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हेल्लो दोस्तों !Sex Stories

मैं एक बार फिर हाज़िर हूं Sex Stories आपकी सेवा में अपनी कहानी ले कर !

उम्मीद है कि आपको मज़ा आएगा। अगर कोई सुझाव हो तो वो अवश्य दें।

यार लड़कियाँ क्यों इतना शरमाती हैं मेल करने में?

कहानी पढ़ने में तो मज़ा आता होगा। बहुत सी तो अपनी चूत में कहानी पढ़ते-पढ़ते सचमुच में ऊँगली कर लेंगी लेकिन अगर कोई उन्हें अपना लण्ड देना चाहे तो वो इतने नखरे करेंगी कि उनका मन ही नहीं है चुदाई का !

मेरी आज की कहानी में भी कुछ इसी बात का ज़िक्र है।

हाँ तो दोस्तो ! जैसा कि मैंने आपको अपनी पिछली कहानी में बताया कि मैंने अपनी गर्लफ़्रेन्ड और उसकी सहेली की चुदाई की और मज़े किए। उसके बाद तो बस मुझे बस चुदाई का नशा ही छा गया था। छुट्टी के बाद स्कूल में मैंने सुधा जो कि मेरी गर्लफ़्रेन्ड है उससे मिलने के लिए कहा तो उसने कहा कि करिश्मा (जो कि उसकी दोस्त है) से पूछ के बताएगी।

उसने बताया कि करिश्मा की मम्मी अभी घर पे है और वो कही बाहर ही नहीं जाने वाले हैं, इसलिए जगह का इन्तजाम भी नहीं हो पा रहा है। करिश्मा का भी चुदाई का बहुत मूड था तो अब कमरे का इन्तजाम करने की सारी जिम्मेदारी मुझ पे आ पड़ी थी।

मेरा एक दोस्त, जिसका नाम रवि था, वो जम्मू का रहने वाला था और कमरा ले कर अकेले रहता था। मैंने उससे अपने चुदाई के किस्से बताये थे और उसका भी दोनों को चोदने का बहुत मन था, उससे कमरे के लिए कहा तो वो दोनों को अपने कमरे पे लाने के लिए कहने लगा।

हम लोग की परीक्षा भी करीब थी। लेकिन चुदाई का नशा भी ऐसा है कि बस और कुछ सूझता ही नहीं।

फिर मैंने सुधा से बताया कि कमरे का इन्तज़ाम हो गया है तो उसने पूछा- कहाँ?

तो मैंने उससे बता दिया कि रवि के कमरे पे. तब उसने वहाँ जाने से मना कर दिया और कहा कि नहीं मुझे नहीं जाना वहाँ ! वो बहुत रिस्की है ! और ना-नुकर करने लगी। लेकिन बाद में वो मान गई।

रविवार को मिलने का प्रोग्राम बना।

मैंने रवि से उसके कमरे की चाबी ले ले थी। सुधा ने घर पर ट्यूशन जाने का बहाना किया, हम लोग एक जगह मिले और रवि के कमरे पर आ गए। उसके कमरे पे कोई नहीं था। हम कमरे के अन्दर थे और आते ही सुधा मुझे पकड़कर चूमने लगी।

क्या मस्ती चढ़ी थी साली पर !

आज उसने जींस टॉप पहना था और कसम से क्या माल लग रही थी !

उसकी चुचियाँ अभी छोटी थी लेकिन अब मैं था ना उनको बड़ा करने के लिए !

साली चुचियो को जैसे ही छुआ, मुझको करंट लग गया। तनी, कड़ी और नुकीली चुचियों का मज़ा आ गया। हमने पहले आपस में खूब फ़ोर-प्ले किया। मैंने उसको खूब चूसा, चाटा और खूब उसका दूध पिया। मैंने उससे अपने लण्ड को चूसने के लिए कहा फिर हम ६९ पोसिशन में हो गए और मैंने उसका पानी निकल दिया। सुधा तड़प रही थी और उसको तड़पाने में मुझको मज़ा आ रहा था।

वो बार बार मेरे लण्ड को अपनी बुर में डालने के लिए कह रही थी। फिर मैंने उसको घोड़ी बनने को कहा और उसकी चूत चोदने लगा।

वो अह्ह्ह्ह्ह् ! ह्ह्छ उ ह्ह्ह्ह्ह् ह्ह्छ ! जैसी मस्त सेक्सी सेक्सी आवाज़ निकल रही थी। फिर मैं नीचे लेट गया और वो मेरे ऊपर आ गई। अब उसने मेरे लण्ड को पूरा अपनी बुर में ले लिया और कूदने लगी।

आह्ह्ह्ह्ह् ह्ह्ह् ! कितना मज़ा आ रहा था ! लग रहा था कि अन्दर लण्ड से कुछ टकरा रहा है। लण्ड पूरा अन्दर तक चला गया था। वो भी ऊह आह करके खूब उछल रही थी। तभी मैंने उसे नीचे उतार दिया और ऊपर मैं आ गया और २०-२५ धक्के लगाने के बाद में झड़ गया, लण्ड उसकी चूत के ही अन्दर था।

क्योंकि मैंने कंडोम पहना था ही। फिर हम वही लेट गए, तब वो कहने लगी कि आते समय उसने करिश्मा को बता दिया था कि वो मुझसे मिलने आ रही है तो वो भी जिद्द कर रही थी। तो मैंने उससे कहा कि मैं वहाँ पहुँच के कॉल करुँगी। फिर उसने मुझसे पूछा कि क्या मैं उसे बुला लूँ?

मुझे और क्या चाहिए था !

मैंने कहा- बुला लो उसे !

मैं जाता हूँ और जहाँ मैं तुम्हें मिला था वहीं से उससे ले आता हूँ क्योकि उसने यह कमरा नहीं देखा है।

उसने कहा- ठीक है। फिर उसने करिश्मा को कॉल किया तो करिश्मा ने आधे घंटे में आने के लिए कहा।

तो मैंने उससे कहा- कह दो कि राहुल तुम्हें लेने जा रहा है।

तब तक मैंने सोचा कि अब सुधा की गाण्ड मार ली जाए !

फिर मैंने सुधा से कहा- तुमने मुझसे गाण्ड मरवाने का वादा किया था !

तो उसने कहा कि करिश्मा आ जाए तो उसकी भी साथ में मार लेना !

मैंने कहा- वो भी हो जाएगा ! लेकिन पहले तुम्हारी गाण्ड तो जरूर मारूंगा !

और मैंने उसको कुतिया स्टाइल में कर दिया, कमरे में पड़ी कोल्ड क्रीम उसके छेद पे और अपने लण्ड पे लगा दी और उससे कहा- थोड़ा दर्द होगा ! रोना नहीं ! बाद में मज़ा आ जाएगा !

और उसके छेद पर अपना लण्ड रख कर घुसाने लगा। लण्ड जैसे ही थोड़ा अन्दर गया वो दर्द से चिल्लाने लगी और गाण्ड मराने से मना करने लगी।

पर अब मैं कहाँ रुकने वाला था ! थोड़ा और अन्दर डाल दिया तो वो खूब जोर जोर से चिल्लाने और रोने लगी। मैं डर गया कि कोई आ ना जाए ! और तुंरत अपने लण्ड को बाहर निकाल लिया।

फिर क्या ! उसने मुझसे गाण्ड नहीं मरवाई। मैं उसको चुप कराने लगा और कुछ देर बाद सब कुछ सामान्य हुआ। फिर उसने जा कर करिश्मा को लाने के लिए कहा। मैं करिश्मा को लेने चला गया। जब मैं और करिश्मा आए तो दरवाज़ा बंद था तो मैं उसको खुलवाने के लिए आगे बढ़ा तो अन्दर से चूमने-चाटने की आवाज़ आ रही थी।

मैं चौंक गया !

