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Massage Girl in Madhubani: Premium Relaxation Services

Our site can help you find a professional massage girl in Madhubani who will help you relax in the best manner possible. We connect you with professional therapists who can offer you a massage that will make you feel better and more relaxed. The pros on our list are ready to provide you with a fantastic experience at your house or in one of their particular spots, whether you want to relax or get away from it all.

Introduction

Massage is currently one of the finest methods to relax your mind, body, and overall health. Our website makes it easy to locate the top massage services in Madhubani that meet your demands. This will be a one-of-a-kind and calming experience for you.

Tottaa wants to make it simple for clients to find the top masseuse. The Madhubani massage service providers on our list offer the greatest quality, comfort, and competence, whether you want a full-body massage or a massage for a particular location.

How Tottaa Helps Advertisers Reach More Customers

Tottaa is not only a list of masseuses, it’s also a secure location for them to show off what they can do. People in Madhubani who are seeking massage services may find them on our website. This makes them easier to find and gets them more appointments.

Advertisers may simply put up profiles, offer their services, and talk about pricing and discounts on our sites. This makes sure that the relevant people notice your Madhubani massage service, which makes it easier to obtain more customers.

Different Types of Massages We Offer

There are a lot of different types of massage services on our site, so you may choose one that works for you. You may choose the kind of treatment that works best for you, whether it’s profound rest or a particular type of therapy.

1. Swedish Massage

A calm and gentle way to ease muscular tension and improve blood flow. This Madhubani massage is perfect for you if you want to relax and forget about your concerns.

2. Deep Tissue Massage

This approach employs a lot of pressure to get to deeper muscle layers. It’s helpful for folks who have muscular discomfort or stiffness that won’t go away. There are specialists on our profiles of massage girls in Madhubani who are good at deep tissue treatments that function effectively.

3. Aromatherapy Massage

Calming massage strokes and essential oils are beneficial in making people feel improved both emotionally and physically. Most massage companies in Madhubani employ the use of custom oil preparations to make you feel good.

4. Thai Massage

A therapy that wakes you up by using a mix of regular massage, stretching, and compression. This traditional massage in Madhubani helps you relax, become more flexible, and get your mind and body back in harmony.

5. Hot Stone Massage

Heated stones are placed on various parts of the body to help with deep muscular tightness. People who want to feel good, relax, and help their muscles recover quickly can use this massage service in Madhubani

How to Book Our Massage Services

Tottaa makes it simple and fast to book. With our listings, you can see what kind of massage you want, read about the providers, see that they are free and then contact them directly. After you choose, you can book a massage in Madhubani at your convenient time and location. In order to get your desired massage services, apply the following simple steps:

Step 1: Browse Our Listings

Take a peek around our site to view a few massage professionals. Each listing gives you information about the many sorts of massages, how long they last, how much they cost, and where they are situated. This makes it easier to choose the finest ones.

Step 2: Compare and Shortlist

Examine the profiles carefully to compare how the services, talents, and reviews posted by customers differ. This phase makes sure you choose a business that has the style, pricing, and supply you desire.

Step 3: Connect with the Provider

When you have decided, use the information that you are offered so that you can contact them directly. One can communicate it to the massage giver thus making it understood what massage you want at what time and when.

Step 4: Confirm the Appointment

The date, time and place of the service, which could be your home, a hotel or the spa where the therapist may be found. You also need to agree on the payment method and any other accords prior to commencement of the course.

Step 5: Relax and Enjoy Your Massage

All you have to do on the day of the appointment is have your area ready for the house visit. The remainder will be handled by the expert. Take it easy and enjoy a massage that is made just for you.

Frequently Asked Questions

To locate a professional who can meet your needs, read our biography, reviews and advertising.

Yes, many of the therapists on our site will come to your house so you may feel safe and at ease.

You may pick based on talents since most adverts provide their qualifications in their profiles.

It would be advisable to make a reservation earlier to guarantee that you would be able to get a massage, particularly against the prevalent services of massage.

Not at all. Tottaa exclusively connects users with service providers. The doctor gets to choose how to handle payment.

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हाय ! Hindi Porn Stories

मैं नागपुर से ३८ साल Hindi Porn Stories का सुन्दर और स्मार्ट पुरुष हूँ। मैं आज आपको अपने जीवन की एक पुरानी लेकिन गर्म कहानी सुनाने जा रहा हूँ।

मेरे पड़ोस में संजना रहती थी जो मुझसे करीब आठ साल छोटी थी। हमारे और संजना के परिवार के बहुत अच्छे सम्बन्ध थे। रुपा सुन्दर और जवान होती जा रही थी और साथ ही मेरी रुचि उसमें बढ़ती जा रही थी। वो जब चलती थी तो मेरी आँखें उसके कूल्हों पर ही अटक जाती थी। उसकी लहराती हुई चाल देखकर मैं तो जैसे पागल ही हो जाता था। वो मुझे चाचा कहती थी।

संजना अब कॉलेज़ में पढ़ने लगी थी। उसके उभार बढ़ने लगे थे और साथ ही उसकी मादकता भी बढ़ने लगी थी। उसका कद लगभग ५’२”हो गया था, उसका बदन भरा भरा सा दिखने लगा था। मैं रात को अक्सर उसे याद करके मुठ मारने लगा था। हमारा रिश्ता ऐसा बन गया था कि मैं एकदम से उसे कुछ नहीं कह पाता था। जब भी मुझे मौका मिलता मैं किसी ना किसी बहाने से उसे छू लेता था।

एक दिन दोपहर में मैं उसके घर गया तो वह अपनी दादी और माँ के साथ बैठी थी। उसके पैरों में दर्द हो रहा था। मैंने उससे कहा- लाओ, मैं तुम्हारा एक्यू-प्रेशर कर देता हूँ। वह मेरे करीब आकर बैठ गई। मैंने धीरे धीरे उसके पंजों पर एक्यू-प्रेशर करना शुरू किया। मुझे एक्यू-प्रेशर के काफी सारे दबाव-बिंदु मालूम हैं। मैं समझ गया कि उसका पैर ऊपर से लॉक हो गया है।

संजना इस समय स्कर्ट और टी-शर्ट पहने हुए थी। धीरे धीरे मैं उसके घुटनों तक प्रेशर देने के बहाने अपने हाथ फिराने लगा। थोड़ी देर में मैंने उसकी जांघों पर हाथ फिराना चालू कर दिया। जांघों को सहलाते हुए दो बार मैंने उसकी योनि भी सहला दी। संजना शरमाने लगी। उसकी माँ और दादी भी बैठी थी, अधिक कुछ हो नहीं सकता था।

समय बीतता गया, संजना पर और ज्यादा जवानी चढ़ने लगी। मैं एक्यू-प्रेशर करने के बहाने उस के पूरे बदन को छूने लगा, जिससे वो हमेशा शरमा जाती थी। मैं अभी तक यह समझ नहीं पा रहा था कि उसके मन में भी ऐसा कुछ हो रहा है क्या।

कुछ दिनों में संजना ने अपनी स्नातिकी पूरी कर ली। अब वो पूरी तरह से निखर चुकी थी। उसका कद ५’४” छाती ३३” कमर २८” और कुल्हे ३२” के लगभग हो गए थे। उसे देख कर मेरी जांघों के बीच जबरदस्त तनाव आ जाता था।

इस बीच मेरी शादी हो गई। मै अक्सर अपनी पत्नी के साथ सेक्स करते समय संजना को याद करके ऐसा महसूस करने लगा जैसे मैं संजना के साथ ही सेक्स कर रहा हूँ।

कुछ दिनों बाद संजना का रिश्ता आ गया और उसकी शादी मुम्बई हो गई। उसका पति दिखने में ज्यादा ठीक नहीं था। मुझे वो कहावत याद आ गई कि हूर के साथ लंगूर ही मजे करते हैं।

मुझे अपनी किस्मत पर बड़ा पछतावा होता था कि ऐसा करारा माल मेरी जगह इस लंगूर को मिल रहा है। उसकी शादी के बाद जब वो पहली बार मायके वापस आई तो उसको देख कर मैं तो एकदम दंग रह गया। थोड़े दिनों कि चुदाई के बाद तो उसका बदन जैसे क़यामत हो गया। उसके बात करने का तरीका भी बदल गया। थोड़े दिनों बाद वो मुंबई आने को कहकर चली गई और मैं इंतजार करने लगा कि कब मुंबई जाने का मौका मिले।

फ़िर कई महीनों मुझे मंत्रालय के काम से मुंबई जाने का मौका लगा। अब तक उसकी शादी को ७ महीने हो चुके थे। मुझे स्टेशन पर लेने के लिए उसके पति आये थे। हम लोग घर पहुंचे तो दरवाजे पर ही मेरे इंतजार कर रही थी। मैंने उसे दरवाजे पर ही अपनी बांहों में भर लिया और उसके माथे पर एक पप्पी दी।

थोड़ी देर में मैं तैयार होने बाथरूम में गया तो देखा संजना की अंडरवियर और ब्रा सूख रही थी। मैंने उसे उठा कर सूंघा, क्या मदहोश सुगंध थी ! मेरा लण्ड खडा हो गया। मैंने उसकी पैंटी को अपने लण्ड पर रख मूठ मारना शुरू कर दिया और अचानक मेरा पानी बह निकला। मैं फटाफट तैयार हुआ और मैं और उसके पति नाश्ता करके साथ में ही निकल गए।

मैं मंत्रालय चला गया और उसके पति अपने ऑफिस। करीब ४.०० बजे मेरा काम ख़त्म हुआ, मुझे वहां और ४ दिन रुकना पड़ रहा था। मैं करीब ६.०० बजे उसके घर वापस आया तो उसके पति पहले ही घर पर थे और उन्होंने मुझे बताया कि ऑफिस के काम से उन्हें ५ दिनों के लिए गोवा जाना पढ़ रहा है।

मेरी तो जैसे लॉटरी लग गई। वो अफ़सोस जता रहे थे कि मैं पहली बार आया और उन्हें जाना पड़ रहा है। मैंने शांत स्वर में कहा- भाई ऑफिस का काम है तो जाना ही पड़ेगा !

फिर रात १०.०० बजे की गाड़ी से वो गोवा चले गए। हमने उन्हें घर से ही ९.०० बजे विदाई दे दी थी।

उनके जाने पर हमने खाना खाया। संजना ने रसोई का काम ख़त्म किया फिर हम दोनों बैठकर घर -परिवार की बातें करने लगे। अगले दिन मुझे दोपहर बाद ही बाहर जाना था इसलिए हम दोनों को सुबह जल्दी उठाने की कोई चिंता नहीं थी। संजना ने अपनी नाईटी पहनी थी क्योंकि मुझसे ऐसी कोई शर्म तो थी नहीं। मैंने भी अपना नाईट-सूट पहन रखा था और आदत के मुताबिक मैंने अपना अंडरवियर नहीं पहना था।

थोड़ी देर बातें करते करते मैंने उससे कहा- चलो, बेड पर लेट कर ही बातें करते हैं, पीठ को थोड़ा आराम मिल जायेगा।

हम दोनों उनके बेड-रूम में आ गए। मैं लेट गया और वो पास में बैठ कर बातें करने लगी।

मैं उसका हाथ अपने हाथों में ले कर सहलाने लगा। फिर उसको खींच कर अपने बाजू में लिटा लिया। फिर मैंने अपना एक हाथ उसकी गर्दन के नीचे से निकालकर उसका सर अपने कन्धों पर रख लिया। हम बातें करते जा रहे थे। धीरे धीरे मैंने उसके हाथ जो उसकी छाती पर रखे थे, सहलाना चालू किया। कमरे में ए सी चालू था। हल्की-हल्की ठण्ड का हमें अहसास होने लगा। उसने एक चादर खींच कर हम दोनों के ऊपर डाल ली ऐसा करते वक़्त मेरा हाथ उसके भारी उरोजों को छू गया। उसे छूते ही मेरा खम्बा अकड़ कर खड़ा होने लगा।

अब मैंने उससे शादीशुदा जिन्दगी के बारे में पूछना शुरू किया। मेरा हाथ उसके हाथों को सहलाते सहलाते उसके उरोजों को भी सहलाने लगा था। शायद अब उसे मेरे इरादे भी समझ में आने लगे थे, उसने कहा- रात बहुत हो गई है, सो जाते हैं।

मैंने कहा- अभी तो बहुत सी बातें करनी हैं, सुबह भी जल्दी उठने की चिंता नहीं है, और बातें करते हैं।

मैंने उससे पूछा कि सेक्स लाइफ कैसी चल रही है तो वो शरमाने लगी, कहने लगी- चाचा ! ये आपके पूछने की बात थोड़े ही है !

मैंने कहा- अब तुम इतनी बड़ी हो गई हो, शादीशुदा हो, अब तो हम एक दोस्त की तरह बातें कर ही सकते हैं।

संजना ने कहा- मुझे शर्म आती है !

मैंने कहा- चलो, मैं अपनी पहले बताता हूँ। देखो मुझे शादी के ४ साल होने पर भी रोज सेक्स किये बिना नींद नहीं आती। मैं पहले तुम्हारी चाची की अच्छे से मालिश करता हूँ और फिर करीब १ घंटा हम सेक्स करते हैं। इतने में तुम्हारी चाची ३ से ४ बार झडती है।

और जब चाची नहीं होती तब? -उसने पूछा।

तब मैं उसका या किसी के भी नाम से स्वयं संतुष्टि कर लेता हूँ, कभी कभी तो उसमें तुम्हारा भी नाम होता है।

वो सकपका गई। उसे मेरे इरादे खुलते नजर आने लगे। उसने कहा- ये तो लगभग रोज देर रात तक लौटते हैं और सुबह जल्दी चले जाते हैं। हम लोग शनिवार रात को ही ये सब कर पाते हैं। या फिर किसी दिन छुट्टी होती है तो बोनस हो जाता है।

अब मैं उसके मम्मों को सीधे सहलाने लग गया। उसने कहा- ये क्या करते हो चाचा?

