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Antarvasna

इस घटना ने शिल्पा को Antarvasna भी हम लोगों के प्रति बोल्ड कर दिया था. शिल्पा शाम को चली गई, मेरा भाई भी तीन दिन बाद चला गया, कोई दस दिन बाद मेरे पति टूअर से लौटे. इस बार भी वे तरह तरह के प्रसाधन लाये थे, शाम के वक्त घर में घुसे तो घुसते ही मुझ पर टूट पड़े, उन्होंने कपडे भी नहीं बदले और मुझसे लिपट गये. मैंने दरवाजे को जब तक लोंक किया तब तक वे मेरे गाउन को हटा चुके थे और देखते ही देखते मेरी ब्रा को हटा स्तनों से सरका कर मेरे स्तनों को चूसने लगे.

“ओफ्फो… तुम सारे भाई बहन एक जैसे हो! घर में आकर पानी वानी पीने के स्थान पर मेरे स्तनों पर टूट पड़ते हो!” मैंने उनके सिर पर हाथ फ़ेर कर कहा.
वह चौंके और स्तन के निप्पल को मुंह से निकाल कर बोले- क्या मतलब है तुम्हारे कहने का? तुमने मेरे साथ मेरी बहन का जिकर क्यों किया?
“इसलिये किया क्योंकि आपके यहाँ से उस दिन जाते ही आपकी बहन शिल्पा आई थी, वो भी दरवाजा खुलते ही मेरे ब्लाउज को खोलने लग पड़ी थी!” मैंने हंसते हुए कहा.
“क्या!? क्या शिल्पा को भी यह सब पसंद है?” उन्हें आश्चर्य हुआ.
“फिर क्या हुआ?” उन्होंने मुझे अपनी बाजूओं में उठा कर बैडरूम की ओर चलते हुए पूछा.

मैं उनकी टाई की नॉट ढीली करती हुई बोली- जब वह यहाँ पहुंची थी तब मैं अपने भाई के साथ बाथरूम में थी, हम दोनों नहा रहे थे.
“साथ साथ नहा रहे थे… तब तो बड़ा मजा आ रहा होगा! चलो, अपन भी साथ साथ नहाते हैं, नहाते नहाते सुनेंगे पूरा किस्सा! उन्होंने बैडरूम में प्रवेश होते होते अपने कदम बाथरूम की और मोड़ कर कहा.

मजा तो आना ही था…! मेरा भाई मुझे साबुन लगा कर मुझे बुरी तरह गर्म चुका था, वह मेरी योनि को चाट ही रहा था कि तुम्हारी बहन ने कॉल बेल बजा दी, हम दोनों का मूड ऑफ़ हो गया. मैं उसे प्यासा छोड़ बाथरूम से निकली और जल्दी जल्दी साड़ी ब्लाउज पहन कर दरवाजे पर पहुंची. दरवाजा खोला तो पाया कि सामने गहरे गले के टॉप और घुटनों तक की चुस्त स्कर्ट में अपनी उफनती जवानी लिये शिल्पा खड़ी थी.

मेरे इतना कहते कहते मेरे पति ने मुझे बाथरूम में ले जाकर मुझे फर्श पर उतार दिया और मुझे दीवार के सहारे खड़ा कर दिया. फिर मेरे होंठों को चूमने के बाद मेरे स्तनों को चूम कर बोले- फिर… फिर क्या हुआ… कहती रहो और मुझे इन झरनों से अपनी प्यास बुझाने दो!

इतना कह कर उन्होंने फिर मेरे स्तन पर मुंह लगा दिया. मेरे शरीर में आग भरती जा रही थी, मेरे हाथों ने उनकी टाई निकालने के बाद उनके कोट को भी उतार दिया था, अब शर्ट के बटन खुल रहे थे.

शर्ट के बटन खोलते खोलते मैं बोली- उफ… उफ… शिल्पा ने भीतर आते ही रंगीन मजाक आरंभ कर दिये, मेरे महकते रूप की तारीफ़ करने लगी, मैं समझ गई कि लड़की प्यासी है, मेरी बातों को… उफ… उफ… आहिस्ता आहिस्ता चूसिये इन्हें… आप तो पागल हुए जा रहे हैं… उफ… मेरे पति पागलों की भांति ही मेरे स्तनों का दोहन सा कर रहे थे, मेरे होंठों से सिसकारियाँ फूटने लगी थी, ऐसा लग रहा था जैसे नाभि में कोई तूफ़ान अंगडाई लेने लगा है.

मैंने उत्तेजना से उत्पन्न होने वाली सिसकारियों को अपने दांतों तले दबा कर एक लंबी सांस छोड़ी फिर कहना शुरू किया- शिल्पा को मैं चाय बनाने के लिए अपने साथ रसोई में ले गई तो उसने… उफ… ऑफ… ओफ्फो… क्या कर रहे हैं आप…? क्या कोई ट्रेनिंग लेकर आये हैं कहीं से स्तनों के साथ इस तरह पेश आने की… आज तो आप मेरे स्तनों को झिंझोडे डाल रहे हैं आज…
मेरे इस तरह कहने से उन्होंने स्तन से मुँह हटा कर मेरे होंठ चूम कर मनमोहक ढंग से कहा- क्या तुम्हें मजा नहीं आ रहा? अगर मजा नहीं आ रहा है तो मैं इन्हें आहिस्ता आहिस्ता चूसता हूँ.

“मजा तो बहुत आ रहा है, इतना आ रहा है कि ऐसा लगता है जैसे मैं आज कण कण होकर बिखर रही हूँ. ठीक है तुम ऐसे ही चूसो!” मैंने उनकी शर्ट को उनकी बाजुओं से निकाल कर कहा.

“तुम शिल्पा वाली बात तो बताओ…” उन्होंने यह कह कर स्तन के निप्पल को फिर मुंह में ले लिया और अपने हाथों को मेरे नितंबों पर ले जाकर नितंबों की मालिश सी करने लगे.

मैं उनकी बेल्ट खोलते हुए बोली- फिर एक ओह्ह.. उफ… ऊई… फिर हाँ मैं..उफ… मैं कह रही थी कि शिल्पा को मैं रसोई में ले गई तो उसने वहाँ पहुँचते पहुँचते ही मेरे ब्लाउज में हाथ डाल दिया और मेरे स्तनों को चूसने की इच्छा जाहिर की और यह भी बताया कि अपनी सहेली के साथ लेस्बियन लव का आनन्द लेती है. मेरी… उफ… ओह… अपने पति के द्वारा अपनी योनि में मौजूद भंगाकुर को मसले जाने से मेरे कंठ से कराह निकल गई- उफ… ये शावर तो खोल लो… नहाना भी साथ साथ हो जायेगा!

मैं इतना कह कर पुनः विषय पर आई- मेरे शरीर में मेरे भाई ने पहले ही कामाग्नि भड़का डाली थी, शिल्पा द्वारा स्तनों को पकड़ने मसलने और उसकी स्तन पान की इच्छा ने मुझे और उत्तेजित कर डाला था. उसे तब तक पता नहीं था… उफ… ओह… ओफ…
मेरे पति अब मेरे स्तनों को छोड़ कर नीचे पहुँच गए थे, उन्होंने मेरी योनि पर मुख लगा दिया था, अब वो मेरे भंगाकुर को चूसने लगे थे.

