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Massage Girl in Panipat: Premium Relaxation Services

Our site can help you find a professional massage girl in Panipat who will help you relax in the best manner possible. We connect you with professional therapists who can offer you a massage that will make you feel better and more relaxed. The pros on our list are ready to provide you with a fantastic experience at your house or in one of their particular spots, whether you want to relax or get away from it all.

Introduction

Massage is currently one of the finest methods to relax your mind, body, and overall health. Our website makes it easy to locate the top massage services in Panipat that meet your demands. This will be a one-of-a-kind and calming experience for you.

Tottaa wants to make it simple for clients to find the top masseuse. The Panipat massage service providers on our list offer the greatest quality, comfort, and competence, whether you want a full-body massage or a massage for a particular location.

How Tottaa Helps Advertisers Reach More Customers

Tottaa is not only a list of masseuses, it’s also a secure location for them to show off what they can do. People in Panipat who are seeking massage services may find them on our website. This makes them easier to find and gets them more appointments.

Advertisers may simply put up profiles, offer their services, and talk about pricing and discounts on our sites. This makes sure that the relevant people notice your Panipat massage service, which makes it easier to obtain more customers.

Different Types of Massages We Offer

There are a lot of different types of massage services on our site, so you may choose one that works for you. You may choose the kind of treatment that works best for you, whether it’s profound rest or a particular type of therapy.

1. Swedish Massage

A calm and gentle way to ease muscular tension and improve blood flow. This Panipat massage is perfect for you if you want to relax and forget about your concerns.

2. Deep Tissue Massage

This approach employs a lot of pressure to get to deeper muscle layers. It’s helpful for folks who have muscular discomfort or stiffness that won’t go away. There are specialists on our profiles of massage girls in Panipat who are good at deep tissue treatments that function effectively.

3. Aromatherapy Massage

Calming massage strokes and essential oils are beneficial in making people feel improved both emotionally and physically. Most massage companies in Panipat employ the use of custom oil preparations to make you feel good.

4. Thai Massage

A therapy that wakes you up by using a mix of regular massage, stretching, and compression. This traditional massage in Panipat helps you relax, become more flexible, and get your mind and body back in harmony.

5. Hot Stone Massage

Heated stones are placed on various parts of the body to help with deep muscular tightness. People who want to feel good, relax, and help their muscles recover quickly can use this massage service in Panipat

How to Book Our Massage Services

Tottaa makes it simple and fast to book. With our listings, you can see what kind of massage you want, read about the providers, see that they are free and then contact them directly. After you choose, you can book a massage in Panipat at your convenient time and location. In order to get your desired massage services, apply the following simple steps:

Step 1: Browse Our Listings

Take a peek around our site to view a few massage professionals. Each listing gives you information about the many sorts of massages, how long they last, how much they cost, and where they are situated. This makes it easier to choose the finest ones.

Step 2: Compare and Shortlist

Examine the profiles carefully to compare how the services, talents, and reviews posted by customers differ. This phase makes sure you choose a business that has the style, pricing, and supply you desire.

Step 3: Connect with the Provider

When you have decided, use the information that you are offered so that you can contact them directly. One can communicate it to the massage giver thus making it understood what massage you want at what time and when.

Step 4: Confirm the Appointment

The date, time and place of the service, which could be your home, a hotel or the spa where the therapist may be found. You also need to agree on the payment method and any other accords prior to commencement of the course.

Step 5: Relax and Enjoy Your Massage

All you have to do on the day of the appointment is have your area ready for the house visit. The remainder will be handled by the expert. Take it easy and enjoy a massage that is made just for you.

Frequently Asked Questions

To locate a professional who can meet your needs, read our biography, reviews and advertising.

Yes, many of the therapists on our site will come to your house so you may feel safe and at ease.

You may pick based on talents since most adverts provide their qualifications in their profiles.

It would be advisable to make a reservation earlier to guarantee that you would be able to get a massage, particularly against the prevalent services of massage.

Not at all. Tottaa exclusively connects users with service providers. The doctor gets to choose how to handle payment.

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प्रेषिका/प्रेषक ?: सिया सोनी/सुनील Hindi Porn Stories

मेरी पिछली कहानी “माला की चुदाई” पर बहुत से Hindi Porn Stories पत्र मिले। मेरे कई पाठकों ने अपने दिमाग का इस्तेमाल किया और मुझसे जानकारी मांगी कि मैं नर हूं या नारी?

तो दोस्तो- हकीकत यह है कि मैं नर हूं, मेरा नाम सुनील है और राजस्थान के अजमेर ज़िले का रहने वाला हूं। आज मैं आपको नई कहानी बत रहा हूं जो करीब चार माह पुरानी है।

मैं शार्टकट के चक्कर से पुलिया पार करता हुआ बाईक से कालोनी में जाने वाला था मगर उससे पहले ही मुझे एक शानदार २६-२७ साल की नई शादीशुदा युवती नज़र आई जो अपने आप में बहुत ही खूबसूरत थी। उसके बूब्स तो माशा अल्लाह बहुत ही नज़ाकत लिए हुए थे। उसने मुझे आवाज़ लगाते हुए कहा कि क्या आप मुझे आगे कालोनी तक लिफ़्ट देंगे? मुझे तो मानो बिन मांगे मुराद मिल गई। मैंने बड़े सलीके से जवाब दिया- जी बैठिए ! मैं आपको आपके घर तक छोड़ दूंगा। वो मेरी बाईक पर बैठ गई।

अब मैं बाईक चलाता और हल्के से भी ब्रेक लगने से वो मुझसे जैसे ही स्पर्श करती, कसम से बहुत गहरा झटका लगता, क्योंकि हए झटके के साथ उसके बड़े बड़े बूब मेरी कमर से टकरा जाते और मेरी हालत खराब हो जाती। खैर जैसे तैसे मैं उसके घर पहुंच कर उसे घर के बाहर छोड़ कर जाने लगा तो उसने मुझे बड़े प्यार से अन्दर बुलाया तो मैं इंकार ना कर सका, चूंकि दोपहर का समय था और गर्मी का मौसम भी, शरीर से पसीना चू रहा था।

मैं अन्दर गया तो वहां मात्र एक उसकी नौकरानी थी, मुझे पानी पिलाने के बाद उसे भी घर भेज दिया। अब घर में हम दोनों ही थे। बातों बातों में मैं उससे पूरी तरह खुल गया था क्योंकि मुझे आए करीब एक घण्टा हो गया था। उसने बताया कि उसका नाम स्वीटी है और उसके पति की मार्बल की तीन चार फ़ैक्ट्रियाँ हैं जिसमें वह इतने व्यस्त रहते हैं कि सवेरे सात बजे के निकले रात दस ग्यारह बजे आते हैं और आते ही सो जाते हैं।

देर हो जाने के कारण उसने मुझे अपना सैल नम्बर देकर फ़िर आने को कहा और जैसे ही मैं जाने लगा, वह मेरे पीछे गेट पर आई और मुझे पीछे से पकर कर किस किया और मैं कुछ समझता इससे पहले ही उसका एक हाथ मेरी पैन्ट पर रेंग गया। मगर वह ज्यादा कुछ करती और मैं ज्यादा कुछ समझता, उससे पहले कालबेल चिंघाड़ उठी, और मेरा मूड बनता उससे पहले ही बिगड़ गया। खैर स्वीटी ने मुझे फ़िर आने को कहा और मैं चला आया।

दो तीन दिन बाद सुबह अचानक स्वीटी का फ़ोन आया और मुझे घर बुलाया। मैं गया तो उसी नौकरानी ने दरवाज़ा खोला और मुझे सोफ़े पर बैठा कर पानी पिलाया और चली गई। मैं स्वीटी का इन्तज़ार करने लगा। थोड़ी देर में स्वीटी आई, मुझे अन्दर अपने बेडरूम में ले गई। दरवाज़ा बंद करने के बाद स्वीटी ने मुझे कस के पकड़ लिया और ऊपर से नीचे तक चूमती रही। मुझे लगा कि आज मेरा देह शोषण होना है। मगर नहीं, उसने मुझे १५-२० मिनट चूमने के बाद अपने बेड पर बिठाया और फ़्रिज़ से बीयर निकाल कर लाई, दो ग्लास बनाए, एक उसने मुझे दिया और मेरे पास बैठ कर दूसरा खुद पीने लगी।

