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Massage Girl in Khagaria: Premium Relaxation Services

Our site can help you find a professional massage girl in Khagaria who will help you relax in the best manner possible. We connect you with professional therapists who can offer you a massage that will make you feel better and more relaxed. The pros on our list are ready to provide you with a fantastic experience at your house or in one of their particular spots, whether you want to relax or get away from it all.

Introduction

Massage is currently one of the finest methods to relax your mind, body, and overall health. Our website makes it easy to locate the top massage services in Khagaria that meet your demands. This will be a one-of-a-kind and calming experience for you.

Tottaa wants to make it simple for clients to find the top masseuse. The Khagaria massage service providers on our list offer the greatest quality, comfort, and competence, whether you want a full-body massage or a massage for a particular location.

How Tottaa Helps Advertisers Reach More Customers

Tottaa is not only a list of masseuses, it’s also a secure location for them to show off what they can do. People in Khagaria who are seeking massage services may find them on our website. This makes them easier to find and gets them more appointments.

Advertisers may simply put up profiles, offer their services, and talk about pricing and discounts on our sites. This makes sure that the relevant people notice your Khagaria massage service, which makes it easier to obtain more customers.

Different Types of Massages We Offer

There are a lot of different types of massage services on our site, so you may choose one that works for you. You may choose the kind of treatment that works best for you, whether it’s profound rest or a particular type of therapy.

1. Swedish Massage

A calm and gentle way to ease muscular tension and improve blood flow. This Khagaria massage is perfect for you if you want to relax and forget about your concerns.

2. Deep Tissue Massage

This approach employs a lot of pressure to get to deeper muscle layers. It’s helpful for folks who have muscular discomfort or stiffness that won’t go away. There are specialists on our profiles of massage girls in Khagaria who are good at deep tissue treatments that function effectively.

3. Aromatherapy Massage

Calming massage strokes and essential oils are beneficial in making people feel improved both emotionally and physically. Most massage companies in Khagaria employ the use of custom oil preparations to make you feel good.

4. Thai Massage

A therapy that wakes you up by using a mix of regular massage, stretching, and compression. This traditional massage in Khagaria helps you relax, become more flexible, and get your mind and body back in harmony.

5. Hot Stone Massage

Heated stones are placed on various parts of the body to help with deep muscular tightness. People who want to feel good, relax, and help their muscles recover quickly can use this massage service in Khagaria

How to Book Our Massage Services

Tottaa makes it simple and fast to book. With our listings, you can see what kind of massage you want, read about the providers, see that they are free and then contact them directly. After you choose, you can book a massage in Khagaria at your convenient time and location. In order to get your desired massage services, apply the following simple steps:

Step 1: Browse Our Listings

Take a peek around our site to view a few massage professionals. Each listing gives you information about the many sorts of massages, how long they last, how much they cost, and where they are situated. This makes it easier to choose the finest ones.

Step 2: Compare and Shortlist

Examine the profiles carefully to compare how the services, talents, and reviews posted by customers differ. This phase makes sure you choose a business that has the style, pricing, and supply you desire.

Step 3: Connect with the Provider

When you have decided, use the information that you are offered so that you can contact them directly. One can communicate it to the massage giver thus making it understood what massage you want at what time and when.

Step 4: Confirm the Appointment

The date, time and place of the service, which could be your home, a hotel or the spa where the therapist may be found. You also need to agree on the payment method and any other accords prior to commencement of the course.

Step 5: Relax and Enjoy Your Massage

All you have to do on the day of the appointment is have your area ready for the house visit. The remainder will be handled by the expert. Take it easy and enjoy a massage that is made just for you.

Frequently Asked Questions

To locate a professional who can meet your needs, read our biography, reviews and advertising.

Yes, many of the therapists on our site will come to your house so you may feel safe and at ease.

You may pick based on talents since most adverts provide their qualifications in their profiles.

It would be advisable to make a reservation earlier to guarantee that you would be able to get a massage, particularly against the prevalent services of massage.

Not at all. Tottaa exclusively connects users with service providers. The doctor gets to choose how to handle payment.

Read Our Top Call Girl Story's

प्रेषिका : संजू Antarvasna

मैं 29 साल Antarvasna की एक स्वस्थ और मस्त औरत हूँ। मेरी शादी 1998 में एक मध्यम वर्गीय परिवार में हुई।

बात उन दिनों की है जब शादी के कुछ दिनों बाद मेरे पति जालंधर अपनी नौकरी पर चले गए जो किसी प्राइवेट कंपनी में काम करते हैं। उनके जाने के कुछ दिन तो ठीक-ठाक रहा लेकिन फिर मेरी कामेच्छा बढ़ने लगी और मेरा चुदवाने का मन होने लगा।

मेरी ससुराल में सास-ससुर, जेठ-जेठानी और उनके तीन बच्चे थे, कोई और नहीं था।

तभी दो दिन बाद मेरा चचेरा देवर अपने घर आया जो कहीं बाहर नौकरी करता था। उसकी शादी अभी नहीं हुई थी। चचेरा देवर बहुत ही मिलन सार है। वह जब भी घर आता तो सभी लोगों से जरूर मिलता है। चूँकि मेरी शादी में वह नहीं आ पाया था इसलिए मुझसे भी मिलने चला आया।

जब मैंने पहली बार उसे देखा तो मैं खुश हो गई मेरी नीयत उसी समय बिगड़ गई। लेकिन मैं उससे अनजान थी और वो भी मुझसे पहली ही बार मिला था। थोड़ी देर तक हम दोनों बातचीत करते रहे और थोड़ी देर बाद उसने मजाक किया- भाभी अगर आपकी कोई बहन और हो तो मेरा भी नंबर है।

और कुछ देर के बाद वह चला गया। मैं उसके बारे में रात भर सोचती रही।

अगले दिन दोपहर में वह फिर मिलने आया, मेरी सास कहीं बाहर गई थी। घर में जेठानी अपने बच्चों को सुला रही थी। वह मेरे पास आया और बैठ कर बातें करने लगा। मैंने देखा कि उसका ध्यान मेरे ब्लाउज पर है। जहाँ से वह मेरी चूचियों को देख रहा था।

मैंने पूछा- क्या देख रहे हो राजीव ?

