Important Notice: Post Free Ads Unlimited...🔥🔥🔥

Massage Girl in Malappuram: Premium Relaxation Services

Our site can help you find a professional massage girl in Malappuram who will help you relax in the best manner possible. We connect you with professional therapists who can offer you a massage that will make you feel better and more relaxed. The pros on our list are ready to provide you with a fantastic experience at your house or in one of their particular spots, whether you want to relax or get away from it all.

Introduction

Massage is currently one of the finest methods to relax your mind, body, and overall health. Our website makes it easy to locate the top massage services in Malappuram that meet your demands. This will be a one-of-a-kind and calming experience for you.

Tottaa wants to make it simple for clients to find the top masseuse. The Malappuram massage service providers on our list offer the greatest quality, comfort, and competence, whether you want a full-body massage or a massage for a particular location.

How Tottaa Helps Advertisers Reach More Customers

Tottaa is not only a list of masseuses, it’s also a secure location for them to show off what they can do. People in Malappuram who are seeking massage services may find them on our website. This makes them easier to find and gets them more appointments.

Advertisers may simply put up profiles, offer their services, and talk about pricing and discounts on our sites. This makes sure that the relevant people notice your Malappuram massage service, which makes it easier to obtain more customers.

Different Types of Massages We Offer

There are a lot of different types of massage services on our site, so you may choose one that works for you. You may choose the kind of treatment that works best for you, whether it’s profound rest or a particular type of therapy.

1. Swedish Massage

A calm and gentle way to ease muscular tension and improve blood flow. This Malappuram massage is perfect for you if you want to relax and forget about your concerns.

2. Deep Tissue Massage

This approach employs a lot of pressure to get to deeper muscle layers. It’s helpful for folks who have muscular discomfort or stiffness that won’t go away. There are specialists on our profiles of massage girls in Malappuram who are good at deep tissue treatments that function effectively.

3. Aromatherapy Massage

Calming massage strokes and essential oils are beneficial in making people feel improved both emotionally and physically. Most massage companies in Malappuram employ the use of custom oil preparations to make you feel good.

4. Thai Massage

A therapy that wakes you up by using a mix of regular massage, stretching, and compression. This traditional massage in Malappuram helps you relax, become more flexible, and get your mind and body back in harmony.

5. Hot Stone Massage

Heated stones are placed on various parts of the body to help with deep muscular tightness. People who want to feel good, relax, and help their muscles recover quickly can use this massage service in Malappuram

How to Book Our Massage Services

Tottaa makes it simple and fast to book. With our listings, you can see what kind of massage you want, read about the providers, see that they are free and then contact them directly. After you choose, you can book a massage in Malappuram at your convenient time and location. In order to get your desired massage services, apply the following simple steps:

Step 1: Browse Our Listings

Take a peek around our site to view a few massage professionals. Each listing gives you information about the many sorts of massages, how long they last, how much they cost, and where they are situated. This makes it easier to choose the finest ones.

Step 2: Compare and Shortlist

Examine the profiles carefully to compare how the services, talents, and reviews posted by customers differ. This phase makes sure you choose a business that has the style, pricing, and supply you desire.

Step 3: Connect with the Provider

When you have decided, use the information that you are offered so that you can contact them directly. One can communicate it to the massage giver thus making it understood what massage you want at what time and when.

Step 4: Confirm the Appointment

The date, time and place of the service, which could be your home, a hotel or the spa where the therapist may be found. You also need to agree on the payment method and any other accords prior to commencement of the course.

Step 5: Relax and Enjoy Your Massage

All you have to do on the day of the appointment is have your area ready for the house visit. The remainder will be handled by the expert. Take it easy and enjoy a massage that is made just for you.

Frequently Asked Questions

To locate a professional who can meet your needs, read our biography, reviews and advertising.

Yes, many of the therapists on our site will come to your house so you may feel safe and at ease.

You may pick based on talents since most adverts provide their qualifications in their profiles.

It would be advisable to make a reservation earlier to guarantee that you would be able to get a massage, particularly against the prevalent services of massage.

Not at all. Tottaa exclusively connects users with service providers. The doctor gets to choose how to handle payment.

Read Our Top Call Girl Story's

Sex Stories

हाय! अन्तर्वासना के पाठकों को Sex Stories नमस्कार! अपनी पिछली कहानी “पापा के दोस्तों ने चोदा- 1” में आपने पढ़ा कि किस प्रकार पापा के दो दोस्तों ने सीमा हमारे घर में ही चोदा। वो अलग बात है कि इसके लिये उन्हें कोई विशेष कोशिश नहीं करनी पड़ी। सीमा तो वैसे ही चुदने के लिये मरी जा रही थी। उसी कड़ी में पेश आगे की कहानी …

यह कहानी भी मैं सीमा की ओर से ही पेश कर रहा हूं …

उस रात गुरुबचन अंकल और अकील अंकल ने जो कमरतोड़ चुदाई की उसका असर दूसरे दिन तक रहा। तीसरे दिन अकील का फोन आया, मैं घर में अकेली थी …

हैलो …

हाय रानी!!! कैसी है … ?

कौन बोल रहा है … मैं चौंक गई।

आय! हाय! दो दिन में ही लन्ड पच गया …

ओह! अकील अंकल … … मैं आवाज पहचानते ही बोली। अनायास ही मेरा हाथ चूत पर पहुँच गया।

अब अंकल तो मत कह रानी … क्या कर रही थी … अकेली ही है ना?

हाँ … क्यों … क्या करना है … मैं शोखी से बोली।

चोदना है तेरी प्यारी चूत को …

ना बाबा ना … अब तक नहीं सम्भल पाई हूँ … …

अरे जान … वो तो मौका प्रोपर नहीं था … वर्ना एक हफ़्ते तक बिस्तर से नहीं उठती …

तभी तो कह रही हूं … मुझे मरना नहीं है …

अच्छा! देख शनिवार को तेरे पापा टूर पे जा रहे हैं और गुरु की वाइफ़ भी बाहर है तो उस दिन गुरू के घर पे प्रोग्राम रखेंगे …

और फ़िर शनिवार का इन्तजार होने लगा।

पापा सुबह 5 बजे की बस से चले गये। मैं एक बार फ़िर चूत चिकनी की और फ़िर तैयार होके 11 बजे गुरू के घर पहुंच गई। मेरे पहुंचते ही उन्होंने मेरा दिल खोलकर स्वागत किया और सीधे बैडरूम में ले गये जहाँ एक शानदार बैड था। पूरा कमरा इत्र की खुशबू से महक रहा था … मैं रोमांचित हो रही थी … … गुरू ने नाश्ते का इन्तजाम किया हुआ था। नाश्ते के दौरान हम खूब गन्दी गन्दी बातें कर रहे थे मैं भी पूरी तरह खुल चुकी थी।

इस सब में एक घंटा गुजर गया तो …

अकील बोला … चल अब शुरू करें …

और हम नंगे हो गये। अकील सोफ़े पर बैठ गया। मैंने जमीन पर कुतिया बनके उसके लंड को मुँह में ले लिया और चूसने लगी। गुरू मेरे पीछे आया और चूत चाटने लगा। जब अकील का लंड पूरी तरह तैयार हो गया तो मैं गुरू की ओर मुड़ी। गुरू घुटने के बल खड़ा हो गया तो मैंने उसका लंड मुँह में ले लिया और इधर अकील चूत चाटने लगा।

फ़िर अकील ने अपना लंड पीछे से ही चूत के छेद पर रखा और एक जोरदार धक्का मारा तो गुरू का लंड मेरे गले तक घुस गया मेरी सांस रुकने लगी पर वे रुके नहीं और मैं दोनों तरफ़ से चुदने लगी …

ले मादर चोद आज देख हमारे लंड का कमाल … … अकील दनादन ठोकते हुए बोला तो गुरू ने भी मेरे बाल पकड़ कर मुँह में ही अन्दर बाहर करना शुरू कर दिया। मुँह बन्द होने के बावजूद भी मैं कराह रही थी पर बहुत मजा आ रहा था। फ़िर उन्होंने साइट बदली और चालू हो गये। लगभग आधा घंटे की ताबड़तोड़ चुदाई के बाद उन्होंने मुझे जमीन पर सीधा लिटाया और एक साथ अपने लंड मुँह डाल दिये, मैं लपालप चूसती रही। थोड़ी ही देर में वे मेरे मुँह में झड़ गये। उनके लंड से निकले गरम गरम वीर्य ने मेरा मुँह भर दिया। मेरी चूत भी झड़ चुकी थी। हम तीनों निढाल हो कर पड़ गये।

दूसरा राउंड 2 बजे शुरू हुआ और ये पहले से भी भारी था। मेरा रोम रोम दर्द करने लगा। ये मेरी जिन्दगी की सबसे यादगार चुदाई थी। Sex Stories

Hindi sex stories

Hindi sex stories में आपने जाना था कि दीपा जीजी मुझसे चुदने को राजी हो गई थी.. और उसने अपना कुरता उतार दिया था.

