Our site can help you find a professional massage girl in Gurgaon who will help you relax in the best manner possible. We connect you with professional therapists who can offer you a massage that will make you feel better and more relaxed. The pros on our list are ready to provide you with a fantastic experience at your house or in one of their particular spots, whether you want to relax or get away from it all.
Find Related Category Ads
Massage is currently one of the finest methods to relax your mind, body, and overall health. Our website makes it easy to locate the top massage services in Gurgaon that meet your demands. This will be a one-of-a-kind and calming experience for you.
Tottaa wants to make it simple for clients to find the top masseuse. The Gurgaon massage service providers on our list offer the greatest quality, comfort, and competence, whether you want a full-body massage or a massage for a particular location.
Tottaa is not only a list of masseuses, it’s also a secure location for them to show off what they can do. People in Gurgaon who are seeking massage services may find them on our website. This makes them easier to find and gets them more appointments.
Advertisers may simply put up profiles, offer their services, and talk about pricing and discounts on our sites. This makes sure that the relevant people notice your Gurgaon massage service, which makes it easier to obtain more customers.
There are a lot of different types of massage services on our site, so you may choose one that works for you. You may choose the kind of treatment that works best for you, whether it’s profound rest or a particular type of therapy.
A calm and gentle way to ease muscular tension and improve blood flow. This Gurgaon massage is perfect for you if you want to relax and forget about your concerns.
This approach employs a lot of pressure to get to deeper muscle layers. It’s helpful for folks who have muscular discomfort or stiffness that won’t go away. There are specialists on our profiles of massage girls in Gurgaon who are good at deep tissue treatments that function effectively.
Calming massage strokes and essential oils are beneficial in making people feel improved both emotionally and physically. Most massage companies in Gurgaon employ the use of custom oil preparations to make you feel good.
A therapy that wakes you up by using a mix of regular massage, stretching, and compression. This traditional massage in Gurgaon helps you relax, become more flexible, and get your mind and body back in harmony.
Heated stones are placed on various parts of the body to help with deep muscular tightness. People who want to feel good, relax, and help their muscles recover quickly can use this massage service in Gurgaon
Tottaa makes it simple and fast to book. With our listings, you can see what kind of massage you want, read about the providers, see that they are free and then contact them directly. After you choose, you can book a massage in Gurgaon at your convenient time and location. In order to get your desired massage services, apply the following simple steps:
Take a peek around our site to view a few massage professionals. Each listing gives you information about the many sorts of massages, how long they last, how much they cost, and where they are situated. This makes it easier to choose the finest ones.
Examine the profiles carefully to compare how the services, talents, and reviews posted by customers differ. This phase makes sure you choose a business that has the style, pricing, and supply you desire.
When you have decided, use the information that you are offered so that you can contact them directly. One can communicate it to the massage giver thus making it understood what massage you want at what time and when.
The date, time and place of the service, which could be your home, a hotel or the spa where the therapist may be found. You also need to agree on the payment method and any other accords prior to commencement of the course.
All you have to do on the day of the appointment is have your area ready for the house visit. The remainder will be handled by the expert. Take it easy and enjoy a massage that is made just for you.
To locate a professional who can meet your needs, read our biography, reviews and advertising.
Yes, many of the therapists on our site will come to your house so you may feel safe and at ease.
You may pick based on talents since most adverts provide their qualifications in their profiles.
It would be advisable to make a reservation earlier to guarantee that you would be able to get a massage, particularly against the prevalent services of massage.
Not at all. Tottaa exclusively connects users with service providers. The doctor gets to choose how to handle payment.
दोस्तो, मेरा नाम राहुल है. मैं राजकोट का रहने Sex Stories वाला हूँ. मेरी उम्र तेईस साल है और मैं एक अच्छा खासा मर्द दिखता हूँ. मेरी त्वचा भी काफी गोरी है, जो किसी भी लड़की या भाभी को आकर्षित कर लेती है.
आपको मैं अपनी पहली मगर सच्ची सेक्स कहानी सुनाने जा रहा हूँ. यह कहानी दिसम्बर 2003 की है.
मैं राजकोट में अपना एक साइबर कैफे चलाता हूँ, वहां पर काफ़ी सारी लड़कियों का आना जाना रहता है. मगर मैं एक बहुत शर्मीला टाइप का बंदा हूँ, इसलिए मेरी किसी भी लड़की से बात करने की हिम्मत ही नहीं होती थी.
मुझे याद है ये काफी साल की बात है. उस दिन शाम के साढ़े सात बजे होंगे, तब मैं अपने साइबर कैफे में अकेला था. उस वक्त एक सुंदर सी लड़की अन्दर आई. उसने अपना नाम आरती बताया था.
मैंने उससे ओके कहा और इशारा किया कि किसी भी सिस्टम पर अपना काम कर ले.
वो मेरे सामने वाले कंप्यूटर पर आकर का बैठ गई थी. मैं उसे देख रहा था, वो बला की खूबसूरत माल लग रही थी. उसने शॉर्ट शर्ट और लो-वेस्ट जींस पहनी हुई थी. उसका बड़ा ही कातिलाना फिगर था. मैंने उसकी फिगर की नाप का अंदाजा 34-26-36 का लगाया था. उसके चूचे एकदम उभरे हुए थे.
कुछ मिनट बाद उसने मुझसे वो कम्प्यूटर ख़राब होने का बहाना बनाया. मैंने सोचा कि अभी तक तो सब सिस्टम सही थे, ये कैसे खराब हो गया है. मगर शायद उसने मुझे जानबूझ कर अपने पास बुलाया था. मैंने उसके करीब जाकर सिस्टम को चैक किया, तो वो बिल्कुल सही चल रहा था.
मैंने उससे कहा- क्या खराबी लग रही है. सिस्टम सही तो है?
इस पर उसने मुझसे कहा- मुझे कंप्यूटर चलाना ठीक से आता नहीं है. प्लीज़ आप मुझको थोड़ा सा सिखा दो.
अब इतनी हॉट लड़की देख कर मेरा भी मन डोल गया था.
मैंने कहा- ठीक है
जैसे ही मैं उसके बाजू में बैठा कि उसने पहले नीचे से अपने पैर को मेरे पैर पर रखा और धीरे धीरे उसको अपने पैर से सहलाने लगी. मैं तो एकदम से दंग रह गया. मुझे कुछ समझ में ही नहीं आ रहा था कि मैं क्या करूं.
मैं चुप रहा और मैंने अपनी तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं जताई.
ये देख कर उसने धीरे धीरे करके मेरे लौड़े पर अपना हाथ रख दिया. उसका हाथ जैसे ही मेरे लंड पर आया तो मुझे एक अजीब सी सिहरन हुई और मैंने वहां से उठ कर जाने की कोशिश की.
उसने मुझे मना करते हुए मेरा हाथ खींच लिया और कहने लगी- मेहरबानी करके मुझे अकेला मत छोड़ो, मुझे तुम बहुत अच्छे लगते हो.
मैंने कहा- ये क्या बात हुई .. अभी तो हम दोनों पूरी तरह से एक दूसरे को जानते भी नहीं हैं … और तुम मेरे से ये सब कर रही हो.
इससे आगे मैं कुछ और बोलता कि उसने मुझे गाल पर किस कर दिया और अगले ही पल मेरे होंठों से होंठ लगा कर मेरे मुँह में अपनी जीभ डाल दी.
बस फ़िर क्या था … मैं भी तो आख़िर मर्द ही था … मैंने भी उसे सहयोग करना शुरू कर दिया और उसे अच्छे से किस करने लगा.
अब वो मेरी जुबान को चूस रही थी और मैं उसकी. तभी मैंने अपना एक हाथ उसके मम्मों पर रख दिया, तो उसने कुछ नहीं बोला … बल्कि उसने मेरा दूसरा हाथ पकड़ कर खुद की गांड पर लगा दिया.
वो मुँह हटा कर मुझे देख कर जोर जोर से बोलने लगी- ओह रौनी .. प्लीज़ जोर से दबाओ आह .. और मेरे बूब्स जोर जोर से दबाओ आह कितना मजा आ रहा है.
मगर मैं डर रहा था कि कहीं कैफे पर कोई और कस्टमर न आ जाए, सो मैंने उसे वहीं पर रोका और उससे कहा- हम कहीं अकेले में आराम से मिलके एन्जॉय करेंगे. अभी इधर कोई आ जाएगा, तो सब गड़बड़ हो जाएगी.
उसने अपने टॉप को ठीक करते हुए कहा- ठीक है. मैं इसी संडे को सुबह छह बजे तुम्हारे कैफे पर आउंगी.
मैंने कहा- इतनी सुबह क्यों भला!
