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अन्तर्वासना/Antarvasna के पाठकों को मेरा प्यार भरा सलाम। मैं नियमित रूप से सारी कहानियां पढ़ती हूँ और बस यही कहूँगी कि मुझे बड़ा मज़ा आता है।
अब मेरे बारे में : मैं तेईस साल की लड़की हूँ, शादीशुदा हूँ और पति भी ठीक ठाक ही है। मेरा रंग सांवला है और मेरी गोलाईयाँ और गहराईयाँ काफी अच्छी हैं। मेरी शादी अभी छः महीने पहले ही हुई है।
मुझे चुदने में बहुत मज़ा आता है, खासकर के जब मैं कुतिया बन कर चुदती हूँ। यह सब मैंने फिल्मों में ही देखा है लेकिन अजय (मेरा पति) यह सब कर नहीं पाता। मुझे लंड चूसना भी बहुत अच्छा लगता है। लेकिन अजय का लंड चूंकि छोटा है मेरे गले तक नहीं जाता। मेरी भी इच्छा है कि ब्लू फिल्मों कि लौंडियों की तरह चुदूँ- खूब गले तक लंड चूसूँ। लेकिन चूंकि अजय का लंड सिर्फ पांच इंच का है मुझे उनसे यह सौभाग्य नहीं मिल पाया।
मगर एक दिन ऊपर वाले ने मेरी सुन ली। मेरे पड़ोस में एक शादी थी। उस शादी में एक बंदा आया था। था तो वो मेरे पापा का दोस्त लेकिन पापा जितने उम्र का नहीं था। चालीस से थोड़ा ही ऊपर का होगा। पता नहीं क्यों वो मुझ पर लट्टू हो गया। हालांकि उम्र में मुझसे काफी बड़ा था लेकिन बार बार वो मुझे ही देखे जा रहा था। परिचय हुआ। उनका नाम शीशपाल था। लोग उन्हें शिशु कहकर बुलाते थे। उन्होंने घर के सारे शादी वाले काम मेरे साथ किये। हम काफी करीब आ गए। एक बार हम एक फूलों की डलिया लेने ऊपर वाले कमरे में गए। वहाँ उन्होंने मुझे भींच लिया और मेरे होंठों पर अपने होंठ रख दिए। मुझे भी काफी मज़ा आया। मैंने भी उन्हें जकड़ लिया। तभी मेरे पति ने आवाज़ लगाई। मैं दौड़कर नीचे चली गई।
शादी हो गई- मैं वापस दिल्ली और वो जनाब पूना। कुछ ही दिनों में मेरी बहन के पति का ट्रान्सफर पूना हो गया। मेरी बहन गर्भवती हो गई और मायके नहीं आ पा रही थी। माँ ने मुझसे पूछा। मैं तैयार हो गई। मेरे पति ने भी इजाज़त दे दी क्योंकि वे भी अपने ऑफिस की तरफ से चार महीनों के लिए लन्दन जा रहे थे। और इसी तरह एक हफ्ते में मैं पूना पहुँच गई। और पूना के पहुँचते ही तीसरे दिन पापा का फोन आया कि शिशु पूना आ रहा है किसी काम से। कुछ सामान भेज रहा हूँ। मैं तो बस लट्टू हो गई उनसे मिलने के लिए।
शिशु जी एक सुबह साढ़े दस बजे के आसपास आये। चूंकि मेरी बहन और जीजू को एक कार्यक्रम में जाना था सो वो दोनों चले गए और मैं रह गई शिशुजी का इन्तजार करते। शिशुजी ने आते ही मुझ पर चुम्बनों की झड़ी लगा दी। फिर वे आकर सोफे पर बैठ गए और मैं उनकी गोद में। उन्होंने मुझे खूब दबाया, नोंचा, चूमा, चाटा, मैं सब कुछ करवा रही थी।
फिर मैंने उनसे कहा- मैं दस मिनट में नहा कर आती हूँ।
उन्होने कहा- मैं नहला दूं?
मेरा मन तो खुश हो गया। मैंने बोला- ना, मैं अभी आती हूँ।
मैं बाथरूम में घुस गई बिना कुण्डी लगाए !
मैं नंगी शावर के नीचे खड़ी हो गई। अपने जिस्म में खूब साबुन लगाया और पूरा जिस्म में मैं हाथ फेर रही थी। इतने में दो मज़बूत हाथ मेरे हाथों के नीचे से आये और मेरे मम्मों को मसलने लगे। मैं एकदम से चौंकी और देखा तो शिशु मेरे पीछे खड़े थे। उनका कड़क लंड मेरी कमर को मार रहा था। धीरे धीरे उन्होंने मेरे गालों को चूमना शुरू किया और एक हाथ मेरी चूत पर रखकर वहाँ साबुन लगाने लगे। मेरे झांटों पर इतना साबुन लग गया कि उनका पूरा हाथ उसमें समाने लगा। मैं तो उनके हाथ लगते ही झड़ गई। मैं इनकी तरफ मुड़ी और पहली बार मैंने इनका लंड देखा। बाप रे बाप ! लंड था या एक लोहे की छड़। मैंने लंड को पकड़ा और फिर मैं इनको देखने लगी।
शिशु बोले – लवीना खूब खेलो मेरे लंड से मेरी जान।
वे मेरे मम्मों को चूसने लगे। मैं हिल सी गई। फिर उन्होंने मेरे गीले जिस्म पर अपना हाथ फेरना शुरू किया और चूत में अपनी एक ऊँगली घुसेड़ दी। मेरा हाथ यकायक उनके लंड को मसलने लगा। मैं कह नहीं सकती कि उस समय मुझे क्या हो रहा था। मैं घुटनों के बल बैठी और मैंने उनका लंड चूसना शुरू किया।
उन्होंने भी मेरा सर पकड़कर मुझे मेरे लंड पर धक्के मारना शुरु किया। क्या लंड था- खूब मोटा और लम्बा। जब भी मेरे गले से टकराता मेरी साँसें रुक सी जाती थी।
इतने में शिशु बोले- हाँ लवीना ! चूस बेबी चूस ! और चूस ! और चूस।
इतने में एक धमाका सा हुआ और मेरा पूरा मुँह उनके माल से भर गया। एक गटक में मैंने सब अपने अन्दर ले लिया। पूरा होने के बाद भी मैं लंड को चूसती रही। इतने में उन्होंने मेरे सर को अपने लंड से अलग किया। एक बात तो कहूँगी। इनका लटका हुआ लंड भी अजय के लंड से कहीं ज्यादा मोटा और कहीं ज्यादा लम्बा है।
हम फिर शावर के नीचे खड़े हो गए। मैंने अपनी चूत को और इनके लंड को खूब साबुन से धोया और अगले पड़ाव की तैयारी में लग गए। हम दोनों एक ही तौलिये में बाहर आ गए।
बाहर निकलकर शिशु बोले- लवीना, तुम्हारे पापा ने कुछ सामान भेजा है और तुम्हें ढेर सारा प्यार। अभी प्यार कर लूं, सामान बाद में देख लेना।
उन्होने मुझे पलंग पर लेटाया और मेरी चूत को निहारने लगे। उन्होंने मेरी जाँघों को खूब सहलाया और मेरी झांटों में अपनी उंगलियाँ फिराने लगे। मेरी चूत को इन्होंने नोचा और उसके दोनों होंट अलग किये।
फिर मुझसे बोले- चुदेगी लवीना? मेरा लंड लेगी अपनी इस कोमल सी चूत में?
