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Massage Girl in Karnal: Premium Relaxation Services

Our site can help you find a professional massage girl in Karnal who will help you relax in the best manner possible. We connect you with professional therapists who can offer you a massage that will make you feel better and more relaxed. The pros on our list are ready to provide you with a fantastic experience at your house or in one of their particular spots, whether you want to relax or get away from it all.

Introduction

Massage is currently one of the finest methods to relax your mind, body, and overall health. Our website makes it easy to locate the top massage services in Karnal that meet your demands. This will be a one-of-a-kind and calming experience for you.

Tottaa wants to make it simple for clients to find the top masseuse. The Karnal massage service providers on our list offer the greatest quality, comfort, and competence, whether you want a full-body massage or a massage for a particular location.

How Tottaa Helps Advertisers Reach More Customers

Tottaa is not only a list of masseuses, it’s also a secure location for them to show off what they can do. People in Karnal who are seeking massage services may find them on our website. This makes them easier to find and gets them more appointments.

Advertisers may simply put up profiles, offer their services, and talk about pricing and discounts on our sites. This makes sure that the relevant people notice your Karnal massage service, which makes it easier to obtain more customers.

Different Types of Massages We Offer

There are a lot of different types of massage services on our site, so you may choose one that works for you. You may choose the kind of treatment that works best for you, whether it’s profound rest or a particular type of therapy.

1. Swedish Massage

A calm and gentle way to ease muscular tension and improve blood flow. This Karnal massage is perfect for you if you want to relax and forget about your concerns.

2. Deep Tissue Massage

This approach employs a lot of pressure to get to deeper muscle layers. It’s helpful for folks who have muscular discomfort or stiffness that won’t go away. There are specialists on our profiles of massage girls in Karnal who are good at deep tissue treatments that function effectively.

3. Aromatherapy Massage

Calming massage strokes and essential oils are beneficial in making people feel improved both emotionally and physically. Most massage companies in Karnal employ the use of custom oil preparations to make you feel good.

4. Thai Massage

A therapy that wakes you up by using a mix of regular massage, stretching, and compression. This traditional massage in Karnal helps you relax, become more flexible, and get your mind and body back in harmony.

5. Hot Stone Massage

Heated stones are placed on various parts of the body to help with deep muscular tightness. People who want to feel good, relax, and help their muscles recover quickly can use this massage service in Karnal

How to Book Our Massage Services

Tottaa makes it simple and fast to book. With our listings, you can see what kind of massage you want, read about the providers, see that they are free and then contact them directly. After you choose, you can book a massage in Karnal at your convenient time and location. In order to get your desired massage services, apply the following simple steps:

Step 1: Browse Our Listings

Take a peek around our site to view a few massage professionals. Each listing gives you information about the many sorts of massages, how long they last, how much they cost, and where they are situated. This makes it easier to choose the finest ones.

Step 2: Compare and Shortlist

Examine the profiles carefully to compare how the services, talents, and reviews posted by customers differ. This phase makes sure you choose a business that has the style, pricing, and supply you desire.

Step 3: Connect with the Provider

When you have decided, use the information that you are offered so that you can contact them directly. One can communicate it to the massage giver thus making it understood what massage you want at what time and when.

Step 4: Confirm the Appointment

The date, time and place of the service, which could be your home, a hotel or the spa where the therapist may be found. You also need to agree on the payment method and any other accords prior to commencement of the course.

Step 5: Relax and Enjoy Your Massage

All you have to do on the day of the appointment is have your area ready for the house visit. The remainder will be handled by the expert. Take it easy and enjoy a massage that is made just for you.

Frequently Asked Questions

To locate a professional who can meet your needs, read our biography, reviews and advertising.

Yes, many of the therapists on our site will come to your house so you may feel safe and at ease.

You may pick based on talents since most adverts provide their qualifications in their profiles.

It would be advisable to make a reservation earlier to guarantee that you would be able to get a massage, particularly against the prevalent services of massage.

Not at all. Tottaa exclusively connects users with service providers. The doctor gets to choose how to handle payment.

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डियर रीडर्स! Sex Stories

मैं अपना परिचय देना चाहता हूँ मैं अमन उर्फ विक्की हूँ मेरी Sex Stories उम्र 26 साल है और मैं उत्तर प्रदेश का रहने वाला हू. मेरा बॉडी फिगर अट्रॅक्टिव तो नहीं कह सकते पर स्मार्ट फिगर कह सकते है और मैं स्मार्ट भी हूँ और लकी भी हूँ मेरे लक (भाग्य) ने हमेशा मेरा साथ दिया. अब ज्यादा बोर ना करते हुए मैं आपसे अपनी लाइफ के कुछ एक्सपीरियेन्स आप से शेयर करूँगा. जिन्हें सच मानना है वो वैसे् पढ़ें और जिन्हें झूट लगे वो सिर्फ़ स्टोरी का लुत्फ़ ले.

बात उन दिनो की है जब मैंने हाई स्कूल पास किया और इंटर मैं एडमिशन लेने के लिए कोशिश कर रहा था हालाकि मेरे मार्क्स अच्छे थे पर मैं जिस कॉलेज मे एडमिशन लेना चाहता था उसके हिसाब से कुछ कम थे. मेरे सब दोस्त एडमिशन ले चुके थे पर मैं उसी कॉलेज मैं एडमिशन लेना चाहता था. एक दिन मैं फॉर्म सब्मिट करने की कोशिश कर रहा था…कि एक लड़की मेरे पास आई. उसने कहा, हेल्लो! ‘विक्की’.

तभी मैंने उधर पलटकर देखा वोही आँखें वोही सीना वोही मुस्करता चेहरा. अब आप सोच रहे होंगे ये कौन है और कहाँ से आई. तो ये है वो आज की इस स्टोरी की हेरोइन. जी शिप्रा. दरसल हम लोग क्लास थर्ड से एक साथ स्टडी कर रहे थे एक ही स्कूल में. पर हम लोगो मैं कभी बात नहीं हुई, लेकिन आज उसने मुझे हेलो बोला, तो कुछ देर तक मेरे मुहँ से कुछ नहीं निकला. फिर उसने कहा- फॉर्म सब्मिट करना है?

मैंने कहाँ ‘हाँ’. तो उसने कहाँ फॉर्म मुझे दे दो और मेरे साथ आओ . मैं बिना कुछ बोले उसके पीछे हो लिया. तब वो मुझे साइंस के डिपार्टमेंट मे ले गयी और अपने अंकल से मिलाया और कहाँ मैं इनको फॉर्म दे देती हूँ आपका काम हो जाएगा. पर मैंने कहाँ मेरे मार्क्स कुछ कम है तो अंकल ने कहाँ कोई बात नहीं शिप्रा तुम्हे अप्रोच कर रही है तो तुम्हारा काम हो जाएगा.

हम लोग डिपार्टमेंट से बाहर आए तो मैं शिप्रा से बोला शिप्रा को ‘धन्यवाद ‘ उसने कहाँ किस बात के लिए. मैंने कहाँ तुमने एडमिशन मे मेरी हेल्प की इसलिए. उसने कहाँ हम लोग एक दूसरे को काफ़ी टाइम से जानते है. तो दोस्त है और सच पूछो मेरी सभी फ्रेंड्स ने एडमिशन अलग अलग कॉलेज मे लिया मैं अकेली थी यहाँ. अंकल की वजह से मैं यहाँ एडमिशन लिया लेकिन कोई परिचित का ना होने की वजह से मैं चाह रही थी कोई ऐसा हो जिसे मैं यहाँ जानती हू ताकि क्लास अटेंड करने मैं बोरिंग फील ना हो. तभी तुम मुझे दिखे और मैं आपके मार्क्स जानती थी इसलिए मैंने सोचा आप दोस्त भी है और जिस तरीके से आप एडमिशन ले रहे हैं वैसे तो एडमिशन होना नहीं है. इसलिए मैं और आपको अपने अंकल के पास ले गयी. तो नाउ वी आर फ्रेंड्स. तब मैंने अपना हाथ शेक करने के लिए उसकी तरफ बढाया और कहा श्योर……वाइ नोट.

जब इतनी बातें हम दोनों के बीच मैं हो गयी तब मुझमे कुछ हिम्मत जागी और मैं कहाँ शिप्रा क्या तुम मेरे साथ कॉफी पीने चलोगी. उसने कहाँ अगर ये रिश्वत है तो नहीं और अगर एक दोस्त दूसरे दोस्त से पूछ रहा हैं तो श्योर.

