसी तो कर रहा था लेकिन मजा इतना आ रहा था कि उसका बयाँ मैं यहाँ नहीं कर सकती, मेरे शरीर के साथ साथ मेरी चूचियाँ भी हवा में झूल रही थी, मेरे मुंह से ऐसे शब्द फुट रहे थे- हूँ… सा… आ… आ… ..बाश… बाबूलाल, सी… ई… सी… ई… बस ऊँ… आह… मुझे ऐसे ही झूले की तलाश थी रे…!’

बाबूलाल भी मेरी तरह पागल आदमी था, उसने तो मेरा एक एक पुर्जा खोल कर रख दिया, वह बुरी तरह हाँफता हुआ मुझे मस्ती का झूला झुला रहा था, बेचारी जिमी सामने बैठी अपनी चूत मे फंसा डंडा हिला रही थी, अचानक वह उठी और बाबूलाल के पीछे जा खड़ी हुई।

‘ठहर जा बेटा!’ उसने यह कह कर ढेर सारा थूक अपने डंडे पर लगाया और बाबूलाल की थिरकती गांड से सटा दिया- मैं भी अभी तेरी ऐसी तैसी करती हूँ साले…!’

‘आ… आई… मार… दिया बेचारे पापड़ वाले को साली!’

बाबूलाल की दर्द भरी चीख सुन कर मुझे पूरा अंदाजा हो गया कि जिमी ने बाबूलाल के साथ क्या हरकत की है। यह तमाशा सारी रात चलता रहा।

पता नहीं उस बुड्ढे में क्या जादू है। हर रात मैं उसके पास खिंची चली आती हूँ, जिमी भी हमारे साथ होती है, अब मेरी जिन्दगी बड़े आराम से चुदवाते हुए गुजर रही है। Antarvasna Sex Stories

लेखक : मुन्ना Sex Stories

यह बात हैं कुछ 12-14 साल Sex Stories पुरानी, तब मैं 19 साल का एक हट्टा- कट्टा नौजवान था।

मैं मध्य प्रदेश के एक छोटे से गाँव “सिवामुलिक” में रहता था। हमारे गाँव में हर साल सावन में मेला लगता था और हम सारे दोस्त उस मेले में जाते थे, बहुत मज़े करते थे। मेला काफी प्रसिद्ध था इसलिए आस-पड़ोस के 5-7 गाँव के भी लोग वहाँ आते थे।

मैंने तब तक किसी भी लड़की को चोदा तो क्या नंगा भी नहीं देखा था। मगर हाँ, मेरे दोस्तों ने मुझे किताबों में लड़कियों की नंगी तस्वीरें दिखाई थी। उसमें अनगिनत लड़कियों की तस्वीरें थी, अलग अलग पोज़ेज़ में ! कहीं एक लड़की दो-दो लड़कों के साथ चुदवा रही थी, तो कहीं तीन लड़कियाँ एक लड़के के लौड़े के लिए लड़ रही थी, सभी कुछ सपना सा लगता था और मैं उन्हें देख कर मुठिया मारा करता था।

खैर, उस मेले में जाने का मुख्य तात्पर्य चोदना था, हम हर बार इसी उद्देश्य से वहाँ जाते थे, इस बार भी हम गए।

इस बार का मेला कुछ अलग ही था, इस बार बहुत सी नई दुकानें थी, झूले थे और काफी सुन्दर लड़कियाँ !

एक लड़की मुझे भी भा गई और मैं उसका पीछा करने लगा। वो जहाँ जाती, मैं वहाँ चला जाता, कभी गुबारा लेने तो कभी चूड़ियाँ लेने !

मेरे मामा की भी वहाँ एक चूड़ियों की दूकान थी, वो वहाँ जा पहुंची और भी वहाँ उसके पीछे पीछे मैं भी चला गया।

मुझे आता देख मामा जी ने कहा,” मुन्ना, अच्छा हुआ तू आ गया, आधे घण्टे के लिए दूकान संभाल ! मुझे ज़रा कुछ काम है !

