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यह कहानी मुझे श्री Antarvasna Stories मुकेश श्रीवास्तव ने भेजी है जिसे उन्होंने मुझे कहानी के रूप में लिखने की विनती की है। जरा सुने तो कि श्रीवास्तव जी क्या कह रहे हैं!
भाभी, भैया और मैं मुम्बई में रहते थे। मैं उस समय पढ़ता था। भैया अपने बिजनेस में मस्त रहते थे और खूब कमाते थे। मुझे तब जवानी चढ़ी ही थी, मुझ तो सारी दुनिया ही रंगीली नजर आती थी। जरा जरा सी बात पर लण्ड खड़ा हो जाता था। छुप छुप कर इन्टरनेट पर नंगी तस्वीरे देखता था और अश्लील पुस्तकें पढ़ कर मुठ मारता था। घर में बस भाभी ही थी, जिन्हें आजकल मैं बड़ी वासना भरी नजर से देखता था। उनके शरीर को अपनी गंदी नजर से निहारता था, भले ही वो मेरी भाभी क्यो ना हो, साली लगती तो एक नम्बर की चुद्दक्कड़ थी।
क्या मस्त जवान थी, बड़ी-बड़ी हिलती हुई चूंचियाँ! मुझे लगता था जैसे मेरे लिये ही हिल रही हों। उसके मटकते हुये सुन्दर कसे हुये गोल चूतड़ मेरा लण्ड एक पल में खड़ा कर देते थे।
जी हाँ… ये सब मन की बातें हैं… वैसे दिल से मैं बहुत बडा गाण्डू हूँ… भाभी सामने हों तो मेरी नजरें भी नहीं उठती हैं। बस उन्हें देख कर चूतियों की तरह लण्ड पकड़ कर मुठ मार लेता था। ना… चूतिया तो नहीं पर शायद इसे शर्म या बड़ों की इज्जत करना भी कहते हों।
एक रात को मैं इन्टर्नेट पर लड़कियों की नंगी तस्वीरें देख कर लेटा हुआ लण्ड को दबा रहा था। मुझे इसी में आनन्द आ रहा था। मुझे अचानक लगा कि दरवाजे से कोई झांक रहा है… मैं तुरन्त उठ बैठा, मैंने चैन की सांस ली।
भाभी थी…
‘भैया, चाय पियेगा क्या…’ भाभी ने दरवाजे से ही पूछा।
‘अभी रात को दस बजे…?’
‘तेरे भैया के लिये बना रही हूँ… अभी आये हैं ना…’
‘अच्छा बना दो…!’
भाभी मुस्कराई और चली गई। मुझे अब शक हो गया कि कहीं भाभी ने देख तो नहीं लिया। फिर सोचा कि मुस्करा कर गई है तो फिर ठीक है… कोई सीरियस बात नहीं है।
कुछ ही देर में भाभी चाय लेकर आ गई और सामने बैठ गईं।
‘इन्टरनेट देख लिया… मजा आया…?’ भाभी ने कुरेदा।
मैं उछल पड़ा, तो भाभी को सब पता है, तो फिर मुठ मारने भी पता होगा।
‘हाँ अ… अह्ह्ह हाँ भाभी, पर आप…?’
‘बस चुप हो जा… चाय पी…’ मैं बेचैन सा हो गया था कि अब क्या करूँ । सच पूछो तो मेरी गाण्ड फ़टने लगी थी, कहीं भैया को ना कह दें।
‘भाभी, भैया को ना कहना कुछ भी…!’
‘क्या नहीं कहना… वो बिस्तर वाली बात… चल चाय तो खत्म कर, तेरे भैया मेरी राह देख रहे होंगे!’
खिलखिला कर हंसते हुए उन्होंने अपने हाथ उठा अंगड़ाई ली तो मेरे दिल में कई तीर एक साथ चल गये।
‘साला डरपोक… बुद्धू…! ‘ उसने मुझे ताना मारा… तो मैं और उलझ गया। वो चाय का प्याला ले कर चली गई। दरवाजा बंद करते हुये बोली- अब फिर इन्टर्नेट चालू कर लो… गुड नाईट…!’
मेरे चेहरे पर पसीना छलक आया… यह तो पक्का है कि भाभी कुछ जानती हैं।
दूसरे दिन मैं दिन को कॉलेज से आया और खाना खा कर बिस्तर पर लेट गया। आज भाभी के तेवर ठीक नहीं लग रहे थे। बिना ब्रा का ब्लाऊज, शायद पैंटी भी नहीं पहनी थी। कपड़े भी अस्त-व्यस्त से पहन रखे थे। खाना परोसते समय उनके झूलते हुये स्तन कयामत ढा रहे थे। पेटीकोट से भी उनके अन्दर के चूतड़ और दूसरे अंग झलक रहे थे। यही सोच सोच कर मेरा लण्ड तना रहा था और मैं उसे दबा दबा कर नीचे बैठा रहा था। पर जितना दबाता था वो उतना ही फ़ुफ़कार उठता था। मैंने सिर्फ़ एक ढीली सी, छोटी सी चड्डी पहन रखी थी। मेरी इसी हालत में भाभी ने कमरे में प्रवेश किया, मैं हड़बड़ा उठा। वो मुस्कराते हुये सीधे मेरे बिस्तर के पास आ गई और मेरे पास में बैठ गई। और मेरा हाथ लण्ड से हटा दिया।
उस बेचारे क्या कसूर… कड़क तो था ही, हाथ हटते ही वो तो तन्ना कर खड़ा हो गया।
‘साला, मादरचोद तू तो हरामी है एक नम्बर का…’ भाभी ने मुझे गालियाँ दी।
‘भाभी… ये गाली क्यूँ दी मुझे…?’ मैं गालियाँ सुनते ही चौंक गया।
‘भोसड़ा के! इतना कड़क, और मोटा लण्ड लिये हुये मुठ मारता है?’ उसने मेरा सात इन्च लम्बा लण्ड हाथ में भर लिया।
‘भाभी ये क्या कर रही आप…!’ मैंने उनक हाथ हटाने की भरकस कोशिश की। पर भाभी के हाथों में ताकत थी। मेरा कड़क लण्ड को उन्होंने मसल डाला, फिर मेरा लण्ड छोड़ दिया और मेरी बांहों को जकड़ लिया। मुझे लगा भाभी में बहुत ताकत है। मैंने थोड़ी सी बेचैनी दर्शाई। पर भाभी मेरे ऊपर चढ़ बैठी।
‘भेन की चूत… ले भाभी की चूत… साला अकेला मुठ मार सकता है… भाभी तो साली चूतिया है… जो देखती ही रहेगी… भाभी की भोसड़ी नजर नहीं आई…?’ भाभी वासना में कांप रही थी। मेरा लण्ड मेरी ढीली चड्डी की एक साईड से निकाल लिया। अचानक भाभी ने भी अपना पेटिकोट ऊँचा कर लिया। और मेरा लण्ड अपनी चूत में लगा दिया।
‘चल मादरचोद… घुसा दे अपना लण्ड… बोल मेरी चूत मारेगा ना…?’ भाभी की छाती धौंकनी की तरह चलने लगी। इतनी देर में मेरे लण्ड में मिठास भर उठी। मेरी घबराहट अब कुछ कम हो गई थी। मैंने भाभी की चूंचियाँ दबाते हुये कहा- रुको तो सही… मेरा जबरन चोदन करोगी क्या, भैया को मालूम होगा तो वो कितने नाराज होंगे!’
भाभी नरम होते हुए बोली- उनके रुपयों को मैं क्या चूत में घुसेड़ूगी… हरामी साले का खड़ा ही नहीं होता है, पहले तो खूब चोदता था अब मुझे देखते ही मादरचोद करवट बदल कर सो जाता है… मेरी चूत क्या उसका बाप चोदेगा… अब ना तो वो मेरी गाण्ड मारता है और ना ही मेरी चूत मारता है… हरामी साला… मुझे देख कर चोदू का लण्ड ही खड़ा नहीं होता है!’
‘भाभी इतनी गालियाँ तो मत निकालो… मैं हूँ ना आपकी चूत और गाण्ड चोदने के लिये। आओ मेरे लण्ड को चूस लो!’
भाभी एक दम सामान्य नजर आने लग गई थी अब, उनके मन की भड़ास निकल चुकी थी। मेरा तन्नाया हुआ लण्ड देख कर वो भूखी शेरनी की तरह लपक ली। उसका चूसना ही क्या कमाल का था। मेरा लण्ड फ़ूल उठा। उसका मुख बहुत कसावट के साथ मेरे लौड़े को चूस रहा था। मेरे लण्ड को कोई लड़की पहली बार चूस रही थी। वो लण्ड को काट भी लेती थी। कुछ ही समय में मेरा शरीर अकड़ गया और मैंने कहा- भाभी, मत चूसो! मेरा माल निकलने वाला है…!’
‘उगल दे मुँह में भोंसड़ी के…!’ उसका कहना भी पूरा नहीं हुआ था कि मेरा लण्ड से वीर्य निकल पड़ा।
‘आह मां की लौड़ी… ये ले… आह… पी ले मेरा रस… भेन दी फ़ुद्दी…!’ मेरा वीर्य उसके मुह में भरता चला गया। भाभी ने बड़े ही स्वाद लेकर उसे पूरा पी लिया।
भाभी बेशर्मी से अब बिस्तर पर लेट गई और अपनी चूत उघाड़ दी। उसकी भूरी-भूरी सी, गुलाबी सी चूत खिल उठी।
‘चल रे भाभी चोद… चूस ले मेरी फ़ुद्दी… देख कमीनी कैसे तर हो रही है!’ तड़पती हुई सी बोली।
मुझे थोड़ा अजीब सा तो लगा पर यह मेरा पहला अनुभव था सो करना ही था। जैसे ही मुख उसकी चूत के पास लाया, एक विचित्र सी शायद चूत की या उसके स्त्राव की भीनी सी महक आई। जीभ लगाते ही पहले तो उसकी चूत में लगा लसलसापन, चिकना सा लगा, जो मुझे अच्छा नहीं लगा। पर अभी अभी भाभी ने भी मेरा वीर्य पिया था… सो हिम्मत करके एक बार जीभ से चाट लिया। भाभी जैसे उछल पड़ी।
‘आह, भैया… मजा आ गया… जरा और कस कर चाट…!’
