Find Related Category Ads
To locate a professional who can meet your needs, read our biography, reviews and advertising.
Yes, many of the therapists on our site will come to your house so you may feel safe and at ease.
You may pick based on talents since most adverts provide their qualifications in their profiles.
It would be advisable to make a reservation earlier to guarantee that you would be able to get a massage, particularly against the prevalent services of massage.
Not at all. Tottaa exclusively connects users with service providers. The doctor gets to choose how to handle payment.
मैं रेखा अपनी पहली Antarvasna चुदाई की कहानी सुनाने जा रही हूँ! उस समय मैं 18 साल की थी।
मैं दिल्ली की रहने वाली हूँ और अभी इन्जिनियरिन्ग अन्तिम वर्ष की छात्रा हूँ। मेरे पिताजी बिजनेस मैन हैं। हम दो बहनें हैं, बड़ी बहन की शादी हो चुकी है, वो अपने ससुराल में रहती है। मेरा कोई भाई नहीं है। मैं अपने मम्मी-पापा के साथ ही रहती हूँ। पापा भी बिजनेस के सिलसिले में ज्यादातर घर से गायब ही रहते हैं।
हमारे घर के सामने वाले मकान में मेरे पापा के एक दोस्त कुछ ही दिनों से रह रहे थे। उनके एक लड़का और एक लड़की है। लड़की तो तब छोटी थी लेकिन लड़का बाईस साल से कम का नहीं था। क्योंकि वो मेरे पापा के दोस्त का लड़का था इसलिये हमारे घर में आता-जाता रहता था। उसका नाम सुरेश था, देखने में काफी हैन्डसम था और बहुत अच्छी बॉडी थी उसकी !
मैं भी काफी जवान हो चुकी थी और बहुत सुन्दर दिखती थी। सबके सोने के बाद मैं बेड पर लेट कर अकसर ब्लू फ़िल्में देखा करती थी और अपनी उन्गलियों से ही अपनी चूत को शान्त कर लिया करती। मेरे स्तन उस समय भी बहुत बड़े थे।
मैं तो सुरेश पर लट्टू हो गई थी और उसके साथ सोने के सपने देखने लगी और सोचती रहती कि कैसे अपनी चूत की प्यास शान्त करूँ !
वो भी मेरे गदराये जिस्म को चोरी-चोरी निहारा करता था। मेरे बड़े बड़े स्तन किसी भी लड़के को पागल कर देने के लिये काफी थे। धीरे धीरे मेरी उससे बात होने लगी।
एक बार वो किसी काम से हमारे घर में आया। उस समय मम्मी बाजार गई हुई थी और मैं टीवी देख रही थी। वो भी मेरे कहने पर बैठ कर टीवी देखने लगा। अब मेरा मन टीवी में बिल्कुल भी नहीं था और सोचने लगी कि इससे अच्छा मौका नहीं मिलेगा चुदवाने का !
मेरा दिल जोर जोर से धड़क रहा था ! उसकी हालत भी मेरे जैसी ही थी ! सुरेश के अन्दर भी खलबली मची हुई थी, उसका लंड खड़ा हो गया था और उसकी पैंट से निकलने के लिये कुलबुला रहा था !
हम दोनों धीरे धीरे पास आने लगे और दिल की धड़कने जोर जोर से चल रही थी हम दोंनो की !
मैने हिम्मत करके उसकी जान्घों पर अपना हाथ रख दिया और धीरे धीरे सरकाते हुए उसके लंड को पकड़ लिया। सुरेश का पूरा शरीर कांप रहा था। हम दोनों ही जल रहे थे और अपनी आग बुझाने के लिये आतुर हो रहे थे। हम बहुत करीब आ गये और गरम सासें आपस में टकराने लगी ! उसने झट से मेरी चूचियों को पकड़ लिया और दबाने लगा। उसके होंठ मेरे होठों का रस चूस रहे थे। मैंने उसकी पैन्ट की चैन खोलकर उसके लंड को अपने हाथों में ले लिया और सहलाने लगी।
मैं आपको कैसे बताऊँ कि क्या हालत हो रही थी मेरी उस समय !
मैं बहुत ही ज्यादा उत्तेजित हो चुकी थी ! लेकिन उसी समय दरवाज़े पर घण्टी बज उठी !
मम्मी बाज़ार से लौट चुकी थी !
मेरी इच्छा अधूरी रह गई !
लेकिन मैने भी ठान लिया कि अब बिना चुदवाये नहीं रह सकती !
एक बार जब पापा किसी काम से बाहर गये हुये थे और घर में सिर्फ मैं और मम्मी ही थे, मैंने सोचा यह अच्छा मौका है अपनी चूत की प्यास शान्त करने का !
मौका देखकर मैंने उसका नम्बर ले लिया !
सोते समय जब मम्मी ने पीने के लिये दूध माँगा तो मैंने उसमें नीन्द की दवा मिला दी ताकि वो सुबह से पहले नहीं उठ सके और सुरेश को सारा कुछ बता दिया !
जब मम्मी सो गई तो मैंने उसे मिसकाल कर दिया !
रात काफी अन्धेरी थी और करीब 11 बज चुके थे, उसके घरवाले भी सो चुके थे।
उसे मैं अपने बेडरूम में ले गई। सिर्फ दो ही बेडरूम थे, एक में मम्मी पापा सोते थे और एक में हम !
मम्मी के बेडरूम का दरवाजा मैंने बाहर से लॉक कर दिया ताकि वो अचानक उठकर आ न जायें !
अब मेरी चुदाई का रास्ता साफ़ था !
हमने भी अपना दरवाजा अन्दर से लॉक कर लिया और एक दूसरे की बाहों में समा गये !
रात के 11 बज रहे थे और काली रात ! दो प्यासे बदन !
यह मौका मैं कैसे चूक सकती थी !
एक दूसरे से उलझ गये हम दोनों ! हम दोनों ही नंगे हो गये। काली रात थी तो कुछ दिखाई नहीं दे रहा था ! वो मेरे वक्ष मसलने लगा और मैं उतेजना के मारे छटपटाने लगी !
वो कह रहा था कि तेरे गदराए हुए जिस्म के बारे में सोचकर मैंने न जाने कितनी बार मुठ मारी है !
वो मेरे ठीक उपर था और बिल्कुल नन्गा !
उसका लण्ड मेरी जान्घों और चूत को छू रहा था, मैं कह नहीं सकती कि कितनी उत्तेजित हो चुकी थी मैं !
वो भी होश में कहाँ था !
उसकी सांसें बहुत जोर जोर से चल रही थी !
मैं उसके लंड को अपने दोनों हाथों से सहलाने लगी और वो अपने काबू से बाहर होने लगा !
काफी देर सहलाने के बाद मैं उसके लंड को अपने मुँह में लेकर चूसने लगी !
बहुत बड़ा था उसका गरम लंड और मेरे मुँह में ठीक से नहीं आ पा रहा था !
बहुत देर तक चूसती रही मैं ! कैसे कहूँ कि कितना मजा आ रहा था मुझे !
वो नीचे खड़ा था और मैं बेड पर लेट कर चूसे जा रही थी !
वो अपने लंड को मेरे मुँह में ही आगे पीछे करने लगा ! बहुत बड़ा होने के कारण मेरे मुँह में पूरा समा नहीं पा रहा था लेकिन वो धक्के मार मार कर मेरे कंठ तक उतार दे रहा था और मैं अकबका जाती थी !
तीन चार मिनट तक वो मेरे मुँह को ही चूत समझकर पेलता रहा !
मुझसे अब नहीं रहा जा रहा था और उसे मैंने बेड पर खींच लिया अपने ऊपर !
और बोली- अब नहीं रुक सकती, चोदना शुरु करो !
मेरे कहते ही सुरेश ने अपना लंड मेरी बुर में धीरे से उतार दिया !
मैं दर्द से छटपटा उठी और कराहने लगी और उसका लंड अपने चूत से निकाल दिया !
बहुत खून भी निकल गया !
सुरेश ने मुझसे पूछा- पहले कभी किसी से भी नहीं चुदवाई?
मैंने कहा- नहीं ! पहली बार मुझे तुम ही चोद रहे हो !
मैंने उससे पूछा- क्या तूने इससे पहले किसी लड़की को चोदा है?
तो उसने कहा- हाँ मैं पहले भी लड़की की चूत का मजा ले चुका हूँ !
उसने मुझे समझाया कि शुरु में दर्द होगा लेकिन बाद में सही हो जायेगा।
सुरेश ने फिर से अपना कड़ा लण्ड मेरी चिकनी चूत में धकेल दिया। मुझे रोना आ गया लेकिन उस दर्द को मैं सह गई। सुरेश ने धीरे धीरे चोदना शुरु किया और मुझे मजा आने लगा। सारा दर्द गायब हो गया और मुझे असीम आनन्द आने लगा।
वो मेरे ऊपर लेट गया और अपने छाती से मेरे वक्ष को रगड़ने लगा। फिर वो मेरे चुचूक को अपने मुँह में ले कर चूसने लगा और हौले हौले अपने दांत मेरी मुलायम चूचियों में गड़ाने लगा।
सुरेश का लंड मेरी बुर में घुसा हुआ था और आगे पीछे हो रहा था। वो अपने चूतड़ उछाल उछाल कर मुझे चोदे जा रहा था ! मैं भी अपने चूतड़ उचका उचका कर चुदवा रही थी !
