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Massage Girl in Sheohar: Premium Relaxation Services

Our site can help you find a professional massage girl in Sheohar who will help you relax in the best manner possible. We connect you with professional therapists who can offer you a massage that will make you feel better and more relaxed. The pros on our list are ready to provide you with a fantastic experience at your house or in one of their particular spots, whether you want to relax or get away from it all.

Introduction

Massage is currently one of the finest methods to relax your mind, body, and overall health. Our website makes it easy to locate the top massage services in Sheohar that meet your demands. This will be a one-of-a-kind and calming experience for you.

Tottaa wants to make it simple for clients to find the top masseuse. The Sheohar massage service providers on our list offer the greatest quality, comfort, and competence, whether you want a full-body massage or a massage for a particular location.

How Tottaa Helps Advertisers Reach More Customers

Tottaa is not only a list of masseuses, it’s also a secure location for them to show off what they can do. People in Sheohar who are seeking massage services may find them on our website. This makes them easier to find and gets them more appointments.

Advertisers may simply put up profiles, offer their services, and talk about pricing and discounts on our sites. This makes sure that the relevant people notice your Sheohar massage service, which makes it easier to obtain more customers.

Different Types of Massages We Offer

There are a lot of different types of massage services on our site, so you may choose one that works for you. You may choose the kind of treatment that works best for you, whether it’s profound rest or a particular type of therapy.

1. Swedish Massage

A calm and gentle way to ease muscular tension and improve blood flow. This Sheohar massage is perfect for you if you want to relax and forget about your concerns.

2. Deep Tissue Massage

This approach employs a lot of pressure to get to deeper muscle layers. It’s helpful for folks who have muscular discomfort or stiffness that won’t go away. There are specialists on our profiles of massage girls in Sheohar who are good at deep tissue treatments that function effectively.

3. Aromatherapy Massage

Calming massage strokes and essential oils are beneficial in making people feel improved both emotionally and physically. Most massage companies in Sheohar employ the use of custom oil preparations to make you feel good.

4. Thai Massage

A therapy that wakes you up by using a mix of regular massage, stretching, and compression. This traditional massage in Sheohar helps you relax, become more flexible, and get your mind and body back in harmony.

5. Hot Stone Massage

Heated stones are placed on various parts of the body to help with deep muscular tightness. People who want to feel good, relax, and help their muscles recover quickly can use this massage service in Sheohar

How to Book Our Massage Services

Tottaa makes it simple and fast to book. With our listings, you can see what kind of massage you want, read about the providers, see that they are free and then contact them directly. After you choose, you can book a massage in Sheohar at your convenient time and location. In order to get your desired massage services, apply the following simple steps:

Step 1: Browse Our Listings

Take a peek around our site to view a few massage professionals. Each listing gives you information about the many sorts of massages, how long they last, how much they cost, and where they are situated. This makes it easier to choose the finest ones.

Step 2: Compare and Shortlist

Examine the profiles carefully to compare how the services, talents, and reviews posted by customers differ. This phase makes sure you choose a business that has the style, pricing, and supply you desire.

Step 3: Connect with the Provider

When you have decided, use the information that you are offered so that you can contact them directly. One can communicate it to the massage giver thus making it understood what massage you want at what time and when.

Step 4: Confirm the Appointment

The date, time and place of the service, which could be your home, a hotel or the spa where the therapist may be found. You also need to agree on the payment method and any other accords prior to commencement of the course.

Step 5: Relax and Enjoy Your Massage

All you have to do on the day of the appointment is have your area ready for the house visit. The remainder will be handled by the expert. Take it easy and enjoy a massage that is made just for you.

Frequently Asked Questions

To locate a professional who can meet your needs, read our biography, reviews and advertising.

Yes, many of the therapists on our site will come to your house so you may feel safe and at ease.

You may pick based on talents since most adverts provide their qualifications in their profiles.

It would be advisable to make a reservation earlier to guarantee that you would be able to get a massage, particularly against the prevalent services of massage.

Not at all. Tottaa exclusively connects users with service providers. The doctor gets to choose how to handle payment.

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Hindi sex kahani

मैं एक 36 साल की शादी शुदा औरत हूँ। Sex kahani दिल्ली कैलाश कॉलोनी में हम रहते हैं। लोग मुझे पिंकी बोल के पुकारते हैं। मैं बहुत ही सेक्सी और हॉट पंजाबी औरत हूँ। जब मैं कॉलेज में थी तब सारे लड़के मेरे पीछे पागल थे। मेरे 2/3 बॉयफ्रेंड भी थे।
लेकिन शादी के बाद मुझे दिल्ली आना पड़ा। मेरा हज़्बेंड बहुत ही बिज़ी टाइप के आदमी हैं। अपनी खूबसूरत और सेक्सी बीबी से उसको अपना बिज़्नेस ज़्यादा पसंद है। हफ्ते में मुश्किल से 2 बार हम बिस्तर पे मिलते थे।

मेरी एक 12 साल की लड़की है, नाम हैं प्रिया… वो जब क्लास सेवेन में पहुँची तो हमने उसकी पढ़ाई के लिए एक हाउस ट्यूटर रखने को ठान ली।
मैंने अपने सहेलियों से पूछा तो उन्होंने राजीव नाम के एक ब्रिलियेंट ट्यूटर का नंबर दिया।

शाम को मैंने उसे फोन किया- हेलो, नमस्ते.. क्या मैं राजीव से बात कर सकती हूं?’
‘हाँ जी, कहिए?’
‘जी मैं पिंकी बोल रही हूँ, कैलाश कोलोनी से, मुझे आपकी ज़रूरत है.’
‘जी?? मैं समझा नहीं?’
‘मेरी एक बेटी है.. अगर आप उसे पढ़ा दें… तो मेहरबानी होगी!’
‘क्यूँ नहीं .. ज़रूर!’

‘आपकी फीस क्या है?’
वो तो आप पहले चीज़ देख लीजिए.. पिंकी जी.. फिर फीस तय करेंगे..’
‘ओके, आप कल शाम को 4 बजे आ जाओ!’
‘ओके!’

अगले दिन.. मैंने एक रेड डीप नेक टॉप और टाइट ब्लू जीन्स पहनी.. गुलाबी होंठो पे डीप चॉक्लेट लिपस्टिक भी… 4 बजते ही प्रिया खेलने चली गई..
4.15 पे बेल बजी, मैंने दरवाज़ा खोला तो एक 30 साल की हैंडसम युवक खड़ा था…
‘नमस्ते.. पिंकी जी?’
‘हाँ जी आइए ना..’
‘थॅंक यू!’
वो अंदर आया और सोफे पे बैठ गया… मैं फ्रंट के सोफे पे बैठ गई…
‘राजीव जी!’ मैंने कहा- आप तो बिल्कुल यंग हैं.. मैंने सोच रही थी कोई बुड्ढा सा टीचर आयेगा!
उसने कहा- सो तो है… मैं सत्ताईस साल का हूँ, वैसे.. आपको देख कर भी नहीं लगता कि आप एक 12 साल की लड़की की माँ हो..
देखने में लगता है… आप कॉलेज की स्टूडेंट हो…और मैं आपको पढ़ाने आया हूँ..’

‘ओ थॅंक्स..’ मुझे उनका स्टाइल अच्छा लगा… ‘ चाहो तो आप मुझे भी कभी पढ़ा लेना…मुझे भी शौक है… पढ़ने का!’
‘जी क्यूँ नहीं!’
वो मुझे स्माइल देते हुए देख रहे थे… मैंने भी एक सेक्सी स्माइल दे दी.

‘आप कोल्ड ड्रिंक्स लेंगे या कॉफी?
‘कोल्ड ड्रिंक्स’
मैं किचन गई और दो ग्लास में पेप्सी ले आई…
‘ये लीजिए..’
‘पिंकी जी, स्टूडेंट कहाँ है?’
‘ओह, वो तो खेलने चली गई.. बड़ी नॉटी है…’
‘मतलब… आज मुझे आपको ही पढ़ाना होगा?’
‘जी..’ मैं खिलखिलाकर खिल पड़ी..

उसने मुझे गौर से देखते हुए कहा- आपकी हँसी बहुत ही सेक्सी और कातिलाना है.
मैंने कहा- अच्छा?
‘कसम से!’ पिंकी जी… आप कोई फिल्म एक्ट्रेस से कम नहीं है..’

मुझे राजीव का स्टाइल अच्छा लगा… मैंने और सेक्सी स्माइल दी और कहा- अब आपकी फीस तो बताइए?
‘फीस का क्या है पिंकी मैडम, डेली आपकी 2/3 हँसी देखने को मिल जाए तो काफ़ी है..’
‘ओह.. तुम तो बड़े फ्लर्ट हो.. जी’
‘सच्ची, आप से क्या फीस लेना??’

‘तो क्या लोगे?’
उसने मेरे उभारों की तरफ देखते हुए कहा- जो आप प्यार से दे दो.. पिंकी..
मैं खिलखिला उठी… बहुत दिनों बाद कोई हैंडसम लड़का मुझे फ्लर्ट कर रहा था… अंदर से मैं बिल्कुल हॉर्नी फील कर रही थी…
मैंने कहा- सोच लो जी.. सिर्फ़ हँसी से काम चला लोगे न??
उसने देखा कि मैं सेक्सी स्माइल दे रही हूँ… उसने कहा- आपकी खूबसूरती की कसम पिंकी जी!

‘तुम मुझे जी मत कहो, सिर्फ़ पिंकी कहो’
‘ओके… पिंकी… पिंकी… कितना स्वीट नाम हैं..’
‘सच?’
‘हाँ… आपका नाम और सब कुछ बेहद खूबसूरत है…’

मैंने मुस्करा दी… वो धीरे से आगे आया.. और कहा…एक बात कहूँ?
मैं भी आगे झुक गई.. और.. पूछा- क्या बात है?

उसने मेरे कान के पास फुसफुसा कर कहा- मैंने आज तक तुम जैसी सेक्सी हाउस वाइफ नहीं देखी.. पिंकी…
कहते ही कहते उसने फटाक से मेरी लेफ्ट गाल पर एक किस दे दिया…
‘आउच’ मैंने नाटक किया- तुम बड़े नॉटी हो..

‘सच में’ राजीव ने कहा और धीरे से उठ कर मेरे साथ एक ही सोफे पर बैठ गया.
मैं समझ नहीं पा रही थी कि क्या करूँ… एक तो राजीव मेरे लिए स्ट्रेंजर था.. लेकिन मुझे फ्लर्टिंग और नॉटी चीज़े बहुत पसंद थी..

मैं मंद मंद मुस्कुरा रही थी… उसी वक़्त राजीव बिल्कुल मेरे बगल पर आ चुका था… वो मेरी दाईं ओर बैठ गया और मेरे हाथ को अपने हाथों में ले लिया- पिंकी…
‘जी??’ मैं मुस्करा रही थी.

उसने मेरी हाथों की ऊँगलियों को सहलाते हुए कहा- तुम्हारे ये लंबे नाख़ून, ये डीप रेड नैल पोलिश इन गोरी गोरी ऊँगलियों में कितनी सेक्सी लग रही है!