वह चौंक गया और बोला कुछ नहीं। मेरा मन तो पहले से चुदवाने को था, मैंने अपनी साड़ी थोड़ी खिसकाई, उसे मजा आ गया और वह बदमाश हो गया।

उसने तुरंत मेरी चूचियाँ पकड़ ली और मैं राजीव से लिपट गई। उसने मेरे होठों को चूमना शुरु कर दिया। मैं गर्म होने लगी। मेरे पति का लंड मोटा तो था लेकिन वह जल्द ही झड़ जाते थे। मैं चुदवा कर भी प्यासी थी। अब मेरा हाथ राजीव की पैन्ट की जिप की तरफ बढ़ा। उसका लंड बाहर आने को बेताब हो रहा था। उसने मेरे ब्लाउज के हुक खोल दिए और ब्रा के ऊपर से मेरी चूचियाँ मसलने लगा। मुझे मजा आ रहा था, मैं जोर जोर से उसका लंड मसल रही थी।

उसने धीरे से मेरा ब्लाउज और साड़ी दोनों ही उतार दिए और मैंने उसकी पैंट और टी-शर्ट।

अब राजीव केवल अंडरवियर में था और मैं पेटीकोट और ब्रा में। मैंने अपने पेटीकोट को खुद ही उतार दिया। राजीव ने मेरी चूचियाँ दबाते-दबाते मेरी चूत में हाथ लगाया, मेरी चूत गीली थी। राजीव की सांसें तेज हो गई। वो मेरी ब्रा और पैंटी उतार कर मुझसे जोर से लिपट गया।

मैंने उसका अंडरवियर उतार दिया और बोली- देवर जी, जल्दी करो मेरा धैर्य जवाब दे रहा है।

उसने मुझे बिस्तर पर लिटाया और खुद मेरे ऊपर लेट कर अपने लंड का गुलाबी सुपाड़ा मेरी चूत की फांकों में डालने की कोशिश करने लगा लेकिन बिना अनुभव के उसका लंड मेरी चूत में नहीं जा सका। तब मैंने उसकी मदद की और उसका लंड पकड़ कर मैंने सही रास्ता दिखाया।

रास्ता पाते ही राजीव तो बड़ा ही ताकतवर निकला और मुझे धकाधक चोदने लगा। मुझे मजा आने लगा राजीव ने 40 मिनट तक मेरी चुदाई की, मेरी चूत का उसने पूरा मजा लिया। इस दौरान मैं दो बार झड़ चुकी थी।

मैंने इसके बाद राजीव से कई बार चुदवाया जो मैं अगली कहानी में बताउंगी कि मेरे देवर ने मेरी प्यास कैसे बुझाई। Antarvasna

Antarvasna

रात के बारह बज़ चुके Antarvasna थे। छोटे से गाँव राजापुर में बहुत ही सन्नाटा छ गया था। राजापुर गरीब की बस्ती है। इसी बस्ती के एक कोने में हरिया का घर है। हरिया की उमर 45 साल की है। और उसकी बीबी की उमर 40 साल की है। हरिया एक गरीब किसान है।

हरिया अपने घर के एक अँधेरी कोठरी में रोज़ की तरह अपनी बीवी की चुदाई में मशगूल था। हरिया अपनी बीबी की चूत में लंड डाल कर काफ़ी देर तक उसकी चुदाई कर रहा था। उसकी बीबी मुन्नी बिना किसी उत्तेजना के अपने दोनों पैर फैला कर यूँ ही पड़ी थी जैसे कि उसे हरिया के बड़े लंड की कोई परवाह ही न हो या फिर कोई तकलीफ़ ही न हो रही है। केवल हर धक्के पर आह आह की आवाज निकल रही थी।
मुन्नी की बुर कब का पानी छोड़ चुकी थी। थोड़ी ही देर में हरिया के लंड से माल निकलने लगा तो उसने भी आह आह कर के मुन्नी की चूची पर अपना मुँह रख दिया। मुन्नी की बेजान चूची को वो मुँह में ले कर चूसने लगा। उसने अपना लंड मुन्नी के बुर से निकाला और मुन्नी के बगल में लेट गया।

उसने अपनी बीडी जलाई और पीने लगा। मुन्नी ने उसके लटक रहे लंड को अपने हाथों में ले लिया और उसको खींच-तान करने लगी। लेकिन अब हरिया के लंड में कोई उत्साह नही था। वो एक बेजान लता की तरह मुन्नी के हाथों का खिलौना बना हुआ था।

मुन्नी ने कहा- जानते हो जी ! आज क्या हुआ?
हरिया ने कहा- क्या?

मुन्नी ने कहा- रोज़ की तरह आज मैं और मालती ( मुन्नी की बहू) सुबह शौच करने खेत गए । वहाँ हम दोनों एक दूसरे के सामने बैठ कर पाखाना कर थे…
तभी मैंने देखा कि मालती अपनी बुर में ऊँगली घुसा कर मुठ मारने लगी।
मैंने पूछा- यह क्या कर रही है तू?

तो उसने मेरी पीछे की तरफ़ इशारा किया और कहा- जरा उधर तो देखो अम्मा।
मैंने पीछे देखा तो एक कुत्ता एक कुतिया पर चढ़ा हुआ है।
मैंने कहा- अच्छा, तो यह बात है।

मालती ने कहा- देख कर बर्दाश्त नहीं हुआ इसलिए मुठ मार रही हूँ।
मैंने कहा- जल्दी कर, घर भी चलना है।
मालती ने कहा- हाँ अम्मा, बस अब निकलने ही वाला है।

और एक मिनट हुआ भी ना होगा कि उसकी बुर से इतना माल निकलने लगा कि एक मिनट तक निकलता ही रहा।
मैंने पूछा- क्यों री, कितने दिन का माल जमा कर रखा था?
उसने कहा- कल दोपहर को ही तो निकाला था।
मैंने भी सोचा- कितना जल्दी इतना माल जमा हो जाता है।

हरिया ने कहा- वो अभी जवान है ना। और फिर उसकी गर्मी शांत करने के लिए अपना बेटा भी तो यहाँ नहीं है ना। कमाने के लिए परदेस चला गया। अरे मैं तो मना कर रहा था। तीन महीने भी नहीं हुए उसकी शादी को और अपनी जवान पत्नी को छोड़ कमाने बम्बई चला गया। बोला, अच्छी नौकरी है। अभी बताओ चार महीने से आने का नाम ही नहीं है। बस फोन कर के हालचाल ले लेता है। अरे फोन से बीबी की गर्मी थोड़े ही शांत होने वाली है? अब उसे कौन कहे ये सब बातें खुल के?

थोड़ी देर शांत रहने के बाद मुन्नी फिर से हरिया के लंड को हाथ में ले कर खेलने लगी।

हरिया ने मुन्नी से पूछा- क्या तुम रोज़ ही उसके सामने बैठ के पाखाना करती हो?
मुन्नी ने कहा- हाँ।
हरिया- तब तो तुम दोनों एक दूसरे की बुर रोज़ देखती होगी।

मुन्नी- हाँ, बुर क्या पूरा गांड भी देखी है हम दोनों ने एक दूसरे की। बिल्कुल ही पास बैठ कर पाखाना करते हैं।
हरिया- अच्छा, एक बात तो बता। उसकी बुर तेरी तरह काली है या गोरी?

