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मैं उन दिनों अपने चाचा Sex Stories जान के यहाँ वाराणसी आई हुई थी। उनके लड़का सुनील बड़ा ही खूबसूरत था। गोरा चिट्टा, दुबला सा, लम्बा सा, उसे देखते ही मेरा दिल उस पर आ गया था।
यूँ तो कानपुर में मुझे चोदने वाले कम नहीं थे, पर उनमें ज्यादातर तो गाण्ड मारने के शौकीन थे। गाण्ड मरवाने में मुझे अच्छा तो लगता था पर असल में तो चूत चुद जाये उसका तो कोई मुकाबला ही नहीं है ना।
सुनील को देख कर मुझे उससे चुदवाने की इच्छा बलवती होने लगी। सुनील भी मेरी हसीन जवानी पर फ़िदा तो था, पर रिश्ते में उसकी बहन जो लगती थी मैं !!!
उसे यह पता नहीं था कि कानपुर में तो कोई यह रिश्ता रखता ही नहीं था। उसे यह बात बताना जरूरी था वरना तो मुझे देख कर बस मुठ ही मार कर रह जायेगा। रात को मैं बिस्तर के अन्दर ही घुस कर उसके नाम की अंगुली चूत में घुसा कर पानी निकाल देती थी।
कहावत है ना, दिल को दिल से राहत होती है, यह बात हम में ज्यादा दिनों तक अन्दर नहीं रह पाई। एक दूसरे की नजरें आपस में लड़ती और दिल का फ़ूल खिल उठता था। नजरें आपस में आपस में सब कुछ कह जाती थी, पर दिल तड़प कर रह जाते थे।
मैं जान बूझ कर के कसी जीन्स और तंग और चिपका हुआ बनियान-नुमा टॉप सिर्फ़ उसके लिये ही पहनती थी, इसमें मेरे जिस्म की सारी गोलाईयाँ उभर कर सामने दिखने लग जाती थी। मेरी मस्त चूंचिया देख कर तो वो अपनी नजरें हटा ही नहीं पाता था। अब मैं हिम्मत करके उसे देख कर मतलब से मुसकराया करती थी।
उस बेचारे को यह नहीं पता था कि मैं उसे सिर्फ़ अपनी वासना शान्त करने के लिये काम में लाना चाहती हूँ, एक नया जिस्म, एक नया मस्त कड़क लण्ड, नई जवानी, नया अनुभव, नया सुख, नई मस्ती… सभी को यही तो चाहिये ना।
एक दिन शाम को सभी घर वाले शादी के खाने पर गए हुए थे। मैंने सोचा- खाने का समय नौ बजे का होता है तो मैं देरी से चली जाऊंगी। पर वहाँ पर घर वालों का कार्यक्रम बदल गया, वो लोग जल्दी खाना खाने के बाद दूसरी शादी में भी हाजिरी देना चाह रहे थे। उन्होने सुनील को मुझे लेने घर भेज दिया।
मैं उस समय अकेलेपन का फ़ायदा उठा कर कम्प्यूटर पर अन्तर्वासना पर कहानी पढ़ रही थी। किसी को आया देख कर मैंने कम्प्यूटर बन्द कर दिया और बाहर आ गई। अकेले सुनील को देख कर मैं चौंक गई। मन में सोचा कि शायद इसको मेरे अकेले होने का फ़ायदा उठाना है, इसलिये इसने मौका देख कर इधर आया है। मैं भी इस मौके को नहीं जाने देना चाह रही थी। मैं दिल ही दिल में इसके लिये मैं अपने आप को तैयार करने लगी।
मैं ढीला ढाला पुराना सा कुरता पहने थी और अच्छी भी नहीं लग रही थी, मुझे अपने आप पर बहुत खीज आई।
“अरे ! ऐसे ही हो अब तक, तैयार तो हो लो, जल्दी चलना है।” उसने मेरे जिस्म को ऊपर से नाचे तक देखा।
“हां, अन्दर आ जाओ, अभी तैयार हो जाती हूँ !” मैं उसे मतलब से घूरने लगी।
“मैं कुछ मदद करूं क्या, कुछ लाना हो तो ?”
“बस दरवाजा बन्द कर दो… और कुछ नहीं !” उसने दरवाजा अन्दर से बन्द कर दिया।
“बस, ठीक है ना… सुनो बानो, नाराज नहीं हो तो एक बात कहूं ?” उसने हिम्मत दिखाई और मेरा दिल धक धक करने लगा।
“अरे कहो ना, भाई हो, शरमाते क्यूँ हो ?” भाई का शब्द सुनते ही उसका सारा जोश ठण्डा पड़ गया।
“नहीं बस यूँ ही, कुछ नहीं !” उसका प्यारा सा मुखड़ा लटक गया।
“अच्छा भाई नहीं दोस्त हो बस, अब कहो…”
“मैं चाहता हूँ कि बस एक बार … बस एक बार… मेरे गाल पर प्यार कर लो !”
“बस इतनी सी बात …?”
मुझे लगा मौका है, बात आगे बढ़ा लो …
मैं उसके पास गई, और उसके गाल पर एक गहरा सा चुम्मा ले लिया।
“थेंक्स… अच्छा लगा !”
“बस एक ही… एक दो बार और कर दूँ …” मैंने एक किस गाल पर और दूसरा होंठ पर कर दिया। इतना उसे भड़काने के लिये बहुत था।
“मुझे भी करने दो ना सिर्फ़ एक बार !” मैंने अपनी आंखे बन्द कर दी और चेहरा ऊपर कर दिया।
उसने धीरे से मेरे निचले होंठ दबा कर चूस लिये और उसके हाथ मेरी कमर पर कस गए।
उसका लम्बा किस खत्म होने का नाम ही नहीं ले रहा था। मेरे मन की कली खिल उठी। मैंने सोचा कि ये तो गया काम से, चक्कर में आ ही गया। हो सकता है शायद वो यह सोच रहा हो कि उसने मैदान मार लिया।
“सुनील, बस कर न, कोई आ जायेगा….हाय अब्बा…. चल छोड़ दे अब !”
“बानो, बस थोड़ा सा और…. ! ऐसा मौका फिर नहीं मिलेगा ना, सब घर में रहते हैं और आप ऊपर मेरे कमरे में आती ही नहीं हैं !”
“हायऽऽ बसऽऽ मेरे अरमान जाग जायेंगे, सुनील, बस कर !” मैंने उसे और भड़काया।
मेरा मन खुशी के मारे उछल रहा था। उसे छोड़ने का दिल बिल्कुल ही नहीं कर रहा था। हम दोनों प्यार में एक दूसरे से लिपट पड़े। वो मेरे होंठो को बेतहाशा चूमने लग गया था, जैसे सब्र का बांध टूट गया हो। उसका जिस्म मेरे जिस्म से रगड़ खा कर उत्तेजित होने लगा था। जाने कब उसके हाथ मेरे उभरे अंगों तक पहुंच गए और उसे सहलाने और दबाने लगे।
ढीले कुरते का यह फ़ायदा हुआ कि उसके हाथ मेरी नंगी चूंचियों तक सरलता से पहुंच गये और अब मुझे भरपूर मजा दे रहे थे। मेरी चूत गीली हो उठी।
“सुनील अब तक तू कहाँ था रे ? मुझसे दूर क्यों रहा था? हाय तुझे पा कर मुझे कितना अच्छा लग रहा है ! कब से तो मैं तुझे लाईन मार रही थी !” मैंने अपनी दिल की बात उससे कह दी।
“मैं भी कबसे आपको प्यार करता हूँ… मैंने भी तो कितनी बार आपको देखा, पर हिम्मत नहीं होती थी … बानो सच तुम मेरी हो, मुझे यकीन ही नहीं हो रहा है !”
“हाय सुनील, सच में मुझे प्यार करोगे… करो ना… मेरे दिल की हसरत निकाल दो, प्लीज !” मुझे लग रहा था कि शादी वादी की ऐसी की तैसी, अभी टांगे चौड़ी करके उसका लण्ड घुसा लूँ।
“देर हो जायेगी बानो, रात को आ जाना ऊपर मेरे कमरे में… मुझे भी अपनी दिल की हसरतें पूरी करनी हैं !”
“मेरे सुनील… !” और एक बार फिर से हम लिपट कर चुम्मा चाटी करने लगे।
उसके लण्ड का भी बुरा हाल था और मेरी चूत तो पानी टपकाने लगी थी। प्यार और वासना की एक मिली जुली आग लगी हुई थी, जिस्म मीठी आग में झुलसने लगा था। लग रहा था कि अभी चुदवा कर सारा पानी निकाल दूँ पर मेरे रब्बा ….हाय…. अभी इस आग में मुझे थोड़ी देर और जलना था।
रात को लगभग घर लौटते लौटते साढ़े ग्यारह बज रहे थे। मेरा मन सब जगह खाली खाली सा लग रहा था, बस सुनील ही नजर आ रहा था। इंतजार खत्म हुआ। हम सभी कपड़े बदल कर सोने की तैयारी करने लगे …
और मैं ….
