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Hindi sex stories

Hindi sex stories में आपने जाना था कि दीपा जीजी मुझसे चुदने को राजी हो गई थी.. और उसने अपना कुरता उतार दिया था.

अब आगे:

मैं उसको देखता ही रह गया. उसकी बगलों में एक भी बाल नहीं था, शायद संडे को ही उसने झांटों के साथ बगल के भी बाल साफ़ किये थे.

मैंने अपना दाहिना हाथ उठा कर उसकी एक चूची पर रख दिया और ब्रा के ऊपर से दबाने लगा. अपने दूसरे हाथ को मैं उसकी गांड पर फिरा रहा था. दीपा का चेहरा चुदास से सुर्ख लाल हो गया था और उसके मुँह से सिसकारियां निकल रही थीं.

वो ‘अह्हह्.. अह्हह्.. ओह्हह्ह..’ कर रही थी.

इस समय मेरे दोनों हाथ उसकी चूचि और गांड मसलने में व्यस्त थे और होंठ उसके होंठों को चूस रहे थे.

मैंने उसको पलंग पर लिटा दिया. मैं उसके ऊपर चढ़ गया और उसकी कमर के नीचे हाथ ले जाकर सर को ऊपर उठाकर उसके होंठ चूसने लगा.

मैं इतना जोश में था कि कई बार उसने कहा कि जरा आहिस्ता चूसो.. मेरा दम घुटता है.

कई बार तो एक दूसरे के होंठ चूसते चूसते हम दोनों के मुँह से ‘गूऊ.. न.. गू..’ की आवाज निकल जाती.

अब मैं पीछे से उसकी ब्रा का हुक खोलने लगा था और थोड़ी सी मेहनत के बाद उसे भी खोल दिया. दीदी की ब्रा का हुक खुलते ही उसकी चूचियां एकदम से ऊपर को उछल पड़ीं, मानो उनको जबरन दबा कर कैद किया गया था.. और अब उनको आजादी मिल गई हो.

उसकी चूचियां बहुत ही गोरी चिट्टी और एकदम सख्त व तनी हुई थीं. निप्पल बाहर को उठे हुए और एकदम तने हुए थे. जैसे ही मैंने एक हाथ से उसकी चूचि मसलनी शुरू की और दूसरी को अपने मुँह से चूसने लगा, तो दीपा की हालत खराब हो गई और वो जोर से कसमसाने लगी.

अब उसके मुँह से ‘स्ससीईई… अह्हह ह्हह.. ओह्ह ह्ह्ह् मर्रर्र.. माँआआआअ मर्रर्र गईई रेईई..’ आवाजें निकलने लगीं.

इधर मेरा लंड अभी तक पेंट में ही कैद था और उछल कूद कर रहा था. मेरा लंड उसकी सलवार के ऊपर से ही उसकी चूत पर टक्कर मार रहा था.

मैंने मुँह से उसकि चूचि चूसते हुए और एक हाथ से चूचि मसलते हुए, दूसरे हाथ से उसकी सलवार का नाड़ा खोल दिया. उसने भी कोई देर नहीं की तथा अपनी गांड ऊपर करके मुझे अपनी सलवार उतारने में मदद कर दी.

अब वो सिर्फ पेंटी में ही थी और उसने सफ़ेद रंग की ही पेंटी भी पहन रखी थी, जो कि चूत के ऊपर से कुछ गीली हो रही थी.

लगता था कि उसकी चूत ने उत्तेजना के कारण छोड़ना शुरू कर दिया था. जैसे ही मैंने उसकी चूत को पेंटी के ऊपर से सहलाना शुरू किया तो वो कांपने सी लगी और मस्ती में आकर बोली कि मुझको तो नंगी कर दिया है साले और मेरा सब कुछ देख लिया है लेकिन तुम अपना लंड अभी तक पेंट में छुपाये हुए हो.

उसने ये कह कर मेरे पेंट की ज़िप खोल दी और चूँकि मैं पेंट के नीचे चड्डी नहीं पहनता हूँ, तो मेरा लंड एकदम फ़नफ़नाता हुआ बाहर निकल आया.

मेरा लंड देखते ही दीपा एकदम मस्त हो गई और बोली- हाय राम तुम्हारा लंड तो काफी लम्बा और मोटा है.. ये तो लगभग 8 इंच लम्बा होगा और 3.5 इंच मोटा होगा. वाह तेरे साथ तो बहुत ही मज़ा आएगा. मैं तो तुम्हें अभी तक बच्चा ही समझती थी.. मगर तुम तो एकदम जवान हो, एक खूबसूरत लंड के मालिक हो.. मुझे लगता है कि तुम बहुत अच्छी तरह से चोदने की ताकत रखते हो.

अब उसने मेरे सारे कपड़े एक एक करके उतार दिये और मेरे तने हुए लंड को सहलाने लगी.

मेरे लंड का सुपारा एकदम से लाल हो रहा था और काफी गरम था.

अब मैंने भी उसकी चूत पर से उसकी पेंटी उतार दी और देखा कि आज उसकी चूत पर एक भी बाल नहीं है और एकदम सफ़ाचट चुत है.

मैंने कहा कि जीजी उस रोज तो तुम्हारी चूत पर बहुत झांटें थीं और आज एकदम साफ़ है.. किसी हीरे की तरह चमक रही है.
मेरी इस बात पर वो हंस पड़ी और बोली कि मैं तुम्हारी तरह नहीं हूँ, जो अपनी झांटें और बगलों का जंगल साफ़ ही ना करे.. ये मुझको अच्छा नहीं लगता. तुम भी ये सब साफ़ रखा करो, नहीं तो जूँए हो जाएंगे.
मैंने कहा- जीजी मैंने तो आज तक अपनी झांटें और बगलों के बाल साफ़ ही नहीं किये हैं. मुझे डर लगता है कि कहीं ब्लेड से कट ना जाए.
इस पर वो खिलखिला कर हंस दी और फिर से बोली- अगर ऐसी बात है तो तेरी बगल के बाल और लंड से झांटें मैं शेव कर दूँगी. और हां.. एक बात और सुन कि अब तू मुझे बार बार जीजी ना कहा कर.. अब मैं तेरी जीजी नहीं रही हूँ, तेरी माशूका हो गई हूँ. इसलिए अब तू मुझको डार्लिंग कहा कर.
मैंने कहा- अच्छा ठीक है माय डार्लिंग

ये कह कर मैंने एक उंगली उसकी चूत के छेद में डाल दी.

दीपा की चुत का छेद काफी गीला था और एकदम चिकना हो रहा था. उसकी चूत एकदम गुलाबी थी.. पानी निकलने के कारण काफी चिकनाहट हो गई थी. मैंने उसकी चूत में उंगली अन्दर बाहर करनी शुरू कर दी और कभी कभी मैं उंगलियों के बीच में उसके दाने को पकड़ कर भी मसल देता था.. जिससे उसके मुँह से मादक सिसकारी निकल रही थी.

वो ‘आह्हह.. आह्हह्ह.. हैईई.. हैईई.. उफ़्फ़.. उफ़्फ़..’ कर रही थी और कह रही थी कि जरा जोर से उंगली को अन्दर बाहर कर.

मैं और तेजी के साथ चुत में उंगली करने लगा. उसके मुँह से सिसकारियों की आवाज बढ़ती ही जा रही थी और वो लगातार ‘उफ़्फ़.. उफ़्फ़.. ओह्ह.. हाय मर गई..’ कर रही थी.

अचानक उसकी कमर तेजी के साथ हिलने लगी और वो अटक अटक कर बोलने लगी- हाय.. आआहह.. और्र.. तेज्ज.. अन्दर बाहर करो.. हैईईई मेर्ररा रस निकला.. आआआआ.. निकलाआआअ..

ये कह कर दीपा शांत सी हो गई और ढीली पड़ गई. मैंने देखा कि उसकी चूत में से पानी निकल रहा था, जिससे चादर गीली हो गई थी.

मैंने कहा- जीजी आपका तो निकल गया.
तो बोली- हां मैं झड़ गई हूँ.
फिर थोड़ा दिखावटी गुस्से से बोली कि मैंने अभी क्या कहा था.. भूल गया? कि तू मुझको अब जीजी नहीं, बल्कि डार्लिंग कह कर बुलाया कर और तू फिर भी जीजी ही कहे जा रहा है.
मैंने कहा- सॉरी जीजी… उफ़.. नहीं डार्लिंग.

कुछ देर हम ऐसे ही मज़ा लूटते रहे और हम दोनों की कामुक छेड़छाड़ चलती रही जिससे इस बीच वो एक बार और झड़ चुकी थी.

वो अभी तक मेरा लौड़ा सहला रही थी, जिससे अब रुक पाना मेरी बर्दाश्त से बाहर हो रहा था.

वो भी कहने लगी कि विक्की और मत तड़पाओ और अपना लौड़ा मेरी चूत में पेल ही दो.

ये सुन कर मैं उसकी टांगों के बीच में आ गया और उसकी गांड के नीचे एक तकिया रख दिया, जिससे उसकी चूत ऊपर को उठ गई. अब मैंने उसकी टांगों को चौड़ा करके घुटनों से मोड़ कर ऊपर को उठाया और अपने लंड का सुपारा उसकी चूत के छेद पर रखा.

उसकी चुत पर टोपा लगते ही मुझे लगा कि मैंने लंड किसी भट्टी पर रख दिया हो. उसकि चूत इतनी गरम थी और किसी हलवाई की भट्टी की तरह तप रही थी.

मैंने अपनी कमर को उठा कर एक धक्का मारा और मेरे लंड का सुपारा उसकी चूत में घुस गया.

उसकी मुट्ठियाँ भिंच गईं. इसके बाद मैंने एक बहुत जोरदार धक्का लगाया, जिससे मेरा लंड 5-6 इंच तक उसकी चूत में घुस गया. इसी के साथ उसके मुँह से एक तेज सिसकी निकली और वो बोली कि आह मार दिया साले.. धीरे कर.. तू तो बड़ा बेदर्दी है.. एक ही धक्के में अपने लंड को मेरी चूत में घुसाना चाहता है. साले मेरी चूत फाड़ने का इरादा है क्या.. ज़रा आराम से कर.. तेरा लंड बड़ा है ना… इसलिए दर्द होता है.

लेकिन मैंने उसकी एक भी नहीं सुनी और एक और धक्का तेजी के साथ लगा दिया. अब सारा का सारा लंड उसकी चूत में घुस गया था.

वो हल्की सी आवाज में चिल्लाई कि हयई.. अर्ररेय मर गई ऊऊऊ मेर्ररि अम्ममाआअ.. मेरीईई चूऊत फाआआड़ दीईई.. कमीने..

