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Hindi Porn Stories

जून 2006 की बात है जब Hindi Porn Stories मैं क्लास 12वीं में दिल्ली में पढ़ता था और दोस्तों से ढेर सारे किस्से सुनता था। कुछ दोस्तों की गर्ल-फ्रेंड थी और वो उनके मुम्मे दबाते थे या उनकी किस लिया करते थे। मुझे भी यह सब सुन कर बहुत ज़रुरत महसूस होती थी कि मैं भी किसी लड़की के साथ वो सब करूं। मैं मुठ तो मारता ही था तो शरीर की ज़रूरत तो पूरी हो जाती थी पर हमेशा एक जिज्ञासा बनी रही कि किसी लड़की के साथ वो सब करके कैसा लगेगा।

मेरे एक चाचा हैं जिनकी लड़की सीमा मेरी हम उम्र है और लड़का सोनू मुझ से 4 साल छोटा है। वो लोग जींद में रहते थे और अक्सर छुट्टियों में हम उनके घर जाते थे या फिर वो सब लोग हमारे घर आ जाते थे। गर्मियों की छुट्टियों में भी ऐसा ही होता था। चाचा ज्यादातर 2-3 दिन रूककर वापिस चले जाते थे और चाची, सोनू और सीमा हमारे साथ 3-4 हफ्ते बिताते थे। ऐसा काफी सालों से चल रहा था और हम सब आपस में बहुत घुल मिल गए थे।

यह बात 2006 की जून की हे। चाची विथ फॅमिली हमारे घर आई हुई थी। मैं सीमा से पूरे 2 साल के बाद मिल रहा था। मैंने नोटिस किया की वोह अब बड़ी हो गयी थी और उसके मम्मे भी बड़े साइज़ के हो गए थे। लेकिन मेरे मन में कोई बुरा विचार नहीं था। फिर भी मैं थोडा हैरान था कि 2 साल में उसके मम्मे कहाँ से आ गए।

पहले 2-3 दिन तो हम सब खेलते रहे- मोनोपोली, ताश, लूडो, लुका-छिपी वगैरह। हमारे घर के सामने कुछ नए गवर्नमेंट मकान बन रहे थे। लुका छिपी खेलते हुए हम लोग अक्सर उन्हीं मकानों में छुप जाते थे। वहाँ कुछ घर पूरे बन गए थे और कुछ आधे! किसी भी कमरे में दरवाज़े नहीं लगे थे तो खेलना आसान था। तो हम लोग कभी किसी स्टोर-रूम में, तो कभी किसी टंकी के पीछे, तो कभी दीवारें टाप कर खुद तो आउट होने से बचाते थे।

ऐसे ही एक दिन शाम को हम सब कालोनी के बच्चे लुका-छिपी खेल रहे थे। सीमा और मैं योजना बना कर के खेलते थे ताकि हम पकड़े न जाएँ। वो और मैं एक छोटे स्टोर रूम में छुप गए। वो स्टोर रूम एल आकार का था और हम उसके छोटे वाले कोने में थे। अचानक मैंने देखा कि जिस लड़के की बारी थी वो हमारी ही तरफ आ रहा था। मैं छुपने के लिए और साइड पे हो गया। मैंने इशारे से सीमा को बता दिया कि वो इसी तरफ आ रहा था। वो भी सांस खींच कर अन्दर को हो गई। मैं भी और पीछे होने लगा और अब मेरी कोहनी और हाथ उसकी साइड बॉडी से छू रहा था। मेरी बाजू को कुछ नर्म नर्म सा लगा और मुझे जानते हुए समय नहीं लगा कि उसके मम्मे मेरे हाथ से दब रहे हैं। उसने कुछ नहीं कहा और मैं भी ऐसे ही खड़ा रहा। वो लड़का कोई दो मिनट आस पास घूम कर चला गया पर उसे हम नहीं दिखे।

वो तो चला गया लेकिन मैंने अपनी जगह नहीं बदली। मैं उसके साथ ही चिपका रहा। मेरा दिमाग सुन्न हो गया था। मुझे समझ नहीं आ रहा था कि मैं क्या करूँ। कुछ 5 मिनट के बाद मैंने कहा- लगता है कि अब वोह लड़का चला गया है। यह कह कर मैं बाहर आ गया। मैं सीमा से नज़र नहीं मिला रहा था क्योंकि मुझे लगा कि कहीं वो मेरी हालत समझ न जाए।

रात को मुझे नींद नहीं आई। बार बार वही नर्म-नर्म स्पर्श का ख्याल आ रहा था। बिलकुल अजीब सा अहसास था।

2-3 दिन ऐसे ही निकल गए और कुछ ख़ास नहीं हुआ। फिर एक रोज़ सीमा नहा रही थी और मेरी मेरी मम्मी और चाची बोली- हम ज़रा मार्केट जा रहे हैं।

सोनू जिद करने लगा कि मैं भी साथ जाऊँगा तो चाची ने उसे भी ले लिया। वो तीन घंटे से पहले नहीं आने वाले थे। अब मैं घर पे अकेला ही था और सीमा बाथरूम में नहा रही थी। उसे नहाने में पूरा एक घंटा लगता है। मैं बोर हो रहा था तो मैंने सीमा को बोला- मैं ज़रा अपने दोस्त के घर जा रहा हूँ और एक घंटे तक आऊँगा। बाहर से ताला लगा दूंगा। सीमा बाथरूम से ही चिल्ला कर बोली- ठीक है।

मैं अपने पड़ोस के दोस्त के घर गया पर उनके यहाँ ताला लगा हुआ था। मैं वापिस आ गया और कमरे में आकर लेट गया। सीमा दूसरे कमरे के बाथरूम में नहा रही थी और उस कमरे का दरवाजा खुला था। मेरे कमरे से ऐसा एंगल था कि मैं बाथरूम से निकलते हुए सीमा को देख सकता था। मैंने चादर ले रखी थी और आँखें आधी बंद थी तो ऐसा ही लगता था कि मैं सो रहा हूँ।

कुछ 20 मिनट बाद मैंने देखा कि सीमा ने बाथरूम का दरवाजा खोला। उनसे केवल ब्रा और पैंटी ही पहन रखी थी। उसने सोचा होगा कि कोई घर पर हैं नहीं तो सूट बाहर आकर पहन लेती हूँ। उसको ऐसा देख कर मेरा तो दिमाग हिल गया। मैं उसी पोजिशन में लेटा रहा ताकि उसे शक न जो जाए। सीमा ने मुझे लेटा देखा तो अचानक सकपका गई पर जब उसने देखा कि मैं सो रहा हूँ तो उसने दरवाजा बंद किया और अपना सूट पहन लिया। मैंने ज़िन्दगी में पहली बार किसी लड़की को इस रूप में देखा था।

उस रात फिर मुझे नींद नहीं आई और मैंने रात को उठ कर दो बार मुठ मारी। मेरे ख्याल में सीमा की नंगी काया ही थी। अगले पूरे दिन उसकी लम्बी टांगें और गोल-गोल मम्मे मेरी आँखों में घूम रहे थे। मैं सीमा को देख रहा था और उसके कपड़ों के ऊपर से ही उसके मम्मे और टांगों का नज़ारा ले रहा था।

शनिवार को हमारे घर मेरे मामा अपनी पूरी फॅमिली के साथ आ गए। उनके 3 बच्चे थे जो तक़रीबन हमारी ही उम्र के थे। मामा सपरिवार सिंगापुर जा रहे थे और उन्हें सोमवार को जाना था। वो दो रात को हमारे ही घर रुकने वाले थे। सोने के लिए यह फ़ैसला हुआ कि सब बच्चे ड्राइंग रूम में ही सोयेंगे। ड्राइंग रूम में एक बड़ा कूलर लगा हुआ था। हम सब बच्चे रात को 12 बजे तक खेल कर सो गए।

सीमा बिल्कुल कूलर के पास में सोई थी और मैं उसके साथ, फिर सोनू और फिर 3 बच्चे। लेटते साथ ही सभी को नींद आ गई क्योंकि हमने पूरे दिन बहुत मस्ती की थी। रात को मैं बाथरूम करने के लिए गया। कमरे में बाहर से थोड़ी रौशनी आ रही थी और अन्दर की चीज़ें साफ़ दिख रही थी। मैंने लाइट नहीं जलाई और वैसे ही बाथरूम हो आया। जब मैं वापिस आया तो मैंने देखा कि सीमा की चादर एक साइड से पूरी उठी हुई थी। उसकी स्कर्ट भी ऊपर उठ गई थी और उसकी एक टांग पूरी नंगी थी। यह देख कर मेरा एक दम खड़ा हो गया। मैं उस के साइड पर लेट गया पर आँखों में नींद नहीं थी। मैं बार बार आँख खोल कर उसकी टांग देख रहा था। थोडी देर में मैंने लेटे ही लेटे हिम्मत कर के उसकी स्कर्ट और ऊपर कर दी और चुपचाप फिर आँख बंद कर ली। दो मिनट के बाद आँख खोली तो देखा कि स्कर्ट उठी हुई ही है और उसकी पैंटी दिख रही है। मैंने 4-5 मिनट तक यह नज़ारा लिया। आँखों से नींद कोसों दूर थी। अब मैं सोच रहा था कि और क्या कर सकता हूँ कि पकड़ा न जाऊँ और कुछ और दिख भी जाए।

