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मेरा नाम राज Hindi Porn Stories घई है, मैं लुधियाना में रहता हूँ। आज मैं आप लोगो को अपना एक व्यक्तिगत अनुभव बताने जा रहा हूँ जो पिछले साल जुलाई के महीने में मेरे साथ हुआ। मैंने तब तक सेक्स नहीं किया था पर इस बार एकदम से किस्मत मेरे ऊपर मेहरबान होगी मैंने कभी सोचा भी नहीं था। किस्मत जब मेहरबान होती है तो बस क्या कहने ! अभी तक मैंने तीन बार अलग अलग लड़कियों के साथ सेक्स किया है। सोचिये तब तक मैंने एक बार भी सेक्स नहीं किया था और अब तक तीन लड़कियों को संतुष्ट कर चुका हूँ। मैं आप लोगों को ज्यादा बोर नहीं करता हूँ।
मैंने पहली बार जिस लड़की से सेक्स किया उसका नाम शीना (बदला हुआ नाम) लुधियाना में ही रहती थी।
मैं कॉलेज़ का विद्यार्थी हूँ और मेरे कॉलेज में नया बैच आया था। उन्हीं में एक लड़की थी शीना ! दिखने में अच्छी थी पर कभी मैंने उसके बार में गलत नहीं सोचा था क्यूँकि एक तो मैं सीनियर और दूसरा उस लड़की की आवाज़ इतनी मधुर है कि कोई भी उससे बात करके ही खुश हो जाये। वो मेरे से काफी घुल मिल गई थी, धीरे-धीरे एक दूसरे के घर भी आना-जाना चालू हो गया। वो मेरे घर के पास में ही रहती थी।
परीक्षा का समय करीब आने लगा था। एक दिन उसने मुझे कॉल किया और बोली- सर, मुझे एक विषय में दिक्कत आ रही है, कल मेरा प्रैक्टिकल है, मुझे पढ़ा दीजिये !
मैंने कहा- इतनी रात में?वो बोली- सर, प्लीज़ !
मैं अपने घर वालों से आज्ञा लेकर उसके घर चला गया। उस दिन मैंने उसे पहली बार नाइटी में देखा था वो भी गुलाबी रंग की ! क्या गज़ब लग रही थी !
जुलाई के महीने में काफ़ी गर्मी हो जाती है, मुझे भी गर्मी लग रही थी तो मैंने उससे बोला और उसने एसी चला दिया। मैं उसके बैठ गया, पढ़ाते-पढ़ाते मुझे नींद की झपकी आने लगी और मैं सो गया। जब उसने मुझे देखा तो मुझे आवाज़ दी पर मैं जागा ही नहीं। तब उसने मुझे हिलाया। उस दिन पहली बार मुझे उसने मुझे छुआ था, क्या नाज़ुक स्पर्श था उसका !
खैर मैं उठा और अपना चेहरा धोया ताकि नींद न आए। मैं आकर उसे दोबारा पढ़ाने लगा और उसका सब काम ख़त्म करवाकर अपने घर वापिस आकर सो गया। उस दिन से वो मेरे सपनों में आने लगी। मुझे लगा यह सब गलत है तो मैंने उससे बात करना बंद कर दिया लेकिन उसे अच्छा नहीं लगा कि मैं उसे नज़रंदाज़ करूँ ! क्यूंकि जब भी वो मेरे सामने आती थी, मैं उस जगह से ही हट जाता था।
लेकिन एक दिन वो मेरे घर ही आ गई, मेरी मम्मी से पूछा कि मैं कहाँ हूँ तो मम्मी ने बोला- अपने कमरे में !
वो अंदर आ गई और मैं एकदम से उसे यहाँ देखकर फंस गया, मैंने सोचा- बेटा अब कहां जाओगे !
उसने मुझसे पूछा- क्या बात है आप मुझे नज़रंअदाज़ क्यूँ कर रहे हो?
तो मैंने उससे बोला- मैं नज़रंदाज़ नहीं कर रहा हूँ ! बस थोड़ा व्यस्त था !
तो बोलने लगी- नज़रअंदाज़ करने में और व्यस्त होने में बहुत फर्क है ! मैं सब समझती हूँ, आप मुझसे बात ही नहीं करना चाहते हो !
और रोने सा चेहरा बना लिया !
अब दोस्तो, मैं भी तो इन्सान ही हूँ न ! क्या करता ! फिसल गया !
मैं उससे बोला- चलो ! कहीं घूम कर आते हैं !
और हम घूमने के लिए निकल गए। तब उसने मुझसे दोबारा से पूछा- आप मुझे से बात क्यूँ नहीं कर रहे थे?
मैं फिर से टालने की कोशिश करने लगा, वो मुझसे जिद्द करने लगी- सही सही बताओ कि क्या बात है?
तब मैंने उसे बता दिया कि ऐसी-ऐसी बात है ! इसलिए मैं तुम्हें नज़रंअदाज़ कर रहा था !
तो वो शरमा गई और मुझसे बोलने लगी- आप मेरे सबसे अच्छे दोस्त हो !
खैर कुछ दिन बीत गए, एक दिन दोपहर में उसका कॉल आया- आप क्या कर रहे हो?
मैं बोला- कुछ नहीं ! मूवी देख रहा हूँ !
वो बोली- मैं घर पर अकेली हूँ और बोर हो रही हूँ ! आप आ जाओ, यहीं बैठ कर देखते हैं ना मूवी !
तो मैंने बोला- ठीक है !
और मैं डीवीडी लेकर उसके घर चला गया। डीवीडी प्लेयर मैं डीवीडी लगा कर हम दोनों मूवी देखने लगे। मूवी में ऐक्टर इमरान हाश्मी था तो उसका एक सीन आ गया और वो इतना जबरदस्त सीन था कि मेरी तो हालत ही ख़राब हो गई। मैंने शीना की तरफ देखा तो उसकी भी हालत ख़राब हो चुकी थी।
मैंने उससे पूछा- क्या हुआ?
तो उसने मुझसे बोला- राज, आई लव यू !
मैं उससे ऐसी बात सुनकर हक्का-बक्का रह गया। मेरा तो उस पर उसी दिन दिल आ गया था। खैर मैंने उसको गले लगा लिया और उसे चूमने लगा इमरान हाश्मी स्टाइल में !
और पता नहीं क्या हुआ कि मेरे हाथ अपना आप उसके वक्ष पर पहुँच गए, उसके नरम स्तनों का अनुभव क्या गज़ब था कि बयान नहीं कर सकता !
दोस्तो, एक बात बता दूँ- सेक्स ऐसी चीज़ है जिसे आप जिसे आराम से करोगे उतना ही ज्यादा मज़ा आएगा। मतलब हर एक शॉट की गर्मी का अनुभव करो। कभी भी आपने शादीशुदा लोगों को फटाफट सेक्स करते नहीं देखा होगा और ना ही कभी सुना होगा। वास्तव में जब तक एक दूसरे की भावना को नहीं समझते, मज़ा नहीं आता ! ये तेज़-तेज़ शॉट्स साला सब ब्लू फिल्मों से देख-देख कर लोग करने लगते हैं, इसमें कोई सेक्स का मज़ा नहीं आता है। दोस्तो, बल्कि आप जल्दी थक भी जाते हो सेक्स का मज़ा ही आराम से एकदम चाय की चुस्की के जैसे जितने आराम से करोगे उतना ज्यादा मज़ा बढ़ता है।
खैर जब मैंने उसके स्तन दबाये तो उसे इतने मज़ा आने लगा कि उसने मुझे जोर से अपने बाँहों में जकड़ लिया और हम एक दूसरे को चूमते हुए ही बेड पर लेट गए और काफी देर तक ऐसे ही पड़े रहे। अब अचानक मेरा सेल बजा और मेरा ध्यान टूटा, और किसी जरुरी काम की वजह से जाना पड़ गया।
मैं वहाँ से चला आया।
कहते हैं ना जो होता है अच्छे के लिए होता है !
