Important Notice: Post Free Ads Unlimited...🔥🔥🔥

Massage Girl in Sirsa Book Professional Massage Services Online

Frequently Asked Questions

To locate a professional who can meet your needs, read our biography, reviews and advertising.

Yes, many of the therapists on our site will come to your house so you may feel safe and at ease.

You may pick based on talents since most adverts provide their qualifications in their profiles.

It would be advisable to make a reservation earlier to guarantee that you would be able to get a massage, particularly against the prevalent services of massage.

Not at all. Tottaa exclusively connects users with service providers. The doctor gets to choose how to handle payment.

Read Our Top Call Girl Story's

Antarvasna

मैं रीता हूँ मेरे पति का नाम Antarvasna अतुल है। मेरे पति चाहते हैं कि मैं उनका लौड़ा चुसूं और पूरी नंगी होकर सेक्स में तरह तरह के खेल करूँ। इस बात को लेकर अक्सर मेरी उनसे लड़ाई हो जाती थी। मुझे लौड़ा चूसने से बड़ी चिढ़ थी मुझे लौड़ा चूसना बहुत गन्दा काम लगता था।

एक बार लड़ाई तेज हो गई, अतुल बोले- कुतिया, तू लौड़ा नहीं चूस सकती तो यहाँ से भाग जा!

मैं भी लड़ कर अपने घर आ गई। मैंने अपनी माँ को बता दिया कि अब मैं घर नहीं जाऊँगी। मेरी माँ ने मुझसे कुछ नहीं कहा। मेरे भैया 3-4 दिन के लिए घर से बाहर थे इसलिए रात में मैं भाभी के कमरे में सोने चली गई।

मैं और भाभी रात को दस बजे बिस्तर पर आ गई। भाभी ने साड़ी उतार दी। वो अब पेटीकोट और ब्लाउज़ में थीं। उन्होंने पेटीकोट उठा कर अपनी चड्डी भी उतार दी। ब्रा वो पहने नहीं थीं। मैं एक मैक्सी और चड्डी पहने थी।

भाभी ने मुझसे पूछा- ब्लू फिल्म देखोगी क्या?
मैं पिछले दस दिन से नहीं चुदी थी, मेरी चूत में खुजली हो रही थी।
मैं बोली- देख लूंगी!

भाभी ने एक सेक्सी हिंदी ब्लू फिल्म लगा दी। फिल्म में कुछ देर बाद लड़कियों ने लड़कों के लंड निकाल कर चूसना शुरू कर दिए।

मैं बोली- भाभी यह काम तो केवल रंडियाँ ही कर सकती हैं!

भाभी मुस्करा कर बोली- शुरू शुरू में तो गन्दा लगता है लेकिन एक बार चूस लो तो फिर बार बार लंड चूसने का मन करता है! तेरे भैया तो दिन में एक बार लंड चुसवाते ही हैं।

मैं बोली- ऊहं! मैं तो कभी नहीं चूस सकती!

कुछ देर बाद लड़की की चूत में लौड़ा घुसा कर लड़के चोदने लगे। कमरे में फिल्म की सेक्सी आवाज़ गूँज रही थी। भाभी पेटीकोट उठा कर अपनी चूत सहलाने लगीं। मेरा हाथ बार बार मेरी चूत पर जा रहा था लेकिन मैं हटा लेती थी।

भाभी मुस्करा कर मेरी तरफ देखती हुई बोलीं- शरमा क्यों रही है? खुजली हो रही है तो खुजा ले! ला, मैं तेरी खुजा देती हूँ और तू मेरी खुजा दे!

भाभी ने मेरी मैक्सी खोल कर मेरी चड्डी में उंगली डाल दी और मेरी चूत खुजानी शुरू कर दी। मेरा हाथ उन्होंने अपनी चूत पर रख दिया। मैं भी उनकी चूत खुजलाने लगी। ब्लू फिल्म अपनी चरम सीमा पर थी। अब दो लड़कियों की चूत उन्हें सीधा लेटाकर 2 लड़के मार रहे थे और एक लड़का उनमें से एक लड़की को अपना लंड चुसवा रहा था। उनकी उहं उहं ओह ओह की आवाजें पूरे कमरे में गूँज रही थीं।

मैं और भाभी बहुत गरम हो रहे थे, भाभी ने अपना पेटीकोट, ब्लाउज़ उतार दिया था। मैं भी सेक्स की गर्मी में नहा रही थी और पूरी नंगी हो गई थी। भाभी की चूत पूरी चिकनी थी। मेरी चूत पर झांटों का जंगल उग रहा था।

भाभी बोली- ननदजी, लगता है रमेश जी को जंगल में घुस कर चोदना अच्छा लगता है!

उन्होंने मेरी चूत में उंगली घुसा दी। मैंने भी उनके चूत के होटों को रगड़ना जारी रखा।

फिल्म ख़त्म हो गई थी। हम दोनों पूरी नंगी एक दूसरे से बुरी तरह से चिपकी हुई थी। मेरी चूत भाभी की चूत से पूरी छुल रही थी और चूचियाँ रगड़ खा रही थीं। हम दोनों ने एक दूसरे के होंठ चूसे और चूचुक उमेठे। थोड़ी देर बाद भाभी और मैंने एक साथ पानी छोड़ दिया उसके बाद हम दोनों सो गए।

अगली रात को हम लोग फिर साथ सोये। आज भाभी मेरे सामने पूरी नंगी हो गई थीं, बोली- तेरे भैया के साथ तो मैं पूरी नंगी ही सोती हूँ! अब कल तो हम लोगों ने मौज की ही थी, आज और मौज करते हैं!

और उन्होंने मुझे भी पूरा नंगा करा दिया। मेरी झांटों के जंगल पर हाथ फिरा कर भाभी बोलीं- चल, इसे साफ कर ले! फिर मजा चखाती हूँ!

और उन्होंने क्रीम लगाकर मेरी चूत पूरी चिकनी कर दी। भाभी बोलीं- आज मैं तुझे असली लंड जैसा मजा देती हूँ!

भाभी अपनी अलमारी की तरफ गईं, उन्होंने एक नकली लंड अपनी अलमारी से निकाला और बोली- यह नकली लंड है! बिल्कुल असली जैसा मजा देता है! तेरे भैया ने अमेरिका से लाकर दिया है। इसे चूत में फिट करके लड़कों की तरह औरतों को चोदा जा सकता है और अपने हाथ से भी चूत में डाल कर मजा ले सकते हैं। अब बता मैं तुझे चोदूँ या तू मुझे चोदेगी?

मैं बुरी तरह शरमा रही थी, भाभी बोली- बहुत शर्माती है? चल लेट! पहले मैं ही तुझे चोदती हूँ!

और उन्होंने अपनी चूत में लंड फिक्स कर लिया। भाभी नकली लंड लगा कर ऐसी लग रहीं थीं जैसे कोई गोरे लंड वाला चिकना लौंडा मुझे चोदने को खड़ा है। मुझे गिरा कर भाभी मेरे ऊपर लेट गईं और मेरी चूत में अपना नकली लौड़ा हाथ से पकड़ कर घुसा दिया। नकली लंड मेरे पति से मोटा था, मेरे मुँह से ऊहऽऽ मर गई! मर गई! की आवाज़ निकल गई, लेकिन मुझे साथ ही साथ मजा भी आया था।

भाभी ने मेरी चूचियाँ मलते हुए करीब दस मिनट तक नकली लंड से मुझे चोदा। उसके बाद उन्होंने मेरी चूत में लंड फिक्स कर दिया और बोली- चल अब तू मुझे चोद!

मैं चोदने में शरमा रही थी, भाभी बोली- साली शरमाती बहुत है!

और वो मेरे ऊपर उछ्ल कर बैठ गईं और ऊपर उछ्ल उछ्ल कर चुदने लगीं। उन्होंने मेरे हाथ अपने बड़े बड़े संतरों पर रख लिए और बोलीं- कुतिया, इन्हें तो दबा दे!

