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पता नहीं लोगों को चार पांच बार Oral Sex नई नवेली चुदाई करने को मिल जाती है, पर मैंने तो एक बार में भी शायद देर कर दी।
मेरी कहानी ऐसी है कि मैं शायद कभी लोगों को समझ नहीं पाया खासकर लेडीज को, पता ही नहीं लगता कि उन्हें कब चुदना है कब नहीं? मेरी कहानी कुछ ऐसी है।
मैं बहुत ही सेक्सी किस्म का इन्सान हूँ, अक्सर सेक्स के बारे में सोचता रहता हूँ।
एक दिन मेरे भाई (सगा नहीं) की बीवी से मुलाकात हुई तो उन्होंने कहा कि आप बड़े मज़ाकिये हो। फिर उसने मेरा नम्बर ले लिया। उसके एक सप्ताह बाद उसने हमारे फर्म से काम करना शुरू कर दिया। मेरा फर्म कंप्यूटर डील करता है इसलिए जब भाई घर पर नहीं होते थे वो मुझे घर पे फ़ोन करके बुलाती और कहती कि उनके कंप्यूटर में कुछ प्रॉब्लम है इसलिए सर्विस के लिए मुझे जाना ही पड़ता था।
वो मेरे करीब बैठ जाती थी लेकिन कभी भी ग़लत हरकत नहीं की।
उसके बाद जब उसे लगा कि मैं कुछ समझ नहीं पा रहा हूँ, तो उसने खुलकर आई लव यू ! भी बोल दिया लेकिन मैं समझ नहीं पाया फिर उसने मुझे कई बार बाहर घूमने के लिए बुलाया और मैं भी चला गया। फिर वो मेरे बगल में सटकर बैठ जाती और बातें करती। कहती कि उसका मन मेरे बिना नहीं लगता। मैंने भी कह दिया कि वो मुझे अच्छी लगती है।
फिर एक दिन जब हम अकेले बैठे थे तो मैंने उसकी ब्रेस्ट को छू लिया क्योंकि हम पार्क में थे इसलिए मैं उसके कपड़े नहीं उतार सका, फिर 2 मिनट बाद वो चलने को कहने लगी और हम चल दिए।
अगले दिन उसने फिर से मिलने के लिए बुलाया और हम पार्क पहुँच गए। थोड़ी देर इधर -उधर की बात के बाद मैंने उसे छूने की इच्छा जाहिर की और वो बोली इधर बहुत भीड़ है। हम एक कोने में चले गए, वहां उसने धीरे से कहा अब छू सकते हो!
मैंने कहा- क्या?
तो बोली- कुछ नहीं !
फिर मैंने उसे पकड़ लिया और उसके होंठ चूमने लगा। वो भी मजे ले रही थी तभी उधर से कोई आदमी के आने की आहट हुई और हम दूर दूर हो गए। वो डर गई और घर चलने को कहा। हम घर आ गए वहां कोई नहीं था पर जब मैंने उसे छूना चाहा तो उसने मुझे मना कर दिया और डांटने लगी, कहने लगी- आप बड़े बदतमीज़ हैं। और मैं घर चला गया।
फिर 8-10 दिन बाद उसने फिर से मिलने के लिए बुलाया। क्योंकि उसके घर में नॉन-वेज़ नही बनता था इसलिए उसने मुझे लंच के लिए मुझे एक होटल में बुलाया और मैं गया। फिर उसने कहा- चलो एक कमरा लेते हैं और कुछ देर बैठते है।
पर मैंने मना कर दिया क्योंकि मेरे पास 1000 रुपये नहीं थे, कमरे का किराया 800 रुपये था। इसलिए मैंने कहा कि मेरे पास समय नहीं है और जल्दी ऑफिस जाना है। फिर वो मुझे एक कपड़े की दुकान में ले गई, मेरे लिए शर्ट खरीदी, मुझे गिफ्ट किया और मुझे ट्राई रूम के अन्दर बुलाने लगी। पर दुकान में भीड़ होने के कारण मैंने मना कर दिया। फिर उसको घर छोड़ आया।
फिर उसके घर पर बहुत बार मिले लेकिन उसने मुझे छूने भी नहीं देती दिया। एक दिन वो कहीं बाहर जा रही थी तो मुझे स्टेशन पर छोड़ने के लिए बुलाया और जब गाड़ी आई तो बिछड़ते हुए उसकी आंखों में आंसू आ गए। मैं सोच में पड़ गया कि वो मुझसे कितना प्यार करती है !
पर उसके बाद वो आई और मुझसे दूर रहने लगी। एक टूर पर पूरे परिवार के साथ गई और मुझे घर पर रहने को कहा। वो चली गई मुझे लगा कि वो मुझे फ़ोन करेगी पर उसने नहीं किया। फिर वो वापिस आ गई और मुझसे दूर रहने लगी। मेरे समझ में नहीं आ रहा था कुछ भी।
फिर एक दिन पता लगा कि वो मेरे ऑफिस के एक स्मार्ट लड़के जो कि मुझसे लंबा और स्वस्थ था उससे बात करने लगी थी। इसी बीच मेरा तबादला 7 किलोमीटर दूर वाली दुकान में हो गया था और वो दोनों खूब मिलने लगे। मुझे बहुत बुरा लगा क्योंकि मैं शायद उससे प्यार करने लगा था और उसके साथ सेक्स भी करना चाहता था, पर शायद देर हो चुकी थी।
उसने मुझसे मिलने से मना कर दिया जिसकी वजह से हम दोनों में खूब झगड़े हुए और वो मुझसे और दूर हो गई। अब न मैं उससे फ़ोन करता न वो मुझे। इसी बीच मेरी जिंदगी में एक लड़की आ गई जिस कारण मैं उससे आसानी से दूर हो सका।
आज फिर से उसने मुझे फ़ोन किया और मैं फिर से उलझन में हूँ। Oral Sex
हाय! रीडर्स मेरा नाम मनीष है। sex stories और मैं मनीषकोट (गुजरात) में रहता हूं, मेरे घर में तीन लोग हैं, मैं,पापा और मां मेरी मां बहुत खूबसूरत हैं और कोई भी मर्द उसे देखे तो उस का दीवाना हो जाये उसके। उसके दोनों दूध इतने बड़े है कि कभी भी उसके ब्लाउज़ में नहीं आते और बाहर से उसकी सत देखती है
हमारा जो भाजी वाला है वो मां से पैसे भी नहीं लेता क्योंकि जेब मां सब्जी खरीद ने जाती है तो वो झुकती है और उसके दोनों चूची बिल्कुल उसके सामने देखते है और उसकी धोती में उसका डंडा खड़ा हो जाता है… ये तो हुई रोज़ की बात लेकिन में अब आप को जो कहानी सुनाने जा रहा हूं वो सब कुछ मेरी आंखों के सामने हुआ है…
मैंने 12वीं पास कर लिया है अब मुझे बोम्बे की युनिवर्सिटी मे पढ़ाना था वहाँ मेरे अंकल रहते हैं, पापा ने उनसे बात की वो घर आये और सब कुछ समझने के बाद पापा ने मुझे वहाँ जाने के लिये हाँ कहा मैं वहाँ चला गया और थोड़े दिनों बाद घर से मां का फोन आया और मुझसे पूछा कि तु खुश है तो मैंने कहा हाँ फ़िर मां ने कहा जरा अंकल को फोन देना तो मैंने दिया और चला गया
तभी मुझे याद आया कि मुझे अपने दोस्त को फोन करना था मैंने दूसरी लाइन से फोन करने वाला था मैंने जैसे ही रिसीवर उठाया अभी मां और अंकल बातें कर रहे थे मैं वो बातें सुनने लगा
अंकल ने मां से पूछा तुम कब आ रही हो तो मां बोली थोड़े दिनो में!
तब अंकल ने कहा- तुम्हारी गांड, पिकी और बोबले केसे हैं?
ये सुनकर मैं सुन्न हो गया.
तब मां ने जवाब दिया वहाँ आ रही हूं तब सब देख लेना तो अंकल ने कहा तुम्हारा पति नहीं आ रहा?
तो मां मुस्कुरा कर बोली- नहीं।
मां ने कहा- मेरे आने के बाद मुझे मौज कराओगे?