मैं फिर लेट गया और धीरे से उसकी चादर ऊपर से भी हटाने लगा। मैं सोच रहा था कि अगर सीमा जाग गई तो मैं बिलकुल पत्थर की तरह लेटा रहूँगा और उसे लगेगा कि चादर खुद ही ऊपर हो गई। कुछ 5 मिनट में उसकी चादर पूरी उतर गई थी। सीमा की स्कर्ट पैंटी तक ऊपर थी और उसने बटन वाला टॉप डाल रखा था। मैं पूरा नज़ारा लेने के लिए चुपचाप उठा और बाथरूम की तरफ जा कर खड़ा हो गया।

सीमा की नंगी टांगें और पैंटी देख कर मेरी हालत ख़राब हो रही थी। मैंने मुठ मारी और कर वापिस लेट गया। आधे घंटे तक तो मन शांत रहा पर फिर सीमा के साथ कुछ करने की इच्छा हुई। मैंने देखा कि वो अभी भी उसी हालत में है- चादर उतरी हुई और स्कर्ट ऊपर चढ़ी हुई। मुझे इत्मिनान हुआ की सीमा बहुत पक्की नींद में है। मेरी हिम्मत और बढ़ गई। मैंने उसकी बटन वाली टॉप को देखा और उसका एक बटन खोल दिया। उसमे से उसके मम्मे की झलक दिखने लगी। मैंने हिम्मत कर के एक और बटन खोला और शर्ट साइड पर की, उसने ब्रा पहन रखी थी। अब पूरा एक मम्मा दिख रहा था। मेरा मन मम्मे को छूने का कर रहा था।

मेरी हिम्मत बढ़ती जा रही थी। मैंने एक और प्लान सोचा। मैंने उसका एक बटन बंद किया और लेट गया। फिर मैंने इस करवट लेते हुए अपना हाथ उसके मम्मे पे रख दिया, ताकि अगर सीमा की नींद खुले तो उसे लगे कि यह नींद में ही हुआ। मेरा हाथ उसके मम्मे पे था और ऐसा एहसास कि मानो जन्नत! मैं उस हालत में कुछ 30 मिनट पड़ा रहा। मैं हिल भी नहीं रहा था कि कहीं उसकी नींद न खुल जाए।

कुछ देर के बाद सीमा हिली। मैंने अपनी आँखें बंद कर रखी थी कि जैसे मैं सो रहा हूँ। सीमा ने मेरा हाथ अपने ऊपर से उठाया और करवट ले कर सो गई। मुझे डर लगा और मैं सो गया। कुछ 1 घंटे बाद मैंने फिर वही प्लान आजमाया और करवट लेते हुए अपना हाथ उसके मम्मे पे रख दिया। अब की बार उधर से कोई हरकत नहीं हुई और मैंने खुद ही लगभग एक घंटे बाद हाथ हटा लिया क्योंकि सवेरा होने को था।

सुबह मैं सबसे लेट उठा और मैंने देखा कि सब उठ चुके हैं। मैं सीमा से बच रहा था और काफी डरा भी हुआ था कि रात वाली बात का कोई उल्टा असर न हो। नाश्ते की टेबल पे वो आमने सामने हो गई और बोली- तुम इतने चुप चुप क्यों हो।

मैं- ऐसे ही! बोल के उठ गया।

नहाते हुए मैं सोचने लगा कि शायद सीमा जाग रही हो और चुपचाप सोने का नाटक कर रही हो। खैर पूरा दिन हम सब बच्चे मस्ती करते रहे और रात को फिर सोने की बारी आई। सीमा बोली कि चलो सब लोग अपनी अपनी कल वाली पोजिशन पर सो जाओ। मेरे मन में लड्डू फूट रहे थे। इसका मतलब कल रात जो भी हुआ उसमें सीमा को भी मज़ा आया।

मैं चुपचाप आ कर लेट गया और सब के सोने का इंतज़ार करने लगा। एक एक मिनट एक घंटे के सामान लग रहा था। आखिर आधे घंटे बाद मैंने करवट ली और हाथ सीमा के मम्मे पे।

वो कुछ नहीं बोली। मैंने हिम्मत करके उसके दो बटन खोले और हाथ अन्दर घुसा दिया। नंगे मम्मे का एहसास कुछ और ही था। मैं धीरे धीरे मम्मे दबाने लगा क्योंकि मुझे मालूम था की सीमा को कोई ऐतराज़ नहीं। थोड़ी देर बाद मैंने दूसरा हाथ उसकी टांग पे रख दिया। मैंने दोनों हाथ धीरे धीरे फेर रहा था। सीमा की साँसे तेज़ चल रही थी और मैं महसूस कर रहा था। मैंने थोड़ी और हिम्मत कर के अपने होंठ उसके गालों को छू दिए। सीमा की तरफ से कुछ नहीं हुआ।

मैं समझ गया कि कोई प्रॉब्लम नहीं। अब मैंने अपने होंठ उसके होंठ पे रख दिए- ऐसा लगा जैसे करंट लग गया हो। सीमा भी थोड़ा सा कसमसाई। मैं कुछ 2-3 मिनट उसके होठों से चिपका रहा। अब मन कुछ और भी करने को हो रहा था। मैंने अपना एक हाथ उसकी पैंटी में डाल दिया। उँगलियों से मैं पैंटी के अन्दर टटोलने लगा। मुझे कुछ अंदाजा नहीं था कि क्या होगा। मैं बस उँगलियों से इधर उधर टटोल रहा था। अचानक कुछ गीला गीला लगा। मैं उस जगह ही मसलता रहा। मैंने अपनी आँखें खोल रखी थी लेकिन सीमा की आँख बंद थी। वो अभी भी सोने का नाटक कर रही थी। मैंने एक हाथ में अपना पकड़ा और एक हाथ से उसकी पैंटी और मम्मे मसलता रहा। बीच बीच में किस भी कर लेता था। आखिर में मैं जोरदार तरीके से झड़ गया। और यह हमारी शुरुआत थी। Hindi Porn Stories

मेरा नाम साधना है और मेरी उम्र 23 साल है. मैं दिल्ली की रहने वाली हूँ.

मैं अपने जिस्म की बात करूँ तो मेरे बूब्स 36 इंच के एकदम टाइट हैं, मेरी कमर 30 की है और गांड 38 इंच की है, जो चलते समय बहुत मटकती है.
मेरा जिस्म किसी पेप्सी की 300 एमएल की बोतल के जैसे है.

ये सेक्स कहानी मेरी और मेरे ब्वॉयफ्रेंड की चुदाई की तो है ही, पर उसके बाद भी मैंने इसमें चुदाई की दुनिया के कुछ और सच भी उजागर किए हैं, उनका आनन्द लीजिए.

मेरे घर में मैं, मेरी मॉम, डैड और एक भाई है … जो मुझसे बड़ा है.
भाई की शादी हो चुकी है.

मेरी भाभी बहुत अच्छी हैं, वे मेरे साथ सहेली की तरह रहती हैं.

मैं एक कंपनी में जॉब करती हूँ और मेरा ब्वॉयफ्रेंड मेरे ऑफिस की सामने वाली बिल्डिंग में जॉब करता है.

हमेशा की तरह मैं सुबह तैयार होकर लैगिंग्स और टॉप पहन कर अपने घर से निकली.

घर से बाहर निकल कर कुछ ही दूर मुझे मेरा ब्वॉयफ्रेंड अपनी कार से लेने आया हुआ था.
वह रोज ही आ जाता था और हम दोनों साथ में ऑफिस जाते थे.

हम दोनों ऑफिस के लिए निकल गए.
थोड़ी ही देर में हम ऑफिस पहुंच गए.

अपनी टेबल पर आकर मैं अपना काम करने लगी.

मैं अपना काम कर रही थी कि तभी मेरा बॉस मेरे पास आया और उसने मुझसे अपने केबिन में आने के लिए कहा.

मैं कुछ पल बाद उनके केबिन में गई और मैंने बाहर से ही उनसे अन्दर आने की आज्ञा मांगी.
उन्होंने सर हिला कर अन्दर आने का इशारा कर दिया.

मैं अन्दर गई और उनसे पूछा कि क्या बात है सर?
उन्होंने मुझे एक नए प्रोजेक्ट के बारे में बताया और कहा- ये प्रोजेक्ट तुम्हें पूरा करना है.

मैंने ‘ओके सर’ बोल कर पेपर्स ले लिए और बाहर आ गई.

अब मैंने उस प्रोजेक्ट पर काम करना शुरू कर दिया.

काम करते करते दो बज गए.

मैं काम रोक कर लंच करने चली गई.
हमारा एक घंटे का लंच होता है.

मैं दस मिनट में खाना खाकर बाहर निकली और तभी ब्वॉयफ्रेंड की कॉल आ गई.

मैंने कॉल उठाई तो उसने कहा- जहां हम मिलते हैं, वहां आ जाओ.
मैं कॉल कट करके वहां जाने लगी.

मैं वहां पहुंच कर अपने ब्वॉयफ्रेंड से मिली.
हमने साथ में सिगरेट पी और फिर हम दोनों घूमने निकल गए.

