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उन दोनों ने अपने जीवन में सैक्स के हर खेल के भरपूर मजे लिए हैं।
दोनों ने एक दूसरे को पूरी छूट दे रखी है कि वे दोनों जब, जिस को, जहां मौका मिले, अलग अलग या साथ में, चुदाई का मजा ले सकते हैं।

हया का कहना है कि उसे ठीक से याद नहीं पर उसने कम से कम 30-40 लंड ले रखे हैं।

मैंने उससे पूछा- तेरे शौहर अखलाक ने कितनी औरतों को चोद रखा है?
वह बोली- 25-30 तो उसने भी चोदी होंगी।

इस पर मैंने पूछा- तूने इतने ज्यादा मर्दों से चुदवाया, तेरी तुलना में अखलाक ने कम औरतें चोदी, ऐसा क्यों?
तो वह बोली- क्योंकि किसी भी औरत के लिए मर्द को पटाना बहुत आसान होता है।

मैं तो यह कहूंगी कि अधिकांश मामलों में मर्द को यह गलतफहमी होती है कि उसने औरत को पटाया है। जबकि वास्तव में तो औरत ने अपने जिस्म की आग बुझाने के लिए मर्द का शिकार किया होता है।
क्योंकि यदि औरत ना चाहे तो किसी भी मर्द की हिम्मत नहीं है कि वह उस औरत को छू भी सके।

हया अपने पति की गैरमौजूदगी में भी कई मर्दों से चुद चुकी है.
और पति के सामने भी उस ने कई बार नए-नए लंड से चुदाई के मजे लिए हैं।

उन दोनों ने अपनी हर तरह की सैक्स फैंटेसी पूरी की है। उन ने कभी, किसी गैर मर्द के साथ 3सम किया है तो औरत के साथ भी, कभी 4सम में दो मर्द उनके साथ थे तो कभी दो औरतें।

उनके लिए कपल स्वैपिंग तो जैसे एक सामान्य कामक्रीड़ा थी।
दोनों ने एक दूसरे की हर फैंटेसी को पूरा करने में अपना पूरा सहयोग दिया था।
यहां तक कि उन्होंने कई बार ग्रुप सेक्स के मजे भी लिए थे।

इसके लिए वे ऐसे क्लबों में गए जहां कामुकता का नंगा खेल होता है।
कोई भी मर्द किसी भी औरत के साथ और कोई भी औरत किसी भी मर्द के साथ मनचाही मस्ती कर सकते थे।
जहां किसी को कुछ भी करने से रोकना, वहां की तहजीब के खिलाफ माना जाता है।

एक बार तो ऐसे क्लब में हया को 10 से अधिक मर्दों ने जी भर के नोचा, उसके वासना की आग में जलते हुए शरीर को अंदर बाहर से वीर्य में तरबतर कर के ठंडा कर दिया था।

हया का कहना था कि उसे याद नहीं कि उस दिन उसकी चूत में कितने लंड गए, कितने गांड में घुसे, कितने मुंह में और कितनों ने उसके बदन पर वीर्य रस का छिड़काव किया।
उसे बस इतना याद है कि उस दिन उसने मस्ती के सब से ऊंचे शिखर को छुआ था।

इतने कामुक और खुले, सैक्स से भरे जीवन के बावजूद हया की एक अजीब सी फैंटेसी बाकी थी, जिसे वह हर हाल में पूरा करना चाहती थी।
उसकी हसरत थी कि वह एक रात रंडी बन के किसी गैर मर्द से चुदवाये.
और इतना ही नहीं, उसको चोदने के लिए ग्राहक, उसका शौहर अखलाक ढूंढ के लाए।

उसने अपनी यह फैंटेसी कैसे पूरी की, उस के बारे में मुझे बताया और मुझ से आग्रह किया कि उसकी इस हसीन फेंटेसी को, बिना उसका नाम लिए, कहानी के रूप में प्रस्तुत करूं।

जिससे उसके जैसी उन्मुक्त जीवन जीने वाली, प्रकृति के इस वरदान का भरपूर दोहन करने वाली, अन्य औरतों को भी इस नए आनंद को प्राप्त करने की प्रेरणा मिल सके।

क्योंकि ऐसी अजीब सी लालसा बहुत सी कामुक औरतों की फैंटेसी हो सकती है।
इस कहानी को पढ़ कर उनके लहू में भी उबाल आ सकता है।
उनमें भी किसी मौके पर अपनी फैंटेसी को पूरा करने की हिम्मत आ सकती है।

यह भी हो सकता है कि अपनी बीवी को गैर मर्द से चुदवाने वाले किसी शौहर की भी, इस किस्म की फैंटेसी हो और कहानी पढ़ के उस शौहर में, इस फेंटेसी को पूरा करने का जोश आ जाए।

इसलिए मेरे कामुक, रसीले पाठकों के लंड को तन्नाने और अपनी हर अधूरी हसरतों को पूरा करने को बेकरार, गर्म चूत वाली पाठिकाओं के लिए प्रस्तुत है मेरी सहेली की यह अनोखी, मगर सच्ची कहानी उसी के शब्दों में:

मैं हया हूँ, मैं 40 वर्षीया, 38 36 38 की फिगर और मांसल बदन वाली एक भरपूर जवान औरत हूं।
मेरे शौहर और मैं सैक्स का, कामक्रीड़ा का भरपूर मज़ा लेते हैं, नए नए लोगों के साथ, नए नए कामुक खेलों ने हमारे जीवन को आनन्द से भर रखा है।

मुझे नहीं पता नहीं कि हर कामुक औरत की ऐसी इच्छा होती है या नहीं … लेकिन मेरी बहुत दिली इच्छा थी कि एक दिन मैं किसी गैर मर्द से रण्डी बनकर चुदवाऊं।
मैंने अपनी इस निराली हसरत का इज़हार अपने शौहर से किया।

मेरे शौहर तो वास्तव में बड़े अनोखे हैं, उन्हें मेरी हर हसरत पूरी करने में एक अजीब सा आनन्द मिलता है।
उनने मेरी इस हसरत को भी सच करने की ठान ली।

मैं अपने शौहर के बारे में बता दूं, उनका नाम अख़लाक़ है.
वे 42 वर्षीय, 5 फीट 10 इंच के बहुत ज्यादा रसिक व्यक्ति हैं।

उन्हें चुदाई के अलावा और कोई शौक नहीं है।
वे न सिर्फ बढ़िया चुदाई करते हैं बल्कि मेरी हर तरह की ख्वाहिश पूरी करते हैं।

उनका लंड करीब साढ़े छः इंच लम्बा और तीन इंच मोटा है।
अपने इस शानदार लंड से उन्होंने मुझे हजारों बार झड़ा के तृप्त कर रखा है यानि वो चोदन क्रिया में निपुण हैं।

सैक्स के किसी भी खेल के लिए पूछो तो … ना तो वे कभी कहते ही नहीं!
उनका एक ही जवाब होता है- जरूर ट्राई करेंगे।

एक बार जब वो पहली बार मेरी गांड मारने वाले थे, तब उन्होंने लंड का सुपारा घुसेड़ने की कोशिश की थी तो दर्द के मारे मैं बिदक गई.
मैंने कहा- इतना मोटा लंड तुम्हारी गांड में घुसे तो पता चले!
तो वे हँस के बोले- हया, मौका आयेगा तो नीग्रो के जैसे लंबे-मोटे लंड से अपनी गांड मरवा के भी दिखा दूंगा।

मेरी किसी भी तमन्ना के लिए उन्होंने कभी मना नहीं किया।
जीवन में मेरे पास हर तरह की सुख सुविधा मौजूद है, किसी चीज की कमी नहीं है।

जब उन्हें मेरी इस रण्डी बनाने की विचित्र तमन्ना के बारे में पता चला तो उन्होंने इसके लिए भी मना नहीं किया, बल्कि उनका लंड भी ये ख्वाहिश सुनकर तन्नाने लगा.
यह इस बात का सबूत था कि उनको भी मेरा आइडिया बहुत सैक्सी लगा था।

इसे पूरा करने के लिए उन्होंने हमारे शहर से 300 कि मी दूर जयपुर शहर को चुना।

हम शनिवार को दोपहर में वहां पहुंचे, खाना खाकर सो गए क्योंकि पूरी रात तो नए अनजाने, किसी गैर मर्द के लंड के मजे लूटने थे।

शाम 7 बजे करीब अख़लाक़ किसी बार से एक छह फुट के गठीले, कसरती बदन वाले 29-30 साल के लड़के राजेश को लेकर आए.

अख़लाक़ 6 बजे के करीब मेरे लिए ग्राहक ढूँढने निकल गए थे.
उन्होंने मुझे बाद में बताया था कि राजेश बार में अकेला बैठा ड्रिंक कर रहा था तो अख़लाक़ खुद भी एक पैग लेकर उसके पास जा के बैठ गए।

मेरे शौहर मार्केटिंग में हैं तो किसी भी व्यक्ति से परिचय करने में एक्सपर्ट हैं.
अख़लाक़ ने उससे इंट्रो किया तो पता चला कि वो राजेश है, एक मल्टी नेशनल कंपनी में जॉब करता है.
उसकी शादी को चार साल हुए थे और उसकी बीवी डिलिवरी के लिए मायके गई हुई थी.
राजेश डेढ़ महीने से बिना चुदाई के तड़प रहा था.

अख़लाक़ को लगा यही राजेश, मेरी गैर मर्द के लंड की प्यासी चूत की फैंटेसी पूरी करने के लिए बिलकुल सही रहेगा।

तो अख़लाक़ ने उससे पूछा- यार एक बात तो बताओ, इतना समय हो गया तुम्हारी बीवी को गए … तो फिर रात में तुमको चैन कैसे पड़ता है?
वो बोला- सेल्फ सर्विस और क्या करूं?

अख़लाक़ ने पूछा- क्यों कोई स्टेपनी नहीं है?
वो बोला- नहीं सर, शादी के बाद अभी तक तो कंट्रोल किया हुआ है.

फिर अख़लाक़ ने पूछा- क्यों, यहां तो अच्छी प्रोफेशनल भी मिल जायेगी?
तो उसने कहा- सर, मैंने अब तक या तो गर्लफ्रेंड के साथ सैक्स किया है या फिर किसी भाभी, आंटी के साथ। किसी धंधे वाली औरत के पास अभी तक तो गया नहीं।

इस पर अख़लाक़ ने पूछा- यदि तुम्हें किसी अच्छे घर की ‘कामुक हाउस वाइफ’ मिले तो?
वो बोला- साफ साफ बोलो न सर, क्या कहना चाह रहे हो?