अंकल ने कहा हाँ क्यों नहीं तुम देखना तुम्हारी चुदाई में कोई कसर नहीं होगी!
फ़िर दोनों ने फोन रख दिया…
थोड़े दिनो में मां वहाँ आयी और अंकल उनको देख कर खुश हो गये वो तो मैं वहाँ खड़ा था इसलिये अंकल में कुछ रिएक्शन नहीं देखा था थोड़ी देर के बाद अंकल ने मां के सामने देख कर अपने लौड़े पर हाथ फ़िराया मां ने हाँ में सिर हिलाया फ़िर मां ने मुझसे कहा तुम ऊपर जाओ मुझे अंकल से कुछ बातें करनी है
मैं भी समझ गया था कि आज मां अपनी चुदाई करवाने वाली है
जैसे ही मैं गया दरवाजा बंद हो गया तो मैं वापस आया और की होल में से देखने लगा और बात चीत सुनने लगा…।
मां: क्या आप रात तक नहीं रुक सकते, आज लड़के को पता चल गया तो वो आप के भाई को बता देगा,
अंकल: मेरी रानी उसे कुछ नहीं पता चलेगा, तू चल अपने कपड़े उतार
मां: मुझे शरम आती है,
अंकल:अरे कितनी बार तो तुझे चोद चुका हूं मुझसे कैसी शरम डार्लिंग
मां: अगर मेरा बेटा नीचे आया तो…
अंकल: नहीं आयेगा चलो चलो…
फ़िर अंकल मां के पीछे आये और पीछे से मां की साड़ी और पेटीकोट कमर तक ले गये मैंने देखा कि मां की गांड दिख रही थी थोड़ी देर अंकल ने उसे सहलाया मां के मुंह से अजीब आवाज आ रही थी आअह्हह… आअह्हहा आह्हहा अह्हह ऊऊउह्ह हहाआआ…
मां के कहा- चलो ना डाल दो ना’ तो देर तक मुझे समझ नहीं आया क्या डाल दो फिर अंकल ने अपनी लुंगी में से अपना बड़ा लौड़ा निकाला और मां को देखते हुए बोले ले चाट ले…… मां बिना कुछ कहे चाट ने लगी जब मां चाट रही थी तब अंकल ने उनकी ऊँगली मां की गांड में घुसा दी मां उछल पड़ी और मुंह से आवाज निकल गयी आआहह ह्हहाह और बोली ‘क्या कर रहे हो, बता ना तो चाहिये’ तो अंकल मुस्कुराते हुए बोले ‘बता तो तुम यूं थोड़ी उछलती’ फ़िर अंकल बहुत उत्तेजित हो गये थे और उसने मां के कपड़े उतारने के बदले फ़ाड़ने शुरु कर दिये मां भी उत्तेजित हो चुकी थी फ़िर उस ने मां को आगे की तरफ़ झुकाया और मां की गांड में अपना लौड़ा डालने लगे लेकिन जा नहीं रहा था तब मां ने उनकी हेल्प की, अपने दोनों हाथों से अपनी गांड फ़ैलाते हुए बोली ‘चलो ये रास्ता क्लीयर है’ अंकल ने एक ही झटके में अपना लौड़ा डाल दिया और मां के मुंह से आआअ… अ…अअ…ह ह्हह्हह हह मार डाला आअ आआ आआअ… ह्ह दर्द कर रहा है आअ अहहहहा अह…अह… अह… अहह…अ हा अहा ह
फ़िर अंकल अपना लौड़ा अंदर बाहर करने लगे और तेजी से मुंह से आआअ… अ… अअ…ह ह्हह्हह की आवाज चल रही थी 15 मिनट के बाद दोनों शांत पड़ गये
तब मुझे लगा कि अंकल ने अपना वीर्य मां की गांड में छोड़ दिया है फ़िर दोनों थोड़ी देर ऐसे ही पड़े रहे फ़िर 5 मिनट के बाद अंकल उठे और अपना लौड़ा मां के मुंह में रख दिया और मां भी उसे लोलीपोप समझकर चूस ने लगी 15 मिनट तक ऐसा ही हुआ फ़िर शायद अंकल फ़िर तैयार हो गये उसने मां की चूत पर हाथ फ़िराते हुए कहा ‘अब इस की बारी है’
तो मां बोली- हाँ, चलिये!
अंकल ने कहा ‘काफ़ी साफ़ है’
तब मां बोली ‘कल ही साफ़ की है’
फ़िर अंकल मां के ऊपर चढ़ गये और अपने लौड़े को अंदर डाल दिया और मां मुंह से आआअ… अ…अअ… ह्हह की आवाज शुरु हो गयी और बोली थोड़े देर रुकिये दर्द हो रहा है
लेकिन अंकल ने सुना नहीं और शोट लगाते गये और मां चिल्लाती गयी, मां के मुंह से आआअ… अ…अअ…ह ह्हह्हह हहह… हहह
आधे घंटे तक ऐसा चला फ़िर दोनों शांत पड़ गये 15 मिनट के बाद दोनों ने कपड़े पहने मां ठीक से चल भी नहीं पा रही थी लेकिन अंकल को और चोदने की इच्छा थी वो मां को पकड़ कर चूमने लगे
तब मां ने कहा- अब रात के लिये तो कुछ रखो, रात को मैं तुम्हारे पास ही आऊँगी!
अंकल ने कहा- ठीक है!
और वो दोनों दरवाजे की तरफ़ आये तो मैं ऊपर चला गया फ़िर मां ऊपर आइ मां कोई गीत गा रही थी मैंने मां को इतना खुश कभी नहीं देखा जब पापा मां की चुदाई करते हैं… और उस रात कि चुदाई sex stories फ़िर कभी बताऊँगा बाय बाय!!
दोस्तो, मैं आपका दोस्त राज.
मेरी सेक्स कहानी के इस भाग में आपका पुन: स्वागत है.
हालांकि इस सेक्स कहानी का शीर्षक अलग है पर यह उसी से जुड़ी हुई कहानी है.
पिछली कहानी
बचपन के प्यार से शादी और सेक्स
में आपने पढ़ा था कि मैंने अपनी बचपन की संगिनी सौम्या से शादी कर ली थी और उसके साथ सुहागरात की चुदाई का मस्त मजा लिया था.
अब आगे वाइफ सिस्टर Xxx कहानी:
शादी के 3 दिन बाद उसकी बहन मानसी चली गई.
फिर हम दोनों भी एक महीने के बाद पुणे आ गए.
मुझे दिल्ली से एक अच्छी जॉब का अवसर मिला तो मैं दिल्ली आ गया.
सौम्या पुणे में ही थी.
मैं दिल्ली आया तो सौम्या ने कहा- आप मानसी के घर में रुक जाना. उसका दिल्ली में अपना फ्लैट है.
यह मानसी मेरी पत्नी सौम्या की चचेरी बहन थी जिसने सुहागरात की चुदाई की चीख सुनी थी.
ये दोनों बचपन से पक्की सहेली रही थीं.
मानसी के मम्मी पापा बचपन में चल बसे थे तो सौम्या के पापा ने उसे अपने बेटी ही माना था और ये दोनों भी एक दूसरे को जान से ज्यादा चाहती थीं.
मानसी भी कमाल की दिखती है, वह बिलकुल दिव्या खोसला कुमार जैसी लगती है.
मैं उसके फ्लैट पर पहुंच गया, घंटी बजाई तो दरवाजा खुला.
वह शायद मानसी की घरेलू नौकरानी थी.
उसने कहा- आप राज जी हो ना!
मैंने कहा- हां.
तो उसने कहा- मुझे मैडम ने बता दिया था. आप बैठिए. मैडम 9 बजे तक आएंगी.
उसने मुझे पानी, कोल्ड ड्रिंक थोड़ा नाश्ता सर्व किया और चली गयी.
मैं फ्रेश होकर टीवी देखने लगा.
थकान के कारण मेरी आंख लग गई.
मेरी नींद तब खुली जब एक मीठी आवाज कानों में पड़ी- उठिए जीजा जी!
मैं उठा और आंख खोली तो सामने मानसी किसी अप्सरा के जैसी खड़ी थी.
सामने से पहली बार उसे गाउन में देखा था. वह बहुत ज्यादा खूबसूरत थी.