मैं तो कब से बेकरार थी कि शिशु जी मेरी चूत को फाड़ें। उन्होने फिर झुककर मेरी चूत को चूमा और फिर अपना मुँह मेरी झांटों में घुसेड़ दिया। थोड़ी ही देर में उनकी लपलपाती जीभ मेरी चूत के अन्दर घूमने लगी। मैं तो बस उछलती रही और उनका सर पकड़कर और अन्दर करती रही। शिशु जी ने मुझे ऐसे पांच मिनट तक चाटा और मैं झड़ गई। मैं तो इसी से ही थक गई। लेकिन अभी तो सफ़र की शुरूआत थी।
फिर वे घुटनों के बल बैठे और मेरी दोनों टांगों को अलग किया। अपना लंड मेरी झांटों में खूब फिराया और एक झटके से टोप अन्दर डाला। मैं चीख उठी। और दो झटकों में उनका दस इंच का लंड मेरी चूत का ध्वंस करता रहा। मैं बस करो बस करो की रट लगा रही थी।
शिशु जी ने कहा – बेबी, पापा से कहना कि शिशु ने तुम्हें खूब प्यार किया। बोलेगी ना मेरी लौंडिया?
मैं हाँ हाँ करती रही। लेकिन अब उनका इतना बड़ा लंड मुझसे झेला नहीं जा रहा था। कहाँ मैं एक तेईस साल की लड़की जिसकी चूत अभी ढंग से खुली भी नहीं और कहाँ यह पैंतालीस साल का सांड। मेरी चूत का तो इसने भोसड़ा बना कर रख दिया। शिशु जी अब स्पीड से मुझे चोद रहे थे। मेरे दोनों हाथ ऊपर थे और मेरी दोनों टांगें इनके कन्धों पर थी और यह मेरे ऊपर उठक-बैठक लगा रहे थे। पूरे कमरे में फच-फच की आवाज़ आ रही थी। और मैं आःह्ह्ह आआह्ह मम्मीई मम्मीईई रुकोओओओओ करती रही। लेकिन एक बात की दाद देनी पड़ेगी- शिशु जी बहुत कमाल का चोदते हैं।
मैं थोड़ा उठकर देखने लगी कि इतना बड़ा लंड घुस कहाँ रहा है। और मैं देखती रह गई। ऐसे बेदर्दी से ये मेरी चूत को चोद रहे थे कि क्या कहूं। दर्द भी हो रहा था और मज़ा भी। मैं खूब चुदी। इस तरह इन्होने मुझे दस मिनट तक चोदा और फिर झड़ने के समीप पहुंचे। झड़ने से पहले इन्होंने अपना लंड निकाला और मेरी चूत पे रख दिया। कम से कम सौ ग्राम माल निकला और यह मेरी सारी झांटों पर फैलाने लगे। मेरी चूत सूज कर और फूल गई। फिर वो मेरी बगल में लेट गए।
थोड़ी देर के बाद शिशु ने मेरा एक मम्मा अपने मुँह में डाल लिया। मेरे मम्मे काफी छोटे हैं। पूरा मम्मा इनके मुँह में था। खूब चूसा। इन्होने फिर मेरा एक हाथ अपने लंड पर रख दिया। वो साला फिर से उठने लगा। पूरा खड़ा हो गया तो मैं भी उसे हिलाने लगी और दबाने लगी। शिशु ने फिर मुझे कुतिया बन जाने को कहा। मैने सोचा शायद पीछे से लेंगे। लेकिन साब को तो मेरी गांड मारनी थी।
उन्होंने कहा- लवीना, मैं अब तेरी गांड मारूंगा।
हे भगवान् ! ये क्या करने की सोच रहे हैं। एक बार अजय ने डालने की कोशिश की थी तो वे नाकामयाब हो गए थे और सिर्फ उनके टोप से ही मैं चीखने लगी थी और यह तो मूसल है।
मैंने कहा- शिशु जी, आप जो कहेंगे, मैं मानूंगी मगर मेरी गांड को छोड़ दीजिये।
उन्होंने मुझे खूब चूमा और पुचकारा और कहा- दर्द होगा तो अपना लंड गांड से निकाल लूंगा।
खैर मैं तैयार हो गई- कोई और चारा भी तो नहीं था। मैं उल्टी लेट गई। उन्होने मुझे खूब चाटा और फिर मेरे दोनों चूतड़ खूब दबाये। और फिर अपनी एक ऊँगली मेरी गांड में डाल दी। मैं उचक गई। फिर वो उठे और मेरी अलमारी से एक क्रीम लेकर आये। उन्होने पूरी क्रीम मेरी गांड में डाल दी और फिर अपनी ऊँगली। अब ऊँगली आसानी से जा रही थी।
फिर मेरी दोनों टांगों को फैलाया और मेरी चूत के नीचे एक तकिया रख दिया। अपना लंड पकड़कर उसका टोप मेरी गांड के पास ले आये। फिर धीरे से उन्होने अपने टोप को मेरी गांड में डाला। मैं मर गई। इनका सुपाड़ा इतना मोटा है कि मेरी तो गांड छिल गई। मैं हिली और फिर सामान्य हो गई। शायद इसी का इंतज़ार कर रहे थे शिशु ! उन्होने एक जोर का झटका दिया और उनका आधा लंड मेरी गांड में समा गया। मैं चीख पड़ी लेकिन शिशु जी ने फिर एक और झटका मारा और फिर पूरा लंड मेरे अन्दर। ऐसा लगा जैसे पूरी धरती हिल गई हो।
और शिशु जी ने जो पेला मुझे- ऐसा लगा कि मेरी गांड के तो आज दो टुकड़े हो जायेंगे। ताज्जुब की बात तो यह है कि जब अजय कोशिश कर रहे थे तब कुछ भी नहीं हुआ और उसने कहा था कि मेरी गांड बहुत कसी है इसलिए गांड मारना मुश्किल है। अबे अजय जहां चाह वहाँ राह। अब तुझे गांड मारनी नहीं आती तो उसमे मेरी गांड का क्या कसूर। देख शिशु जी कैसे मेरी गांड का फलूदा बना रहे हैं। काश अजय मुझे शिशु के साथ देखते। मैं चीखती रही लेकिन शिशु जी तो अपना माल डालने तक कहाँ रुकने वाले थे।
इतने में वो बोले- शर्मा जी (मेरे पापा), आपकी लौंडिया को बहुत प्यार दे रहा हूँ। क्या लौंडिया पैदा की है- माँ कसम मज़ा आ गया। क्या चूसती है और क्या चुदती है। शर्मा जी देखिये तो सही, मैं कैसे आपकी बेटी की गांड मार रहा हूँ। ऐसा कहते वे और उत्तेजित हो गए और खूब जोर जोर से मेरी बुंड मारने लगे।
शिशु ने मेरी गांड को अच्छे से रौंदा। और तकरीबन बारह मिनट के बाद अपना पूरा माल मेरी गांड के अन्दर डालकर मेरे ही ऊपर गिर पड़े। एक गर्म एहसास हुआ मुझे । मेरी गांड में जो गरम लावा गिरा उससे मेरी गांड की अच्छी तरह से सिंकाई हो गई। उनका लंड अभी भी मेरी गांड में था। मैं पूरी पसीने में नहा चुकी थी। मेरे बालों को एक तरफ करके मेरे गाल को चूमकर बोले- लवीना कैसा लगा।
मैं कसमसाई और बोली- अच्छा तो लगा लेकिन काफी दर्द हो रहा है।
शिशु जी ने मुझे उस दिन तीन बार और चोदा और शाम के तीन बजे चले गए। मैं जब भी मायके जाती हूँ, उनसे ज़रूर मिलती हूँ और खूब चुदती हूँ। यह बात ना तो मेरे पति और ना ही उनकी पत्नी को पता है। जब तक मज़ा ले सको ले लो। क्या कहते हो आप लोग?
