Important Notice: Post Free Ads Unlimited...🔥🔥🔥

Massage Girl in Alappuzha: Premium Relaxation Services

Our site can help you find a professional massage girl in Alappuzha who will help you relax in the best manner possible. We connect you with professional therapists who can offer you a massage that will make you feel better and more relaxed. The pros on our list are ready to provide you with a fantastic experience at your house or in one of their particular spots, whether you want to relax or get away from it all.

Introduction

Massage is currently one of the finest methods to relax your mind, body, and overall health. Our website makes it easy to locate the top massage services in Alappuzha that meet your demands. This will be a one-of-a-kind and calming experience for you.

Tottaa wants to make it simple for clients to find the top masseuse. The Alappuzha massage service providers on our list offer the greatest quality, comfort, and competence, whether you want a full-body massage or a massage for a particular location.

How Tottaa Helps Advertisers Reach More Customers

Tottaa is not only a list of masseuses, it’s also a secure location for them to show off what they can do. People in Alappuzha who are seeking massage services may find them on our website. This makes them easier to find and gets them more appointments.

Advertisers may simply put up profiles, offer their services, and talk about pricing and discounts on our sites. This makes sure that the relevant people notice your Alappuzha massage service, which makes it easier to obtain more customers.

Different Types of Massages We Offer

There are a lot of different types of massage services on our site, so you may choose one that works for you. You may choose the kind of treatment that works best for you, whether it’s profound rest or a particular type of therapy.

1. Swedish Massage

A calm and gentle way to ease muscular tension and improve blood flow. This Alappuzha massage is perfect for you if you want to relax and forget about your concerns.

2. Deep Tissue Massage

This approach employs a lot of pressure to get to deeper muscle layers. It’s helpful for folks who have muscular discomfort or stiffness that won’t go away. There are specialists on our profiles of massage girls in Alappuzha who are good at deep tissue treatments that function effectively.

3. Aromatherapy Massage

Calming massage strokes and essential oils are beneficial in making people feel improved both emotionally and physically. Most massage companies in Alappuzha employ the use of custom oil preparations to make you feel good.

4. Thai Massage

A therapy that wakes you up by using a mix of regular massage, stretching, and compression. This traditional massage in Alappuzha helps you relax, become more flexible, and get your mind and body back in harmony.

5. Hot Stone Massage

Heated stones are placed on various parts of the body to help with deep muscular tightness. People who want to feel good, relax, and help their muscles recover quickly can use this massage service in Alappuzha

How to Book Our Massage Services

Tottaa makes it simple and fast to book. With our listings, you can see what kind of massage you want, read about the providers, see that they are free and then contact them directly. After you choose, you can book a massage in Alappuzha at your convenient time and location. In order to get your desired massage services, apply the following simple steps:

Step 1: Browse Our Listings

Take a peek around our site to view a few massage professionals. Each listing gives you information about the many sorts of massages, how long they last, how much they cost, and where they are situated. This makes it easier to choose the finest ones.

Step 2: Compare and Shortlist

Examine the profiles carefully to compare how the services, talents, and reviews posted by customers differ. This phase makes sure you choose a business that has the style, pricing, and supply you desire.

Step 3: Connect with the Provider

When you have decided, use the information that you are offered so that you can contact them directly. One can communicate it to the massage giver thus making it understood what massage you want at what time and when.

Step 4: Confirm the Appointment

The date, time and place of the service, which could be your home, a hotel or the spa where the therapist may be found. You also need to agree on the payment method and any other accords prior to commencement of the course.

Step 5: Relax and Enjoy Your Massage

All you have to do on the day of the appointment is have your area ready for the house visit. The remainder will be handled by the expert. Take it easy and enjoy a massage that is made just for you.

Frequently Asked Questions

To locate a professional who can meet your needs, read our biography, reviews and advertising.

Yes, many of the therapists on our site will come to your house so you may feel safe and at ease.

You may pick based on talents since most adverts provide their qualifications in their profiles.

It would be advisable to make a reservation earlier to guarantee that you would be able to get a massage, particularly against the prevalent services of massage.

Not at all. Tottaa exclusively connects users with service providers. The doctor gets to choose how to handle payment.

Read Our Top Call Girl Story's

Hindi Porn Stories

दोस्तो मैं अजनबी आपके सामने Hindi Porn Stories अपनी पहली कहानी लेकर हाज़िर हूँ।

मैं हार्डवेयर का काम करता हूँ जिससे काम के सिलसिले मे मुझे ज़्यादा से ज़्यादा समय बाहर ही काम करना पड़ता है।

यह कुछ ही महीने पहले की बात है, जब मैं अपनी एक भाभी से मिला। मेरी उस भाभी का नाम काजल है। वो मुझसे बहुत प्यार करती है। मैं उनके शहर में भी जाता था, वहाँ मैने कमरा ले रखा था।

एक दिन जब उनके पति घर पर नहीं थे तो मैने उनको अपने कमरे पे बुला लिया. भाभी को देखते ही मेरा लण्ड फनफना कर खड़ा हो गया। भाभी मेरे खड़े लंड को देखते हुई बोली- सचमुच तुम्हारा लंड बहुत लम्बा और मोटा है।

मुझे मालूम हो चुका था कि भाभी मुझसे अपनी चूत चुदवाना चाहती हैं, लेकिन पहल मेरी तरफ़ से चाहती है. मैंने तब आगे बढ़ कर उनकी चूचियों पर अपना हाथ रख दिया और उन्हें धीरे धीरे सहलाने लगा।

भाभी कुछ नहीं बोली बस मुस्कुराती रही। तब मैंने उनकी नाईटी उतार दी और मेरे सामने भाभी सिर्फ़ काली ब्रा और गुलाबी पैंटी अपनी जवानी का जलवा दिखाते हुए अधनंगी खड़ी थी। फिर मैंने उसकी ब्रा को निकाल फेंका, मैं उनकी गोल गोल चूचियाँ देख कर हैरान हो गया।

मैंने फिर धीरे से उनको अपनी बाँहों में ले लिया और उनके चूचियों पर अपनी पकड़ मजबूत करके उनको अपने दोनों हाथों में लेकर मसलने लगा। मैंने भाभी को अपनी बाँहों में भर कर कस कर जकड लिया. भाभी भी मुझको अपने दोनों हाथों से पकडे हुए थी मैंने उनके दोनों होंठ अपने होंठों के बीच ले कर चूसने लगा. भाभी भी मेरी बाँहों में अधनंगी खड़ी खड़ी मुझे दोनों हाथों से पकड़ कर अपने होंठ चुसवा रही थी और अपनी चूचियाँ मसलवा रही थी।

अब धीरे धीरे भाभी ने मेरे हाथों से निकल कर मेरा बनियान उतार दिया, फिर मैंने अपना एक हाथ उसकी पैंटी में डाल के उनकी चूत को हाथ से रगड़ा, फिर मैंने अपनी एक ऊँगली उनकी चूत में डाल दी, और उनको ऊँगली से चोदने लगा। मेरे ऐसा करने से कुछ देर में उनकी चूत गीली हो गयी। फिर मुझे लगा अब यह रंडी चुदने को एकदम तैयार है, तब मैंने अपनी ऊँगली उसकी चूत से बाहर निकाली, और उसकी पैंटी को उस के बदन से अलग कर दी।

मैंने अब भाभी से पूछा, क्या आप मेरे लंड को अपनी चूत के अन्दर लेना चाहती हैं ?

भाभी मेरा लंड अपने हाथ में लेकर प्यार करने लगी। अब मैं भाभी का एक चूची अपने मुंह में लेकर चूसने लगा और दूसरी चूची अपने एक हाथ में लेकर मसलने लगा। भाभी भी अब तक गरमा गयी थी। उन्होंने मेरा लंड अपने हाथों में पकड़ कर मुझको बेड पर पटक दिया और मेरा लंड अपने हाथों में लेकर उसको बड़े ध्यान से देखने लगी।

थोडी देर के बाद वो बोली- वैसे तुम्हारा लंड बहुत ही सेक्सी है, आज मेरी चूत खूब मज़े ले ले कर इस लंड से चुदेगी, अब तुम चुपचाप पड़े रहो, मुझको तुम्हारा लंड का पानी चखना है।

मै तब बोला,”ठीक है भाभी जब तक आप मेरे लंड का स्वाद चखोगी, मैं भी आपकी चूत के स्वाद का आनंद उठाऊंगा।

आइये हम दोनों ६९ पोसिशन पर पलंग पर लेटते हैं। फिर हम दोनों पलंग पर एक दूसरे के पैर की तरफ़ मुंह करके लेट गए. मैंने भाभी को अपने ऊपर कर लिया। भाभी ने मेरे लंड के सुपारे को अपने होठों से लगा कर एक जोरदार चुम्मा दिया और फिर अपने मुंह में ले कर चूसने लगी और कभी कभी उसको अपनी जीभ से चाटने लगी. मुझको अपने लंड चुसाई से रहा नहीं गया और अपना लंड भाभी के मुंह में पेल दिया .भाभी लंड को अपने मुंह से निकलते हुए एक रंडी की तरह बोली- वाह मेरे राजा अभी और पेलो अपने लंड को मेरे मुंह में, बाद में इसको मेरी चूत में पेलना.”

भाभी अपने मुंह में मेरा लंड लेकर उसको खूब जोर जोर से चूस रही थी और मैं भी भाभी के मुंह में झड़ गया। मेरे लंड का सारा का सारा माल भाभी के मुंह के अन्दर गिरा और उसको उन्होंने पूरा का पूरा पी लिया। अब भाभी का चेहरा काम-ज्वाला से चमक रहा था और वो मुस्कुराते हुए बोली- चूत चुसाई में बहुत मज़ा आया, अब चूत चुदाई का मज़ा लेना चाहती हूँ, अब तुम जल्दी से अपना लंड चुदाई के लिए तैयार करो और मेरे चूत में पेलो, अब मुझसे रहा नहीं जाता।

मैंने भाभी को पलंग पर चित्त करके लेटा दिया और उनके दोनों पैरों को ऊपर उठा कर घुटने से मोड़ दिया। फिर मैंने अपने लन्ड का सुपारा खोल कर उनकी चूत के ऊपर रख दिया और धीरे धीरे उनकी चूत से रगड़ने लगा। भाभी मारे चुदास के अपनी कमर नीचे ऊपर कर रही थी तब मैंने उनकी चूचियों को पकड़ कर निप्पल को मसलते हुए उनके होटों को चूमा और बोला- अरे मेरी रानी ! इतनी भी क्या जल्दी है? पहले मैं ज़रा तुम्हारे सुन्दर नंगे बदन का आनन्द तो उठा लूं ! फ़िर तुम्हें जी भर के चोदूंगा।

भाभी मेरे लण्ड से चुदाने के लिए पूरी तरह से तैयार थी। मैंने अपना सुपारा उनकी पहले से ही भीगी चूत के दरवाजे के ऊपर रखा और धीरे से कमर हिला कर सिर्फ़ सुपारे को ही अन्दर किया। भाभी ने मेरे फ़ूले हुए सुपारे को अपनी चूत में घुसते ही अपनी कमर को झटके ऊपर उछाला और मेरा आठ इन्च का लण्ड पूरा का पूरा उनकी चूत में घुस गया।

