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मेरा नाम सन्नी है. मेरी उम्र २१ साल है. यह उस वक्त की बात है जब में बी एस सी में था और मेरी उम्र १९ साल थी. मेरे चाचा की उम्र ३५ साल थी और मेरी नई चाची की उम्र २३ थी। जिनका नाम सुमन है उनका फिगर ३६ -२८ -३८ है. उनके बूब्स बहुत सेक्सी हैं. जब वो लाल ब्रा और काली पैंटी पहनती हैं बहुत सेक्सी लगती हैं वो बहुत सेक्सी और प्यारी है। जब वो शादी के बाद हमारे घर में रहने लगी तो उनकी सेक्सी फ़ीगर का दीवाना हो गया। जब भी वक्त मिलता, मैं उनके साथ बैठता और उन से बातें करता। वो भी मुझे पसन्द करने लगी थीं, वो कहती थीं कि मैं उनका भतीजा नहीं बल्कि उनका देवर लगता हूं।
एक दिन घर के सभी लोग मेरे कज़िन की शादी में गए। मेरी वार्षिक परीक्षा चल रही थी इसलिए मैं नहीं गया, तो चाची ने कहा मैं भी नहीं जाऊंगी, मैं यहीं सन्नी की देखभाल करूंगी। चाचा ने भी हां कर दी।
मैं उनको स्टेशन छोड़ कर आया तो चाची ने खाना के लिए पूछा तो मैंने खाना लगाने को कह दिया। चाची ने कहा कि खाना तो तैयार है, तुम रसोई में ही आ जाओ, वहीं खा लेना। मैं रसोई में चला गया।
चाची खाना लगा रही थी कि बिजली चली गई। कुछ देर बाद गर्मी के कारण चाची का ब्लाऊज़ पसीने से भीग गया और उनकी ब्रा नज़र आने लगी। मैं खुश हो गया और उनके वक्ष देखने लगा। कुछ देर तो चाची को पता नहीं लगा पर बाद में उन्होंने भांप लिया कि मेरी नज़रें उनकी छाती पर हैं तो उन्होंने मुस्कुराते हुए पूछा कि क्या देख रहे हो। मैं घबरा गया और कहा कि कुछ नहीं, आप को गर्मी लग रही होगी, मैं खाना खा चुका हूं, आप कुछ देर बाहर जाकर हवा में बैठ जाएं।
उन्होंने कहा कि नहीं, मैं नहाने जा रही हूं, तुम दरवाजा चैक कर लेना। दरवाजा बंद करके मैं अपने कमरे में चला गया। बराबर में ही बाथरूम है और उस का एक दरवाजा मेरे कमरे में भी खुलता है।
अपने कमरे में पहुंच कर जब मैंने पानी गिरने की आवाज़ सुनी तो एकदम मेरे जहन में ख्याल आया कि क्यों ना मैं चाची को नंगा देखूं? मैं फ़ौरन उठा और दरवाजे के की-होल से देखने लगा। वो मोमबत्ती की रोशनी में नहा रही थी। बड़ी मादरचोद लग रही थी, रण्डी की तरह मम्मे मसल रही थी अपने।
हे भगवान ! मैंने पहली बार उनको नंगा देखा था। उनके मम्मे इतने बड़े थे कि मैं बस उनको ही देखता रहा। मेरे शरीर में एक अजीब किस्म का करंट दौड़ गया। मेरा लण्ड एकदम खड़ा होने लगा।
मैंने उसे अपने हाथ में ले लिया और हिलाने लगा। हिलाते हिलाते बराबर में मेज़ पर रखा फ़ूलदान गिर गया। उसकी आवाज़ को सुन कर चाची ने मेरे कमरे वाले दरवाजे को खोल कर देखा कि क्या हुआ। मगर जब उन्होंने मुझे अपना लण्ड पकड़े हुए देखा तो एकदम चौंक गई। मैं भी एकदम अपने लण्ड को अन्दर करके ज़िप लगाने लगा। चाची भी तुरन्त चली गई।
45 मिनट के बाद उन्होंने मेरे कमरे का दरवाजा खटखटाया तो मैं घबरा गया कि पता नहीं अब क्या होगा। खैर मैंने दरवाज़ा खोल दिया। चाची ने आसमानी रंग की साड़ी और मैचिन्ग ब्लाऊज़ पहन रखी थी। वो अन्दर आई और मेरे बेड पर बैठ गई। कुछ देर बाद उन्होंने कहा कि मेरे पास आओ। मैं घबराते हुए उनके पास जा कर खड़ा हो गया। उन्होंने मुझ से पूछा कि तुम कितनी बार मुझे नहाते हुए देख चुके हो?
मैं एकदम घबरा गया, मेरे पसीने छूट गए। उन्होंने मेरी यह हालत देखी तो मुस्कुराई और कहा कि तुम मुझे बताओ, मैं किसी को नहीं बताऊंगी, अगर तुमने नहीं बताया तो मैं सबको बता दूंगी। मैंने फ़ौरन कहा – मुझे माफ़ कर दें ! यह पहली बार हुआ है, इससे पहले मैंने कभी ऐसा नहीं किया है।
उन्होंने कुछ देर बाद कहा कि क्या मैं तुम्हें अच्छी लगती हूं? मैंने कहा- हां ! आप मेरी चाची हैं मैं आपको बहुत पसन्द करता हूं।
उन्होंने कहा कि मैं जो कहूं, तुम मान लोगे?
मैंने कहा- आज़मा कर देख लें।
उन्होंने कहा- अपनी पैन्ट उतारो।
मैं सन्न रह गया।
उन्होंने कहा- अगर मेरा कहा नहीं मानोगे तो मैं सब को बता दूंगी कि तुम मुझे नंगा नहाते हुए देख रहे थे।
मैं और ज्यादा परेशान हो गया। उन्होंने फ़िर कहा कि अपनी पैन्ट उतारो।
मैंने कहा- क्यों?
उन्होंने कहा कि तुमने मुझे नंगा देखा है, मैं भी तुम्हें नंगा देखूंगी।
इसके बाद वो मेरे करीब आईं और जबरदस्ती मेरी शर्ट उतारने लगी। इससे मेरी आस्तीनें फ़ट गई तो मैंने कहा- अच्छा ! मैं उतारता हूं और मैंने अपनी कमीज़ उतार दी। फ़िर चाची ने कहा – पैन्ट भी उतारो। मैंने धीरे धीरे वो भी उतार दी। अब मैं अन्डरवीयर में उनके सामने खड़ा था। मुझे बहुत शरम आ रही थी।
इस पर उन्होंने कहा कि यह भी उतारो, मैं तुम्हें पूरा नंगा देखना चाहती हूं। मैंने मना कर दिया तो उन्होंने मेरे पास आ कर मुझे एक चपत लगाई और कहा- मादरचोद उतारता है या नहीं !
मैं उनके मुंह से गाली सुन कर हैरान रह गया। उन्होंने जलदी से मेरा अन्डरवीयर नीचे कर दिया। मेरा लण्ड उस वक्त ५” का था और किसी खम्बे की तरह खड़ा था।
चाची ने मेरे लण्ड को अपने हाथ में लिया तो मुझे एक अजीब सा मज़ा आया और मेरे मुंह से सिसकारी निकल गई। उन्होंने कहा कि तुम्हारे चाचा का तो 3″ ही लम्बा होगा मगर तुम्हारा तो उस से भी बड़ा है। तुम्हारे चाचा तो सेक्स करना जानते ही नहीं हैं, उनका लण्ड मेरे अन्दर जाते ही पानी छोड़ देता है। क्या तुमने किसी से सेक्स किया है?