आपकी प्यारी लवीना Antarvasna
मेरा नाम रेखा है और मैं दिल्ली में रहती Sex Stories हूं अपने पति अनिल के साथ। मेरी कहानी बहुत ही अजीब है पर है सच्ची।
बात तीन साल पहले की है, तब मैं अट्ठारह साल की थी। मैंने बंगलौर में स्नातिकी की शिक्षा लेना बस शुरू ही किया था। मेरे ताऊ का एक लड़का था जिसका नाम अनिल है। वैसे मेरे खानदान में पापा तीन भाई हैं और अगली पीढ़ी में मैं सबसे छोटी हूं।
हम कुल आठ भाई बहिन हैं और अनिल भइया दूसरे नम्बर पर और मैं आखरी। मेरा कद 5’2′ है और काफी खूबसूरत भी और शायद मैं वाकई में हूँ भी।
वैसे मेरी दो कजन बहनें भी काफी खूबसूरत हैं। पर मैं अपनी ही धुन में रहती थी। मेरा फिगर 34 -24 -34 है।
हम भाई बहिन आपस में काफी घुले मिले हैं इसलिए अक्सर चुहल बजी चलती थी। कभी कभी तो ये भी आपस में बातें होती थी कि यार तुम आजकल बहुत सेक्सी हो गई हो या हो गए हो।
अनिल भइया करीब 25 साल के थे उस वक्त। उनकी हाईट काफी थी 5’10′ और उनका व्यक्तित्व भी काफी अच्छा था।
कभी कभी लगता कि वो मुझे या मेरी एक और कजन के बदन को निहारते हैं, पर मैंने कभी उतना ध्यान नहीं दिया।
वैसे मुझे वो अच्छे तो लगते थे पर मैंने उस तरह कभी सोचा नहीं।
भैया दिल्ली में नौकरी करते थे और उनका टूर लगता रहता था।
एक बार उनका टूर बंगलौर का लगा और वो मुझसे मिलने मेरे कालेज़ आ गए।
मैं भी खुश हो गई कि चलो कोई घर से मुझसे मिलने आया तो.
वो मेरे हॉस्टल आ गए और हम दोनों गले मिले प्यार से और उन्होंने मुझे गाल पर एक हलकी सी पप्पी दी तो मेरे बदन में सिहरन सी दौड़ गई. मुझे अच्छा लगा पर दूसरे सेंस में नहीं. वो मेरे दोस्तों से मिले और ये कह कर चले गए कि शाम को आऊँगा मिलने. मैं भी खुश थी कि भइया आए तो सही.
भइया शाम को 5 बजे आ गए और कहा कि चलो 3-4 दिन मेरे साथ रहो कंपनी के होटल में और घूमना मजे करना।
मैं भी चहक उठी और वैसे भी उन दिनों छुट्टियाँ थी 5 -6 दिनों की तो मैं तैयार हो गई और 1-2 ड्रेस ले कर जैसे ही चलने लगी तो उन्होंने कहा कि मैं खरीद दूँगा तो मैं और खुशी से झूम उठी. हम दोनों उनके ऑफिस की कार से उनके होटल में गए.
हम लोगों ने कुछ खाया पिया और घूमने चले गए और रात में 9 बजे के करीब होटल लौटे. मैं काफी थक गई थी इसलिए बिस्तर पर आ कर धम से पसर गई.
मैंने उस वक्त टाइट जींस और टॉप पहना हुआ था और इस वजह से मेरे टाइट हाफ सर्कल बूब्स तने हुए थे. वैसे भी मेरे बूब्स काफी टाइट थे.
भइया आए और सीधे बाथरूम में घुस गए और फिर निकल कर आते ही मेरे बगल में वो भी धम से लेट गए।
5 मिनट बाद भइया ने मेरी तरफ़ करवट ली और बोले ‘क्या बात है बहुत सेक्सी और सुंदर लग रही हो,’ और ये कहते हुए उन्होंने मेरे माथे पर किस किया और उनका एक हाथ ठीक मेरी नाभि के ऊपर था.
मैं भी मुस्कुरा दी. मैंने अभी तक भइया को कभी उस तरह से नहीं देखा था.
मैंने कहा,’यह तो सब बोलते रहते हैं।’
उन्होंने कहा ‘अरे सच्ची! वाकई में तुम बहुत कमाल की लग रही हो।’
मैं शरमाते हुए भइया से लिपट गई. भइया ने मुझे तब अपनी बाँहों में भर लिया और अपने सीने से चिपका लिया. उस वक्त मेरे बूब्स भिंचे हुए थे.
मेरे पूरे बदन में सिहरन दौड़ गई जब भइया ने प्यार से भींच कर मेरी गर्दन पर किस किया. फिर मैं उठ कर बाथरूम में चली गई नहाने. पर नहाने के बीच में याद आया कि मैंने नाईटी नहीं ली है तो मैंने भइया को आवाज़ दी कि भइया कोई दूसरा तौलिया दे दीजिये.
बाथरूम में शटर लगा हुआ था शावर केबिन में और कोई लाक नहीं था। बस अलग अलग केबिन थे, इसलिए भैया अन्दर आ गए।
मैंने शटर ज़रा सा सरका कर तौलिया ले लिया।
मैंने ध्यान नहीं दिया पर शायद वो भी तौलिया लपेटे थे क्योंकि उन्होंने भी नहाना था। वो शीशे के सामने अपना चेहरा धोने लगे।
मैं शटर से जैसे ही बाहर निकली और वो जैसे ही मुड़े तो हम दोनों टकरा गए और मेरा तौलिया खुल गया।
मैं घबरा गई और तुरन्त अपने दोनों हाथ अपने स्तनों पर रख लिए क्योंकि अब मैं पूरी तरह से नंगी थी।
मेरा योनि-क्षेत्र पूरी तरह से बाल- रहित किया हुआ था।
भैया ने मुझ पर ऊपर से नीचे तक नज़र डाली, उनके तौलिये के अन्दर भी कुछ उभार सा आ रहा था, पर उस वक्त मैं समझ नहीं पाई. मेरी आंखों में आँसू थे।
भैया ने तुरन्त तौलिया उठाया। यह सब इतनी जल्दी हुआ कि कुछ समझने क मौका ही नहीं मिला।
मैं भी सन्न चुपचाप सर झुकाए खड़ी थी। भैया ने तौलिया मेरे कन्धे पर डाला और मुझे अपनी बाहों में भर लिया और मैं भी उनसे चिपक गई और रोने लगी।
मैंने यह भी ध्यान नहीं दिया कि मैं अभी भी नंगी हूँ। मेरे बूब्स उनके सीने से चिपके हुए थे। उनका भी शायद तौलिया खुल चुका था और उनका औज़ार यानि लिंग करीब 8-9′ लम्बा और 2′ मोटा मेरी कुँवारी योनि पर टिका हुआ था।
पर उस वक्त मेरा इन सब बातों पर ध्यान ही नहीं गया।
भैया मुझे चुप कराते हुए बोले- अरे पगली मनु!(प्यार से वो मुझे मनु कहते हैं) सिर्फ़ मैं ही तो हूँ! क्या हुआ?’