धीरे धीरे मैंने अपना हाथ बढ़ाया और उसके बूब्स को सहलाने लगा। उसका मुंह अपनी ओर करके मैंने एक लम्बा किस लिया और एक हाथ से उसका ब्लाऊज़ उतारा। ब्लाऊज़ के अन्दर उसने काली ब्रा पहन रखी थी जो मेरी एक खास पसन्द है। काली ब्रा में कैद दोनों कबूतर कब आज़ाद हो गए पता ही नहीं चला। इधर स्वीटी ने मेरी पैन्ट की ज़िप खोल कर मेरा लण्ड पने हाथ में ले लिया और सहलाने लगी। फ़िए बड़े प्यार से मेरे लण्ड को चूमने, चूसने लगी। उसके चूसने से मेरा लण्ड एक दम सख्त हो गया और उसके बाल पकड़ कर उसके मुंह में ही चुदाई करने लगा। थोड़ी देर में ही मेरे लण्ड ने उसके मुंह में रुक रुक कर फ़व्वारा छोड़ दिया जिसे स्वीटी ने बड़े प्यार से गटक लिया और अपनी जीभ से दीवानों की तरह मेरे पूरे लण्ड को चाटने लगी।

इधर मैंने उसके चूतड़ों में अपनी उंगलियों से चुदाई कर कर के उसको भी झाड़ दिया। अब मैंने उसको बेड पर पीठ के बल लिटाया और उसकी टांगों को चौड़ी करके रसीली चूत को चाटने लगा। हकीकत में, दोस्तो, जितना आनन्द चूत चटाई में आता है उतना आनन्द तो ओर कहीं नहीं मिल सकता। चूत चटाई के दौर में स्वीटी दो बार झड़ चुकी थी। उसने मेरे बाल कस के पकड़ लिए और उसके मुंह से लगातार आवाज़ें आ रही थी… आह्… संजू… चाटो आज जी भर कर चाटो ! मैं भी स्वर्ग का आनन्द प्राप्त कर रहा था। उसकी चूत गोरी-चिट्टी व चिकनी थी और साथ ही मामूली बालों का भी पहरा था जिससे चूत चटाई का आनन्द दुगना हो गया।

अब मैंने उसकी दोनों टांगों को अपने कंधों पर रख लण्ड का सुपाड़ा उसकी चूत के दरवाज़े पर रखा, सुपाड़ा अपने आप फ़िसल कर आधा अन्दर चला गया क्योंकि मेरी चूत चटाई से उसकी बुर एकदम गीली और चिकनी हो गई थी। स्वीटी डार्लिंग इतनी गर्म हो चुकी थी कि उसके मुंह से अनाप शनाप आवाज़ें आ रही थी कि संजू डार्लिंग ! मैंने तुम्हें चुन कर गलत नहीं किया, वाकय में तुम्हारा लण्ड माशाअल्लाह है।

मैंने अपने लण्ड को एक धक्का दिया तो वह चिल्ला उठी- आह ! मार डालोगे क्या ! मेरी चूत का सत्यानाश कर दोगे, मुझे नहीं चुदवाना, मुझे छोड़ो, मगर अब संजू यानि आपका चोदू दोस्त कहां रुकने वाला था। मैं उसके दोनों उरोज़ों को सहलाने लगा और अपने होठों से उसके रसीले होठों को चूसने लगा जिससे वो थोड़ी शांत हुई।

मैं लण्ड को स्वीटी की चूत में धीरे धीरे पेल रहा था। अब वो भी जोश में आ गयी थी और नीचे से अपने चूतड़ हिला हिला कर मेरा साथ दे रही थी। स्वीटी बके जा रही थी- चोदू ! आज मुझे पूरी कर दो संजू, आज फ़ाड़ दो मेरी चूत को…वगैरह वगैरह्। जिस पर मेरा हौंसला और बुलन्द हुए जा रहा था और मैं अपनी चोदने की गति को बढ़ाए जा रहा था।

अब स्वीटी चिल्लाने लगी- संजू ! मैं गई ! मैं गई संजू !

और वह झड़ गई। मैं दस पन्द्रह धक्कों के बाद आह्…आह की आवाज़ करता उसकी चूत में ही झड़ गया।

हमने पहला दौर ही करीब २०-२५ मिनट में पूरा किया। फ़िर दूसरे, तीसरे, चौथे दौर में देर नहीं लगाई क्योंकि स्वीटी थी ही इतनी शानदार चीज़ ! हमारा चुदाई का दौर शाम तक चलता रहा।

स्वीटी को कभी कुतिया बना कर चोदा तो कभी सोफ़े पर तो कभी अपनी खुद की चुदाइ कराता। मैंने जाते जाते स्वीटी की गाण्ड मारने के लिए उसकी गाण्ड में उंगली की तो वह समझ गयी। उसने कहा- अभी नहीं ! अगली बार।

सच ! स्वीटी को चोदने का मज़ा किसी भी नायाब हीरे मिलने की खुशी से कम नहीं था क्योंकि जब मैं जाने लगा तो उसने मुझे ५००० रूपए दिए और मुझे लेने पड़े।

तो कैसी लगी मेरी स्वीटी संग चुदाई की कहानी Hindi Porn Stories

लेखिका : पायल शर्मा Hindi Porn Stories

मेरी सहेली पायल शर्मा, Hindi Porn Stories उम्र 24 वर्ष की, भरपूर जवान, शादी शुदा है, सुन्दर और लुभावनी फ़िगर वाली युवती है। उसने अपनी कहानी मुझे लिख कर भेजी है, उसे उसी के शब्दों में प्रस्तुत कर रही हूँ।

मेरी शादी मेरे व्यस्क होते ही 18 वर्ष की उम्र में कर दी थी। उस समय मैं सेक्स के बारे में अधिक नहीं जानती थी। पर शादी के बाद जब से मेरी चुदाई आरम्भ हुई है, मैं तो चुदाई की मतवाली हो गई हूँ। जैसा कि अधिकतर होता है कि समय के साथ साथ सेक्स से भी दिल ऊब जाता है, जिसका मुख्य कारण एक जैसी चुदाई, वही रात में पति को जोश चढ़ा और ऊपर चढ़ कर चोद दिया और सो गये। धत्त्… ये भी कोई जिंदगी है।

आज पांच-छः साल हो गये, अब तो पति देव का यह हाल है कि काम से लौटे, खाना खाया और बिस्तर पर लेट गये। बहुत हो गया तो महीने में एक बार चोद दिया। पर मैं… ना… ना… पतिव्रता तो हूँ, पर चुदाई के मामले में नहीं…
उसके कुछ दोस्तों से मैं चुद चुकी हूँ, पर वो सभी अब यहाँ नहीं है। मेरी चूंचियाँ भी अब बड़ी हो चुकी हैं, इतनी सी उम्र में 38 की ब्रा पहनती हूँ, मेरे चूतड़ बड़े और लचकदार हो गये हैं। मैं टाईट जीन्स और कसी हुई बनियान नुमा टॉप पहनती हूँ। मेरे बड़े बड़े चूंचे उसने उभर कर हिमालय पर्वत को भी मात देते है। कोई एक बार देखता है वो देखता ही रह जाता है।

घर की मुर्गी दाल बराबर…! घर के पास तो किसी का ध्यान जाता ही नहीं है। बेचारा पड़ोसी रोज़ ही प्यासी नजरों से मुझे निहारता रहता था। मुझे देख कर उसका लण्ड भी कड़कता होगा। जी हां, साथ वाले घर में एक लड़का रहता है, पर उस पर कभी ध्यान ही नहीं गया। बीस साल का भरपूर जवान लड़का, नाम आदित्य, हम लोग उसे आदी कहते है। उसकी नजर मुझ पर बहुत पहले से थी, पर मेरा ध्यान उस पर कभी नहीं गया।

एक दिन मैं बाल्कनी पर बैठी किताब पढ़ कर रही थी कि मेरी नजर अचानक साथ वाले घर पर आदी पर पड़ी… वो एक छोटी सी चड्डी पहने नहा रहा था। वो अपनी चड्डी के अन्दर हाथ घुसा कर लण्ड पर साबुन मल रहा था, फिर हाथ पीछे घुसा कर गाण्ड पर साबुन भी लगाता था। आह… मेरी नजरें जैसे उस पर चिपक कर रह गई। कसा हुआ बदन, उभरी हुई मसल्स, ताकत और उर्जा से भरा हुआ शरीर… जिस पर उसका उभरा हुआ लण्ड चड्डी में से साफ़ नजर आ रहा था।