मेरे ब्वॉयफ्रेंड के ऑफिस से थोड़ी ही दूर पर एक टॉयलेट है, जो हमेशा खाली रहता है.
वहां कोई नहीं आता है.

हम दोनों घूम ही रहे थे कि उसने मुझसे कहा- चलो ना बेबी, आज इसके अन्दर चलते हैं.
मैंने उसे मना किया पर वह जिद करने लगा.

उसकी काफी जिद के बाद मैं उसके साथ जाने को रेडी हो गई.

हम दोनों अन्दर गए.
वहां हम दोनों एक खाली वाशरूम में घुस गए.

उसने डोर लॉक किया और मुझसे लिपट कर मुझे चूमने लगा.
मैं एक Xxx लड़की हूँ, उसका साथ देने लगी.

चूमते चूमते उसने मेरा टॉप उतार दिया और मैंने उसकी शर्ट के बटन खोल दिए.

उसने मुझे दीवार से चिपकाया और मेरी ब्रा के हुक खोल कर उतार कर एक तरफ लटका दी.
अब वह मेरे मोटे मोटे बूब्स पर टूट पड़ा.

मैं उसके बाल सहलाने लगी और एक हाथ से उसके पैंट की जिप खोल कर उसका लंड बाहर निकाल कर हिलाने लगी.

वह पागलों की तरह मेरे बूब्स चूस रहा था.
कभी वह निप्पल पर काट लेता तो कभी दूध को पूरा मुँह में भरने की कोशिश करने लगता.

मैं भी वासना में मदहोश हो गई और कामुक सिसकारियां लेती हुई जोर जोर से उसका लंड हिला रही थी- उम्म्म्म सीसीई आह अह्ह्ह्ह ओह गॉड बेबी … खा जाओ … इन्हें चूसो!

थोड़ी देर बाद वह मुझसे अलग हुआ और उसने नीचे बैठने को कहा.

मैं झट से नीचे बैठ गई और उसका लंड हाथ में पकड़ कर सहलाने लगी, उसके पूरे लंड पर जीभ फिराने लगी.

‘उम्म्म उम्मम्म आह बेबी…’ वह पागल होने लगा और मेरे बाल पकड़ सहलाता हुआ सिसकारियां भरने लगा.
‘आह्ह्हह साधना चूसो बेबी … ओह तुम कितना मस्त लंड से खेलती हो यार!’

उसके लंड को जीभ से चाटने के बाद एक ही झटके में मैंने उसका पूरा लंड मुँह में भर लिया और तेज तेज चूसने लगी.
‘ऑव्व गुओ गुओ गाफ़ गाफ़ ग्लो ग्लो …’

वह भी मेरे बालों को पकड़ कर तेज तेज झटके देने लगा.
पांच मिनट तक ऐसे ही लंड चूसने के बाद उसने मुझे खड़ा कर दिया.

मैं वहीं दीवार पर हाथ रख कर घोड़ी बन गई और वह मेरे पीछे आ गया.
उसने तुरंत मेरी लैगी खींच कर घुटनों तक उतार दी और पैंटी भी नीचे कर दी.

अब उसने मेरी चूत पर अपना लंड रखा और जोर जोर से रगड़ने लगा.
मैं Xxx लड़की मचलने लगी- सी सी आआह बेबी प्लीज डाल दो ना!

मुझे ऐसे तड़पती हुई देख उसने मेरी कमर पकड़ी और पूरी दम से एक झटका लगा कर लंड चूत में घुसा दिया.
मैं चिल्ला पड़ी- आआहह आह आह्ह मेरी चूत फट गई … मैं तुमसे कहती हूँ ना कि पहले मेरी चूत चाट लिया करो!

उसने लंड दबाते हुए कहा- बाबू तुम्हें पता तो है कि मुझे उसे चाटना पसंद नहीं है.
वह मेरी कमर पकड़ कर लौड़े के झटके दिए जा रहा था.

थोड़ी देर बाद मुझे भी मजा आने लगा.
मैं अपनी गांड आगे पीछे करती हुई उसका साथ देने लगी- आह आआह आआह … फक चोदो चोदो मुझे … आह और तेज … और तेज बेबी आह्ह साले मां के लौड़े चोद मादरचोद मेरी चूत … साले बहन के लौड़े!

वह भी पूरे जोश में मेरी चूत में झटके देने लगा- आआआह आह आआ आह ले साली कुतिया रंडी साली … तू Xxx लड़की कितनी बड़ी रांड है मादरचोद पब्लिक टॉयलेट में मेरा लंड ले रही है छिनाल! कुतिया गंदा सेक्स कर रही है!

मैं भी गांड आगे पीछे करती हुई उसका पूरा साथ दे रही थी- आआ आह … आआह चोद … साले चोदता रहे साले … फाड़ दे मेरी चूत रंडी के जने!
हम दोनों चुदाई में मगन ऐसे ही सिसकारियां लेते हुए मजा लेने लगे.

फिर पांच मिनट बाद ही वह जोर जोर से झटके देता हुआ मेरी चूत में झड़ने लगा.
मैंने जैसे ही उसके माल का अहसास किया, अपने मुँह को पीछे करके उसे देखने लगी.

मैं गुस्से में बोली- बहन के लौड़े ने आज फिर इतनी जल्दी रस छोड़ दिया. साले … हरामी की औलाद … हमेशा तू ऐसे ही करता है!

उसने लंड झाड़ कर उसे चूत से बाहर निकाल लिया.

मैं झट से नीचे बैठी और उसका लंड मुँह में भर कर चूसने लगी.

‘आआह आआह साले इसे खड़ा कर भोसड़ी के … मेरी चूत की प्यास अभी नहीं बुझी … पहले मेरा पानी निकाल कुत्ते.’
मैं तेज तेज लंड को चूस रही थी.

तभी उसने लंड निकाल लिया और बोला- बेबी अब बस … अब ये खड़ा नहीं होगा.
इतना बोल उसने लंड चड्डी के अन्दर किया और पैंट पहनने लगा.

उसने पैंट के हुक लगा कर दरवाजा खोला और बोला- मैं जा रहा हूँ, तुम भी कपड़े पहन कर आ जाओ.
वह निकल गया.

मुझे उस पर बहुत गुस्सा आया.
वह हमेशा मुझे बिना झड़े छोड़ देता है.

मैंने दरवाजा बंद किया और अपनी चूत में तेज तेज उंगली करने लगी- आह आआअह आआआह मेरी चूत कोई चोदो … इसे शांत कर दो … आह!
मैं अपनी आंखें बंद किए हुई अपने मम्मों को मसलती हुई चूत में उंगली किए जा रही थी.

पांच मिनट के बाद मेरी जांघें कांपने लगीं और मैं जोर जोर से सिसकारियां लेती हुई झड़ने लगी.
मेरी चूत से पानी की धार बहने लगी.

‘आआअह आआअह ओह माय गॉड मेरी चूत … आह आआअह आआहह.’
मैं चिल्लाती हुई झड़ गई.

फिर मैंने अपनी चूत से उंगलियां निकालीं और उन्हें मुँह में लेकर चूसने लगी- उम्म्म्म उम्मम्म सो टेस्टी!

यही बुदबुदाती हुई मैंने खुद को साफ किया और कपड़े पहनने लगी.
फिर बाल ठीक करके लिपस्टिक लगाई और दरवाजा खोल कर बाहर आ गई.

जैसे ही मैं बाहर निकली, मैंने देखा कि एक काला सा आदमी गंदे फटे कपड़ों में खड़ा पेशाब कर रहा है.
वह एक भिखारी था.

मैं Xxx लड़की उसे देखने लगी.
वह अपनी आंखें बंद करके मस्ती से मूत रहा था.

मेरी नजर उसके लंड पर गई और मैं लंड देखती ही रह गई.
इतना बड़ा और इतना मोटा लंड … मैंने आज तक नहीं देखा था.

मेरी नजरें उसके लंड से हट ही नहीं रही थीं.
तभी उसने आंखें खोल दीं और मुझे लंड को घूरते हुए देख लिया.

वह दांत निकाल कर बोला- क्या चाहिए मैडम?
उसकी आवाज सुन कर मैं डर गई और वहां से तुरंत निकल गई.

मैं अपने ऑफिस में आ गई और प्रोजेक्ट पर काम करने लगी.

मुझे काम करते करते 5 बज गए.
मैंने अपने लिए एक कॉफी मगायी और तसल्ली से पी.

उस समय मेरे दिमाग में अपनी प्यासी चूत और उस भिखारी का मोटा लंड ही घूम रहा था.

कॉफी खत्म करके मैं दोबारा काम में लग गई.
धीरे धीरे स्टाफ जाने लगा.

मैंने घड़ी की तरफ देखा तो 7 बज चुके थे.
तब मैंने लैपटॉप बंद करके बैग में रखा और घर के लिए बाहर निकल गई.

बाहर आकर मैंने ब्वॉयफ्रेंड को कॉल की.
उसने कहा- मैं बस पांच मिनट में आ रहा हूँ.

मैं वहीं खड़ी हो गई और सिगरेट पीती हुई उसका इंतजार करने लगी.

करीब दस मिनट बाद ब्वॉयफ्रेंड आया.
मैं कार में बैठ गई और हम दोनों घर के लिए निकल गए.