उसने कहा- सर्दियों के दिन हैं … सुबह सुबह का मजा ही कुछ और आएगा. वैसे भी मैं घर से सुबह घूमने के लिए निकलती हूँ, सो घर पर सबको यही पता रहेगा. फिर छह बजे थोड़ा सा अंधेरा भी होता है.
चूंकि सर्दी का मौसम था तो उसकी बात सही थी. मैं उसकी तरफ देखने लगा.
उसने कहा कि तुम्हें कोई प्रॉब्लम तो नहीं है ना!
मैंने सोचा और अपने आपसे भी कहा कि ऐसा मौका फ़िर नहीं मिलेगा … साली खुद ही चुत चुदने मचल रही है. मैंने कहा- ठीक है मैं आ जाऊंगा.
फ़िर उसने मुस्कुराते हुए मुझे एक किस की और गांड मटकाते हुए मेरे कैफे से निकल गई.
दो दिन बाद संडे था. मैं सुबह सुबह जल्दी पांच बजे उठा और फ्रेश होकर एक चाय पी और बाइक उठा कर फुल स्पीड से कैफे आ पहुंचा.
मैंने कल रात को ही पूरी व्यवस्था कर दी थी. एक बार अन्दर जाकर फिर से सब ठीक किया. थोड़ा रूम फ्रेशनर भी स्प्रे कर दिया और उसके आने का इन्तजार करने लगा. मैं कैफे की शटर आधी उठा रखी थी ताकि उसे मेरे आ जाने का अहसास हो जाए.
तभी वो शटर उठा कर अन्दर आ गई और आते ही मुझसे लिपट गई.
मैंने कहा- एक मिनट शटर तो बंद कर लेने दो.
वो अलग हुई, तो मैंने शटर बंद कर दी और उसकी तरफ घूम गया. वो मुझे देख कर सीधे आकर मुझसे लिपट गई.
मैंने ध्यान से देखा वो जॉगिंग सूट में आई थी. उसके खुले हुए लंबे बाल उसकी खूबसूरत जवानी को और भी ज्यादा मदहोश कर देने वाली बना रहे थे.
हम दोनों ने करीब दस मिनट तक किस किया. चूमाचाटी के दौरान एक बार तो उसने मुझे काटा भी, मगर मैंने कुछ नहीं कहा. वो काफी गरम हो रही थी.
मैंने उसके टॉप की जिप खोली, तो उसने अन्दर पिंक कलर की ब्रा पहनी थी.
जैसे ही मैंने उसके दूध दबाए, तो वो मादक सिस्कारियां भरने लगी- आह जोर से … और जोर से!
उसके चूचे काफी नर्म थे. मैंने उसका टॉप खोल दिया और उसकी ब्रा भी निकाल दी. उसकी चूचियां हवा में एकदम से फुदकने लगीं. मैंने उसका एक निप्पल मुँह में ले लिया.
बदले में उसने मेरी गांड पर जोर से दबाते और कहा- आह मेरे राजा और जोर से चूस ले इसको.
फ़िर मैं उसके दोनों मम्मों को बारी बारी से चूसता और चूमता हुआ उसके पेट तक आ गया. कुछ ही पलों के बाद मैंने उसके पैंट और पैंटी को भी उतार फैंका.
तभी उसने कहा- एक मिनट.
मैं रुका, तो उसने मेरे सारे कपड़े निकाल दिए और मुझे हर जगह पागलों की तरह चूमने लगी. अब चुदास बढ़ी … तो मैंने भी एक दो बार उसके निप्पल को काटा.
फिर वो नीचे बैठ कर तुंरत ही मेरा लंड अपने मुँह में लेने लगी. एक मस्त लौंडिया के मुँह में अपने लंड का अहसास पाते ही मैं अपने होश खो बैठा. ऐसा आनन्द आ रहा था मानो मैं किसी जन्नत की हूर से अपने लंड को चुसवा रहा हूँ.
मैंने आह भरते हुए कहा- आह जान अब और मत तड़पाओ … तुम अकेली अकेली मजा मत लो. मुझे भी मजा चाहिए.
वो तुंरत समझ गई और सोफे पर लेट गई. उसने मुझे अपने ऊपर उल्टा लेटा दिया. अब मेरे मुँह में उसकी चुत थी. मैं चुत पर टूट पड़ा. वो लंड को कुल्फी के जैसे चूसने लगी. उसे जो चाहिए था, उसे मिल गया और मुझे जो चाहिए था, मुझे मिल गया था. हम दोनों 69 में आकर मस्त मजा ले रहे थे.
सच में यार क्या मलाईदार चूत थी उसकी .. लगता था उसने अभी सुबह ही चुत की शेव की हो. उसकी चुत काफी गर्म भी थी और उसने चुत पर कोई मस्त स्वादिष्ट सा फ्लेवर भी लगाया हुआ था.
मैंने तुंरत ही अपनी जुबान नुकीली की और किसी पागल कुत्ते की तरह चुत चाटने लगा. मेरी जीभ उसकी चुत में अन्दर भी जाने लगी थी. वो भी काफी मजे से मेरा लौड़ा चूस रही थी.
कुछ मिनट बाद मेरा पानी निकल गया और उसने बड़े मजे से मेरे लंडरस को चाट लिया. उसने मेरे वीर्य को पूरा का पूरा खा लिया था. एक बूंद भी बेस्ट नहीं जाने दी थी.
फ़िर पांच मिनट के बाद उसने फ़िर से मेरे लौड़े को चूस कर गरम किया और बोली- अब मेहरबानी करके मुझे जल्दी से चोद दो … मुझसे अब और बर्दाश्त नहीं हो रहा है.
मैंने कहा- ठीक है रानी.
उसकी टांगें चौड़ी करके मैंने अपने कंधे पर रख लीं और अपना लौड़ा अन्दर पेलने के लिए कोशिश की. मगर लंड चुत के अन्दर नहीं गया. उसे दर्द भी हो रहा था.
उसे दर्द से कराहते हुए देख कर मैंने पूछा- क्या हुआ?
वो बोली- एक मिनट रुको.
उसने अपने मुँह से ढेर सारा थूक निकाल कर मेरे लौड़े पर लगाया और कुछ अपनी चूत पर भी लगा लिया. फिर अपने हाथों से अपनी चूत को चौड़ा करके बोली- अब आ जाओ मेरे राजा.
मैंने कहा- हां ये ले मेरी रानी.
ये कहते हुए मैंने अपने खड़े लंड को एक ही झटके में पूरा का पूरा अन्दर डाल दिया.
लंड लेते ही वो चिल्लाने लगी- उई मां … मर गई … मेरी फट गई.
मैंने कहा- चिल्लाओ मत … कोई आ जाएगा तो मुसीबत हो जाएगी.
वो अपनी चीख दबाते हुए बोली- दर्द बहुत हो रहा है रौनी … तुम एक काम करो तुम मेरे दर्द की परवाह किये बिना जल्दी से लंड को दो तीन बार अन्दर बाहर करो.
मैंने वैसे ही किया.
वो कराहते हुए अपने मुँह बंद किये हुए मेरे लंड के प्रहार झेलती रही.
कोई आठ दस धक्कों के बाद उसका दर्द जाता रहा. अब वो अपनी गांड उछाल उछाल कर चुदवाने लगी. मैं भी उसके मम्मों को दबा रहा था, उसे किस कर रहा था.
थोड़ी देर के बाद वो बोली कि मुझे तुम्हारे ऊपर आना है.
मैंने कहा- ठीक है.
मैं लंड खींच कर उठा और सोफे पर लेटने जा रहा था कि तभी उसे न जान क्या सूझा और वो मेरी गांड में उंगली डालने की कोशिश करने लगी.
मैंने उसका हाथ पकड़ लिया.
वो हंसने लगी और बोली- चलो लेट जाओ, मुझे रायडिंग करने दो.
मैंने कहा- नहीं, पहले मुझे तुम्हारी गांड मारने देनी होगी.
वो बोली- आज नहीं … फ़िर कभी ले लेना.
वो मुझे धक्का देकर मेरे ऊपर चढ़ गई और लंड पकड़ कर चुत में फंसा कर बैठती चली गई.
आह क्या गजब की बला थी वो .. मेरे ऊपर क्या मस्त माल लग रही थी. लंबे बाल और हिलते हुए चुचे मुझे काफी मदहोश किए जा रहे थे.
करीब दस मिनट के बाद मेरा पानी निकलने वाला था.
मैंने पूछा- क्या करूं?
उसने कहा- अन्दर नहीं निकालना. मुझे पीना है … तुम्हारा गाढ़ा पानी बहुत मस्त स्वाद देता है.
