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मम्मी की दमदार चुदाई

मम्मी की भड़कते जिस्म को देख मेरा मन उत्तेजित हो हरेक रात उनकी दमदार चुदाई के सपने देखने लगा हालांकि उससे दोगुना मजा उनकी असल चुदाई करके मैंने महसूस किया।

मम्मी की दमदार चुदाई की कल्पना
हैलो दोस्तो, मेरा नाम मनोज है और मैं स्लिम मिड हाईट 5’8″ का और वजन करीब 54-55 किलो है। मैं 26 साल का हूँ, इन दिनों मैं देहरादून में रहता हूँ।

आज मैं आपको मेरे और मेरे मम्मी के सेक्स की कहानी सुनाता हूँ। यह बात आज से करीब 6-7 साल पहले की है जब मेरी उम्र 20 साल की थी और मेरी मम्मी 32 की थीं।

मेरी जवानी शुरु हुई थी और उनकी जवानी के शोले भड़कते थे। मेरी मम्मी बहुत सेक्सी और सुन्दर है। शी हेज गोट ए ब्यूटीफुल बॉडी शेप 36-28-36! शी हेज गॉड मेड बूब्स एज वेल एज बटक्स!

उनका सुडौल गोरा बदन बहुत हसीन है। वैसे वो मेरी रियल मम्मी नहीं हैं वह मेरे डैड की सेक्रेटरी थी, बाद में पापा ने माता जी के कोंन्सेंट से उससे अनओफियसली शादी कर ली।

मैं पहले उनको संध्या आंटी कहता था, पर अब मम्मी ही कहता हूँ।

मैं मम्मी को जब भी देखता तो मुझे उनका सेक्सी फिगर देखकर मन मे गुदगुदी होती थी।

मैंने उनको एक दो बार डैड के ऑफिस में आधा नंगा (जैसे जब वह स्कर्ट पहनती थी तो उनकी थाईज बड़ी जबरदस्त होती थी तब वह मेरे पापा की सेक्रेटरी थी।

एक दो बार मैंने मम्मी को डैड के ऑफिस के प्राइवेट रूम में जो चेंजिंग रूम कम रेस्ट रूम था। मैं छुप कर कपड़े चेंज करते भी देखा था, और मैं उनके चूचे और चड्डी के नीचे के एरिया को छोड़कर पूरा नंगा देख चुका था।

मम्मी की बॉडी एकदम संगमरमर की तरह चिकनी थी। उनकी जांघें ऐसी लगती थी जैसे दो केले का जोड़ा हो। उनके होंठ एकदम गुलाब की पंखुड़ियों की तरह थे और गाल एकदम कश्मीरी सेब जैसे पिंक।

मम्मी एकदम टाईट फिटिंग के कपड़े पहनती थी और मैं उनको बहुत नज़दीक से देखकर अपनी आँखों को सुकुन दिया करता था।

मतलब जब से मेरा लण्ड खड़ा होना शुरू हुआ वो बस संध्या (मम्मी) को ही तलाशता और सोचता था। मैं उनकी बॉडी को देखकर अपने मन और आँखों की प्यास बुझाया करता था।

लेकिन पहले जब तक वह संध्या आंटी थी मुझे उनसे नफरत थी और मैं सोचता था कि एक दिन इनको तसल्ली से चोदकर अपनी भड़ास निकालूँगा।

पर बाद में उनके लिए मेरे पापा के प्यार ने और उनके अच्छे व्यवहार ने मुझे चेंज कर दिया।

अब वो हमारे घर पर फर्स्ट फ्लोर में रहती थी। डैड और उनका बेडरूम फर्स्ट फ्लोर पर था और हुम लोग ग्राउंड फ्लोर पर रहते हैं।

डैड संध्या(मम्मी) के साथ फर्स्ट फ्लोर पर ही सोते हैं बेड रूम के साथ ही एक और रूम है जो एज ए कॉमन रूम यूज़ होता है। धीरे धीरे मैं मम्मी के और करीब आने लगा।

वह शायद मेरा इरादा नहीं समझ पा रही थीं। वह मुझको वही बच्चा समझती थी पर अब मैं जवान हो गया था।

जैसे ही मैंने कॉलेज में एडमिशन लिया तो डैड ने ऑफिस का वर्क भी मुझको सिखाना शुरू कर दिया और मैं भी फ्री टाइम में रेगुलरली ऑफिस का काम देखने लगा।

मोस्टली मैं एसोसिएट्स का काम देखता हूँ क्योंकि मैं समवेयर स्टूडेंट था।

कॉलेज में भी मुझे कोई भी लड़की मम्मी से ज्यादा सेक्सी नहीं लगती थी।

अब मझे जब मौका मिले मोन्स को टच करके, जैसे उनकी जाँघों पर हाथ फ़ेर के, उनके चूतड़ पर रब करके या कभी जानबुझकर उनके बूब्स छु लिया करता।

मम्मी पता नहीं जानबूझकर या अनजाने में अनदेखा कर देती थी, या वह मेरा उद्देश्य नहीं समझ पाती थी।

कभी डैड रात को मुझे अपने बेड रूम में बुलाते थे और ऑफिस के बारे में मम्मी और मेरे साथ डिसकस करते। क्योंकि मम्मी अक्सर नाईट गाऊन में होती थी और मैं पूरी तसल्ली से उनके बदन का मुआयना करता था।

उनके बूब्स बिल्कुल पके हुए आम जैसे मुझे बड़ा ललचाते थे, कई बार मम्मी को भी मेरा इरादा पता चल जता था पर वो कुछ नहीं कहती थी।

अब तो मेरी बेचैनी बढ़ती जा रही थी और मैंने मम्मी की चुदाई का पक्का इरादा कर लिया और मौके की तलाश करने लगा।

एक दिन जब डैड ने मुझे फर्स्ट फ्लोर पर रात को 11 बजे बुलाया तो मैं ऊपर गया तो डैड ने बताया कि उनको रात 1 बजे की फ्लाइट से 1 सप्ताह के लिये अर्जेंट बाहर जाना है और वो मुझे और मम्मी (संध्या) को जरूरी बातें ब्रीफ करने लगे।

मम्मी थोड़ा घबरा रही थीं तो डैड ने कहा- सैंडी डार्लिंग, यू डोंट वरी! तुम और मनोज सब सम्भाल लोगे, मनोज तुम्हारी मदद करेगा। कोई प्रॉब्लम हो तो, मुझे कॉल करना! वैसे यू विल मैनेज, देयर विल बी नो प्रॉब्लम!

मम्मी और पापा का फोरप्ले
उसके बाद डैड ने मुझसे कहा- सैंडी थोड़ी नर्वस है, तुम जरा बाहर जाओ मैं उसको समझाता हूँ।

मैं बाहर आ गया तो डैड ने अन्दर से दरवाजा बन्द कर दिया, लेकिन मुझको शक हुआ कि डैड मेरी अनुपस्थिति में संध्या(मम्मी) को क्या समझाते हैं?

मैं की-होल से चुपके से देखने लगा। लोजिकली डोर पर कर्टेन नहीं चढ़ा था और लाईट भी जल रही थी। लेकिन मैंने जो देखा तो मैं स्तब्ध रह गया।

डैड मम्मी को बाहों में लेकर किश कर रहे थे और मम्मी क्राई कर रही थी। फिर डैड ने मम्मी के होंठ अपने होंठों पर लेकर डीप किश लिया तो मम्मी भी जवाब देने लगी। फिर डैड ने मम्मी का गाऊन पीछे से खोल दिया और पीठ पर रब करने लगे।

मम्मी और डैड अभी भी एक दुसरे को किश कर रहे थे और दोनों लम्बी सांसें ले रहे थे कि मैं सुन सकता था। फिर डैड ने मम्मी का गाऊन पीछे से उठाया और उनकी चड्डी भी नीचे करके मम्मी के चूतड़ पर रब करने लगे।

मम्मी के चूतड़ के दर्शन
मम्मी की पीठ दरवाजे के तरफ थी जिस कारण मुझे मम्मी की गांड और चूतड़ के दर्शन पहली बार करने का मौका मिला।

मम्मी के चूतड़ एकदम संगमरमर से मुलायम और चिकने नजर आ रहे थे। मम्मी क्राई भी कर रही थीं और मस्ती में लम्बी सांसें भी ले रही थीं।

फिर अचानक डैड ने मम्मी का गाऊन आगे से ऊपर किया और उनकी चूत पर उंगलियाँ फिराने लगे पर मैं कुछ देख नहीं पाया क्योंकि वो दूसरी साइड थीं।

फिर डैड दूसरी तरफ़ पलटे तो मम्मी की चूत वाली साइड मेरे तरफ़ हो गई और अब मैं मम्मी की चूत थोड़ी बहुत देख सकता था।

पर डोर से कुछ नज़र साफ नहीं आ रहा था। मम्मी की चूत का मैं अन्दाज लगा सकता था क्योंकि डैड वहाँ पर उंगलियाँ फिरा रहे थे और मम्मी के खड़े होने के कारण चूत पूरी नजर नहीं आ रही थी।

वो बस एक छोटी लाइन से दिख रही थी जहाँ डैड उंगली फिरा रहे थे। उसके बाद डैड नीचे झुके और मम्मी की चूत पर अपने होंठ रख दिए।

यह मुझे साफ़ नहीं दिख रहा था पर मैं गेस कर सकता था कि मम्मी अब जोर जोर से सिसकारियाँ लेकर मजे ले रही थी और डैड भी मस्ती में थे।

लेकिन अचानक जाने क्या हुआ कि डैड रुक गए और उन्होंने मम्मी को छोड़ दिया और मम्मी को लिप्स पर किश करते हुए बोले- डार्लिंग आई ऍम सॉरी! आई कांट गो बियॉन्ड लेट आई कम बिकॉज़? मनोज इज आल्सो आउट, एंड आई ऍम गेटिंग लेट आई ऍम वैरी सॉरी!

मम्मी भी तब तक शांत हो चुकी थी पर वो असन्तुष्ट लग रही थी। वो सामान्य होते हुए बोली, इट्स ओके!
और उन्होंने अपना गाऊन ठीक किया।

उसके बाद डैड ने मुझको आवाज़ लगाते हुए कहा- मनोज, आर यू देयर बेटा?

मैं चौकन्ना हो गया और अपने को नार्मल करने लगा क्योंकि मेरा लण्ड एकदम खंभे के माफिक खड़ा हो गया था और मेरी धड़कन भी नार्मल नहीं थी। लेकिन जब तक डैड डोर खोलते मैं नार्मल हो गया था।

फिर डैड ने दरवाजा खोला और बोले- ड्राईवर को बुलाओ और मेरे सामान गाड़ी में रखो। रात काफी हो गई है, यू डोंट नीड टू कम एयरपोर्ट आई विल मेनेज एंड प्लीज! सी द ऑफिस एंड फोर वन वीक टेक लीव फ्रॉम द कॉलेज एंड असिस्ट सैंडी।

मैं और मम्मी डैड को ड्रॉप करने जाना चाहते थे पर डैड ने स्ट्रिक्टली मना कर दिया। डैड को हमने गुड बाय कहा और डैड ने हुमको बेस्ट ऑफ़ लक कहते हुए किश किया।

जब डैड चले गए तो मम्मी ने मुझसे कहा- मनोज आज तुम ऊपर वाले कमरे में ही सो जाओ मुझे कुछ अच्छा नहीं लग रहा है।
मैं तो ऐसे मौके की तलाश में ही था। मैं एकदम से थोड़ा झिझकने का नाटक करते हुए हाँ! कह दिया।

मम्मी और मैं फर्स्ट फ्लोर पर आ गए और मम्मी बेडरूम में चली गई उनहोने मुझे पुछा कि, आर यू कोम्फरटेबल ना?
मैंने कहा, यस!

