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Massage Girl in Kollam: Premium Relaxation Services

Our site can help you find a professional massage girl in Kollam who will help you relax in the best manner possible. We connect you with professional therapists who can offer you a massage that will make you feel better and more relaxed. The pros on our list are ready to provide you with a fantastic experience at your house or in one of their particular spots, whether you want to relax or get away from it all.

Introduction

Massage is currently one of the finest methods to relax your mind, body, and overall health. Our website makes it easy to locate the top massage services in Kollam that meet your demands. This will be a one-of-a-kind and calming experience for you.

Tottaa wants to make it simple for clients to find the top masseuse. The Kollam massage service providers on our list offer the greatest quality, comfort, and competence, whether you want a full-body massage or a massage for a particular location.

How Tottaa Helps Advertisers Reach More Customers

Tottaa is not only a list of masseuses, it’s also a secure location for them to show off what they can do. People in Kollam who are seeking massage services may find them on our website. This makes them easier to find and gets them more appointments.

Advertisers may simply put up profiles, offer their services, and talk about pricing and discounts on our sites. This makes sure that the relevant people notice your Kollam massage service, which makes it easier to obtain more customers.

Different Types of Massages We Offer

There are a lot of different types of massage services on our site, so you may choose one that works for you. You may choose the kind of treatment that works best for you, whether it’s profound rest or a particular type of therapy.

1. Swedish Massage

A calm and gentle way to ease muscular tension and improve blood flow. This Kollam massage is perfect for you if you want to relax and forget about your concerns.

2. Deep Tissue Massage

This approach employs a lot of pressure to get to deeper muscle layers. It’s helpful for folks who have muscular discomfort or stiffness that won’t go away. There are specialists on our profiles of massage girls in Kollam who are good at deep tissue treatments that function effectively.

3. Aromatherapy Massage

Calming massage strokes and essential oils are beneficial in making people feel improved both emotionally and physically. Most massage companies in Kollam employ the use of custom oil preparations to make you feel good.

4. Thai Massage

A therapy that wakes you up by using a mix of regular massage, stretching, and compression. This traditional massage in Kollam helps you relax, become more flexible, and get your mind and body back in harmony.

5. Hot Stone Massage

Heated stones are placed on various parts of the body to help with deep muscular tightness. People who want to feel good, relax, and help their muscles recover quickly can use this massage service in Kollam

How to Book Our Massage Services

Tottaa makes it simple and fast to book. With our listings, you can see what kind of massage you want, read about the providers, see that they are free and then contact them directly. After you choose, you can book a massage in Kollam at your convenient time and location. In order to get your desired massage services, apply the following simple steps:

Step 1: Browse Our Listings

Take a peek around our site to view a few massage professionals. Each listing gives you information about the many sorts of massages, how long they last, how much they cost, and where they are situated. This makes it easier to choose the finest ones.

Step 2: Compare and Shortlist

Examine the profiles carefully to compare how the services, talents, and reviews posted by customers differ. This phase makes sure you choose a business that has the style, pricing, and supply you desire.

Step 3: Connect with the Provider

When you have decided, use the information that you are offered so that you can contact them directly. One can communicate it to the massage giver thus making it understood what massage you want at what time and when.

Step 4: Confirm the Appointment

The date, time and place of the service, which could be your home, a hotel or the spa where the therapist may be found. You also need to agree on the payment method and any other accords prior to commencement of the course.

Step 5: Relax and Enjoy Your Massage

All you have to do on the day of the appointment is have your area ready for the house visit. The remainder will be handled by the expert. Take it easy and enjoy a massage that is made just for you.

Frequently Asked Questions

To locate a professional who can meet your needs, read our biography, reviews and advertising.

Yes, many of the therapists on our site will come to your house so you may feel safe and at ease.

You may pick based on talents since most adverts provide their qualifications in their profiles.

It would be advisable to make a reservation earlier to guarantee that you would be able to get a massage, particularly against the prevalent services of massage.

Not at all. Tottaa exclusively connects users with service providers. The doctor gets to choose how to handle payment.

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Antarvasna

मैं सीमा हूं। 35 साल की होने पर भी Antarvasna अकेली हूं और शादि के बारे में नहीं सोचा। मैं अपनी बूढी मां के साथ रहती हूं।
मेरा एक भाई और दो बहनें शादीशुदा हैं और वो अलग रहते हैं।

मेरे 38 आकार के सुडोल स्तन हैं और मेरी कुंवारी चूत जिसमें एक लाल छेद है, पर मुझे गर्व है। मेरे पिता की काफ़ी पहले मौत हो गयी थी। तब से मैं ही मां की देखभाल कर रही हूं। मेरी बड़ी बहन विधवा है इसलिये मां को अक्सर उसके पास जाना पड़ता है। मैं बाल मन्दिर विद्यालय में अधयापिका हूं।

नजदीकी रिश्तों में मेरे एक मौसी, मौसा और उनके दो बच्चे हैं। मेरी मौसी अपने परिवार के साथ खुश हैं। अपनी जिन्दगी में मैने जितने मर्दों को देखा है उन में मैं अपने मौसा को पसंद करती हूं। वो एक शान्त स्वभाव, अच्छे पति, अच्छे पिता और अच्छे मित्र हैं। मेरे पिता की मौत के बाद उन्होंने हमारे परिवार की देखभाल की।

एक बार बरसात के मौसम में मां दीदी के घर गयी हुई थी, हल्की बारिश हो रही थी और मैं अकेली ब्लाउज और पेटिकोट में बैठी टी वी पर कोई अन्गरेजी फ़िल्म देख रही थी। घर पर अक्सर मै ब्रा पैन्टी नहीं पहनती हूं। किसिंग सीन चल रहा था। रात के 11 बज रहे थे।

तभी दरवाजे पर घंटी बजी। मुझे हैरानी हुई, पहले मैने टी वी बन्द किया फ़िर दुपटटा औढ कर दरवाजे तक गयी और अन्दर से ही पूछा कि कौन है?
लेकिन जवाब नहीं मिला।

मैने धीरे से दरवाजा खोला तो मौसाजी को देखा, वो बोले- हैलो सीमा कैसी हो, तुम्हारी मां कहां है?
मैने कहा अन्दर तो आइये!
मौसाजी अन्दर आये- ओह क्या मम्मी नहीं है?
मैने कहा- दीदी के वहां गयी है.
‘तो मैं चलता हूं।’
मैने कहा- क्या यह घर नहीं है?
‘नहीं ऐसा नहीं…’ उन्होने कहा- तुम कहती हो तो रुक जाउंगा.

बारिश भी बढ़ गई थी।
हम दोनो भीतर आये, मैने पानी दिया तब उनकी नजर मेरी नजर से टकराई मैं भूल चुकि थी कि मैने अंडरवियर नहीं पहना है। उनकी नजर पानी पीते पीते मेरी चूचियों पर गयी, उसका ब्रा नहीं पहनने से आकार बड़ा दिखाई देता था.

मैने अपने को सम्भाला लेकिन बातें करते करते उन्होने कहा सच कहुं सीमा तेरी चूचियां बहुत बड़ी हैं और उन्होने मेरा हाथ पकड़ कर अपनी ओर खींचने लगे। अगले ही पल में मुझे अपनी बाहों में भर दिया.

मैं चिल्ला उठी और कहने लगी मुझे छोड़ दो लेकिन वो नहीं माने और कस के मुझे चूमने लगे मैं ऐतराज करती रही पर मेरी नहीं चली वो मेरे होंठों का रस पीने लगे मैं कुछ भी कर न सकी वो जी भरके चूमने लगे फिर धीरे दुपट्टा खींच कर अलग कर दिया मैने खूब हाथ पांव मारे फिर भी वो चूमने रहे एक बार मैने धक्का मारा तो मैं बाहो में से निकल गयी लेकिन तुरन्त मुझे फिर से कस कर दबाया तो दोनो चूचियां पूरी दब के रह गयी।

मैने फिर से जोर लगाया पर मेरी चूचियां पर होले होले दबा रहे थे। फिर पीछे जा कर मेरी गर्दन गाल कंधे को चूमने और सहलाने लगे और दोनो चूचियों को ब्लाउज़ के ऊपर से दबाते रहे.
करीब 5 मिनट तक यह खेल चलता रहा पर मैं अलग न हो सकी पर मौका मिला तो जोर से धक्का मारा लेकिन ये क्या? जैसे मैं दूर गयी कि मेरा ब्लाउज़ फाड़ दिया उन्होने और दोनो चूचियां कैद में से मुक्त हो कर पहली बार किसी मर्द के सामने उछल कर नंगी हो गयी हाय रे! ये क्या किया।

मैने दोनो चूचियों पर हाथ ढक दिये तो वो आगे आ कर बोले सीमा उसको छोड़ दो मैं उसे नंगा देखना चाहता हूं।
मैं नहीं मानी तब वो करीब आके बोले- दोनो हाथ को उठा लो!
‘नहीं नहीं…’ मैं चिल्लाई पर उन्होने मेरे दोनो हाथों को उपर कर दिया दोनो नंगी चूचियां पा कर देख कर वो आनन्दित हुये पूरा नंगापन देख कर कहा- सीमा ! इतनी बड़ी और कड़ी चूचियां पहली बार देखी हैं.