शेष आगे के भाग में….Sex Stories

(Abbu Aur Bhai- Part 1) Antarvasna

हेल्लो Antarvasna के पाठकगण!
कैसे हैं आप सब! इस बार रमज़ान की वजह से मैं नेट पर रेगुलर नहीं आ पा रही हूं। खैर! अब वक्त मिला है

तो आप सबकी खिदमत में एक नई कहानी अर्ज है और आप सबके बहुत सारे मेल मिले।
शुक्रिया मेरी कहानिया पसन्द करने का।

हां तो आज मैं आप सबको बता रही हूं कि अम्मी कहीं बाहर गई हुई थी और जैसा कि आप सबको पता ही है मेरे अब्बू और भैया मुझे कई बार चोद चुके हैं और दो चार बार तो साथ में भी चोदा है उन दोनों ने।

खैर करीब 15 दिन हो गये थे और मैंने उन दोनो से चुदाया नहीं था क्यूंकि मैं अपने बॉयफ़्रेंड से चुदवा कर बहुत थक जाती थी साला हरामी पता नहीं क्या खा कर चोदता था सारे कस बल ढीले कर देता था. पर वो किसी काम के सिलसिले में बाहर गया हुआ था और मेरी आदत लगभग रोज़ ही चुदाने की हो गई थी जब तक बुर में लण्ड ना डलवा लूं चैन ही नहीं आता था।

पर इधर करीब 15 दिन से मैंने नहीं चुदवाया था और उस दिन रात को मैं अपने रूम में एक ब्ल्यू फ़िल्म देख रही थी जिसमें एक लड़की को चार चार साले मुस्टण्डे चोद रहे थे और वो भी साले काले काले हबशी, जिनके मोटे मोटे लण्ड देख कर मेरी आंखें भी फ़ट गई और उस लड़की के तो कहने ही क्या साली इस तरह अपनी गाण्ड और बुर चारों से मरवा रही थी जैसे पता नहीं कबसे चुदवाती आ रही हो।

खैर जब मूवी देखने के बाद मुझपे भी मस्ती चढ़ी तब मैं अपने अब्बू के रूम की तरफ़ गई और धीरे से अन्दर चली गई अब्बू सो रहे थे। मैंने धीरे से उनकी लुंगी हटा दी और उनका मुरझाया हुआ लण्ड हाथ में लेकर सहलाने लगी।
अब्बू थोड़ा सा कुनमुनाये और करवट लेकर सीधे हो गये अब मैंने अपनी निकर उतारी और पूरी तरह से नंगी हो गई और अपने जलते हुए होंठ लेकर उनके लण्ड को इतनी जोर से काटा कि वो ‘आआह्ह हह्हह’ कर के उठ बैठे और मुझे देखते ही बोले- मेरी रानी बेटी को आज मेरी याद कैसे आ गई?

और मेरे बाल पकड़ कर फ़िर से मेरे मुँह में अपने लण्ड को धकेल दिया जिसे मैं मज़े से चूस रही थी.
तब अब्बू ने कहा- मेरी बेटी को आज मेरा ख्याल कैसे आ गया?
तो मैंने कहा- अब्बूजान, मैं आज अपने रूम में ब्ल्यू फ़िल्म देख रही थी, उसमें एक बहुत ही कम उमर की लड़की चार चार लोगों से एक साथ चुदवा रही थी।
तब अब्बू ने कहा- मां की लोडी साली फ़िरंगी (अमेरिकन) होगी। वहां के लोग ऐसे ही होते हैं।
तो मैंने कहा- अब्बू, मैं भी ऐसे ही चुदवाऊँगी।
तब अब्बू ने कहा- नहीं मेरी बच्ची, उस तरह तो यहां की अच्छी अच्छी चुदक्कड़ औरतें भी नहीं चुदा पाती, तो तू तो अभी बहुत कमसिन है.

मगर मैं ज़िद पे उतर आई और कहने लगी- नहीं अब्बू, आपको मुझे चार लोगों से एक साथ चुदवाना ही होगा। अपनी प्यारी बेटी के लिए चार लंड का इंतजाम करो!
तब अब्बू ने कहा- अच्छा … लेकिन अभी चार लोग कहां से लाऊं। अभी तो सिर्फ़ मैं ही हूं और ज्यादा चुदासी हो तो जा बगल के रूम में तेरा भैया साला हाथ की लगा रहा होगा उसको बुला ला!

और मैं नंगी ही भैया के कमरे की तरफ़ गई तो देखा कि भैया हकीकत में पूरी तरह से नंगा होकर अपने लण्ड को सहला रहा था। मैं दरवाज़े की आड़ से छुपकर देखने लगी और अब भैया जल्दी जल्दी हाथ चला रहा था और उसके मुँह से ‘ऊऊह ऊऊह्ह्ह आआअह्ह आआ आआह्ह …’ की आवाज़ निकल रही थी।

तभी मैं दौड़ कर भैया के पास पहुँची और जल्दी से उसके लण्ड को अपनी चूचियों पर पटकने लगी उसका लण्ड लम्बा होकर बस अपना रस उड़ेलने ही वाला था। जैसे ही मैंने उसके लण्ड को हाथ में लेकर अपनी चूची पे रगड़ा तो उसके लण्ड से ढेर सारा माल निकल पड़ा और मैं उसके गाढ़े रस को जल्दी जल्दी अपनी चूची पे रगड़ते हुए बोली- भाईजान अब्बू ठीक ही कह रहे थे; तुम तो सही में हाथ की लगा रहे हो। अरे मेरे प्यारे चोदू भैया जब तेरे पास इतनी खूबसूरत चूत है चोदने के लिये तो किसलिये हाथ की मार रहे हो?

तब भैया मेरी चूची को जोर से दबाते हुए बोला- अरे मेरी चुदक्कड़ बहन, हाथ की मारने में भी बहुत मज़ा आता है।
तो मैंने कहा- अच्छा, अब चलो, अब्बू अपने रूम में बुला रहे हैं और मैं उसके झड़े हुए लण्ड को हाथ से पकड़ कर खीचते हुए अब्बू के रूम में ले आई।
तब अब्बू ने कहा- क्या हुअ बेटी, बहुत देर लगा दी।
मैंने कहा- अब्बू, आपने सही कहा था भैया हाथ की लगा रहे थे, वो तो मैं सही वक्त पर पहुँच गई वरना तो इन्होने अपना कीमती माल बरबाद कर ही दिया होता!
तब अब्बू हंसते हुए बोले- बेटी तजुरबा भी कुछ होता है मैंने तो पहले ही कहा था ये साला हाथ की मार रहा होगा। अच्छा, अब जल्दी से बेड पर आओ और मज़ा करो!

फ़िर जैसे ही मैं बेड पर चढी अब्बू मुझसे बोले कि अपने दोनों पैर उनके कन्धों पर रखूं और एक दूसरे से लपेट लूं। मैंने ऐसा ही किया अब मेरी चूत अब्बू के बिल्कुल मुँह के पास थी और मैंने अपने दोनों पैर अब्बू की गर्दन के पीछे लपेटे हुए थे।
अब अब्बू धीरे धीरे खड़े होने लगे जिससे मुझे डर लगने लगा, मैंने कहा- अब्बू, क्या कर रहे हैं? मैं गिर जाऊँगी।
तब अब्बू ने कहा- मेरी बेटी, नहीं गिरोगी, आज नया स्टाईल देखो चूत, चुसाने का इस तरह तुमने ब्ल्यू फ़िल्म में भी नहीं देखा होगा.

और अब्बू खड़े हो गये। अब वो बिल्कुल सीधे खड़े थे और मेरी चूत को चूस रहे थे। मुझे इस तरह डर भी बहुत लग रहा था पर मज़ा भी बहुत आ रहा था।
तब ही अब्बू ने कहा- बेटी, अब तुम अपना सर नीचे की तरफ़ झुकाओ।
पर मैंने मना कर दिया इस पर वो एक चपत लगाते हुए बोले- साली जैसा कहता हूं कर … वरना आज हम दोनों जने एक साथ तेरी गाण्ड में लण्ड डाल कर फ़ाड़ देंगे।

तब मैं अपने सर को धीरे धीरे नीचे की तरफ़ ले आई और अब मेरा मुँह उनके मुरझाये हुए लण्ड के पास था जिसे वो आगे बढ़ाने लगे. मैं उनका मतलब समझ गई थी और मैंने उनका लण्ड हाथ से पकड़ कर गप्प से मुँह में डाल लिया और चूसने लगी।
‘वाआआह्ह …’ बिल्कुल नया तरीका, बुर और लण्ड की चुसाई का … इस तरह से अब मेरा डर जाता रहा और थोड़ी देर बाद ही मैं जोर जोर से अपना मुँह अब्बू के लण्ड पे चलाने लगी।

इस वक्त एक ज़रूरी कॉल आई है तो मुझे जाना पड़ रहा है, पर अपनी Antarvasna स्टोरी ज़रूर पूरी करुंगी। ओके।
जारी रहेगी!

टीनएजर गर्ल फर्स्ट सेक्स का मजा मुझे दिया मेरी पड़ोस के लड़के ने! मैंने अपनी चूत फड़वाने के लिए उसे पसंद किया पर उसकी नजर मेरी छोटी बहन पर थी. उसको मैंने कैसे सेट किया?

दोस्तो, मेरा नाम रीता शर्मा है. मैं 19 साल की हूँ.
मैं हर रोज अन्तर्वासना की सेक्स कहानी पढ़ती हूँ और इस पटल की एक नियमित पाठिका हूँ.

आज मैं आप सबको अपनी पहली चुदाई की कहानी बताने जा रही हूँ.
ये मेरे ब्वॉयफ्रेंड के साथ हुई चुदाई की कहानी है जिसमें टीनएजर गर्ल फर्स्ट सेक्स का मजा मैंने लिया.