मुझे राजीव का सहलाना.. और बातें बहुत ही अच्छा लग रहा था…

‘पिंकी, तुम अपनी ब्यूटी की बहुत ध्यान रखती हो न??’..राजीव का हाथ धीरे धीरे अब मेरी पूरे हाथ और कलाई पर रेंग रहा था…
‘हाँ.. मैं हफ्ते में 2 बार ब्यूटी पार्लर जाती हूँ… और घर पे भी मेक अप करती हूँ…’
मुझे अब सहलाना.. और अच्छा लग रहा था.

‘तभी तो तुम इतनी सेक्सी हो… पिंकी… तुम्हारे पति बहुत लकी हैं…’
‘वो क्यूँ.?’ मैं हंस कर पूछा!!!
‘ये रेड नैल पोलिश, सेक्सी फिगर, सेक्सी होंठ… तुम्हारे पति के तो ऐश ही ऐश हैं…’
‘उन्हें फुर्सत कहाँ जी? सिर्फ़ बिजनेस.. और पैसा…’ मैं कह उठी..

अब राजीव ने अपना दायें हाथ से मेरे हाथ को सहलाते हुए अपना लेफ्ट हॅंड मेरी शोल्डर्स के ऊपर से ले गया और मेरी बाएँ आर्म को पकड़ लिया..’ तुम पंजाबी औरतों की बात ही कुछ और है… पिंकी, पता नहीं कैसे इतनी सेक्सी होती हो… करीना कपूर को ही देख लो…
तुम तो उस से भी बढ़ कर हो…’
मैं सेक्सी स्माइल देते हुए कहा- मैं जवानी में मॉडेलिंग किया करती थी..
‘जवानी मतलब?? तुम तो अब भी जवान और लाजवाब हो पिंकी…’ कहते हुए राजीव ने आहिस्ता अपने लेफ्ट हॅंड से मेरी लेफ्ट बूब को दबा दिया… ‘सी… ई ई…’ मेरी मुँह से आवाज़ निकल गई- राजीव… ये.. क्या…??’

जब राजीव ने देखा कि मैंने उसे ऐतराज़ नहीं किया तो उसने धीरे से अपनी दायाँ हाथ भी मेरी दाई मुम्मे पर रख दिया और होले से दबा दिया.
‘आ आ ह ह राजीव…’
‘उम्म म म म… कितनी सेक्सी है… ये…’
राजीव की बातें कंप्लीट होने से पहले ही बेल बज उठी..

डींग डींग डोंग…

हड़बड़ा कर राजीव अपने सीट पर चला गया… मैं दरवाज़ा खोलने गई.
बाहर.. प्रिया थी…
‘मम्मी, पता है… आज ईशा ने..’
प्रिया कुछ बोलने ही वाली थी कि राजीव को देख कर वो चुप हो गई.

‘प्रिया… नमस्ते करो… ये तुम्हारे सर हैं…बहुत ही अच्छे सर है…’ मैंने मुस्करा कर कहा.
‘हाय सर… आई एम प्रिया…’
‘औ.. आई एम युवर राजीव सर…’

मैंने कहा..’ बेटा, जाओ अपनी बुक्स ले कर आओ… राजीव सर से थोड़ा पढ़ लो…’

पाँच मिनट बाद हमारी डाइनिंग टेबल पे प्रिया और राजीव पढ़ रहे थे… मैं पास ही सोफे पर बैठी देख रही थी…
‘पिंकी जी आज पहली क्लास है… आप भी यहाँ आके बैठ जाओ…’ राजीव ने मुस्कराते हुए कहा…
मुझे पता चल गया उसके दिमाग़ मैं क्या चल रहा है… लेकिन.. मैं अपने आप ही उठ कर राजीव के दाईं और बैठ गई.
अब बाएं ओर प्रिया थी.. और दाई ओर.. सेक्सी मम्मी.. मतलब मैं थी.

थोड़ी देर बाद मुझे लगा कोई चीज़ मुझे मेरी लेफ्ट थाई जांघ पर टच कर रहा है.. जल्द ही मुझे पता चला… ये राजीव का दायँ हाथ था…वो बड़े आराम से प्रिया को पढ़ा रहा था, और नीचे उसकी माँ की जाँघो को छू रहा था.
मुझे हल्की सी गुदगुदी हो रही थी.. ये लड़का बहुत ही नॉटी था.

उसने प्रिया को एक सम करने दिया… और धीरे से टेबल के नीचे से ही मेरे सपाट पेट पर अपना हाथ रख दिया.
उई माँ… मैं तो अब गर्म होने लगी थी… राजीव मुझे देख कर मुस्कराया, मैंने भी एक सेक्सी स्माइल दी.
अचानक उसने अपने शरारती हाथ को ऊपर ले जाकर मेरी लेफ्ट उभार को दबा दिया.
‘उउउहह..’ मेरी मुँह से आवाज़ निकली.

‘क्या हुआ माँ?’ प्रिया ने पूछा.
‘कुछ नहीं बेटा… बस ऐसे ही.. शायद कोई कीड़ा होगा…’ मैं सेक्सी स्माइल देकर राजीव को घूर रही थी.
उसने कहा- मैडम… कहीं कीड़ा ज़हरीला न हो… मैं देखूं?’
‘नहीं ठीक है!’ मैंने कहा.
‘नहीं मैडम, आप घबरायें मत… प्रिया.. जाओ एक ग्लास पानी लेके आना मम्मी के लिए…’ राजीव ने कहा.

प्रिया जैसे ही अंदर गई, राजीव ने मुझे पास खींच कर मेरे लेफ्ट उरोज़ को दबाना शुरू किया…
‘आह… आह राजीव छोड़ो न… कोई देख लेगा!’
‘पिंकी.. जी कर रहा है तुम्हें… अच्छी तरह प्यार दूं…लेकिन…’

तभी प्रिया आ गई पानी के साथ… पानी पीते हुए मैंने प्रिया को कहा- प्रिया.. ज़रा जाकर अंदर से एक पेन किलर ले आना..

जैसे ही वो गई, मैंने कहा- राजीव, यहाँ प्लीज़ कुछ मत करना, मैं फँस जाऊँगी, तुम मुझे वसंत विहार में आर. पी. एम. पब में मिलना… आज रात को सात बजे…
कह कर मैं अंदर चली गई. sex kahani

बीस मिनट बाद प्रिया ने आकर कहा- राजीव सर चले गये हैं.

मैंने प्रिया को पास ही मीना के घर खेलने भेज दिया और तैयार होने लगी.

Antarvasna

मैं कॉलेज में आ चुका था। मेरे Antarvasna एक पुराना दोस्त मेरे साथ में मेरे घर में रहता था। हम दोनो पक्के दोस्त थे और एक दूसरे को बहुत चाहते थे। सेक्स के मामले में मैं बहुत झिझकता था। इतनी तो मेरी बड़ी दीदी भी नही शर्माती थी। मैं जब सुबह जागता था तो मेरे लण्ड में पेशाब भरे होने के कारण वो खड़ा हो जाता था। दीदी बस यही देखने के लिये सुबह मेरे कमरे में आ जाती थी और मेरे खड़े लौड़े को देख कर आहें भरती थी। अपनी चूत भी दबा लेती थी।

मेरी नजर जब उस पर पड़ती तो मैं झेंप जाता था, पर दीदी बेशर्मों की तरह मुस्करा कर चली जाती थी। मुझे ये सब देख कर सनसनी आने लगती थी। दीदी के चूतड़ मस्त गोल गोल उभरे हुए थे, मेरे भी वैसे ही थे … पर लड़की होने के कारण उसके चूतड़ ज्यादा सेक्सी लगते थे। उसकी चूंचिया भी भरी भरी गोल गोल मस्त उठान और उभार वाली थी। सीधी तनी हुई, किसी को भी दबाने के लिये निमन्त्रण देती हुई।

मेरा दोस्त ज्यादातर मेरे बिस्तर पर ही सोता था। कितनी बार तो रात को वो मेरे चेहरे को चूम भी लेता था। मुझे लगता था वो मुझे बहुत प्यार करता है। कभी कभी मैं भी उसे चूम लेता था।

इन दिनों उसमें कुछ बदलाव आ रहा था। हम जब कॉलेज साथ साथ जाते तो वो कभी कभी मेरी गाण्ड सहला देता था। मुझे बड़ा अच्छा लगता था। एक बार तो छत पर उसने मेरे पीछे आ कर अपना लण्ड मेरी गाण्ड में लगा दिया था। मुझे एक झुरझुरी सी आई थी। उसके लण्ड का कड़ापन मेरी गाण्ड को करण्ट मार रहा था। मैंने अपनी गाण्ड हटा ली। बात आई गई हो गई।

रात को सोते समय उसने धीरे से मेरा लण्ड पकड़ लिया, मुझे अच्छा लगा। पर शरम के मारे मैंने उसका हाथ हटा दिया।

एक बार रात को सोते समय अनजाने में मेरा हाथ जाने कैसे उसके लण्ड पर चला गया। रवि ने मेरा हाथ अपने लण्ड पर दबा दिया। शायद उसने ही अपने लण्ड पर मेरा हाथ रख दिया होगा। कुछ देर मैं सोने का बहाना करता रहा, उसका हाथ अब मेरे लण्ड पर आ गया … मुझे बहुत मजा आया। मैं शान्त ही रहा। उसने अपना हाथ मेरे पजामे में डाल कर मेरा नंगा लण्ड पकड़ लिया। वो मेरा लण्ड सहलाने लगा।

मैंने मन ही मन आह भरी और जब सहा नहीं गया तो दूसरी तरफ़ करवट ले ली। उसने लण्ड छोड़ दिया। अब मेरा लण्ड तड़प रहा था कुछ करने को … पर क्या करने को … शायद गाण्ड मारने को या मराने को … वो पीछे से मेरे से चिपक गया और अपना लण्ड मेरे चूतड़ो में घुसाने की कोशिश करने लगा। चूतड़ो की दरार के बीच उसका लण्ड फ़ंसा हुआ अपनी साईज़ का अहसास दिला रहा था।

मैंने अचानक जागने का नाटक किया,”अरे यार सो जा ना … “

“तुझे प्यार करने को मन कर रहा है … ” उसने अपनी झेंप मिटाने की कोशिश की।

“ओह हो … ये ले बस … ” मैंने करवट बदल कर उसे पकड़ कर चूम लिया पर उसने मुझे जबरदस्ती होंठ पर चिपका लिया और होंठ चूसने लगा।

मैंने अलग होते हुए कहा,”ऐसे तो लड़किया करती हैं … साले … बस हो गया अब सो जा … “

“अभी आया … ” कह कर वो बाथ रूम गया, शायद अन्दर वो मुठ मार रहा था। कुछ देर में वो आ गया और अब वो शांति से सो रहा था। मुझे भी मुठ मारने की तेज इच्छा होने लगी थी, पर कुछ ही देर मेरा वीर्य बिस्तर पर ही निकल गया। मैंने अपना रूमाल पजामे में घुसा लिया और वीर्य पोन्छ दिया।

हमने सिनेमा देखने का कार्यक्रम बनाया। हॉल लगभग खाली था। बालकनी में बस हम दोनों ही थे। पिक्चर शुरू होते ही रवि ने मेरा हाथ पकड़ लिया … और फिर धीरे से हाथ छोड़ कर उसने मेरी जांघ पर रख दिया। मुझे पता था कि मुझे ये सिनेमा लाया ही इसीलिये है।