मौका पाकर मैं वहाँ बैठ गया और उसे चूड़ियाँ दिखाने लगा।

उसके गोरे-गोरे हाथ अपने हाथों में लेकर उनमें चूड़ियाँ पिरोने लगा। कभी कोई टाइट चूड़ी से उसे दर्द होता तो वो अपना दर्द अपने होटों को काट कर दर्शाती। यह सब देख-महसूस कर के मेरा तो लौड़ा ही खड़ा हो गया।

मैंने कहा,” आपके हाथ काफी कोमल हैं, मानो रेशम के बने हों !”

और वो शरमा गई। मुझे लगा कि उसे भी मैं अच्छा लगता हूँ।

धीरे धीरे मैं उसका हाथ अपने लौड़े के पास लाते गया, शायद उसने यह महसूस कर लिया और मुझसे कहा,” क्या आप मुझे घर तक छोड़ सकते हैं, रात काफी हो गई है और मेरी सहेलियाँ भी नहीं दिख रही !”

मैं फट से तैयार हो गया, मामाजी आये तो उनसे सायकिल ली और चल पड़ा उसके साथ।

रास्ते में उससे उसका नाम पूछा।

“रति” उसने जवाब दिया।

काफी देर चलने के बाद हम एक सुनसान जगह पर पहुँचे, मैंने उसका हाथ पकड़ा और उसे पास के खेत में ले गया।

उसके होठों को अपने हाथ से छुआ, उन पर शबाब की बूंदें मानो शहद लग रही थी, मैंने हलके से उसके होठों पर अपने होठ रखे और अपनी जबान को उसके मुँह के अन्दर फ़िलाने लगा। उसके हाथ भी मेरे शरीर पर घूमने लगे, कभी वो मेरी गर्दन को चूमती तो कभी मेरे कान को अपनी जुबान से सहलाती।

मेरे अंग-अंग में रोमांच भर गया, मैंने उसकी चोली निकाली तो उसके स्तन बाहर छलक पड़े, उनका आकार बहुत बड़ा था, मेरे हाथ से भी बड़ा !

मैंने एक को मुँह में लिया और चाटने लगा, उसके चुचूक खड़े हो गए। मैं अपनी जुबान से उसके चुचूक के इर्द गिर्द गोला बनाने लगा, उससे उसको बहुत अच्छा लगा “आ…आया…ऊऊओह्ह्ह्ह” की आवाज़ से मेरे लौड़ा पैन्ट फाड़ने को तैयार हो गया।

मैंने उसे नीचे लिटाया, उसका घगरा निकला और फिर उसकी चड्डी। उसकी गोरी गोरी टांगें देखकर तो मेरे मुँह में पानी आने लगा। मैंने जल्दी से अपनी पैन्ट और चड्डी निकली और उसकी चूत चाटने लगा। उसकी चूत में मेरी जुबान अन्दर तक जा रही थी। वो अपना आनंद ” और ….और जोर से …..आह…” की आवाज़ से जता रही थी।

फिर वो हट गई और मुझे लिटा दिया, वो मेरी टांगों की बीच बैठ गई और मेरे खड़े लौड़े को देखने लगी।

” बाप रे ९ इंच ! बहुत बड़ा हैं यह तो ! क्या मेरी चूत में जा पायेगा?”

मैं भी सोच में पड़ गया। मगर उसने मुझे सोचने का वक़्त नहीं दिया, और फट से मेरे लण्ड को अपने गरम होठों के बीच ले लिया, अपने सिर को ऊपर-नीचे करने लगी, लौड़े के सर पर जुबान से गोले बनाने लगी। ख़ुशी के मारे मैं चिल्लाने लगा,” हाँ, हाँ और जोर से…..और जोर से……रति…….रांड और अन्दर ले …”

इतने में मेरा चीक(वीर्य) निकल गया, वो हँस पड़ी, उसने मेरा पूरा चीक खा लिया।

मेरा लौड़ा छोटा हो गया। वो उसे हाथ में पकड़ कर हिलाने लगी, मेरी छाती को चूमने लगी, मेरे चुचूकों को चाटने लगी। वो फिर मेरी गोटियों को अपने मुँह में लेकर खेलने लगी। थोड़ी देर में मेरा लौड़ा खड़ा हो गया।

“चल अब डाल दे !” रति बोली।

मैंने कहा,” मैंने कभी किया नहीं, क्या आप मुझे बताएंगी कि कहाँ डालना है !”