इतना कह कर बाकी ब्लाउज़ को हटाया और दोनो चूचियों को पहले पिया अपने हाथों को रख कर किया दोनो को होले होले दबाया फिर निप्पल को प्यार से दुलारा चूचियों को सहलाया दबाया.

मेरी कुछ न चली धीरे से खींच कर बाहों में लेकर सीने से लगाया मैं मचल उठी पहली बार मर्द के सामने नंगी चूचियों की थी वो प्यार से दोनो फलों को दबाना सहलाना करते करते मेरे नीचे अपने एक हाथ को ले गये कहा सीमा सच कहुं तुम्हारी चूचियां मुझे बहुत पसंद है.
और मैं अपने अपको सम्भाल न सकी उन्होने नाड़ा खींचकर पेटीकोट को गिरा दिया, मैं नंगी हो गई, मौसाजी बहुत खुश हो गये मेरा नंगापन देख कर उठा लिया, मुझे बेड पर करके उन्होने अपने सभी कपड़े निकाल दिये.
मैं हाय हाय कर उठी उसके नंगे लंड को देखा तो पूरा ८ इंच लम्बा हो गया मेरी चूत को देख कर मेरी साइड आकर चूचियों पकड़ दबाये बाद में चूसना और दूसरी को मसलने लगे फिर दूसरी को चूसा पहली को मसलने लगे बारी बारी दोनो चूचियों को चूसा और दबाया निप्पल को बच्चे की तरह बार बार चूस रहे थे.

मैं बेताब हो गयी पहली बार किसी मर्द ने मुझे नंगा देखा था। धीरे धीरे उंगली मेरी हसीन चूत पर फ़िराने लगे मैं जोश में आने लगी आखिर कब तक अपने आप से लड़ती रहती, बस मैने दोनो होंठों को मौसाजी के होंठों पर रख कर चूसना चूमना शुरु किया जियो मेरी रानी कह कर मुझे अपने ऊपर गिरा लिया कि लंड का पहला स्पर्श चूत से हुआ अपनी चूत को हटाया तो चूचियों को चुलबुलाने लगे.

मैं अब गर्म होने लगी थी होंठों का और चूचियों का रस करीब १५ मिनट तक पीने के बाद मुझे नीचे गिराकर वो ऊपर आ गये मेरा पूरा बदन कम्पन करने लगा उन्होने मेरी नंगी जवानी को देखा फिर अपने होंठों से पूरा बदन चूमने सहलाने और दबाने लगे मेरी चूत के सिवाय सभी हिस्सों को कई बार चूमा तो मेरी दोनो टांगें खुद फ़ैल गयीं मैं हार गयी थी

मुझे भी अब रहा नहीं जाता था उन्होने मेरी चूचियों जोर से कसा.
‘मैं आह्हह ह्हह्हह मर जाउंगी मेरे मौसाजी अब नहीं रहा जाता। हाय रे बिना स…’

‘बोलो मेरी सीमा रानी…’
‘मुझे सिर्फ़ तुम्हारा कसा हुआ लंड चाहिये जी भर के चोदो मुझे अपना लो मौसाजी मुझे’
‘हां हां बोलो मेरी सीमा रानी।’

‘मौसाजी…’ तब मैने दोनो टांगें ज्यादा फ़ैलाई मेरी चूत देख कर उनका लौड़ा पूरी तरह तन कर कड़ा हो गया वो अब झुक गया मेरी चूत पर धीरे धीरे चूत को चूमने लगे थे कि मैं चिल्ला उठी- बस करो मेरे प्यार अह्हह ह्हह्हह ओय माअ ओयम्मम्ममा अयह क्या कर रहे हो।
पर उन्होने कुछ न सुना और अपनी जीभ को चूत में डाल कर चूसने लगे, मेरी तो अब जान ही निकलने लगी थी हायययययी रीईईई यह क्या हो रहा है।
‘अब और मत तरसाओ अपनी रानी को…’
अपनी टांगे खुद फ़ैला के बोली.

वो पूरे 5 मिनट तक चूसता रहा मेरी चूत खुल गयी थी अब इन्तजार करना ठीक नहीं था मैने दोनो पांवों को ऊपर उठाकर मुझे मंजरी आसन में ले लिया, मौसाजी अब मत रुको मेरी चूत मस्तानी हो गयी है तब मैने लंड को पकड़ कर चूत पर रख दिया वो और आहें भरने लगी मौसाजी चोदो मेरी …।

तब उन्होने धीरे से चूत में लंड दबाया ओह्हह्हह ऊऊह्हह्ह ह्ह्हह्ह हयरीए मेरी कुंवारी चूत ३५ साल के बाद चुदाई उन्होने दूसरा धक्का मारा तो वो खुल गयी हायययी आह्ह आह्ह अह्हह मर जांउगी तब उनका तीसरा और एक दो एक दो करता हुआ लंड अपनी मन्ज़िल और आगे बढ़ गया पर मैं आह्हह ओअह्हह्ह ओह्ह करती रह गयी

सच में उनको मेरी चूत बहुत टाइट लगी पर अब वो मानने वाले कहां थे धक्के पर धक्का धका धक धका धक फ़का फ़क फ़का फ़क फ़का फ़क चोदने लगे मन्ज़िल को छू लिया पूरा लंड अब मेरी चूत में था और अब मेरी दोनो चूचियों को कस कस कर दबाते दबाते जि भर के मस्त चुदाई का आनंद लेने लगे.

मैं भी मस्त हो चुकी थी वो भी पुरी तरह चोदने लगे अब दिल खोलकर मैं भी चूचियों और चुदाई करवाने लगी सीमा आह हहह बहुत मजा आ रहा है.
‘मेरे रजा जोर जोर से अब चोदो मैं तुम्हारी हो चुकी हूं चोदो चोद मेरे राजा…’

बस वो कस कस कर चोदने लगे तब धीरे धीरे दोनो बाहों में भरकर मैने अपनी ऊपर खींचा और तेज और तेज मौसाजी पूरी तरह चोद लो, स्पीड बढ़ाते गये और तेज फ़का फ़क फ़का फ़क और तेज फ़चा फ़च फ़चा फ़च आह्हह फ़चा फ़च फ़च अह्ह्ह ह्हह्ह मैं गयी अह्हह्हह्हह्ह और मौसाजी पूरी तरह मेरे पर छोट गये और पहली बार वीर्यदान कर दिया हमारा मिलन हुआ वो मेरे ऊपर थे मैने कसकर उसे मेरी चूचियों पर दबाया हमारी सांसे तेज और एक हो गई.

बाहर बारिश तेज बरस रही थी और मैने अपनी सुहाग रात चार बार चुदवा के मनाई। Antarvasna

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मेरा नाम आर्यन गुप्ता है। मैं Hindi Porn Stories अब अकेला हूँ। मेरी उम्र अभी ५९ वर्ष की है। मेरे दो लड़के हैं जो कनाडा में रहते हैं और वहीं नौकरी करते हैं। मेरी पत्नी का निधन, जब वो ४८ वर्ष की थी, एक दुर्घटना में हो गया था। तब से मैं अकेला हूँ और अपना छोटा सा बिजनेस सम्भालता हूँ।

मेरी पत्नी जब जीवित थी तभी से मेरी सेक्स में रूचि कम हो गई थी। मेरे लण्ड में तनाव भी कम हो गया था और उस समय भी मैं अपनी पत्नी को सन्तुष्ट नहीं कर पाता था। मेरी चोदने की इच्छा तो बहुत होती थी पर शायद मेरे में उम्र के हिसाब से लण्ड में मामूली सा कड़ापन आता था, पर मैं चुदाई नहीं कर पाता था।

धीरे धीरे मेरी पत्नी भी मुझसे दूर रहने लगी। शारीरिक तौर पर भी स्तन दबाना, मसलना, चूतड़ दबाना और मस्ती करने का सुख भी मेरे हाथ से जाता रहा। चूत चाटने का और अंगुली से उसे सन्तुष्ट करने का सुख भी जाता रहा। धीरे धीरे मैं इस अवसाद में ही घिर गया। मैंने हार कर अकेले ही रहने की आदत डाल दी। कभी कभी मुठ भी मार लेता था, वह भी जब मुझे लगता था कि ये जरूरी है।
फिर मेरी पत्नी एक दुर्घटना में चल बसी तो मैं बिल्कुल ही अकेला हो गया और अन्दर से टूट गया। अब मैं अपना मन सिर्फ़ काम में लगाने लग गया था, इससे मुझे फ़ायदा तो बहुत होने लगा पर मन में यही आता कि इन पैसो का क्या करूंगा। तब मैं एक अनाथों की संस्था में से दो बच्चों को पालने का खर्च उठाने लगा। उन्हें पढ़ाना, लिखाना, कपड़े यानि सभी जरूरतें पूरा करने लगा। लोगों ने भी मेरे इस कार्य को सराहा।