आज मैंने सोचा कि ये अधिक परेशान करेगा तो मैं उठ कर चला जाऊंगा।

पर उसके हाथों में जादू था। मेरी जांघ वो सहलाता रहा। मुझमें करण्ट दौड़ने लगा। धीरे से उसने मेरे लण्ड पर हाथ रख दिया। मुझे अजीब सा लगने लगा पर आनन्द भी आया। जैसे ही उसने लण्ड दबाया, मैंने उसका हाथ हटा दिया। उसने मुझे देखा फिर कुछ ही देर के बाद उसने हाथ फिर से मेरी जांघ पर रख दिया। कुछ ही देर के बाद उसने फिर कोशिश की और मेरे लण्ड पर हाथ रख दिया और हल्के से सहलाने लगा।

मेरे मन में एक हूक सी उठी … हाय … कितना मजा आ रहा है … । पर दिल नहीं माना … उसका हाथ मैंने फिर से हटा दिया। उसने भी हिम्मत नही हारी … और कुछ ही देर में उसने फिर मेरे लण्ड पर हाथ रख दिया और दबाने लगा। पर यहाँ मैंने हिम्मत हार दी और उसे करने दिया।

वो मेरा लण्ड दबाने लगा … और अपनी अंगुलियां से दोनो ओर से लण्ड को दबा कर सहलाने लगा। मुझे कोई विरोध ना करते देख कर वो खुश हो गया। और मेरी पेन्ट की ज़िप खोल दी … अब उसका हाथ मेरे अंडरवीयर को ऊंचा करके नंगे लण्ड तक पहुंच गया था। उसने अपने हाथ में उसे पूरा भर लिया। मुझे आनन्द की एक तरावट सी आ गई। मुझे लगने लगा कि काश मेरा मुठ मार दे और मेरा वीर्य निकाल दे।

“कैसा लगा … बता ना !” उसने मुझसे फ़ुसफ़ुसा कर पूछा।

“बस रवि … अब हाथ हटा ले यार … “

“अरे नहीं … देख बहुत मजा आता है … ” कह कर उसने लण्ड पेन्ट से बाहर निकाल लिया। मेरा मन खुशी से भर गया। मैंने अपना हाथ उसके लण्ड की तरफ़ बढा दिया और बाहर से उसे पकड़ लिया।

“तुझे भी मजा आया क्या … ” मैंने उससे पूछा और उसके पेन्ट के अन्दर हाथ डाल दिया उसने अन्दर चड्डी नही पहन रखी थी, सीधे लण्ड से हाथ टकरा गया। उसे मसलते हुए मैंने बाहर निकाल लिया। अब वह मेरे लण्ड को हौले हौले घिस रहा था, और मैं उसके लण्ड को घिस रहा था। तभी इन्टरवेल हो गया।

हॉल की लाईटें जल उठी। दोनो के लण्ड बाहर मस्त हो कर लहरा रहे थे। मैंने शरमा कर लण्ड एक दम पेन्ट के अन्दर डाल लिया।

“चल यार … अब चलें … कही आराम से मजे करते हैं … “

“ओके … चल … ।” बाहर आकर मैंने स्टैण्ड से अपनी मोटर साईकल निकाली और नेहरू गार्डन चले आये। रात हो चुकी थी, भीड़ भी कम थी। हम दोनों एक एकान्त की ओर बढ़ गये। एक घने झाड़ के नीचे बैठ गये।

“आ जा अब मस्ती करते हैं !” मुझे तो वही मस्ती आ रही थी, मैंने तुरन्त अपना लण्ड निकाल दिया। उसने मेरा लण्ड पकड़ कर अब फ़्री स्टाईल में मुठ मारना चालू कर दिया। मैं झूम उठा …

“मजा आ रहा है ना … देख घर पर तबीयत से चुदाना … “

” चुदाना ? मैं क्या लड़की हूँ … साले … आह्ह्ह भोसड़ी के … मस्त मजा आ रहा है … तू भी अपना लौड़ा निकाल ना … ला मसल दूँ … ”

“निकाल तो रखा है यार … तू तो मस्ती में खोया है … ” मैंने उसका लण्ड पकड़ लिया और मसलने लगा। उसने मुझे लिपटा लिया और मेरे होंठो को चूमने लगा। मैं भी प्रति-उत्तर में उसे चूमने लगा। हम दोनो मदहोशी में भूल गये कि हम गार्डन में है।

लण्ड मसलने से कुछ ही देर में मेरा वीर्य छुट गया, कुछ ही देर में वो भी झड़ गया। हमें झड़ने के बाद होश आया। देखा तो पूरा गार्डन सूना था … हम उठ खड़े हुये, लण्ड को पेण्ट के भीतर डाला और उठ खड़े हुए।

“थेन्क्स यार … बड़ा मजा आया … ” और हम चल दिये।

घर आ कर मुझे बड़ी घिन आने लगी कि हाय मैं ये क्या कर रहा था? मैंने अलमारी से दारू की बोतल निकाली और दो पेग बना कर पी गया। खाना खा कर हम सोने की तैयारी करने लगे। मुझे नशे में फिर से वासना की खुमारी चढ़ने लगी। इतने में दीदी आ गई।

“रवि, आज लगता है कोई खास बात है … ।”

“नहीं दीदी … ऐसा तो कुछ भी नहीं है … “

“अरे बता दे ना … आज कितनी मस्ती मारी है हमने … मजा आ गया !” मैंने नशे में कहा।

“भैया आप ही बता दो ना … !” दीदी ने मुझसे पूछा।

“अरे दीदी, क्या बताऊँ … इस साले ने मेरा लण्ड का मुठ मार कर माल ही निकाल दिया” मैंने हिचकी लेते हुये कहा।

‘दीदी ये तो बहक रहा है … “रवि ने शर्माते हुए कहा।

“अच्छा तो ये बात है … अकेले अकेले मजे कर रहे हो … ” दीदी मुस्कराई।

और मुड़ कर चली गई। मैंने अपने कपड़े उतारे और बिस्तर पर लेट गया … रवि ने भी मौका देखा और लाईट बंद कर दी और वो भी नंगा हो कर लेट गया। कुछ ही देर बाद हम दोनो एक दूसरे का लण्ड मसल रहे थे … मुझे बड़ा आनन्द आ रहा था। मुझे लग रहा था कि कुछ करना चहिये … पर क्या ?

“गाण्ड मरवाओगे क्या … “

“क्या … क्या मरवाओगे … “

“मेरा मन, तेरी गाण्ड में लण्ड घुसेड़ने को कर रहा है … देख मजा आयेगा राजू … “

“पर यार छेद तो छोटा सा है … ” मुझे पता था कि लण्ड गाण्ड में घुसेड़ कर उसे चोदी जाती है … पर मैं मसूम ही बना रहा।

“लौड़ा घुस जायेगा … देख उल्टा लेट जा … ये तकिया भी नीचे लगा ले … “

मैं नीचे तकिया लगा कर लेट गया, मेरी गाण्ड और ऊंची हो गई। उसने मेरी गाण्ड ने थूक लगाया और वो मेरी पीठ पर चिपक गया और मेरी गाण्ड में अपना लण्ड घुसेड़ने लगा। उसके लण्ड ने मेरी गाण्ड के छेद में ठोकर मारी। मुझे गुदगुदी सी हुई। मैंने अपनी गाण्ड खोल दी उसने जोर लगा कर लण्ड का सुपाड़ा गाण्ड में घुसेड़ दिया और आगे हाथ बढा कर मेरा लण्ड पकड़ लिया। उसने जोर मार कर लण्ड अन्दर घुसा मारा …

मेरी गाण्ड नरम थी, जवान थी … पूरा लण्ड निगल गई। अब उसने धक्के मारने शुरू कर दिये … मुझे थोड़ी सी जलन हुई, पर मजा अधिक आया। पहली बार लण्ड से गाण्ड मरा रहा था। वो मुझे चूमने चाटने लगा … मेरा लण्ड तकिये से दबा हुआ सिसक रहा था … और जोर मार रहा था।

रवि तो मस्ती में चूर था … पूरे जोश के साथ मेरी गाण्ड चोद रहा था और कुछ ही देर में वीर्य निकाल दिया। रवि निढाल सा एक तरफ़ लुढ़क गया।

“राजू, तेरी बहन को चोद डाले क्या?” रवि ने गहरी सांस भरते हुए कहा।

“साले मरवायेगा क्या … ?”

“नहीं यार … बड़ी सेक्सी है … चल यार कोशिश करते हैं … अपना लण्ड का माल उसी से निकाल लेना !”

“अच्छा, चल कोशिश करते हैं … देख बात बिगड़े तो सम्हाल लेना !”

रवि ने हामी भर दी। मेरी दीदी की नजर तो मुझ पर थी ही … मुझे लगता था कि काम हो ही जायेगा … । हम दोनों बिस्तर से उठे और तोलिया लपेट लिया और दबे पांव दीदी के कमरे में सामने चले आये। कमरे में बाहर की लाईट का खासा उजाला था … दीदी दोनों पांव चौड़े करके और स्कर्ट ऊंची करके लेटी हुई थी। मैं दीदी के बिस्तर पर उसके पास बैठ गया।

दीदी ने धीरे से आंखे खोली,”राजू … क्या हुआ … ये सिर्फ़ तोलिया लपेटे क्यूँ घूम रहे हो … ?”

मैं थोड़ा नर्वस हो गया। पर रवि बोल उठा,”दीदी … आप लेटी रहो … राजू … चल कर ना … “

मैंने दीदी की चूंचियों की तरफ़ हाथ बढ़ाया। दीदी सब समझ चुकी थी। मुस्करा उठी …

मेरे हाथ उसके बोबे तक आ चुके थे …

“राजू … घबरा मत … पकड़ ले और दबा दे … !”

मेरी हिम्मत खुल गई,” दीदी … थेन्क्स … ” और मैंने धीरे से दीदी के बोबे पकड़ कर दबा दिये।

“अरे, शरमा मत … मसल दे … मजा ले ले दीदी का … और मजा दे दे दीदी को … ” दीदी सिसक उठी, जाने कब से बेचारी चुदासी थी …

उसने मेरा तौलिया उतार दिया और रवि ने मुझे बिस्तर पर धक्का दे दिया …

“बस बस … चढ़े ही जा रहे हो … ” वो उठ कर बैठ गई … और भाग कर अपना दरवाजा अन्दर से बंद कर दिया। रवि ने उसे अपनी तरफ़ खींच लिया और उसका एक चूतड़ दबा लिया।

“दीदी, आपकी बाटिया यानी चूतड़ सोलिड हैं … बॉल भी बड़े कसे हुए हैं …! ”

“तू भी तो रवि सोलिड है … भैया की अभी गाण्ड मारी है ना … उसकी बाटिया मेरी जैसी ही तो है … !”

“दीदी … आपने सब देखा है क्या … ” मैं चौंक गया। दीदी मुस्कुरा उठी।

“राजू जवानी लगी है अभी … इसमें सब चलता है … देख मैं भी अभी चूत मरवाऊंगी और इसकी प्यास बुझाउंगी, रवि से गाण्ड मरवाउंगी … साला हरामी मस्त गाण्ड चोदता है !” और खिलखिला कर हंस पड़ी।

रवि से हट कर दीदी मेरे पास आई,”भैया … पहले आपका हक बनता है … देखो प्यार से चोदना … तेरी मस्त चूतड़ो की तो मैं भी दीवानी हूँ !”

