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मेरा नाम राहुल है, मैं गुजरात का रहने Sex Stories वाला हूँ और मैं अपनी एक कहानी बताने जा रहा हूँ जो काफ़ी दिलच़स्प है।
अब मैं मुख्य बात पर आ रहा हूँ। स्कूल के दिनों में मेरे साथ एक लड़का पढ़ता था जिसका नाम राहुल था। हमारे स्कूल में हमने एक समूह बना रखा था जो मौज-मस्ती करता था और साथ-साथ खेलते-कूदते भी थे। एक दिन राहुल आया और उसने हमसे पूछा कि मैं भी तुम्हारे समूह में सम्मिलित होना चाहता हूँ। पर हमने उसे मना कर दिया और वह वहाँ से चला गया।
उसने लगातार दस दिनों तक प्रयास किया कि वह हमारे साथ शामिल हो जाए पर उसे निराशा ही हाथ लगी। एक दिन राहुल ने मुझसे कहा कि तुमसे मेरी माँ मिलना चाहती है, तुम्हें बुलाया है। तो मैंने उसे टालने के लिए कह दिया कि ठीक है, मैं मिलकर आ जाऊँगा, पर मैं गया ही नहीं।
एक दिन मैं रास्ते पर जा रहा था कि सामने राहुल की मम्मी आती दिखीं, उन्होंने मुझसे कहा- मैंने तुम्हें बुलाया था, आते क्यों नहीं?
मैंने कहा- ठीक है, आज आ जाऊँगा।
और मैं चला गया।
उसके बाद मैं दोपहर को उसके घर गया तो राहुल घर पर नहीं था, उसकी मम्मी थी। उसने मुझे कुर्सी पर बिठाया और कहा कि तुम मेरे बेटे को अपने समूह में शामिल क्यों नहीं करते हो?
तो मैंने कहा- कुछ नहीं, बस ऐसे ही।
तो आंटी ने कहा- ऐसा नहीं करते, तुम उसे शामिल कर लो।
मैंने हामी भर दी।
फिर उसने मुझसे पूछा कि थम्स अप पीओगे?
तो मैंने हाँ कहा।
उसने उस समय क्रीम रंग की साड़ी और उसी रंग की ब्लाऊज़ भी पहन रखी थी। अन्दर काली ब्रा पहनी थी, वो भी साफ़ दिख रही थी और उसकी गांड इतनी मोटी और गोल-मटोल थी कि कोई देख ले तो पागल हो जाए।
वह किचन में चली गई, थम्सअप लाने के लिए।
जब वह थम्सअप लेकर आई तो मैं हैरान हो गया कि उसने साड़ी उतारकर सफेद पारदर्शी गाऊन पहना हुआ था और अन्दर काली ब्रा और काली पैन्टी साफ़ दिख रही थी, और भरा हुआ बदन जैसे संगमरमर का ताज़महल हो।
वह थम्सअप के दो गिलास लेकर मेरे पास बैठ गई और एक गिलास मुझे दिया और एक ख़ुद पीने लगी।
पीते-पीते मेरे जाँघों पर हाथ रख कर घुमा रही थी, मुझे गुदगुदी हो रही थी, लेकिन मुझे मज़ा भी आ रहा था, इसलिए कुछ नहीं बोला।
धीरे-धीरे उसका हाथ मेरे लण्ड के पास ले गई और पकड़ के मसलने लगी तो मैं खड़ा हो गया और कहा- मैं जा रहा हूँ।
तो उसने मेरा हाथ पकड़ कर मुझे बिठा दिया, पूछा- क्या हुआ।
मैंने कहा- गुदगुदी हो रही है।
तो उसने कहा- आज तुझे कुछ सिखाऊँगी जो तेरे बहुत काम आएगा।
फिर मैं बैठ गया।
पहले तो उसने मुझे गाल पर किस किया और मेरी शर्ट उतार दी।
मैंने मना किया तो वह बोली- कुछ नहीं होगा, तुझे बहुत मज़ा आएगा।
फिर मैंने विरोध करना छोड़ दिया, उसने मेरी पैन्ट की चेन खोल कर मेरा लण्ड बाहर निकाल कर उसे किस्स किया और मुँह में लेकर कैण्डी की तरह चूसने लगी और मैं तो जैसे स्वर्ग में पहुँच गया था।
मेरे दोस्त की मम्मी 15 मिनट तक मेरा लंड चूसती रही, इसी दौरान मेरे सारे कपड़े भी उतार दिए। उसने मुझसे कहा कि मेरा गाऊन उतार दो!
तो मैंने उसका गाऊन उतार दिया और काली ब्रा-पैन्टी में जैसा आगरा का ताज़महल मेरे सामने आ खड़ा हुआ।
उसने कहा मेरी ब्रा भी उतार दो, तो मैंने वैसा ही किया।
ब्रा खोलते ही जैसे दो कबूतर आज़ाद होकर उछलकर बाहर आ गए।
उसने मेरा सिर पकड़कर मेरा मुँह उसकी चूचियों पर रख कर मुझे चूसने को कहा तो मैं जीभ घुमाने लगा और चूसने लगा। तब उसके मुँह से आआआ आआ… हहह हहह… निकने लगी। वह मेरा लण्ड पकड़कर दबाने लगी।
थोड़ी देर में वह काफ़ी गरम हो गई और मुझे नोचने-खसोटने लगी, उसने कहा- तुम्हारा लण्ड तो बहुत बड़ा है और मेरे पति का तो इसका आधा ही है।
मैं तो मानो अपने होश में ही नहीं था। वह जैसा कह रही थी मैं वैसे ही करता जा रहा था। मेरे अन्दर इतनी समझ नहीं थी मैं कुछ कर सकूँ।
फिर वह बिस्तर पर लेट गई और बोली- तुम मेरी भोस को चाटो!
तो मैं उसकी पाँवों के बीच में बैठ कर जीभ घुमा-घुमा कर चाटने लगा। वह मेरा मुँह दबा कर जोर से चिल्ला रही थी… चाटो… चाटो… चाटो… मुझे खत्म कर दे, खत्म कर दे।
उसी समय उसकी भोस से कुछ चिकना-चिकना क्रीम निकलने लगा वो मैं पी गया वह मुझे काफी मज़ेदार लगा, तो मैंने पूरा चाट लिया।
अब उसने कहा- अब उठो और मेरी भोस में डालो!
तब मैं पोज़ीशन लेकर उसकी पाँवों के बीच बैठ गया और लण्ड पकड़कर उसकी भोस पर रख कर थोड़ा धक्का दिया। चिकनाई की वज़ह से मेरा लण्ड सटाक से अन्दर चला गया।
उसने कहा- शाबास बेटे तुमने सिक्सर लगाया, चालू रख!
मैं तो धक्के पर धक्का लगा रहा था, वो खुशी से पागल हो रही थी, नीचे से गांड उठा उठाकर साथ दे रही थी.
थोड़ी देर बाद वह उठकर खड़ी हो गई और मुझसे कहा- मेरी गांड में डाल और फाड़ दे।
उसने मुझे क्रीम दी और कहा- पहली बार गांड में डलवा रही हूँ इलसिए मेरी गांड पर ये थोड़ा लगा, और थोड़ा अपने लण्ड पर भी लगाकर पेल दे।
मैंने ऐसा ही किया और उसकी गांड पर रख कर धक्का दिया तो उसकी एक लम्बी चीख निकल गई, और बोली, बाहर निकाल नहीं तो मैं मर जाऊँगी। लेकिन मैंने कुछ नहीं सुना और धक्के जारी रखे, उसकी गांड से थोड़ा सा खून भी निकला, मैं घबरा गया तो उसने कहा कि डार्लिंग, कुछ भी नहीं, तू चालू रख, ये खुशी का खून है।
कुछ देर तक धक्के मारने के बाद मैंने अपना लण्ड निकाल कर उसके मुँह में दे दिया और वह मेरा लण्ड चूसने लगी और मेरा क्रीम सारा उसके मुँह में चला गया और उसने पूरा पी लिया। फिर चाटकर मेरा लण्ड साफ कर दिया.