वो बोली- एक्टचुअली आई ऍम नॉट फीलिंग वेल इसलिए तुमको परेशान किया!

मैंने कहा, इट्स ओके! मम्मी, फिर मम्मी अन्दर चली गई और मैं बाहर कॉमन रूम में लाइट ऑफ करके सो गया।

मम्मी थोड़ा घबरा रही थी, इसलिए उनहोने दरवाजा बन्द तो किया पर लॉक नहीं किया और नाईट लैंप ऑफ नहीं किया।

अब मेरे को तो नींद कहाँ आनी थी?, मैं तो मम्मी के साथ सपनो की दुनिया सजा रहा था और मेरी नज़र मम्मी की एक्टिविटीज पर थी।

करीब आधे घंटे बाद मम्मी मेरे कमरे में आई और जैसे ही उन्होंने लाइट ओन की तो देखा कि, मैं भी लेटा हुआ जग रहा हूँ।

मम्मी बोली- राजु लगता है, तुमको भी नींद नहीं आ रही है, 2:00 बज गए हैं!

तुम भी शायद, अपने डैड के बारे में और कल ऑफिस के बारे में सोच रहा हो।

मैंने कहा- बात तो आप ठीक कर रही हैं, पर पता नहीं क्यों? मुझे ऐसी कोई चिंता नहीं है, पर नींद नहीं आ रही है! आप सो जाओ, मैं भी सो जाता हूँ थोड़ी देर में नींद आ जाएगी।

मम्मी बोली- ओके! राजु पर मैं थोड़ा कम्फ़र्टेबल नहीं फील कर रही हूँ।

तुम सो जाओ, मैं लाइट ऑफ कर देती हूँ।

तब मैं मम्मी से कहा कि, मम्मी अगर आप बुरा ना माने तो ऐसा करते हैं कि, अन्दर ही मैं भी आपके पास बैठता हूँ बातें करते हुए शायद नींद आ जाए!

वो बोली- गुड आईडिया! चलो, अन्दर आ जाओ, और मैं और मम्मी अन्दर बेड रूम में चले गए।

मैं अन्दर चेयर पर बैठ गया और मम्मी बेड पर बैठ गईं। फिर मम्मी बोली, राजु ठण्ड ज्यादा है! तुम भी बेड पर ही बैठ जाओ।

मैंने मना करने का बहाना बनाया पर मम्मी ने जब दुबारा बोला तो, मैं उनके सामने बेड पर बैठ गया और रजाई से आधा कभर कर लिया।

अब मैं मम्मी को तसल्ली से बात कर रहा था और रजाई के अन्दर मैं पायजामे का नादा थोड़ा ढीला कर लिया था। फिर मैंने मम्मी से कहा कि, ऑफिस की बात नहीं करेंगे कुछ गप शप करतें हैं।

मम्मी नंगी जिस्म दिखाने को हुई राजी
फिर मम्मी बोली, ओके! तो मैंने कहा, मम्मी तुम बुरा ना मानो तो तुमसे एक प्राइवेट बात कहनी थी!

मम्मी बोली- कम ओन डोंट कंफ्यूज खुल कर कहो।

मैंने कहा- मम्मी यू आर मोस्ट ब्यूटीफुल लेडी आई इवर मेट!

आई रियली मीन इट मैं गप शप नहीं कर रहा हूँ।

मैं आज से नहीं जब से तुमको देखा है, तुमको अपनी कल्पना, अपना प्यार और सब कुछ मानता हूँ!

यू आर रियली ग्रेट! मम्मी, एंड योर फिगर इज मारवलस एंड इवन मोस्ट गॉर्जियस गर्ल ऑफ 16 कांट बीट योर ब्यूटी एंड सेंसुअलिटी।

मैं ये सब एक ही साथ कह गया कुछ तो मैं कहा कुछ मैं कहता चला गया पता नहीं मुझे क्या हो गया था।

मम्मी मुझे देखती रही और हँसने लगीं! बोली, तुम पागल हो एक बुढ़िया के दीवाने हो गए हो।

मैंने कहा- नो मम्मी यू आर मारवलस! कोई भी जवान लड़की, तुम्हारा मुकबला नहीं कर सकती!

मम्मी प्लीज अगर तुम मेरी एक बात मान लो तो मैं तुमसे जिन्दगी में कुछ नहीं माँगूंगा।

मम्मी बोली- अरे बुद्धु कुछ बोलो भी, ये शायरों की तरह शायरी मत करो!

मैं तुम्हारी क्या हेल्प कर सकती हूँ?

मैंने कहा- मम्मी प्लीज! बुरा मत मानना पर मैं तुमको सबसे खूबसुरत मानता हूँ, इसलिए अपनी सबसे खूबसूरत लेडी की खूबसूरती को एक बार पूरी तरह देख लेना चाहता हूँ!

मम्मी प्लीज! मना मत करना, नहीं तो मैं सचमुच मर जाऊँगा और अगर जिंदा भी रहा तो मारा जैसा ही समझो।

मम्मी एकदम चुप हो गई और सोचने लगी फिर धीरे से बोली- राजु, तुम सचमुच दीवाने हो गए हो, वह भी अपनी मम्मी के!

अगर तुम्हारी यही इच्छा है तो ओके! बट प्रॉमिस, मेरे साथ कोई शरारत नहीं करना नहीं तो, तुम्हारे डैड को बोल दूँगी और आँख मारते हुए बोली तुम्हारी पिटाई भी करूंगी!

मैंने कहा- ओके! पर एक शर्त है कि, मैं अपने आप देखूँगा आप शान्त बैठी रहो।

मम्मी बोली- ओके! मैं मम्मी के नज़दीक गया और मम्मी का गाऊन के पीछे का बटन खोलकर गाऊन को डाउन कर दिया फिर उसको उनकी कमर से नीचे लाया। इसके बाद मैंने रजाई हटाई।

अब मम्मी मेरे सामने ऊपर से सेमी न्यूड हो गई थी उनके ऊपर केवल ब्रा ही रह गई थी।

मम्मी बिल्कुल बुत की तरह शांत थी। मैं नहीं समझ पा रहा था कि उनको क्या हुआ है। मुझे लगता है कि वह बड़े कन्फ्जयून में थी पर?

मैं बड़ा खुश था और एक्साईटमेंट में मेरी खुशी को और बढ़ा दिया था। फिर मैंने मम्मी का गाऊन उनकी टाँगों से होते हुए अलग कर दिया।

अब मम्मी केवल पैन्टी और ब्रा में बेड पर लेटी थी। फिर मैंने मम्मी की ब्रा का हुक खोल दिया।

मम्मी की एक चीख सी निकली पर फिर वह चुप हो गई। फिर मैं मम्मी की ब्रा को उनके शरीर से अलग कर दिया।

मम्मी की चूचियों को चूमा
उनके बूब्स देखकर मैं पागल हो गया और एक्साईटमेंट में मैंने उनके बूब्स को चूम लिया।

मम्मी की सिसकारी निकल गई, पर नेक्स्ट मोमेन्ट वो क्रीटिसाईट होती हुई बोली- राजु बिहेव योरसेल्फ तुमने वादा किया था?

मैंने कहा- मम्मी, तुम इतनी मस्त चीज़ हो! कि मैं अपना वादा भूल गया।

फिर मैंने मम्मी की पैन्टी को निकालने लगा और मम्मी ने भी इसमें मेरी मदद की पर, वो एक बूत सी बनी थी।
उनकी इस हरकत से मैं भी थोड़ा नर्वस हो गया, पर मैंने अपना काम नहीं रोका, और पैन्टी के निकलते ही मेरे कल्पनाएँ साकार हो गई थी!

मम्मी की चूत का अनोखा एहसास
मैंने मम्मी की चूत पहली बार देखी थी, एकदम चिकनी मखमल जैसी! और एकदम बन्द, ऐसा लगती थी जैसे संतरे की दो फांकें हों!

मैंने ब्लू फिल्मों में बहुत सी चूतें देखी थी। वो एकदम चौड़ी और मरकस वाली होती हैं, पर मम्मी की चूत को देखकर यह लगता ही नहीं था कि, वो एक 32 साल की औरत की चूत है।

सबसे बड़ी बात यह थी कि, उनकी चूत एक दम क्लीन शेवड थी और गोरी ऐसी कि, ताजमहल का टुकड़ा! अब मेरे सामने एक 32 साल की लड़की नंगी लेटी थी।

आप खुद सोचो! ऐसे में एक 20 साल के लड़के का क्या हाल हो रहा होगा?

फिर मैंने कहा, मम्मी प्लीज! मैं एक बार तुम्हारी बॉडी को महसूस करना चाहता हूँ कि, एक औरत की बॉडी के रियल टच का क्या एहसास होता है?

मम्मी बोली- तुम अपना वादा याद रखो, सोच लो वादा खिलाफी नहीं होनी चाहिए!

मैं उनका सही मतलब नहीं समझ पाया पर उनकी नंगी काया देखकर मैं पहले ही बेशुध हो चुका था, अगर कोई कमी थी तो मम्मी के रेस्पोंस की और मेरे पहले एक्स्पेक्ट की वजह से झिझकी।

मम्मी के चूचियों का छुवन का आनन्द
फिर मैं मम्मी के ल्पिस का एक डीप किश लिया और उनको उनकी पीठ से बाहों में ले लिया, और उनकी पीठ पर रब करने लगा।

मम्मी का कोई रेस्पोंस नहीं आया पर, उनके बूब्स का टच मुझे पागल कर रहा था। ऐसा टच मुझे पहली बार हुआ था!

मैं समझ नहीं पा रहा था कि वो बूब्स थे या, मार्बल और वेल्लेट का मिक्स! आअह!! फ्रेंड्स, इट वाज अ रियली ग्रेट फीलिंग। उसके बाद मैंने मम्मी को पलटा और अब उनकी पीठ पर किश करने लगा और उनके बूब्स को मसलने लगा।

ऊह!! आई वाज इन 7थ स्काई! फ्रेंड्स, आई कान्ट टेल यू क्या मजा आ रहा था।

मम्मी भी अब कोई विरोध नहीं कर रही थी पर, उनका रेस्पोंस बहुत पॉजिटिव नहीं था, पर मुझे अब इस बात का कोई एहसास नहीं था कि मम्मी क्या सोच रही है?

मैं तो सचमुच! जन्नत के दरवाजे की तरफ बढ़ रहा था और मम्मी की बॉडी का टेस्ट ले रहा था।

मम्मी को चुदने के लिए राजी किया
मम्मी के बूब्स का रस सचमुच बड़ा रसीला था। मैंने अब उनके निप्पल्स पर दांतों से काटना शुरू किया तो मम्मी पहली बार चीखी! और बोली, अरे काट डालेगा क्या? आराम से कर हरामी।

मैं समझ गया कि अब मम्मी भी मस्त हो चुकी हैं। मैंने अपना पायजामा उतार दिया और बनियान भी उतार दी।

अब मैं केवल अंडरवियर में था। कुछ देर मम्मी के बूब्स चूसने के बाद मैंने मम्मी की नेवेल पर किश करना शुरू कर दिया तो, मम्मी बेड पर उछलने लगीं और सिसकारियाँ लेने लगीं।

मैं हाथों से उनके बूब्स दबा रहा था और होंठों से उन नेवेल को चुम रहा था, फिर मैं और नीचे गया और मम्मी के अब्डोमन के पास और पुबिक्स एरियाज में किश करने लगा।

दोस्तों, मैं बता नहीं सकता और, आप भी केवल मस्सुस कर सकते हैं कि क्या मजा! आ रहा था?

