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रामजीलाल को गिड़गिड़ाता हुआ देखकर अनुपमा Sex Stories बोली- आपका काम माफ़ करने के लायक नहीं है। ज़रा मैं भी तो देखूँ कि तुम्हारे लंड में कितना दम है।
रामजीलाल यह सुनकर बुरी तरह चौंककर बोले- आप यह क्या कह रही हैं?
अनुपमा- जो सुन रहे हो, वही कह रही हूँ। ज़ल्दी से अपनी अण्डरवियार खोलो और अपना लंड दिखाओ मुझे। मैं भी तो देखूँ कि इतना कितना लम्बा लंड है तुम्हारा कि अमर उसे देखकर डर गया।
रामजीलाल किसी तरह सँभले, पर वह यह समझ गए कि अनुपमा की चूत में खुज़ली मच गई है वरना वह ऐसा नहीं कहती। अच्छा मौक़ा है इसे चोदने का वर्ना आज नहीं तो फिर कभी यह मेरे हाथ नहीं आएगी।
रामजीलाल का लंड अनुपमा को चोदने के ख्याल से ही फिर खड़ा हो गया। अपनी अण्डरवियार खोली तो लंड फिर से उफान पर था। अनुपमा लंबे और मोटे लंड को देखकर खुश हो गई। उसे हाथों में लेकर बोली- वाह समधी जी। आपका लंड तो अच्छा-ख़ासा लम्बा और मोटा है। अब आपकी असली मेज़बानी का समय है।
रामजीलाल फिर से रंग में आ गए और बोले- कसर तो मैं भी कुछ नहीं रखूँगा। आपको वह मज़ा दूँगा कि आप अपने पति को भूल जाएँगीं।
रामजीलाल ने अनुपमा को अपनी बाँहों में भींच लिया। अनुपमा भी रामजीलाल से इस तरह चिपकी जैसे बरसों से उनके चिपकने का इन्तज़ार था। रामजीलाल ने अनुपमा के होंठों को अपने होंठों से लगा लिया और उस लॉलीपॉप की तरह चूसने लगे।
अनुपमा भी पूरी तरह उनका साथ दे रही थी। दोनों एक-दूसरे की जीभ से खेल रहे थे। बहुत देर तक दोनों एक-दूसरे को चूसते रहे। रामजीलाल ने अनुपमा का साड़ी खोल दी और उनके मोटे और बड़े उरोज़ों को मसलकर दबाने लगे।
अनुपमा की आह निकलने लगी। रामजीलाल ने फटाफट ब्लाउज़ खोला, उसके साथ ही लहंगे का नाड़ा भी खोल दिया। अनुपमा अब उनके सामने सिर्फ ब्रा और पैन्टी में खड़ी थी।
रामजीलाल- हाय मेरी जान! तुम्हारा बदन तो क़यामत ढा रहा है। कहाँ थी तुम इतने दिनों तक? तुम्हें पाकर तो मुझे नशा सा छा रहा है।
अनुपमा- अरे मेरे सनम। मुझे क्या मालूम था तुम मेरे लिए इतने बेचैन हो? वर्ना कब की अपनी चूत तुम्हें खिला देती। आज मुझे अपने लौड़े का स्वाद चखा दो जानेमन। तुम्हारे समधी का तो अब ठीक से खड़ा भी नहीं होता।
रामजीलाल- अरी छिनाल तो मुझे तो याद किया होता। तुम्हारी चूत को ऐसा खाऊँगा कि सातों जन्म तक मेरा ही लौड़ा याद आएगा।
अनुपमा नीचे झुकी और रामजीलाल का लौड़ा अपने मुँह में भरकर चूसने लगी। रामजीलाल पर मस्त नशा छाने लगा। कहाँ तो वो चोदने को तरस रहे थे और आज वो मौक़ा ख़ुद ही चलकर आ गया। अनुपमा तब तक लंड चूसती रही जबतक कि सारा वीर्य उनके मुँह में नहीं चला गया। पूरा वीर्य और झाँटों के बाल चाटने के बाद अनुपमा भी एकदम गरम हो गई थी।
अनुपमा- वाह रे मादरचोद! तेरा पानी तो अमृत जैसा है। मैं तो पीकर धन्य हो गई।
रामजीलाल- तेरे जैसी काम की देवी ने इसे अमृत बना दिया है रंडी। चल नीचे लेट जा, अब मैं तेरी चूत को चाट-चाटकर तेरा पानी निकाल दूँगा।
यह कहकर रामजीलाल ने अनुपमा को नीचे लिटाया और पैन्टी खोल दी। अनुपमा की मस्त चूत देखकर उनके मुँह में पानी आ गया। आज भी उसकी चूत गुलाबी थी और हल्के से बाल छाए हुए थे।
रामजीलाल ने देर नहीं की और झट अनुपमा की चूत में मुँह घुसेड़ दिया। अपनी जीभ से चूत के चारों ओर चाट-चाटकर गीला कर दिया फिर चूत के छेद में जीभ डाल-डालकर अनुपमा को ज़न्नत का अहसास देने लगे। अनुपमा भी चूत पर प्यारा सा स्पर्श पाकर सिहरने लगी। दो मिनट में ही रामजीलाल ने चूस-चूसकर चूत का पानी निकाल दिया और सारा पानी चाट गए।
अनुपमा – मेरे सैंया, अब देर न करो। जल्दी से अपना लौ़ड़ा मेरी चूत में डाल दो।
रामजीलाल – हाँ … हाँ क्यों नहीं मेरी रानी। चल जल्दी से मेरे लौड़े को चूस कर गीला कर दे। पर मैं तेरी गाँड की बहन चोदूंगा फिर उसके बाद तेरी चूत की माँ चोदूँगा।
अनुपमा- ओय होय हरामी। तुझे भी चूत की सौतन गाँड ज़्यादा पसन्द आई है। तुम सारे मर्द साले हरामी होते हैं। सौतन को पहले चोदते हैं, बाद में अपनी घरवाली को।
रामजीलाल- चल गंडमरी, अब देर मत कर। मेरा लौड़ा चूसकर गीला कर दे, वर्ना तेरी गाँड की ऐसी बहन चुदेगी कि तू खड़ी भी नहीं हो पाएगी।
अनुपमा ने फिर से रामजीलाल के लौड़े को मुँह में भर लिया और चूस-चूसकर अच्छा-ख़ासा गीला कर दिया। रामजीलाल ने अनुपमा को कुतिया बनाया और लंड का एक भरपूर धक्का गाँड की छेद पर दिया। अनुपमा चीख पड़ी।
अनुपमा- अरे हरामी मादरचोद। गाँड की माँ चोद दी तूने। भोसड़ी के धीरे-धीरे कर।
रामजीलाल धीरे-धीरे लंड को अन्दर-बाहर करने लगे। थोड़ी देर बाद उन्होंने अपनी गति तेज़ कर दी और धकाधक धक्के मारने लगे। अनुपमा को अब मज़ा आने लगा और वह और तेज़ चोदो, और तेज़ चोदो कहने लगी। पाँच मिनट तक रामजीलाल ने अनुपमा की गाँड मारी और फिर कुछ तेज़ धक्के मार-मारकर सारा वीर्य अनुपमा की गाँड में डाल दिया। अनुपमा की गाँड गरम वीर्य से भर गई। दोनों कुछ देर के लिए ज़मीन पर लेट गए।
रामजीलाल- क्यों मेरी जान। मज़ा आया कि नहीं चुदाई में?
अनुपमा- इससे पहले इतना मज़ा कभी नहीं आया मेरे सनम। आज तो तुमने मेरी गाँड फाड़कर रख दी है।
रामजीलाल अनुपमा के ऊपर आ गए। दोनों के गरम बदन एक-दूसरे से टकराने लगे। रामजीलाल ने चुम्बनों की बौछार कर दी। पूरे चेहरे पर अपनी जीभ फिरा-फिराकर अनुपमा के मुँह को गीला कर दिया और अपनी जीभ अनुपमा के मुँह में डाल दी। अनुपमा मज़े ले-लेकर उसे चूसने लगी।
अनुपमा ने लंड को चूसकर फिर खड़ा कर दिया। रामजीलाल ने लंड के सुपाड़े को चूत पर रखा और चोदने लगे। अनुपमा ने दोनों हाथों से रामजीलाल को जकड़ लिया और टाँगों में फाँस लिया। दोनों इस समय एक जिस्म-एक जान नज़र आ रहे थे। आनंदीनाल ने बहुत देर तक अनुपमा को चोदा और सारा माल उसकी चूत में डाल दिया।
रामजीलाल- मेरी गंडमरी रानी। तुझे चोदकर तो वो मज़ा आया है जो मेरी पत्नी को चोदने के बाद भी नहीं आया था। मेरा बस चले तो तुझे यहीं मेरे साथ रख लूँ।
अनुपमा- तूने भी मज़े, बहुत मज़े से मुझे चोदा है। मैं तो बस तेरी होकर रह गई हूँ। जाने की इच्छा तो नहीं हो रही है, पर मुझे जाना होगा। अमर इन्तज़ार कर रहा होगा। पता नहीं वो सोया भी कि नहीं। और रात भी बहुत हो गई है।
रामजीलाल- ठीक है। कल मिलते हैं। पर अमर को समझा देना कि वह इस सम्बन्ध में किसी से कुछ कहे नहीं। बहुत भोला और सीधा लड़का है।
अनुपमा- तुम चिन्ता मत करो। मैं उसे समझा दूँगी। वह किसी से नहीं कहेगा।
अनुपमा ने अपने कपड़े पहने और अपने कमरे में चली गई। रामजीलाल आज ख़ुद को बहुत खुशकिस्मत समझ रहे थे क्योंकि आज वे अपने ख़्वाबों को हक़ीकत में बदल चुके थे। उन्हें बहुत अच्छी नींद लगी थी।
इधर अनुपमा जब अपने कमरे में पहुँची तो अमर जाग रहा था। अमर ने गुस्सा ज़ाहिर करते हुए कहा कि तुम इतनी देर से वहाँ क्या कर रही थी? मैं कब से इन्तज़ार कर रहा हूँ?