जी हाँ, चुदने की तैयारी कर रही थी। चूत में और गाण्ड में चिकनाई लगा कर मल रही थी। चूंचियो में भी क्रीम लगा कर उसे खुशबूदार और चमकदार बना लिया था। बस एक हल्का सा नाईट गाऊन ऊपर से यूँ ही लटका लिया और समय का इन्तजार करती रही।
साढ़े बारह बजे तक जब मुझे यकीन हो गया कि अपने अपने कमरों में सब सो गये होंगे। तब मैं दबे पांव बैठक में से निकल पड़ी। पास के कमरे में सिसकारियों की आवाज से लगा कि भाभी और भैया का चुदाई का कार्यक्रम चल रहा था। आज सब औरते फ़्रेश थी, घर के काम से छुट्टी थी, सारी ताकत को चुदाई में लगा रही थी।
मैं बरामदे की सीढ़ियों से ऊपर आ गई। सुनील के कमरे की लाईट जली हुई थी। मैंने दरवाजा खोला तो सुनील तौलिया लपेटे खड़ा था। शायद अभी नहाया था, साबुन की खुशबू से मैंने अन्दाजा लगाया। मुझे ये अच्छा लगा,कि अब मैं उसके साफ़ सुथरे शरीर का पूरा आनद ले पाउंगी।
“बानो, तेरा तो अन्दर का सब कुछ दिख रहा है, बड़ी मस्त लग रही है तू !”
“तू भी तो मस्त लग रहा है, ये सिर्फ़ तौलिया ही है ना या अन्दर और भी है कुछ?” मैंने उसका तौलिया खींच लिया।
वो नंगा हो गया। उसका कड़क लण्ड सीधा खड़ा था। मेरा मन डोल उठा चुदने के लिये।
“चल आ मस्ती करें ! शावर के नीचे पानी में चलें, गीली गीली में करने से मजा आयेगा !”
मैंने देखा उसकी सांसे उखड़ने लगी थी। उसकी धड़कनें बढ़ गई थी। मैंने उसका हाथ पकड़ा और जा कर शावर के नीचे खड़ी हो गई। मैंने उसका लण्ड पकड़ा और नीचे बैठ गई। उसके लौड़े को हाथ से सहलाने लगी। उसकी सुपाड़े की स्किन फ़टी हुई थी, मतलब वो पूरा मर्द था, किसी को चोद चुका था।
“किसी के साथ किया था… बता ना !” मैंने लण्ड मुँह में लेते हुए कहा।
“नहीं अभी तक तो नहीं … पर ये क्या कर रही हो, हटो !” उसने अपना लण्ड मेरे मुँह से बाहर निकाल लिया। शायद उसे ये अच्छा नहीं लगा।
“क्यूँ क्या हुआ….मजा नहीं आ रहा है क्या ?”
“बस ये नहीं करो…” मुझे बाहों से पकड़ कर उठा लिया, और हम पानी की बौछार में फिर से लिपट पड़े।
“अच्छा पर तुमने कुछ तो किया है ना, अन्दर तो घुसाया ही है तुमने?”
“बानो, तुमने तो पकड़ लिया मुझे ! पर सच में ! वो यूसुफ़ है ना वो बड़ा खराब है !”
“अच्छा, क्या गाण्ड मरवाई थी उसने ?” मैंने उसे और खोलने की कोशिश की।
“चुप बानो, ऐसे क्या बोलती है !” उसने मुझे ऐसे कहने से मना किया।
“बोल ना, गाण्ड मारी थी उसकी…?” मुझे तो मजा लेना था।
“हाँ, कोशिश की थी, पर जोर से लग गई थी यहाँ पर ! बहुत तकलीफ़ हुई थी !”
“तो फिर क्या उसने तेरी गाण्ड चोदी थी ?”
“अब तुमने गाली बोली तो ठीक नहीं होगा !” उसने मुझे आगाह किया। पर मैं तो वासना में बह निकली थी। मुझे चुदाई की ऐसी बातें ही चाहिये थी।
“बता ना ! तूने गाण्ड मराई थी ना?” मैंने फिर जिद की।
“हाँ, उसने मेरी गाण्ड मार दी थी, बहुत दर्द हुआ था !” उसने शिकायत भरे लहजे में कहा।
“मुझे गीली करके चूत मारेगा या गाण्ड मारेगा?” मेरी चूत लपलपा उठी, चिकना पानी भर गया चूत में।
मेरी बातों को सुनकर वो नाराज हो गया और वहां से कमरे में आ गया और बिस्तर पर लेट गया।
“बानो क्या हो गया है तुम्हें ? ऐसी गालियाँ क्यूँ निकाल रही हो?” उसने फिर से शिकायत की।
पर मुझे अपना मजा लेना था।
मैं उसके पास आ गई और अपनी एक टांग ऊपर उठा कर उसके गले के पास रख दी और अपनी भीगी हुई चूत को उसके मुँह से लगा दिया। मेरी चिकनी चूत का पानी उसके मुँह के आस पास लग कर फ़ैल गया। वो कुलबुला उठा।
“सुनील, चल चूस ले, मुझे मस्त कर दे भेन-चोद, ये दाना हौले से मसल डाल !” मैं अपनी असलियत पर आती जा रही थी।
“चल हट ना, तू तो बेशरम हो गई है !”
“भोसड़ी के ! गाण्ड मरवा सकता है, चूत से परहेज कर रहा है? चूतिया है तू तो !”
मैंने उसके दुबले शरीर को कस कर भींच लिया। और उस पर चढ़ गई। उसका लौड़ा तो पहले से ही तन्ना रहा था। उसे अपनी चूत में दबा लिया और देखते ही देखते वो चूत में घुस गया।
“हरामी साले ! बड़े नखरे दिख रहा है रे ! एक लौड़ा क्या मिल गया तेरे को ! तो क्या खुदा हो गया है रे? मादरचोद ! तेरे जैसे सौ लौड़ों से चुद चुकी हूँ मैं !!” मैं उत्तेजना में बह चली।
मै ऊपर को धक्के लगाने लगी।
“अरे छोड़ दे रण्डी, छिनाल मुझे ! तेरी भेन चोदूँ ! साली हरामी, हट जा !”
“लगा ले जोर, तुझे आज मैं नहीं छोड़ने वाली, साला बड़ा आया था आशिकी झाड़ने।” मैंने उसे और कस कर जकड़ लिया। उसने भी अपनी ताकत लगा दी। जैसे जैसे वो ताकत लगाता, उसका लण्ड भी जोर मारता।
मुझे बड़ा मजा आ रहा था। मेरे में जाने कहा से इतनी ताकत आ गई कि उसे मैंने बुरी तरह से दबा लिया। वो कराह उठा। मेरी चूत तेजी से भड़क उठी, और कस कस के उसके लौड़े पर चूत पटकने लगी। मेरे मुँह से सिसकारियाँ निकलने लगी।
अचानक मेरा पानी निकल पड़ा और मैं झड़ने लगी। मैंने उसे और जोर से नीचे भींच लिया।
“बानो मेरी सांस रुक रही है, छोड़ दे प्लीज !” मुझे अचानक लगा कि अरे मैंने ये क्या कर दिया। सुनील का तो जैसे जबरन चोदन कर ही कर दिया। मैंने उसका कड़क लण्ड बाहर निकाला और उस पर से हट गई।
सुनील थका सा उठा, पर उठते मुझ पर झपट पड़ा और मुझे बिस्तर पर उल्टा पटक दिया।
“तेरी मां का भोसड़ा, अब बताता हू मैं….” उसने मुझे गाली देते हुये मेरी गाण्ड में अपना लण्ड घुसेड़ दिया। पर उसे क्या पता था कि मैं तो पूरी तैयारी से आई थी। लण्ड गाण्ड में घुसते ही मुझे मजा आ गया।
“हाय रे…. मेरी गाण्ड बजायेगा ना, देख धीरे बजाना, लग जायेगी मुझे !”
“हरामी तेरी माँ चुद जायेगी अब, तेरी गाण्ड फ़ाड़ कर रख दूंगा…. साली चुद्दक्कड़ …. मेरी माँ चोद दी तूने…. तेरी तो फ़ोड़ कर रख दूंगा !” गुस्से में वो कस के गाण्ड चोद रहा था। मुझे मस्त किये दे रहा था। मुझे इसी तरह की चुदाई चाहिए थी। मुझे ऐसी ही तूफ़ानी तरीके से चुदना अच्छा लगता था।
हां मेरे चूंचे जरूर उसने रगड़ कर रख दिये थे जो टीस रहे थे। पर उसमें भी मजा था। वो मेरे चूंचे अभी भी बुरी तरह से खींचे जा रहा था। बहुत दर्द होने लगा था। गाण्ड में भी आस पास दुखने लगा था। मेरे गालों पर उसने काट लिया था। मेरे चूचुकों को दांतो से कुचल दिया था।
और अब वो अंतिम चरण में था। कुछ ही देर में उसके लण्ड ने फ़ुफ़कार भरी और पिचकारी छोड़ दी, ढेर सारा वीर्य निकल पड़ा और मेरे चूतड़ो पर फ़ैल गया। वो बार बार जोर मार कर लौड़े से अपना वीर्य बाहर फ़ेंक रहा था। कुछ ही पलो में वो पूरा झड़ गया।
मैं तुरन्त उसे धक्का दे कर अलग हो गई और खड़ी हो गई।
“मजा आया मेरे सुनील?”
“आप बहुत खराब हैं बानो, तुम भी युसुफ़ की तरह ही निकली…. देख मेरा लौड़ा, अब दर्द कर रहा है।”
“तू तो साला न तो लण्ड पीने दे और ना ही चूत का रस पीए, तो फिर जबरदस्ती करनी ही पड़ती है ना ! कोई एक और साथ में होती तो तेरे से जबरदस्ती अपनी रसीली चूत चुसवाती।”
“हाँ और ये लण्ड में दर्द जो हो रहा है, साली ऊपर से मुझे पूरा चोद दिया।” उसने अपना लौड़ा मुझे दिखाया। उसकी शिकायत पर मैं हंस पड़ी।
“दर्द तो तूने मेरी गाण्ड फोड़ी है ना उसका है, मेरी चूत तो देख अब तक रस से भरी खान है, लग ही नहीं सकती है तुझे।”
“तू अब जा बानो, मेरी तो तूने आज ऐसी तैसी कर दी !”