इसके बाद मैंने मम्मी की टागों पर भी हाथ फिराना शुरु कर दिया। उनकी टांगें बड़ी मुलायम और स्मूथ थी!

मुझे लगता है कि, मम्मी अपनी बॉडी का बहुत ख्याल रखती हैं और डैड भी तो उनकी इस लाजवाब! बॉडी के गुलाम हो गए थे। बट शी इज ग्रेट लेडी रियली इन आल रिस्पेक्ट! और इस टाइम तो वो मेरी क्लिओपेट्रा बनी हुई थी।

अब मैं मम्मी की टाँगों और जाँघों पर अपना कमाल! दिखाना शुरु कर दिया और मैं कभी उनको चूमता कभी दबाता और कभी रब करता।

मम्मी भी अब तक मस्त हो चुकी थी और मेरा पूरा साथ दे रही थी पर, मैंने अब तक एन्ट्री गेट पर दस्तक नहीं दी थी।

मैं मम्मी को पूरा मस्त कर देना चाहता था और मैंने अपने लण्ड को फुल कन्ट्रोल में रखा था। मैं मम्मी की बॉडी को अभी भी अपने होंठों और उंगलियों और हाथों से ही रौंद रहा था।

अब तो मम्मी भी पूरी तरह गर्म हो चुकी थी और वादे वाली बात भुलकर मस्ती में पूरे जोर से मेरा साथ दे रही थीं, और चीखने लगी- अरे मनोज, अब आ भी जा यार प्लीज! मत तड़पा जालिम जल्दी से मेरे ऊपर आ जा!

मैंने कहा- बस मम्मी, जस्ट वेट मैं तैयार हो रहा हूँ बस एक मिनट रूक जाओ मैं भी आता हूँ।

मम्मी की धक्कापेल चुदाई
तभी मम्मी ने मेरा अंडरवियर नीचे खिसका दिया और वो बोली- अबे मादरचोद अपनी मम्मी की बात नहीं मानेगा?

इतना कहकर उन्होंने अब मेरा लण्ड पकड़ कर जोर से दबा दिया।

मेरी तो चीख निकल गई और अब तक जो मेरा लण्ड तैयार था बिल्कुल बेताब हो गया।

मैंने मम्मी की दोनों टाँगों को दूर करते हुए उनकी राईट थाई पर बैठ गया, और उनके चूतड़ को दोनों हाथों से धकेलते हुए अपना लण्ड उनकी चूत के पास ले गया, और पूरे जोर का धक्का दिया तो मेरा आधा लण्ड उनके चूत में समा गया।

मेरी तो चीख निकल गई लेकिन मम्मी को कुछ तसल्ली हुई और वो मेरे अगले एक्शन का इंतज़ार करने लगी।

मैंने एक और ज़ोरदार धक्का लगाया तो पूरा लण्ड अन्दर चला गया। अब मैंने धीरे धीरे अन्दर बाहर करना शुरू किया और मम्मी की दूसरी जाँघ को अपने कंधे की तरफ़ रख दिया। राईट थाई पर बैठ कर अपना चुदाई कार्यक्रम शुरू कर दिया।

अब तो मम्मी पूरे मज़े में आ गई और मेरा पूरा सहयोग करने लगीं।पूरे कमरे में मेरे और मम्मी के चुदाई प्रोग्राम का म्यूजिक शुरू हो गया।

मम्मी भी शश!! अह्ह!! करने लगीं और बोली- अन्दर तक घुसेड़ दे अपना लण्ड, मैं भी जोर से अन्दर बाहर करने लगा।

बोलीं- मस्ती आ रही है, तुझे भी मज़ा आ गया! आज बहुत दिन बाद जवानी का मज़ा पाया है। कसम से आज तूने मुझे अपनी जवानी के दिन याद दिला दिए! अयीई ईस्स!

मैं भी बहुत जोश के साथ चुदाई कर रहा था।
मैं बोला- आज तेरी चूत की धज्जियाँ उड़ा दूँगा। अब तू डैड से चुदवाना भूल जाएगी, हर वक्त मेरा ही लण्ड अपनी चूत मे डलवाने को तड़पा करेगी।

मम्मी- आह्ह!! आयीई!! क्या मज़ा आ रहा है, फ़क मी हार्डर रआजु कम ऑन और फर्स्ट यू आर माई डार्लिंग।
मैं भी बोला- यस माई फेयर लेडी स्योर!

मम्मी बोली- मुझको संध्या के नाम से बुलाओ, कहो संध्या मेरी जान!

मैंने कहा- ओके संध्या डार्लिंग ये ले मजा आअ रहा है ना! आज मैं भी अपने लण्ड से तेरी चूत को फाड़ के रख देता हूँ।

वह चिल्ला रही थी- आअह गुड। म्मम!! आह!! उह!! म्म!!

फिर अचानक जब मुझे कुछ दबाव सा महसूस होने लगा तो मम्मी बोली- मनोज अब बस एक बार अब धीरे धीरे कर दे … मेरा तो पानी निकाल दिया तूने।

मैंने स्पीड थोड़ी कम कर दी और अब मम्मी और मैं थकने भी लगे थे।
अचानक मेरा सारा दबाव मेरे लण्ड के रास्ते मम्मी की चूत की घाटी में समा गया और मम्मी भी शान्त हो गई और हम दोनों एक दूसरे से चिपक कर लेट गए।

मेरा लण्ड मम्मी की चूत के अन्दर ही था।

एक दूसरे से बिना कुछ बोले ही हम दोनों वैसे ही सो गए।

सुबह जब नींद खुली तो 6:00 बज गए थे और मेरा लण्ड मम्मी की चूत में वैसे पड़ा था।

मैंने मम्मी को जगाया तो वह शरमाने सा लगीं फिर बोली- मनोज तुम तो एकदम जवान हो गए हो!

तुमने आज, इस 38 साल की बुढ़िया को, 18 साल की गुड़िया बना दिया!

तब मैंने कहा- अब तू मुझे बुलाएगी क्या बोल?
उसने मुझे अलग करके दूर करते हुए कहा- जरुर मेरी जान!
मम्मी ने अपने उपर लिटाया मुझे किश किया।

मैंने भी फिर से मम्मी के माथे पर, बूब्स पर, नाभि पर किश कर बगल में ही लेट गया और सुबह तक एक साथ लिपट कर चिपक कर सोए रहे।

7:00 बजे मम्मी ने उठाया और मुस्कुराईं, बोली- याद रखना इसको राज रखना!
मैं भी बोला- ऐसे ही इनटरटेनमेंट कर रहना!

तो दोस्तो, ये तो थी मेरी और मम्मी की चुदाई की कहानी आपको कैसी लगी?
यह तो शुरूआत है अभी तो कई कहानियाँ हैं बस आप मेरी स्टोरी पढते रहें

सेक्स शब्द मात्र से ही तन मन में रोमांच पैदा हो जाता है तो सोचिये जिसने एक बार ये स्वाद चख लिया हो तो वो इसके बिना कैसे तड़पता होगा?
मैं निशा मल्होत्रा हरियाणा के कुरुक्षेत्र शहर से 34 28 36 फिगर की 28 वर्षीय नटखट अल्हड़ जवान शादीशुदा उच्च शिक्षित महिला आप सभी सेक्स दीवानों का अभिवादन करती हूँ.

मेरी शादी आज से तीन वर्ष पहले एक काफी अमीर परिवार में हुई थी. मेरे पतिदेव का अपना बिज़नस है और उनका कारोबार भारत के कई प्रदेशों में फैला हुआ है. इसलिए वो अक्सर अपने बिज़नस टूर की वजह से काफी काफी दिनों तक बाहर भी रहते हैं. शादी के बाद सुहागरात पर पहली बार सेक्स का आनन्द लेने का मौका मिला था मुझे जीवन में! सुहागरात की चुदाई मेरी पहली चुदाई थी.
मेरे पतिदेव बहुत सेक्सी भी हैं और पावरफुल भी इसलिए उन्होंने मुझे सेक्स का अपार सुख दिया. मुझ में ऐसी काम वासना जागृत कर दी थी उन्होंने कि अक्सर जब वो घर नहीं होते थे तो मैं पीछे से सेक्स के लिए तड़पती हुई कभी डिल्डो से तो कभी अपनी प्यारी उंगलियों से अपनी चूत का रस निकलकर उसे शांत करती थी.

पर शादी के तीन साल बाद अब ये प्यास कुछ ज्यादा ही बढ़ने लगी थी मुझमें और दूसरी तरफ मेरे पति अपने कारोबार की तरक्की के लिए कुछ ज्यादा ही व्यस्त रहने लगे थे.

फिर एक दिन वो हुआ दोस्तो… जिससे मुझे मेरी काम इच्छाओं को पूरी करने वाला एक नया साथी मिल गया.

उस दिन मैं हमेशा की तरह बाथरूम में नहा रही थी, मैं कभी भी कपड़े अपने साथ अन्दर लेकर नहीं जाती. नहाते वक़्त मैं अपने खूबसूरत जिस्म को निहारते हुए अपनी ही कामवासना में खोई हुई अपनी चूत को सहलाये जा रही थी.
मेरी ब्रा पैंटी और टॉवल सब बाहर मेरे बेड पर ही पड़े थे.

मेरे मामाजी का लड़का जिसके साथ बचपन से ही मैं काफी खुली हुई थी, हम दोनों भाई बहन हर तरह की बातें कर लेते थे, वो घर आया और मेरी सास ने उसे ऊपर मेरे रूम में भेज दिया मिलने!

वो मेरे बेडरूम में आकर बेड पर बैठा और मेरे अंदरूनी कपड़ों को देखकर उसका मन भी डोलने लगा शायद… वो मेरी ब्रा हो हाथ में लेकर चूमते हुए मेरे 34 साइज़ के भरे हुए बूब्स को फील करके उन्हें चूसने का अनुभव करने लगा.

इधर मैंने अपनी चूत को सहलाकर उसका रस निकाला और अच्छे से नहाकर अपने जिस्म की खूबसूरती को निहारकर मटकती हुई अपने बाथरूम का दरवाजा खोलते हुए बेडरूम में आई तो देखती हूँ कि मेरे बेड पर तरुण (मेरे मामा का लड़का) बैठा हुआ है और उसका तक़रीबन 8 इंच का एकदम कसा हुआ लंड जो काली घुंघराली झांटों से भरा हुआ था, उस पर मेरी पैंटी को रगड़ रहा था.

मैं उसे इस हालत में देखकर कुछ पल के लिए मानो मन्त्र मुग्ध सी हो गई थी. मैं ये भी भूल गई कि मैं खुद एकदम नग्न अवस्था में उसके सामने हूँ. वो भी मेरी जैसी अप्सरा को अपने सामने इस नग्न कामुक अवस्था में देख खो सा गया था.
इससे पहले कि मैं कुछ समझ पाती, वो एकदम से मेरे करीब आ गया. हम दोनों अब एक दूसरे के बिल्कुल समीप थे, दोनों एक दूजे की आँखों में खोये हुए थे कि इतने में कब उसने मेरे होंठों को अपने लबों में ले लिया, पता ही नहीं चला यारो!