मुझे उनके मोटे मोटे चूचे मसलने में बड़ा मजा आने लगा। थोड़ी देर में हम दोनों झड़ गई। उसके बाद हम दोनों पहले की तरह चिपक कर सो गई।

रात के 3-4 बजे घर में घंटी बजी, भैया बाहर से आ गए थे। मैं भी जाग गई। भाभी, मैं और भैया बातें करने लगे। थोड़ी देर में मैं सोने लगी। तभी मुझे ऐसा लगा जैसे भाभी उठकर बाथरूम में गई हों। कुछ देर बाद मैंने बाथरूम में झाँककर देखा तो मैं दंग रह गई- भाभी भैया का लंड पैंट से निकाल कर लपालप चूसे जा रही थीं। उसके बाद इंग्लिश टॉयलेट पर बैठकर भैया ने अपने लौड़े पर भाभी को बिठा लिया और कस कस कर उनकी चूचियों को मसलने लगे। भाभी धीरे धीरे चिल्ला रही थी- कुत्ते! चूत में डाल इस लौड़े को! 15 दिन से बिना चुदे पड़ी हूँ! कोई और होती तो रंडी बन गई होती! भैया ने एक झटके में लंड भाभी की चूत में घुसा दिया और भाभी चिल्ला उठीं- उईऽऽ! मर गई! फट गई! मजा आ गया! क्या घुसाया है!

भैया भाभी की घुन्डियाँ मसलते हुए बोले- रंडी, नकली लंड नहीं डाला अपनी चूत में? तुझे अमेरिका से लाकर दिया था!

लौड़े पर उछ्लती हुई भाभी बोली- अरे कुत्ते! तेरे जैसे लंड का मजा नकली में कहाँ! साले को जब तक नहीं चखा था तब तक तो कोई बात नहीं लेकिन अब तो तीन दिन नहीं चुदुं तो मन करने लगता है कि सब्जी वाले को बुलाकर चुदवा लूँ! मेरे कुत्ते, ज्यादा दिन को मत जाया कर! अगर रंडी बन गई तो तू जिम्मेदार होगा..

भाभी उनके लौड़े पर धीरे धीरे उछ्ल रहीं थीं, भैया उनकी चूचियों की घुन्डियाँ मसल रहे थे। भैया बोले- चल जरा हट थोड़ा! तेरे को पीछे से ठोकता हूँ!

भैया ने भाभी को उठा दिया। भैया उठते, इससे पहले ही भाभी ने उन्हें रोका और बोलीं- तेरा शेर बहुत सुंदर लग रहा है! इसको थोड़ा चूस लूं!

यह कह कर उन्होंने भैया का लौड़ा अपने मुँह में ले लिया और तेजी से आगे पीछे करके चूसने लगी। मैं हैरान थी कि मेरी भाभी इतना मस्त होकर लौड़ा चूसती हैं। भाभी इस समय ब्लू फिल्म की हिरोइन लग रही थीं। भैया का सुपाड़ा ऐसे चाट रही थीं जैसे कोई आइसक्रीम चाट रहा हो। भैया भाभी की गांड में उंगली कर रहे थे।

भैया बोले- चल कुतिया लौड़ा छोड़ और अब जरा चूत बजाने दे।

भाभी टॉयलेट की सीट पर हाथ रखकर घोड़ी बन गईं। भैया ने पीछे से उनकी चूत में लंड छुला दिया और धीरे धीरे से उनके संतरे मसलते हुऐ लंड उनकी चूत में घुसा दिया और भाभी को चोदने लगे। भाभी की ऊहं ऊह की आवाजें साफ़ सुनाई दे रही थीं। भैया बीच बीच में जोर से हाथ उनके चूतड़ों पर मार देते थे। कुछ देर बाद भैया ने अपना लंड बाहर निकाल लिया। लंड झड़ चुका था। भाभी खड़ी होकर भैया से चिपक गईं और उन्हें चूमती हुई बोलीं- सच, आज बहुत मजा आया!

इसके बाद मैं बिस्तर पर आकर लेट गई थोड़ी देर में भाभी भी मेरे पास आकर सो गईं। मैं सोच रही थी कि भाभी तो बहुत बदमाश हैं, लंड लपालप ऐसे चूसती हैं जैसे आइसक्रीम खा रही हों! छीः छीः कितना गन्दा काम है लंड चूसना! चुदने में तो मजा आता है लेकिन लंड चूसना? छीः छीः. मैं तो कभी नहीं चूस सकती..

शेष कहानी अगले भाग में!
आपकी उषा रांड
साथियो, कहानी कैसी लगी? Antarvasna

प्रेषक : अमित Antarvasna

पिछले भाग की कुछ Antarvasna अन्तिम पंक्तियाँ : लल्लू लाल कहाँ रुकने वाले थे, 5 मिनट बाद उन्होंने अपने पूरा चिकना लण्ड बहू की चूत में पेल ही दिया, अब सिर्फ़ आँड बाहर रह गये। जैसे ही सुषमा का दर्द थोड़ा कम हुआ और वो सामान्य हुई, उन्होने लण्ड को अंदर-बाहर करना शुरू कर दिया। लल्लू लाल बहू की चूत के खून से रंगा लण्ड अंदर-बाहर करते रहे, सुषमा की चीखे सुनाई देती रहीं।

बेटा तू बापू की गाण्ड चाट ! मैं आँड चाटती हूँ, नहीं तो ये बहू को चोद चोद कर मार डालेंगे ! रुक्मणि बोली।

सुषमा ने देखा कि उसका पति उसके ससुर की गाण्ड चाट रहा था और सास ससुर के मोटे काले अंडकोष चाट रही थी। लल्लू लाल जी उत्तेजना के शिखर पर थे- बहू, भर दूँ तुम्हारी कुँवारी चूत अपने ताक़तवर वीर्य से? उन्होने पूछा।

सुषमा ने कुछ बोलना चाहा ही था कि वो गर्र-गर्र करते हुए झड़ गये।

ओह ! ओह ! आपने तो कोई आधा कप पानी बहू की चूत में छोड़ दिया है, बच्चा होकर रहेगा ! रुक्मणि बोली।

अब आगे :

ससुर जी ऊपर से हट कर बिस्तर के कोने पर बैठ गये और सुषमा को सहलाने लगे। उधर सुरेश नीचे जाकर रुक्मणि की चूत चाट रहा था।

चाट मेरे लाल, चाट ! मेरे बेटे तेरी जीभ तो लण्ड से भी ज़्यादा मज़ा देती है ! रुक्मणि बोल रही थी। उधर लल्लू लाल जी भी नीचे पहुँच गये, उन्होंने सुरेश की गाण्ड में तेल लगा कर उसको उंगली से चोदना शुरू कर दिया।

हाँ बापू ! फ़ाड़ो मेरी गाण्ड ! सुरेश गाण्ड नचाते हुए बोल रहा था।

ससुर ने सुषमा को नीचे खींचा और उसका मुँह से अपने लण्ड को अड़ा दिया- इसको चूस चूस कर बड़ा कर बहूरानी ! ताकि मैं तेरे पति की सेवा कर सकूँ ! उन्होने कहा।

सुषमा ने उनके मोटे काले लण्ड को कस के पकड़ा और जीभ फेरने लगी। धीरे धीरे लल्लू लाल जी का सुपारा चीकू जितना बड़ा हो गया और लण्ड एकदम हथोड़े जैसा !

ससुरजी ने बहू को धन्यवाद दिया और वापस से सुरेश की गाण्ड पर अपना हथियार तान दिया। किसी मंजे हुए खिलाड़ी की तरह सुरेश ने गाण्ड को हिलाया और एक ही झटके में लल्लू लाल जी का आधा लण्ड उसकी गाण्ड में चला गया।

सुरेश ज़ोर से चीखा- मर गया बापू ! अभी पूरा कहाँ मरा है? अभी तो आधा ही मारा है ! लल्लू लाल जी बोले और पूरा लण्ड पेल दिया। सुषमा सोचने लगी कि सुरेश की गाण्ड क्या उतनी बड़ी है?