मुझे लगा कि जैसे भाभी तो मजे की खान हैं… साली को और रगड़ो… मैंने उसे कस-कस कर चाटना आरम्भ कर दिया। भाभी ने मेरे सर के बाल पकड़ कर मेरा मुख अपने दाने पर रख दिया।
‘साले यह है रस की खान… इसे चाट और हिला… मेरी माँ चुद जायेगी राम…!’ दाने को चाटते ही जैसे भाभी कांप गई।
‘मर गई रे! हाय मां की…! चोद दे हाय चोद दे…! साला लण्ड घुसेड़ दे!… मां चोद दे… हाय रे!’ और भाभी ने अपनी चूत पर पांव दोहरे कर लिये और अपना पानी छोड़ दिया। ये सब देख कर मेरा मन डोल उठा था। मेरा लण्ड एक बार फिर से भड़क उठा।
भाभी ने ज्योंही मेरा खड़ा लण्ड देखा- साला हरामी… एक तो वो है… जो खड़ा ही नहीं होता है… और एक ये है… फिर से जोर मार रहा है…’
‘भाभी, मैंने यह सब पहली बार किया है ना…! मुझे बार-बार आपको चोदने की इच्छा हो रही है!’
‘चल रे भोसड़ी के… ये अपना लण्ड देख…साला पूरा छिला हुआ है… और कहता है पहली बार किया है!’
‘भाभी ये तो मुठ मारने से हुआ है… उस दो रजाई के बीच लण्ड घुसेड़ने से हुआ है… सच…! ‘
‘आये हाये… मेरे भेन के लौड़े… मुझे तो तुझ पर प्यार आ रहा है सच… साले लण्ड को टिका मेरे गाण्ड के गुलाब पर… मेरे चिकने लौण्डे!’ भाभी ने एक बार फिर से मुझे कठोरता से जकड़ लिया और घोड़ी बन गई। अपनी भूखी प्यासी गाण्ड को मेरे लौड़े पर कस दिया।
‘चल हरामी… लगा जोर… घुसेड़ दे…तेरी मां की… चल घुसा ना…!’ मेरे हर तरफ़ से जोर लगाने पर भी लण्ड अन्दर नहीं जा रहा था।
‘भोसड़ी के… थूक लगा के चोद…नहीं तो तेल लगा के चोद… वाकई यार नया खिलाड़ी है!’ और भाभी ने अपने कसे हुये सुन्दर से गोल गोल चूतड़ मेरे चेहरे के सामने कर दिये। मैंने थूक निकाल कर जीभ को उसकी गाण्ड पर लगा दी और उसे जीभ से फ़ैलाने लगा। भाभी को जोरदार गुदगुदी हुई।
‘भड़वे… और कर… जीभ गाण्ड में घुसा दे… हाय हाय हाय रे… और जीभ घुमा… आह्ह्ह रे… गाण्ड में घुसा दे…बड़ा नमकीन है रे तू तो!’ उसकी सिसकारियाँ मुझे मस्त किये दे रही थी।
‘भाभी… ये नमकीन क्या?’ मैंने पूछा तो वो जोर से हंस दी।
‘तेरे लौड़े की कसम भैया जी… जीभ से गाण्ड मार दे राम…’ मैंने भी अपनी जीभ को उसकी गाण्ड में घुसा दी और अन्दर बाहर करने लगा। मैंने अपनी अपनी एक अंगुली उसकी चूत में भी घुसा दी। भाभी तड़प सी उठी।
‘आह मार दे गाण्ड रे… उठा लौड़ा… मार दे अब…भोसड़ी के ‘
मैंने तुरंत अपनी पोजिशन बदली और और उसकी गाण्ड के पीछे चिपक गया और तन्नाया हुआ लण्ड उसकी गाण्ड की छेद पर रख दिया और जोर लगाते ही फ़क से अन्दर उतर गया।
‘मदरचोद पेल दे… चोद दे गाण्ड… साली को… मरी भूखी प्यासी तड़प रही थी… चोद दे इस कमीनी को…’
मेरी कमर अब उसे चोदते हुये हिलने लगी थी। मेरा लण्ड तेजी से चलने लगा था। उसकी गाण्ड का छेद अब बन्द नहीं हो रहा था। जैसे ही मैं लण्ड बाहर निकालता, वो खुला का खुला रह जाता। तभी मैं जल्दी से फिर अपना लण्ड घुसेड़ देता… हाँ एक थूक का लौन्दा जरूर उसमें टपका देता था। फिर वापस से दनादन चोदने लगता था। बीच बीच में वो आनन्द के मारे चीख उठती थी। घोड़ी बनी भाभी की चूत भी अब चूने लग गई थी। उसमें से रति-रस बूंद बूंद करके टपकने लगा था। मैंने अपना लन्ड बाहर निकाल कर उसकी चूत में घुसेड़ दिया।
‘भोसड़ी के…धीरे से… मेरी चूत तो अभी तो साल भर से चुदी भी नहीं है… धीरे कर!’
‘ना भाभी… मत रोको… चलने दो लौड़ा…’
‘हाय तो रुक जा… नीचे लेट जा… मुझे चोदने दे अब…’
‘बात एक ही ना भाभी… चुदना तो चूत को ही है…’
‘अरे चल यार… मुझे मेरे हिसाब से चुदने दे…भोसड़ी तो मेरी है ना…’ उसके स्वर में व्याकुलता थी।
मेरे नीचे लेटते ही वो मुझ पर उछल कर चढ़ गई और खड़े लण्ड पर चूत के पट खोलकर उस पर बैठ गई। चिकनी चूत में लण्ड गुदगुदी करता हुया पूरा अन्दर तक बैठ गया। उसके मुख से एक आह निकल पड़ी। अब उसने मेरा लण्ड थोड़ा सा बाहर निकाला और फिर जोर लगा कर और भी गहराई में उतारने लगी। हर बार मुझे लण्ड पर एक जोर की मिठास आ जाती थी।
उसके मुँह से एक प्रकार की गुर्राहट सी निकल रही थी जैसे कि कोई भूखी शेरनी हो और एक बार में ही पुरा चुद जाना चाहती हो। अब तो अपनी चूत मेरे लण्ड पर पटकने लगी… मेरा लण्ड मिठास की कसक से भर उठा। उसके धक्के बढ़ते गये और मेरी हालत पतली होती गई… मुझे लगा कि मैं बस अब गया… तब गया… पर तभी भाभी ने अपने दांत भींच लिये और मेरे लण्ड को जोर से भीतर रगड़ दिया और उसकी चूत ने पानी छोड़ दिया। चूत की रगड़ खाते ही मेरी जान निकल गई और मेरे लण्ड ने चूत में ही अपना यौवन रस छोड़ दिया…
उसकी चूत में जैसे बाढ़ आ गई हो। मेरा तो वीर्य निकले ही जा रहा था… और शायद भाभी की चूत ने भी चुदाई के बाद अपना रस जोर से छोड़ दिया था। वो ऊपर चढ़ी अपना रस निकाल रही थी और फिर मेरे ऊपर लेट गई। सब कुछ फिर से एक बार सामान्य हो गया…
‘भाभी आपकी चुदाई तो…’
भाभी ने मेरे मुख पर हाथ रख दिया- अब नहीं… गालियाँ तो चुदाई में ही भली लगती है…अब अगली चुदाई में प्यारी-प्यारी गालियाँ देंगे!’
‘सॉरी, भाभी… हाँ मैं यह पूछ रहा था कि जब आप को मेरे बारे में पता था तब आपने पहल क्यों नहीं की?’
‘पता तो तुझे भी था… मैं इशारे करती तो तू समझता ही नहीं था… फिर जब मुझे पक्का पता चल गया कि तेरे मन में मुझे चोदने की है और तू मेरे नाम की मुठ मारता है तो फिर मेरे से रहा नहीं गया और तुझ पर चढ़ बैठी और मस्ती से चुदवा लिया।’
‘भाभी धन्यवाद आपको… मतलब अब कब चुदाई करेंगें…?’
