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मेरा नाम साधना है और मेरी उम्र 23 साल है. मैं दिल्ली की रहने वाली हूँ.
मैं अपने जिस्म की बात करूँ तो मेरे बूब्स 36 इंच के एकदम टाइट हैं, मेरी कमर 30 की है और गांड 38 इंच की है, जो चलते समय बहुत मटकती है.
मेरा जिस्म किसी पेप्सी की 300 एमएल की बोतल के जैसे है.
ये सेक्स कहानी मेरी और मेरे ब्वॉयफ्रेंड की चुदाई की तो है ही, पर उसके बाद भी मैंने इसमें चुदाई की दुनिया के कुछ और सच भी उजागर किए हैं, उनका आनन्द लीजिए.
मेरे घर में मैं, मेरी मॉम, डैड और एक भाई है … जो मुझसे बड़ा है.
भाई की शादी हो चुकी है.
मेरी भाभी बहुत अच्छी हैं, वे मेरे साथ सहेली की तरह रहती हैं.
मैं एक कंपनी में जॉब करती हूँ और मेरा ब्वॉयफ्रेंड मेरे ऑफिस की सामने वाली बिल्डिंग में जॉब करता है.
हमेशा की तरह मैं सुबह तैयार होकर लैगिंग्स और टॉप पहन कर अपने घर से निकली.
घर से बाहर निकल कर कुछ ही दूर मुझे मेरा ब्वॉयफ्रेंड अपनी कार से लेने आया हुआ था.
वह रोज ही आ जाता था और हम दोनों साथ में ऑफिस जाते थे.
हम दोनों ऑफिस के लिए निकल गए.
थोड़ी ही देर में हम ऑफिस पहुंच गए.
अपनी टेबल पर आकर मैं अपना काम करने लगी.
मैं अपना काम कर रही थी कि तभी मेरा बॉस मेरे पास आया और उसने मुझसे अपने केबिन में आने के लिए कहा.
मैं कुछ पल बाद उनके केबिन में गई और मैंने बाहर से ही उनसे अन्दर आने की आज्ञा मांगी.
उन्होंने सर हिला कर अन्दर आने का इशारा कर दिया.
मैं अन्दर गई और उनसे पूछा कि क्या बात है सर?
उन्होंने मुझे एक नए प्रोजेक्ट के बारे में बताया और कहा- ये प्रोजेक्ट तुम्हें पूरा करना है.
मैंने ‘ओके सर’ बोल कर पेपर्स ले लिए और बाहर आ गई.
अब मैंने उस प्रोजेक्ट पर काम करना शुरू कर दिया.
काम करते करते दो बज गए.
मैं काम रोक कर लंच करने चली गई.
हमारा एक घंटे का लंच होता है.
मैं दस मिनट में खाना खाकर बाहर निकली और तभी ब्वॉयफ्रेंड की कॉल आ गई.
मैंने कॉल उठाई तो उसने कहा- जहां हम मिलते हैं, वहां आ जाओ.
मैं कॉल कट करके वहां जाने लगी.
मैं वहां पहुंच कर अपने ब्वॉयफ्रेंड से मिली.
हमने साथ में सिगरेट पी और फिर हम दोनों घूमने निकल गए.
मेरे ब्वॉयफ्रेंड के ऑफिस से थोड़ी ही दूर पर एक टॉयलेट है, जो हमेशा खाली रहता है.
वहां कोई नहीं आता है.
हम दोनों घूम ही रहे थे कि उसने मुझसे कहा- चलो ना बेबी, आज इसके अन्दर चलते हैं.
मैंने उसे मना किया पर वह जिद करने लगा.
उसकी काफी जिद के बाद मैं उसके साथ जाने को रेडी हो गई.
हम दोनों अन्दर गए.
वहां हम दोनों एक खाली वाशरूम में घुस गए.
उसने डोर लॉक किया और मुझसे लिपट कर मुझे चूमने लगा.
मैं एक Xxx लड़की हूँ, उसका साथ देने लगी.
चूमते चूमते उसने मेरा टॉप उतार दिया और मैंने उसकी शर्ट के बटन खोल दिए.
उसने मुझे दीवार से चिपकाया और मेरी ब्रा के हुक खोल कर उतार कर एक तरफ लटका दी.
अब वह मेरे मोटे मोटे बूब्स पर टूट पड़ा.
मैं उसके बाल सहलाने लगी और एक हाथ से उसके पैंट की जिप खोल कर उसका लंड बाहर निकाल कर हिलाने लगी.
वह पागलों की तरह मेरे बूब्स चूस रहा था.
कभी वह निप्पल पर काट लेता तो कभी दूध को पूरा मुँह में भरने की कोशिश करने लगता.
मैं भी वासना में मदहोश हो गई और कामुक सिसकारियां लेती हुई जोर जोर से उसका लंड हिला रही थी- उम्म्म्म सीसीई आह अह्ह्ह्ह ओह गॉड बेबी … खा जाओ … इन्हें चूसो!
थोड़ी देर बाद वह मुझसे अलग हुआ और उसने नीचे बैठने को कहा.
मैं झट से नीचे बैठ गई और उसका लंड हाथ में पकड़ कर सहलाने लगी, उसके पूरे लंड पर जीभ फिराने लगी.
‘उम्म्म उम्मम्म आह बेबी…’ वह पागल होने लगा और मेरे बाल पकड़ सहलाता हुआ सिसकारियां भरने लगा.
‘आह्ह्हह साधना चूसो बेबी … ओह तुम कितना मस्त लंड से खेलती हो यार!’
उसके लंड को जीभ से चाटने के बाद एक ही झटके में मैंने उसका पूरा लंड मुँह में भर लिया और तेज तेज चूसने लगी.
‘ऑव्व गुओ गुओ गाफ़ गाफ़ ग्लो ग्लो …’
वह भी मेरे बालों को पकड़ कर तेज तेज झटके देने लगा.
पांच मिनट तक ऐसे ही लंड चूसने के बाद उसने मुझे खड़ा कर दिया.
मैं वहीं दीवार पर हाथ रख कर घोड़ी बन गई और वह मेरे पीछे आ गया.
उसने तुरंत मेरी लैगी खींच कर घुटनों तक उतार दी और पैंटी भी नीचे कर दी.
अब उसने मेरी चूत पर अपना लंड रखा और जोर जोर से रगड़ने लगा.
मैं Xxx लड़की मचलने लगी- सी सी आआह बेबी प्लीज डाल दो ना!
मुझे ऐसे तड़पती हुई देख उसने मेरी कमर पकड़ी और पूरी दम से एक झटका लगा कर लंड चूत में घुसा दिया.
मैं चिल्ला पड़ी- आआहह आह आह्ह मेरी चूत फट गई … मैं तुमसे कहती हूँ ना कि पहले मेरी चूत चाट लिया करो!
उसने लंड दबाते हुए कहा- बाबू तुम्हें पता तो है कि मुझे उसे चाटना पसंद नहीं है.
वह मेरी कमर पकड़ कर लौड़े के झटके दिए जा रहा था.
थोड़ी देर बाद मुझे भी मजा आने लगा.
मैं अपनी गांड आगे पीछे करती हुई उसका साथ देने लगी- आह आआह आआह … फक चोदो चोदो मुझे … आह और तेज … और तेज बेबी आह्ह साले मां के लौड़े चोद मादरचोद मेरी चूत … साले बहन के लौड़े!