मैंने कहा- पगली अभी तो हम दोस्त हैं चाचा-भतीजी नहीं ! देखो तुम भी जवान हो और मैं भी। तुम्हारी भी शादी हो चुकी है और मेरी भी। तुम ये भी जानती हो एक बार करने से कुछ हो नहीं जाने वाला है।

उसने बताया कि वे लोग अभी बच्चा नहीं चाहते इस लिए कंडोम इस्तेमाल करते हैं।

मैंने कहा फिक्र न करो। हम भी वही इस्तेमाल कर लेंगे।

अब मैंने उसके अधरों पर अपने होंट रख दिए, वो थोड़ा कसमसाई और कुछ बोलने के लिए मुंह खोलने लगी तो मैंने अपनी जीभ उसके मुंह में डाल दी। उसपर इसका असर होने लगा। उसकी सांसे भरी होने लगी। लेटे लेटे ही मैंने उसका हाथ पकड़कर अपने लण्ड पर रख दिया, वो हाथ हटाने लगी पर मैंने उसका हाथ जोर से पकड़ कर रखा था। फिर वो धीरे से मेरे लण्ड को सहलाने लगी।

आज मुझे अपनी बरसों की तपस्या का फल मिलने वाला था। मैंने उसके उरोजों को अब खुलकर दबाना चालू कर दिया। वो मेरी छाती में अपना मुंह छिपाने लगी। मैंने अपना हाथ उसके पेट और कमर पर से सरकाते हुए उसके मादक कूल्हों पर रख कर उन्हें दबाने लगा। मुझे जैसे स्वर्ग का आनंद मिलने लगा। अब संजना भी खुलने लगी।

आज गुरूवार था यानि उसकी पिछली चुदाई हुए लगभग ५ दिन बीत चुके थे।

अब मैं उसके पैरों के पास बैठा था। मैंने धीरे से उसका ग़ाऊन टांगों पर से उठाना शुरू किया। जैसे जैसे उसका ग़ाऊन ऊपर हो रहा था, उसकी सुडौल मरमरी टाँगें बाहर आने लगी। मेरा सुलेमान अब एकदम टाईट हो गया था। उसकी पिंडलियाँ देख मैं अपने आप को रोक नहीं सका और उन्हें चूमने लगा। मैं ग़ाऊन को इंच-इंच ऊपर कर रहा था और उसकी सेक्सी चिकनी टांगों को चूमता जा रहा था।

संजना भी मस्त होने लगी। उसने एकदम से मेरा पायजामा खींच दिया। अब मैं उसके सामने सिर्फ शर्ट में था। उसने मेरे फौलादी को हाथ में लेकर मसलना-सहलाना चालू कर दिया। मैंने उसके ग़ाऊन को जांघों पर से सरकाते हुए उसके हुस्न के दर्शन के लिए नाभि तक ऊपर उठा दिया। अन्दर वो भड़कीले लाल रंग की पैंटी पहने हुए थी। उसकी कली के आस पास की जगह गीली होने से कत्थई नजर आ रही थी। मैंने उसकी नाभि को चूम लिया और ग़ाऊन ऊपर उठाते हुए पूरा निकाल दिया।

अब मेरे सामने मेरी बरसों की तमन्ना सिर्फ ब्रा और पैंटी में मदहोश पड़ी थी। मैंने उसको उठा के गले से लगा लिया और बेतहाशा चूमने लगा। वो भी मुझे सब जगह चूमने लगी। उसने खींच कर मेरा शर्ट भी उतार दिया।

मैंने पीछे हाथ डालकर उसकी ब्रा का हुक खोल दिया, उसके तने हुए उरोज बंधन से एक झटके में आजाद हो गए, मैंने जल्दी से ब्रा अलग कर उसके चुचुकों को चूसना चालू कर दिया। वो मेरी छाती और लण्ड को सहलाने लगी। उसके मुंह से अब सऽऽसऽऽसऽऽऽ सिस्कारियां छूटना चालू हो गई।

अब मैं ६९ की पोजीशन बनाते हुए उसकी पैंटी से उसकी जवानी को आजाद करने लगा। मेरा लण्ड अब उसके होटों को छूने लगा। मेरे लण्ड पर एक बूंद प्री-कम की उभर आई, जो मोती की तरह चमक रही थी। उसने अपनी जीभ निकालकर उस मोती को अपने मुंह में ले लिया। उसका स्वाद शायद उसे बहुत पसंद आया क्योंकि अब वो मेरे ६.५ इंच का लण्ड अपने मुंह में लेने लगी। इस काम के लिए वो बार बार अपना सर ऊपर उठा कर मेरा लण्ड अपने हलक तक लेने लगी।

मैंने उसकी पैंटी उतार दी, अन्दर से पाव रोटी की तरह बाल-रहित एकदम गुलाबी सी उसकी चूत नजर आने लगी। उसकी चूत देखते ही मैं पागल हो गया। मैंने ६९ पोजीशन में ही अपने को नीचे और उसको अपने ऊपर कर लिया। यह पोजीशन हम दोनों के मुख -मैथुन करने में सहायक हो रही थी।

मैंने उसकी चूत की पलकों को अपनी अँगुलियों से अलग किया और अपनी जीभ उसमें घुसा दी। जीभ का खुरदरापन उसके योनि-कलिका पर महसूस करते ही वो जोश में आ गई, वो भी मेरे लण्ड को पूरा निगलने की कोशिश करने लगी।

लण्ड-चूत हमारे मुंह में होने के कारण मुंह से कोई आवाज नहीं निकल रही थी। थोड़ी देर में हम दोनों एक साथ झड़ गए। उसने मेरा और मैंने उसका पानी पी लिया। क्या पानी था, क्या स्वाद था। उसकी चूत की सुगंध मुझे मदहोश बना रही थी। ऐसा लग रहा था मानो ३ पैग विस्की पी ली हो !

अब मैं घूम कर उसके मुंह के करीब आ गया और उसे बाँहों में भर लिया। उसका चेहरा चमकने लगा था। अब उसकी आँखों में देख कर मेरे साण्ड ने फिर हरकत करनी शुरू कर दी। मैं उसके स्तनों और गाण्ड को सहलाने लगा। मेरा तना हुआ लण्ड उसकी नंगी जांघों से टकराने लगा।

उसके अन्दर भी फिर से तूफ़ान तैयार होने लगा। अब मुझ से सहन नहीं हो रहा था। मैंने उसके कमर के नीचे अपना हाथ डाला और अपने लण्ड को उसकी चूत के दरवाजे पर लगा कर एक जोरदार झटका मारा।

लण्ड अन्दर जाते ही वो जोर से चिल्लाई- मर गई ! इ इ इ ई ईई ईई ! थोड़ा धीरे डालो।

लेकिन अब सुनाने का समय नहीं था, मैं पूरी गति से झटके लगाने लगा, वो नीचे से चूतड उठाने लगी। १० मिनट के घमासान के बाद मैंने उसे जोर से अपने बदन से चिपका लिया, वो अब तक तीन बार झड़ गई थी, मेरे चिपकाते ही वो ४ थी बार साथ में झड़ने लगी। हम दोनों बाँहों में बाहें डालकर अपनी साँसे दुरुस्त करने लगे।

उसकी आँखों में गज़ब की संतुष्टि नज़र आ रही थी।

उसने मुझे अब खुलकर बताना चालू किया कि वो भी मुझे बहुत पहले से चाहती है पर कभी बोल नहीं पाई। उसका पति उसे कभी कभी ही संतुष्ट कर पाता है।

हमें याद आया कि जल्दबाजी में हमने तो कंडोम लगाया ही नहीं। मैंने उसे तुंरत पेशाब करके आने को कहा। आते वक़्त वो दूध ले आई। उस रात मैंने उसे ४ बार चोदा। एक बार घोड़ी बनाकर, एक बार सोफे पर। एक बार कंधे पर लेकर और एक बार बाथरूम में !

अगले दिन क्या हुआ?

यह बाद में बताऊंगा कि कैसे मैंने उसकी गांड मारी।

यदि आपको यह कहानी अच्छी लगी हो तो मुझे जरूर बताएं।

अलविदा ! Hindi Porn Stories

मॅाम फक कहानी में मैंने ट्रेन में अपने पापा की दूसरी बीवी को चोदा, कई बार चोदा. फर्स्ट क्लास के केबिन में 4 लोग थे, दूसरा कपल भी चुदाई में लगा था.

दोस्तो,
मेरा नाम विकी है. हम लोग पुराने पैसे वाले रईस हैं.
पापा स्कूल में प्रिंसिपल हैं.

मेरे पापा ने दो शादियाँ की थी. दोनों पत्नियों को एक साथ ही रखा हुआ था.
कुछ साल पहले मेरी जन्मदात्री इस दुनिया से चली गयी थी.
अब मेरी दूसरी माँ ही है.

मैं अपनी सौतेली मां के बारे में बता दूं.
मां का नाम निर्मला है. वह पेशे से हाउसवाइफ हैं और घर में ही रहती हैं.

यह मॅाम फक कहानी तब की है जब हम शहर से हमारे गांव भागलपुर के पास जा रहे थे.

हमारी फर्स्ट एसी की टिकटें थीं और एक ही कंपार्टमेंट में थीं जहां एक रूम होता है और 4 सीटें होती हैं.

मां की नीचे वाली सीट थी और मेरी उनके सामने वाली ऊपर की सीट थी.

करीब दो घंटा बाद हमारे कम्पार्टमेंट में एक कपल आया.
शायद उनकी नई नई शादी हुई थी.

पूछने पर पता चला वह बीवी को मायके से लेने आया था.
अब वे दोनों अपने घर जा रहे थे.

अब दोनों की सेक्सी हरकतें चालू हो चुकी थीं.
उनका एक दूसरे से सेक्सी बातें करना और बात बात में एक दूसरे को टच करना चल रहा था.

मां यह सब देखकर शर्मा रही थीं.
शायद उनको अपने दिनों की याद आ रही थी.

मैंने मां को होंठ चबाते हुए देखा और जब किसी की नजर नहीं थी, तो मां ने साड़ी सैट करने के बहाने अपनी चूत भी खुजाई थी.

उस वक्त मैं उन्हें देख रहा था.
जैसे ही उन्होंने मेरी तरफ़ देखा, मैं यहां वहां देखने लगा.

अब मुझे उनकी हरकतें मां के ऊपर लगे हुए शीशे में साफ दिख रही थीं.

तभी मुझे उस सामने वाली औरत के पति ने देख लिया कि मैं उन दोनों को प्यार की हरकतें करता देख रहा हूँ.

उस आदमी ने मुझे इशारा कर बाहर आने को कहा.
मैं आ गया और वह भी पीछे आ गया.

उसने कहा- भाई, मेरी नई नई शादी हुई है. तुम लोग ऐसा करोगे तो कैसे चलेगा?
मैंने सॉरी कहा.

तो उसने कहा- कोई बात नहीं. अरे मुझसे कंट्रोल ही नहीं हो रहा है. तुम्हारा भी क्या दोष है … और सामने जो औरत बैठी है, मेरी पत्नी उसे समझा रही है. तू समझ गया तो मेरा एक काम करेगा. तू उनके साथ बैठ जा. उनको कंपनी दे दे. हम यहां लाइट बंद करके आते हैं. मेरा स्टेशन आने को अभी 5-6 घंटे हैं. उसके बाद मुझे घर पर ऐसा मौका 4-5 दिन नहीं मिलेगा. भाई मान जा. क्या पता अगर उस आंटी ने तुझे चांस दे दिया, तो कुछ भी हो सकता है. मजे ले ले!

मैंने उससे कहा- ठीक है.

कुछ देर बाद हम अन्दर आए तो मैं ऊपर न जाकर मां के बगल में ही बैठ गया.
मां ने कहा- उनको प्राईवेसी चाहिए, तू यहीं मेरे साथ बैठ जा.

फिर उन्होंने पूछा कि लाइट बंद कर दें?
मैंने कहा- हां कर दो.

उसके बाद अंधेरे में मैं और मां एक दूसरे से सट कर बैठे थे.
अब हमें कुछ दिखाई तो नहीं दे रहा था पर उनकी हरकतों की आवाजें आ रही थी.

उनकी चूमने की आवाज और उस लड़की का मादक भाव से सिसकना सुनकर मेरा लंड तन गया था.

मेरा हाथ मां की तरफ था.
मुझे लग रहा था कि मां अपने मम्मों से मेरी कोहनी पर दबाव डाल रही हैं.

इतने में मां का फोन आया तो लाइट जली.

हम दोनों ने देखा कि वह औरत ऊपर से नंगी हो चुकी थी और वह आदमी उसकी गोदी में बैठा, उसके मम्मे चूस रहा था.
मां ने हड़बड़ा कर फोन कट किया और फोन ब्लाउज में डाल लिया.

जैसे ही हाथ नीचे किया, तो मेरी जांघों पर लंड के करीब हाथ रख दिया.
मैं कुछ नहीं बोला.