मेरे अन्दर भी सेक्स की अधूरी कामनायें पूरी तरह से जाग चुकी थी और वो भी आज मुझे पूरी तरह से भोगने के लिए तैयार था. उसने फटाफट अपने सारे कपड़े निकाले और मुझे चूमते हुए बेड पर लिटा दिया, फिर मेरे कोमल पर सख्त, मुलायम पर कसे हुए बूब्स को जोरों से चूसने लगा, मेरे पेट को चूमते हुए मेरी चूत तक पहुँच गया और फिर एकदम से टूट पड़ा मेरी भीगी हुई चूत पर…

उफ अशश्स आह्ह्ह आह्ह ह्ह की आहें बरबस ही मेरे मुख से निकलने लगी.

उसने चूस चूस कर ही मेरी प्यासी चूत का कामरस निकाल दिया और फिर अपने तनतनाते हुए लंड को मेरे मुख के करीब ले आया. मैं समझ गई थी उसका इशारा और मैं खुद उसके कसे हुए लंड को चूसना चाहती थी इसलिए मैंने अपना मुंह पूरा खोलते हुए उसके लंड को गप्प से निगलना शुरू किया.

अभी कुछ ही पल हुए थे उसका लंड चूसते हुए मुझे कि इतने में उसने मेरे मुँह से अपना लंड निकाला और बेड पर लेट गया. मैं उसका इशारा समझते हुए उसके ऊपर चढ़ गई और अपनी भीगी प्यासी चूत में उसका लंड सेट करने लगी.
वो मेरे 34 साइज़ के रसभरे बूब्स को दबाने लगा जोर से और मैं उसके लंड पर कूदने लगी. उस वक़्त हम दोनों सेक्स के नशे में चूर हो चुके थे.

जल्दी ही मैं झड़ गई और थक कर नीचे उतर गई फिर वो मेरे ऊपर आ गया. उसने मेरी चूत को चूमा और फिर अपना लंड मेरी चूत में डालते हुए दस मिनट तक मेरी ज़बरदस्त चुदाई की.

हम दोनों थक कर कुछ देर यूँ ही साथ नंगे ही लेटे रहे.

वैसे पहले हमारे बीच बातें तो सभी हो जाती थी मज़ाक मजाक में… पर दोनों के बीच सेक्स का यह पहला अवसर था.

उस दिन से मुझे मेरी तनहाई को मिटाकर प्यार और सेक्स का आनन्द देने वाला साथी मिल गया.

मित्रो, यह थी मेरे पहले पर पुरुष के साथ सेक्स भाई बहन की चुदाई की कहानी.
मैं आशिक राहुल का दिल से और अपनी भीगी चूत से धन्यवाद करती हूँ कि उन्होंने मेरी कहानी को हिंदी में लिखा और अन्तर्वासना पर प्रकाशित करने में मेरी मदद की और साथ ही आशिक राहुल से गुजारिश भी करती हूँ कि वो जल्दी ही उनके और मेरे बीच हुए सेक्स संगम की रोचक कहानी भी आप सबके सामने पेश करें!
और साथ ही अन्तर्वासना प्लेटफ़ॉर्म को धन्यवाद करना चाहूंगी जिसकी वजह से ऐसे प्यारे दोस्त से मुलाकात हुई और अपनी सेक्स कामनाओं के पूर्ति के लिए एक विश्वसनीय दोस्त मिला.

दोस्तो! यह भाई बहन की चुदाई की कहानी थी निशा मल्होत्रा की उन्ही की जुबानी. जैसाकि निशा ने कहा है कि मैं उनके और मे

