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Massage Girl in Rohtas: Premium Relaxation Services

Our site can help you find a professional massage girl in Rohtas who will help you relax in the best manner possible. We connect you with professional therapists who can offer you a massage that will make you feel better and more relaxed. The pros on our list are ready to provide you with a fantastic experience at your house or in one of their particular spots, whether you want to relax or get away from it all.

Introduction

Massage is currently one of the finest methods to relax your mind, body, and overall health. Our website makes it easy to locate the top massage services in Rohtas that meet your demands. This will be a one-of-a-kind and calming experience for you.

Tottaa wants to make it simple for clients to find the top masseuse. The Rohtas massage service providers on our list offer the greatest quality, comfort, and competence, whether you want a full-body massage or a massage for a particular location.

How Tottaa Helps Advertisers Reach More Customers

Tottaa is not only a list of masseuses, it’s also a secure location for them to show off what they can do. People in Rohtas who are seeking massage services may find them on our website. This makes them easier to find and gets them more appointments.

Advertisers may simply put up profiles, offer their services, and talk about pricing and discounts on our sites. This makes sure that the relevant people notice your Rohtas massage service, which makes it easier to obtain more customers.

Different Types of Massages We Offer

There are a lot of different types of massage services on our site, so you may choose one that works for you. You may choose the kind of treatment that works best for you, whether it’s profound rest or a particular type of therapy.

1. Swedish Massage

A calm and gentle way to ease muscular tension and improve blood flow. This Rohtas massage is perfect for you if you want to relax and forget about your concerns.

2. Deep Tissue Massage

This approach employs a lot of pressure to get to deeper muscle layers. It’s helpful for folks who have muscular discomfort or stiffness that won’t go away. There are specialists on our profiles of massage girls in Rohtas who are good at deep tissue treatments that function effectively.

3. Aromatherapy Massage

Calming massage strokes and essential oils are beneficial in making people feel improved both emotionally and physically. Most massage companies in Rohtas employ the use of custom oil preparations to make you feel good.

4. Thai Massage

A therapy that wakes you up by using a mix of regular massage, stretching, and compression. This traditional massage in Rohtas helps you relax, become more flexible, and get your mind and body back in harmony.

5. Hot Stone Massage

Heated stones are placed on various parts of the body to help with deep muscular tightness. People who want to feel good, relax, and help their muscles recover quickly can use this massage service in Rohtas

How to Book Our Massage Services

Tottaa makes it simple and fast to book. With our listings, you can see what kind of massage you want, read about the providers, see that they are free and then contact them directly. After you choose, you can book a massage in Rohtas at your convenient time and location. In order to get your desired massage services, apply the following simple steps:

Step 1: Browse Our Listings

Take a peek around our site to view a few massage professionals. Each listing gives you information about the many sorts of massages, how long they last, how much they cost, and where they are situated. This makes it easier to choose the finest ones.

Step 2: Compare and Shortlist

Examine the profiles carefully to compare how the services, talents, and reviews posted by customers differ. This phase makes sure you choose a business that has the style, pricing, and supply you desire.

Step 3: Connect with the Provider

When you have decided, use the information that you are offered so that you can contact them directly. One can communicate it to the massage giver thus making it understood what massage you want at what time and when.

Step 4: Confirm the Appointment

The date, time and place of the service, which could be your home, a hotel or the spa where the therapist may be found. You also need to agree on the payment method and any other accords prior to commencement of the course.

Step 5: Relax and Enjoy Your Massage

All you have to do on the day of the appointment is have your area ready for the house visit. The remainder will be handled by the expert. Take it easy and enjoy a massage that is made just for you.

Frequently Asked Questions

To locate a professional who can meet your needs, read our biography, reviews and advertising.

Yes, many of the therapists on our site will come to your house so you may feel safe and at ease.

You may pick based on talents since most adverts provide their qualifications in their profiles.

It would be advisable to make a reservation earlier to guarantee that you would be able to get a massage, particularly against the prevalent services of massage.

Not at all. Tottaa exclusively connects users with service providers. The doctor gets to choose how to handle payment.

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Sex stories

हाय मैं आरती फिर से Sex stories आपकी सेवा में हूँ. आपको कैसा लग रहा है.. मुझे तो मजा आ रहा है. आपको आ रहा है.. जरूर आ रहा होगा. आपको शायद यकीन नहीं होगा कि घर में आज कोई नहीं है. इसलिए यह वाली कहानी मैं बिल्कुल नंगी होकर लिख रही हूँ और इस दौरान मैं अपनी चूचियों को भींच भींच कर तथा अपनी चुत और गांड में पेन को डालकर सेक्स करूँगी. क्या करूँ शादी नहीं हुई न.. इसलिए चूत को शांत करने के लिए ऐसा करना पड़ता है. अभी तो पेन या पेन्सिल से ही काम चलाना पड़ेगा.

चलो आगे बढ़ते है. कम्पनी के प्रेसिडेंट के यहां से चुद कर आने के बाद मैं आते ही सो गई. क्या करूँ बहुत थक जो गई थी. इतनी बार चुदी थी कि मेरी चुत और गांड दोनों में बहुत दर्द हो रहा था.

फिर मैं अगले दिन सुबह उठी और नाश्ता करने के लिए गई. अबकी बार मैंने एक छोटी सी निक्कर पहन रखी थी.. और उसके ऊपर टाईट सा टॉप डाला हुआ था, जिसमें से मेरे चूचे कहर बरपा रहे थे. नीचे मामा जी थे जिनको मैं अंकल कह कर बुलाती थी

मैं अंकल को अपनी गांड दिखाते हुए बैठ गई. मैं साफ़ देख रही थी कि अंकल का लंड खड़ा हो चुका था. हम लोग उस दिन सोफ़े पर बैठ कर नाश्ता कर रहे थे. तभी मनीष ने कहा कि वो आज दिल्ली से बाहर जा रहा है, कल तक आ पाएगा.