मुन्नी- पूरी गोरी तो नहीं है लेकिन मेरे से साफ़ है। मुझे उसकी बुर पर के बाल बड़े ही प्यारे लगते हैं। बड़े बड़े और लहरदार रोएँ की तरह बाल। एक बार तो मैंने उसके बाल भी छुए हैं।

हरिया- बुर कैसी है उसकी?
मुन्नी- बुर क्या है लगता है मानो कटे हुए टमाटर हैं। एकदम फुले फुले लाल लाल।

अचानक मुन्नी ने महसूस किया कि हरिया का लंड खड़ा हो रहा है। वो समझ गई कि हरिया को मज़ा आ रहा है। वो बोली- अच्छा, एक बात तो बताओ।

हरिया बोला- क्या?
मुन्नी- क्या तुम उसे चोदोगे?
हरिया- यह कैसे हो सकता है?

मुन्नी- क्यों नहीं हो सकता है? वो जवान है, अगर गर्मी के मारे किसी और के साथ भाग गई तो क्या मुँह दिखायेंगे हम लोग गाँव वालों को? अगर तुम उसकी गर्मी घर में ही शांत कर दो तो वो भला किसी दूसरे का मुँह क्यों देखेगी। जब वो किसी कुत्ते-कुतिया को देख कर मुठ मार सकती है तो वो किसी के साथ भी भाग सकती है। कितना नजर रख सकते हैं हम लोग? थोड़े दिन की तो बात है, फिर हमारा बेटा मोहन उसे अपने साथ बम्बई ले जाएगा तब तो हमें कोई चिंता करने की जरूरत तो नहीं है।

हरिया- क्या मालती मान जायेगी?

मुन्नी ने कहा- कल रात को मैं उसे तुम्हारे पास भेजूंगी। उसी समय अपना काम कर लेना।

हरिया का लंड पूरा जोश में आ गया। उसने मुन्नी की बुर में अपना लंड डालते हुए कहा- तूने तो मुझे गरम कर दिया रे।

मुन्नी ने मुस्कुरा कर अपनी दोनों टांगें फैला दी और आह आह की आवाज़ निकालने लगी। इस बार वो जोर जोर से आवाज निकाल रही थी। हालंकि उसे कोई ख़ास दर्द नहीं हो रहा था लेकिन वो जोर जोर से बोलने लगी- आह आह, धीरे धीरे करो ना। दर्द हो रहा है।

यह आवाज़ बगल के कमरे में सो रही उसकी बहू मालती को जगाने के लिए काफ़ी थी। चुदाई की मीठी दर्द भरी आवाज़ सुन कर मालती की बुर चिपचिपी हो गई। उसने अपने पिया मोहन के लंड को याद करके अपनी बुर में ऊँगली डाली और दस मिनट तक ऊँगली से ही बुर की गत बना डाली।

सुबह हुई, दोनों सास-बहू खेत गई, दोनों एक दूसरे के सामने बठी कर पाखाना कर रही थी।

मालती अपनी सास मुन्नी की बुर देख कर बोली- अम्मा, तुम्हारा बुर कुछ सूजी हुई लग रही है।

मुन्नी ने हंसते हुए कहा- यह जो तेरे ससुर जी हैं न, बुढापे में भी नहीं मानते। देख न कल रात को इतना चोदा कि अभी तक दुःख रहा है।

मालती ने कहा- एक बात पूछूं अम्मा?
मुन्नी- हाँ, पूछ न।
मालती- बाबूजी का लंड खड़ा होता है अभी भी?

मुन्नी- हाँ री। खड़ा क्या? लगता है बांस है। जब वो मुझे चोदते हैं तो लगता है कि अब मेरी बुर तो फट ही जायेगी। एक हाथ बराबर हो जाता है उनका लंड खड़ा हो के।
मुन्नी ने देखा कि मालती ने अपनी ऊँगली अपने बुर में घुसा दी है।

मुन्नी ने पूछा- क्या हुआ तुझे? क्या फिर कोई कुत्ता है यहाँ?

मालती बोली- नहीं अम्मा, मुझे तुम्हारी बातें सुन के गर्मी चढ़ गई है। इसे निकालना जरूरी है।

मुन्नी बोली- सुन, तू एक काम क्यों नहीं करती? आज रात तू अपने ससुर के साथ अपनी गर्मी क्यों नहीं निकाल देती?
मालती चौंक कर बोली- यह कैसे हो सकता है? वो मेरे ससुर हैं।

मुन्नी बोली- अरे तेरी जरूरत को समझते हुए मैंने ऐसा कहा। तुझे इस समय किसी मर्द की जरूरत है। अब जब घर में ही मर्द मौजूद हो तो क्यों नहीं उसका लाभ उठाया जाए।

मालती का मन अब डोल चुका था, वो बोली- कहीं बाबूजी नाराज हों गए तो?

मुन्नी बोली- अरे तू रात को उनके पास चले जाना। मैं बहाना बना के भेज दूँगी। धीरे धीरे रात के अंधेरे में जब तू उनको छुएगी ना तो तू भूल जायेगी कि तू उनकी बहू है और वो भूल जायेंगे कि वो तुम्हारे ससुर हैं।

यह सुन कर मालती की बुर में मानो तूफ़ान आ गया। उसकी बुर से इतना पानी निकलने लगा कि मुन्नी को लगा कि यह पेशाब कर रही है। अब मुन्नी खुश थी। दोनों तरफ़ मामला सेट था।

रात हुई, खाना-वाना ख़त्म कर मुन्नी हरिया के कमरे में गई और बता दिया कि मैं मालती को भेज रही हूँ। उसको भी समझा दिया है। तुम सिर्फ़ थोड़ी पहल करना। वो तो कुत्ते से भी चुदवाने के लिए तैयार बैठी है। तुम तो इंसान ही हों।

कह कर वो बाहर चली आई और जोर से बोली- बहू, ओ बहू, सुन आज मेरी तबीयत कुछ ठीक नहीं है। तू जरा अपने ससुर जी को तेल तो लगा दे।

फिर दरवाजे के बाहर से हरिया को बोली- सुनते हो जी, मैं जरा छत पर सोने जा रही हूँ। मालती बहू से तेल लगवा लेना।

मालती जैसे ही दरवाजे के पास आई, मुन्नी ने उससे धीरे से कहा- देख मैं बहाना बना कर तुम्हें उनके पास भेज रही हूँ। मालिश करते करते उनके लंड तक अपना हाथ ले जाना। शरमाना नहीं। अगर उनको बुरा लगे तो कह देना कि अंधेरे में दिखा नहीं। अगर कुछ नहीं बोले तो फिर हाथ लगाना। जब देखो कि कुछ नहीं बोल रहे हैं तो समझना कि उन्हें भी अच्छा लग रहा है। ठीक है ना? अब मैं चलती हूँ।

कह कर मुन्नी छत पर चली गई। इधर मालती हाथ में तेल की शीशी लिए हरिया के कमरे में आई।

हरिया ने कहा- आजा, वैसे तो तेल मालिश की जरूरत नहीं थी, लेकिन आज मेरा पैर थोड़ा सा दर्द कर रहा है इसलिए मालिश जरूरी है।

मालती हरिया के बिस्तर पर बैठ गई। कमरे में एक छोटी सी डिबिया जल रही थी। जो की पर्याप्त रोशनी के लिए अनुकूल नहीं थी।