“और मैं भी दीदी … तेरी चूतड़ो की गहराई देख कर तो मेरा लण्ड कब से चोदने को बेताब हो रहा था।”

“हाय रे भैया, तो देरी किस बात की है … चोद दे ना … ” और वो मेरे से लिपट पड़ी।

मैंने उसे तुरन्त घोड़ी बनाया और और उसे अपने से चिपका लिया। रवि लपक कर आया और नीचे से मेरा कड़क लौड़ा उसकी चूत के द्वार पर रख दिया।

“मार राजू … चोद दे दीदी को … पर देख प्यार से … दीदी अपनी ही है … ” रवि के स्वर में प्यार झलक रहा था।

मैंने धीरे से लण्ड दीदी की चूत में ठेल दिया।

लण्ड का प्रवेश होते ही उसके मुख से प्यारी सी सिसकारी निकली और उसने प्यार भरी निगाहों से मुझे देखा,”भैया … रहम मत करना … साले लौड़े को जोर से ठोक दे … बहुत महीनों बाद लौड़ा खा रही हूं !”

“हाय दीदी … ये लो … मुझे भी मत रोकना … मेरा तो रोम रोम सुलग रहा है … पहली बार मुझे भी कोई चूत मिली है … !”

मैंने जोर लगा कर लण्ड चूत की जड़ तक बैठा दिया। रवि ने मेरी गाण्ड सहलानी चालू कर दी। उसका लण्ड भी बेकाबू हो रहा था। मैंने दीदी की चूंचिया दबा कर पकड़ ली और मसलते हुए पूरी ताकत से लौड़ा खींच कर दे मारा।

“आह राजू … ये हुई ना बात … अब ढेर सारे जोर की ठोकरे दे मार … साली चूत को मजा आ जाये … “

मैं जैसे ये सुनते ही पगला गया … जोर जोर से उसकी चूत में लण्ड घुसेड़ कर चोदने लगा … पर जवानी तो दीदी पर पूरी तरह से छाई हुई थी … उसकी चूत लपक लपक कर लौड़ा ले रही थी। तभी मुझे लगा रवि भी अपना संयम खो बैठा और उसने मेरी गाण्ड में अपना लण्ड घुसेड़ दिया।

“राजू प्लीज … तेरे गोल गोल चूतड़ मारने को कर रहा है … !” रवि ने कहा।

“अरे रुक जा साले … दीदी की गाण्ड और भी मस्त है … ठहर जरा … दीदी, आप दोनो छेद से मजा लो ना … “

दीदी तो वासना की आग में जली जा रही थी …

“हाय आगे से और पीछे से … दोनो तरफ़ से चोदोगे … माँ मेरी … चल पोजिशन ले … आज तो तुम दोनों मुझे मस्त करके ही छोड़ोगे !”

मैं बिस्तर पर चित्त लेट गया और दीदी ने ऊपर आ कर मेरा लण्ड चूत में डाल लिया और पूरा घुसेड़ कर जड़ तक बैठा लिया … और दोनों पांव से अपने चूतड़ ऊपर उठा लिये। रवि तुरन्त लपक कर बिस्तर पर चढ़ गया और उसकी खुले हुये चूतड़ो के पट में लण्ड रख दिया। दीदी ने रवि को देखा और मुस्कुरा दी और लण्ड गाण्ड में सरक गया।

“हाय रवि … भारी है … पर हां, कस के गाण्ड मारना … ये जवान लड़की की गाण्ड है … खूब लेती है और भरपूर लेती है !”

रवि तो सुनते ही जोश में आ गया और पहले धीरे धीरे और फिर जो जोर पकड़ा तो दीदी को भी मजा आ गया। अपनी गाण्ड उभार कर चुदाने लगी।

“वाकई, राजू … दीदी की गाण्ड तो मस्त है … जबरदस्त चोदने लायक है …! ” मैं नीचे उसके बोबे मसल मसल कर लण्ड उछाल उछाल कर दीदी को चोद रहा था। दीदी दोनों तरफ़ से चुद कर मस्त हो चली थी।

अब मुझे लगा कि मेरी नसें खिंचने लगी हैं … सारा कुछ लण्ड के रास्ते निकलने वाला है … मैं सिसक उठा,”दीदी … प्यारी दीदी … मेरा तो निकला … हाय … “

दीदी मुझसे चिपक गई … “राजू … निकाल दे … मस्त हो जा … रवि है ना, वो चोद देगा … तू झड़ जा … आराम से … हां”

“दीदी … तेरी तो … हाय … भेन की चूत … मैं गया … अरे रे रे रे … ओह्ह्ह्ह्ह्ह हा हाऽऽऽऽऽ।” और मेरा वीर्य छुट पड़ा … दीदी ने मेरा लौड़ा बाहर निकाल दिया … सारा वीर्य उसकी चूत के आस पास निकलता रहा। इतने में रवि ने गाण्ड से लण्ड निकाल कर दीदी की चूत में घुसेड़ दिया।

“आह्ह्ह साला हरामी रवि … मेरी चूत मार रहा है … “

“दीदी, अब आपकी बारी है माल निकालने की … “

“तेरे को कैसे पता … मैया री … अह्ह्ह् … साला … रवि … चोद दे रे … जोर से … मार और मार… भैया “

और मेरे से से जोर से लिपट गई … और दीदी का पानी छुट गया … दीदी मेरे से लिपट कर बल खाती हुई झड़ने लगी।

“दीदी … मेरा लण्ड … गया रे … निकला मेरा भी … ओये रे … चल निकल … हाऽऽऽऽऽऽ … ” और रवि ने लण्ड चूत से बाहर निकाला और दीदी की गाण्ड पर फ़ुहारें छोड़ दी … दीदी मुझे दबाये लेटी रही … रवि उठ कर बैठ गया।

“अब हो गया … सबका माल निकल गया … चलो उठो” रवि ने हांक लगाई।

दीदी ने मेरे ऊपर से सर उठाया और मुझे आंखो से जी भर कर देखा, और मुस्कराने लगी।

मुझे चूमते हुये बोली,”आप बहुत प्यारे हैं भैया … दीदी की प्यास बुझा दी और एक रवि जैसा गाण्ड की प्यास बुझाने वाला दोस्त भी दे दिया … क्यो रवि … है ना !”

“दीदी … आप के तो हम दास है … बस आप तो आदेश दे दे ना … लण्ड हाजिर है … “

दीदी हंस पड़ी और मुझे फिर से चूम लिया। वो मेरे ऊपर से हट गई और रवि को लिपट कर प्यार करने लगी। मैंने बड़ी मुश्किल से दोनों को अलग किया।

“चल साले तौलिया लपेट और निकल यहाँ से … अब तो रोज का प्रोग्राम रहेगा … उतावाला मत हो !”

रवि बड़ी आसक्ति भरी नजरों से दीदी को देखता हुआ कमरे से बाहर आ गया।

हम बिस्तर पर जा कर जैसे लुढ़क पड़े, और नींद की आगोश में चले गये … अचानक मेरी नींद रात को खुल गई … देखा तो रवि पास में नहीं था … मैंने जल्दी से उसे तलाशा … तभी दीदी के कमरे से सिसकियाँ सुनाई दी … अन्दर देखा तो मस्त चुदाई चल रही थी … मैं उनके पास गया”शश्श्श्श्श्श्श … चुप … ।”

“भैया … प्लीज करने दो … रहा नहीं गया ना … “

“चुप … बाहर तक सिसकारी की आवाजें आ रही हैं … चुप से चोदा-चादी करो … शोर नहीं … वरना ऐसा पिटोगे कि सब भूल जाओगे … ” मैंने दरवाजा बाहर से बंद कर किया … अब वो दोनों बिना आहें भरे … चुदाई कर रहे थे … । Antarvasna

Hindi Porn Stories

हेल्लो फ्रेंड्स, मेरा नाम मोहित है Hindi Porn Stories और मैं 22 साल का हूँ। मैं पुणे में रहता हूँ और यह मेरी अन्तर्वासना को भेजी पहली कहानी है।

ये बात तब की है जब मैं 12वीं कक्षा में पढ़ता था। हमारे घर के पास ही मेरे भैया (कज़न) अपने परिवार के साथ रहते थे।
उनकी 2 बेटियाँ थी, जिनमे से बड़ी वाली का नाम प्रिया और छोटी का नाम अदिति था। प्रिया 18 साल की थी।

यूँ तो मेरे अपनी दोनों भतीजियों के साथ अच्छे रिश्ते थे पर प्रिया के साथ मैं ज्यादा नजदीक था।

प्रिया भी मुझसे काफी घुल मिल रखी थी और मैं भी।
वो मुझे अपने भाई की तरह मानती थी।

वैसे जब तक मैं 12वीं कक्षा में नहीं आया था तब तक मैंने प्रिया की तरफ किसी ऐसी वैसी नज़र से नहीं देखा था पर 12वीं में आने के बाद वो मुझे अचानक ही बहुत अच्छी लगने लगी, शायद यह उसके बढ़ते हुए उभारों की वजह से था।

एक दिन मैं घर पर अकेला था, गर्मियों के दिन थे, मैने हाफ पैन्ट और टी-शर्ट पहनी थी । मैं काफ़ी बोर हो रहा था तो मैने सोचा क्यों ना प्रिया से मिलने चलूं !

यह सोचकर मैं उसके घर गया और मैने बेल बजाई । शायद मेरी किस्मत अच्छी थी, प्रिया ने दरवाज़ा खोला तो मैने देखा कि उसने काला स्लीवलेस टॉप और लाल रंग की कॅप्री पहन रखी थी, और वो अत्यंत सेक्सी लग रही थी।

मैने पूछा क्या कर रही थी?

तो उसने बोला- कुछ खास नहीं, ऐसे ही !

हम दोनों अंदर गये तो मैने पूछा- भैया भाभी कहाँ हैं?

तो उसने बताया कि वो तो अदिति को ले कर बाज़ार गये हैं। उसके बाद हम दोनों पढ़ाई की बातें करने लगे और एकदम से हम बाय्फ्रेंड और गर्लफ्रेंड की बातों पर भी आ गये (असल में हम दोनों एक दूसरे के बीच काफ़ी फ़्रैन्क थे)

हम बात कर ही रहे थे कि उसने चाय के लिए पूछा और मैने कहा ठीक है।

प्रिया चाय बनाने किचन में चली गयी।

मैं भी उसका साथ देने रसोई में चला गया, पर जैसे ही मैं रसोई में घुसा, मेरा ध्यान प्रिया की मोटी गाण्ड की तरफ गया और मैं आकर्षित हो गया।

तभी प्रिया मेरी तरफ मुंह करके बोली- चीनी कितनी लोगे?

मैने साहस जुटाया और प्रिया के पास गया और बोला प्रिया क्या तुम मेरी एक बात मानोगी?

प्रिया ने पूछा- कौन सी बात?

तो मैंने कहा- मैं एक बार तुम्हारे चोचे दबाना चाहता हूँ।

इस बात पर वो सहम गयी और बोली- यह क्या कह रहे हो?