कुछ दिनों पहले मेरे एक दोस्त की लड़की को इस शहर में एक कॉलेज में दाखिला करवाया। वो एम ए कर रही थी। मेरा घर चूंकि बहुत बड़ा था सो मैंने उसे अपने ही घर में एक कमरा दे दिया। उसका नाम सोनिया था। देखने में सुन्दर थी और उसका फ़िगर भी बहुत अच्छा था। वह बहुत समझदार भी थी। उसे जब कम्प्यूटर का काम करना होता था तब वो मेरे कमरे में आ जाती थी। मेरी अनुपस्थिति में वो अक्सर कम्प्यूटर इस्तेमाल करती थी। तभी एक प्यारी सी घटना घट गई। सोनिया ने मेरी दिल की मुराद पूरी कर दी।

मैं शाम को घर आया, नौकर खाना बना कर जा चुका था। मैंने हमेशा की तरह अपनी व्हिस्की की बोतल खोल कर बैठ गया। मैंने कम्प्यूटर ऑन किया। जैसे ही मैंने गूगल लोड किया, सोनिया की साईट खुल कर सामने आ गई। शायद उसने जल्दी में लोग-ओफ़ नहीं किया होगा या जाने कैसे ये हो गया।

मैं अपनी उत्सुकता नहीं रोक पाया और उसके मेल देखने लगा। अधिकतर मेल अश्लील थे। मेरी अनुपस्थिति में वो ये खेल खेलती थी। तभी मैंने देखा कि उसकी और भी अलग नामों से आई डी भी थी जिनके एड्रेस और पास वर्ड भी अपने ही मेल में लिखे थे। मैं उन्हें भी खोल कर देखने लगा। उन सेक्सी मेल पढ़ कर कर मेरे मन में वासना जागृत हो गई।

उसमें बहुत सारे नंगी और चुदाई करते हुए तस्वीरें भी थी। उसमे कुछ लिंक चुदाई के वीडियो के भी थे। और एक वीडियो तो सोनिया ने अपने मोबाईल से खुद की चुदाई का भी लिया था। मैं उसे ध्यान से देखने लगा। वीडियो साफ़ तो नहीं था पर सोनिया का नंगा शरीर उसमें अवश्य नजर आ रहा था।
सोनिया मुझे सेक्सी लड़की लगने लग गई। मैंने अपनी ड्रिन्क समाप्त की और भोजन करने लगा। पीसी अभी भी ओन ही था। मैंने सोनिया कि जो आईडी उसके मेल में थी मैंने नोट कर ली। मैं अब रोज रात को उसके सेक्सी मेल पढ़ता था और कभी कभी मुठ मार लेता था। शायद सोनिया को अब कुछ शक होने लगा था।

एक रात मैं ड्रिन्क्स ले रहा था और सोनिया की साईट का आनन्द ले रहा था, कि सोनिया कमरे में आ गई और उसने मुझे रंगे हाथ पकड़ लिया। वो लपक कर आई और साईट बन्द कर दी।
“अंकल ये क्या कर रहे हो?” उसने जोर से कहा। मैं वास्तव में घबरा गया। मेरे मुख से घबराहट में कुछ भी ना निकल पाया। मुझे अपने बड़े होने पर और ऐसा काम करने पर शायद पहली बार शर्मिन्दगी हुई।

पर इतने में सोनिया सम्भल गई- “सॉरी अंकल, आपने तो मेरी सारी मेल पढ़ ली, प्लीज इसे अपने तक ही रखना !” मेरी सांस में सांस में आई।
“नहीं सोनिया, माफ़ी तो मुझे मांगनी चाहिये, मुझे ये सब नहीं करना चाहिये था, पर तुम्हारी साईट एक दिन अचानक ही अपने आप खुल गई थी। कुछ सेक्सी बातों पर बाहर से नजर पड़ी तो मुझसे रहा नहीं गया।”
“अंकल ये तो बस हम अपने मनोरंजन के लिये करते हैं, ये सब सच तो नहीं है ना।”

“पर वो राहुल, विक्की, और जय उन्हें तो तुम पसन्द करती हो ना, तुम्हारी तो एक इसमे वीडियो भी है !” मैंने उसे भी बांधने की कोशिश की जिससे उसे लगे कि उसके भी कुछ रहस्यो को मैं जान गया हूँ।
“अंकल प्लीज किसी को बताना मत, मैं बदनाम हो जाऊंगी !” उसका सिर नीचे झुक गया।
“अरे कैसी बात करती है, मैं इन सब बातों को समझता नहीं हूँ क्या ? जवानी में मस्ती तो करनी ही चाहिये ना, हमने भी खूब मस्ती की थी।” मैंने उसे उत्साहित करते हुए कहा।
“अंकल, ये तीनों मेरे व्यक्तिगत दोस्त हैं, आप तो जान ही गये हैं, बस पापा को मत बताना !”

“तू जानती है ना, मैं भी सालों से अकेला हूँ, मेरे दिल में भी इच्छाएँ होती हैं, पर मैं तो अब ६० साल का होने जा रहा हूँ, देखो मैं अपनी दबी इच्छाएँ किसी को नहीं बताता हूँ, मैं इन सब बातों को समझता हूँ।”
“हाय अंकल, इस उमर में भी आपकी इच्छा होती है, फिर क्या करते आप?” उसे आश्चर्य हुआ।
“कुछ नहीं, बस मन मार कर रह जाता हूँ, हमें कौन समझ पाता है !” मेरे चेहरे पर निराशा उभर आई। सोनिया मुझे देखती रह गई। मुझे लगा उसके मन में मेरे प्रति सहानुभूति उभर आई थी।

“अंकल किसी आण्टी से दोस्ती कर लो, मैं मदद करूँ इसमें?” वो मेरे पास आकर हाथों में मेरा हाथ ले कर बोली।
“नहीं मैं अब ये सब नहीं कर सकता हूँ, सच !” मेरे मुँह से अचानक सच्चाई निकल आई।
“तो क्या हुआ, और तो सब काम तो कर सकते हो ना !” उसके चेहरे पर अब शरारत मचलने लगी थी। मुझे उसकी ये शरारतें मोहक लग रही थी।

“अब तू चुप हो जा, मेरी इच्छाएँ जाग जायेंगी, तुझे क्या है, हाल तो मेरा खराब हो जायेगा ना !” मैंने अंधेरे में तीर छोड़ा, मुझे लगा कि वो मुझे बुरा भला कहेगी। पर हुआ उल्टा ही।
“अंकल, एक बात कहूँ, मुझ पर भरोसा हो तो मुझे अपना राजदार बना लो, मैं आपकी अधूरी इच्छा पूरी कर दूंगी…. पर देखो, पापा को इंटरनेट के बारे में मत बताना, प्रोमिस?” वो इठला कर बोली। मेरे शरीर में सनसनाहट होने लगी। सोनिया मेरे साथ…. पर मुझसे तो होता ही नहीं है।

“तेरे पापा को? कैसी बाते करती है, उन्हें मुझ पर भरोसा है, और सुन ले ये ठीक नहीं है, तू तो मेरी बेटी जैसी है और फिर मैं तो कुछ कर ही नहीं पाता हूँ।” मैं असमंजस में था।
“मैं तो कर पाती हूँ ना !” वो धीरे से मेरे पास आ गई और मेरे गाल चूम लिया। मुझे इतने में ही असीम आनन्द आ गया। दूसरे ही पल उसने मेरे गालों को हाथ से थाम लिया और मेरे होंठ चूमने लगी।

“अंकल मैं जय, विक्की और राहुल को एक एक करके बुलाऊं तो आप उन्हें यहा आने देंगे ना?” उसने मुझे ब्लैक मेल करने की कोशिश की। मुझे हंसी आ गई। मुझे क्या फ़रक पड़ता था भला। मुझे समझ में आने लगा था कि वो मुझे पटा कर अपना राज गुप्त रखना चाहती थी और साथ ही अपने दोस्तों के लिये इस घर का रास्ता भी खोलना चाहती थी। जवान लड़की थी, उसे भी जवान लण्ड चाहिये था, उसे भी अपने जिस्म की प्यास बुझानी थी। मैंने दिल ही दिल में अपने आप से समझौता किया कि तन का सुख चाहिये तो ये सब करना ही पड़ेगा, फिर इस उम्र में मुझे कौन घास डालेगा।

“हां… हां… जरूर, पर मेरी उपस्थिति में, ताकि कोई गड़बड़ हो तो मैं सम्भाल लूँ !” सोनिया मेरे से चिपक गई और मेरे सोते हुए लटके लन्ड को सहलाने लगी।
“आप क्या मुझे उनके साथ सोता हुआ देखना चाहते हैं, मजा लेना चाहते हैं ?”
“अरे नहीं, तुम एन्जोय करो, पर यदि तुम चाहो तो मैं भी चुपके से देख लूं?”