“और ये देख तूने तो मेरे चूचे लाल कर दिये, देख दोनों सूज के दुगने मोटे हो गए हैं, मर साले … सुन सुनील, कल फ़िर ऐसे ही एक दूसरे को बजायेंगे !” कह कर मैं हंसी और धीरे से दरवाजा खोल कर दबे पांव नीचे अपने कमरे में आ गई।
मैंने जल्दी से अन्दर पेंटी पहनी और ब्रा डाल ली और बिस्तर में घुस गई। सब कुछ याद करके मुझे हंसी आ रही थी और खुशी भी हो रही थी सुनील को चोद कर, आज चुदाई करके मुझे मजा आ गया था, ऐसा जबरदस्ती वाला सुख मुझे जाने फिर कब मिलेगा।
मेरे चेहरे पर सुकून और शान्ति थी, चेहरे पर मुस्कान थी, दिल राजी था कि आज सुनील से चुदवा लिया, उसे फ़ड़फ़ड़ाता देख कर मजा भी आया था, पर हरामी ने मेरे चूंचो पर उसकी कसर निकाल दी थी…
धन्यवाद ! Sex Stories
मेरा नाम विनोद है। मैं गुडगाँव में रहता Sex Stories हूं। ये मेरी पहली स्टोरी है। ये कहानी ४ साल पहले की है, जब मेरी ज़िंदगी में एक १८ साल की लड़की आई। वो १० वीं क्लास में पढ़ती थी। मेरा दोस्त अपने लिए एक हाउस की कन्स्ट्रशन करवा रहा था तो में वहाँ अक्सर जाता रहता था। उसी घर के पास में एक लड़की रहती थी उसका नामसोना था। वो मुझे स्कूल से आते हुए दिखाई देती थी। वहाँ पर मेरे और दोस्त भी होते थे हम सभी उसको देखते थे। उसका रंग सांवला था लेकिन फिर भी वो सेक्सी दिखती थी। उसके बूब्स अनार की तरह गोल और एक दम तने हुए थे, वो अपनी गंड को मटका-२ के चलती थी, उसको देखते ही हम सब दोस्तों का दिल उसको छेड़ने का करता था।
एक दिन वो स्कूल से आ रही थी तो मैने उसको प्रपोज़ किया लेकिन वो बिना कुछ कहे चली गयी, ३ -४ दिन के बाद उसने मेरे से दोस्ती कर ली। धीरे-२ हमारी मुलाक़ातों का सिलसिला शुरू हो गया। एक दिन मैने उसको सेक्स करने के लिए मना लिया और जब वो स्कूल जा रही थी तो मैने उसकी छुट्टी करवाकर अपने साथ एक रूम पे ले गया। कमरे में जाते ही मैने उसको अपनी बाहों में भर कर बिस्तर पे लेटा लिया और उसके होठों का रूस चूसने लगा काफ़ी देर तक उसको होठों के चूसने के बाद मैने उसके टॉप में हाथ डाल कर उसके सेक्सी बूब्स को दबाने लगा अब वो धीरे धीरे गरम हो रही थी, मैने उसका टॉप उतर दिया ओर उसकी ब्रा में हाथ डाल कर उसके बूब्स दबाए फिर मैने उसकी ब्रा भी उतर दी।
उसके बूब्स एकदम टाइट थे मैने इतने टाइट बूब्स किसी लड़की के देखे ही नही थे। उसके बूब्स इतने सेक्सी थे कि शब्दों में बताना ही सम्भव नही है।सोना भी अब गरम हो गयी थी उसने मुझे कस कर अपनी बाहों में भर रखा था। मैने उसकी जीन्स ओर पेंटी भी उतार दी अब वो मेरे सामने बिल्कुल नंगी थी। उसकी चूत पर बाल भी नही थे। मैने अपना लंड निकाल कर उसके हाथ में दे दिया वो धीरे-२ मेरे लंड को सहलाने लगी, मेरा लंड खड़ा होकर लोहे की रोड की तरह हो गया था, लंड की ओर देखकरसोना बोली कि ये मेरी चूत में जाएगा तो मुझे बहुत दर्द होगा, मैने उसको समझाया कि जान दर्द तो सिर्फ़ एक बार होगा उसके बाद तो ज़िंदगी भर मज़ा ही मज़ा है।
अब वो चुदवाने के लिए तैयार हो गयी, मैने अपना लंड उसकी चूत पे रखकर धीरे से झटका मारा लेकिन मेरा लंड उसकी चूत के अंदर नहीं गया क्योंकि उसकी चूत बहुत टाइट थी। फिर मैने अपने लंड पर थूक लगाकर एक ज़ोर का झटका मारा तो मेरा लंड आधा उसकी चूत में घूस गया वो दर्द से बुरी तरह से चिल्लाने लगी आअहह्ह्ह, उहह्ह्हह्ह्ह्ह, वो बोली लंड बाहर निकालो नही तो मैं मर जाउंगी, उसकी चूत से ख़ून आ रहा था।
मैने चुदाई रोक कर उसके होठों को चूसने लगा और उसके बूब्स को दबाने लगा तो वो ख़ुद ही नीचे से अपनी गांड उठा उठा कर नीचे से धीरे-२ झटके मारने लगी, मैने अचानक एक ज़ोर का झटका मारा तो मेरा पूरा लंड उसकी चूत में घुस गया वो ओर ज़ोर से चिल्लाने लगी, उसको दर्द भी हो रहा था और मज़ा भी आ रहा था। उसके मुंह से अजीब अजीब से आवाजें निकल रही थी, मैने अब अपनी स्पीड बढ़ा दी, थोड़ी देर में हम दोनो डिस्चार्ज हो कर अलग हो गये। १५ मिनट के बाद मेरा लंड फिर सेसोना को चोदने के लिए तैयार हो गया अबकी बार मैने उसको अलग-२ स्टाइल में चोदा, कभी उसकी टांगें अपने कंधो के ऊपर रखकर, कभी डोगी स्टायल में…Sex Stories
आसाम की हरी भरी वादियों में यदि आप जायें Antarvasna तो आपका मन झूम उठेगा। मैं अपने पति के साथ आसाम के एक ओयल फ़ील्ड में हूं। 15 दिनों तक लगातार यहाँ फ़ील्ड में रहना होता है। केम्प से 3 किलोमीटर दूर ड्रिलिंग मशीन काम कर रही है। उसके लिये उन्हें लाने ले जाने के लिये वाहन की व्यवस्था है।
दिन भर बस दिल कुछ करने को चाहता है। अकेलेपन का अभी कोई साथी नहीं है।
इनके एक अच्छे दोस्त है, मैं उनका असली नाम नहीं बताऊँगी, हम उन्हें करण कहेंगे। 25 वर्ष का हट्टा कट्टा नौजवान है! अभी तक उसकी शादी नहीं हुई है। वो कभी कभी शाम को इनके साथ ड्रिन्क करने आ जाता है। मेरी तरफ़ बडी हसरत भरी निगाहों से देखता रहता है कि शायद कभी कोई इशारा मिल जाये।
मैं समझ कर भी उसे टाल जाती हूं। पर देखिये तो … मौसम की मार … दिल भटकने लग जाता है.
सब कुछ पास में है, फिर भी ये दिल मांगे मोर … मोर …और मोर …
आखिर दिल हार बैठी … मैं करण की ओर देख कर मुस्करा उठी.
उसकी तो जैसे बांछें खिल उठी।
हंसी तो फ़ंसी के आधार पर हमारी गाड़ी आगे बढ़ चली।
जब भी वो शाम को आता तो मैं उसका दरवाजे पर इन्तजार करती, पर वो समझ कर भी हिम्मत नहीं कर पा रहा था।
मैं इन्तज़ार करती रही.
पर कब तक … वो तो आगे ही नहीं बढ रहा था।
मैंने उसे अन्त में एक कागज का टुकड़ा लिख के उसे थमा ही दिया।
वो पहले तो घबरा ही गया, फिर उसने मुझे देखा … मेरी आंखों में उसे बस लाल लाल वासना के डोरे दिखे।
‘सुनील कहाँ है?’
‘अन्दर है… आ जाओ… नहा रहे हैं…’ मैंने उसे आंख मार कर इशारा किया।
जैसे ही वो अन्दर आया, मैंने उसका हाथ पकड़ लिया … मैंने लाज शरम छोड दी.
वो कांप उठा।
‘लड़की हो क्या … ऐसे क्यों कांप गये?’
‘जी… पहली बार किसी ने छुआ है ना!’
‘कल सुनील के जाने के बाद आओगे ना?’
उसने कहा कुछ भी नहीं … बस हाँ में सर हिला दिया।
आज उसकी रात बेचैनी में गुजरी. मेरी भी हालत उत्तेजना के मारे वैसी ही थी।
सुनील के ओफ़िस जाते ही करण आ गया.