मैंने कहा- ठीक है.
वो उठ कर अलग हुई और उसने मेरा लौड़ा मुँह में ले लिया. अगले ही पल मेरा रस छूट गया और उसने लंड का सारा पानी पी लिया.
चुदाई के बाद हम दोनों ने करीब आधे घंटे तक एक दूसरे को चूमा सहलाया और अपने अपने कपड़े पहने.
मैंने उसकी गांड पर हाथ फेरा, तो उसने वादा किया कि वो मुझे अपनी गांड मारने देगी.
मेरे प्यारे दोस्तो, अन्तर्वासना के लिए ये मेरी पहली सेक्स कहानी है, अगर कोई भूल हुई हो, तो प्लीज़ नजरअंदाज कर देना. कमेंट्स करना न भूलें. Sex Stories
इस वक्त मेरी उम्र पच्चीस Hindi Sex Stories साल है, मैं विवाहित और एक बच्चे की माँ हूँ। मेरे पति एक फेक्ट्री में सुपरवाइजर हैं।
जब मेरी शादी हुई तब मेरी उम्र बीस साल थी, मैं यह शादी नहीं करना चाहती थी क्योंकि उस समय अपने एक दोस्त के साथ मेरा लव अफेयर चल रहा था, वो बहुत रोमांटिक और दिलफेंक युवक था, कभी कभी तो उसकी इस आदत का मुझ पर गहरा असर पड़ता, जहां भी किसी लड़की को अपने करीब पाता उसे वो अपनी मीठी मीठी बातों से फंसाने की कोशिश करता।
बस मैं उसकी इसी बात का बुरा मान जाती, कई कई दिन तक मैं उससे बात नहीं करती थी, वो तरह तरह से मुझे मनाने की कोशिश करता तो मैं मान भी जाती थी।
उसका और मेरा प्यार अभी तक शारीरिक सम्बंधों के बन्धन से दूर था, ऐसा नहीं था कि उसने अपनी इच्छा जाहिर नहीं की थी, वो कई बार मुझे चोदने की कोशिश कर चुका था, उसने कई बार मुझे सहला सहला कर गर्म भी कर दिया था, चूचियाँ दबा दबा कर उनमें आग भी भर दी थी मगर मैं अपनी मर्यादाओं की सीमा नहीं लांघना चाहती थी, मेरा इस बात पर अटूट विश्वास था कि चूत की सील सिर्फ पति तोड़ सकता है क्योंकि उस पर उसी का हक होता है।
ऐसा भी नहीं था कि मेरा प्रेमी मुझसे शादी नहीं करना चाहता था, सब कुछ ठीक था मगर मैं शादी से पहले चुदवा कर सुहागरात का मजा फीका नहीं करना चाहती थी, मेरा प्रेमी कई बार गुस्से से कहता कि मैं उससे प्यार नहीं करती। उसने शादी का वादा किया, कसमें खाई, मगर मेरा एक ही जवाब था कि अगर कुछ होगा तो शादी के बाद ही होगा। मैंने उसे साफ साफ जवाब दे दिया कि मैं शादी से पहले वो चीज हरगिज नहीं दे सकती जिसकी वो जिद कर रहा है।
मगर वो चालू था, उसने कई बार चाहा कि मैं बहक जाऊं और बहक कर उसकी बात मान लूँ।
एक दिन वो मुझे एकांत में ले गया, वहाँ ले जाकर उसने मुझे सहलाना शुरू कर दिया, वो ऐसा कई बार कर चुका था इसलिए इस ओर मैंने कोई ज्यादा ध्यान नहीं दिया। वो जब भी ऐसा करता तो मैं काफी गर्म हो जाती थी मगर संयम का दामन मेरे हाथ से नहीं छूटता था, मगर उस दिन मैं अपने आप को नहीं रोक सकी।
वो मेरी दोनों चूचियों पर हथेली चला रहा था और मैं हमेशा की तरह आँखें मूंदे उसकी इस हरकत का मजा ले रही थी। तभी उसने मेरा हाथ पकड़ा और अपने खड़े लंड को मेरे हाथ में पकड़ा दिया।
उसका लंड काफी लंबा और मोटा था, इतना ही नहीं, वो आग की तरह जल भी रहा था। जब मैंने आँखें खोल कर अपने हाथ की तरफ देखा तो मैं चौंक पड़ी,” उफ क्या है यह?”
मैंने उसका लंड हाथ से छोड़ दिया तो वो सांप के फन की तरह फुंफकार उठा, मेरा रोयाँ-रोयाँ खड़ा हो गया था उस समय। मैं अच्छी तरह जानती थी कि यह लंड है मगर मैंने हर लड़की की तरह मासूमियत दिखाते हुए यह सवाल पूछा था।
हाथ से छूटते ही लंड एक तोप की तरह उपर उठा और सीधा हो गया, मैं अपनी पलकें झपका झपका कर उसे देख रही थी। मेरी मासूमियत देख कर मेरे प्रेमी के होंठों की मुस्कान गहरी हो गई।
इसे नहीं जानती, क्या है यह? उसने अपना अकड़ता हुआ लंड अपने हाथ से पकड़ कर हिलाते हुए कहा।
नहीं … क्या है यह? मैंने कहा।
हाय तुम्हारी इसी मासूमियत पर तो हम फ़िदा हैं! वो फिर से मेरी चूचियाँ दबाता हुए बोला- खैर अब मैं ही बता देता हूँ कि यह क्या चीज है!
फिर वो अपने खड़े लंड को हाथ से इधर उधर घुमा कर देखता हुआ बोला- वैसे तो इसे कई नामों से पुकारा जाता है, मगर मैं इसे कुछ और ही समझता हूँ।
क्या समझते हो तुम इसे? उसके मोटे और लम्बे लंड का सम्मोहन मेरे दिलो-दिमाग पर छाता जा रहा था, उसने अपना लंड क्या दिखाया कि उस पर से मेरी नजर हट ही नहीं रही थी।
मैं यहाँ झूठ नहीं लिखूंगी, प्रेमी का कठोर विशाल, फुंफकारता लंड देख कर मेरी तबियत ऐसी फिसली कि मेरी चूत के मुँह में पानी भर आया, मेरी चूत पूरी गीली हो गई और लगा कि अन्दर चीटियाँ रेंग रही हैं। मेरी चूचियों में भी कुलबुलाहट शुरू हो गई थी, मेरा मन यही चाह रहा था कि वो मेरी चूचियों को हाथ से पकड़-पकड़ कर खूब मसले और दबाये।
उस समय मेरी मस्ती परवान चढ़ी हुई थी, मैंने आँखें मूंद ली थी और वो कपड़े के ऊपर से ही मेरी चूचियों को दबाये जा रहा था। उस समय सी … सी के सिवा मेरे मुँह से कुछ और नहीं निकल पा रहा था।
सच कहती हूँ, उस दिन मैं मर्यादाओं को भुला बैठी, मेरा सुहागरात वाला इरादा तो ताश के पतों की तरह बिखर गया। बस सब कुछ भूल कर दिल चाह रहा था कि लंड को अपने होंठों के बीच दबा कर खूब चूसूँ!
उसका लंड सचमुच मुझे बहुत अलबेला लग रहा था, जैसा वो खुद गोरा था वैसा ही गोरा उसका बमपिलाट हथियार भी था। ताज्जुब की बात तो यह थी कि ऐसा ना तो मैंने सोचा था और ना ही कभी किया था, हाँ मगर सुहागरात वाले सपने की यह एक कड़ी जरूर थी।
उस समय मैं पूरी तरह से पागल हो चुकी थी, लंड मेरी आँखों के सामने बार बार फुंफकार मार रहा था, तभी उसने मेरी बात का जवाब दिया तो मेरी चेतना लौटी।
इसे मैं अपना छोटा भाई समझता हूँ! वो अपना लंड बड़ी मस्ती और कामुकता से सहलाता हुआ बोला।
मेरी नजरें अब भी उसके उछलते लंड पर अटकी हुई थी।
तुम इसे बहुत गौर से देख रही हो? वो मुझे अपने लंड को देखता पाकर बोला।
हूँ! शायद इसलिए कि इसे मैंने पहली बार देखा है! मैंने अपने सूखे गले को थूक से तर करते हुए कहा।
इससे तो मैं तुम्हारी पहचान बहुत पहले ही करवा देता मगर तुम तैयार ही कहाँ होती थी? उसने अपनी चमकदार आँखों से मेरी तरफ देख कर कहा।
मैंने इसकी कोई खास जरूरत नहीं समझी थी- मैंने दिल की बात छुपाते हुए कहा।
तुम्हें कैसा दीखता है यह? उसने पूछा।
उसकी बात सुन कर मुझे मजाक सूझा तो मैंने कहा- हूँ … देख रही हूँ कि इसकी सूरत तुमसे बहुत मिल रही है इसमें कोई शक नहीं कि यह तुम्हारा छोटा भाई है!