अनुपमा ने उसे समझाते हुए कहा कि बेटा उन्हें समझाना बहुत ज़रूरी था। अब वे समझ गए हैं और आइन्दा ऐसी हरक़त नहीं करेंगे। तुम भी यह बात किसी से कहना नहीं और उनसे ज़्यादा बात मत करना। चलो अब सो जाओ।
अनुपमा ख़ूब चुदा-चुदाकर थकी हुई थी इसलिए उसे भी बिस्तर पर पड़ते ही नींद आ गई, लेकिन अमर को कुछ-न-कुछ गड़बड़ लग रही थी। आख़िरकार वह भी सो गया।
अगले दिन अनुपमा और रामजीलाल डाईनिंग-टेबल पर खाना खाते-खाते बहुत हँसी-मज़ाक कर रहे थे। अमर यह देखकर हैरान था क्योंकि उसे लगा था कि आज मम्मी उनसे बात नहीं करेगी, लेकिन यहाँ तो उल्टा और हँसी-मज़ाक कर रही है।
अमर ने सारा दिन किसी तरह निकाला। रात को वह सोने का नाटक करने लगा। अनुपमा को लगा कि वह सो गया है तो वह उठी और आनंदीनाल के कमरे में पहुँच गई।
अमर भी अनुपमा के जाते ही पीछे-पीछे चलने लगा।
अनुपमा ने जाते ही रामजीलाल को बाँहों में भर लिया और जी भर कर उनके होंठों का रस पिया। अमर दरवाज़े के की-होल से यह देखकर बुरी तरह चौंक गया।
इधर अनुपमा इस बात से बेख़बर रामजीलाल से चिपकी हुई थी। अनुपमा ने पहले रामजीलाल को नंगा किया और फिर ख़ुद नंगी हो गई। आज पहली बार अमर अपनी मम्मी को नंगी देख रहा था। उसकी मम्मी उछल-उछल कर रामजीलाल से चुदवा रही थी।
उसे अपनी मम्मी से नफ़रत होने लगी। वह सोच भी नहीं सकता था कि सबको अपने गुस्से से डराकर रखने वाली इतना नीचे गिर सकती है।
रामजीलाल और अनुपमा की चुदाई का खेल देखकर उसके रोंगटे खड़े हो गए और उसके हाथ-पाँव काँपने लगे। वह कमरे के बाहर खड़ा हुआ काँप रहा था कि सामने से उसकी भाभी रीमा आ खड़ी हुई। रीमा उसे देखकर हैरान हुई कि वह यहाँ क्यों खड़ा है और इतना काँप क्यों रहा है?
अमर ने सारी बात बता दी। रीमा भी अनुपमा और रामजीलाल की चुदाई देखकर दंग रह गई। उन दोनों को चुदाई करते देख पहले तो रीमा को बहुत गुस्सा आया पर उसे भी चुदाई की प्यास सताने लगी।
रीमा की चूत की तड़प बढ़ गई। वह भी चुदवाना चाहती थी। उसे लगा कि अमर छोटा ही सही, पर उसे चोदकर अभी उसकी चूत की तड़प तो दूर कर ही सकता है। उसने कुछ सोचा और अमर को बताया। अमर पहले तो घबराया पर रीमा की वज़ह से हिम्मत आ गई।
रीमा और अमर दोनों दरवाज़ा खोलकर अन्दर आ गए, जहाँ अनुपमा और रामजीलाल चुदाई में मग्न हो रहे थे। रीमा और अमर को देखकर दोनों हक्के-बक्के रह गए। उनके मुँह से आवाज़ भी नहीं निकली।
अनुपमा रामजीलाल से अलग हो गई। अनुपमा अपने बेटे के सामने नंगी थी तो रामजीलाल आज अपनी बेटी के सामने नंगे खड़े थे। दोनों को अपनी इस स्थिति पर बड़ी ग्लानि हो रही थी।
रीमा ने चुप्पी तोड़ते हुए कहा – तो रात में यह काम होता है। पर आप बिल्कुल डरिए मत। मैं और अमर इसमें कोई रुकावट नहीं बनेंगे।
रामजीलाल बोले- हमें माफ कर दो बेटी। इस उम्र में हमें यह नहीं करना चाहिए था लेकिन हम दोनों इतने अकेले थे कि अपने आपको रोक नहीं सके।
रीमा- कोई बात नहीं पापा। हमें आपसे कोई शिकायत नहीं और ना ही मेरी सास से है। आप दोनों को पूरा हक़ है अपने अरमानों को पूरा करने का।
अनुपमा- क्या तुम सच कह रही हो रीमा? तुम्हें हमसे कोई शिकायत नहीं है?
रीमा- नहीं मम्मी, हमें आपसे कोई शिकायत नहीं है। लेकिन हमारी एक शर्त है, उसके बाद ही हम आपको माफ़ करेंगे।
अनुपमा- हम तुम्हार हर शर्त मानने को तैयार हैं रीमा!
रीमा- आप दोनों फिर एक-दूसरे की चुदाई करो। मैं और अमर आपका साथ देंगे।
रामजीलाल- तुम कहना क्या चाहती हो रीमा? तुम दोनों भला हमारा कैसे साथ दोगी?
रीमा- पापा, आप दोनों चुदाई करोगे तो हम दोनों क्या खाली बैठेंगे। मैं भी अपने देवर अमर के साथ जी भरकर चुदवाऊँगी क्योंकि आप दोनों को देख कर मेरी चूत की तड़प जाग उठी है।
रामजीलाल और अनुपमा को रीमा की बात माननी पड़ी क्योंकि इसके अलावा उनके पास कोई चारा नहीं था।
अनुपमा और रामजीलाल तो पहले ही नंगे थे अब रीमा और अमर भी कपड़े उतारकर नंगे हो गए। चुदाई का खेल फिर चालू हो गया। रामजीलाल के लौड़े को चूसकर अनुपमा ने फिर खड़ा कर दिया।
रामजीलाल नीचे लेट गए और अनुपमा उनके ऊपर बैठकर उनके लौड़े को अपनी चूत पर सेट करके चुदवाने लगी।
इधर रीमा ने भी अमर के लौड़े को मुँह में भर लिया। अमर को बहुत मज़ा आने लगा। उसे लगा कि रामजीलाल ने ठीक ही कहा था। लौड़ा चूसने में भले ही आनंद न आता हो, लेकिन चुसवाने में बहुत मज़ा आता है।
अमर का लंड 5 इंच का था। अभी रीमा ने ठीक से लंड को अन्दर-बाहर करना शुरु ही किया था कि अमर का पानी निकल गया। रीमा ने सारा पानी चाट लिया।
रीमा ने अमर को समझाते हुए कहा कि कोई बात नहीं, पहली बार ऐसा होता है, लेकिन अब तुम मेरी चूत को चाट-चाटकर पानी निकालो और उसे पी जाओ। मेरी चूत में बहुत खुजली मची हुई है। अमर समझ गया और फिर उसने रीमा को लिटाया और चूत में जीभ डालकर चूसने लगा। रीमा तड़प उठी। बहुत दिनों के बाद वह नंगी होकर किसी से चूत चुसवा रही थी।
उधर अनुपमा जब ऊपर-नीचे होते हुए थक गई तो रामजीलाल ने अनुपमा को नीचे लिटाया और चूत में धकाधक लंड पेलने लगे। रीमा और अमर यह दृश्य देखकर और उत्तेजित हो गए। कुछ देर बाद रामजीलाल ने ज़ोर-ज़ोर के धक्के लगाते हुए सारा माल अनुपमा की चूत में डाल दिया।
अमर ने भी चूस-चूसकर रीमा का पानी निकाला और अच्छे बच्चे की तरह उसे चाट-चाटकर पी गया। अमर का लंड फिर से खड़ा होने लगा था। रीमा ने अमर के लंड को अपने मुँह में भर लिया और चूसने लगी। अमर का लंड फिर तन गया। रीमा को लिटाकर अमर ने चूत में लंड डाला और धक्के देने लगा।
उसने पहली बार किसी चूत में लंड डाला था। उसे आज बहुत कुछ सीखने और करने को मिला। वह अपनी सुन्दर और सेक्सी भाभी को चोद रहा था जिसके लिए उसके मन में बहुत सम्मान और प्यार था। साथ ही उसकी मम्मी एक ओर चुदवाकर लेटी पड़ी हुई थी और उनका खेल देख रही थी।
कुछ देर में ही अमर ने सारा माल रीमा की चूत में डाल दिया। इस तरह रात-भर चुदाई चली। अमर ने रीमा की चूत के साथ ही रीमा की गांड में भी लंड पेला जिसमें उसे बहुत मज़ा आया। उसके सामने ही उसकी मम्मी रामजीलाल से चुदवा रही थी। अनुपमा और रामजीलाल ने जिस तरह चुदाई की, उसी अन्दाज़ में अमर ने रीमा की चुदाई की।
पूरी रात सभी ने चुदाई का भरपूर आनन्द लिया।
दोस्तो, आपको यह कहानी कैसी लगी। कृपया मेल करके ज़रूर बताएँ। Sex Stories
तीन महीने से भी ज्यादा से Antarvasna अन्तर्वासना की कहानियों की नियमित पाठक हूँ मैं! अब जाकर मुझमे भी एक जोश आया है कि अपनी कहानी आप सभी के साथ बाँट सकूँ!
यह कहानी मेरे पहले सेक्स की है जब मैं ग्यारहवीं कक्षा में थी! मेरे स्कूल में को-एजुकेशन थी यानि की लड़के और लड़कियां साथ में पढ़ते थे! घर से स्कूल लगभग दो किलोमीटर दूर था, कभी पापा स्कूल छोड़ आया करते थे कभी मैं खुद पैदल में चली जाया करती थी!
ओह्ह्ह्ह सॉरी आप बोर हो रहे होंगे, सो मुद्दे पे आती हूँ!
एक दिन मैं साइकिल से स्कूल जा रही थी। उस दिन सुबह से हल्की हल्की बारिश हो रही थी। एक मन था कि स्कूल न जाऊँ पर फिर भी मैं चली गई! रास्ते में कीचड़ था। तभी एक रिक्शे वाले ने जानबूझकर मेरी साइकिल में साइड मार दी, जिससे मैं नीचे गिर पड़ी और मेरे सारे कपड़े कीचड़ से गंदे हो गए! तभी विकास ने उस रिक्शे वाले को भाग कर पकड़ लिया!
विकास मेरी क्लास में था और मेरी अच्छी दोस्ती थी उससे! पर मैंने उस तरफ ध्यान नहीं दिया क्योंकि मेरे सारे कपड़े गंदे हो चुके थे और कोहनी भी थोड़ी छिल गई थी। मेरी आँखों से आंसू टपक पड़े! मुझे अपने आप पर बड़ी कोफ़्त हुई कि इससे तो स्कूल ना में आती तो अच्छा होता!
तब तक विकास रिक्शे वाले को मरता हुआ मेरे पास ले आया। वो लगातार उस रिक्शे वाले को मार रहा था और गन्दी गन्दी गालियां दे रहा था! विकास का घर सामने वाली गली में में था इसलिए वो और रोब झाड़ रहा था!
विकास ने रिक्शे वाले के कॉलर को झटका दिया और बोला- भोसड़ी के! तुझे इतनी बड़ी साइकिल नहीं दिखी, साले गांडू!!!!!
रिक्शा वाला हाथ जोड़ कर बोला- भाईसाब! गलती हो गई माफ़ कर दो!
तब तक काफी भीड़ इकठ्ठा हो चुकी थी।
विकास बोला- साले, मुझसे क्या माफ़ी मांगता है मादरचोद … इन से माफ़ी मांग!
विकास का इशारा मेरी तरफ था.
मुझे गुस्सा तो बहुत आ रही थी पर भीड़ के सामने अच्छा भी नहीं लग रहा था!
तब मैंने विकास को बोला कि रिक्शे वाले को जाने दे!
पर विकास ने दो और थप्पड़ जड़कर ही रिक्शे वाले को जाने दिया!