मैंने कहा- रियली एक दोस्त दूसरे दोस्त से पूछ रहा है.
फिर हम लोग कॉफी पीने गये और ढेर सारी पुरानी बातें की कैसे आज तक मैं इतने सालों से उससे बातें करना चाहता था पर ना कर सका. इस प्रकार हम दोनों में दोस्ती हुई. जो पिछले 8 सालो से सिर्फ़ एक दूसरे को देख रहे हो बातें ना करते हो और अचानक वो इतनी जल्दी दोस्त बन जाते हैं. ‘हैं ना लक’. इसलिए मैं ये सब रामकथा सुनाई आप लोगो को. चलो अब अगर आप बोर हो गये हो तो ज़रा अटेंशन हो जाए क्योंकि अब मैं शिप्रा की जवानी के बारे में बताने जा रहा हूँ.

दरअसल शिप्रा एक नाटे कद की सावली लड़की थी. फेस उसका नॉर्मल था मेरा मतलब एक जनरल गर्ल आम लड़की का. उसके बावजूद वो गुड लुकिंग फेस थी. लेकिन उसमे जो सबसे अट्रॅक्टिव था वो उसके बूब्स (चुचिया) उस छोटे से बॉडी मैं छोटी फुटबॉल जितने बड़े बूब्स. सच बताऊँ मैं जब से उसे जनता था, उसको कम, उसके बूब्स ज्यादा देखता था. ये सिर्फ़ मैं नहीं करता था हर वो लड़का टीचर लड़की करते थे की फेस नहीं बूब्स देखते थे. क्यूकी उसकी बॉडी मैं अगर कुछ अट्रॅक्टिव था तो वो थे बूब्स. ये बूब्स ही उसे सेक्सी हॉट और मज़ेदार बनाते थे. मैं अक्सर ख्यालो में उसके बूब्स को अपने हाँथो में लेता था पर कमबख्त आते ही नहीं थे.

एंटर की क्लासस स्टार्ट हो गयी हम दोनों अगल-बगल बैठते थे. और स्टडी के साथ फन भी करते कॅंटीन में जाते बातें भी करते और एक दूसरे के साथ मज़ाक भी करते. फिर मैं उसे कॉलेज से उसके घर और घर से कॉलेज लाने ले जाने लगा. जब घर से वो निकलती अकेले मैं कुछ दूर पर उसका इंतज़ार करता और वो आकर मेरी मोटरसाइकल पर बैठ जाती और कॉलेज घर जाते टाइम मैं उसे घर से पहले छोड़ देता.

एक दिन उसने अपनी जन्मदिन में मुझे अपने घर बुलाया और सबसे मिलाया. मैंने उसके मम्मी और पापा के चरण छुए और उसकी एक बड़ी सिस्टर थी सुनीता लेकिन उससे बिल्कुल अलग पर एक चीज़ सेम थी मालूम है क्या उसके बूब्स. शायद शिप्रा से बड़े क्योंकि वो शिप्रा से दो साल बड़ी थी. उस दिन से मेरा उसके घर आना जाना शुरू हो गया. कुछ दो या तीन महीने निकल गये इन सब में. अब मैं कभी कभी स्टडी करने भी उसके घर जाने लगा. मेरा मतलब क्लोज़ हो गये हमदोनों एक दूसरे के. हमने कभी ‘आई लव यू ‘ नहीं कहा . क्यों…ये बात फिर कभी…पर बताऊँगा ज़रूर.

तो शायद अब आप लोग पूरी तरीके से समझ गये होंगे. तो अब मैं उस दिन की बात बताने जा रहा हूँ जिसके लिए आप ने इतना सारा पड़ा और मुझे शायद गाली भी दी होंगी. तो मेरे बेसब्र दोस्तो सब्र रखो. क्योंकि सब्र का फल मीठा होता है. तो मैं स्टार्ट करता हूँ.

उस दिन सनडे था जब मैं उसके घर गया मैंने कॉल बेल दबाई अंदर से कोई आवाज़ नहीं आई कुछ देर बाद मैं दुबारा बेल पुश किया. तभी अंदर से मधुर सी आवाज़ आई ‘कौन है?’
मैंने कहा- मैं… विक्की.
उसने कहा- एक मिनट!

मैं दरवाज़े के बाहर इंतज़ार करने लगा और कुछ सोचने जा ही रहा था की दरवाज़ा खुलने की आवाज़ आई और खुल गया पर दरवाज़े पर कोई नही…मैं देख ही रहा था की फिर से वोही आवाज़ आई अरे जल्दी अंदर आओ क्या वही खड़े रहोगे.

मैं झट से अंदर घुसा और जैसे अंदर घुसा तभी दरवाज़ा बंद होने की आवाज़ आई और मैं पलटा और पलटते ही दंग रह गया…वो भीगे हुए बदन एक घुटनो से भी ऊपर तक के गाउन से डाले हुई थी और जांघो के नीचे से नंगे पैर…वो जो नज़ारा था या कोई कयामत था वो कोई और नहीं अपनी फिल्म की हिरोइन शिप्रा थी.

उसने मेरी तरफ देखा और कहा तुम 5 मिनट वेट करो मैं बस अभी आती हूँ. और मुझे हतप्रभ वही छोड़ गयी.
मैं कुछ समय के बाद नॉर्मल हुआ और सोफे पर बैठ गया. कुछ देर बाद एक लो कट टी-शर्ट और ब्लू रंग की स्किन टाइट जीन्स पहने हुए भीगे बालों को पोछते हुए वो मेरे सामने आई और कहा- अरे! क्या हुआ ठीक से बैठते क्यों नहीं हो…

मैंने अपने आप को ठीक किया और नॉर्मल दरशाने के लिए पूछा आज कोई दिख नहीं रहा?
शिप्रा ने कहा- दिखेंगे कैसे जब कोई होगा तब ना. मम्मी-पापा और दीदी सीतापुर गये है शादी अटेंड करने लेट नाइट आएँगे मेरा मन नहीं था इसलिए नहीं गयी.

मैं अंदर अंदर बहुत खुश हुआ और अपने अंदर हिम्मत भी आ गयी. तो मैंने कहा- तो आज तुम अकेली हो.
उसने कहा- अकेले? नहीं तो, किसने कहा?
मैंने कहा- मम्मी-पापा और दीदी सब चले गये फिर कौन है तुम्हारे साथ?
उसने कहा- तुम हो ना…

मेरे मुह से ज़ोर सी हँसी निकल गयी… और वो भी हंस दी.
उसने तभी कहा- रियली मैं अभी तुम्हे फ़ोन करने वाली थी मैं यहाँ अकेली हूँ तुम आ जाओगे तो साथ भी हो जाएगा, स्टडी भी हो जाएगी और समय भी कट जाएगा. अच्छा तुम दो मिनट बैठो, मैं कॉफी ले के आती हूँ.

मेरी नज़र ना चाहते हुए भी बार बार उसके बूब्स की तरफ जा रही थी. भीगे बालों में वो इतनी सेक्सी लग रही थी की एक बरी तो मेरा लंड खरा होते होते बचा…

आज मैं शिप्रा की चूचियाँ दबा कर ही मानूंगा चाहें जो हो जाए पर कैसे, कहीं चिल्ला दी तो, अरे नहीं इतने सालों से जानती हैं नहीं चिल्लाएगी. लेकिन अगर कहीं बुरा मान गयी तो दोस्ती टूट गयी तो… फिर क्या किया जाए कैसे शिप्रा की चुदाई करूऊऊउ, कुछ समझ में नहीं आ रहा हैं…

मैं इन्ही ख़यालो मैं डूबा था की शिप्रा की आवाज़ आई- अरे विक्की क्या सोच रहे हो?
मुझे झटका लगा क्या बोलूं , बोलूं कि न बोलूँ.
तभी शिप्रा की दुबारा आवाज़ मेरे कानो मैं पड़ी- विक्की तबीयत तो ठीक हैं…मैंने कहाँ तबीयत…तबीयत को क्या हुआ ठीक तो है…बस कुछ सोच रहा था.
‘क्या सोच रहे थे?’ शिप्रा ने कहा.
मैंने कहा- कुछ खास नहीं!
और उसके हाथों से बढाया हुआ कॉफी का मॅग ले लिया और सिप लगाया. वाकई कॉफी बिल्कुल शिप्रा की ज़वानी जैसी कड़क बनी थी. तो मैंने कहाँ मुझे नहीं पता था कि तुम इतनी अच्छी कॉफी बना लेती हों. वो मुस्कराई और कहाँ हाआआं कभी-कभी वरना दीदी ही बनाती है.