तो मैंने कहा- किसी को पता नहीं चलेगा क्यूंकि हम दोनों के घर वाले घर पर नहीं है और शाम तक नहीं आने वाले।

इस पर उसने कहा- ठीक है, तू मेरा चाचा लगता और मैं तेरी भतीजी हूँ तो हम दोनों के बीच इतना रिश्ता तो हो ही सकता है।

मैं खुश हो गया और प्रिया को गोदी में उठा कर बेडरूम में ले गया।

वहाँ मैने पहले तो उसके होठों पे किस किया जिसका उसने भी जवाब दिया, उसके बाद मैने उसका लाल टॉप उतार फेंका और उसके चोचे उसकी ब्रा के बाहर से ही दबाने लगा, इतने में वह गरम हो गयी।

उसके तुरंत बाद मैने अपनी टी-शर्ट उतार दी तो प्रिया कहने लगी- मोहित तुम क्यों अपने कपड़े उतार रहे हो?

तो मैने कहा- क्या इससे तुम्हें कोई परेशानी है?

तो प्रिया ने कहा- नहीं !
और धीरे से मुस्कुरा दी।

मैं समझ चुका था की रास्ता साफ है।

इसके बाद मैने प्रिया की ब्रा उतार दी और पागलों की तरह उसके चोचे चूसने लगा, प्रिया भी मज़े ले रही थी और आ आ की आवाज़ निकल रही थी।

मैने ज़्यादा देर नहीं की और उससे पूछा क्यों ना हम चुदाई करें?

तो प्रिया ने जवाब दिया जैसा मर्ज़ी वैसा करो पर किसी तो पता नहीं चलना चाहिए तो मैने उसे निश्चिंत होने के लिए कहा।
बस फिर क्या था, मैने प्रिया की कैप्री और चड्डी भी उतार दी और अपना भी अंडरवीयर उतार दिया मेरा लण्ड टंकार खड़ा हो गया कम से कम 7 इंच तक।

मेरे लण्ड को देखकर प्रिया ने उसे अपने मुंह में ले लिया और जम के चूसने लगी, यह सिलसिला 10 मिनिट तक चला।

इसके बाद मैने अपना लण्ड प्रिया की चूत पे लगाया और एक ही झटके में उसकी चूत में घुसा दिया, इस पर वह ज़ोर ज़ोर से आ आ की आवाज़ें निकालनें लगी।

मैने कहा- चिंता मत करो।

उसके बाद तो हमने एक दूसरे के साथ करीब 20 मिनट तक कभी डोगी स्टाइल में तो कभी घोड़ी बनकर सेक्स किया।

उसके बाद मैने प्रिया से पूछा कि तुमने आज तक कितनी बार चुदाई कराई है तो उसने कहा 4-5 बार कराई थी पर मेरे चाचा जैसा मज़ा किसी ने नहीं दिया जिस पर मैं मुस्कुराए बिना नहीं रह सका।

उस दिन के बाद जब भी हम दोनों के घर पर कोई नहीं होता है हम दोनों एक दूसरे में खो जाते है और एक दूसरे की प्यास बुझाते हैं। Hindi Porn Stories

फर्स्ट ओरल सक का मजा मैंने तब लिया था जब मैं कॉलेज टूर में गयी थी. वहां मैंने लड़के लड़कियों के ग्रुप को सेक्स का मजा लेते देखा. उन्होंने मुझे भी खींच लिया और मैंने पहली बार लंड चूसा.

कहानी के दूसरे भाग
बेटी को यौन शिक्षा की शुरुआत
में आपने पढ़ा कि मेरी बेटी सेक्स के बारे में जानती तो थी पर उतना नहीं जितना उसे उस उम्र में जानना चाहिए तो मैंने उसे बताना शुरू किया, उसे कंडोम, लंड और चूत के बारे में बताया. उसके साथ लेस्बियन सेक्स करके उसे मजा दिया.

अब आगे फर्स्ट ओरल सक का मजा:

चारू झड़ने के बाद मुझ पर गुस्सा करने लगी- मौसी, आपने जो उंगली डाली थी अभी भी बहुत जलन हो रही है मुझे!
मैंने कंडोम चढ़ा खीरा उठाया और चारू को दिया- लो, तुम अब मेरी चूत मार लो।

चारू की आंखों में चमक आ गई।
उसने झट से खीरा मेरी चूत पर लगाया और एक ही झटके में पेल दिया।

मैं तो बस चिल्ला कर रह गई।
खीरा मेरी बच्चेदानी से जा टकराया था और उसमे ऐसा दर्द उठा कि मेरा बदन ऐंठ गया।

6 इंच तक खीरा मेरी चूत में घुसा मेरी चूत को गहरा करने में लगा था।
चारू बेहद शैतानी अंदाज में मेरी चूत को खीरे से चोद रही थी।

डॉट वाला कंडोम होने की वजह से खुरदरापन इतना ज्यादा था कि मेरी चूत का हर कोना रगड़ खाकर झनझना रहा था।

चारू इतने जोर से मेरी चूत मार रही थी कि मुझे झड़ने में 5 मिनट भी न लगे।

मेरी चूत से झरना निकला तो चारू ने खीरा निकाल लिया.
लेकिन धार इतनी तेज थी कि चारू का बदन भीग गया।

मेरी चूत से कामरस के फव्वारे छूट रहे थे और वह झरने जैसे बह रही थी।
तब मैंने अपनी जीभ से उसका जिस्म चाट कर साफ किया।

इसके बाद हम दोनों ही ठण्डी हो गई थी।

चारू अब मुझसे लिपट गई और हमने चारू की बनियान से ही अपना बदन साफ किया।

फिर नंगे बदन ही एक दूसरे से लिपट कर लेट गई।
मां बेटी के बीच आज सारी दीवारें खत्म हो गई थी।

चारू- मौसी, आज के पहले आपने कभी किसी लड़की के साथ सेक्स किया है?
मैं- लड़की नहीं, लड़कियों के साथ किया है, ग्रुप में, मेरी चारों सहेलियों ने मिलकर मेरी ली थी।

चारू- इसीलिए आप सेक्स में इतनी एक्सपर्ट हो. अगर कोई मर्द आपको आज मिले तो क्या आप उसके साथ मजा करोगी?
मैं- ऐसा क्यों पूछ रही है तू?
चारू- मुझे आपको सेक्स करते हुए देखना है।

मैं- कोई तेरे सामने मेरी लेगा तो तुझे बुरा नहीं लगेगा?
चारू- नहीं, मुझे मजा आयेगा क्यूंकि आप उस मर्द को भी मेरी तरह निचोड़ कर रख दोगी।

मैं- अगर तेरे पापा को पता चला तो वे मुझे घर से निकाल देंगे।
चारू- आप परेशान मत हो मौसी, मैं उनसे कुछ नहीं कहूंगी बल्कि मैं तो चाहती हूं कि आपके साथ साथ मैं भी किसी लड़के को निचोड़ कर अपनी प्यास बुझाऊं!

उसकी बात सुनकर मुझे हंसी आ गई।
मैं- चारू अभी तुम छोटी हो, अगर इस उम्र में सेक्स करोगी तो बहुत सी परेशानियां सामने आ जायेंगी, जैसे वजन बढ़ना, इन्फेक्शन, योनि का ढीलापन, मुंहासे वगैरह। तुम थोड़ा और सब्र कर लो फिर जी भर के जिंदगी के मजे लेना।

चारू ने कहा- ठीक है मौसी … लेकिन याद रखियेगा, आपने आज मुझे निचोड़ दिया है, अब मैं आपकी बेटी के साथ साथ लौड़ी भी हूं, इसलिए मैं आपके दूध निचोड़ूंगी भी और चूसूंगी भी!
यह कहकर उसने मेरे निप्पल पर काट लिया।

मैं आह भरी सिसकी लेकर उसका मुलायम बदन सहलाने लगी।
उसके नितम्बों के बीच के छेद पर उंगली फेर कर मैंने उसे आराम दिया.

और फिर चारू मेरे ऊपर चिपक कर लेट गई।

उसका नंगा बदन इतना मुलायम और रसभरा था कि कोई भी उसे छूकर उत्तेजित हो जाता, उसके गोलाकार नितंब मेरी हथेलियों से मालिश का मजा ले रहे थे।

चारू- वासू मौसी, आपने पहली बार सेक्स किसके साथ किया था?
मैं- एक लड़का था मेरे कॉलेज के पास का, उसके साथ प्रेम शुरू किया था, उसने ही मेरी सील तोड़ी थी। लेकिन तुम्हारे पापा से मुझे शादी करनी पड़ी और हम दोनों अलग हो गए।
चारू- सच! लेकिन सब कैसे हुआ, प्लीज बताइए।

मैंने उसे अपनी आप बीती सुनानी शुरू की।

चारू, बात तब की है जब मैं 12वीं में स्कूल में थी।
तब मैं तेरे जैसी थी, इतनी की उम्र की जितनी कि तुम अब हो.

मैं पढ़ाई में ज्यादा अच्छी नहीं थी लेकिन मार्क्स ठीक आ जाते थे।
देखने में तो मैं बला की खूबसूरत हूँ ही।

मेरे हल्के नींबू जैसे स्तन अभी विकसित होना शुरू ही हुए थे, मेरे शरीर पर मांस पर्याप्त मात्रा में था और मेरे नितम्ब गोलाई लिए हुए मेरे रूप को आकर्षक बनाते थे।

बोर्ड एग्जाम हो चुके थे और सभी लोग छुट्टियां काट रहे थे।

एक दिन स्कूल की तरफ से टूर पर जाने की योजना बनाई गई।
टूर में हमें सिर्फ राजनगर के किले और जंगल में जाना था और टूर एक ही दिन का था।
मुझे भी जाने का अवसर मिला।

अगले दिन मैं अपने कपड़े और बाकी समान लेकर स्कूल के लिए निकल गई।

धीरज सर और मोनिका मैम को छात्रों को संभालने की जिम्मेदारी दी गई।
हमारे साथ हमारे सीनियर क्लास के लड़के लड़की भी आए थे।
कुल 30 बच्चों का ग्रुप था।

धीरज सर और मोनिका मैम का चक्कर पूरे कॉलेज को पता था।

हमारे ग्रुप में कुछ तेज तर्रार लड़कियां थीं।
उनमें से एक लड़की थी रचना जो सबसे हॉट और सेक्सी थी।

उसकी दो सहेलियां थी रुचि और नेहा।
वे भी उसी के जैसी थी और उन तीनों के पीछे लड़कों की लाइन लगी रहती थी।

हम सभी बस में सवार हो गए।
फिर बस राजनगर के किले की तरफ़ चल दी।

बस में मेरी ही क्लास का एक लड़का भी था, रोहित जो चोरी छुपे मुझे देखता था लेकिन कुछ कहता नहीं था।

टूर एक दिन और एक रात का था।

बस राजनगर के किले के पास पहुंच गई तो हम सब लोग अपनी अपनी टीम में बंट गए।

लड़के धीरज सर के साथ थे और मेरी टीम मोनिका मैडम के साथ थी।
हम सखियां रचना को ही देख रहे थे।

उसका लम्बा गोरा मांसल जिस्म बहुत आकर्षक लग रहा था।
इंटर के लड़के उसी को ताड़ रहे थे, रचना भी उनको खूब लाइन दे रही थी।