तब भाभी ने एक आह सी भरी और बोली- आह ! क्या शान्ति मिली तुम्हारे लण्ड को अपनी चूत में डलवा कर। यह अच्छा हुआ, मुझे बहुत दिन से इच्छा थी कि किसी लम्बे लण्ड से चुदने की, आज वो पूरी हो गई। नहीं तो मेरी इच्छा पूरी नहीं होती।

अब मैं अपना लण्ड धीरे धीरे उनकी चूत के अन्दर-बाहर करने लगा। उन्होंने पहले कभी अपनी चूत में इतना मोटा लण्ड कभी नहीं घुसवाया था। शायद उसके पति का लण्ड छोटा होगा, उन्हें कुछ तकलीफ़ हो रही थी। मुझे भी उनकी चूत काफ़ी टाईट लग रही थी। मैं मस्त हो कर उनकी चूत चोदने लगा।

भाभी मेरी चुदाई से मस्त होकर बड़बड़ा रही थी,” हाय मेरे राजा ! मेरे राजा और पेलो, और पेलो अपनी भाभी की चूत मे अपना मोटा लण्ड, तुम्हारी भाभी की चूत तुम्हारा लण्ड खाकर निहाल हो रही है। हाय ! लम्बे और मोटे लण्ड की चुदाई का मज़ा कुछ और ही होता है, बस मज़ा आ गया, हां ! हां ! तुम ऐसे ही अपनी कमर उछाल उछाल कर मेरी चूत में अपना लण्ड आने दो। मेरी चूत की चिन्ता मत करो, फ़ट जाने दो इसको आज ! इसको भी बहुत दिनों से शौक था मोटा और लम्बा लण्ड खाने का। इसको और जोर से खिलाओ अपना मोटा और लम्बा लण्ड।”

हम लोग चुदाई का मज़ा लेते रहे और मेरी चुदाई से भाभी दो बार झड़ चुकी थी। फ़िर मैंने अपना लण्ड उनकी चूत के अन्दर तक डाल कर उनके अन्दर झड़ गया। फ़िर मैं उनके ऊपर ही सो गया। कुछ देर बाद भाभी ने बेड से उठ कर अपने कपड़े पहन लिए, मुझे गाल पे किस दिया और अपने घर चली गई।

दोस्तो आपको मेरी कहानी कैसे लगी प्लीज़ मुझे मेल करें मैं आपको बताऊँगा कि कैसे मैने दूसरी बार भाभी की चुदाई की। Hindi Porn Stories

Sex Stories

अगल बगल में सभी लड़कियाँ Sex Stories अपने हाथों में लंड पकड़े हुए थीं और उनको मसल रही थीं। मोनी को एक मोटे से सेठ ने अपनी गोद में बठा रखा था। सेठ ने १००० रूपये पिंटू की तरफ बढ़ा दिए। पिंटू ने मोनी को आंख मार कर लौड़ा चूसने का इशारा किया। मोनी जमीन पर बैठ गई और उसने सेठ का ४ इंच लम्बा लौड़ा मुँह में ले लिया और उसे लोलीपोप की तरह चूसने लगी।

नेताजी मेरी चूत में अपनी उँगलियाँ आगे पीछे कर रहे थे तभी एक एक ग्राहक मेरी तरफ आया और १०-१० के नोट मेरे ऊपर फेंकने लगा। पिंटू पीछे से आकर मेरी चुचियों की घुन्डियाँ गोल गोल घुमाने लगा और नेताजी ने मुझे अपनी दोनों टांगों पर बिठा लिया और मेरी चूत के होंठ सहलाने लगे। उनका लंड मेरी चूत से छू रहा था। मेरी चूत की खुजली बहुत बढ़ गई थी और मन कर रहा था कि चूत में लंड घुसे और मैं चुदाई का मस्त मज़ा लूं। नेताजी मेरी चूत की मसलाई जोरों से कर रहे थे। ग्राहक ने पूरी १० के नोट की गड्डी मुझ पर लुटा दी। उसके बाद एक मुस्टंडे ने उसे वहां से हटा दिया।

१० मिनट वाली घंटी बज गई। नेताजी को मिलाकर पांच लोगों ने १००० रु. बढ़ा दिए। अब वो लोंडी को १० मिनट और मसल सकते थे। २ रंडियों के ग्राहक झड़ चुके थे वो दोनों उठ गई और फिर काउंटर पर जाकर खड़ी हो गई। ७ में से ३ लडकियाँ लौड़ा चूस रही थीं। नेताजी ने अपनी जेब से १००० की गड्डी निकाली और एक नोट पिंटू की तरफ बढ़ा दिया। पिंटू ने मेरा एक संतरा जोरों से मसलते हुआ कहा चल अब जरा साहब का लौड़ा चूस।

मैं मरती क्या न करती। मुझे अब नेताजी के पैरों में बैठकर उनका लौड़ा मुँह में लेना पड़ा। लौड़ा पूरा वीर्य से गीला हो रहा था। मुँह में लौड़ा घुसते ही एक कसेला सा स्वाद मुझे लगा। दो तीन बार लौड़ा चूसने से मुझे मस्ती आने लगी और मैं मस्त होकर नेताजी का लौड़ा चूसने लगी। नेताजी मेरे चूतड़ों को कस कस कर दबा रहे थे और कह रहे थे,”रंडी तू तो बड़ा मस्त लौड़ा चूसती है चल जरा मेरा सुपाड़ा चाट ! अगर मुझे खुश कर देगी तो कुतिया, मैं तुझे हिरोइन बनवा दूंगा !”

अब मैंने नेताजी का सुपाड़ा चाटना और चूसना शुरू कर दिया था। नेताजी ने मेरे ऊपर दो-तीन १०००-१००० के नोट लुटा दिए। तभी वहां मौसी के साथ ४-५ पुलिस वाले आ गए। सभी सादी वर्दी में थे मौसी बोली- कोई घबराए नहीं, सब कुछ २-३ मिनट के लिए है।

एक पुलिस वाले ने मेरे बाल खींचे और मुझे धक्का दिया और बोला,”साली रंडी हट इधर से हट !”

मैं पीठ के बल गिरी और एक पुलिस वाले ने नेताजी को १०-१२ थप्पड़ मार दिए। फिर बोला,”कलुआ ! साले हमें धोखा देता है साला बैंक लूटता है… हरामी कहीं के ! तुझे अभी थाने में चलकर बताता हूँ कि पुलिस को परेशान करने का मतलब क्या होता है ?”

पुलिस नेताजी को धक्के मार कर ले गई। उनका इंसपेक्टर मौसी से बोला,”मौसी, आपकी मदद से हम इसे पकड़ने में सफल रहे, धन्यवाद।”

मौसी कुटिल मुस्कराहट से बोली,”हजूर हम तो आपके सेवक हैं !”

उनके जाने के बाद मौसी बोली,”भाई, सभी मस्ती करो, डरने की बात कोई नहीं। कुते के पास जो नोटों की गड्डियाँ थी उस पर जिस बैंक की मोहर थी वो कल ही लूटी गई थी। मैं समझ गई थी कि साले बैंक लूट कर आये हैं। यह साला कलुआ बदमाश था २०,००० का इनाम है इस पर हरामी पर। नेता बनता है साला भडुआ !”

हम सभी रंडियों के ग्राहक हमें छोड़कर भाग गए थे। हम सभी रंडियाँ एक बार फिर साइड में जाकर खड़ी हो गईं। रोकी ने हमें पतले कपड़े की चड्डियाँ पहना दी थी और हमारे गले में मालाएं डाल दी थीं। नाचने वाली लड़कियों की चड्डियाँ मुस्टंडों ने उतार दी थीं। वो अब वो फर्श पर लेटकर अपनी चूत कभी फैला रही थीं कभी छुपा रही थीं। ग्राहकों की भीड़ दुबारा बढ़ गई थी हम लोगों की बोली दुबारा लग गई थी। इस बार मेरे हिस्से में एक मरियल सा ५५ साल का बुड्ढा आया था जिसने मुझे मसलने के लिए १५०० रुपए लगाए थे।

बुड्ढे ने मेरी माला के फूल मसल दिए और अपने दोनों हाथों में मेरे स्तनों को पकड़ कर उन्हें धीरे धीरे दबाने लगा। मैंने बुड्ढे के पैंट के बटन खोल दिए और उसकी चड्डी नीचे कर दी। बुड्ढे का पतला लंड खड़ा हुआ था जो मुश्किल से ४ इंच का होगा। मुझे उसे पकड़ने में ऐसा लग रहा था जैसे कि कोई बड़ी मूंगफली अपने हाथों में दबी है । धीरे धीर मैं बुड्ढे की मूंगफली मसलने लगी। बुड्ढा मेरी चूचियाँ मसले जा रहा था। मेरी तरफ देखकर खी-खी करते हुआ बुड्ढा बोला,”तेरी चूचियाँ बिलकुल मेरी बहू की तरह चिकनी हैं !”

मैं हैरान थी मैं बोली,”क्यों ? तू अपनी बहू को भी चोदता है क्या?”

बुड्ढा खी-खी करते हुआ बोला,”चोदी तो नहीं है, लेकिन जब भी मुन्ने को दूध पिलाती है तो उसकी चूचियाँ छुपकर देखता हूँ ! बिल्कुल तेरी जैसी चिकनी हैं !”

मैं हैरान थी कि ऐसे भी लोग होते हैं। मैंने उसके लौड़े को मसलते हुआ पूछा,”और ताऊ क्या देखा है?”

बुढ़ऊ फुसफुसाया,”बाथरूम में २-३ बार नंगे नहाते हुए भी देखा है, एक बार जब मेरा लड़का १०-१२ दिन के लिए बाहर गया हुआ था तो बाथरूम में उसे चूत में मोमबत्ती डालते हुए भी देखा था। साली को चोदने का मन तो करता है लेकिन शराफत भी तो कोई चीज़ है।”

मौसी उधर से निकली और बुड्ढे की तरफ देखती हुई बोली।”चचा दूध ही मसलते रहोगे या कुछ और भी करोगे? थोड़ा इसकी सुरंग में ऊँगली करो, मज़ा आ जायेगा।”

ताऊ की उँगलियाँ अब मेरा चूत के होटों पर फिसल रही थीं। एक मिनट बाद ही ताऊ ने अपना पानी छोड़ दिया जिसकी धार मेरे हाथ और पेट पर जाकर गिरी। ताऊ के १० मिनट पूरे होने वाले थे। पिंटू बोला,”ताऊ टाइम हो गया है, और देर तक कुतिया को मसलना है तो १००० रु निकालो !”

ताउ मुझे हटा कर अपनी पैन्ट ऊपर चढ़ाते हुए बोला,”और पैसे नहीं हैं, वो राजू की अम्मा बटुआ भूल गई थी, उसमें से २००० रूपये निकाल लाया था ! सिर्फ २०० रु बचे हैं। साली कुतिया बहुत मजा दे रही है। तू मौसी से बोल २०० रूपये में लौड़ा चुसवाने दे बाकी बाद में दे दूंगा !”

पिंटू बोला,”नो पैसा, नो मजा ! अब जाओ फिर बाद में आना लाइन में और लगे हैं !”

रंडियों की मसलाई जोरों पर थी। दो रंडियों की चूत में लौड़ा भी घुसा हुआ था उनके कस्टमर उनको सबके सामने चोद रहे थे। मोनी के सेठ ने एक ५० की गड्डी पिंटू की तरफ बढ़ा दी और बोला,”साली की चूत चोदनी है !”