‘तेरी मां की चूत… आज करे सो अब… चल भोसड़ी के चोद दे मुझे…! ‘ और भाभी फिर से मुझे नोचने खसोटने के लिये मुझ पर चढ़ बैठी और मुझे नीचे दबा लिया और मुझे गाल पर काटने लगी। मैं सिसक उठा और वो एक बार फिर से मुझ पर छा गई…
मेरा लण्ड तन्ना उठा… मेरा चेहरा उसने थूक से गीला कर दिया और मेरे गालों को काटने लगी… मेरा लण्ड उसकी चूत में फिर से घुस पड़ा… Antarvasna Stories
एक बार मैं फिर हाजिर हूँ Antarvasna Stories अपनी एक नई कहानी लेकर। दरअसल मैं जिस कंपनी के लिए काम करता हूँ वो एक प्रोफेशनल जिगोलो और एस्कोर्ट सुविधा देने वाली कंपनी है।
एक बार मेरे ऑफिस से फोन आया कि ग्रेटर कैलाश की एक महिला को चुदाई की सर्विस देनी है जिसके लिए मुझे शाम के छः बजे जाना था। हालाँकि मैं एक दिन पहले ही गोवा से बंगलोर ट्रेन सर्विस देकर आया था लेकिन यह असाइनमेंट मैं नहीं छोड़ना नहीं चाहता था क्योंकि यह ग्रेटर-कैलाश का था और हाई-प्रोफाइल को सर्विस देने का मजा ही कुछ और है। यही सोच कर मैंने हामी भर दी।
ठीक समय पर पहुँच कर घंटी बजाई तो सामने एक 38-40 साल की महिला ने मेरा स्वागत किया। देखने में ठीक-ठाक ही थी, चूचियाँ भी तनी थी लेकिन उम्र का तकाजा था, जिसे वो वह चाहकर भी छुपा नहीं सकती थी।
खैर मैं अंदर दाखिल हुआ, घर देख कर ही पता चल गया कि महिला ने भले ही चुदवाने के लिए मुझे बुलाया है लेकिन ठाट-बाट सब अमीरों वाले हैं। थोड़ी देर इधर उधर के बातों में उसने अपना नाम चंदा बताया। वो एक विधवा है और उसके पति को गुजरे हुए तक़रीबन दस साल हो गए हैं तब से आज तक वो प्यासी है, जब बर्दाश्त नहीं हुआ तो आज उसने हमारी सर्विस का याद किया। हमारी सर्विस का पता अक्सर किटी पार्टियो में एक से दूसरे तक पहुँच जाता है।
थोड़ी देर बात करने के बाद उसने पूछा- क्या पियोगे?
और मैंने भी हमेशा की तरह बोल दिया- आप जो लेंगी, वही मैं भी ले लूँगा।
आंटी दो ग्लास में विस्की लेकर आई जिसे हम धीरे धीरे पीने लगे और इसी बीच उन्होंने बताया कि उनकी एक 18 साल की बेटी है जो होस्टल मैं रह कर बी ए कर रही है और अक्सर छुट्टी में ही घर आती है। उनका कोई भी रिश्तेदार दिल्ली में नहीं है। कभी साल में एक आध बार कोई आ गया तो ठीक, वरना वो अकेली ही रहती हैं।
फिर मैंने ही शुरु किया क्योंकि मैं तो एक असाइनमेंट पूरा करने आया था।
विस्की पीते हुए मैंने चंदा को अपनी तरफ खींचा तो वो बिना किसी विरोध के मेरे करीब आ गई। फिर मैं अपनी ड्रिंक का ग्लास वहीं मेज़ पर रख कर चंदा के गुलाबी होंठ पीने लगा। मेरे हाथ अपना करतब दिखाते हुए उसकी चूचियों को मसल रहे थे। कभी चंदा मेरा होंठ पीती तो कभी मैं उसके होंठ पीता। इस तरह लगभग एक घंटा तक हम एक दूसरे से चिपक कर चूमा-चाटी करते रहे।
फिर मैं अपने कपड़े उतार कर केवल चड्डी में आ गया। मेरा ७ इंच का लंड काले नाग की तरह उछल रहा था। फिर मैंने चंदा के टॉप को उससे अलग किया तो मैं देखता रह गया क्योंकि काली ब्रा में उसकी गोरी गोरी चूचियों का कुछ अलग ही सौंदर्य था जिसे मैं देखता ही रह गया।
यह देख कर चंदा बोली- क्या देख रहे हो राजा! अब तो ये तुम्हारे हैं!
और वो हंस दी।
मैं साथ ही बोल पड़ा- रानी तुम्हारी चूचियों को देख कर तो साली किसी की भी नियत डोल जायेगी।
फिर उसे झुका कर अपने लंड को चुसाने लगा। वो एक तजुरबेकार की तरह जीभ से चाट चाट कर अलग ही मजा देने लगी। फिर 69 के पोज में आने के लिए मैंने उसे बोला तो उसकी खुशी का ठिकाना ही नहीं रहा। उसने तुरंत अपनी जींस को अलग कर डाला। अब वो भी चड्डी में थी और मैं भी। पहले तो फिर हम एक दूसरे की बाजुओं में काफी देर तक चूमते रहे, फिर मैंने उसे 69 पोजिशन में लाते हुए चड्डी से मुक्त कर दिया, उसने भी मुझे चड्डी-मुक्त कर दिया।
अब 69 पोजिशन में वो मेरा लंड चूस रही थी और मैं जीभ उसके चूत की शिश्निका को छेड़ रहा था। वो थोड़ी ही देर में झड़ गई तो मुझे थोड़ी बुरा सा जरुर लगा। फिर भी वो बोली- एक पग विस्की के बाद फिर उसमें वही जोश होगा और सच मुच ऐसा ही हुआ। वो फिर तैयार थी, बल्कि पहले से ज्यादा जोश उसमें आ गया था, मुझे भी संतुष्टि हुई कि अब ये साली ज्यादा मजा और माल देगी। थोड़ी देर तक चूमा-चाटी के बाद मैंने सीधे उसकी चूत को अपने लंड से खोलने का मन बना लिया, साथ ही उसकी चूत पर अपने लंड को रगड़ते हुए एकदम जोर से उसकी बुर में पेल दिया। चंदा शायद मेरे हमले को तैयार नहीं थी और उसके मुंह से निकल गई- अह्ह ………….अह्ह! प्लीज धीरे धीरे चोदो! दर्द हो रहा है!
लेकिन मेरे ऊपर इसका कोई प्रभाव न देखकर बोली- साले चूतिये! आराम से पेल! नहीं तो मेरी चूत फट जायेगी!
तो मैं थोड़ा धीमा हुआ लेकिन चोदना चालू रखा। वो भी अब सामान्य हो गई थी और अपनी कमर को उछाल-उछाल कर चुदा रही थी। यह मस्ती दो घंटे तक चली। उसके बाद उसका बदन अकड़ने लगा तो मैं समझ गया कि अब यह झड़ने वाली है। फिर मैंने अपनी गति बढ़ा दी। हम दोनों एक साथ झड़ गए, उसकी चूत की कटोरी मेरे वीर्य से लबालब हो गई।
दस मिनट तक हम एक दूसरे से चिपके रहे, उसके बाद अलग हुए तो चंदा बोली- बाथ लेने जा रही हूँ!
तो मैं बोला- मैं भी बाथ लूँगा!
इतना सुन के वो खुश हो गई और बोली- तब तो और मजा आयेगा।
हम दोनों नंगे ही बाथरूम में घुस गए और शॉवर के नीचे एक दूसरे से चिपक गए। वो मेरे शरीर में साबुन लगा रही थी और मैं उसके शरीर में!
थोड़ी देर में ही मेरा लंड फिर अपने विकराल रूप में आ गया। जिसे देख कर वो और खुश हो गई और होंठ लगा पर चूसने लगी- बिल्कुल जैसे छोटा बच्चा लॉलीपोप चूसता है।
उसने फिर चुदाई की मांग कर दी तो मैं बोला- इस बार तुम्हारी गांड में पेलना है!
वो थोड़ा डरने लगी।
फिर मैंने उसे समझाया- थोड़ा सा मुंडी घुसने के वक्त दर्द होगा फिर उसके बाद मजा ही मजा है!
थोड़ी ना-नुकुर के बाद वो तैयार हो गई। मैंने अपने लंड पर साबुन का झाग लगाया जिससे चंदा को दर्द काम हो।
बाथरूम में उसे कुतिया की तरह झुका कर उसकी गांड में पेलना चालू किया।
जैसे ही थोड़ा सा घुसा, वो दर्द से चिल्लाने लगी और गालियां देने लगी, साथ ही आगे बढ़ना चाहा, लेकिन मैंने उसकी कमर को पकड़ कर जोर का झटका मारा जिससे पूरा का पूरा लंड चंदा की गांड में था। बदले में था- वोह… वोह वो माँ …साले ने मेरी गांड फा दी… अबे साले बाहर निकाल… वोह वोह… चूतिये बाहर निकल! नहीं तो मेरी गांड फट जायेगी।
लेकिन सब सुन कर भी मैंने झटके धीरे धीरे चालू रखे।
थोड़ी देर चोदने के बाद वो सामान्य हो गई और मजे लेने लगी।
एक घंटे तक हमारा यह चुदाई का प्रोग्राम फिर चला, तब जाकर मैं भी झड़ गया।
चलने के वक्त एक दूसरे को चूम कर चल दिया इस वादे के साथ कि चंदा जब चुदने को बुलाएगी मैं हाजिर हो जाऊंगा।
यह थी चंदा की चुदाई!
लेकिन अभी तो उसकी मस्त माल बेटी जिसका नाम छवि है को चोदना बाकी है, शायद मेरी आने वाली कहानी में चुद जायेगी।
कृपया अपना राय और सुझाव जरूर भेजें। Antarvasna Stories
मेरी शादी हुए दस Sex Stories साल हो गये हैं और हम दोनों का यौन-जीवन बहुत बढ़िया है। पर मेरे मन में इसके अलावा भी कुछ और करने की इच्छा थी।
मैंने रात को सेक्स करते हुए बीवी को बोला- अगर तुम्हें एक ओर लंड मिले तो कैसे लगेगा?
यह सुन कर वह नाराज हो गई और बोली- तुम बस अभी चूत मारो ! मुझे इसमें मजा आ रहा है।
मैंने पूछा- अगर मेरा लंड और बड़ा होता तो कैसा लगता?
तो वो बोली- तब तो मेरी चूत को मजा आ जाता और मैं आसमान में पहुँच जाती।
मैंने पूछा- अगर एक और लंड का इन्तजाम हो जाये जैसे कि डिल्डो?
वो बोली- मजा आ जायेगा।
मैंने बोला- अगर इस डिल्डो की जगह अगर एक आदमी बड़े लौड़े वाला हो तो? हम दोनों मिल कर तुम्हें जम कर चोदेंगे।
तो वह इसे सुन कर हल्का मुस्कराने लगी।
मैंने बोला- तुम्हारा भी मन है !