उसने एक घुटने तक आने वाला काले रंग का रेशमी गाउन पहना हुआ था जिसका गला काफी खुला हुआ था और उसकी चूचियों के उभार एक पतली सी ब्रा में कैद थे.
पतली सी ब्रा इसलिए लिखा क्योंकि मानसी के मम्मों के कड़क निप्पल उसके रेशमी गाउन के बाहर से ही नुमाया हो रहे थे.
शायद वह खुद ही अपने दूध दिखाने को उतावली लग रही थी इसलिए मेरे उठ जाने के बाद भी वह मेरे सामने झुकी हुई थी ताकि मैं उसके मम्मों का दीदार कर लूं.
मैं उसके मम्मों को ललचाई नजरों से देखते हुए उठा और फ्रेश हुआ.
फिर हॉल में बैठ गया.
वह प्लेट में मेरी फेवरेट पनीर चिली, वेज पुलाव और सलाद लेकर आई.
उसके हाथ में एक व्हिस्की की बोतल थी.
मैंने मादक भाव से उसे देखते हुए कहा- क्या बात है! शवाब के हाथ में शराब!
उसने हंस कर आंख दबाते हुए कहा- जब शवाब और शराब सामने है, तो आओ अब जश्न मनाते हैं.
मैं भी झट से मान गया.
मानसी ने दारू की बोतल खोली और दोनों का पहला पैग बनाया.
हम दोनों ने चियर्स किया और पहला पैग पी गए.
ऐसे ही हम दोनों ने धीरे धीरे 4-4 पैग पी लिए और अब मानसी को नशा चढ़ रहा था.
जब वह पांचवां पैग पी रही थी तो उसका ग्लास गिर गया और दारू उसके टॉप पर गिर गई.
वह तो इतने नशे में थी कि उसको कुछ पता ही नहीं चल रहा था.
लड़खड़ाती हुई आवाज में वह मुझसे बोली- प्लीज मुझे साफ कर दो.
मैंने उसकी तरफ देखा.
मैं भी नशे में आ चुका था.
गाउन में से उसकी छाती पर तनी हुई मोटी मोटी चूचियों की नोकें साफ नजर आ रही थीं.
उसकी फिगर 36-30-38 की थी.
पूरी कयामत लग रही थी.
जैसा कि मैंने आपको बताया कि वह दिव्या खोसला कुमार की तरह दिखती है.
मैं तो उसको देखता ही रह गया और जब वह उठ कर बाथरूम की तरफ अन्दर जाने लगी तो उसकी फूली हुई गांड को देख कर मेरा फौलादी लंड खड़ा हो गया.
मैंने उससे कहा- मैं नहीं कर सकता … क्योंकि उसके लिए मुझे तुम्हारा गाउन भी खोलना पड़ेगा.
वह बोली- प्लीज यार, तुम कुछ भी मत सोचो और तुम जैसे चाहो इसे बस साफ कर दो.
मैंने उसका गाउन उतारा और उसके गाउन को खोलते ही मुझे उसकी लाल रंग की ब्रा के अन्दर उसके बहुत बड़े बड़े मुलायम स्तन नजर आए.
उन्हें देखकर मेरा मन उन्हें पकड़ कर चूसने का हो रहा था.
वह हंसी और बोली- कैसे हैं?
मैंने कहा- बहुत मस्त हैं.
अब तक मेरा लंड भी खड़ा हो चुका था.
मैंने तौलिये से उसके गोरे गोरे जिस्म को बहुत हल्के हाथों से साफ कर दिया.
मैं उसके मम्मों को देखता रहा.
तभी वह बोली- क्या अब घूरते ही रहोगे या कुछ करोगे भी? प्लीज मेरी ब्रा भी उतार दो न!
उसी समय मुझे सौम्या का भोला चेहरा याद आ गया.
मैंने उससे कहा- ये गलत है. मैं सौम्या को प्यार करता हूँ.
उसने कहा- जीजा जी, सौम्या को सब पता है. आपको प्यार करने वाली वह अकेली नहीं है. वह नाराज़ नहीं होगी.
मैं भी नशे में था, वासना मुझ पर हावी हो रही थी.
मैंने कहा- तुम मुझसे पाप करवा रही हो.
वह हंसी और बोली- मुझे चोदने से तुम पापी नहीं बनोगे, यह बात पक्की है.
जब उसने चुदाई की बात साफ साफ शब्दों में कही तो मेरा लंड भड़क गया.
मैंने धीरे धीरे एक एक करके उसके सभी कपड़े उतार दिए.
जब मैंने उसकी पैंटी को छुआ तो वह चूत रस में एकदम गीली थी.
मैं समझ गया कि इसको भी मेरे छूने से जोश आ रहा है.
लेकिन उसके पूरे कपड़े उतारते ही मेरा तो जैसे दारू का नशा ही उतर गया था.
मैंने धीरे से अपने भी सारे कपड़े उतार दिए.
फिर मैं अपने लंड को शराब से नहला कर उसके मुँह के पास ले गया और उससे बोला- लो लॉलीपॉप चूस लो.
वह भी नशे की हालत में मेरे एक बार कहने से ही मान गई और मेरे लंड को पूरा अपने मुँह में लेकर चूसने लगी.
मैं बोतल से बूंद बूंद करके शराब अपने लंड पर टपकाता गया और वह मेरे लौड़े को चूसती हुई शराब को भी पीती गई.
नीचे से मैं उसकी गीली एकदम व गर्म चूत में उंगली कर रहा था.
धीरे धीरे मैंने अपनी स्पीड बढ़ा दी तो उसको बहुत दर्द होने लगा और वह ज़ोर ज़ोर से सिसकारियां लेने लगी.
मैं समझ गया कि उसकी चूत अभी तक कुंवारी है और आज में पहली बार उसकी चूत का भेदन करूँगा.
उसके लंड चूसने से जब मैं झड़ने वाला था तो मैंने लंड उसके मुँह से बाहर निकाल लिया और सारा वीर्य एक ग्लास में निकाल दिया.
फिर उसी ग्लास में एक और पैग बनाकर मानसी को पिला दिया.
वह बड़े मज़े लेकर पी गई और मैं उसकी चूत चाटने लगा.
थोड़ी ही देर में पूरी गर्म हो गई और उसकी चूत से पानी भी निकल रहा था.
उसको जरा सा भी होश नहीं था कि उसके साथ क्या क्या हो रहा है.
मैंने थोड़ी देर बाद उसे एक पैग बनाकर और पिला दिया और उसे अपनी गोद में उठाकर बेडरूम में ले आया, उसे बेड पर लेटा दिया.
उसकी कमर के नीचे मैंने एक तकिया रख दिया.
इससे उसकी चूत का मुँह थोड़ा खुल गया और मुझे उसकी चूत का दाना साफ साफ दिखने लगा.
फिर मैंने अपना लंड उसकी गर्म चूत पर रखा और अन्दर डालने लगा.
लेकिन मेरा लंड उसकी टाईट चूत के अन्दर नहीं जा रहा था.
मैंने उसकी कमर को अच्छी तरह कसकर पकड़ा और लंड को चूत के मुँह पर रखकर एक ज़ोर का धक्का दे मारा.
मेरा पूरा लंड उसकी चूत में फिसलता हुआ अन्दर चला गया और मानसी के मुँह से एकदम ज़ोर से चिल्लाने की आवाज बाहर आ गई.
उसका भी दारू का सारा नशा उतर गया.
जब मैंने नीचे देखा तो उसकी चूत से खून निकल रहा था.
मानसी की आंखों से आंसू निकल रहे थे, सांसें ज़ोर ज़ोर से चल रही थीं.
वह पूरी पसीने से गीली हो चुकी थी और अब उसके मुँह से गाली भी निकलने लगी थी.
मानसी बोली- मादरचोद धीरे पेल साले … लुगाई हूँ तेरी … कोई रंडी नहीं हूँ.
उसकी गाली से मुझे और जोश आ गया और मैंने उसकी एक चूची को जोर से भींच दिया.
‘साली है तू मेरी. अभी बीवी नहीं हुई है.’
मानसी- आज से मैं भी आपकी हुई. अब हम दोनों आपकी पत्नी हैं और आप भी हम दोनों को एक जैसे ही चाहेंगे.
मैंने भगवान से कहा- एक छोड़ कर गई तो आपने दो दो प्यार करने वाली दे दीं.