आज मैं थका थका फील कर रही थी.
मेरी आंख लग गई और मैं सो गई.

पांच मिनट बाद मुझे ब्वॉयफ्रेंड ने उठाया और कहा- हम पहुंच गए बेबी.
मैं अपने अपार्टमेंट के बाहर पहुंच गई थी.

मैंने ब्वॉयफ्रेंड को हग किया और बाई बोल कर उतर कर घर आने लगी.

मैं घर पहुंची और डोर बेल बजाई.
मॉम ने दरवाजा खोला और बोली- अरे बेटी आ गई तू!

मैं हां कह कर अन्दर आई और अपने रूम में आकर बेड पर बैग फेंक कर सीधा बेड पर गिर गई.
मुझे कब नींद आ गई, मुझे पता ही नहीं चला.

मेरी आंख खुली जब मेरा दरवाजा खटखटाया गया.

मैंने आंखें खोलीं तो बाहर भाभी आवाज लगा रही थीं- साधना साढ़े आठ बज गए हैं, उठो खाना खाने आ जाओ.

इसका मतलब था कि मैं करीब आधा घंटा सो चुकी थी.
मैंने कहा- ओके भाभी, आती हूँ.

मैं अपने बेड से उठी और अपने सारे कपड़े उतार नंगी हो गई और शॉवर लेने चली गई.
मैं शॉवर के नीचे खड़ी होकर नहाने लगी और जल्दी से नहा कर बाहर आ गई.

फिर बिना ब्रा पैंटी के एक शॉर्ट्स और टी-शर्ट डाल कर बाहर आ गई.
बाहर देखा तो सब डिनर टेबल पर बैठे थे.

मैं अपनी जगह पर जाकर बैठ गई.

भाभी ने मुझे खाना सर्व किया और मैं खाना खाने लगी.

थोड़ी देर में ही मैंने खाना खत्म किया और उठ कर अपने कमरे में आ गई.

हाय दोस्तो, मैं शाहिद… Sex Stories

मैं एक बार फिर आप लोगों के Sex Stories सामने आया हूँ अपनी नई कहानी के साथ। मेरी पहले की कहानी कुंवारी छोकरी
और
विदेशी माल
को आप लोगों ने बहुत पसंद किया, उससे मुझे बहुत ख़ुशी हुई। आशा है आप लोग मेरी यह कहानी भी पसंद करेंगे। तो सभी लड़कियों और लड़कों से कहना है कि अपने-अपने औजार संभाल लें क्योंकि मैं कहानी शुरू करता हूँ।

दो महीने पहले की बात है जब मेरे इलाके में कोई सरकारी टीचर अपने परिवार के साथ रहने आये। सब उन्हें मिश्रा जी कहते थे। उनके परिवार में उनकी पत्नी और उनकी एक बेटी थी।

हम सब दोस्त अपने घर के बाहर बाते कर रहे थे कि अचानक मिश्राजी ने हम सभी को सामान घर के अन्दर रखने के लिए मदद मांगी। हम सबने जाकर उनकी मदद की।

जब वापस आ रहे थे तो उनकी बेटी ने मुझे कुछ अलग नजरों से देखा तो मैं समझ गया कि वह मुझ पर फिदा हो गई है। पर मैंने उस पर ध्यान नहीं दिया। अब जब भी मैं घर के बाहर रहता तो वह मुझे देखकर मुस्कुराती रहती, मैं अनदेखा कर देता। आप सभी लोग सोच रहे होंगे कि मैं ऐसा क्यों करता था। उसकी वजह थी उसका रंग। वह बिल्कुल काली थी। उसका नाम सोनी था। ( बदला हुआ नाम )

अब मैं उसके बारे में बताता हूँ की वह कैसी थी। वह बिल्कुल काली थी पर उसकी फिगर बहुत ही सेक्सी थी। उसकी उम्र 18 साल की होगी। उसकी चूची ज्यादा बड़ी नहीं थी। यह सब कुछ दिनों तक चला तो दोस्तों ने मुझे चिड़ाना शुरू कर दिया था। मैंने उन्हें बताया कि ऐसा कुछ नहीं है तो दोस्तों ने कहा कि उससे तुझे क्या लेना है, अगर वह आती है तो आने दो! काम होने पर चलता करना!

मुझे उनकी बातें शुरू में अच्छी नहीं लगी फिर मैंने सोचा कि इसमें हर्ज़ ही क्या है। मैंने भी दाना डालना शुरू कर दिया। यह सब देख कर उसे बहुत अच्छा लग रहा था। यह सब कुछ दिनों तक चला तो मेरे दोस्तों ने मुझसे पूछना शुरू कर दिया कि कुछ किया भी या ऐसे ही चल रहा है। उन्होंने कहा कि कुछ कर यार।

बातों ही बातों में एक बार सोनी ने बताया कि मैं दो बार चुदवा चुकी हूँ।

मैंने कहा- तब मुझे कब खिला रही हो?

उसने कहा- चार दिन बाद मेरी माँ अपनी किसी रिश्तेदार के यहाँ शादी में जा रही है, मुझे भी साथ ले जा रही थी पर मैं पढाई का बहाना बनाकर नहीं जा रही हूँ। पापा भी स्कूल चले जाते हैं। तुम मेरे घर आना, मैं तुम्हारे लिए तुम्हारी पसंद का खाना बनूंगी(बनाऊँगी)।

मैं उसका मतलब समझ चुका था। उस दिन जैसे ही उसके पापा घर से बाहर गए, वो घर से बाहर आकर मुझे घर के अन्दर आने के लिए इशारा कर गई। मैं भी मौका देख कर उसके घर के अन्दर चला गया।

घर के अन्दर जाते ही उसने मुझे बिठाया और किचन में चली गई वहाँ से उसने मुझे खीर लाकर दी। वो मुझे अपने हाथों से खीर खिलाने लगी, मैं भी खीर खा रहा था और बस उसे ही देखे जा रहा था। वह भी मेरे आँखों में देखती जा रही थी।

मैंने कहा- अब मैं तुम्हें खिलाऊंगा!
उससे चम्मच लेकर मैं उसे खिलाने लगा। खिलाते-खिलाते उसके मुंह के बजाय उसके कपड़ों के अन्दर खीर डाल दी। वह उठकर दूसरे कमरे में चली गई।

मैं समझ गया कि वह कपड़े बदलने गई है, मैं भी उसके पीछे जाकर उसे देखने लगा। मैंने देखा कि वह केवल सफेद ब्रा में ही है। मैंने कुछ हिम्मत करके उसे पीछे से पकड़ लिया। वह कुछ घबराई और कहने लगी- आज नहीं फिर कभी!

मैंने कहा- आज नहीं तो कभी नहीं।

कहते हुए मैं उसके गले पर चूमने लगा। वह नहीं-नहीं कहे जा रही थी। पर मैं कुछ और इरादा कर के आया था। मैं बस लगा रहा। मैं उसे पीछे से ही पागलों की तरह चूमने लगा। धीरे-धीरे उसकी ब्रा क हुक भी खोल दिया और पीछे से ही उसके दोनों चुचियों को पहले धीरे-धीरे फिर बाद में उसे कस-कस कर मसलने लगा। उसकी मुंह से सी… सी … की आवाजें निकलने लगी।

मैं समझ गया कि वह भी गरम हो चुकी है। मैं बस चुम्बन लिये जा रहा था और उसकी चुचियों को मसले जा रहा था।

अचानक उसने मेरे खड़े लण्ड को हाथ पीछे करके पकड़ लिया। मुझे अजीब सा लगा। मैंने उसका मुंह अपनी ओर किया और उसे किस करने लगा। उसके होंठों को अपने होंठों से जोरदार किस किये जा रहा था।

वह बिल्कुल पागल सी हो गई थी। वह अपने घुटनों पर बैठ कर मेरे लण्ड को आगे पीछे करने लगी। मैंने उसे अपने मुंह में लेने के लिए कहा तो उसने मुंह में ले लिया और चाटने लगी। जब वो अपने फ़ूल से कोमल होंठो मेरे लण्ड को चाट रही थी तो मेरे तन बदन में मानो आग सी लग रही थी।

मैंने कहा- अब मेरी बारी है!

मैंने फट से उसे नंगा कर दिया और उसे बिस्तर पर लिटा कर उसकी बुर को देखा तो एक दम चौंक गया, पूरा बदन काला था मगर उसकी बुर लाल नज़र आ रही थी। बुर पर एक भी बाल नहीं था। शायद उसे पता था कि मैं जब आऊंगा तो उसे जरुर ही चोदूंगा, इसलिए वह पूरी तरह से तैयार थी। जैसे ही उसकी बुर को करीब से देख रहा था तो मानो उसकी बुर काँप रही हो। जब मैंने उसकी बुर पर अपनी जीभ लगाई तो उसके बदन में हलचल से हो गई।

अब मैं उसकी कोमल बुर को धीरे-धीरे चाट रहा था। उसकी आवाज़ में एक कम्पन्न सी हो रही थी। बुर-रस और मेरे थूक से उसकी बुर एक दम गीली हो गई थी। मेरा लण्ड भी कब तक इंतज़ार करता, वह कह रहा था कि मुझे भी जन्नत की सैर करनी है।

जब मैंने अपना लण्ड को उसकी बुर पर रखा और अन्दर डालना चाहा तो अन्दर नहीं जा रहा था। यह देखकर मैं चौंक गया कि उसकी बुर एकदम टाइट थी। मैंने कहा- अरे तुम्हारी बुर तो एक दम टाइट है?