अनजान आदमी से फ्रेंड के साथ सेक्स किया हाय फ्रेंड्स मेरा नाम मालविका हैं मेरी उम्र 27 साल हैं और मेरा फिगर 36-34-38 हैं मैं दिल्ली से हूं। मेरे हसबैंड एक बड़े संस्थान में नौकरी करते हैं और मैं भी सरकारी नौकरी के लिए तैयारी कर रही हूं। ये मेरी रियल सेक्स स्टोरी हैं। यह मेरी और मेरी कोचिंग की क्लासमेट मीनाक्षी की हैं। हम लोग कोचिंग में हमेशा एक साथ बैठते हैं और वापस घर भी एक साथ ही आते हैं मीनाक्षी की उम्र 30 साल है और उसका फिगर 38 34 40 है वह मेरे से थोड़ी मोटी है और उसके बड़े-बड़े बस और बड़ी-बड़ी गांड मेरे से भी ज्यादा बड़े और सेक्सी लगते हैं। वह कोचिंग में हमेशा टाइट कपड़े पहन कर आती है और कोचिंग के टीचर और बाकी स्टूडेंट उसे घूर-घूर कर देखते रहते हैं। कोचिंग के बाद जब हम घर आते हैं तो कई बार वह मेरे साथ मेरे घर आ जाती है क्योंकि वह भी दिल्ली में अकेले रहकर ही तैयारी कर रही है उसकी फैमिली उदयपुर में रहती है और उसका हस्बैंड कोलकाता में नौकरी करता है। वह सेक्स में बहुत इंटरेस्ट लेती है और मेरे से भी मेरे और मेरे हस्बैंड की सेक्स लाइफ के बारे में रोज पूछती रहती है। एक बार हम कोचिंग से घर आए तो मीनाक्षी और में एक साथ बैठकर पोर्न देखने लगे और पॉर्न मूवी देखते देखते हम दोनों गर्म हो गई थी तो मीनाक्षी मुझे किस करने लगी और मैं भी उसे वापस किस करने लगी और हम एक दूसरे के बूब्स दबाने लगे और वह मेरे कपड़े उतारने लगी और उसने मेरे सारे कपड़े उतार कर मुझे नंगा कर दिया और खुद भी पूरी नंगी हो गई फिर वह आई और अपना बूब्स मेरे मुंह में दे दिया और बोली कि तुम इसे जोर-जोर से चूस हो और मैं उसके बूब्स को चूसने लगी वह मेरे बस को दबा रही थी और मैं उसके बूब्स को चूस रही थी कुछ देर बाद उसने मुझे सोफे पर लिटा दिया और मेरी चुत चाटने लगी। वह अपनी जीभ मेरी चुत के अंदर तक डालकर चाट रही थी और मेरे बूब्स को सहला रही थी। फिर उसने मेरे मुंह पर अपनी छूट रखनी और मेरी चुत चाटने लगे हम लोग 69 की पोजीशन में एक दूसरे की चुत चाट रहे थे। कुछ देर बाद हमारी चुत से पानी झड़ गया और हम एक दूसरे से अलग होकर सोफे पर नंगे ही बैठ गए। फिर उसने मुझे कहा कि तुम्हारे पास डिल्डो है क्या तो मैंने कहा नहीं मेरे पास तो नहीं है तो फिर वह बोले कि घर में लंड के जैसा क्या है तो मैंने कहा कि फ्रिज में खीरा रखा है तो वह बोली तो लेकर के आओ फिर मैं किचन में गई और एक लंबा खीरा लेकर आई मीनाक्षी ने मुझे कहा कि तुम्हारे हस्बैंड के कंडोम कहां पड़े हैं तो मैंने कहा कि वह अलमारी के अंदर है तो उसने एक कंडोम लिया और खीरे पर कंडोम चढ़ा लिया। फिर वह सोफे पर टांगे चौड़ी करके बैठ गई और मुझे कहा कि तुम मेरी चुत में खीरे को अंदर बाहर करो मैं उसे लंबे खीरे को अपने हाथ में पकड़ कर मीनाक्षी की चुत में डालने लगी वह बहुत ज्यादा गर्म हो गई थी इसलिए आहें भर रही थी। 6 7 मिनट तक खीर डालते रहने के बाद उसकी चुत ने पानी छोड़ दिया था और उसकी चुत में खीरा करने के कारण मैं भी गरम हो गई तो मैं मीनाक्षी से कहा कि साली रंडी तेरा तो पानी छुट गया है अब मुझे कौन शांत करेगा। मीनाक्षी बोली कि तुझे तो रोज रात में तेरे हस्बैंड का लंड मिलता है तुझे खीरे की क्या जरूरत तुम्हें बोली की हस्बैंड तो रात में आकर चोदेगा करीब 5-6 मिनट तक लगातार खीरा डालने के बाद मेरी चुत ने भी पानी छोड़ दिया। फिर हम लोगों ने कपड़े पहने और खाना खाकर मेरे घर पर ही सो गए। कुछ दिनों बाद हमारा सरकारी नौकरी का एग्जाम जयपुर में होने वाला था मेरा और मीनाक्षी का सेंटर जयपुर में आया तो मैं मेरे हस्बैंड से कहा कि आप हमारे साथ चलोगे क्या तो वह बोले कि मैं नहीं चल पाऊंगा मुझे ऑफिस जाना पड़ेगा तुम और मीनाक्षी एक साथ चले जाओ। फिर मैं थर्ड एसी के दो टिकट बनवा ली है और मीनाक्षी के साथ जयपुर जाने की तैयारी कर ली। मीनाक्षी बोली की दिसंबर का महीना है और जयपुर में दिसंबर के महीने में टूरिस्ट बहुत आते हैं तो हम भी एक-दो दिन बाहर रख कर वापस आएंगे तो मैं एग्जाम के दो दिन बाद वापस दिल्ली आने का टिकट बनवाया। संडे को दिन में हमारा एग्जाम था इसलिए हम शनिवार की रात को दिल्ली से ट्रेन में बैठे और सुबह जयपुर पहुंच गए वहां जाकर हम सीधे होटल गए और वहां से तैयार होकर में मेरे एग्जाम सेंटर की तरफ निकल गई और मीनाक्षी अपने एग्जाम सेंटर की तरफ निकल गई। शाम को पांच बजे तक हम दोनों वापस होटल आए थोड़ी देर हम लोगों ने रेस्ट किया और फिर हम लोग जयपुर सिटी घूमने चले गए। मैं और मीनाक्षी ने टाइट जींस और टाइट टी-शर्ट पहने हुए थे और उसके ऊपर स्वेटर पहने हुए थे जिसमें हमारा फिगर बहुत ज्यादा सेक्सी लग रहा था। लोग जयपुर के मार्केट में घूम रहे थे जो जंतर मंतर के पास था वहां पर बहुत सारे टूरिस्ट भी आए हुए थे वहां पर लोग हमें घूर घूर कर देख रहे थे। काफी देर घूमने के बाद हम लोग खाना खाने एक अच्छे होटल में चले गए वहां पर काफी टूरिस्ट भी खाना खा रहे थे वहां पर सारी टेबल बुक थी इसलिए हमने थोड़ी देर में ही खड़े रहकर वेट किया और फिर हमने देखा कि एक काला अफ्रीकन आदमी बैठा है और उसकी टेबल पर और कोई नहीं बैठा है वह अकेला ही वहां बैठा था तो मीनाक्षी ने उससे पूछा कि क्या हम यहां पर बैठ सकते हैं तो उसे फ्री करने कहा कि हां आप यहां बैठ जाइए। फिर हम लोग वहां बैठ गए और हमने ऑर्डर दिया हमें और मीनाक्षी उससे बातें करने लगे वह आदमी जयपुर किसी बिजनेस मीटिंग के लिए आया था और अकेला ही था वह अमेरिका में रहता था उसका नाम जॉर्ज था बातों ही बातों में उसने बताया कि उसकी उम्र 47 साल है और उसकी वाइफ फ्रांस की है और उसकी उम्र 27 साल है। और उन्होंने लव मैरिज की है। मीनाक्षी ने पूछा कि वह तो आपसे बहुत ज्यादा छोटी है तो लव मैरिज कैसे हुई तो उसने बताया कि वह मेरे ऑफिस में काम करती थी और हमें आपस में प्यार हो गया और हम लोगों ने शादी कर ली फिर उसने अपने फोन में अपनी और अपनी वाइफ की फोटो दिखाई जो किसी बीच पर थी। जिसमें वह दोनों किसी बीच के किनारे खड़े होकर फोटो खिंचवा रहे थे जिसमें उसकी वाइफ बिकनी पहने हुई थी और जॉर्ज ने केवल अंडरवियर पहना हुआ था। फिर जॉर्ज ने हमें पूछा कि आप लोग कहां रुके हो तुम मीनाक्षी ने बताया कि हम यही एक होटल में रुके हैं फिर जोश ने बताया कि वह भी यही पास ही एक होटल में रुका हुआ हैं। फिर खाना खाने के बाद वह भी थोड़ी देर हमारे साथ घूमने लगा और फिर वह बोला कि आप मेरे रूम पर चलो वहां हम लोग थोड़ी देर बातें करेंगे तो मीनाक्षी बोली की हम लोग आज एग्जाम देकर आए हैं और हमें थोड़ी थकान है इसलिए हम जाकर रेस्ट करेंगे तो वह बोला कि वह हमारी थकान उतार देगा मीनाक्षी बोली कि कैसे उतरोगे तो जॉर्ज ने कहा कि जैसा आप कहोगे वैसे आपकी थकान उतार दूंगा वैसे उसकी वाइफ उसकी बहुत तारीफ करती है क्योंकि वह बहुत अच्छी मसाज करता है और आप कहो तो आपकी भी मसाज कर सकता हूं। मैंने कहा कि मसाज की कोई जरूरत नहीं है हम ऐसे ही चलते हैं। फिर हम लोग जॉर्ज के रूम पर आ गए और वहां पर थोड़ी देर रुके और बातें करने के बाद हम अपने होटल के लिए निकलने लगे तो जॉर्ज ने निकलते समय हम दोनों को गले लगाया और बोला कि कल सुबह में आपका इंतजार करूंगा मीनाक्षी बोली कि कल हम लोग जयपुर घूमने का प्लान कर रहे हैं तो वह बोला कि मैं भी आपके साथ घूमना चाहता हूं तो हमने उसे कह दिया कि ठीक है हम तीनों कल एक साथ जयपुर घूम लेंगे फिर हम लोग अपने होटल आ गए। मैंने मीनाक्षी से कहा कि मीनाक्षी मुझे उसे जॉर्ज का इरादा ठीक नहीं लगता तो मीनाक्षी बोली की वह अफ्रीकन है उसके पास लंबा लंड है और हमारे पास एक अच्छा मौका है बड़े लंड से चुदवाने का इसलिए ज्यादा सोच मत और कल घूमने चलो। फिर दूसरे दिन सुबह मैं और मीनाक्षी वन पीस ड्रेस पहन कर जॉर्ज के होटल पहुंच गए वहां पर वह हमारा इंतजार कर रहा था और जॉर्ज के साथ ही ब्रेकफास्ट करने के बाद हम लोग कर टैक्सी में जयपुर घूमने चले गए उसे दिन हमने उसके साथ आमेर किला नाहरगढ़ फोर्ट हवा महल जंतर मंतर अल्बर्ट हॉल म्यूजियम और कई जगह घूमी दिन में हमने जॉर्ज के साथ लंच भी किया। दिन में जब हम घूम रहे थे तब जॉर्ज रह रहकर कभी मीनाक्षी तो कभी मेरे साथ चिपकने की कोशिश करता था। शाम को वह हमें अपने साथ अपने होटल लेकर गया और वहां हमने साथ में कॉफी पी। मैं बोली की जोर जब हम लोग अपने होटल जाते हैं तो वह बोला कि खाना यही खाकर जाना तो मैं बोली कि हमें लेट हो जाएगा तो वह बोला कि आज यहीं रुक जाओ तो मीनाक्षी ने कहा कि यहां तो सिर्फ एक बेड है हम तीनों कैसे रख सकते हैं तो जॉर्ज बोला कि हम तीनों एक साथ भी तो सो सकते हैं मीनाक्षी बोली कि तुम्हें कोई तकलीफ तो नहीं होगी जॉर्ज बोला कि तुम दो हसीनाएं अगर मेरे साथ रात में रखेगी तो मुझे क्या तकलीफ होगी। मीनाक्षी बोली कि जॉर्ज तुम्हारा इरादा क्या है बता दो तो जॉर्ज बोला कि अब तुम समझ ही रही हो कि मेरा इरादा क्या है मैं तुम दो हसीनाओं के साथ आज रात एंजॉय करना चाहता हूं क्या तुम तैयार हो तो मीनाक्षी बोली कि हमें क्या फायदा होगा जॉर्ज तुम्हें तो हमारी दो चुत चोदने को मिलेगी हमें क्या मिलेगा तो जॉर्ज बोला कि तुम्हें क्या चाहिए मैं तुम्हें देने को तैयार हूं तो मीनाक्षी बोली कि तुम क्या दे सकते हो तो जॉर्ज बोला कि तुम जो मांगो में देने को तैयार हूं तो मीनाक्षी बोली की क्या तुम हमें पेमेंट कर दोगे तो जॉर्ज बोला कि तुम जितना कहोगी मैं उतना पेमेंट कर दूंगा बस तुम दोनों आज रात मेरे साथ रुक जाओ फिर मीनाक्षी बोली ठीक हैं। फिर जॉर्ज के साथ हम लोगों ने खाना खाया और वापस उसके रूम में चले गए वहां हम लोग सोफे पर बैठकर बातें कर रहे थे थोड़ी देर बातें करने के बाद जॉर्ज ने मुझे अपनी गोद में बिठा लिया और मेरे बूब्स को दबाने लगा उसने मीनाक्षी को भी अपने पास बुला लिया हो मेरे वन पीस सूट के ऊपर से ही मेरे बूब्स को दबा रहा था थोड़ी देर बूब्स दबाने के बाद वह बोला तुम दोनों नंगी हो जाओ फिर वह खड़ा हुआ और उसने अपने सारे कपड़े निकाल दिए और नंगा हो गया हम उसके लंबे लंड को देखते रह गए उसका लंड बहुत ज्यादा कला और 10 इंच लंबा और 4 इंच मोटा था मैंने मीनाक्षी को कहा कि मीनाक्षी आज तो यह हमें मार ही देगा मीनाक्षी बोली कि ऐसा लंड लेने का मौका हमें बार-बार नहीं मिलेगा इसलिए आज से जी भर के चुदाई करने का मौका है इसलिए हम दोनों मजे से सेक्स का मजा लो। फिर जॉर्ज ने हमें भी नंगा कर दिया हम तीनों नंगे खड़े थे जॉर्ज ने खड़े-खड़े ही मुझे किस करना शुरू कर दिया वह मुझे किस करते हुए मेरी गांड को दबा रहा था वह अपने बड़े-बड़े हाथों से मेरी गांड को बहुत ज्यादा दबा रहा था फिर सोफे पर बैठ गया और मुझे अपने लंड पर बैठा लिया उसका लंड बहुत ज्यादा लंबा था इसलिए मुझे दर्द होने लगा लेकिन उसने कोई परवाह नहीं की और जबरदस्ती मेरी चुत में अपना लंबा काला लंड घुसा दिया उसने मीनाक्षी को पास बुलाया और उसका बूब्स अपने मुंह में लेकर चूसने लगा। मैं उसके लंड पर ऊपर नीचे हो रही थी और उसका पूरा लंबा काला लंड मेरी चुत में घुस रहा था मुझे ऐसा लग रहा था कि आज मेरी चुत फट जाएगी क्योंकि जॉर्ज का लंड मेरे हस्बैंड से कई गुना ज्यादा बड़ा था। थोड़ी देर बाद वह उठा और बेड पर लेट गया उसने मीनाक्षी को अपने लैंड पर बैठा लिया और मुझे बोला कि तुम तुम्हारी चुत मेरे मुंह पर रख दो मैं उसके मुंह पर अपनी चुत रख कर बैठ गई और मीनाक्षी उसके लंड पर बैठकर छुड़वाने लगी वह मेरी चुत के बहुत अंदर तक जीभ डालकर चोद रहा था। मीनाक्षी और मैं एक दूसरे के बूब्स दबा रहे थे। जॉर्ज बहुत तेजी से हम दोनों को एक साथ छोड़ने का मजा ले रहा था। थोड़ी देर बाद मेरी चुत ने पानी छोड़ दिया और जॉर्ज मेरी चुत का सारा पानी पी गया। फिर मैं है कर पास में बैठ गई और मीनाक्षी अभी भी उसके लंड पर ऊपर नीचे होकर सेक्स का मजा ले रही थी कुछ देर बाद जॉर्ज ने मीनाक्षी की चुत में ही अपना स्पर्म गिरा दिया और फिर वह दोनों भी अलग हो गए। दस पन्द्रह मिनट तक हम लोग आपस में बातें करते रहे फिर जॉर्ज का लंड वापस खड़ा हो गया तो वह बोला कि मीनाक्षी तुम बेड पर बैठ जाओ मालविका तुम्हारी चुत चाटेगी और मैं मालविका को डॉगी स्टाइल में पीछे से चोदूंगा फिर मीनाक्षी बेड पर बैठ गई मैंने उसकी टांगों को फैलाया और उसकी चुत चाटने लगी और जॉर्ज ने मुझे डॉगी स्टाइल में किया और पीछे से मेरी चुदाई करने लगा अब उसका लंबा लैंड मेरी चुत के गहराई तक अंदर जा रहा था और वापस बाहर निकाल कर वह बहुत तेज तेज ढके लग रहा था मीनाक्षी अपनी चुत चटवाते हुए मेरे बस को मसल रही थी और मेरा सिर पकड़कर चुत पर दबा रही थी जॉर्ज मेरी गांड पर तेजी से मर भी रहा था इस कारण मुझे दर्द भी हो रहा था लेकिन उसके लंबे लंड के कारण मुझे मजा भी बहुत आ रहा था। जॉर्ज करीब 10 मिनट तक इसी पोजीशन में हमें चोदता रहा मेरी चुत ने दो बार पानी छोड़ दिया था लेकिन जॉर्ज का लैंड अभी भी इतना हुआ था और वह तेजी से छोड़ रहा था। जॉर्ज ने फिर कहा कि अब तुम दोनों अपनी पोजीशन बदल लो अब मैं बेड पर बैठ गई और मीनाक्षी मेरी जगह डॉगी स्टाइल में उससे चुदवाने लगी थोड़ी देर बाद मीनाक्षी बोली कि जॉर्ज तुमने मेरी चुत को तो अपने स्पर्म से भर दिया है मालविका की चुत में भी तो अपना स्पर्म गिराओ तो बोला कि कोई बात नहीं इस बार मेरा सर इस पर मालविका की चुत में ही गिरेगा फिर थोड़ी देर बाद उसने मीनाक्षी की चुत से अपना लंड निकाल और बेड पर आकर मिशनरी पोज में वह मुझे चोदने लगा वह बहुत तेज स्पीड से ढके लग रहा था करीब दो-तीन मिनट तक उसने मेरी चुत में बहुत तेज तेज धक्के लगाने लगा और अपना सारा इस पर मेरी चुत में भर दिया फिर उसने अपना लंड बाहर निकल दिया मेरी चुत से उसका स्पर्म बाहर आने लगा तो मैंने उसे टॉवल से साफ किया। फिर मैंने जोर-जोर मीनाक्षी को अपने बैग में से निकाल कर चॉकलेट दी हमने चॉकलेट खाई और थोड़ी देर बातें करते रहे फिर जॉर्ज ने बोला कि तुम दोनों 69 की पोजीशन में एक दूसरे की चुत चाटा फिर मैं बेड पर लेट गई और मीनाक्षी मेरे मुंह पर अपनी चुत रखकर मेरी चुत चाटने लगी और मैं उसकी चुत चाटने लगी फिर जो आज आया और उसने मीनाक्षी की गांड पर क्रीम लगाई और अपनी एक अंगुली अंदर करने लगा मीनाक्षी बोली कि जॉर्ज तुम्हारा बहुत बड़ा है तुम धीरे-धीरे करना तो वह धीरे-धीरे अपनी अंगुली अंदर बाहर कर रहा था फिर उसने अपनी दो उंगलियां मीनाक्षी की गांड में डाल दिया और कुछ देर बाद उसने अपने लैंड पर क्रीम लगाई और वह मीनाक्षी की गांड मारने लगा मीनाक्षी को दर्द हो रहा था इसलिए वह आहें भरने लगी। जार्ज पांच छः मिनट तक उसकी गांड मारता रहा फिर उसने मुझे अपने सामने लुटाया और बोला कि अब मैं तुम्हारी गांड में अपना लंड डालूंगा तो मैंने कहा धीरे-धीरे डालना फिर उसने मेरी गांड पर भी क्रीम लगाई और धीरे-धीरे अपना लंड नेघुसने लगा थोड़ी देर बाद उसने अपना पूरा लंड मेरी गांड में घुसा दिया और 5 मिनट तक लगातार उसने मेरी गांड मारी फिर उसने मुझे अपने सामने बैठाया और मेरे बस पर अपना स्पर्म गिरा दिया। फिर हम तीनों थक चुके थे तो हम तीनों सो गए। रात में 3:00 बजे जॉर्ज उठा और उसने मीनाक्षी को मिशनरी पोजीशन में चोदना शुरू कर दिया मेरी भी नींद खुल गई थी मैंने देखा कि जॉर्ज बहुत तेज स्पीड से मीनाक्षी की चुत में धक्के लगा रहा था यह देखकर मैं भी गर्म हो गई और मैं भी मीनाक्षी के बूब्स को दबाने लगी और जॉर्ज को किस करने लगी। थोड़ी देर बाद उसने मुझे सामने से गोद में उठाया और मेरी चुत में अपना लंड डालकर चोदने लगा वह खड़ी-खड़े मुझे बहुत तेज स्पीड से छोड़ रहा था मीनाक्षी बेड पर देखकर यह देख रही थी जॉर्ज करीब छः सात मिनट तक इसी तरह खड़े-खड़े मुझे चोदता रहा फिर मीनाक्षी बोली कि जॉर्ज मालविका को अकेले ही छोड़ोगे या मुझे भी चोदोगे तो जॉर्ज बुला के तुम भी आ जाओ फिर उसने मीनाक्षी को भी अपनी गोद में उठा लिया और खड़ी-खड़े चोदने लगा। फिर उसने हम दोनों को अपने सामने बैठाया और हम दोनों के मुंह पर अपना स्पर्म गिरा दिया और बोला कि तुम यह स्पर्म चाट लो तो हमने उसका स्पर्म चाट लिया। फिर हम लोग सो गए ।सुबह सात बजे हम लोग उठे तो मीनाक्षी बोली कि जॉर्ज अब हम अपने होटल जा रहे हैं तो जॉर्ज बोला कि अभी एक बार और चुदाई करने दो फिर तुम चली जाना मीनाक्षी बोली कि जॉर्ज हमने तो चुदाई करने दी लेकिन तुमने अपना वादा नहीं निभाया तू जॉर्ज बोला कि मुझे मेरा वादा याद है और उसने एक लिफाफा मीनाक्षी को दिया मीनाक्षी ने वह लिफाफा खोलकर देखा तो उसमें एक लाख रुपये थे जार्ज बोला कि तुम खुश हो या और चाहिए तो मीनाक्षी बोली कि जॉर्ज हम खुश हैं फिर जॉर्ज नंगा ही बेड से खड़ा हुआ और बोला कि तुम दोनों मेरा लंड मुंह में लेकर चूसो फिर मैं और मीनाक्षी बारी-बारी से उसका लंड अपने मुंह में ले रहे थे फिर जॉर्ज ने हमें बेड पर लिटा दिया और मुझे मिशनरी पोजीशन में चोदने लगा वह करीब छः सात मिनट तक तेज स्पीड से मुझे चोदता रहा फिर बोला कि मीनाक्षी अब तुम आ जाओ फिर वो पांच छः मिनट तक चोदता रहा फिर उसने मेरे मुंह में अपना पूरा स्पर्म गिरा दिया और बोला कि मालविका तुम इसे पी जाओ फिर मैं उसका पूरा स्पर्म पी गई। फिर उसने मीनाक्षी को डागी स्टाइल में चोदना शुरु कर दिया वो मीनाक्षी को दस मिनट तक तेज स्पीड से चोदता रहा फिर उसने मीनाक्षी को सामने बैठाया और अपना लंड मीनाक्षी के मुंह में डाल दिया और अपना स्पर्म मीनाक्षी के मुंह में गिरा दिया। फिर हम वहां से वापस अपने होटल आ गए। उस दिन हम दिन में जयपुर घूमने गए। मीनाक्षी ने मुझे पचास हजार दिए और बोली कि ये लो जार्ज का गिफ्ट। फिर उस दिन शाम को हम वापस ट्रेन से दिल्ली आ गए। उसके बाद जार्ज कई बार दिल्ली आया मैंने और मीनाक्षी ने उसके साथ चुदाई की। anubabita1@hotmail.com
Antarvasna Sex Stories