उसने मुझे तिरछी निगाहो से देखा,“अच्छा जी, अब आप मुझे ऐसे भी देखना चाहेंगे, कोई बात नहीं, देख लेना, पर चुपके से !”
“सोनिया, तुम क्या जानो इस उम्र के लोगों की तड़प….”
“माफ़ करना अंकल, मुझसे आपकी तड़प देखी नहीं जाती, मैं ये अहसास समझ सकती हूँ।” सोनिया ने मुझे प्यार करते हुए कहा।
“मैं तुम्हारा अहसानमन्द रहूंगा सोनिया, तुमने मुझे दिल से समझा है।” मैंने उसे प्यार से लिपटा लिया।

“आज से आप मुझे बेटी कहना छोड़ दीजिये अब मैं आपकी दोस्त बन गई हूँ, और जो मैं दोस्तों के साथ करती हूँ आपके साथ भी वही करूंगी।” उसके हाथ का दबाव मेरे लण्ड पर बढ गया और मेरे लण्ड का साईज़ नापने लगा। मुझे उसके हाथ लगाने से जोश आने लगा। मेरे खून का दौरा बढ़ गया। मेरी सांसें तेज हो गई।

“अंकल अब शरम छोड़ दीजिये, ये 21वीं सदी है, आपसे तो हम ही ठीक हैं।” सोनिया ने मेरे झेंपू स्वभाव को परख लिया था।
“क्या इरादा है, मेरे साथ ब्लात्कार करोगी क्या, मुझसे तो कुछ नहीं होगा !” मैंने लगभग हांफ़ते हुए कहा।
“आप तो यूं ही शरमा रहे हैं, उतारो ये कपड़े और फ़्री हो जाओ, देखो फिर कैसा मजा आता है इस उम्र में भी !”

मैंने अपने कपड़े उतार दिये। अब शर्म करने से कोई फ़ायदा नहीं था। मेरा दुबला बदन और सूखा लण्ड देख कर वो मुस्करा उठी। मेरा लण्ड इन सब बातों से खड़ा हो गया था और थोड़ा फूल गया था। सुपाड़ा भी लाल हो कर कुप्पा हो गया था। सोनिया भी अब अपने जिस्म को दिखाने लगी।
“बदन हो तो ऐसा…. ये देखो !” सोनिया ने अपने कपड़े अदाओं के साथ उतारना आरम्भ कर दिया।
उसका एक एक अंग तराशा हुआ था। सेक्स की गुड़िया लग लग रही थी वो। उसके उरोज बड़े और भारी थे, कमर पतली और उसके चूतड़ और गोलाइयाँ मटके जैसी थी। उसने अपनी गाण्ड को मेरी तरफ़ घुमाया और नीचे झुक कर अपनी चूतड़ो की गहराईयाँ दिखाने लगी।

चिकनी गांड चमकती हुई, और बीच में एक प्यारा सा छेद। गुलाबी गीली चूत और उस पर काली काली बड़ी झांटे, उसके बदन को निहारते हुए जाने मेरा लण्ड कब खड़ा हो गया। इस तरह से अपने बदन को मेरी पत्नी ने भी कभी नहीं दिखाया था। उसने एक भरपूर अंगड़ाई ली और नंगे बदन को मेरे नंगे बदन से चिपका लिया। मेरा लण्ड उसकी चूत में ठोकर मारने लगा। उसकी चूत भी गीली हो चुकी थी।

उसने अपनी एक टांग उठा कर मेरी कमर से लिपटा दी और खड़े खड़े ही अपने योनि-द्वार से मेरे लण्ड को सटा दिया। मेरे हाथ स्वयंमेव उसकी भरी भरी चूंचियों पर आ गये और उन्हें मसलने लगे। उसने अपनी चूत का दबाव मेरे लण्ड पर डाल दिया। पर मेरा लण्ड एक ओर फ़िसल गया। उसने अपना हाथ नीचे लिया और मेरा लण्ड पकड़ कर अपनी गीली चूत में डाल दिया। चूत की गर्माहट मेरे लण्ड को मिली। वो अन्दर सरकता चला गया।

सोनिया ने अपनी कमर हिलानी शुरु कर दी, लण्ड पहले अन्दर बाहर होता रहा पर, मैं अथाह आनन्द में डूबने लगा। लण्ड में प्यारी सी सरसराहट, गुलाबी सा मीठा मीठा सा मजा, मैंने अपने चूतड़ो का पूरा जोर उसकी चूत पर लगा दिया, हल्के से धक्के लग रहे थे, पर आह्….कुछ ही देर में वो ढीला पड़ने लगा और अब तो लण्ड बिलकुल ही ढीला हो कर लचलचा हो गया, और धीरे धीरे बाहर निकल आया। मैं फिर से निराशा में डूबने लगा।

“हाय अंकल, आपने तो दो मिनट में कितना मजा ले लिया, लण्ड तो आपका लम्बा है।” उसने अपनी टांगें नीचे कर ली और मेरा ढीला लण्ड उठा कर अपने मुँह में डाल लिया।
“अब देखो, आपका मस्त लण्ड कैसे मजे लेता है !”

मुझे लण्ड चूसने से बहुत मजा आने लग गया था। मेरा सुपाड़ा यूँ तो चूसने से फ़ूल गया था और तीखा सा और मीठा सा आनन्द आने लगा था। लण्ड की जोरदार चुसाई से मेरा लण्ड एक बार फिर से खड़ा हो गया, सोनिया ने लण्ड खड़ा देख कर अपने हाथ में लेकर उसे मुठ मारना आरम्भ कर दिया।

मेरे बदन में मुठ मारने से आग लग लग गई। लण्ड की जोरदार रगड़ाई हो रही थी। वो मुह से थूक लगा कर लण्ड को चिकना और गीला कर रही थी फिर दुगने जोश से मुठ मारने लगती थी। मुठ मारते मारते मेरा हाल बुरा हो गया और लगा कि बस अब माल निकल ही जायेगा। मेरे मुख से सिसकारियाँ निकलने लग गई।

“अंकल मजा आ रहा है ना….ये ….ये…. माल निकलने वाला है अब !!!”
“आह हाँ हाँ, मार , मुठ मार …. निकाल दे मेरा पानी !!” मैं भी अब जोश के मारे चूतड़ हिला हिला कर मुठ मरवा रहा था। लग रहा था कि कभी भी मेरा माल निकल पड़ेगा।

“ये….ये….फ़ड़क रहा है अंकल, टाईट हो गया है….आपका माल आया….हाय रे ….ये आया !”
“सोनिया, मेरा निकला, आह, ये ऊहऽऽ आया !”
“निकाल दो अंकल, निकालो हाय रे…. आ गया….”

मेरी धार छूट पड़ी, पिचकारी तेजी से बाहर आई और सोनिया के चेहरे पर गिरी, और झटके मार के निकलती ही गई। इतना वीर्य निकला कि उसका चेहरा पूरा भीग गया और नीचे पानी की तरह बह निकला। वो मेरे लण्ड को अब धीरे धीरे मसल रही थी। दूध दुहने की तरह मेरा वीर्य निकाल रही थी, बूंद बूंद करके सारा वीर्य बाहर निकाल लिया। फिर जीभ निकाल कर मुँह पर लगा वीर्य चखा और मेरी चादर से अपना मुँह साफ़ कर लिया।

“हाय इतनी सारा रस, कहां से आ रहा है ये….?” सोनिया हैरानी से देखने लगी।
“मेरा लण्ड खड़ा नहीं होता है इसका ये मतलब नहीं है कि मेरी इच्छा ही नहीं होती है।”
“पर इतना माल ?”
“मैं बहुत दिनो बाद दिल से सन्तुष्ट हुआ हूँ, मुझे इतना सारा रस निकाल कर बहुत सुकून मिला है।”

मैंने सोनिया के नंगे बदन को अपने से चिपका कर खूब प्यार किया। मैं इतने से थक गया था और कमजोरी सी आ गई थी। हम दोनों ने कपड़े पहने और कमरे से बाहर आ गये। सोनिया ने डिनर गर्म किया और हम दोनों मेज पर बैठ गये।
“सोनिया, आज तो तुम्हारा अह्सान रहेगा मुझ पर, आज तुमने मुझे बहुत सुख दिया और मेरी कमजोरी का मजाक नहीं उड़ाया।”
“अरे मजाक क्यूँ…. ये तो सभी के साथ होता होगा। पर इस बात को समझने वाली होना चाहिये, वर्ना तो इस उमर में मर्द अपनी इच्छा को मार कर कहा जायेगा?”