मैंने कहा कि नहीं। तो उन्होंने कहा कि आज मैं तुन्हें एक नया गेम सिखाऊंगी। तुम्हें फ़ुटबाल बहुत पसन्द है ना, यह खेल उससे भी ज्यादा अच्छा है।
उसके बाद उन्होंने मेरे होंटों पर किस किया। मैं भी अपना काबू खो बैठा और उनको अपनी बाहों में ले लिया। वो किस मुझे हमेशा याद रहेगी, उनके होंटों को जब मैंने अपने दांतों में दबाया तो मुझे बहुत मज़ा आया था। चाची ने मुझे २०-२५ मिनट तक किस किया, फ़िर कहा कि बेडरूम में चलो।
मैं नंगा ही उनके साथ बेडरूम में चला गया। वहां पर चाची ने मुझे बेड पर धक्का दे दिया और मेरा लण्ड अपने मुंह में लेकर आइसक्रीम कई तरह चूसना शुरू कर दिया। मैं तो आसमान पर पहुंच गया। मैं बता नहीं सकता कि कितना मज़ा आया था
कुछ देर बाद मैंने कहा- चाची अब मेरा निकलने वाला है, आप मुंह से मेरा लण्ड निकाल दें तो उन्होंने कहा कि मेरे मुंह में ही गिरा दो, मैं कब से लण्ड का पानी पीने को बेकरार हूं। मैंने ऐसा ही किया। मुझे अच्छी तरह याद है कि इससे पहले मेरा पानी इतना ज्यादा नहीं निकला था।
फ़िर चाची ने पूछा कि तुम्हें मेरे शरीर में सबसे ज्यादा क्या पसन्द है?
मैंने कहा- आप के स्तन।
तो उन्होंने कहा- दूर से तो देख ही चुके हो, क्या छूना चाहते हो?
यह सुनते ही मैंने उनको अपनी ओर खींच लिया और उनके ब्लाऊज़ के बटन खोलने लगा। ब्लाऊज़ के नीचे काले रंग की ब्रा उनके बूब्स पर कसी हुई थी। मैंने उनके बूब्स को ब्रा के ऊपर से ही दबाना और चूमना शुरू कर दिया। फ़िर मैंने ब्रा खोलने की कोशिश की मगर मुझसे नहीं खुली। चाची हंस पड़ी और अपने आप अपनी ब्रा उतार दी।
उनके बूब्स देख कर मैं पागल हो गया, उफ़्फ़ ! इतने बड़े ! मैंने एकदम अपने मुंह में ले ली और चाची अजीब अजीब आवाज़ें निकालने लगी। मैंने उनके लाल लाल निप्पल चूस चूस कर बड़े कर दिए।
तब चाची ने कहा कि मुझे किस दो। मैं फ़ौरन उन के होंटों की तरफ़ बढा तो उन्होंने कहा- यहां पर नहीं ! नीचे ! मैंने कहा कि वहां पर मैं कैसे किस कर सकता हूं, तो उन्होंने कहा कि मैंने तो भी तुम्हारे लण्ड को चूसा था, अब तुम्हारी बारी है।
मैंने कहा- अच्छा ! कोशिश करता हूं!
फ़िर मैंने चाची की साड़ी खोली, पेटिकोट भी उतार दिया। अब वो मेरे सामने बिल्कुल नंगी खड़ी थी। मैंने उन को बेड पर लिटाया और उनकी चूत पर हल्के से किस की। मुझे बड़ा मज़ा आया। मैंने फ़ौरन अपनी जीभ उनकी चूत के होंटों पर रख दी और रगड़ने लगा।
उनकी सिसकारियां निकल गई लेकिन वो कह रही थी कि ” सन्नी ! खा जाओ मेरी चूत को ! मैं बहुत दिनों से प्यासी हूं ! मेरी चूत का पानी पी लो ! मुझ से बरदाश्त नहीं होता आह ह्ह आ आऽऽ यस फ़क मी यू बास्टर्ड यू मदर फ़कर ऽऽऽ”
मैं सोच रहा था कि कैसे मां की लोड़ी गालियां दे रही है. मुझे चाचा की किस्मत पर रश्क हो रहा था। वो रोज़ कैसे मजे से चाची को बजाते होंगे. कुछ देर बाद चाची की चूत में से भी मनी निकली।
मैं बहुत हैरान हुआ कि लेडीज़ की भी मनी निकलती है।
हम दोनो एक दूसरे से लिपट कर बेड पर लेट गए। मैंने उन से पूछा कि क्या आपने शादी से पहले किसी के साथ सेक्स किया था? उन्होंने कहा कि यह मैं बाद में बताऊंगी, पहले मेरी चूत को ठण्डी तो कर।
मैंने कहा कि ठीक है मेरा लण्ड दोबारा चूसें।
चाची ने कहा कि ६९ पोज़ीशन में हो जाओ।
मैंने कहा- यह क्या होता है तो वो कहने लगीं कि सीधे लेट जाओ। मैं सीधा लेट गया, वो मेरे ऊपर इस तरह लेटीं कि उनका मुंह मेरे लण्ड की तरफ़ और उनकी चूत मेरे मुंह की तरफ़।
फ़िर उन्होंने कहा कि यह है ६९ पोज़ीशन। अब तुम मेरी चूत चाटो, मैं तुम्हारा लण्ड चूसती हूं।
हम दोनो चूसना और चाटना शुरू हो गए। ५-१० मिनट बाद मेरा लण्ड फ़िर से खड़ा होने लगा था। पता नहीं उनके चूसने में क्या जादू था कि मेरा लण्ड इतना खूबसूरत कभी नहीं लगा।
मैंने कहा- क्या आप की चूत में डाल दूं?
उन्होंने कहा कि देर क्यों कर रहे हो, आ जाओ, लेकिन एक मिनट रुको, वो बेड से उठी और मेज़ की दराज़ से कन्डोम का पैकेट निकाला और मेरे लण्ड पे चढा दिया और कहा- मैं प्रेग्नैन्ट नहीं होना चाहती।
फ़िर उन्होंने मेरे लण्ड पर क्रीम लगाई और कुछ अपनी चूत पर भी लगाई और घोड़ी बन गई और कहा कि मेरे अन्दर आ जाओ मेरी जान ! मैंने अपने लण्ड की टोपी उनकी चूत पर रगड़ी।
चाची ने कहा कि क्यों तड़फ़ा रहे हो, जल्दी से मेरे अन्दर डाल दो। मैंने एक जोरदार धक्का लगाया तो चाची की चीख निकल गई। उन्होंने कहा – आराम से डालो।
मैंने आराम से धीरे धीरे करना शुरू कर दिया तो वो कहने लगी – मादरचोद ! बहनचोद ! चोद दे मुझे ! मेरी चूत फ़ाड़ दे आ आहऽऽऽ आ मज़ा आ रहा है, जोर से करो। अब मैं जोर से करने लगा। कुछ देर बाद मैंने अपना लण्ड उनकी चूत में से निकाल लिया तो उन्होंने पूछा कि क्या हुआ? मैंने कहा कि मैं अपने अन्दाज़ में करना चाहता हूं। चाची ने कहा- तुम जो चाहो करो।
मैंने चाची को गोद में उठाया और अपना लण्ड उनकी चूत में डाल कर उनको उछालने लगा। मुझे बहुत मेहनत करनी पड़ी मगर इस अन्दाज़ में मुझे बहुत मज़ा आ रहा था।
दस मिनट में मैंने चाची से कहा कि मेरी निकलने वाली है तो उन्होंने फ़ौरन मेरा लण्ड निकाल कर उस पर से कन्डोम हटा दिया और अपने मुंह में ले कर चूसने लगी। मेरी मनी फ़िर निकल गई।
कुछ देर बाद मैंने चाची से कहा कि मैं आपको फ़िर चोदना चाहता हूं।
उन्होंने कहा कि सब्र करो, अब कल करेंगे, हमारे पास पूरा एक हफ़्ता है।
मैंने कहा- अब आप अपनी कहानी मुझे सुनाएं।
उन्होंने कहा- मैंने सेक्स अपनी बहन के साथ किया था जिस का नाम सनम है। मैंने कहा कि आप उसी को बुला लीज़िए, मैं उसको भी मज़ा दे सकता हूं।
यह उस समय की बात है Antarvasna Stories जब मैं पढ़ता था। गर्मियों के दिन थे, मैं अपनी एक कॉपी अपनी अंग्रेजी की टयूशन टीचर के घर पर भूल आया था। मैं दोपहर को दो बजे अपनी कॉपी लेने टीचर के घर गया।
पहले मैं यह बता दूँ कि मेरी टीचर की उमर 30-32 साल के आस पास होगी और वो शादीशुदा हैं। जब भी मैं टयूशन जाता था तो वो मुझे अजीब नज़रों से देखती थीं और जब भी मौका मिलता था तब मुझको अपने से चिपका लेती थीं।
जब मैं उनके घर पंहुचा तो दरवाज़ा खुला हुआ था। मैं दरवाज़ा खोल के अन्दर गया और मैडम के कमरे में घुस गया। मैंने देखा कि वो पारदर्शी सलवार और कुरते में लेटी हुई थीं। उन्हें देखते ही मेरा लंड खड़ा हो गया। मैंने उन्हें नमस्ते की और उनके पास जाकर बैठ गया। मैंने उन्हें बताया कि मेरी कॉपी रह गई थी और मैं उसी को लेने आया हूँ।
वो टीवी पर एक फिल्म देख रही थीं, तभी उसमें एक गरम दृश्य आ गया। उन्होंने कस कर मेरा हाथ पकड़ लिया और उसे दबाने लगीं। मेरा तो वैसे ही हाल बुरा था और अब तो मेरी धड़कने और भी तेज़ हो गई।
उन्होंने उठ कर अपने कमरे का दरवाज़ा बंद कर दिया और मुझसे बोलीं- हाय! मैं तो कबसे इस इंतज़ार में थी कि तुम मेरी प्यास बुझाओ। मेरे पति तो हमेशा बाहर रहते हैं और मैं तड़पती रहती हूँ मैं भी अपनी मैडम की एक बार लेना चाहता था और आज मुझे मौका मिल गया।
वो मेरे पास आकर बैठ गईं और मेरी पैंट के ऊपर से ही मेरे लंड को मसलने लगीं। मैं भी अपने हाथों से उनकी चूचियाँ दबाने लगा और अपने होंठ उनके लाल-लाल होठों पर रख दिए। वो मेरे होंठ चूसने लगीं। मैंने इससे पहले कभी किसी के साथ सेक्स नहीं किया था।
करीब दस मिनट तक यही चलता रहा। फिर उन्होंने मेरी पैंट खोल दी और मेरे लंड को बाहर निकाला। हालाँकि मैं बहुत छोटा था पर मेरा लंड तब भी काफी बड़ा और मोटा था। वो मेरे लंड को देख कर चौंक गईं, बोलीं- तुम्हारा लंड तो मैंने जितना सोचा था उससे भी बड़ा है!