अब वह खुल कर बोली- हाँ !
वह पूछने लगी- तुम्हारा मन भी किसी और चूत के लिये करता है क्या?
मैं तो इस भी ज्यादा चाहता हूँ !
वह बोली- तो और क्या?
मैंने बोला- दो लण्ड पहले तुम्हें चोदेगे और फिर वही लण्ड मुझे चोदेगा।
यह सुन कर वह बोली- तुम अपनी गाण्ड में लण्ड लोगे?
मैं बोला- हाँ मेरी जान ! दोनों एक लण्ड को चूसेंगे ओर मजे लेंगे।
उसकी आँखों में एक चमक आ ग़ई। अब हम दोनों सेक्स करते हुए यही बात करते और सेक्स का मजा लेते। अब मुझे एक ऐसे आदमी की ख़ोज थी जो मुझे और मेरी बीवी दोनों को चोद सके। हमारी यह ख़ोज भी जल्दी पूरी हो ग़ई। वह तो हमारा पुराना पड़ोसी ही था जिसे मेरी बीवी भी पसंद करती थी। एक दिन मेरी बीवी ने उसे मूतते हुए देखा था जब वह छत पर घूम रही थी। सामान्य अवस्था में भी उसका लण्ड 5 इन्च का था। अब बस उसे पटाना था और घर तक लाना था।
एक दिन मैंने उसे बोला- कभी बैठ कर पैग लगाते हैं।
वो बोला- इस शनिवार को बैठते हैं।
मेरे मन की और मेरी बीवी की इच्छा अब बस पूरी होने वाली थी। अब हम दोनों शनिवार का इन्तज़ार करने लगे।
शनिवार को सुबह ही मेरी बीवी ने मुझे बोला- आज तबीयत से तैयार होने वाली हूँ और मुझे काफ़ी समय लगेगा।
उसने पूरी वैक्सिंग करी और चूत को हेयर रिमूवर से साफ़ किया। मैंने भी अपने सारे झान्ट साफ़ किये और अपनी गाण्ड के बालों को हेयर रिमूवर से साफ़ किया।
शीशे में अपनी गाण्ड देख कर मुझे कुछ होने लगा। फिर मैंने अपनी गाण्ड में खूब तेल लगाया। जिससे कि मेरी गाण्ड चिकनी हो जाये। शाम को वह हमारा पड़ोसी आ गयाँ और हम दोनों इसके लिये पहले से तैयार थे। मैंने एक शॉर्ट और टीशर्ट पहनी थी ओर मेरी बीवी ने एक टॉप जिसका गला बहुत खुला था और इसके साथ उसने एक टाईट कैप्री पहनी थी जिसमें उसके कूल्हे एक दम गोल-गोल नजर आ रहे थे। टॉप के नीचे उसने ब्रा नहीं पहनी थी। उस के 38-सी कप के स्तन एक दम मस्त लग रहे थे और तने हुए चुचूक गजब ढा रहे थे।
जब वह कोल्ड ड्रिंक देने आई तो हम दोनों उसे देख़ते ही रह गये। जैसे ही उसने झुक कर सामान रखा हमारा पड़ोसी मेरी पत्नी के वक्ष देख़ने लगा। यह देख़ कर हम दोनों मुस्करा दिये क्योंकि आज रात वह हम दोनों को खुश करने वाला था। फिर मैंने ड्रिन्क ग्लास में डाला और उसे दिया। मैंने जानबूझ कर उसके पैग बड़े बनाए ओर दो पैग में वह सुरुर में आ गया।
अब हम दोनों अश्लील चुटकले सुनाने लगे।
इतने में रितु (मेरी बीवी) भी वहीं आ गई और हमारे साथ बैठ कर बातें करने लगी। रितु बोली- मुझे भी चुटकले सुनने हैं।
तो मैंने एक चुटकला सुनायाँ जो इस तरह से था :
राम लाल : ठाकुर साहब, ग़ब्बर ने बहू की इज्जत लूट ली है।
ठाकुर : तो मैं क्या करुँ?
रामलाल : बहूरानी पूछ रही है कि बब्बर से बदला लेना है या पेमेन्ट?
इस दौरान जब हम सब हंस रहे थे तो चौधरी (हमारा पड़ोसी) रितु के स्तन और चुचूक देख रह था।
और इस तरह से हमारी अश्लील बातचीत आगे चलने लगी। हम धीरे धीरे पूरी तरह से व्यस्क चुटकले सुनाने लगे।
मैंने चौधरी से पूछा- क्या कभी तुमने भाभी के अलावा किसी और से सेक्स कियाँ है?
वो बोला- मन तो बहुत करता है पर कियाँ नहीं है।
मैंने पूछा- किसी पर तुम्हारा दिल आयाँ है?
तो वो बोला- आप नाराज नहीं होना ! मुझे रितु भाभी बहुत सैक्सी लगती है।
मैंने बोला- तुम्हारी नजरें ही बता रही हैं क्योंकि तुम इसके स्तनों को ही घूरते जा रहे हो।
वो बोला- इनकी गाण्ड तो और भी सेक्सी है। मै तो अपनी बीवी को चोदते हुए भी इनके बारे में सोचते हुए चोदता हूँ।
यह सुन कर रितु हंसने लगी और बोली- तो क्या मैं इतनी सेक्सी हूँ?
तो हम दोनों एक साथ बोले- हाँ।
मैंने पूछा- चौधरी सच में इसे चोदना चाहते हो क्या?
वो बोला- अगर मौका मिले तो जरुर चोदूंगा।
मैंने बोला- आज तुम मेरे सामने ही चोद लो ! बाद में कुछ और हरकत मत कर बैठना।
वो बोला- तुम अपने सामने चोदने दोगे?
मैंने बोला- मैं भी तो चोदूंगा।
यह सब सुन कर रितु भी जोश में आ गई थी। अब हम तीनों अपने बैडरूम की तरफ़ चल दिए। रितु ऐसे मटक कर चल रही थी कि हम दोनों के लण्ड ख़ड़े हो गये। जैसे ही हम बैडरूम में पहुँचे, रितु ने बैड पर लेट कर एक जोरदार अंगड़ाई ली और उसके स्तन एक दम ख़ड़े हो ग़ये। मैंने आगे बढ़कर दोनों कबूतरों को पकड़ लिया और मसलने लगा। वह जोर से आह आह करने लगी और चौधरी अपने लण्ड को पकड़ कर हिलाने लगा।
मैंने रितु का टॉप उतार दिया और दोनों कबूतर बाहर आ गये। चौधरी ने आगे बढ़कर एक चूची को पकड़ लिया और मसलने लगा। मैंने चुचूक को मुँह में ले लिया और चूसने लगा। अब हम दोनों के बीच में रितु थी और हम दोनों उसके स्तनों से ख़ेल रहे थे। उसने हमारे लण्ड पकड़ लिये और हिलाने लगी। अब हमने मिल कर उसे पूरा नंगा कर दिया और खुद भी नंगे हो गये। अब कमरे में एक चूत और दो लण्ड थे जो कि धमाल मचाने वाले थे।
चौधरी ने बोला- मैं तो रितु की चूत को चूसूंगा।
और रितु ने टांगें खोल कर उसे बुलाया। वो उसकी टांगें उठा कर चूत को चाटने लगा और रितु की सिसकारियां निकलने लगी। वह भी उसे जोर से चूसने को कह रही थी और क्यों ना कहे, उसे आज मनचाहा दिलदार मिला था जो उसे चोदने वाला था।
चौधरी भी पूरी जोर से चूत चाटे जा रहा था। उसने दोनों हाथों से चूत को फ़ैला रख़ा था और पूरी जीभ अन्दर पेल रहा था। रितु ने उस के सिर को दोनों हाथों से पकड़ कर चूत पर दबा दिया और वो बोल रही थी- चूसो मेरे जानू और जोर से चूसो !
और इसको सुनकर चौधरी भी पूरा दम लगा कर चूसे जा रहा था। अब चूत में से पानी टपकने लगा था और चपर-चपर की आवाज भी आने लगी थी। मैं बड़े गौर से रितु को चूत चटवाते हुए देख रहा था। वह बहुत सैक्सी लग रही थी।
अब मैंने आगे बढ़कर उसे अपना लण्ड पकड़ा दिया और उसे चूसने को बोला। उसने मेरे लण्ड को मुँह में ले लिया और चूसने लगी। अब कमरे में हमारी सिसकारियाँ निकल रही थी। रितु ने अचानक मेरे लण्ड को चूसना बन्द करके जोर जोर से सिसकारियाँ भरने लगी और चौधरी के सर को जोर से चूत पर दबा दिया। वोह बोलने लगी- चूस जा इस चूत को ! चूस जा ! निकाल दे मेरा पानी ! मजा आ रहा है ! आ रहा है ! और जोर से चूस ! और जोर से।
चौधरी को भी जोश आ गया और पूरी जीभ अन्दर डाल कर चूसने लगा। इतने में रितु ने चूत को उछालना शूरु कर दिया और आअह्ह्ह, औह्हह, आआअह्ह्ह् करने लगी। और फिर थोड़ी ही देर में उसकी चूत ने पानी छोड़ना शुरु कर दिया। चौधरी मजे ले ले कर चूत का पानी पीने लग़ा। रितु की भी सिसकारियाँ तेज होती जा रही थी और फिर वह प्यार से चौधरी के सर पर हाथ फेरने लगी। अब
मैंने चौधरी को बोला- बहुत हो गया चूसना ! अब जरा इस चूत को चोदना शुरु करो।
वह बोला- इसके लिए तो मैं कब से तड़प रहा हूँ।
फिर वह रितु की टांगों के बीच आ गया और अपने लण्ड को रितु की चूत पर फ़ेरने लगा। रितु ने भी दोनों टांगें फैला दी ताकि वह आराम से उसे चोद सके। अब चौधरी ने लण्ड को चूत पर रख कर एक जोरदार धक्का लगाया तो उस का आठ इन्च का लण्ड पूरा अन्दर तक घुस गया और रितु जोर से बोली- फ़ाड दी मेरी भैन चोद !