घूमते घूमते शाम हो गई और हम लोग राजनगर के जंगल में आ गए।

धीरज सर और मोनिका मैम के बीच कुछ इशारा हुआ तो धीरज सर बोले- बच्चो, मोनिका मैम की तबीयत ठीक नहीं है, मैं इनको दवा दिलाकर लाता हूं, तब तक आप लोग यहीं रहिएगा और मेरे आने तक इधर उधर मत जाइएगा।

यह कहकर वह मोनिका मैम के साथ चले गए।

अब टीचर थे नहीं इसलिए सबको खुलकर नैन मटक्का करने का मौका मिल गया।
रचना ने कुछ लड़कों को इशारा किया और फिर पहले 5 लड़के और फिर कुछ देर बाद रचना और उसकी सहेलियां नेहा और रुचि भी जंगल में अंदर की तरफ चली गई।

मैंने अपनी सखियों से कहा- चलो हम लोग भी चलते हैं जंगल में, देखो रचना गई है। बहुत मजा आयेगा।
लेकिन मेरी सहेलियों ने मना कर दिया।

लेकिन मैं नहीं मानी और 10 मिनट बाद मैं भी जंगल में चली गई।

जंगल में बड़ी चट्टाने थी और मुझे कुछ आहट मिली तो मैं उन्ही की ओट में छिपकर सब देखने लगी।

देखा तो आंखें फटी रह गई।
रचना 3 लड़कों के साथ चुम्मा चाटी कर रही थी और उसकी सहेलियां नेहा और रुचि भी यही कर रही थी।

नेहा अपनी टांगें खोल कर चट्टान पर बैठी हुई थी और एक लड़का उसकी योनि को चाट रहा था।
रुचि भी एक लड़के को किस कर रही थी और वह लड़का रुचि के नितम्ब सहला रहा था।

सबसे ज्यादा तो रचना लगी थी इन सब कामों में!
उसने अपनी शर्ट के बटन खोल रखे थे और उसकी ब्रा नीचे सरकी हुई थी।
एक लड़का पीछे से उसके दोनों संतरे जैसे स्तनों को मसल रहा था और दो लड़के अगल बगल खड़े हो कर उसे किस कर रहे थे।

रचना के दोनों हाथों में दोनों लड़कों के लंड थे और वह उन्हें सहला रही थी।

वहां बिलकुल कामसूत्र का लाइव टेलीकास्ट चल रहा था।
तभी एक लड़के ने रचना और रुचि की पैंटी निकाल दी।
स्कर्ट पहने हुए वह लड़कियां अपनी ब्रा नीचे किए लड़कों से मजे ले रही थी।

तभी एक लड़के ने रचना को छोड़ा और जाकर नेहा के पास खड़ा हो गया।
नेहा इशारा समझ गई।
उसने लपक कर उस लड़के का लिंग अपने मुंह में भर लिया।
चारू, ये सीन देखकर तो मेरे तन बदन में आग लग गई।
मेरी सांसें तेज हो गई और मैं अब गीली होने लगी।

तभी एक और करतब हुआ।
एक लड़के ने रचना को उठा लिया और सर के बल कर दिया।
रचना का सर उस लड़के के लिंग के सामने आ गया।

तभी एक और लड़के ने रचना को सहारा दिया और फिर दोनों ने रचना के गुप्तांगों पर अपनी जीभ चलानी शुरू कर दी।

रचना भी एक एक कर के उस दोनो का लिंग चूस रही थी।

उधर एक लड़का रुचि के स्तन पी रहा था और उसकी योनि सहला रहा था.
वहीं दूसरी तरफ दो लड़के नेहा पर लगे थे।

उनमें से एक नेहा का मुंह चोदन कर रहा था और एक लड़का नेहा की योनि को चूस रहा था।

इन गर्मागर्म नजारों को देखकर मुझे भी गर्मी लगने लगी।
हाथ पांव कांपने लगे और दिल की धड़कन आसमान छूने लगी।

तभी मुझे छींक आ गई और लोगों की नजर मुझपे गई।

मैं वहां जड़ खड़ी थी, कुछ समझ नहीं आ रहा था कि क्या करूं।

सबने मुझे देखा तो मुस्कुरा कर एक दूसरे से धीरे धीरे कुछ कहने लगे।

फिर रचना, नेहा और रुचि मेरे पास आई।
उनके स्तन अभी भी खुले हुए थे।

जब रचना मेरे पास आई तो अहसास हुआ कि उसके स्तन कितने रस भरे हैं।

रचना- यहां क्या कर रही है वासु?
मैं हकलाती हुई बोली- मुझे माफ कर दो दीदी, मैं बस यहां से गुजर रही थी।
रचना- अच्छा, आ फिर तुझे सैर कराती हूं।

ये कहकर उसने मेरा हाथ पकड़ लिया और मुझे अपने साथ उस चट्टान के पास ले आई।

सारे लड़के मुझे देखकर आनन्दित थे।

अभी कच्ची कली थी मैं इसलिए शरीर ज्यादा विकसित नहीं हुआ था।

रचना ने मेरी शर्ट खोली तो बनियान में मेरे स्तन आधे नींबू की तरह उभार लिए सामने आ गए।

एक लड़का बोला- इसकी तो चूचियां भी नहीं निकली अभी, इसमें मजा नहीं आयेगा।
तो रचना बोली- रुक जाओ जानेमन, चूत तो है ही, चलो देखते हैं।

यह कहकर उसने मेरी पैंटी सहलाई तो मुझे करंट सा लगा।

नेहा उन लड़कियों ने मेरी पैंटी निकाल दी और मैं कुछ न कह सकी।

मेरी योनि पर हल्के हल्के बाल आ गए थे।

रचना ने मेरी चूत का मुआयना किया और कहा- अभी सील पैक माल है ये!
यह बोलकर उसने जीभ निकाली और मेरी चूत को चाटने लगी।

उफ्फ पहली बार किसी की जुबान मेरी चूत से टकराई थी।
मैं आँखें बंद कर के इस लम्हे का मजा लेने लगी।

अब नेहा ने मेरी बनियान भी उठा दी और मेरे स्तन को बाहर कर दिया।

लड़कों ने मेरे नींबू दबा दिए तो मुझे दर्द हुआ।
मैं चिल्लाई- आह दीदी, दर्द हो रहा है।

रचना ने मेरी चूत छोड़ी और अपने होंठ मेरे होंठों से टिका दिए।
पहली बार किसी ने मुझे किस किया था वह भी एक लड़की ने!
मैं भी मजे लेकर उसे चूसने लगी।

सच कहूं तो वह चुम्बन मुझे आज भी याद है चारू!

इसके बाद नेहा और रुचि नीचे बैठ गई।

एक एक लड़का उन दोनों के पास गया और दोनों ने उनके लंड अपने मुंह में भर लिए।

उधर रचना दो लड़कों का लंड चूस रही थी।
यह नजारा ही ऐसा था कि कोई भी गीला हो जाए।

इसके बाद एक लड़का मेरे पास आया और बोला- तू भी चूस मेरा!
मैं डर के बोली- नहीं, मैं नहीं कर पाऊंगी।

तो उस लड़के ने मेरा हाथ पकड़ कर अपने लिंग पर रख दिया।
उसका गर्म लिंग पकड़ कर मुझे बेहद झटका सा लगा।

मैंने धीरे धीरे उसे सहलाना शुरु किया और फिर उसने मुझे भी घुटनों के बल बिठा दिया।

मेरे बाल पकड़ कर उसने अपना लिंग मेरे मुंह में डाल दिया।
उसका नमकीन स्वाद मेरे मुंह में घुल गया।

वह अब धीरे धीरे मेरे मुंह का चोदन करने लगा।
मेरे मुंह पर धक्के लगाते हुए उसने गले तक अपना लिंग मेरे मुंह में घुसेड़ना शुरू कर दिया।

उसका 5 इंच का काला लिंग मेरे मुंह में घुसता और निकालकर दोबारा अंदर घुस जाता।
उसका लिंग मेरी लार से अच्छी तरह भीग गया।

फर्स्ट ओरल सक का ये क्रम 5 मिनट तक चला फिर उसका बदन अकड़ने लगा।
उसने मेरे सर पर अपनी पकड़ मजबूत कर ली और फिर मेरे मुंह में झड़ गया।

एक गर्म तेल सा मेरे मुंह में गिरा और मुझे उसका नमकीन स्वाद मिल गया।

उस लड़के ने मेरा सर ऊपर उठा दिया और मेरे मुंह का वीर्य मेरे गले से अंदर उतर गया।

झड़ने के बाद वह लड़का ढीला हो कर मुझसे अलग हो गया।

मैंने देखा तो दोनों लड़के रचना के मुंह पर लंड रगड़ रहे थे और कुछ ही देर बाद झटकों के साथ उनका वीर्य रचना के चेहरे पर जा गिरा।

उधर नेहा और रुचि भी लंड को चूस चूस कर खाली कर चुकी थी।

रचना मेरे पास आई और अपने चेहरे पर लगा वीर्य मेरे स्तनों पर मल दिया और कहा- इसे लगा रहने देना बेबी, तुझे बहुत मजा आयेगा।

लड़के झड़ कर ठंडे हो गए थे इसलिए अब हमने चलने का फैसला किया।
अपने कपड़े पहनकर हम सब वापस बस में आ गए।

Antarvasna

मेरे पति को अब तीस Antarvasna पैंतीस दिन तक किसी टूर पर नहीं जाना था, उन्होंने शिल्पा वाली कहानी कई दिनों तक मुझसे बड़ी बारीकी से सुनी थी ऑर फिर हसरत जाहिर की थी कि काश इस बार शिल्पा जब घर आये तो वो भी मौजूद हों, इस बात पर अफ़सोस भी जताया था कि जब शिल्पा वाली घटना घटी तब वह वहाँ क्यों नहीं थे.

वे इस बार टूर से सिर्फ सौन्दर्य प्रसाधन नहीं लाये थे बल्कि कई इंग्लिश मैगजीन भी लाये थे, जिनका विषय एक ही था सेक्स. उन मैगजीनों में अनेक भरी सेक्स अपील वाली मोडल्स के उत्तेजक नग्न व अर्धनग्न चित्र थे, कुछ कामोत्तेजक कहानियाँ व उदाहरण आदि थे तथा दुनिया के सेक्स से संबंधित कुछ मुख्य समाचार थे.
मैं कई दिनों तक खाली समय में उन मैगजींस को देखती व पढ़ती रही थी.

दरअसल मेरी ससुराल इस शहर से चालीस किलोमीटर दूर एक कस्बे में है, जहाँ से कभी किसी काम से मेरी ससुराल के अन्य लोग आते रहते हैं, कभी मेरे वृद्ध ससुर तो कभी ननद शिल्पा, कभी मेरा एक मात्र देवर जो शिल्पा से चार वर्ष बड़ा है, अगर शहर में उनमें से किसी को शाम हो जाती है तो वे हमारे घर में ही ठहरते हैं.

एक दिन फिर मेरी ससुराल से एक शख्स आया, वह मेरा देवर था. शाम के पांच बजे वह हमारे घर आया था, मेरे पति घर पर नहीं थे, ऑफिस से साढ़े पांच या छः बजे तक ही आते थे.