और यह कहते हुए उनहोंने मेरे लंड पर अपना मुँह लगा दिया। वो काफी देर उसे चूसती रहीं।
फिर मैंने उनसे कहा- बस यही करना है क्या?
और मैंने उनके कपड़े उतारने शुरू कर दिए। जैसे ही मैंने उनकी ब्रा खोली, उनकी चूचियाँ उछ्ल कर बाहर आ गईं, मैं तो दंग ही रह गया। इतनी बड़ी चूचियाँ मैंने पहली बार देखी थीं। मैंने झट से उन्हें मुँह में ले लिया और चूसने लगा। मैंने उनकी पैंटी के अन्दर हाथ डाला और उनकी चूत को रगड़ने लगा।
वो मस्त हो कर आह ऊई ओह! चिल्लाने लगी।
फिर उन्होंने भी मेरे कपड़े उतार दिए। अब हम दोनों बिलकुल नंगे थे।
मैंने उनसे कहा- मुझे सेक्स करना नहीं आता!
तो उन्होंने कहा- मैं सिखा दूंगी।
फिर उन्होंने मुझे उनकी चूत चाटने को कहा।
पहले तो मैंने मना किया कि मुझे यह गन्दा लगता है, पर बाद में मैं मान गया। मैंने अपने नरम नरम होंठ उनकी चूत पर लगा दिए और कस-कस के चूसने लगा। वाह क्या खुशबू थी।
मैं अपनी जीभ उनकी चूत में अन्दर-बाहर करने लगा। वो पलंग पर लेटी हुई सिसकियाँ भर रहीं थीं। मैं उनके ऊपर गया और उनके होंठ चूसने लगा, साथ ही साथ अपनी ऊँगली उनकी चूत में डाल कर हिला रहा था, तभी मेरे हाथ में कुछ पानी सा आने लगा। मैंने देखा कि मैडम झड़ चुकी थीं। मैंने उनकी चूत का पानी अमृत जल समझ कर चाट लिया।
फिर हम उठे और मैडम मेरे लंड को पकड़ कर हिलाने लगीं। मेरा लंड लोहे की तरह सख्त था। फिर वो अपनी टांग चौड़ा कर लेट गई। मैं समझ गया कि अब क्या करना है क्यूंकि मैं काफी ब्लू फिल्म देख चुका था।
मैंने अपना लंड उनकी चूत में डाल दिया। वो आहह्ह्ह ऊहहह करने लगीं। क्यूंकि वो पहले चुद चुकी थीं इसलिए मेरा लंड आसानी से अन्दर चला गया। फिर मैं उन्हें झटके देने लगा। सारा कमरा फच-फच की आवाजों से गूंज उठा। मैडम भी मस्त होकर सिसकियाँ भरने लगीं। उसी में मैडम दो बार और झड़ गईं।
तभी मुझे लगा कि मेरा लंड फूल रहा है और बाहर नहीं आ पा रहा है।
मैंने मैडम को बताया तो उन्होंने कहा- तुम पानी छोड़ने वाले हो!
मैंने कहा कि उससे तो आप प्रेग्नेंट भी हो सकती हो!
तो वो मेरे भोलेपन पर हंसती हुई बोलीं- कोई बात नहीं! मैं तो एक हफ्ते पहले ही अपने पति से चुदी हूँ! किसी को शक नहीं होगा!
इसी बीच मैंने पानी छोड़ दिया और निढाल होकर एक ओर लुढ़क गया। पर अभी भी थोड़ा सा पानी मेरे लंड में बचा था। मेरी मैडम ने मेरा लंडा हिलाया तो एक ज़ोरदार धार निकली और मेरा अमृत रस उनके मुहँ में भर गया। फिर उन्होंने मेरा लण्ड और जांघ चाट कर साफ़ किये। फिर मुझे बाथरूम में ले जा कर नहलाया और नहाते समय भी मज़े लिए।
मैंने भी नहाते समय उन्हें खूब रगड़ा। फिर मैं अपनी कॉपी लेकर घर चला गया।
उसके बाद भी मैंने उन्हें कई बार चोदा पर बाकी कहानी अगले अंक में!
आपसे विदा लेता हूँ!!
धन्यवाद। Antarvasna Stories
नमस्कार मित्रो,
सबसे पहले Antarvasna के सभी पाठकों का धन्यवाद जो सभी को मेरी कहानी पसंद आ रही है। मेरी अब तीन रचनाएँ प्रकाशित हो चुकी हैं :
पहला आनन्दमयी एहसास, सुहागरात और सपनों से हकीकत का सफर !