फिर ना जाने क्यों … मां ने हाथ सरका कर लंड पर रखा और मेरे खड़े हुए लंड को महसूस करने लगीं.
मां मेरे लंड को भांप रही थीं.

उन्होंने लंड को पकड़ने की कोशिश की.
शायद उन्हें पता चला होगा कि यह मेरा लंड है, तो उन्होंने झट से हाथ हटा लिया.

अब मेरा पारा चढ़ गया था, मैंने हाथ पीछे लेकर मां की कमर पर रखा और वहां से हाथ निकाल कर मां के पेट को मसलने लगा.

मां फुसफुसा कर बोलीं- बेटा यह क्या कर रहा है!
मैंने पूछा- क्या?
मां कुछ नहीं बोलीं.

अंधेरे में मां ने वापस मेरे लौड़े पर हाथ रखा.
इस बार उन्होंने उठाया नहीं.

मुझे ऐसा लगा जैसे वे इशारा दे रही थीं कि चलो हम भी कुछ करते हैं.
मैंने अपना एक हाथ मां के मम्मों पर रखा और मसलने लगा.

मां मेरे कान में धीरे से बोलीं- बेटा, यह गलत है.
मैंने मां के कान में कहा- छोड़ो ना मां … किसे पता चलेगा. प्लीज मां करने दो ना! बस एक बार, मैं इसके बाद ना मांगूंगा और ना किसी से कुछ कहूंगा.

मैं ऐसे कहते कहते मां के कान और उनकी गर्दन को चूमने लगा.
उनकी सांसें धीरे धीरे ऊपर नीचे हो रही थीं.

माहौल में गर्मी बढ़ रही थी.
मैं मां का ब्लाउज खोलने लगा.

मां ने मेरा हाथ पकड़ा मगर मैंने ब्लाउज के सारे हुक एक एक करके खोल दिए.

मां का ब्लाउज खुल चुका था और मां का हाथ अभी भी मेरे हाथ पर ही था.

मैं समझ गया था कि मां गर्म है और यही मौका है उनकी चूत पर लौड़ा मारने का.

अब मैं मां की साड़ी को ऊपर खींचने लगा.
मां ने फिर से मेरा हाथ पकड़ लिया लेकिन इस बार उन्होंने रोका नहीं.

मैंने साड़ी ऊपर की और मां की जांघों पर हाथ फेरने लगा.

मां की सांसें तेज़ चल रही थीं.
‘हम्मम हम्म सों सों …’ की आवाजें आ रही थीं.

मैं चूत पर गया और चड्डी के ऊपर हाथ फेरने लगा.
चड्डी गीली सी लगी इसलिए मैंने अन्दर हाथ डाला.

शायद मां ने 2-3 दिन पहले ही चूत साफ की थी. उनके छोटे छोटे बाल आए हुए थे.
उनकी चूत पर हाथ फेरने का क्या मीठा अहसास था.

मुझे उनकी चूत के होंठ समझ नहीं आ रहे थे.
यह मेरा पहली बार था, जब मैं किसी की चूत को टच कर रहा था.

उन्होंने मेरा हाथ पकड़ कर अन्दर घुसाया और मेरी उंगली पकड़ कर चूत के छेद के अन्दर डाल दी.
फिर गांड उठा कर इशारा दिया कि अन्दर बाहर करो.

मैंने चूत से हाथ निकाला और खुद से दो उंगलियां डाल कर अन्दर बाहर करने लगा.
तब तक सामने वाली सीट पर चुदाई चालू हो चुकी थी.
पच फच धक्कों की आवाजें आ रही थीं.

मैं उठा और अपनी पैंट निकाल कर नंगा हो गया.
फिर मां के पास बैठ कर उनकी चड्डी निकालने के लिए हाथ लगाने लगा.

पर मां पहले ही चड्डी निकाल टांगें फैला लेटी हुई थीं.
मैं मां के ऊपर लेट गया.

मां ने मेरा लंड पकड़ चूत पर सैट किया और धक्का देने को बोलीं- पेल दे!

जैसे ही मेरा हैवी लंड चूत के अन्दर गया, मां की चीख निकल गई- उई मर गई आह आराम से कर ना!

मेरे कुछ ही धक्कों में मां सामान्य हो गईं.
मेरा लंड आसानी से अन्दर आ जा रहा था.

अब हम भी फच फच की आवाज़ें करने लगे.
मां गांड उठा उठा कर चुदवा रही थीं.

अब मैंने मां के मम्मे चूसने को हाथ ऊपर किए, तो वे नंगे थे.
मां ने ब्रा पहले से ही ऊपर कर ली थी.

मैं बुरी तरह से मम्मे चूसने लगा और काट भी रहा था.

मां कह रही थीं- आह काट मत बेटा … बस चूस कर मजा ले और ऐसे ही धक्के देता रह … बड़ा अच्छा लग रहा है.

मैं धक्के देते देते हुए ही मां की चूत के अन्दर झड़ गया.
मां भी झड़ गई थीं.

उन्होंने मुझे कसके पकड़ लिया और अपनी झड़ी हुई चूत को रगड़ने लगीं.

हम दोनों ने अपने आपको संभाला.
मैंने मां की चड्डी अपनी जेब में छुपा ली.

थोड़ी देर तक हम दोनों ऐसे ही एक दूसरे के साथ लेटे रहे.

फिर एक स्टेशन आया तो खिड़कियां खटखटाई जाने लगीं- चाय चाय.

सामने की सीट वाले उस आदमी ने बाहर जाकर चाय ली.
मेरी मम्मी ने भी मुझसे चाय मँगवा ली.

वह आदमी मुझे देख कर हंस रहा था. उसने मुझे इशारा किया.

हम दोनों पानी लेने के बहाने बाहर गए.
बाहर आकर वह मुझसे बोला- भाई सही खेल गया तू तो … क्या गजब माल बजाया है. वैसे एक बात बोलूं यह मेरी बीवी नहीं है, मेरी बहन है.

मैं शॉक्ड हो गया.

मैंने कहा- चल झूठे … ऐसा भी कहीं होता है?
“क्यों नहीं होता. आज तूने क्या किया. तुझे क्या लगा कि मुझे पता नहीं चलेगा कि जिसको तूने चोदा है, वह तेरी कौन है? मैंने बाहर लगे चार्ट पर तुम्हारे नाम पढ़े थे! तू मॅाम फक कर रहा था.”

अब मेरी बोलती बंद हो गई.
मैं उदास हो गया और सोचने लगा कि यह मुझसे क्या हो गया!
वह बोला- भाई टैंशन क्यों लेता है, साले मजे ले इतना बड़ा कांड किया है तूने! हर फैमिली में ऐसे ही होता है, बस कोई बताता नहीं है. अब मुझे ही देख ले अपनी बहन को बीवी की तरह चोदता हूँ.

कुछ रुक कर वह फिर से बोला- हमारे पास तो अभी मौका है. हम लोग तो यहां से जाने से पहले एक और शॉट मारने वाले हैं. अब तक मेरी बहन ने तेरी मां का दिमाग सैट कर दिया होगा. अब तुझे जब चाहे चूत मिलेगी, नहीं भी मिली तो अब भी मौका है. जो चाहे वह कर ले.

अब हम दोनों ट्रेन में चढ़ गए.

मेरी मां और उस लड़की की बातों से लग नहीं रहा था कि उनका कोई डिस्कशन हुआ था.
उन दोनों में हंसी मजाक चल रहा था.

फिर टीसी टिकट चैक करने आया.
अब उस आदमी ने बोला- लाइट बंद कर दूँ … कोई दिक्कत तो नहीं है आपको!
मैं हंस कर बोला- हां जी जरूर जरूर.

मैं ऊपर वाली बर्थ पर जाने लगा तो मां बोलीं- बेटा कहां जा रहा है, यहीं मेरी बगल में सो जा!
अब मैं बाहर की तरफ सो रहा था और मां अन्दर की तरफ सीट पर.
जगह कम पड़ रही थी, इसलिए हम दोनों चिपक कर सो रहे थे.

वे दोनों पुनः शुरू हो चुके थे.
उसकी बहन की चूड़ियों की आवाज गूंज रही थी व उसकी खिलखिलाने की आवाज आ रही थी.

मैं सोच रहा था कि अब क्या होगा.
क्या मैं आगे फिर से कुछ करूँ.

तभी मां की हरकतें शुरू हो गईं.
मां अपनी गांड को मेरे लंड पर रगड़ने लगीं.

मैं फिर से सेक्स नहीं करना चाहता था लेकिन इस बार मां सामने से मौका दे रही थीं.

मेरा हाथ पकड़ मां ने अपने पेट पर घुमाते हुए नीचे को किया और अपनी चूत पर रख लिया.
मां ने अपनी साड़ी ऊपर कर ली थी और एक हाथ से मेरी पैंट नीचे करने की कोशिश कर रही थीं.

मैंने उठकर अपनी पैंट उतारी और मां ने मेरा लंड पकड़ लिया.
वे लंड हिला हिला कर उसे टाइट कर रही थीं.

मां मूड में आ गई थीं.
अब मां मेरी तरफ मुँह कर मेरे ऊपर आना चाह रही थीं.

मैंने मां को अपने ऊपर खींच लिया.
मां ने अपना ब्लाउज के बटन खोल दिए; ब्रा तो पहले ही ढीली थी.

ऊपर से मां नंगी हो गई थीं और अपने दूध मेरे मुँह में दे रही थीं.

कुछ देर बाद मां ने मेरी भी शर्ट के बटन खोल दिए.
मैंने भी जोश मैं मां की साड़ी उतार दी.

मैं मां के नीचे था और वे मेरे ऊपर थीं.

मां मुझे अपने दूध चुसवा रही थीं और मेरे लंड को मां अपनी चूत में लेकर खुद ऊपर नीचे करने लगी थीं.
मैं नीचे से धक्के दे रहा था.

ऐसे ही चुदाई होती रही.

काफी देर बाद हम दोनों झड़ गए.
मां मेरे ऊपर नंगी ही सोई रहीं.

हमें जो कंबल मिला था, उसमें ही हम दोनों सोए रहे.

सुबह अचानक उन दोनों ने हमें जगाया.
उनका स्टेशन आ गया था.

हमने उन्हें विदा करके कुंडी लगाई.
अब हम दोनों ऐसे ही नंगे बैठे थे.

मैंने पहली बार मां का नंगा गोरा बदन देखा था.

मां मुझसे चिपक कर सोई थीं.
हम एक दूसरे को देख रहे थे.

मां ने मुझसे कहा- विकी बेटा देख, जो ट्रेन में हुआ, वह किसी को पता नहीं चलना चाहिए … और यह सब यहीं पर खत्म हुआ मान लेना. ट्रेन से उतरने के बाद गलती से भी नहीं होगा. ना ही मेरी तरफ से, ना ही तेरी तरफ से … ओके!

मैंने मां से ओके कहा और उनके दूध चूसने लगा.

मां मेरे बालों में हाथ डाल सहलाने लगीं मेरी एक जांघ मां की जांघों के बीच गई तो मुझे चूत की गर्मी महसूस हुई.
मैं मां की चूत में लौड़ा घिसने लगा.

मां कुछ नहीं बोलीं.

मैंने मां से कहा- मां, अभी ट्रेन से उतरने में दो घंटा बाकी हैं. क्यों ना एक आखिरी बार और हो जाए.
मां हंस दीं और बोलीं- बदमाश मुझे पता था कि तू इतने में नहीं मानेगा.

अब हम दोनों ने किस करना चालू किया.
मैं मां को चूमे जा रहा था और चूसे जा रहा था.

यह मॅाम फक का आखिरी मौका था.
मां मेरा लंड हिला रही थीं.

मैंने मां से लंड चूसने को कहा.
मां खड़ी हुईं और मेरा लंड चूसने लगीं.

आह बड़ा मजा आ रहा था.

मैंने मां को सीट पर बिठाया और उनके पैर फैला कर चूत चाटने लगा.

अब मैं मां को अपनी गोद में बिठा कर चोद रहा था.
फिर मैं मां को खिड़की के पास डॉगी स्टाइल में चोदने लगा.

मां खिड़की की सलाखों को पकड़ कर गांड उछाल उछाल कर लंड अन्दर ले रही थीं.
मस्त माहौल था.

मां का ऐसा जंगली रूप रात को भी नहीं था.
मैं मां को खड़ा करके और झुका कर पीछे से चोद रहा था.

मैंने मां को नीचे बिठाया और उन पर अपने माल की बरसात कर दी और मां का सारा बदन अपने माल से भर दिया.
हम दोनों हांफते हांफते एक दूसरे के ऊपर सो गए.

अब मुझे मां को और चोदना था लेकिन मां जुबान की पक्की थी.
वे मुझे ट्रेन के बाहर कभी चोदने नहीं देतीं.
तो कैसे मैंने मां को पटाया और अगली चुदाई कब की.
यह सब मैं अगली कहानी में लिखूँगा.