मेरा नाम राहुल है। मैं Antarvasna Sex Stories अपनी बहन radha के साथ एक किराये के घर में रहता था। हम दोनों कॉलेज में पढ़ते थे। हमारे बहुत से दोस्त हो गये थे, अधिकतर दोस्त तो radha के कारण थे। वह बहुत ही मस्त लड़की थी, लड़कों और लड़कियों से एक सी दोस्ती रखती थी। खास कर वो लड़कों से सेक्स की बातें अधिक करती थी।

हम दोनों भी अक्सर घर में radha के दोस्तों की बातें करते थे। बातें करते समय मुझ में उत्तेजना भर जाती थी। कभी कभी वो लड़कों के बारे ऐसा कुछ कह जाती थी कि मेरा लण्ड खड़ा हो जाता था। यह उसे भी पता था कि सेक्स की बातों से मेरा लण्ड खड़ा हो जाता है, तब वो मेरा भी मजा देखा करती थी।

उसका ज्यादा झुकाव विनोद की तरफ़ था। विनोद की नजरें भी उस पर थी। radha इस बात को जानती थी। वह नजरें पहचानती थी पर ऐसा भी नहीं था कि मेरी बहन मेरी गंदी नजरों को नहीं पहचानती थी। वो मेरी हर हरकत को देखती थी और मुसकराती थी। पर मैं ही इस मामले पीछे था, बस उसके नाम का मुठ मार लेता था और अपना वीर्य टपका देता था।

सवेरे सवेरे यह बहुत होता था कि मेरी नींद मेरे खड़े लण्ड की वजह से खुल जाती थी और मैं उल्टे लेट कर लण्ड पर चूतड़ों का जोर लगा कर बिस्तर से दबा दबा कर माल निकाल देता था। एक बार दीदी ने मुझे ऐसा करते हुये पकड़ भी लिया था।

वो सो कर उठी ही थी और मैं अपना चेहरा दूसरी ओर किये हुये लण्ड को चूतड़ों से दबा रहा था। बड़ी मीठी मीठी सी गुदगुदी भरा अहसास हो रहा था। मेरा लण्ड मेरी जांघ के जोइन्ट पर बिस्तर पर दबा पड़ा था और दबाने पर एक साईड से बाहर आता था और एक मिठास भर देता था। दीदी मेरे पास खड़ी यह सब देख रही थी।

मेरे चूतड़ों का दबना उसे बहुत भा रहा था शायद। उसने मेरे चूतड़ों पर हाथ फ़ेरा, पर मैं उस समय चरम सीमा पर था, झड़ने ही वाला था, उसका हाथ मुझे बहुत ही सुहाना लग रहा था। मेरे चूतड़ के उभरे हुये गोल गोल भाग को वो

सहला रही थी। तभी मेरा वीर्य छूट पड़ा। मैं चूतड़ो से लण्ड को दबा दबा कर वीर्य निकालता रहा। तभी मैंने radha के होने के अहसास का नाटक किया।

‘अरे दीदी आप… !’
‘बहुत मजा आ रहा था क्या…’
‘आ…आप क्या कह रही हैं…?’

‘ये पजामे पर इतना सारा माल… सारा पाजामा गीला कर दिया है…तुम बहुत गन्दे हो भैया !’

‘सॉरी दीदी… ‘ मैं शरमा गया और जल्दी से बाथ रूम में भागा। radha खिलखिला कर हंस पड़ी। शायद मेरे चूतड़ को छूने का अहसास उसे हो रहा होगा… क्योंकि मुझे भी उसके हाथों का स्पर्श जिस्म में अभी भी सनसनी पैदा कर रहा था। शरम के मारे ना तो मैंने कुछ कहा और ना ही radha ने कुछ कहा। पर हम दोनों के मन में एक दूसरे लिये एक कसक सी मन में रह गई।

एक दिन विनोद ने मुझसे radha के बारे में कह ही दिया,’यार राहुल… radha से मेरी दोस्ती करा दे ना…!’
‘क्यों… ऐसा क्या है? वैसे भी तुम उसके दोस्त तो हो ना…!’
‘नहीं यार… वैसी दोस्ती नहीं… तुम्हारी अनुमति से मैं उसे चोदना चाहता हूँ, वो भी ऐसा चाहती है !’