और विकास मेरे पास आकर बोला- अरे रश्मि, तुम्हारे तो सारे कपड़े गंदे हो गए! अब स्कूल कैसे जाओगी??
“नहीं! अब स्कूल नहीं जाउंगी, वापस घर जाऊँगी!” मैंने जबाब दिया!
इन कपड़ो में वापस घर? नहीं नहीं! चलो, मेरे घर चलो वहां आराम से कपडे साफ़ कर लेना! विकास ने मेरी साइकिल को उठाते हुए कहा!
मैंने कुछ सोच कर कहा- चलो, यही ठीक रहेगा! पर तुम भी तो स्कूल के लिए लेट हो जाओगे?
“अरे! आज स्कूल में क्या घंटा करेंगे जाकर? बारिश में तो मैडम भी नहीं आती पढ़ाने!” वो हँसता हुआ बोला!
और मेरे साथ चल पड़ा मेरी साइकिल लेकर पैदल पैदल!
उसका घर सामने ही था! अपने घर के सामने साइकिल स्टैंड पर लगा कर विकास घर का ताला खोलने लगा!
“विकास, क्या घर पर कोई नहीं है तुम्हारे?” मैंने पूछा.
विकास- नहीं!
“क्यों? अंकल आंटी कहाँ गए हैं?” मैंने फिर सवाल किया!
विकास- अरे मम्मी, पापा तो ऑफिस चले जाते हैं ना! और नेहा दीदी अपने कॉलेज गई हैं!
“ओके!” मैं हल्के से सब बात समझने के अंदाज़ में बोली!
विकास की मम्मी, पापा सरकारी बैंक के कर्मचारी थे! और नेहा उसकी बड़ी बहन थी जो कॉलेज में थी! उस समय घर में मेरे और विकास के अलावा कोई नहीं था! मुझे इसमें कोई परेशानी नहीं थी क्योंकि विकास मेरा अच्छा दोस्त था और मेरी में उम्र का था।
विकास सीधे बाथरूम में गया और नल खोल के देखा, नल में पानी नहीं था!
“ओह शिट्! आज भी पानी नहीं आ रहा.” विकास झुंझलाते हुए बोला- रश्मि एक काम करो, मैं हैण्ड पम्प चलाता हूँ और तुम हैण्ड पम्प के नीचे बैठ कर नहा लो!
मेरा मूड और ख़राब हो गया, पर मरती क्या ना करती! अनमने भाव से बोली- ठीक है! चलो चलाओ हैण्ड पम्प!
और मैं हैण्ड पम्प के नीचे बैठ कर नहाने लगी, मैं सूट सलवार में थी और ऐसे ही नीचे बैठ कर नहाने लगी!
विकास नल चला रहा था अब मैं मसल मसल कर कीचड़ साफ़ कर रही थी। विकास लगातार मुझे घूर रहा था, उसकी आँखों में एक चमक आ गई थी और मैं जानती थी कि वो क्या सोच रहा है! उसकी पैन्ट की चैन वाला भाग बढ़ता जा रहा था और मुझे यह देख कर अच्छा लग रहा था! मैं हलके हलके मुस्कुरा रही थी!
“रश्मि! अरे कमीज़ उतार कर आराम से साफ़ कर लो यार! कीचड़ अन्दर तक लगा है!” अचानक वो बोला!
“तुम पागल हो क्या? भला तुम्हारे सामने नंगी होकर नहाउंगी क्या?” मैं शरमाते हुए बोली!
“अरे तो क्या हुआ? मैं आँखे बंद कर लूँगा.” वो हंसते हुए बोला!
मेरे मन में शरारत समा चुकी थी। आखिर मैं जवानी में कदम रख रही थी, दिल का कीड़ा कुलबुलाने लगा और मन में मन मैं विकास को पसंद भी करती थी। पर आज तक प्यार-व्यार वाली कोई बात नहीं थी! मैंने कुछ करने की मन में मन में ठान ली और कुछ देर सोच कर बोली- अच्छा ठीक है! पर वादा करो कि आँखे बंद रखोगे!
“ठीक है मेरी माँ! अब ज्यादा नाटक ना करो! दिक्कत तुम्हें है, मुझे नहीं!” विकास किलसता हुआ बोला!
“ओके … चलो आँखे बंद करो!” मैं अपना शर्ट उतारते हुए बोली और अच्छे से नहाने लगी.
मुझे शर्म आ रही थी पर अब मैं कुछ और मूड में थी! विकास मुझे देखकर आश्चर्य चकित हो रहा था! उसकी आँखे बंद होने की बजाये और अधिक चौड़ी हो गई थी! वो लगातार नल चला रहा था! वैसे इस सबका एक और तरीका यह भी था कि मैं बाल्टी भर कर बाथरूम में भी नहा सकती थी, पर मैं कुछ और सोचे बैठी थी!
अचानक विकास मेरे पास आ गया, नल चलाना उसने छोड़ दिया और मेरा बायाँ हाथ पकड़ कर मुझे ऊपर उठा लिया और मुझे अपनी बाँहों में लपेटने लगा!
“यह क्या बदतमीजी है विकास! तुम पागल तो नहीं हो गए हो!” मैं बनाबटी गुस्सा दिखाते हुए उसकी गिरफ्त से छूटने की नाकाम कोशिश करने लगी!
“रश्मि! आई लव यू … आज मुझे अपने से अलग न करो प्लीज! रश्मि तुम इतनी सुन्दर हो कि मैं तुम्हें प्यार करना चाहता हूँ! आज मुझे मना मत करना!” वो गिड़गिड़ाता सा बोला और मुझे बेतहाशा चूमने लगा!
मैं भी गरम होने लगी थी! पर अभी एकदम हथियार डाल देना सही नहीं था!
“विकास, ये ठीक नहीं है … दूर हटो मुझसे, मैं अंकल आंटी से कह दूंगी!” मैंने थोड़ी और स्यानपती दिखाई!
“रश्मि! प्लीज, पापा से मत कहना! मैं कुछ नहीं करूँगा! बस एक किस ही करूँगा!” वो बोला!
“ठीक है! पर किस से ज्यादा कुछ नहीं! नहीं तो मैं अंकल को बोल दूंगी!” मैंने हथियार डालते हुए कहा!
उसे तो मुँह मांगी मुराद मिल गई! उसने मेरे होंठों को अपने होंठों मैं कैद कर लिया और मज़े से चूसने लगा! मेरी उत्तेजना बढ़ती जा रही थी। मैं भी उसका पूरा साथ देने लगी! उसने मुझे बुरी तरह से बाँहों मैं जकड़ा हुआ था और फिर उसने अपना दायां हाथ मेरे दाहिने स्तन पे रख दिया। मेरी आँखें फटी की फटी रह गई, शरीर में एक झुरझुरी सी दौड़ गई!
मैं उससे मना करना चाहती थी पर उसने मेरे होंठ अपने होंठों से जोड़ रखे थे! विकास का दूसरा हाथ मेरे हिप पर पहुँच गया और उसने कसके मुझे ऊपर उठा लिया और फिर दाहिना हाथ मेरे स्तन से हटाकर मेरी कमर में डालकर मुझे पूरी तरह से अपनी गोद में उठा लिया!
मैंने भी अपनी बाहें उसके गले मैं डाल दी! इस सब के दौरान हमारे होंठ एक सेकंड को भी जुदा नहीं हुए! वो मुझे उठाकर अपने बेडरूम में ले आया और बिस्तर पे पटक दिया। मैंने सलवार नहीं उतारी थी जो कि पूरी तरह से गीली थी। बिस्तर भी गीला होने लगा। मैंने उठने की कोशिश की लेकिन विकास ने उठने नहीं दिया और मुझे अपनी बाहों में लिपटाकर मेरे होंठों का रसपान करता रहा। फिर धीरे से मेरी सलवार का नाड़ा खोलने लगा! मैंने विकास के हाथ पकड़ लिया पर वो नाड़ा खोल कर ही माना और सलवार को भी जबरदस्ती उतार दिया!
अब मैं केवल ब्रा और पैंटी मैं थी, मेरी आँखों से आंसू छलक आये!
“अरे यार रोना मत!” वो ये देख कर बोला!
और उसने मुझे छोड़ दिया! मैं तकिये मैं मुँह देकर रोने लगी वो थोड़ी देर खड़ा होकर सोचने लगा। फिर पता नहीं कहाँ से एक तौलिया लेकर मेरे पास आया और बोला- रश्मि! आय ऍम वैरी वैरी सौरी! प्लीज, मुझे माफ़ कर दो और यह लो तौलिया और अपना बदन साफ़ कर लो!
मैं लगातार रोये जा रही थी और उसकी तरफ भी नहीं देखा मैंने मुड़कर! तभी वो मेरी कमर को तौलिया से पोंछने लगा और टांगो को साफ़ करने लगा मैं करवट लेकर लेटी थी और मेरा चेहरा तकिये में धंसा हुआ था। उसका धीरे से मेरा बदन पर स्पर्श अच्छा लग रहा था
फिर मैं उठकर बैठ गई और उसकी आँखों में ना जाने ढूँढने लगी! वो बड़ा प्यारा लग रहा थ मुझे!
फिर मैंने झट से उसका चेहरा अपने हाथो में लेकर होंठ से होंठ भिड़ा दिए! अब उसने भी मुझे भींच लिया और मेरे होंठों को पीने लगा! अब मेरे हाथ उसकी शर्ट के बटनों से खेल रहे थे सारे बटन खुलते ही उसने अपनी शर्ट निकाल फेंकी और अपने हाथ पीछे ले जाकर मेरी ब्रा का हुक भी खोल दिया और ब्रा को मेरे स्तन से अलग कर दिया! मेरे दूधिया उरोज हिलते हुए अलग हो गए!
विकास एक तक देखता ही रह गया और बोला- रश्मि! तू क्या माल है यार! अब तक कैसे बच गई मेरे हाथ से!
मेरी हंसी छुट गई! और फिर उसने मेरे टेनिस बॉल के आकार के स्तनों को हाथों में ले लिया। फिर दाहिने स्तन के निप्पल को अपने मुँह में भर कर चूसना शुरू कर दिया!
मैं मस्ती से सराबोर हो उठी और उसका सर अपने हाथों से अपनी छाती पर दबाने लगी! तभी उसने मेरे दूसरे निप्पल को अपनी उंगलियों से मसल दिया!
आईईइ… क्या कर रहा है … दर्द हो रहा है! मैं चिल्ला उठी!
वो और जोश में आक़र मेरे स्तन को चूसने लगा! मेरी हालत ख़राब होने लगी, मैं अपने हाथ से अपनी बुर रगड़ने लगी! फिर हाथ ऊपर लाकर उसकी पैन्ट को खोलने लगी। वो बदस्तूर स्तनपान करे जा रहा था जैसे कितने जन्मों का प्यासा हो!
पैन्ट की जिप खुलते ही उसने अपनी पैन्ट जल्दी जल्दी उतार दी पर इस काम के बीच उसके होंठ और एक हाथ मेरे बूब्स पे लगे रहे!