“तुम्हें इतनी समझ कैसे आई, मेरी पत्नी ने भी ये नहीं समझा, फिर तुम तो इतनी सी उमर में इतना जान गई हो !”
”अंकल, ये मह्सूस करने के लिये दिल होना चाहिये, उसने फ़ीलिंगस होनी चाहिये, अरे छोड़ो ना अब, आपका ध्यान आज से मैं रखूंगी। पर एक्स्क्यूज मी….मेर ध्यान भी आप रखना….मेरे तीन तीन आशिक है और जोरदार चुदाई करते हैं…. आपको याद है न….?”

मैं और सोनिया जोर से हंस पड़े और मैं आज की याद लिये बेडरूम की तरफ़ बढ़ गया। सोनिया भी शुभ-रात्रि कह कर अपने कमरे में चली गई। सोनिया की समझदारी की बातें मेरे दिल में घर कर गई थी। मैं पूर्ण रूप से सन्तुष्ट हो कर बिस्तर पर लेट गया। Hindi Porn Stories

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मैं आज एक सच्ची कहानी Hindi Sex Stories बताने जा रहा हूं !मैं जब नौकरी कर रहा था तो एक क्रेडिट कार्ड कम्पनी से फ़ोन आया। एक लड़की बोल रही थी कि सर आप क्रेडिट कार्ड बनवा लो।

मैंने कहा- बनवा लूंगा तुम मुझ से डोक्यूमेंट ले जाओ।

जब मैं उससे मिला तो देख कर मेरा लण्ड खड़ा हो गया क्योंकि वह बहुत खूबसूरत थी। मैंने उसे डोक्यूमेंट दे दिए और उसका मोबाईल नम्बर ले लिया। हम दोनों में आपस में बातें होने लग गई, मैं उसके घर जाने लग गया। मैंने उसका और उसकी मम्मी का दिल जीत लिया।

एक दिन जब मैं उसके घर गया तो वो घर पर अकेली थी। उसने मुझ अपने कमरे मे बैठाया और पानी लेने चली गई। उसने नीले रंग का गाऊन पहन रखा था। उसके बूब्स बड़े बड़े थे। उसे देख मेरा लण्ड खड़ा हो गया।

मैंने उससे पूछा कि उसका कोई बोय-फ़्रेन्ड है क्या?

उसने कहा- नहीं !

तो मैंने कहा- तुम मेरी गर्ल-फ़्रेन्ड बन जाओ ! मैंने उसका हाथ पकड़ लिया और कहा- जान ! मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूँ !

वह शरमाई तो मैंने देर नहीं की और उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए और अपनी बाहों में भर लिया।

उसने कहा- छोड़ो मुझे ! कोई आ जाएगा !

मैंने कहा- कोई नहीं आएगा ! मैं उसके बूब्स दबाने लगा। अब उसको भी मज़ा आने लगा। मैंने अपनी जीभ उसके मुंह में दे दी। मैंने उसका गाऊन उतार दिया, उसने काली ब्रा, पैन्टी पहन रखी थी। मैंने उसके बूब्स को ब्रा से आज़ाद कर दिया और उसकी छोटी छोटी चुचूक चूसने लगा। वह पागल हो गई और कहने लगी- और करो और करो !

मैंने उसकी पैन्टी उतार दी और उसे पूरा नंगा करके बेड पर लिटा दिया। अपने सारे कपड़े उतार कर मैंने अपना लण्ड उसके हाथ में दे दिया। वह उसे दबाने लगी। मैं उसकी चूत को चूसने लगा तो उसने कहा- और चूसो ! इसकी प्यास बुझा दो !

मैंने अपनी जीभ उसकी चूत में डाली तो वो सिसकारी भरने लगी। अभी उसकी चूत की सील नहीं टूटी थी। वो बार बार कह रही थी-इसे चूत में डालो !

तो मैंने कहा- इसे क्या कहते हैं? इस डंडे को ?

तो उसने कहा- इस लण्ड को मेरी चूत में डालो !

मैंने लन्ड उसकी चूत पर रख कर जैसे ही थोड़ा धक्का दिया तो वो चिल्लाई। मैंने उसका मुँह बंद करके जोर का झटका दे कर पूरा लण्ड उसकी चूत में घुसा दिया। वह छटपटा रही थी। मैं धीरे धीरे लन्ड को उसकी कसी हुई चूत में अन्दर बाहर कर रहा था।

अब उसे भी मज़ा आने लगा था और अब वो नीचे से अपने कूल्हों को उठा रही थी। अब मैं उसकी भोंसड़ी को जोर जोर से चोद रहा था। उसे बहुत मज़े आ रहे थे। उसकी चूत से पानी आने लगा, वो झड़ गई थी।

मैंने देखा कि उसकी चूत से खून आ रहा था। मैंने कहा- जान ! पहली बार चुदवा रही हो इसलिए खून आ रहा है।

मैं जोर जोर से झटके दे रहा था, अब मैं झड़ने वाला था तो मैंने लण्ड चूत से निकाल कर उसके मुँह में डाल दिया और झड़ गया। वो मेरा सारा वीर्य गटक गई। हम दोनों को नींद आ गई।

थोड़ी देर बाद मेरी नींद खुली तो देखा वो मज़े से नंगी सो रही है। फ़िर मैंने उसे दो बार और चोदा।

अब जब भी मौका मिलता है, मैं उसे चोद देता हूँ  Hindi Sex Stories

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मैं आज अपने मायके आ Hindi Sex Stories गई, सोचा कि कुछ समय अपने भाई और माता पिता के साथ गुजार लूँ। मेरी माँ और पिता एक सरकरी विभाग में काम करते हैं, भैया कॉलेज में पढ़ता है। आप जानते हैं ना चुदाई एक ऐसी चीज़ है जिसके बिना हम लड़कियाँ तो बिल्कुल नहीं रह पाती। यहां मायके में भी यही हाल हुआ। ये चूत है कि लण्ड मांगे मोर…। बोबे भी फ़ड़क उठते हैं… गांड भी लण्ड दिखते ही लचकदार होकर अदाएँ दिखाने लगती है… चाल ही बदल जाती है। देखने वाला भी समझ जाता है कि अब ये लण्ड की भूखी है। बाहर से हम चाहे जितनी भी गम्भीर लगें, सोबर लगें पर हमारी नजरें तो पैन्ट के अन्दर लण्ड तक उतर जाती हैं। लड़कों का खड़ा लण्ड नजर आने लगता है।

मैं खिड़की पर खड़ी सब्जी काट रही थी की भैया आया और बिना इधर उधर देखे बाहर ही दीवार पर अपना लण्ड निकाल कर पेशाब करने लगा। मेरा दिल धक से रह गया। इतना बड़ा और मोटा लण्ड… भैया ने पेशाब किया और लण्ड को झटका और पेण्ट में घुसा लिया। मैं तुरन्त एक तरफ़ हो गयी। भैया अन्दर आ गया और मुझे रसोई में देख कर थोड़ा विचलित हो गया … उसे लगा को शायद मैने उसे पेशाब करते हुये देख लिया है।

“ये खिड़की क्या खुली हुई थी…”

“हां क्यो, क्या बात है…”

“नहीं यू ही बस …।”

“हां… तुम वहा पेशाब कर रहे थे न…” मैं मुस्कराई और उसकी पेन्ट की तरफ़ देखा

भैया शर्मा गया।

“धत्त , तुझे शरम नही मुझे देखते हुये”

“शरम कैसी… ये तो सबके होता है ना, बस तेरा थोड़ा सा बड़ा है…”

“दीदी…” वो शरमा कर बाहर चला गया। मुझे हंसी आ गयी। हां, मेरा दिल जरूर मचल गया हा। पर भैया भी चालू निकला, वो जब भी खिड़की खुली देखता तो वहा पेशाब करने खड़ा हो जाता था… और मुझे अब वो जान करके अपना लण्ड दिखाता था। मेरा मन विचलित होता गया। एक बार मैने उससे कह ही दिया…

“बबलू… तू रोज़ ही वहा पेशाब क्यो करता है रे…”

“मुझे अच्छा लगता है वहां”

“… या मुझे दिखाता है…अपना वो…”

“दीदी, आप भी तो देखती हो ना… फिर ये तो सबका एक सा होता है ना…”

” जा रे… तू दिखायेगा तो मैं देखूंगी ही ना… फिर…” मैं शर्मा सी उठी

“दीदी… तेरी तो शादी हो गई है…तुझे क्या…”

“अच्छा छोड़, मैं स्टूल पर चढ कर वो समान उतारती हू, तू मेरा ध्यान रखना…मैं कही गिर ना जाऊ”

मैं स्टूल पर चढी, और कहा “बबलू… मेरी कमर थाम ले…और ध्यान रखना…”

समान उतार कर मैं ज्योही स्टूल पर से उतरी बबलू ने मुझे उतरते हुये अपनी तरफ़ खींच लिया।