आप सभी के ढेरों मेल मिल रहे हैं, पढ़ कर और लिखने का मन करता है। नए पाठकों के लिए मेरा परिचय- मेरा नाम बाबा है और अभी मैं 27 साल का नौजवान हूँ। मैं जयपुर, राजस्थान का रहने वाला हूँ।
आज आप सभी के लिए सेक्स से होने वाले फायदे के बारे में अवगत करवा रहा हूँ और आप सभी पाठक अगर मुझसे सहमत हैं तो मुझे अपनी प्रतिक्रिया जरूर भेजें।
सेक्स क्या है? और कैसे होता है इसके बारे में सब के सब जानते हैं, आज छोटे बच्चों को भी इसका ज्ञान होने लगा है पर सेक्स करने से क्या फायदा हो सकता है इसका ज्ञान शायद ही हर किसी को होता है।
सेक्स के बारे में जानने की जिज्ञासा बहुत से लोगों में होती है पर हर कोई सेक्स के बारे में जान नहीं पाता। खासकर महिलाएँ, क्यूंकि वो जानने की इच्छुक तो रहती हैं पर समाज का डर और अपने परिवार की बदनामी का डर उन्हें ये सब जानने के लिए रोक देता है।
बेहतर सेक्स आत्मसम्मान से शुरू होता है और यह आत्मसम्मान को बढ़ाता भी है। जिनके अंदर आत्मसम्मान पहले से ही होता है उन्हें सेक्स के बाद अलग किस्म की खुशी महसूस होती है।
काफी लोग ऐसे हैं जो अच्छा महसूस करने के लिए सेक्स करते हैं। सेक्स शारीरिक और भावनात्माक लाभ भी देता है।
सेक्स करने से पहले खुद को भ्रमित ना करें। सेक्स न केवल आनन्ददायक हैं बल्कि रिश्तों को भी मज़बूत बनाने वाला होता है। सेक्स हमारे स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद होता है क्यूंकि सेक्स एक तरह योगा है। अगर सेक्स को सही रूप से किया जाए तो आप शरीर निरोगी काया रहेगा। यही नहीं, सेक्स की गिनती सबसे उपयुक्त व्यायामों में भी की जाती है।
सेक्स अब एक ऐसा विषय हो गया है जिस पर लोग खुलकर बात करने लगे हैं। पहले लोग इस विषय पर बात करने से कतराते थे विशेष तौर पर महिलाएँ, लेकिन अब महिलाएँ भी इस विषय पर खुलकर बात करने लगी हैं।
सेक्स को लेकर अभी भी कई तरह की भ्रांतियाँ फैली हुई है लेकिन असल में सेक्स हर लिहाज से फायदेमंद ही साबित होता है। सेक्स के ऊपर कई तरह के शोध और अध्ययन हो चुके हैं जो यह सिद्ध करते हैं कि सेक्स फायदेमंद होता है।
दोस्तो, सेक्स किस तरह से हमारे लिए फायदेमंद है यह जानना शायद आपके लिए आश्चर्य भरा हो सकता है।
क्यूंकि जो सेक्स को नहीं समझते कि यह सम्पूर्ण जीवन तथा सम्बन्धों की गुणवत्ता के लिए काफी फायदेमंद हो सकता है उनके लिए सेक्स परेशानी और घृणा का विषय होता है।
इसलिए सेक्स करने से पहले खुद को सेक्स के लिए तैयार करे और कोशिश करे जानने की सेक्स करने से हमें क्या क्या फायदा हो सकता है पर एक जरूरी बात सेक्स को मजाक के रूप में ना लेकर रिश्तों को मजबूत और खुद के स्वास्थ्य को अच्छा बना सके इस तरह की सोच के साथ सेक्स करे। हजारों कहानियाँ हैं अन्तर्वासना पर !
सेक्स जैसे विषय में हर कोई अपने आप ही जुड़ जाता है और ज्यादातर लोग जताना भी नहीं चाहते हैं। सेक्स को लेकर कई गलतफहमियाँ भी मौजूद हैं। लेकिन असल में सेक्स हर लिहाज से फायदेमंद ही साबित होता है। सेक्स से हेल्थ पर काफी असर पड़ता है। देखते हैं कि सेक्स करने के फायदे क्या हैं !
नियमित सेक्स करने से आपका शरीर तनावपूर्ण दशाओं का बेहतर सामना करने के लिए तैयार होता है। सेक्स रक्तचाप में मस्तिष्क और शरीर का तनाव घटाने में मदद करता है। और आपका ब्लड प्रेशर बढ़ने नहीं देता।
तनाव का सामना करने के लिए सेक्स क्रिया का प्रवेश (योनि में लिंग का प्रवेश) होना ज़रूरी नहीं है। सेक्स के अलावा जैसे आलिंगन और अंतरंग गर्माहट के पल भी बहुत सहयोग देते हैं। सेक्स से आपको रोजमर्रा के जीवन में स्थितियों का बेहतर ढंग से सामना करने में मदद मिलती है।
24 महिलाओं और 22 पुरुषों पर की गई स्टडी में पाया गया कि जो लोग नियमित सेक्स करते रहे, तनाव के प्रति उनका रिस्पॉन्स बेहतर रहा।
सेक्स के दौरान आपके शरीर की सभी मांसपेशियाँ खिंचती और खुलती हैं। सेक्स से मोटापा घटाने में भी मदद मिलती है। सेक्स आपकी अतिरिक्त कैलोरी घटाने में मदद करता है और यह व्यायाम करने का सबसे आनन्ददायक तरीका है।
पूरी क्षमता से की गई एक बार सेक्स क्रिया से उतनी कैलोरी घट जाती है जितनी कैलोरी पन्द्रह मिनटों तक ट्रेड मिल पर ब्रिस्क वॉक करने पर खर्च होगी। आधे घंटे के सेक्स से 85 कैलरीज बर्न होती हैं। हालांकि 85 कैलरीज ज्यादा नजर नहीं आती हैं।
प्यार करने वाले साथी की निकटता और चरमसुख की ओर बढने का आनन्द दोनों मिलकर प्यार के हॉर्मोन ‘ऑक्सीटोसिन’ का स्तर ब्ढ़ा देते हैं जिससे आपसी सम्बन्ध और रिश्ते मजबूत होते हैं।
सेक्स के सही तरीकों से आपके पार्टनर से आपके रिश्तों में मजबूती आती है, इस प्रकार से सेक्स के सही तरीकों से आप न सिर्फ अपने साथी के साथ अपने रिश्तों में मजबूती ला सकते हैं बल्कि शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ भी रह सकते हैं।
कल्पनाशील बनिए ! शरारती बनिए ! कुछ नया करने की सोचिए ! देखिए आपकी जिंदगी किस तरह से उमंगों से भर जाती है और आपके साथी में आपके लिए कैसी दीवानगी और कैसा जुनून पैदा करती है और आपके रिश्तों में भी मजबूती प्रदान होगी। सेक्स उन्मुक्ति को बढ़ाता है और एक अलग ही आनन्द का अनुभव कराता है।
सेक्स एक योग है अगर सही रूप और सही तरीके से अगर सेक्स किया जाए तो यह एक दवा के रूप में भी असर करता है। सेक्स ऑक्सीटोसिन हॉर्मोन का स्तर बढ़ाता है जिससे सिरदर्द, जोड़ों के दर्द और यहाँ तक कि मासिकधर्म पूर्व लक्षणों में भी राहत मिलती है।
सेक्स रक्त संचार को कन्ट्रोल करने में मदद करता है और कोलेस्ट्रॉल का स्तर ठीक करता है। सेक्स क्रिया के दौरान हृदय तेज गति से धड़कता है और ज्यादा मात्रा में रक्त को पम्प करता है जिससे रक्त संचार तेज होता है। सप्ताह में दो या तीन बार सेक्स करने से हार्टअटैक से पीड़ित होने का खतरा कम हो जाता है।
अगर आप पारिवारिक समस्या या दफ्तर के तनाव से जूझ रहे हैं तो सेक्स दवा की तरह काम करता है। न केवल यह मूड ठीक करता है बल्कि आपके सही फैसले लेने की क्षमता भी बढ़ाता है।
सेक्स करने के ढ़ेरों फायदे हैं तो आगे से सेक्स को महज़ आनन्द देने वाली क्रिया ही ना समझें बल्कि यह सेहत से सीधे तौर पर जुड़ा मसला है अगर आप जिम जाने में आलस्य महसूस कर रहे हैं और आधे घंटे की ब्रिस्क वॉकिंग से भी बचना चाहते हैं तो सेक्स से बेहतर विकल्प कुछ भी नहीं है।