अब उसने मेरी पेंटी भी उतार फेंकी! मेरा हाथ जैसे ही उसके अण्डरवियर से छुआ, मुझे करंट लगा। उसने मौके की नजाकत को समझते हुए अपना अंडरवियर भी उतार फेंका और मेरा हाथ ले जाकर अपने लिंग पे रख दिया! पहले तो मैंने शरमा कर अपना हाथ छिटक दिया! पर उसने दोबारा मेरा हाथ अपने लिंग पर रख दिया और इस बार उसने अपना हाथ भी मेरे हाथ से लगाये रखकर मुठ्ठी भीच दी!
अब विकास का लिंग मेरी मुठ्ठी में था! मुझे लिंग का स्पर्श अच्छा लगा! एकदम लकडी की तरह कड़ा हो चुका था उसका लिंग! मैंने अंदाजा लगाया कि उसका लिंग करीब ५.५” से ६” के लगभग था और २” मोटा रहा होगा!
मैं उसका लिंग सहलाने लगी! तभी विकास ने अप्रत्याशित हरकत कर दी, उसने अपनी ऊँगली से मेरी बुर को छेड़ दिया मैं चिहुंक उठी- आअह्हऽऽ विकास आराम से!
पर वो कहाँ मानने वाला था, उसने फिर अपनी एक ऊँगली मेरी बुर में घुसा दी! मैं उछल के उससे लिपट गई उसने फिर मुझे सीधा लिटा दिया और मेरी टांगें चौड़ी करने लगा! मैंने अपनी बुर को अपने हाथों से ढक लिया, आँखे बंद कर ली और टांगों को आपस में भींचने की कोशिश करने लगी! विकास ने मेरे हाथ को हटा कर एक चुम्बन मेरी बुर पे ले लिया!
‘सीईईई ईइऽऽऽ’ मेरी सीत्कार छुट गई, अपने आप को संभाला मुश्किल हो गया! दांतों से निचला होंठ काटने लगी और दोनों हाथों को ऊपर ले जाकर तकिये को मसलने लगी, मेरा शरीर कांप रहा था!
विकास अपनी जीभ से मेरी बुर चाट रहा था!
जब मैं मज़े के चरम पे पहुंची तो मैंने विकास को अपने ऊपर खींच लिया- जल्दी कुछ करो विकास! मेरी चूत में कुछ कुछ हो रहा है! आह्ह्हऽऽऽ! मैं मर जाऊँगी! प्लीज जल्दी कुछ करो!!!!! मैं पता नहीं क्या क्या बोले जा रही थी, मुझे नहीं पता!
मेरी जान, आज कसम से मज़ा आ जायेगा तुझे! विकास बोला!
और उसने अपने लंड पे थूक लगाया और मेरी चूत तो पहले ही गीली हो चुकी थी! चूत के मुहाने पे टिका कर एक हल्का सा धक्का मारा! लंड का अग्र भाग चूत में धंस गया।
मैं चिल्ला पड़ी- आईईईई ईईई मम्मी! मैं मरी! तू पागल है विकास! तू कुत्ता है! तू कमीना है! मेरी आँख से आंसू निकल पड़े!
मेरा पहला सेक्स था, इसलिए ज्यादा दर्द हो रहा था और शायद विकास का भी पहला ही था!!
शायद! इसलिए क्यूंकि उसको देखकर लग नहीं रहा था कि वो पहली बार कर रहा है! पर चूँकि उसने बताया था कि मैं ही उसके जीवन मैं पहली लड़की थी जिसके साथ यह सब कर रहा है!
उसने अपना लंड कुछ देर थामे रखा और मेरे उरोज सहलाता रहा। मुझे कुछ शांति मिली। मैंने नीचे से कूल्हे उचकाना शुरू किया तो उसने मेरी कमर को पकड़ कर एक जोरदार धक्का मारा!
हईईईए राम मम्म्य्य्य मैं मरी! आआअह्ह् विकास! पागल है क्या तू! इतना ही चीख पाई कि उसने अपने होंठों को मेरे होंठों पर कस दिया!
उसका आधा से ज्यादा लंड चूत में घुस चुका था! मेरी जान निकली जा रही थी और आँखों से आंसू लगातार बह रहे थे, साँस लेने में भी दिक्कत हो रही थी! कुल मिलाकर यह लग रहा था कि आज मैं मरने वाली हूँ!
मैंने जबदस्ती उसके होंठों से अपने होंठ छुड़ाये! फिर थोड़ी देर साँस लेकर रोने लगी!
मुझे रोता देख विकास डर गया पर उसने अपना लंड बाहर नहीं निकाला- रश्मि कुछ नहीं होगा! पहली बार ऐसा ही होता है! अभी सब ठीक हो जायेगा!
हाई मम्मी! आईईई रीईई रामा! आआअह्ह्ह! विकास, आई हेट यू! यू आर फूल! कुत्ता! हाई! तू कमीना! हाई! तू! फिर पता नहीं क्या क्या कहा मैंने उसे!
विकास मेरे उरोज सहलाता, फिर कभी हिप को सहलाता, १० मिनट तक ऐसे ही पड़े पड़े मैंने उसे बहुत गालियाँ दी फिर भी वो बेचारा चुपचाप मुझे प्यार से सहलाता रहा!
फिर धीरे धीरे उसने अपना लंड हिलाना शुरू किया, जब मुझे मज़ा आना शुरू हुआ तो उसका वर्णन करना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन है!
“ऊऊऊओह्ह्ह! येस्स्स् विकास आई लव यू!” परिस्थिति बदल चुकी थी!
विकास मुस्कुरा रहा था- आई लव यू ठु डार्लिंग! तू कमाल है रश्मि! आआअह्ह! वाकई तू कमाल है!
धक्के पे धक्के, रेलमपेल हो रही थी! गपागप तथा फचाफच की मधुर आवाज़ निकल रही थी!
फिर विकास ढीला पड़ता गया, मैंने नीचे से अपनी गांड उछालनी शुरू कर दी, उसी वक़्त मेरा भी स्खलन हो गया! विकास लम्बी लम्बी साँस लेता हुआ मेरे उपर लेट गया। फिर अपनी आँखें बंद कर ली!
२०-२५ मिनट ऐसे ही पड़े रहे हम दोनों!
फिर विकास को एक तरफ कर मैंने उठने की कोशिश की पर उठा नहीं गया।
मेरी नज़र बेड शीट पर पड़ी तो वो पूरी की पूरी खून से सनी हुई थी, मैं फिर लेट गई!
विकास ५ मिनट बाद उठा फिर बोला- रश्मि! तुम लेटी रहो मैं कुछ करता हूँ!
फिर उसने मेरे कपड़े और वो बेड शीट खुद धोई और फिर किचन में जाकर मेगी बनाकर लाया!
भूख भी लगी थी!
उसके बाद मुझे नींद आने लगी पर विकास नहीं माना और उसने मुझे एक बार फिर चोदा!
शाम को तीन बजे हमें नेहा दीदी ने जगाया! विकास दरवाजा बंद करना भूल गया था! मैं नेहा दीदी की मेक्सी ही पहन कर सोई थी और विकास भी उसी बेड पे सोया था! दीदी सब कुछ समझ गई थीं!
पर विकास ने उनको अलग ले जाकर पता नहीं क्या समझाया, वो मुस्कुरा कर बोली कि विकास मुझे मेरे घर छोड़ आये!!
अब मेरे कपड़े भी सूख चुके थे। मैंने अपने कपड़े पहने और विकास के साथ बाहर आ गई!
फिर उसे कहा कि मैं खुद चली जाऊँगी अब!
विकास ने मेरे माथे पे किस किया और बोला- रश्मि! थेंक यू फॉर आल थिंग्स!
मैंने मुस्कुराकर उसको बाय कहा फिर अपने घर चल दी!
तो दोस्तो, कैसी लगी मेरी पहली चुदाई? Antarvasna
कई सालों के बाद मैं Hindi Porn Stories अपने मामा के पास गया था। मेरे मामा एक दबंग ठेकेदार थे और पूरे इलाके में उनकी बहुत धाक थी, 50 साल पार करने के बाद, भी उनके पहलवान शरीर पर बुढ़ापे के कोई लक्ष्ण नहीं थे। मामा की हवेली की शान देखते ही बनती थी। इकलौता भांजा होने की वजह से मामा मुझे प्यार भी बहुत करते थे।
शहर से पहली बार मैं गाँव की गया था। मेरे लिए एक अलग कमरा और नौकर था, मगर यह नहीं मालूम था कि एक नौकरानी भी रख रखी थी मेरे लिए। शाम होते ही नौकरानी मेरे लिए चाय और नाश्ता लेकर कमरे में पहुँच गई।
मैं उसी समय नहा कर निकला था और तौलिये में लिपटा मेरा गठीला बदन देखने लायक था। होता क्यों नहीं, जिम जा कर और कसरत करके मैंने अपनी बदन को गठीला और मजबूत बना रखा था।
तौलिया लपेट कर मैं आईने में बाल संवारता जा रहा थी कि मेरी नजर अचानक अपने पीछे किसी पर पड़ी। चोली और लहंगे में लिपटी एक छरहरी काया वाली कंटीली कन्या मेरे पीछे चाय की तश्तरी लिए मेरे गठीले बदन को निहार रही थी।
पीछे मुड़ कर देखा तो वो शरमा गई। उसकी कसी हुई चोली और नाभि के नीचे तक कसा हुआ लहंगा वाकई में गजब ढा रहा था।
‘छोटे मालिक, नाश्ता!’ उसने कहा।
‘रख दो! और सुनो, आगे से पूछ कर कमरे में आना!’
‘जी, गलती हो गई!’ उसने कहा और मुड़ कर जाने लगी।
कुछ सोच कर मैंने उसे रोका और कहा- अच्छा, तुम्हारा नाम क्या है?
‘रानी!’ उसने जवाब दिया।
‘हम्म! नाम तो अच्छा है, कब से काम करती हो?’
‘साहब, मैं तो हूँ ही आप लोगों की सेवा के लिए… और बड़े मालिक ने कहा है कि आपका खास ख्याल रखूं.. अगर किसी चीज़ की जरूरत हो तो संकोच मत कीजियेगा…’
सच में, रानी कर भरा-पूरा शरीर देख कर कोई भी संकोच नहीं करना चाहेगा…
‘साहब मैं रात में फिर से आऊँगी!’ कह कर रानी अपने मांसल नितम्बों को सेक्सी अदा से मटकाती हुई कमरे से चल दी।
रानी क्या गई मेरे तन बदन में आग लगा गई… मेरा 8 इंच का लंड एकदम से फनफ़ना उठा… दिल कर रहा था कि उसी समय उसे अपनी बाँहों में दबोच लूँ और उसकी मादक जवानी का रस पी लूँ…
खैर रात होने का इन्तज़ार करने लगा। इतने में मामा जी आ गए और कहने लगे- क्यों भांजे, कैसा लगा हमारा इन्तजाम… कोई कसर तो नहीं रह गई?
‘नहीं मामा जी, सब बहुत बढ़िया है!’
‘और कैसी लगी, तीखी मिर्ची?’ मामा जी ने कहा.