वह मेरे घर के बगल में रहता था.

उन दिनों मैं हॉस्टल में रहती थी तो मैं विंटर वेकेशन में अपने घर गई थी.

उधर मेरी मुलाकात मेरे पड़ोसी लड़के से हुई.
वह काफी हैंडसम था और जिम भी जाता था.

उस दिन मैं नहा कर छत पर धूप सेंकने गई थी.

उधर वह सिर्फ एक गमछा लपेटे हुए छत पर खड़ा धूप ले रहा था.

मैंने उसे देखा तो वह काफी हॉट लग रहा था.
उसके सिक्स पैक साफ दिख रहे थे और सच में क्या मस्त लग रहा था.

पहली नजर में वह एकदम सलमान खान जैसा लगा था.
मैं उसे देखती रही, वह अपने मोबाइल में कुछ देख रहा था इसी लिए शायद उसने मुझे नहीं देखा था.

फिर जब उसकी नजरें मोबाईल से हटीं तो वह मेरी छोटी बहन को देख रहा था.
शायद उसे मेरी छोटी बहन पसंद थी.
यही सब देख कर मैं छत की दूसरी तरफ चली गई.

फिर दूसरे दिन कुछ ऐसा हुआ कि मेरे घर में लाइट नहीं आ रही थी.

मैं उस वक्त छत पर थी.
वह उधर ही था.

मैंने उससे हाय कहा और उसको अपना फ़ोन चार्ज करने के लिए दे दिया.
उसे मैंने उसे बताया कि किसी वजह से मेरे घर की बिजली नहीं आ रही है और मोबाईल पूरा डिस्चार्ज पड़ा है.

उसने मेरा फ़ोन ले लिया और चार्ज पर लगाने के लिए नीचे ले लगा.
उसी दौरान उसने मेरा नंबर चुरा लिया.

शायद उसी शाम को वह अपनी नानी के घर चला गया क्योंकि वह अपनी पढ़ाई नानी के घर रह कर ही करता था.

उधर से उसने मेरे फोन पर मैसेज किया.
मैं उसके मैसेज से मन ही मन खुश हुई और धीरे धीरे उससे मेरी बात होना शुरू हो गई.

मैंने पहले तो उससे कहा- तुम्हारे पास मेरा नंबर कहां से आया है?
उसने कहा- वो सब छोड़ो, तुम बस ये बताओ कि तुम्हें मुझसे बात करना कैसा लगा?

मैंने कहा- मुझे बात करने में भला कैसे बुरा लग सकता है. बस यह बात मुझे बुरी लग रही है कि तुमने मेरा नंबर कुछ गलत तरीके से हासिल किया है.

वह बोला- क्या मैंने कोई पाप किया है?
उसके इस सवाल पर मैं चुप थी.

मेरे मन में अब बस वह सवाल चल रहा था कि क्या वो मुझमें दिलचस्पी रखता है या मेरी छोटी बहन में.
फिर मैंने उससे ये बात साफ साफ पूछने की बात ठान ली और उससे कहा.

मैं- मैं तुमसे एक बात साफ साफ पूछना चाहती हूँ. बिना कोई छिपाव के तुम मुझे बताओगे, तो मुझे अच्छा लगेगा और तभी मैं तुमसे बात करना या ना करना तय करूंगी.
वह बोला- क्या जानना चाहती हो?

मैंने कहा- मैंने तुम्हें अपनी छोटी बहन को देखते हुए देखा है. क्या तुम मेरी छोटी बहन में दिलचस्पी रखते हो?

उसने एक पल के लिए मौन साधा और उसके बाद कहा- वो मुझे पसंद नहीं करती है. मगर मैं तुम दोनों को पसंद करता हूँ.

उसके इस साफ जवाब से मैं मन ही मन खुश हो गई थी कि मैं अपनी छोटी बहन का हक नहीं चुरा रही हूँ.

उसके बाद हम दोनों में बातें होने लगीं और कुछ ही समय बाद हम दोनों में प्यार का इजहार हुआ.

प्यार मुहब्बत की बातें चलती रहीं और बातों में सेक्स भी हिस्सा बनने लगा.
फिर एक रोज वह अपने घर आया और उसने मुझे रात में बाहर बुलाया.

मैं उस रात बेहद घबराई हुई थी कि आज पहली बार एक लड़का मुझे अकेले में बुला रहा है.
अपनी सांसों को नियंत्रित करती हुई मैं उससे मिलने चली गई.

हमारे घर के पास में ही एक टूटा मकान था. उसमें रात में कोई नहीं जाता था.
उसी खंडहर में हम दोनों गए.

उसने मुझे कसके पकड़ा और किस करने लगा.
मैं भी उसका साथ देने लगी.

वह मेरी चूचियों को दबाने लगा.
मैं मदभरी सिसकारियां भरने लगी ‘अंह अंह धीरे करो आह.’

वह मान ही नहीं रहा था.

मैंने कहा- धीरे धीरे दबाओ … मुझे दर्द हो रहा है.
उसने मेरी एक न सुनी और मेरी दोनों चूचियों को बस दबाए जा रहा था.

उसी दौरान वह अपना एक हाथ मेरी चूत पर ले गया और उसे जोर जोर से रगड़ने लगा.
कुछ ही देर में मेरी चूत ने पानी छोड़ दिया.
चूत के पानी से मेरी जींस गीली हो गई.

वह अभी भी मेरी चूत को रगड़ता ही जा रहा था.
फिर उसने अपना हाथ मेरी जींस में डालना चाहा लेकिन मैंने उसे डालने नहीं दिया.

मैंने उससे कहा- आज नहीं, कभी फिर कर लेना.
फिर हम दोनों वहां से चले गए.

दूसरे दिन वह अपनी नानी के घर चला गया.
उसकी हरकतें मुझे बार बार उसकी याद दिलाने लगी थीं.

उस दिन के बाद से वह रोज मुझे वीडियो कॉल करने लगा और मुझे अपनी चूत और चूची दिखाने को बोलने लगा.

जब मैं उसे अपने दूध दिखाती तो वह मेरे सामने अपना लंड निकाल कर मुठ मारने लगता.

उसका लंड बड़ा ही मस्त था और काफी लंबा व मोटा था.

इसी तरह से वीडियो कॉल से हम दोनों के मन में चुदाई की इच्छा ने जोर पकड़ लिया और मैं भी मन ही मन उससे चुदने के लिए बेचैन होने लगी.

काफी समय बीतने के बाद हमें चुदाई करने का मौका मिला.
मुझे अच्छी तरह से याद है कि उस दिन बीस फरवरी की तारीख थी.

वह अपनी नानी के घर से मुझसे मिलने आया था.

उन दिनों कोई छुट्टी भी नहीं थी.
वैलेंटाइन डे भी निकल चुका था.

उसी ने वैलेंटाइन डे पर मिलने के लिए मना किया था क्योंकि उस दिन हमारे आस-पास के इलाके में कुछ लोग प्यार के दुश्मन बन जाते हैं और उनके कारण हमारी निजता पर फर्क पड़ सकता था.

बीस तारीख के दिन हम दोनों ने मिलने के लिए बात की.
मैंने उससे कहा कि मैं खंडहर में मिलना नहीं चाहती हूँ.

वह समझ गया कि आज चुदाई का मुहूर्त आ गया है.
उसने एक ओयो रूम बुक किया और मुझे बताया कि तुम मुझे गली के बाहर मिलो.

फिर हम दोनों उधर उस होटल में गए.

कमरे के अन्दर जाते ही उसने गेट लॉक कर दिया और मुझे कसके पकड़ लिया.
वह मुझे किस करने लगा.
मैं भी उसका साथ देने लगी.

वह मेरी चूचियों को कपड़ों के ऊपर से ही दबाने लगा.
मुझे दर्द होने लगा और मैं सिसकारियां भरने लगी- आह सीई … आह आराम से करो … मैं कहीं भागी थोड़ी न जा रही हूँ.

उसने कुछ देर बाद मेरा टॉप ऊपर उठाते हुए उतार दिया, फिर मेरी ब्रा को भी खोला और मेरी चूचियों को बारी बारी से चूसने लगा.
उसके दूध चूसने से मुझे काफी मज़ा आने लगा.

मैंने भी उसका सर अपने मम्मों में दबाते हुए सिसकारना शुरू कर दिया- आह चूसो मेरी जान … मेरी चूचियों को पूरा चूस लो आह बड़ा मज़ा आ रहा है.

कुछ देर बाद उसने अपनी टी-शर्ट को उतार कर अलग कर दी और मैं उसके सीने को सहलाने लगी.

थोड़ी देर बाद उसने मेरी जींस को उतार फेंका और मेरी पैंटी को भी निकाल दिया.
मैं पूरी नंगी हो गई थी.

उसने मुझे बेड पर चित लिटाया और मेरी चूत को चाटने लगा.
मुझे भी अपनी चूत चटवाने में मज़ा आने लगा.