यौन संबंध बनाने की क्रिया से कमर की चर्बी घटती है। रिसर्च के मुताबिक अंतरंग क्षणों में बिताए आधे घंटे से 80 कैलोरी उर्जा का निकास होता है। एक नए रिसर्च के मुताबिक रोजाना सेक्स सेहत के लिए फायदेमंद है।
हर रोज सेक्स से न केवल नींद अच्छी आती है बल्कि यह तनाव घटाता है और कैलोरी या कहें मोटापा कम करने में मददगार है। रोजाना सेक्स महिलाओं और पुरूषों दोनों की त्वचा को तरोताजा रखने में मदद करता है, झुर्रियाँ कम बनती हैं। त्वचा को प्राकृतिक चमक इससे मिल सकती है।
सेक्स एक तरफ जहाँ वैवाहिक संबंधों को दृढ़ता प्रदान करता है वहीं यह कई बीमारियों को कम करता है। इनमें संक्रमण से होने वाली बीमारियाँ शामिल हैं। निरंतर सेक्स से गठिया, सिर दर्द जैसे अनेको बीमारियों से राहत मिल सकती है।
सेक्स महिलाओं में कैंसर, सिस्टस जैसी बीमारियों के भी खतरे को भी कम करता है। सेक्स महिलाओं की पैल्विक मांसपेशियों को मजबूत बनाता है क्योंकि इससे पैल्विक मांसपेशियों का व्यायाम होता है, जिससे महिलाओं में असंयम का जोखिम कम हो जाता है।
खुशहाल सेक्सुल जीवन से तनाव कम होता है और व्यक्ति को खुश रखने में मदद करता है। सेक्स प्रक्रिया से रक्तचाप भी कम होता है, सेक्स से रक्तचाप नियंत्रित रहता है और कई प्रकार की बीमारियों से मुक्ति मिलती है। सेक्स हृदय को भी मजबूत बनाता है।
इससे दिल से जुड़ी बीमारियों की संभावना कम होती है। इसलिए एक सप्ताह में दो बार या दो से अधिक बार सेक्स करने से महिलाओं में घातक दिल के दौरे की संभावना कम हो जाती है।
वैसे तो फिट रहने के लिए मॉर्निंग एक्सरसाइज़ के अलावा अगर आप मॉर्निंग सेक्स करें तो आप फिट और फाइन रहेंगे। मॉर्निंग में सेक्स आपको एक स्वस्थ हृदय देता है। वैसे मॉर्निंग सेक्स के और भी कई फायदे हैं, जो आपके स्वास्थ्य को अच्छा बनाए रख सकता है। त्वचा को प्राकृतिक चमक इससे मिल सकती है।
माइग्रेन के दर्द से छुटकारा मिलता है। मॉर्निंग सेक्स शरीर में ब्लड सर्कुलेशन को बेहतर बनाता है, जिससे ब्लड प्रेशर कम होता है। जोड़ों का दर्द, खासकर आर्थ्राइटिस जैसी समस्या को कम कर सकता है।
सेक्स आपके शरीर से कुछ ऐसे हॉर्मोन्स रिलीज़ करता है, जो बालों को चमकदार और सिल्की बनाता है। सुबह उठने और खुद को एनर्जी से भरपूर रखने का सबसे बढ़िया तरीका यही हैं।
और अधिक जानकारी चाहिए सेक्स के विषय पर तो आप मुझसे मेल करके पूछ सकते हैं, आपको हर तरीके के सेक्स की जानकारी में जरूर उपलब्ध करवाऊँगा।
पर उन पाठकों को मेरी तरफ से एक छोटी सी प्रार्थना है कि कृपा करके मुझे फालतू की मेल ना करें जैसे कि ‘मेरा भी जुगाड़ करवा दो या किसी की दिलवा दो’ ये सब भेज कर आप मेरा समय ना बर्बाद करें, क्यूंकि अभी में भी अपने जीवन में अकेला ही सफर कर रहा हूँ।
हाँ, आपको कुछ भी Antarvasna जानना हो तो जरूर मुझसे सम्पर्क करें, आपको हर तरह की सम्पूर्ण जानकारी देने की जरुर कोशिश रहेगी। धन्यवाद।
लीजिए एक और नई कहानी Indian Sex Stories आपकी खिदमत में पेश है। यह कहानी मुझे मेरी एक सहेली ने सुनाई थी, सो मैं आपको सुनाता हूँ।
बात कोई ज्यादा पुरानी नहीं है, मैं नेहा अग्रवाल, मेरी शादी मई, 2006 में कवीश से हुई थी। कवीश एक सजीला मर्द था और कामयाब बिज़ेनेस्मैन भी। दो साल तक उसने मुझे शादी का भरपूर सुख दिया, एक मासूम सी बेटी भी दी और मेरी कोई भी तमन्ना
उसने अधूरी नहीं छोड़ी थी।
मैं अपनी ज़िन्दगी से बहुत खुश थी कि अचानक एक दिन कार दुर्घटना में कवीश की मौत हो गई।
मेरे लिए यह ज़िन्दगी का सबसे बड़ा सदमा था। 2-4 महीने तो रोते-रोते बीत गए पर असली परेशानी तो उसके बाद शुरू हुई। दिन तो जैसे तैसे बीत जाता था पर रात को तो नींद ही नहीं आती थी। कवीश की कमी अब मुझे सबसे ज़यादा महसूस हो रही थी। सिरहाने को बाँहों में भरने से भी मज़ा नहीं आता था।
अब मैं क्या करूँ ! किससे अपने दिल का हाल बयां करूँ ! अपनी बड़ी बहन को बताया तो उसने भी कन्नी काट ली के कहीं मैं अपनी प्यास बुझाने के लिए उसके पति को ही न पटा लूं। सारा दिन घर में रह कर भी काम नहीं चलता था। अपनी ऊँगली से या और चीज़ों से खुद को संतुष्ट करना चाहा पर मज़ा नहीं आया। हालात इतने बिगड़ गए कि मैं अक्सर अपने कमरे में नंगी घूमती रहती थी, पर इस से भी कोई लाभ नहीं हुआ।
एक बार तो घर में आने वाले सेलमैन को पटाने के लिए मैं सिर्फ एक पतली सी नाइटी में उस से कितनी देर बातें करती रही। वो भी मेरे बदन को घूरता रहा पर साले ने ज़रा भी हिम्मत नहीं दिखाई। मैंने उसे खुली बात भी कही कि मुझे तुम्हारा सामान नहीं कुछ और दमदार चीज़ चाहिए जो तुम्हारी पैंट में है, पर वो बोला- सॉरी मैडम मैं सिर्फ सामान ही बेचता हूँ !
मैं सोच कर हैरान रह गई कि कोई कैसे एक भरपूर जवान, गोरी चिट्टी, सुंदर औरत की पेशकश ठुकरा सकता है। खैर जब कहीं बात नहीं बनी तो एक दिन मैं अपने चाचा ससुर के घर गई।
उनका एक बेटा सुरेश था जो करीब मेरी ही उम्र का था पर था भोंदू राम। वो जिस तरह होते हैं न बुद्धू किस्म के बड़े ही सीधे साधे से, वैसा ही था। इसी वजह से उसकी अभी तक शादी भी नहीं की थी कि यह घर गृहस्थी का बोझ कैसे उठा पायेगा, इसे तो दो और दो चार करने भी नहीं आते।
खैर एक हट्टे कटते मर्द को देख कर चाहे वो भोंदू ही सही, पर मेरे मन में कुछ हुआ। दो तीन दिन रहने के बाद जब मैं वापिस आने लगी तो मैंने अपने चचिया ससुर से कहा- अगर कुछ दिन के लिए सुरेश मेरे साथ रहने चले तो मुझे अच्छा लगेगा।
तो उन्होंने खुशी खुशी उसे मेरे साथ भेज दिया, बिना यह जाने कि मेरे दिल में क्या है।
मैंने रास्ते में ही सारी योज़ना बना ली थी। जिस दिन हम घर पहुँचे, रात का खाना खा कर मैंने उसे अपने साथ ही सुला लिया।
एक गहरे गले वाली पतली सी नाईटी पहन कर मैं उसके सामने लेट गई। मैं चाहती थी कि वो मेरा बदन देखे। अपनी बेटी को दूध पिलाने के बहाने मैंने जानबूझ कर अपनी भरी पूरी चूची निकाल कर उसे दिखाई। पर वो तो ऐसे शरमा रहा था जैसे छोटा बच्चा हो।
खैर मैंने बातों बातों में उस से पूछा- सुरेश ! क्या मैं तुम्हें अच्छी लगती हूं?
वो बोला- हाँ भाभी ! आप बहुत अच्छी हो !
मैं बोली- कहाँ से? यहाँ से ! यह कह कर मैंने अपने गाल पर उंगली रखी।
वो बोला- जी भाभी !
और यहाँ से भी? यह कह कर मैंने अपने स्तन पर उंगली रख कर उससे पूछा।
तो वो शरमा कर बोला- भाभी ! आप बड़ी वो हो !
