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मेरी यह कहानी एकदम Sex Stories सच्ची है जो आप लोगो को एकदम अपने करीब लगेगी। मेरा अगला सैक्सपिरियन्स चाँद के साथ था। फिर नीना, फिर शैलजा, फिर कल्पना और फिर साक्षी के साथ मेरा सैक्सपिरियन्स हुआ।
पर आज ना जाने क्यों मुझे साक्षी बहुत याद आ रही है। इसलिये मैं चाँद, नीना, शैलजा और कल्पना को साईड करते हुए पहले साक्षी के साथ हुए सैक्सपिरियन्स को आप लोगो के साथ शेयर करता हूँ। उस वक़्त मैं 20 साल का और साक्षी 19 साल की थी।
मेरे माता-पिता दोनों टीचर थे। मेरी एक बडी बहन है। जो मेरे से लगभग दो साल बड़ी है। मेरी बहन की शादी बनारस में हुई।
मेरे जीजाजी एक मल्टी-नैशनल कम्पनी में परचेज़ मैंनेजर हैं। बी.एस सी के बाद मैंने बनारस युनिवर्सिटी में बी.फ़ार्मेसी में प्रवेश लिया। मैं होस्टल में रहने लगा। फिर दीदी ने अकेले होने की वजह से मुझे अपने साथ ही रहने को कहा। मैं होस्टल छोड़ कर दीदी-जीजाजी के साथ में रहने लगा।
दीदी के पड़ोस में एक दुमंज़िला मकान था। जहाँ दो बहनें रहा करती थी। ऊपर बड़ी बहन जो कि मकान मालकिन भी थी और नीचे यानी ग्राउंड-फलौर पर छोटी बहन।
बड़ी बहन लगभग 55 साल की थी और छोटी बहन लगभग 50 साल की थी।
हम उन्हें ऊपर वाली आन्टी और नीचे वाली आन्टी कहते थे। ऊपर वाली आन्टी के तीन बच्चे थे। दो लड़के और एक लड़की। लड़की सबसे बड़ी थी।
तीनों बच्चों की शादी हो चुकी थी और सभी बाहर रहते थे। इसलिये उपर वाली आन्टी-अकल ने अपनी सबसे बड़ी लड़की की लड़की को अपने साथ रखा हुआ था। उसका नाम लीनू था। लीनू बनारस महिला कॉलेज़ में बी.ए. प्रथम वर्ष में पढ़ती थी।
लीनू बहुत ही ख़ूबसूरत थी। खैर वो बाद में…
नीचे वाली आन्टी के भी तीन ही बच्चे थे। दो लड़के और एक लड़की। लड़की सबसे बड़ी थी। तीनों बच्चे पढ़ रहे थे। लड़की का नाम मीनाक्षी था। घर में सब उसे साक्षी कहते थे। साक्षी लगभग 19 साल की थी और बनारस महिला कॉलेज़ में ही बी. एस सी. (बायो) अन्तिम वर्ष में पढ़ती थी।
साक्षी भी बहुत ही ख़ूबसूरत थी मगर लीनू से कुछ कम। मेरी बहन ने भी बी.एस सी. (बायो) की थी। इसलिये साक्षी मेरी बहन से कभी-कभी पढ़ने आती थी। जब मैं दीदी-जीजाजी के साथ में रहने लगा तो दीदी साक्षी को मेरे से पढ़ने के लिये कह देती। साक्षी को मेरा समझाना अच्छा लगता था, इसलिये वो अकसर मेरे से पढ़ने आने लगी।
धीरे-धीरे मैं और साक्षी एक दूसरे को बहुत पसन्द करने लगे। साक्षी से मेरी मुलाक़ातें बढ़ने लगी। ये मुलाक़ातें धीरे-धीरे प्यार में बदल गई।
फिर एक दूसरे को बाँहो में भरना, किस करना, फिर एक दूसरे के अंगों को छूना भी शुरु हो गया। मैं साक्षी के स्तनों को दबाने और सलवार के उपर से उसकी चूत को दबाने और फिर सलवार के अन्दर हाथ डाल कर चूत पर हाथ फिराने तक पहुँच गया। साक्षी भी मेरी पैंट की ज़िप खोल कर मेरा लण्ड निकालने और दबाने तक पहुँच गई।
एक दिन साक्षी घर आई। उसे मुझ से केमिस्ट्री में कुछ पढ़ना था। हम दोनों ड्राइंगरूम में पढ़ने लगे। हमें पढ़ते देख कर मेरी बहन बोली कि तुम लोग पढ़ाई करो और मैं मार्केट हो कर आती हूँ। दो-तीन घंटे तक आ जाउँगी। कह कर वो चली गई। बहन के जाते ही मैं साक्षी को छेड़ने लगा।
साक्षी ने कहा- क्या कर रहे हो।
मैं बोला- मौके का फायदा उठा रहा हूँ।
मैंने साक्षी को खींच कर अपनी गोद में लिटा लिया।
मैं साक्षी के बालों में हाथ फिराने लगा। फिर मैं उसके गालों पर हाथ फिराने लगा। मैं उसके कुरते के ऊपर से उसके स्तन दबाने लगा। साक्षी ने अपनी आंखें बंद कर रखी थी। फिर मैं उसके कुरते के गले के अन्दर से हाथ डाल कर उसके सख्त हो चुके स्तनों को दबाने लगा। फिर मैं उसके कुरते को उतारने लगा।
साक्षी बोली- क्या करते हो! दीदी आने वाली होंगी।
मैंने कहा- वो दो-तीन घंटे तक नहीं आँएंगी। कह कर मैं फिर उसके कुरते को उतारने लगा।
साक्षी बोली- प्लीज़! कोई आ जाएगा।
मैंने उठ कर दरवाज़ा बंद कर दिया। फिर मैं साक्षी का हाथ पकड़ कर उसे बेडरूम में ले आया। मैंने साक्षी को अपनी बाँहो में भर लिया, अपने जलते हुए होंठ साक्षी के होंठों पर रख दिए। फिर मैं उसके नरम-नरम होंठों को अपने होंठों में भर कर चूसने लगा।
साक्षी ने मुझे अपनी बाँहो में कस लिया। मेरे हाथ साक्षी के जिस्म पर फिर रहे थे। कुछ देर बाद मैंने साक्षी को बैड पर लिटा दिया। फिर साक्षी का कुरता उपर करके उसके चिकने पेट पर अपने जलते हुए होंठ रख दिए। फिर मैं उसके नरम-नरम गोरे-गोरे पेट को अपने होंठों में भर कर चूसने लगा। साक्षी के मुँह से आह निकलने लगी।
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फिर उंगलियों से साक्षी की चूत के फाँको को खोलने और बन्द करने लगा। फिर मैं साक्षी की चूत के जी-पॉन्यट को रगड़ने लगा।
साक्षी के मुँह से सिसकियाँ निकलने लगी। साक्षी ने मस्त होकर अपनी आंखें बंद कर ली। मेरा लण्ड साक्षी की जांघों से रगड़ खा रहा था। साक्षी ने मेरा लण्ड अपने हाथ में थाम लिया। वो मेरे लण्ड को अपने हाथ में दबाने लगी।
मेरा लण्ड तन कर सख्त हो गया था। साक्षी मेरे लण्ड को मुठ्ठी में भर कर उपर-नीचे और आगे-पीछे करने लगी। मैं साक्षी की चूत मारने को बेताब हो रहा था।
मैंने साक्षी को कहा- साक्षी! बहुत मन हो रहा है। कर लें क्या!
साक्षी कुछ नहीं बोली।
मैंने इसे साक्षी की हाँ समझ लिया। मैं साक्षी के उपर लेट गया।
साक्षी का नंगा जिस्म मेरे नीचे दबा हुआ था। मैं अपने लण्ड को मुठ्ठी में भर कर साक्षी की चूत के जी-पॉन्यट के उपर-नीचे करके रगड़ने लगा। फिर मैं अपने लण्ड को पकड़ कर साक्षी की चूत के अन्दर डालने की कोशिश करने लगा।
साक्षी ने मेरा हाथ पकड़ लिया और बोली- हमें डर लगता है। प्लीज़! कंडोम के बिना कुछ नहीं करेंगे। प्लीज़! कंडोम हो तो लगा लीजिए।
मैंने एक बार दीदी के साथ साफ-सफाई में हाथ बँटाते हुए बैड की दराज में कंडोम देखे थे। मैंने फौरन उठ कर बैड की दराज में से कंडोम निकाल कर अपने लण्ड पर लगा लिया। साक्षी ध्यान से मुझे कंडोम लगाते देख रही थी। कंडोम लगा कर मैं फिर से साक्षी के ऊपर लेट गया। साक्षी का नंगा जिस्म मेरे नीचे दब गया।
फिर साक्षी मेरे लण्ड को मुठ्ठी में भर अपनी चूत के ऊपर रगड़ने लगी और बोली- प्लीज़! ऐसे करते रहिए। अपने आप चला जाएगा।
साक्षी की चूत से कुछ चिकना-चिकना सा निकलने लगा था। शायद उसको यह करना अच्छा लग रहा था। वो मेरे लण्ड को अपनी चूत से रगड़े जा रही थी। मुझे बहुत ज्यादा उत्तेजना हो रही थी। इसी उत्तेजना में मैंने साक्षी का हाथ पकड़ लिया। इससे पहले मैं कुछ समझ पाता मैं साक्षी की चूत के ऊपर झड़ गया।
कंडोम लगे लण्ड को चूत से रगड़ने की वजह से कंडोम फट गया था और मेरा वीर्य साक्षी की चूत के बालों में भर गया था। मैं साक्षी के बगल में लेट गया।
साक्षी उठ कर बाथरुम चली गई। कुछ देर बाद वो बाथरुम से अपनी चूत साफ करके आकर मेरी बगल में लेट गई। कुछ देर हम चुपचाप लेटे रहे।
थोड़ी देर बाद साक्षी ने मेरी तरफ करवट ले कर अपनी टांगों को मेरी टांगों पर रख लिया। मैंने भी करवट ले कर साक्षी को अपनी बाँहो में भर लिया।
मैंने अपने जलते हुए होंठ साक्षी के होंठों पर रख दिए। फिर मैं उसके नरम-नरम होंठों को अपने होंठों में भर कर चूसने लगा। उसने मुझे अपनी बाँहो में कस लिया। मेरे हाथ साक्षी के गोरे-गोरे और चिकने-चिकने जिस्म पर फिर रहे थे। साक्षी भी अपने हाथों को मेरी पीठ पर फिर रही थी। कुछ देर मैं साक्षी के होठों को चूसता रहा। फिर मैं साक्षी के ऊपर लेट गया।
फिर मैं साथ-साथ उसके गुलाबी निप्पल को हल्के-हल्के मसलने लगा। मेरा लण्ड फिर से तन कर खड़ा हो गया था और साक्षी की चूत के बालों से रगड़ खा रहा था। मैं साक्षी की चिकनी टांगों पर हाथ फिराने लगा।
मेरा लण्ड साक्षी की जांघों के बीच फंसा हुआ था। साक्षी ने मेरा लण्ड अपने हाथ में थाम लिया। मैं साक्षी को चोदने को बेताब हो रहा था। साक्षी की चूत से फिर से कुछ चिकना-चिकना सा निकलने लगा था। फिर कुछ देर बाद मैं अपने लण्ड को पकड़ कर साक्षी की चूत के अन्दर डालने की कोशिश करने लगा।
साक्षी ने फिर से मेरा हाथ पकड़ लिया और बोली- प्लीज़ कंडोम लगा लीजिए।
मैंने फौरन फिर से बैड की दराज में से कंडोम निकाल कर अपने लण्ड पर लगा लिया। कंडोम लगा कर मैं फिर से साक्षी के उपर लेट गया। मैंने अपने को साक्षी की टांगों के बीच में सैट कर अपने लण्ड को पकड कर साक्षी की चूत के अन्दर डालने की कोशिश करने लगा। साक्षी ने मेरा लण्ड अपने हाथ में थाम लिया और अपनी चूत के सुराख पर लगा दिया और बोली- अब धीरे से डालिए।
मैंने हल्का सा ज़ोर लगाया। मेरे लण्ड का सुपाड़ा साक्षी की चूत में घुस गया। साक्षी के मुँह से आह निकली।