ये कहते कहते उन्होंने मुझे अपनी बाहों में उठा लिया और कमरे में ले गये और बिजली बंद करके मद्धम रोशनी कर दी ताकि मेरी शर्म दूर हो जाए।
ये सब 3-4 मिनट में हो गया था। उन्होंने मुझे दीवार से सटा दिया और मेरे माथे को किस किया और कहा- चिन्ता मत करो।
मैंने उन्हें चिपका लिया और उन्होंने मुझे। उनका लम्बा मोटा लिंग मेरी कुँवारी योनि पर रगड़ खा रहा था पर इस बात पर काफ़ी देर बाद मेरा ध्यान गया।
भैया ने मेरे चेहरे को अपने हाथों में के कर होठों को किस किया तो मेरे शरीर में बिजली सी दौड़ गई। मैंने कहा- भैया! यह सब ठीक नहीं है।
मैं यह कहना चाहती थी कि भैया मुझे होठों पर किस करने लगे। फ़िर रुक कर मेरे बालों को हटा कर मेरी गरदन पर किस किया तो मैं उनसे कस कर लिपट गई।
वो फ़िर मुझे बिस्तर पर ले गए और लिटा कर मेरे ऊपर लेट गए।
हम दोनों के नंगे बदन एक दूसरे से कस कर चिपके हुए थे और हम दोनों एक दूसरे को किस कर रहे थे।
वो मेरे होठों को और मेरी जीभ को चूस रहे थे, मैं अपने होश खोती जा रही थी।
उनका लण्ड मेरी अनचुदी चूत पर रगड़ खा रहा था जिससे मैं पागल हुई जा रही थी।
फ़िर भैया मेरी एक चूची को जोर से दबाने लगे और दूसरी के निप्पल को चूसने लगे जिससे मैं और पगला गई।
अचानक मैं ज़रा होश में आई तो कहा- भैया ये सब ठीक नहीं है, अगर किसी को पता चला तो मैं तो मर ही जाऊँगी।
वो बोले- मनु जान! क्या तुम मुझे ज़रा भी नहीं चाहती! मैं तुम्हारे लिए इतने दिनों से तड़प रहा था और आज तुम्हें पूरी तरह से अपना बनाना चाहता हूँ।
मैंने कहा- भैया…ऽऽऽ…!
और मेरे आगे कुछ कहने से पहले उन्होंने अपने होठों को मेरे होठों पर रखा, फ़िर कहा- आज से मैं भैया नहीं, तुम्हारा पति और जान हूँ, अगर ज़रा भी तुम्हारे दिल में मेरे लिए कोई जगह है तो बोलो।
मैंने कहा- मैं आपको चाह्ती तो हूँ पर…!
मेरे आगे बोलने से पहले उन्होंने मेरे होठों पर ऊँगली रख दी और कहा- बस हम आज से पति-पत्नी हैं और आज हमारी सुहागरात है।
मैंने कहा- लोग क्या कहेंगे?
उन्होंने कहा- मैं किसी की परवाह नहीं करता और अब हम तुम पति-पत्नी बन कर एक दूसरे को सुखी रखेंगे… मैं तुम्हें प्यार करता हूँ मनु जान!
मैंने कहा- मैं भी तुम्हें प्यार करती हूँ… भैया!
भैया कहते ही उन्होंने मुझे कहा- आज से मैं तुम्हारा भाई नहीं पति हूँ और अब तुम मुझे कुछ और कहा करो!
मैंने कहा- क्या!
वो बोले- कुछ भी … जैसे जान या कुछ भी!
मैंने कहा- ठीक है भैया.. ओह सोरी… जान… आई लव यू!
हम दोनों बिस्तर पर एक दूसरे से कस के चिपके हुए थे। भैया ने फ़िर मुझे किस किया और मेरी जांघों के बीच में आ गए।
मैंने अपनी टांगें उनके पैरों पर रख ली थी। उन्होंने अपने एक हाथ को मेरे सर के नीचे रख कर किस किया और दूसरे से मेरी अनचुदी कुँवारी चूत में उँगली की तो मेरे मुंह से सिसकारी सी निकली- आऽऽऽऽऽऽह!
भैया ने कहा- जान अपने पति के लण्ड को अपनी कुँवारी चूत पर रखना जरा!
मैंने कहा- क्या होगा जान …!
कहते हुए उनके लण्ड को अपनी चूत पर रखा।
हम दोनों अब एक दूसरे का साथ देने लगे थे। भैया पहले धीरे धीरे मेरे अन्दर अपना डालने लगे। मैं सिसकारी लेने लगी थी। एक इन्च जाते ही मुझे दर्द का अनुभव हुआ तो मैंने कहा- आऽऽऽऽह्ह्ह … अब बस … जान, अब बस भी करो, दर्द हो रहा है …!
वो बोले- चिन्ता मत करो, आज सब कुछ होगा … दर्द, मज़ा और हमारी सुहागरात … आऽऽह!
कहते हुए उन्होंने एक झटका दिया कस के
आऽ… अऽऽऽऽअऽ ह्ह्हहाऽ आऽऽऽ ऊईऽऽऽ माँ मर गई मैं! प्लीज़ भैया अब निकाल लो अब और दर्द नहीं सहा जा रहा है! मैं रोते हुए बोली।
उन्होंने कहा- भैया बोलोगी? यह कहते हुए एक और झटका मारा, लण्ड शायद 5′ अन्दर जा चुका था।
मैंने कहा- सोरी जान …. लेकिन बहुत दर्द हो रहा है!
वो बोले- जान चिन्ता मत कर, थोड़ी देर में सब सही हो जाएगा। वो फ़िर मेरे बूब्स चूसने लगे। थोड़ी देर में मुझे कुछ आराम मिला तो उन्होंने फ़िर 3-4 जोरदार झटके मारे तो मेरी हालत ही बिगड़ गई और चीख निकल गई- आऽऽऽऽह… मर गई… … माँअऽऽऽऽऽ …!
मेरी आंखों में आँसू थे। मैं उनसे चिपक गई और अपनी टांगों को उनकी कमर पर जकड़ लिया।
वो मुझे किस करने लगे और हम दोनों एक दूसरे के मुंह में जीभ डाल कर चूमने लगे।
थोड़ी देर में मैं सामान्य होने लगी। तब भैया ने मेरे बूब्स को पकड़ा और अपने लण्ड को अन्दर बाहर करने लगे।
मुझे तकलीफ़ हो रही थी पर थोड़ा मज़ा भी था कुछ अलग तरह का- आऽऽऽऽह्ह्ह… जान… आऽऽह्ह्ह्हाअ … आज पूरी तरह से अपनी बना लो जानऽऽऽ … आऽऽऽअऽऽऽह्ह मैंने कहा
तो भैया ने भी कहा- ओहऽऽ… जान …!