जब मेरी बेटी सो गई तो मैंने कहा- देख सुरेश ! ज़ीजिया तो दूध पीकर सो गई ! क्या तू भी सोने से पहले दूध पीना चाहेगा?
पर वो बदतमीज़ बोला- नहीं भाभी ! मैं ऐसे ही सो जाऊँगा !. आप मुझे तंग मत करो।
और यह कह कर वो मेरी तरफ़ पीठ करके सो गया। मुझे लगा कि यार मेरी तो सारी योजना ही चौपट हो गई। खैर ! मैं भी सो गई।
सुबह उठी तो देखा की सुरेश अभी सो रहा था मगर उसके पायजामे से उसका तना हुआ लण्ड ऊपर उठा हुआ था। यह तो मेरे सब्र की इन्तहा थी। मैं चुपके से उठ के उसके पास गई और धीरे धीरे से उसके पायजामे का नाड़ा खोला। पायजामे के नीचे उसने चड्डी पहन रखी थी, मैंने धीरे से उसकी चड्डी हटाई तो अंदर एक कुल्हाड़ी के दस्ते जैसा मोटा लम्बा लण्ड खड़ा था।
मैंने बड़े प्यार से उसका लण्ड अपने हाथ में पकड़ कर बाहर निकाला, उसे चूमा। उसके बाद कब मेरी आँखें बंद हो गई और कब उसका लण्ड मुंह में लेकर चूसने लगी, मुझे कुछ पता नहीं चला।
मैं चूसती गई, चूसती गई, मैंने सुरेश के जिस्म में हलचल महसूस की पर मैं आँखें खोल कर देखने की हालत में नहीं थी और तभी बिजली सी कौंध गई, सुरेश ने पानी छोड़ दिया जिससे मेरा सारा मुंह, सर के बाल गर्दन, छातियाँ भीग गए। जैसे कोई बांध टूटा है ऐसे सुरेश झड़ा।
उसका कुछ माल तो मेरे मुंह के अंदर भी चला गया। मैंने नज़र उठा कर देखा, सुरेश बड़ा परेशान सा लग रहा था।
वो बोला- भाभी आप बड़ी गन्दी हो, मेरे साथ गन्दा काम करती हो !
मैंने कहा- तुम्हें किसने कहा कि यह गन्दा काम है? देखो तुम्हें मज़ा आया ! आया या नहीं?
उसने सर हिला कर हाँ कहा।
मैंने कहा- आओ चलो, नहा कर आते हैं।
मैंने उसका हाथ पकडा और बाथरूम में ले गई। वहां मैंने उसको खुद नहलाया और जानबूझ कर उसके सामने पूरी नंगी हो कर नहाई। उससे अपने जिस्म पर साबुन लगवाया ताकि उसमें औरत के जिस्म के लिए चाहत पैदा हो। नहाकर हम बाहर निकले। फिर दिन में मैं उसे बाज़ार भी घुमा कर लाई, उसकी पसंद की चीजें भी उसे लेकर दी। दोपहर का खाना खा कर जब हम आराम कर रहे थे तो मेरी बेटी सोने के लिए जिद करने लगी। मैंने बिना किसी संकोच के सुरेश के सामने ही अपनी शर्ट उतारी और अपनी ब्रा में से एक स्तन बाहर निकल कर उसे दूध पिलाने लगी। सुरेश मेरे सामने बैठा ये सब देख रहा था। मैंने उससे पूछा- अरे सुरेश, क्या देख रहा है?
कुछ नहीं भाभी, वो बोला।
मैंने पूछा- दूध पिएगा?
तो वो शरमा गया। मैंने उसे अपने पास बुलाया और अपनी ब्रा हटा कर अपनी दूसरी चूची उसके सामने करके बोली- ले पीकर देख !
पहले तो वो शरमा गया, पर जब मैंने उसका सर पकड़ कर अपने स्तन से लगाया तो उसने धीरे धीरे चूसना शुरू कर दिया। जब ज़ीनिया सो गई तो मैंने अपनी ब्रा भी उतार कर फ़ेंक दी और सुरेश से कहा- ऐसे मज़ा नहीं आएगा, मैं बताती हूँ कि कैसे पीना चाहिए।
यह कह कर मैंने उसे अपनी दोनों टांगों के बीच में ले लिया और उसके दोनों हाथ में अपने स्तन पकड़ा कर कहा- अब इन्हें चूसो !
उसने ऐसे ही किया। मैंने नीचे से अपनी कमर हिलानी शुरू की मैंने महसूस किया कि उसका लण्ड अकड़ने लगा था। जब उसका लण्ड पूरा तन गया तो मैंने कहा- सुरेश और मज़ा लेगा?
तो वो शरमा गया पर सर हिला कर उसने हाँ कह दी। मैंने अपनी सलवार उतारी और अपनी चूत उसके सामने खोल कर दिखाई और उसके लण्ड को पकड़ कर बोली- इसको इसमें डाल कर आगे पीछे करते हैं तो बहुत मज़ा आता है, बोल करेगा?
उसने फिर सर हिलाया तो मैंने झट से उसकी पैंट, शर्ट, बनियान और चड्डी उतार दी। मैंने उसका लण्ड पकड़ कर अपनी चूत पे रगड़ा तो वो बोला- भाभी ! वैसे करो जैसे सुबह किया था।
मैंने हंस कर कहा- क्यों मज़ा आया था न !
वो बोला- हाँ !
तो मेरे राजा अगर सुबह वाला काम करवाना है तो तुम्हें भी कुछ करना पड़ेगा, अगर मैं तुम्हारा चूसूंगी तो तुम्हें भी मेरी चाटनी पड़ेगी !
वो तैयार तो हो गया पर जब उसने मेरी चूत में मुंह लगा कर चाटा तो बोला- थू ओ ! ये तो गन्दा स्वाद है !