Sex Stories

अंतर्वासना पर मैं Sex Stories कई कहानियाँ भेज चुका हूँ और इसके लिए मैं गुरु जी का शुक्रिया करना चाहता हूँ जिनकी कृपा से मेरी चुदाई सबके सामने आई और बाकी मेरे पाठकों ने मुझे वेबकैम और याहू पर देख यह बात जान ली है कि मैं कोई कहानी मनघड़ंत नहीं लिखता। एक बार फिर से सभी पाठकों को प्रणाम करते हुए मैं अपनी नवीनतम चुदाई लेकर सबकी कचहरी में फिर से हाज़िर हूँ।

अन्तर्वासना के ज़रिये मुझे दो मस्त लौड़े भी मिले हैं जोकि मैं इस चुदाई के बाद लिखूंगा। उसके लिए आपको इंतज़ार करना पड़ेगा। उससे पहले यह मस्त चुदाई दो दिन पहले करवाई।

मेरे घर के रास्ते में एक अमरुद का बढ़िया सा बाग़ पड़ता है, इस बाग़ में मैं दो बन्दों के साथ मौज मस्ती भी कर चुका हूँ, कैसी मस्ती यह आप जानते ही हो, तब सीज़न नहीं था और बाग़ खाली रहता था, आजकल भारी फसल है, मैं घर आ रहा था कि पके अमरुद देखकर सोचा कि चलो तोड़कर लाता हूँ! दुपहर में कौन होगा, यह सोच मैंने बाग़ में प्रवेश किया, काफी आगे चला गया और एक बढ़िया सा अमरुद तोड़ा और खाने लगा। चार पांच पके अमरुद अपने लिफाफे में ड़ाल लिए।

तभी जोर से आवाज़ आई- अभी कौन है? क्या रहा है बाग़ में साले?
उसने जोर से सीटी बजाई, सोचा अब क्या करूँ? यह अकेला नहीं होगा!

लिफाफा वही छुपा दिया और अपनी पतलून खोल पौटी करने की तरह उसकी ओर पीठ करके बैठ गया। सब जानते हैं, अब तो वेबकैम पर मैं अपने हर चाहने वाले को दिखा भी चुका हूँ, गोरी गोल-मोल गद्दे जैसे गांड है मेरी!

वो पीछे आकर हल्की सी सोटी(डण्डा) मेरी गांड पे मारते हुए बोला- क्या कर रहा है यहाँ?
मैंने कहा- दिख नहीं रहा?
बोला- साले! नीचे कुछ नहीं है! पागल बना रहा है अपने बाप को? उठ साला!प्लीज़ सच कह रहा हूँ! जाने दो मुझे!

इतने में दूसरा भी वहीं अ गया, मैं वैसे ही बैठा था, उनकी नज़र मेरी गांड पर टिक गई।

दूसरा वाला तो लूंगी के ऊपर से अपना लौड़ा खुजालने लगा। मैं उठा, खुद ही पतलून हाथ से छोड़ दी, पतलून नीचे गिर गई, मैं उनकी ओर पीठ करके घोड़ी की तरहं नीचे झुका और पतलून उठाई।
दोनों बोले- क्या गांड है साले की! पकड़ इसको पुलिस में देते हैं बहनचोद को!

उसने मेरी कलाई पकड़ी और बाग़ के अदंर वहाँ एक कमरा था, छोटी सी रसोई, एक पंखा लगा हुआ था, दो बिस्तर थे पास में ट्यूबवेल चल रहा था। उसने मुझे वहीं बिठा दिया और रस्सी लेने गया। मेरा दिमाग घूम सा गया, उसका एक साथी लूंगी उतार ट्यूबवेल के सामने बने चुबच्चे में कूद गया। उसके कपड़े उसके जिस्म से चिपक गए, उसका लौड़ा देख मेरी गांड में खुजली होने लगी, पानी पीने के लिए उठा।

बोला- बहनचोद भाग रहा है!
नहीं यार! भागना कहाँ? पानी पीने आ रहा हूँ मैं!

वो बार-बार कच्छे में हाथ डाल साबुन लगाता। मैं दूसरी ओर से गया, उसकी पीठ उस तरफ थी। मैंने पतलून उतार कर एक तरफ़ रख दी और शर्ट भी! मेरी चेस्ट नहीं ब्रेस्ट है! अब तो वेबकैम पर सब देख चुके हैं। यह सब अन्तर्वासना की बदौलत हुआ है। मैं उसके पीछे गया, उसकी कमर से हाथ डालते हुए उसके लौड़े को पकड़ लिया, बगल से हाथ डाल उसकी पीठ से अपना मम्मे रगड़ने लगा। वो मेरी ओर घूम गया, उसका खड़ा हो रहा था, मैंने उसको नीचे झुक मुँह में ले लिया। वो मेरे सर पे हाथ रख बालों में फेरने लगा।

उसकी आंखें बंद हो रही थी। दूसरा वाला सब देख रहा था। मैंने लौड़ा निकाल लिया और खुद भी उसके अंदर छलाँग लगा दी। पानी से मेरे मम्मे चमकने लगे।

साले क्या लड़की जैसा है तेरा बदन!
और किनारे पर बिठा लौड़े का रसपान करने लगा।

उसको भी मैंने आंख मार दी, जुबान उसके लौड़े को देख होंठों पर फिरा दी, उसका भी काम कण्ट्रोल से बाहर हो रहा था। वो उठकर आया और लूंगी खोल अंदर कूद गया। उसने कुछ भी नहीं पहना था। उसका लौड़ा बहुत भयंकर था, आधा लटक रहा था। दोनों को पास-पास ही चुबच्चे की दीवार पर बिठा खुद बीच में बैठकर चूसने लगा।

बोले- वाह यार! वाह! बहुत बढ़िया माल निकला! तेरी गांड देख कर समझ गया था कि तू अमरुद नहीं लंडरुद तोड़ने आया था, तेरे जैसे बहुत गांडू इस बाग़ में गांड मरवाने के लिए मर्द लाते हैं, लेकिन हमें पैसे देते थे। आज पहली बार कोई लौड़ा चूस रहा है। हम लोग गरीब हैं, चूत मिल जाये वही बहुत है, चुसवाना दूर की बात है!

कोई बात नहीं, मैं मिल गया हूँ ना! क्या बढ़िया से लौड़े हैं!

दोनों के पूरे तन चुके थे, पहली बार मुँह में डालने की वजह से दोनों मुँह में झड़ गए। कोई बात नहीं रे!

मैं किनारे पर लेट गया, दोनों के लौड़े हाथ में ले लिए और उनके सर को अपने मम्मों की ओर करते हुए एक-एक मम्मा दोनों ने पकड़ चूस लिया। इतने में उनके मैंने फिर खड़े कर लिए मुंह में लेकर पूरी तरह से खड़े कर लिए और काफी साबुन की झाग बना उनके लौड़ों पर लगा दी।

उनके कमरे में ले गया, मैंने गांड के नीचे तकिया रख टांगे खोल दी और एक को बीच में आने का इशारा कर दूसरे का मुँह में डाल लिया। अपने हाथ से लौड़ा छेद पर टिकाया दोनों ओर से ऊँगली डाल गांड खोल दी। लेकिन मैंने उसे वहीं रोक दिया। मटकता हुआ पतलून से कंडोम निकाले जो मैं रिज़र्व में अपने साथ रखता हूँ, छोटे-मोटे और साधारण नहीं, महंगे! जिन्हें डाल कर पता भी न चलता कि डाला है या नहीं!

उसका लौड़ा फ़िर से अपनी गाण्ड के छेद पर टिका लिया, उसने झटका दिया और उसका टोपा मेरी गांड में फंस गया।
मैंने कहा- निकालकर दुबारा डालो! इस कंडोम में बहुत चिकनाहट है!

इस बार उसने पूरा लौड़ा धीरे-धीरे कर घुसा दिया। उसके बाद उसने ऐसे झटके मारे जिससे मेरा ढांचा हिलने लगा, हड्डी से हड्डी बजाने लगा बेरहम बन कर! कुछ पल में मुझे आनन्द आने लगा। उधर एक का लौड़ा पहले से मुँह में घुसा हुआ था। उसका लौड़ा मैं लॉलीपॉप की तरह चूसने लगा। दूसरी तरफ मेरी गाण्ड बज़ रही थी और एक तरफ स्वादिष्ट लौड़ा मेरे मुँह में! मेरे होंठों में सोने पर सुहागा हो रहा था। वहाँ पर अह उह और मार बेन्चोद दे मेरी आज फाड़ डाल इस कमीनी को हाय मेरा रजा रोज़ तुझ मरवाने आऊँगा इतना कस कर छोड़ रहा है तूँ साले असली मर्द है! अहऽऽ ओहऽऽ मेरे आशिक!

जब मैं बोलता, उसका लौड़ा निकालना पड़ता!

उसने मेरे बालों को बुरी तरह से पकड़ लिया और जोर-जोर से मेरे मुँह में अन्दर-बाहर करने लगा। वो मुंह से बाहर नहीं आने दे रहा था, हलक में उतार देता, मैं खांसने लगता। उधर झटके पर झटका तेज़ होता गया और कुछ देर में उसने पिचकारी छोड़ दी। कंडोम उतार उसने गीला लौड़ा मुँह में डाल दिया और मैंने साफ़ कर दिया।

आजा मेरे राजा! तेरी बारी है अब! उस पर भी कंडोम लगा दिया और उसके सामने घोड़ी बन गया। उसने पीछे आकर डाल दिया- अह उह उह अह मार साले मार मेरी ऐसा जुगाड़ कभी नहीं मिलेगा और ना मिला होगा!

जुगाड़ हूँ मैं पक्का जुगाड़ हूँ! मैंने कहा- अपने नीचे डाल ले! मुझे अच्छा लगता है किसी मर्द के नीचे लेट कर उसके बदन से चिपक कर लौडे का स्वाद लेता हूँ!

उसने सीधा लिटा दिया और टाँगे चौड़ी करवा कर डाल दिया अन्दर! और मैं अपना मम्मा उसके मुँह के पास लाया तो वो मुँह में डाल निपल को जुबान से छेड़ता तो मेरी मस्ती का आलम न रहता। मैं चूतड उठा उठा मरवाने लगा- हाय, साले! मेरी माँ चोद दे! बहन चोद दे! मेरी फाड़ डाल! फाड़ डाल! हाँ फाड़! फाड़!

ऐसे बातें सुन उसका जोश बढ़ा और वो तेज़ तेज़ धक्के लगा, उसका काम भी तमाम हो गया, उसका भी निकाल साफ़ किया।

और कपड़े पहनते हुए कहा- आते-जाते गांड मरवाने आऊँगा!

दोस्तो, यह थी मेरी नवीनतम चुदाई!

सभी पाठकों की शिकायत थी कि अगली चुदाई क्यूँ नहीं लिख रहा! सो कैसी लगी बताना! Sex Stories

Sex Stories

बात उन दिनों की है Sex Stories जब मैं बैंगलोर में एक अर्धशासकीय कम्पनी में काम करता था। मेरे पास कॉलेज के बहुत सारे छात्र प्रोजेक्ट करने के लिये आते थे और मैं बहुत सिंसियरली उनको प्रोजेक्ट कराता था। मैं सॉफ़्टवेयर डेवलपमेंट ग्रुप में था इसलिये मेरे पास ज्यादातर कम्प्यूटर ब्रान्च के छात्र आते थे, जिसमें ज्यादातर लड़कियाँ होती थीं।

यहाँ मैं आपको बता दूँ कि बैंगलोर की लड़कियाँ बहुत ही आज़ाद ख्यालों वाली होती हैं। उनके कपड़े काफ़ी भड़कीले होते हैं … टाइट जींस … जिसमें उनका सुडौल पिछवाड़ा बहुत ही आकर्षक दिखाई देता है। लो कट टी-शर्ट जिसमें से उनके वक्ष का आधा भाग और उनके बीच का दरार काफ़ी उत्तेजक लगता है। ऊपर से वो कुछ ऐसा पर्फ़्यूम छिड़क के आती थीं जो मदमस्त कर देने वाला होता था।

मैं एक अच्छा ओरेटर हूँ इसलिये मेरे बात करने का अन्दाज़ लड़कियों को बहुत भाता है इसलिये लगभग सारी लड़कियाँ किसी ना किसी तरह से मुझे लाइन मारने की कोशिश करती रहती थीं। मैं उनका लाइन मारना, उनके साथ पिक्चर जाना, अम्यूज़मेंट पार्क्स में घूमना, वाटर पार्क्स में उनके भीगे बदन के साथ घूमना, उन्हें देखना इत्यादि तो इन्जॉय करता था पर उससे आगे बढ़ने की ना तो मेरी हिम्मत थी ना ही इच्छा।

मगर किस्मत को तो कुछ और ही मंज़ूर था।

मैं अपने सहयोगियों के साथ कैन्टीन में लन्च कर रहा था, कि अचानक ज़मील ने कहा “अबे देख … कितने बड़े-बड़े हैं इसके …”

मैंने सर उठाकर देखा … एक बीस-इक्कीस साल की लड़की अपनी दो सहेलियों के साथ लंच लेने आई थी, और जिसके बारे में ज़मील ने कमेंट किया था उसके स्तन वाकई बहुत बड़े थे … आम लड़कियों से काफ़ी बड़े … उसकी दोनों सहिलियाँ भी ठीक ठाक थीं।

मैंने कहा,”देखते हैं किसकी झोली में गिरती हैं … !”

ज़मील ने कहा,”तू ही तो है प्रोजेक्ट गाइड सभी लड़कियों का … तेरे पास ही आयेंगी … और कहाँ जायेंगी..”

मैंने कहा,”काश …!”