उसने मुझे अपनी बाँहो में कस लिया और अपनी आँखें कस कर बन्द कर ली। मैंने थोड़ा ओर जोर लगाया। मेरा लगभग आधा लण्ड साक्षी की चूत में घुस गया। साक्षी के मुँह से सिसकियाँ निकलने लगी। फिर मैंने तीसरा और आखिरी धक्का दिया तो मेरा पूरा लण्ड साक्षी के कौमार्य को चीरता हुआ चूत में समा गया। साक्षी के मुँह से जोर से आह निकली। उसने मुझे अपनी बाँहो में पूरी ताकत से कस लिया।
मैंने भी साक्षी को अपनी बाँहो में भर लिया और मैं उसके नरम-नरम होंठों को अपने होंठों में भर कर चूसने लगा ताकि वो अपना दर्द भूल जाए।
मेरा पूरा लण्ड साक्षी की चूत के अन्दर समाया हुआ था। हम दोनों ने एक दूसरे को इस कदर अपनी बाँह में जकड़ा हुआ था कि हवा भी हम दोनों के बीच से पास नहीं हो सकती थी।
साक्षी का नंगा जिस्म मेरे नंगे जिस्म के नीचे दबा हुआ था। मेरी टांगें साक्षी की टांगों के बीच में फंसी हुई थी। मैं साक्षी के माथे पर, फिर आँखों पर तथा गालों को किस करने लगा। साक्षी भी मेरे गालों को किस करने लगी।
कुछ देर हम दोनों इसी तरह से एक-दूसरे को चूमते रहे। फिर मैंने अपने लण्ड को धीरे से साक्षी की चूत से थोड़ा सा बाहर निकाला और फिर अपने लण्ड को धीरे से साक्षी की चूत में अन्दर घुसा दिया। फिर मैं अपने लण्ड को धीरे-धीरे से साक्षी की चूत के अन्दर-बाहर करने लगा।
कुछ देर बाद साक्षी ने अपनी टांगें ऊपर की तरफ मोड़ ली और मेरी कमर के दोनों तरफ लपेट ली। मैं अपने लण्ड को धीरे-धीरे साक्षी की चूत के अन्दर-बाहर कर रहा था। धीरे-धीरे मेरी रफ़्तार बढ़ने लगी। अब मेरा लण्ड साक्षी की चूत में तेजी से अन्दर-बाहर हो रहा था।
मैं साक्षी की चूत में अपने लण्ड के तेज-तेज धक्के मार रहा था। हम दोनों सेक्स के नशे में चूर हो रहे थे। साक्षी को भी मजा आने लगा था। वो मेरे हर धक्के का स्वागत कर रही थी।
उसने मेरे हिप्स को अपने हाथों में थाम लिया। अब वो भी नीचे से मेरे धक्कों के साथ-साथ अपने हिप्स ऊपर-नीचे कर रही थी।
जब मैं लण्ड उसकी चूत में से बाहर खींचता तो वो अपने हिप्स ऊपर उठा देती। जब मैं लण्ड उसकी चूत के अन्दर घुसाता तो वो अपने हिप्स पीछे खींच लेती। मैं तेज-तेज धक्के मार कर साक्षी को चोदने लगा। मैं बैड पर हाथ रख कर साक्षी के उपर झुक कर तेजी से उसकी चूत मारने लगा। अब मेरा लण्ड साक्षी की चिकनी चूत में तेजी से आ-जा रहा था।
साक्षी भी अब आँखें खोल कर चुदाई का भरपूर मजा ले रही थी। मैं साक्षी को पागलों की तरह से चोद रहा था। अब मैं पूरी तेजी से साक्षी के उपर कूद-कूद कर उसे चोद रहा था। साक्षी इस चुदाई के नशे से मदहोश हो रही थी।
मैंने रुक कर साक्षी से कहा- साक्षी अच्छा लग रहा है क्या?
साक्षी बोली- हां बहुत अच्छा लग रहा है। करो ना। तेज-तेज करते रहो।
साक्षी के मुहँ से ये सुन कर मैंने अपनी रफ्तार और बढ़ा दी। मैंने साक्षी के हिप्स को हाथों से जकड़ लिया और छोटे-छोटे मगर तेज-तेज शॉट मार कर साक्षी को चोदने लगा।
साक्षी के मुँह से मस्ती में “ओह्ह्ह्ह होहोह सस्स्स ह्ह्ह हाहाह्ह्ह आआ हा-हा करो-करो ऽअआह हाहअआ प्लीज़ राज, तेज-तेज करो ना।”
मैं साक्षी के उपर लेट गया और मैंने साक्षी को अपनी बाँहो में भर लिया। फिर मैंने अपने होंठ साक्षी के होंठों पर रख दिए और मैं उसके नरम-नरम होंठों को अपने होंठों में भर कर चूसते हुए उसे ओर तेजी से चोदने लगा। मेरा लण्ड सटासट साक्षी की चूत में तेजी से अन्दर-बाहर हो रहा था।
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उसने अपने होंठ मेरे होठों से अलग करके कहा- ओह राज, मैं तो होने वाली हूँ। प्लीज़ तुम भी हो जाओ। दोनों साथ-साथ होंगे। जब तुम होने लगो प्लीज़ तो इसे मेरे अन्दर से बाहर निकाल लेना। कंडोम का भी कोई भरोसा नहीं होता है। प्लीज़ बाहर ही होना।
मैंने कहा- ठीक है साक्षी।
और यह कह कर मैं तेज-तेज धक्के मार कर साक्षी को चोदने लगा।
लगभग 2 मिनट बाद अचानक साक्षी ने एक जोर से आह भरी और अपने हिप्स और अपनी चूत को थोड़ा ऊपर की तरफ उठाया और फिर बैड पर अपने पैर पसार दिये। मैं समझ गया कि साक्षी डिस्चार्ज हो चुकी है।
मैं भी डिस्चार्ज होने वाला था, इसलिये मैं बैड पर हाथ रख कर साक्षी के उपर झुक कर तेजी से उसकी चूत मारने लगा। अब मेरा लण्ड साक्षी की चिकनी चूत में तेजी से आ-जा रहा था। साक्षी आँखें बंद करके बैड पर सपाट लेट कर मेरे डिस्चार्ज होने का इंतजार कर रही थी।
लगभग 2 मिनट तक साक्षी को तेज-तेज चोदने के बाद जब मैं डिस्चार्ज होने लगा तो मैंने साक्षी के कहने के मुताब़िक, अपना लण्ड साक्षी की चूत में से बाहर खींच लिया और साक्षी की चूत के बाहर कंडोम में ही डिस्चार्ज हो गया।
फिर मैं साक्षी के उपर लेट गया। साक्षी का नंगा जिस्म मेरे नीचे दब गया। मेरा लण्ड कंडोम में सिकुड़ा हुआ साक्षी की झाटों के ऊपर पडा था। कुछ देर तक मैं साक्षी के ऊपर लेटा रहा और अपनी तेज-तेज चल रही सांसों को काबू में आने का इंतजार करता रहा। साक्षी भी मेरे नीचे दबी हुई अपनी आँखें बंद करके लेटी हुई थी।
कुछ देर बाद मैंने उठ कर अपने लण्ड पर से कंडोम उतार कर एक अखबार के कागज़ में लपेट कर डस्टबिन में फेंक दिया। फिर अपने अन्डरवियर से अपना लण्ड साफ करके साक्षी की बगल में लेट गया। साक्षी आँखें बंद करके लेटी हुई थी। कमरे की हल्की रोशनी में उसका गोरा और नंगा बदन चमक रहा था।
कुछ देर बाद मैंने साक्षी की तरफ करवट ली और अपनी टांग साक्षी की टांगों पर रख दी। फिर उसके स्तनों पर हाथ फेरने लगा।
साक्षी बोली- हो गई तुम्हारे मन की!
मैंने कहा- हाँ साक्षी, बहुत अच्छा लगा। मजा आ गया।
कह कर मैंने करवट ले कर साक्षी को अपनी बाँहो में भर लिया।
कुछ देर तक हम ऐसे ही लिपटे हुए बातचीत करते रहे। फिर साक्षी बोली- चलो अब उठो। दीदी आने वाली होंगी।
मैंने कोई खास नखरा नहीं किया और साक्षी के कहते ही मैंने उठ कर अपने अन्डरवियर से अपना लण्ड फिर से साफ किया और अपने कपड़े पहन लिये। साक्षी ने भी उठ कर अपने कपड़े पहन लिये। फिर हम दोनों ड्राइंगरूम में बैठ कर बातें करने लगे। हमने कुछ देर बातचीत की।
फिर साक्षी बोली- मैं चलती हूँ। दीदी के आने से पहले मेरा चले जाना ही ठीक रहेगा। वरना दीदी को खामख्वाह शक होगा।
कह कर साक्षी घर जाने लगी। मैंने उसका हाथ पकड़ लिया।
फिर मैंने उससे कहा- प्लीज़ कुछ देर ओर रुको ना।
वो अपना हाथ छुड़ाने लगी और बोली- क्या करते हो। दीदी आने वाली होंगी। मैं जा रही हूं।
वो जाने लगी। मैंने उसे खींच कर अपनी गोद में लिटा लिया।
साक्षी बोली “क्या करते हो। दीदी आने वाली होंगी। प्लीज़ छोड़ो मुझे।
मैंने उसे छोड़ने की बजाय अपने सीने से चिपका लिया। फिर मैं अपने हाथ को नीचे ले जाकर उसके कुरते के ऊपर से उसके स्तन दबाने लगा।
मैं साक्षी से बोला- साक्षी, एक बार फिर करने का मूड़ हो रहा है। एक बार फिर करें क्या?
यह सुनते ही वो एकदम छिटक कर अलग हो गई और बोली- पागल तो नहीं हो गये हो। दीदी आने वाली होंगी। मैं जा रही हूं। ओ.के बाय!
उसने हाथ हिला कर बाय किया। फिर वो दरवाजा खोल कर तेजी से अपने घर जाने लगी। मैं उसे जाते हुए देखता रहा।
तो यह था मेरा साक्षी के साथ ये मेरा पहला सैक्सपिरियंस। इसके बाद मौका मिलने पर लगभग एक साल में हमने 18 बार खुलकर सेक्स किया। हर बार सेक्स करने का अन्दाज और मजा अलग ही था। अगर समय मिला तो साक्षी के साथ बाकी के 18 में से कुछ खास-खास सैक्सपिरियंस के बारे में भी जरुर बताऊँगा।
साक्षी के साथ इसके बाद लगभग एक साल तक ही सेक्स हो पाया। क्योंकि साक्षी की मम्मी और मौसी की आपस में अनबन हो गई और उन्होंने मकान बदल लिया। फिर जीजाजी ने भी बनारस वाली कम्पनी छोड़ कर फरीदाबाद में एक दूसरी कम्पनी ज्वाईन कर ली। मैं फिर से होस्टल में शिफ्ट हो गया। मकान बदलने के बाद, दीदी-जीजाजी के जाने के बाद मैं साक्षी से मिलने उसके घर तो कई बार गया तथा साक्षी से मिलना भी हुआ। मगर सेक्स ना हो सका।
फिर मेरे बी.फ़ार्मा अन्तिम वर्ष के पेपर शुरु हो गये। पेपर दे कर मैं साक्षी से मिलने उसके घर गया और साक्षी से जल्द मिलने का वादा करके गुड़गाँव वापस आ गया।
लगभग 3 महीने बाद मैं अपना रिजल्ट लेने फिर बनारस गया। चूंकि मैं होस्टल छोड़ चुका था, इसलिये मैं होटल में ठहरा था।
रिजल्ट लेकर मैं साक्षी से मिलने उसके घर पास होने की खुशी में मिठाई ले कर गया। साक्षी और उसके घरवालों ने मेरा जोर-शोर से स्वागत किया।
मैं काफी देर वहां रुका। वहीं लन्च किया। फिर लन्च के बाद जब मैं चलने लगा तो साक्षी मुझे मेन-गेट पर छोड़ने के बहाने आ गई।
मैंने गेट पर साक्षी को कहा- साक्षी, परसों मैं वापस गुड़गाँव जा रहा हूँ। अब ना जाने कब मुलाकात होगी। मैं सम्राट होटल में रूम न:11 में ठहरा हूँ। क्या तुम कल मुझसे मिलने वहां आ सकती हो? प्लीज़ साक्षी, प्लीज़ जरूर आ जाना। मैं पूरा दिन तुम्हारा इन्तज़ार करुंगा। ओके! बाय!