अब हम लोग खामोश होकर कॉफी सिप कर रहे थे और मेरी नज़र शिप्रा के बूब्स की तरफ जा रही थी बार-बार लगातार. मैं कॉफी सिप करता जाता और उसके बूब्स देखता जाता मुझे ये भी ख्याल नहीं रहा की शिप्रा जिसके बूब्स मैं देख रहा हूँ, वो मेरे सामने बैठें ही कॉफी सिप कर रही है.
दोस्तो एक बात बताऊँ हम लड़के चाहें जितनी होशियारी क्यों न आते हो, पर लड़कियों की नज़रों से नहीं बच सकते, की आप क्या सोच रहे हो क्या देख रहे हो. वो लड़की जो बचपन से ये देखती आ रही हो कि लोगो की नज़र मेरी तरफ कम मेरे बूब्स की तरफ़ ज़यादा जाती हैं…तो वो क्या सोचती होगी…

तबी उसने मुझे टोका- विक्की क्या देख रहे हो?
इस सवाल ने मेरा पसीना निकाल दिया और मैं बिल्कुल हकला गया मैंने कहा- कुछ, कुछ भी तो नही!
लेकिन शिप्रा आज कुछ और मूड में थी तो उसने कहा- नहीं, कुछ देख रहे थे…

उसके कहने के अंदाज़ ने मुझे और डरा दिया…
उसने कहा- बोलो… क्या देख रहे थे?
मैंने बरी हिम्मत करके उसके दोनों बूब्स की तरफ़ इशारा करते हुए कहा- वूऊऊ दोनो!
शिप्रा ने मेरी ऊँगलियों का इशारा समझते हुए भी कहा- मैं समझी नहीं. मुह से बोलो क्या देख रहे थे?

अब मुझे ये नहीं समझ मैं आया की मैं क्या बोलूँ… मैंने कहा- सीना… देख रहा था!
शिप्रा ने कहाँ सीना, क्यों… सीने मैं क्या है?
अब मैं चुप, क्या बोलूं?
उसने फिर कहा- अरे! बोलते क्यों नहीं हो?
तो मैंने कहा- तुम्हारी चूचियों को…

जिस प्रकार डरते हुए उसको मैंने ये वर्ड बोला… वो ज़ोर से हंस दी… और कहा- आरीईई तो डर क्यों रहे हो, कौन आज पहली बार तुम इन्हें देख रहे हो या कौन से पहले तुम हो जो इसे देख रहें हो देखने वाली चीज़ है सब देखते हैं… तो तुम देख रहें हो तो क्या अपराध कर रहें हो…
जब शिप्रा ने ये वर्ड्स बोलें तब मेरी जान में जान आई और मैं मुस्कराए बगैर नहीं रहा सका…और अपनी झेप मिटाने लगा.

उसी वक्त शिप्रा सामने वाले सोफे से उठकर मेरे बगल में सटकर बैठ गयी और मेरे हाथों से कॉफी का मॅग ले कर टेबल पर रख दिया और मेरी आखों की तरफ देखने लगी…और कहा- अब देखो, जो देखना है…
मेरी समझ में नहीं आ रहा था कि मैं क्या करूँ.

तभी उसने अपने होंठो को मेरे होंठो पर रख दिए और कहाँ शायद अब तुमको देखने में आसानी होगी. और ज़ोर से मेरे होंठों को चूसने लगी थोरी देर में मैं गर्मा गया और मेरे हाथ उसकी चूचियों को दबाने लगे. और अब मैं भी उसके होंठों को चूस रहा था.
ये मेरी लाइफ का सबसे बड़ा और हॉट दिन था. आज से पहले मैंने कभी ऐसा महसूस नहीं किया था. धीरे-2 हम दोनों की साँसे गर्म हो रही थी और मेरे हाथों का दबाव उसकी चूचियों पे बढता ही जा रहा था और वो ज़ोर ज़ोर से साँसे ले रही थी.

तभी वो मेरे बगल से उठ कर मेरे ऊपर दोनों घुटनों को मोड़ कर अपने हिप्स को मेरे ऊपर रख कर मेरी तरफ अपना सीना दिखाते हुए बैठ गयी. मेरे ऊपर चढ़ कर मेरे होंठों कों बदस्तूर दबाये जा रही थी. मैंने भी उसे अपनी बाहों मे कस कर भर लिया और उसेके रसीलें होंठों को चूसने लगा जिस अंदाज़ से वो मेरे ऊपर बैठी थी उससे उसेके हिप्पस का प्रेसर मेरे लंड पर पड़ रहा था. जिसकी वजह से मेरा लंड टाइट होने लगा और उसके हिप्स को छूने लगा.

शिप्रा ने पूछा- विक्की ये मेरे नीचे कड़ा कड़ा क्या लग रहा है?
मैंने कहा- शिप्रा ये मेरा लंड है.
‘क्या मैं इसे देख सकती हूँ?’
मैंने कहा- डार्लिंग ये सिर्फ़ तुम्हारे लिए ही है.

और वो सोफे से उतर कर नीचे ज़मीन पर घुटने के बल बैठ गयी और अपने हाथों से मेरी पैंट के ऊपर से ही लंड पकड़ लिया और वो मेरी तरफ़ देखते हुए मेरा लंड मसलने लगी.

मैंने बड़कर उसके होंठों को चूम लिया और हाथों से मैं अब उसकी टी-शर्ट उतारने लगा तो उसने अपने दोनों हाथों को ऊपर कर दिया और मैंने उसकी टी-शर्ट उतार दी. वो अंदर ब्रा में अपने मिनी फूटबाल जितनी चूचियाँ छुपा रखी थी. वो बिना परवाह किए मेरे लंड को पैंट के ऊपर से मल रही थी.

मैंने ब्रा के ऊपर से उन हिमालय जितनी विशाल चोटिया देख कर दंग हो गया जो कल तक मेरे सपना था आज हक़ीक़त बनकर मेरे सामने खड़ा था, जिन्हें दबाने की मैं कलपना किया करता था आज मैं उन्हें रियल में दबा रहा हूँ… और मैंने उन्हें खूब जमकर दबाया उसके बाद उसकी ब्रा खोल दी दो उछालती हुई गेंदे बाहर आ गयी उन चूचियों को मैंने क़ैद से आज़ाद कर दिया और वो अब मेरे सामने सीना ताने खड़ी थी.

मैंने शिप्रा को अपनी गोद मैं बैठा लिया और उसकी चूचियों को अपने मुँह मैं भर लिया और दूसरी को अपने हाथों से दबाने लगा. अब शिप्रा के मुँह से सिसकारिया निकलने लगी- …आआ ईई… उसका बदन अंगारों की तरह तप रहा था.

मेरा लंड पैंट से निकलने के लिए बेताब हो रहा था, मैंने शिप्रा से कहा- जानू अब मेरा हथियार अपने होंठों से चूसो उसने तुरंत मेरी पैंट की ज़िप खोल कर लंड बाहर निकाल लिया और उसे देख कर मेरी तरफ़ मुस्कराई और उसे चूसने लगी. में सोफे पर से उतर गया और पैंट पूरी उतार दी अब मेरा पूरा लंड शिप्रा के सामने था और वो मज़े से चूस रही थी. अब मैंने अपने बचे कपडे उतार दिए और शिप्रा मेरा लंड चूसने में मस्त थी अब मैंने उसको खड़ा करके उसे अंपनी बांहों मैं भर लिया और उसकी जींस उतार दी वो बिल्कुल नंगी मेरे सामने खड़ी थी औरे मैं उस नंगे बदन को निहार रहा था.

उसकी घाटी पे उगे छोटे छोटे बाल बिल्कुल फूलो जैसा अहसास दे रहे थे मुझे मैंने तभी एक हाथ से उसकी चूची पकड़ी और दूसरे हाथ की उंगली उसकी चूत मैं डाल दिया उसकी चूत बिल्कुल गीली हो चुकी थी, उसने हल्का हल्का पानी छोड़ दिया था.

मैंने अच्छी तरीके से अपनी उंगली को उसकी चूत में डाल दी धीरे से मैंने दो उंगली उसकी चूत मैं डाली तो वो सिहर उठी जब मेरी दोनों उँगलियाँ चूत के पानी से गीली हो गयी तो मैंने उन दोनों ऊँगलियों को मुंह में डाल ली फर्स्ट टाइम मुझे जन्नत का अहसास हुआ अब मैंने उसे सोफे पर लिटा दिया हम दोनों पूरी तरीके से नंगे हो चुके थे जल्दी कोई थी नहीं क्योंकि अभी तो दोपहर थी और सबको आना था रात में.

