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Massage Girl in Araria: Premium Relaxation Services

Our site can help you find a professional massage girl in Araria who will help you relax in the best manner possible. We connect you with professional therapists who can offer you a massage that will make you feel better and more relaxed. The pros on our list are ready to provide you with a fantastic experience at your house or in one of their particular spots, whether you want to relax or get away from it all.

Last Updated: 24 May 2026, 08:19 PM

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Introduction

Massage is currently one of the finest methods to relax your mind, body, and overall health. Our website makes it easy to locate the top massage services in Araria that meet your demands. This will be a one-of-a-kind and calming experience for you.

Tottaa wants to make it simple for clients to find the top masseuse. The Araria massage service providers on our list offer the greatest quality, comfort, and competence, whether you want a full-body massage or a massage for a particular location.

How Tottaa Helps Advertisers Reach More Customers

Tottaa is not only a list of masseuses, it’s also a secure location for them to show off what they can do. People in Araria who are seeking massage services may find them on our website. This makes them easier to find and gets them more appointments.

Advertisers may simply put up profiles, offer their services, and talk about pricing and discounts on our sites. This makes sure that the relevant people notice your Araria massage service, which makes it easier to obtain more customers.

Different Types of Massages We Offer

There are a lot of different types of massage services on our site, so you may choose one that works for you. You may choose the kind of treatment that works best for you, whether it’s profound rest or a particular type of therapy.

1. Swedish Massage

A calm and gentle way to ease muscular tension and improve blood flow. This Araria massage is perfect for you if you want to relax and forget about your concerns.

2. Deep Tissue Massage

This approach employs a lot of pressure to get to deeper muscle layers. It’s helpful for folks who have muscular discomfort or stiffness that won’t go away. There are specialists on our profiles of massage girls in Araria who are good at deep tissue treatments that function effectively.

3. Aromatherapy Massage

Calming massage strokes and essential oils are beneficial in making people feel improved both emotionally and physically. Most massage companies in Araria employ the use of custom oil preparations to make you feel good.

4. Thai Massage

A therapy that wakes you up by using a mix of regular massage, stretching, and compression. This traditional massage in Araria helps you relax, become more flexible, and get your mind and body back in harmony.

5. Hot Stone Massage

Heated stones are placed on various parts of the body to help with deep muscular tightness. People who want to feel good, relax, and help their muscles recover quickly can use this massage service in Araria

How to Book Our Massage Services

Tottaa makes it simple and fast to book. With our listings, you can see what kind of massage you want, read about the providers, see that they are free and then contact them directly. After you choose, you can book a massage in Araria at your convenient time and location. In order to get your desired massage services, apply the following simple steps:

Step 1: Browse Our Listings

Take a peek around our site to view a few massage professionals. Each listing gives you information about the many sorts of massages, how long they last, how much they cost, and where they are situated. This makes it easier to choose the finest ones.

Step 2: Compare and Shortlist

Examine the profiles carefully to compare how the services, talents, and reviews posted by customers differ. This phase makes sure you choose a business that has the style, pricing, and supply you desire.

Step 3: Connect with the Provider

When you have decided, use the information that you are offered so that you can contact them directly. One can communicate it to the massage giver thus making it understood what massage you want at what time and when.

Step 4: Confirm the Appointment

The date, time and place of the service, which could be your home, a hotel or the spa where the therapist may be found. You also need to agree on the payment method and any other accords prior to commencement of the course.

Step 5: Relax and Enjoy Your Massage

All you have to do on the day of the appointment is have your area ready for the house visit. The remainder will be handled by the expert. Take it easy and enjoy a massage that is made just for you.

Frequently Asked Questions

To locate a professional who can meet your needs, read our biography, reviews and advertising.

Yes, many of the therapists on our site will come to your house so you may feel safe and at ease.

You may pick based on talents since most adverts provide their qualifications in their profiles.

It would be advisable to make a reservation earlier to guarantee that you would be able to get a massage, particularly against the prevalent services of massage.

Not at all. Tottaa exclusively connects users with service providers. The doctor gets to choose how to handle payment.

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Sex Stories

यह बात तब की है जब मैं 12वीं में Sex Stories पढ़़ती थी. मैं एक को-एड स्कूल में पढ़़ती थी जिस में लड़के और लड़कियाँ दोनों साथ में पढ़़ते हैं और हमारे स्कूल में लड़के पैंट शर्ट और लड़कियाँस्कर्ट शर्ट पहनते हैं टाई के साथ. वो मेरे स्कूल के सबसे सुनहरे दिन थे. मैं अपनी क्लास में सबसे सुंदर थी, ऐसा मुझे कई लड़के कह चुके थे पर मैं ये बात किसी और के मुंह से सुनना चाहती थी.

हाँ ! आईने के सामने खड़े हो के ख़ुद को निहारती भी थी कभी बालों को समेटती कभी बिखेरती कभी अपनी माँ का बलोउस और पेटीकोट पहन के साड़ी पहनने की कोशिश करती तो कभी फव्व्वारे के नीचे अपनी नाईटी पहन के नहाती !!

उन दिनों मैं अपने यौवन के शिखर पे थी मेरे उभरते हुए स्तन और खूबसूरत जांघें सबको लुभाती थी.. मेरी क्लास के सभी लड़के मुझ पे जान छिड़कते थे..पर मैं 12वीं में पढ़ने वाले एक लड़के को बेहद पसंद करती थी उसका नाम वरुण था वो बेहद स्मार्ट और हैंडसम था. उसकी हाईट करीबन 6 फीट रही होगी और मैं 5.6 फीट की थी पर हील्स पहन के उसके कंधे तक पहुँच ही जाती थी।

उन्ही दिनों टीचर्स डे आने वाला था.. दो दिन पहले नाम अनोउंस हुए चूंकि उसकी क्लास में कम लड़कियाँथी तो हमारे क्लास से लड़कियों को टीचर्स बनने का प्रस्ताव आया. मेरे गैर मौजूदगी में मेरे क्लास के कुछ शरारती लड़कों ने मुझे साड़ी में देखने के लिए लिस्ट में मेरा नाम लिखवा दिया और उस दिन 5 सितम्बर को टीचर बनी…

मैंने व्हाइट कलर की साड़ी पहनी थी जिसमें गुलाबी और हलके जामुनी रंग के खूबसूरत फूल थे और व्हाइट ब्लाउज जिसका गला बेहद डीप था चूँकि वो माँ का था इसीलिए मुझे उसे थोड़ा टाइट करना पड़ा था. पर गला तो बदला नहीं जा सकता था इसीलिए मुझे ऐसे ही पहन ना पड़ा. उस ब्लाउज का गला V आकार का था और बेक लेस था जिस वजह से मैं ब्रा भी नहीं पहन पाई. पेटीकोट बहुत बड़े घेरे होने की वजह से मैंने अंदर एक टाइट जींस पहनी थी और फ़िर साड़ी बंधवाई माँ से, ताकि मैं पतली और लम्बी लगूँ..

फ़िर मैंने अपने जांघो को चूमते लंबे बाल खोले और आधे बांधे, हलकी सी न्यूड लिपस्टिक और मस्कारा, लाइनर लगाया और पहुँच गई स्कूल सुबह 8 बजे. क्लास्सें 9 बजे शुरू होनी थी.. और असेम्बली में टीचर्स मीट होनी थी असली और नकली दोनों की, ताकि हम अपनी टीचर को थंक्स कह सकें।

मैं अपनी टीचर के लिए एक रेड रोज़ लायी थी और एक कार्ड. मैंने घोषणा के वक्त सुना वरुण मेरे साथ ही था यानि वरुण और मैं एक ही टीचर बने थे चूंकि हमारे स्कूल मैं एक क्लास में 50 बच्चे पढ़ते थे और एक बन्दे का 50 बच्चों को संभालना काफी मुश्किल होता तो टीचर्स ने एक क्लास के लिए दो टीचर बनाये।

मैं काफी उत्साहित थी और नर्वस भी कि आज मैं सारा दिन वरुण के साथ रहूंगी. जब मैं अपनी टीचर से मिलने गई, उन्हें थंक्स कहने के लिए तो वो भी मेरे साथ था. मैंने वो गुलाब जो मैं अपनी टीचर के लिए लायी थी उन्हें देने की बजाये वरुण को दे दिया गलती से नर्वसनेस में.. और वो जोर जोर से हँसने लगा. फ़िर कहने लगा थंक्स वैसे ये तुम्हारे बालों पे ज्यादा खिलेगा.. और मेरे बालों में फूल लगते हुए वो बोला.. नाऊ यू आर लूकिंग गोर्जियस..!!