अब वो अपने बदन पर पानी डाल रहा था। कुछ देर बाद उसने अपने शरीर को तौलिये से पोंछना चालू कर दिया। एक बार तो उसने सावधानी से यहाँ वहाँ देखा, फिर जल्दी से अपना लण्ड निकाला और तौलिये से साफ़ कर दिया। मेरे दिल ने जैसे धड़कना बन्द कर दिया। उसका सोलिड लण्ड मोटा और लम्बा, मेरे दिल को भा गया। मेरी चूत फ़ड़क उठी, बोबे कसक गये…
उसने तौलिया लपेटा और चड्डी खोल कर दूसरी पहनने लगा। उसकी चूतड़ों की दरार का दर्शन भी हो गया। मेरी नजर मेरे बोबे पर पड़ी, मुझे लगा कि मेरा ब्लाऊज तंग होने लगा है। मुझसे रहा नहीं गया मैं उठ कर नीचे चली आई और उसकी दीवार के पास खड़ी हो गई, जैसे कि फूल तोड़ने आई हूँ। चड्डी में से उसका उठा हुआ लण्ड मुझे बहुत ही प्यारा लग रहा था। मुझे इस तरह से देखने पर वो बेचारा झेंप गया। मैं मुस्करा उठी।

पर उसने तौलिया नहीं लपेटा, अब वो भी मुस्करा रहा था। उसे लगा कि शरमाना आण्टी को चाहिये,’ नमस्ते आण्टी… ‘

‘नमस्ते आदी… आजकल कहा रहते हो तुम… दिखते ही नहीं हो…?’

‘कहीं नहीं आण्टी… यहीं हूँ… कोई काम हो तो बता दीजिये…!’

‘हां काम तो है… समय मिले तो घर आओ, चाय भी पियेंगे… और काम भी बताऊंगी !’

‘ठीक है आण्टी… अभी आता हूँ… ‘ उसने चुपके से अपना लण्ड देखा जो खड़ा हुआ था, और शायद मुझे बुला रहा था। अचानक उसकी नजर मुझसे फिर मिल गई। दोनों ही मतलब से मुस्करा दिये। मैं खुश हो गई, मुझे लगा कि ये तो पट जायेगा। शायद वो भी यही सोच रहा था। अनजाने में मेरी एक आंख चल गई, आंख मारते ही वो शरमा गया। पर वो सब कुछ समझ चुका था।

कुछ ही देर में वो मेरे घर पर आ गया। इतनी देर में मैंने ढीला सा कुर्ता और पेटीकोट पहन लिया था, पेण्टी और ब्रा उतार कर एक तरफ़ रख दी थी। मुझे ये सब करते हुये बड़ी झुरझुरी सी हो रही थी और मन में लग रहा था कि मुर्गा तो फ़ंसा।

मैं अपनी टांगें बड़ी बेशर्मी से मेज़ पर रख कर बैठ गई ताकि उसके अन्दर आते ही उसे चूत के दर्शन हो जायें। जैसे ही वो अन्दर आया, मैंने उसे सामने बैठा दिया। जैसा कि होना ही था, उसकी नजरें सीधे मेरे उठे हुये पेटीकोट पर पड़ी और मेरी चिकनी शेव की हुई चूत पर पड़ी। एक बार जो नजरें टिकी तो वहीं पर चिपक गई। यह देख कर मैंने अपना थोड़ा सा पांव और खोल दिया। चूत अब स्पष्ट दिखने लगी थी।

‘क्या देख रहे हो आदी… !’

‘अह्ह्… कुछ नहीं… ‘ उसका लण्ड कठोर होता जा रहा था। मैं आगे को झुक गई, मेरे लो कट ब्लाऊज में से मेरे बड़े बड़े उरोज छलक उठे। उस पर प्रहार पर प्रहार हो रहे थे, वो बेचारा कब तक सहता। मेरे उरोज भी कड़क हो उठे थे, चूचुक फूल कर मचल रहे थे कि कोई उन्हें मसल दे।

‘आण्टी… बहुत बड़े हैं… ‘ उसके मुँह से अचानक निकल पड़ा।

‘क्या…? अच्छा तो जनाब ये देख रहे थे…! ‘ मैंने उसे उलाहना दिया।

वो असमंजस में था कि कैसे अपने आप को कंट्रोल में रखू, कहने लगा,’आण्टी… काम हो तो बताओ मुझसे और नहीं बैठा जा रहा है… ‘ वो कसमसाते हुए बोला।

‘बैठे रहो… खड़े हो जाओगे तो… तुम्हारा यह भी खड़ा हो कर जोर लगायेगा… ‘ मैंने हंसते हुए कहा और धीरे से उसके लण्ड पर हाथ मार दिया।

‘इसीलिये तो कह रहा हूं ना… बस मैं जाऊँ…? ‘ आह भरता हुआ वो बैचेन सा उठा।

‘ तुम मत बैठो पर इसे बैठाना नहीं है क्या… आओ पास में यहां बैठ जाओ… ‘ उसे मैंने सोफ़े में पास बैठा लिया…

अपने बोबे दिखा कर बोली,’तुमने ये देखे हैं ना… इन्हें दबाओ !… और देखो मैं भी यही चाहती हूं !’

कह कर मैंने उसका हाथ अपने सीने पर रख दिया। उसने मुझे बड़ी आसक्ति से मुझे देखा, और मेरी चूचियां दबाने लगा लगा जैसे उसने मुझे धन्यवाद दिया। मेरा हाथ उसके लण्ड पर आ गया। मैंने उसकी पेन्ट की ज़िप खोल दी और चड्डी में से उसका लण्ड खींच कर बाहर निकाल लिया।

आह कितना सुन्दर सुपाड़ा था… लाल और चिकना। उसने अपनी पेन्ट को खोल कर नीचे कर लिया। उसका पूरा लण्ड बाहर निकल आया। उसने मेरे बोबे को मसलते हुए एक हाथ चूत पर रख दिया। मेरा हाथ उसके लण्ड पर चल पड़ा… उसके मुँह से सिसकारियाँ निकलने लगी।

मैंने जोर से उसका लण्ड मरोड़ते हुये मुठ मारनी शुरु कर दी। वो तड़प उठा। उसने भी हिम्मत की और अब उसकी अंगुली भी मेरी चूत में घुस गई थी। मेरी चूत के पानी से उसका हाथ तर हो गया था। उसने मुझे लिपटा लिया और मेरे मुख में अपनी जीभ डाल कर चूसने लगा।
जोश में मैं भी मुठ और जोर से मारने लगी। उसके मुख से जोर से हाय निकली और उसका वीर्य छूट गया। उसका लण्ड जोर से पिचकारी छोड़ने लगा।
मैंने तुरन्त ही झुक कर उसका लण्ड मुँह में ले लिया और उसका कुछ वीर्य तो पी गई और कुछ बाहर गिर गया। उसने मेरे बोबे छोड़ दिये और और अपना पेण्ट ठीक करने लगा।

‘अभी रुको ना… चले जाना… जल्दी क्या है?’