पिंटू ने एक कंडोम का पैकेट उसकी तरफ बढ़ा दिया और बोला,”ले सेठ १५ मिनट में कुतिया को निपटा दियो, वरना ५००० और देने पड़ेंगे !”

सेठ ने अपना लौड़ा मोनी की चूत में फिट कर दिया और उसकी चुदाई शुरू कर दी। मोनी सहित तीन रंडियाँ डांस हाल में चुद रही थीं। ३ की मसलाई सोफों पर हो रही थी। मैं काउंटर पर नंगी खड़ी थी। इतनी देर तक हाल में नंगी खड़ी होने से मेरी शर्म बिलकुल ख़त्म हो गई थी। मैं अपने को रंडी मान चुकी थी मेरा मन लौड़ा खाने को कर रहा था। पिंटू ने मेरे मेरे चून्चों पर एक जोर का हाथ मारा और बोला,”अभी २० मिनट और हैं, एक ग्राहक को और निपटाना है !”

मौसी वहीं घूम रही थीं। उन्होंने आकर एक केला मुझे पकड़ा दिया और बोली,”हल्के-हल्के अपनी चूत पर फिरा और अपने मुँह से इशारे कर ! इस बार तेरा दाम २००० रु से ऊपर लगना चाहिए, समझी ! वरना एक और कुत्ता तेरे ऊपर चढ़वाना पड़ेगा !”

तभी आशा नाम की एक और रंडी काउंटर पर आकर खड़ी हो गई थी। हम दोनों केला अपनी चूत पर फिराने लगी और ग्राहकों की तरफ देखकर चुम्मी फेंकने लगी। मैं अब अपने को मौसी की लोंडी मान चुकी थी। मेरे अन्दर उनकी बात टालने की हिम्मत नहीं थी। सामने लड़कियों की चूत में लौड़े घुसे हुए थे। मेरी चूत बहुत जोरों से खुजिया रही थी, मन कर रहा था कि अबकी बार मैं भी चुदूं। नाचने वाली लडकियाँ बार बार अपनी चूत में मोमबत्ती डाल रही थी। मौसी मुस्करा रही थी और रोकी से कह रही थीं,”सभी रंडियाँ बिक चुकी हैं १-२ को छोड़कर। भोंसड़ी वालियों के भी रेट आज ५०० से उपर लग रहे हैं !”

तभी दो ग्राहक हमारी तरफ आए। मौसी उन्हें लेकर आई थी। मौसी मुझसे बोली,”यह छोटा खलील और उसके चेले हैं, पूरे पूना का अन्डरवर्ड देखते हैं। तुम दोनों की चुदाई और मसलाई दोनों करेंगे। १२ हज़ार दे चुके है। चूत चुदवा और जम के मज़ा ले। ऐसा मज़ा दुबारा नहीं मिलेगा।”

मेरे चूतड़ों पर हाथ फेरते हुए पिंटू बोला,”तेरी चूत में बहुत खुजली हो रही है न ? जा अभी यह मिटा देंगे। कुतिया चल जा चुद और मस्तिया !”

छोटा खलील और उसके साथी के साथ हम दोनों सोफों की तरफ बढ़ गईं। दो सोफे पास पास खाली नहीं थे। पिंटू ने एक ग्राहक को उठाकर दूसरी साइड में बिठा दिया। खलील और उसका साथी पहले भी कोठे पर आ चुके थे। दोनों ने पैन्ट खोल कर अपने लौड़े हम दोनों के हाथ में पकड़ा दिए। थोड़ा मसलने पर खलील का लौड़ा ८ इंच लम्बा हो गया। खलील का लंड अच्छा मोटा था। खलील और उसके चेले ने अच्छे पैसे दिए थे इसलिए उन पर कोई रोक नहीं थी। वो हमारी चूत भी बजा सकते थे। खलील मेरी चूत रगड़ते हुआ बोला,”हम पी कम्पनी के गुंडे हैं अब तक ५६ आदमियों को निपटा चुके हैं। कुतिया तू नई आई लगती है तेरी चूत तो बड़ी माल है बिलकुल घरेलू नई बहू की तरह है। मेरी बीबी भी जब नई थी तो उसकी भी ऐसी ही मस्त थी, साली के अब तो ६ बच्चे हो गए हैं, घुसाने में मजा ही नहीं आता। आज मुझे कुछ काम है इसलिए आज तो तेरी चूत का स्वाद चख लेता हूँ कल आकर पूरी रात बजाता हूँ। इतनी हसीं चूत तो बॉम्बे की फाइव स्टार कॉल गर्ल्स की भी नहीं होती है। ऐसी चूत रोज़ रोज़ थोड़े ही मिलती है तुझे चोदने में तो रंडी मज़ा आ जायेगा।”

खलील में काफी ताकत थी वो जोर जोर से मेरे दूध और निप्पल्स मसल रहा था और चूत में ऊँगली कर रहा था उसका लौड़ा बिलकुल लोहे की रोड की तरह तन गया था। मुझे लौड़ा उमेठने में मज़ा आ रहा था और खलील के लंड से मस्तिया रही थी। मैंने खलील के होटों पर अपने होठ रख दिए और चूसने लगी थी। उसने मेरी गांड पर चुटकी काटी और बोला,”ले जरा लंड राज को चूस !”

मैं घोड़ी बन कर खलील का लंड चूसने लगी। उसने अपनी एक ऊँगली मेरी गांड में डाल दी और आगे पीछे करने लगा। साथ ही साथ बुदबुदा रहा था,”कुतिया तेरी गांड तो लगता है अभी तक मारी ही नहीं गई, बिलकुल ताजा माल है।”

थोड़ी देर बाद उसने मुझे हटा दिया और सोफे से मुझे गोद में उठाया और फिर सोफे पर पटक दिया और मेरी दोनों टांगें चौड़ी कर मेरे चूत के मुँह पर अपना लंड रख दिया और मेरी दोनों चूचियाँ कस कस के मसलते हुए अपना लंड एक झटके में मेरी चूत में डाल दिया। मैं जोर से चिल्ला उठी उई…,”मर गई … मर गई मर गई … छोड़ साले कुत्ते ! चूत फट गई, बाहर निकाल ! बहुत दर्द हो रहा है !”

शायद उसे इसमें मज़ा आया। उसने मेरी चूत और जोर जोर से फाड़नी जारी रखी। मेरी बगल में आशा भी चुद रही थी। हाल में २० -२५ बाहर के लोग शो देख रहे थे। वो रंडियों का ब्लू डांस कम हमारी चुदाई देखने का आनंद ज्यादा ले रहे थे। ३-४ धक्कों के बाद मुझे चुदने का मज़ा आने लगा। अभी खलील ने १०-१२ धक्के ही मारे थे कि आवाज़ आई,”मैं हूँ डॉन… मैं हूँ डॉन…”

खलील का फ़ोन बजा था। वो एकदम से घबरा उठा और फ़ोन उठा कर घिघयाते हुए बोला,”जी साहब जी साहब अभी आता हूँ साहब …”

उसने और उसके चेल ने अपने लंड बाहर खींच लिए बोला,”गुरु क्या बात है?

खलील बोला,”पी साहब का फ़ोन था अभी चलना है एक को निपटाना है !”

खलील का लंड बिल्कुल डाउन हो गया था, शायद पी साहब का डर बोल रहा था। वो दोनों तेजी से बाहर निकल गए मेरी चूत में वो एक आग लगा गया था।

खलील और उसके चेले चले गए थे शो ख़त्म हो गया था। उनके जाने के बाद एक मुस्टंडा परदे के पीछे से आया और हमें मौसी के कमरे में ले गया। मौसी दारू पी रही थी, मौसी बोली,”अरे बड़ी जल्दी बाहर आ गईं? क्या हुआ चुदी नहीं क्या?”

सीमा बोली,”साले लंड छुला कर भाग गए, उनके साहब का फ़ोन आ गया था !”

मौसी बोली,”तुम दोनों नंगी बहुत सुंदर लग रही हो ! थोड़ा ऊपर वाले हाल में मटक लो। २-४ रंडियाँ बच रही हैं वो भी उठ जाएँगी। यह लो पतली लाल साड़ी पहन ले, इसमें से जब तेरी चूचियाँ चमकेंगी तो ढेर नोट गिरेंगे तेरे ऊपर !”

मौसी एक मुस्टंडे की तरफ इशारा कर के फिर बोली,”अरे कालू, जरा इन दोनों को ऊपर नचा !”

मेरी गांड पर चुटकी काटते हुऐ मौसी बोली,”जा ! जरा मस्त होकर मटक। बड़ा मज़ा आएगा !”

कालू मुस्टंडा हम दोनों को ऊपर ले गया। आशा बोली,”डर नहीं, जैसे मैं करुँ वैसे कर ! कमर और स्तन मटका। बड़ा मज़ा आएगा और रुकियो नहीं, वर्ना साले मुस्टंडे गांड के अंदर सिगरेट बुझा देते हैं।”

मैं सोच चुकी थी कि अब रंडी बनने में ही भलाई है। तीन चार रंडियाँ वहां पर पहले से ही मटक रही थीं। धीर धीरे मैं भी अपने चूतड़ और चूचियाँ हिलाने लगी कभी नीचे झुककर कभी साड़ी का पल्लू गिरा कर मैं ग्राहकों को अपने दूधों के दर्शन करा रही थी। मेरे ऊपर कुछ नोट १०-१० के गिरे। मैं अब जोर जोर से अपने चूतड़ हिला रही थी। मेरा पल्लू नीचे गिर गया था मेरी नंगी चूचियाँ अब जोरों से हिल रही थीं। वहां खड़े सभी ग्राहक मेरे पर नोट फ़ेंक रहे थे। एक मुस्टंडे ने पीछे से आकर मेरी चूचियाँ मसली और गोद में उठाकर जाँघों तक मेरी साड़ी उठा दी और ग्राहकों के मुँह के सामने मेरी चूत खोल के रख दी। मेरी चूत का दीदार अब सामने खड़े ५- ६ ग्राहक कर रहे थे। उन्होंने मेरे ऊपर १०-१२ नोट फेंक दिए। थोड़ी देर में गाने चलने बंद हो गए। सभी रंडियाँ धंधे पर लग चुकी थीं। नाचने वाली ३-४ रंडियाँ कोने में जाकर बैठ गईं। मुझे पता चल गया था कि यहाँ सब लड़कियाँ मौसी की कुतिया हैं इस से ज्यादा कुछ नहीं। मौसी हाल में आयीं और बोली,”पिंटू, मोनी और इसे मेरे कमरे में पहुंचा ! बाकी बची हुई नाचने वालियों को धंधे पर लगा दे !”

अगले भाग की प्रतीक्षा करें ! Sex Stories

सौम्या उनकी इकलौती बेटी है.
वह बचपन से ही थोड़ी समझदार टाइप की थी.
बचपन में मेरी मां कह देती थीं कि तुम दोनों शादी कर लेना.
हम दोनों ही झेंप जाते.
पर शायद उसे मैं हमेशा से पसंद था.

फिर मैं इंजीनियरिंग करने बाहर चला गया.
वह भी चली गई.

यह बात लॉकडॉउन की है.