मन में यह बोलते हुए मैं धीरे धीरे लंड को धक्के देकर उसे चोदने लगा.
वह कुछ बोलना चाह रही थी लेकिन अपनी चुदाई के दर्द के कारण कुछ बोल नहीं पा रही थी.
मानसी बोल रही थी- अह्ह्ह उह्ह्हह्ह बाहर मत निकालो इसे प्लीज … अह्ह्ह अब से मैं आपकी ही हूँ मेरे पतिदेव प्लीज मिसेज राज समझ कर ही मुझे चोदिए … अह्ह्ह्ह.
वह मादक सिसकारियां ले रही थी और मैं लगातार ताबड़तोड़ धक्के दिए जा रहा था.
मेरे लंड के चूत के अन्दर बाहर होने से पूरे कमरे में फच फच की आवाजें आ रही थीं.
कुछ मिनट के धक्कों के बाद उसको भी मज़ा आने लगा और वह भी मेरा पूरा साथ देने लगी.
मैं- क्यों मिसेज राज, अब तो आपको मेरे लंड से चुदाई करने में मज़ा आ रहा है ना?
मानसी- हां पतिदेव अह्ह उह्ह और चोदो मुझे और चोदो … पूरी फाड़ दो आज मेरी चूत को … अह्ह हां और ज़ोर से … भोसड़ा बना दो मेरी चूत का.
मैं तो जैसे उसकी कामुक आवाजों को सुनकर पागल सा हुआ जा रहा था.
मैंने हचक कर चुदाई चालू कर दी.
‘आईईइ अह्ह्ह हां और तेज चोदो मुझे जानेमन चोदो … और तेज़ चोदो … मुझे आज चोदकर एक औरत बना दो.’
मैंने पास में रखी दारू की बोतल से एक लंबा घूंट नीट दारू का लिया और अपनी चुदाई की स्पीड तेज़ कर दी.
इसी बीच वह झड़ चुकी थी.
दस मिनट के बाद मैं झड़ने वाला था तो मैंने पूछा- वीर्य कहां पर निकालूँ?
मानसी- मेरी प्यासी चूत में ही डाल दो और आज इसकी आग बुझा दो.
मैंने अपना सारा वीर्य उसकी चूत में निकाल दिया और थककर बेड पर लेट गया.
हमने उस रात को खूब दारू पी और एक बार चुदाई की.
फिर थककर ऐसे ही नंगे सो गए.
दूसरे दिन सुबह जल्दी उठकर मैंने एक बार और उसकी चूत में लंड डाला और उसे चोदा.
अब वह बड़े आराम से पड़ी रही और मेरे लंड का मज़ा लेती रही क्योंकि रात भर चुदाई से उसकी चूत फट चुकी थी जिसकी वजह से मेरा लंड आसानी से अन्दर बाहर हो रहा था.
उस दिन हम दोनों कहीं भी नहीं गए और पूरे दिन नंगे ही पड़े रहे.
दोस्तो, अब मानसी और सौम्या हम तीनों पति पत्नी की तरह रहते हैं.
अगले दिन सुबह मैं जल्दी उठ गई और फिर सब लोगों को उठा दिया, हम सब लोग तैयार हुए और फिर रवि हम सब को रेलवे स्टेशन छोड़ आए.
हमारी ट्रेन सुबह छह बजे थी.
थोड़ी देर बाद ट्रेन आ गई और हम लोग ट्रेन में बैठ गए।
रात को दस बजे हमारी ट्रेन नैनीताल पहुँच गई… हमने वहां से टैक्सी बुक की और अपने होटल में पहुंच गए. अनिल ने होटल ऑनलाइन ही बुक किये थे तो हमें जाते ही वहाँ तीन कमरे मिल गए।
हमने अपने अपने कमरे चुन लिए. स्वाति और अनिल एक कमरे में… आलोक और रोहित एक कमरे में थे और रोहन, अन्नू और मैं… हम तीनों एक ही कमरे में रुक गए क्योंकि हमारा रूम थोड़ा बड़ा था।
सफर के कारण हम लोग पसीने से नहा रहे थे… तभी आलोक हमारे कमरे में आया, बोला- चलो, सब लोग स्वीमिंगपूल में नहाने चलते हैं।
मैंने आलोक से कहा- कहाँ है पूल… और इतनी रात को कौन-कौन जा रहा है?
आलोक ने कहा- अरे चाची जी… यहीं होटल में ही है… और सब लोग नहाने जा रहे हैं… आप भी चलो।
मैंने कहा- नहीं… मैं नहीं जा रही… तुम लोग जाओ।
सब लोग जाने के लिए तैयार हो गए और मुझसे भी चलने के लिए जिद करने लगे तो मैंने सभी को समझाते हुए कहा- ना ही मेरे पास स्विमिंग कॉस्ट्यूम है और ना ही मुझे तैरना आता है..
तभी स्वाति और अनिल मेरे रूम में आ गए।
अनिल ने मुझसे कहा- आपको जो ठीक लगे… आप वह पहन कर चल सकती हैं… और हम लोग तो बस वहां मस्ती करने जा रहे हैं!
अनिल के कहने पर मैं भी चलने के लिए तैयार हो गई।
सब लोग चलने के लिए तैयार थे… रोहन, आलोक, रोहित और अनिल सभी ने केवल हाफ पैंट ही पहने हुए थे… अन्नू ने भी एक टी-शर्ट और एक हॉट पैंट पहना हुआ था… स्वाति भी टी-शर्ट और कैपरी में थी।
मेरे पास पहनने के लिए केवल एक गाउन ही था जो मुझे रात मैं पहनना था. मैंने स्वाति को अपनी यह दुविधा बताई तो स्वाति ने अपनी एक नाइटी लाकर मुझे दे दी और मुझे वह पहनने के लिए कहा।
स्वाति की नाइटी केवल घुटनों तक ही थी और आर्मलेस थी… उस नाइटी को कमर पर बांधने के लिए एक रिबन लगी हुई थी.
बच्चों के सामने इसे पहनने में मुझे थोड़ी हिचकिचाहट हो रही थी… पर बच्चों को इसमें कोई प्रॉब्लम नहीं थी।
हम सब रूम से निकलकर स्विमिंग पूल पहुंच गए और फिर सब लोग पूल में उतर कर नहाने लगे… रात के समय केवल हम लोग ही पूल में नहा रहे थे, और कोई नहीं था… बस पास में बेंच पर एक आदमी बैठा हुआ था.
हम सब लोग पूल में नहाने लगे, हम सब लोग साथ में ही नहा रहे थे।
सब लोग पूरी तरह से गीले थे… गीली होने की वजह से मेरी नाइटी मेरे शरीर से बिल्कुल चिपक गई… मेरे साथ साथ अन्नू और स्वाति दोनों की टीशर्ट भी उनके मम्मों से चिपकी हुई थी जिसमें से हम सभी के उभार साफ नजर आ रहे थे.
तभी आलोक और रोहन दोनों ने हम लोगों के पास आकर हमें पानी में इधर-उधर खींचना शुरू कर दिया और मेरे साथ मस्ती करने लगे।
रोहन भी मेरे पास आया और मुझसे कहा- मम्मी… मैं आपको तैरना सिखाता हूँ।
मैंने कहा- हां… ठीक है.. जब तक हम इस होटल में हैं, तुम लोग मुझे तैरना सिखा दो।
रोहन मेरे पीछे आ गया और वह मुझसे चिपक कर खड़ा हो गया. रोहन का लंड भी टाइट हो गया था और फिर वो अपने लंड को मेरी गांड पर घिसने लगा… हम लोग चार फीट गहरे पानी में थे… पानी में होने की वजह से ना किसी को कुछ दिख रहा था… ना ही कुछ समझ आ रहा था।
रोहन ने मुझे मेरे हाथ फैलाने के लिए कहा… फिर रोहन ने अपने एक हाथ को मेरी कमर पर रखा और दूसरे हाथ से मेरे हाथ को पकड़ लिया… फिर वह मुझे तैरना सिखाने लगा… रोहन पीछे से अपने लंड से बॉक्सर में ही मेरी गांड पर झटके देने लगा।
मैंने रोहन से धीरे से कहा- अभी रुक जाओ…यह सही वक्त नहीं है कोई देख लेगा…
रोहन भी हल्के स्वर में बोला- मम्मी, आप बस तैरने पर अपना ध्यान लगाओ बाकी सब मुझ पर छोड़ दो…
और फिर वो झटकों के साथ साथ मुझे पानी के अंदर हाथ पैर चलाना सिखाने लगा।
तभी मेरी नज़र सामने बैंच पर बैठे उस आदमी पर गई जो कि शुरू से ही हम लोगों को नहाते हुए देख रहा था… उस आदमी की नज़र मेरी और और लड़कियों की तरफ ही थी।
तभी हम दोनों की नज़रें आपस मे टकरा गई… और वो मेरी तरफ घूरते हुए मुस्कुरा दिया.