उसकी चीख से मैं एकदम से डर गया कि कुछ गड़बड़ ना हो गई हो.

मैंने पूछा कि ज्यादा दर्द हो रहा हो तो मैं निकाल लूँ?
वो बोली- अरे नहीं.. ज्यादा तो नहीं मगर तूने एकदम से अन्दर कर दिया है न.. इसलिए थोड़ा सा दर्द हो रहा है. तेरा लंड काफी लम्बा और मोटा है ना.. इसलिए मेरी चुत को दर्द हुआ.. अभी कुछ देर बाद मजा आने लगेगा. अब तो मेरे ऊपर लेट जा और चूची चूस.
मैंने ऐसे ही किया और उसकी चूची चूसने और मसलने लगा. कुछ देर में ही उसे मज़ा आने लगा और अपनी गांड हिला हिला कर ऊपर को उठाने लगी.
दीदी बोली- आह.. अब धक्के लगा और मेरी चुत की चुदाई चालू कर.

मैंने अपनी कमर और चूतड़ों उठा उठा कर जोर शोर से धक्के मारने शुरू कर दिए.

थोड़ी ही देर में उसके मुँह से अंटशंट आवाजें निकलने लगीं.
वो बोल रही थी- अय..यईईए.. र्रर स्सछह्ह.. मुझेय.. जोऊओर जोऊर से चोद साले.. फाड़ दे मेर्रर्इ फुद्दी.. ऊऊओह उफ़्फ़फ़ मेर्र रस फिरर्रर से निकलने वालाआ.. है.. हाय.. और जोओर्र से..

ये कह कर दीपा दीदी तेजी से कमर हिलाने लगी और ‘स्स्सीईईई.. इस्सस्स्ई..’ करती हुई झड़ गई.

मेरा लंड एकदम गीला हो गया था और काफी चिकना हो गया था, जिससे लंड दीदी की चुत से 2-3 बार बाहर भी निकल गया.

अब मैंने धक्के लगाने की स्पीड तेज कर दी थी. मुझको थोड़ी मस्ती सूझी और मैंने धक्के लगाते लगाते एक उंगली पर उसका पानी लगाया और अचानक उसकी गांड के सुराख पर फेरते हुए, मैंने उंगली को उसकी गांड के अन्दर कर दिया.

वो एकदम दर्द से चीख उठी और बोली कि आह.. साले क्या शैतानी कर रहा है अरे उधर नहीं.. मुझको दर्द होता है.. मेरी गांड से उंगली को फ़ौरन बाहर निकालो.

मैंने पूछा कि क्या कभी किसी से गांड भी मरवाई है? मैं तुम्हारी गांड मारना चाहता हूँ.

इस पर दीपा ने कहा कि नहीं मैंने अपनी गांड कभी नहीं मरवाई है और ना ही तुझसे मरवाऊंगी.. क्योंकि मैं गांड मारने को सही नहीं मानती हूँ.
मैंने कुछ नहीं कहा, बस उसकी चूत की चुदाई का मजा लेता रहा.
फिर उसने पलट कर पूछा कि क्या तुमने किसी से अपनी गांड मराई है या किसी की गांड मारी है?

तो मैंने ‘नहीं..’ में जवाब दिया. इस पर उसने कहा कि विक्की तू तो बहुत ही सुन्दर और स्मार्ट है.. तुझे तेरे दोस्तों ने कैसे छोड़ दिया.. क्योंकि मुझे मालूम है लड़के आपस में एक दूसरे की गांड ही मार कर काम चलाते हैं.

मैंने कहा कि मैं सेक्सी ज़रूर हूँ लेकिन मैं ना तो किसी लड़के की गांड मारता हूँ और ना ही मरवाता हूँ. मैं तो बस चूत ही चोदना चाहता हूँ. हां आज तुम्हारी गांड पर दिल आ गया है, इसलिए गांड मारना चाहता हूँ.

दीपा बोली कि अभी तक तो मैंने गांड कभी नहीं मरवाई है.. यदि कभी मरवाने कि इच्छा हुई तो तेरे से ही मरवाऊंगी.

हम चुदाई के साथ गरम बातें कर ही रहे थे कि वो फिर से चुदासी हो गई और अंटशंट बकने लगी- आह्ह.. आआ और जोओर्र से चोद भोसड़ी के.. मेरा रस फिर से निकाल दे.

वो ऐसे ही कहती रही और इधर मेरे भी धक्कों की गति बढ़ती ही जा रही थी और मैं पसीने पसीने हो रहा था.

अब मेरे मुँह से भी अंटशंट निकलने लगा- आह्ह.. आअह.. क्यों नहीं.. साली रंडी.. ईईइ.. आह.. मैं आज ही तुम्हारी चूत को चोद कर भोसड़ा बना देता हूँ कुतिया.. साली.. ले मेरे लंड का पानी ले.. हैईईईई मेरा आने वाला है..

ये कहते हुए मैं फ़ुल स्पीड से धक्के मार रहा था, तभी मुझे लगा कि मेरे लंड से कुछ बाहर आ रहा है. मैंने हांफ़ते हुए उसे कस कर पकड़ लिया और जोर जोर से उसकी चूचि चूसने लगा.

उधर दीपा भी मादक आवाजें निकाल रही थी- हायऐई ईईईइ मैं गईईई फिर्र सेययई.. मैं झर्र रहीईईई हूँऊऊ.. ओ मेरी माँआआन.. मेरा रस निकल रहा है.. आह..

ये कहते कहते उसका पूरा बदन एक बार फिर से अकड़ गया और वो भी मेरे साथ साथ झड़ गई.

उसने झड़ते हुए अपने दांत मेरे कंधे में गड़ा दिए और मेरे मुँह से एक चीख निकल गई- साली कुतिया काट लिया..

वो जोर से हंस पड़ी.

मैं काफी देर तक ऐसे ही उसके ऊपर पड़ा रहा. फिर हम दोनों उठकर बाथरूम में गए तो उसने मुझे बाहर जाने के लिए कहा, पर मैंने मना कर दिया और कहा कि डार्लिंग मैं तो यहीं रहूँगा और तुमको पेशाब करते हुए देखूँगा.

पहले तो वो मना करती रही, लेकिन वो फिर मान गई और मेरे सामने बैठ कर पेशाब करने लगी.

मैं ये तो नहीं जान पाया कि उसका पेशाब, चूत में से कहां से निकल रहा है लेकिन उसको पेशाब करते हुए देख कर अच्छा बहुत लगा.

उसके पेशाब की धार उसकी चूत से काफी मोटी बाहर आ रही थी और सुर्राहट की आवाज में निकलकर ऊपर को उठी हुई काफी दूर पड़ रही थी.

दीपा मेरी तरफ़ देख कर शर्मीली हंसी हंस रही थी.

फिर मैंने पेशाब किया तो उसने भी मुझेय बड़े गौर से देखा. मेरी भी धार काफी मोटी थी और काफी दूर तक जा रही थी.

इसी बीच हम दोनों दोबारा उत्तेजित होने शुरू हो गए और हम लोगों ने एक बार फ़िर से चुदाई की.

हम काफी देर तक यूं ही चिपटे हुए नंगे पड़े रहे और बात करते रहे. मेरा मन तो उसको एक बार फ़िर से चोदने को कर रहा था, लेकिन दीपा ने ही मना कर दिया.

उसने कहा कि ज्यादा चुदाई नहीं करनी चाहिये.. वरना कमजोरी आ जाएगी.

मैंने भी उसकी बात मान ली और हम दोनों अपने अपने कपड़े पहन कर तैयार हो गए.

फ़िर दूसरे किसी मौके की तलाश में रहने लगे ताकि चुदाई का मजा लिया जा सके.

तो दोस्तो, और सखियो, ये था मेरा चुदाई का पहला तज़ुरबा.. मुझे उम्मीद है कि आप सबने बड़े ध्यान से इस चुदाई की कहानी को पढ़ा होगा.. इसलिए अब बारी आपकी है, यानि कि आपकी राय की कि आपको ये Hindi sex stories कहानी कैसी लगी.

Antarvasna

अगले दिन से मैं Antarvasna अलग कमरे में सोने लगी। भाभी अब भैया के साथ सो रही थीं। मुझे घर में रहते हुए बीस दिन से ज्यादा हो गए थे। भाभी अब मुझसे थोड़ा चिढ़ने लगी थीं।

एक दिन मैं बाज़ार घूमने गई। मुझे बाज़ार में मेरी पुरानी सहेली उमा मिल गई, वो मुझसे बोली कि उसके पति बाहर गए हुए हैं और मुझे अपने साथ रहने को कहा।

उमा मेरी अच्छी दोस्त थी। मेरी दोस्त होने के कारण उसकी भाभी से भी दोस्ती थी लेकिन वो बदमाश टाइप लड़की थी और पैसे के लिए बहुत लालची थी, शादी से पहले वो मेरे साथ हॉस्टल में रहती थी तो उसकी एक कॉल गर्ल के दलाल से दोस्ती थी और महीने में एक दो बार उमा पंच-तारा होटल में चुदने जाती थी। मुझे वो बताती थी कि उसके एक रात के दस हज़ार लगते हैं जिसमें से पाँच उसको मिल जाते थे और ग्राहक टिप अलग से देता था। मुझे भी उसने चुदने के लिए कई बार कहा, लेकिन मैं कभी चुदने नहीं गई। बाद में उमा की शादी एक कम्पनी के मैनेजर से हो गई।

मुझे घर में रहते हुए 20-22 दिन हो गए थे, भाभी मुझसे चिढ़ने सी लगी थीं। मैंने सोचा की दो दिन बाद मैं उमा के पास जाकर रह लूंगी। मेरी मौसी दो दिन के लिए आ रही थीं।

मैंने उमा से कहा- मैं दो दिन बाद तेरे साथ आकर रहूंगी।

अगले दिन मेरी मौसी आ गईं पूरा दिन गपशप में चला गया। रात में मुझे भाभी के कमरे में सोना पड़ा। मैं भाभी के कमरे में भाभी के साथ सोई। आदमी लोग अलग कमरे में सोये। मौसी और माँ एक अलग कमरे में सोई थीं। अगले दिन भैया को सुबह टूर पर जाना था, भाभी भन्ना सी रही थीं क्योंकि आज उन्हें बिना चुदे सोना था। मुझसे एक दो बार बोली भी थीं कि तू बिना चुदे कैसे रह लेती है? मेरी तो चूत एक दिन न चुदे तो खुजियाने लगती है। रात बारह बजे भाभी मुझसे बोली- प्यारी ननद जी, आप एक घंटा छत पर टहल आओ, तब तक मैं इनसे से चुदवा लेती हूँ! फिर तो यह 5 दिन बाद वापस आयेंगे।

मुझे पहले से ही नींद नहीं आ रही थी, मैं बाहर छत पर टहलने चली गई। मौका देखकर भाभी ने भैया को अंदर बुला लिया और अपनी चूत की सेवा करवाने लगीं।

थोड़ी देर बाद मैंने सीढ़ियों के पास मौसी और मौसा को कुछ फुसफुसाते देखा। मैं चुप हो कर बातें सुनने लगी। मौसी मौसा का लंड पैंट से निकाल कर पकड़े हुए थीं और कह रही थीं- कुत्ते, तेरा घोड़ा तो बड़ा टनटना रहा है लेकिन चूत में घुसते ही पिचक जाता है। एक जमाना था कि एक एक घंटे तक मेरी सुरंग में हल्ला मचाता रहता था।

मौसी की दोनों चूचियाँ खुली हुई थीं और पपीते की तरह लटक रही थीं। मौसा मौसी की चूचियाँ मसल रहे थे, मौसी के चूचुक पर चुटकी काटते हुऐ मौसा बोले- कुतिया, बहुत गाली दे रही है? तेरी जवानी की आग भी तो बहुत बुझाई है इसने!