वह भी पूरे जोश में मेरी चूत में झटके देने लगा- आआआह आह आआ आह ले साली कुतिया रंडी साली … तू Xxx लड़की कितनी बड़ी रांड है मादरचोद पब्लिक टॉयलेट में मेरा लंड ले रही है छिनाल! कुतिया गंदा सेक्स कर रही है!
मैं भी गांड आगे पीछे करती हुई उसका पूरा साथ दे रही थी- आआ आह … आआह चोद … साले चोदता रहे साले … फाड़ दे मेरी चूत रंडी के जने!
हम दोनों चुदाई में मगन ऐसे ही सिसकारियां लेते हुए मजा लेने लगे.
फिर पांच मिनट बाद ही वह जोर जोर से झटके देता हुआ मेरी चूत में झड़ने लगा.
मैंने जैसे ही उसके माल का अहसास किया, अपने मुँह को पीछे करके उसे देखने लगी.
मैं गुस्से में बोली- बहन के लौड़े ने आज फिर इतनी जल्दी रस छोड़ दिया. साले … हरामी की औलाद … हमेशा तू ऐसे ही करता है!
उसने लंड झाड़ कर उसे चूत से बाहर निकाल लिया.
मैं झट से नीचे बैठी और उसका लंड मुँह में भर कर चूसने लगी.
‘आआह आआह साले इसे खड़ा कर भोसड़ी के … मेरी चूत की प्यास अभी नहीं बुझी … पहले मेरा पानी निकाल कुत्ते.’
मैं तेज तेज लंड को चूस रही थी.
तभी उसने लंड निकाल लिया और बोला- बेबी अब बस … अब ये खड़ा नहीं होगा.
इतना बोल उसने लंड चड्डी के अन्दर किया और पैंट पहनने लगा.
उसने पैंट के हुक लगा कर दरवाजा खोला और बोला- मैं जा रहा हूँ, तुम भी कपड़े पहन कर आ जाओ.
वह निकल गया.
मुझे उस पर बहुत गुस्सा आया.
वह हमेशा मुझे बिना झड़े छोड़ देता है.
मैंने दरवाजा बंद किया और अपनी चूत में तेज तेज उंगली करने लगी- आह आआअह आआआह मेरी चूत कोई चोदो … इसे शांत कर दो … आह!
मैं अपनी आंखें बंद किए हुई अपने मम्मों को मसलती हुई चूत में उंगली किए जा रही थी.
पांच मिनट के बाद मेरी जांघें कांपने लगीं और मैं जोर जोर से सिसकारियां लेती हुई झड़ने लगी.
मेरी चूत से पानी की धार बहने लगी.
‘आआअह आआअह ओह माय गॉड मेरी चूत … आह आआअह आआहह.’
मैं चिल्लाती हुई झड़ गई.
फिर मैंने अपनी चूत से उंगलियां निकालीं और उन्हें मुँह में लेकर चूसने लगी- उम्म्म्म उम्मम्म सो टेस्टी!
यही बुदबुदाती हुई मैंने खुद को साफ किया और कपड़े पहनने लगी.
फिर बाल ठीक करके लिपस्टिक लगाई और दरवाजा खोल कर बाहर आ गई.
जैसे ही मैं बाहर निकली, मैंने देखा कि एक काला सा आदमी गंदे फटे कपड़ों में खड़ा पेशाब कर रहा है.
वह एक भिखारी था.
मैं Xxx लड़की उसे देखने लगी.
वह अपनी आंखें बंद करके मस्ती से मूत रहा था.
मेरी नजर उसके लंड पर गई और मैं लंड देखती ही रह गई.
इतना बड़ा और इतना मोटा लंड … मैंने आज तक नहीं देखा था.
मेरी नजरें उसके लंड से हट ही नहीं रही थीं.
तभी उसने आंखें खोल दीं और मुझे लंड को घूरते हुए देख लिया.
वह दांत निकाल कर बोला- क्या चाहिए मैडम?
उसकी आवाज सुन कर मैं डर गई और वहां से तुरंत निकल गई.
मैं अपने ऑफिस में आ गई और प्रोजेक्ट पर काम करने लगी.
मुझे काम करते करते 5 बज गए.
मैंने अपने लिए एक कॉफी मगायी और तसल्ली से पी.
उस समय मेरे दिमाग में अपनी प्यासी चूत और उस भिखारी का मोटा लंड ही घूम रहा था.
कॉफी खत्म करके मैं दोबारा काम में लग गई.
धीरे धीरे स्टाफ जाने लगा.
मैंने घड़ी की तरफ देखा तो 7 बज चुके थे.
तब मैंने लैपटॉप बंद करके बैग में रखा और घर के लिए बाहर निकल गई.
बाहर आकर मैंने ब्वॉयफ्रेंड को कॉल की.
उसने कहा- मैं बस पांच मिनट में आ रहा हूँ.
मैं वहीं खड़ी हो गई और सिगरेट पीती हुई उसका इंतजार करने लगी.
करीब दस मिनट बाद ब्वॉयफ्रेंड आया.
मैं कार में बैठ गई और हम दोनों घर के लिए निकल गए.
आज मैं थका थका फील कर रही थी.
मेरी आंख लग गई और मैं सो गई.
पांच मिनट बाद मुझे ब्वॉयफ्रेंड ने उठाया और कहा- हम पहुंच गए बेबी.
मैं अपने अपार्टमेंट के बाहर पहुंच गई थी.
मैंने ब्वॉयफ्रेंड को हग किया और बाई बोल कर उतर कर घर आने लगी.
मैं घर पहुंची और डोर बेल बजाई.
मॉम ने दरवाजा खोला और बोली- अरे बेटी आ गई तू!
मैं हां कह कर अन्दर आई और अपने रूम में आकर बेड पर बैग फेंक कर सीधा बेड पर गिर गई.
मुझे कब नींद आ गई, मुझे पता ही नहीं चला.
मेरी आंख खुली जब मेरा दरवाजा खटखटाया गया.
मैंने आंखें खोलीं तो बाहर भाभी आवाज लगा रही थीं- साधना साढ़े आठ बज गए हैं, उठो खाना खाने आ जाओ.
इसका मतलब था कि मैं करीब आधा घंटा सो चुकी थी.
मैंने कहा- ओके भाभी, आती हूँ.
मैं अपने बेड से उठी और अपने सारे कपड़े उतार नंगी हो गई और शॉवर लेने चली गई.
मैं शॉवर के नीचे खड़ी होकर नहाने लगी और जल्दी से नहा कर बाहर आ गई.
फिर बिना ब्रा पैंटी के एक शॉर्ट्स और टी-शर्ट डाल कर बाहर आ गई.
बाहर देखा तो सब डिनर टेबल पर बैठे थे.
मैं अपनी जगह पर जाकर बैठ गई.
भाभी ने मुझे खाना सर्व किया और मैं खाना खाने लगी.
थोड़ी देर में ही मैंने खाना खत्म किया और उठ कर अपने कमरे में आ गई.