“धीरे धीरे दीदी…”और उसने मुझे ऐसे उतारना चालू किया कि मेरे बोबे तक दबा डाले धीरे धीरे सरकते हुए वो मुझे नीचे उतारने लगा और मेरे चूतड़ उससे चिपकते हुए उसके लण्ड तक पहुंच गये। अब हाल ये था की मेरे दोनो बोबे उसके कब्जे में थे और उसका लण्ड मेरे पटीकोट को दबाते हुए गाण्ड में घुस गया था। उसके मोटे लण्ड का स्पर्श मैं अपने दोनो चुतड़ो के बीच महसूस कर रही थी। मैने उसे देखा तो उसकी आंखे बंद थी… और मुझे वो कस कर जकड़ा था। शायद उसे मजा आ रहा था। मुझे बहुत ही मजा आने लगा था। पर शराफ़त का तकाजा था कि एक बार तो कह ही दू…”अरे छोड़ ना…क्या कर रहा है…”

“ओह दीदी… मुझे ना क्या हो गया था… सॉरी…”

“बड़े प्यार से सॉरी कह दिया… “मैने उसकी हिम्मत बढाई।

“दीदी क्या करू बस आपको देख कर प्यार उमड़ पड़ता है…”

“और वो जो खड़ा हो जाता है… उसका क्या”

“दीदी… वो तो पता नही , बस हो गया था” और मुस्कराता हुआ बाहर चला गया।

रात को सब सो गये तब मन में वासना जाग उठी। भैया के अन्दर का शैतान जाग उठा और मेरी अन्तर्वासना जाग उठी। जवान जिस्मो को अब खेल चाहिये था। दोनो के तन बदन में आग लगी हुई थी। कैसे शैतान ने काम किया कि हम दोनो को एक दूसरे की जरुरत महसूस होने लगी । हम दोनो लेटे हुये एक दूसरे को देख रहे थे… आंखो ही आंखो में वासना भरे इशारे हो रहे थे। भैया ने तो अपना लण्ड ही दबाना शुरू कर दिया, मैने भी उसे देख कर अपने होंठ दांतो से काट लिये। मैने उसे अपने बोबे अपना ब्लाऊज नीचे खींच कर दिखा दिये और दबा भी दिये। अब मैने चादर के अन्दर ही अपनी पेण्टी उतार दी और ब्रा खींच कर खोल दी। पेटीकोट को ऊपर उठा लिया… और अपनी चूत सहलाने लगी। ऊपर साफ़ दिख रहा था मेरा चूत का मसलना…

“दीदी, आप यही क्यो नही आ जाती , अपन बाते करेंगे”

“क्या बात करेंगे… मुझे पता है… तुझे भी पता है…आजा मेरे भैया…”

हम दोनो बिस्तर से उतर कर खड़े हो गये। धीरे धीरे एक दूसरे के समीप आ गये और फिर हम दोनो आपस में लिपट पड़े। मेरा अस्त व्यस्त ब्लाऊज और पेटीकोट धीले हो कर जाने कब नीचे खिसक गये, उसका पजामा भी नीचे उतर गया। हम नंगे खड़े थे। हम दोनो अब एक दूसरे को चूमने लगे। उसका लण्ड मेरी नगी चूत पर ठोकरे मारने लगा।

मैं भी निशाना लगा कर लण्ड को लपकने की कोशिश करने लगी कि उसे अन्दर ले लूं। हम दोनो के नगे और चिकने जिस्म रगड़ खाने लगे। जाने हम दोनो के होंठ कब एक दूसरे से चिपक गये। बबलू ने खुद को नीचे करते हुए मेरी गीली चूत में लण्ड घुसाने कोशिश करने लगा। उसका लण्ड मुझे यहा वहा रगड़ खा कर मस्ती दे रहा था। मेरी चूत अब लप लप करने लगी थी। तभी लगा की लण्ड ने चूत में प्रवेश कर लिया है। मैने अपनी एक टांग कुर्सी पर रख ली और चूत का द्वार और खोल दिया। लण्ड अन्दर घुस पड़ा। मीठा मीठा सा मजा आने लगा … मैने भी अपनी चूत उसके लण्ड पर दबा दी , उसका लण्ड पूरा अन्दर तक उतर गया।

अब मैने अपनी टांग नीचे कर ली। और भैया को जकड़ लिया। हम एक दूसरे से चिपके हुये कमर को हौले हौले चलाने लग गये। गीली और चिकनी चूत में लण्ड अन्दर बाहर फ़िसलने लगा। मुझे चुदाई का नशा सा आने लगा। बबलू का मोटा लण्ड मुझे भरपूर मजा दे रहा था। हम काफ़ी देर तक यू ही वासना की कसक भरी मस्ती लेते रहे। वो धीरे धीरे मुझे चोदता रहा… अब मुझे लगा कि कही मैं झड़ ना जाऊ… पर देर हो चुकी थी…मेरी चूत में पानी उतरने लगा था, सब्र टूट रहा था… मेरी सांसे जोर से चलने लगी और मेरा पानी छूट पड़ा। पर मैं उससे चिपकी रही। भैया मुझे हौले हौले चोदता ही रहा। धीरे धीरे मुझे फिर से चुदने का मजा आने लगा। मैं फिर से उसे पकड़ कर चिपट गयी। वो मेरे बोबे दबाता रहा और चोदता रहा, उसमें दम था…

“दीदी … अब उल्टी हो जाओ दूसरा मजा भी लू क्या ?”

“मेरे प्यारे भैया … हाय रे गान्ड चोदेगा क्या…” उसने हां में सर हिलाया। मैं उसकी तरफ़ पीठ करके खड़ी हो गयी। उसने मुझे घोड़ी जैसा झुकाया और झुक कर देखा, पास में पड़ी शीशी से क्रीम निकाली और गाण्ड में भर दी।

“क्रीम मत लगा, मेरी गाण्ड तो वैसे ही खुली हुई है… खूब लण्ड खा लेती है…” मैने उसे बताया पर तब तक उसका लौड़ा मेरी गाण्ड में घुस चुका था। लण्ड गाण्ड में कसता हुआ जा रहा था पर दर्द नही हुआ। बस एक मीठी सी सुरसुरी होने लगी। उसका लौड़ा मेरी गाण्ड में पूरा अन्दर तक बैठ गया था।

मैने फ़्री स्टाईल में कमर हिलानी शुरू कर दी पर भैया को मजा चाहिये था, सो उसने मुझे सीधा खड़ा कर दिया और और मेरी पीठ अपने से चिपका ली । मेरे बड़े बड़े बोबे थाम कर उसे मसलना चालू कर दिया और लण्ड को हौले हौले गाण्ड में चलाने लगा। लण्ड का पूरा मजा आ रहा था। उसका साईज़ मेरे चूतड़ो तक को महसूस हो रहा था मुझे अब थोड़ी सी इस पोज में तकलीफ़ होने लगी थी सो मैं अब झुकने लगी और घोड़ी बनने लगी चुदते चुदते ही मैने अपने अपने हाथ कुर्सी पर टिका दिये और अपने पांव खोल दिये। उसका लण्ड अब अच्छी तरह से तेज चलने लगा। मैने भी चूतड़ो कि ताल में हिला कर गाण्ड मरवाने लगी। अब मुझे भी मस्ती आने लगी थी। भैया गाण्ड मारने में माहिर था। अब तो मेरी चूत भी फिर से तैयार थी, भैया ने मेरा इशारा समझा और लण्ड को गाण्ड में से निकाल कर फिर से चूत में पिरो दिया। मेरी चूत में मजे की तरावट आ गयी। खूब गुदगुदी भरी मिठास उठने लगी।

मैने भी चूत को गाण्ड के साथ नचाना शुरू कर दिया और मजा तेजआने लगा। चूत के पानी का चिकनापन से चोदते समय फ़च फ़च की आवाज आने लगी थी। सारी दुनिया मेरी चूत में सिमट कर रह गई थी। मस्ती सर पर चढ चुकी थी। चुदाई जोरो पर थी। भैया तूफ़ानी गति से कस कर धक्के मार रहा था। मेरी चूत बेहाल हो उठी थी। अब लग रहा था कि मेरा माल निकलने वाला है… उत्तेजना चरम दौर पर थी… चूत पर लण्ड की चोट मुझे मस्त किये दे रही थी। अचानक भैया ने लण्ड मेरी चूत में दबा दिया और मेरी कमर कस कर भींच दी ।

“दीदी… दीदी… हाय… आह्ह्ह … मेरा लण्ड गया… दीदी… मेरा निकला…ऊईईईईई…ऐह्ह्ह्ह्ह्ह्…”