मौसी लंड को मसलते हुए बोलीं- अरे गाली क्यों दूँगी मेरे कुत्ते! तेरे शेर को तो मैं अब भी सबसे जयादा प्यार करती हूँ! इधर ला जरा एक पप्पी तो लेने दे इसकी!

इतना कह कर मौसी ने मौसा का लौड़ा मुँह में रख लिया और पूरी मस्त होकर चूसने लगी। मैं हैरान थी कि पचास साल की मौसी भी लौड़ा चूस सकती हैं। मौसी मौसा की गोदी में सर रखकर मस्ती से 5 मिनट तक लौड़ा चूसती रहीं, 55 साल के मौसा ने 55 मिनट बाद रस छोड़ दिया, मौसी उसे अपने मुँह में गटक गई।

मौसा बोले- चल भाग चलें! किसी बच्चे ने देख लिया तो क्या सोचेगा!

मैं 2-3 मिनट खड़ी यह सोचती रही कि पता नहीं लोग लौड़ा कैसे चूस लेते हैं?

अगले दिन मौसी ने मुझे अकेले में पकड़ लिया और बोली- क्यों? रात को छिप कर क्या देख रही थी? इतनी चूत में आग लग रही है तो आदमी से दूर क्यों रह रही है? घर जा और चुदवा! यह गन्दी बात होती है किसी को छिप कर देखना!

भाभी मुझसे चिढ़ी-चिढ़ी सी रह ही रही थीं, ऊपर से मौसी की बात से मेरा दिमाग ख़राब सा हो रहा था। इन सबके बाद एक असली बात यह भी थी कि मेरी चूत में खुजली भी जोरों की हो रही थी क्योंकि मेरे पति चूत तो मेरी रोज़ ही चोदा करते थे और अब भाभी मौसी की चुदाई होते देखकर मेरी चूत रोज़ पानी छोड़ रही थी। मैंने सोचा कुछ दिन उमा के पास जाकर रह आती हूँ।

उमा एक मस्त स्वभाव की लड़की थी कॉलेज के दिनों में उसने काल गर्ल बनकर, बॉय फ्रेंड बनाकर कई बार कई लोगों से अपनी चूत को चुदवाया था। मेरी रूम मेट रही थी, कई बार गर्मी में हम दोनों नंगी होकर सोती थीं इसलिए मुझमें और उसमे शर्म की कोई बात नहीं थी। मेरी उससे अच्छी दोस्ती थी। रात को नौ बजे मैं उमा के घर पहुँच गई। मुझे देखकर उमा खुश हो गई। हम दोनों ने खाना खाया, इसके बाद उमा मेरी साड़ी उतार कर बोली- चल, आज नंगे सोते हैं! तेरी सुहागरात और चुदाई की कहानी भी तो मुझे सुननी है!

चूंकि पहले भी हम नंगी होकर सो चुकी थीं इसलिए रात को हम दोनों नंगी होकर सो गईं।

उमा बोली- अब तो तेरी शर्म छुट गई होगी! तीन महीने हो गए तेरी शादी को! अब तक तो सौ से ज्यादा बार चुद चुकी होगी? बोल, चुदने में मजा आता है या नहीं?

और वो मेरा चूत के होटों से खेलने लगी। मैंने कभी खुल कर अतुल से चूत नहीं चुदवाई थी लेकिन रोज़ रात को अतुल जबरदस्ती मेरी चूत चोद देते थे। अब 20-25 दिन से मैं बाहर थी तो मुझे चूत की खुजली पता चल रही थी। मैं भी उमा की चूत खुजाने लगी। थोड़ी देर में हम दोनों गर्म थीं, उमा बोली- खुजली ज्यादा हो रही हो तो बोल! धंधे पर चलते हैं! नोट भी कमाएंगे और मौज भी लेंगे!

मैं बोली- नहीं बाबा! नहीं! मुझे तो बड़ा डर लगता है! तू क्या शादी के बाद भी धंधा करती है?

उमा बोली- भाई कभी कभी अब भी लगवा लेती हूँ! पटी जब बाहर होते हैं! एक रात के पाँच हज़ार मिल जाते हैं और मजा भी आ जाता है। लेकिन सिर्फ अपने पुराने यारों से लगवाती हूँ नहीं तो बदनाम हो जाऊँगी। मैं तो साली बदनाम हो गई थी इसलिए तो 5000 रुपए कमाने वाले से शादी हुई नहीं तो तेरी तरह सॉफ्टवेयर इंजिनियर से शादी होती! चल यह छोड़, यह बता कितना मोटा लंड है तेरे पति का? अभी नई नई शादी हुई है, 3-4 बार तो चूस ही लेती होगी एक दिन में?

मैं हूँ हाँ करती रही! मेरी समझ में नहीं आ रहा था कि सब लौड़ा चूसने की बातें क्यों करती हैं!

12 बजे के करीब मैं सो गई। रात को 3 बजे के करीब उमा का मोबाइल बजा। उमा ने तुंरत काट दिया। मैं नींद में थी इसलिए मैंने ध्यान नहीं दिया। लेकिन दस मिनट बाद उमा उठ कर गाउन पहन कर गई तो मैं चौंक गई। दबे पाँव मैंने पीछे जाकर देखा तो मैं हैरान थी। उमा ने अपने फ्लैट का दरवाज़ा खोला, एक जवान सा लड़का अंदर आया, उमा उसे दूसरे कमरे में ले गई और बोली- राजीव जी, पहले फीस निकालिए!

राजीव ने सौ के नोटों की गद्दी उमा के हाथ में रख दी। उमा मुस्करा दी, गद्दी अलमारी में रख दी और राजीव की पैंट की चैन खोल दी। उसके बाद उसका लौड़ा निकाल कर चूसने लगी। राजीव ने अपनी पैंट उतार दी। राजीव का लौड़ा सात इंच लम्बा और तीन इंच मोटा होगा। पूरा लौड़ा लोहे की रॉड की तरह तना हुआ था और उमा लौड़ा लप लप कर के चूस रही थी।

मैं छुप कर देखने लगी। कुछ देर में दोनों नंगे थे। राजीव उमा को पलंग पर लिटा कर उसकी चूत चूसे जा रहा था, उमा की आह ऊह ओह की आवाजें कमरे में गूँज रही थीं। मेरी चूत में जोरों की खुजली हो रही थी। होती भी क्यों नहीं! आज मुझे चुदे हुए पूरा एक महीना हो गया था।

उमा थोड़ी देर बाद चूत फ़ैला कर लेट गई। राजीव ने उसकी चूत में अपना सात इंच लम्बा लंड ठोंक दिया और धक्के मरना शुरू कर दिया। उमा की चुदाई शुरू हो गई थी। उमा जोर जोर से चिल्ला रही थी- उई! बड़ा मजा आ रहा है! और जोर से पेल कुत्ते! क्या चोदता है! क्या मस्त लंड है! महीने में एक बार तो आ जाया कर! अगली बार से 10% छूट दूँगी साले! हरामी क्या मस्त बजाता है! और जोर से पेल कुत्ते!

राजीव ने 15 मिनट तक उमा की चूत बजाई। उसके बाद उसका लंड खाली हो गया और उसने लंड बाहर खींच लिया। उमा की चूत की प्यास शांत नहीं हुई थी, उसने राजीव को जबरदस्ती अपनी तरफ खींच कर एक बार दुबारा उसका लंड अपने मुँह में डाल लिया और चूसने लगी। मैं तो हैरान थी कि भाभी, मौसी उमा सब लंड चूसने में होशियार हैं और मैं लण्ड चूसने को लेकर लड़ कर आ गई। मेरे मन में एक बार लण्ड चूसने का ख्याल आया लेकिन अपने अहं के कारण मैं लंड नहीं चूसना चाहती थी और अतुल के पास वापस नहीं जाना चाहती थी।

मेरी बुर उमा की चुदाई देखकर बुरी तरह गरम हो गई थी। मैं वापस आकर लेट गई कुछ देर और चुदवाने के बाद उमा भी वापस आकर सो गई।

सुबह हम दोनों 12 बजे उठे। उमा बिल्कुल तरो-ताज़ा दिख रही थी। दिन में मुझसे उमा बोली- चुदना हो तो बता दियो! मेरे यारों की संख्या अभी कम नहीं हुई है!

मैंने अनजान बन कर पूछा- उमा, शादी के बाद भी औरों से चुदवाती है क्या?

छोटी मेम आइ लव यू- Antarvasna Storiesआगे की कहानी अगले भाग में! Antarvasna

लेखिका : आरती वर्मा Hindi Sex Stories

मेरी सगाई की तारीख पक्की हो Hindi Sex Stories गई थी। मैं जब राजू से पहली बार मिली तो मैं उसे देखती रह गई। वो बड़ा ही हंसमुख है। मज़ाक भी अच्छी कर लेता है। मैं ३ दिनों से इन्दौर में ही थी। वो मुझे मिलने रोज़ ही आता था। हम दोनो एक दिन सिनेमा देखने गए। अंधेरे का फ़ायदा उठाते हुए उन्होंने मेरे स्तनों का भी जायज़ा ले लिया। मुझे बहुत अच्छा लगा था।

पापा ने बताया कि उज्जैन में मन्दिर की बहुत मान्यता है, अगर तुम दोनों जाना चाहो तो जा सकते हो। इस पर हमने उज्जैन जाने का कार्यक्रम बना लिया और सुबह आठ बजे हम कार से उज्जैन के लिए निकल पड़े। लगभग दो घण्टे में ७०-७५ किलोमीटर का सफर तय करके हम होटल पहुँच गये.