फिर अख़लाक़ ने कहा- देखो यार, मेरी बीवी का नाम हया है, हम ओपन माइंड कपल हैं, स्वैपिंग, थ्रीसम, फोरसम, हर तरह के सैक्स को खुल के एंजॉय करते हैं।
उसने पूछा- क्या तुम मुझे अपनी वाइफ हया को फक करने की पेशकश कर रहे हो?
अख़लाक़ ने कहा- हां, यूं ही समझो, बहुत आनन्द आएगा।

फिर राजेश ने पूछा- आप लोग कुछ चार्ज भी करेंगे या मुफ्त में आपकी बीवी चोदने को मिलेगी?
तो अख़लाक़ को मेरे रण्डी बन के चुदने में एक्स्ट्रा किक लगने का ध्यान आया तो उनने बोला- अरे यार, मेरी बीवी कोई धंधे वाली औरत नहीं है, न हमारे पास रुपए पैसे की कमी है। उसे बस एक बार एक अजनबी मर्द से रण्डी की तरह चुद के एंजॉय करना है, इसलिए वो चार्ज तो करेगी लेकिन बहुत कम!

इस पर उसने कहा- लेकिन यार, मैं बहुत भूखा हूं, मजा पूरा आना चाहिए!
अख़लाक़ ने कहा- हम दोनों मिलकर तुमको मस्त कर देंगे, यह हमारा वादा है।

फिर राजेश ने अख़लाक़ से पूछा- यार, तुम मेरे साथ मजाक तो नहीं कर रहे? क्या मैं तुम्हारी वाइफ से बात कर सकता हूं?
अख़लाक़ ने कहा- मैं हया से पूछ कर बताता हूं.

तब अख़लाक़ ने थोड़ा अलग होकर मुझसे पूछा- एक लड़का मिला है जो तुझसे बात करना चाहता है।
मेरा रण्डीपन मेरे दिमाग पे इतना हावी था कि मेरी चूत अपने ग्राहक से बात करने के नाम से रिसने लगी।

मैंने कहा- हां, बात करवाओ।
अख़लाक़ ने अपना फोन राजेश को दिया.

उसने अख़लाक़ को कहा- मैं थोड़ा अकेले में बात करना चाहता हूं.
तो अख़लाक़ थोड़ा दूर चले गए।

राजेश ने मुझ से पूछा- हया जी, आप एक अच्छे घर की होकर मेरे साथ रण्डी की तरह एंजॉय करोगी, तो मुझे छूट कितनी होगी?
मैंने कहा- 100%, तुम जो भी चाहो करना, जैसे चाहो वैसा करना, जितनी देर चाहो, उतनी देर करना!

उसने कहा- ओके … और तुम्हारी डिमांड क्या है?
मैंने कहा- मुझे ज्यादा नहीं केवल दस हजार दे देना, दस हजार में पूरी रात के लिए ये रण्डी तुम्हारी! तुम भरपूर मस्ती करना, जी भर के आनन्द लूटना, रौंद डालना मेरी जवानी को। मुझे मेरा रण्डी बन के चुदने का आनन्द चाहिए बस!

इस पर वो बोला- मुझे तुम से मिलना मंजूर है। लेकिन मैं जो चाहूं वो करूं? जैसे चाहूं वैसे करूं? और जितनी देर चाहूं उतनी देर करूं?
मैंने कहा- बिल्कुल सही, आज की रात तुम्हारी जिंदगी की यादगार रात होगी।

उसके बाद वो अख़लाक़ के साथ होटल के हमारे रूम में आया.
अख़लाक़ ने हम दोनों का परिचय करवाया।

हम तीनों ने दो दो पैग व्हिस्की के लिए!

पीने के बाद अख़लाक़ ने कहा- मैं कमरे में रुक सकता हूं या तुम अकेले एंजॉय करोगे?
वो बोला- रुको न यार, यह पहला मौका होगा जब मैं किसी मर्द की बीवी को, उसी के शौहर के सामने चोदूंगा। तुम्हारे सामने तुम्हारी लम्पट बीवी को एक रण्डी की तरह चोदने में अधिक मजे आयेंगे।

मैंने साड़ी पहन रखी थी.
राजेश ने चीरहरण से शुरू किया.

मैंने भी उसकी जैकेट, टी शर्ट उतारी।
फिर उसने मेरा ब्लाउज और ब्रा भी उतार फैंकी.

जब उसने मेरे कोमल, मुलायम स्तनों पर हाथ फेरा तो मेरे बदन में वासना की लहरें उठने लगी।

उसने मेरे नंगे बदन से अपना बदन चिपका लिया और मेरे होंठ चूमने लगा.
फिर वह अपने दोनों हाथों से मेरे कूल्हे दबाने लगा.
वासना के वशीभूत मेरा हाथ उसके लंड पर चला गया.
वो तन्नाने की प्रक्रिया में था.

तभी राजेश पलंग के किनारे बैठ गया.

मैंने उसे कहा- तुम दोनों मर्द मेरे दोनों बोबे एक साथ चूसो!
उसको भी यह आइडिया पसंद आया, उसने अख़लाक़ को बुलाया.

अख़लाक़ भी इस बीच आधे नंगे हो गए थे.

फिर दोनों ने एक साथ मेरे बोबे चूसे और मेरी चूत पानी छोड़ने लगी.

करीब पांच मिनट तक मेरे बोबे चूसने के बाद राजेश खड़ा हुआ, उसने अपनी जींस और अंडरवियर एक साथ उतारी और मेरा पेटीकोट पैंटी सहित खींच के उतार दिया।

मैं एक रात की रण्डी एक गैर मर्द के सामने पूरी नंगी खड़ी थी.

अख़लाक़ भी पूरे नंगे हो गए थे.
राजेश ने अख़लाक़ को पूरा नंगा देखा तो बोला- अख़लाक़, अब तुम सोफे पर बैठ कर लाइव ब्लू फिल्म देखो. तुम्हारी ये कामुक हाउसवाइफ अब से कुछ घंटों के लिए मेरी रण्डी है रण्डी!

अख़लाक़ हंसते हुए जाकर सोफे पर बैठकर अपने लंड को सहलाने लगे.

राजेश ने मेरे कंधों पर दबाव डालकर मुझे झुकाया और अपना लंड मेरे मुंह के सामने ले आया।

यार … यह पहला लंड था जो अख़लाक़ के लंड से करीब एक इंच अधिक यानि साढ़े सात इंच लंबा था और मोटा भी थोड़ा ज्यादा ही था।

मैंने राजेश के चिकने, सांवले, सलौने, सुहाने लंड को कुछ पल निहारा.
उसने शायद आज ही झांटें साफ करी थी, उसका लंड बहुत ही मनमोहक लग रहा था।

मैंने उसके चमकदार सुर्ख लाल सुपारे को चूमा, हाथों से सहलाया फिर मैंने चूसना शुरू किया.

वो बोला- हया जान, सबसे पहले तेरे मुंह में ही सारा वीर्य निकालूंगा।
मैंने 👍👍 इशारा कर के कहा- ओके, निकालो।

उसने मेरे मुंह को चोदना शुरू किया.
मैंने कई बार अपनी जुबान उसके लंड के चारों ओर घुमाई.
उसके मुंह से मस्ती की सिसकारियां निकल रही थीं।

उसने दो तीन मिनट रुक रुक के अपना लंड मेरे मुंह के अंदर बाहर किया.
उसके लंड में वीर्य हिलोरें मार रहा था.

फिर एक तूफान सा उठा और फिर उसके लंड ने पिचकारी छोड़ी, ढेर सारा वीर्य उछल उछल के मेरे हलक में जा रहा था.
मैं हर कतरे को निगलती रही.

लेकिन आखिर में एक दो छोटे छोटे कतरे मैंने मुंह में रोक लिए।
मुझे ध्यान आया कि अख़लाक़ कहते थे कि मेरा लंड तन्नाया हुआ हो तो मैं तेरी चूत से किसी गैर मर्द का वीर्य भी चाट सकता हूं.
मैंने अख़लाक़ को आजमाने की सोची.

मैं, जब राजेश का लंड सिकुड़ के मुंह से निकल गया, तब अख़लाक़ की ओर बढ़ी और उनके होठों से होंठ लगाकर बचा खुचा वीर्य अख़लाक़ के मुंह में स्थानांतरित कर दिया।

राजेश ये देखकर हैरानी से ताली बजाने लगा- वाह यार, ये हुई न बात!

अख़लाक़ ने सारा वीर्य गटक लिया और राजेश से बोला- मैंने कहा था न हम हर तरह का सैक्स एंजॉय करते हैं।
उसके बाद राजेश बिस्तर पर पस्त होकर बैठ गया।
उसके चेहरे और बदन पर पसीने की बूंदें चमक रही थीं।

थोड़ी देर वो इस मीठी थकान का आनन्द लेता रहा।

उसके बाद हमने थोड़ा नाश्ता किया।

मेरी चूत तो मेरे ग्राहक के लंड से चुदने के लिए कुलबुला रही थी.
इसके लिए मैं राजेश के नंगे बदन से चिपक कर लेट गई, उसके चौड़े सीने को चूमती रही, उसके निप्पलों को सहलाती रही, हल्के हल्के मसलती रही.
मैंने उसकी निप्पलों को चूसा, काटा.

राजेश का लंड अंगड़ाइयां लेने लगा.
मैंने झुक के उसका लंड मुंह में ले लिया और अख़लाक़ को इशारा किया.

वो भी उठकर आए और राजेश के आंड चाटने लगे.
राजेश के लंड में सनसनी होने लगी.

आखिर एक औरत और एक मर्द एक साथ उसका लंड चूस रहे थे।
उसका लंड फिर से तन्नाने लग गया।

मैंने राजेश को कहा- अब अपने इस माँसल लंड से मुझे कस के चोद दे मेरे राजा! मेरी चूत तेरे इस विशाल लंड को अपने भीतर लेने के लिए मचल रही है, तड़प रही है।

राजेश ने ये सुनते ही मेरे घुटने मोड़ के ऊपर किए और मेरी चूत पे अपने होंठ टिका दिए।
उसकी जुबान चूत के चारों ओर से चूत रस को सुड़क रही थी।

मेरी चूत को वो चाटता रहा और चूत पानी छोड़ती रही।

उसके बाद उसने मेरे संवेदनशील क्लिटोरिस को जुबान की नोक से टच किया और हौले हौले जुबान से सहलाने लगा.
फिर उसके स्ट्रोक में तेजी आने लगी मेरे बदन में चरम उठने लगा.