मैं घर पर था.
मेरी गर्लफ्रेंड ने भी मुझसे ब्रेकअप कर लिया था.

सौम्या मेरे घर में आती जाती रहती थी.
हम दोनों आपस में बातचीत भी करते थे.

घर पर भी लोग हमें देखने तक नहीं आते थे कि हम दोनों अकेले में क्या कर रहे हैं.
उनके विचारों में हमारे जवान होने के बाद भी किसी तरह का बदलाव नहीं आया था.

एक दिन की बात है. मैं सोया हुआ था और वह सुबह घर आई.

मम्मी ने उसे कहा- राज को जगा लो, दोनों चाय पी लेना.

वह चाय लेकर आई.
उसने चाय की ट्रे रखी और मुझे जगाने लगी.

मैं गहरी नींद में सोया हुआ था.
दो तीन बार जगाने पर भी जब मैं नहीं उठा, तो वह मेरा हाथ पकड़ कर खींचने लगी.

मैंने नींद में ही उसे अपने करीब खींच लिया और हग करके उसके होंठों पर किस कर दी.

दरअसल मैं नींद में उसे अपनी गर्लफ्रेंड समझ रहा था.
पर फिर अन्दर याद आया वह तो मुझे छोड़ कर जा चुकी है तो ये कौन है!

यह याद करते ही मेरी फटी और नींद खुल गई.
वह भी उठ कर बैठ गई.

मैंने देखा सौम्या कांप रही थी.
मैंने उससे सॉरी कहा और कहा मैंने तुम्हें अपनी गर्लफ्रेंड समझ लिया.

यह सुनकर वह उठी और चाय छोड़ कर चली गई.
मुझे लगा मेरी वजह से नाराज हो गई है.

वह तीन दिन तक घर नहीं आई.

फिर एक दिन शाम को आई.
मैंने कहा- सॉरी सौम्या, उस दिन मुझसे भारी भूल हो गई थी.

उसने हंस कर बात को टाल दिया.

फिर यूं ही हम दोनों में बातचीत होती रही.

एक दिन शाम को हम बात कर रहे थे.
तो उसने पूछा- तुम उस दिन किसके बारे में सोच रहे थे?

मैंने अनजान बनते हुए पूछा- क्या?
उसने कहा- मैं समझ गई कि तुमने सॉरी क्यों कहा.

मैंने पूछा- इतना गौर करती हो मेरी बातों पर?
उसने कहा- अब इतना तो हक है!

मैंने सब बता दिया.

उसने मेरी आंखों में देखते हुए कहा- तुम्हें भी कोई खोना चाहेगी क्या?
मैं समझा नहीं.
वह चली गई.

फिर दीवाली आई.
हम सब मिल कर घर पेंट कर रहे थे.
वह भी काम में हाथ बंटाती थी.

मेरे कमरे में पेंट की बारी आई, तो उसने रंग पसंद करके बताया. मैंने भी वही रंग सोचा था. मुझे सौम्या और ज्यादा अच्छी लगने लगी.

फिर वह कमरे में आई तो मैं पेंट कर रहा था.

वह मेरे लिए चाय लेकर आई थी.
मैं चाय पीने लगा तो वह खुद ब्रश उठा कर पेंट करने लगी थी.

उस वक्त मुझे उसको देखने में बड़ा सुखद लग रहा था, मुझे उस पर प्यार आ रहा था.

आज मैं उसका फिगर देखने लगा था.
उसकी काया मुझे बड़ी ही कमनीय लग रही थी.

मैं आपको भी उसकी फिगर बता दूँ.
वह 34-30-36 की थी.
उसकी आखें एकदम गहरी मानो कोई नेचर का पोर्ट्रेट देख रहे हों.

दूसरे दिन बाहर की ओर पेंट चल रहा था.
वह मुझे चाय देकर खुद सीढ़ी के ऊपर चढ़ कर पेंट कर रही थी.

मैं उसे देखते हुए चाय पीने लगा.
पेंट का ब्रश डिब्बे में डुबोने के चक्कर में वह एकदम से फिसल गई.

मैंने चाय का कप छोड़ा और उसे लपक लिया.
वह आह करती हुई मेरे एकदम करीब हो गई थी.
मैं उसकी आंखों में खो गया.

चाय का कप गिरने की आवाज हुई.
तो मम्मी की आवाज आई- क्या हुआ?
मैंने कहा- कुछ नहीं … कप गिर गया मेरे हाथ से.

फिर वह संभली और मुझे देख कर स्माइल करके बोली- हमेशा बचाओगे क्या?
मैंने भी उस अहसास को पहली बार महसूस किया था.

मैंने पता नहीं कैसे बस कह दिया- हां.
वह मेरे पास आई और बोली- सच में?

मैंने उसकी आंखों में देखते हुए उसे अपने गले से लगा लिया और कहा- हां हमेशा.
वह भी मेरी बांहों में कटी हुई डाली की तरह गिर सी गई.

मैंने उसका चेहरा उठाया और कहा- आई लव यू.
उसने कुछ भी नहीं कहा और चली गई.

मैं फिर उसका इंतजार करने लगा.
दीवाली के दिन वह फिर से आई.

मैंने कहा- प्रपोज किया था, घर नहीं आने के लिए नहीं कहा था.
उसने कहा- अच्छा जी, मिस कर रहे थे अपनी मिसेज को!

मैंने उसकी आंखों में देखा तो वह शर्मा गई.
तो मैंने कोहनी मारते हुए कहा- हां, मिसेज राज.

उसने सर झुका लिया और मुस्कुरा दी.
फिर हम सब दीवाली मनाने लगे.

दीवाली के अगली सुबह वह सुबह सुबह आई और मम्मी और मेरे लिए चाय बना कर लाई.

मम्मी को देने के बाद वह मेरे कमरे में आई और मुझे उठाने लगी.

मैं उठ गया था पर मैंने जानबूझ कर उसे फिर से खींच लिया और किस कर दिया.

उसने मुझे धक्का दिया और कहा- बचपन से तुम्हें प्यार किया है. क्या तुम भी करते हो?
मैंने कहा- देख लो.
उसने कहा- ठीक है.

फिर उस दिन के बाद हम दोनों नहीं मिले.
मैं जॉब पर वापस आ गया और वह भी.

6 महीने बाद मैं अपने घर गया.
वह भी आई हुई थी या शायद उसे पता था कि मैं आऊंगा.

अगले दिन फिर से मेरी पत्नी की तरह चाय लेकर आ गई.
मैं जाग कर बैठा हुआ था.

वह देख कर ऐसे मुस्कुराई जैसे जानती हो कि मैं उसका इंतजार कर रहा था.

चाय लेते हुए मैंने एक सिप ली और उससे पूछा- पूरी लाइफ केयर करोगी?
उसने कहा- तुम्हें पता नहीं क्या?

फिर मैंने अपना कप उसकी तरफ बढ़ा दिया.
उसने बेहिचक मेरी जूठी चाय से एक सिप ले लिया और अपने हाथ से में खुद मुझे पिलाने के लिए आगे झुकी.
मैंने भी पी ली.

उसने मेरे सर पर हाथ फेरा और कहा- गुड ब्वॉय.
मैंने उसकी तरफ देखा तो उसने कहा- किस्सी चाहिए मेरे बाबू को!

यह कह कर वह मेरे चेहरे पर झुकी और एक जोरदार किस दे दिया.
फिर कहा- सो स्वीट.

मैंने उसकी आंखों में प्यार से देखा.
उसने कहा- ये रोजाना चाहिए है तो सोच लो.

मैंने कहा- सोच कर ही आया था.
उसने कहा- क्या?

मैंने कहा- अभी देख लेना.
वह चली गई.

मैं उसकी मम्मी के पास गया और अपने और उसके बारे में बात की.
उन्होंने कहा- वह मेरी बेटी है और खुद समझदार है. वह जॉब भी करती है, उसे ही अपना फैसला लेना है. हम उसके साथ हैं.

फिर ये बात हमारे घर वालों ने की और हमारी शादी हो गई.

पहली रात को वह पहले से ही कपड़े चेंज करके बैठी थी.
मैं अन्दर आया तो उसने कहा- आप भी चेंज कर लो पतिदेव.
यह सुन कर मुझे अच्छा लगा.

मैं चेंज करके आया तो उसने हमारे लिए वाइन के दो ग्लास तैयार करके रखे थे.
मैंने कहा- वाह दूध की जगह सोमरस!

उसने मुझे ताना मारते हुए कहा- पुराने ख्यालों की नहीं हूँ मैं!

मैं उसके पास गया और उसके बालों में पीछे से साथ डाल कर उसे अपने चेहरे के पास लाकर कहा- तुम बचपन से इंतजार कर सकती हो … और मैं तुम्हारे दिल की बात नहीं समझता तो फिर प्यार किस बात का?

वह मेरी आंखों में देखने लगी और फिर उसने कांपते होंठों से मुझे चूम लिया.
मैंने भी उसे चूम लिया.

हम दोनों अलग हुए और हमने वाइन का पैग लिया.
कुछ देर बात करते हुए हम दोनों बिना कुछ किए वैसे ही सो गए.

सुबह 4.30 पर आंख खुली.
हल्की हल्की रोशनी आ रही थी.

मैं उठने लगा तो उठ नहीं पाया.
उसने मुझे जकड़ रखा था.

मेरे हिलने से वह भी उठ गई.
उसने ऐसे ही मुझे अपनी ओर खींच लिया और एक लंबा किस हुआ.

उसके बाद उसने कहा- ये तो हुआ मेरे हक का … अब आप कुछ पियेंगे?

मैंने उसकी तरफ देखा.
वह मुस्कुरा रही थी.

मैंने उसे अपनी तरफ खींचा.
वह घूम कर मेरी गोद में सीने से सीना लगा ऐसे बैठ गई जैसे चंदन से लिपटा सांप.

मैंने उसकी गर्दन पर एक छोटा सा किस किया.
उसने अपना हाथ पीछे करके मेरे बालों में अपनी उंगलियां फंसा लीं, फिर अपनी ओर खींच कर किस कर लिया.

मैंने पीछे से उसके गाउन का स्ट्रैप खोल दिया और दोनों हाथ आगे ले आया.

उसने मेरा हाथ पकड़ कर अपने एक मम्मे पर रख दिया.
मेरा दूसरा हाथ सरकते हुए उसके पेट और नाभि से खेलने लगा.

अब उसकी काम वासना से भरी हुई सिसकारी निकल गई.
मैं ब्रा के ऊपर से ही उसके निप्पल को निचोड़ रहा था.

हमें दस मिनट हो चुके थे.
अब वह गोद से उतरी और मेरे ऊपर चढ़ कर मुझे खाने लगी.

वह किस करते करते मेरी चड्डी तक पहुंच गई.
मैं उसकी चूचियों से खेल रहा था.

उसने सीधे ही मेरी चड्डी खींच दी.
मेरा 6 इंच लंबा और 3 इंच मोटा लंड उसके सामने था.

उसने उसे अपने हाथों में भरा और लौड़े की मुठ मारती हुई बोली- बचपन से एक ही सपना था कि तुम्हारी होना है. मेरी सहेलियों ने मुझसे कहा भी कि मजे कर ले, पर मुझे तुम्हारी होना था. तुम तो कर चुके हो!
मैंने उसके मुँह पर हाथ डाला और उसे अपने पास खींचते हुए कहा- अब बस तुम्हारा ही तो हूँ.