मेरी बात सुन कर वो बड़ी जोर से हंसा, वो समझ गया कि मैं मजाक में लंड और उसकी सूरत में तालमेल बिठा रही हूँ।
इसका जादू निराला है। वो बोला और अपने हाथों से लंड को सहलाने लगा।
अच्छा तो क्या यह जादूगर भी है? मैंने हैरान होकर पूछा।
इसका जादू देखना चाहती हो? उसने पूछा।
हूँ! मगर उलटी सीधी बात नहीं होनी चाहिए।
नहीं तुम्हारी मरजी के बिना यह कोई भी उलटी सीधी बात नहीं करेगा।
ठीक है, तब तो मैं इसका जादू जरूर देखना चाहूंगी। अब मेरी चूत में बुरी तरह कुलबुलाहट होने लगी थी।
मेरे प्रेमी ने मचल कर मुझसे कहा- मधु, यह कमीज अपने बदन से उतार दो!
मोहन डीयर! तुम्हीं क्यों नहीं उतार देते? मैंने मचल कर कहा।
बटन खोलना है, तुम खोल दो फिर मैं ही उतार दूंगा। वो हंसते हुए बोला।
बस क्या था, मुझ पर तो अब वासना का भूत सवार हो चुका था, मैं धीरे धीरे मदहोश होती जा रही थी, चूत अन्दर से पूरी तरह रसीली हो गई थी, मैंने तुंरत अपनी कमीज के बटनों को एक एक कर खोल दिया और बोली- लो खोल दिए बटन! तुम इसे मेरे बदन से निकाल दो!
बांह में से तो तुम्हीं को निकालना है!
मैं बांह से निकाल दूंगी तो तुम क्या करोगे?
यही तो जादू है, देखना कैसा जादू करता हूँ।
और जैसे ही मैं अपनी कमीज को हाथ ऊपर कर निकालने लगी उसने तुंरत मेरी ब्रा के हुक को खोल दिया, मेरी दोनों चूचियाँ नंगी हो गई, उसने अपने दोनों हाथों से मेरी नंगी चूचियों को पकड़ कर कस कर मसला तो मैं सिसकारने लगी।
जीवन में पहली बार किसी युवक ने मेरी नंगी चूचियों को हाथ में लिया था, मेरा गनगना उठना स्वाभाविक था, सारे बदन का रोम-रोम मरमरा उठा।
मेरी दोनों चूचियां हमेशा की तरह अपनी औकात से ज्यादा फ़ूल उठी थी, उस समय मेरी चूत भी गीली हो रही थी। ऐसा तभी होता था जब मोहन मेरी भावनाओं से खेलता था, वैसे सुबह सुबह भी चूचियाँ फ़ूल जाती थी, पहले तो उसने मेरी चूचियों को दबाना शुरू किया और मेरा हाथ पकड़ कर अपने लंड पर रख दिया और मुझसे बोला- जैसा दिल चाहे इस लंड के साथ वैसा ही व्यव्हार करो!
मैंने उसके बमापिलाट लंड को दबाना और सहलाना शरू कर दिया, शरीर में उसको छूने के कारण गुदगुदी हो रही थी।
जब मैंने उसका लंड पकड़ा तो मेरी चूत पहले से ज्यादा फ़ूल कर फुदफ़ुदाने लगी, ऐसा लग रहा था जैसे वो परदे से बाहर निकल कर लंड से पहली मुलाक़ात कर लेना चाहती हो। सलवार के अन्दर वो पिंजरे में बन्द चिड़िया की तरह फुदकने लगी, मैं अपने प्रेमी मोहन का एकदम बमपिलाट कड़ा लंड उत्साह के साथ सहलाने लगी, मेरा सारा शरीर कसमसाने लगा।
फिर मेरा प्रेमी मेरी चूचियों के निप्पल को होंठों के बीच दबा कर चूसने लगा, उसकी इस नई हरकत से मेरा सारा शरीर मस्ती से काँपने लगा, मुझ पर वासना पूरी तरह सवार हो गई। उसने अपने होंठों के जादू से मेरी चूचियों के निप्पल नुकीले बना दिये।
कैसा लग रहा है? उसने पूछा।
सी … पता नहीं है … पता नहीं मुझे क्या हो रहा है … एक अजीब सा नशा मुझ पर छाता जा रहा है …
अभी मैं नया जादू शुरू करता हूँ … तुम नीचे अपने घुटनों पर खड़ी हो जाओ, इससे तुम्हें एक नया अनुभव मिलेगा! मोहन ने मुझसे कहा।
मैं नीचे घुटनों पर खड़ी हो गई, मोहन ने अपना लंड पकडा और मेरी चूचियों पर अपने लंड का सुपारा रगड़ना शुरू कर दिया, उसने सच कहा था कि उसके लंड में अजीब सा जादू भरा था, मेरा सारा शरीर झनझना उठा, पहली बार दिल में एक इच्छा जागी कि उसके लंड की छाँव तले सो जाऊं और सारी उम्र नहीं जागूँ। मैं एक अजीब सी दुनिया में खो चुकी थी जहां हर तरफ मस्ती और खुशी का बोल-बाला था।
अब कैसा लग रहा है? उसने एक बार फिर पूछा।
सी … कुछ ना कहो … कुछ ना पूछो … ! मैंने कसमसा कर कहा- बस इसे ऐसे ही मेरे दिल से रगड़ते रहो।
फिर उसने अपना लंड ठीक मेरी चूचियों के बीच में रख कर उन्हें आपस में सटा दिया, चूचियों के आपस में सट जाने से बीच में एक पतली सी गली बन गई थी, उसी गली में लंड फंसा था, बड़ा ही मजेदार नजारा था, मैंने उसे पूरा सहयोग करने का मन बना लिया था, फिर वो मेरी चूचियों पर धक्के लगाने लगा, उसके लंड के सुपारे से कोई चिकनी सी चीज रिस रही थी, जिसकी वजह से चूचियों के बीच बनी उस पतली गली का रास्ता चिकना हो गया था। मोहन अब उस पतली गली में आसानी से अपने लंड को घुमा रहा था, वो अपने लंड को ऊपर-नीचे कर धक्के लगा रहा था और उसका लंड चूचियों के बीच से अपनी मुंडी निकाल कर बार बार मुझे देख रहा था। उस समय मैं पूरी तरह बावली सी हो गई, इधर चूत के अन्दर गर्मी कुछ इस तरह बढ़ी कि मैंने हथियार डाल दिये।
सी … बस … बस … मैं हार गई! मैंने तड़प कर कहा- अब तुम इसका जादू यहाँ पर दिखाओ।
मैंने अपनी चूत की तरफ इशारा किया और उठ कर जल्दी से अपनी सलवार खोल डाली।
ठीक है! वो मेरी जाँघों के बिच देखते हुए बोला- यदि तुम्हारी यही इच्छा है तो अपना काम तो सेवा करना ही है।
मैं सलवार उतार कर लेट गई, उसने मेरी जांघें फैला दी और मुस्कुराता हुआ बड़े प्यार से मेरी चूत को सहलाने लगा, इससे मैं और भी ज्यादा खौल उठी।
सीऽऽ जल्दी आओ ना! मैंने अपने हाथ से अपनी चूत को रगड़ते हुए कहा- यहाँ … यहाँ … कोई चीज खौल रही है! सी … ई … हाय … माँ …
फिर वो थोड़ा सा झुका और एक लम्बा मस्त चुम्बन मेरी चूत पर धर दिया, चूत उसके होंठों का स्पर्श पा कर सरसरा उठी, फिर उसने ढेर सारा थूक मेरी चूत के ठीक बीच में टपका दिया और उसे अंगुली से अच्छी तरह रगड़ा और वहाँ अपना लंड सटा कर मेरी तरफ देखा और बोला- अब आ रहा है!
आऽऽ आने दो सइयां … मैंने कसमसा कर कहा- इतनी देर क्यों लगा रहे हो! बुद्धू इसे देख कर तो मैंने अपनी कसम तोड़ दी है!