मेरा काम हो जाने के बाद मैंने उसे काल करके पूछा- क्या कर रही हो?
तो उसने मुझे बोला- आज रात को मम्मी-पापा कोई नहीं है, आप आ जाओ ! यहाँ आओ प्लीज़ !
मैंने बोला- ठीक है !
मैंने अपने घर जाकर खाना खाया और अपनी किताबें और एक कंडोम का पैकेट लेकर उसके घर चल दिया। जब उसके घर पहुंचा तो वो खाना बना रही थी। वो मुझसे खाना खाने का बोलने लगी।
मैंने बोला- नहीं, मैं खाकर आया हूँ !
तो बोलने लगी- नहीं थोड़ा तो खाना पड़ेगा ! मैं आपके लिए बना रही हूँ !
फिर उसके इतना कहने पर मैंने बोला- ठीक है, थोड़ा खा लूँगा !
जब खाना बन गया तो उसने बोला- मैं नहा कर आती हूँ !
तो मैंने सोचा- चलो, मैं भी साथ मैं ही नहा लेता हूँ !
और उसके साथ बाथरूम में चला गया और पहले तो कपड़े उतारे फिर शॉवर चालू किया। हम दोनों ने साथ में शॉवर लिया। नहाने के बाद मैंने उसे अपनी बाँहों में उठाया और बेड पर ले जाकर लेटा दिया। उसका पूरा शरीर तौलिए से पौंछ दिया। फिर रसोई में जाकर फ़्रिज से एक बर्फ़ का टुकड़ा ले आया और उसके टॉप पर बर्फ फेरने लगा और उसका पानी चूसने लगा और धीरे-धीरे नीचे उतरने लगा- स्तन, फिर नाभि ! सबसे ज्यादा मज़ा यहीं आता है दोस्तो ! नाभि में पानी भर के पिया। जब नीचे उतरा तो उसकी चूत की गर्मी से बर्फ १० सेकंड में ही पानी हो गई। मैं उसकी चूत को चाटने लगा। क्या टेस्ट था दोस्तो ! आप सोच भी नहीं सकते हो ! उस समय निकलने वाली आवाजें इतना मज़ा देती हैं कि पूछो मत ! जोश चार गुना बढ़ जाता है। सेक्स ऐसी चीज़ है जिसे आप जब तक खुद सही ढंग से करोगे नहीं तो मज़ा नहीं आएगा।
मैंने उसे इतना ज्यादा चाट चाट कर बेहाल कर दिया था कि वो बस आऽऽआ अह करती रह गई, लेटे-लेटे आहें ही भरती रही और मेरे सर के बालों को नोचने लगी। कुछ ही देर में वो स्खलित हो गई। मैंने उसके पूरे रतिरस को चूस लिया और उसके बगल से जाकर लेट गया।
फिर वो उठी, मेरे लंड को हाथ में लिया और उसे प्यार से सहलाने लगी और उसके बाद उसे लॉलीपोप के जैसे चूसने लगी। धीरे धीरे लंड महाराज अपनी असली औकात में आ गए और फनफनाने लगे खड़े होकर !
वो एकदम से डर गई- ये क्या हो गया ?
मैंने उसे प्यार से समझाया कि कुछ नहीं, यही तो मज़ा है इसका असली ! पगली ! और उसे चूसने के लिए कहता रहा। जब बहुत देर हो गई तो मैंने उसको बगल से लिटाया और उसके पैरों को अपने कंधे पर रखने के बाद अपने लंड पर एक कंडोम चढ़ाया। फिर उसकी चूत पर थोड़ी देर तक धीरे धीरे ऊपर ही रगड़ता रहा तो वो कराहने लगी- आह्ह्ह प्ल्ज्ज्ज़ अब डाल दो ! रहा नहीं जाता है मुझसे ! मैंने कहा- सब्र करो जानू ! सब्र का फल मीठा होता है !
और एकदम से एक तगड़ा शॉट लगा दिया। वो इसके लिए अभी तैयार नहीं थी और एकदम से दर्द के मारे बहुत जोर से चीख पड़ी- आआह्छ !
मैंने जल्दी से उसके होटों को अपने होठों से दबा लिया और थोड़ी देर आराम से पड़ा रहा। थोड़ी देर के बाद उसने जब सांस ली तो मैंने एक और तगड़ा झटका लगा दिया और उसकी चीख निकल गई- आआआअह्ह्ह्ह माआआआ !
उसकी हालत ऐसी हो गई थी कि उसकी आँखों से आंसू निकलने लगे।
मैंने कहा- यदि कोई तकलीफ़ है तो रहने दो !
तो बोली- नहीं, आराम से करो बस !
मैंने धीरे-धीरे करके अपना ७″ का लंड पूरा अंदर कर दिया और हर एक शॉट के मज़े लेने लग गया- अ आया !
उससे पूछा- क्यूँ तुम्हें भी मज़ा आ रहा है ना?
तो बोली- जान ! हाँ ऐसा मज़ा कभी नहीं आया आआअह्ह्ह्ह्ह ! ऐसा सुख किसी चीज़ में नहीं है, जानू, तुम बहुत ही बढ़िया कर रहे हो !
और धीरे धीरे करके मैंने स्पीड बढ़ा दी और करीब 15 मिनट के बाद मैं स्खलित हो गया। इतनी देर में वो भी दो बार डिस्चार्ज हो चुकी थी। फिर मैं उसे अपनी बाँहों में जकड़ कर बगल में लेट गया और थोड़ी खामोशी का मज़ा लेने लग गया। फिर मैंने उसे जोर से चूम लिया गालों पर ! उसने भी लेटे-लेटे मेरी छाती के बालों में ऊँगली घुमाना चालू कर दी।
दोस्तो, ऐसा लग रहा था जैसे कि मैं जन्नत में घूम रहा हूँ।
जब हम बिस्तर से उठे तो बिस्तर पर खून के लाल-लाल निशान बन गए थे। वो देख कर डर गई।
उसके बाद हम एक साथ नहाये, खाना खाया और फिर लेट गए। उस रात मैंने उसे 3-4 बार चोदा। सुबह जब मैं जाने लगा तो उसने मुझे किस दिया और बोलने लगी- आगे जब भी मौका मिलेगा हम यह करेंगे !
अब मेरी पढ़ाई ख़त्म हो चुकी है, मैंने उसके साथ कई बार सेक्स किया और किस्मत कि उसके बाद मुझे दो और लड़कियों से सेक्स करने का मौका मिला, कभी किसी और दिन सुनाऊंगा उनकी बातें।
दोस्तों कैसी लगी यह कहानी? जरूर बताना ! Hindi Porn Stories
मेरा नाम अमन है। मैं बचपन से दिल्ली Antarvasna में रह रहा हूँ। जब से मुझे सेक्स की जानकारी हुई, तब से मैं बस सेक्स के बारे में ही सोचता रहता हूँ। विशेषकर मुझे विवाहित स्त्रियाँ अधिक पसन्द हैं, साथ ही मोटी स्त्रियाँ भी। मेरा लंड ८ इंच लम्बा व ३ इंच मोटा है।
मैं इन्टरनेट पर चैट रूम में एक समलैंगिक रूम में हमेशा एक स्त्री के नाम से चैट करता और पूरा मज़ा लेता। एक दिन मेरी बात ग्रेटर कैलाश में रहने वाली गौरी नाम की महिला से हुई। एक दूसरे की जानकारी लेने के बाद हम सीधा सेक्स की बात पर आ गए। उसने बताया कि उसके पति अक्सर बाहर रहते हैं। उसको जब भी अवसर प्राप्त होता है तो वह अपने कामवाली बाई के साथ समलैंगिक सहवास करती है। मैं भी उससे स्त्री बनकर ही बात कर रहा था।
मैंने उससे कहा, “आप किसी लड़के को क्यों नहीं तलाश करतीं?”