तो उसने कहा- हाँ, मैं पहली बार करवा रही हूँ। मैंने तुमसे झूठ इसलिए कहा क्योंकि मैं तुमसे सेक्स करना चाहती थी। अगर मैं तुमसे नहीं कहती कि मैं दो बार चुदवा चुकी हूँ तो तुम डर जाते, क्योंकि मैं जानती हूँ कि तुम मुझसे शादी नहीं करोगे। कहाँ मैं और कहाँ तुम। इसलिए तुम्हें एहसास हो जाये कि मैं एक चुदासी लड़की हूँ। जिससे तुम जल्द ही तुम मेरे साथ सेक्स करने के लिए राजी हो जाओ।

यह सब सुनकर मुझे लगा कि अब मैं उसे नहीं चोदूंगा पर मैं अपने आपको नहीं रोक सका।
तभी उसने कहा- क्या सोच रहे हो? जल्दी चोदो ना!

मैंने भी एक बार फिर अपना लण्ड बुर पर रखा और धीरे-धीरे करके उसे बुर के अन्दर डालने लगा। वह अपनी जीभ को दांतों तले दबाये थी। फिर एकाएक मैंने जोरदार धक्का दिया जिससे मेरा पूरा लण्ड बुर में चला गया। उसकी चीख जोरदार होने के कारण मुझे उसका मुंह बंद करना पड़ा। दिन का समय था कोई भी घर में आ सकता था।

कुछ मिनट बाद मैंने असली चुदाई शुरू की। मैं धक्के पर धक्के लगाये जा रहा था। फच -फच की आवाजे चारों ओर गूंजने लगी थी। उसे भी मस्ती आ रही थी। वह भी खूब मजे लेकर चुदाई का आनंद उठा रही थी। उसके दूसरी बार झड़ने के बाद मैं भी उसकी बुर में झड़ गया और उसके बगल में लेट गया।

कुछ समय बाद वह उठी और लड़खड़ाते हुए बाथरूम की ओर जाने लगी। मैंने बिस्तर पर देख तो खून ही खून था। कुछ खून उसके जाँघों पर लगा था। जब वह बाथरूम से आई तो मुस्कुरा रही थी।

मैंने पूछा- यह तुम पहली बार कर रही थी, पर तुम्हारे अंदाज़ से तो मुझे कभी भी नहीं लगा कि यह पहली बार थी?

उसने कहा- क्योंकि मैं ब्लू फिल्म कई बार देख चुकी हूँ। जिससे बहुत कुछ सीख गई थी। लेकिन यार काली लड़कियों की बुर एकदम कमाल की होती है। कभी कोशिश करके देखो। एकदम मक्खन जैसा बुर। मज़ा आ जायेगा। अगर लड़कियां पढ़ रही होगी तो माफ करना, लेकिन क्या यह झूठ है।

मैंने जाते-जाते उससे पूछ लिया- तो अगली बार कब?

वह मुस्कुराते हुए बोली- जब तुम चाहो।

पर अफसोस, दूसरी बार यह मौका नहीं मिला अब तक। दुआ करो कि यह मौका जल्द ही मिल जाये।

तो मेरी कहानी आपको कैसी लगी आप लोग जरुर मेल करें, आपके मेल से ही हम सभी लेखकों को हौंसला मिलता है।

अगली कहानी के लिए आप प्रतीक्षा कीजिये। Sex Stories

Hindi Sex Stories

मैं अपनी चालीस की उम्र Hindi Sex Stories पार कर चुकी थी। पर तन का सुख मुझे बस चार-पांच साल ही मिला। मैं चौबीस वर्ष की ही थी कि मेरे पति एक बस दुर्घटना में चल बसे थे। मेरी बेटी की शादी मैंने उसके अठारह वर्ष होते ही कर दी थी। अब मुझे बहुत अकेलापन लगता था।

पड़ोसी रीना का जवान लड़का मोनू अधिकतर मेरे यहाँ कम्प्यूटर पर काम करने आता था। कभी कभी तो उसे काम करते करते बारह तक बज जाते थे। वो मेरी बेटी वर्षा के कमरे में ही काम करता था। मेरा कमरा पीछे वाला था … मैं तो दस बजे ही सोने चली जाती थी।

एक बार रात को सेक्स की बचैनी के कारण मुझे नींद नही आ रही थी व इधर उधर करवटें बदल रही थी। मैंने अपना पेटीकोट ऊपर कर रखा था और चूत को हौले हौले सहला रही थी। कभी कभी अपने चुचूकों को भी मसल देती थी। मुझे लगा कि बिना अंगुली घुसाये चैन नहीं आयेगा। सो मैं कमरे से बाहर निकल आई।

मोनू अभी तक कम्प्यूटर पर काम कर रहा था। मैंने बस यूं ही जिज्ञासावश खिड़की से झांक लिया। मुझे झटका सा लगा। वो इन्टरनेट पर लड़कियों की नंगी तस्वीरें देख रहा था। मैं भी उस समय हीट में थी, मैं शान्ति से खिड़की पर खड़ी हो गई और उसकी हरकतें देखने लग गई। उसका हाथ पजामे के ऊपर लण्ड पर था और धीरे धीरे उसे मल रहा था।

ये सब देख कर मेरे दिल की धड़कन बढ़ गई। मेरे हाथ अनायास ही चूत पर चले गये, और सहलाने लग गये। कुछ ही समय में उसने पजामा नीचे सरका कर अपना नंगा लण्ड बाहर निकाल लिया और सुपाड़ा खोल कर मुठ मारने लगा। मन कह रहा था कि तेरी प्यासी आंटी चुदवाने को तैयार है, मुठ काहे मारता है?

तभी उसका वीर्य निकल पड़ा और उसने अपने रूमाल से लण्ड साफ़ कर लिया। अब वो कम्प्यूटर बंद करके घर जाने की तैयारी कर रहा था। मैं फ़ुर्ती से लपक कर अपने कमरे में चली आई। उसने कमरा बन्द किया और बाहर चला गया।

उसके जाते ही मेरे खाली दिमाग में सेक्स उभर आया। मेरा जिस्म जैसे तड़पने लगा। मैंने जैसे तैसे बाथरूम में जा कर चूत में अंगुली डाल कर अपनी अग्नि शान्त की। पर दिल में मोनू का लण्ड मेरी नजरों के सामने से नहीं हट पा रहा था। सपने में भी मैंने उसके लण्ड को चूस लिया था। अब मोनू को देख कर मेरे मन में वासना जागने लगी थी। मुझे लगा कि सोनू को भी कोई लड़की चोदने के लिये नहीं मिल रही है, इसीलिये वो ये सब करता है। मतलब उसे पटाया जा सकता है। सुबह तक उसका लण्ड मेरे मन में छाया रहा। मैंने सोच लिया था कि यूं ही जलते रहने से तो अच्छा है कि उसे जैसे तैसे पटा कर चुदवा लिया जाये, बस अगर रास्ता खुल गया तो मजे ही मजे हैं।

मोनू सवेरे ही आ गया था। वो सीधे कम्प्यूटर पर गया और उसने कुछ किया और जाने लगा। मैंने उसे चाय के लिये रोक लिया। चाय के बहाने मैंने उसे अपने सुडौल वक्ष के दर्शन करा दिये। मुझे लगा कि उसकी नजरें मेरे स्तनों पर जम सी गई थी। मैंने उसके सामने अपने गोल गोल चूतड़ों को भी घुमा कर उसका ध्यान अपनी ओर खींचने की कोशिश की और मुझे लगा कि मुझे उसे आकर्षित में सफ़लता मिल रही है। मन ही मन में मैं हंसी कि ये लड़के भी कितने फ़िसलपट्टू होते हैं। मेरा दिल बाग बाग हो गया। लगा कि मुझे सफ़लता जल्दी ही मिल जायेगी।

मेरा अन्दाजा सही निकला। दिन में आराम करने के समय वो चुपके से आ गया और मेरी खिड़की से झांक कर देखा। उसकी आहट पा कर मैं अपना पेटीकोट पांवों से ऊपर जांघों तक खींच कर लेट गई। मेरे चिकने उघाड़े जिस्म को वो आंखे फ़ाड़-फ़ाड़ कर देखता रहा, फिर वो कम्प्यूटर के कमरे में आ गया। ये सब देख कर मुझे लगा चिड़िया जाल में उलझ चुकी है, बस फ़न्दा कसना बाकी है।

रात को मैं बेसब्री से उसका इन्तज़ार करती रही। आशा के अनुरूप वो जल्दी ही आ गया। मैं कम्प्यूटर के पास बिस्तर पर यूँ ही उल्टी लेटी हुई एक किताब खोल कर पढने का बहाना करने लगी। मैंने पेटीकोट भी पीछे से जांघो तक उठा दिया था। ढीले से ब्लाऊज में से मेरे स्तन झूलने लगे और उसे साफ़ दिखने लगे। ये सब करते हुये मेरा दिल धड़क भी रहा था, पर वासना का जोर मन में अधिक था।

मैंने देखा उसका मन कम्प्यूटर में बिलकुल नहीं था, बस मेरे झूलते हुये सुघड़ स्तनों को घूर रहा था। उसका पजामा भी लण्ड के तन जाने से उठ चुका था। उसके लण्ड की तड़प साफ़ नजर आ रही थी। उसे गर्म जान कर मैंने प्रहार कर ही दिया।

“क्या देख रहे हो मोनू…?”