मैं सोफे पर बैठी इंग्लिश मैगजीन पढ़ रही थी, तभी कॉल-बेल बजी, मैंने मैगजीन को सेंटर टेबल पर डाला ऑर यह सोचते हुए दरवाजा खोला कि शायद मेरे पति आज ऑफिस से जल्दी आ गए हैं, लेकिन दरवाजा खोला तो पाया कि मेरा देवर जतिन सामने खड़ा है, उसने कुर्ता पायजामा पहन रखा था, वह कुर्ता पायजामा में काफी जाँच रहा था.

“भाभी जी नमस्ते!” उसने कहा और अन्दर आ गया.
“कहो जतिन! आज कैसे रास्ता भूल गये? तुम तो अपनी भाभी को पसंद ही नहीं करते शायद!” मैंने दरवाजे को लॉक करके उसकी ओर मुड़ कर कहा.
“ऐसा किसने कहा आपसे?” वह सोफे पर बैठ कर बोला. वह मेज़ से उस मैगजीन को उठा चुका था जिसे मैं देख रही थी.

मेरे दिल में धड़का हुआ, मैगजीन तो कामोत्तेजक सामग्री से भरी पड़ी थी, कहीं जतिन उसे पढ़ न ले, मैंने सोचा लेकिन फिर इस विचार ने मेरे मन को ठंडक पहुंचा दी कि अगर यह मैगजीन पढ़ ले तब हो सकता है उसकी मर्दानगी का स्वाद आज मिल जाए, इसमें भी तो जोश एकदम फ्रेश होगा! मैं निश्चिंत हो गई.

“कौन कहेगा… मैं जानती हूँ! अगर मैं तुम्हें पसंद होती तो क्या तुम यहाँ छः छः महीने में आते? आज कितने दिनों बाद शक्ल दिखा रहे हो… पूरे साढ़े पांच महीने बाद आये हो, तब भी सिर्फ एक घंटे के लिए आये थे!” मैं उसके सामने सोफे पर बैठ कर बोली.

मैंने ब्रेजियर और पेंटी पहन कर सिर्फ एक सूती मैक्सी पहन रखी थी, जिसके गहरे गले के दो बटन खुले हुए भी थे, वहाँ से मेरे गोरे गोरे सीने का रंग प्रकट हो रहा था.

मैंने देखा कि जतिन ने चोर नजरों से उस स्थान को देखा था फिर नजर झुका कर कहा- यह तो बेकार की बात है… आप जानती ही हैं कि मैं कितना व्यस्त रहता हूँ. कंप्यूटर कोर्स, पढ़ाई और फिर घर का काम… चक्की सी बनी रहती है, आज थोड़ा टाइम मिला तो इधर चला आया, वो भी शिल्पा ने भेज दिया क्योंकि भाई साहब ने फोन किया था, उन्होंने शिल्पा को बुलाया था कहा था कि उसे कुछ कपड़े दिलवाने हैं, शिल्पा को तो आज अपनी एक सहेली की शादी में जाना था सो उसने मुझे भेज दिया… जतिन बोला.

मैं समझ गई कि मेरे पति ने शिल्पा को किसलिए फोन किया होगा, कपड़े दिलवाने का तो एक बहाना है, असल बात तो वही है जिसकी उन्होंने तमन्ना जाहिर की थी.
“आज ही बुलाया था तुम्हारे भैया ने शिल्पा को?” मैंने जतिन से पूछा.
“हाँ… कहा था कि आज या कल सुबह आ जाना!” जतिन बोला.

“अच्छा तुम बैठो मैं पानी-वानी लाती हूँ!” मैंने यह कहा और सोफे से उठ कर रसोई की ओर चली गई, फ्रिज में से पानी की बोतल निकाल कर एक ग्लास में पानी डाला और ग्लास अपने देवर जतिन के सम्मुख जरा झुक कर ग्लास उसकी ओर बढ़ा कर बोली- लो पानी पीयो! मैं चाय बनाती हूँ!

जतिन ने सकपका कर मैगजीन से नजर हटाई, मैंने देख लिया था- वह एक मोडल का उत्तेजक फोटो बड़ी तल्लीनता से देख रहा था, उसके चेहरे पर ऐसे भाव आ गए जैसे चोरी पकड़ी गई हो!

उसने कांपते हाथ से ग्लास ले लिया, मेरी ओर देखने पर उसकी पैनी नजर मेरे खुले सीने पर अन्दर ब्रेजरी तक होकर वापस लौट आई, वह नजर झुका कर पानी पीने लगा तो मैं मन ही मन मुस्कुराती हुई रसोई में चली गई.

मैंने चाय पांच मिनट में ही बना ली, चाय लेकर मैं वापस ड्राइंग रूम पहुंची तो देखा कि जतिन तपते चेहरे से मैगजीन को पढ़ रहा है, मेरी आहट पाते ही उसने मैगजीन मेज़ पर उलट कर रख दी,

“लो चाय… चाय का एक कप ट्रे में से उठा कर मैंने उसकी ओर बढ़ाया, उसने कंपकंपाते हाथ से कप पकड़ लिया और नजर चुरा कर कप में फूंक मारने लगा, मैंने भी एक कप उठा लिया, मैंने महसूस कर लिया कि जतिन सेक्स के प्रति अभी संकोची भी है और अज्ञानी भी, ऐसे युवक से संबंध स्थापित करने का एक अलग ही मजा होता है, मैं सोचने लगी कि जतिन से कैसे सेक्स संबंध विकसित किया जाये ताकि मेरी यौन पिपासा में शांति पड़े.

उसके गोल चेहरे और अकसर शांत रहने वाली आँखों में मैं यह देख चकी थी कि कामोत्तेजक मैगजीन ने शांत झील में पत्थर मार दिया है और अब उसके मन में काम-भावना से संबंधित भंवर बनने लगे हैं, वह खामोशी से चाय पी रहा था, मेरी ओर यदा कदा देख लेता था.

तभी फोन की घंटी बज उठी, मैंने सोफे से उठ कर फोन का रिसीवर उठाया ओर उसे कान में लगा कर बोली- हेलो! आप कौन बोल रहे हैं?
“जानेमन हम तुम्हारे पति बोल रहे हैं.” उधर से मेरे पति का स्वर आया- हम थोड़ी देर में आयेंगे… तुम परेशान मत होना… ओ.के…
इतना कह कर उन्होंने संबंध विच्छेद भी कर दिया.

“किसका फोन था?” जतिन ने प्रश्न किया.
“तुम्हारे भाई साहब का…! मेरी कुछ सुनी भी नहीं और थोड़ी देर से आयेंगे ये कह कर रिसीवर भी रख दिया.” मैंने दोबारा उसके सामने बैठते हुए कहा.
“अब तक उनकी आदत ऐसी ही है… कमाल है!” जतिन बोला.

वह चाय ख़त्म कर चुका था, खाली कप उसने मेज़ पर रख दिया, मैं भी चाय पी चुकी थी.

“चलो टी. वी देखते हैं…” मैं सोफे से उठती हुई बोली, मैंने एक शरीर-तोड़ अंगड़ाई ली, मेरी मेक्सी में से मेरा शरीर बाहर निकलने को हुआ, जतिन के होंठों पर उसकी जीभ ने गीलापन बिखेरा और आँखें अपनी कटोरियों से बाहर आने को हुई.

मैंने टेबल से मैगजीन उठा ली और बेडरूम की ओर चल दी, जतिन मेरे पीछे पीछे था.

मैंने बेडरूम में पहुँच कर टी.वी. ऑन करके केबल पर सेट किया एक अंग्रेजी चैनल लगाया ओर बेड पर अधलेटी मुद्रा में बेड की पुश्त से पीठ लगा कर बैठ गई और मैगजीन खोल कर देखने लगी, जतिन भी बेड पर बैठ गया लेकिन मुझसे फासला बना कर.
“मुझमें कांटे लगे हैं क्या?” मैंने उससे कहा.
“जी… जी… क्या मतलब?” जतिन हड़बड़ा कर बोला.
“तुम मुझसे इतनी दूर जो बैठे हो…!” मैंने मैगजीन को बंद करके पुश्त पर रख कर कहा.
“ओह्ह… लो नजदीक बैठ जाता हूँ!” कह कर वह मेरे निकट आ गया.

उसके और मेरे शरीर में मुश्किल से चार छः अंगुल का फासला रह गया.

“तबियत ठीक नहीं है तुम्हारी…? कान कैसे लाल हो रहे हैं…! मैंने उसके चेहरे को देख कर कहा ओर उसके माथे पर हाथ लगा कर बोली- ओहो… माथा तो तप रहा है… ऐसा लगता है कि तुम्हें बुखार है… दर्द-वर्द तो नहीं हो रहा सिर में…! हो रहा हो तो सिर दबा दूँ!” मैंने कहा.
“हो तो रहा है भाभी जी… दोपहर से ही सर दर्द है…! अगर दबा दोगी तो बढ़िया ही है!” जतिन बोला.

“लाओ… गोद में रख लो सिर…” मैंने उसके सिर को अपनी ओर झुकाते हुए कहा.
उसने ऐतराज नहीं किया और मेरी जाँघों के जोड़ पर सिर रख कर लेट गया, मैं उसके माथे को हल्के हल्के दबाने लगी और मेरे मस्तिस्क में काम-विषयक अनार से छूटने शुरू हो गये थे.

“भाभी… आप बुरा न मानो तो एक बात पूछूं?” जतिन बोला.
“पूछो… एक क्यों दस पूछो…” मैं टीवी से नजर हटा कर उसकी बड़ी बड़ी आँखों में झांक कर बोली.
“यह जो मैगजीन है, इसे आप पढ़ती हैं या भाई साहब?” जतिन ने प्रश्न किया.
हम दोनों ही पढ़ते हैं क्यों…? मैंने कहा.
“दोनों ही…आपको क्या जरूरत है ऐसी मैगजीन पढ़ने की?” वह बोला.
“क्यों? हम दोनों क्यों नहीं पढ़ सकते… हमें जरूरत नहीं पड़नी चाहिए?” मैं बोली.
“और क्या… आप तो शादी शुदा हो… इसकी या ऐसी मैगजीन मेरे जैसे कुंवारों के लिए ठीक रहती है!” जतिन बोला.
“क्यों… जो आनन्द इस मैगजीन से कुंवारे ले सकते हैं… उस पर हमारा अधिकार नहीं है क्या? कैसी बातें करते हो तुम…” मैं उसकी कनपटियाँ सहला कर बोली.

“अरे वाह… आपको आनन्द के लिये मैगजीन की क्या जरूरत? आपके पास तो जीवित आनन्द देने वाली मशीन है… मेरे कहने का मतलब है कि आप भैया से आनन्द ले सकती हो और वे आपसे… परेशानी तो हम जैसों की है… जो अपनी आँखों की प्यास बुझाने के लिये ऐसी मैगजीनों पर आश्रित हैं.” जतिन ने बात को गंभीर मोड़ दिया.