मैं मजे से अपनी गांड उठाती हुई चूत चटवा रही थी और साथ में कामुक सिसकारियां भी भर रही थी- आह आह उन्ह चाटो मेरी चूत … आह आह!

कुछ ही देर में मेरी चूत ने उसके मुँह पर सारा पानी छोड़ दिया और वह मज़े से मेरी चूत का पानी पी गया.

अब उसने मुझसे कहा- बेबी, मेरा लंड चूसोगी?
मैंने उसे साफ़ मना कर दिया.

वह मेरी आंखों में वासना से देखता हुआ चूसने के लिए इशारा करने लगा.
मैंने साफ बोल दिया कि मैं लंड नहीं चूसूंगी.

उसने कहा- तो चलो हो गया. अब हम दोनों वापस चलते हैं.
मैंने कहा- क्यों मेरी लेना नहीं है?

वह कुछ नहीं बोला.
उसका मन था कि मैं उसके लौड़े को चूस कर उसे भी मजा दूँ.

उसकी इस बात को मैंने समझ लिया और उसके गले लग कर उसे मनाया, तब जाकर वह चुदाई के लिए राजी हुआ.

अब मैं उसका लंड चूसने के लिए मान गई थी.
मैंने अपना मुँह खोला और उसका सुपारा चाटने लगी.

मेरे मन की अजीब सी स्थिति को बदलने में देर न लगी और मुझे लंड चूसने में अच्छा लगने लगा.

मैंने उसके एक इंच लंड को अपने मुँह में ले लिया और जीभ से लिक लिक करके लौड़े को चूसने लगी.
उसने उसी समय मौका देखा और एक ही झटके में अपना पूरा का पूरा लंड मेरे मुँह में पेल दिया.

उसका लंड मेरे गले में जाकर फंसने लगा था.
फिर मैंने उसका लंड करीब 20 मिनट तक चूसा और उसने अपने लंड का सारा पानी मेरे गले में छोड़ दिया.

पानी छोड़ने के बाद भी वह अपने लंड को मेरे मुँह में दिए रहा, जिस वजह से मुझे उसका सारा पानी पी जाना पड़ा.

कुछ देर बाद उसने लंड बाहर निकाला और मुझसे पूछा- कैसा लगा स्वाद?
सच में मुझे अच्छा लगा था.
मैंने कहा- हां मुझे अच्छा लगा.

उसने कुछ देर बाद फिर से लंड चूस कर खड़ा करवाया और अब उसने मुझे लेटा दिया.

उसने मेरी जांघों को पूरा खोल दिया और मेरी चूत के मुख पर अपना लंड रगड़ने लगा.

वह मेरी चूत में लंड पेलने की कोशिश करने लगा.
लेकिन मेरी सीलपैक चूत काफी टाइट थी तो उसका लंड मेरी चूत नहीं जा रहा था.

फिर उसने बाथरूम से बॉडीलोशन लाकर अपने लंड पर लगाया और मेरी चूत की फांकों में भी थोड़ा बॉडीलोशन लगा दिया.
फिर उसने चूत के छेद पर लौड़े को रखा और एक ही झटके में लंड पेल दिया.

उसने अपना आधा लंड मेरी चूत में डाल दिया, जिससे मुझे काफी दर्द होने लगा, मेरी आंखों से आंसू आने लगे.

मैं दर्द से कराह उठी और बोली- लंड बाहर निकालो, मुझे दर्द हो रहा है.
लेकिन उसने मेरी चूत में अपना लंड पेले रखा.
वह मेरे ऊपर लेटा रहा और मुझे सहलाता रहा.

करीब 5 मिनट बाद मुझे थोड़ा ठीक लगा तो उसने एक और झटके में अपना पूरा लंड अन्दर पेल दिया.
उसका लंड मेरी चूत को चीरता हुआ अन्दर तक चला गया था.

कुछ दर्द के बाद अब मुझे टीनएजर गर्ल फर्स्ट सेक्स का मज़ा आने लगा.
मैं अपनी गांड उठा उठा कर उसके झटकों में उसका साथ देने लगी.

वह भी बेदर्दी से मेरी चूत को चोदता रहा.
मैं मज़े से अपनी चूत चुदवाती रही.

कुछ बीस मिनट की चुदाई के बाद उसने अपना सारा पानी मेरी चूत में छोड़ दिया और मेरे ऊपर ही लेटा रहा.
बाद में हम लोग साथ में नहाने बाथरूम में चले गए. नहाने के बाद उसने एक बार फिर से मेरी चूत को चोदा.

फिर हम लोग उधर से निकल आए.

मेरी टीनएजर गर्ल फर्स्ट सेक्स की कहानी आपको कैसी लगी?
आप अपनी राय मुझे मेल कर सकते हैं.
sauravjaikar2@gmail.com

लेखक की पिछली कहानी थी: गृह प्रवेश में भाभी की चूत में लंड प्रवेश

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हाय दोस्तो! कैसे हो! Sex Stories

आप लोगों ने याद किया और मैं Sex Stories हाज़िर हो गया आप लोगों के लिए फिर से एक नया अनुभव लेकर!

दोस्तो, फिर एक नया अहसास, सेक्स से भरा, मज़े से भरा और साथ ही ढेर सारी मस्ती, जो मैंने महसूस की वही मस्ती लेकार आया हूँ आप सभी के लिए!

कसम खुदा की क्या वो हसीं सूरत थी,

चढ़ती उसके हुस्न पे जवानी की मस्ती थी,

छलक गया यौवन उसकी नज़र से वो कातिल,

कि जिसमें डूब गई मेरी जवानी की कश्ती थी!

दोस्तो, अबकी बार मैं अपने कुछ दोस्तों के साथ राजस्थान घूमने गया था।
जाते वक़्त हम भरतपुर से होकर गुजरे थे तो सभी ने योजना बनाई कि भरतपुर पक्षी अभयारण्य देख कर ही आगे जायेंगे।
इसलिए हम लोगों ने टिकेट लिए और अंदर चले गए।

अभयारण्य का दायरा कई किलोमीटर में फैला हुआ था।
चलते चलते हमारा ग्रुप बिखर गया और मोबाइल से हम एक दूसरे के संपर्क में रहे।

मज़े की बात, मैं अपने ग्रुप से अकेला अलग हो गया। काफी दूर चलकर एक परिवार के कुछ लोग वहां से निकले, वो अलग साइकलों पर थे।
वहां घूमने के लिए साईकलें मिलती हैं। उन लोगों में से एक लड़की पीछे रह गई।

मैंने देखा उसकी साईकल के पैडल फ्री हो गए थे। वो थोड़ी आगे तक बढ़ी और रुक कर चेन को देखने लगी।
इतने में उसका फॅमिली परिवार आगे निकल गया।

मैं पास से गुजरा तो उसने कहा- अगर आप को बुरा न लगे तो कृपया मेरी साईकल की चेन लगा दोगे?

मैंने उसे एक नज़र भर देखा तो देखता ही रह गया! हुस्न इतना कातिल कि किसी को फनाह करने के लिए किसी और चीज़ कि जरूरत ही न पड़े!

नीली जींस उस पर लाल टॉप!

माशा अल्लाह! शरीर का हर एक अंग अलग अलग दिखाई दे रहा था। टॉप के ऊपर के खुले बटन मानो उसकी छुपती खूबसूरती को बेशर्मी से जग-जाहिर कर रहे थे। गोरे से चेहरे पर ऊपर से ढलते हुए सुनहले बाल उसके हुस्न की बिजली को मेरे अंग अंग पे गिरा रहे थे। कमर इतनी नाजुक कि अगर जोर से पकड़ लूँ तो लचक जाये, बिलकुल हल्की फुल्की! लेकिन एक उत्तम बदन की मलिका!

खैर मैंने अपनी हसरतों को काबू किया और बिना कुछ बोले उसकी चेन लगा दी हाथ चेन पर और नज़र उस हुस्न की परी पे!

और इसी गुस्ताखी में दब गई मेरी ऊँगली चेन में। ऊँगली में मामूली सी चोट लगी थी, थोड़ा सा खून निकल आया, मैंने सोचा अब फ़िल्मी स्टाइल में ये दुपट्टा फाड़ेगी और मेरी ऊँगली पर बांधेगी, लेकिन यहाँ तो सीन ही उल्टा हो गया, उंगली से खून बहता देख कर वो तो गश खाकर बेहोश हो गई। वो गिरने लगी तो मैंने सीधे ही उसे अपनी बाँहों में ले लिया।

हमने तो खुदा से माँगा कि

उसके हाथों का छूना नसीब हो जाये,

हम देख लें उसे नज़र भर के,

तेरी हम पर इतनी रहामत हो जाये,

के वो बेखौफ आ गए बाँहों में मेरी,

के न अब उनसे दूर रहा जाये!