फिर उठकर कपड़े पहनने लगा तो उसने कहा- कल आना, मैं तुझे दूसरा मज़ा दूँगी जो तेरी शादी के बाद तुझे काम आएगा और तुझे तक़लीफ नहीं होगी और बहुत मज़ा आएगा।
अगली कहानी दूसरी बार। Sex Stories
यह बात सन 2008 की है, जब Hindi Sex Kahani मैं गाँधीनगर में नौकरी करता था। मैंने एक कमरा लिया था किराए पर क्योंकि मैं गाँधीनगर में नया था। वहाँ मैं एक बहुराष्ट्रीय कंपनी में इंजिनीयर था। मैंने कमरा दूसरी मंज़िल पर लिया ताकि मुझे कोई डिस्टर्ब ना कर सके। रोज़ सवेरे मैं ऑफ़िस निकल जाता था और शाम को देर से आता था।
मेरे मकान मलिक की बीवी करीब 40 साल की थी और एक लड़की थी जो करीब बीस साल की थी, नाम था भावना।
दिखने में दोनों माँ और बेटी ग़ज़ब की थी। मकान मालकिन की फ़ीगर 38-30-40 के लगभग होगा। उसका भरा हुआ बदन देख कर मेरे लण्ड में आग सी लग जाती थी। बिल्कुल चिकनी औरत थी वो ! मकान मालिक सरकारी नौकरी में था और शाम को देर से आता था। देखने में वह अधेड़ उम्र का लगता था जैसे बिल्कुल झड़ गया हो।
क्योंकि मेरी नौकरी ऐसी थी कि मुझे सवेरे जाना पड़ता था और शाम को आता था इसलिए मैं उन लोगों से ज़्यादा बात नहीं करता था, कभी कभार ही हेलो होती थी। गुजराती थे इसलिए घर में शराब और सामिष खाना और लाना मना था। इसलिए मैं भी इन बातों पर बहुत ध्यान रखता था, कभी अगर बीयर पीने का मन होता था तो बाहर से ही पीकर आता था।
धीरे धीरे मकान मालकिन से कभी कभार मुलाकात हो जाती थी। उसकी बेटी क्योंकि कॉलेज में पढ़ती थी इसलिए शाम को घर पर वो अकेली हो होती थी।
एक शाम को मैं थोड़ा जल्दी आ गया घर पर और नीचे ही मकान मालकिन ने मुझे चाय पर निमंत्रण दिया। मैंने पहले तो ना कर दी लेकिन फिर उसके आग्रह करने पर मैं चाय के लिए हाँ कर दी। मैं अपने कमरे में गया और अपने कपड़े बदल कर आ गया। मैंने एक टी-शर्ट और बरमुडा पहन रखा था। मकान मालिकन ने मेरे घण्टी बजाने पर दरवाज़ा खोला तो मैं उसको देख कर दंग रह गया। उसने एक बहुत ही पतला सा गाऊन पहन रखा था जिसमें से उसकी चड्डी साफ साफ दिखाई दे रही थी।
मैंने उसे कहा- भाभी जी ! आज तो बहुत गर्मी है !
और पंखा चला दिया।
मकान मालकिन ने कहा- हाँ, आज गर्मी तो बहुत है इसलिए मैंने भी यह नया गाऊन पहन ही लिया !
मैंने कहा- यह गाऊन तो बहुत ही अच्छा है !
यह बात सुन कर वो खुश हो गई और बोली- अब मैं चाय बनाती हूँ आपके लिए !
और इतना बोलकर वो रसोई में चली गई। मैंने उसे रसोई में जाते देखा तो दंग रह गया। उसने गाउन के नीचे कोई ब्रा भी नहीं पहन रखी थी। मैंने सोचा शायद गर्मी ज़यादा है इसलिए पतला सा गाऊन पहना होगा।
पर अपने लण्ड का क्या करता? वो तो लोहे से भी ज़्यादा सख़्त हो गया था। मैंने सोचा कि आज कुछ बात आगे बढ़ा ली जाए।
खैर भाभी जी चाय लेकर आ गई और हम दोनों ने बातें शुरू कर दी।
भाभी जी ने पूछा- आपने अभी तक शादी क्यों नहीं की ?
मैंने कहा- भाभी जी, पहले मैं ज़िंदगी में कुछ बन जाऊं फिर शादी करूँगा। फिलहाल तो मैं अपने करियर पर ध्यान दे रहा हूँ।
भाभी जी बोली- यह पैसे कमाने के चक्कर में कहीं तुम्हारी उमर ना ढल जाय! फिर कोई लड़की भी नहीं मिलेगी।
मैंने बोला- भाभी जी, यह तो मेरी किस्मत है, अगर कोई लड़की नहीं मिलती तो कोई बात नहीं !
भाभी जी बोली- नहीं, अभी तुम्हारी उमर ज़्यादा नहीं है और फिर शरीर की ज़रूरत का भी तो तुम्हें ही ख्याल रखना है !
यह सुनकर मैं बहुत खुश हुआ और बोला- भाभी जी, शरीर की ज़रूरत का तो मैं खुद ही कोशिश करता हूँ पूरी करने के लिए !
भाभी जी बोली- देखो, यह जो तुम बात कर रहे हो, उससे तुम्हारा शरीर कमज़ोर हो जाएगा और फिर शादी के बाद कुछ नहीं कर सकोगे।
भाभी जी की बात सुनकर मैं चौंक गया और मैंने सोचा कि लोहा गरम है, लगता है कि आज काम बन ही जाएगा।
मैंने बोला- भाभी जी, फिर आप ही बताइए कि मैं क्या करूँ ? फिलहाल तो मैं अपने हाथ से ही काम चला लेता हूँ।
भाभी जी बोली- क्यों तुम्हारी कोई गर्लफ्रेंड नहीं है क्या? उससे कुछ करते हो?
मैंने बोला- भाभी जी, इतना समय नहीं है कि कोई गर्लफ्रेंड बनाई जाय और फिर मैं फिलहाल अपने करियर की तरफ़ ध्यान दे रहा हूँ।
भाभी जी बोली- चलो कोई बात नहीं, तुम कभी कभार अपने दिल की बात तो मुझसे कर लिया करो। इससे तुम्हारा मन भी हल्का हो जाएगा और तुम्हारा ध्यान भी बंट जाएगा।
फिर मैंने पूछा- भाभी जी और सुनाएं ! भैया तो बहुत ही काम करते हैं ! दिन रात सिर्फ़ पैसे कमाने की कोशिश करते रहते हैं, वो तो आपका बहुत ही ख्याल रखते हैं।
यह सुनकर भाभी जी बोली- अब क्या बताऊं तुमको ! जब से भावना हुई है, वो तो कुछ करते ही नहीं है। बस मैं भी तुम्हारी तरह ही हूँ, सब कुछ होते हुए भी कुछ नहीं है मेरे पास, बस अधूरी सी बनकर रह गई हूँ। इन पैसो का क्या करूँगी जब मेरा कोई ख्याल ही नहीं रखता।
मैंने हिम्मत कर के बोला- भाभी जी, हम लोग ऐसा क्यों नहीं करते कि एक दूसरे का ध्यान रखें, मेरा मतलब हम लोग दोस्त भी तो बन सकते हैं ना?