खैर मैंने उसे मजबूर नहीं किया, कुछ देर उसका लण्ड चूसने के बाद मेरी अपनी हालत बड़ी ख़राब हो रही थी सो मैंने उसकी पोसिशन अपने ऊपर सेट की और उसका लण्ड अपनी चूत पर रख कर उसे अंदर डालने को कहा।
उसने सी सी करते हुए अपना लण्ड मेरी चूत में डाला मगर वो ढंग से चोद नहीं पा रहा था।
मैंने सोचा- ऐसे तो मज़ा नहीं आएगा। यह चोद कम रहा है और हाय तौबा ज्यादा मचा रहा है।
फिर मैंने कमांड संभाली, उसे नीचे लिटा कर खुद ऊपर आ गई। चूत में लण्ड लेकर मैंने खुद ही चुदाई शुरू की। वो नीचे से हाय तौबा करने लगा तो 2 चांटे लगाये उसके और पूरे जोर से चुदाई करती रही और तब तक करती रही जब तक मैं झड़ नहीं गई। पर वो मर्द का बच्चा अभी खड़ा था सो मैंने अपनी तसल्ली होते ही नीचे उतार कर उसका लण्ड अपने मुंह में ले लिया और अपनी चूत 69 बनाते हुए उसके मुंह पर रख दी। बेशक उसने मेरी चूत नहीं चाटी पर मैं अपनी चूत उसके मुंह पर रगड़ती रही और उसका लण्ड चूसती रही और तब तक चूसती रही जब तक वो झड़ नहीं गया।
जोश ही जोश में मैं उसका सारा माल चट कर गई और संतुष्ट हो कर बेड पर लुढ़क गई क्योंकि आज मेरी तमन्ना पूरी हो गई थी। उसके बाद सुरेश मेरे पास 15 दिन और रहा और हमने तकरीबन रोज 2-3 बार सेक्स किया और हर स्टाइल से किया। मेरी इस सेक्स-शिक्षा का असर यह हुआ कि भोंदू राम को अकल आ गई और आज वो अपनी शादी शुदा ज़िन्दगी जी रहा है। Indian Sex Stories
झांसी एक एतिहासिक नगर Antarvasna Sex Stories है, वहां के रहने वाले लोग भी बहुत अच्छे हैं … दूसरों की सहायता तहे दिल से करते है। मेरे पति के साथ मैं झांसी आई थी।
मेरे पति की नौकरी झांसी से लगभग 10 किलोमीटर दूर बी एच ई एल में थी, हम भोपाल से स्थानान्तरित होकर झांसी आये तो सबसे पहले हमने वहां किराये का मकान ढूंढा और जल्दी ही हमें कॉलोनी में मकान मिल भी गया। मकान मालिक ने अपने लड़के सुनील को हमारी सहायता के लिये लगा दिया था।
पहले दिन तो खाना वगैरह का इन्तजाम तो उसने ही कर दिया था। बड़ा ही हंसमुख था वो।
यह बात अलग है कि उसका इरादा आरम्भ से ही बहुत नेक था। एक जवान लड़की सामने हो तो उन्हें अपना मतलब पहले दिखने लगता था। मैं उसकी नजरें तो समझ चुकी थी पर वो ही तो एक हमारा मदद करने वाला था, उसे मैं छोड़ती कैसे भला।
एक-दो दिन में उसने हमारी घर की सेटिंग करवा दी थी और शायद वो भी अपने आप की सेटिंग मुझसे कर रहा था। उसे देख कर मुझे बड़ा ही रोमांच सा हो रहा था।
ललितपुर से सामान भी शिफ़्ट करना था। नई जगह थी सो मेरे पति ने सुनील को दो तीन दिन रात को घर पर सोने के लिये कह दिया था। उसकी तो जैसे बांछें खिल गई …
उसे मेरे समीप रहने का मौका मिल गया था। शाम को सुनील उन्हें अपनी मोटर बाईक पर बस स्टेण्ड छोड़ आया था। शाम ढल चुकी थी। जब वो लौट कर आया तो साथ में झांसी के सैयर गेट के मशहूर नॉन-वेज कवाब और बिरयानी भी ले आया था। सुनील का व्यवहार बहुत ही अच्छा था।
नये मकान में मैं घर पर अकेली थी और सुनील की नजरें मुझे आसक्ति से भरी हुई बदली हुई लग रही थी। मुझे भी अपने अकेले होने का रोमांच होने लगा था कि कहीं कोई अनहोनी ना हो जाये, जिसकी वजह से मेरा दिल भी धड़क रहा था।
जब दो भरी जवानियां अकेली हों और वो प्यासी भी हों तो मूड अपने आप बनने लगता है। मेरे दिल में भी बेईमानी भरने लगी थी, दिल में चोर था, सो मैं उससे आंखें नहीं मिला पा रही थी। उसकी तरफ़ से तो सारी तरकीबें आजमाई जा रही थी, बस मेरे फ़िसलने की देर थी।
पर मैंने मन को कठोर कर रखा था कि मैं नहीं फ़िसलूंगी। उसका लण्ड भी जाने क्या सोच सोच कर खड़ा हो रहा था जिसे मैं उसके पतले झीने पजामें में से उभार लिये हुये देख सकती थी। उसका प्यारा सा लण्ड बार बार मेरा मन विचलित किये दे रहा था। मेरा मन डोलने लगा था, मैंने अपनी रात के सोने वाली ड्रेस यानि ढीला सा गुलाबी पजामा और उस पर एक ढीला ऊंचा सा टॉप … अन्दर मैंने जानबूझ कर कोई पेण्टी या ब्रा नहीं पहनी थी। मतलब मात्र उसे मेरे स्तनों को हिला हिला कर रिझाना था, ताकि वो खुद ही बेसब्री में पहल करे। यूँ तो मेरा दिल यह सब करने को नहीं मान रहा था पर जवान जिस्म एक जवान लड़के को देख कर पिघल ही जाता है, फिर जब दोनों अकेले हों तो, और किसी का डर ना हो तो मन में यह आ ही जाता है कि मौके का फ़ायदा उठा लो … जाने ऐसा मौका फिर मिले ना मिले। आग और पेट्रोल को पास पास रख दो और यह उम्मीद करो कि कुछ ना हो।
सुनील भी मेरे पास पास ही मण्डरा रहा था। कभी तो मेरे चूतड़ों पर हाथ छुला देता था या फिर मेरे हाथों को किसी ना किसी बहाने छू लेता था। मेरे दिल में भी इन सब बातों से आग सी सुलगने लगी थी। वासना की शुरूआत होने लगी थी।
खाना भी ठीक से नहीं खाया गया। वो तो बस मेरे टॉप में से मेरे स्तनों को बार बार देखने की कोशिश कर रहा था। अब मुझे भी लग रहा था कि नीचे गले का टॉप क्यूँ पहना, पर दूसरी ओर लग रहा था कि इस टॉप को उतार फ़ेंक दूँ और अपनी नंगी चूचियाँ उसके हाथों में थमा दूँ।
रह रह कर मेरे बदन में एक वासना भरी सिरहन दौड़ जाती थी।
रात को वो मेरे कमरे में बातें करने के बहाने आ गया था, पर उसके चेहरे के नक्शे को मुझे समझने में जरा भी मुश्किल नहीं आई। वासना उसके चेहरे पर चढ़ी हुई थी। मैं बार बार नजरें चुरा कर उसके मोहक लण्ड के उभार को निहार लेती थी। बातों बातों में वो मुझे लपेटने लगा, और मैं उसकी बातों में फ़िसलने लगी।
मेरे झुकने के कारण मेरे मेरे टॉप में से स्तन भी बाहर छलके पड़ रहे थे। उसकी नजरें मेरे स्तन का जैसे नाप ले रही हो। मेरा दिल अब काबू में नहीं लग रहा था। बदन में झुरझुरी सी उठ रही थी।
“भाभी, लड़कों को लड़कियाँ इतनी अच्छी क्यूँ लगती हैं? चाहे वो शादीशुदा ही क्यूँ ना हो?”
“विपरीत सेक्स के कारण … लड़का और लड़की प्रकृति की ओर से भी एक दूसरे के लिये पूरक माने जाते हैं।” मैंने उसे उसी के तरीके से समझाया, ताकि वो मुझे ही अपना पूरक माने।
“भाभी, फिर भी लड़कियों के हाथ, पांव और जिस्म में बड़ा ही आकर्षण होता है, जैसे ये आपके ये पांव … ” सुनील ने अपना हाथ मेरे चिकने पांव पर फ़ेरते हुए कहा।
मेरा मन लरज उठा, जैसे किसी ने करण्ट लगा दिया हो। मेरी योनि में जैसे एक अजीब कुलबुलाहट सी हुई।
“अरे छू मत … मुझे कुछ होता है … !” मैंने अपने हाथ से उसका हाथ हटा दिया।
उसने मेरा हाथ पकड़ लिया। मुझे बड़ा भला सा लगा। उसके हाथ ने मेरे कोमल हाथों को हल्के से इशारा देते हुये दबा दिया।
“आपके ये हाथ कितने चिकने हैं … ! “
‘ तू क्या कर रहा है सुनील … कोई देख लेगा तो बड़ी बदनामी हो जायेगी … “
अन्दर ही अन्दर मैं पिघलने सी लगी … मैंने कोई विरोध नहीं किया।
“भाभी हम तुम तो अकेले हैं ना … कौन देखेगा … बस आप इतनी सुन्दर है तो, बदन इतना चिकना हो तो … बस एक बार हाथ से छूने दो प्लीज … !” उसका हाथ मेरे कंधे तक आ गया।
“नहीं कर ना … हाय रे … उनको पता चलेगा, मैं तो मर ही जाऊंगी … !” मैंने अपने जवाब को लगभग हां में बदलते हुये कहा, जिसे कोई भी समझ जाता। यानि कुछ भी करो पर पता नहीं चलना चाहिये।
“भाभी, भाई साहब तो ललित पुर चले गये हैं … कैसे पता चलेगा !” वो अब मेरे और पास आ गया था उसकी सांसे तेज हो उठी थी। मेरा दिल भी धाड़ धाड़ करके धड़कने लगा था।
“देख, बस हाथ ही लगाना … ” उसे मन्जूरी देते हुये कहा … मन में तो मैं अब चाह रही थी कि बस मुझे छोड़ना मत … बस चोद चोद कर मुझे निहाल कर देना।
“भाभी किसी लड़की को मैं पहली बार हाथ लगा रहा हूँ … कुछ गलती से हो जाये तो बुरा मत मानना !”
