Our site can help you find a professional massage girl in Nalanda who will help you relax in the best manner possible. We connect you with professional therapists who can offer you a massage that will make you feel better and more relaxed. The pros on our list are ready to provide you with a fantastic experience at your house or in one of their particular spots, whether you want to relax or get away from it all.
Find Related Category Ads
Massage is currently one of the finest methods to relax your mind, body, and overall health. Our website makes it easy to locate the top massage services in Nalanda that meet your demands. This will be a one-of-a-kind and calming experience for you.
Tottaa wants to make it simple for clients to find the top masseuse. The Nalanda massage service providers on our list offer the greatest quality, comfort, and competence, whether you want a full-body massage or a massage for a particular location.
Tottaa is not only a list of masseuses, it’s also a secure location for them to show off what they can do. People in Nalanda who are seeking massage services may find them on our website. This makes them easier to find and gets them more appointments.
Advertisers may simply put up profiles, offer their services, and talk about pricing and discounts on our sites. This makes sure that the relevant people notice your Nalanda massage service, which makes it easier to obtain more customers.
There are a lot of different types of massage services on our site, so you may choose one that works for you. You may choose the kind of treatment that works best for you, whether it’s profound rest or a particular type of therapy.
A calm and gentle way to ease muscular tension and improve blood flow. This Nalanda massage is perfect for you if you want to relax and forget about your concerns.
This approach employs a lot of pressure to get to deeper muscle layers. It’s helpful for folks who have muscular discomfort or stiffness that won’t go away. There are specialists on our profiles of massage girls in Nalanda who are good at deep tissue treatments that function effectively.
Calming massage strokes and essential oils are beneficial in making people feel improved both emotionally and physically. Most massage companies in Nalanda employ the use of custom oil preparations to make you feel good.
A therapy that wakes you up by using a mix of regular massage, stretching, and compression. This traditional massage in Nalanda helps you relax, become more flexible, and get your mind and body back in harmony.
Heated stones are placed on various parts of the body to help with deep muscular tightness. People who want to feel good, relax, and help their muscles recover quickly can use this massage service in Nalanda
Tottaa makes it simple and fast to book. With our listings, you can see what kind of massage you want, read about the providers, see that they are free and then contact them directly. After you choose, you can book a massage in Nalanda at your convenient time and location. In order to get your desired massage services, apply the following simple steps:
Take a peek around our site to view a few massage professionals. Each listing gives you information about the many sorts of massages, how long they last, how much they cost, and where they are situated. This makes it easier to choose the finest ones.
Examine the profiles carefully to compare how the services, talents, and reviews posted by customers differ. This phase makes sure you choose a business that has the style, pricing, and supply you desire.
When you have decided, use the information that you are offered so that you can contact them directly. One can communicate it to the massage giver thus making it understood what massage you want at what time and when.
The date, time and place of the service, which could be your home, a hotel or the spa where the therapist may be found. You also need to agree on the payment method and any other accords prior to commencement of the course.
All you have to do on the day of the appointment is have your area ready for the house visit. The remainder will be handled by the expert. Take it easy and enjoy a massage that is made just for you.
To locate a professional who can meet your needs, read our biography, reviews and advertising.
Yes, many of the therapists on our site will come to your house so you may feel safe and at ease.
You may pick based on talents since most adverts provide their qualifications in their profiles.
It would be advisable to make a reservation earlier to guarantee that you would be able to get a massage, particularly against the prevalent services of massage.
Not at all. Tottaa exclusively connects users with service providers. The doctor gets to choose how to handle payment.
प्यारे दोस्तो, मेरा नाम Sex Stories वीरू, बीस साल का हूँ। मैं कॉलेज के प्रथम वर्ष में हूँ। मैं एक मध्यवर्गीय परिवार से हूँ। मैं शर्मीले स्वभाव का सीधा सा दिखने वाला लड़का हूँ, राजस्थान के श्री गंगानगर में रहता हूँ।
मैं आपको अपनी पड़ोसन किशोर लड़की जिया के साथ हुए पहला अनुभव बताने जा रहा हूँ। वह 18 साल की एक ख़ूबसूरत और गोरी-चिट्टी लड़की है, उसकी चूचियाँ इतनी मदमस्त कर देने वाली हैं कि किसी का भी लण्ड खड़ा हो जाए। मेरा और उसका घर एक दम साथ-साथ था। मेरे को वो बहुत अच्छी लगती थी। पर मैं उससे कभी बात नहीं कर पाया, मेरा मन बहुत करता था उससे बात करने का और उसको पटाने का, पर यह कैसे होगा समझ नहीं आता था।
मेरे को एक आईडिया आया, उसका एक छोटा भाई था राहुल। मैंने उसको पटाने की सोची, अगर इसको पटा लिया तो जिया को पटाना आसान हो जायेगा। इसलिए मैं जिया के भाई को पटाने लगा और उसके साथ खेल खेलने लगा। उसको अपने घर पर बुला कर पीसी पर गेम भी खिलाता, इस तरह वो मेरे साथ रहने लग गया और कभी कभी मैं भी उसके घर भी चला जाता। कुछ समय बाद जिया से भी मेरी थोड़ी-थोड़ी बातें होने लग गई और हम एक साथ मिल कर खेलने लग गए।
पर मैं तो जिया को पटा कर चोदना चाहता था, पर कैसे हो सकता था। मैं नए-नए आईडिया सोचने लग गया कि किस तरह जिया को चोदूँ, मेरे मन में फ़िर एक आईडिया आया।
मैं एक ब्लू फिल्म की सीडी लेकर आया, उस दिन उसके घर वाले बाहर गए हुए थे। मैंने अपनी छत से उसकी छत पर पर उस सीडी को फेंक दिया और अपनी छत पर घूमने लग गया। उसने मुझे देखा और वो भी छत पर आ गई और आते ही उसको वो सीडी मिल गई। वो मेरे पास उस सीडी को ले कर आई और बोली- यह सीडी छत पर मिली है।
मैंने पूछा- क्या है इसमें ?
तो उसने बोला- मुझे नहीं पता, मुझे तो छत पर पड़ी मिली है।
मैं उससे कहा- चलो देखते हैं कि क्या है इसमें!
तो वो राजी हो गई और मैं अपनी छत से उसकी छत पर आकर उसके घर पर चला गया।
वो जाते ही सीडी प्लेयर में उस सीडी को लगाने लगी। मेरा दिल बहुत जोर जोर से धक-धक कर रहा था, पता नहीं क्या होगा। कहीं उसने अपने घर वालों को इसके बारे में बता दिया तो?
मैं बहुत डर गया था।
उसने सीडी लगा कर टीवी ऑन किया। मैं अभी भी डर रहा था और टीवी चालू होते ही एक लड़का और एक लड़की आपस बातें कर रहे थे।
उसने मुझ से कहा- यह कोई हॉलीवुड फिल्म लगती है!
थोड़ी देर में उस लड़के ने उस लड़की के सारे कपड़े उतार दिए।
उसने एक दम अनजान की तरह कहा- ये क्या कर रहे हैं?
तो मैंने उससे कहा- यह एक ब्लू फिल्म है। पहले नहीं देखी क्या कभी?
उसने कहा- नहीं तो।
फिर धीरे धीरे वो लड़का उस लड़की की चूचियाँ दबाने और चूसने लग गया। उस लड़की ने उस लड़के के भी सारे कपड़े उतार दिए और फिर उसका लण्ड चूसने लग गई।
उसने कहा- मुझे तो शर्म आ रही है, कितने गंदे है ये।
मैंने उससे कहा- ऐसे तो सब लोग ही करते हैं, इसको ही तो सेक्स बोलते हैं।
मैंने उससे पूछा- तूने कभी सेक्स किया है?
उसने कहा- नहीं किया।
मैंने उससे कहा- इसमें बहुत मजा आता है।
तभी मैंने उसके पास जाकर बैठ गया और अपना हाथ धीरे उसकी चूचियों पर रखा, तो उसने मेरा हाथ हटा दिया और बोली- यह क्या कर रहे हो तुम?
मैंने कुछ न बोलते हुए फिर से अपना हाथ उसकी चूचियों पर रखा और उसके टॉप के ऊपर से चूचियाँ दबाने लगा। उस समय उसकी शक्ल देख कर ऐसा लग रहा था कि उसको मजा आ रहा था। फिर मैं दोनों चूचियों को एक साथ मसल मसल कर दबाने से ऐसा लगा और फिर मैं उसके टॉप मैं हाथ डाल कर चूचियों दबाने लगा और वो सिसकियाँ लेने गई। अब मुझे पता चल गया कि उसको मजे आ रहे हैं।
मैंने उसको पूछा- मज़ा आ रहा है क्या?
तो उसने कहा- हाँ, आ रहा है। क्या इसको ही सेक्स कहते हैं?
मैंने कहा- अभी तो कुछ भी नहीं हुआ है, अभी तो और बहुत मजे आयेंगे।
उसने- कहा कैसे?
तो मैं कहा- तुझे मेरा साथ देना होगा!
तो उसने हामी भर दी।
मैंने उसका टॉप और जींस उतार दी। उसने लाल रंग की ब्रा और पैंटी पहन रखी थी। वो बहुत ही गोरी थी और गोरे रंग पर लाल रंग बहुत सुन्दर लग रहा था। फिर मैंने दोनों को उतार फेंका। मैं पहली बार किसी लड़की की नंगी चूत के दर्शन कर रहा था, उसकी चूत में हल्के भूरे रंग के बाल थे।
उसने कहा- मुझे शर्म आ रही है!
