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मेरा नाम Hindi Sex Stories रेशमा है। मैं इस्लामाबाद पाकिस्तान से हूँ। मैं विवाहित हूँ। मेरी उम्र 26 वर्ष है।
यह बात तब की है जब मैं कालेज में थी।
मुझे अपने क्लास के एक लड़के मोइन से प्यार हो गया।
हम दोनों अकसर कालेज से घूमने के लिये निकल जाते थे।
फिर दोनों पिक्चर देखने के लिये भी जाने लगे।
हम दोनों धीरे धीरे बहुत करीब आते गये।
मोइन मुझे हमेशा हाथों पर और फिर धीरे धीरे गालों पर चूम लेता था।
एक दिन उसने मुझे मेरे होठों पर चूम लिया। अब वह थोड़ा निडर हो गया था।
एक दिन उसने मुझे कस कर पकड़ लिया और मेरे होठों को चूम लिया, फिर उसने मेरे कन्धों पर, फिर मेरी गर्दन को चूम लिया।
उसने मेरे उरोजों को छू लिया।
पहली बार किसी ने मेरे वक्ष को छुआ था मुझे बहुत अच्छा लगा था।
धीमे धीमे वह और आगे बढ़ गया था। अब वह अपने हाथों से मेरी जांघों को, कभी कभी वह अपने हाथों से मुझे पीछे से कमर के नीचे के भाग को दबा देता था।
मुझे बहुत मजा आता था, मैंने कभी विरोध नहीं किया।
एक दिन हम दोनों पिक्चर देखने गये। हम सबसे पीछे की सीट पर बैठे थे।
हॉल में भीड़ बहुत कम थी और हमारे आस पास कोई नहीं बैठा था।
पिक्चर शुरू होने के 10 या 15 मिनट बाद मोइन ने अपना हाथ मेरे कन्धों पर रखा और अपनी तरफ खींचा।
थियेटर में काफी अन्धेरा था।
वह मेरे गालों पर चूमने लगा उसने मेरे होठों पर अपने होंठ रख दिये उसकी सांसें बहुत गर्म थी।
हम दोनों ने एक दूसरे को बहुत बेताबी से चूमना शुरू कर दिया।
तभी मैंने उसका हाथ अपने दुपट्टे के नीचे महसूस किया। उसका हाथ मेरे उरोजों को कमीज के ऊपर से दबाने लगा।
इस दौरान भी वह मुझे चूम रहा था।
मैंने अपनी आँखें बन्द कर ली मुझे बहुत मजा आ रहा था।
अचानक मुझे महसूस हुआ कि उसका हाथ मेरी कमीज के ऊपर के दो बटनों को खोल चुका था।
उसका हाथ मेरी ब्रा के कोनों के अन्दर मेरे स्तनों को सहला रहे थे।
धीरे धीरे उसका हाथ मेरे चुचूकों को अंगुलियों से छेड़ने लगा जिससे वे एकदम कठोर हो गये।
मैं कुछ सोच नहीं पा रही थी कि मैं क्या करूँ।
मेरे पूरे शरीर में अजीब सी तरंगें दौड़ रही थी जो कि मेरी जिन्दगी में पहली बार हुआ था।
उसने अपने हाथ को मेरी कमीज से निकाला और मेरे पेट पर रखा और इधर उधर घुमाता रहा।
फिर उसका हाथ नीचे की ओर बढ़ने लगा।
मेरे अन्दर अजीब सी फीलिंग हो रही थी।
उसने अपना हाथ मेरी जांघों पर रखा और धीरे धीरे ऊपर की ओर ले गया।
उसने मेरे प्राइवेट भाग को मेरी सलवार के ऊपर से ही छूआ।
मेरे मुँह से उॅहह हहह करके आवाज निकली, मेरे पैर फैल गये और उसकी हथेली ने उस जगह को भर लिया।
अपनी अंगुलियों से वह मेरे प्राइवेट अंग को रगड़ रहा था।
उसका ऐसा करना मुझे पागल बना रहा था।
मेरा बदन मेरे वश में नहीं था, मैं अपनी कमर को आगे पीछे करने लगी थी।
अचानक उसने मुझसे अपनी कमीज के बटन बन्द करने और उसके साथ बाहर चलने को कहा।
मैंने वैसा ही किया।
हमने टैक्सी ली और कॉलेज की ओर चल पड़े।
शाम हो गई थी, कॉलेज बन्द हो चुका था केवल एक-दो बच्चे थे।
हम दोनों कॉलेज के पीछे की ओर से कॉलेज की छत की ओर गये।
कॉलेज बन्द हो चुका था किसी के उधर आने की उम्मीद नहीं थी।
हमने ऐसी जगह चुनी जहाँ से हमें कोई देख नहीं पाये।
हम दोनों दीवार के सहारे खड़े हो गये और बगैर वक्त बर्बाद किये एक दूसरे को बेसब्री से चूमना शुरू कर दिया।
उसने मेरे दुपट्टे को उतार दिया। मेरी कमीज के सारे बटन खोल डाले और अपना हाथ मेरी कमीज में डालकर मेरे उरोजों को हाथ में ले लिया।
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उसने मेरी ब्रा को खोल दिया और बड़ी बेदर्दी से मेरे स्तनों को मसलने लगा।
मेरे स्तन एकदम सख्त हो गये।
वह अब मेरे उरोजों को चूमने लगा और मेरे एक चुचूक को मुँह में ले लिया और बड़ी सख्ती से उन्हें चूसने लगा।
उसका एक हाथ मेरे चूतड़ को मसल रहा था।
उसने मुझे पीछे से अपनी बांहों में जकड़ लिया और मेरे वक्ष को दबाने लगा।
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मैंने महसूस किया कि उसका सख्त लण्ड मेरी कमर में चुभ रहा है और धक्के लगा रहा था।
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मैं दर्द से तड़प उठी।
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धीरे धीरे मुझे मजा आने लगा मेरा दर्द जाने कहाँ चला गया। मैं अपने आप को ऊपर नीचे करने लगी।
फ़िर उसने वहीं जमीन पर मुझे लिटाया और मेरे पैरों को फैलाया और उसका लण्ड अगले ही पल मेरी चूत में था।
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इस बीच मेरी चूत से पानी निकल गया।
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हम दोनों एक दूसरे को बहुत जबरदस्त धक्के दे रहे थे।
अचानक हम दोनों ने एक दूसरे को कसकर पकड़ लिया, उसने अपनी स्पीड चालू रखी और अगले ही पल उसका वीर्य मेरी चूत में भर गया, तभी मैं भी एक बार फिर झर गई।
वह मेरे ऊपर ही निढाल हो कर गिर गया।
हम दोनों बुरी तरह से हांफ रहे थे।
हम दोनों ने कपड़े पहने एक दूसरे को देख कर मुस्कुराये। हम दोनों एक दूसरे से पूरी तरह से सन्तुष्ट थे। Hindi Sex Stories
मैं मिसेज रागिनी हूँ दोस्तो.
मैं 30 साल की एक मद मस्त, जवान और पढ़ी लिखी औरत हूँ।
मेरी शादी दो साल पहले आनंद नाम के एक लड़के से हो गई थी।
आनद भी बड़ा स्मार्ट और हैंडसम लड़का है.
वैसे मैं कानपुर की रहने वाली हूँ।
मेरी ससुराल भी कानपुर में ही है मगर मैं आजकल अपने पति के साथ मुंबई के कोलाबा एरिया में रह रही हूँ।
मैं 5′ 5″ के कद वाली हूँ, गोरी चिट्टी हूँ और चंचल स्वभाव की हूँ।
देखने में सेक्सी, खूबसूरत और हॉट हूँ।
ऐसा मैं नहीं कह रही हूँ लोग कहते हैं।
मेरे मम्मे थोड़ा बड़े बड़े साइज के हैं.