मैं पूरी तरह से गर्म हो चुकी थी ! कभी मैं उसे नीचे पटक देती तो कभी वो मुझे अपने नीचे ले लेता था !
बुरी तरह से एक दूसरे से उलझे हुए थे हम दोनों !
सुरेश के चोदने की रफ्तार धीरे धीरे तेज होने लगी। उसका बड़ा और कठोर लण्ड मेरी मुलायम चूत को फाड़े जा रहा था। सुरेश अपने लंड को मेरी चूत की पूरी गहराई में उतार उतार कर पेल रहा था और बहुत जोर जोर से धक्का लगा रहा था।
मैं उई उई कर रही थी और अपनी पहली चुदाई का पूरा मजा ले रही थी।
वो भी अनछुई चूत का जमकर मजा उठा रहा था।
वो बीच-बीच में पूछता भी कि मजा आ रहा है?
और मैं कहती- पूछो मत क्या हाल है मेरा ! आह आह ! बस चोदते रहो नॉन स्टॉप !
वो और तेजी से चोदने लगता !
वो कहता- रेखा तेरी कुँवारी चूत का स्वाद मैं बयान नहीं कर सकता !
एकाएक उसके चोदने की रफ्तार बहुत तेज हो गई, पूरा बेड हिलने लगा, मेरी सिसकारियाँ निकलने लगी और उसने मेरा मुँह ढांप दिया।
मैं बेड में धंसी जा रही थी और उसका सारा बोझ उठाये हुए थी !
मैं उतेजना में जोर जोर से चोदो ! उई उई ! फाड़ डालो चूत को ! ओह बहुत मजा आ रहा है ! पेलते रहो ! रुको मत ! और ना जाने क्या क्या बड़बड़ाती रही और वो पेलता रहा मुझे नॉन-स्टॉप !
अन्त में सुरेश ने मुझे जोर से पकड़ लिया और मेरी चूत में झड़ गया !
अभी करीब रात के बारह बज रहे थे और मेरी चूत पूरी तरह से शान्त नहीं हुई थी। वो भी मेरी मस्त मस्त चूत और चूचियों का फिर से मजा उठाना चाहता था और रात भी बहुत बची हुई थी !
वो फिर से तैयार हो गया और एक बार फिर से चोदने लगा !
वो कह रहा था- रेखा, मैं तेरी बड़ी बड़ी रसीली दूधिया चूचियों और चिकनी चूत का स्वाद कभी नहीं भूल पाऊँगा ! मुझसे शादी कर लो डार्लिंग ! और फिर मैं तुम्हें दिन रात चोदता रहूंगा ! हम दोनों ही रात गंवाना नहीं चाहते थे !
उस रात मैं करीब तीन बजे रात तक चुदवाती रही और फिर सुरेश अपने घर चला गया !
मेरी दोनों चूचियाँ फ़ूल कर लाल हो गई थी और मेरी चूत अन्दर से छिल सी गई थी !
यह थी मेरी पहली चुदाई !
इसके बाद तो मैं काफी चुदक्कड़ हो गई थी !
सुरेश ने पता नहीं कितनी बार मेरी चिकनी चूत का आनन्द उठाया और मैंने उसके गरम कठोर लंड का !
मुझे जरुर मेल करें ! Antarvasna
हेल्लो Antarvasna के पाठकगण, मैं आपकी फ़ेवरेट आरज़ू। माफ़ी चाहती हूँ कि कल मैं अपनी कहानी पूरी नहीं कर पाई क्योंकि एक अरजेन्ट कॉल आया था
सो आज मैं अपनी कहानी वहीं से दोबारा शुरू करती हूं जहां से अधूरी छोड़ी थी।
जैसा कि मैं बता चुकी हूं कि मैंने ब्ल्यू फ़िल्म देख कर अब्बू से ज़िद करी कि मुझे भी चार आदमियों से एक साथ चुदाना है. तब अब्बू ने कहा कि अभी तो तेरा भाई और मैं ही हूं, हां ! कल ज़रूर तूझे चार आदमियों से चुदवा दूंगा और उसके बाद अब्बू ने नये तरीके से मेरी बुर चूसी. जो आप पार्ट एक में पढ़ सकते हैं।
अब बात आगे बढ़ाती हूं।
तो अब मैं अब्बू के कन्धे पर अपने दोनों पैर लपेटे उनका लण्ड चूस रही थी और अब्बू मेरी चूत को चूस रहे थे और वही किनारे मेरा भाई अपने लण्ड को हाथ में लेकर खड़ा था. तब अब्बू ने मुझे नीचे लेटा दिया और भाई से कहा- आओ बेटे, आज इस साली की चूत की दोनों बाप बेटे मिलकर धज्जियाँ उड़ा देते हैं. साली ब्ल्यू फ़िल्म देख कर चार लोगों से एक साथ चुदाने की ज़िद कर रही है तो आज तो हम दोनों ही चार के बराबर चुदाई कर देते हैं बाकि कल इस चूत मरानी को चुदाता हूं चार मुस्टण्डों से!
और फ़िर अब्बू मेरी चूत के मु्ंह पर अपने लण्ड को रगड़ने लगे और भाई मेरे सर के पास मेरे मुँह पर आया और अपने लण्ड को मेरे हाथ में देकर चूसने को बोला।
तब मैं भाई के तगड़े लण्ड को हाथ से सहलाने लगी. और अब्बू जी ने अचानक मेरी बुर पर चिकोटी काट ली और मेरी बुर के दाने के साथ छेड़खानी करने लगे. आज वाकई अब्बू के साथ अलग ही तरह का मज़ा मिल रहा था जो पहले कभी नहीं मिला था।
उधर भाई ने अपना लण्ड मेरे मुँह में डाल दिया और मैं मज़े से चूसने लगी. अब्बू जान भी अब मेरी जवान बुर पे अपनी जबान रख कर चाटने लगे. फ़िर मैं भी अपने चूतड़ नीचे से उचकाने लगी अब मेरे मुँह से सिसकियाँ निकलने लगी- आआह्हह्ह आआअह्हह अब्बू जान, बहुत मज़ा आ रहा है चूस डालो मेरी बुर को … पी जाओ साली को! बहुत खाज मचती है इसमें! आआह्हह्ह आज अपनी बेटी की चूत की सारी खाज मिटा दो!
अब अब्बू ने अपनी जबान किसी लण्ड की तरह मेरी चूत के अन्दर धकेल दी और मथनी की तरह मथने लगे मेरी बुर को। अब मुझे दो तरफ़ा मज़ा मिल रहा था; एक तरफ़ भाईजान लण्ड अपनी बहन के मुँह में डाले था और अब्बू मेरी चूत को चूस रहे थे.
तब ही मैं ‘आआह्ह आआअह्ह …’ करते हुए झड़ गई और अब्बू मेरे सारे रस को बड़े मज़े से चाट गये. और फ़िर भाई भी जोरदार धक्के मेरे मुँह में लगाते हुए झड़ गया. उसके बाद थोड़ी देर तक हम लोग सुस्त से पड़े रहे।
करीब 20 मिनट बाद अब्बू ने कहा- अब बेटा, इस माँ की लोड़ी की चुदाई करनी है. वो भी इस तरह कि साली ब्ल्यू फ़िल्म की चुदाई भूल जाये!
और ये कहकर अब्बू ने मेरी चूची को कसकर दाब दिया और भाई मेरी पीठ के पीछे से चिपक गया. अब मैं अब्बू और भाई के बीच में पिसी जा रही थी।
आगे से अब्बू अपने सीने से कसकर मेरी दोनों चूची दाबे हुए मेरे लबों को चूस रहे थे और पीछे से मेरा भाई अपने दोनों हाथ से मेरी बुर की दरार को कुरेद रहा था और उसका 7″ का कड़ा लण्ड मैं अपनी गाण्ड पर साफ़ महसूस कर रही थी।
तब ही भाई ने गप्प से अपनी एक अंगुली मेरी चूत में डाल दी और अब्बू तो अब बकायदा मेरी एक चूची के निप्पल को मुँह में दाब कर अपने होंठ से मसल रहे थे और दूसरी चूची को हाथ से बहुत बेदर्दी से दबा रहे थे।
मैं सिसक रही थी- आआह्हह अब्बू … ज़रा धीरे धीरे दबाइये, बहुत दर्द हो रहा है, रहम कीजिए अपनी बेटी पर!

और फ़िर अब्बू ने कहा- बेटा, अब ज़रा आसन लगाने दे, आज एक साथ दो लण्ड तेरी बुर में डलवाऊँगा.
तब मैंने कहा- अब्बू जी, आपके पास तो एक ही है।
अब्बू ने कहा- अरी मेरी छिनाल बिटिया रानी! ज़रा सबर तो कर और पीछे देख! तेरे भाई का लण्ड भी तो है!
और ये कहकर वो बेड पर लेट गये उनका लण्ड किसी सांप की तरह फ़ुफ़कार रहा था।
इस उम्र में भी अब्बू का लण्ड बहुत मोटा और लम्बा था मेरा दिल अन्दर से डर रहा था कि आज मेरी नन्ही सी चूत का क्या होगा?
तब अब्बू ने कहा- मेरी प्यारी बेटी, तू अपनी चूत को मेरे लण्ड पे रख कर बैठ जा!
और मैं अपने दोनों पैर छितरा कर उनके लण्ड पर बैठ गई और फ़िर उनका लण्ड थोड़ा सा मेरी चूत में घुस गया।
तब अब्बू ने कहा- अब तू मेरी तरफ़ झुक जा!