और उसने अपने दोनों हाथ अपनी चूत और मोमो पर लगा लिए।
मैंने कहा- इसमें शर्माने की क्या बात है? सेक्स तो नंगे होकर ही किया जाता है।
मैंने प्यार से उसके दोनों हाथ हटा दिए और उसकी दोनों चूचियों को चूमने लगा तो वह पागल होने लगी। मैंने दूसरा हाथ उसकी चूत पर रखा, उसकी चूत एक दम गीली हो चुकी थी। अब मैं समझ गया कि ज़िया एक दम चुदने को तैयार है।
पर मैं उस को इतनी जल्दी नहीं चोदना चाहता था। इसलिए मैं उसकी चूत में अपनी एक उंगली डालने लगा और थोड़ी सी उंगली अन्दर जाते ही वह चिहुँक उठी,”दर्द हो रहा है।”
तो मैंने कहा,”जान पहली बार ज़रा दर्द होता है, आज तो इस दर्द सहन करना ही पड़ेगा।”
उसने कहा,” ठीक है।”
फिर मैं उसको ऊँगली से चोदने लगा और उसके मुँह से सी सी की आवाज आ रही थी।
फिर मैंने उसको मेरी शर्ट-पैंट उतारने के लिए बोला।
उसने कहा- मुझे शर्म आ रही है।
मैंने कहा- अब काहे की शर्म!
और मेरे कपड़े उतारने के लिए बोला तो उसने मेरी शर्ट-पैंट उतार दी और लगे हाथ अण्डरवियर भी उतारने को बोला। ना ना करते हुए उसने उसको भी उतार ही दिया। उसने मेरा लण्ड देखा और अपनी आँखें बंद कर ली।
मैंने उससे कहा- यह प्यार करने की चीज है इससे मुँह नहीं मोड़ा करते।
फिर मैंने उसके दोनों हाथ आँखों से हटा दिए और उसको अपना लण्ड दिखाते हुए कहा- इसको लण्ड बोलते हैं और इसको ही चूत में डाल कर चुदाई करते हैं जिससे चूत और लण्ड का मिलन होता है। इस को अन्दर डालने से दोनों को बहुत मजा आता है!
तो उसने कहा- इतना बड़ा मेरी चूत में कैसे जायेगा? यहाँ तो उंगली भी ठीक से अन्दर नहीं जा रही है।
मैंने कहा- तुम चिंता मत करो, सब कुछ हो जायेगा। पर इसको चूत में डालने से पहले चूसना पड़ता है।
मैंने अपना लण्ड पकड़ कर उसके मुँह में डाल दिया। पहले तो उसने मुँह में लेते ही निकाल दिया।
मैंने उसके मुँह में फिर से अपना लण्ड डाल दिया तो इस बार वो धीरे धीरे मेरे लण्ड का सुपारा चूसने लग गई और धीरे धीरे अपना सारा लण्ड उसके मुँह में अंदर-बाहर करने लग गया।
फिर मैंने उस को बेड पर लिटाया और 69 की अवस्था में आकर उसकी चूत को उंगली और जीभ से चोदने लगा।
वो सिसकारियाँ लेने लगी और बोली- वीरू! थोड़ा धीरे करो, मुझे दर्द हो रहा है।
मैंने कहा- दर्द तो हो रहा है पर मज़ा आ रहा है या नहीं?
वो बोली- हाँ! मज़ा तो आ रहा है पर दर्द भी हो रहा है।
मैंने कहा- थोड़ी देर में यह दर्द खत्म हो जाएगा।
उसके मुँह से कामुक सिसकियाँ निकल रही थी। उसके मुँह से आवाजें आने लगी- सी… सी… स्… आ… अच्छा लग रहा … और चूसो और!
उसकी चूत एक दम गीली हो चुकी थी और उसकी चूत ने अंदर से सफ़ेद सफ़ेद सा पानी छोड़ दिया जिसे मैंने अपने मुँह पर महसूस किया और मेरा भी वीर्य निकलने वाला था और मैं उसके मुँह में झड़ गया।
उसने कहा- यह क्या है?
मैंने कहा- प्यार की निशानी है।
उसने मेरा सारा वीर्य पी लिया।
इसके बाद मैंने उसे सोफे पर बैठा दिया और अंदर से तेल की शीशी ले आया और उसकी चूत और अपने लण्ड पर तेल लगा लिया फिर उसकी टांगों को अपने कंधों पर रख लिया। इससे उसकी चूत मेरे लण्ड के करीब आ गई और मैं अपना लण्ड उसकी चूत पर रगड़ने लगा। ज़िया सिसकारियाँ भरने लगी।
फ़िर मैंने अपना लण्ड उसकी चूत के मुहाने पर रखा और अंदर करने लगा। जिया की चूत कुंवारी होने के कारण काफी कसी थी। मैंने जोर लगा कर अपना लण्ड उसकी चूत में ठेल दिया। लण्ड का सुपारा ही अंदर गया था कि जिया जोर जोर से चीखने लगी। अपने हाथ-पाँव मारने लगी और बोलने लगी- मुझे छोड़ दो! मुझे कुछ नहीं करना।
मैंने अपने हाथों से उसका मुँह बंद कर दिया और जोर-जोर से धक्के लगा कर अपना लण्ड उसकी चूत में घुसाने लगा। अभी आधा ही अंदर गया था कि उसकी आँखों से आंसू आने लगे और उसका मुँह बंद था। मैंने धक्के लगाने चालू रखे। मेरे हाथ से बंद होने के कारण उसके मुँह से गूँ-गूँ की आवाजें आने लगी। मैं समझ गया कि उसको मजे आ रहे हैं, मैंने अपना हाथ उसके मुँह से हटा लिया, उसके मुँह से सी सी की आवाज आ रही थी।
मुझे उस किशोर लड़की की चूत से कुछ बहने का अहसास हुआ, नीचे देखा तो उसकी चूत पूरी खून से भरी हुई थी। मैंने इस पर ध्यान ना देते हुए एक और जोर का झटका दिया जिससे मेरा तीन चौथाई लण्ड उसकी चूत में समा गया। इस झटके के लिए वो तैयार नहीं थी। और इस झटके के साथ ही जिया अपना सर जोर जोर से इधर उधर पटकने लगी। अब मैं थोड़ी देर के लिए रुका और उसके मम्मे मसलने लगा। उसके होठों को चूमने लगा, अपने लण्ड को धीरे धीरे आगे पीछे करने लगा। अब उसका सर पटकना कुछ कम हुआ और वो भी धीरे धीरे अपने चूतड़ उछालने लगी।
वो बोली- तुमने तो मेरी जान ही निकाल दी थी, एक बार लगा कि मैं जिन्दा बच पाउंगी।
मैं बोला- मेरी जान! दर्द तो एक बार हुआ होगा, लेकिन अब मज़ा आ रहा है या नहीं?