कल की उसकी घबराहट देख कर नहीं लग रहा था कि वो आयेगा।
मैंने दरवाजा खोला और उसका हाथ पकड़ कर जल्दी से अन्दर खींच लिया, और फिर से दरवाजा बन्द कर लिया।
‘करण… हाय… तुम आ गये!’ उसका मुख सूखने लगा था।
‘जी…जी… आप ने लिख कर बुलाया था ना…’ करण अटकता हुआ बोला।
‘नहीं तो… कब लिखा था…’
‘ये… है ना…’ वो झेंप गया… और कागज का टुकडा निकाल कर मुझे दिखाया।
मैंने कहा- अरे हाँ … ये तो मैंने ही लिखा है.’ उसे मैंने पढ़ा … और उसे फाड़ कर फ़ेंक दिया.
उसे देख कर लगा कि मुझे ही बेशरमी पर उतरना पडेगा।
‘करण कागज़ क्या है… मैंने तो खुद ही तुम्हें बुलाया था ना…’ मेरी आंखों में फिर वासना के डोरे खिंचने लगे… उसे सामने देख कर मेरी चूचियाँ कड़ी होने लगी।
‘ नेहा जी… आप बहुत अच्छी है… सुन्दर हैं!’
‘सच… फिर से कहो…’ मैं खुश हो उठी… उसे पास बुला कर सटा लिया और उसके गले में हाथ डाल दिया।
‘नेहा जी…मैं आपसे प्यार करता हूं…’
‘अच्छा… तो फिर चलो प्यार ही करो ना… या मैं ही सब कुछ करूं…’ मेरे स्वर में वासनामय विनती थी.
उसने हरी झन्डी पाते ही मुझे धीरे से लिपटा लिया।
मेरे नर्म होंठों पर उसके होंठ रगड़ खाने लगे। मेरा काम सफ़ल हो गया।
अब एक कुँवारा लण्ड मुझे चोदने के लिये तैयार था।
उसने मेरे निचले होंठ को चूमना और चूसना चालू कर दिया।
उसका लण्ड बुरी तरह से फ़ड़क रहा था, इतना कठोर हो गया कि लगता था कि पैन्ट फ़ाड देगा।
‘करण… देखो तुम्हारा नीचे से पैन्ट फ़ट जायेगा… लण्ड तो बाहर निकाल लो!’
‘क्… क्… क्या कहा… लण्ड… हाय’ वो मेरी भाषा से उत्तेजित हो गया…
‘हाँ… देखो तो कितना जोर मार रहा है… मेरी चूंची दबा दो करण…’
‘हाय… नेहा जी… आप कितना सेक्सी बोलती हैं… लण्ड चूची … नेहा जी चूत भी है ना…’
वो मेरी चूची बेदर्दी से दबाने लगा… चूची में दर्द हुआ…पर अनाड़ी का मजा कहीं ज्यादा होता है… मैंने उसका लण्ड पैन्ट से बाहर निकाल दिया… मैं उसे देख कर ही मस्त हो गयी… लम्बा और मोटा सुनील की तरह ही था। मैंने उसके लण्ड को देखा उसकी सुपारे की झिल्ली सही सलामत थी… मैंने जोश में उसे मसलना चालू कर दिया… कस कस कर उसे मुठ मारने लगी।
‘नेहा जी… आऽह हा… बस बस… हाय…’ और ये क्या… उसका वीर्य निकल पड़ा… वो जोर लगा कर वीर्य निकालने लग गया। और हाँफ़ने लगा। मेरी आंखो में वासना के डोरे और खिंच गये… वो मुझसे लिपट पड़ा।
‘नेहा जी… माफ़ करना… ये कैसे हो गया?’
‘पहले कभी लड़की को नहीं चोदा क्या?’
‘नहीं… ये पहली बार आपके साथ मजा आया है.’ उसने सर झुका लिया।
उसकी मासूमियत पर मुझे प्यार आ गया- कोई बात नहीं पहली बार ऐसा होता है… देखना दूसरी बार तुम मुझे पूरा चोद दोगे!
मैं उसे ताबड़तोड़ चूमने लग गयी।
इतना कुँवारा … कि किसी ने उसे छुआ तक नहीं।
मैं तो ये सोच कर ही आनन्दित हो रही थी कि फ़्रेश माल मिल गया है … कोई सेकन्ड हेण्ड नहीं।
मैंने उसका पैन्ट उतार दिया और उसे पूरा नंगा कर दिया।
वो अपना लण्ड छुपा कर सोफ़े पर बैठ गया। उसका सिर नीचे झुका हुआ था।
उसकी एक एक अदा पर मुझे प्यार आने लगा। कुंवारे लण्ड और अनछुए जिस्म का मजा पहले मैं लूंगी… ये सोच सोच कर ही मेरी चूत पानी छोड़े जा रही थी।
‘नेहा जी आप भी तो… कपड़े …’ मेरी बेशर्मी उसे भा रही थी.
मैं मुसकरा उठी … मैंने कमीज़ ऐसी स्टाईल से उतारी कि मेरे बोबे उछल कर बाहर आ गये… फिर जीन्स उतार कर एक तरफ़ रख दी.
मुझे इस तरह नंगी देख कर उसकी आंखें फ़टी की फ़टी रह गयी। उसके मुँह से एक आह निकल पड़ी।
मैं भी चुदने को उतावली हो रही थी।
मैंने उसके पास आकर उसका लण्ड पकड़ लिया… उसे फिर से अच्छी तरह से देखा … सुपारे की चमड़ी धीरे से ऊपर कर दी… सच में उसका मोटा लाल सुपारा और उसकी लगी हुयी स्किन उसकी कुंवारेपन को दर्शा रही थी.
मैंने उसका लण्ड अपने मुँह में भर लिया… और उसका मर्द जाग उठा… टन से उछल कर खड़ा हो गया… जैसे मैं चूसती, उसका लण्ड मोटा होता जा रहा था… बेहद टाईट हो कर फ़ुंफ़कार उठा… मैंने बेशरमी से उसे न्योता दिया…
‘करण… आओ बिस्तर हमारा इन्तजार कर रहा है… चलें…’
‘जी…जी… क्या करेंगी… बिस्तर पर…’
‘अरे… क्या बुद्धू हो…’ मैं हंस पड़ी ‘चलो चुदाई करते है…’
‘जी… मैंने कभी किया नहीं है ऐसा… सुनो बाद में करेंगे…’
‘क्या… क्या कहा… हाय मर जाऊँ… मेरे राजा…’ मैं उसकी अदा पर बिछ गयी… उसके ऐसा कहने से मैं तो और उत्तेजित हो गयी… उसका हाथ पकड़ कर उसे मैंने बिस्तर पर लिटा दिया।
‘बस पड़े रहो ऐसे ही… तुम कुछ मत करो… ‘
उसके बिस्तर पर सीधे लेटते ही उसका लण्ड ऐसे खड़ा हो गया जैसे कोई लोहे की रोड हो। मैं करण के ऊपर आ गयी… और अपनी चूत को उसके मुख पर रख दिया… और हल्के से चूत दबा दी… मेरी गीली चूत ने उसके होंठ गीले कर दिये-
‘ये तो गीली है… चिकना पानी है.’ उसने अपना मुख एक तरफ़ कर दिया।
‘चाट जाओ करण… पीते जाओ और… जीभ घुसा दो…’ मैंने फिर से चूत को उसके मुख पर चिपका दिया।
मेरा हाथ पीछे लण्ड पर गया… हाय कितना बेचैन हो रहा है… उसने अब मेरी चूत अच्छे से चूसना चालू कर दिया।
मैं भी अब अपनी चूत को उसके होठों पर रगड़ने लगी थी.
अचानक करण ने मेरी चूतड़ों की फ़ान्कों को पकड़ लिया और सहलाने लगा.
उसकी उंगलियां चूतड़ों की दरार में घुसने लगी… अब उसकी एक उंगली मेरी गाण्ड में घुसने लगी थी.
मैं मदहोश होने लगी। मैंने अपनी गाण्ड ढीली छोड़ दी.
उसने पूरी उंगली अन्दर घुसा दी। मैं हौले हौले से अपनी चूत उसके होंठों पर रगड़ रही थी। उसका लण्ड झूम रहा था। उसकी उंगली मेरी गाण्ड को अन्दर घुमा घुमा कर चोद रही थी।
मुझ पर मस्ती चढ़ने लगी थी। उसकी जीभ मेरी चूत में अन्दर बाहर हो रही थी। मैंने उसका लण्ड पकड़ लिया… एक दम कड़क… टन्नाया हुआ… अनछुआ लण्ड।
अब मैंने अपनी चूत धीरे से हटा ली…
‘करण… मेरी गाण्ड से उंगली निकाल लो प्लीज़ …’
उसने धीरे से अपनी उंगली बाहर निकाल ली…
मैंने अब उसकी कमर के दोनों ओर अपने पैर करके उसके लण्ड पर धीरे से बैठ गयी। उसका लण्ड भी चिकना पानी छोड़ रहा था… मेरी चूत तो वैसे ही चिकनी और गीली हो रही थी।
करण से रहा नहीं गया… उसने नीचे से अपनी चूतड़ उछाल कर लण्ड को मेरी चूत में घुसेड़ दिया… मैंने भी साथ ही ऊपर से जोर लगा कर अन्दर तक बैठा दिया… उसकी चीख निकल पड़ी… उसके लण्ड की चमड़ी फ़ट चुकी थी…
‘नेहा… जलन हो रही है…हटो ना… ‘
‘कुछ नहीं है… करण … सब ठीक हो जायेगा … हाय रे मेरे राजा…’ उसका कुँवारापन टूट चुका था… उसका दर्द मुझे असीम खुशी दे रहा था… उसके कुंवारेपन की कराह मुझे मदहोश कर रही थी।
मैंने उसकी बात अनसुनी कर दी… और ऊपर से धक्के चालू रखे… वो कराहता रहा…मैं मजे लेती रही…मैंने अब चूतड़ों को उसके लण्ड पर तेजी से मारना चालू कर दिया… अब उसकी कराह खुशी की सिसकारी में बदलने लगी… उसने मेरे बोबे भींच लिये… और अब नीचे से उसके चूतड़ भी उछलने लगे… मैं सातवें आसमान पर पहुंच गयी।
‘मेरे करण… मजा आ रहा है…क्या मस्त लण्ड है… चोद दे रे…’
‘नेहा…मेरी रानी… हाय पहली बार किसी ने…मुझे इतना प्यार दिया है…’
‘मेरे राजा…’
‘नेहा…जोर से धक्के मारो ना…हाय… मुझे ये क्या हो रहा है…’
मैंने भी अब अपनी चूत को भींच भींच कर और टाईट करके चोदने लगी… उसकी चरमसीमा आने वाली थी… मैंने अपनी चूत को उसके लण्ड पर जोर से दबा डाला… मेरी चूत में एक बार तो लण्ड जड़ तक पहुंच गया.