ऐसे में चूत के अंदर लंड के करारे रगड़े लग जाएं तो क्या बात है.
यह सोच कर मैंने उसे कहा- राजू यार … अब लंड डाल भी दे ना जल्दी से!

राजेश ने अपना लंड चूत पे टिका के दबाते हुए, धीरे धीरे अंदर डाला.

मुझे इतना अच्छा महसूस हो रहा था यार कि पूछ मत, सुंदर चेहरा, बलिष्ठ शरीर, खूबसूरत लंबा-मोटा, मेरा मन पसंद लंड!
उसका लंड मेरी चूत में जड़ तक चला गया।

दो मिनट तक वो दबाव डाल के आनन्द लेता रहा.
फिर मैं ही बोली- रगड़ न मादरचोद!

इतना सुनना था कि उसका जोश बढ़ा उसने गाली बकते हुए धक्के लगाने शुरू किए- ले मेरी रण्डी, ले भोसड़ी वाली, लंडखोर साली हया … ले!
बोलते हुए रुक रुक के दस पंद्रह मिनट तक चोदता रहा।

फिर जब मेरा चरम नजदीक लगने लगा तो मैंने उसे कहा- राजू, अब लगातार रगड़ दे कस के, मेरा बस होने वाला है!

उसने फिर दम लगा के खूब जोर जोर से रगड़े लगाए, उसका डिस्चार्ज होने लगा, चूत से फच फच की आवाज आने लगी.

लेकिन वो रुका नहीं, डिस्चार्ज होने के बाद करीब दस धक्के और लगाए होंगे कि मेरा पूरा शरीर अकड़ा और चूत जोर जोर से फड़कने लगी, मानो मेरा दिल सीने से हट के चूत में चला गया हो।
मुझे इस चुदाई ने परम आनन्द से मस्त कर दिया।

मैं बहुत देर तक आंखें बंद करके चरम सुख के इन लम्हों को भोगती रही।

उसके बाद वो एकदम पस्त हो गया, बोला- यार हया, इतना आनन्द आज तक नहीं आया. तुम दोनों वास्तव में गजब की कामुक जोड़ी हो. तुम दोनों से मिलकर जो आनन्द मुझे आज मिला है, मैं उसके बारे में सोच भी नहीं सकता था.

अख़लाक़ को मैंने अब तक डिस्चार्ज करने से रोका हुआ था क्योंकि अभी अख़लाक़ को एक गैर मर्द के वीर्य से भरी मेरी चूत चटवानी थी।
मैंने राजेश को बोला- आज का एक और स्पेशल सरप्राइज़ अभी बाकी है.
वो जिज्ञासा से बोला- क्या?

मैंने अख़लाक़ को इशारा किया.
वो आया और मेरी चूत से सारा वीर्य चाटने और सुड़कने लगा.
राजेश हैरत से सारा नज़ारा देख रहा था.

अख़लाक़ ने आज साबित कर दिया कि वह मेरी खुशी के लिए कुछ भी कर सकता है।

उसके बाद अख़लाक़ ने मेरे होंठ चूसे मुझे राजेश के वीर्य और मेरी चूत रस का, मिला जुला खट्टा कसैला स्वाद आया।

राजेश हमारी हरकतें देख देख के मस्त हो रहा था।

थोड़ी देर सुस्ताने के बाद राजेश ने कहा- यार, अब खाना खाते हैं फिर एक बार तेरी गांड और मारूंगा.
अख़लाक़ ने कहा- यार, अब मेरे को भी तो एक बार डिस्चार्ज करने दे!

मैंने कहा- देखो यार, मेरी चूत तो अभी अभी तृप्त हुई है और गांड तो राजेश के इस मस्त लौड़े से ही मरवाऊंगी। तुम भी चाहो तो मेरे मुंह में वीर्य निकाल दो!

अख़लाक़ ने तुरंत मेरे मुंह में लंड डाल के चोदना शुरू किया.
लंड उफना हुआ तो था ही, एक मिनट भी नहीं लगा और पिचकारी छूट गई।
मैंने अख़लाक़ का सारा वीर्य भी गटक लिया।

उसके बाद हमने खाना ऑर्डर किया.

जब तक खाना आया, तब तक हम तीनों साथ में नहाए, एक दूसरे के नंगे और साबुन लगे चिकने बदन का आनन्द लिया.

और खाना खाने के बाद भी हमने काफी देर आराम किया।

रात के करीब बारह बज रहे थे, मैंने और अख़लाक़ ने एक साथ राजेश का लंड चूस के खड़ा किया.

और जब वो तन्ना गया, तब उसने मुझे घोड़ी बना के लंड को तेल से चिकना किया, थोड़ा तेल मेरी गदराई हुई, सुडौल गांड में भी लगाया.

फिर राजेश ने बहुत धीरे से मेरी गांड में लंड का सुपारा घुसेड़ा.
मेरी गांड थोड़ा सा चिरमिराई पर उसका लंड मेरे जिस्म के अंदर घुसता चला गया.

फिर वो धीरे धीरे लंड अंदर डालता और जल्दी से बाहर निकालता.
वो गांड मारने का भी एक्सपर्ट था, बहुत देर तक उसने पूरे मन से मेरी गांड मारी.

उस को और मेरे को, दोनों को खूब मजे आए।

अख़लाक़ उसके पीछे खड़े होकर उसकी निप्पलें मसल रहे थे, उसके लंड में आनन्द की लहरें उठ रही थीं।

करीब पंद्रह मिनट के आनन्ददायक घर्षण के बाद उसने अपना वीर्य का स्टॉक गांड में खाली कर दिया और जब तक लंड मुरझा नहीं गया, मेरी गांड में अपना लंड, अंदर बाहर करता रहा.
हम दोनों को इस रगड़ाई का आनन्द मिलता रहा।

उसके बाद हम तीनों पस्त होकर बिस्तर पर पड़े तो नींद आने लगी.
एक ने मेरे स्तनों में मुंह दे रखा था, दूसरे ने गांड में!

फिर हम सो गए।

सुबह हमारी नींद खुली तो मेरी चूत फिर से चुदना चाहती थी.

मैंने राजेश से कहा- अब तुम दोनों एक बार और मेरी चुदाई कर दो।
उसने पूछा- एक साथ?
मैंने कहा- नहीं, बारी बारी।

उसके बाद हम दोनों से प्रेरणा लेकर राजेश ने अख़लाक़ के साथ 69 की मुद्रा में एक दूसरे का लंड चूसा।

दोनों लंड रात के रेस्ट के बाद तरोताजा तो थे ही, जल्दी कड़क हो गए।

उसके बाद मैं पलंग के किनारे पर लेटी, कभी पैर जमीन पर टिकाती, कभी घुटनों से मोड़ के ऊपर उठाती।

शुरुआत राजेश ने की.
राजेश और अख़लाक़ ने धक्के लगाने शुरू किए.

जब राजेश के लंड में सरसराहट होने लगती तो वह हट जाता, उसकी जगह अख़लाक़ धक्के लगाने लगता.
ऐसा बहुत देर तक चला, मेरी चूत की जबरदस्त कुटाई हुई।

आखिर में मुझे झड़ाने का श्रेय मिला राजेश को!

मेरी चूत में जैसे अनार छूट रहा था और उसके साथ राजेश के लंड से वीर्य का फव्वारा!

उधर मेरे शौहर अख़लाक़ के लंड से वीर्य की पिचकारी मेरे चेहरे और मेरे स्तनों पर गिर रही थी।

मैं अंदर बाहर से वासना के इस आनन्द-सागर में डूब रही थी।

करीब आधा घंटे सुस्ताने के बाद राजेश उठा, तैयार हुआ.
उसने अपने पर्स से दस के बजाए ग्यारह हजार निकाल के मुझे हॉट रंडी सेक्स के लिए दिए।

हम दोनों को थैंक यू के साथ फिर से सेवा का मौका देने का बोला।

हम तीनों एक साथ गले मिले और बस … वो चला गया कामुक और मस्त यादें छोड़ कर!

मेरी रण्डी बन के चुदने की ख्वाहिश पूरी हुई।

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शहर में तीन साल की पढ़ाई Hindi Porn Stories के बाद मैं बिल्कुल ही बदल चुका था, लेकिन मेरे पड़ोसी बिरजू काका की बेटी रनिया मुझे पहले जैसा लल्लू ही समझती थी। मैंने इंटर तक पढ़ाई गांव में ही की थी। तब तक खेती और पढ़ाई के अतिरिक्त दुनियादारी को मुझे कोई समझ नहीं थी। गांव के सिवान पर हमारे और रनिया के खेत थे। मैं स्कूल से वापस आने के बाद सीधे खेत में चला जाता। वह भी स्कूल से आकर अपनी बकरियां लेकर वहीं आ जाती। मेरे पहुंचने पर बिरजू काका गांजा पीने के लिए चले जाते।

जब मैंने बारहवीं के बाद गांव छोड़ा तो वह सातवीं में थी। मैंने जब बी ए पास किया तो वह दसवीं में आ गयी। उसकी नीबू के आकार की चूचियां सेब के आकार में बदल गयीं। होस्टल के जीवन ने मेरी काया ही पलट दी थी। मुट्ठ मारना मैंने वहीं आकर सीखा। उस समय मेरे सामने रनिया का ही चेहरा होता। मैं उसी की चुदाई की कल्पना करके मुट्ठी मारता। मुट्ठी मारते मारते मेरा लन्ड थोड़ा टेढ़ा भी हो गया था। सुपाड़े की चमड़ी खुल गयी थी। कभी कभी तो हम तीन लड़के एक साथ ही मुट्ठी मारते।

हर बार मुट्ठी मारते मैं यही सोचता कि बस यह अन्तिम बार है, अब जाकर साक्षात ही उसे चोदूंगा। वह मेरे सामने ही जवान हो रही थी, लेकिन अवसर ही नहीं मिला। पहले साल के बाद मैं जब दूसरे साल मैं यह सब जान सका तो वह गरमियों की छुट्टियों में अपने ननिहाल चली गई। उसके बाद बीच में ऐसा अवसर ही नहीं मिला कि मैं कोशिश करुं।

फाइनल की परीक्षा के बाद दैवयोग से वह अवसर मिल गया। मैं जानता तो नहीं था कि उसके मन में क्या है लेकिन एक दिन बाबू जब मुकदमें के सिलसिले में बाहर चले गये तो मैं दोपहर का खाना खाने के बाद खेत में चला गया। वहां मेरे ट्यूबवेल के पास आम का घना पेड़ था।

मैंने माई से कहा कि मैं जाकर वहीं कुछ पढ़ूंगा और सो जाऊंगा।

मेरे ट्यूबवेल से बिरजू काका अपने गन्ने में पानी लगा रहे थे। चिलचिलाती दुपहरिया थी। उनका खेत निकट ही था। वह पानी खोलकर वही मेरे ट्यूबवेल के घर में रखी खटोली पर लेटे थे। मुझे देखकर उठ गये। बातें करने लगे। पता चला कि रनिया अब खाना लेकर आती ही होगी।

यह सुनकर न जाने मेरा मन क्यों खिल उठा। मेरी छठी इंद्री ने कहा अभी बिरजू काका खाना खाकर गांजा पीने जायेंगे। आज बिना चोदे छोड़ूंगा नहीं!