मालती ने कहा- कोई बात नहीं, मैं आपकी अच्छे से मालिश कर देती हूँ। आप ये लूंगी उतार ले।
हरिया ने कहा- बहू, जरा ये डिबिया बुझा दे क्योंकि मैंने लूंगी के अन्दर छोटी सी लंगोट ही पहन रखी है।

मालती ने डिबिया बुझा दी। अब वहां घुप अँधेरा छा गया। सिर्फ़ बाहर की चांदनी रात की हल्की रोशनी ही अन्दर आ रही थी। हरिया ने लूंगी उतार दी। मालती की सांसें तेज़ हों गई। वो तेल को हरिया के पैरों में लगाने लगी। धीरे धीरे वो हरिया की जांघों में तेल लगाने लगी। धीरे से वो जानबूझ कर हरिया के लंड तक अपना हाथ ले गई। हरिया ने कुछ नहीं कहा। मालती ने दुबारा हरिया के लंड पर हाथ लगाया।

हरिया ने कहा- बहू, तुम्हें गर्मी लग रही होगी। तुम अपनी साड़ी खोल दो ना। वैसे भी तेल लगने से साड़ी ख़राब हों सकती है।

मालती ने कहा- बाबूजी, साड़ी के नीचे मैंने पेटीकोट नही पहना है। सिर्फ़ पैंटी पहन रखा है। इसलिए मैं साड़ी नहीं खोल सकती।

हरिया ने कहा- तो क्या हुआ? वैसे भी अंधेरे में मैं तुम्हें देख थोड़े ही पा रहा हूँ जो तुम यूँ शरमा रही हों?

मालती तो यही चाहती थी, उसने अपनी साड़ी खोल कर एक किनारे रख दी और तेल को वो जांघों और लंड के बीच लगाने लगी। जिससे वो बार बार हरिया के अंडकोष पर हाथ लगा सकती थी। हरिया ने जब देखा कि बात लगभग बन चुकी है, उसने अपनी लंगोट की डोरी को कब खोल दिया, मालती को पता भी ना चला। धीरे धीरे जब वो हरिया के अंडकोष पर हाथ फेर रही थी तो उसी के हाथ से उसकी लंगोट हट गई।

लंगोट हटने पर मालती पूरी गरम हो गई। अब वो हरिया के लंड को छूने की कोशिश कर रही थी। धीरे धीरे उसने लंड पर हाथ लगाया और हटा लिया। हरिया का लंड सोया हुआ था। लेकिन ज्यों ही मालती ने हरिया का लंड छुआ, मालती के जिस्म में एक सिरहन सी दौड़ गई। अब वो दुबारा अपना हाथ हरिया के दूसरे जांघ पर इस तरह ले गई जिससे उसकी कलाई हरिया के लण्ड को छूती रहे। हरिया भी पका हुआ खिलाड़ी था। उसका लंड जल्दी खड़ा होने वाला नहीं था, वो बोला- बहू, तू थक गई होगी। आ जरा लेट जा।

उसने लगभग जबरदस्ती बहू को पकड़ कर अपने बगल में लिटा दिया और उसके चूची पर हाथ रख के बोला- इसे खोल दे ! बहुत गर्मी है।

मालती ने अपने ब्लाउज का हुक खोल दिया। हरिया ने ब्लाउज को मालती के चूची पर से अलग कर दिया और चूची को छूने लगा, बोला- अरे तुमने अन्दर ब्रा नही पहन रखा है? खैर कोई बात नहीं, अब गर्मी तो नहीं लग रही है न?

वो मालती के चूची को मसलने लगा, बोला- तेरी चूची तो एक दम सख्त है। मैं तेरी चूची छू रहा हूँ, तुझे बुरा तो नहीं लग रहा है न?

मालती बोली- नहीं, आप मेरे साथ कुछ भी करेंगे तो मैं बुरा नहीं मानूंगी।
हरिया ने कहा- शाबाश बहू, यही अच्छी बहू की निशानी है। बोल तुझे क्या चाहिए?
मालती- बाबूजी, मुझे कुछ नही चाहिए, सिर्फ़ आपका लंड छूना चाहती हूँ।
हरिया- एक शर्त पर। तू भी मुझे अपनी बुर छूने देगी।

मालती ने आव देखा ना ताव, एक झटके में अपना पैन्टी उतार फेंकी। हरिया ने नीचे जा कर मालती की बुर को पहले तो छुआ फिर मुँह में लेकर चूसने लगा।

मालती बोली- ऐसे मत चूसिये, मैं मर जाऊंगी।

हरिया उठ खड़ा हुआ और मालती के हाथ में अपना लंड थमा दिया। मालती के हाथ मानो कोई खजाना लग गया हो। वो हरिया के लंड को कभी चूमती कभी खेलती। काफी देर यह करने के बाद बोली- बाबूजी, इसको मेरी बुर में एक बार डाल दीजिये न।

हरिया ने अपने लटके हुए लंड को हाथ से पकड़ कर मालती के बुर में घुसा दिया। मालती की बुर में हरिया का लंड जाते ही फुफकार मारने लगा और मालती की बुर में ही वो खड़ा होने लगा। मालती- बाबूजी ये क्या हो रहा है? जल्दी से निकाल दीजिये।

हरिया- कुछ नहीं होगा बहू।

अब हरिया का लंड पूरी तरह से टाइट हो गया। मालती दर्द से छटपटाने लगी। उसे यह अंदाजा ही नहीं था कि जिसे वो कमजोर और बूढ़ा लंड समझ रही थी, वो बुर में जाने के बाद इतना विशालकाय हो जाएगा।

हरिया ने मालती को चोदना चालू किया। पहले दस मिनट तक तो मालती बाबूजी बाबूजी छोड़ दीजिये कहती रही। लेकिन हरिया ने नहीं सुना, वो धीरे धीरे उसे चोदता रहा। दस मिनट के बाद मालती की बुर थोड़ी ढीली हुई। अब उसे भी अच्छा लग रहा था। दस मिनट और हरिया ने मालती की जम के चुदाई की। तब जाकर हरिया के अन्दर का पानी बाहर आने को हुआ तो उसने अपना लंड मालती की बुर से निकाल के मालती के मुँह में लगा दिया, बोला- पी जा।

मालती ने हरिया के लंड को मुंह में ले कर ज्योंही दो-तीन बार चूसा कि हरिया के लंड से तेज़ धार निकली जिससे मालती का पूरा मुँह भर गया। मालती ने सारा का सारा माल गटक लिया।

आज जाकर मालती की गर्मी शांत हुई। उसके बाद वो रोज़ ही अपने ससुर के साथ ही सोने लगी। हाँ दो-तीन दिन में उसकी सास मुन्नी भी साथ सोने लगी। अब हरिया एक तरफ करवट ले कर बीबी को चोदता तो दूसरी तरफ़ करवट ले कर अपनी बहू मालती को। Antarvasna