“हाय तू ये क्या कह रहा है … हाय रे ! मैं मर गई … सुनील गुदगुदी हो रही है …! ” मुझे उसके हाथ लगाते ही झटका सा लगा, पर मर्द का हाथ था … मेरी चूंचियां कड़ी होने लगी … निपल कठोर हो गये … उसका हाथ मेरी चिकनी पीठ को सहला रहा था। उसने मेरा ढीला टॉप नीचे से उठा दिया था। उसका हाथ मेरी पीठ पर फ़िसलते हुये मेरी चूंचियों को छूने लगा था। धीरे धीरे मुझे लगने लगा कि वो मेरी चूंचियाँ मसल डाले। वो अपना हाथ तो चूंचियों पर लगाता और झटका चूत पर पड़ता था, वो गीली होने लगी थी। जो पहले चुद चुकी हो उसे तो सीधे चुदने की ही लगती है ना … इतना करना तो खुलने के लिये बहुत होता है … बस यही हाल मेरा हो रहा था। उसके हाथ अब मेरी चूचियों को सहलाने में लगे थे। अब मेरा मन जल्दी से चुद जाने को कर रहा था।
“सुनील, एक बात कहूँ … ” मैंने झिझकते हुये कहा, मेरे मन उसका लण्ड पकड़ने का कर रहा था।
“जरूर कहो … बस ये सब करने के लिये मना मत करना … “
“नहीं, इसमें तो मुझे भी मजा आ रहा है … पर आपका वो … मुझे भा रहा है … क्या उसे छू लूँ … ” कह कर मैंने अपना चेहरा नीचे कर लिया। वो पहले तो समझा नहीं …
पर जब मैंने हाथ बढ़ा कर धीरे से लण्ड पकड़ लिया तो उसके मुख से आनन्द के मारे सिसकी निकल पड़ी। पर हाय रे … लण्ड तो गजब का लम्बा था। सात इन्च तो होगा ही … और मोटा … हां, उनसे ज्यादा मोटा था। उसे हाथ लगाते ही, उसकी मोटाई और लम्बाई का अहसास होने लगा। मेरा दिल धड़क उठा। मेरे मन में आया कि इतना मोटा लण्ड मेरी चूत या गाण्ड में समा जायेगा क्या ? फिर भी मेरा दिल मचल उठा उसे अपनी चूत में उसे लेने के लिये।
मैंने उसका लण्ड दबाकर ज्योंही मुठ मारी, सुनील तड़प उठा। मुझे अपने पति का लण्ड याद आ गया, सुनील का लण्ड मेरे पति के लण्ड से मोटा और लंबा था। पर वो चोदते बहुत प्यार से थे … अपना माल समझ कर … ।
अब उसने मेरी टॉप को ऊपर से खींच कर उतार दिया। पंखे की ठण्डी हवा से मेरा जिस्म सिहर उठा। मेरे कड़े निपल उसकी अंगुलियो में भिंच गये और वो उसे दबा दबा कर घुमाने लगा। मेरी चूत में उत्तेजना भरती जा रही थी। तभी मुझे ख्याल आया कि दरवाजा खुला है।
“हटो तो … दरवाजा खुला है … !” मैं लपक कर गई और दरवाजा बंद कर दिया।
“अरे कौन आयेगा … !” और उठ कर मुझे पीछे से कमर पकड़ कर भींच लिया। इसी के बीच में मुझे अहसास हुआ कि उसका लम्बा लण्ड मेरी चूतड़ों की दरारों के बीच जोर लगा रहा था, जैसे गाण्ड में घुसना चाह रहा हो। मुझे उसके अपने चूतड़ों के बीच लण्ड की मोटाई का अनुभव होने लगा था।
“अरे ये क्या कर रहे हो … बात तो बस छूने की थी … !” मैंने आनन्द लेते हुये कहा … उसके ऐसा करने से मेरे पति जब मेरी गाण्ड मारते थे, उसके आनन्द की याद ताजा हो गई थी। तभी सुनील ने मेरा पजामा नीचे जांघो तक खींच दिया और खुद का भी पाजामा नीचे खींच कर लण्ड बाहर निकाल लिया।
“हाये रे … सुनील … बस हटो … ये मत करना … !” अपने नंगे होने से मुझे बेहद आनन्द आया। किसी दूसरे मर्द के सामने नंगा होने का मजा बहुत ही प्यारा होता है।
“भाभी, प्लीज अब मत रोको मुझे … मुझसे नहीं रहा जा रहा है !” और वो अपना लण्ड मेरी चूतड़ों की चिकनी दरारों के बीचों बीच समाने लगा। चूतड़ों के पट के बीच लण्ड चीरता हुआ गाण्ड के छेद से जा टकराया।
“हाय रे, सुनील, तुम तो मेरी इज़्ज़त लूट लोगे …! ” मैंने हाथ बढ़ा कर उसके चूतड़ों को थाम कर अपनी गाण्ड की ओर दबा लिया। मुझे गाण्ड के छेद में गुदगुदी सी होने लगी … । गाण्ड के चुदने की याद से ही मेरा बदन आग होने लगा।
“इज्जत लूटने में मजा है … हाय रे भाभी … वो किसी ओर में कहां ?”
“आह्ह्ह्ह , घुस गया रे अन्दर … उईईईईईई … मेरी इज्जत लूट ली रे … !” लण्ड गाण्ड में घुस चला था।
“नहीं मेरी इज्जत लुटी है … भाभी … मुझे आपने लूट लिया … मेरा लण्ड भी ले लिया !” लण्ड का नाम सुनते ही मुझे बहुत अच्छा लगा।
“सुनील … लूट ले रे … मुझे पूरा ही लूट ले … लुटने में मजा आ रहा है !” उसका लण्ड मेरी गाण्ड में घुस चुका था, वो अपना थूक लगाता जा रहा था और गाण्ड में लण्ड अन्दर घुसेड़ता जा रहा था। मुझे तो जैसे सारा जहां मिल गया था।
अभी गाण्ड चुद रही है तो फिर चूत भी चुदेगी, मेरे शरीर को मसल मसल मस्त कर देगा … मेरा सारा पानी निकाल देगा … हाय रे तीन दिनों तक चुदा चुदाकर मुझे तो स्वर्ग ही मिल जायेगा। मुझमें जोश भरता गया। मैं बेसुध हो कर गाण्ड मरवाने लगी … मेरी चूत में आग लगी हुई थी। मेरी चूचियां मसल मसल कर बेहाल हो गई थी, उसके कठोर हाथों ने उसे लाल कर दिया था। उसके लण्ड ने गति पकड़ ली थी। मेरी गाण्ड तबियत से चुदी जा रही थी। मैंने भी अपने चूतड़ हिला हिला कर उसे चोदने में सहायता की। मेरी चूतड़ों के गोल गोल चिकनी गोलाईयों से उसके लण्ड के नीचे पेड़ू टकरा रहे थे … जो मुझे और उत्तेजित कर रहे थे। उसे मेरी तंग गांड चोदने में बड़ा आनन्द आ रहा था पर मेरी तंग गाण्ड ने उसको जल्दी ही चरम सीमा पर पहुंचा दिया और उसका माल छूट गया।
पर मेरी चूत चुदने की राह में पानी छोड़ रही थी। वो मेरी चूतड़ों पर अपना वीर्य मारने लगा और उसे पूरी गीला कर दिया। उसका लण्ड अब सिकुड़ कर छोटा हो गया था। वो पास में पड़ी कुर्सी पर हांफ़ता हुआ सा बैठ गया। मैंने जल्दी से अपना पजामा ऊपर किया और टॉप पहन लिया। थोड़ी ही देर मैंने दूध गरम करके उसे पिला दिया। नई जवानी थी … कुछ ही देर में वो फिर से तरोताज़ा था।
मेरी चूत को अब उसका लंबा और मोटा लौड़ा चाहिये था। उसके लिये मुझे अधिक इन्तज़ार नहीं करना पड़ा।
वह सब अगले भाग में ! Antarvasna Sex Stories
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