कुछ देर बाद मनीष चला गया. अंकल वहीं पर बैठे हुए थे और चोरी चोरी कभी मेरी तरफ़ देखते, तो कभी मेरी चूचियों की तरफ़ देख रहे थे. जो कि मेरी टी शर्ट मैं उभरी हुई थीं. मैंने मन ही मन सोचा कि चलो क्यों न आज कुछ मजे ही ले लिए जाएं. उस वक्त अंकल ने एक ढीला सा पजामा ही पहन रखा था. मैंने चुपके से अपनी निक्कर की ज़िप खोल ली और धीरे धीरे अपनी टांगें ऊपर की ओर टेबल पर इस तरह से रख लीं कि मेरी चुत हल्की से दिखने लगे. इसके बाद मैंने वहीं रखा हुआ अखबार उठा कर पढ़ने की एक्टिंग करने लगी. मैं चुपके से देखने लगी कि अंकल मेरी हल्की सी दिखती हुई चुत की तरफ़ देख कर अपना लंड मसल रहे थे. फिर थोड़ी ही देर मैं उनका पजामा गीला सा हो गया और लंड नीचे बैठ गया. मैं समझ गई कि उन्होंने माल छोड़ दिया था.

मैंने अंकल से पूछा- अंकल क्या हुआ अभी आपका पजामा एकदम से ऊपर को उठा हुआ था.. फिर गीला हुआ और फिर नीचे बैठ गया.
अंकल मेरी बात सुनकर हंसने लगे और बोले- अरे ये तो नेचुरल है.

ये कहते हुए ही अंकल ने एकदम से अपने लंड को पजामे से बाहर निकाला जो गीला था.

अंकल ने कहा- ये बेचारा भी क्या करे.. बार बार तुम्हें देख कर खड़ा होता है और पानी छोड़ कर बैठ जाता है.
मैंने हंस कर कहा- अब क्या होगा?
तो उन्होंने कहा- कुछ नहीं.. इसका इलाज़ है… लेकिन अभी नहीं रात को होगा.

फिर वो उठे और मेरी गांड को दबा कर ऑफिस जाने के लिए तैयार होने चले गए. मैं समझ गई कि अंकल आज मेरी चुदाई करने के मूड में हैं.

मैंने मन में कहा कि यार जब रात को मजा लेना ही है तो क्यों न अभी से तैयारी कर ली जाए.

फिर मैं बाजार गई और वहां से एक नाईट सूट लेकर आ गई. इसी के साथ एक सेक्सी सी ब्रा पेंटी और स्विमिंग के समय पहनने वाली बिकनी भी ले आई. इन तीनों ही आइटम की ये खासियत थी कि ये सब पारदर्शी थे. नाईटी एक बेबी डॉल किस्म की थी, जो सिर्फ मेरे घुटनों तक आती थी. मैंने ब्रा की सजावटी लेस को कैंची से काट कर इतना छोटा कर लिया था कि वो अब मेरे मम्मों को हल्का सी ही ढँक पा रही थी. साथ ही पेंटी को मैंने चूतड़ की तरफ़ से काट कर एक डोरी नुमा बना दिया था. इस डोरी से बस मेरी गांड का छेद ही छुप रहा था. लेकिन मैंने चुत की तरफ़ से कुछ नहीं किया था.

फिर रात को खाने पर मैं जब इसी बिकनी में पहुँची तो अंकल मुझे देखते ही रह गए.

मैंने पूछा- कैसी लग रही हूँ?
अंकल ने मुझे घूरते हुए कहा- बहुत ही नंगी लग रही हो.. इतने कम कपड़े अगर पहन ही नहीं रखे होते तो और भी मजेदार लगती, आरती तुम इतने कम कपड़े क्यों पहनती हो.
मैंने कहा- पता नहीं अंकल जब मर्द नीचे मेरी चुत और गांड को, ऊपर मेरे मम्मों को घूरते हैं.. तो मुझे बहुत मजा आता है.

अंकल मुस्कुरा दिए. फिर हम लोग खाना खाने लगे.

अंकल बोले- आरती तुम्हें याद है कि जब तुम छोटी थीं.. तब तुम कैसे मेरी गोद मैं बैठ कर खाना खाती थीं.. आज भी वैसे ही खा ना!
मैंने कहा- अभी लो..

मैं लपक कर उनकी गोद में जा कर बैठ गई. मैं जानबूझ कर इस तरह से बैठी कि मेरी गांड का छेद उनके लंड के ठीक ऊपर आ जाए. मैं अंकल के लंड की सख्ती को फ़ील कर सकती थी कि मेरे बैठते ही कैसे अंकल के लंड का साइज़ बढ़ने लगा था.

फिर थोड़ी के बाद अंकल ने जानबूझ कर मेरे ऊपर दाल गिरा दी और कहा- अरे सॉरी.. लाओ मैं साफ़ कर देता हूँ.

फिर मेरे मम्मों के ऊपर से मेरे मम्मों को दबा दबा कर साफ़ करने लगे.

फिर मैंने अपनी नाईटी को देखते हुए कहा- अरे यह तो अभी भी गंदी है.. इसे उतार देती हूँ.

ये कह कर मैंने अपनी नाईटी को उतार दिया और मेरा गोरा बदन अंकल को साफ़ दिखने लगा.

तभी अंकल खड़े हुए और बोले- आरती तेरे कंधे पर एक तिल था.. मुझे वो याद है.. और हां एक तिल तो शायद तुम्हारे मम्मों पर भी तो था. तभी तो देख कितने बड़े मम्मे हो गए हैं. ज्योतिषी सही कहते हैं, जिस लड़की के मम्मों के ऊपर तिल होता है. उसके मम्मे जरूर पीने चाहिए, खूब दबाने चाहिए.. और चूसने चाहिए.
मैंने कहा- सॉरी अंकल.. लेकिन मेरे मम्मों पर तो कोई तिल नहीं है.
अंकल ने कहा- ऐसा हो ही नहीं सकता.. लाओ मुझे देखने दो

अंकल मेरे पास आए और मेरी ब्रा फाड़ कर फेंक दी. फिर अंकल मेरे मम्मों को दबा दबा कर देखने लगे. मैंने मस्ती से आँखें बंद कर लीं और अंकल के हाथों से अपने मम्मों को दबवाने का मजा लेने लगी. मेरे आँखें बंद करते ही अंकल ने चुपके से पेन से मेरे मम्मे पर एक तिल का निशान लगा दिया.