उसने मेरे खड़े लौड़े को अपने हाथ में लिया और अपनी चूत के दरवाज़े पर रख दिया।

“चल अब डाल !” वोह बोली।

और मैंने डाल दिया, थोड़ा सा दर्द हुआ मुझे, पहली बार था ना !

“अब अन्दर-बाहर कर अपने लौड़े को, फिर देख क्या मजा आता है !”

मैं वैसा ही करने लगा, उसके स्तनों को काटने लगा, उसके होठों को चूमने लगा, उसके उभार लाल लाल हो गए थे, उनमें मेरे हाथों के निशाँ भी पड़ गए थे। मैंने अपने धक्कों को गति बढ़ा दी।

” डालो और जोर से डालो, मेरी चूत कब से एक लौड़े के लिए प्यासी थी…. रणजीत… अपने हाथों से मेरी गांड भी दबाओ… !”

मैंने फिर उसके पैर अपने कंधे पर रख लिए और फिर से धक्के देना चालू किया, उसे पैरों को काटता तो कभी चूमता !

मेरे धक्कों के उसके स्तन यूं झूलते मानो आंधी में लालटेन !

” रणजीत, अपने लौड़े की वर्षा से एक बार फिर मेरे चेहरे को नहला दो, जोर से डालो अन्दर……आअह्ह…..ऊऊऊउऊऊऊह्ह्ह्ह्ह्ह……मेरे राजा…..बड़ी तेज़ हैं तेरी गाड़ी…….फाड़ डाल मेरी चूत को………आ …और और और…..हाँ हाय हाँ हाँ हाँ…” वो बड़ी ही रोमांचित थी और मैं भी !

मैं फिर से निकलने वाला था, मैंने अपना लौड़ा बाहर निकाला और उसके मुँह की तरफ रख कर हिलाने लगा … एक-दो बार हिलाने के बाद मेरा पूरा चीक निकल गया,”ओह , आ आ….ले…पूरा ले मुँह में रांड……ले ले मेरे लौड़े को !” मैं बोला।

उसके बाद हमने कपड़े पहने और फिर उसे उसके घर छोड़ दिया।

इस घटना के बाद मैंने कई बार कोशिश की उससे मिलने की, मगर वो कहीं नहीं मिली………

आप बताइए, आपको मेरी कहानी कैसी लगी? Sex Stories

Hindi Porn Stories

यह मेरी अन्तर्वासना में पहली कहानी है। मैं Hindi Porn Stories एक मुंबई रहने वाला 19 वर्षीय युवक हूँ। यह बात उस वक्त की है जब मेरे दादाजी का देहांत हुए एक साल हो चुका था और उसी वजह से सबको गाँव जाना था। लेकिन मेरी परीक्षा के कारण मु्झे रुकना पड़ा लेकिन मेरी देखभाल के लिए किसी को तो रखना था। उसी वक्त मेरी चचेरी बहन नौकरी के कारण मुंबई हमारे पास आई हुई थी। और उसी की जम्मेदारी पे घरवाले मुझे छोड़कर गाँव चले गए।

मेरी चचेरी बहन का नाम वंदना(बदला हुआ) है। उसकी उमर 28 की थी लेकिन उसकी शादी नहीं हुई थी। ओर उस वक्त मेरी उमर 18 की थी। पाँच दिन बाद मेरी परीक्षा ख़तम हो गई। इसी के कारण मैंने बाज़ार से ब्लू फ़िल्म की सीडी लाकर मेरे सीडी प्लेयर के नीचे छुपा दी थी। उस वक्त दोपहर का समय था। उसी वक्त एक दोस्त आकर मुझे खेलने के लिए ले गया। मेरी चचेरी बहन घर पे ही थी। न जाने कैसे सफाई करते वक्त वो सीडी उसके हाथ लग गई और उस सीडी के कवर के ऊपर नंगे फोटो भी थे।

उसी वक्त मैं घर में आ धमका, और उसके हाथ में वो सीडी देखकर दंग रह गया और घबरा के सर नीचे झुका लिया।
उसने मुझ से पूछा- ये क्या है?