मैं बेहद खुश थी उसने मुझे गोर्जिअस कहा.. फ़िर हम लोगों को अपना टाइम टेबल दिया गया उस दिन के लिए और हम अपनी फर्स्ट क्लास लेने के लिए 11वीं क्लास में पहुँच गए मैंने जैसे ही क्लास में कदम रखा, मैं ठोकर खाकर गिरने लगी थी क्यूंकि मेरा सारा ध्यान तो वरुण पे था.. क्यूंकि वो एक दम मेरे सपनों के राजकुमार जैसा लग रहा था काला कोट, काली टाई, हलकी जामुनी फोर्मल शर्ट में, सच, मैं अपने होश में नहीं थी।

अचानक से वरुण ने मुझे थामा और गिरने से बचाया.. अपने पैरों पे खड़े होते हुए मैंने उसे थंक्स कहा और वो मुस्कुराते हुए बोला माय प्लेजर ! तभी पीछे से क्लास के एक लड़के ने कमेन्ट किया अरे वाह क्या जोड़ी है जामुन और जामुनी की और वरुण ने उस लड़के को ये कहते हुए देख लिया और उसे क्लास के बाहर खड़ा कर दिया… और बच्चों को पढ़ाने लगा.
तब मुझे पता चला कि वो देखने में ही नहीं पढ़़ाई में भी बेहद होशियार था। मैं सच मुच उसकी दीवानी होती जा रही थी. कई बार उसने मुझे उसे निहारते हुए देखा पर देख कर अनदेखा कर दिया. इसी तरह 2 पीरियड गुजर गए, तीसरा पीरियड खाली था।

तो हम दोनों स्टाफ रूम में चले गए वहां कोई नहीं था हम दोनों के सिवा, वहां मैं सर झुकाए बैठी थी. और एक नोवेल पढ़ रही थी. कि अचानक से वरुण ने पूछा- तुम्हारा नाम क्या है? मैंने कहा आपको मेरा नाम भी नहीं मालूम और हम इकठे काम कर रहे हैं तो कहने लगा- बताओगी नहीं तो पता कैसे चलेगा…
तो मैंने कहा पूछोगे नहीं तो क्या मुझे सपना आया कि तुम्हें मेरा मतलब आपको मेरा नाम नहीं मालूम.
तो उसने मुझे बीच में टोकते हुए कहा- ठीक है तुम मुझे तुम कह कर बुला सकती हो, मैं काफ़ी खुले विचारों का हूं।
मैंने कहा.. अच्छा.. कितना खुला है तुम्हारा मन..
तो वो हसने लगा

मैंने कहा मैंने कोई जोक नहीं मारा है तो कहने लगा- रहने दो तुम अभी नादाँ हो..
और मैं चुप हो गई और नोवेल पढ़ने लगी.
उसने फ़िर कहा- ये साड़ी तुम्हारी अपनी है?
मैंने कहा- नहीं माँ की है.
और फ़िर उसे टोकते हुए कहा कि मुझे नोवेल पढ़ने दो मुझे पसंद नहीं कि कोई मुझे पढ़़ते हुए डिस्टर्ब करे. तो वो नाराज़ हो के वहां से उठ के चला गया. मुझे बहुत ग्लानि महसूस हुई कि मैंने उस से ऐसा कहा. इतनी मुश्किल से तो मैं उसका साथ पा सकी हूँ वो भी एक दिन के लिए उसमें भी मैंने उसे नाराज़ कर दिया. तो मैंने अपनी नोवेल वहीँ छोड़ी और उसके पीछे भागते हुए गई और उसे दूर से कहा- एक्सक्यूज़ मी ! आई एम् सॉरी फॉर बीइंग रयुड टू यू । आप मुझसे नाराज़ हो?

उसने कहा हाँ.. मैंने फ़िर कहा सॉरी तो कहने लगा कि मैं तुमसे उस बात पे नाराज नहीं हूँ इस बात पे नाराज हूँ कि तुमने मुझे आप कहके बुलाया और. हलके से मुस्कुराते हुए शरारत भरे लफ़्ज़ों में बोला- मैं खूबसूरत लड़कियों से न तो नाराज़ होता हूँ न ही उन्हें नाराज़ करता हूँ.
मेरे मन में लड्डू फ़ूट रहे थे कि उसने मुझे खूबसूरत कहा और मेरे चेहरे पे खुशी झलकने लगी जो उसने भी नोटिस की. फ़िर कहने लगा इतनी खुश मत हो मैंने तुम्हे खूबसूरत नहीं कहा और मेरा सारा मूड ऑफ़ कर दिया.

मैं मुड़ के वापिस स्टाफ रूम में जाने लगी कि पीछे से उसने मुझे आवाज़ लगायी… कृति !!! तुम्हारा नाम क्या है..!!!

मैंने कहा तुम्हे मेरा नाम मालूम है तो पूछा क्यूँ था.. कहने लगा मुझे मालूम है कि तुम थोडी सी शोर्ट टेम्पेरेड हो इसीलिए तुम्हे तंग कर रहा था.
मैंने कहा.. मैं शोर्ट टेम्पेरेड ही नहीं कराटे चैम्प भी हूँ. इसीलिए बचके रहना. फ़िर बोला कि तुम कराटे चैम्प होगी पर मैं प्रेम पुजारी हूँ फ़िर मैं शरमा के स्टाफ रूम में चली गई थोड़ी देर में हमारा चौथा पीरियड लगने वाला था।

जैसे ही वरुण स्टाफ रूम में आया मैं उठ के जाने लगी और मेरी साड़ी का पल्लू उसके कोट के बटन में अड़ गया. अच्छा हुआ मैंने उसे पिन अप कर रखा था. उसने पल्लू छुड़वाया और मैं भागते हुए क्लास में चली गई पर पल्लू छुडाते वक्त मैंने उसके होंठो पे आती मुस्कराहट साफ देखी और 5 मिनट बाद वो भी क्लास में आया.

मैं क्लास में खड़ी थी अंदर आते हुए उसने कहा- बच्चों आज पढ़़ाई का मूड है.. सब ने जोर से चिल्लाते हुए कहा- नहीं ! और क्लास को दो हिस्सों में बाँट दिया एक तरफ़ लड़के और वो और दूसरी तरफ़ लड़कियाँऔर मैं और हम अन्ताक्षरी खेलने लगे.!!!
खेलते खेलते उनकी बारी आई अक्षर था प तो उन्होंने मेरी तरफ़ देखते हुए गाना शुरू किया प्यार के लिए चार पल कम नहीं थे कभी तुम नहीं थे कभी हम नहीं थे…

मैंने शरमा के नज़रें झुका ली थोड़ी देर बाद मेरी बारी आई गाने की मेरा अक्षर था डी तो मैंने गया दिल दे दिया है जान तुम्हे देंगे, दगा नहीं करेंगे सनम, इसी तरह से खेल चलता रहा और हम दोनों अपने दिल के एहसासों को गानों में बयाँकरते रहे. इसी तरह वक्त गुज़र गया और रिसेस की घंटी बजी. सभी बच्चे शोर करते हुए बाहर चले गए और मैं अपनी साड़ी समेटते हुए खड़ी हुई. वरुण मुझे ही देख रहा था और मैंने जान बूझ कर ध्यान नहीं दिया.

मैं क्लास से निकलने लगी तो कहने लगा- तुम कहाँ स्टाफ रूम में खाना खाओगी क्या. मैंने कहा- हाँ ! तो कहने लगा कि इस टाइम पूरा स्टाफ रूम फुल होगा मैंने कहा तो क्या हुआ और जाने लगी तो कहने लगा कि मैं तुमसे कुछ बात करना चाहता हूँ. तो मैंने कहा कि करो तो कहता कि वो मैं तुमसे कहना चाहता हूँ कि आई.. आई… आई लव… आई लव…
मैंने कहा- आगे भी कुछ बोलोगे अब..
तो कहने लगा कि… आई लव बुक्स !!!

मैंने कहा- यूऽऽऽ..!!!! मैं जा रही हूं और स्टाफ़ रूम की तरफ़ जाने लगी तो कहने लगा- अरे रुको मैं भी आता हूँ ना तुम्हारे साथ…!!
मैंने कहा- अपने आप आ जाना, मैं जा रही हूँ.
और स्टाफ रूम में आ गई .. वहां कुछ और ही माहौल था, लड़कियाँ साड़ी ठीक कर रही थी और मेक अप कर रही थी और अपनी साडियाँ लड़कों से ठीक करा रही थी .. ये सब देख के मुझे और गुस्सा आ गया और मैं वरुण के पास वापिस चली गई.

मेरे पहुँचने पे वो कहने लगा देख लिया तमाशा इसीलिए मैं मना कर रहा था .. पर मेरी तो ना मानने की ठान रखी है तुमने .. तो मैंने कहा अच्छा ना सॉरी ! .. कहता सॉरी बोल के एहसान कर रही हो… और मेरा हाथ पकड़ के उसने मुझे दीवार की तरफ़ धक्का दिया और कहने लगा- मैं तुमसे उमर में भी बड़ा हूँ और सोच में भी, दुनिया तुमसे ज्यादा देखी है,…तुम्हें क्या लगता है तुम कोई हूर की परी हो जिसके लिए लड़के मरते हैं?

तो मैंने कहा मेरा हाथ छोड़ो मुझे दर्द हो रहा है। छोड़ते हुए उसने मुझे सॉरी कहा और फ़िर सारा दिन मैंने उस से बात नहीं की.
स्कूल टाइमिंग्स के बाद टीचर्स के लिए स्कूल में लंच था लंच कराने के बाद जब में स्कूल से निकलने लगी तो जोर जोर से बारिश शुरू हो गई।
मैं पूरी तरह से भीग गई और मेरे ब्लाउज़ व्हाइट होने की वजह से अंदर के मेरे स्तन साफ दिखने लगे. मुझे भीगते हुए रिक्शा का इंतज़ार करते देख वरुण ने मुझे बाईक पे घर छोड़ने की ऑफर दी और मैंने कोई और रास्ता ना दीखते हुए उसे हाँ कर दी.