यह कह कर मैं साक्षी की हां या ना सुने बगैर चल दिया। मैं जानता था कि साक्षी जरुर आएगी और ऐसा हुआ भी।
अगले दिन साक्षी लगभग 12 बजे होटल आई। मैं होटल लॉबी में उसका इन्तज़ार कर रहा था। फिर साक्षी को साथ लेकर मैं होटल के कमरे में आ गया।
उस दिन हमने होटल के कमरे में और फिर बाथटब में कुल 3 बार सेक्स किया। बड़ा मजा आया। अगले दिन मैं गुड़गाँव वापस आ गया फिर चाहते हुए भी हम दोबारा नहीं मिल सके और हमारे प्यार की कहानी यहीं खत्म हो गई।
एक बार साक्षी का भाई मेरे पास गुड़गाँव में मेरे घर पर आया। उसने बताया कि साक्षी की शादी हो गई है और वो गुड़गाँव में ही किसी काल-सेन्टर में जॉब कर रही है। उसके दो बेटे है। उसका पति दिल्ली में किसी न्यूज़ चैनल में जॉब कर रहा है।
मैंने साक्षी के भाई को अपना मोबाईल नम्बर दिया और कहा कि साक्षी को कहना कि मेरे से बात करे। मगर आज इस बात को लगभग तीन साल हो गये है। मगर साक्षी का आज तक फोन नहीं आया। या तो उसके भाई ने उसे मेरा नम्बर दिया ही नहीं। या फिर वो चूंकि अब शादीशुदा है, इसलिये वो शायद मुझसे बात ना करना चाहती हो। खैर जो भी हो।
सो साक्षी आज तुम कहाँ हो। अगर तुम यह कहानी पढ़ोगी, तो जरूर मुझे पहचान लोगी।
तो दोस्तो, कैसी लगी मेरी ये कहानी। Sex Stories
Xxx मौसी की चुदाई हिंदी में पढ़ें इस कहानी में! मेरी मौसी बहुत चंचल बिंदास है, हर वक्त हर किसी से माँ बहन से बोलती है. मैं उसे चोदना चाहता था पर उसकी शादी तय हो गयी.
मेरा नाम विशाल है, मैं एक हट्टा कट्टा नौजवान हूँ और एक कंपनी में काम करता हूँ।
मैं गोरा हूँ, घुंघराले बालों वाला हूँ और क्लीन शेव रहता हूँ।
मेरी काजल मौसी बड़ी खूबसूरत, चंचल और बिंदास है, हंसमुख है, बोल्ड है और हंसी मजाक करने में सबसे तेज है।
उसे गन्दी गन्दी बातें करने से कोई परहेज़ नहीं है।
अपनी बातों के बीच बीच में लण्ड, बुर, चूत भोसड़ा वगैरह खूब खुल्लम खुल्ला बोलती है।
गालियां तो उसके मुंह से अक्सर निकल ही जाती हैं जिन्हें सुनकर सब लोग एन्जॉय करतें हैं।
मैं उसकी गालियां सुनने के लिए घंटों इंतज़ार करता हूँ।
वह जब भोसड़ी वाली, माँ की लौड़ी, बहन चोद बोलती है तो मेरा लण्ड साला खड़ा हो जाता है।
जब भी वह अपनी सहेलियों से बातें करती है तो गालियां जरूर बकती है और मैं वो गालियां सुन सुन कर एन्जॉय करता हूँ।
उसका कद 5′ 4″ है रंग गोरा है और जिस्म एकदम संगमरमर जैसा है।
उसकी बड़ी बड़ी कजरारी आँखें, गोल गोल सुर्ख गाल, गुलाबी होंठ और बड़ी बड़ी मस्तानी चूचियाँ किसी को भी अपनी ओर आकर्षित कर लेती हैं।
वह जब सज धज कर बाहर निकलती है तो लोग उसे देखते ही रह जाते हैं।
उसकी पतली कमर, बड़े बड़े उभरे हुए चूतड़ और उनके बीच की मटकती हुई गांड अपना अलग ही जलवा बिखेरती है।
मैं तो सच में उसके नाम का मुट्ठ मारता हूँ।
मेरा मन करता है कि मैं उसके मुंह में अपना लौड़ा घुसेड़ दूँ, उसकी चूचियों में अपना लौड़ा पेल दूँ और अगर किसी दिन मुझे नंगी मिल जाए तो घपाघप चोद डालूं उसकी फुद्दी!
काजल मौसी मुझसे केवल एक साल बड़ी है।
वह 25 साल की है और मैं 24 साल का!
यह Xxx मौसी की चुदाई हिंदी इसी काजल की है.
एक दिन मैंने कहा- मौसी तुम मुझे बहुत अच्छी लगती हो।
वह बोली- अच्छा, तो फिर क्या करेगा तू मेरा, अगर मैं तुझको अच्छी लगती हूँ।
मैं- कर तो बहुत कुछ सकता हूँ मौसी जी, पर डरता हूँ।
मौसी- मुझे डरपोक लोग अच्छे नहीं लगते … तुम भोसड़ी के डरपोक हो तो मुझसे दूर रहो।
मुझे उसकी गाली पसंद आ गई मैंने कहा- दूर रह कर कहाँ जाऊंगा? तुम्हारे सामने रहूंगा तो निडर हो जाऊंगा, बेशर्म हो जाऊंगा और गन्दी गन्दी बातें करने लगूंगा।
वह बोली- गन्दी गन्दी बातें करने के लिए कलेजा चाहिए। बड़ों बड़ों की गांड फट जाती है गन्दी गन्दी बातें करने में! आसान नहीं है गन्दी गन्दी बातें करना!
मैं- पर तुम्हारी तो नहीं फटती काजल मौसी?
वह- मेरी तो गांड कभी फटती नहीं, मैं तो दूसरों की फाड़ देती हूँ गांड!
एक दिन मैं सवेरे सवेरे अपने कमरे में लेटा अपना लौड़ा सहला रहा था।
लौड़ा साला एकदम तन कर खड़ा हुआ था। सवेरे का लण्ड बहन चोद बड़ा कड़क होता है। लगता है कि दीवार में भी छेद कर देगा।
लण्ड का टोपा पूरा खुला हुआ था।
मैंने लण्ड हाथ में लिया तो काजल मौसी की तस्वीर मेरे दिमाग में घूमने लगी और मैं लण्ड का धीरे धीरे सड़का मारने लगा।
इतने में किसी ने मेरे हाथ से लण्ड छीन लिया और बोली- अरे यार, यह मेरा काम है भोसड़ी के विशाल!
वह मेरी मौसी ही थी।
मैं उसे देख कर थोड़ा सहम गया, बोला- अरे मौसी सॉरी!
वह बोली- सॉरी की माँ की चूत … मैं हूँ न तेरे लण्ड का सड़का मारने के लिए! यह लड़कियों का काम है।
उसने मुझे पूरी तरह नंगा कर दिया और मेरे लण्ड को कई बार बड़े प्यार से चूमा।
मौसी ने कहा- तेरा लौड़ा तो बड़ा मस्त है विशाल! मुझे उम्मीद नहीं थी कि तेरा लण्ड इतना जबरदस्त होगा और इतना मोटा तगड़ा होगा। मैं तो बुर चोदी तुम्हें अभी बच्चा ही समझ रही थी।
फिर उसने मुझे दीवार के सहारे खड़ा कर दिया; खुद एक स्टूल पर बैठ गयी और एक हाथ से मेरे पेल्हड़ थाम दूसरे हाथ से सटासट सड़का मारने लगी।
मैंने कहा- अब मुझे अपने बड़े बड़े मम्मे दिखा दो न काजल मौसी!
उसने अपना ब्लाउज़ तुरंत खोल दिया और दिखा दिये अपने बड़े बड़े दूध।
मैंने कहा- वाओ बड़े रसीले हैं तेरे मम्मे काजल मौसी!
वह जोश में बोली- मौसी की माँ का भोसड़ा … मैं जब किसी का लण्ड पकड़ती हूँ तो उसकी बुरचोदी हरामजादी काजल हो जाती हूँ। मुझे माँ की लौड़ी भोसड़ी वाली काजल कहो!
मैंने कहा- हाय मेरी भोसड़ी वाली काजल, मेरा लौड़ा अपने मुँह में ले लो न प्लीज!
उसने फ़ौरन लौड़ा मुंह में घुसेड़ लिया और मजे से चूसने लगी.
मैं एन्जॉय करने लगा।
वह बार बार लण्ड मुंह में लेती और फिर मुंह से निकाल कर सड़का मारने लगती।
मुझे ऐसे में बड़ा मज़ा आने लगा।
आज पहली बार मेरे लण्ड का सड़का कोई मस्त जवान लड़की मार रही थी।
मेरे मन में आया कि आज यह मेरे लण्ड का मुट्ठ मार रही है तो कल मुझसे चुदवा भी लेगी.
कितना मज़ा आएगा जब मैं इसकी मस्तानी चूत में अपना लण्ड पेलूँगा.
मैं इसी तरह के ख़याली पुलाव पकाने लगा।
मौसी बड़े मन से अपना मुंह खोले हुए मेरे लण्ड का सड़का मार रही थी और लण्ड से कुछ कह भी रही थी- अरे मेरे भोसड़ी के लण्ड राजा, जल्दी से निकाल दे तू अपना मक्खन! तू बड़ा प्यारा लग रहा है मुझे। तू बड़ा मस्त है, बड़ा ज़ालिम है। मुझे तुझसे प्यार हो गया लण्ड राजा! अब तू निकल आ … डुबो दे मुझे अपने वीर्य से! मैं उसे पीने के लिए तैयार बैठी हूँ।
फिर क्या … लण्ड ने छोड़ दी दनादन 4-5 पिचकारियाँ उसके मुंह में!
वह सच में सारा का सारा वीर्य चट कर गयी।
दूसरे दिन अचानक एक बहुत बड़ा परिवर्तन हो गया।
मौसी की शादी तय हो गयी।
अब वह अपनी शादी के मूड में आ गई। बार बार ब्यूटी पार्लर जाने लगी, शॉपिंग हॉल जाने लगीं, साड़ियां खरीदने लगी।
वह पूरी तरह व्यस्त हो गयी।
उसे मेरा लण्ड पकड़ने का ख्याल भी नहीं आया और न मेरी हिम्मत हुई उसको अपना लण्ड पकड़ाने की।
समय यूं ही बीतता गया.