उधर सुरेश अपनी माँ की चूत चाटे जा रहा था।

रुक्मणि उछल रही थी- बेटा। मैं झड़ने वाली हूँ, पूरी जीभ डाल दे अपनी माँ के भोसड़े में ! वो बोली।

और दो मिनट में हांफ़ते हुए अपना पानी छोड़ दिया। उधर लल्लू लाल जी की रफ़्तार बढ़ गई थी।

रुक्मणि पीछे आ गई, मेरे बेटे की गाण्ड फाड़ दोगे क्या ? अब रहम करो ! वो बोली और सुरेश के नीचे लेट गई। सुषमा ने देखा कि रुक्मणि सुरेश की लुल्ली को चूस रही थी और अपने हाथों से ससुरजी के बड़े बड़े अण्डकोषों को मसल रही थी।

अब अपने बेटे की गाण्ड अपने पानी से भर दो ! रुक्मणि बोली। यह सुनते ही लल्लू लाल जी तेज़ हो गये और बोले- हाँ जान। ये ले तेरे बेटे की गाण्ड में अपना पानी डालता हूँ ! कहकर वो झड़ गये। सुषमा थक कर सो गई।

सुषमा को पता चल गया था कि उसके ससुर उसकी सास को तो माँ नही बना सके मगर ये कसर अब उसके साथ ज़रूर पूरी करेंगे।

सुबह जब उसकी आँख खुली तो ससुर और पति दोनों काम पर जा चुके थे मगर सास नहीं गई थी।

रुक्मणि बोली- आज तेरी सेवा करूँगी बहू !

खून से भरी चादर धुल गई थी और रुक्मणि ने सुषमा से कहा- नहाने से पहले मैं तेरी तेल मालिश करूँगी।

रुक्मणि ने सुषमा के पूरे कपड़े खोल दिए और उसके पूरे बदन पर मालिश करने लगी। फिर उसने रेज़र लेकर सुषमा की झांट साफ की और बोली- बेटा यहाँ हमेशा सफाई रखनी चाहिए। मैं, तुम्हारे ससुर और सुरेश के झांट भी साफ करती हूँ हमेशा !

सफाई के बाद रुक्मणि ने तेल लेकर उसकी चूत पेर लगाया और उंगली से सुषमा की चूत चोदने लगी।

बेटी, इससे तेरा छेद बड़ा हो जाएगा ताकि आज रात तू आसानी से ससुर का लण्ड ले सके ! वो बोली।

उंगली की चुदाई में सुषमा को बहुत मज़ा आ रहा था और वो सास के साथ साथ अपनी गाण्ड हिलाने लगी। कोई पाँच मिनट बाद सास की तीन उंगलियाँ अंदर थी और सुषमा झड़ गई। उसे पहली बार चरमसुख मिला था। सास उसको रात के लिए तैयार कर रही थी।

रात होते ही सुषमा वापस ससुर के कमरे में गई। ससुरजी वैसे ही नंगे लेटे हुए थे, पास जाते ही उन्होंने सुषमा को अपने पास खींच लिया और चूमने लगे। एक ही पल में उन्होंने सुषमा को नंगा कर दिया और उसकी चूत चाटने लगे। कोई पाँच मिनट बाद सुषमा अपने ससुर की जीभ पर झड़ गई। उधर सुरेश अपने पिता का लण्ड कुत्तों की तरह चाट रहा था। सुषमा के झड़ते ही लल्लू लाल जी ने अपना लण्ड उसकी चूत से भिड़ाया और एक ही शॉट में भीतर पेल दिया। सुषमा चीखी मगर उसे आनंद भी आया। अब ससुरजी धीरे-धीरे लण्ड अंदर-बाहर करने लगे। उसको अच्छा लग रहा था, उसने अपने हाथों से ससुरजी की गाण्ड कस कर पकड़ ली और उन्हें अपने ऊपर दबाने लगी।

लल्लू लाल जी ने धक्कों की रफ़्तार बढ़ा दी और ज़ोर-ज़ोर से सुषमा को चोदने लगे। उधर सुरेश अपने पिताजी के अमरूद समान आण्डों को तेल लगा कर मसल रहा था और कह रहा था- बापू इन आण्डों का पूरा रस डाल दो इस रांड की चूत में, ताकि इसको आपका बच्चा हो !

हाँ बेटा, पूरा वीर्य खाली कर दूँगा ! लल्लू लाल जी बोले और एक चीख के साथ वो झड़ गये। सुषमा का भी पानी निकल गया। सुषमा को पहली बार चुदाई का मज़ा आया था।

अगले दिन रुक्मणि बोली- बेटी, हालाँकि तेरे ससुर का लण्ड शानदार है लेकिन तू मुझे कहेगी कि मैंने तुझे जवान लण्ड का मज़ा नहीं दिया, इसलिए आज एक जवान लण्ड के लिए तैयार रहना ! वो आँख मारते हुए बोली।

सुषमा कुछ समझती उससे पहले यासीन वहाँ आ गया। यह वही लड़का था जिसको उसने अपने पति सुरेश की गाण्ड मारते हुए देखा था। सुरेश उसको कमरे में लाया और अंदर से बंद कर दिया। सुरेश ने एक मिनट में सुषमा के कपड़े उतार दिये और यासीन को नंगा कर उसका लण्ड चूसने लगा। सुषमा ने देखा कि यासीन का लण्ड भी बहुत बड़ा था हालाँकि वो उसके ससुर के लण्ड से छोटा था मगर मोटाई अच्छी थी और ससुर की तरह उसके लण्ड के आगे चमड़ी नहीं थी।

यासीन तुरंत सुषमा के पास आया और उसके 38 इंच के स्तन दबाने लगा। उधर सुरेश नीचे सुषमा की चूत और यासीन का लण्ड चाट रहा था। यासीन कामोत्तेजना में पागल हो रहा था और उसने झटके से अपने लण्ड का गुलाबी सुपारा सुषमा की चूत में पेल दिया। सुषमा के मुँह से हल्की सी चीख निकली। चीख सुनते ही यासीन ने पूरा सात इंच का लण्ड अंदर घुसा दिया सुषमा की साँस ऊपर चढ़ गई। सुरेश यासीन की गाण्ड चाट रहा था और यासीन गालियाँ बक रहा था- भेन की लौड़ी, आज तेरे हिजड़े पति के सामने तेरी चूत फाड़ दूँगा।

सुषमा को उसके मज़बूत झटको से आनंद आ रहा था। यासीन ज़्यादा देर तक चल नहीं पाया, दो मिनट में उसका फव्वारा सुषमा की चूत में छुट गया। मगर सुरेश कम नहीं था, उसने यासीन का गीला लण्ड बाहर निकाला और उसको चाटने और चूसने लगा। दो मिनट में यासीन फिर तैयार था, उसने सुषमा की गीली चूत में ही अपना लौड़ा पेल दिया।

चोदो मुझे ज़ोर से ! सुषमा बोली।

इस बार कोई 5 मिनट चोदने के बाद यासीन और सुषमा एक साथ झड़ गये। यासीन के जाने के बाद रुक्मणि अंदर आई और बोली- मैने ही इस लड़के को सुरेश की गाण्ड मारने की आदत डलवाई है। इसका चाचा और बाप दोनों मुझे चोद चुके हैं, रात को उन दोनों को बुलाऊंगी ! यह कह कर वो चली गई।

रात में सुषमा ने देखा कि दो बुड्ढे घर आए, दोनो साठ के आसपास होंगे। एक की दाढ़ी थी। उनकी उमर देख कर लग नहीं रहा था कि उनका लण्ड काम भी करता होगा। एक तो हाथ में लाठी लिए हुआ था।

कोई दस बजे रुक्मणि सुषमा को कमरे में ले गई।

बेटा ये यूसुफ चाचा हैं और ये अकरम चाचा ! दोनों तेरे ससुर के दोस्त हैं ! वो बोली।

दोनों आदमी एक दूसरे के कपड़े उतारने लगे। उधर रुक्मणि एकदम नंगी हो गई और सुषमा को भी नंगा कर दिया। यह देख कर लल्लू लाल जी भी नंगे हो गये। सुषमा ने देखा कि दोनों बुड्ढों के औज़ार लटके हुए थे और आंड नीचे झूल रहे थे। दोनों बुड्ढे रुक्मणि के आगे खड़े हो गये और रुक्मणि उनके लौड़े एक एक करके चूसने लगी।