मेरी साड़ी भीगने की वजह से जींस के साथ एक दम चिपक गई थी और जींस दिखने लगी थी तो मुझे वरुण ने कहा तुम साड़ी उतार दो ..और जींस में बैठ जाओ .. मैं तुम्हे अपने घर ले चलता हूँ वहां ब्लाउज चेंज़ करके मेरी टी शर्ट पहन के घर चली जाना तब तक बारिश भी कम हो जायेगी . इसीलिए वो मुझे अपने घर ले गया मेरे भीगे बाल मेरे बदन से चिपके हुए थे जैसे पेड़ से कोई लट चिपकी होती है और मेरी जींस पूरी तरह भीग चुकी थी .. मेरे व्हाइट ब्लाउउज़ में से मेरे स्तन साफ नजर आ रहे थे.
उसने मुझे घर के अन्दर बुलाया और एक टॉवेल दिया .. और पूछा कि तुम्हारे पास और कपड़े नहीं हैं क्या.

मैंने कहा- नहीं !

तो उसने मुझे अपनी टी शर्ट दी। वो बेहद खुली थी, उसके अंदर से मुझे उसके बदन की खुशबू भी आ रही थ। मैं अपनी टांगे पोंछ रही थी तो वरुण मेरे पास आकर खड़ा हो गया और मेरे चेहरे पे फिसलते मेरे बालों को ऊपर करने लगा ताकि मैं अच्छे से अपना बदन पोंछ सकूँ। मेरे ब्लाउज में से मेरे स्तन ऊपर की ओर झांक रहे थे।

फ़िर मैं खड़ी हुई और बाथ रूम में चली गई चेंज करने के लिए पर मेरे ब्लाउज की डोरियों तक मेरे हाथ नहीं पहुँच रहे थे कि मैं उन्हें खोल सकूँ. और घर में वरुण के सिवा कोई और नहीं था, तो मैंने उसे मदद के लिए बुलाया। उसने कहा क्या हुआ .. मैंने कहा कि मेरे ब्लाउज कि डोरी नहीं खुल रही, तो उसने डोरी पकड़ के खींची और खोल के बाहर चला गया..

मुझे उसकी ये बात बहुत अच्छी लगी कि उसने अकेलेपन का कोई ग़लत फायदा नहीं उठाया. मैंने उसकी दी हुई टी शर्ट पहनी और घर चली गई. उसकी बाईक पे बैठ के।
उसके बाद से हम दोनों के बीच अच्छी खासी दोस्ती हो गई.

और अब तक हम दोनों खूब मस्ती करते हैं.

ये हम दोनों की प्रेम कहानी की सिर्फ़ शुरुआत थी. बाकी के किस्से में आप सभी को इस कहानी के दूसरे अंको में बताउंगी. हमारी प्रेम कहानी में भी वो सब कुछ हुआ जो हर प्रेम कहानी में होता है लेकिन कुछ अलग अंदाज़ से. तो आप लोगों को कैसी लगी मेरी कहानी ये मुझे ई मेल करके जरूर बताइयेगा, मुझे आपके फीडबैक का इंतज़ार रहेगा .. अगर आपको ये शुरुआत पसंद आई तभी मैं इस सच्ची कहानी को आगे बढाउंगी. पढ़ने के लिए बहुत बहुत शुक्रिया. Sex Stories