कमरे में जाकर राजू ने कहा-“आरतीफ्रेश हो जाओ…नाश्ता करके निकलेंगे..”

मैं फ्रेश होने चली गयी. फिर आकर थोड़ा मेक अप किया. इतने में नाश्ता आ गया. नाश्ते के बीच बीच में वो मेरी तरफ़ देखता भी जा रहा था. उसकी नज़ारे मैं भांप गयी थी. वो सेक्सी लग रहा था.

मैंने कहा -“क्या देख रहे हो…”

“तुम्हे… इतनी खूबसूरत कभी नहीं लगी तुम..”

“हटो…” मैं शरमा गयी.

“सच… तुम्हे बाँहों में लेने का मन कर है”

“राजू !!! ”

“आओ मेरे गले लग जाओ..”

‘वो कुर्सी से खड़ा हो गया और अपनी बाहें फैला दी. मैं धीरे धीरे आंखे बंद करके राजू की तरफ़ बढ गयी. उसने मुझे अपने आलिंगन में कस लिया. उसके पेंट में नीचे से लंड का उभार मेरी टांगों के बीच में गड़ने लगा. मैं भी राजू से और चिपक गयी. उसने मेरे चेहरे को प्यार से ऊपर कर लिया और निहारने लगा. मेरी आंखे बंद थी. हौले से उसके होंट मेरे होंटों से चिपक गए. मैंने अपने आपको उसके हवाले कर दिया. वो मुझे चूमने लगा. उसने मेरे होंट दबा लिए और मेरे नीचे के होंट को चूसने लगा. मैं आनंद से भर उठी. उसके नीचे का उभार मेरी टांगों के बीच अब ज्यादा चुभ रहा था. मैंने थोड़ा सेट करके उसे अपनी टांगों के बीच में कर लिया. अब वो सही जगह पर जोर मार रहा था. मैं भी उस पर नीचे से जोर लगा लगा कर चिपकी जा रही थी.

वो अलग होते हुए बोला -“नेहा…एक बात कहूं…”

“कहो राजू”

“मैं तुम्हे देखना चाहता हूँ…”

मैं उसका मतलब समझ गयी , पर उसको तड़पाते हुए मजा लेने लगी…”तो देखो न…सामने तो खड़ी हूँ…”

“नहीं…ऐसे नहीं…”

“मैंने इठला कर कहा -“तो फिर कैसे.. ”

“मतलब…कपडों में नहीं…”

“हटो राजू…चुप रहो…”

“न..नहीं..मैं तो यूँ ही कह रहा था… चलो…अच्छा..”

मैं उस से लिपट गयी..” मेरे राजू… क्या चाहते हो… सच बोलो..

“क कक्क कुछ नहीं… बस..”

“मुझे बिना कपडों के देखना चाहते हो न…”

उसने मुझे देखा… फिर बोला..” मेरी इच्छा हो रही थी.. तुम्हे देखने की…क्या करून अब तुम हो ही इतनी सुंदर…”

“मैं धीरे से उसे प्यार करते हुए बोली – ” सुनो मैं तो तुम्हारी हूँ… ख़ुद ही उतार लो..”

“सच…” उसने मेरे टॉप को ऊपर से धीरे से उतार दिया. मैं सिहर उठी.

“राजू… आह…”

ब्रा में कसे मेरे उरोज उभार कर सामने आ गए. राजू ने प्यार से मेरे उरोजों को हाथ से सहलाया. मुझे तेज बिजली का जैसे करंट लगा…फिर उसने मेरी ब्रा खोल दी. उसकी आँखे चुंधिया गयी. उसके मुंह से आह निकल पड़ी. मैंने अपनी आंखे बंद करली. वो नज़दीक आया उसने मेरे उभारों को सहला दिया. मुझे कंपकंपी आ गयी. उस से भी अब रहा नहीं गया…मेरे मस्त उभारों की नोकों को मुंह में भर लिया..और चूसने लगा..

“राजू मैं मर जाऊंगी…बस…करो..” मेरे ना में हाँ अधिक थी.

उसने मेरी सफ़ेद पेंट की चैन खोल दी और नीचे बैठ कर उसे उतारने लगा. मैंने उसकी मदद की और ख़ुद ही उतार दी. अब वो घुटनों पर बैठे बैठे ही मेरे गहरे अंगों को निहार रहा था. धीरे से उसके दोनो हाथ मेरे नितम्बों पर चले गए और वो मुझे अपनी और खींचने लगा.। मेरे आगे के उभार उसके मुंह से सट गए. उसकी जीभ अब मेरी फूलों जैसे दोनों फाकों के बीच घुस गयी थी. मैंने थोड़ा और जोर लगा कर उसे अन्दर कर दी. फिर पीछे हट गयी.

“बस करो ना अब…” वो खड़ा हो गया. ऐसा लग रहा था की उसका लंड पेंट को फाड़ कर बाहर आ जाएगा

“राजू..अब मैं भी तुम्हे देखना चाहती हूँ… मुझे भी देखने दो.. ”

राजू ने अपने कपड़े भी उतार दिए. मैं उसका तराशा हुआ शरीर देख कर शर्मा गयी. अब हम दोनों ही नंगे थे. उसका खड़ा हुआ लंड देख कर और उसकी कसरती बॉडी देख कर मन आया कि… हाय…ये तो मस्त चीज़ है… मजा आ जाएगा… पर मुझे कुछ नहीं कहना पड़ा. वो ख़ुद ही मन ही मन में तड़प रहा था. वो मेरे पास आ गया. उसका इतना कड़क लंड देख कर मैं उसके पास आकर उस से चिपकने लगी. मुझे गांड कि चुदाई में आरंभ से ही मजा आता था. मुझे गांड मराने में मजा भी खूब आता है. उसका कड़क, मोटा और लंबा लंड देख कर मेरी गांड चुदवाने कि इच्छा बलवती होने लगी.

मेरी चूत भी बेहद गीली हो गयी थी. उसका लंड मेरी चूत से टकरा गया था. वो बहुत उत्तेजित हो रहा था. वो मुझे बे -तहाशा चूम रहा था. “नेहा…डार्लिंग… कुछ करें…”

“राजू… मत बोलो कुछ…” मैं ऑंखें बंद करके बोली ” मैं तुमसे प्यार करती हूँ…मैं तुम्हारी हूँ.. मेरे राजू..”

उसने मुझे अपनी बलिष्ठ बाँहों में खिलोने की तरह उठा लिया. मुझे बिस्तर पर सीधा लेटा दिया. मेरे चूतडों के नीचे तकिया लगा दिया. वो मेरी जांघों के बीच में आकर बैठ गया। धीरे से कहा -“आरतीमैं अगर दूसरे छेद को काम में लाऊं तो…” मैं समझ गयी कि ये तो ख़ुद ही गांड चोदने को कह रहा है. मैं बहुत खुश हो गयी.”चाहे जो करो मेरे राजा…पर अब रहा नहीं जाता है.”

” इस से सुरक्षा भी रहेगी..किसी चीज का खतरा नहीं है…”

“राजू…अब चुप भी रहो न… चालू करो न…” मैंने विनती करते हुए कहा.

मैंने अपनी दोनों टांगे ऊँची करली. उसने अपने लंड कि चमड़ी ऊपर खीच ली और लंड को गांड के छेद पर रख दिया. मैं तो गंद चुदवाने के लिए हमेशा उसमे चिकनाई लगाती थी. उसने अपना थूक लगाया और… और अपने कड़े लंड की सुपारी पर जोर लगाया. सुपारी आराम से अन्दर सरक गयी. मैं आह भर उठी.

“दर्द हो तो बता देना..नेहा..”

“राजू… चलो न…आगे बढो… अब..” मैं बेहाल हो उठी थी. पर उसे क्या पता था की मैं तो गांड चुदवाने और चुदाई कराने मैं अभ्यस्त हूँ. उसने धीरे धीरे धक्के मारना चालू किया.

“तकलीफ़ तो नहीं हुई…नेहा…”

“अरे चलो न…जोर से करो ना…क्या बैलगाडी की तरह चल रहे हो…” मुझसे रहा नहीं गया. मुझे तेजी चाहिए थी.

सुनते ही एक जोरदार धक्का मारा उसने… अब मेरी चीख निकल गयी. लंबा लंड था…बहुत अंदर तक चला गया. अपना लंड अब बाहर निकल कर फिर अन्दर पेल दिया उसने… अब धक्के बढने लगे थे. खूब तेजी से अन्दर तक गांड छोड़ रहा था.. मुझे बहुत मजा आने लगा था. “हाय..मेरे..राजा… मजा आ गया… और जोर से… जोर लगा…जोर से… हाय रे…”

उसके मुंह से भी सिस्कारियां फूट पड़ी. “नेहा… ओ ओह हह ह्ह्ह… मजा..आ रहा है… तुम कितनी अच्छी हो…”

“राजा…और करो… लगा दो…अन्दर तक…घुसेड दो… राम रे…तुम कितने अच्छे हो…आ आह हह…रे..”

मेरी गांड चिकनी थी…उसे चूत को चोदने जैसा आनंद आ रहा था… मेरी दोनों जांघों को उसने कस के पकड़ रखा था. मेरी चुन्चियों तक उसके हाथ नहीं पहुँच रहे थे. मैं ही अपने आप मसल रही थी. और सिस्कारियां भर रही थी. मैंने अब उसे ज्यादा मजा देने के लिए अपने चूतडों को थोड़ा सिकोड़ कर दबा लिया. पर हुआ उल्टा…

“आरतीये क्या किया… आह…मेरा निकला…मैं गया… ”

“मैंने तुंरत अपने चूतडों को ढीला छोड़ दिया… पर तब तक मेरी गांड के अन्दर लावा उगलने लगा था.

“आ अह हह नेहा…मैं तो गया… अ आह ह्ह्ह…” उसका वीर्य पूरा निकल चुका था. उसका लंड अपने आप सिकुड़ कर बाहर आ गया था. मैंने तोलिये से उसका वीर्य साफ़ किया

मैं अभी तक नहीं झड़ी थी.. मेरी इच्छा अधूरी रह गयी थी. फिर भी उसके साथ मैं भी उठ गयी.

हम दोनों एक बार फिर से तैयार हो कर होटल में भोजनालय में आ गए. दोपहर के १२ बज रहे थे. खाना खा कर हम उज्जैन की सैर को निकल पड़े.