मैं कुछ नहीं बोल पाया लेकिन न जाने उसकी गुस्से भरी आँखें गुलाबी होने लगी और मुझे वासना की नजर से देखने लगी लेकिन में स्तब्ध चुपचाप खड़ा था। उसने आगे बढ़कर दरवाज़ा बंद कर लिया। मैं कुछ समझ नहीं पा रहा था, वो मेरी तरफ बढ़ी और मुझे गले लगा के चूमने लगी।

वो मुझे दस मिनट तक चूमती रही। आखिरकार मुझे भी मस्ती चढ़ने लगी, आखिर मैं भी एक मर्द हूँ, मैं भी उसे चूमता रह गया। जब मुझे होश आया तो मैंने सोचा कि अभी शाम के साढ़े पाँच बजे हैं इसीलिए मैंने उसे कहा कि ये सब उस वक्त करना ठीक नहीं है। हम दोनों रुक गए, मैंने उसे कहा कि तुम फटाफट खाना बना लो और रात को अपनी प्यास बुझायेंगे।

तो वो खाना बनाने लगी लेकिन हमारी वासना बढ़ती जा रही थी।

रात के नौ बज चुके थे। साढ़े नौ बजे तक घर का सारा काम निपट गया। तब मुझसे रहा नहीं गया, मैंने उसे पीछे से जाकर पकड़ लिया। उसने कोई विरोध नहीं किया।

फिर मैंने उसको होटों पे चूमना शुरू किया और दूसरे हाथ से दरवाज़े की कुण्डी लगा दी। अब मेरे हाथ उसके बूब्स को दबाने लगे थे। वो भी तड़प रही थी। अब मेरे हाथ उसके बूब्स से निकलकर उसकी पैंटी की तरफ बढ़ने लगे और उसकी पैंटी में हाथ डालकर उसकी चूत को सहलाने लगा। वो गरम हो गई और मेरे आठ इन्च के लंड को सहलाने लगी।

मैंने अब उसे पूरा नंगा कर दिया और मैं भी नंगा हो गया। हम पागल हुए जा रहे थे।

अब मैं उसे लिटाकर उसकी चूत चाटने लगा, वो पागल हो रही थी और इतने में उसने अपना पानी मेरे मुँह में छोड़ दिया। अब उसकी चूत पूरी गीली थी। मैंने अपना लंड उसकी चूत पे रगड़ना शुरू किया। और देर न करते हुए मैंने अपना लौड़ा वंदना की चूत में घुसाना शुरू किया पर मेरा लौड़ा अन्दर जा ही नहीं रहा था। किसी तरह जोर लगा कर मैंने अपने लिंग का अग्र भाग ही अन्दर घुसाया।

अब उसकी चूत से खून निकलने लगा, वो दर्द से तड़पती रही लेकिन मैं रुका नहीं और अपने लंड को पलते हुए उसकी चूत में पूरा घुसा दिया और मैं उसके चूत में लंड को लगातार आगे पीछे करता रहा। अब उसे भी मज़ा आने लगा, वो भी चूतड़ उठा के मेरा साथ देने लगी।

पूरे 10 मिनट बाद हम दोनों का पानी निकल गया। और उसी रात हम दोनों ने 5 बार चुदाई की।
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दोस्तो! मेरा नाम सुनील है, मैं Sex Stoires आपको अपनी मॉम की सेक्स स्टोरी बताता हूँ। मेरी मॉम की उम्र लगभग 45 साल होगी, वो बहुत ही सुंदर और सेक्सी है। मेरे पिता बाहर रहते हैं घर में मैं और मॉम ही होते हैं।

एक दिन हमारे घर में कोई मेहमान आये हुए थे, मेरे रिश्ते की चाचा! उनकी अभी अभी शादी हुई थी।
हमने उनको एक कमरा सोने को दे दिया और मेरी मॉम और मैं साथ सो गए।

रात को उनके कमरे से आवाज़ आने लगी तो मेरी नींद खुल गई और मैं इधर उधर देखने लगा तो मैंने देखा कि मॉम अपने बेड पर नहीं थी। मैं मॉम को देखने बाहर आया तो मैंने देखा कि मॉम अपना पेटीकोट उतारकर दरवाज़े के छेद से अंदर देख रही हैं और अपनी चूत में उंगली कर रही हैं।

मैं चुपचाप देखता रहा, कुछ नहीं बोला। जब मॉम झड़ गई तो उठ कर कमरे में आई और मुझे देख कर घबरा गई, बोली- क्या देखा तूने?
मैं बोला- कुछ नहीं!
मॉम बोली- अच्छा चल सो जा!