हेल्लो दोस्तो, मेरा नाम है नयन । मैंने अन्तर्वासना पर हजारों कहानियाँ पढ़ी हैं। यह मेरी पहली और सच्ची कहानी है। मैं वड़ोदरा (गुजरात) के कंपनी में एक पद नौकरी करता हूँ। मैं छः फुट लम्बा और कसरती बदन का मालिक हूँ। मैं jain परिवार से हूँ तो लड़कियाँ मुझे देखते ही फ़िदा हो जाती हैं। एक बार मेरा लैंड लाइन बी.एस.एन.एल. फोन में कुछ प्रॉब्लम आ गई। मैंने अपने नौकर से कहा कि कल वो फोन बी.एस.एन.एल. के कार्यालय ले जाकर इसे बदल लाये। लेकिन सुबह उसे आकास्मिक छुट्टी जाना था। इसलिए ऑफिस जाने से पहले फोन लेकर मैं खुद ही निकल गया। मैं अपनी गाड़ी से उतरा और फोन लेकर सीधा रिसेप्शनिस्ट के पास गया। सॉरी दोस्तो, उसे रिसेप्शनिस्ट कहना गलत होगा क्योंकि वो तो किसी पोर्न स्टार से कम नहीं थी, इतना क्यूट चेहरा, इतनी प्यारी हँसी मैंने आज तक नहीं देखी थी। वो अपने मोबाइल पर किसी से बात कर रही थी। जैसे ही मैं उसके पास गया तो वो फोन रख कर खड़ी हो गई। अब मैं उसका पूरा शरीर देख रहा था। क्या चूचे थे उसके ! मन कर रहा था कि जैसे चूम लो इन जालिम चूचों को जिन्होंने मेरा पहली नज़र मैं ही कत्ल कर दिया था। मेरा रोम रोम खड़ा हो गया और लंड का तो हाल क्या बताऊँ, लग रहा था कि अभी पैंट से बाहर निकल आएगा। मैं आप लोगों को बताना भूल गया कि जब भी मैं ऑफिस जाता हूँ तो फोर्मल पैंट ही पहन के जाता हूँ इसलिए उसकी नज़र मेरी पैंट के उभरे हुए हिस्से पर जा रुकी। उसने एक प्यारी सी स्माइल के साथ कहा- बैठ जाईये, मैं आपकी क्या मदद कर सकती हूँ? लेकिन मुझे उस समय कुछ होश ही नहीं थी, मैं कभी उसकी जांघों की तरफ देख रहा था तो कभी उसके चूचों को। उसने मुझे फिर से कहा- कि बैठ जैए, मेरा नाम नैना है मैं आपकी क्या मदद कर सकती हूँ? तब जाकर मुझे कहीं होश आया। 34-30-36 के करीब शरीर और पाँच फुट चार इंच के करीब उसकी लम्बाई थी। मैं एकदम चौंक कर जल्दी में बोला- मेरा नाम रॉकी है, आप बहुत खूबसूरत हैं, मेरा फोन खराब हो गया है, मुझे इसे रिपेयर करवाना है। मैं तुम्हें पहली नज़र में ही अपना दिल दे बैठा हूँ, मुझे मेरा फोन कब तक मिल जायेगा, मैं तुम्हें चाहने लगा हूँ। वो एकदम से बोली- यह आप क्या कह रहे हो? मैं थोड़ा घबराते हुए बोला- मुझे माफ़ कर दो, मुझे नहीं पता कि मैंने आपको क्या बोला है, पर इतना बोलना चाहता हूँ कि आप बेहद सुन्दर हैं और मैं आपको प्यार करने लगा हूँ। नैना मुझे आँख मारते हुये बोली- प्यार करने लगे हो या मुझे चोदना चाहते हो???? मैं एक पल के लिये कुछ नहीं बोला, फिर मैं हंसते हुये बोला- प्यार करते हुये चोदना चाहता हूँ। नैना ने कहा- 500 रुपये एक घंटे के और पूरी रात के 1500 रुपये। मैंने हंसते हुये कहा- 3000 रुपये एक रात के। नैना खुश हो गई, उसने मेरा मोबाइल ‌नंबर लिया और मुझे कहा- रात को 8 बजे काल करती हूँ। वहाँ से मैं अपने ऑफिस निकल गया। ऑफिस से घर जाते हुए मैंने कॉन्डम का एक बड़ा पैकिट ले लिया। रात को ठीक 8 बजे नैना ने फोन किया और कहा कि वो बस स्टैंड पर है मुझे पिक कर लो। मैंने तुरंत अपनी गाड़ी निकाली और उसे लेने चला गया। उसने काले रंग की टी-शर्ट और हल्की नीली जींस पहन रखी थी। मैंने एक जेंटलमेन की तरह अपनी गाड़ी की खिड़की खोली और कहा- नैना जी प्लीज़ ! उसने एक प्यारी सी स्माइल दी और कहा- थैंक्यू ! मैंने रास्ते से कुछ स्नेक्स, डिनर और कोल्डड्रिंक पैक करवा ली। रास्ते मैं मैंने एक दो बार गेयर लगाते हुए उसकी मोटी मोटी जांघ को छू लिया था। मेरा लंड एकदम से अकड़ चुका था, खैर किसी तरह मैंने अपने ऊपर कंट्रोल रखा। 15 मिनट के बाद हम लोग घर आ गये। मैंने गाड़ी से पैक करवाया हुआ सामान उठाया और हम दोनों मेरे घर में आ गये। मैंने दरवाजा अंदर से लॉक किया और नैना को बाहों में भर लिया। नैना हंसते हुए बोली- आराम से प्यार का मज़ा लो ! पूरी रात बाकी है। लेकिन मैं कहाँ रूकने वाला था, मैंने कहा- प्यार से मज़ा लेने के लिए पूरी रात है। लेकिन अभी मुझे अपने तरीके से चोदने दो। मैंने उसे अपने दोनों हाथों में उठाया और सीधे अपने बेडरूम में ले गया। उसने मुझे किस करना शुरु कर दिया, मेरे लिप्स को वो बुरी तरह से किस करने लगी। मैं भी जोश में आ गया और उसको किस करने लगा और उसको अपनी बाहों में दबाने लगा। मैंने उसको खींच कर बेड पर लिटा दिया और मैं उसके ऊपर आ गया और उसको चूमना शुरु कर दिया। दस मिनट तक मैं उसको चूमता रहा। फिर मैंने उसकी टी-शर्ट खोल दी। उसके बाद मैंने उसकी ब्रा भी खोल दी। जैसे ही मैंने ब्रा खोली तो उसके दूध उछल कर बाहर आ गये, मैं उन्हें देखकर दबाने लगा। फिर मैंने उसकी निप्पल को मुंह में लिया और चूसने लगा। वो आ आआह्ह ह्हा आ आआह हाह्हह कर रही थी। मैं उसे चूसता ही रहा। थोड़ी देर बाद मैंने उसकी जींस खोल कर उसको पैंटी में ला दिया। उसकी चूत बहुत गरम हो गई थी, उसकी पैंटी गीली हो चुकी थी। मैं पैंटी को निकाल कर उसकी चूत को फैला कर चाटने लगा। वो सिसकारियाँ भर रही थी- अहा आआ अस्शहस आआ आअह्ह्हस्स स्सशाआ आआहह्हस्स अह्हह ह्ह हस्साआ आअह्ह ह्हहा हह्हाआ ह्हह्हह ! वो मेरे लंड को हाथ में लेकर खींच रही थी और कस कर दबा रही थी। फिर नैना ने कमर को ऊपर उठा लिया और मेरे तने हुए लंड को अपनी जांघों के बीच लेकर रगड़ने लगी। वो मेरी तरफ़ करवट लेकर लेट गई ताकि मेरे लंड को ठीक तरह से पकड़ सके। उसकी चूची मेरे मुंह के बिल्कुल पास थी और मैं उन्हें कस कस कर दबा रहा था। अचानक उसने अपनी एक चूची मेरे मुंह मे ठेलते हुए कहा- चूसो इनको मुंह में लेकर। मैंने उसकी बाईं चूची को मुँह में भर लिया और जोर जोर से चूसने लगा। थोड़ी देर के लिये मैंने उसकी चूची को मुंह से निकाला और बोला- मैं पूरे दिन तुम्हारी चूचियों के बारे में सोचते हुए 8 बजने का इंतज़ार कर रहा था । इनको मसलने की बहुत इच्छा हो रही थी। जब मैं सुबह तुमसे मिला था तो मेरा दिल कर रहा था कि इन्हें वहीं मुंह में लेकर चूसूं और इनका रस पीऊँ। तुम नहीं जानती नैना कि तुमने मुझे और मेरे लंड को सुबह से परेशान कर रखा है। “अच्छा तो आज अपनी तमन्ना पूरी कर लो, जी भर कर दबाओ, चूसो और मज़े लो, मैं तो आज पूरी रात तुम्हारी हूँ ! जैसा चाहे वैसा ही करो।” फिर क्या था, मेरी जीभ उसके कड़े निप्पल को महसूस कर रही थी। मैंने अपनी जीभ नैना के उठे हुए कड़े निप्पल पर घुमाई। मैं दोनों अनारों को कस के पकड़े हुए था और बारी बारी से उन्हें चूस रहा था। मैं ऐसे कस कर चूचियों को दबा रहा था जैसे कि उनका पूरा का पूरा रस निचोड़ लूंगा। नैना भी मेरा पूरा साथ दे रही थी, उसके मुंह से ओह ! ओह ! अह ! सी सी ! की आवाज निकल रही थी, मुझसे पूरी तरह से सटे हुए वो मेरे लंड को बुरी तरह से मसल रही थी और मरोड़ रही थी। उसने अपनी बाईं टांग को मेरे कंधे के ऊपर चढ़ा दिया और मेरे लंड को अपनी जांघों के बीच रख लिया। मुझे उसकी जांघों के बीच एक मुलायम रेशमी एहसास हुआ। यह उसकी चूत थी। नैना ने पैंटी नहीं पहन रखी थी और मेरे लंड का सुपाड़ा उसकी झांटों में घूम रहा था। मेरा सब्र का बांध टूट रहा था, मैं नैना से बोला- नैना, मुझे कुछ हो रहा है, और मैं अपने आपे में नहीं हूँ, प्लीज मुझे बताओ कि मैं क्या करूं? नैना बोली- करो क्या, मुझे चोदो, फाड़ डालो मेरी चूत को। पर मैं चुपचाप उसके चेहरे को देखते हुए चूची मसलता रहा। उसने अपना मुंह मेरे मुंह से बिल्कुल सटा दिया और फुसफुसा कर बोली- अपनी नैना को चोदो ! नैना हाथ से लंड को निशाने पर लगा कर रास्ता दिखा रही थी और रास्ता मिलते ही मेरा लंड एक ही धक्के में सुपाड़ा अंदर चला गया। इससे पहले कि नैना सम्भले या आसन बदले, मैंने दूसरा धक्का लगाया और पूरा का पूरा लंड मक्खन जैसी चूत की जन्नत में दाखिल हो गया। नैना चिल्लाई- उई ईइ ईईइ माआआ हुहुह्हह ओह नयन ! ऐसे ही कुछ देर हिलना डुलना नहीं, हाय ! बड़ा जालिम है तुम्हारा लंड। मार ही डाला मुझे तुमने मेरे राजा। नैना को काफ़ी दर्द हो रहा था, पहली बार जो इतना मोटा और लम्बा लंड उसकी बुर में घुसा था। मैं अपना लंड उसकी चूत में घुसा कर चुपचाप पड़ा था। नैना की चूत फड़क रही थी और अंदर ही अंदर मेरे लौड़े को मसल रही थी। उसकी उठी उठी चूचियाँ काफ़ी तेज़ी से ऊपर नीचे हो रही थी। मैंने हाथ बढ़ा कर दोनों चूचियों को पकड़ लिया और मुंह में लेकर चूसने लगा। नैना को कुछ राहत मिली और उसने कमर हिलानी शुरु कर दी। फिर नैना बोली- अब लंड को बाहर निकालो ! लेकिन मैं लंड धीरे धीरे नैना की चूत में अंदर-बाहर करने लगा। फिर नैना ने स्पीड बढ़ाने को कहा। मैंने अपनी स्पीड बढ़ा दी और तेज़ी से लंड अंदर-बाहर करने लगा। नैना को पूरी मस्ती आ रही थी और वो नीचे से कमर उठा उठा कर हर शॉट का जवाब देने लगी। रसीली चूची मेरी छाती पर रगड़ते हुए उसने गुलाबी होंठ मेरे होंठ पर रख दिये और मेरे मुंह में जीभ ठेल दिया। चूत में मेरा लंड समाये हुए तेज़ी से ऊपर नीचे हो रहा था। मुझे लग रहा था कि मैं जन्नत पहुँच गया हूं। जैसे जैसे वो झड़ने के करीब आ रही थी उसकी रफ़्तार बढ़ती जा रही थी। कमरे में फच फच की आवाज गूंज रही थी। मैं नैना के ऊपर लेट कर दनादन शॉट लगाने लगा। नैना ने अपनी टांग को मेरी कमर पर रख कर मुझे जकड़ लिया और जोर जोर से चूतड़ उठा उठा कर चुदाई में साथ देने लगी। मैं भी अब नैना की चूची को मसलते हुए ठका-ठक शॉट लगा रहा था। कमरा हमारी चुदाई की आवाज से भरा पड़ा था। नैना अपनी कमर हिला कर चूतड़ उठा उठा कर चुदा रही थी और बोले जा रही थी- अहह आअह उनह ऊओह् ऊऊह् हाआआन हाआऐ माआआअर गयययययये रीईए, लल्लल्लल्ला चूऊओद रे चूऊओद उईई मीईईरीईइ माआअ, फाआआअत गाआआईई रीईई शुरु करो, चोदो मुझे। लेलो मज़ा जवानी का मेरे राज्जज्जा। और अपनी गांड हिलाने लगी। मैंने लगातर 30 मिनट तक उसे चोदा। मैं भी बोल रहा था- लीईए मेरीईइ रानीई, लीई लीईए मेरा लौड़ा अपनीईइ ओखलीईए मीईए। बड़ाआअ तड़पयया है तूनीई मुझीई। लीईए लीई, लीई मेरीईइ नैना ये लंड अब्बब्बब तेराआ हीई है। अह्ह! उह्हह्ह क्या जन्नत का मज़ाआअ सिखयाआअ तुनीईए। मैं तो तेरीईइ गुलाम हूऊऊ गईए। नैना गांड उछाल उछाल कर मेरा लंड चूत में ले रही थी और मैं भी पूरे जोश के साथ उसकी चूचियों को मसल मसल कर अपनी नैना को चोदे जा रहा था। नैना मुझको ललकार कर कहती- लगाओ शॉट ! और मैं जवाब देता- ये ले मेरी रानी, ले ले अपनी चूत में। “जरा और जोर से सरकाओ अपना लंड मेरी चूत में मेरे नयन !” “ये ले मेरी नैना रानी, ये लंड तो तेरे लिये ही है।” “देखो नयन, मेरी चूत तो तेरे लंड की दिवानी हो गई ! और जोर से आआईईए मेरे राजा। मैं गईईईए रीई !” कहते हुए मेरी नैना ने मुझको कस कर अपनी बाहों में जकड़ लिया और उसकी चूत ने ज्वालामुखी का लावा छोड़ दिया। अब तक मेरा भी लंड पानी छोड़ने वाला था, मैं बोला- मैं भी अयाआआ मेरी जाआअन ! और मैंने भी अपने लंड का पानी छोड़ दिया और मैं हांफ़ते हुए उसकी चूची पर सिर रख कर कस के चिपक कर लेट गया। हम दोनों 10 मिनट इसी तरह लेटे रहे। फिर हम दोनों एक साथ नहाने गये। फ्रेश होने के बाद हम ने डिनर किया। रात को मैंने अन्तर्वासना स्टाइल में उसकी कुंवारी गांड मारी और पूरी रात उसे छ बार चोदा। आपको मेरी कहानी कैसी लगी प्लीज मुझे मेल कर के बताओ। jainnayan150@gmail.com
प्रेषक : राहुल वर्मा हाय फ्रेंड्स Indian Sex Stories