भाभी लण्ड चूसने में तुम्हारा मुक़ाबला नहीं ! बुड्ढों को भी जवानी चढ़ जाए ! यह कह कर अकरम हंसे।

उधर लल्लू लाल जी ने सुषमा के मुँह में अपना मोटा सुपारा ठूंस दिया। सुषमा मज़े से चूसने लगी। सुषमा ने देखा कि कोई 5 मिनट की चूसाई के बाद दोनों बुड्ढों के लण्ड तन गये थे। उसने देखा कि एक बुड्ढे का लण्ड तो 6 इंच था मगर मोटाई उसकी कलाई जितनी थी, दूसरे का पतला था मगर लंबाई पूरी नौ इंच थी।

अब देखो तुम्हारे लण्ड तैयार हैं मेरी बहू की चुदाई की लिए ! रुक्मणि बोली।

सुषमा को लल्लू लाल जी ने बिस्तर पर लिटाया और उसके मुँह मे अपना लण्ड डाल दिया। उधर अकरम ने सुषमा की टाँगें चौड़ी की और अपना मोटा लण्ड भीतर डाल कर सुषमा को चुदाई के मज़े देने लगा। सुषमा को मज़ा आ रहा था। ससुर उसके मुँह की चुदाई कर रहे थे और अकरम चूत की।

उधर सुषमा ने देखा कि यूसुफ ने रुक्मणि को घोड़ी बनाया हुआ था। रुक्मणि जितनी बड़ी गाण्ड सुषमा ने ज़िंदगी में नहीं देखी थी। ऐसा लगता था कि जैसे दो बड़े बड़े मटके हों।

यूसुफ रुक्मणि की गाण्ड को उंगली से चोद रहा था, साथ ही थूक भी लगा रहा था।

सुषमा को अब समझ में आया कि उसकी सास पतले और लंबे लण्ड कहां लेती है।

भाभीजान, आपकी गाण्ड है या घड़ा? युसुफ बोले और अपने लण्ड को घुसाने लगे। रुक्मणि दर्द में चिल्ला रही थी- मेरी मटकी आज फोड़ ही दो ! यह कह कर वो अपनी गाण्ड हिलाने लगी। युसुफ धीरे-धीरे रुक्मणि को चोदने लगे। उधर अकरम ने रफ़्तार बढ़ा दी थी।

चाचा इतना जोर से नहीं ! सुषमा बोली।

लल्लू लाल जी ने अपना लण्ड सुषमा के मुँह से निकाला और युसुफ के पीछे पहुँच गये। दो चम्मच तेल उन्होंने युसुफ की गाण्ड में लगाया और एक ही झटके में अपने तगड़ा लण्ड यूसुफ की गाण्ड में पेल दिया। यूसुफ दोनों तरफ से मज़े ले रहा था।

भाभी मैं झड़ने वाला हूँ ! कह कर उन्होंने रुक्मणि की चूत अपने वीर्य से भर दी। उधर लल्लू लाल जी ने स्पीड बढ़ा दी थी और उन्होंने अपनी टंकी यूसुफ की गाण्ड में खाली कर दी।

इधर अकरम का पानी निकलने वाला था। सुषमा दो बार चरमसीमा पर पहुँच चुकी थी और अकरम का गरम फव्वारा उसके अंदर छुट गया।

चुदाई के बाद दोनों बुड्ढे बोले- भाभी, एक बार बहू को हमारे घर लाओ !

रात भर वहाँ जम कर चुदाई चली। दो महीनों बाद सुषमा को उल्टियाँ आने लगी।

लल्लू लाल जी, रुक्मणि, सुरेश भी सभी खुश थे। Antarvasna

मैं अपने माँ पापा की इकलौती संतान हूँ, मेरे पापा का गांव में खुद का बहुत बड़ा बिज़नस है और मेरे चाचा का भी शहर में बिज़नस था जिसे चाचा और चाची दोनों मिलकर संभालते हैं। मेरे चाचा चाची की कोई संतान नहीं है तो वो दोनों भी मुझे अपनी बेटी की तरह ही प्यार करते हैं। अकेली संतान होने से मेरी परवरिश बहुत ही लाड प्यार से हुई थी, किसी बात की पाबंदी नहीं थी। कॉलेज लाइफ में भी मैं एकदम बिंदास थी और मेरे 1-2 अफेयर्स भी हुए थे।

मेरी हाइट 5’4″ है, रंग गोरा है, आँखें नशीली हैं, गुलाबी उभरे हुए गाल है, मखमली होंठ है, मेरे बाल लंबे हैं, लंबी नुकीली नाक है, छाती 34 की कमर 28 और नितम्ब 35 के हैं।
मैं अपनी कमर में एक चांदी की चैन पहनती हूँ, पैरों में पायल और नाक में छोटी सी नथ पहनती हूँ।

हाल ही में मैंने अपने बारहवीं के एग्जाम दिए थे और आगे बहुत लंबी छुट्टी थी। अप्रैल महीना ख़त्म होने को था, और अपने चाचा के पास शहर में जाने के लिए तैयारी कर रही थी। हर बार की तरह इस बार भी मैं स्कूल की छुट्टियों में अपने चाचा के यहाँ जा रही थी।
मेरे चाचा का शहर से बाहर बहुत बड़ा घर था जिसमें जिम, स्विमिंग पूल सब सुविधा है, मुझे वहाँ रहना बहुत अच्छा लगता है।

मैं सुबह ट्रेन से निकली और रात को अपने चाचा के घर पहुँच गई। हर बार की तरह चाचा और चाची ने मेरा स्वागत किया, मुझे शहर घुमाया और बहुत सारी शॉपिंग भी कराई। मैं और चाची पार्लर में भी जाकर आये और वैक्सिंग, फेशीयल, पेडीक्योर करवाया.

चार पांच दिन के बाद मेरे चाचा और चाची को बिज़नस के सिलसिले में अचानक देश के बाहर जाना पड़ा। मैं घर में अकेली कैसे रहूंगी, उनको चिंता होने लगी थी। पर मैंने उनको विश्वास दिलाया कि बस 2 दिन की ही तो बात है। मैं अकेली रह लूंगी, तो वो जाने को तैयार हो गए।

वो बुधवार को सुबह के प्लेन से निकल गए। उनके जाने के बाद मैंने गार्डन में थोड़ी देर वक्त गुजारा, फिर थोड़ी देर किताब पढ़ी, टीवी देखा। फिर खाना खाने के बाद अपने चाची की साड़ी
पहन कर देखी, पर मेरा मन किसी में भी नहीं लग रहा था।

फिर मैंने सोचा क्यों न एक फिल्म देखी जाए तो मैं फट से रेडी होके थिएटर पहुंची। दोपहर के चार बजे का शो था। एक तो बुधवार ऊपर से फिल्म इंग्लिश में थी, इसलिए भीड़ बहुत कम थी।
मुश्किल से 10% सीट्स ही भरी थी। उनमें भी दो कपल्स थे जो आगे की कॉर्नर सीट पर चले गए। मैं अकेली एकदम लास्ट के लाइन में बैठ गई।

मैंने उस दिन घुटनों तक लॉन्ग स्कर्ट पहनी थी और ऊपर एक स्लीवलेस लूज़ टीशर्ट पहनी हुई थी। मैं फिल्म देखने लगी।
दोनों कपल्स अपने काम में व्यस्त थे।

आधे घंटे के बाद दो लोग मुझे मेरी ओर आते हुए दिखे। मैं थोड़ा डर गई पर चेहरे पर कुछ महसूस नहीं होने दिया।

फिर एक अजीब बात हुई, वो दोनों में से एक मेरी दाई साइड में तो दूसरा मेरी बाई साइड मैं बैठ गया। मैं तो अंदर से बहुत डरी हुई थी। मेरे मन में ख्याल आया कि झट से उठ कर बाहर चली
जाऊँ लेकिन सोचा पब्लिक प्लेस में वो कुछ गलत नहीं कर सकते।
तो मैं फिल्म देखने लग गई।