और हम दोनों सो गए पर मुझे नींद नहीं आ रही थी। अब मैं बार बार मॉम की तरफ देख रहा था। मुझे वो बड़ी सेक्सी लग रही थी।

सुबह चाचा लोग चले गए, फिर घर पर हम दोनों ही रह गये। मॉम ने नाश्ता बनाया और हम दोनों ने साथ बैठ कर खाया।

मॉम ने मैक्सी पहन रखी थी और अन्दर से कुछ नहीं पहना था। मुझे लगा कि उनको सेक्स करने का मन हो रहा है। नाश्ता करने के बाद वो बाथरूम में चली गई, बोली-मैं नहाने जा रही हूँ, तू कहीं जाना मत!
मैंने कहा- ठीक है!

फिर मॉम नहाने चली गई। हमारे बाथरूम के दरवाज़े में एक छेद है। जब मॉम को गए कुछ देर हो गई तो मैंने छेद पर जा कर देखा कि मॉम क्या कर रही हैं तो मैंने अन्दर देखा की मॉम बाथरूम में एक लम्बे बैंगन को अपनी चूत में जोर जोर से अन्दर बाहर कर रही हैं।

मैं यह खेल देखने में मशगूल हो गया। तभी अचानक मॉम ने दरवाज़ा खोल दिया। मुझे भागने का भी समय नहीं मिला और मैं पकड़ा गया। वो बहुत गुस्से में थी और अंदर जाकर बोली- रुक जा! तेरी शिकायत तेरे पापा से अभी करती हूँ!

पूरे दिन वो मुझसे नहीं बोली और अलग अलग ही रही। अब रात को जब सोने का समय हुआ तो मुझसे बोली- तू आज मेरे साथ ही सोयेगा!
मैं बोला- क्यों?
बोली- आज कल तू बहुत गलत बातें सीख रहा है, इसलिए!

मेरा तो मन उनके साथ सोने को हो ही रहा था क्योंकि वो रात को सिर्फ पेटीकोट पहन कर सोती हैं और नीद में उनका पेटीकोट ऊपर खिसक जाता है तो सब कुछ दिखता है।

फ़िर रात को हम सोने चले गए। मैंने पैन्ट पहन रखी थी। वो बोली- चल इसे उतार दे! सोने में परेशानी होगी!
मैंने कहा- मुझे कोई परेशानी नहीं होगी।
तो बोली- मुझे होगी! चल उतार!
अब हम दोनों सो गए। मॉम बोली- तू क्या देख रहा है?
मैं बोला- कुछ नहीं!
बोली- सच सच बता! नहीं तो पापा से बोल दूंगी!

मैं डर के मारे बोला कि रात को आप जब उंगली कर रही थी तो मैंने आप को देखा था। फ़िर सुबह आप सेक्सी लग रही थी तो मेरा मन आपको देखने का कर रहा था तो आपको देखा।
मॉम बोली- तुझे कुछ होता है?
मैं बोला- हाँ, बहुत कुछ होता है!

उन्होंने मेरे लंड को पकड़ लिया मेरा तो लौड़ा बिल्कुल खड़ा हो गया।
वो बोली- अब समझी कि तू आजकल क्या कर रहा है।
वो बोली- अब जब तू सब कुछ जानता है तो चल मेरे साथ सब कुछ कर!
मैं बोला- नहीं!
तो बोली- पापा से बोलना है क्या!
मैं बोला- नहीं!

बस फिर क्या था, मैं तो चालू हो गया, उनके पूरे कपड़े उतार कर उनको चाटने लगा और चूत चाट चाट कर तो उनको झाड़ दिया।
मैं बोला- कैसा लगा?
बोली- अच्छा लगा! लगे रहो!