मैं उनके बालों में अंगुलियाँ फंसा कर मुट्ठियाँ भींचने लगी, उनकी इस क्रिया ने मेरी नस नस में बहते रक्त को उबाल सा दिया था, मुझे अपनी उत्तेजना ज्वालामुखी का सा रूप लेती महसूस हुई, मुझे रोम रोम में फूटते कामानन्द के कई घूंट भरने पड़े.

“सुनाओ न आगे क्या हुआ…?” मेरे पति ने अपना मुख मेरी योनि से पल भर के लिए हटा कर कहा.
“तुम शावर खोलो, मैं आगे बताती हूँ…” अपनी साँसों को संयत करने का असफल प्रयास करती हुई बोली.
“ओफ़्फ़… फिर शिल्पा के सामने मेरा भाई आ गया, वह रसोई के बाहर खड़ा होकर पहले से हम दोनों को देख भी रहा था और हमारी बातें भी सुन रहा था, मेरा भाई सिर्फ अंडरवीयर में था, वह भी पहले से उत्तेजित था इसलिए उसका बृहद आकार में फैला लिंग अंडरवीयर में से भी उभरा उभरा दिखाई दे रहा था. शिल्पा की दृष्टि उसके अंडरवीयर पर टिक गई, मैं समझ गई कि उसने अभी तक लिंग के दर्शन नहीं किए हैं, ओह… उफ आउच… ओह…

इतनी कहानी सुनते सुनते ही मेरे पति ने अपने लिंग का मुंड मेरी योनि में प्रविष्ट करा दिया, वे शावर वह खोल चुके थे.

मैं उनके द्वारा हुए लिंग प्रवेश से आवेशित होने लगी थी, मेरे हाथ उनके कन्धों से पीठ तक बारी बारी से कस रहे थे, मेरी साँसें तीब्र हो रही थी, मादक सिसकियों की अस्फुट ध्वनियाँ रह रह कर मेरे कंठ से उभर रही थी.

मेरे पति ने लिंग का योनि में घर्षण करते हुए कहा- स्टोरी का क्या बना…! आगे क्या तुमने अपने भाई से शिल्पा की प्यास बुझवा दी?… ओह… कितना मजा आ रहा है!
शावर के नीचे मैथुन करने में… उफ… वह लिंग को आगे तक ठोक कर बोले. उनके हाथों में मेरी पतली कमर थी, उनकी जांघें मेरी जाँघों से टकरा कर विचित्र सी आवाज पैदा कर रही थी.

“हाँ… उफ… ओह… ऊई मां… तुम क्या मोटा कर लाये हो अपने लिंग को… इससे आज ज्यादा ही आनन्द मिल रहा है…” मुझे वाकई पहले से ज्यादा मजा आ रहा था, मैं फिर स्टोरी पर आई- बड़ा मजा आया था… शिल्पा को मेरे भाई ने पूरा मजा दिया था… खूब जोर जोर के धक्के मारे थे… मैंने बताया और लिंग प्रहार से उत्त्पन्न आनन्दित कर देने वाली पीड़ा से मेरे शरीर के रोयें रोयें में पुलकन थी, कंठ खुश्क हो गया था, मेरी जीभ बार बार मेरे होठों पर फिर रही थी.

थोड़ी देर में मेरे पति ने मेरी मुद्रा बदलवाई, अब मेरी पीठ उनकी ओर हो गई, मैंने जरा झुक कर दीवार में लगी नल को पकड़ लिया, वह मेरी योनि से लिंग निकाल चुके थे और अब मेरी गुदा(गांड) में प्रवेश करा रहे थे. गुदा में लिंग पहले ही प्रहार में प्रवेश हो गया, उन्होंने मेरी कमर पकड़ कर खूब शक्ति के साथ धक्के मारे और गुदा में ही स्खलित हो गए, मैं भी स्खलित हो चुकी थी.

फिर हम दोनों एक दूसरे से लिपट कर देर तक नहाते रहे.

कहानी जारी है. Antarvasna

संजय और मैं बीच एग्जाम में फ़ोन से सेक्सी चैट करते थे.
वह अपनी नंगी तस्वीरें भेजता था, इधर से मैं भेजती थी.

संजय रोल प्ले करवाता था कि मुझे कैसे चोदना है.

इसी तरह सारे पेपर खत्म हो गए और अब मुझे व छवि दोनों को एग्जाम के बाद घर जाना था.

पर संजय चाहता था कि मैं रुकी रहूँ क्योंकि घर जाने से पहले उसको मुझे चोदने की इच्छा थी.
इसलिए मैंने अपने घर पर दो दिन बाद का बोला था कि एग्जाम अभी दो दिन बाद खत्म होंगे.

पर हॉस्टल तो खाली करना ही था, उस कारण से मेरे और छवि के रुकने की समस्या थी.

संजय ने कहा कि उसने राहुल से बात कर ली है, उसके फ्लैट में हम दोनों सहेलियां जितना चाहें, उतने दिन रुक सकती हैं.
राहुल ने भी छवि के लिए हां बोल दिया था.

संजय को अभी छवि, मेरे और राहुल के सेक्स के बारे में कुछ नहीं मालूम था.

उसने हमारे लिए कैब बुक कर दी और छवि और मैं दोनों हॉस्टल में से घर का बोल कर सारा सामान लेकर राहुल के फ्लैट पर जाने के लिए तैयार थी.
हम दोनों फ्लैट पर पहुंच गईं.

वहां संजय हमारा इन्तजार कर रहा था.
जब हम दोनों फ्लैट पर पहुंची तो राहुल भी उसी वक़्त आ गया था.

मैंने कहा- संजय, हमारे पास आज पूरा दिन और कल का दिन है. घर कल शाम तक किसी भी हालत में पहुंचना ही है.
उसने कहा- बिल्कुल, अपने पास बहुत समय है. पहले हम सब कुछ खा पी लेते हैं.

संजय ने खाना आर्डर कर दिया.

हम सभी आपस में बातें कर रहे थे; हंसी मजाक भी कर रहे थे.
थोड़ी देर बाद ही खाना आ गया.

संजय और राहुल दोनों ने कहा- तुम लोग खाना खा लो, हम लोग अभी आते हैं.
हमने पूछा भी कि किधर जा रहे हैं, लेकिन उन्होंने हमें नहीं बताया.

वे दोनों गाड़ी से निकल गए.
तब तक हम दोनों ने खाना खा लिया और कुछ ही देर बाद दोनों आ गए.

वे बीयर लेकर आये और उन्होंने पहले थोड़ी-थोड़ी बीयर पी.
उन्होंने हमें भी बियर पीने को कहा पर हम दोनों ने मना कर दिया.

फिर कुछ देर बाद दोनों ने खाना खाया.