मेरी कमर पतली है, मेरी बाहों की गोलाई बड़ी मनमोहक है इसलिए मैं अक्सर स्लीवलेस कपड़े ही पहनती हूँ।
मेरे कूल्हे थोड़ा बड़े बड़े है जिससे मुझे ठुमके लगाने में बड़ी आसानी होती है।
मेरी जांघें केले के तने जैसी हैं और मेरे चूतड़ भी बड़े आकर्षक हैं।
साथ ही मेरी गांड़ भी ससुरी बड़ी मस्त है.
और फिर गरम चूत के तो कहने ही क्या!
उसके बारे में मैं आपको आगे बताऊंगी।
शादी के पहले कॉलेज के दिनों में मैं दो बातों के लिए बहुत मशहूर थी।
एक तो पढ़ाई के लिए और दूसरे चुदाई के लिए!
मतलब यह कि मैं जितनी बातें पढ़ाई के बारे में करती थी उतनी ही बातें चुदाई के बारे में भी करती थी।
चुदाई में सबसे ज्यादा लण्ड की बातें होतीं थीं।
मैं ही नहीं, सभी लड़कियां खुल कर लण्ड की बातें करती थीं।
‘लण्ड का साइज और लण्ड की बनावट’ कभी ख़त्म न होने वाला टॉपिक था।
कोई ऐसा दिन न था जब लण्ड पर कोई बात न होती हो.
लड़कियां वैसे भी लड़कों से ज्यादा गन्दी गन्दी बातें करतीं हैं।
वैसे भी हर लड़की के मुंह से लण्ड, बुर, चूत, भोसड़ा जैसे शब्द निकलते ही रहते थे।
उसके साथ साथ गालियां भी जैसे बहन चोद, मादर चोद, माँ का लौड़ा, बहन का लौड़ा, भोसड़ी वाली, बुर चोदी, गांडू और भी बहुत कुछ सबके मुंह से सुनाई पड़ता था।
वो सच में बड़े अच्छे दिन थे यार!
मैं याद करती हूँ तो सिहर जाती हूँ।
बस कॉलेज के दिनों में ही मैंने लण्ड पकड़ना शुरू किया, लण्ड मुंह में लेना शुरू किया और फिर लण्ड का सड़का मारना भी शुरू किया।
तभी मुझे एक सहेली ने लण्ड का वीर्य पीने की सलाह दी और उसके फायदे बताये।
उसने मुझे लण्ड का वीर्य पीते हुए दिखाया।
बस मैं भी वही करने लगी.
तो एक साल में ही मेरी चूचियाँ दूनी हो गईं।
मुझे लण्ड पीने में मज़ा आने लगा.
फिर एक दिन लण्ड चूत में पेलवाना भी शुरू कर दिया।
जी हां दोस्तो, मैं शादी के पहले खूब चुदी हुई थी।
यह बात किसी को नहीं मालूम सिर्फ आपको बता रही हूँ।
किसी से मत कहना प्लीज!
मैं कॉलेज में पढ़ती थी तो हमारे पड़ोस में एक प्रशांत नाम के अंकल रहते थे।
वे बड़े मस्त, गोरे चिट्टे, स्मार्ट और हैंडसम थे।
हमारे घर आते जाते थे।
मैं कभी कभी उनके घर जाकर इंग्लिश पढ़ती थी।
अंकल बड़े प्यार से पढ़ाते भी थे।
मैं मन ही मन अंकल का बड़ा आदर और सम्मान करती थी।
मेरी जब शादी हो गयी तो हमारा संपर्क टूट गया।
वे कानपुर में ही थे और मैं यहाँ मुंबई आ गई।
मेरी शादी को दो साल हो गये हैं. इन दो सालों में मुझे अपने पति के लण्ड के अलावा कोई और लण्ड नहीं मिला।
मैं धीरे धीरे किसी पराये मरद के लण्ड के लिए तरसने लगी।
मेरी चूत मुझे बहुत परेशान करने लगी।
मेरा मन किसी काम में नहीं लग रहा था।
मुझे कॉलेज के लण्ड बहुत याद आ रहे थे।
एक दिन शाम को मैं अपनी दोस्त अंजलि के साथ चौपाटी पर घूम रही थी।
अचानक किसी के मुंह से निकला- अरे रागिनी तुम यहाँ?
मैंने पीछे मुड़ कर देखा तो बोली- आप प्रशांत अंकल है न?
वे बोले – हां रागिनी, मैं प्रशांत ही हूँ।
मैंने कहा- अरे अंकल, कहाँ खो गए थे आप? मैं आपको बहुत याद करती हूँ … आपसे मिलना चाहती थी। आपसे बातें करना चाहती थी। पर यह बताओ यहाँ मुंबई में कैसे?
वे बोले- यहाँ कोलाबा में मेरी बेटी है। मैं उसी के यहाँ ठहरा हुआ हूँ।
मैंने कहा- अरे वाह, मैं तो कोलाबा में ही रहती हूँ।
वे बोले- फिर तो हमारा मिलना होता रहेगा।
मैंने कहा- होता रहेगा ये तो आगे की बात है, मेरे साथ अभी चलो मेरे घर!
फिर मैंने उन्हें अंजलि से मिलवाया और कहा- यह मेरी दोस्त अंजलि है। यह भी साथ चलेगी।
फिर हम तीनों लोग गाड़ी में बैठ कर घर आ गए।
मेरा पति एक हफ्ते के लिए विदेश गया था।
मैंने दोनों को बड़े प्यार से बैठाया और झुक कर पानी दिया।
झुकने से मेरी साड़ी का पल्लू गिर पड़ा।
मेरी छोटी सी ब्रा के अंदर से मेरी बड़ी बड़ी चूचियाँ अंकल को दिख गईं।
वे अपने होंठ चाटने लगे।
मुझे बहुत अच्छा लगा, मैंने राहत की सांस ली। मुझे पराये मरद के लण्ड का रास्ता दिख गया।
मैंने ठान लिया कि आज नहीं तो कल मैं अंकल का ओल्ड लंड अपनी गरम चूत में ले ही लूंगी।
सुना है कि बड़े बड़े लोगों के लण्ड भी बड़े बड़े होते हैं।
इतने में नकल बोले- रागिनी, तुम पहले से ज्यादा खूबसूरत हो गई हो। ज्यादा सेक्सी दिखने लगी हो. शादी के बाद तुम्हारा चेहरा ज्यादा खिल गया है।
मैंने कहा- वो तो मैं नहीं जानती अंकल … लेकिन शादी के बाद मैं बहनचोद ज्यादा बोल्ड हो गई हूँ। अब मैं किसी भोसड़ी वाले से शर्माती नहीं हूँ और डरती भी नहीं हूँ। बेशरम हो गई हूँ मैं! मेरे पति के न रहने पर मुझे कोई भी मादरचोद हाथ नहीं लगा सकता!
वे बोले- क्या मैं भी नहीं लगा सकता रागिनी?
मैंने हंस कर कहा- तुम्हारी बात और है अंकल! तुम तो मेरे साथ जबरदस्ती भी कर सकते हो.
वे हंसने लगे।
इतने में अंकल का अचानक फोन आ गया तो वे चाय पीकर चले गये।
उनके जाने के बाद अंजलि बोली- यार रागिनी, मुझे लगता है कि तेरे अंकल लण्ड बड़ा सॉलिड होगा। उनकी नज़रें बता रहीं थीं कि वे तुम्हें अपना लण्ड पकड़ाना चाहते हैं. उन्हें तुमसे प्यार हो गया है।
मैंने कहा- अरे यार अंजलि, मैं खुद उनका लण्ड पकड़ना चाहती हूँ। मैं तो आज ही पकड़ लेती उनका लण्ड … लेकिन एक फोन ने सब काम बिगाड़ दिया बहनचोद!