और जैसे ही उनका पूरा लण्ड मेरी चूत में घुस गया और मैं जब झुकी तो अब्बू ने अपने दोनों हाथ से मुझे अपनी तरफ़ खींच लिया और मेरे होंठ को चूसने लगे.
अब अब्बू ने पीछे से भाई को इशारा किया कि तू भी अपना लण्ड इसकी चूत में घुसेड़ दे.
पर भाई इतना समझदार नहीं था, वो अपने लण्ड को मेरी गाण्ड के छेद में घुसेड़ने लगा।
तब मैंने कहा- अब्बू … भाई तो गाण्ड में मारने जा रहा है.
भाई ने कहा- साले बहनचोद … मैं कह रहा हूं कि बहन की चूत में डाल … और तू है कि बहन की गाण्ड के पीछे पड़ा है?
तब भाई ने कहा- इसमें तो आप डाले हुए हैं, मैं कहां से डालूं?
अब्बू ने कहा- साले आजकल के लड़के तो बस चूत मारना और गाण्ड मारना जानते हैं, साले बस लड़की की टांग उठाई और लगे चोदने! अरे साले हरामी, जिसमें मैं डाले हूं, उसी में तू भी अपना लण्ड डाल।
तब अब्बू ने मुझसे कहा- बेटी, तू ज़रा अपनी बुर और ऊपर कर दे ताकि इस बहनचोद को साफ़ साफ़ नज़र आये तेरी चूत!
और फ़िर मैंने अपनी चूत और ऊपर उठा दी।
अब भाई अपने लण्ड को मेरी चूत पे रख कर घिसने लगा. पर मेरी समझ में खुद भी नहीं आ रहा था कि जब अब्बू का लण्ड मेरी चूत में घुसा है, तब भाई का लण्ड कैसे जायेगा मेरी चूत में? हां अगर अंगुली पेलनी होती तो वो जा सकती थी.
पर मैं खमोश थी.
आखिर भाई ने बहुत ज़ोर देकर अपने लण्ड की टोपी मेरी चूत में डाल ही दी और तब मुझे बहुत दर्द हुआ- आआअह्हह ऊऊओह्हह अम्मीईई … अब्बू बहुत दर्द हो रहा है।
तब अब्बू ने कहा- क्या भाई का पूरा लण्ड चला गया अन्दर?
मैंने कहा- नहीं, अभी तो सिर्फ टोपी ही गई है.
तब भाई ने एक धक्का और मारा और अब भाई का करीब चार इन्च लण्ड उसकी बहन की चूत के अन्दर घुस गया था।
मैं चीख रही थी- आआअह्हह अब्बूऊऊ जीईई पलज़्ज़ रहम कीजिये, मैं मर जाऊंगी ईई आआह्ह्ह!
तब अब्बू मेरी चूची को दबाते हुए बोले- बेटी, अभी तुझे बहुत मज़ा आयेगा, जब दो लोगों का लण्ड एक साथ बुर में जाता है तब बहुत मज़ा आता है क्यूंकि मैंने तेरी अम्मी को भी इस तरह से तेरे चचा के साथ चोद चुका हूं!
और तब ही मेरे भाई ने एक और धक्का मारा और मेरा बेलेन्स बिगड़ गया और मैं अब्बू के सीने पर गिर गई और मेरी आंख से आंसू निकलने लगे और मेरी सिसकियाँ बंध गई।
अब भाई और अब्बू का पूरा पूरा लण्ड मेरी चूत में था और एक दूसरे के लण्ड से रगड़ खा रहा था और मेरी चूत की दरार फ़ैलती जा रही थी. अब मुझे भी दर्द की जगह मज़ा आने लगा था और मैं धीरे धीरे उन दोनों का साथ देने लगी थी- आआह्हह आआअह्ह ह्हह … अब्बू … भाई … बहुत अच्छा लग रहा है. और अन्दर कीजिये … आअह्ह ह्हह ऊऊफ़्फ़ … कसम से बहुत मज़ा आ रहा है!
और अब दोनों बहुत ही जोरदार धक्के लगा रहे थे साथ साथ मेरी दोनों चूची को भी मसल रहे थे. तभी मेरे बाप या भाई में से एक का लण्ड मेरी चूत में झड़ा. पर मैं समझ नहीं पाई कि किसका पानी मेरी चूत में गिरा है!
फ़िर कुछ देर बाद मैंने अपनी चूत में एक बार फ़िर से पानी की फ़ुहार महसूस की और फ़िर दोनों के लण्ड ढीले हो गये.
पर मैं अभी झड़ी नहीं थी, तब मैंने अब्बू से कहा- साला बेटी चोद कर अपना पानी तो आप लोगों ने निकाल लिया पर मेरा तो अभी पानी भी नहीं निकला. साले अगर जल्दी ही मेरी प्यास नहीं बुझाई तो तुम दोनों का लण्ड काट लूंगी।
तब अब्बू ने मुझे झट से अपने लण्ड पर बैठा लिया और मेरी चूची को चूसते हुए बोले- मेरी बिटिया रानी, ऐसे बात ना करो, आज देखो मैंने तुमको कितना मज़ा दिया है और अभी तुम्हारा पानी भी निकाल देता हूं.
और फ़िर मुझसे कहा- तुम ऐसा करो कि भाई से एक बार गाण्ड मरवा लो, तुम्हारा पानी भी निकल जायेगा।
तब मैंने कहा- अबे जाहिल … कहीं गाण्ड मरवाने से भी पानी निकलता है बेटीचोद? मेरी बुर में खाज है और तू गाण्ड मरवाने की बात कर रहा है।
तब अब्बू ने कहा- बेटी, मैं तेरी मारुंगा, भाई गाण्ड मारेगा.
और उसके बाद भाई ने मेरी जम कर गाण्ड मारी और आगे से अब्बू मेरी चूत में अपना लण्ड पेले जा रहे थे, अब मुझे दो तरफ़ से मज़ा मिल रहा था।
एक साथ बुर और गाण्ड मरवाने का थोड़ी देर बाद ही मैं झड़ गई और मेरी चूत से फ़स फ़स की अवाज़ आने लगी।
तो दोस्तो, कैसे लगी मेरी Antarvasna कहानी?
दोस्तो, मैं आदि, मेरी उम्र २० साल है Antarvasna और मैं दिल्ली का रहने वाला हूँ। मेरा लण्ड छः इंच का है, मैं 6’1″ लम्बा हूँ।
बात आज से लगभग एक साल पहले की है, मेरी मम्मी की तबीयत ख़राब होने के कारण हम लोगों ने एक आंटी को खाना पकाने के लिए रखा। वैसे वो काम वाली नहीं थी पर उनके घर की खराब हालत की वजह से वो हमारे घर काम करने आई।
वो बिलकुल गोरी चिट्टी थी, बड़े-बड़े मम्मे और मोटी गांड एक दम कातिल बदन था उनका। उनके घर में आते ही मुझे मस्ती चढ़ जाती थी। मैं उन दिनों छुट्टियों की वजह से घर पर ही रहता था और मेरे घर वाले सुबह ही काम पर चले जाते थे, मम्मी दो बजे से पहले नहीं आती थी।
तो अब बात पर आते हैं असली बात पर !
आंटी मुझे वासना की निगाह से देखती है, यह मुझे पता नहीं था। लेकिन वो दिन का खाना बनाने आधा घंटे पहले ही आ जाती थी। तो मुझे कुछ कुछ महसूस हुआ क्योंकि वो मुझे कुछ-कुछ काम बताती रहती थी और उसी बहाने मैं उसे छू लिया करता था। उसे छूते ही मेरे बदन में करंट सा दौड़ने लगता था। मन करता था उसे वहीं दबोच लूँ पर हिम्मत कभी नहीं होती थी।
धीरे धीरे हमारी दोस्ती बढ़ी और मैं उन्हें किसी न किसी बहाने से छू लिया करता था और वो भी कभी ऐतराज़ नहीं करती थी। आग दोनों तरफ बराबर लगी थी। मेरा लौड़ा तो उसे देखते ही खड़ा हो जाता था, वो भी उसे देखती रहती और नीचे झुक कर अपनी चूचियों के दर्शन कराती थी।
एक दिन अंजू ने मुझसे कहा- आदि, तू मुझे उठा सकता है क्या ?
मैंने कहा- आराम से।
वो बोली- नहीं उठा सकता !
मैंने कहा- तो आओ, उठा कर दिखता हूँ।
और वो घड़ी आ गई जिसका मुझे और अंजू दोनों को इंतज़ार था। मेरा लौड़ा तो पहले से ही खड़ा था। मैंने अंजू को उठाया, मेरा एक हाथ उसकी चूची के ऊपर था और उसके चेहरा बिल्कुल मेरे करीब था। मैंने हिम्मत करके अपने होंठ उसके होंठों पर रख दिए, उसने भी मेरा साथ दिया।
फिर मैंने उसे बेड पर लिटा दिया। मैं उसका कुरता उतारने लगा तो बोली- अपनी अंकल की जगह पर मत जा !
मैंने कहा- सब जगह अब मेरी है !