करीब ४ बजे हम होटल वापस लौट कर आ गये. मैंने राजू से वो बातें भी पूछी जिसमे उसकी दिलचस्पी थी. सेक्स के बारे में उसने बताया कि उसे गांड चोदना अच्छा लगता है. चूत की चुदाई तो सबको ही अच्छी लगती है. हम दोनों के बीच में से परदा हट गया था. होटल में आते ही हम एक दूसरे से लिपट गए. मेरी चूत अभी तक शांत नहीं हुयी थी. मुझे राजू को फिर से तैयार करना था. आते ही मैं बाथरूम में चली गयी. अन्दर जाकर मैंने कपड़े उतार दिए और नंगी हो कर नहाने लगी. राजू बाथरूम में चुपके से आ गया. मैंने शोवेर खोल रखा था. मुझे अपनी कमर पर सुहाना सा स्पर्श महसूस हुआ. मुझे पता चल गया कि राजू बाथरूम में आ गया है. मैं भीगी हुयी थी. मैंने तुरन्त कहा -“राजू बाहर जाओ… अन्दर क्यूँ आ गए..”

राजू तो पहले ही नंगा हो कर आया था. उसके इरादे तो मैं समझ ही गयी थी. उसका नंगा शरीर मेरी पीठ से चिपक गया वो भी भीगने लगा. “मुझे भी तो नहाना है…” उसका लंड मेरे चूतड में घुसने लगा. मैं तुंरत घूम गयी. और शोवेर के नीचे ही उस से लिपट गयी. उसका लंड अब मेरी चूत से टकरा गया. मैं फिर से उत्तेजित होने लगी. मेरी चूत में भी लंड डालने की इच्छा तेज होने लगी. हम दोनों मस्ती में एक दूसरे को सहला और दबा रहे थे. अपने गाल एक दूसरे पर घिस रहे थे. उसका लंड कड़क हो कर मेरी चूत पर ठोकरें मार रहा था. उसने मुझे सामने स्टील की रोड पकड़ कर झुकने को कहा. शोवेर ऊपर खुला था. मेरे और राजू पर पानी की बौछार पड़ रही थी. मैंने स्टील रोड पकड़ कर मेरी गांड को इस तरह निकाल लिया कि मेरी चूत की फ़ांकें उसे दिखने लगी.

उसने अपना लण्ड पीछे से चूत की फ़ांकों पर रगड़ दिया। मेरा दाना भी रगड़ खा गया। मुझे मीठी सी गुदगुदी हुई। दूसरे ही पल में उसका लण्ड मेरी चूत को चीरता हुआ अन्दर तक घुस गया। मैं आनन्द के मारे सिसक उठी,”हाय रे… मार डाला…”

“हाँ नेहा… तुम्हें सुबह तो मजा नहीं आया होगा…अब लो मजा…”

उसे कौन समझाए कि वो तो और भी मजेदार था… पर हाँ…सुबह चुदाई तो नहीं हो पाई थी.

“हाँ… अब मत छोड़ना मुझे… पानी निकाल ही देना…” मैं सिसककते हुए बोली.

“तो ये लो…येस…येस… कितनी चिकनी है तुम्हारी..”उसके धक्के तेज हो गए थे. ऊपर से शोवेर से ठंडे पानी की बरसात हो रही थी…पर आग बदती जा रही थी. मुझे बहुत आनंद आने लगा था.

“राजू… तेज और… तेज… कस के लगाओ… हाय रे मजा आ रहा है…”

“हा…ये..लो…और…लो…ऊ ओऊ एई एई…”

मैंने अपनी टांगे और खोल दी. उसका लंड सटासट अन्दर बाहर जा रहा था. हाँ…अब लग रहा था कि शताब्दी एक्सप्रेस है. मेरे तन में मीठी मीठी सी जलन बढती जा रही थी .उसके धक्के रफ़्तार से चल रहे थे. फच फच की आवाजें तेज हो गयी. “हाय रे मार दो मुझे…और तेज धक्के लगाओ…हाय…आ आह ह्ह्ह…आ आ हह हह…”

मुझसे अब रहा नहीं जा रहा था. मैं झड़ने वाली थी. मैंने राजू की ओर देखा. उसकी आँखे बंद थी. उसकी कमर तेजी से चल रही थी. उसके चूतड मेरी चूत पर पूरे जोर से धक्का मार रहे थे. मेरी चूत भी नीचे से लंड की रफ्तार से चुदा रही थी. “राजू…अ आह…हाय…आ आया ऐ ई ई ई… मैं गयी… हाय रे…सी ई सी एई ई… निकल गया मेरा पानी… अब छोड़ दे मुझे… बस कर…”मैं जोर से झड़ गयी. मेरी चूत ने पानी छोड़ दिया. पर वो तो धक्के मारता ही गया. मैंने कहा..”अब बस करो…लग रही है… हाय..छोड़ दो ना…”

राजू को होश आया… उसने अपना लंड बाहर निकल लिया. उसका बेहद उफनता लंड अब बाहर आ गया था. मैंने तुंरत उसे अपने हाथ में कस के भर लिया. ओर तेजी से मुठ मारने लगी. कस कस के मुठ मारते ही उसका रस निकल पड़ा. “नेहा…आ आह हह…आ अहह ह्ह्ह… हो गया…बस… बस…ये आया…आया…”

इतने मैं उसका वीर्य बाहर छलक पड़ा. मैं राजू से लिपट गयी. उसका लंड रुक रुक कर पिचकारियाँ उगलता रहा. और मैं उसका लंड खींच खींच कर दूध की तरह रस निकालती रही. जब पूरा रस निकल गया तो मैंने उसका लंड पानी से अच्छी तरह धो दिया. कुछ देर हम वैसे ही लिपटे खड़े रहे. फिर एक दूसरे को प्यार करते रहे और शोवर के नीचे से हट गए. हम दोनों एक दूसरे को प्यार से देख रहे थे. इसके बाद हम एक दूसरे के साथ दिल से जुड़ गए. हमारा प्यार अब बदने लगा था.

शाम के ६ बजे हम उज्जैन से रवाना हो गए… मन में उज्जैन की यादें समेटे हुए इंदौर की और कूच कर गए. Hindi Sex Stories

Hindi Sex Stories

सभी अन्तर्वासना पढ़ने वाले Hindi Sex Stories पाठकों को पम्मी पंजाबन का खुली योनि के साथ कोटि-कोटि प्रणाम। मेरा नाम पम्मी है। मैं पंजाब की रहने वाली हूँ। मेरी उम्र २२ वर्ष है। मेरी शादी आज से ठीक २ वर्ष पहले हुई थी। शादी के पहले मैंने अपने हर आशिक के साथ जिस्मानी ताल्लुक़ात बनाए।

एक बार मम्मी ने मुझे रात को अपने घर की छत पर अपने पड़ोसी से चुदवाते हुए पकड़ लिया। यहाँ मैं जिक़्र करना चाहती हूँ कि पापा के पीछे से मैंने अपनी माँ को बहुत से गैर मर्दों के साथ हम-बिस्तर होते देखा और मेरी बड़ी बहन २ बार लड़कों के साथ भाग गई। दूसरे नम्बर वाली बहन अपने आशिक़ के साथ शादी करके चली गई। एक भाई है जिसे मम्मी ने हॉस्टल में रखा है। जिस बेटी ने बचपन से अपनी माँ को ग़ैर मर्दों की बाँहों में झूलते देखा हो वो लड़की बड़ी होकर वही सब करेगी ही।

जिस दिन मेरी माँ ने मुझे पकड़ा, वो कुछ कहती, उसके पहले मैंने कहा- तुम कौन सी दूध की धुली हो?

चलो दोस्तों, इसी वज़ह से मेरी शादी कर दी गई प्रदीप शर्मा के साथ। पहली रात वो दारू के नशे में धुत्त होकर आया। उसने मुझे कुछ ही पलों में नंगी करके अपना लौड़ा मेरे हाथ में दे दिया। लौड़ा देखकर मैं भी गरम हो गई। वो भी जल्दी मुझ पर सवार हो गया। उसका लंड सामान्य आकार का था।

मेरे जैसी लड़की जिसने शादी के पहले मन-मर्ज़ी के हट्ठे-कट्ठे लड़कों के साथ चुदाई के मज़े लिए हों, उसके लिए छोटा ही था। उसके नशे ने मेरी पोल नहीं खुलने दी। मैंने झूठ-मूठ दर्द का नाटक किया और अपनी चूत को साँस खींच कस सा लिया। सुहागरात के बाद भी वो बिस्तर में दारू पी कर आता।

मेरी ननद पेट से है, और सासू माँ उसका ख़्याल रखती है, और मुझे बाँझ कह कर ताने मारती। ननद की वज़ह से ननदोई जी भी रोज़ रात को अपने कार्यालय से इधर ही आते, क्योंकि वो अकेले डिनर कहाँ से करते। उनका हमारे यहाँ आना मुझे बहुत भाता। उनकी नज़र भी शुरु से ही मेरे प्रति ख़राब थी। इसी बीच मेरे पति का आबूधाबी का वीज़ा आ गया। पापा ने उसको वहाँ काम दिलवा दिया और मुझे जल्दी साथ ले जाने को कह वो दुबई चले गए।

दोस्तों चाहे वो लण्ड छोटा था, लेकिन लण्ड तो लण्ड ही है, इसके बिना औरत शान्त नहीं होती। मैं भी प्यासी रहने लगी, बिस्तर पर करवट बदलती रहती। तभी एक रोज़ सासू-माँ ननद का चेकअप करवाने के लिए ले गई। ननदोई जी को ऊपर वाला हिस्सा दिया हुआ था। जब तक उनके बच्चा नहीं होता, दीदी ऊपर नहीं जाती थी।

ननदोई जी को मैं सुबह में कॉफी दे कर आती थी। ननदोई जी का आकर्षण मेरी ओर बढ़ता जा रहा था, जिसकी वज़ह मैं भी थी और वो भी। दोनों एक-दूसरे की आँखों में कुछ-ना-कुछ तलाश से करते रहते। वासना की आग बराबर लगी ती। मैं भी अब ननदोई जी की हरक़तों को रोकती नहीं। जानबूझ कर गहरे गले की कमीज़ पहन उनको पानी वगैरह देती, और देते वक्त सामने झुक जाती। वो भी मुझे दिखाकर पैन्ट के ऊपर से ही लंड को खुजलाते। एक-दो बार रसोई में निकलते हुए मेरी चूचियाँ भी उन्होंने दबाईं।