‘जरा संभल कर! शहर की मालों से अलग है, खास तुम्हारे लिए ही है…जी भर के मजे करना…और कोई कसर मत रखना…’
मैं समझ गया कि उस कंटाप को मामा जी ने मेरे लिए ही रखा है…
अब तो मैं भी पूरे जोश में था कि कैसे अपनी प्यास बुझाई जाये और रात का इन्तज़ार करने लगा।
रात का भोजन तो हो गया और मैं अपने कमरे में लौट गया और रानी का इन्तज़ार करने लगा।
नौ बजे के बाद कमरे का दरवाजा हल्का सा खुला और सजी-धजी रानी मेरे कमरे में आई…
‘साहब आ सकती हूँ?’ उसने आवाज लगाई…
‘आ जाओ,’ मैंने कहा।
वो आई और बिस्तर पर मेरे बगल में बैठ गई… उसने कसी हुई चोली और कमर के बहुत नीचे से लहंगा पहन रखा था, उसके बालों में मोगरे और चमेली की माला सजी हुई थी, माथे पर बिंदी, आँखों में काजल और होंठों में गजब की लाली थी।
मैंने उसके कमर पर हाथ रखा और तुंरत अपनी बाहों में भींच लिया…
‘ज्यादा उतावले मत होईये साहब, रात तो अभी बाकी है और मैं तो आपकी ही हूँ!’ रानी ने कहा।
‘मुझे साहब मत कहो, मनोज कहो!’ मैंने कहा।
वो मेरी बाँहों में लिपट गई और उसके सीने के दो उन्नत उभर मेरे सीने में धँसने लगे।
यूँ तो मैंने शहर में बहुत लड़कियों को चोदा था मगर गाँव की किसी हसीना के साथ ये मेरा पहला मौका था।
मैंने उसके होंठों को अपने होंठों में लिया और धीरे-धीरे चूसने लगा। गजब का स्वाद था! मेरे हाथ उसकी चिकनी पीठ पर फिसल रहे थे और मेरा 8 इंच का लंड धीरे-धीरे अपने शबाब पर आ रहा था। मगर मैं यह पारी बहुत देर तक खेलना चाहता था और उस नशीली रात का पूरा मजा लेना चाहता था, आखिर मुझे उस गाँव की कली को मसल कर जो रख देना था। रानी की कमर पर हाथ डाल कर मैंने उसे पूरा भींच लिया था। रानी भी अपने रसीले होंठों को मेरे होंठों पर घुमा रही थी जैसे कहना चाहती हो कि चूसो और चूसो मेरे रसीले होंठों को!
मेरे हाथ फिसलते हुए उसके मांसल नितम्बों पर जा पहुंचे और मैंने उसके मांसल नितम्बों को कस-कस के दबाना शुरू कर दिया। रानी जैसे पागल हुई जा रही थी। मैंने उसका लहँगा खींच कर सीधे उसकी कमर तक उठा दिया और उसके होंठों को चूसते हुए उसकी चिकनी जाँघों को सहलाना शुरू कर दिया। अब रानी भी पागल हो गई और मेरी कमीज को उतारना शुरू कर दिया। मैंने अपनी कमीज उतार दी और पैंट भी! अब मैं सिर्फ अपनी चड्डी में था और चड्डी में 8 इंच का लंड हिलौरें मार रहा था।
मैंने सीधे रानी को बाँहों में भर और पलंग पर पटक दिया, उसकी चोली को उतारा और उसके उन्नत उरोजों को सहलाना शुरू कर दिया, चुचूकों को मुँह में लिया और धीरे धीरे चूसना शुरू किया। एक चुचूक को चूसता रहा और हाथ से उसकी दूसरी चुची को दबाना शुरू किया.
रानी के मुँह से उह.. उफ़. आह की आवाजें आने लगी और मैं बेहद उत्तेजित हो गया।
मैंने उसकी चुची को और जोर से दबाना शुरू कर दिया। रानी अपनी चिकनी जांघें मेरी जाँघों से रगड़ने लगी और अपनी कमर को मेरी कमर से सटाना शुरू कर दिया। मैंने रानी के मम्मे छोड़े और उसके पेट को सहलाते हुए उसके लहंगे में अपना हाथ घुसा दिया और उसकी चिकनी चूत को अपनी बीच की उंगली से हल्के-हल्के रगड़ना शुरू कर दिया। रानी की तो मस्ती का ठिकाना ही नहीं था..
‘मेरे राजा… मुझे चोदो . जल्दी चोदो… और मत तड़पाओ…’ कहते हुए मुझ पर हावी होने की कोशिश करने लगी.. मगर मेरी मर्दानगी के आगे कहाँ टिक पाती, मैंने फिर से उसके पलंग पर पटक दिया और उसके लहंगे को ऊपर कर, उसकी चड्डी उतार फेंकी.
हाय… उसकी जवान.. कोमल चूत… थोड़ी सी पनिया गई थी…उसकी चूत पूरी तरह साफ़ थी…शायद मेरी लिए ही अपनी कोमल चूत को साफ़ करके आई थी।
मैंने अपनी जीभ से उसकी रसीली चिकनी चूत को चाटना शुरू किया तो रानी जोर से चिल्ला उठी- उफ़ ऽऽ… हाय… मर गई… इतना मत तड़पाओ न राजा… अब डाल दो अपना लंड मेरी बुर में…और मिटा दो इसकी खुजली…
मगर मैं कहाँ मानने वाला था… उसकी चूत को चूसना और चाटना मैंने नहीं छोड़ा… गाँव की छोरी की चूत का स्वाद कुछ अलग ही होता है… करारा…!
मैंने अपनी जीभ को उसकी चूत में और अन्दर तक डाला और उसके रस को पीने लगा.
रानी बार-बार अपने चूतड़ उछाल कर मेरे मुँह पर धकेलती और मैं अपनी जीभ उसकी चूत में और अन्दर तक डालता।
मजा आ गया उसकी चूत का स्वाद ले कर.. ऐसा मजा पहले नहीं आया था.. शहर की लड़कियों की चूत रानी की चूत के सामने कुछ नहीं थी.
बहुत देर तक रानी की चूत का मजा ले कर मैंने सोचा और रानी को अपने मूसल लंड का मजा भी दे दिया जाये…
मैं पलटा और अपने लंड को रानी के मुँह के सामने ले गया… बस फिर क्या था, खूंखार शेरनी की तरह रानी ने फ़ौरन मेरे लंड को अपने मुँह में ले लिया और जोर-जोर से चूसने लगी..
मैंने भी अपने लंड को उसके मुँह में पूरा अन्दर तक डाल दिया। रानी बहुत बेकरार थी और मेरे लंड के स्वाद ने उसको और भी बेकरार कर दिया था। वो पूरी तरह पनिया चुकी थी मगर मेरे लंड को बहुत मजे से चूस रही थी।
‘रानी! कैसा लगा मेरा लंड?’
‘मस्त है मेरे राजा! आज तक ऐसा तगड़ा लंड मैंने नहीं चखा है… आज तो लगता है मुझे बहुत मजा आने वाला है!’ रानी ने कहा।
रानी मेरा लंड चूसती जा रही थी और मैं उस एहसास का मजा ले रहा था।
मैंने फैसला कर रखा था कि आज रानी की चूत और गांड दोनों को फाड़ दिया जाये और रानी को ऐसा मजा दिया जाये कि साली सारी जिंदगी याद रखे…
इधर रानी मेरे लंड को अपनी जीभ से सहला रही थी और मैं उसकी गांड को जोर से मसल रहा था… उसकी चूचियों को तो मैं मसल-मसल कर लाल कर ही चुका था, अब बारी उसकी गांड की थी…
बहुत देर तक अपने लंड की चुसवा कर मैंने रानी को पीठ के बल लिटाया और सीधा उसकी केले के तने जैसे चिकनी जाँघों के बीच में आ गया। आज बहुत दिनों के बाद अपने मूसल से लंड को चूत का स्वाद चखाना था। मगर मैं रानी को थोड़ा और तड़पाना चाहता था, मैंने अपना आठ इंच के लंड तो रानी की चूत पर रखा और धीरे धीरे अपने लंड से उसकी पनियायी चूत को रगड़ने लगा..
रानी और भी उत्तेजित हो गई…और मेरी गाण्ड में अपने नाखून गड़ा दिए… मैंने मगर अपना लंड उसकी चूत में नहीं डाला… और फिर से लंड उसकी चूत के ऊपर रगड़ने लगा… मैं रानी को और भी गर्म करना चाहता था ताकि उसको रगड़ कर चोद सकूँ… पता नहीं मेरा मूसल सा लंड झेल भी पायेगी या नहीं…
लंड को उसकी चूत में रगरते-रगड़ते मैंने एक झटके से अपना आठ इंच उसके अन्दर डाल दिया…
‘आऽऽऽहऽऽ…’ की जोर से आवाज़ आई और रानी एकदम तिलमिला उठी… मैंने रानी को कस के पकड़ा और अपना लंड पूरा उसकी चूत में डाल दिया। रानी तड़फ़ती रही और मैंने उसको चोदना जारी रखा… सचमुच बहुत मजा आ रहा था।
रानी यूँ तो पहले चुद चुकी थी मगर उसकी चूत एकदम कसी हुई थी और मेरे जैसा मूसल लंड उसमें कभी नहीं गया था… मैंने उसे अपनी बाँहों में जकड़ा और जोर से शॉट मारने लगा… उसकी चिकनी चूत की गर्मी मेरे लंड को और भी मोटा और कड़ बना रही थी.. एक तो कंटाप माल और उसकी कसी चूत… ऊपर से मेरा मूसल सा लंड…फिर दबा कर चुदाई होनी ही थी… मैं चोदता रहा और रानी चिल्लाती रही.