फ़िर मैंने उनकी चूत मारी! काफी देर तक मारने के बाद वो झड़ गई, फिर बोली- बेटा! मजा आ गया!
कुछ देर बाद मैं भी झड़ गया। उस रात हमने चार बार चुदाई की।
अब तो रोज़ ही होता है!

एक दिन मेरे पापा को शक हो गया, लेकिन मॉम ने बात सम्भाल ली। अब मेरी मॉम और मैं रोज़ रात को साथ ही सोते हैं। मॉम और मैं बहुत ही खुश हैं।
आपको मेरी मॉम सेक्स स्टोरी कैसी लगी, मुझे मेल करना! Sex Stoires

Antarvasna

मेरा नाम दीपक है। मैंने Antarvasna अन्तर्वासना की काफी कहानियाँ पढ़ी हैं और वो सब मुझे बहुत पसंद आई और मेरा मन मचल उठा अपनी एक सच्ची कहानी आपको बताने का !

तो दोस्तो, मैं एक २६ वर्षीय लम्बा, भरा-पूरा एथलीट हूँ और मुझे सेक्स करना एक कला लगता है।

अब मैं आपको अपनी आपबीती सुनाता हूँ।

बात एक दिन इतवार की है, उस दिन मैं जल्दी सुबह अपने कसबे (रुरल जयपुर) से जयपुर आया प्रतियोगी-परीक्षा देने के लिए ! मेरा परीक्षा-केन्द्र शास्त्री नगर, जयपुर के एक स्कूल में बना और मुझे अपने कमरे के गेट के पास वाली कुर्सी मिली।

थोड़ी देर में स्कूल की घंटी बजी और एक सुंदर सी मेडम पश्न-पत्र और उत्तर-पुस्तिका लेकर कमरे में आई। वो एकदम सुंदर नैन नक्श वाली और हुस्न की मल्लिका लगती थी। थोड़ी देर में उसने सबको पेपर बांटे और फिर मेरे पास वाली कुर्सी पर बैठ गई और कभी मेरी उत्तर-पुस्तिका और कभी मेरे ऊपर लगातार देखती रही। परन्तु मेरा मन उस समय केवल परीक्षा देने का ही था सो मैंने इस बात पर विशेष ध्यान नहीं दिया।

थोड़ी देर में वो मेडम मेरी चोरी छुपे मदद करने लगी और मुझे प्रश्न हल करवाने लग गई और मैं उसका पूरा पूरा फ़ायदा लेने लगा। मैंने अपना पेपर नियत समय से आधा घंटा पहले ही ख़त्म कर लिया और उसकी तरफ प्यार से देखने लग गया। अब वो भी मुझे प्यार से बातें पूछने लगी कि तुम कहाँ रहते हो और क्या करते हो?

मैंने बताया- मैं फुलेरा में रहता हूँ और शाम को ६ बजे वापस ट्रेन से जाऊंगा।

तो मेडम बोली- ठीक है, परीक्षा के बाद गेट के पास मेरा इंतजार करना !

मैं कुछ नहीं बोला और परीक्षा ख़त्म हुई तो गेट के पास मैं उसका इंतजार करने लगा।

थोड़ी ही देर में मेडम आई और मैं उसके साथ हो लिया। लगभग १० मिनट पैदल चलते चलते हमने इधर उधर की बातें करते करते उसके घर पहुंचे जो कि ऊपर वाली मंजिल में एक अलग थलग घर था। वो मुझे लेकर अन्दर आई और दरवाज़ा बंद कर दिया।

अब वो मुझे ऊपर से नीचे तक निहारती ही रही। तो मैंने मेडम से उनका नाम पूछा, उसने बताया की नीलम है।

थोड़ी देर में वो मेरे लिए पानी लेकर आई और मुझे खाना भी खिलाया। जब मैं खाना खा रहा था तो वो मेरे सामने ही अपने कपड़े बदलने लगी तो मैंने शरमाकर दूसरी तरफ गर्दन कर ली लेकिन वो एक झीनी सी नाईटी पहनकर मेरे सामने बैठ गई और मुझे प्यार से खाना खिलाने लग गई।