और मैंने जोर से उसके होंठ चूम लिये। वो गर्म हो गई थी। मैंने उसका कुरता उतार दिया और सलवार भी। अब वो किसी परी से कम नहीं लग रही थी। मैं उसके ऊपर लेट गया और उसकी चूचियाँ मसलने लगा। वो आआ आआअहहहहह ऊ ऊऊ उहह्ह्ह्हह्ह की आवाजें निकालने लगी। उन सिसकारियों ने मुझे और ज्यादा उत्तेजित कर दिया और मैं उसकी चूचियाँ बहुत बुरी तरह चूसने लगा और चूसते-चूसते मैंने उसकी पैंटी उतार दी।
अब वो पूरी नंगी थी। फिर उसने पहले मेरी शर्ट उतारी और मुझे चूमने लगी। फिर उसने मेरी पैंट उतारकर मेरा लौड़ा चूसने लगी। क्या लंड चूसा उसने, वो मज़ा आ गया।
मैंने भी उसके मुँह में ही धक्के मारने शुरू कर दिये। करीब 15 मिनट बाद वो मेरा सारा माल पी गई।
फिर वो मेरे ऊपर चढ़ गई और मुझे पागलों की तरह चूमने लगी। मैंने उसके बाल पकड़ कर उसके होंठ दुबारा चूमे और मैं क्या देखता हूँ- मेरा लण्ड दुबारा खड़ा हो गया है।
मैंने उसकी टाँगें फैलाई और एक झटके में उसकी चूत में घुसेड़ दिया। वो तड़प उठी और मुझे अपनी बाहों में जकड़ लिया। मैं पूरे जोश में था और सच बताऊँ दोस्तो, मुझसे कण्ट्रोल भी नहीं हो रहा था। मैं बहुत तगड़े-तगड़े धक्के मारने लगा, वो बोली- धीरे धीरे मार ! फाड़नी है क्या मेरी चूत तुझे?
मैंने कहा- आंटी, आज मत रोको ! आज बस भोंसडा बना दूंगा तेरी चूत का।
जैसे-जैसे मैंने जोर से धक्के मारे, वो बोलती- आआ आ आ आअह्हह्ह आदि, धीरे ! मर जाउंगी ! आह आ…..आआ……हय मर गई मैं ! आ……अह।
थोड़ी देर में वो अपनी गांड उठा-उठा कर चुदने लगी। वो एक बार झड़ चुकी थी। मेरा माल निकलने वाला था, मैंने धक्के और तेज़ कर दिए। पूरे कमरे में कच कच और सिसकारियों की आवाजें गूंजने लगी।
वो बोली- आदि, आ आअह्ह्ह ह्ह्ह् ! और जोर से फाड़ दे आह आ अह आह आअह आह आह आह ऊह।
मेरा भी निकलने वाला था, हम दोनों पसीने पसीने हो गये थे और तभी आंटी फ़िर झड़ गई और उसके मुँह से संतुष्टि भरी आवाज़ निकली अअआआ………आआह्ह्ह ह्ह्ह
तभी मैं भी झड़ गया।
थोड़ी देर तो हम ऐसे ही लेटे रहे और फिर हम अलग हो गए।
सच बताऊं दोस्तो, उस दिन को कभी नहीं भूल सकता क्योंकि वो मेरी पहली चुदाई थी।
मेरी और कहानियों के लिए थोड़ा इंतज़ार कीजिये। मेरी कहानी आपको कैसी लगी ज़रुर बताइयेगा। Antarvasna
बाबू लाल जी बीकानेर से १२० किलो Hindi Sex Stories मीटर दूर बिहार के राजपुर गाँव के हाई स्कूल में हेडमास्टर थे, पढाने में बड़े तेज थे और उन्हें गोल्ड मैडल मिला था। वो कहीं भी और अच्छी नौकरी कर सकते थे, लेकिन उन्हें अपने गाँव से बहुत प्यार था, और वहीं वो कुछ करना चाहते थे। २२ साल की उमर में उनकी शादी १७ साल की एक बड़ी सुंदर लड़की कमला से हुई।
उन दोनों की जोड़ी बड़ी अच्छी लगी सबको। बाबू लाल जी कद के थोड़े छोटे थे- ५ फीट ३ इंच के, लेकिन कमला शादी के समय उनसे १ इंच छोटी थी। कमला का बदन शादी के समय तक भरा नहीं था। शादी के बाद भी उसका कद बढ़ता गया और साल भर में अपने बेटे राहुल को जन्म देने के समय तक वो करीब ५ फीट ४ इंच की हो गई और उसका बदन भी गदरा गया। उनकी दूसरी संतान दीपा राहुल के ८ साल बाद पैदा हुई, लेकिन उसके जन्म के समय कमला को शारीरिक समस्या हो गई और उसका ऑपरेशन करना पड़ा, जिसकी वजह से वो फिर कभी माँ नहीं बन सकती थी।
तो फिलहाल अभी बाबू लाल जी ४४ साल के थे और कमला ३ महीने में ४० की होने वाली थी। बाबू लाल जी जैसे तेज थे, उनका बेटा राहुल भी उतना ही तेज निकला और २१ साल की उमर मे आई आई टी कानपुर में कंप्यूटर साइंस के आखिरी साल में था उनकी १३ साल की बेटी दीपा बड़ी सुंदर मासूम कली थी।
हर इन्सान की कोई न कोई कमजोरी होती है। बाबू लाल जी को हाई स्कूल में ही बीड़ी सिगेरेट की लत लग गई थी, जो कभी नहीं गई। कॉलेज में पीते रहे क्योंकि उससे वो रात भर जग कर पढ़ाई करने में मदद मिलती थी। खैर ! ४ साल पहले बाबू लाल जी को काफी तेज़ दमा शुरू हुआ। दमे ने उन्हें अशक्त कर दिया, लेकिन कम से कम जान लेवा नहीं था। लेकिन अभी ३ महीने पहले डॉक्टर ने बताया कि उन्हें टी बी भी हो गई है और उन्हें किसी सैनेटोरियम में दाखिल कर देना चाहिए। ऐसी स्थिति में घर में सभी आस लगाये बैठे थे कि जब राहुल को नौकरी मिलेगी तो सब ठीक हो जाएगा।
बाबू लाल जी ने अपने ख़राब सेहत की वजह से स्कूल जाना भी बंद कर दिया था, लेकिन सरकार ने कुछ मदद की जिससे घर का काम काज चलता था। पति, पत्नी और बेटी, तीनों बाबू लाल जी के घर के पहले मंजिल पर रहते थे और ऊपर के मंजिल पर सिर्फ़ १ कमरा था जो स्टोर के जैसे इस्तेमाल किया जाता था। लेकिन पैसे की तंगी की वजह से बाबू लाल जी उसे अब खाली कर के किराये पर लगाने की सोच रहे थे।
जब राहुल आखिरी परीक्षा देकर आया तो उसने ऊपर के कमरे को खाली किया और जब तक वो किराये पे नहीं लगता तब तक उसे अपना कमरा बना लिया। रिजल्ट निकलने से पहले ही राहुल को कई नौकरियों के प्रस्ताव आए थे, जिसमे कई बहु-राष्ट्रीय कम्पनियाँ और अच्छी कम्पनियाँ थी। राहुल ने एक बहु-राष्ट्रीय कम्पनी की नौकरी स्वीकार कर ली थी, क्योंकि उसे यहाँ २ हफ्ते की ट्रेनिंग के बाद उस कंपनी के ऑफिस में काम करने का मौका मिलेगा। कंपनी ने राहुल को सिर्फ़ २ हफ्ते का समय दिया काम पर आने के लिए। राहुल के लिए भी अच्छा था कि जल्दी नौकरी मिलने से जल्दी पैसा भी आना शुरू हो जाएगा।
पहली सुबह राहुल की नींद पानी के हैन्ड-पम्प की आवाज़ से खुली। उसने खिड़की से नीचे जो देखा, वो दृष्य देखकर अवाक रह गया।
आंगन के एक कोने में हैन्ड-पम्प एक हौज़ में था और उसके तीन ओर दीवार डाल कर एक बाथरूम जैसा बनाया हुआ था और बाथरूम के दरवाज़े पर एक कपड़े का पर्दा था। लेकिन बाथरूम के ऊपर कोई छत नहीं थी।
राहुल ने देखा कि उसकी माँ बिल्कुल मादर जात नंगी पानी का हैण्ड पम्प चला रही थी। गेहुआं गदराया बदन और उसके उठे हुए मांसल चूतड़ हैण्ड-पम्प चलने से थिरक रहे थे और उसकी बड़ी बड़ी आजाद चूचियां भी पेंग मार रही थी। राहुल यह दृश्य एक टक देखता ही रह गया, जैसे उसकी आँखें पथरा गई हों।
इसके पहले राहुल ने कई बार माँ को नहाने के बाद देखा था लेकिन कमला हमेशा पेटीकोट को अपनी चूची के ऊपर बाँध कर नहाने जाती थी या फिर नहा के निकलती थी लेकिन आज की तरह बिल्कुल नंगी कभी नहीं देखा था।
कमला को शायद इस बात की ख़बर नहीं थी कि ऊपर के कमरे में राहुल है और वहां से सब कुछ दिख सकता है। हौज में पानी भरने के बाद वो मग से पानी लेकर नहाने लगी। नहाना क्या, ज्यादा पानी वो अपनी खड़ी चूचियों की घुंडी पर डालती थी। आज कल उसका सारा बदन जैसे हमेशा जलता रहता था। उसने लेडी डॉक्टर को बताया, तो लेडी डॉक्टर ने कहा कि इस उम्र में ऐसा ही होता है, इसे हॉट फ्लैश कहते हैं।