“मैं कुछ लड़कों को जानती हूँ, जो सेक्स-जॉब करते हैं।” – मैंने उसे आगे बताया
गौरी ने कहा, “क्या वो मेरी गाँड भी चाटेगा?”
“सब कुछ करेगा, जो कुछ तुम करवाना चाहोगी, और उसकी शुल्क भी अधिक नहीं है।” – मैंने उसे जानकारी दी।
मेरे मन में लड्डू फूट रहे थे, मेरी बात बनती नज़र आ रही थी। मैंने गौरी को टेलीफोन नम्बर दिया, और कहा कि यह उसका नम्बर है, और उसका नाम अमन है। तुम उससे बात कर लो, मैं भी उससे बात करके तुम्हारे बारे में बता दूँगी। असल में अमन तो मैं ही था।
चैट के लगभग एक घण्टे के बाद उस स्त्री का फ़ोन आ गया। उसने मेरा नाम पूछा, और अपना नाम बताया। उसने कहा कि आपका नम्बर मुझे एक औरत ने दिया है। वो तो मैं ही था, तो मैं समझ गया।
मैंने पूछा, “तो फिर कब आऊँ आपके पास?”
कल दिन में ११ बजे आ जाओ।
मैंने कहा, “ठीक है।”
क्या बताऊँ दोस्तों, वह आधा दिन काटना मेरे लिए पहाड़ जैसा प्रतीत हुआ, बस मैं तो यही सोचता रहा कि ये करूँगा, वो करूँगा, और ये सब सोच-सोचकर मैंने उस औरत के नाम से दो बार मुट्ठ भी मार ली।
अगले दिन ठीक ११ बजे मैं उसके घर पहुँच गया। मैंने घंटी बजाई, दरवाजा खुला, और लगभग ३५ वर्ष की एक गोरी स्त्री ने दरवाजा खोला। मैंने उसे बताया, “मैं अमन…”। उसने अन्दर आने को कहा।
मैं जैसे ही अन्दर घुसा, उसने दरवाजा बन्द कर लिया, और सीधे शयनकक्ष में ले गई और कहा, तुम ५ मिनट यहीं रुको, मैं अभी आई। ५ मिनटों को बाद जब वह वापस आई तो मैं उसे बस देखता ही रह गया। वह गुलाब़ी रंग की ब्रा और पैन्टी पहने हुए मेरे सामने थी। थोड़ी देर के लिए तो मैं बिल्कुल सुन्न हो गया था, फिर मैं होश में आया और सीधे जाकर उसे ज़ोरों से गले लगा लिया और उसके होंठों पर होंठ रखकर चूमने लगा, उसे ख़ुद को सँभालने का मौक़ा भी नहीं मिला।
चूमते-चूमते मैंने अपना एक हाथ उसकी पैन्टी के अन्दर डाल कर उसके गोरे-गोरे और मुलायम चूतड़ों को सहलाने लग गया। फिर मैंने उसकी ब्रा भी उतार दी। ब्रा उतारते ही उसकी गुलाब़ी घुंडियों वाली चूचियाँ मेरे सामने थीं। मैंने उन्हें दबोच लिया और एक हाथ से उसकी घुंडी को मसलने लगा, तो उसकी सिसकियाँ निकल पड़ीं। फिर मैंने एक झटके से उसकी पैन्टी को उतार कर उसे बेड पर लिटा दिया, उसने भी मेरे कपड़े उतार दिए।
उसने झट से उठकर मेरे लंड को पकड़ कर चूसना शुरु कर दिया। मैंने जीवन में कभी भी ऐसा अनुभव नहीं किया था, मुझे स्वर्ग की अनुभूति हो रही थी। वह मेरे लंड को चूसती रही। मैं कभी उसकी चूचियों को सहलाने लगता, कभी घुंडियों को काट लेता। उसने मुझे नीचे लिटा दिया और स्वयं मेरे ऊपर इस तरह आ गई, कि उसकी बिना बालों की चूत मेरे मुँह के पास थी। मैंने भी उसकी चूत में उँगली डालकर चूसने लगा।
उसके गाँड की छेद भी गुलाबी रंग की थी। मैं बीच-बीच में उसमें भी उँगली डाल देता, जिससे वह अचानक चिहुँक पड़ती। थोड़ी देर ऐसा करने के बाद मैंने उसे नीचे लिटा दिया, उसकी टाँगों को अपने कंधों पर रखकर मैंने अपना लंड उसके गाँड की छेद पर रखा और हल्का सा धक्का लगाया तो मेरे लंड का सुपाड़ा उसके अन्दर चला गया, जिसके कारण वो चिल्ला उठी। मैं रुक गया और उसकी चूचियाँ दबाने लगा, उसका दर्द थोड़ा कम हुआ तो मैंने फिर उसकी जाँघों को पकड़ कर धक्का मारा और पूरा लंड अन्दर घुसा दिया। वह एकदम से चिल्ला उठी।
मैंने उसके होठों को चूमने शुरू कर दिया, फिर थोड़ा सामान्य होने पर मैं उसकी गाँड में अपना लंड अन्दर-बाहर करने लगा। अब उसे भी मज़ा आने लगा। मैंने साथ में उसकी चूत में उँगली करना भी जारी रखा, जिससे उसे और भी मज़ा आ रहा था। वह सिसकारियाँ लेने लगी और बोली, अमन थोड़ा और तेज़ करो। मैंने चुदाई की गति में और बढ़ावा किया। थोड़ी देर बाद उसकी चूत से पानी आने लगा, और वह अपनी गाँड को दबोचने लगी। उसने कहा, “अमन मैं गई… मैं गई…!” कहते हुए फिर वो आहहह्हहहह…. आह्ह्हहह्हहहह करने लगी।
पर मैं रुका नहीं। ५ मिनट बाद मेरा भी निकलने वाला था। मैंने पूछा – “गौरी कहाँ छोड़ूँ?”
उसने कहा, “अन्दर ही।”
थोड़ी देर धक्के मारने का बाद मैंने अपना सारा वीर्य उसकी गाँड में ही छोड़ दिया। यह पहला अवसर था कि मैं किसी की गाँड में स्खलित हुआ था।
फिर मैं उसके ऊपर लेट गया, थोड़ी देर लेटे रहने के बाद हमने एक-दूसरे को साफ़ किया और वापस आकार दुबारा बिस्तर पर लेट गए और बातें करने लगे। थोड़ी देर बाद मैं फिर से तैयार हो गया। फिर मैंने उसकी चूत की जमकर चुदाई की।
उस दिन मैंने उसकी २ बार चुदाई की। फिर उसने मुझे १००० रुपये दिए और कहा कि अब मैं तुम्हें बुलाती रहूँगी।
उस दिन से अब तक मैंने उसकी कई बार चुदाई की। फिर मैंने उसके द्वारा अन्य स्त्रियों से भी सम्पर्क साधा। Antarvasna
इंडियन भाभी की गांड में लंड गया तो भाभी की गांड फट गयी, उसमें से खून निकलने लगा क्योंकि भाभी ने उतना मोटा लंड पहले कभी गांड में नहीं लिया था.
दोस्तो, मैं अंकिता राठौर एक बार फिर से आपकी सेवा में हाजिर हूं.
मेरी पिछली कहानी
विधवा सहेली की चूत चुदवा कर मजा दिलाया
को आप लोगों ने बहुत प्यार दिया है.
उसके लिए आप सभी का बहुत बहुत शुक्रिया!
आज मैं फिर एक नई कहानी लेकर आई हूं.
अगर आपने मेरी पिछली कहानी नहीं पढ़ी है तो उसे पहले पढ़ लें वरना ये आपको समझ नहीं आयेगी.