अब आगे:

मैं उसको देखता ही रह गया. उसकी बगलों में एक भी बाल नहीं था, शायद संडे को ही उसने झांटों के साथ बगल के भी बाल साफ़ किये थे.

मैंने अपना दाहिना हाथ उठा कर उसकी एक चूची पर रख दिया और ब्रा के ऊपर से दबाने लगा. अपने दूसरे हाथ को मैं उसकी गांड पर फिरा रहा था. दीपा का चेहरा चुदास से सुर्ख लाल हो गया था और उसके मुँह से सिसकारियां निकल रही थीं.

वो ‘अह्हह्.. अह्हह्.. ओह्हह्ह..’ कर रही थी.

इस समय मेरे दोनों हाथ उसकी चूचि और गांड मसलने में व्यस्त थे और होंठ उसके होंठों को चूस रहे थे.

मैंने उसको पलंग पर लिटा दिया. मैं उसके ऊपर चढ़ गया और उसकी कमर के नीचे हाथ ले जाकर सर को ऊपर उठाकर उसके होंठ चूसने लगा.

मैं इतना जोश में था कि कई बार उसने कहा कि जरा आहिस्ता चूसो.. मेरा दम घुटता है.

कई बार तो एक दूसरे के होंठ चूसते चूसते हम दोनों के मुँह से ‘गूऊ.. न.. गू..’ की आवाज निकल जाती.

अब मैं पीछे से उसकी ब्रा का हुक खोलने लगा था और थोड़ी सी मेहनत के बाद उसे भी खोल दिया. दीदी की ब्रा का हुक खुलते ही उसकी चूचियां एकदम से ऊपर को उछल पड़ीं, मानो उनको जबरन दबा कर कैद किया गया था.. और अब उनको आजादी मिल गई हो.

उसकी चूचियां बहुत ही गोरी चिट्टी और एकदम सख्त व तनी हुई थीं. निप्पल बाहर को उठे हुए और एकदम तने हुए थे. जैसे ही मैंने एक हाथ से उसकी चूचि मसलनी शुरू की और दूसरी को अपने मुँह से चूसने लगा, तो दीपा की हालत खराब हो गई और वो जोर से कसमसाने लगी.

अब उसके मुँह से ‘स्ससीईई… अह्हह ह्हह.. ओह्ह ह्ह्ह् मर्रर्र.. माँआआआअ मर्रर्र गईई रेईई..’ आवाजें निकलने लगीं.

इधर मेरा लंड अभी तक पेंट में ही कैद था और उछल कूद कर रहा था. मेरा लंड उसकी सलवार के ऊपर से ही उसकी चूत पर टक्कर मार रहा था.

मैंने मुँह से उसकि चूचि चूसते हुए और एक हाथ से चूचि मसलते हुए, दूसरे हाथ से उसकी सलवार का नाड़ा खोल दिया. उसने भी कोई देर नहीं की तथा अपनी गांड ऊपर करके मुझे अपनी सलवार उतारने में मदद कर दी.

अब वो सिर्फ पेंटी में ही थी और उसने सफ़ेद रंग की ही पेंटी भी पहन रखी थी, जो कि चूत के ऊपर से कुछ गीली हो रही थी.

लगता था कि उसकी चूत ने उत्तेजना के कारण छोड़ना शुरू कर दिया था. जैसे ही मैंने उसकी चूत को पेंटी के ऊपर से सहलाना शुरू किया तो वो कांपने सी लगी और मस्ती में आकर बोली कि मुझको तो नंगी कर दिया है साले और मेरा सब कुछ देख लिया है लेकिन तुम अपना लंड अभी तक पेंट में छुपाये हुए हो.

उसने ये कह कर मेरे पेंट की ज़िप खोल दी और चूँकि मैं पेंट के नीचे चड्डी नहीं पहनता हूँ, तो मेरा लंड एकदम फ़नफ़नाता हुआ बाहर निकल आया.

मेरा लंड देखते ही दीपा एकदम मस्त हो गई और बोली- हाय राम तुम्हारा लंड तो काफी लम्बा और मोटा है.. ये तो लगभग 8 इंच लम्बा होगा और 3.5 इंच मोटा होगा. वाह तेरे साथ तो बहुत ही मज़ा आएगा. मैं तो तुम्हें अभी तक बच्चा ही समझती थी.. मगर तुम तो एकदम जवान हो, एक खूबसूरत लंड के मालिक हो.. मुझे लगता है कि तुम बहुत अच्छी तरह से चोदने की ताकत रखते हो.

अब उसने मेरे सारे कपड़े एक एक करके उतार दिये और मेरे तने हुए लंड को सहलाने लगी.

मेरे लंड का सुपारा एकदम से लाल हो रहा था और काफी गरम था.

अब मैंने भी उसकी चूत पर से उसकी पेंटी उतार दी और देखा कि आज उसकी चूत पर एक भी बाल नहीं है और एकदम सफ़ाचट चुत है.

मैंने कहा कि जीजी उस रोज तो तुम्हारी चूत पर बहुत झांटें थीं और आज एकदम साफ़ है.. किसी हीरे की तरह चमक रही है.
मेरी इस बात पर वो हंस पड़ी और बोली कि मैं तुम्हारी तरह नहीं हूँ, जो अपनी झांटें और बगलों का जंगल साफ़ ही ना करे.. ये मुझको अच्छा नहीं लगता. तुम भी ये सब साफ़ रखा करो, नहीं तो जूँए हो जाएंगे.
मैंने कहा- जीजी मैंने तो आज तक अपनी झांटें और बगलों के बाल साफ़ ही नहीं किये हैं. मुझे डर लगता है कि कहीं ब्लेड से कट ना जाए.
इस पर वो खिलखिला कर हंस दी और फिर से बोली- अगर ऐसी बात है तो तेरी बगल के बाल और लंड से झांटें मैं शेव कर दूँगी. और हां.. एक बात और सुन कि अब तू मुझे बार बार जीजी ना कहा कर.. अब मैं तेरी जीजी नहीं रही हूँ, तेरी माशूका हो गई हूँ. इसलिए अब तू मुझको डार्लिंग कहा कर.
मैंने कहा- अच्छा ठीक है माय डार्लिंग

ये कह कर मैंने एक उंगली उसकी चूत के छेद में डाल दी.

दीपा की चुत का छेद काफी गीला था और एकदम चिकना हो रहा था. उसकी चूत एकदम गुलाबी थी.. पानी निकलने के कारण काफी चिकनाहट हो गई थी. मैंने उसकी चूत में उंगली अन्दर बाहर करनी शुरू कर दी और कभी कभी मैं उंगलियों के बीच में उसके दाने को पकड़ कर भी मसल देता था.. जिससे उसके मुँह से मादक सिसकारी निकल रही थी.

वो ‘आह्हह.. आह्हह्ह.. हैईई.. हैईई.. उफ़्फ़.. उफ़्फ़..’ कर रही थी और कह रही थी कि जरा जोर से उंगली को अन्दर बाहर कर.

मैं और तेजी के साथ चुत में उंगली करने लगा. उसके मुँह से सिसकारियों की आवाज बढ़ती ही जा रही थी और वो लगातार ‘उफ़्फ़.. उफ़्फ़.. ओह्ह.. हाय मर गई..’ कर रही थी.

अचानक उसकी कमर तेजी के साथ हिलने लगी और वो अटक अटक कर बोलने लगी- हाय.. आआहह.. और्र.. तेज्ज.. अन्दर बाहर करो.. हैईईई मेर्ररा रस निकला.. आआआआ.. निकलाआआअ..

ये कह कर दीपा शांत सी हो गई और ढीली पड़ गई. मैंने देखा कि उसकी चूत में से पानी निकल रहा था, जिससे चादर गीली हो गई थी.

मैंने कहा- जीजी आपका तो निकल गया.
तो बोली- हां मैं झड़ गई हूँ.
फिर थोड़ा दिखावटी गुस्से से बोली कि मैंने अभी क्या कहा था.. भूल गया? कि तू मुझको अब जीजी नहीं, बल्कि डार्लिंग कह कर बुलाया कर और तू फिर भी जीजी ही कहे जा रहा है.
मैंने कहा- सॉरी जीजी… उफ़.. नहीं डार्लिंग.

कुछ देर हम ऐसे ही मज़ा लूटते रहे और हम दोनों की कामुक छेड़छाड़ चलती रही जिससे इस बीच वो एक बार और झड़ चुकी थी.

वो अभी तक मेरा लौड़ा सहला रही थी, जिससे अब रुक पाना मेरी बर्दाश्त से बाहर हो रहा था.

वो भी कहने लगी कि विक्की और मत तड़पाओ और अपना लौड़ा मेरी चूत में पेल ही दो.

ये सुन कर मैं उसकी टांगों के बीच में आ गया और उसकी गांड के नीचे एक तकिया रख दिया, जिससे उसकी चूत ऊपर को उठ गई. अब मैंने उसकी टांगों को चौड़ा करके घुटनों से मोड़ कर ऊपर को उठाया और अपने लंड का सुपारा उसकी चूत के छेद पर रखा.