फिर अंकल बोले- देखो मैंने कहा था न.. तेरे मम्मे पर तिल का निशान है.

यह बोल कर वो मेरे मम्मों को चूसने लगे.. उन्हें भर भर के दबाने लगे.

फिर खड़े हुए और बोले- वैसे जहां तक मुझे याद है कि एक तिल तुम्हारी चुत पर भी है.
मैंने कहा- नहीं है.
उन्होंने कहा- दिखाओ.
मैंने कहा- हां देख लीजिएगा.

उन्होंने मुझे टेबल पर लिटा दिया और मेरी टांगें फैलाते हुए नीचे को कर दीं, जिससे मेरी चुत ऊपर को उठ गई. फिर अंकल ने मेरी पेंटी हटाने का कहते हुए पेंटी को फाड़ कर हटा दिया.

अब मेरी गोरी गोरी चुत उनके सामने थी. वे मेरी चुत को देखने लगे और बोले- आरती मालूम है.. जिसकी चूत में तिल होता है.. उसे हर रोज़ इसे चुसवाना चाहिए और इसके अन्दर लंड डलवाना चाहिए.

मैंने कुछ नहीं कहा बस आँख बंद करके अंकल के सामने अपनी चुत की प्रदर्शनी लगाए मजा लेती रही. अंकल ने पहले की तरह मेरी चुत पर चुपके से तिल बना दिया… और बोले- देखो मैंने कहा था कि तेरी चुत पर भी एक तिल है.
मैंने कहा- अजीब बात है.. मैंने तो कभी नहीं देखा.

अंकल ने मेरी बात को अनसुना कर दिया और मेरी चूत को चूसने लगे. थोड़ी देर बाद हम फिर से खाना खाने के लिए आ गए. इस वक्त मैं बिल्कुल नंगी थी. मैं फिर से अंकल की गोद में जाकर बैठ गई.

मैंने पूछा- अंकल यह क्या है.. जो मुझे बहुत देर से चुभ रहा है.
अंकल ने मुझे गोद से हटाया और नंगे होकर कहा- देख ले ये और कुछ नहीं.. मेरा लंड है. मैंने कहा था कि मेरा लंड तुम्हारी चुत देख कर ही खड़ा हो जाता है.
मैंने कहा- प्लीज़ अंकल इसका कुछ करो न.. मैं इससे बहुत परेशान हो रही हूँ.
अंकल चेयर पर बैठ गए और बोले- अच्छा दो मिनट रुको.. तुम एक काम करो कि तुम यहां पर आओ.

मैं उनके करीब चली गई. अंकल ने मेरी गांड को दोनों हाथों से खोला और मेरे छेद को चौड़ा करके अपने लंड पर रखते हुए कहा- अब तू झटके से लंड पर बैठ जा.

मैं अपने छेद को अंकल के लंड पर टिकाते हुए बैठ गई. बस देखते ही देखते उनका आठ इंच लम्बा लंड मेरी चुत में घुस गया. लंड बहुत ही मोटा था, मेरी चूत सहन नहीं कर पाई और मैं चिल्ला उठी. मैंने बोला- बहुत दर्द हो रहा है अंकल.

तो अंकल ने लंड घुसेड़ते हुए कहा- चुप हो जा साली कुतिया.. अभी दो मिनट बाद बहुत मजा आएगा.

फिर उन्होंने मेरे मम्मे अपने हाथों में थामे और बैठे बैठे ही नीचे से मेरी चुत में अपने लंड से धक्के लगाने शुरू कर दिए. कुछ ही पलों बाद मैं भी अपनी गांड उछालने लगी.

फिर उन्होंने अपना मूसल मेरी चूत मैं पूरा ठोक दिया.

इसके बाद अंकल खड़े हुए और मुझे गोद में उठा कर मुझे यूं ही लंड फंसाए हुए कमरे में ले गए.
अंकल ने मुझे बिस्तर पर पटक कर चोदना शुरू कर दिया. मैंने भी अपनी चूत की पूरी खुजली मिटवा कर ही दम लिया.
जब अंकल झड़ने को हुए तो मैंने उनसे कहा- मुझे मम्मी न बना देना.
अंकल ने हंसते हुए लंड को चूत से खींचा और मेरे मुँह में लगा दिया. मैंने अंकल के लंड का पूरा माल चूस लिया.
अब हम दोनों नंगे चित्त पड़े थे. बड़ी थकान हो गई थी. हम दोनों ही एक दूसरे से बाते करने लगे.

अंकल ने कहा- चल आरती मेरे पूरे बदन पर तेल से मालिश कर दे.
मैंने कहा- क्यों?
अंकल बोले- इस तरह से ही तो मेरे लंड का इलाज होगा.
मैंने- अंकल क्या इलाज होना है इस लंड का.. अच्छा ख़ासा तो चुदाई कर लेता है.
अंकल बोले- अरे यार इलाज का मतलब ये है कि अब तुम मालिश करोगी तभी तो ये दुबारा से खड़ा होकर चूत की चुदाई कर पाएगा.

मैंने अंकल के लंड की मालिश करनी शुरू कर दी. फिर अंकल मुझे अपने चूतड़ दिखाए और बोले- यहां पर भी कर.

मैं अंकल के चूतड़ों पर मालिश करने लगी.

फिर अंकल ने एक दूसरा तेल निकाला और बोले- इस तेल को मेरे लंड पर मल दो.
मैंने कहा- अंकल मेरी चूत का भी ख्याल करो.
अंकल बोले- हम्म.. ऐसा करो अपनी गांड को मेरे मुँह के पास लेकर आराम से लेट कर मालिश करो, मैं तेरी गांड को भी मजा दे दूंगा. लेकिन प्लीज़ मुझे आधे रास्ते में मत छोड़ देना.
मैंने हंस कर कहा- ओके डार्लिंग..

फिर मैं बैठ कर उसी तरह से मालिश करने लगी और लंड को बड़ा होते हुए देखने लगी.