उसने कहा- यदि भरोसा ऐसा था तो बचपन में कहते … एक बार भी तुम्हें छोड़ कर नहीं गई होती.
मैंने कहा- फिर तुमसे प्यार कैसे होता?
वह मुस्कुरा दी.

उसने मेरे लंड को पकड़ा और मुँह में भर कर चूसने लगी.

फिर जब मुझे लगा कि अब रुक पाना मुश्किल है, तो मैंने उसे सीधा उठाया और बेड पर गिरा दिया.

उसने मेरी तरफ देख कर मुझे उंगली से इशारा करके चूत का रास्ता दिखाया.

मैंने कहा- ऐसे नहीं.
उसने मेरी तरफ देखा.

मैंने उसे उठाया और उसके शरीर पर कसे हुए ब्रा पैंटी को उतार दिया.
फिर दीवार से चिपका कर उसके दूध पीने लगा.
मैं एक चूची मसल रहा था और दूसरे हाथ से उसका गला दबा रखा था.

थोड़ी ही देर में वह मचलने लगी और मेरे लौड़े को हाथ में लेकर दबाने लगी.
उसने कहा- बस पतिदेव, अब चोद दीजिए ना!

मैंने कहा- ठीक है.

मैं भी खड़ा खड़ा थक गया था.
मैंने उसे बेड पर लिटाया और चूत चाटने लगा.

उसने कहा- कल भी यहीं रहूँगी और मेरी चूत भी … अभी पहले चोद दो ना प्लीज!

मुझे उसकी मासूमियत भरे चेहरे पर प्यार आ गया और अपने लंड को उसकी चूत पर लगा दिया.

काफी गीली चूत थी.
थोड़ा इधर उधर करने पर लंड का सुपारा अन्दर फंस गया.

उसे हल्का सा दर्द हुआ.
वह उछली.

मैंने कहा- क्या हुआ?
उसने दर्द भरे भाव से कहा- कुछ भी नहीं … बस रुकना मत, डाल दो तुम.

मैंने एक ही बार में पूरा लंड जड़ तक पेल दिया.

उसकी बहुत जोर से चीख निकली, जिसे सुन कर उसकी चचेरी बहन मानसी जो दिल्ली में डॉक्टर थी और शादी में आई थी, वह हमारे ही बाजू वाले कमरे में रुकी हुई थी.
मानसी जाग गई और अपने कमरे से उठ कर आकर दरवाजा खटखटाने लगी.

पर मेरी बीवी जो अपने नाखून मेरे पीठ में चुभो चुकी थी, अब चुप थी.
फिर उसकी बहन चली गई.

इधर मैंने भी उसे प्यार से सहलाते सहलाते उसका दर्द कम किया.

उसने मेरी आंखों में ऐसे देखा मानो उसने मुझे जीत लिया हो.

अपने आंसू पौंछते हुए आंखों से ऑर्डर दिया- आगे बढ़ो.
मैंने उसकी आंखों में देखते हुए चोदना शुरू किया और 15 मिनट चोदने के बाद वह झड़ गई.

मैंने उसे अपनी गोद में ले लिया और उसकी चूत में लंड पेल दिया.
इस आसन में मेरा लौड़ा सीधा उसकी बच्चेदानी में ठोकर मारकर वापस आ गया.

वह चिहुंक उठी और उसने कराहते हुए कहा- पतिदेव मर गई.

मैं खड़ा हुआ और उसे दीवार से लगा दिया.
एक तरह से वह हवा में लटकी हुई थी.
मेरा लंड उसकी चुत में फंसा था.

मैं उसे चोदने लगा.
वह मेरी ताकत की कायल हो गई थी और चुदाई का मजा लेने लगी थी.

काफी देर बाद मैं थक गया तो मैं उसे वैसे ही लेकर लेट गया.

वह मेरे ऊपर आ गई और अपनी गांड उठा उठा कर चूत में लंड लेने लगी.

इधर मैं उसकी चूचियों को निचोड़ रहा था.
वह पागलों की तरह आह आह कर रही थी.

फिर हम दोनों एक साथ आह आह करते हुए झड़ गए.

मैं उसे उठा कर बाथरूम में लेकर जाने लगा तो उसने मेरे चेहरे को अपने चेहरे से ढक दिया और होंठ चूसने लगी.

लेकिन मुझे गेट बंद होने की आवाज आई.
मुझे लगा बाथकमरे में कोई है.

मेरा और मेरे बगल वाले कमरे का साझा बाथरूम है.
मैं रुक गया.

फिर मैं आगे बढ़ा.
दरवाजा हल्का सा खुला था.

पर उस टाइम मैंने गौर भी नहीं किया, बस बाथरूम में आ गया.

उधर भी साफ सफाई के बाद हमारी चुदाई होने लगी और बहुत देर तक हुई.

चुदाई की आवाज़ शायद मानसी ने सुनी ही होगी, जो उस टाइम हम दोनों के ध्यान में नहीं आई.

Hindi Sex Stories

प्रीती की कहानी सुनने के बाद मुझे सही Hindi Sex Stories में लगा कि जो कुछ मैंने किया वो गलत किया था। खैर जो होना था सो हो गया, अब वो बदला नहीं जा सकता था। मैंने प्रीती से कहा, “प्रीती! मैंने कुछ दिन बाद ही तुमसे माफ़ी माँग ली थी, उसके बाद भी मैं कई बार तुमसे माफ़ी माँग चुका हूँ, पर तुमने मेरी एक नहीं सुनी। आज फिर मैं दिल से तुमसे माफ़ी माँग रहा हूँ, मुझे माफ़ कर दो।”

“हाँ मुझे मालूम है, और मैं तुम्हें उस दिन भी माफ़ कर सकती थी, पर मैं तुम्हें एक सबक सिखाना चाहती थी। आज वो पूरा हो गया”, प्रीती ने जवाब देते हुए कहा, “सुनील मैं एक शर्त पर ही तुम्हें माफ़ करूँगी! अगर तुम मुझे एम-डी और महेश से बदला लेने में मेरी मदद करोगे?”

“मेरा वादा है तुमसे! मैं तुम्हारी पूरी मदद करूँगा।” मैंने जवाब दिया। “अब अंजू और मंजू के बारे में क्या करना है? अगर ये दोनों प्रेगनेंट हो गयी तो?”

“इसके बारे में मैंने सोच लिया है, सुबह मैं दोनों को डॉक्टर के पास ले गयी थी, इतनी जल्दी तो कुछ पता नहीं चलेगा किंतु भविष्य के लिये उसने बर्थ कंट्रोल पिल्स दे दी हैं”, प्रीती ने जवाब दिया।

“लेकिन अब इन दोनों का यहाँ क्या काम है, क्या तुम्हारा इनसे मक्सद पूरा नहीं हुआ?” मैंने पूछा।

“भाभी का हो गया होगा पर हमारा नहीं! अभी हम कुछ दिन और यहाँ रुकना चाहते हैं और खूब चुदाई करना चाहते है, क्यों भाभी ठीक है ना?” अंजू ने प्रीती से पूछा।

“क्या तुम लोग भी यहाँ रहकर वेश्या बनना चाहती हो? तुम लोगों का दिमाग खराब हो गया है?” मैंने थोड़ा झल्लाते हुए कहा।

“हाँ भैया! हम लोग पागल हो गये हैं, और एम-डी और उसके दोस्तों से चुदवा कर उनको पागल कर देंगे, जिन्होंने भाभी को उन सबसे चुदवाने पर मजबूर कर दिया था, और साथ ही साथ पैसा भी कमाना चाहते हैं,” मंजू ने कहा। इस कहानी के लेखक सुनील अग्रवाल है!

“पर मैंने तो प्रीती से नहीं कहा था उन लोगों से चुदवाने को!” मैं थोड़ा गुस्से में बोला।

“नहीं भैया! आप गलत हो, जिस दिन आपने एम-डी और महेश को भाभी को चोदने दिया उसी दिन आपने भाभी को दूसरों से चुदवाने के लिये मजबूर कर दिया था”, अंजू ने कहा।

“हाँ भैया और हमारी शादी से पहले चुदाई भी आपके कारण ही हुई है”, मंजू ने कहा।

“पर ये मैंने नहीं, तुम्हारी भाभी ने किया है”, मैंने रोते हुए कहा।

“अगर आपने प्रीती भाभी के साथ ये सब ना किया होता तो ये हमारे साथ इस तरह ना करती”, अंजू बोली।

“प्रीती! तुम ही इन्हें समझाओ ना कि तुम्हारा बदला पूरा हो चुका है”, मैंने मिन्नत करते हुए कहा।

“करने दो इन दोनों को, इन्हें कोई तकलीफ़ नहीं होगी… मैं हमेशा साथ रहुँगी। आओ पहले मैं तुम्हें इन दोनों की कुँवारी चूत के फटने की कुछ तसवीरें दिखाती हूँ”, प्रीती ने पर्स में से तसवीरें निकालते हुए कहा।

“भाभी! आप ने हम लोगों की तसवीरें कब निकाली?” अंजू ने पूछा।

“भाभी आप बड़ी बदमाश हो, आपको ऐसा नहीं करना चाहिये था”, मंजू बोली।

उनकी अलग-अलग रूप में चुदाई की तसवीरें देख कर मैं पागल सा हो गया, “बस अब मुझसे और बर्दाश्त नहीं होता”, कहकर मैंने वो तसवीरें फेंक दीं।

“चलो लड़कियों! अब नहा धो कर तैयार हो जाओ, तब तक मैं फोन करके पास के होटल से खाना मंगवा लेती हूँ, आज मैंने बहुत पी ली है… खाना बनाने की हिम्मत नहीं है मुझमें”, प्रीती ने उन दोनों से कहा।

खाना खाते समय हम लोग बातें कर रहे थे कि प्रीती बोली, “चलो अब तुम लोग भी सोने जाओ और मैं भी सोने जा रही हूँ।”

“इतनी जल्दी भाभी? अभी तो बहुत वक्त पड़ा है,” अंजू बोली। इस कहानी के लेखक सुनील अग्रवाल है!

“हाँ इतनी जल्दी! क्योंकि आज मैं तुम्हारे भैया के लंड की एक-एक बूँद अपनी चूत में ले लूँगी। कई दिन हो गये हैं तुम्हारे भैया के मोटे लंड से नहीं चुदवाया है…” कहकर प्रीती मुझे घसीट कर बेडरूम में ले आयी।

रात भर हम जमकर चुदाई करते रहे। प्रीती ने मुझे एक पल भी साँस नहीं लेने दी।

अगले दिन मैं जब ऑफिस पहुँचा तो महेश मुझे एक नये केबिन की और ले गया। दरवाजे पर नेम प्लेट लगी थी, सुनील अग्रवाल {फायनेंस और अकाऊँट्स मैनेजर}। “थैंक यू सर”, मैंने खुश होते हुए कहा।

“मुझे नहीं! अपने एम-डी साहिब को थैंक यू बोलो, उन्होंने रातों रात इसे तैयार करवाया है, जाओ अब मजे लो… स्पेशियली इस नये सोफ़े का। तुम्हारी तीनों एसिस्टेंट्स इंतज़ार कर रही हैं…” महेश हँसते हुए बोला।

नया केबिन पहले केबिन से बड़ा था और उसकी खासियत यह थी कि उसमें सोफ़ा-कम-बेड भी था। अपनी तीनों एसिस्टेंट्स को बुला कर मैंने नये सोफ़े पर चुदाई का आनंद लिया। इस कहानी के लेखक सुनील अग्रवाल है!