दोस्तो, हिंदी में इंडियन अन्तर्वासना कहानी में आपने अब तक पढ़ा था कि पण्डित जी रीना की जवानी को भोगने के चक्कर में उसको पूजा करवाने के लिए फंसा चुके थे. पण्डित जी रीना की तारीफ़ करते हुए उस पर डोरे डाल रहे थे कि श्रृंगार के इतनी सुन्दर लगती हो.. तो श्रृंगार के पश्चात तो तुम बिल्कुल अप्सरा लगोगी.
अब आगे..
पण्डित- परम्परा के अनुसार तुम्हारा श्रृंगार पवित्र हाथों से होना चाहिये.. अथवा तुम्हारा श्रृंगार मैं करूँगा.. इसमें तुम्हें कोई आपत्ति तो नहीं?
रीना- नहीं पण्डित जी..
पण्डित- रीना.. मुझे याद नहीं रहा था.. लेकिन जो देवलिंग मैंने तुम्हें दिया था, उस पर पण्डित का चित्र होना चाहिये.. इसलिए इस देवलिंग पे मैं अपनी एक छोटी सी फोटो चिपका रहा हूँ.
रीना- ठीक है पण्डित जी.
पण्डित- और हाँ.. रात को दो बार उठ कर इस देवलिंग को जय करना.. एक बार सोने से पहले.. और दूसरी बार मध्य रात्रि में.
रीना- जी पण्डित जी..
पण्डित ने देवलिंग पर अपनी एक छोटी सी फोटो चिपका दी.. और रीना को बांधने के लिए दे दिया.
रीना ने पहले जैसे देवलिंग को अपनी टांगों के बीच बांध लिया..
आज की पूजा खत्म हुई और रीना अपने कपड़े पहन के घर चली आई.. पण्डित से अपनी तारीफ़ सुन कर वो खुश थी.
सारे दिन देवलिंग रीना की टांगों के बीच चुभता रहा.. लेकिन अब ये चुभन रीना को अच्छी लग रही थी.
रीना रात को सोने लेटी तो उसे याद आया कि देवलिंग को जय करना है..
उसने सलवार का नाड़ा खोल कर देवलिंग निकाला और अपने माथे से लगाया. वो देवलिंग पर पण्डित की फोटो को देखने लगी.
उसे पण्डित द्वारा की गई अपनी तारीफ़ याद आ गई.. अब उसे पण्डित अच्छा लगने लगा था.
कुछ देर तक पण्डित की फोटो को देखने के बाद उसने देवलिंग को वहीं अपनी टांगों के बीच में रख दिया और नाड़ा लगा लिया.
देवलिंग रीना की चूत को टच कर रहा था.. रीना ना चाहते हुए भी एक हाथ सलवार के ऊपर से ही देवलिंग पे ले गई.. और देवलिंग को अपनी चूत पे दबाने लगी. साथ साथ उसे पण्डित की तारीफ़ याद आ रही थी.
उसका दिल कर रहा था कि वो पूरा का पूरा देवलिंग अपनी चूत में डाल ले.. लेकिन इसे गलत मानते हुए और अपना मन मारते हुए उसने देवलिंग से हाथ हटा लिया.
आधी रात को उसकी आँख खुली तो उसे याद आया कि देवलिंग को जय करना है.
देवलिंग का सोचते ही रीना को अपने हिप्स के बीच में कुछ लगा.. देवलिंग कल की तरह रीना की हिप्स में फंसा हुआ था.
रीना ने सलवार का नाड़ा खोला और देवलिंग बाहर निकाला.. उसने देवलिंग को जय किया. उस पर पण्डित की फोटो को देख कर दिल में कहने लगी..
ये क्या पण्डित जी.. पीछे क्या कर रहे थे..?
रीना देवलिंग को अपनी हिप्स के बीच में ले गई और अपने गांड पे दबाने लगी. उसे मज़ा आ रहा था लेकिन डर की वजह से वो देवलिंग को गांड से हटा कर टांगों के बीच ले आई.. उसने देवलिंग को हल्का सा चूत पर रगड़ा.. फिर देवलिंग को अपने माथे पे रखा और पण्डित की फोटो को देख कर दिल में कहने लगी, ‘पण्डित जी.. क्या चाहते हो..? एक विधवा के साथ ये सब करना अच्छी बात नहीं..’
फिर उसने वापस देवलिंग को अपनी जगह बांध दिया.. और गरम चूत ही ले के सो गई.
अगले दिन..
पण्डित- रीना.. शिव को सुन्दर स्त्रियाँ आकर्षित करती हैं अत: तुम्हें श्रृंगार करना होगा.. परन्तु नियम के अनुसार ये श्रृंगार शुद्ध हाथों से होना चाहिये.. मैंने ऐसा पहले इसलिए नहीं कहा कि शायद तुम्हें लज्जा आये..
रीना- पण्डित जी.. मैंने तो आपसे पहले ही कहा था कि मैं भगवान के काम में कोई लज्जा नहीं करूँगी.
पण्डित- तो मैं तुम्हारा श्रृंगार खुद अपने हाथों से करूँगा.
रीना- जी पण्डित जी..
पण्डित- तो जाओ.. पहले दूथ से स्नान कर आओ.
रीना दूध से नहा आई.
पण्डित ने श्रृंगार का सारा सामान तैयार कर रखा था.. लिपस्टिक, रूज़, आई-लाइनर, ग्लीमर, बॉडी आयल..
रीना ने ब्लाउज और पेटीकोट पहना था.
पण्डित- आओ रीना..
पण्डित और रीना आमने सामने ज़मीन पर बैठ गए.. पण्डित रीना के बिल्कुल पास आ गया.
पण्डित- तो पहले आँखों से शुरू करते हैं
पण्डित रीना को आई-लाइनर लगाने लगा.
पण्डित- रीना.. एक बात कहूँ..?
रीना- जी कहिये पण्डित जी..
पण्डित- तुम्हारी आँखें बहुत सुन्दर हैं तुम्हारी आँखों में बहुत गहराई है.
रीना शरमा गई..
पण्डित- इतनी चमकीली.. जीवन से भरी.. प्यार बिखेरती.. कोई भी इन आँखों से मन्त्र-मुग्ध हो जाए.
रीना शर्माती रही.. वो कुछ बोली नहीं.. बस थोड़ा मुस्कुरा रही थी.. उसे अच्छा लग रहा था.
आई-लाइनर लगाने के बाद अब गालों पे रूज़ लगाने की बारी आई.
पण्डित ने रीना के गालों पे रूज़ लगाते हुए कहा.
पण्डित- रीना.. एक बात कहूँ.. ?
रीना- जी.. कहिये पण्डित जी..
पण्डित- तुम्हारे गाल कितने कोमल हैं जैसे कि मखमल के बने हों.. इन पे कुछ लगाती हो क्या..?
रीना- नहीं पण्डित जी.. अब श्रृंगार नहीं करती.. केवल नहाते वक्त साबुन लगाती हूँ.
पण्डित रीना के गालों पे हाथ फेरने लगा. इससे रीना शरमा रही थी.
पण्डित- रीना.. तुम्हारे गाल छूने में इतने अच्छे हैं कि शिव का भी इन्हें.. इन्हें..
रीना- इन्हें क्या पण्डित जी..?
पण्डित- शिव का भी इन गालों का चुम्बन लेने को दिल करे.
रीना शरमा गई.. थोड़ा सा मुस्कुराई भी.. अन्दर से उसे बहुत अच्छा लग रहा था.