दोपहर में जब मैं लंच के बाद आकर अपने केबिन में बैठा तो मेरे एक सीनियर का फ़ोन आया, वो रिक्वेस्ट कर रहे थे कि मैं उनकी रिश्तेदार और उसकी सहेलियों का प्रोजेक्ट गाइड बन जाऊँ। मैंने हाँ कर दिया था..परंतु तब तक भी मैंने यह नहीं सोचा था कि ये वही लड़कियाँ होंगी जिन्हें हमने कैन्टीन में देखा था।

बहरहाल वो तीनों मेरे पास आईं, हैण्ड-शेक किया, अपने लो कट टी-शर्ट्स में से अपना यौवन दिखा-दिखा कर अपना इन्ट्रोडक्शन दिया, कुछ प्रोजेक्ट की बातें की, कुछ मुझे पटाने के लिये अदायें फेकीं (ताकि उनका प्रोजेक्ट ज़ल्दी और आसानी से हो जाये) और “थैन्क् यू सर” बोल के … अपने सुगठित, उन्नत … गोल-गोल … लुभावने … पिछवाड़े मटकाते हुये चली गईं।

पहली बार … जी हाँ पहली बार मुझे किसी लड़की ने इतना हिला कर रख दिया था। वैसे तो मैं शाम को ऑफ़िस से आकर सारी बातें भूल जाता हूँ पर उस दिन ऐसा नहीं हुआ … उसके उन्नत उरोज … उनके बीच की मादक दरार … उसके भरे-भरे नितंब … उसके रसीले और तराशे हुये होंठ … उसकी कमनीय आँखे (जो तकरीबन सभी साउथ इंडियन लड़कियों की होती हैं) … मेरे जेहन में घूम रहे थे।

दूसरे दिन मेरा मन काम में नहीं लग रहा था ..

मैं रह-रह के अपनी घड़ी की तरफ़ देख रहा था। आखिरकार वो आईं और इस बार ज़्यादा सज सँवरकर आईं, और कमनीय बन के आईं, और हाई-हील के सैंडिल पहन के आईं ताकि उनके नितंब और उभरे हुए दिखें … शायद उन्हें यह एहसास हो गया था कि मैं उनके पुष्ट नितंबों को निहारता था.. क्योंकि उनका प्रोजेक्ट गाइड यानि मैं, एक जवान और अविवाहित लड़का था।

तीनों एक से बढ़कर एक लग रही थीं पर मेरी नज़र तो उस बड़े उरोजों वाली … ‘शशि’ पर थी, जो उन तीनों में सबसे खूबसूरत भी थी। बहरहाल मैं यह दिखा था कि मैं बहुत नॉर्मल हूँ और तीनों को बराबर ट्रीट कर रहा हूँ। मैं उनको कम्प्यूटर पर कोड लिखने को कहता और पीछे बैठकर उनके सुडौल अंगों को देखता। उफ़ क्या ग़ज़ब का सम्मोहन था … जो मुझे उन अंगो को छूकर देखने को उत्तेजित करता था।

जब वो मेरे बगल में बैठती थीं और मैं की-बोर्ड में टाइप करता था तो कोहनी से जानबूझकर उनके उभारों को छूकर ’सॉरी’ बोल देता था … वो भी ’इट्स ओके’ कह देती थीं और उन्हें लगता था कि सर कितने शरीफ़ हैं। और आपको बता दूँ कि अच्छी और कुँवारी लड़कियाँ शरीफ़ और लल्लू से दिखने वाले लड़के पसंद करती हैं जिन्हें वो आसानी से अपने काबू में कर सकें।

पर उनको पता नहीं था कि उनसे पहले मैं जाने कितनों का प्रोजेक्ट गाइड था। पर समस्या यह थी कि तीनों अच्छी दोस्त थीं और उनमें से किसी एक को अलग करके कुछ करना मुश्किल काम था।

उस रात मैंने काफ़ी सोचा … आखिर एक आइडिया मेरे खुरापाती दिमाग में आ ही गया। अगले दिन मैंने यह दिखाना शुरू किया कि मुझे स्मिता और नेहा में ज़्यादा रुचि है … उनसे हँस-हँस के बातें करता … कभी कंधे पे हाथ रख देता … कुछ पूछती तो काफ़ी देर तक समझाता … उनके बहुत करीब रहता और ऐसी हरकतें करता कि शशि को जलन हो गई।

दो दिन ये रूटीन दोहराता रहा … और शशि का रुपगौरव और आत्मसम्मान कुचला जाता रहा। आखिर मेरी स्कीम ने काम किया … उस शाम सेशन खत्म होने से पहले शशि ने मुझसे पूछा,”सर ! आप मुझे मेरे कज़िन के घर छोड़ देंगे क्या?”

मैंने कहा,”व्हाइ नॉट !”

मैंने उसको अपनी पल्सर में लिफ़्ट दिया। रास्ते भर वो अपने बड़े-बड़े उरोज़ मेरे पीठ से छुलाती रही। मेरे अंगों में सिहरन सी दौड़ जाती और मेरे शिश्न में इतनी ज़्यादा कठोरता आ जाती जिसको पैंट में सम्हालना मुश्किल हो जाता।

अब रोज़ का यही क्रम बन गया था … धीरे धीरे उसकी हरकतें बढ़ने लगीं … पहले बाइक में मेरे कमर को पकड़कर बैठती थी, फ़िर जांघों को … एक दिन स्पीड ब्रेकर में उसका हाथ जांघ से फ़िसलकर मेरे पूरी तरह खड़े लंड पे पहुंच गया जिसको उसने, धोखे से या जानबूझकर पता नहीं, पर जोर से पकड़ लिया। बाद में उसने सॉरी बोला और मैंने कहा- कोई बात नहीं !

बात आई गई हो गई।

एक दिन उसकी कज़िन घर पे नहीं थी … मोबाइल पे लगाया तो उसने कहा कि आधे घंटे में आयेगी …

फ़ोन बन्द करके शशि बुदबुदाई,”अब मैं कहाँ जाऊँ आधे घंटे के लिये ?”

मैंने कहा,”मेरे घर !”

वो बोली,”ठीक है … मैं आपको चाय बनाके पिलाऊँगी !”

हम दोनों घर पहुंचे, चाय पी। फ़िर उसने कहा मैं थक गई हूँ, थोड़ी देर लेट जाऊँ?

मैंने कहा,”नो प्रॉब्लम !”

उसने बिस्तर पर लेट कर आँखे बंद कर ली और वहीं बगल में बैठकर ऊपर से नीचे तक उसके सारे जिस्म को अपनी आँखों से तोलने लगा। फ़िर मेरी आँखे उसके उरोजों पर अटक गई …

उसने करवट लिया और एक हाथ मेरे जांघ पर रख दिया। फ़िर कुनमुनाते हुये (जैसे नींद में होते हैं) उसने हाथ मेरे तने हुये लंड पे रख दिया। अब मैं बेकाबू होता जा रहा था।

अचानक उसने मेरे लंड को भींच लिया और कहा,”सर कितना बड़ा है आपका ये …”

मैं भौंचक्का रह गया।

उसने कहा,”ऐसे क्यों देख रहे हैं … क्या आपको मेरा इस तरह पकड़ना पसन्द नहीं?”

मैंने थूक गटका,” …ऐसी कोई बात नहीं !”

तो कैसी बात है सर … आप क्यों मुझे इग्नोर करते रहते हैं … स्मिता और नेहा मुझसे ज़्यादा अच्छी हैं क्या?”

मेरा तीर निशाने पर लग चुका था। ये सब कहते हुये उसने मेरा लंड छोड़ा नहीं था … बल्कि और भी जोर से पकड़ लिया था … मेरा लंड लोहे के रॉड की तरह सख्त हो चुका था। अंदर से मैं बहुत उत्तेजित हो चुका था पर बाहर से मुस्कुराते हुये बोला,”यह बात नहीं है शशि … मुझे तुम बहुत अच्छी लगती हो !”

उसने पूछा- आपको मुझमें क्या अच्छा लगता है?

मैंने कहा- तुम्हारे होंठ, तुम्हारे गाल … !

उसने कहा- और..?

वह कुछ और ही सुनना चाहती थी …

मैंने जारी रखा- तुम्हारे बड़े-बड़े बूब्स … तुम्हारे बट्स … मैं इन्हें महसूस करना चाहता हूँ … इनमें डूब जाना चाहता हूँ..!

उसने हस्की आवाज़ में कहा- आपको रोका किसने है सर … मैं तो कितने दिनों से यही चाह रही थी …

उसका इतना कहना था कि मैंने अपने होंठ उसके नर्म मुलायम होंठों पर रख दिये और दोनों हाथों से उसके स्तनों को टी-शर्ट के ऊपर से ही मसलने लगा …

इतने भरे-भरे कठोर और बड़े स्तन थे उसके कि लगता था अभी टी-शर्ट फाड़ के निकल पड़ेंगे। वह भी मेरे लंड को सहलाते हुये मेरा ज़िप खोलने की कोशिश कर रही थी। मेरा लंड इतना तन चुका था कि उसको बड़ी मुश्किल से बाहर निकाला और उसको देखते ही उसकी आँखें फटी की फटी रह गईं, किस करना भूल गई थी वो। ८-८.५ इंच का लंड .. उसपे ३ इंच का घेरा …

बाप रे ! उसने कहा।

घुटने के बल आकर उसने मेरा सुपाड़े को लॉलीपॉप की तरह चूसना शुरू कर दिया और मेरा लंड मुँह में लेकर चूसने लगी।

मैं सिसकारियाँ लेने लगा और खड़े-खड़े अपने हाथ नीचे करके जोर-जोर से उसके स्तन मसलने लगा … थोड़ी देर बाद मेरे लंड के टिप पे लसलसा सा प्रि-कम आ गया था जो उसने मजे से चाट लिया था।

अचानक वो खड़ी हुई … उसने मेरा एक हाथ अपने वक्ष से हटाया और अपने दोनों टाँगों के बीच वहाँ रख दिया जहाँ दहकता लावा था …

पहले तो मैं बाहर से ही सहलाता रहा … नापता रहा दोनों पंखुड़ियाँ … उनके बीच की दरार … जहाँ हल्की-हल्की रिसावट हो रही थी … मैंने और आगे उंगली घुसेड़ने की कोशिश की मगर फिर याद आया कि मैंने उसकी जींस तो उतारी ही नहीं थी। अब मैंने देर नहीं लगाई … फ़टाफ़ट उसकी जींस का बटन खोला … .फ़िर ज़िप … .फ़िर मैंने उसे अपने पैर से धीरे से नीचे सरका दिया …।

मैंने उसकी अंडरवियर के अंदर हाथ डाल के उसके झांटों को टटोलते हुये दरार पे उंगली फ़िराई …उसने सिसकारियाँ भरना शुरु कर दिया और अपने गुदाज नितंबों को आगे-पीछे करने लगी … मैंने अपनी एक उंगली धीरे से अंदर प्रविष्ट कर दी … वो चिहुँक उठी … .और अपना वस्ति-दोलन और तेज़ कर दिया …

उसने अपनी आँखें बन्द कर रखी थीं … ..मैंने उंगली को आगे पीछे करना शुरु कर दिया … उसने मेरे लंड को एक हाथ में लेकर उसके चमड़े को आगे-पीछे करने लगी … मेरा सुपाड़ा और मोटा होता जा रहा था … उसकी अंडरवियर गीली होती जा रही थी … वो और बर्दाश्त नहीं कर पा रही थी … उसके मुँह से गूँ-गूँ की आवाज़ निकल रही थी।

अचानक मैंने उसकी अंडरवियर धीरे से नीचे सरका दी … और उसके दोनों टांगो के बीच फ़ँसी उस दरार को निहारने लगा जिसके पीछे ऋषि-मुनियों की तपस्या भंग हो गई थी फिर मैं तो क्षणभंगुर मानव था।

शायद उसको अपनी नग्नता का अहसास हुआ या जाने कैसे वो पीछे घूम गई … अब मेरा लंड उसके उन्न्त नितम्बों के बीच की खाई में झटके मार रहा था … ..मैंने उसके दोनों बूब्स पकड़े और पीछे सट गया … वो अपने चूतड़ मेरे मुन्ने पे रगड़ने लगी। आह … स्वर्गीय आनंद था … कामुकता … लस्ट … अपनी चरम सीमा पर थी। मैंने उसके गर्दन पे एक चुम्बन दिया … उसने कराहती सी वासना में लिप्त आवाज़ में कहा,”उँह …”

मैंने अपना एक हाथ उसके उरोज से हटाया और योनिद्वार पे फेरने लगा … एक छोटी सी … मटर के दाने जितनी घुंडी का अहसास हुआ … जाने क्यों मैं उस घुंडी को रगड़ने लगा और वो बेसाख़्ता सिसकारियाँ भरने लगी …

और मेरे लंड को अपने गोल-गोल नितम्बों को बीच फ़ँसाकर ऊपर-नीचे रगड़ने लगी … लग रहा था किसी लावा में रगड़ा जा रहा है … मैं अपने आपको संयत कर पाता कि अचानक वो अपने दोनों हाथ पलंग पे रखकर झुक गई और जन्नत का दरवाजा मेरे सामने था।

साँसें घुटती हुई सी लग रही थीं … धड़कनें थमी सी महसूस हो रही थीं … सीटी बजाने के आकार में सुकड़ा हुआ भूरा सा गुदाद्वार किसी खिले हुए जासबन फूल सा लग रहा था … उसके कुछ आधे इंच नीचे भूरे-भूरे रेशमी झाँटों के झुरमुट में जो दिखाई दे रहा था … वो ऐसा लग रहा था जैसे शशि के सेक्सी होंठों को किसी ने वर्टिकल कर दिया हो … थोड़ा गुलाबी … थोड़ा बादामी … ऐसा कुछ रंग था उन होंठों के बीच …

मेरे हाथ-पाँव भारी से होते जा रहे थे … मैं अपने घुटनों पर आ गया और जाने किस अनजान शक्ति ने मेरा मुँह उस खुशबूदार … तीन इंची दरार में टिका दिया … मेरी जीभ बाहर निकल आई और मैं कुत्ते की तरह उसकी कुँवारी बुर को चाटने लगा … कुछ नमकीन-कसैला सा स्वाद था …

अब वो कन्नड़ में कुछ अंड-बंड बकने लगी और अपने चूतड़ को आगे-पीछे करने लगी … मैंने अपने जीभ के आगे का हिस्सा नुकीला करके उस मुलायम से योनिद्वार में घुसा दिया … उसकी सिसकारियाँ रुकने का नाम नहीं ले रही थीं …

मैंने जीभ को मटर के दाने जितनी घुंडी पर गोल-गोल घुमाना शुरु कर दिया … उसके दरारों से और ज़्यादा नमकीन पानी रिसने लगा … लंड का तनाव काबू से बाहर होता जा रहा था …जो आम तौर पर ८-८.५ इंच का दिखता था … आज ९ इंच का दिख रहा था … सुपाड़ा अंगारा हो गया था … उतना ही गरम … उतना ही लाल … !