‘इतना जोर से मत चोदो.. मैं मर जाऊँगी… उफ़्फ़ऽऽऽ… आऽऽऽहऽऽ… ऊई…माँ…’ ये सब रानी के मुँह से निकलता रहा और मैं उसको कस-कस कर चोदता रहा… मैंने अपने दांत उसके चुचूकों पर गड़ा दिए और चुदाई चालू रखी…मुझे लगा शायद मेरा लंड पूरा अन्दर नहीं जा रहा है, एक तकिया उसकी गाण्ड के नीचे रखा और फिर शुरू हुई- रगड़म चुदाई…
मैं उसकी चूत के अन्दर तक अपना पूरा लंड पेल रहा था और रानी मजे ले रही थी…
रानी ने मेरी कमर पर नाखूनों के बहुत निशान बना दिए और मेरा लंड उसके चूत में और अन्दर तक जाता रहा…
काफी देर की चुदाई के बाद मैंने आसन बदला और ..रानी को अपने ऊपर ले आया…
ले रानी, अब तू मुझको चोद! देखता हूँ तुझमें कितना दम है…
अब रानी मेरे ऊपर थी… और इस अवस्था में मेरा पूरा लंड उसकी चूत में एकदम अन्दर तक जा रहा था.. मैंने उसके दोनों झूलते हुए स्तनों को दबाना शुरू किया और रानी मेरे ऊपर अपनी कमर हिला-हिला कर अपनी चूत से मेरे लंड को चोदती रही… मगर इस आसन में रानी को ज्यादा तकलीफ़ हो रही थी.. मैंने फ़ौरन उसकी गाण्ड को अपने हाथों से पकड़ा और जोर से उसकी चूत को अपने लंड पर दबाना शुरू किया… रानी की तो हालत ख़राब होने लगी…
मैंने कहा- क्यों रानी? अभी तो पूरी रात बाकी है! अभी तो मुझे सुबह तक तुझे चोदना है… तेरी कसी चूत और गाण्ड का भोंसड़ा न बना दिया तो कहना…
रानी बस अपनी गाण्ड हिलाती रही और मुझे चूमती रही…
थोड़ी देर बाद मैंने रानी को फिर से पीठ के बल लिटाया और अपना लंड उसकी चूत से निकाल लिया… तुंरत एक दानेदार कण्डोम लिया और अपने लंड महाराज़ को पहना दिया। देखता हूँ अब ये मेरी चुदाई कैसे सहन करती है…
बस जो मैंने उसे चोदना शुरू किया तो पूरा कमरा उसकी सिसकियों से गूंज उठा- उह.. आह .. माँ… मर गई… धीरे चोद… मैं मर जाऊँगी…
मगर मैं कहाँ मानने वाला था… उसे कस कर चोदा.
देर तक मैं उसे चोदता रहा… मगर अब थोड़ा थक गया था… मैंने सोचा थोड़ा आराम करते हैं… फिर रानी की गाण्ड मारेंगे…
मैं कस कर उससे लिपट गया… रानी तब तक तीन बार झड़ चुकी थी… और लम्बी-लम्बी सांसें ले रही थी… मैंने अपना लंड बाहर निकाला तो देखा- कण्डोम फ़ट चुका था.
थोड़ा आराम करने के बाद… मैंने बोरोलीन क्रीम ली, अपने लंड पर और रानी की गाण्ड पर खूब अच्छे से लगाई… रानी को पेट के बल लिटाया और धीरे से अपना लंड उसकी गाण्ड के छेद में टिका दिया… उसकी गाण्ड कुंवारी थी.. पहले कभी नहीं चुदी थी… रानी भी थक कर बेहाल हो चुकी थी पर मेरा विरोध नहीं कर सकती थी.
मैंने धीरे से उसकी गाण्ड में लंड का सुपाड़ा डाला और अन्दर धकेलने की कोशिश करने लगा.. मगर बहुत कसी थी उसकी गाण्ड.. लंड अन्दर जा ही नहीं रहा था… आखिर मेरा सयंम जवाब दे गया… मैंने उसके नितम्बों को पकड़ा और एक झटके में अपना लंड उसकी गाण्ड में घुसा दिया.
उसकी गाण्ड से खून छलक गया… उसकी गाण्ड का छेद फ़ट चुका था… रानी इतनी थक गई थी कि चिल्ला भी नहीं सकती थी.. मगर मुझे परवाह किसकी थी… उसकी कसी गाण्ड में मैंने अपना लंड डालना चालू रखा और पूरा अन्दर तक डाल दिया… फिर धीरे से बाहर निकाला और एक झटके से अन्दर डाला। उसकी गाण्ड को चोदने में मुझे बहुत मजा आ रहा था… एकदम कसी हुई गाण्ड और मेरा मोटा लंड… मैं तब तक उसकी गाण्ड को चोदता रहा जब तक कि वो ढीली नहीं पड़ गई.
रानी एकदम बेदम थी… यही तो मैं चाहता था…
मगर इतनी देर चुदाई के बाद मेरा लंड भी गर्म हो गया था और चूत में झड़ना चाहता था.
मैंने उसके गाण्ड से अपना लंड निकाला और उसे अच्छे से पौंछा…थोड़ा सा तेल लगाया और रानी की चूत में फिर से डाल दिया .. अब रानी एकदम बेसुध थी… मैंने उसकी दोनों टांगों को अपनी कमर से लगाया और उसे बाँहों में भर कर अब धीरे से चोदना शुरू किया…
बस करीब दस मिनट के बाद मैंने अपने वीर्य की पहली बूंद उसकी चूत में टपका दी… फिर तो एक पिचकारी सी छूटी और उसकी चूत को मैंने अपने वीर्य से भर दिया… बहुत सुख का अनुभव हो रहा था… गाँव की एक सेक्सी माल को मैंने इतनी देर तक चोदा… कि वो बेसुध हो गई…मैं रानी को चूमता रहा और अपना वीर्य गिराता रहा.
थोड़ी देर में शान्त होकर मैं रानी के बदन से लिपट गया.. मैं भी थक गया था .. और ऐसे ही अपना लंड रानी की चूत में डाले-डाले सो गया…
सुबह हुई तो पहले मेरी नींद खुली.
मैंने देखा कि रानी वैसे ही बेदम नंगी पड़ी थी और बिस्तर पर थोडा सा खून लगा था… मैं समझ गया यह खून उसकी कोरी गांड की चुदाई के कारण लगा है।
मैं उठा और रानी का एक चुम्मा लिया…मेरा लंड इतनी चुदाई कर के एकदम झन झन कर रहा था. मैंने रानी को कपड़े से ढक दिया और बाथरूम की ओर चल दिया।
अगले हिस्से में.. मामा और रानी की चुदाई का किस्सा बयान करूँगा.
जरूर लिखें कि आपको मेरी और रानी की चुदाई पसंद आई या नहीं! Hindi Porn Stories
मेरा नाम राहुल है, मैं Sex Stories एक 26 साल का लड़का हूँ, पेशे से इंजिनियर हूँ, एक बहुराष्ट्रीय कम्पनी के ऑफिस में काम करता हूँ। वैसे तो मेरे साथ बहुत सी लड़कियाँ काम करती है पर एक लड़की पर मेरा दिल आ गया था। कुछ ही महीनो पहले एक नई लड़की ने हमारी कंपनी ज्वाइन की थी जिसका नाम गीता है। वो देखने में बहुत खूबसूरत है, उसके मम्मे उतने बड़े नहीं, पर वो देखने में बहुत गौरी है, उसकी आवाज भी बहुत मीठी है। वो अगर सामने आ जाये तो नजर नहीं हटती। वो कभी सलवार पहन कर आती तो कभी जींस।
मैं देखने में उतना खूबसूरत तो नहीं हूँ पर प्यार किया तो डरना क्या !
एक दिन मैं ऑफिस जल्दी पहुँच गया था, उस वक़्त कोई भी वहाँ नहीं था। थोड़ी देर में वो भी आ गई, उस वक़्त ऑफिस में सिर्फ हम दोनों थे। मैं भी अपने काम में लगा हुआ था, तभी एक मीठी सी आवाज से उस लड़की ने मुझे पीछे से पुकारा। उसने अपना हाथ हैन्डशेक करने के लिए बढ़ाया और अपना परिचय दिया। मेरे तो मुँह से आवाज नहीं निकल रही थी, मैं उसकी तरफ एक टक देखे जा रहा था। वो भी मुझे इस तरह देखते झेंप गई और मेरा ध्यान भंग करते हुए मुझसे अपना परिचय देने को कहा।
मैंने झट से अपना परिचय दे दिया। बस फिर क्या था, मैं भी उससे बात करने के लिए उसके बारे में पूछने लगा- वो पहले कहाँ काम करती थी ? उसके दोस्त कैसे थे वगैरह-वगैरह !
बातों ही बातों में मैंने उसे कॉफ़ी के लिए पूछ लिया। वो भी जल्दी से तैयार हो गई। फिर हम दोनों ने कैंटीन में जा कर काफ़ी पीते पीते बहुत सी बातें की।
यह सिलसिला काफी दिनों तक चला। एक दिन हम लोगों ने बाहर जा कर खाना खाने की सोची। वो एक बार बोलते ही तैयार हो गई थी। मैं उसे एक मंहगे होटल में ले गया था, वो होटल मेरे घर के काफी नजदीक था। हमने खाना आर्डर किया और खाना का इन्तजार करने लगे। खाना आने में बहुत समय लग रहा था तो मैंने उसको समय बिताने के लिए कोई चुटकला सुनाने को बोला। वो थोड़े नखरे करने के बाद एक चुटकला सुनाने को तैयार हो गई। उसने एक बकवास सा बच्चों वाला चुटकला सुना दिया। उसे खुश करने के लिए मैं बहुत हँसा।
अब मेरी बारी थी, मैंने उसे एक दोहरे मतलब वाला व्यस्क चुटकला सुना दिया, जिसे सुन कर वो शरमा गई और मुस्कुराने लगी। मैंने मौका देख कर एक और वैसा ही चुटकला सुना दिया। इस बार उसने मुझे ‘शरारती’ कहते हुए मेरे हाथ पर हल्के से चपत लगा दी। हम दोनों एक दूसरे की तरफ देख कर मुस्कुरा रहे थे। इतनी देर में खाना भी आ गया था। हम खाना खाते खाते अपनी रुचियों के बारे में बात करने लगे।
बातों बातों में हम एक दूसरे का हाथ छू लिया करते थे, वो बिलकुल भी ऐतराहुल नहीं करती थी। मेरा भी साहस बढ़ रहा था।
एक दिन हम नई मूवी के बारे में बात कर रहे थे, उसने मुझसे कोई एक मूवी लाने को कहा। अगले दिन मैंने उसे मूवी के साथ एक और इंग्लिश मूवी भी दी जिसमे कुछ सीन भी थे। दूसरे दिन जब उसने मुझे मेरी सीडी वापस की तो कहा कि वो इंग्लिश वाली मूवी उसे बहुत अच्छी लगी। मैं भी समझ गया कि यह तो खुल्लम खुल्ला लाइन दे रही है। मैंने मौका का फायदा उठाते हुए उससे शॉपिंग में मेरी मदद करने को कहा। वो झट से मान गई।
अगले दिन हम जब शॉपिंग के लिए गए तब मैं अक्सर साथ चलते चलते उससे टकरा जाता, ट्रैफिक क्रॉस करते हुए उसका हाथ पकड़ लेता। वो ऐतराहुल नहीं करती थी।
मैं जानबूझ कर उसकी चूचियों से टकरा जाता, वो भी मेरे काफी नजदीक आ गई थी, वो अक्सर मेरी कमर में हाथ डाल कर मुझे दुकानों में खींच लेती थी। मुझे भी बहुत मजा आता था और एक अजीब से सनसनी पूरे शरीर में दौड़ पड़ती। देखते देखते मेरी भी झिझक कम हो गई थी, मैंने भी उसके गले में हाथ डालना शुरू कर दिया था, फिर मैं अक्सर उसके बालों को सहलाने लगता, उसके गालों को आहिस्ता आहिस्ता अपनी उंगलियों से छू लेता था।
गीता अब मुझ से काफी घुल मिल गई थी। एक बार हम दोनों पिज्जा खा रहे थे, और थोड़ा सा सॉस उसके नाक पर लग गया, मैंने अपनी ऊँगली से उसकी नाक पर से सॉस को पौंछ दिया, उसने भी झट से मेरा हाथ पकड़ कर मेरी ऊँगली से सॉस को चूस कर साफ़ कर दिया। उसे ऊँगली चुसवाने से मुझे जो मजा आया वो मैं बयान नहीं कर सकता। मेरा रोम रोम खड़ा हो गया था, लौड़े से तो मानो एक बार पिचकारी छूट ही गई थी।
मैं इतना ज्यादा रोमांचित हो गया कि मैंने अपनी आँखें बंद कर ली थी। मैंने तुंरत उसी ऊँगली को सॉस में डूबा कर कहा- एक बार और करो ना !