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हैलो रीडर्स, आई एम सुमित बैक वंस अगैन Hindi sex stories आई एम २४ इयर्स ओल्ड एंड विद ए गुड फिज़िक & गुड मशीन साइज़। बात तब की है जब मैं कॉलेज में था एमए फ़ाइनल कर रहा था और कॉलेज में फेस्ट चल रहा था। निधि मेरी बहुत अच्छी दोस्त थी और मैं उसे दिल ही दिल में चाहता भी बहुत था लेकिन कभी कहने की हिम्मत नहीं होती थी। हम दोनों खूब साथ कॉलेज में रहते थे बात चीत करते थे लेकिन इससे ज़्यादा न कभी मैंने न कभी उसने ही कोई पहल करी। फेस्ट में हम दोनों एक्टर ऐक्ट्रेस का रोल कर रहे थे। नाटक शाम को ५ बजे होना था और हम १ बजे से ही रिहर्सल कर रहे थे। लगभग २ घंटा पहले मेक अप करके हम दोनों को थोड़ी देर डाइरेक्टर ने हमें एक ही कमरे में छोड़ दिया और डाइलोग बोल कर देखने को कहा। उसने एक आदिवासी की साड़ी पहनी थी और मैंने एक धोती और एक फटा हुआ बनियान पहना हुआ था क्योंकि मैं नाटक में एक मजदूर और वो मेरी बीवी का रोल कर रही थी।

नाटक की प्रक्टिस में हम दोनों को एक सीन में डांस करना था मैंने उसकी कमर में हाथ डाला और उसने मेरी कमर में हाथ डाला और हमने डांस करना शुरू किया। उसके बाद एक बेंच से टकरा कर वो थोडी सी लड़खड़ायी और उसकी साड़ी का पल्लू नीचे गिर गया। अचानक मेरी नज़र उसके बूब्स पर चली गई जो ब्लाउज़ का गला गहरा होने की वजह से साफ साफ दिखाई पड़ रहे थे। उसका रंग इतना गोरा था कि मानो दूध से भी सफ़ेद। साइज़ तो बस एक दम परफेक्ट। इतना परफेक्ट कि कोई भी देखे तो बस देखता ही रह जाए। शायद ३६-२६-३४ होगा। मेरी निगाह उसकी छाती से ही अटकी रह गई। तभी मैंने देख कि निधि अपने साड़ी का पल्लू उठाने की बजाय मेरी तरफ़ ही देखे जा रही है। मुझे लगा कि शायद ग्रीन सिग्नल मिल रहा है मैंने चेहरा ऊपर उठा कर उसके लिप्स पर किस करना शुरू कर दिया। उसने कोई विरोध नहीं किया। मैं किस और ज़्यादा डीप करता गया और फ़िर अपनी जीभ उसके मुंह मी दे दी और फ़िर उसके जीभ मेरे मुंह में भी आ गई। वो भी बहुत एन्जॉय कर रही थी।

मैंने मौका देखते हुए उसके बूब्स को दबाना शुरू कर दिया और ब्लाउस के ऊपर से ही पूरा मज़ा लेने के बाद मैंने ब्लाउज़ के अन्दर हाथ डालने की बजाय उसे पीछे से बांहों में भर कर उसकी गांड दबाने लगा। मैंने वो भी मुझे बिल्कुल मना करने की बजाय मेरा साथ दे रही थी मैंने अब देर न करते हुए उसकी साड़ी को उठाया और उसकी गोरी गोरी टांगो को देख कर मेरी आँख जैसे खुली की खुली ही रह गई। मैं उसकी टांगों को नीचे से चूमता हुआ ऊपर तक गया और उसकी काले रंग की पैंटी को किस किया और फ़िर देर न करते हुए उसकी पैंटी को उतार कर उसकी चूत को चाटना शुरू कर दिया। वो और ज़्यादा गरम होती जा रही थी।

मैंने अब देर न करते हुए अपनी धोती खोल कर अपने लंड को आज़ाद किया जिसका कच्छे में बुरा हाल हो रहा था। ८ इंच लंबा और ३ इंच मोटा लंड देखते ही उसके होश उड़ गए और वो कहने लगी कि नहीं सुमित प्लीज़ मेरे साथ वो मत करना मुझे बहुत दर्द होगा। मैंने कहा डरो मत मेरी जान मैं बिल्कुल दर्द नहीं करूँगा मगर वो मान ही नहीं रही थी। तो मैंने उसको कहा कि क्या तुम मेरे इस हथियार को अपने मुंह में ले सकती हो? उसने पहले तो मना किया पर फ़िर मेरे बार बार प्लीज़ कहने पर वो मान गई अब वो मेरे लंड को चूस रही थी और मैं मानो जन्नत में था। उससे खूबसूरत लड़की को मैंने अपनी ज़िंदगी में नहीं देखा था और वो मेरा लंड चूस रही थी।

थोड़ी देर के बाद वो पूरे मज़े के साथ चुसाई का काम करने लगी और उसे भी खूब मज़ा आ रहा था। अब मैंने उसको कहा कि जानू एक बार असली खेल भी खेल लेते हैं फ़िर बहुत मज़ा आएगा। वो फ़िर भी घबरा रही थी लेकिन अब की बार थोड़ा सा ही समझाने पर वो तुरंत मान गई और मैंने मुंह से ढेर सारा थूक निकाल कर अपने लंड और उसकी चूत पर लगाया और अपना काम धीरे धीरे शुरू किया। उसे बहुत दर्द हो रहा था। मगर अब वो कुछ बोल भी नहीं सकती थी क्योंकि अगर वो थोड़ी से भी आवाज़ बाहर निकालती तो बाहर से कोई भी आ सकता था। ऐसे में मैंने अपने होठ उसके होठों पे रख दिए और चुदाई कार्यक्रम शुरू कर दिया। थोड़ी देर में उसे भी मज़ा आने लगा और फ़िर लगभग १५ मिनट की मजेदार चुदाई के बाद हम दोनों ने अपना अपना पानी छोड़ दिया। उसके बाद तो मैंने लगभग हर हफ्ते उसे उसके घर पर जाकर चोदा।

वैसे वो आज भी मेरी बेस्ट फ्रेंड है पर अब उसकी शादी हो गई है। Hindi sex storie हालांकि शादी को २ महीने ही हुए हैं पर हो सकता है कि मेरा प्रोग्राम अभी भी चलता रहे।

Hindi Sex Stories

नमस्ते दोस्तो ! मेरा Hindi Sex Stories नाम खुश है, मैं आपसे अपना पहला सेक्स अनुभव बाँटने जा रहा हूँ।

अभी तो मैं मोदीनगर में रहता हूँ, लेकिन यह बात तब की है जब मैं मुज़फ्फरनगर से ग्रेजुएशन कर रहा था।

मेरी गर्लफ्रेण्ड का नाम कशिश है। वो ५ फीट ५ इंच की गोरी, लम्बी, सुडौल बदन, फिगर ३४-२४-३६ है, और मुझे जो सबसे अच्छा लगता है, वो है उसके होंठ, बिल्कुल एन्जेलेना जॉली जैसे हैं, जिनसे मैं खेलता रहता और चूसता रहता।

मैं भी कम स्मार्ट नहीं हूँ दोस्तों। मैं ६ फीट लम्बा, गोरा और हैंडसम हूँ। मैं अपने कॉलेज का प्लेब्वॉय हुआ करता था। किसी भी लड़की को कोई भी काम पड़ता, मुझे ही याद करती, “कहाँ है मेरा खुश ?”