शनिवार को महेश ने मुझे होटल शेराटन के सूईट में पहुँचने को कहा। शाम को मैंने प्रीती को बताया, तो उसने कहा, “तुम्हारा सही इनाम मिलने का वक्त आ गया है, शायद कोई बिना चुदी चूत हो…”

“मेरा दिल नहीं कर रहा जाने के लिये”, मैंने कहा।

“नहीं सुनील तुम्हें जाना चाहिये! जाओ और चुदाई का मजा लो, मैं बुरा नहीं मानूँगी, कसम से, वैसे भी हम तीनों बिज़ी हैं…” प्रीती ने कहा।

जब मैं होटल के सूईट में पहुँचा तो एम-डी और महेश को मेरा इंतज़ार करते पाया, “आओ सुनील बैठो और अपने लिये ड्रिंक बना लो।”

मैं अपने लिये ड्रिंक बना कर सोफ़े पर बैठ गया और शक की निगाहों से उन्हें देखने लगा।

“डरो मत सुनील! आज हमने तुमसे कुछ लेने नहीं, बल्कि तुम्हें तुम्हारे काम का इनाम देने के लिये बुलाया है, इसलिये निश्चिंत हो जाओ”, एम-डी ने अपने ग्लास में से घूँट भरते हुए कहा।

“सुनील तुमने सुना तो होगा कि मैंने अपनी ऑफिस की हर औरत को चोदा है?” एम-डी ने मुझसे पूछा।

“हाँ सर! कुछ ऐसी अफ़वाह सुनी तो है…” मैंने जवाब दिया। इस कहानी के लेखक सुनील अग्रवाल है!

“ये अफ़वाह नहीं, हकीकत है सुनील! मैंने और महेश ने ऑफिस में काम करने वाली हर लड़की या औरत को खूब चोदा है। नयी-नयी लड़कियों को चोदने के बाद यहाँ काम पर लगाया है। आज हम दोनों तुम्हें अपना राज़दार और हिस्सेदार बनाना चाहते हैं”, एम-डी ने गर्व से कहा, मगर मैंने ये नहीं सोच था।

“इसका मतलब है कि तुम ऑफिस की किसी भी औरत को अपने नये केबिन में बुला कर उसे चोद सकते हो, तुम्हें मेरी परमिशन है इस काम के लिये।”

“थैंक यू सर”, मैंने जवाब दिया।

मेरे ऑफिस में कई लड़कियाँ थीं जिन्हें मैं चोदना चाहता था। इस बात ने मेरा काम और आसान कर दिया था। ये सोच मेरे चेहरे पर मुस्कान आ गयी थी।

महेश ने ताली बजाते हुए कहा, “सुनील… कल का क्यों इंतज़ार करें! आओ आज से ही शुरू करते हैं।”

महेश के ताली बजते ही बेडरूम से दो निहायत ही सुंदर लड़कियाँ बाहर निकल कर आयी। दोनों के हाथों में शराब के ग्लास और सिगरेट थीं। “ये रेहाना है, हमारे डिसपैच डिपार्टमेंट से और ये नसरीन है हमारी ब्राँच ऑफिस से”, महेश ने मेरा उनसे परिचय कराते हुए कहा।

“पहले कभी इन्हें देखा है? मैंने आज की रात सबसे बेहतरीन लड़कियों को अपनी ऑफिस और ब्रन्च ऑफिस से चुना है…” एम-डी ने कहा।

“सर रेहाना को मैंने देखा है, और इसे चोदना भी चाहता था पर नसरीन मेरे लिये नयी है…” मैंने जवाब दिया।

“चिंता मत करो! थोड़े दिनों में सबको जान जाओगे…, लड़कियों! ये सुनील है और आज से इसे मेरी परमिशन है कि ये तुम सबको जब जी चाहे चोद सकता है, ये बात औरों को भी बता देना, समझ गयी तुम दोनों?” एम-डी ने उनसे कहा।

“हाँ सर! हम समझ गये”, रेहाना ने अपनी गर्दन हिलाते हुए सिगरेट का धुँआ बाहर छोड़ते हुए कहा।

“चलो फिर शुरू हो जाओ और अपना छुपा हुआ खज़ाना सुनील को दिखाओ”, महेश ने हुक्म दिया।

दोनों अपने कपड़े उतारने लगी। दोनों ही काफी सुंदर थी, भरी-भरी छातियाँ, पतली-पतली कमर, बिना बालों की चूत काफी शानदार लग रही थी, तरबूज जैसी गाँड, लंबी-लंबी सुडौल टाँगें और अंत में गोरे- गोरे पैरों में बहुत ही सैक्सी और ऊँची ऐड़ी वाली सैंडल। उन्हें नंगा देखते ही मेरा लंड खड़ा हो गया।

“चलो महेश यहाँ से! और सुनील को चुदाई का पूरा आनंद लेने दो”, एम-डी ने कहा।

“रुकिये सर, आपने कहा कि मैं आज से आपका पार्टनर और राज़दार हूँ तो क्यों ना हम लोग मिलकर इन्हें चोदें?” मैंने एम-डी से कहा।

“देखा महेश! मैं नहीं कहता था कि अपना सुनील मतलबी नहीं है, ये सब कुछ शेयर करना चाहता है”, एम-डी खुश होते हुए बोला, “लेकिन सुनील ये दो हैं और हम तीन…”

“सर औरत के पास तीन छेद होते हैं, मर्द को मज़ा देने के लिये, चूत गाँड और मुँह… और इसके लिये हम तीन हैं।”

“मेरे लिये ये नयी बात होगी”, एम-डी ने कहा, “चलो महेश… कपड़े उतारते हैं और ट्राई करते हैं।”

“सर हम लोग एक-एक कर के तीनों छेदों का मज़ा लेंगे”, मैंने एम-डी को समझाया। इस कहानी के लेखक सुनील अग्रवाल है!

“ओह गॉड!!!” हम तीनों को नंगा देखते हुए एक ही झटके में अपना पैग गटकते हुए रेहाना बोली।

एम-डी की नज़र जब मेरे लंड पर पड़ी तो उसने हँसते हुए कहा, “महेश! देखो सुनील का लंड तुमसे बड़ा और मोटा है, अब तुम्हारे मोटे लंड के किस्से ही रह जायेंगे।”

रेहाना ने मेरे लंबे लंड को देखते हुए कहा, “सर!!! मैं ये लंबा लंड अपनी गाँड में नहीं लूँगी।”

“रेहाना! तुम्हें पता है मुझे ’ना’ सुनने की आदत नहीं है, इसलिये सुनील तुम्हारी गाँड में अपना लंड डालेगा।” फिर रेहाना ने विरोध नहीं किया। रेहाना वैसे भी काफी नशे की हालत में थी।

एम-डी बिस्तर पर लेट गया और रेहाना ने एम-डी के ऊपर आकर उसका लंड अपनी चूत में ले लिया और उछलने लगी। एम-डी का लंड जड़ तक उसकी चूत में समा चुका था। रेहाना की गाँड उभरी हुई थी। अपने लंड को सहलाते हुए मैं अपने थूक से उसकी गाँड को चिकना कर रहा था।

“सुनील ये कोई तरीका नहीं है इतनी सुंदर गाँड मारने का, मैं होता तो एक ही धक्के में पूरा लंड डाल देता…” महेश ने कहा।

“क्या उसे दर्द नहीं होगा?” मैंने कहा।

“हाँ… उसे दर्द तो होगा, पर जब वो दर्द से चींखेगी तो उसके दर्द की आवाज़ मुझे अपने कानों में संगीत की तरह लगती है…” महेश बोला।

“तुम्हें जैसे करना है, वैसे करना, मुझे अपने तरीके से करने दो”, मैंने जवाब दिया। रेहाना मेरी और देख कर मुस्कुरा दी। उसकी आँखें नशे में बोझल थीं। मैंने अपने लंड और उसकी गाँड को चिकना कर अपने लंड को गाँड के छेद पर रख कर थोड़ा अंदर घुसाया।

“ऊऊऊऊऊऊऊऊईईईईईईई प्लीज़ सर!!! रुक जाइये, बहुत दर्द हो रहा है, मैं मर जाऊँगी”, रेहाना दर्द से चिल्लायी।

“सुनील रुकना नहीं! और जोर से डालो”, एम-डी ने कहा। मैंने अपने लंड को और अंदर घुसाया।

“ऊऊऊऊऊऊऊऊऊईईईईईईईईईईईईई……. अल्लाहहहहह मर गयीईईईई…” रेहाना जोर से चींखी।

मैंने रेहाना की गाँड में धक्के लगाते हुए महेश से कहा, “अब तुम अपना लंड रेहाना के मुँह में दे दो।”

मैं ऊपर से गाँड मर रहा था और एम-डी नीचे से धक्के लगा कर उसकी चूत को चोद रहा था। रेहाना जोर-जोर से महेश के लंड को चूस रही थी। करीब पाँच मिनट के बाद हमारे तीनों के लंड ने रेहाना के तीनों छेद मैं पानी छोड़ दिया। इस कहानी के लेखक सुनील अग्रवाल है!

“नसरीन!! अब तुम्हारी बारी है”, महेश ने कहा।

“ठीक है सर! सुनील सर का लंड अपनी गाँड में लेकर मुझे खुशी होगी”, नसरीन ने जवाब दिया, “लेकिन सर इजाज़त हो तो पहले मैं अपनी डोज़ ले लूँ?”

“जरूर….” लेकिन जल्दी एम-डी ने कहा।

मुझे कनफ्यूज़्ड देख कर महेश ने बाताया कि नसरीन चुदाई के समय ड्रग्स लेती है और फिर बहुत मस्त हो कर चुदवाती है। मैंने देखा कि नसरीन ने अपने पर्स में से एक पैकेट निकाला और एक सफ़ेद से पाऊडर की मेज पर धारी सी बना दी और फिर एक सौ रुपये के नोट को रोल करके उसके द्वारा वो पाऊडर अपनी नाक में खींचने लगी।

“चलिये सर… अब मैं तैयार हुँ, चुदाई के लिये…” नसरीन अपना बाकी का पैग गटकते हुए बोली। उसकी आँखों में एक अलग सी चमक थी और उसकी आँखों की पुतलियाँ फैली हुई थीं।

इस बार महेश बिस्तर पर लेट गया और नसरीन उसके लंड को अपनी चूत में लेकर उस पर लेट गयी। एम-डी ने अपना लंड उसके मुँह में दिया। मैंने ऊपर आकर उसकी गाँड में एक ही धक्के में पूरा लंड पेल दिया।

हम तीनों जोर-जोर के धक्के लगाते हुए उसे चोद रहे थे। नसरीन की गाँड रेहाना की गाँड से कसी थी इसलिये मुझे और मज़ा आ रहा था। नसरीन की सिसकरियाँ भी तेज थी।

हम तीनों ने जम-जम कर धक्के मारते हुए अपना अपना पानी छोड़ दिया। थोड़ी देर बाद एम-डी ने कहा, “सुनील तुम मज़े लो, हम लोग जाते हैं, देर हो रही है।”

उनके जाने के बाद मैंने एक-एक बार और उन दोनों की चुदाई की और रात के दो बजे घर पहुँचा। इस कहानी के लेखक सुनील अग्रवाल है!