खाना खाने के बाद संजय ने मुझे इशारा कर दिया.
हम दोनों अन्दर आ गए.

मैंने जींस और स्लीवलेस टॉप पहनी थी, नेट की ब्रा और जॉकी की पैंटी पहनी थी जिसमें मेरी आधी गांड ही कवर हो.
ये जींस में भी कम्फर्ट देती है.

उसने पहले मेरे होंठों को चूमा और दोनों हाथों से मेरे दूध दबाने लगा.
उसने मेरे बालों को पूरा खोल दिया.

हम दोनों एक दूसरे को चूमने लगे, होंठों में होंठों को डालकर एक दूसरे को चाटने लगे.

उसके दोनों हाथ मेरी कमर पर आ गए और वह मेरी कमर को मसलता हुआ च्यूँटी काटने लगा.

फिर उसने कमर से मेरे टॉप के अन्दर हाथ डाल कर मेरे मम्मे दबाने शुरू कर दिए.
मुझे डर था कि कहीं ये टॉप को फाड़ न दे.

मैंने दोनों हाथ ऊपर उठा लिए ताकि वह मेरे टॉप को उतार दे.
उसने ऐसा ही किया.

फिर वह अपने कपड़े उतार कर नंगा हो गया.
उसका लंड अभी खड़ा नहीं हुआ था.
मैंने अपने दोनों हाथ से उसके लंड को पकड़ा और खड़ा करने की कोशिश करने लगी.

इसी बीच वह मेरी गर्दन और गालों को चूमने लगा.
उसके इस तरह से चाटने के कारण मैं भी गर्म होने लगी थी.

भले ही मैं ब्रा में थी लेकिन वह मेरे क्लीवेज़ देखते हुए उनके बीच वह अपनी जीभ से मुझे मदहोश करने लगा था.

इस तरह से वह मेरा तापमान बढ़ा रहा था.
उसकी इन हरकतों से उसका लंड खड़ा हो गया था.

उसने मेरे बालों को पकड़ कर नीचे झुकने का इशारा किया तो मैं समझ गयी कि लंड को लॉलीपॉप समझ कर चूसना है.

मैंने सोचा कि क्यों न लंड का पानी निकाल दूँ … जिससे ये ठीक से दोबारा खड़ा होने में समय ले.

यह सोचते ही मैं पूरी शिद्दत के साथ लंड पर टूट पड़ी.
मैं अब उसके लंड के सुपारे को ऐसे चूसने लगी जैसे वह लॉलीपॉप ही हो.

जल्द ही उसका लंड गुलाबी रंग का हो गया था.

मैंने उसकी बॉल्स को भी मुँह में लिया और पूरे लंड को अपने थूक से चाट चाट कर गीला कर दिया था.

पूरा लंड मेरे मुँह में नहीं आ रहा था तो जितना हो सकता … उतना मुँह के अन्दर लेती और अन्दर जीभ से लंड के ऊपर घुमा देती.

संजय इससे एकदम से कामुक होने लगा और वह मेरे मुँह में ही झड़ गया.

उसका सारा वीर्य मेरे मुँह में था.
मैं बाथरूम में गयी और मुँह धोकर आ गयी.
क्योंकि मुझे उसके वीर्य को निगलना अच्छा नहीं लगता था.

वह वहीं लेट गया था.
उसने कहा- आज तो मजा ही आ गया. अनु, तुम तो लंड चूसने में उस्ताद हो गयी हो.

मैंने भी हंस कर कहा- हां, ये सब तुम्हारी सोहबत का कमाल है.
उसने कहा- अभी थोड़ी देर से करते हैं. पहले बाहर चलते हैं.

उसने कपड़े पहने और बाहर गया.
उसने देखा कि राहुल और छवि दोनों चुम्मा चाटी कर रहे हैं.

संजय देखकर दंग ही रह गया.
उसने अन्दर आकर मेरा हाथ पकड़ा और मुझे तुरंत अन्दर से बाहर ले आया.

उसने कहा- यह देखो, क्या कर रहे हैं ये लोग?

उन दोनों ने हमारी तरफ देखा और फिर से वे दोनों एक दूसरे को निसंकोच किस करने लगे थे.

मैं ब्रा और जींस में ही उनके सामने खड़ी थी.
संजय मुझे ब्रा में देख कर जरा हैरान था.
मुझे भी लगा कि मुझसे चूक हो गई है.

मैं वापस अन्दर जाने लगी तो संजय ने रोक दिया कि ऐसे ही ठीक है.

फिर राहुल ने कहा- साले संजय, तू तो भी तो मजे ले रहा था. मैं क्या यहां पर अपनी गाड़ी हाथ से चलाऊं. मुझे भी तो चूत चाहिए ना! तो मैंने भी आज से छवि को सैट कर लिया. क्यों मेरी जान छवि!
छवि ने भी कहा- हां क्यों नहीं.

फिर वे दोनों अन्दर चले गए और हम बाहर थे.

संजय को थोड़ा अजीब लगा.
पर मैंने उसे सब समझा दिया- ठीक है. क्या प्रॉब्लम है. छवि को राहुल पसंद है.

वह भी मान गया.

जल्द ही अन्दर से चुदाई की आवाजें आने लगीं.

वे दोनों करीब 25 मिनट के बाद बाहर आने को हुए.

पहले राहुल आया.
वह तो सिर्फ अंडरवियर में ही बाहर आया था.

थोड़ी देर बाद छवि कपड़े पहन कर बाहर आ गई.
हम सब वहीं बैठे थे.

राहुल ने मुझे इशारा करते हुए पूछा.
मैंने भी उसे इशारे से कहा- सब ठीक है.

वह भी निश्चिन्त हो गया.
फिर माहौल ठीक करने के लिए राहुल ने बात शुरू की.

अब संजय भी नार्मल हो गया.
कुछ देर के बाद राहुल का फ़ोन आया तो उसने कहा कि उसे कुछ काम से 15-20 मिनट के लिए बाहर जाना पड़ेगा.

संजय और मैं चुप रहे.

राहुल ने छवि से कहा- छवि तुम भी चलो, घूम कर आते हैं.

वे दोनों तैयार होकर निकल गए.

संजय ने कहा- अनु, चलो तैयार हो जाओ.
मैंने कहा- मैं तो कब से तैयार हूँ.

अब संजय भी अपने सारे कपड़े उतार कर नंगा हो गया.
उसका लंड अभी खड़ा नहीं था तो उसने मुझे इशारा किया.
मैं समझ गयी कि मुझे क्या करना है.

वह वहीं कुर्सी पर बैठ गया और मुझे घुटनों पर बैठ कर उसके लंड को चूस कर खड़ा करना था.
मैं शुरू हो गई.

मैंने उसका लंड चूसना शुरू किया.

लंड को चूसते हुए मैं उसे धीरे-धीरे खड़ा करने लगी.
लंड धीरे धीरे बड़ा होने लगा था.

इस बीच उसने मेरे बालों को पड़कर मुझे ऊपर उठाया और मुझे किस करने लगा.
मैं भी उसे किस करने लगी.