न उनको खुद से दूर किया जाये!

वो मेरी बाँहों में बेहोश थी और मैं सर से लेकर पाँव तक उसे देखे जा रहा था। दिल में डर था कि वो होश में आते ही मुझसे दूर हो जायेगी।

लेकिन मैंने उसके गालों को छुआ और उसके चेहरे को हिला कर उसे बेहोशी से जगाया। उसने आँख खोली और मेरी बाँहों में लेटी हुई एक टक मुझे देख रही थी। उसके चेहरे पर सर्दी में भी पसीना छलक आया। मैंने अपने रूमाल से उसका चेहरा साफ़ किया। उसके गोरे गालों को छूकर मेरी उँगलियाँ मदमस्त हो रही थी।

खैर वो मेरी बाँहों से अब दूर हो गई और उसने सॉरी कहा।
उसने कहा- मेरी वजह से आप को चोट लग गई!

मैंने भी बिना सोचे समझे कह दिया- अगर मुझे चोट ना लगती तो आप को बाँहों में लेने का मौका कहाँ मिलता!

वो इस बात पर नाराज़ भी हो सकती थी लेकिन वो शरमा गई और मेरी हिम्मत बढ़ गई।

तभी उसकी मम्मी का फ़ोन आ गया, उसने अपने बेहोश होने की बात छोड़ कर बाकी सब अपनी मम्मी को बता दिया।
उसने मुझसे कहा- मेरे घर वाले आगे मेरा इंतज़ार कर रहे हैं और वो आपसे भी मिलना चाहते हैं।

मैंने उससे उसका नाम पूछा तो उसने अपना नाम मधु बताया।
उसने मेरा नाम पूछा, मैंने भी अपना नाम बता दिया।

उसने कहा- अपनी उंगली दिखाओ!
मैंने कहा- रहने दो तुम बेहोश हो जाओगी।
तो उसने कहा- कोई बात नहीं तुम मुझे थाम लेना!

चलते चलते हम बात करते रहे और एक दूसरे को अपने नंबर दे दिए।

कुछ दूरी पर उसके परिवार वाले मिल गए।
उसके घर वाले बिल्कुल आजाद विचारों वाले थे। उनसे बात करके मैं अपने दोस्तों के पास जाने लगा।

जाते जाते मधु ने अपना रूमाल मेरी उंगली पे लपेट दिया।
वो रूमाल मैंने अपने दोस्तों से छुपाया, कह दिया- यार मेरी तबियत ठीक नहीं है, मैं यही बैठता हूँ, तुम घूम आओ!

वो लोग चले गए।
मैंने मधु को फ़ोन किया और काफी देर तक उससे बात की। वो लोग भरतपुर में ही होटल पार्क में ठहरे थे।

मैंने शाम को अपने दोस्तों से कहा- यार! मेरी तबियत ठीक नहीं है, इसलिए मैं आज यहीं रुकना चाहता हूँ, तुम लोग जयपुर पहुँचो, मैं कल आकर तुमको मिलूँगा।

वो लोग वहाँ से निकल गए।

अब मैंने भी जाकर होटल पार्क रेज़िडेन्सी में एक कमरा बुक कराया।
मधु और उसका परिवार पहली मंज़िल पर थे और मैं दूसरी मंज़िल पर!

मैंने मधु को इसके बारे में बताया कि मैंने भी तुम्हारे होटल में ही कमरा ले लिया है, तो यह सुन कर मधु कुछ उत्साहित सी हो गई।
मुझे लगा शायद मधु भी यही चाहती थी।

एक बार फिर हमारी मुलाकात डिनर के समय पर हुई।
अब की बार मधु ने एक जामुनी रंग की साड़ी पहनी हुई थी। कसम से क्या कयामत थी वो उस वक्त!
और उस पर बैक-लैस ब्लाऊज़ उस कयामत को और भी भड़का रहा था।

भोजन के बाद उसके घर वालों ने मुझे फ़िर अपने साथ बुला लिया और हम सभी पार्क में टहलने लगे।

अब मैंने मौका देख कर टहलते टहलते मधु की नंगी कमर पर हाथ रख दिया।

चलते चलते मधु ठहर सी गई लेकिन कुछ ही पलों में मैं मधु से दूर हो गया।
फ़िर हम लोग अपने अपने कमरों में चले गए।

मैं बिस्तर पर था लेकिन कमबख्त नींद किस की सगी थी जो आ जाती।
मैं सोने की कोशिश कर रहा था लेकिन मधु की जवानी के परदे एक-एक करके मेरी आँखों पर पड़ते जा रहे थे जिन्होंने नींद को मेरी आँखों से दूर कर दिया।

रात के लगभग 11 बजे होंगे, मैंने मधु को फ़ोन किया, एक दो बार रिंग बज़ते ही उसने फ़ोन उठा लिया, ऐसा लग रहा था जैसे वो मेरे फ़ोन का इन्तज़ार कर रही थी।

दिन में ज्यादा घूमने के कारण उसके घर वाले थक कर सो रहे थे।
मैंने उसे अपने कमरे में बुला लिया।

मधु ने आने में जरा भी देर नहीं की।

दो तीन मिनट में वो कयामत उसी लिबास में मेरे कमरे में आ गई।
कसम से, मानो, किसी दुल्हन की तरह शरमाई सी वो बेड के पास खड़ी हो गई।

मैंने भी पहले उसका अंग अंग जी भर कर देखा फ़िर धीरे से बाहों में भर लिया। मानो कोई फ़ूल मेरी बाहों में सिमट आया हो।

मैंने उसे बिस्तर पर बैठा लिया और उसके चेहरे को साड़ी के पल्लू से ढक दिया।
उसने भी पल्लू को दुल्हन की तरह थामे रखा फिर धीरे से मैंने उस चाँद से घूँघट के बादलों को हटाया और उसके मदमाते होटों पर एक किस कर दिया तो वो एकदम ही मुझसे लिपट गई।

मैंने उसकी सांसों की गर्मी को अपने सीने पर महसूस किया।

वो बिलकुल तैयार थी, मैंने अपना हाथ धीरे धीरे उसकी साड़ी में डालना शुरू किया, वो नीचे की तरफ झुकती सी चली गई।
मैंने एक हाथ उसकी मदमस्त कर देने वाली चूचियों पे रख दिया और उन्हें दबाने लगा।

वो टूट कर अब मेरी बाँहों में बिखरने लगी थी, उसने अपनी आँखें बंद कर ली और अपना नरम नाज़ुक शरीर मुझे सौंप दिया।

मेरा एक हाथ अब उसकी नरम, गरम और गुलाबी चूत पर पहुँच कर उसके साथ शरारत कर रहा था।
शायद वो अब सहन नहीं कर पा रही थी।

मैंने एक एक करके उसके शरीर से सारे कपडे अलग कर दिए।
अब वो गुलाब की गुलाबी कली मेरे सामने अपनी सारी पंखुडियों से बाहर आ चुकी थी।

उसके पूरे नंगे बदन को देख कर तो कोई भी अपना आप खो दे!

मैंने अपने कपड़े उतार दिए। हम दोनों एक दूसरे की बाँहों की गिरफ्त में जाने के लिए बेताब थे।

मैंने बिस्तर पर जाकर मधु को कस के अपनी बाँहों में ले लिया।
उसके जिस्म का अंग अंग सेक्स की आग में जल रहा था।
अब इस सावन को मधु के जिस्म पर बरस कर उसके जिस्म की प्यास को बुझाना था।

मैंने मधु की खामोशी तोड़ी और उससे पूछा कि क्या कभी पहले सेक्स किया है तो उसने चेहरे को हाथों से ढक लिया और इन्कार में सर हिला दिया।
यानि कि मधु बिल्कुल अनछुई थी।

अब मुझे उसके साथ थोड़ी ऐहतियात बरतनी थी क्योंकि उसकी चूत बिल्कुल कोमल थी।

मैंने ऊँगली से उसकी चूत को धीरे धीरे से सहलाया तो मधु कि सिसकियाँ सी छूटने लगी।

उस कमरे का माहौल आऽऽ आहऽहऽहऽ ऊऽउऽ उफ़ऽफ अऽअऽ आ स ओऽऽऊहऽ नऽऽनाऽ सावन करोऽ हम्मऽ … ऊऽऽऊफ ओ ओह येसऽस स से और भी सेक्सी हो गया।

मैंने उसके शरीर पर हर जगह चूमा, उस कली को हर तरफ से चूमा।

अब मैंने उसकी हालत को समझते हुए धीरे से अपना लण्ड उसकी चिकनी और मुलायम चूत पर रख दिया और धीरे धीरे उसके अंदर लण्ड को डालने लगा।
मधु अपने पैरों को भींचने लगी और कहा- दर्द हो रहा है!
मैंने उस से कहा- अगर टांगें भींचोगी तो दर्द होगा!