तो जैसा आपने मेरी पिछली कहानी में पढ़ा था कि शोभा का बेटा आर्यन मुझको चोद चुका था और मैंने प्लान बना के शोभा को भी आर्यन से चुदवा दिया था।
अब आगे इंडियन भाभी की गांड में लंड:
ऐसे एक दिन मैं घर में फ्री आराम कर रही थी तो सोचा क्यों न आर्यन से बात करूं क्योंकि मेरी भी चूत में बहुत खुजली हो रही थी, काफी दिनों से लौड़ा अंदर नहीं लिया था मैंने भी!
मैंने आपको पिछली कहानी में बताया था कि आर्यन मेरी सबसे अच्छी सहेली शोभा का बेटा है जिसकी उम्र 24 साल है.
तो मैंने झट से फोन उठाया और आर्यन का नंबर डायल किया.
उसने फोन उठाया और बोला- कैसी हो मेरी जान?
मैंने कहा- अपनी जान को भूल गये या मन भर गया है क्या जो अब मिलने नहीं आते?
तो उसने बताया कि उसके एग्जाम थे तो वह व्यस्त था.
मैंने कहा- अच्छा ठीक है. फिर बताओ कब मिल रहे हो?
तो उसने बताया- मम्मी कल परसों में दिल्ली जाने वाली हैं ऑफिस के काम से! तो घर खाली रहेगा. तो फिर हमारे मजे ही मजे हैं मेरी रण्डी!
उसके मुंह से रण्डी सुन कर मेरी चूत में खुजली होने लगी.
मैंने कहा- यार बेटा, बहुत मन कर रहा है. जल्दी मिलो!
उसने बोला कि फोन करेगा वो!
उस दिन मैं चूत में उंगली कर के सो गई।
फिर एक दिन सुबह आर्यन का फोन आया- मम्मी अभी थोड़ी में निकल रही हैं. तो घर आ जाना!
मैंने कहा- ठीक है.
तब मैंने अपने पति को बोल दिया- मुझको मेकअप का ऑर्डर मिला है. एक लड़की का मेकओवर करना है. तो मैं बाहर जा रही हूं.
तो पति ने कहा- ठीक है … लेकिन आराम से जाना!
आप सबको तो पता ही है कि मैं एक ब्यूटी पार्लर चलाती हूं.
फिर आर्यन का फोन आया बोला- कहाँ हो जानेमन? आओ ना … घर में मैं बिल्कुल अकेला हूं!
मैं बोली- बस आ रही हूं यार!
करीब बारह बजे मैं आर्यन के घर पहुंच गई.
उसने दरवाजा खोला, मैं अंदर जाकर सोफे पे टांगें ऊपर कर फैका कर बैठ गई.
आर्यन ने मुझको देखा.
मैं बोली- क्या हुआ?
उसने बोला- कुछ नहीं … आज बहुत खूबसूरत लग रही हो!
मैंने उस दिन काली साड़ी और ब्लैकलेस ब्लाउज पहना था. अंदर ब्रा पहनी नहीं थी. हाँ पैंटी पहनी थी नीले रंग की!
आर्यन मेरे पास बैठ कर मेरी चिकनी टांगें सहलाने लगा.
थोड़ी देर में मैं गर्म हो गई थी.
काफी देर मेरी चूचियों और जांघें सहलाने के बाद आर्यन बोला- यार, एक बात बोलूं … मेरा एक फ्रेंड है. मैंने उसे बताया कि मैंने एक भाभी के साथ मजे लिए. तो वो भी बोलने लगा करने से लिए!
मैंने पूछा- कौन है वो?
तो आर्यन बोला- बबलू!
मैंने पूछा- कौन बबलू?
तो उसने बताया- अरे यार, वो जिसकी चौराहे पे पान शॉप है वही!
तब मुझे पता चला वो बबलू!
दरअसल बबलू की हमारे चौराहे पर शराब के ठेके के पास पान सिगरेट की दुकान है. वहाँ हमेशा भीड़ ही लगी रहती है.
मैंने आर्यन से पूछा- तुमने ऐसे लोगों से दोस्ती कर रखी है?
तो उसने बताया- यार, एक दिन मैं नशे में था बहुत ज्यादा … तो उसी की दुकान पे खड़ा होकर सिगरेट पी रहा था. तो मैंने ऐसे नशे में इसको हमारी बात बता दी.
मैंने उसे कहा- यार, यह क्या कर दिया तुमने? उसने हमारे बारे में सबको बता दिया तो?
आर्यन बोला- वह अब मुझसे बोल रहा था कि सिर्फ एक बार … बस एक बार दिला दो यार! अब तुम बताओ मैं क्या करूं?
उसने मुझसे पूछा तो मैं बोली- अब सबको बता देगा बबलू!
तो आर्यन बोला- ऐसा नहीं है. तुम एक बार बस उसके साथ कर लो ना … फिर ऐसा कुछ नहीं होगा, नहीं बताएगा वह किसी को!
मैं आर्यन से बोली- ऐसे कैसे यार कर लूं उसके साथ?
तो आर्यन बोला- यार और कोई दूसरा ऑप्शन नहीं है!
फिर मैंने काफी देर सोचने के बाद आर्यन से कहा- बोल तो तुम सही रहे हो! लेकिन तुम भी साथ में रहना!
आर्यन बोला- ठीक है. बताओ अभी बुला लूं बबलू भैया को?
मैंने कहा- अभी?
तो आर्यन बोला- हाँ, वह 5 मिनट में दुकान बंद कर के आ जाएगा.
मैंने कहा- ठीक है, बुला लो!
फिर आर्यन ने बबलू को फोन किया और बोला- भैया, मेरे घर आ जाओ. आपका काम हो गया है.
करीब आधे घंटे बाद घण्टी बजी.
आर्यन मुझसे बोला- तुम अंदर रहना. जब मैं बोलूं तब आना!
मैं अंदर कमरे में चली गई.
आर्यन दरवाजा खोलने चला गया.
मैंने दोनों की आवाज सुनी.
बबलू बोल रहा था- कहाँ हैं भाभी जी?
तो आर्यन बोला- बैठो, अभी बुलाता हूं.
आर्यन ने मुझ को आवाज दी.
मैं बाहर वाले कमरे में गई.
बबलू और आर्यन दोनों बैठे थे.
बबलू ऐसे नजरें फाड़ कर देख रहा था मुझे!
मैंने टेबल पर देखा तो एक बोतल शराब की रखी हुई थी और दो पैकेट सिगरेट थे.
आर्यन बोला- तुम दोनों बैठो, मैं ग्लास लेकर आता हू.
वह अंदर ग्लास लेने चला गया.
तो बबलू मेरे पास आकर बैठ गया और बोला- भाभी, आपको कोई दिक्कत तो नहीं है न? बता दो?
मैं बोली- अगर मैं मना करूंगी तो क्या तुम मान जाओगे?
तो बबलू बोला- भाभी, आप मुझे बहुत मस्त लगती हो. मैं हमेशा आपके पार्लर की तरफ से निकलता हूँ आपको देखने के लिए! यहाँ तक कि कभी कभी राज से भी पूछ लेता था कि ‘मम्मी पापा कैसे हैं’ जब वो मेरी दुकान पे आता था.
आप सबको बता दूँ कि राज मेरे बेटे का नाम है.
मैंने पूछा- वह तुम्हारे वहाँ क्या करने आता है?
तो बबलू बोला- अरे भाभी, अब मेरी जिस चीज की दुकान है, वही सामान लेने आता है … सिगरेट!
अब मुझे पता चला कि मेरा बेटा भी सिगरेट पीता है.
तब तक आर्यन ग्लास लेकर आ चुका था और हमारी बातें सुन रहा था.
आर्यन बोला- चलो, मैं पीछे कमरे में हूँ. आप लोग एंजॉय करो.
तो बबलू बोला- अरे तू कहाँ जा रहा … रुक यहीं … दो पेग ले यार!
आर्यन बोला- अरे रहने दो, आपको डिस्टर्ब होगा.