जिया ने कहा- हाँ, मज़ा तो बहुत आ रहा है, बस ऐसे ही अपने लण्ड को मेरी चूत में डालते रहो। सच में आज ज़न्नत जैसा अहसास हो रहा है।
मैंने कहा- मेरी जानू! अभी तुमने ज़न्नत देखी ही नहीं है, आगे आगे देखो, मैं तुम्हें क्या क्या और दिखाता हूँ।
इतना कहते ही मैंने एक जोरदार धक्का लगा कर अपना पूरा लण्ड उसकी चूत में घुसा दिया। जिया इस अचानक हुए हमले के लिए बिल्कुल तैयार नहीं थी, इस कारण उसकी जोर की चीख निकल गई और बोली- प्लीज़! तुम अपना लण्ड मेरी चूत से निकाल लो, मुझे बहुत दर्द हो रहा है, मैं मर जाऊंगी, प्लीज़ निकाल लो अपना लण्ड! मैं तुम्हारे आगे हाथ जोड़ती हूँ।
मैं उसकी बातों पर ध्यान ना देकर उसके मम्मे चूसने लगा और अपने लण्ड को उसकी चूत धीरे धीरे आगे पीछे पेलने लगा। थोड़ी देर में उसको पूरा मज़ा आने लगा। उसकी सील टूट चुकी थी और वो अब मेरा लण्ड अपनी चूत में आराम से अंदर ले रही थी। वो अपनी गाण्ड ऊपर नीचे उछालने लगी और बोलने लगी- यस यस्स्स और जोर से चोदो वीरू , मेरी चूत फ़ाड़ दोओअओ, चोदो और जोर से चोदते जाओ, मेरी चूत को फ़ाड़ दो और मेरी चूत की प्यास को मिटा दो।
इस पर मैं उसको और जोर-जोर से चोदना शुरु कर दिया।
मैंने अपनी गति बढ़ाई, फिर भी वह ज़ोर से करो! की रट लगा रही थी।
मैंने कहा- हाँ जान और ज़ोर से करूँगा।
फिर मैंने उसके दोनों पाँव उठाए और काफी तेज़ी से लण्ड को उसकी चूत के अन्दर-बाहर करने लगा। और थोड़ी ही देर में मैंने अपना सारा माल उसकी चूत में डाल दिया। वो भी मेरे साथ ही झड़ गई, फिर हम दोनों एक साथ ले लेट गए।
फिर तो मैंने और जिया ने एक बार और सेक्स किया! उसको घोड़ी स्टाईल में खड़ा कर उसकी गांड में लण्ड घुसाने लगा। उसकी गांड भी बहुत कसी थी। मैंने पूरा दम लगा कर पूरा का पूरा लण्ड उसकी गांड में पेल दिया और धक्के मारने लगा। एक बार तो उसको दर्द हुआ फिर उसको और मज़ा आने लगा। उसके चूतड़ मुझे बहुत ही आनंद दे रहे थे। दो-तीन मिनट में ही वो अपने चूतड़ उठा-उठा कर मेरे हर धक्के का जवाब देने लगी। मैंने अपनी स्पीड और बढ़ा दी और लण्ड को गांड से निकाल कर फिर से उसकी चूत में डाल दिया। कुछ ही देर में उसकी चूत से पानी निकलने लगा।
उसने कहा- खूब ज़ोर-ज़ोर से धक्का लगाओ।
मैं समझ गया कि वो झड़ने वाली है। मैंने बहुत ही तेज़ी के साथ उसकी चुदाई शुरू कर दी।
वो बोली- आआआ!!! मैंऽऽऽ आआआऽऽऽ रहीऽऽऽ हूँऽऽऽ और तेज़ ऽऽऽ और तेज़ ऽऽऽ
उसकी चूत से पानी निकलने लगा और मेरा सारा लण्ड भीग गया। मैं भी बिना रुके उसे आँधी की तरह चोदता रहा। लगभग बीस मिनट तक चोदने के बाद मैं उसकी चूत में ही झड़ गया। इस दौरान वो भी तीन बार झड़ चुकी थी। लण्ड का पूरा पानी उसकी चूत में निकल जाने के बाद मैं हट गया।
अब मुझे दर लगने लगा कि वो कहीं गर्भवती न हो जाये इसलिए मैंने उसको ई-पिल लाकर खिला दी।
अब जब कभी वो अकेली होती तो हम सेक्स करते और आज तक मैं उसके साथ सेक्स कर रहा हूँ।
दोस्तो यह मेरी पहली कहानी है किशोर लड़की की चुदाई की … कृपया अपने विचार मुझे जरूर भेजें … धन्यवाद। Sex Stories
प्यारे दोस्तो, मैं राहुल कोटा Antarvasna से एक बार फिर से आया हूँ एक मजेदार सच्ची कहानी लेकर। आशा है कि कोटा की सभी लड़कियों को पसंद आएगी ! तो इसी आशा के साथ मैं अपनी सच्ची कहानी शुरू करता हूँ।
यह घटना है पिंकी की जिसका एक और नाम पूजा भी है। पूजा हमारी ही जाति की है। आज से करीब चार साल पहले उसकी शादी हो चुकी है और अभी उसके दो बच्चे भी हैं। देखने में थोडी सांवली है पर नाक नक्श तो ऐसे तराशे हुए है जैसे पूरे जिस्म को सोच समझकर बनाया गया हो।
उसकी शादी से पहले मेरी और उसके रिश्ते की बात चली थी पर हम दोनों की कुंडली नहीं मिल पाने के कारण हमारी शादी नहीं हो पाई थी। उसकी शादी के बाद हम दोनों का बात करना और मिलना सब बंद हो गया था।
अभी लगभग पंद्रह दिन पहले की बात है, हमारे समाज में एक शादी थी, वो भी हमारे घर से कुछ ही दूरी पर। मैं एक प्राइवेट कंपनी में जॉब करता हूँ, शाम को छ: बजे मैं घर पर आया तो मेरी मम्मी ने कहा कि मैं उनको शादी में छोड़ आऊं।
मम्मी को शादी में छोड़कर मैं सीधा घर पर आ गया। इस समय मेरे सिवा घर पर कोई भी नहीं था। मैं टीवी देखने लग गया। कुछ देर बाद किसी ने दरवाजा खटखटाया। मैंने दरवाजा खोला तो देखा कि सामने पूजा और मेरे मामा का लड़का खड़ा था। मैं उसको देखकर चौंक गया कि यह कैसे आ गई।
मैंने उनको बिठाया और पानी पिलाया। उसने मुझसे कहा कि उस शादी में वो भी आई है। उसने मम्मी से मेरे बारे में पूछा होगा तो मम्मी ने बताया कि वो घर पर ही है, और वो मुझसे मिलने घर पर आ गई। वो केवल पांच मिनट ही बैठी और जाने लगी। वो बाहर निकली ही थी कि वापस अन्दर आई और मुझसे मेरे मोबाइल नंबर देने को कहा तो मैंने दे दिया। तब उसने मुझे कॉल करने को कहा। उस दिन की वो बात ख़त्म हो गई।
दो तीन दिन बाद मेरे मोबाइल पर किसी नंबर से मिस कॉल आया। मैंने दुबारा उसी नंबर पर कॉल किया तो पता चला कि वो नंबर पूजा का है। बस उस दिन से हमारे बीच बातचीत फिर से शुरू हो गई। उस दिन से मेरे अन्दर का सेक्स भी उसके लिए जाग गया था।
कुछ दिन बाद उसका जन्मदिन था तो मैंने उसे कॉल करके विश किया और उससे पूछा कि बताइए आपको क्या चाहिए।
तो उसने कहा- जो आपका दिल हो दे देना !
तो मैंने कह दिया- फिर जो भी मैं देना चाहूँ, वो आपको लेना पड़ेगा !
तो उसने हाँ बोल दिया।
मैंने कहा- फिर मैं कब आ सकता हूँ आपके यहाँ?
पूजा ने कहा- सुबह आठ से लेकर शाम को सात बजे तक कोई भी नहीं होता है घर पर ! तो आप इस बीच किसी भी समय पर आ जाना। उसके इस तरह से कहने का मतलब शायद मैं समझ चुका था इसलिए एक दिन शनिवार को मैं घर से दस बजे निकलकर उसके घर पर चला गया।
उसने मुझे बिठाया और चाय पिलाई। वो थोड़े गरीब लोग थे और घर में छोटे छोटे केवल दो ही कमरे थे। एक कमरे में उसके बच्चे सोये हुए थे। कुछ देर बाद मैंने उससे कहा कि मुझे दूसरा कमरा भी देखना है तो वो मेरे साथ दूसरे कमरे में आ गई। वहाँ पर लाइट नहीं थी इसलिए अँधेरा था। उसने आगे होकर मुझसे पूछ लिया कि बताओ आप क्या देना चाहते थे मुझे !
तो मैंने बिना शर्म किये सीधे बोल दिया- मैं तुमको किस करना चाहता हूँ और मैं तुमको बहुत पसंद भी करता हूँ !
पहले तो उसने मना किया और जाने लगी पर मैंने उसका हाथ पकड़कर अपनी ओर खींच लिया। उसने दूर होने की कोशिश नहीं की। मैंने अपने होंठ उसके होंठों पर रख दिए और किस करने लगा, वो भी मेरा साथ दे रही थी। तब मुझे लगा कि वो भी यही चाहती है। मैं उसे करीब दस मिनट तक किस करता रहा।
उसने साड़ी पहन रखी थी पर मैंने पहले उसके ब्लाउज के हुक खोल दिए और ब्रा को भी उतार दिया। इसका उसने थोड़ा विरोध तो किया पर उसमें उसकी मर्जी भी शामिल थी। फिर मौका देखकर मैंने अपनी जींस खुद ही उतार दी और अंडरवियर भी। बहुत देर तक मैं उसके स्तनों को चूसता रहा। सही में दोस्तो, इतना दूध भरा था उनमें कि मैं तो मस्त हो गया। फिर मैंने उसको अपना लंड चूसने के लिए कहा तो उसने साफ़ साफ़ मना कर दिया।
मैंने कहा- लंड तो तुमको चूसना ही पड़ेगा !
उसने मुझे कहा कि लंड तो उसने आज तक उसके पति का भी नहीं चूसा। तो मैंने कहा कि मैं तुम्हारा पति नहीं हूँ ! लंड तो तुमको मुंह में लेना ही पड़ेगा !
बहुत देर के बाद वो केवल कुछ सेकंड के लिए मेरे लंड को मुंह में लेने को तैयार हुई। मैंने उसको अपने पैरों पर बिठाया और लंड को उसके होंठों से लगा दिया। जैसे ही उसने लंड को मुंह में लिया, मैंने पीछे से उसके सर को पकड़कर आगे के तरफ धक्का दिया जिससे पूरा लंड उसके मुंह में चला गया और लंड को कस कर उसके मुंह में डालकर रखा। उसने दूर हटने की बहुत कोशिश की पर मैंने उसके सर को कसकर पकड़ रखा था और उसके मुंह को चोद रहा था।
मैं करीब दस मिनट तक उसके मुंह को चोदता रहा और उसके मुंह में ही झड़ गया। मैंने उसका सर अभी भी अपने लंड से अलग नहीं होने दिया। इस कारण से उसको मेरा सारा वीर्य पीना पड़ा। उसकी आँखों से आंसू आ रहे थे। फिर मैंने उसको चूमना शुरू कर दिया। थोड़ी देर बाद जब मैं फिर से सेक्स के लिए तैयार हो चुका था तो मैंने उसे जमीन पर पटक कर चूमना शुरू किया और धीरे धीरे उसको उसकी साड़ी से आजाद कर दिया और पेंटी भी उतार दी।
पहले तो मैंने उससे ऐसे ही पूछा- नीचे तो डाल सकता हूँ न लंड को?