लेडी डॉक्टर ने ही बताया कि जब ज्यादा जलन हो तो ठंडे पानी से नहा लो। लेडी डॉक्टर को भी बाबू लाल जी के सेहत के बारे में मालूम था, इसलिए उसने हिचकिचाते हुए कमला को बताया कि जब ज्यादा गर्मी लगे तो ऊँगली से अपने को शांत कर लिया करो। कमला अब हर रोज तीन बार नहाने लगी और लेडी डॉक्टर की सलाह के मुताबिक जब भी वो नहाती, वो ऊँगली से अपने को झाड़ लेती। उसे कुछ रहत तो मिलती थी, लेकिन कहाँ ऊँगली और कहाँ एक मुस्टंड लंड। कोई तुलना नहीं।
खैर, सारी दुनिया से बेख़बर, ठंडे पानी से नहाने के बाद कमला ने अपनी ऊँगली से अपनी चूत पर साबुन लगा के दाने को मसलना शुरू किया। उसकी आँखें बंद हो गई और वो अपने होंठ काटने लगी। यह देख कर राहुल का लण्ड भी खड़ा हो गया, और वो हलके हलके मूठ मारने लगा। जिस एंगल से राहुल देख रहा था, माँ की काले काले घुंघराले बाल से ढकी चूत देखने में कोई मुश्किल नहीं हुई। ५-७ मिनट के बाद उसकी माँ के बदन में कम्पन हुई, और वो शांत हो गई। राहुल समझ गया कि उसकी माँ झड़ गई, और यह सब देख कर मूठ मारते हुए राहुल का भी निकल गया।
जब तक राहुल वहां रहा, २ हफ्ते उसने दिन में तीन बार यही दृश्य देखा और मूठ मारा। वास्तव में वो दिन में भी इंतज़ार में रहता था कि उसकी माँ कब नहाने जायेगी। जब भी उसकी माँ घर में चलती, वो उसके चूतड़ और चूचियों कि थिरकन देखता ही रह जाता। कई बार तो राहुल ने माँ को सुबह मैं जबरदस्ती चोदने की भी ठानी। एक बार तो वो बाथरूम के पास जा कर लौट आया, यह सोच कर कि उसे इतना गरम करूँगा कि ख़ुद चुदाने आ जाएगी तब उसे कोई ग्लानि नहीं होगी।
२ हफ्ते के बाद राहुल अपनी नौकरी पे चला गया, और फिर वहां से अमेरिका। लेकिन वह मन से माँ का नंगा रूप कभी नहीं भूल पाया। राहुल को अपनी माँ की इस दशा पर तरस भी आता था, कि ऐसी मस्त औरत को ऐसे कम उमर में पूरी चुदाई का सुख नहीं मिल पाया।
उसने जब अमेरिका से पैसे भेजने शुरू किए तो घर की हालत भी ठीक होने लगी। राहुल ने माँ को एक सेल फ़ोन लेने को भी कहा, और वो अपनी माँ से हर हफ्ते बात करता था। फिर एक दिन उसने एक योजना बनाई और माँ से राय मांगी। योजना यह थी कि राहुल ६ महीने के बाद भारत आकर पिताजी को सैनेटोरियम में भरती करा देगा, और दीपा को कुरसेओंग के पब्लिक स्कूल में, और माँ को अमेरिका ले आएगा जिससे उसके खाने पीने का हिसाब भी ठीक हो जाएगा।
माँ क्या करती, घर का सब कुछ तो राहुल की वजह से ही चल रहा था, लेकिन वो बोली कि इस सब में तो बहुत खर्च होगा। राहुल ने कहा कि माँ मुझे जितना मिलता है उसमें कोई मुश्किल नहीं होगी। माँ ने पूछा, घर का क्या करेंगे ? राहुल ने कहा, अभी किसी को किराये पर दे देंगे, और जब कोई खरीद डर मिल जाए तो बेच देंगे। बाबू लाल जी का सारा परिवार राहुल की सलाह से बहुत खुश हुआ। बेटा हो तो ऐसा – श्रवण कुमार के जैसा।
६ महीने के बाद राहुल भारत आया, और योजना के मुताबिक पिता जी को सैनेटोरियम में और दीपा को बोर्डिंग स्कूल में दाखिल करवा दिया। इत्तेफाक से स्कूल के नए हेडमास्टर ने उनका घर किराये पर ले लिया तो वो भी समस्या हल हो गई। यह सब काम करने के बाद राहुल ट्रेन से माँ को लेकर दिल्ली चला। कार्यक्रम ऐसा था कि दिल्ली में वीसा के लिए १ हफ्ता लगेगा, और तब तक वो माँ को दिल्ली भी घुमा देगा। बेचारी कमला दिल्ली तो क्या, सिर्फ़ १ बार बीकानेर गई थी जब बाबू लाल जी को राज्य के सबसे अच्छे हेडमास्टर का इनाम मिला था। कमला थोड़ी घबरा रही थी कि वो जब बीकानेर और दिल्ली से डरती है तो अमेरिका में कैसे काम चलाएगी। राहुल ने उसे समझाया कि माँ तुम बड़ी तेज हो, सब कर लोगी, और मैं जो हूँ।
राहुल ने ट्रेन में वातानुकूलित श्रेणी में आरक्षण करवाया था, और उसकी माँ ट्रेन की सफाई देख कर अवाक् हो गई। राहुल और उसकी माँ को दोनों नीचे के बर्थ मिले थे, और ऊपर सिर्फ़ एक आदमी था, और चौथा बर्थ अलाहाबाद के कोटे में था। जब वो तीसरा आदमी शाम को बाथरूम गया तो राहुल ने माँ को एक नाईट गाऊन दिया, और बोला कि ये सोने के लिए है, पहन लो। माँ को समझ नहीं आया कि उसे पहने कैसे, तो राहुल ने कहा कि वो बाहर जाएगा तब सारे कपड़े उतार कर सिर्फ़ नाईट गाऊन इस तरह पहन लो, राहुल ने माँ को उसकी साड़ी ब्लाउज के ऊपर से ही नाईट गाऊन पहना कर दिखाया।
फिर राहुल बाहर चला गया, और २ मिनट के बाद आया तो देखा कि उसकी माँ राहुल की ओर पीठ कर के खड़ी थी। माँ ने कहा कि इसमे तो सामने से बिल्कुल खुला है, तो राहुल ने बताया कि इसमें बेल्ट है ना बांधने के लिए। राहुल ने बेल्ट के दोनों छोर पकड़ के पीछे से ही बेल्ट को बांधा और माँ को घूम कर सामने से दिखाने को कहा।
राहुल ने जान बूझ कर ही ऐसा नाईट गाऊन ख़रीदा था जिसका गला काफ़ी नीचे तक कटा था, और वह घुटने से ४ इंच ऊपर तक ही था। कमला ऐसे कपड़े पहन कर बड़े पशोपेश में थी, और राहुल ने यह भाँपते हुए कहा कि माँ तुम अमेरिका में लोगों को जैसा कपड़ा पहनते देखोगी उसके मुकाबले ये कुछ नहीं है। घबराओ नहीं, तुम इन सबकी आदि हो जाओगी। अब सो जाओ। कमला ने एक हाथ से गाऊन से अपनी चूची को ढकने की कोशिश की और दूसरे से जाँघों के पास के खुले हुए गाऊन को साथ कर के पकड़ा, और कम्बल में घुस कर सो गई। राहुल भी अपने बर्थ पर सो गया।
सुबह ट्रेन दिल्ली पहुँची और राहुल और कमला एक होटल पहुंचे जहाँ राहुल ने पहले से आरक्षण करवा रखा था, लेकिन उसने १ हफ्ते का सिर्फ़ १ बेड का आरक्षण करवाया था कि तब उन दोनों को साथ सोने और करीब आने का मौका भी मिलेगा।
होटल देख कर माँ की आँखें चौंधिया गई। लेकिन सबसे पहले वो नहाना चाहती थी, सिर्फ़ नहाना ही नहीं, अपने जलते बदन को ठंडा करना चाहती थी। गाँव से चले उसे पूरा १ दिन हो गया था और उसके बदन में जैसे आग लगी थी। राहुल को सब मालूम था, इसलिए उसने अपना कैमरा फ़ोन बाथरूम के सिंक के नीचे लगा कर चालू कर दिया और माँ को नहाने जाने को बोला, उसने फव्वारे को चला के दिखाया। बाथरूम का दरवाजा बंद करते ही कमला ने फव्वारे से ठंडा पानी चला कर पूरे बदन पर साबुन लगाया और चूत मल कर अपने को झाड़ा।
इसके बाद राहुल नहाने गया और कैमरा फ़ोन की रिकॉर्डिंग देख कर मन ही मन मुस्कुराया – क्या मस्त चुदासी चीज़ है ?
राहुल ने माँ को कहा कि सबसे पहले वो उसे एक सैलून ले जा कर उसकी ऐसी काया पलट करवा देगा कि वो ख़ुद को पहचान नहीं पायेगी। और उसके बाद उसके लिए कुछ कपड़े भी खरीदेगा क्योंकि वो कपड़े यहाँ सस्ते मिलेंगे। उसने एक माँ का साइज़ नापने के लिए एक टेप निकला और माँ को सामने खड़ी होने को बोला और नापने लगा। चूतड़-४१, सीना-४०, कमर-३४। नापने के बहाने उसने कई बार माँ की चूची, चूतड़ और नंगी कमर को भी हलके से छू लिया।
इसके बाद उसने माँ को टैक्सी में सैलून ले जा कर उसके बाल ठीक कराये, और फेशियल करवा के उसका चेहरा और चमकने लगा। वापस टैक्सी में बैठते ही राहुल ने माँ को बाँहों में भर कर उसके गाल चूम लिए और बोला- माँ तू तो क्या मस्त सुंदर लग रही है !