वह जब दुल्हन बनी बैठी थी तो वास्तव में बड़ी जबरदस्त खूबसूरत लग रही थी।
मैं मन मसोस कर रह गया।
और वह शादी के बाद अपनी ससुराल चली गई।
15 दिन बाद वह अपनी ससुराल से वापस आ गयी।
मैं समझ गया कि काजल मौसी अपनी सुहागरात मना कर आई है; खूब चुद कर आई है; अपने पति का लण्ड खूब पेलवाकर आईं है।
लेकिन वह सच में बड़ी सुन्दर लग रही थी।
उसका रूप रंग सब कुछ बदला हुआ था।
मांग में सिन्दूर, हाथों में कंगन. गले में हार, कानों में झुमके, नाक में नथनी, कमर में करधनी और पावों में पायल!
ये सब मौसी की खूबसूरती बढ़ा रही थी।
वह बहुत ही ज्यादा हॉट लग रही थी; एकदम सेक्स बम लग रही थी।
मेरा मन उसकी चूत देखने का हो गया।
मैं उसको आते जाते बड़े गौर से देखने लगा।
आते ही वह बड़े प्यार से मिली थी मुझसे!
लेकिन दो दिन बाद भी वह मेरे लण्ड से नहीं मिल पाई।
इसका मलाल था मुझे!
मैं उसके हाथ में अपना लण्ड देखना चाहता था।
वह सबसे खुल कर बातें भी कर रही थी, अपनी ससुराल के किस्से भी सुना रही थी सबको!
लेकिन उसकी सुहागरात की बातें किसी को भी नहीं मालूम हुई।
मैं यह जानना चाहता था कि उसके हसबैंड का लण्ड कैसा है?
उसका हसबैंड रिश्ते में अब मेरा मौसा था।
क्या मौसा का लंड मेरे लण्ड से बेहतर है या फिर मेरा लण्ड उसके लण्ड से बेहतर है?
इसका जबाब तो काजल मौसी ही दे सकतीं थीं वह भी एकांत में!
मैं उसी मौके की तलाश में था। मैं उससे अकेले में बात करने की कोशिश करने लगा.
पर वह हमेशा किसी न किसी से घिरी रहती थी।
एक दिन जब मैं बाथरूम जा रहा था तो वह मुस्कराती हुई मेरे कान में बोली- विशाल कैसा है तुम्हारा लण्ड?
मैंने भी उसके कान में ही जवाब दिया- जैसा तुम छोड़ कर गई थी, बस वैसा ही है मेरा लण्ड! लेकिन आजकल तुम्हें पाने के लिए बिचारा तड़प रहा है।
तब तक एक पड़ोसन आ गई मादरचोद।
मौसी उससे बातें करने लगीं।
ख़ैर मैं बाथरूम में नहाने चला गया और सोचने लगा कि चलो कभी न कभी तो मौका मिल ही जाएगा।
कुछ देर बाद किसी ने बाथरूम का दरवाजा खटखटाया।
मैंने खोला तो मौसी बाथरूम में ही घुस आईं और बोली- चली गयी बुरचोदी पड़ोसन! अब घर में हम दोनों के अलावा कोई और नहीं है। मैंने दरवाजा अंदर से बंद कर लिया है।
उसने मेरी तौलियां खींच ली तो मैं नंगा हो गया।
फिर उसने भी अपनी ब्रा खोल दी।
उसकी मस्तानी चूचियाँ नंगी हो गईं।
फिर उसने अपना पेटीकोट भी खोल डाला तो उसकी चूत मेरे सामने नंगी हो गयी.
उसकी गांड, उसके चूतड़ सब मेरी आँखों के सामने नंगे हो गए।
मैं बड़ी देर तक उसे नंगी देखता रहा, उसके नंगे जिस्म का मज़ा लेता रहा.
फिर उसकी चूचियाँ दबा कर कहा- तेरे तो मम्मे पहले से बड़े हो गए हैं मौसी!
वह बोली- अब तुम इन्हें मसल मसल कर और बड़ा कर दो विशाल!
मौसी मेरा लण्ड पकड़े पकड़े मस्ती करने लगी, उस पर प्यार से साबुन लगाने लगी और पेल्हड़ पर भी साबुन लगाने लगी।
मैंने भी उसके नंगे बदन पर खूब साबुन लगाया और फिर हम दोनों ने एक दूसरे के नंगे बदन को खूब नहलाया।
मैंने कहा- यार काजल, मैं तुम्हें बहुत याद कर रहा था।
वह बोली- मुझे भी तुम और तुमसे ज्यादा तुम्हारा लण्ड याद आ रहा था।
फिर मैंने पूछ ही लिया- तेरे पति का लण्ड कैसा है?
वह बोली- हां बस काम चलाऊ है यार! तेरा लण्ड उसके लण्ड से ज्यादा बढ़िया है।
यह सुनकर मुझे बड़ी तसल्ली हुई।
मैंने फिर कहा- अगर उसे मालूम हो गया कि तुम मेरा लण्ड पकड़ती हो तो वह बुरा मानेगा न?
वह बोली- उसकी माँ का भोसड़ा। वह क्यों बुरा मानेगा? बुरा मानेगा तो मेरा क्या उखाड़ लेगा? मैं उसके लण्ड के सहारे नहीं रहने वाली। अब तो मैं खुल्लम खुल्ला पराये मर्दों से चुदवाऊंगी। जब तक शादी नहीं हुई थी तब तक छुप छुप कर चुदवाती थी।
मैंने कहा- अच्छा ऐसी बात है। मुझे तो पता नहीं था।
वह बोली- हां यार, मैं शादी के पहले खूब चुदी हुई थी। मैं एक चुदक्कड़ औरत हूँ। अब मुझे किसी बात का डर नहीं है. अब तो मेरी शादी हो चुकी है। अब मुझे तुम खूब घपाघप चोदो। मैं तुमसे चुदने के लिए एकदम तैयार हूँ।
फिर हम दोनों नहा धो कर बाहर बेड पर आ गए।
उसने मुझे चित लिटा दिया और मेरे ऊपर चढ़ कर अपनी चूत मेरे मुंह पर रख दी.
मौसी ने अपने बालों का जूड़ा बनाया और झुक कर मेरा लण्ड चाटने लगी।
मैं भी उसकी चूत चाटने लगा।
मैंने अनुभव किया कि आज वह जितने बिंदास तरीके से लण्ड चाट रही है इतनी बिंदास तरह से उस दिन लण्ड नहीं चाटा था। उस दिन थोड़ा डर रही थी आज तो वह शेरनी बन कर लण्ड चाट रही है। उसे कोई लण्ड चाटते हुए देख भी ले तो उसे कोई फर्क नहीं पड़ता।
मेरा लण्ड साला बड़े ताव पर था तो मैंने उसे नीचे पटका और चढ़ गया उसके ऊपर! फिर रख दिया अपना लण्ड उसकी चूत पर!
लण्ड भी गीला था और चूत भी गीली … तो मैंने उसे अंदर तक घुसा दिया।
मेरा लण्ड बहनचोद सरसराता हुआ पूरा घुस गया अंदर!
तब मुझे मालूम हुआ कि बड़ी गहरी है ससुरी मौसी की चूत।
मैं लण्ड बार बार निकालने और पेलने लगा, चोदने लगा मौसी की चूत!
Xxx मौसी की चुदाई का मजा लेती हुई बोली- हाय विशाल, तेरा लण्ड भी विशाल है यार. बड़ी दूर तक चोट कर रहा है। मुझे इतना मज़ा तो अपनी सुहागरात में भी नहीं आया था जितना मज़ा आज आ रहा है। आज मैं सही अर्थों में अपनी सुहागरात मना रही हूँ।
मैं धीरे धीरे चुदाई की स्पीड बढ़ा रहा था और वह भी कमर हिला हिला कर बराबर मज़ा दे रही थी।
मैंने सोचा अगर मैंने इसे पहले चोदा होता तो शायद इतना मज़ा नहीं आता।
लड़की जब निडर और बेख़ौफ़ होकर चुदवाती है तो चोदने वाले को ज्यादा मज़ा आता है।
वह मस्ती में बोलने लगी- भोसड़ी के विशाल फाड़ डाल मेरी चूत … चीथड़े उड़ा दे मेरी चूत के! ये ससुरी लण्ड की बड़ी प्यासी है। इसकी प्यास बुझा दे यार। तेरा लण्ड साला बड़ा ज़ालिम है। हाय रे … मुझे अपनी बीवी की तरह चोद। समझ ले कि मैं तेरी बीवी हूँ। बड़ा मज़ा आ रहा है। हूँ आ … हो हां हां … और पेल … घुसेड़ दे और ठोक दे पूरा … घुसा दे … चीर डाल मेरी चूत।
मौसी की मस्ती देखने वाली थी।
मैंने कहा- माँ की लौड़ी मादरचोद काजल, अब मैं तुझे पीछे से चोदूंगा। तू बड़ी मस्त चीज है। तू एकदम लड्डू पेड़ा बर्फी है मन करता है तुझे कच्चा चबा जाऊं।
मैं उसे घोड़ी बनाकर पीछे से चोदने लगा।
मेरे दोनों हाथ उसकी कमर पर थे।
वह भी बहन की लौड़ी अपनी गांड आगे पीछे करती हुई चुदवाने लगी।
मुझे यकीन हो गया कि काजल अच्छी तरह चुदी हुई है क्योंकि इसे चुदाने का बहुत बड़ा अनुभव है।
कुछ देर इस तरह चोदने के बाद मैंने लण्ड फिर आगे से उसके मुंह में घुसेड़ दिया, उसका सिर पकड़ कर आगे पीछे करने लगा।
मैं वास्तव में चोदने लगा उसका मुंह … मुँह को चूत समझ कर चोदने लगा।
उसके बाद जब मैं झड़ने लगा तो काजल ने जिस मस्ती से झड़ता हुआ लण्ड चाटा … उसका वर्णन करना बड़ा कठिन है।
दूसरे दिन शाम को जब मैं मौसी के घर गया तो वह किसी औरत के साथ बैठी हुई बतला रही थी।
मैं उसे देख कर वापस होने लगा।
इतने में मौसी ने आवाज़ लगाई- अरे विशाल यहाँ आ न!
मैं उसके पास पहुँच गया.
तो वह बोली- यार शर्माते क्यों हो? इससे मिलो … ये हैं मेरी जेठानी मिसेज रोली। मैं तुम्हारी ही बातें इससे कर रही थी।
फिर वह रोली की तरफ मुंह करके वोली- बड़ा मस्त लड़का है ये विशाल! इससे ज्यादा मस्त इसका लौड़ा है। मैं जिस लौड़े की बात तुमसे कर रही थी, वह इसी का लौड़ा है.
मैंने कहा- अरे मेरी मजाक उड़ा रही हैं काजल मौसी?
तब तक उसकी जेठानी बोली- तो क्या मैं यह समझूँ कि तेरा लौड़ा वैसा नहीं है जैसा काजल कह रही है?
फिर तो मैं फंस गया।
मैंने कहा- नहीं नहीं, ऐसी बात नहीं. पर सबसे ऐसा कहना अच्छा नहीं है न!
मौसी की जेठानी बोली- अरे विशाल, मैं तेरी बुरचोदी मौसी की जेठानी हूँ ऐसी वैसी नहीं हूँ। अगर तेरा लौड़ा तारीफ के काबिल है तो उसे बताने में हर्ज़ क्या है? कहो तो मैं खोल कर देख लूँ तेरा लण्ड?
मैंने मन में कहा तो फिर खोल कर देख लो न मेरा लण्ड!