मैं उसके पूरे बदन को अपनी जीभ से चाटने लगा और चूचियों को लगातार दबा रहा था उसका बदन पूरे तरीके से भभक रहा था वो गर्म हो चुकी थी पुरी तरीके से मैंने अपनी उँगलियों से उसकी चूत को चोद रहा था.
उसके मुहँ से सिसकरिया निकल रही थी- ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्छ ईईए विक्की अब मुझे चोद दो मैं बर्दास्त नहीं कर पा रही हूँ.

अब मैंने उसे अपने बदन के ऊपर लेता हुआ सोफे पर लेट गया और 69 का कोण बना लिया मैंने बहुत सी ब्लू फिल्म्स में ऐक्टर और ऐक्ट्रेस को इस तरीके से मजा लेते देखा था इसलिए मैंने शिप्रा को बताया उसे क्या करना है वो मेरा लैंड लेकर उसे चूसने लगी और मैंने उसकी चूत को चाटने लगा मैंने उसकी चूत को कभी ऊँगलियों से तो कभी जीभ से चोद रहा था उससे रहा नहीं गया वो मेरे लंड को खा जाने वाली स्टायल से चूस रही थी और मैं उसकी चूत को बड़े प्यार से जीभ से चोद रहा था.

वो मेरा लंड चूसना छोड़ कर कहरारने लगी और मेरी तरफ़ याचना की नज़र से देखने लगी जैसे कह रही हो बस करो विक्की खेलना जो बाँध टूटने वाला है अब मुझसे नहीं रुक रहा है…

तो मैंने उसे अब सोफे पर लिटा दिया और अपने लंड का सुपाडा उसकी चूत के मुहँ पर रख दिया और बाहर से ही उसके ऊपर लंड का लाल वाला हिस्सा जिसे सुपाडा कहते है रगड़ने लगा हम दोनों को एक जलन सा अहसास होने लगा जो कभी तो ठंडा लगता और कभी भट्टी की तरह गर्म जब मुझसे भी रहा नहीं गया तब मैंने अपना लंड पकड़ के उसकी चूत के अन्दर डाला लेकिन चूत बहुत टाईट थी मैंने थोड़ा जोर लगाया तो शिप्रा चिल्ला उठी।

मैंने उसके होठों पर अपने होठों को रख दिया और चूसने लगा कुछ सेकेंड बाद मैंने एक जोर का धक्का धीरे से दिया तो मेरा आधा लंड चूत में चला गया उसने चीखना चाहा, पर मेरे होठों ने उसकी चीख रोक दी मैंने उसके होठों चूसना बदस्तूर जरी रखा जब उसे थोड़ा आराम मिला तो एक जोर का धक्का और लगाया की चीख के साथ ही खून की एक धारा भी निकल पड़ी चूत से पर मैंने परवाह नहीं की क्योंकि ये तो होता ही जब नई चूत फटती है.

मैंने धीरे धीरे अपने लंड को अन्दर बाहर करना शुरु किया पहले तो उसके मुहँ से आवाजें आती रही फिर कुछ देर बाद वो भी अपनी कमर उठा उठा के मेरा साथ देने लगी. अब हमदोनों हवा में ऊड रहे थे कमर एक ताल मैं चल रही थी जब मैंने देखा शिप्रा को अब कोई दर्द नहीं है तो हमने अपनी स्टायल को बदल कर के डॉग स्टाइल में आ गए मैंने उसे पीछे से खड़ा करके चोद रहा था और एक हाथ से उसके बाल पकडे हुए और एक हाथ से उसकी चूची दबा रहा था और अपने लंड से शिप्रा की चूत चोद रहा था और शिप्रा के मुहँ से आवाजें आ रही थी उसे लंड पहली बार खा रही थी इसलिए शोर मचा रही थी पर मैंने परवाह किए बगैर उसे चोद रहा था.

तभी शिप्रा को बदन मैं झटका लगा और वो ढीली हो गई मैंने दुबारा उसे जल्दी से तैयार किया और अबकी उसे अपनी गोद में लेकर चोदा उस दिन हमने एक दूसरे को कई बार चोदा वो दिन मेरी लाइफ का सबसे हसीं पल था. मुझे मेरी जवानी का अहसास शिप्रा ने ही कराया था…हम दोनों ने फर्स्ट टाइम जन्नत की सैर की. उसके बाद हम दोनों एक साथ बाथरूम में शावर लिया और काफ़ी पीने बैठ गए.

मैंने शिप्रा को आज के लिए थैंक्स कहा तो शिप्रा ने मुस्कराया और कहा- नहीं विक्की, तुम नहीं जानते आज मैंने तुमसे क्या पाया! इसका अगर तुम्हे अहसास होता तो तुम मुझे थैंक्स न कहते बल्कि मुझे तुम्हे थैंक्स कहना चाहिए!

फिर थोडी देर हम लोगो ने नोर्मल होने के लिए कुछ इधर उधर की बातें की और दुबारा इसी तरीके से मौका मिलने पर एक दूसरे को चोदने का वादा किया!

उसके बाद तो हम लोगो को कई मौके मिले और हमने भरपूर फायदा उठाया. हम लोग आपस में इतने पास आ गए थे तो आपस में अश्लील हरक़त करने से नहीं चुकते और शायद शिप्रा की बड़ी सिस्टर को हमारी हरक़तो की भनक लग गई थी उसे कुछ डाउट रहता था इसलिए न जाने क्यों वो हमदोनों को अलग नहीं छोड़ती थी. ये स्टोरी आगे बताऊँगा…

तो दोस्तो, आपको मेरा फर्स्ट एक्सपीरियेंस कैसा लगा? अगर अच्छा लगा तो मुझे जरूर लिखें और हाँ पाठक चाहे मेल हो या फीमेल- कमेंट्स लिखना जरूरी है .इस स्टोरी मैं कुछ गलती या कमी हो तो जरूर लिखें. आपने मेरी स्टोरी पड़ी इसके लिए शुक्रिया मैं जल्दी अपना एक दूसरा एक्सपीरियेंस आप लोगो के बीच जल्दी ले कर आऊँगा. Sex Stories

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मैं मेरे नये दोस्तों को मेरा अपना परिचय करा Sex stories दूं। मेरा नाम सीता है, मेरी उमर 28 साल है, मेरी शादी हो चुकी है। मैं सेक्स की बहुत भूखी हूं। मेरे हबी संजू बड़े स्मार्ट और सेक्स में पावरफ़ुल हैं पर वो ज्यादातर समय बाहर ही गुजारते हैं और मुझमें सेक्स की भूख बहुत ज्यादा है इसलिये मैं हर वक्त नये लंड की तलाश में रहती हूं। अपनी पिछली कहानी में मैंने बताया था कि किस तरह मेरे ड्राइवर अमित ने मुझसे जबरदस्ती की थी।

आज मैं आपको अपनी एक नयी कहानी सुना रही हूं जिसमे मैंने और मेरी दोस्त (अब वो मेरी ननद है) सुमन ने किस तरह मनाली में चुदाई के साथ इनकम भी की। ये बात 1998 की है जब मैं और मेरी दोस्त चंडीगढ़ में बी ए के तीसरे साल की पढ़ाई कर रही थी। हम दोनों ही शुरु से चुदक्कड़ थी और अक्सर अपने ब्वायफ़्रेंड के साथ डेट पर जाती और चुदाई का मज़ा लेती।
एक बार मैं अपने दोस्त के साथ शिमला घूमने के लिये गयी हुई थी। वहां पर हमने 3 दिन तक खूब चुदाई का नज़ारा लिया। वहां जिस होटल में हम रुके हुए थे वो होटल पर अक्सर काल गर्ल आती रहती थी और उस होटल में लगभग हर टूरिस्ट इसी लिये आता था।

मैं एक दिन शाम के वक्त बार टेबल पर बैठी थी मेरा दोस्त अभी रूम से नीचे नहीं आया था तभी एक सांवले रंग का मजबूत बदन का मर्द मेरे पास आ कर बैठ गया। उसने मुझे काल गर्ल समझ लिया था। मेरे पास आ कर उसने मुझे ड्रिंक की पेशकश की जिसे मैंने नम्रता से ठुकरा दिया। उसके बाद उसने स्माइल पास करते हुए मुझे से नाम पूछते हुए अपना परिचय देने लेगा। कुछ देर बाद उसने असली बात पर आते हुए मुझे रात की ओफ़र की और इसके लिये उसने बिना मेरी तरफ़ देखे सौ रुपये के काफ़ी सारे नोट मेरी तरफ़ बढ़ा दिये।