‘आण्टी अभी कॉलेज जाना है… फिर कल आऊंगा’ मैंने भी उसे नहीं रोका। सोचा कि इसे चस्का तो लग ही गया है, साला जायेगा कहाँ, यहीं तो आयेगा लण्ड शान्त करने।

मुझे सच में बहुत मजा आया था… मैं रसोई से बैंगन उठा लाई और अपनी चूत पर घिसने लगी। कुछ ही देर में मेरा पानी निकल गया। इतना कुछ होने के बाद मुझे लगा कि बैचेन आदी नहीं… मैं हो रही हूँ।

तड़पते हुए मैं उसकी राह देखने लग गई।

शाम को वह कॉलेज से वापस आया तो मुझे देख कर उसने हाथ हिलाया। मेरे दिल को सुकून मिला। मैंने हाथ हिला कर उसका जवाब दिया। उसने यहाँ वहाँ देखा और हाथ से लण्ड बना कर चूत में घुसाने का इशारा किया। मैं शरमा गई। मैंने भी हाथ की अंगुलियों से चूत का छेद बना कर उसने एक अंगुली लण्ड बना कर डाल कर चुदाई का इशारा किया। वो खूब हंसा और आंख मार दी। मैंने शरमा कर मुँह को हाथ से छुपा लिया।

सवेरे नौ बजे मेरे पति ओफ़िस चले गये। अब मैं बैचेनी से आदी की राह देखने लगी थी। मैंने हल्के फ़ुल्के कपड़े पहन लिये और चुदने के लिये बेकरार थी। चूत लप लप कर रही थी, पानी से तर हो रही थी। बार बार मेरी नजरें बाहर झांक रही थी। साला आया क्यों नहीं… ये मर्द बड़े निर्दयी होते हैं, साले ने कल भी मेरी चूत नहीं मारी थी। ठण्डी आह भरते हुए मैंने सोचा कि जब तक वो आये मैं नहा कर फ़्रेश हो लूँ…

मैं नँगी हो कर नहाने लगी। मुझे लगा कि जैसे मेरा शरीर आग में जल रहा हो। मैं अपनी आंखे बंद कर के अपने बड़े बड़े चूचे निचोड़ने लगी… स्तनाग्रों को मसलने लगी… मुझे तभी खटका हुआ… मैंने झांक कर देखा तो आदी ही था। उसे देखते ही मेरे मन की कली खिल उठी। लगता था वो भी चोदने की तैयारी से आया था। हल्का पजामा और बनियान बस… यही था उसका पूरा पहनावा।

मैंने गीले बदन ही तौलिया लपेटा और बाहर आ गई।

‘बड़े सेक्सी लग रहे हो… ‘

‘आण्टी… जरा अपने को तो देखो… पूरी बम्ब लग रही हो… यानी पटाखा…’

‘आ एक किस कर ले… ‘ मेरी चूत में आग लगी हुई थी।

‘काहे का किस आण्टी… आज तो लौड़े का नम्बर है किस करने का !’ कह कर उसने मुझे अपने से लिपटा लिया। मेरा तौलिया खींच कर एक और बिस्तर पर उछाल दिया। उसने बिना किसी देरी किये अपना पजामा खोल दिया और नीचे से नंगा हो गया।

‘आजा पायल… आज अपन दोनों मस्ती करें… उसने होंठ मेरे होंठ पर रगड़ दिये और उन्हें चूसना शूरू कर दिया। मैं मस्ती में झूम उठी। उसका लण्ड मेरी चूत के छेद को ढूंढने लगा और चूत के आस पास घुसने लगा।

‘आदी, चूत तो सेन्टर में है… वहाँ घुसाओ… अच्छा चलो बिस्तर पर… वहां तो खुद ब खुद घुस जायेगा… और मुझे चोद देगा !’

उसने प्यार से मेरे चूंचे दबाये… और किस करता हुआ बिस्तर की ओर चल पड़ा। मुझे उसने प्यार से लेटा कर खुद पास में लेट गया। मुझे प्यार से सहला कर अपने ऊपर खींच लिया। मैं अब उसके ऊपर आ गई थी। उसका लण्ड सीधा खड़ा था। ऐसा लग रहा था कि कोई सड़क पर खम्भा खड़ा हो। मैंने उसके लण्ड को हाथ में लिया और धीरे से मुठ मारी…

उसे बड़ा मजा आया… बोला,’आण्टी… और मुठ मारो… बहुत मजा आ रहा है… !’

मैंने सोचा कि कही पहले की तरह झड़ गया तो चुदाई रह जायेगी। मैंने उसका सुपाड़ा खोला तो देखते ही खुश हो गई… कुंवारा लण्ड था… उसने किसी को चोदा नहीं था। मैंने बड़े प्यार से उसे अपने चूत के खड्डे में रखा और धीरे से चूत का भार उस पर डाला। फ़क से लण्ड खड्डे में घुस पड़ा। मुझे असीम मजा आया। उसके मुख से भी आह निकल पड़ी।

‘मेरे आदी… तुम कितने प्यारे हो… हाय !’

फिर मैंने और जोर लगाया… उसमें जोश भरा था… नई उमन्गें थी, उसने भी नीचे से उछाल भरी। मेरी चूत ने उसका पूरा लण्ड निगल लिया। उसके मुँह से एक दर्द भरी आह निकल गई।

‘आण्टी… मुझे लण्ड पर लग गई है… !’

‘बस… सह लो… पहली बार ही ऐसा होता है… बाद में नहीं होगा… ‘

मैं उसके ऊपर लेटी रही, फिर बहुत ही धीरे धीरे से चूत हिलानी शुरू कर दी। उसकी आह निकलती गई। मैंने उसे होंठों पर होंठ रख कर कस कर दबा लिया और धक्के बढ़ा दिये। थोड़ी देर तक तो वो कसमसाता रहा फिर शान्त हो चला… मैंने अब उसे किस करना चालू कर दिया और चूतड़ो को दबा कर उसके लण्ड पर मारना शुरू कर दिया।

उसे भी अब मस्ती आने लगी। वासना की रंगीनियाँ रंग दिखाने लगी। वो कुछ ही देर में वासना के नशे में झूम उठा और उसने मुझे दबा कर नीचे पटक दिया। मेरा शरीर उसके बोझ तले दब गया, ये सुहाना दबाव मुझे और मस्त कर गया जब उसके लण्ड ने मुझे दबा कर चोदना शुरू कर दिया।

‘वाह मेरे शेर… लगा जोर… चोद दे अपनी अक्सू को… ‘ मैं भावना में बह चली।

‘हाय रे अक्सू आन्टी… आप कितनी अच्छी हैं… पहले क्यो नहीं चुदाया… !’

‘उईईई… क्या मेरी फ़ाड़ डालेगा राम… आह्ह्ह मेरा आदीऽऽऽ… चोद दे रे।’

वो भचाभच चोद रहा था… मुझे स्वर्ग की सैर करा रहा था। कभी वो मेरे बोबे मचकाता और कभी मेरे होंठो को चूमता और साथ में मेरे गालों को चाटता भी जा रहा था। मैंने चूतड़ों कि लय उसके लण्ड के साथ मिला ली और फ़च फ़च की आवाज के साथ मुझे चोदता जा रहा था। मेरी उत्तेजना बढ़ती जा रही थी, मेरे शरीर में लग रहा था कि खिंचाव होने लगा था। सारे जिस्म में जैसे मीठा मीठा जहर भरने लगा। मेरी वासना की तड़प बढ़ने लगी। मैं उसके जिस्म को जोर से जकड़ने लगी… उसने भी लण्ड का भार मेरी चूत पर डाल दिया और उसका बदन जैसे कस गया।

‘मेरे आदी… हाय रे… फ़ाड़ दे मेरी चूत को… ।’ मेरी आंखों में गुलाबी डोरे तैर रहे थे, अधखुली आंखे नशे से चूर थी… लग रहा था कि मुझे जिन्दगी भर चोदता ही रहे।

‘ आण्टी… मेरा लण्ड… हाय रे… गया…’ वो शायद झड़ने वाला था। मुझे भी झड़ने जैसी उत्तेजना लगने लगी थी। आखिर चूत को मस्त लण्ड मिला था और हम दोनों दिल से चुदाई कर रहे थे। मैं आह भर कर उसे जकड़ कर चूत का रस निकालना चाह रही थी।

‘ आदीऽऽऽ… आह्ह्ह… तेरी तो… हाय चुद गई रे… गई मैं तो… ऊईईई…’

मेरी चूत से जवानी का रस चू पड़ा और मैं झड़ने लगी…

तभी आदी भी चीख सा उठा,’अक्सू आण्टी… गया मेरा लौड़ा… निकला माल… हाय रे… निकला…’

और वीर्य निकलते ही उसने अपना लण्ड बाहर खींच लिया। मैंने उसका लण्ड पकड़ लिया,’आजा ऊपर ले आ…’

वो लण्ड मेरे मुँह तक लाता, उससे पहले ही उसकी पिचकारी निकल पड़ी और सीधे मेरे चेहरे पर आ कर वीर्य गिरा और अब उसका लौड़ा मेरे मुँह में था… थोड़ा ही सही पर वीर्य पीने को मिल गया… उसका लण्ड पूरा चाट कर साफ़ कर लिया फिर अपने चेहरे का वीर्य भी जीभ से मुँह में चाट लिया। आदी ने भी मेरे मुख से मुख को सटाते हुए मेरे चेहरे का वीर्य चाट किया। अब आदी ने पास पड़े कपड़े से मेरा मुख साफ़ किया और मुझसे लिपट कर लेट गया।

मुझे उसने आज भरपूर मजा दिया था। उससे मैंने दिन को रोज चोद जाने का आग्रह किया जिसके लिये वो सहर्ष तैयार हो गया।

‘अक्सू आण्टी… आप बहुत ही प्यारी चुदाती है… आप मुझसे गाण्ड भी मरा लेंगी क्या?’