अपना दहकता अंगार मैंने शशि के सुलगते लावा में रख दिया … जिसे मैंने चाट-चाट के लाल कर दिया था … उफ़ क्या गरमी थी … क्या नरमी थी … । अपने गरम सुपाड़े को उसकी चूत के दोनों पँखुड़ियों के बीच रगड़ने लगा … … जहाँ लसलसे पदार्थ का झरना सा बह रहा था …

शशि अपना नियंत्रण खोती जा रही थी … उसके तन-मन में मादकता छा गई थी … उसने अपनी कमर को उछालना शुरू कर दिया …

मैंने धीरे से सुपाड़ा अंदर घुसेड़ने की कोशिश की …

कोशिश इसलिये कह रहा हूँ कि सुपाड़ा बार-बार फ़िसल जाता था … अंदर जा ही नहीं रहा था। इतनी चिकनाई होने के बावजूद उस नई चूत के छेद के लिये तीन इंच घेरे वाला लंड काफ़ी बड़ा साबित हो रहा था … ।

मैंने एक हाथ से उसके नितंब को थामा … दूसरे हाथ से अपने लंड को पकड़ा … उसे जन्नत के दरवाजे पर टिकाया और हाथ से पकड़े-पकड़े अपने चूतड़ों को एक जुम्बिश दी … सुपाड़ा अन्दर समा गया … अभी भी ८ इंच का फ़ड़कता हुआ रॉड बुर के बाहर था … बैंगलोर के उस सुहाने मौसम में भी मैं पसीने-पसीने हो रहा था …।

अब मैंने लंड को छोड़ा … अपने आपको सीधा किया … गहरी साँस ली … दोनों हाथों से उसके गोल-गोल सुडौल नितंबों को थामा …नज़रें जासबन फूल पे टिकाई और अपने चूतड़ों को जबरदस्त झटका दिया … अब तकरीबन ४-४.५ इंच अंदर था..। अंदर तो भट्टी दहक रही थी … सब कुछ गरम-गरम महसूस हो रहा था …

शशि कराह रही थी …

थोड़ी देर तक हम दोनो ऐसे ही निश्चल रहे …लंड आधा ही अंदर था … मेरा लंड अंदर के कसाव के बावजूद फड़क रहा था …शशि चुपचाप मेरे लंड का फड़कन महसूस कर रही थी। … मैं भी उसके योनि की मांसपेशियों का संकुचन और विस्तार (फैलना और सुकड़ना) को महसूस कर रहा था।

करीब एक मिनट तक ऐसे ही रहने के बाद उसने अपने आपको आगे पीछे हिलाना शुरू किया … अभी भी लंड का आधा हिस्सा बाहर ही था … मुझे याद नहीं आ रहा है जाने कब मैं कुत्ते वाली स्टाइल में उसके ऊपर झुक गया था … उसके दोनों स्तन मेरे हाथ में थे और मैं पीछे से उसका बुरमर्दन कर रहा था।

मैं रफ़्तार पकड़ चुका था … और शशि भी अपने कूल्हों को हिला-हिला कर पूरा साथ निभा रही थी। उसकी हस्की और सेक्सी आवाज़ मुझे और उत्तेजित कर रही थी …

वो बड़बड़ा रही थी,” पुश इट् हार्ड … पुश दैट मोर इनसाइड … ऊह … ओ गॉड … आह..ऊँहु … ” और जाने क्या-क्या … ।

अचानक उसका पूरा शरीर बुरी तरह काँपने लगा … ऐसा लग रहा था कि उसके हाथ पैर उसका बोझ नहीं सम्हाल पा रहे हैं … उसके नितंबों में अजीब सी थरथराहट हो रही थी … और मैं था कि रुकने का नाम ही नहीं ले रहा था।

अचानक शशि भरभराकर कोहनियों के बल ज़मीन पर आ गई … उसका पेट और बूब्स ज़मीन पर टिके थे पर नितम्बों वाला हिस्सा ऊपर उठा हुआ था … मैंने अपना लंड एक इंच पीछे खींचा … उसकी कमर दोनों हाथों से पकड़ा और दोनों कूल्हों के बीच निहारा … उसके फ़ाँकों के बीच फ़ंसे अपने खुद के अंग को देखकर मैं इतना उत्तेजित हो गया कि पूरी ताकत के साथ लंड को वापिस पेल दिया …

शशि बोली,”ओ गॉड … यह तो यूटेरस (बच्चेदानी) में टकरा रहा है … “

इतना कहते ही उसके बुर से तेज धार सी निकली और मेरे झाँटों की भिगोती चली गई … मैं दुगनी रफ़्तार से भिड़ गया …

थोड़ी देर में मेरे लंड में अजीब सी ऐंठन हुई और पता नहीं कितना वीर्य उसके बच्चेदानी के छेद पे न्यौछावर हो गया …

बस इतना पता है कि उसने कहा..”ओह गॉड … .इतना सारा … “

मैं उसके खुशबूदार शरीर से चिपट गया … उसके स्तनों को मसलने लगा … मेरा लंड उसकी योनि में फैलने-सुकड़ने लगा … उसने पता नहीं क्या किया … ऐसा लगा जैसे मेरे लंड का पूरा रस अपने बुर को टाइट करके निचोड़ रही हो।

मैं उसकी सुराहीदार गर्दन को चूमता जा रहा था … हम दोनों तरबतर हो चुके थे … तन से भी … मन से भी …

आज बस इतना ही …

अगली बार मैं आपको बताऊँगा कि कैसे शशि ने रति-पश्चात-क्रीड़ा में चूस-चूसकर मेरे लंड को खड़ा किया … अपने मोबाइल में उसकी फोटो खींची … और कैसे दूसरे दिन लैब में स्मिता और नेहा को दिखाया …

फिर कैसे बारी-बारी दोनों ने मुझसे लिफ़्ट माँगा … और फिर … Sex Stories

Antarvasna Stories

मेरे जीजू और दीदी नासिक Antarvasna Stories में नई नौकरी लगने के कारण मेरे पास ही आ गये थे. मैंने यहाँ पर एक छोटा सा घर किराये पर ले रखा था. मेरी दीदी मुझसे कोई दो साल बड़ी थी. मेरे मामले में वो बड़ी लापरवाह थी. मेरे सामने वो कपड़े वगैरह या स्नान करने बाद यूँ आ जाती थी जैसे कि मैं कोई छोटा बच्चा या नासमझ हूँ.

शादी के बाद तो दीदी और सेक्सी लगने लगी थी. उसकी चूंचियाँ भारी हो गई थी, बदन और गुदाज सा हो गया था. चेहरे में लुनाई सी आ गई थी. उसके चूतड़ और भर कर मस्त लचीले और गोल गोल से हो गये थे जो कमर के नीचे उसके कूल्हे मटकी से लगते थे. जब वो चलती थी तो उसके यही गोल गोल चूतड़ अलग अलग ऊपर नीचे यूँ चलते थे कि मानो… हाय! लण्ड जोर मारने लगता था. जब वो झुकती थी तो बस उसकी मस्त गोलाईयाँ देख कर लण्ड टनटना जाता था. पर वो थी कि इस नामुराद भाई पर बिजलियाँ यूं गिराती रहती थी कि दिल फ़ड़फ़ड़ा कर रह जाता था.

बहन जो लगती थी ना, मन मसोस कर रह जाता था. मेरे लण्ड की तो कभी कभी यह हालत हो जाती थी कि मैं बाथरूम में जा कर उकड़ू बैठ कर लण्ड को घिस घिसकर मुठ मारता था और माल निकलने के बाद ही चैन आता था.

मैंने एक बार जाने अनजाने में दीदी से यूं ही मजाक में पूछ लिया. मैं बिस्तर पर बैठा हुआ था और वो मेरे पास ही कपड़े समेट रही थी. उसके झुकने से उसकी चूचियाँ उसके ढीले ढाले कुरते में से यूं हिल रही थी कि बस मेरा मुन्ना टन्न से खड़ा हो गया. वो तो जालिम तो थी ही, फिर से मेरे प्यासे दिल को झकझोर दिया.

‘कम्मो दीदी, मुझे मामा कब बनाओगी?’

‘अरे अभी कहाँ भैया, अभी तो मेरे खाने-खेलने के दिन हैं!’ उसने खाने शब्द पर जोर दे कर कहा और बड़े ठसके से खिलखिलाई.

‘अच्छा, भला क्या खाती हो?’ मेरा अन्दाज कुछ अलग सा था, दिल एक बार फिर आशा से भर गया. दीदी अब सेक्सी ठिठोली पर जो आ गई थी.

‘धत्त, दीदी से ऐसे कहते हैं…? अभी तो हम फ़ेमिली प्लानिंग कर रहे हैं!’ दीदी ने मुस्करा कर तिरछी नजर से देखा, फिर हम दोनों ही हंस पड़े. कैसी कन्टीली हंसी थी दीदी की.

‘फ़ेमिली प्लानिंग में क्या करते हैं?’ मैंने अनजान बनते हुये कहा. मेर दिल जैसे धड़क उठा. मैं धीरे धीरे आगे बढ़ने की कोशिश में लगा था.

‘इसमें घर की स्थिति को देखते हुये बच्चा पैदा करते हैं, इसमें कण्डोम, पिल्स वगैरह काम में लेते हैं, मैं तो पिल्स लेती हूँ… और फिर धमाधम चुद… , हाय राम!’ शब्द चुदाई अधूरा रह गया था पर दिल में मीठी सी गुदगुदी कर गया. लण्ड फ़ड़क उठा. लगता था कि वो ही मुझे लाईन पर ला रही थी.

‘हाँ… हाँ… कहो धमाधम क्या…?’ मैंने जानकर शरारत की. उसका चेहरा लाल हो उठा. दीदी ने मुझे फिर तिरछी नजर देखा और हंसने लगी.

‘बता दूँ… बुरा तो नहीं मानोगे…?’ दीदी भी शरमाती हुई शरारत पर उतर आई थी. मेरा दिल धड़क उठा. दीदी की अदायें मुझे भाने लगी थी. उसकी चूंचियाँ भी मुझे अब उत्तेजक लगने लगी थी. वो अब ग्रीन सिग्नल देने लगी थी. मैं उत्साह से भर गया.

‘दीदी बता दो ना…’ मैंने उतावलेपन से कहा. मेरे लण्ड में तरावट आने लगी थी. मेरे दिल में तीर घुसे जा रहे थे. मैं घायल की तरह जैसे कराहने लगा था.

‘तेरे जीजू मुझे फिर धमाधम चोदते हैं…’ कुछ सकुचाती हुई सी बोली. फिर एकदम शरमा गई. मेरे दिल के टांके जैसे चट चट करके टूटने लगे. घाव बहने लगा. बहना खुलने लगी थी, अब मुझे यकीन हो गया कि दीदी के भी मन में मेरे लिये भावना पैदा हो गई है.

‘कैसे चोदते हैं दीदी…?’ मेरी आवाज में कसक भर गई थी. मुझे दीदी की चूत मन में नजर आने लगी थी… लगा मेरी प्यारी बहन तो पहले से ही चालू है… बड़ी मर्द-मार… नहीं मर्द-मार नहीं… भैया मार बहना है. उसे भी अब मेरा उठा हुआ लण्ड नजर आने लगा था.

‘चल साले… अब ये भी बताना पड़ेगा?’ उसने मेरे लण्ड के उठान पर अपनी नजर डाली और वो खिलखिला कर हंस पड़ी. उसकी नजर लण्ड पर पड़ते ही मैंने उसकी बांह पकड़ पर एक झटके में मेरे ऊपर उसे गिरा लिया. उसकी सांसें जैसे ऊपर की ऊपर और नीचे की नीचे रह गई और फिर उसकी छाती धड़क उठी. वो मेरी छाती पर थी.

मेरा छः इन्च का लण्ड अब सात इन्च का हो गया था. भला कैसे छिपा रह सकता था.

‘दीदी बता दो ना…’ उसकी गर्म सांसे मेरे चेहरे से टकराने लगी. हमारी सांसें तेज हो गई.

‘भैया, मुझे जाने क्या हो रहा है…!’

‘बहना… पता नहीं… पर तेरा दिल बड़ी जोर से धड़क रहा है… तू चुदाई के बारे में बता रही थी ना… एक बार कर के बता दे… ये सब कैसे करते हैं…?’