पण्डित- और एक बार चुम्बन ले तो छोड़ने का दिल ना करे.
गालों पर रूज़ लगाने के बाद अब लिप्स की बारी आई.
पण्डित- रीना.. होंठ (लिप्स) सामने करो.
रीना ने लिप्स सामने करे.
पण्डित- मेरे ख्याल से तुम्हारे होंठों पर गाढ़ा लाल रंग बहुत अच्छा लगेगा.
पण्डित ने रीना के होंठों पे लिपस्टिक लगानी शुरू की.. रीना ने शर्म से आँखें बंद कर रखी थीं.
पण्डित- रीना.. तुम लिपस्टिक होंठ बंद करके लगाती हो क्या.. थोड़े होंठ खोलो..
रीना ने होंठ खोले.. पण्डित ने एक हाथ से रीना की ठोड़ी पकड़ी और दूसरे हाथ से लिपस्टिक लगाने लगा.
पण्डित- वाह.. अति सुन्दर..
रीना- क्या पण्डित जी?
पण्डित- तुम्हारे होंठ.. कितने आकर्षक हैं तुम्हारे होंठ.. क्या बनावट है.. कितने भरे भरे.. कितने गुलाबी..
रीना- आप मज़ाक कर रहे हैं पण्डित जी..
पण्डित- नहीं.. शिव की सौगंध.. तुम्हारे होंठ किसी को भी आकर्षित कर सकते हैं तुम्हारे होंठ देख कर तो शिव पार्वती के होंठ भूल जाएं.. वह भी ललचा जाएं.. तुम्हारे होंठों का सेवन करें.. तुम्हारे होंठों की मदिरा पिएं..
रीना अन्दर से मरी जा रही थी.. उसे बहुत ही अच्छा फ़ील हो रहा था.
पण्डित- एक बात पूछू?
रीना- पूछिए पण्डित जी..
पण्डित- क्या आज तक तुम्हारे होंठों का सेवन किसी ने किया है?
रीना ये सुनते ही बहुत शर्मा गई.
रीना- एक दो बार.. मेरे पति ने..
पण्डित- केवल एक दो बार..
रीना- वो ज्यादातर बाहर ही रहते थे.
पण्डित- तुम्हारे पति के अलावा और किसी ने नहीं..!
रीना- कैसी बातें कर रहे हैं पण्डित जी.. पति के अलावा और कौन कर सकता है? क्या वो पाप नहीं होता.
पण्डित- यदि विवश हो कर किया जाए तो पाप है, वरना नहीं.. लेकिन तुम्हारे होंठों का सेवन बहुत आनन्ददायक होगा.. ऐसे होंठों का रस जिसने नहीं पिया.. उसका जीवन अधूरा है.
रीना अन्दर ही अन्दर ख़ुशी से पागल हुई जा रही थी.. अपनी इतनी तारीफ़ उसने पहले बार सुनने को मिल रही थी.
फिर पण्डित ने हेयर-ड्रायर निकाला. अब पण्डित ड्रायर से रीना के बाल सुखाने लगा. रीना के बाल बहुत लम्बे थे.
पण्डित- रीना झूठ नहीं बोल रहा.. लेकिन तुम्हारे बाल इतने लम्बे और घने हैं कि शिव इनमें खो जाएंगे.
उसने रीना का हेयर-स्टाइल चेंज कर दिया. उसके बाल बहुत पफी हो गए थे. आई-लाइनर, रूज़, लिपस्टिक और ड्रायर लगाने के बाद पण्डित ने रीना को शीशा दिखाया.
रीना को यकीन ही नहीं हुआ कि वह इतनी सुन्दर भी दिख सकती है.
पण्डित ने वाकयी ही रीना का बहुत अच्छा मेकअप किया था. ऐसा मेकअप देख कर रीना खुद में सनसनी सी फ़ील करने लगी. उसे पता ना था कि वो भी इतनी एरोटिक लग सकती है.
पण्डित- मैंने तुम्हारे लिए खास जड़ीबूटियों का तेल बनाया है.. इससे तुम्हारी त्वचा में निखार आयेगा.. तुम्हारी त्वचा बहुत मुलायम हो जाएगी. तुम अपने बदन पे कौन सा तेल लगाती हो?
रीना ‘बदन’ का नाम सुन के थोड़ा शरमा गई.. सनसनी तो वो पहले ही फ़ील कर रही थी.. ‘बदन’ का नाम सुनके वो और अधिक सनसनी सी फ़ील करने लगी.
रीना- जी.. मैं बदन पे कोई तेल नहीं लगाती.
पण्डित- चलो कोई नहीं.. अब ज़रा घुटनों के बल खड़ी हो जाओ.
रीना अपने घुटनों के बल हो गई.
पण्डित- मैं तुम पर तेल लगाऊंगा.. लज्जा ना करना.
रीना- जी पण्डित जी..
रीना ब्लाउज-पेटीकोट में घुटनों पे थी..
पण्डित भी घुटनों पर हो गया. अब वो रीना के पेट पे तेल लगाने लगा. फिर वो रीना के पीछे आ गया.. और रीना की पीठ और कमर पर तेल लगाने लगा.
पण्डित- रीना तुम्हारी कमर कितनी लचीली है.. तेल के बिना भी कितनी चिकनी लगती है.
पण्डित रीना के बिल्कुल पीछे आ गया.. वे दोनों घुटनों पे थे.
रीना के हिप्स और पण्डित के लंड में मुश्किल से 1 इंच का फ़ासला था. पण्डित पीछे से ही रीना के पेट पे तेल लगाने लगा.
वो उसके पेट पे लम्बे लम्बे हाथ फेर रहा था.
पण्डित- रीना.. तुम्हारा बदन तो रेशमी है.. तुम्हारे पेट को हाथ लगाने में कितना आनन्द आता है.. ऐसा लग रहा है कि शनील की रजाई पे हाथ चला रहा हूँ.
पण्डित पीछे से रीना के और पास आ गया.. उसका लंड रीना के चूतड़ों की दरार को एकदम टच कर रहा था.
अब पण्डित रीना की नाभि में उंगली घुमाने का लगा.
पण्डित- तुम्हारी नाभि कितनी चिकनी और गहरी है.. जानती हो यदि शिव ने ऐसी नाभि देख ली तो वह क्या करेगा?
रीना- क्या पण्डित जी.?
पण्डित- सीधा तुम्हारी नाभि में अपनी जीभ डाले रखेगा.. इसे चूसता और चाटता रहेगा.
ये सुन कर रीना मुस्कुराने लगी. शायद हर लड़की या नारी को अपनी तारीफ़ सुनना अच्छा लगता है.. चाहे तारीफ़ झूठी ही क्यों ना हो.
पण्डित एक हाथ रीना के पेट पे फेर रहा था.. और दूसरे हाथ की उंगली रीना की नाभि में घुमा रहा था.
रीना के पेट पे लम्बे लम्बे हाथ मारते वक्त पण्डित दो तीन उंगलियां रीना के पेट से ऊपर उठता हुआ ब्लाउज के अन्दर भी ले जाता.
तीन चार बार उसकी उंगलियां रीना के मम्मों के निचले हिस्से पर टच हुईं.
रीना गरम होती जा रही थी.