अंकल के लंड ने खड़ा होने में कुछ देर लगाई.. इसके बाद क्या हुआ मेरी गांड का कचूमर निकला या चुत का भोसड़ा बना.. Sex stories

Hindi sex stories

यह मेरी पहली Hindi sex stories है जिसके माध्यम से मैं अपनी बात सबके सामने रख रहा हूं। अगर आपकी कोई भी प्रतिक्रिया हो तो मेल करना। मुझे इन्तज़ार रहेगा। बात एक साल पहले की है जब मैं एक ट्रैनिंग के लिये जयपुर जा रहा था। माफ़ कारना दोस्तों, मेरा नाम बिल्लू है और मेरी उम्र 28 साल है।

मेरे साथ मेरी एक फ़्रेंड रीना भी जा रही थी। रीना मेरे साथ ही जोब करती है। हम दोनों जब जयपुर पहुंचे तो रात के 8 बजे थे। गरम मौसम के कारण रीना ने एक हलका सा सलवार सूट पहना था। हम जब होटल पहुचे तो पता चला कि हम लोगों के लिये गलती से एक ही रूम रिजर्व था।

होटल के मैनेजर ने माफ़ी मांगी और कहा कि आज आपको काम चलाना होगा, कल से आपके लिये एक और रूम खाली हो जायेगा। रीना के कहने पर मैं उसके रूम मे चला गया। हम जाकर सो गये। रात मे सोते हुये मेरा एक हाथ रीना के चूतड़ों पर लगा। मेरी नींद खुल गयी। हम दोनों एक ही बेड पर थे। मैं बैचेन हो गया और मैने एक हाथ उसके चूतड़ के बीच मे लगा दिया। कुछ देर के बाद रीना ने मेरा हाथ हटा दिया। दस मिनट के बढ मैने उसके लिप्स चूम लिये। रीना भी बैचेन हो गयी और मेरे होटों को चूमने लगी। फिर मैने उसकी बिना बाल कि चूत को चाटा। और उसने मेरा लण्ड चाटा और चूसा। फिर मैने उसकी चूत मे लण्ड डालने के लिया कहा तो उसने मना किया और कहा कि मेरी गाण्ड मार लो।

तब मैने उसको डोगी स्टाईल मे ले कर उसके गाण्ड के छेद मे अपना थूक डाला जिसके बाद उसकी गाण्ड गीली हो गयी। फिर मैने अपना 8 इन्च का लौड़ा उसकी गाण्ड मे डाला। वो दर्द से रोने लगी पेर मैने स्पीड कम नही की। सारे रूम मे उसकी चीखें थी। कुछ देर के बाद उसको भी मजा अने लगा। जब मैं झड़ने लगा तो मैने सारा उसकी गाण्ड मे ही डाल दिया इस तरह हमे बहुत मज़ा आया। आपको ये कहानी कैसी लगी मुझे जरूर मेल करे। अगर कोई 25 से 35 साल क बीच की लड़की या औरत मुझे मेल कारना चाहे तो मुझे मेल करे।

मैं आज अपनी कहानी पहली बार भेज रहा हूं और उम्मीद है पसन्द कि आयेगी जिसमे मैने अपनी मम्मी और बहन को चोदा था साथ साथ पापा भी थे यानि कि पूरा घर ही चुदक्कड़ थ। बात उन दिनो कि है जब मैं 16 या 18 साल का हुआ करता था और मेरी बहन 14 साल की। उस दिन रात को पापा मम्मी कि चुदायी कर रहे थे और मैं पेशाब करने को उठा था तब मैने पापा के रूम से चीखने कि आवाज सुनी और मै जिज्ञासा शान्त करने को रूम कि तरफ़ बढ गया और जब पास गया तो तबियत हरी हो गयी।

मम्मी पूरी तरह से नंगी थी और रूम की लाईट जल रही थी जिससे उनकी चूचियां साफ़ नज़र आ रही थी और पापा उनको पीछे से चूतड़ मे धक्का लगा रहे थे और गाली बक रहे थे साली रण्डी इतनी बार गाण्ड मरवा चुकी है फ़िर भी चिल्लाती है मादरचोद आज तेरी गाण्ड फ़ाड़ दूंगा और पापा कस कस कर धक्के लगाने लगी मम्मी ऊऊ ओफ़्फ़फ ऊउफ़्फफ़्फ़ आआईई आआह्ह आआअह सीई कर रही थी और उनकी आंख से आंसू निकल रहे थे तब पापा ने अपने दोनों हाथ मम्मी की नीचे लटकी चूचियों पर रख कर दबाने लगे जिसे मम्मी को कुछ राहत मिली और वो धक्के लगाने लगी तब पापा उनकी गाण्ड मे खलास हो गये और तब मम्मी ने उनका झड़ा हुआ लौड़ा हाथ मे ले लिया और रगड़ने के बाद मुह मे रख कर चूसने लगी।

बोली- बिल्लूा, आपका लौड़ा पीने मे मुझे बहुत मज़ा आता है।

पापा ने कहा- मेरी जान अकेले अकेले चाटने का मज़ा ले रही हो? यह तो गलत बात है, मैं भी तुम्हारी चूत का पानी चाटूंगा और फ़िर वो दोनों 69 कि स्थिति में लेट गये और फ़िर मम्मी ऊऊह्हह ऊऊऊ ऊऊऊओह्हह् आअहहह्ह आआअह्हह करने लगी और कुछ देर बाद ही दोनों का माल एक दूसरे के मुँह मे गिर गया और उसके बाद मैने अपने पापा के साथ मिलकर किस तरह से मम्मी और बहन की चुदाई की।

इसका जिक्र मैं अगली बार करुंगा Hindi sex stories

दोस्तो, Sex Stories

मेरा नाम राहुल है Sex Stories और मेरी उम्र 24 साल की है।मैं मुम्बई में नौकरी करता हूँ और रहने वाला इन्दौर का हूँ।

मैंने अन्तर्वासना पर काफी कहानियाँ पढ़ीं, और मुझे भी लगा कि मुझे भी अपनी कहानी अन्तर्वासना को भेजनी चाहिए। अब मैं आपको अपनी कहानी सुनाता हूँ।