इसका फायदा भी तुम्हें मिलेगा! इतना कह कर उसने मेरे दोनों संतरों को अपने हाथों में ले लिया। उसका फुंफकार मारता बमपीलाट लंड बहुत जबरदस्त और कठोर था और पूरी मुस्तैदी के साथ चूत की खास जगह से सटा हुआ था, मेरी चूत उसे इतना करीब पा कर बौखला रही थी, वो इतनी गर्म हो चुकी थी कि जल्द से जल्द लंड से तालमेल बिठा कर उसे हजम कर जाना चाहती थी।
आ रहा है! मोहन ने एक जोरदार आवाज में कहा।
आने दो! मैं भी बुलंद आवाज में बोली।
बस फिर एक जोर का झटका मैंने अपनी चूत पर महसूस किया, ऐसा लगा कि मैंने बिजली का नंगा तार छू लिया हो, जैसे किसी ने एक चूहे को दुम से पकड़ कर जमीन पर एक जोरदार पटखनी लगाई हो। एक तीखी टीस सी पीड़ा चूत से उठी और सीधा मेरे दिमाग से टकराई, मेरे मुँह से चीख निकली- ऊई … माँ … ये सी … ये क्या हुआ? मैंने जल्दी से उठ कर अपनी चूत देखी तो उसका मुँह एक फटे हुए जूते की तरह खुला हुआ था और एक भारी भरकम पैर की तरह उसका लंड मेरी चूत में फंसा दिख रहा था।
ओफ्फो … क्या हुआ? मेरी चीख पर मेरे प्रेमी ने बौखला कर पूछा।
ऊं … हूँ … तुम्हें दिख नहीं रहा है क्या? मैंने उसे आँखों के इशारे से अपनी चूत दिखाई- देखो … सी … देखो तुम्हारा … सी … ई … छोटा भाई … छोटी सी जगह पर किस तरह फंसा पडा है, ऊई … ऊई माँ … मर … गई … आह … मुझे दर्द हो रहा है!
इसमें इतना रोने पीटने की जरूरत नहीं है! वो मेरी चरमराती चूत को सहलाते हुए बोला- यह जगह बनी ही इसके लिये है, यहाँ अब तुम्हें मेरा छोटा भाई फंसा दिख रहा है, इसमें हैरानी की क्या बात है, आज नहीं तो कल यहाँ किसी ना किसी का छोटा भाई फँसना ही था!
उफ … दर्द हो रहा है! मैंने दर्द से नाक सिकोड़ कर कहा- क्या अब यह बाहर नहीं निकल सकता? हूँ … मुझसे इसकी जलन बर्दास्त नहीं हो रही … सी … सी …
अब तो ये आगे जाएगा! इतना कह कर उसने एक और वैसा ही झटका आगे की ओर मारा, चूत से एक अजीब सी आवाज निकली, जैसा कपड़ा फटते समय निकलती है, फिर उसका लंड चूत में समाधी रमा बैठा, अब मैं उछल रही थी क्योंकि उसके लंड का सुपारा मेरे गर्भाशय के मुँह से टकरा रहा था, सुपारे की रगड़ से गर्भाशय के मुँह पर मीठी मीठी गुदगुदी हो रही थी- ऊई … अब तो … हाय … अब तो मैं उछल भी रही हूँ …
ऐसा ही होता है! वो मुस्कुरा कर बोला, वो मेरी चूचियों को दबाने लगा। एक बार फिर मैंने अपनी जाँघों के बीच देखा तो वहाँ गहरे लाल रंग का खून बूंद बूंद होकर टपक रहा था।
हाय … सी … वही हुआ … जो मैं सुहागरात से पहले नहीं चाहती थी, तुमने इसका खून कर ही दिया, हटो … तुम … बड़े वो हो … मैं तुमसे नहीं बोलती!
तुम्हें बोलने को कौन कह रहा है मेरी जान! वो मुझे चूम कर बोला- अब तो तुम देखती रहो … तुम्हें मैं कैसे कैसे जलवे दिखाता हूँ!
उसने चूत पर ताबड़तोड़ धक्के लगाने शुरू कर दिये। मैं आह … ऊई … सी … के अलावा कुछ नहीं कर सकती थी, चूत की कच्ची दीवारें काँप रही थी, मुझे अच्छी तरह याद है की दसवां धक्का मेरी जवानी को ठंडा कर गया था.
फिर जब तक मेरी शादी नहीं हो गई वो इसी तरह मेरी चूत पर कहर ढाता रहा था, मुझे चुदाई से बहुत सुख मिलता था, इसलिए मैं बिना डोर उसकी ओर खिंची चली जाती थी, उसने चूत पर पूरा अधिकार जमा कर उसका नक्शा ही बदल डाला था, अब पेशाब करते समय चूत से तेज सीटी की आवाज निकलने लगी थी, किसी कारणवश उसका और मेरा जीवन भर का साथ नहीं हो सका था, यह बात बहुत लम्बी है, यहाँ लिख कर मैं आप सबका समय खराब नहीं करना चाहती। Hindi Sex Stories
अन्तर्वासना कहानी
दोस्तो, हिंदी इंडियन सेक्स स्टोरीज में आपने अब तक पढ़ा था कि पण्डित जी रीना की जवानी को भोगने के चक्कर में उसको पूजा करवाने के लिए फंसा चुके थे. अब पण्डित जी ने उसके साथ आसन लगाने की विधि शुरू कर दे थी जिससे रीना की चुदास बढ़ने लगी थी.
अब आगे..
रीना का नंगा पेट पण्डित की नंगी पीठ से चिपका हुआ था. रीना खुद ही अपना पेट पण्डित की पीठ पे रगड़ने लगी.
पण्डित- रीना.. तुम्हारे पेट का स्पर्श ऐसे लगता है जैसे कि मैंने शनील कि रजाई ओढ़ ली हो.. और एक बात कहूँ.
रीना अब गर्म हो चली थी वो चुदास भरे स्वर में बोली- स्स.. कहिए ना पण्डित जी..
पण्डित- तुम्हारे स्तनों का स्पर्श तो..
रीना अपने मम्मों को और भी मस्ती से पण्डित की पीठ पे रगड़ने लगी.
रीना- तो क्या पण्डित जी?
पण्डित- मदहोश कर देने वाला है.. तुम्हारे स्तनों को हाथों में लेने के लिए कोई भी ललचा जाये.
रीना- स्सह्ह..
पण्डित- अब मैं सीधा लेटूंगा और तुम मुझ पर पेट के बल लेट जाना.. लेकिन तुम्हारा मुँह मेरे चरणों की ओर और मेरा मुँह तुम्हारे चरणों की तरफ़ होना चाहिये.
पण्डित पीठ के बल लेट गया और रीना पण्डित के ऊपर पेट के बल लेट गई.
रीना की टांगें पण्डित के चेहरे की तरफ़ थीं. रीना की नाभि पण्डित के लंड पर थी.. वह उसके सख्त लंड को गड़ता सा महसूस कर रही थी.
पण्डित रीना की संगमरमरी टांगों पे हाथ फेरने लगा.
पण्डित- रीना.. तुम्हारी टांगें कितनी अच्छी हैं.
पण्डित ने रीना का पेटीकोट ऊपर चढ़ा दिया और उसकी जांघें मसलने लगा.
उसने रीना की टांगें और फैला दीं. अब रीना की पेंटी साफ़ दिख रही थी.
पण्डित रीना की चूत के पास हल्के हल्के हाथ फेरने लगा.
पण्डित- रीना.. तुम्हारी जांघें कितनी गोरी और मुलायम हैं.
चूत के पास हाथ लगाने से रीना और भी गरम हो रही थी.
पण्डित- तुम्हें अब तक सबसे अच्छा आसन कौन सा लगा..?
रीना- स्स.. वो.. घुटनों के बल.. पीठ से पीठ.. नीचे से नीचे वाला.
पण्डित- चलो.. अब मैं बैठता हूँ.. और तुम्हें सामने से मेरे कंधों पर बैठना है.. मेरा सिर तुम्हारी टांगों के बीच में होना चाहिये.
रीना- जी..
रीना ने पण्डित का सिर अपनी टांगों के बीच लिया और उसके कंधों पर बैठ गई.
इस पोजीशन में रीना की नाभि पण्डित के होंठों पर आ रही थी.
पण्डित अपनी जीभ बाहर निकाल कर रीना की नाभि में घुमाने लगा. इससे रीना को बहुत मज़ा आ रहा था.
पण्डित- रीना.. आँखें बंद करके बोलो.. स्वाहा..
रीना- स्वाहा..
पण्डित- रीना.. तुम्हारी नाभि कितनी मीठी और गहरी है.. क्या तुम्हें ये वाला आसन अच्छा लग रहा है?
रीना- हाँ.. पण्डित जी.. ये आसन बहुत अच्छा है.. बहुत ही अच्छा अह..
पण्डित- क्या किसी ने तुम्हारी नाभि में जीभ डाली है?
रीना- आह्ह.. नहीं पण्डित जी.. आप पहले हैं.