अब उसने अपने पैर खोल लिए।
मैंने एक झटके से जोर से लण्ड चूत के अंदर डाला तो मधु की चीख निकल गई और लण्ड चूत के अंदर था।

मधु बेहाल सी हो गई, मैंने उसे थोड़ा शांत किया, उसका चेहरा पसीने से भीग गया।
अब मैंने लण्ड को थोड़ा बाहर निकाला तो लण्ड पर खून लगा था, उसे देख कर मधु बोली- कुछ होगा तो नहीं?

मैंने कहा- कुछ नहीं होगा!

मैंने धीरे धीरे लण्ड को हिलाना शुरू किया तो मधु सिसकियाँ अब सेक्स की आवाजों में बदलने लगी थी और उसका चेहरे का डर एक चमक में बदल गया था।

फिर तो उल्टा मधु सेक्स करने में मेरा साथ देने लगी।
मैंने उसे धीरे से चोदा, अपने लण्ड को उसकी गहराइयों तक उतारा, जितना गहरा लण्ड चूत में जाता, उतनी ही मधु मुझसे चिपक जाती और उतनी ही जोर से उसकी सिसकी आती थी।

उसके बाद तो पता नहीं हम दोनों इतना समय खींच गए कि इतने गरम होने के बावजूद हम लगभग 25 मिनट तक सेक्स करते रहे।
काफी देर बाद मैं मधु के ऊपर निढाल सा हो गया और साथ ही साथ मधु ने भी खुद को मुझसे जकड़ लिया।

अरे! यानि कि यारो उसका भी सेक्स पूरा हो गया था।

अब हम दोनों काफी देर एक दूजे पर निढाल लेटे रहे और आधे घंटे बाद दोबारा से एक बार फिर एक दूजे में समां गए।

और फिर मधु अपनी साड़ी पहन कर थके से कदमों से वहां से अपने कमरे में चली गई। खैर एक दूजे की कुछ मिठास दिल में लिए नींद के आगोश में समां गए।

अगली सुबह जब हम उठे और नाश्ते के लिए नीचे आए तो मैंने मधु की आँखों में एक अजीब सी चमक और चेहरे पर एक मुस्कान देखी।

सुबह 11 बजे तक मुझे होटल से चेक आउट करना था।
मैंने मधु को यह बताया तो वो बोलने लगी- हम शाम 4 बजे यहाँ से चेक आउट करेंगे!

सुबह मधु के घर वाले भरतपुर घुमने के लिए निकलने लगे तो मधु ने उनसे बहाना कर दिया कि उसके सर में बहुत दर्द है।
मधु की मम्मी उसके पास रुकने लगी लेकिन मधु ने कहा कि मैं थोड़ा सोना चाहती हूँ, फिर आप मेरे पास अकेली बैठी बोर हो जाओगी, इसलिए आप भी थोड़ी देर घूम आइये!

उसकी मम्मी मान गई।

अब मधु अकेली ही कमरे में थी।
कुछ देर बाद मैं मधु के कमरे में गया।

मेरे वहां जाते ही मधु भागकर मुझसे लिपट गई और नज़रें नीचे करके कहने लगी- सावन! क्या रात वाला अहसास तुम मुझे अभी करा सकते हो?
उसने मेरे दिल की बात कह दी।

फिर क्या था हम दोनों ने एक दूसरे के कपड़े उतार दिए और बेड पर बैठ गए।
मैंने मधु के तन के हर हिस्से को किस किया। जैसे मैं उसे किस करता तो मधु उतनी ही उत्तेजित होती जाती।

फिर हमने आधे घंटे तक एक दूसरे को वो अहसास कराया, जिस अहसास को आप मेरे इस अनुभव को पढ़ने के बाद करना और पाना चाहते हो।

उसके बाद मैंने मधु को कपड़े पहनाये और उसके नरम नाज़ुक होटों पे एक प्यारा सा “गुड बाय किस” किया और मैं होटल से चेक आउट कर गया।

दोस्तो, ये थे मधु के साथ बिताये कुछ हसीं पल!

आपको मेरा ये अनुभव कैसा लगा?
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Antarvasna

मेरी शादी हुये लगभग तीन Antarvasna साल गुजर चुके हैं। मेरे पति सुरेश मुझसे बहुत प्यार करते हैं, एक प्राईवेट फ़र्म में काम करते हैं और उनका वेतन भी बहुत अच्छा है। हमने एक क्लब भी जोईन कर रखा है।। मेरे साथ की महिलाएं जो 20 से 50 वर्ष तक की थी, अपने आप को बहुत मेन्टेन रखती थी। यूं तो मैं एक मॉडल भी हूँ और अपने शरीर को सुडौल रखने के लिये मैं जिम और ब्यूटी पार्लर जाती हूँ।

पर आज मैंने शहर में एक नए पार्लर का नाम सुना। साथ की महिलायें उसकी पार्लर की बहुत तारीफ़ कर रही थी। अन्य महिलाओं की तरह मैं भी सबसे आगे रहना चाहती हूँ। आज सुरेश के जाते ही मैं सबसे पहले उस नये पार्लर में गई। हालांकि वह मेरे घर से काफ़ी दूर था।

वहां काम करने वाली कुछ लड़कियों ने तो मुझे पहचान भी लिया कि मैं मॉडल गर्ल सीमा हूँ। पार्लर के मालिक ने मेरा स्वागत किया और सभी डिपार्टमेन्ट से मेरा परिचय कराया। जो लड़कियां मुझे जानती थी उन्होने सभी को बता दिया मॉडल गर्ल सीमा पार्लर में आई हुई है। मालिक को पता चलते ही मुझे ब्यूटी पार्लर जोईन करने पर काफ़ी छूट भी दी गई। मैंने वो पार्लर जोईन कर लिया।

मैं लगभग हर दो तीन दिन में एक बार वहाँ जाने लगी। वहां मुझे हर तरह के बाथ एन्जोय करने को मिल जाता था। जैसे गुलाब जल का स्नान, सोना बाथ, स्टीम बाथ, फिर स्विमिन्ग पूल का लुफ़्त, बॉडी मसाज का लुफ़्त, हरेक प्रकार का फ़ेस पैक, और भी बहुत सी चीज़ें…

ये सब बातें मैंने सुरेश को भी बताई। सुरेश यह सुन कर बहुत प्रसन्न हुआ कि मेरे पास समय का सदुपयोग करने का साधन आ गया था।
आज मुझे शरीर का मसाज करवाना था, सो मैंने आते ही ड्रेस बदल ली। मेरे इस रूप को वहां की वर्कर और अन्य युवतियां बड़े चाव से निहारती थी। उनकी नजरे मुझ पर जैसे चिपक जाती थी। मैं हमेशा की तरह अपनी जगह पर जा कर लेट गई और मसाज करने वाली का इन्तज़ार करने लगी।

“गुड मॉर्निन्ग मैडम… आज रीटा छुट्टी पर है… क्या मुझसे मसाज करवायेंगी आप?” किसी लड़के की आवाज सुनाई दी।

मैंने नजरें घुमा कर देखा तो एक सुन्दर सा युवक सर झुकाये खड़ा था। मुझे उसके स्टाईल पर हंसी आ गई। मासूम सा नजर आने वाला लड़का मुझे एक नजर में ही भा गया। उसका सभ्य व्यवहार मुझे पसन्द आया,”हां हां… क्यूँ नहीं…आज आप ही मसाज कर दो…” मैंने उसे मुस्करा कर देखा और उसे प्यार से सहमति दे दी। वो तुरन्त अपना एप्रिन पहन कर आ गया और मुझे उल्टा लेटा दिया।

मैं यह भूल गई थी कि यह एक जवान लड़का है। मेरे गोल गोल चूतड़ों के उभार उसे लुभा रहे थे। मात्र एक छोटी सी पेन्टी और ब्रा में मेरा सभी कुछ दिख रहा था। उसके हाथों में वैसे तो लड़कों वाली गर्मी नहीं थी पर हां उसका मसाज मुझे उत्तेजित कर रहा था।

शायद मेरा मन उस पर आ गया था। उसके हाथ मेरे शरीर पर मालिश कर रहे थे और मैं लेटी हुई उत्तेजित हो रही थी, आखिर हाथ तो किसी मर्द का ही था ना। उसके हाथों में शायद जादू था। जैसे ही वो मेरी जांघों पर मालिश करता मुझे सिरहन सी उठ जाती थी। मेरे स्तनों के पास उसके हाथ आते तो लगने लगता था कि बस अब मेरी चूंचियां ही दबा दे। मेरे तन में एक मीठी सी वासना घर कर कर रही थी।

तब उसने मुझे सीधे होने को कहा। उसके हाथ फिर से चलने लगे। मेरे पेट पर, कमर पर, पांव पर… मेरा दिल डोल उठा था। मेरे शरीर में उत्तेजना घर करने लगी थी, वासना का ज्वर चढ़ने लगा था। मेरी चूंचिया कड़ी होने लग गई थी।