जवाब में मैंने उस आदमी से नज़र हटा ली.
रोहन मेरे पीछे ही था और मेरे हाथों को पकड़ा हुआ था…तभी उसके झटके तेज हो गए और वो झड़ने लगा।
मैंने रोहन से कहा- रोहन खाली हो गया क्या तेरा?
तो रोहन ने कहा- हाँ मम्मी, मुझसे कंट्रोल ही नहीं हुआ…
उत्तेजना के कारण मेरी चूत भी पानी छोड़ रही थी।
ग्यारह बजने को थे… फिर हम लोग पूल से वापस अपने अपने रूम में आ गए. अन्नू रोहन और मैं तीनों ही गीले थे. रूम में आकर हम लोग खुद को पौंछने लगे. तब तक अन्नू बाथरूम से कपड़े बदलकर आ गई और फिर स्वाति के रूम में चली गई।
अब मैं और रोहन ही रूम में बचे थे, रोहन ने अन्नू के जाते ही गेट को लॉक कर दिया और मेरे हाथ से टॉवल लेकर बिस्तर पर फेंक दिया.
मैं कुछ बोलती, उससे पहले ही रोहन ने मेरे होंठों को चूमना शुरू कर दिया… फिर रोहन ने मेरी नाइटी को खोलकर उतार दिया।
मैं बस ब्रा और पैंटी में ही खड़ी थी. मेरे होंठ रोहन की गिरफ्त से छूटते ही मैंने रोहन से कहा- रोहन बेटा, तू तो इतना उतावला हो रहा है जैसे मैंने कभी तुझे चोदने ही नहीं दिया ।
रोहन बोला- ऐसी बात नहीं है मम्मी… आज जब से आपको पूल में नहाती हुई देखा है.. मुझसे रहा ही नहीं जा रहा।
मैंने हँसते हुए रोहन को अपने गले से लगा लिया. रोहन के दोनों हाथ मेरी कमर से होते हुए मेरी पीठ पर लिपटे हुए थे, मैंने रोहन से कहा- मेरा राजा बेटा अपनी मम्मी से इतना प्यार करता है?
रोहन ने हां में सर हिला दिया।
तभी रोहन ने पीछे से ही मेरी ब्रा के हुक को खोल दिया और मेरी ब्रा को खींचता हुआ मुझसे दूर हो गया. मैं अधनंगी थी और अपने स्तनों को देखने लगी… फिर मैंने रोहन की तरफ देखते हुए उसे कहा- रोहन, बहुत शरारती हो गया है तू?
और फिर हम दोनों हँसने लगे।
हम दोनों अभी भी गीले थे… रोहन मेरे पास आया और मेरे मम्मों पर एक चुम्मी देते हुए मेरी पैंटी को भी उतार दिया… मेरी नाइटी, ब्रा और पैंटी वही जमीन पर पड़ी हुई थी… मैं बिल्कुल नंगी रोहन के सामने खड़ी थी और फिर रोहन टॉवल लेकर मेरे नंगे शरीर को पौंछने लगा.
फिर मैंने भी झुककर रोहन की हाफ पैंट को उतार दिया… और फिर रोहन की चड्डी को भी उतार दिया.
कपड़ों से आजाद होते ही रोहन का लण्ड फनफनाने लगा।
पूल में झड़ने की वजह से रोहन की चड्डी और उसका लण्ड दोनों ही उसके वीर्य से लथपथ थे.
मैं जमीन पर घुटनों के बल बैठ गई और मैंने रोहन के गीले लण्ड को अपनी जीभ से चाटना शुरू कर दिया… वीर्य के कारण लण्ड का स्वाद काफी अच्छा लग रहा था।
फिर हम दोनों उठ कर बिस्तर पर लेट गए, रोहन मेरे ऊपर आकर आकर 69 की पोजीशन में लेट गया… फिर रोहन ने मेरी चूत को चाटना और चूसना शुरू कर दिया.
रोहन का लण्ड मेरे मुंह के सामने था तो मैंने भी रोहन के लण्ड को अपने मुंह मे भर लिया और उसे चूसने लगी.
रोहन ने उत्तेजित होकर अपने लण्ड से मेरे मुंह को चोदना शुरू कर दिया।
रोहन अपनी जीभ को मेरी चूत के अंदर बाहर कर रहा था… मेरी चूत काफी देर से पानी छोड़ रही थी तो मैं ज्यादा देर तक नहीं टिक पाई और झड़ने लगी… मेरी चूत से रस की धार बहने लगी जिसे रोहन ने चाटना शुरू कर दिया।
चूत चाटने के बाद रोहन मेरे ऊपर से उठ गया और अपना लण्ड मेरे मुँह से बाहर निकाल कर अपने हाथों से पकड़कर सहलाते हुए मुझसे बोला- मम्मी… अब बताओ, किस पोजीशन में चुदना पसंद करोगी आप?
मैंने रोहन से बिना कुछ कहे अपनी दोनों टांगों को फैला दिया… रोहन को मैंने चुदाई का काफी ज्ञान दिया है… अब वो काफी अनुभवी हो गया है.
मेरे टाँगें फैलाते ही वो मुस्कुराते हुए मेरी टांगों के बीच आकर घुटनों के बल बैठ गया और फिर मेरी दोनों टाँगों को पकड़कर अपनी कमर के बगल में ले गया. इससे मेरी दोनों जाँघें रोहन की कमर पर टिक गई और मेरी कमर बिस्तर से थोड़ी ऊपर हवा में झूलने लगी।
रोहन ने देरी न करते हुए अपने लण्ड को मेरी चूत पर टिकाया और एक जोरदार धक्के के साथ अपना करीब सात इंच लम्बा और दो इंच मोटा लण्ड मेरी चूत में उतार दिया जो सीधा मेरी बच्चेदानी से जा टकराया.
रोहन के इस धक्के के साथ मैं भी चीखते हुए आगे गिर पड़ी।
मैंने दर्द में चीखते हुए रोहन से कहा- उइईईई…माँ… मर गई…मैं… रोहन… तेरी माँ हू मैं… कोई किराये की वेश्या नहीं हूँ जो इतनी बेदर्दी से धक्के मार रहा है… उम्म्ह… अहह… हय… याह… ओह्ह…मम्मा…
रोहन ने कहा- सॉरी मम्मी… आज मैं बहुत हॉर्नी हो रहा हूँ… अगर मुझे पता होता कि आपको दर्द होगा तो मैं धीरे से ही धक्के मारता!
इतना बोलकर रोहन ने मुझे चोदना शुरू कर दिया।
रोहन का लण्ड मेरी चूत की गहराई को छूता हुआ वापस बाहर आकर दोबारा मेरी चूत की गहराई में उतर जाता. मैं भी रोहन के हर धक्कों पर अपनी कमर उछाल कर रोहन को ओर उत्तेजित कर रही थी।
रोहन लगातार मेरी चूत के अंदर अपने लण्ड से वार कर रहा था… मैं भी चुदाई का मजा लेते हुए सिसकार रही थी- आहह… रोहन… बस ऐसे ही… चोद मुझे…चोद दे… मेरी चूत को अपने इस मोटे लंड से… और ज़ोर से… और ज़ोर से… हाँ बेटा.. ऐसे ही… बस ऐसे ही चोद मुझे… आहहहह… रोहन.. मेरे लाल… चोद डाल अपनी मम्मी को… आहह…
तभी रोहन ने मेरे मटकते हुए पेट को चाटना शुरू कर दिया और फिर मेरी नाभि में थूक दिया और फिर मेरी नाभि को चाटते हुए नाभि को जीभ से कुरेदने लगा.