“आं … हां … कुछ नहीं रीता आण्टी… !” उसके चेहरे पर पसीना आ गया था।

“झूठ… मुझे पता है कि तुम ये किताब देख रहे थे ना ……?” उसके चेहरे की चमक में वासना साफ़ नजर आ रही थी।

वो कुर्सी से उठ खड़ा हुआ और मेरे पास बिस्तर के नजदीक आ गया।

“आण्टी, आप बहुत अच्छी हैं, एक बात कहूँ ! आप को प्यार करने का मन कर रहा है।” उसके स्वर में प्यार भरी वासना थी।

मैंने उसे अपना सर घुमा कर देखा,”आण्टी हूँ मैं तेरी, कर ले प्यार, इसमे शर्माना क्या…”

वो धीरे से मेरी पीठ पर सवार हो गया और पीछे से लिपट पड़ा। उसकी कमर मेरे नितम्बो से सट गई। उसका लण्ड मेरे कोमल चूतड़ों में घुस गया। उसके हाथ मेरे सीने पर पहुंच गये। पीछे से ही मेरे गालों को चूमने लगा। भोला कबूतर जाल में उलझ कर तड़प रहा था। मुझे लगा कि जैसे मैंने कोई गढ़ जीत लिया हो।

मैंने अपनी टांगें और चौड़ी कर ली, उसका लण्ड गाण्ड में फ़िट करने की उसे मनमानी करने में सहायता करने लगी।

“बस बस, बहुत हो गया प्यार … अब हट जा…” मेरा दिल खुशी से बाग बाग हो गया था।

“नहीं रीता आण्टी, बस थोड़ी सी देर और…” उसने कुत्ते की भांति अपने लण्ड को और गहराई में घुसाने की कोशिश की। मेरी गाण्ड का छेद भी उसके लण्ड को छू गया। उसके हाथ मेरी झूलती हुई चूंचियों को मसलने लगे, उसकी सांसें तेज हो गई थी। मेरी सांसे भी धौकनीं की तरह चलने लगी थी। दिल जोर जोर से धड़कने लगा था। लगा कि मुझे चोद ही डालेगा।

“बस ना… मोनू …तू तो जाने क्या करने लगा है …ऐसे कोई प्यार किया जाता है क्या ? …चल हट अब !” मैंने प्यार भरी झिड़की दी उसे। वास्तव में मेरी इच्छा थी कि बस वो मुझे पर ऐसे ही चढ़ा रहे और अब मुझे चोद दे… मेरी झिड़की सुन कर वो मेरी पीठ पर से उतर गया। उसके लण्ड का बुरा हाल था। इधर मेरी चूंचियां, निपल सभी कड़क गये थे, फ़ूल कर कठोर हो गये थे।

“तू तो मेरे से ऐसे लिपट गया कि जैसे मुझे बहुत प्यार करता है ?”

“हां सच आण्टी … बहुत प्यार करता हूँ…”

“तो इतने दिनों तक तूने बताया क्यों नहीं?”

“वो मेरी हिम्मत नहीं हुई थी…”उसने शरमा कर कहा।

“कोई बात नहीं … चल अब ठीक से मेरे गाल पर प्यार कर… बस… आजा !” मैं उसे अधिक सोचने का मौका नहीं देना चाहती थी।

उसने फिर से मुझे जकड़ सा लिया और मेरे गालों को चूमने लगा। तभी उसके होंठ मेरे होठों से चिपक गये। उसने अपना लण्ड उभार कर मेरी चूत से चिपका दिया।

मेरे दिल के तार झनझना गये। जैसे बाग में बहार आ गई। मन डोल उठा। मेरी चूत भी उभर कर उसके लण्ड का उभार को स्पर्श करने लगी। मैंने उसकी उत्तेजना और बढ़ाने के लिये उसे अब परे धकेल दिया। वो हांफ़ता सा दो कदम दूर हट गया।

मुझे पूर्ण विश्वास था कि अब वो मेरी कैद में था।

“मोनू, मैं अब सोने जा रही हूं, तू भी अपना काम करके चले जाना !” मैंने उसे मुस्करा कर देखा और कमरे के बाहर चल दी। इस बार मेरी चाल में बला की लचक आ गई थी, जो जवानी में हुआ करती थी।

कमरे में आकर मैंने अपनी दोनों चूंचियाँ दबाई और आह भरने लगी। पेटीकोट में हाथ डाल कर चूत दबा ली और लेट गई। तभी मेरे कमरे में मोनू आ गया। इस बार वो पूरा नंगा था। मैं झट से बिस्तर से उतरी और उसके पास चली आई।

“अरे तूने कपड़े क्यों उतार दिये…?”

“आ…आ… आण्टी … मुझे और प्यार करो …”

“हां हां, क्यों नहीं … पर कपड़े…?”

“आण्टी… प्लीज आप भी ये ब्लाऊज उतार दो, ये पेटीकोट उतार दो।” उसकी आवाज जैसे लड़खड़ा रही थी।

“अरे नहीं रे … ऐसे ही प्यार कर ले !”

उसने मेरी बांह पकड़ कर मुझे अपनी ओर खींच लिया और मुझसे लिपट गया।

“आण्टी … प्लीज … मैं आपको … आपको … अह्ह्ह्ह्… चोदना चाहता हूं !” वो अपने होश खो बैठा था।

“मोनू बेटा, क्या कह रहा है …” उसके बावलेपन का फ़ायदा उठाते हुये मैंने उसका तना हुआ लण्ड पकड़ लिया।

“आह रीता आण्टी … मजा आ गया … इसे छोड़ना नहीं … कस लो मुठ्ठी में इसे…”

उसने अपने हाथ मेरे गले में डाल दिये और लण्ड को मेरी तरफ़ उभार दिया।

मैंने उसका कड़क लण्ड पकड़ लिया। मेरे दिल को बहुत सुकून पहुंचा। आखिर मैंने उसे फ़ंसा ही लिया। बस अब उसकी मदमस्त जवानी का मजा उठाना था। बरसों बाद मेरी सूनी जिंदगी में बहार आई थी। मैंने दूसरे हाथ से अपना पेटीकोट का नाड़ा ढीला कर दिया, वह जाने कब नीचे सरक गया। मैंने मोनू को बिस्तर के पास ही खड़ा कर दिया और खुद बिस्तर पर बैठ गई। अब उसका लौड़ा मैंने फिर से मुठ्ठी में भरा और उसे आगे पीछे करके मुठ मारने लगी। वो जैसे चीखने सा लगा। अपना लण्ड जोर जोर से हाथ में मारने लगा। तभी मैंने उसे अपने मुख में ले लिया। उसकी उत्तेजना बढ़ती गई। मेरे मुख मर्दन और मुठ मारने पर उसे बहुत मजा आ रहा था। तभी उसने अपना वीर्य उगल दिया। जवानी का ताजा वीर्य …

सुन्दर लण्ड का माल … लाल सुपाड़े का रस … किसे नसीब होता है … मेरे मुख में पिचकारियां भरने लगी। पहली रति क्रिया का वीर्य … ढेर सारा … मुँह में … हाय … स्वाद भरा… गले में उतरता चला गया। अन्त में जोर जोर से चूस कर पूरा ही निकाल लिया।

सब कुछ शान्त हो गया। उसने शरम के मारे अपना चेहरा हाथों में छिपा लिया।

मैंने भी ये देख कर अपना चेहरा भी छुपा लिया।

“आण्टी… सॉरी … मुझे माफ़ कर देना … मुझे जाने क्या हो गया था।” उसने प्यार से मेरे बालों में हाथ फ़ेरते हुये कहा।

मैं उसके पास ही बैठ गई। अपने फ़ांसे हुये शिकार को प्यार से निहारने लगी।

“मोनू, तेरा लण्ड तो बहुत करारा है रे…!”

“आण्टी … फिर आपने उसे भी प्यार किया… आई लव यू आण्टी!”

मैंने उसका लण्ड फिर से हाथ में ले लिया।

“बस आंटी, अब मुझे जाने दीजिये… कल फिर आऊंगा” उसे ये सब करने से शायद शर्म सी लग रही थी।

वो उठ कर जाने लगा, मैं जल्दी से उठ खड़ी हुई और दरवाजे के पास जा खड़ी हुई और उसे प्यार भरी नजरों से देखने लगी। उसने मेरी चूत और जिस्म को एक बार निहारा और कहा,”एक बार प्यार कर लो … आप को यूँ छोड़ कर जाने को मन नहीं कर रहा !”