कमरे में हमारी आवाज़ें गूंज़ रही थी। मेरी सिसकारियाँ ज्यादा ही थी क्योंकि उनका 8-9 इन्च लम्बा लण्ड मुझसे झेला नहीं जा रहा था।
5 मिनट तक वो मुझे लगातार रौंदते रहे, फ़िर मैं चीखी-जान आऽऽऽऽअऽऽ आऽऽह्ह मुझे कुछ हो रहा है, पता नहीं क्या हो रहा है, मज़ाऽऽ आ रहा है आऽअ अऽ आऽऽऽह!
‘ओऽऽह जान तू चरम पर है और मैं भी ऽऽऽ जान! मैं गया ऽऽ मेरा झड़ रहा है अआ…’ उन्होंने लगातार 6-7 झटके मारे और हम दोनों एक साथ आनन्द के शिखर तक पहुँच गए।
भैया मेरे ऊपर ही पसर गए और हम दोनों ने एक दूसरे को अपनी बाहों में जकड़ लिया। कमरे में ए सी चल रहा था पर हम दोनों पसीने से लथपथ एक दूसरे से लिपटे हुए किस कर रहे थे।
थोड़ी देर बाद हम अलग हुए और स्नानघर में जाने लगे तो देखा बिस्तर खून से भरा हुआ था। मैं घबरा गई और बोली,’ ये क्या… अब क्या होगा?’
भैया बोले,’ इसमें डर कुछ नहीं, पहले पहले यही होता है’
मेरी कमर में दर्द होने लगा था। हम दोनों बाथरूम में एक साथ नहाने गए तो एक दूसरे को साबुन लगा कर नहलाया।
मेरी चूत अब कुँवारी नहीं रही थी।
भैया ने रगड़ कर मेरी चूत को धोया और मैंने उनके लण्ड को, जिससे हम दोनों गर्म हो गए।
मैं थोड़ा शरमाई पर काफ़ी झिझक निकल चुकी थी। हम दोनों फ़व्वारे के नीचे खड़े थे। भैया नीचे बैठे तो मैंने कहा,’ये क्या करने जा रहे हो जान!’
‘मैं तो अपने होठों की मुहर लगाने जा रहा हूँ … और अब तुम भी लगाना’
वो मेरी चूत में उँगली करने लगे थे और जीभ भी फ़िराने लगे।
मैं पागल हो उठी। मैं अपने एक स्तन को मसलने लगी और भैया हाथ बढ़ा कर दूसरे को।
भैया मेरी हालत समझ गए और फ़र्श पर ही लिटा लिया। मेरी चूत में उनकी जीभ तैर रही थी और मेरे हाथ उनके सर को पकड़ कर मेरी चूत को दबा रहे थे। मैं अपने होठों को काट रही थी और लम्बी लम्बी सिसकारियाँ ले रही थी। मेरी टांगें उनकी गरदन में लिपट गई थी।
फ़िर वो मेरे ऊपर आ गए और मैंने अपनी टांगें उनकी कमर पे लपेट ली। मेरे दोनों हाथ उनकी गरदन में लिपट गए।
उन्होंने फ़िर जोर का झटका मारा तो आऽऽऽह्ह ऽऽआ… अ…अह… जैसे मेरी जान ही निकल गई।
फ़िर भैया मेरे बूब्स को दबाते और झटके मारते जाते। वो वहशी होते चले गए, मेरे बूब्स को निर्दयता से मसल रहे थे और दांतों से काट रहे थे, मेरी गरदन पर भी प्यार से काटा। वो जहाँ जहाँ अपने दाँत गड़ाते वहाँ खून सा जम जाता।
मैं भी पागल हो जाती तो बदले में अपने नाखून उनकी पीठ में गड़ा देती और उनकी गरदन पर काट लेती। जंगलीपने से बाथरूम में मेरी प्यार भरी चीखें गूंज रही थी, जिससे भैया का जोश बढ़ता ही जा रहा था।
यह सिलसिला आधे घण्टे तक चला और उतनी देर में मैं दो बार झड़ चुकी थी और भैया रुकने का नाम ही नहीं ले रहे थे। फ़िर जब हम शांत हुए तो मैं तीसरी बार झड़ी थी। हम फ़्रेश हो कर कमरे में चले गए और थोड़ा आराम करके खाना खाया। फ़िर हम नंगे ही एक दूसरे से लिपट कर बातें करने लगे।
मैंने कहा,’भैया … ओह सोरी … जान, अब मेरा क्या होगा, मैं क्या करूँ और अब आगे का क्या प्लान है, मेरा मतलब भविष्य का, क्योंकि अब मुझे घबराहट हो रही है, मैं आपके बिना नहीं रह सकती।’
वो बोले ‘चिंता मत करो जान मैं भी तुमसे बहुत प्यार करता हूँ, हम दोनों दिल्ली जा कर शादी कर लेंगे पर अभी किसी को नहीं बताएँगे.’
मैंने कहा ‘ठीक है जान, चलिए अब सो जाते हैं क्योंकि कल आपको ऑफिस भी जाना है’
वो बोले ‘चिंता क्यों करती हो जान, मैं तुम्हें तड़पता नहीं छोड़ सकता। आज ही हम एक हुए और क्या तुम मुझे तड़पता छोड़ दोगी जान?’
मैंने कहा ‘नहीं जान… प्लीज़ ऐसा मत बोलो। आज हम नहीं सोयेंगे। आज हम एक दूसरे को पूरा सुख देंगे। आप मेरे साथ जी भर कर और जम कर करो और अपनी बीवी को रौंद डालो जान.’
फिर भइया ने मुझे रात में तीन बार और जम कर चोदा और वो भी आधे आधे घंटे तक।
और तब तक मैं बेहोशी की हालत में आ चुकी थी।
हम दोनों नंगे ही चिपक कर सो गए।
सुबह जब मैं उठी तो भइया ऑफिस चले गए थे और फिर 10 .30 बजे फ़ोन भी कर दिया कि मैं 2-3 बजे तक आ जाऊँगा।
मैं बहुत थकी हुई थी और मेरा बदन भी काफी दर्द कर रहा था खास कर से मेरी कमर।
मैंने फ्रेश हो कर नाश्ता किया और फिर सो गई।
मैं सीधे 3 बजे के करीब उठी तो काफी ठीक महसूस भी कर रही थी और देखा कि भइया मेरे सर को अपनी गोद में लिए हुए थे।
ये थी मेरी कहानी! आगे का मैं अब बाद में ही लिखूंगी! Sex Stories
मैं अन्तर्वासना की एक Hindi Sex Stories नियमित पाठक हूँ। मैंने एक बात पर ध्यान दिया कि यहाँ तांत्रिक की कोई कहानी नहीं है जबकि तांत्रिकों को लेकर कई मनघड़न्त कहानियाँ हैं हमारे देश में।
यह कहानी है आज से पाँच सौ साल पहले के भारतवर्ष की। उस ज़माने में इस देश में तांत्रिकों और औझाओं का बड़ा दबदबा था। बड़े बड़े राजा-महाराजा किसी न किसी तांत्रिक की शिष्य थे। ऐसे ही एक राजा थे महाराजा प्रताप सिंह !