मेरा नाम राहुल है, उम्र २१ साल है, Indian Sex Stories दिल्ली का रहने वाला हूँ।

मैं आज एक ऐसी कहानी सुनाने जा रहा हूँ जो मेरे साथ गुजरी है।

मैं कुछ दिन पहले अपने एक मित्र से मिलने के लिए मनाली गया था, जिसका नाम अंकित है। वहाँ का मौसम मुझे बहुत अच्छा लगा। अंकित मनाली के एक कॉलेज में पढ़ता है।

एक दिन मैं अपने दोस्तों के साथ घूमने के लिए निकला। मेरे दोस्त की गर्लफ्रेंड पूजा और उसकी छोटी बहन सोनिया भी साथ में थी। हम लोग बाइक से कैम्पटी फ़ाल के लिए निकले। सोनिया मेरी बाइक पर थी। वहाँ पहुँचने के बाद अंकित और पूजा मुझे और सोनिया को एक जगह छोड़ कर दूसरी तरफ जाते हुए बोले- हम थोड़ी देर बाद तुमसे यहीं मिलेंगे !

हमने बोला- ठीक है !

उनके जाने के बाद मैने सोनिया से कहा- चलो हम कहीं चल के बैठते है !

सोनिया तैयार हो गई। हम लोग पूल के पास जाकर बैठे और बातें करने लगे। मैंने सोनिया से काफी बातें की और हम दोनों अच्छे दोस्त बन गए। मैंने सोनिया से पूछा- तुम्हारा कोई बॉयफ्रेंड नहीं है?

सोनिया ने मना कर दिया।

मैंने सोनिया से कहा- तुम मेरी गर्लफ्रेंड बनोगी?

तो उसने हाँ कर दिया। मैं काफी प्रसन्न हो गया। हम लोग कैम्पटी फ़ाल से वापस लौटने के बाद कमरे पर आए। मेरा मन सोनिया से बातें करने को कर रहा था। शाम को मैंने सोनिया से कहा- सोनिया मुझे तुम से कुछ काम है।

सोनिया ने कहा- बोलो !

मैंने सोनिया से कहा- हम अकेले में बात करें?

सोनिया ने हाँ कर दी। मैं और सोनिया ऊपर छत पर चले गए।

मैंने सोनिया से बातो बातो में कहा तुम मुझे बहुत अच्छी लगती हो। सोनिया मुस्कुरा उठी, मैंने उसका हाथ पकड़ लिया।

सोनिया ने मुझे देखा, मैंने सोनिया को अपनी तरफ खींचते हुए कहा- क्या हम दोनों एक हो सकते हैं?

सोनिया ने कुछ नहीं बोला और शर्म से पलकों को झुका लिया। मैंने सोनिया को चूम लिया और अपने बाँहों में भर लिया। सोनिया शरमा रही थी। मैं सोनिया की गर्दन को चूमने लगा मगर सोनिया ने कुछ नहीं बोला। मैं उसके गर्दन को चूमते हुए उसके होटों तक पहुच गया।

अब सोनिया भी धीरे-धीरे मेरा साथ देने लगी। मैंने उसे किस करते हुए उसके बूब्स को दबाने लगा और मेरा लंड खड़ा हो गया और सोनिया के मुँह से सिस्कारियाँ निकलने लगी। सोनिया भी मेरा साथ देने लगी और मैंने सोनिया के शर्ट की बटन को खोल कर उस के ब्रा को ढीला करके उसके बूब्स को अपने मुँह में ले लिया। मैंने अपना एक हाथ सोनिया की कमर पर रखा और मैंने सोनिया को छत पर ही लिटा दिया और सोनिया के जींस की बटन को खोलकर नीचे कर दी। उसकी चिकनी-चिकनी जांघों को देख कर मुँह में पानी आ गया। एक हाथ उसके दोनों टांगों के बीच में ले गया। तब तक उसकी पैंटी गीली हो चुकी थी।

मैंने झट से उसकी पैंटी को नीचे कर मैंने उसकी चूत के बालों में उंगली फिरानी शुरू कर दी। अब तो उसके मुँह से और भी जोर से सिस्कारियाँ निकलने लगी।

मैंने अपना छः इंच का लण्ड सोनिया के हाथों में पकड़ा दिया, सोनिया मेरे लंड को सहलाने लगी। लंड को सहलाते हुए सोनिया बोली- राहुल ! अब और देर मत करो ! और मुझसे चिपक गई। मैंने सोनिया की टांगों को फैलाया और उसकी चूत को चाटने लगा।

अब सोनिया जोर-जोर से ऊऊऊउह्ह्ह्ह्ह् आआआआअह्ह्ह्ह्ह् स्स्स्सीईई ! करने लगी। उसकी चूत अब और भी गीली हो गई थी।

मैं अपना छः इंच का लंड सहलाते हुए उसकी चूत पर रगड़ने लगा और रगड़ते हुए ही उसकी चूत के छेद पर हल्का सा जोर दिया, मेरे लंड का अगला हिस्सा उसकी चूत में घुस गया। अब सोनिया दर्द से चीख उठी। मैंने उसके मुँह पर अपना हाथ रख दिया और थोड़ा सा और जोर दिया, सोनिया की चूत में मेरा लंड अब आधा घुस गया था।मैंने देखा कि उसकी चूत से खून निकल आया है और उसकी आँखों से आँसू निकल आए।

अब मैं सोनिया के होटों को चूमने लगा और अपना लंड अन्दर बाहर करने लगा। धीरे-धीरे सोनिया भी साथ देने लगी। सोनिया ऊउह ऊऊउह ह्ह्ह्हाआअस स्स्स्स्सीईईई स्स्सीईईईई की आवाज निकालने लगी। मैं उसके दोनों बूब्स को अपने मुँह में भर कर चूसता हुआ अपने लंड से उसकी चूत-चुदाई कर रहा था। अब हम दोनों को मजा आने लगा। मैं अब उसकी चूत को जोर-जोर से मारने लगा और वो जोर-जोर से स्स्स्सीईईईए ऊऊउ आअह्ह्ह्ह् सस्स्स्स्स्स्सीईए…ऊऊह करने लगी। मुझे एसा लग रहा था कि मैं ना जाने कौन सी दुनिया में आ गया।

मैं बार-बार उसकी गर्दन को, उसके होंठों को, उसके गालों को, उसके गले से चूमते हुए, उसके स्त्नों के चूचुकों को चूसते हुए उसकी चूत में पूरा लंड पेल रहा था और वो जोर-जोर से सिस्कारियाँ भर रही थी। अब हम दोनों जन्नत में पहुँच गए थे और उसकी चूत में से गरम-गरम पानी निकलने लगा। अब वो अपने पेट को कसकर चूत पर पूरा जोर देने लगी और उसके चूत से गरम पानी का निकलना और मेरे लंड का अन्दर बाहर होना बहुत ही मजा आ रहा था। उसकी चूत से दो बार पानी निकला। उसके कुछ देर के बाद मेरा भी गाढ़ा पानी मेरे लंड से निकलने लगा, मैंने अपना सारा का सारा पानी उसकी चूत में गिरा दिया। उसके थोड़ी देर तक हम दोनों एक दूसरे से लिपटे रहे।

कैसा लगा ?

दोस्तों अपनी राय मुझे जरूर भेजें।

ओके, गुड बाय! Indian Sex Stories

Antarvasna

मेरा नाम मोहित है। मैंने अभी अपनी Antarvasna इंजीनियरिंग पूरी की है।मैं अब एक बहुराष्ट्रीय कंपनी में काम करता हूँ।
जहाँ मैं काम करता हूँ वहाँ एक से एक लड़कियां आती हैं।

मैं दिखने में बहुत आकर्षक हूँ, मैं जिम जाता हूँ इसलिए बढ़िया तंदुरुस्त शरीर बहुत ही आकर्षक है इसलिए ज्यादातर लड़कियां मेरी तरफ़ आकर्षित हो जाती हैं।

मेरी कंपनी में एक बहुत ही सुंदर लड़की है जो मुझे अक्सर देखा करती थी लेकिन मैं उससे ज्यादा भाव नहीं देता था।

ऑफिस में मेरी सीट बहुत ही बढ़िया जगह पर थी, एकदम गर्ल्स टॉयलेट के सामने, इसलिए कई बार आती जाती लड़कियां मुझे देख कर मुस्कुरा देती थी क्यूंकि मेरी नज़रें बहुत कुछ बयान करती थी।

एक दिन जब मैं ऑफिस से छुटी के वक्त जा रहा था अपनी गाड़ी में, तो अचानक उसी लड़की ने मुझे लिफ्ट के लिए हाथ दिया।
मैंने भी ताव में आकर गाड़ी रोक दी।