आज से तीन साल पहले मैं मुम्बई नौकरी करने आया था।
तब मुम्बई मेरे लिए अजनबी शहर था, इसलिए मुझे मेरा अकेलापन खलता था, मुझे भी एक अच्छी दोस्त की ज़रूरत थी ताकि मेरा समय भी कट सके और मेरी काम-इच्छा भी पूरी हो सके।

मैंने बहुत प्रयास किया पर किसी भी अमीर और ख़ूबसूरत लड़की को पटा नहीं सका क्योंकि यहाँ की लड़कियों को पैसे वाले लंड पसन्द आते हैं।

तो मैंने आख़िर में एक मध्यम-वर्गीय लड़की जो दूसरों के घरों में काम करने जाती थी, उसको अपनी नौकरी और पैसे की झलक दिखलाकर पटा लिया।
मेरी उससे फोन पर बातचीत भी शुरु हो गई।

एक दिन शाम को मैंने उसे अपने घर बुलाया यह कह कर कि मेरी तबीयत ख़राब है और मेरे सभी दोस्त घर गए हैं। तुम मेरे लिए खाना बना दो, वरना मुझे भूखा ही सोना पड़ेगा।

मेरी तबीयत ख़राब है, यह सोचकर वो मेरे लिए खाना बनाने मेरे फ्लैट में आ गई।

मैं कई दिनों से इसी ताक में था कि कब मेरे दोस्त लोग फ्लैट पर ना हों और मैं उस कामवाली को चोद दूँ।

उस दिन जब वो मेरे फ्लैट में आई तो मैं खुश हो गया।

मैंने उसे किचन दिखा दिया, जब वो खाना बनाने की तैयारी कर रही थी, तो मैंने धीरे से उसके पीछे जाकर थोड़ा सा चिपक कर खड़ा हो गया।

वह अचानक मुझे पीछे देखकर घबरा सी गई और बोली, “आपकी तबीयत ख़राब है, आप जाकर आराम कीजिए … मैं खाना बना दूँगी.”

मैं उसकी बात सुनकर उससे थोड़ा और चिपक गया।
इससे पहले कि वो कुछ कहती मैं उसकी दोनों चूचियों को एक बार ज़ोर से दबा दिया और फिर सहलाने लगा।

पहले तो उसे बहुत डर लगा, लेकिन बाद में धीरे-धीरे सहलाने से उसे मज़ा आने लगा और वो आँखें बन्द कर मज़े लेने लगी।

मैंने लोहा गरम होते देख उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए और उसे चूमने लगा। मैंने धीरे से अपना हाथ उसकी पैन्टी में डाल दिया और उससे पहले कि वह कुछ विरोध करे, मैंने उसकी चूत में उँगली डाल दी, और ज़ोर-ज़ोर से आगे-पीछे करने लगा।

वो अब सब कुछ भूल कर मदहोश होने लगी।

मैं उसे किचन में ही नंगा करने लगा और वो कुछ नहीं बोली।

थोड़ी ही देर में वो मेरे सामने बिल्कुल नंगी खड़ी थी। उसके शरीर पर एक भी तिनका कपड़ा का नहीं बचा था।

उसे इस तरह देखकर मेरा लण्ड तुरन्त खड़ा हो गया।

अब वो भी जोश में आकर मेरे कपड़े उतारने लगी और मैं भी उसकी मदद करते हुए जल्दी से पूरा नंगा हो गया।

मैंने अब अपना लंड उसके मुँह में डालना चाहा तो शर्म के मारे उसने मना कर दिया।

फिर मैंने दूसरा तरीका अपनाया।
मैंने अब उसे ज़मीन पर सुला कर उसकी चूत पर अपना मुँह रख दिया और उसकी चूत को ज़ोरों से चाटने लगा।
अब उसने मस्ती और मदहोशी में चूर होकर अपनी आँखें बन्द कर लीं।

मैंने इसी बात का फ़ायदा उठा कर उसकी चूत चाटते-चाटते ही 69 की मुद्रा में आ गया और मेरा लण्ड उसके होंठों पर रख दिया।
पर इस बार भी उसने मना कर दिया।
मैं नाराज़ होने का नाटक करने लगा और कपड़े पहनने लगा।

अब तक तो वह इतनी गरम हो चुकी थी कि मुझसे चुदवाने के लिए कुछ भी करना पड़े तो वो कर सकती थी।
उसने तुरन्त मेरे लण्ड को मुँह में भर लिया और उसे आईसक्रीम की तरह चूसने लगी।

मेरी योजना सफल हो गई, मैं बहुत खुश हुआ। आज तो जैसे लकी ड्रा ही निकल आया था मेरे लिए!

अब हम दोनों 69 की स्थिति में थे। मैं उसकी चूत चाट रहा था, और वह मेरा लंड चूस रही थी।

क़रीब आधे घंटे तक मैंने उसके मुँह की चुदाई की, इसी दौरान वह एक बार झड़ चुकी थी और मेरे लंड ने भी उसके मुँह में एक बार उल्टी कर दी थी।
वो उस सफेद गाढ़े द्रव को पूरा पी गई।

अब तक आग दोनों ओर भड़क चुकी थी।
मैंने अपना लंड उसके मुँह से निकाला और अब उसकी चूत में डालने लगा लेकिन उसकी चूत काफी तंग थी, अतः मैं असफल हो गया।
उसकी सील शायद अभी तक नहीं तोड़ी गई थी।

मैंने किचन से तेल लेकर अपने लंड पर और थोड़ा तेल उसकी चूत पर भी लगा दिया और फिर से चूत में लंड डालने लगा।

इस बार मैंने उसकी चूत में एक ज़ोर का झटका दिया और लंड दो इंच तक अन्दर घुसा दिया।

इस झटके से वो तड़प उठी और ज़ोर से चिल्लाई। मैंने उसका मुँह तुरन्त बन्द कर दिया और साथ ही एक और झटका दिया तो उसकी आँखों से आँसू निकल आए।

मैं डर गया तो मैंने उसके मुँह से हाथ हटा लिया।
वो बहुत रोई, अब उसकी चूत से खून निकल रहा था।
मैंने उससे धीरे-धीरे चोदने का वादा करके फिर से राजी किया।

अब मैं अपनी कमर धीरे-धीरे चला रहा था और ऐसे ही धीरे-धीरे अपना ८ इंच लम्बा लंड उसकी चूत के अन्दर गाड़ ही दिया।

थोड़ी देर में दर्द कम होने की वज़ह से उसे भी मज़ा आने लगा और वो भी मेरा साथ अपनी चूत हिला-हिला कर देने लगी।
अब उसे मज़ा आने लगा था और वो ख़ुद बोल रही थी- ज़ोर से चोदो मुझे, और ज़ोर से, फाड़ दे आज मेरी चूत, बुझा दे आज इसकी प्यास … फाड़ दे साली चूत को और ज़ोर से!