पण्डित- रीना.. अब हमारी पूजा आखिरी चरण में है. परम्परा में कुछ आसन बताए गए हैं.
रीना- आसन.. कैसे आसन पण्डित जी?
पण्डित- अपने शरीर को शुद्ध करने के पश्चात जो स्त्री उस आसन में लेट जाती है.. शिव उससे सदा के लिए प्रसन्न हो जाता है.. लेकिन ये आसन तुम्हें एक पण्डित के साथ लेने होंगे.. परन्तु हो सकता है मेरे साथ आसन लेने में तुम्हें लज्जा आए.
रीना- आपके साथ आसन.. मुझे कोई आपत्ति नहीं है..!
पण्डित- तो तुम मेरे साथ आसन लोगी..?
रीना- जी पण्डित जी..!
पण्डित- लेकिन आसन लेने से पहले मुझे भी बदन पे तेल लगाना होगा.. और ये तुम्हें लगाना है.
रीना- जी पण्डित जी..
ये कह कर पण्डित ने तेल की बोतल रीना को दे दी.. और वो दोनों आमने सामने आ गए. दोनों घुटनों के बल खड़े थे.
रीना ने पण्डित की छाती पे तेल लगाना शुरू किया.
पण्डित ने छाती, पेट और अंडरआर्म्स शेव किये थे.. इसलिए उसकी स्किन बिल्कुल कोमल थी.
रीना पहले भी पण्डित के बदन से आकर्षित हो चुकी थी. आज पण्डित के बदन पे तेल लगाने से उसका बदन और चिकना हो गया. वो पण्डित की छाती, पेट, बाँहें और पीठ पर तेल लगाने लगी.
वह खुद के अन्दर से पण्डित के बदन से लिपटना चाह रही थी. रीना भी पण्डित के पीछे आ गई.. और उसकी पीठ पे तेल मलने लगी. फिर पीछे से ही उसके पेट और छाती पर तेल मलने लगी. रीना के चूचे हल्के हल्के पण्डित की पीठ से टच हो रहे थे. रीना ने भी पण्डित की नाभि में दो तीन बार उंगली घुमाई.
पण्डित- रीना.. तुम्हारे हाथों का स्पर्श कितना सुखदायी है.
रीना कहना चाह रही थी कि पण्डित जी.. आपके बदन का स्पर्श भी बहुत सुखदायी है.. लेकिन शर्म की वजह से ना कह पाई.
पण्डित- चलो.. अब आसन लेते हैं.. पहले आसन में हम दोनों को एक दूसरे से पीठ मिला कर बैठना है.
पण्डित और रीना चौकड़ी मार के और एक दूसरे की तरफ़ पीठ कर के बैठ गए.. फिर दोनों पास पास आए जिससे कि दोनों कि पीठ मिल जाएं.
पण्डित की पीठ तो पहले ही नंगी थी क्योंकि उसने सिर्फ लुंगी पहनी थी. रीना ब्लाउज और पेटीकोट में थी.. उसकी लोवर पीठ तो नंगी थी ही.. उसके ब्लाउज के हुक्स भी नहीं थे, इसलिए ऊपर की पीठ भी थोड़ी सी एक्सपोज्ड थी.
दोनों नंगी पीठ से पीठ मिला कर बैठ गए.
पण्डित- रीना.. अब हाथ जोड़ लो..
पण्डित हल्के हल्के रीना की पीठ को अपनी पीठ से रगड़ने लगा. दोनों की पीठ पे तेल लगा था.. इसलिए दोनों की पीठ चिकनी हो रही थी.
पण्डित- रीना.. तुम्हारी पीठ का स्पर्श कितना अच्छा है.. क्या तुमने इससे पहले कभी अपनी नंगी पीठ किसी की पीठ से मिलाई है..?
रीना- नहीं पण्डित जी.. पहली बार मिला रही हूँ.
रीना भी हल्के हल्के पण्डित की पीठ पे अपनी पीठ रगड़ने लगी.
पण्डित- चलो.. अब घुटनों पे खड़े होकर पीठ से पीठ मिलानी है.
दोनों घुटनों के बल हो गए.
एक दूसरे की पीठ से चिपक गए.. इस पोजीशन में सिर्फ पीठ ही नहीं.. दोनों के हिप्स भी चिपक रहे थे.
पण्डित- अब अपनी बाँहें मेरी बांहों में डाल के अपनी तरफ़ हल्के हल्के खींचो.
दोनों एक दूसरे की बांहों में बांहें डाल के खींचने लगे. दोनों की नंगी पीठ और हिप्स एक दूसरे की पीठ और हिप्स से चिपक गईं.
पण्डित अपने हिप्स रीना के कूल्हों पर रगड़ने लगा. रीना भी अपने चूतड़ पण्डित के कूल्हों पर रगड़ने लगी.
रीना की चूत गरम होती जा रही थी.
पण्डित- रीना.. क्या तुम्हें मेरी पीठ का स्पर्श सुखदायी लग रहा है?
रीना शरमाई.. लेकिन कुछ बोल ही पड़ी.
रीना- हाँ पण्डित जी.. आपकी पीठ का स्पर्श बहुत सुखदायी है.
पण्डित- और नीचे का..?
रीना समझ गई पण्डित का इशारा हिप्स की तरफ़ है.
रीना- अ..ह्ह..हाँ पण्डित जी..
दोनों एक दूसरे के हिप्स को रगड़ रहे थे.
पण्डित- रीना.. तुम्हारे चूतड़ भी कितने कोमल लगते हैं कितने सुडौल हैं. मेरे चूतड़ तो थोड़े कठोर हैं.
रीना- पण्डित जी.. आदमियों के थोड़े कठोर ही अच्छे लगते हैं.
पण्डित- अब मैं पेट के बल लेटूंगा.. और तुम मेरे ऊपर पेट के बल लेट जाना.
रीना- जी पण्डित जी.
पण्डित ज़मीन पर पेट के बल लेट गया और रीना पण्डित के ऊपर पेट के बल लेट गई.
रीना के चूचे पण्डित की पीठ पर चिपके हुए थे.
आगे की अन्तर्वासना कहानी भाग 4 में पढें
साथियो, इंडियन सेक्स स्टोरीज कैसी लग रही है?