जब मेरा प्रथम वर्ष पूरा हुआ तो मेरी नज़र में एक जूनियर आई, उसका नाम कशिश था, जैसा नाम वैसी शक्ल और खूबसूरती भगवान ने दी थी उसे! मैंने सोच लिया, मैं उसकी अपनी गर्लफ्रेण्ड बनाऊँगा, और मैंने बनाया भी।

जो भी हमारे अन्तर्वासना के पाठक मुज़फ्फरनगर से हैं, वो सभी रामलीला ग्राउंड का नाम ज़रूर जानते होंगे, ये एक जंगली इलाका है जो पर्यटक-स्थल भी है, वहाँ जंगली जानवर आदि भी हैं। रामलीला ग्राउंड प्रेम-परिन्दों के लिए यानि कि युगलों के लिए स्वर्ग है। लड़के-लड़कियाँ दिनभर वहाँ जोड़े बनाकर प्रेमालाप में तल्लीन रहते हैं – बिना रोक-टोक ! कोई पूछने वाला नहीं होता, कौन क्या कर रहा है और क्यों कर रहा है।

मैं भी अपनी जानेमन को लेकर रामलीला ग्राउंड गया। बाईक पार्क करने के बाद हम प्रेम-परिन्दे अपने लिए एक घोंसला तलाश करने लगे। काफ़ी ऊपर जाने के बाद मुझे एक जगह मिली, जहाँ मैं आराम से अपनी कशिश के साथ अपने प्यार के ग़ुल को ग़ुलिस्ता बना सकता था, और वहाँ किसी को पता भी नहीं चलता, कि कोई बैठा भी है। मैं उसे अपनी बाँहों में लेकर बैठ गया। हम दोनों इधर-उधर की बातें करने लगे, और धीरे-धीरे मैं अपने हाथों से उसकी चूचियाँ दबाने लगा। वो भी मेरे हाथों को पकड़ कर अपनी चूचियाँ और ज़ोरों से दबवाने लगी।

फिर मैंने पीछे से उसके गले और कंधों पर चूमने लगा और उसके मुँह से सिसकारियाँ निकलने लगीं। फिर मैंने उसका टॉप उतार दिया, वो गुलाबी रंग की ब्रा में थी, सच में क्या क़यामत लग रही थी वो उस समय, जैसे स्वर्ग की कोई अप्सरा धरती पर आ गई हो। मैंने उसकी दोनों चूचियों को अपने दोनों हाथों में भर लिया और मसलने लगा।

वो मेरी बाँहों में कसमसाने लगी, इसके बाद मैंने ऊपर से ही उसकी चूचियों को चूम लिया और घुण्डियों को चूसा और काटा। फिर उसने मुझसे मुँह से ब्रा खोलने के लिए बोला, और मैंने अपने दाँतों से उसकी ब्रा की स्ट्रिप खोली और एक तरफ फेंक दी। अब मेरे सामने उसकी उभरती जवानी थी जिसे मैंने अपने हाथों और मँह में भर लिया। एक हाथ से मैं उसकी बाईं ओर की चूची को दबाने लगा और दाईं तरफ की चूची को अपने मुँह में भर कर चूसने लगा। उसके मुँह से और ज़ोरों की आवाज़ें निकलने लगीं।

फिर मैं अपनी जीभ से उसकी घुण्डियों को सहलाने लगा, उसे ज़ोर का झटका लगा और मैंने उसकी घुण्डियों को दाँतों से पकड़ लिया और हल्के से काट लिया और दूसरी घुण्डी को ज़ोर से मसल दिया।

वो मेरी बाँहों में तड़प उठी।

अब उसने मेरी शर्ट के बटन खोलने चालू किए। मैंने अन्दर बनियान नहीं पहनी थी। फिर वो पागलों की तरह बेतहाशा मेरे छाती पर चूमने लगी, बालों से खेलने लगी, और फिर अपने होंठों से मेरे निप्पलों को चूसने लगी। मैं अब उत्तेजित हुआ जा रहा था और वो अपने गीले होंठों से मुझे चूमे जा रही थी।

मैंने उसे ज़ोर से अपनी बाँहों में भर लिया।

इसके बाद मैंने उसे अपने नीचे लिटा दिया और उसके होंठों को चूसने लगा। हम दोनों के मुँह से सिसकारियाँ निकलने लगीं। उसने अपनी आँखें बन्द कर लीं और हम ऐसे ही आनन्द लेते रहे। फिर मैं अपनी जीभ उसके मुँह में ले गया और वो उसे चूसने लगी – ज़ोरों से !

मैं अपनी जीभ उसके मुँह में चारों ओर फिरा रहा था और फिर उसकी जीभ पर घुमाने लगा। इससे अजीब नशा छा रहा था हम दोनों पर ! दोनों डूबे जा रहे थे एक-दूसरे में ! साथ-साथ में मैं उसकी चूचियों को भी दबाए जा रहा था, जिससे वो और भी ज़्यादा उत्तेजित हो गई थी।

इस तरह हमने क़रीब 15 मिनट तक खूब प्यार किया।

फिर मैंने उसके कान के लटकन से खेलना शुरु किया, उसे अपने दाँतों में लिया, अपनी जीभ से चाटा और फिर धीरे-धीरे नीचे आने लगा। अब मैं उसकी चूचियों के ऊपरी हिस्सों पर किस करते हुए चूचियों के बीच की घाटी पर चूम रहा था। फिर नीचे उसकी नाभि पर चूमने लगा। इतनी देर में ही वो काफ़ी गरम हो गई थी, और सेक्सी आवाज़ें निकालने लगी थी।

फिर मैंने उसकी जीन्स की ज़िप खोल कर जीन्स उतार दी। अब उसके पूरे बदन पर कपड़े के नाम पर बस एक पैन्टी रह गई थी, वो भी ब्रा की तरह ही गुलाबी रंग की थी। मैं पैन्टी के ऊपर से ही उसकी चूत को सहलाने लगा। पैन्टी पूरी गीली हो चुकी थी, मैंने पैन्टी को निकाला और उसकी चूत के आस-पास सहलाने लगा। क्या चूत थी ! बिल्कुल गुलाबी, एक भी बाल नहीं। मन कर रहा था, खा जाऊँ उसकी चूत को ! उसे देखकर मुँह में पानी आ गया।

वो बोलने लगी- प्लीज़ ! अब मत तड़पाओ।

मैंने कहा, “अभी तो बहुत समय है स्वीटहार्ट ! थोड़ा सब्र करो, और पहले इन्हीं बातों से आनन्द उठाओ, तभी सेक्स का पूरा मज़ा आएगा।”

फिर मैं उसकी चूत को चूमने लगा, और अपनी जीभ से सहलाने लगा, और उसके दाने को जीभ से उठाने लगा। वो काफ़ी उत्तेजित हो गई। फिर मैंने उसकी चूत पर अपने होंठ लगा दिए और ज़ोर से चूसना शुरु किया, वह ज़ोर से तड़पी और बोली- क्या कर रहे हो?