यह सुन कर चौधरी को और जोश आ गया और उसने एक बार फिर लण्ड को बाहर निकाल कर पूरे जोर से पूरा लण्ड अन्दर पेल दिया। इस बार रितु ने बोला- मजा आ गया मेरी जान ! और पेलो जोर से पेलो।
मैं रितु को इस तरह से चुदते देख कर जोश से भर गया और बोला- आज इसकी चूत को फ़ाड दो और खूब दम लगा कर चोदो।
मैंने फिर से अपने लण्ड को रितु के मुँह में डाल दिया।
अब वह मेरे लण्ड को चूस रही थी और उधर से उसकी चूत में चौधरी लण्ड पेले जा रहा था। मैं दोनों हाथों से उसकी दोनों चूचियों को मसल रहा था।।
थोड़ी देर जब चौधरी ने चोद लिया तो मैंने बोला- तुम इसे अपना लण्ड चुसाओ, मैं तब तक चूत का स्वाद लेता हूँ।
अब हम दोनों ने पोजीशन बदल ली। मैंने चूत में अपना लण्ड डाल दिया और चौधरी ने अपना लण्ड रितु के मुँह में दे दिया। बड़ा लण्ड देख कर वह भी उसे जोश से चाटने लगी। चौधरी का लण्ड किसी ने पहली बार चूसा था और वह हवा में उड़ने लगा। उसके मुँह से आवाजें आने लगी- वाह मेरी जान, आज पहली बार इस लण्ड को किसी ने चूसा है, मेरी बीवी तो चूसती ही नहीं है, आह्ह्ह्ह, आह्ह्ह्ह्ह, वाह्ह्ह्ह्ह्ह, हो हो !
और रितु ने उसे और जोर से चूसना शुरु कर दिया। यह सब देख कर मैंने भी चूत को जोर से चोदना शुरु कर दिया। इधर रितु की चूत से पानी निकलने लगा और चूत में चिकनाई और बढ़ गई, इसके साथ ही फच फच की आवाज भी आनी शुरु हो गई। अब मैंने दोनों हाथों से उसकी चूचियों को पकड़ रखा था और चोदे जा रहा था। जबकि चौधरी ने उसके सिर को पकड़ कर मुँह को चोदना शुरु कर दिया।
मैंने चौधरी को बोला- तुम इसकी चूत में आ जाओ और मैं थोड़ी देर तुम लोगों को देखता हूँ।
चौधरी ने फिर से चूत पर मोर्चा जमा लिया और उसकी दोनों टागों को कन्धे पर रख लिया। दोनों हाथों से उसकी चूचियों को पकड़ कर जोर जोर से चोदने लगा। रितु भी नीचे से गाण्ड उठा उठा कर साथ दे रही थी।
अब दोनों के मुँह से आवाजें आने लगी- आऽऽ चोदो ! और जोर से चोदो ! फाड़ दो इस चूत को ! वह भी बोल रहा था- आज इस चूत का तो मैं बैन्ड बजा दूंगा।
और फिर रितु बोलने लगी- मैं झड़ने वाली हूँ, आईईईई, आह्ह्ह्ह्ह, और और और आह्ह्ह्ह्ह आईईईईई !
और फिर उसने कस कर चौधरी को पकड़ लिया। चौधरी अभी भी उसे पूरा जोर लगा कर चोदे जा रहा था। इतने में चौधरी की आवाज भी आने लगी- मैं खाली हो रहा हूँ, मेरा छुटने वाला है।
और रितु ने उसे और कस कर पकड़ लिया और फिर चौधरी भी उस से चिपक गया और हांफने लगा। उसके लण्ड ने रितु की चूत में अपना माल छोड़ दिया जो चूत से रिस कर बिस्तर पर गिरने लगा। अब तक मैं अपने लण्ड को सहला रहा था और ख़डा हो गया और बोला- अब इस चूत का पानी मैं निकालता हूँ।
चौधरी बोला- मैं इन मस्त चूचियों से दूध निकालता हूँ।
अब चौधरी ने एक चूची को मुँह में लेकर चूसना शुरु कर दिया और दूसरे हाथ से दूसरी चूची को मसलने लगा। रितु ने एक हाथ से उसके लण्ड को हिलाना शुरु कर दिया।मैंने रितु की चूत में अपना लण्ड डाल कर अन्दर-बाहर करना शुरु कर दिया। फिर से कमरे में चूत से फच फच की आवाज आने लगी और माहौल और सैक्सी हो गया। कुछ ही देर में चौधरी का लण्ड फिर से खड़ा हो गया।
मैं जोर जोर से रितु को चोद रहा था पर मेरा ध्यान चौधरी के लण्ड पर था क्योंकि आज मुझे भी तो अपनी गाण्ड का उदघाटन करवाना था। चौधरी से अपने लण्ड का ताव सहा नहीं जा रहा था और मेरी चिकनी गाण्ड देख कर वो भी उत्तेजित हो रहा था जिसे मैंने सुबह ही साफ किया था और उसका परिणाम आने ही वाला था।
अब चौधरी ने उठ कर मेरी गाण्ड पर हाथ फेरना शुरु कर दिया जो कि मुझे भी उत्तेजित कर रहा था। इतने में वह मेरे पीछे आ गया और अपनी दो अन्गुलियाँ मेरी गाण्ड में पेल दी। मेरी गाण्ड में जोर से दर्द हुआ, मैं बोला- भैन्चोद ! तेल तो लगा ले।
यह सुन कर चौधरी ने ड्रैसिंग टेबल से तेल की शीशी उठाई और बहुत सा तेल लेकर मेरी गाण्ड में लगाने लगा। अब उसने दो अन्गुलियाँ मेरी गाण्ड में डालनी शुरु कर दी और मुझे अजीब सा मजा आने लगा। इधर चूत मारने का और उधर गाण्ड में अन्गुलियाँ, इससे ऊपर की थोड़ी ही देर में एक आठ इन्च लम्बा लण्ड मेरी गाण्ड में घुसने वाला है।
अब रितु फिर से उह आह करने लगी थी।
अब चौधरी ने बोला- मैं तुम्हारी ग़ान्ड मारने वाला हूँ, तैयार हो जाओ।
उसने मेरी कमर को पकड़ लिया और मेरी गाण्ड पर अपना लण्ड रगड़ने लगा। मैंने रितु को चोदना बन्द कर दिया ताकि वह अपना लण्ड मेरी गाण्ड में डाल सके। उसने फिर से बहुत सा तेल अपने लण्ड पर लगाया और मेरी कमर पकड़ कर लण्ड को गाण्ड के छेद पर लगाया। मेरी गाण्ड में झुरझुरी सी दौड़ गई। अब उसने एक जोर का धक्का लगाया और उसका दो इन्च लण्ड मेरी गाण्ड में घुस गया।
मेरी गाण्ड में लण्ड घुसते ही दर्द हुआ पर मै आगे का मजा सोच कर और उत्तेजित हो गया और इतनी ही देर में दूसरा झटका लगा और उसका पूरा लण्ड मेरी गाण्ड में घुस गया और मेरा पूरा लण्ड रितु की चूत में। और इस के साथ ही हम तीनों की आवाज आई।
अब मै सैन्डविच की तरह से था। मैं रितु की चूत मार रहा था और चौधरी मेरी गाण्ड मार रहा था। पहले चौधरी मुझे धक्का मारता और मैं रितु की चूत में लण्ड पेलता।
इधर रितु कह रही थी- चोदो !
और उधर मै कह रहा था- चोदो।
चौधरी तो मेरी गाण्ड मारते हुए मजे से दीवाना हुआ जा रहा था और कह रहा था- क्या टाइट गाण्ड है !
मेरे को भी मजा आने लगा था और फिर चौधरी ने एक दम रफ़्तार बढ़ा दी। लगता था कि टाइट गाण्ड की वजह से वह जल्दी ही खाली होने वाला था। मैंने भी अपने धक्कों की रफ़्तार बढ़ा दी। अब रितु, मैं और चौधरी एक साथ ही झड़ने वाले थे और वह क्षण शीघ्र ही आ गया जब हम तीनों ने बोलना शुरु किया- मैं झड़ने वाला हूँ ! और तीनों कि रफ़्तार तेज हो गई।
इसके साथ ही चौधरी ने मेरी गाण्ड में अपना वीर्य छोड दिया और उसके गर्म गर्म वीर्य को महसूस करते ही मैंने भी रितु की चूत में अपना वीर्य छोड़ दिया। रितु पहले ही झड़ना शुरू हो चुकी थी। मैंने कस कर रितु को पकड लिया और चौधरी ने मुझे।
तीनो ही हांफ़ रहे थे और एक जोरदार चुदाई से तीनों के चेहरे चमक रहे थे।
थोड़ी देर बाद ही हम तीनों फिर से एक और चुदाई के लिये तैयार थे। अब मै नीचे लेटा और मेरे लण्ड पर रितु मेरी तरफ मुँह करके अपनी चूत ख़ोल कर बैठ गई। फिर मैंने उसे अपनी तरफ झुका लिया जिससे उसकी गाण्ड ऊपर की तरफ निकल आई। चौधरी ने फिर से अपने लण्ड को रितु की गाण्ड में डालने की तैयारी कर ली।
उसने अपने लण्ड पर तेल लगाया और अपनी अन्गुलियों पर तेल लगा कर रितु की गाण्ड में पेल दी और वह जैसे ही आगे हुई, मेरा लण्ड उसकी चूत में पूरा घुस गया। चौधरी ने अपने लण्ड को रितु की गाण्ड पर टिकाया और जोर से धक्का मारा। उसका लण्ड आधे तक गाण्ड में घुस गया और वह चिल्लाने लगी।
चौधरी ने हाथ आगे बढ़ा कर उसके दोनों स्तन पकड़ लिये और मसलने लगा। मैं उसके होठों को चूस रहा था। अब चौधरी ने एक और जोर से धक्का मारा और इसके साथ ही पूरा लण्ड अन्दर तक पेल दिया।
अब हमने मिल कर चोदना शुरु कर दिया और एक बार फिर से रितु की सुख भरी सिसकारियाँ कमरे में गूंजने लगी। इस बार हमने पाँच मिनट तक ऐसे ही चोदा और फिर हमने अपनी पोजीशन बदल ली।
अब चौधरी चूत में लण्ड घुसा रहा था तो मै गाण्ड की मरम्मत कर रहा था।
और फिर कुछ ही देर में रितु ने बोलना शुरु किया- आज चोद डालो इस चूत को और गाण्ड को ! मजे आ गये ! जोर से चोदो ! और जोर से !