दोस्तो, मैं आपको बताऊँ, अब मैं उसकी हर इच्छा में एक सुखमय आनंद ले रहा था। खाना ख़त्म करने के बाद वो अचानक मुझसे लिपट गई और मुझे चूम लिया। मुझसे भी रहा ही नहीं गया और मैंने उसको अपनी बाहों में जकड़ लिया और उसके खूबसूरत लबों पर अपने लब रख दिए, उसको बेतहाशा चूमने लग गया और नाईटी के ऊपर से ही उसके मम्मों से खेलने लगा। क्या गजब के मम्मे थे !

मैंने उसे उठाकर दूसरे कमरे में बेड पर लिटा दिया और बोला- मेडम, आप बहुत सेक्सी हो !

तो वो मुस्कराने लगी। अब मुझे जल्दी हो रही थी सो मैंने उसकी नाईटी खोलकर पूरा नंगा कर दिया। कसम से क्या चीज़ लग रही थी वो !

मैंने उसकी बुर में अपने हाथ से खुजली करी, वो मचल उठी और मेरे कपड़ों को खोलकर मुझे नंगा कर दिया। अब वो मेरे लंड पर हाथ फिरा रही थी और थोड़ी देर में उसने मेरे लम्बे मोटे से लंड को मुँह में ले लिया। उस समय मैं जैसे स्वप्नलोक में था। मैंने उसे कहा- मैडम और जोर से चूसो !

उसने कहा- मैडम नहीं, मुझे नीलू कहो !

मैने कहा- नीलू मैडम और जोर से !

उसने फिर कहा- सिर्फ नीलू ! ओके ?

मैंने कहा- ओके ! नीलू मेरी जान !

नीलू ने अब मुझे पकड़ कर साइड में लिटा दिया और मेरे ऊपर बैठ गई और मेरे लंड को अपनी बुर में पेलने की तैयारी करने लगी। मैं उसका बराबर साथ दिए जा रहा था।

थोड़ी देर में मैंने उसे अपने नीचे लिटाकर खूब चोदा और ऐसे जमकर चुदाई की कि वो एकदम मस्त हो गई और बोली- मेरी जानू ! मेरी जिन्दगी का सबसे खूबसूरत दिन आज था जो तुम मुझे मिले !

वो और मैं उस दिन लगभग ५ घंटे तक चुदाई-चुदाई खेलते रहे ! एक दूसरे को छेड़ते और खूब मज़े लूटते रहे ! उस दरमयान मैंने उसके खूब स्तन दबाये और जमकर एक दूसरे का रसपान किया, एक बार गांड भी मारी।

अब इतने में शाम हो गई और वो सब तरह से संतुष्ट होकर बोली- मेरे राजा दीपक, तुम मुझे मिलते रहना !

मैंने भी वादा किया और इजाज़त ली और चल पड़ा स्टेशन की ओर !

मैंने घर आकर उससे फोन पर बात की और बताया- मैं ठीक से पहुँच गया हूँ और तुम्हारी याद आ रही है !

तो वो रोने लगी और फ़ोन पर ही मुझे अगली मुलाकात का समय देने लगी !

मैंने तुरंत हाँ कर दी !

दोस्तो, फिर हम महीने में ४-५ बार मिलते और खूब मज़े करते। लेकिन एक दिन वो मुझसे दूर चली गई उसका तबादला हो गया दिल्ली और मैं अकेला पड़ गया।

अब मुझे उसकी बहुत याद आती है और मैं आपको विश्वास दिलाना चाहूँगा कि मैं उस प्यारी मैडम को कभी नहीं भूल पाया।

दोस्तो, मैंने अपनी इस कहानी में गन्दे शब्द ज्यादा प्रयोग नहीं किये क्योंकि मैं एक अच्छे घराने का सदाचारी नवयुवक हूँ और हमारे संस्कार ऐसे है कि मुझे गाली भी नहीं आती है।

कृपया मेरी कहानी के बारे में और मेरी नीलू मैडम के भविष्य में साथ के बारे में अपने अनमोल विचार और सुझाव मुझे जरूर मेल करें। Antarvasna

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