एक बार तो मैं उसकी हरकत पर हैरान हो गयी और मुझे गुस्सा भी आया पर दूसरे ही पल मेरे दिमाग में एक नया विचार आया (हालांकि मैं भी बहुत रिच फ़ैमिली से हूं पर जैसा कि सभी पाठक जानते हैं कोलेज लाइफ़ में पोकेट मनी की प्रोब्लम रहती है) कि ये तो पैसे के साथ मजा और नये लंड के साथ बाहर घूमने का बड़ा अच्छा साधन है। पर उस वक्त मैं अपने दोस्त के साथ थी। मैंने उसे अपना पता देते हुए बाद में सम्पर्क करने को कहा।

कई दिन के बाद मुझे उसका सन्देशा मिला कि उसे 2 लड़कियां 5 दिन के लिये चाहिये। वो और उसका दोस्त अपनी आउटिंग को इस बार रंगीन करना चाहते हैं। मेरे पूछने पर बताया की उन लोगों को मनाली के अन्दर अपना होलीडे बिताना है। मैंने उससे उसका कोन्टेक्ट नम्बर ले लिया और बोला कि मैं आपको कल तक बता दूंगी।

मैं तो उसी वक्त तैयार थी पर अब उसे दो लड़कियों की जरूरत थी जबकि मैं अकेली थी। तभी मेरे मन में सुमन का ख्याल आया। वैसे भी हम अकसर इकट्ठी चुदायी पर जाती थी।

पहले तो सुमन ने इन्कार कर दिया पर मेरे समझाने पर वो राजी हो गयी। मैंने उसी शाम उसको फोन करके रुपये और टाइम की सेटिंग कर ली। हम लोगों ने 5 दिन के उनसे 20000 रुपये मांगे। २ दिन के बाद हम मनाली के लिये निकल पड़े। अब हम दोनों बहुत खुश थे। एक तो हमे २-२ नये लंड मिलने वाले थे दूसरा हमें 20000/- रुपये भी मिलने वाले थे मनाली बसस्टेंड पर ही वो दोनों हमें मिल गये। हम दोनों उनके साथ कर पर चल पड़े। उन लोगों ने होटल पिकडेली में रूम ले रखा था। हमने रूम में पहुंचते ही उन्होने हमें नंगा होने को कहा और खुद फोन कर के वेटर को खाने का ओर्डर दे दिया।

हम लोगों ने पहले बाथ लेने की इच्छा जतायी। सन्जू (उनमें एक का नाम) ने कहा ठीक है परन्तु पहले कुछ खा लो। इतने में वेटर कोफ़ी और कुछ स्नैक्स ले आया। कोफ़ी लेने के बाद हम नहाने के लिये बाथरूम में चले गये। जैसे ही सुमन ने बाथरूम का गेट बंद करना चाहा तो उसे श्याम ने रोक दिया और कहने लगा, अब कोई शरम नहीं, दरवाजा खुला रहने दो हम देखना चाहते हैं कि तुम कैसे एक दूसरे को नहलाती हो। क्योंकि इस वक्त हम उनकी पेड सेक्स थी इसलिये चुप-चाप उनकी बात मानते हुए नंगी नहाने लेगी।

कुछ समय के बाद सन्जू और श्याम भी बाथरूम के अंदर आ गये। वो दोनों बिल्कुल नंगे थे। सन्जू बोला- इकट्ठे नहाएँ?
मैंने उन्हें कहा- ओके।
सन्जू ने श्याम से कहा- चलो हम चारों सब साथ साथ ही नहा लेते हैं, फिर चुदाई करेंगे!
और हम सब बाथरूम में इकट्ठे नहाने लगे।

मैं सन्जू की तरफ़ देख कर मुस्कुरा रही थी। उसका खड़ा हुआ लंड देख कर मेरा हाथ अन्जाने में मेरी चूत पर चला गया और मैं अपनी चूत में उसके सामने ही उंगली करने लगी। ये देख कर श्याम बोला- अरे तुम क्यों अपनी चूत में उंगली कर रही हो। तुम तो अपने हाथ से सन्जू के लंड का मजा लो और फिर जम कर चुदवाओ।

सन्जू ने तभी एक हाथ से मेरी चूचियों को मसलना शुरु कर दिया और दूसरे हाथ की दो उंगलियां मेरी चूत में डाल दी। मुझसे रहा नहीं गया और मैं भी अपने एक हाथ से उसके लम्बे और मोटे लंड को कस के पकड़ कर आगे पीछे करने लगी। उसके लंड का सुपाड़ा काफ़ी बड़ा था और बिल्कुल काले रंग का था।

उधर सुमन और श्याम शोवर के नीचे एक दूसरे से चिपके हुए खड़े थे और सुमन श्याम के लंड को पकड़ कर खींच खींच कर हिला रही थी। श्याम एक हाथ से सुमन के दोनों नंगे चूतड़ों को मसल रहा था और दूसरे हाथ से उसकी चूत में उंगली से चोद रहा था।

मैंने भी सन्जू के तने हुए लंड को इतना चूसा कि उसके सुपाड़े से चिकना चिकना पानी निकलने लगा। हम दोनों वहीं बाथरूम फ़्लोर पर 69 के पोज में लेट गये। सन्जू की जीभ मेरी चूत में आग लगा रही थी। मैं सन्जू के लंड को हाथ से पकड़ कर खींच खींच के चूस रही थी।
तभी सन्जू मेरे मुंह में ही झड़ गया। मैं तो उसके लंड से निकले डिस्चार्ज की मात्रा देख कर ही हैरान रह गई। काफी सारा सफ़ेद सफ़ेद गाढ़ा गाढ़ा माल उसके लंड से निकला जो मेरे मुंह में भर गया। मैं धीरे धीरे उस सारे खट्टे खट्टे माल को अपनी जीभ से चाट चाट कर पी गयी। इससे पहले मैंने जितने भी देखे थे उनके लंड से तो इसका करीब आधा माल ही निकलता है।

मेरा मन अभी भरा नहीं था इसलिये उसके झड़े हुए लम्बे लटकते हुए लंड को मैंने फिर से चूसना शुरु कर दिया। सन्जू अभी भी मेरी चूत चाटने में लगा था। मैं तो ये सोच कर मजे में बिल्कुल पागल सी हो गयी कि ये लंड आगले 5 दिन के लिये मेरे पास रहेगा।

जब सन्जू से नहीं रहा गया उसने मुझे वहीं बाथरूम के फ़्लोर पर कुतिया की तरह पोज बना कर बिठा दिया और मेरी दोनों टांगे फैला कर पीछे से मेरी चूत में अपना ८ इंच लम्बा और ४ इंच मोटा गधे जैसा लंड पेल दिया और एक जोरदार धक्का लगाया। मेरी चूत चुदने के लिये बिल्कुल गीली हो कर इतना खुल गयी थी कि एक ही धक्के में सन्जू का पूरा लंड गपक गयी। उसके धक्कों में मुझे इतना मजा आ रहा था कि मैं भी अपने चूतड़ उछाल उछाल कर अपनी चूत में उसके लंड के धक्कों का मजा लेने लगी। दो तीन धक्कों में ही मेरी चूत फच फच करने लगी।

चार पांच धक्कों में ही मैं झड़ गयी। लेकिन सन्जू के लम्बे लंड के धक्के जारी थे और उसके बाद तो मैंने पहली बार मल्टीपल ओर्गास्म का मतलब जाना क्योंकि हर दूसरे धक्के पर मेरी चूत पानी छोड़ रही थी।
मुझे सन्जू से चुदाने में बहुत मजा आ रहा था कि मैं सिसकारियां भर रही थी, मैं एक्साइटमेंट में कई बार बोल भी पड़ी- मुझे और जोर से चोदो। पूरा लंड पेल दो। हाय, मेरी चूत फाड़ डालो।

करीब मुझे 15 मिनट तक सन्जू ने कई सारे पोज में कभी आगे से, कभी पीछे से, कभी खड़े खड़े और कभी अपने लंड पर बिठा कर वहीं पर श्याम और सुमन के सामने चोदा और मेरी चूत में अपना सारा माल एक बार फिर से निकाल दिया। हम दोनों अब थक कर अलग हो गये। मेरी चूत से सन्जू का सारा माल निकल निकल कर मेरी जांघों पर टपक रहा था।

सन्जू अभी भी मेरी चूचियां मसल रहा था। उसका लंड मेरी चूत के रस से गीला हो कर चमक रहा था और गधे के लंड की तरह नीचे लटक गया था।