उसकी चुत पर टोपा लगते ही मुझे लगा कि मैंने लंड किसी भट्टी पर रख दिया हो. उसकि चूत इतनी गरम थी और किसी हलवाई की भट्टी की तरह तप रही थी.

मैंने अपनी कमर को उठा कर एक धक्का मारा और मेरे लंड का सुपारा उसकी चूत में घुस गया.

उसकी मुट्ठियाँ भिंच गईं. इसके बाद मैंने एक बहुत जोरदार धक्का लगाया, जिससे मेरा लंड 5-6 इंच तक उसकी चूत में घुस गया. इसी के साथ उसके मुँह से एक तेज सिसकी निकली और वो बोली कि आह मार दिया साले.. धीरे कर.. तू तो बड़ा बेदर्दी है.. एक ही धक्के में अपने लंड को मेरी चूत में घुसाना चाहता है. साले मेरी चूत फाड़ने का इरादा है क्या.. ज़रा आराम से कर.. तेरा लंड बड़ा है ना… इसलिए दर्द होता है.

लेकिन मैंने उसकी एक भी नहीं सुनी और एक और धक्का तेजी के साथ लगा दिया. अब सारा का सारा लंड उसकी चूत में घुस गया था.

वो हल्की सी आवाज में चिल्लाई कि हयई.. अर्ररेय मर गई ऊऊऊ मेर्ररि अम्ममाआअ.. मेरीईई चूऊत फाआआड़ दीईई.. कमीने..

उसकी चीख से मैं एकदम से डर गया कि कुछ गड़बड़ ना हो गई हो.

मैंने पूछा कि ज्यादा दर्द हो रहा हो तो मैं निकाल लूँ?
वो बोली- अरे नहीं.. ज्यादा तो नहीं मगर तूने एकदम से अन्दर कर दिया है न.. इसलिए थोड़ा सा दर्द हो रहा है. तेरा लंड काफी लम्बा और मोटा है ना.. इसलिए मेरी चुत को दर्द हुआ.. अभी कुछ देर बाद मजा आने लगेगा. अब तो मेरे ऊपर लेट जा और चूची चूस.
मैंने ऐसे ही किया और उसकी चूची चूसने और मसलने लगा. कुछ देर में ही उसे मज़ा आने लगा और अपनी गांड हिला हिला कर ऊपर को उठाने लगी.
दीदी बोली- आह.. अब धक्के लगा और मेरी चुत की चुदाई चालू कर.

मैंने अपनी कमर और चूतड़ों उठा उठा कर जोर शोर से धक्के मारने शुरू कर दिए.

थोड़ी ही देर में उसके मुँह से अंटशंट आवाजें निकलने लगीं.
वो बोल रही थी- अय..यईईए.. र्रर स्सछह्ह.. मुझेय.. जोऊओर जोऊर से चोद साले.. फाड़ दे मेर्रर्इ फुद्दी.. ऊऊओह उफ़्फ़फ़ मेर्र रस फिरर्रर से निकलने वालाआ.. है.. हाय.. और जोओर्र से..

ये कह कर दीपा दीदी तेजी से कमर हिलाने लगी और ‘स्स्सीईईई.. इस्सस्स्ई..’ करती हुई झड़ गई.

मेरा लंड एकदम गीला हो गया था और काफी चिकना हो गया था, जिससे लंड दीदी की चुत से 2-3 बार बाहर भी निकल गया.

अब मैंने धक्के लगाने की स्पीड तेज कर दी थी. मुझको थोड़ी मस्ती सूझी और मैंने धक्के लगाते लगाते एक उंगली पर उसका पानी लगाया और अचानक उसकी गांड के सुराख पर फेरते हुए, मैंने उंगली को उसकी गांड के अन्दर कर दिया.

वो एकदम दर्द से चीख उठी और बोली कि आह.. साले क्या शैतानी कर रहा है अरे उधर नहीं.. मुझको दर्द होता है.. मेरी गांड से उंगली को फ़ौरन बाहर निकालो.

मैंने पूछा कि क्या कभी किसी से गांड भी मरवाई है? मैं तुम्हारी गांड मारना चाहता हूँ.

इस पर दीपा ने कहा कि नहीं मैंने अपनी गांड कभी नहीं मरवाई है और ना ही तुझसे मरवाऊंगी.. क्योंकि मैं गांड मारने को सही नहीं मानती हूँ.
मैंने कुछ नहीं कहा, बस उसकी चूत की चुदाई का मजा लेता रहा.
फिर उसने पलट कर पूछा कि क्या तुमने किसी से अपनी गांड मराई है या किसी की गांड मारी है?

तो मैंने ‘नहीं..’ में जवाब दिया. इस पर उसने कहा कि विक्की तू तो बहुत ही सुन्दर और स्मार्ट है.. तुझे तेरे दोस्तों ने कैसे छोड़ दिया.. क्योंकि मुझे मालूम है लड़के आपस में एक दूसरे की गांड ही मार कर काम चलाते हैं.

मैंने कहा कि मैं सेक्सी ज़रूर हूँ लेकिन मैं ना तो किसी लड़के की गांड मारता हूँ और ना ही मरवाता हूँ. मैं तो बस चूत ही चोदना चाहता हूँ. हां आज तुम्हारी गांड पर दिल आ गया है, इसलिए गांड मारना चाहता हूँ.

दीपा बोली कि अभी तक तो मैंने गांड कभी नहीं मरवाई है.. यदि कभी मरवाने कि इच्छा हुई तो तेरे से ही मरवाऊंगी.

हम चुदाई के साथ गरम बातें कर ही रहे थे कि वो फिर से चुदासी हो गई और अंटशंट बकने लगी- आह्ह.. आआ और जोओर्र से चोद भोसड़ी के.. मेरा रस फिर से निकाल दे.

वो ऐसे ही कहती रही और इधर मेरे भी धक्कों की गति बढ़ती ही जा रही थी और मैं पसीने पसीने हो रहा था.

अब मेरे मुँह से भी अंटशंट निकलने लगा- आह्ह.. आअह.. क्यों नहीं.. साली रंडी.. ईईइ.. आह.. मैं आज ही तुम्हारी चूत को चोद कर भोसड़ा बना देता हूँ कुतिया.. साली.. ले मेरे लंड का पानी ले.. हैईईईई मेरा आने वाला है..

ये कहते हुए मैं फ़ुल स्पीड से धक्के मार रहा था, तभी मुझे लगा कि मेरे लंड से कुछ बाहर आ रहा है. मैंने हांफ़ते हुए उसे कस कर पकड़ लिया और जोर जोर से उसकी चूचि चूसने लगा.

उधर दीपा भी मादक आवाजें निकाल रही थी- हायऐई ईईईइ मैं गईईई फिर्र सेययई.. मैं झर्र रहीईईई हूँऊऊ.. ओ मेरी माँआआन.. मेरा रस निकल रहा है.. आह..

ये कहते कहते उसका पूरा बदन एक बार फिर से अकड़ गया और वो भी मेरे साथ साथ झड़ गई.

उसने झड़ते हुए अपने दांत मेरे कंधे में गड़ा दिए और मेरे मुँह से एक चीख निकल गई- साली कुतिया काट लिया..

वो जोर से हंस पड़ी.

मैं काफी देर तक ऐसे ही उसके ऊपर पड़ा रहा. फिर हम दोनों उठकर बाथरूम में गए तो उसने मुझे बाहर जाने के लिए कहा, पर मैंने मना कर दिया और कहा कि डार्लिंग मैं तो यहीं रहूँगा और तुमको पेशाब करते हुए देखूँगा.

पहले तो वो मना करती रही, लेकिन वो फिर मान गई और मेरे सामने बैठ कर पेशाब करने लगी.

मैं ये तो नहीं जान पाया कि उसका पेशाब, चूत में से कहां से निकल रहा है लेकिन उसको पेशाब करते हुए देख कर अच्छा बहुत लगा.

उसके पेशाब की धार उसकी चूत से काफी मोटी बाहर आ रही थी और सुर्राहट की आवाज में निकलकर ऊपर को उठी हुई काफी दूर पड़ रही थी.

दीपा मेरी तरफ़ देख कर शर्मीली हंसी हंस रही थी.

फिर मैंने पेशाब किया तो उसने भी मुझेय बड़े गौर से देखा. मेरी भी धार काफी मोटी थी और काफी दूर तक जा रही थी.

इसी बीच हम दोनों दोबारा उत्तेजित होने शुरू हो गए और हम लोगों ने एक बार फ़िर से चुदाई की.

हम काफी देर तक यूं ही चिपटे हुए नंगे पड़े रहे और बात करते रहे. मेरा मन तो उसको एक बार फ़िर से चोदने को कर रहा था, लेकिन दीपा ने ही मना कर दिया.

उसने कहा कि ज्यादा चुदाई नहीं करनी चाहिये.. वरना कमजोरी आ जाएगी.