यह सुन कर वो शरमा गई और दोबारा मेरी उंगलियों को चूसना शुरू कर दिया। इस बार उसने पूरे 15 सेकंड तक मेरी ऊँगली को चूसा होगा। बस फिर क्या था, मुझे तो ग्रीन सिग्नल मिल गया था, मैंने भी खाना आधा छोड़ कर पेमेंट किया और उसके साथ जल्दी से होटल के बाहर आ गया।
हमने एक ऑटो किया और उसे समुन्दर के किनारे ले जाने को कहा। समुन्दर काफी दूर था, अब बस मैं और वो ऑटो की पीछे की सीट में बैठे बैठे पागलों की तरह एक दूसरे को चूमने लगे, मैं उसको पूरी ताकत से अपनी बाहों में कसने लगा और उसके गले के पीछे और उसके होठों को चूमने लगा।
एक लड़की को किस करने का आनंद मैं लिख कर बयान नहीं कर सकता। मेरे लौड़ा पूरी तरह खड़ा हो गया था, वो भी पूरी तरह गर्म हो गई थी।
मैंने ऑटो वाले को ऑटो अपने घर के तरफ मोड़ने को कहा।
घर में घुसते ही हम दोनों पागलों के जैसे एक दूसरे के कपड़े उतारने लगे। हम कोई भी बात नहीं कर रहे थे, बस एक दूसरे को चूम-चाट रहे थे। मैंने अपने दोनों हाथों से उसके चूतड़ पकड़ कर दबाने शुरू कर दिए, वो मुझे और जोर से किस करने लगी थी।
फिर उसने मुझे कहा- अब बस और देर मत करो और जल्दी से बिस्तर पर चलो !
हम दोनों पूरी तरह नंगे हो गए थे और दोनों की सांसें काफी जोर जोर से चल रही थी।
वो जाकर बेड पर लेट गई, उसकी चूत पर बहुत से रेशमी बाल थे जिसमें से उसकी चूत दिख नहीं रही थी। में भी उसके ऊपर लेट गया और अपने लौड़े को उसकी चूत पर रख दिया। उसने मुझे तुंरत रोक दिया और कहा- कंडोम है या नहीं ?
मैंने तुंरत दराहुल से एक कंडोम निकला और पहन लिया। इतनी देर में मेरा लौड़ा थोड़ा मुरझा गया था, वो भी समझ रही थी। मुझे उसे बोलना अच्छा नहीं लग रहा था कि मेरा लौड़ा चूसे। सो मैंने उसकी चूत में ऊँगली करनी शुरू कर दी और दूसरे हाथ से उसके मम्मे दबाने लगा और अपने मुँह से दूसरे मम्मे को चूसने लगा।वो अजीब अजीब सी आवाजें निकालने लगी, जैसे उसे बहुत मजा आ रहा था। थोड़ी ही देर में वो झड़ने लगी। झड़ने के बाद मैंने उसे अपना लौड़ा दिखाते हुए कहा- तुम मेरे लौड़े को चूसो ना !
वो थोड़े नखरे करने के बाद मान गई। उसने जैसे ही मेरा लण्ड मुँह में लिया, मुझे अलौकिक आननद की अनुभूति होने लगी। थोड़ी देर में जब मुझे लगा कि मैं झड़ने वाला हूँ, मैंने उसके मुँह से लौड़े को निकाल लिया और उसकी चूत पर रख दिया और जोर जोर से धकेलने लगा। मेरा लौड़ा पूरी तरह उसकी चूत के अन्दर घुस गया था, मैंने आनंद में अपनी आँखें बंद कर ली, धीरे धीरे चोदना शुरू कर दिया। कुछ ही पलों में हम दोनों फिर से झड़ने लगे।
मैं काफी देर तक उसके साथ लेटा रहा, थोड़ी देर में हम दोनों तैयार हो कर चल पड़े।
हम अब अक्सर मिला करते थे। धीरे धीरे मैंने उसे गांड मरवाने के लिए भी राहुली कर लिया था।
मेरी कहानी अगर आपको पसंद आई तो जरूर कमेन्ट करना… मैं आगे भी ऐसे ही कहानी लिखता रहूँगा। Sex Stories
मेरा नाम अंजना वर्मा है! मैं दिल्ली Antarvasna की रहने वाली हूँ और मैं ग्यारहवीं कक्षा की छात्रा हूँ! मेरी उम्र १८ साल है। मेरे पापा और मम्मी दोनों ही नौकरी करते हैं, एक बहु-राष्ट्रीय कंपनी में बहुत ऊँचे पद पर हैं! पर उनके पास मेरे लिए बिलकुल भी समय नहीं है! क्योंकि शायद मैं गोद ली हुई हूँ इसलिए !
और बाद में उन को एक लड़का हो गया, इसलिए अब वो मुझे बोझ समझते हैं! उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता, मैं घर आऊँ या ना आऊँ. . . . बस समाज को दिखाने के लिए मुझे रखना मजबूरी है उनकी !
खैर अब मैं भी सब समझती हूँ और उनकी परवाह नहीं करती ! अब मैं भी जिन्दगी के मज़े लेती हूँ!
मेरा कद ५ फीट ३ इंच, मेरा फिगर बड़ा ही सेक्सी है! गोल और कसी हुई चूचियाँ जो ज्यादा बड़ी नहीं पर मस्त दिखती हैं ! चूत मैं हमेशा साफ़ ही रखती हूँ! क्या पता कहाँ कोई लण्ड मिल जाये….. रंग मेरा ऐसा जैसे कि दूध में गुलाब डाल दिया हो! मैं भी एकदम बिंदास रहती हूँ!
मेरा २-३ लड़कों से शारीरिक रिश्ता भी रह चुका है जो मेरी माँ की रिश्ते में ही हैं.. शायद कम उम्र में ही सेक्स करने से अब मुझे लण्ड बहुत अच्छे लगने लगे हैं! लण्ड के बारे में सोचते ही मेरी चूत में पानी आने लगता है!
अब मैं अपनी कहानी बताती हूँ! मैं रोज सुबह बस से स्कूल जाती थी और शाम को वापिस आती थी! कई बार शाम को थोड़ा लेट हो जाती थी! क्योंकि मेरा घर पर मन ही नहीं लगता था! आप तो जानते ही हैं कि दिल्ली की बसों में कितनी भीड़ रहती है! पर मैं पहले स्टाप से ही बैठती हूँ सो सीट मिल जाती है!
यह एक साल पहले की बात है, ऐसे ही एक दिन मैं बस में जा रही थी! बस में बहुत भीड़ थी! मेरे पास ही एक बड़ी उम्र का आदमी धोती कुर्ता पहने खड़ा था! कद करीब ५ फीट १० इंच होगा! रंग थोड़ा सावंला पर था हट्टा कट्टा ! बड़ी रौबदार मूछें !
मैंने सामने वाली सीट को हाथ से पकड़ा था इसलिए शायद गलती से मेरा हाथ उसके लण्ड से लग गया था, मुझे अच्छा लगा। बस फिर मेरा तो पूरा ध्यान ही वहीं अटक गया! वो बेचारा पीछे हटने की कोशिश करता हर बार! मुझे मज़ा आने लगा, और थोड़ी हंसी भी आ रही थी! मैं अब मज़े लेने के मूड में आ गई थी!
मैंने पूरी बस में देखा- आस पास सभी औरतें ही थी, बहुत भीड़ थी, शायद सभी के पास आज सामान कुछ ज्यादा ही था! मेरे बाजू वाली सीट पर एक लड़की बहुत सारा सामान ले कर बैठी थी!
मैंने अपना बैग अपनी टांगों पे रख लिया! अ़ब मैं आगे झुक के सोने का नाटक करने लगी और हाथ को आगे वाली सीट के पाइप पे रख के जरा बाहर निकाल लिया, पर वो थोड़ा पीछे हो गया! पर झटकों से कभी कभी उसका लण्ड मेरी उंगलियों से छू जाता था!
अब मुझे मज़ा आने लगा.. मेरी चूत में खुजली होने लगी थी! मैंने नीचे ही नीचे अपनी शर्ट के ऊपर के बटन खोल लिए ओर पीछे हो कर बैठ गई!
अब ऊपर से मेरी सफ़ेद ब्रा और गोल गोल चूचियां साफ़ दिख रही थी! मैंने अपने बैग को पेट से चिपका लिया ताकि मेरी चूचियां थोड़ी और ऊपर उठ जाएँ और बाहर ज्यादा नज़ारा दिख सके.. मैं नोट कर रही थी कि वो आदमी मुझे देख रहा है पर जब भी मैं ऊपर देखती हूँ तो वो नज़रें घूमा लेता है! शायद उसे अपनी बड़ी उम्र का अहसाह था!
पर मुझे तो मस्ती सूझ रही थी! मुझे और शरारत सूझी और मैं बाहर स्टैंड देखने के लिए थोड़ा उठी और चुपके से साइड से अपनी स्कर्ट सीट के पीछे अटका दी और बैठ गई! जैसे ही मैं बैठी, मेरी स्कर्ट ऊपर उठ गई और मेरी पैंटी दिखने लगी, जो कि बहुत पतली थी! पैंटी में से मेरे चूत के होंट साफ़ दिखाई देते थे!
मैं झट से दोबारा उठी और स्कर्ट ठीक कर के बैठ गई, जैसे गलती से स्कर्ट अटक गई हो.. पर जो मैं दिखाना चाहती थी, वो उस आदमी ने देख लिया था!
मैंने उपर देखा और हल्के से मुस्करा दी! मैंने महसूस किया कि उस आदमी का लण्ड टाइट होने लगा था। वो अब भी कुछ शरमा रहा था पर मैंने हाथ को सामने वाली सीट पे ही लगा के रखा था! जब भी कोई उतरता था तो उसे आगे होना पड़ता था ओर मेरा हाथ उसके लण्ड से छू जाता था!
तभी बस में और भीड़ चढ़ गई! अब तो बस खचखच भरी थी! तभी मैंने देखा के पास में एक औरत सामान के साथ खड़ी थी! मुझे एक आइडिया आया और मैंने उसे अपनी सीट दे दी! अब मैं उस आदमी के सामने खड़ी हो गई! मेरी सीट पे वो औरत बैठ गई, उसकी गोद में सामान था और उसने मेरा बैग भी अपनी गोद में रख लिया था! बस फिर चल पड़ी!