ये सब मुझे काफी उत्तेजित कर रहा था।
कुछ देर की चुदाई के बाद मैं झड़ने को हुई तो मैं रोहन से बोली- उफफ्फ़… रोहन… ओह्ह… माय्य… गॉडड… फ़क्क… मीईई… रोहन… मैं झड़ने वाली हूँ… उफ्फ़… आहह… चोद दे अपनी माँ की चूत…
और फिर मैं झड़ने लगी।
रोहन अभी तक मेरी चुदाई कर रहा था पर मैं थक चुकी थी, मैंने अपना शरीर ढीला छोड़ दिया.
रोहन समझ गया था कि मैं अब थक चुकी हूँ तो उसने अपना लण्ड मेरी चूत से बाहर निकाल लिया।
रोहन मुझसे बोला- मम्मी… बहुत दिनों से मैंने आपकी गांड नहीं मारी है…
और फिर उसने अपना लण्ड वैसे ही मेरी चूत से निकालकर मेरी गांड के छेद पर लगाया और फिर अपने लण्ड को मेरी गांड में डालने लगा।
रोहन का लण्ड गीला था… पर मेरी गांड भी कसी हुई थी क्योंकि मैं कभी कभार ही अपनी गांड के अंदर लण्ड लेती हूँ।
गीला होने की वजह से रोहन के लण्ड का सुपारा तो अंदर चला गया पर मेरी कसी हुई गांड में लंड को और अंदर डालने के चक्कर में रोहन झड़ने लगा… झड़ते वक्त रोहन ने अपना शरीर मेरे ऊपर रख दिया और ऊपर से ही गांड पर झटके देने लगा।
सुपारा अंदर होने की वजह से रोहन का वीर्य मेरी गांड के अंदर ही भर गया. झड़ने के बाद रोहन ने अपने लंड को बाहर खींच लिया और मेरी बगल में आकर लेट गया.
रोहन के लंड निकालते ही उसका वीर्य मेरी गांड से बहकर बाहर आने लगा जिसे रोकने के लिए मैं उलटी होकर लेट गई।
हम दोनों निढाल होकर बिस्तर पर लेटे हुए थे… रोहन मुझसे आकर चिपक गया और मेरे बालों को हाथ से सहलाने लगा।
मैंने रोहन से कहा- रोहन… भर गया तेरा मन… या अभी भी कुछ बचा है… और आज तो गांड मारने से पहले ही तू आउट हो गया।
रोहन ने कहा- आपकी गांड बहुत कसी हुई है मम्मी… और मैं तब ही झड़ने वाला था जब मैंने आपकी चूत से लण्ड निकाला था।
फिर मैंने रोहन से कपड़े पहनने के लिए कहा और मैं खुद को साफ करने के लिए नंगी ही उठकर बाथरूम जाने लगी।
रोहन ने अपने साफ कपड़े पहन लिए और मैं जमीन से सभी कपड़े उठाकर बाथरूम चली गई.
रोहन का वीर्य मेरी गांड से निकलकर मेरी जांघों पर आ रहा था.
मैं शावर चालू करके उसके नीचे नहाने लगी.
तभी मुझे रूम की घंटी की आवाज़ सुनाई दी.. पर मैंने उस पर गौर नहीं किया।
मुझे नहाने में थोड़ी देर लग गई… नहाने के बाद मुझे याद आया कि जल्दी में मैं अपनी ब्रा, पैंटी और गाउन बाहर ही छोड़ आई हूँ…
तो मैंने रोहन को आवाज़ लगाते हुए कहा- रोहन, मेरे कपड़े बैग पर ही रह गए है… जरा मुझे दे तो जा?
मैं बिल्कुल नंगी गीली ही खड़ी थी… अपने बदन को पौंछने के लिए मेरे पास टॉवल भी नहीं था… तभी बाथरूम के गेट पर दस्तक हुई।
मैंने तुरंत ही दरवाज़ा खोल दिया…और सामने रोहित मेरे कपड़े लिए हुए खड़ा था… मैं बिल्कुल नंगी उसकी आँखों के सामने खड़ी थी और उसकी नज़र मेरे नंगे बदन पर टिकी थी।
रोहित को सामने देख मैं घबरा गई और गेट के पीछे चली गई… मैंने गेट के पीछे से ही अपने एक हाथ से रोहित से कपड़े ले लिए और फिर गेट बंद कर दिया।
मैंने जल्दी से अपने कपड़े पहने और बाहर आ गई.
रोहित वहीं बेड पर बैठा हुआ था.
अभी जो हुआ था… उसके बारे में कुछ भी बात करने के लिए नहीं था… और हम दोनों नज़रें भी नहीं मिला पा रहे थे पर फिर भी मैंने रोहित से पूछा- रोहन कहाँ है?
रोहित ने कहा- वो आलोक भैया के साथ गया है।
इससे पहले कि मैं उससे कुछ कहती, रोहन और अन्नू रूम में आ गए… फिर मैंने रोहित से कोई बात नहीं की.
कुछ देर बाद रोहित अपने रूम में चला गया और फिर हम तीनों भी सो गए.
मैं बिस्तर के कोने से सो रही थी… अन्नू बीच में थी और रोहन दूसरे कोने पर!
मुझे नींद नहीं आ रही थी… मैं तो बस यही सोच रही थी ‘जाने रोहित क्या सोच रहा होगा…उसे भी खुद पर ग्लानि हो रही होगी?’
वैसे रोहन और रोहित हर बात आपस मे शेयर करते है तो मैंने सोचा कि कल में रोहन से इस घटना के बारे में बात करुँगी.
यही सब सोचते सोचते मैं सो गई।
मेरा नाम पूजा अरोड़ा है, मैं बी टेक 3र्ड इयर की स्टूडेंट हूँ. मेरी उमर 21 साल है. भगवान की कृपा से रंग गोरा और दिखने में सुन्दर हूँ. सुन्दर हूँ.. शायद इससे अच्छा आप यह बोल सकते हो कि मैं एक बार्बी डॉल सी क्यूट हूँ.
मैं हरियाणा के छोटे से जिले यमुनानगर से हूँ और बी टेक करने दिल्ली आई हूँ, मेरा कॉलेज गुरुग्राम में है.
मेरे परिवार में मेरे पिता जी, माँ और एक छोटा भाई है जो मुझसे बहुत प्यार करते हैं और मैं भी अपने परिवार से बहुत प्यार करती हूँ, शायद यही कारण था कि मैं आज तक किसी ग़लत चक्कर में नहीं पड़ी और ना ही कभी बॉयफ्रेंड बनाया.
मेरा फिगर 36-24-36 का है, मैं अपने फिगर को लोगों को आकर्षित करने के लिए नहीं पर अपनी खुशी के लिए मेंटेन रखती हूँ. मेरे कॉलेज के सब लड़के मेरे दीवाने हैं. बहुत लड़कों ने मुझे प्रपोज़ किया है पर मैंने कभी किसी को कभी हाँ नहीं कहा और ना ही कभी किसी लड़के से कभी दोस्ती की.
लेकिन किस्मत ने जब जिससे जहाँ मिलना होता है, मिला देती है और शायद किस्मत को ऋषि को मुझसे मिलना था.
ऋषि मेरा एक दोस्त है जो मुझे गुरुग्राम में ही मिला. ऋषि दिखने में भी बहुत अच्छा है, मन में एक बार तो आया था कि उसे अपना बॉयफ्रेंड बना लूँ पर अपने माँ बाप की इज़्ज़त पर कोई आँच नहीं आने देना चाहती इसलिए सिर्फ़ दोस्त ही रहने दिया उसे भी.
ऋषि रहने वाला मेरठ का है और मुझे गुरुग्राम के एक माल में मिला था. वो यहाँ एक कंपनी में डेटा अनालिस्ट है.
एक बार मॉल में कुछ लड़के मुझे छेड़ रहे थे तब ऋषि ने मुझे उनसे बचाया था और हॉस्टल तक छोड़ा था. तब से मेरी और ऋषि की दोस्ती हो गई. ऋषि ने मुझे बाद में प्रपोज़ भी किया तो मैंने उससे बता दिया- ऋषि, मैं सिर्फ़ अरेंज मैरिज करना चाहती हूँ वो भी उससे जो मेरे माँ बाप मेरे लिए ढूंढेंगे. तुम एक अच्छे लड़के हो इसलिए मैं तुम से दोस्ती नहीं तोड़ना चाहती.