उसकी बातें सुनकर तो मेरा लण्ड साला अंदर ही अंदर उछाल मारने लगा।
रोली भी काजल से कम खूबसूरत नहीं थी।
उसकी भी चूचियाँ बड़ी बड़ी दिख रही थी।
साइज में काजल की चूचियों से बड़ी ही होंगी।
फिर हम तीनों बातें करने लगे और खुल कर करने लगे।
काजल मौसी बोली- विशाल देखो … जैसे मैं पराये मर्दों के लण्ड की दीवानी हूँ, वैसे ही मेरी जेठानी भी पराये मर्दों के लण्ड की दीवानी है!
उसके बाद सबका खाना पीना हो गया।
मूड सबका रोमांटिक हो गया था।
मैं जल्दी से जल्दी रोली को नंगी देखने के लिए बेताब था … रोली मेरा लण्ड देखने के लिए बेताब थी और काजल अपनी जेठानी के साथ चुदाई का मज़ा लेने के लिए बेताब थी।
सब काम हो जाने के बाद हम तीनों बिस्तर पर आ गए।
इस बार काजल ने बिस्तर जमीन पर लगा रखा था।
काजल ने पहल की और अपने कपड़े एक एक करके उतारने लगी।
उसे देख कर रोली भी अपने कपड़े उतारने लगी।
मुझे मालूम हो गया कि रोली तो काजल से कुछ ज्यादा ही बेशर्म है।
मैंने जब रोली की बड़ी चूचियाँ देखीं तो मेरे होश उड़ गये।
इतनी मस्तानी बड़ी बड़ी सुडौल चूचियां तो मैंने कभी पोर्न में भी नहीं देखी।
मेरा मन हुआ मैं उन्हें कच्चा चबा जाऊं।
फिर रोली मेरे कपड़े खोलने लगी।
आखिर में मैं जब पूरा नंगा हुआ तो मेरा लण्ड पकड़ कर बोली- वाओ … क्या मस्त लौड़ा है भोसड़ी का तेरा विशाल। बड़ा हैंडसम और शानदार है तेरा लौड़ा। हाय रे … आज मुझे आएगा चुदाने का असली मज़ा!
ऐसा बोल कर उसने लण्ड की कई चुम्मियाँ लीं।
मेरे पूरे लगे बदन पर हाथ फिराया, बोली- लड़का तो बड़ा बढ़िया है काजल। बड़ा मस्त माल है यार! इसका हथौड़ा जैसा लौड़ा आज मेरी चूत की ऐसी की तैसी कर देगा।
तब तक काजल भी नंगी नंगी हमारे सामने आ गई।
मैंने तो रोली के मम्मे खूब मसले खूब दबाये और खूब चूमा और चाटा।
फिर जब दोनों जेठानी और देवरानी मिलकर नंगी नंगी मेरा लण्ड चाटने लगीं तो मुझे बड़ा आनंद आने लगा।
मैं बीच में नंगा लेटा था।
एक तरफ मेरी बाईं जांघ में अपना सर रख कर काजल मेरा लण्ड चाटने लगी। दूसरी तरफ मेरी दाईं जांघ पर अपना सर रख कर रोली मेरा लण्ड चाटने लगी।
काजल रोली के मुंह में लण्ड घुसेड़ती, रोली काजल के मुंह में लण्ड घुसेड़ती।
दोनों बड़े प्यार से मेरा लण्ड चूमने, चाटने और चूसने में जुट गईं।
मेरी ख़ुशी का ठिकाना न रहा।
मैं सातवें आसमान पर था।
कुछ देर बाद काजल ने कहा- इधर आ मेरी बुरचोदी जेठानी, अब मैं पेलूँगी तेरी चूत में लण्ड … मैं चोदूंगी तेरी फुद्दी!
उसने मेरा लण्ड रोली की चूत में पेल दिया और मेरी पीठ पर चढ़ बैठी।
मेरे साथ वह भी चोदने लगी अपनी जेठानी की चूत।
इसी तरह दोनों ने मिलकर खूब एक दूसरी की चूत मुझसे खूब चुदवाई.
रात भर यह चुदाई होती रही।
रोली रात में न खुद सोई और न किसी को सोने दिया।
नमस्ते दोस्तों। मेरा नाम Antarvasna गौरी है। दोस्तों मैं दिल्ली का रहने वाला हूँ। मेरी ज़िन्दगी में तरह-तरह की लड़कियाँ आतीं हैं, या फिर यूँ कहिए किशोरियों से लेकर अधेड़ तक, हर कोई। ऐसा ही एक वाक़या आप लोगों को बता रहा हूँ।
आप सोच रहे होंगे कि मेरी ज़िन्दगी में इतनी लड़कियाँ कहाँ से आतीं हैं। दोस्तों मैं एक प्लेब्वॉय हूँ, यानि कि पुरुष-वेश्या।
एक बार दिन के समय मुझे एक ४५ वर्षीय स्त्री ने अपने यहाँ बुलाया। मैं उसके घर चला गया। वहाँ जाकर मैंने उससे बात की। उसने मुझे २ घंटों के लिए तय किया। वह ४५ साल की थी, लेकिन देखने में बद़न से काफी अच्छी लगती थी।
पहले वह मुझे अपने बेडरूम में ले गई, वहाँ जाकर उसने अपने-आप को मेरे ऊपर छोड़ दिया। मैंने उसे अपनी बाँहों में ले लिया। मैडम ने जीन्स-टॉप पहन रखी थी। मैंने उसे बिस्तर पर बिठाया और उसकी टॉप उतार दी। उसकी मोटी-मोटी हिलती हुई चूचियाँ बाहर आ गईं। मैंने उन विशाल चूचियों को दबाना चालू कर दिया। जैसे-जैसे मैं चूचियों को दबाता जाता, वह बिस्तर पर गिरती जाती।
मैंने उसकी जीन्स का बटन खोल दिया और सरका कर उसकी चिकनी और सेक्सी पैरों तक उतार दिया। उसकी पैन्टी के भीतर से उसकी उभरी सी चूत साफ दिखाई दे रही थी। पैन्टी चूत के पानी से गीली हो चुकी थी। मैंने उसके कपड़े उसके तन से अलग कर दिए। उसने फटाक से मेरी पैन्ट की ज़िप खोल कर अपना हाथ मेरे लण्ड तक पहुँचा दिया। मैंने अपने भी कपड़े उतार दिए और उसने मुझे मुख-मैथुन करने को कहा।
हमने 69 की मुद्रा बनाई और उसकी चूत को चाटने लगा। उसने भी मेरा लण्ड अपने मुँह में ले लिया। मैंने उसकी चूत को इस कद़र चूसा कि उसकी सिसकियाँ निकल गईं। अब वह जल्दी ही अपनी चूत का पानी छोड़ने वाली थी। मैंने एक कॉण्डोम अपने लण्ड पर लगाया, उसे सीधा करके उसे अपने नीचे ले लिया और उसकी चूत में अपना लण्ड डाल दिया।
चूत थोड़ी सी ढीली थी लेकिन वह पूरा साथ दे रही थी। वैसे भी कुछ ही झटके लगे और उसकी चूत से पानी बाहर आ गया। वह मुझे कसके पकड़े हुई थी। मैंने भी थोड़ी ही देर में अपना काम पूरा कर लिया।
मैं थोड़ी देर तक उसकी चूत को सहलाता रहा, उसके बाद वह मुझे अपने साथ अपने बाथरूम में ले गई। हम दोनों घर में अकेले ही थे। वह वहाँ जाकर बाथ-टब में चली गई और मुझे भी आने का आमंत्रण दिया। काफी देर तक मैं उसकी चूत को सहलाता रहा। वह फिर से सिसकियाँ भरने लगी। उसने कहा कि इस बार पानी के भीतर ही सेक्स करेंगे। मैंने कॉण्डोम लगाया और पानी के भीतर ही उसकी चूत में अपना लण्ड घुसा दिया। अभी हम दोनों का चूत-लण्ड का खेल शुरू ही हुआ था कि दरवाज़े की घंटी बजी। थोड़ी देर के लिए वह सोच में पड़ गई कि आख़िर कौन आ गया। उसने सोचा कि दरवाज़ा नहीं खोलूँगी, जो भी होगा वापस लौट जाएगा। लेकिन दरवाज़ा खुल गया, और जो अन्दर आई, वो थी उसकी बेटी।
वह इधर-उधर देखती हुई सीधी हमारे पास आई। वह हमे इस हालत में देख चौंक पड़ी। वह बोली, मम्मी ये सब क्या है? तो वह बोली, बेटा हम तो बस मज़े कर रहे हैं। अगर तुम्हें पसन्द हो तो तुम भी कर सकती हो, तुम भी इसका मज़ा ले सकती हो। उसकी बातें सुनकर मैं तो हैरान ही रह गया। उसकी लड़की ने कहा, “मम्मी, ये सेक्सी है कौन?”
“बेटी, ये गौरी है, एक प्लेब्वॉय।” – माँ ने कहा।
“यानि मज़ा का मज़ा और राज़ भी छुपा का छुपा।” बेटी बोली।
तब तक मेरे दो घण्टे पूरे हो चुके थे। मैंने जाने की बात कही, कि तभी उसकी बेटी सिमी (काल्पनिक नाम) ने मुझे जाने से रोक दिया और बोली, “कोई बात नहीं सेक्सी ! दोगुने पैसे ले लेना और अगर ख़िदमत अच्छी की तो टिप भी मिलेगी।”
अब तक सिमी भी टब में ही आ गई थी। सिमी की मम्मी ने मेरा एक हाथ अपनी चूत पर रखा और दूसरा हाथ रिमी की मस्त प्यारी-प्यारी चूत पर रख दिया। दोनों ने मिलकर मेरे लण्ड को पकड़ लिया। सिमी की मम्मी एक बार अपनी चूत चुदवा ही चुकी थी, इसलिए उसने सिमी से कहा, “जाओ, बेडरूम में जाओ, और खुलकर लण्ड के मज़े लो। सिमी ने कहा, “नहीं मॉम, मैं आप के सामने ही चूत मरवाना चाहती हूँ। सिमी की चूत चुदने के लिए तैयार हो चुकी थी। मैंने उसे अपने लण्ड पर बिठाया और एक झटके में लण्ड उसकी चूत में पहुँचा दिया। सिमी की मॉम को डर था कि सिमी को खून निकलेगा, लेकिन सिमी की चूत से खून नहीं निकला। सिमी की मॉम ने पूछा, तो सिमी ने कहा, “मॉम क्या तुम्हारी चूत से अभी खून निकला था?”
“नहीं।” – मॉम ने कहा।
“तो फिर मेरी से भी नहीं निकला।”
उसकी मॉम समझ गई कि सिमी ने पहले भी चूत चुदवाई हुई है। अब तक मैं सिमी को कस कर चोदने लगा था और सिमी भी पूरी तरह से चुदाई का मज़ा ले रही थी। थोड़ी देर में ही सिमी झड़ने वाली थी, उसने मुझे कस कर पकड़ा और ज़ोरों से सिसकियाँ भरने लगी। झड़ते-झड़ते सिमी ने कम से कम पूरा एक मिनट का समय लगाया। अब मैं भी सिमी की चूत में ख़ुद को झड़ने से रोक नहीं पाया और उसकी प्यारी सी कसी हुई चूत में अपना स्खलन पूरा किया।
वह चुदाई मेरे कॅरियर की सबसे अहम चुदाई थी, जिसमें एक ही जगह माँ बेटी एक ही बार चुदी थी।
ख़ैर उस दिन के बाद तो अक्सर वह मुझे बुलाती रहती थी, और मज़े की बात तो यह कि दोनों एक ही साथ।
तो दोस्तों, कैसा लगा आपको? मुझे प्रतिक्रिया अवश्य दें। Antarvasna
राम कुमार (ग्वालियर से) का Antarvasna stories अन्तर्वासना के सभी पाठकों को खड़े लण्ड का सलाम। मैं अपना एक सच्चा अनुभव लेकर हाज़िर हूँ जिस को पढ़कर आँटियाँ, चाचियाँ, मामियाँ, भाभियाँ और लण्ड की प्यासी लड़कियों की चूत गीली हो जाएगी और लंड के लिए तड़प उठेंगीं। और जिन लड़कों के पास चूत की व्यवस्था होगी, वो चूत चोदने लगेंगे और जिनके पास नहीं होगी, वो मूठ मारने लगेंगे।
यह बात मई की है। मेरी मामी जो लगभग ३२ साल की है और दो बच्चों की माँ है, रंग गोरा, शरीर भरा हुआ, न एकदम दुबला न एक दम मोटा-ताज़ा। मतलब बिल्कुल गज़ब की। पर चूचियाँ तो दो-दो किलो के और गाँड कुछ ज़्यादा ही बाहर निकले हैं। मेरे ख़्याल से उसकी फिगर ३८-३२-३९ होगी।
मैं उस मामी को चोदने के चक्कर में दो सालों से लगा था, और उसके नाम से मूठ मारा करता था। मेरे मामा (४०), जो ग्वालियर में ही रहते थे, रेडीमेड कपड़ों के धंधे में थे और अपना माल दिल्ली ख़ुद ही जाकर लेकर आते थे।
एक दिन जब मैं अपने घर पहुँचा तो मामा वहाँ थे, और मम्मी से बातें कर रहे थे। मैंने मामा से पूछा – “अब नये कपड़े कब आ रहे हैं?”