पण्डित- अब तुम मेरे कंधों पर रह कर ही पीछे की तरफ़ लेट जाओ.. अपने हाथों से ज़मीन का सहारा ले लो.
रीना पण्डित के कंधों का सहारा लेकर लेट गई.
अब पण्डित के होंठों के सामने रीना की चूत थी.
पण्डित धीरे से अपने हाथ रीना के स्तन पे ले गया.. और ब्लाउज के ऊपर से ही दबाने लगा.
रीना भी यही चाह रही थी.
पण्डित- रीना.. तुम्हारे स्तन कितने भरे भरे हैं बहुत ही अच्छे हैं.
रीना- आह्ह..
रीना ने एक हाथ से अपना पेटीकोट ऊपर चढ़ा दिया और अपनी चूत को पण्डित के होंठों पे लगा दिया.
पण्डित कच्छी के ऊपर से ही रीना की चूत पे जीभ मारने लगा.
पण्डित- रीना.. अब तुम मेरी झोली में आ जाओ.
रीना फ़ौरन पण्डित के लंड पे बैठ गई.. उससे लिपट गई.
पण्डित- अह्ह.. रीना.. ये आसन अच्छा है?
रीना- स्स..स..सबसे.अच्छा.. ऊओ पण्डित जी..
पण्डित- ऊह्ह.. रीना.. आज तुम बहुत कामुक लग रही हो.. क्या तुम मेरे साथ काम करना चाहती हो..?
रीना- हाँ पण्डित जी.. स्सस.. मेरी काम अग्नि को शांत कीजिये.. ह्हह्ह.. प्लीज़..पण्डित जी..
पण्डित रीना के मम्मों को ज़ोर ज़ोर से दबाने लगा.. रीना बार बार अपनी चूत पण्डित के लंड पे दबाने लगी.
पण्डित ने रीना का ब्लाउज उतार कर फेंक दिया और उसके निप्पलों को अपने मुँह में ले लिया.
रीना- आअह्ह.. पण्डित जी.. मेरा उद्धार करो.. मेरे साथ काम करो..
पण्डित- बहुत नहाई है मेरे दूध से.. सारा दूध पी जाऊंगा तेरी छातियों का..
रीना- आअह्ह.. पी जाओ.. मैं क्क..कब मना करती हूँ.. पी लो पण्डित जी.. पी लो..
कुछ देर तक दूध पीने के बाद अब दोनों से और नहीं सहा जा रहा था.
पण्डित ने बैठे बैठे ही अपनी लुंगी खोल के अपने कच्छे से अपना लंड निकाला.. रीना ने भी बैठे बैठे ही अपनी कच्छी थोड़ी नीचे कर दी.
पण्डित- चल जल्दी कर..
रीना पण्डित के सख्त लंड पर बैठ गई.. लंड पूरा उसकी चूत में चला गया.
रीना- आअह्हह्हह.. स्वाहा.. कर दो मेरा स्वाहा.. आ..
रीना पण्डित के लंड पे ऊपर नीचे होने लगी. चुदाई ज़ोरों पर शुरू हो गई थी.
पण्डित- आह्हह.. मेरी रानी.. मेरी पुजारन.. तेरी योनि कितनी अच्छी है.. कितनी सुखदायी.. मेरी बांसुरी को बहुत मज़ा आ रहा है.
रीना- पण्डित जी.. आपकी बांसुरी भी बड़ी सुखदायी है.. आपकी बांसुरी मेरी योनि में बड़ी मीठी धुन बजा रही है.
पण्डित- देवलिंग को छोड़.. पहले मेरे लिंग की जय कर ले.. बहुत मज़ा देगा ये तेरे को..
रीना- ऊऊआअ.. प्प.. पण्डित जी.. रात को तो आपके देवलिंग ने न जाने कहां कहां घुसने की कोशिश की!
पण्डित- मेरी रानी.. आअ.. फिकर मत कर.. स्स.. तुझे जहाँ जहाँ घुसवाना है.. मैं घुसाऊंगा.
रीना- आअह्हह्ह.. पण्डित जी.. एक विधवा को.. दिलासा नहीं.. मर्द का बदन चाहिए.. असली सुख तो इसी में है. क्यों.. आआ.. बोलिए ना पण्डित जी.. आऐई..
पण्डित- हांन..आ..
अब रीना लेट गई और पण्डित उसके ऊपर आकर उसे चोदने लगा.
साथ साथ वो रीना के मम्मों को भी दबा रहा था.
पण्डित- आअह्ह.. उस.. आज के लिए तेरा पति बन जाऊँ.. बोल..!
रीना- आऐए.. स्सस.. ई.. हाअन्न.. बन जाओ..
पण्डित- मेरा लिंग आज तेरी योनि को चीर देगा.. मेरी प्यारी रीना..
रीना- आअह्हह.. चीर दो.. आअह्ह.. आह्हह्ह.. चीर दो ना.. आआह्ह..
पण्डित- आअह्हह.. ऊऊऊऊ..
दोनों एक साथ झड़ गए और पण्डित ने सारा वीर्य रीना की चूत के ऊपर झाड़ दिया.
रीना- आह्ह..
अब रीना पण्डित से आँखें नहीं मिला पा रही थी.
पण्डित रीना के साथ लेट गया और उसके गालों को चूमने लगा.
रीना- पण्डित जी.. क्या मैंने पाप कर दिया है?
पण्डित- नहीं रीना.. पण्डित के साथ काम करने से तुम्हारी शुद्धता बढ़ गई है.
कुछ देर दोनों मौन पड़े रहे और फिर रीना कपड़े पहन कर और मेकअप उतार कर घर चली आई.
आज पण्डित ने उसे देवलिंग बांधने को नहीं दिया था.
रात को सोते वक्त रीना देवलिंग को मिस कर रही थी.
उसे पण्डित के साथ हुई चुदाई याद आने लगी. वो मन ही मन में सोचने लगी कि पण्डित जी.. आप बड़े वो हैं, कब मेरे साथ क्या क्या करते चले गए..पता ही नहीं चला.. पण्डित जी.. आपका बदन कितना अच्छा है.. अपने बदन की इतनी तारीफ़ मैंने पहली बार सुनी है. आप यहाँ क्यों नहीं हैं.
रीना ने अपनी सलवार का नाड़ा खोला और अपनी चूत को रगड़ने लगी.
‘पण्डित जी.. मुझे क्या हो रहा है’.. वो ये बुदबुदाते हुए सोचने लगी.
चूत से हाथ की उंगली गांड पे ले गई.. और गांड को रगड़ने लगी.
‘ये मुझे कैसा रोग लग गया है.. टांगों के बीच में भी चुभन.. हिप्स के बीच में भी चुभन.. ओह..’
अगले दिन रोज़ की तरह सुबह 5 बजे रीना मन्दिर आई.. इस वक्त मन्दिर में और कोई नहीं हुआ करता था.
पण्डित ने रीना को इशारे से मन्दिर के पीछे आने को कहा.
रीना मन्दिर के पीछे आ गई.. आते ही रीना पण्डित से लिपट गई.
रीना- ओह.. पण्डित जी..
पण्डित- ओह्ह.. रीना..
पण्डित रीना को होंठों को चूमने लगा.. रीना की गांड दबाने लगा.. रीना भी कसके पण्डित के होंठों को चूम रही थी. तभी मन्दिर का घंटा बजा.. और दोनों अलग हो गए.
मन्दिर में कोई पूजा करने आया था.. पण्डित अपनी चूमा-चाटी छोड़ कर मन्दिर में आ गया.
जब मन्दिर फिर खाली हो गया तो पण्डित रीना के पास आया.
पण्डित- रीना.. इस वक्त तो कोई ना कोई आता ही रहेगा.. तुम वही अपने पूजा के समय पर आ जाना.
रीना अपनी पूजा करके चली आई.. उसका पण्डित को छोड़ने का दिल नहीं कर रहा था.
खैर.. वो 12:45 बजे का इन्तजार करने लगी. ठीक 12:45 बजे वो पण्डित के घर पहुँची.. दरवाज़ा खुलते ही वो पण्डित से लिपट गई.
पण्डित ने जल्दी से दरवाज़ा बंद किया और रीना को लेकर ज़मीन पर बिछी चादर पे ले आया.
रीना ने पण्डित को कस के बांहों में ले लिया.. पण्डित के चेहरे पर किस पे किस किये जा रही थी. अब दोनों लेट गए थे और पण्डित रीना के ऊपर था. दोनों एक दूसरे के होंठों को कस कस के चूमने लगे.