मैं २२ साल का एक साधारण लड़का Sex Stories हूँ। मेरी दिलचस्पी ३५ साल या उससे ज्यादा उम्र की औरतों में है, इसके दो कारण हैं, एक तो इन औरतों की गांड काफी मोटी और चूची काफी बड़ी होती है, दूसरे अगर कभी इनकी ब्रा दिख रही हो या सलवार का नाड़ा ढीला हो तो ये १०० लड़कों के बीच में उसे ठीक करने में नहीं शर्माती।
अगर कभी इनकी गांड में ऊँगली डाल दी जाये या हाथ फेर लिया जाये या चूची दबा दी जाये तो इन्हें महसूस नहीं होता और अगर होता भी है तो नज़र-अंदाज़ कर देती हैं क्योंकि इनकी चूत तो पहले से ही फटी होती है। अगर आपकी दिलचस्पी इनमें नहीं भी है तो भी मेरी कहानी पढ़ो और फिर आपका लोड़ा भी मेरी तरह हर वक़्त इनकी मोटी गांड देख कर खडा हो जायेगा माल उगलने के लिए।
दोस्तों ये घटना तब घटी जब मैं बस से सफ़र कर रहा था और बस में बिलकुल भी जगह नहीं थी। अचानक से बस एक स्टाप पर रुकी और आप विश्वास नहीं करेंगे पूरी की पूरी बस खाली हो गयी पर मुझे अभी भी सीट नहीं मिली थी। मैं सोच रहा था आज किस्मत ख़राब है वरना कोई ना कोई आंटी तो दबाने के लिए मिल ही जाती।
पर भगवान् ने मेरी सुन ली। अगले बस स्टाप पर फैक्ट्री में काम करने वाली कुछ मजदूर औरतें चढी जो कि 3५-४० के बीच की थी। मेरे आगे एक बहुत ही छोटी पर मोटी औरत खड़ी हो गयी।
कुछ ही मिनट में भीड़ फिर बढ़ गयी और वो औरत अब मेरे बिलकुल करीब थी। मेरा उसके बदन से बदबू आ रही थी और इसी बदबू ने मेरा लोड़ा खडा कर दिया। उसके बाल थोड़े थोड़े सफ़ेद होने लग गए थे। उसकी उमर ३८ के आस पास रही होगी।
तभी वो पीछे की ओर हुई और अपनी गांड को मेरे लण्ड पे लगा दिया। मेरा लोड़ा २-३ सेकंड में ही खडा हो गया। उसने साड़ी पहनी थी और मैं उसकी गांड के दो टुकडो के बीच का गैप महसूस कर सकता था।
अभी मैं अपने लण्ड का दबाव उसकी गाँड पर बढ़ा ही रहा था कि मेरी पीठ पर दो मोटी मोटी गोल चूचियां टकराई। मैंने पीछे मुड़ के देखा तो एक ४५ साल की औरत जो कि कम से कम ३ बच्चों की माँ खड़ी थी। उसका रंग एक दम काला था और शायद उसका शराबी पति उस गरीब औरत को सुख नहीं दे पाता था, तभी वो आज मुझ से मज़ा ले रही थी।
मैं पीछे की ओर हुआ और जैसे ही मैंने अपनी पीठ पर उसके चुचों को महसूस किया, वो आगे वाली आंटी अपनी गांड को मेरे लोड़े पर धक्के दे कर मारने लगी। उसकी गांड चौड़ी थी और मेरा लोड़ा उसकी गांड में घुस जाता था।
अब मेरी हालत ख़राब होती जा रही थी सभी लोग मुझे देख रहे थे। अब मैंने हिम्मत करके अपना हाथ आगे वाली आंटी की गांड की तरफ बढ़ाया और सीधा उसकी चूत को महसूस करने लगा। उसने पैंटी नहीं पहनी थी और उसकी चूत गीली और ढीली थी और मैं अब अपने हाथ से उसकी चूत की खुशबू सूंघने लगा।
मैं पागल सा हो रहा था कि पीछे वाली आंटी ने मुझे देख लिया और मेरी गर्दन पर गर्म सांस छोड़ने लगी और उसने एक हाथ मेरे लोड़े पर पीछे से लगा दिया और उसे जोर से पकड़ लिया।
तभी वो आगे वाली आंटी पीछे मुड़ गयी और देखने लगी कि किसका हाथ उसकी गांड में घुस रहा है। वो भी हंसने लगी। अब मेरे लण्ड पे दो काम हो रहे थे, एक पीछे वाली आंटी के हाथ का कमाल और आगे वाली की गांड का कमाल।
पीछे वाली आंटी का स्टाप आ गया और अब मैं आगे वाली आंटी के साथ मज़ा लेने लगा पर तभी वो आगे वाली आंटी का स्टाप भी आ गया और उसने मुझे इशारे से उतरने को कहा।
मैं भी उसके साथ उतर गया और पीछे चलने लगा। आगे जा कर गन्ने के खेत आ गए और वो मुझे उसके अंदर ले गयी। जाते ही उसने अपनी साड़ी और पेटीकोट उठा दिया और नाली में लेट गयी उसकी चूत एकदम काली और सूखी थी। मैं उस पर लेट गया और उसका ब्लाऊज़ खोल कर उसकी चूची चूसने लगा।
उसकी चूची एकदम काली थी और उसके लिप्स भी काले थे मैंने अपना लोड़ा उसकी चूत में डाल दिया और उसकी मोटी मोटी चूची चूसने लगा।
अब बस वो मेरे ८ इंच के लोड़े को ले कर चीख रही थी और मज़ा ले रही थी। वो जैसे ही झड़ने वाली थी उसने मुझे जोर से पकड़ लिया और मैं भी झड़ गया और सारा माल उसकी चूत में छोड़ दिया। अब मैं खेत से निकल कर बाहर आ गया।
दोस्तो, मैंने उस औरत से बात तक नहीं की और उसकी चूत चोद दी। तब से मैं ऐसी आंटी को ढूँढता रहता हूँ पर ऐसी औरत मुझे दोबारा नहीं मिली। Sex Stories
सौरी सर, आज आखिरी दिन था मजार में हाजिरी लगाने का, आज 40 दिन पूरे हो गए हैं, कल से मैं समय से पहले ही हाजिरी दर्ज करा लूंगा.”
“यह क्या मजार का चक्कर लगाते रहते हो? इतना पढ़ने लिखने के बाद भी अंधविश्वासी बने हो।” प्रोफैसर ने व्यंग्य किया.
“सर, ऐसा न कहिए।” एक छात्र बोल उठा.
दूसरे छात्र ने हां में हां मिलाई,” सर, आप को मजार की ताकत का अंदाजा नहीं है।”
“सर, अंगरेजों के जमाने से ही इस मजार का बहुत नाम है, 40 दिनों की नियम से हाजिरी लगाने पर हर मनोकामना पूरी हो जाती है।” किसी छात्र ने ज्ञान बघारा.
आज भौतिकी की क्लास में मजार का पूरा इतिहास भूगोल ही चर्चा का विषय बना रहा.
प्रोफैसर भी इस वार्त्तालाप को सुनते रहे.
महेंद्र सिंह का पूरा छात्र जीवन व नौकरी के शुरू के वर्ष भोपाल में बीते हैं.
पिछले वर्ष उन्हें इस छोटे से जिले से प्रोफैसर का प्रस्ताव आया तो वे अपनी पत्नी को लेकर इस कसबेनुमा जिले परसिया में चले आए जहां सुविधा व स्वास्थ्य के मूलभूत साधन भी उपलब्ध नहीं हैं.
नए खुले आईटीआई में महेंद्र सिंह को उन के अनुभव के आधार पर प्रोफैसर के पद का औफर मिला, तो वे मना न कर सके और भोपाल के अपने संयुक्त परिवार को छोड़ कर अपनी पत्नी को साथ लिए यहां चले आए.
30 वर्षीय पत्नी सुजाता बेहद सुन्दर आधुनिक व उच्च शिक्षित है इसीलिए कभी कभार वह भी कालेज में गैस्ट फैकल्टी बन क्लास लेने आ जाती.
यह Xxx बाबा सेक्स कहानी इन्हीं सुजाता मैम की है.
सुजाता जब भी कालेज में आती, छात्रों की बांछें खिल जातीं.