“बस आज ही लाने जा रहा हूँ। पर इस बार माल दिल्ली से नहीं, मुम्बई से लेकर आना है। वहाँ एक नामी कम्पनी से मेरी बात तय हो गई है। मुझे वहाँ से आने में चार-पाँच दिन तो लग ही जाएँगे। तब तक मैं चाहता हूँ कि तुम दिन में एक बार ज़रा दुकान जाकर काम देख लेना और रात में मेरे घर चले जाना।”
“तू कुसुम और बच्चों को यहीं क्यों नहीं छोड़ देता?” मेरी मम्मी ने पूछा।
“मैंने कुसुम से कहा था कि बच्चों के साथ दीदी के यहाँ रह लेना, पर वह कह रही थी कि चार-पाँच दिनों के लिए आप लोगों को क्यों परेशान करना, बस राम को बोल देना, वो तुम्हारे आने तक हमारे यहाँ ही आ जाए और दुकान को भी काम देख ले। नौकरों के भरोसे दुकान छोड़ना ठीक नहीं। तुझे कोई दिक्क़त तो नहीं?” – मामा बोले।
“अभी तो मैं पूरा खाली ही हूँ। परीक्षाएँ भी खत्म हो चुकी हैं। चलिए एक अनुभव के लिए आपकी दुकान को भी सँभाल लेते हैं (और मामी को भी)।”
“आज ८ बजे मेरी ट्रेन है, तू सात बजे घर आ जाना और मुझे स्टेशन छोड़ कर वापिस मेरे घर ही चले जाना।”
“ठीक है मैं ६:३० बजे आ जाऊँगा।”
६:३० बजे मैं मामा के घर पहुँच गया, मामा सफ़र की तैयारी कर रहे थे और मामी पैकिंग में मामा की मदद कर रही थी। पैकिंग के बाद मामी ने मामा को खाना दिया और मुझे भी खाने के लिए पूछा।
“मामा को छोड़कर आता हूँ, फिर खा लूँगा।” मैंने कहा।
७:३० बजे मामा और मैं स्टेशन पहुँच गए। मामा की ट्रेन सही समय पर आ गई, मामा का आरक्षण था, मामा अपनी सीट पर जाकर बैठ गए और पाँच मिनट के बाद ट्रेन मुम्बई के लिए चल पड़ी। चलते-चलते मामा बोले,”मामी और बच्चों का ख्याल रखना।”
“आप यहाँ की फिक्र ना करें, मैं मामी और बच्चों का पूरा ख्याल रखूँगा।”
मैंने स्टैण्ड से अपनी बाईक ली और ८:३० तक घर आ गया। मैंने दरवाज़े की कॉलबेल बजाई तो मामी ने दरवाज़ा खोला और बोली,”हाथ-मुँह धो लो, अब हम खाना खा लेते हैं।”
“आपने अभी तक काना नहीं खाया?” मैंने पूछा।
“बस तुम्हारा ही इन्तज़ार कर रही थी। बिट्टू और सोनू तो खाना खाकर सो गए हैं। तुम भी खाना खा लो।”
मैं और मामी डिनर की टेबल पर एक-दूसरे के आमने-सामने बैठ कर खाना खा रहे थे। जब मामी निवाला खाने के लिए थोड़ा झुकती उनकी चूचियों की गहराईयों के दर्शन होने लगते और मेरा लंड विचलित होने लगता। पर स्वयं को सँभाल कर मैंने खाना खतम किया और टीवी चालू कर लिया। उस समय आई पी एल मैच चल रहे थे, मैं मैच देखने लगा।
कुछ देर बाद मामी बर्तन साफ करने लगी और वह भी मैच देखने लगी। जल्दी ही उसे नींद आने लगी।
“मैं तो सोने जा रही हूँ, तुम भी हमारे कमरे में ही सो जाना, तुम डबल बेड में बच्चों के एक तरफ ही सो जाना” मामी बोली।
“ठीक है, बस एक घन्टे में मैच खत्म होने वाला है। आप सो जाओ, मैं मैच देखकर आता हूँ।”
मामी चली गई और मैं मैच देखने लगा।
कुछ देर बाद बाद ब्रेक हुआ और मैं चैनल बदलने लगा, और एक लोकल चैनल पर रुक गया। डिश वाले एक ब्लू-फिल्म प्रसारित कर रहे थे। अब काहे का मैच, मैं तो उसी चैनल पर रुक गया और वो ब्लू-फिल्म देखने लगा और मेरा लंड हिचकोले मारने लगा।
मेरा साढ़े पाँच इंच का लंड लोहे की तरह सख्त होकर तन गया, मैं अपनी पैंट के ऊपर से ही उसे सहलाने लगा। मेरा लंड चूत के लिए फड़फड़ाने लगा और मेरी आँखों के सामने मामी का नंगा बदन घूमने लगा और मैं मामी के नाम से मूठ मारने लगा। मैं मन ही मन मामी को चोद रहा था, कुछ देर बाद लंड ने एक पिचकारी छोड़ दी। मेरा वीर्य लगभग पाँच फीट दूर छिटका, और यह बस मामी के नाम का कमाल था।
अब मेरा दिमाग मामी को हर हाल में चोदने के बारे में सोचने लगा, तब तक फिल्म भी खत्म हो गई थी। मैंने टीवी बन्द किया और बेडरूम की ओर चल दिया। जैसे ही मैंने कमरे की बत्ती जलाई, मेरी आँखें फटी रह गईं। बिल्लू और सोनू, दोनों दीवार की ओर सो रहे थे, और मामी बीच बिस्तर में। उनकी साड़ी घुटनों के ऊपर तक उठ गई थी और उनकी गोरी-गोरी जाँघें दिख रहीं थीं। उनका पल्लू बिखरा हुआ था, ब्लाउज़ के ऊपर के दो हुक खुले थे और काली ब्रा साफ-साफ दिख रही थी। मामी एकदम बेसुध सो रहीं थीं।
मैंने तुरन्त लाईट बन्द की और अपने लंड को सहलाते हुए सोचा,’क़िस्मत ने साथ दिया तो समझ हो गया तुम्हारा जुगाड़ !’
मैं जाकर मामी के पास लेट गया, मामी एकदम गहरी नींद में थी। मैंने एक हाथ मामी के गले पर रख दिया और हाथ को नीचे खिसकाने लगा। अब मेरा हाथ ब्लाउज़ के हुक तक पहुँच गया। मैं आहिस्ते-आहिस्ते हुक खोलने लगा। तभी मामी बच्चों की ओर पलट गई, इससे मुझे हुक खोलने में और भी आसानी हो गई और मैंने सारे हुक खोल दिए। ब्रा के ऊपर से ही मामी की चूचियों को सहलाने लगा।
मामी के स्तन एकदम मुलायम थे। पर ब्रा ने उन्हें ज़ोरों से दबा रखा था, इस कारण ऊपर पकड़ नहीं बन रही थी। मैं अपना हाथ मामी की ब्लाउज़ के पीछे ले गया और ब्रा के हुक को भी खोल दिया। अब दोनों स्तन एकदम स्वतंत्र थे। मैं उन आज़ाद हो चुके बड़े-बड़े स्तनों को हल्के-हल्के सहलाने लगा, फिर मैं एक हाथ उनकी जाँघ पर ले गया और ऊपर की ओर ले जाने लगा पर एक डर सा भी लग रहा था कि कहीं मामी जाग ना जाए। पर जिसके लंड में आग लगी हो वो हर रिस्क के लिए तैयार रहता है और लंड की आग को सिर्फ चूत का पानी ही बुझा सकता है।
हिम्मत करके मैं अपने हाथ को ऊपर ले जाने लगा। जैसे-जैसे मेरा हाथ चूत के पास जा रहा था, मेरा लंड और तेज़ हिचकोले मार रहा था।
अब मेरा हाथ मामी की पैन्टी तक जा पहुँचा था। पैन्टी के ऊपर से ही मैंने हाथ चूत के ऊपर रख दिया। चूत बहुत गीली थी और भट्टी की तरह तप रही थी। मैंने साड़ी को ऊपर कर दिया और पैन्टी को नीचे खिसकाने लगा। थोड़ी मेहनत के बाद मैं पैन्टी को टाँगों से अलग करने में कामयाब रहा।
अब मैं हाथ को चूत के ऊपर ले गया और चूत को प्यार से सहलाने लगा। मामी अभी तक शायद गहरी नींद में थी। मैंने एक हाथ मामी की कमर पर रखा और उन्हें सीधा करने लगा।
मामी एक ही झटके से सीधी हो गई। मैं अपनी टाँग को मामी की टाँगों के बीच ले गया और मामी की टाँगों को फैला दिया। अब मैं नीचे खिसकने लगा और मैं जैसे ही चूत चाटने के लिए मुँह चूत के पास ले गया, मामी ने हाथ से चूत को ढँक लिया।
मेरी तो गाँड फट गई, रॉड की तरह तना हुआ लौड़ा एकदम मुरझा गया, दिल धाड़-धाड़ धड़कने लगला।
तभी मामी उठी और फुसफुसाकर बोली,”ये सब यहाँ नहीं। बिट्टू और सोनू जाग सकते हैं। अब तक तो मैंने किसी तरह अपनी सिसकियाँ रोक रखीं थीं पर अब नहीं रोक सकूँगी। हम ड्राईंगरूम में चलते हैं।”
इतना सुनते ही मेरा लंड फिर से क़ुतुबमीनार बन गया। मामी जैसे ही बिस्तर पर से उठी, मैंने मामी को अपनी बाँहों में भर लिया और उनके होंठों को चूमने लगा। वह भी मेरे होंठों पर टूट पड़ी। हम एक-दूसरे के होंठों को पागलों की तरह निचोड़ने लगे।
मैं उनके होंठों को चूमते हुए अपने दोनों हाथ उनकी गांड तक ले गया और उन्हें उठा लिया। मामी ने अपने पैर मेरी कमर के गिर्द लपेट दिए। मैं उन्हें चूमते हुए ड्राईंगरूम तक ले आया और मामी को लेकर सोफे पर बैठ गया।
मामी मेरी गोद में थी, ब्लाउज़ और ब्रा अभी भी मामी के कंधों से लटक रहे थे। पहले मैंने ब्लाउज़ को निकाल फेंका, फिर ब्रा और एक चूची को हाथ से मसलने लगा और साथ ही दूसरी चूची को चाटने लगा।
अब साड़ी की बारी थी, मैंने साड़ी भी निकाल फेंकी, अब पेटीकोट बेचारे का भी शरीर पर क्या काम था। अब मामी एकदम नंगी हो चुकी थी। लाल नाईट-बल्ब की रोशनी में मामी का नंगा बदन पूर्णिमा में ताज़ की तरह चमक रहा था और इस वक्त मैं इस ताजमहल का मालिक था।