मेरा सोचा सही हुआ। पानी का काम बस दो-तीन घंटे में पूरा होने वाला था। वह रनिया को पानी देखने के लिए कहकर मुझसे बोले कि काम होने के बाद पंप बन्द कर दूं तब यह चली जायेगी, मुझे देर हो जायेगी।

रनिया खेत का एक चक्कर लगाकर आकर वहीं भूमि पर बिछे एक बोरे पर बैठ गई।

मैंने उसे गौर से देखा। उसने छींट की सलवार और कुरती पहने थी। उसकी चूंचियां सेब से भी बड़ी थीं। नीचे केवल शमीज थी, ब्रा नहीं। इसलिए उनका पूरा आकार मेरी आंखों में था। शरीर भरा था।

वह चुप ही बैठी थी। मैंने बात आरम्भ की, ” तुम काफी बड़ी हो गयी हो। “

वह चुप ही रही। मैंने फिर कहा, ” खूबसूरत हो गयी हो। “

” हट ” वह बोली।

” भगवान कसम!” मैंने कहा।

उसने कोई उत्तर नहीं दिया तो मेरी समझ में नहीं आया कि क्या कहूं। थोड़ी देर तक चुप रहने के बाद मैंने कहा, ” आओ चारपाई पर बैठ जाओ। क्यों जमीन पर बैठी हो? “

” यहीं ठीक है। ” उसने कहा।

मैंने चारों तरफ देखा, सन्नाटा था। सूरज बिल्कुल सिर के ऊपर आ गया था। गांव की तरफ गन्ने के खेत थे। पेड़ की आड़ भी थी। मैं हिम्मत सजोकर उठा और उसका हाथ पकड़ कर खींचते हुए कहा, आओ पास बैठो। अच्छा नहीं लग रहा है।”

उसने विरोध किया तो मैंने और जोर लगाया। वह खड़ी हो गयी। मैंने उसे अपनी तरफ खींचा तो वह चारपाई पर गिरते-गिरते बैठ गयी। संम्भवतः उसे मेरी नीयत का आभास हो गया था। उसकी सांसे लम्बी हो गयीं।

मै एक बार फिर इधर उधर देखकर उससे सट कर बैठ गया और उसका हाथ पकड़ लिया।

रनिया बोली, ” लल्लू भैया छोड़ो, अभी कोई देखेगा तो क्या कहेगा? “

उसका यह कहना था, मैं तो निश्चिन्त हो गया। उसे अपनी भुजाओं में कसकर जकड़ लिया और कहा,” आज मैं तुम्हें छोड़ूंगा नहीं। मेरी नीयत बहुत दिनों से तुम्हारे ऊपर है। ” फिर मैं उसकी दाहिनी चूची को शमीज के ऊपर से पकड़कर मलने लगा।

वह घोड़ी की तरह हिनहिनाने लगी, ” छोड़ दो! छोड़ दो! “

मैंने उसकी आवाज को बन्द करने के लिए उसके मुंह पर अपना मुंह लगाकर पहले होंठ को किस किया फिर मुँह में जीभ डालकर उसकी जीभ को चूसने लगा।

वह अभी भी छुड़ाने का हल्का सा प्रयास कर रही थी, लेकिन वह शक्ति नहीं थी जो छुड़ाने के लिए होनी चाहिए थी।

थोड़ी देर उसकी जीभ चूसने के बाद मैंने उसके मुंह से अपना मुंह हटाकर फिर उसकी चूचियों पर आ गया। इस बार उसकी कुरती को शमीज के साथ ऊपर करके दोनों चूचियों को नंगा कर दिया। उसके चूचियों की ढेंपी कड़ी हो गयी थी।

एक चूची को मलते हुए दूसरी पर जब मुंह लगाया तो वह अहक कर बोली, ” चलों किसी खेत में “

” इसका मतलब है कि तुम पहले ही करवा चुकी हो? “

” भगवान कसम नहीं ! “

” तब तुमने कैसे कहा कि चलो खेत में? “

” यहां कोई देख लेगा तो जान मार देगा “

कोई नहीं देखेगा, कहकर मैंने एक हाथ से उसकी चूची को मसलते हुए दूसरे को अपने लन्ड पर रख दिया। लुंगी के नीचे जांघिया में मेरा लंड खड़ा हो गया था।

उसने हाथ हटा लिया।

मैंने फिर खींचकर हाथ रक्खा और कहा, “सहलाओ न मजा आयेगा। यह तो जान ही लो कि आज बिना चोदे छोड़ने वाला नहीं।”

” अभी तो! “कहकर उसने मेरा लंड पकड़ लिया।

मीजते हुए मैंने देखा कि उसकी चुचियां फूलने लगीं। वह अकड़ने भी लगी थी।

उसे वहीं चारपाई पर लिटाकर सलवार का नाड़ा खोलकर देखा तो उसकी चूत झांटों से भरी थी।

मैंनें कहा, ” इसे साफ नहीं करती? “

वह बोली, ” मुझे डर लगता हैं। बालसफा साबुन भी तो कौन लाये। यहां गांव में औरतें गरम राख से बनाती हैं। “

मैंने देखा कि अब उसकी चूत पूरी तरह पनिया गयी है इधर मेरे बाबू जी अब काबू से बाहर हो रहे थे। वह मस्ती में बेसुध होने लगी तो मैंने कहा चलो ट्यूबेल वाले कमरे में।

वह उठकर सलवार पकड़े इधर उधर देखते अन्दर चली गयी। मैं भी गया और अपनी जांघिया निकालकर उसकी जांघों से एक मोहरी निकालकर उसकी टांगे चीरकर लंड को उसकी पनियाई बुर के मुहाने पर रखकर उसकी दोनों टांगों को फैलाकर उसके ऊपर छा गया। कसते ही सट से लंड उसके अन्दर चला गया।

उसने कहा, ” आह! “

फिर मैं घपाघप धक्के मारने लगा। उसने मेरी पीठ को ऊपर से कस लिया और नोचने लगी।

मैंने चोदते हुए उससे पूछा, ” रनिया तूने किसी और से तो नहीं चुदवाया क्योंकि तू तो मजे ले रही है।”

वह बोली, “तुम्हारी कसम नहीं। दर्द वाली बात झूठी होती है। मैं सायकिल चलाती हूं एक दिन मेरी झिल्ली फट गयी। अब गांव में भी लड़कियां मूठ मारती हैं।”

बातें करने में मेरा ध्यान बंट गया। तो थोड़ा समय और लग गया। मैं कमर चलाता रहा। वह नीचे से अपनी कमर हिलाती रही। मैं एकाएक फड़फड़ाकर झड़ गया और उसे छाप लिया। झड़ने के बाद भी मेरा लंड खड़ा था। उसकी बुर की पुत्ती फूल गयी थी। मेरा बीज उसकी बुर से होता हुआ जांघों तक फैला था। मैंने अपने जांघिये से उसे साफ किया।

वह उठी और सलवार बांधकर धीरे से कमरे से बाहर चली आयी थोड़ी देर बाद मैं भी निकल आया।

फिर तो मैं सारी छुट्टी उसे पत्नी की तरह चोदता रहा। हम दोनों ही प्रयत्न करते कि खेत में कोई काम रहे।

बिरजू काका की उपस्थिति में ही हम लोग चुदाई पेलाई की बात करते रहते। वह सारे गांव की कहानी बताती।

उसने अपनी एक सहेली की और बुर भी दिलावाई। उसकी कहानी फिर कभी। Hindi Porn Stories

दोस्तो, मेरा नाम राजवीर है. मैं 28 साल का हूँ.
मेरी बीवी का नाम हर्षा है और वह 25 साल की है.

हम लोग गुजरात में जूनागढ़ के रहने वाले हैं.

मेरी शादी को 3 साल हो चुके हैं.

अपनी बीवी को मैं बहुत प्यार करता हूँ. मेरी बीवी भी मुझे बहुत प्यार करती है.
मैं और मेरी बीवी अपनी अपनी फैन्टेसी हर तरीके से पूरी करते हैं.

यह पोर्न बीवी Xxx कहानी मेरी पत्नी की है.

एक दिन रात में बेड पर हर्षा ने मुझसे कहा- बेबी, आज मेरे साथ कुछ अजीब हुआ था.
मैंने कहा- क्या हुआ था डार्लिंग?

हर्षा- शाम को मैं जब बाल्कनी में खड़ी होकर कॉफी पी रही थी. तब रोड के पास से एक जवान लड़का साइकल पर खड़े होकर मुझको ताड़ रहा था.
मैंने कहा- सच में!

हर्षा- हां … और जब मैंने उसकी तरफ देखा, तो उस ने मुझे हाय का इशारा भी किया.
मैंने कहा- क्या … नहीं, वह तुम्हें कोई और समझ रहा होगा!
हर्षा- हां जी, मुझे भी ऐसा ही लगा और मैं भी उसे नजरअंदाज करके बाल्कनी से अन्दर आ गई.