अंजलि बोली- अच्छा पकड़ना तो फिर मुझे भी दिलवा देना उनका लण्ड! मैं भी लण्ड की प्यासी हूँ।
दूसरे दिन शाम को फिर घंटी बज उठी।
मैंने दरवाजा खोला तो बोली- अरे आप अंकल … अंदर आओ न प्लीज!
मैंने उन्हें बैठाया और फिर एक गिलास पानी का रखा।
आज मेरी चूचियाँ कुछ ज्यादा ही खुली हुईं थीं।
अंकल ने पानी पिया और बोले- थैंक यू रागिनी!
मैं उसके सामने बैठ गई।
इस समय मैं केवल ब्रालेट पहने थी नीचे एक छोटी सी टाइट नेकर।
मैं एकदम एक मॉडर्न गर्ल बनी हुई थी।
फिर मैंने पूछा- अंकल बोलो क्या पियोगे, ठण्डा या गर्म?
वे बोले- आज तो मैं व्हिस्की पियूँगा। तुम मेरा साथ दोगी तो!
मैंने कहा- हां जरूर दूँगी।
उन्होंने अपनी जेब से हाफ निकाला और मुझे दिया.
फिर क्या … हम दोनों व्हिस्की पीने लगे, सिगरेट भी पीने लगे.
हमारा मूड बन गया।
मैंने कहा- आज मुझे अपने कॉलेज के दिन याद आ रहें हैं अंकल!
फिर क्या … थोड़ा नशा हुआ तो दिल की बातें बाहर निकलने लगीं।
मैंने कहा- अंकल कल आपका फोन आया था. कोई खास बात थी क्या?
उन्होंने कहा- नहीं, कोई खास बात नहीं थी। पर हां, कल मुझे तुम्हारी गालियां बड़ी अच्छी लग रहीं थी रागिनी। मन करता था कि बस सुनता जाऊं? तेरी दोस्त न होती तो मैं तुमसे खुल कर बातें करता.
मैंने कहा- तो फिर आज कर लो न खुल कर बातें बहनचोद? आज तो वह बुरचोदी अंजलि नहीं है।
उन्होंने सिगरेट का एक कश लिया और मेरे मम्मों पर धुंआ छोड़ दिया।
मैं कहाँ चूकने वाली थी, मैंने भी कश लिया और उनके लण्ड पर धुआं छोड़ दिया।
वे बोले- तुम बहुत समझदार लड़की हो रागिनी!
मैंने कहा- हां, तभी तो मैंने तुम्हारे सवाल का जबाब देकर अपनी इच्छा ज़ाहिर कर दी।
वे बोले- रागिनी, एक बात है कि हमारे तुम्हारे बीच में उम्र का बड़ा अंतर है।
मैंने कहा- उम्र की माँ का भोसड़ा अंकल! औरत उम्र नहीं देखती, औरत मर्द का हथियार देखती है अंकल। हथियार टना टन हो तो उम्र की माँ चूत!
वे बोले- रागिनी, तुम इतनी हॉट हो कि मैं कल रात भर सो नहीं पाया।
मैंने कहा- अरे यार, मुझे भी तुम्हारी बड़ी याद आती रही रात भर!
उन्होंने मेरे कंधे पर हाथ रख दिया तो मैं भी उसकी जांघ पर हाथ रगड़ने लगी।
तब उन्होंने मेरी चुम्मी ले ली और मेरी नंगी टांगों पर अपना हाथ फिराने लगे।
फिर मेरा भी हाथ अपने आप उसके लण्ड तक पहुँच गया।
मैं उनकी पैंट के ऊपर से ही लण्ड टटोलने लगी।
मेरे मुंह से निकला- तेरा हथियार तो मादर चोद बड़ा जबरदस्त लग रहा है अंकल?
मैं मन ही मन अंकल से पूरी तरह फंस चुकी थी।
मुझे बिना उनका लण्ड देखे एक मिनट का भी चैन न था।
मैं जल्दी से जल्दी उन्हें नंगा करना चाहती थी और इसी आवेश में मैंने उनकी शर्ट उतार दी।
उनके चौड़े कंधे बलिष्ठ भुजाएं, चौड़ी छाती और पूरा कसरती बदन देख कर मैं उन पर मोहित हो गयी।
तब तक उन्होंने मेरी ब्रा का हुक खोल डाला तो मेरी दोनों मम्मे उसके सामने छलक पड़े।
वे मम्मे देख कर मस्त हो गये, उन्हें पकड़ कर सहलाने लगे, मसलने और चूमने लगे।
अंकल मेरे निप्पल मुंह में भर कर चूसने लगे।
मैं भी उत्तेजित होने लगी, मज़ा लेने लगी।
फिर बड़ी बेशर्मी से मैंने उनकी पैंट उतार दी उनकी नेकर भी खोल डाला।
नेकर खुलते ही लौड़े मियां ताल ठोकते हुए बाहर आ गए।
मैंने उसे देखा तो सन्न रह गयी।
सांप की तरह फनफनाकर खड़ा हो गया था उनका मोटा तगड़ा लण्ड।
लण्ड का अंडाकार 3″ का चिकना टोपा एकदम झकास लग रहा था।
मैंने उसे पकड़ा चूमा और बोली- वाह क्या मरदाना लण्ड है अंकल? ऐसा लौड़ा बहुत कम लोगों का होता है। तुम बड़े लकी हो. तुम्हारा लण्ड लाखों में एक है. मैं तो तुम्हारे लण्ड पर मर मिटी। मेरा तो दिल आ गया इस मादरचोद लण्ड पर! क्या मस्ताना लण्ड है भोसड़ी का! मज़ा आ गया यार ऐसा लौड़ा देख कर!
तब तक उन्होंने मेरी छोटी सी नेकर उतार कर फेंक दी।
मैं माँ की लौड़ी उसके आगे एकदम नंगी हो गयी।
मेरा यह पहला मौका था जब मैं शादी के बाद किसी पराये मर्द के आगे नंगी खड़ी थी वह भी उसका नंगा लण्ड पकड़े हुए!
मैं किसी पराये मर्द को पहली बार नंगा देख भी रही थी।
मुझे किंचित मात्र भी न शर्म थी और न झिझक … मैं बिंदास अपनी जवानी का मज़ा लूटने लगी.
मैंने मन में कहा कि मैं झांट किसी की परवाह नहीं करूंगी। अब तो मैं एक नहीं, कई लण्ड का मज़ा लूंगी।
बस मैं अंकल का लण्ड बड़े प्यार से चाटने लगी और अंकल भी उसी प्यार से मेरी फुद्दी चाटने लगे।
मेरी चूत बहुत गर्मा चुकी थी।
अंकल उसमें बार बार अपनी उं गली घुसेड़ रहे थे।
मैंने धीरे से अपनी टाँगें फैलाई तो मेरी चूत पूरी तरह खुल गयी.
अंकल को यही चाहिए था।
उन्होंने फ़ौरन लण्ड पेल दिया अंदर और बिना रुके चोदने लगे मुझे!