तो बबलू बोला- नहीं होगा मेरे भाई!
तभी बबलू बोला- अंकिता भाभी, एक काम करो … आप बनाओगे हमारा पेग!
मैंने पहले कभी पेग नहीं बनाया था.
तो मैंने उसको बताया- मैंने पहले कभी बनाया है.
बबलू बोला- अरे बस बोतल से थोड़ी थोड़ी शराब ग्लास में डालनी है. इसमें क्या दिक्कत है?
उसने बोतल का ढक्कन खोल कर मुझे दी और मैंने दोनों ग्लास में थोड़ी थोड़ी शराब डाली.
लेकिन दोनों में ज्यादा हो गई.
तो आर्यन बोला- अरे, ये तो पटियाला पेग बना दिया यार!
बबलू बोला- अरे अब भाभी जी ने बना दिया है तो पी लेंगे!
वे दोनों आराम से पीने लगे.
फिर बबलू ने सिगरेट जलाई, आर्यन और बबलू दोनों सिगरेट पीने लगे और मुझे घूर घूर के देखने लगे.
तब बबलू उठा और मेरे पास आकर बैठ गया और मेरी जांघें सहलाने लगा आर्यन के सामने!
आर्यन बोला- चलो बबलू भैया, मैं अंदर जाता हूं.
बबलू बोला- नहीं बे … यहीं रुक … दोनों साथ में मजे लेंगे.
आज तो वैसे अंदर से आग मेरे भी लगी थी.
लेकिन दो लंड एक साथ कभी नहीं लिए मैंने!
फिर बबलू बोला- भाभी, एक पेग ऐसा ही और बनाओ.
मैं फिर पेग बनाने लगी झुक कर!
तो पीछे से बबलू ने मेरे चूतड़ों पर हाथ फेर दिया और दबाने लगा.
फिर आकर उसने पेग खतम किया और मेरी साड़ी उतारने लगा.
मैं अब सिर्फ पेटिकोट ब्लाउज में थी.
आर्यन सब कुछ बैठ कर देख रहा था और अपना लंड सहला रहा रहा था.
मैं देख रही थी कि उसका लंड बिल्कुल खड़ा हो गया था.
बबलू ने अब अपने कपड़े उतार दिए पूरे बस चड्डी में था।
फिर धीरे से बबलू ने मेरा ब्लाउज उतार दिया और मेरे स्तन के साथ खेलने लगा.
बार बार मेरी दोनों चूचियों को काटता तो कहीं दबाता.
मैं बहुत गर्म हो गई थी.
तब तक आर्यन ने मेरा पेटीकोट उतार दिया.
अब मैं सिर्फ पैंटी में थी … दो जवान मर्दों के बीच मैं अबला!
आर्यन मेरी पैंटी के ऊपर से ही मेरी चूत पर जीभ लगा के चाटने लगा.
मैं पैंटी में ही झड़ गई और मेरी चूत का पानी बह कर टांगों से होते हुए बहने लगा.
फिर बबलू उठा, मेरी पैंटी उतारी और बोला- अरे भाभी, अभी तो हमने कुछ किया भी नहीं और आप इतना गर्म गई!
मेरी पैंटी उतार कर वह सारा माल चाटने लगा जिससे मैं और झड़ने लगी और मैंने बबलू के मुंह पर ही मूत दिया.
मेरे मूत की धार सीधे बबलू के मुंह में जा रही थी जिसे बबलू बड़े मजे से पी रहा था.
फिर बबलू बोला- भाभी, अब आप बेड पे लेट जाओ.
मैं अब आराम से अपनी टांगें फैलाकर बेड पे लेट गई.
अब बबलू मेरी चूत को चाटने लगा और आर्यन मेरे मुंह में लंड देने लगा.
आर्यन का लंड भी बहुत मोटा और बड़ा है लेकिन बबलू का लंड लम्बा बहुत है आर्यन से ज्यादा … लेकिन मोटा नहीं है.
थोड़ी देर में बबलू मेरे ऊपर आकर मेरे मुंह में लंड देने लगा जिसे मैं बड़े मजे से चाटने लगी.
आर्यन अब मेरी चूत चाट रहा रहा था.
मैं दोबारा गर्म हो गई थी.
मैंने बबलू से बोला- अब जल्दी से डाल दो यार!
फिर बबलू ने अपने लंड को मेरे मुंह से बाहर निकाला और बोला- भाभी, पलट जाओ!
मैंने पूछा- क्यों?
तो बबलू बोला- मुझे आपकी गांड का छेद चाटना है.
उसके कहने से मैं पलट कर लेट गई.
मैब बेड पर लेटी थी और मेरा मुंह बेड से नीचे लटक रहा था.
अब बबलू मेरी गांड का छेद चाट रहा था और आर्यन मेरे मुंह में अपना लंड डालकर अंदर बाहर कर रहा था.
मैं भी बड़े मजे से उसका लंड चूस रही थी और अपनी गांड चटवा रही थी.
फिर बबलू बोला- भाभी, आप की गांड बहुत गोरी है यार!
बबलू ने दो तीन चांटे मेरी गांड पे लगा दिए जिससे मेरी गांड बिल्कुल लाल टमाटर हो गई थी.
आर्यन बोला- आंटी, अब मैं झड़ने वाला हूँ.
ऐसा बोलते ही वह मेरे मुंह में ही झड़ गया. उसका सारा माल मेरे मुंह से टपक टपक के बेड के नीचे बिछी हुई कार्पेट पर टपकने लगा.
बबलू बोला- भाभी, अब सीधी लेट जाओ मेरे जान!
मैं जैसे ही सीधी लेटी, बबलू ने मेरी चूत पर अपने लंड का टोपा रगड़ कर रखा और बड़े प्यार से हल्का हल्का अंदर डालने लगा.
मुझे और उसको इतना मजा रहा था कि मैं आपको शब्दों में जाहिर भी नहीं कर सकती.
मेरी दोनों टांगें बबलू की गांड पर थी और हाथ बबलू की बांहों में थे.
वह मेरे वक्ष से चिपका हुआ था और मुझे प्यार से चोद रहा था.
काफी देर चोदने के बाद बबलू ने मुझे कुत्ती बनने को बोला.
मैं दोनों टांगें मोड कर कुतिया बन गई.
बबलू ने अब मेरी गांड के गुलाबी छेद पर अपने लंड का टोपा टिकाया और एक झटके में पूरा लंड अंदर कर दिया जिससे मुझे बहुत दर्द हुआ और मैं बेड पर नीचे गिर गई.
उसका लंड बहुत लंबा था.
मेरी गांड से लहू निकलने लगा और मैं रोने लगी और बब्लू काल्न्द निकलवाकर बैठ गयी.
आर्यन ने मुझे चुप कराया और बोला- आंटी मत रोओ! इसने थूक लगाए बिना डाल दिया!
तब आर्यन ने हमको कुछ देर अपने जिस्म से चिपका के रखा.
बबलू भी बोला- भाभी सॉरी! मैंने बिना बताए गांड में डाल दिया. माफ कर दो!
और वह बोला- बस थोड़ी देर बर्दाश्त कर लो, मेरा निकलने वाला है.
उसके बहुत कहने के बाद मैं फिर से बेड पर कुतिया बन गई.
इस बार बबलू ने अपने लंड पे थूक लगाया, मेरी गांड का सारा लहू साफ करने से बाद उस पर भी थूक लगाया और लंड डाल के अंदर बाहर करने लगा.
आर्यन सब कुछ बैठ कर देख रहा था और अपना लौड़ा हिला रहा था.
मैं भी अब बड़े मजे से अपनी गांड मरवा रही थी.
इस टाइम मुझे जन्नत वाली फील आ रही थी.
मेरी गांड अब पूरी खुल गई थी. इंडियन भाभी की गांड में लंड सही से जा आ रहा था.
थोड़ी देर गांड मारने के बाद बबलू ने मुझे बोला- अब मेरे लंड पे बैठ!