उसने कहा- आप मुझे मेट्रो स्टेशन तक छोड़ सकते हैं मैं बहुत जल्दी में हूँ।
मैंने कहा- ओके सिट!
वो मेरे साथ आकर बैठ गई।

वह उस दिन मेरा पसंदीदा काला टॉप नीली जींस पहन कर आई थी।

उसके उभार देख कर अचानक मैं थोड़ा ललचा सा गया था लेकिन मैंने ऐसा कुछ ज़ाहिर नही होने दिया।

उसके साथ बहुत मज़ाक किया, वो बहुत इम्प्रेस हो गई और जाते वक्त अपना फ़ोन नम्बर मुझे दे गई लेकिन मैंने उसे फिर भी कॉल नही किया।

अचानक एक दिन श्याम को मैंने देखा कि उसके नम्बर से मुझे कॉल आ रही है तो मैं हैरान रह गया।

मैं समझ नहीं पाया कि उसे मेरा नम्बर कहाँ से मिला।

मैंने कॉल उठाई तो कहने लगी- मोहित, आज मेरा बर्थडे है और मैंने एक पार्टी रखी है, अगर तुम थोड़ा टाइम निकाल कर घर पर आ सकते हो तो मुझे बहतु अच्छा लगेगा।
तो मैंने कहा- आ तो जाता पर मुझे तुम्हारा घर नहीं पता, मैं कैसे आऊँगा।

वो कहने लगी- टेक माय एड्रेस!
उसने अपना एड्रेस बताया।

मैं टाइम पर पहुँच गया।

मैंने उसके दरवाजे की घंटी बजाई।
वो काला सूट पहने हुए थी और बेहद खूबसूरत लग रही थी।

मैंने कहा- हैप्पी बर्थडे जानवी! यू आर लुकिंग गुड!
उसने मुझे अन्दर आने को कहा।

अन्दर आकर मैंने देखा कि अन्दर कोई नही है।

मैंने पूछा- और कोई नही है घर में?
उसने कहा- मम्मी अभी बाहर गई है और पापा मेरे लिए कुछ सामान लेने गए हैं, आते ही होंगे।
फ़िर मैंने पूछा- और कोई तुम्हारा दोस्त नहीं आया तो कहने लगी कि आते ही होंगे।

आज उसे देख कर मैं मदहोश सा महसूस कर रहा था।

वो थोड़ी देर में मेरे लिए कुछ खाने को ले आई और मेरे पास आकर बैठ गई।

मैंने उससे फ़िर एक बार कहा कि आज तुम बहुत खूबसूरत लग रही हो!
इतना कहते ही वो मेरे पास आ गई और मुझे गाल पे किस करके बोली- थैंक्यू!

उसकी ये हरकत काम कर गई मैंने आव देखा न ताव और उसकी कमर में हाथ डाल कर उसे अपनी तरफ़ खींचा और एक किस उसके होंठों पर दे दी।
वो मेरी इस हरकत से एकदम घबरा गई और कहने लगी- ये तुम क्या कर रहे हो?

मैंने कहा- जानवी, तुम आज मुझे मत रोको!
और मैंने उससे एक और बार किस कर डाला।

वो मुझे दूर धकेलने लगी लेकिन उसके हुस्न का जादू सा मुझ पर चल गया था.
मैंने फट से उसकी चुचियों को पकड़ लिया और उसके होंठों को पागलों की तरह चूमने लगा।
अब वो भी मान गई उससे भी मज़ा आने लगा।

मैंने कहा- जानवी डार्लिंग! आइ लव यू!
उसने कहा- ये सब ठीक नही!

मैंने उसे पकड़ कर सोफे पर डाल दिया और झट से उसके बोबों को दबाने लगा।
क्या टाइट चुचे थे, छेड़ते ही मज़ा आ गया।

मैंने धीरे से अपना एक हाथ उसकी कमर से नीचे यौनमंडल में फंसा दिया।
वो सिहर उठी, उसके रोंगटे खड़े हो गए।

अब उससे भी मज़ा आ रहा था।
मैंने मौका देखते ही उसकी मदमस्त गांड पर हाथ फेर दिया।
उसके जिस्म से एक अच्छी सी खुशबू आ रही थी।

मैंने कहा- तुम्हें बुरा तो नही लगा रहा ना?
तो कहने लगी- मैंने तुमसे झूठ कहा था कि मेरा जन्मदिन है बल्कि मैं भी यही चाहती थी।

मैं हस पड़ा और मैंने उसके यौनमंडल में ऊँगली घुसा दी लेकिन अब भी उसका कपड़े मेरे आड़े आ रहे थे।
तो मैंने फट से उसकी सलवार नीचे को खींच दी।

मैंने कहा तुम्हारे घर वाले तो नहीं आ जायेंगे?
वो बोली- मैंने सब सेटिंग कर रखी है वो दो दिन के लिए बाहर गए है जान!

अब मेरा रास्ता साफ़ था।

मैंने उसकी कच्छी पर हाथ फ़ेरना शुरू कर दिया।
उसे मज़ा आने लगा.

मेरा एक हाथ अब भी उसकी चुचियों पर था.
मैंने उसका कमीज़ भी उतार दिया.

जैसे ही मैंने उसके बोबो को देखा तो देखता ही रह गया। इतने बड़े गोल मटोल चुचे मैंने पहले नही देखे थे।
मैंने कहा- तुस्सी छा गए!
ये कहते ही वो हस पड़ी।

उसने काले रंग की पैन्टी पहनी थी।
मैंने उसके चुचों को मसलते हुए उसकी पैंटी में हाथ डाल दिया।

वो पहले से उबाल में थी। उसकी योनि अकड़ के फूल चुकी थी जैसे किसी ने हवा भर दी हो।

मैंने हाथ फिराया तो थोड़ा सा पानी मेरे हाथ पर लग गया।
मेरा लंड खड़ा हो गया.

उसने भी हिम्मत करके मेरे लंड पर अपना हाथ रख दिया और सहलाने लगी।
वो एक नम्बर की झूठी और चुदक्कड लग रही थी मुझे।

अब मैंने खींच कर उसकी कच्छी उतार दी।
वाह! क्या बुर पायी थी उसने, एकदम गोरी साफ़।

मैंने उसके बदन को सहलाना शुरू कर दिया.
अब उससे मज़ा आने लगा तो मैंने भी अपने कपड़े उतार दिए।

वो मेरी बॉडी देख कर दंग रह गई कहने लगी- जैसी सोची वैसी ही पायी। तूने मुझ बहुत तड़पाया है मोहित राजा! आज मैं अपनी सारी प्यास बुझाऊंगी।
इतना कहकर उसने मेरा कच्छा नीचे खींच दिया और मेरा तडकता हुआ 7 इंच का लंड बाहर आ गया।

इतना मोटा लंड देख कर वो घबरा गई और कहने लगी- अब आएगा खेल में मज़ा!
कहकर उसने मेरा लंड अपने मुह में लेकर चूसना शुरू कर दिया.

वाह, क्या मज़ेदार था वो पल!
वो मेरा लंड अपने हलक में भी ले जा रही थी.

मैंने भी उसके चुचे दबाना शुरू कर दिया आह … ऊह… उम्म… सो गुड!
और उसने मेरा लंड चूसना शुरू कर दिया।

जब मैं बस झड़ने ही वाला था, तब मैंने उससे रोका.
पर वो न रुकी और सारा रस पी गई.

मैंने भी उससे उठा कर लेटा दिया अब वो अपनी योनि खुजाने लगी।
मैं समझ गया और मैंने अपनी जीभ उसके योनि से सटा दी और उसके दाने को ज़ोर से चूसने लगा.
उसकी तड़प बढ़ गई।

वो अपने चूतड़ ऊपर नीचे करने लगी- हा …येही …हाँ …बस यहीं … मेरे राजा …अब मेरे शरीर की आग बुझा दो अब नही रहा जाता आह …ओह …मोहित माय डीयर!

लेकिन मैं भी पूरा शैतान था इतनी आराम से नही माना, उसकी गांड में अब मैंने ऊँगली घुसा दी और चूत चाटता रहा।

अब वो पागल हो गई और अपने चूतड़ हवा में झुलाने लगी।

मैंने एक हाथ उसके मुंह में भी डाल दिया क्यूंकि वो अब चिल्लाने लगी थी।

वो शरबत बना के लायी थी मेरे लिए, मैंने उस पर नज़र गड़ाई और थोड़ा सा शरबत उसके चुचों पर डाल दिया और पीने लगा।

वो मेरी इस हरकत पर हस पड़ी, बोली- तुम बहुत किताबें पढ़ते हो क्या?
मैंने कहा- बस जान तुम्हारे लिए!
वो हंस पड़ी।

मैंने अब उससे सीधा लेटा दिया और अपना लंड उसकी चूत पर रख दिया।
वो डर गई।
मैंने कहा- डरो मत, मैं तुम्हारा ख्याल रखूँगा!

मैंने उसकी यौनमंडल पर अपना लंड फिराया और एक झटके से आधा लण्ड पेल दिया।
वो चिल्लाने ही वाली थी कि मैंने उसके मुंह में अपना हाथ दांतों के बीच में डाल दिया और उसके कंधे पर हाथ रख कर एक और झटके के साथ अपना पूरा लंड अन्दर डाल दिया।

ये करते ही उसकी चीख निकल गई और आँखों से आंसू बहने लगे।
वो एक कुवांरी लड़की थी.
मैं तो यूंही उसे पुराना माल समझ रहा था।

वो रोने लगी- इसस … नही … आ ..राम .. से!