‘कैसे बताऊँ… उसके लिये तो कपड़े उतारने होंगे… फिर… हाय भैया…’ और वो मुझसे लिपट गई. उसकी दिल की धड़कन चूंचियों के रास्ते मुझे महसूस होने लगी थी.

‘दीदी… फिर… उतारें कपड़े…? चुदाई में कैसा लगता है?’ मारे तनाव के मेरा लण्ड फ़ूल उठा था. हाय… कैसे काबू में रखूँ!

मेरा दिल तेजी से धड़कने लगा. लण्ड उछाले मारने लगा. दीदी ने मेरे बाल पकड़ लिये और अपनी चूंचियाँ मेरी छाती पर दबा दी… उसकी सांसें तेज होने लगी.

मेरे माथे पर भी पसीने की बूंदें उभर आई थी. उसका चेहरा मेरे चेहरे के पास आ गया. उसकी सांसों की खुशबू मेरे नथुने में समाने लगी. मेरे हाथ उसके चूतड़ों पर कस गये. उसका गाऊन ऊपर खींच लिया. मेरे होंठों से दीदी के होंठ चिपक गये. उसकी चूत मेरे तन्नाये हुये लण्ड पर जोर मारने लगी. उसकी चूत का दबाव मुझे बहुत ही सुकून दे रहा था.

आखिर दीदी ने मेरे मन की सुन ही ली. मैंने दीदी का गाऊन सामने से खोल दिया. उसकी बड़ी-बड़ी कठोर चूंचियाँ ब्रा में से बाहर उबल पड़ी. मेरा लण्ड कपड़ों में ही उसकी चूत पर दबाव डालने लगा. लगता था कि पैन्ट को फ़ाड़ डालेगा.

उसकी काली पेंटी में चूत का गीलापन उभर आया था. मेरी अँडरवियर और उसकी पेंटी के अन्दर ही अन्दर लण्ड और चूत टकरा उठे. एक मीठी सी लहर हम दोनों को तड़पा गई. मैंने उसकी पेंटी उतारने के लिये उसे नीचे खींचा. उसकी प्यारी सी चूत मेरे लण्ड से टकरा ही गई. उसकी चूत लप-लप कर रही थी. मेरे लण्ड का सुपाड़ा उसकी गीली चूत में अन्दर सरक गया. उसके मुख से आह्ह्ह सी निकल गई. अचानक दीदी ने अपने होंठ अलग कर लिये और तड़प कर मेरे ऊपर से धीरे से हट गई.

‘नहीं भैया ये तो पाप है… हम ये क्या करने लगे थे!’ मैं भी उठ कर बैठ गया.

जल्दबाज़ी में और वासना के बहाव में हम दोनों भटक गये थे. उसने अपना चेहरा दोनों हाथों से छुपा लिया. मुझे भी शर्म आ गई. उसके मुख की लालिमा उसकी शर्म बता रही रही थी. उसने मुँह छुपाये हुये अपनी दो अंगुलियों के बीच से मुझे निहारा और मेरी प्रतिक्रिया देखने लगी. उसके मुस्कराते ही मेरा सर नीचे झुक गया.

‘सॉरी दीदी… मुझे जाने क्या हो गया था…’ मेरा सर अभी भी झुका हुआ था.

‘आं हाँ… नहीं भैया, सॉरी मुझे कहना चहिये था!’ हम दोनों की नजरे झुकी हुई थी. दीदी ने मेरी छाती पर सर रख दिया.

‘सॉरी बहना… सॉरी…’ मैंने उसके माथे पर एक हल्का सा चुम्मा लिया और कमरे से बाहर आ गया. मैं तुरंत तैयार हो कर कॉलेज चला गया. मन ग्लानि से भर गया था. जाने दीदी के मन में क्या था. वह अब जाने क्या सोच रही होगी. दिन भर पढ़ाई में मन नहीं लगा. शाम को जीजाजी फ़ेक्टरी से घर आये, खाना खा कर उन्हें किसी स्टाफ़ के छुट्टी पर होने से नाईट शिफ़्ट में भी काम करना था. वो रात के नौ बजे वापस चले गये.

रात गहराने लगी. शैतान के साये फिर से अपने पंजे फ़ैलाने लगे. लेटे हुये मेरे दिल में वासना ने फिर करवट ली. काजल का सेक्सी बदन कांटे बन कर मेरे दिल में चुभने लगा. मेरा दिल फिर से दीदी के तन को याद करके कसकने लगा.

मेरा लण्ड दिन की घटना को याद करके खड़ा होने लगा था. सुपाड़े का चूत से मोहक स्पर्श रह रह कर लण्ड में गर्मी भर रहा था. रात गहराने लगी थी. लण्ड तन्ना कर हवा में लहरा उठा था. मैं जैसे तड़प उठा. मैंने लण्ड को थाम लिया और दबा डाला. मेरे मुख से एक वासनायुक्त सिसकारी निकल पड़ी. अचानक ही काजल ने दरवाजा खोला. मुझे नंगा देख कर वापस जाने लगी. मेरा हाथ मेरे लण्ड पर था और लाल सुपाड़ा बाहर जैसे चुनौती दे रहा था. मेरे कड़क लण्ड ने शायद बहना का दिल बींध दिया था. उसने फिर से ललचाई नजर से लण्ड को निहारा और जैसे अपने मन में कैद कर लिया.

‘क्या हुआ दीदी…?’ मैंने चादर ओढ़ ली.

‘कुछ नहीं, बस मुझे अकेले डर लग रहा था… बाहर तेज बरसात हो रही है ना!’ उसने मजबूरी में कहा. उसका मन मेरे तन्नाये हुये खूबसूरत लण्ड में अटक गया था. मैंने मौके का फ़ायदा उठाया. चादर एक तरफ़ कर दी और खड़े लण्ड के साथ एक किनारे सरक गया.

‘आजा दीदी, मेरे साथ सो जा, यहीं पर…पर पलंग छोटा है!’ मैंने उसे बताया.

मेरे मन के शैतान ने काजल को चिपक कर सोने का लालच दिया. उसे शायद मेरा लण्ड अपने जिस्म में घुसता सा लगा होगा. उसकी निगाहें मेरे कठोर लण्ड पर टिकी हुई थी. उसका मन पिघल गया… उसका दिल लण्ड लेने को जैसे मचल उठा.

‘सच… आ जाऊँ तेरे पास… तू तौलिया ही लपेट ले!’ उसकी दिल जैसे धड़क उठा. दीदी ने पास पड़ा तौलिया मुझे दे दिया. मैंने उसे एक तरफ़ रख लिया. वो मेरे पास आकर लेट गई.

‘लाईट बन्द कर दे काजल…’ मेरा मन सुलगने लगा था.

‘नहीं मुझे डर लगता है भैया…’ शायद मेरे तन की आंच उस तक पहुंच रही थी.

मैंने दूसरी तरफ़ करवट ले ली. पर अब तो और मुश्किल हो गया. मेरे मन को कैसे कंट्रोल करूँ, और यह लण्ड तो कड़क हो कर लोहा हो गया था. मेरा हाथ पर फिर से लण्ड पर आ गया था और लण्ड को हाथ से दबा लिया. तभी दीदी का तन मेरे तन से चिपक गया. मुझे महसूस हुआ कि वो नंगी थी. उसकी नंगी चूंचियाँ मेरी पीठ को गुदगुदा रही थी. उसके चूचक का स्पर्श मुझे साफ़ महसूस हो रहा था. मुझे महसूस हुआ कि वो भी अब वासना की आग में झुलस रही थी… यानी सवेरे का भैया अब सैंया बनने जा रहा था. मैंने हौले से करवट बदली… और उसकी ओर घूम गया.

काजल अपनी बड़ी बड़ी आंखों से मुझे देख रही थी. उसकी आंखों में वासना भरी हुई थी, पर प्यार भी उमड़ रहा था. लगता था कि उसे अब मेरा मोटा लण्ड चाहिये था. वो मुझे से चिपकने की पुरजोर कोशिश कर रही थी. मेरा कड़ा लण्ड भी उस पर न्योछावर होने के लिये मरा जा रहा था.

‘दिन को बुरा मान गये थे ना…’ उसकी आवाज में बेचैनी थी.

‘नहीं मेरी बहना… ऐसे मत बोल… हम तो हैं ही एक दूजे के लिये!’ मैंने अपना लण्ड उसके दोनों पांवों के बीच घुसा दिया था. चूत तो बस निकट ही थी.

‘तू तो मेरा प्यारा भाई है… शरमा मत रे!’ उसने अपना हाथ मेरी गरदन पर लपेट लिया. मेरा लण्ड अपनी दोनों टांगों के बीच उसने दबा लिया था और उसकी मोटाई महसूस कर रही थी. उसने अपना गाऊन का फ़ीता खोल रखा था. आह्ह… मेरी बहना अन्दर से पूरी नंगी थी. मुझे अब तो लण्ड पर काबू पाना मुश्किल हो रहा था. उसने अपनी चूत मेरे लण्ड से चिपका दी. जैसे लण्ड को अब शांति मिली. मेरा मन फिर से उसे चोदने के लिये मचल उठा. मैंने भी उसे कस लिया और कुत्ते की तरह से लण्ड को सही स्थान पर घुसाने की कोशिश करने लगा.

‘भैया ये क्या कर रहे हो… ये अब नीचे चुभ रहा है!’ उसकी आवाज में वासना का तेज था. उसकी आंखें नशीली हो उठी थी. चूत का गीलापन मेरे लण्ड को भी चिकना किये जा रहा था.

‘अरे यूं ही बस… मजा आ रहा है!’ मैंने सिसकी भरते हुये कहा. चूत की पलकों को छेड़ता हुआ, लण्ड चूत को गुदगुदाने लगा.

‘देखो चोदना मत…’ उसकी आवाज में कसक बढ़ती जा रही थी, जैसे कि लण्ड घुसा लेना चाहती हो. उसका इकरार में इन्कार मुझे पागल किये दे रहा था.

‘नहीं रे… साथ सोने का बस थोड़ा सा मजा आ रहा है!’ मैं अपना लण्ड का जोर उसकी चूत के आसपास लगा कर रगड़ रहा था. अचानक लण्ड को रास्ता मिल गया और सुपाड़ा उसकी रस भरी चूत के द्वार पर आ गया. हमारे नंगे बदन जैसे आग उगलने लगे.

‘हाय रे, देखो ये अन्दर ना घुस जाये…बड़ा जोर मार रहा है रे!’ चुदने की तड़प उसके चेहरे पर आ गई थी. अब लण्ड के बाहर रहने पर जैसे चूत को भी एतराज़ था.

‘दीदी… आह्ह्ह… नहीं जायेगा…’ पर लण्ड भी क्या करे… उसकी चूत भी तो उसे अपनी तरफ़ दबा रही थी, खींच रही थी. सुपाड़ा फ़क से अन्दर उतर गया.

‘हाय भैया, उफ़्फ़्फ़्फ़… मैं चुद जाऊँगी… रोको ना!’ उसका स्वर वासना में भीगा हुआ था. इन्कार बढ़ता जा रहा था, साथ में उसकी चूत ने अपना मुख फ़ाड़ कर सुपाड़े का स्वागत किया.

‘नहीं बहना नहीं… नहीं चुदेगी… आह्ह्ह… ‘

काजल ने अपने अधरों से अपने अधर मिला दिये और जीभ मेरे मुख में ठेल दी. साथ ही उसका दबाव चूत पर बढ़ गया. मेरे लण्ड में अब एक मीठी सी लहर उठने लगी. लण्ड और भीतर घुस गया.

‘भैया ना करो… यह तो घुसा ही जा रहा है… देखो ना… मैं तो चुद जाऊँगी!’

उसका भीगा सा इन्कार भरा स्वर जैसे मुझे धन्यवाद दे रहा था. उसकी बड़ी-बड़ी आंखें मेरी आंखों को एक टक निहार रही थी. मुझसे रहा नहीं गया, मैंने जोर लगा कर लण्ड़ पूरा ही उतार दिया. वो सिसक उठी.

‘दीदी, ये तो मान ही नहीं रहा है… हाय… कितना मजा आ रहा है…!’ मैंने दीदी को दबाते हुये कहा. मैंने अपने दांत भींच लिये थे.

‘अपनी बहन को चोदेगा भैया… बस अब ना कर… देख ना मेरी चूत की हालत कैसी हो गई है… तूने तो फ़ोड़ ही दिया इसे!’ मेरा पूरा लण्ड अपनी चूत में समेटती हुई बोली.

‘नहीं रे… ये तो तेरी प्यारी चूत ही अपना मुह फ़ाड़ कर लण्ड मांग रही है, हाय रे बहना तेरी रसीली चूत…कितना मजा आ रहा है… सुन ना… अब चुदा ले… फ़ुड़वा ले अपनी फ़ुद्दी…!’ मैंने उसे अपनी बाहों में ओर जोर से कस लिया.

‘आह ना बोल ऐसे… मेरे भैया रे… उफ़्फ़्फ़्फ़’ उसने साईड से ही चूत उछाल कर लण्ड अपनी चूत में पूरा घुसा लिया. मैं उसके ऊपर आ गया. ऊपर से उसे मैं भली प्रकार से चोद सकता था. हम दोनों एक होने की कोशिश करने लगे. दीदी अपनी टांगें फ़ैला कर खोलने लगी. चूत का मुख पूरा खुल गया था. मैं मदहोश हो चला.