मैंने अपनी नजरें झुका ली और पास में रखा तौलिया अपने ऊपर डाल लिया। उसका लण्ड एक बार फिर से कड़क होने लगा। वो मेरे नजदीक आ गया और मेरी पीठ से चिपक गया। उसका बलिष्ठ लण्ड मेरी चूतड़ की दरारों में फ़ंसने लगा। इस बार उसके भारी लण्ड ने मुझ पर असर किया… उसके हाथों ने मेरी चूंचियां सम्भाल ली और उसका मर्दन करने लगे। अब वह मुझे एक पूर्ण मर्द सा नजर आने लगा था। मेरा तौलिया छूट कर जमीन पर गिर पड़ा।

“क्या कर रहे हो मोनू…”

“वही जो ब्ल्यू फ़िल्म में होता है … आपकी गाण्ड मारना चाहता हू … फिर चूत भी…”

“नहीं मोनू, मैं तेरी आण्टी हू ना …”

“आण्टी, सच कहो, आपका मन भी तो चुदने को कर रहा है ना?”

“हाय रे, कैसे कहूँ … जन्मों से नहीं चुदी हूँ… पर प्लीज आज मुझे छोड़ दे…”

“और मेरे लण्ड का क्या होगा … प्लीज ” और उसका लण्ड ने मेरी गाण्ड के छेद में दबाव डाल दिया।

“सच में चोदेगा… ? हाय … रुक तो … वो क्रीम लगा दे पहले, वर्ना मेरी गाण्ड फ़ट जायेगी !”

उसने क्रीम मेरी गाण्ड के छेद में लगा दी और अंगुली गाण्ड में चलाने लगा। मुझे तेज खुजली सी हुई।

“मार दे ना अब … खुजली हो रही है।”

मोनू ने लण्ड दरार में घुसा कर छेद तक पहुंचा दिया और मेरा छेद उसके लण्ड के दबाव से खुलने लगा और फ़क से अन्दर घुस पड़ा।

“आह मेरे मोनू … गया रे भीतर … अब चोद दे बस !”

मोनू ने एक बार फिर से मेरे उभरे हुये गोरे गोरे स्तनों को भींच लिया। मेरे मुख से आनन्द भरी चीख निकल गई। मैंने झुक कर मेज़ पर हाथ रख लिया और अपनी टांगें और चौड़ा दी। मेरी चिकनी गाण्ड के बीच उसका लण्ड अन्दर-बाहर होने लगा। चुदना बड़ा आसान सा और मनमोहक सा लग रहा था। वो मेरी कभी चूंचियां निचोड़ता तो कभी मेरी गोरी गोरी गाण्ड पर जोर जोर से हाथ मारता।

उसक सुपाड़ा मेरी गाण्ड के छेद की चमड़ी को बाहर तक खींच देता था और फिर से अन्दर घुस जाता था। वो मेरी पीठ को हाथ से रगड़ रगड़ कर और रोमांचित कर रहा था। उसका सोलिड लण्ड तेजी से मेरी गाण्ड मार रहा था। कभी मेरी पनीली चूत में अपनी अंगुली घुसा देता था। मैं आनन्द से निहाल हो चुकी थी। तभी मुझे लगा कि मोनू कहीं झड़ न जाये। पर एक बार वो झड़ चुका था, इसलिये उम्मीद थी कि दूसरी बार देर से झड़ेगा, फिर भी मैंने उसे चूत का रास्ता दिखा दिया।

“मोनू, बस मेरी गाण्ड को मजा गया, अब मेरी चूत मार दो …” उसके चहरे पर पसीना छलक आया था। उसे बहुत मेहनत करनी पड़ रही थी। उसने एक झटके से अपना लण्ड बाहर खींच लिया। मैंने मुड़ कर देखा तो उसका लण्ड फ़ूल कर लम्बा और मोटा हो चुका था। उसे देखते ही मेरी चूत उसे खाने के लिये लपलपा उठी।

“मोनू मार दे मेरी चूत … हाय कितना मदमस्त हो रहा है … दैय्या रे !”

“आन्टी, जरा पकड़ कर सेट कर दो…” उसकी सांसें जैसे उखड़ रही थी, वो बुरी तरह हांफ़ने लगा था, उसके विपरीत मुझे तो बस चुदवाना था। तभी मेरे मुख से आनन्द भरी सीत्कार निकल गई। मेरे बिना सेट किये ही उसका लण्ड चूत में प्रवेश कर गया था। उसने मेरे बाल खींच कर मुझे अपने से और कस कर चिपटा लिया और मेरी चूत पर लण्ड जोर जोर से मारने लगा। बालों के खींचने से मैं दर्द से बिलबिला उठी। मैं छिटक कर उससे अलग हो गई। उसे मैंने धक्का दे कर बिस्तर पर गिरा दिया और उससे जोंक की तरह उस पर चढ़ कर चिपक गई। उसके कड़कते लण्ड की धार पर मैंने अपनी प्यासी चूत रख दी और जैसे चाकू मेरे शरीर में उतरता चला गया। उसके बाल पकड़ कर मैंने जोर लगाया और उसका लण्ड मेरी बच्चेदानी से जा टकराया। उसने मदहोशी में मेरी चूंचियां जैसे निचोड़ कर रख दी। मैं दर्द से एक बार फिर चीख उठी और चूत को उसके लण्ड पर बेतहाशा पटकने लगी। मेरी अदम्य वासना प्रचण्ड रूप में थी। मेरे हाथ भी उसे नोंच खसोट रहे थे, वो आनन्द के मारे निहाल हो रहा था, अपने दांत भींच कर अपने चूतड़ ऊपर की ओर जोर-जोर से मार रहा था।

“मां कसम, मोनू चोद मेरे भोसड़े को … साले का कीमा बना दे … रण्डी बना दे मुझे… !”

“पटक, हरामजादी … चूत पटक … मेरा लौड़ा … आह रे … आण्टी…” मोनू भी वासना के शिकंजे में जकड़ा हुआ था। हम दोनों की चुदाई रफ़्तार पकड़ चुकी थी। मेरे बाल मेरे चेहरे पर उलझ से गये थे। मेरी चूत उसके लण्ड को जैसे खा जाना चाहती हो। सालों बाद चूत को लण्ड मिला था, भला कैसे छोड़ देती !

वो भी नीचे से अपने चूतड़ उछाल रहा था, जबरदस्त ताकत थी उसमें, मेरी चूत में जोर की मिठास भरी जा रही थी। तभी जैसे आग का भभका सा आया … मैंने अपनी चूत का पूरा जोर लण्ड पर लगा दिया… लण्ड चूत की गहराई में जोर से गड़ने लगा… तभी चूत कसने और ढीली होने लगी। लगा मैं गई… उधर इस दबाव से मोनू भी चीख उठा और उसने भी अपने लण्ड को जोर से चूत में भींच दिया। उसका वीर्य निकल पड़ा था। मैं भी झड़ रही थी। जैसे ठण्डा पानी सा हम दोनों को नहला गया। हम दोनों एक दूसरे से जकड़े हुये झड़ रहे थे। हम तेज सांसें भर रहे थे। हम दोनों का शरीर पसीने में भीग गया था। उसने मुझे धीरे से साईड में करके अपने नीचे दबा लिया और मुझे दबा कर चूमने लगा। मैं बेसुध सी टांगें चौड़ी करके उसके चुम्बन का जवाब दे रही थी। मेरा मन शान्त हो चुका था। मैं भी प्यार में भर कर उसे चूमने लगी थी। लेकिन हाय रे ! जवानी का क्या दोष … उसका लण्ड जाने कब कड़ा हो गया था और चूत में घुस गया था, वो फिर से मुझे चोदने लगा था।

मैं निढाल सी चुदती रही … पता नहीं कब वो झड़ गया था। तब तक मेरी उत्तेजना भी वासना के रूप में मुझ छा गई थी। मुझे लगा कि मुझे अब और चुदना चाहिये कि तभी एक बार फिर उसका लण्ड मेरी चूत को चीरता हुआ अन्दर घुस गया। मैंने उसे आश्चर्य से देखा और चुदती रही। कुछ देर में हम दोनों झड़ गये। मुझे अब कमजोरी आने लगी थी। मुझ पर नींद का साया मण्डराने लगा था। आंखें थकान के मारे बंद हुई जा रही थी, कि मुझे चूत में फिर से अंगारा सा घुसता महसूस हुआ।

“मोनू, बस अब छो … छोड़ दे… कल करेंगे …!” पर मुझे नहीं पता चला कि उसने मुझे कब तक चोदा, मैं गहरी नींद में चली गई थी।

सुबह उठी तो मेरा बदन दर्द कर रहा था। भयानक कमजोरी आने लगी थी। मैं उठ कर बैठ गई, देखा तो मेरे बिस्तर पर वीर्य और खून के दाग थे। मेरी चूत पर खून की पपड़ी जम गई थी। उठते ही चूत में दर्द हुआ। गाण्ड भी चुदने के कारण दर्द कर रही थी। मोनू बिस्तर पर पसरा हुआ था। उसके शरीर पर मेरे नाखूनों की खरोंचे थी। मैं गरम पानी से नहाई तब मुझे कुछ ठीक लगा। मैंने एक एण्टी सेप्टिक क्रीम चूत और गाण्ड में मल ली।

मैंने किचन में आकर दो गिलास दूध पिया और एक गिलास मोनू के लिये ले आई।

मेरी काम-पिपासा शान्त हो चुकी थी, मोनू ने मुझे अच्छी तरह चोद दिया था। कुछ ही देर में मोनू जाग गया, उसको भी बहुत कमजोरी आ रही थी। मैंने उसे दूध पिला दिया। उसके जिस्म की खरोंचों पर मैंने दवाई लगा दी थी। शाम तक उसे बुखार हो आया था। शायद उसने अति कर दी थी…। Hindi Sex Stories