कमला को राहुल का इस तरह करना अच्छा ही लगा, लेकिन उसने राहुल को इशारा किया कि टैक्सी वाला शीशे में देख रहा है। फ़िर टैक्सी से वो माँ को एक मॉल ले गया और माँ के लिए १ सलवार-कमीज़, १ स्कर्ट -ब्लाउज, और २ जींस-टॉप माँ के आकार के ख़रीदे। इसके बाद उसने माँ के लिए २ ऊंची ऐड़ी के सैंडल, और कई नकली सोने के माडर्न दिखने वाले कानों की बालियाँ, गले के हार और चूड़ियाँ आदि बहुत कुछ खरीदा और दोनों लौट कर होटल आ गए।
अपने ऊपर इतना खर्च करते देख कर कमला अपने बेटे के ऐहसान में डूबती गई। टैक्सी में एक बार माँ ने राहुल को कहा भी कि उस पर इतना खर्च करने की क्या जरूरत है तो राहुल ने माँ की जांघ पर हाथ मार कर कहा- माँ तुम्हारे लिए तो कुछ भी कर सकता हूँ मैं !
राहुल हमेशा माँ को छूने या पकड़ने का मौका कभी नहीं चूकता था, गाड़ी से उतरते, या किसी सीढ़ी पर चढ़ते, उतरते वो कभी माँ का हाथ तो कभी बांह पकड़ लेता था। कभी उसकी कमर पर हाथ रख देता था तो कभी हल्के से माँ के चूतड़ पर इस तरह से छू लेता था जैसे अनजाने में हाथ लग गया हो।
होटल आ कर उसने माँ को कपड़े पहन कर देखने के लिए कहा। शुरूआत हुई सलवार-कुर्ते से, और फ़िर स्कर्ट-ब्लाऊज़। दोनों बिल्कुल ठीक थे। जब कमला जींस पहन कर आई तो उसकी सेक्सी फ़िटिन्ग देख कर राहुल के लण्ड में हरकत होने लगी, लेकिन कमला ने कहा कि वो बड़ा कसा लग रहा है उसे।
राहुल ने समझाया कि माँ यह जींस ऐसी ही होती है कि उभार ठीक से दिख सकें, और तुम्हारे तो हैं भी इतने सुन्दर !
यह कहते हुए उसने कमला के चूतड़ों पर हाथ रख कर उसकी गोलाइयों को एक बार सहला दिया और कहा कि पहनने लगोगी तो अच्छा लगने लगेगा। राहुल के इस तरह करने पर कमला थोड़ी चौंकी, लेकिन जब तक वो कुछ सोचती, राहुल ने उसकी कमर पकड़ कर अपने सामने कर उसकी चूत की ओर नज़र डाली और कहा- वाह ! क्या फ़िट बैठी है यहाँ सामने भी ! राहुल ने जानबूझ कर माँ के लिए पैंटी नहीं खरीदी और कमला ने कभी पैंटी कभी पहनी भी नहीं थी तो उसे यह मालूम नहीं था कि पैंटी पहनना जरूरी है।
हाँ ! मॉल में उसने अच्छी अच्छी ब्रा देखी थी लेकिन शर्म के मारे वो राहुल से ब्रा के लिए कह नहीं पाई।
कमला ने राहुल से पूछा- आज कितना खर्चा हुआ?
तो राहुल ने जब सारा खर्च बताया तो कमला ने कहा कि टैक्सी की जगह हम लोग बस में नहीं ज सकते क्या?
राहुल ने कहा कि हाँ, पैसे तो बचेंगे, लेकिन भीड़ में थोड़ी परेशानी होगी तुम्हें।
कमला ने कहा कि जैसे इतने सारे लोग बस लेते हैं, हम भी ले लेंगे।
इसके बाद कमला और राहुल सोने की तैयारी करने लगे। कमला ने अपना नाईट-गाऊन पहना और राहुल पायज़ामा-बनियान में।
लेकिन आज़ कमला नाईट-गाऊन पहनने में नहीं शरमा रही थी जबकि उसकी चूचियों उभार और उसकी नंगी जांघें राहुल को दिख रही थी। यही नहीं, जब वो बाथरूम से नाईट-गाऊन पहन कर निकली तो पीछे से रोशनी होने की वज़ह से उसका शरीर राहुल को करीब करीब नंगा ही लग रहा था। रात भर माँ बेटे होटल में साथ सोए और राहुल ने माँ के ऊपर कई बार हाथ भी रखा, लेकिन इसके अलावा और कुछ नहीं हुआ।
दूसरे दिन राहुल और कमला बस से दिल्ली घूमने निकले। कमला ने सलवार-कुर्ता पहना था। पहली बार ही बस में चढ़ते हुए वो समझ गई कि राहुल क्यों बोल रहा था कि भीड़ भाड़ में मुश्किल होती है बस में। वो चारों ओर से मर्दों से घिरी हुई थी। कई लोगों के हाथ उसने अपने स्तनों और चूतड़ों पर महसूस किए। कुछ लोगों ने कमला के चूतड़ों की दरार में अपना लण्ड रगड़ा। कई तो सिर्फ़ एक दो बार छू या दबा कर वहाँ से खिसक जाते थे, लेकिन कई तो ऐसे निडर थे कि हाथ हटाने का नाम नहीं लेते थे।
एक ने जब ऐसा किया तो कमला पूरा घूम गई, लेकिन तब उसने कमला की जांघों के बीच उसकी चूत पर ही हाथ रख दिया। कमला थोड़ा घबरा गई और उसे समझ नहीं आ रहा था कि अब क्या करे।
राहुल पास ही खड़ायह सब देख रहा था। उसने एक सीट के पास थोड़ी जगह बनाई और कमला को कहा- आप यहाँ बगल में आ जाओ। कमला को अब थोड़ी राहत मिली। कम से कम वो चारों ओर से लोगों से घिरी नहीं थी। उसने एक हाथ से ऊपर का डण्डा पकड़ा और दूसरे हाथ से सीट को। अब भी उसके पीछे खड़े और आते जाते लोगों का हाथ वो कभी कभी अपने चूतड़ों पर महसूस कर रही थी। अब उसे डर या इतना बुरा नहीं लग रहा था।
लेकिन तभी उसे लगा कि सामने से कोई हाथ बड़े हल्के से सलवार के ऊपर से उसकी जांघ सहला रहा है। उसे विश्वास नहीं हुआ क्योंकि वो हाथ किनारे वाली सीट पर बैठे एक लड़के का था।
हे भगवान ! आजकल इस उम्र के लड़के भी ऐसे बेधड़क हो गए हैं ! कमला ने सोचा कि देखें यह लड़का किस हद तक बढ़ता है और वो उसकी उंगलियों की हरकत को अपनी जांघों पर महसूस कर रही थी लेकिन बस की खिड़की के बाहर ऐसे देख रही थी जैसे बिल्कुल बेखबर हो। उस लड़के की उँगलियाँ कमला की जाँघों पर सलवार के ऊपर धीरे धीरे ऊपर रेंगने लगी और कमला को ऐसे लगा जैसे उसकी दोनों जाँघों से उसकी चूत तक कोई करंट मार रहा हो और उसकी चूत गीली होने लगी। उस हिम्मती लड़के ने आख़िर कमला की चूत पर अपनी हथेली रख दी और धीरे धीरे मसलने लगा। कमला ने अपनी टांगों को और थोड़ा खोल लिया जिससे लड़के को अपना काम करने में आसानी हो। उसका सर हल्का होने लगा, वो झड़ना चाहती थी, इसी बस में लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
बस रुकी और वो लड़का सीट से उठा, उसका स्टाप आ गया था। लेकिन जाते हुए उसने कमला से कहा- आंटी ! मेरा नाम अनिल है, कल सलवार की सिलाई खोल कर आना तो और मजा दूँगा !