मैंने अब अपना लंड बाहर निकाला तो उसकी चूत से बहुत सा खून बाहर आ गया।
उसकी चूत एकदम लाल हो गई.

मैंने एक बार फ़िर उससे चोदना शुरू कर दिया।
उसका शरीर अकड़ने लगा लेकिन उसके धक्के कम नही हुए- हाँ ..धीरे …से!

मैंने उससे धीरे धीरे झुकाना शुरू कर दिया अपनी और और उसकी टांगों को अपने कंधे पर रख दिया.
अब उसका दर्द बढ़ गया और मज़ा भी!

वो अपनी तरफ़ से धक्के लगाने लगी- हा …हा …हए…माँ … मैं गई!
और इतना कह कर वो झड़ गई और थोड़ी देर में मैं भी ठंडा हो गया।

वो मुझ पर गिर गई और मुझे चूमने लगी- आइ लव यू मोहित!
“आइ लव यू टु जानवी …” इतना कह कर मैंने उसे उल्टा लिटा दिया और उसके शरीर पर मालिश करने लगा.

वो फ़िर मुझ से लिपट गई, मेरा लंड फ़िर खड़ा हो गया.

मैंने उसे झुका दिया और उसके गांड पे थूक दिया.
“ये क्या कर रहे हो?”

मैंने उसकी गाडं को मसला तो उसे मज़ा आने लगा. मैंने अब अपना लंड उसकी गांड पर रखा और अन्दर घुसाना चाहा.

पर उसकी गांड बहुत टाइट थी आराम से नही घुस रहा था।

मैं अब सीधा लेट गया और उससे ऊपर आने को कहा.
वो मान गई और उसने अपनी गांड मेरे लंड पे टिका दी.
वाह क्या जन्नत थी!

मैंने उससे रोक कर अपने आप से धक्के लगाने शुरू कर दिए.
उसे अब मैं बहुत अच्छा लग रहा था हम्म …हम्म …इस …हम्म …हा ..गर्र …हम्म .. इस!
और 15 मिनट में मैं झड़ गया.

उसके बाद हम दोनों ने साथ में शोवर लिया और मैं अपने घर चला गया। Antarvasna

Antarvasna Sex Stories

दोस्तों मैं अन्तर्वासना का Antarvasna Sex Stories एक नियमित पाठक हूँ। मैं इसकी सारी कहानियाँ बहुत मज़े से पढता हूँ। आज मेरे दिल में भी यह ख्याल आया कि मैं भी अपनी कहानी आप लोगों के समक्ष पेश करुँ। मेरा मकसद सिर्फ वोट पाना नहीं है अपितु आप सब के समक्ष अपने दिल की बात व्यक्त करने का है। यह एक ऐसी कहानी है जिसे मैं सब के साथ शेयर नहीं कर सकता हूँ पर मेरी इच्छा थी कि लोग यह जाने कि इस दुनिया में हर किसी के नसीब में एक चूत होती है।

तो अब आप सबका ज्यादा समय न लेते हुए मैं अपनी कहानी आपके सामने रखना चाहता हूँ, यह कहानी सच्ची है या नहीं यह आप ही फ़ैसला करें तो बेहतर होगा।

तो कहानी शुरू होती है मेरे परिचय से:- मैं बिहार का रहने वाला एक सीधा सादा बीस साल का हट्टा कट्टा नौजवान हूँ और दिल्ली में आई आई टी से इंजीनियरिंग कर रहा हूँ। मैं द्वीतीय वर्ष का छात्र हूँ और पढ़ाई लिखाई में ठीक ठाक हूँ। बचपन से ही मैं अपनी पढ़ाई को लेकर गंभीर था सो कभी भी पढ़ाई के अलावा कुछ नहीं सोचता था। मैं पुरुष और नारी सम्बन्ध के बारे में बस किताबी ज्ञान ही रखता था, हालांकि थोड़ा बहुत व्यावहारिक ज्ञान भी था मुझे पर मैं चूंकि सीधा सादा था सो मैं आज तक कुंवारा ही था पर मैंने आपको पहले ही बताया कि हर किसी के नसीब में एक चूत होती है सो आखिरकार मुझे भी एक दिन चूत मिल ही गई। हाँ दोस्तो, एक बात और जो मैं बताना भूल गया था वो यह कि मैं पियानो अच्छा बजता हूँ और इसीलिए मैं अपने कॉलेज के बैंड में पियानो बजाता हूँ और यही बात मेरे किस्मत की चाबी बनी।

दूसरे सेमेस्टर की परीक्षा के बाद मेरे इंस्टिट्यूट में डेढ़ महीने की छुट्टी हुई और मैं अपने घर आ गया जो पटना में राजेंद्र नगर में है। अभी मुझे घर आये एक महीना ही हुआ था कि मुझे खबर आई कि मेरे इंस्टिट्यूट के बैंड का एक कंसर्ट है जो पाँच दिन के बाद होना है और मुझे तुंरत वहां पहुंचना है। अब आप तो जानते ही हैं कि दिल्ली जाने वाली ट्रेनों में कितनी भीड़ होती है सो मुझे किसी भी आम ट्रेन में रिज़र्वेशन नहीं मिल पा रहा था।

मैंने अपने बैंड के लीडर को अपनी असमर्थता बताई तो उसने कहा “भाई तेरा आना बहुत ज़रूरी है क्यूंकि अगर पियानो बजाने वाला नहीं होगा तो फिर हमारा बैंड अधूरा ही है। “

फिर मैंने तय किया कि अब मैं तत्काल में रिज़र्वेशन करा कर जाऊंगा पर अब चार दिन ही बाकी बचे थे सो तत्काल में भी वही हालत थी और मुझे कंसर्ट से एक दो दिन पहले ही पहुंचना था सो आखिरकार मैंने राजधानी एक्सप्रेस में अपना रिज़र्वेशन कराया वो भी सेकंड एसी में। मेरे जेब से पैसे लगे थे सो मैं परेशान था पर दिल में एक तसल्ली थी कि चलो सेकंड एसी में कभी गया नहीं हूँ तो अच्छा ही अनुभव रहेगा। मैं नियत दिन, नियत समय पर ट्रेन पकड़ने राजेंद्र नगर जंक्शन चला गया। ट्रेन वहां पहले से लगी होती है इसलिए मैं सीधा अपने सीट पर चला गया पर राजेंद्र नगर में ज्यादा लोग नहीं चढ़ते हैं इसलिए ज्यादा भीड़ नहीं थी।

ट्रेन अपने समय पर खुली और ट्रेन के खुलने के बाद मुझे ख्याल आया कि इतना लम्बा सफ़र कैसे कटेगा, तो मैंने सोचा कि पटना जंक्शन पर कोई नोवल खरीद लूँगा। पटना जंक्शन पर ट्रेन रुकी तो मैं ट्रेन से नीचे उतर गया और प्लेटफ़ॉर्म पर खड़े एक व्हीलर के पास गया वहां पर सामने एक नोवल रखी थी जिसका नाम था फाइव पॉइंट समवन ! मैं काफ़ी दिन से वो नोवल पढ़ना चाहता था और उस नोवल का लेखक एक आईआईटीअन था इसलिए मैंने कुछ सोचे बिना वह नोवल खरीद ली।

और फिर ट्रेन खुलने से पहले मैं वापस अपने कंपार्टमेंट में पहुंचा तो देखा कि मेरे सामने वाली सीट पर एक चौबीस-पच्चीस साल की लड़की बैठी थी और वह फ़ोन पर किसी से बात कर रही थी। मैं चुप चाप आकर अपनी सीट पर बैठ गया और नोवल के पन्ने पलटने लगा और पढ़ने में तल्लीन हो गया कि अचानक उसने मुझसे पूछा- क्या आप भी दिल्ली जा रहे हो?

मैंने कहा- हाँ।

तो उसने मुझसे पूछा- क्या आप वहां जॉब करते हो?

मैंने उसे बताया- नहीं, मैं तो आई आई टी दिल्ली में पढ़ता हूँ और मेकेनिकल इंजीनियरिंग कर रहा हूँ।

तो उसने बताया कि उसका भाई भी पुणे के किसी इंस्टिट्यूट से मेकेनिकल इंजीनियरिंग कर रहा है और वो अभी सेकंड इयर में गया है।

मैंने उससे कहा- मैं भी सेकंड इयर में ही हूँ।

फिर उसने मुझसे पूछा- क्या तुम चेतन भगत के फैन हो?

तो मैंने कहा- नहीं मैं तो बस इसीलिए यह नोवल लेकर आया क्यूंकि चेतन भगत भी आई आई टी का ही छात्र था।

इसी तरह हमारी बात-चीत का सिलसिला चल पड़ा। पर मैंने आपको पहले ही बताया कि मैं एक निहायती शरीफ और सीधा सादा बन्दा हूँ इसीलिए मैं उसके साथ कोई काम की बात नहीं कर रहा था मेरे सवाल कुछ इस तरह के थे : आप क्या करती हो? जिसका जवाब था मैं एक आकिर्टेक्ट हूँ।

मैंने पूछा- दिल्ली में ही?

जिसका जवाब था- नहीं, मेरा पटना में ही एक ऑफिस है जहाँ मैं क्लिएंट्स के साथ डील करती हूँ।

फिर मैंने पूछा- आप दिल्ली क्यूँ जा रही हो?