कुछ समय के बाद मैं फिर से गर्म हो गयी। मैंने फिर से सन्जू के लंड को चूसना शुरु कर दिया। सन्जू भी मेरी चूत में उंगली डाल डाल कर और निकाल कर उंगली में लगे मेरे और उसके झड़े हुए माल को चाटने लगा। इतने जोर से झड़ कर भी मेरी चुदास शान्त नहीं हुई थी और मेरा मन कर रहा था कि मैं सारी रात सन्जू के उस मोटे और लम्बे लंड से मजे लेती रहूं।

तभी हम सभी बाथरूम से बाहर आ गये सन्जू का गधे जैसा लम्बा लंड चलते समय उसकी दोनों टांगों के बीच लटका हुआ ऐसे मस्ताना हो कर झूल रहा था कि मैं उसके लंड पर से नजर हटा ही नहीं पा रही थी। मैं अभी भी सन्जू के लटकते हुए लंड को देख रही थी।

उसके बाद तो फिर 5 रातों तक हम चारों एक ही कमरे में सारी बत्तियां जला कर एक ही बिस्तर पर अलग अलग स्ताइल से एक-दूसरे को चोदते। वो 5 रातों में मैंने जी भर कर ऐसी चुदाई करवाई कि मैं जीवन भर कभी भूल नहीं सकती।

आखिरी रात को सन्जू के उस लम्बे लंड से मैं पता नहीं कितनी बार झड़ी। श्याम ने भी मेरी चूत और मुंह में पता नहीं कितनी पिचकारियां मारी होंगी। मेरी चूत को तो 5 दिन के बाद उसके लंड ने खुला भोसड़ा बना दिया था।

आखिरी दिन जब हम जब वो दोनों जाने लगे तब भी मुझ से रहा नहीं गया और मैंने फिर से एक आखिरी बार सन्जू के लंड को चूस चूस कर इतना गर्म कर दिया कि वो मेरे मुंह में ही झड़ गया। उसका सारा सफ़ेद माल पी कर मैंने उसको बुझते हुए दिल से गुड बाय कहा।

हमें जाते वक्त उन्होंने 20000/- से अलग 2000/- और भी दिये और साथ में ब्रा-पैंटी के इम्पोरटेड सेट भी दिये।

अब चंडीगढ़ वापस आने के बाद हम दोनों उस रात की बात जरूर करते हैं और दोनों ही उत्तेजित हो कर एक दूसरे के साथ लेस्बियन करती। सन्जू का गधे जैसा मोटा और लम्बा लंड अभी भी आंखों के सामने आ जाता है। Sex stories

Hindi sex stories

मैं मोनिका शर्मा फ़िलहाल 25 साल की लड़की हूँ, Hindi sex stories जब होस्टल में रह कर पढ़ती थी तब 18 साल की थी। बात उस दिन की है

जब एक दिन खूब बारिश हो रही थी और मुझे कोलेज से निकलने में देर हो गई थी। रात के 9 बज गये थे।
घनघोर बारिश थी मैं पूरी तरह भीग गई थी। सलवार और कुरती मेरे बदन से चिपक गई थी। मुझे डर भी लग रहा था।

बारिश से बचने के लिये एक घर के नीचे रुकी थी, ठंड से ठिठुर भी रही थी।

घर में से एक औरत ने निकल कर मुझे ऊपर बुला लिया, मुझे राहत मिल गई थी, उसने मुझे कपड़े बदलने को दिये, एक कुरता दिया जिसे मैंने पहन लिया और उस औरत को धन्यवाद दिया।

बारिश रुक नहीं रही थी। औरत अपने कमरे में चली गई। मैं अकेली हो गई थी। कुछ देर बाद तीन लड़के आये, मुझे देखा और अंदर चले गये।
बाद में मुझे बुलाया तो मैंने देखा वो औरत उन तीनों के साथ नंगी लेटी थी।

पहले मैं डर गई.
मगर उसने मुझे डरने से मना किया और कहा- यदि वो इस बारिश का मज़ा लेना चाहती हो तो बोलो?

मैं कुछ बोल नहीं पाई.
तभी एक लड़के ने मुझे कहा- तुम्हारा बदन कोरा है। यदि एक बार तुम मज़ा लोगी तो बार बार यहाँ आओगी।
मैं क्या करती। मैंने हाँ कह दिया।

तब मेरे कपड़े उतार कर तीनों ने मुझे नंगा कर दिया और लेटा दिया।

मुझे डर भी लग रहा था मगर एक नये अनुभव का सोच कर चुप थी, मेरे बूब्स देख कर तीनों ने कहा कि इतने बड़े आज तक नहीं देखे।

तीनों लड़के मेरे बदन को सहलाने लगे थे। मुझे भी थोड़ा मज़ा आने लगा था। पहली बार ऐसा मिला मज़ा था।

औरत ने कहा कि तुम चुप चाप लेटी रहो.

तभी तीनों ने मेरे बदन पर शराब उड़ेल दी और चाटने लगे। मुझे पता नहीं क्यों बहुत अच्छा लगा। मुझे एक ने उठाया और मेरी चूत में उंगली डाल दी। मैं चिल्ला उठी मगर मज़ा आया।

एक ने मेरी गाँड में उंगली डाल दी।

तीसरे ने मेरे उरोजों को दबाना शुरु कर दिया।

उस औरत ने मुझे एक पलंग से बांध देने को कहा। मुझे तीनों ने बांध दिया और एक मेरे ऊपर चढ़ कर अपने लंड को मेरी चूत में डालने लगा।

मैं चिल्ला उठी बहुत दर्द हो रहा था। मगर चुप रही। मेरी चूत में उसने अपने लंड को डाल कर हिलाना शुरु कर दिया।

मैं चिल्ला उठी थी। चूत से खून भी आ गया था। मगर मुझे अच्छा लग रहा था।

तभी एक ने मेरे मुँह मेँ लंड दे दिया और कहा कि इसे चूसो।

मैं चूसने लगी।

उसका वीर्य मेरे मुँह में आ गया।

मेरे हाथ बंधे थे, तीनों ने बारी बारी से मुझे पागल कर दिया।

मैं थक गई थी तब औरत ने मुझे कुछ पीने को दिया। वो शराब थी, मैं पी गई और उस रात कई बार तीनों ने मेरे साथ मज़ा लिया।
सुबह 4 बजे बारिश बंद हो गई थी तब मुझे जाने को कहा और बाद में आने को कहा।

मैं फ़िर वहाँ जाने लगी और एक बार तो 5 लोगों ने मुझे संतुष्ट किया। Hindi sex stories

मुझे ये आदत लग गई। उस रात ने मुझे सेक्सी बना दिया। 25 साल की हूं मगर एक दो से मेरा मन नहीं भरता।
मेरी शादी हो गई है मगर मैं आज भी कई लोगों के साथ एक साथ मज़ा लेती हूँ।

प्रिय दोस्तो ! Hindi Sex Stories

मैं बड़ौदा का रहने वाला Hindi Sex Stories हूँ। मैं कई दिनों से अन्तर्वासना में आप लोगों की कहानियाँ पढ़ रहा हूँ। तो मैंने सोचा कि मैं भी अपनी कहानी आप लोगों के साथ शेयर करूँ।

तो बात ऐसी थी कि मैं अकेला रहता हूँ। मेरी जॉब शाम को होता था तो मैं पूरा दिन अपने घर पर खाली रहता था। मेरे घर के एकदम बाजू के घर में एक सुन्दर सी भाभी रहती है। इंसान तो वो बहुत अच्छी है और मेरे साथ बहुत दोस्ताना बात भी करती है। कभी कभी मुझे खाना भी बना देती है। ऐसे करते करते एक सामान्य सा रिश्ता बन गया था। उनका एक लड़का भी है। लड़का शायद ११-१२ साल का होगा। वो स्कूल जाता है। उनकी पति नौकरी करते हैं। लेकिन थोड़ा दुबले पतले हैं।

उनकी समस्या यह थी कि वो तीनों एक ही कमरे में रहते हैं। इसीलिए पति- पत्नी के बीच सेक्स कभी-कभार ही होता था। जब उनका लड़का कहीं बाहर होता था। ११ साल का लड़का स्कूल के अलावा कहीं जाता नहीं था। उनका कोई खास रिश्तेदार भी नहीं थे। इसलिए सेक्स की भूखी रहती थी।

उनकी फिगर मैं क्या बताऊँ दोस्तों, बहुत ही अच्छी सेक्सी है। मैं जब भी उनको देखता था मेरा तो लण्ड कन्ट्रोल से बाहर हो जाता था। मैं कई बार मेरे घर में उनको सोचते सोचते मुठी मार देता था। लेकिन मैंने एक दिन सोचा कि यह रोज रोज मुठी मारने से अच्छा है कि एक बार साहस करके उनको बोल दूँ।

तो दोस्तो, मैंने ऐसा ही किया।

एक दिन उनका लड़का स्कूल गया था, पति भी नौकरी पे ! मैं घर पर अकेला था। वो कुछ काम के लिए आई। सॉरी, काम तो नहीं था, सुबह मुझे चाय पिलाने आई, बोली- मैं चाय बना रही थी तो सोचा कि तुम्हारी लिए भी बना लूँ ! लो चाय पियो !