वे विलासपुर के महाराजा थे। यह कहानी उनकी बेटी राजकुमारी सुजाता की है। राजकुमारी सुजाता सर्वगुण-सम्पन्ना थी। वो सुन्दर, सुशील, शांत और सब कलाओं में निपुण थी। उसका कद 5 फीट 2 इंच, रंग सांवला, घट की तरह वक्ष और ढोल की तरह नितम्ब थे। इतनी भारी भरकम नितम्ब लेकर वो ज्यादा तेज़ नहीं चल पाती थी, बिलकुल राजहंस की तरह वो चलती थी। जब गाना गाती थी तो ऐसा लगता था जैसे सारी कायनात (दुनिया) गूंज उठी हो।
राजकुमारी सुजाता जब उन्नीस साल की हो गई तब महाराजा प्रताप सिंह ने उसके स्वयम्बर का प्रबंध किया।
उनके तांत्रिक गुरुदेव बाबा गोरबनाथजी उन्हें सलाह दी कि स्वयम्बर के एक सप्ताह पहले वे सुजाता को गोरबनाथजी के पास भेजें। राजा उन पर पूर्ण विश्वास करते थे। राजा ने सुजाता को भेजने का प्रबंध किया।
उस रात बहुत बारिश हो रही थी। सुजाता अकेली एक घोड़े पर सवार हो कर गोरबनाथजी के आश्रम आई। आश्रम में बाबा के भक्तों ने सुजाता को एक कुटिया में बिठाया और एक लड़की आकर सुजाता के पैर धोने लगी। उस लड़की नाम अंजना था। कुछ ही देर में दोनों में दोस्ती हो गई।
सुजाता(सु): मुझे क्या करना है यहाँ?
अंजना(अ): तुमको पता नहीं? तुम्हें किसी ने नहीं बताया?
सु: नहीं !
अ: तुम्हें इस पवित्र गंगा-जल से नहाना पड़ेगा, तब तुम शुद्ध होगी।
सु: उसके बाद?
अ: तुम नग्न अवस्था में बाबा के पास जाओगी, तब बाबा तुम्हें नीवी पहनायेंगे।
सु: नग्न होकर? नहीं बाबा, मुझसे यह काम नहीं होगा।
अ: तो फिर तुम कभी भी माँ नहीं बन पाओगी ! बाबा की सेवा करनी होगी तुम्हें आज रात को ! तब बाबा तुम्हें आर्शीवाद देंगे, तब तुम माँ बनोगी।
सु: अच्छा, ठीक है ! सेवा करूंगी !
अ: यह हुई न बात ! जाओ उस पवित्र गंगाजल से नहा कर आओ !
यह कहकर अंजना सुजाता को एक जलप्रपात के पास ले आई, सुजाता के सारे कपड़े उतार दिए और उसे नहलाना शुरू किया।. उन दोनों में से किसी को नहीं पता चला कि और भी कोई है जो इस स्नान-दृश्य को बड़े गौर से देख रहा है।
नहाने के बाद सुजाता नग्न अवस्था में जब बाबा गोरबनाथ के पास पहुँची तो बाबा की आँखें फटी की फटी रह गई। इतनी सुन्दर नारी बाबाजी ने पहले कभी नहीं देखी थी। मन ही मन वे सुजाता के यौवन की तारीफ़ कर रहे थे।
उसका उन्नत वक्ष-स्थल, मदमस्त कर देने वाले पृष्ट-उभार देखकर ही बाबाजी गरम होने लगे। उन्होंने तय किया कि आज इस नारी की मस्त जवानी का रस खूब पियूँगा।
अंजना नीवी लाई। बाबाजी काम्पते हुए हाथ से उस सुंदरी सुजाता को नीवी पहनाने लगे। सुजाता मुस्कुराई।
पहली बार किसी मर्द की हाथ का स्पर्श पाकर सुजाता एक अजीब सी आनंद में खो गई। ऐसा क्या जादू था उस स्पर्श में ! बाबा का जादूभरा स्पर्श पाकर सुजाता खिल उठी। बाबाजी उसके मन की बात को समझ कर मुस्कुराए- आ जाओ जान आज की मदमस्त रात तुम्हारी इस मदमस्त जवानी के नाम !
बाबा गोरबनाथ बड़े सिद्ध पुरुष थे। उनके पास कई सिद्धियाँ थी। उनमें से एक है वशीकरण ! वो किसी भी प्राणी चाहे वो इंसान हो या जानवर, किसी को भी अपने वश में कर सकते थे। दरअसल बात यह थी कि बाबाजी ने महाराजा प्रताप सिंह को अपने वश में किया हुआ था। वे स्पर्श से, आँख से और बातों से भी वशीकरण कर सकते थे। सुजाता को उन्होंने अपने स्पर्श से वशीभूत किया। अंजना अब सुजाता को लेकर एक पास वाली कुटिया में गई।
उस कुटिया में गुलाब की महक थी, एक चारपाई थी, उस चारपाई पर एक थाली थी, थाली में एक गिलास था जिसमें शरबत था। अंजना के कहने पर सुजाता ने वो शरबत पी लिया और धीरे धीरे उसे एक अजीब सा नशा छाने लगा। दरअसल वो एक खास किस्म का नशीला शरबत था, उसे जो पीता उसे ही नशा हो जाता। आज से ५ साल पहले बाबाजी ने इसी शरबत को पिलाकर राजा को वश किया। आज राजकुमारी सुजाता की बारी है।
आधी सोई आधी जगी सुजाता को अंजना बाबा की यज्ञ भूमि पर लाई। बाबा ने उसके सर पर हाथ रखके एक मंत्र का उच्चारण किया और सुजाता जाग गई। उसे सब कुछ अच्छा लगने लगा। आज तक जो कुछ उसे बुरा लगता था वो भी अच्छा लगने लगा। उसने बाबा गोरबनाथ को कामुक नजर से देखा और अपने आप ही घुटनों के बल बाबाजी के सामने बैठ गई और धोती से उनका लण्ड निकालकर देखने लगी। बाबा गोरबनाथ की उम्र पैन्तालीस साल थी पर लुंड दस इन्च का था। सुजाता ने जिंदगी में पहली बार इतना मोटा और लम्बा लण्ड देखा पर उसे डर नहीं लगा। ऐसा ही असर था बाबाजी के मंत्र का ! सुजाता पूरी तरह से उनके वश में थी, वो अपने होश खो चुकी थी।
वो बाबाजी का मोटा लण्ड मुंह में लेकर चूसने लगी। बाबाजी तो तब सातवें आसमान पर थे। जब उन्हें लगा कि अब वो झड़ने वाले हैं तो उन्होंने कहा- अच्छा राजकुमारी जी, अब चूसना बंद कीजिये। आपने मेरी कामेच्छा को जगाकर मुझ पर बहुत दया दिखाई है, अब इस बालक को आपकी सेवा करने का अवसर दीजिये। अब कृपया विपरीत आसन में लेट जाईये इस बालक के ऊपर !
सुजाता ने मुस्कुराकर कहा- ठीक है बालक ! चलो लेट जाओ !
बाबाजी लेट गए अपनी चारपाई पर ! उसके ऊपर 69 पोज़िशन में सुजाता लेट गई। बाबाजी सुजाता की चूत को चाट रहे थे, चूस रहे थे। सुजाता आनंद में झूम रही थी और ऊहऽऽ आह कर रही थी और बाबाजी का मोटा लण्ड चूस रही थी। बाबाजी भी चिल्ला रहे थे- आह क्या बात है, आह ऊ आअ हह आह !