मैं भी उसकी बात सुनकर जोश में आकर ज़ोरों के झटके मारने लगा।

थोड़ी देर बाद मैंने उसे कुतिया बना कर उसकी चुदाई की। लगभग 20 मिनट की चुदाई के बाद वो झड़ गई और उसके 2 मिनट बाद मुझे भी लगा कि अब मैं झड़ने वाला हूँ तो मैंने अपना लंड निकाल कर उसके मुँह में चुदाई करनी शुरु कर दी।
और अन्त में मैं भी उसके मुँह में झड़ गया।

उसने फिर मेरे लण्ड का सारा पानी पी लिया और मेरे लण्ड को चाट-चाट कर साफ कर दिया।

उसके बाद हम दोनों किचन से निकल करक साथ में नहाने चले गए।
नहाने के बाद मैंने उसे अपना मोबाईल देकर कहा कि अपने घर फोन करके कह दो कि आज तुम मैडम (जिसके घर वह काम करती थी) के यहाँ रुकोगी, क्योंकि उनके पति घर पर नहीं हैं, तो उन्होंने मुझे आज रात यहीं रुकने को कहा है।

उसने घर पर यही बता दिया।
उसके घर वालों को कोई आपत्ति नहीं थी।

हमने होटल से खाना मँगवा कर खाया।
उसके बाद फिर दोनों नंगे ही बिस्तर पर सो गए।

रात में मैंने उसकी चार बार चुदाई की और एक बार गाँड भी मारी।

पर सबसे ज़्यादा मज़ा मुझे उसकी गाँड मारने में आया था.

उस रात की चुदाई के बाद वो जब भी मुझसे बात करती तो यही कहती- अब आपकी तबीयत कब ख़राब होगी?
और मैं जब भी अपने फ्लैट पर अकेला होता तो उसे किसी ना किसी बहाने बुलाकर चुदाई का खेल खेलता।

दोस्तो, यह थी मेरी कहानी।
बाद में मैंने इन्दौर में भी एक शादीशुदा आन्टी की चुदाई की थी जिसका किस्सा मैं अगली कहानी में सुनाऊंगा।

यह कहानी आपको कैसी लगी।

लेखक की अगली कहानी: मेरी पहली ग्राहक Sex Stories

Hindi Sex Stories

मेरे पतिदेव का एक Hindi Sex Stories तथाकथित भाई जो उन दिनों मेरे परिवार का हिस्सा बना हुआ था… मेरा भी दोस्त बन गया था, बल्कि काफ़ी अन्तरंग हो गया था। उसने मुझसे एक बार सेक्स करने का वादा ले लिया था, मैंने शर्त रखी थी कि अपने शहर से बाहर ही उसके साथ सेक्स करूँगी। मैं करूँ या न करूँ का फ़ैसला नहीं कर पा रही थी। वह हमेशा मौके की तलाश में रहता, एक बार दूसरे शहर में मौका मिला भी तो मैंने खुद को बचा लिया था।

अब वह जब भी अकेले मिलता या फ़ोन पर बातें करता तो शिकायत जरूर करता कि आपने वादा करके उसे निभाया नहीं !

मैं उसे यह कह कर टालती कि मैं कोई मरी या भागी जा रही हूँ आगे और भी मौके आयेंगे। यूँ वह घर में मुझे अकेले पाकर भी कभी छेड़ता नहीं था बस मीठी-2 बातें करके मुझे पटाने की कोशिश करता और इस तरह वह मेरा विश्वास ही जीत रहा था।

उस घटना के करीब दो माह बाद मेरे पति 3-4 दिनों के लिये बाहर गये हुए थे, उस दौरान वह रोज ही मुझे अपना वादा पूरा करने की याद दिलाता। मेरे यह कहने पर कि शहर से बाहर का वादा है मेरा, तो वह कहता कि तब तो मिल चुका मुझे आपका संसर्ग……… जब भैया शहर से बाहर हैं यानि कि आपका पोल तो खुलने से रहा, और कोई समस्या तो है नहीं। चूँकि वह तकरीबन रोज ही आता था अतः पड़ोसियों को भी कोइ शक नहीं होता। अन्ततः उनके लौटने से एक दिन पहले उसके लगातार मनुहार करने पर मैं पिघल गई, और रात में देने का वादा इस शर्त पर किया कि आज के बाद वह फ़िर कभी मुझसे सम्बन्ध बनाने की कोशिश नहीं करेगा अन्यथा मैं पति को सब कुछ बता दूँगी।

उसने मुझसे वादा किया कि ऐसा ही होगा। उस शाम वह सात बजे ही आ गया और बच्चों के साथ टी वी देखता और बातें करता रहा। डिनर के बाद तीनों बच्चे मेरे बेडरूम में सो गये क्योंकि उसी में ए सी था, पति के बाहर जाने पर हम चारों उसी में सोते थे। दस बजे तक नौकर भी बालकनी में चला गया, हम दोनों बैठक में टी वी देखते बैठे रहे, मेरा तो घबराहट के कारण दिल धक-धक कर रहा था, जब नौकर भी सो गया तो उसने धीरे से दरवाजा बन्द कर दिया और बैठक के कमरे की लाइट बुझा कर मुझे पकड़ कर दीवान पर ले गया।