तो उसने तपाक से जवाब दिया कि उन्होंने (उसके पति ने) पहले ही इसको चौड़ा कर रखा है, अगर तुम डाल भी लोगे तो क्या हो जाएगा ! अब डाल भी दो, बहुत बेचैनी हो रही है।
मैंने अपने लंड को उसकी चूत के मुंह पर रखा और एक धक्का मारा तो वो सीधा चूत की गहराइयों में चला गया। सच में लंड के अन्दर जाने का तो मुझे एहसास ही नहीं हुआ। तब मुझे पता लगा कि साला उसका पति उसे कितना चोदता होगा। पर मुझे क्या ! मुझे तो केवल हल्का होना था। मैंने उसकी चूत में लंड के धक्के मारना शुरू कर दिया. करीब आधे घंटे तक मैं उसे चोदता रहा। फिर लंड को निकाल कर उसके वक्ष के बीच की दरार में रगड़ने लगा। दोस्तो, इसका भी एक अलग ही आनंद है। और फिर कुछ देर बाद मैंने अपना वीर्य उसके वक्ष पर छोड़ दिया। इस सारे प्रोग्राम के बाद वो कुछ ज्यादा ही खुश लग रही थी, पर जाने क्यूँ मुझे अच्छा नहीं लगा और वहां केवल पांच मिनट रुक कर वापस घर आ गया।
अब वो मुझे रोज कॉल करती है, पर मैं सोचता हूँ कि हमारे बीच जो भी हुआ वो हम दोनों की गलती थी। पर मैं अब क्यूँ उसकी शादीशुदा जिन्दगी को बर्बाद करूँ। इसलिए मैं उसका फ़ोन रिसीव नहीं करता हूँ। हांलांकि मेरे ऑफिस और उसके घर के बीच में ज्यादा से ज्यादा दो किलोमीटर की दूरी होगी पर फिर भी मैं वहां नही जाना चाहता हूँ।
कई बार वो मुझे मैसेज भी करती है कि वो मुझसे लाइफ टाइम सेक्स चाहती है पर वो मेरी ही जाति की होने के कारण मुझे डर सा लगता है। इससे पहले मैं नहीं जानता था कि किसी लड़की में सेक्स को लेकर इतना क्रेज भी होता है।
तो दोस्तो, यह थी मेरी और पूजा की कहानी। इस कहानी में जैसा कि सब बताते है कि चोदते वक़्त लड़की के मुंह से जोर जोर से सिसकारियां निकलती रही, मैंने ऐसा कुछ नहीं बताया है। क्यूंकि उस समय ऐसा कुछ हुआ ही नहीं ! हाँ थोड़ा उसको दर्द जरुर हो रहा था पर इतना नहीं कि वो चिल्लाती रहे। मैंने उसको न तो घोड़ी बनाकर चोदा और ना ही कुतिया बनाकर !
ये कह सकते है कि वो केवल एक सधारण सेक्स था।
आपके संदेशों के इन्तजार में आतुर ! Antarvasna
Kota me call girl services aur available options ke liye yahan detail dekhi ja sakti hai.
मैंने रीता को तीन Antarvasna बार दिन और चार बार रात में चोदा। फिर एक दिन नीलम ने मुझ से चुदवा ही लिया।
पर कैसे?
वो आज मैं आपको बताता हूँ कि कैसे मैंने रीता के बाद नीलम को चोदा!
अगले दिन मैं जल्दी 5 बजे ही जगा, जब सब लड़कियाँ नहाती थी और खिड़की के पास बैठ गया। जब सविता आई तो उसने मेरे कमरे की तरफ झांका और बाथरूम में चली गई। और जाते ही उसने गीता की गांड पर हाथ मारा और कहा- क्या हाल है मेरी चुदक्क्ड़?
और मेरी खिड़की की तरफ मुँह करके पूरे कपड़े उतार कर नंगी हो गई और गीता से कहने लगी- यार गीता, मेरी चूत में बहुत आग लगी है, किसी असली लंड से इसको चुदवा दे!
और अपनी चूत के होठों को खोलते हुए उसे मेरी तरफ मुँह करके दिखाने लगी जिससे मुझे उसकी चूत अन्दर तक लाल दिखाई दी और मेरा हाथ अपने लंड पर चला गया।
इतने में गीता बोली- अपने राजेश के लंड से चुदवा ले ना!
इतने में बाथरूम में रीता घुसते हुए बोली- यार कौन राजेश से चुदवाना नहीं चाहता? सभी चाहती हैं पर चुदवाने का बहाना तो तलाश करो!
और रीता ने अपनी एक उंगली सविता की चूत में डाल दी तो इस पर सविता बोली- अब इसे तेरी उंगली की नहीं, राजेश के लंड की जरूरत है!
फिर सभी लड़कियाँ मस्ती से नहाकर अपने कॉलेज चली गई और मैं भी नहाकर अपने कॉलेज चला गया पर जब मेरा दिल नहीं लगा तो वापस कमरे पर आ गया।
वहाँ देखा कि नीलम बाथरूम में नंगी ही नहा रही है!
तो मैं भी कपड़े धोने के बहाने पूरे कपड़े उतार कर सिर्फ अंडरवीयर में बाथरूम में चला गया। नीलम मुझे देख कर बाथरूम में इधर-उधर चक्कर लगाये क्योंकि वो अपने कमरे से नंगी ही नहाने आई थी। तो मैंने कहा- क्या हुआ नीलम जी? आप ऐसे इधर उधर क्यों भाग रही हो? अब तो मैंने आपका सब कुछ देख लिया है, चूत भी चूचियाँ भी! बड़ी मस्त चूत और चूचियाँ हैं!
इतना सुनकर वो बोली- मेरा इतना देख कर भी अपना लंड इस टेंट में छिपा रखा है?
तो मेरा लंड निक्कर में फड़फड़ाने लगा। नीलम मेरी निक्कर नीचे सरका कर उसे चूसने लगी तो मेरा लंड एक लोहे की छड़ की तरह हो गया।
मैं बोला- साली, यदि तू मेरा चूस रही है तो कुछ मुझे भी चुसा!
और मैंने उसकी टांग पकड़ के उसकी टांग ऊपर उठा के उसे उल्टा लटका दिया और उसकी चूत चूसने लगा और वो मेरा लंड!
15 मिनट के बाद वो सी सी… करके अपनी टांग दबाने लगी और झड़ गई। मैं उसकी चूत का नमकीन और स्वादिष्ट रस पी गया। फिर मैंने उसे खड़े खड़े ही पल्टा और उसको लंड पर बिठा कर चूत में लंड घुसा दिया और चोदने लगा। वो भी मेरे कन्धों को पकड़ कर अपनी गांड हिलाने लगी। अब वो पूरी मस्ती में आ चुकी थी, बोली- राजेश, प्यारे मैं तुझे पहले ही दिन देख कर समझ गई थी कि तू ही मेरी चूत की आग बुझा सकता है। आज मेरी चूत की आग चोद-चोद कर बुझा दे।
मैं बोला- मैं तो तब ही समझ गया जब आपको मैंने बाथरूम में झांट काटते हुए देखा और आपकी गुलाबी चूत ने मेरा जीना हराम कर रखा था। यह लंड मुझे जीने नहीं दे रहा था, आज मुझे शांति मिली है जब मैंने तेरी चूत में इसे घुसा दिया है। अब रोज तेरी चूत की धज्जियाँ उड़ाया करूँगा।
फिर मैं उसे दबा कर चोदता रहा और वो भी मुझे खूब गांड हिला कर उकसाती रही। जब मैं उसे तीसरी बार चोद रहा था तो नीलम बोली- राजा, अब मुझे लंड पर बैठा कर चोदते हुए मुझे मेरे कमरे में ले चलो! यहाँ कोई आ जायेगा!
फिर मैं उसे लंड पर बिठा कर उसके कमरे में लाकर उसके बेड पर घोड़ी बना कर चोदने लगा। जब मैं नीलम को घोड़ी बना कर चोद रहा था तो अचानक रीता आ गई और वो बड़ी तेजी से कमरे में घुसी और घुसते ही रुक गई और हमें देखा तो मैंने उसे आँख मारी, वो समझ गई कि अपनी चुदाई की बात नहीं बतानी है।
वो नीलम पर बरस पड़ी- आप तो राजेश से चुदवा रही हैं और यहाँ हमरी चूत की फिकर ही नहीं है!
तो नीलम उसे अपने पास बुलाया और उसकी चूची दबा कर बोली- यार, तू क्या समझती है कि मुझे पता नहीं है कि तू कल कहाँ थी जब मैं और सविता आपस में प्लास्टिक के लंड से चुद रहे थे!
तो मैं अचानक चौंका- आपको कैसे पता चला?
तो नीलम बोली- जब हम चुदाई करते हैं और रीता होती है तो यह जरूर हमसे अपनी चूत में लंड डलवाने आती है और कल यह आई नहीं! और मैंने तुम्हें कमरे में घुसते हुए देख लिया था। फिर जब सविता मेरी चूत में प्लास्टिक के लंड से चुदाई कर रही थी तो मैंने देखा कि कोई तेरे लंड को नीचे बैठे चूस रहा है क्योंकि मुझे रीता के सर के बल दिखे और जब मैंने सविता को छोड़ा तो मैंने देख लिया था कि तुम रीता को घोड़ी बना कर चोद रहे थे।
इस पर रीता बोली- दीदी आपको आना चाहिए था असली लंड से चुदवाने!
नीलम बोली- मैंने सोचा कि अब मैं तो प्लास्टिक के लंड से चुदवा ही रही हूँ, चलो तुम ही चुदवा लो!