एक शाम मम्मी ननद को चेक करवाने अस्पताल गईं थीं। इधर मैं अकेली थी। तभी ननदोई जी आए, मैं जानबूझ कर अपने बिस्तर पर लेट गई। अपनी कुर्ती को इस तरह सरका दिया, और ब्रा भी खोल दी जिससे मेरी क़हर ढाती प्यासी जवानी दिखने लगी। मेरे दोनों मम्मे साफ़ दिख रहे थे। तभी दरवाज़ा खुला और आवाज़ आई, “मम्मी !”
जब किसी ने उत्तर न दिया तो वो मेरे कमरे में पहुँचे और देखकर आवाज़ दी। मैंने सोने की ऐक्टिंग की।

वो कुण्डी चढ़ा कर मेरे बिस्तर पर बैठ गए, फिर आवाज़ दी। मैं चुप ही रही। वो आहिस्ते से मेरे पैरों की तरफ बैठ अपना हाथ मेरी जाँघों पर फेरने लगे। साथ में एक हाथ से मेरा मम्मा दबोच लिया और निप्पलों को चूसने लगे। सीईईईईई मैंने आँखें खोलीं और उनको अपने ऊपर गिरा लिया। अचानक से यह देख वो हैरान रह गए।

मैंने उनकी शर्ट उतार कर उनकी घने बालों से भरी छाती पर हाथ फेरते हुए काट लिया। वो मेरे होंठों को चूसने लगे। नीचे से ऊँगली से योनि के दाने को मसलने लगा। मैं पूरी तरह गरम पड़ी हुई थी। मैंने जल्दी से पैन्ट के ऊपर से लंड पकड़ लिया। उन्होंने तुरन्त पैंट और अण्डरवियार उतार दिया।

बाप-रे-बाप, ९ इंच लम्बा और ३ इंच मोटा साँवले रंग का लंड पकड़ते ही मेरी योनी में खुज़ली होने लगी। मैंने झट से उसका लंड बाहर निकाल और मुँह में भर कर चपड़-चपड़ करते हुए चूसने लगी। वो सीधे लेटे हुए अपने पाँव के अँगूठे से मेरी योनि मसलने लगे। फिर उन्होंने 69 में आकार बना कर अपनी पूरी ज़ुबान अन्दर डाल दी, बोले, “भाभी जी बहुत तड़पाया है आपने, आज मसल दूँगा आपके कोमल बदन को।”

मैंने कहा, “आपने भी कम नहीं तड़पाया है, दूर से इस लंड को खुज़लाते थे, वो भी इतना सॉलिड लम्ड। कितने दिनों से मेरे अन्दर कोई लण्ड नहीं गया है।”

मेरी कसी हुई गीली योनि को देख कर वह स्वयं को रोक नहीं पाए और बीच में बैठ लंड मेरी योनि पर रखते हुए धक्का मारा। थोड़ा दर्द हुआ, लेकिन मैंने भी दाँतों को भींचते हुए सब सह लिया, क्योंकि मैं एक खेली-खाई लड़की थी। पता था कि मज़ा तो मोटा लंड ही देता है। एक बार दर्द के बाद जो मज़े देगा, वह मैं अच्छी तरह से जानती थी। फिर उनका पूरा लंड योनि में डलवा लिया।

आह्ह्ह ह्हहह ! दोस्तों ! इतना मोटा लौड़ा मैंने शादी से पहले नहीं लिया था। वेबसाईटों पर देखा था, क्या मर्द था वो, असली देसी घी खा-खा कर उसका सारा शरीर ही शक्तिशाली हो गया था। उनकी जाँघों में क्या दम था कि ज़ोर-ज़ोर से मुझे रौंदने लगे। दनादन मेरे मुँह से अचानक गन्दी बातें निकलने लगीं।

मैं जब चुदती थी शादी से पहले, तब इन्हीं गन्दी बातों से मुझे और गर्मी मिलती। ओह… यस्स्स बहनचोद… मार हरामी… मार हरामी… तेरी औरत पेट से है ना। मुझे अपनी रंडी समझ… आह्ह्हहह उह्ह्ह्हहह उसने लौड़ा निकाल लिया। मुँह में डाल दिया। गीला लौड़ा मैंने चाट-चाट साफ़ कर दिया और लॉलीपॉप की तरह चूस के बिल्कुल एक नंगी कुतिया बन गई।

बहुत दिनों से लौड़े की भूखी थी, भूल गई कि हमारा रिश्ता क्या है। बस दोनों के सिर पर चुदाई का भूत सवार था। थोड़ा चूसने के बाद जब मेरी योनि में लौड़े की प्यास बढ़ने लगी तो ननदोई जी को समझ में आ गया कि अब घोड़ी की तरह चुदने के लिए तैयार है।

मैं उनके सामने घुटने टेक घोड़ी बन गई और वो पीछे से मेरी योनि को फटाफट चोदने लगे। आहा… ननदोई जी फाड़ डालो आज इसको… कसम से मैं आपकी दीवानी थी। और मेरी बातें सुन-सुन कर वो और तेज़ी से लौड़ा आगे-पीछे करने लगे। वाह क्या लौड़ा था। माँ क़सम मान गई.. कई लड़कों ने मुझे चोदा था लेकिन ननदोई जी के तेज़ धक्कों से मैं पिघल चुकी थी, और मैं झड़ गई।

लेकिन ननदोई जी असली मर्द थे, उन्होंने मुझे फिर से सीधा लिटा कर दोनों टांगों के बीच आसन लगा लिया। मेरी योनि उनके लौड़े की रगड़ सहन नहीं कर पाई, पर अभी उनका काम अभी कहाँ बना था,। उन्होंने मेरी दोनों टाँगें अपने कंधों पर रख कर मेरी गांड के छेद पर थूक लगा कर अपना लंड पेल दिया। ईईईईईई… कमीने यह क्या किया मररररर गई… उईईईई माँआआआआ.. पूरा लौड़ा अन्दर गया और फिर तेज़ धक्कों से अब मुझे मज़ा आने लगा, और मैं नीचे से गांड उठा-उठा कर चुदवाने लगी और वो भी मेरी इस हरक़त से झड़ने के क़रीब आए तो लंड योनि में डाल दिया और फिर उनके लौड़े ने मेरी कोख में पिचकारी मारी। उसके पानी से मैं दूसरी बार झड़ गई।

दोस्तों, उसके बाद मेरे और ननदोई जी मैं अवैध सम्बन्ध बन गए। वो जितने दिन रुके, जब भी माँ ननद के चेकअप या किसी काम से सासू-माँ अकेली जाती लेकिन ननद का पेट अधिक निकल आया, तो वह अपने कमरे में रहती, मैं और ननदोई मज़े लेते। और दोस्तों ठीक हफ़्ता पहले मेरे पैर भी भारी हो गए। सासु माँ खुश हैं। पति को फ़ोन पर उसने बताया, वह भी खुश है। लेकिन मैं और ननदोई जी जानते हैं कि बच्चा हम दोनों का है।

मेरी यह सच्ची कहानी कैसी लगी, बताना मत भूलना। मैं जल्दी अपनी चुदाई के अन्य किस्से आपके साथ बाँटूँगी, क्योंकि मुझे अपने बिस्तर की बातें लोगों तक ले जाने से अजीब सी गर्मी मिलती है।
नमस्कार Hindi Sex Stories