मैं उस दिन एक टू-पीस-नाइटी पहने थी। अंधेरे में वह मुझे बेतहाशा चूमने लगा और अपनी बाहों में लेकर दीवान पर लोट-पोट होने लगा……… वह अत्यन्त ही उत्तेजित था और मेरी भी हालत बुरी थी……… डर, घबराहट और शायद कुछ हद तक उत्तेजित भी हो चुकी थी मैं !……… शायद मानसिक रूप से मैं उसके साथ सम्भोग के लिये तैयार हो चुकी थी………

उसने ज्यादा देर न करके मेरी नाइटी और साया ऊपर करके अपने पैण्ट की जिप खोल कर अपना लिंग निकाल कर मेरी योनि में डाल ही दिया ………

मुझे तो कुछ होश ही नहीं रहा कि आगे क्या-क्या हुआ और कैसे-कैसे उसने किया………

बस इतना याद था कि उसका लिंग मेरे पति की तुलना में बहुत बड़ा और मोटा था। शायद पूरा गया भी नहीं था और मैं चिल्लाई भी थी आहिस्ता से ……… शायद मैं भी सहयोग करने लगी थी, उसका जल्दी ही पतन हो गया जिसका मुझे अन्दाज नहीं हुआ ……… फ़िर पता नहीं मैं या वह मुझे खींचकर बच्चों के खाली बेडरूम में ले गया और दरवाजा अन्दर से बन्द करके हम दोनों फ़िर गुत्थम-गुत्था हो गये………

शायद उसने अपनी पैण्ट उतार दी थी पर मैं नाइटी में ही थी, चूँकि मासिक के दिनो के अलावा मैं पैण्टी नहीं पहनती इसलिये मेरी योनि तक पहुँचने में उसे कोई रुकावट नहीं हुई। मुझे इतना ही याद है कि वह बहुत ही जोर-जोर से मुझे मुझे चोद रहा था और मस्ती में मैं उसके ऊपर चढ़ कर अपनी बुर उसके पोल जैसे लण्ड पर ऊपर नीचे करने लगी थी। सचमुच मुझे भी काफ़ी अनन्द आ रहा था और उस समय कोई अपराध-बोध नहीं हो रहा था, बस एक आदिम-तृप्ति की चाह बच रही थी ………… मुझे और कुछ याद नहीं कितनी देर तक उसने मुझे किया ……… मैं स्खलित हुई या नहीं ……… वह कब स्खलित हुआ !

उसने बाद में बताया कि मेरा अत्यन्त उत्तेजित और रौद्र रूप देखकर (महसूस कर क्योंकि अंधेरा था न) वह अन्दर ही अन्दर डर गया कि मुझे कुछ हो न जाये।

अच्छा, एक बात और …… हमेशा चटर-पटर करने वाली उसकी जुबान उस सारे क्रिया-कलाप के दौरान एक बार भी नहीं खुली। बस चुपचाप वह मुझे लिये जा रहा था …… और ज्वार शान्त होने पर रात ही में बारह-एक बजे के बीच चला गया। हमारे काम्प्लेक्स में उस वक्त तक लोगों का आना जाना लगा रहता था अतः कोई बदनामी का डर नहीं था। मैं उसी कमरे में सो गई।

सुबह मेरा तेरह वर्षीय बड़ा बेटा पूछने लगा- मम्मी चाचा और आप रात में हम लोगों के कमरे में सोये थे क्या? मैं रात में पेशाब करने उठा तो आप दोनों के चप्पल दरवाजे के बाहर देखे थे?

मुझे काटो तो खून नहीं, पर मैं अपने धड़कते दिल को सामान्य रखने का यत्न करते हुए बोली- तुम्हें नींद में गलतफ़हमी हुई होगी क्योंकि चाचा तो साढ़े दस तक चले गये थे। मुझे तुम तीनों के साथ सोने में दिक्कत हो रही थी तो मैं उस कमरे में चली गई। खैर उस दिन के बाद मुझे कुछ अपराध-बोध भी हुआ और मन को तसल्ली भी देती कि अब ऐसा नहीं करूँगी, एक अनुभव ही काफ़ी है। वरना पाँव फ़िसला तो इज्जत जाते देर नहीं लगनी। Hindi Sex Stories

छटे भाग से आगे : Antarvasna

सुबह Antarvasna मम्मी ने हम लोगों को करीब नौ बजे जगाया।

हम लोग हड़बड़ा कर उठे और अपने अपने कपड़े को खोजने लगे। हम लोगों की हालत देख कर मम्मी बड़ी प्रसन्ता से बोली- मैं तुम लोगों के लिए चाय नाश्ता बना रही हूँ, फ्रेश हो कर डाइनिंग टेबल पर आ जाना।

यह कहते हुए मम्मी रसोई की तरफ चली गई। हम सभी लोग थोड़ी ही देर में डाइनिंग टेबल पर आ गए। चाय नाश्ता मेज़ पर लगा था।

मम्मी रसोई से आते हुए मुस्कराते हुए बोली- लगता है तुम लोगों ने रश्मि को रात भर कस कर चोदा है।

इस बात पर प्रदीप और विशाल बगैर कुछ बोले मुस्कराने लगे। नाश्ता करने के बाद प्रदीप और विशाल एक साथ कॉलेज के लिए निकल गए।

पाँच दिनों तक विशाल और प्रदीप मुझे सुबह और रात में दो दो बार चोदते रहे। उसके बाद विशाल दिल्ली चला गया और प्रदीप अपने घर चला गया। लेकिन रोज शाम को आकर मुझे चोदता था और वीर्य पिलाता था। कभी कभी प्रदीप के दोस्त भी मुझे चोदते और वीर्य पिलाते थे।

एक दिन प्रदीप के साथ उसका दोस्त मोहन त्रिपाठी आया। मैं समझ गई कि आज यह भी मुझे चोदेगा और वीर्य पिलाएगा।

खैर प्रदीप ने मोहन त्रिपाठी का परिचय मेरी मम्मी से कराया ये मेरे बड़े भाई के और मेरे भी दोस्त हैं ये ज्योतिष और हस्त रेखा के विशेषज्ञ है ये जो भी बात बताते हैं वो बिल्कुल सही निकलती है।

यह सुन कर मेरी मम्मी तुरन्त मेरे बारे में पूछने लगीं- मेरी बेटी रश्मि का बदन एक जवान लड़की की तरह होगा या नहीं और इसकी शादी कब होगी?