वह मुझे चूमते हुए गालों तक आया और मेरी गर्दन को चूमने लगा.
गर्दन को चूमते हुए वह मेरे बूब्स पर आ गया और मेरे बूब्स को दोनों हाथों से ब्रा के ऊपर से ही दबाने लगा, मसलने लगा.

अब उसने मुझे वहीं खड़ा किया और मेरे पीछे आकर पीछे से चूमने लगा.

उसका एक हाथ मेरी चूत को जींस के ऊपर से ही मसल रहा था और दूसरा हाथ मेरी कमर को लॉक किए हुए था.

उसने पीछे से ही मेरी जींस का हुक और चैन खोली और उसे उतारते हुए धीरे-धीरे मेरे घुटनों के नीचे कर दिया.
फिर पीछे से ही उसने मेरी गांड को पैंटी के ऊपर से ही चाटना चूमना शुरू कर दिया.
वह एक हाथ से मेरी चूत को पैंटी के ऊपर से ही मसलने लगा.

मेरी चूत अब तक गीली हो चुकी थी और लंड की मांग कर रही थी.
वह अभी भी मेरी गांड पर अपने होंठों से किस कर रहा था.

फिर उसने मुझे सोफे पर वहीं पर बिठा दिया और मेरी जींस को पैरों से पूरी तरीके से निकाल कर वहीं पर फेंक दिया.
अब मैं सिर्फ ब्रा और पैंटी में थी.

संजय ने मेरी तरफ देख कर कहा कि आज कुछ नए तरीके से करते हैं.
मैंने ज्यादा कुछ न सोचते हुए मुस्कुराते हुए कहा- हां क्यों नहीं.

उसने मुझे खड़ा किया और सोफे पर झुका दिया.
फिर मुझसे कहा- अपनी दोनों टांगें फैला लो और बस ऐसे ही रहना.
मैं हो गई.

उसने अपने एक हाथ से मेरी पैंटी को चूत से साइड में खिसका दिया और अपनी दो उंगलियां मेरी चूत में धीरे धीरे पेलते हुए अन्दर बाहर करने लगा.

मैं सीधी खड़ी होने लगी तो उसने मुझे रोकते हुए कहा- न न … वैसी ही रहो जैसी हो.
तो मैं वापस उसी पोजीशन में हो गई.

मुझे तो कुछ समझ में नहीं आ रहा था.
बस मैं पागल सी होने लगी थी.
मेरी चूत गीली थी ही!

फिर उसने मेरी पैंटी को चूत के पास से ही फाड़ दिया और पैंटी को ऊपर कमर की ओर खिसका दिया.

मैंने कहा- बाबू, कंडोम तो पहन लो, भूल जाओगे.
उसने कहा- जान तुम ही पहना दो.

मैंने उसके लंड को चूमा और अपने हाथों से कंडोम पहना दिया.

अब उसने मुझे सोफे पर इस तरह से झुकाया कि जहां पर कोने की ओर हाथ रखते हैं, वहां पर मेरी कमर हो ताकि चूत को वह खड़े खड़े ही निशाना लगा सके.

मेरी कमर से ऊपर का हिस्से सोफे पर था.
इस वजह से मेरी चूत उसे साफ साफ दिख रही थी.

वह मेरी चूत को मुँह से चाटने लगा और अपनी जीभ से ही मुझे चोदने लगा.

मेरी चूत और ज्यादा गीली हो चुकी थी.
अब उसने अपना लंड मेरी चूत पर घिसना चालू कर दिया. उसके दोनों हाथ मेरी कमर को पकड़े हुए थे.

मैंने उस पर झुक कर अपनी दोनों टांगों को फैला दिया और अपनी दोनों टांगों को फर्श पर रख दिया.
साथ ही मैंने अपने दोनों हाथों से अपनी गांड को फैला लिया.

संजय ने मेरी पीठ के निचले हिस्से पर हाथ रखा.
मैंने कहा- जान अब कितनी देर और तड़पाओगे?

उसने कहा- ऐसी बात है तो ये लो.
उसने एक झटके में अपने लंड को मेरी चूत के अन्दर डाल दिया.

मेरी आह निकल गई.

उसने लंड को दबाते हुए कहा- अब ठीक है न!
मैंने भी ‘ह्म्म्म …’ कहा.

वह शुरू हो गया.
धपाधप गीली चूत में आराम से लंड अन्दर बाहर होते हुए आवाज़ कर रहा था.

उसकी दोनों टांगें मेरी दोनों टांगों के बीच में थीं.
वह भी जानबूझ कर रुक रुक कर तेज धक्के लगाता.

मुझे मजा आने लगा था.

कुछ ही मिनट ऐसे ही चोदते हुए उसने मेरे दोनों हाथों को अपने दोनों हाथों से पकड़ किया.

अब मेरे बूब्स हवा में थे और वह आराम से मेरी चुदाई कर रहा था.

तभी अचानक से दरवाजा खुला और राहुल और छवि अन्दर आ गए.

मुझे थोड़ी शर्म आयी लेकिन संजय को पता नहीं क्यों, उसे कुछ फर्क नहीं पड़ा.

वह उन्हें देखकर कुछ सेकंड रुका, फिर वापस शुरू हो गया.

यह देख कर दोनों नंगी गर्ल Xxx चुदाई के मजे लेने लगे.
मेरी चूचियां गजब हिल रही थीं.

राहुल सामने आकर बैठ गया और बोला- वाह क्या चूचियां हैं, मजा आ जाएगा ऐसी चूचियां पीने में तो … ओए होए होए होए!

छवि भी सामने बैठकर मुस्कुरा रही थी और संजय रुकने का नाम नहीं ले रहा था.
वह धपाधप मेरी चूत मारे जा रहा था.

फिर राहुल मेरे पास आकर मेरी चूचियों को दोनों हाथों से दबाने लगा और मुझे चूमने लगा.
इधर संजय ने कहा- राहुल!

राहुल ने कहा- क्या हो जाएगा यार … यदि मैं उसकी चूचियों को थोड़ा सा दबा लूँ तो? ले तो तू ही रहा है न … अगर तू मुझे पेलने दे तो कुछ बात हो!

संजय कुछ नहीं बोला.
राहुल मुझे किस करके अलग सामने आकर बैठ गया.
संजय मुझे चोदता रहा.

कुछ देर के बाद मैंने कहा- संजय, मेरा होने वाला है.
उसने कहा- बहुत अच्छा … निकल जाओ.

मैं झड़ गयी.
मेरी जांघों तक पानी आ गया था.

संजय ने मुझे कुछ देर चोदने के बाद पोजीशन से चेंज करके अपने गले से लगाया और कहा- जान मैं अपना पानी निकालने वाला हूं, कहां निकालूँ?

मैंने उसके लंड से कंडोम को निकाला और कहा- मेरे ऊपर ही निकाल दो.
उसने अपना सारा पानी मेरे बूब्स के ऊपर निकाल दिया.
ज्यादा पानी नहीं निकला था.