दोनों दिखने में अच्छे थे, बॉडी बिल्डर लगते थे। लगभग 35-40 के आसपास दोनों की उम्र होगी, दोनों ने जीन्स और टीशर्ट पहनी हुई थी।
मैं बिना डरे अपने दोनों हाथ कुर्सी पे रख कर बैठी।

थोड़ी देर के बाद दाईं तरफ मेरे हाथ पर किसी ने हाथ रखा। मेरी तो जैसे सांस ही रुक गई।
‘ओह सॉरी…’ उस अंकल ने कहा और अपना हाथ मेरे हाथ पर से हटा दिया।
‘इट्स ओके!’ मैंने कहा, मैं ना डरने का नाटक कर रही थी पर अंदर से बहुत डरी हुई थी।

थोड़ी देर बाद फिर से उसका हाथ मेरे हाथ से टच हुआ। पर इस बार उन्होंने अपना हाथ पीछे नहीं लिया और वैसे ही रहने दिया। मेरी साँस बहुत तेज चल रही थी। और हाथ को पसीना भी आ रहा
था, पर मैं न डरने का नाटक करती रही।
मेरी और से कुछ रिस्पांस न पाकर फिर उस अंकल ने अपना पूरा हाथ मेरे हाथ से सटा लिया और अपना हाथ मेरे हाथ पे हल्के से घिसने लगे।

थोड़ी देर बाद मुझे मेरे दूसरे हाथ पर भी किसी के हाथ का टच महसूस हुआ। शायद दोनों ने इशारों से एक दूसरे को बताया होगा।
मुझे बहुत अजीब लग रहा था, दोनों मेरे चाचा की उम्र के थे और मेरे साथ अजीब हरकत कर रहे थे।

फिर दाईं तरफ बैठे अंकल ने अपना बायाँ हाथ उठाया और मेरे कुर्सी के पीछे वाले हिस्से पे रख लिया, फिर धीरे से मेरे बायें कंधे को टच किया।
तेज डर की एक लहर मेरे दिमाग से मेरे पैरों तक दौड़ गई।

इतने में फिल्म का इंटरवल हुआ और वो दोनों अंकल उठ के बाहर चले गए, मुझसे सदमे से उठा भी नहीं जा रहा था।
ऐसा नहीं की किसी ने मुझे पहले टच नहीं किया था। पर दो अंजान लोगों के साथ किसी अनजान जगह पर मेरे साथ लाइफ में पहली बार हो रहा था।

मैंने थिएटर में नजर दौड़ाई तो सिर्फ दो कपल ही थे, वो भी किसिंग में बिजी थे। मैंने भी अपने बॉयफ्रेंड के साथ बहुत दिन हुए सेक्स नहीं किया था तो मेरे मन में भी हलचल पैदा होने लगी थी।
‘चल नीतू घर चल!’ मेरा दिल मुझे बोलता।
‘रुक जा नीतू, पब्लिक प्लेस है। वो दोनों थोड़े ही तुझे नुकसान पहुँचाएंगे। थोड़े मजे ले ले!’ तभी दूसरा मन कहता।

इतने में इंटरवल खत्म हो गया और लाइट बुझ गई।

थोड़ी देर बाद एक अंकल अंदर आये और मुझे चेक किया। मैं वहीं बैठी हूँ, जान कर फिर बाहर गये और दो मिनट बाद दोनों वापस आये और पहली वाली जगह पर बैठ गए।
मेरे रुकने से उनकी हिम्मत बढ़ गई थी और अपनी जगह बैठते ही दोनों ने अपने अपने हाथ मेरे हाथों पे रखे और सहलाने लगे।

मैं जरूर अपनी मर्जी से रुकी थी लेकिन मेरे होंठ अब सूखने लगे थे, मेरे मन में अजीब सी उथल पुथल हो रही थी, मुझे देखना था कि वो दोनों और कितने आगे बढ़ सकते हैं।

फिर एक बार दाईं साइड में बैठे हुए अंकल ने अपना हाथ कुर्सी के पीछे से मेरे बाये कंधे के पास रखा और फिर मेरे स्लीवलेस कंधे को टच करने लगे। थोड़ी देर बाद वो अपना पूरा हाथ मेरे कंधे पर रखा, उनका मर्दाना हाथ मेरे नाजुक कंधे को दबोच रहा था, सहला रहा था।
बाईं साइड के अंकल ने भी हिम्मत करके अपना दायाँ हाथ मेरे हाथ से उठाकर मेरे जांघ पर रखा और हल्का सा दबा दिया।
मुझे यों लगा कि मेरे पैरों से जान निकल गई हो.

फिर वो धीरे धीरे मेरे जांघ को मेरे स्कर्ट के ऊपर से सहलाने लगे। मेरे दूसरी साइड में बैठे हुए अंकल भी कहाँ पीछे रहने वाले थे, उन्होंने भी अपना हाथ मेरे कंधे से सरका कर मेरे दाईं चूची पर रख दिया और हल्के से दबा दिया।
मेरे मुंह से ‘आहह…’ निकल गई, जिंदगी में पहली बार मुझसे दुगने उम्र वाला आदमी मेरी चूची दबा रहा था। मेरे निप्पल अब खड़े होने लगे थे। वो अब मेरे निप्पल कपड़ों के ऊपर से फील कर सकते थे।
उसने मेरे निप्पल को अपने अंगूठे से छेड़ा। मैंने उत्तेजना में अपने दोनों हाथों से जोर से कुर्सी को पकड़ लिया और अपनी आँखें बंद कर ली।

उनका मेरे बदन को सहलाना बदस्तूर जारी था।

थोड़ी देर बाद उन्होंने अपना हाथ मेरे टीशर्ट के गले से अंदर घुसा कर ब्रा के अंदर डाल दिया और मेरी कड़क चूची को दबाने लगे। उधर दूसरे अंकल मेरी दोनों जांघों को सहला रहे थे, कभी कभी उनका हाथ मेरी चुत के बहुत नजदीक चला जाता।
मेरी साँस तेजी से चलने लगी थी और मेरी चुत अब गीली होने लगी थी।

फिर दायें वाले अंकल ने अपना दूसरा हाथ कपड़ों के ऊपर से ही मेरी चूची पर रख दिया, अब वो दोनों हाथ से मेरी दोनों चूची को दबा रहे थे।
तो दूसरे अंकल ने भी अपना हाथ नीचे से मेरी टीशर्ट के अंदर डाल दिया और मेरा पेट को सहलाने लगे।

मैं जैसे आसमान में उड़ने लगी थी, मैंने अपना सर पीछे चेयर पे टिका कर आँखें बंद करके मजा लेने लगी थी।

दाईं तरफ बैठे अंकल ने भी अपना हाथ नीचे से मेरी टीशर्ट में ब्रा के अंदर डाल दिया और वो मेरी दोनों चूचियों को एक साथ सहलाने लगे। वो कभी मेरी चूची को दबाते कभी मेरे निप्पल को उंगली से छेड़ते।
तभी दूसरे अंकल ने मेरा पैर पकड़ के सामने वाले कुर्सी पे रखा और धीरे धीरे मेरी पूरी टांग को सहला रहे थे।

मुझे इस स्पेशल ट्रीटमेंट पर बहुत मजा आ रहा था।

फिर अंकल अपना हाथ मेरे घुटनों तक ले गए और मेरे स्कर्ट को धीरे धीरे ऊपर सरकने लगे। उन्होंने स्कर्ट ऊपर सरका दी और मेरी नंगी जाँघों पर हाथ घुमाने लगे। फिर धीरे धीरे उन्होंने मेरा स्कर्ट जांघों में ऊपर चूत तक ऊपर सरका दिया तो मेरी जांघें फिल्म की हल्की रोशनी से चमकने लगी।

दाईं तरफ के अंकल ने भी अपना हाथ मेरी टीशर्ट से निकाल दिया और मेरी नंगी जांघ को सहलाने लगे।
अब आलम यह था कि वो दोनों अंकल लगभग खाली थिएटर में एक हाथ से मेरी नंगी जांघें सहला रहे थे और दूसरे हाथ से मेरी एक एक चूची पकड़ के सहला रहे थे।
मेरे दिमाग ने अब काम करना बंद कर दिया था, वासना अब मुझ पे हावी होने लगी थी, वो जो करना चाहते थे, मैं उन्हें करने दे रही थी।