मैंने कहा- अच्छा काम किया … चलो अब कुछ अपना मनोरंजन करते हैं.
हर्षा- हमेशा तुम्हें मेरी लेने की पड़ी रहती है … हा हा हा.

मैंने कहा- अब क्या करूं, तुम हो ही ऐसी माल!

और मैंने उसको अपने पास खींचा और उसके साथ चूमाचाटी करने लगा.

जल्दी ही हमारे कपड़े निकल कर दूर हो गए और चुदाई का कार्यक्रम चालू हो गया.
हम दोनों में दो बार धकापेल हुई और झड़ कर थक गए, फिर एक दूसरे से यूं ही नंगे लिपट कर सो गए.

अगले दिन सवेरे मैंने नाश्ता किया और ऑफिस चला गया.
लेकिन लंच करते हुए भी रात की बात मेरे दिमाग़ में चल रही थी कि कोई अजनबी लड़का मेरी बीवी को ताड़ रहा है और हाय भी बोल रहा है.

मैं भी इस बात को कुछ समय के लिए भूल गया और शाम को घर लौट आया.

हर्षा ने फिर बतायार- जी सुनो.
मैंने कहा- हां बोलो डियर!

हर्षा- वह जो कल आपको बोला ना … वह लड़के के बारे में!
मैंने कहा- हां हां … क्या हुआ? उसने आज भी कुछ किया क्या?

हर्षा- हां, आज भी उसने मुझे हाय का इशारा किया. मैंने इधर-उधर देखा तो उस वक्त हमारी बिल्डिंग में कोई भी बाहर नहीं था, सिर्फ़ मैं ही थी. तो मैंने भी उसको हाय कह दिया.

मैंने कहा- फिर?
वह- उसने मुझे इशारों इशारों में कहा कि तुम बहुत खूबसूरत हो. मैं थैंक्यू कह कर अन्दर आ गई.

मैंने कहा- ओह … क्या तुम्हें वह लड़का परेशान कर रहा है?
हर्षा- नहीं नहीं ऐसा कुछ नहीं है. वैसे भी अगर कुछ परेशानी होती, तो तुम्हें कह देती.

मैंने कहा- ठीक है. अगर वह कुछ परेशान करता है, तो मुझे बताना.
हर्षा- ओके बेबी.

मैंने उस चीज़ को अनदेखा किया।

अगले दिन मेरी बीवी ने फिर से मुझसे कहा- बेबी सुनो, वह लड़का आज भी आया और उसने आज भी इशारे में बात की. मैंने भी थोड़ी बात की. उसने इशारे में मुझे अपना नंबर दिखाया, जिसे मैंने नोट किया पर कॉल नहीं किया. उसने इशारा किया कि वह कुछ बात करना चाहता है.

मैंने कहा- अगर तुम्हें लगता है कि वह अच्छा लड़का है, तो उससे दोस्ती कर लो. वैसे भी यहां तुम्हारा कोई दोस्त नहीं है. वह शायद यहां पर तुम्हारी कुछ मदद कर दे.
हर्षा- ठीक है बेबी … कल करती हूँ.

अब मेरे मन में भी अब उस लड़के को लेकर कुछ ग़लत विचार आने लगे थे.
लेकिन मैंने सोचा कि वह लड़का शायद वैसा नहीं है.
इसी लिए मैंने इस चीज़ को अनदेखा कर दिया.

अगले दिन मैंने हर्षा से पूछा- हर्षा क्या हुआ उस लड़के का?

हर्षा- हां वह लड़का अच्छा है. आज भी शाम आया था … तो मैंने उसको देखते हुए कॉल किया. उसने भी एक रिंग में ही कॉल उठा लिया.

अब उस लड़के ने कॉल पर बताया कि क्या हुआ.

अजनबी लड़का- नमस्ते भाभी.
हर्षा- नमस्ते तुम्हारा नाम?
अजनबी- जी मैं यश … और आपका नाम?
हर्षा- जी, मैं हर्षा.

यश- ओह बहुत प्यार नाम है.
हर्षा- हां … यश तुम हमेशा मेरी बाल्कनी में क्यों देखते रहते हो?

यश- वह हर्षा भाभी ये घर 3 साल पहले हमारा था. जिसे डैड ने बेच दिया था. लेकिन इस घर से मेरा बचपन जुड़ा है सो हर दिन आकर देखता हूँ.

हर्षा- ओह … मगर पहले तुम्हें कभी नहीं देखा. इन चंद दिनों में ही तुम कई बार दिखे.
यश- वह भाभी, मैं राजकोट चला गया था. अब वापस आ गया हूँ.
हर्षा- ओह …

उसके बाद कुछ ऐसे ही डेली लाइफ की बात होती रही पर उससे आगे कुछ नहीं.
फिर उसने खुद ही बाय कह कर कॉल कट कर दिया.

मैंने कहा- क्या तुमने यश को नया दोस्त बना लिया है?
हर्षा- हां हां … उसने कहा अगर मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं हो तो वह एक बार घर आकर अन्दर से देखना चाहता है.

मैं समझ गया कि वह भावनाओं में बांध कर मेरी बीवी के पास आना चाहता है.
पर मुझे मेरी बीवी पर यकीन था इसलिए मैंने भी उसको इग्नोर करके कहा- ठीक है बुला लो, कोई प्रॉब्लम नहीं है.

हर्षा- ओके बेबी, कल बुला लूँगी.
मैंने कहा- ओके बेबी.

अगले दिन मैं ऑफिस से घर आया.
तब हर्षा ने मुझसे कहा- वह लड़का आया था.
मैंने पूछा- क्या कहा उसने?
तब हर्षा ने कहा- कुछ नहीं, उसने अपने बचपन की बातें बताईं. बड़ा क्यूट है और बातों-बातों में ही वह रोने लगा. मैंने उसको अपना कंधा दिया. वह मुझे हग करके रोने लगा. फिर हम दोनों ने कुछ सेल्फ़ियां भी ली थीं.

मैंने कहा- दिखाना सेल्फ़ियां!
हर्षा- हां ये देखो.

अब मैंने देखा, वह लड़का अच्छा था.
कुछ फ़ोटोज में उसने अपना हाथ हर्षा के ऊपर रख रखा था.

मैंने कहा- हम्म … अच्छा लड़का है.
हर्षा- हां.

अब मैं समझ चुका था कि लड़का कुछ तो करेगा.
पर मैं अपनी बीवी को परखना चाहता था कि वह मुझे बहुत प्यार करती है या नहीं. तो जो भी हो रहा है, उस सबको इग्नोर करने का ठान लिया.

कुछ दिन ऐसे ही चला.
ये दोनों कॉल बात करते.
जब मैं हर पर नहीं रहता, वह घर आता और मेरी बीवी हर्षा से बातें करता.

एक दिन हर्षा ने मुझसे कहा कि उसको शॉपिंग करने जाना है.
मैंने कहा कि मैं बिज़ी हूँ.

तो उसने कहा- फिर मैं यश के साथ जा रही हूँ.
मैंने भी कहा- हां ठीक है चली जाओ.

उसने मेरे सामने ही यश को फोन किया.
वह तय समय पर आ गया और दोनों ऑटो में जाने लगे.

मैंने उन दोनों के जाते ही घर में कैमरे और माइक्रोफोन्स सैट कर दिए.
पूरा घर अपने कंट्रोल में सैट कर दिया जिससे वह जो भी करे, उस सबका मुझे पता चल जाए.

अब मैं घर पर उन दोनों के आने का इंतज़ार करने लगा पर वे दोनों आए ही नहीं.

मैं नजदीक के मॉल में गया.
उधर पार्किंग एरिया में अपनी कार के पास खड़ा होकर उनके आने का इंतजार कर रहा था.

तब वह दोनों कई सारे शॉपिंग बैग लेकर आते दिखे.
सारे थैले यश ने उठाए हुए थे.

किसी कारण से बीच में कुछ बैग गिर गए तो वह बैग उठाने लगा.

मैंने देखा कि उस वक्त हर्षा हंस रही थी.
यश ने मायूस सी शक्ल बनाई तो हर्षा ने उसको बैग उठा कर दे दिए.
वह तब भी कुछ उदास सा था.

तब हर्षा ने उसके गाल पर एक छोटी सी पप्पी कर दी.
मैं ये देख कर शॉक हो गया था.

वह दोनों ऑटो करके घर आ गए.
मैं भी वापस आ गया.

मैंने नीचे खड़े होकर अपने मोबाइल पर देखा कि वे दोनों क्या कर रहे हैं.

मेरे घर के हिडन कैमरे आदि वाई फ़ाई से जुड़े हुए थे.
मैं देख कर शॉक हुआ कि यश हर्षा को किस कर रहा है.

हर्षा- उमम्म … उम्माह …. ओंम …
यश- आह … उम्म … उम्म …

फिर थैले वहीं रख कर उसने हर्षा को सोफे पर गिरा दिया और उसे किस करने लगा.

किस करते हुए ही उसने हर्षा के कपड़े निकाल दिए.
साथ ही यश ने भी अपने कपड़े निकाल दिए.

वह हर्षा की टांगों को अपने कंधे पर रख कर उसे चोदने लगा.

हर्षा- आह … उम्म … एकदम से पेल दिया … आह मर गई.
यश- आह … बहुत टाइट हो यार आह!

भकाभक चोदते हुए उसने हर्षा के बूब्स हाथ में पकड़ लिए और एक को चबाते हुए वह मेरी बीवी की चूत में अपना लंड तेज रफ्तार से चला रहा था.

हर्षा- आह … आह … यश बेबी आरामम्म … सेए … आह.
यश- आह … आ … क्या … … मम्मे हैं भाभी तेरे … आह … मस्त माल है यार तू.

कुछ देर बाद यश और हर्षा दोनों झड़ गए.

यश- अहह …
हर्षा- उई मांआ … आअहह … तोड़ दिया … आह.

वे दोनों हांफ रहे थे.

कुछ देर बाद वे अलग हुए और यश अपने कपड़े पहन कर वहां से जाने लगा.
हर्षा अभी भी सोफे पर नंगी पड़ी थी.

मैंने देखा कि यश नीचे आ गया था और सड़क पर आने लगा था.
उसे आता देखकर मैं छिप गया.

बाद में मैंने फोन में फिर से देखा, हर्षा उठ कर अपने कपड़े पहनने लगी.

कुछ देर बाद देखा कि हर्षा रो रही थी.

अब मैं समझ गया कि हर्षा बहक गयी और वासना में उससे चुद गयी थी.