मैं दूसरे दिन ऑफिस पहुँचा तो मुझे सभी महिला एम्पलोयिज़ की लिस्ट मिल गयी। उनका नाम, उम्र, किस डिपार्टमेंट में काम करती है और कितने साल से। उस दिन के बाद मैं एक-एक करके उनको अपने केबिन में बुला कर उन्हें चोदने लगा।

थोड़े ही दिन में ये बात आग की तरह फ़ैल गयी कि मेरा लंड महेश के लंड से मोटा है।

थोड़े दिन बाद पिताजी की चिट्ठी आयी कि मैं अंजू और मंजू को वापस भेज दूँ। मैंने उन दोनों की टिकट करा दी। जिस दिन वो जा रही थीं, मैंने उनसे कहा, “तुम दोनों वादा करो कि यहाँ से जाने के बाद ये सब छोड़ दोगी?”

“भैया! हम आपसे वादा करते हैं कि अब शादी से पहले किसी से नहीं चुदवायेंगे”, मंजू ने कहा।

उन दोनों को ट्रेन में बिठा कर मैं घर पहुँचा तो प्रीती ने कहा, “सुनील अब अंजू और मंजू यहाँ से जा चुकी हैं तो क्यों ना हम एम-डी और महेश से अपना बदला लेने का प्लैन बनायें।”

“तुम क्या करना चाहती हो?” मैंने पूछा।

“सबसे पहले मैं उनके बारे में सब कुछ जानना चाहुँगी”, प्रीती ने कहा।

“तुम उन दोनों से इतनी बार चुदवा चुकी हो, और क्या जानना चहोगी?” मैंने कहा।

“मजाक मत करो, मैं उनकी हर बात जानना चाहती हूँ, जिससे उनकी कमजोरियों का पता चल सके, सुनील! तुम जितना भी जानते हो मुझे बताओ”, प्रीती बोली।

“महेश के बारे में इतना नहीं जानता। पर हाँ एम-डी, मिसेज योगिता के साथ उनके ही बंगले पर रहते हैं, उनकी बीवी का नाम मिली है और उनकी दो बेटियाँ हैं”, मैंने जवाब दिया।

“दो बेटियाँ!” प्रीती के चेहरे पर मुस्कान आ गयी।

“मैं जानता हूँ तुम क्या सोच रही हो पर अभी वो छोटी हैं”, मैंने कहा।

“सुनील! तुम मिस्टर रजनीश, तुम्हारे एक्स एम-डी के परिवार के बारे में क्या जानते हो?” प्रीती ने पूछा।

“यही कि उनकी विधवा मिसेज योगिता, और उनकी लड़की रजनी साथ में रहती हैं। एम-डी रजनी को अपनी बेटियों से भी ज्यादा प्यार करता है”, मैंने जवाब दिया।

“तुम्हें ये कैसे मालूम?” उसने पूछा।

“मुझे रजनी ने बताया था, उसने छुट्टियों में कुछ दिन कंपनी में काम किया था।” मैंने जवाब दिया।

“क्या तुमने रजनी को चोदा है? मुझे सच- सच बताना”, उसने पूछा।

कुछ देर सोचते रहने के बाद मैंने सच बताते हुए कहा, “हाँ! मैंने उसे चोदा है पर वो हमारी शादी के पहले की बात है।”

“उस समय वो कुँवारी थी! है ना? क्या उसके बाद तुमने उसे चोदा है?” प्रीती ने फिर पूछा।

“नहीं प्रीती! कसम ले लो, मैंने उसके बाद उसे एक बार ही मिला हूँ, वो भी पार्टी में तुम्हारे साथ”, मैंने जवाब दिया।

“सुनील मैं जानती हूँ तुम सच बोल रहे हो! जब तुम झूठ बोलते हो तो तुम्हारे चेहरे से पता चल जाता है। रजनी तुम्हें प्यार करती है, मैंने उसकी आँखों में तुम्हारे लिये प्यार देखा है, क्या तुम जानते हो?” प्रीती ने कहा।

“मुझे भी ऐसा कई बार लगा है”, मैंने जवाब दिया।

“क्या पता तुम्हें फिर रजनी को चोदना पड़े”, प्रीती ने मुझे बाँहों में भरते हुए कहा, “फिलहाल तो रजनी को भूल जाओ, वो यहाँ नहीं है! पर मैं तो हूँ, सुनील! मुझे चोदो और इतना चोदो कि मेरी चूत माफी माँगने लगे।”

मैं उसे बाँहों में भर कर बेडरूम में ले गया और पूरी रात उसे कस-कस कर चोदता रहा। इस कहानी के लेखक सुनील अग्रवाल है!

दूसरे दिन से प्रीती एम-डी और महेश के घर जाने लगी। वो बराबर उनसे और उनके परिवार से मिलने लगी। अब वो उनके परिवार की एक सदस्या जैसे हो गयी थी। एक दिन मैंने उससे पूछा, “क्या पता लगाया तुमने इतने दिनों में?”

“कुछ खास नहीं, महेश के दो बच्चे हैं! एक लड़की मीना २२ साल की… जो अपना ग्रैजुयेशन कर रही है और एक लड़का अमित १६ का। लगता है महेश घर से ज्यादा बाहर चुदाई करता है, प्रीती ने हँसते हुए कहा, मीना और मैं अच्छे दोस्त बन गये हैं।”

“एम-डी के बारे में क्या पता लगा?” मैंने पूछा।

“वहाँ भी कुछ खास हाथ नहीं लगा। मिसेज योगिता और मिसेज मिली, अच्छी सहेलियाँ हैं, और हाँ तुमने सच कहा था! उनकी बेटियाँ छोटी हैं। हाँ! रजनी और मैं अच्छे दोस्त बन गये हैं। मैंने हार नहीं मानी है, एक दिन भगवान हमारी मदद जरूर करेगा।”

करीब तीन महीने बाद मुझे पिताजी की चिट्ठी मिली कि अंजू और मंजू की शादी पक्की हो गयी। करीब के गाँव के जमीनदार के लड़कों के साथ। हम दोनों को शादी में बुलाया था।

मैं और प्रीती हमारे घर शादी अटेंड करने पहुँचे। देखा अंजू और मंजू बहुत खुश थीं। शादी के दिन जब हम अकेले में मिले तो प्रीती ने उनसे पूछा, “तुम दोनों को कोई शिकायत तो नहीं है?”

अंजू ने मंजू की तरफ देख कर कहा, “सिर्फ़ एक!”

“और वो क्या है?” प्रीती ने पूछा। इस कहानी के लेखक सुनील अग्रवाल है!

“हम इतने दिन वहाँ रहे पर भैया को हम इतने सुंदर नहीं दिखे कि वो हमें चोद सके”, अंजू ने कहा।

“अभी भी कुछ नहीं बिगड़ा है, तुम भी यहीं हो और तुम्हारे भैया भी! जाओ और चुदवा लो उनसे, मैं बुरा नहीं मानुँगी”, प्रीती ने हँसते हुए कहा।

“प्रीती! अपनी सीमा में रहो”, मैंने अपनी बहनों को बाँहों में भरते हुए कहा, “ऐसी बात नहीं है पगली, जब तुम दोनों का नंगा बदन देखा तो मेरा लंड तन कर खड़ा हो गया था, अगर तुम दोनों मेरी बहनें ना होती तो उसी समय तुम दोनों को चोद देता।”

“मैं भी इस चीज़ को मानती हूँ, रिश्तों की कदर करनी चाहिये”, प्रीती बीच में बोली, “अब तुम दोनों को अपनी सुहागरात का इंतज़ार होगा?”

“हाँ भाभी, तीन महीने हो गये चुदवाये, अँगुली से अपनी चूत चोद-चोद कर देखो हमारी अँगुली भी घिस कर एक इंच छोटी हो गयी है”, मंजू ने अपनी अँगुली दिखाते हुए कहा।

“मैं तो यही प्रार्थना करती हूँ कि सब अच्छी तरह से हो जाये, हमारे पतियों को ये ना पता चले कि हमारी चूत कुँवारी नहीं है”, अंजू थोड़ा सिरियस होते हुए बोली।

“घबराओ मत! सब ठीक होगा”, प्रीती ने उन्हें सांतवना दी।

शादी के बाद हम लोग वापस लौट आये। प्रीती बराबर एम-डी और महेश के घर जाती रही। हमारी चुदाई वैसे ही चल रही थी। मैं ऑफिस में लड़कियों को चोदता और प्रीती को घर पर। प्रीती भी घर पर मुझसे चुदवाती और क्लब में दूसरों से। वो चाहे एम-डी और महेश से कितनी भी गुस्सा हो पर मुझे लगने लगा था कि प्रीती को यह शबाब-शराब से भरपूर ऐय्याश लाइफ स्टाईल रास आ गया था। उसकी चुदाई की आग पहले से बहुत बढ़ गयी थी। इस कहानी के लेखक सुनील अग्रवाल है!

एक दिन मैं ऑफिस से घर लौटा तो देखा प्रीती एक खत फढ़ रही थी, और जोर-जोर से हँस रही थी।

“किसका खत है?” मैंने पूछा।

“लो तुम ही पढ़ के देख लो”, प्रीती ने मेरे हाथ में खत पकड़ा दिया।

मैंने खत लेके पढ़ा………………………..

“हमारी प्यारी भाभी,

सॉरी हम दोनों आप को खत नहीं लिख पाये।

हम दोनों बहुत मज़े में हैं। हमारे पति बहुत ही अच्छे इनसान है। हर रात को हमारी जमकर चुदाई करते हैं। मैं शुरू से बताती हूँ।

हाँ हमारी सुहागरात की रात से! हमारे पतियों ने पहले किसी लड़की को चोदा नहीं था, इसलिये जल्दबाज़ी में उन्हें हमारे कुँवारे ना होने का पता नहीं चला। फिर भी हम उन्हें कहते रहे, जरा धीरे-धीरे करो, दर्द हो रहा है।

कुछ महीनों तक ऐसे ही चलता रहा। फिर हमें चुदाई में इतना मज़ा नहीं आता था, क्योंकि हमारे पति बहुत ही सीधे हैं। ना तो वो हमारी चूत चाटते हैं, ना ही हमे अपना लौड़ा चूसने देते हैं। गाँड मारने की बात तो जाने दो।

फिर हम दोनों ने मिलकर इसका उपाय निकाला। हम दोनों ने एक दूसरे के पति को पटाया और उनसे चुदवा लिया। फिर एक बार हमने नाटक करके एक दूसरे को दूसरे के पति के साथ पकड़ लिया। हमारे पति इतने सीधे हैं कि हमसे माफी माँगने लगे। हमने उन्हें माफ़ किया पर एक शर्त पर कि वो हमें साथ-साथ चोदेंगे।

अब हम चारों साथ में ही सोते हैं, जैसे राम और श्याम के साथ सोते थे। हमने उन्हें चूत चाटना भी सिखा दिया है और हम उनका लंड भी मज़े से चूसते हैं। हम चारों का आपके पास आने को बहुत मन कर रहा है।

और आपका क्या हल है? भैया को हमारा प्यार देना।

बाय-बाय!