भाभी जी बोली- अच्छा, अब दोस्त भी बोलते हो और भाभी भी कहते हो? सबसे पहले तुम मुझे गौरी कह कर बुलाओ ! इतनी औपचारिकता में पड़ने की ज़रूरत नहीं है।मैंने कहा- अच्छा गौरी, चलो अब से हम दोस्त हो गये हैं।
यह कह कर मैंने गौरी का हाथ पकड़ लिया और उसे प्यार से दबा दिया। गौरी मेरी इस हरकत से गरम सी हो रही थी।
मैंने कहा- गौरी, तुम बहुत सुंदर हो और मैं तो तुम्हारी वजह से ही इस घर में रहता हूँ, नहीं तो मैं अपने ऑफ़िस के पास भी रह सकता था। इतने दिनों से बस अपने दिल की बात दिल में रख कर घूम रहा था। बहुत दिल करता था कि आपसे आ कर दोस्ती की बात करूँ लेकिन कभी हिम्मत ही नहीं होती थी। मेरी नज़र में गौरी तुम बहुत ही खूबसूरत और सेक्सी औरत हो और मैं हमेशा तुम्हारे पति को बहुत ही खुशनसीब समझता हूँ जिसे तुम्हारे जैसे औरत मिली है।
गौरी यह सब सुनकर बहुत खुश हुई और बोली- अच्छा अब उनके आने का समय हो गया है, तुम चाय ख़त्म करो और ऊपर अपने कमरे में जाओ। मैं तुमसे कल बात करूँगी।
अगली सुबह लगभग साढ़े पाँच बजे मेरे दरवाजे की घंटी बजी और मैंने दरवाज़ा खोला तो देखा कि गौरी बाहर खड़ी है। वो मुझे अर्धनगन अवस्था में देख कर मुस्कुरा कर गुड मॉर्निंग बोलकर छत पर चली गई। मुझे कुछ समझ नहीं आया और जब वो नीचे जा रही थी तो उसे मैंने अपने कमरे में खींच लिया।
वो बोली- मैं तो सुबह सुबह छत पर पानी देखने के बहाने से आई थी, सोचा कि तुमसे बात हो जाएगी, लेकिन तुम तो सोए हुए थे।
मैंने बोला- कोई बात नहीं गौरी, आज मैं दिन में जल्दी आ जाऊंगा।
इतना सुनकर वो बोली- मैं तुम्हें तुम्हारे ऑफ़िस में फ़ोन करूँगी, फिर तुम आ जाना।
मैं ऑफ़िस में एक ज़रूरी काम में व्यस्त था कि मेरे फोन की घण्टी बजी और उधर से आवाज़ आई- वो घर पर नहीं हैं, पास किसी शादी में जाएंगे तो तुम जल्दी से आ जाओ।मैंने जल्दी जल्दी अपना काम ख़त्म किया और घर पहुँच गया।
गौरी बोली- तुम पहले कमरे में जाओ, मैं नीचे ताला लगा कर आती हूँ।
मेरे घर में दो दरवाज़े होने की वजह से एक दरवाज़े पर ताला लगा कर दूसरे दरवाज़े से अंदर जा सकते थे इसलिए मैंने बड़ी ही चालाकी से ताला खोला और फिर दूसरे दरवाज़े से बाहर आकर मुख्य दरवाज़े पर ताला लगा दिया। कुछ देर बाद गौरी मेरे दूसरे दरवाज़े से अंदर आई और फिर हम दोनों मेरे बेडरूम में चले गये।
मैंने कुछ देर गौरी से बातें की और कहा- क्या मैं तुम्हारी पप्पी ले सकता हूँ?
इतना सुनकर गौरी बोली- इस में पूछने की क्या बात है? अगर तुम कुछ नहीं करते तो मैं क्या वैसे ही तुम्हारे पास आई हूँ?
यह सुनकर मैंने गौरी को अपनी बाहों में भर लिया और उसके होठों पर अपने होंठ चिपका दिए। गौरी ने साड़ी और ब्लाउज़ पहन रखा था और वो बहुत ही खूबसूरत लग रही थी। मैंने उसके होंठ चूसने शुरू कर दिए और वो सिसकियाँ भरने लगी। फिर मैंने उसके बालों में हाथ फेरना शुरु किया और उसके कान पर मैंने प्यार से अपनी जीभ फेर दी। गौरी अब काफ़ी गरम हो चुकी थी। उसने मेरी कमीज़ में हाथ दे दिया और मेरे शरीर को ज़ोर से अपने हाथों से पकड़ लिया. मैंने धीरे धीरे उसके ब्लाउज़ में हाथ डाला और अपना चेहरा ब्लाउज़ के ऊपर रख दिया।
गौरी बोली- ज़रा धीरज से काम लो ! यह सब तुम्हें ही मिलेगा !
मैंने उसका ब्लाउज़ और साड़ी उतार दी और अपनी कमीज़ भी निकाल दी। फिर मैंने गौरी को बिस्तर पर लिटा दिया और उसकी ब्रा भी निकाल दी और उसके मम्मे चूसने लगा। गौरी अब मेरा साथ भरपूर दे रही थी और उसने मेरे लण्ड को ज़ोर से दबा दिया और हिलाने लगी।
मैंने बोला- इतनी ज़ोर से हिलाओगी तो सब माल तो ऐसे ही निकल जाएगा !
मैंने गौरी की चूची चूसना शुरू किया और अपने हाथ से उसकी पैन्टी निकाल दी और हाथ उसकी चूत पर फेरना शुरू कर दिया। गौरी ने मेरी अंडरवीयर निकाल दी और मेरे लण्ड को प्यार से सहलाने लगी। मैंने गौरी की चूची से अपना मुँह हटाया और उसकी नाभि को चाटना शुरू किया। गौरी अब बहुत गरम हो चुकी थी। मैंने फिर धीरे धीरे अपना मुँह उसकी चूत पर रख दिया और उसे चाटने लगा। गौरी की सिसकी निकल गई और उसने अपनी टाँगें फैला दी जिससे मैं उसकी चूत को अच्छी तरह से चाट सकूँ। गौरी की योनि से नमकीन स्वाद आ रहा था और थोड़ी देर में उसने मेरे अण्डकोश पकड़ कर मेरा सर ज़ोर से दबा दिया और वो जैसे झड़ गई।
गौरी ज़ोर ज़ोर से सिसकियाँ ले रही थी और वो बोली- अब से यह तुम्हारी है, इसका जो भी और जैसे भी इस्तेमाल करना है तुम कर सकते हो। मेरी बरसों की आग को तुम ही बुझा सकते हो।
मैंने अब अपना लण्ड गौरी के मुँह की तरफ किया और उसने अपने मुँह में ले लिया और चाटने लगी। मैं एक बार फिर से गौरी की चूत चाटने लगा और अपने जीभ गौरी की चूत में जल्दी जल्दी चला रहा था।
गौरी की सिसकियाँ निकल रही थी, उसने मेरा लण्ड मुँह से बाहर निकाला और बोली” अब मुझसे नहीं रहा जाता, अब डाल दो इसे मेरे अंदर और मेरी प्यास बुझा दो। मुझे शांत कर दो मेरे हीरो !
मैंने अपने लण्ड का सुपारा गौरी की चूत पर रखा और एक धक्के में मेरा मोटा लंड गौरी की चूत में आधा चला गया। उसकी जैसे चीख सी निकल गई और बोली- ज़रा धीरे धीरे मेरे राजा ! इसका मज़ा लेना है तो धीरे धीरे इसे अंदर डालो और फिर जब पूरा चला जाए फिर ज़ोर ज़ोर से इसे अंदर बाहर करो !
मैंने अपने लण्ड धीरे धीरे उसकी चूत में डाला और फ़िर एक ज़ोर से धक्का पेल दिया और मेरा मोटा लंड उसकी चूत में सारा चला गया।
गौरी बोली- आ उउई ऊफफफ्फ़ हमम्म्मम आआ मेरे राजा डाल दो अंदर पूरा का पूरा ! यह चूत तुम्हारी है, फाड़ दो इसे ! आअहह ऊऊऊऊओ आआहह ज़ोर से और ज़ोर से !