फिर हम दोनों नंगे ही वहीं सोफे पर बैठ गए.

अब तो मुझे शर्म भी नहीं आ रही थी क्योंकि राहुल मुझे छवि के सामने चोद चुका था इसलिए शर्म खत्म हो गई थी.

मैंने अपनी फटी हुई पैंटी को कमर से निकाला और बस फिर कुछ देर बाद बाथरूम जाकर एक नयी पैंटी और ब्रा को पहन लिया.
अपने कपड़े पहन कर वापस आ गई.

राहुल और संजय दोनों का एक दूसरे के ऊपर से गुस्सा शांत हो गया था.
उन दोनों में सुलह हो गई थी.

हम चारों ने फिर से बातचीत शुरू कर दी.

फिर प्लान बना कि मूवी देखने चलते हैं.
हम लोग चारों मूवी देखने गए.

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हाय फ़्रेंड्स कैसे हो? सब के लंड को मेरा Sex storiesसलाम और प्यारी चूतों को मेरा अतिविशेष प्रणाम। मैं अपना परिचय देता हूं।
मेरा नाम बंटी है और मैं काफ़ी हैंडसम दिखता हूं। मेरी हाइट ६” है और लंड मेरा ७ इंच का है जो किसी भी लड़की, औरत को घायल कर सकता है। मैं यहाँ अपनी पहली चुदाई की स्टोरी लिख रहा हूं।

मैं गुजरात के बड़े अच्छे शहर वडोदरा में रहता हूं। मेरे सामने एक मस्त अच्छी बड़े बूब्स वाली औंटी रहती हैं जिसको मैं भाभी कहता हूं। उसकी फ़ीगर ३८ २९ ३८ है। उनका नाम सोनू भाभी है। उनकी शादी को ८ साल हो गये लेकिन उन्हें अभी तक बच्चा नहीं है।

मैं उनके घर आता जाता रहता था। एक दिन मैं गया तो देखा कोईं नहीं था। मेरे घर पर भी कोई नहीं था। मेरी मोम ने उनके घर खाने को बोला था। मैं दोपहर के टाइम उनके घर गया। फिर हम दोनो ने साथ खाना खाया। खाते समय वो मेरी और देख कर कातिल सी मुस्कुराहट देती थी।

खाना खत्म करने के बाद हम दोनो उनके रूम में बेड पर बैठ कर बातें कर ने लगे। बातों बातों में मैने पूछ लिया कि आपको बच्चा क्यों नहीं होता? उन्होंने कहा कि मेरे पति में कुछ प्रोब्लम है। मैने कहा आपको दुख नहीं होता तो वो एक आह भरकर बोली होता है पर अब ये दुख तुम दूर कर सकते हो। मैने पूछा कैसे?

तो वो धीरे से मेरे पास आकर बोली ऐसे। मैने कहा मुझे कुछ पता नहीं चला? तो उन्होंने मेरे शर्ट के बटन खोल कर किस कर ने लगी। मैं दो मिनट के लिये दंग रह गया फ़िर धीरे से वो मेरे होंठ पर आयी मैने भी उनको किस करना स्टार्ट कर दिया। फिर धीरे धीरे मैने उनके कपड़े उतारे और ब्रा और पैंटी में ले आया। उन्होंने कहा “ये देखने के लिये ही, अब ये तुम्हारे है जो चाहो वो करो” मैने पहली ब्रा उतार कर बूब्स चूसना शुरु किया। उनके मुंह से सिस्कियां निकलने लगी। फिर धीरे धीरे किस करते करते मैं नीचे पैंटी तक पहुंच गया और उसको भी सरका दिया। फिर उनकी चूत को मैं चाटने लगा। वो तो मस्त हो कर लेट गयी थी। फिर मैने उनके मुंह पे अपना लंड रख दिया और हम ६९ पोजिशन में आ गये। हमने १५-२० मिनट तक ऐसा किया।

फिर उसने कहा कि बहुत हो गया अब तुम मुझे और मत तड़पाओ जल्दी अपना मोटा लंड घुसा दो मेरी चूत में। मैं खड़ा हो गया और मेरा लंड उनकी चूत पर रख दिया। और एक ही झटके में घुसा दिया वो तो चीख कर रो पड़ी फिर मैं रुक गया फिर धीरे धीरे स्ट्रोक लगाना शुरु किया उनको भी मज़ा आया। वो भी साथ देने लगी फिर मैं अपनी स्पीड बढ़ाता गया उनसे मुंह से आवाज़ आने लगी

“हा हा यस यस हाजु चोद मने हाजु चोद आ चुत ने फाड़ी ने भोस बनाई दे भेन चोद बाउ वरसो पछि चोदवा मल्यु छे चोद तु आजे चोद मने” और ये सुनकर मेरी स्पीड डबल हो गयी फिर मेरा पानी छुटने वाला था। मैने बोला तो वो कहने लगी कि चोदो और चोदो भर दो मेरी चूत तुम्हारे पानी से और मैं ने एक आखरी झटका दिया और छूट गया मेरा पानी। अब मैं उनके ऊपर लेट गया।

उस दिन हम ने ४ बार अलग-अलग तरीके से चुदाई की। और अब भी हम महीने में ३ -४ बार ऐसा करते है। तो फ़्रेंड्स मेरी स्टोरी कैसी लगी? आशा है, आपके लंड और चूत से पानी निकला हो। Sex stories

लेखिका : रेखा Antarvasna Sex Stories

सबसे पहले गुरु जी को मेरा Antarvasna Sex Stories कोटि-कोटि प्रणाम ! गुरु जी का क्या कहना ? क्या वेबसाइट लॉन्च की है,जिसमे लोगों की चुदाई के किस्से पढ़ के चूत गीली हुए बिना नहीं रहती !

मेरा नाम रेखा (काल्पनिक) है ! दोस्तो, मैं २६ बरस की एक जवान औरत हूँ ! वैसे तो मैंने एम. कॉम तक पढ़ाई की हुई है लेकिन मेरे पति देव नहीं चाहते कि मैं जॉब करूँ ! मेरी सुन्दरता को लेकर उनके दिमाग में मेरे प्रति गंदे ख्याल आते हैं ! शादी को तीन साल हो चुके हैं लेकिन अभी तक कोई बच्चा नहीं हुआ ! हाँ, इस वक़्त मैं पेट से हूँ ! शादी से पहले मेरी गिनती चालू गर्ल्स में रही है !

मेरी पहली चुदाई 18 साल की उम्र में हुई थी, जब मैं 12वीं की फाइनल पेपर दे कर अपने नानके गई हुई थी ! वहां मैं एक लड़के से इश्क लड़ा बैठी और उसने मेरा काम तमाम कर दिया ! एक महीने में कई बार चुदी ! फिर तो बस मुझे लड़कों का चस्का लग गया और मेरे न जाने कितने लड़कों से एफेअर चले ! मैंने उनमें से कुछ से शारीरिक सम्बन्ध स्थापित किये ! मेरे फिसलते क़दमों को मेरी माँ ने भांप लिया और एक रिश्ता ढूँढ मेरी भी शादी करवा दी !