अब मैं अपनी जीभ को उसकी चूत में अन्दर-बाहर करने लगा और जीभ से ही उसे चोदने लगा।

अब तक वो चिल्लाने लगी थी, “यस… कम ऑन, फक्क मी…!”

मैंने बोला- इतनी भी क्या ज़ल्दी है, आराम से करेंगे। तुम मेरे लंड से नहीं खेलना चाहती क्या?

फिर मैंने अपना ९ इंच लम्बा और ३ इंच मोटा लण्ड उसके हाथों में पकड़ा दिया। पहले वो उससे खेलने लगी, फिर सुपाड़े की चमड़ी को पीछे कर अपनी जीभ से सहलाने लगी और अपने मुँह में भर कर लॉलीपॉप की तरह चूसने लगी। धीरे-धीरे मेरा लंड और मोटा और टाईट होता जा रहा था। मैं उसको सिर से पकड़ करक उसका मुँह ही चोदने लगा और क़रीब 25-30 झटकों के बाद में उसके मुँह में ही झड़ गया और अपना पूरा वीर्य उसके मुँह में उगल दिया, जिसे वह आसानी से चाट-चाट कर निगल गई।

इसके बाद हम दोनों 69 की मुद्रा में आ गए और मैं उसकी चूत का रस पीने लगा, वो मेरे लण्ड से खेलने लगी। धीरे-धीरे मेरा लण्ड फिर से खड़ा हो गया और उसकी चूत मारने को तैयार हो गया।

अब मैंने उसे सीधा लिटाया और उसकी टाँगों को मोड़ कर फैला दिया, ताकि चूत का मुँह खुल जाए और लंड आसानी से चला जाए। वैसे भी चूत अभी तक इतनी गीली हो चुकी थी कि लण्ड उसमें आसानी से चला ही जाता।

अब मैंने अपने लंड को चूत के मुँह पर रखा और धीरे-धीरे अन्दर डालने लगा, इस विधि से लंड घुसाने पर उसे दर्द भी कम हुआ और मज़ा भी आया। अब तक मेरा लंड आधा अन्दर जा चुका था।

अगले झटके में मेरा पूरा-का-पूरा लंड अन्दर चला गया और वो चिल्ला उठी।

फिर मैंने उसके होंठों को अपने होंठों से दबा लिया और चूसने लगा।

धीरे-धीरे जब उसका दर्द कम हुआ तो वो अपनी कमर हिलाने लगी, मैं समझ गया अब वो तैयार है पूरी तरह से।

अब मैंने अपने लंड को अन्दर-बाहर करना शुरु किया और झटके लगाने लगा। वह भी कमर हिला-हिला कर झटकों का उत्तर झटकों से देने लगी।

ऐसे ही क़रीब 15 मिनटों तक चुदाई चलती रही। फिर मैंने उसे अपने गोद में उठा लिया और ऊपर उछाल-उछाल कर चोदने लगा, इससे हर बार मेरा लंड चूत की दीवार छू लेता, जिससे पूरा मज़ा आ रहा था। इतनी देर में वो तीन बार झड़ चुकी थी, और अब मैं झड़ने वाला था।

मैंने उसे नीचे किया और उसकी चूत में अपने वीर्य की पिचकारी छोड़ दी।

काफ़ी देर तक मेरा लंड धार मारता रहा। तब तक मेरी जानेमन भी एक बार झड़ गई मेरे साथ ही। ऐसे ही हम एक-दूसरे की बाँहों में पड़े रहे और फिर उठकर कपड़े पहन कर तैयार हो गए।

तो दोस्तों, कैसी लगा मेरा पहला अनुभव? Hindi Sex Stories

मेरा नाम सागर मेहता है मेरी आयु 19 वर्ष है, मेरा रंग गोरा है और मैं दिखने में भी अच्छा हूँ, मैं उत्तर प्रदेश के बिजनौर ज़िले में रहता हूँ।
बात तब की है जब मैं नया-नया कंप्यूटर सीखने लगा था मेरी कंप्यूटर टीचर का नाम अंजलि ।
वो मुझसे उम्र 3 साल बड़ी थी।
मुझे अंजलि मैडम बहुत मस्त लगती थी।
क्या मस्त मादक देह थी उसकी..!
उसको देख कर तो हर उम्र के लोगों का लौड़ा खड़ा हो जाए और उसके चूतड़ तो पूछो मत… क्या गजब के उठे हुए चूतड़ थे…!

वो जब कभी किसी सवाल को हल करने के लिए मेरे जिस्म के साथ छू जाती तो नीचे मेरा लण्ड खड़ा हो जाता और दिल करता कि अभी इसको पकड़ कर चोद दूँ, पर क्या करूँ मजबूरी थी।

एक दिन मेरे एक दोस्त ने मुझे ब्लू-फिल्म की डिस्क दी। वो डिस्क मैंने अपनी कॉपी में रख ली।

मैंने कंप्यूटर सेंटर में जा कर थोड़ा काम किया कुछ समय के बाद मैं गुसलखाने में गया और जब वापिस आया तो देखा कि अंजलि मैडम मेरे कंप्यूटर पर बैठी हुई थी।

जब हमारे बैच का समय पूरा हुआ और हम जाने लगे तो मैडम ने मुझे रोक लिया कि तुमसे मुझे कुछ काम है।

इतने में अगले बैच वाले स्टूडेंट आ गए।

कुछ समय के बाद अंजलि मैडम मुझे ऑफिस के अन्दर ले गई और मुझे बैठने को कहा और खुद बाहर चली गई।

कुछ समय के बाद ऑफिस में आई और आते ही मुझसे बोली- अभिजित मैं तो तुमको इतना अच्छा लड़का समझती थी।

तो मैंने पूछा- मैडम क्या हुआ?

अंजलि मैडम ने मेरी कॉपी उठाई और उस में से ब्लू-फिल्म वाली डिस्क निकाल कर पूछा- ये क्या है?

मैं घबरा गया, मैंने बोला- मैडम ये मेरी नहीं है।

इतनी बात सुन कर वो हँसने लगी- डर क्यों रहे हो? ये सब तो चलता है।

इतना सुन कर मेरी घबराहट कुछ कम हुई।

मैडम ने पूछा- तुमने ये फिल्म देखी है?