जिसका जवाब था- मैं अपने दोस्तों के साथ बर्थडे मनाने जा रही हूँ और हम लोग मौज मस्ती करेंगे।

फिर मेरे इन सवालों से परेशान हो कर उसने कहा- तुम कोई काम का सवाल क्यूँ नहीं पूछ रहे हो?

मैंने कहा- मतलब?

तो उसने कहा- छोड़ो ! तुम अभी बच्चे हो।

मैंने उससे उसका नाम पूछा तो उसने अपना नाम श्रेया बताया।

हम बातचीत कर ही रहे थे कि तभी हमारा खाना आ गया और मैं खाना खाने लगा। खाना खा कर मैंने अपने बर्थ पर अपना बिस्तर लगाया और सोने की कोशिश करने लगा पर हर आईआईटीअन की आदत देर तक जागने की होती है सो नींद मेरी आँखों से कोसों दूर थी। धीरे धीरे पूरी बोगी की रोशनी बन्द हो गई और खर्राटों की आवाज़ पूरी बोगी में गूंजने लगी। अब तो सोना और भी मुश्किल हो गया। पर फिर भी मैं सोने की कोशिश करने लगा। मुझे लगा कि अब तक तो श्रेया भी सो गई होगी पर शायद मैं गलत था। अभी मुझे नींद का पहला ही झोंका आया था कि मुझे लगा कि मेरे बर्थ पर कोई और आ गया है और वो पर्दा खींच रहा है पर नींद से मेरी आँखें बोझिल थी सो मैंने कोई ज्यादा ध्यान नहीं दिया और मैंने नज़रंदाज़ कर दिया।

पर थोड़ी ही देर में मेरी आँखों से नींद गायब हो गई जब मुझे मेरे लंड पर किसी का हाथ होने का एहसास हुआ मैंने आँखें खोली तो देखा- श्रेया मेरे बगल में सोई हुई है और उसका हाथ मेरे लंड पर हरकतें कर रहा है।

मुझे जागता देख कर उसने मुझे चुप रहने का इशारा किया। अब मैं इन सब चीज़ों के बारे में इतना भी अनजान तो नहीं था सो मेरा दिल बल्लियों उछलने लगा और मेरे दिल की धड़कनें तेज़ हो गईं। मेरा लंड बिल्कुल तन गया और मेरी पैंट फाड़ कर बाहर आने की कोशिश में लग गया जिसकी वजह से मुझे हलके दर्द का एहसास होने लगा। पर आज मैं भी उस आनंद की अनुभूति लेना चाहता था जिसके पीछे सारी दुनिया दीवानी है।

मैं आँखें बंद कर के लेटा रहा और मज़ा लेटा रहा क्यूंकि मुझे पता ही नहीं था कि आगे करना क्या है?

तभी उसने मेरे पैंट की जिप खोल दी और मेरा लंड बाहर निकाल लिया और अपने हाथों से उसे सहलाने लगी।

अब तक मेरा लंड पूरी तरह से कड़ा हो गया था और ६-१/२ इंच लम्बा और २ इंच मोटा हो गया था। फिर उसने मेरा हाथ अपने मम्मों पर रख दिया और मुझे उसे दबाने को कहा। मैंने जब उसके मम्मे दबाये तो वो बिल्कुल नर्म थे रुई के फाहे जैसे और बिल्कुल गोल और बड़े बड़े।

मुझे मज़ा आने लगा। मैंने उसकी टॉप उतारी और ब्रा उतारी और उसके मम्मों को चूमने चाटने लगा। उसके चूचुक सख्त हो गए बिलकुल मटर के दानों की तरह। मैं अभी उसके मम्मों में खोया हुआ था और उन्हें चूमता जा रहा था, तभी उसने मुझसे कहा- सिर्फ इन्हीं से खेलते रहोगे या असली खेल भी खेलना है?

तो मैंने कहा- यह असली खेल कैसे खेलते हैं?

उसने मेरी तरफ देखा और कहा- धत्त ऽऽ ! कैसे मर्द हो तुम ? अब तुम्हें यह भी सिखाना पड़ेगा? चलो अब जब इतना कुछ सिखा ही दिया है तो यह भी सिखा देती हूँ ताकि आगे से तुम किसी लड़की के सामने अनाड़ी न रहो।

फिर उसने अपने और मेरे सारे कपड़े उतार दिए। हम दोनों बिल्कुल ही नग्न अवस्था में आ गये। फिर उसने मेरा हाथ अपनी चूत के ऊपर रख दिया और कहा- यही तो है वो स्टेडियम जहाँ असली खेल खेलते हैं। फिर उसने अपने रति द्वार के ऊपर मेरी ऊँगली रख दी जो कि काफी गीला लग रहा था। मैंने उसकी योनि में अपनी ऊँगली घुसा दी और अपनी ऊँगली अन्दर बाहर करने लगा तो उसने मुझे कहा- रुको मैं तुम्हें एक नया एहसास दिलाती हूँ !

वो पलट गई और अपनी चूत मेरे मुँह के पास और मेरा लंड अपने मुँह के पास ले गई। फिर उसने मुझे कहा- अब तुम मेरी फुद्दी चूसो !

मैं तो बस जैसे उसका गुलाम ही बन गया था। खुद मुझे तो कुछ आता नहीं था सो वो जो कह रही थी मैं वही करता जा रहा था। मैंने उसकी फुद्दी चाटनी और चूसनी शुरू की और उसका नमकीन रस मुझे मजेदार लगने लगा। मैंने चूसता रहा चाटता रहा। तभी अचानक मुझे लगा कि अब मैं झड़ जाऊँगा और मैं झड़ गया उसके मुह में ही ! उसने मेरा सारा कामरस पी लिया। तभी उसका बदन ऐंठने लगा और वो भी झड़ गई। पहले तो मुझे अच्छा नहीं लगा पर फिर मुझे उसकी चूत का नमकीन पानी स्वादिष्ट लगने लगा और मैं सारा पानी पी गया।

मैंने उससे पूछा- क्या यही था असली खेल?

तो उसने कहा- नहीं ! अभी तो असली खेल बाकी है ! यह तो पूर्व-क्रीड़ा थी, या यह समझ लो कि यह तो डिनर के पहले लिया गया सूप है।

मैंने कहा- तो फिर असली खेल खेलो ना !

उसने कहा- उसके लिए तुम्हारे लंड को फिर से तैयार करना पड़ेगा !

और उसने फिर से मेरा लंड चूसना शुरू कर दिया। थोड़ी ही देर में मेरा लंड फिर से तन गया। अब मैं फिर से तैयार था और मुझे वाकई बड़ा मज़ा आया था। मैंने सोचा कि अगर यह असली खेल नहीं था तो फिर असली खेल में कितना मज़ा आएगा !

उसने मुझसे पूछा- क्या यह तुम्हारा पहली बार है ?

तो मैंने कहा- हाँ ! क्यूँ ? तुम्हें क्या लगता है?

तो उसने कहा- मुझे भी तुम्हारा पहली बार ही लगता है।

फिर मैंने उससे पूछा- क्या तुम्हारा भी पहली बार ही है?

तो उसने कहा- नहीं ! मैंने तो कई बार मज़ा लिया है इसका।

फिर उसने अपने पर्स से निवेया क्रीम की डिब्बी निकली और उसमें से क्रीम निकाल कर मेरे लंड पर लगा दी।

फिर उसने कहा- अब असली खेल के लिए तैयार हो जाओ।

मैं तो तैयार ही था क्यूंकि मुझे बहुत मज़ा आ रहा था। फिर वो बर्थ पर लेट गई और मुझे अपने ऊपर आने को कहा। मैं उसकी टांगों के बीच में बैठ गया और फिर उसने मेरा लंड अपनी फुद्दी के मुहाने पर रख दिया और कहा- अब जोर लगाओ।

मैंने जोर लगाया तो मेरा लंड उसकी फुद्दी में आराम से चला गया यह उसकी क्रीम का असर था। अब वो गांड उठा उठा कर धक्के लगाने लगी। उसकी देखा-देखी मैंने भी अपने कमर के जोर से धक्के लगाने शुरू किये तकरीबन पांच मिनट की चुदाई के बाद उसका शरीर ऐंठने लगा और वो झड़ गई मेरे लंड को बहुत ही गरम एहसास हुआ और फिर दो मिनट के बाद मैं भी उसकी फुद्दी में ही झड़ गया। और उसके ऊपर ही लेट गया। धीरे धीरे मेरा लंड अपने आप उसकी चूत से बाहर आ गया।

इस तरह मैंने अपनी ज़िन्दगी की पहली चुदाई पूर्ण की और वो राजधानी एक्सप्रेस मेरे लिए राजधानी सेक्स्प्रेस बन गया।

फिर तो उस रात हमने दो बार और चुदाई की। सुबह उठा तो मैं बिलकुल फ्रेश महसूस कर रहा था। उसने उतरने से पहले मेरा नंबर लिया और मुझसे वादा लिया कि आज मैं उसकी दोस्त के फ्लैट में उसका जन्मदिन मनाने ज़रूर आऊँ !

मैंने उस रात उसकी दोस्त के फ्लैट में उसको और उसकी दोस्त को भी चोदा जोकि अगली बार मैं आप लोगों को बताऊंगा।

मेरी कहानी कैसी लगी मुझे मेल ज़रूर करें।

मेरा ईमेल आई डी है : Antarvasna Sex Stories

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