मैंने भी उसकी बात मान ली और हम दोनों अपने अपने कपड़े पहन कर तैयार हो गए.

फ़िर दूसरे किसी मौके की तलाश में रहने लगे ताकि चुदाई का मजा लिया जा सके.

तो दोस्तो, और सखियो, ये था मेरा चुदाई का पहला तज़ुरबा.. मुझे उम्मीद है कि आप सबने बड़े ध्यान से इस चुदाई की कहानी को पढ़ा होगा.. इसलिए अब बारी आपकी है, यानि कि आपकी राय की कि आपको ये Hindi sex stories कहानी कैसी लगी.

अन्तर्वासना के सभी पाठकों और गुरूजी को मेरा नमस्कार! Antarvasna

मैं प्रतीक, मध्यप्रदेश का Antarvasna रहने वाला हूँ। मैं अन्तर्वासना का पिछले एक वर्ष से नियमित पाठक हूँ। मैंने यहाँ बहुत सी कहानियाँ पढ़ी हैं। मैं भी आप सबसे अपना अनुभव बांटना चाहता हूँ।

मैं ऍमबीए का छात्र हूँ। यह कहानी तब की है जब मैं ऍमबीए करने के लिए नया-नया इंदौर आया था। इंदौर आने पर मेरी सबसे पहली समस्या यह थी कि मुझे एक अच्छे कमरे की तलाश करनी थी। मेरे कुछ दोस्त पहले से इंदौर में पढ़ाई कर रहे थे इसलिए उन्होंने मुझे जल्दी ही एक अच्छा कमरा दिलवा दिया।

मेरी जिन्दगी अच्छी तरह से चल रही थी। मैं जहाँ पर रहता था, उस कालोनी में बहुत सी सुन्दर महिलाएं और लड़कियां रहती थी। मैं कॉलेज में व्यस्त होने क कारण किसी पर भी ज्यादा ध्यान नहीं देता था।

मैंने एक दिन देखा कि मेरे पास वाले कमरे में कुछ नए लोग रहने के लिए आये हैं। वो कुल मिलकर तीन लोग थे- पति, पत्नी और उन भाभी की छोटी बहन!

भाभी देखने में बहुत ही सुन्दर थी, भाभी का जिस्म 34-28-36 का होगा। उनकी नई-नई शादी हुई थी।

एक दो बार कॉलेज आते जाते हुए ऐसे ही हम दोनों ने एक दूसरे को देखा था। दो एक महीने तो ऐसे ही गुजर गए, मैं भी अपनी पढ़ाई में व्यस्त हो गया।

एक दिन जब मैं अपने कमरे में पढ़ाई कर रहा था। अचानक मेरे कमरे की घंटी बजी, मैंने जब दरवाज़ा खोला तो देखा कि पास वाली भाभीजी सामने खड़ी थी।
मैंने उनको हेल्लो कहा और अन्दर आने को कहा।

उन्होंने मुझसे कहा- आज तुम्हारे भैया बाहर गए हुए हैं, मुझे बाज़ार से कुछ चीजें मंगवानी हैं, क्या आप मेरी चीजें कॉलेज से आते वक़्त ले आयेंगे?
मैंने कहा- ठीक है मैं ले आऊंगा!
क्योंकि जहाँ से मुझे उनकी चीजें लेनी थी वो मेरे कॉलेज के रास्ते में ही है।
वो मुझे धन्यवाद कहकर अपने घर चली गई…

मैं भी तैयार होकर अपने कॉलेज चला गया और लौटते समय उनका सामान ले आया। मैं अपने कमरे पर नहाकर, कपड़े बदलकर भाभी के घर सामान देने गया।

भाभी ने मुझे अन्दर बुलाया, उन्होंने अपनी बहन से मेरा परिचय कराया। उन्होंने मुझे धन्यवाद कहा, मेरे बारे में बहुत सी बातें पूछी जैसे कि मैं कहाँ का रहने वाला हूँ, मेरा नाम क्या है, मैं क्या करता हूँ….

कुछ देर बात करने के बाद मैं अपने कमरे पर वापिस आ गया।

कुछ दिन ऐसे ही निकल जाने के बाद मेरी और भाभी की अच्छी दोस्ती हो गई।

मैंने भाभी से भैया के बारे में पूछा तो उन्होंने बताया- वो एक कंपनी में काम करते हैं और इस कारण अधिकतर घर से बाहर ही रहते हैं।

अब भाभी मेरे से पूरी तरह से खुल गई थी, मैं भी उन्हें सारी बातें बताता था।
एक बार भाभी ने मुझसे पूछा- क्या तुम्हारी कोई गर्लफ्रेंड हैं?
मैंने कहा- नहीं हैं!
उन्होंने कहा- क्यों ? तुम तो बहुत ही अच्छे और स्मार्ट लड़के हो!
तो मैंने उनसे कहा- मुझे पढ़ाई से ही समय नहीं मिलता है!
वो यह सुनकर थोड़ी खुश दिखी। मुझे उस वक़्त तक नहीं मालूम था कि क्यों!

कुछ दिन निकल जाने के बाद मैंने देखा कि भाभी उदास-उदास सी रहने लगी हैं। पहले तो मुझे लगा कि शायद अपने घर वालों की याद आ रही होगी लेकिन एक दिन मैंने देखा कि वो बहुत ज्यादा उदास हैं। वो मेरे कमरे पर यूँ ही आई थी, मैंने उनसे उनकी उदासी का कारण पूछा तो उन्होंने कहा- कुछ नहीं!

पर मैंने उनसे कहा- अगर आप मुझे अपना अच्छा दोस्त समझती हैं तो मुझे अपनी दिक्कत बताओ!
तो उन्होंने कहा- मुझे तुम्हारे भैया की बहुत याद आ रही है!
तो मैंने कहा- उनसे बात कर लो फ़ोन पर!
तो उन्होंने कहा- मुझे जो चाहिए वो बात करने से नहीं मिलेगा!
मैंने कहा- मैं समझा नहीं?
उन्होंने कहा- शादी के बाद मुझे तुम्हारे भैया से पूरा सुख नहीं मिला है!

पहले तो मैं समझा नहीं, पर एक दम मुझे लगा कि शायद भाभी प्यासी हैं, उनकी बहुत दिन से चुदाई नहीं हुई है।
मैंने भाभी से कहा- तो फिर आप भैया को कुछ दिन के लिए यहीं पर बुला लीजिये!
उन्होंने बताया कि भैया के ऑफिस में काम बहुत है और अगले 20-25 दिन वो घर नहीं आयेंगे।
तो मैंने भाभी को समझाया और उनके घर भेज दिया।

पर भाभी की तन की प्यास बढ़ती जा रही थी।
वो एक दिन मेरे पास आई और उन्होंने मुझसे कहा- प्रतीक तुम मुझे बहुत अच्छे लगते हो!
मैंने कहा- भाभी आप भी मुझे अच्छी लगती हैं!
उन्होंने एकदम से मुझे अपने गले लगा लिया।

मैंने भाभी को दूर करते हुए कहा- भाभी, यह आप क्या कर रही हैं?
भाभी ने कहा कि वो मुझे बहुत पसंद करती हैं और मुझसे प्यार करती हैं।
मैंने कहा- भाभी, यह गलत है!
तो उन्होंने कहा- कुछ गलत नहीं है! अगर उन्हें प्यार नहीं मिला तो वो मर जाएँगी!
मैंने भाभी से कहा- भाभी! आप अभी अपने घर चली जाएँ!

पर भाभी एकदम मेरे पास आ गई और उन्होने मुझे बाहों में भर लिया। पहले तो मैं उन्हें दूर करने लगा पर थोड़ी देर बाद मुझे भी मज़ा आने लगा। भाभी के बड़े बड़े स्तन मेरे सीने से टकराने लगे।

मैंने भाभी को कसकर अपनी बाहों में भर लिया और उन्हें चूमने लगा। मैंने अपने होंठ उनके रसीले होंठों पर रख दिए, मैं ऐसे ही उनके होंठ चूसने लगा। क्या रसीले होंठ थे उनके!

10-15 मिनट उनके होंठों को चूसने के बाद मैंने अपना एक हाथ भाभी की चूचियों पर रख दिया और दूसरा उनकी गांड पर रख दिया। मैं भाभी की चूचियों को ऊपर से ही दबाने लगा। वो आह आह की सिसकारियाँ निकालने लगी।

मैंने धीरे से भाभी की साड़ी खोल दी और अलग फ़ेंक दी। मैंने धीरे-धीरे भाभी का ब्लाउज़ और पेटीकोट भी निकाल कर अलग कर दिए। अब भाभी मेरे सामने सिर्फ ब्रा और पैंटी में थी। क्या गज़ब की लग रही थी- लग रहा था जैसे कोई स्वर्ग की अप्सरा सामने खड़ी हो!