मैंने लण्ड को दबाये ही रखा…और मैंने एक अंगड़ाई ली और करण पर बिछ गयी… मैं झड़ रही थी… मेरी चूत में लहरें उठने लगी थी… और झड़ती जा रही थी… करण का लण्ड भी चूत से भींचा हुआ था… कब तक बचता… उसने भी नीचे से जोर लगाया… और एकबारगी उसका पूरा शरीर कांप गया…
और फिर उसके लण्ड ने चूत की गहराई में अपना वीर्य छोड़ना चालू कर दिया… उसके लण्ड का फ़ूलना पिचकना… और रस छोड़ना बड़ा ही आनन्द दे रहा था.
मैं उस पर थोड़ी देर लेटी रही.
जब हम दोनों पूरे ही झड़ गये तो मैं उस पर से उठी और बिस्तर से नीचे आ गयी.
उसका वीर्य थोड़े से खून के साथ मेरे तौलिये पर गिरने लगा।
लाल लाल खून भरा वीर्य मुझे बहुत सन्तोष दे रहा था।
मैंने कपड़े पहन लिये और करण को निहारती रही।
आखिर वो भी उठा और कपड़े पहन कर तैयार हो गया.
‘नेहा जी… आज आपने मुझे सही मर्द का दर्जा दे दिया… बहुत मजा आया.’
‘आओ एक बार प्यार कर लो… फिर शाम को तो मिलोगे ही!’
‘नेहा जी… कल दिन को…’
‘अभी अपने लण्ड को ठीक तो कर लो… फिर मजे तो करेंगे ही!’
करण ने हाथ हिला कर विदा ली.
मैं आज की चुदाई से खुश थी. Antarvasna
दोस्तो, मैं हाज़िर हूँ एक नई Hindi Porn Stories और दिलचस्प कहानी लेकर जो मेरे दोस्त और उसकी गर्लफ्रेंड की है और एक ब्लू सीडी की है जो उन दोनों पर बनाई गई।
बात उन दिनों की है जब मैं भुवनेश्वर में रह कर अपनी पढ़ाई कर रहा था। मेरा एक दोस्त था समीर ! वो देखने में उतना ख़ास नहीं था पर लड़कियाँ पटा कर चोदने में उस्ताद था। वो हर वक्त इसी फिराक में रहता कि कैसे कोई लड़की पटे और उसको नई चूत चोदने के लिए मिल जाए। वो लड़की पटाने के लिए किसी भी हद तक जा सकता था।
जब हमारा बी.एस.सी का अन्तिम वर्ष था तब एक नई लड़की हमारी ही क्लास में आई। उसके पिताजी का तबादला हमारे शहर में हो गया था। उसका नाम था श्रीजा। श्रीजा देखने में थी बला की खूबसूरत ! गोरा रंग, उस पर लंबे काले बाल, बाएँ गाल पर डिम्पल और होंठों के दाईं ओर एक छोटा सा तिल। फिगर ऐसा कि कोई मॉडल भी शरमा जाए। वो एक गजब की गायिका भी थी। वो कई सारे एल्बम में गा चुकी थी।
जिस दिन से उसको समीर ने देखा, उसी दिन से उसको चोदने के सपने देखने लगा। कई बार उसने मुझे भी अपने सपनों के बारे में बताया कि कैसे उसने श्रीजा को जमकर चोदा सपने में।
उसके बाद उसने श्रीजा के आगे पीछे घूमना शुरु कर दिया। श्रीजा तो पहले पहले किसी भी लड़के को भाव नहीं देती थी, लेकिन एक दिन अचानक समीर ने कुछ ऐसा किया कि वो उसके जाल में फंसती चली गई।
वो उसके लिए नोट्स ला देता, हमेशा उसकी कुछ ना कुछ मदद करता रहता। एक दिन तो हद ही हो गई- जब श्रीजा ने अपनी स्कूटी से एक बच्चे को ठोक दिया, तभी पास में जा रहा समीर वहाँ आकर श्रीजा का कसूर अपने सर ले गया कि स्कूटी असल में वो ही चला रहा था। उसको एक दिन जेल में बितानी पड़ी, मगर इससे उसको श्रीजा के दिल में एक ख़ास जगह मिल गई।
उसके बाद श्रीजा हफ़्ते में एक दो बार हमारे हॉस्टल में भी आने लगी। क्योंकि मैं समीर का रूममेट था इसलिए जब श्रीजा आने के लिए फ़ोन करती तो वो मुझे किसी बहाने से बाहर भेज देता। कुछ दिन बाद समीर ने श्रीजा को प्रोपोज़ कर दिया और श्रीजा मान भी गई। अब वो दोनों घंटो फ़ोन पर बातें करने लगे। अब तो समीर सिर्फ़ उसको चोदने के लिए मौके के इन्तजार में रहने लगा।
एक दिन जब श्रीजा समीर से मिलने हमारे हॉस्टल आई तो समीर ने मुझे बाहर जाकर बाहर से दरवाजा बंद कर देने को कहा और मैंने वैसा ही किया। मेरे मोबाइल पर दो घंटे बाद समीर का कॉल आया और मैंने दरवाजा खोल दिया और श्रीजा चली गई।
अगले एक महीने में ऐसा कई बार हुआ। तब मेरे मन में उत्सुकता बढ़ने लगी कि आख़िर ये लोग बंद कमरे में दो दो घंटे तक करते क्या हैं ?