तो मैंने उनको थैंक्स बोला। वो जाने लगी। मैंने सोचा कि अभी उनका मूड अच्छा है तो मैं अपनी गेम खेल सकता हूँ। तो मैंने उनको बोला- भाभी, आप अपनी चाय भी लेकर यहीं आ जाओ ! साथ में बैठ के पीते हैं और कुछ बात भी करेंगे।

वो बोली- ठीक है !

और वो चाय लेकर आ गई। हम दोनों ने चाय पी और कुछ बातें करने लगे।

तो मैंने उनको पूछा- भाभी, कई दिनों से मैं देख रहा हूँ कि आप कुछ उदास उदास लगती हो ! क्या बात है? आप तो उम्र में इतनी बड़ी नहीं लगती, तो अभी से आप को क्या टेंशन है? क्यूँ उदास-उदास रहती हो?

वो बोली- नहीं ऐसा कुछ नहीं है !

तो मैंने बोला- ऐसा ही है ! आप मेरे साथ शेयर कर सकती हो !

तो थोड़ी देर के बाद वो बोली- लाइफ में अभी मजा नहीं रहा ! सुबह से लेकर शाम तक बस काम करो और सो जाओ ! और कुछ नहीं !

मैंने पूछा- तो काम बहुत करना पड़ता है? मैं कुछ मदद कर सकता हूँ क्या आपकी?

पहले तो वो न बोली कि नहीं इस बात में तुम कुछ मदद नहीं कर सकते। लेकिन मैं भी जिद पकड़ के बैठ गया कि कौन सी बात में मदद नहीं कर सकता?

तो अन्त में उसने अपनी वास्तविक समस्या बताई।

मैं बोला- भाभी, मैं क्यूँ मदद नहीं कर सकता ! मैं कर सकता हूँ !

वो बोली- क्या बात करते हो ! मजाक मत करो !

मैंने बोला- मैं मजाक नहीं कर रहा हूँ !

वो बोली- ठीक है !

तो मैं आगे एक भी मौका न गंवाते हुए उनको चूम लिया ! ना आगे देखा न पीछे ! बस चूम लिया।

वो भी कामुक थी तो वो भी कुछ नहीं बोली और मेरे साथ मजा लेने लगी। पहले तो वो दरवाज़ा बंद कर दिया कि कोई आ न जाए !

वो थोड़ी मोटी थी और मुझे मोटी औरत बहुत अच्छी लगती है। उनके स्तन भी बहुत बड़े थे। उनकी गांड तो इतनी कामुक थी ….

मैं पहले से ही छोटी निककर में था। पहले पाँच मिनट तो मैं उनको किस करता रहा। इतने में उनकी आंसू निकल पड़े और बोली- बहुत दिनों के बाद आज मुझे मेरी प्यास बुझाने का मौका मिलेगा।

मैंने तो उनके आँसू भी पी लिए और उनका पूरा मुंह चाट लिया। वो गाऊन में थी। धीरे धीरे मैंने उनका गाऊन निकाल फेंका। अब वो खाली ब्रा और पैंटी में थी। धीरे से मैंने उनको बेड पर लिटा दिया और उनकी ब्रा खोलने लगा। ब्रा को खोलते ही मेरे पसंद की चीज मेरे हाथों में थी। मैंने जम क उनको किस किया। जैसे जैसे मैं चूसता रहा वो भी उतेजित होने लगी।

तब तक मैं उनको होठों से ले कर नाभि तक किस करता रहा। इतने में उसने खुद ही अपने पैंटी निकाल फेंकी और बोली- अब रहा नहीं जाता, तुम अपना लण्ड उसमें डालो ! मैंने कहा- इतनी जल्दी भी क्या है, आज तो पूरा दिन पड़ा है, सालों का मजा आज ले लो अच्छी तरह से !

धीरे धीरे मैं उनकी चूत चाटने लगा तो वो और भी गर्म हो गई और तरह तरह की आवाज निकालने लगी। इसक मतलब उनको भी मज़ा आ रहा था।

थोड़ी देर चूसने के बाद मैंने अपना हथियार उनकी चूत में डाल दिया। मुझे भी थोड़ा जोर लगाना पड़ा क्यूँकि काफी दिनों से उनके छेग में कुछ घुसा नहीं था। और वो भी चिल्ला उठी- धीरे धीरे करो !

मैं तो नहीं रुका और अपने काम में लग गया, धक्का देने लगा। वो भी उह्ह्ह्ह्ह् ह्ह्ह्ह्ह्ह् अह्ह्ह्ह्ह् ह्ह्ह्ह् करने लगी- ओह्ह्ह् ओह्ह्ह्ह्छ ओह्ह्ह्छ करने लगी।

ऐसे करते करते १० मिनट के बाद वो झड़ गई और थोड़ी देर में मैंने भी अपना सारा का सारा माल उनके अन्दर डाल दिया।

वो बोली- नो प्रॉब्लम ! मेडीसिन ले लूंगी !

उस दिन हम लोगों ने ५ बार चोदा-चुदाई की। वो भी बहुत खुश हो गई और उस दिन के बाद तो हम लोग सप्ताह में तीन-चार बार तो सम्भोग कर लेते थे।

आपको मेरी कहानी कैसी लगी, मुझे लिखिए जरूर ! Hindi Sex Stories

Antarvasna

इस घटना ने शिल्पा को Antarvasna भी हम लोगों के प्रति बोल्ड कर दिया था. शिल्पा शाम को चली गई, मेरा भाई भी तीन दिन बाद चला गया, कोई दस दिन बाद मेरे पति टूअर से लौटे. इस बार भी वे तरह तरह के प्रसाधन लाये थे, शाम के वक्त घर में घुसे तो घुसते ही मुझ पर टूट पड़े, उन्होंने कपडे भी नहीं बदले और मुझसे लिपट गये. मैंने दरवाजे को जब तक लोंक किया तब तक वे मेरे गाउन को हटा चुके थे और देखते ही देखते मेरी ब्रा को हटा स्तनों से सरका कर मेरे स्तनों को चूसने लगे.

“ओफ्फो… तुम सारे भाई बहन एक जैसे हो! घर में आकर पानी वानी पीने के स्थान पर मेरे स्तनों पर टूट पड़ते हो!” मैंने उनके सिर पर हाथ फ़ेर कर कहा.
वह चौंके और स्तन के निप्पल को मुंह से निकाल कर बोले- क्या मतलब है तुम्हारे कहने का? तुमने मेरे साथ मेरी बहन का जिकर क्यों किया?
“इसलिये किया क्योंकि आपके यहाँ से उस दिन जाते ही आपकी बहन शिल्पा आई थी, वो भी दरवाजा खुलते ही मेरे ब्लाउज को खोलने लग पड़ी थी!” मैंने हंसते हुए कहा.
“क्या!? क्या शिल्पा को भी यह सब पसंद है?” उन्हें आश्चर्य हुआ.
“फिर क्या हुआ?” उन्होंने मुझे अपनी बाजूओं में उठा कर बैडरूम की ओर चलते हुए पूछा.

मैं उनकी टाई की नॉट ढीली करती हुई बोली- जब वह यहाँ पहुंची थी तब मैं अपने भाई के साथ बाथरूम में थी, हम दोनों नहा रहे थे.
“साथ साथ नहा रहे थे… तब तो बड़ा मजा आ रहा होगा! चलो, अपन भी साथ साथ नहाते हैं, नहाते नहाते सुनेंगे पूरा किस्सा! उन्होंने बैडरूम में प्रवेश होते होते अपने कदम बाथरूम की और मोड़ कर कहा.

मजा तो आना ही था…! मेरा भाई मुझे साबुन लगा कर मुझे बुरी तरह गर्म चुका था, वह मेरी योनि को चाट ही रहा था कि तुम्हारी बहन ने कॉल बेल बजा दी, हम दोनों का मूड ऑफ़ हो गया. मैं उसे प्यासा छोड़ बाथरूम से निकली और जल्दी जल्दी साड़ी ब्लाउज पहन कर दरवाजे पर पहुंची. दरवाजा खोला तो पाया कि सामने गहरे गले के टॉप और घुटनों तक की चुस्त स्कर्ट में अपनी उफनती जवानी लिये शिल्पा खड़ी थी.