तभी मेरी भी सारी नसे जैसे खिंच उठी और मैं तड़प उठी। मेरा भी पानी जैसे अन्दर से उबल पड़ा और मैं झड़ने लगी। तभी भैया के लण्ड ने भी पिचकारी छोड़ दी। लण्ड बाहर निकाल कर सारा वीर्य छोड़ दिया। उसका लण्ड रह रह कर रस बरसा रहा था। मेरी गाण्ड पूरी वीर्य से तर हो चुकी थी। वो लगता था थक गया था। उसने पास पड़े कपड़े से मेरे चूतड़ साफ़ कर दिये और अपना लण्ड भी पोंछ डाला। हम दोनो फिर से आपस में लिपट गये और प्यार करने लगे।

अब हम एक ही बिस्तर में लेटे थे और एक दूसरे के साथ खेल खेलने लगे थे। मुझे तो उसे फिर से उत्तेजित करना था। मेरा तो रात भर का कार्यक्रम था… कुछ देर में भैया फिर से तैयार था … उसका लण्ड कड़क हो चुका था… मैं भी चुदने को तैयार थी… उसने मेरे ऊपर चढ कर मुझे दबा डाला… और उसका लण्ड एक बार फिर से मेरी चूत में घुसता चला गया… मेरी सिसकारिया मुख से फ़ूट उठी… लण्ड और चूत का घमासान युद्ध होने लगा… Hindi Sex Stories

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हेलो पाठको, मैं अन्तर्वासना Hindi Porn Stories का नियमित पाठक हूँ। मैं अपनी कहानी आप सभी को बताना चाहता हूँ। यह करीब पाँच साल पुरानी बात है, जब मैं स्नातिकी के प्रथम वर्ष में था। कॉलेज की छुट्टियों में मेरे घर के सभी सदस्य गाँव चले गए थे। मेरा रहने का प्रबंध मेरी चाची के यहाँ कर दिया था। मैं बहुत खुश था।

मैं सुबह जल्दी से तैयार होके चाची के यहाँ चला गया। चाची ने दरवाजा खोला, वो बहुत ही अलग लग रही थी। उन्होंने साड़ी पहनी थी। साड़ी में वो बहुत ही खूबसूरत लग रही थी। मेरा मन बदलने लगा, मैं कभी कभी चाची के बारे में सोचता था और मुठ मारता था।

उन्होंने मुझसे बैठने को कहा और अन्दर रसोई में चली गई, कुछ देर बाद चाची कुछ खाने को लाई। मैंने उनसे चाचा और बच्चों के बारे में पूछा, तो पता चला कि चाचा सुबह ही गाँव गए हैं और बच्चे अपनी नानी माँ के पास गए हैं, दो दिन बाद लौटेंगे।

मैं यह सोच कर सोचता ही रह गया कि आज के बाद के आठ दिन मुझे उनके साथ रहना है, और दो दिन हम दोनों को अकेले ही रहना है। वैसे तो मुझे चाची पसंद ही नहीं, बल्कि वो तो मेरी ड्रीम गर्ल थी। उनको जब पहली बार देखा था तो वो बहुत ही सादगीपूर्ण थी। उन्होंने कभी मुझे अपने बच्चों से अलग नहीं समझा था। कुछ साल पहले जब मैं उनके घर गया था तो उन्होंने मुझे छोटा समझ के मेरे सामने अपनी साड़ी बदली थी, तब मैं सातवीं कक्षा में था। तभी से आज तक मैं उनके बारे में सोचता और अपने मन को शांत करता था। उनके उस सादे रूप में और अ़ब दो बच्चों को जन्म देने के बाद बहुत बदलाव हुए हैं, वो और भी सुन्दर होती जा रही हैं।

उस दिन तो वो गजब लग रही थी। मैं उनको चोरी से देखता हूँ, यह बात उन्हें पता चल चुकी थी। मगर उन्होंने इस बात का जिक्र कभी किसी से नहीं किया था और आज मैं उनके साथ अकेला था। उन्होंने मेरी कॉलेज-लाइफ के बारे में पूछना शुरु किया। वैसे तो मैं उनसे ज्यादा बात तो करता ही था, मैंने भी उनसे उनकी कॉलेज-लाइफ के बारे में पूछा और हम बातों में इतने घुल मिल गये कि हमें वक्त का लिहाज भी नहीं रहा। कोई एक बजे हमने खाना खाया। उन्हें मदद करने के बहाने (देखने के लिए) रसोई में चला गया। वहाँ बरतन मांजते समय मैंने एक दो बार उन्हें छू भी लिया था। उन्होंने कुछ भी नहीं कहते हुए सब अनदेखा कर दिया। यह देख कर मैं और भी उनकी तरफ आकर्षित हुआ।

काम निपटा के हम दोनों बाहर आ गये। टीवी उनके बेडरूम में होने के कारण हम दोनों बेडरूम में चले गए। वो बेड पर बैठी और मैं ठीक उनके सामने बेड से नीचे बैठा था।

टीवी पर कोई होरर फ़िल्म चल रही थी। बेडरूम में हम दोनों के अलावा कोई नहीं था और होम- थियेटर होने के कारण आवाज कमरे में गूंज रही थी। डर के कारण उनके पैर मुझे छू रहे थे, यह देखकर मैंने उन्हें महसूस करना शुरु किया। चाची फ़िल्म के मज़े ले रही थी और मैं उनके स्पर्श का अनुभव कर रहा था। अचानक मरे कंधों को चाची ने दबोचा, मैं अपने गहरे सपने से जाग गया तो देखा कि चाची के दोनों पैर मेरे दोनों कंधों के बगल में थे। अगर मैं घूम जाता तो चाची की मांसल पिंडलियों में मैं अपने आपको खो देता। मैं उनके शरीर को महसूस करने लगा।

अचानक डर के मारे चाची ने अपना चेहरा मेरे सर और दाएं कंधे के बीच दबाया। उनके गदराये शरीर ने मानो मुझे पागल कर दिया। उनकी दोनों टांगों के बीच मेरा सर उनकी जांघों से और उनके रसीले मादक आमों से टकरा रहा था। अचानक वो फ़िल्म के माहौल से बाहर आ गई और अपने आपको मुझसे इतना चिपके देख हड़बड़ा गई। मैं उनके दोनों पैरों के बीच फंसा था, यह देख उन्हें मुझ पर हंसी आ रही थी, मगर मेरी होने वाली हलचल से उन्हें कुछ और महसूस होने लगा था। मैं उनके मम्मों के और चूत के इतने करीब था कि उनकी चूत पानी छोड़ रही थी और मेरे बाल भीगी चूत के कारण गीले हो रहे थे। मेरी हालत पतली हो गई थी और यह देख कर वो वापिस फ़िल्म देखने लगी मगर उनके मन में कुछ और ही चल रहा था।

कुछ देर बाद मुझे महसूस हुआ कि उनका बायाँ हाथ मेरे कंधे से मेरे गले तक आ गया था और उनकी चुचियाँ मेरे सर को चुभ रही थी। एकाएक उन्होंने अपने बायें हाथ से मेरे सर को अपनी ओर घुमाया और मेरी आँखों में आँखें डालकर अपने रसीले होंटों को मेरे होंटों से लगाकर चूमना शुरु किया। मेरे लिए ये सब नया था, मैं पहले डर गया मगर थोड़ी देर बाद मैंने भी साथ देना शुरु किया। अ़ब मेरे हाथ चाची को टटोल रहे थे। मैंने उनके स्तनों को ऊपर से सहलाना शुरु किया वह भी यही चाहती थी। उनके हाथ मेरी पीठ और बालों में घूम रहे थे। उन्होंने मुझे अपने ऊपर खींच लिया।

मैं अब बेड पर आ गया। मैं उनके ऊपर और वो मेरे नीचे थी। मैं अपने हाथों से उनके वक्ष सहला रहा था। एक एक करके उनके दोनों मम्मों को बारी-बारी ब्लाऊज़ के ऊपर से मुँह में ले रहा था, मेरे थूक के कारण उनकी ब्लाऊज़ गीली हो गई थी। वो भी उसका आनन्द ले रही थी। गर्मी के साथ मेरी थूक के कारण उन्हें ठंडी का एहसास हो रहा था और वो मुझसे और लिपटती सी जा रही थी।

तभी अचानक मैंने अपनी पैन्ट के ऊपर चाची के हाथ का जोर महसूस किया। वो मुझे छूना चाहती थी, मेरे साथ का पूरा आनन्द लेना चाहती थी। मेरी आँखों में उनके लिए जो वासना थी उसे वो पीना चाहती थी। मैंने उनकी तरफ देखा, वो आँखों को बंद कर के मेरे हर एक स्पर्श को महसूस कर रही थी। यह देख उनके ब्लाऊज़ के बटन मैंने अपने दांतों से एक एक करके खोल दिए। अ़ब उनके दोनों मम्मे खुले थे, बिना ब्रा के मैं उन्हें पहली बार देख रहा था। उन्हें देख कर मैं पागल हो गया और उन्हें मसलने लगा, अपने हाथों में ले के एक एक करके रगड़ने लगा अपने जीभ से उनके साथ खेलने लगा, अपने दांतों से उन्हें काटने लगा।

यह देख वो भी मचलने लगी, मेरे बालों को पकड़ के अपने हाथों से मेरा सर मम्मों पे दबाने लगी। यह देख मैं और जोरों से उनके दोनों मम्मों से खेलने लगा। अ़ब तक वो एक बार झड़ चुकी थी। उनके मम्मो को तो मैंने टमाटर की तरह लाल कर दिये थे, उन्हें देख वो बोली,”छोटेऽऽ आम ही खायेगा? और मुझे कुछ नहीं खिलायेगा? आआअ उईईईइ।”

तभी मैं बोला,”चाची मैं तो पूरा आपका तो हूँ जहाँ से चाहे खा लीजिये !”