मैं फिर से भाभी को चूमने लगा। भाभी ने मेरे कपड़े भी निकाल दिए। फिर हम दोनों एक दूसरे को चूमते-चूमते बिस्तर पर आ गए। मैंने अब भाभी के ब्रा का हुक खोल दिया। अचानक उनकी बड़ी बड़ी चूचियां मेरे सामने आ गई। उनकी चूचियां बहुत ही गोरी थी। मैं उनकी एक चूची अपने मुँह में लेकर चूसने लगा और दूसरे हाथ से दूसरी चूची दबाने लगा। भाभी अलग तरह की आवाजें निकालने लगी। मैंने इसी बीच भाभी की पैंटी भी निकाल दी और दो ऊँगलियाँ उनकी चूत में घुसा दी। वो सिसकारियाँ भरने लगी।

फिर भाभी के पूरे बदन को चूसता हुआ उनकी चूत चाटने लगा। वो अजीब तरह की आवाजें निकलने लगी। मैं उनकी चूत बहुत तेजी से चाट रहा था। फिर मैंने अपनी जीभ भाभी की चूत में घुसा दी। भाभी को अब बहुत मज़ा आने लगा था, वो मेरा सर पकड़ कर अपनी चूत में और अन्दर तक दबाने लगी।

मैं भी मज़ा ले लेकर उनकी चूत चाट रहा था। आधा घंटा चूत चाटने के बाद भाभी ने सारा पानी में मेरे मुंह में ही छोड़ दिया। मैंने उनका सारा पानी पी लिया। अब मैं भाभी की चूत में दो ऊँगलियाँ डालकर अन्दर बाहर कर रहा था। उन्हें बहुत मज़ा आ रहा था। कुछ देर ऐसा करने के बाद मैंने अपना आठ इंच का लंड उनके मुँह के पास रख दिया और उनसे कहा- आप इसे चूसो!

भाभी ने बिना संकोच किये मेरा पूरा का पूरा लंड अपने मुँह में ले लिया और एक चुदक्कड़ की तरह चूसने लगी। मुझे ऐसा लग रहा था जैसे मैं स्वर्ग की सैर कर रहा हूँ। कुछ देर लंड चूसने के बाद मैंने भाभी के मुँह में ही अपना सारा वीर्य छोड़ दिया। वो मेरा सारा का सारा वीर्य पी गई और मेरे लंड को भी चाट कर साफ़ कर दिया।

अब मैं और भाभी दोनों ही बहुत गर्म हो गये थे। मैंने भाभी को बिस्तर पर सीधा लेटाकर अपने लंड का अग्र भाग उनकी चूत के मुख पर रखा और भाभी के होंठो को चूमते हुए एक जोर का धक्का लगाया। मेरा लंड उनकी चूत को चीरता हुआ आधा उनकी चूत में घुस गया। भाभी के मुँह से एक तेज़ चीख निकली पर मैंने अपने होंठों से उनकी चीख दबा ली। भाभी की चूत में बहुत ज्यादा दर्द हो रहा था। शायद भैया का लंड बहुत छोटा था जिसके कारण भाभी की चूत की झिल्ली अभी तक टूटी नहीं थी।

मैंने जब भाभी से पूछा तो उन्होंने कहा- मुझे बहुत दर्द हो रहा है, तुम अभी जरा भी हिलना मत!

उन्होंने मुझे साथ ही यह भी बताया कि तुम्हारे भैया का लण्ड केवल तीन इंच का है और वो भी पतला!

कुछ ही देर में भाभी का दर्द थोड़ा कम हुआ। उन्होंने मुझे इशारा करते हुए अपने चूतड़ ऊपर उठाने लगी। मैंने इशारा देखकर एक और तेज झटका मारा, इस बार मेरा पूरा लंड भाभी की चूत में प्रवेश कर चुका था। भाभी को बहुत दर्द हुआ, उन्होंने मुझे फिर रुकने के लिए कहा लेकिन इस बार मैंने उनकी नहीं सुनी और अपना लंड अन्दर बाहर करता रहा। भाभी को बहुत दर्द हुआ, उनके आंसू तक निकल गए।

थोड़ी देर ऐसे ही करते रहने के बाद उनका दर्द कम हुआ और वो भी मज़े लेने लगी। अब मैं उनको बहुत तेजी से चोद रहा था, वो भी अपनी गांड उठा-उठा कर मेरा साथ दे रही थी।

अचानक भाभी ने मुझे कस कर पकड़ लिया और अपना पानी छोड़ दिया लेकिन मेरा लंड अभी भी पूरे जोश में था। मैं उनको चोदता रहा! उनको बहुत मज़ा आ रहा था। मैंने भाभी को उठाकर कुतिया की तरह बनने को कहा। वो आगे की तरफ झुककर कुतिया की तरह पलंग पर बैठ गई। मैंने अपना लंड पीछे से उनकी चूत में डाल दिया। इस बार एक ही बार में मेरा पूरा लंड उनकी चूत की अंतिम सीमा तक घुस गया। अब मैं उनको बहुत जंगली तरीके से तेज़ तेज़ चोद रहा था।

अचानक मुझे लगा कि मेरा पानी छुटने वाला है। तब मैंने भाभी से पूछा- मेरा वीर्य निकलने वाला है, कहाँ पर निकालूँ?
तो उन्होंने मुझे कहा- मेरी चूत के अन्दर ही छोड़ दो!
मैंने कहा- ठीक है!
और मैंने अपना सारा वीर्य उनकी चूत में ही छोड़ दिया और उनके ऊपर चूत में लंड डालकर लेट गया।

उसके थोड़ी देर बाद हम दोनों उठे और बाथरूम में एक साथ चले गए और भाभी ने मेरा लंड मुँह से चाट कर साफ़ किया और मैंने उनकी चूत चाट कर साफ़ की। हम दोनों ने एक साथ शावर लिया और नहाते हुए ही हमने एक बार और सेक्स किया।

मैंने भाभी को चोदते हुए कहा- मैं आपकी गांड भी मरना चाहता हूँ!
तो भाभी ने कहा- अब तो मैं पूरी की पूरी तुम्हारी ही हूँ! तुम जो चाहो मेरे साथ कर सकते हो!

अब मैं भाभी को जब चाहता हूँ चोद देता हूँ। वो भी मुझसे चुदने का मौका देखती रहती हैं। अब हमारे सम्बन्ध के बारे में भाभी की छोटी बहन को भी पता चल गया है।

भाभी ने मुझे एक दिन चुदाई करते वक़्त बताया- मेरी बहन को सब मालूम पड़ गया है और वो भी चुदना चाहती है तुम से!
मैं तो यह सुनकर खुश हो गया और भाभी की बहुत तेज़ चुदाई करने लगा।

मैंने भाभी की गांड भी मारी और उनकी छोटी बहन की सील भी तोड़ी, यह सब मैं अपनी अगली कहानी में बताऊंगा। Antarvasna

Hindi Porn Stories

सबसे पहले सभी Hindi Porn Stories प्यासी चूतों को मेरे लण्ड का सलाम !

मेरा नाम राजेश कुमार है, मैं आप सब प्यासी चूतवालियों का अपने ७ इंच के खड़े लण्ड के साथ आप लोगों का स्वागत करता हूँ !

मैं अन्तर्वासना का बहुत पुराना पाठक हूँ। मैं २४ साल का नवयुवक हूँ मेरा कद १७५ सेमी और मेरा वजन ६५ किलो है और मैंने बहुत साहस करके अपनी खुद की वास्तविक कहानी आप लोगों का बता रहा हूँ।

वैसे आप सब लोगों को बता दूँ कि मैं एक नम्बर का चूत का चुस्सू हूँ, मुझे चूत चाटने, चूसने और उसका रस पीने में बड़ा मजा आता है। वैसे मैं एक कॉल बॉय बनना चाहता हूँ।

मैं राजस्थान का रहने वाला हूँ और अभी गांधीनगर, गुजरात में रह रहा हूँ, गांधीनगर में मैं एक सिक्योरिटी कम्पनी में नौकरी करता हूँ और हर ३-४ महीने बाद घर जाता हूँ।

अभी मैं अपनी कहानी पर आता हूँ, मैं अपने परिवार के साथ गाँव में रहता था, मेरे घर के पिछवाड़े में एक परिवार रहता है। उस घर में एक बड़ी सेक्सी औरत रहती है, उसका नाम श्वेता है। उसका साईज ३६ इंच, ३२ इंच, ३८ इंच है।

उसका पति फौज में है, मैंने उस औरत को कैसे चोदा और कब चोदा इस कहानी में बताउंगा।

यह बात उन दिनों की है, जब मैं ग्यारहवीं कक्षा में पढ़ता था, तब मेरी उम्र १८ साल और ६ महीने थी।

जब मैं दोपहर को स्कूल से आता तो हमारे घर पर कोई नहीं होता था, एक दिन मैं स्कूल से जब घर आया तो मेरा घर बंद था तो मैं अपने पिछवाड़े की तरफ गया तो देखा कि श्वेता नीम के पेड़ के नीचे आधी नंगी होकर नहा रही है।