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मेरा नाम संजीव Hindi Sex Stories है। मेरी उम्र 24 साल है। यह कहानी मेरी जिन्दगी का असली और सत्य अनुभव है। उन दिनों मैं जयपुर में एक इंजीनियरिंग कॉलेज का छात्र था। मैं जुलाई 2008 जयपुर में आया था। मैंने जयपुर आने से पहले कभी चुदाई नहीं की थी। चुदाई करने की कसक मेरे दिल में हमेशा से ही थी लेकिन न जाने क्यों 24 की उम्र में आते आते मुझे अपने नाग की तरह फुनकते लंड को थामना बहुत ही मुश्किल पड़ रहा था। मुठ मारने से भी में अब बोर हो गया था। मुझे चूत की बहुत जरूरत थी और इस बार किस्मत ने भी मेरा भरपूर साथ दिया।

मेरी कक्षा में सिर्फ दो लड़कियाँ थी। उन दोनों में से एक थी गार्गी ! गार्गी क्या लड़की थी, उसके दो दो किलो के चूचे थे और गांड भी खूब भारी थी। उसी दिन मुझे लगा कि गार्गी की चूत ही मेरे लंड की गर्मी को ठंडा कर सकती है।

अगले दिन गार्गी ने मुझे बताया कि उसे मोबाइल फ़ोन खरीदना है। कॉलेज से मार्केट काफी दूर था और मेरे पास बाइक भी नहीं थी। मैंने अपने दोस्त से पल्सर मांग ली।

फिर क्या था, क्लास ख़त्म होने के बाद गार्गी और मैं बाइक पर चल दिए। मैंने बाइक की स्पीड १०० से भी ऊपर कर दी और उसने मुझे कसकर पकड़ लिया जैसे ही उसके नाजुक नाजुक हाथ मुझे छू रहे थे मेरी पूरी बॉडी में सनसनाहट दौड़ रही थी और मेरे लंड तो आज सारी हदें पार कर रहा था। उस वक़्त मुझे लगा कि अभी बाइक रोक कर उसे अपने लंड का स्वाद चखा दूँ। लेकिन मैंने अपनी भावनाओं को काबू में रखा। मुझे तो समुन्दर में तैरना था, नदी में नहाने में क्या रखा था।

उस दिन बाइक पर जो तीस मिनट का सफ़र था, उसको रात को सोच कर मैं मुठ ही लगा रहा था कि गार्गी का फ़ोन आ गया। अब मैंने गार्गी से फ़ोन पर बात करते करते ही लंड से ऐसी पिचकारी छोड़ी कि वीर्य दो मीटर दूर जाकर गिरा। लेकिन आज की मुठ में और दिनों से अलग मजा था।

अगले दिन क्लास में गार्गी मेरे आगे बैठी थी तो उसकी सलवार से उसकी पैन्टी दिख रही थी। उसने गुलाबी रंग की पैन्टी पहनी थी। अब तो मेरा लंड फ़ुफ़कारने लगा।

क्लास छुटने के बाद मैं गार्गी को कॉफ़ी के लिए कैंटीन ले गया। बात बात में उससे पता चला कि उसका अभी कोई बॉयफ़्रेंड नहीं है। अब तो मुझे गार्गी की चूत की सुरंग और मेरे लंड की तोप का मिलन साफ़ नजर आ रहा था। धीरे धीरे हमारी दोस्ती प्यार में बदल गई।

एक दिन शाम के 4 बजे लैब में कोई नहीं था। मैंने गार्गी को अपने दिल की बात कह दी। उसने भी हामी भर दी, मैंने उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए और इमरान हाश्मी स्टाइल में गार्गी के होंठों का सारा रस चूस लिया। अब मेरे हाथ धीरे धीरे उसके वक्ष पर पहुँच गए। मैंने उसके स्तनों को दबाना शुरु कर दिया। उसके स्तन डनलप के गद्दे से कम नहीं लग रहे थेऔर मेरा लंड तो उस वक़्त हीरे से भी सख्त हो रहा था। उसने भी मेरा लंड अपने कोमल हाथो में ले लिया और सहलाने लगी। अपने हॉस्टल में मैंने खूब ब्लू फिल्म देखी थी और मैंने लैब के कंप्यूटर में गूगल से ढूंढ कर ब्लू फिल्म चला दी।

अब मैंने फिल्म की नक़ल करते हुए अपना लंड गार्गी के मुँह में दे दिया। पहले तो गार्गी ने मना किया फिर मान गई और वो लंड चूसने लगी। मेरा लंड पहली बार किसी लड़की के मुँह में गया था। एक मिनट के अंदर ही मैं झड़ने लगा और मैंने गार्गी के मुँह के ऊपर वीर्य बारिश कर दी और वो उसको ऐसे चूसने लगी जैसे अमृत की बारिश हो रही हो।

मैं झड़ चुका था लेकिन गार्गी की आग अभी बाकी थी। उसने अपनी चूत में ऊँगली करके अपनी आग बुझाई।

अगले दिन मुझे गार्गी को संतुष्ट करना था इसलिए मैं अगले दिन पॉवर कैप्सूल और कंडोम लेकर गया। लेकिन अगले दिन लैब में क्लास चल रही थी और मैंने लंच के बाद कैप्सूल खा लिया था। शाम के चार बज रहे थे और मेरा लण्ड नाग के फन की तरह जींस को फाड़ के बाहर आने को कर रहा था। आज किस्मत ने मेरा साथ दिया। एक टीचर को बाहर जाना था दो घंटे के लिए उसने मुझे अपने ऑफिस की चाबी दे दी क्योंकि टीचर का कुछ काम करना था। इधर मुझे अपने लंड की आग बुझानी थी।

मैं गार्गी को लेकर ऑफिस में आ गया। मेरे ऊपर अब तो कैप्सूल का पूरा असर हो चुका था। ऑफिस में घुसते ही मैंने गार्गी को बाहों में भर लिया और टूट पड़ा। मैंने उसकी ब्रा को उतार दिया और स्तनों को चूसने लगा और गार्गी भी मेरा पूरा साथ दे रही थी। आज मेरा लंड सात इंच से बढ़ कर आठ इंच का हो गया था। गार्गी की चूचियाँ दबाने में बहुत मजा आ रहा था, उसके स्तन काफी गुदगुदे थे।

मैंने अपना लंड उसके दोनों स्तनों के बीच में रख दिया और हिलाने लगा। अब मेरा हाथ अपने आप गार्गी की पैन्टी पर पहुँच गया और मैंने उसकी पैन्टी उतार दी। गार्गी की चूत पर एक भी बाल नहीं था और चूत एक दम गोरी गोरी थी। मैं चूत को सहलाने लगा।

अब उसकी चूत गीली होती जा रही थी, मुझे लगा कि गार्गी की सुरंग में तोप दागने का इससे अच्छा मौका नहीं मिलेगा और मैंने कंडोम चढ़ा के डाल दिया अपना लण्ड गार्गी की चूत में !

जैसे ही पहल झटका लगा, गार्गी कर गई- उहऽऽ ह्ह अह्ह्ह्हह्ह. और उसकी चूत से खून निकलने लगा। वो दर्द से कराहने लगी पर आज मेरा लण्ड कहाँ रुकने वाला था, मैंने उसकी एक टांग कुर्सी पर रखी और एक टांग को अपने हाथ में रख के झटके पे झटके देने लगा। उधर गार्गी दर्द से उफ्फ्फ अहह उफ़ आह्ह मर गई … और धीरे से डालो ..कहने लगी।

और जब तीन चार बार लंड चूत में घुस कर बाहर आ गया तो गार्गी को मजा आने लग गया।

अब गार्गी कहने लगी- और डालो … और डालो !पाँच मिनट तक मैंने गार्गी को खूब पेला। अब मेरा झड़ने वाला था कि तभी टीचर आ गया। लंड की आग में मुझे कुछ नहीं दिख रहा था। उसने हमें दरवाज़े के छेद में से देख लिया था। लेकिन जब तक मैंने अपने लंड से गार्गी की चूत को तृप्त नहीं कर दिया, मैं ठोकता रहा और अंत में मैं झड़ने लगा। फिर जल्दी जल्दी गार्गी और मैंने कपड़े पहने लेकिन टीचर हमें देख चुका था।

दरवाजा खोला तो टीचर ने गार्गी से कहा- मुझे भी अपनी चूत दे दे ! नहीं तो सबको बता दूंगा !

गार्गी मेरी तरफ देखने लगी, मेरे पास भी कोई और रास्ता नहीं था। टीचर ने भी गार्गी को ठोका और उसकी नई और गोरी गोरी चूत का मजा लूटा।

आज भी गार्गी और मेरा चुदाई कार्यक्रम चल रहा है और हफ्ते में एक दो बार टीचर गार्गी की ले लेता है।

लेकिन क्या करें ! हमे भी ऑफिस चुदाई करने को मिल जाता है।

दोस्तो, कहानी कैसी लगी, बताना जरूर ! Hindi Sex Stories

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