मैं उसके लंड पे बैठ गई और मौज से उछलने लगी.
बबलू बार बार मेरी गांड पर तमाचे लगाता जिससे मुझे और भी जोश चढ़ जाता.
मैं फिर से झड़ चुकी थी और मेरा माल निकलने की वजह से मेरी चूत पूरी गीली हो गई थी और चिकनी भी … जिससे लंड बड़े आराम से अंदर बाहर हो रहा था.
बबलू बोला- भाभी, मेरा निकलने वाला है.
और इतना बोलते ही उसका माल मेरी चूत में ही अंदर निकल गया जिसे मैंने अपने अंदर गर्म गर्म महसूस किया.
फिर मैं आराम से लंड से उठी जिससे बबलू का लंड मेरी चूत से बाहर निकल गया और उसका सारा माल जो मेरी चूत के अंदर निकल गया था, वो बहने लगा.
जैसे मैं खड़ी हुई, मेरी चूत से उसका माल गिरने लगा जो कुछ बबलू के सीने पर और कुछ बूंदें उसके चेहरे, होठों पे गिर गया.
मेरी चूत से माल अभी भी निकल रहा था.
मैं नीचे बबलू के बगल में बैठ कर उसके ऊपर गिरा हुआ सारा माल अपनी जीभ से चाटने लगी और धीरे धीरे करके सारा माल चाट गई.
और फिर आर्यन ने मेरी चूत चाटकर सारा माल साफ किया.
फिर हम तीनों ने एक साथ किस किया और जो भी माल चाटा था, उसे बार बार एक दूसरे के मुंह में दिया, चाटा फिर दिया, फिर चाटा.
बहुत मजा आया.
तो इस तरह मेरी चुदाई एक नए लंड से हुई.
दोस्तो, आपको मेरी यह इंडियन भाभी की गांड में लंड कहानी कैसी लगी?
मेल करके बताना जरूर!
मैं नागपुर से ३८ साल का Sex Stories सुन्दर और स्मार्ट पुरुष हूँ। मैं आज आपको अपने जीवन की एक पुरानी लेकिन गर्म कहानी सुनाने जा रहा हूँ।
मेरे पड़ोस में पायल रहती थी जो मुझसे करीब आठ साल छोटी थी। हमारे और पायल के परिवार के बहुत अच्छे सम्बन्ध थे। रुपा सुन्दर और जवान होती जा रही थी और साथ ही मेरी रुचि उसमें बढ़ती जा रही थी। वो जब चलती थी तो मेरी आँखें उसके कूल्हों पर ही अटक जाती थी। उसकी लहराती हुई चाल देखकर मैं तो जैसे पागल ही हो जाता था। वो मुझे चाचा कहती थी।
पायल अब कॉलेज़ में पढ़ने लगी थी। उसके उभार बढ़ने लगे थे और साथ ही उसकी मादकता भी बढ़ने लगी थी। उसका कद लगभग ५’२”हो गया था, उसका बदन भरा भरा सा दिखने लगा था। मैं रात को अक्सर उसे याद करके मुठ मारने लगा था। हमारा रिश्ता ऐसा बन गया था कि मैं एकदम से उसे कुछ नहीं कह पाता था। जब भी मुझे मौका मिलता मैं किसी ना किसी बहाने से उसे छू लेता था।
एक दिन दोपहर में मैं उसके घर गया तो वह अपनी दादी और माँ के साथ बैठी थी। उसके पैरों में दर्द हो रहा था। मैंने उससे कहा- लाओ, मैं तुम्हारा एक्यू-प्रेशर कर देता हूँ। वह मेरे करीब आकर बैठ गई। मैंने धीरे धीरे उसके पंजों पर एक्यू-प्रेशर करना शुरू किया। मुझे एक्यू-प्रेशर के काफी सारे दबाव-बिंदु मालूम हैं। मैं समझ गया कि उसका पैर ऊपर से लॉक हो गया है।
पायल इस समय स्कर्ट और टी-शर्ट पहने हुए थी। धीरे धीरे मैं उसके घुटनों तक प्रेशर देने के बहाने अपने हाथ फिराने लगा। थोड़ी देर में मैंने उसकी जांघों पर हाथ फिराना चालू कर दिया। जांघों को सहलाते हुए दो बार मैंने उसकी योनि भी सहला दी। पायल शरमाने लगी। उसकी माँ और दादी भी बैठी थी, अधिक कुछ हो नहीं सकता था।
समय बीतता गया, पायल पर और ज्यादा जवानी चढ़ने लगी। मैं एक्यू-प्रेशर करने के बहाने उस के पूरे बदन को छूने लगा, जिससे वो हमेशा शरमा जाती थी। मैं अभी तक यह समझ नहीं पा रहा था कि उसके मन में भी ऐसा कुछ हो रहा है क्या।
कुछ दिनों में पायल ने अपनी स्नातिकी पूरी कर ली। अब वो पूरी तरह से निखर चुकी थी। उसका कद ५’४” छाती ३३” कमर २८” और कुल्हे ३२” के लगभग हो गए थे। उसे देख कर मेरी जांघों के बीच जबरदस्त तनाव आ जाता था।
इस बीच मेरी शादी हो गई। मै अक्सर अपनी पत्नी के साथ सेक्स करते समय पायल को याद करके ऐसा महसूस करने लगा जैसे मैं पायल के साथ ही सेक्स कर रहा हूँ।
कुछ दिनों बाद पायल का रिश्ता आ गया और उसकी शादी मुम्बई हो गई। उसका पति दिखने में ज्यादा ठीक नहीं था। मुझे वो कहावत याद आ गई कि हूर के साथ लंगूर ही मजे करते हैं।
मुझे अपनी किस्मत पर बड़ा पछतावा होता था कि ऐसा करारा माल मेरी जगह इस लंगूर को मिल रहा है। उसकी शादी के बाद जब वो पहली बार मायके वापस आई तो उसको देख कर मैं तो एकदम दंग रह गया। थोड़े दिनों कि चुदाई के बाद तो उसका बदन जैसे क़यामत हो गया। उसके बात करने का तरीका भी बदल गया। थोड़े दिनों बाद वो मुंबई आने को कहकर चली गई और मैं इंतजार करने लगा कि कब मुंबई जाने का मौका मिले।
फ़िर कई महीनों मुझे मंत्रालय के काम से मुंबई जाने का मौका लगा। अब तक उसकी शादी को ७ महीने हो चुके थे। मुझे स्टेशन पर लेने के लिए उसके पति आये थे। हम लोग घर पहुंचे तो दरवाजे पर ही मेरे इंतजार कर रही थी। मैंने उसे दरवाजे पर ही अपनी बांहों में भर लिया और उसके माथे पर एक पप्पी दी।
थोड़ी देर में मैं तैयार होने बाथरूम में गया तो देखा पायल की अंडरवियर और ब्रा सूख रही थी। मैंने उसे उठा कर सूंघा, क्या मदहोश सुगंध थी ! मेरा लण्ड खडा हो गया। मैंने उसकी पैंटी को अपने लण्ड पर रख मूठ मारना शुरू कर दिया और अचानक मेरा पानी बह निकला। मैं फटाफट तैयार हुआ और मैं और उसके पति नाश्ता करके साथ में ही निकल गए।
मैं मंत्रालय चला गया और उसके पति अपने ऑफिस। करीब ४.०० बजे मेरा काम ख़त्म हुआ, मुझे वहां और ४ दिन रुकना पड़ रहा था। मैं करीब ६.०० बजे उसके घर वापस आया तो उसके पति पहले ही घर पर थे और उन्होंने मुझे बताया कि ऑफिस के काम से उन्हें ५ दिनों के लिए गोवा जाना पढ़ रहा है।
मेरी तो जैसे लॉटरी लग गई। वो अफ़सोस जता रहे थे कि मैं पहली बार आया और उन्हें जाना पड़ रहा है। मैंने शांत स्वर में कहा- भाई ऑफिस का काम है तो जाना ही पड़ेगा !