मैं भी अपने कॉलेज के दिनों को याद कर कर के चुदवाने लगी … मैं एन्जॉय करने लगी।
मुझे लगा कि आज मैं सच में अपनी सुहागरात मना रही हूँ।
अपनी सुहागरात में भी मुझे इतना मज़ा नहीं आया था।
मैं बोली- अंकल, मुझे अपनी बीवी समझ कर चोदो। मैं ही तुम्हारी असली बीवी हूँ, मुझे चोदो। मेरी बुर चोदो, मेरी चूत चोदो, मेरी गांड चोदो। मैं तुम्हारी ही हूँ, जैसे चाहो वैसे चोदो। तुम्हारा लण्ड बड़ा मज़ा दे रहा है यार!
वे बोले- ले भोसड़ी की रागिनी, आज मैं फाड़ डालूँगा तेरी चूत … भोसड़ा बना दूंगा मैं तेरी चूत का! मैंने जब मुंबई में तुझे पहली बार देखा था तो मेरा लण्ड खड़ा हो गया था. और आज देख वही लण्ड तेरी चूत में घुसा है। तेरी माँ की चूत … तू भोसड़ी वाली एकदम रंडी है और मैं रंडियां खूब चोदता हूँ। मैं मुंबई में रंडियां चोदने ही आता हूँ। मैं हर रोज़ 2/3 लड़कियों की चूत में लण्ड पेलता हूँ।
अंकल को जोश आ गया था, वे बोलते रहे- मैं खुद बहुत बड़ा हरामजादा हूँ। मैं रंडीबाज हूँ, लौडियाबाज़ हूँ। मैं अपने दोस्तों की बीवियां फंसा फंसा कर चोदता हूँ। बीवियां भी बुरचोदी मेरे लण्ड की दीवानी है और बार बार मुझसे चुदवाने आतीं हैं।
सच में अंकल बड़े मूड में थे और मस्ती से अपनी ही पोल खोल रहे थे।
चुदाई का नशा शराब के नशे से ज्यादा ताकतवर होता है।
दूसरे की बीवी चोदने के नशे में वह सब सच उगल देता है।
मुझे अंकल की बातें, उनका जोश, उनकी गालियां सब कुछ बड़ा अच्छा लग रहा था।
मैं अपनी गरम चूत में ओल्ड लंड एन्जॉय कर रही थी।
मेरा मन सातवें आसमान पर था।
इस तरह उन्होंने मुझे हर तरफ से चोदा और मैं भी खूब मन से चुदी।
मैंने उसे रात में रोक लिया और तब उन्होंने मुझे रात में 3 बार चोदा।
सुबह उठ कर वे चले गये।
उस दिन मुझे अहसास हुआ कि बड़े लोगों से चुदवाने में ज्यादा मज़ा आता है।
मेरा नाम राहुल है, मैं Sex Stories द्वितीय वर्ष का छात्र हूँ। मैं आपको जो कहानी बताने जा रहा हूँ वह गत वर्ष ग्रीष्मकाल की है।
मैं गर्मी की छुट्टियों में मुम्बई गया था। मुम्बई में मेरी चाची रहती हैं। वह वहाँ पर चेम्बुर में रहती हैं। मैं जब मुम्बई गया था तब चाची के पास मेरी चचेरी बहन भी आई हुई थी। उसका नाम रीना है। उसकी शादी हो चुकी है। उसकी उम्र चौबीस वर्ष की है। वो दिखने में बहुत ही सेक्सी है। उसके कपड़े पहनने के ढंग और रहन-सहन भी बहुत सेक्सी हैं। उसे कोई भी देखे तो उसका लण्ड खड़ा होना ही होना है।
एक दिन चाची को गाँव जाना पड़ा। वह गाँव चली गई। घर पर मैं और रीना दीदी दोनों ही थे। उस दिन शाम को मैं बोर हो गया था, इसलिए मैंने दीदी से कहा- क्यों ना फिल्म देखने चलते हैं।’
वह भी राजी हो गई, और हम फिल्म देखने चले गए। उस दिन हमने मर्डर फिल्म देखी। फिल्म में काफी गरम दृश्य थे। फिल्म देखने के बाद हम घर आए। हमने रात का खाना खाया। रात काफ़ी हो चुकी थी।
आपको तो पता ही होगा, मुम्बई में घर बहुत छोटे होते हैं। उस पर मेरी चाची एक कमरे के घर में रहती हैं। वहाँ सिर्फ एक ही बिस्तर के बाद, थोड़ी और जगह बचती थी। अब हमें सोना था। सो मैंने अपनी लुँगी ली और दीदी के सामने ही अपने कपड़े बदलने लगा।
मैंने मेरी शर्ट खोली, बाद में पैन्ट भी। मेरे सामने अब भी मर्डर फिल्म के दृश्य घूम रहे थे, इसलिए मेरे लंड खड़ा था। वो अण्डरवियर में तम्बू बना रहा था।
मेरे पैन्ट निकालने के बाद मेरे लण्ड की तरफ़ दीदी की नज़र गई, वह यह देखकर मुस्कुराई। मैंने नीचे देखा तो मेरे अण्डरवियर में बहुत बड़ा टेन्ट बना हुआ था। मैं शरमाया और मैंने मेरा मुँह दूसरी ओर घुमा लिया, फिर लुँगी बाँध ली।
पर लुँगी के बावज़ूद मेरे लंड का आकार नज़र आ रहा था। उस हालत में मैं कुछ भी नहीं कर सकता था। फिर मैंने यह भी सोचा कि दीदी यह सब देखकर मुस्कुरा रही है, उसे शर्म नहीं आ रही है, तो फिर मैं क्यों शरमाऊँ?
मैं बिस्तर पर जाकर सो गया। फिर दीदी ने आलमारी से अपनी नाईटी निकाली और कमरे का दरवाज़ा बन्द कर लिया, उसने साड़ी उतारी। वाऊ… क्या बद़न था। वह देखकर तो मैं पागल ही हो गया और मेरा लंड उछाल मारने लगा। उसने अपनी ब्लाऊज़ निकाली और बाद में अपनी पेटीकोट भी निकाल दी। वह मेरे सामने सिर्फ ब्रा और पैन्टी में खड़ी थी।
उसे उस हालत में देखकर तो मैं पागल ही हो रहा था। लेकिन वह मेरी दीदी थी, इसलिए नियंत्रण कर रहा था। मुझे डर भी लग रहा था कि मैं कुछ कर ना बैठूँ और दीदी को गुस्सा आ गया तो मेरी तो शामत आ जाएगी। उसने नाईटी पहन ली। उसकी नाईटी पारदर्शी थी, जिसमें से उसका सारा जिस्म नज़र आ रहा था।
वह मेरे पास आकर सो गई। हम दोनों एक ही बिस्तर पर सोए थे। लेकिन उस रात मुझे नींद नहीं आ रही थी। मेरे सामने उसका नंगा जिस्म घूम रहा था। और उसके मेरे पास सोने के कारण मेरा तनाव और बढ़ा हुआ था। लेकिन कुछ करने की हिम्मत भी नहीं हो रही थी।
आधे घंटे तक तो मैं वैसे ही तड़पता रहा। लेकिन बाद में मैंने सोचा कि ऐसा मौक़ा बार-बार नहीं आने वाला। अगर तूने कुछ नहीं किया तो हाथ से निकल जाएगा। मैंने सोच लिया थोड़ा रिस्क लेने में क्या हर्ज़ है। और मैं थोड़ा सा दीदी की ओर सरक गया।
दीदी मेरी विपरीत दिशा में मुँह करके सोई थी। मैंने मेरा हाथ उनके बदन पर डाला। मेरा हाथ दीदी के पेट पर था। मैंने धीरे-धीरे मेरा हाथ उनके पेट पर घुमाना चालू किया। थोड़ी देर बाद मैंने अपना हाथ उनकी चूचियों पर रखा। उसकी चूचियाँ काफ़ी बड़ी और नरम थीं।