‘जब मियां-बीवी राजी तो क्या करेगा भैया जी !’ मैंने उसे कहा कि अब वो मेरे घर आना जाना शुरू कर दे… रोज मिलोगे तो जरूर बात बन जायेगी।

मेरी बात मान कर उसने अब मेरे घर पर आना जाना आरम्भ कर दिया। पहले तो मैंने उनकी दोस्ती और गहरी कर दी। जब दोनों आंखों ही आंखों में इशारा करने लगे तब मैंने उन्हें अकेला छोड़ दिया। विनोद के आने का समय होता तो मैं उस समय बाहर चला जाता था।
आगे क्या हुआ… अब सुनिये मुझे जैसा विनोद ने बताया।

आज विनोद अपने साथ व्हिस्की की एक बोतल लाया था। उस समय क्रिकेट के किसी मैच का री-प्ले आ रहा था। विनोद और radha दोनों ही उस मैच का मज़ा ले रहे थे। पर radha की निगाहें तो विनोद पर ही जमी थी। यह विनोद को भी पता था। वो उसके समीप ही बैठी थी। तभी धोनी का छक्का पड़ा… विनोद खुशी के मारे radha से लिपट गया। radha भी उसकी बाहों में सिमटती चली गई। अब विनोद ने कोई विरोध नहीं देख कर उसे चूम लिया। radha बस विनोद की तरफ़ टकटकी लगाये देखती रही।

‘ओह माफ़ करना… बुरा मत मानना…’ विनोद ने यूं ही झेंपने का नाटक किया।
radha खिलखिला कर हंस पड़ी,’बड़ी मस्ती आ रही है…?’
‘ये दारू का कसूर है… मेरा नहीं !’
‘अच्छा तो मुझे भी इसका अनुभव कराओ… देखें तो दारू पीने से कितनी मस्ती आती है !’

उसने radha को एक पेग बना कर दिया। जिसे वो धीरे धीरे पूरा पी गई। फिर उसने दूसरा पेग भी धीरे धीरे करके पूरा पी लिया। इतनी देर में radha को अच्छा नशा चढ़ गया था।

‘दारू कड़वी जरूर होती है पर देखो कितना मजा आ रहा है…!’ विनोद ने radha को अपनी ओर खींचा और radha जान करके उसकी गोदी में बैठ गई। विनोद radha की नरम गाण्ड में अपना कड़क लण्ड दबाता हुआ उसे प्यार करने लगा। उसके कड़क लण्ड का अह्सास पा कर उसने अपनी गाण्ड को उसके लण्ड पर ठीक से सेट कर लिया। दोनों ही अब कुछ करने के मूड में थे। टीवी कोई नहीं देख रहा था। विनोद के हाथ radha की चूंचियों पर मचल उठे। radha के मुख से आह निकल पड़ी।

उसने radha का टॉप उतारना आरम्भ कर दिया। radha ने दबा हुआ सा विरोध किया पर ज्यादा समय तक अपने आप को नहीं सम्भाल पाई। उसके मन भी वासना का तूफ़ान उठा हुआ था। उसकी चूत गीली हो चुकी थी। नशे में भला कितना विरोध करती।

विनोद ने उसके दुबले पतले शरीर को हाथों में ले लिया। radha ने भी अपनी बाहें उसके गले में डाल दी। दोनों एक दूसरे को चूमते हुये अन्दर बेड रूम मे आ गये। विनोद radha का टॉप तो पहले उतार चुका था। ब्रा का हुक खोल कर उसकी चूंचियों को आज़ाद कर दिया। विनोद ने अपने कपड़े उतारे और अब radha का तंग पजामा भी उतार दिया।

radha तो बिस्तर पर पड़ी अपनी दोनों टांगें खोले हुये नशे में पड़ी हुई थी। विनोद ने अपना लण्ड सहलाया और उसके ऊपर जाकर लेट गया। उसकी चूंचिया दबा कर मसलने लगा। उसकी चूत के पट खोल कर अपने लण्ड को बीच में रख दिया औए लण्ड को दबाते हुये अन्दर घुसेड़ दिया और उसके ऊपर लेट गया। radha के मुख से एक सिसकारी निकली और और विनोद को कमर से पकड़ कर अपनी ओर खींच लिया। लण्ड चूत की गहराई में उतर चुका था।

radha के मुख से स्वर की मालाये निकल उठी,’आह्ह्ह्… विनोऽऽऽद चोद दो मुझे… हा रे…’
‘कुछ मत कहो radha… मेरा लण्ड भी बेताब हो रहा है…’ उसने चूत में लण्ड दबाते हुये कहा।
‘हाय रे इतना मस्त… मोटा लण्ड… कहा छुपा रखा था रे…’

‘हं… हं… बस ना बोलो… लण्ड का मजा लो…’ उसने धक्के लगाने शुरू कर दिये थे। दोनों ही नशे में चूर चुदाई कर रहे थे। उनके शरीर की गर्मी बढ़ती जा रही थी। दूसरे कमरे में क्रिकेट की कमेन्ट्री चल रही थी और यहां चुदाई लाईव चल रही थी। कुछ ही देर में दोनों ने पल्टा मारा और अब radha विनोद को चोद रही थी। उसके लण्ड पर बैठ कर अपनी चूत में पूरा ठोक रही थी और चीखती भी जा रही थी। उसकी बच्चेदानी पर विनोद का मुलायम टोपा बार बार रगड़ मार रहा था… और radha की मस्ती बढ़ती जा रही थी।

उसके उछलते हुये बोबे के निपल विनोद दोनों अंगुलियों से मसक रहा था। जो उसे दुगना मजा दे रहा था। अब वो विनोद के ऊपर धीरे से लेट गई और अपनी चूत लण्ड पर पटकने लगी। तभी विनोद ने उसे दबा कर एक पल्टी और मारी और एक बार फिर से radha पर चढ़ गया। इस बार विनोद के धक्के कहर बरपा रहे थे, कस कस जोरदार धक्के मार रहा था। शायद चरम सीमा पर पहुँच गया थ वो।

‘मेरी जान… तेरी भोसड़ी… हाय रे… मर गया… ले ले और चुद जा साली… हारामी… खा मेरा लण्ड !’

‘मार दे मेरी चूत… राजा मैं तो गई… चोद इस रण्डी चूत को… मां मेरी… विनोऽऽऽद… गई मैं तो… आआईईईऽऽऽ… ओह्ह्ह विनोऽऽऽद’ और radha हांफ़ती हुई झड़ने लगी। तभी विनोद का लण्ड भी छूटने लगा… उसने अपना लण्ड बाहर निकाल लिया उसने और एक तेज लहर लण्ड में से निकल पड़ी।

फ़ुहारें radha के जिस्म पर फ़ैलने लगी। रुक रुक कर फ़ुहारों से समापन समारोह होने लगा। दोनों पूरी तरह से झड़ चुके थे। विनोद उसके ऊपर से उठ गया और बिस्तर से नीचे आ गया। तौलिये से radha का बदन साफ़ किया और अपने कपड़े पहने लगा। नशे में radha ने उसे और चोदने के लिये बुलाना चाहा पर उसने एक चादर मुझे ओढ़ दी और बाहर चला गया।

मेरे दरवाजे पर औटोमेटिक लॉक लगा था। सो उसके जाते ही दरवाजा बन्द हो गया। अभी मुझे आने में घण्टे भर की देर थी… सो radha ने सोचा अभी थोड़ी देर में उठ कर फ़्रेश हो लूंगी पर नशे में आंखे बंद होती गई और वो सो गई।

मैं अपने निर्धारित समय पर घर आ गया था। दरवाजा खोल कर मैं अन्दर आया तो देखा टीवी चल रहा था और कमरे में कोई नहीं था। मैं अन्दर बेडरूम में गया तो देखा कि radha बिस्तर पर एक करवट पर पड़ी मदमस्त नंगी सो रही थी। पास मे ही चादर ढुलकी हुई पड़ी थी। उसके मस्ताने चूतड़ देख कर मैं तो पगला गया।

चाहे वो मेरी बहन थी पर अभी तो जवानी से भरी पूरी एक नवयौवना थी। मेरा लण्ड ठनक उठा… फ़ड़फ़ड़ा गया… सुपाड़े में से गीलापन बाहर आ गया। पास जाकर देखा तो उसके मुख से दारू की खुशबू आ रही थी। मैंने भी बची हुई दारू पी और काजू चबाने लगा। मैंने अपने कपड़े भी आराम से धीरे धीरे उतार दिये। पूरी दारू समाप्त करके मैंने अपने शरीर को निहारा। मेरा लण्ड कड़क हो रहा था।

मैंने उसकी चादर पूरी हटा दी और नंगा हो कर उसकी पीठ से चिपक गया। उसके नंगे शरीर का स्पर्श पा कर मेरा जिस्म एक बारगी झनझना गया। वो नशे मे थोड़ा सा हिली। मैंने पास पड़ी क्रीम अपने लण्ड पर लपेट ली और उसकी गाण्ड के छेद पर लगा दिया। अब मैंने उसके बोबे पकड़ लिये और उसे प्यार से दबाना चालू कर दिया। मैंने अपना लण्ड उसकी गाण्ड में दबा दिया।

उसने नशे में मुड़ कर पीछे मुझे देखा और मुसकराई…’भैया… आह्ह्ह… आप हो… क्या करोगे… जरा धीरे मसलो…’ उसे मालूम हो गया कि उसे अब और मस्ती मिलने वाली है।
‘दीदी… विनोद ने आपको चोद दिया ना… मजा आया…’ मैंने उसे उकसाने की कोशिश की।

‘तेरा दोस्त बड़ा प्यारा है… मस्त है… देखो ना ! चोद कर कैसा बेहाल कर गया है… अरे हाय रे नीचे तू बड़ी गुदगुदी कर रहा है… देख तो घुसा जा रहा है !’ नशे में कराहती सी बोली।

‘अब दीदी… गाण्ड चुदा ले… मेरा लण्ड भी देख कितना फ़ड़क रहा है… मैंने तेरे नाम के जाने कितने मुठ मारे होंगे !’
‘जानती हूँ ना रे भैया… पर मुठ मत मारा कर, मैं तो हू ना तेरे ही पास… दोनों प्यास बुझा लिया करेंगे… देख तो तेरा प्यारा लण्ड पाने को मैं कितनी आतुर थी… पर तू तो बुद्धू है।’

‘ओह… मेरी प्यारी दीदी…’ और मेरे लण्ड का जोर उसकी गाण्ड की छेद पर बढ़ गया। और एक मिठास भरी गुदगुदी के साथ छेद में घुस गया।

‘तेरी प्यारी सी, मोटी सी गाण्ड मार कर तो मुझे मजा आ जायेगा, दीदी फिर चूत का मजा भी देगी ना?’
‘चल गाण्ड तो मार ना… चूत का तो तेरे पास देखना ढेर लगा दूंगी, मेरी सारी सहेलियाँ तुझ से ही चुदने आयेंगी, देखना तो !… हाय… मार दी रे मेरी प्यारी सी गाण्ड…’ मेरा लण्ड उसकी गाण्ड की गहराइयों में घुसता चला गया।
‘सच मेरी दीदी… मुझे तेरी सहेलियों की चूत मिलेगी ना…’ उसकी बातें मेरे दिल में गड़ी जा रही थी। मुझे चूतें ही चूतें नजर आने लगी और मेरा लण्ड भी उफ़ान पर आ गया।
‘तेरी गाण्ड है कि चूत… लण्ड को लपक लपक कर ले रही है !’ मैंने आह भरते हुये कहा।

‘क्या करूं रे… मोमबत्ती से मेरी गाण्ड का छेद बहुत बड़ा हो गया है… साली कठोर पत्थर जैसी थी… लण्ड जैसी कोमलता उसमें कहां… चल पेल दे लण्ड… चोद दे मेरी गाण्ड…’ उसने अपनी गाण्ड के नीचे अब उसने तकिया भी घुसा लिया था।
radha की मस्त गाण्ड मारने का मजा आ रहा था।