कमला को अब तक लग नहीं रहा था कि वो इस दुनिया में थी, लेकिन लड़के की ऐसी बात सुन कर एकाएक चौंक कर फिर वापिस इस दुनिया में आ गई और उस लड़के की खाली की हुई सीट पर बैठ गई। कमला को ये नहीं मालूम था कि राहुल बस में दूर था लेकिन वो कमला के साथ की सारी हरकतें गौर से देख रहा था।
थोड़ी देर के बाद राहुल उसके पास आया और बोला कि उनका भी स्टाप आ गया है। वो दोनों होटल के पास बस से उतर गए। बस में इतने लोगों के उसके अंग अंग के साथ खेलने से कमला के बदन में आग लग गई थी। उसे सिर्फ़ लण्ड चाहिए था, किसी का लण्ड।
होटल आते ही वो नहाने के बहाने बाथरूम भागी और ऊँगली से अपने को झाड़ा और आकर बिस्तर पर राहुल की ओर अपने चूतड़ कर के सो गई। लेकिन उसे नींद नहीं आ रही थी। राहुल भी कमला की हरकतों से बेखबर नहीं था और उसके अन्दर मन में एक गुदगुदी सी हो रही थी। वो चित्त लेटा था, लेकिन थोड़ी देर के बाद वो अपनी माँ की ओर घूम कर माँ से सट गया और अपना एक हाथ माँ के ऊपर इस तरह रखा कि उसकी उंगलियाँ कमला की चूची को छूने लगी। राहुल ने इस हरकत को इस तरह किया जैसे वो नींद में हो।
कमला ने नाईट-गाऊन की बेल्ट नहीं बांधी थी इसलिए वो सामने से बिल्कुल नंगी ही थी। राहुल का सीना कमला की पीठ से सटा हुआ था और उसकी जांघ अपनी मां के चूतड़ से। राहुल से हाथ में नींद में फ़िर हरकत हुई और कमला की चूची की घुण्डियों को हल्के से रगड़ते हुए उसका हाथ कमला की नाभि और चूत के ऊपर आकर ठहर गया। लेकिन उसके बाद राहुल के हाथों में कोई हरकत नहीं हुई तो कमला ने सोचा कि राहुल ने सोचा की राहुल नींद में ऐसा कर रहा है।
राहुल ने ऐसा करने के साथ अपनी जांघें माँ के चूतड़ से इतनी सटा दी कि उसका लण्ड कमला के चूतड़ को छू गया। कमला को फिर अपनी चूत में ऊँगली डाल कर झड़ने की इच्छा हुई, लेकिन उसके दोनों जांघ सटे हुए थे और राहुल का हाथ उसके पेट पर इस तरह था कि वो अभी ऐसा नहीं कर सकती थी। वो अगर चित्त हो जाए तो दोनों टांग खोल कर वो ऊँगली कर सकती थी। लेकिन जब वो चित्त हुई तो राहुल के हाथ खिसक कर उसकी नंगी चूत के ऊपर बाल पर आ गए।
अपने चूत की जलन चुदासी माँ नहीं सहन कर पाई और सारी लाज और शर्म छोड़ कर, दोनों टांग फैला कर अपनी ऊँगली से चूत के दाने को सहलाने लगी, और कभी कभी ऊँगली को चूत के अन्दर बाहर करने लगी। राहुल से भी नहीं रहा गया। अपनी माँ को ऊँगली करते देख वोह चित्त हो गया और बेधड़क एक हाथ से अपनी माँ का हाथ उसकी चूत से हटा कर अपने लण्ड खड़े फनफनाते लण्ड पर रखा, और दूसरे हाथ की हथेली को माँ की चूत पर रखा।
दोनों अब समझ गए कि वो एक दूसरे के साथ क्या करना चाहते हैं लेकिन कोई कुछ नहीं बोल रहा था। एक ओर राहुल कमला की गीली चूत के दाने को सहलाने लगा, साथ ही कमला धीरे धीरे राहुल के लण्ड को जड़ से टोपी तक सहला कर उसके लण्ड की लम्बाई और मोटाई का अनुमान लगाने लगी।
हे भगवन, क्या लण्ड दिया तूने मेरे बेटे को, ७ से ८ इंच का लगा उसे। कमला ने सिर्फ़ बाबू लाल जी का ५ इंच के लण्ड का स्वाद लिया था और उसने कभी कल्पना नहीं की थी कि लण्ड इतना लंबा मोटा भी होता है।
राहुल ने सोचा कि अब लोहा गरम हो चुका है और वो घड़ी आ गई है जिसका इंतज़ार था। वो उठा और पजामे को उतार फेंका और नीचे से बिल्कुल नंगा हो कर अपनी माँ की टांगों को बेड के किनारे तक इस तरह खींचा कि उसकी माँ की गांड बेड के किनारे आ गई। इसके जवाब में कमला ने अपनी टांगें जितनी खुल सकती थी खोल कर फैला दी। अब राहुल ने माँ की गरम और रसीली चूत की दरार में अपना सुपाड़ा रख कर हलके से दबाया। उसका लण्ड २ इंच माँ की चूत के अन्दर घुस गया। तब उसने माँ के दोनों मांसल चूतड़ के नीचे दोनों हाथ रख एक जोर दार धक्का लगाया। घच की आवाज के साथ राहुल का पूरा लण्ड जड़ तक अपनी माँ की चूत में चला गया, और कमला के मुंह से एक आह निकल पड़ी। अब राहुल ने घच घच अपनी माँ की चूत को चोदना शुरू किया और आनंद से उसकी माँ बड़बड़ा रही थी– चोदो मेरे लाल, मेरे श्रवण कुमार, चोदो आज अपनी चुदासी माँ को ! कई साल से भूखी है तुम्हारी माँ ! आज सारी भूख मिटा दो !
राहुल माँ को घच घच चोदते हुए बोल रहा था- ये ले, और ले माँ। तुम्हारी सालों की चुदाई की कसर अब पूरी हो जायेगी। चोदने के साथ राहुल माँ की चूचियां बेरहमी से मसल रहा था और माँ के मुंह और गले को चूम रहा था। कमला भी अब नीचे से चूतड़ उछाल उछाल कर राहुल के धक्के का जवाब देने लगी। लगता था कि कमरे में भूचाल आ गया हो।
कमला के मुंह से अजब गजब की आवाज निकलने लगी, और एक बार तो उसके मुंह से चीख जैसी निकल पड़ी तो राहुल ने उसका मुंह दबा दिया ताकि होटल वाले ये सब सुन कर कहीं वहां न आ जाएँ। तभी कमला के बदन में बड़ी जोर की सिहरन हुई, और राहुल समझ गया की उसकी माँ अब झड़ने वाली है। उसने कमला के मुंह को तकिये से ढक दिया ताकि वोह चीखे तो उसकी आवाज कम हो जाए, और उसके ५ -७ करारे धक्के लगाते ही उसकी माँ झड़ने लगी। राहुल और कमला दोनों ने एक दूसरे के चूतड पकड़ कर अपने लण्ड और चूत को इस तरह एक दूसरे से दबाया कि लगा कि उनकी हड्डी टूट जायेगी। तभी राहुल के लण्ड से उसके रस की १०-१२ पिचकारी छूटी और कमला की चूत के हर कोने को रसदार कर दिया .राहुल अपनी माँ की चूत में लण्ड डाले हुए उसके ऊपर पड़ा रहा।
कमला को बड़ा आश्चर्य हुआ कि झड़ने के बाद भी राहुल का लण्ड पूरा ढीला नही हुआ। वास्तव में १५ मिनट के बाद उसे लगा कि राहुल का लण्ड उसकी चूत में धीरे धीरे फड़क रहा है और फिर से लोहे की तरह कड़ा होता जा रहा है। कमला भी फिर से चुदाने के लिए तैयार थी, लेकिन राहुल ने बिस्तर से उठ कर बिजली जलाई और अपनी मस्त नंगी माँ का हाथ पकड़ बिस्तर से उठाया और कहा – अभी तो शुरुआत हुई है, अभी देखो रात भर क्या करता हूँ।
वो अपनी माँ को बाथरूम ले गया और साबुन लगा कर उसकी चूत और बगल के बाल को साफ़ कर के चिकना कर दिया और फिर माँ बेटे नंगे बिस्तर पर आए। राहुल ने अपनी माँ को बिस्तर पर चित्त लिटा कर उसकी चिकनी चूत चाटते हुए उसे झाड़ा और फिर अपना लण्ड माँ के मुंह में डाल कर उसे सिखाया कि लण्ड कैसे चूसते हैं।
रात की तीसरी चुदाई में राहुल ने माँ को कुटिया जैसी बना कर पीछे से चोदा। कमला आज तक कभी पीछे से ऐसे नहीं चुदी थी, लेकिन उसे लगा कि ऐसे में लण्ड और गहराई तक जाता है।
राहुल ने माँ को कहा कि कल दिन में वे साइबर कैफे चलेंगे और वहां तरह तरह की चुदाई की फ़िल्म देखेंगे !