मैंने उसकी चूचियाँ धीरे-धीरे दबानी चालू कीं। उसने कुछ भी नहीं कहा, ना ही कोई हरक़त की। मेरी हिम्मत काफ़ी बढ़ गई। मैंने अपने लंड को उसके चूतड़ पर दबाया और उसे अपनी ओर खींचा और फिर धीरे-धीरे मैं अपना लंड उसके दोनों चूतड़ों के बीच की दरार में दबाने लगा। वह मेरी ओर घूम गई। मेरी तो डर के मारे गाँड ही फट गई।
लेकिन वह भी मेरी ओर सरकी, तो मेरा लंड उसकी चूत पर दब रहा था और उसकी चूचियाँ मेरी छाती पर। मैं समझ गया कि वह सो नहीं रही थी, बस सोने का नाटक कर रही थी और वह भी चुदवाना चाहती है। अब तो मेरे जोश की कोई सीमा ही नहीं थी। मैंने उसे मेरी ओर फिर से खींचा, तो वह मुझसे थोड़ा दूर सरक गई। मैं डर गया, और चुपचाप वैसे ही पड़ा रहा।
थोड़ी ही देर बाद उसने अपना हाथ मेरे लंड पर रख दिया और मसलने लगी। मैं बहुत खुश हुआ।
उसने अपने हाथों से मेरी लुंगी निकाल दी और अण्डरवियर भी, और मेरे लंड को मसलने लगी, फिर उसने मेरे कान में कहा- वीजू, तुम्हारा लंड तो बहुत बड़ा है। तुम्हारे जीजू का तो बहुत छोटा है।’
मैंने भी दीदी की नाईटी निकाल दी और उनको पूरा नंगा कर दिया। फिर मैं उनके ऊपर लेट कर उन्हें चूमने लगा। मैं उनके पूरे बदन को चूम रहा था। वह सिसकियाँ भर रही थी। मैं उसे चूमते-चूमते उसकी चूत तक चला गया और उसकी चूत पर अपने होंठ रख दिए। उसके मुँह से सीत्कार निकल गई। फिर मैंने उसकी चूत में अपनी जीभ डालनी शुरु की, वह अपने चूतड़ उठाकर मुझे प्रतिक्रिया दे रही थी।
मेरा लंड अब लोहे जैसा गरम हो गया था। मैं उठा और उसकी छाती पर बैठ गया और मैंने लंड उसके मुँह में डाल दिया। वह भी मेरा लंड बड़े मज़े से चूसने लगी। मुझे बहुत मज़ा आ रहा था।
मैंने बाद में अपना लण्ड उसकी दोनों चूचियों के बीच में डाला और उसे आगे-पीछे करने लगा। वाऊ… क्या चूचियाँ थीं उसकी, मैं तो पागल हुआ जा रहा था।
थोड़ी देर बाद उसने कहा- वीजू, प्लीज़, अब रहा नहीं जाता, लंड मेरी चूत में डाल दो और मुझे चोदो।
मैं उसके ऊपर फिर से लेट गया और मैंने मेरा लंड हाथ में पकड़ कर उसकी चूत के ऊपर रखा और एक ज़ोर का झटका दिया तो मेरा आधा लण्ड उसकी चूत में घुस गया।
मैंने दीदी से पूछा- दीदी, तुम तो कह रही थी कि जीजू का लण्ड मेरे लण्ड से काफी छोटा है, तो तुम्हारी चूत इतनी ढीली? एक ही झटके में आधा लण्ड अन्दर चला गया।’
इस पर वह मुस्कुराई और बोली- अरे वीजू, तुम्हारे जीजू का लण्ड छोटा तो है, पर मेरी चूत ने अब तक बहुत से लण्ड का पानी चखा है।’
फिर मैंने दूसरा झटका दिया और मेरा पूरा लण्ड उसकी चूत में चला गया। फिर मैंने उसकी चुदाई शुरु कर दी।
वह भी अपनी कमर उठाकर मेरा साथ दे रही थी. उसके मुँह से आवाज़ें निकल रही थीं, वह कह रही थी- वीजू… चोदोओओओ… और ज़ोर से चोदोओओओओ… अपनी दीदी की चूत आज फाआआआड़ डालो… ओह.. वीजू… डालो और ज़ोर से और अन्दर डालो… बहुत मज़ा आ रहा है।’
उसकी ये बातें सुनकर मेरा जोश और भी बढ़ जाता और मेरी रफ़्तार भी बढ़ती जा रही थी। फिर मैं झड़ गया और वैसे ही उसके बदन पर सो गया और उसकी चूचियों के साथ खेलने लगा। उस रात मैंने दीदी की ख़ूब चुदाई की। Sex Stories
Sex stories- मेरा नाम सुमित है. मैं मुंबई में रहता हूँ. मैं आज से एक साल पहले मुंबई आया था. मैने जहा पर रूम किराये पर लिया था वहा एक आंटी भी रहती थी. मेरी आंटी से दोस्ती हूँ गई. आंटी की दो लडकियां थी. एक का नाम सुनीता और एक का नाम सिम्मी था. दोनों बहुत सेक्सी थी. एक थोडी मोटी थी जिसका नाम सुनीता था. बड़ी वाली एकदम सेक्सी और स्लिम थी. दोनों चोदने वाली चीजे थी. दोनों दूध की तरह गोरी थी. मैं रात दिन उनकू चोदने के बारे मैं सोचता रहता. कई बार मैं उनकू याद करके नगन करके ख्यालू मैं चोदता रहता था. उनकू याद करके मैं दिन मैं एक बार मुठ जरूर मरता था
एक दिन मेरी किस्मत खुल गई. मैने सिम्मी को उसके बॉय फ्रेंड के साथ गार्डन मैं फ्रेंच किस करते देख लिया. मैं वही पर उनका पीछा करते रहा. मैने मोबाइल से उनके फोटो भी ले लिए. शाम को जब वो घर वापिस आ रही थी तू मैने उसको रास्ते मैं रूक लिया. मैने उसे कहा पैदल जा रही हो आओ बाईक पे घर छोड़ दू पहले तो वो मन करती रही पर जोर डालने पर वो मान गई. मैने उसे बिठा लिया. रास्ते मैं मैने पूछा गार्डन मैं क्या कर रही थी. वो घबरा गई और कहने लगी कुछ नही. मैने कहा ज्यादा बनो मत मेरे पास तुम्हारे फोटो हैं. वो डर गई और मान गई. वो मेरी मिन्नतें करने लगी की घर पर मत बताना. मैने कहा एक शर्त पर नही बताऊंगा अगर तुम मेरे से चुदवाओगी. उसने कहा यह नही हो सकता. मैने कहा तो मैं बता दूंगा. वो मान गई और मुझे अपना मोबाइल नम्बर दिया और कहने लगी कल जहा कहोगे आ जाऊगी.
मैं खुश हो गया. रात भर कल का इंतज़ार करता रहा. सुबह होणे पर मैने अपनी दोस्त से रूम की चाबी ली. मेरा दोस्त सुबह जॉब पर जाता था और रात को घर आता था. मैने सिम्मी को फ़ोन करके वहीं बुला लिया. दोपहर को १२ बजे का मैने टाइम रखा. वो कॉलेज जाने की बजाये सीधे मेरे पास आ गई.. मैने उसे रूम मैं बैठाया. सबसे पहले उसे कोल्ड ड्रिंक पिलाया. उसने नीले रंग की जींस और टॉप पहन रखा था. जिसमें वो सेक्स सिम्बोल लग रही थी. मैं उसे उठा कर बेड पर ले गया उसे वहा लिटा दिया और साथ ख़ुद भी लेट गया. मैने उसको कस कर बाहों मैं ले लिया और पूरे बदन पर किस करने लगा. फिर मैने उसके मखमल जैसे ममे हाथो में लिए और धीरे २ दबाने लगा. वो सिसकिया भरने लगी आआया…. आया…. ह्ह्छ.. .मेरी मस्ती और बढ गई. बाद में मैं उसे समूच करने लगा. मैने उसे गोद मैं बिठाया और स्मोच और गहरा कर दिया. मैं कभी उसके मुँह मैं जीब डालकर उसे कसता कभी वो मेरे मुँह मैं अपनी जीभ डालती और उसे चूसता. १५ मिनट हम यही करते रहे.