‘मुझे तरसाओगे क्या… अभी गाण्ड मार लो आदी…’

‘सच आण्टी…’ मेरे कुछ कहने के पहले ही वो मेरी पीठ से चिपक गया और मेरी चूतड़ो की फ़ांके खुल गई। उसका लण्ड कठोरता से भर उठा। उसने मेरे चूतड़ों को सहलाया और दोनों गोल गोल चूतड़ों को फ़ाड़ कर गाण्ड का छेद खोल दिया। एक थूक का लौंदा मेरी गाण्ड के छेद पर महसूस हुआ और उसका सुपाड़ा जो कि कुछ दर्द से सूज भी गया था उसका स्पर्श हुआ। जोर लगाते ही उसका लण्ड मेरी गाण्ड में था…

मुझे मीठा सा एक अह्सास हुआ। गाण्ड की दीवारों को सहलाता हुआ लण्ड अन्दर उतरने लगा। मुझे बड़ा सुहाना सा लग रहा था। अब उसने धीरे धीरे लण्ड को अन्दर बाहर करना चलू किया और मेरी गाण्ड चुदने लगी थी… मैं निहाल हो उठी थी… फिर मेरी उसने जी भर कर गाण्ड मारी…

गाण्ड मराने की इच्छा पूरी हो गई, गाण्ड मराने का मजा काफ़ी दिनों बाद आया था। उसका गाण्ड मारना मुझे बहुत ही भाया और जब वो झड़ गया तब मैंने उसे एक बार फिर से मेरी चूत की प्यास मिटाने को कहा…

इतनी देर में मेरी चूत फिर से पानी छोड़ने लगी थी। वो बेचारा बुरी तरह फ़ंस चुका था… कुछ ही देर में उसे तैयार करके मैंने अपनी टांगे उठा कर चूत को खोल दिया। आदी को मुझे चोदना ही पड़ा…

उसे भूखी शेरनी जो मिल गई थी… जो उसकी जवानी के रस को पूरा पी जाना चाहती थी। अचानक मुझे लगा मेरा काम तो हो गया है अब इसे रवाना कर देना चाहिये, कही भण्डा फ़ोड़ ना हो जाये… पर इस चूत का क्या करुं साली प्यासी की प्यासी रहती है।

जी भर कर जब मैं चुद चुकी तो उसे मैंने लिपटा कर प्यार किया। वो भावना में बह चला और प्यार की कसमें खाने लगा। उसे शान्त करके मैंने उसे कहा कि यदि तुम मुझे प्यार करते हो तो कल फिर दिन में मुझे चोद जाना। उसने मेरे बोबे दबा कर अलविदा कहा।

मेरे जाल में शिकार फ़ंस चुका था…

कहानी आपको कैसी लगी?
मुझे मेल करे पायल शर्मा के आई डी पर ! Hindi Porn Stories

Antarvasna Stories

दोस्तो, मेरा नाम विजय है Antarvasna Stories और मैं अंबिकापुर का रहने वाला हूँ। आज मैं आप लोगो को अपनी सच्ची कहानी बताने जा रहा हूँ।

बात आज से दो साल पहले की है, मेरी दोस्ती नेट से अंबिकापुर के पास में ही रहने वाली एक लड़की से हुई, वो अंबिकापुर से २५ किलोमीटर दूर रहती थी और रोज सुबह अंबिकापुर के कॉलेज आती थी।

पहले २-३ दिन तो हमने नेट में ही ४-५ बजे तक बात की, उसके बाद मैंने उससे उसका मोबाइल नंबर माँगा जो कि उसने देने से मना कर दिया। फिर मैंने उसे अपना नंबर दिया और कहा कि जब तुम्हें लगे कि हमें फ़ोन से बात करनी चाहिए तुम खुद मुझे कॉल कर लेना !

उसने बोला- ठीक है !

जैसा मैंने सोचा था, दो दिन बाद उसका कॉल आया, उससे पहली बार बात करके ही मुझे लगा कि उसमें चुदाई की बहुत प्यास है। मैंने भी देर ना करते हुये पहले ही दिन उसके साथ फ़ोन सेक्स किया, फिर हम रोज ही फ़ोन सेक्स करने लगे।

कुछ दिनों बाद मैंने उसे बोला- मैं तुमसे मिलना चाहता हूँ !

तो वो पहले तो ना नुकुर करने लगी, फिर मान गईइ। मंगलवार की दोपहर को वो अपने घर में कुछ बहाना करके अंबिकापुर आई, उसने मुझे कॉल करके बोला कि वो एक रेस्टोरेंट में है। मैं जैसे ही रेस्टोरेंट के नीचे पहुंचा, वो मेरी कार में आकर बैठ गई। उसने जींस और टी-शर्ट पहन रखी थी और बहुत ही सेक्सी दिख रही थी। जैसे ही मैने कार टाऊन से बाहर निकाली, वो मुझसे लिपट गई और मुझे पागलों के जैसे चूमने लगी। मैंने भी देर न करते हुए कार को सुनसान जगह में रोक दिया और उसे चूमने लगा।

वो मदहोश होने लगी थी, मैंने मौके का फायदा उठाते हुए उसके मम्मों को कपड़ो के ऊपर से दबाना शुरु कर दिया। उसने पहले बोला कि यह क्या कर रहे हो?

तो मैंने बोला- तुझे प्यार कर रहा हूँ मेरी जान !

तो उसने मुझे दिखाने के लिए बोला- ये सब गलत है !

तो मैने बोला- प्यार में कुछ सही-गलत नहीं होता !

फिर वो मान गई, मैंने उसका टॉप ऊपर कर दिया। उसने सफ़ेद रंग की ब्रा पहनी थी। जैसे ही मैंने उसकी ब्रा खोलनी चाही, उसने मुझे अपनी बाहों में कस लिया और बोली- आज नहीं कुछ दिन सबर करो !

मैंने भी जल्दबाजी नहीं की और उस दिन सिर्फ चुम्बन और मम्मों को दबा के काम चला लिया। फिर तो हम रोज मिलने लगे, वो रोज कॉलेज आती और मैं उसे कॉलेज के सामने से अपनी कार में बैठा के ले जाता और कॉलेज ख़त्म होने के पहले कॉलेज के सामने छोड़ देता था, सुबह ७ बजे से लेकर दोपहर को २ बजे तक हम घूमते रहते थे मैं उसके मम्मे चूसता था वो मेरा लौड़ा चूसती थी। मैं कार चलाता रहता और वो मुझे चलती कार में किस करती और मेरे लौड़े से खेलती रहती थी, पर कभी कार में चुदाई का मौका नहीं मिला।

एक दिन नवरात्र की रात को मैं जगराते में घर से बाहर था, रात को ११ बजे उसका कॉल आया कि प्लीज़, आज रात मेरे घर आ जाओ !

मैंने बोला- तू पागल हो गई है? खुद भी मरेगी और मुझे भी मरवाएगी !

तो उसने बोला- घर में सब सो गए हैं, आज मुझे रात भर जी भर के चोदना ! बस एक बार आ जाओ !

उसकी ऐसी बातें सुन कर मेरा भी लौड़ा खड़ा हो गया। मैंने जाकर वोदका के चार पैग पिए और दो पैग कोल्ड ड्रिंक के साथ मिलाकर पैक करवा के उसके घर ले गया। पहली बार उसके घर जाने में मेरी गांड तो फट रही थी पर सामने वो नंगी भी दिख रही थी। मैने सोचा- आज जो भी हो जाये, आज तो उसको चोद के रहूँगा !

मैं जैसे ही उसके घर पहुंचा, वो मुझसे लिपट गई। मैने बोला- मैने तेरी बात मानी, अब तुझे भी मेरी बात माननी होगी और ये वोदका पीनी पड़ेगी !

वो मान गई, उसने एक ही बार में दोनों पैग वोदका पी लिए। फिर वोदका के नशे में झूमते हुए उसने मेरी जींस में हाथ डाल दिया और मेरा लौड़ा बाहर निकाल के चूसने लगी…..