ऋषि एक शरीफ लड़का था तो उसने मुझे समझा और उसने इसलिए भी मुझे समझा क्योंकि वो मेरे बारे में सब जानता था. ऋषि को पता था कि पूजा एक शरीफ लड़की है और कभी बॉयफ्रेंड ना बनाया है और ना बनाएगी.
एक बार ऋषि ने मुझे पूछा कि क्या मैं वर्जिन हूँ. तो मैंने उससे बहुत सुनाया कि क्या मतलब है उसका कि मैं वर्जिन हूँ.
मैंने उससे बोला- एक बात, जब आज तक मैं किसी लड़के के साथ नहीं हुई तो यह सवाल कैसा और दूसरा उसे शर्म आनी चाहिए यह सवाल पूछते हुए मुझसे!
मैंने उससे दोस्ती तोड़ दी, उसने माफी माँगी पर मैंने उससे माफ़ नहीं किया.
उस पर तरस तो आया पर हिम्मत नहीं हुई उससे नज़रें मिलाने की… उसके इस सवाल के बाद!
एक दिन मुझे कॉलेज की फीस भरनी थी तो मैंने पिता जी को फोन कर दिया. हालांकि मुझे पिता जी से पैसे लेना अच्छा नहीं लगता था पर मैंने सोच रखा था की मेरी पढ़ाई कंप्लीट होते ही और नौकरी लगते ही पिता जी को एक एक रूपया लौटा दूँगी.
मेरे फोन करते ही पिता जी ने मेरे अकाउंट में 1 लाख 30 हज़ार जमा करवा दिए. शनिवार का दिन था, तब बैंक हाफ डे के लिए ही खुलता था, मैंने अपनी रूममेट को बोला- मेरे साथ बैंक चल… पर उसकी तबीयत कराब थी तो मैं अकेली चली गई.
एक बार तो सोचा ऋषि को फोन करके बुला लूँ, वैसे भी अब नाराज़ हुए काफ़ी दिन हो गये थे, पर फिर सोचा छोड़ो. बाद में देखते हैं. और पहले फीस का काम निपटा लूँ.
मैं सुबह 10 बजे बैंक पौंछ गई, वहाँ पर्ची भर के पैसे ले लिए. मैंने पैसे बैंग में डाले और कैब बुलवा कर हॉस्टल आ गई. किस्मत से ट्रॅफिक ना मिलने के कारण मैं 12 बजे तक हॉस्टल पहुंच गई थी. हॉस्टल में एंट्री लेते हुए समय मैंने देखा कि फीस विंडो पर लाइन नहीं लगी हुई है और विंडो भी खुला था तो सोचा क्यूँ ना अपनी फीस ही भर दूं और यह काम पूरे से निपटा दूं और वैसे भी सोमवार को काफ़ी लंबी लाइन लगने वाली थी.
मैं फीस काउंटर पर गई और फॉर्म लेकर अपना नाम, बेच, रोल नंबर और सब भर दिया. जैसे मैं विंडो पर पहुंची और पैसे निकालने के लिए बैग में हाथ डाला तो देखा बैग में से पैसे गायब थे. मैंने घबरा कर बैग में से सारा सामान निकल दिया और देखा बाद में एक छेद हुआ पड़ा था और पैसे बैग से गायब थे. मैं वहीं चक्कर खाकर गिर गई.
तभी हॉस्टल की वॉर्डन ने और ना जाने किसने मुझे मेरे हॉस्टल रूम में पहुंचाया.
जब मुझे होश आया तो एक पल कि मुझे लगा कि सपना था पर पास में बैग देख कर समझ आया कि सपना नहीं यह सच था कि मैंने अपनी फीस के 1 लाख 30 हज़ार गुमा दिए थे. मैं एकदम से घबरा गई और समझ नहीं आया कि क्या करूँ!
घबराहट में मुझे कुछ नहीं सूझा और मैंने तुरंत अपने दोस्त ऋषि को फोन घुमा दिया. ऋषि ने जैसे ही मेरा फोन उठाया, मैंने उससे रोते रोते सब बताया कि क्या हुआ.
ऋषि ने मुझे फोन पर चुप करवाया और बाहर बुलाया क्योंकि वो गर्ल्स हॉस्टल की अंदर तक नहीं आ सकता था.
मैं बाहर ऋषि का वेट कर रही थी और 5 ही मिनट में ऋषि अपने किसी दोस्त की मोटरसाइकल लेकर आ गया. ऋषि के आते ही मेरा रोना फिर छूट गया तो उसने मुझे बोला- चुप हो जाओ और यहाँ से चलो पहले!
और यह कह कर वो मुझे दूर एक पार्क में ले गया और पूरी बात पूछी. पूरी बात जानने के बाद वो मुझे मोटरसाइकल से बैंक के रास्ते और बैंक से हॉस्टल के रास्ते ले गया पर कुछ नहीं मिला.
मुझे रोता देख ऋषि बोला- देखो पूजा, पैसे तो मेरे पास भी नहीं है, नहीं तो मैं तुम्हें दे देता… पर मैं वादा करता हूँ कि 2 दिन का समय दो तो मैं कुछ कर पाऊंगा.
मैंने ऋषि की बात मान ली और हम दोनों सोचने लगे.
तीसरे दिन मैंने ऋषि को फोन किया और बोला- ऋषि, फीस भरने की आख़िरी डेट आने वाली है, जल्दी कुछ नहीं किया तो बहुत बड़ी मुसीबत में फंस जाऊँगी.
तभी ऋषि ने बोला- पूजा तुम परेशान मत हो, पैसों का इंतज़ाम 80% हो गया है पर पहले तुम मिलो मुझे.
मैं ऋषि से मिलने पहुँची और फिर वो मुझसे मोटरसाइकल पर बिठा कर एक पार्क में ले गया और बेंच पर हम बैठ गये.
तभी ऋषि ने मुझे एक बात बोल कर हैरान और परेशन दोनों कर दिया.
ऋषि ने मेरा हाथ अपने हाथ में लिया और बोला- देख पूजा, मैं तुझे अपना बहुत प्यार दोस्त मानता हूँ, समझ नहीं आ रहा कि कैसे बोलूं तुझे… पर मेरे पास कोई दूसरा रास्ता नहीं है.
ऋषि ने कहा- पूजा, मैंने 2 दिन पहले अपने एक दोस्त से बात की पैसों के लिए और मैंने उसे तुम्हारी पूरी कहानी भी बता दी थी कि क्यों एकदम से इतने पैसों की ज़रूरत आ पड़ी है पर उसके पास भी पैसे ना होने के कारण उसने मना कर दिया था.
ऋषि मुझसे बोला- पूजा, आज मेरे उसी दोस्त का फ़ोन आया था और वो बोला की 1 लाख 30 हज़ार की जगह 2 लाख मिल जाएँगे अगर तुम एक आदमी के साथ पूरी रात गुजार लो तो!
यह सुनते ही मुझे सब समझ तो आ गया था पर यकीन नहीं हुआ था कि यह ऋषि ने क्या बोल दिया.
मैंने ऋषि को कहा- वॉट डू यू मीन कि पूरी रात गुज़ारनी होगी?
ऋषि बोला- तुम्हें एक आदमी के साथ सेक्स करना होगा और पूरी रात उसी पास रहना पड़ेगा.
मुझे ऋषि पर बहुत गुस्सा आया और मैंने उससे तमाचा मार दिया और रोते हुए अपने हॉस्टल आ गई.
मेरे हॉस्टल आने के बाद मैंने ऋषि को सॉरी का मेसेज किया और सोने की कोशिश करने लगी पर टेंशन में और ऋषि की बात सुन कर नींद नहीं आ रही थी. मैं बहुत डरी हुई थी, समझ नहीं आ रहा था कि कैसे क्या करूँ. एक बार तो सोचा कि घर पर ही बता दूं पर फिर अपने घर की आर्थिक हालत के बारे में सोच कर मैंने चुप रह कर खुद से सब संभालने की सोची.
पर संभालना कैसे था… यह समझ नहीं आ रहा था.