वो पूरी तरह गरम हो चुकी थी. मैने कहा चल साली अब तेरे को नग्न करू और तेरे ममे पियू और तेरे को चोदूं. मैने उसे नग्न कर दिया. अब उसके बदन पर काले रंग की ब्रा और पेंटी थी. मैं उसके रूप को देख कर पागल हो गया और पूरे बदन को उसके चूमने लगा. मैं उसके पेट पर चुम्बन चोदता रहा और उसे सिस्क्किया देता रहा. मैने उसके पूरे बदन पर हाथ और मुह फेरता रहा.वोह स्स्स्स.. आःछ…….आआस्स्स्स….करती रही. उसके गोरे बदन पर गले मैं चैन और काली ब्रा और पेंटी उसे गजब रूप दे रही थी. फिर मैने उसकी पेंटी और ब्रा उतारी. अब वो पूरी तरहे नंगी थी. मैने उसके मम्मों को हाथ मैं भर लिया वो कड़क हो चुके थे. मैने उसके एक ममे को हाथ मैं लिया और दोसरे हाथ से उसके निपल को प्यार से दबाने लगा. वो पागल हो गई और सिसकिया भाते हुए मेरे साथ चिपट गई.
मैने कहा आज तेरे को चोद कर तेरे जुड़वा बच्चे पैदा करूगा. बोल कितनी बच्चे पैदा करेगी. वो कहने लगी प्लीज़ ऐसा मत करना मोहल्ले में मेरी बेइस्ती हो जायेगी. मैं हस पड़ा और कहने लगा फिकर मत कर तुझे प्रेग्नैन्सी पिल खिला दूगा. बाद मैं मैने कहा तेरे बॉय फ्रेंड ने कितनी बार तेरे को चोदा है. उसने कहा कभी नही. मैने कहा क्या २ किया उसने तेरे साथ. उसने उत्तर दिया सिर्फ़ पहला फ्रेंच किस जब तुमने देख लिया. मैं खुश हो गया की कुवारी फ़ुद्दी मिलेगी आज तो. मैं उसके ममे हाथ मैं लेकर निप्पल चूसने लगा. उसके गोरे म्मो पर काले निप्पल मस्त थे. मैं १५ मिनट मम्मे चूसता रहा और वो सिसकिया भरती रही. वो मेरे अंडरवियर से मेरा लंड टटोल रही थी. मैने अंडरवियर उतार दिया. मेरा लंड बाहर आ गया. वो मेरे लंड से खेलने लगी.
मैने उसे मुँह मैं लेने को कहा. वो मना करती रही. मैने उसके बालो से पकडा और मुँह में लंड घुसा दिया. बाद में वो उसे चूसने लगी अब उसे ७ इंच लंबा और मोटा लंड अच्छा लगा और वो उसे लोलीपोप की तरहे चूसने ली. मैने उसके सर को पकड़ा और मूह में ही वीर्य निकाल दिया. अब वो गुस्सा हो गई पर बाद में मैने कहा ऐसा नही करुंगा तो वो मान गई.फिर में उसके बदन से खेलता रहा और लंड के खडे होने का इंतज़ार करने लगा. लंड १० मिनट बाद दोबारा खड़ा हुआ. अब में उसकी फुदी को चाटने लगा. उसकी फुदी फूल गई तो मैने अपनी लंड को उसके मुँह में दे कर गीला किया, फिर फुदी पर रखा और जोर से झटका मारा और लंड फिसल गया. उसकी फुदी छोटी थी.
मैने दुबारा उसकी फुदी को खोला और लंड रखा और जोर से झटका मारा. आधा लंड अन्दर घुस गया.वो दर्द से तड़फ़ने लगी. कहने लगी मुझे माफ़ कर दो प्लीज़. मैं हंस पड़ा और एक और झटका देकर पूरा लंड अन्दर धकेल दिया. वो रोने लगी और कहने लगी मेरी गलतियां माफ़ कर दो मुझे छोड़ दो. मैं उसके ऊपर लेट गया और उसे समूच करने लगा और ममे चूसने लगा. अब दर्द कम होने लगा था . मैने दोबारा चोदना सुरु किया अब उसे मजा आने लगा. सिम्मी भी अब मेरा साथ देने लगी. कुछ देर बाद वो झड़ गई.में नही झडा. मैं लगातार लगा रहा वो छुटने का यतन कर रही पर में उसे पेलता रहा. में आधे घंटे बाद उसके झड़ने के बाद झड़ा. मैने उस दिन तीन बार अलग २ ऐन्गल से उसको चोदा. सिम्मी को मेरे दोस्त और मैने मिल कर कैसे चोदा और सुनीता की चुदाई की कहानी में अगली बार लिखूंगा.
तो दोस्तों कैसी लगी मेरी Sex stories मुझे लिखे
दिन में बंगाली भाभी के साथ लेस्बियन सेक्स करने के बाद मुझमें सेक्स की भूख कुछ ज्यादा ही बढ़ गई लगती थी।
मगर मैं क्या करती, सुनील को तो डांटकर भगा चुकी थी।
उसका रोता हुआ चेहरा देख कर मुझे हंसी सी आ रही थी।
लेकिन मैं बिल्कुल ही निष्ठुर हो चुकी थी।
मेरे मन में ग्लानि भी थी कि मैंने अपने पति को धोखा दिया है।
लेकिन अब तो इस बारे में कुछ किया नहीं जा सकता था क्योंकि मैं तो सुनील से अपनी चुदाई करवा चुकी थी।
यही सोचते हुए शाम हो गई।
अब मेरे पति के आने का समय हो गया था।
मेरी बेटी जाग गई तो मैंने उसे दूध पिलाया।
इतने में ही मेरे पति आ गए।
शाम से ही मैंने अपने पति को सेक्स के लिए उकसाना शुरू कर दिया था, एक बार तो मैंने उनको तगड़ा वाला स्मूच कर दिया।
फिर एक बार मैं उनकी गोदी में बैठ कर अपनी गांड उनके लन्ड पर रगड़ने भी लगी।
मेरे पति भी मेरा साथ देने लगे, मेरे चूचे दबाने लगे तो कभी मेरी गांड में उंगली भी करने लगे।
अभी रात होने में देर थी, गुड़िया भी जगी हुई थी।
इसलिए मैंने खाना बना कर पहले गुड़िया को दूध पिलाया।
फिर हम दोनों ने खाना खाया।
मैं खाना खाकर गुड़िया को सुलाने लगी और मेरे पति मुझे बार बार देख कर मुस्करा रहे थे।
जैसे सोच रहे हों कि आज तो मैंने उनका कत्ल कर देना है।
करीब 9 बजे गुड़िया सो गई तो मैं धीरे से उठी.