पति का अच्छा बिज़नस है लेकिन उनमें वैसी सेक्स पॉवर नहीं है जैसी मुझे चाहिए थी ! कई बार बिना पानी की मछली की तरह बिस्तर पर तड़फती ! पति हफ्ते में सिर्फ तीन बार सेक्स करते जिससे मेरी प्यास बढ़ गई थी ! मैंने कहा कि मुझे जॉब मिल रही है लेकिन मेरे खसम ने ऐसा नहीं होने दिया ! उसको अपनी कमजोरी का डर था ! वो यह भी जानता था कि उसकी बीवी में कितनी आग है !

मेरे जेठ के बड़े लड़के ने बारहवीं कक्षा में कामर्स रखा लेकिन गाँव में कोई टयूशन नहीं पढ़ाता !
जेठानी जी ने मुझे कहा,”छोटी बहू, प्लीज़ इसको एक दो घंटे पढ़ा दिया कर !”

मैंने कहा,”ठीक है !”

अगले ही दिन समीर मेरे पास पढ़ने आने लगा ! उसका ध्यान मेरे मस्त मम्मों पर रहता ! गहरे गले के सूट से तो मेरा यौवन डुल-डुल जाता ! कई बार नोटिस किया कि उसके लौड़े वाला भाग फूला फूला सा रहता !

एक रोज़ सभी रात की शादी पर गए थे ! यहाँ पर भी मेरे पति को मैं सुरक्षित नहीं लगी! मुझसे बोला,”उसके दोस्त की शादी ही है ! “

जब मैंने कहा कि बाकी सब क्यूँ जा रहे हैं ?

तो बोले कि बचपन से उनका परिवार माँ बापू को जानते हैं ! मुझे कहा गया कि तुम रुको और समीर रुक जायेगा !

समीर भी रुक रहा था इसलिए पहले से सेक्सी कपड़े पहन रखे थे ! नाईटी में से मेरा जिस्म साफ़ दिखता ! पैंटी-ब्रा सब कुछ! आज समीर ने मुझे देखा तो देखता रह गया ! मैंने उसको बिठाया और बोली,” चलो पढ़ाई करें !”

“जी ,चाची ………! ”

एक बहुत मुश्किल गणित का सवाल था ! मैंने कहा,” इधर मेरे पास ही बैठ जाओ !”

मैंने उसे अपने पास बिठा लिया और मैं उसे गणित के सवाल का फार्मूला बताने लगी ! उसका ध्यान मेरी छातियों पर था ! मैंने उसकी जांघ पे हाथ फेरते हुए कहा,”अब इन्हें देखना छोड़ो !”

मेरा हाथ फिसलता हुआ उसके लौड़े की तरफ जाने लगा ! मैंने पहल इसलिए की क्योंकि वो डर रहा था ! हिम्मत नहीं जुटा पा रहा था ! मैं उसके लौडे की तरफ अपना हाथ ले जाकर उसको मसलने लगी ! उसने भी सारा डर फेंक कर मुझे बाँहों में उठाया और सीधा बिस्तर पर ले गया ! देखते ही देखते उसने मुझे एक दम नंगी कर दिया और मेरी जवानी से खेलने लगा !

मैंने कहा,” वाह ! मेरे मुन्ना !!”

मैंने भी अब उसका लौड़ा निकाल लिया ! वाह ! क्या लौड़ा था !!!!!! छोटी उम्र से यह हाल था तो आगे क्या होगा ? मैंने भी उसका लौड़ा मुँह में ले लिया और खूब चूसने लगी ! वो आहें भर भर के कह रहा था,” मेरी रखैल चुदासी चाची, आज तुझे मसल दूंगा !”

“वाह ! पट्ठे ! वाह ! मसल दे मुझे ! रौंद दे मुझे ! फाड़ दे मेरी चूत ! मत छोड़ना इसको !”

“अभी ले ,चाची ! कमीनी, कितना दिखा दिखा के तड़फाया मुझे !”

वो बखूबी खेल रहा था वॉलीबाल के साइज़ के मेरे मम्मे के साथ !

मैंने कहा,” बहन चोद ! मार मेरी !”

“अभी ले, रंडी !” कहते हुए उसने टांगें खोल कर अपना लम्बा मोटा लौड़ा मेरी चूत में घुसा दिया !

“वाह ! और तेज़ ………और तेज़…… और तेज़ मार ……..! ” उसका जोश बढाने के लिए मैं अप-शब्द बोल रही थी !

“मादरचोद, बहनचोद ! तेरे चाचा से मेरी जवानी नहीं संभाली जाती ! मुझे अपनी बना ले !”

मैं झड़ने के करीब थी इस लिए और जोर-जोर से चूतड़ उठा के उसका लौड़ा ले रही थी !

वो बोला,”चाची, मैं झड़ने वाला हूँ !”

“अन्दर डाल दे समीर ! अपना गरम माल ! डाल दो अपना बीज मेरी कोख में !”

देखते ही देखते उसने सारा माल मेरी चूत में भर दिया और लौड़ा निकाल कर मुंह में डाल दिया ! मैंने उसको चाट-चाट कर साफ़ कर दिया !

“वाह ! मेरे राजा ! ” मैंने कहा ! उस रात हम नंगे बिस्तर पे रहे ! तीन बार उसने मुझे अलग अलग मुद्रा में ठोका !
उस रात के बाद चुदने के लिए हमें जगह नहीं मिल रही थी ! उसने मुझे कहा,” चाची, मेरा एक दोस्त अकेला रहता है ! उसका परिवार अमेरिका में है ! वहीं चला करो ! ” मैंने हामी भर दी और उसके साथ वहां गई। ?????????????????

इंतज़ार का फल मीठा होवे …………….!

कहानी कैसी लगी ? बताओ ताकि आगे लिख सकूँ ! बाय ………………………… Antarvasna Sex Stories

मैंने बताया था कि मैं जल्दी ही अपनी आगे की कहानी बताऊंगा, परन्तु अपने बिजनेस में व्यस्त होने के कारण यह कहानी लिखने में थोड़ी देरी हो गयी.
उसके लिए आपसे माफी चाहता हूँ.

वैसे आप सभी मुझसे पहले ही परिचित हैं.
नए पाठक मुझसे वाकिफ़ नहीं होंगे, तो मैं उन्हें एक बार बता देता हूं कि मैं राज शर्मा इंदौर में एक बिजनेसमैन हूं. मेरी उम्र ज्यादा नहीं है लेकिन हां मेरा अच्छा खासा काम है.

मैंने पिछली सेक्स कहानी में नहीं बताया था परंतु मेरी उम्र अभी 24 वर्ष की है और मेरी बहन की उम्र 22 वर्ष की है.

हम दोनों के बीच में जब पहली घटना हुई, तब वह 19 वर्ष की थी और उसी कहानी को अब मैं आगे बताना चाहता हूं.
मुझे उम्मीद है कि आपको यह Xxx पुसी लिक स्टोरी पसंद आएगी और मेरी यह कहानी शत-प्रतिशत सही है. इसमें किसी प्रकार का कोई झूठ नहीं है.