फिर मैंने नीलम को दो बार और रीता को एक बार चोद कर रात को चोदने का फैसला किया और इसके बाद सविता, गीता, मीरा को चोदा। Antarvasna
अभी तक अपना कौमार्य बचा Antarvasna कर रखा था। मैं तो चाहती थी कि अपना अनछुआ बदन अपने पति को ही सुहागरात में समर्पित करुँ पर इस शमा की बातें सुन सुन कर और इस पिक्की में अंगुली कर करके मैं भी थक चुकी थी। मेरी रातों की नींद इस शमा की बच्ची ने हराम कर दी थी। पर अब मैंने भी सोच लिया था कि एक बार चुदाई का मज़ा ले ही लिया जाए।
…. इसी कहानी से
मैं बी.ए. में पढ़ रही हूँ। पिछले सावन तक तो मेरा नाम मेरा नाम मीनल ही था। लेकिन पिछले सावन की उस बारिश भरी रात में नहाने के बाद तो मैं मीनल से मैना ही बन गई हूँ। आप भी सोच रहे होंगे कि अजीब झल्ली लड़की है ! भला यह क्या बात हुई- कोई सावन की बारिश नहा कर कोई लड़की भला मीनल से मैना कैसे बन सकती है ?
ओह.. मैं बताना ही भूल गई।
दरअसल बात यह है कि मेरी एक बहुत ही प्यारी सहेली है शमा खान। एक नंबर की चुद्दक्कड़ है। अपने भाईजान के साथ चुदाई के किस्से इस तरह रस ले ले कर सुनाती है कि मेरी मुनिया भी पीहू पीहू बोलने लग जाती है। मेरे साथ बी.ए. कर रही है। अगले महीने उसकी शादी भी होने वाली है अपने चचा के लड़के के साथ। पर उन्हें शादी की कोई जल्दी नहीं है क्योंकि वो तो शादी से पहले ही रोज अपनी सुहागरात मनाते हैं।
शमा बताती है कि उनके भाईजान (गुल खान) उनके चचा का लडके हैं। उनका परिवार भी उनके साथ वाली कोठी में ही रहता है। उनका कपड़े का बहुत बड़ा कारोबार है। शमा अपने माँ-बाप की इकलोती औलाद है और गुल भी अपने माँ बाप का इकलौता लड़का और 5 बहनों का एक ही भाई है। दोनों की सगाई हो चुकी है और अगले महीने शादी है।
क्लास रूम में हम दोनों साथ साथ ही बैठती हैं। जब भी कोई खाली पीरियड होता है तो हम दोनों कॉलेज के लॉन या कैंटीन में चली जाती हैं और फिर शमा अपनी चुदाई के किस्से रस ले ले कर सुनाती है कि कल रात भाईजान ने किस तरीके या किस आसन में उसकी धमाकेदार चुदाई की थी।
एक बार मैंने उससे पूछा था कि तुम्हें शादी से पहले यह सब करने में डर नहीं लगता? तो उसने जो जवाब दिया था- आप भी सुन लें “चुदाई में डर कैसा ? खूब मस्त होकर चुदवाती हूँ मैं तो और रही हमल (गर्भ) ठहरने की बात तो आज कल बाज़ार में बहुत सी पिल्स (गोलियाँ) मिलती हैं जिनसे उसका भी कोई खतरा नहीं है।”
“लेकिन वो .. पहली चुदाई तो सुहागरात में की जाती है ना… तुमने तो शादी के पहले ही सब कुछ करवा लिया अब सुहागरात में क्या करोगी ?” मैंने पूछा तो वो हंसते हुए बोली
“अरे मेरी भोली बन्नो मेरी चूत की सहेली फिर किस काम आएगी ?”
मैंने हैरानी से उसे देखते हुए पूछा “वो क्या होती है ?”
“तुम तो एक नंबर की बहनजी हो अरे भाई मैं गांड बेगम की बात कर रही हूँ !” उसने आँख मारते हुए कहा तो मेरी हंसी निकल गई।
“छी … छी… उसमें भी भला कोई करता है ?” मैंने कहा।
“अरे मेरी जान इसमें नाक चढ़ाने वाली क्या बात है, चुदाई में कुछ भी गन्दा या बुरा नहीं होता ! इस जवानी का पूरा मजा लेना चाहिए। मेरे भाईजान तो कहते हैं असली मजा तो गांड बाजी में ही आता है ये तो जन्नत का दूसरा दरवाजा है !” वो जोर जोर से हंसने लगी।
“तो क्या उन्होंने तुम्हारी ? … मेरा मतलब …” मैं गड़बड़ा सी गई।
“नहीं उसके लिए मैंने ही मना कर दिया है। गांड तो मैं उनसे जरूर मरवाउंगी पर सुहागरात को !” शमा ने कहा “अच्छा चल मेरी छोड़, तू बता तूने कभी कुछ किया है या नहीं ?”
“मैंने ?? अरे ना बाबा ना … मैंने कभी किसी के साथ कुछ नहीं किया ”
“तुम भी निरी बहनजी हो। शादी से पहले की गई चुदाई में अलग ही मज़ा होता है। लड़की की खूबसूरती चुदाई के बाद और भी बढ़ जाती है। ये देख मेरे मम्मे और चूतड़ (नितम्ब) कितने गोल मटोल हो गए हैं एक साल की चुदाई में ही। तू किसी को क्यों नहीं पटाती ? क्यों अपनी जालिम जवानी को बर्बाद कर रही है। इन मम्मों का दूध किसी प्यासे को पिला दिया कर 32 से 36 हो जायेंगे।”
कितना गन्दा बोलती है ये शमा। मुझे तो इन अंगों का नाम लेते हुए भी शर्म आती है फिर चुदाई की बात तो दूर की है। पर जब भी शमा अपनी चुदाई की बात करती है तो मेरी मुनिया भी चुलबुला कर आंसू बहाने लग जाती है और फिर मुझे टॉयलेट में जा कर उसकी पिटाई करनी पड़ती है।
मैंने अभी तक अपना कौमार्य बचा कर रखा था। मैं तो चाहती थी कि अपना अनछुआ बदन अपने पति को ही सुहागरात में समर्पित करुँ पर इस शमा की बातें सुन सुन कर और इस पिक्की में अंगुली कर करके मैं भी थक चुकी थी। मेरी रातों की नींद इस शमा की बच्ची ने हराम कर दी थी। पर अब मैंने भी सोच लिया था कि एक बार चुदाई का मज़ा ले ही लिया जाए।
पर सबसे बड़ा प्रश्न तो यह था कि किसके साथ ? मोहल्ले में तो कई शोहदे अपना लंड हाथों में लिए फिरते है पर मेरे ख़्वाबों का शहजादा तो उनमें से कोई भी नहीं है। हाँ कॉलेज में जरूर एक दो लडके मेरी पसंद के हैं पर वो भी किसी न किसी लड़की के चक्कर में पड़े रहते हैं।
और फिर जैसे भगवान् ने मेरी सुन ली। प्रेम भैया 3-4 दिन पहले ही तो हमारे यहाँ आये है अपनी ट्रेनिंग के सिलसिले में। पहले तो मैंने ध्यान ही नहीं दिया था। ओह… मैं भी निरी उल्लू ही हूँ इतना सुन्दर सजीला जवान मेरे पास है और मैं अपनी चूत हाथों में लिए बेकार घूम रही हूँ। प्रेम भैया मेरी जोधपुर वाली मौसी के लड़के है। बचपन में तो हम साथ साथ ही खेलते और बारिश में नहाते थे पर पिछले 4-5 साल में मैं उनसे नहीं मिल पाई थी। परसों जब वो आये थे तो उन्होंने मुझे अपनी बाहों में भर लिया था। तब पहली बार मुझे लगा था कि मैं अपने भैया के नहीं किसी मर्द के सीने से लगी हूँ। मेरे उरोज उनके सीने से लग कर दब से गए थे। पर वो तो मुझे अभी भी छोटी बच्ची ही समझ रहे होंगे। मैंने सोचा क्यों ना प्रेम भैया से …..
ओह … पर यह कैसे संभव हो सकता है वो मेरे सगे तो नहीं पर मौसेरे भाई तो हैं और भाई के साथ… ओह ये नहीं हो सकता ? वो तो अभी भी मुझे बच्ची ही समझते होंगे। उन्हें क्या पता कि मैं अब बच्ची नहीं क़यामत बन चुकी हूँ। मेरे नितम्ब देख कर तो अच्छे अच्छों के पपलू खड़े हो जाते हैं और उनके सीने पर सांप लोटने लग जाते है रास्ते में चलते हुए जब कोई फिकरे कसता है या सीटी बजाता है तो मुझे बहुत गुस्सा आता है पर फिर मैं रोमांच से भी भर जाती हूँ। काश मैं भी शमा की तरह होती तो मैं भी प्रेम के साथ आसानी से सब कुछ करवा लेती और शादी के बारे में भी सोच सकती थी पर हमारे धर्म और समाज में ऐसा कैसे हो सकता है। पता नहीं इन धर्म और समाज के ठेकेदारों ने औरत जाति के साथ हमेशा ही अत्त्याचार क्यों किया है। औरत और मर्द का रिश्ता तो कुदरत ने खुद बनाया है। शमा बताती है कि उनकी एक रिश्तेदार है उसने तो अपने सगे भाई से ही चुदवा लिया है।
और फिर मैंने भी सब कुछ सोच लिया ….