मैंने अपनी स्पीड बढ़ा दी और ज़ोर ज़ोर से उसकी चूत पर वार कर रहा था। मैंने उसके मम्मे मुँह में लिए और अपनी स्पीड और भी बढ़ा दी। लगभग दस मिनट के बाद हम दोनों की आह निकली और हम दोनों झड़ गये। गौरी ने मुझे एक ज़ोर से पप्पी दी और हम लोग बाथरूम में साफ होने के लिए चले गये। थोड़ी देर में गौरी और मैंने फिर से किस करना शुरू किया और इस बार गौरी ने मेरा लण्ड अपने मुँह में लेकर चूसना शुरू किया। मैं पांच मिनट बाद में फिर से तैयार हो गया चुदाई करने के लिए। मैंने इस बार गौरी को उल्टा लिटा दिया और उसके मम्मे को पीछे से पकड़ कर मैंने अपना लण्ड उसकी चूत में डाल दिया। दोस्तो, इस पोज़िशन में लंड सीधा योनि में घुस जाता है और औरत को बहुत ही मज़ा आता है।
मेरी इस हरकत से गौरी की चीख निकल गई, वो बोली- आहह उउफफफफ्फ़ अफ ऊहह आआ ऊ हह आअहह बहुत दर्द हो रहा है, ऐसे लगता है कि तुमने अपना लंड सीधा मेरे पेट में ही घुसा दिया है। ज़रा धीरे धीरे करो ना ! आहह बहुत मज़ा आ रहा है. अब तुम अपनी स्पीड बढ़ा सकते हो।
मैंने उसकी कमर पकड़ कर उसे पेलना शुरू किया और अपने घस्से ज़ोर ज़ोर से मारने लगा लेकिन मेरा झड़ने का कोई हिसाब नहीं बन रहा था। मैंने गौरी से कहा- लगता है कि मुझे समय लगेगा झड़ने के लिये !
गौरी बोली- कोई बात नहीं ! तुम लगे रहो, जब समय आएगा तब झड़ जाना !
मैंने गौरी की गाण्ड के नीचे एक तकिया लगाया और उसके ऊपर चढ़ गया। गौरी की सिसकिया तेज़ हो रही थी, मैंने काफ़ी कोशिश की पर मेरा लण्ड झड़ने को तैयार नहीं था।फिर मैंने सोचा कि अगर मेरा लंड एक टाइट सी चीज़ में जाए तो शायद यह झड़ जाए। मैंने धीरे धीरे अपने लण्ड की रफ़्तार कम करी और गौरी की गांड पर उसे फेरना शुरू किया। गौरी शायद मेरा इशारा समझ रही थी, वो बोली- क्या इरादा है? मेरी कुँवारी गांड मारने का इरादा है क्या? यह तो तुम्हारी ही है लेकिन ज़रा प्यार से इस्तेमाल करना क्योंकि यह अभी बिल्कुल कुँवारी है।
मैंने झटक से उसके गांड पर सुपारा रखा और ज़ोर से पेल दिया। मेरा मोटा लंड गौरी की गांड में सिर्फ़ दो इन्च जाकर फँस गया और गोर की चीख निकल गई, बोली- उफ़फ्फ़ आहह ! निकाल दो इसे बाहर ! बहुत दर्द हो रहा है, मर गई …एयेए हह आ आ आ !
मैंने अपना लंड घबराकर बाहर निकाला और फिर धीरे धीरे उसे अंदर डालना शुरू किया, साथ में मैं अपने हाथ से गौरी के मम्मे दबा रहा था जिससे उसकी गरमी और बढ़ती जा रही थी। मैंने लगभग चार इन्च लण्ड घुसा दिया था और फिर एक बार ज़ोर से झटका मारा और पूरा का पूरा लौड़ा उसकी गाण्ड में घुस गया। गौरी अब मेरा भरपूर साथ दे रही थी। मैंने गौरी को ज़ोर ज़ोर से पेलना शुरू किया और उसकी टाइट गांड में मेरा लण्ड बहुत मज़े से चुदाई कर रहा था। फिर मैं कुछ देर बाद उसकी गांड में ही झड़ गया।
उस दिन के बाद हम दोनों को जब भी मौका मिलता था हम चुदाई करते थे।
दोस्तो, मेरी कहानी कैसी लगी, मुझे ज़रूर लिखें। Hindi Sex Kahani
नमस्कार दोस्तो, मेरी Hindi Porn Stories कहानी को पढ़ कर बहुत लोगों ने मुझे मेल किया और मुझसे निशु के साथ के सेक्स मजे के बारे में और लिखने को कहा। अपने उन सभी पाठकों के लिए मैं उससे आगे की घटना ले कर आया हूँ।
जब सुमित को पता चला कि अनवर ने भी निशु की कमसिन जवानी का मजा लूट लिया है तब उसने भी निशु के साथ सेक्स करने की इच्छा जताई।
सुमित और अनवर निशु के लिए नये नहीं थे और जब से उसने वो ताश का खेल हम लोगों के साथ खेला था तब से ही उसको पता था कि उसको मेरे दोनों दोस्त आज न कल चोदेंगे ही।
साथ ही मैं भी कहता कि तुम परेशान न हो, वो अगर सेक्स करेंगे भी तो हमेशा नहीं एक दो बार ही करेंगे, क्योंकि उनको पता है कि तुम मेरी बहन कम गर्लफ़्रेन्ड ज्यादा हो।
मानसिक रूप से निशु भी अनवर से चुदाने के बाद सुमित से सेक्स करने के लिए तैयार थी।
जब सुमित ने मुझे अपनी इच्छा बताई तो मैंने उसको सीधे निशु से बात करने को कहा।
अगले रविवार को हम तीनों दोस्त जमा थे और निशु चिकेन पका रही थी कि फ़िर सुमित ने यह बात की। तय हुआ कि आज खाने की मेज पर सुमित निशु से बात कर ले।
जैसा तय था, खाने की मेज पर सुमित ने निशु से पूछ लिया कि क्या वो उसके साथ एक बार सेक्स करेगी।
निशु भी मुस्कुरा कर बोली कि वो तो बहुत पहले से ही ये सोच रही है कि इतने दिनों तक आखिर सुमित भैया यह बात कह क्यों नहीं रहे हैं और फ़िर उसने तीन चार दिन बाद की बात कही क्योंकि तब उसके पीरियड्स के दिन शुरु हो गये थे।
अनवर ने ठहाका लगा कर जोर से कहा- ‘के एल पी डी’
और हम सब हंसने लगे। सुमित का चेहरा देखने लायक था। फ़िर वो निशु से बोल पड़ा- ठीक है पर रोकने का मुझे हर्जाना देना होगा।
निशु भी हंसते हुए पूछन लगी- क्या?
और सुमित ने कहा-तुम्हें मुझसे अपनी गाण्ड भी मरवानी होगी!
मुझे पता था कि सुमित साला एक नम्बर का हरामी है और चुदाई के मामले में वो लड़की से पूरा मजा लूटता है।
अब मुझे निशु के जवाब का इंतजार था, उसका जवाब तुरंत आया- नहीं रे बाप, जब आगे घुसवाने में इतना दर्द होता है तब वहाँ करवाने में तो मैं मर जाउँगी!
पर सुमित भी मिन्न्तें करने लगा। जहाँ निशु कहती कि नहीं और सुमित कहता- सिर्फ़ एक बार! इसके बाद वो कभी निशु से सेक्स की मांग नहीं करेगा।
थोड़ी देर बाद जब निशु का सुर बदलने लगा तो मुझे भी लगने लगा कि अब निशु को सेक्स में पूरा पी0एच0डी0 मिल जायेगा।
निशु ने तब कहा था- अभी तक सिर्फ़ मैंने सुना है गाण्ड चोदन के बारे में!
तब अनवर ने भी निशु को चढ़ाया कि वो एक बार यह अनुभव भी ले।
निशु ने तब मुझसे पूछा कि क्या मैंने कभी ऐसा किया है, और मैंने सच कह दिया कि नहीं, पर साथ ही कहा कि सुमित ही ऐसा करता रहता है लड़कियों के साथ, वो इस मामले में अनुभवी है।
अनवर ने अपनी बात कही कि उसने दो-चार बार गांड मारी है और उसको खूब मजा आया, पर सब लड़कियाँ राजी नहीं होती हैं इसलिए बहुत मौका नहीं मिला।
सुमित ने उसको तब आश्वस्त किया कि वह निशु को खूब प्यार से पहले गांड मरवाना सिखाएगा और तब उसकी गाण्ड मारेगा।
निशु भी तब बोली- ठीक है, पर अगर मुझे दर्द हुआ तो आप भी रुक जाएँगे!