लंड पसंद करने वाले लड़के लड़कियों की जानकारी के लिए बताना चाहता हूं कि मेरे लंड का साइज अभी 7 इंच लंबा है और यह ढाई इंच मोटा है.
मेरा लंड किसी को भी पूर्ण रूप से संतुष्ट कर सकता है. यह जानकारी इसलिए बताई है ताकि कहानी में थोड़ा सा स्वाद बढ़ाया जा सके.

उस दिन जब मेरी बहन ने मुझसे कहा- भैया, अभी यहां पर कुछ नहीं करना. घर चल कर कुछ करेंगे.

हम शाम को 7:30 बजे घर पहुंच गए.

मां ने खाना तैयार रखा था, हम लोगों ने खाना खाया.

लगभग 8:30 बजे पापा भी आ गए थे.
हम सभी ने मिलकर कुछ बातें की.

मैंने देखा कि रितिका जो मेरी छोटी बहन है, बार-बार मुझे देखकर एक कटीली मुस्कान दे रही थी.

कुछ समय बात करने के बाद हम दोनों भाई बहन अपने अपने रूम में ऊपर आ गए.

वैसे मम्मी पापा के रूम नीचे ही बने थे और मेरा और मेरी छोटी बहन का रूम ऊपर मेरे रूम से अटैच था.

मेरी बहन अपने कमरे में चली गई और मैं अपने कमरे में.

मैं बहुत थक गया था तो मेरी गहरी नींद लग गई.

लेकिन 11:30 बजे मेरे मोबाइल की रिंगटोन बजी और मेरी नींद खुल गई.
मैं सोच रहा था कि इस वक्त कौन?

यह कॉल मेरी छोटी बहन रितिका का था.
मैंने तुरंत कॉल रिसीव किया और पूछा- क्या हुआ?
वह गुस्सा होकर बोली- भैया, मेरे बिना आपको नींद कैसे आ गई?
मैंने उससे सॉरी कहा.

उसने कहा- ठीक है, कोई बात नहीं. आप अभी मेरे कमरे में आ सकते हैं … या मैं आऊं?
मैंने कहा- मैं आ रहा हूं.

मैंने अपना दरवाजा खोला और जैसे ही उसके दरवाजे पर हाथ लगाया, दरवाजा खुला था.
अन्दर पिंक कलर की लाइट और मोमबत्तियां जल रही थीं.

रितिका मुझे देख कर बोली- भैया जल्दी से दरवाजा बंद कर दो.
मैंने दरवाजा बंद किया.

और जैसे ही मेरी नजर मेरी बहन पर पड़ी … मैं वह नजारा देखता ही रह गया.

मेरी बहन दुल्हन के जोड़े में मेरे सामने बिस्तर पर बैठी थी.
मैं कुछ समय के लिए बस उसे देखता ही रह गया.

उसने कहा- भैया कहां खो गए!
तब मुझे होश आया और मैंने कहा- कहीं नहीं!

मैं उसके पास गया.
मुझे यकीन नहीं हो रहा था कि मेरी बहन मेरे लिए शादी के जोड़े में बैठी है.

परंतु मैं समझ गया था जब उसने ऑफिस में कहा था कि अभी यहां पर कुछ नहीं … घर चल कर कुछ करेंगे.
पर मुझे इतना नहीं पता था कि इतना कुछ करेंगे!

मैं उसे देख रहा था कि मैं मेरी बहन बोली- भैया दूर क्यों खड़े हो, पास आओ ना!
तो मैं पास गया और किस करने लगा.

हम दोनों के होंठ आपस में ऐसे जुड़ गए जैसे बरसों के बिछड़े हुए प्रेमी हों.

दोनों ने लगभग 20 मिनट तक एक दूसरे को इतना किस किया कि दोनों के होंठ पूरे लाल हो चुके थे.
कभी मैं उसके मुँह में मेरी जुबान दे देता तो कभी वह मेरे मुँह में अपनी जुबान दे देती.

हम दोनों ने काफी देर तक किस की.
उसके बाद मैं किस करते हुए उसकी गर्दन पर आ गया और उसको झटके से अपने आगे ले लिया.

उसके बालों को एक तरफ करके उसकी गर्दन पर … और पीछे से उसके कानों पर किस करने लगा. जिससे उसकी ‘आह … अहह …’ निकलने लगी.
धीरे धीरे मेरा हाथ उसके पेट से होते हुए उसके मम्मों पर आ गया.

उसने दुल्हन वाला लहंगा ब्लाउज पहना था, अन्दर उसने शायद गुलाबी रंग की ब्रा पहनी थी.
मैं ब्लाउज के ऊपर से ही उसके बूब्स दबाने लगा और उसकी गर्दन और कान पर किस करता रहा.

मेरी बहन गर्म होती जा रही थी और पीछे से मेरा लंड भी उसकी गांड में घुसने के लिए बेताब हो रहा था.

मैंने उसके ब्लाउज के बटन खोले और ब्लाउज को निकाल दिया.
फिर उसको मेरी तरफ घुमा कर मेरे सामने कर लिया.

इस बार उसने मुझ पर हमला बोल दिया और वह भूखी बिल्ली सी मुझ पर टूट पड़ी.

उसने मेरी टी-शर्ट निकलवाई और बनियान भी. वह मेरे पूरे सीने पर किस करने लगी और धीरे धीरे मेरी नाभि की तरफ बढ़ी.

नीचे आकर उसने पैंट के ऊपर से ही मेरे लंड को पकड़ा और किस करने लगी.

मैंने उसका हाथ पकड़ा और उसको ऊपर की तरफ खींच कर एक झटके में उसको अपने नीचे ले गया.
अब मैं पूरे जोश के साथ उस पर टूट पड़ा.

मैंने रितिका को नीचे खींचा कर अपने एक हाथ से उसके एक दूध को दबाने लगा और दूसरे हाथ से उसके दूसरे दूध को अपने मुँह में लेकर चूसने लगा.
अब मेरी बहन छटपटा रही थी लेकिन मैं उसके मम्मों को चूसता ही रहा.

मुझे बहुत मज़ा आ रहा था.
लगभग 10 मिनट तक दूध पीने के बाद मैं उसकी नाभि पर आ गया और उसकी नाभि पर किस करने लगा.

मेरी बहन रितिका की सांसें बहुत तेज चल रही थीं और वह अपनी मस्ती में बोले जा रही थी- हां भैया और जोर से आहह … आहह … करते रहो उम्म … और मस्ती से … आह और करो … आज मैं आपकी बहन नहीं हूं … मैं आपकी बीवी हूं … आपको आज की रात जो भी करना है, करो … और मेरे साथ पूरी सुहागरात मनाओ उम्मम!

वह ऐसी बातें कहती हुई अपने मुँह से मादक सीत्कारें भी निकाल रही थी ‘आह …… उम्म …’
मैं उसे चुप रह कर बस चूसता जा रहा था.