मेरे इतना कहते कहते मेरे पति ने मुझे बाथरूम में ले जाकर मुझे फर्श पर उतार दिया और मुझे दीवार के सहारे खड़ा कर दिया. फिर मेरे होंठों को चूमने के बाद मेरे स्तनों को चूम कर बोले- फिर… फिर क्या हुआ… कहती रहो और मुझे इन झरनों से अपनी प्यास बुझाने दो!

इतना कह कर उन्होंने फिर मेरे स्तन पर मुंह लगा दिया. मेरे शरीर में आग भरती जा रही थी, मेरे हाथों ने उनकी टाई निकालने के बाद उनके कोट को भी उतार दिया था, अब शर्ट के बटन खुल रहे थे.

शर्ट के बटन खोलते खोलते मैं बोली- उफ… उफ… शिल्पा ने भीतर आते ही रंगीन मजाक आरंभ कर दिये, मेरे महकते रूप की तारीफ़ करने लगी, मैं समझ गई कि लड़की प्यासी है, मेरी बातों को… उफ… उफ… आहिस्ता आहिस्ता चूसिये इन्हें… आप तो पागल हुए जा रहे हैं… उफ… मेरे पति पागलों की भांति ही मेरे स्तनों का दोहन सा कर रहे थे, मेरे होंठों से सिसकारियाँ फूटने लगी थी, ऐसा लग रहा था जैसे नाभि में कोई तूफ़ान अंगडाई लेने लगा है.

मैंने उत्तेजना से उत्पन्न होने वाली सिसकारियों को अपने दांतों तले दबा कर एक लंबी सांस छोड़ी फिर कहना शुरू किया- शिल्पा को मैं चाय बनाने के लिए अपने साथ रसोई में ले गई तो उसने… उफ… ऑफ… ओफ्फो… क्या कर रहे हैं आप…? क्या कोई ट्रेनिंग लेकर आये हैं कहीं से स्तनों के साथ इस तरह पेश आने की… आज तो आप मेरे स्तनों को झिंझोडे डाल रहे हैं आज…
मेरे इस तरह कहने से उन्होंने स्तन से मुँह हटा कर मेरे होंठ चूम कर मनमोहक ढंग से कहा- क्या तुम्हें मजा नहीं आ रहा? अगर मजा नहीं आ रहा है तो मैं इन्हें आहिस्ता आहिस्ता चूसता हूँ.

“मजा तो बहुत आ रहा है, इतना आ रहा है कि ऐसा लगता है जैसे मैं आज कण कण होकर बिखर रही हूँ. ठीक है तुम ऐसे ही चूसो!” मैंने उनकी शर्ट को उनकी बाजुओं से निकाल कर कहा.

“तुम शिल्पा वाली बात तो बताओ…” उन्होंने यह कह कर स्तन के निप्पल को फिर मुंह में ले लिया और अपने हाथों को मेरे नितंबों पर ले जाकर नितंबों की मालिश सी करने लगे.

मैं उनकी बेल्ट खोलते हुए बोली- फिर एक ओह्ह.. उफ… ऊई… फिर हाँ मैं..उफ… मैं कह रही थी कि शिल्पा को मैं रसोई में ले गई तो उसने वहाँ पहुँचते पहुँचते ही मेरे ब्लाउज में हाथ डाल दिया और मेरे स्तनों को चूसने की इच्छा जाहिर की और यह भी बताया कि अपनी सहेली के साथ लेस्बियन लव का आनन्द लेती है. मेरी… उफ… ओह… अपने पति के द्वारा अपनी योनि में मौजूद भंगाकुर को मसले जाने से मेरे कंठ से कराह निकल गई- उफ… ये शावर तो खोल लो… नहाना भी साथ साथ हो जायेगा!

मैं इतना कह कर पुनः विषय पर आई- मेरे शरीर में मेरे भाई ने पहले ही कामाग्नि भड़का डाली थी, शिल्पा द्वारा स्तनों को पकड़ने मसलने और उसकी स्तन पान की इच्छा ने मुझे और उत्तेजित कर डाला था. उसे तब तक पता नहीं था… उफ… ओह… ओफ…
मेरे पति अब मेरे स्तनों को छोड़ कर नीचे पहुँच गए थे, उन्होंने मेरी योनि पर मुख लगा दिया था, अब वो मेरे भंगाकुर को चूसने लगे थे.

मैं उनके बालों में अंगुलियाँ फंसा कर मुट्ठियाँ भींचने लगी, उनकी इस क्रिया ने मेरी नस नस में बहते रक्त को उबाल सा दिया था, मुझे अपनी उत्तेजना ज्वालामुखी का सा रूप लेती महसूस हुई, मुझे रोम रोम में फूटते कामानन्द के कई घूंट भरने पड़े.

“सुनाओ न आगे क्या हुआ…?” मेरे पति ने अपना मुख मेरी योनि से पल भर के लिए हटा कर कहा.
“तुम शावर खोलो, मैं आगे बताती हूँ…” अपनी साँसों को संयत करने का असफल प्रयास करती हुई बोली.
“ओफ़्फ़… फिर शिल्पा के सामने मेरा भाई आ गया, वह रसोई के बाहर खड़ा होकर पहले से हम दोनों को देख भी रहा था और हमारी बातें भी सुन रहा था, मेरा भाई सिर्फ अंडरवीयर में था, वह भी पहले से उत्तेजित था इसलिए उसका बृहद आकार में फैला लिंग अंडरवीयर में से भी उभरा उभरा दिखाई दे रहा था. शिल्पा की दृष्टि उसके अंडरवीयर पर टिक गई, मैं समझ गई कि उसने अभी तक लिंग के दर्शन नहीं किए हैं, ओह… उफ आउच… ओह…

इतनी कहानी सुनते सुनते ही मेरे पति ने अपने लिंग का मुंड मेरी योनि में प्रविष्ट करा दिया, वे शावर वह खोल चुके थे.

मैं उनके द्वारा हुए लिंग प्रवेश से आवेशित होने लगी थी, मेरे हाथ उनके कन्धों से पीठ तक बारी बारी से कस रहे थे, मेरी साँसें तीब्र हो रही थी, मादक सिसकियों की अस्फुट ध्वनियाँ रह रह कर मेरे कंठ से उभर रही थी.

मेरे पति ने लिंग का योनि में घर्षण करते हुए कहा- स्टोरी का क्या बना…! आगे क्या तुमने अपने भाई से शिल्पा की प्यास बुझवा दी?… ओह… कितना मजा आ रहा है!
शावर के नीचे मैथुन करने में… उफ… वह लिंग को आगे तक ठोक कर बोले. उनके हाथों में मेरी पतली कमर थी, उनकी जांघें मेरी जाँघों से टकरा कर विचित्र सी आवाज पैदा कर रही थी.

“हाँ… उफ… ओह… ऊई मां… तुम क्या मोटा कर लाये हो अपने लिंग को… इससे आज ज्यादा ही आनन्द मिल रहा है…” मुझे वाकई पहले से ज्यादा मजा आ रहा था, मैं फिर स्टोरी पर आई- बड़ा मजा आया था… शिल्पा को मेरे भाई ने पूरा मजा दिया था… खूब जोर जोर के धक्के मारे थे… मैंने बताया और लिंग प्रहार से उत्त्पन्न आनन्दित कर देने वाली पीड़ा से मेरे शरीर के रोयें रोयें में पुलकन थी, कंठ खुश्क हो गया था, मेरी जीभ बार बार मेरे होठों पर फिर रही थी.

थोड़ी देर में मेरे पति ने मेरी मुद्रा बदलवाई, अब मेरी पीठ उनकी ओर हो गई, मैंने जरा झुक कर दीवार में लगी नल को पकड़ लिया, वह मेरी योनि से लिंग निकाल चुके थे और अब मेरी गुदा(गांड) में प्रवेश करा रहे थे. गुदा में लिंग पहले ही प्रहार में प्रवेश हो गया, उन्होंने मेरी कमर पकड़ कर खूब शक्ति के साथ धक्के मारे और गुदा में ही स्खलित हो गए, मैं भी स्खलित हो चुकी थी.

फिर हम दोनों एक दूसरे से लिपट कर देर तक नहाते रहे.

कहानी जारी है. Antarvasna

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