बचपन में मुझे बारिश में नहाना बहुत अच्छा लगता था। पर मेरी मम्मी तो मुझे बारिश में भीगने ही नहीं देती थी। बात दरअसल यह थी कि जब भी मैं बारिश में नहाती तो मुझे जोर की ठण्ड लग जाती और मैं बीमार पड़ जाती तो मम्मी बहुत ही गुस्सा होती। अब भी जब बारिश होती है तो मैं अपने आप को नहीं रोक पाती भले ही मुझे बाद में तकलीफ ही क्यों ना हो। और फिर सावन की बरसात तो मैं मिस कर ही नहीं सकती।
हमारा घर दो मंजिला है। ऊपर एक कमरा बना है और उसके साथ ही बाथरूम भी है। अगर कोई मेहमान आ जाए तो उसमें ही ठहर जाता है। प्रेम भैया को भी वही कमरा दिया है। वो इस कमरे में बिना किसी विघ्न बाधा के अपनी पढ़ाई लिखाई कर सकते हैं। उस समय रात के कोई 10.30 बजे होंगे। हम सभी ने खाना खा लिया था। मम्मी पापा सो गए थे। मैं प्रेम भैया के पास बैठी गप्प लगा रही थी। बाहर बारिश हो रही थी। मेरा जी बारिश में नहाने को मचलने लगा। मैंने प्रेम से कहा तो वो बोले “तुम्हें ठण्ड लग जायेगी और फिर मौसीजी बहुत गुस्सा होंगी !”
“ओह कुछ नहीं होता ! प्लीज भैया, आप भी आ जाओ ना ! बहुत मजा आएगा साथ नहाने में !”
और फिर हम दोनों ही बाहर आ गए। मैंने हलके पिस्ता रंग का टॉप और पतला सा कॉटन का पाजामा पहन रखा था। आप तो जानती ही हैं कि मैं रात को सोते समय ब्रा और पेंटी नहीं डालती। भैया ने भी कुरता पाजामा पहन रखा था। मैं कोई 2-3 साल बाद ही बारिश में नहा रही थी। नहाने में पहले तो मुझे बड़ा मजा आया पर बाद में ठण्ड के कारण मेरे दांत बजने लगे और मुझे छींके आनी शुरू हो गई। मेरे सारे कपड़े भीग चुके थे और गीले कपड़ों में मेरा सांचे में ढला बदन साफ़ नजर आ रहा था। मेरे गोल गोल उरोज भीगे शर्ट से साफ़ नजर आ रहे थे। भैया की घूरती आँखें मुझ से छुपी नहीं थी। भगवान् ने औरत जात को ये गुण तो दिया ही है कि वो आदमियों की नजरों को एक मिनट में ही पहचान लेती है, फिर भला मैं उनकी आँखों की चमक कैसी नहीं पहचानती ?
मुझे अपनी और देखते हुए पाकर भैया बोले, “मैंने तुम्हे मना किया था ना ! अब मौसीजी कितना नाराज होंगी ?”
“ओह भैया प्लीज मम्मी को मत बता … न … ओ … छीईईइ …..” मुझे जोर की छींक आ गई और उसके साथ ही मेरे उरोज टेनिस की गेंद की तरह उछले।
भैया मेरा बाजू पकड़ कर नीचे ले जाने लगे मैंने कहा, “नहीं, नीचे मम्मी देख लेंगी आपके कमरे में ही चलते हैं !” और हम लोग वापस कमरे के अन्दर आ गए। मेरे दांत बजते जा रहे थे भैया ने तौलिये से मेरा शरीर पोंछना शुरू कर दिया शरीर पोंछते हुए उनका हाथ मेरे उरोजों और नितम्बों से छू गया। मेरे शरीर में जैसे कोई बिजली सी दौड़ी। मैं तो रोमांच से ही भर उठी मेरा अंग अंग गीले कपड़ों में साफ़ झलक रहा था।
“ओह इन गीले कपड़ों को उतारना होगा… पर….. वो… तुम्हारे लिए सूखे कपड़े ?”
“कोई बात नहीं आपकी कोई लुंगी और शर्ट तो होंगी ?”
“आन … हाँ ” उन्होंने अपनी धुली हुई लुंगी और शर्ट मुझे दे दी। हम दोनों ने बाथरूम में जाकर कपड़े बदल लिए। ढीली शर्ट में मेरे उरोजों की घुन्डियाँ साफ़ दिख रही थी। गोल गोल संतरे जैसे मेरे उरोज तो इस समय तन कर खड़े क़यामत बने थे। भैया की नज़रें तो उन पर से हट ही नहीं रही थी। इतने में जोर से बिजली कड़की तो डर के मारे मैं भैया की ओर खिसक आई। मेरे दांत अब भी बज रहे थे।
भैया बोले,“तुमने तो जानबूझकर मुसीबत मोल ली है। लाओ, तुम्हारे हाथ और पैर के तलवे मल देता हूँ इससे तुम्हारी ठण्ड कम हो जायेगी !” और उन्होंने मेरे नाजुक हाथ अपने हाथों में ले लिए। मेरे लिए किसी मर्द का ये पहला स्पर्श था। मेरे शरीर में एक झुरझुरी सी दौड़ने लगी। भैया मेरे हाथ मलते जा रहे थे। मैंने कनखियों से देखा था उनका ‘वो’ कुतुबमीनार बन गया था। हे भगवान् ये तो कम से कम 7-8 इंच का तो जरूर होगा। उनकी साँसे गरम होती जा रही थी। मेरा भी यही हाल था। मेरे होंठ काँप रहे थे पर इस बार ठण्ड के कारण नहीं बल्कि रोमांच के कारण। पर मैंने ठण्ड का बहाना बनाए रखा।
फिर भैया बोले “मीनू लाओ तुम्हारे पैर के तलवे भी मल देता हूँ ”
मैं भी तो यही चाहती थी। मैं बेड से टेक लगाए उकडू बैठी थी। मैंने एक पैर थोडा सा आगे कर दिया। उन्होंने मेरे पैर के तलवों को मलना शुरू कर दिया। जैसे ही उन्होंने मेरा पैर थोड़ा सा ऊपर किया मेरी ढीली लुंगी नीचे हो गई। मैंने जान बूझ कर इसकी और कोई ध्यान नहीं दिया। मैं जानती थी मेरी मुनिया अब उनको साफ़ दिख रही होगी। मैंने अधखुली आँखों से देखा भैया की कनपटी लाल हो गई है। थोडा सा पसीना भी आने लगा है। उनके होंठ भी कांपने से लगे हैं। भैया का बुरा हाल था। वो तो टकटकी लगाए मेरी जाँघों की और ही देखे जा रहे था। केले के पेड़ की तरह मेरी चिकनी जांघें और छोटे छोटे रेशमी बालों से लकदक मेरी पिक्की देख कर वो तो जैसे निहाल ही हो गए थे। और पिक्की की मोटी मोटी गुलाबी फांकें को देखकर तो उनकी आँखें जैसे फटी की फटी ही रह गई थी। उनके हाथ कांप रहे थे। मैं भी आँखे बंद किये रोमांच के सागर में गोते लगा रही थी। मैंने छेड़ने के अंदाज में उनसे कहा “भैया आपको भी ठण्ड लग रही है क्या ?”
“आन…. हाँ शायद ऐसा ही है !”
“पर ठण्ड में तो दांत बजते है, आपको तो पसीना आ रहा है ?”
“वो.. वो … ओह कुछ नहीं ” उनकी आँखें अब भी मेरी पिक्की की ओर ही थी। मैंने झट से अपना पैर खींचते हुए लुंगी से ढक लिया।
“ओह सॉरी ….” भैया की हालत तो अब देखने लायक थी।
“भैया ये चीटिंग है ?” मैंने झूटमूठ का गुस्सा किया।
“ओह सॉरी बाबा ! मैंने कुछ नहीं देखा !”
“तो फिर आप इतना घबरा क्यों रहे हैं ?” मेरी हंसी निकल गई।
“ओह.. आई एम… सॉरी !”
“अच्छा भैया एक बात पूछूं ?”
“क… क्या …?”
“सच बताना आपकी कोई गर्ल फ्रेंड है ?”
“अरे… वो … वो… नहीं तो … पर तुम ये क्यों पूछ रही हो ?”
“प्लीज बताओ ना भैया ?”
“अरे मैंने बताया ना कि मेरी कोई गर्ल फ्रेंड नहीं है। मुझे तो पढ़ाई से ही फुर्सत नहीं मिलती। पर एक बात है ?”
वो क्या ?”
“तुम्हारी वो जो फ्रेंड है ना ! अरे वो ही जो सुबह आई थी ?”
“ओह… शमा ?”
“हाँ….”
“क्यों क्या बात है ?”
“यार … वो बहुत खूबसूरत है ?”
“ओह … तो मेरे भैया उस पर मर मिटे हैं ?” मैं हँसने लगी।
“नहीं ऐसी बात नहीं है। वैसे वो है लाजवाब !” भैया की आँखों में जैसे चमक सी आ गई थी।
“अरे उसका वीजा लग चुका है वो हाथ आने वाली नहीं है ?”
“ओह…”
“पर ऐसी क्या बात है उसमें ?”
“यार मीनू उसके बूब्स और नितम्ब तो कमाल के हैं” भैया बोले।
उनकी आंखों में अब लाल डोरे तैरने लगे थे। ये मर्द भी सभी एक जात के होते हैं. औरत की खूबसूरती तो उन्हें केवल नितम्बों और उरोजों में ही नजर आती है. मैंने अपने मन में कहा ‘एक बार मेरे देख लोगे तो सब कुछ भूल जाओगे” पर मैंने कहा “अच्छा मेरी फिगर कैसी है ?”
“अरे तुम तो हुस्न की मल्लिका हो अगर कोई फ़रिश्ता भी तुम्हारे भीगे बदन को देख ले तो जन्नत का रास्ता भूल जाए !”
जी में तो आया कह दूं ‘फिर तुम क्यों नहीं रास्ता भूल रहे हो’ पर मैंने उनकी आँखों में झांकते हुए कहा “क्या वाकई मैं इतनी खूबसूरत हूँ ?”