अब मामी मेरे कपड़े उतारने लगी। मेरे सारे कपड़े उन्होंने उतार दिए और मैं सिर्फ अपनी फ्रेंची अण्डरवियर में रह गया पर वह भी अधिक देर न रह सका। उन्होंने वह भी एक ही झटके में उतार फेंकी और फिर मामी ने मेरे साढ़े पाँच इंच लम्बे विकराल लंड को लॉलीपॉप की तरह चूसने लगी।
कभी मामी लंड पर, तो कभी अंडकोष से सुपाड़े तक जीभ फिराती, कभी लंड को हल्के से काटती, सुपाड़े पर थूकती और फिर उसे चाट जाती। मेरा तो बुरा हाल कर दिया और मेरे लंड ने मामी के मुँह पर अपनी पिचकारी मार दी। उनका पूरा चेहरा मेरे वीर्य से सन गया था। मैंने अपने दोनों हाथों से सारा वीर्य उनके चेहरे पर मल दिया।
“दूसरी बार में भी इतना माल? तेरा लंड है या वीर्य का टैंक?” – मामी ने कहा।
मैं यह सुनकर हैरान हो गया, मेरी हैरानी जानकर उन्होंने बताया – “जब तू ब्लू-फिल्म देख रहा था और मेरे नाम से मूठ मार रहा था तब मैं पानी पीने के लिए रसोईघर में आई थी और तेरे लंड की धार को देख कर मेरी कामवासना की प्यास जाग गई और मैं बेडरूम में अपने कपड़ों को जान-बूझ कर अस्त-व्यस्त कर लेट गई थी। वहाँ आने के बाद अगर तू ऐसी हरकतें नहीं करता तो आज मैं ही तेरा जबरन चोदन कर देती।”
“तरबूज़ तलवार पर गिरे या तलवार तरबूज़ पर, कटना तरबूज़ को ही है। अब तो आज रात सचमुच में जोरदार चोदन होगा। आज रात अगर आपसे रहम की भीख न मँगवाई तो मेरा भी नाम राम नहीं।” मैंने कहा।
“चल देखते हैं, कौन रहम की भीख माँगता है !” मामी ने भी ताना सा मारा।
मामी के ऐसा कहते ही मैंने मामी को ज़मीन पर लिटा दिया और उनकी चूत पर टूट पड़ा, अपनी जीभ को चूत में जितना हो सकता था अन्दर डाल दिया और जीभ हिलाने लगा। चूत के गुलाबी दाने को जैसे ही मैं हल्के-हल्के काटता-चूसता, वह तड़प उठती और आआहहहहहह आआहह्ह्हहहह करने लगती।
उसने टाँगों से मेरे सिर को जकड़ लिया और टाँगों से ही सिर को चूत में दबाने लगी और बालों में हाथ फेरने लगी। मैं चूत-अमृत पीते हुए दोनों स्तनों को मसल रहा था… तभी अचानक मामी का शरीर अकड़ने लगा उनकी चूत ज़ोरदार तरीके से झड़ने लगी।
मैंने चूत को चाटकर साफ कर दिया और जैसे ही मैं मामी के ऊपर आने को हुआ, मामी ने मुझे रोका और गेस्ट-रूम की ओर इशारा किया। मैं समझ गया कि वह उस कमरे में चलने को कह रही है। मैंने उन्हें गोद में लिया और चूमते हुए उस कमरे में ले आया। लाईट जलाई तो देखा, वहाँ एक सिंगल बेड था। मैंने पंखा चालू किया और उन्हें बिस्तर पर पटक दिया और उनके ऊपर आ गया। मैंने उनके होंठों को चूमते हुए अपनी टाँगों से उनकी टाँगे चौड़ी कीं।
अब मेरा लंड मामी की चूत के ऊपर था। मैंने अपने हाथों को सीधा किया और धक्के मारने की मुद्रा में आ गया। अब मैं अपनी कमर को नीचे करता और लंड को चूत से स्पर्श करते ही ऊपर कर लेता। कुछ देर ऐसा करने के बाद मामी बोली,”अब मत तड़पाओ, मेरी चूत में आग लग रही है, इसमें अपना लंड अब डाल दो और मेरी चूत की आग को शान्त करो, मैं तुम्हारे हाथ जोड़ती हूँ।
इस बार मैंने लण्ड चूत पर रखा और धीरे-धीरे नीचे होने लगा और लण्ड चूत की गहराईयों में समाने लगा। चूत बिल्कुल गीली थी, एक ही बार में लण्ड जड़ तक चूत में समा गया और हमारी झाँटे आपस में मिल गईं। अब मेरे झटके शुरु हो गए और मामी की सिसकियाँ भी… मामी आआआहहहहह अअआआआआहहहह करने लगी। कमरा उनकी सिसकियों से गूँज रहा था।
जब मेरा लण्ड उनकी चूत में जाता तो फच्च-फच्च और फक्क-फक्क की आवाज़ होती। मेरा लण्ड पूरा निकलता और एक ही झटके मे चूत में पूरा समा जाता। मामी भी गाँड हिला-हिला कर मेरा पूरा साथ दे रही थी। मैंने झटकों की रफ्तार बढ़ा दी, अब तो खाट भी चरमराने लगी थी। पर मेरी गति बढ़ती जा रही थी। हम दोनों पसीने से नहा रहे थे। पंखे के चलने का कोई भी प्रभाव नहीं था।
दोनों के चेहरे एकदम लाल हो रहे थे पर हम रुकने का नाम नहीं ले रहे थे। झटके अनवरत जारी थे। कभी मैं मामी के ऊपर तो कभी मामी मेरे ऊपर आ जाती। दोनों ही चुदाई का भरपूर मज़ा ले रहे थे। पूरे कमरे में बस कामदेव का राज था। हम दोनों एक-दूसरे की आग को बुझा रहे थे। तभी हमारे शरीर अकड़ने लगे।
दोनों झड़ने वाले थे। मैं लण्ड को बाहर निकालने वाला ही था कि मामी ने रोक दिया और बोली – “अपना सारा माल चूत के अन्दर ही छोड़ दो।”
मैंने भी झटके चालू रखे। हम दोनों ने एक-दूसरे को भींच लिया। मामी ने टाँगों और हाथों को मेरे शरीर पर लपेट दिया। मैंने मामी के कंधों को कसकर पकड़ लिया और एक ज़ोरदार झटका मारा। मैं और मामी एक ही साथ झड़े थे। मामी की चूत मेरे वीर्य से भर गई।
वीर्य चूत से बह रहा था। मेरा मुँह अपने-आप चूत पर पहुँच गया और मैं मामी की चूत को चाट-चाट कर साफ करने लगा।
मामी ने भी मेरे लंड को चूस-चूस कर साफ कर दिया और हम दोनों एक-दूसरे के बगल में लेट गए, पर मामी का हाथ मेरे लंड पर था और मैं मामी के बालों को सहला रहा था।
मामा के आने तक मैं और मामी पति-पत्नी की तरह रहे। मैं सुबह को दुकान का एक चक्कर लगा आता। दिन में हम नींद ले लेते और रात को…
मामा के आने के बाद भी जब भी मौक़ा मिलता, मैं उसको छोड़ता नहीं।
अन्तर्वासना के पाठकों, आपको मेरी यह दास्तान कैसी लगी, मेल कर बताएँ। Antarvasna stories
सबसे पहले अन्तर्वासना Sex Stories सेक्स स्टोरीज साईट का धन्यवाद लोगों के बिस्तर में खेले जाने वाले जायज़ और नाजायज़ संबंधों को हम लोगों के समक्ष जाहिर करने के लिए!
कई लोग सोचते होंगे कि शायद यहाँ पर मनगढ़ंत कहानियाँ होती हैं लेकिन दोस्तो, यह कलयुग है, घोर कलयुग! इन सभी किस्सों में सचाई सौ परसेंट होती है।
अब अंतर्वासना के पाठकों को वंदना की गीली चूत का प्रणाम!
मैं एक तेतीस साल की ज़िन्दगी को जी लेने वाली सोच की मालिक हूँ। मुझे जिंदगी अपने ढंग से मस्ती के साथ जीना अच्छा लगता है। मैं एक पढ़ी-लिखी महिला हूँ, तेतीस साल की
जिंदगी में अब तक मैं बहुत से लौड़े ले चुकी हूँ।
किशोर कमसिन थी जब मैंने अपनी सील तुड़वाई थी और फिर उसके बाद कई लड़के कॉलेज लाइफ तक आये और मेरे साथ मजे करके गए। मैं खुद भी कभी किसी लड़के के साथ सीरियस नहीं रही थी।
अब मैं एक सरकारी स्कूल में कंप्यूटर की वोकेशनल स्कीम के तहत कंप्यूटर लेक्चरर हूँ, वो भी सिर्फ लड़कों के स्कूल में! वैसे तो वहाँ मेरे अपने कुछ ख़ास सहयोगियों के साथ स्कूल से बाहर अवैध संबंध हैं। मैं अपने पति से अलग रहती हूँ, मेरी दो बेटियाँ हैं जो अपने पापा के साथ दादा-दादी के घर में ही रहती हैं। अकेलेपन ने मुझे और गाड़ दिया था, पतिदेव ने मुझे समझाने के बजाये छोड़ ही दिया जिससे मैं और अय्याश होने लगी हूँ। बत्तीस हज़ार मेरी तनख्वाह है, अकेली रहती हूँ, हर सुख-सुविधा घर में मौजूद है। पति के अलग होने के बाद मैं और बिगड़ चुकी हूँ और अपने साथियों को रात-रात भर अपने घर रखती हूँ।
आज मैं आपके सामने अपनी एक सबसे अच्छी चुदाई के बारे लिखने लगी हूँ ज़रा गौर फरमाना!
मुझे गहरे-खुले गले के सूट पहनना पसंद है और वो भी छातियों से कसे हुए, पीठ पर जिप, कमर से कसे, पटियाला सलवार!
जून-जुलाई की बात है, सब जानते हैं पंजाब में कितनी गर्मी पड़ती है इन दिनों! स्कूल बंद थे लेकिन आजकल हमारे महकमे में एजुसेट एजूकेशन ऑनलाइन क्लास लगती है, उसके तहत पांच दिन का सेमीनार लगा। बाकी सारा स्कूल बंद था। साइंस ग्रुप में सिर्फ पांच लड़के हैं। गर्मी बहुत थी पहले ही जालीदार मुलायम सा सूट डाला था बाकी पसीने से मेरा सूट बदन से चिपक जाता!
पांच में से तीन लड़के सिरे के हरामी हैं, उनकी नज़र तो मेरी चूचियों पर टिकी रहती, बस मेरे जिस्म को देख देख अन्दर ही आहें भरते होंगे!