फिर रात १०.०० बजे की गाड़ी से वो गोवा चले गए। हमने उन्हें घर से ही ९.०० बजे विदाई दे दी थी।
उनके जाने पर हमने खाना खाया। पायल ने रसोई का काम ख़त्म किया फिर हम दोनों बैठकर घर -परिवार की बातें करने लगे। अगले दिन मुझे दोपहर बाद ही बाहर जाना था इसलिए हम दोनों को सुबह जल्दी उठाने की कोई चिंता नहीं थी। पायल ने अपनी नाईटी पहनी थी क्योंकि मुझसे ऐसी कोई शर्म तो थी नहीं। मैंने भी अपना नाईट-सूट पहन रखा था और आदत के मुताबिक मैंने अपना अंडरवियर नहीं पहना था।
थोड़ी देर बातें करते करते मैंने उससे कहा- चलो, बेड पर लेट कर ही बातें करते हैं, पीठ को थोड़ा आराम मिल जायेगा।
हम दोनों उनके बेड-रूम में आ गए। मैं लेट गया और वो पास में बैठ कर बातें करने लगी।
मैं उसका हाथ अपने हाथों में ले कर सहलाने लगा। फिर उसको खींच कर अपने बाजू में लिटा लिया। फिर मैंने अपना एक हाथ उसकी गर्दन के नीचे से निकालकर उसका सर अपने कन्धों पर रख लिया। हम बातें करते जा रहे थे। धीरे धीरे मैंने उसके हाथ जो उसकी छाती पर रखे थे, सहलाना चालू किया। कमरे में ए सी चालू था। हल्की-हल्की ठण्ड का हमें अहसास होने लगा। उसने एक चादर खींच कर हम दोनों के ऊपर डाल ली ऐसा करते वक़्त मेरा हाथ उसके भारी उरोजों को छू गया। उसे छूते ही मेरा खम्बा अकड़ कर खड़ा होने लगा।
अब मैंने उससे शादीशुदा जिन्दगी के बारे में पूछना शुरू किया। मेरा हाथ उसके हाथों को सहलाते सहलाते उसके उरोजों को भी सहलाने लगा था। शायद अब उसे मेरे इरादे भी समझ में आने लगे थे, उसने कहा- रात बहुत हो गई है, सो जाते हैं।
मैंने कहा- अभी तो बहुत सी बातें करनी हैं, सुबह भी जल्दी उठने की चिंता नहीं है, और बातें करते हैं।
मैंने उससे पूछा कि सेक्स लाइफ कैसी चल रही है तो वो शरमाने लगी, कहने लगी- चाचा ! ये आपके पूछने की बात थोड़े ही है !
मैंने कहा- अब तुम इतनी बड़ी हो गई हो, शादीशुदा हो, अब तो हम एक दोस्त की तरह बातें कर ही सकते हैं।
पायल ने कहा- मुझे शर्म आती है !
मैंने कहा- चलो, मैं अपनी पहले बताता हूँ। देखो मुझे शादी के ४ साल होने पर भी रोज सेक्स किये बिना नींद नहीं आती। मैं पहले तुम्हारी चाची की अच्छे से मालिश करता हूँ और फिर करीब १ घंटा हम सेक्स करते हैं। इतने में तुम्हारी चाची ३ से ४ बार झडती है।
और जब चाची नहीं होती तब? -उसने पूछा।
तब मैं उसका या किसी के भी नाम से स्वयं संतुष्टि कर लेता हूँ, कभी कभी तो उसमें तुम्हारा भी नाम होता है।
वो सकपका गई। उसे मेरे इरादे खुलते नजर आने लगे। उसने कहा- ये तो लगभग रोज देर रात तक लौटते हैं और सुबह जल्दी चले जाते हैं। हम लोग शनिवार रात को ही ये सब कर पाते हैं। या फिर किसी दिन छुट्टी होती है तो बोनस हो जाता है।
अब मैं उसके मम्मों को सीधे सहलाने लग गया। उसने कहा- ये क्या करते हो चाचा?
मैंने कहा- पगली अभी तो हम दोस्त हैं चाचा-भतीजी नहीं ! देखो तुम भी जवान हो और मैं भी। तुम्हारी भी शादी हो चुकी है और मेरी भी। तुम ये भी जानती हो एक बार करने से कुछ हो नहीं जाने वाला है।
उसने बताया कि वे लोग अभी बच्चा नहीं चाहते इस लिए कंडोम इस्तेमाल करते हैं।
मैंने कहा फिक्र न करो। हम भी वही इस्तेमाल कर लेंगे।
अब मैंने उसके अधरों पर अपने होंट रख दिए, वो थोड़ा कसमसाई और कुछ बोलने के लिए मुंह खोलने लगी तो मैंने अपनी जीभ उसके मुंह में डाल दी। उसपर इसका असर होने लगा। उसकी सांसे भरी होने लगी। लेटे लेटे ही मैंने उसका हाथ पकड़कर अपने लण्ड पर रख दिया, वो हाथ हटाने लगी पर मैंने उसका हाथ जोर से पकड़ कर रखा था। फिर वो धीरे से मेरे लण्ड को सहलाने लगी।
आज मुझे अपनी बरसों की तपस्या का फल मिलने वाला था। मैंने उसके उरोजों को अब खुलकर दबाना चालू कर दिया। वो मेरी छाती में अपना मुंह छिपाने लगी। मैंने अपना हाथ उसके पेट और कमर पर से सरकाते हुए उसके मादक कूल्हों पर रख कर उन्हें दबाने लगा। मुझे जैसे स्वर्ग का आनंद मिलने लगा। अब पायल भी खुलने लगी।
आज गुरूवार था यानि उसकी पिछली चुदाई हुए लगभग ५ दिन बीत चुके थे।
अब मैं उसके पैरों के पास बैठा था। मैंने धीरे से उसका ग़ाऊन टांगों पर से उठाना शुरू किया। जैसे जैसे उसका ग़ाऊन ऊपर हो रहा था, उसकी सुडौल मरमरी टाँगें बाहर आने लगी। मेरा सुलेमान अब एकदम टाईट हो गया था। उसकी पिंडलियाँ देख मैं अपने आप को रोक नहीं सका और उन्हें चूमने लगा। मैं ग़ाऊन को इंच-इंच ऊपर कर रहा था और उसकी सेक्सी चिकनी टांगों को चूमता जा रहा था।
पायल भी मस्त होने लगी। उसने एकदम से मेरा पायजामा खींच दिया। अब मैं उसके सामने सिर्फ शर्ट में था। उसने मेरे फौलादी को हाथ में लेकर मसलना-सहलाना चालू कर दिया। मैंने उसके ग़ाऊन को जांघों पर से सरकाते हुए उसके हुस्न के दर्शन के लिए नाभि तक ऊपर उठा दिया। अन्दर वो भड़कीले लाल रंग की पैंटी पहने हुए थी। उसकी कली के आस पास की जगह गीली होने से कत्थई नजर आ रही थी। मैंने उसकी नाभि को चूम लिया और ग़ाऊन ऊपर उठाते हुए पूरा निकाल दिया।
अब मेरे सामने मेरी बरसों की तमन्ना सिर्फ ब्रा और पैंटी में मदहोश पड़ी थी। मैंने उसको उठा के गले से लगा लिया और बेतहाशा चूमने लगा। वो भी मुझे सब जगह चूमने लगी। उसने खींच कर मेरा शर्ट भी उतार दिया।
मैंने पीछे हाथ डालकर उसकी ब्रा का हुक खोल दिया, उसके तने हुए उरोज बंधन से एक झटके में आजाद हो गए, मैंने जल्दी से ब्रा अलग कर उसके चुचुकों को चूसना चालू कर दिया। वो मेरी छाती और लण्ड को सहलाने लगी। उसके मुंह से अब सऽऽसऽऽसऽऽऽ सिस्कारियां छूटना चालू हो गई।
अब मैं ६९ की पोजीशन बनाते हुए उसकी पैंटी से उसकी जवानी को आजाद करने लगा। मेरा लण्ड अब उसके होटों को छूने लगा। मेरे लण्ड पर एक बूंद प्री-कम की उभर आई, जो मोती की तरह चमक रही थी। उसने अपनी जीभ निकालकर उस मोती को अपने मुंह में ले लिया। उसका स्वाद शायद उसे बहुत पसंद आया क्योंकि अब वो मेरे ६.५ इंच का लण्ड अपने मुंह में लेने लगी। इस काम के लिए वो बार बार अपना सर ऊपर उठा कर मेरा लण्ड अपने हलक तक लेने लगी।
मैंने उसकी पैंटी उतार दी, अन्दर से पाव रोटी की तरह बाल-रहित एकदम गुलाबी सी उसकी चूत नजर आने लगी। उसकी चूत देखते ही मैं पागल हो गया। मैंने ६९ पोजीशन में ही अपने को नीचे और उसको अपने ऊपर कर लिया। यह पोजीशन हम दोनों के मुख -मैथुन करने में सहायक हो रही थी।
मैंने उसकी चूत की पलकों को अपनी अँगुलियों से अलग किया और अपनी जीभ उसमें घुसा दी। जीभ का खुरदरापन उसके योनि-कलिका पर महसूस करते ही वो जोश में आ गई, वो भी मेरे लण्ड को पूरा निगलने की कोशिश करने लगी।
लण्ड-चूत हमारे मुंह में होने के कारण मुंह से कोई आवाज नहीं निकल रही थी। थोड़ी देर में हम दोनों एक साथ झड़ गए। उसने मेरा और मैंने उसका पानी पी लिया। क्या पानी था, क्या स्वाद था। उसकी चूत की सुगंध मुझे मदहोश बना रही थी। ऐसा लग रहा था मानो ३ पैग विस्की पी ली हो !