अगले दिन क्या हुआ? कहानी के दूसरे भाग में शीघ्र ही… Hindi Sex Stories
मेरा नाम विक्की है। मैं राजकोट Sex Stories का रहने वाला हूँ लेकिन अभी मैं अहमदाबाद में कुछ दिनों से रह रहा हूँ। अन्तर्वासना कहानियाँ पढ़ कर मैंने भी अपनी एक रियल सेक्स स्टोरी आप लोगों के साथ बाँटना चाही।
तो बात उन दिनों की है जब मुझे सेक्स के बारे में कुछ मालूम नहीं था। मेरे सभी दोस्तों की गर्लफ्रेंड थी पर मैं एक सीधा लड़का था। मेरे दोस्तों ने मुझे कई बार कहा कि तू भी कोई लड़की क्यों नहीं पटा लेता, पर हम तो पहले से ही बहुत शर्मीले थे।
एक दिन मेरे दोस्त की गर्लफ्रेंड को मिलने मैं उसके साथ गया। वहाँ पर उसकी भी एक सहेली आई हुई थी। वो उम्र में मुझसे बड़ी थी पर बहुत ही सुन्दर और सेक्सी लग रही थी। मैं मन ही मन उसे हवस भरी नजरों से देखने लगा। कभी उसके टॉप में उभरे स्तनों को तो कभी उसकी टाइट जींस से उसकी चूत का आकार! उसके जिस्म का एक एक अंग बहुत ही उभार वाला था। कसम से कोई भी लड़का उसे देखने बाद एक बार तो उसके नाम के मुठ मार ही लेगा।
उसकी नज़र भी मेरी तरफ थी, वो जान गई थी कि मैं उसके सारे अंगों को बहुत ही हवस से देख रहा हूँ पर वो कुछ बोली नहीं।
थोड़ी देर में हम लोग चले आए। मैंने घर जाकर उसके जिस्म का विचार करते हुए मुठ भी मार ली।
दूसरे दिन मैंने अपने दोस्त को उसकी गर्लफ्रेंड की सहेली को मेरे साथ मिलवाने के लिए कहा। पर मुझे मालूम नहीं था कि वो तो मुझसे भी ज्यादा चुदक्कड़ निकलेगी। मेरे दोस्त की गर्लफ्रेंड ने मुझे उससे शाम को ही मिलवा दिया।
हमने थोड़ी बातें की और दूसरे दिन ही अकेले मिलने की योजना बनाई।
ऐसे ही हमारा रूटीन हो गया, हम रोज़ मिलते रहे पर मैं इतना शर्मीला था कि मैं उससे कुछ कह ही नहीं पाता था, सिर्फ उसके शरीर के सभी उभारों को देखता ही रहता था। उसको सब मालूम था पर मुझे कहती नहीं थी, वो मेरे मुँह से बुलवाना चाहती थी पर मैं एक महीने तक कुछ बोल ही नहीं पाया।
एक दिन अचानक उसका फ़ोन आया और मुझे उसने बाहर खाने हो कहा। मैं भी जल्दी से गया, हम दोनों खाना खाने गए, मुझे नहीं मालूम था कि उसकी हवस आज मुझे कुछ और कहना चाहती थी।
खाने के बाद उसने मुझे अपने घर साथ चलने को कहा। मैंने उसको पहले मना किया पर बाद में मान गया। हम लोग चलते चलते बातें करते हुए घर की ओर जा रहे थे, रास्ते में वो मेरे बहुत करीब चलने लगी, उसके हाथ कभी मेरी जांघ पर तो कभी मेरे लंड पर लग रहे थे। तो मैं भी थोड़ा उसके करीब चलने लगा डरते हुए।
एक बार कुछ गिरते हुए सीधे मुझ पर गिर ही पड़ी, मैंने झट से उसे संभाल तो लिया पर उसके मोटे मोटे स्तन मेरे हाथ से टकरा गए। मैंने मेरी इतनी उम्र में पहली बार किसी के वक्ष छुए थे। मैं पसीना-पसीना हो गया, दिल की धड़कन तेज हो गई। मेरे मुँह से आवाज निकलना बंद हो गई पर वो तो मुझे बार बार अपने शरीर से लगा रही थी। मैंने उस दिन जींस पहनी थी फिर भी मेरा लंड जींस में से खड़ा दिख रहा था, उसकी नज़र बार बार उस पर पड़ती थी और मैं शर्म से नीचे देखने लगता था।
इतने में उसका घर आ गया। मैं सोफे पर बैठा था, वो अन्दर गई और मुझे पानी पिलाया, फिर अपने कमरे में चली गई। थोड़ी देर बाद वो एक सिल्क का गाऊन पहन कर आई और मेरे पास बैठ गई। मैंने अपनी नज़र एक बार उसके शरीर को देख कर दूसरी तरफ घुमा ली। उसने हलके से अपना हाथ मेरे हाथ पर रख दिया। मैं कुछ बोल ही नहीं पा रहा था, तभी वो अपना हाथ धीरे धीरे मेरे गालों पर फिराने लगी।
मेरा लंड बहुत टाइट हो गया था, वो मेरे होठों के साथ अपने होंठ मिलाकर मुझे चूमने लगी। मेरे शरीर का एक एक रोंगटा खड़ा हो गया। मैंने कभी ऐसा अनुभव नहीं किया था। वो धीरे से अपना मुँह मेरे शर्ट के बटन खोल कर अन्दर लगाने लगी, पूरे जिस्म में आग फ़ैल गई, मेरे हाथ काम्पने लगे। फिर मैंने हिम्मत करके अपना एक हाथ उसके गाऊन के ऊपर ही उसके कमर पर फेरना चालू किया। वो तो मुझसे पहले की गरम ही थी, धीरे से अपना हाथ मैंने उसके वक्ष पर रखा तो जैसे मेरी जन्मों की प्यास भड़क उठी हो, वैसा मुझे आनंद मिला।
अब तो मुझसे भी रहा नहीं गया और उसके गाऊन को धीरे से निकाला और फेंक दिया। उसने मेरा शर्ट उतार दिया और मुझ पर चढ़ गई। गाऊन उतरने के बाद मैंने उसके जिस्म को देखा तो मानो उसको सिर्फ चोदने के लिए ही बनाया होगा। उसने लाल ब्रा और पैंटी पहनी थी, उसके स्तन ब्रा में से भी बाहर निकल रहे थे। धीरे से उसकी कमर पर हाथ घुमा कर मैंने उसकी ब्रा निकाल दी। वो मेरे लंड पर हाथ रख के धीरे धीरे उसको सहलाने लगी। मुझे लगा कि अभी ही मेरा वीर्य निकल जायेगा।
फिर उसने मेरी जिप खोल कर अन्दर हाथ डाला, लण्ड को छूते ही मानो एक मूर्ति में जान आ गई हो एसे लंड और खड़ा हो गया। उसने अपने कोमल हाथों से मेरे लंड को बाहर निकाला और नीचे हो कर उसको चूमा।
उसने कहा- मुझ में कब से इसे पाने की आग थी, तुमने मुझे बहुत तड़पाया है पर आज मैंने भी ठान लिया कि इसका मज़ा लेकर ही रहूंगी।
फिर वो एक हाथ मेरे सीने पर फिराने लगी और दूसरे हाथ से मेरा लंड पकड़ कर मुँह में ले कर ऊपर-नीचे होने लगी। मैंने उसकी पैंटी उतार कर एक हाथ उसकी गुलाबी चूत पर रख दिया, उसकी चूत पहले से ही पानी छोड़ने लगी थी, वो बहुत ही उतावली हो रही थी चुदवाने के लिए।
मैंने उसको उठा कर अपनी गोद में बिठाया और लंड सीधा खड़ा कर दिया क्योंकि मुझे मालूम नहीं था कि कैसे करते हैं, उसने मेरा लंड पकड़ के अपनी चूत में डलवाने लगी। लंड का मुंड अन्दर जाते ही वो चीख उठी- हाय राम! इतना मोटा लौड़ा!
थोड़ी देर रुक कर वो धीरे से लंड पर नीचे बैठती रही, धीरे-धीरे पूरा लंड उसकी चूत में चला गया। दर्द के मारे उसकी आँखों से आंसू निकल आए पर वो कुछ बोली नहीं। फिर उसने ऊपर उठ कर दो-तीन बार झटका लगाया, अब मेरा लंड पूरी तरह अन्दर जा रहा था, मुझे बहुत मज़ा आ रहा था।
थोड़ी देर में उसके मुँह से ये आवाज़ें निकलने लगी- आऽऽ… आआऽऽऽ आऽअ…आ आय… अआ..ऊ… उऔऊ उ. .उ .मर गई…
आज मेरी भी जन्मों की प्यास बुझ रही थी, मैं भी अऽऽ आय… आआऽऽ आआअ ऊऊऊऊउ… कर रहा था और कह रहा था- साली अब तुझे नहीं जाने दूंगा, तू कितने दिनों से मेरे लंड को भड़का रही थी… साली आज में तेरी माँ-बहन एक कर दूंगा…
वो अभी भी चीख रही थी- माय… उ.उ.उ.उ.. ऊऊऊ… दर्द हो रहा है!
थोड़ी देर बाद वो उतर के कुतिया की तरह हो गई और मुझे पीछे से डालने को कहा। मैंने धीरे से लंड को चूत पे रख कर जोर दिया, मेरा लंड पूरा उसकी चूत में चला गया। फिर मैं भी आगे-पीछे हो कर लंड को अन्दर-बाहर करता रहा। हम दोनों ही जन्नत में पहुँच चुके थे, वो अपनी गांड हिला कर मानो मुझे चोद रही हो, ऐसे हिल रही थी।
थोड़ी देर में मैंने और ज्यादा गति पकड़ ली। शायद लंड पूरा उसके चूत के अन्दर से टकरा रहा हो, उसने मुझे रोक देना चाहा पर मैं रुका नहीं क्योंकि अब उसकी चरमसीमा आ रही थी। उसने झटके से पूरा पानी छोड़ दिया और मैंने भी उसकी चूत अपनी पहली चुदाई के पानी से भर दी।
उसने और मैंने एक अलग ही अनुभव किया। थोड़ी देर मैं उससे चिपक कर वैसे ही लेटा रहा!
फिर उस दिन के बाद मैंने कई बार उसको चोदा।
मानो या न मानो, जो पहले सेक्स का अनुभव होता है वो एक अलग ही होता है!
तो कैसी लगी मेरी यह घटना?
इस रियल से स्टोरी को पढ़ कर आप मुझे अपना विचार भेज सकते हैं। Sex Stories
The user agrees to follow our Terms and Conditions and gives us feedback about our website and our services. These ads in TOTTAA were put there by the advertiser on his own and are solely their responsibility. Publishing these kinds of ads doesn’t have to be checked out by ourselves first.
We are not responsible for the ethics, morality, protection of intellectual property rights, or possible violations of public or moral values in the profiles created by the advertisers. TOTTAA lets you publish free online ads and find your way around the websites. It’s not up to us to act as a dealer between the customer and the advertiser.