पण्डित रीना के होंठों पे अपनी जीभ चलाने लगा.. रीना ने भी मुँह खोल दिया.. अपनी जीभ निकाल कर पण्डित की जीभ को चाटने लगी.
पण्डित ने अपनी पूरी जीभ रीना के मुँह में डाल दी.. रीना पण्डित के दांतों पर जीभ चलाने लगी.
पण्डित- ओह.. रीना.. मेरी रानी.. तेरी जीभ.. तेरा मुँह तो मिल्क शेक जैसा मीठा है.
रीना- पण्डित जी.. आअ.. आपके होंठ बड़े रसीले हैं, आपकी जीभ शरबत है.. आआह्ह..
पण्डित- ओह्हह.. रीना..
पण्डित रीना के गले को चूमने लगा..
आज रीना सफ़ेद साड़ी-ब्लाउज में आई थी.
पण्डित रीना का पल्लू हटा कर उसके स्तनों को दबाने लगा.. रीना ने खुद ही ब्लाउज और ब्रा को निकाल फेंका.
पण्डित उसके मम्मों पर टूट पड़ा.. उसके निप्पलों को कस कस के चूसने लगा.
रीना- अह्हह्ह.. पण्डित जी.. आराम से.. मेरे स्तन आपको इतने अच्छे लगे हैं.. आऐईए..
पण्डित- हाँ.. तेरे स्तनों का जवाब नहीं रानी.. तेरा दूध कितनी मलाई वाला है.. और तेरे गुलाबी निप्पलों.. इन्हें तो मैं खा जाऊंगा.
रीना- आअह्हह्ह.. अह.. उई.. तो खा जाओ ना.. मना कौन करता है..
पण्डित रीना के निप्पलों को दाँतों के बीच में लेकर दबाने लगा.
रीना- आऐई.. इतना मत काटो.. आह्ह.. वरना अपनी इस भैंस का दूध नहीं पी पाओगे.
पण्डित- ऊओ.. मेरी भैंस.. मैं हमेशा तेरा दूदू पीता रहूँगा.
रीना- उई.. त..आआ.. तो..पी..अह्ह.. लो ना.. निकालो ना मेरा दूध.. खाली कर दो मेरे स्तनों को..
पण्डित कुछ देर तक रीना के स्तनों को चूसता, चबाता, दबाता और काटता रहा.
फिर पण्डित नीचे की तरफ़ आ गया.. उसने रीना की साड़ी और पेटीकोट उसके पेट तक चढ़ा दिए.. उसकी टांगें खोल दीं.
पण्डित- रीना.. आज कच्छी पहनने की क्या ज़रूरत थी!
रीना- पण्डित जी.. आगे से नहीं पहनूँगी.
पण्डित ने रीना की कच्छी निकाल दी.
पण्डित- मेरी रानी.. अपनी योनि द्वार का सेवन तो करा दे..
ये कह कर पण्डित रीना की चूत चाटने लगा.. रीना के बदन में करंट सा दौड़ गया. रीना पहली बार चूत चटवा रही थी.
रीना- आआह्हह्ह.. म.. म्म..म.. मेरी योनि का सेवन कर लो पण्डित जी.. तुम्हारे लिए सारे द्वार खुले हैं.. अपनी शुद्ध जीभ से मेरी योनि का भोग लगा लो.. मेरी योनि भी पवित्र हो जाएगी.. आआह्हह्हह..
पण्डित- आअह्ह.. मज़ा आ गया..
रीना- आअह.. हाँ.. हाँन.. ले लो मज़ा.. एक विधवा को तुमने गरम तो कर ही दिया है.. इसकी योनि चखने का मौका मत गंवाओ.. मेरे पण्डित जी.. आआईई..
पण्डित ने रीना को पेट के बल लिटा दिया.. उसकी साड़ी और पेटीकोट उसके हिप्स के ऊपर चढ़ा दिये. अब वो रीना के हिप्स पे किस करने लगा. रीना के हिप्स थोड़े बड़े थे.. लेकिन बहुत मुलायम थे.
पण्डित- रीना.. मैं तो तेरे चूतड़ पे मर जाऊं.
रीना- पण्डित जी.. आह्ह.. मरना ही है तो मेरे चूतड़ों के असली द्वार पर मरो.. आपने जो देवलिंग दिया था, वो मेरे चूतड़ों के द्वार पे आकर ही फंसता था.
पण्डित- तू फिक्र मत कर.. तेरे हर एक द्वार का भोग लगाऊंगा.
यह कह कर पण्डित ने रीना को घोड़ी बनाया.. और उसकी गांड चाटने लगा.
रीना को इसमें बहुत अच्छा लग रहा था.. पण्डित रीना की गांड के छेद को चाटने के साथ साथ उसकी फुद्दी को रगड़ रहा था.
रीना- आअह्हह.. चलो.. पण्डित जी.. अब स्वाहा कर दो.. ऊस्सशह्ह ह्हह्ह..
पण्डित- चल.. अब मेरा प्रसाद लेने के लिए तैयार हो जा.
रीना- आह्हह.. पण्डित जी.. आज मैं प्रसाद पीछे से लूँगी.
पण्डित- चल मेरी रानी.. जैसे तेरी मर्जी.
पण्डित ने धीरे धीरे रीना की गांड में अपना पूरा लंड डाल दिया.
रीना- आआअहह्ह..
पण्डित- आअह.. रीना प्यारी.. बस कुछ सब्र कर ले.. आह्ह..
रीना- आआह्हह्ह.. पण्डित जी.. मेरे पीछे.. आऐई.. के द्वार में.. आपका स्वागत है.. ऊई..
पण्डित- आअह्ह.. मेरे लंड को तेरा पिछला द्वार बहुत अच्छा लगा है.. कितना टाईट और चिकना है तेरा पीछे का द्वार..
रीना- आअह्हह.. पण्डित जी.. अपने स्कूटर की स्पीड बढ़ा दो.. रेस दो ना.. आअह..
पण्डित ने गांड में धक्कों की स्पीड बढ़ा दी.
फिर रीना की गांड से लंड निकाल कर उसकी फुद्दी में पेल दिया.
रीना- आई माँअ.. कोई द्वार मत छोड़ना.. आआह.. आपकी बांसुरी मेरे बीच के.. आह्ह.. द्वार में क्या धुन बजा रही है..
पण्डित- मेरी रीना.. मेरी रानी.. तेरे छेदों में मैं ही बांसुरी बजाऊंगा.
रीना- आअह्हह्हह.. पण्डित जी.. मुझे योनि में बहुत.. आअह.. खुजली हो रही है.. अब अपना चाकू मेरी योनि पे चला दो.. मिटा दो मेरी खुजली.. मिटाओ ना..
पण्डित ने रीना को लिटा दिया.. और उसके ऊपर आकर अपना लंड उसकी चूत में डाल दिया. साथ साथ उसने अपनी एक उंगली रीना की गांड में डाल दी.
रीना- आअह्हह्हह.. पण्डित जी.. प्यार करो इस विधवा लड़की को.. अपनी बांसुरी से तेज़ तेज़ धुनें निकालो.. मिटा दो मेरी खुजली.. आहहह्हह्ह.. अ.आ..ए.ए..
पण्डित- आआह्हह्ह.. मेरी रानी..
रीना- ऊऊह्ह्ह.. मेरे राज्जाअ.. और तेज़.. औऊर्रर तेज.. आआह्हह.. अन्दर.. और अन्दर आज्जजाआ.. आअह्ह.. प्पप.. स.स..स..
पण्डित- आह्हह.. ओह्हह.. रीना.. प्यारी.. मैं छूटने वाला हूँ.
रीना- आअहह्ह.. मैं भी.. आआ.. ई.. ऊऊऊ.. अन्दर ही.. गिरा.. द.. दो अपना.. प्रसाद..
पण्डित- आह्हह..
रीना- आआह्हह्हह.. अ..अह.. अह.. अह.. अह..
स्वाहा.. चुद गई चुत और हो गया कल्याण.
साथियो, आपने हिंदी अन्तर्वासना कहानी का मजा ले लिया, आप अपने कमेंट्स कर सकते हैं.
अंजलि का महीना हुए चार दिन हो चुके Hindi Sex Stories थे और मैं उसको चोदने की योजना बना रहा था। शाम के समय मैं अपने कमरे में चाय पी रहा था तो मैंने देखा कि अंजलि अपने छज्जे पर खड़ी होकर सड़क का नज़ारा देख रही है, मुझसे नज़र मिली तो हल्के से मुस्कुरा दी। मुझसे चुदवाने के बाद आज पहली बार सामना हुआ था। मैंने अपनी जेब से मोबाइल निकला और अंजलि का नम्बर डायल कर दिया, घंटी बजने पर उसने अपना मोबाइल देखा, फ़िर मुझे देखा तो मुस्कुरा कर फ़ोन काट दिया और मेरे पास आकर खड़ी हो गई।
मैंने हाल चाल पूछा तो बोली- ठीक है !