तभी एक अंकल ने पीछे से हाथ डालकर मेरी ब्रा का हुक खोल दिया और सामने से मेरी टीशर्ट और ब्रा को मेरे गले तक ऊपर सरका दिया तो मेरी दोनों चूचियाँ दोनों के सामने नंगी हो गई।
मैंने अनजाने में मेरा हाथ उनकी जांघ पर रख दिया। वो दोनों मेरी नंगी चूचियों को देखने में व्यस्त थे।

फिर एक अंकल नीचे झुके और मेरे एक निप्पल को अपने मुंह में लिया, मेरे मुंह से ‘उम्म्ह… अहह… हय… याह…’ निकल गई।
उधर दूसरे अंकल ने अपनी जीन्स की ज़िप नीचे करके अपना लंड पैंट से बाहर निकाल लिया और मेरा हाथ पकड़ के अपने लंड पे रखा।

मैंने शॉक से अपनी आँखें खोली तो मुझे मेरा हाथ उनके लंड पे दिखा। मैंने झट से अपना हाथ पीछे खींच लिया और शर्मा कर फिर से अपनी आँखें बंद कर दी। उन्होंने फिर से मेरा हाथ पकड़ के उनके लंड पर रखा। इस बार मैंने अपना हाथ नहीं हटाया, बस लंड के ऊपर रहने दिया।

फिर दाईं तरफ के अंकल ने अपना मुंह मेरे निप्पल से हटा लिया, तो ए सी की ठंडी हवा मेरे गीले निप्पल को छूने लगी। उसकी वजह से मेरे निप्पल और कड़क हो गए।
उन्होंने अपना हाथ मेरे चेहरे पे रखा और मेरा सिर अपनी तरफ घुमाया। वो धीरे धीरे अपने होंठ मेरे होंठों के पास लाने लगे, मुझे मेरे होंठों पे उनकी गर्म साँस महसूस होने लगी।
उनके होंठ मेरे होंठों से छू गये तो मैंने शर्मा के अपना मुंह दूसरी तरफ फेर लिया।
वो मेरे गले को किस करने लगे, धीरे धीरे गाल पे और कान पे किस करने लगे। मैं मजे से मेरे सिर को इधर उधर घुमाने लगी।

उन्होंने फिर अपनी किस रोक दी और अपना लंड अपनी पैंट से बाहर निकाल कर मेरा दूसरा हाथ अपने लंड पर रख दिया।

तभी दूसरे अंकल ने नीचे झुक कर मेरा एक निप्पल को अपने मुंह में लिया और पहले अंकल ने मेरा दूसरा निप्पल अपने मुंह में डाला।
मैंने उत्तेजित होकर उन दोनों के लंड को अपने हाथों में भीच लिया। वो दोनों अपनी अपनी स्पीड से मेरी गोरी चूचियों का रस पी रहे थे। कभी कोई मेरी चूची को चूसता, तो कोई दांतों से हल्के से काटता, तो कोई अपनी जीभ से मेरे निप्पल को छेड़ता।

मैं जैसे वासना के समंदर में गोते खा रही थी, मेरे हाथों की पकड़ उनके लंड पर बढ़ने लगी थी।

तभी एक अंकल ने अपना हाथ मेरी स्कर्ट के अंदर डालकर मेरी चुत को दबा दिया। मैंने अपना हाथ उनके लंड पर से निकालकर मेरी चुत की तरफ बढ़ रहे हाथ पर रख दिया लेकिन उन्होंने फिर से
मेरा हाथ अपने लंड पर रख दिया, और अपना हाथ मेरी पैंटी के अंदर में डालकर मेरी चुत के दाने को छेड़ने लगे।
तो दूसरे अंकल भी अपनी 2 उंगलियाँ मेरी चुत में डालकर अंदर बाहर करने लगे।

मेरे मुंह से दबी दबी चीत्कार निकलने लगी थी। वो दोनों मेरी एक एक चूची को चूस रहे थे और एक हाथ से मेरी चुत को छेड़ रहे थे। मैं भी जोश मैं अपनी गांड उठा के उनका साथ देने लगी थी।
उनकी हरकतों से मेरी चुत का बांध टूटा और मैं ‘आह… उम्म… हाह’ करके जोर से झड़ गई। मेरी झड़ने की तीव्रता इतनी थी कि जैसे मुझे चक्कर ही आ गया।
दो मिनट बाद मुझे होश आया तो देखा की वो अब भी मेरी चूची चूस रहे थे।

‘ये मैंने क्या कर दिया!’ मैंने अपने आप से कहा। झड़ने के बाद अब वासना की जगह अपराध भावना ने ले ली थी।
‘अब बस हो गया!’ मैंने अपने हाथों से उनके सर को अपनी चूची पे से उठाते हुए कहा।
‘तेरा तो हो गया, हमारा क्या होगा जानेमन!’ एक अंकल ने कहा।
‘थिएटर में इतना ही हो सकता है।’ मैंने अपनी ब्रा का हुक लगाते हुए कहा।

उन्होंने भी मेरी बात को मान लिया और अपने कपड़े ठीक करने लगे। मैंने भी अपने कपड़े ठीक किये।
थोड़ी देर बाद फिल्म खत्म हो गई और हम तीनों थिएटर के बाहर आ गए।
तभी मैंने पहली बार दोनों को रोशनी में ठीक से देखा। दोनों बहुत हैण्डसम लग रहे थे, हाइट लगभग 6 फीट, चौड़ी छाती, मजबूत कंधे… दोनों को देख कर मेरे मन में फिर से हलचल होने लगी थी।
‘तुम्हारा नाम क्या है बेटी?’ एक ने कहा।
‘न… नीतू, नीतू नाम है मेरा!’ मैंने जवाब दिया।

‘मेरा नाम सुनील है, और ये आसिफ है!’ उन्होंने दूसरे अंकल का परिचय कराया।
‘तो नीतू, चलें मेरे घर?’ सुनील अंकल ने कहा।

मैं तो मरी जा रही थी चुदाई को… पर डर भी लग रहा था।
एक तो अंजान लोग, दूसरे अंजान जगह पे जाना… कुछ गलत हो गया तो?
‘नहीं अंकल, मैं आपके साथ नहीं आ सकती!’ मैंने उनसे कहा।

तो वो मुझे समझाने लगे, पर मैं नहीं मानी तो वो नाराज होकर जाने लगे।

हेल्लो दोस्तो ! मैं जीतू एक बार फ़िर हाज़िर हूँ अपना अनुभव लेकर !Antarvasna

यह आज से एक साल पुरानी बात है, मुझे चेटिंग Antarvasna करने का बहुत शोक है और मैं चेटिंग पर लड़कियों और शादीशुदा औरतों से सेक्स की बातें किया करता था। उनको चेट के जरिये चोदा करता था, मजा आता था इस सब में। मुझे पर फ़िर धीरे धीरे वस्तविक सेक्स करने की इच्छा होने लगी। इसलिए मैंने चेटिंग पर असंतुष्ट महिला की तलाश शुरू कर दी।

एक दिन मैं चेट करने के लिए किसी को ढूंढ रहा था, तभी मुझे एक प्राइवेट मैसेज मिला, वो एक औरत का मैसेज था। वो अपने पति से असंतुष्ट थी, उसका नाम रचना था, उसकी उमर ३२ साल थी। उसने मुझे अपना फ़ोन नम्बर दिया और शाम को फ़ोन करने के लिए बोला। मैंने जब शाम को उसको फ़ोन किया थो उसने मुझसे ज्यादा बात ना करते हुए सिर्फ़ अपना पता दिया और २ दिन बाद आने के लिए कहा।

मैं जब उसके घर गया तो वो अकेली थी। वो एक बहुत ही सुंदर महिला थी उसको देख कर लगता नहीं था कि वो ३२ साल ही की है। हम दोनों सोफे पर बैठ गए और बात करने लगे। मैंने उससे पूछा- आपके पति क्या करते हैं?