तब चाची ने मुझे अपने नीचे ले लिया और खुद मेरे ऊपर आकर मेरे पूरे शरीर को चूमने लगी, मानो मेरे लिए ही तड़प रही थी। मेरा कच्छा छोड़ चाची ने मेरे सारे कपड़े उतार दिए और मेरे होंटों से अपने होंटों को गड़ा लिया और चूमने लगी। ऐसा लग रहा था मानो मैं उनके लिए नहीं, वो मेरे लिए प्यासी हैं !

फिर करीबन ५ मिनट के बाद वो मेरे ऊपरी शरीर को चूमते चूमते मेरे कच्छे तक पहुँच गई और मेरी आँखों में देखते हुए मेरे लंड को ऊपर से ही चूमती रही। उनकी यह अदा देख मानो वो मुझे याद दिलाना चाहती थी, जितनी बार उन्हें देख मेरे लंड खड़ा होता था तब तब वो मेरे लौड़े को देख कर तरसती थी। मैं सोच ही रहा था कि उन्होंने मेरे ७ इन्च के लौड़े को कच्छे से बाहर निकाला और अपने दांतों से खाने ही लगी और मेरे कच्छा निकाल फ़ेंका। अपने दांतों से मेरे लंड को चबाती और फिर अपने होंटों से ऐसे चूमती रही मानो मेरा लंड नहीं कोई लोलीपोप है। करीबन ५ मिनट मुझे खाने के बाद चाची मेरे लंड से पानी निकाल कर गटागट पी गई। इस बीच वो भी दो बार झड़ गई। अभी तक साड़ी उनकी कमर पर ही थी। उन्हें कोई भी मौका दिए बिना मैं उनके ऊपर आ गया, अपने सारे शरीर का बोजझ उनके ऊपर डालते हुए मैं उन्हें चूमता रहा। उनके होंटों को करीबन ५ मिनट तक चूमने के बाद उनके गले को और फिर उन के मम्मों को ऊपर से हाथ मारते हुए कब मैं उनकी साड़ी और पेटीकोट को उनके शरीर से अलग किया, पता भी न चला।

मगर यह साजिश गहरी थी, यह पता चल गया क्योंकि उन्होंने ब्रा के साथ साथ अपनी पैन्टी भी नहीं पहनी थी। ब्रा घर पर रहने के कारण नहीं पहनी होगी मगर साड़ी के साथ पैन्टी नहीं, वो भी अंकल सुबह ही गाँव गए हैं तो पैन्टी न पहनने का कोई सवाल नहीं था। जब वो अंकल के साथ सेक्स करती तो वो दिन में दो से तीन बार अपनी पैन्टी बदलती थी, यह बात मुझे पता थी। अ़ब अंकल गाँव गए हैं तो जाहिर है कि अंकल से अपनी भूख तो जरुर मिटाई होगी उन्होंने। फिर भी उन्होंने पैन्टी नहीं पहनी थी और रही मेरे उनके यहाँ ठहरने की बात तो यहाँ तो एक हफ़्ते पहले ही उन्हें पता था कि मेरे घर के सभी लोग गाँव जाने वाले हैं।

तो क्या बस मैं शुरु हो गया उनके पेट के ऊपर से नाभि तक चूमते हुए मैं उनकी जांघों के बीच उनकी मुनिया पर आ गया। अपनी जीभ उनकी जांघों पर फेरते हुए मैं उनके भगोष्ठों के ऊपर से फेरने लगा। वो चहक उठी और मैं भी उस गंध के कारण रोमांचित हो उठा था। मैं धीरे धीरे उनके अन्दर अपनी जीभ को डालते हुए उनके अंदरूनी होंटों को अलग करने लगा। वो भी यह प्रयास कर रही थी कि मैं पूरी तरह से उनमें समा जाऊं ! मैं उनकी यह तड़प और बढ़ाना चाहता था। मैं धीरे धीरे उनको पी रहा था कि अचानक उन्होंने अपने पैरों की पकड़ कड़ी कर दी और मेरे मुँह को अपने अमृत से भिगो दिया। मगर मैं रुकने वाला नहीं था, मैं और जोर से उनमें समाने लगा, अपने होंटों से उनके आंतरिक होंटों का सारा रस पीने लगा। वो एक बार फिर मेरे मुंह में आ गई।

अ़ब मैं अपने हाथों की उंगलियों का उपयोग करते हुए उन्हें फिर से मेरे अगले कार्यक्रम के लिए तैयार करने लगा। अब मानो वो मेरे सामने गिड़गिड़ाने लगी और बोली,”छोटे, अ़ब तो तेरे लौड़े का स्वाद मेरी मुनिया को चखा दे, नहीं तो रो रो के दम तोड़ देगी ! आआआआआआ ईईईईईईईए “

यह सुनकर अ़ब मुझे उन पर तरस आ गया, मैंने कहा,”हाँ चाची ! थोड़ा सा और, बस फिर आप मुझे ही खा लेना !”

यह सुनकर मानो वो भी मेरे उंगलियों को साथ देने लगी। अपने कूल्हे पहले से अधिक उछालने लगी। अ़ब मैं अचानक रुक गया और अपने लौड़े को उनके मुँह तक ले गया। उनके चूमने से वो और मस्त हो गया। अ़ब उसे उनके सारे शरीर पर फिरा के उनके मम्मों से होते हुए मैं उनकी नाभि पर आकर उसे घुमाने लगा तो चाची और जोर जोर से मिन्नत करने लगी। उनकी भट्टी में मानो आग लगी थी, उनसे रहा नहीं जा रहा था। फिर मैं उनकी मुनिया को तरसाने लगा तो चाची ने अपना पूरा जोर लगा के मेरे बालों को पकड़ के मुझे अपने ऊपर ले लिया फिर भी मैं मानने वाला थोड़े ही था। मैंने अपने होट उनके होंटों से लगा लिये और उनको व्यस्त रखने की कोशिश करने लगा मगर उन्होंने अपने हाथों से मेरे लंड को पकड़ के अपनी आंतरिक होंटों से खाने लगी। देखते ही देखते उन्होंने मेरे आधा लंड अन्दर ले लिया। अ़ब क्या था, मैं तो कबसे तरस रहा था इस दिन के लिए ! मैंने जोर लगा के सारा का सारा अन्दर डाल दिया। तभी चाची जोर से चिल्लाई और मुझसे लिपट गई। मैंने अपने धक्के आहिस्ता-आहिस्ता शुरु किये।

मुझे चाची की ज़कड़ से लगा कि चाची जल्दी ही झड़ जायेगी। मैंने अपने धक्के धीरे से चालू किये। फिर अचानक अन्दर मुझे ज़कड़न और दबाव महसूस होने लगा और चाची झड़ गई।

मैं अभी नहीं आने वाला था। झड़ने के कारण उनकी मुनिया और भी गीली हो गई और मैंने अपना काम जारी रखा। थोड़ी देर बाद वो भी फ़िर साथ देने लगी और अपने कूल्हे मेरे साथ साथ उछालने लगी। मैं समझ गया कि अ़ब तो मज़ा ही मज़ा है। हम दोनों भी एक दूसरे को चूमते रहे। चाची ने तो मुझे अन्दर बाहर आते समय अड़चन ना हो इसलिए अपने पैर हवा में उठा लिए। मैंने फ़िर वही ज़कड़न को महसूस किया इसलिए मैंने अपनी रफ्तार बढ़ाई। चाची भी बराबर का साथ देने लगी और हम एक साथ एक दूसरे में मिल गए। मैं फिर भी रुका नहीं जब तक चाची ने मेरे पूरे लंड का रस अपनी योनि में नहीं लिया। तब तक मैं नहीं रुका। फिर कुछ देर बातें करते हम वैसे ही पड़े रहे। मेरा लंड अभी तक उनकी मुनिया से बाहर नहीं निकला था। उनके मम्मों से खेलते खेलते और बातें करते करते हम दोनों सो गए फिर अगले दौर के लिए !

दोस्तो, कहानी अभी बाकी है।

यह कहानी कैसी लगी, मुझे जरुर बतायें ! Hindi Porn Stories

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