जैसे ही मैंने उसे देखा मेरा तो लंड उसकी ३६ इंच की चूची देख के खड़ा हो गया, हमारे पिछवाड़े में एक छप्पर है जिसमें हमारी भैंसें बंधती हैं, मैं उस छप्पर में घुस गया और उसकी तरफ देखा तो श्वेता मेरी तरफ ही देख रही थी। तो मैंने उसे दिखाते हुए अपनी पैन्ट उतारी और उसे नहाता देखते हुए मुठ मारने लगा, अब वो अपने बदन पर साबुन लगा रही थी और तिरछी नजर से मेरे ७ इंच लंड को मुझे मुठ मारते हुए देख रही थी, लेकिन वो जैसे ही मेरी तरफ देखती, मैं छप्पर की दीवार कर आड़ में हो जाता। पर उसे पता था कि मैं उसे नहाते देख के मुठ मार रहा हूँ।

अब वो अपना पेटीकोट ऊपर करके अपनी जांघों पर साबुन लगा रही थी मुझे उसकी जांघें साफ दिखाई दे रही थी। मैं उसे नहाते हुए देख मुठ मार रहा था और वो कभी अपनी चूचियों को दबाती कभी अपनी जांघों को सहलाती और अचानक उसने अपना पेटीकोट ऊपर उठाया और अपनी चूत पर साबुन मलने लगी। अब मेरे हाथ की स्पीड बढ़ गई थी और मैं झड़ने लगा।

मैंने अपनी पैन्ट पहनी और छप्पर से बाहर निकल कर घर का पिछला दरवाजा खोल अन्दर जाते हुए उसे देखा तो वो मेरी तरफ ही देख रही थी और मुझे अपनी ओर देखते हुए देख के मुस्करा गई।

अब तो मैं उसे रोज उसे नहाते देखता हुआ मुठ मारने लगा और अब मैं धीरे-२ खुल के मुठ मारते हुए नहाते देखता और वो मुझे देखती हुई नहाते हुए अपनी चूची दबाती।

एक महीने बाद मेरी माँ और मेरा छोटा भाई मेरे मामा के घर गये तो मेरी माँ श्वेता को मेरे खाने के बारे में बता के गई क्योंकि मुझे खाना बनाना नहीं आता था।

जब मैं स्कूल से घर आया तो श्वेता ने मुझे बताया कि मेरी माँ मेरे मामा के घर गई है और आज से वो मुझे खाना खिलायेगी।

तो मैंने कहा- ठीक है !

उसने कहा- तुम आज शाम ७ बजे खाना खाने आ जाना !

फिर मैंने खाना खाया और फिर पिछवाड़े में आ गया तो श्वेता ने कहा- मैं नहा लेती हूँ।

मैंने कहा- ठीक है !

और मैं अपने छप्पर की ओर जाने लगा तो श्वेता ने कहा- वहाँ जाने की कोई जरूरत नहीं है, तुम यहीं बैठ के मुझे नहाते हुए देखो।

मैंने कहा- मैं तो कभी आपको नहाते हुए नहीं देखता !

तो वो बोली- मैं तुम्हें रोज देखती हूँ ! तुम रोज मुझे देखते हुए वहाँ छप्पर में मुठ मारते हो और अब झूठ बोल रहे हो !

तो मैंने कुछ नहीं कहा और वहीं बैठ गया, वो अपने कपड़े खोलने लगी और मुझसे पूछने लगी- तुझे मेरी कौन सी चीज बहुत अच्छी लगती है?

तो मैंने कहा- मुझे तो तेरी चूचियॉं बहुत अच्छी लगती हैं !

उसने कहा- तो फिर यहाँ आओ और इन्हें अच्छी तरह देखो !

मैं डरते हुए उसके पास गया और देखने लगा तो उसने डाँटते हुए कहा- इन्हें जोर-२ से दबाओ !

और मैंने उसकी दोनों चूचियों को जोर-२ से दबाना शुरू कर दिया।

फिर श्वेता ने मुझ से पूछा- राजेश क्या तूने कभी किसी को चोदा है या किसी को चुदाते हुए देखा है आज तक?

तो मैंने मना कर दिया।

तुम चुदाई के बारे में कुछ जानते हो क्या?

मैंने जवाब दिया- मैं चुदाई के बारे में कुछ नहीं जानता हूँ !

तो श्वेता कहने लगी- तुम आज रात हमारे घर ही सोना, आज मैं तुम्हें सब सिखाउंगी कि चुदाई कैसे करते हैं और चुदाई का कैसे मजा लेते हैं !

मैं मन ही मन बहुत खुश हुआ कि आज जमके चोदने को मिलेगा।

फिर मैं शाम को ७ बजे श्वेता के घर गया तो श्वेता सज धज के बैठी थी।

यारो, मैं तुम लोगों को बताना भूल गया था कि श्वेता के दो बच्चे भी हैं एक लड़का ३ साल का और एक लड़की १ साल की !

उसने पहले अपने बच्चों खिला के सुला दिया, फिर हम दोनों ने खाना खाया और टीवी देखने लगे। उस समय पर ये सीडी प्लेयर नहीं चले थे। श्वेता के घर में एक पुराना वीसीआर था तो श्वेता ने अपने वीसीआर में एक कैसेट लगाई और बोली- आज तुझे सब कुछ सिखा दूंगी !

थोड़ी देर में जब कैसेट चली तो उसमें दो लड़कियाँ एक लड़के को नंगा कर रही थी, एक ने उसकी शर्ट निकाली और एक ने पैन्ट ! जिस लड़की ने उसकी पैन्ट निकाली, उसने उसकी अण्डरवीयर निकाली और लण्ड पकड़ कर उसे चूसना शुरू कर दिया।

अचानक श्वेता ने मुझे खड़ा कर के मेरी भी पैन्ट निकाल के मेरा लण्ड चूसना शुरू कर दिया तो मुझे ऐसे लगा जैसे मैं स्वर्ग में पहुंच गया हूँ और श्वेता मेरे हाथों को अपनी चूचियों पर लाकर बोली- अब इन्हें जोर-जोर से दबाओ और चूसो भी !

तो मैं उसकी चूचियों को दबाने और चूसने लगा। थोड़ी देर बाद हम एक दूसरे के होंठों को चूस रहे थे। फिर श्वेता ने मुझे टीवी की ओर इशारा किया कि देखो वो लड़का कैसे उन लड़कियों की चूत चूस रहा है ! तुम भी मेरी चूत भी ऐसे ही चूसो !

फिर मैंने उसका पेटीकोट खोल दिया, मैंने देखा कि उसने नीचे कुछ नहीं पहना है और मुझे उसकी झाँटों से छिपी चूत नजर आने लगी। पहले मैंने उसकी चूत को चूमा और अपनी जीभ चूत के अन्दर डाल दी और चूसने लगा- वाह ! क्या स्वाद था उसकी चूत का ! थोड़ा नमकीन थोड़ा खारा ! मुझे तो मजा आ गया चूत चूसने में, श्वेता जोर-जोर से आ़ऽऽऽ….. और जोर सेऽऽ चूसोऽऽ ! और जोर….. से चूसो ….. बड़ा मजा आ रहा है ….. आह ….. ओह …… अब मैं झड़ने वाली हूँ ….. आह ……. ओर जोर से …….. आह …..मैं गई…..

और अचानक उसकी चूत का रस बुरी तरह बहने लगा तो श्वेता ने मुझसे कहा- मेरा रस पीओ !

तो मैं उसका पूरा चूत-रस पी गया, वो भी मेरा लण्ड बड़े प्यार से चूस रही थी।

श्वेता के झड़ने के थोड़ी देर बाद मेरा वीर्य भी निकलने लगा तो श्वेता मेरा पूरा वीर्य पी गई और कहने लगी- राजेश, मैंने आज तक तेरे वीर्य जैसा गाढ़ा और स्वादिष्ट वीर्य किसी का नहीं पिया !

फिर मैंने कहा- श्वेता, मुझे झांटों वाली चूत अच्छी नहीं लगती, और फिर टीवी की ओर इशारा करके बोला- मुझे उन लड़कियों की तरह सफाचट और साफ चूत पसंद है !

तो श्वेता बोली- मेरे राजा, तुम्हें थोड़ी मेहनत करनी पड़ेगी, मैं शेविंग का सामान लाती हूँ ! तुम मेरी चूत की शेव कर दो ! फिर दबा के चोदना !

मैंने कहा- हाँ यह ठीक रहेगा !

फिर वो शेविंग का सामान ले आई।

मैंने उसकी उसकी चूत पे शेविंग क्रीम लगाई और ब्रश को रगड़ने लगा। ब्रश के मुलायम बाल जब चूत के अन्दर गुदगुदी करते तो श्वेता आह…… ओह …… करने लगती। फिर जब खूब झाग बन गये तो मैंने रेजर लिया और शेव करना शुरू कर दिया। थोड़ी देर बाद चूत चमकने लगी और मैं दोबारा चूत चाटने लगा तो श्वेता बोली- क्या चूत ही चाटते रहोगे या चोदोगे भी !

मैं बोला- मुझे तो चोदना आता ही नहीं है !