दोस्तो, मेरा नाम सुजीत है और मैं दिल्ली का रहने वाला हूं|आज आप सभी को मैं अपनी जिन्दगी का सबसे हसीन वाकिया बताना चाहता हूं जिसको पढ़ कर लड़कियों की चूत और लड़कों के लंड से पानी की फुहार निकल जाएगी| ये कहानी मेरी पड़ोसन ज्योति मैडम की है जिनसे मै बचपन में पढता था | वो पड़ोस में रहती थी तो मेरे घर से अच्छा लगाव रहता था लेकिन उनकी फिगर इतनी अच्छी थी की मेरा मन उनको हमेशा से चोदने का करता था और फिर एक समय ऐसा आया जिसमें मैंने अपनी एक ज्योति मैडम की जमकर चुदाई की| ज्योति मैडम के चूचे खरबूजे के जैसे थे और मस्त गांड थी; एकदम दूध सा गोरा बदन और काले लंबे बाल| वैसे तो ज्योति मैडम दो लड़कियों की मां थीं पर हर कोई उनका दीवाना था| मैं अक्सर ज्योति मैडम को देखकर मुठ मारा करता था| हुआ यूं कि जब मेरे नाना जी की तबीयत खराब हो गई तो मेरे घर वालों को मुझे छोड़कर जाना पड़ा क्योंकि मेरे 12वीं कक्षा की प्रैक्टिकल थे| तो मेरे घरवालों ने मेरी पड़ोसन ज्योति मैडम को मेरी जिम्मेवारी दी| मेरे घर वालों के जाने के बाद मैं ज्योति मैडम के घर खाना खाता और रोज की तरह स्कूल जाता| दो दिन तक ऐसे ही चलता रहा| तीसरे दिन मैं प्रैक्टिकल देकर स्कूल से जल्दी घर आ गया| मैंने अपने घर आकर कपड़े बदले और दोपहर का खाना खाने के लिए ज्योति मैडम के घर चला गया| वैसे तो मैं उनके घर आवाज लगाकर जाता था लेकिन उस दिन मैं उनके घर में ऐसे ही चला गया| मैंने देखा ज्योति मैडम के घर में कोई नहीं है, तो मैंने आवाज लगाई- ज्योति मैडम जी, कहां हो? बाथरूम से आवाज आई- , खाना गर्म करना पड़ेगा, तुम बैठ जाओ| मैं आती हूँ| जैसे ही मैं बैठा मैंने बाथरूम के बाहर की दीवार पर टंगी हुई एक लाल रंग की पैंटी और सफ़ेद ब्रा देखी| ज्योति मैडम की ब्रा पैंटी देख कर मैं अपने होश खो बैठा| मैं अपने आप पर पूरी तरह से कंट्रोल नहीं कर पा रहा था| ज्योति मैडम की ब्रा पैंटी को देखकर ही मेरे लंड ने लोअर में तम्बू तान दिया था|मेरा लंड बैठने का नाम नहीं ले रहा था और मैं नहीं चाहता था कि ज्योति मैडम मुझे इस हालत में देखें|मैंने झट से हैंगर से ज्योति मैडम की पैंटी उतारी और उसको अपने साथ घर ले गया| अपने घर जाकर मैं बेड पर लेट गया और ज्योति मैडम की पैंटी को चूत की तरह गद्दे तकिया के बीच में सैट कर दिया|फिर अपने लंड को उनकी पैंटी में घुसेड़ दिया| मुझे ऐसा लग रहा था कि मैं ज्योति मैडम की चुदाई कर रहा हूँ| कसम से दोस्तो, मैंने दो बार जल्दी जल्दी ज्योति मैडम की पैंटी में अपने लंड का पानी गिराया और इसके बाद मैं उनके घर चला गया|मेरी जेब में ज्योति मैडम की गंदी हो चुकी पैंटी थी|लेकिन जैसे ही उनके घर में पहुंचा, मेरी आंखें फटी की फटी रह गईं क्योंकि ज्योति मैडम पूरी तरह से सिर्फ एक तौलिए में लिपटी हुई थीं| शायद ज्योति मैडम अपनी पैंटी को ढूँढ रही थीं| मैंने ज्योति मैडम को देखा तो मैं सकपका सा गया| शायद उनको भी शक हो गया था कि उनकी पैंटी गायब होने में मेरा हाथ है| चूंकि उनके घर में मेरे सिवाए कोई नहीं गया था| ज्योति मैडम की दोनों बेटियां हॉस्टल में पढ़ती थीं और मैडम के पति जी डॉक्टर थे, वो शाम को घर आते थे| जब ज्योति मैडम ने मुझसे कुछ नहीं कहा, तो मैंने समझ लिया कि सब कुछ ठीक है| फिर मैं खाना खाने के बाद वापस आ गया और उनकी पैंटी को वहीं ज्योति मैडम के घर में छिपा कर रख आया| शाम के समय मैंने ज्योति मैडम के घर जाकर खाना खाया और उसके बाद मैं वहीं गहरी नींद में सो गया| मैं रात को ज्योति मैडम के घर में सोता था क्योंकि मुझे अकेले घर में डर लगता था| रात में मैंने अजीब सी आवाजें सुनी तो देखा कि मैडम के पति और ज्योति मैडम सेक्स कर रहे थे, पागलों की तरह एक दूसरे में लगे हुए थे| उन दोनों का सेक्स देख कर मैं पागल हो गया| मैंने देखा ज्योति मैडम पति के बालों को पकड़कर उनका मुँह अपनी चूत में घुसाए जा रही थीं|वो उनको गालियां दे रही थीं- चाट मेरी चूत को आज खा जा … मेरी चूत को जल्दी जल्दी से चाट साले| ज्योति मैडम ने अब अपनी चूत अलग हटाई और उस पर लिक्विड चॉकलेट गिराकर पति को इशारा किया| मैडम के पति ज्योति मैडम की चूत से लग गए और ज्योति मैडम ने उन्हें अपनी चूत से चिपका लिया था| मैडम के पति को ज्योति मैडम की चूत चाटते देखकर मैं भी गर्म हो गया|मैंने अपना लंड हिलाना शुरू कर दिया; अपने हाथ से तेज तेज हिलाते हुए लंड की मुट्ठी मारी|आज मैंने पहली बार ज्योति मैडम को इस हालत में देखा था| वैसे तो ज्योति मैडम साड़ी में बड़ी शरीफ लगती थीं लेकिन सारे मोहल्ले वाले उनके दीवाने थे; ज्योति मैडम की मटकती गांड को हर कोई चोदना चाहता था| अगली सुबह जब मैं उठा, तो मैं नहाकर स्कूल आ गया| उधर अपना प्रैक्टिकल देने लगा| लेकिन मैं वह दृश्य भुला नहीं पा रहा था| सोच रहा था कि किस तरह से ज्योति मैडम चूत चुसवा रही थीं| मेरे मुँह में पानी आ रहा था| मैं स्कूल से फ्री हुआ और तेज कदमों से अपने घर आ गया| जल्दी से अपनी ड्रेस चेंज की और ज्योति मैडम के घर आ गया| मैंने उनके घर में छिपाई हुई ज्योति मैडम की पैंटी उठाई और अपने घर आकर बैठ कर कल के जैसे नंगा होकर फिर से ज्योति मैडम की पैंटी को ज्योति मैडम समझ कर चोदने लगा| इतने में मेरे घर में ज्योति मैडम आ गईं और उन्होंने मुझे रंगे हाथों पकड़ लिया| वैसे तो ज्योति मैडम गुस्सा थीं लेकिन कुछ हंस भी रही थीं| उन्होंने मुझसे कहा- तुम्हारी मम्मी को मैं सब बताऊंगी| मैंने दोनों हाथ जोड़ कर ज्योति मैडम से कहा- प्लीज़ माफ़ कर दीजिए, आप जो कहेंगी, मैं करूंगा| ठीक है … चलो अभी घर आकर खाना खाओ| बाद में सोचती हूँ कि क्या करना है|” मैं खाना खाने आ गया लेकिन मुझसे खाना नहीं खाया गया क्योंकि मैं काफी डर गया था| शाम को भी मेरा ज्योति मैडम के घर जाने का दिल नहीं कर रहा था, मुझे बेहद डर लग रहा था| जब मैं शाम को नहीं गया, तो वो मेरे घर आईं और मुझे अपने साथ ले गईं| उसी वक्त अचानक से ज्योति मैडम के फोन पर मैडम के पति का फोन आया| उन्होंने हैलो कहा| तो मैडम के पति ने कहा- हां, मैं जरा देरी से वापस आऊंगा| तुम दोनों खाना खाकर सो जाना| यदि मैं ग्यारह बजे तक नहीं आया, तो फिर मैं कल आऊंगा| अब ज्योति मैडम ने मेरी तरफ देखा और होंठ दबा कर हल्का सा मुस्कुरा दी| लेकिन मैंने कुछ भी रिएक्ट नहीं किया| मैंने और ज्योति मैडम ने खाना खाया और टीवी देखने आ गए| हम दोनों ने 11:00 बजे तक टीवी देखा| फिर ज्योति मैडम बाथरूम में नहाने चली गईं| आज भी उनकी पैंटी और ब्रा वहीं दरवाजे के पीछे की दीवार पर टंगी हुई थी| मेरा अभी फिर से मन हुआ कि ज्योति मैडम की पैंटी को चोदने के लिए उठा लूं लेकिन मुझे ज्योति मैडम का डर था| मुझे नहीं पता था कि आज ज्योति मैडम का क्या इरादा है| ज्योति मैडम ने मुझे आवाज लगाई और बोलीं- बेटा, बाहर मेरी पैंटी और ब्रा टंगी है, उसे लेकर देना| मैं डरते डरते वॉशरूम के पास आ गया| तभी झटके से दरवाजा खुला और मैंने देखा कि ज्योति मैडम पूरी नंगी खड़ी थीं| मेरी आंखें फटी की फटी रह गईं| ज्योति मैडम की नंगी चूत को देखकर मेरे मुँह में पानी आ गया था| तभी उनकी मस्त उठी हुई गांड हिली, जिससे चूत ने मुँह चलाया| मैं नजारा देखने लगा| फिर ज्योति मैडम मादक आवाज में बोलीं- क्या देख रहे हो? अन्दर आ जाओ| जैसे ही मैं अन्दर जाने लगा तो सहमा हुआ था| मेरी सांसें तेज चल रही थीं| मैं कुछ भी करने से डर रहा था| मैंने कहा- ज्योति मैडम, मुझे माफ़ कर दीजिए| कैसा काम? उन्होंने मेरे बालों को पकड़ा और मुझे नीचे कर दिया| अपनी एक टांग को कमोड पर रखी और मेरे सामने ज्योति मैडम की गुलाबी और रसभरी चूत खुल गई थी| उन्होंने मेरा सर अपनी चूत में दबा दिया|मैंने भी चूत को देखा और ज्योति मैडम की चूत में मुँह लगा दिया| ज्योति मैडम की चूत में रस ही रस भरा था| नमकीन सफ़ेद अमृत का स्वाद जैसे ही मेरी जीभ पर लगा, मैं निहाल हो गया ‘उफ्फ … उम्महा …’ मैंने आज पहली किस उनकी चूत की फांकों पर की थी| उनके मुँह से मुझे वासना से लबरेज सिसकारियां निकलती सुनाई देने लगीं| मैंने जीभ चूत पर चलाने शुरू कर दी| शुरूआत में तो चूत चाटने में बहुत अजीब सा लगा| मगर चपर चपर करके मैं ज्योति मैडम की चूत चाटने लगा| तभी उन्होंने अपनी चूत पर लिक्विड चॉकलेट टपकानी शुरू कर दी| मुझे ज्योति मैडम की चूत मीठी लगने लगी| उन्होंने एक पल के लिए मुझे हटाया औरलिक्विड चॉकलेट की शीशी को अपनी चूत में लगा कर दबा दिया| उनकी चूत में लिक्विड चॉकलेट भर गई| अब ज्योति मैडम बोलीं- अगर तुम ये पूरी चॉकलेट खा लोगे, तो मैं तुमको स्पेशल गिफ्ट दूंगी| मैंने ज्योति मैडम की चूत को चाटा, उनकी चूत में जीभ डालकर मजा लेने लगा| ज्योति मैडम सेक्स की उत्तेजना में बोलने लगी- उफ्फ आंह … चाट ले साले … हिलाने से क्या होगा, आज चूत में घुस जा | ज्योति मैडम की गालियां और कामुक