तभी मेरे मन में एक योजना आई। मैंने मेरे एक दोस्त से एक हैन्डीकैम मांग कर अपने पास रख लिया। एक दिन जब समीर श्रीजा से फ़ोन पर बातें कर रहा था तब मुझे पता चला कि श्रीजा आज हॉस्टल आने वाली है। मैंने मौका मिलते ही समीर से छुपाते हुए कैम को सेट कर दिया जिससे कि समीर का बेड पूरा उस पर रिकॉर्ड हो सके। और उसे ऑन करके इन्तजार करने लगा।
कुछ देर बाद श्रीजा आई और पहले की तरह मैं बाहर चला गया और दरवाजा बाहर से बंद कर दिया।
करीब ढाई घंटे बाद समीर का कॉल आया, मैंने दरवाजा खोल दिया और श्रीजा चली गई।
कुछ देर बाद समीर भी उठा और कहीं घूमने चला गया। तब मैंने कैम निकाला और उस पर जो रिकॉर्ड हुआ था उसे देखते ही दंग रह गया।
श्रीजा उस दिन बला की सुंदर लग रही थी, काले रंग के टॉप पर टाइट जींस गजब ढा रहे थे। उसका गोरा बदन जैसे कि कोई सफ़ेद मोती धूप में रखा हो। उसके गुलाबी लब जैसे गुलाब की पंखुड़ियाँ सुबह की ओस में भीगे हुई ! उसके गोरे रंग पर काले घने बाल क़यामत लग रहे थे। उसके कसे टॉप से उसके स्तन झाँक रहे थे जैसे दो पहाड़ियों के बीच में एक खाई हो।
श्रीजा को पहले समीर ने बेड पर बिठाया और कुछ स्नैक्स खाने के लिए दिए। फिर पानी दिया। उसके बाद समीर उसकी पीठ की तरफ़ आ गया और पीछे से ही गले पर चूमने लगा। श्रीजा थोड़ी अंगडाईयाँ लेने लगी। फिर समीर ने उसका चेहरा अपनी तरफ़ घुमाया और उसके लबों पर अपने होंठ सटा लिए। श्रीजा ने अपने आँखें बंद कर ली और जोर-जोर से सांसें लेने लगी। इसी बीच समीर ने अपना हाथ धीरे से उसके पेट पर रखा जो कि संगमरमर की तरह लग रहा था।
फिर हाथ सरकाते हुए वो उसके वक्ष तक पहुँच गया और जोर जोर से टॉप के ऊपर से ही स्तन दबाने लगा। श्रीजा सिसकारियाँ भरने लगी।
फिर समीर ने उसके चेहरे को हर जगह चूमा-चाटा। कुछ देर बाद उसने अपने होंठ उसके गले की तरफ़ सरकाए और धीरे से बोबों के उभारों को चाटने लगा। फिर उसने अपना शर्ट उतार दिया और श्रीजा का भी टॉप ऊपर से खींच कर निकाल दिया। श्रीजा के स्तन ब्रा के बंधन में जकड़े हुए आजाद होने का इन्तजार करते हुए से लग रहे थे। फिर समीर ब्रा के ऊपर से ही उसके वक्ष को मसलता रहा और श्रीजा सिसकारियाँ लेती रही।
कुछ देर बाद समीर ने उसकी पीठ की तरफ़ हाथ लेजाते हुए उसकी ब्रा का हुक खोल दिया।
श्रीजा की चूचियाँ आजाद होकर झूम उठी। वो न तो बड़ी, न ही छोटी, सही आकार की और बिल्कुल ही मक्खन की तरह लग रही थी। बीच में गोलाकार चुचूक थे जो कि भूरे रंग के थे। श्रीजा के चुचूक ज्यादा बड़े नहीं थे लेकिन उन्हें देखकर ऐसा लग रहा था मानो उनमें से मधु निकल रहा हो और उसे पीने के लिए किसी का भी मन मचल उठे।
फिर समीर ने उन नाजुक बोबों को अपने दोनों हाथों में लिया और मसलने लगा। उसके हाथों की जकड़न से बोबे के आकार कई तरह से बदल रहे थे। श्रीजा इसी बीच जोर जोर से सिसकारियाँ भर रही थी। वो समीर के बालों में अपने हाथ फेरते हुए उसके चेहरे को अपने मोमों में दबा रही थी।
तभी समीर ने अपने हाथ नीचे सरकाए और श्रीजा की जींस की चैन खोलने लगा और कुछ ही देर में वो श्रीजा को सिर्फ़ पैंटी में ले आया। श्रीजा का गदराया बदन किसी अप्सरा सा लग रहा था। जी कर रहा थी कि तभी उसको अपनी बाँहों में भर लूँ।
श्रीजा ने समीर का लंड जींस के ऊपर से ही सहलाना चालू कर दिया था। समीर का लंड जींस को फाड़ कर बाहर आने को बेताब हो रहा था।
समीर ने फिर अपनी जींस खोल दी और अंडरवियर भी निकाल फेंका। उसका 6″ का लंड अब पूरे दम से खड़ा था। समीर ने अब श्रीजा की पैंटी भी उतार फेंकी। श्रीजा की चूत एक नन्हे गुलाब सी कोमल और रस से भरी हुई सी लग रही थी। वो दोनों अब एक दूसरे में समाने के लिए पूरी तरह से तयार थे।
तभी समीर नीचे सरक गया और श्रीजा के चूत में एक गहरा चुम्बन लिया। श्रीजा का पूरा बदन झूम उठा। फिर समीर ने अपने उंगली से श्रीजा की चूत को बहुत सहलाया और काफी देर तक दुलारता रहा। श्रीजा तो जैसे इस दुनिया में ना होकर किसी और ही दुनिया में चली गई थी।
समीर श्रीजा के सारे बदन को चूमता जा रहा था और श्रीजा उसके बालों को सहलाती जा रही थी।
श्रीजा जोर जोर से सिसकारियाँ भर रही थी और समीर उसके एक बोबे को चूमता और दूसरे को हाथ से पुचकार रहा था। उसके बाद श्रीजा का धीरज जवाब दे गया और उसने अपनी दोनों टांगों को फ़ैला कर समीर के लिए जन्नत का रास्ता खोल दिया और बोलने लगी- जानू, अब तो मेरे अन्दर समां जाओ जल्दी ! मैं और इन्तजार नहीं कर पाऊंगी !
समीर तब पूरी तरह से श्रीजा के ऊपर आ गया। अपना 7″ का लंड श्रीजा की चूत के ऊपर रखा और धीरे से धक्का दिया तो लंड धीरे धीरे अन्दर जाने लगा। श्रीजा के मुँह से आःह निकल पड़ी। फिर वो अपना लंड धीरे धीरे अन्दर- बाहर करने लगा। बीच-बीच में बोबों को चूम लेता और चूस लेता। कभी कभी लबों को चूम लेता। कुछ देर बाद समीर ने अपनी गति बढ़ाई और जोर जोर से चोदने लगा। श्रीजा अपने कमर को जुम्बिश देती समीर का भरपूर साथ देने लगी। करीब आधे घंटे बाद समीर और तेजी से चोदने लगा फिर अचानक अपना लंड निकाल के श्रीजा के पेट पर सारा माल गिरा दिया। फिर करीब पाँच मिनट तक वो दोनों चूमा-चाटी करते रहे।
फिर समीर उठा और एक कपड़े से श्रीजा के पेट से सारा माल पौंछ डाला। फिर दोनों ने कपड़े पहन लिए।
इस वीडियो को मैंने एक सीडी में उतार लिया और हैंडीकैम अपने दोस्त को लौटा दिया।
तब से हर वक्त श्रीजा का गदराया बदन मेरे सामने नाचता रहता। मैं भी श्रीजा को चोदने के सपने देखने लगा।
इस कहानी का अगला भाग शीघ्र ही अन्तर्वासना डॉट कॉम पर प्रकाशित होगा। Hindi Porn Stories
कई बार सपने में मैं अपनी सोनू भाभी को Antarvasna उनकी तारीफ में कहता था ..” भाभी आप बहुत खूबसूरत हो आपके रसीले होंठों का रस पीने के लिए कोई भी मर्द चाहेगा गोल गोल बड़ी आँखों में अजीब सी उलझन है आपकी पतली कमर देख कर कोई भी छूने को चाहेगा काजोल की जैसे बड़ी बड़ी चुचियां है आपकी दो मोटे कूल्हों को देखकर हर कोई दीवाना हो जाएगा सच कहूं भाभी आप एक हसींन हिरोइन जैसे दिखती हो.” वो मुस्कुरा कर कहती हैं-“बस बस बहुत तारीफ करते हो वो भी झूठी ” ये क्या कहा आपने मैं भी कुर्बान जाऊँ आप पर अगर झूठा निकला तो।
भैया को अक्सर शहर से बाहर जाना पड़ता है। एक बार भाभी ने काले रंग की साड़ी और ब्लाऊज पहना। भाभी गोरी हैं इसिलिए मैंने उसकी खूब तारीफ की और कहा- भाभी आप तो काले कपड़ो में बहुत ही खूबसूरत दिखाती हो वो मुस्कुरा के बोली झूठे कहीं के।
फिर कई दिनों तक मन में एक सपना सजाता रहा कि कब भाभी को पा लूं और कस के उनकी गरम नरम चूत में अपना मोटा लन्ड डाल के उन्हें चीखने पर मज़बूर कर दूं।
एक दिन भैया ने सुबह जल्दी बाहर जाना था और मैंने उन्हें स्टेशन तक छोड़ने जाना था। मैं केवल अंडरवीयर पहने कसरत कर रहा था कि अचानक भाभी आ गई। मुझे एक झटका सा लगा और मैंने एकदम अपनी कमर पर एक तौलिया लपेट लिया। भाभी मेरे पास आईं और बोली- देवर जी ! आपकी बोडी तो बहुत जानदार है। मेरी बाजू पकड़ कर कहा- क्या सख्त बाजू है। मेर लन्ड भाभी के नर्म हाथों का स्पर्श पाते ही मचलने लगा। भाभी ने तौलिये में मेरे लन्ड को फ़ूलते हुए देख लिया। फ़िर वो जल्दी से बोली- जल्दी तैयार हो जाओ, चलो तुम्हारे भैया राह देख रहे हैं, उनकी गाड़ी का वक्त हो रहा है। वो चली गई पर मेरा लन्ड गर्म हो चुका था। मैं भैया को स्टेशन छोड़ आया और फ़िर कालेज चला गया।
शाम को जब घर आया तो भाभी पड़ोस में गप्पें हान्क रही थी। मुझे देख कर वो अन्दर आ गई। आज उन्होंने गहरे नीले रंग का गाऊन पहन रखा था और अन्दर आ कर दरवाजा बंद करते ही उन्होंने कहा- क्यों देवर जी मैं काले कपडों में सुंदर लगती हूँ ना !
मैंने कहा- हाँ. तो उन्होंने मैं कैसी दिखती हू इन काले कपड़ो में ?
मैंने हँसते हुए कहा- भाभी तुमने तो नीले रंग का गाऊन पहना है.
उन्होंने शरारत से कहा उस दिन तो कहते थे भाभी तुम काली साड़ी और काले ब्लाऊज में अप्सरा लगती हो. आज क्या हुआ ? मैंने कहा- लेकिन भाभी आपने नीला गाऊन पहना हुआ है काला नहीं.
तभी मेरा ध्यान भाभी के कंधे पर दिख रहे ब्रा स्ट्रैप पर गया। मैंने आगे बढ़ कर ब्रा स्ट्रैप के नीचे उंगली डाल कर ऊपर को उठाया और कहा- अच्छा तो ये है काले रंग की ब्रा। लेकिन दिख तो नहीं रही, भाभी जरा दिखाओ ना।
” कुछ नहीं ! कुछ नहीं ! मैं तो मज़ाक कर रही थी “भाभी बोली।
मैंने कहा- भाभी प्लीज! दिखाओ ना ! प्लीज भाभी प्लीज ! बस एक झलक एक बार !