श्वेता बोली- चोदोगे तभी तो चोदना सीखोगे ! चूत ही चाटते रहोगे तो चाटना ही सीखोगे।

फिर श्वेता चारपाई पर लेट गई और बोली- मेरे राजा यहाँ आओ और अपना यह मूसलचंद मेरी इस ओखली में डाल के दबा के कुटाई करो !

तो मैं बोला- मेरी चुद्‌दो रानी ! मेरी तो कुछ समझ में नहीं आया कि तुम क्या बोल गई ?

तो वो हंस के बोली- मेरे बुद्धू चोदू राजा ! अपना यह लम्बा लण्ड मेरी इस में घुसा दो !

और उसने अपनी टाँगें फैला दी, मैंने अपना लण्ड उसकी चूत पे रख कर धक्का मारा तो लण्ड फिसल के साईड में चला गया तो श्वेता बोली- मेरे प्यारे चोदू राजा, यह ऐसे ही अन्दर चला जाता तो हर आदमी चोदू बन जाता !

और फिर अपने हाथ से मेरा लण्ड पकड़ कर अपनी चूत के छेद पर लगाया और बोली- अब मारो धक्का, जोर से मारना कि पूरा लण्ड एक ही झटके में चूत को फाड़ के अन्दर चला जाये और फिर धुँआधार झटके मारना, मेरे दर्द की परवाह मत करना !

फिर मैने एक जोर का झटका मारा और पूरा लण्ड एक ही झटके में चूत के अन्दर पेल दिया, श्वेता जोर से चिल्ला पड़ी- आह ……… थोड़े धीरे, साले मारेगा क्या ………..

मैंने कहा- तुम ही तो बोली थी कि जोर से पेलना !

इतने जोर से पेलने को थोड़े ही बोला था ?

तो मैं रुक गया।

वो बोली- रुक क्यों गया साले?

तो मैं बोला- साली कभी रुकने को बोलती है कभी चोदने को !

तो वो बोली- कि मैंने तुझे पहले कहा था कि मैं कुछ भी बोलूँ तू रुकना मत ! जोर-जोर से धक्के मारते रहना ! तो तू रुका क्यों? अब जोर -जोर से धक्के मारते हुए चुदाई कर !

और चूचियों को भी खूब दबा और चूस !

तो फिर मैंने राजधानी मेल की तरह धक्कों की रफ़्तार बढ़ा दी। ३० मिनट तक दबा के चुदाई चली। इस दौरान श्वेता ३ बार झड़ी और जब मैं झड़ने वाला थ तो मैंने कहा- मेरा निकलने वाला है !

तो श्वेता बोली- राजा तुम अपना ये अमृत मुझे पिलाना ! मेरी चूत को मत पिलाना !

तो मैंने अपना लण्ड उसकी चूत से निकाल कर उसके मुंह में डाल दिया और वो मेरा पूरा वीर्य गटागट पी गई। उस रात उसने मुझे अलग-अलग आसनों से चोदना सिखाया और फिर हम रोज चुदाई करते ! जब उसका पति छुट्‌टी आता तो हम छुप के चुदाई करते।

फिर एक बार उसकी बड़ी बहन की लड़की उसके घर आई तो मैंने उसे भी चोदा ! उसका नाम बीरबती था, वो १९ साल की थी और उसके जेठ की लड़की विमला को कैसे चोदा और विमला की गांड कैसे मारी ये आपको अगली कहानी में बताउंगा !

आपको मेरी कहानी कैसी लगी, कृपया मुझे मेल करें ! Hindi Porn Stories

Hindi Sex Stories

वो आह ओह्ह उफ़्फ़्फ़ Hindi Sex Stories करता रहा, मैं जोश भरे अन्दाज में उसकी मुठ मारती रही। मेरा यह पहला मौका था कि मैं किसी की मुठ मार रही थी। वो अब कसमसा उठा … धीरे से झुक गया मेरे कंधों को जोर से पकड़ लिया और लण्ड ने एक भरपूर पिचकारी उछाल दी। उसके मुख से एक वासना भरी सीत्कार निकल गई। रुक रुक कर उसका वीर्य निकलता रहा।

फिर मैंने उसे हिला हिला कर सारा बचा खुचा वीर्य झटक डाला। उसने झड़ने के बाद अपना पजामा ऊपर खींच लिया। मुझे मन ही मन में बहुत खीज आई। बस माल निकल गया तो पहचानते नहीं !

हम दोनों फिर से सामान्य हो गये थे, यहां-वहां की बातें करने लग गये थे। कुछ देर बाद उसके हाथ मेरे चूतड़ों पर फ़िसलने लगे। मेरे दिल की आग बुझते बुझते फिर से भड़क उठी।

“सोना, आज की रात मेरे साथ गुजार लो … जी भर कर प्यार करेंगे !”

“आप कब से मुझसे प्यार करने लगे… बताओ तो ?” मैंने उसे यूँ ही मजाक में पूछा।

“सच बताऊँ… मुझे तो आपसे पहले दिन से ही प्यार हो गया था।”

“मैं शादीशुदा हूँ, तब भी… एक बच्ची है फिर भी?”

“प्यार तो अन्धा होता है ना…”

आप तो अन्धे नहीं हो ना…”

“ओह, सॉरी, मुझसे गलती हो गई … ” उसका चेहरा लटक गया।

वो मुड़ा और सीढ़ियाँ उतर गया। मुझे बहुत ग्लानि हुई कि मैंने यह क्या कह दिया ? मैं भी पीछे पीछे सीढ़ियाँ उतर आई।

“हां , आप क्या कह रहे थे … आप के साथ रात गुजारने वाली बात?”

उसकी आंखें एक बार फिर से चमक उठी।

“मैं अभी बच्ची को देख कर आती हूँ”

बालिका तो मस्ती में सो रही थी, उसे क्या देखना था ? मैं जल्दी से बाथरूम गई और नहा-धो कर चूत की शेविन्ग की। मेरी आंखों के आगे तरह तरह के दृश्य घूमने लगे। मेक-अप करके कुछ ही देर में उनके कक्ष में आ गई। वो मात्र एक चड्डी में बिस्तर पर लेटे मेरा इन्तज़ार कर रहे थे।

“लाईट बन्द कर दूँ ?”

फिर बिना पूछे मैंने लाईट बंद कर दी। मैंने मात्र पेटीकोट और ढीला सा ब्लाऊज पहन रखा था, मालूम जो था कि चुदाई करनी है। मेरे मन के लड्डू फ़ूट रहे थे। तन और मन से चुदने के लिये हर तरह से तैयार थी। मेरा दिल खुशी के मारे उछल रहा था। आंखों में और दिल में प्रेम-पिपासा नजर आने लगी थी। मैं उनके पास धीरे से लेट गई। शर्म के मारे मेरा बुरा हाल था, पर दिल से मजबूर थी। मेरा दिल अभी भी जाने क्या क्या सपने देखने लगा था। मेरी शर्म को ढकने के लिये अंधेरा मेरा साथ दे रहा था। उसने मुझे कमर से पकड़ कर अपनी ओर घुमा लिया। हाय रे ! वो कितने नजदीक था, उसकी गरम खुशबू भरी सांसे मेरे से टकरा रही थी। मेरी सांस धौंकनी की तरह चल रही थी। यही हाल उसका भी था … उसकी धड़कनें मुझे यहाँ तक सुनाई पड़ रही थी।

“सोना, आओ मुझे चूम लो, प्यार कर लो !”

“मेरे राजा, अब तो मैं आपकी हूँ … चाहे जो कर लो !” मेरे थरथराते लब कांप उठे।

मेरे ढीले से ब्लाऊज को उसके ऊपर उठा दिया और मेरे उरोजों को थाम लिया।

मेरी तो जैसे सांसें रुक गई। अन्धेरे का राज कायम था … अन्धेरे में मेरी हिम्मत बंधी हुई थी। उसके हाथ ने मेरे पेटिकोट के नाड़े को खींच कर ढीला कर दिया। मैंने मारे खुशी के अपनी आंखें कस कर बंद कर ली। मैं नंगी होने वाली थी। मेरी तो सुहागरात भी इतनी खूबसूरत नहीं थी, और ना ही इतनी प्यार भरी थी। धीर से अनिल ने अपने पावों से मेरा पेटीकोट खींच दिया। मैंने भी उसे उतारने में उसकी सहायता की। मेरा नंगापन अंधेरे में छुपा था …

“आ जाओ, मेरे से लिपट जाओ …”

कुछ मैंने, कुछ उसने बाहों के घेरे में लपेट लिया। हाय रे ! वो भी नंगा था…

जाने कब उसने अपनी चड्डी उतार दी थी। उसका मदमाता बलिष्ठ और लोहे जैसा मजबूत लिंग मेरी योनि को छू गया। मुझे एक तेज गुदगुदी सी हुई। उसके गीले होंठ मेरे चेहरे से रगड़ खा गये। मैं मस्ती में झूम उठी। उसके लिंग का दबाव मेरी योनि पर बढ़ता ही गया। मेरे मन की भावना जैसे पिंघल कर बह निकली। हाय मेरे राजा … अब देरी किस बात की … मेहमान को आने दे …” मेरे चुचूक कड़े हो गये थे। उस पर उसकी अंगुलियाँ उन्हें दबा रही थी।