यह पहला मौका था जब कि कोई मर्द मेरा मसाज कर रहा था। मुझे उसके हाथों में जैसे सेक्स भरा हुआ सा लग रहा था। उसने भी एक बार तो अपने उभरे हुये लण्ड को मेरे कूल्हों के पास रगड़ दिया था। मैं समझ गई थी कि उसके हाल भी बुरे हैं।

अचानक उसने मेरे बड़े बड़े उरोज पर अपने हाथ जमा दिये और उन्हें दबा डाला। मैं इस हमले से हड़बड़ा गई और अनजाने में उसका हाथ पकड़ लिया और बैठ गई। मुझे ये अपना अपमान सा लगा। मैंने गुस्से से उसे देखा और अचानक ही मेरा हाथ उठ गया। मैंने उसके चेहरे पर एक तमाचा मार दिया। और उठ कर गुस्से में केबिन में चली आई।

उसका सारा नशा जैसे काफ़ूर हो गया। वो घबरा गया। मैंने अपने कपड़े पहने और और मंजू रानी जो उसकी मालकिन थी उसे डाण्ट कर चली आई। पार्लर में उस युवक को बुला कर मंजू रानी ने बहुत फ़टकारा।

दूसरे दिन मैंने सवेरे ही घर के बाहर उसी युवक को देखा। वो बहुत ही असमन्जस की स्थिति में यहाँ-वहाँ देख रहा था। तभी चौकीदार का फोन आया कि ब्यूटी पार्लर से कोई राजीव नाम का लड़का मुझसे मिलने चाह रहा है। सुरेश काम पर जा चुका था। उसे मैंने ऊपर बुला लिया।

राजीव ने आते ही मेरा पांव पकड़ लिया और माफ़ी मांगने लगा और उसने मुझे पार्लर में मंजू रानी को फोन करने कहा। स्त्री स्वभाव होने से मेरा दिल पसीज गया और उसे मैंने माफ़ कर दिया। माफ़ तो करना ही था क्यूंकि वो मेरे मन को भा चुका था। उस पर मेरा दिल आ गया था। मुझे उससे चुदवाने की इच्छा होने लगी थी।
उसे छेड़ने में मुझे अब मजा आने लगा था। उसके भोलेपन पर मुझे प्यार भी आ रहा था।

मुझे शरारत सूझी,”राजीव, मेरा मसाज वैसे ही करो जैसे पार्लर में किया था। अब चालू हो जाओ। चलो…”

वो घबरा गया और झट से अपनी कमीज और बनियान उतार दिया। मैंने भी ब्रा और पेण्टी को छोड़ कर कपड़े उतार दिये।

“अब पेण्ट भी उतारो… चलो… मैं भी तो वहाँ ऐसी ही थी ना…” मैंने अपनी धमकी का असर देख लिया था। वो सचमुच में डर गया था।
“जी… जी… मैडम मैंने माफ़ी मांग ली है ना… प्लीज…”
“अरे चल उतार ना…” उसकी रेगिंग लेते हुये मुझे बहुत हंसी आ रही थी। तुझे बस मेरा मसाज ही तो करना है !”

उसने अपना पेण्ट उतार दिया, और मेरा दिल धक से रह गया। उसका लण्ड उठान पर था। साफ़ ही बड़ा सा नजर आ रहा था। मुझे इस तरह से घूरते देख कर उसका लण्ड और भी कड़क हो चला था। मेरे दिल की धड़कन बढ गई। उसे कुछ भी समझ नहीं आ रहा था। पर मैं तो खेल खेल में पिघलने लगी थी।

“तुम्हारा शरीर तो बहुत सुन्दर है राजीव… जिम जाते हो क्या…?” मैं उसके पास आते हुये बोली।
“मैडम, प्लीज सॉरी, मेरी नौकरी चली जायेगी !”
“नौकरी कैसे जायेगी … मैंने उसके पेट पर हाथ फ़ेरा। उसका लण्ड सीधा तन्ना गया। मैंने उसे बड़ी सेक्सी और वासना भरी निगाहों से देखा। वो कुछ कुछ समझ रहा था पर डर अधिक रहा था।

“बस कीजिये मैडम जी… मुझे और ना सताईये…”
“मेरा नाम सीमा है… मुझे नाम से बुलाओ… और हां तुमने मुझे सताया था उसका क्या… बोलो… तुमने मेरे स्तन दबा दिये थे ना… अब अगर मैं तुम्हारा ये मुनमुन दबा दूं तो…” कह कर मैंने उसका लण्ड हौले से दबा दिया। उसके मुख से सिसकारी निकल पड़ी।

“सीमा जी, आप क्या कर रही हैं, मुझे समझ में नहीं आ रहा है… मैं आपका मसाज कर देता हूँ, अब प्लीज मुझे ओर ना सताईये !” उसने मेरा लण्ड पर हाथ हटाते हुये कहा और बैठ गया।
“क्यूं मजा नहीं आया क्या…” मेरी आंखो में उसने वासना देख ली थी, पर वो डर रहा था। उसने जल्दी से कपड़े पहने और जाने लगा।

“जाओ तुम्हें माफ़ कर दिया, कल मैं पार्लर आऊंगी…तुम्हीं मेरा मसाज करना… अब तुम्हें मैं छोड़ने वाली नहीं !” और जोर से हंस पड़ी। वो कुछ असमन्जस की हालत में चला गया।

पर उसका कड़क लण्ड मेरे दिल में अनेक तीर बींध गया था। रह रह कर मुझे उसका कड़क लण्ड दिख रहा था, उसकी मसल्स से भरा हुआ बदन… मुझे पिघला रहा था। उस दिन मैंने चूत में अंगुली कर के राजीव के नाम का अपना यौवन रस भी निकाला।

शाम को बेताबी में सुरेश से चुदाई भी जम कर कराई। पर मन नहीं माना, उसका मोटा लण्ड का साईज़ अभी भी हाथों को मह्सूस हो रहा था। शायद मेरे दिल को राजीव का लण्ड चाहिये ही चाहिये था। सुबह से मुझे राजीव की याद आने लगी थी। सुरेश के जाने के लिये नौ बजने का इन्तज़ार करने लगी। एक एक पल मुझे जैसे पहाड़ सा लग रहा था। आखिर वो घड़ी आ ही गई।

सुरेश ओफ़िस के लिये रवाना हो गया और मैंने तुरन्त अपनी कार निकाली। धड़कते दिल से पार्लर पहुंच गई। सामने ब्यूटी पार्लर था, मेरा दिल धड़कने लगा था। अन्दर कदम रखते ही मुझे राजीव मिल गया।मैंने उसे मसाज रूम में आने को कह दिया और सीधे केबिन में चली आई।

ब्रा और पेण्टी में मसाज रूम में आ गई। मेरा दिल अब वासना की उत्तेजना के मारे धड़कने लगा था। मेरी सांसे भी अनियंत्रित हो चली थी। वहाँ पर राजीव आ चुका था। मैं चुपचाप आ कर लेट गई और उल्टी लेट गई।

पहले तो वो मुझे घूरता रहा फिर मेरे जिस्म को देख कर वो बहकने लगा। मैं अपनी चुदाई का इन्तज़ार करने लगी। उसके हाथ मेरे शरीर पर फ़िसलने लगे। पर उसने आज कोई मुझे उत्तेजित करने वाली हरकत नहीं की। मुझे स्वयं ही बेचेनी होने लगी। पर मैं तो स्वमेव ही उत्तेजित होने लगी थी।

जैसे ही वो मेरे चेहरे की ओर आया मैंने ही पहल कर दी… उसके लण्ड को अपनी एक अंगुली से दबा दिया। उसने कोई आपत्ति नहीं की। मैंने दुबारा उसके लण्ड को फिर से हाथ से दबाया। उसका लण्ड कड़ा होने लगा, और उभार स्पष्ट नजर आने लगा। वो भी शायद यही चाहता था। अतः वह उसी स्थान पर खड़ा रहा।

“राजीव, मजा नहीं आ रहा है… क्या नाराज है ?” मेरी बेचैनी उभर कर सामने आने लगी।
“क्या कह रही है सीमा जी… आप कहे तो एक बार… क्या करना है ?” उसे डर भी लग रहा था।

“कुछ करो ना…” मेरी इस विनती पर वो मुस्करा उठा, और उसने मेरे चूतड़ों को अपने हाथ से सहला दिया। मेरे सारे शरीर में कंपकंपी सी छूट गई। जैसे मेरी मन चाहत पूरी होने वाली थी।