पहला दिन ऐसे निकला, दूसरे दिन मैंने और पतला सूट पहना और खुल कर अपने गले की नुमाईश लगाई। मुझे शुरु से ही इस तरीके से लड़कों को अपना जिस्म दिखाना अच्छा लगता था। इससे मुझे बहुत गर्मी मिलती थी। वो आज मुझे देख देखते ही रह गए। गर्मी की वजह से मैं आज कंप्यूटर लैब में बैठ गई, ए.सी लैब थी। मैंने उनको छुट्टी कर दी और खुद लैब में चली गई। दरवाज़ा थोडा बंद कर मैंने अन्तर्वासना की साईट खोल ली साथ में ही एक और अडल्ट वेबसाइट! वहाँ कहानियाँ पढ़ते-पढ़ते मेरी चूत गीली हो गई और मम्मे तन गए। देखते और पढ़ते हुए मेरा हाथ मेरी सलवार में घुस गया। मैंने अपना नाड़ा थोड़ा डीला कर लिया और अपनी चूत में उंगली करने लगी। दरवाज़े को कोई कुण्डी नहीं लगाईं थी क्यूंकि स्कूल में सिर्फ मैं ही थी इसलिए कुण्डी नहीं लगाईं थी।
पर्स से सी.डी निकाल कर लगाई और देखने लगी। अब मैं आराम से मेज पर आधी लेट गई और अपना कमीज़ उठाकर मम्मे दबाने लगी। मुझे क्या मालूम था कि मैं तो सिर्फ कंप्यूटर पर मूवी देख रही हूँ, तो कोई और मेरी लाइव मूवी देख रहा है। तभी किसी का हाथ मेरे कंधे पर आन टिका। मैं घबरा गई, मेरा रंग उड़ने लगा।
वो तीनों हरामी लड़के मेरे पीछे खड़े थे।
तुम यहाँ क्या कर रहे हो?
मैडम! आप इस वक्त यहाँ क्या कर रही हो?
शट- अप एंड गेट लोस्ट फ्रॉम माय लैब!
वो बोले- मैडम, लैब सरकारी है आपकी नहीं! हमें तो कुछ प्रिंट्स निकालने थे। क्या पता था कि कुछ और दिख जाएगा!
उनसे बातें करते हुए अपनी सलवार और कुर्ती वहीं रहने दी। तभी विवेक नाम का लड़का घूम मेरे सामने आया और मेरी जांघों पर हाथ फेरता हुआ बोला- क्या जांघें हैं यार!
उसका स्पर्श पाते ही मैं बहकने लगी, नकली डांट लगाने लगी।
विकास ने अपना हाथ मेरी कुर्ती में डालते हुए मेरे चूचूक मसल दिए और राजेश ने मेरा हाथ पकड़ा और अपनी जिप खोल अन्दर घुसा दिया। उसका लिंग हाथ में पकड़ कर ही मैंने अब बेशर्म होने का फैंसला लिया। एक दम से मेरे में बदलाव देख वो थोड़ा चौंके।
मादरचोद कमीनो, हरामियो! कुण्डी तो लगा लो!
भोंसड़ी वालो! एक जना जाकर स्कूल के मेन-गेट को लॉक करके आओ!
तीनों ने मुझे छोड़ा और मेरे बताये सारे काम करने निकल गए। मैंने अब मूवी की आवाज़ भी तेज़ कर दी और सलवार उतार पास में पड़ी कुर्सी पर फेंक दी, फिर कमीज़ भी उतार कर फेंक दी। पर्स से कोल्ड क्रीम निकाली, उसको चूत पर लगाया और गांड में भी लिपस्टिक लगाई।
जब वो आये, मैं सिर्फ ब्रा-पेंटी में मेज़ पर लेटी थी। तीनों ने मेरे इशारे पर अपनी अपनी पैंट उतार डाली और शर्ट भी। तीनों को उंगली के इशारे से पास बुलाया और ब्रा खोलते हुए बारी-बारी तीनों के कच्छे उतार दिए।
हरामियों के क्या लौड़े थे- सोचा नहीं था कि बारहवीं क्लास के लड़कों के इतने बड़े लौड़े होंगे। एक एक कर तीनों के चूसने लगी। विकास और राजेश के एक साथ मुँह में डलवाए और विवेक मेरी पेंटी उतार मेरी शेव्ड चूत चाटने लगा। उसके चाटने से मेरा दाना और फड़कने लगा, चूचूक तन गए।
राजेश ने झट से मुँह में चूचूक लेकर चूसना शुरु किया। विकास ने भी दूसरा चूचूक मुँह में लेकर काट सा दिया- हरामी! ज़रा प्यार से चूस! बहुत कोमल हैं!
बोला- साली कुतिया कहीं की! मैडम, साली बहन की लौड़ी! रांड कहीं की!
उसने लौड़ा मेरे हलक में उतार दिया, मैं खांसने लगी। बोले- चल कुतिया तेरा चोदन करते हैं!
विवेक ने मेरी गांड पर थप्पड़ जड़ दिए, मेरे बाल नौचकर मेरे हलक में लौड़ा उतार दिया।
पागल हो गए हो कुत्तो!
हाँ!
बुरी तरह से मेरी छाती पर दांतों के निशान गाड़ डाले। विवेक ने मेरी चूत में डाल दिया, राजेश और विकास मेरा मुँह चोदने लगे, साथ में मेरे चूचूक रगड़ने लगे।
अहऽऽ उहऽऽ!
उसका मोटा लौड़ा मेरी चूत चीर रहा था- ले साली कुतिया! बहुत सुना था तेरे बारे में तेरे मोहल्ले से! वाकई में तू बहुत प्यासी और चुदासी औरत है!
हाँ कमीनो! हूँ मैं रांड! क्या करूँ? मेरे खसम का खड़ा न होवे! हाय और मार बेहन चोद मेरी! विवेक जोर लगा दे सारा!
उसने साथ में अपनी दो ऊँगलियों को मेरी गांड में घुसा दिया और कोल्ड क्रीम लगाते लगाते 4 ऊँगलियों को घुसा दिया।
चूत से निकाल एक पल में गांड में डाल दिया- चीरता हुआ लौड़ा घुसने लगा- मेरी फटने लगी!
उसने वैसे ही उठाया और नीचे कारपेट पर मुझे ले गया। खुद सीधा लेट गया, मैं उसकी तरफ पिछवाड़ा करके उसके लौड़े पर बैठती गई और लौड़ा अन्दर जाता रहा। वो वॉलीबाल की तरह उछल रहा था कि राजेश ने मेरी चूत पर अपने होंठ रख दिए। विकास ने मुँह में डाल रखा था।
हाय कमीनी अब बोल के दिखा- बहुत बकती है साली क्लास में!
सही में मैं कुतिया बन चुकी थी, मैं खांसने लगती तब वो निकालता। लेकिन राजेश के होंठों की मेरी चूत पर हो रही करामात मेरी सारी तकलीफ ख़तम कर देती। विवेक गांड मारता जा रहा था कि राजेश खड़ा हुआ और आगे से आकर विवेक की जांघों पर बैठ गया और अपना आठ इंच का लौड़ा चूत पे रगड़ने लगा।
हाय हाय डाल दे तू भी साले!
उसने अपना मोटा लौड़ा चूत में घुसाना शुरु किया तब विवेक रुक गया। लेकिन जैसे ही उसका पूरा घुस गया, दोनों हवाई जहाज की स्पीड पर मेरी ठुकाई करने लगे। मुँह से सिसकियाँ फ़ूट रही थी- हाय! चोदो मुझे!
विकास ने फिर से मुँह में डाल दिया और हो गया शुरु!
राजेश तेज़ होता गया, विवेक उससे भी ज्यादा तेज़ हो गया तो राजेश रुक गया। विवेक ने राजेश को हटा दिया और एकदम से मुझे पलट कर नीचे किया और तेजी से चोदने लगा।
अह उह करता करता उसने अपना सारा माल मेरी गांड में छोड़ना शुरु किया- सारी खुजली ख़त्म!
अब राजेश सीधा लेट गया और मेरी गांड में डाल दिया, विकास ने राजेश की तरह मेरी चूत में घुसा दिया। विवेक का लौड़ा मेरी गीली गाण्ड से भर कर निकला था दोनों के रस से लथपथ मैंने मुँह में डाल सारा चाट लिया, एक बून्द भी नहीं जाने दी मैंने!
विवेक पास में लेट हाँफने लगा। राजेश ने भी वैसे ही रफ़्तार खींची, विकास को उतार दिया और घोड़ी बना के गांड में डाल फिर चूत में डालते हुए रफ़्तार पकड़ी। विकास ने मुँह में ठूंस दिया। दोनों हाथों से नीचे से भैंस के थनों की तरह लटक रहे कसे हुए मम्मों को पकड़ कर झटके दिए। एक भैंस की तरह मानो मेरा दूध चो रहा हो! ज़बरदस्त तरीके से पकड़ रखे थे उसने और पीछे दन दना दन झटके मारते हुए उसने एक दम से मेरे घुटनों को खिसकाते मुझे कारपेट पर गिरा दिया लेकिन लौड़ा बाहर नहीं आने दिया। मेरे मम्मे कारपेट से रगड़ खाने लगे। थोड़ी चुभन होने लगी। लौड़ा भी कस गया लेकिन वो नहीं रुका।
दोनों एक साथ झड़े। उसने सारा माल मेरी बच्चेदानी के मुँह के पास निकाल दिया। न जाने कितने वक्त के बाद मैंने किसी को बिना कंडोम चूत में छूटने का मौका दिया। एक साथ दोनों का कम जब मिला- मैंने आंखें मूँद ली और उसके साथ चिपक गई! फिर अलग हुए तो उसने मुँह में डाल कर साफ़ करवाया। विकास उठा और मुझे फिर से पटक कर मेरे ऊपर सवार हो गया। सबमें से विकास का लौड़ा सबसे लम्बा मोटा और फाड़ू था। उसने बेहतरीन तरीके से मेरी चूत मारी, झड़ने का नाम नहीं ले रहा था। इतने में विवेक का फिर खड़ा हो चुका था।
लेकिन विकास क्या चोदू था- उसने मुझे फिर से झाड़ दिया और गांड में डाल दिया और सारा लावा वहीं छोड़ दिया।
विवेक का तन चुका था, राजेश तैयार था।
पूरा दिन स्कूल की लैब में ए.सी के सामने तीनों ने न जाने कितनी बार मुझे रौंदा!
घड़ी देखी तो शाम के साढ़े पांच बज चुके थे और छः बजे चौकीदार स्कूल में आता था। उसको सब मालूम था मेरे बारे में, क्यूंकि एक दो बार मेरे साथी टीचर ने उसके कमरे में मुझे चोदा था। लेकिन वो तीनों नहीं चाहते थे कि चौकीदार उन्हें देखे!
हम निकल रहे थे, मैंने अपनी स्कूटी स्टार्ट की ही थी कि चौकीदार ने उन्हें निकलते देख लिया। मेरी स्कूटी बंद हो गई, सेल्फ ख़राब था। मैंने उसको कहा- स्टार्ट कर दो किक से!
बोला- मैडम मेरे लौड़े को कब मौका दोगी आप? आज फिर से लड़कों से ठुकवा बैठी हो! मैं कौन सा कम हूँ? माना पोस्ट चौकीदार की है लेकिन कौन सा काला कलूटा हूँ? पूरा मजा दूंगा! किक मारते मारते यह सब बोल रहा था। उसने एक दम से अपना लौड़ा निकाला और बोला- देखो इसको! अभी सोया हुआ है फिर भी कितना मोटा है! जब आपका हाथ लगेगा तो दहाड़ेगा यह!
सही में उस जैसा लौड़ा आज तक नहीं देखा था। वो था भी खुद छः फुट तीन इंच लम्बा-चौड़ा मर्द था, सुडौल मजबूत शरीर का मालिक था।
स्कूटी स्टार्ट हुई- मैडम जवाब देती जाओ?
मैंने गौगल्ज़ लगाते हुए कहा- रात ग्यारह बजे मेरे घर आ जाना! इंतज़ार करुँगी!
वो खुश हो गया।
दोस्तो, यह थी अंतर्वासना पर मेरी मन मोहक चुदाई!
रात को घर में क्या-क्या हुआ?
वो लिखूंगी अगले भाग में! Sex Stories
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