“सच्ची मीनू कभी कभी तो मैं ये सोचता हूँ अगर तुम मेरी मौसेरी बहन नहीं होती तो मैं किसी भी कीमत पर तुमसे शादी कर के छोड़ता …” उन्होंने मेरा हाथ अपने हाथों में लेते हुए कहा “ओह … पर ऐसा कहाँ संभव है ?”
“क्यों ?” मैंने अनजान बनाते हुए कहा। मैं उनकी उखड़ी हुई साँसे अच्छी तरह महसूस कर रही थी। उनका पाजामा तो तम्बू ही बना था।
“ओह … मीनू … सच कहता हूँ मैं इन तीन दिनों से तुम्हारे बारे में सोच सोच कर पागल सा हो गया हूँ। लगता है मैं सचमुच ही तुम्हें पर … प्रेम … ओह … चाहने लगा हूँ। पर ये सामाजिक बंधन भी हम जैसो की जान ही लेने के लिए बने है !” भैया की आवाज कांप रही थी।
शेष अगले भाग में !
For call girl booking :- https://jodhpur.tottaa.com/
इस कहानी का मूल्यांकन दूसरे भाग में करें ! Antarvasna
मेरा नाम अंजना वर्मा है! मैं दिल्ली Antarvasna की रहने वाली हूँ और मैं ग्यारहवीं कक्षा की छात्रा हूँ! मेरी उम्र १८ साल है। मेरे पापा और मम्मी दोनों ही नौकरी करते हैं, एक बहु-राष्ट्रीय कंपनी में बहुत ऊँचे पद पर हैं! पर उनके पास मेरे लिए बिलकुल भी समय नहीं है! क्योंकि शायद मैं गोद ली हुई हूँ इसलिए !
और बाद में उन को एक लड़का हो गया, इसलिए अब वो मुझे बोझ समझते हैं! उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता, मैं घर आऊँ या ना आऊँ. . . . बस समाज को दिखाने के लिए मुझे रखना मजबूरी है उनकी !
खैर अब मैं भी सब समझती हूँ और उनकी परवाह नहीं करती ! अब मैं भी जिन्दगी के मज़े लेती हूँ!
मेरा कद ५ फीट ३ इंच, मेरा फिगर बड़ा ही सेक्सी है! गोल और कसी हुई चूचियाँ जो ज्यादा बड़ी नहीं पर मस्त दिखती हैं ! चूत मैं हमेशा साफ़ ही रखती हूँ! क्या पता कहाँ कोई लण्ड मिल जाये….. रंग मेरा ऐसा जैसे कि दूध में गुलाब डाल दिया हो! मैं भी एकदम बिंदास रहती हूँ!
मेरा २-३ लड़कों से शारीरिक रिश्ता भी रह चुका है जो मेरी माँ की रिश्ते में ही हैं.. शायद कम उम्र में ही सेक्स करने से अब मुझे लण्ड बहुत अच्छे लगने लगे हैं! लण्ड के बारे में सोचते ही मेरी चूत में पानी आने लगता है!
अब मैं अपनी कहानी बताती हूँ! मैं रोज सुबह बस से स्कूल जाती थी और शाम को वापिस आती थी! कई बार शाम को थोड़ा लेट हो जाती थी! क्योंकि मेरा घर पर मन ही नहीं लगता था! आप तो जानते ही हैं कि दिल्ली की बसों में कितनी भीड़ रहती है! पर मैं पहले स्टाप से ही बैठती हूँ सो सीट मिल जाती है!
यह एक साल पहले की बात है, ऐसे ही एक दिन मैं बस में जा रही थी! बस में बहुत भीड़ थी! मेरे पास ही एक बड़ी उम्र का आदमी धोती कुर्ता पहने खड़ा था! कद करीब ५ फीट १० इंच होगा! रंग थोड़ा सावंला पर था हट्टा कट्टा ! बड़ी रौबदार मूछें !
मैंने सामने वाली सीट को हाथ से पकड़ा था इसलिए शायद गलती से मेरा हाथ उसके लण्ड से लग गया था, मुझे अच्छा लगा। बस फिर मेरा तो पूरा ध्यान ही वहीं अटक गया! वो बेचारा पीछे हटने की कोशिश करता हर बार! मुझे मज़ा आने लगा, और थोड़ी हंसी भी आ रही थी! मैं अब मज़े लेने के मूड में आ गई थी!
मैंने पूरी बस में देखा- आस पास सभी औरतें ही थी, बहुत भीड़ थी, शायद सभी के पास आज सामान कुछ ज्यादा ही था! मेरे बाजू वाली सीट पर एक लड़की बहुत सारा सामान ले कर बैठी थी!
मैंने अपना बैग अपनी टांगों पे रख लिया! अ़ब मैं आगे झुक के सोने का नाटक करने लगी और हाथ को आगे वाली सीट के पाइप पे रख के जरा बाहर निकाल लिया, पर वो थोड़ा पीछे हो गया! पर झटकों से कभी कभी उसका लण्ड मेरी उंगलियों से छू जाता था!
अब मुझे मज़ा आने लगा.. मेरी चूत में खुजली होने लगी थी! मैंने नीचे ही नीचे अपनी शर्ट के ऊपर के बटन खोल लिए ओर पीछे हो कर बैठ गई!
अब ऊपर से मेरी सफ़ेद ब्रा और गोल गोल चूचियां साफ़ दिख रही थी! मैंने अपने बैग को पेट से चिपका लिया ताकि मेरी चूचियां थोड़ी और ऊपर उठ जाएँ और बाहर ज्यादा नज़ारा दिख सके.. मैं नोट कर रही थी कि वो आदमी मुझे देख रहा है पर जब भी मैं ऊपर देखती हूँ तो वो नज़रें घूमा लेता है! शायद उसे अपनी बड़ी उम्र का अहसाह था!
पर मुझे तो मस्ती सूझ रही थी! मुझे और शरारत सूझी और मैं बाहर स्टैंड देखने के लिए थोड़ा उठी और चुपके से साइड से अपनी स्कर्ट सीट के पीछे अटका दी और बैठ गई! जैसे ही मैं बैठी, मेरी स्कर्ट ऊपर उठ गई और मेरी पैंटी दिखने लगी, जो कि बहुत पतली थी! पैंटी में से मेरे चूत के होंट साफ़ दिखाई देते थे!
मैं झट से दोबारा उठी और स्कर्ट ठीक कर के बैठ गई, जैसे गलती से स्कर्ट अटक गई हो.. पर जो मैं दिखाना चाहती थी, वो उस आदमी ने देख लिया था!
मैंने उपर देखा और हल्के से मुस्करा दी! मैंने महसूस किया कि उस आदमी का लण्ड टाइट होने लगा था। वो अब भी कुछ शरमा रहा था पर मैंने हाथ को सामने वाली सीट पे ही लगा के रखा था! जब भी कोई उतरता था तो उसे आगे होना पड़ता था ओर मेरा हाथ उसके लण्ड से छू जाता था!
तभी बस में और भीड़ चढ़ गई! अब तो बस खचखच भरी थी! तभी मैंने देखा के पास में एक औरत सामान के साथ खड़ी थी! मुझे एक आइडिया आया और मैंने उसे अपनी सीट दे दी! अब मैं उस आदमी के सामने खड़ी हो गई! मेरी सीट पे वो औरत बैठ गई, उसकी गोद में सामान था और उसने मेरा बैग भी अपनी गोद में रख लिया था! बस फिर चल पड़ी!
अब मेरा ध्यान उस आदमी के लण्ड पे था! मुझे उस आदमी का लण्ड अपनी गांड के थोड़ा ऊपर महसूस हो रहा था! मैंने एड़ियों को थोड़ा ऊपर उठा लिया ताकि लण्ड मेरी गांड की दरार में लग जाये! वाह… क्या लण्ड था उसका!
मैं उसके लण्ड का जायजा लेने लगी..जिससे मेरी चूत में पानी आने लगा था! पर वो आदमी कोई हरकत नहीं कर रहा था! अब मुझे उस पे गुस्सा आ रहा था! अ़ब मैं काफी गरम हो चुकी थी!
तब मैंने थोड़ी हिम्मत करके हाथ धीरे से पीछे ले जाकर उसके लण्ड को छुआ! मैं उसे सहलाने लगी जिससे वो और कड़क हो गया! मुझे मज़ा आने लगा। मैं उसके लण्ड को हल्के- हल्के से सहला रही थी, पर तभी उसने मेरा हाथ अपने लण्ड से हटा दिया! मैंने पीछे मुड़ के देखा, वो चुपचाप था पर आगे की ओर आ गया था! अब वो अपना लण्ड मेरी गांड की दरार में दबा रहा था! मुझे खुशी हुई कि वो अब मेरा साथ दे रहा था!
मेरी स्कर्ट में साइड में चैन थी! सो मैंने धीरे धीरे स्कर्ट घुमाना शुरु कर दिया! मैं साथ साथ बस में भी नज़र मार रही थी कि कोई देख तो नहीं रहा है! पर शायद भीड़ होने की वज़ह से कोई नहीं देख पा रहा था!
अब मेरी स्कर्ट की जिप पीछे थी जो मैं पहले ही खोल चुकी थी! उसका लण्ड अ़ब मैं और अच्छे से महसूस कर सकती थी! कुछ देर ऐसे ही चलता रहा, हर झटके के साथ वो अपने लण्ड का दबाव और बढ़ा देता! मुझे मज़ा आ रहा था! मैंने पीछे मुड़ के देखा पर वो ऐसे देख रहा था जैसे कुछ हो ही नहीं रहा था!