मैं बोला- नहीं देखी।

वो बोली- ठीक है.. अब तुम जाओ।

मैं ऑफिस से बाहर आ गया। उसके बाद 2-3 दिन हमारे बीच कोई बात नहीं हुई।

यहाँ यह बात बता दूँ कि हमारा सेन्टर शनिवार और रविवार को बन्द रहता है, शुक्रवार को जब मैं अपनी क्लास खत्म कर जाने लगा तो मैडम बोली- अभिजित कल तुम 11.00 बजे मेरे घर आना, मुझे कुछ काम है।

मैंने ‘ठीक है मैडम !’ बोला और आ गया।

शनिवार को जब मैं 11.00 बजे मैडम के घर पहुँचा तो देखा कि मैडम के घर में और कोई नहीं था और वो नहा कर निकली थी।
क्या मस्त माल लग रही थी अंजलि मैडम..!

मैडम ने पजामा और टी-शर्ट पहन रखी थी, मैडम के मम्मे टी-शर्ट को फाड़ कर बाहर निकलने को बेताब थे।

मेरा लण्ड पैन्ट में ही मचलने लगा, मैंने किसी तरह लौड़े पर संयम रखा और मैडम से पूछा- क्या काम था मैडम?

अंजलि मैडम मेरे सामने सोफे पर बैठ गई और बोली- उस दिन मैंने तुम्हारी कॉपी में ब्लू-फिल्म की सीडी देखी तो मेरा दिल भी मचलने लगा था पर वहाँ पर मैं कुछ नहीं बोल पाई, इसलिए तुमको आज यहाँ बुलाया है। मम्मी-पापा और भाई बाहर गए हुए हैं तो मैंने सोचा कि आज तुमसे बात करूँ।

इतना बोल कर वो उठ कर मेरे बगल में बैठ गई।

मेरा दिल ख़ुशी से झूम उठा, मैडम ने मेरा हाथ पकड़ कर अपने कठोर मम्मों पर रख दिया, मुझे करंट सा लगा।

मैडम बोली- अभिजित मेरी प्यास बुझा दो… मैं कब से तड़प रही हूँ।

इतना बोलते-बोलते मैडम ने मेरी पैन्ट के ऊपर से ही मेरे लण्ड को सहलाना शुरू कर दिया।

मेरा हाथ भी मैडम के मम्मों पर चल रहा था, वो मुँह से अजीब-अजीब आवाज निकल रही थीं।

मेरा लण्ड भी अब पूरा तन चुका था।

कुछ समय के बाद वो उठी और मेरे घुटनों में बैठ गई मेरी पैन्ट की चैन खोल कर मेरा 7″ का लण्ड बाहर निकाला और एकदम से उस पर टूट पड़ी… जैसे कोई भूखा खाने पर टूटता है।

यह मेरा पहला मौका था कि किसी लड़की ने मेरा लण्ड अपने मुँह में लिया था। मुझे बहुत मज़ा आ रहा था। वो मेरे लण्ड को पूरा मुँह में ले कर चूसे जा रही थी।

अचानक मुझमें तेजी आ गई और मैंने जोर-जोर से लण्ड को उसके मुँह में आगे-पीछे करना शुरू कर दिया।
फिर ऐसा लगा जैसे गर्म-गर्म लावा मेरे शरीर से निकल रहा हो। मेरा पूरा माल अंजलि पी गई।

फिर कुछ समय हम ऐसे ही बैठे रहे। मैंने धीरे-धीरे अंजलि के मम्मों पर हाथ फेरना शुरू किया जिससे उनमें फिर से कठोरता आ गई और मेरा लण्ड भी तन गया।

मैंने अंजलि के कपड़े उतार दिए और साथ में अपने भी कपड़े उतार दिए।
अब हम जन्मजात नंगे थे।

मैंने मैडम के संतरे अपने मुँह में ले कर चूसना शुरू कर दिए और हाथ की ऊँगली उस की गर्म-गर्म चूत में डाल दी।
उसकी चूत ऐसे लग रही थी जैसे गर्म ज्वालामुखी दहक रहा हो।
करीब 7-8 मिनट में ही अंजलि झड़ गई।

फिर मैंने अपना लण्ड उसके मुँह में डाल दिया, कुछ समय लण्ड चूसने के बाद अंजलि उठ गई और अपने गोल-गोल मम्मे मेरे मुँह पर रगड़ने लगी। मैंने उसकी कठोर चूची मुँह में लेकर चूसनी शुरू कर दी।

फिर अंजलि बोली- अब और मत तड़पाओ… अब मेरी चूत में अपना लण्ड डाल दो।

मैंने भी देरी नहीं की और अंजलि को घोड़ी बना कर उसकी चूत में अपना मोटा लण्ड पेल दिया।
वो तड़प उठी ‘उह्ह्ह हाह्ह्ह ह्ह्ह्ह अह्ह्ह ह्ह्ह्ह्ह’ और बोली- इस लोहे के सरिए को बाहर निकालो… मैं मर गई..!
मैंने देर नहीं की और फटाक से अपना पूरा लण्ड चूत में पेल दिया और उसकी कमर को कस कर पकड़ लिया और जोर-जोर से चूत चोदने लगा।

पहले तो वो तड़प रही थी, पर अब उसको मज़ा आ रहा था और उसके मुँह से ‘उह्ह… अह्ह्ह.. जोर से चोदो.. फाड़ दो.. फुद्दी को… ओउछ्ह्ह.. मर गई आह ओह्ह्ह..!’ निकल रहा था।

उसे ऐसा करते देख मैं और जोर से धक्के मारने लगा।

फिर अंजलि ने मुझे जोर से पकड़ लिया और अपनी बुण्ड उठा उठा कर मेरा साथ देने लगी, मैं पूरे उत्साह के साथ उसको चोद रहा था।
करीब 10 मिनट बाद वो झड़ गई और उसकी चूत से पानी बाहर निकला और मेरे टट्टों पर लग गया।

मैंने फिर उसको बिस्तर पर सीधा लिटा दिया और उसकी टाँगें ऊपर करके उस की पानी से नहाई हुई चूत में अपना लण्ड डाल दिया।
अब उसको पूरा मज़ा आ रहा था और वो बोल रही थी- आज फुद्दी देने का मज़ा आया है।

फिर मुझे लगा कि अब मैं भी झड़ने वाला हूँ, तो मैंने पूरी ताकत के साथ धक्के मारने शुरू कर दिए।
मेरे मुँह से भी अब ‘अह्ह्हह उह्ह ह्ह’ की आवाज आ रही थी।

फिर एक गर्म पिचकारी उसकी चूत में पड़ी और मेरा सारा मज़ा अन्दर ही निकल गया।

मैंने अपना लण्ड निकाला और अंजलि के मुँह में डाल दिया।

उसने जो मज़ा मेरे लण्ड पर लगा था, चाट कर पूरा साफ कर दिया।

उसके बाद तो मैंने अंजलि मैडम की बहुत फुद्दी और गांड मारी।

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