इतना सुनते ही भाभी ने अपना गाऊन निकल दिया मैं उसे देखते ही दंग रह गया सच भाभी काले रंग की चोटी सी ब्रा और काले रंग की बिल्कुल छोटी सी पैन्टी में थी। उसकी दोनों चूचियां आधी से ज्यादा नंगी थी जब पैन्टी उसकी आधी चूत को ही ढक पा रही थी दोनों ओर से चूत नंगी दिखाई दे रही थी ये नजारा देख कर मेरा लंड अंडरवियर में खड़ा होने लगा.
भाभी ने कहा ” उस दिन तो बड़ी तारीफ करते थे आज क्या हो गया ”. मैंने कहा “भाभी तुम्हारी चूचियां और चूत का कोई जवाब मेरे पास नहीं पहली बार किसी औरत का आधा बदन नंगा देखा है सच कह रहा हूँ तुम्हारी कसम भाभी इतनी खूबसूरत गदराई हुई जवानी पहली बार देख कर मैं बाग बाग हो गया हूँ ”
ये कहते हुए मैंने आगे कदम बढाया तो भाभी हिली नहीं अपनी जगह से. मैंने भाभी को कंधो से पकड़ कर अपने से चिपटा लिया।
उन्होंने मुझसे कहा- क्या कर रहे हो, पहले अन्दर चलो !
मैं समझ गया कि आज भाभी दावत दे रही हैं। अन्दर जाते ही मैंने अपनी शर्ट निकल दी ,ऊपर का बदन नंगा हो गया फिर बिना सोचे अपनी पैंट उतार दी सिर्फ़ अंडरवियर में आ गया मेरी नजर भाभी की चुचियों पर गई छोटी सी ब्रा और बड़े कद की चूचियां कब तक छुपाती. मैंने पीछे जा के हूक खोल दी। दो नंगे फल भाभी के बदन पर झूलने लगे .वो कसमसाई मैंने उनकी बिना परवाह किए पैंटी को एक ही झटके में उतार दी और अपना अंडरवियर को निकाल दिया.
उन्होंने नकली गुस्से से कहा- यह क्या कर रहे हो?
मैंने कुछ सुना नहीं मैंने अपनी बाहों में नंगी भाभी के जिस्म को दबोच लिया वो कराहने लगी की मैंने दोनों होंठों को उसके रसीले होंठों पर रख दिए और जी भर के उसका रस पान करने लगा एक हाथ से चुचियों को दबाता मसलता रहा दूसरे हाथ से उसका जिस्म पूरा कस के मेरे जिस्म से चिपकाया ये सब अचानक हो जाने से वो हाथ पाँव मारने लगी लेकिन उसका कुछ न चला ओर मैं भाभी के जिस्म को बुरी तरह रौंदने लगा होंठों के बीच जीभ डाल के मैंने उसे बुरी तरह चूमा उसके मुह में .. आह्ह्ह उफ़. .मोनू .. मैं तुम्हारी भाभी हूँ .. ये ग़लत है .. छोड़ दो मुझे ..जग गगग ..की आवाज निकलने लगी पर मैं पूरी तरह से उनकी भरी भरी चूचियों को दबाता रहा उसकी कड़ी निप्पल को दो उंगली के बीच ले के मसलने लगा भाभी अब सिस्कारियां भरने लगी ..नही .. प्लिज्ज़ ..उईई ईई… धीरे ..मोनू ऊउऊ ..लेकिन अब उसका विरोध ख़तम हो गया था.
हम दोनों की सांसे तेज होने लगी मैंने जम कर भाभी के पूरे बदन को बेतहाशा चूमा .. .. मेरे होंठ उसके बदन पर फिसलने लगे .. एकदम गोरा और चिकना बदन था .अभी तक मैंने उसकी चूत पर हाथ नहीं लगाया था .. वो दोनों जांघो को सिकोड़े हुए थी .. मेरे हाथ और होंठो के स्पर्श से वो… ऐसी आवाजे निकलने लगी थी. सोनू भाभी अब मीठी मीठी आहें भरने लगी मेरी ध्यान अब उसके पेट से होते हुए गहरी नाभि पर गया मैंने वहाँ सहलाया तो उन्होंने सिहर कर अपनी जांघे खोल दी और अब मेरी नजर उन की चूत पर पड़ी मैं झूम उठा एक भी बाल नहीं था गुलाबी रंग की चूत के बीच में एक लाल रंग का होल दिखाई दिया ये देख कर मुह में पानी आ गया.
भाभी के जिस्म को चारो ओर से चूमने सहलाने और दबाने के बाद चूचियों को प्यार से मुंह में लेकर कई बार चूसा भाभी का अंग अंग महक ने लगा उसकी दोनों चूचियां कड़ी ओर बड़ी हो गई उसके लाल लाल निप्प्ल उठ कर खड़े हो गए तीर की तरह नुकीले लग रहे थे. तब मेरी भाभी मुझसे जोर से लिपट गई। दो बदन एक दूसरे से रगड़ने लगे मेरी सांसे फूलने लगी हम दोनों तेजी से अपने मकसद की ओर आगे बढ़ने लग॥ 10 मिनट तक हम दोनों ने एक दूसरे को पूरा चूमा सहलाया। भाभी ने पहली बार शरमाते शरमाते लंड को पकड़ा तो बदन में बिजली सी दौड़ गई पहली बार मैंने कहा “मेरी जान उसके साथ खेलो शरमाओ मत अब हम दोनों में शर्म कैसी .”
मेरा बदन बहुत ही गरमा चुका था तब मैंने भाभी को फर्श पर लिटा दिया ओर उसके ऊपर आके जोर से चुचियों को फिर से दबाया पर बाद में मैंने चूत की तरफ़ देखा. चूत तो पूरी गीली थी. उसमे से जूस ऐसे निकल रहा था जैसे नल से पानी बह रहा हो. अब मैंने भाभी के पावों को चौडा किया तो उनकी फूली हुयी गुलाबी चूत पूरी तरह दिखने लगी .भाभी की गुलाबी चूत को देख कर मैंने कहा “भाभी सच बहुत ही चिकनी है तेरी ये चूत बिना बाल की गोरी उभरी हुई। दिल कर रहा है इसे खा जाऊँ ” इतना कह कर मैं उसकी चूत पर झुका और चूत के होठों को अपने होठों से चूमने लगा।
भाभी तो जैसे उछल पड़ी। ओह आ मोनू…॥अऽऽऽ ये क्या कर रहे हो…ऐसा तो तुम्हारे भैया भी नहीं करते कभी.. ओह मुझे अजीब सा लग रहा है। भाभी की सिस्कारियों से पूरा कमरा गूंजने लगा। मैं बड़े प्यार से भाभी की चूत को चूसता, चूमता चाटता रहा। वो अपने होठों पर जीभ फ़ेर रही थी और मचल रही थी कि अचानक चिल्लाई- मोनू छोड़ मुझे… आहऽऽमेरा हो रहा है…जोर से…कहते हुए मेरा सिर अपनी जान्घों में दबा लिया और मेरे बाल खींचने लगी।…भाभी ने आह ऽऽ भरते हुए जल्दी जल्दी तीन चार झटके पूरे जोरों से अपने चूतड़ उठा कर मारे। मैंने फ़िर भी उनको नहीं छोड़ा और अपनी जीभ से उनकी चूत से बहने वाले रस को चाट गया।
वो कह रही थी- अब हट जाओ मोनू, अब सहन नहीं हो रहा। अब अपनी प्यारी भाभी को चोदो। फ़ाड़ दो मेरी चूत को अपनी भाभी की चूत में घुस जाओ। मैं पहले से जानती थी कि तुम मुझे चोदना चाह्ते हो, मैं भी तुम से चुदना चाहती थीअब मैं भी भाभी की चूत का स्वाद अपने लौड़े को चखाना चाहता था। मैं भाभी के ऊपर आया तो भाभी ने सिर उठा कर मेरे लौड़े कि तरफ़ देखा। उन्होने कहा- देवरजी ! मैं तो मर जाऊँगी इतने मोटे और लम्बे से।
मैंने पूछा किस मोटे और लम्बे से?
वो शरमाते हुए बोली तुम्हारे लो ऽऽऽ लौड़े से !
मैंने कहा-कुछ नहीं होगा… और भाभी की टांगें चौड़ी की तो उनकी चूत के होंट ऐसे खुल गये जैसे किसी फ़ाइव स्टार होटल के दरवाजे अपने आप खुल जाते हैं किसी के आने पर। मैंने अपनी दो अंगुलियों से चूत को थोड़ा और खोला और अपना लन्ड का सिर उस पूरे खिले गुलाब के फ़ूल में रख दिया। भाभी ने कहा- थोड़ा अन्दर तो करो !
मैंने कहा- अभी करता हूं। यह कह कर मैं अपना लौड़ा धीरे धीरे बाहर ही रगड़ने लगा। भाभी बेचैन हो उठी। वो अपने चूतड़ ऊपर को उठा उठा कर लौड़े को अपनी चूत में डलवाने की कोशिश कर रही थी। मैं उनको तड़फ़ाते हुए उनकी सारी कोशिशें नाकाम कर दिए जा रहा था।
“अब डालो ना !” भाभी बोली।
“क्या डालूं… और कहाँ…” मैंने भाभी से पूछा।
“अच्छा बताऊँ तुझे? बहनचोद ! अपनी भाभी की चूत में अपना लौड़ा डाल और चोद साले ! भाभी तड़फ़ते हुए बोली।
भाभी के मुंह से ऐसी गालियां सुन कर मैं हैरान रह गया।
तभी भाभी ने एक ऐसा झटका दिया ऊपर की तरफ़ अपने चूतड़ों को कि एक बार में ही मेरा पूरा का पूरा लौड़ा भाभी की चूत की गहराई में उतर गया। भाभी के मुख से निकला- आह हय-मार दिया ! एक दर्द मिश्रित आनन्द भरी चीख !