इतने में सुजाता दो बार झड़ी। कोई साधारण लड़की होती तो निढाल पड़ जाती पर बाबाजी के मंत्र के जोर से उसकी ताक़त और कामेच्छा बिल्कुल कम नहीं हुई।
अब बाबाजी भी इतना चूसने के बाबजूद झड़नेवाले नहीं थे, उनकी अजीब शक्ति थी। ये जो वो सुजाता के साथ कर रहे हैं इसे भैरभी साधना कहते हैं। इसमें नारी होती है देवी माँ जो अपने भक्त की कामना पूरी करती है, भक्त उन्हें जिस रूप में चाहे पूजा कर सकता है। यहाँ बाबा गोरबनाथ उन्हें कामदेवी के रूप में पूज रहे हैं।
बाबाजी ने अब कहा- हे माते, अब आप पद्मासन में अपने बालक की काम-इच्छा पूरी कीजिये, मेरा लिंग धारण करके मेरी वासना पूरी कीजिये !
सुजाता ने कहा- जैसी तेरी इच्छा बालक ! आज मैं तेरी हर मनोकामना पूरी करूंगी, अपने बालक की हर मनोकामना उसकी माँ ही पूरी करती है ! चल तैयार हो जा !
बाबाजी ने पद्मासन में बैठ गए और सुजाता उनके ऊपर आसन जमा कर बैठ गई. सुजाता की योनि ने बाबाजी के लण्ड को आसानी से ले लिया। कमाल का मान्त्रिक है बाबा गोरबनाथ।
पद्मासन में एक दूसरे को धक्के लगाते- लगाते दोनों ही सिसकारियाँ भर रहे थे। सुजाता को बहुत आनंद आ रहा था, वो चिल्ला रही थी- आ आ अह ऊ ओहऽऽ !
तभी अचानक बाहर उल्लू ने आवाज लगाई। बाबाजी को पता चल गया कि क्रिया का अंतिम चरण आ गया है, उन्होंने उसी हालत में सुजाता के कान में एक और मंत्र पढ़ दिया और सुजाता पर से पहले के मंत्र का असर ख़त्म हो गया।
सुजाता आखरी बार चीखी- ऊ ऊओह्ह्ह्ह ! ई ऊऊ मा आऽऽ !
कहते कहते वो जोर से झड़ने लगी। उस समय बाबाजी ने धक्के मारना बंद किया और एक पात्र में सुजाता का योनि-रस भरने लगे। पात्र पूरा भर चुका था। तभी सुजाता ने बाबाजी के लण्ड पकड़ कर दो बार मुठ मारी और बाबा ने भी अपना माल उसी पात्र में गिरा दिया। बहुत ही गाढ़ा और गर्म था बाबाजी का रस।
अब दोनों निढाल पड़ गए और एक दूसरे की बाहों में सो गए।
कुछ देर बाद जब बाबाजी उठे, उन्होंने सुजाता को उठाया और कहा- अब यह पवित्र शर्बत पी लो !
शर्बत और कुछ नहीं दोनों का मिलाजुला रस जो बाबा ने उस पात्र में भरा था। सुजाता ने वो पी लिया और फिर बाबा ने कहा- जाओ बेटी ! महल लौट जाओ ! अब तुम सुखी और सौभाग्यवती होगी। मेरा आर्शीवाद तुम्हारे साथ है !
सुजाता घोड़े पर सवार हो कर महल लौट रही थी, अब वो एक नई सुजाता थी- काम-क्रीड़ा में निपुण !
बाबा के मंत्र ने उसे हमेशा के लिए बदल दिया।
कहानी कैसी लगी? अपनी राय जरूर भेजें ! Hindi Sex Stories
मेरा नाम सुरेश है मैं दिल्ली में Indian Sex Stories रहता हूँ। मैं अपनी पहली स्टोरी लिखने जा रहा हूँ उम्मीद है आपको पसंद आएगी।
बात उन दिनों की है जब मैं बी.ए. में था। उन दिनों मेरी चाची की बहन घर पर आई हुई थी। देखने में वो बहुत सुंदर थी और मन ही मन मैं उसको चाहने लगा था लेकिन उसको कहने से डरता था।
एक दिन घर में सब बाहर गए हुए थे और घर में सिर्फ़ मैं और वो थे। हम म्यूज़िक सिस्टम पर गाने सुन रहे थे हम दोनों बिस्तर पर एक साथ लेटे हुए थे अचानक उसके हाथ मेरे शरीर पर चलने लगे, मेरा लंड खड़ा हो गया। उसने मेरे हाथ पकड़ कर अपनी चूचियों पर रख दिए मुझे पता चल गया की आग उस तरफ़ भी लगी हुई है।
अब मैंने उसकी चूचियों को मसलना शुरू किया, उसके मुँह से सिस्कारियां निकलने लगी। फ़िर उसने अपना हाथ मेरे लंड पर रख दिया और उसको सहलाने लगी। मैंने उसके होठों पर अपने होंठ रख दिए और उनको चूसने लगा, एक हाथ से उसकी गांड को मसलने लगा। उसकी गांड एक दम चिकनी और गोरी थी।
अब उसके हाथ बड़ी तेजी से मेरे शरीर पर चलने लगे। मैंने उसकी कमीज को धीरे से उतार दिया उसने कोई भी विरोध नहीं किया अब उसकी चूचियां मेरे सामने थी मैंने पागलों की तरह उनको चूसना शुरू कर दिया। उसके हाथ भी मेरी गांड पर चलने लगे और उसने मेरी पेंट को उतार दिया अब मैं सिर्फ़ बनियान और अंडरवियर में था और मेरे लंड अंडरवियर को फाड़ कर बाहर आने को बेताब था उसने जल्दी से मेरे अंडरवियर उतार दिया और मेरे लंड को चूसने लगी और अपनी एक ऊँगली मेरी गांड में घुसा दी और मेरे चूतड़ों को मसलने लगी।
मैंने उसको उठाया और बिस्तर पर पटक दिया। उसके बाद मैंने उसकी सलवार को भी उतार दिया उसने नीचे कुछ भी नहीं पहना था मैंने पहली बार किसी की चूत देखी थी। उसकी बिना बालों की चूत को देख कर मैं पागल हो गया और चूत को चाटने लगा। उसने अपनी दोनों टाँगे मेरे कन्धों पर रख दी और बोलने लगी जोर से चाटो !
मैं भी पागल हो गया था मैंने उसके गांड की दोनों गोलाईयों को जोर से भींचा तो उसके मुँह से हल्की सी चीख निकल गयी। उसने कहा- सुरेश अब चोद दो मुझे कब से मेरी चूत तुम्हारे लंड की प्यासी है।
मैंने उसकी चूत पर अपने लंड को रखा और घुसाने लगा लेकिन उसकी चूत बड़ी टाइट थी और मेरा लंड उसमें घुस नहीं रहा था। यह उसका और मेरा पहला अनुभव था। अब मैंने थोड़ा और जोर लगाया तो मेरे लंड की सुपारी उसकी चूत में घुस गयी। उसने चिल्लाना शुरू कर दिया मैंने उसके होठों पर अपने होंठ रख दिया ताकि कोई आवाज़ न सुन ले और अपना पूरा जोर लगा कर लंड को उसकी चूत में घुसा दिया।
वो छटपटाने लगी। मैंने अपने शरीर के भार से उसको पूरा दबा दिया ताकि वो कहीं निकल न सके और जोर जोर से धक्के मारने शुरू कर दिया। अब उसको भी मज़ा आने लगा और वो भी मेरा साथ देने लगी और अपने चूतडों को उठा उठा कर धक्के मारने लगी।
मैंने उसको अपने ऊपर ले लिया और फिर से अपना लंड उसकी टाइट चूत में घुसा दिया और उसके चूतड़ों को अपने दोनों हाथों से पकड़ कर धक्के लगाने लगा। सच दोस्तों ऐसा मज़ा मुझे पहली बार आ रहा था। मैंने अपनी एक ऊँगली उसकी गांड में भी घुसा दी और उसको अंदर बाहर करने लगा।
थोडी देर बाद उसका शरीर अकड़ने लगा मैं समझ गया कि वो अब छूटने वाली है मैंने झटके से उसको दोबारा अपने नीचे ले लिया और धक्के लगाने लगा उसके मुँह से आह आह की आवाज़ निकल रही थी और कह रही थी सुरेश और जोर से चोदो फाड़ दो मेरी चूत को और यह कहते हुए वो झड़ गयी।
अब मैंने और जोर से धक्के लगाने शुरू कर दिए और १५ मिनट तक उसको चोदता रहा। उसके बाद मैंने कहा कि मैं भी आने वाला हूँ उसने कहा मेरी चूत को भर दो अपने इस वीर्य से !