मेरा लण्ड दे दनादन मस्ती से चूत को चोद रहा था. दीदी की सिसकारियाँ मुख से फ़ूट उठी. उसकी वासना भरी सिसकियाँ मुझे उत्तेजित कर रही थी. मेरा लण्ड दीदी की चूत का भरपूर आनन्द ले रहा था. मुझे मालूम था दीदी मेरे पास चुदवाने ही आई थी… डर तो एक बहाना था. बाहर बरसात और तेज होने लगी थी.

हवा में ठण्डक बढ़ गई थी. पर हमारे जिस्म तो शोलों में लिपटे हुये थे. दीदी मेरे शरीर के नीचे दबी हुई थी और सिसकियाँ भर रही थी. मेरा लण्ड उसकी चूत में भचाभच घुसे जा रहा था. उसकी चूत भी उछाले मार मार कर चुद रही थी.

तभी उसने अपना पोज बदलने के लिये कहा और वो पलट कर मेरे ऊपर आ गई. उसके गुदाज स्तन मेरे सामने झूल गये. मेरे हाथ स्वतः ही उसकी चूंचियाँ मसलने को बेताब हो उठे… उसने मेरे तने हुए लण्ड पर अपनी चूत को सेट किया और कहा- भैया, बहना की भोसड़ी तैयार है… शुरु करें?’ उसने शरारत भरी वासनायुक्त स्वर में हरी झण्डी दिखाई.

‘रुक जा दीदी… तेरी कठोर चूंचियाँ तो दाब लू, फिर…’ मैं अपनी बात पूरी करता, उसने बेताबी में मेरे खड़े लण्ड को अपनी चूत में समा लिया और उसकी चूंचियाँ मेरे हाथों में दब गई. फिर उसने अपनी चूत का पूरा जोर लगा दिया और लण्ड को जड़ तक बैठा दिया.

‘भैया रे… आह पूरा ही बैठ गया… मजा आ गया!’ नशे में जैसे झूमती हुई बोली.
‘तू तो ऐसे कह रही है कि पहले कभी चुदी ही नहीं…!’ मुझे हंसी आ गई.
‘वो तो बहुत सीधे हैं… चुदाई को तो कहते हैं ये तो गन्दी बात है… एक बार उन्हें उत्तेजित किया तो…’ अपने पति की शिकायत करती हुई बोल रही थी.
‘तो क्या…?’ मुझे आश्चर्य सा हुआ, जीजाजी की ये नादानी, भरी जवानी तो चुदेगी ही, उसे कौन रोक सकता है.
‘जोश ही जोश में मुझे चोद दिया… पर फिर मुझे हज़ार बार कसमें दिलाये कि किसी मत कहना कि हमने ऐसा किया है… बस फिर मैं नहीं चुदी इनसे…’
‘अच्छा… फिर… किसी और ने चोदा…’

‘और फिर क्या करती मैं… आज तक मुझे कसमें दिलाते रहते है और कहते हैं कि हमने इतना गन्दा काम कर दिया है… लोग क्या कहेंगे… फिर उनके दोस्त को मैंने पटा लिया… और अब भैया तुम तो पटे पटाये ही हो.’

मुझे हंसी आ गई. तभी मेरी बहना प्यासी की प्यासी रह गई और शरम के मारे कुछ ना कह सकी… ये पति पत्नी का रिश्ता ही ऐसा होता है. यदि मस्ती में चूत अधिक उछाल दी तो पति सोचेगा कि ये चुद्दक्कड़ रांड है, वगैरह.

‘सब भूल जाओ काजल… लगाओ धक्के… मेरे साथ खूब निकालो पानी…’

‘मेरे अच्छे भैया…मैंने तो तेरा खड़ा लण्ड पहले ही देख लिया था… मुझे लगा था कि तू मेरी जरूर बजायेगा एक दिन…!’ और मेरे से लिपट कर अपनी चूत बिजली की तेजी से चलाने लगी. मेरा लण्ड रगड़ खा कर मस्त हो उठा और कड़कने लगा. मेरे लण्ड में उत्तेजना फ़ूटने लगी. बहुत दिनों के बाद कोई चोदने को मिली थी, लग़ा कि मेरा निकल ही जायेगा. मेरा जिस्म कंपकपाने लगा… उसके बोबे मसलते हुये भींचने लगा. मेरा प्यासा लण्ड रसीला हो उठा. तभी मेरे लण्ड से वीर्य स्खलित होने लगा. दीदी रुक गई और मेरे वीर्य को चूत में भरती रही. जब मैं पूरा झड़ गया और लण्ड सिकुड़ कर अपने आप बाहर आ गया तो उसने बैठ कर अपनी चूत देखी, मेरा वीर्य उसकि चूत में से बह निकला था. मेरा तौलिया उसने अपनी चूत पर लगा लिया और एक तरफ़ बैठ गई. मैं उठा और कमरे से बाहर आ गया.

पानी से लण्ड साफ़ किया और मूत्र त्यागा. तभी मुझे ठण्ड से झुरझुरी आ गई. बरसाती ठण्डी हवा ने मौसम को और भी ठण्डा कर दिया था. मैं कमरे में वापस आ गया. देखा तो काजल भी ठण्ड से सिकुड़ी जा रही थी. मैंने तुरंत ही कम्बल निकाला और उसे औढ़ा दिया और खुद भी अन्दर घुस गया. मैं उसकी पीठ से चिपक गया. दो नंगे बदन आपस में चिपक गये और ठण्ड जैसे वापस दूर हो गई.

उसके मधुर, सुहाने गोल गोल चूतड़ मेरे शरीर में फिर से ऊर्जा भरने लगे. मेरा लण्ड एक बार फिर कड़कने लगा. और उसके चूतड़ों की दरार में घुस पड़ा. दीदी फिर से कुलबुलाने लगी. अपनी गान्ड को मेरे लण्ड से चिपकाने लगी.

‘दीदी… ये तो फिर से भड़क उठा है…’ मैंने जैसे मजबूरी में कहा.
‘हाँ भैया… ये लण्ड बहुत बेशर्म होता है… बस मौका मिला और घुसा…’ उसकी मधुर सी हंसी सुनाई दी.
‘क्या करूँ दीदी…’ मैंने कड़कते लण्ड को एक बार फिर खुला छोड़ दिया. अभी वो मेरी दीदी नहीं बल्कि एक सुन्दर सी नार थी… जो एक रसीली चूत और सुडौल चूतड़ों वाली एक कामुक कन्या थी… जिसे विधाता ने सिर्फ़ चुदने के लिये बनाई थी.

‘सो जा ना, उसे करने दे जो कर रहा है… कब तक खेलेगा… थक कर सो ही जायेगा ना!’ उसकी शरारत भरी हंसी बता रही कि वो अपनी गाण्ड अब चुदाने को तैयार है.
‘दीदी, तेरा माल तो बाकी है ना…?’ मैं जानता था कि वो झड़ी नहीं थी.
‘ओफ़ोह्ह्ह्ह… अच्छा चल माल निकालें… तू मस्त चुदाई करता है रे!’ हंसती हुई बोली.

मैं दीदी की गाण्ड में लण्ड को और दबाव दिये जा रहा था. वो मुझे मदद कर रही थी. उसने धीरे से अपनी गाण्ड ढीली की और अपने पैर चौड़ा दिये. मैंने उसकी चूंचियाँ एक बार से थाम ली और उसके चूंचक खींच कर दबाने लगा.

‘सुन रे थोड़ी सी क्रीम लगा कर चिकना कर दे, फिर मुझे लगेगी नहीं!’

मैंने हाथ बढ़ा कर मेज़ से क्रीम ले कर उसके छेद में और मेरे लण्ड पर लगा दी. लण्ड का सुपाड़ा चूतड़ों के बीच घुस कर छेद तक आ पहुंचा और छेद में फ़क से घुस गया. उसे थोड़ी सी गुदगुदी हुई और वो चिहुंक उठी. मैंने पीछे से ही उसके गाल को चूम लिया और जोर लगा कर अन्दर लण्ड को घुसेड़ता चला गया. वो आराम से करवट पर लेटी हुई थी. शरीर में गर्मी का संचार होने लगा था.

क्रीम की वजह से लण्ड सरकता हुआ जड़ तक बैठ गया. काजल ने मुझे देखा और मुस्करा दी.

‘तकिया दे तो मुझे…’ उसने तकिया ले कर अपनी चूत के नीचे लगा लिया.
‘अब बिना लण्ड निकाले मेरी पीठ पर चढ़ जा और मस्ती से चोद दे!’

मैं बड़ी सफ़ाई से लण्ड भीतर ही डाले उसकी गाण्ड पर सवार हो गया. वो अपने दोनों पांव खोल कर उल्टी लेटी हुई थी… मैंने अपने शरीर का बोझ अपने दोनों हाथों पर डाला और अपनी छाती उठा ली. फिर अपने लण्ड को उसकी चूतड़ों पर दबा दिया. अब धीरे धीरे मेरा लण्ड अन्दर बाहर आने जाने लगा. उसकी गाण्ड चुदने लगी. वो अपनी आंखें बन्द किये हुये इस मोहक पल का आनन्द ले रही थी. मेरा कड़क लण्ड अब तेजी से चलने लग गया था. अब मैं उसके ऊपर लेट गया था और उसके बोबे पकड़ कर मसल रहा था. उसके मुख से मस्ती की किलकारियाँ फ़ूट रही थी…

काफ़ी देर तक उसकी गाण्ड चोदता रहा फिर अचानक ही मुझे ध्यान आया कि उसकी चूत तो चुदना बाकी है.

मैंने पीछे से ही उसकी गाण्ड से लण्ड निकाल कर काजल को चूत चोदने के कहा.

वो तुरन्त सीधी लेट गई और मैंने उसके चूतड़ों के नीचे तकिया सेट कर दिया. उसकी मोहक चूत अब उभर कर चोदने का न्यौता दे रही थी. उसकी भीगी चिकनी चूत खुली जा रही थी. मेरा मोटा लण्ड उसकी गुलाबी भूरी सी धार में घुस पड़ा.

उसके मुख से उफ़्फ़्फ़ निकल गई. अब मैं उसकी चूत चोद रहा था. लण्ड गहराई में उसकी बच्चे दानी तक पहुंच गया. वो एक बार तो कराह उठी.

मेरे लण्ड में जैसे पानी उतरने लगा था. उसकी तकिये के कारण उभरी हुई चूत गहराई तक चुद रही थी. उसे दर्द हो रहा था पर मजा अधिक आ रहा था. मेरा लण्ड अब उसकी चूत को जैसे ठोक रहा था. जोर की शॉट लग रहे थे. उसकी चूत जैसे पिघलने लगी थी. वो आनन्द में आंखे बंद करके मस्ती की सीत्कार भरने लगी थी. मुख से आह्ह्ह उफ़्फ़्फ़्फ़ और शायद गालियाँ भी निकल रही थी. चुदाई जोरों पर थी… अब चूत और लण्ड के टकराने से फ़च फ़च की आवाजें भी आ रही थी.

अचानक दीदी की चूत में जैसे पानी उतर आया. वो चीख सी उठी और उसका रतिरस छलक पड़ा. उसकी चूत में लहर सी चलने लगी. तभी मेरा वीर्य भी छूट गया… उसका रतिरस और मेरा वीर्य आपस में मिल गये और चिकनाई बढ़ गई. हम दोनों के शरीर अपना अपना माल निकालते रहे और एक दूसरे से चिपट से गये. अन्त में मेरा लण्ड सिकुड़ कर धीरे से बाहर निकलने लगा और उसकी चूत से रस की धार बाहर निकल कर चूतड़ की ओर बह चली. मैं एक तरफ़ लुढ़क गया और हाँफ़ने लगा. दीदी भी लम्बी लम्बी सांसें भर रही थी… हम लेटे लेटे थकान से जाने कब सो गये. हमें चुदाई का भरपूर आनन्द मिल चुका था.

अचानक मेरी नींद खुल गई. दीदी मेरे ऊपर चढ़ी हुई थी और मेरे लण्ड को अपनी चूत में घुसाने की कोशिश कर रही थी.

‘भैया, बस एक बार और… ‘ बहना की विनती थी, भला कैसे मना करता. फिर मुझे भी तो फिर से अपना यौवन रस निकालना था. फिर जाने दीदी की नजरें इनायत कब तक इस भाई पर रहें.

मैंने अपनी अंगुली उसके होंठों पर रख दी और तन्मयता से सुख भोगने लगा. मेरे लण्ड ने उसकी चूत को गुडमोर्निंग कहा और फिर लण्ड और चूत दोनों आपस में फ़ंस गये… दीदी फिर से मन लगा कर चुदने लगी… हमारे शरीर फिर एक हो गये… कमरा फ़च फ़च की आवाज से गूंजने लगा… और स्वर्ग जैसे आनन्द में विचरण करने लगे…

बारिश बन्द हो चुकी थी… सवेरे की मन्द मन्द बयार चल रही थी… पर यहाँ हम दोनों एक बन्द कमरे में गदराई हुई जवानी का आनन्द भोग रहे थे. लग रहा था कि समय रुक जाये… तन एक ही रहे… वीर्य कभी भी स्खलित ना हो… मीठी मीठी सी शरीर में लहर चलती ही रहे…

पाठको, जैसा कि आपको मालूम है कि यह एक काल्पनिक कहानी है, वास्तविकता से इसका कोई लेना देना नहीं है… और यह मात्र आपके मनोरंजन की दृष्टि से लिखी गई है. यदि आपको लगता है कि यह कहानी मनोरंजन करती है तो प्लीज, एक बार लण्ड को कस कर पकड़ कर मुठ जरूर मार लें.

धन्यवाद! Antarvasna Stories

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