और फिर मैंने अंगड़ाई ली और धीरे-धीरे अपनी गांड मटकाते हुए कपड़े खोलने लगी।
बस मैं पैंटी में आ गई क्योंकि चूचों में दूध इतना आता है कि चूचे बहुत भारी हो गए हैं। उनका दूध मुझे मेरे पतिदेव को पिलाना पड़ता है।
मुझे देख कर मेरे साहब भी कपड़े खोलकर सिर्फ अंडरवियर में आ गए।
मैं उनके पास चिपक कर उनके कंधे पर सिर रखते हुए एक पैर उनके ऊपर रखकर लेट गयी।
मेरा घुटना उनके लन्ड को छू रहा था और मैं एक हाथ से उनके लन्ड को सहला रही थी।
आखिरकार जो डर था वही हुआ।
वे पूछ बैठे- आज इतनी मस्ती क्यों आ रही है ये बता?
एक बार तो मैं हड़बड़ा गई लेकिन सम्भल कर बोली- आज मुझे मेरी सुहागरात याद आ गई थी। जबकि उनको पता ही नहीं कि मैं एक दिन पहले सुनील के साथ सुहागदिन मना चुकी थी।
बस इतना सुनते ही मेरे पति मेरे ऊपर भूखे शेर की तरह टूट पड़े।
वे मेरे होंठों को, मेरे गालों को, और मेरी चूची को दबाकर दूध की धार खुद के मुंह में लेने लगे, जोर से मुझे मसलने लगे।
मैं सिर्फ आह … ही कर पा रही थी।
सच में मेरी जिंदगी की वो सबसे हसीन रात थी।
मेरे अंदर कामाग्नि भयंकर जल रही थी।
लग रहा था कि बस लन्ड मेरी चूत में हो और मैं चुदती रहूं।
तभी उन्होंने अपने दांतों से मेरी पैंटी उतारनी शुरू की।
मैंने थोड़ा सा ऊचक कर उनका साथ दिया।
वे मेरे पैर के अंगूठे को काटने लगे और मैं तड़प उठी।
सच में बहुत मजा आ रहा था।
तभी वो मेरे पैरों को चाटते हुए मेरी चूत तक आ गए।
पहले तो उंगली से सहलाने लगे, फिर अपनी जीभ से चाटने लगे।
मैं सिर्फ आनन्द के सागर में गोते लगा रही थी और सिर्फ ‘आह … और करो … ऐसे ही चाटो … बस करते रहो … अंदर तक … आह्ह’ करती जा रही थी।
उनका सिर मैं लगातार चूत में दबा रही थी।
मैं बार बार गांड को उठाकर ऊंची होने की कोशिश कर रही थी।
मुश्किल से 2 मिनट बीते थे कि मेरी चूत ने पानी छोड़ दिया; मेरा शरीर एकदम हल्का हो गया।
मैं हांफ रही थी।
तभी मेरे पति अपना लंड मेरे मुंह के पास ले आए।
उन दिनों मुझे चूसना अच्छा नहीं लगता था।
उनकी खुशी के लिए मैं उनके टट्टे चाटने लगी।
मैं लंड को साइड से चाट रही थी।
मेरे पति इससे भी संतुष्ट हो जाते थे।
चाटने की वजह से मेरे निप्पल तन गए थे, मेरे अंदर कामरस बहने लगा था।
बस मुझे लगने लगा कि अब तो चोद ही दे ये।
पतिदेव भी समझ गए, उन्होंने मेरी गांड के नीचे तकिया लगा दिया जो कि हमेशा लगाते हैं।
इससे चूत ऊपर हो जाती है और टांगें चौड़ी करने से लन्ड अंदर बच्चेदानी तक पहुंच जाता है।
मेरे पति अपना लन्ड मेरी चूत में रगड़ने लगे।
इससे मैं और ज्यादा तरस गई और उनसे बोली- यार अब चोद दो! अब नहीं रहा जाता बस!
तभी एक झटका लगा और उनका आधा लन्ड मेरी चूत के अंदर घुस गया।
मेरे मुंह से आह्ह निकल गई और मैं बोली- आराम से करो यार, हमेशा ही क्यों हवसी बने रहते हो!
लेकिन उन्होंने जैसे सुना नहीं …बस दूसरा झटका लगा और लन्ड सीधा मेरी बच्चेदानी के मुंह से टकराया।
थोड़ा दर्द हुआ लेकिन मजा भी आ गया।
फिर पति धक्के पर धक्के लगाने लगे और मैं चूतड़ उचका कर लंड अंदर लेने की कोशिश करने लगी।
ये तो राजधानी मेल की तरह शुरू हुए और लगातार 10 मिनट तक मुझे ठोकते रहे।
फिर उन्होंने मेरी टांगें पकड़ कर उठा लीं और खुद घुटनों के बल बैठकर चोदने लगे।
मेरे मुंह से आह … आह … निकलती जा रही थी और चुदाई की मस्ती में चूर हो चुकी थी।
फिर ये पूछने लगे- माल चूचियों पर निकालूं या चूत में?
मैं बोली- चूत में!
इतना कहते ही मेरी चूत का पानी भी छूटने लगा और साथ में पतिदेव भी झड़ गए।
हम दोनों पस्त होकर करीब 15 मिनट ऐसे ही पड़े रहे।
फिर मैंने उनको हटने को बोला।
तौलिया लेकर मैंने अपनी चूत साफ की; उनके लन्ड को पौंछा, एक बार किस किया और सो गई।
अगली सुबह उठी तो मैं संतुष्ट थी।
लेकिन पता नहीं क्यों मुझे सुनील का लंड रह रहकर याद आ रहा था।
अब खुद ही मेरी इच्छा उससे चुदवाने की हो रही थी।
सुनील रोज मेरे घर के सामने से निकलने लगा और उसको लालच रहता था कि वह मुझसे फिर बात करना शुरू करे।
वह इतना तो समझ ही गया था कि मैंने उसकी बात को राज रखा हुआ है क्योंकि मेरे पति उससे नॉर्मल तरीके से ही मिल रहे थे।
अब मेरे मन में वापस उससे चुदवाने की इच्छा होने लगी थी।
लेकिन एक डर भी लग रहा था कि किसी को पता चल गया तो क्या होगा!
मेरे पति की शिफ्ट शाम 4 बजे से रात 12 बजे की थी।
अचानक 2 बजे सुनील अपने स्कूल की छुट्टी करके घर आ गया।
वह मेरे पति से बात करने लगा.
तभी मेरे मन में ये ख्याल आया कि चलो इसको फिर से बुला ही लेते हैं।
तो मैंने कहा- आपको बेटी रोज शाम को याद करती है और आप उसे घुमाने भी नहीं ले जाते।
इतना सुनते ही उसकी जैसे आत्मा प्रसन्न हो गई और बोला- हां भाभी, थोड़ा बिजी था … आज लेकर जाऊंगा।
वह ठीक 6 बजे घर आ गया और बेटी को घुमाने ले गया।
करीब आधे घण्टे बाद वह वापिस आया और कमरे में बैठ गया।
मैंने चाय बनाई और हम साथ में पीने लगे।
फिर सीधे ही उसने बोला- भाभी, चूत की खुजली बर्दाश्त नहीं हुई न? मैं तो जानता हूं कि जो एक बार मुझसे चुदवा ले, दोबारा भी चुदवाती जरूर है। बताओ कितने बजे आऊं?