दोस्तो, रात के दो बज गए हैं और यह कहानी लिखते लिखते मेरा लौड़ा खड़ा हो चुका है, आगे की कहानी आपके विचारों के बाद जारी रहेगी… Antarvasna Stories

हेल्लो दोस्तो, Hindi Porn Stories

मैं आपका प्यारा Hindi Porn Stories मेजस्टी, जिसकी कहानियाँ आप सब बहुत पसंद करते हैं।

शायद इसलिये कि मेरी कहानियों में ज्यादातर लड़की या औरत मेरी करीबी होती है, जैसे मम्मी, बुआ या छोटी बहन।

बहन से याद आया कि मेरी कहानी ¨छोटी बहन के साथ¨ को पसंद करने के लिए सबका शुक्रिया करता हूँ।

इस बार मैं अपनी मम्मी और मौसी की चुदाई से शुरु करता हूँ।

क्योंकि लड़कियों को मेरी मम्मी की चुदाई की कहानियाँ बहुत पसंद हैं तो भला मैं इन कुँवारी नाजुक चूत वालियों का दिल भला कैसे तोड़ सकता हूँ, अब बात छोड़ कहानी शुरु करता हूँ..

बात उन दिनों की है जब मेरी ३५ वर्षीय मौसी अपने ३ बच्चों के साथ सहारनपुर से आई थी। उनकी शादी १६ साल पहले एक सरकारी कर्मचारी की साथ हुई थी।

सपना मौसी अपने फिगर का बहुत ख्याल रखती थी। उनका रंग गोरा, गाल गुलाबी थे, पर चुँचियां बहुत बड़ी नहीं थी। पर हां ! उनकी गांड बहुत जबरदस्त थी, जब वो चलती थी तब मेरा ध्यान अक्सर उनकी गांड पर अटक जाता और वो साड़ी ही पहना करती थी! कसम से वो साड़ी में कयामत लगती थी, उनका साड़ी बांधने का अंदाज भी अलग था।

वो नाभि के काफी नीचे साड़ी बांधती थी और सदा गहरे गले का ब्लाउज पहना करती थी जिससे से वो जब भी झुकती थी तो उनकी दूध डेयरी का नजारा मैं बहुत आराम से देख करता था।

मै अपनी मम्मी, बुआ व बहन की चुदाई करने के बाद काफी चुदक्कड़ हो गया था।

मैने एक रात मम्मी को चोदते हुए मौसी की तारीफ की तो मम्मी ने कहा- साले ! मादरचोद ! मुझे पहले ही पता था कि तू मेरी बहन को बिना चोदे नहीं छोड़ेगा, क्योंकि मैं तुझे उसकी दूध डेयरी में झांकते हुए अनेक बार देख चुकी हूँ और जब भी तू उसके चूतड़ों की तरफ देखता है तो मै समझ जाती हूँ कि तू उसकी गांड भी मारेगा और वो छिनाल भी ऐसा ब्लाउज पहनती है कि सारी चूँचियां बाहर ताकती रहती हैं, रंडी ऊपर के हुक भी नही लगाती…

कई बार तो तेरे पिता जी भी मुझसे उसको सही ढंग से कपड़े पहनने के लिए कहने को कहते।

वो कहते- समझा लो मेरी साली को, वरना बाद में ना कहना कि मैंने उसकी चूँची दबा दी !

और मैं हंस कर टाल देती थी। लेकिन अब तू अपनी मौसी को चोदने को कह रहा है, तू भी बहुत हरामी हो गया है।

आप सब जानते ही होंगे कि मम्मी को चुदवाते वक़्त गालियों से बात करना बहुत अच्छा लगता है।

तभी मैं जो इतनी देर से मम्मी की बकबक सुन सुने जा रहा था, उनके बड़े-2 ब्लैडर जैसे स्तन दबाते हुए बोला- तो साली हर्ज ही क्या है जो अपनी बहन को मेरा लौड़ा खिला देगी तो उसको भी तेरे जैसे मजा आ जाएगा, वो तो वैसे भी तुझ से छोटी है और वैसे भी मौसा जी ज्यादातर घर से बाहर ही रहते हैं, उसकी चूत भी प्यासी ही रहती होगी। कसम से जब मेरा लौड़ा उसकी टाइट चूत में जायेगा तब बहुत मज़ा आयेगा। मम्मी प्लीज़ ! एक बार चुदवा दो न !

तब मम्मी ने कहा- अच्छा-2 अब अभी तो मेरी चुदाई कर !

उसके बाद मैने मम्मी की चूत को चाट कर उनकी बुर में बहुत ही ज़ोरदार ढंग से अपना पूरा 9″ का लौड़ा धंसा कर बहुत बेरहमी से पेला।

मम्मी ने थोडी देर बाद ही चूत से पानी छोड़ दिया। फ़िर मैने एक बार पलट कर उनकी गांड मारी जिससे मेरी माँ बहुत थक गई और फ़िर हम दोनों सो गये।

दूसरे दिन जब मैं नहा रहा था तब मैंने मम्मी की आवाज़ सुनी, वो सपनी मौसी से कह रही थी- सपना तुम उदास लग रही हो ?

तो मौसी ने न-नुकर करने के बाद बताया- क्या बताऊँ दीदी ! आजकल रिंकू के पापा मेरी ओर बिल्कुल भी ध्यान नहीं देते, पहले वो मेरे साथ लगभग रोज़ ही सम्भोग करते थे(इतने में मैं नहा कर कमरे मे आ गया था)।

फ़िर माँ ने कहा- मैं तेरी परेशानी समझ गई, तू यही कहना चाह्ती है कि आनंद तेरी ठीक तरह से चुदाई नहीं करता। पर इसमें परेशान होने की कोइ बात नही क्योंकि वो तुम्हारे लिए ही काम कर रहा है, अब सारा वक्त तो तेरी चूत मारने में नहीं लगा सकता। चल कोई बात नहीं ! आज मैं तेरी प्यास बुझा दूंगी !

तब मौसी ने कहा- किससे? क्या मोमबत्ती से?

तो मम्मी बोली- नहीं पूरे 9″ का लौड़ा घुसवाउंगी आज तेरी चूत में।

मम्मी की बात सुन कर मैं खुश हो गया।

थोड़ी देर बाद ही मैने सुना कि मम्मी मौसी से बोली- देख सपना, मैं तुझे चुदवा तो दूंगी, पर एक शर्त है !

मौसी बोली- वो क्या?

मम्मी बोली- तुझे चूत और लंड की बातें खुल कर किसी रंडी की तरह करनी होंगी !

मौसी मान गई।

मौसी ने पूछा- आप मुझे चुदवाओगी किससे?

मम्मी ने कहा- यह तो रात को ही पता चलेगा।

रात होते सबके सोने के बाद मम्मी मेरे कमरे में आई और मेरे होंठों पर किस करते हुए बोली- चल मेरे चोदू राजा ! आज अपनी मौसी की चूत भी चेक कर ले, तूने ऐसी माँ कभी नहीं देखी होगी जो खुद के साथ अपनी बहन को भी चुदवाए !

तब मैंने कहा- मम्मी, मौसी को बता दिया कि उसकी चूत कौन मारेगा?

मम्मी बोली- बेटा, अभी नहीं बताया ! तू जब करेगा तो खुद ही देख लेगी।

मैं बोला- उसको बुरा नहीं लगेगा?

मम्मी ने कहा- अरे, बुरा कैसे मानेगी? साली की बुर में खुद ही कीड़े काट रहे हैं, और जब कोई औरत एक बार चुदाई कराने का सोचती है तो फ़िर वो किसी से भी चुदवा सकती है।

फ़िर मैं मम्मी के साथ उनके कमरे में चला गया। तब मौसी मम्मी के बेड पर बैठी थी और मुझे देख कर संभल कर बैठ गई।

मम्मी बोली- देख ले अपने चोदू को … आज यही तेरी चूत मरेगा !

यह सुनकर मौसी का मुख लाल हो गया।

वो झपाक से बोली- हाय दीदी ! मैं भला अपने भांजे से कैसे सम्भोग कर सकती हूँ?

तब मम्मी ने कहा- जब मैं अपने सगे बेटे से चुदवा सकती हूँ और इसको अपने सामने ही अपनी बेटी की चूत भी मरवाने का मज़ा दे चुकी हूँ, तब तुझे क्या मुश्किल है?