मैंने उसको इस बात का पता नहीं चलने दिया कि मैं उसकी हरकत जानता हूँ.

उस दिन हर्षा सारे दिन चुप रही और अपने ही ख्यालों में डूबी रही थी.

अगले दिन सवेरे जब मैं सो रहा था. तब हर्षा के फोन पर यश का कॉल आया कि वह नीचे है और पार्किंग में मिलना चाहता है.
उसने मना कर दिया.

यश ने कहा- सिर्फ़ माफी मांग कर चला जाऊंगा और कभी नहीं दिखूंगा.

उस वक्त मैं आंख बंद करके सुन रहा था.
फिर मैंने देखा कि हर्षा जा रही है.

उसके जाने के पांच मिनट बाद मैं भी नीचे आया और पार्किंग में एक कार के पीछे खड़ा हो गया था.

यश अपनी साइकिल से आया था.

हर्षा लिफ्ट से नीचे आई और उसे देख कर उसने कहा- अब क्या बचा? तुमको मैं दोस्त समझती थी, पर तुमने मुझे ग़लत समझा … छी!
यश- आई एम सॉरी. जो भी हुआ … पर जो भी हुआ तुम भी उससे खुश थी ना!

हर्षा- क्या मतलब तुम्हारा?
यश- हां, तुम मज़े से मुझसे चुदवा रही थीं ना!

हर्षा- ऐसा नहीं है, वह हालात के चलते ऐसा हो गया था.
यश- अगर ऐसा है तो मुझे क्यों नहीं रोका?

हर्षा चुप रही.
यश- तुमने मुझे वहां मॉल की पार्किंग एरिया में भी तो किस किया था. उसका क्या मतलब था?

हर्षा- तुम बहुत खराब लड़के हो. तुम मुझे फिर से कभी मत दिखना … चले जाओ.
यश ने हर्षा को पकड़ कर दीवार से सटा दिया और उसे किस करने लगा.

यश- उम्म म्मा उम्माह.
हर्षा विरोध करने वाला किस कर रही थी- नहीं … एमेम .. उम्माह.

यश ने थोड़ी देर किस किया और कहा- ये लो गिफ्ट … इसको पहन लेना और रेडी रहना. दोपहर में आकर तुम्हारी डोरबेल बजा कर 4 बार नॉक करूँगा. दरवाजा खोल देना. अगर नहीं खोला, तो चला जाऊंगा. आगे तुम्हारी मर्ज़ी.

ये बोल कर वह चला गया.
हर्षा वहां पर एकदम बदहवास हाल में थी और एकदम चुप थी.

वह यश की दी हुई ड्रेस को लेकर लिफ्ट की ओर जाने लगी.
मैं भी भागता हुआ दूसरी लिफ्ट से फ्लैट में पहुंचा और उसके अन्दर आने से पहले मैं बेड पर पड़ा था.

वह आई, मुझे देखा और आंखों से आंसू पौंछती हुई बाथरूम में चली गई.
उसने अपनी उस ड्रेस को कपबोर्ड में रख लिया.

मैं उठा और तैयार होने लगा. मैंने ऐसा दिखाया जैसे कुछ नहीं हुआ.

फिर जैसे ही हर्षा ने ब्रेकफास्ट दिया.
मैं खाकर चला गया.

जाते हुए मैंने सोच लिया कि अगर इस बार हर्षा ने कुछ किया मतलब ये मुझे धोखा दे रही है. मैं इसको तलाक दे दूँगा. क्योंकि यश ने साफ कहा था कि दरवाजा खोलना.
अब ये हर्षा के ऊपर है कि वह क्या करती है.

उस दिन मैं ऑफिस नहीं गया.
घर से निकल कर एक ग्राउंड में जाकर कार पार्क करके बैठ गया और फोन में देखने लगा.

हर्षा अपना काम कर रही थी.
कुछ देर बाद वह अपने रूम में गयी.

उसके कुछ देर बाद वह बाथरूम में यश की दी हुई ड्रेस को लेकर चली गयी.
जब वह बाहर आई तो मैं चौंक गया.
उसने एकदम झीनी ड्रेस पहनी हुई थी.

कुछ देर बाद डोर बेल बजी और दरवाजा चार बार नॉक किया गया.

पहली बार हर्षा ने नहीं खोला.
दूसरी बार उसने खोला तो देखा सामने यश था.

उसने हर्षा को देख कर उसको दरवाजे से ही पकड़ लिया और किस करना चालू कर दी.

हर्षा ने दरवाजा बंद कर दिया और यश उसको किचन में ले गया.

धीरे धीरे उसके सारे कपड़े निकाल कर हर्षा को किचन के प्लेटफॉर्म पर टिका कर चोदना चालू कर दिया.

हर्षा- आह … आह … धीरे करो!
यश- आह चैन कहां मिलता है तुम्हें देख कर … बस कच्चा खा जाने का जी करता है … आह लो और लो … आह.

वह हर्षा को चोदते हुए ही उठा कर बेडरूम में ले गया और वापस चोदने लगा.

हर्षा- आह मां … आह कितनी अन्दर तक पेल रहे हो … हाड़ मांस की ही हूँ ऐसे मत कुचलो यश आह … धीमे करो ना!
यश- आह उफ़फ्फ़!

कुछ ही देर में मेरी Xxx बीवी हर्षा की चूत ने अपना गर्म लावा छोड़ दिया.

हर्षा- उई मां आहह … आह.
यश- आ हां हर्षा यू आर सो हॉट बेबी.

यश ने अपना लंड हर्षा की चुत से बाहर निकाल कर उसको दिखाया. उसका लौड़ा अभी भी तना हुआ था.

यश हर्षा को घुमा कर उसकी गांड के छेद में डालने लगा.

हर्षा मना कर रही थी.
वह फिर भी नहीं माना.
सने अपना लंड हर्षा की गांड के छेद में डाल ही दिया.

हर्षा- आआआ आह मर गई!
यश- आह … उफ्फ़!

कुछ देर बाद यश का पूरा लंड हर्षा की गांड में चला गया और वह हर्षा की गांड मारने लगा.

यश- आह … जान मजा आ रहा है ना!
हर्षा- आह साले तू बहुत कुत्ता है आह पीछे से भी फाड़ दी तूने … आह एयेए!

कुछ देर बाद वह हर्षा की गांड में झड़ गया.
यश- आआआह.

फिर वह उठा और उसने हर्षा को लंड चूसने को कहा.

मेरी पोर्न बीवी हर्षा ने बहुत देर लंड को चूस कर यश को मजा दिया.
उसका लंड फिर से तन गया था और जब तक यश का लंड फिर से नहीं झड़ा, तब तक यश ने हर्षा के मम्मों में लंड फंसा कर चोदा, उसकी जांघों में लौड़ा फंसा कर रगड़ा और आखिर में यश ने हर्षा के मुँह में अपना गाढ़ा लावा डाल दिया.

इस तरह से उन दोनों ने तीन घंटे तक चुदाई की और काफी थक गए.

वे दोनों बेड पर वैसे ही नंगे पड़े थे.

मैं जो भी फोन से देख रहा था, उससे मेरा लंड भी खड़ा हो गया था.

वह सब देख कर मैं मुठ मारने लगा और शांत हो गया.

मैंने तय किया कि ये भी मेरी एक फैन्टेसी की तरह है. अब हर्षा को तलाक देना कैंसिल … अब से उसकी चुदाई दूसरों के साथ देखना चालू.

उस दिन से मैंने कई बार फोन में यश को हर्षा की चुदाई करते देख कर अपना लंड हिलाया.
न जाने क्यों मुझे भी मज़ा लंड हिलाने में मजा आने लगा था.

मैंने हर्षा को साथ ही रखा क्योंकि मुझे उसका ये रंडीपना पसंद आने लगा था.

वह मुझसे छुप कर सेक्स करती थी तो ये और भी पसंद आने लगा था.
इस तरह से हम तीनों मज़े ले रहे थे.

हर्षा भी मुझसे झूठ बोल कर कह देती थी कि यश बहुत ही समझदार दोस्त की तरह पेश आता है.
मैं भी उसकी बात को सुनकर नजरअंदाज कर देता था.

Antarvasna

मैं राहुल, 32 साल, मैंने Antarvasna अंतर्वासना की लगभग सारी कहानियाँ पढ़ी हैं. खास कर मुझे अगम्यागमन कहानियाँ ज्यादा अच्छी लगती हैं. वैसे नेहा जी भी अच्छी लिखती हैं. अब मैं अपनी कहानी पर आता हूँ.

मैं जब छोटा था, तब दीदी मुझसे पीठ खुजलाने के लिए बोला करती थी. हम एक ही कमरे में एक ही बिस्तर पर सोया करते थे. फिर कुछ दिनों बाद दीदी मेर हाथ अपने चुच्ची की तरफ आगे बढ़ाने लगी और बोली- यहाँ खुजलाओ!

मुझे थोड़ा अजीब लगा पर मैं दीदी को मना नहीं कर पाता था क्योंकि दीदी मुझे बहुत प्यार करती थी. फिर दूसरे दिन रात को दीदी बोली- आज नीचे खुजला दे!
तो मैंने पूछा- कहाँ दीदी?

दीदी ने अपनी पेंटी उतार दी और अपनी बुर की ओर इशारा करके बोली- यहाँ!
मैं बोला- दीदी, यहाँ से तो सु-सु करते हैं!
दीदी बोली- हाँ यहीं बहुत खुजली हो रही है.
फिर मैं दीदी की बुर खुजलाने लगा.

फिर दीदी बोली- उसके अंदर जहाँ से सु-सु आता है ना, वहाँ उंगली डाल के खुजला ना!
मैं दीदी की बुर में उंगली डाल के खुजलाने लगा.

फिर इसी तरह कुछ दिन चलता रहा और फिर कुछ दिनों बाद दीदी मामा के घर आगे की पढ़ाई के लिये चली गई.

हम कई बार बीच बीच में मिलते रहे, मामा के घर तो कभी हमारे घर, लेकिन कभी मौका नहीं मिला हमें वैसा मस्ती करने के लिये.

फिर दीदी अपनी पढाई पूरी करके लौटी तो दीदी 24 की हो गई थी.

कुछ दिनों बाद दीदी ने एक दिन मुझ से पूछा- बचपन की बातें याद हैं?
मैंने सर हिला के हाँ कहा, फिर दीदी बहुत खुश हो गई और मेरे गालों को चूम लिया.