“ओहो… तो मेरे देवर की आँखें प्यासी रहती हैं तभी ऐसी बातें कर रहे हो…” मैंने मुस्कुराते हुए कहा, फ़िर बोली- तो क्या तुमने अभी तक अपनी आँखों की प्यास नहीं बुझाई… मेरे कहने का मतलब ये है कि… क्या इन बड़ी बड़ी आँखों को देवी दर्शन नहीं हुए?
“देवी दर्शन?” वह इस शब्द पर उलझ गया.
“यानि कि किसी युवती को बिना कपड़ों के नहीं देखा?” मैंने देवी दर्शन का मतलब समझाया.
“इसे कहते हो आप देवी दर्शन… वाकई आप तो जीनियस हो भाभी जी… वैसे कह ठीक रही हो आप! अपनी किस्मत में ऐसा कोई मौका अभी तक नहीं आया है, आगे भी शायद ही आये…” वह सोचता हुआ सा बोला, फ़िर टी.वी पर आते एक दृश्य में दो मिनी स्कर्ट वाली लड़कियों को देख कर बोला- टी.वी. या किताबों में ही देख कर संतोष करना पड़ता है!

“तुम सचमुच ही बद-किस्मत हो, लेकिन एक बात बताओ! जब तुम ऐसी मैगजीन देख लेते होगे तब तो और प्यास भड़क उठती होगी और शरीर में उत्तेजना भी फ़ैल जाती होगी… उस उत्तेजना को तुम कैसे शांत करते हो फ़िर?” मैं बोली.
“क्या भाभी जी आप भी कैसी बातें करती हो? क्यों मेरे जख्म पर नमक छिड़क रही हो… कैसे शांत करता हूँ… अपना हाथ जगन्नाथ…!” वह बोला.
“यानि अपने हाथ से ही अपने को संतुष्ट कर लेते हो और अगर मैं तुम्हारी ये मुश्किल दूर कर दूँ तो?” मैंने उसके गालों को सहला कर भेद भरे स्वर में कहा, मेरी आँखें रंगीन हो चुकी थी.
“क्या? आप कैसे मेरी मुश्किल दूर कर सकती हैं?” वह जिज्ञासु होकर बोला.

“इस बात को छोड़ो… यह बताओ कि अगर मैं तुम्हें यह छूट दे दूँ कि तुम मेरे कठोर और सुन्दर स्तनों को कपड़े हटा कर देख सकते हो तो बताओ तुम क्या करोगे?” मैंने अब उससे एकदम साफ़ कहा.
“जी… जी…” वह सकपका गया, उसे मेरी बात पर यकीन नहीं हुआ और बोला- आप तो मजाक कर रही हो भाभी!
“चलो मजाक में ही सही अगर कह दूँ तो क्या… कह ही रही हूँ… जतिन देवर जी… अगर तुम चाहो तो मेरे गाउन के चारों बटन खोल कर मेरी ब्रा में कैद मेरे स्तनों को ब्रा को हटा कर देख सकते हो…” मैंने उसके कुरते के गले में हाथ डाल कर उसके मजबूत सीने को सहला कर कहा.
“लगता है आप मुझ पर मेहरबान हैं या फ़िर मजाक कर रहीं हैं…!” उसे अभी भी यकीन नहीं आया.

“ओहो… बड़े शक्की आदमी हो… चलो मैं ही तुम्हारे स्तनों को देख भी लेती हूँ और मसल भी देती हूँ…” मैंने झल्ला कर उसके सीने पर मौजूद उसके दोनों छोटे छोटे निप्पलों को मसलना शुरू कर दिया.
“उफ… यह क्या कर रही हो भाभी…मुझे परेशानी होगी…!” वह मचल कर बोला.
“अब तुम तो कुछ करने को तैयार नहीं हो… तो मुझे ही कुछ करना पड़ेगा ना…!” मैंने कहा.

अब जतिन से पीछे नहीं रहा गया, उसने अपने ऊपर मुझे लेते हुए मेरे स्तनों को मेक्सी के ऊपर से ही सहलाना शुरु कर दिया और बोला- आज तो आप मुझे कत्ल कर के ही छोड़ेंगी… ये दोनों पर्वत कब से मुझे परेशान कर रहे हैं… अब मुझे मौका मिला है इन्हें परेशान करने का…” वह मेक्सी के बटन खोलने लगा था, उसकी क्रिया में बेताबी थी, मैं उसके कुर्ते के बटन खोल कर उसके सीने को सहला रही थी.

उसने कांपते हाँथों से मेक्सी के दोनों पल्लों को स्तनों से हटा कर ब्रेजरी के कप को नीचे कर दिया और स्तब्ध निगाहों से पहले मेरे गुलाबी रंग के कठोर स्तनों को देखता रहा फ़िर मैंने ही स्तन के निप्पल को उसके होठों में देकर कहा- लो… बुझाओ प्यास… मैं जानती हूँ… जबसे तुमने मैगजीन देखी है… तब से ही तुम्हारी प्यास भड़क उठी है!

उसने निप्पल मुंह में ले लिया और उसे चूसते हुए दूसरे स्तन को भी ब्रेजरी के कप में से निकालने की कोशिश करने लगा, उसकी कोशिश देख कर मैंने हाथों को पीछे ले जा कर ब्रेजरी के हुक को खोल दिया तो उसने दूसरे स्तन को भी उसके कप से निकाल कर हाथ में ले लिया और उसके निप्पल को जोर जोर से मसलने लगा.

मैं तरंगित होती जा रही थी, मैगजीन के पन्नों ने मेरी नसों का लहू गर्म कर दिया था, जिसको शीतल करने के लिये मुझे भी एक पुरुषीय-वर्षा की जरूरत थी, मैं उसके बालों को सहला रही थी.
“चूसो जतिन! जितना चाहो चूसो… तुम्हारे भईया को भी यही पसंद है…” मैंने उत्तेजित होते हुए कहा.

“लेकिन मेरी दिलचस्पी तो दूसरी चीज में भी है, उसे भी चूसने की इजाजत मिल जाये तो मजा दोगुना हो जाये…!” जतिन ने निप्पल को मुंह से निकाल कर कहा.
“उफ… पहले इस पहली चीज से तो जी भर लो! वह दूसरी चीज भी दूर नहीं है…” मैंने उसकी क्रिया से आनन्दित होते हुए कहा.

मेरे हाथ उसके पाजामे पर पहुँच चुके थे, मैं उसके नाड़े को खोलने ही जा रही थी कि उसने जरा नीचे को सरक कर मेरे सपाट चिकने पेट और नाभि को चूमना शुरू कर दिया, वह मेरी मेक्सी से परेशान होने लगा था, मैंने मेक्सी को शरीर से अलग कर दिया और पूरी तरह चित लेट गई, मेरी यौवन संपदा को साक्षात देख कर वह पागल सा होने लगा, मेरी जाँघों को और मेरे गोरे पांव के तलवों को पागलों की तरह जोर जोर से चूमने चाटने लगा.

मैं भी पागलों सी हो गई, मेरे कंठ से कामुक सिसकारियाँ छूटने लगी, उसके होंठ और उसकी जीभ मेरे शरीर में नया सा नशा घोलने लगी, वह मेरी टांगों के जरा जरा से हिस्से को चूम रहा था और सहला रहा था, उसने मेरी कमर में हाथ डाल कर मुझे पेट के बल लिटा दिया, अब मेरी पीठ और नितंबों के चूमे जाने का नंम्बर था, वह बड़ी ही कुशलता से मेरे संवेदनशील शरीर को सहला रहा था और चूम रहा था.
“तुम तो पूरे गुरु आदमी हो उफ… कैसे मेरे… उफ… .उफ… कैसे मेरे सारे शरीर में हर अंगुल पर एक ज्वालामुखी सा रखते हो… उफ…” मैं तरंगित स्वर में बोल रही थी- उफ… कहीं से ट्रेनिंग ली है क्या?
“ऐसा ही समझो भाभी… मैं एक कम्प्यूटर आर्टिस्ट हूँ… कम्प्यूटर की कई सी.डी. ऐसी आती हैं जिनमें संभोग के गजब गजब के आसन और मुद्रायें होती हैं…” उसने मेरे नितंबों से पेंटी सरकाते हुए कहा.

वह अब मेरे नितंबों पर चुंबन धर रहा था, मैं शोला बन गई थी, मेरी उत्तेजना शिखर पर पहुँच गई थी.
अब मुझसे रुका नहीं जा रहा था लेकिन फ़िर भी जतिन द्वारा मिलते चुंबनों के आनन्द ने मुझे और प्यासा बना डाला था, मैं चाहती थी कि मेरे शरीर के पोर पोर से वह काम रस चूस ले और मुझे पागल करके छोड़ दे.

वह अपनी क्रिया में व्यस्त था, मैं पुनः पीठ के बल हो गई थी और वह मेरी जाँघों को खोल कर मेरी केश विहीन योनि को चूस रहा था, मैं उत्तेजना में अपने स्तनों को स्वयं ही मथ रही थी.
“अपनी टांगें मेरी तरफ कर लो…” मैंने उससे कहा, तो उसने मेरा कहा मान लिया, उसके पाँव मेरे सिर के भी पीछे तक चले गए, मैंने फुर्ती से उसका पाजामा व अंडरवीयर उसके उत्तेजित लिंग से हटाया और आठ नौ इंच के लिंग को मुंह में ले लिया, उसका लिंग मेरे पति से मोटा था इस कारण मुझे होंठ पूरे खोलने पड़ गये, मैं उसे चूसने लगी.

अब तड़पने और उछलने की बारी उसकी थी.
“उफ… उफ… भा… भाभी… .आप तो लगता है मुंह में निचोड़ लेंगी मुझे… उफ…!”

“यह पहला टेस्ट तो मैं मुंह से ही लूंगी… फ़िर योनि में डलवाऊँगी, तुम लगे रहो उस काम में, जिसमें लगे हो…” इतना कह कर मैं फ़िर लिंग चूसने लगी, जतिन लिंग पर मेरे होठों का घर्षण अधिक देर तक नहीं झेल पाया और वह मेरी योनि को भूल कर मेरे कंठ में ही तेजी से धक्के मार कर स्खलित हो गया, उसका सुगन्धित व खौलता वीर्य मैं पी गई, फ़िर भी मैंने लिंग को नहीं छोड़ा और उसे चूस चूस कर पुनः उत्तेजित करने लगी.
थोड़ी देर मैं वह फ़िर कठोर हो गया तो मैंने योनि में उसे डलवाया.

जतिन ने ऐसे ऐसे ढंग से योनि को लिंग से रगड़ा कि मैं चीख पड़ी, उसने अन्ततः बेड से नीचे उतर कर खड़े होकर मेरी जाँघों को खोलकर ऐसे धक्के मारे कि मैं तृप्त हो गई और चरमोत्कर्ष तक पहुंची, वह पुनः स्खलित हो कर मुझसे लिपट गया.

अब मैं और मेरे पति इतने उन्मुक्त हो गये हैं कि मेरे घर मेरा देवर आ जाये, मेरा भाई आ जाये, शिल्पा आ जाये या मेरी कोई सहेली आ जाये या मेरे पति का कोई दोस्त आ जाये हम लोग हर किसी को अपनी काम क्रीड़ा में शामिल कर लेते हैं.

मेरी कामुकता ने सारी हदें पार कर दी हैं, मुझे तो कपड़े अच्छे लगते ही नहीं है, अब उस दिन मेरे ससुर आये थे तब भी मैंने ब्रा-पेंटी पर पारदर्शी गाउन पहन रखा था और मेरे पति ने उनकी उपस्थिति में भी शर्म ना की और मेरे उभारों को चूमते रहे!
मेरे ससुर को ही ड्राइंगरूम से उठ कर अपने कमरे में जाना पड़ा था! Antarvasna

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