मौसी बोली- हाय दीदी, आप कितनी निर्लज्ज हो, भला अपने बेटे से भी कोई चुदवाता है।

मम्मी बोली- तू बोल- तुझे चुदवाना है या मैं अपनी चूत की खुजली मिटा लूँ तेरे सामने चुदवा कर ! साली नाटक करती है !और इससे तो घर की बात घर में ही रहेगी।

मौसी के नखरे दिखाने पर मम्मी ने उसकी साड़ी के ऊपर से ही उसकी बुर के पास चिकोटी काटते हुए कहा- रानी एक बार लंड घुसवा लेगी तो ससुराल जाना भूल जाएगी।

यह बोलते हुए मम्मी ने मौसी की साड़ी उतार दी, अब वो सिर्फ़ ब्लाउज़ और पेटीकोट में रह गई। अब मैं बर्दाश्त से बाहर हो रहा था, मैंने मम्मी की चूँची दबाते हुए कहा- पहले एक बार आप चुदवा लो, फ़िर मौसी को देख लेंगे !

मम्मी ने कहा- अब तू अपनी मौसी को ही चोद ! इतने दिनों से तूने रट लगा रखी थी।

मम्मी ने मेरी लुंगी झटके से खोलते हुए मेरा अधखड़ा लंड हाथ मे लेकर मौसी की तरफ़ बढ़ाते हुए उसे हाथ में लेकर लंड की गर्मी महसूस करने को कहा और बोली- साली ले और जल्दी से इसे चूस !

मम्मी ने अपने सारे कपड़े उतार दिए।

मौसी अभी भी शरमा रही थी लेकिन मम्मी ने उसके कान के पास चुम्बन लेते हुए उसे शर्म छोड़ने को कहा।

मैं झट से मौसी की चूंची दबाने लगा … वाह … बहुत मज़ेदार थी उनकी चूंचियां ! बिल्कुल टाईट ।

उनके गज़ब के चुचूकों को मैं हाथों से रगड़ रहा था, मम्मी पीछे से उसकी पीठ पर अपनी छाती रगड़ रही थी।

मौसी ओह…… ओफ़्फ़्फ़्… की सिसकियां निकाल रही थी। तब मैंने अपना हाथ साईड से उनकी पेटीकोट में डालकर धीरे से नाड़ा खोल दिया और पेटीकोट निकाल दिया।

अब मौसी बिल्कुल नंगी थी, पर उसने दोनों हाथों से अपनी बुर को छिपा लिया था।

मम्मी ने जल्दी से पीछे से उसके दोनों हाथ पकड़ लिए और मुझसे बोली- राज ! चल अब अपनी मौसी को चूत चाटने का मज़ा दे !

ये सुन कर मैं मौसी की बिना बालों वाली फ़ूली हुईं गुलाबी चूत पर हाथ फ़ेरने लगा, उसकी फ़ांके बहुत ही सुंदर थीं।

मैं अपना हाथ फ़ेरने लगा और मेरा हाथ अपनी चूत पर पाकर मौसी चिहुंक पड़ी और उसके मुँह से एस्स्स्स …स्स्स सिसकारियां निकलने लगीं। तभी मैंने अपने हाथों से उसकी फांकों को फ़ैला कर उसकी चूत का करीब से नज़ारा देखा।

उसके अंदर का गुलाबी भाग बहुत ही खूबसूरत था और उसकी भीनी-2 सुगंध आई।

मैंने जैसे ही अपनी ज़बान निकाल कर मौसी की चूत पर रखी, वो एकदम से उछल पड़ी और आईईई…एस्स्स्स्स हाय्य्य्य राज …उफ़्फ़्फ़्फ़्…क्या करते हो? बहुत गुदगुदी होती है !

तभी मौसी ने मेरा सर पकड़ कर अपनी चूत पर मेरा मुँह दबाने लगी।

कुछ देर चाटने के बाद मैंने उसकी चूत में अपनी ज़बान घुसा दी। वो ज़ोर से फ़िर उछल पड़ी … हाय राम ! दीदी यह राज कितना गंदा है … उफ़्फ़्फ़्फ़ बहुत मज़ा आ रहा है !

मम्मी बोली- अभी तो ये सिर्फ़ तेरी चूत को चूस और चाट ही रहा है पर जब अपने खड़े लंड के झूले पे बिठाकर झुलाएगा, तू फिर देख्ना कितना दम है इसके लंड में !

और यह कह कर मम्मी ज़ोर-2 से मौसी मे स्तन और चुचूक मसलने लगी … कभी अपने होंठों से मम्मी उसकी चूँची को चूस रही थी।

अब तो मौसी के बदन मे आग लग चुकी थी और वो सारी लाज-शर्म भूल कर बोली- आओ मेरे चोदू राज …॥ आईईईइ…इस्स्स्स इस तरह का मज़ा तो तेरे मौसा ने भी कभी नहीं दिया आह्ह्ह्ह्हह्ह,……

और वो अपनी चूत उचकाने लगी और मैं भी उनकी चूत की दरारों को फ़ैला कर उनकी टांगें अपने कंधों में फंसा कर बहुत ही ज़ोरदार तरीके से उसकी चुसाई कर रहा था …

मेरी छिनाल मम्मी ! आज तो तेरी बहन की चूत चाटने मे बहुत मज़ा आ रहा है ! मैं बोला।

मम्मी बोली- मादरचोद अब जल्दी से इसकी चूत से पानी निकाल ! इतनी देर से घुसा पड़ा है।

मैंने कहा- इसकी चूत इतनी चुदी नहीं है और आज पहली बार तो इसकी चुसाई हो रही है, भला इतनी जल्दी पानी कैसे छोड़ेगी ! अब तेरी बात तो अलग है, तेरा तो भोसड़ा बन चुका है !

इससे मम्मी तप गई और मेरे सर पे एक चपत मारते हुए बोली- अब मेरी चूत मारना ! तेरी गांड पे लात मारूंगी।

इतने में मौसी बोली- बात ही करते रहोगे या मेरा पानी भी निकालोगे, मैं झड़ने वाली हूँ… जल्दी… जल्दी जबान चलाओ ! मेरी बुर में ज़ोर से धक्का मारो …

कहते हुए अपनी चूत को उचकाने लगी और उनके मुँह से उईईईईईईईई आअ ह्ह्ह्ह्ह्ह, जल्दी करो…राज्ज्ज्ज…

और तभी मौसी ने पानी छोड़ दिया। उनका ढेर सारा रस मेरे मुँह पे पड़ गया, मैने बहुत ही चाव से सारा कामरस पी लिया।

झड़ने के बाद मौसी एक तरफ बेड पर गिर गई। उसके बाद मैंने अपनी मम्मी की गांड मारी और मौसी को उस रात मैंने चार बार चोदा।

उसका ज़िकर अगली बार करुंगा …

अब इज़ाज़त दीजिए…पर हर बार की तरह मुझे आपकी मेल का इंतज़ार रहेगा… Hindi Porn Stories

Antarvasna

मेरा नाम जय है, मैं Antarvasna पचमढ़ी का रहने वाला हूँ, मेरी उम्र 26 वर्ष है। मैं बहुत ही मिलनसार और सेक्सी हूँ। मेरा लंड काफी बड़ा और आप कह सकते हैं कि बस मस्त है। मेरे दोस्तों का कहना है- सिंधन की चूत, पंजाबन का दूध, हिमालय की ठण्ड और जय का लंड इनका कोई मुकाबला नहीं है।

मैं आज से 5 साल पहले भोपाल आ गया क्योंकि मुझे भोपाल में अच्छा लगता है। मैंने पंचशील नगर में कमरा किराये पर लिया। नीचे मकान मालिक और ऊपर मेरा कमरा, मेरे बाजू में एक और किरायेदार, जो ड्रायवर था, पति पत्नी रहते हैं। मेर कमरे में बाथरूम नहीं था तो मैं मकान मालिक का बाथरूम इस्तेमाल करता हूँ और मेरे कमरे की खिड़की से बाथरूम की झलक देखी जा सकती है जो मेरा टाइम पास हो गया है।

मालिक बैंक मैंनेजर है, उसके दो लड़के हैं बड़ा बाहर ही रहता है, छोटा लड़का मेरी उम्र का, नाम राकेश है, नशा भी करता है। उसके बाद सबसे छोटी उसकी लड़की मीनू जो स्कूल में पढ़ती है, रंग गोरा, भरपूर बदन, गोल-गोल मोटी गांड, बड़े-बड़े बोबे और मेरी सबसे बड़ी कमजोरी!