अब मैं घूम कर उसके मुंह के करीब आ गया और उसे बाँहों में भर लिया। उसका चेहरा चमकने लगा था। अब उसकी आँखों में देख कर मेरे साण्ड ने फिर हरकत करनी शुरू कर दी। मैं उसके स्तनों और गाण्ड को सहलाने लगा। मेरा तना हुआ लण्ड उसकी नंगी जांघों से टकराने लगा।
उसके अन्दर भी फिर से तूफ़ान तैयार होने लगा। अब मुझ से सहन नहीं हो रहा था। मैंने उसके कमर के नीचे अपना हाथ डाला और अपने लण्ड को उसकी चूत के दरवाजे पर लगा कर एक जोरदार झटका मारा।
लण्ड अन्दर जाते ही वो जोर से चिल्लाई- मर गई ! इ इ इ ई ईई ईई ! थोड़ा धीरे डालो।
लेकिन अब सुनाने का समय नहीं था, मैं पूरी गति से झटके लगाने लगा, वो नीचे से चूतड उठाने लगी। १० मिनट के घमासान के बाद मैंने उसे जोर से अपने बदन से चिपका लिया, वो अब तक तीन बार झड़ गई थी, मेरे चिपकाते ही वो ४ थी बार साथ में झड़ने लगी। हम दोनों बाँहों में बाहें डालकर अपनी साँसे दुरुस्त करने लगे।
उसकी आँखों में गज़ब की संतुष्टि नज़र आ रही थी।
उसने मुझे अब खुलकर बताना चालू किया कि वो भी मुझे बहुत पहले से चाहती है पर कभी बोल नहीं पाई। उसका पति उसे कभी कभी ही संतुष्ट कर पाता है।
हमें याद आया कि जल्दबाजी में हमने तो कंडोम लगाया ही नहीं। मैंने उसे तुंरत पेशाब करके आने को कहा। आते वक़्त वो दूध ले आई। उस रात मैंने उसे ४ बार चोदा। एक बार घोड़ी बनाकर, एक बार सोफे पर। एक बार कंधे पर लेकर और एक बार बाथरूम में !
अगले दिन क्या हुआ?
यह बाद में बताऊंगा कि कैसे मैंने उसकी गांड मारी।
यदि आपको यह कहानी अच्छी लगी हो तो मुझे जरूर बताएं।
अलविदा ! Sex Stories
मेरा नाम रोशन है। यह मेरी एक आज तक की Sex Stories सबसे अच्छी गुज़री रात है। मैंने उस एक रात अपनी बीवी (शालिनी) और उसकी शादीशुदा सहेली (रचना) जिसका पति मेरी दोस्त भी है, को एक ही रात चोदा।
शालिनी ५ फीट ४ इंच लम्बी है और उसका फ़िगर ३२-२८-३२ है। रचना भी उतनी ही लम्बी और कद-काठी की है पर उसकी चूचियाँ और भी बड़ी और आकर्षक हैं।
मैं और शालिनी अक्सर ही एक-दूसरे से अलग-अलग लड़कियों या लड़कियों के साथ चुदाई करने की बात किया करते थे। एक दिन रचना को मजबूरी में हमारे घर रूकना पड़ा, क्योंकि उसके पति को ऑफिस के काम से बाहर जाना था।
उस दिन खाना खाने के बाद हम तीनों मिलकर बेडरूम में फिल्म देख रहे थे जिसमें बहुत ही सेक्सी सीन अचानक ही आ गया। उसके बाद मुझे कुछ हो गया और मैं शालिनी को किस करने लगा। रचना फिल्म देखने में व्यस्त थी। फिर मैंने शालिनी को प्यार करते हुए उसके कान में धीरे से कहा कि मैं उसे और रचना को एक साथ चोदना चाहता हूँ। शालिनी ने मेरी तरफ देखा और फिर एकदम से रचना के पास जाकर उसके कान में कुछ कहा। उसके बाद रचना बाहर चली गई और शालिनी मेरे पास आकर मुझे चूमने लगी। मैंने उससे पूछा कि तुमने रचना से ऐसा क्या कहा है जो वह बाहर चली गई?
शालिनी ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया- सब्र कर लो थोड़ी देर !
उसके बाद मैं शालिनी को नंगा करके उसकी चूचियों को अपने मुँह में लेकर पीने लगा और उसकी चूत में ऊँगली करने लगा।
अचानक ही दरवाज़ा खुला और रचना एक काले रंग के गाऊन में अन्दर आई और आकर मेरे पास बैठ गई। उसके बाद मैंने शालिनी की तरफ देखा तो उसने मुस्कुराते हुए कहा कि आज हम दोनों तुम्हारे हैं।
इसके बाद तो मैं झपट कर रचना को चूमने लगा और उसका गाऊन खोल दिया। फिर मैं रचना की चूचियों को पीने लगा तो वह तड़पने लगी और मेरे सिर को अपने सीने में ज़ोर से दबा दिया।
इधर नीचे शालिनी मेरे लण्ड को बड़े मज़े से चूस कर रचना की चूत के लिए तैयार कर रही थी। उधर मैं रचना के पूरे बदन को चूम लेने के बाद उसकी चूत को चाटने लगा तो वह सिसकने लगी, शालिनी ने भी उसे और उत्तेजित करने के लिए उसकी चूचियाँ चूसनी शुरू कर दी।
फिर मैंने अपने गरमा-गरम लण्ड पर रचना को बैठा दिया और उसे कुदाने लगा, और शालिनी इधर मेरे मुँह पर बैठ कर अपनी चूत मुझसे चटवाने लगी।
इस तरह मैंने दोनों को बारी-बारी से चोदा और वह रात हमारे लिए यादगार बन गई। उसके बाद से हम लोगों को जब भी मौक़ा मिलता है हम लोग समूह में सेक्स करते हैं। Sex Stories
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