वह कहने लगी- भैया, मैं तो हमेशा आपके पास ही रहने वाली हूं. पर आज जल्दी से मेरी चुदाई करो.
यह सुनते ही मैंने उसको उल्टा किया और पीछे से उसकी ब्रा के हुक खोल दिया.
उसके बूब्स आजाद हो गए.

मैंने दोनों हाथों में एक एक दूध को पकड़ा और जोर जोर से मसलने लगा.
वह दर्द से तिलमिला गई और बोली- भैया, धीरे आपकी छोटी बहन हूँ, कोई रंडी नहीं … प्लीज धीरे करो ना … ऐसे क्यों दबा रहे हो! अब तो हर रोज आपको ये आम चूसने को मिलेंगे.

उसकी इस बात पर मुझे उस पर और भी प्यार आ गया.

मेरी छोटी बहन सोनाली बेंद्रे जैसे दिखने वाली इतनी हॉट सिस आज मेरे बिस्तर पर मेरी दुल्हन बनकर मेरा लंड लेने के लिए बेताब हो रही है.

अब मैंने उसको सीधा लिटा दिया, उसके लहंगे को उठाया, उसकी जांघों पर किस किया और आगे बढ़ता गया.
मैं धीरे धीरे उसकी पैंटी पर आ गया.

उसने पिंक कलर की नेट वाली पैंटी पहनी थी.
मैं उसके ऊपर से उसको किस करने लगा.

फिर मैंने उसको एक बार खड़ा किया और उसके लहंगे का नाड़ा खोल दिया जिससे उसका लहंगा नीचे गिर गया और वह मेरे सामने पैंटी में आ गई.

फिर वह नीचे बैठी और उसने मेरे लोवर को पूरा निकाल दिया.
हम दोनों भाई बहन अब एक जैसी दशा में थे … हम दोनों अपने-अपने पैंटी व निक्कर में थे.

वह घुटने के नीचे बैठ गई और मेरा निक्कर नीचे करते हुए निकाल दिया.
उसने मेरे लंड पर हमला बोल दिया और मेरा लंड चूसने लगी.
मैं उस समय स्वर्ग की अनुभूति कर रहा था.

जरा सोचिए दोस्तो, आपकी बहन सोनाली बेंद्रे जैसी हॉट हो और आपके साथ बिस्तर में हो … और आपका लंड चूस रही हो, तो आप कैसा फील करेंगे!

या फिर सोचिए बहनो … कि आपका भाई, जिसे आप बहुत चाहती हों, वह आपकी चूत के साथ ऐसा करे तो आपको कैसा लगेगा.
अभी बहुत सारी बहनें सोच रही होंगी कि काश हमारी किस्मत भी रितिका जैसी होती कि हम भी अपने भाई के लंड को चूस सकते.

तो मेरी चुदक्कड़ बहनों मैं आपको बता देना चाहता हूं कि दुनिया में किसी के साथ भी इतना सेक्स करने का मजा नहीं है, जितना भाई-बहन के बीच में है.
अगर आपको बुरा लगा हो तो उसके लिए माफी चाहूंगा, परंतु मैंने यही अनुभव किया है.

रितिका मेरे पूरे लंड के ऊपर से नीचे तक जीभ घुमा रही थी. वह लंड को मुँह में लेती और जितना अन्दर तक ले पा रही थी, वह ले रही थी. लंड को चूस रही थी.
फिर उसने मेरे लंड की चमड़ी को नीचे कर दिया, जिससे ऊपर का हिस्सा खुल गया.

सुपारे पर वह प्यार से अपने गुलाबी होंठों से किस कर रही थी और जीभ घुमा रही थी.
जिसने भी अपने सुपारे पर जीभ फिरवाने का यह रंगीन अनुभव किया है, वही इस आनन्द को समझ सकता है.

मेरी बहन मेरा लंड चूस रही थी और मैं थोड़ा झुक कर उसके बूब्स को दबा रहा था.
मैं जितनी जोर से उसके बूब्स मसलता, वह मेरा लंड उतना ही मुँह के अन्दर ले रही थी.

करीब दस मिनट तक उसने मेरा लंड उसी पोजिशन में चूसा.
फिर मैंने उसे 69 में आने को कहा, तो वह लेट गयी.

मैंने भी उसके ऊपर उसके मुँह में लंड देकर उसकी पैंटी के ऊपर से ही उसकी चूत पर किस किया.
इससे वह सिहर गयी.

फिर मैंने उसकी पैंटी को उसकी चूत के मुहाने से अलग किया और एक उंगली डाल दी.
उसको इस अचानक हमले की आशा नहीं थी. वह उचक गयी और उसने मेरा पूरा लंड मुँह में ले लिया.

वह कुछ कहना चाह रही थी, पर उसकी आवाज नहीं निकली.
फिर मैंने उंगली को बाहर किया और उसके ऊपर से उठ गया. मेरा लंड भी उसके मुँह से निकल गया.

मैं खड़ा हो गया. वह सवालिया नजरों से देखने लगी.
वह कुछ कहती, उसके पहले ही मैंने उसे खड़ा होने को कहा.

वह जैसे ही खड़ी हुई, मैंने उसकी पैंटी खींच कर निकाल दी और उसकी चूत में अपनी जीभ डाल दी.
उसकी चूत बहुत गीली हो चुकी थी, जिसका स्वाद मैं आपको शब्दों में नहीं बता सकता.

फिर मैंने खड़े खड़े ही उसके एक पैर को उठाया, जिससे उसकी चूत खुल गई.
मैंने अपनी पूरी जीभ उसकी चूत की फांकों के बीच घुसा दी और Xxx पुसी लिक का मजा लेने लगा.

वह मेरा सर पकड़ कर चूत पर दबाव बनाने लगी- उम्म म्म भैया … और अन्दर तक डालो … आप इतने रोमांटिक हो, मैंने सोचा भी नहीं था … आह बहुत मज़ा आ रहा है भैया … ओहह … उम्म … यस भैया मेरी जान अपनी छोटी की चूत और जोर से पियो … चूस लो इसे पूरी!

तभी मैंने अपना मुँह अचानक से हटा लिया.
वह तड़फ कर कहने लगी- आह भैया, प्लीज ऐसा मत करो … चूसो ना … मुझे यह मजा ओर लेना है … बदले में जो करना चाहो, कर लेना … पर प्लीज मेरी चूत चूसो न प्लीज.

मुझे भी जाने क्या खुराफत सूझी, मैंने बोल दिया- छोटी, मैं तेरी गांड में भी लंड डालना चाहता हूँ.
उसने कुछ सोचा और बोली- ठीक है, पर आप पहले मेरी चूत में अपनी जीभ डालो … और जब तक मेरी ये मुनिया बह ना जाए, जीभ को निकालना मत.

मैंने उसको बेड के किनारे पर लिटाया ओर उसके दोनों पैरों को खोल दिया.
खुद नीचे बैठ कर और अपनी जीभ को नुकीली करके उसकी चूत में डाल दी.

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