तो वो कहने लगी कि वो एक बहुराष्ट्रीय कम्पनी में काम करता है और ज्यादातर बाहर ही रहता है इसीलिए उसको समय नहीं दे पाता और वो तड़पती रहती है। उसकी शादी को ५ साल हो गए लेकिन उनके कोई बच्चा भी नहीं है। फ़िर वोह रोने लगी। मुझे उस पर बहुत दया आई और मैं उठकर उसके पास गया और उसको चुप करने लगा।

वो एकदम से मुझसे चिपट कर रोने लगी। मुझे उसकी चुचियों का दबाव अच्छा लगने लगा और मेरा लण्ड खड़ा होने लगा। मैंने उसकी कमर पर हाथ फिराना शुरू कर दिया और उसकी गर्दन पर किस करने लगा। अब उसकी रोने की सिसकी मस्ती की सिसकी में बदल गई। मैं धीरे धीरे उसकी चुचियों को दबाने लगा। उसकी चूची एकदम टाइट हो गई। अब वो पूरी तरह मस्ती में आ चुकी थी।

मैंने उसका ब्लाउज़ उतार दिया और ब्रा भी। मैं तो उसकी चूची देख कर हैरान रह गया, क्या मस्त एक दम सीधी खड़ी थी !

मैंने उनको जोर जोर से दबाना और चूसना शुरू कर दिया। उसने भी मेरी पैंट खोल कर मेरा लण्ड बाहर निकाल लिया और उसको सहलाने लगी। वो मेरा लण्ड देख कर बहुत खुश हो गई, कहने लगी कि उसके पति का तो बहुत छोटा है !

फ़िर उसने मेरे सारे कपड़े निकाल दिए और मैंने उसके। उसका खूबसूरत नंगा जिस्म देख कर मैं तो पागल हो गया। मैंने उसको वहीं ज़मीन पर लिटाया और उसके पूरे शरीर पर किस करना शुरू कर दिया। वो जोर जोर से आआआआअह्ह्ह्ह्ह ऊऊऊऊमम्म्म्म्म करने लगी।

फ़िर मैंने उसकी चूत में अपनी ऊँगली डाल दी और चोदने लगा। उसकी चूत बहुत कसी लग रही थी। उसको बहुत मजा आ रहा था। फ़िर मैंने उसकी चूत पर अपना मुँह रख दिया और उसको चाटने लगा। उसके दाने को जीभ से सहलाने लगा। वोह जोर जोर से अपनी गांड उठाने लगी और चिल्लाने लगी- जोर जोर से करो ! मैं झड़ने वाली हूँ ! आआआआअह्ह्ह्ह्ह्ह्ह ऊऊऊऊऊऊऊस्स्स्स्स्स्स्म्म्म्म्म करने लगी।

तभी उसने मेरे बाल पकड़ कर मेरा मुँह अपनी चूत पर दबा दिया और झड़ने लगी। मैं उसका सारा पानी पी गया। फ़िर वो खड़ी हो गई और मुझसे लिपट गई और कहने लगी- जीतू आज तक मैं प्यासी थी, तुमने आज मुझे संतुष्ट कर दिया !

मैंने कहा- जान ! अभी तो आधा काम हुआ है !

और फ़िर मैं उसको अपनी गोद में उठा कर बेडरूम में ले गया और बेड पर लिटा कर उसकी चूची को चूसना शुरू कर दिया। वो दोबारा गरम होने लगी। मैंने उसके ड्रेसिंग से तेल उठाया और उसके पूरे बदन पर डाल कर मालिश करने लगा। वो मस्ती में जोर जोर से चिल्लाने लगी- येस्स ! स्स्स्स्स आआआआअ ऊऊ !

मैं धीरे धीरे उसकी गांड में ऊँगली डालने लगा। वो एक दम से उछल पड़ी और मुझे देख कर मुस्कराने लगी। उसकी आँखों में वासना थी। फ़िर मैंने उसको उल्टा किया और उसकी गांड चाटने लगा। वो मस्ती से बोलने लगी। मैंने उसकी गांड में अपनी दो ऊँगलियाँ घुसा दी और उसको चोदने लगा।

फ़िर मैंने उसको घोड़ी बनाया और उसकी गांड पर लण्ड रखा। वो कहने लगी कि धीरे करना ! मैंने आज तक गांड नहीं मरवाई !

मैंने धीरे से अपना लण्ड गांड में दबाया और एक झटका दिया। जैसे ही गांड में लण्ड का टोपा घुसा, वो चिल्ला पड़ी।

मैं रुक गया और उसकी चूची दबाने लगा। उसको मजा आने लगा। फ़िर मैंने एक झटका जोर से लगा दिया पूरा का पूरा लण्ड तेल की वजह से गांड को चीरता हुआ अंदर घुस गया। वो जोर से चिल्ला पड़ी और रोने लगी। फ़िर मैंने अपना लण्ड बाहर निकाला और उसको सीधा करके उसकी चूत मे लण्ड घुसाने लगा।

मैंने धीरे से लण्ड चूत मे डाला तो चूत के पानी की वजह से लण्ड जाने लगा और धीरे धीरे मैंने पूरा लण्ड उसकी चूत मे घुसा दिया। उसकी चूत बहुत टाइट थी, शायद उसके पति ने उसे ज्यादा नहीं चोदा था उसको, जैसे कि उसने बताया था।

खैर जैसे ही मैंने एक झटका दिया, वो जोर से बोली- जीतू प्लीज़ ! धीरे ! मैं मर जाऊंगी ! तुम्हारा लण्ड बहुत मोटा है, आराम से करो !

मैंने धीरे धीरे झटके देने शुरू कर दिए और अपना पूरा लण्ड उसकी चूत की गहराई में उतारने लगा। उसको अब मजा आने लगा और वो अपनी गांड उठाने लगी। मैंने भी अपनी स्पीड बढ़ाई और तेज तेज चोदने लगा।

तभी उसने मुझे कस कर पकड़ लिया और मेरी पीठ में अपने नाखून गड़ा दिए और चिल्लाते हुए झड़ने लगी। फ़िर मैंने उसको घोड़ी बना कर उसकी गांड में लण्ड डाल दिया और उसको चोदने लगा। अब वो मस्ती में थी। मैं कभी उसकी चूत में लण्ड डाल कर चोदता तो कभी गांड में। वो फ़िर से झड़ गई। अब मैं भी झड़ने वाला था, मैंने अपना लण्ड उसकी चूत में डाला और जोर जोर से चोदने लगा।

मैंने उसको सीधा लिटाया और उसके पैर उसके कंधो तक मोड़ कर उठा दिए। इससे मेरा लण्ड सीधा उसकी बच्चेदानी तक पहुँचने लगा। अब मैं झड़ने ही वाला था कि वो भी झड़ गई और मैं भी !

मैं इतनी जोर से पहले कभी नहीं झड़ा था। मैं १५ मिनट तक उसके ऊपर ही लेटा रहा और उसकी और मेरी आँख लग गई। करीब १ घंटे बाद मेरी आँख खुली तो वो सो रही थी। मैं धीरे से उठा और उसको देखने लगा। मैंने अपना लण्ड बाहर निकाला, मैं उसके गोरे बदन को सहलाने लगा। इससे वो भी उठ गई और मेरा लण्ड पकड़ कर सहलाते हुई कहने लगी- जीतू तुमने आज मुझे पूरी औरत बना दिया है !

और मेरा लण्ड चूसने लगी। उसके मुँह में लण्ड जाते ही मेरा लण्ड फ़िर से खड़ा हो गया चोदने के लिए। मैंने फ़िर उसको कुतिया की तरह और कई प्रकार से चोदा और फ़िर उसकी चूत मे ही झड़ गया।

घड़ी में समय देखा तो शाम के ५ बज रहे थे। मैं उठा और अपनी कपड़े पहनने लगा। यह देख कर वो मुझसे लिपट गई और कहने लगी- आज की रात मत जाओ ! कल चले जाना !