मैं अ़ब और आगे बढ़ना चाहती थी, इसलिए अ़ब मैंने पीछे हाथ कर के उसकी धोती में हाथ डाल दिया और उसके लण्ड को बाहर निकालना चाहा पर उसने मेरा हाथ झटक दिया! मैंने उसकी ओर देखा, वो हल्के से मुस्कराया और उसने बस में होने का अहसास कराया!
मैंने धीरे से पीछे हट के उसके कान में कहा,”इतनी भीड़ में कोई नहीं देख रहा, अभी भीड़ कम नहीं होगी बल्कि और बढ़ेगी, मैं रोज़ इसी बस मैं जाती हूँ, तुम बस मज़ा लो !”
और मैं उसकी तरफ मुस्करा दी.. जवाब में उसने भी एक प्यारी से मुस्कराहट दी.. .
वो थोड़ा शरमाया और ऐसे ही लण्ड को दबाता रहा! मैंने सोचा- चलो कोई नहीं ! इतना मज़ा तो आ रहा है! पर थोड़ी देर बाद मैंने महसूस किया कि वो अपनी धोती में हाथ डाल रहा है! तभी मैंने अपनी पैंटी पे उसका लण्ड उठा हुआ महसूस किया! मैं फिर से ऊपर उठ गई ताकि लण्ड मेरी गांड की दरार में लग जाये! मैं बार बार ऊपर उठ रही थी, यह बात उसने भांप ली, सो उसने मेरी एड़ियों के नीचे अपने पैर लगा दिए, जिससे वो मेरे और पास आ गया और मैं ऊपर उठ गई!
मैंने आगे देखा तो मेरे सामने सामान ही सामान था, मैंने चुपके से अपनी स्कर्ट ऊपर उठानी शुरु कर दी पर एक लिमिट से ज्यादा नहीं उठा सकती थी, नहीं तो किसी को पता चल जाता! इसलिए स्कर्ट को वापिस नीचे ही कर दिया! पर मेरा मन तो पूरे मज़े लेने का था!
मैं थोड़ा आगे की तरफ हो गई ताकि उसके और मेरे बीच कुछ गैप बन जाए। मैंने अपनी टांगो को थोड़ा फैला लिया! अब मैंने पीछे हाथ ले जा कर उसके लण्ड को अपने स्कर्ट की जिप से दोनों टांगो के बीच में फंसा लिया! यार क्या गरम लण्ड था…….स्स्स्स्स्स्स्स्स्स……म्मम्मम………..
मैं उसका लण्ड अपनी दोनों टांगो पे महसूस कर रही थी! ऐसा लगता था कि मैं किसी बड़ी मोटी गरम रॉड पे बठी हूँ! मैंने अपनी गाण्ड थोड़ा पीछे धकेल दी और वो भी थोड़ा आगे आ गया! उसका लण्ड मेरी टांगों पे रगड़ता हुआ आगे आ गया! अब उसके लण्ड का आगे वाले हिस्से का उभार स्किर्ट पे आगे की साइड दिख रहा था, इसलिए मैं थोड़ा आगे झुक गई ताकि स्कर्ट ऊपर उठ जाये!
“म्मम्मम्म………
उसका गरम लण्ड मैंने टांगों के बीच दबा रखा था जो कि हर झटके में आगे पीछे हो रहा था! एक तरह से वो मेरी टांगों को चोद रहा था, मेरी पैंटी पूरी गीली हो चुकी थी! मेरा मन हो रहा था कि अपनी पैंटी को हाथ डाल के हटा दूँ ताकि उसके लण्ड की गर्मी अपनी चूत पर महसूस कर सकूँ! पर शायद बस में यह नहीं हो सकता था!
मैं पीछे मुड़ी और उसके कान में धीरे से कहा,” अपने हाथ से मेरी पैंटी साइड में कर दो प्लीज़…!” और वापिस आगे देखने लगी।
उसने अपना हाथ नीचे ले जाकर स्कर्ट की जिप से २ उँगलियाँ अंदर डाली ओर मेरी पैंटी को साइड में कर दिया!
मैं तो जैसे ……… अपने होश ही खो बैठी थी! उसका गरम लण्ड मेरी चूत पे लगा हुआ था। अब उसका लण्ड मेरी चूत पे रगड़ खा रहा था, शायद चूत के पानी की वज़ह से जो मेरी टांगों तक आ गया था, वो अ़ब आराम से आगे पीछे जा रहा था! मेरी आँखे बंद हो रही थी!
मेरा चेहरा लाल हो गया था पर मैं सामान्य दिखने की कोशिश कर रही थी! मैंने आस पास देखा पर कोई भी हमारी तरफ नहीं देख रहा था! बस के हर झटके के साथ वो मेरी टांगों में झटके मार रहा था! उसका गरम लण्ड जब भी आगे या पीछे होता मेरी चूत में आग बढ़ जाती!
तभी एक तेज़ झटका लगा और उसका लण्ड पीछे चला गया, आगे से मेरी पैंटी थोड़ा अपनी जगह पर वापिस आ गई! जब उसने लण्ड वापिस आगे किया तो वो मेरी पैंटी में चला गया म्म्म्म्म्म्म्म………………………………..
अब उसका लण्ड मेरी पैंटी में था और चूत के होठों के बीच में ….. ऊपर नीचे हो रहा था……….! मुझे और मज़ा आने लगा, … और मैंने एड़ियों को और ऊपर उठा लिया। शायद उसे भी मज़ा आ रहा था इसलिए उसने झटके बढ़ा दिए। तभी बस रेड लाइट पे रूक गई और झटके बंद हो गए! मैंने पेट के नीचे खुजली करने के बहाने से हाथ स्कर्ट पे ले जा के उसके लण्ड के सुपाड़े को मसलने लगी! मैंने पीछे मुड़ के देखा तो उसका पूरा चेहरा पसीने से गीला हो गया था!
तभी बस चल पड़ी पर मेरे मसलने से शायद वो झड़ने वाला था। अब मैं भी अपनी गाण्ड को हल्के हल्के ऊपर नीचे करने लगी! स्स्स्स्स्स्स्स्स्श्ह्ह्ह्ह्ह्ह्छ मज़ा बढ़ने लगा था… मेरी चूत में कैसे खलबली मच गई थी…… तभी मैंने एड़ियों को ऊपर उठा लिया और मेरा शरीर टाइट हो गया !
मैं …..में…….झड़ने वाली थी, और ….औ ..औम्मम्मम… औ..आह्ह्ह्छ ….. में उसके ऊपर झड़ गई और मेरा सारा जूस उसके लण्ड पे आ गया! और मैं ढीली होती चली गई! उसने भी एक दो झटके लगाये और सारा वीर्य मेरी पैंटी में छोड़ दिया, जिसे में अपनी जांघों तक महसूस कर रही थी!
२-३ मिनट तक हम ऐसे ही रहे और फ़िर वो अपना लण्ड बाहर निकलने लगा। मैंने अपना हाथ पीछे लगा लिया ताकि उसके वीर्य से मेरी स्कर्ट ख़राब न हो! सारा वीर्य मैंने अपने हाथ से पौंछ लिया और उसने अपना लण्ड वापिस अपनी धोती में कर लिया! तभी एक स्टाप आया और मैं उतर गई, पता चला कि ४ स्टाप आगे आ गई हूँ पर इस स्टाप पे ज्यादा लोग नहीं होते क्योंकि यह दिल्ली का बाहरी इलाका था,
और आज तो ये स्टाप बिल्कुल खाली था, पता नहीं क्यों… शायद हमारी किस्मत………
वो आदमी भी वहीं उतर गया! मैंने इधर उधर देखा, फिर उसकी तरफ देख के अपने हाथों को चूसने लगी चाट -चाट के सारा हाथ साफ़ कर लिया!
तब थोड़ी देर बात करने के बाद उसने बताया कि वो यहाँ से ८० किलोमीटर दूर गाँव में रहता है, यहाँ अपने बेटे के पास आया है, पूरा दिन खाली रहता है इसलिए सोचा आज एक दोस्त से मिल आऊँ, उसका नाम महादेव सिंह है।
मेरा भी स्कूल मिस हो गया था सो हम बस स्टाप के साथ में बने पार्क में गए और एक पेड़ों से घिरी जगह बैठ गए! वहाँ पहले तो मैंने अपनी पैंटी में हाथ डाल के सारा वीर्य हाथों से साफ़ किया और हाथों को चटकारे ले ले कर चूसना शुरु कर दिया..! पर किसी के आने की आहट से हम सतर्क हो गए, वहाँ पार्क में कुछ दूर कुछ लोग आ के बैठ गए थे और शायद उनका लम्बे समय तक बैठने का कार्यक्रम था!
इसलिए हम कल फिर वहीं मिलने का वादा कर के वापिस चल पड़े क्योंकि उसे भी कुछ जल्दी थी! वो शायद अपने दोस्त के घर के लिए चला गया और मैं अपनी बस की प्रतीक्षा करने लगी..
और बस पकड़ के अपने घर आ गई………………….
आगे क्या हुआ बाद में…. Antarvasna
The user agrees to follow our Terms and Conditions and gives us feedback about our website and our services. These ads in TOTTAA were put there by the advertiser on his own and are solely their responsibility. Publishing these kinds of ads doesn’t have to be checked out by ourselves first.
We are not responsible for the ethics, morality, protection of intellectual property rights, or possible violations of public or moral values in the profiles created by the advertisers. TOTTAA lets you publish free online ads and find your way around the websites. It’s not up to us to act as a dealer between the customer and the advertiser.