मैं भोपाल आकर घर को बहुत याद करता था क्योंकि वहाँ खूब चुदाई करता था। यहाँ कोई जुगाड़ ही नहीं, बस मुठ ही मारते रहो।

जब भी मैं नहाने जाता, नंगा होकर खूब नहाता और मीनू की ब्रा और पेंटी से खूब खेलता। उसे पहनकर नहाता और कभी कभी उसे लंड में फँसाकर मुठ मारता। पैसे की मेरे पास कमी नहीं है, घर से खूब आते रहते हैं। मैंने मकान मालिक को बताया कि मैं पढ़ाई करता हूँ। कुछ दिन ऐसे ही गुजरते गए, कभी कभी मीनू को, कभी उसकी माँ को मैं बाथरूम में देखता, पूरा तो दिखता नहीं था पर जितना दिखता था मेरे मौसम बनाने के लिए काफी था।

मैं होम थियेटर लाया। मीनू को गाने सुनने का बहुत शौक था। जब भी उसके पसंद का गाना बजता, वो ऊपर मेरे कमरे के पास घूमती रहती और गाने सुनती या बाजू वाली भाभी के पास बैठती। पड़ोस में एक ही पड़ोसी के कारण मेरी उनसे अच्छी दोस्ती हो गई। मैं भाभी के कमरे में और कभी भाभी मेरे कमरे में घंटों बातें करते।

मैंने धीरे धीरे भाभी से भैया को न बताने की कसम देकर शादी के पहले उनके दोस्त से उनकी चुदाई की पूरी कहानी पूछ ली।

भाभी ने मुझसे पूछा तो मैंने कहा- अभी कोई मिली नहीं!

भाभी से मेरी खूब गन्दी गन्दी बातें होने लगी। मैंने सोचा क्यों न भाभी को ही चोद लिया जाये।

एक दिन मैंने बातें करते करते भाभी के बोबे दबा दिए। भाभी ने ज्यादा कुछ नहीं कहा तो मैं भैया के जाने के बाद खूब बोबे दबाता और भाभी को गर्म करता।

एक बार मैंने भाभी के बोबे खूब दबाये और उसकी साड़ी के अन्दर जबरदस्ती उसकी चूत में ऊँगली डाल दी। भाभी की चूत गीली हो गई। मैंने भी ऊँगली अन्दर-बाहर की और भाभी की चूत के चने को रगड़ दिया तो भाभी तो कोयल जैसे कूकने लगी। मैंने सोचा- बेटा जय! आज तेरा उपवास खुल गया!

मैंने अपना लंड बाहर निकाला और भाभी को पकड़ा दिया।

भाभी ने कहा- यह तो तुम्हारे भैया के लण्ड से भी ज्यादा पहलवान है।

रगड़ा पट्टी में भाभी झड़ गई और हिला हिला कर मेरा मुठ मार कर वीर्य निकाल दिया और बोली- यह तो रो रहा है।

मैंने 5 मिनट तक कुछ नहीं कहा और फिर से लंड खड़ा करके बोला- भाभी, लो यह लड़ने के लिए तैयार है! अब जीत कर बताओ!

भाभी बोली- तुमसे क्या जीतना, मैं तो तुमसे हारना चाहती हूँ, मगर यह मैं नहीं कर सकती क्योंकि मेरे पेट में बच्चा है।

मैं उदास हो गया।

मुझे देखकर भाभी ने मेरा लंड पकड़कर मुँह में भर लिया और चूसने लगी। मैं तो पागल सा हो गया। कभी किसी ने मेरा लंड नहीं चूसा था। मेरे मुँह से सिसकारी निकलने लगी। मैंने लंड छुड़ाना चाहा पर भाभी कहाँ मानने वाली थी। पूरी आइसक्रीम चूस कर ही दम लिया। लेकिन लंड की भूख तो चूत से ही मिटती है, भाभी के गर्भवती होने के कारण सब लफड़ा हो गया।

मैं अपने कमरे में गया और सो गया।

दूसरे दिन भैया के जाते ही भाभी से गपशप चालू हो गई। मैंने कहा- भाभी, मीनू तुम्हारे घर आती है, उससे दोस्ती करा दो!

भाभी ने कहा- यह तो मेरे बाएँ हाथ का खेल है।

भाभी ने अगली दोपहर मीनू को घर पर बुलाया और मुझ से मिलाया। मीनू से मेरी दोस्ती की बात कही।

उसने सोच कर बताने को कहा और अगले दिन हाँ कर दी।उसकी हाँ सुनते ही मैं मीनू की चुदाई के सपने देखने लगा। कभी उसको स्कूल से घुमाने ले जाता, मैं उसे चूमता तो उसे बुरा लगता।

अब हम दोनों हमारे ही कमरे में मिलने लगे। मीनू का जन्मदिन आया, वो सुबह ही मेरे कमरे में आई और मुझे चूम लिया।

मैंने भी उसे बर्थ डे की बधाई दी और पूछा- तुम्हें क्या तोहफ़ा चाहिए?

मीनू ने कहा- तुम जो भी प्यार से दोगे, मैं ले लूंगी।

मैंने फिर से पूछा, उसने फिर वही कहा।

मैंने कहा- अपनी बात से मुकरोगी तो नहीं?

उसने कहा- बिल्कुल नहीं!

मैंने भी देर न करते हुए कहा- मैं अभी गिफ्ट देना चाहता हूँ।

मैंने मीनू हाथ पकड़कर खींचा और बिस्तर पर पटक लिया। वो सुबह सुबह नहा कर आई थी, बाल खुले थे, टॉप-स्कर्ट पहने हुए थी।

मैं उसके ऊपर चढ़ गया और उसके बोबे पहली बार दबाये।

मीनू सिसककर बोली- यह क्या कर रहे हो?

मैंने कहा- गिफ्ट दे रहा हूँ।

इस पर मीनू बोली- ऐसे भी गिफ्ट देते हैं?

मैंने कहा- अभी तुम ही ने कहा था कि मैं बुरा नहीं मानूंगी, जो भी देना चाहो, दे देना।

मैं तो सो कर उठा था, तो सिर्फ चड्डी में था। मेरा सामान तो सुबह सुबह ही टन्ना गया।

मैंने समय ना गंवाते हुए उसके बोबे दबाना जारी रखा और मुँह में जीभ डालकर किस करने लगा। मीनू दो ही मिनट में अंगड़ाई लेते हुए मेरा साथ देने लगी। बोबे दबाते हुए उसकी टॉप हटा दी, ब्रा के हुक भी खोल दिए और स्कर्ट खींच कर अलग कर दी। मीनू सिर्फ पेंटी में गजब लग रही थी।

उसके बोबे के गुलाबी-गुलाबी चुचूकों को मैंने अपने मुँह में ले लिया और चूसने लगा। मीनू कराहने लगी। चूसते चूसते उसकी पेंटी में ऊँगली डाली, उसकी झांटों में उन्गली घुमाते हुए मैंने अचानक उसकी चूत में घुसा दी।

मीनू उन्ह आंह आइंह कर रही थी, उसकी चूत से चिकना चिकना पानी निकल रहा था।

मैंने चड्डी अलग की और मीनू की चूत में लंड रगड़ने लगा। रगड़ते रगड़ते उसके कन्धों को पकड़कर ज्योंही लंड मीनू की चूत में एक ही झटके में आधा घुसा, मीनू चिहुंक उठी और धक्का देने लगी। मैंने भी लंड चूत की रगड़ा पट्टी चालू रखी उसकी चूत को घिस डाला, पूरा लण्ड अन्दर बिठा दिया।

अब मीनू मुझे कस कर पकड़े थी और मैं उसे बस चोदे जा रहा था। वो आइया उम्नह आहा ओई कर-कर के चुदवा रही थी।

मैंने उसको उस दिन दो बार चोदा, बड़ा मज़ा आया पर एक बात अखरी कि मीनू की चूत से खून नहीं निकला। मेरे पूछने पर भी वो अंजान बनी रही। खैर मुझे क्या!

उस दिन के बाद में दो साल तक जब भी मौका मिलता, मीनू को खूब चोदता!

भाभी को चुदाई की मिठाई भी खिलाई।

पर अब मीनू की पिछले साल शादी हो गई है और अब मैं भाभी को चोदकर काम चला रहा हूँ।

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