अब भी हम लोगों का कमरा एक ही था लेकिन पलंग अलग अलग था. और फिर जब रात को मैं अपने बिस्तर में बरमु्डा पहने गहरी नीन्द में सोया हुआ था तो दीदी ना जाने कब मेरे बिस्तर आ गई और मेरा लण्ड निकाल के सहलाने लगी, मुझे पता ही नहीं चला. मेरा लौड़ा अकड़ के जम के खड़ा हो गया था.

अचानक मेरा नीन्द खुली, देखा कि दीदी के हाथों में मेरा लौड़ा है और वो उसे कभी प्यार से देखती है, कभी सहलाती है और कभी मेरे झाटों से खेल रही है.

तो मैं दीदी से अचानक बोला- दीदी, ये क्या कर रही हो?
दीदी बिल्कुल ही नहीं डरी और बोली- क्यों? तुझे अच्छा नहीं लग रहा है क्या?

फिर मैं क्या बोलता, मुझे तो मजा ही आ रहा था, मैं यूं ही लेटा रहा, फिर मैंने दीदी को बोला- दीदी, इसे मुँह में ले लो ना!

दीदी बोली- क्यों? अभी तो तुझे बुरा लग रहा था! अब कैसे मुँह में लेने के लिए बोल रहा है?
मैं बोला- दीदी प्लीज़ ले लो ना! नाटक क्यों कर रही हो!
दीदी बोली- मुँह में क्या, सब जगह ले लूंगी, लेकिन पहले मेरे पूरे कपड़े खोल के जम के गरम तो करो!

फिर दीदी ने मेरा बरमुडा निकाल के अलग कर दिया, मैंने दीदी को बेड पे ही खड़ा कर दिया और दीदी का टी-शर्ट निकाला, फिर जीन्स!

अब दीदी ब्रा और पेंटी में थी. दीदी पेंटी-ब्रा में क्या गज़ब की मस्त लग रही थी क्योंकि दीदी का फ़िगर 36 28 36 था, बड़े बड़े स्तन और गांड बड़ी बड़ी थी.

दीदी को नंगी देख मैं बहुत खुश हो रहा था और सोच रहा था कि आज तो दीदी मस्त चुदाई करुंगा क्योंकि ये सब मैं जिन्दगी में पहली बार देख रहा था और इन सब चीज़ों के लिये कब से तड़प रहा था.

मैंने दीदी दे स्तनों को ब्रा के ऊपर से खूब दबाया. फिर मैंने दीदी की पेंटी नीचे खिसका दी.

दीदी की बुर तो देखते ही बनती थी क्योंकि दीदी की बुर बिल्कुल साफ़ और डबलरोटी की तरह फूली हुई थी.

फिर मैंने दीदी की बुर की फांकों को खोल के देखा- क्या बुर थी दीदी की, बिल्कुल गुलाबी-गुलाबी! ऐसा लग रहा था जैसे किसी राजा के महल में गुलाबी परदे लगे हों!

मैं अब बिल्कुल रोमांच से भर गया था और ऐसा लग रहा था कि कहीं मैं कोई सपना तो नहीं देख रहा हूँ. मैंने दीदी से बोला- अब तो मेरा लण्ड अपने मुँह में ले लो!

दीदी भी बिल्कुल गरम हो चुकी थी, दीदी ने मुझसे बेड पे लेटने के लिये कहा और खुद मेरे टांगों के बीच में आ के बैठ गई.

मेरा लण्ड बिल्कुल छत की ओर ऐसे खड़ा था जैसे कोइ झंडे का डंडा खड़ा हो.

दीदी बड़े प्यार से मेरे लण्ड को फिर से सहलाने लगी और अंडे को चाटने लगी.

मैंने पहले कभी मुठ नहीं मारा था इसीलिये मेरे सील टूटी नहीं थी और ना ही मैंने कभी झांट साफ किये थे इसलिये मेरे बड़े बड़े झांट भी थे.

मेरे अंडों को चाटते हुए दीदी लण्ड की ओर बढ़ने लगी और फिर लण्ड की जड़ के चारों ओर चाटने और हल्का हल्का काटने लगी.
मुझे बड़ा ही मजा आ रहा था और इंतज़ार कर रहा था कि कब दीदी मेरे लण्ड को अपने मुँह में भरेगी!

दीदी से स्तन मेरी जांघों में रगड़ खा रहे थे, मैं तो बिल्कुल सातवें आसमान में था.

मेरे लण्ड के चारों ओर से काटते, चाटते हुए दीदी सुपाड़े की तरफ धीरे धीरे बढ़ रही थी.
ऐसा लग रहा था कि दीदी मुझे जानबूझ के तड़पा रही हो.

फिर दीदी ने मेरे सुपाड़े के छेद में जीभ लगाई और धीरे धीरे जीभ से चाटने लगी और फिर थोड़ी देर बाद आखिर दीदी ने मेरे सुपाड़े को अपने मुँह में भर ही लिया.
और जैसे दीदी ने मेरा लण्ड अपने मुँह में भरा, मेरा पूरा शरिर ही झनझना गया, ऐसा लगा कि मेरा बरसों का इंतज़ार खत्म हुआ और बरसों की तमन्ना पूरी हुई.

फिर दीदी लगी जम के लण्ड चुसाई करने.

थोड़ी देर बाद मुझे पेशाब लगी, मैं बोला- दीदी एक मिनट रुको! मैं सु-सु करके आता हूँ!
दीदी बोली- नहीं यहीं करो सु-सु!
मैं बोला- दीदी यहाँ कहाँ करुँ सु-सु?
दीदी बोली- मेरे मुँह में!

मैं बोला- दीदी मुझे बड़ी जोर से सु-सु लगी है और एक बार जो सु-सु करना शुरु होगा तो मैं बीच में नहीं रोक सकूंगा और फिर बिस्तर भी गीला हो जायेगा.
दीदी बोली- मैं नीचे बैठ जाती हूँ, मुझे एक बर थोड़ा सा स्वाद चखना है और अगर अच्छा लगा तो पूरा पी जाऊँगी!

फिर दीदी नीचे बैठ गई, मैं दीदी के मुँह में लण्ड डाल लगा मूतने जोरों से!
दीदी दो चार घूंट पी गई लेकिन पूरा मुँह भर जाने के कारण पी नहीं सकी और फिर अपने चेहरे पर, वक्ष पर, बुर में गिराने लगी.

मैंने पूछा- दीदी, कैसा लगा स्वाद?
दीदी बोली- बहुत ही मजा आ रहा था, लेकिन थोड़ा धीरे धीरे करते तो मैं पूरा पी जाती!
मैं बोला- ठीक है, अगली बार धीरे धीरे करुंगा!

फिर दीदी ने कमरे में पोंछा लगाया और बोली- अब तुम थोड़ा स्वाद ले के देखो सु-सु का!
मैं बोला- नहीं मुझे नहीं करना है टेस्ट! दीदी बोली- बिल्कुल थोड़ा सा ही करुंगी, अगर अच्छा नहीं लगा तो दुबारा नहीं बोलूंगी!

फिर मैं नीचे लेट गया और दीदी मेरे मुँह में बुर लगा के ऐसे बैठ गई जैसे बाथरुम में सु-सु करते हैं और लगी जोर लगाने सु-सु करने को.
लेकिन दीदी को तो सु-सु लगी ही नहीं थी इसलिये बहुत जोर लगाने से 4-5 बून्द सु-सु ही कर पाई मेरे मुँह में.

दीदी ने पूछा- कैस लगा टेस्ट?
मैं बोला- बहुत ही नमकीन, खटटा और थोड़ी बदबू भी!
दीदी बोली- मुझे तो अच्छा लगा!

मैं बोला- लेकिन दीदी आपकी बुर चाटने मजा आ रहा था!
तो दीदी बोली- तो फिर जम बुर ही चाट दो!

फिर हम बिस्तर में आ गये और मैं दीदी के होंटो पे चुम्बन करने और चूसने लगा.

दीदी के होंटो को चूसते, चाटते हुए दीदी के कान पे जीभ फिराने लगा. दीदी बहुत ही गरम हो गई थी, कान को चाटते गले से होते हुए वक्ष को चाटने लगा लेकिन दीदी के चुचूकों के पास जा कर चुचूक को मुँह में लिये बगैर ही दूर हो जाता था. दीदी चुचूक चुसवाने के लिये तड़पने लगी और जबर्दस्ती मेरे मुँह में अपने चुचूक पकड़ के ठूंस दिए.

मैं दीदी का एक चुचूक चूसने लगा और दूसरे को हाथ से दबाने सहलाने लगा.

फिर धीरे धीरे मैं दीदी की बुर की ओर बढ़ने लगा और बुर के चारों ओर चूस-चूस दीदी की बुर लाल कर दी.
दीदी बुर चटवाने के लिये छटपटाने लगी और मेरा सर पकड़ के जबर्दस्ती अपने बुर में धंसा दिया. मैं लगा दीदी की बुर और बुर के दाने चूसने-चाटने!

फिर थोड़ी देर में हम फिर 69 करने लगे. दीदी फिर से मेरा लण्ड जम चूसने लगी.

मैं बेड पे खड़ा हो गया और दीदी घुटनों के बल बैठ गई, मैंने दीदी का सर पकड़ के लौड़ा घुसा दिया.

दीदी ओ-ओ करने लगी और दीदी की आंख से आंसू आ गये.
मैं दीदी के मुँह को बड़े प्यार चोदने लगा.

दीदी ने एक हाथ से मेरी गांड को सहलाते हुए मेरे गाण्ड के छेद में एक उंगली घुसेड़ दी.

अब मुझे डबल मजा आने लगा. फिर दीदी दूसरे हाथ मेरे लण्ड को हिलाते हुए चूसने लगी.
मेरे लण्ड में हल्का हल्का दर्द होने लगा. दीदी बड़े जोरों से मेरे लण्ड हिलाने और चूसने लगी और दूसरे हाथ की दो ऊँगलियाँ मेरी गांड में घुसेड़ के अंदर-बाहर करने लगी.

मुझे बहुत मजा आने लगा और पूरा शरीर अकड़ने लगा और मैं दीदी के मुँह में ही झड़ गया.

दीदी मेरा पूरा लण्ड का रस चूस-चूस के पी गई.