अब 5 दिन बीत चुके थे और आज गुरुवार था और सोमवार को फीस भरने की आख़िरी तारीख थी. गुरुवार की रात तक सब कुछ सोचने के बाद जब कुछ रास्ता दिखाई नहीं दे रहा था तो ऋषि की बात मेरे दिमाग़ में घूमने लगी. एक बार दिमाग़ ने कहा कि पूजा एक रात किसी और के साथ… तेरी सब दिक्कत दूर कर देगी और सेक्स कभी ना कभी तो करना ही पड़ेगा और आजकल सब शादी से पहले कर चुके होते हैं पर किसी अंजान आदमी के साथ कैसे?
पूरी रात सोचते सोचते निकल गई और फिर मैंने शुक्रवार की सुबह ऋषि को फोन किया, कहा- ऋषि मैं तैयार हूँ, पर यह बात प्लीज़ तुम्हारे और मेरे बीच में ही रखना!
ऋषि बोला- ठीक है, मैं पता करके बताता हूँ कि कब जाना होगा.
आधे घन्टे बाद ऋषि ने मुझसे मेरा अकाउंट नंबर माँगा और कहा- इसमें अभी 50 हज़ार आ जाएँगे और बाकी के बाद में… और तुम्हें आज की रात ही जाना पड़ेगा तो तुम वॉर्डन को बोल दो कि तुम घर जाओगी आज शाम को!
मैंने ऋषि की बात मान ली और वैसा ही किया.
ऋषि मुझे 6 बजे हॉस्टल से ले गया और फिर एक जगह जाकर हम खड़े हो गये. मुझे बहुत ड़र लग रहा था.
तभी वहाँ एक सफेद गाड़ी आकर रुकी और उसमें से एक लड़का निकला. लड़के ने ऋषि से हाथ मिलाया और मुझे कहा- डरो मत, मैं ऋषि का दोस्त हूँ, मैं आपको वहाँ छोड़ कर आऊंगा और फिर कल दोपहर लेने भी आऊंगा और फिर ऋषि आपको यहीं से ले जाकर हॉस्टल छोड़ देगा.
और फिर मुझे साथ चलने को कहा.
मैं चुपचाप गाड़ी में बैठ गई और ऋषि का दोस्त, जिसका नाम अंशुल था, आगे की सीट पर ड्राइवर के साथ बैठ गया.
रास्ते में अंशुल ने मुझे कहा- तुम बहुत प्यारी हो और तुम्हें मैं सचिन सर के पास छोड़ के आने वाला हूँ.
रास्ते में उसने मुझे अपने सचिन सर के बारे में बताया.
अंशुल ने बताया- सचिन सर करीब 34 साल के हैं और बहुत बड़े बिजनेसमैन हैं, भारत में उनके कई बिजनेस हैं..
और सब कुछ बताया.
अंशुल ने यह भी बताया- सचिन सर की कभी शादी नहीं हुई है, एक बार शादी तय हुई थी पर जिस लड़की से उनकी शादी तय हुई थी, वो लड़की मंडप से अपने बॉयफ्रेंड के साथ भाग गई थी और उसके बाद सचिन सर ने कभी शादी नहीं की और अपने काम में लग गये.
करीब 45 मिनट में हम सचिन सर के घर पहुंच गये. उसे घर कहना शायद ठीक नहीं होगा, वो एक महल से काम नहीं था, घर के गेट पर ही 2 गार्ड खड़े थे.
गाड़ी अंदर गई, ड्राइवर ने घर के दरवाजे पर कार रोक दी. मैं और अंशुल गाड़ी से उतर के अंदर गये तो देखा एक बहुत बड़ा हॉल था जिसमें सोफे पर कोई आदमी बैठा था. देखने में तो 34 की उमर का सचिन नहीं लगा तो मुझे लगा कोई होगा… यह सचिन का छोटा भाई हो सकता है. उसका शरीर जिम जाने वाले लड़कों की तरह तना हुआ था और हाइट उसकी 5 फुट 11 इंच होगी.
हम जैसे ही थोड़ा करीब पहुंचे तो अंशुल ने बताया- ये ही सचिन सर हैं!
और फिर मुझे इंट्रोड्यूस करवाया.
मैंने घबराते हुए अपने काँपते हाथ से उनसे हाथ मिलाया.
उन्होंने हमें बैठने को कहा.
तभी अंशुल ने कहा- चलो, मैं चलता हूँ कल दस बजे तक आ जाऊँगा आपको लेने!
यह बोल कर अंशुल चला गया और सचिन अंदर कहीं चले गये.
थोड़ी देर बाड 2 चाईनीज या पहाड़ी सी दिखने वाली लड़कियाँ आई और मुझे कहा- चलो हमारे साथ!
और एक कमरे में ले गई, वो कमरा वैसा था जैसा मॉडेल्स या हीरो हेरोइन के तैयार होने के लिए होता है.
उन्होंने ने मुझे कहा- हम तुम्हें यहाँ दुल्हन की तरह तैयार करेंगे क्योंकि सचिन सर तुम्हें अपनी दुल्हन की तरह देखना चाहते हैं.
मैं समझ गई कि आज मेरी बिना शादी के सुहागरात मनेगी. मैं बहुत घबराई हुई थी.
उन्होंने मुझे एक कुर्सी पर बैठा दिया और फिर मेरी टीशर्ट और जीन्स उतार कर बैठने को कहा.
मैं बोली- मुझे बहुत शर्म आएगी आप दोनों के सामने!
तब उन्होंने समझाया कि वो भी लड़कियाँ ही हैं और शरमाने की कोई बात नहीं है.
मैंने उनकी बात मान ली और अपने कपड़े उतार दिए.
फिर उन्होंने मेरे वक्ष का साइज़ चेक किया और मेरे साइज़ से 1 नंबर छोटी ब्रा और पेंटी के 4-5 सेट मंगवा लिए. फिर वो दोनों मेरे हाथों पैरों की वैक्सिंग करने लगी.
उसके बाद उन्होंने मेरे हाथों पैरों पर मेहंदी लगाई.
फिर उन्होंने मेरा फेशियल किया और नहलाया और पूरा अच्छे से तैयार कर दिया. उन्होंने मेरी बुर पर से भी बाल पूरी तरह साफ कर दिए थे.
फिर उन्होंने मुझे एक डार्क ब्लू कलर की ब्रा और पेंटी पहना दी जो थोड़ी टाइट थी और मेरे शरीर को और उभार रही थी. मुझे जो पेंटी पहनाई थी वो भी डार्क ब्लू की थी जिसके आगे थोड़ा सा जाली वाला डिज़ाइन था.
मुझे एक लहंगा पहनाया गया और हाथ में कुछ चूड़ियाँ और दुल्हन वाला चूड़ा पहनाया और पैरों में पायल पहनाई. यहाँ तक कि उन्होंने मुझे गले में एक मंगल सूत्र पहनने को भी दिया.
मुझे पूरी तरह दुल्हन की तरह सज़ा दिया गया.
मैंने जब खड़े होकर खुद को शीशे में देखा तो खुद को एक बार यकीन नहीं हुआ कि मैं इतनी ज्यादा खूबसूरत लग रही थी.
फिर मुझे वो लोग एक कमरे में ले गये. कमरे में जाते ही मैंने देखा कि कमरे में बेड को फूलों से सजाया हुया था. मुझे उस बेड पर बैठा कर वो दोनों वहाँ से चली गई.
मैं बहुत डर रही थी कुछ समझ नहीं आ रहा था कि क्या हो रहा है और क्या होने वाला था. हालांकि मुझे पता था कि आज मेरे साथ क्या होने वाला है.
करीब 15 मिनट में सचिन कमरे में आए, दरवाज़ा बंद कर दिया और ए.सी. का टेंपरेचर 16 पर कर दिया. वो मेरे करीब आकर बैठ गये और फिर मेरा हाथ पकड़ कर कहा- आज रात तुम मेरी पत्नी हो, मुझे अपने पति की तरह प्यार करना है तुम्हें आज!
मैंने नज़रें नीचे झुका ली…
उन्होंने मुझे गले से लगाया और बेड पर लिटा दिया और वो भी मेरे पास ही लेट गये और मेरे हाथ को पकड़ लिया.
मैं बहुत घबरा रही थी. उन्होंने फिर मेरे माथे पर किस किया, फिर मेरी आँखों पर और फिर मेरे गाल पर!
जैसे ही वो मेरे लिप्स पर किस करने लगे, मैंने मुँह फेर लिया.
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