इतना सुनते ही हम दोनों की स्पीड बढ़ गई। और हम जोर जोर से चोदने लगे।
रितु की सिसकारियाँ निकलने लगी और वह और बोलने लगी- और तेज ! तेज-तेज !
इधर चूत और गाण्ड दोनों से ही आवाज आ रही थी- फ़्च, फ़च, फ़च !
और इसके साथ ही रितु ने पानी छोड़ना शुरू कर दिया और हमने अपने धक्को की रफ्तार और तेज कर दी ताकि हम भी एक साथ ही खाली हो जायें। अब मेरे चिल्लाने की बारी थी, आह निकला, आह निकला !
इतने में चौधरी की भी आवाज आई- मेरा भी निकला !
और हम दोनों ने अपना वीर्य छोड़ना शुरू कर दिया। मैंने रितु की गाण्ड में सारा वीर्य छोड़ दिया और चौधरी ने चूत में।
तीनों के चेहरे पर सन्तोष झलक रहा था और इस तरह हम सबकी इच्छा पूरी हो गई। Sex Stories
दोस्तो! मेरा नाम आरव है।
मैं एक बार अपने एक दोस्त अरमान के घर गया हुआ था.
वहां उसकी कोई दूर के रिश्ते में दो लड़कियां आईं हुईं थीं।
वहां एक मेला लगता था तो मैं और मेरा दोस्त मेला देखने गए।
हमारे साथ उसकी वह दोनों रिश्तेदार लड़कियां भी थीं।
वे दोनों आपस में बहनें थीं।
उनमें से एक का नाम पलक था जो उस वक्त करीब उन्नीस साल की होगी।
यह न्यू चूत सेक्सी कहानी इसी पलक की है.
हम लोगों ने वहां पर बहुत मस्ती की।
इस दौरान मैंने महसूस किया कि इस पलक का ध्यान मेरी तरफ ही रहा और वह बार-बार मेरी तरफ देखकर अजीब से अंदाज में मुस्कुरा रही थी।
बहरहाल रात करीब साढ़े बारह बजे हम लोग घर वापस आए तो इतना थक गए थे कि एक बजे तक हम सोने के लिए लेट चुके थे।
मैं काफी दिन बाद यहां आया था तो हम सब सोने के लिए एक ही कमरे में लेट गए कि कुछ बातें और कर लेंगे।
अब स्थिति यह थी कि एक तरफ अरमान की चारपाई थी, उसके बाद मेरी और मेरे साथ वाली चारपाई पर पलक और महक की चारपाई थी।
हम लोग कुछ देर बातें करते रहे.
और इसी दौरान मैंने देखा कि पलक और महक सो गई हैं और अरमान भी ऊंघने लगा था.
तो मैंने कहा- अरमान यार, बाकी बातें सुबह करेंगे. अभी तो मुझे भी नींद आ रही है।
अरमान ने कहा- हां यार, मुझे भी नींद महसूस हो रही है। ठीक है सुबह बात करेंगे।
और वह दूसरी तरफ मुंह करके लेट गया।
अभी पांच मिनट ही हुए होंगे कि मुझे ऐसे लगा जैसे पलक की चारपाई हिली है।
मैंने आंखें खोलकर देखा तो पलक उठकर लाईट बंद करने जा रही थी।
लाईट बंद करके जब वह अंधेरे में वापस अपनी चारपाई पर आई तो मैंने पूछा- पलक, लाईट क्यों बंद करदी?
उसने कहा- मुझे रोशनी में नींद नहीं आती।
मैंने कहा ‘चलो ठीक है’ और में भी आंखें बंद करके सोने की कोशिश करने लगा।
अभी कुछ देर ही हुई थी कि मुझे अपने जिस्म पर किसी का हाथ महसूस हुआ जोकि धीरे-धीरे मेरी पिंडली पर से फिसलता हुआ मेरी जांघों की तरफ जा रहा था।
मैंने अंधेरे में उस हाथ पर हाथ रखा तो पता चला कि वह पलक का हाथ है।
उसने मेरा हाथ दबाकर मुझे खामोश रहने का इशारा किया।
मैं हैरान था कि ये लड़की क्या कर रही है?
पलक का हाथ फिसलता हुआ मेरे लंड तक पहुंच गया।
उसने बहुत प्यार से मेरे अकड़ते हुए लंड को अपने हाथ में लिया और उसके सुपारे को सहलाने लगी।
करीब पंद्रह मिनट तक वह मेरे लंड से खेलती रही जिसकी वजह से मेरा लंड पूरा तनकर खड़ा हो गया।
इसी दौरान मैंने भी अपना एक हाथ आगे बढ़ाया और पहले धीरे-धीरे पलक के पेट पर फेरा और फिर उसके बाद उसकी छाती तक पहुंच गया।
पलक ने अपनी बत्तीस साइज की चूचियों पर फोम वाली ब्रा पहनी हुई थी।
मैंने भी ब्रा के ऊपर से ही पलक की नर्म और गर्म चूचियों को दबाना शुरू कर दिया।
उसे लंड से खेलते और मुझे चूचियों को सहलाते हुए करीब आधा घंटा गुजर चुका था।
अचानक ही पलक अपनी चारपाई से उठी और धीरे से मेरे बराबर में आकर लेट गई।
आते ही उसने मेरे चेहरे पर अपने होंठों से चुम्मियों की बौछार कर दी।
एक तो उसका नर्म और गर्म जवानी से भरपूर जिस्म मेरे जिस्म के साथ लिपटा हुआ था जो मेरे अंदर आग लगा रहा था और दूसरी तरफ उसके रसीले और गुदाज होंठ मेरे गालों और होंठों को चूम रहे थे।
मैंने पलक के कान के बिल्कुल करीब जाकर कहा- पलक, कहीं अरमान और महक जाग ना रहे हों!
इस पर उसने भी इसी तरह धीरे से मेरे कान में जवाब दिया- नहीं कोई बात नहीं; अरमान तो काफी गहरी नींद सोता है, इसको तो अब तक होश भी नहीं होगा. तुम बेफिक्र हो जाओ।
मैंने कहा- पलक, क्या ये सब ठीक रहेगा जो हम कर रहे हैं?
तो वह बोली- मैं तुमसे बहुत प्यार करती हूं। तुम मुझे बहुत अच्छे लगते हो और मैं कब से तुम्हें इस तरह प्यार करने और तुमसे प्यार करवाने के लिए बेताब थी। आज सब कुछ भूल जाओ और बस ऐसे मुझसे प्यार करो जैसे कोई अपनी बीवी से करता है।
पलक ने यह बात कह तो दी मगर मुझे डर लग रहा था कि अगर अरमान जाग गया और उसको ये सब पता चल गया तो क्या होगा.
जब मैंने पलक से ये सब कहा तो वह बोली- चलो फिर चुपके से छत पर चलते हैं. और इस बात से तो बेफिक्र हो जाओ कि घर में से कोई उठ जाएगा और हम पकड़े जाऐंगे।
यह कहकर पलक मेरे पास से उठी और अंधेरे में गायब हो गई।
थोड़ी देर बाद मैंने महसूस किया कि कमरे का दरवाजा खुला और पलक मुझे पीछे-पीछे आने का इशारा करके दरवाजे से हट गई।
मैं समझ गया कि वह छत पर गई है तो मैं भी हिम्मत सी करके उठा और उसके पीछे-पीछे छत पर चला गया।
छत पर एक स्टोररूम बना हुआ था।
चांद की हल्की-हल्की रोशनी में मैंने देखा कि पलक स्टोररूम के दरवाजे पर खड़ी थी और उसने अपनी कमीज उतार दी थी।
अब वह सिर्फ सलवार और ब्रा पहने हुए थी।
चांद की रूमानी रोशनी में पलक का रूप बहुत भला लग रहा था।
चन्द्रमा की हल्की-हल्की चांदनी में उसका गोरा जिस्म मेरे अंदर आग सी लगा रहा था।
जैसे ही में पलक के करीब पहुंचा, उसने मुझे जोर से अपनी तरफ खींचा और मुझे बांहों में लेकर अपने होंठों से मेरे होंठों को कस लिया।
पलक बहुत ज्यादा गर्म हो रही थी और खड़े-खड़े ही अपने जिस्म को इस तरह हरकत दे रही थी कि मेरा खड़ा हुआ लंड बार-बार उसकी चूत के साथ रगड़ खा रहा था।
मैंने एक हाथ में उसकी गर्म गुदाज चूची पकड़ी हुई थी जिसको मैं धीरे-धीरे दबा और मसल रहा था और दूसरे हाथ से उसकी गोल और नर्म गांड से खेल रहा था।
उसने दोनों हाथों से मेरा चेहरा थामा हुआ था और हम दोनों एक-दूसरे के होंठ और जीभ चूस रहे थे।
तभी मैंने पलक की चूचियों पर से अपना हाथ हटाया और धीर-धीरे उसकी सलवार में डाल दिया।
जहां मेरा स्वागत चूत पर आए हुए बालों के गुच्छे ने किया.