और मुझे और अनवर को इसकी गारंटी लेने को कहा। मुझे तो कोइ आपत्ति होनी नहीं थी। मैं खुश था कि चलो अब निशु के साथ मुझे और ज्यादा मजा का मौका मिलेगा। आखिर सुमित से गाण्ड मराने के बाद उसको मुझसे तो मरवाना ही था।
तय हुआ कि सुमित रोज़ शाम को एक घण्टा निशु के साथ बितायेगा और धीरे धीरे उसके डर को एक सप्ताह में खत्म करेगा।
गुरुवार को सुमित का फ़ोन आया कि आज वो शाम आठ बजे आयेगा। उस दिन वो एक डी वी डी लाया जिसमें करीब बीस क्लिप थी, सब में 20-22 साल की लड़कियों को चोदा गया था और गाण्ड भी मारी गई थी। दो क्लिप भारत की भी थी।
चाय पीने के बाद सुमित ने उस फ़िल्म को चला दिया और फ़िर निशु को अपने सोफ़े के सामने टीवी की तरफ़ मुँह करके झुकने को कहा।
निशु सेन्टर टेबल के सहारे झुक गई और फ़िल्म देखने लगी। सुमित ने उसका लम्बा स्कर्ट कमर से ऊपर कर दिया और फ़िर पैन्टी खोल दी।
निशु अब तक बिल्कुल बेशर्म हो गई थी, बोली- आप तो बोले थे कि मुझे पहले सिखाएँगे कि कैसे किया जाता है, फ़िर अभी क्यों?
सुमित हँसा- हाँ मुझे याद है! आज तुमको सिखाउँगा ही, कुछ दिन में जब तुमको अपनी गाण्ड की मांसपेशियाँ खुद ढीला करना आ जायेगा तब पेलूंगा भीतर!
और फ़िर उसने निशु की बुर पर हाथ फ़ेरना शुरु किया। फ़िल्म देखते हुए और बुर को ऐसे मसलवाते हुए निशु भी धीरे धीरे कसमसाने लगी। जब उसकी बूर पनीया गई।
तब सुमित ने उसकी बुर के पानी को ही उसकी गाण्ड के छेद पर लगाया और फ़िर थूक लगा लगा कर निशु की गाण्ड से खेलने लगा। उसका एक हाथ बूर के साथ खेल रहा था और एक हाथ गाण्ड के साथ।
15 मिनट बाद सुमित ने अपनी उँगली निशु की गाण्ड में ठेली। उसकी उँगली के दबाब को महसूस कर निशु पीछे पलटी, पर फ़िर उसको पता था कि क्या होना है सो वापस अपना ध्यान टीवी पे ले गई।
इसी तरह से रोज़ गाण्ड में उँगली करते करते चार दिन बाद रविवार को जब अनवर भी था तब सुमित ने हमें दिखाया कि निशु अब बड़े प्यार से अपना गाण्ड ढीली करके दो ऊँगलियाँ भीतर ले रही थी।
इस चार दिनों में जिस तरह से निशु को तैयार किया जा रहा था, उसमें निशु को खुद मजा आने लगा था। उसे लगता था कि वो एक स्पेशल लड़की है।
मैंने भी जब उसको चोदा या घर में जब मौका मिला उसकी गाण्ड में उँगली जरूर की। उसको अब समझ में आने लगा था कि इस काम का एक अलग मजा है।
मंगल को एक छुट्टी थी, तय हुआ कि उसी दिन दोपहर में निशु की गाण्ड का उदघाटन हो। सुमित ने निशु को पेट साफ़ करने के लिए दवा दी और कहा कि सोमवार की रात वो उसे खा ले और फ़िर मंगल को जब तक उसकी गाण्ड नहीं मारी जाती वो खाली पेट रहे।
मैं और अनवर ऐसे बेचैन हो रहे थे कि जैसे एक बहुत बड़ा कारनामा देखने वाले हो। सच में हमने कभी किसी लड़की को गाण्ड मरवाते नहीं देखा था और वो भी जब वो पहली बार ऐसा करवा रही हो।
हम यह जानते थे कि सुमित अक्सर लड़कियों की गाण्ड मारता है पर हम सबने जब भी साथ-साथ सेक्स किया, सुमित ने लड़की को चोदा ही था।
मुझे अब मंगल का बेसब्री से इंतजार था, क्योंकि मेरे लिए पहला मौका होता जब मैं किसी लड़की को गाण्ड मराते देखता, हालाँकि ब्ल्यू फ़िल्मों में मैंने कई बार देखा था फ़िर भी एकदम सामने किसी लड़की को पहली बार गाण्ड मराते देखना कम किस्मत बात नहीं थी।
मंगल को करीब 11 बजे सुमित आया। अनवर उसके पहले ही आ गया था। हम सबने चाय पी जो निशु ही बनाई।
चाय पीने के बाद सुमित बोला- निशु अब जाओ और अपनी बुर और गाण्ड अच्छे से धो लो, फ़िर मैं भी अपना लण्ड धो कर तुमको एकदम नया मजा देता हूँ!
अब तक निशु भी अपनी गाण्ड में लण्ड का मजा लेने के लिए उत्सुक हो गई थी, बोली- भीतर चलिए न सुमित भैया कमरे में! वही कपड़े खोल कर बाथरुम में धोकर बिस्तर पर आ जाऊँगी!
हम सब अब बेडरुम में आ गए। सुमित ने अपने कपड़े खोले और फ़िर अपने लण्ड को हाथ से सहलाते हुए बाथरुम की तरफ़ बढ़ गया। निशु ने भी अपना टॉप-स्कर्ट खोल दी और सिर्फ़ पैन्टी में बाथरुम की तरफ़ चल दी।
सुमित अब वापस आ रहा था। उसका लण्ड अब आधा कड़ा हो गया था। उसने जब निशु को पैन्टी पहने देखा तब बोला- अब निशु, पैन्टी भी खोलो ना, अब हम तीनों से क्या शर्म है तुमको!
निशु मुस्कुराई और वहीं खड़े हो कर पैन्टी नीचे करके पैर से फ़ुटबाल को किक करने के स्टाईल में उसको अनवर और मेरी तरफ़ उछाल दिया। अनवर ने उस पैन्टी को कैच किया और उसकी खुशबू लेने लगा।
वो उसको ऐसे करते देख जोर से हँस दी, बोली- आप तीनों को मैं भैया बोलती हूँ, फ़िर भी आप लोग कितने बेशर्म की तरह मेरे लिए करते हैं।
अनवर साला अब कहाँ चुप रहता, बोला- अरे तुमको भी तो हम लोग छोटी बहन समझ कर ही प्यार करते हैं। अगर हम लोग इस जवानी में तुम्हारा ख्याल नहीं करेंगे तब तुम भी जैसे हम कभी कभी रंडी-बाजी करते हैं, किसी ऐरे-गैरे से चुदाने लगी तब बदनामी होगी की नहीं। यही सोच कर हम लोग तुम्हें इतना खुश रखते हैं। अब देखो आज तुम्हारी गांड के लिए हम सब कितने दिन से बेचैन हैं।
सुमित भी हँसते हुए जोड़ दिया- वैसे भी हम लोगों को बहनचोद कहलाने में कोइ परेशानी नहीं है!
और मेरी तरफ़ देख कर आँख मार दी।
‘सही में तुम लोग बहनचोद हो’, कहते हुए निशु बाथरुम में घुस गई।
शेष कहानी अगले भाग में! Hindi Porn Stories
मेरा नाम मोहित है और मेरी उमर ३४ साल है मैं दिल्ली Hindi Sex Stories में रहता हूँ, मेरी बीवी का नाम सोनू है और उसकी उमर भी २५ साल है हम दोनों के एक बच्चा है ५ साल का ! सोनू का ५ साल का बच्चा होने के बाद भी फिगर इतना आकर्षक है कि उसको अगर कोई देख ले तो सिर्फ़ एक ही ख्याल उसके दिमाग में आता है कि काश मैं इसकी चुदाई कर पाता, वो भी नंगी करके ! उसका फिगर है भी क़यामत ३६ इंच के मोटे मोटे बाहर को तने हुए चुचे, २८ इंच की कमर, ३८ इंच की मोटी गोल गोल गांड ! गांड देख कर तो गांड को फाड़ डालने का ही ख्याल आता है !