मेरा लण्ड खड़ा तो था लेकिन थोड़ा ढीला पड़ गया था और दर्द भी होने लगा था.
दीदी तो लौड़े का रस पी के बिल्कुल गरम हो चुकी थी और बोली- भाई, अब मुझे जम के चोद दो!

मैं बोला- दीदी लण्ड तो खड़ा है लेकिन इसमें दर्द बहुत हो रहा है मैं चोद नहीं सकूंगा!
दीदी बोली- कोई बात नहीं, जब तुम्हारा लण्ड सही हो जायेगा तब चोद देना! लेकिन अभी तो इसे चूस-चाट के झड़ा दो!
मैं बोला- दीदी, हाँ! मैं ये कर सकता हूँ!

फिर दीदी टांग फैला के लेट गई और मैं दीदी की चूत चाटने लगा. दीदी मेरा सर पकड़ के जोर जोर से चटवा रही थी. फिर दीदी मेरे मुँह पे ही झड़ गई.

इसी तरह रात भर में 5-6 बार मेरे मुँह में झड़ी और मैं दीदी का सारा माल चाट-चाट कर पी गया और जब घड़ी देखी तो सुबह के पांच बज रहे थे.

हम दोनों थक के चूर हो गये थे और फिर हम लुढ़क के चिपक के सो गये.

और आगे कहानी सुनने के लिये मुझे मेल करें और बताएं कि मेरी कहानी कैसी लगी. Antarvasna

Antarvasna

दोस्तों, मेरा नाम कोमल है। मैं Antarvasna उत्तर प्रदेश के गाज़ियाबाद की रहने वाली हूँ। मेरी उम्र तेईस साल है, ख़ूबसूरत और एक कसे हुए बद़न की मल्लिका हूँ। शादी से पहले मैंने कई लड़कों से चुदवाया था, पर शादी अपने घरवालों की मर्ज़ी से की। कहते हैं ना कि यह सच्चाई है कि एक लल्लू को ख़ूबसूरत और ख़ूबसूरत को बद़सूरत जीवनसाथी मिलता है। मेरा पति बद़सूरत तो नहीं था, पर हाँ माँ का पिल्ला था। मेरे ससुर फौज में रह चुके थे।

मैं शादी की पहली रात ही निराश हुई, जब पति का लंड मेरे अनुमान से कम निकला। ऊपर से वह ख़ुद तक ही सीमित रहता। पाँच-छः मिनटों तक चोदता और अपना मतलब निकाल, पासा पलट कर सो जाता, और मैं सारी रात मछली की तरह तड़पती रह जाती।

शादी को छः महीने हो गए। सास मुझसे कहती रहती कि तुम लोग बेबी कब करने वाले हो? मुझे जल्दी पोते-पोती का मुँह देखना है। मैं उनसे क्या कहती कि आपका बेटा किसी लायक़ ही नहीं है! बच्चा क्या आसमान से पेट में डलवा लूँ! पति भी कहता कि मैं तो तुम्हें रोज़ चोदता हूँ, फिर तेरे अन्दर ही कोई कसर है।

मैंने कहा, “कभी मेरा पानी निकलवाया है, जिससे बच्चा हो जाए।” इस बात को लेकर बन्द कमरे में हमारी तक़रार होने लगी।

उधर मेरी जवानी देख-देख कर मेरा फौजी ससुर मुझे दूसरी नज़र से देखने लगा। फौजी होते ही ऐसे हैं। एक रात हम दोनों के अलावा घर में ससुर जी ही थे। पति को पहली बार नशे में देखा था, वह बहुत मूड में था। उसने मुझे रोज़ की तरह नंगी कर दिया। मुझे चूम-चाट कर गरम कर डाला।

मैंने भी सोचा कि नशे के कारण शायद उसका आज देर से झड़े, क्योंकि मेरा आशिक दारू पी कर मुझे पूरी रात चोदता था। मैंने जितने भी लड़के फाँसे थे, सभी यह राय रखते थे। पहली बार नशे में पति को बिस्तर मे मूड में देखा, चूमा-चाटी के बाद उसने अन्दर डाला, पहले से कुछ अधिक समय तक टिका, लेकिन वह कुछ अधिक ही उत्तेजना के मारे, रोज़ की तरह मुझे फिर से प्यासी छोड़ कर लुढ़क गया। मैंने ख़ूब खरी-खोटी सुनाई और मेरे मुँह से नामर्द निकल गया। उसने साथ लाई बोतल में से और पी कर मुझे खूब मारा-पीटा और मुझे कमरे से निकाल दिया।

मैंने अभी सलवार पहनी थी, ब्रा हाथ में था कि उसने मुझे बाहर निकाल कर कमरा अन्दर से बन्द कर सो गया। मेरे और सारे कपड़े अन्दर ही थे। मैं ब्रा डाल कर सोफे पर बैठ कर रोने लगी, तभी ससुर जी अपने कमरे से बाहर आ गए। मैं घबरा गई। पास में पड़ी सोफे की गद्दी पकड़ ख़ुद को छुपाने लगी।

“बहू, क्या हुआ? बाहर बैठी हो, वो भी इस तरह? मेरे पास बैठते हुए मुझसे उन्होंने पूछा।

“मुझसे क्या शर्म, क्यों छुपा रही रही हो अपनी जवानी मुझसे? क्या बात है? फिर प्यासी छोड़ दिया बेवकूफ़ ने?”

वह ज़बरदस्ती करने लगे। मैंने बहुत कोशिश की, लेकिन एक फौजी जितनी जान नहीं थी मुझमें। उनकी फौलाद सी बाँहें देखकर मैं दंग रह गई। उनका पाजाम फूल चुका था। मतलब उनका लंड खड़ा हो चुका था। बेटे से दुगुना दम देखकर अधिक विरोध न कर पाई। वह मुझे बाँहों में उठाकर अपने बिस्तर पर ले गए और पटक दिया।

मेरी सलवार उतार कर बोले, इतनी पटाका बीवी मिली हो तो आदमी कैसे सो जाए? वह मेरी गोरी जाँघों को चूमने लगे। मैंने उनका पाजामा उतार दिया। नीचे कुछ नहीं था, लंड फनफना कर बाहर निकल आया। मैंने आज तक इतना बड़ा लंड नहीं लिया था। उनकी चौड़ी की छाती से अपने मम्मों पर रगड़ खाकर मेरी चूत गीली हो गई। मैंने उनका लंड मुँह में लिया और भूखी सी लंड पर टूट पड़ी।

ससुर जी ने मुझे सीधा लिटा, बीच में आकर पहले मेरी चूत सूँघी, “कितनी मस्त चूत है! कहते हुए उन्होंने अपने होंठ लगा दिए और मैं पागल हो गई। बेटा लल्लू, बाप फौलादी।

“बहू बहुत गरम माल है तू, कितने लौड़े खाए हुए हैं अभी तक?”

मैं शरमा गई, हाय छोड़ो… चोद दो मुझे अभी बस – मैंने सोचा

टाँगे खोलते हुए वह बीच में बैठ गए। लंड को चूत के होंठों पर रगड़ने लगे। मैं जल उठी। नीचे से कूल्हे उठाकर लंड डलवाने की नाकाम कोशिश की। मैं कह रही थी, अब तड़पाओ मत। लेकिन वह जानता था कि किस तरह एक आग जैसी गर्म औरत को ठंडी कैसे करते हैं। उसने धीरे-धीरे अपना लंड अन्दर डाल दिया। मोटा लंड काफी दिनों के बाद डलवाया, मज़ा आ गया।

ज़बरदस्त झटके लगने लगे। “हाय…. हाय… चोद… ज़ोर से… ज़ोर से… हाय फाड़ डालो पापा… आज अपनी बहू को चित्त कर दो। देखो अपनी बहू को नंगी अपने नीचे लिटा कर चोद रहे हो…”

“साली ठंडी कर दूँगा, सारा माल तेरी कोख में डाल दूँगा…”

“हाय पापा अपना बीज मेरी कोख में डाल दो… सासू माँ ताने देतीं हैं…”

यह सुनकर वह और गरम हो गया।

“पापा अपनी रंडी बहू की चूत आज फाड़ दो। हाय, कुतिया हूँ मैं… मुझे कुत्ते की तरह चोदो… मुझे घोड़ी बना कर पेलो…”

उसके दम के सामने कितने दिनों बाद आज ऊँगली की बजाय लंड से झड़ी थी मैं। मुझे झड़ता देख उसने सीधा लिटा कर ऊपर से आते हुए टांगे कंधों पर रख कर तेज़ झटका दिया। तेज़-तेज़ झटकों से एक दम वो अकड़ने लगे और मेरे शरीर को मज़बूती से थाम अपना सारा पानी निकाल दिया।

“हाय ससुर जी, मज़ा आ गया।”

“बहू तुम बहुत ही सेक्सी माल हो।”

दोस्तों, फिर हम मौक़ा देखकर हमबिस्तर होने लगे। ससुर जी ने अपने दूसरे बेटे के लिए एक और फ्लैट ले रखा था जो पढ़ाई करता था। ससुर से आज्ञा लेकर मैंने एक कम्प्यूटर-क्लास में दाखिला ले लिया। लेकिन वह एक बहाना था। मैं सीधा फ्लैट पर जाती, जहाँ ससुर जी भी आ जाते, और हमारी रोज़ चुदाई के दौर चलते। मुझे अगली माहवारी नहीं आई। स्ट्रिप से जाँच किया तो मैं गर्भवती निकली। सासु माँ बहुत खुश हुईं।

ससुर जी भी जब उस दिन फ्लैट में मिले तो बहुत खुश हुए। पापा और दादा दोनों ने उस दिन मुझे और जोश से ठोंका। पर एक दिन उन्हें दिल का दौरा पड़ा और वह अब घर में रहते हैं, कमज़ोर हो गए हैं। मैं फिर से प्यासी रहने लगी।

एक दिन ननद और ननदोई पापा को मिलने आए। अब वो लगभग रोज़ आने लगे। वह मुझ पर फिदा थे, यह मैं भी जानती थी। एक दिन घर में अकेली थी, ननदोई जी आए, मुझे बाँहों में लेकर बोले, बहुत प्यार करता हूँ आपसे। हमारी बन जाओ रानी। मैं भी उनके आगोश में ढीली पड़ गई और… आगे क्या हुआ… यह अगली बार लिखूँगी… Antarvasna

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