अब मैं भाभी के ऊपर गिर सा गया और उनको हिलने का मौका ना देकर उनके होंट अपने होंटों से बंद कर दिये और अपने चूतड़ ऊपर उठा कर एक जोर का धक्का मारा तो भाभी फ़िर तड़प गई।
इसके बाद तो बस आऽऽह्…आऽऽह्…आऽऽह्…आऽऽह्…आऽऽह्… आऽऽह्…आऽऽह्…आऽऽह्…आऽऽह्…धीरे…आऽऽह्…आऽऽह्…आऽऽह्…आऽऽह्… आऽऽह्…आऽऽह्…आऽऽह्…आऽऽह्…आऽऽह्…आऽऽह्…रुक जरा… हाँ… आऽऽह्…आऽऽह्…आऽऽह्…जोर से… आऽऽह्…आऽऽह्…आऽऽह्…हाँऽऽअः…हाँऽऽअः…हाँऽऽअः…ह्म्म… हाँऽऽअः
हम दोनों की एक जैसी आवाजें निकल रही थी। काफ़ी देर ऐसे ही चलता रहा। बीच बीच में भाभी बड़बड़ाती रही- मज़ा आ रहा है ! करते रहो ! चूसो !
भाभी की चूत लगातार पानी छोड़ रही थी और मेरा लौड़ा बड़े आराम से अन्दर बाहर आ जा रहा था। भाभी भी अपने चूतड़ उठा उठा कर सहयोग कर रही थी। वो मदहोश हुई जा रही थी। उनके आनन्द का कोई पारावार ना था। ऐसा मज़ा शायद उन्हें पहले नहीं मिला था।
अब मैं चरमोत्कर्ष तक पहुंचने वाला था। मैंने भाभी को कहा- ले सोनू ! ले ले मेरा सारा रस ! पिला दे अपनी चूत को !
“हाँ ! भर दे मेरी चूत अपने रस से मेरे मोनू भैया ! ” भाभी बोली।
और मैंने पूरे जोर से आखिरी धक्का दिया तो मेर लन्ड भाभी के गर्भाशय तक पहुंच गया शायद और वो चीख पड़ी- मार डालेगा क्या?
मेरे मुंह से निकला- बस हो गया ! मेरा लन्ड भाभी की चूत में पिचकारियां मार रहा था। भाभी भी चरम सीमा प्राप्त कर चुकी थी। फ़िर कुछ रुक रुक कर हल्के हल्के झटके मार कर मैं भाभी के ऊपर ही लेटा रहा। हम दोनों अर्धमूर्छित से पड़े रहे काफ़ी देर। पता नहीं कब नींद भी आ गई।
जब मेरी नींद खुली तो देखा कि भाभी उसी तरह नंगी मेरी बगल में बेसुध हो कर सो रही थी। उनके मुख पर असीम तृप्ति का आभास हो रहा था। उनके लबों पर बहुत हल्की सी मुस्कान भी दिख रही थी। मैं धीरे से उठा और रसोई में जाकर दो कप चाय बना कर लाया तो देखा भाभी वैसे ही सो रही थी। मैं उनके पास गया और उनके लबों को हल्के से चूम लिया। जैसे ही मेरे होंठ ने उनके होंठों को स्पर्श किया, भाभी ने आंखें खोल दी और मुस्कुरा कर मेरी आंखों में झांकने लगी।
मैंने भाभी से कहा- “तो सोने का बहाना कर रही थी आप?”
भाभी बोली- मैं तो तभी जाग गई थी जब तुम यहाँ से उठ कर गए थे, लाओ अब चाय तो पिला दो जो प्यार से बना के लाए हो।
हमने चाय पी। तब तक रात के आठ बज चुके थे। मैंने भाभी से पूछा- कैसा लगा?
भाभी ने शरमा कर नज़रें झुका ली, कुछ बोली नहीं।
मैंने उनकी ठोडी पकड़ कर उनका चेहरा ऊपर को उठाया और फ़िर पूछा कि कैसा लगा आज मेरे साथ।
भाभी शर्मिली मुस्कान के साथ बोली- बहुत मज़ा आया, मज़ा तो तुम्हारे भैया के साथ भी बहुत आता है, पर तुम्हारे अन्दर नया जोश है
“पहले ऐसा ही मज़ा आता था भैया के साथ?” मैंने पूछा।
” सच कहूं तो ऐसा मज़ा मुझे कभी नहीं आया, मुझे तो पता भी नहीं था कि इतना मज़ा भी आता होगा चुदाई में” भाभी ने कहा।
भाभी के मुंह से चुदाई शब्द सुन कर मैं अवाक रह गया। फ़िर मैंने भाभी से कहा- भाभी ! मैंने आपको इतना आनन्द दिया है, मुझे ईनाम मिलना चाहिए
” हाँ ! ईनाम के हकदार तो तुम हो। बोलो क्या चाहिए तुम्हें ईनाम में?” भाभी ने पूछा।
“मैं तो ऐसे ही कह रहा हूं, आप मिल गई, मुझे तो मेरा ईनाम मिल गया” मैंने कहा।
” नहीं, फ़िर भी मैं तुम्हें कुछ ना कुछ ईनाम जरूर दूंगी” भाभी ने कहा।
” जैसी आपकी मरजी ! अगर मैंने अपनी तरफ़ से कुछ मांग लिया तो देना पड़ेगा भाभी ! ” मैंने कहा।
” हाँ हाँ जरूर ! मेरे बस में हुआ तो जरूर दूंगी” भाभी ने आश्वासन दिया।
” अच्छा अब बताओ रात के खाने में क्या बनाऊँ? ” सोनू भाभी ने पूछा।
“अब क्या बनाओगी, मैं बाज़ार से ले आता हूं कुछ, वैसे भी मैं अभी सारी रात बाकी है। आप मुझे खाना, मैं आपको खाऊँगा” मैंने भाभी को छेड़ा।
मैंने बाज़ार जाने के लिए उठते हुए कहा- भाभी ! मैं बाज़ार से खाना ले कर आता हूं। आप बस ऐसे ही नंगी रहना, कपड़े नहीं पहनना।
भाभी भी मेरे साथ खड़ी हो गई यह कहते हुए कि दरवाजा भी तो बंद करना होगा। भाभी मेरे पीछे पीछे आईं और मुझे कहा देखो बाहर कोई है तो नहीं, मैं दरवाजा बंद कर लूं।
जब मैंने बाज़ार से आकर दरवाजे की घण्टी बजाई और भाभी ने दरवाजा खोला तो वो वही नीला गाऊन पहने थी।
अन्दर आते आते मैंने पूछा कि गाऊन क्यों पहना?
तो कमरे में पहुंच कर भाभी बोली- आज तो बस बच गई। अभी अभी थोड़ी देर पहले दरवाजे की घण्टी बजी थी और मैंने समझा तुम ही होगे और मैं बिना गाऊन पहने दरवाजा खोलने ही वाली थी कि मुझे पड़ोस वाली रितु की आवाज सुनाई दी। वो मुझे ही पुकार रही थी। मैंने दौड़ कर गाऊन पहना और फ़िर दरवाजा खोला।
क्या करने आई थी रितु? रितु वही जो चार पांच घर छोड़ कर रहती है, नमिता आन्टी की बेटी?
हाँ वही, तू तो सबको जानता है?
बड़ी मस्त चीज है वो, एक बार मिल जाए तो साली को चोद चोद कर चार छः बच्चों की माँ बना दूं।
“तेरा बस चले तो तू सारी दुनिया की लड़कियों को चोद चोद कर माँ बना दे” भाभी बोली।
“सारी दुनिया को नहीं तो भाभी आपको तो अब जरूर माँ बना दूंगा” मैंने कहा।
यह सुन कर भाभी भावुक हो उठी, उनकी आंखें गीली हो गई, वो बोली- तीन साल हो गए शादी को ! अब तक तो कोई आस बंधी नहीं, पता नहीं कब मैं माँ का शब्द सुनूंगी अपने लिए। और तुम क्या सोचते हो कि मैंने ये सारी रासलीला तुम्हारे साथ शारीरिक आनन्द के लिए रचाई है? यह सब मैंने औलाद का सुख पाने के लिए किया है। भाभी रोती जा रही थी और बोलती जा रही थी-” वैसे तो तुम्हारे भैया में कोई कमी नहीं है, वो मुझे सहवास का पूरा पूरा मज़ा देते हैं, पर पता नहीं क्यों मैं गर्भवती क्यों नहीं हो रही। अब देखो तुम क्या गुल खिलाते हो? इतना कह कर भाभी के चेहरे पर कुछ मुस्कुराहट आई।
मैंने आगे बढ़ कर भाभी को अपनी बाहों में भर लिया और कहा- भगवान ने चाहा तो अगले साल तक मैं चाचाऽऽ… नहीं आपके बच्चे का पापाऽऽ… नहीं बस चाचा… हाँ… चाचा ही ठीक है, बन जाऊँगा।
अगर ऐसा हो गया तो मैं तुम्हें मुंह मांगा ईनाम दूंगी- भाभी ने भरे गले से कहा।
तो अब दो ईनाम हो गये- एक तो आपने चाय पीते हुए वायदा किया था आज ही और दूसरा अब जो अगले साल या उससे भी पहले मिल सकता है। Antarvasna
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