नाभि दिखने वाली साड़ी, खुले बाल, गहरी लिपस्टिक से सजे होंठ और आंखों में गहरा काजल सजाए वह जब भी क्लास लेने आती, लड़कों में मैम को प्रभावित करने की होड़ मच जाती.
वे उसे फिल्मी हीरोइन से कम न समझते.
उस दिन महेंद्र जब घर लौटे तो चाय पीते हुए दिनभर की चर्चा में मजार का जिक्र करना न भूले.
यह सुनते ही निसंतान सुजाता की आंखें एक आस से चमक उठीं कि हो सकता है कि इसीलिए ही समय उसे यहां परसिया खींच लाया है.
शादी के कई साल बीत जाने पर भी अभी तक सुजाता निःसंतान थी बहुत उपाय कर लिए पर गर्भ धारण नहीं हो पाया।
दोनों दम्पति की मेडिकल जाँच में भी सब नार्मल था।
सुजाता जितनी वेशभूषा से आधुनिक थी उतनी ही धार्मिक थी.
आए दिन घर में महिलाओं को बुला कर धार्मिक कार्यक्रम करवाना उस की दिनचर्या में शामिल था.
इसी वजह से वह अपने महल्ले वालों में काफी लोकप्रिय हो गई थी.
सुजाता का शुरू में तो यहां बिलकुल मन नहीं लगता था मगर धीरे धीरे उसने अपने आप को साथी महिलाओं के साथ सामूहिक कार्यक्रम में व्यस्त कर लिया.
उसे रह रह कर भोपाल याद आता.
वहां की चमचमाती सड़कों की लौंग ड्राइव, किट्टी पार्टी, बड़े ताल का नजारा, क्लब और अपनी आधुनिक सखियों का साथ.
इधर, सुजाता का मन मजार के चक्कर लगाने को मचलने लगा.
वह सोचती कि सारे वैज्ञानिक तरीके अपना कर देख ही लिए हैं, कोई परिणाम नहीं मिला.
अब इस मजार के चक्कर लगा कर भी देख लेती हूं.
जब इस विषय में महेंद्र की राय लेनी चाही तो उन्होंने कोई उत्तर नहीं दिया.
शायद उन्होंने भी सुजाता की आंखों में आशा की चमक को देख लिया था.
महेंद्र से कोई भी जवाब न पा कर सुजाता सोच में पड़ गई.
उसने अपने पड़ोसियों से इस विषय में बात करने का मन बना लिया.
लगे हाथ महिलाओं ने सुजाता की दुखती रग पर हाथ रखते हुए उसे भी संतान की मनौती मांगने के लिए 40 दिन मजार का फेरा लगाने का सुझाव दे ही दिया.
कुछ का तो कहना था कि 40 दिन पूरे होने से पहले ही उसकी गोद हरी हो जाएगी.
जितने मुंह उतनी बातें सुन कर सुजाता ने तय कर लिया कि वह कल सुबह से ही मजार जाने लगेगी.
मजार कसबे के बाहर थी।
जब से यह जगह जिले में परिवर्तित हुई है, तब से भीड़ बढ़ने लगी और मजार में एक बाबा मुस्तफा की मौजूदगी भी थी.
बाबा हफ्ते में 3 दिन मजार में, शेष 4 दिन पास में पीपल के नीचे बनी झोपड़ी में बैठा मिलता.
लोग बाबा से अपनी परेशानियां बताते जिन्हें वह अपने तरीके से हल करने के उपाय बताता.
बाबा मुस्तफा बड़ा होशियार था, वह शाकाहारियों को नारियल तोड़ने तो मांसाहारियों को काला मुरगा काट कर चढ़ाने का उपाय बताता.
लोगों के बुलावे पर उन के घर जा कर भी झाड़ फूंक करता.
जो लोग उस के उपाय करवाने के बाद मन मांगी मुराद पा जाते, वे खुश हो उसके मुरीद हो जाते.
लेकिन जो लोग सारे उपाय अपना कर भी खाली हाथ रह जाते, वे अपने को ही दोषी मान कर चुप रहते.
इसलिए बाबा का धंधा अच्छा चल निकला.
सुजाता सुबह के समय साड़ी पहनकर घर से निकली.
उस समय हल्के जाड़े की शुरुआत हो गयी थी.
वह तेज कदमों से मजार की ओर निकल गई.
उसके घर और मजार के बीच एक किलोमीटर का ही फासला तो था.
अभी मजार में अगरबत्ती सुलगा कर पलटी ही थी कि बाबा मुस्तफा से सामना हो गया.
बाबा तगड़ा तंदुरुस्त अधेड़ उम्र का था।
सर पर गोल जालीदार टोपी, सफ़ेद कुरता और लुंगी में था; चेहरे पर लम्बी दाढ़ी।
बाबा सुजाता को देखता रह गया।
उसने कभी सोचा नहीं था कि इतनी सुन्दर स्त्री मजार पर आएगी।
सुजाता ने प्रणाम करने को झुकना चाहा पर बाबा दो कदम पीछे हट गया और बोला- मेरे नहीं, इसके पैर पकड़ो, वह जो इस में समाया है.
उसने उंगली से मजार की तरफ इशारा करते हुए कहा, “जिस मंशा से यहां आई हो, वह जरूर पूरी होगी. बस अपने मन में कोई शंका न रखना.”
बाबा ने सुजाता की आँखों में देखते हुए कुछ मंत्र पढ़े और सुजाता को कुछ मिश्री के दाने दिए।
सुजाता गदगद हो गई.
आज सुबह इतनी सुहावनी होगी, उसने सोचा न था.
उसे पड़ोसिनों ने बताया तो था यदि मजार वाले बाबा का आशीर्वाद भी मिल जाए तो फिर तुम्हारी मनोकामना पूरी हुई ही समझो.
खुश मन से सुजाता ने जब घर में प्रवेश किया तो उसका पति चाय की चुस्की के साथ अखबार पढ़ने में तल्लीन था.
सुजाता गुनगुनाते हुए घर के कार्यों में व्यस्त हो गई.
महेंद्र सब समझ गया कि वह मजार का चक्कर लगा कर आई है.
मगर कुछ न बोला.
वह सोचने लगा कि कितने सरल स्वभाव की है उसकी पत्नी, सब की बातों में तुरंत आ जाती है. अब अगर मैं वहां जाने से रोकूंगा तो रुक तो जाएगी मगर उम्रभर मुझे दोषी भी समझती रहेगी।
अगले दिन फिर सुजाता मजार पहुंची।
उसने अगरबत्ती जला कर माथा टेका।
वापस जाने को घूमी तो सामने बाबा सामने खड़ा था।
बाबा अपनी गहरी आँखों से सुजाता को देखता हुआ बोला- सुजाता, तुम्हे अब चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है. तुम्हारी सारी मनोकामना पूरी हो जाएगी।
सुजाता हैरान थी कि बाबा को उसका नाम कैसे पता चला.
“जल्दी ही तुम्हारी गोद में बच्चा होगा, बस कुछ महीनों की बात है।”
सुजाता से अब रहा नहीं गया और पूछा- आपको ये सब कैसे पता बाबा जी?
“मेरे पास तंत्र मंत्र की शक्ति है, मुझे सब पता है। लेकिन सुजाता इसके लिए तुमको साधना करनी होगी.” बाबा ने कहा.