वो कपड़े भी ऐसे पहनती है कि मज़ा आ जाता है ! चूड़ीदार पजामी पर नीचे गले का सूट जिसमें से उसके मोटे चुचे झांकते रहते हैं !
चलो खैर क्या बताऊँ उसके बारे में ! बिस्तर पर भी वो चुदाई में मेरा पूरा साथ देती है। बिस्तर पर मैं नहीं वो मुझे चोदती है ! हर तरह का आसन उसे आता है ! लण्ड चूसने में तो वो एक्सपर्ट है !
मेरा एक दोस्त है विकास ! वो थोड़ा बात करने में बहुत तेज़ है ! वो भी शादीशुदा है उसकी बीवी बबली अभी छोटी है।
मेरा मन करता है उसकी बीवी के छोटे छोटे चुचे मुँह में ले कर चूसता रहूं और उसकी टाइट चूत में लण्ड डाल कर अपने लण्ड को छलनी कर दूं ! पर क्या करूं ! सोच ही सकता हूँ !
काश ऐसा होता विकास मेरे सामने सोनू को चोदता और मैं विकास के सामने बबली को चोदूं !
खैर असल कहानी यहीं से शुरू होती है ……..
विकास और सोनू अक्सर बातें किया करते थे, मेरे सामने भी और मेरे पीछे भी। पर क्या करते थे, मैं नहीं जानता था। मैं सोचता था सामान्य बात होती होंगी !
पर मैं ये भी जानता था विकास बहुत बड़ा चोदू है, वो लड़कियों और औरतों को जल्द ही पटा लेता था और समझ जाता था कि औरत क्या चाहती है !
पता नहीं घर पर एक टाइट चूत होते हुए भी क्यों वो बाहर मुँह मारता था ! खैर !
एक बार मैं और सोनू विकास के घर पार्टी पर गए हुए थे हमारा बच्चा दादी के घर पर था।
रात को दारू पार्टी हुई और सभी ने जमकर दारू पी। रात होने पर सभी अपने घर चले गए पर मैं वहीं रह गया क्योंकि मुझे कुछ ज्यादा ही चढ़ गई थी ! मैं एक कमरे में जा कर सो गया ! कुछ रात होने पर मेरी नींद प्यास के कारण खुल गई ! मैं पानी पीने किचन पर गया तो देखा विकास के बेडरूम की खिड़की पर कोई खड़ा है !
पास जाकर देखा तो सोनू थी पहले तो मुझे देख कर थोड़ा सकपका गई ! पर जब मैंने देख ही लिया था तो मुझे चुप रहने का इशारा करके मुझे अन्दर दिखाने लगी ! अन्दर का सीन देखते ही मेरे लण्ड का पानी छुटने को हुआ अन्दर सोफे पर बबली बिल्कुल नंगी होकर कुतिया वाले पोज़ में खड़ी है और विकास उसकी जमकर गांड में लण्ड पेले जा रहा है ! बबली जोर जोर से चीख रही है- बस करो जी अब !
पर विकास रुक ही नहीं रहा है ! धकाधक गांड का कुंआ बनाए जा रहा था !
पता नहीं बबली को मज़े आ रहे थे या नहीं पर वो भी आपनी गांड को जोर जोर से हिलाए जा रही थी और चीखे जा रही थी !
ये देख कर मैंने सोनू से कहा,” अरे रे रे ! बेचारी की चूत तो इतनी टाइट है पर न जाने इस विकास को क्या मज़े चाहिएँ जो इसको इस तरह से चोद रहा है !”
तब सोनू ने कहा- नहीं ! ये बात नहीं है ! मैं तो शुरू से देख रही हूँ विकास जिस तरह से चुदाई चाहता है उस तरह से बबली नहीं कर पा रही है ! वो बेचारी वैसे ही इतनी छोटी है उसको क्या पता सेक्स के बारे में इतना ! उसको तो सिर्फ़ बिस्तर पर लेट कर अपनी टांगें खोल कर लण्ड लेने की आदत है ! उसे क्या पता कि क्या होता है लण्ड चूसना, गांड मरवाना, घोड़ी बनकर चुदना वगेरह वगेरह ! हर कोई मेरी तरह थोड़े ही होता है !
सच में सोनू ने ये सही कहा था !
” वैसे मोहित ! विकास का लण्ड भी तो बहुत बड़ा है ! तुमसे कम से कम २ इंच तो लंबा होगा ही और मोटा भी बहुत है !” मैं ये सुनकर थोड़ा मुस्कराया और सोनू को देखने लगा ! उसकी आंखों में भी एक शरारत थी।
” तो फिर तुम ही क्यो नहीं पहुँच जाती उसके पास ! बबली को भी आराम आ जाएगा !” ऐसा कहकर मैं चला गया सोने के लिए वापस !
मैं बिस्तर पर तो लेट गया पर नींद आँखों में नहीं थी ! सोचता रहा मेरा लण्ड बबली के लिए परफेक्ट है और विकास का सोनू के लिए ! क्यों न ……….?
ऐसा सोचते सोचते थोड़ा टाइम हुआ तो मैं फिर सोचने लगा- नहीं यार सोनू तैयार नहीं होगी इसके लिए ! बबली को तो मैं जबरदस्ती चोद भी सकता हूँ वो कुछ भी नहीं कहेगी !
पर सोनू ….?
एक बार फिर मैं विकास के कमरे की तरफ़ बड़ा तो सोनू वहाँ नहीं थी ! कहाँ गई होगी?
मैंने कमरे में देखा तो वहाँ अँधेरा था !
अन्दर गया और लाईट जला कर देखा तो वहाँ सिर्फ़ बबली थी ! वो सो रही थी उसने सिर्फ़ मेक्सी पहन रखी थी ! और वो भी पारदर्शक ! उसमें उसके छोटे छोटे सीधे खड़े हुए चुचे झलक रहे थे ! मेक्सी भी जांघों से ऊपर आ रही थी।
मैंने हल्का सा हिम्मत करके उसकी मेक्सी को ऊपर उठाया तो हाय ! ये क्या …?
बिल्कुल चिकनी चूत ! मन कर रहा था अपनी जीभ लेकर घुसा दूँ उसमें और पी जाऊं सारा रस ! चूत देखकर लग रहा था कि कब से इसको किसी ने चोदा नहीं था ! विकास तो गांड में ही लगा रहता है ! पर मैंने देखा सोनू और विकास कहाँ है ? मैंने सोचा चलो थोडी देर में आकर इस चूत को भी देखते हैं पर पहले अपनी चूत …… मतलब अपनी बीवी को तो देखूँ कहाँ है वो !
सोनू को खोजते हुए में दूसरे कमरे की तरफ़ पहुँचा तो एक कमरे से लाईट जलती देख कर उधर गया तो अन्दर का नज़ारा देखते ही सन्न रह गया ..!
अन्दर चुदाई का ऐसा खेल चल रहा था जिसमे सोनू अपने नंगे बदन को दो दो मर्दों को सौंप उनके नंगे जिस्म से अपनी प्यास को बुझा रही थी !
अन्दर सोनू बिल्कुल नंगी होकर घुटनों के बल बैठी थी ! उसके सामने विकास अपना लण्ड उसके मुँह में डाल कर हिलाए जा रहा था और सोनू उसे चूसे जा रही थी। विकास का लण्ड उसके मुँह में पूरा भी नहीं आ रहा था ! पर सोनू मदमस्त होकर ऐसे चूस रही थी जैसे आज तक लण्ड मिला ही न हो !
उधर एक और शख्स दीपक था मेरा एक और दोस्त वो पता नहीं कब वापस आया था, वो भी बिल्कुल नंगा था शायद अपनी बारी का इंतज़ार कर रहा हो !