तो मैंने पलक से पूछा- यार, तुम चूत के बाल साफ नहीं करती हो क्या?
तो पलक ने कहा- मेरी जान, अगर मुझे पता होता कि ये सब होने वाला है तो मैं अपनी चूत को मक्खन की तरह मुलायम कर लेती। मगर ये सब हुआ ही अचानक है।
बालों के ऊपर से गुजर कर जब मेरी उंगलियां उसकी चूत के दाने तक पहुंचीं तो मैंने महसूस किया कि उसकी चूत बहुत गीली हो चुकी थी।
जब मैंने उसकी चूत के दाने को छुआ तो पलक का जिस्म एकदम से कांप सा गया और वह नशीली सी आवाज में सिसकारी भरकर बोली- जान, तुम्हारी उंगलियों में जादू है। मेरी चूत जलने लगी है। प्लीज कुछ करो … मुझे और मत तड़पाओ।
अब हम स्टोर रुम के दरवाजे से हटकर अंदर आ गए।
वहां पर एक पुराना सोफा पड़ा हुआ था।
पलक सोफे के पास जाकर खड़ी हो गई और मुझे दरवाजा बंद करने का इशारा किया।
मैंने दरवाजा बंद करके उस के आगे एक कुर्सी रख दी क्योंकि दरवाजे को अंदर से बंद करने के लिए कोई कुंडी या चिटकनी नहीं थी।
अंदर एक बल्ब जल रहा था जिसकी वजह से स्टोर में अच्छी खासी रोशनी हो रही थी।
पलक ने अपनी सलवार भी उतारकर सोफे पर रख दी और अपनी टांगें खोलकर सोफे पर इस तरह बैठ गई कि उसकी चूत पूरी तरह खुलकर मेरे सामने आ गई।
मैं भी नजदीक आकर उसकी चूत के सामने पैरों के बल बैठ गया।
पलक की चूत बाहर से गोरी थी और उसकी चूत का रंग गुलाबी था।
मैंने पहले धीरे-धीरे उसकी चूत को हाथ से सहलाया और इसके बाद दो उंगलीयों से उसकी चूत को खोलकर अंदर के गुलाबी हिस्से पर जीभ से मसलना शुरू कर दिया और कहा- पलक तुम्हारी चूत की खुशबू बहुत अच्छी है और ये कुछ ज्यादा ही गर्म हो रही है।
इस पर पलक ने हंसते हुए कहा- इसकी सारी खुबसूरती सिर्फ तुम्हारे लिए है मेरी जान! खा जाओ मेरी चूत को … ये इसलिए गर्म हो रही है ताकि इसकी गर्मी से तुम भी गर्म हो जाओ और मेरी चूत को खा जाओ।
पलक के मुंह से इस तरह के गंदे-गंदे लफ्ज सुनकर आज मुझे पता नहीं क्यों लेकिन बहुत मजा आ रहा था।
मैं दीवानों की तरह पलक की कुंआरी चूत को चाटता रहा।
दो बार पलक की चूत ने चिकना-चिकना सा पानी छोड़ा जो सब का सब मैंने चाट लिया।
अब पलक ने अपनी ब्रा भी उतारकर फैंक दी और वह सिसकारियां भरते हुए अपनी चूचियों को दबा और सहलाने लगी।
इधर मैं दीवानों की तरह उसकी चूत की भूल-भुलैया में घूम रहा था।
थोड़ी देर बाद पलक ने कहा- चलो कुछ और ट्राई करते हैं।
तो मैं बोला- ठीक है, मैं बताता हूं कि अब हमें क्या करना है।
मैंने उसे सोफे पर लेटने को कहा और जल्दी-जल्दी अपने सारे कपड़े उतार कर खुद उसके ऊपर 69 की पोजीशन में लेट गया।
अब मेरा लंड बिल्कुल पलक के होंठों के करीब था और उसकी चूत मेरे मुंह के पास!
बस फिर क्या था?
मैं फिर से भूखों की तरह उसकी चूत के साथ चिपक गया और उसकी चूत के अंदर जीभ डालकर जीभ से चोदने लगा।
पलक ने मेरा लंड देखा तो कहने लगी- जान, ये तो बहुत मोटा है।
उसकी गर्म-गर्म सांसें मुझे अपने लंड पर महसूस हो रही थीं।
उसने पहले मेरे लंड के सुपारे को हल्का सा चूमा और फिर एक हाथ से लंड और एक हाथ से मेरे टट्टे पकड़कर धीरे से लंड को पूरा मुंह में ले लिया और जीभ से लंड की मालिश सी शुरू कर दी।
शायद पलक को बहुत मजा आ रहा था क्योंकि वह लंड चूसने के साथ-साथ अपनी चूत को मेरे होंठों पर धीरे-धीरे हिला भी रही थी।
लगभग 10 मिनट तक मैं उसकी चूत चाटता रहा और वह मेरा लंड चूसती रही।
उसकी चूत से बार-बार चिकना-चिकना पानी निकल रहा था जिसे चाटना मुझे बहुत अच्छा लग रहा था।
लगभग 10 मिनट बाद हम उठ गए और मैंने पलक को इस तरह लिटा लिया कि मैं उसकी चूत में लंड डाल सकूं।
पलक ने पूछा- जान क्या अब तुम मुझे चोदोगे?
तो मैंने कहा- हां पलक, अब मैं खुद को तुम्हें चोदने से नहीं रोक सकता।
पलक ने कहा- हां मेरी जान, मैं तो खुद चाहती हूं कि तुम अपने इस तने हुए लंड से मेरी चूत मारो।
अब मैंने लंड के सुपारे को पलक की चूत पर रगड़कर थोड़ा सा चिकना किया और उसे चूत के मुंह पर रखा.
तो पलक ने मस्ती में आकर आंखें बंद कर लीं और दोनों हाथों से अपनी छोटी-छोटी कड़क चूचियों को दबाते हुए मस्ती भरी आवाज में सिसकारी भरती हुई बोली- जान, अपना लंड मेरी चूत में डालो ना! क्यों तरसा रहे हो मेरी इस मासूम चूत को?
उसकी बात सुनकर मैंने पलक के ऊपर लेटकर उसके होंठों से अपने होंठ मिला दिए और धीरे-धीरे लंड को उसकी सेक्सी चूत के अंदर धकेलना शुरू कर दिया।
पलक की चूत बहुत टाइट और गर्म थी।
उसकी नर्म नर्म और टाइट चूत में मेरा लंड धीरे-धीरे घुस रहा था और तकलीफ की वजह से उसने अपनी आंखें कसके बंद की हुईं थीं।
पलक की न्यू चूत के अंदर आधा लंड घुस गया तो उसने मुझे रुकने को कहा।
मैंने लंड को वहीं रोक लिया और उसकी 32 साइज की चूचियों पर अपने होंठ रख दिए।
उसके छोटे-छोटे निप्पल चुदाई की आग में जलकर काफी कड़े हो गए थे।
मैं थोड़ी देर तक उसकी दोनों चूचियों को बारी-बारी चूमता और चूसता रहा तो थोड़ी देर बाद पलक ने नीचे से अपनी चूत को हरकत देना शुरू कर दी।
मैंने भी लंड को धीरे-धीरे और अंदर करना शुरू कर दिया था।
इस बार शायद उसे दर्द कम हो रहा था क्योंकि जैसे-जैसे लंड चूत में घुसता जा रहा था वह अपनी टांगों को और ज्यादा खोलती जा रही थी।
जब लंड पूरा अंदर चला गया तो पलक के मुंह से दर्द भरी सिसकारी निकल गई।
मैं फिर से रूक गया और उसकी जबरदस्त चूचियों से खेलना शुरू कर दिया।
थोड़ी देर बाद फिर से पलक की सेक्सी चूत ने नीचे से हरकत शुरू कर दी तो मैंने भी लंड को धीरे-धीरे बाहर खींचा और पूरा लंड बाहर आने से पहले ही दोबारा उसकी चूत में धकेल दिया।
पलक के मुंह से हल्की सी चीख निकल गई ‘हाय मेरी चूत!’