“मैं सब कुछ करने के लिए तैयार हूँ बाबा जी।”
बाबा मुस्तफा ने एक काला धागा निकाला और बोला- इस धागे को अभी अपनी कमर में बाँध लो और इसे कभी भी न खोलना।
सुजाता ने धागा ले लिया और साड़ी को हटाते हुए कमर में दो राउंड करके धागा बांध लिया।
उसकी गोरी कमर और गहरी नाभि पर बंधा काला धागा देखकर बाबा मुस्तफा की आँखों में खास चमक थी.
सुजाता प्रणाम करके घर लौट आयी।
शाम होते होते सुजाता के शरीर में वासना की आग जलने लगी।
उसने सोचा कि जरूर यह इस काले धागे के कारण हुआ है।
रात में पहल करते हुए उसने पति से कहा- आज बहुत मन हो रहा है!
पति महेंद्र ने सुजाता को बाँहों में भर लिया और फिर वासना का तूफ़ान चला और थोड़ी देर में महेंद्र संतुष्ट होकर एक तरफ लेट गया.
पर सुजाता अधूरी थी, अतृप्त थी.
वह जागती रही और उसके मन में बार बार बाबा का तगड़ा तंदरुस्त जिस्म आ रहा था।
सम्मोहनी काला धागा पूरा असर कर रहा था।
अगले दिन कामवासना से तपती सुजाता अच्छी तरह सज धज कर मजार पहुंची।
हरे बार्डर वाली हलकी गुलाबी साड़ी नाभि के नीचे बंधी थी और पारदर्शी साड़ी से कमर दिख रही थी.
गहरे हरे रंग के ब्लाउज से स्तनों के उभार साफ़ दिख रहे थे.
बाबा उसे देखकर समझ गया कि मंत्र वाले काले धागे का असर हो गया है.
सुजाता ने अगरबत्ती करके बाबा की ओर देखा।
बाबा ने अपने पीछे आने इशारा किया।
सम्मोहित सी सुजाता बाबा के पीछे चल दी.
झोपड़ी में पहुंचकर बाबा तख़्त पर बिछे गद्दे पर बैठ गया और सुजाता को बैठने को कहा।
सुजाता तख़्त पर बैठ गयी।
मंत्रमुग्ध सुजाता पूरी तरह से बाबा के वश में थी.
बाबा मुस्तफा उठा और सुजाता को अपने आगोश में ले लिया।
सुजाता के लिपस्टिक लगे होंठों को बाबा ने चूसते हुए उसकी साड़ी उतार दी।
गहरे हरे रंग के ब्लाउज में कैद सुडौल स्तन, गोरी कमर पर गुलाबी पेटीकोट और काले धागे का बंधन।
सुजाता की सुंदरता देख कर बाबा और इन्तजार न कर सका।
उसने सुजाता को तख़्त पर लिटा दिया और अपनी लुंगी खोलते हुए सुजाता के ऊपर आ गया.
धीरे धीरे पेटीकोट ऊपर सरक गया और फिर सुजाता की आ..ह के साथ बाबा का लिंग सुजाता की योनि में प्रवेश कर गया।
बाबा ने एक और धक्का दिया और पूरा लिंग सुजाता की योनि में समा गया।
और बाबा सुजाता के ऊपर छा गया।
सुजाता को अपनी योनि में इतना भराव और कठोरता पहले नहीं मिली थी।
उसने देखा तो नहीं पर शायद बाबा का लिंग काफी मोटा था।
मुस्तफा ने तेजी से सुजाता के शरीर का मंथन करना शुरू कर दिया।
बाबा के भारी भरकम जिस्म के नीचे दबी सुजाता की कामुक सिसकारियां गूंज रही थी.
उसके हर प्रहार के साथ तख़्त की चरमराहट, सुजाता की पायल की छन-छन और चूड़ियों की खन-खन ने बाबा को मस्त कर दिया।
बाबा को ऐसी सुन्दर स्त्री कभी नसीब नहीं हुई थी।
इधर सुजाता को ऐसा तेज और ताकतवर सम्भोग पहली बार मिला था।
वह सब कुछ भूल कर बाबा से लिपटी हुई सम्भोग के आनंद में खोयी हुई थी।
बाबा के एक एक धक्के का जवाब अपनी कमर उचका कर देते हुए आगे बढ़ते बढ़ते वह अपनी मंजिल के पास पहुँच गयी।
सुजाता ने अपनी जांघों से बाबा मुस्तफा को कस कर भींच लिया और चरमसुख के आनंद में खो गयी।
बाबा मुस्तफा ने कुछ लम्बे लम्बे धक्के लगाए और फिर एक लम्बा धक्का मारा।
उसका लिंग सुजाता की योनि में गहराई तक समा गया।
भारी भारी आवाज निकालते हुए बाबा स्खलित होने लगा।
वीर्य की फुहारों से सुजाता की योनि भर गयी।
कुछ हल्के हल्के झटके लगाते हुए बाबा शांत हो गया.
दोनों एक साथ तृप्त हो गए।
एक सुन्दर कामातुर गदरायी स्त्री से सम्भोग करके बाबा मुस्तफा मस्ती से सुजाता के ऊपर लेटा रहा।
थोड़ी देर बाद बाबा मुस्तफा उठा, अपनी लुंगी पहनी और झोपडी के बाहर देखा.
आसपास कोई नहीं था.
सुजाता के चेहरे पर सम्भोग की अपार संतुष्टि थी.
पहली बार उसे ऐसा सम्भोग सुख मिला था।
वह उठी और साड़ी पहनकर घर के लिए चल दी.
शाम तक सुजाता फिर से कामवासना की आग में जलने लगी।
उसका मन बाबा के बारे में सोचने लगा और वह अगले दिन का इन्तजार करने लगी.
सुजाता अगले दिन मजार पर गयी और बाबा से संतुष्ट होकर लौट आयी।
अब सुजाता को बाबा की आदत हो गयी और अब झाड़ फूंक के बहाने बाबा सुजाता के घर भी आने लगा।
पति महेंद्र ड्यूटी पर होते और सुजाता बैडरूम में बाबा के साथ होती।
बाबा मुस्तफा ने सुजाता के यौवन का भरपूर मजा लिया और सुजाता बाबा की सम्भोग शक्ति से मस्त रहने लगी.
यह Xxx बाबा सेक्स का सिलसिला चलता रहा और डेढ़ महीने बाद सुजाता गर्भवती हो गयी।
सब बातों से अनजान पति महेंद्र बहुत खुश थे.
और सुजाता भी बहुत खुश थी पर वो सच जानती थी कि उसका बच्चा बाबा मुस्तफा का है.
अब सुजाता मजार पर कभी कभी ही जाती थी।
लेकिन बाबा उसके घर पर आता रहा।
कुछ दिन बाद सुजाता मजार गयी तो देखा बाबा एक सुन्दर विवाहित स्त्री को काला धागा दे रहा था।
कुछ दिन बाद एक बार वह शॉपिंग करने गयी तो एक और युवती मिली।
उसकी कमर पर काला धागा बंधा था।
उस युवती ने सुजाता की ओर देखा और मुस्कुरा दी।
उसने सुजाता की कमर पर बंधा काला धागा देख लिया था।
सुजाता भी मुस्कुराई।
दोनों की मुस्कराहट में खास समानता थी।
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