सिसकारियों से मेरा लंड तनता जा रहा था| फिर मैंने अपने दोनों हाथों से उनकी चूत को खोला और जीभ को नुकीला करके अन्दर डाल दी| जीभ अन्दर हुई और हाथ फ्री हो गए| मैंने हाथों से ज्योति मैडम की गांड को पकड़ा और अपनी जीभ से उनकी चूत को गपागप चोदने लगा| मैं पागलों के जैसे लगा हुआ था| वो भी मेरे बालों को पकड़कर मेरा साथ दे रही थीं|ज्योति मैडम बोलीं- तुम आज अपने मैडम के पति का काम कर रहे हो, इतनी मस्ती से तो पति भी नहीं चूसते हैं| आंह लगे रहो मेरी जान| चूसो , आंह जब तक मेरी चूत का पानी तुम्हारे मुँह में नहीं आ जाता, चूत चूसते रहो| कुछ देर बाद मुझे लगा कि बहुत अजीब सा नमकीन पानी मेरे मुँह आने लगा है| मैं हटने को हुआ, लेकिन उन्होंने मुझे हटने ही नहीं दिया| ज्योति मैडम बोलीं- आंह … साले पी जा ,आज अगर आज तूने मेरी चूत से मुँह हटाया, तो मैं तुम्हारी मम्मी को सारी बात बता दूंगी| मुझे डर लगा और बिना मुँह हटाए उनकी चूत को चूसना पड़ा|चूत चूसते हुए ही मुझे उनका सारा नमकीन पानी पीना पड़ा| फिर ज्योति मैडम ने मुझे उठाया और मेरे होंठों पर टूट पड़ीं| ज्योति मैडम ने मेरे होंठों को चूस चूस कर अपनी चूत का सारा रस साफ़ कर दिया| फिर वो मुझे अपने साथ पकड़ कर अपने रूम में ले आईं| अब मेरे लंड की गर्मी बढ़ चुकी थी और मुझे लग रहा था कि मैं जल्द से जल्द मुठ मार लूं| मतलब सामने चुदासी ज्योति मैडम नंगी थी और मैं चूतिया मुठ मारने की सोच रहा था| गांड फटने पर यही हाल होता है| फिर जब ज्योति मैडम ने मेरे कपड़े उतारने शुरू किए, तब ख्याल आया कि लंड के लिए चूत तो सामने ही है, मुठ क्या मारना| मैं पूरा नंगा हो गया| ज्योति मैडम ने मेरा लंड देखा और मुस्कुरा दीं| अब हम दोनों बेड पर आ गए और मैं चित लेट गया| ज्योति मैडम मेरे ऊपर चढ़ गईं और वो मेरे होंठों को किस करने लगीं| एक मिनट बाद ज्योति मैडम बोलीं- आज तुझे पति का काम करना है, करेगा ना!मैंने सर हां में हिला दिया|ज्योति मैडम मेरे होंठों को अपने होंठों के बीच दबाने और चूसने लगीं, मेरे लंड को अपने हाथों से दबाने लगीं| लंड पर उनका हाथ लगते ही लंड एकदम कड़क हो गया था|आह आह साली ज्योति मैडम, किसी रंडी के जैसे मेरे लंड को मसल रही थी| कुछ पल बाद वो अपनी चूत से मेरे लंड को रगड़ने लगीं| लंड को चूत का चुम्बन मिला तो मैं चूत का कायल हो गया; लंड चूत के अन्दर घुसने को लालायित हो गया| हम दोनों ही पागल हो चुके थे| मैं नहीं चाहता था कि ज्योति मैडम मुझे चोदें, इसलिए मैंने उनको धक्का दे दिया और उनके ऊपर आ गया| मैं भी गर्म हो चुका था| मैंने भी उनके गोरे-गोरे चूचों को मसलना और दबाना शुरू कर दिया| एक स्तन को अपने मुँह में लेकर चूसने लगा| पागलों के जैसे उनके निप्पल को दाँतों से खींच कर काटा| दूसरे हाथ से उनके दूसरे निप्पल को मसल दिया| ज्योति मैडम एकदम से चिल्ला उठीं- आंह साले काट मत , प्यार से चूस न|फिर मुझको पता ही नहीं चला कि मैं कब उनके चूचों से उनकी चूत पर आ गया| मुझे भी ज्योति मैडम की चूत चूसने का मजा आने लगा था क्योंकि वह चॉकलेट और शहद टपका कर मुझे पागल कर रही थीं|अबकी बार मैं ज्योति मैडम की चूत को ऐसे चाट रहा था जैसे मलाई खाता है| उन्होंने अपनी दोनों टांगों को खोलकर मुझसे अपनी चूत खूब चुसवाई|ज्योति मैडम बोलीं- तुम मेरे हो और चाटो|सच कहा था उन्होंने , आज असल में ज्योति मैडम का ही बन गया था| फिर ज्योति मैडम बोलीं- चल आ जा , अब आज मैं तुझको कुछ और देना चाहती हूँ|अब ज्योति मैडम ने मुझको अपने नीचे लेटाया और मेरे मुँह पर आकर बैठ गईं| ज्योति मैडम बोलीं- चूत चूसते जाओ बस, मरी तरफ मत देखो, और जो भी परसाद मिले, उसे खा जाना| मैं ज्योति मैडम की चूत चूसने लगा| कुछ मिनट के बाद ज्योति मैडम का रज मेरे मुँह में निकल गया| मैंने उस दिन उनका 3 बार पानी चूस लिया था| फिर ज्योति मैडम बोलीं- आज तुझे तेरे किए की सजा भी मिलेगी| तेरे लिए मेरी चूत से अभी कुछ और भी आएगा| चुत से धीरे धीरे नमकीन पानी आने लगा , शुरू में कुछ नमकीन सा स्वाद आया , वो बोली कैसा लगा , मैंने कहा बहुत अच्छा लेकिन ये क्या है वो बोली पेशाब है , रुको मत ज्योति मैडम ने मेरा सर थामा और बोलीं- तुम्हें तुम्हारी मम्मी की कसम, पी ल | कुछ ही पलों में मुझको उनका गर्म-गर्म मूत बहुत मस्त लगने लगा| मैं ज्योति मैडम का सारा मूत पी गया| उनकी चूत से मूत निकलना बंद हो गया जबकि मैं चाह रहा था कि वो मुझे और पिलाएं| वह समझ गईं और बोलीं- आज तूने मेरे मन की इच्छा पूरी कर दी| बोलो तुमको क्या चाहिए? मैंने भी बोल दिया- आपकी चूत को चोदना चाहता हूँ|उन्होंने ओके कहा और मेरे लंड को अपने मुँह में ले लिया|वो पागलों के जैसे लंड चूमने लगीं| जैसे ही मैं अपना लंड उनके होंठों पर रखा, मेरे लंड ने हार मान ली| लंड का रस उनके मुँह में निकल गया| ज्योति मैडम ने सारा रस खा लिया|साली के मुँह से एक भी बूंद बाहर नहीं गिरी| आज पहली बार मेरे लंड से इतनी क्रीम निकली थी कि ज्योति मैडम का मुँह अच्छे से भर गया था| ज्योति मैडम हंसती हुई बोलीं- इतनी सारी क्रीम मत जमा किया करो, इसके अन्दर कीड़े पड़ जाएंगे|मैंने कहा- निकालता तो आपकी पैंटी में हूँ| ज्योति मैडम हंसने लगीं और बोलीं- अब तड़पाओ मत … मेरी चुदाई करो| मैंने कहा- लंड तो खड़ा करो| उन्होंने दोबारा से मेरा लंड अपने मुँह में ले लिया और एक मिनट में ही चूस कर खड़ा कर दिया| लंड देख कर ज्योति मैडम बोलीं- चल अब असली काम पर लग जा| मुझे ज्यादा मत तड़पा| डाल दे जल्दी से मेरी चूत में| मैंने भी उनको कुतिया बनाया और पीछे से लंड लगा और उनकी चूत पर लंड रगड़ा| ज्योति मैडम अपनी गांड हिलाकर बोलीं- कुत्ते ऐसे मत तड़पा , डाल देना अन्दर अपना लंड मेरी चूत को रगड़ दे| मैंने भी लंड को सैट किया, उनकी गांड को पकड़ा और जोर से धक्का दे मारा|मेरा पूरा लंड ज्योति मैडम की चूत में अन्दर तक समा गया था| वो एकदम से चिल्ला उठीं और बोलीं- इतना लंबा लंड तो तेरे मैडम के पति का भी नहीं है|मैंने कहा- ज्योति मैडम, तुम्हारी पैंटी पर लंड को रगड़ रगड़ कर इतना लंबा किया है| वो हंसने लगीं और गांड हिलाने लगीं| मैं जोर जोर से धक्के देने लगा और उनके चूचों को पकड़कर चूत को फाड़ता रहा| ज्योति मैडम भी अपनी गांड को उठा उठा कर साथ दे रही थीं, मुझे गालियां दे देकर अपनी चूत का भोसड़ा बनवा रही थीं| वो मुझे जोश दिला रही थीं लेकिन मैं भी कहां थकने वाला था, मैंने भी ज्योति मैडम को ऐसा चोदा कि वो थरथरा उठीं| ज्योति मैडम बोली- तू तो बड़ा मर्द निकला| मैंने कहा- बस आपके मूत की वजह से ही ये सब कुछ हुआ| लगभग दस मिनट की चुदाई के बाद ज्योति मैडम की चूत से पानी की फुहार छूटने लगी| अब उन्होंने धक्का देकर मुझे हटाया और मुझे बेड पर गिरा दिया| वो फिर से मेरे होंठों पर बैठ कर बोलीं- फिर से चूस मेरी चूत को , मुझे आज तुझे सजा देनी है| मैं भी चूत चूसने लगा क्योंकि उनकी चूत में से मस्त खुशबू आ रही थी| कुछ देर बाद ज्योति मैडम लंड पर चूत फंसा कर चुदवाने लगीं| आधा घंटा की चुदाई में हम दोनों संतुष्ट हो गए| कुछ देर आराम करने के बाद ज्योति मैडम बोलीं- अब तुम मेरी गांड की चुदाई करो| मैं तो ज्योति मैडम का गुलाम था| मैंने उनकी गांड की चुदाई करने के लिए इस बार उनको बेड के एक सिरे पर लेटा दिया | उनकी टांगों को फैलाया और उनकी गांड के नीचे तकिया लगा दिया| फिर अपने लंड पर थूक गिरा कर लंड को ज्योति मैडम की गांड में सैट कर दिया| ज्योति मैडम ने मुस्करा कर देखा, तो मैंने उनकी चूचियों को पकड़ कर जोर से झटका दे दिया| लंड गांड में घुसता चला गया| ज्योति मैडम की चीख निकल गई|मैंने झट से उनके होंठों को लॉक किया और अपने लंड से फिर से धक्के देने शुरू कर दिए| मेरे धक्के इतने जोर से लग रहे थे | कि ज्योति मैडम की गांड के अंतिम छोर पर लग रहे थे| ज्योति मैडम पागलों के जैसे चिल्ला रही थीं| मैंने अपने लंड से धक्के मार मार कर उनकी गांड सुजा दी| कुछ देर बाद मैंने कहा- मेरा रस निकलने वाला है| ज्योति मैडम ने कहा- आज तुम अपनी बना लो| बोलो कहां निकालने का मन है!मैंने भी बोल दिया- आपके मुँह में| वो बैठकर मेरे लंड को चूसने लगीं|मेरे माल की पिचकारी निकली तो उनकी आंखों में, बालों में, होंठों पर जा गिरी| वो हंसने लगीं| फिर हम दोनों शांत होकर वहीं लेट गए और सो गए| सुबह जब उठे तो ज्योति मैडम ने एक प्यारी सी किस मेरे होंठों पर कर दी और बोलीं- यदि आज रात को भी तुम्हारे मैडम के पति नहीं आए, तो तुम्हारे लिए एक और चीज भी है, जो तुम्हें चाटनी है| ये ज्योति मैडम ने अपनी गांड की तरफ इशारा करते हुए कहा| मेरी सुबह खराब हो गई| वो सब क्या था , ये अगली कहानी में लिखूंगा| मेरी यह ज्योति मैडम की सेक्स कहानी आपको कैसी लगी? आप मेल करना न भूलें|

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