उसने मेरी पेण्टी थोड़ी सी नीचे सरका दी थी और चूतड़ो की दरार और दोनों चूतड़ों के पार्टीशन राजीव को नजर आने आने लगे थे। मुझे भी थोड़ी सी हवा की ठण्डक चूतड़ों पर लगी। मेरे मन में खलबली मचने लगी। लगने लगा कि बस अब चुदाई ज्यादा दूर नहीं है।

उसका कड़क लण्ड और भी कठोर हो चुका था। उसका लण्ड मेरे चेहरे के बिलकुल समीप था… चाहती तो थोड़ा सा आगे बढ़ कर लण्ड को मुख में भर सकती थी…

“राजीव… बहुत कड़क हो रहा है… अपने मुन्ना को बाहर निकाल लो कर दर्शन करा दो…” मैं पूरी तरह से बहक चुकी थी।

“जी… क्या कह रही है आप… आप ही निकाल लो…” उसने कुछ शरमाते हुये कहा।

मैंने भी हिम्मत की और उसके पेण्ट की जिप खींच दी। उसने ऊपर के बटन खोल दिये… काली अंडरवीयर थी अन्दर… अंगुली से नीचे खींच दी… दिल फिर मेरे जैसे मेरे हलक में अटक गया। गोरा सा, मोटा सा लण्ड… बेहद तन्नाया हुआ। नीचे लटकती दो गोलियाँ… साफ़ शेव की हुई…

इतने में राजीव ने पीछे से ब्रा का हुक खोल दिया… ब्रा ढीली हो कर मेरे उरोजों से नीचे बिस्तर पर गिर गई। मेरे तराशे हुये मॉडल शरीर की चिकनाई और लुनाई उसे पागल किये दे रही थी। वो मेरे उभरे चूतड़ों की मालिश कर रहा था और रह रह कर मेरे दरार को चीर कर मेरे भूरे और गुलाबी गाण्ड के छेद पर तेल की बूंदे टपका रहा था। मेरे जिस्म में वासना की आग भड़क उठी थी। तन जैसे आग में झुलसने लगा था।

मैंने एक हाथ से उसके चूतड़ो को खींच कर उसके लण्ड को मुख के नजदीक ले आई और धीरे से उसे अपने मुख में ले लिया। राजीव सिसक उठा। उसने जोश में मेरी गाण्ड में अंगुली घुसा दी। मैंने मस्ती में अपनी आंखे बंद कर ली। दूसरे ही पल उसका दूसरा हाथ मेरी चूंची दबा रहा था। अब उसकी कमर हौले हौले चलने लगी थी और मेरे मुख को चोदने लगी थी। मैंने अपने मुख में उसका लण्ड जोर जोर से चूसना चालू कर दिया।

“सीमा जी, अब आगे बढ़ें क्या…?”

उसका उतावलापन बढ़ रहा था। मैं सीधी हो गई और मुख से लण्ड निकाल दिया।

“क्या करोगे अब… क्या नीचे कुछ…”

उसने मेरे अधरों पर हाथ रख दिया और पलंग के पैताने आ गया। मेरी दोनों टांगें खींच कर मेरी चूतड़ के छेद को अपने लण्ड से सटा लिया। उसके कोमल और कड़कते लण्ड का छेद पर स्पर्श मुझे गुदगुदाने लगा।

मुझे नीचे छेद पर प्यारी सी गुदगुदी और खुजली सी हुई। दूसरे ही क्षण छेद पर लण्ड का प्यारा सा दबाव बढ़ गया और मेरे मुख से एक आह निकल पड़ी। उसका लण्ड मेरी तेल भरी गान्ड के छेद में सरक कर अन्दर उतर आया था।

“हाय राजीव पूरा घुसा दे … उह्ह्ह्ह… मस्त मोटा है…!” मैंने अपने होंठ दांतों से काट लिये। थोड़ा सा जोर लगाते ही लण्ड पूरा गहराई तक घुस गया। मेरे मन की इच्छा पूरी हो रही थी।

उसने अब लण्ड को हौले हौले अन्दर बाहर करके ग़ाण्ड मारनी चालू कर दी। उसके हाथ आगे बढ़ कर मेरे उन्नत उरोज पर आ गये और उसे अब मसलने लगा था। निपल कड़े हो गये थे। वो मुझे खड़े खड़े बहुत प्यार से चोद रहा था। मेरे मुख से मस्ती भरी आहें निकल रही थी।

राजीव भी पूरी मस्ती में आ चुका था। वो खड़े हो कर आराम से धक्के मार रहा था। मेरी गाण्ड को असीम सुख मिल रहा था। यूं तो सुरेश मेरी गाण्ड पर आशिक था और जम के गाण्ड मारता भी था, पर कसम से, नये लण्ड का मजा नये तरह का और गजब का होता है। मेरी चूंचियों की घुण्डियाँ मसलने पर तीखा आनन्द दे रही थी।

मुझे लगा कि राजीव कहीं झड़ ना जाये। अभी मुझे तो उसके जिस्म का प्यार भी चाहिये था। प्यास तो उसके जवान जिस्म को भोगने की थी। थोड़ी देर गाण्ड चुदाने के बाद मैंने उसे अपने ऊपर चढ़ जाने का न्योता दिया।

मैंने ठीक से सीधे लेट कर पोजिशन ले ली। वो भी बिस्तर पर मेरे ऊपर आ गया और अपने नंगे जिस्म को मेरे नंगे जिस्म से चिपका लिया। हम दोनों की बाहों का कसाव बढ़ता गया और लण्ड चूत का छेद तलाशता रहा।

उसने चूत की दरार को लण्ड पर सेट कर दिया और… हाय रे चूत में प्यारी सी… मीठी मीठी सी गुदगुदी करता हुआ मेरे जिस्म में समाने लगा। अब उसके शरीर का सुख भी मुझे बहुत आनन्द दे रहा था। जैसे शरीर में कसक भरी हुई थी।
उसने अपने लण्ड को चूत पर रगड़ते हुये और गहराई तक चोदते हुये मेरे कस बल को निकालने लगा। मैं तड़प उठी। तन में जैसे आग लग गई। उसके अधर मेरे अधर को पी रहे थे। बोबे मसले जा रहे थे… चूत चुदी जा रही थी। काश … ऐसा मोटा लण्ड मुझे रोज मिल जाये।

अब हम दोनों बरबरी से झूम झूम कर कमर चला रहे थे और मस्त चुदाई कर रहे थे। चूत और लण्ड का घर्षण हम दोनों को बेहाल कर रहा था। धक्के तेजी पर थे… लण्ड चूत पर जम कर चल रहा था। लग रहा था कि बस जिंदगी भर चुदती ही रहूं।

पर ऊपर वाले की जैसी इच्छा … उत्तेजना बहुत बढ़ गई थी, चूत तेजी से चुद रही थी। सिसकियाँ रोकने से भी नहीं रूक रही थी। पर जल्दी ही मेरा शरीर ऐंठने लगा… लगता था शरीर का सारा खून खिंच कर चूत में भर जायेगा… मेरी कमर अब अपने आप ही ऊपर उछल कर लण्ड को गहराई में लेने लगी… और आह्ह्ह रे… जावानी का रस पानी बन कर चूत के रास्ते बाहर निकल पड़ा।

मेरी सारी ताकत यौवन रस को बाहर निकालने में लगने लगी… तभी राजीव ने भी लण्ड बाहर निकाल लिया और एक भरपूर पिचकारी छोड़ दी… उसका लण्ड मेरी चूत के एक साईड में आ गया था और वीर्य निकालने लगा था।

मैं उससे लिपटी हुई थी। उसके लण्ड को और जिस्म को भली प्रकार से भोग चुकी थी। मेरा जोश झड़ने के साथ ही साथ कम होने लगा। मैंने नीचे से राजीव को हाथों से दबाव देकर इशारा किया… और वो उछल कर बिस्तर से नीचे आ गया। उसने तौलिया ले कर मेरी चूत साफ़ कर दी।

मैं भी सुस्ताई सी उठ कर बैठ गई। मैंने केबिन में जाकर कपड़े बदले और बाहर आकर राजीव को एक हज़ार रुपये इनाम में दिए। उसने अपना सर झुका कर मुझे अभिवादन किया और बाहर तक छोड़ने आया। पर मेरा उसके जवान जिस्म को और भोगना चाह रहा था। कम उम्र के लड़के कितने कंटीले होते है, ये वो जान सकता है जिसकी उम्र मेरे बराबर हो या जिसका अपने पति से चुद कर मन भर गया हो।

मैंने बाहर आ कर अपनी कार में बैठ गई और घर की तरफ़ गाड़ी मोड़ ली। बैक मिरर में से मैं राजीव को दूर होते हुये देख रही थी… मेरे दिल से एक ठण्डी आह निकली, मैंने अपना सर झटका और और उसके लण्ड का ख्याल दिल से निकाल दिया और फिर सड़क पर ध्यान केन्द्रित करने लगी… Antarvasna

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