आपकी रंडी ननदें, अंजू और मंजू।”

“थैंक गॉड! ये दोनों अपने जीवन में सैटल हो गयी”, मैंने खत पढ़कर कहा।

समय गुजरने लगा और प्रीती की एम-डी और महेश से बदला लेने की ख्वाहिश और ज्यादा तेज होने लगी। मैंने उसे सांतवना देते हुए कहा, “प्रीती हिम्मत रखो! कोई रास्ता जरूर निकल आयेगा।” मुझे क्या मालूम था कि रास्ता भविष्य में हमारा इंतज़ार कर रहा है।

एक दिन मैंने ऑफिस से लौट कर प्रीती को बताया कि महेश बरबाद हो गया है। इस कहानी के लेखक सुनील अग्रवाल है!

“क्यों कैसे?”

“तुम्हें याद है? उसने बताया था कि वो अपना सारा पैसा शेयर मॉर्केट में लगाता है। मॉर्केट बहुत नीचे गिर गया है और उसे भारी नुकसान लगा है। बेचारा रो रहा था मेरे सामने, कि उसके पास अब कुछ भी नहीं बचा है।”

“भगवान ने अच्छा सबक सिखाया है हरामी को!”

“हाँ प्रीती, वो तो आत्महत्या तक करने की सोच रहा है।”

“नहीं सुनील! उसे आत्महत्या नहीं करने देना, पहले मेरा बदला पूरा हो जाये, फिर चाहे वो आत्महत्या कर ले। सुनील तुमने क्या बताया उसे पैसे की तकलीफ है? इससे मेरे दिमाग में एक ऑयडिया आया है”, प्रीती ने कहा।

मैंने प्रीती को बाँहों भरते हुआ पूछा, “जल्दी से बताओ क्या ऑयडिया है?”

“अभी नहीं पहले मुझे सोचने दो, चलो चल कर सैलिब्रेट करते हैं”, कहकर प्रीती ने मुझे बाँहों में भर लिया और अपने होंठ मेरे होंठ पर रख कर चूमने लगी।

उसने दो पैग बनाये और ड्रिंक पीने के बाद हम कपड़े उतार कर बिस्तर पर लेट गये। “ओह सुनील! देखो तुम्हारा लंड कैसे तन कर खड़ा है”, प्रीती ने मेरे लंड को अपने हाथों में पकड़ते हुए कहा।

“पर मैं तो समझा था कि तुम अपने प्लैन के बारे में बताओगी?”

“ओहहह सुनील! प्लैन तो वेट कर सकता पर इस समय इस खड़े लंड की ज्यादा चिंता है, आओ और मुझे कस कर चोदो”, प्रीती ने अपनी टाँगें फैला कर कहा।

जैसे ही मैंने अपना लंड उसकी चूत में घुसाया, “ओहहहहहह सुनील!!!” उसके मुँह से सिसकरी निकली।

“सुनील! मैं आज कितनी खुश हूँ, मुझे महेश से बदला लेने का तरीका मिल गया।”

“प्रीती! अब महेश के बारे में सोचना छोड़ो और इस बात पे ध्यान दो कि मैं अब तुम्हारी चूत के साथ क्या करने वाला हूँ”, मैंने अपना लंड तेजी से उसकी चूत के अंदर बाहर करते हुए कहा।

“हाँ सुनील! मुझे चोदो, बहुत अच्छा लग रहा है”, वो कहने लगी और मैं उसे और तेजी चोद रहा था। मेरा लंड पिस्टन की तरह अंदर बाहर हो रहा था।

मेरे ध्क्कों की रफ़्तार बढ़ते देख उसने अपनी दोनों टाँगें मेरी कमर पे जकड़ लीं और अपने कुल्हे उछाल कर थाप से थाप मिलाने लगी। उसके मुँह सिसकरियाँ निकल रही थी।

“हाँआंआंआं सुनील!!! और जोर से!!!!!, हाँआँआँ ऐसे ही करते जाओ, हाँ और अंदर तक घुसा दो….. ओहहहहह….. आआआआआआहहहहहह….. मैं तो अपनी मंज़िल के करीब हूँ। मेरा छुटाआआ!!!” कहकर वो निढाल पड़ गयी। इस कहानी के लेखक सुनील अग्रवाल है!

मेरा नहीं छूटा था, इसलिये मैं और तेजी से उसे चोदने लगा। “लगता है तुम्हारा नहीं छुटा”, उसने भी मेरा साथ देते हुए कहा।

“नहीं, पर जल्द ही छूटने वाला है”, और मैं जोर-जोर से अपने लंड को अंदर डालने लगा।

वो फिर मेरा साथ देने लगी, “सुनील, रुको मत! हाँआँ चोदते जाओ… हाँआंआं लगता है मेरा फिर छूटने वाला है….” उसकी साँसें उखड़ रही थी।

“ओहहहहहहह सुनील मेरा छूटाआआआ….” वो जोर से चिल्लायी और उसी वक्त मैंने भी अपना पानी उसकी चूत में छोड़ दिया।

हम दोनों एक दूसरे को बाँहों में भरे चूम रहे थे और एक दूसरे के बदन को सहला रहे थे। इससे मेरे लंड में फिर गर्मी आ गयी और वो खड़ा हो उसकी चूत पर झटके मारने लगा।

वो मेरे लंड को अपने हाथों में पकड़ कर बोली, “सुनील अब मेरी गाँड मारो।” मुझे भी गाँड मारने का शौक था, इसलिये उसके कहते ही मैं उसके पीछे आकर अपने थूक से उसकी गाँड को गीली करने लगा। “सुनील ये मत करो!!! आज मेरी गाँड में ऐसे ही अपना लौड़ा घुसा दो”, वो बोली।

“पागल हो गयी हो? तुम्हें बहुत दर्द होगा!”

“होने दो सुनील! महेश भी हमेशा मेरी गाँड ऐसे ही मारता आया है। और अब अगर मेरा ऑयडिया काम कर गया तो मैं समझूँगी कि जैसे मैंने महेश की कोरी गाँड मारी है। इसलिये मैं बोलती हूँ वैसा करो”, उसने कहा।

मेरे पास कोई चारा नहीं था। मैंने जोर से अपना लंड उसकी गाँड में डाल दिया।

“ऊऊऊऊऊऊऊऊईईईईईईईई माँआंआंआं…. मर गयीईईईई”, उसके मुँह से चींख निकली। मैं उसकी गाँड मारने लगा और साथ ही उसकी चूत में अपनी अँगुली डाल कर उसे चोदने लगा। थोड़ी देर में ही हम दोनों का काम हो गया और दोनों एक दूसरे को बाँहों में ले कर सो गये।

सुबह मैंने उसे फिर पूछा, “प्रीती! अब बताओ तुम्हारा प्लैन क्या है?”

“सुनील प्लैन सिंपल है, बस तुम्हारी मदद चाहिये। तुम्हारी मदद के बिना ये पूरा नहीं हो सकता”, प्रीती खुश होती हुई बोली।

“प्रीती! मैं तुम्हें पहले ही बोल चुका हूँ, तुम्हें मुझसे पूरी मदद मिलेगी जिससे तुम एम-डी और महेश से अपना बदला ले सको, अब बताओ।”

“ठीक है! सुनो मेरा प्लैन क्या है….” Hindi Sex Stories

प्रेषिका : राहुल वर्मा -Sex Stories

मेरे पड़ोस में एक Sex Stories आंटी रहती थीं, जिनका नाम मंजू था. उनकी उमर 27-28 साल और फिगर 36-28-36 था. उनको देखकर हमेशा मेरा लंड खड़ा हो जाता था और उनकी चूत में जाने के लिए फड़कने लगता था.

एक दिन उनकी 6 साल की लड़की पार्क में खेलते खेलते गिर गयी. मैंने उसे उठाया और उनके घर ले गया. वो बहुत रो रही थी. आंटी ने उसे चुप कराया, दवा लगाई और थपकी देकर सुला दिया.

मैं चुप चाप खड़ा आंटी के मम्मे और गदराई गांड देख रहा था.

लड़की के सोते ही आंटी मेरी तरफ़ मुखातिब होकर बोली ”तुम इसे नहीं लाते तो बेचारी वहीँ रोती रहती।’

मैंने कहा,’आंटी, क्यूँ नहीं लाता?’

आंटी मुस्कुराई और बोली- बैठो, तुम्हे चाय पिलाती हूँ।’

पता नहीं मेरे अन्दर कहाँ से इतनी हिम्मत आ गई कि मैं बोला ‘पिलाना है तो दूध पिलाओ।’

आंटी तुंरत समझ गई और थोड़ा गुस्सा दिखाते हुए बोलीं ‘शर्म नहीं आती ऐसे कहने में।’

मैं बोला ‘आंटी शर्म करूँगा तो आप दूध कैसे पिलाओगे।’

इतना कहकर मैंने आंटी के मम्मों पर हाथ रखा और सहलाने लगा. आंटी भी शायद मुझसे चुदवाने को तैयार थीं इसीलिए कुछ नहीं बोलीं मैंने उनका गाउन उतारा और फ़िर ब्रा और पैंटी भी उतार दी. आंटी को पूरा नंगा करके मैंने अपने कपड़े उतारे और बिना देर किए अपना लंड आंटी कि चूत में डाल दिया और उनके मम्मे चूसने लगा. थोडी देर में आंटी नीचे से अपनी गांड उठा उठा कर मेरा साथ देने लगीं.

इसके बाद 12 साल तक मैं आंटी को चोदता रहा. इस बीच उनकी लड़की 18 साल की हो गयी.

एक दिन मैं आंटी को चोद रहा था कि वो आ गयी.
आंटी को लगा कि ये अंकल को बता देगी.
आंटी ने उसको अपने पास बुलाया, उसकी स्कर्ट को पकड़ कर ऊपर उठाया और उसकी पैंटी उतार दी और बोली ‘इसकी चूत पर अपना लंड रगडो इसको भी मजा दो’. मेरी तो लाटरी लग गयी, मैंने उसकी चूत पर अपना लंड रगड़ना शुरू किया तो वो मस्त होने लगी. आंटी पेशाब करने बाथरूम गयी तो मैंने अपना लंड लड़की की चूत में डाल दिया. लड़की चिल्लाने लगी तो मैंने उसके मुंह पर हाथ रख दिया, लड़की चुप हो गयी और और थोडी देर में मजा लेने लगी.

आंटी बाथरूम से आयीं और लड़की को चुदवाते देखकर बोलीं ‘पहले ही दिन पूरा ले लिया ! ये है मेरी बेटी की हिम्मत ! हिम्मतवाली माँ की हिम्मतवाली बेटी’. Sex Stories

TOTTAA’s Disclaimer & User Responsibility Statement

The user agrees to follow our Terms and Conditions and gives us feedback about our website and our services. These ads in TOTTAA were put there by the advertiser on his own and are solely their responsibility. Publishing these kinds of ads doesn’t have to be checked out by ourselves first. 

We are not responsible for the ethics, morality, protection of intellectual property rights, or possible violations of public or moral values in the profiles created by the advertisers. TOTTAA lets you publish free online ads and find your way around the websites. It’s not up to us to act as a dealer between the customer and the advertiser.

 

👆 सेक्सी कहानियां 👆