इस पर मोहन त्रिपाठी ने मेरी कुन्डली मांगी। मम्मी ने मोहन त्रिपाठी को कुन्डली ला कर दे दी। उन्होंने बड़े ध्यान से कुन्डली को पाँच मिनट तक देखा फिर मुझसे बोले- अपना बायाँ हाथ दिखाओ।

मेरा हाथ उलट पलट कर देखते रहे, फिर मम्मी से बोले- आपकी बेटी का हार्मोनल सिस्टम बिगड़ा है अगर एक चीज आपकी बेटी के शरीर में होगी तो वो बिलकुल ठीक हो जायेगी।

वोह क्या… मम्मी बोलीं।

इस पर पंडित जी ने प्रदीप के कान में कुछ कहा। फिर प्रदीप ने मम्मी को इशारे से अन्दर आने को कहा। प्रदीप और मम्मी अन्दर चले गए। प्रदीप ने मम्मी से कहा कि पंडित जी रश्मि की बुर का निरीक्षण करना चाहते हैं।

मम्मी ने अनुमति दे दी।

फिर प्रदीप ने आकर पंडित जी से कहा कि आप देख सकते हैं !

और मुझसे कहा कि सलवार उतार कर तुम अपनी बुर पंडित जी को दिखाओ।

मैंने वैसा ही किया जैसे प्रदीप ने कहा। मुझे अब किसी के सामने कपड़े उतारने में कोई संकोच नही होता था।

पंडित जी ने मेरी चूत को बारीकी से देखा और मुस्कराकर मम्मी से बोले- आपकी लड़की बिल्कुल सही हो जायेगी क्योंकि इसकी योनि पर काला तिल है, आपकी लड़की इतनी सेक्सी है कि कोई साधारण लड़का इसको संतुष्ट नहीं कर पायेगा, वही लड़का इसको संतुष्ट कर सकता है, जिसके लिंग पर काला तिल होगा। आप इसकी शादी उसी लड़के से करियेगा। और जहाँ तक इसकी शादी की बात है वह 28-29 वर्ष में हो जायेगी। आप की लड़की तो सुन्दरता का प्रयाय बनेगी। आप देखती जाइये। क्योंकि इसकी कुन्डली में पिछले तीन महीने से शुक्र की महादशा चल रही है आप बिलकुल निश्चिंत रहिए। फिर प्रदीप और पंडित बाहर चले गए। मैं और मम्मी, पंडित जी की भविष्यवाणी सुन कर बहुत प्रसन्न हुए।

इसके बाद यह थैरेपी करीब तीन महीने तक चली लेकिन कोई खास परिवर्तन मेरे बदन में नही दिखा। लेकिन मेरी मम्मी ने कहा- तुम लगातार वीर्य पान करती रहो।

चौथे महीने के एक दिन जब सुबह उठी, तो मुझे लगा कि मेरी बुर के पास की सलवार गीली है। मैंने हाथ लगा कर देखा कि मेरी बुर से खून रिस रहा था।

मैंने भाग कर मम्मी को बताया। मम्मी ने मुझे बेड पर लिटा दिया और सलवार उतार कर मेरी बुर के होठों को फैला कर देखते ही बोली- चलो, तुम्हारे पीरियड शुरू हो गये हैं अब सब ठीक हो जायेगा। इसके बाद तो चुदाई में मुझे और मजा आने लगा। मेरी चुदाई से अब मेरे शरीर में परिवर्तन आने लगा था। पांचवे महीने मेरी चूचियाँ सन्तरे के बराबर हो चुकी थी और मेरा रंग भी पहले से ज्यादा साफ हो रहा था।

एक साल के बाद तो कोई मुझे पहचान ही नही सकता था। मैं एक सम्पूर्ण खूबसूरत लड़की हो चुकी थी। जहाँ भी जाती, लोग मुझे देखते ही रहते। अब तो मैं महफ़िलों की शान थी। जो भी लड़का मुझे देखता, वो चोदने के फिराक में आ जाता था। लेकिन मैं सबसे तो चुदवा नहीं सकती थी।

समय बीतता गया, बीच बीच में मेरे रिश्ते के मामा ने भी मेरी खूब चुदाई की। मुझे उनकी चुदाई में मजा भी आता था।

मम्मी अक्सर कहती थी कि तुम्हारी शादी इन्हीं से करवा दे ! लेकिन वो कभी भी मुझे पूर्ण संतिष्टि नहीं दे पाये। इसलिए मैंने उनसे शादी के लिए मना कर दिया। इसीलिए मैंने अपने कई ब्वाय फ्रेन्ड्स के साथ सेक्स किया लेकिन सर… ! मैंने किसी के लण्ड पर काला तिल नहीं देखा। मेरी उम्र बढ़ती जा रही थी। फिर मेरे पापा के जानने वाले ने मेरी शादी एक सी ए से तय करा दी। वो सी ए साधारण लड़का था। मैंने भी सोचा कि चलो इसी से कर लेते हैं। शादी हमारे समाज में आवश्यक है। जब कोई आदमी, जिसके लन्ड पर काला तिल होगा, मिलेगा, तो उससे अपनी चूत की आग बुझवा लिया करूगीं।

फिर कुछ दिनों के बाद मेरी शादी हो गई। दो महीने के बाद मैंने आप के यहाँ जॉब कर ली। और आज जब मैंने आप के लन्ड पर काला तिल देखा तो मुझसे रहा नहीं गया, मैंने तुरन्त आपके ऑफर को मान लिया। पंडित जी के अनुसार आप ही मुझे संतुष्ट कर सकते हैं !

यह सुनते ही मैंने कहा- ओह.. तो यह बात है… रश्मि। यही तो मैं सोच रहा था कि तुम्हारे जैसी बला की खूबसूरत लड़की इतनी आसानी से कैसे तैयार हो गई।

खैर मैंने रश्मि से कहा- चलो, आज मैं तुम्हारी अतृप्त वासना की इच्छा पूरी करता हूँ।

अगली कड़ी में समाप्य ! Antarvasna

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