मेरा लंड एक ही झटके में पूरे का पूरा उसकी न्यू चूत में स्थापित हो गया।
पलक ने कहा- जान, तुम्हारा लंड बहुत जालिम है। इससे तो मेरी चूत फटती हुई सी महसूस हो रही है।
मैंने कहा- मेरी जान, मेरा लंड मोटा नहीं है बल्कि तुम्हारी चूत ही बहुत टाइट है।
अब मैंने धीरे-धीरे पलक की चूत में धक्के लगाने शुरू कर दिए।
मैं धीरे-धीरे धक्के लगा रहा था और पलक चुदाई के मजे में सिसकारियां भर रही थी- आह आह आह … हाय मेरी चूत … धीरे-धीरे चोदो … आह आह … मेरी चूत फट रही है। आह प्लीज जान धीरे चोदो … मेरी चूत फट जाएगी।
उसके मुंह से ऐसी सेक्सी सिसकारियां सुनकर मेरे अंदर और भी आग धधकने लगी तो मैंने धक्कों की स्पीड बढ़ा दी और जोर-जोर से चूत में धक्के मारने लगा।
दस मिनट की इस चुदाई ने हम दोनों को पसीने में सराबोर कर दिया क्योंकि स्टोर में कोई पंखा नहीं था।
मेरा लंड कस-कस के पलक को चोद रहा था।
मैं अपने लंड को उसकी चूत से निकालता और फिर से एकदम उसको चूत में धकेल देता जिसकी वजह से पलक की चूत दो बार पानी छोड़ चुकी थी।
उसकी चूत से पचक-पचक की आवाजें आ रही थीं।
पलक की चूत इतनी टाइट और जिस्म इतना सेक्सी था कि कुछ ही देर में मुझे लगा कि मैं छूटने वाला हूं।
अब मैंने लंड उसकी चूत से बाहर निकाला और उसे घोड़ी बनने को कहा तो वह उठी और सोफे पर इस तरह घोड़ी बन गई कि मैं जमीन पर खड़ा होकर उसको चोद सकता था।
मैंने पहले डोगी स्टाइल में ही उसकी चूत को चाटना शुरू कर दिया जो कि मेरे लंड और उसकी चूत के पानी से चिकनी हो रही थी।
तब मैंने उसकी चूत को चाटकर खूब साफ किया और फिर उसकी गोल-मटोल छोटी सी गांड को अपने दोनों हाथों से पकड़कर लंड को उसकी चूत के मुंह पर रखा ही था कि पलक ने पीछे को एक धक्का मारा.
जिसकी वजह से मेरा पूरे का पूरा लंड पलक की चूत में घुस गया और उसके मुंह से चीख निकल गई- हाय मैं मर गई … आह … मेरी चूत फट गई … आह आह!
और फिर कुछ देर रुके रहने के बाद उसने खुद ही धीरे-धीरे से धक्के लगाने शुरू कर दिए।
जब उसके धक्कों की स्पीड कुछ कम हुई तो मैंने उसकी गांड पर हाथ फेरते हुए उसकी चूत में लंड अंदर-बाहर करना शुरू कर दिया।
घोड़ी बनने की वजह से उसकी चूत और भी टाइट महसूस हो रही थी।
अभी इस तरह चुदाई करते हुए कुछ पांच मिनट ही हुए होंगे कि मुझे लगा कि किसी भी लम्हे मेरा लंड उसकी चूत में अपना लावा उगल देगा.
तो मैंने पलक को कहा- जान, मेरा लंड पानी छोड़ने वाला है।
उसने कहा- मेरी चूत में मत झड़ना प्लीज!
लेकिन मुझ पर तो जैसे जुनून सवार था; मैं जोर-जोर से धक्के मार रहा था और कब मेरे लंड ने पलक की चूत में गर्म-गर्म पानी छोड़ दिया मुझे पता भी नहीं चला।
मैं लंड को उसकी चूत में ही रखकर उसके ऊपर पसर गया.
और जब हमारी हालत कुछ संभली तो मैंने अपने लंड को पलक की चूत से बाहर निकाला और अपनी बनियान से अपने लंड और पलक की चूत को साफ किया.
तब पलक को अपने सामने खड़ा करके मैं उसको अपने सीने से लगाकर उसके होंठों पर किस करने लगा।
कुछ देर बाद हमने कपड़े पहने और फिर से कमरे में आकर लेट गए।
जब मैं बिस्तर पर लेट गया तो पलक ने लाईट जलाई और महक और अरमान को चैक किया तो वे दोनों बेखबर सो रहे थे।
पलक मेरे साथ ही मेरे बिस्तर पर लेट गई और थोड़ी देर हम एक-दूसरे को चूमते रहे और फिर मैंने उसको अपने बिस्तर पर जाने को कहा।
वह उठी और अपने बिस्तर पर जाकर महक के साथ लेट गई.
और मैं पलक के सेक्सी जिस्म और अपनी इस चुदाई के बारे में सोचता हुआ जाने कब सो गया पता ही नहीं चला।
मेरी पिचली स्टोरी सबने पढ़ी Antarvasnaहै, आप सब का मुझे जवाब अच्छा मिला, उसके लिये धन्यवाद, मैं जो भी स्टोरी लिखुंगा सब सच लिखुंगा मैने कसम खाई है कि झूठ नहीं लिखुंगा। मैं अपनी स्टोरी शुरु कर रहा हूं।
कुछ टाइम पहले की बात है मेरी मौसी की लड़की है जिसकी उमर मुझसे कम है हम अक्सर मिलते थे पर कभी दिमाग में उसके लिये गलत ख्याल नहीं आया। कभी वो हमारे घर आती थी रहने कभी मैं जाता था एक दिन वो हमारे घर आये वो हमेशा स्कर्ट पहनती थी मैं दोपहर को बाल्कोनी मैं बैठा था वो आये बोली कि आ मैं तेरा सिर देखती हूं मैने कहा ठीक है मम्मी नीचे धूप सेकने गई ठी क्योंकि सर्दियां थी और हम दूसरी मंजिल पर रहते थे मम्मी सामने पार्क में बैठी थी जो हमारी बाल्कोनी और एक रूम से दिखता था फ़िर मैने कहा अब मैं देखता हूं तो उसने कहा ठीक है मैने कहा पहले मैं नहा लूं तो बोली ठीक है मैं नहा कर टोवल लपेट कर बाहर आ गया मैने कहा क्या मैं थोड़ी देर धूप देख लूं तो बोली ठीक है मैने कहा लाओ मैं तब तक तुम्हारा सिर देखूं मैं सामने चेयर पर बैठ गया तो वो दूसरी तरफ़ चेहरा करके बैठ गई फ़िर मैने कहा इस साइड से देख लिया है।
अब मेरी तरफ़ सिर घुमा लो अब इस साइड से भी देख लूं वो बोली कोई चीज़ भी नहीं है जिस पर मैं बैठुं नीचे ठंड चढ़ रही है क्योंकि उसने खाली स्केर्ट पहनी थी मैने कहा मैरे पैरों पर बैठ जा वो बोली ठीक है उसने मेरी तरफ़ चेहरा कर लिया मुझे ध्यान नहीं रहा कि मैं सिर्फ़ टोवल मे हूं वो घूमी तो उसने देखा कि मेरे टोवल मैं से मेरा लंड दिख रहा है पर वो चुप रही फ़िर मैने महसूस किया कि उसकी स्कर्ट मुझे चुभ रही है मैने कहा कि तेरी स्कर्ट मेरे पैरों में चुभ रही है थोड़ी ऊपर कर लो उसने कर ली थोड़ी सी जिस कारण उसकी चूत मेरे पैरों पर छूने लगी पर एक टक मेरा लंड देख रही थी
बाद में मैने देखा फ़िर वो बोली कि पैरों पर बैठ कर मैं गिर जाउंगी क्या कुरसी और तेरे पैरों को पकड़ कर बैठ सकती हूं मैने कहा हां उसको मज़ा आ रहा था उसने मैरे पैरों को पकड़ लिया फ़िर धीरे २ मेरे लंड पर हाथ रख दिया मैं हड़बड़ा कर उठा तो टोवल खुल गया मैं पूरा नंगा हो गया वो हंस पड़ी मैं एक दम टोवल बांधा और अंदर भाग गया फ़िर तो मैं आंख भी नहीं मिला पा रहा था उससे वो मेरे पास आयी और बोली अरे इसमे शरमा क्यों रहा है भाई क्या हुआ अगर मैने देख लिया तो मैने कहा अगर
मैं तुम्हारे साथ ऐसा करुं तो वो चुप हो गई
एक दिन वो नहा कर बाहर आयी तो रूम मैं छुप गया वो अंदर आयी और कपड़े चेंज करने लगी जब उसने सारे कपड़े उतार लिये तो मैं भी तब तक कपड़े उतार चुका था उसे पता नहीं लगा फ़िर मैने एक दम उसे पकड़ लिया वो हैरान हो गई और छूटने की कोशिश करने लगी मैने कहा अब क्या हुआ अपनी बारी में तो बोली अब देख लिया है न सब अब छोड़ो मुझे मैने कहा अब नहीं छूट सकोगी तो बोली अब और नहीं मैने कहा अच्छा एक बार देखने दो सब और छूने दो फ़िर कुछ नहीं कहुंगा वो खड़ी हो गई मैने एक २ चीज़ यानि चूची और चूत को छू कर देखा फ़िर मैने कपड़े पहन कर बाहर आ गया फ़िर तो हम खुल चुके थे
एक दिन रात को हम सो रहे थे तो मैने कहा आज न्यूड सोये क्या तो बोली कुछ करेगा तो नहीं मैने कहा नहीं तो वो तैयार हो गई हम पूरी रात मस्ती करते रहे कभी उसके ऊपर कभी नीचे फ़िर मैने कहा क्या पीचे से कर लूं बहुत इच्छा हो रही है तो बोली सिर्फ़ पीचे से मैने कहा हां तब मैने उसकी गांड पर खूब तेल लगाया और अपना लंड अंदर डाल दिया वो चीख रही थी पर मैं रुका नहीं फ़िर थोड़ी देर बाद शांत हो गई उसे मज़ा आने लगा फ़िर सुबह ४ बजे मैने देखा कि वो टांग खोल कर सो रही है मैने धीरे से उसके खूब तेल लगाया और अपना लंड धीरे २ अंदर डालने लगा अभी आधा ही अंदर गया था कि वो एक दम उठ गई मैने कहा कि थोड़ी देर करने दे प्लीज़ तो उसने मना किया पर फ़िर भी मैने मना लिया और उसके बाद मैने उसकी चूत में अपना मोटा सा लंड डाल दिया और अचानक उसकी चीख निकली देखा कि सील टूट गई है पर उसने साथ दिया और मैने जी भर कर चुदाई की। आप को कैसे लगी ये स्टोरी बताना Antarvasna
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