अपने लण्ड को दबाते हुये वो मेरे ऊपर आ गया और धीरे से उसने जोर लगा दिया। मेरी चिकनी चूत में इस तरह उतर गया जैसे मक्खन में चाकू। आह्ह्ह रे …

मेरी मां … मैं तो मर गई। मेरी योनि में वो मुझे एक तीव्र मिठास भरता हुआ अन्दर उतरने लगा।

“मेरे राजा … मैं तो तेरी बांदी हो गई हूँ रे…” मैं सिसक उठी।

अनिल भी वासना के मीथे नशे में मदहोश हो गया था। लण्ड पूरा मेरी चूत में समा गया। पहले तो वो उसी का आनन्द लेता रहा, फिर धीरे से अन्दर ही अन्दर वो चूत में लण्ड रगड़ने लगा। उस रगड़ाई से मुझे तेज आनन्द आने लगा। मेरा शरीर जैसे वासना की मिठास भरी आग का गोला हो गया था। उसकी रफ़्तार बढ़ने लगी। मेरी चूत भी नीचे से उछलने लगी थी। एक साथ दोनों लयपूर्वक चल रहे थे।

चूत और लण्ड के मिलाप की थाप गूंजने लगी थी। थप थप की आवाजें और चूत की गुदगुदी मेरे होश उड़ा चुकी थी। जाने मैं नीचे दबी कब तक चुदती रही। जब होश आया तो मेरी जान जैसे निकलने वाली थी। नशे का तार टूट गया, मैं वासना के नशे में चीख सी उठी। मैं जोर से झड़ गई थी। चूत में लहरें रह रह कर उठ रही थी। मेरा पानी धीरे धीरे निकलता जा रहा था पर उसके धक्के बन्द नहीं हुये थे। मैं झड़ कर निश्चल सी लेटी थी। फिर वो भी एक धीमी सी चीख के साथ चूत मे ही झड़ने लगा। मेरी चूत को उसने लबालब भर दिया।

मुझे उसने प्यार किया और बिस्तर से उतर कर खड़ा हो गया। उसने लाईट जला दी।

मैं चौंक गई।

“अरे, ये क्या… बन्द करो ना … मैं नंगी हूँ !”

उसने मुझे ऊपर से नीचे तक ध्यान से देखा,”मैं नहीं जानता था कि जितना मैंने सोचा उससे तो तुम बहुत अधिक सुन्दर हो।”

“हाय रे, मम्मी … तुम तो बहुत बेशरम हो जी !”

“अरे ये क्या … कुछ टपक रहा है ये तो?”

“चल हटो … मैं साफ़ कर लूंगी !” टांगो के बीच में से टपकता हुआ वीर्य देखकर मैं शरमा गई। मैंने अपना पेटीकोट से उसे साफ़ कर लिया, फिर भी कुछ माल तो चूत में था ही। मैंने अनिल को मुस्करा कर देखा फिर जल्दी से अपने कपड़े उठा कर अपने कमरे में भाग आई। मेरे गोरे नितम्बों को देख कर एक बार फिर अनिल के मुख से आह निकल गई।

रात को ना जाने किस समय किसी ने मुझे अपने दोनों हाथों में किसी बच्चे की उठा लिया। वो कोई और नहीं अनिल ही था। मेरी नींद खुल गई। मैं उसके गले से लिपट गई। उसने मुझे उसी के कमरे में लाकर खड़ा कर दिया। हाय तौबा ! उसका लण्ड बेहद तन्ना रहा था … उसने मेरा पेटीकोट एक बार से उतार दिया और मुझसे लिपट गया। हम दोनों बिस्तर पर एक बार फिर से यौन क्रिया के लिये तैयार हो गये थे। मुझे पता था कि इस बार मेरी गाण्ड की चुदाई होगी। मैं घोड़ी बन गई … उसने एक खुशबूदार क्रीम मेरे गाण्ड के छेद में लगा दिया। और अपना मजबूत लोहे जैसा लौड़ा मेरी गाण्ड के छिद्र से लगा दिया। सब कुछ निशाने पर था। मैं भी इसके लिये अपने आप को तैयार कर चुकी थी। एक बार पति से गाण्ड मरवा चुकी थी, पर उसका अनुभव कुछ अच्छा नहीं था।

“सोना, तैयार हो ना?”

“हूं, उहं…”

“छेद को ढीला छोड़ो …”

“हूं, ओह्ह्ह …”

उसने धीरे से लण्ड छेद में घुसा दिया। सुपाड़ा अन्दर आ चुका था। लण्ड घुसते ही लग़ा कि जैसे गाण्ड फ़ट जायेगी। मेरे मुख से एक चीख सी निकल गई। तभी उसने और जोर लगाया और करीब आधा लण्ड छेद में उतार दिया। इस बार दर्द तो कम हुआ पर छेद बहुत कसा होने से जलन हुई। उसका अगला धक्का करारा था। मेरी तो आंखें उबल पड़ी … एक भरपूर चीख निकल पड़ी।

“बस सोना जी, हो गया… अब बस चुदाई बाकी है … प्लीज शान्त हो जाईये”

“मेरी तो फ़ट गई होगी … देखो बहुत दर्द है…”

“कभी गाण्ड चुदाई नहीं क्या…”

“अरे गाण्ड की बात करते हो, यहाँ तो चूत भी चुदने के लिये तरस जाती है !”

उसने सब समझ कर धीरे धीरे लण्ड अन्दर बाहर करना शुरू कर दिया। जलन धीरे धीरे कम होती गई। गाण्ड के छेद की चमड़ी नरम थी सो बस फ़ैल गई थी, फ़टी नहीं थी। काफ़ी देर तक वो मेरी गाण्ड चोदता रहा। उसके लण्ड की मोटाई का अहसास मुझे भली प्रकार हो रहा था। वास्तव में मुझे एक ऐसा ही मजबूत और भारी लण्ड चाहिये था जो मुझे पूर्ण रूप से सन्तुष्ट कर सके। अब मेरी गाण्ड में मुझे मजा आने लगा था, पर इतनी देर में इस यौन क्रिया के कारण मेरी चूत कसक उठी थी। अब उसमें एक लौड़ा चाहिये था। मुझे लगा कि अनिल अब झड़ने के करीब आ चुका है तो मैंने उससे विनती की,”अनिल, अब मेरी नीचे भी तर होने लगी है, उसे भी शान्त कर दो…”

वो मुस्करा उठा… और मुझे उसी पोजीशन में गाण्ड में से लण्ड निकाल कर चूत पर सेट कर दिया।

“रोज ऐसे ही गाण्ड चुदवाना, देखना कोई दर्द नहीं होगा, बल्कि मजा आयेगा।”

“बड़े अनुभवी लगते हो…” मेरी हंसी छूट गई।

“अरे नहीं … बस किताबों में पढ़ा है …”

मेरी प्यासी चूत ने लण्ड को पूरा ही निगल लिया। फिर भचाभच चुदाई होने लगी … कुछ ही देर में मेरा पानी छूट गया और उसका भी वीर्य मेरी चूत में निकल गया।

अब तो मेरी पति की अनुपस्तिथि में अनिल मुझे खूब चोदता और मैं भी उसे नहीं छोड़ती थी। अब वो अपनी आधी तनख्वाह भी चुपके से मुझे दे दिया करता था। घर में खाने का सामान, मेरे और बेबी के कपड़े वगैरह भी दिलाने लगा था। अब मैं तंगी में नही, बल्कि शान से चुदवा कर रहती थी।

आज भी मैं चालीस साल की हो गई हूँ। अनिल का भी ट्रांसफ़र हो चुका था। अब तो उनकी भी फ़ेमिली है, बच्चे हैं। मेरे पति का जीप एक्सीडेंट में स्वर्गवास हो चुका था। अनिल ने उनके स्थान पर मुझे क्लर्क की नौकरी दिला दी थी। जब कभी भी वो यहाँ आते थे तो मैं उनसे जी भर कर चुदवाया करती हूँ। मेरी बेबी कल्पना का दाखिला अनिल ने जयपुर में करवा दिया था। Hindi Sex Stories

TOTTAA’s Disclaimer & User Responsibility Statement

The user agrees to follow our Terms and Conditions and gives us feedback about our website and our services. These ads in TOTTAA were put there by the advertiser on his own and are solely their responsibility. Publishing these kinds of ads doesn’t have to be checked out by ourselves first. 

We are not responsible for the ethics, morality, protection of intellectual property rights, or possible violations of public or moral values in the profiles created by the advertisers. TOTTAA lets you publish free online ads and find your way around the websites. It’s not up to us to act as a dealer between the customer and the advertiser.

 

👆 सेक्सी कहानियां 👆