‘मैंने पहली बार किसी लड़की की गाण्ड मारी है दीदी !’ मैंने गाण्ड चुदाई के नशे में कहा।
‘इसके लिये तुझे दीदी ही मिली थी क्या? अच्छा चूत कितनों की मारी है?’ दीदी ने हंस कर पूछा।
‘वो भी पहली बार आपकी ही मारनी है… ‘ मैंने कुछ चुलबुलेपन से कहा।
‘अच्छा चल निकाल और चूत भी मार ले मेरी…’ radha ने प्यार से कहा।

मैंने लण्ड गाण्ड से निकाल दिया और और उसे सीधा लेटा दिया और तकिया एक तरफ़ कर दिया। हम दोनों फिर से लिपट गये और चूत लण्ड को और लण्ड चूत को टटोलने लगी। जल्दी ही रास्ता ढूंढ कर एक दूसरे में समा गये। हमारे अधर आपस में जुड़ गये और मनोहर चुदाई चालू हो गई। दोनों के मुख से दारू की महक के भभके निकल रहे थे… पर वासना में सब कुछ चलता है।

दोनों की कमर मटकने लग़ी और radha बड़े ही सरल तरीके से सौम्यता से चुदने लगी। radha ने अपने दोनों पांव मेरी कमर से लपेट लिये और चूत पूरी खोल दी। अब सब कुछ प्यार से हो रहा था। नशे में दोनों ने आंखे मूंद रखी थी और चूतड़ ऊपर नीचे एक लय मे चल रहे थे। अचानक radha की चूत का कसाव बढ़ गया और उह… उह… मुख से बोल फ़ूटने लगे… और फिर उसने मुझे ऐसा जोर से जकड़ा कि मेरा वीर्य भी चूत की कसावट के मारे छूट पड़ा।

हम दोनों ही चूतड़ों का जोर लगा कर अपना अपना माल निकालने में लगे हुये थे।

चूत के आस पास दोनों का यौवन रस एकत्र हो गया था और चिकनापन और चिपचिपापन हो गया था। चादर गीली हो गई थी। radha नशे में थी सो झड़ने के बाद वह गहरी नींद मे सो गई थी। मैं भी उठा और अपने बिस्तर पर जा कर लेट गया। मेरे मन में अनेक लड़कियों को चोदने का प्लान बना रहा था, पर दारू के नशे ने मुझे अधिक नहीं सोचने दिया… और गहरी और सन्तुष्टि की नींद में खोने लगा… और जाने कब निंदिया रानी ने मुझे दबोच लिया… Antarvasna Sex Stories

Antarvasna

मैं सुनील वर्मा, 21 साल पठानकोट का Antarvasna रहने वाला, 5′ 9″, अच्छी सुगठित काया, सात इन्च का लण्ड, अपने पांच भाई बहनों में सबसे छोटा हूं और प्यार से मुझे सब छोटू कहते हैं।

मेरी भाभी सोनू वर्मा, 24 साल, मेरे बड़े भाई की बीवी, स्तनाकार 34, कमर 28 और कूल्हे 36″, खूब सुन्दर हैं और मुझ से काफ़ी खुली हुई हैं।

मेरे भाई करण वर्मा दुबई में नौकरी करते हैं, 28 साल के हैं और कुछ बेचैन से रहते हैं।
तीन बहनें हैं, तीनों शादीशुदा पर उनमें से एक विधवा है जो यहीं घर पर रहती है और अपनी पढ़ाई पूरी कर रही है, उसका नाम सुमीना है।

हमारा एक मध्यम श्रेणी का परिवार है, मां बाप और पांच भाई बहन, पापा सरकारी नौकरी से सेवानिवृत हुए हैं और घर पर ही रहते हैं लेकिन आजकल चारों धाम की यात्रा पर गए हुए हैं।

घर पर मैं, मेरी भाभी और सुमीना ही हैं। बहन अकसर कालेज़ में रहती है।
मेरी भाभी की शादी को तीन साल हो गए पर उन्हें मां ना बन पाने का गम है, इसलिए हम दोनों में समझौता है कि जब तक वो गर्भवती ना हो जाएं, मैं उनसे सेक्स कर सकता हूं।

भाई अभी तक यहीं थे, पांच दिन पहले ही दुबई वापिस गए हैं और मेरे लिए मैदान खुला छोड़ गए हैं।
सुमीना के कालेज़ जाने के बाद मैं अक्सर भाभी से छेड़खानी और चुदाई किया करता हूं।

बात कुछ यूं हुई कि एक दिन भैया और भाभी काफ़ी मूड में थे और आपस में गुफ़्तगू कर रहे थे।
मैं भी बैठा था।
भाभी बोली कि आप चले जाते हो दुबई, यहां मेरा मन नहीं लगता, बताओ मैं क्या करूं?

तो भैया बोले- अरे! ये छोटू है ना तुम्हारा मन लगाने के लिए, इसको सब अधिकार है तुम्हारे साथ यह कुछ भी कर सकता है।

भाभी बोली- वो सब भी?

भैया बोले- बाहर वालों से तो घर वाला अच्छा है।

भैया जब चले गए तो एक दिन सुमीना कालेज़ जा चुकी थी, तो मैंने भाभी से कहा- आज बहुत मन हो रहा है कि आपके साथ कोई पिक्चर देखी जाए।
भाभी बोली- कौन सी देखनी है?

मैंने कहा- “ख्वाहिश” देखें?

हम दोनों पिक्चर देखने चले गए।
उस फ़िल्म में कई किस सीन थे, मन हुआ कि भाभी को चूम लूं पर हिम्मत ना कर सका।

पिक्चर खत्म होते होते मैं इतना गर्म हो गयाकि मैंने भाभी की चूची दबा दी।

जिससे वो चोंक गई और बोली- इसलिए पिक्चर देखना चाहते थे!
मैंने कहा- हां भाभी!

हंसी मज़ाक हो रहा था और फ़िल्म खत्म होने पर हम लोग घर आ गए।

इतने में सुमीना के आने का समय भी हो गया था, इस लिए हम दोनों चुप हो गए।

दूसरे दिन सुबह सुबह ही सुमीना को कहीं जाना था और वो तैयार होकर चली गई।

सुबह का सुहाना मौका देखकर मैने पीछे से जाकर भाभी को चूम लिया।
पर मेरे चूमने से नाराज़ ना होकर बोली- देखो छोटू! आओ हम तुम एक समझौता कर लें! तुम जब चाहो मुझको चोद सकते हो पर इन इक्कीस दिनों में मैं गर्भवती होना चाहती हूं।

मैंने हामी भर दी और इस तरह शुरू हुआ अपना सेक्स का सफ़र!

हम दोनों नहा धो कर कमरे में आ गये और मैंने भाभी को किस करना शुरू किया।
चूमते हुए ही मैं उनके ब्लाऊज़ में हाथ डाल कर उनके मम्मे दबाने लगा और धीरे धीरे ब्लाऊज़ के बटन खोलने लगा।

जैसे जैसे बटन खुलते जा रहे थे, भाभी के चेहरे पर चमक आ रही थी।

पूरा ब्लाऊज़ उतार कर मैंने उनकी ब्रा का हुक भी खोल दिया।
अब भाभी मेरे सामने अपने 34 डी के बूब्स लेकर खड़ी थी और हंस कर मुझे देख रही थी, कह रही थी- छोटू! ये सब कहां से सीखा?

मैंने मुस्कुरा कर कहा- सब आप लोगों को करते देख कर अन्दाज़ा लगाया और सीख लिया।

मैं उनकी चूचियां चूसने लगा और वो आह! उफ़्फ़ ऽऽऽ आह ओहऽऽ करने लगी।

अब मेरा हाथ उनके पेटिकोट पर था और मैंने उसका इज़ारबंद खोल दिया।
इज़ारबंद खुलते ही पेटिकोट नीचे गिर गया और भाभी एकदम नंगी हो गई।

अब उनकी बारी थी।
वो मेरी टीशर्ट उतार कर मेरे जिस्म को चूमने लगी।

मुझे उनके जिस्म से भीनी भीनी खुशबू आ रही थी और मैं मस्त हो रहा था।

भाभी ने मेरी पैन्ट की ज़िप खोल कर मेरे लण्ड को बाहर निकाल लिया और उसे सहला कर खड़ा करने लगी और फ़िर अपने मुंह में लेकर चूसने लगी।

मैं उनकी चूचियां दबा रहा था और वो मेरा लौड़ा चूस रही थी।

चूसते चूसते थोड़ा सा प्री-कम भी निकला जो उन्होंने चाट लिया।

अब मैं उनकी चूत को चाटने लगा।
पहले धीरे धीरे फ़िर तेज़ी से अपनी जीभ चूत के अन्दर बाहर करने लगा।

भाभी आनन्दित हो रही थी और धीरे धीरे बोल रही थी- करे जाओ! मज़ा आ रहा है!

इस आनन्द को उठाते हुए करीब एक घण्टा बीत गया था और दोनों तरफ़ से कोई कमी नहीं आ रही थी, कभी वो मुझे कस कर गले लगाती और कभी मैं उनको गले लगाता।

एक दूसरे को चूमते चाटते काफ़ी समय हो गया तो भाभी बोली- अब कर डालो छोटू! नहीं तो सुमीना आ जाएगी।

हम दोनों बिस्तर पर चले गए और भाभी को पलंग पर लिटा कर मैं उनकी जांघें सहलाने लगा।
भाभी ने आनन्दित होकर अपनी टांगें फ़ैला ली जिससे उनकी चूत अब साफ़ दिखने लगी थी।

मेरे लण्ड का भी बुरा हाल था। मैंने भाभी की चूत पर अपना लण्ड रख कर धक्का लगा दिया और अपना आधा लण्ड अन्दर कर दिया।
एक दो धक्कों के बाद पूरा का पूरा लण्ड अन्दर चला गया।

भाभी जोर से चीखी।
मैंने उनका मुंह बंद कर दिया और झटके मारता रहा।
वो मेरे बदन को चूमती, मैं उनकी चूची को चूमता, इस तरह करते करते मैंने अपना पूरा माल भाभी की बुर में डाल दिया।

वो बुरी तरह से मुझ से चिपक गयी।

इस तरह हम करीब आधा घण्टा पड़े रहे फ़िर सुमीना के आने का समय हो गया था इस लिए एक दूसरे को किस करके अलग हो गए।

अब एक चिन्ता मन में थी कि अगर सुमीना को पता चल गया इस बात का तो क्या होगा।
अभी 21 दिन चुदाई करनी है और अगले पूरे हफ़्ते उसकी छुट्टी है। मैंने भाभी को आग्रह किया कि इस जाल में सुमीना को भी फ़ंसाना पड़ेगा, नहीं तो हम दोनों को मंहगा पड़ेगा।

हम यह सब सोच ही रहे थे कि सुमीना आ गयी।

भाभी ने धीरे से कहा- यह तुम मुझ पर छोड़ दो, दो तीन ब्लू फ़िल्मों की सी डी लाकर मुझे दे दो, मैं उसे पटा लूंगी।

मैंने कहा- ठीक है! मैं ले आऊंगा।

मैंने चार सी डी लाकर भाभी को दे दी और खाना खा कर घर से निकल गया और सारा दिन बाहर रह कर भाभी का जादू देखने को बेताब रहा।
शाम हुए घर आया।

भाभी ने हंस कर स्वागत किया तो तबीयत मस्त हो गई।

क्या मैं सुमीना को भी चोद लूंगा?? Antarvasna

अगले भाग में……

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