दीपक ने सोनू की कमर में हाथ रख कर उसे उठाया और उसकी गांड को ठीक अपने लण्ड की पोसिशन में ले आया ! ठीक सोनू की चूत के सामने आते ही दीपक ने अपना लण्ड उसकी चूत में पेल दिया !
आह ! मर गई ईई इ इ क्या शोट मारा है तूने दीपक मज़ा आ गया !
उधर विकास लण्ड चुसाये जा रहा था !फिर जो दीपक ने झटके मारने शुरू किए तो रुका ही नहीं !
पट ! पट की आवाज़ कमरे में गूंज रही थी साथ साथ सोनू की भी चीखें अहा मार डाला !!!!! कितना मज़ा दे रहा है तेरा लण्ड दीपक !
बड़ी देर तक उसी पोज़ में चोदने के बाद सोनू ने पोज़ बदला और विकास के मोटे लण्ड को पकड़ कर उसको बिस्तर पर लेटा कर उसके लण्ड को अपनी चूत में समां ले गई, अब सोनू विकास के ऊपर थी और विकास का लण्ड सोनू की चूत पर था दीपक सोनू के सामने आ गया और अपना लण्ड उसके मुँह में डाल दिया
आह !!!!!! क्या मज़े का दिन है दो दो लण्ड एक साथ काश तीसरा भी होता तो!!!!!!!?
सोनू दीपक का लण्ड चूसती जा रही थी और विकास के लण्ड पर अपनी गांड हिलाए जा रही थी विकास को पूरा मज़ा आ रहा था !
तभी सोनू ने दीपक को कहा- दीपक ! क्यों ना तू मेरे इसी पोज़ में मेरे पीछे आए और मेरी गांड में अपना लण्ड घुसाए?
दीपक ने कहा- हाँ हाँ! क्यों नहीं ! भाभी जी ! जैसी आपकी इच्छा !
और दीपक सोनू के पीछे आ गया और किसी तरह सोनू की सहायता से अपना लण्ड उसकी गांड में डालने में सफल हो गया।
अब तो जो चुदाई चल रही थी वो किसी ब्लू फ़िल्म से कम नहीं थी सोनू अपनी गांड को आगे करती तो विकास को मज़ा आता अगर पीछे करती तो दीपक को और सोनू को तो मज़ा आ ही रहा था। ऐसा करते करते जब तीनों थक गए तब जाकर तीनों अलग हुए अब विकास ने सोनू को साधारण आसन में चोदा।
मतलब सोनू की दोनों टांगे खोल कर टांगों के बीच में ख़ुद लेट कर धक्का पेली करते हुए !
जैसे ही विकास झड़ने को हुआ तभी उसने अपना लण्ड निकल कर सोनू के मुँह पर धार मार दी सोनू बड़े प्यार से उसे चाटने लगी तब दीपक ने भी ऐसा ही किया वैसे ही सोनू को चोद कर उसके मुँह में अपना माल झाड़ दिया।
फिर उस रात वो दोनों सोनू को बारी बारी से अपने पोज़ में चोदते रहे और सोनू भी उनका पूरा साथ देती रही !
आज की तारीख में ये हाल है कि मेरे सारे दोस्त सोनू को चोद चुके हैं !
मैंने भी उस रात जोश में बबली को चोदा था पर वो मैं आपको अपनी अगली कहानी में बताऊंगा !
तब तक के लिए बाय Hindi Sex Stories
भरी जवानी में मैं Sex Stories अपनी क्लास के एक सुन्दर से लड़के से प्यार कर बैठी। झिझक तो खुलते खुलते ही खुलती है। पहले तो हम क्लास में ही चुपके से प्रेम-पत्र का आदान प्रदान करते रहे। एक दिन प्रतीक ने मुझे वहाँ के एक गार्डन में शाम को बुलाया। मैं असमंजस में थी कि जाऊं अथवा ना जाऊं। फिर सोचा कि इसमें डरने की क्या बात है … वहाँ तो और लोग भी होंगे। पर किसी ने पहचान लिया तो फिर … ? चलो मुँह पर कपड़ा बांध लेंगे।
मैंने हिम्मत की और शाम को बगीचे में पहुंच गई। वो मोटर साईकल स्टेण्ड पर ही मेरा इन्तज़ार कर रहा था। हम दोनों उस शाम को बहुत देर तक घूमे। खूब बातें की, पर प्यार की नहीं, बस यूँ ही इधर उधर की। मेरा डर मन से निकलता गया और अब मुझे उसके साथ घूमना-फ़िरना अच्छा लगने लगा। धीरे धीरे हम प्यार की बातें भी करने लगे।
पहले तो मुझे बहुत शरम आती थी, पर मैं अपना चेहरा हाथों से छिपा कर बहुत कुछ कह जाती थी। वो एक बहुत ही शरीफ़ लडका था, उसने मुझे अकेला पा कर भी कोई भी अश्लील हरकत नहीं की। पर मुझे यह अजीब लगता था। मेरी मन की इच्छा तो यह थी कि हम दोनों अकेले में एक दूसरे के यौन-अंगों से छेड़छाड़ करें, कुछ रूमानी माहौल में जाये। कुछ ऐसा करें कि मन की आग और भड़क जाये …
यानि … यानि …
एक दिन मैंने ही पहल कर दी। एकान्त पा कर मैंने अपना चेहरा हाथों में छिपा कर कह ही दिया,”प्रतीक … एक बात कहूँ … ?”
“हां अंजली … कहो …!”
“बस एक बार … एक बार … यानि कि … ” मैं नहीं कह पाई। पर दिल ने सब कुछ समझ लिया। उसने चेहरे पर से हाथ हटाया और मेरे होंठों को चूम लिया।
“हाय … और करो ना … !”
उसने ज्योंही मेरे होंठों पर अपने होंठ रखे, मैंने जोर से उसे भींच लिया और बेतहाशा चूमने लगी। प्रतीक ने मेरे बालों में हाथ डाल कर सहला दिया। मेरी गुलाबी आंखें उस एकटक निहारने लगी। मेरी नजरें स्वतः ही झुक गई।
इसी तरह एक दिन मैंने उसके हाथों को मेरे सीने पर रख कर स्तनों को दबाने को कह दिया।
उसने बड़े ही प्यार से मेरे स्तन सहलाये और दाबे … । अब मुझे प्यार में सेक्स का भी मजा आने लगा था। फिर वो घड़ी भी आई जब मैंने उसका हाथ मेरा कुर्ता ऊपर करके अपनी चूत पर रख दिया। वो उसे सहला कर मेरे नक्शे का जायजा लेने लगा। मेरी गीली चूत का भी उसे अहसास हो गया।
मैंने भी हिम्मत करके उसका लण्ड पकड़ लिया और सहलाने लगी।
अब अधिकतर यही होने लगा था कि हम किसी कोने या अंधेरी जगह को तलाशते और एक दूसरे के अंगों के साथ खेलते और वासना में लिप्त हो जाते।
एक दिन प्रतीक ने मुझसे चुदवाने को कहा। मैं डर गई, मुझे तो इसी खेल में मजा आने लगा था। पर चुदना, मतलब उसके लण्ड को मेरी चूत में घुसवाना पड़ेगा। जाने क्या होगा … ? मैं उसे टालती रही। यूँ हम सालभर तक ऐसे ही वासना भरा, अंगों की छेड़छाड़ का खेल खेलते रहे। हां अब हम कभी कभी अपना यौवन रस भी निकालने लगे थे। उसका तो वीर्य भी ढेर सारा निकलता था। उसका लण्ड वास्तव में मोटा था। उसका सुपाड़ा भी मैंने देख लिया था, बड़ा सा फ़ूला हुआ लाल टमाटर जैसा था, पर उस समय वो उत्तेजित था।
यूँ ही करते करते मेरी शादी भी पक्की हो गई। शादी का समय भी आ गया और फिर देखते ही देखते शादी भी हो गई। हम दोनों इस बार बहुत ही फ़ूट फ़ूट कर रोये थे। हम में भाग कर शादी करने की भी हिम्मत नहीं थी। हमारी कसमें, वादे सभी कुछ किताबी बातें बन कर रह गये थे। तारे तोड़ कर लाना बस मुहावरा बन कर ही रह गया था।
मेरे पति बंसी लाल की एक बड़ी दुकान थी, जो बहुत अच्छी चलती थी। वो अधिकतर दिल्ली या कलकत्ता आता जाता रहता था। मेरे लिये बहुत सी चीज़ें लाया करता था। मुझे वो बहुत प्यार करता था। चुदाई भी बहुत बढ़िया करता था। हां, गालियां वगैरह नहीं देता था। जब भी बंसी लाल शहर से बाहर जाता तो मैं प्रतीक के कमरे पर चली जाती थी।
उन दिनों मेरी जिन्दगी रंगो से भरी हुई थी। मुझे सब कुछ सुहाना और सुन्दर सा लगता था। मेरा मन खिला खिला सा रहता था। मेरा पति मुझे बहुत प्यार करता था और मेरा प्रेमी मुझ पर अब भी जान छिड़कता था। दोनों ही मुझे बहुत खुश रखते थे। आज भी मैं अपनी स्कूटी से प्रतीक के घर आ गई थी। प्रतीक हमेशा की तरह अपनी पढ़ाई में लगा था। मुझे देखते ही वो खुश हो गया और मुझे अपने आलिंगन में जकड़ लिया। सदा की तरह उसका लण्ड खड़ा हो गया और मेरी गाण्ड की दरार में घुसने लगा। मुझे बस रंगीनियाँ ही रंगीनियाँ नजर आने लगी।
कुछ देर तक तो हम चूमा-चाटी करते रहे … फिर मैंने उसका लण्ड पकड़ लिया और सहलाने लगी। आज उसने अपना पजामा उतार दिया और अपना नंगा लण्ड मेरे हाथों में थमा दिया। उसका मोटा लण्ड मेरे दिल में पहले ही बसा हुआ था, सो उसे मैंने हौले हौले रगड़ना चालू कर दिया। उसने भी आज पहली बार मेरी साड़ी उतार दी और हाथ ब्लाऊज में घुसा दिया। मुझे इस से थोड़ी तकलीफ़ हुई फिर मैंने उसका हाथ हटा दिया।
“ऐसे मत करो, लगती है … बस अब मैं चलती हूँ !”