दोस्तों उसकी इतनी प्यार से की गई प्रार्थना की वजह से मैं रुक गया और रात भर मैंने उसको ४-५ बार चोदा अलग अलग तरीके से।

सुबह उसके चेहरे पर एक चमक थी और संतुष्टि भी। मैंने अपनी कपड़े पहने और जाने लगा तो उसने मुझे ५००० रुपए दिए। मैंने मना कर दिया तो भी उसने मुझे जबरदस्ती ३००० तो दे ही दिए।

और मैं फ़िर मिलने का वादा करके वापस आ गया। उसके बाद उसने मुझे ३-४ बार बुलाया और अपनी एक फ्रेंड से भी मिलवाया।

यह कहानी फ़िर अगली बार !

तब तक आप सब लड़कियां, भाभी और आंटियाँ अपनी चूत में ऊँगली डाल कर अपना पानी निकालो !

तो कैसी लगी मेरी कहानी मुझे मेल करें ! Antarvasna

प्रेषिका : नीना Sex Stories

हाय दोस्तो ! सभी Sex Stories अन्तर्वासना पढ़ने वालों को मेरी तरफ से यानि कि गौरी की तरफ से गीली चूत के साथ प्रणाम !

मैंने अन्तर्वासना पर लगभग सभी कहानियाँ पढ़ी हैं और आज मैं आपके सामने अपनी एक मस्त चुदाई लेकर आई हूँ।

नाम गौरी है, उम्र उन्नीस साल, गोरा रंग, कसा हुआ बदन, गोल गोल वक्ष, पतली कमर !

वैसे तो मैं छोटी ही थी जब मैंने अपनी चूत का चीरहरण करवा डाला था।

उसके बाद कई लड़कों ने मुझे चोदा- स्कूल में, स्कूल जाते रास्ते में पड़ने वाले बाग़ में, जहाँ मेरे आशिक मेरी इन्तज़ार करते और छुट्टी के बाद उन बागों में रासलीला रचाई।

उसके बाद मुझे वो स्कूल छोड़ना पड़ा क्यूंकि वो दसवीं तक था। माँ ने मुझे शहर मामा जी के घर भेज दिया। एक तो मामी के बच्चा होने वाला था दूसरा स्कूल घर की बग़ल में था बस यही बात ठीक नहीं थी। ऊपर से रात को जब मामा मामी मजे लेते तो मैं छुप कर देखती।

मामी मुँह में लेकर, मुठ मारकर मामा का पानी निकालती। यह देख मेरी चूत गीली हो जाती, सोचती कि मामा को ही पटा लूँ !

लोहा गर्म तो था ही, चोट मारनी रह गई थी।

तभी मेरा स्कूल शुरू हो गया। कुछ ही दिनों में मेरा श्याम नाम के लड़के के साथ अफेयर चल पड़ा। आधी छुट्टी में खाली क्लास में उसकी मुठ मारती, कभी चूस भी लेती।

वो तो मुझे अपने दोस्त के घर में ले जाना चाहता था। उसके दोस्त के मम्मी पापा ऑफिस में जॉब करते थे, बहन हॉस्टल में रहती, घर खाली होता। दोनों मेरी चूत मारने के लिए उतावले थे। मैं चाहते हुए भी नहीं जा पा रही थी। मेरे न जाने से वो मुझसे खफा रहने लगा।

आखिर एक दिन मैंने मन बना ही लिया। सुबह स्कूल जाने के लिए निकली लेकिन आगे निकल गई। शहर था, मुँह पर चुन्नी डाल उसके साथ चिपक गई और हम सीधा उसके दोस्त के घर चले गए।

जाते ही उसने मुझे दबोच लिया, पागलों की तरह मुझे चूमने लगे। दोनों ने मुझे बिस्तर पर लिटा कर नंगी कर दिया।

मैंने श्याम का तो कई बार चूसा था, विपन का लौड़ा उस से भी ज्यादा मस्त निकला।

भूखे भेड़िये को मांस मिला हो उसी तरह एक ने मेरा एक मम्मा मुँह में डाला दूसरे ने दूसरा ! हाय !

मैंने दोनों के लौड़े पकड़ रखे थे। हाय क्या मजा था एक साथ श्याम और विपन के नीचे लेटकर !

इतने में डोर-बेल बजी। विपन की फटने लगी, उसने रसोई में से देखा- उसकी मामी, मासी, उसका लड़का खड़े थे।

सारा स्वाद ख़राब हो गया। अब क्या करते वो कपड़े पहन कर बोला- तुम दोनों पीछे वाले हिस्से में चले जाओ, चाबी ले लो !

वहीं दरवाज़ा खोल कर चले जाना, उधर कोई नहीं आयेगा। हम दोनों ने कपड़े उठाये, पीछे चले गए। ऊपर से खुला हुआ था, कोई भी अपनी छत से देख सकता था। एक बाथरूम था, मैं उसमें घुस गई, श्याम भी वहीं आ गया। उसने विपन को मोबाइल पर कहा कि पीछे कोई न आये, वरना तुझे इसकी चूत कभी नहीं मारने दूंगा। हम बाथरूम में हैं।

कह कर हम फिर चिपक गए। जगह काफी थी, मैंने उसको सीट पर बिठा खुद नीचे बैठ कर उसके लौड़े को चूसने लगी। वो आहें भरने लगा- हाय रानी और चूस चूसती जा ! साली रंडी !

मैं उठी, उसको वहीं बैठे रहने को कहा। उसका लौड़ा छत की तरफ तना हुआ खड़ा था। मैंने टांगे खोली और उसके ऊपर गई, चूत पे रखते हुए उसपर बैठती गई और उसका पूरा लौड़ा अन्दर डलवा लिया। पहली बार उसने अन्दर डाला था, उसको बहुत मजा आने लगा। मैं उठ उठ कर चुदने लगी- हाय ! चोरी का गुड़ कहते हैं कि ज्यादा मीठा लागे ! वोही बात थी ! वहां बहुत मजा आने लगा।

फिर मैंने इंग्लिश सीट पर बैठ गई।श्याम मेरी टांगें उठा मेरे ऊपर आते हुए बीच में आ गया और मैंने पकड़ कर निशाने पर लगा दिया। उसने अन्दर डाल दिया- बहन की लौड़ी ! साली ! पक्की रंडी है ! सब जाने तू !

उसने तेज़ धक्के देने शुरू किये।

हाय मैं झड़ने वाली हूँ ! उह अह उह !

वो और तेजी से ठोकने लगा।

हाय हाय ! जोर दे कर ! हाय फाड़ दे कमीने ! इतने दिन से नाराज़ बैठा था ! लगा दम ! हाय साईँ ! मार, मेरी मार ! करते हुए दोनों लगभग एक साथ ढीले पड़ गए उसने मेरा मम्मा मुँह में लेकर निपल काट दिया।

और जैसे उसने अपना लौड़ा मेरी फ़ुद्दी से बाहर निकाला, मैंने झट से मुँह में डाल सारा रस चाट लिया।

तभी विपन ने दरवाज़ा खटकाया- मैं हूँ !

अबे साले रुक !

दरवाज़ा खोला, मैं सलवार पहन चुकी थी, ब्रा बंद करने वाली थी कि उसने रोक दिया- छोड़ो !

मुझसे वो बोला- सब गए ! अब आओ, आराम से अन्दर बैठते हैं ! कोल्ड ड्रिंक पियो !

अभी छुट्टी में काफी वक्त था, मैंने सोचा दोहरा मजा ले ही लिया जाये !

मौका तो था ही !

ठीक है विपन ! छुट्टी के टाइम तक मैं यहीं हूँ !

उसके बाद क्या क्या हुआ ? मैंने खूब मजे लूटे !

यह मैं आप सब के सामने जल्दी ही लाने वाली हूँ !

इतंजार का फल मीठा होवे, समझे ना !

आपके जवाबों का इंतज़ार रहेगा Sex Stories

TOTTAA’s Disclaimer & User Responsibility Statement

The user agrees to follow our Terms and Conditions and gives us feedback about our website and our services. These ads in TOTTAA were put there by the advertiser on his own and are solely their responsibility. Publishing these kinds of ads doesn’t have to be checked out by ourselves first. 

We are not responsible for the ethics, morality, protection of intellectual property rights, or possible violations of public or moral values in the profiles created by the advertisers. TOTTAA lets you publish free online ads and find your way around the websites. It’s not up to us to act as a dealer between the customer and the advertiser.

 

👆 सेक्सी कहानियां 👆