अब मेरा ध्यान उस आदमी के लण्ड पे था! मुझे उस आदमी का लण्ड अपनी गांड के थोड़ा ऊपर महसूस हो रहा था! मैंने एड़ियों को थोड़ा ऊपर उठा लिया ताकि लण्ड मेरी गांड की दरार में लग जाये! वाह… क्या लण्ड था उसका!
मैं उसके लण्ड का जायजा लेने लगी..जिससे मेरी चूत में पानी आने लगा था! पर वो आदमी कोई हरकत नहीं कर रहा था! अब मुझे उस पे गुस्सा आ रहा था! अ़ब मैं काफी गरम हो चुकी थी!
तब मैंने थोड़ी हिम्मत करके हाथ धीरे से पीछे ले जाकर उसके लण्ड को छुआ! मैं उसे सहलाने लगी जिससे वो और कड़क हो गया! मुझे मज़ा आने लगा। मैं उसके लण्ड को हल्के- हल्के से सहला रही थी, पर तभी उसने मेरा हाथ अपने लण्ड से हटा दिया! मैंने पीछे मुड़ के देखा, वो चुपचाप था पर आगे की ओर आ गया था! अब वो अपना लण्ड मेरी गांड की दरार में दबा रहा था! मुझे खुशी हुई कि वो अब मेरा साथ दे रहा था!
मेरी स्कर्ट में साइड में चैन थी! सो मैंने धीरे धीरे स्कर्ट घुमाना शुरु कर दिया! मैं साथ साथ बस में भी नज़र मार रही थी कि कोई देख तो नहीं रहा है! पर शायद भीड़ होने की वज़ह से कोई नहीं देख पा रहा था!
अब मेरी स्कर्ट की जिप पीछे थी जो मैं पहले ही खोल चुकी थी! उसका लण्ड अ़ब मैं और अच्छे से महसूस कर सकती थी! कुछ देर ऐसे ही चलता रहा, हर झटके के साथ वो अपने लण्ड का दबाव और बढ़ा देता! मुझे मज़ा आ रहा था! मैंने पीछे मुड़ के देखा पर वो ऐसे देख रहा था जैसे कुछ हो ही नहीं रहा था!
मैं अ़ब और आगे बढ़ना चाहती थी, इसलिए अ़ब मैंने पीछे हाथ कर के उसकी धोती में हाथ डाल दिया और उसके लण्ड को बाहर निकालना चाहा पर उसने मेरा हाथ झटक दिया! मैंने उसकी ओर देखा, वो हल्के से मुस्कराया और उसने बस में होने का अहसास कराया!
मैंने धीरे से पीछे हट के उसके कान में कहा,”इतनी भीड़ में कोई नहीं देख रहा, अभी भीड़ कम नहीं होगी बल्कि और बढ़ेगी, मैं रोज़ इसी बस मैं जाती हूँ, तुम बस मज़ा लो !”
और मैं उसकी तरफ मुस्करा दी.. जवाब में उसने भी एक प्यारी से मुस्कराहट दी.. .
वो थोड़ा शरमाया और ऐसे ही लण्ड को दबाता रहा! मैंने सोचा- चलो कोई नहीं ! इतना मज़ा तो आ रहा है! पर थोड़ी देर बाद मैंने महसूस किया कि वो अपनी धोती में हाथ डाल रहा है! तभी मैंने अपनी पैंटी पे उसका लण्ड उठा हुआ महसूस किया! मैं फिर से ऊपर उठ गई ताकि लण्ड मेरी गांड की दरार में लग जाये! मैं बार बार ऊपर उठ रही थी, यह बात उसने भांप ली, सो उसने मेरी एड़ियों के नीचे अपने पैर लगा दिए, जिससे वो मेरे और पास आ गया और मैं ऊपर उठ गई!
मैंने आगे देखा तो मेरे सामने सामान ही सामान था, मैंने चुपके से अपनी स्कर्ट ऊपर उठानी शुरु कर दी पर एक लिमिट से ज्यादा नहीं उठा सकती थी, नहीं तो किसी को पता चल जाता! इसलिए स्कर्ट को वापिस नीचे ही कर दिया! पर मेरा मन तो पूरे मज़े लेने का था!
मैं थोड़ा आगे की तरफ हो गई ताकि उसके और मेरे बीच कुछ गैप बन जाए। मैंने अपनी टांगो को थोड़ा फैला लिया! अब मैंने पीछे हाथ ले जा कर उसके लण्ड को अपने स्कर्ट की जिप से दोनों टांगो के बीच में फंसा लिया! यार क्या गरम लण्ड था…….स्स्स्स्स्स्स्स्स्स……म्मम्मम………..
मैं उसका लण्ड अपनी दोनों टांगो पे महसूस कर रही थी! ऐसा लगता था कि मैं किसी बड़ी मोटी गरम रॉड पे बठी हूँ! मैंने अपनी गाण्ड थोड़ा पीछे धकेल दी और वो भी थोड़ा आगे आ गया! उसका लण्ड मेरी टांगों पे रगड़ता हुआ आगे आ गया! अब उसके लण्ड का आगे वाले हिस्से का उभार स्किर्ट पे आगे की साइड दिख रहा था, इसलिए मैं थोड़ा आगे झुक गई ताकि स्कर्ट ऊपर उठ जाये!
“म्मम्मम्म………
उसका गरम लण्ड मैंने टांगों के बीच दबा रखा था जो कि हर झटके में आगे पीछे हो रहा था! एक तरह से वो मेरी टांगों को चोद रहा था, मेरी पैंटी पूरी गीली हो चुकी थी! मेरा मन हो रहा था कि अपनी पैंटी को हाथ डाल के हटा दूँ ताकि उसके लण्ड की गर्मी अपनी चूत पर महसूस कर सकूँ! पर शायद बस में यह नहीं हो सकता था!
मैं पीछे मुड़ी और उसके कान में धीरे से कहा,” अपने हाथ से मेरी पैंटी साइड में कर दो प्लीज़…!” और वापिस आगे देखने लगी।
उसने अपना हाथ नीचे ले जाकर स्कर्ट की जिप से २ उँगलियाँ अंदर डाली ओर मेरी पैंटी को साइड में कर दिया!
मैं तो जैसे ……… अपने होश ही खो बैठी थी! उसका गरम लण्ड मेरी चूत पे लगा हुआ था। अब उसका लण्ड मेरी चूत पे रगड़ खा रहा था, शायद चूत के पानी की वज़ह से जो मेरी टांगों तक आ गया था, वो अ़ब आराम से आगे पीछे जा रहा था! मेरी आँखे बंद हो रही थी!
मेरा चेहरा लाल हो गया था पर मैं सामान्य दिखने की कोशिश कर रही थी! मैंने आस पास देखा पर कोई भी हमारी तरफ नहीं देख रहा था! बस के हर झटके के साथ वो मेरी टांगों में झटके मार रहा था! उसका गरम लण्ड जब भी आगे या पीछे होता मेरी चूत में आग बढ़ जाती!
तभी एक तेज़ झटका लगा और उसका लण्ड पीछे चला गया, आगे से मेरी पैंटी थोड़ा अपनी जगह पर वापिस आ गई! जब उसने लण्ड वापिस आगे किया तो वो मेरी पैंटी में चला गया म्म्म्म्म्म्म्म………………………………..
अब उसका लण्ड मेरी पैंटी में था और चूत के होठों के बीच में ….. ऊपर नीचे हो रहा था……….! मुझे और मज़ा आने लगा, … और मैंने एड़ियों को और ऊपर उठा लिया। शायद उसे भी मज़ा आ रहा था इसलिए उसने झटके बढ़ा दिए। तभी बस रेड लाइट पे रूक गई और झटके बंद हो गए! मैंने पेट के नीचे खुजली करने के बहाने से हाथ स्कर्ट पे ले जा के उसके लण्ड के सुपाड़े को मसलने लगी! मैंने पीछे मुड़ के देखा तो उसका पूरा चेहरा पसीने से गीला हो गया था!
तभी बस चल पड़ी पर मेरे मसलने से शायद वो झड़ने वाला था। अब मैं भी अपनी गाण्ड को हल्के हल्के ऊपर नीचे करने लगी! स्स्स्स्स्स्स्स्स्श्ह्ह्ह्ह्ह्ह्छ मज़ा बढ़ने लगा था… मेरी चूत में कैसे खलबली मच गई थी…… तभी मैंने एड़ियों को ऊपर उठा लिया और मेरा शरीर टाइट हो गया !
मैं …..में…….झड़ने वाली थी, और ….औ ..औम्मम्मम… औ..आह्ह्ह्छ ….. में उसके ऊपर झड़ गई और मेरा सारा जूस उसके लण्ड पे आ गया! और मैं ढीली होती चली गई! उसने भी एक दो झटके लगाये और सारा वीर्य मेरी पैंटी में छोड़ दिया, जिसे में अपनी जांघों तक महसूस कर रही थी!
२-३ मिनट तक हम ऐसे ही रहे और फ़िर वो अपना लण्ड बाहर निकलने लगा। मैंने अपना हाथ पीछे लगा लिया ताकि उसके वीर्य से मेरी स्कर्ट ख़राब न हो! सारा वीर्य मैंने अपने हाथ से पौंछ लिया और उसने अपना लण्ड वापिस अपनी धोती में कर लिया! तभी एक स्टाप आया और मैं उतर गई, पता चला कि ४ स्टाप आगे आ गई हूँ पर इस स्टाप पे ज्यादा लोग नहीं होते क्योंकि यह दिल्ली का बाहरी इलाका था,
और आज तो ये स्टाप बिल्कुल खाली था, पता नहीं क्यों… शायद हमारी किस्मत………
वो आदमी भी वहीं उतर गया! मैंने इधर उधर देखा, फिर उसकी तरफ देख के अपने हाथों को चूसने लगी चाट -चाट के सारा हाथ साफ़ कर लिया!
तब थोड़ी देर बात करने के बाद उसने बताया कि वो यहाँ से ८० किलोमीटर दूर गाँव में रहता है, यहाँ अपने बेटे के पास आया है, पूरा दिन खाली रहता है इसलिए सोचा आज एक दोस्त से मिल आऊँ, उसका नाम महादेव सिंह है।
मेरा भी स्कूल मिस हो गया था सो हम बस स्टाप के साथ में बने पार्क में गए और एक पेड़ों से घिरी जगह बैठ गए! वहाँ पहले तो मैंने अपनी पैंटी में हाथ डाल के सारा वीर्य हाथों से साफ़ किया और हाथों को चटकारे ले ले कर चूसना शुरु कर दिया..! पर किसी के आने की आहट से हम सतर्क हो गए, वहाँ पार्क में कुछ दूर कुछ लोग आ के बैठ गए थे और शायद उनका लम्बे समय तक बैठने का कार्यक्रम था!
इसलिए हम कल फिर वहीं मिलने का वादा कर के वापिस चल पड़े क्योंकि उसे भी कुछ जल्दी थी! वो शायद अपने दोस्त के घर के लिए चला गया और मैं अपनी बस की प्रतीक्षा करने लगी..
और बस पकड़ के अपने घर आ गई………………….
आगे क्या हुआ बाद में…. Antarvasna
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