पर प्रतीक ने मेरी एक ना सुनी। उसने मुझे बिस्तर पर लेटा दिया और मेरे ऊपर चढ़ गया।
“ये मत करो, पति के अलावा दूसरा कोई नहीं … !!” मैं कुछ आगे कहती, प्रतीक ने चुप करा दिया,”मैं दूसरा नहीं हूँ, मैं तुम्हें प्यार करता हूँ, आज मुझे सब करने दो … “
“नहीं प्रतीक, बस ऊपर ही ऊपर से कर लो … “
“प्लीज बस एक बार चुदा लो … देखो मैं तो तुमसे कब से प्यार करता हूँ, मेरी कसम है तुम्हें … देखो तुमने मेरा क्या हाल कर दिया है … प्लीज अंजली … “
उसका यह हाल देख कर मुझे भी ठीक नहीं लगा। सोचा किसको पता मालूम चलेगा, सच है ये कब से तड़प रहा है … मैं पिघलने लगी। मैंने अपनी साड़ी ऊंची कर ली।
“तुम्हारी कसम अंजली … तुमने तो आज मेरा दिल जीत लिया … ” और वो मुझ पर झुक गया, मुझे प्यार से चूमने लगा, उसका लण्ड मेरी चूत में घुसने लगा। मुझे लगा उसका लण्ड मेरे पति से बहुत मोटा है … कसता हुआ सा भीतर जाने लगा।
आनन्द से मेरी आंखें बंद होने लगी। उसने धीरे धीरे अपना लण्ड मेरी चूत में पूरा उतार ही दिया। दूसरा लण्ड, नया लण्ड … अलग ही आनन्द दे रहा था। मैंने प्यार से प्रतीक को देखा और अपनी ओर खींच लिया।
“प्रतीक … बहुत मजा आ रहा है … अब तक क्यों नहीं चोदा तुमने !”
“तुम ही दूर रही मुझसे … तुम तो मेरी जान हो … आह्ह्ह … !”
वो मेरे से प्यार से लिपट गया और उसके चूतड़ मेरी चूत के ऊपर भचाभच चलने लगे। मैं भी उसे प्यार से चूमने चाटने लगी। मैं अब पलट कर उसके ऊपर आ गई और उसके लण्ड पर बैठ कर चुदने लगी। उत्तेजना के मारे मेरा बुरा हाल था।
उसका लण्ड मेरी चूत को मस्ती से चोद रहा था। कितनी खुशी लग रही थी मुझे।
उसका मोटा लण्ड मेरी योनि में अब भी कसता हुआ आ जा रहा था। मीठी सी गुदगुदी तेज हो गई। मुझे लगा कि मैं चरम बिन्दु तक पहुंच गई हूँ और अब मुझे नहीं सहा जायेगा। तभी मेरा रज छूट गया। प्रतीक ने झट से पोज बदला और मुझे घोड़ी बना दिया और देखते ही देखते उसका लण्ड मेरी गाण्ड में फ़ंस चुका था। मेरी गाण्ड खासी चिकनी थी और खुली हुई थी। उसने लण्ड को भीतर घुसा दिया और आगे पीछे करने लगा। मुझे फिर से आनन्द आने लगा। उसका ये सब इतने प्यार से करना मुझे बहुत पसन्द आया। उसका तरीका इतना अच्छा था कि कोई एक बार चुद जाये तो बार बार लण्ड खाने की इच्छा हो !
मैंने उसे कहा,”प्रतीक, एक बार और मेरी चूत चोद डालो, प्लीज !”
उसने जल्दी से लण्ड बाहर निकाल कर चूत में घुसेड़ दिया। मुझे फिर से असीम आनन्द की दुनिया में पहुँचा दिया। सच में कुतिया के पोज में ज्यादा मस्त चुद रही थी। धक्के अन्दर तक ठोक रहे थे। मधुर चुदाई ने फिर रंग दिखाया और मैं फिर से झड़ने के कगार पर थी। मस्त चूत की उसने जम कर ठुकाई की उसने और मेरा रस फिर से चू पड़ा। तभी उसका वीर्य भी निकल पड़ा। मेरी चूत उसके वीर्य से लबालब भर गई और फिर उसका लण्ड सिकुड़ कर बाहर आता प्रतीत हुआ।
उसने जल्दी से अपनी कमीज को मेरी चूत पर लगा दिया और उसे साफ़ करने लगा।
मैने पीछे मुड़ कर उसे प्यार से देखा। वो बड़े अच्छे तरीके से मेरी चूत को साफ़ करने में लगा था।
“प्रतीक, तुमने मुझे ये सुख पहले क्यों नहीं दिया … ?”
“यह तो सब समय की बात है, तुमने मुझे हाथ लगाने दिया तो मेरी किस्मत खुल गई।”
“हाय राम, अपन इतने दिनों तक बेकार ही यूँ ही मसला-मसली करते रहे, चुदाई कर लेते तो कितना आनन्द आता … ! है ना ?… अपन तो अपने आप को वासना की आग में जलाते रहे … मुठ मारते रहे … प्रतीक, साले तुमने मुझे जबरदस्ती क्यों नहीं चोद दिया?”
“मैं तुम्हें प्यार करता हूँ … कोई जानवर तो नहीं हूँ … “
“कसम खाओ, अब रोज ही ये सब करेंगे … तुम्हारा लण्ड मुझे बहुत ही अच्छा लगा !”
“बस जान लो … आज से ये लण्ड तुम्हारा ही है।”
हम दोनों एक बार फिर से लिपट गये और अब मुझे चोदने वाला पति के अलावा प्रतीक भी था। एक बार फिर से हमने मरने जीने की कसमे खाने लगे, चांद तारे तोड़ कर लाने की बातें करने लगे … मरने जीने की कसमें खाने लगे … आह्ह्ह्ह्ह … … Sex Stories
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