मैं बोली- रात 9.30 के बाद आना, तब तक मैं गुड़िया को भी सुला दूंगी।
उसके बाद मैंने रात की तैयारी करनी शुरू कर दी।
खाना तो 3 बजे बन ही गया था क्योंकि 4 बजे उनको भी टिफिन देना होता है।
उसके बाद मैंने अपनी चूत के बाल साफ किए।
गर्मी के दिन थे तो शाम को दुबारा नहा भी ली और गुड़िया को जल्दी सुलाने की कोशिश करने लगी।
गेट मैंने खुला ही छोड़ दिया था और गुड़िया को लेकर बेड पर लेटा कर सुलाने लगी।
करीब 9 बजे तक गुड़िया सो भी गई।
फिर धीरे से मुझे भी नींद आ गई।
मुझे पता भी नहीं लगा कि कब सुनील मेरे घर में दाखिल हो गया।
वह फिर मेरे मम्में सहलाने लगा और मेरे गाल पर प्यार करने लगा।
ऐसा करने से मेरी आँख अचानक खुल गई तो वो दूर हो गया और बोला- भाभी, दूसरे बिस्तर पर बैठते हैं।
फिर हम दोनों उठकर दूसरे बिस्तर पर आ गए।
गुड़िया के पास मैंने तकिया लगा दिया जिससे कि वह बीच में न जगे।
फिर हम दोनों ऐसे चिपक गए जैसे कि बरसों बाद मिले हों।
मेरी और उसकी जीभ एक दूसरे के साथ खिलवाड़ कर रही थी।
वह कुर्ते के ऊपर से मेरे मम्में दबा रहा था, सहला रहा था।
कभी मेरी गांड पकड़ कर दबा रहा था और मैं भी उससे बेल की तरह लिपटी हुई थी।
उसको बस जितना मैं भींच सकती थी उतना मैंने भींच रखा था।
दोनों की लार एक हो रही थी।
करीब 15 मिनट तक यही स्थिति रही हम दोनों की।
उसके बाद हमने एक दूसरे की तरफ देखा और जैसे कहा हो कि कहां थे यार इतने दिनों तक हम दोनों।
तभी उसने मुझे खड़े खड़े पलट दिया।
अब वह मेरी पीठ और गर्दन को पीछे से चूमने लगा, साथ-साथ मेरे चूचे भी दबाने लगा।
मेरा दूध मेरे कुर्ते को गीला कर रहा था।
उसने मेरा कुर्ता उतार दिया; मैंने हाथ उठा कर उसका साथ दिया।
अब मेरे मम्मे आजाद थे क्योंकि मैंने ब्रा नहीं पहनी थी।
तभी उसने मेरी सलवार का नाड़ा भी खोल दिया।
अब चूंकि पैंटी नहीं थी तो मैं एकदम नंगी खड़ी थी।
फिर मैंने बोला कि वो भी उतारे कपड़े।
तो वह सब कुछ उतार कर मेरे पास आ गया और मेरे ऊपर लेट गया।
उसका मोटा लन्ड मेरी चूत को छू रहा था और मैं आनंद के सागर में गोते लगा रही थी।
वह मेरे दूध की अमृत धार का पान कर रहा था और मैं उसकी पीठ सहला रही थी।
तभी वो उठकर मेरे पैर के अंगूठे को चूसने लगा।
फिर बोला- भाभी, मैं आज से आपका गुलाम हूं।
वह चाटते हुए मेरी जांघों तक आ गया।
फिर वह मेरी नाभि को चाटने लगा।
अब मैं मचल पड़ी थी।
इतना मजा आ रहा था कि मैं लिख नहीं सकती।
बस मैं आह … आह कर रही थी और पैर हल्के से पटक रही थी।
ऐसा लग रहा था कि बस ये मादरचोद मुझे चोद दे।
पर सुनील ऐसा नहीं कर रहा था।
तभी वह अपना मुंह मेरी चूत पर ले गया और हाथों से मेरी चूचियों की घुंडियों को उमेठने लगा।
बस कुछ बयां नहीं कर सकती कि मैं कितने आनन्द के सागर में गोते लगा रही थी।
उसने धीरे-धीरे मेरे भगनासा को चाटना शुरू किया; फिर मेरी चूत में अपनी जीभ घुसाने लगा।
यह मेरे लिए अलग अनुभव था।
बस मैंने उसका सिर पकड़ कर अपनी चूत में दबा दिया।
मेरे मुंह से बस आह-आह निकल रही थी।
तभी मेरा कामरस छूट गया और उसने अपना मुंह हटा लिया।
मेरी सांसें लम्बी-लम्बी चल रही थीं।
मुझे लग रहा था कि मैं स्वर्ग में हूं।
इतना मजा मुझे आज तक नहीं मिला था।
फिर मैंने सुनील से कहा- अब ऊपर आ जाओ।
वह मेरे पास आ गया और ऊपर लेट गया।
उसका लन्ड चुभता हुआ मुझे मेरी चूत में महसूस हो रहा था।
तभी वह उठा और उसने मेरी गांड के नीचे तकिया लगा दिया।
मैंने उसको बोला कि वो छोटा तौलिया इसके ऊपर रख ले क्योंकि जो तकिया मेरी गांड के नीचे लगा था, वो मेरे पति का था।
उसने ऐसा ही किया और मेरी दोनों टांगों को अपने कंधे पर रखकर अपना लन्ड मेरी चूत के मुंह पर लगा दिया।
मैं अपनी गांड उचका कर उसका लन्ड लेने की कोशिश करने लगी।
लेकिन वह ऐसे ही रहा, मानो मुझे और तड़पाना चाह रहा।
तभी मुझे गुस्सा आ गया और कहा- मादरचोद, चोद ले अब तो!
तभी सुनील मुस्कराया और उसने अपना 2 इंच मोटा लन्ड मेरी चूत में एक झटके में आधा डाल दिया।
मेरी चूत गीली थी; फिर भी मुझे लगा कि मेरी चूत की दीवालों को किसी ने छील दिया हो।
मैंने कहा- कुत्ते धीरे कर!
लेकिन अब वह कहां सुनने वाला था … अगले ही पल एक करारा शॉट पड़ा और उसका लन्ड मेरी बच्चेदानी तक पहुंच गया।
बस मेरे लिए बहुत था।
मैंने बोला- मादरचोद … अब रुका तो फिर कुछ नहीं करने दूंगी।
फिर चल पड़ा वो राजधानी मेल की तरह।
लंड कब अंदर हो रहा था और कब आधा बाहर हो रहा था, मुझे पता नहीं लग रहा था।
वह बड़े ही खतरनाक तरीके से चोद रहा था।
मैं तो सिर्फ आह-आह कर जोर से आवाज निकाल रही थी।
पर मैं कोशिश कर रही थी कि आवाज ज्यादा तेज न हो।
करीब 10 मिनट में मेरा शरीर अकड़ने लगा और मेरा पानी छूट गया।
मैंने उसे रुकने को बोला और लम्बी सांसें लेने लगी।
तभी सुनील बोला- भाभी घोड़ी बन जाओ, अब पीछे से चोदने दो।
मैं मेरे घुटनों और मेरी कुहनियों पर आ गई जिससे मेरी चूत पीछे से खुल गई क्योंकि मुझे पता था कि लन्ड मोटा है, दर्द करेगा।
बस इस बार चूत गीली थी और एक शॉट में लन्ड अंदर चला गया।
फिर सुनील शुरू हो गया, मेरी धक्कापेल चुदाई शुरू हुई।
मेरे चूतड़ों पर पड़ने वाली थाप और थप्पड़ अलग ही मजा दे रहे थे।
करीब 5 मिनट बाद सुनील बोला- भाभी मेरा आने वाला है, कहां निकालूं?
मैंने कहा- अंदर मत निकालना!
तभी उसने अपना लन्ड बाहर निकाल कर सारा माल मेरी गांड पर निकाल दिया।
वह फिर साइड में पस्त होकर पड़ गया।
मैं भी पेट के बल लेट गयी।
सच में बहुत मजा आया।
थोड़ी देर बाद मैंने उसके लन्ड को तौलिया से पौंछा।
उसने मेरी पीठ को पौंछा।
हमने कपड़े पहने, एक जोरदार हग किया।
उसके बाद उसने किस किया और वह चला गया।
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