उसके बाद मैं भी जोर से आवाज़ करता हुआ उसकी चूत में ही झड़ गया और उसके उपर ही लेट गया। हम दोनों थोडी देर उसी अवस्था में पड़े रहे। उसके बाद उसने मेरे लंड को अपने मुँह से साफ़ किया और कहा- अगली बात कब चोदोगे?
मैंने कहा अगली बार तुम्हारी गांड की बारी है।
दोस्तों आगे की कहानी अगली बार प्लीज़ मुझे बताइए कि मेरी यह सच्ची कहानी आपको कैसी लगी। Indian Sex Stories
मेरा नाम रमेश है। वैसे तो मैं उत्तर Antarvasna प्रदेश का रहने वाला हूँ पर जॉब कोइम्बटोर में करता हूँ। मेरा जॉब मार्केटिंग का है जिसमें घूमना ज्यादा होता है। अब मैं आपको असली बात बताता हूँ।
एक बार मैं काम के सिलसिले में कोइम्बटोर से चेन्नई जा रहा था। मैने एसी स्लीपर बस में टिकट बुक कराई थी। मुझे बस में डबल वाली सीट मिली थी। मैंने सोचा पता नहीं कौन आयेगा मेरे साथ ! मगर जब बस चलने लगी तो एक औरत जो कि कोई ३०-३५ साल की होगी, वो मेरे साथ सीट पर आ गई और पूछा दस नम्बर की बर्थ यही है क्या?
मैंने कहा- हाँ!
वो मेरे साथ बैठ गई और इधर-उधर की बात करने लगी। वैसे वो देखने में सुंदर और गोरी चिट्टी थी। थोड़ी देर के बाद मुझे नींद आने लगी और मैं बोला- मुझे सोना है !
और मैं अपना कम्बल ले कर सो गया। वो भी मेरे साथ लेट गई।
मैं सोच रहा था कि इतना अच्छा मौका हैं, एक तो एसी बस और एक सुंदर औरत जो मेरे साथ ही लेटी हुई है !
मैं बस अपने लण्ड को पकड़ के लेटा था, कुछ कर नहीं पा रहा था, क्योंकि मुझे डर था कि यह कुछ कह न दे ! और मैं ऐसे ही सोया रहा।
मगर कोई एक घंटे के बाद मुझे लगा कि मेरी गांड पर कुछ लग रहा है। मैंने ध्यान किया तो उसका घुटना मेरी गांड से लग रहा था और बस के झटकों की वजह से मेरी गांड में लग रहा था। मैं तो एकदम से पागल हो गया और सोचने लगा कि शायद यह जानबूझ कर कर रही है।
तो मैंने यह जानने के लिए उसकी तरफ मुँह कर लिया और अब उसका पैर मेरे लंड पर लगने लगा जो कि एकदम खड़ा हुआ था। मुझे मजा आने लगा। पर धीरे-धीरे मुझे लगा कि कुछ और भी मेरे लण्ड पर लग रहा है। मैंने हाथ लगाकर देखा तो उस औरत का हाथ था जो मेरा लण्ड सहला रही थी। जैसे ही मैंने उसका हाथ पकड़ा तो उसने मेरा लंड जोर से पकड़ लिया और दबाने लगी। मैं भी अब कुछ नहीं कह रहा था और अपना हाथ हटा लिया और उसकी साड़ी पर हाथ लगाने लगा और धीरे धीरे उसकी चूत की तरफ बढ़ने लगा, उसकी चूत पर ऊपर से ही हाथ फिराने लगा।
फिर वो मेरे और पास सरक आई और मुझे चूमने लगी। मैं तो पहली बार किसी को चूम रहा था, मुझे बहुत मजा आ रहा था। हम लोगों कोई २० मिनट किस करने के बाद बस के परदे इस ढंग से लगा दिए ताकि कोई देखे नहीं ! वैसे तो वोल्वो में सुविधा अच्छी होती है पर हम बेफिक्र होना चाहते थे। किस करने के बाद वो मेरा लंड पैन्ट में से निकाल कर चूसने लगी और उसने अपनी साड़ी और पेटीकोट भी उतार दी। अब वो सिर्फ चड़डी और ब्रा में थी। मैंने भी अपने कपड़े उतार दिए और अब मैं सिर्फ चड्डी में था। उसने एकदम से मेरी चड्डी उतार दी और मेरा लंड चूसने लगी।
फिर मुझे बोली- तुम भी मेरी चूत चाटो !
मैं भी बेताब था चूत चाटने के लिए और फिर मैंने उसकी ब्रा और चड्डी भी उतार दी। वो एक दम नंगी हो गई थी। मैंने तो पहली बार किसी को नंगा देखा था। मैं तो बस पागल हो रहा था और उसको चूमने लगा। फिर हम दोनों ६९ की पोसिशन में आ गये। कोई १५ -२० मिनट तक चाटने के बाद वो बोली- अब मुझे शांत कर दो !
मैंने पूछा- कैसे?
तो बोली- अपना लंड मेरी चूत में डाल दो !
मुझे अपने ऊपर लिटा लिया और मैं अपना लंड उसकी चूत में डालने लगा तो लंड ढग से नहीं जा पा रहा था। उसने हाथ से लण्ड को पकड़ा और अपनी चूत पर रखकर बोली- अब करो !
मैंने जैसे ही झटका मारा तो थोड़ा सा ही लंड अंदर गया क्योंकि उसकी चूत बहुत टाइट थी। फिर मैं धीरे धीरे डालने लगा और जब लंड पूरा घुस गया तो मैं झटके मारने लगा। मेरे झटके और बस के झटकों से हम दोनों को अलग ही मजा आ रहा था। ४०-४५ झटकों के बाद वो झड़ने लगी तो उसने मुझे बहुत जोर से पकड़ लिया और अपने अंदर समेटने की कोशिश करने लगी।
पर मेरा अभी झड़ा नहीं था तो मैंने उसकी चूत से लंड नही निकाला और तेज-तेज करने लगा। फिर १०-१२ झटकों के बाद मैं भी झड़ गया और उसके ऊपर ही लेटा रहा और उसको चूमता रहा।
इस तरह हमने पूरी रात ४ बार चुदाई की।
तो दोस्तो, कैसी लगी मेरी कहानी?
कृपया मुझे मेल करे !
मेरा आईडी है Antarvasna
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