मैंने पूछा- आज रात को आओगी?
तो शरमाकर बोली- नहीं ! मैंने कहा- मैं तुम्हारा इंतज़ार करूंगा।
रात को लगभग १२ बजे मेरे मोबाइल पर मिस्ड कॉल आई, देखा तो अंजलि की थी। मैंने कॉल-बैक किया तो बोली- क्या कर रहे हैं?
मैंने कहा- तुम्हारा इंतज़ार !
तो बोली- अभी आ रही हूँ।
५ मिनट बाद अंजलि मेरे कमरे में आई और आते ही मुझसे लिपट गई। मैंने उसके बदन पर हाथ फेरा तो पाया कि उसने सिर्फ़ गाउन पहना हुआ था। गाउन के अन्दर ब्रा और पैंटी नहीं पहनी थी। मैं समझ गया बंदी चुदवाने की पूरी तैयारी कर के आई है।
दीवान के पास आकर उसका एक पैर मैंने दीवान पर रख दिया और उसका गाउन कमर तक उठा दिया। अपना लोअर मैंने उतार दिया और लंड उसकी चूत पर रखना चाहा तो मेरी खुशी का ठिकाना नहीं रहा, आज उसकी चूत पर एक भी बाल नहीं था, अपनी झांटे साफ़ करके उसने चूत की सुन्दरता को चार चाँद लगा दिए थे। मैंने चोदने का इरादा फिलहाल छोड़ा और उसकी चूत चाटने लगा।
उसने भी पोजीशन बदली और मेरा लंड अपने मुंह में लेकर चूसने लगी। १० मिनट तक मुख-मैथुन का मज़ा लेने के बाद मैंने अपने लंड पर कंडोम चढाया और उसकी चूत में डाल दिया। जमकर चोदने के बाद जब मैं उसकी चूत में स्खलित हुआ तो मैं ख़ुद को जन्नत में महसूस कर कर रहा था। अब हमारी चुदाई की गाड़ी पटरी पर हौले हौले चल रही थी, दूसरे तीसरे दिन वह मुझसे चुदवा लेती थी, इतना मेरे लिए भी काफ़ी था और उसके लिए भी।
अब हमारी कहानी में एक तीसरा पात्र आ गया।
मेरी पत्नी की एक ममेरी बहन श्वेता इसी शहर में रहती थी। एक दिन लगभग ११ बजे मैं ऑफिस में था कि मेरी पत्नी का फ़ोन आया कि वह श्वेता के घर जाना चाहती है !
मैंने कहा- चली जाओ !
तो बोली- मैंने खाना बना दिया है और चाभी रागिनी भाभी को दे दी है, शाम को ४-५ बजे तक आ जाऊंगी।
मैंने कहा- ठीक है।
दोपहर को १ बजे मैं लंच करने घर आया, घंटी बजाई तो रागिनी भाभी बोली- चाभी लेकर आ रही हूँ। उन्होंने मुझे चाभी दी, मैंने ताला खोला और वो भी अन्दर आ गईं, उनके घर में भी कोई नहीं था, डॉक्टर साहब क्लीनिक और लड़कियाँ कॉलेज गई थीं।
अन्दर आकर बोली- रेखा दाल सब्जी बनाकर गई है और मुझसे कह रही थी कि रोटी मैं सेंक दूँ।
रागिनी का गदराया हुआ बदन और एकांत मेरे लंड को खड़ा कर चुके थे और मैंने उनको चोदने की ठान ली थी। मैंने कहा- भाभी आप कुछ देर बैठिये, मैं नहा लूँ फ़िर खाना खाऊँगा।
भाभी वहीं कुर्सी पर बैठ गईं। मैंने उनको गरम करने के लिए जानबूझकर वहीं अपनी शर्ट उतारी और फ़िर बनियान भी उतार दी, भाभी शर्म के मारे इधर उधर ना देखें इसलिए उनसे कुछ ना कुछ बात करता रहा। मैंने कहा- दोपहर में नहा लेने से शरीर में ताजगी आ जाती है और मैंने अपनी पैंट भी उतार दी। अंडरवियर में से मेरा तन्नाया हुआ लंड साफ़ नज़र आ रहा था। मैंने अपना तौलिया कमर पर लपेटा और अंडरवियर उतारते उतारते बोला- भाभी जी अगर आप बुरा ना मानें तो एक बात कहूं?
बोलीं- कहिये।
मैंने कहा- ऐसा लगता है जैसे भगवान् जोड़ियाँ बनाते समय गलती कर गया है, मैं आप जैसी पत्नी पाने का हकदार था और रेखा को डॉक्टर साहब की पत्नी होना चाहिए था। अगर ऐसी जोड़ियाँ होतीं तो मेरी ज़िन्दगी जन्नत से कम न होती।
भाभी उठीं और बोलीं- काश ऐसा होता तो मैं हर पल तुम्हारी बाहों में ही गुजारती।
इतना सुनते ही मैंने उनका हाथ पकड़ कर चूमा और अपनी आंखों से इस तरह लगाया कि मैं धन्य हो गया। मैं एक कदम उनकी ओर बढ़ा ओर अपनी बाहें फैलाकर उन्हें अपने करीब आने का इशारा किया, वो मेरे सीने लग गईं, मैंने अपना एक हाथ उनकी कमर पर और दूसरा टांगों के पास ले जा कर उनको अपनी गोद में उठा लिया, मेरे कसरती बदन को निहारते हुए बोलीं- उतार दो दीपक ! मैं बहुत भारी हूँ।
मैंने कहा- भाभी मेरे प्यार के सामने आपका भार कुछ भी नहीं।
मैं उनको रेखा के बेडरूम में ले आया और पलंग पर लिटाकर उनसे लिपट गया। वो मेरे से लिपटी हुई छुई मुई हुई जा रहीं थीं। एक एक करके उनके सारे कपड़े मैंने उतार दिए और उनके होठों पर अपने होंठ रखकर एक हाथ से उनके मम्मे और दूसरे से उनकी चूत सहलाने लगा। थोड़ी देर में जब उनकी चूत गीली हो गई तो मैं उठा और अलमारी से कंडोम निकालकर अपने लंड पर चढ़ाने लगा तो भाभी बोलीं- दीपक जी इसकी कोई जरूरत नहीं है, मैं कई साल पहले नसबंदी करा चुकी हूँ।
मैं वापस पलंग पर आया, उनकी टाँगे फैला कर अपने लंड का सुपाड़ा उनकी चूत के मुंह पर रखा और पूरा लंड उनकी चूत के अन्दर कर दिया।
भाभी बोलीं- दीपक जी एक बात पूछूं?
मैंने कहा- पूछिए !
तो बोलीं- तीन साल बाद आपका लंड किसी की चूत में जा रहा है तो कैसा लग रहा है।
मैंने कहा- आपको ये कैसे पता है?
तो बोलीं- रेखा ने मुझे बताया था कि मेरी इच्छा नहीं होती।
इस बातचीत के साथ साथ मेरा लंड अपना काम कर रहा था। उस दिन १ बजे से ४ बजे तक भाभी को दो बार चोदा, मैंने पूछा- भाभी सच बताना तुम्हारा देवर चोदने में कैसा है?
तो बोलीं- टचवुड ! बहुत अच्छा।
मैंने कहा- अच्छा भाभी एक बात और बताओ, कभी गांड मराई है?
बोली- नहीं ! कभी नहीं ! शुरू शुरू में एक दो बार डॉक्टर साहब ने मारनी चाही थी लेकिन उनका लंड गांड में घुसा ही नहीं !
मैंने कहा- भाभी मैं तुम्हारी गांड मारूंगा, मराओगी ?
बोलीं- हाँ मेरे राजा ! जरूर मराउंगी।
फ़िर भाभी ने रोटियां सेंकी, हम दोनों ने खाना खाया और भाभी अपने घर चली गईं।
बाकी कहानी अगली बार लिखूंगा, इंतज़ार करिए !!! Hindi Sex Stories
The user agrees to follow our Terms and Conditions and gives us feedback about our website and our services. These ads in TOTTAA were put there by the advertiser on his own and are solely their responsibility. Publishing these kinds of ads doesn’t have to be checked out by ourselves first.
We are not responsible for the ethics, morality, protection of intellectual property rights, or possible violations of public or moral values in the profiles created by the advertisers. TOTTAA lets you publish free online ads and find your way around the websites. It’s not up to us to act as a dealer between the customer and the advertiser.